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तभी क्लास में राशि और आँचल आजाती है. आरुषि और मेघा भी पीछे पीछे आते है.
राशि: यश क्या तुम हुम्हे 1 मोनथस के नोट्स दे सकते हो.
यश: मैं नोट्स नहीं लिखता. मेरा पूरा नोट्स राधा संभालती है.
अब राशि और आँचल तोह राधा से मांगेगी नहीं. उन्हें लगा था नोट्स के बहाने यश से बात करेंगी उसके करीब आएँगी. पर यहाँ भी उल्टा होगया. राधा के लिए आँखों में गुस्सा और नफरत लेके वह बैठ जाते है.
आरुषि: क्या बात है यश. आज तोह पूरा hi बदला हुआ रूप दिख रहा है.
मेघा: हआ. वर्ण तुम तोह कभी भी ऐसे मुँह पे जवाब नहीं देते थे. ख़ास कर इनलोगो को.
यश: है कुछ बात.
कुछ देर बाद टीचर आजाते है और सब पढ़ने लगते है. रेसस्स में सब कैंटीन में आते है.
आरव: भाई अगर हम कुछ पूछे तोह आप बताएँगे.
यश: पूछो.
अवि: भाई हमने आजतक आपको कभी भी किसी को भी ऐसे मुँह पे जवाब देते नहीं देखा. ख़ास कर लड़कियों के साथ तोह नहीं सूना. फिर आज आपने ऐसा किया. कोई ख़ास वजह.
सोनिया: और वह बोल रही थी फॅमिली फ्रेंड्स है. हम समझे नहीं भाई.
आरव: आप हुम्हे कुछ छिपा रहे हो भाई.
यश: लगता है अब तुमलोगो को सच बताने का टाइम आगया है. के मैंने 8 साल लंदन में क्या किया. आज वैसा बेहवे क्यों किया.
सोनिया: कैसा सच भैई. और आप तोह लंदन में पढाई करते थे ना.
यश: ऐसा सबको पता है. मैंने वह 6 साल सिर्फ पढाई की थी. पर आखरी 2 साल बहोत कुछ हुआ था. जिसके बारे में सिया और राधा के अलावा किसी को नहीं पता.
आरव: आखिर ऐसी क्या बात है जो आपने हमसब से छिपाई.
यश: यहाँ नहीं. तुमलोग शाम को घर आना. वह बताऊंगा.
सब: ठिक्क है.
यश: बुआ फूफाजी मामाजी मामीजी को कुछ मत बताना.
सब: ठीक है.
फिर सब वापस क्लास में आते है और छुट्टी के बाद सब घर चले जाते है.
घर आके सिया महक से बोलती है.
सिया: माँ. माँ कहा है आप.
महक: घर में आयी नहीं के चिल्लाना स्टार्ट. बोलो क्या हुआ. क्यों चिल्ला रही हो.
सिया: माँ आज आरव अवि आरुषि मेघा सोनिया राधा आरहे है शाम को.
महक: क्या बात है आज सब शैतानो की टोली यहाँ पे किस लिये.
सिया: बस सोचा आज थोड़ा सब मिलके एन्जॉय करले.
महक: अच्छी बात है. पर तुमलोगो ने वरुण को नहीं बुलाया.
सिया: माँ वह अभी कैसे आसक्त है.
महक: ारी क्यों नहीं आसक्त. वह भी थोड़ा एन्जॉय करलेगा. वर्ण अभी तोह हरवक्त कमरे में hi बंद रहता है. राधा को कॉल करो बोलो उसको भी लेके आये.
सिया: ोकक माँ.
फिर वह अपने रूम में आके राधा को कॉल करके बोलदेति है. और फ्रेश होक लंच करके अपना सेकंड फवौरीते काम में लग जाती है मतलब सो जाती है.
शाम को सब अग्रवाल हाउस आते है. महक हॉल में hi बैठी थी.
राधा आरुषि और मेघा जाके महक के पैरर छुट्टे है.
महक: आज शैतानो की टोली यहाँ पे.
सोनिया: बस सोचा आज यहाँ पे हंगामा करी.
महक: अच्छी बात है. और वरुण कैसे हो अब्ब.
वरुण: क्या बताऊ आंटी. जेल के कैदी के जैसी हालत होगयी है.
सोनिया: मेरा बस चले तोह हाथ और पेअर में बेड़िया बांड दू.
वरुण: देखा आंटी. मुझे लगता है इसिने माँ और ममी को बोलै है.
महक: एकबार ठीक होजाओ. फिर तोह आज़ाद पंछी हो.
सोनिया: बुआ भाई और सिया कहा है.
महक: यश तोह अपने रूम में है. और वह अलसी या तोह यश के कमरे में सो रही होगी नहीं तोह अपने कमरे में सो रही होगी. जाओ उठाओ.
फिर सब ऊपर जाने लगते है.
सोनिया के दिमाग में शरारत सूझती है.
सोनिया: राधा आरुषि मेघा एक प्लान है.
आरव: क्या प्लान है. क्या करना है अब तुझे.
सोनिया: तुमलोग जाओ ना. यह हमारा काम है.
मेघा: क्या करना है तुम्हे.
सोनिया: चलो मेरे साथ.
फिर चारो सिया के कमरे में आती है. जहा वह बेसुध सोरही थी.
राधा: देखो हुम्हे बुला के कैसे सोरही है. रुको अभी बताती हु.
सोनिया: ारी रुकोऊ. थोड़ अलग स्टाइल में उठाते है.
आरुषि: क्या करना है.
सोनिया सबको बताती है क्या करना है.
सब सोनिया की बात सुनके हसने लगते है
फिर चारो सिया के पास आते है.
सोनिया और मेघा एक तरफ राधा और आरुषि दूसरी तरफ आजाते है. फिर सिया के करीब आके उसके कान के पास जोरर से चिल्लाते है. Siyaaaaaaaaaa uthoooooooooo.
सिया नींद में हुए इस हमले घबराए जाती है.
सिया: चिल्लाते हुए. मममममममिययययययय बछहहूऊऊ. सिया की आवाज़ नीचे महक के कानो तक जाती है.
महक: होगयी इनकी बदमाशी सुरु. पता नहीं अब क्या किया है इनलोगो ने. फिर महक ऊपर आने लगती है.
बगल के कमरे में भी सब यह सुनके डर जाते है.
आरव: जरूर सोनिया ने कुछ किया है. चलो देखते है.
सिया के ऐसे उठने से सब जोर जोर से हसने लगते है.
सिया को नार्मल होने में थोड़ा टाइम लगता है. नार्मल होने के बाद जब वह साड़ी सिचुएशन समझती है तोह वह सोनिया राधा आरुषि और मेघा को मारने लगती है.
सिया: तुमसब को शर्म नहीं आती. एक मासूम बच्ची को कोई इस तरह से नींद से उठता है. अगर मेरा हैरतफाइल होजाता तोह क्या होता. अभी तोह मेरी यश से शादी भी नहीं हुई.
यह सुनके सब और जोर जोर से हसने लगते है.
तभी रूम में सब आते है.
महक: क्या हुआ क्यों चिल्ला रही हो क्या हुआ.
सिया महक के गले लग जाती है.
सिया: मॉम एहलोग ना बहोत्त बुरी है. एक मासूम सी बच्ची को सोने भी नही देते. पता है मैं कितना आराम से सो रही थी. पर इनसब ने मेरे कान के पास आके इतने जोर से चिल्लाया के मैं डर गयी.
सिया की बात सुनके वह चर्र हसने लगते है. पर इससबार इनके साथ बाकी सब भी थोड़ा थोड़ा हसने लगते है.
महक: वह सब तोह ठीक है पर मासूम सी बच्ची कहा है.
महक की बात सुनके वह चर्र पेट पकड़ के हसने लगते है.
सिया: ममममम. वह मासूम बच्ची मैं हु.
महक: तुम और मासूम बच्ची. तुम तोह शैतानी में इनसब की लीडर हो.
सिया: माँ आप भी. जाईये मैं बात नहीं करती आपसे.
महक: ारी मेरा बच्चा. फिर आगे जेक उन् चार जानके कान पकड़ लेती है. क्यों तुमसब ने मेरी मासूम बच्ची को डरा दिया. देखो कितनी मासूम सी बच्ची है सिया.
सिया: और जोरर से मॉम. चोरियेगा नहिई.
महक: अच्छा अच्छा होगया अब. बैठो में कुछ नाश्ता लाती हु.
यश: माँ मेरे कमरे में भिजवा दीजिये.
महक: ठीककक है. फिर वह नीचे चली जाती है.
यश: तुमसब चलो अब. और तुम फ्रेश होक जल्दी आओ.
थोड़ी देर बाद सब यश के कमरे में बैठे थे नाश्ता करके.
यश अच्छे से रूम के दूर को लॉक करदेता है. रूम साउंड प्रूफ था इसीलिए आवाज़ बहार जाने के कोई चांस नहीं था.
आरव: भाई अब तोह बताइये. आखिर बात क्या है. आपलोग आखिर क्या छिपा रहे है हमसे.
यश: पहले यह बताओ मेरे ऊपर कितना भरोसा है.
सोनिया: खुद से भी ज्यादा. और आज तोह यह बात केहड़ी आपने. आइंदा फिर न कहना.
अवि: भाई अब सस्पेंस ना बढ़ाइए. बताइये ना आखिर बात क्या है. क्यों आप उनसे इस तरह का बेहवे कर रहे थे.
यश: क्या तुमलोग जानते हो हमारे दादा दादी और नाना नानी की डेथ कैसे हुई थी.
सोनिया आरव और अवि: हां ओहलोग कही जा रहे थे तभी उनका बहोत बुरी तरह से एक्सीडेंट होगया था और उसी में उनकी डेथ होगयी थी.
यश: थोड़ा गुस्से से. एक्सीडेंट हुआ नहीं था एक्सीडेंट करवाया गया था. वह एक प्रेपलन्नेड़ मर्डर था.
सिया और राधा को चोरके सब चिल्ला उठते है. क्याआआआ.
यश: हा. वह एक प्रेपलन्नेड़ मर्डर था. उनका एक्सीडेंट हुआ नहीं था एक्सीडेंट करवाया गया था.
तीनो: किसने करवाया था. क्यों करवाया था. और आपको एहसाब कैसे पता. क्योकि उस वक़्त आप भी तोह हमारे आगे के hi थे.
यश: मुझे यह सब लंदन में पता चला था. मुझे लंदन गए 6 साल होगये थे. सिया उस वक़्त मेरे पास थी. दादा दादी और नानी नानी की डेथ का दर्द उस वक़्त भी मेरे साथ था. क्योकि पूरी फॅमिली में सबसे करीब मैं उनके hi था. उनकी मौत से मुझे बहोत बड़ा धक्का लगा था. एकदिन मैं स्कूल ना जाके समुन्दर के पास बैठा था. क्योकि जब भी मुझे तकलीफ होती या मैं दुखी होता मैं उस समुन्दर के पास चला जाता और वह बैठके लेहरो के उफान को देखता रहता.
मुझे बैठे हुए कुछ टाइम hi हुआ था तभी मुझे कुछ आवाज़े आरही थी. आवाज़े हिंदी में थी. लंदन में हिंदी ना के बराबर hi सुनने को मिलता था. वह आवाज़ किसी और की नहीं महेंद्र ठाकुर की थी यानी राशि और आँचल के दादा की. जो वह किसी मीटिंग के लिए आया था. और वह वह पत्थर के पीछे सबसे दुर्र आके अपने बेटे देव ठाकुर से बात कर रहा था.
आरव: ऐसी क्या बात कर रहा था वह भाई.
यश: देव ठाकुर बोल रहा था के अग्रवाल्स ने आज फिर उनसे कोई बिज़नेस डील छिन्न की है. यह डील बहोत बड़ी थी. अगर यह डील उससे मिल जाती तोह उस टाइम पे वह डैड के आसपास होता. और वह डील ना मिलने की बात hi वह अपने बाप से कर रहा था. पर फिर महेंद्र ठाकुर ने ऐसी बात बोली जिससे सुनके मुझे बहोत बड़ा झटका लगा.
सोनिया: कौनसी बात.
यश: उसने कहा था:-
( महेंद्र: चिंता मत करो देव. बहोत जल्द उन् अग्रवाल्स का naam-o-nishan मिटा देंगे. उनसे अपना बदला जरूर लेंगे. आधा बदला तोह राजवीर और अजीत को उनकी बीवियों के साथ मार्के ले लिया है. और आधा बदला उस इशांत और उसकी बीवी को मार्के भी ले लेंगे. )
एहसंके सबके ऊपर पूरा बिजली का खम्भा गिर्र गया हो ऐसा हाल होगया था. वह क्या बोले उनको समाज नहीं आरहा था. उनको तोह अभी भी अपने कानो में विश्वास नहीं होरहा था.
सब बस यश को hi देखे जा रहे थे. जिसकी आँखों में दर्द गुस्सा नफरत सब नज़र आरहा था.
तभी क्लास में राशि और आँचल आजाती है. आरुषि और मेघा भी पीछे पीछे आते है.
राशि: यश क्या तुम हुम्हे 1 मोनथस के नोट्स दे सकते हो.
यश: मैं नोट्स नहीं लिखता. मेरा पूरा नोट्स राधा संभालती है.
अब राशि और आँचल तोह राधा से मांगेगी नहीं. उन्हें लगा था नोट्स के बहाने यश से बात करेंगी उसके करीब आएँगी. पर यहाँ भी उल्टा होगया. राधा के लिए आँखों में गुस्सा और नफरत लेके वह बैठ जाते है.
आरुषि: क्या बात है यश. आज तोह पूरा hi बदला हुआ रूप दिख रहा है.
मेघा: हआ. वर्ण तुम तोह कभी भी ऐसे मुँह पे जवाब नहीं देते थे. ख़ास कर इनलोगो को.
यश: है कुछ बात.
कुछ देर बाद टीचर आजाते है और सब पढ़ने लगते है. रेसस्स में सब कैंटीन में आते है.
आरव: भाई अगर हम कुछ पूछे तोह आप बताएँगे.
यश: पूछो.
अवि: भाई हमने आजतक आपको कभी भी किसी को भी ऐसे मुँह पे जवाब देते नहीं देखा. ख़ास कर लड़कियों के साथ तोह नहीं सूना. फिर आज आपने ऐसा किया. कोई ख़ास वजह.
सोनिया: और वह बोल रही थी फॅमिली फ्रेंड्स है. हम समझे नहीं भाई.
आरव: आप हुम्हे कुछ छिपा रहे हो भाई.
यश: लगता है अब तुमलोगो को सच बताने का टाइम आगया है. के मैंने 8 साल लंदन में क्या किया. आज वैसा बेहवे क्यों किया.
सोनिया: कैसा सच भैई. और आप तोह लंदन में पढाई करते थे ना.
यश: ऐसा सबको पता है. मैंने वह 6 साल सिर्फ पढाई की थी. पर आखरी 2 साल बहोत कुछ हुआ था. जिसके बारे में सिया और राधा के अलावा किसी को नहीं पता.
आरव: आखिर ऐसी क्या बात है जो आपने हमसब से छिपाई.
यश: यहाँ नहीं. तुमलोग शाम को घर आना. वह बताऊंगा.
सब: ठिक्क है.
यश: बुआ फूफाजी मामाजी मामीजी को कुछ मत बताना.
सब: ठीक है.
फिर सब वापस क्लास में आते है और छुट्टी के बाद सब घर चले जाते है.
घर आके सिया महक से बोलती है.
सिया: माँ. माँ कहा है आप.
महक: घर में आयी नहीं के चिल्लाना स्टार्ट. बोलो क्या हुआ. क्यों चिल्ला रही हो.
सिया: माँ आज आरव अवि आरुषि मेघा सोनिया राधा आरहे है शाम को.
महक: क्या बात है आज सब शैतानो की टोली यहाँ पे किस लिये.
सिया: बस सोचा आज थोड़ा सब मिलके एन्जॉय करले.
महक: अच्छी बात है. पर तुमलोगो ने वरुण को नहीं बुलाया.
सिया: माँ वह अभी कैसे आसक्त है.
महक: ारी क्यों नहीं आसक्त. वह भी थोड़ा एन्जॉय करलेगा. वर्ण अभी तोह हरवक्त कमरे में hi बंद रहता है. राधा को कॉल करो बोलो उसको भी लेके आये.
सिया: ोकक माँ.
फिर वह अपने रूम में आके राधा को कॉल करके बोलदेति है. और फ्रेश होक लंच करके अपना सेकंड फवौरीते काम में लग जाती है मतलब सो जाती है.
शाम को सब अग्रवाल हाउस आते है. महक हॉल में hi बैठी थी.
राधा आरुषि और मेघा जाके महक के पैरर छुट्टे है.
महक: आज शैतानो की टोली यहाँ पे.
सोनिया: बस सोचा आज यहाँ पे हंगामा करी.
महक: अच्छी बात है. और वरुण कैसे हो अब्ब.
वरुण: क्या बताऊ आंटी. जेल के कैदी के जैसी हालत होगयी है.
सोनिया: मेरा बस चले तोह हाथ और पेअर में बेड़िया बांड दू.
वरुण: देखा आंटी. मुझे लगता है इसिने माँ और ममी को बोलै है.
महक: एकबार ठीक होजाओ. फिर तोह आज़ाद पंछी हो.
सोनिया: बुआ भाई और सिया कहा है.
महक: यश तोह अपने रूम में है. और वह अलसी या तोह यश के कमरे में सो रही होगी नहीं तोह अपने कमरे में सो रही होगी. जाओ उठाओ.
फिर सब ऊपर जाने लगते है.
सोनिया के दिमाग में शरारत सूझती है.
सोनिया: राधा आरुषि मेघा एक प्लान है.
आरव: क्या प्लान है. क्या करना है अब तुझे.
सोनिया: तुमलोग जाओ ना. यह हमारा काम है.
मेघा: क्या करना है तुम्हे.
सोनिया: चलो मेरे साथ.
फिर चारो सिया के कमरे में आती है. जहा वह बेसुध सोरही थी.
राधा: देखो हुम्हे बुला के कैसे सोरही है. रुको अभी बताती हु.
सोनिया: ारी रुकोऊ. थोड़ अलग स्टाइल में उठाते है.
आरुषि: क्या करना है.
सोनिया सबको बताती है क्या करना है.
सब सोनिया की बात सुनके हसने लगते है
फिर चारो सिया के पास आते है.
सोनिया और मेघा एक तरफ राधा और आरुषि दूसरी तरफ आजाते है. फिर सिया के करीब आके उसके कान के पास जोरर से चिल्लाते है. Siyaaaaaaaaaa uthoooooooooo.
सिया नींद में हुए इस हमले घबराए जाती है.
सिया: चिल्लाते हुए. मममममममिययययययय बछहहूऊऊ. सिया की आवाज़ नीचे महक के कानो तक जाती है.
महक: होगयी इनकी बदमाशी सुरु. पता नहीं अब क्या किया है इनलोगो ने. फिर महक ऊपर आने लगती है.
बगल के कमरे में भी सब यह सुनके डर जाते है.
आरव: जरूर सोनिया ने कुछ किया है. चलो देखते है.
सिया के ऐसे उठने से सब जोर जोर से हसने लगते है.
सिया को नार्मल होने में थोड़ा टाइम लगता है. नार्मल होने के बाद जब वह साड़ी सिचुएशन समझती है तोह वह सोनिया राधा आरुषि और मेघा को मारने लगती है.
सिया: तुमसब को शर्म नहीं आती. एक मासूम बच्ची को कोई इस तरह से नींद से उठता है. अगर मेरा हैरतफाइल होजाता तोह क्या होता. अभी तोह मेरी यश से शादी भी नहीं हुई.
यह सुनके सब और जोर जोर से हसने लगते है.
तभी रूम में सब आते है.
महक: क्या हुआ क्यों चिल्ला रही हो क्या हुआ.
सिया महक के गले लग जाती है.
सिया: मॉम एहलोग ना बहोत्त बुरी है. एक मासूम सी बच्ची को सोने भी नही देते. पता है मैं कितना आराम से सो रही थी. पर इनसब ने मेरे कान के पास आके इतने जोर से चिल्लाया के मैं डर गयी.
सिया की बात सुनके वह चर्र हसने लगते है. पर इससबार इनके साथ बाकी सब भी थोड़ा थोड़ा हसने लगते है.
महक: वह सब तोह ठीक है पर मासूम सी बच्ची कहा है.
महक की बात सुनके वह चर्र पेट पकड़ के हसने लगते है.
सिया: ममममम. वह मासूम बच्ची मैं हु.
महक: तुम और मासूम बच्ची. तुम तोह शैतानी में इनसब की लीडर हो.
सिया: माँ आप भी. जाईये मैं बात नहीं करती आपसे.
महक: ारी मेरा बच्चा. फिर आगे जेक उन् चार जानके कान पकड़ लेती है. क्यों तुमसब ने मेरी मासूम बच्ची को डरा दिया. देखो कितनी मासूम सी बच्ची है सिया.
सिया: और जोरर से मॉम. चोरियेगा नहिई.
महक: अच्छा अच्छा होगया अब. बैठो में कुछ नाश्ता लाती हु.
यश: माँ मेरे कमरे में भिजवा दीजिये.
महक: ठीककक है. फिर वह नीचे चली जाती है.
यश: तुमसब चलो अब. और तुम फ्रेश होक जल्दी आओ.
थोड़ी देर बाद सब यश के कमरे में बैठे थे नाश्ता करके.
यश अच्छे से रूम के दूर को लॉक करदेता है. रूम साउंड प्रूफ था इसीलिए आवाज़ बहार जाने के कोई चांस नहीं था.
आरव: भाई अब तोह बताइये. आखिर बात क्या है. आपलोग आखिर क्या छिपा रहे है हमसे.
यश: पहले यह बताओ मेरे ऊपर कितना भरोसा है.
सोनिया: खुद से भी ज्यादा. और आज तोह यह बात केहड़ी आपने. आइंदा फिर न कहना.
अवि: भाई अब सस्पेंस ना बढ़ाइए. बताइये ना आखिर बात क्या है. क्यों आप उनसे इस तरह का बेहवे कर रहे थे.
यश: क्या तुमलोग जानते हो हमारे दादा दादी और नाना नानी की डेथ कैसे हुई थी.
सोनिया आरव और अवि: हां ओहलोग कही जा रहे थे तभी उनका बहोत बुरी तरह से एक्सीडेंट होगया था और उसी में उनकी डेथ होगयी थी.
यश: थोड़ा गुस्से से. एक्सीडेंट हुआ नहीं था एक्सीडेंट करवाया गया था. वह एक प्रेपलन्नेड़ मर्डर था.
सिया और राधा को चोरके सब चिल्ला उठते है. क्याआआआ.
यश: हा. वह एक प्रेपलन्नेड़ मर्डर था. उनका एक्सीडेंट हुआ नहीं था एक्सीडेंट करवाया गया था.
तीनो: किसने करवाया था. क्यों करवाया था. और आपको एहसाब कैसे पता. क्योकि उस वक़्त आप भी तोह हमारे आगे के hi थे.
यश: मुझे यह सब लंदन में पता चला था. मुझे लंदन गए 6 साल होगये थे. सिया उस वक़्त मेरे पास थी. दादा दादी और नानी नानी की डेथ का दर्द उस वक़्त भी मेरे साथ था. क्योकि पूरी फॅमिली में सबसे करीब मैं उनके hi था. उनकी मौत से मुझे बहोत बड़ा धक्का लगा था. एकदिन मैं स्कूल ना जाके समुन्दर के पास बैठा था. क्योकि जब भी मुझे तकलीफ होती या मैं दुखी होता मैं उस समुन्दर के पास चला जाता और वह बैठके लेहरो के उफान को देखता रहता.
मुझे बैठे हुए कुछ टाइम hi हुआ था तभी मुझे कुछ आवाज़े आरही थी. आवाज़े हिंदी में थी. लंदन में हिंदी ना के बराबर hi सुनने को मिलता था. वह आवाज़ किसी और की नहीं महेंद्र ठाकुर की थी यानी राशि और आँचल के दादा की. जो वह किसी मीटिंग के लिए आया था. और वह वह पत्थर के पीछे सबसे दुर्र आके अपने बेटे देव ठाकुर से बात कर रहा था.
आरव: ऐसी क्या बात कर रहा था वह भाई.
यश: देव ठाकुर बोल रहा था के अग्रवाल्स ने आज फिर उनसे कोई बिज़नेस डील छिन्न की है. यह डील बहोत बड़ी थी. अगर यह डील उससे मिल जाती तोह उस टाइम पे वह डैड के आसपास होता. और वह डील ना मिलने की बात hi वह अपने बाप से कर रहा था. पर फिर महेंद्र ठाकुर ने ऐसी बात बोली जिससे सुनके मुझे बहोत बड़ा झटका लगा.
सोनिया: कौनसी बात.
यश: उसने कहा था:-
( महेंद्र: चिंता मत करो देव. बहोत जल्द उन् अग्रवाल्स का naam-o-nishan मिटा देंगे. उनसे अपना बदला जरूर लेंगे. आधा बदला तोह राजवीर और अजीत को उनकी बीवियों के साथ मार्के ले लिया है. और आधा बदला उस इशांत और उसकी बीवी को मार्के भी ले लेंगे. )
एहसंके सबके ऊपर पूरा बिजली का खम्भा गिर्र गया हो ऐसा हाल होगया था. वह क्या बोले उनको समाज नहीं आरहा था. उनको तोह अभी भी अपने कानो में विश्वास नहीं होरहा था.
सब बस यश को hi देखे जा रहे थे. जिसकी आँखों में दर्द गुस्सा नफरत सब नज़र आरहा था.