Romance Sex kahani - Beintehaan Mohobbat - Page 9 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Beintehaan Mohobbat

अपडेट 62

तभी क्लास में राशि और आँचल आजाती है. आरुषि और मेघा भी पीछे पीछे आते है.



राशि: यश क्या तुम हुम्हे 1 मोनथस के नोट्स दे सकते हो.



यश: मैं नोट्स नहीं लिखता. मेरा पूरा नोट्स राधा संभालती है.



अब राशि और आँचल तोह राधा से मांगेगी नहीं. उन्हें लगा था नोट्स के बहाने यश से बात करेंगी उसके करीब आएँगी. पर यहाँ भी उल्टा होगया. राधा के लिए आँखों में गुस्सा और नफरत लेके वह बैठ जाते है.



आरुषि: क्या बात है यश. आज तोह पूरा hi बदला हुआ रूप दिख रहा है.



मेघा: हआ. वर्ण तुम तोह कभी भी ऐसे मुँह पे जवाब नहीं देते थे. ख़ास कर इनलोगो को.



यश: है कुछ बात.



कुछ देर बाद टीचर आजाते है और सब पढ़ने लगते है. रेसस्स में सब कैंटीन में आते है.



आरव: भाई अगर हम कुछ पूछे तोह आप बताएँगे.

यश: पूछो.



अवि: भाई हमने आजतक आपको कभी भी किसी को भी ऐसे मुँह पे जवाब देते नहीं देखा. ख़ास कर लड़कियों के साथ तोह नहीं सूना. फिर आज आपने ऐसा किया. कोई ख़ास वजह.



सोनिया: और वह बोल रही थी फॅमिली फ्रेंड्स है. हम समझे नहीं भाई.



आरव: आप हुम्हे कुछ छिपा रहे हो भाई.



यश: लगता है अब तुमलोगो को सच बताने का टाइम आगया है. के मैंने 8 साल लंदन में क्या किया. आज वैसा बेहवे क्यों किया.



सोनिया: कैसा सच भैई. और आप तोह लंदन में पढाई करते थे ना.



यश: ऐसा सबको पता है. मैंने वह 6 साल सिर्फ पढाई की थी. पर आखरी 2 साल बहोत कुछ हुआ था. जिसके बारे में सिया और राधा के अलावा किसी को नहीं पता.



आरव: आखिर ऐसी क्या बात है जो आपने हमसब से छिपाई.



यश: यहाँ नहीं. तुमलोग शाम को घर आना. वह बताऊंगा.



सब: ठिक्क है.



यश: बुआ फूफाजी मामाजी मामीजी को कुछ मत बताना.



सब: ठीक है.



फिर सब वापस क्लास में आते है और छुट्टी के बाद सब घर चले जाते है.



घर आके सिया महक से बोलती है.



सिया: माँ. माँ कहा है आप.



महक: घर में आयी नहीं के चिल्लाना स्टार्ट. बोलो क्या हुआ. क्यों चिल्ला रही हो.



सिया: माँ आज आरव अवि आरुषि मेघा सोनिया राधा आरहे है शाम को.



महक: क्या बात है आज सब शैतानो की टोली यहाँ पे किस लिये.



सिया: बस सोचा आज थोड़ा सब मिलके एन्जॉय करले.



महक: अच्छी बात है. पर तुमलोगो ने वरुण को नहीं बुलाया.



सिया: माँ वह अभी कैसे आसक्त है.



महक: ारी क्यों नहीं आसक्त. वह भी थोड़ा एन्जॉय करलेगा. वर्ण अभी तोह हरवक्त कमरे में hi बंद रहता है. राधा को कॉल करो बोलो उसको भी लेके आये.



सिया: ोकक माँ.



फिर वह अपने रूम में आके राधा को कॉल करके बोलदेति है. और फ्रेश होक लंच करके अपना सेकंड फवौरीते काम में लग जाती है मतलब सो जाती है.



शाम को सब अग्रवाल हाउस आते है. महक हॉल में hi बैठी थी.



राधा आरुषि और मेघा जाके महक के पैरर छुट्टे है.



महक: आज शैतानो की टोली यहाँ पे.



सोनिया: बस सोचा आज यहाँ पे हंगामा करी.



महक: अच्छी बात है. और वरुण कैसे हो अब्ब.



वरुण: क्या बताऊ आंटी. जेल के कैदी के जैसी हालत होगयी है.



सोनिया: मेरा बस चले तोह हाथ और पेअर में बेड़िया बांड दू.



वरुण: देखा आंटी. मुझे लगता है इसिने माँ और ममी को बोलै है.



महक: एकबार ठीक होजाओ. फिर तोह आज़ाद पंछी हो.



सोनिया: बुआ भाई और सिया कहा है.



महक: यश तोह अपने रूम में है. और वह अलसी या तोह यश के कमरे में सो रही होगी नहीं तोह अपने कमरे में सो रही होगी. जाओ उठाओ.



फिर सब ऊपर जाने लगते है.



सोनिया के दिमाग में शरारत सूझती है.



सोनिया: राधा आरुषि मेघा एक प्लान है.



आरव: क्या प्लान है. क्या करना है अब तुझे.



सोनिया: तुमलोग जाओ ना. यह हमारा काम है.



मेघा: क्या करना है तुम्हे.



सोनिया: चलो मेरे साथ.



फिर चारो सिया के कमरे में आती है. जहा वह बेसुध सोरही थी.



राधा: देखो हुम्हे बुला के कैसे सोरही है. रुको अभी बताती हु.



सोनिया: ारी रुकोऊ. थोड़ अलग स्टाइल में उठाते है.



आरुषि: क्या करना है.



सोनिया सबको बताती है क्या करना है.



सब सोनिया की बात सुनके हसने लगते है



फिर चारो सिया के पास आते है.



सोनिया और मेघा एक तरफ राधा और आरुषि दूसरी तरफ आजाते है. फिर सिया के करीब आके उसके कान के पास जोरर से चिल्लाते है. Siyaaaaaaaaaa uthoooooooooo.



सिया नींद में हुए इस हमले घबराए जाती है.



सिया: चिल्लाते हुए. मममममममिययययययय बछहहूऊऊ. सिया की आवाज़ नीचे महक के कानो तक जाती है.



महक: होगयी इनकी बदमाशी सुरु. पता नहीं अब क्या किया है इनलोगो ने. फिर महक ऊपर आने लगती है.



बगल के कमरे में भी सब यह सुनके डर जाते है.



आरव: जरूर सोनिया ने कुछ किया है. चलो देखते है.



सिया के ऐसे उठने से सब जोर जोर से हसने लगते है.



सिया को नार्मल होने में थोड़ा टाइम लगता है. नार्मल होने के बाद जब वह साड़ी सिचुएशन समझती है तोह वह सोनिया राधा आरुषि और मेघा को मारने लगती है.



सिया: तुमसब को शर्म नहीं आती. एक मासूम बच्ची को कोई इस तरह से नींद से उठता है. अगर मेरा हैरतफाइल होजाता तोह क्या होता. अभी तोह मेरी यश से शादी भी नहीं हुई.



यह सुनके सब और जोर जोर से हसने लगते है.



तभी रूम में सब आते है.



महक: क्या हुआ क्यों चिल्ला रही हो क्या हुआ.



सिया महक के गले लग जाती है.



सिया: मॉम एहलोग ना बहोत्त बुरी है. एक मासूम सी बच्ची को सोने भी नही देते. पता है मैं कितना आराम से सो रही थी. पर इनसब ने मेरे कान के पास आके इतने जोर से चिल्लाया के मैं डर गयी.



सिया की बात सुनके वह चर्र हसने लगते है. पर इससबार इनके साथ बाकी सब भी थोड़ा थोड़ा हसने लगते है.



महक: वह सब तोह ठीक है पर मासूम सी बच्ची कहा है.



महक की बात सुनके वह चर्र पेट पकड़ के हसने लगते है.



सिया: ममममम. वह मासूम बच्ची मैं हु.



महक: तुम और मासूम बच्ची. तुम तोह शैतानी में इनसब की लीडर हो.



सिया: माँ आप भी. जाईये मैं बात नहीं करती आपसे.



महक: ारी मेरा बच्चा. फिर आगे जेक उन् चार जानके कान पकड़ लेती है. क्यों तुमसब ने मेरी मासूम बच्ची को डरा दिया. देखो कितनी मासूम सी बच्ची है सिया.



सिया: और जोरर से मॉम. चोरियेगा नहिई.



महक: अच्छा अच्छा होगया अब. बैठो में कुछ नाश्ता लाती हु.



यश: माँ मेरे कमरे में भिजवा दीजिये.



महक: ठीककक है. फिर वह नीचे चली जाती है.



यश: तुमसब चलो अब. और तुम फ्रेश होक जल्दी आओ.



थोड़ी देर बाद सब यश के कमरे में बैठे थे नाश्ता करके.



यश अच्छे से रूम के दूर को लॉक करदेता है. रूम साउंड प्रूफ था इसीलिए आवाज़ बहार जाने के कोई चांस नहीं था.



आरव: भाई अब तोह बताइये. आखिर बात क्या है. आपलोग आखिर क्या छिपा रहे है हमसे.



यश: पहले यह बताओ मेरे ऊपर कितना भरोसा है.



सोनिया: खुद से भी ज्यादा. और आज तोह यह बात केहड़ी आपने. आइंदा फिर न कहना.



अवि: भाई अब सस्पेंस ना बढ़ाइए. बताइये ना आखिर बात क्या है. क्यों आप उनसे इस तरह का बेहवे कर रहे थे.



यश: क्या तुमलोग जानते हो हमारे दादा दादी और नाना नानी की डेथ कैसे हुई थी.



सोनिया आरव और अवि: हां ओहलोग कही जा रहे थे तभी उनका बहोत बुरी तरह से एक्सीडेंट होगया था और उसी में उनकी डेथ होगयी थी.



यश: थोड़ा गुस्से से. एक्सीडेंट हुआ नहीं था एक्सीडेंट करवाया गया था. वह एक प्रेपलन्नेड़ मर्डर था.



सिया और राधा को चोरके सब चिल्ला उठते है. क्याआआआ.



यश: हा. वह एक प्रेपलन्नेड़ मर्डर था. उनका एक्सीडेंट हुआ नहीं था एक्सीडेंट करवाया गया था.



तीनो: किसने करवाया था. क्यों करवाया था. और आपको एहसाब कैसे पता. क्योकि उस वक़्त आप भी तोह हमारे आगे के hi थे.



यश: मुझे यह सब लंदन में पता चला था. मुझे लंदन गए 6 साल होगये थे. सिया उस वक़्त मेरे पास थी. दादा दादी और नानी नानी की डेथ का दर्द उस वक़्त भी मेरे साथ था. क्योकि पूरी फॅमिली में सबसे करीब मैं उनके hi था. उनकी मौत से मुझे बहोत बड़ा धक्का लगा था. एकदिन मैं स्कूल ना जाके समुन्दर के पास बैठा था. क्योकि जब भी मुझे तकलीफ होती या मैं दुखी होता मैं उस समुन्दर के पास चला जाता और वह बैठके लेहरो के उफान को देखता रहता.



मुझे बैठे हुए कुछ टाइम hi हुआ था तभी मुझे कुछ आवाज़े आरही थी. आवाज़े हिंदी में थी. लंदन में हिंदी ना के बराबर hi सुनने को मिलता था. वह आवाज़ किसी और की नहीं महेंद्र ठाकुर की थी यानी राशि और आँचल के दादा की. जो वह किसी मीटिंग के लिए आया था. और वह वह पत्थर के पीछे सबसे दुर्र आके अपने बेटे देव ठाकुर से बात कर रहा था.



आरव: ऐसी क्या बात कर रहा था वह भाई.



यश: देव ठाकुर बोल रहा था के अग्रवाल्स ने आज फिर उनसे कोई बिज़नेस डील छिन्न की है. यह डील बहोत बड़ी थी. अगर यह डील उससे मिल जाती तोह उस टाइम पे वह डैड के आसपास होता. और वह डील ना मिलने की बात hi वह अपने बाप से कर रहा था. पर फिर महेंद्र ठाकुर ने ऐसी बात बोली जिससे सुनके मुझे बहोत बड़ा झटका लगा.



सोनिया: कौनसी बात.



यश: उसने कहा था:-



( महेंद्र: चिंता मत करो देव. बहोत जल्द उन् अग्रवाल्स का naam-o-nishan मिटा देंगे. उनसे अपना बदला जरूर लेंगे. आधा बदला तोह राजवीर और अजीत को उनकी बीवियों के साथ मार्के ले लिया है. और आधा बदला उस इशांत और उसकी बीवी को मार्के भी ले लेंगे. )



एहसंके सबके ऊपर पूरा बिजली का खम्भा गिर्र गया हो ऐसा हाल होगया था. वह क्या बोले उनको समाज नहीं आरहा था. उनको तोह अभी भी अपने कानो में विश्वास नहीं होरहा था.



सब बस यश को hi देखे जा रहे थे. जिसकी आँखों में दर्द गुस्सा नफरत सब नज़र आरहा था.
 
अपडेट 63

यश: उस वक़्त यह सुनके मेरी हालत तुमलोगो से भी ख़राब थी. मेरी आँखों से आंसू निकल रहे थे. मेरे से बस कुछ कदम दुर्र मेरी दादा दादी नाना नानी का हतियार खड़ा था. मुझे समाज नहीं आरहा था मैं क्या करू. मैं झट्ट से उस पत्थर के पीछे गया तोह वह तबतक वह से चला गया था. मैं बस उससे जाते हुए देखता रह.



मैं जल्दी से घर आया सिया मेरी हालत देख कर परेशां होगयी थी. उसने मुझसे बहोत पूछा पर मैंने उसकी किसी बात का जवाब नहीं दिया.



सिया: उस वक़्त यश की हालत देख कर मुझे बहोत टेंशन होगयी थी. मुझे समाज नहीं आरहा था आखिर यश को हुआ क्या है. वह रात तक कमरे में बंद था. उसके हाथो में दादा दादी नाना नानी की फोटो थी. वह बस उसको सीने से लगाए रोये जारहा था.



मैंने बहोत कोशिश की तब जाके यश शांत हुआ और उसने मुझे सब बताया. वह सब सुनके मुझे भी शॉक लगा था. मैं भले उनसे कभी नहीं मिली थी पर यश से उनके बारे में बहोत सुन्ना था.



यश: मैं उस वक़्त उस का चेहरा तोह नहीं देख पाया था. पर मुझे उस आदमी को देखना था उसको अपने हाथो से सजा देनी थी. इसीलिए मैंने वह अपने पदोष में रहने वाले ऋषि को कॉल लगाया. उसके साथ उसका भाई कारन रहता था. दोनों अनाथ थे. हमारे बहोत अच्छे दोस्त थे.



कॉलेज गोइंग स्टूडेंट थे. ऋषि को ब्रेन तुमौर था. पर उसके इलाज़ के लिए उनके पास पैसे नहीं थे. तब मैंने डैड से बात करके उसका ट्रीटमेंट करवाया था. तबसे वह मेरे लिए कुछ भी करसकते है.



मैंने ऋषि को सबकुछ बताया. उसने जल्दी से अपनी गर्लफ्रेंड रितिका को कॉल किया जो एक आईटी एक्सपर्ट थी. हैकिंग तोह उसका बाए हाथ का खेल था. उसी के मदद से मुझे वरुण का पता चला था.



रितिका ने उस बीच के आसपास जितने भी कक्तव थे उनन्साब की फुटेज चेक की और मुझे उसकी शकल दिखाई. उसकी शकल देखते hi मेरे आँखों में खून उतर आया. मैं उस्सको मारने के लिए तदल रहा था. मैंने रितिका से कहके उसकी पूरी डिटेल्स निकलवाई. उसका नाम उसका खानदान सबकुछ.



उससे मुझे उसके बारे में सब पता चला पर हमसे दुश्मनी का कोई रीज़न नहीं मिला. मैंने झट्ट से डैड के सिक्योरिटी हेड मंगल भाई को कॉल लगाया था. उनको पूरी बात बताई पर माँ डैड और किसी को भी बताने से मन किया. उनसे मैंने उस महेंद्र ठाकुर के देव ठाकुर की पूरी कुंडली बहार निकलवाई. सबकुछ पता चला और उससे hi मुझे ठाकुरस की दुश्मनी का कारण भी पता चला. मुझे बस उन् ठाकुरस को उनके किये की सजा देनी है. उनको पूरा बर्बाद करके उन् भी वैसे hi मारना है जैसे उन्होंने मेरे दादा दादी और नाना नानी को मारा था.



सब बस मुँह खोले यश की बाते सुन्न रहे थे. उनको तोह यकीन hi नहीं होरहा था जो कुछ यश ने उनको बोलै था.

सब: हुम्हे समाज नहीं आरहा है हम क्या कहे. यह सब कुछ बहोत hi ज्यादा शॉकिंग भरा है.



सिया: जब हुम्हे पता चला था तब हमारी भी एहि हालत थी. हुम्हे भी बहोत गुस्सा आया था. पर हमने गुस्सा दबा दिया और उनको बर्बाद करने का सोचा. जिसके लिए उन्होंने एहसाब किया उसको hi उनसे छिन्न लेना चाहा.



आरव: आखिर उनकी क्या दुश्मनी थी. जो उन्होंने यह किया. किस चीज़ का बदला लेना चाहते है ओहलोग.



यश: उनका बदला लेने का मैं रीज़न है ईगो और लालच. इसी के लिए उन्होंने एहसाब किया.



सब: मतलब.



यश: एहसाब तब स्टार्ट हुआ जब दादाजी और नानाजी अच्छे दोस्त थे उनका एक और दोस्त था महेंद्र ठाकुर. पर वह दोस्त सिर्फ और सिर्फ अपने लालच के चाकर में था. क्योकि उस टाइम पे भी दादा जी और नाना जी का बुसिनेस अच्छा था और ठाकुरस से अच्छा था. उसी को हतियाने के लिए वह दोस्त था. माँ डैड की शादी नहीं हुई नहीं थी. वह अच्छे दोस्त थे. इनका एकदोस्त और भी था देव ठाकुर.



एहलोग ेखि कॉलेज में पढ़ते थे. माँ डैड बुआ फूफाजी देव ठाकुर और उसकी बेहेन रश्मि ठाकुर.



एहसाब अच्छे दोस्त थे. डैड और माँ एकदूसरे को कॉलेज के फर्स्ट डे से hi पसंद करते थे. यह बात सिर्फ और सिर्फ बुआ और फूफाजी को hi पता थी. जो के कॉलेज के पहले से hi कमिटेड थे. माँ को उस वक़्त डैड ने यह नहीं बताया था वह अग्रवाल्स के बेटे है. बस टाइटल hi अग्रवाल था.

माँ को भी इससे कोई मतलब नहीं था. उनको डैड से मतलब था नाके उनके स्टेटस से.



एहसाब लोग बहोत अच्छे दोस्त हुआ करते थे. पर इस दोस्ती में 2 जान दोस्ती के नाम पे कुछ और hi मतलब निकलते थे. वह थे देव और रश्मि ठाकुर.



देव माँ से ओने साइडेड प्यार करता था पर माँ सिर्फ और सिर्फ डैड से hi प्यार करती थी वह देव को अच्छा दोस्त मानती थी उससे ज्यादा कुछ नहीं. और उधर रश्मि भी डैड से ओने साइडेड प्यार करती थी पर डैड सिर्फ और सिर्फ माँ से hi प्यार करते थे. वह भी रश्मि को एक अच्छी दोस्त और बेहेन की तरह देखते थे.



माँ और डैड के रिलेशन के बारे में ुनन्दनो को नहीं पता था.



माँ डैड के रिलेशन के बारे में दोनों मां को पता चल गया था पर उनको पता था डैड कौन है और उनको भी इससे कोई प्रॉब्लम नहीं था.



देखते देखते कॉलेज लाइफ के एन्ड होने का टाइम आगया. और तब तक देव ठाकुर की जिद्द बनगयी थी के उनको माँ चाहिए. और उसकी लालच भी बढ़ गयी थी पैसो के लिए.



उसने अपने बाप से बात की के उससे माँ से शादी करनी है. लगे हाथ रश्मि ने भी बोल्दिया के उसको भी डैड से शादी करनी है. रश्मि दिल की अच्छी थी. वह अपने बाप और भाई की तरह गिरी हुई नहीं थी.



महेंद्र को यह एक अच्छा मौका मिला दोनों बिज़नेस को अपने नाम करवाने का. अगर माँ की शादी देव से होजाती तोह नानाजी का बिज़नेस को माँ के द्वारा ले लेता और रश्मि की शादी अगर डैड से होजाती तोह वह उनके द्वारा दादाजी का बिज़नेस ले लेता.



महेंद्र ठाकुर अलग अलग जाके दोनों के रिश्ते की बात करते है. तीनो अच्छे दोस्त थे इसीलिए उन्होंने रिश्ता मान लिया पर किसी ने माँ और डैड को नहीं बताया था इससबारे में.



वह अपनी पढाई और रिलेशन में hi बिजी थे उनको और किसी से कोई मतलब नहीं था.



रिश्ता तय होने के कुछ दिन बाद जब माँ और डैड को इसके बारे में पता चला उनको बहोत बड़ा झटका लगा.



उन्होंने इस रिश्ते से इंकार किया तोह दादाजी और नानाजी ने उनकी बात नहीं मानी. और तभी माँ को भी डैड के रियल स्टेटस के बारे में पता चला.



माँ डैड एकदूसरे से मिलके इसके बारे में डिसकस किया. उनको कोई रास्ता नहीं मिल रहा था. बुआ और दोनों मां ने दादा जी और नानाजी से बात की फिर भी वह नहीं माने क्योकि उन्होंने महेंद्र ठाकुर को अपनी जबान दे दी थी.



माँ और डैड ने देव ठाकुर से मिलके उनसे बात की जब उससे पता चला के माँ डैड एकदूसरे से प्यार करते है तोह उसको झटका लगा. उसने उस वक़्त कुछ ना कहा पर अपना कमीनापन दिखा दिया. उसने अपने बाप से बोल्दिया और उसने दादाजी और नानाजी को इसके बारे में बोल्दिया.



दादाजी और नानाजी ने माँ डैड को बहोत सुनाया. शादी में और एक हफ्ता hi बाकी रह गया था और उनका घर से निकलना बंद करवा दिया. दोनों के फ़ोन्स भी ले लिए थे. उनसे बहोत रिक्वेस्ट की पर दादाजी और नानाजी के हुकुम के आगे किसी न चली.



इधर रश्मि बस अपने खयालो में hi गुम्म थी. उसको माँ डैड के बारे में कुछ भी पता नहीं चला. वह तोह अपने प्यार को पाने की ख़ुशी में खोयी हुई थी.



शादी के 1 रात पहले माँ और डैड बुआ और फूफाजी की मदद से घर से भाग गए. दूसरे दिन जब दादाजी और नानाजी को पता चला उनके पैरों टेल ज़मीन खिसक गयी थी. उन्होंने बहोत खोजै पर वह नहीं मिले.



दूसरी तरफ महेंद्र ठाकुर को जब यह पता चला तोह उसने दादाजी और नानाजी को बहोत सुनाया. रश्मि को जब पता चला वह तोह जैसे ज़िंदा लाश hi बनगयी थी. उसको बहोत गहरा सदमा लगा था. और उसने सुसाइड एटेम्पट करलिया था.



महेंद्र और देव ठाकुर को बहोत बड़ा झटका लगा था. वह इनसब के लिए सिर्फ और सिर्फ माँ डैड को hi जिम्मेदार मानते थे.



इधर माँ डैड ने शादी वाले दिन तोह फूफाजी के घर में छुपी थे. दूसरे दिन उन्होंने मंदिर में शादी कर्ली और जब डैड उनको लेके घर आये तोह दादा जी ने उनको घर में घुसने नहीं दिया. उनको घर से निकल दिया. नानाजी ने भी उनसे हर तरह का रिश्ता टॉड दिया था. दादी और नानी की तकलीफ के बारे में किसी ने नहीं सोचा.



उसके बाद मेरे जनम तक माँ डैड फूफाजी के साथ रहे. इसी बीच बुआ फूफी और दोनों मामाजी की शादी होगयी थी. क्योकि इनका रिश्ता पहले hi फिक्स करदिया गया था.



इधर महेंद्र ठाकुर और देव ठाकुर को जब पता चला के दादाजी और नानाजी ने माँ और डैड को माफ़ करदिया था उनका गुस्से और बदले की आग और बढ़ गयी.



मेरे 10 साल होने की ख़ुशी में वह चारो हमारे कुलगुरु के पास जा रहे थे तभी उंनलोगो का एक्सीडेंट करके मरवा दिया उनलोगो ने. और अब वह माँ डैड को भी मरवाना चाहते है. ताकि उनका बदला पूरा हो. और कुछ वक़्त पहले उन्होंने डैड का एक्सीडेंट करवाने की कोशिश की थी पर वह बच गए. उस इंसिडेंट के बाद hi मैं यहाँ आया.



इतना कुछ बोलने बाद यश शांत होता है. सामने वहसब बस सुनते जारहे थे. उनके चेहरे पे भी गुस्सा और नफरत भरा हुआ था.



आरुषि: कैसे कैसे नीच लोग भरे हुए है दुनिया है. लालच और ईगो के चाकर में कितना नीच गिरगाये है एहलोग. एक हस्ता खेलता परिवार बर्बाद करदिया इन्होने.



मेघा: बिलकुल ठिक्क कहा. ऐसे लोगो को तोह मार hi देना चाहिए.



आरव: इनलोगो की वजह से हमने हमारे दादा दादी को खोया है. इनको ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे.



अवि: बिलकुल. इनको उनके किये की बुरी से बुरी सजा देंगे.



सोनिया: भाई क्या बुआ और फूफाजी को पता है.



यश: नही उनको कुछ नहीं पता. और मैं नहीं चाहता वह एहसाब अभी जाने. एकबार एहसाब ख़तम होजाये फिर सबको बतादूँगा. अभी सिर्फ हमलोग मेरे वह लंदन वाले दोस्त और मंगल भाई hi सब जानते है.



अवि: मतलब देव इंडस्ट्रीज को आपने तबाह किया था.



यश: हआ. उस देव ठाकुर की दोनों फैक्ट्रीज में शार्ट सर्किट मैंने करवाया था. सिर्फ यहाँ पे hi नहीं लंदन में उसका पूरा बिज़नेस मैंने hi ख़तम किया था. और कुछ दिन पहले जो ड्रग्स पकड़ा गया था वह भी देव ठाकुर का hi था. यहाँ का सबसे बड़ा दादा रघु भाई को भी मैंने hi मारा था क्योकि उसी ने डैड का एक्सीडेंट करवाया था. और इसमें मेरी मदद मेरे दोस्तों ने और मंगल भाई के आदमियों ने जो अब मेरे आदमी है उन्होंने किया था.



सोनिया: यानी राशि और आँचल पे हुम्ला भी आपने.



यश: उनको माया और रितिका ने मारा था क्योकि उन्होंने राधा और सिया को जान से मारने के लिए गुंडे भिजवाए थे. क्योकि मैंने उनको पुरे क्लास के सामने थप्पड़ मारा था इसीकिये.



आरव: आप हुम्हे भी बता सकते थे भाई. आपने सबकुछ अकेले किया. क्या वह हमारे कुछ नहीं लगते थे. क्या आपको हुमए भरोसा नहीं.



अवि: हां भाई. आरव ने ठिक्क कहा. वह हमारे भी कुछ लगते थे. मामाजी का एक्सीडेंट हुआ था यह बात भी हुम्हे किसी ने नहीं बताया. और आप अकेले इतना कुछ कर रहे हो. क्या हम आपकी मदद करसके इस लायक भी नहीं.



आरुषि: हां राधा. तुम्हे तोह सब पता था ना फिर भी तुमने हुम्हे नहीं बताया. सब कुछ अकेले hi हैंडल किया.



सोनिया: हां सिया बोलो. क्या हमलोग तुमलोगो के कुछ नहीं लगते. और प्लीज यह मत कहियेगा हमारी फ़िक्र थी हुम्हे कुछ होजाता. क्या आपको कुछ नहीं होता. अगर आपको कुछ होजाये तोह हमारा क्या होगा. मम्मी पापा बड़ी मम्मी बड़ी पापा बुआ फूफाजी इनका क्या होगा कभी सोचा है.



यश राधा और सिया मुँह नीचे करके बैठे थे.



आरव: अब आप अकेले कुछ नहीं करेंगे भाई. हमसब आपके साथ है. जो भी करेंगे साथ मिलके करेंगे.



सब: आरव ने सही कहा. जो भी करेंगे साथ मिलके करेंगे.



यश सिया और राधा सबका मुँह देखते रहते है.



अवि: और प्लीज कोई अगर मगर नही करेंगे आपलोग.



तीनो कुछ नहीं बोलते बस उनका मुँह देखते रहते है तभी दरवाज़े पे नॉक होता है. राधा जाके खोलती है तोह सामने महक थी.



महक: यह दरवाज़ा बांध करके कौनसी सीक्रेट मीटिंग चल रही है तुमसब की.



सिया: नथिंग माँ. हमसब तोह बस ऐसे hi बाते कर रहे थे.



महक: ठिक्क है. चलो अब नीचे आजाओ. डिनर का टाइम होगया है.



मेघा: ओह्ह गॉड. बातो में टाइम का पता hi नहीं चला.



बहोत लेट होगया. बुआ जी अब हुम्हे चलना चाहिए. माँ डैड वेट कर रहे होंगे.



आरुषि: हां मामीजी. अब चलना चाहिए.



महक: ारी ऐसे कैसे. डिनर करके जाना.



दोनों: नही नेक्स्ट टाइम पक्का. आज नहीं



महक: और तुमलोग.



आरव: बुआ हम तोह करेंगे hi. और घर में बोलके आये है आज की रात एहि है.



महक: अच्छी बात है. और राधा वरुण.



वरुण: नही आंटी. हम चलते है. माँ वेट कर रही होंगी. वर्ण फिर टेंशन करेंगी.



राधा: यस माँ. हम चलते है.



फिर राधा आरुषि मेघा और वरुण निकल जाते है.



बाकिलोग डिनर टेबल पे बैठ जाते है. और खाने के बाद अपने अपने कमरे में सोने चले जाते है.



सबलोग सोते हुए यश की कही हुई बातो को hi याद कर रहे थे. उनका दिमाग पूरा हिला हुआ था. ओहलोग एहसाब सोचते हुए hi सो जाते है.
 
अपडेट 64

अगले दिन सबलोग कॉलेज में आते है पर उनके दिमाग में अभी भी वही सब चल रहा था.



राधा: क्या हुआ तुम सब क्या सोच रहे हो.



सब: कल आपलोगो ने जो शॉक दिया है उसी को लेके सोच रहे है.



यश: ज्यादा मत सोचो. जो होना था होगया. और अब जो होना है वह होक रहेगा.



सोनिया: पर भाई अगर किसी को पता चल गया आपके बारे में तोह आपकी लाइफ बर्बाद होजायेगी. पूरी फॅमिली की जान आप में बस्ती है. अगर आपको कुछ होगया तोह हमलोगो का क्या होगा.



यश: मुझे कुछ नहीं होगा. मैं अपना पूरा ध्यान रखता हु. और अगर हमने कुछ नहीं किया तोह सबकुछ तबाह होजायेगा.



अभी कोई कुछ बोलता तभी वह वह त्रिमूर्ति आजाते है. पर इससबार इनके पास ना आके इनके बगल वाले चेयर में बैठ जाते है.



इनको देख कर उनसब को बहोत गुस्सा आरहा होता है पर वह कुछ नहीं कर पाते. इसीलिए सबलोग चुप चाप क्लास में चल देते है.



रेसस्स में सबलोग चुप चाप बैठे हुए थे. तभी यश के मोबाइल में एक कॉल आता है.



यश: हां बोलो.



सामने से ऋषि कुछ बोलता है.



यश: क्याआ. लगता है उसके दिन पुरे होगया है तभी उसने एहसाब करने का सोचा है. कब करने वाला है वह.



ऋषि: आज.



यश: ठीककक है. आज उसके काम को अच्छे से करदेते है.

यह बोल यश कॉल कट करदेता है.



सिया: क्या हुआ. किसका कॉल था.



यश: डैड को फसाने का प्लान बना है.



राधा: किसने बना है.



यश: है कुछ दुश्मन. जिनकी अकाल आज ठिकाने लगेगी.



आरव: भाई पूरी बात बताइये ना. आखिर हुआ क्या है.



यश उन्हें बताता है आखिर मामला क्या है.



अवि: इनकी तोह. उसको तोह छोड़ेंगे नहीं. भाई आप कब जाएंगे.



यश: कॉलेज के बाद शाम को



आरव: हम भी जायेंगे.



अवि: बिलकुल. अब हम भी आपके साथ चलेंगे हर जगह. आखिर यह हमारी फॅमिली का भी मटर है.



यश आगे कुछ नहीं बोल पाटा. वह एक कॉल करता है.



यश: मंगल भाई.



मंगल: हआ यशः बोलो.



यश: डैड कहा है.



मंगल: सर तोह अभी मीटिंग में है. कुछ हुआ है क्या.



यश: हुआ तोह नहीं है होने वाला है. डैड की कार और ड्राइवर कहा है.



मंगल: वह तोह नीचे होंगे. क्या हुआ है.



यश: वह बाद में बोल रहा हु. अभी आप एक काम करे. एक दूसरी कार मंगवाए और उसमे डैड को ले जाए. और दूसरे ड्राइवर के साथ. और जो कार नीचे कड़ी है उसको अभी के अभी बहार निकले. और उस ड्राइवर को जरा नाश्ता पानी करवाना है.



मंगल: समाज गया. मैं अभी करवाता हु.



फिर एहलोग क्लास में चले जाते है और छुट्टी के बाद घर आते है.



यश फिर मंगल भाई को कॉल करके कुछ बोलता है. और वह भी अपने काम में लग जाते है. फिर यश बहार निकल जाता है. और एक जगह जाके आरव अवि और अपनी टीम का वेट करने लगता है.



थोड़ी देर में ओहलोग भी आजाते है.



यश: आरव अवि यह है कारन ऋषि माया और रितिका. और तुमलोग तोह इनदोनो को जानते hi हो.



अवि: ऋषि को देख कर. तुम तुम्हे कही तोह देखा है. कहा देखा है याद नहीं आरहा है.



ऋषि: मुस्कुराते हुए. हॉस्पिटल में देखा होगा. जहा ठाकुर की बेटियां एडमिट थी.



अवि: हआ याद आया. तुम रिसेप्शन के वह मुझसे टकराये थे. पर तुम वह क्या कर रहे थे. क्या भाई ने तुमने वह बुलाया था.



ऋषि: ऐसा hi समाज लो. मैं अपना काम hi कर रहा था. यश चले. ओहलोग कभी भी वह पहुंच सकते है. उसके पहले हुम्हे अपना काम करके निकलना होगा.



आरव: ारी करना क्या है हुम्हे भी तोह बताओ. और कौन लोग पहुंच सकते है और क्या काम करना है.



यश: अच्छा एक बात बताओ. अभी हम यहाँ किसलिए है.

अवि: इसीलिए ताकि मामाजी की गाडी में उनके ड्राइवर की मदद से जो ड्रग इम्प्लांट होने वाला है जिससे उन्हें फस्या जाए वह प्लान फ़ैल करना है.



कारन: गुड. अब तुमने वह कहावत तोह सुनी होगी जो किसी और के लिए गड्ढा खोदता है वह उसमे खुद hi गिरता है.



आरव: हां सुना है.



कारन: तोह यहाँ भी वही होगा. जिसने इशांत अंकल की कार में ड्रग इम्प्लांट करने की सोची है उसी के घर में वह ड्रग इम्प्लांट होगा.



अवि: मतलब जैसे को तैसा.



कारन: एक्साक्ट्ली.



रितिका: यश मंगल भाई का मश्ग आगया है. बैग उनके हाथ लग गया है. और वह ड्राइवर भी.



यश: ग्रेट. चलो अब चलके उस बैग को उसके सही जगह देके आते है.



फिर सबलोग वह से निकल जाते है और रास्ते से यश मंगल भाई से वह बैग लेके सीधा चले जाते है उस आदमी के घर जिसने यह प्लान बनाया था.



यश: आरव अवि कारन और ऋषि तुमलोग अपने फेस को अच्छे से कवर करो और जाकर उन् गार्ड्स का ध्यान भटकाओ. तब तक मैं काम ख़तम करता हु. रितिका कामर्स का क्या हुआ.



रितिका: बस हो hi गया. लो कामर्स अब मेरी कण्ट्रोल में है.



यश: तुमलोग जाओ. और अपना चेहरा किसी को ना दिखाना. क्योकि अभी यहाँ पे नारकोटिक्स वाले आएंगे.



चारो: ठिक्क है.



फिर वह चारो चले जाते है सिक्योरिटी का ध्यान भटकने. जैसे hi सिक्योरिटी का ध्यान इधर उधर होता है यश जल्दी से बंगला के अंदर जाता है और पीछे बने ोउथोउसे में जाके वह बैग एक अलमारी के पीछे चुप्पा देता है. और ऐसे छुपता है जिससे ऐसे लगे उसको किसीने अच्छे से छुपाया है.



वह बैग छुपाने के बाद यश चुपके से वह से निकल जाता है. जैसे hi यश वह से निकलता है वह चारो भी निकल जाते है और कामर्स भी पहले जैसे होजाते है.



शाम को हरजगह न्यूज़ फैल गयी के नारकोटिक्स डिपार्टमेंट ने ex-minister के घर छापा मारा और 30 कग कोकीन बरामत किया. उनको और उनके बेटे को ड्रग्स सप्लाई करने की जुर्म में गिरफ्तार किया गया. उन्होंने ड्रग्स का बैग अपने घर के पीछे बने ोउथोउसे में छुपाया था पर नकब ने वह ड्रग्स बरामत किया.



जब इशांत और महेंद्र ने यह न्यूज़ देखि तोह उन्दोनो को अलग अलग तरीके का झटका लगा.



इशांत को झटका लगा क्योकि उसको सिर्फ शक था पर यकीन नहीं था के ex-minister ड्रग्स का धंधा करता है.

और महेंद्र को झटका लगा क्योकि उसका प्लान जो फ़ैल होगया.



महेंद्र: यह क्या है. यह कैसे फहस्स गया. यहाँ तोह इशांत को होना चाहिए था. मैंने तोह इसको कहा था एकदम ध्यान से वह बैग इशांत की कार में रख दे. और उसने कहा था इशांत का ड्राइवर उसके साथ है. और बैग को कार में संभल के रख दिया है. फिर यह सब कैसी हुआ.



महेंद्र इसी सोच में घुम्म था तभी उसके पास किसी का कॉल आता है.



महेंद्र: Hello.



यश: अपनी उलटी गिनती करना स्टार्ट करदे. तेरे बनाये हर प्लान का सत्यानाश मैं करूँगा. जैसे आज किया है.



महेंद्र: तू है कौन. एकबार सामने आजा. तुझे ऐसी मौत दूंगा के तेरी रूह काँप जायेगा.



यश: मुझे मारना तेरे बस का नहीं है. और रही तेरे सामने आने की बात तोह वह जल्दी hi आऊंगा. और जब मैं सामने आऊंगा विह तेरा आंखरी दिन होगा.



यह बोल यश कॉल कट करदेता है.



इधर मिनिस्टर और शिवम् को नकब वालो ने ड्रग्स का धंधा करने के जुर्म में गिरफ्तार करलिया और उनको जेल में ढाल दिया. और इसी के साथ मिनिस्टर का chapter यश के लाइफ में ख़तम हुआ.



इधर रोहन राशि आँचल को भी झटका लगा. क्योकि उनको भी शिवम् ने इस प्लान के बारे में बता दिया था. पर जब इनको पता चला शिवम् hi फस गया है उनको यकीन hi नहीं हुआ.



इधर यश जब घर आया तोह सिया भग्ग के आयी और उसके गले लग गयी.



यश: क्या हुआ सिया.



सिया: तुमने तोह कमाल hi करदिया. हुम्हे फसाने चले थे अब खुद hi फस गए.



यश: हमारी फॅमिली के ऊपर बुरी नज़र रखेगा तोह एहि होगा. उसके पास ऑप्शन था. खुद ko.aur अपने बेटे को सही रस्ते पे लाके इज़्ज़त की ज़िन्दगी जिए. पर वह कुत्ते है और उनकी दम हमेश टेढ़ी की टेढ़ी hi रहेगी. अब सड़ते रहेंगे जेल में. उनके खिलाफ और भी केसेस दर्ज है अब वह कभी बहार नहीं आएंगे.



सिया: अच्छा हुआ. एक तोह काम हुआ.



यश: बहोत जल्द बचे हुए भी ख़तम होजाएंगे.



ऐसे hi कुछ दिन गुज़र जाते है. इन् कुछ दिनों में बहोत कुछ बदल चूका था. यश की ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल गयी थी.



अग्रवाल हाउस के चारो तरफ पुलिस का पहरा था. बहार पार्किंग में से कुछ गाड़ियां जा रही थी तोह कुछ गाड़ियां आरही थी.



हॉल में बहोत जान मौजूद थे. कम बड़े बड़े बिजनेसमैन मिनिस्टर मीडिया हाई रंकड पुलिस ऑफिसर्स यश की पूरी फॅमिली विक्रम संजना संगीता वरुण आरुषि मेघा देव ठाकुर महेंद्र ठाकुर राशि आँचल मौजूद थे.



हॉल के बीचो बीचो यश ज़मीन में बैठा हुआ था.



उसके सामने 4 तस्वीर में मालाएं लगी हुई थी. सबलोग सफ़ेद कपड़ो में थे. यश एंड फॅमिली विक्रम संजना की आँखों में आंसू थे. क्योकि वह 4 तस्वीरें किसी और की नहीं इशांत महक सिया और राधा की थी. 2 दिन पहले hi इन् 4 जान की मौत होगयी थी. यह चर्र एक कार से कही जा रहे थे.



तभी इनकी कार का ब्रेक फ़ैल होगया कार एक पेड़ से टकरा गयी और ब्लास्ट होगया. चारो वही पे मारे गए.



यश को जब यह पता चला वह पूरी तरह से पागल होगया था. संजना ने तोह रो रो के अपना बुरा हाल करलिया था.



विक्रम भी अपनी बेटी की गुम्म में पागल होगया था.



यश के परिवार वाले भी इस एक्सीडेंट के बाद ज़िंदा लाश बन गए थे खान पीना सब चोरर दिया था. यश ने तोह बोलना hi बंद करिडिया था. बस हर वक़्त उन् चारो की तस्वीर लिए बैठा रहते थे.



संगीता और शालिनी ने बड़ी मुश्किल से सबको थोड़ा खिलाया. यश तोह खाने को तैयार hi नहीं था पर उन् 4 जान की कसम देके उसको भी थोड़ा खिलाया गया.



राशि और आँचल की आँखों में टेअर ड्रॉप्स के आंसू थे. उनको बहोत ख़ुशी हुई थी इस एक्सीडेंट से. आखिर राधा के जाने से उनका रास्ता साफ़ होगया था. अब वह यश के करीब आसक्ति थी. इन् 2 दिनों में इन् दोनों ने यश को बिलकुल भी अकेला नहीं छोरा था. भले hi उसकी फॅमिली उसके साथ थी. पर यह दोनों भी उसके साथ थे. सोनिया आरुषि मेघा आरव अवि और वरुण को इनका रहना बिलकुल भी पसंद नहीं आरहा था पर वह चुप्प थे.



थोड़ी देर बाद सबलोग चले जाते है. बस घर के लोग विक्रम संजना महेंद्र और उसका परिवार hi था.



महेंद्र: यश मुझे मालूम है इसवक्त यह कहना सही नहीं. पर फिर भी मैं कुछ बोलना चाहता हु.

यश: बोलिये न.



महेंद्र: देखो अब जो होगया है उसको बदला नहीं जा सकता था. पर अब हुम्हे भी अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहिए. कब तक उनकी याद में इस तरह रहेंगे. इसीलिए यहाँ पे सबसे बड़ा होने के नाते मैं कहूंगा तुम्हे और बाकी सब को अब अपनी अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहिए. विक्रम मैं समझता हु तुमने क्या खोया है. पर अब तुम्हे भी अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहिए.



विजय: यश विक्रम अंकल सही बोल रहे है. अब आगे बढ़ना चाहिए. हमने जो खोया है उसको छह कर भी हम नहीं पा सकते. पर कब तक ऐसे hi रहेंगे. हुम्हे ऐसे देख कर उन्हें भी तकलीफ होगी.



यश: जी फूफाजी.



महेंद्र: बीटा इशांत के बाद बिज़नेस का क्या होगा. अब इतने बड़े एम्पायर को कौन संभालेगा.



यश: आप उसकी चिंता ना करे. यह पूरा एम्पायर अब मेरे नाम पे है. तोह इससे मैं hi सम्भालूंगा.



देव: पर अभी तुम छोटे हो. और तुम्हारी पढाई भी बाकी है. बिज़नेस और पढाई एकसाथ कैसे करोगे.



यश: मैनेज होजायेगा अंकल. फिर मेरे साथ मामाजी और विक्रम अंकल भी है तोह.



देव: बेमानन से. हां सही कहा. फिर हम भी है. अगर कभी भी कोई भी जरुरत पढ़े तोह हुम्हे जरूर याद करना.



और अपने आप को बिलकुल भी अकेला मत समझाना. हम हमेशा तुम्हारे साथ है.



राशि और आँचल: हां यश. राधा और सिया नहीं है तोह क्या हुआ. हम तोह है. हम हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे. तुम अपने आप को अकेला मत समझाना.



यश कुछ नहीं बोलता बस हल्का सा मुस्कुरा देता है.



फिर बाकी सब भी चले जाते है. अब घर में सिर्फ फॅमिली मेंबर्स hi थे. सबलोग बस एकदूसरे को देख रहे थे. फिर कुछ बाते करके अपने अपने कमरे में चले जाते है.

इधर एक आदमी किसी से फ़ोन पे बात करता है.



आदमी: कैसा हुआ सबकुछ आज.



सामने से: जैसा हमने सोचा था सब वैसा hi हुआ है

आदमी: यानी अग्रवाल हाउस में मातम चा गया है.



सामने से: जीई.



आदमी: और कब तक यह सब चलेगा.



सामने से: जीई बहोत जल्द ख़तम होजायेगा.



आदमी: जो भी करना संभल के करना. कोई गर्बर नहीं होनी चाहिए.



सामने से: चिंता ना करे. कोई गर्बर नहीं होगी. सब प्लान के हिसाब से hi होगा. बस आप जहा है वही रहिये.



आदमी: हम्म्म. सही टाइम आने पे मैं ाजुंगा.



सामने से: जीई.



फिर कॉल कट होजाता है.
 
अपडेट 65

अगले दिन सबलोग कॉलेज आते है. यश के आने का मन नहीं था पर उसको जबरदस्ती भेजा गया पर चुप चाप गुमसुम सा था. आज पहली बार उसके साथ उसकी राधा और सिया नहीं थी.



अभी उसको वह बैठे कुछ टाइम hi हुआ था तभी वह राशि और आँचल आजाती है.



दोनों ही यश. अब कैसे हो तुम.



यश: अब ठीक हु.



दोनों: हम यहाँ बैठ सकते है.



यश: एकबार उनको देखता है फिर बोलता है हां बैठो.



यश के हां बोलने से दोनों झट्ट से उसके पास बैठ जाती है.



उनके वह बैठने से बाकी सब को बहोत गुस्सा आता है पर वह कुछ नहीं बोलते क्योकि उनको पता है अभी यश के दिमाग ख़राब है और इसीलिए उसने बिना कुछ सोचे समझे उनको बैठने बोलै है.



राशि: यश कब तक ऐसे उदास रहोगे.



आँचल: हां यश. अब आगे बढ़ो लाइफ में. जो होगया है उसको बदला तोह नहीं जा सकता न.



यश: हम्म्म. कोशिश कर रहा हु.



दोनों: तुम अपने आप को अकेला मत समझो. हमदोनो हमेशा तुम्हारे साथ है.



यश उनकी तरफ देख कर हल्का सा मुस्कुरा देता है.

अभी कोई कुछ बोलता तभी यश के मोबाइल में एक कॉल आता है.



यश: Hello.



सामने से कोई कुछ बोलता है.



यश: शांत होजाओ.



सामने से फिर कोई कुछ बोलता है.



यश: अच्छा अच्छा ठीक है समाज गया. और कुछ.

सामने से कोई कुछ बोलता है जिससे सुन्न के यश के चेहरे में एक हलकी सी मुस्कान आजाती है.



यश: मी तू.



फिर कॉल कट होजाता है.



सोनिया: कौन था भाई.



यश: मेरे कुछ खाश दोस्त थे. उनका hi कॉल था.



अभी सोनिया कुछ बोलती तभी उसके आँख में किसी ने हाथ रख दिया.



सोनिया: कौन है. चोरो मुझे.



पीछे से: हुम्हे नहीं पहचाना सोनू. इतनी जल्दी भूल गयी.



सोनिया: सोनल रिया तुमदोनो यहाँ. व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज.



दोनों: चलो काम से काम पहचान तोह लिया. वर्ण हुम्हे लगा तुम भूल hi गयी.



सोनिया झट्ट से गले लगते हुए. ारी तुमदोनो को कैसे भूल सकती हु. बस तुमदोनो को यहाँ एक्सपेक्ट नहीं किया था.



दोनों: ारी हमदोनो ने तोह एहि एडमिशन लिया था बस तबियत ख़राब होगयी थी इसीलिए आ नहीं पाए. पर अब ठीक है इसीलिए कॉलेज स्टार्ट करदिया. पर हमने पढाई का नुक्सान नहीं होने दिया. कॉलेज अथॉरिटी हुम्हे सारे नोट्स भेज रही थी.



सोनिया: व्हॉट रियली. तुमदोनो इस कॉलेज में हो. मज़ा आगया. और तबियत को क्या हुआ था.



दोनों: वह एक छोटा सा एक्सीडेंट हुआ था.



इधर बाकिसब इन् तीनो को hi देख रहे थे.



सोनिया: ारी परेशां मत हो. बताती हु यह कौन है. यह है सोनल और रिया. मेरे स्कूल फ्रेंड्स. हमने 10तह तक एकसाथ पढाई की थी. और यह है यश यह आरव यह अवि यह मेघा यह आरुषि और यह है बन्दर.



दोनों: बंदरररर.



सोनिया: ू सॉरी वरुणंन.



वरुण सोनिया को घुर्र्र के देखता रहता है. सोनिया उसको देख कर एक नॉटी स्माइल देती है.



दोनों: अछ्हा और यह दोनों कौन है.



सोनिया: बेमानन से. यह है राशि और आँचल.



सोनल और रिया: ही गयसस. हमारा इंट्रो तोह इसने दे दिया है अब हम और क्या बोले.



सब: होई.



सोनिया: तुमदोनो कौनसे ब्रांच में गयी हो.



सोनल: मैं तोह मेडिकल में हु और रिया बिज़नेस में.



सोनिया: ोोू. ग्रात्तट. अवि भी मेडिकल का है. और यश बिज़नेस का.



सोनल: अछ्हा. यश िफ़ यू don’t मंद क्या तुम एक फवौर करोगे.



यश: हम्म बोलो.



सोनल: यह रिया मेरी बेहेन. यह भी बिज़नेस स्ट्रीम की है. क्या तुम इसके साथ रहोगे. अगर प्रॉब्लम ना हो तोह.



आँचल: क्यों यह क्या कोई छोटी बच्ची है जो अकेले नहीं रह सकती. यह आरुषि और मेघा भी तोह बिज़नेस की है. इनके साथ रहलेगी.



सोनल: तुम आँचल हो राइट.



आँचल: हआ.



सोनल: क्या मैंने तुमको बोलै है मेरी बेहेन के साथ रहने के लिए. नहीं ना. तोह क्यों बीच में बोल रही हो.



राशि: अपनी लिमिट में रहो. हम यश के दोस्त है. हुम्हे हक़ है बीच में बोलने का.



सोनल: यश के दोस्त हो. यश की गर्लफ्रेंड या बीवी नहीं हो. तोह बीच में न बोलना. हां तोह बोलो यश. क्या तुम इसके साथ रहोगे.



राशि और आँचल गुस्से से देखने लगती है.



रिया: सोनल चोरो ना. मैं अकेले रह सकती हु. क्यों बेकार में किसी को परेशां करना.



सोनिया: ारी कोई नहीं रिया. यश को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी. यश क्या तुम रहोगे.



यश: क्या इनको कोई प्रॉब्लम है जो इनके साथ किसी को रहना होगा.



सोनल: एक्चुअली रिया का लेफ्ट हैंड बीच बीच में कांपने लगता है. यह एक्सीडेंट के बाद से hi ऐसा होरहा है. और जब ऐसा होता है तब इसके उसके हाथ को काश के पकड़के रखना पढता है. इसीलिए मैंने कहा. आरुषि और मेघा भी पकड़ सकती है पर अगर कोई शाक्त हाथ पकड़ले तोह कांपना जल्दी बंद होजाता है. वर्ण हम गर्ल्स के हाथ तोह यू क्नोव न व्हाट ी मैं.



यश: ह्म्म्मम्म.



सोनल: अगर कोई प्रॉब्लम है तोह चोरर दो. कोई नहीं.



यश: ारी कोई बात नहीं. मैं रहूंगा साथ. तुमदोनो सोनू के दोस्त हो मतलब मेरे दोस्त हो.



यश के हां बोलने राशि और आँचल को बहोत गुस्सा आता है. वह गुस्से से यश को देख रहे थे.



सोनल और रिया: थैंक यू यश. तुम बिलकुल वैसे hi हो जैसा सोनू हुम्हे बताती थी.



यश बस मुस्कुरा देता है.



वरुण: अब क्लास में चले. टाइम होगया है.



सब: हां चलो.



फिर सब क्लास में आजाते है. यश और रिया साथ बैठ जाते है. राशि और आँचल इनके पीछे बैठ जाते है और गुस्से से इनको घूरने लगते है.



थोड़ी देर में टीचर आते है और रिया को इंट्रोडस करवाते है फिर पढ़ने लगते है. अभी थोड़ी देर hi हुई थी के रिया थोड़ी बेचैन होने लगती है.



यश यह नोटिस करता है पर कुछ नहीं बोलता. थोड़ी देर बाद रिया वापस बेचैन होने लगती है. पीछे से राशि और आँचल यह सब देख रहे थे.



यश: क्या हुआ. अन्य प्रॉब्लम.



रिया: वह वह एक्चुअली मेरा हाथ वह मेरा हाथ कांपने लगा है.



यश झट्ट से रिया के हाथ को शक्ति से पकड़ लेता है. पीछे से राशि और आँचल यह देख कर और ज्यादा गुस्सा होजाती है पर कुछ नहीं कर पाते.



इधर जैसे hi यश ने रिया के हाथ को पकड़ा तोह रिया को एक झटका लगता है वह यश को देखने लगती है.



यश: Don’t वोर्री. थोड़ी देर में ठिक्क होजायेगा.



रिया: हम्म्म. थैंक्सस.



यश कुछ नहीं बोलता. फिर एहलोग क्लास करने लगते है पर यश ने रिया का हाथ नहीं छोरा था पुरे क्लास में उसने हाथ पकड़ा हुआ था.



रिया: यश अब ठिक्क है तुम हाथ चोरर सकते हो.



यश: ू सॉरी. मैंने ध्यान नहीं दिया. मुझे लगा मैंने मेरी राधा का हाथ पकड़ा हुआ है. क्योकि हम ऐसे hi हाथ में हाथ वाले क्लास करते थे.



रिया: होव स्वीट. वैसे यह राधा कौन है.



यश: राधा मेरी जान है. बूत अब वह मेरे साथ नहीं है.



रिया: ऊऊह्ह्ककक. कोई बात नहीं. वह जहा भी होगी खुश होगी.



यश: हम्म्म.



रेसस्स तक एहलोग क्लास करते रहते है. फिर कैंटीन में आके लंच करते है.
 
अपडेट 66

कैंटीन में रिया यश के बगल में hi बैठी थी. राशि और आँचल को तोह जैसे यश वापस उनके हाथ से निकलता हुआ दिखा रहा था.



राशि: आँचल अगर यह सब होता रहा तोह यश वापस हमारे हाथ से निकल जायेगा. हुम्हे कुछ करना होगा.



आँचल: पर हम करेंगे क्या. यश तोह हमसे ठीक से बात तक नहीं करता. अगर हम उसको बोलेंगे हम उससे प्यार करते है तोह वह नाजाने कैसा रियेक्ट करेगा.



राशि: एहि तोह प्रॉब्लम है. राधा के जाने के बाद भी वह हमारा नहीं होरहा है. और अब यह रिया नाम की मुसीबत पता नहीं कहा से आगयी. इसको और इसकी बेहेन को कैसे भी करके यश से दुर्र रखना होगा.



आँचल: हआ ठीक बोल रही है. देख कैसे उसके बगल में बैठी है. और है है के बाते करे जा रही है. इनके दिल में यश को लेके कुछ आने से पहले हुम्हे कुछ करना होगा. वर्ण अगर इनदोनो में से किसी एक के दिल में कुछ आगया और यश के दिल में भी आगे तोह सब बर्बाद होजायेगा.



राशि: हम्म पर करे क्या. ऊपर से वह सोनिया की दोस्त है. अगर हमने कुछ किया तोह विह उससे ना बोल दे.



आँचल: हम्म एहि भी है. देखते है क्या कर सकते है.



इधर कमिश्नर अपने बेटे को बचने के लिए और अपनी जॉब को वापस पाने के लिए जी जान से कोशिश कर रहा था. पर वह कुछ ना कर पा रहा था.



यश ने रोहन को कुछ महीने पहले हुए बम ब्लास्ट में फसा दिया था. और ऐसा दिखा दिया के कमिश्नर भी शामिल था. यश ने पूरी तरह से उनको फसा दिया था जिससे वह छह के भी नहीं निकल पा रहे थे. रोहन और उसका बाप जेल में था और कमिश्नर के ऊपर इन्क्वायरी बैठी थी. जिससे वह बहोत बुरी तरह फस गया था.



कॉलेज के बात सब घर आते है. यश के साथ सोनल रिया राशि आँचल चोर के सब आये थे.



आरव: भाई आगे का क्या सोचा है.



यश: कुछ समाज नहीं आरहा है क्या करू. दिमाग काम hi नहीं कर रहा है.



अभी कोई कुछ बोलै तभी एक आवाज़ आती है. दिमाग काम नहीं कर रहा है तोह उसको फहैकक दो.



सब आवाज़ की तरफ देखते है तोह वह जिया कड़ी थी.



यश: जिया दी आप यहाँ.



जिया: अब क्या करू हैंडसम. इशांत सर के बाद पूरी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आगयी है क्या करू कैसे करू कुछ समाज नहीं आरहा है.



यश: ी ऍम सॉरी जिया दी. डैड ने जिम्मेदारी मुझे दी थी पर मैंने कुछ नहीं किया.



जिया: नहीं नहीं हैंडसम. मुझे पता है अभी के हालात क्या है. तुम टेंशन मतलो मैं सब हैंडल करलूँगी.



यश: कोई नहीं जिया दी. कल से मैं भी ऑफिस आऊंगा. ज्यादा कुछ नहीं तोह आपकी हेल्प hi करदिया करूँगा. इससे मुझे फ्यूचर में हेल्प मिलेगा.



जिया: अरे यू सूरे. तुम आना चाहते हो ऑफिस.



यश: हआ. मैं कल कॉलेज के बाद ऑफिस आजाऊंगा.



जिया: ोकककक. तोह मैं वेट करुँगी.



यश: हम्म्म.



फिर जिया थोड़ी देर बैठ कर बाते करती है और चली जाती है. जिया के साथ बाकी सब भी चले जाते है.



यश: ऋषि सब ठीक है ना. कोई प्रॉब्लम तोह नहीं है ना.



ऋषि: कोई प्रॉब्लम नहीं है. सब ठीक है. तुम टेंशन मतलो.



यश: हम्म्म. उस काम का क्या हुआ.



ऋषि: थोड़ी देर में होजायेगा.



यश: ठिक्क है. फिर कॉल कट होजाता है.



इधर देव इशांत और महक की मौत से खुश होक पार्टी कर रहा था. पार्टी में उसने इतना नशा करलिया के उसको कोई होश hi नहीं था.



वह उसी हालत में गाडी चलते हुए घर की तरफ आरहा था. गाडी फुल स्पीड में चला रहा था तभी पीछे से एक ट्रक ने उसकी गाडी को टक्कर मार दी. जिससे वह गाडी 3-4 बार पलट ते हुए एक पेड़ से जाके टकरा गयी.

देव वही पे बेहोश होगया. उसके सर में बहोत गहरी चोट आयी थी. पूरा चेहरा खून से भग्ग गया था. तभी वह पे कोई आता है. उसने एकनाज़र देव को देखा फिर अपने हाथ में पकडे रोड से उसके एक पैरर को और हाथ को ताक़त से मारता है और वह से चला जाता है.



अगले दिन हरजगह खबर फैल गयी के देव ठाकुर का एक्सीडेंट हुआ है और वह हॉस्पिटल में है.



महेंद्र राशि और आँचल हॉस्पिटल में बैठे हुए थे. उनकी आँखों में दुःख और गुस्सा दोनों था. दुःख इस्सलिये के देव हॉस्पिटल में था और गुस्सा इस्सलिये क्योकि किसी ने उसका एक्सीडेंट करवाया.



यश अपने भाई बहेनो के साथ आता है. राशि और आँचल यश को देखते hi उसके गले लगने के लिए आगे बढ़ते है बूत तभी सामने सोनल और रिया आजाती है. राशि और आँचल यश की जगह ुनन्दनो के गले लग जाते है. जो उन्होंने एक्सपेक्ट नहीं किया था.



सोनल और रिया: शांत होजाओ. कुछ नहीं होगा अंकल को वह ठीक होजाएंगे.



वह दोनों उनसे अलग होक. गुस्से से उनको देखते है फिर यश को देखते है.



यश: कैसे हुआ.



दोनों: नहीं पता. हुम्हे यहाँ से कॉल आया और बोलै के डैड हॉस्पिटल में है.



यश: ठीक होजाएंगे.



फिर यश महेंद्र के पास जाता है.



यश: यह सब कैसे हुआ. क्या किसी की कोई दुश्मनी थी आपलोगो की. कुछ वक़्त पहले आपकी पोतियां और आज आपका बीटा. आपका लंदन का बिज़नेस यहाँ पे 2 फैक्ट्री में आग लग्न लगता है किसी ने आपलोगो को टारगेट किया है.



महेंद्र: हम ठाकुर है. जिसने हुम्हे टारगेट किया है उसको जिन्दा गार देंगे. बस एकबार पता चले वह कौन है.



यश: क्या आपलोगो ने किसी के साथ कुछ बुरा किया था जिसके वजह से यह सब होरहा है.



महेंद्र एक नज़र यश को देखता है फिर बोलता है.



महेंद्र: हम ऐसा क्यों करेंगे. और हमारी किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी.



यश: छोड़िये. अंकल कैसे है.



महेंद्र: सर पे चोट आयी है. एक हाथ और पैरर टूट गया है. किसी ने जबरदस्ती वह पे वह है.



यश: यह तोह कोई पर्सनल दुश्मनी का नतीजा है तभी किसी ने अंकल को ऐसे मारा है.



महेंद्र: पता नहीं. चलो तुमसब मिल लो.



फिर सब अंदर आते है तोह देखते है देव बीएड में लेता हुआ है हाथ और पैरर में प्लास्टर चढ़ा हुआ है. सर पे पट्टी है.



यश: अब आप कैसे है अंकल.



देव: अब ठिक्क हु. तुमलोग आये मुझे अच्छा लगा.



यश: कैसे ना आते अंकल. आप माँ डैड के अच्छे दोस्त थे. हुमहर तोह आना hi था.



इधर महेंद्र देव को कुछ इशारा करता है तोह देव भी इशारे को समाज के बोलता है.



देव: यश बीटा तुमसे कुछ बात करनी है.



यश: बोलिये ना अंकल.



देव: बीटा ऐसे वक़्त में यह बात करना अच्छा नहीं लगता.



यश: कोई बात नहीं अंकल. आप बोलिये ना.



देव: देखो बीटा अभी अभी तुम्हे इतना बड़ा लोस्स हुआ है. तुम अब अकेले होगये हो. मंटा हु तुम्हारे मां ममी बुआ फूफा तुम्हारे साथ है फिर भी माँ बाप से सागा कोई नहीं होता.



यश: मैं समाज रहा हु अंकल.



देव: देखो बीटा अभी मेरा भी एक्सीडेंट होगया है. जब से इशांत और महक का एक्सीडेंट हुआ था तब से मुझे इस एक्सीडेंट से डर लगने लगा है. कालको अगर मैं भी मर्डर गया तोह मेरे पीछे तोह राशि और आँचल का क्या होगया.



यश: ऐसा मत सोचिये अंकल. ऐसा कुछ नहीं होगा.

देव: किस्मत का लिखा कौन जान पाया है बीटा.



यश: यह तोह आपने ठिक्क कहा. किस्मत का लिखा कौन जान पाया है. किस्मत में जो लिखा है वह तोह होगा hi.



देव: इसीलिए मैं चाहता हु की....



यश: बोलिये ना अंकल.



देव: बुरा मत मन्ना बीटा. पर मैं बेटियों का बाप हु. चाहे यह जितनी भी सेल्फ इंडिपेंडेंट हो पर है तोह बेटियां hi और मुझे इनके फ्यूचर की बहोत चिंता होती है.



यश: चिंता कैसी अंकल. आपका इतना बड़ा बिज़नेस है एहडोणो वह संभालेंगी.



देव: वह तोह है. पर ज़िन्दगी अकेले नहीं बितायी जाती. उसके लिए एक साथ की जरुरत पढ़ती है. तुमने भी तोह अपनी हमसफ़र को खोया है.



यश इस बात पे कुछ ना बोलता.



देव: और मैं अपनी बेटियों के लिए किसी भरोसेमंद को hi चुनना चाहता हु. जिसके साथ वह खुश रहे.



यश: हम्म्म.



देव: बेटा क्या तुम इनदोनो से शादी करके मुझपे एक उपकार करोगे.



देव की बात सुन्न वह खड़े सभी के ऊपर जैसे बिजली गिर्र जाती है. 2 जान तोह गुस्से से आग बबूला होजाते है. वह तोह देव को जान से मारने जारहे थे. पर उनके पास खड़े किसी ने उन्हें पकड़ लिया.



राशि आँचल: ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ एहहहह आपपपप क्या कहहह रही हीी. एहहह पॉसिब्ली नहिई हीी.



महेंद्र: हा बेताऑ एहहह तुममम क्या कहहहह रही होऊ. एहहह पॉसिब्ली नही हैई.



देव: मैंने बहोत सोच समाज के hi यह बोलै है. इस एक्सीडेंट से बछ गया क्या पता फिर कोई एक्सीडेंट होजाये और मैं न बच्चू. तोह मेरे बाद इन् भिन्न माँ की बच्चियों का क्या होगा. आपकी भी अब उम्र होगयी है. आपके ऊपर भी इतना भोजज नहीं दे सकता. और यश हमारे जान पहचान का है. हमारे दोस्त का बीटा है. कालको हमारे बाद यह सब संभल सकता है. राशि और आँचल भी इससे प्यार करती है. भले hi इन्होने पहले थोड़ी गलतियां की है. पर अब यह सुधर चुकी है. बोलो यश क्या तुम मेरी यह बात मानोगे. करोगे मेरी बेटियों से शादी.



यश: यह पॉसिबल नहीं है अंकल. मेरी ज़िन्दगी में राधा को चोरर के कोई नहीं आएगा. राधा नहीं है तोह क्या हुआ. उसकी यादें मेरे साथ है.



देव: मैंने भी एक समय किसी से बहोत प्यार किया था. बूत वह मुझे ना मिल सकीय. मैंने भी सोचा था उसकी यादों के सहारे साड़ी ज़िन्दगी गुज़ार दूंगा. पर यह कहने को आसान है पर करने को नहीं. फिर मेरी ज़िन्दगी में इनकी माँ आयी भले hi उसने कुछ सालों में hi मेरा साथ चोरर दिया. पर जीने के किये यह दोनों मुझे दे गयी.



यश: मेरे से नहीं होगा अंकल. मैं यह नहीं कर सकता. ी ऍम सॉरी.



देव: अभी तुम थोड़ा परेशां हो बीटा. अगर तुम कहो तोह मैं तुम्हारे मां ममी बुआ फूफा यहाँ तक की विक्रम और संजना से भी बात करता हु.



यश: ी don’t क्नोव अंकल. पर मैं नहीं कर सकता. यह बोल वह वह से निकल जाता है. उसके पीछे बाकी सब भी निकल जाते है. रह जाते है सर्फ देव महेंद्र राशि और आँचल.
 
अपडेट 67

यश और बाकी सबके जाने के बाद महेंद्र बोलता है.



महेंद्र: बहोत खुब्ब बेटा. बहोत खुब्ब. यश को एकदम सही मौके पे पकड़ा है. और ऐसा इमोशनल होक बोलै है उसको मन्ना hi पड़ेगा. भले hi उसने अभी ना कहा है. पर उसकी ना बहोत कमज़ोर थी.



आँचल: हआ डैड. बहोत hi सही मौके पे आपने यह बात चेदि है. अब यश सिर्फ हमारा होगा. और उसको हमसे कोई नहीं छिन्न पायेगा.



राशि: डैड दादाजी आपलोग जल्द से जल्द यश के घर में बात करके हमारा रिश्ता पक्का करे. अभी यश की मेन्टल कंडीशन कमज़ोर है. उसके घरवाले जैसा बोलेंगे वह वैसा hi करेगा. अभी वह दिल और दिमाग दोनों से hi नहीं सोच रहा है. हुम्हे इस मौके का फैयदा उठाना चाहिए. एकबार अगर उसके घरवाले मान गए तोह काम होजायेगा.



आँचल: हां डैड दादाजी. राशि ने बिलकुल ठिक्क कहा है. आपलोग देरी न करे. अभी उसकी पूरी फॅमिली की मेन्टल कंडीशन ठिक्क नहीं है. और इससे अच्छा मौका हुम्हे नहीं मिलेगा. और रही बात उस राधा के माँ बाप की बात तोह ुस्सर अगर बात नहीं भी करेंगे तोह कोई फर्क नहीं पड़ेगा. वह लोग अपनी बेटी की वजह से इनके साथ थे. अब वह मर्डर चुकी है तोह उनको इससे दुर्र hi रखो. और एकबार हमारी शादी यश से होगयी तोह उसके सारे भाई बहेनो को देखलेंगे.



राशि: पर क्या वह हमदोनो से शादी के लिए मानेगा. अगर उसने किसी एक से शादी करने की बात की तोह.

आँचल: तोह उससे hi पूछेंगे वह किस्से शादी करना चाहता है बात ख़तम.



महेंद्र: हमलोग कल hi जायेंगे बात करने. बस एकबार यह शादी होजाये फिर पूरा अग्रवाल एम्पायर हमारा होजायेगा.



इधर यश जब अपने घर आया तोह सब उसको घेरर लेते है. और तरह तरह से सवाल पूछने लगते है.



यश: चिंता मत करो. कुछ नहीं होगा. महेंद्र और देव ठाकुर को उनके किये की सजा मिलेगी. जरूर मिलेगी. अगर वह सोचते है उनकी बेटियों की शादी मुझसे हो जाने से अग्रवाल एम्पायर उनका होजायेगा तोह गलत सोचता है. उनको मौत तोह मिलेगी hi.



सब फिर शांत होजाते है. कोई कुछ नहीं बोलता.

यश अपने कमरे में आता है और किसी को मश्ग करता है और कुछ बात करता है.



इधर किसीने यश से बात करना बंद करदिया था. यश मानाने की बहोत कोशिश करता है. पर नहीं मानते. फिर यश साड़ी िछाये पूरी करने का वडा करता है तब जाके मानते है.



अगले दिन देव और महेंद्र ठाकुर ने यश के मां ममी और बुआ फूफाजी के साथ एक फॅमिली मीटिंग ओर्गनइजे की जिसमे यश और उसके भाई बेहेन नहीं थे और नाही राशि और आँचल थे.



ुनन्दनो ने यश की फॅमिली को इमोशनली ब्लैकमेल करके इस शादी के लिए मन लिया था. भले hi इसके किये उन्होंने मगरमछ के आंसू बहाये हाथ और पैरर भी जोड़ लिए. यश की फॅमिली ने भी यश को जैसे तैसे शादी के लिए मन लिया.



यश और उसके भाई बहेनो ने बहोत मन किया. पर किसी ने उनकी एक ना सुनी. क्योकि उनको भी पता था एह्लः कभी भी सिया और राधा के अलावा किसी और को यश के साथ नहीं देख पाएंगे. यह अभी थोड़ा मेंटली डिस्टर्ब है. पर समय के साथ सब ठीक होजायेगा यह सोच के वह शादी के लिए मान गए.



उनमे से किसी को लगा अभी शादी में बहोत टाइम है पहले पढाई पूरी होजाने देते है. बाद में शादी करेंगे. पर देव और महेंद्र ठाकुर रिस्क नहीं लेना चाहते थे इसीलिए उन्होंने पढाई तक का वेट ना किया. पढाई शादी के बाद होजायेगी यह बोलके जल्द से जल्द शादी करवानी चाही.



बेटियों के पिता है उनके फ्यूचर की टेंशन है यह समाज के यश की फॅमिली ने भी हां केहड़ी.



यश अपने पुरे मैं से रेडी नहीं था. पर अपनी फॅमिली की ख़ुशी के लिए उसने भी हां केहड़ी. यश ने विक्रम और संजना से भी परमिशन ली. उन्होंने भी हां केहड़िया. आखिर वह ना किस हक़ से कहते.



राशि और आँचल यह सुनके बहोत खुश होते है. उनके इतने दिन की मुराद या फिर यह कहे की जिद्द जो पूरी होरही थी. यश के बर्थडे के दिन से जो सपना उन्होंने देखा था वह अब पूरा होने जारहा था.



शादी की तैयारियां स्टार्ट होगयी थी. यश के मां ममी बुआ फूफा विक्रम संजना आरव अवि आरुषि मेघा सोनिया वरुण के साथ सोनल और रिया भी शादी के लिए अग्रवाल हाउस में शिफ्ट होगये थे. सोनल और रिया को सोनिया ने जबरदस्ती अपने साथ शिफ्ट करवाया था. जिया भी शादी की तैयारी के लिए अवेलेबल थी.



आरव और मेघा गार्डन में टहल रहे थे.



मेघा: आरव सब कितना अजीब होरहा है न. िस्तरः से यश की शादी होना कितना अजीब है. हमने कभी नहीं सोचा था यश की शादी इस तरह होगी.



आरव: तुम्हे पता है मेघा हम सब के कितने अरमान थे हम भाई की शादी में क्या क्या करेंगे. पर वह सब अब नहीं होगा. हमारा मैं hi नहीं है.



मेघा: होगा भी कैसे. जब शादी में इतनी प्रोब्लेम्स आये तोह. वैसी अब जब यश की शादी होरही है तोह उसके बाद तोह तुम्हारी और अवि की hi बारी है राइट. तोह तुमने कुछ सोचा है इसके बारे में.



आरव: मस्ती करते हुए. सोचना क्या है. शादी के लिए अभी बहोत टाइम है. तब तक कोई ना कोई लड़की पसंद आजायेगी. फिर मम्मी पापा से मिलवा के शादी करलूँगा.



तुमने क्या सोचा है. कोई लड़का पसंद आया क्या.

मेघा आरव की बात सुनके गुस्सा होजाती है और उसको मारने लगती है.



मेघा: क्या बोला तुमने. दूसरी लड़की पसंद करके उसको मम्मी पापा से मिलवा के शादी करोगे. किसी और की तरफ नज़र उठा के देखो. तुम्हारी आँखे निकल लुंगी. और उस लड़की की जान लेलूँगी.



आरव: ारी बाप री क्या डेंजर बीवी मिल रही है. अपने पति को अँधा करने की बात कर रही है.



मेघा: अभी तोह सिर्फ बोलरहि हु. जरुरत पढ़ा तोह कर भी दूंगी.



आरव: अँधा पति चलेगा.



मेघा: अँधा पति भी चलेगा पर सौतन नहीं चलेगी.

आरव मेघा को खींच के अपने सीने से लगा लेता है और बोलता है. इस जनम में तोह क्या हर जनम में मेरी ज़िन्दगी में सिर्फ और सिर्फ तुम hi रहोगी. तुम्हारे सिवा और कोई नहीं होगा.



मेघा: इतना प्यार करते हो मुझसे.



आरव: बिलकुल भी नहीं करता. मैं तोह बस टाइम पास कर रहा हु.



मेघा: आरव के सीने में मारते हुए. ी लव यू



आरव: ी लव यू तू.



फिर एहलोग शादी की तैयारियों में लग जाते है.

इधर यश ऋषि को कॉल करता है.



यश: ऋषि सब ठिक्क है ना.



ऋषि: सब ठिक्क है. तुम बस अपनी शादी एन्जॉय करो.

यश: हम्म्म. सब काम ठीक से होरहा है ना.



ऋषि: चिंता मत करो. सारा काम ठीक से होजायेगा.



यश: हम्म ठिक्क है.



फिर कॉल कट होजाता है. यश फ़ोन रखता तभी उसके मोबाइल में एक और कॉल आता है.



यश: Hello.



सामने से यश को कोई कुछ बोलता है.



यश: ारी शांत शांत. चिंता मत करो. कुछ नहीं होगा. सब ठिक्क है. बस शादी में आजाना.



सामने से कोई कुछ बोलता है.



यश: पता है. पर नज़र गलत जगह गिर्र गयी थी. और वह जगह पे जो नज़र देगा उसके साथ जो होगा वह देखने लायक होगा.



फिर यश कॉल कट करदेता है.
 
अपडेट 68

अगले दिन देव और महेंद्र यश से मिलने अग्रवाल हाउस आते है.



यश: अंकल आपलोगो से कुछ बात करनी थी.



दोनों: हां बोलो ना बीटा. अब तोह तुम ठाकुर खानदान के एक लौटे दामाद हो. तुम्हारी बात तोह सुन्नी hi होगी.



यश: बात होसकता है आपलोगो को पसंद ना आये.



दोनों: हम समझे नहीं.



यश: मैंने आपलोगो की बात सुनके शादी की लिए है करदी.

दोनों: हआ.



यश: तोह क्या आपलोग मेरी एक बात मानेंगे.



दोनों: बोलो ना क्या बात है.



यश: वह मैं चाहता हु. कन्यादान विक्रम अंकल और संजना आंटी करे. उनकी बेटी तोह अब नहीं है. अगर उन्हें यह मौका दिया गया तोह शायद वह इस गुम्म से थोड़ा उभर पाए. उन्हें लगेगा उन्होंने अपनी बेटी का कन्यादान किया है. उम्मीद है आपलोगो को इससे कोई ऐतराज़ नहीं होगा.



देव और महेंद्र यश की बात सुनके एकदूसरे को देखते रहते है. फिर कुछ सोचके वह बोलते है.



देव: वैसे तोह यह हक़ मेरा है. और कोई भी बाप यह नहीं चाहेगा यह हक़ किसी और को दिया जाए. पर ठाकुर खानदान के दामाद ने पहली बार कुछ माँगा है तोह वह हम जरूर देंगे. कन्यादान विक्रम और संजना hi करेंगे.



यश: थैंक यू अंकल.



फिर ओहलोग शादी की तैयारियों की बात करने लगते है.

राशि और आँचल तोह अपनी शॉपिंग खुद hi करने वाले थे. पर शालिनी के कहने पे उनको बाकियों के साथ जाना पढ़ा.



सब लोग एक मॉल में आते है और शादी की तैयारियां करने लगते है.



रिया: सोनिया यश के ऊपर यह शेरवानी कैसी लगेगी. उसके ऊपर बहोत अच्छी दिखेगी.



सोनल: हआ एकदुम्म यश के ऊपर यह शेरवानी बहोत अच्छी दिखेगी.



राशि और आँचल को इनका पसंद किया हुआ ड्रेस पसंद नहीं आया और वह अभी भी इनदोनो से जेलस थी.



आँचल: नहीं. यश यह शेरवानी नहीं पहनेगा.



रिया: क्यों नहीं पहनेगा. हम उसके दोस्त है.



राशि: और हम बीवियां है. यश वही पहनेगा जो हम सेलेक्ट करेंगे. इसीलिए तुमलोग अपना देखो. यश के लिए अब हम है. अबसे उसकी हर्चिज़ हमहि सेलेक्ट करेंगे.



सोनिया: लिसेन शादी हुई नहीं है. और जब तक शादी नहीं होजाती तब तक भाई पे तुम्हारा कोई हक़ नहीं है. और भाई की शादी की शेरवानी हमारे घर की तरफ से होंगी तोह भाई एहि शेरवानी पेहेंगे.



राशि: शादी हुई नहीं तोह क्या हुआ. बहोत जल्द हमारी शादी होजायेगी. फिर तोह पूरी ज़िन्दगी तुम्हारे भाई को हमारे सेलेक्ट किये हुए कपड़े hi पेहेन्ने है. तोह शादी में भी वह हमारे लिए हुए कपड़े hi पहनेगा.



रिया: चोरर दो सोनिया. रहने दो. इनकी मर्ज़ी है तोह इन्हे करने दो. हम अपनी शॉपिंग करते है.



आँचल: अच्छा है बहोत जल्दी समाज गयी.



सोनिया कुछ बोलने वाली होती है तभी वरुण उसका हाथ पकड़ लेता है तोह वह चुप होजाती है. फिर सब अपनी अपनी शॉपिंग करने लगते है.



राशि और आँचल अपनी शॉपिंग करके घर चले जाते है. बाकी सब भी थोड़ी देर बाद अपने घर आजाते है.



शादी की तैयारियां अपने जोरो से चल रही थी. शादी बिलकुल नार्मल तरीके से होरही थी सिर्फ फॅमिली मेंबर्स की प्रजेंस में.



राशि और आँचल ने शामे डिज़ाइन और कलर का ड्रेस लिया था शादी के लिए. वह दोनों तोह अभी से hi ख़याली पुलाओ बना रहे थे.



देखते देखते शादी का दिन आजाता है.



राशि और आँचल तैयार होने के लिए ब्यूटी पार्लर चले जाते है. वह दोनों वह से hi कम्प्लीटली रेडी होक शादी में आने वाले थे.



बाकी लड़कियां भी पार्लर hi चली गयी थी रेडी होने के लिए. लड़के यश को रेडी कर रहे थे.



बड़े शादी की तैयारी देख रहे थे. देव और महेंद्र ठाकुर की तोह ख़ुशी तोह का ठिकाना hi नहीं था. आखिर सब उनके प्लान के हिसाब से चल रहा है. जैसे उन्होंने सोचा था सब वैसा hi होरहा था.



देव: पिताजी और कुछ देर. फिर यह पूरा एम्पायर हमारा होगा. हमारा बर्षो पुराण सपना अब जाकर सच होगा.



महेंद्र: सही कहा देव. कुछ hi देर में अग्रवाल एम्पायर हमारा होगा. और इससबार इससे कोई भी नहीं रुख पायेगा.



थोड़ी देर में राशि और आँचल रेडी होक आजाती है. बाकी लड़कियां भी आजाती है.



देव: क्या बात है आज तोह मेरी बेटियां कितनी ख़ूबसूरत लगरही है.



आँचल: ख़ूबसूरत तोह लग्न hi होगा. आखिर आज हमारी शादी है.



महेंद्र: आज के बाद यह पूरा एम्पायर तुमदोनो को अपने नाम पे करना है. और उसके बाद हमारे नाम पे.



राशि: बिलकुल ऐसा hi होगा. आज के बाद ठाकुर खानदान की किस्मत बदल जाएगी.



देव: बिलकुल.



इधर सारे लड़के यश को तैयार करकर नीचे लाते है और मंडप पे बैठा देते है. पंडित अपना काम स्टार्ट करता है. थोड़ी देर बाद राशि और आँचल को यश के दोनों साइड बैठा दिया जाता है.



विक्रम और संजना इनदोनो का कन्यादान करते है. कन्यादान करते वक़्त विक्रम और संजना की आँखों में आंसू आजाते है. फिर फेरे होते है. फेरो के बाद यश दोनों के मांग में सिन्दूर लगता है और मंगलसूत्र पहनता है.



पंडित शादी पूरी होने की घोषणा करता है. तीनो सभी बड़ो का आशीर्वाद लेते है. शादी होजाने से देव और महेंद्र की ख़ुशी तोह जैसे काम hi नहीं होरही थी. उन्होंने तोह जैसे कोई बहोत बड़ी जुंग जीत ली थी.



शादी अग्रवाल हाउस में hi हुई थी इसीलिए बिदाई जैसा कुछ नहीं होना था. देव और महेंद्र राशि और आँचल को आशीर्वाद देके और थोड़ी बात करके वह से चले जाते है.



यश और उसकी बीवियों को अलग अलग कमरों में भेज दिया जाता है. बाकी सब भी अपने अपने कमरे और घर चले जाते है.



इधर यश अपने कमरे में आके ऋषि को कॉल करता है.



ऋषि: शादी मुबारक हो.



यश: शुक्रिया. अब बताओ काम ठीक से हुआ.



ऋषि: एकदम. तुम चिंता मत करो. काम एकदम परफेक्ट हुआ है.



यश: ोककक. कल टाइम से बाकी अधूरा काम भी करदेना. और ओहलोग आये या नहीं.



ऋषि: वह भी आगये है. बस कल का वेट कर रहे है. जब तुम कहोगे वह अपने काम में लग जायेंगे.



यश: और साड़ी चीज़े देखली है ना.



ऋषि: तुम कोई फ़िक्र मत करो. रितिका ने साड़ी चीज़े देख ली है. सब ठिक्क है. तुम कल टाइम से आजाना.



यश: ठीककक है.



फिर कॉल कट होजाता है. फिर यश फ्रेश होक जब आता है तब उसके मोबाइल में कोई मश्ग आता है.



यश मश्ग देख कर मुस्कुराने लगता है. फिर थोड़ी देर वह मश्ग के थ्रू किसी से बात करता है और सुजाता है.



इधर देव और महेंद्र जब घर आते है तोह ख़ुशी से नाचने लगते है.



देव: हमारा बर्षो पुराण सपना आज पूरा होगया पिताजी. आखिर में अब वह पूरा एम्पायर हमारा होगा.



महेंद्र: एकदुम्म. और इससबार बिना किसी झमेले के यह काम होगया. राशि और आँचल अब पूरा बिज़नेस एम्पायर हमारे नाम करेगी. बस कुछ दिन और फिर सब कुछ हमारा होगा.



देव: बिलकुल.



फिर एहलोग बैठके ड्रिंक करने लगते है और आने वाले दिनों के बारे में सोचने लगते है.
 
अपडेट 69

अगली सुबह जब देव और महेंद्र उठे तोह उनके चेहरे पे एक अलग hi ख़ुशी थी. आखिर उनका बर्षो पुराण सपना जो पूरा हुआ था.



जब ओहलोग नीचे हॉल में आते है तोह उनके चेहरे पे ख़ुशी थी आँखों में में जो चमक थी वह पूरी तरह से शॉक में बदल गया था. वह सामने का नज़ारा देख कर यकीन नहीं कर पारहे थे.



उनके सामने सबलोग बेहोश पड़े हुए थे. उनमे से कुछ आदमी यश के भी थे जिनकी लाशें पढ़ी थी जिन्हे देव ने ख़रीदा था. और इन्होने hi इशांत की कार का एक्सीडेंट करवाया था. पर इनसब से भी ज्यादा हैरानी की बात उनके लिए यह थी के उनके सामने सोफे पे राशि और आँचल भी बेहोश पढ़े हुए थी.



देव: पिताजी यह यह सब क्या है. एहसाब किसने किया. और हमारी बच्चियां यहाँ क्या कर रही है वह भी बेहोश. इन्हे तोह िःस्वक़्त अग्रवाल हाउस में होना चाहिए था.



महेंद्र: और यह तोह वही आदमी है जिन्हे हमने इशांत महक सिया और राधा का एक्सीडेंट करवाने के लिए भेजा था. इनको किसने मारा. और एहलोग यहाँ ोे कैसे आये.



ओहदोनो जल्दी से जाके अपने एक आदमी को होश में लाते है और उसको बाकी सबको होश में लाने के लिए बोलते है. फिर वह जल्दी से राशि और आँचल के पास जाते है और उन्हें होश में लाने लगते है.



थोड़ी देर में राशि और आँचल को होश आने लगता है. उनके आँखों के सामने अभी भी थोड़ा अन्धेरा चाय हुआ था.



देव: राशि आँचल तुमदोनो यहाँ क्या कर रही हो. वह भी िस्तरः. तुम्हे तोह ुस्सवक्त यश के साथ होना चाहिए था.



महेंद्र: और तुमलोग सब बेहोश कैसे होगई. और इन् लाशो को यहाँ पे किसने रखा.



आदमी: सिर्र हुम्हे नहीं पता. हम तोह पहरा दे रहे थे. पर तभी अचानक से कोई धुँआ उठा और हम बेहोश होगये. उसके बाद क्या हुआ यह हुम्हे याद नहीं.



देव: और तुमदोनो यहाँ क्या कर रही हो. वह भी बेहोश.

राशि: डैड हम तोह ब्यूटी पार्लर में गए थे रेडी होने के लिए. हम रेडी होरहे थे.



आँचल: तभी उस ब्यूटिशियन ने हमारे फेस में कोई क्रीम लगाया. वह क्रीम लगवाने के बाद हुम्हे पता नहीं क्यों बहोत नींद आरही थी.



राशि: हमने उससे पूछा तोह उसने कोई रिप्लाई नहीं किया. हम फेस धोने के लिए उठते उससे पहले hi हम बेहोश होगये.



आँचल: और अभी आपने हमने उठाया है. जल्दी चलिए यहाँ से. यश शादी के लिए हमारा वेट कर रहा होगा.



देव और महेंद्र साड़ी बाते सुनके एकदम शॉक होगये थे. उन्हें समाज नहीं आरहा था वह कैसे रियेक्ट करी.



आँचल: क्या हुआ आपलोग रूखे हुए क्यों है. जल्दी चलिए शादी के लिए लेट होरहा है.



महेंद्र: गुस्से में. चुप होजाओ. अगर तुमदोनो यहाँ पे हो तोह कल यश ने हमारे सामने तुमदोनो से शादी कैसे की.



दोनों: शॉक में. Whattttttttttt. यश ने शादी कर्ली. कीसीई. हम तोह वह थी hi नहिई. फिर उसने किस्से शादी करलई.



देव: कल हमारे सामने तोह उसने तुमदोनो से शादी की. और तुमदोनो बोल्रहे हो तुम वह थे hi नहीं. तोह फिर शादी किस्से की.



अभी ओहलोग और कुछ बोलते तभी वह कुछ वेपन लेस्स आदमी घुस आते है.



वह खड़े सभी उनको देख कर शॉक होजाते है.

देव: कौन कौन हो तुम्लोग्ग.



आदमी: हम कौन है यह जल्दी hi पता चल जायेगा. पकड़ो सबको और ले चलो हमारे साथ.



उस आदमी के इशारे पे बाकी आदमी देव महेंद्र राशि आँचल और उनके बाकी आदमी को पकड़ के अपने अपने साथ ले जाते है.



वह चर्र अभी भी शॉकेड थे. उन्हें समाज नहीं आरहा था आखिर हो क्या रहा है.



थोड़ी देर बाद उनन्साब को लेके एक बंद पढ़े गोडाउन में ले जाते है. और सबको वह बांड देते है.

देव: कौन हो तुमलोग और हुम्हे यहाँ क्यों लाया गया है. क्या चाहिए तुमलोगो को.



आदमी: चुप्प चाप बैठा रह. वरना कुछ देर बाद जो मरने वाला है वह अभी मरजाएगा.



महेंद्र: तुमलोग जानते हो तुमने किसको पकड़ा है. मैं कहता हु हुम्हे चोरर दो. वर्ण जान से जाओगी.



आदमी महेंद्र की बात सुनके हसने लगता है.



आदमी: अभी बूढ़े. मरने की उम्र होचुकी है फिर भी अकड़ नहीं गयी. जी तोह कर रहा है तुझे एहि काट के फहैकक दू. पर कुछ वक़्त और उधर की ज़िन्दगी जी ले.



अभी कोई कुछ बोलता तभी पीछे से कुछ गाड़ियां अंदर आती है.



आदमी: लो आगयी तुम्हारी मौत. यह बोल वह आदमी वह से हट जाता है.



गाड़ियां आके इनसब से थोड़ा दुर्र रखती है. देव महेंद्र राशि और आँचल बस गाड़ियों को देख रहे थे.



गाडी में से जो लोग बहार निकलते है उनको देख कर तोह इन् 4 जान की आँखे hi बहार आजाती है. इनको अपनी आँखों में विश्वास नहीं होरहा था. सामने यश खड़ा था और उसके अगल बगल उसकी पूरी फॅमिली कड़ी थी. साथ में उसकी बीवियां भी कड़ी थी. बीवियों को देख कर तोह राशि और आँचल की आँखे hi बहार आगयी थी. क्योकि बीवियों के रूप में सोनल और रिया कड़ी थी.



यश: क्या हाल है ससुर और दादा ससुर ज्यादा तकलीफ तोह ना दी मेरे आदमियों ने.



सोनल: यष्ठ. मंद योर लैंग्वेज. इनसे मेरा और रिया का कोई रिलेशन नहीं है. सो प्लीज इन् नीच लोगो को हमारा पिता और दादा ना बनाओ.



यश: ोकक ोककक. कूल.



देव: यह सब क्या है बेटा. तुम यह सब क्या और क्यों कर रहे हो. तुम तोह मेरे दामाद हो.



यश: दामाद और वह भी तेरा. अभी तेरी बेटियों को मैं अपनी बीवियों की नौकरानी ना बनाऊ. और तू कहता है मैं उनसे शादी करू.



राशि और आँचल: यशःह्ह्ह. यह सब क्या है. हमारी शादी होने वाली थी. हम तुमसे प्यार करते है. और तुमने हुम्हे यहाँ िस्तरः रखा हुआ है. आख़िररर क्यूओ.



रिया ुनन्दनो की बात सुनके गुस्से में आजाती है और जाके ुनन्दनो को एक एक थप्पड़ लगा देती है. थप्पड़ उसी हाथ से लगाया था जो हाथ उसका काँपता है.



रिया: अगर तेरी इस जबान से मेरे यश का नाम निकला ना तोह तुझे एहि ज़िंदा जला दूंगी. बहोत महीनो से तुझे मैं सेहन कर रही हु.



महेंद्र: यष्ठ यह सब क्या है. अगर तुम्हे शादी नहीं करनी थी तोह फिर तुमने हां क्योकि. हमारी इस तरह बेइज़ाती क्यों.



यश: बेइज़ाती. इसी बेइज़ाती की वजह से आज यह हालत है. तुझे बेइज़ाती कुछ ज्यादा hi लगती है. आज तेरी साड़ी बेइज़ाती निकलेगी. थोड़ा रुखः जा.



आँचल: यष्ठ. तुम तोह राधा से प्यार करते थे. वह नहीं रही तोह तुमने शादी से hi मन करदिया. पर तुमने इस सोनल और रिया से शादी की. आखिर क्यों. तुम तोह इन्हे जानते भी नहीं थे.



आँचल की बात सुनके वह खड़े सभी हसने लगते है.

सोनिया: बेचारी. इतने बड़े शॉक में है के इसको कुछ समाज hi नहीं आरहा है. याद कर जब यह दोनों पहली बार मेरे से कैंटीन में मिले थे तब सोनल ने मुझे क्या बोलके बुलाया था. इनदोनो के स्ट्रीम कौनसे है. सोनल ने यश को hi क्यों बोलै था रिया का हाथ पकड़ने के लिए. यह क्यों किसी अनजान को अपनी बेहेन का हाथ पकड़ के हेल्प करने के लिए बोलेगी. वह भी एक लड़के को.



राशि और आँचल सोनिया की कही हुई बातो को सोचने लगते है. जब उसको उसकी कही हुई कुछ बाते समाज आती है तोह वह उसकी तरफ हैरानी से देखती है जैसे कन्फर्म करना छह रही हो के जो ओहदोनो सोच रही है वह गलत है.



सोनिया: दिमाग की बत्ती जाली.



दोनों: कौन हो तुमदोनो.



सोनल और रिया उनके इस सवाल पे हसने लगते है. दोनों के ऐसे हसने से उनकी हैरानी और बढ़ जाती है.



सोनल: बहोत जल्दी समाज आया तुमदोनो को.



रिया: हमारे यश को हमसे चिन्ना चाहती थी तुमदोनो. पर तुमदोनो भूल गयी. वह तुम्हारी क्या तुम्हारे पुरे खानदान की औकात के बहार है.



सोनल: उसको पाना तोह दुर्र उसके सपने भी तुम्हारी औकात के बहार है. यश सिर्फ और सिर्फ सिया और राधा का था सिया और राधा का है और सिया और राधा का hi रहेगा. किसी में इतनी ताक़त नहीं के उन्हें यश से या यश को उनसे अलग कर पाए. वह तीन साथ थे साथ है और हमेशा साथ रहेंगे.



यह बोल सोनल और रिया ने अपने चेहरे पे जो मास्क लगाया था वह उतारर के फहैकक देते है. अब उनके सामने सोनल और रिया नहीं बल्कि सिया और राधा खड़े थी.



पूरा का पूरा ठकुरर खानदान जैसे सदमे में चला गया था. उन्हें अपनी आँखों पे विश्वास नहीं हो रहा था.

यश: ऐसी क्या देखह रहे होऊ. कभी देखा नहीं क्या.



महेंद्र: यह नही होसकता. नहिई होसकता. एहहह ज़िंदा कैसी है. इनकी तोह मुत्तत होचुकी थिई. फिरर यह ज़िंदा कैसी हैई.



यश: प्लानिंग क्या सिर्फ तुमलोग hi कर सकते हो.



देव: घबराके. प्लॅनिंगघग. कैसी प्लानिंग. तुम क्या बोल रहे हो.



यश जाके देव के गालों पे 2 थप्पड़ लगता है. यश के इस एक्शन को देख कर सब शॉक होजाते है.



राशि और आँचल: यशःह्ह. तुम्हारिई हिम्मत कैसे हुयी हमारे डैड को मारने की.



सिया और राधा ुनन्दनो को थप्पड़ लगते हुए. ऐसी हुयी. और अभी तोह सिर्फ थप्पड़ लगाया है. अगर ज्यादा छू चपड़ की तोह लात और घुसे भी पड़ेंगे.



यश: तुझे क्या लगता है. तू हॉस्पिटल के बीएड में बैठ के शादी की प्लानिंग करेगा और किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.



यश की बात सुनके वह चारो एकदम शॉक होजाते है.

देव: हैरानी से. तुम्ही कैसी पता.



यश: तेरा ट्रीटमेंट जिस डॉक्टर ने किया था वह डॉक्टर मेरा दोस्त था. और उसी ने तेरे बीएड के नीचे एक माइक्रोफोन लगवा दिया था.



आँचल: अगर तुम्हे सब पता था तोह यह सब क्यों किया. हमारी फीलिंग्स के साथ क्यों खेला तुमने.



यश: अछ्हा. तुम्हारी फीलिंग्स. यह बोल जोर जोर से हसने लगता है. अग्रवाल एम्पायर को अपने नाम करवाने चले थे ना तुमलोग. तोह उसकी सजा तोह मिलेगी hi.



पर चिंता मत करो. तुमलोगो की सजा अभी ख़तम नहीं हुई है. अभी तोह और भी सजा देना बाकी है. आरव जाके खोल इस देव ठाकुर को.



आरव जाके उसको खोल देता है.



यश जाके देव को मारने लगता है. देव सिर्फ चिल्लाता रहता है. पर यश उसको बिना रुके अंधाधुन मारने लगता है.



यश: मेरे माँ डैड सिया और राधा को मारने की प्लानिंग करेगा. मेरे डैड का एक्सीडेंट करवाएगा. उनको ड्रग केस में फसाने का प्लान करेगा. यह बोल वापस उसको मारना लगता है. उसका थोड़ा ठीक हुआ हाथ और पैरर वापस टॉड देता है.



देव वह ज़मीन में पढ़ा तड़पने लगता है. उसके पुरे शरीर से खून निकल रहा था.



जब यश देव को मार रहा था तब उसके पीछे से इशांत और महक गाडी से बहार आके खड़े होजाते है. और गुस्से से उन् चारो को देखने लगते है. वह चर्र तोह सदमे में चले गए थे. उनकी पूरी प्लानिंग की ऐसी बंद बजायी थी यश ने के उनकी हालत ख़राब पूरी होगयी थी
 
अपडेट 70

यश अब महेंद्र के पास जाता है और उसको खोलता है. महेंद्र खुलते hi यश को मारने के लिए अपने हाथ खड़े करता है तोह यश उसको एक थप्पड़ लगा देता है जिससे वह सीधा ज़मीन में गिरता है.



यश: तेरी उतनी औकात नहीं के तू मुझे छू भी पाए. और तू मुझे मारने चला था.



महेंद्र उसको गुस्से से घूरने लगता है.



यश: तुझे मारने के लिए मैं पुरे 2 साल से तड़प रहा हु. तुझे तेरे किये की सजा देने के लिए तड़प रहा हु. आज तुझे ऐसी मौत दूंगा के तेरी रूह भी काँप जाएगी.



महेंद्र: शॉक से. मैंने मैंने क्या किया है. मैं तोह तुम्हे ठीक से जानता भी नहीं. फिर क्यूओ.



यश: राजवीर अग्रवाल राजश्री अग्रवाल अजीत सिंह रुक्मिणी सिंह याद हीी तुझीऐ.



महेंद्र यश के मुँह से यह नाम सुनके शोकक होजाता है.



यश: बोलल याद है तुझे यह नाम.



महेंद्र: यह तुम कैसी बात कर रहे हो यह तोह मेरे दोस्त थे तुम्हारे दादा दादी और नाना नानी इन्हे मैं कैसे भूल सकता हु.



यश: सीने पे एक लात मार्के. उन्हें अपना दोस्त बोलके दोस्त स्तब्ध का अपमान मत कर. दोस्त वह होते है जो जान बचते है. और तू तूने उनकी hi जान ले ली. सिर्फ और सिर्फ अपना ईगो सटिस्फी करने के लिए.



देव महेंद्र राशि और आँचल यश की बात सनकी फुल शॉक होजाते है. देव और महेंद्र तोह इस्सलिये शॉक थे के यश को कैसे पता चला और वह दोनों इस्सलिये शॉक थी के उनके डैड और दादा ने खून किया है.



देव जो अब तक थोड़ा नार्मल होगया था वह बोलता है

देव: एहहह यह सब तुम क्या कह रहे हो. एहहह यह सब झूट है. हमने ऐसा कुछः नही किया है.



यश जाके देव के मुँह पे लात मारता है जिससे उसके दांत टूट जाते है.



यश: अगर एक शब्द भी अब झूट निकला तोह एहि ज़िंदा गार दूंगा. यश का गुस्सा देख कर वह खड़े सभी दररर जाते है. क्योकि सबको पता था यश का गुस्सा कितना खतरनाक है.



महक: यशः बेटा शांततः होजाओ.



यश महक की बात को इग्नोर करके महेंद्र के पास जाके उसको मारने लगता है.



यश: बोलल क्यों मारा तुणी उन्ही बोलल.



यह बोल यश उसका एक हाथ तोड़ड देता. जिससे महेंद्र गाला फाड़ के चिल्लाता है.



यश: चिल्ला और चिल्ला. इससे मेरे दादा दादी और नाना नानी की रूह को सुकून मिलेगा.



महेंद्र: दर्द में तड़पते हुए. मुझे मुझे माफ़ कार्डो बेटा. मैं मैं गुस्से में अँधा होगया था.

यश: उसको मारते हुई. झूट्ठत. सछह बोललललल.



महेंद्र: मैं मैं सछह बोल रहा हुऊ. तुम्हारे माँ बाप ने जो हमारी बेइज़ाती की थिई और जिस वजह से मैंने मेरी बेटी खोयी थी. उसी गुस्से की वजह से मुझसे गलती होगयी. मुझी माफ़ कार्डो.



यश गुस्से में उसका दुसरा हाथ भी टॉड देता है और पहला हाथ उखाड़ के फहैकक देता है.



यश का यह रूप देख कर वह खड़े सभी की चिखह निकल जाती है. राधा तोह डर से कांपने लगती है. वह डर के मारे रोने लगती है. सिया और सोनिया का भी कुछ एहि हाल था.



संजना महक और श्रुति अपनी अपनी बेटियों को सँभालते है. पर किसी में हिम्मत नहीं थी के वह यश को रुखः सकी. आज उनके सामने कोई इंसान नहीं बल्कि एक हैवान खड़ा था. जिसको सिर्फ और सिर्फ अपना बदला चाहिए था.



महेंद्र का जब हाथ टूट ता और उखड़ता है तोह वह छिलके बेहोश होजाता है.



यश: ऋषी इससे होश में लाए.



यश की आवाज़ सुनके द्वारा हुआ ऋषि और डर जा

अत है. वह जल्दी से जाके महेंद्र को होश में लाता है.



होश में आते hi महेंद्र दर्द के मारे फिर से चिल्लाने लगता है.



महेंद्र: मैं मैं सच बोलता हु. मुझी और मत मरना. मैं सब सच सच बोलता हु.



मुझे हमेशा से hi राजवीर और अजीत का बिज़नेस चाहिए था. मैंने बहोत कोशिश की पर कभी कामियाब नहीं हुआ. फिर मुझे पता चला देव महक से प्यार करता है और मेरी बेटी रश्मि इशांत से प्यार करती है.



इशांत और महक यह सुनके बुरी तरह से शोकक हो जाते है. क्योकि उन्होंने कभी रश्मि और देव को कभी उस नज़र से नहीं देखा था.



महेंद्र: जब मुझे यह पता चला तब मुझे दोनों का बिज़नेस पाने का प्लान दिखा. मैं देव और रश्मि का रिश्ता लेके राजवीर और अजीत के पास गया. और किस्मत से उन्होंने भी मान लिया.



पर बाद में मुझे पता चला इशांत और महक एकदूसरे से प्यार करते है तब मुझे अपना प्लान डूबता हुआ नज़र आया तोह मैंने राजवीर और अजीत से यह वडा ले लिया के वह रिश्ता नहीं तोड़ेंगे. मैं जानता था राजवीर और अजीत मर जायेंगे पर अपना वडा नहीं तोड़ेंगे.



जब उन्हें इशांत और महक के रिश्ते के बारे में पता चला तोह वह बहोत खुश हुए थे और इनदोनो की शादी करवाना चाहते थे पर मुझे दिए वेड के कारन इनको अलग करना पढ़ा.



(इशांत और महक की आँखों में आंसू आजाते है के उनके पिता को उनका रिश्ता मंजूर था पर महेंद्र की वजह से वह कठोर बने बैठे थे)



धीरे धीरे देव को भी बिज़नेस का लालच आगया और तब वह महक से सिर्फ बिज़नेस के लिए शादी कर रहा था. पर रश्मि इशांत से सच्चा प्यार करती थी.



जब हुम्हे पता चला इशांत और महक भाग गए है तोह हुम्हे बहोत गुस्सा आया क्योकि बिज़नेस पाने का पूरा प्लान बर्बाद होचुका था. मैंने राजवीर और अजीत की बहोत बेइज़ाती की थी जिसके वजह से उन्होंने इनदोनो से रिश्ता तोड़ दिया और घर से निकल दिया.



पर इनकी वजह से मेरी बेटी ने सुसाइड करलिया और हमने उसको हमेशा के लिए खू दिया.



बिज़नेस ना पाने की बात तोह मैं भूल भी जाता पर इनकी वजह से मैंने मेरी जान से प्यारी बेटी खू दी. एहलोग मेरी बेटी के हत्यारे है. और इनको वापस अपनाके राजवीर और अजीत भी हत्यारे होगये थे. इसीलिए मैंने पुरे अग्रवाल खानदान का नामोनिशान मिटाना चाहता था. और इसकी शुरुआत हुई उन् चारो की मौत से.



वह खड़े सभी यह सुनके शॉक होजाते है. सबसे ज्यादा तोह इशांत और महक. क्योकि उनको लग रहा था के कही न कही उनके प्यार की वजह से hi उनके माँ बाप मारे गए है और रश्मि भी मारी गयी. उन्हें अपने ऊपर घिन्न आरही थी.



इशांत और महक: पर हमने तोह देव को यह बात बता दी थी के हम एकदूसरे से प्यार करते है. फिर आपने यह सब क्यों किया. क्यों मारा हमारे माँ बाप को.



यश: क्योकि इनको बिज़नेस चाहिए था. इनके लालच के वजह से इन्होने यह सब किया है.



तुझे बिज़नेस चाहिए था जिसके वजह से तूने यह सब किया. तोह दिखा मुझे कहा है तेरा बिज़नेस. तेरे को लंदन में बर्बाद किया. यहाँ का सारा बिज़नेस तबाह करदिया. तेरे ड्रग्स का बिज़नेस तबाह करदिया. जिस्सके लिए तूने यह सब किया मैंने तुझसे वह सब छिन्न लिया.



और तूने क्या बोलै तेरी बेटी ने सुसाइड किया था. तोह चल तुझे आज बता देता हु तेरी बेटी ने सुसाइड नहीं किया था बल्कि उसका मर्डर हुआ था.



यश के इस खुलासे से वह जैसे एक बम गिर्र गया हो. एक्पाल के लिए जैसे शांति hi चा गयी थी.



महेंद्र: यह यह क्या बोल रहे हो. मैंने खुद देखा था उसने अपने आप को फ़ासी लगायी थी. उसकी लाश पंखे से लटक रही थी.



यश: हर वक़्त आँखों देखा सच नहीं होता. तूने जो देखा वह तुझे दिखाया गया ताकि तू यह समझे के तेरी बेटी ने सुसाइड किया था. पर सच तोह यह है उसको गाला घोटत के मारा गया था.



महेंद्र: नहिई यह सच नहीं है. तू अपने माँ बाप को बचने के लिए झूट बोल रहा है.



यश बिना कुछ बोले देव की तरफ जाता है. देव यश को अपनी तरफ आता देख डर से थर्र थर्र कांपने लगता है.



यश उसके पास जाके उसका एक पैरर पकड़ता है और पूरी ताक़त लगाके उसको उखाड़ फेकता है. देव ठाकुर चिल्लाते हुए बेहोश होजाता है. यश को वापस ऐसा करता देख कर इससबार साड़ी लड़कियां जोर जोर से रोने लगती है. राधा का रोना तोह और बढ़ गया था.



ऋषि देव के पास जाके उसको होश में लाता है. होश में आते hi वह फिर से चिल्लाने लगता है.



यश: सच बोलेगा या दूसरा पैरर अलग करू.



देव: दर्द में तड़पते हुए. नही नही मैं मैं सच बोलता हु. रश्मि ने सुसाइड नहीं किया था. उसने मेरी बाते सुनली थी के इशांत और महक एकदूसरे से प्यार करते है. और यह बात मुझे और पिताजी को पता थी फिर भी हम बिज़नेस के लिए यह शादी जबरदस्ती कर रहे है.



रश्मि बहोत hi सुलझी हुई अच्छी लड़की थी. उसने इशांत से सच्चा प्यार किया था. और वह उससे धोखे से शादी नहीं करना चाहती थी. वह इशांत को सच बताने के लिए फ़ोन कर रही थी तभी रखा जो मेरा ख़ास आदमी था उसने फ़ोन छिन्न लिया और मैं बिज़नेस की लालच में अँधा होगया था और वह इशांत को या महक को बता न दे इसीलिए मैंने उसको मार्डिया और सुसाइड करार दे दिया. और इस सब मेरी मदद रखा ने hi की थी.



देव की बात सुनकर इससबार इशांत का भी खून खौल जाता है और वह भी देव को मारने लगता है. क्योकि उसके सीने में हमेशा से एक बोज था के उसके वजह से रश्मि ने सुसाइड किया था.



इशांत: कमीने तू इतना गिरा हुआ है के तूने अपनी सगी बेहेन को मार दिया. सिर्फ पैसो के लिए. छी. तेरी वजह से मैं हमेशा यह सोचता के मेरी वजह से रश्मि ने सुसाइड किया. आज तुझे जान से मारडुंगा.



यश जाके इशांत को पकड़ के साइड करता है. महक इशांत को संभाले कड़ी थी.



पर इशांत शांत नहीं होता. और बगल में खड़े आदमी की कमर से गन लेके देव को शूट करदेता है. गोली सीधा उसके सीने में जाके लगती है और देव वही मौत को प्यारा होजाता है.



इशांत के इस हरकत पे सब कोई शॉक होजाते है. राशि और आँचल तोह चिल्ला चिल्ला के रोने लगती है.



यश इशांत के हाथ से गन ले लेता है और महेंद्र के पास आके खड़ा होजाता है.



महेंद्र को जब पता चला के उसके अपने बेटे ने उसकी बेटी को मारा था तोह वह अंदर से hi टूट गया था. उसने जिसके लिए यह सब किया वह सब बस एक झूट था. उसने झूट को सच मान के hi राजवीर और अजीत को मरवा दिया.



यश: देखा. जिस झूट की बदौलत तूने मेरे दादा दादी और नाना नानी को मरवाया था उसका सच क्या निकला. तेरे अपने बेटे ने तेरी बेटी को मारा था.



पर तू यह मत सोचना तुझे मैं माफ़ करदूंगा. तुझे तेरे किये की सजा तोह देकर रहूँगा.



महेंद्र: मैंने जो किया है उसकी सजा सिर्फ मौत है. मैंने अनजाने में और गुस्से में बहोत बड़ा पाप करदिया. मैं मेरी बेटी की मौत को भुला नहीं पाया. और उसका जिम्मेदार हमेशा इशांत और महक को hi माना था. पर सच तोह यह निकला के मेरे बेटे ने hi मेरी बेटी को मारा था.



महेंद्र झट्ट से यश के हाथ से गन ली और खुद को शूट करलिया. राशि और आँचल यह देख कर और जोरर जोरर से रोने लगते है.



यश भी यह देख कर एक पल के लिए शॉक होगया था. पर वह भी कुछ ऐसा hi करता.



यश के आदमियों ने महेंद्र के आदमियों को ठिकाने लगा दिया था. अब सिर्फ और सिर्फ राशि और आँचल hi बचे हुए थे.



यश उनके पास आता है और उनको खोल देता है.

यश: तुमदोनो ने जो किया है उसके बाद तोह तुम्हे भी मार देने को जी करता है. पर तुमदोनो को एक मौका देता हु. चली जाओ. कही दुर्र चली जाओ. इतनी दुर्र के तुम्हारी परछाई भी मेरे पास ना आये. वर्ण अगली बार मैं और कोई मौका नहीं दूंगा.



यह बोल यश वह से अपने परिवार वालो को लेके जाने लगता है.



राशि और आँचल अपने पिता और दादा की लाश को देख कर जोरर जोरर से रो रही थी. उनके अंदर जितना भी गुस्सा था वह बहार आने लगता है. वह यश को जाते हुए देखती है.

दोनों जल्दी से अपने दादा के पास पढ़ी हुई हुई गन उठा लेती है. और छिलके यश को बुलाती है.



दोनों: मर. यश अग्रवाललललललललल.



दोनों के ऐसे चिल्लाने से सब पीछे मदद के उनको देखते है तोह पाते है उनके हाथ में गन है और पॉइंट पे यश है.



दोनों: तुमने हमारी पूरी ज़िन्दगी बर्बाद करदी. हमारे पुरे खानदान को बर्बाद करदिया. तुम्हारी वजह से हमारे डैड और दादाजी मर्डर गए. हम तुमसे प्यार करते थे पर तुमने हुम्हे चोरर के इनदोनो को पसंद किया.



और इनसब की सजा तुम्हे मिलेगी. तुम अगर हमारे नहीं होसकते तोह किसी और का भी नहीं होने देंगे. यह बोल वह दोनों एक एक बार शूट करती है और गोली सीधा यश के सीने और पेट में लगती है.



यश को गोली लगते देख सिया और राधा जोरर से चिल्लाती है.



सिया और राधा: Yashhhhhhhhhhhhhh.



यश बगल में खड़े कारन की कमर से गन लेता और राशि आँचल को शूट करदेता है. गोली सीधा उनके गले में लगी और वह वही पे मौत को प्यारी होगयी.



शूट करने के बाद यश धीरे धीरे गिर्र जाता है.



राधा और सिया: यशःह्ह्ह्हह्ह. यशःह्ह्ह ुथूवो नाआ यशःह्ह्ह. नहिई यशःह्ह्ह तुम्हे कुछःह नहिई होगा. हम तुम्ही कुछः नही होनी देंगी. यशःह्ह्ह्ह.



बाआआआ देखीयीए ना क्या हुआ है यष्ठ को. यशःह्ह उठाऊ नाआ. मममममममम. पलासी कहिये ना यशःह्ह्ह को के वह उठीई.



महक: रट हुए. शालिनीईई विजयययययय. जल्दी से मेरे यशःह्ह को लेके हॉस्पिटल चालुओ. मुझी मेरा यशःह्ह सहिई सलमततत वापस चाहियेए. िशांतत्तततततत.



सब लोग यश को जल्दी से उठाते है और उसके लेके हॉस्पिटल दौड़ते है. सिया और राधा को तोह जैसे कोई होश hi नहीं था. वह बस यशः यश करके रोई जा रही थी.
 
अपडेट 71(लास्ट अपडेट)

सबलोग जल्दी से हॉस्पिटल आते है. यश ओट में लेजाया जाता है. सिया और राधा भी अंदर जाने के लिए जिद्द करती है. पर संजना और महक उन्हें संभल लेते है. वह दोनों बस रोये जारही थी.



महक को इशांत ने संभाला हुआ था. रो तोह वह भी रही थी. सोनिया का हाल भी बहोत बुरा था. वह भी जोर जोर से रोये जा रही थी. वरुण ने उसको बहोत मुश्किल से संभाला हुआ था.



ओट के अंदर यश ऑपरेशन चल रहा था. यह ऑपरेशन शालिनी या विजय नहीं डॉक्टर नील कर रहा था. उसीने जिसने यश के कंधे का ट्रीटमेंट किया था जब उसको गोली छू के निकली थी.



महक राधा और सिया तोह भगवन के सामने बैठी बस रोये जारही थी. सब उनको सँभालने की कोशिश कर रहे थे पर वह किसीसे नहीं संभल रही थी.



2 घंटे बाद नील ओट से बहार आता है.



सिया: नील नील मेरा यश कैसा है. वह ठिक्क तोह है ना. बोलो ना कैसा है मेरा यष्ठ.



शालिनी: सिया बच्चा शांत होजाओ. यश बिलकुल ठीक है. उसका ऑपरेशन सक्सेस्फुल रहा. गोलियां निकल चुकी है.



नील: यश को 2 गोलियां लगी थी. एक उसके सीने में बिलकुल दिल के पास. और एक पेट में. दिल के पास गोली लगी है यह देख कर हम सब डर गए थे. पर यश कोई आम इंसान नहीं है.



महक: मतलब. मेरा यशः ठिक्क तोह है ना. उसको कुछ हुआ तोह नहीं है ना.



नील: यश बिलकुल ठीक है. और मेरे कहने का मतलब है. हमसब का दिल लेफ्ट साइड होता है. पर लाखो करोड़ में कोई एक इंसान ऐसा होता है जिसका दिल राइट साइड में होता है. और यश वही इंसान है जिसका दिल लेफ्ट की जगह राइट साइड में है. अगर उसका दिल लेफ्ट में होता तोह उससे कोई नहीं बचा सकता था. हे इस वैरी वैरी लकी पर्सन.



सिया: थैंक यू थैंक यू नील. तुमने यश को ठीक करके हम सबके ऊपर बहोत बड़ा उपकार किया है. हम कभी तुम्हारा यह उपकार नहीं भूलेंगे.



नील: कैसी बात कर रही हो सिया. मैं एक डॉक्टर हु. और तुमसब का दोस्त भी. यश को कैसे कुछ होने देता.

यह बोल वह वह से चला जाता है.



थोड़ी देर बाद यश को स्पेशल वार्ड में शिफ्ट करदिया जाता है. वह अभी भी बेहोश था. सिया और राधा उसके दोनों तरफ दोनों हाथ पकड़े बैठे हुए थे. दोनों वह से हिलने का नाम भी नहीं ले रहे थे.



महक और सोनिया भी वही ुनन्दनो के साथ बैठी हुई थी. इंनकारो की आँखों से आंसू निकले hi जा रहे थे.



आरुषि और मेघा अवि और आरव के साथ जैसे तैसे सब को थोड़ा शांत करवाते है.



लगभग 1 घंटे बाद यश को होश आता है.



यश: ममममम.



महक: यष्ठ यष्ठ मैं एहि हु यश. तुम्हारी माँ बिलकुल तुम्हारे पास है यश. तुम्हे कुछ नहीं होगा.



शालिनी और विजय जल्दी से आके यश को चेक करते है.



विजय: भाभी अब यह ठिक्क है. बस थोड़ी वीकनेस है. सिया और राधा देखना यह ज्यादा से ज्यादा आराम करे. झखम बहोत गहरा है. अगर ज्यादा प्रेशर गिरा तोह स्टीट्चेस खुल जायेंगे.



दोनों: हम यश का पूरा ख्याल रखेंगे.



शालिनी: भाभी अब यश ठिक्क है. आपसब ने सुबह से कुछ नहीं खाया है. सो घर जाके थोड़ा आराम कीजिये. यश वैसे भी अब सोयेगा hi.



महक: नहीं मैं मेरे बेटे को चोरके कही नहीं जाउंगी.



राधा और सिया: हम भी नहीं जायेंगे.



शालिनी: भैया. अब आप hi समझाइये.



इशांत: महक सिया राधा, शालिनी सही बोल रही है. यश अब ठिक्क है. अब तुमसब को भी थोड़ा आराम करना चाहिए. अमन संजय तुमलोग भी चलो.



इशांत के फाॅर्स करने पे सब घर जाने के लिए रेडी होजाते है.



शालिनी ने एक नर्स को 24*7 यश के लिए अप्पोइंट करदिया था.



इधर यश के आदमियों ने वह पढ़ी सभी लाशो को ठिकाने लगवा दिया था. ठाकुर की कंपनी में सीबीआई की राइड पढ़ी थी जहा से उन्हें ब्लैकमोनी ड्रग्स और कुछ इललीगल सामान मिला. जिससे ठाकुरस की हर कंपनी को सील करदिया था और देव महेंद्र राशि आँचल को फरार घोषित करदिया था और उनके ऊपर इनाम भी रखा था.



15 दिन बाद यश घर आगया था. झखम अभी भी गहरा था इसीलिए उससे उसके रूम से निकलने के लिए मन करदिया था.



महक सिया और राधा हरवक्त उसके पास रहते. बोनस के लिए सोनिया शालिनी किरण और श्रुति भी थे.



यश सिया और राधा की शादी तोह होचुकी थी पर यश ने राधा को भी उसके पेरेंट्स के साथ रहने को hi कहा था. क्योकि वह पूरी दुनिया के सामने राधा और सिया से शादी करना चाहता था और वह भी उनकी पढाई पूरी होने के बाद. राधा और सिया ने बहोत मन किया पर यश नहीं माना.



देखते देखते 5 साल गुज़र गए थे. इन् 5 सालो में बहोत कुछ बदल गया था. शालिनी और विजय ने हॉस्पिटल चोरर दिया था अब वह घर में hi रहते थे. इशांत ने भी ऑफिस से छुट्टी ले ली थी अब यश hi सब संभालता था. राधा ने भी विक्रम का बिज़नेस संभालना स्टार्ट करदिया था.



सिया और अवि अब एक अच्छे डॉक्टर बनगए थे शालिनी और विजय ने उन्हें अपने हॉस्पिटल में hi पोस्ट करवा दिया था.

आरव वरुण और सोनिया अपने अपने काम में माहिर थे. आरव और सोनिया अपने काम के साथ अपना फॅमिली बिज़नेस भी सँभालते थे.



आज अग्रवाल हाउस पूरी तरह से सजा हुआ था. क्योकि आज यहाँ पे 1 नहीं बल्कि 6 शादियां होरही थी.



यश राधा और सिया के साथ आरव मेघा अवि आरुषि सोनिया वरुण ऋषि रितिका और कारन माया.



संगीता ने संजय और श्रुति से खुद जाके वरुण के लिए सोनिया का हाथ माँगा था. सोनिया तोह पहले से hi रेडी थी. इसीलिए ुनन्दनो ने भी हां करदी इसीलिए एकतरह इनकी शादी Love+arranged मैरिज हुई.



अग्रवाल हाउस में बहोत से मेहमान आये थे. बड़े बड़े मिनिस्टर्स विप्स बुसिनेसस्मेन्स मीडिया सब इनकी शादी में आये थे.



पंडित मंत्र पढ़े जारहा था. जोड़ियां मंडप में बैठी हुई थी. जैसे जैसे पंडित बोल रहा था वह वैसे वैसे कर रहे थे.



थोड़ी देर बाद इनसब की शादी होजाती है. सब बड़ो का आशीर्वाद लेते है.



विक्रम और संजना आरुषि और मेघा के पेरेंट्स उन्हें आशीर्वाद देके निकल जाते है. शालिनी किरण अपनी अपनी बहुओं लेके चली जाती है. संगीता भी अपनी बहु को लेके चली जाती है.



महक भी राधा और सिया के रितिका और माया का घःप्रवेश करवाती है और उनके कमरे में भेज देती है.



राधा और सिया ने जिससे बेइन्तेहाँ मोहब्बत की आखिर में बहोत सी परेशानियों को पार करके उसको हमेशा के लिए पा लिया. इस्स्में और भी बहोत सी जोड़ियां बानी. और सभी ने अपने सच्चे प्यार को पाया.



यश ने अपने दादा दादी और नाना नानी की मौत का बदला लिया. उसके माँ बाप के मैं में जो बोज था उसको काम किया. और जिससे प्यार किया था उसका हाथ पूरी ज़िन्दगी के लिए थाम लिया.



थे एन्ड
 
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