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- Dec 5, 2013
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नयकी भौजी,
मिश्राइन भौजी ने हमारी टीम का हौसला बुलंद कर रखा था वैसे भी हमारी टीम की पुरानी खिलाड़ियों में सिर्फ वही एक बची थीं, रज्जो, मोहिनी, मंजू और दूबे भाभी सब आउट हो गयी थीं, जिन चार लोगों को हम ने चुना था उसमें से भी रमजनिया आउट हो गयी थी, सिर्फ ६ हम बचे थे मैं, छुटकी, मिश्राइन भौजी और तीन चमेलिया, गुलबिया और,...
मैंने तय किया की अब मैं जाउंगी , ननदों की ओर हालाँकि मिश्राइन भाभी ने वार्न किया की अगर मैं फंस गयी तो फिर मेरी वो दुर्गत होगी और उससे भी बढ़के मेरी टीम वाली हार मान लेंगी, तो मैं कुछ भी हो बच के निकल आऊं और नैना को पकड़ने के चक्कर में न आऊं।
लेकिन मैंने वही सब किया जो मुझे मना किया गया था, मैंने साडी का आँचल फेंटे की तरह कमर में बांध लिया और उससे मेरी चोली भी कस के बंध गयी,
मैं जानती थी ननदें पहले वहीँ हाथ मारेंगी, और तीर की तरह अंदर घुसी जिधर नैना मुझे चैलेंज कर रही थी, और छुटकियो को उकसा रही थी बाहर बैठी हल्ला कर रही नंदों को चढ़ा रही थी
" देखो देखो बाइस्कोप देखो भौजी लोगन क मटकती गाँड़ देखो, चौड़ी चौड़ी बुर देखो, देखो देखो "
अरे मोहिनी भौजी की जो नन्दो ने मस्त मुट्ठी की एक साथ गाँड़ और बुर में,…. बेचारी नयकी भौजी, हमरे कोमल भौजी से नहीं रहा गया खुदे आय गयीं चोदवाये "
" अरे महतारी इनकी खुदे भेजी थीं इनको और जब यहाँ का मोटा मोटा लंबा लम्बा पसंद आ गया तो उनकी छोटी बहिनियों को भेज दी, कुछ दिन में ऊ खुदे और माझिलीकी भी, लेकिन जब आ गयी हैं तो इनकी रगड़ाई तो मोहिनी भौजी से डब्बल होगी "
पीछे से लीलवा ने आवाज लगाई।
मैं जान रही थी ये सब मेरा ध्यान भटकाने के लिए है जैसे क्रिकेट में स्लेजिंग करते हैं बस उसी तरह, पीछे से लीलवा आगे से छुटकी सब,...
लेकिन नैना की स्ट्रेटजी,..... मान गयी मैं नैना ननदिया को , जैसे मैं उसकी ओर बढ़ी बस बित्ते भर की दूरी ढेर सारी छुटकियो ने नैना को छाप लिया, उसे छूने के पहले मुझे इन छुटकियों से निबटना पड़ता और वो सब फ्राक और लेगिंग वाली, बड़ी ही फुर्तीली . और उस झुण्ड में कन्नी काट के वो बायीं ओर मुड़ी.
लीलवा जो बोल रही थी मैं समझ रही थी उसकी लोकेशन , गितवा के साथ वो एकदम लाइन के पास दाएं ओर से मुझे घेरने की कोशिश करेगी क्योंकि मैं नैना का पीछा बायीं तरफ जा के करुँगी,
पिंसर मूवमेंट बाएं ओर से नैना, दाएं से गीता और लीलवा
और एकदम बीच में वो दीवाल की तरह लंगड़ी घोड़ी, चंदा खड़ी थी , पैर में मोच से वो भाग तो नहीं सकती थी लेकिन दबोच सकती थी और उमर में सबसे बड़ी, वजन में भी तो बस पल भर के लिए मुझे रोक लेती, खुद ऊपर गिर जाती और उतना टाइम काफी था गितवा और लीलवा को मुझे पकड़ने के लिए।
मैं उन तीनो की ओर देख भी नहीं रही थी, लेकिन उन सबो को नहीं मालूम था की मेरे पीछे भी चार आँखे हैं,
मैं दिखाने के लिए नैना की ओर मुड़ी बायें लेकिन फिर पूरा चक्कर काट के सीधे उस लंगड़ी घोड़ी, चंदा को बजाय छू के भागने के सीधे लड़ गयी और एक हाथ से उसका टॉप पकड़ के खींचा जबतक वो सम्हलती मैंने दाएं पैर से हलके से उसकी उसी पैर में जहाँ मोच थी,
वो भहरा के गिरी और उस काब्लाउज फट के मेरे हाथ में... दोनों जोबन बाहर
अब भौजाइयों ने खूब हल्ला किया,.....सारी ननदों की फटेगी खूब फटेगी, साल भर फटेगी हमारे मायके वाले ससुराल वाले सब फाड़ेंगे,
लेकिन थी वो तगड़ी, गिरते हुए भी उसने जमीन पर से अपनी सही टांग मेरी टांग में फंसाने की कोशिश की अगर मैं इस दांव के लिए तैयार न होती, तो गयी थी. तब भी आधी तो झुक ही गयी , और झुके झुके धक्का देकर उसका फटा टॉप हाथ में लपेटे मैं अपनी लाइन की ओर लपकी,
बस आधे मिनट का अंतर् होगा वरना गितवा और लीलवा मुझे छाप लेती पर इतना टाइम बहुत था मैंने कस के डाइव मारी और मेरा आधा शरीर लाइन के पार
लेकिन चंदा ने अभी भी कस के दोनों हाथों से मेरे पैर को पकड़ रखा था ,पर लाइन पार करने के बाद मेरी सहेलियां मेरी मदद को आ सकती थीं और मैंने इशारा किया तो गुलबिया और चमेलिया दोनों , ... बड़ी ताकत थी दोनों के हाथ में, मेरे साथ साथ घसीटती हुयी वो चंदा भी, लाइन इस पार
मिश्राइन भौजी ने हमारी टीम का हौसला बुलंद कर रखा था वैसे भी हमारी टीम की पुरानी खिलाड़ियों में सिर्फ वही एक बची थीं, रज्जो, मोहिनी, मंजू और दूबे भाभी सब आउट हो गयी थीं, जिन चार लोगों को हम ने चुना था उसमें से भी रमजनिया आउट हो गयी थी, सिर्फ ६ हम बचे थे मैं, छुटकी, मिश्राइन भौजी और तीन चमेलिया, गुलबिया और,...
मैंने तय किया की अब मैं जाउंगी , ननदों की ओर हालाँकि मिश्राइन भाभी ने वार्न किया की अगर मैं फंस गयी तो फिर मेरी वो दुर्गत होगी और उससे भी बढ़के मेरी टीम वाली हार मान लेंगी, तो मैं कुछ भी हो बच के निकल आऊं और नैना को पकड़ने के चक्कर में न आऊं।
लेकिन मैंने वही सब किया जो मुझे मना किया गया था, मैंने साडी का आँचल फेंटे की तरह कमर में बांध लिया और उससे मेरी चोली भी कस के बंध गयी,
मैं जानती थी ननदें पहले वहीँ हाथ मारेंगी, और तीर की तरह अंदर घुसी जिधर नैना मुझे चैलेंज कर रही थी, और छुटकियो को उकसा रही थी बाहर बैठी हल्ला कर रही नंदों को चढ़ा रही थी
" देखो देखो बाइस्कोप देखो भौजी लोगन क मटकती गाँड़ देखो, चौड़ी चौड़ी बुर देखो, देखो देखो "
अरे मोहिनी भौजी की जो नन्दो ने मस्त मुट्ठी की एक साथ गाँड़ और बुर में,…. बेचारी नयकी भौजी, हमरे कोमल भौजी से नहीं रहा गया खुदे आय गयीं चोदवाये "
" अरे महतारी इनकी खुदे भेजी थीं इनको और जब यहाँ का मोटा मोटा लंबा लम्बा पसंद आ गया तो उनकी छोटी बहिनियों को भेज दी, कुछ दिन में ऊ खुदे और माझिलीकी भी, लेकिन जब आ गयी हैं तो इनकी रगड़ाई तो मोहिनी भौजी से डब्बल होगी "
पीछे से लीलवा ने आवाज लगाई।
मैं जान रही थी ये सब मेरा ध्यान भटकाने के लिए है जैसे क्रिकेट में स्लेजिंग करते हैं बस उसी तरह, पीछे से लीलवा आगे से छुटकी सब,...
लेकिन नैना की स्ट्रेटजी,..... मान गयी मैं नैना ननदिया को , जैसे मैं उसकी ओर बढ़ी बस बित्ते भर की दूरी ढेर सारी छुटकियो ने नैना को छाप लिया, उसे छूने के पहले मुझे इन छुटकियों से निबटना पड़ता और वो सब फ्राक और लेगिंग वाली, बड़ी ही फुर्तीली . और उस झुण्ड में कन्नी काट के वो बायीं ओर मुड़ी.
लीलवा जो बोल रही थी मैं समझ रही थी उसकी लोकेशन , गितवा के साथ वो एकदम लाइन के पास दाएं ओर से मुझे घेरने की कोशिश करेगी क्योंकि मैं नैना का पीछा बायीं तरफ जा के करुँगी,
पिंसर मूवमेंट बाएं ओर से नैना, दाएं से गीता और लीलवा
और एकदम बीच में वो दीवाल की तरह लंगड़ी घोड़ी, चंदा खड़ी थी , पैर में मोच से वो भाग तो नहीं सकती थी लेकिन दबोच सकती थी और उमर में सबसे बड़ी, वजन में भी तो बस पल भर के लिए मुझे रोक लेती, खुद ऊपर गिर जाती और उतना टाइम काफी था गितवा और लीलवा को मुझे पकड़ने के लिए।
मैं उन तीनो की ओर देख भी नहीं रही थी, लेकिन उन सबो को नहीं मालूम था की मेरे पीछे भी चार आँखे हैं,
मैं दिखाने के लिए नैना की ओर मुड़ी बायें लेकिन फिर पूरा चक्कर काट के सीधे उस लंगड़ी घोड़ी, चंदा को बजाय छू के भागने के सीधे लड़ गयी और एक हाथ से उसका टॉप पकड़ के खींचा जबतक वो सम्हलती मैंने दाएं पैर से हलके से उसकी उसी पैर में जहाँ मोच थी,
वो भहरा के गिरी और उस काब्लाउज फट के मेरे हाथ में... दोनों जोबन बाहर
अब भौजाइयों ने खूब हल्ला किया,.....सारी ननदों की फटेगी खूब फटेगी, साल भर फटेगी हमारे मायके वाले ससुराल वाले सब फाड़ेंगे,
लेकिन थी वो तगड़ी, गिरते हुए भी उसने जमीन पर से अपनी सही टांग मेरी टांग में फंसाने की कोशिश की अगर मैं इस दांव के लिए तैयार न होती, तो गयी थी. तब भी आधी तो झुक ही गयी , और झुके झुके धक्का देकर उसका फटा टॉप हाथ में लपेटे मैं अपनी लाइन की ओर लपकी,
बस आधे मिनट का अंतर् होगा वरना गितवा और लीलवा मुझे छाप लेती पर इतना टाइम बहुत था मैंने कस के डाइव मारी और मेरा आधा शरीर लाइन के पार
लेकिन चंदा ने अभी भी कस के दोनों हाथों से मेरे पैर को पकड़ रखा था ,पर लाइन पार करने के बाद मेरी सहेलियां मेरी मदद को आ सकती थीं और मैंने इशारा किया तो गुलबिया और चमेलिया दोनों , ... बड़ी ताकत थी दोनों के हाथ में, मेरे साथ साथ घसीटती हुयी वो चंदा भी, लाइन इस पार