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- Dec 5, 2013
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अपडेट 29
आज शुक्रवार का दिन था और पारस में मल्लिका इ जहाँ हूर इ जहाँ अपने बेटे शमशेर क आने पर बहुत खुश थी
Shamshera:ammi क्या क्या है खाने में
भूरिया अपने देश से बुलवा कर कई बड़े थालिओ में अलग अलग किस्म का खाना पड़ोस देती है
Shamshera:ammi इतनी अछि khushbu,or इतने सारे खाने बनाने की क्या ज़रूरत थी
में कौन सा मेहमान हु
Hooriya:mere लाल एक वक़्फ़ा बीत गया था तुझे देखे हुए ये सब मेरे लाल की ख़ुशी में है
Shamshera:shukria अम्मी जान
Hooriya:tum खा लो फिर आज तुम्हे इबादत क लये भी जाना है दिन तो यद् है न तुम्हे आज
shamshera:zarur अम्मी जान
Hooriya
r हाँ अपने अब्बा हुज़ूर को भी ले कर जाना उन्हें खुदा की शख्त ज़रूरत है
भूरिया वह से अपने कमरे में आ जाती है और नहाने जाने क लये झट से अपना हिजाब निकल ने लगती है
भूरिया अपने आप को आईने में देखती है उसका लम्बा बदन उसपे 42 की छाती और उसके 46 की गांड क़यामत ध रही थी और वो नाहा कर एक अलग किस्म का हिजाब पहन लेती है
और खुद को इबादत क लये तैयार करने लगती है ,भूरिया कभी भी बहार हिजाब में हे जाती थी ,भूरिया का चेहरा उसके देश क अलावा और उसके परिवार क अलावा कोई और नहीं देखा था
गहतराष्ट्रा
शुक्रवार दोपहर क भोजन क बाद बद्री और शयाम की अपने घर वापसी की तैयारी होने लगती है
देवरानी अपने राज्य क हर वो प्रसिद्ध चीज़े अपने पुत्र बलदेव क मित्रो को बांधने लगती है.
shayam:ary मौसी जी इतना कष्ट करने की क्या ज़रूरत थी
Devrani:tum लोग गहतराष्ट्रा से जाओ और तुम्हे खली हाथ भेज दे ऐसा नहीं हो सकता
Baldev:man में) साले शयाम मौसी नहीं भाबी बोल तो और ज़्यादा मान दान होगा
Badri
ar फिर भी क्या इतना हम घोड़े पर ले जा सकेंगे
devrani:aaram से चले जायेंगे ,बहाने न बनाओ
Baldev:man में) देखो ऐसे जबरदस्ती कर रही है जैसे क इनके देवर हो ये दोनों
devrani:tu उधर क्यू खड़ा है बलदेव इधर आ कर मदद करो
Baldev:haan माँ
shayam:baldev देखो माँ कितनी काम करती है ,अब ये भरी भरकम करने की उम्र नहीं तुम तो विवाह कर लो
baldev:nahi माँ इतनी कमज़ोर नहीं हुई
baldev:man me)abe सालो तुम्हे क्या पता क में इनसे हे विवाह करने क फ़िराक में हु और तुम्हारी भाबी देवरानी में इतनी शक्ति है क तुम दोनों को एक साथ पचार दे
देवरानी मौके का फायदा उठा k,baldev को चिढ़ाते हुए
Devrani:han एक अछि सी लड़की देखो तुम्हारे राज्य me(or हल्का मुस्कुराती है)
बलदेव ये सुन कर अपना मुँह उतर लेता है और रूत जाता है
shayam:q नहीं हम तो कोशिश करेंगे क जैसी इसकी चाहत है उसी अनुसार कन्या मिल जाये
baldev:aisi आज कल मिलनी मुश्किल hai,me तो कहता हु मिलेगी हे नहीं
shayam:bhai हमे पता है तुम्हे संस्कारी क साथ साथ नए सोच रखने वाली कन्या चाहिए
Baldev:han ऐसे कन्याये ेकी दुक्की मिलती है
और देवरानी की ओरे देख कर "और मिलती भी है तो उनके हज़ार नखरे होते है"
Badri:bhai अब तुम्हे वैसी तेवर की मजबूत लड़की चाहिए तो कुछ सेहन तो करना पड़ेगा
देवरानी इस बात पे चुटकी लेते हुए
Devrani:han बद्री और वैसी कन्या को संभल लेना किसी ैरु गैरु खैरु की बास की बात नहीं
(बलदेव को देख मुस्कुराती है)
baldev
josh में आ kar)Badri तुम तो जानते हो मेरे शैली है क में 10 को संभल लू ये एक किस खेत की मूली है,
अब देवरानी को तना सुन ने की बरी थी
देवरानी इस बात पर बलदेव को न देख अंदर से खुश हो कर मुस्कुरा कर अपने आप को देखती है
devrani:man me)is मूली को खाने क लये तुम्हे दिन रात ज़मीन की सिचाई करनी पड़ेगी बलदेव,
ये सोच कर देवरानी की छूट पनिया जाती है
इन्ही बातो क बीच साडी तैयारी हो जाती है और वो दोनों अपने अपने घर को निकल पड़ते है
बद्री और शयाम वादा करते है क जब भी बलदेव को किसी भी प्रकार की ज़रूरत होगी वो सहायता करेंगे और गहतराष्ट्रा बहुत जल्द वापस आएंगे
पारस में
शाम क 4 बजे अपनी खुदा की इबादत कर हूरजहाँ अपने सुल्तान को खोजने निकलती hai,uski दासी उसे कहती है क वो बैठे कही किताबे पढ़ रहे है भूरिया वह पहुँचती है
Hooriya:sultan
मेरे wahid:aayiye मुहतरमा
Hooriya:aapne आज इबादत की या बस
hooriya:tumhare जैसे इबादतगार बीवी क रहते हुए भला सुल्तान की क्या मज़ाल क वो इबादत में हिस्सेदारी न ले
Hooriya:khuda आप पैर रेहमत बनाये रखे
Sultan:to बताईये मल्लिका इ जहाँ सुल्तान मेरे वाहिद आपकी क्या खिदमत कर सकता है
Hooriya:aaj कल सुलटा जुंग में मशरूफ होते है मल्लिका इ जहाँ को भला कौन पूछता है
Sultan:aap क हुस्न क हम अब कईल है और जब आप सवेरे काळा हिजाब में खुद को धक् कर आई थी तब भी आपके लचकते इस बड़े गांड को देख और आपकी हिलते दूध को देख मेरा बुरा हाल था
hooriya:budhe हो गए हो आप अब तो 60 क ऊपर हो
sultan
ar मेरी बीवी तो जवान है
सुल्तान हुरिया क करीब जा कर खड़ा होता ह
45 वर्षीया भूरिया मिश्रा की रानी थी जिसे मेरे वाहिद ने मिश्रा फ़तेह करने क बात लाया था
सुल्तान अपने दाहिने हाथ से उसके बाये दूध को पकड़ लेता है और सहलाता है
Hooriya:sach में आपको मुझे देख जमा करने का डिल हुआ तो आप मुझे इशारा कर dete,me कही कोने में आप से मिल लेती
Sultan:koi बात नहीं अभी साडी कसार निकल देता हु
और उसके दूध को ज़ोर से दबाने लगा
sultan:aah तुम्हारे ये दूध कितने बड़े है भूरिया
भूरिया सुल्तान का हाथ पकड़ कर अपने हाथ से दूध को दबवाने लगती है
कुछ देर खूब अचे से दोनों बड़े गेंदों को अचे मसलने क बाद सुल्तान से रहा नहीं जाता और वो अपने कपडे उतर फेकता है
Sultan:ab जल्दी करो भूरिया जान
भूरिया झट से निचे बैठ क सुल्तान क आधे खड़े लैंड को मुँह में ले कर पहले उसके टोपे पर चाट टी है फिर उसे अपने मुँह में ठूस लेती है
Sultan:aaaah हुरिया ाः ऐसे हे चूसो
Hooriya:uhmm ुहममम ुहम्म
सुल्तान अब भूरिया को उठता है और ऊपर से उसकी कमीज को उठा कर उसके भरी दूध को नंगा कर देता है और उसे दबोच लेता है
Sultan:kya कैसे हुए और भरी मम्मी है तुम्हारे
Hooriya:aapke इसे सख्त से नरम कर दो दबा क
अब सुल्तान भूरिया को निचे कर क भूरिया क दूध क बीच अपने लौड़े को दाल उसके भरी मम्मी छोड़ने लगता है
sultan:aah भूरिया
सुल्तान अब अपना लौड़ा अपने हाथ से पकड़ कर ज़ोर से एक दूध पर लौड़ा "थप" से मरता है
भूरिया आखे बंद कर "ाः सुल्तान"
अब सुल्तान पास में रखे मेज़ क ऊपर भूरिया को झुकने का इशारा करता है और भूरिया अपनी बड़ी गांड को हिलाये झुक जाती है
sultan:thapp कर क गांड पैर एक लप्पड़ माररता hai"kyaa मोठे गांड है तुम्हारी मल्लिका इ जहाँ"
Hooriya:aaah नहीं सुल्तान..
Sultan:is पर फ़तेह कर क जितना मज़ा मुझे आया उतना पूरी दुन्या पर फ़तेह कर क नहीं आया
सुल्तान अपना लैंड अब झुकी हुई भूरिया क छूट में दाल देता है
Sultan:ye लो अब बूढ़े का लैंड
hooriya:aaaaah" सुल्तान धीरे
Hooriya:aaaaah बस्स्स सुल्तान धीरे से मुझे बहुत दर्द हो रहा है
sultan:to सीधा लेट जा मेरी जान
भूरिया अब पलट कर लेट जाती है
भूरिया क दूध हवा में किसी बड़े गेंद की तरह हिल रहे थे और सुल्तान एक बा फिर से धक्के लगाना शुरू करता है
Hooriya:issshh ाः सुल्तान
Sultan
r ले ये "पहच पहच " कर लौड़ा पेलते जाता है
Hooriya:nahi सुल्तान अभी मत पानी छोरना आराम से
भूरिया समझ जाती क सुल्तान का पानी निकलने वाला है
ये सब हरकत इन मिया बीवी क अलावा कोई और देख रहा था वो था इनका शहज़ादा शमशेर जो अपने माँ क ये रूप को देख वही रुक गया था दरअसल वो अपने अब्बा से किसी जंगी किताब लेने आया था पर जैसे हे वो वह पहुँचता है तो पता है उसके माँ भूरिया चिल्ला रही थी
भूरिया मिन्नतें कर रही थी पानी न छोरे पर 6 7 धक्के लगा कर सुल्तान निढाल हो जाता है
Hooriya:aaah नहीं सुल्तान
और निचे सुल्तान क लौड़े को देखती है जो मुरझाने लगा था
Shamshera:apne माँ क बड़े गांड और दूध देख पागल हो गया था
"अम्मी जान इतनी इबादतगार होने क बाद भी कैसे अपने शौहर से दिन दहाड़े छुड़वा रही है और आज तक मैंने कभी अम्मी को बिना हिजाब नहीं देखा बचपना क बाद और आज इनके बड़े दूध और गांड देख यक़ीन नहीं होता क इतने बड़े चीज़ अम्मी छुपा कैसे लेती है "और शमशेर वह से निकल जाता है
गहतराष्ट्रा
रात क भोजन क बाद देवरानी जा कर स्नान करती है और खूब सजती सवारती है ,फिर अपने कक्षा क मंदिर से थोड़ा सिंदूर उठा कर लगा लेती है और अपना मंगल सूत्र पहन लेती है
Devrani:man में) आज तो बलदेव तो मुझे देख पागल हो जायेगा ,दिन में बहुत बक बक कर रहा था न
बलदेव अपने कक्षा से निकल कर देवरानी की कक्षा की ओरे जा रहा था
baldev:man में) ये मेरे मित्र भी ऐसे समय पर आगये जब में उनकी भाबी उनके लये तैयार कर रहा हु ये दो दिन बद्री और शयाम क वजह से ख़राब हो गया
बलदेव तेज़ी में चल रहा था क उसके कानो में आवाज़ आती है
Jeevika:Baldev
Baldev:dadi आप
jeevika:han कहा जा रहे हो पोते
Baldev:wo माँ क कक्षा में
jeevika:Q
बलदेव क पास इसका जवाब नहीं था
और जीविका घर कर बलदेव को देख रही थी
Baldev:wo दादी कुछ राज्य की स्तिथि की बात करनी थी
jeevika:acha बीटा( मन me:rajya की या तुम्हारे अपने डिल की)
Baldev:theeek है दादी आशीर्वाद दो
जीविका :जीते रहो
Baldev:man में) कोई न कोई आहे जाता है काम में बंधा बन ne,pr कोई बात नहीं आज साडी कसार निकल लूंगा इस देवरानी का
बलदेव देवरानी क कक्षा में अत है
देवरानी मेज़ पर रखे आम को काट उसका रास बना रही बलदेव की आहात उसे समझ आ जाती है
बलदेव देखता है उसकी माँ हल्का झुकी कुछ काट रही है
baldev:man me)aaj तो माँ दुल्हन की तरह तैयार है जैसे हे आज मेरी सुहागरात हो और गांड निहारता है
देवरानी को दरवाज़ा की छिटकली लगने की कानो में आवाज़ आती है और वो पीछे मुद कर देखती है
बलदेव उसके गांड को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था जिसे देख देवरानी की छूट में चिति दौड़ने लगती है
Devrani:tumne ये छिट्किली क्यू लगा दी बलदेव
Baldev:wo माँ बास हम दोनों को थोड़ा सा एकांत जगह चाहिए न माँ और वैसे भी दो दिनों से हमने ढंग से बातचीत नहीं की
devrani:Baldev में तुम्हारी माँ हु पत्नी नहीं जो बातचीत करने क लये
एकांत जगह चाहिए और छिट्किली लगा दी tumne(muskurati है)
Baldev:Maa दिन में तुम हे कह रही थी न विवाह करनी है मेरी तो समझो में अभ्यास कर रहा हु पत्नी क साथ रहने का
devrani:me आम रास बना लू
और देवरानी झुकती है
बलदेव अपनी माँ से जा कर चिपक जाता है
devrani:tum पियोगे न आम रास
baldev:han पहले दबाऊंगा फिर निःसादके रास पीऊंगा
devrani:agar में तुम्हे बिना म्हणत किये रास निकल क दू
Baldev:to भी पीऊंगा आपका रास
बलदेव अब अपने देवरानी क गांड पर टिका देता है अपना लैंड और मज़े लेने लगता है
Baldev:man me)haay क्या गद्देदार गांड है
devrani:aah" आँख बंद हो जाती है
देवरानी अपने आप पर काबू कर किसी भी तरह आम रास बना लेती है और घूम कर बलदेव को देती है
दोनों पास में सोफे पैर बैठ जाते है
Devrani:kaisa लगा आम रास
Baldev:kya ये दसहरी आम क है
और देवरानी क दूध क तरफ देखता है देवरानी क दूध क बीच मंगलसूत्र लटक रहा था जिस से उसके उभर और अधिक सुन्दर लग रहे थे
Devrani:nahi ये मालदे आम क है
बलदेव क आखो में झक क
Baldev:agar मालदे का रास ऐसा है तो दसहरी का कैसा होगा
बलदेव देवरानी क ु उभरे हुए 38 की चुकी देख कहता है
देवरानी अपनी आखे निचे कर लेती है शर्म से
Baldev:ek बात कहु
Devrani:han कहो
ी
बलदेव देवरानी क चुचो को मस्ती से देख देवरानी क कण क पास जा कर उसके काने में
"माँ ये दोनों तो दसहरी से भी बड़े है "
और फिर अपने माँ क दूध क तरफ इशारा करता है
devrani:halke से उसके कंधे पे छठा मरती है" बदमाश हट"
और उठ कर जाने लगती है
बलदेव उसका हाथ पाकर कर
"माँ सच कहा है"
Devrani:siski लेते हुए "बलदेव"
Baldev:chhupaye नहीं छुपते माँ
और ये सुन न था क देवरानी क दूध पर से उसका दुपट्टा हट जाता है और उसके बाहो को पाकर बलदेव थम लेता है
Devrani:muskura kar)tu सच नहीं कहता तू झुट्टा है
और लज्जा कर अपना सर झुका लेती है जब उसे बलदेव अब भी उसके दूध को ताड़ते देखती ह
बलदेव मौके का फायदा उठा का देवरानी को अपने गॉड में उठा लेता है और बिस्तर की ओरे चलने लगता है
Baldev:maa क्या कहा था तुमने दिन में क सब क बास की बात नहीं क संभाल ले
devrani:hmm मैंने तुम्हे तुम्हारे पत्नी क लये कहा था
Baldev:dekho में तुम्हे संभाले खड़ा हु और तुम किसी बचे की तरह लटकी हो
क्या फायदा तुम्हारे इस भरी शरीर का
देवरानी उसके छाती पे मुक्का मरती है
"ये लो फिर बड़े महाबली बनते हो"
Baldev:maa में तुम्हे संभाल सकता हु तो सोच लो किसी को भी संभाल सकता हु
devrani:han बाबा तुम ने मुझ जैसी भरी भरकम को संभाल लय तो किसी को भी संभाल लोगे
Baldev
ar मुझे किसी और को नहीं संभालना
devrani:to किसे संभालना है
देवरानी क छूट पानी छोर छोर लाल हो गयी थी
और अपने गांड क निचले हिस्से पर उसे लैंड भी महसूस हो रहा था
Baldev:bass तुम्हे संभालना है
Devrani:soch लो
baldev:soch लो
devrani:bhari पद सकता है
baldev:me सब सहने तैयार हु
इतने में बलदेव देवरानी को पलंग पर लिटा ता है
jeevika:baldev ो बलदेव
बलदेव गुस्सा होता है और चिढ कर
"जी दादी"
देवरानी है देती है
devrani:man me)bada आया बचे की तरह चिढ गया जैसे इसकी पत्नी हु और इसे कोई बीच कार्यकर्म में तकलीफ दे दी
देवरानी को हस्ते देख
Baldev:tumhe तो में बाद में देख लूंगा
Baldev:aaya दादी
फिर बलदेव देवरानी को छोर दादी क पास चला जाता है.
आज शुक्रवार का दिन था और पारस में मल्लिका इ जहाँ हूर इ जहाँ अपने बेटे शमशेर क आने पर बहुत खुश थी
Shamshera:ammi क्या क्या है खाने में
भूरिया अपने देश से बुलवा कर कई बड़े थालिओ में अलग अलग किस्म का खाना पड़ोस देती है
Shamshera:ammi इतनी अछि khushbu,or इतने सारे खाने बनाने की क्या ज़रूरत थी
में कौन सा मेहमान हु
Hooriya:mere लाल एक वक़्फ़ा बीत गया था तुझे देखे हुए ये सब मेरे लाल की ख़ुशी में है
Shamshera:shukria अम्मी जान
Hooriya:tum खा लो फिर आज तुम्हे इबादत क लये भी जाना है दिन तो यद् है न तुम्हे आज
shamshera:zarur अम्मी जान
Hooriya
भूरिया वह से अपने कमरे में आ जाती है और नहाने जाने क लये झट से अपना हिजाब निकल ने लगती है
भूरिया अपने आप को आईने में देखती है उसका लम्बा बदन उसपे 42 की छाती और उसके 46 की गांड क़यामत ध रही थी और वो नाहा कर एक अलग किस्म का हिजाब पहन लेती है
और खुद को इबादत क लये तैयार करने लगती है ,भूरिया कभी भी बहार हिजाब में हे जाती थी ,भूरिया का चेहरा उसके देश क अलावा और उसके परिवार क अलावा कोई और नहीं देखा था
गहतराष्ट्रा
शुक्रवार दोपहर क भोजन क बाद बद्री और शयाम की अपने घर वापसी की तैयारी होने लगती है
देवरानी अपने राज्य क हर वो प्रसिद्ध चीज़े अपने पुत्र बलदेव क मित्रो को बांधने लगती है.
shayam:ary मौसी जी इतना कष्ट करने की क्या ज़रूरत थी
Devrani:tum लोग गहतराष्ट्रा से जाओ और तुम्हे खली हाथ भेज दे ऐसा नहीं हो सकता
Baldev:man में) साले शयाम मौसी नहीं भाबी बोल तो और ज़्यादा मान दान होगा
Badri
devrani:aaram से चले जायेंगे ,बहाने न बनाओ
Baldev:man में) देखो ऐसे जबरदस्ती कर रही है जैसे क इनके देवर हो ये दोनों
devrani:tu उधर क्यू खड़ा है बलदेव इधर आ कर मदद करो
Baldev:haan माँ
shayam:baldev देखो माँ कितनी काम करती है ,अब ये भरी भरकम करने की उम्र नहीं तुम तो विवाह कर लो
baldev:nahi माँ इतनी कमज़ोर नहीं हुई
baldev:man me)abe सालो तुम्हे क्या पता क में इनसे हे विवाह करने क फ़िराक में हु और तुम्हारी भाबी देवरानी में इतनी शक्ति है क तुम दोनों को एक साथ पचार दे
देवरानी मौके का फायदा उठा k,baldev को चिढ़ाते हुए
Devrani:han एक अछि सी लड़की देखो तुम्हारे राज्य me(or हल्का मुस्कुराती है)
बलदेव ये सुन कर अपना मुँह उतर लेता है और रूत जाता है
shayam:q नहीं हम तो कोशिश करेंगे क जैसी इसकी चाहत है उसी अनुसार कन्या मिल जाये
baldev:aisi आज कल मिलनी मुश्किल hai,me तो कहता हु मिलेगी हे नहीं
shayam:bhai हमे पता है तुम्हे संस्कारी क साथ साथ नए सोच रखने वाली कन्या चाहिए
Baldev:han ऐसे कन्याये ेकी दुक्की मिलती है
और देवरानी की ओरे देख कर "और मिलती भी है तो उनके हज़ार नखरे होते है"
Badri:bhai अब तुम्हे वैसी तेवर की मजबूत लड़की चाहिए तो कुछ सेहन तो करना पड़ेगा
देवरानी इस बात पे चुटकी लेते हुए
Devrani:han बद्री और वैसी कन्या को संभल लेना किसी ैरु गैरु खैरु की बास की बात नहीं
(बलदेव को देख मुस्कुराती है)
baldev
अब देवरानी को तना सुन ने की बरी थी
देवरानी इस बात पर बलदेव को न देख अंदर से खुश हो कर मुस्कुरा कर अपने आप को देखती है
devrani:man me)is मूली को खाने क लये तुम्हे दिन रात ज़मीन की सिचाई करनी पड़ेगी बलदेव,
ये सोच कर देवरानी की छूट पनिया जाती है
इन्ही बातो क बीच साडी तैयारी हो जाती है और वो दोनों अपने अपने घर को निकल पड़ते है
बद्री और शयाम वादा करते है क जब भी बलदेव को किसी भी प्रकार की ज़रूरत होगी वो सहायता करेंगे और गहतराष्ट्रा बहुत जल्द वापस आएंगे
पारस में
शाम क 4 बजे अपनी खुदा की इबादत कर हूरजहाँ अपने सुल्तान को खोजने निकलती hai,uski दासी उसे कहती है क वो बैठे कही किताबे पढ़ रहे है भूरिया वह पहुँचती है
Hooriya:sultan
मेरे wahid:aayiye मुहतरमा
Hooriya:aapne आज इबादत की या बस
hooriya:tumhare जैसे इबादतगार बीवी क रहते हुए भला सुल्तान की क्या मज़ाल क वो इबादत में हिस्सेदारी न ले
Hooriya:khuda आप पैर रेहमत बनाये रखे
Sultan:to बताईये मल्लिका इ जहाँ सुल्तान मेरे वाहिद आपकी क्या खिदमत कर सकता है
Hooriya:aaj कल सुलटा जुंग में मशरूफ होते है मल्लिका इ जहाँ को भला कौन पूछता है
Sultan:aap क हुस्न क हम अब कईल है और जब आप सवेरे काळा हिजाब में खुद को धक् कर आई थी तब भी आपके लचकते इस बड़े गांड को देख और आपकी हिलते दूध को देख मेरा बुरा हाल था
hooriya:budhe हो गए हो आप अब तो 60 क ऊपर हो
sultan
सुल्तान हुरिया क करीब जा कर खड़ा होता ह
45 वर्षीया भूरिया मिश्रा की रानी थी जिसे मेरे वाहिद ने मिश्रा फ़तेह करने क बात लाया था
सुल्तान अपने दाहिने हाथ से उसके बाये दूध को पकड़ लेता है और सहलाता है
Hooriya:sach में आपको मुझे देख जमा करने का डिल हुआ तो आप मुझे इशारा कर dete,me कही कोने में आप से मिल लेती
Sultan:koi बात नहीं अभी साडी कसार निकल देता हु
और उसके दूध को ज़ोर से दबाने लगा
sultan:aah तुम्हारे ये दूध कितने बड़े है भूरिया
भूरिया सुल्तान का हाथ पकड़ कर अपने हाथ से दूध को दबवाने लगती है
कुछ देर खूब अचे से दोनों बड़े गेंदों को अचे मसलने क बाद सुल्तान से रहा नहीं जाता और वो अपने कपडे उतर फेकता है
Sultan:ab जल्दी करो भूरिया जान
भूरिया झट से निचे बैठ क सुल्तान क आधे खड़े लैंड को मुँह में ले कर पहले उसके टोपे पर चाट टी है फिर उसे अपने मुँह में ठूस लेती है
Sultan:aaaah हुरिया ाः ऐसे हे चूसो
Hooriya:uhmm ुहममम ुहम्म
सुल्तान अब भूरिया को उठता है और ऊपर से उसकी कमीज को उठा कर उसके भरी दूध को नंगा कर देता है और उसे दबोच लेता है
Sultan:kya कैसे हुए और भरी मम्मी है तुम्हारे
Hooriya:aapke इसे सख्त से नरम कर दो दबा क
अब सुल्तान भूरिया को निचे कर क भूरिया क दूध क बीच अपने लौड़े को दाल उसके भरी मम्मी छोड़ने लगता है
sultan:aah भूरिया
सुल्तान अब अपना लौड़ा अपने हाथ से पकड़ कर ज़ोर से एक दूध पर लौड़ा "थप" से मरता है
भूरिया आखे बंद कर "ाः सुल्तान"
अब सुल्तान पास में रखे मेज़ क ऊपर भूरिया को झुकने का इशारा करता है और भूरिया अपनी बड़ी गांड को हिलाये झुक जाती है
sultan:thapp कर क गांड पैर एक लप्पड़ माररता hai"kyaa मोठे गांड है तुम्हारी मल्लिका इ जहाँ"
Hooriya:aaah नहीं सुल्तान..
Sultan:is पर फ़तेह कर क जितना मज़ा मुझे आया उतना पूरी दुन्या पर फ़तेह कर क नहीं आया
सुल्तान अपना लैंड अब झुकी हुई भूरिया क छूट में दाल देता है
Sultan:ye लो अब बूढ़े का लैंड
hooriya:aaaaah" सुल्तान धीरे
Hooriya:aaaaah बस्स्स सुल्तान धीरे से मुझे बहुत दर्द हो रहा है
sultan:to सीधा लेट जा मेरी जान
भूरिया अब पलट कर लेट जाती है
भूरिया क दूध हवा में किसी बड़े गेंद की तरह हिल रहे थे और सुल्तान एक बा फिर से धक्के लगाना शुरू करता है
Hooriya:issshh ाः सुल्तान
Sultan
Hooriya:nahi सुल्तान अभी मत पानी छोरना आराम से
भूरिया समझ जाती क सुल्तान का पानी निकलने वाला है
ये सब हरकत इन मिया बीवी क अलावा कोई और देख रहा था वो था इनका शहज़ादा शमशेर जो अपने माँ क ये रूप को देख वही रुक गया था दरअसल वो अपने अब्बा से किसी जंगी किताब लेने आया था पर जैसे हे वो वह पहुँचता है तो पता है उसके माँ भूरिया चिल्ला रही थी
भूरिया मिन्नतें कर रही थी पानी न छोरे पर 6 7 धक्के लगा कर सुल्तान निढाल हो जाता है
Hooriya:aaah नहीं सुल्तान
और निचे सुल्तान क लौड़े को देखती है जो मुरझाने लगा था
Shamshera:apne माँ क बड़े गांड और दूध देख पागल हो गया था
"अम्मी जान इतनी इबादतगार होने क बाद भी कैसे अपने शौहर से दिन दहाड़े छुड़वा रही है और आज तक मैंने कभी अम्मी को बिना हिजाब नहीं देखा बचपना क बाद और आज इनके बड़े दूध और गांड देख यक़ीन नहीं होता क इतने बड़े चीज़ अम्मी छुपा कैसे लेती है "और शमशेर वह से निकल जाता है
गहतराष्ट्रा
रात क भोजन क बाद देवरानी जा कर स्नान करती है और खूब सजती सवारती है ,फिर अपने कक्षा क मंदिर से थोड़ा सिंदूर उठा कर लगा लेती है और अपना मंगल सूत्र पहन लेती है
Devrani:man में) आज तो बलदेव तो मुझे देख पागल हो जायेगा ,दिन में बहुत बक बक कर रहा था न
बलदेव अपने कक्षा से निकल कर देवरानी की कक्षा की ओरे जा रहा था
baldev:man में) ये मेरे मित्र भी ऐसे समय पर आगये जब में उनकी भाबी उनके लये तैयार कर रहा हु ये दो दिन बद्री और शयाम क वजह से ख़राब हो गया
बलदेव तेज़ी में चल रहा था क उसके कानो में आवाज़ आती है
Jeevika:Baldev
Baldev:dadi आप
jeevika:han कहा जा रहे हो पोते
Baldev:wo माँ क कक्षा में
jeevika:Q
बलदेव क पास इसका जवाब नहीं था
और जीविका घर कर बलदेव को देख रही थी
Baldev:wo दादी कुछ राज्य की स्तिथि की बात करनी थी
jeevika:acha बीटा( मन me:rajya की या तुम्हारे अपने डिल की)
Baldev:theeek है दादी आशीर्वाद दो
जीविका :जीते रहो
Baldev:man में) कोई न कोई आहे जाता है काम में बंधा बन ne,pr कोई बात नहीं आज साडी कसार निकल लूंगा इस देवरानी का
बलदेव देवरानी क कक्षा में अत है
देवरानी मेज़ पर रखे आम को काट उसका रास बना रही बलदेव की आहात उसे समझ आ जाती है
बलदेव देखता है उसकी माँ हल्का झुकी कुछ काट रही है
baldev:man me)aaj तो माँ दुल्हन की तरह तैयार है जैसे हे आज मेरी सुहागरात हो और गांड निहारता है
देवरानी को दरवाज़ा की छिटकली लगने की कानो में आवाज़ आती है और वो पीछे मुद कर देखती है
बलदेव उसके गांड को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था जिसे देख देवरानी की छूट में चिति दौड़ने लगती है
Devrani:tumne ये छिट्किली क्यू लगा दी बलदेव
Baldev:wo माँ बास हम दोनों को थोड़ा सा एकांत जगह चाहिए न माँ और वैसे भी दो दिनों से हमने ढंग से बातचीत नहीं की
devrani:Baldev में तुम्हारी माँ हु पत्नी नहीं जो बातचीत करने क लये
एकांत जगह चाहिए और छिट्किली लगा दी tumne(muskurati है)
Baldev:Maa दिन में तुम हे कह रही थी न विवाह करनी है मेरी तो समझो में अभ्यास कर रहा हु पत्नी क साथ रहने का
devrani:me आम रास बना लू
और देवरानी झुकती है
बलदेव अपनी माँ से जा कर चिपक जाता है
devrani:tum पियोगे न आम रास
baldev:han पहले दबाऊंगा फिर निःसादके रास पीऊंगा
devrani:agar में तुम्हे बिना म्हणत किये रास निकल क दू
Baldev:to भी पीऊंगा आपका रास
बलदेव अब अपने देवरानी क गांड पर टिका देता है अपना लैंड और मज़े लेने लगता है
Baldev:man me)haay क्या गद्देदार गांड है
devrani:aah" आँख बंद हो जाती है
देवरानी अपने आप पर काबू कर किसी भी तरह आम रास बना लेती है और घूम कर बलदेव को देती है
दोनों पास में सोफे पैर बैठ जाते है
Devrani:kaisa लगा आम रास
Baldev:kya ये दसहरी आम क है
और देवरानी क दूध क तरफ देखता है देवरानी क दूध क बीच मंगलसूत्र लटक रहा था जिस से उसके उभर और अधिक सुन्दर लग रहे थे
Devrani:nahi ये मालदे आम क है
बलदेव क आखो में झक क
Baldev:agar मालदे का रास ऐसा है तो दसहरी का कैसा होगा
बलदेव देवरानी क ु उभरे हुए 38 की चुकी देख कहता है
देवरानी अपनी आखे निचे कर लेती है शर्म से
Baldev:ek बात कहु
Devrani:han कहो
ी
बलदेव देवरानी क चुचो को मस्ती से देख देवरानी क कण क पास जा कर उसके काने में
"माँ ये दोनों तो दसहरी से भी बड़े है "
और फिर अपने माँ क दूध क तरफ इशारा करता है
devrani:halke से उसके कंधे पे छठा मरती है" बदमाश हट"
और उठ कर जाने लगती है
बलदेव उसका हाथ पाकर कर
"माँ सच कहा है"
Devrani:siski लेते हुए "बलदेव"
Baldev:chhupaye नहीं छुपते माँ
और ये सुन न था क देवरानी क दूध पर से उसका दुपट्टा हट जाता है और उसके बाहो को पाकर बलदेव थम लेता है
Devrani:muskura kar)tu सच नहीं कहता तू झुट्टा है
और लज्जा कर अपना सर झुका लेती है जब उसे बलदेव अब भी उसके दूध को ताड़ते देखती ह
बलदेव मौके का फायदा उठा का देवरानी को अपने गॉड में उठा लेता है और बिस्तर की ओरे चलने लगता है
Baldev:maa क्या कहा था तुमने दिन में क सब क बास की बात नहीं क संभाल ले
devrani:hmm मैंने तुम्हे तुम्हारे पत्नी क लये कहा था
Baldev:dekho में तुम्हे संभाले खड़ा हु और तुम किसी बचे की तरह लटकी हो
क्या फायदा तुम्हारे इस भरी शरीर का
देवरानी उसके छाती पे मुक्का मरती है
"ये लो फिर बड़े महाबली बनते हो"
Baldev:maa में तुम्हे संभाल सकता हु तो सोच लो किसी को भी संभाल सकता हु
devrani:han बाबा तुम ने मुझ जैसी भरी भरकम को संभाल लय तो किसी को भी संभाल लोगे
Baldev
devrani:to किसे संभालना है
देवरानी क छूट पानी छोर छोर लाल हो गयी थी
और अपने गांड क निचले हिस्से पर उसे लैंड भी महसूस हो रहा था
Baldev:bass तुम्हे संभालना है
Devrani:soch लो
baldev:soch लो
devrani:bhari पद सकता है
baldev:me सब सहने तैयार हु
इतने में बलदेव देवरानी को पलंग पर लिटा ता है
jeevika:baldev ो बलदेव
बलदेव गुस्सा होता है और चिढ कर
"जी दादी"
देवरानी है देती है
devrani:man me)bada आया बचे की तरह चिढ गया जैसे इसकी पत्नी हु और इसे कोई बीच कार्यकर्म में तकलीफ दे दी
देवरानी को हस्ते देख
Baldev:tumhe तो में बाद में देख लूंगा
Baldev:aaya दादी
फिर बलदेव देवरानी को छोर दादी क पास चला जाता है.