Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 4 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 29

आज शुक्रवार का दिन था और पारस में मल्लिका इ जहाँ हूर इ जहाँ अपने बेटे शमशेर क आने पर बहुत खुश थी

Shamshera:ammi क्या क्या है खाने में

भूरिया अपने देश से बुलवा कर कई बड़े थालिओ में अलग अलग किस्म का खाना पड़ोस देती है

Shamshera:ammi इतनी अछि khushbu,or इतने सारे खाने बनाने की क्या ज़रूरत थी

में कौन सा मेहमान हु

Hooriya:mere लाल एक वक़्फ़ा बीत गया था तुझे देखे हुए ये सब मेरे लाल की ख़ुशी में है

Shamshera:shukria अम्मी जान

Hooriya:tum खा लो फिर आज तुम्हे इबादत क लये भी जाना है दिन तो यद् है न तुम्हे आज

shamshera:zarur अम्मी जान

Hooriya:or हाँ अपने अब्बा हुज़ूर को भी ले कर जाना उन्हें खुदा की शख्त ज़रूरत है

भूरिया वह से अपने कमरे में आ जाती है और नहाने जाने क लये झट से अपना हिजाब निकल ने लगती है



भूरिया अपने आप को आईने में देखती है उसका लम्बा बदन उसपे 42 की छाती और उसके 46 की गांड क़यामत ध रही थी और वो नाहा कर एक अलग किस्म का हिजाब पहन लेती है



और खुद को इबादत क लये तैयार करने लगती है ,भूरिया कभी भी बहार हिजाब में हे जाती थी ,भूरिया का चेहरा उसके देश क अलावा और उसके परिवार क अलावा कोई और नहीं देखा था

गहतराष्ट्रा

शुक्रवार दोपहर क भोजन क बाद बद्री और शयाम की अपने घर वापसी की तैयारी होने लगती है

देवरानी अपने राज्य क हर वो प्रसिद्ध चीज़े अपने पुत्र बलदेव क मित्रो को बांधने लगती है.

shayam:ary मौसी जी इतना कष्ट करने की क्या ज़रूरत थी

Devrani:tum लोग गहतराष्ट्रा से जाओ और तुम्हे खली हाथ भेज दे ऐसा नहीं हो सकता

Baldev:man में) साले शयाम मौसी नहीं भाबी बोल तो और ज़्यादा मान दान होगा

Badri:par फिर भी क्या इतना हम घोड़े पर ले जा सकेंगे

devrani:aaram से चले जायेंगे ,बहाने न बनाओ

Baldev:man में) देखो ऐसे जबरदस्ती कर रही है जैसे क इनके देवर हो ये दोनों

devrani:tu उधर क्यू खड़ा है बलदेव इधर आ कर मदद करो

Baldev:haan माँ

shayam:baldev देखो माँ कितनी काम करती है ,अब ये भरी भरकम करने की उम्र नहीं तुम तो विवाह कर लो

baldev:nahi माँ इतनी कमज़ोर नहीं हुई

baldev:man me)abe सालो तुम्हे क्या पता क में इनसे हे विवाह करने क फ़िराक में हु और तुम्हारी भाबी देवरानी में इतनी शक्ति है क तुम दोनों को एक साथ पचार दे

देवरानी मौके का फायदा उठा k,baldev को चिढ़ाते हुए

Devrani:han एक अछि सी लड़की देखो तुम्हारे राज्य me(or हल्का मुस्कुराती है)

बलदेव ये सुन कर अपना मुँह उतर लेता है और रूत जाता है

shayam:q नहीं हम तो कोशिश करेंगे क जैसी इसकी चाहत है उसी अनुसार कन्या मिल जाये

baldev:aisi आज कल मिलनी मुश्किल hai,me तो कहता हु मिलेगी हे नहीं

shayam:bhai हमे पता है तुम्हे संस्कारी क साथ साथ नए सोच रखने वाली कन्या चाहिए

Baldev:han ऐसे कन्याये ेकी दुक्की मिलती है

और देवरानी की ओरे देख कर "और मिलती भी है तो उनके हज़ार नखरे होते है"

Badri:bhai अब तुम्हे वैसी तेवर की मजबूत लड़की चाहिए तो कुछ सेहन तो करना पड़ेगा

देवरानी इस बात पे चुटकी लेते हुए

Devrani:han बद्री और वैसी कन्या को संभल लेना किसी ैरु गैरु खैरु की बास की बात नहीं

(बलदेव को देख मुस्कुराती है)

baldev:(josh में आ kar)Badri तुम तो जानते हो मेरे शैली है क में 10 को संभल लू ये एक किस खेत की मूली है,

अब देवरानी को तना सुन ने की बरी थी

देवरानी इस बात पर बलदेव को न देख अंदर से खुश हो कर मुस्कुरा कर अपने आप को देखती है

devrani:man me)is मूली को खाने क लये तुम्हे दिन रात ज़मीन की सिचाई करनी पड़ेगी बलदेव,

ये सोच कर देवरानी की छूट पनिया जाती है

इन्ही बातो क बीच साडी तैयारी हो जाती है और वो दोनों अपने अपने घर को निकल पड़ते है

बद्री और शयाम वादा करते है क जब भी बलदेव को किसी भी प्रकार की ज़रूरत होगी वो सहायता करेंगे और गहतराष्ट्रा बहुत जल्द वापस आएंगे

पारस में

शाम क 4 बजे अपनी खुदा की इबादत कर हूरजहाँ अपने सुल्तान को खोजने निकलती hai,uski दासी उसे कहती है क वो बैठे कही किताबे पढ़ रहे है भूरिया वह पहुँचती है

Hooriya:sultan

मेरे wahid:aayiye मुहतरमा

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Hooriya:aapne आज इबादत की या बस

hooriya:tumhare जैसे इबादतगार बीवी क रहते हुए भला सुल्तान की क्या मज़ाल क वो इबादत में हिस्सेदारी न ले

Hooriya:khuda आप पैर रेहमत बनाये रखे

Sultan:to बताईये मल्लिका इ जहाँ सुल्तान मेरे वाहिद आपकी क्या खिदमत कर सकता है

Hooriya:aaj कल सुलटा जुंग में मशरूफ होते है मल्लिका इ जहाँ को भला कौन पूछता है

Sultan:aap क हुस्न क हम अब कईल है और जब आप सवेरे काळा हिजाब में खुद को धक् कर आई थी तब भी आपके लचकते इस बड़े गांड को देख और आपकी हिलते दूध को देख मेरा बुरा हाल था

hooriya:budhe हो गए हो आप अब तो 60 क ऊपर हो

sultan:par मेरी बीवी तो जवान है

सुल्तान हुरिया क करीब जा कर खड़ा होता ह

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45 वर्षीया भूरिया मिश्रा की रानी थी जिसे मेरे वाहिद ने मिश्रा फ़तेह करने क बात लाया था

सुल्तान अपने दाहिने हाथ से उसके बाये दूध को पकड़ लेता है और सहलाता है

Hooriya:sach में आपको मुझे देख जमा करने का डिल हुआ तो आप मुझे इशारा कर dete,me कही कोने में आप से मिल लेती

Sultan:koi बात नहीं अभी साडी कसार निकल देता हु

और उसके दूध को ज़ोर से दबाने लगा

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sultan:aah तुम्हारे ये दूध कितने बड़े है भूरिया

भूरिया सुल्तान का हाथ पकड़ कर अपने हाथ से दूध को दबवाने लगती है

कुछ देर खूब अचे से दोनों बड़े गेंदों को अचे मसलने क बाद सुल्तान से रहा नहीं जाता और वो अपने कपडे उतर फेकता है

Sultan:ab जल्दी करो भूरिया जान

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भूरिया झट से निचे बैठ क सुल्तान क आधे खड़े लैंड को मुँह में ले कर पहले उसके टोपे पर चाट टी है फिर उसे अपने मुँह में ठूस लेती है

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Sultan:aaaah हुरिया ाः ऐसे हे चूसो

Hooriya:uhmm ुहममम ुहम्म

सुल्तान अब भूरिया को उठता है और ऊपर से उसकी कमीज को उठा कर उसके भरी दूध को नंगा कर देता है और उसे दबोच लेता है

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Sultan:kya कैसे हुए और भरी मम्मी है तुम्हारे

Hooriya:aapke इसे सख्त से नरम कर दो दबा क

अब सुल्तान भूरिया को निचे कर क भूरिया क दूध क बीच अपने लौड़े को दाल उसके भरी मम्मी छोड़ने लगता है

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sultan:aah भूरिया

सुल्तान अब अपना लौड़ा अपने हाथ से पकड़ कर ज़ोर से एक दूध पर लौड़ा "थप" से मरता है

भूरिया आखे बंद कर "ाः सुल्तान"

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अब सुल्तान पास में रखे मेज़ क ऊपर भूरिया को झुकने का इशारा करता है और भूरिया अपनी बड़ी गांड को हिलाये झुक जाती है

sultan:thapp कर क गांड पैर एक लप्पड़ माररता hai"kyaa मोठे गांड है तुम्हारी मल्लिका इ जहाँ"

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Hooriya:aaah नहीं सुल्तान..

Sultan:is पर फ़तेह कर क जितना मज़ा मुझे आया उतना पूरी दुन्या पर फ़तेह कर क नहीं आया

सुल्तान अपना लैंड अब झुकी हुई भूरिया क छूट में दाल देता है

Sultan:ye लो अब बूढ़े का लैंड

hooriya:aaaaah" सुल्तान धीरे

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Hooriya:aaaaah बस्स्स सुल्तान धीरे से मुझे बहुत दर्द हो रहा है

sultan:to सीधा लेट जा मेरी जान

भूरिया अब पलट कर लेट जाती है

भूरिया क दूध हवा में किसी बड़े गेंद की तरह हिल रहे थे और सुल्तान एक बा फिर से धक्के लगाना शुरू करता है

Hooriya:issshh ाः सुल्तान

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Sultan:or ले ये "पहच पहच " कर लौड़ा पेलते जाता है

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Hooriya:nahi सुल्तान अभी मत पानी छोरना आराम से

भूरिया समझ जाती क सुल्तान का पानी निकलने वाला है

ये सब हरकत इन मिया बीवी क अलावा कोई और देख रहा था वो था इनका शहज़ादा शमशेर जो अपने माँ क ये रूप को देख वही रुक गया था दरअसल वो अपने अब्बा से किसी जंगी किताब लेने आया था पर जैसे हे वो वह पहुँचता है तो पता है उसके माँ भूरिया चिल्ला रही थी

भूरिया मिन्नतें कर रही थी पानी न छोरे पर 6 7 धक्के लगा कर सुल्तान निढाल हो जाता है

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Hooriya:aaah नहीं सुल्तान

और निचे सुल्तान क लौड़े को देखती है जो मुरझाने लगा था

Shamshera:apne माँ क बड़े गांड और दूध देख पागल हो गया था

"अम्मी जान इतनी इबादतगार होने क बाद भी कैसे अपने शौहर से दिन दहाड़े छुड़वा रही है और आज तक मैंने कभी अम्मी को बिना हिजाब नहीं देखा बचपना क बाद और आज इनके बड़े दूध और गांड देख यक़ीन नहीं होता क इतने बड़े चीज़ अम्मी छुपा कैसे लेती है "और शमशेर वह से निकल जाता है

गहतराष्ट्रा

रात क भोजन क बाद देवरानी जा कर स्नान करती है और खूब सजती सवारती है ,फिर अपने कक्षा क मंदिर से थोड़ा सिंदूर उठा कर लगा लेती है और अपना मंगल सूत्र पहन लेती है

Devrani:man में) आज तो बलदेव तो मुझे देख पागल हो जायेगा ,दिन में बहुत बक बक कर रहा था न

बलदेव अपने कक्षा से निकल कर देवरानी की कक्षा की ओरे जा रहा था

baldev:man में) ये मेरे मित्र भी ऐसे समय पर आगये जब में उनकी भाबी उनके लये तैयार कर रहा हु ये दो दिन बद्री और शयाम क वजह से ख़राब हो गया

बलदेव तेज़ी में चल रहा था क उसके कानो में आवाज़ आती है

Jeevika:Baldev

Baldev:dadi आप

jeevika:han कहा जा रहे हो पोते

Baldev:wo माँ क कक्षा में

jeevika:Q

बलदेव क पास इसका जवाब नहीं था

और जीविका घर कर बलदेव को देख रही थी

Baldev:wo दादी कुछ राज्य की स्तिथि की बात करनी थी

jeevika:acha बीटा( मन me:rajya की या तुम्हारे अपने डिल की)

Baldev:theeek है दादी आशीर्वाद दो

जीविका :जीते रहो

Baldev:man में) कोई न कोई आहे जाता है काम में बंधा बन ne,pr कोई बात नहीं आज साडी कसार निकल लूंगा इस देवरानी का

बलदेव देवरानी क कक्षा में अत है

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देवरानी मेज़ पर रखे आम को काट उसका रास बना रही बलदेव की आहात उसे समझ आ जाती है

बलदेव देखता है उसकी माँ हल्का झुकी कुछ काट रही है

baldev:man me)aaj तो माँ दुल्हन की तरह तैयार है जैसे हे आज मेरी सुहागरात हो और गांड निहारता है

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देवरानी को दरवाज़ा की छिटकली लगने की कानो में आवाज़ आती है और वो पीछे मुद कर देखती है

बलदेव उसके गांड को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था जिसे देख देवरानी की छूट में चिति दौड़ने लगती है

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Devrani:tumne ये छिट्किली क्यू लगा दी बलदेव

Baldev:wo माँ बास हम दोनों को थोड़ा सा एकांत जगह चाहिए न माँ और वैसे भी दो दिनों से हमने ढंग से बातचीत नहीं की

devrani:Baldev में तुम्हारी माँ हु पत्नी नहीं जो बातचीत करने क लये

एकांत जगह चाहिए और छिट्किली लगा दी tumne(muskurati है)

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Baldev:Maa दिन में तुम हे कह रही थी न विवाह करनी है मेरी तो समझो में अभ्यास कर रहा हु पत्नी क साथ रहने का

devrani:me आम रास बना लू

और देवरानी झुकती है

बलदेव अपनी माँ से जा कर चिपक जाता है

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devrani:tum पियोगे न आम रास

baldev:han पहले दबाऊंगा फिर निःसादके रास पीऊंगा

devrani:agar में तुम्हे बिना म्हणत किये रास निकल क दू

Baldev:to भी पीऊंगा आपका रास

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बलदेव अब अपने देवरानी क गांड पर टिका देता है अपना लैंड और मज़े लेने लगता है

Baldev:man me)haay क्या गद्देदार गांड है

devrani:aah" आँख बंद हो जाती है

देवरानी अपने आप पर काबू कर किसी भी तरह आम रास बना लेती है और घूम कर बलदेव को देती है

दोनों पास में सोफे पैर बैठ जाते है

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Devrani:kaisa लगा आम रास

Baldev:kya ये दसहरी आम क है

और देवरानी क दूध क तरफ देखता है देवरानी क दूध क बीच मंगलसूत्र लटक रहा था जिस से उसके उभर और अधिक सुन्दर लग रहे थे

Devrani:nahi ये मालदे आम क है

बलदेव क आखो में झक क

Baldev:agar मालदे का रास ऐसा है तो दसहरी का कैसा होगा

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बलदेव देवरानी क ु उभरे हुए 38 की चुकी देख कहता है

देवरानी अपनी आखे निचे कर लेती है शर्म से

Baldev:ek बात कहु

Devrani:han कहो



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बलदेव देवरानी क चुचो को मस्ती से देख देवरानी क कण क पास जा कर उसके काने में

"माँ ये दोनों तो दसहरी से भी बड़े है "

और फिर अपने माँ क दूध क तरफ इशारा करता है

devrani:halke से उसके कंधे पे छठा मरती है" बदमाश हट"

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और उठ कर जाने लगती है

बलदेव उसका हाथ पाकर कर

"माँ सच कहा है"

Devrani:siski लेते हुए "बलदेव"

Baldev:chhupaye नहीं छुपते माँ

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और ये सुन न था क देवरानी क दूध पर से उसका दुपट्टा हट जाता है और उसके बाहो को पाकर बलदेव थम लेता है

Devrani:muskura kar)tu सच नहीं कहता तू झुट्टा है

और लज्जा कर अपना सर झुका लेती है जब उसे बलदेव अब भी उसके दूध को ताड़ते देखती ह

बलदेव मौके का फायदा उठा का देवरानी को अपने गॉड में उठा लेता है और बिस्तर की ओरे चलने लगता है

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Baldev:maa क्या कहा था तुमने दिन में क सब क बास की बात नहीं क संभाल ले

devrani:hmm मैंने तुम्हे तुम्हारे पत्नी क लये कहा था

Baldev:dekho में तुम्हे संभाले खड़ा हु और तुम किसी बचे की तरह लटकी हो

क्या फायदा तुम्हारे इस भरी शरीर का

देवरानी उसके छाती पे मुक्का मरती है

"ये लो फिर बड़े महाबली बनते हो"

Baldev:maa में तुम्हे संभाल सकता हु तो सोच लो किसी को भी संभाल सकता हु

devrani:han बाबा तुम ने मुझ जैसी भरी भरकम को संभाल लय तो किसी को भी संभाल लोगे

Baldev:par मुझे किसी और को नहीं संभालना

devrani:to किसे संभालना है

देवरानी क छूट पानी छोर छोर लाल हो गयी थी

और अपने गांड क निचले हिस्से पर उसे लैंड भी महसूस हो रहा था

Baldev:bass तुम्हे संभालना है

Devrani:soch लो

baldev:soch लो

devrani:bhari पद सकता है

baldev:me सब सहने तैयार हु

इतने में बलदेव देवरानी को पलंग पर लिटा ता है

jeevika:baldev ो बलदेव

बलदेव गुस्सा होता है और चिढ कर

"जी दादी"

देवरानी है देती है

devrani:man me)bada आया बचे की तरह चिढ गया जैसे इसकी पत्नी हु और इसे कोई बीच कार्यकर्म में तकलीफ दे दी

देवरानी को हस्ते देख

Baldev:tumhe तो में बाद में देख लूंगा

Baldev:aaya दादी

फिर बलदेव देवरानी को छोर दादी क पास चला जाता है.
 
भाई बुरा न मन न पर आप बहुत जल्दबाज़ी में रहते हो हमेशा लिखे "और अपडेट दो जल्दी दो" "एक किश दो" भाई आप को फटाफट चुदाई देखनी है तो मेरी सलाह क आप adultery+incest स्टोरीज रीड karo,par राइटर को ऐसे प्रेससूरिजे मत करो अगर आपको रे कहानी में फिट होगी तभी राइटर दाल सकता है नहीं तो कहानी की ऐसी की तैसी हो जाती है.

स्टोरी क अलावा और भी काम होते है भाई

ये पुरे इन्सेस्ट है अडुल्टेरी नहीं

और हाँ वैसे आज का यूजर नहीं एक्सबी से स्टार्ट क्या था फोरम.

थैंक्स भाई प्लीज बुरा मत मन न

एन्जॉय एंड कीप सपोर्टिंग
 
अपडेट 30

जीविका क आवाज़ पर बलदेव अपने रानी देवरानी को छोर अपने दादी क पास जाता है पर वो चिढ़ा हुआ था

baldev:kya हुआ दादी

jeevika:tum कहा व्यस्त थे

baldev:kahi नहीं

jeevika:to मुझे ऐसा क्यू प्रतीत होता है जैसे मैंने तुम्हे किसी महत्वपूर्ण कार्य क बीच बुला लय

अब बलेव कैसे बताये क वो अपने माँ से प्यार करने में देवरानी को रगड़ने में व्यस्त था

Baldev:mai वो राज्य में हुए

बीती आपदा माँ से पूछ रहा

था जिस से आगे सावधान रहा जा सके

Devrani:man में) क्या घटना घाट रही

थी मुझे मत सिखाओ

Devrani:acha ठीक है तुम मेरी कुछ जड़ी बूटी ले आओ वैध से

Baldev:ji दादी

बलदेव जड़ी बूटी ले आने चला जाता है

और इधर देवरानी उल्टा अपने छूट को दबाये लेती थी

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Devrani:hey भगवन मेरी बुर फैट जाएगी अब इतनी जलन "aaah"itni. तड़प "aaah"ye बलदेव भी न हमेशा आग सुलगा क चला जाता है खेल खेल में"

अपने छूट को मसलते हुए तड़पते हुए देवरानी सो जाती hai,kuch देर में बलदेव दादी का काम निपटा कर आता है और देवरानी का दरवाज़ा पे आकर "माँ दरवाज़ा खोलो"

बेतहास दरवाज़ा पीट ता है पर उसकी माँ तो घोड़े बेच कर सो रही थी

बलदेव भी जा कर सो जाता है

शनिवार सुबह सब उठ ते है

और अपने अपने कार्य पर लग जाते है

देवरानी आज जल्दी उठ जाती है और रोज़ की तरह पहले पूजा अर्चना करती है फिर अपना योग कर कर कुछ जड़ी बूटी कहती है

बलदेव को कल रात अछि नींद नहीं मिली थी और अपने माँ क छुवन की खुमारी में अब भी डूबा था

Kamla:O युवराज उठ जाओ सूरज सर क ऊपर आगया

बलदेव "हम्म. " और उठ ता है

Kamla:lagta है प्यार में दिन रत समझ नहीं अत युवराज को

Baldev:ab तुम्हारे महरानी से पूछो उसकी गलती है

कमला: ओहो प्यार में डूबे तुम और गलती महरानी की

baldev:apne महरानी से कहो वो अपने हुस्न का जलवा न दिखाया करे

kamla:ab उनके रूप में ऐसी बात है तो वो क्या करे

Baldev:bass रूप नहीं

Kamla;Or क्या

baldev;or अंग भी

Kamla:hay महरानी का अंग सुन्दर होना उनकी गलती नहीं

Baldev:chup करो साली

कमला ये सुन कर एक डैम चौक जाती है

कमला का. मुरझाया चेहरा देख बलदेव मुस्कुराता है

Baldev:kamla तुम माँ को अपनी बहिन मानती हो न

Kamla:han

Baldev:to पत्नी की बहिन कौन हुई?

साली

Kamla:hay दय्या और मुस्कराती है

Baldev:or साली आधी घरवाली होती है

Kamla:chup करो

बलदेव कमला को ताड़ते हुए वैसे तुम भी अपने बहिन से काम नहीं हु साली जी

kamla:aise वैसे न देखो नहीं तो में अपने बहिन का कण भर क तुम्हारा पत्ता काट दूंगी

बलदेव मुस्कुराता है

कमला "हहह बड़े आये" और जाने लगती है

बलदेव स्नान कर तैयार हो कर राज सभा में जाता है और महारानी षुरूश्ती प्रजा की बातो को सुन रही थी और समस्याओ का समाधान दे रही थी

Mantr:aayiye युवराज

Shurushti:baitho बलदेव

बलदेव प्रणाम कर क षुरूश्ती क बगल में आसान ग्रहण करता है

Mantri:yuvraj सेनापति का सन्देश आया है हमारे सीमा पर घुसपैठ होने की संभावना है

shurushti:han ये सही बात है युवराज baldev,or हम चाहते है क आज से तुम्हारे निगरानी में गहतराष्ट्रा की सीमा रहे

Baldev:man me)Iska अर्थ तो ये है क मुझे दिन रत कभी भी सीमा पर सुरक्षा देने क लये जाना होगा

Shurushti:Tum सही सोच रहे हो युवराज ,दिन हो या रात तुम्हे वही पहरा देना है

baldev:par माँ

shurushti:Tumhara महल में आना जाना लगा रहेगा पर तुम सीमा की सुरक्षा में कोई कटही नहीं बरतनी है

Baldev:jo आज्ञा महरानी

षुरूश्ती क कान में राधा आ कर कुछ कहती है जिसे बलदेव सुन लेता है

radha:Mahrani ये तो आगया पर इसकी माँ नहीं दिख रही है

महारानी षुरूश्ती अपने सिंहासन से उठ का सभा समाप्त करते हुए राधा क साथ जाने लगती है

Baldev:Man me)me और मेरी माँ तुम सब की इतनी आदर करते है परन्तु तुम तो बड़ी माँ अपने दासी से मेरी माँ की बेइज़्ज़ती करवा रही हो

बलदेव और मंत्री सैनिको से बात करते है और बलदेव सैनिको को ले कर सीमा पर चला जाता है

पारस

शनिवार सुबह सब हो हे रहे थे क पारस की महारानी हूर जहाँ उठ कर बगीचे की ओरे जाने लगती है

शमशेर अभी सो कर उठा था और वो अपने खिड़की क पास कुर्सी रख कर बैठ ता है

शमशेर क कक्षा से महल क पास का बगीचा साफ़ नज़र आता है

शमशेर बैठा ताज़ी हवा ले रहा था क उसे किसी को बाग़ में टहलते देखता है और उसके पहनावे को देख वो समझ जाता है क वो कोई और नहीं उसकी माँ भूरिया है

हूर जहाँ जो एक मज़हबी और बड़े सख्त मिजाज़ की औरत थी जिसका ताल्लुक मिश्रा से tha,kam उम्र में शादी हो कर आयी भूरिया किसी हूर जैसी दिखती थी ,आज 45 साल की थी पर उसके चेहरे पर अब भी सेब से लाली thi,chehra एक डैम दूध सा और लम्बाई चौड़ाई ऐसी क हिजाब में भी उसके बड़े गांड और दूध छुप्ये नहीं छुपते the,Hooriya का जीवन तो खुश से भरा था पर कुछ सालो से अपने शौहर मेरे वाहिद क पूरी दुन्या में दौरा और उनके जिन्सी कमज़ोरी से भूरिया थोड़ी सी फिकरमंद थी

वैसे भूरिया की ख्वाइशे उम्र ढलने क साथ बढ़ रही थी पर सुल्तान मेरे वाहिद की काम हो रही thi,hooriya की गांड काम आज काम 46 की थी और उसके दूध 40 क थे

शमशेर जिसने अपने माँ को बचपन में हे बिना हिजाब क सूट सलवार में देखा था उसने कल दिन दहाड़े अपने अब्बू को अम्मी को छोड़ते देख हैरान था

Shamshera:Man में) आह क्या गांड है अम्मी जान

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शमशेर को याद आजाता है कल इस गांड को नंगी कर क सुल्तान कैसे पेल रहा था

Shamshera:man में) देखो कितने शरीफ बन रही है ये और इनकी गांड जैसे कल उचक उचक कर नाह चूड़ी हो

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गांड अब जल्दी में चलने से ऊपर नीचे हो रहे थे

शमशेर का हाथ खुद बा खुद अपने लैंड पर चला जाता है और मसलने लगता है

भूरिया अपने मस्ती से चल रही थी उसे क्या पता था क उसका अपना बीटा उसके गांड को खा जाने वाली नज़र से देख रहा है

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तभी भूरिया थोड़ा रूकती है एक गुलाब का फूल तोड़ने क लये और उसके रुकने से उसके हिजाब थोड़ा सा उसके बड़े गांड क दरार में घुस जाता है

शमशेर अपना लैंड ज़ोर से हिलने लगता है और उसके आखे बंद हो जाती है और जैसे आखे खोलता है

तो भूरिया को एक दूसरे फूल जो उसके पीछे की तरफ था उसको देखता पता है

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जैसे शमशेर की तरफ मुड़ती है भूरिया उसके दोनों फुटबॉल साइज क मम्मी हवा में लहराते हुए हिलते है

shamshera:aaah अम्मी जान" और पांच से पानी छोर देता है वो

वो इस महल बनाने वाले को शुकरिअ करता है जिसने बैग साथ में बनाया और उसने उसकी माँ. मटकते गांड और हिलते दूध को देख मज़े लय

शमशेर उठ कर नाहा धो कर अपने माँ क कक्षा में जाता है

Shamshera:ammi

कहा हो

hooriya:yaha हु

Shamshera:maa क्या कर रही हो

Hooriya:bass अभी दवा कर क उठी हु

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Shamshera:kaisi दवा

Hooriya:bete जनि तुम्हारे और तुम्हारे अब्बा क सलामती की दवा

Shamshera:shukria अम्मी दिन रत हमारे लिए दवा क्र क थक टी नहीं आप

Hooriya:bhala कैसे थकूँगी में तो खुदा से तुम दोनों की सलामती की दवा करती हु और आज कल मेरा ये जुंग का सुन कर मन घबरा रहा है

shamshera:ghabraye नहीं अम्मी

Hooriya:par इतने दूर हिन्द पर हमला करना क्या ठीक रहेग

Shamshera:ammi कुछ. हज़ार दो हज़ार को. मई अकेला निपटा लूंगा

Hooriya:pagla

shamshera:ap अपना ख्याल रखिए

Hooriya:rakhti तो हु

shamshera:kya रखती हो दिन रत इबादत गह में रहती हो और ये झुब्बा पहनी रहती हो

Hooriya:han किसी गैर मर्द की नज़र से बचने क लये

Shamshera:Me क्या गैर मर्द हु? (अपने माँ क ायखो में देखते हुए)

Hooriya:par तुम भी तो अब जवान हो गए हो

Shamshera:aap को ऐसा लगता hai,mujhe मेरे बचपना वाली अम्मी चाहिए

भूरिया अपने बचे की ऐसी ज़िद स पिघल जाती है और झट से अपना हिजाब निकल कर दूसरी तरफ फेकती है

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भूरिया अंदर से चुस्त समीज़ और सलवार पहनी थी और उसके दूध कैसे हुए थे और उसके मोठे गांड तो सलवार का डैम तोड़ रहा था

Hooriya:muskura कर " अब ठीक है"

शमशेर लगातार अपनी माँ को देख रहा था

Shamshera:ammi आप ऐसे हे रहा करे ,बेहद खूबसूरत हो आप

Hooriya:Han ऐसे रहूंगी बस घर में. बहार nahi,ab कहा पहले में खूबसुआत थी

shamshera:ab भी हो आप

भूरिया है कर "चलो अब हम पारसी फर्श कालीन लगवाती हु "

और भूरिया जाने लगती है

शमशेर बास भूरिया क गांड निहारते रह जाता है..
 
अपडेट 31

शनिवार क दिन अपने सैनिको क साथ बलदेव पुरे राज्य की सीमा की छान बीन शुरू कर देता है

Baldev:sainiko ये हमारे राष्ट्र को बचने क लये हम आज सीमा पर एकता है और हमे दिन रात जाग सीमा की सुरक्षा करनी है

Sainik:ji महाराज

दूसरा sainik:maharaj पर यहाँ हमे दिन रत रहना है तो हमारे खाने रहने का कैसे होगा

Baldev:Murkh ..उसकी चिंता न करो मई भी तुम लोगो क साथ हु और खाने पीने और विश्राम क लये हम पास क गुफा का इश्तेमाल करेंगे

दूसरा sainik:yuvraj वो सब तो ठीक है पर हम तो अपने पत्नी और बचे से तो मिल नहीं पाएंगे

Baldev:Uske बारे में हम सोचेंगे वैसे राष्ट्र ज़्यादा महत्वपूर्ण है

sainik:maharaj बुरा न मने पर आप की तो पत्नी नहीं है इसलिए आप ये दुःख नहीं समझ सकते

baldev:man me)Meri देवरानी जिस से में अत्यधिक प्रेम करता हु मेरे लिए पत्नी से बढ़ कर है

Baldev:me कुछ सोचूंगा इस बारे में

तब तक जिसको जो काम दया है वो करे और में बीच बीच में आता रहूँगा

रात क 9 बज गए तह देवरानी हर दो घरी में महल क दरवाज़े पे देखती ये आस में क बलदेव आ गया हो

आखिर कार थक कर वो अपने कक्षा में चली जाती है और बलदेव क बारे में सोचती रहती है

उसकी सोच तब टूट टी ह जब वो घोड़े क आवाज़ आती है और उसकी आवाज़ से समझ जाती है क बलदेव हे

देवरानी अपने कक्षा से महल क बहार जाने लगती है तो देखती है हलकी बारिश शुरू हो गई है देवरानी न चाहते हुए भी बारिस में भीग गयी और बलदेव क घोड़े की तरफ गयी

बलदेव घोड़े को बांध कर जैसे हे पलटता है वो देवरानी जो बारिश में भीग रही है को देखते रह जाता है

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देवरानी क सुन्दर वक्ष सदी में पानी से चिपक क साफ़ दिख रहे थे. और देवरानी रात क अँधेरे में भी बिजली क रौशनी में चमक रही थी

baldev:maa इतनी वर्षा में बहार क्यू आगयी

Devrani:Me तो अपने बलदेव से मिलने आई और तुम तो..

देवरानी का मज़ा किरकिरा होते देख

Baldev:Bas तो आ जाओ मिल लो

और उसे अपनी ओरे खींच लेता है

देवरानी बलदेव क चौड़े ठोस सीने को

देख रही थी "कितना बलिष्ट और कठोर है"

तभी बलदेव देवरानी को हल्का गॉड में उठाये अपने आगे ले लेता है और पीछे से देवरानी जैसी भरपूर माल को जकड लेता है

Devrani:hey भगवन ,आह" बलदेव यहाँ नहीं

बादेव अपने लैंड का दबाव और बढ़ा क

baldev:q यहाँ nahi,aapko ाचा नहीं लग रहा?

अब बलदेव अपना 9 इंच का खड़ा लंडा देवरानी क 44 की गांड पर गोल गोल घूमता है

Baldev:"aaah"acha लग रहा है

baldev:to फिर

Devrani:dar लग रहा है

बलदेव देवरानी क गर्दन पर अपना मुँह रख क

Baldev:mere से दर रही हो ?

Devrani:nai "ाः "हम. महल क बहार hai,koi देख लेगा तो क्या समझेगा

Baldev:yahi क हम माँ बीटा प्यार कर रहे है



Devrani:tumhe ज़रा भी दर नहीं

baldev:tumhare लिए में दुन्या से लड़ सकता हु ये गहतराष्ट्रा क लोग को में जवाब दूंगा

देवरानी भी अब दर नहीं रही थी

बलदेव अब देवरानी को दबोच कर उसके गाल पर एक ज़ोर दर चुम्मा ले लेता है

देवरानी ख़ुशी से आखे बंद कर लेती है

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फिर देवरानी को बलदेव अपने बहे में बहे दाल कर अंदर अत है और देवरान क कक्षा में ले जा कर

Baldev:ja कर कपडे बदल लो माँ नहीं तो ताब्यात ख़राब हो जाएगी

Devrani:theek है.

बलदेव एक बार कास क गले लग कर जाने लगता है

Devrani:ruko

Baldev:bolo maa,ab क्या में हे कपडे बदल दू आपके

देवरानी अपने मुँह पे हाथ रख के

"बदमाश"

"कोई ज़रूरत नहीं है भागो"

बलदेव हस्ते हुए अपने कक्षा चला जाता है सोने और देवरानी भी सोने चली जाती है
 
अपडेट 32

आज रविवार का दिन था जो क बलदेव और देवरानी की ज़िन्दगी क लये बहुत अहम् था और निर्णायक भी क उनके ज़िन्दगी किस रुख को अपनाती hai.beete हुए कुछ हफ्तों में जो इस खेल का हिस्सा थे वो बखूबी जानते थे क कुछ रोमांचित होने वाला जिसका असर न की

माँ बेटे क रिश्ते पर बल्कि गहतराष्ट्रा क भविष्य पर होने वाला था

देवरानी ने बलदेव का मन भी टटोल लय था क उसकी चाहत क्या है और बलदेव ने भी सफलतापूर्वक देवरानी को अहसास दिलाने में कामयाब रहा जिसमे कमला ने कुछ हद तक उसकी मदद ज़रूर ki,wahi जीविका भी आत्मा चिंतन में थी क वो क्या करे जीविका को अपने पुत्र दुवारा और अपने बड़ी बहु षुरूश्ती का बर्ताव आचरण बीते 18 वर्ष से जो देवरानी क प्रति था उससे कही न कही जीविका भी दुखी thi,par जीविका तो पहले राजपाल की माँ थी बाद में अपने बहु देवरानी की सास उसे खुद समझ नहीं आरहा था क वो क्या करे और वो चुप चाप रहना पसंद की

उधर पारस में देवराज जो अब सुल्तान मेरे वाहिद क करम पर अपने राज्य को संभाल रहा था उसे भी मजबूरन अपनी बहिन देवरानी क राज्य गहतराष्ट्रा पर हमला करना पद सकता था क्यू क शमशेर मेरे वाहिद का एकलौता चिराग ने थान लय था लूट करने का कुबेरी ko,yahi वजह थी कुबेरी क राजा रतन सिंह अपने सहयोगिओं से सहयोग ले कर अपने सेना बढ़ा रहे थे और उनका साथ दे रहे थे वर्षो से साथ दे रहे गहतराष्ट्रा क राजा राजपाल और देवरानी क पति राजपाल या कह लीजिये बलदेव क पिता.,

राजा रतन को न सिर्फ सुल्तान मेरे वाहिद से खतरा था बल्कि उसे उम्मीद थी दिल्ली क बादशाह शाहज़ेब भी कुबेरी पर हमला कर सकते है

इन सब क बीच जहा दो डिल बलदेव और देवरानी क लगभग जुड़ चुके थे वही पारस में भी युवराज शमशेर अपने माँ को अपने पिता क साथ सम्भोग करते देख अब एक मर्द की नज़र से अपनी माँ हूर जहाँ या भूरिया को देखने लगा tha,par भूरिया को पाने का वो सोच भी नहीं सकता था क्यू क भूरिया एक परहेज़गार और इबादतगार औरत थी जिसके नाख़ून भी बहार क लोग नहीं देखे थे kabhi,paras क मर्द क्या औरत ने भी उनको नहीं देखा था ,भूरिया को केवल घरवाले और राज दरबार वाले दस दसियो और कुछ सैनिक बालो ने हे सिर्फ चेहरा देखा tha,hooriya अक्सर महल में अपना चेहरा सिर्फ खुला रखती और बहार जाने पर उसे भी छुपा लेती थी.

गहतराष्ट्रा

आज रविवार का दिन था देवरानी उठ कर अपने आपको नए जोड़े में तैयार करती है अपने आपको और खूब डिल से सब क लये खाना बनती hai,baldev से जब भी उसकी नज़र मिलती वो बलदेव क आखो में एक नमी देख प् रही थी देवरानी सबको खिला कर अपने कक्षा में जा कर अपने हाथो में चुड़िआ डालने लगती है

Kamla:mahrani क्या बात है आज तो चुड़िआ भी पहनी जा रही है

Devrani:han आज रविवार है न

Kamla:to आपने निर्णय ले लय

devrani:han कुछ हद तक

Kamla:iska मतलब

(कमला थोड़ा रुआँसी होती है)

Devrani:ary क्या हुआ

Kamla:matlab आप हमे छोर कर चली जाओगी आज रात को उस शेरसिंघ क साथ

devrani:hasti हुई "सुनो तो

Kamla:kya सुन न

Devrani:maine ये निर्णय लिया है क मई शेर सिंह को देखना चाहती हु और कुछ दिन उसके साथ रह कर ,उसका बर्ताव सही रहा तो ठीक नहीं तो चली आउंगी

kamla:mahrani तुम पागल हो

Devrani:q

kamla:jab तुम चली जाओगी एक बार तो कौन तुम्हे वापस राज्य में रखेगा महाराज राजपाल को तो जानती हो आप

devrani:kamla मेरी बहिन तुम्हे क्या लगता है मेरा कोई नै मेरा भाई देवराज ज़िंदा है मई उसके यहाँ चली जाउंगी

पर मुझे इस नरक से निकलना है इस नरक ने मुझे बहुत कष्ट डाई अब और नहीं

देवरानी क ायखो में ासु आ जाते है

कमला भी रोने लगती है

Kamla:par मेरा तो ठीक है पर बलदेव का क्या

देवरानी चुप होते हुए अपने आखो को पोछती है और

"बलदेव सदैव मेरे डिल में बस्ता है"

कमला गुस्सा हो जाती है

"तुम सही में सिर्फ अपना सोच रही हो और तुम ये बेवकूफी कर रही हो"

Devrani:mujhe ये बेवकूफी कई वर्ष पहले कर देना चाहिए था और बलदेव का ख्याल तुम रखोगी और उसे जब भी किसी चीज़ की ज़रूरत होगी तब में उसका साथ दूंगी

Kamla:Ek बात कहु बहन तुम निर्णय लेने में बिलकुल ठीक नहीं हो तुम ये निर्णय डिल से नहीं ले रही हो

देवरानी ये बात सुनती है और उसके डिल में बलदेव की बाटे यद् आने लगती है और मुस्कुराता हुआ चेहरा सामने आजाता है

kamla:Tumhara जब विवाह हुआ तो तुम्हारे पिता ने एक अधेड़ उम्र क साथ तुमसे बिना पूछे विवाह करा दया

तुम चुप रही !!!

तुम्हारे पति ने तुमसे दुव्यवहार क्या

तुम चुप रही!!!

तुम्हारे सौतन ने तुमसे दुश्मनी की

तुम चुप रही!!!

तुम्हारे महारानी बन ने क सपने को चकनाचूर कर दया गया

तुम चुप रही!!!

क्यू

बोलो

Devrani:q क इस समाज और धर्म क विरुद्धा में नहीं जा सकती

Kamla:nahi ,क्यू क तुम डरपोक हो महरानी

तुम्हे लड़ने से डर्टी हो तुम मरने से डर्टी हो,

आज में खुश हु एक सटी हो कर क्यू क मैंने समाज नहीं अपनी ख़ुशी देखि और क्यू क मई इस समाज से लड़ सकती हु इतनी हिम्मत है मेरे में और तुमने इस दर क वजह से अपनी ज़िन्दगी शुरू से अब तक ख़राब करती आयी हो

Devrani:bass करो तुम चुप हे नहीं रहती

Kamla:is नरक से भागने से नहीं होगा कुछ इस नरक को स्वर्ग बनाओ देवरानी

समाज को मत देखो अपने डिल की suno,aaj शेर सिंह की सुन रही हो कल अपने पिता की सुन कर अपना भविष्य खरब कर दया था

अपने डिल की सुनो दुसरो की मत सुनो

और कमला रट. हुए चली जाती है

देवरानी वही बैठ कर एक गहरी सोच में चली जाती है

तभी बलदेव इतनी आवाज़ सुन कर कक्षा में अत है तो देखता है उसकी माँ एक गहरी सोच में डूबी है

Baldev:kya हुआ माँ आप मायूस हो

देवरानी बलदेव क आखो में झक्ति हुई देखती है बलदेव की आखे कुछ कह रही थी जैसे

"माँ तुमसे बहुत प्रेम करता हु किसी क साथ मत जाओ"

Devrani:beta क्या में सही में ाचा निर्णय ले लेती हु तुम कह रहे थे एक दिन

Baldev:tum जो भी निर्णय लोगे माँ वो सही हे होगा

बलदेव हल्का सा मुस्कुराता है और देवरानी क. माथे पे एक हल्का सा चुम्मा लेता है

Baldev:maa तुम्हारा हर निर्णय ठीक है

देवरानी समझ रही थी क ये बात का अर्थ शायद बलदेव नहीं समझ रहा था

बलदेव से गले लगने क लये उठ टी है देवरानी और. बलदेव उसे अपने में समां लेता है जैसे कभी छोड़ेगा नहीं

devrani:man me)Baldev में समझ सकती हु पर क्या करू में मजबूर हु

बलदेव मन में) "माँ तुम्हारी ख़ुशी में हे मेरी ख़ुशी है तुम्हारे लये में अपनी क़ुरबानी दे सकता हु.

देवरानी से विदा ले कर बलदेव चला जाता है

और देवरानी उसे दूर तक जाते हुए देखती रहती है

"जीते रहो बीटा "

बलदेव मन me"maa अगर तुम्हे किसी और से व्याह रचना है इसलिए आज तैयार हुई हो शेरसिंघ से मिलने क लये तो में तुम्हे पंहुचा. दूंगा ऐसे इंसान क पास"
 
अपडेट 33

बलदेव को जाते हुए देखते देखते देवरानी वही अपने बिस्तर पर बैठ जाती है और पीछे बीती कुछ सप्ताह में बीती घटना को याद करती रहती है

बलदेव अपने काम से गहतराष्ट्रा की सीमा सुरक्षा क लये चला जाता है ऐसे हे संध्या हो जाता है

Kamla:mahrani चाँद निकल आये

devrani:Han कमला

kamla:to आप जाओगी हे क्या महरानी

Devrani:han मैंने वडा क्या था शेर सिंह को आज मिलने का

kamla;or मेरे और बलदेव क प्यार और वेड का क्या मेरा छोरो बलदेव का क्या

Devrani:kamla बताओ कैसे जाना है नदी पर

कमला देवरानी का मुँह देखती है जो उसकी बातो को अनसुना कर रही थी

kamla:me पीछे क रस्ते से आपको महल क बहार ले जाउंगी और नदी क रास्ता दिखा दूंगी आपको वो रास्ता नदी तात तक ले जायेगा जहा आपको शेर सिंह मिलेगा

devrani:to ठीक है सही समय बनते हे चलना है हमे

kamla:man me)kamini कही की

Devrani:kya कहा

Kamla:wo मने कहा ज़रूर महरानी

पर तुम बेगाने क लये अपनों का साथ छोर डौगी

उधर बलदेव सीमा पर जा कर अपने घोड़े को बांध देता है और एक नयी पोषक पहन लेता है और एक दूसरे घोड़े पर बैठ ता है और अपने चेहरे पर सर पे बंधे पगड़ी क निचले हिस्से से धक् लेता है जिस से उसको देवरानी पहचान नहीं पाए

Baldev:gusse में था और घोडा क लगाम को ढील देता है और घोड़े को कहता है

"चलो यार ज़रा अपनी मैया छुड़वा ले"

ये बलदेव क ऊपर मदिरा का असर था जो उसने गम में पीया था क उसके माँ किसी और क पास जा रही थी

वो घोडा भागता हुआ नदी क तात पर जा कर बैठ जाता है

इधर कमला क बार बार समझने पर भी देवरानी नहीं मानती और अपने कक्षा से अपने भगवन की मूर्ति लिए

Kamla;or कुछ नहीं चाहिए

devrani:nahi और कुछ नहीं चाहिए

कमला देवरानी को महल से ले कर बहार आने लगती है और देवरानी भी अपने पल्लू से मुँह धक् कर चलने लगती है

दोनों छुपे छुपाये महल से बहार निकलते है सब सैनिको क ायखो में धूल झोक कर और आखिर कर नदी क रास्ता पर आकर देवरानी को अलविदा कहने का समय आ गया था

kamla:Mahrani न जाओ रट हुए

devrani:kamla रट नहीं

kamla:tumhare पास कोई है अपना जो तुम्हारे इस नरक को स्वर्ग में बदल देगा और तुम इस बात को जानती है क वो कितना शक्तिशाली है

देवरानी इस बात को भाप लेती है क वो बलदेव क सिवा किसी और क संपर्क में नहीं है तो ये बात बलदेव की हे कर रही है " पर कैसे वो मेरा बीटा है धर्म और समाज नहीं मानेगा"

devrani:chup करो कमला ,फिर मिलेंगे

दोनों गले मिलते है और देवरानी नदी क रस्ते क तरफ चलने लगती है

बलदेव बैठा सोच रहा था क

ये साला शेर सिंह कितना भाग्य वाला है जिसे बैठे बिठाये देवरानी जैसी पत्नी मिल जाएगी वो भी मेरी गलती से

"पर मेने उसे अहसास दिलाया हे अपने प्यार का पर वो उसे धर्म क विरुद्धा मानती है तो में क्या करू"

"आखिर उसके भी अपने चाहत है "

"तो क्या मुझे माँ को रोकना चाहिए "

"उनके डिल में जब ये बात है क वो किसी और पुरुष से सम्बन्ध रखे तो हम कए कर सकते है"

देवरानी भी चलते जा रही थी और उसके मन में मंथन शुरू था

उसे कमला की कही हुई एक एक बात कण में गूंज रही थी

"कमला ने ठीक कहा मेरे चुप रहने क वजह से में अपने पिता की बात मन कर विवाह क्या फिर चुप रहने पर मेरे पति ने मेरा अधिकार नहीं दया क्यू क में समझती थी क पिता जी क फैसले क विरुद्धा जाना सही नहीं फिर सोची पति से बगावत करना जुर्म है फिर अपने ससुराल की प्रतिष्ठा बनाये रखने क वजह. से कभी किसी क साथ कोई गलत कदम नहीं उठाया पर अंतिम में मिला मुझे क्या

आज में अपने घर से भाग रही हु और मेरे जाने क बाद वही होगा जिस से बचने क लये में आज तक चुप रही वो है "बदनामी"

"पर अगर में रुक गयी तो भी बलदेव क प्यार को कैसे रोकूंगी में फिर भी में अधर्मी कहलाउंगी और तो और इसमें मेरे और बलदेव दोनों की जान ले ली जाएगी"

"हे भगवन में तो इस जीवन से तंग आ गई हु"

और वो पगडंडियों से जल्दी जल्दी नदी की ओरे चले जा रही थी

कुछ दूर चलने क बाद उसे नदी का तात दिखाई पड़ता है और वो वह अपना चेहरा छुपाये एक पुरुष को बैठा देखती है

देवरानी समझ जाती है यही शेर सिंह है फिर वो उसके पास चलने लगती है

बलदेव देखता है क उसकी माँ हकसी प्यासी हाथ में मूर्ति लये चली आ रही है तो जल्दी से उठ कर अपना घोडा लता है उसपे बैठ जाता है

बलदेव क आखो से ासु रुक नहीं रहे थे

बादेव अपने आखो को पोछता है

देवरानी बलदेव क समीप आ कर

devrani:tum आगये शेर सिंह

शेर सिंह बना बलदेव अपनी हाथ से इशारा करता है क घोड़े पे बैठ जाओ

देवरानी आगे की तरफ चलती है तभी उसके पैरो क अंगूठे में एक करा चुभता है जिस से उसके कोमल पेअर से खून निकलने लगता है

वो निचे बैठ कर देखती है

और अपने कटा निकलते हुए

मन में सोचती है" ये शेर सिंह देखो बैठा देख रहा है अगर बलदेव होता तो अब तक मेरे पास आजाता ,कमला सही कही क दूसरे दूसरे होते hai,or उसके कमला की बात याद आती है

"तुम डरपोक हो महरानी तुम में हिम्मत नहीं इसी डर क वजह से तुम्हारी ज़िन्दगी ख़राब है तुम लार नहीं सकती समाज से अपने ख़ुशी क लये "

देवरानी उठ टी है

"उसके आखो में ासु थे " एक दिन तो मरना हे है भगवन क्यों बुज़दिल की तरह मरू अगर मेरा बलदेव मुझे चाहता है और इस वजह से हमे मर दया जाये तो कौन सा हम 1000 वर्ष जीना है पर कुछ पल तो अपनी ख़ुशी क जी लुंगी"

और उसके मुँह से निकलता है " देवरानी डरपोक नहीं देवरानी लड़ेगी "

और वो पीछे मुद कर देखती है रास्ता बहुत लम्बा था वो मज़बूती से अपने मूर्ति को पकड़ती है

"भगवन मुझे शक्ति दे"

और देवरानी दौड़ने लगती है महल की ओरे ये देख क शेर सिंह उसके तरफ बढ़ रहा है

देवरानी अपने लम्बे पेअर से बहुत तेज़ी से दौर रही थी और शेर सिंह बना बलदेव आश्चर्य से देख रहा था

देवरानी कुछ हे पालो में शेरनी की तरह शेरसिंघ क आखो से ओझल हो जाती है

देवरानी क पेअर क अंगूठे से खून बह रहा था

और वो भागे जा रही थी

बलदेव जहा आश्चर्य चकित था और देवरानी क पेअर की अवस्था देख थोड़ा परेशान था वही उसे एक अलग हे प्रसन्नता हो रही थी. अपने माँ क निर्णय बदलने पर

बलदेव जा कर फिर से जा कर अपनी वेस भूसा बदलता है और अपने असली अवतार में अत है और अपने घोड़े से अपनी माँ क पेअर की चिंता लये घोड़े को दौरान लगता है

देवरानी भी थके हरे महल पहुंच जाती है और सबसे पहले रसोई में जा कर अपने आप को ठीक कर और हल्दी ले कर अपने पैरो में लगाती है फिर

"बलदेव में आगयी तुम्हारे पास"

कहा हो बलदेव"

मन में बोलते हुए बलदेव क कक्षा की ओरे जाने लगती है

देवरानी क जाने क बाद कमला अपनी जान भविष्य में बचने क लये और गुस्से में आकर बलदेव क कक्षसे हर पत्र जो देवरानी की थी उसे ढूंढ़ती है और उसे एकत्रित कर जलने लगती है

बलदेव क कक्षा क पास पहुंच कर देवरानी रुक जाती है और देखती है क कमला बैठ क कुछ जला रही है वो उसके करीब जाती है तो कमला रो रही थी

देवरानी की नज़र पत्र पर जाती है और वो अपनी लिखावट को देख समझ जाती है क ये तो वही प्रेम पत्र है जिसे मैंने शेरसिंघ को लिखा था

"पर ये सब कमला ले कर कैसे जला रही है और ये भी बलदेव क कक्षा में"

देवरानी को वो हर पुराणी बाते याद आने लगती है कैसे कमला उसे अपने बेटे क प्रति ज़ोर डालती थी और बलदेव का उतरा हुआ चेहरा

देवरानी तुरंत वह पर रखा गिलास का पानी उस पर रख पत्रों को जलने से बचती है

कमला तो अचानक से देवरानी को देख हिल जाती है

"देवरानी तुम"

देवरानी को समझते देर नहीं लगता क शेर सिंह कोई और नहीं बलदेव था

"हे भगवन"

और एक ज़ोर का छठा कमला को मरती है और वो सब पत्र ले कर अपने कक्षा की और भागने. लगती है

kamla:mahrani रुको

कमला आई मार खा क भी खुश थी क्यू क उसके महारानी देवरानी वापस आगयी थी

बलदेव महल पहुँचता है और अपने कक्षा की अस्त व्यथ हालत देख कर कमला से पूछता है

कमला उसको पूरा हाल बता देती है

वो दोनों देवरानी क कैशा की ओरे जाते है और उसका दरवाज़ा पीट ते है

baldev:Maa खोलो

kamla:mahrani आप मुझे जितना मरना चाहो मर लो पर मेरी बात सुन लो

Baldev:hume मुआफ कर दो माँ

kamla:meri जान ले लो लेकिन देवरानी आप कोई गलत कदम मत उठाना

देवरानी अंदर अपने बिस्तर पर लेती सुबक रही थी "भगवन मेरे हे जीवन में तुम हर कष्ट डाई ये लोग मुझे इतने दिन से छल रहे थे और में "और खूब रोटी है

कमला और बलदे देवरानी को कसम दे देते है क वो रोना बंद करे

तब जाकर देवनी रोना बंद करती है

आधी रात हो गयी थी

kamla:chalo बलदेव कल बात करेंगे

जाओ सो जाओ

baldev:tumhe. क्या लगता है क तुम सो पाओगे

Kamla:tumhe कल फिर सीमा पर जाना है तुम जाओ

कमला बलदेव और देवरानी पूरी रात सोच में हे निकल देते है और देवरानी का रो रो कर आँख फूल जाता है.

तो बे कंटिन्यू...
 
अपडेट 34

कल रात की हुई घटना डिल दहला देने वाली थी और हुआ भी कुछ ऐसा he,ek तरफ जहा देवरानी अपने आपको छाला हुआ मेषसुस कर रही थी वही बलदेव और कमला को भी अपने किये पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी

कमला और बलदेव सुबह उठ कर सबसे पहले देवरानी क कक्षा की ओरे जाते है पर दरवाज़ा अब भी बंद था फिर कमला अपने काम में लग जाती है और बलदेव अपने सीमा पर जाने की तैयारी करने लगता है सैनिको क साथ

देवरानी अब भी अपने बिस्तर में लेती सिसक रही थी

Devrani:Mere अपने हे हमेशा मुझे धोका डाई है दुसरो से क्या उम्मीद करू

देवरानी कल रात भी कुछ नहीं खाई थी इसलिए वो अब बहुत कमज़ोर महसूस कर रही थी तो देवरानी हिम्मत कर क उठ टी है उसके पेअर क में लगा काटा का घाव बन गया था

देवरानी क अंगूठे में घाव क कारन उसे चलने में हल्का घाव दुःख जाता वैसे ये तो छोटा हे घाव था पर देवरानी जिसके शरीर पर कभी उसके माँ बाप ने माखी नहीं बैठने दी उस कोमल सी देवरानी क लये ये दर्द भरा घाव था

देवरानी दरवाज़ा खोल कर क रसोई में जाती है और मटका से पानी निकल कर पीने लगती hai,kamla उसे देख

Kamla:aapne क्यू कष्ट किया महरानी मुझे बोलते

Devrani:mujhe झूटी और अपनों क साथ छलावा करने वाली से पानी तक नहीं पीना समझी

Kamla:aap मुझे जान से मार देना पर पूरी बात तो सुनो

Devrani:chall हट यहाँ से

Kamla:acha आप खाना तो खा लो

तभी वह बलदेव आ जाता है जो अपने कक्षा से कुछ ले कर सीमा पर जाने की तैयारी कर रहा था

Baldev:Maa ,आप खाना खाओ

और बलदेव भी अब रसोई में आ जाता है

devrani:kamla इस झूठे फरेबी से कह दो क अपना मुँह नहीं दिखाए मुझे दुबारा

और हाँ खाना मुझे जब खाना होगा तब में खा लुंगी तुम चिंता करने वाले होते कौन हो

देवरानी बलदेव को देखे बिना ये बात कहती है और अपने कक्षा की ओरे जाने लगती है

बलदेव गुस्से से टिमटिमाता महल क बहार चला जाता है

कमला देवरानी क पीछे चलने लगती है

देवरानी अपने कक्षा में घुसते हे ज़ोर से दरवाज़ा बंद करती है

kamla:mahrani आप बात मत करो खाना खा लो काम से काम

कमला कुछ देर कड़ी रह क समझा रही थी पर देवरानी की ज़िद्द क आगे वो घुटने तक देती है

Kamla:man में) अब तुम्हे कैसे बताये महरानी क हम तुम्हे कितना मानते है

इधर बलदेव भी सीमा पर पहरेदारी कर रहा था और सुबह से हे सैनिको पर गुस्सा हो रहा था उसका ये रवैय्या देख कर सब परेशां था क आज बलदेव ऐसा कैसे हो गया

बलदेव सीमा पर एक बंकर में बैठा

"माँ अगर में कोई नहीं होता तुम्हारा जब में पापी हे हु तो आज क बाद अपना चेहरा नहीं dikhaunga"or उसके आखो में ासु आजाते है

शाम का 4 बज जाता है और देवरानी की हालत ख़राब होने लगती है भूक se,wo बहार आ कर देखती है ,राधा कुछ काम कर रही थी

Devrani:radha कुछ खाने क लये है

Radha:man me)ye देवरानी को आज क्या हुआ आज मुझे बुला रही है

Radha:ji मालिकिन और वो कुछ खाने को देती है

"ये लीजिये मालकिन"

Devrani:dhanywad राधा

और देवरानी खाने लगती है

radha:malkin वो कमला कहा है आज

देवरानी चुप रहती है फिर

"होगी कहा जहाँ काम करना है वह"

राधा देवरानी का गुस्सा देख "दाल में ज़रूर कुछ कला है"

सोचते हुए चली जाती है

देवरानी खाने तो बैठ गयी थी पर थोड़ा खाने क बाद उसे खाया नहीं जाता और वो उठ क फिर अपने कक्षा में चली जाती है

सूर्यास्त का समय हो गया था तभी कुछ घोड़े गहतराष्ट्रा की सीमा की तरफ आते हुए बलदेव को दीखते है

Baldev:Sainiko फंदा तैयार करो

सैनिक रस्सी क फंदे बने हुए पाकर कर बैठ जाते है

जैसे हे घोड़े और पास आते है

बलदेव गौर से देखता रहता है और उसे उस घोड़े पे उसके पिता राजपाल दिखाई पड़ता है

Baldev:sainiko फंदा हटाओ

बलदेव एक सैनिक से

"तुम जा कर खड़े हो जाओ वह पे वो पिता जी है"

एक सैनिक रस्ते पे खड़ा हो जाता है और गहतराष्ट्रा की ओरे जा रहा राजा राजपाल वही अपने सैनिको क साथ घोडा रोक देता है

sainik:maharaj की जय हो

राजपाल सैनिक को देख मुस्कुरा क सर हिलता है

बलदेव पीछे से आ कर "महाराज "और अपने पिता का पेअर छू लेता है

राजपाल घोड़े पे हे बैठा रहता है

"कैसे हो पुत्र"

"ठीक हु पिता जी"

rajpal:waise नाकाबंदी अछि लगाई है बलदेव तुमने"

बलदेव मुस्कुरा कर "हाँ वो आपके सुचना मिलने पर"

rajpal:chalo ऐसे हे डेट रहो सुरक्षा तो अब तुम्हे हे करनी है गहतराष्ट्रा की

Rajpal:Ghar चलो

Baldev:nahi में आधी रात हे आऊंगा जब तक सुनिश्चित न हो जाये क दूर दूर तक कोई आक्रमणकारी सीमा तक नहीं

Rajpal:jeeyo तुम हो असली उत्तराधिकारी गहतराष्ट्रा क

राजपाल महल चला जाता है और बलदेव अपना काम ख़त्म कर क मदिरा पीने

कुछ सैनिको क साथ बैठ क खूब पीटा है

sainik:bass करो युवराज आप अपने होश खो बैठे हो

Baldev:mujhe जीना नहीं मुझे पीना hai(latpatakar)

कुछ देर यु हे पीने क बाद वो एक सैनिक क साथ अपने घोड़े पे बैठ महल की ओरे चल देता है

राजपाल महल पहुंच कर सब से मिलता है फिर अपने माँ से जा कर आशीर्वाद लेता है और दूर का सफर करने से वो थक चूका था तो जा कर तुरंत सो जाता है

आधी रात बलदेव अपने घोड़े से उतरता है और उतारते साथ हे गिर जाता है

sainik:yuvraj संभल क

baldev:ary में संभाला हे हु अब तू मुझे सिखाएगा कैसे चला जाता है

सैनिक बलदेव को किसी भी तरह अंदर लता है और उसको कक्षा की ओरे ले जा रहा था

कमला :है दय्या क्या हुआ बलदेव को

sainik:kuch नहीं बास इन्होने मदिरा ज़्यादा चढ़ा ली

कमला भी सैनिक का साथ देने लगती है

आवाज़ सुन कर देवरानी भी अपने कक्षा से बहार आती है

तो बलदेव को ऐसे नशे में बेसुध देख कर

"nasheri,ab ये सब भी शुरू कर दया" देवरानी ये बात धीरे से बोलती है पर कमला उसकी बात सुन ली थी

कमला बलदेव को ले जा क उसके बिस्तर पर लिटा देती है

सैनिक चला जाता है

कमला जैसे जाने को होती है

बलदेव उसका हाथ पाकर कर

"देवरानी मत जाओ मुआफ करना मत जाओ माँ"

Kamla:beta में कमला हु देवरानी नहीं

कमला उसके मुँह पे हल्का पानी मरती है

बलदेव थोड़ा होश में अत है

Kamla:kyu पी तूने इतना जब तुम्हे नहीं पचती

Baldev:to क्या करू कमला

Kamla:tumhare मुँह से बोली नहीं निकल रही

कल से में तुम्हे देख रही हु तुमको

Baldev:Me मर जाऊँगा कमला

Kamla:shubh शुभ बोलो

Baldev:nahi रह सकता में देवरानी क बिना

Kamla:zara होश में रहो महाराज राजपाल भी है यहाँ

Baldev:mujhe किसी की परवाह नहीं

कमला को ये बात बलदेव अपनी आखे बंद कर लेता है और कमला उसकी हालत देख बहुत दुखी होती है और वो भी महल से छुट्टी ले कर अपने घर चली जाती है

सुबह की किरण बलदेव क चेहरे पर पड़ती है और वो उठ ता है तो अपने आप को आसमान रूप से अपने बिस्तर पे लेता पाया

उसे याद आता है कल का थोड़ा बहुत और वो स्नान करने चला जाता है

तैयार हो कर महल से बहार निकल कर दरबार जो क सामने थे वह जाता है

सब युवराज की जय जयकार करते है

दरबार में सब बैठे थे आज राजपाल कई दिनों बाद अपने राज दरबार में था

वो बलदेव को भी बैठने को कहते है

बलदेव जा कर देवरानी क बगल में बैठ जाता है

देवरानी की ओरे बलदेव देख रहा था पर देवरानी बिना पालक झपकाए सामने हे देख रही थी जैसे क थान ली हो क बलदेव को नहीं देखना है

सभा ख़तम किया जाता है और सब उठ कर जाने लगते है

बलदेव भी महल क मुख्या द्वार से अपने कक्षा की ओरे बढ़ रहा था तो उसे देवरानी क हसने की आवाज़ आ रही थी

राजपाल और देवरानी देवरानी क कक्षा क गलियारे में पाए क पीछे खड़े थे और बात कर रहे थे

बलदेव अपने पेअर जमा लेता है और कनखीओं से उस तरफ देवरानी और राजपाल को हस्ते खिलखिलाते देख रहा था

Devrani:haha आप भी न महाराज बूढ़े हो गए पर

Rajpal:abhi बूढ़ा नहीं हुआ

राजपाल देवरानी को अपने बाहो में ले लेता है

बलदेव सीधा खड़ा हो कर देखता है तो राजपाल की पीठ क तरफ खड़े होने क वजह से राजपाल उसे देख नहीं पता

पर जब देवरानी गले लगती है तो सामने बलदेव को देखती है और एक गुस्से क निगाह से बलदेव को जलने क. lye"aaah" "महाराज आप भी न क्या करते hai"hasti हुई

राजपाल अब देवरानी क गांड क पास हाथ रख दया था.

और बलदेव अपने माँ को ऐसा देख जल भून जाता है और देवरानी सीधी कड़ी हो कर राजपाल का हाथ अपने हाथ में फसा कर

"चलिए न महराज"

और उसको अपने कक्षा में ले कर चली जाती है

बलदेव क आखो क सामने अँधेरा छ जाता है

वो अपने कक्षा में जा कर लेट जाता है
 
अपडेट 35

राजपाल क साथ जाते देख बलदेव को रहा नहीं जाता है और वो गुस्से में आकर अपने कक्षा में आ कर लेट जाता है

कक्षा साफ़ सफाई क लये जब कमला आती है

तो बलदेव को ऐसे हाल में देख उसे बहुत दुःख होता है "आज बताती हु इस महारानी की बची को मेरे बचे का ऐसा हाल कर दी"

आज दो दिन से लगातार मदिरा पीने से बलदेव बहुत कमज़ोर दिख रहा था उसके आखो क निचे निशान आगये थे जो खुला बता रहा था क नींद नहीं पूरी होने और नशे का असर hai,par बलदेव को कोई पूछता तो वो कह देता है क उसके दिन रत सीमा को सुरक्षा देने पर उसकी हालत ऐसी हुई है

देवरानी शाम को पूजा करती है माथे पे सिंदूर लगाती है और भगवन से प्राथना करती है "भगवन मेरे हे जीवन में. क्यू इतनी उथल पुथल मची है क्या मुझे खुश रहने का हक़ नहीं ,हर कोई मुझे धोका देता hai,pehle पिता जी ने कहा "बेटी तुम्हे इस से सुन्दर वर और ससुराल नहीं मिलेगा राज करोगी तुम गहतराष्ट्रा me"or आज बीटा झूट बोल रहा है और मेरे साथ सडयंत्र रच रहा है

अपने माँ को भोगने की बात या प्रेम की बात वो किसी और से कैसे कर सकता है मेरी प्रतिष्ठा का ख्याल नहीं आया उसको ,और शेर सिंह बन कर मुझे पाने क फ़िराक में था

कमला टाक में बैठी थी क महल में कब शांति हो सही समय मिलते हे वो देवरानी से बात करे

देवरानी क मुख से भजन सुन कर वो उसके कक्षा में जाती है और उसके पूजा ख़त्म होने का इंतज़ार करती है

थोड़े देर में पूजा ख़त्म कर क देवरानी मुड़ती है तो वो कमला को पति है

Devrani:ab तुम क्यू आगयी यहाँ

Kamla:aap से कुछ बात करनी है

Devrani:mujhe तुम से कुछ बात नहीं करनी

Kamla:par मुझे करनी है

Devrani:Chillate हुए "तुम्हे तो जो करना था. वो तुमने कर लय

Kamla:chilllao मत लोग सुनेंगे तो तुम्हारी हे बदनामी होगी

Devrani:ab क्या बाकि रह गया बदनाम तो कर हे दिया तुम ने और बलदेव ने

Kamla:kaise हुई बदनाम भला हमने कौन सा ढिंढोरा पीट दया है गहतराष्ट्रा में क बलदेव तुमको प्यार करता है

devrani:chup कर कामिनी तेरे मुख से ये बात सोभा नहीं देते

Kamla:Batao कैसे हमने तुम्हे धोका दया और किस बात का तुम्हे दुःख है

devrani:baldev ने मेरे साथ छलावा क्या मुझे पाने क लये भेस बदला

उसने तो हद्द हे पर कर दी अपने माँ को पाने क लये अपनी माँ की दासी को भी सब बता दया

कमला ये बात सुन कर रो देती है

Kamla:bana दया न एक पल में बेगाना मेरे 18 का सेवा और ईमानदारी तुमने एक पल में दासी बना दया मेरी गलती थी जो में तुम्हे अपनी छोटी बहिन समझ रही थी

सुनो देवरानी ये बात सच है क हमने झूट कहा ,बलदेव ने अपनी भेस बदली जो नहीं करना था पर ये सोचो हमने किस लिए क्या

हमने सिर्फ तुम्हारी ख़ुशी क लये क्या

और तुम्हे इस बात कटे खाये जा रही है न क ये बात मुझे कैसे बताया बलदेव ने तो सुनो उसने नहीं बताया बिचारे ने मैंने हे उसके डिल को भाप कर जबरदस्ती उसके मुँह से बात निकलवाई क वो तुमको चाहता है नहीं तो वो बेचारा तुम्हारे इज़्ज़त क डर से बोल हे नहीं रहा था

और मुझे पता चल गया तो तुम्हे दुःख है क्यू क में अब तुम्हारी बड़ी बहिन जैसी नहीं सिर्फ एक दासी हु जो तुम्हारे लिए सिर्फ बुरा सोचती हु

देवरानी ये सुन कर स्तब्ध हो जाती है

"कमला मैंने ऐसा तो नहीं कहा"

kamla:chupo तुम वो तो बलदेव पागल है जो तुम्हारे चक्कर में पद गया वो तो ऐसा है क न जाने कितनी राणिओ को भोग लय होता अब तक पर वो किसी और की तरफ देखता तक नहीं

देवरानी ये मत कहना क बलदेव हे जिम्मेदार है भले हे शुरुवात उसने की पर तुम्हारा डिल भी दोल गया था उस पर और तुम दोनों का चिपकना और छेड़खानी में देख रही थी

देवरानी इस बात को सुन सर निचे कर लेती है

Kamla:rote हुए महारानी झूट मत कहना मत डरो मुझ से मत डरो इस समाज से आपका कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता जब तक आप बलदेव क साथ सच बताओ

"क्या तुमने कभी एक स्त्री की तरह बलदेव को चाहा नहीं"?

देवरानी चुप हे रहती है उसके पास कोई उत्तर नहीं था

Kamla:tumhari ख़ामोशी इस बात का सुबूत है क तुम भी उसे पसंद करती हो

कमला अचानक से देवरानी क पैरो पर बैठ जाती है

"महरानी दया करो बलदेव पर वो दो दिन से न तो खा रहा है और बास मदिरा पी कर अपने जान गवाने पर लगा हुआ है

"

देवरानी क आखो में हल्का ासु आ जाता है "उठो कमला मेरी बहिन"

कमला देवरानी को पूरी कहानी बता देती है कैसे उसने और बलदेव ने सिर्फ देवरानी क ख़ुशी क लये ऐसा क्या

"और तो और महरानी बलदेव तो इतना तक शपथ ले लय था क अगर तुम्हे शेर सिंह हे चाहिए तो वो किसी और से आपका विवाह करवा देता"

ये बात सुन देवरानी अचंभित थी

"हाँ महरानी उस दिन अगर आप घोड़े पे बैठ जाती तो वो आपको एक राजा क पास छोर देता था जो आपके मर्ज़ी से आपसे विवाह करता"

अब बलदेव आपके बिना नहीं जी सकता वो कहता है क वो जान देगा अगर तुम उसे न मिली तो अगर तुम उस दिन चली जाती तो पक्का वो गहतराष्ट्रा छोर चला जाता या मर्डर जाता था

"कल रात भी वो कह रहा था क वो मर जायेगा अगर तुम नहीं मिली तो"

Devrani:par में कैसे क्या करू ये समाज और धर्म हमे जीने नहीं देंगे कमला

Kamla:apni ख़ुशी मार क ऐसे भी कौन सा तुम ज़िन्दी हो तुम तो मरी हुई ho,is से ाचा तुम खुश हो कर मारो

Devrani:wo कहा है अभी

Kamla:wo अधिकतर गहतराष्ट्रा क सीमा पर हे होता है सुरक्षा क लये

देवरानी को समझा कर कमला विदा लेती है पर देवरानी क दिमाग पे सोचो का पहाड़ छोर देती है

devrani:ye लड़का भी न कैसे मुझे किसी और क साथ विवाह करवा देता और अपनी जान भी दे deta,apne प्रेम की बलि देने वाला था बलदेव और मैं उसे गलत समझी

जो व्यक्ति अपने प्रेम की बलि दे सकता है जान दे सकता है मेरे लये वो मेरे इज़्ज़त कभी नहीं ख़त्म होने देगा और न हे मेरा साथ छोड़ेगा

वो मुझे कहता भी तो कैसे कहता अपने डिल की बात

ये सोचते हुए देवरानी क लैब से निकलता है

"पागल प्रेमी" और उसके मुख पर हलकी मुस्कान आजाती है

रात देर तक देवरानी बलदेव का इंतज़ार करती है आधी रत मदिरा में डूबा बलदेव

आता है और उसको देख देवरानी

"बलदेव" पुकारती है और बलदेव उसको अनसुना कर क चला जाता है

अगले दिन भी देवरानी कोशिश करती है पर वो अपने होश खो बैठा बलदेव से बात नहीं कर पति और घर में राजपाल क रहते हुए वो खुल्लमखुल्ला इस मुद्दे पर बात भी नहीं कर सकती पता नहीं बलदेव नशे में क्या कह दे सबके सामने.
 
अपडेट 36

पिछले दो दिन क प्रयास क बाद देवरानी अब समझ गई थी क बलदेव से बात करने क लये कुछ और रास्ता निकलना पड़ेगा

आज पुरे 4 दिन हो गए थे बलदेव और देवरानी क बीच दूरिया आये हुए और इन चार दिनों में हे दोनों ऐसा महसूस कर रहे थे जैसे सालो से बिछड़े हो

देवरानी का सुबह सवेरे आँख खुलता है

devrani:man में )आज तो इस लड़के से बात कर क रहूंगी ,मेरी हे गलती थी उसे गलत समझ ली मई जो एक सच्चा आशिके है उसे में हवस का पुजारी समझ बैठी पर वो तो मेरे लये खुद बलिदान देने का निर्णय कर लिया था

बलदेव क बारे में सोच कर वो स्नान घर में जा कर अचे से अपने को रगड़ क साफ़ करती है और फिर एक गहरे गले का छोटा सा ब्लाउज पहन लेती है जिसमे देवरानी क वक्ष डाब गए the,mathe पे बिंदी और सिंदूर रख लेती बालो में चमेली क फूलो का गजरा लगा खूब सजती सवारती है और तैयार होती है

आईये क सामने खड़े हो कर अपना रूप सवारती सोचती है "बीटा आज तो तेरे पे ऐसे बिजलिया गिरौंगी क." और मुस्कुराती है अपने भरी शरीर को देख क

अपने कक्षा बहार निकल कर जैसे हे रसोई की ओरे घूमती है उसे सामने से आता बलदेव देख लेता है और देवरानी एक मतवाली चल से रसोई में घुसती है

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उसके भरी कूल्हे देवरानी क हल्का झटका देने से एक रिठाम से थिरक रहे थे और उसके बड़े दूध थैलिया तो मानव अब दूध फैट जायेगा और बह जायेगा इतने हिल रहे थे

बलदेव ये दृश्य देख सब नशा और गम भूल जाता है और अपनी माँ की ऐसी चाल देख उसका लैंड खड़ा हो जाता है

तभी सब एक एक कर क खाना खाने आ जाते है राजपाल बहुत दिनों बाद गहतराष्ट्रा लौटा था अधिकतर सब क साथ में हे खाना खता था

भोजन रसोई में तैयारी करने में लगी थी राधा और कमला और उनका साथ दे रही थी हमारी महारानी देवरानी

राजपाल और बलदेव साथ बैठे थे और सामने बैठी थी षुरूश्ती

अब कमला खाना ले कर आती है और खाना लगाने लगती है

Devrani:ary कमला छोरो में लगा देती हु

सब अपने आसान पर निचे बैठे हुए थे और देवरानी सब को भोजन पड़ोस रही थी अब बलदेव को पडोसने की बरी थी

देवरानी हल्का सा अपना पल्लू खिसकती है और बलदेव की तरफ घूम क झुक जाती है और उसको खाना पड़ोसती है ,बलदेव अपना सर झुकाये रहता hai,ab देवरानी सब्ज़ी का बर्तन उठा क

devrani:Ye लोगे

बलदेव चुप रहता है

Devrani:Bolo ये लोगे क्या

बलदेव मजबूरन अपना सर ऊपर उठा ता है और देखता है

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देवरानी झुकी हुई अपने दूध की गहरी घाटी बलदेव क तरफ कर देती है

devrani:loge ये ?

बलदेव की आखे उसके बड़े मम्मो पर थम जाती बज

बलदेव: क्या ?

Devrani:ab भी नहीं दिख रहा क्या ?

लोगे या नहीं?

Baldev:han..wo नहीं...

बलदेव उसके भरी मम्मी और उसके ऊपर इतने बड़े निप्पल जो उभर कर दिख रहे थे देख उसका लैंड उठ ने लगता है

Devrani:han या नहीं?

तुम्हे तो पसंद थे न ये

Baldev:kya

Devrani:apne दूध में हल्का सा ढील देती है और " ये गोभी और उसके साथ मटर"

Baldev:Par अब मेरा डिल नहीं इस गोभी और इस मटर क डेन में" बलदेव उसके दूध और उसके दूध क डेन को देख बोलता है

devrani:Maharaj इस लड़के का रोज़ रोज़ डिल बदलता है कुछ समझाइये इसे

rajpal:beta माँ दे रही है गोभी खाने को तो खाओ na,khane में मत शर्माओ

ये सुन कर क उसका बाप हे उसके माँ क गोभी जो क देवरानी अपने वक्ष को निशाना बना क्र बताया था ,खाने को कह रहा है

Baldev:theek है दो

देवरानी एक क़ातिल मुस्कान से उसे पड़ोस देती है

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और दूर कड़ी हो कर उसे कहते हुए देखने लगती hai,sochti है

"बलदेव अब तुम हे मेरे सब कुछ हु अब मेरे अंदर की औरत जाग गयी है जिसे सिर्फ अपने ख़ुशी की परवाह है और तुम्हारे प्यार और ख़ुशी की परवाह है किसी नियम किसी समाज की nahi,ab जो बचे दिन है ज़िन्दगी क तुम्हारे साथ हे मस्ती में बिताउंगी इसके लये में समाज से क्या भगवन से भी लड़ लू"

इतने में बलदेव अपना सर खाने से हटा कर देखता है क अपने माँ जो मुस्कुरा रही थी

Devrani:beta ये गोभी और दू( अपना सर अपने दूध क तरफ इशारा करती है)

फ़िक़र मत करो ये मेरे पसंद क बड़े बड़े चुन क मैंने गोभी बनाये थे

बलदेव इस बात का मतलब समझ कर उसको खाना सरक जाता है और वो एक हिचकी लेता है

Devrani:aaram से धीरे से खाओ ये गोभी कही भगा नहीं जा रहे बीटा

और उसके आखो में देख

"तुम्हारे हे hai,jiska खाने का था खा लिए अब बास तुम्हारा हिस्सा हे hai,tumhe हे खाना है"

ये बात सुन कर बलदेव का गुस्सा जैसे छू हो जाता है क बलदेव उसे खुला निमंत्रण दे रही थी और वो हल्का सा मुस्कुरा देता है

पास में कड़ी कमला ये सब बात सुन रही थी और शर्म क मरे निचे देख रही thi"ye देवरानी तो आज मुझे भी पीछे छोर दी खुल क रान्दीपना कर रही है बीटा को रिझाने में पति क सामने"

देवरानी काम बनते देख चलने लगती है अपने कक्षा की ओरे

और अपने चुतर को खूब झटकते हुए चल रही थी

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बलदेव बड़ी बड़ी गांड क थिरकन को महसूस और दोनों गांड क पैट रगड़ें देख रहा था तभी देवरानी पीछे मुड़ती है

Devrani:baldev कैसे लगे ख़रबूज़े ?

बलदेव सकपका जाता है उसके माँ अपने गांड क बारे. में पूछ रही थी

Baldev:wo अभी तक चखा नहीं में आम खा रहा हु

devrani:kharbooze भी वही है उसपे भी धयान दो

अब देवरानी की बात सुन बलदेव भी शर्मा जाता है और सर निचे कर लेता है

kamla:mahrani आप भी खाय लो न

देवरानी बलदेव की तरफ देख कर "वैसे भी मुझे ये सब फल पसंद नहीं तुम केला ले आओ मेरे कक्षा में खा लुंगी" और एक आँख मरती है बलदेव को

kamla:theek है में ले आउंगी महरानी

बलदेव खाना खता है और अपने पिता जी से बात करते हुए राज दरबार आता है जहा उसे सेनापति क साथ गहतराष्ट्रा की सीमा पर जाना था

देवरानी अपने कक्षा में जाती है और एक कलम उठा कर एक कोरे कागज़ पे कुछ लिखने लगती है

Devrani:kamla इधर आना

kamla:ji महरानी

देवरानी उसे पत्र देती है

kamla:ye क्या है

devrani:sharma कर प्रेम पत्र

Kamla:aay है देखो कितना शर्मा राई है अभी थोड़ी देर पहले तो बलदेव की हालत ख़राब कर. दिया था अपने

तड़प रहा होगा उसका बदन प्यार क लये

ये बात सुन कर देवरानी और शर्मा जाती है

devrani:ab क्या बताऊ में तुम्हे कमला मेरे पास चारा नै

Kamla:sahi जा रही हो ,जी लो अपनी ज़िन्दगी

और ये पत्र में तुम्हारे प्रेमी तक पंहुचा दूंगी

ये सुन कर देवरानी दौर कर अपने पलंग पर उलटी हो कर लेट जाती है तकिये को अपने मुँह से दबाये शर्माती है और कुछ सोच कर मुस्कुरा देती है..

Kamla:ary रे बन्नो अभी से इतना शर्माना क्या अभी कौन से सुहागरात है आज आपकी

Devrani:ab बास करो जाओ मुझे इस बारे में कुछ बात नहीं करनी

Kamla:ary भाई अब तो हम जायेंगे हे ,प्रेमिका को प्रेमी मिल गया तो हमारा क्या काम

Devrani:ary मत करो न

Kamla:ary लाधो शर्माओ नहीं में जाती हु यहाँ पर लेते लेते खूब सपने सजा लो अपने आशिक़ क

ये सुन कर लज्जते हुए

Devrani:kamla..

कमला चली जाती है और पत्र को बलदेव को देने क लिए छुपा लेती है
 
थैंक यू एवरीवन फॉर सपोर्टिंग थिस story.I ऑलवेज तरय तो अपडेट थिस स्टोरी ों डेली बेसिस बूत िफ़ सम डे िफ़ ी don't गिव अपडेट प्लीज दो नॉट मंद ,सोमेतिमेस ी don't गेट फ्री टाइम.

टॉकिंग अबाउट पारस scenes,Shamshera एंड भूरिया अरे मैं चरक्टेर्स ऑफ़ थिस स्टोरी आफ्टर बलदेव एंड देवरानी एंड तेरे स्टोरी विल बे आल्सो अपडेटेड अस पैर plan.Upcoming उपदटेस वोउल्ड बे मजोरलय फोकस्ड ों गहतराष्ट्रा बूत तेरे वोउल्ड बे फ्यू ग्लिम्प्सेस फ्रॉम पारस अस वेल.

आल ी नीड इस यू गाइस सपोर्ट थिस स्टोरी अस यू अरे दोंग आईटी नाउ.

थैंक्स
 
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