Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 5 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 37

देवरानी ने मैं से बलदेव को स्वीकार लिया था और उसने पत्र लिख कर बलदेव को अपनी स्वीकृति भी दे दी थी बस वो इंतज़ार कर रही थी कब बलदेव उसके पत्र का उत्तर देता है

आज सुबह की घटना क बाद बलदेव का मन नहीं लगता है सीमा पर उसे रह रह क आखो क सामने देवरानी क सुबह का दृश्य आजाता है

Baldev:man me)aaj मदिरा क्या पीना देवरानी ने अपने बड़े वक्ष और चुतर दिखा कर मुझे नशा चढ़ा दया hai,Jis दिन हाथ आगयी न तो उसको. इतना मसलूंगा क सब अंगड़ाई लेना निकल दूंगा" ये सोच कर बलदेव अपनी इस सोच पर मुस्कुरा देता है क वो कैसे अपने हे माँ को रगड़ने की सोच रहा है

देवरानी आज जल्दी से रात का खाना खा कर अपने कक्षा में आ कर सो जाती है उसे दर था कही न कही बलदेव का सामना करने से

बलदेव आज जल्दी पहुंच कर अपने कक्षा में जाता है तो उसका कक्षा एक साफ़ सुथरा और उसके लिए 56 भोग रखा हुआ था खाने क लये

Kamla:kya हुआ युवराज आप हाथ मुँह धो कर आईये

बलदेव अपने अश्त्र शाश्त्र निकल कर अपने. कपडे बदल कर हाथ मुँह धो कर अत है

Kamla:kya बात है युवराज आज होश में हो मदिरा नहीं चढ़ाई

Baldev:han वो..

kamla:Han क्या सुबह में महरानी को देख तुमने आखो से पी लिया

बलदेव ये सुन कर मुस्कुराता है

Baldev:tumhe बड़ा दुःख हो रहा है अपने महरानी क लिए

कमला उसको साडी बात बता देती है क कैसे देवरानी को कमला ने पूरी हकीकत बताई और वो हमे गलत नहीं समझती

Baldev:aaj कक्षा ज़्यादा साफ़ सुथरा लग रहा है और ये पकवान इतने सरे व्यंजन

kamla:Bechari देवरानी तुम्हे मानाने क लये सुबह से तुम्हारे कक्षा की साफ़ सफाई की ,बिस्तर झड़ी और उसके चादर बदले ,तकिये का खोल badla,tumhare सब गंदे कपडे धोये और ये सारा तुम्हारे पसंद का पकवान बनाया

बलदेव ये सुन कर स्तब्ध हो जाता है

Baldev:Itna सब कुछ अकेले

kamla:han मैंने कहा में करती हु तो वो मन कर दी ये कह कर " ये. मेरा काम है मेरा धर्म है"

Baldev:pagal है वो

kamla:wo अभी प्रेमिका नहीं बानी और अभी से तुम्हरे हर काम करना शुरू कर दी जैसे तुम्हारी पत्नी है वो और वो पत्नी धर्म निभा रही हो

ये सुन कर बलदेव शर्मा कर लाल हो जाता है

kamla:aah है देखो तो पति जी क चेहरे की लाली

Baldev:ab मुझे महराज कहना शुरू कर दो

kamla:wo क्यू

Baldev:q क तुम्हारी महरानी अब मेरी हो jayegi,tumhare महरानी का महराजा मई बनूँगा

Kamla:itni जल्दबाज़ी मत करो वो महरानी है मुँह जल जायेगा इतना गरम खाओगे तो युवराज

Baldev:tumne फिर युवराज कहा ,और जितनी भी

गरम हो तुम्हारी महरानी मेरे पास आते हे ठंडी कर dunga,muh तो जलने की दूर की बात है

Kamla:sharma जाती hai..theek है बाबा तुम समझे देवरानी समझे ये लो तुम्हारा प्रेम पत्र"

कमला प्रेम पत्र अपने ब्लाउज से निकल कर दे देती है

बलदेव भोजन करता हैं फिर कमला बर्तन सब उठा कर रसोई में ले जाती है

बलदेव अपने बिस्तर पैर लेते हुए पत्र खोलता है और पढ़ना शुरू करता है

प्रिय शेर सिंह उर्फ़ बलदेव जी

आशा करती हु आप अभी मेरा पत्र देख मुस्कुरा रहे honge,me आपको सदैव ऐसे हे मुस्कुराते रहते देखना चाहती हु और उसके लिए में अपनी प्राण भी त्याग दू तो मुझे परवाह नहीं होगा

बलदेव मैंने हर

एक बात कमला द्वारा जान ली हु और

तुम्हारे हर निर्णय की वजह सिर्फ में हु और मेरा दुःख hai,mai हे पागल थी जो तुम्हे एक हवसी और मेरे मान सम्मान की परवाह न करने वाला समझ लय क्यू क

तुम मुझे पाने क लये शेर सिंह का भेस अपनाया जिसके वजह से मुझे लगा तुम मेरे जिस्म को पाने क लये किसी हद्द तक गिर सकते पर में गलत थी

तुमने मुझे पाने क लये कमला से मदद. ली जिस से मुझे लगा तुम मेरी मन मर्यादा दुन्या क सामने उजागर कर क मुझे बदनाम कर डोज पर में गलत थी

कमला ने बताया कैसे तुमने मेरे लिए किसी शेर सिंह नमक व्यक्ति क चयन कर लय था यदि में उस दिन घोड़े पे बैठ जाती तुम मुझे उसके पास छोर देते

तुम मेरी ख़ुशी क लये इतना बड़ा बलिदान देने जा रहे थे

मई ने जीवन में किसी से पहले प्रेम नहीं क्या विवाह तो मेरे पिता जी ने जबरदस्ती करवा दी

मेरा पहला प्रेम शेर सिंह है या शायद बलदेव मुझे नहीं पता पर तुम दोनों क लये मेरे दिली में प्रेम क जज़्बात ए और जब अब ये बात हे ख़त्म हो जाती है क में किसका चुनाव करू

मेरे डिल ने पहली बार किसी क सपने सजाये वो था शेर सिंह और किसीने अपने प्यारी बाटे और मेरा ख्याल रख कर मेरे डिल को भय वो था बलदेव

बलदेव उर्फ़ शेर सिंह जी मेरा जीवन अब आपके नाम बास ये डिल कभी मत तोडना क्यू क एक औरत हर मर्यादा नियम और धर्म क विरुद्धा जा कर फैसला लेती है तो उसके साथ कुछ गलत हो तो वो दुबारा अपने जीवन में वापस नहीं जा सकती है.

आपकी देवरानी

देवरानी का पत्र पढ़ कर

"ये औरतो को समझना बहुत मुश्किल है "

"देवरानी तुम्हे किसी से भी प्यार हुआ हो पर बनोगी तो मेरी हे "

पत्र को रख कर बलदेव गहरी नींद में डूब जाता है.
 
अपडेट 38

आज का सवेरा बलदेव और देवरानी क लये एक नयी आस ले कर आया था और खास कर क ये सवेरा देवरानी क जीवन को जो हमेशा से अँधेरे में रही प्यार को तरसती रही उसे उसका हक़ दिलाने क लये आया था

बलदेव इतना खुश था क वो रात में अचे से सो नहीं पता है और हर घंटे उठ कर बैठ जाता है और उसका डिल करता है के वो देवरानी से मिले जा कर क और वो कभी उठ था तो कभी बैठ ता कभी टहलने लगता है रात भर कैसे भी निकलता है और सुबह होते हे ख़ुशी क मारे जल्दी जल्दी स्नान कर क क तैयार होजाता है

उधर देवरानी जिसका भी हाल कुछ बलदेव सा हे था वो अपने आपको रात भर बिस्तर पर इधर से उधर पलट टी रही और जब भी आखे बंद करती उसे बलदेव हे दिखाई पड़ता है और वो इस बात को अपने डिल से मान लेती है क बलदेव हे उसका पहला और आखिरी प्यार है

Devrani:man में) भगवन में मुझे पहले बार मेरे डिल में प्यार डाला है और मुझे ऐसे अहसास हुआ आज 35 वर्ष की आयु में मुझे प्यार हुआ वो भी अपने पुत्र से

वैसे मेरे डिल को शेर सिंह ने छू लय था जिसे में पहला प्यार समझ रही थी पर बलदेव में डिल को मरोड़ दया है अपने वफादारी और मेरे प्रति सम्मान और स्नेहा दिखा कर"

देवरानी ये सोच कर उठ टी है और नहाने चली जाती है

"अब इस 35 वर्षीया क अधेड़ उम्र क एक बचे की माँ को 18 साल का जवान लड़का प्यार करता है मई और क्या मांग सकती हु भगवन से"

नाहा धो कर आ कर अपने माथे पे सिंदूर और फिर गले में मंगलसूत्र पहन लेती है और खूब अचे से तैयार हो कर पहले अपने हे कक्षा क मंदिर में पूजा करने लगती है

"भगवन मुझे याद है मैंने आपसे 10 दिन का व्रत की मन्नत मांगी थी और गरीबो को ज़िन्दगी भर खिलने का"

"भगवन मैंने बलदेव को अपने डिल से अपना लिया है ,कुछ ऐसा कर क वो गुस्सा छोर कर मेरे पत्र पढ़ कर मेरे पास भगा चला आये और मेरे और बलदेव क प्रेम क वजह से कुछ गलत न हो भगवन ,अगर प्रेम करना गलत है और मेरी ख़ुशी की परवाह नहीं आपको तो गलत होगा मेरे साथ अगर आपको लगता है क मुझे खुश रहने का अधिकार है तो मेरे साथ या बलदेव क साथ कुछ गलत नहीं होगा ,अगर गलत हुआ कुछ तो में तेरे बनाये इस नियम को भूल जाउंगी और धर्म पर से विस्वास उठ जायेगा मेरा"

"अगर सब कुछ सही रहा मेरे और बलदेव क जीवन अछि कटी तो में भी अपना वडा नहीं तोडूंगी 10 दिन का व्रत तो रखूंगी और ऊपर जीवन भर गरीबो क लये ाचा करती रहूंगी"

देवरानी फिर घंटी बजा क प्रसाद ले कर घर में बाँटने लगती है फिर कमला को देकर कहती है क बाकि क प्रसाद राज दरबार और गाओ में बटवा दे

बलदेव तैयार हो कर सबसे पहले अपनी कलम उठा ता है और एक कागज़ क टुकड़े पर गुलाब का पानी चिरक देता है और वो कागज़ गुलाबी रंग का हो जाता है और वो कुछ देर सूखने क पश्चात धरा धार बलदेव लिखना शुरू करता है और अपने पत्र को छुपा कर कमला को देने क लिए रख देता है

जैसे हे बहार निकलता है देवरानी अपने कक्ष क दुवार पर कड़ी अपने बाल सूखा रही थी ,बलदेव देखता है

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उसके सदी अस्त व्यस्त थी और उसके दूध का ऊपरी हिस्सा और नाभि की गहरी घाटी साफ दिख रही थी

तभी सामने से बलदेव आ जाता है और बलदेव को

rajpal:ary तुम उठ गए beta,baitho यहाँ

वही पर कुर्सी पर बैठा देता है बीच आँगन में और देवरानी इस बात को भाप ली थी क बलदेव उसे खा जाने वाली नज़रो से देख रहा और उसको करीब आने से पहले उसका बाप उस से गहतराष्ट्रा की सुरक्षा की बात करने लगता है और राजपाल क पीठ की ओरे कड़ी देवरानी बलदेव को साफ़ दिख रही थी

बलदेव सिर्फ अपने पिता क हर बात में हाँ हाँ मिला रहा था और उसकी नज़रे अपनी माँ पर थी

Devrani:man me)besharam बाप क सामने ताड़ रहा है माँ को

बलदेव उसके दूध और नाभि पर नज़रे टिका देता है

देवरानी अब अपने हाथो से बाल को झरते हुए थोड़ा ज़्यादा हिलती है जिस से उसके दूध भी हिलते है और उसका पूरा पल्लू निचे गिर जाता है



देवरानी क बड़े वक्ष और नाभि सुन्दर पेट साफ़ दिख रहा था

devrani:man me)kaise देख रहा है जैसे खा जायेगा"

"देखे भी क्यू न बेचारा इतनी सजी सॉरी भी तो उसके लिए हे हु और आज ऐसे कपडे भी तो इसके लिए हे पहनी हु क वो देख सके" और मुस्कुरा देती है

बलदेव क इस तरह देखने से देवरानी भी गरम हो रही थी और वो बलदेव को भड़काने क लये दीवाल से चिपक कर कड़ी हो जाती है और अपने दूध को ऊपर उठा टी है और बलदेव को एक क़ातिल अंदाज़ से देखती है



एक हाथ उठाने से उसके लाल ब्लाउज और कस जाते है और उसके ब्लाउज क निचे कुछ जगह बन जाती hai,uske पेट पैर एक धरी बन जाती है और पेट किसी रसगुल्ला की तरह चिकना था

baldev:ji पिता जी आप सही कह रहे है

बलदेव अपनी धुनकी में अपने प्रेमिका माँ को ताड़ रहा था और उसका बाप उसे सेना और युधा की बाते समझा रहा था

ये सब देख क देवरानी और बलदेव दोनों गरम थे और तभी देवरानी अपना सर क लम्बे बाल को अपने दोनों हाथ उठा कर बांधने लगती है और अपने बड़े वक्ष को बलदेव क तरफ निकल लेती है और उसके आखो में देखती है

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devrani:man में) आ क्र पीले दूर से क्या मिलेगा

baldev:man में) है क्या माल हो तुम माँ कसम से दिन रात पेलुँगा एक बार हाँ कर दे तो

देवरानी :मन में) ज़रूर मुझे छोड़ने क सपने देख रहा है ,हाय राम कैसे मुझे ये बलदेव मेरा बीटा ुइ वो सीधा कड़ी होती है

Baldev:man में) कैसे सीधी हो गई जैसे कुछ किया हे न हो

devrani:man में) अगर इसका बाप न होता तो अब तक मुझे नंगी कर दया होता

और उसके अंदर का कही न कही शर्म अब भी था वो वह से पलट कर जाने लगती है कुछ चार कदम चलने पर पीछे मुद क्र देखती है

देवरानी को पूरा यक़ीन की बॉडी की हवस भरी आखे उसके गांड क पतों को ज़रूर घर रहे होंगे

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वो मुड़ती है तो बलदेव अपना ज़बान अपने होठ से चाट रहा था और उसका दूसरा हाथ अब उसके धोती क ऊपर से उसके लौड़े पे था ,देवरानी कनखियों से हे सब देख ली थी वो बास मुस्कुरा क अपने कक्षा की ओरे जाने लगती है

कुछ देर यु हे कुर्सी पर बैठ क बात करने क बाद बलदेव क पिता राजा राजपाल चले जाते है पर अपने खड़े लैंड को छुपाने क लये थोड़ी देर वही बैठा था तभी वह आ रही कमला को आता देख

बलदेव आओ कमला

kamla:ji युवराज

बलदेव चुपके से उसके हाथ में वो प्रेम पत्र दे देता है और मुस्कुराता है

Kamla:mai तो सब कुछ कर रही हु पर इसका इनाम मुझे क्या मिलेगा युवराज

Baldev:tumhe इसका इनाम हम ज़रूर देंगे ो कमला क कानो क पास जा कर "जिस दिन तुम्हारे महरानी क महाराजा बन गए तो"

Baldev:paani पिलाना कमला

कमला रसोई क तरफ जाते हुए खिड़की से देवरानी क कक्षा में आवाज़ देती hai"maharani दरवाज़ा खोलो और बहार आओ अब आपके भागने से काम नहीं चलेगा"

वो देवरानी को छेड़ते हुए कहती है ,देवरानी सोचती है क क कमला उसे डरपोक समझ रही है

devrani:man me)use बताना पड़ेगा में पारस की रानी हु

देवरानी घर से बहार निकलती है तो सामने बलदेव को वही अपने लैंड पर हाथ रखे बैठा पति है

devrani:man में) इसे तो शांति हे नहीं 24 घंटे खड़ा रखता है

तभी अचानक से बहार से वापस राजपाल आ जाता है

rajpal:ary बीटा मैंने तुम्हे एक बात तो बताना भूल हे गया की अगर सैनिक काम हो और शत्रु ज़्यादा हो तो क्या करना चाहिए

देवरानी भी चल कर अपने बेटे क पास आ रही हल्का रुक जाती है

पर ये सब से बेपरवाह कमला गिलास और जग में पानी लिए रसोई क बहार आती है और राजा राजपाल और बलदेव क पास झुक कर जग में पानी भरने लगती है

कमला ने बलदेव क दिए पत्र को अपने ब्लाउज में छुपाया था पर जैसे हे वो पानी भरना शुरू करती है उसका ब्लाउज ढीला होता है और बलदेव का प्रेमा पत्र बहार गिर पड़ता है

राजपाल और बलदेव क सामने वो पत्र गिर जाता है

Rajpal:ye क्या है कमला

kamla:uh वो ये वो..

कमला घबरा जाती है

उसका घबराया हुआ चेहरा देख क राजपाल क शातिर दिमाग में कुछ गड़बड़ लगती है

पानी पे रहा बलदेव पानी पीते हुए सरक्क जाता है और वो आँख फाडे देख रहा रहा

बलदेव मन में " हे भगवन बचा ले"

दूर कड़ी देवरानी मन me"hey कृष्णा कन्हैया बचा ले और घबरा कर अपने आँख बंद क्र क प्राथना करने लगती है और मंतर पढ़ने लगती है"

Kamla:han वो वैध जी ने दया था ये मुझे

rajpal:Kya है इसमें

गुलाबी रंग क पत्र को देख ये तो गुलाबी है

राजपाल मन में :ये तो पत्र जैसा है

kamla:wo महराज इसमें जड़ी बूटी क नाम है जो वैध जी ने कहा था मुझे दे देने क लये क में युवाज को दे दू

कमला झट से उठा क उसे बलदेव क तरफ करती है

बलदेव अपना हाथ आगे बढ़ता उस से पहले हे

rajpal:zara मुझे भी बताओ आखिर कौन से

औसधि और जड़ी बूटी मंगवाते है ये

राजपाल एक डैम चतुर बनते हुए कमला क कांपते हाथ से वो पत्र अपने हाथ में लेता है

देवरानी अब आँख खोल कर देखती है "हे bhaggwaan,ye मेरा पत्र तो नहीं पर बलदेव बुद्धू ने तो ज़रूर सब खुल्लम खुल्ला लिखा होगा"

बलदेव दर से अपने दोनों हाथो से कुर्सी को पकड़ लेता है

और कमला कांपते हुए कड़ी थी

राजपाल उस पत्र को हाथ में लिए अपने मुँह क तरफ करता है...

तो बे कंटिन्यू...
 
देवरानी अब आँख खोल कर देखती है "हे bhaggwaan,ye मेरा पत्र तो नहीं पर बलदेव बुद्धू ने तो ज़रूर सब खुल्लम खुल्ला लिखा होगा"

बलदेव दर से अपने दोनों हाथो से कुर्सी को पकड़ लेता है

और कमला कांपते हुए कड़ी थी

# अब आगे

उप्दत 39

राजपाल उस पत्र को हाथ में लिए अपने मुँह क तरफ करता है

राजपाल अभी पत्र खोलने हे वाला था हे था क कोई ज़ोर से चिल्लाता है

"raaaaaaaaaaaajpaaaaaaal"

"हे राआम"

ये आवाज़ सुन कर राजपाल समझ जाता है ये कोई नहीं उसके माँ जीविका है

सामने से भगति हुई राधा आयति है "महाराज वो महारानी जीविका चौखट पर गिर गयी"

राधा जीविका क कक्षा क सामने थे इसलिए उसे जीविका अपने वैशाखी से आती हुई दिखी और अचानक अपने दरवाज़े से बहार निकलते हुए उसका एक पेअर जो बिलकुल नाकाम था वो वैशाखी से संभाल नहीं सकीय और उलझ कर गिरते हे उसके मुँह से उसके बेटे का नाम फुट पड़ा

राधा क मुँह से जीविका क गिरने की खबर सुन राजपाल वो "प्रेम पत्र" वही कुर्सी पर फेकता है

जीविका की आवाज़ आने क बाद भी बलदेव कमला और खासकर देवरानी डरे हुए चेहरे से राज पल की ओरे देख रहे थे और जैसे हे राजपाल अपने हाथ से वो "प्रेम पत्र" फेकता है ,तीनो रहत की सांस लेते है

Rajpal:baldev आप ज़रा देखे तुम्हारे दादी को

बलदेव :जी जी पिता जी

घबराई हुई कमला वो पत्र झट से उठा लेती है अपने सामने से और देवरानी वह से ये मंज़र देख कर दौड़ते हुए अपने सदी क पल्लू को लहराते अपने कक्षा में पहुँचती है

देवरानी अपने कक्षा क मंदिर की घंटी बजा कर सीधे घुटने क बल बैठ जाती है और अपने आखे बंद कए हुए हाथ जोड़ कर "भगवन तूने मेरी लाज रख ली"

"धन्यवाद भगवन"

देवरानी कुछ श्लोका भनभनाती है और उठ टी है तो देखती है उसके सामने कमला कड़ी है

Devrani:gusse "कमला तुम्हारा दिमाग ख़राब तो नहीं"

Kamla:muaf कर दो महरानी

devrani:Aise कैसे लापरवाही कर सकती हो

Kamla:bass आज क बाद नहीं होगा..

कमला वो "प्रेम पत्र "निकल कर जो बलदेव ने अपने माँ देवरानी क लये लिखा था दे देती है

देवरानी झट्ट से उसके हाथ से पत्र लेते हुए उसे अपने तकिये क निचे रख देती है

कमला ऐसे अपने हाथ से जल्दबाज़ी में पत्र छेने जाने पर

kamla:bada बेसब्र हो रही हो महरानी पत्र क लिए

देवरानी मुस्कुरा है

"होउंगी हे पहले प्यार की पहला पत्र है"

और शर्म से अपने सर निचे झुका लेती है

kamla:ladho अब नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्माओ मत ,चलो जीविका क पास नहीं तो महाराज जी समझ जायेंगे ये दोनों गायब है मतलब पत्र उनके प्यारी पत्नी का हे था

और कमला एक क़ातिल मुस्कान देती है

फिर दोनों चल पड़ते है जीविका क कक्षा की ओरे

जीविका को चारो ओरे से घेरे सब खड़े थे और जीविका अंदर लम्बी लम्बी साँसे ले रही है

अब तक वैध भी पहुंच चूका था और उपचार शुरू कर देता है

इतने में दोनों कमला और देवरानी पहुंच जाती है और सबके साथ ये भी देखने लगती है जीविका को

Vaidh:mahrani जी आप को पता है आप को चलने में परेशानी होती है वैशाखी भी आप बड़ी मुश्किल से उठा पति है तो

आपको संम्भल क चलना चाहिए था

Rajpal:han माँ आपको कुछ भी लेना हो आप हमे कहिये

Vaidh:maharaj इनका पेअर क यदि की ऊपर की हड्डी जो नाज़ुक होती है उसमे दरार आगयी है कुछ दिन जड़ी बूटी रखे बांध क रखना होगा

वैध अपना उपचार समाप्त करता है तो जीविका का दर्द अब कुछ आराम होता है

Vaidh:chaliye अब आज्ञा दीजिये महाराज

राजपाल को अब वो पत्र याद आता है और उसका शातिर दिमाग जान न चाहता था क उसमे क्या है

Rajpal:Beta बलदेव तुमने पत्र देखा वैध जी को क्या क्या आयुर्वेदिक जड़ी बूटी चाहिए

Baldev:Ji पिता जी

Rajpal:waise आज हे जाये बलदेव जड़ी बूटी लाने या कल.

राजपाल एक शातिर दिमाग से अपनी आखो को घुमा क वैध जी क तरफ देखता है

वैध जी को समझ नहीं आरहा था क क्या बात चल रही है

वैध जी राजपाल क तरफ देखता है तो राजपाल क ठीक. पीछे कड़ी कमला उसको देख आँख मरती है और अपने होठ दन्त से काट टी है

Rajpal:kya हुआ वैध जी आपने हे तो कमला को लिख कर दया था

वैध चालक था वो कमला का इशारा समझ जाता है

vaidh:maharaj आज कोई आवश्यकता नहीं कल भी वो जड़ी बूटी मिले तो चलेगा

और कमला की तरफ देखता है

ये सब बलदेव देख रहा था और उसे भी समझ आरहा था सब

देवरानी तो बास मन में श्लोका की झड़ी लगा दी थी और प्राथना कर रही थी क वैध जी कही मन न क्र दे क उन्होंने जड़ी बूटी मंगवाना था बलदेव से

राजपाल वैध का स्पष्ट उत्तर सुन कर मुस्कुराते हुए

rajpal:theek है तुम लोग माँ की देख भल करो

और बहार चला जाता है

पर राधा कही न कही इन सब का मुख देख शक होना शुरू हो जाता है

देवरानी और बलदेव कक्षा से बहार चले जाते है

radha:kamla में महारानी षुरूश्ती से बता कर आती हु वो यहाँ नहीं आई अब तक

kamla:theek है राधा

जीविका का अब कमला मालिश कर रही थी

जिस से कमला अब रहत महसूस कर रही थी

jeevika:ye बलदेव और देवरानी भी चले गए

Kamla:han

jeevika:"han जायेंगे हे "

(मन me:dono को प्यार का भूत जो चढ़ा है)

कमला इस तरह से जीविका का बोलना अटपटा सा लगता है और सोच में पद जाती है क आखिर क्या सोच कर जीविका ने ऐसा कहा

बलदेव बहार अपने सैन्य अभ्यास में लगा था और अंदर देवरानी सब से पहले अपने कक्षा का दरवाज़ा बंद करती है फिर खिड़की क परदे लगाती है

पलंग पर लेट कर अपने तकिये क निचे से

"प्रेम पत्र" निकलती है जिसमे से गुलाब की भीनी भीनी खुशबु आ रही थी

देवरानी पैन को खोल कर पैर क बल लेट कर पढ़ना शुरू करती है

प्रिय माँ

मई आपका बलदेव हु और आपका हमेशा रहूँगा ,अपनी माँ का बलदेव जितना सम्मान कल करता था उतना आज करता है और वो सम्मान कल भी उतना हे रहेगा चाहे प्रस्तिथि कैसी भी हो

मेरी माँ की मान मर्यादा इज़्ज़त का रखवाला जितना बचपन से था उतना भी आज हु और कल भी नहीं बदलूंगा और सदैव आपकी मान मर्यादा की रक्षा करूँगा

माँ अगर मेरे किसी भी गलत तरीके से आपके डिल से ठेस पहुंची है तो उसके लिए क्षमा मांगता हु मुआफ कर दो मुझे

जीवन में मई कल तक बहुत अकेला महसूस करता था जब तक में अपनी शिक्षा पूरी कर क नहीं आया था और जैसे हे मेरी नज़र तुम पर गयी तब से में तुम्हारे लिए पागल हो गया था कही न कही मेरा डिल तुमने उस दिन हे चुरा लिया पर इस बात को मानते हुए मुझे समय लगा

सिर्फ इसलिए नहीं क तुम्हारा दुःख देख कर मेरा डिल पसीज गया पर सही कहु तो तुम्हारे ख़ूबसूरती भी बहुत बड़ी वजह थी जिसने मेरे डिल को बेबस कर दया अपने माँ क प्यार में पड़ने क लये

माँ में तुमसे बहुत प्रेम करता हु और तुम्हारे साथ अपनी साडी ज़िन्दगी बिताना चाहता हु और मई तुम्हारे हर वो दुःख जो तुमने जीवन में देखे है सब पर मरहम की तरह लग जाना चाहता हु जिस से तुम्हारा डिल का दर्द मिट जाये और तुम जीवन का सही आनंद ले सको

मैंने बहुत सोचा समाज क बार में पर आखिर कर मेरे डिल नहीं मन और मई और मेरा डिल अपने हसरते पूरा कर क रहेंगे और सबसे बड़ी हसरत है तुम्हे जीवन भर की खुशीअ dena,uske लिए ज़माने से लड़ने का और मरने का गम नहीं अब बास जीने की ख़ुशी है

बोलो जियोगी मेरे साथ?

तो आज रात भोजन क बाद नदी किनारे आजाना

तुम्हारा प्रेमी

बलदेव उर्फ़ शेर सिंह

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देवरानी लेती हुई ये पढ़ रही थी और उसके छूट में खलबली मच रही थी वो बिस्तर पर अपने छूट रगड़ क

"आह बलदेव"
 
अपडेट 40

देवरानी लेती हुई ये पढ़ रही थी और उसके छूट में खलबली मच रही थी वो बिस्तर पर अपने छूट रगड़ क

"आह बलदेव"

देवरानी क कान में कमला की कही हुई बात गूंजती है "महरानी बलदेव का हाथ इतना बड़ा है तो वो कितना बड़ा होगा ,और बलदेव का वो तो अआप्के आगे की खाई और पीछे का समुन्दर को पार कर देगा"

देवरानी ये सोच कर अपना सर तकिये में दबा लेती है

कमला की कही हुई मज़ाक की बात अब देवरानी को सच होते दिख रही थी जो खाई और समुन्दर को पार राजपाल ने कभी नहीं कर पाया था शायद उसके अंत तक उसका बीटा चला जाये यही उम्मीद थी देवरानी को अपने बलिष्ट पुत्र से थी उसके वर्षो की अन्हु खाई और समुन्दर को कोई पार कर दे कोई वीर हो जो तैर क वो पार तक जा सके

ये सब सोचते हुए देवरानी शाम में उठ कर अपने आप को खूब अचे से स्नान करती है सजती सवारती है और छोटे से ब्लाउज और सदी में आग उगलती जवानी को धक् लेती है

अपने कक्षा में पूजा कर क भगवन से प्राथना करती है क सब कुछ कुशल मंगल हो

"भगवन मेरा मान रख लेना पहली बार हम मिल रहे है कुछ उल्टा सीधा न हो "

देवरानी अब मंदिर से थोड़ा सिंदूर उठा टी है और उसको अपने मंगल सूत्र से रगड़ती है और मंगल सूत्र. पहन क फिर सिंदूर अपने माथे पे लगा लेती है

अब देवरानी अपने आप को देखने आईने में जाती है और बड़े शिद्दत से सवारती है



Devrani:man में )अछि. तो लग रही हु न में ,बलदेव को पसंद आउंगी न

देवरानी अभी अपने आप को निहार हे रही थी क कमला आ जाती है और ऐसे अपने आप को सजते सवारते देख

kamla:man me)chudne क लये बेचैन है ये तो

Devrani:ary आओ कमला

Kamla:kya बात है महरानी आज तो ऐसे सजी हो जैसे कावेरी दुल्हन सजती है

देवरानी ये सुन कर शर्मा जाती है

हट कमला कुछ भी कहती है"

Kamla:sahi कह रही हो आज तो क़यामत लग रही हो

devrani:sach बताओ ठीक लग रही हु न

kamla:aap अप्सरा से काम नहीं लग रही हो महरानी देवरानी ,अगर बलदेव अकेला पा ले तो आप क दरया और समुन्दर दोनों में गोते लगा ले अपने नाव से

देवरानी इस बात का मतलब समझ कर शर्माती है

devrani:mera बलदेव इतना गन्दा नहीं

kamla:aapki गलत फेहमी हैं वो क्या है पता चल जायेगा

devrani:hey भगवन इस कमला को सद्बुद्धि दो

Kamla:bass "हे भगवन हे भगवन हे चिल्लाते रह जाओगी अगर बलदेव को एक मौक़ा दया तो

devrani:bass करो kamla,deewalo को भी कण होते है

kamla:waise बन थान खा जा रही हो

devrani:baldev से मिलने

kamla:wo तो मुझे पता है अपने यार से हे मिलोगी न पर कहा मिलोगी ?

देवरानी अपने बाल स्वैर्त हुए "वो पत्र में कहा था क नदी किनारे मिलने आज रात"
 
अपडेट 41

देवरानी क बात सुन कर कमला है देती है और मन में

कमला मन में: अपने आशिक़ से मिलने आज नदी पर जाएगी जो कल तक संस्कारी का पल्लू ओढ़े घर से बहार नहीं निकलती थी

kamla:aap ऐसे हे खुश रहे महारानी और याद रखे क आप दोनों की प्रेम लीला किसी को दिखे नहीं

देवरानी कमला क पास आकर उसका दोनों हाथ पकड़ लेती है

"कमला तुम्हारा बहुत धन्यवाद बहिन आज तुम्हारे वजह से मई अपना प्यार पाने जा रही हु और इतनी खुश हु जैसे कोई ग़म हे. नहीं tha,tumne मेरा हर मौके पे साथ दया"

"कमला बोलो इसके बदले में क्या चाहिए?"

kamla:mujhe जब चाहिए होगा तो बता दूंगी अभी तो आप लोग खुल क जीयो

devrani:Han अब किसी को पता भी चल जाये तो में उसका परवाह नहीं करुँगी और न डरूंगी कभी

"घुट घुट क 100 दिन जीने से ाचा है एक दिन ख़ुशी क जी लो"

Kamla:wah अब तो बड़ी बहादुर हो गई ह आप

रात में देवरानी खूब जैम क पकवान बनती है और साथ हे खासकर क खीर बनती है अपने हाथो से बलदेव क लये

रात का भोजन करने सब बैठे थे एक तरफ बलदेव और उसके पिता राजपाल और दूसरी तरफ देवरानी और षुरूश्ती

कमला और राधा खाने की तैयारी कर रही थी

rajpal:Kamla ,ज़रा माँ का भी भोजन उनके कक्षा में पंहुचा देना

Kamla:aap लोग खा ले में उनके लये हु न

धीरे धीरे भोजन कमला और राधा लगा देती है और सब खाना शुरू करते है

Rajpal:wah आज का खाना ज़्यादा स्वादिष्ट लग रहा है

Shurushti:Han वो तो है

Kamla:aaj महरानी देवरानी ने बनाया है

षुरूश्ती कमला क मुँह से महरानी सुनते आगबबूला हो जाती है

Rajpal:Kya बात है रानी देवरानी आज आप बहुत सजी सॉरी खुश नज़र आरही हो और ऊपर से इतना ाचा खाना भी

Kamla:man me)Ab तुम्हे क्या बताये राजपाल की ये देवरानी की छूट ने अपने बराबर लौड़े क इंतेज़ाम होने जाने क बाद ख़ुशी से देवरानी को मजबूर कर दया खाना बनाने

Devrani:man me)Maharaj आपको क्या बताऊ क आप क निकम्मे होने क वजह से आज में अपने हे पुत्र से एक प्रेमी क रूप में तुम. सब से छुप क मिलने जा रही हु

Shurushti:maharaj इतना भी ाचा खाना नहीं है वो तो देवरानी ठीक थक बना लेती है

Kamla:man me)ab इसकी क्यू जाली पड़ी है इसको तो बूढ़े लैंड से हे काम चलते रहना पड़ेगा देवरानी की बराबरी करती है करम जल्ली

षुरूश्ती देवरानी का तारीफ सुन कर तुनक कर उठ जाती है

rajpal:beta तुम्हे कैसा लगा

बलदेव जो चुपचाप चोर नज़रो से देवरानी पर नज़रे गड़ाए था वो देवरानी क आखो में आखे देख

Baldev:"bhut अच्छी है"

rajpal:Kaun अछि है ? तुम्हारी माँ!

Rajpal:mai खाने की बात कर रहा हु ये तो मुझे पता है तुम्हारी माँ अछि है तुम्हारा बहुत ध्यान रखती है

देवरानी क तरफ देखता है और उसके पल्लू क जालीदार कपड़ो से उसके बड़े ुचे दूह को देख

Baldev:inke ये भी अच्छे है

Rajpal:kya बक बक कर रहे हो

Baldev:matlab माँ भी अछि और इनके हाथो का ये सब खाना बहुत अचे है

rajpal:aw: हाँ तुमने सही कहा

ये बात समझ हल्का सा शर्मा कर देवरानी अपना सर निचे कर खाने लगती है

Baldev;or लीजिये न पिता जी

rajpal:nahi नहीं अब नहीं

Baldev:ab लीजिये ये क्या बात हुई

"माँ इतनी अछि है माँ क ये सब चीज़ खाने लायक है"

"पर आप कहते हे नहीं "

राजपाल: अब बुढ़ापा हुआ पहले जैसी बात नहीं

Baldev:par में तो ठाकु नहीं कभी इतने अच्छे खाने मिले तो

Rajpal:Han तुम जवान हो तुम खाओ पीओ कुछ मत छोरना सब चाट छूट क खा जाओ

Baldev:bas आप की आज्ञा और आशीर्वाद मिल जाये तो में इतना खो क दिन रत खा कर मोटा हो जाऊ

Rajpal:meri आज्ञा और आशीर्वाद है मेरे हिस्सा भी खा लिया करो

Baldev:ab में चाट छूट कर khaunga,maa अब मुझे मन मत करना

देवरानी ये सुन कर मुस्कुराती है

Devrani:"han नहीं करुँगी मन"

जितना जी चाहे खा लेना "

देवरानी अपने होठ अपने दन्त से पीसती हुई कहती है

बलदेव खाना खा कर बहार चला जाता है और कमला और देवरानी बर्तन समेटने लगती है

kamla:ab तो तुम्हारा आशिक़ भी चला गया

नदी पर

तुम कब जाओगी

Devrani:kamla देखो न ,सैनिक बल चारो ओरे घिरे है और ये महाराज और षुरूश्ती भी पीछे पड़े रहते है नज़र रखते है

kamla:peeche क रास्ते से जाओ

devrani:han इनलोगो को झपकी लेने दो फिर जाउंगी बलदेव से मिलने

kamla:or हाँ जल्दी आजाना पूरी रत नदी पर मत रुक जाना

Devrani:nahi रे कमला

kamla:han नहीं तो ज़्यादा समय रुकी नदी पर तो बलदेव तुम्हारे नदी में गोते लगा लेगा

इस बायत कमला अपना सर झुकाये शर्माती है

devrani:kuch भी कहती हो भगवन तुम्हे सद्बुद्धि दे

बलदेव खाना खा कर टहलने क बहाने नदी की ओरे चल देता है

सोचते हुए

बलदेव मन में) आज कैसा दिन है मई अपनी माँ जो अब मेरी प्रेमिका बन गई है उस से प्रेम लीला क लये नदी पर बुलाया हु और वो भी घर वालो और सैनिको से छुप कर आएगी अपने यार से milne,ye प्रेम ये मिलने की तड़प ये जिस्म की आग हम से क्या क्या करवाती है

रात धीरे बढ़ रही थी और सब अपने अपने कक्षा में आराम कर थे और सैनिक बल भी अब एक एक कोना पाकर कर झपकी लेने लगे थे इसी का फायदा उठा कर देवरानी हल्का सा अपना श्रृंगार करती है और अपने आशिके से मिलने क लये पीछे क दरवाज़े से नदी क बहार जाने लगती है

devrani:man me)bhagwan कुछ गड़बड़ नहो कही किसी ने हमे धार लय तो क्या होगा ,आर्य नहीं मई क्यू दारू मेरा बलदेव सब संभाल लेगा जो होगा देख लेंगे

"पर आज अपने प्रेमी से ऐसे चोरी छुपे मिलने जाने का आनंद कुछ और हे hai"or मुस्कुरा रही थी

बलदेव इधर नदी पर पहुंच कर एक पेड़ क निचे छोटे से पठार पर बैठ जाता है और अपने हाथ में कुछ कंकर ले कर नदी क चलते हुए पानी पर मारने लगता है

देवरानी तभी नदी पर पहुंच कर चारो ओरे देखती है और पूर्णिमा की रात की रौशनी में बलदेव बैठा हुआ पेड़ क निचे दिख जाता है

देवरानी एक मुस्कान क sath"kitni शिद्दत से इंतज़ार कर रहा है मेरा प्रेमी"

देवरानी धीरे धीरे चल क बलदेव क पास पहुंच रही थी अंदर से देवरानी का डिल ज़ोर से धड़कने लगा है और उसके हाथ और पेअर हल्का कंपनी लगता है

बलदेव धीरे चल से मस्तानी देवरानी सजी सवरी अपने कैसे हुए बदन को एक छोटे से ब्लाउज और सदी में लापति और अपने लाज शर्म को छुपाते हुए उसके पास आ रही थी

baldev:man me)sharmao मत माँ तुम्हारे सरे लाज शर्म निकल दूंगा

देवरानी अब बलदेव क सामने कड़ी थी वो अपने पेअर क अंगूठे को अपने अंगूठे क बगल वाली ऊँगली पर चढ़ाये थी और उसकी आखे निचे थी जैसे इंतज़ार कर रही हो क बलदेव कुछ कहे

बलदेव अपनी माँ का रूप देख खो गया था और निहारे जा रहा था पर अंदर हे अंदर उसकी भी थोड़ी डिल की धड़कन बढ़ गयी थी क्यू क ये भी उसका पहला प्यार था

देवरानी भी अपने पहले प्यार और अपने पहले यार क सामने सजी सॉरी उसको अपने आपको पडोसने आई थी

आखिर कर बलदेव हे हिम्मत कर क चुप्पी तोड़ता है

Baldev:maa बहुत देर कर दी

देवरानी सर उठा कर बलदेव को देखती है जो अपने मुचो पर तव दे रहा था

devrani:han वो सब क सोने का इंतज़ार कर रही थी

Baldev:muskura क " ाचा आओ मेरे पास बैठो"

बलदेव क अचे बर्ताव से देवरानी उसके पास हे पत्थर पर बैठ जाती है

Baldev:khana खा लय आपने

Devrani:hmm

Baldev:jhut

Devrani:hmmm

Baldev:kha कर आना था में थोड़ा समय और प्रतीक्षा कर लेता

devrani:thode देर में हे तो तुम्हारी हालत ऐसी हो गई और मुस्कुराती है वैसे देरी मैंने नहीं तुमने की

Baldev:wo कैसे

Devrani:tumne बताने में वो तो कमला का भला हो

बलदेव मुस्कुरा कर "ाचा जी"

Baldev:me डरता था क कही तुम

Devrani:han हिम्मत नहीं तुम में

Baldev:aisi बात नहीं

devrani:kya ऐसी बात नहीं मैंने हे पत्र लिखा जब तुम मदिरा में डूबे रहते थे तो तुम मिलने आये

बलदेव और देवरानी अपना मुँह अभी भी नदी क तरफ कए थे और बाटे कए जा रहे थे बिना दूसरे को देखे

Baldev:dhanywad माँ

Devrani:chup करो धन्यवाद् कितनी बात का करोगे ,तुम इतनी क्यू पीते हो? हाँ ?

Baldev:wo हम्म

देवरानी बलदेव क ज़ोर से पूछती है जिसका बलदेव उत्तर नहीं दे परः था तभी देवरानी उसको अपने सामने आने को कहती है

devrani:idhar आओ मेरे सामने मेरे आखो में आखे दाल कर कहो

बलदेव उठ कर पठार पर बैठी देवरानी क सामने खड़ा हो जाता है

devrani:badh कर वृक्ष हो गए पर एक छोटी सी बात कहने की हिम्मत नहीं जुताई और मदिरा में लिप्त हो गए

ये कह कर देवरानी बलदेव जो 6.3 उचाई का था उसको निचे आने को कहती है

Devrani:niche आओ तुम इतने ुचे हो क में तुम्हारे आखे नहीं देख सकती क क्या झूट क्या सच कह रहे हो

बलदेव ये सुन कर अपने घुटनो क बल देवरानी क आगे बैठ जाता है

बलदेव क आँख ासु से भरे थे

devrani:agar तुम्हे कुछ हो जाता तो

क्या करती मई? कहा जाती मई?

और तुमने कैसे सोच लय क अगर तुम अपने प्यार का इज़हार कर देते तो में क्या तुम्हे जान से मार देती ?

और तो और तुमने तो मेरे लये पति भी ढूंढ लय और उस दिन मुझे किसी और क पास भी ले जा कर रख देते ?

Devrani:baldev सुन रहे हो न

Baldev:hmmm

बलदेव चुपचाप सुने जा रहा था और उसका दर्द उसके आखो में पानी बने दिख रहा था

Devrani:kya तुम पागल हो

और अब देवरानी क आखो से ासु बहाने लगते है क्या तुम खुश रह पते मुझे किसी और को सौंप के?

Devrani:tumne ऐसा सोचा भी कैसे हाँ

देवरानी अपना हाथ ले जा कर बलदेव को हल्का थप्पड़ मारती है और ज़ोर से रोने लगती है

"तुम मेरे पहले प्यार हो और मेरे बेटे भी में तुम्हारे प्यार की क़ुरबानी दे कर कभी जी नहीं पति और तुम तो दो दिन मरने क हाल में आगये थे तुम तो मर हे जाते "

Baldev:han माँ

Devrani:or तुमने कहा था क तुम जान दे डोज अपनी अगर मई नहीं मिली तो

Baldev:hmm

देवरानी रट हुए उठ कड़ी होती है और सीधा. बलदेव क बाहो में आकर उसका गर्दन पकड़ क्र लटक सी जाती है

Devrani:khabardar अगर तुमने अपने मरने का सोचा भी तो तुम्हारे जान से पहले मेरी जान जाएगी

और फफक क रोने लगती है

अपनी माँ अपनी प्रेमिका को ऐसे अपने लटके देख अपने दोनों हाथो से अपनी माँ को पाकर लेता है और माँ को उठा लेता है

baldev:nahi माँ मुझे मुआफ कर दो

devrani:mujhe भी मुआफ कर दो जो में दूसरे पुरुष का सोच रही थी

Baldev:tumhe में जीवन भर अपनी बना कर रखूँगा

devrani:mujhe तो बाकी क हर जनम में तुम हे चाहिए

और फिर से दोनों गले लगते है

थोड़े देर तक गले लगने पर दोनों का डिल ठंडा होता है

devrani:ab उतारो मुझे निचे तुम थक गए होंगे

baldev:me तुम्हारे भर से कभी थक नहीं सकता

Devrani:me कोई हलकी नहीं जो तुम ऐसे उठाये रहोगे तो चल जायेगा तुम्हारी नस न चढ़ जाये

बलदेव देवरानी को उतार देता है

baldev:waise मेरी क़ाबिलियत पे इतना भरोसा है क में तुम्हारा दुगना भर रात भर उठा क राखु तो टास से मास्स नहीं होऊंगा

devrani:ha आये बड़े पहलवान कही क ,चलो अब जल्दी चले घर

देवरानी आगे आगे चलने लगती है बलदेव अभी जाना नहीं चाहता था वो बस रुक गया था

देवरानी उसको पलट कर देखती है

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Devrani:kya उल्लू हो निहारना बंद करो और चलो

Baldev:ullu नहीं में चकोर हु और तुम चाँद हो

देवरानी भलीभांति जानती थी क बलदेव उसके पिछवाड़े पे नज़र गड़ाए हुआ है ,देवरानी अब हल्का अपने गांड को हिला देती है

Baldev:thodi देर और रुको न

Devrani:apne मस्तानी चल से जाने लगती है और जान बुझ कर बलदेव को तड़पा रही थी और धीरे पर ैथ क चल रही थी

Baldev:ruko में बता ता हु मेरी बात न मानती हो

देवरानी देखती है बलदेव उसके तरफ तेज़ी से भाग रहा है तो वो भी भागने सी लगती है पर बलदेव झट से उसको पीछे से पकड़ लेता है

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देवरानी को कैसे हुए बलदेव अब उसके पीछे स चिपक जाता है

devrani:uff हे भगवन

Baldev:kab तक भागोजी

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अब बलदेव का लैंड देवरानी को अपने पीछे महसूस होने लगता है और उसके मुँह से सिसकारी निकलने लगती hi

baldev:itni सजती सवारती हो तुम कही कोई भगा न ले जाये

devrani:aah" मुझे भगा ले जाने वाले क पास शेर का डिल होना चाहिए " उठ"

बलदेव क इस तरह मसलने से देवरानी मचल रही थी और उसके सदी का पल्लू गिर जाता है

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बलदेव देवरानी क कमर में हाथ रख कर देवरानी क कंधे को चूमता है जिस से देवरानी बलदेव से दूर होती है और उसके सामने सीढ़ी कड़ी होती है

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बिना पल्लू क ब्लाउज में कैसे गेंदों की तरफ बलदेव बड़े चाव से देख रहा था

baldev:man me)ye सच में इतने बड़े है क गहतराष्ट्रा में इतने बड़े किसी की चुकी नहीं हो माँ तुम सच में पारी हो

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मंगलसूत्र और सिंदूर लगाए देवरानी क़यामत ध रही थी

Baldev:maa ब्लाउज अचे है

devrani:sirf ब्लाउज और कामुकता से देखती है

baldev:wo भी बड़े अचे है

Devrani:bass सिर्फ बड़े अचे है और कोई शब्द नहीं

baldev:Bhut बड़े बड़े ..अचे है

इसका अर्थ समझ कर देवरानी शर्मा जाती है

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और बलदेव से दूर जाने लगती है बलदेव उसके सदी का पल्लू पकड़ क उसके पास जाता है और उसके बड़े वक्ष को धक् देता है

बलदेव का ऐसा करने से देवरानी बहुत हे खुश होती है

Baldev:ab चले माँ

Devrani:chalo बीटा जी

रस्ते में चलने लगते है और बलदेव रस्ते म कुछ कंकर उठा कर फिर उनको पानी में फेकने लगता है

devrani:tum धीरे धीरे बचपना में जाते जा रहे हो

Baldev:pyar में अक्सर लोग बचे हो जाते है

devrani:han ये पत्थर हे मरते रहो पानी में बचो की तरह..

बलदेव देवरानी क आखो में देखता है

Baldev:Abhi तो पत्थर हे है कुछ मिलेगा तो वो भी मार लूंगा

ऐसी खुल्लमखुल्ला मारने की बात समझ कर. देवरानी का मुँह खुला का खुला रह जाता है

devrani:besharam..

तो बे कंटिन्यू..
 
अपडेट 42

देवरानी और बलदेव महल की तरफ नदी पर से आ रहे थे ,महल क पास पहुंच कर

Baldev:kal मेरा दया हुआ गले का हार पहन न

Devrani:q पहनू

Baldev:q क मई कह रहा हु

देवरानी थोड़ी शराररति मुस्कान क साथ

"आप हमारे है कौन "?

बलदेव महल क पीछे हे देवरानी का हाथ पकड़ क अपने ओरे खींचते हुए

"आपके सैय्यन है हम"

देवरानी शर्मा जाती है "बेशरम बड़ा आया अपने मैया का सय्या बन ने वाला "

Baldev:ab बन चूका हु में अपने मैया का सैयां

और हस्ता है

देवरानी उसके बहो से निकल कर

"सैय्यन जी इतनी जल्दबाज़ी ठीक नहीं कही कोई सुन न ले"

baldev:sun लेने दो अगर कोई सुनता है तो

Devrani:tum से बहस करना बेकार ,हाँ पहन लुंगी

बलदेव मुस्कुराता है और देवरानी पीछे क दरवाज़े से महल में घुस जाती है और बलदेव आगे क दरवाज़े की ओरे चलने लगता है

जैसे हे बलदेव महल क सामने आता है उसे राजपाल सामने टहल ता हुआ दिखाई पड़ता है

बलदेव झट से अपने पिता जी क पेअर छू कर

Baldev:pita जी

Rajpal:Aashirwad रहे

Rajpal:ary बीटा इतने रात गए कहा घूम रहे हो

Baldev:wo mai...(man me:ab कैसे बताऊ क में माँ से मिलने गया था)

Rajpal:Bolo भाई ..इतनी रत गए घर लौट रहे हो किसी कन्या का चक्कर है क्या

Baldev:nahi पिता जी

Rajpal:ary शर्माओ मत बताओ हम विवाह करवा देंगे

Baldev:man में) अब कैसे बताऊ क मई तुम्हारे हे पत्नी से मिलने गया था और उसको हे दबोच क मसल क आरहा हु पिता जी)

rajpal:kaho भी

Baldev:man me)ab तुम मेरी माँ से विवाह करवा हे लये पिता जी अगर बोल दू तो)

Baldev:nahi पिता जी वो तो में सीमा पर सुरक्षा देखने गया था क सैनिक कैसे काम कर रहे है

Rajpal:wah मेरे लाल तुम सही राजधर्म निभा रहे हो

Baldev:man में) हाँ जो धर्म तुमने नहीं निभाया उसकी पूर्ति में करूँगा माँ को खुश रखूँगा

फिर दोनों इधर उधर की बाते करने लगते है

देवरानी महल क अंदर घुसते है और अपने कक्षा में जाने लगती है तो उसे जीविका दिखाई देती है

jeevika:Bahu

Devrani:ji माँ जी

जीविका की पैनी नज़र उसके उलझे हुए बाल और अस्त व्यस्त सदी पर पड़ती है

Jeevika:man me)lagta है बलदेव से खूब मस्ती कर क आरही है और शायद छुड़वा भी ली हो

Devrani:kya देख रहा है माँ जी क्या हुआ

jeevika:hona क्या है bahu,tum इतने देर रात गए कहा थी

देवरानी थोड़ा हड़बड़ा जाती है" वो मजी में महल क पीछे बाग़ में बैठी थी"

jeevika:itni रात में ? तारे गईं रही थी?

Devrani:wo बास नींद नहीं आ रही थी तो चली गयी

मन me:ye जीविका तो मेरे पीछे हे पद गयी अब क्या कहु इसके पोते को मुझसे प्यार है और उसने हे प्यार क्या है मुझे नदी पैर बुला क पर इस बूढी को मेरे सदी पद हे नज़र है)

jeevika:ye ब्लाउज तुमने पहली बार पहना ये तो छोटे हो गए थे न

Devrani:han पर में सोची फेकने से ाचा है पहन लू

मन me:(ab तुम्हे क्या बताऊ तुम्हारा पोता बलदेव इस ब्लाउज में मेरे दूध देख कितना पागल हो गया था )

Jeevika:theek है पर समय की सीमा मत लाँघो बहु

devrani:je माँ जी

और देवरानी अपने ज़ोर से धड़कते साँसों को रोकते हुए अपने कक्षा में प्रवेश करती है

और आज की दिन को यद् कर क देवरानी खुश थी और उसे नींद नहीं आरही थी उधर बलदेव भी अपने पिता क साथ आजाता है और अपने कक्षा में सोने की तैयारी करने लगता है

पारस में

राजदरबार में मेरे वाहिद अपने वज़ीर और मंत्रीओ क साथ इंतज़ार कर रहे थे देवराज का यानि क देवरानी क भाई का

महल में शमशेर तैयार हो रहा था राजदरबार देवराज का स्वागत करने क लये पर उसके दिमाग में अब सिर्फ भूरिया हे रहती थी वो जब से अपनी अम्मी भूरिया और अपने बाप मेरे वाहिद की चुदाई देखि थी वो भूल नहीं परः था

शमशेर अपने आभूषण बदलते हुए सोच रहा था

Shamshera:man me)ammi तो क़यामत है हिजाब में तो कुछ पता नहीं चलता है अब्बा कसम से किस्मत वाले है

पर एक बात शमशेर को खाई जा रही थी

क उसकी अम्मी को मिन्नतें करते हुए देखा था उसने पर उसके अब्बा जल्दी फ़ारिग़ हो गए

Shamshera:man me)Ammi ने कितनी मिन्नतें की क अब्बा फ़ारिग़ न हो जल्दी पर अम्मी को प्यासा हे छोर दया

शमशेर तैयार हो कर अपने मेहमान देवराज क स्वागत करने क लये जाता है उसके रस्ते में उसके अम्मी कक्षा था जिसका दरवाज़ा खुला था

शमशेर कुछ सोचता है फिर दरवाज़े क पास जाता है तो देखता है उसकी अम्मी आईने क सामने सज सवार रही थी

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हुरिये क बड़े दूध और थोड़ी चर्बीदार पेट और मांसल चुतर एक तरफ से दिखाई पड़ता है जिसे देख शमशेर

Shamshera:Khuda मुआफ करे पर इतने बड़े दूध ऐसी बीवी को भला कोई कैसे प्यासा हे छोर सकता है

शमशेर बहुत चालबाज़ किस्म का इंसान था जो जासूसी करने में अव्वल था उसे लगा ये सही. समय नहीं और अपने डिल को मन कर वह से राजदरबार चला जाता है

भूरिया थोड़े देर अपने आप को निहारती है

"कसम से में आज भी उतनी खूबसूरत हु एक वक़्त में मिश्रा की सबसे खूबसूरत लड़की थी पर अब कोई तारीफ भी नहीं करता"

"इसकी वजह ये है क वो मेरा घर था जहा में बिना हिजाब नक़ाब क भी रह लेती थी जिस से मेरे जिस्म की ख़ूबसूरती सब देख लेते थे पर ससुराल में आकर बंदिशे लग गई"

वो अपना पास रखा कला हिजाब पहन लेती है और वो भी अपने राजदरबार चली जाती है

राजदरबार भूरिया पहुँचती है तो देखती है सब बैठे है शमशेर अपनी जगह छोर कर

shamshera:ammi जान यहाँ बैठे

Hooriya:Ji बीटा

shamshera:ammi तुम्हारा नाम हूर इ जहाँ सही रखा गया इस हिजाब में तो तुम्हे कोई भी एक मामूली औरत समझेगा पर तुम बाला की खूबसूरत हो

इतने में कुछ लोगो की आवाज़ आती है और दरबारी स्वागत करते है देवराज का

मेरे वाहिद खड़ा होता है

देवराज सामने से चल कर आ रहा था

Hooriya:kitna हत्था कत्था है देवराज (मन में)

मेरे wahid:Ishteqbal है आप का देवराज जी खुशामदीद

Devraj:dhanywad हमारे स्वागत क लये

जहाँ पनाह

देवराज और मेरे वाहिद मिलते है फिर देवराज शमशेर से मिलता है

shamshera:waise काफी देर कर दी तुमने आने में

Devraj:han थोड़ी देर तो हुई

meerwahid:to आगे का क्या इरादा है हमे "Kuberi"raja रतन सिंह का राज्य लूटना है

Devraj:Raja रतन सिघ क मित्र है मेरे जीजा जी राजा राजपाल और अगर हम कुबेरी पर हमला करेंगे तो वो अवशय हे उनका साथ देंगे

Shamshera:hume किसी भी कीमत पे वह का खज़ाना चाहिए

devraj:inhe समझाइये जहाँ पनाह आपका शेह्ज़ादा जल्दी उत्तेजित हो जाते है

मेरे wahid:beta शमशेर शांत

Devraj:me इसी शर्त पर आपका साथ दे सकता हु

मेरे wahid:hume मंज़ूर है बोलो क्या शर्त है

Devraj:waha क आम लोगो को मारा नहीं जायेगा और खासकर औरतो और बचो पर कोई ज़ुल्म नहीं करेगा

मेरे wahid:hume मंज़ूर है

devraj:Mere बहिन देवरानी और जीजा राजपाल क ऊपर कोई भूल से भी हमला न करे वो मेरे परिवार है

मेरे wahid:hahhaa जब वो तुम्हारे परिवार है तो हमारे दूसरे नहीं है उनके हिफाज़त की ज़िम्मेदारी खुद मेरे वाहिद लेता है

Devraj:fir मेरी और कोई इच्छा नहीं

"सेनापति युधा की तैयारी करो हमे उस दिल्ली क शाहज़ेब से पहले कुबेरी का खज़ाना लूटना है"

senapati:ji महाराज

shamshera:or तुम्हारी पुराणी दुश्मनी भी निकल जाएगी शाहज़ेब से

Devraj:Shahzeb को अब पता चलेगा में क्या हु उसके सब मुराद उसके डिल में रह जायेंगे खज़ाना पाने क

मेरे wahid:Hum ज़रूर बादशाह शाजेब क दिल्ली से निकलने से पहले हम कुबेरी पहुंच जायेंगे अभी आप जा कर आराम कीजिये राजा देवराज

Devraj:ji जहाँपनाह

देवराज चला जाता है और सब उठ कर जाने लगते है भूरिया अपने हिजाब में अपने कक्षा. की ओरे जा रही और उसके पीछे से शमशेर आ रहा था

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भूरिया की लचकती गांड जो हिजाब से ढके रहने क बाद ज़ाहिर होरहे रहे उसपर नज़र टिकाये शमशेर आरहा था

shamshera:man में) क्या क़ातिल गांड है अम्मी जान

भूरिया अपने कक्षा में पहुँचती है

"उफ़ इतनी गर्मी लगती है इस हिजाब में"

तभी पीछे से

Shamshera:to कौन कहता है पहनो इसे

Hooriya:ary बीटा तुम

शमशेर मुस्कुरा कर सामने अत है

Hooriya:Ye तो औरत का गहना है ,और खुदा की ख़ुशी इसमें हे है एक इज़्ज़तदार औरत का खज़ाना यही है

shamshera:Ammi मई ये नहीं कहता आप गैर क पास जाये पर अपनों क पास तो आप काम से काम थोड़ी सी..

(मन me:tum तो उस नायब ख़ज़ाने को छुपाने की कोशिश करती हो जो छुपना जानते हे नहीं)

भूरिया भी जो पिछले 25 साल से हिजाब पहन रही थी जब से उसकी शादी हुई थी

वो खुश हो कर हिजाब ऊपर कर निकलने लगती है और शमशेर एक एक सेकंड उसके तरफ देख हे रहा था

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अब भूरिया अपने हाथ उठा कर हिजाब निकल देती है पर उसके दोनों हाथ अब भी ऊपर थे

उसके बड़े दूध तन क खड़े हो जाते है किसी बड़े नारियल की तरह जैसे कह रहे हो आओ मुझे मसलो

Shamshera:a खुदा की चीज़ है ये इसे तो ढंग से अब्बा ने मसला भी नहीं है लगता उसके दूध को देखता है

फिर उसके गांड देख उफ़ ये तो ऐसे है जैसे पीछे से किसी ने गद्दा लगा दया है कटवा क

शमशेर का लैंड खड़ा होजाता है

भूरिया अब सीढ़ी होती है

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Hooriya:Kaisi दिखती हु मई

shamshera:Qayamat..

(भूरिया मन me:ab पहले वाली क़यामत नहीं अब तो 45 साल की हो गयी )

भूरिया ये सुन कर

"क्या कहा "हैरानी से

Shamshera:mai ये कह रहा था क आप पारी ो हूर जैसी हो जिसका मुक़ाबला इंसान क्या पारी भी नहीं कर सकती

ये सुन कर भूरिया मुस्कुरा देती है..
 
अपडेट 43

पारस

अपनी तारीफ सुन कर शमशेर से भूरिया को आज सालो बाद एक अलग अहसास हो रहा था उसे आज फिर महसूस हुआ. जैसे क वो दुन्या क सबसे हसीं सबसे खूबसूरत औरत है

शमशेर भूरिया को घूरते हुए तारीफ कर क निकल जाता है

पारस क राजदरबार में बैठे सुल्तान मेरे वाहिद और देवराज कुबेरी पे आक्रमण करने की तैयारी कर रहे थे उतने में शमशेर वह पहुँचता है

Shamshera:salam अब्बा

मेरे wahid:salam बीटा जानी

Shamshera:salam देवराज जी

Devraj:salam युवराज

Shamsher:to तैयारी कहा तक पहुंची

Devraj:Ho जाएगी आप फ़िक्र न करे

shamshera:aapko एक बात कहु

devraj:han भाई कहो

Shamshera:mai तुम से बोलना भूल गया पर तुम्हारी बहिन देवरानी तुम्हे बहुत याद कर्त ी है

Devraj:kya कह रहे हो समझा नहीं

मेरे wahid:beta तुम्हे कैसे पता

shamshera:q क मई गहतराष्ट्रा गया था जब में कुबेरी क ख़ज़ाने की जासूसी करने गया था

देवराज ये सुन कर आश्चर्य चकित हो जाता है

Devraj:Kaisi है मेरी बहिन Devrani,khush तो है न वो

Shamshera:han अपने भाई से मिलने को बेचैन सी है पर तुम्हे तो उसकी चिंता हे नहीं

Devraj:aisa नहीं है

Shamshera:aisa नहीं है तो मेरे ख्याल से तुमको उस से मिलना चाहिए

devraj:par कैसे Yuvraj,milna तो हम भी चाहते है बहिन देवरानी से कई वर्षो से देखा नहीं

shamshera:dekho भाई हमारे सलाह मनो तो तुम्हारा वह जाना खतरे से खली नहीं क्यू क राजा रतन सिंह जनता है क हम उसके राज्य कुबेरी को लूटना चाहते है और वो आपको छोड़ेगा नहीं

devraj:tum सही कह रहे हो

Shamshera:tum अपनी बहिन को हे यहाँ बुलवा सकते हो कुछ दिनों क लये तुम

चाहो तो

Devraj:tumhari सलाह तो अछि है

मेरे wahid:han और हम उसे देख लेंगे जिस से अगरचे हमे कुबेरी क साथ साथ गहतराष्ट्रा पर हमला करना पड़ा तो हम में से कोई उसे नुकसान नहीं पहुचायेगा

devraj:dhanyawad सुल्तान आपका हमारे परिवार क लये सोचने क लये

मेरे wahid:aapka परिवार भी हमारा परिवार है राजा देवराज

Devraj:dhanywad सुल्तान ,में आज हे अपने बहिन देवरानी को निमंत्रण भेजता हु

गहतराष्ट्रा

दोनों प्रेमी प्रेमिका आज मिल कर खुश थे और आज हुई मिलाप से दोनों को बहुत ख़ुशी और संतुष्टि थी बलदेव और देवरानी आने वाली कठिनाईओ से अनजान प्यार क समुन्दर में गोते लगाने क लये तैयार थे उन्हें दर खौफ अब नहीं था और बलदेव और देवरानी को बुलाने क लये. पारस उधर देवराज अपनी तैयारी कर रहा

था

सुबह होती एक नए रिश्ते की उदय क साथ जिसे दोनों ने डिल से क़ुबूल कर लय था देवरानी उठ कर किसी दुल्हन की तरह तैयार होती है और अपने गले में बलदेव का दया हुआ सोने का हार पहन लेती है

देवराज भी सुबह उठ कर अपना व्यायाम करता है फिर नाहा धो कर वैध जी की जड़ी बूटी खा कर अपने कक्षा में से बहार निकलता है तो उसके पिता और उसकी बड़ी माँ भोजन करने क लये बैठी थी और पास में हे उसकी दादी जीविका भी थी जो आपस में कुछ बाते कर रहे थे

Rajpal:ary बीटा आओ

बलदेव सब क पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है

rajpal:maa देखो आपका पोता कितना बड़ा हो गया है अब ये मेरा बीटा नहीं भाई लगता है

Jeevika:han (मन me:is लये तुम्हारी बीवी क खूब छोड़ता है चाट ता है)

rajpal:Iske लये अब लड़की ढूंढ़नी होगी

jeevika:Han ढूंढ लो राजपाल कही देर न हो जाये

और बलदेव को गौर से देख कर

(मन me:Kahi ये तुम्हारी पत्नी को हे न अपनी पत्नी बना ले राजपाल)

बलदेव ये सुन कर शर्मा कर

Baldev:nahi पिता जी अभी तो हम 18 क हे है

Rajpal:par अब तो हथर कथे पुरुष दीखते हो

उतने में देवरानी आती है रसोई में से

देवरानी :क्या चल रहा है किसकी सगाई करवा रहे हो

Baldev:maa देखो न ये लोग कह रहे है शादी करने मुझे

shuruti:Han तो इसमें गलत क्या है बीटा बलदेव

Devrani:Nahi नहीं मेरा बचा अभी इतना बड़ा नहीं हुआ

Baldev:han मुझे नहीं करनी शादी

Jeevika:man me)han तो जीवन भर अपने माँ को हे छोड़ना कूटना क्यू करेगा शादी कमीना

Shuruti:Acha ठीक है ये तो बताओ क तुम्हे कैसे कन्या चाहिए

Baldev:Aisi...(Devrani को देखते हुए आँख मर देता है)

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देवरानी उसको आँख मरते हुए देख लेती है पर कोई नै देख पता और देवरानी अपने दोनों आखो को फाडे खाना पडोसने लगी

rajpal:me कुछ समझा नहीं

baldev:pita जी जैसी माँ है वैसी काम काजी सब का ख्याल रखने वाली

jeevika:man me)ye बोल न सीधा क माँ हे चाहिए तुझे अपनी हवस मिटने क लये

षुरूति: हम्म्म (अंदर से देवरानी क तारीफ सुन उसके अंदर का सौतन जग जाता है वो चिढ जाती है)

Rajpal:ary देवरानी आज बड़ी सुन्दर लग रही हो और ये गले में हार कहा से लाइ

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jeevika:man में) कहा से लाएगी इसके यार बलदेव ने दया है बुद्धू राजपाल

Devrani:Iske बारे में आप अपने पुत्र से पूछिए और मुस्कुरा कर बलदेव की ओरे देख आँख मरती है

इसबार बलदेव की फसने की बरी थी

Baldev:man में) बड़ी शरारती होते जा रही है देवरानी जब छोड़ना शुरू करूँगा सब शरारत निकल दूंगा

Jeevika:bolo बलदेव क्या बात है इस हार क पीछे

Baldev:dadi ये प्रेम की निशानी है

जीविका ये उत्तर सुन कर बास देखते रह जाती है

jeevika:kya

Baldev:dadi ये मैंने अपने म्हणत क डैम पर खरीद कर दया है माँ को जब में पांच वर्ष तक वन में था गुरु जी क पास तो वह लकड़ी काटने का काम करता था जिस से हमे कठोर और परिशरसं करना सीखा सके और हमे उसकी मजदूरी मिलती थी उसका मैंने नहीं मेरे सब मित्र ने माँ को उपहार भेट क्या

जीविका जवाब सुन कर चुप बैठ जाती है

उतने में कमला आजाती है और खाना पडोसने लगती है

Kamla:ary भाई सबको उपहार मिल रहा है मेरा क्या

Baldev:aapka उपहार आप वैध जी से ले लो

कमला :क्या...

Baldev:han वो कह रहे थे क कमला बहुत म्हणत करती है उसे कुछ न कुछ मिलना चाहिए

कमला बात को समझ जाती है क बलदेव का निशाना किधर है

kamla:ab जो युवराज जो जवान है वो अपने माँ को दे रहे है वो हमे कहा मिलेगा वैध जी से

Baldev:wo क्यू

Kamla:bhala वैध जी कहा अब म्हणत कर कमाई कर क मेरे लये लाएंगे उपहार और उनसे मजलेगा भी तो वो खरा सोना नहीं मिलेगा

देवरानी समझ जाती है क बलदेव जवान है और कास क म्हणत कर सकता है पर वैध नहीं कर सकता

Kamla:hai न महरानी देवरानी जी बलदेव कस क म्हणत करता है न

devrani:han han...karta है ...

jeevika:man me)ab वैध जी कहा रगड़ क छोड़ पाएंगे बलदेव जैसा छोड़ता है देवरानी को पर ये बात कमला कैसे जानती है

Baldev:kamla खरा सोना नहीं पर चंडी तो मिल हे सकता है तुम्हे वैध जी से

कमला मुस्कुरा देती है

kamla:ji युवराज

rajpal:ary क्या बात को बढ़ा रहे हो तुम सब चुप चाप खाओ

shuruti:aaj तुमने पूजा नहीं क्या देवरानी

devrani:aisa हो सकता है क में पूजा करना भोल्ल जाऊ

Shuruti:aaj तुम्हारा प्रसाद नहीं मिला

Devrani:han वो प्रसाद देना भूल गई में आपको ला क्र देती हु रखा है

Shuruti:koi बात नहीं में खुद तुम्हारे कक्षा में आ कर ले लुंगी बाद में

राजपाल उठ ता है

rajpal:mujhe आज काम से पड़ोस क राज्य में जाना है सेनापति क साथ

Baldev:to कब तक लौटोगे आप

देवरानी बलदेव को हे देख रही थी जो ख़ुशी से फूला नहीं समां रहा था

rajpal:sandhya हो हे जाएगी

shuruti:theek है महाराज आप जाये हम है यहाँ

राजपाल चला जाता है और धीरे धीरे सब उठ कर जाने लगते है

अब सिर्फ बलदेव और देवरानी बच जाते है

Baldev:ab आप भी खा लो

devrani:me खा lungi,meri चिंता मत करो

Baldev:Ab प्रेम आपसे करते है चिंता थोड़े हे पड़ओसिओ का करेंगे

देवरानी शर्मा कर

Devrani:hatt बड़ा आया प्रेम पुजारी

देवरानी थाली ले कर बैठ जाती है और खाने लगती है

Baldev:ye हुई न बात अब मेरी बात मैंने की आदत सीख लो

devrani:agar नहीं मनु तो

Baldev:nahi मणि तो में तुम्हे इतना प्यार दूंगा क तुम खुद मान जाओगी

बलदेव अब देवरानी क आखो में देख रहा था

देवरानी कहते हुए रुक गयी थी अपने प्रति इतना प्यार देख का अपने बेटे द्वारा ,बलदेव अब अपने हाथ से रोटी का निवाला बना कर देवरानी क मुँह में रखता है और उसको खिलने लगता है

devrani:itna प्यार मत करो क संभाल नहीं पाओ तुम

Baldev:mujhe तुम्हारे प्यार में पागल होना है

devrani:pagal तो हो हे गए हो तुम

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देवरानी क पीछे जा कर बलदेव उसे गले लगा लेता हु

baldev:abhi तुमने पागलपंती देखि कहा हो

और बलदेव देवरानी को अपने गॉड में उठा लेता है और देवरानी क कक्षा में चला जाता है और उसे गॉड में उठाये हे दरवाज़ा भी लगा. देता है



गॉड में उठाये ला कर देवरानी क कक्षा में आ कर खड़ा कर देता है देवरानी को

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देवरानी क एक हाथ को पकड़ कर अपने हाथो से मसलता है और उसके पेट क ऊपर उसके नाभि को छेर्ने लगता है

देवरानी का पल्लू अब खिसक जाता है और उसके दोनों बड़े वक्ष साद बहार आयने की गुहार लगा रहे थे

Baldev:maa

Devrani:Hmm

Baldev:kaisa महसूस कर रही हो मेरी बाहो में

devrani:surakshit "aah"siski लेती है

क्यू क बलदेव अब अपना लैंड उसके पीछा चुभा दया था

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"आह उफ्फ्फ बलदेव"

Baldev:hum आपसे बहुत प्रेम करते है

Devrani:mai भी तुमसे प्रेम करने लगी हु बलदेव तुम मेरे पहले प्यार हो

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ये सुनते हे "ुम्म्हा मेरी rani"baldev देवरानी क कान क जड़ में चूमता है जिससे देवरानी क छूट पानी छोड़ने लगती है और उसके आँख बंद होने लगते है अपने जिस्म क इस तरह रगड़ने से

Baldev:tum इस हार में बाला की सुन्दर लगती हो

Devrani:kitni सुन्दर

Baldev:itni जितनी पूरी संसार में कोई महिला नहीं

devrani:par तुम्हे आज न कल तो शादी करनी है आज से हे सब शुरू हो गए पूछना

Baldev:maa सुश्हःहः ऐसा कभी न कहना किसी और का होने से पहले में अपनी जान देना पसंद करूँगा

बलदेव की बात सुनकर देवरानी उसको पलट कर ज़ोर से पाकर क गले लग जाती है

"बलदेव मेरी जान"

"पर तुम्हे करना तो होगा हे एक न एक दिन"

baldev:to तुमसे करूँगा विवाह में

ये सुन कर देवरानी क होश उड़ जाते है

Baldev:bolo करोगी विवाह मुझसे

Devrani:par ये कैसे मुमकिन है

baldev:sab मुमकिन है अगर तुम मेरा साथ दो

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फिर से देवरानी को अपने बहो में भर कर अपने लौड़े को उसके मोठे बड़े मटके जैसे गांड पर टिकाये उसके दूध को घूर रहा था और देवरानी विवाह की बात सुन कर सोच में डूब गयी थी

Baldev:tumhara अंग अंग संगमर मर सा है मेरी रानी और उसके दूध पर से पल्लू हटा देता है

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Baldev:tumhare ये कितने आकर में है

ये सुन कर देवरानी थोड़ा शर्मा कर दूसरी तरफ देख रही थी और बलदेव हिम्मत कए उसके पल्लू खोलने लगता है

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Baldev:sharma रही हो तुम अपने जान से

देवरानी अपनी आखे फिर बंद कर लेती है और अपने वक्ष की तारीफ सुन कर अंदर हे अंदर बहुत खुश थी

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देवरानी क वक्ष किसी बड़े नारियल की तरह फूल क सर उठाये थे और उसके ब्लाउज में उसके निप्पल भी साफ पता चल रहे थे" माँ तुम्हारे ये आम को चूस लूंगा सारा रास पी लूंगा कही से भी दसहरी आम से दुगने है पर छोटे नहीं"

devrani:ishhhh"

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बलदेव अब उसके सदी को लगभग खोल दया था और उसके पीछे आजाता है

गोल घूम क

बलदेव की नज़र अब पेटीकोट में छुप नहीं रहे बड़े तरबूज़े से बड़े गांड देख

Baldev:maa ये तरबूज़े तुम्हारे कितने कड़े और मज़बूत है इसे भी फोड़ कर में इसका रास पीऊंगा

देवरानी बूट बने कड़ी थी उसे समझ में नहीं आरहा था क वो क्या करे इसलिए चुप चाप आनंद ले रही थी

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अब सदी को निचे फेक कर बलदेव ऊपर से निचे तक देवरानी क हर अंग को खा जाने वाली नज़र से देखता है

अब बलदेव माँ क गहरे नाभि में अपनी ऊँगली दाल देता है

devrani:ishhhh बलदेव"

और अपनी ऊँगली धीरे धीरे देवरानी क पेट से ऊपर की ओरे ले जा रहा था

देवरानी क. सांस तेज़ी से चलने लगती है

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अब बलदेव की ऊँगली उसके बड़े दूध क बीच पहुंच जाती है

देवरानी आँख बंद कए

Devrani:uhhhh आआह बलदेव

और उसके दूध ज़ोर से ऊपर निचे हो रहे थे

baldev:maa आज तुम दुल्हन लग रही हो और ये आपके कमर की सिकरी तो आपके दूधिया पेट को खोल्बसूरत बना रहे है और आपकी जांघ भी खूब भरी और लचीली लगती है

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devrani:ishh बलदेव बास

बलदेव तो मैंने को तैयार हे नहीं था और अपने दो ऊँगली उसके दोनों वक्षो क बीच में फसाया रहा जिस से उसे अपने माँ क बड़े दूध का नरम अहसास मिल रहा था

देवरानी अपना हाथ ले जा कर बलदेव क हाथ पर रख कर पीछे करती है

devrani:beta मान जा

बलदेव अपना हाथो से देवरानी क आखो में देखता है

baldev:bolo आज तुम इतनी सजी सॉरी क्यू हो

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उसको दोनों गलो को दबोचता है देवरानी मन में "कमला सही कहती थी इसके जितने बड़े और कठोर हाथ किसी क नहीं"

Devrani:apne प्यार क लये सजी हु

अपने यार क लये सॉरी हु

अब देवरानी भी हल्का महसूस कर रही थी उसके माँ बेटे वाली लज्जा थोड़ी सी निकल गयी थी

baldev:kaun है तुम्हारा यार

Devrani:tum हो बलदेव

इतने में दरवाज़ा कोई खटखटा ता है

बलदेव और देवरानी सीधे होते है

Devrani:Kaun है बहार

बहार से आवाज़ आती है

"मई हु कमला महरानी भरी दोपहरी में कहे दरवाज़ा लगे लिए"

baldev:ye कमला भी न

देवरानी बलदेव को देख मुस्कुराती है

Devrani:jao अब जा कर दरवाज़ा खोलो

Baldev:nahi आप जाओ माँ और उसको यहाँ से भगाओ

devrani:muskurate हुए बीटा तुम मेरी हालत देखो वो क्या सोचेगी और बहार से कोई आ जा रहा होगा तो वो भी देख सकता है मुझे

बलदेव थोड़ा गुस्से में दरवाज़ा खोलता है

कमला देखती है क यह तो बलदेव है और आवाज़ तो देवरानी ने दी थी

उसे समझते देर नहीं लगता है क क्या चल रहा है अंदर

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Baldev:kya है कमला

Kamla:wo वो मई मालिस

मुस्कुराते हुए कहती है और अंदर उसकी नज़र जाती जहा पर अध् नंगी देवरानी कड़ी थी और उसके अस्त व्यस्त सदी और ब्लाउज बाल देख समझ जाती है क मैंने कार्यकर्म ख़राब क्र दया है

Baldev:tum जाओ मालिश में कर दूंगा

और बलदेव क चेहरे पे मुस्कान आ जाती है

कमला मुस्कुराते हुए चली जाती है

और बलदेव फिर से दरवाज़ा बंद करता है..

तो बे कंटिन्यू...
 
अपडेट 44

बलदेव दरवाज़ा लगा कर फिर आता है तो देखता है देवरानी अब भी कड़ी मुस्कुरा रही थी

Devrani:Aise गुस्सा हो रहे हो जैसे किसी ने तुम से साम्राज्य छीन लिया हो

Baldev:tum से बढ़ कर कोई खज़ाना कोई राज्य या साम्राज्य नहीं ..इस कमला की तो..

devrani:shant हो जाओ

बलदेव जा कर पलंग पर बैठ जाता है देवरानी क

Baldev:kar दो शांत

Devrani:mujhe नहीं आता है शांत करने

Baldev:Sab आता है तुमको ..तुम कोई छोटी बची नहीं हो

"और ऐसे हे ये सब कुछ इतने बड़े नहीं हो गए"

देवरानी क दूध पर नज़र गड़ाए हुए कहता है

Devrani:chal हट कमीने

और घूम कर जाने लगती है

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देवरानी की बड़ी गांड देख बलदेव अपने लैंड पर हाथ रख कर मसलते हुए कहता है "अपने दोनों मटके को सम्भालो कही भागने से गिर नहीं जाये"

देवरानी समझते हुए चिढ जाती है

"बलदेव में तुम्हारा जान ले लुंगी"

और बलदेव की ओरे झपट टी है बलदेव इसी क इंतज़ार में tha,devrani क पलट ते हे उसे बहो में भर लेता है

Baldev:maa बोलो न

देवरानी उस स चिपकी थी

Baldev:maa कहो न

devrani:kya बलदेव

baldev:"in तरबूज़ों को फोड़ दू अपने अपने हथोड़े से"

Devrani:aaj तक किसी की हिम्मत नहीं हुई ये सोचने की

Baldev:tumhe कैसे पता किसी ने सोचा होगा क नहीं

Devrani:q क ये कोई आजम तरबूज़े नहीं है

जो किसी भी हथोड़े से फुट जाये

और शर्मा कर बलदेव क सीने में अपना मुँह घुसा लेती है

Baldev:agar मेरे हथोड़े से फुट जायेंगे तो

देवरानी ये सुन कर अपने नाख़ून बलदेव क सीने में गदति है

Devrani:kahi ये न हो क हथोड़ा हे टूट जाये

और है देती है

Baldev:itna गुमान न कर में इन्हे तोड़ क ऐसा दर्द दूंगा क...

देवरानी झूठा गुस्सा दिखते हुए

अपने प्यारी प्यारी रानी को दर्द दोगे?

हाँ?

Baldev:han जो दर्द तुम्हे मिलना चाहिए था जिस से तुम्हारा हर वो दर्द जो सालो से अंग अंग में है सब निकल जायेगा और तुम्हे एक अलग ख़ुशी मिलेगी

Devrani:chal भाग बड़ा आया

बलदेव को भी देवरानी जानबूझ कर उकसा रही थी जिसके फलस्वरूप बलदेव और बेशर्मी से देवरानी क साथ मज़े ले रहा था

बलदेव अबकी बार देवरानी को उसके कमर से पाकर लेता है और भागने नहीं देता

Baldev:ruko भगति है है रानी

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उसको अपनी बहो में भरे उसके गहरे नाभि जो दूध सा चमक रहा था उसे अपने मुँह क करीब खींचता है और अपना जबान उसके नाभि क छेड़ में लगता है

"आआह बलदेव" मत कर ऐसे"

"आआआह ुह्ह्हह्ह्ह्ह"

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देवरानी उत्तेजना से अपना आँख बंद कर लेती है और अपना दोनों हाथ पलंग पर रख कर बलदेव से अपना नाभि चटवाने लगती है

"ाआअह मत ज़ालीमंम ुह्ह्ह्ह बलदेव

ये क्या कर ररः है "

"वही मेरी रानी जो इस प्यारे से दूधिये नाभि का हक़ है उसे दे रहा हु. "

उम्म्म्म आह क्या प्यारी नाभि है "माँ

"इससष्ठ कमीने"

अब देवरानी से रुके रहना मुश्किल था उसके छूट पानी का धार छूट रहा था

देवरानी बेतहाशा बलदेव क ऊपर लेट जाती है और बलदेव भी उसे कास क दबोच कर देवरानी क गर्दन पर अपने जीभ फेर रहा था

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देवरानी अब और ज़ोरो से बलदेव को जकड लेती है जिसके उत्तर में बलदेव भी खूब रगड़ क पकड़ता है

"उठ ाः बलदेव"

Baldev:Maa

Devrani:hmm

बलदेव देवरानी क कान में

"2 मिंट मिला नहीं क तुमने फिर से सदी पहन क दुल्हन बन गयी पता है न मैंने कितने मुश्किल से खोली थी"

देवरानी उसके लैंड पर छूट को रगड़ते हुए

"तुम्हारा क्या है खोल डाई चले गए पहन ने में टाइम लगता है"

baldev:tum मुझे सीखा दो में तुम्हे रोज़ पहना दूंगा और निकल भी दिया करूँगा

और कस क दबोच क "हम्म क्या तगड़ी माल हो पुरे बहो में भर गयी हो"

"क्या कहा कमीने में कोई माल नहीं रानी हु"

बलदेव अब उसको अपने बहो में कास कर पलट देता है

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देवरानी बलदेव क सर पर हाथ फेर रही थी और बलदेव अपने बड़े 9 इंच क लैंड को देवरानी क पेट पर घास रहा था

देवरानी इतने बड़े लैंड का पहली बार अहसास कर थोड़ी भयभीत थोड़ी उत्तेजित भी थी

Devrani:tum कितने कठोर हो लग रहा है बदन का अंग अंग मुद गया

baldev:ab आदत दाल लो रानी बदन का अंग अंग नहीं नस नस ढीली कर दूंगा और वैसे भी तुम कौन सी नाज़ुक हो इतनी भरी हो

Devrani:kya कहा तुमने में मोती हु

देवरानी अपनी ताक़त लगा कर अपने ऊपर लेते बलदेव को ले कर पलटी है और वो अब ऊपर आजाती है

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Devrani:chal मोटू तू है

बलदेव फिर से देवरानी क छूट पर लैंड राहदते हुए

"ताक़त दिखा रही है तुम moti,abhi बताते है "और फिर पलट जाता है देवरानी को ले कर क

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देवरानी फिर से एक बार बलदेव को ले कर पलट जाती है

Baldev:bass मेरी रानी

बलदेव अब देवरानी का सर अपने हाथ पर रख कर उसके साथ चिपक कर लेट जाता है

और अपना पेअर अपनी माँ क पेअर क ऊपर रख लेता है

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एक हाथ कमर पर रख कर

baldev:tum सही में घोड़ी हो गयी हो

devrani:or तुम घोड़े हो गए हो

Baldev:me शेर हु

devrani:bada आया शेर

बलदेव :वो तो पता चलेगा

देवरानी :हाँ वो तो वक़्त हे बताएगा क कौन कितने पानी में है हहह

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बलदेव को जैसे ये बात ललकार देती है और वो देवरानी क ऊपर आ जाता है एक हाथ से कमर पकड़ कर दूसरे हाथो से अपने माँ क कंधो को बड़ी ज़ोर से दबोचता है

"उठ आआह बलदेव"

बलदेव धीरे धीरे अपने हाथ को उसके दूध क बीचो में ले जाता है और एक ऊँगली से

अपने माँ क पहाड़ो क बीच एक ऊँगली रख कर निचे लेता है जिस से देवरानी का ब्लाउज थोड़ा खुलता है और उसका वक्ष का कटाव देख बलदेव अपना जबान अपने होठ पैर फेरता है

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देवरानी "उठ आआह नहीं बलदेव"

बलदेव का हाथ पर वो हाथ रख कर मन करती है इशारे से

देवरानी अब एक हाथ से बलदेव का हाथ पकड़ी

थी और दूसरे हाथ से बलदेव क कंधे पर

राखी थी

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बलदेव अपना दूसरा हाथ देवरानी क कंधे पैर रख अपने मुँह को देवरानी क पेट क पास

लता है और उसे अपने जबान से चाटने लगता

है

devrani:"uhhhh आआआआह बलदेव"

िष्ठ "

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देवरानी आँख बंद कर क मज़े लेने लगती है और बलदेव अब पूरा देवरानी पर छ जाता है

और देवरानी क गाल पर चुम कर

"माँ क्या रसगुल्ले जैसे गाल है तुम्हारे"

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अब बलदेव अपनी माँ क गर्दन पर चूमते हुए निचे अपने माँ क छूट पर अपना लैंड सताए रहता है अभी दोनों माँ बेटे क लैंड और छूट पानी पानी हो गया था

बलदेव अब सीधा अपने माँ क बड़े दूध पर धावा बोलता है और अपना मुँह उसके छाती क बीच डालता है

"उठ आआआआह बलदेव"

"िशः मुझे कुछ हो रहा है बलदेव"

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और एक धार गधा पानी देवरानी क छूट से छूट टी है और सदी क अंदर पेटीकोट को बीघा देती है

"aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh हुउउहुहू ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बलदेव ाः हे bhagwaaaaaaaaaaaan"teen चार धार गधा पानी देवरानी क छूट से छूट ता है

वो अपनी आखे मूंदे बलदेव का पीठ सहला रही थी और उत्तेजना में डूबी थी

Baldev:ye तुम्हारे होठ किसी गुलाब जैसे है खिले हुए लाल गुलाब ,तुम्हारी झील सी आखो में देख डूब जाने का मन करता है

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devrani:aaao डूब जाओ मेरे प्रेमी

देवरानी क दोनों दूध क आकर बढ़ कर दुगने हो छुए थे

बलदेव अब अपने होठ उसके गर्दन से लेते हुए उसके होठो तक ले रहा था...

तभी दोनों चौंकते है

"देवरानी ो देवरानी"

"कहा हो इतने घंटो से "

देवरानी आँख खोल कर देखती है उसे ऐसा लगता है जैसे वो कोई सपना देख रही नींद से जगी है क उसके ऊपर लेता बलदेव भी गुस्से में देख रहा था

Baldev:ab कौन है साला

Devrani:ye षुरूस्ती है

उठो जल्दी

बलदेव अपने लैंड पर तरस कहते हुए उठ ता है

"अब क्या करू बलदेव क्या कहूँगी तुम्हारी बड़ी माँ को"

"बलदेव ऐसा करो तुम ये कम्बल ओढ़ क सो जाओ आँख बंद कए रहना"

देवरानी झट से जा कर अपने सदी सही करती है वो देखती है क उसके छूट का पानी उसके सदी क ऊपर से भी दिख रहा है और उसका गर्दन चाटने क वजह से पूरा लाल है

वो अपने गर्दन थोड़ा साफ करती है और अपने सदी क उस भाग को छुपाती जिस पर उसके छूट का पानी से भेजा था

जा कर दरवाज़ा खोलती है

Devrani:ary आप आईये न

Shurushti:itne देर से क्यू नहीं खोल रही थी

Devrani:wo दीदी में श्लोका पढ़ रही थी और आप तो जानते है क बिना पूरा पढ़े बीच में उठने से कितना पाप होता है islye,pura अध्याय पढ़ कर उठी हु

षुरूश्ती की नज़र देवरानी क अस्त व्यस्त कपडे पे जाती है

Shurushti:man में ) इसके हाल से लग तो नहीं रहा क ये कोई पूजा अर्चना कर रही थी

तबभी उसकी नज़र देवरानी क पेट पर जाती है जो भीगा हुआ था बलदेव क चाटने क वजह से

Shurushti:dekh क तो ऐसा लगता है जैसे तुम सो कर उठी हो थकी सी लग रही हो

Devrani:wo दीदी अब पूजा अर्चना में इतनी लीं हो जाती हु क दुन्या का पता हे नहीं रहता

Shurushti:acha ठीक है वो तो में बस सोची क तुमसे प्रसाद ले औ क्यू क तुम आज दी नहीं प्रसाद और सुबह में मैंने बोलै था क में आउंगी लेने

devrani:ary हाँ दीदी मेरे तो ख्याल से हे निकल गया

मन में) कामिनी तेरे इस प्रसाद क वजह से मेरे प्रेमी का और मेरा प्रेम खेल रुक गया

"दीदी में राखी हु ये लीजिये प्रसाद"

तभी षुरूश्ती की नज़र लेते हुए बलदेव पर पड़ती है

shurushti:Ye बलदेव यहाँ क्यों सो रहा है

Devrani:man me)ab तुम्हे क्या बताऊ क तू चुड़ैल मुझसे पति भी छीन ली अब बेटे क साथ भी चैन से सोने नहीं देगी

"दीदी वो बलदेव क पेट में दर्द था तो मैंने उसे कड़ा पिलाया तो उसे यही नींद आगयी तो सो गया"

shurushti:oh

Devrani:ab छोटा तो नहीं है ये जो उठा क रख औ उसके कक्षा में

shurushti:han बास बास बास

षुरूश्ती जाने लगती है

"अगर में सही हु तो क्या सही में इन दोनों का कुछ ची में क्या सोच रही हु" ये सोचते हुए षुरूश्ती चली जाती है फिर कुछ सोच कर

दरवाज़े पे रुक कर देवरानी ज़रा मेरे कक्षा में चलो न

devrani:q दीदी

Shurushti:thoda पकवान बनाने का गन तुमसे सीखना था

devrani:man में )नहीं गयी इसके साथ तो पक्का ये शक करेगी

"है चलो दीदी"

और फिर दोनों चल देते है...
 
अपडेट 45

बलदेव लेता हुआ पलंग पर अपनी माँ को देखता रह जाता है कैसे उसकी बड़ी माँ ने उसका पूरा मज़ा किरकिरा कर दया था और वह से देवरानी को ले कर चली गयी थी षुरूश्ती

“ये बड़ी माँ को तो सुकून नहीं माँ को थोड़ा सा भी खुश नहीं देख सकती आधी ज़िन्दगी तो बर्बाद हे कर दया मेरी रानी का इनलोगो ने आधी ज़िन्दगी बाकी है उसे में इनलोगो को बर्बाद नहीं करने दूंगा “

अब तक बलदेव का लैंड शांत हो चूका था और वो बुझे मन क साथ बहार आता है तो देखता है उसकी माँ और बड़ी माँ दोनों रसोई में है

देवरानी देखती है क बलदेव का चेहरा उतरा हुआ है और वो रसोई में काम करते हुए “बलदेव उठ गए तुम ,तुम्हारे लये आज क्या बनाऊ?”

षुरूश्ती वही पर थी

Baldev:Han

बास इतना कह कर मुँह लटकाये सीडीओ पर चढ़ने लगता है

Shurushti:ary देवरानी इसको क्या हुआ

Devrani:muskura kar”kya होगा इसे सो कर उठा है न”

मन me)ise प्यार हो गया है

षुरूश्ती :पर फिर भी देवरानी इसने मुँह क्यू बना रखा है और तुम्हारा जवाब भी नहीं दया

Devrani:wo उसकी ताब्यात ख़राब है न इसलिए

मन me)wo भले से नहीं बोलै पर में उसके जज़्बात समझ गयी

shurushti:han हो सकता है वही तो मई बोलू बलदेव जैसा मेहनती लड़का भरे दोपहरी क्यू सो रहा है

इस बात पर देवरानी शर्म से सर झुका कर मुस्कुरा लेती है मन हे man”ye लड़का तो वैसे तो म्हणत हे कर रहा था पर अपने माँ पर”

देवरानी अपने मन में बड़बड़ाती है

Shurushti:kya ?

Devrani:nahi कुछ नहीं ,में कह रही थी जल्दी से खाना बना लेती हु आप जाओ कमला को भेज दो

Shurushti:kya बात है आज मेरी सौतन मुझे खाना बनाने नहीं दे रही और हमेशा से. मेरे से काम करवाने क लये तुनकती थी आज उल्टा गंगा कहा से बह रही है

Devrani:kya कहा दीदी

Shurushti:kuch नहीं में जाती हु कमला जो भेज दूंगी

षुरूश्ती चली जाती है और देवरानी अपने काम में लग जाती है

“ये बलदेव भी न एक पल नहीं रहता मेरे बिना आज मुझे महसूस हुआ क एक मर्द का साथ क्या होता है और एक औरत क जीवन में पुरुष का काम क्या है”

“नहीं तो ये राजपाल तो जीवन भर कभी न मुझे खोजै न पूछा न प्यार क्या सबका बदला लेगा मेरा बलदेव”

और मुस्कुराती है

तभी कमला आजाती है

Kamla:haay बन्नो तो बड़ी मुस्कुरा रही है लगता है तुम्हारे दरया में गोते लगा लय बलदेव ने

देवरानी देखती है सामने कमला कड़ी हो कर उसपर ताने कस रही थी

devrani:chup कर कामिनी

Kamla:ha है अब मुझे क्यू बताओगी दुश्मन जो हु

Devrani:aisa नहीं है कमला

Kamla:to फिर बताओ न उद्घाटन हो गया क्या?

देवरानी एक दम्म शर्म से लाल हो जाती है

Devrani:pagal वो सब नहीं हुआ

Kamla:kya सब नहीं हुआ ,घंटो भर अंदर क़ैस थे तुम दोनों दरवाज़ा लगा क भरी दोपहर में और कहते हो कुछ नहीं हुआ

“बुरबक समझी हो?

Devrani:ary कहा न कमला वैसा कुछ नहीं हुआ

Kamla:to क्या अंदर बैठ क पूजा अर्चना कर रही थी और पथ पढ़ रही थी

Devrani:aisa नहीं है वो तो बास

ऊपर ऊपर से

देवरानी अपना सर झुका लेती है और मरे शर्म की गाड़ी जा रही थी

Kamla:acha तो बास रगड़ा रगड़ी हुई hai,khub कस क रगड़ा है बलदेव ने देखो अब तक गर्दन लाल है

देवरानी ये सुन कर अपने पेअर क अंगूठो को ऊँगली पर रख kar”bass करो कमला खाना बनाओ”

Kamla:acha ठीक है महरानी

आपको पता है महरानी षुरूश्ती कह रही थी क बलदेव की ताब्यात ख़राब है और तुम अध्याय ख़त्म कर रही थी कक्षा में

और कमला है देती है ठहाका लगा कर जिसे देख देवरानी भी है देती है

“अब क्या कहती कमला”

देवरानी मासूम बनते हुए कहती है

Kamla:wo तो है अपने सही बेवक़ूफ़ बनाया उसे

Devrani:hmm झूट बोलना पड़ा

Kamla:han तो क्या बताते आप क आप कुछ और भक्ति में लीं थे और वैसे भी कुछ जीवन में पाने क लये और खासकर आज क समय तो झूट बोलना हे पड़ता है

Devrani:hmm

Kamla:kuch ाचा होने क लये कुछ बुरा करना संसार का नियम है देवरानी

और तुम उस नियम को जितना जल्दी सीख जाओ उतना ाचा है नहीं तो लोग सिर्फ तुम्हारा इश्तेमाल करेंगे तुम्हारे लये कोई कुछ नहीं करेगा

Devrani:han कमला अब मुझे अपने जीवन में ख़ुशी क लये किसी क भरोसे नहीं रहना है खुद करना है जो करना ,सब अपने ख़ुशी क लये मेरे ख़ुशी का गाला होते तो सही तो में क्यू किसी नियम और समाज का सोचु में तो किसी की ख़ुशी का गाला तो नहीं घोट रही

“और ज़रूरत पड़े तो वो भी करुँगी क्यू क मेरे साथ भी ऐसा हे हुआ है”

Kamla:aapka बलदेव सब ठीक कर देगा अब ज़्यादा मत सोचिये महरानी

Devrani:sun न

देवरानी कमला क कान में कुछ कहती है

दोनों मिल कर खाना तैयार करते है और कमला बरी बरी से सबको खाना तैयार होने का सुचना दे देती है

षुरूश्ती जीविका देवरानी बलदेव सब मिल कर खाने लगते है क्यू क आज राजपाल रात तक हे आने वाला था

सब चुप चाप खा रहे थे बैठे

देवरानी क सामने बलदेव बैठा अपना सर झुकाये खा रहा था पर अपना सर उठाने का नाम नहीं ले रहा था

Devrani:man me)rus गया मेरा कन्हैया

Shurushti:Kamla और सब्ज़ी लाओ

Kamla:abhi लाइ

कमला सब्ज़ी ले कर आती है

Kamla:lagta है आपको अछि लगी बहुत

षुरूश्ती :है स्वादिष्ट तो है पनीर आज का

कौन बनाया?

Kamla:banaya तो मैंने पर तेल मसाला सब महरानी देवरानी क हिसाब का था

Shurushti;oh

देवरानी अभी भी बलदेव को देखे जा रही थी और वो अपना सर झुकाये धीरे धीर खा रहा था

बलदेव को गुमशुम देख अब देवरानी का भी चेहरा उतर जाता है

Devrani:baldev ये सब्ज़ी लो न तुम्हारे पसंद की है

बलदेव चुप रहता है

देवरानी चम्मच से उसके प्लेट में रखने वाली थी क वो अपना हाथ से चमच को पीछे करता है

जिसे देख देवरानी वापस सब्ज़ी कटोरे में रख देती है

बलदेव उठ जाता है और हाथ धो कर महल क बहार जाता है

देवरानी इशारे से कमला को कहती है क रोको बलदेव को वो खाया नहीं

Kamla:ary युवराज आप ने बहुत काम खाया

आपका मनपसंद पनीर था

Baldev:bass मेरी खुराक काम है मेरा इतने से हे पेट भर जाता है आज चाहा वो कोई चीज़ हो

और एक नज़र देवरानी को तिरछी नज़र से देखता है और पलट कर जाने लगता है महल क बहार

देवरानी जो गुमशुम थी अब हल्का मुस्कुरा क शरारत से “कितना खायेगा बलदेव खिलाऊंगी न क्यू घबराता है और जिस दिन मुझे लगा क मेरे से तेरा मन भर गया उस दिन बताउंगी आज बड़ा भाव खा रहा है”

मन में अपने आप से बात करती है देवरानी

भोजन क बाद सब जा कर अपने अपने कक्षा में कुछ समय सोने क लये जाते है पर देवरानी अब भी बर्तन हटा कर वही बैठी थी

कुछ देर में बलदेव उसे वापस आता दिखाई देता है

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“कितने मुछो पर ताव डाई हुआ है जैसे इसकी पत्नी हु में और इसका मिलान करने दे नहीं रहे सब ,अभी से हाल है इस लड़के का आगे क्या करेगा”

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“पर प्यार भी तो मुझसे हे करता है न “

देवरानी बलदेव को देखते हुए सीडीओ पद चढ़ने लगती है जिसे अंदर आता हुआ बलदेव देखता है

“ये माँ को क्या हुआ वो ऊपर क्यू जा रही है”

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बलदेव बास माँ को हे देखे न रहा था जो एक बलखाती नागिन सी ऊपर जा रही थी

जैसे हे देवरानी को लगा क बलदेव उसे घर रहा है वो अपने गांड को मटकती है

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देवरानी क दोनों बड़े चुतर को यु मटकता देख बलदेव से रहा नहीं जाता

बलदेव मन me:”ye गांड बहुत मटका रही हो रानी जब कुटुंगा न अपने मुसल से तो पता चलेगा”

देवरानी मन me;ab तो बलदेव का बचा आएगा हे मेरे पीछे

और ऐडा से पीछे मुद कर देखती है

और अपने गांड पे गुमान करते हुए बलदेव क कक्षा में जाती है

बलदेव भी पीछे पीछे चोरो की तरह अपने माँ क गांड का पीछे करते हुए अपने कक्षा में प्रवेश करता है

बलदेव को उसकी माँ सामने खिड़की पैर कड़ी मिलती है पर उसे अपने पलंग क सामने एक चित्र लटका हुआ दीखता है

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दीवार पैर चित्र जो कुछ देवरानी जैसी थी बलदेव समझ जाता है ये तो माँ की हे चित्र है

“ये माँ की चित्र कला किसने बनाई और मेरे कक्षा में कैसे ?”

देवरानी को देखता है तो पता है वो बड़े मनमोहक अंगड़ाई क ऐडा से खिड़की क दोनों ओरे अपने हाथ रखे अपने गांड को फैलाये कड़ी थी

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Baldev:man me)ji तो चाहता है अभी खड़े खड़े हे पेल दू पर ये कोई कमज़ोर माल नहीं है म्हणत करना पड़ेगा ऐसी पारसी माल की मलाई खाने क लये

जालीदार ब्लाउज और सदी में देवरानी क मनमोहक जिस्म को घर कर बलदेव का लैंड सर उठाने लगा था तभी देवरानी अपना हाथ पीछे ले जाती है

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और अपने ब्लाउज का डोरी खोल देती है जिसे देख फैंन से बलदेव शेर हुंकार मरने लगता है और देवरानी एक ऐडा से बलदेव पैर कहर बरपाते हुए घूमती है

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ऐसी मुस्कान और उत्तेजना से भरी अंदाज़ ने बलदेव को कुछ सोचने समझने की शक्ति छीन ली वो हर गुस्सा भुला कर देवरानी क पास जाना चाहता था वो जा कर उससे

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पीछे से जा कर चिपक जाता है

Baldev:maa जान लोगे क्या

बलदेव उसके कानो में सरगोशी करते हुए कहता है देवरानी आँख बंद कए

“और उसका क्या जो दोपहर से तुम मुझ से दूर दूर जा कर मेरे डिल को ठेस पंहुचा रहे हो”

“मुआफ कर दो मेरी रानी”

“उठ आआह में समझती हु तुम्हारे पयद को पर तुम शायद ये नहीं जानते बलदेव में इस प्यार क लये बरसो से तरसी हु”

“माँ तो उस दिन राजपाल से क्यू चिपकी थी और खूब है है क बतया रहे थे तुम दोनों”

“वो मई गुस्से में थी तुम्हे बुरा लगा मेरे राजा”

“हाँ मेरी रानी को कोई और छुए राजा को बुरा तो लगेगा हे न”

“पर वो तुम्हारे बाप है उसके पत्नी हु में अब भी तुम उनके पत्नी क साथ छेड़ छड़ करते हो और अपने पिता को नाम से बुला रहे हो”

बलदेव अब कास क देवरानी को पीछे से दबोच लेता है

“िस्ष्ह बलदेव”

“वैसे पिता का क्या जो मेरी रानी को जीवन भर तकलीफ दया है वो मेरा शत्रु जो किसी ने मेरे रानी को दुःख दया”

“उठ ाः मेरे राजा आराम से अगर तुम्हे उस दिन क लये बुरा लगा हो तो मुआफ कर दो वैसे उस दिन भी तुम्हारे पिता जी बास हस्स क्र बातचीत कए और फिर उस षुरूश्ती क कक्षा में चले गए मुझे छोर क आआह “

“मई नहीं चाहता क वो राजपाल तुम्हे छुए भी मेरी रानी”

“बास तुमने कह दया मतलब आज क बाद मेरा कोई नहीं है राजपाल”

अब तक गले लगने से छेड़ छड़ से दोनों क जिस्म गरम हो गए थे और दोनों एक दूसरे में सामना चाहते थे

“वो सब छोरो बलदेव बड़े गुस्सा थे दिन में शाम होते हे फिर प्यार आगया मुझ पैर”

“माँ तुम्हारे पास वो सब कुछ जिस से में क्या कोई भी मर्द किसी की हत्या करना भी गवारा करे”

“उठ सच्ची बलदेव”

“मुछि मेरी रानी”

बलदेव अब निचे आते हुए ब्लाउज क डोरी को हाथ से हटा कर देवरानी क पीठ पर हाथ फेरते हुए

“क्या पीठ है तुम्हारे कसम से इसे तो चाटने का मन कर रहा है”

“तो चाल लो “

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बलदेव अपना मुँह लगा कर पीठ को चूमता है और पीठ को जबान से चाट ते हुए ऊपर आने लगता है

“उम्म्म मा क्या दूधिया पीठ है तुम्हारी”

“उह्ह्ह आआह बलदेव आराम पूरा पीठ भीग गया मेरा कितना गरम जबान है तुम्हारी “” ाआअह. ुह्ह्ह्हह्ह”

बलदेव ऊपर अपने होठ ले कर आता है

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“ुह्हम्म्म्म ओमममममम आह मा”

“उफ्फ्फ बलदेव मेरी जान लोगे तुम अब”

“अगर तुम ऐसे बिजलिया गिराओगी दिन दहाड़े तो में उसका बदला ऐसे हे लूंगा”

“हे भगवन उफ्फ्फ घर पैर सब है संयम राख्न सीखो में कही भागी नहीं जा राहु उह्ह्ह बलदेव”

बलदेव अब सीधा हो कर देवरानी क गांड पर अपना 9 इंच का लैंड भिड़ा देता है

देवरानी भी अपने 44 की गांड पर लैंड महसूस कर आखे बंद कर ली



“कैसा लग रहा है माँ”

“ओह्ह्ह बलदेव बेशरम अह्ह्ह “

बलदेव निचे से अपने माँ को हाथो को अपने हाथो से अपने कब्ज़े में लय था



“बोलो न माँ कैसा लग रहा है”

“उठ बलदेव ाचा “देवरानी अब अपने पेट पर रखे बलदेव क हाथ को आपने हाथ से दबती है

“क्या इतना मज़ा कभी तुम्हारे पति ने दया “

“इस चुप करो बलदेव वो मेरी इज़्ज़त नहीं करता मज़ा तो दूर की बातहै”

“तुम्हे मेने हृदय से प्रेम क्या है पुत्र तुम मेरे पहले प्यार हो मेरे आशिके”

“पिता जी को उनके गलती की सजा मिलेगी”



“वो क्या मुझे प्रेम करेगा पिछले 18 वर्षो में 18 बार भी मेरे साथ नहीं सोया”

“क्या माँ क्या कह रही हो तुम”

“सच्ची बलदेव वो दुष्ट 18 बार क्या मेरे साथ मिलान करेगा 18 मिंट भी नहीं क्या”

“इसका मतलब तुमने अभी तक 18 बार भी मिलाप नबी क्या” और बलदेव देवरानी क बालो में नाक लगा कर सूंघता है

“नहीं बलदेव में झूट नहीं कहूँगी राजपाल ने पहली रात में मुझे कुछ समय दया सुहागरात में उसके बाद तीन या चार बार सुहागरात क बाद में हम मिले”

“उठ माँ ुम्म्हा “बलदेव उसके गर्दन पर चुम रहा “तुम्हारे ये ज़ुल्फो की खुशबु माँ”

“उठ ाः बीटा तुम्हे पता है तीन चार बार मई हे छुप छुपा क उनके पास गयी थी क्यू क उनको कसम था षुरूश्ती क तरफ से”

“मेरे जीवन से खेला है इस षुरूश्ती ने”

“माँ तुम्हारी आयु कितनी है”

“उठ आह आराम से बीटा ‘में 35 वर्षीया हु”



“अभी बहुत समय है पश्चिम देशो में ये उम्र में लोग विवाह करते है और वैसे में पुरे 18 साल का कसार पूरा कर दूंगा”

बलदेव अब धीरे धीरे अपने लौड़े को देवरानी क दरार में गुसा दया

“यह ाः baldev”devrani अपनी आखे बंद कए मज़े ले रही थी

“बलदेव मैं तुम्हे अपना माना है डिल से राजपाल की तरह धोका न देना”

“में उसके जैसा बेवक़ूफ़ नहीं जो तुम जैसी माल क रहते हुए कही मुँह मारु”

“सब मर्द ऐसा हे कहते है”

बलदेव देवरानी क बाल को खोल देता है



“माँ तुम्हारा चाँद सा मुखर और सुन्दर हो गया तुम्हारे सुराही दार गर्दन उफ़ माँ तुम्हारे आँख तुम्हारे होठ की लाली तुम्हारे ये गाल दूध से चमक रहे जी करता है काट लू”

“उठ इतना प्यार करता है मुझे”

“यक़ीन नहीं होता तो आज़मा कर देखा लेना कभी”

“कितना प्यार करते हो मुझसे?”

“अपनी जान से भी ज़्यादा”

“और तुम मेरी रानी तुम कितना चाहती हो अपने प्रेमी बलदेव को”

“इतना क अब से तुम मेरे भगवन हो और तुम्हारी इच्छा पूरी करना हे मेरी भक्ति है बलदेव”

“नहीं माँ पूजा तो मई करना चाहता हु इस संगमरमरी बदन की तुम्हे तो में रानी नहीं महारानी बना कर रखूँगा और देवी माँ बना कर दिन रत उपासना करूँगा “

देवरानी बलदेव को मुस्कुराते हुए एक ऐडा से दीवार की ओरे धकेल टी है

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“अपने माँ को महारानी बनाएगा बड़ा आया महाराजा”

“माँ गहतराष्ट्रा का अगला महाराजा मई हु और तुम बनोगी मेरी maharani”devrani बलदेव क बलिष्ट सीने पैर हाथ राखी मुस्कुरा रही थी

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“और वैसे भी मैंने गहतराष्ट्रा की महारानी को जीत लय हु तो महाराजा तो हो हे गया में मुझे पिता जी बनाये इसकी आवश्यकता नहीं”

“तो फिर सीने में तलवार खाने क लये तैयार रहना देवरानी को अपनी महारानी बनाने का स्वप्न अगर देख रहे हो तो”

“मर जाऊंगा पर तुम्हारे हर अधूरे सपने पुरे करूँगा इस जान का क्या करना जो अपने प्यार पे न मर सके”

देवरानी क आखो में अचानक एक अलग सा प्यार आजाता है

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बलदेव यु प्यार से देखते देवरानी क पास

अपना मुँह ले जाता है

“यही करना छह रहा था न दोपहर को”

“हाँ मेरी महारानी”

“आजा मेरे महाराजा”

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देवरानी बलदेव क आखो में देख रही थी और बलदेव अपने होठ हल्का खोले हुए देवरानी क होठो क करीब धीरे से ला रहा था

जैसे हे बलदेव का होठ देवरानी क होठ से टकराते है वो आखे बंद कर लेती है पद बलदेव अब भी उसके मासूम से चाँद से मुखड़े में खोया था

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“उह्ह्ह आआह्ह”

बलदेव हल्का सा होठ को पकड़ा था और फिर अपने दोनों होठो से देवरानी क निचले होठो को पकड़ लेता है

“उह्ह्ह बल....”

“उम्म्म्म माँ हहह””

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छप्पपपपप चूऊउउउ क आवाज़ से बलदेव चूसे जा रहा था

देवरानी अब अपने होठ थोड़ा बलदेव क होठ पर रगड़ती है

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बलदेव दोनों होठो से देवरानी क निचले होठो को पकडे खींचता है

Devrani:uhh ाआअह

ज़ोरो से अपने छाती ऊपर निचे करती है

बलदेव होठ को चबा क खींच रहा था

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देवरानी ज़ोरो से उत्तेजना में बलदेव से चिपक जाती है देवरानी अपने दूध बलदेव क सीने से सताती है

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बलदेव उसके होठ को चूसते हुए उसके कमर पर हाथ रखे उसे अपने पास खींचता है

और फिर उसके होठो को खूब ज़ोर से

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अब देवरानी क दोनों होठ को खूब ज़ोरो से चूस रहा था बलदेव

Devrani:uhh ामममम

साथ देते हुए वो भी उसके होठो में अपने जीभ दाल देती है

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“उम्म्म्म ाह्मममम “

यह चूऊउ चूऊओ आआह उनमममम”

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ान देवरानी भी खूब कास क चुम चाट रही थी और उसके साँसे रुकने लगी तो वो बलदेव क मुँह से थोड़ा दूर होती है

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अपने अंदर थूक गटकते हुए मुस्कुराते हुए कहती है

“तुम थक ते नहीं बलदेव”

“तुम्हे प्यार करते हुए बरसो बीत जाये तो पता न चले इतने जल्दी “

“तुम थक गए क्या मेरी रानी”

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“में तुम्हारी माँ हु पारस की रानी” और बलदेव उसे अपने से खूब जकड क गले लगा लेता है

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“ये तुम्हारी चित्र मेरे कक्षा में कैसे आई और कहा से आई”

“आर्य मेरे राजा तो तुमने देख लय वो ,वो मेरी ओरे से उपहार है मेरे प्रेमी क लये”

“उस चित्र में तुम माल लग रही हो तुम्हारे मांसल पेट उभर सब दिख रहे है”

“हँ पागल तो देखना सुबह शाम मेरे चित्र को”

देवरानी बलदेव क सीने को सहलाते हुए कहती है

बलदेव ये सुन कर फिर से बहो में देवरानी को भरते हुए “उह मेरी देवरानी”

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“मेरी प्रेमिका” और झट से उसके होठो को फिर अपने होठो में दबा लेता है चुस्सने लगता है ,देवरानी उसके बहो में सिमटी चली जाती है और अपने नाम पुकारने से और उत्तेजित हो जाती है

Devrani:man में “हे भगवन ये तो अपने माँ को नाम से पुकार रहा है जैसे में इसके पत्नी हो गयी”

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देवरानी क होठ की लाली को चूसते हुए खूब ज़ोर से जकड़ा था बलदेव जिसे देख कर देवरानी भी अपने मन में “अब इसे प्रेमी बनाया है तो कहेगा हे नाम से”

देवरानी अब ज़ोर से बलडेक होठ को अपने होठ

में दबा लेती है और चुस्ती है

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देवरानी अब पानी छोड़ने लगती है उसका छूट किसी भट्टी की तरह जल रहा था वो बलदेव क होठ को जकड क चूस क रास पी रही थी

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बलदेव अब अपने लौड़े को देवरानी क बुर पैर खूब ज़ोर से रगड़ता है और होठ चूसते हुए एक लम्बी सांस ले कर अपने माँ क होठ छोरता hai,devrani की चूड़ी तन तन बज रही थी

Baldev:devrani

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Devrani:baldev:uhh

“ऐसे सर क्यू निचे झुका रही मेरे नाम लेने से कोई आपत्ति है मेरे प्रेमिका को”

“नहीं मेरे प्रेमी पहले बार सुना तो अटपटा लगा पर तुम्हे हक़ है कहने का”

“मेरे प्रेमी कहो पुकारो मेरे नाम से “

“देवरानी जी ...महारानी देवरानी”

“महाराजा जी महाराजा बलदेव”

और अपने छूट को ज़ोर से रगड़ती है बलदेव क लैंड से ठप्प कर चोट लगता है छूट पर

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देवरानी अपने होठ आगे बढाती है क बलदेव उसके होठ पूरा अपने मुँह में भर कर चूसने लगता है

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बलदेव क मुँह से हल्का सा निकलता hai”devrani”

अब देवरानी किसी शेरनी की तरह उत्तेजित हो कर बलदेव पर भरी पड़ती हुई अपनी जीभ को निकल कर बलदेव क मुख में दाल उसके होठ को बुरी तरह चूसने लगती है

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“ुह्माआ ायः”

देवरानी मन में” मेरे राजा अभी तुझे पता नहीं तुमने पारस क शेरनी क मुँह खून लगने का अंजाम”

ुम्म्हा छू ाआअह

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देवरानी अपने जीभ को अंदर घुसाए और अपने दोनों होठो से बलदेव क होठो को खाये जा रही थी और बलदेव भी उसके इस तरह से चूसने से हैरान था

“ुहममम ाः बल”

उठ मा

और बलदेव क होठो को काट कर वो अपने होठो पर जबान फेरते हुए बलदेव को चूरति है

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देवरानी अब भी बलदेव क बलिष्ट सीने पे हाथ रखे थी और संतुष्टि से बलदेव को देख रही थी

बलदेव उसे देख हैरान था

“माँ तुम्हारा ये रूप बड़ा क़ातिल था”

“तुम्हे एक तरसे हुए डिल और पारस क रानी को खून चखा दया है अब ये शेरनी तुम्हारा क्या हश्र करेगी”

“में मर मिटने तैयार हु मेरी रानी”

Devrani:tumhe संयम रखना सीखा दूंगी तुम्हे सरे सूत्र पता हो जायेगा कमा क मेरे काम देव

Baldev:meri रति रानी वही तो में चाहता हु

Devrani:to आजाना आज रत भोजन क बाद मेरे कक्षा में

“तुमने कहा था न देवरानी आज रात तुम्हे माँ नहीं देवरानी मिलेगी”

देवरानी किसी भुकी शेरनी की तरह देखती है बलदेव क आखो में

बलदेव देवरानी का हाथ पकड़ कर चूमता है “मेरी देवरानी महारानी”

और गले लगा लेता है
 
अपडेट 46

देवरानी बलदेव से खूब रगड़ पट्टी कर क उसके कक्षा से निचे सीडीओ से उतरती है और गुनगुनाते हुए अपने बाल जो बलदेव ने पुरे खोल डाई थे उसे सवारती हुई उतर रही थी

शाम क वक़्त जीविका टहल रही थी वैध जी कहे अनुसार और तभी उसके ऊपर से बलखाती देवरानी मुस्कुराती हुई किसी घोड़ी की तरह की चल कर सामने से आती दिखाई दी

Jeevika:man में “किसी घोड़ी जैसी मटक रही है दिन दहाड़े ये लोग शुरू हो गए ,शाम में उतर रही है ऊपर से दिन भर ऊपर हे थी क्या चुड़ैल”



देवरानी अब जीविका क सामने थी जीविका देखते रह जाती है देवरानी क बिखरे बाल अस्त व्यस्त सदी ब्लाउज ढीला सा पड़ा हुआ घाघरा मुदा उलझा हुआ देवरानी क होठो की लाली कही पर थी कही पर नहीं उसके गर्दन और गाल पैर लाल निशान

जीविका गुस्से से देख रही थी

जीविका बूढी हो गयी थी उसे समझते देर नहीं लगती क देवरानी का हाल का कारन क्या है

जीविका को समझ नहीं आता है क बहु को क्या बोले

Devrani:man me)Budhi आखे फाड् देख रही है तो देख ले मेने करवा आई हु तेरे पोते से मालिश

जीविका को देखते हुए सोचती है और जीविका बोल हे नहीं रही थी जैसे उसे सांप सूंघ गया हो

देवरानी हल्का मुस्कुरा क जीविका क पेअर छू लेती है

“सांसु मा”

“हाँ हैं जीत rho”jeevika मजबूरन अपने मुँह से निकलती है

ये देख कर देवरानी एक क़ातिल मुस्कान देती है

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“अब लगा लो ज़ोर अपना बूढी और अपने बहु से लगवा लो इस बार तुम मेरी ख़ुशी छीन नहीं सकती प्यारी संसू माँ”

“यह” हल्का मुस्कुरा क

“तुम सबको तो मेरा बलदेव हे मज़ा चाकहएगा मेरे हर दुःख का बदला लेगा वो”

और अपने सर क बाल को बांध कर अपने पल्लू को झटक कर चलते रहती है

Jeevika:man में) भगवन इस अधर्मी देवरानी की बूढी भ्रष्ट हो गयी है इसे सद्बुद्धि दे अपने बेटे से हे रंग रलिया मन रही है

“कही देवरानी हम सब से बदला लेने का तो नहीं सोच रही ,ऊपर से पेअर आ कर छू रही है जैसे सटी सावित्री बहु हो”

जीविका टहलते हुए सोचते हे अपने कक्षा में पहुंच जाती है

देवरानी अपने कक्षा में पहुँचती है तो देखती है कमला उसका बिस्तर ठीक कर रही थी

कमला पलट कर देखती है देवरानी का हाल देख सोचती है

“लगता है कमीनी खुलवा क आगयी अपना तिजोरी बलदेव क चाभी से”

Kamla:devrani क्या बात है आज बड़ी खिली खिली लग रही हो?

Devrani:han बास अब तो मेरा समय शुरू हो गया मेरी कमला अब तो बास ऐसे हे रहूंगी

Kamla:kaisa समय महरानी

Devrani:ab बनो मत

है देती है कमला

Kamla:hey भगवन लगता है पूरी लाली खा गया हो तुम्हारा किसी ने

देवरानी शर्मा कर “हाँ”

“हाँ महरानी कितने बुरा हाल बना रखा है”

“क्यू ऐसा क्या हुआ है मुझमे”

“अपनी हालत को देखो कोई बचा भी देखेगा तो समझ जायेगा क खूब रगडम पट्टी का खेल खेल क आई हो”

“चल मुझे घर में कौन देखने आ रहा है”

“हे भगवन महरानी इतनी भी लापरवाही ठीक नहीं कोई देखा तो नहीं न आपको इस हाल में”

देवरानी को जीविका का चेहरा याद आजाता है पर वो ये बात कमला से छुपा लेती है

“है भगवन अपने आप को देखो ऐसा हाल तो मेरा सुहागरात में रत भर सम्भोग कर क भी नहीं हुआ था”

देवरानी झट से अपने कक्षा क आईये क परदे को हटा टी है और अपने आपको देख

“ईशःठ “

शर्मा जाती है उसका पूरा गर्दन गाल होठ पर निशान पड़े थे गोर बदन पर लाल निशान अलग हे दिख रहे थे

Devrani:man me)ye बलदेव भी न एक काम संयम से न करता सब कुछ में अपना बल दिखाना ज़रूरी है उसे

Kamla:kya हुआ जी किसको यद् कर रही हो

Devrani:tum ज़्यादा बाद बाद मत करो और हाँ सुनो ये सफ़ेद चादर हटाओ पलंग पे से

Kamla:maine अभी बदल क बिछाया है

Devrani:nahi हटाओ इसे दूसरा बिछाओ

देवरानी अपने कक्षा क अंदर क कक्षा में जाती है जहा बड़े अलमारी से एक लाल रंग का चादर लती है

“ये ले इसे बिछा कमला”

कमला; क्या बात है आज सफ़ेद से सीधा लाल रंग पे कही आज रत का कार्यकर्म यही तो नहीं है

देवरानी शर्मा क

Kamla:chup कर हर कुछ पूछती है tu,han है आअज बलदेव यही आएगा तुझसे मतलब

Kamla:mujhe सब बता दया करो कब कहा ये कमला काम आजाये किसी को नहीं पता होता

Devrani:wo तो है कमला तू है बड़े काम की cheez,bass एक काम करना रात में तू आज महल हे रुक जाना और मेरे कक्षा क सामने रसोई का सामान रखा है उस कक्षा में एक खटिया है वह सोना है तुम्हे

कमला चादर बदलने लगती है

कमला: पर देवरानी ,हमे यहाँ रुकना मन है

Devrani:samjho ..तुम्हे अपनी पैनी नज़र बनाये रखना है जैसे हे राजपाल या कोई मेरे कक्षा में आने लगे मुझे सचेत कर देना या इशारा देना ताली बजा क या खासी कर क

Kamla:badi चाल बाज़ होते जा रही हो

देवरानी वही कुर्सी पर बैठ टी है और कामसूत्र की किताब पलंग क निचे से निकल कर पढ़ने लगती है खूब चौसे

कमला सारा काम निपटती है और रसोई में जा कर कारा तैयार करने लगती है और गिलास में ले कर आती है देवरानी अब भी पुष्तक पढ़ रबी थी

Kamla:kab तक पुष्तक में पढ़ते रहोगे कुछ सच में भी ऐसे करो

कमला पास में हे बैठ जाती है

देवरानी एक पैन को देख रही थी जिसमे एक पुरुष महिला क दोनों टैंगो को अपने कंधे पर रखे बच्चे की तरह उठा रखा था दीवार क सहारे अपने ऊपर और उसका मुँह उस स्त्री क छूट में था

Kamla:aisa हे करने का इरादा है क्या

Devrani:dhatt ये सब तो बास चित्र कला है सच में ऐसा नहीं होता

Kamla:nahi ये सच में भी होता है करने आना चाहिए

Devrani:par पूरी औरत इस चित्र में दीवार क सहारे इस पुरुष क कंधे पर बैठी है ...की

और देवरानी पास रखा गिलास उठा कर करा पीने लगती है

Kamla:fiqar न करो महरानी बलदेव आपको दोनों कंधा क्या एक कंधे पैर भी उठा सकता है

Devrani:chup कर पापिन

Kamla:aaj योग नहीं की शाम का ,तैयारी करो मज़बूती से नहीं तो हड्डी पसली एक कर देगा बलदेव

देवरानी मुस्कुराते हुए

“है मेरी जान कमला में तो अंग अंग तुड़वाना चाहती हु वैसे मैंने जड़ी बूटी वाला कारा पी लय है योग बलदेव क साथ रत को करुँगी”

Kamla:badi छिनार होते जा रही हो सटी सावित्री से

Devrani:chup kar...bhagwan भी है इस कक्षा में धीरे बोल

Kamla:to क्या धीरे बोलने से तुम भगवन से बात छुपा लोगी और रात में यही अपने बेटे को ले कर लेतोगी तो भगवन को दिखेगा नहीं

Devrani:hmmm पर इसमें भगवन की हे मर्ज़ी है इसलिए सब कुछ हो रहा है उसके आज्ञा क बिना कुछ नहीं होता

Kamla:ary में मज़ाक कर रही थी महरानी आप तो आनंद लो इस पल का में पुष्तक पढ़ो में खाना बनाने जा रही हु

Devrani:jao में कुछ देर में आई

और फिर कामसूत्र क पुष्तक पढ़ने लगती है

बलदेव अपने कक्षा से बहार आकर वयायाम करने लगता है और तलवार से अभ्यास करने लगता है सैनिक क साथ

वही पर बैठे राजपाल

Rajpal:putra बड़े ज़ोरो से तैयारी चल रही है कौन सा क़िला फ़तेह करने का इरादा है

Baldev:man me)apke पत्नी का क़िला पिता जी

“पिता जे अभ्यास और व्यायाम में रोज़ हे करने लगा हु”

Rajpal:chalo अब संध्या हो गया है घर चले

बलदेव पसीने पसीने हो गया था वो पास में रखे एक टोकड़ी से फल उठा कर खता है और कुछ पीसी हुई जड़ी बूटी को फाक कर पानी पीटा है

राजपाल बलदेव क करीब आ कर

“लगता है मेरे बीटा अपने शरीर पर खूब म्हणत कर रहा है”

“पिता जी शरीर जितना स्वस्थ रहे उतना ाचा होता है “

मज़ाकिया अंदाज़ में

“पता है पास एक गाओ में सुखिया नाम क युवक की पत्नी भाग गई अभी कुछ दिन पहले हे विवाह करवाए थे”

“क्या बात कर रहे हो ये तो गलत है”

“सही है पिता जी उस सुखिया में जान नहीं है किसी डंडे की तरह है उसको बिना दिखाए लड़की से विवाह करवा दया लड़की देख क सुहागरात में हे भाग गयी”

“पर ये तो गहतराष्ट्रा क नियम का उल्लंघन है”

“वो तो है पिता जी सैनिक अभी भी ढूंढ रहे हो उस लड़की को पर शायद वो अब गहतराष्ट्रा में नहीं”

“पर पिता जी क्या ये सही है किसी क इच्छा क विरुद्धा विवाह करवा देना अपने डिल से सोचिये अगर आपका विवाह ऐसे स्त्री से करवा दिया जाये जइसे कोई रोग हो तो क्या आप उसको रखोगे “

“आप नहीं रखोगे पिता जी क्यू क मर्द तो चुन कर विवाह करता है औरत देखे बिना करती है”

“में तुम्हारी बात समझ सकता हु पर एहि धर्म है “

बलदेव मन में “अगर ये धर्म है तो में इस नियम को नहीं मंटा “

“ठीक है पिता जी चले अब”

“ठीक है चलो”

ऐसे हे रात हो जाती है सब भोजन करने क लये बैठ ते है

बलदेव ख़ुशी ख़ुशी खा रहा था

Shurushti:aaj दिन में तो मुँह लटकाये खा रहा थे तुम युवराज बलदेव

अभी बड़े खुश हो क्या बात है

Baldev:wo बस बड़ी माँ दिन में माँ का हाथ का था और अभी कमला क हाथ का है इसलिए

षुरूश्ती ये उत्तर समझ नहीं पति क्यू क कमला से ाचा तो देवरानी बनती है

बलदेव देवरानी को देख मुस्कुराता है देवरानी हल्का गुस्सा दिखती है और मार दूंगी का इशारा करती है

सब अपना भोजन कर क अपने अपने कक्षा की ओरे जाने लगते बलदेव हाथ धो कर वही टहलने लगता है और कुछ देर में देवरानी भी अपने कक्षा की ओरे जा रही थी

बलदेव देवरानी क सामने खड़ा हो जाता है उसके रस्ते में ,देवरानी अपना रास्ता बदल क आगे बढ़ने लगती है तभी बलदेव उसका हाथ पकड़ लेता है

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“आर्य कहा जा रही हो मेरी जान”

“बलदेव हम महल क बीचो बीच है बीटा”

“में किसी से डरता नहीं ,जब प्यार किया तो डरना kya”or मुस्कुराता है

देवरानी धीरे से

“सब क सो जाने क पश्चात आओ मेरे कक्षा me”or शर्म से अपना सर झुका लेती है

सामने से राधा क पायल चली आरही थी बर्तन रखने उसके पायल की आवाज़ सुन कर

Baldev:”theek है माँ मई भगवन का प्रसाद लेने आऊंगा”

देवरानी “धत्त” और मुस्कुरा क शरमाते हुए अपने कक्षा में चली जाती है

राधा :मन में) ये क्या हो रहा है मेरे दिमाग क बहार है इस बारे में महरानी षुरूश्ती से बात करनी पड़ेगी

देवरानी अपने कक्षा में जाती खूब अचे से स्नान कर क सजती सवारती है और अपने आपको आईने में देखती है

देवरानी अपने गहने में खूब जांच रही थी उसके ऊपरी हिस्से में एक ब्रासिएर सा कपडा उसके वक्ष को ढाका था और निचे एक धोती नुमा कपडा उसके जांघ तक हे आ रहे थे कुल मिला कर आज देवरानी बिजली गिराने वाली थी

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“आज तो तुम गए बलदेव”

देर रात चारो ओरे से चिडिओ और सियार क बोलने की आवाज़ गूंज रही थी और सब क सब नींद क आग़ोश में थे कमला देवरानी की बात मने आज महल हे रुकी थी और वही रसोई क पास खत पर लेती थी

बलदेव हर पांच मिनट में महल क चारो ओरे चक्कर काट रहा था और देखने की कोशिश कर रहा था क सब सोये क नहीं

आखिर कार आधी रात को उसे लगता है क अब सब क सब सो गए और महल क बहार सैनिक भी नींद खींच रहे होंगे वो हल्का सा अपने बदन पर इतर लगता है और खुद को महका क धीरे से देवरानी क कक्षा की ओरे चल देता है

देवरानी अपने कक्षा में गोल गोल घूम रही थी और बलदेव का इंतज़ार कर रही थी

तभी बलदेव देवरानी क दरवाज़े पर पहुँचता है

और एक डैम हलके आवाज़ से फुसफुसाता है

Dev..raani...dev रानी” और हलके से अपनी मुँह से सीटी निकलता hai”ishhh सही”

देवरानी ये सुन कर मुस्कुराती है और अपने दुवार की ओरे बढ़ती है

और जा कर दरवाज़ा खोलती है

“ कुण्डी मत खड़काओ राजा”

बलदेव आता है तो देवरानी को एक छोटे से कपडे में देख पागल सा हो जाता है

Devrani:seedha अंदर आओ raja,man बनाओ मेरा ताज़ा ताज़ा

Baldev:aaj ये रूप में पहली बार देख रहा हु तुम तो जान हे ले लोगी माँ

Devrani:darwaza खुला था फिर bhi..muskurati है

बलदेव तो बास आधी नंगी देवरानी क वक्ष और उसके अध् खुले जांघो में खो गया था

देवरानी मुड़ते हुए अपने बिस्तर की ओरे जाने लोगी

Devrani:waise ये देवरानी का रूप है तुम्हारे माँ का नहीं

बलदेव ऐसे बड़े बड़े गांड छोटे से वस्त्र में देख क और माँ की कविता सुन कर लैंड खड़ा हो गया था

देवरानी तभी मुद कर देखती है और एक उत्तेजित स्वर में बलदेव को देख

“आओ राजा”

बलदेव झट से दरवाज़ा लगता है और अपने माँ की ओरे चल पड़ता है

हरे रंग क धोती और ब्रासिएर में देवरानी कहर ध रही thi,baldev उस से पीछे से उसका एक हाथ अपने हाथ में लेता है दूसरे हाथ से उसके मुलायम पेट को पकड़ता है

Baldev:maa देवरानी



“िस्ष्ह ाः बलदेव”

“तुम इस परिधान में पहले कभी नहीं दिखी”

“किसके लये ये पहनती अब से जब तुम चाहोगे में पहनूंगी ये “

“पर माँ तुम्हे लोग साडी में देख आप खो देते है ये पहन क बहार मत जाना”

“अगर ये पहन बहार गई तो “



“तो कोई तुम्हारे लये अपनी जान भी दे देगा जबरदस्ती भी कर सकता है “

“इतनी हिम्मत नहीं किसी क कोई देवरानी क पास भटके तलवार से दो भाग में बाँट दूंगी”

“पर माँ मई नहीं चाहता क कोई तुम्हे देख कर आहे भरे और नज़रो से पीये”

“ठीक है बलदेव जैसी तुम्हारी मर्ज़ी पर नज़रो से तो चाँद को भी लोग प्यार कर लेते है पर छू तो नै सकते”

बलदेव देवरानी क मखमली पेट को दबोच कर सहलाने लगता है

“माँ तुम भी मेरे लये उस चाँद से काम नहीं जिसके लिए में सपना देखा करता था”



“उह्ह्ह ाः बलदेव आराम से”

बलदेव खूब अचे

“तुम्हारी ये गहरी नाभि में कितनी प्यारी है”

बलदेव कमर को पकड़ कर देवरानी की गांड को अपने लैंड क तरफ खींचता है जिसे समझ कर देवरानी थोड़ा झुक जाती है

आप एक पेअर सोफे पैर रख दूसरा पेअर निचे रख अपने गांड को बलदेव क लौड़े क तरफ कर देती है और अपने दोनों हाथो से

सोफे का कोने को पकड़ लेती है



बलदेव मुद्रा समझ कर सीधा खड़ा हो कर अपने धोती में फसे बड़े हुल्लाबी 9 इंच क लौड़ा को देवरानी क 44 की गान पर टिकता है देवरानी अपन आँख बंद कर लेती है

“माँ तुम्हारे बड़े तरबूज़े कितने गोआल आयकर क है”



देवरानी हल्का मुस्कुरा क अपना गांड पीछे की ओरे धकेलती है और बलदेव अपना हाथ देवरानी क कंधे पर रखता है और देवरानी बलदेव का घुटना पकड़ लेती है और अपने गांड को रगड़ती है

बलदेव का लौड़ा अब पूरी औक़ात में आगया था वो अब अपनी जगह तलाशने लगा था और देवरानी क ढीले धोती में गांड की दरार ढूंढ हे लेता है और वह घुसने लगता है

बलदेव हल्का सा धक्का लगता है

“यह अम्मा कितनी गरम हो तुम”

“ाः बीटा आए “

उत्तेजना क मरे देवरानी बलदेव क लैंड पर अपने गांड को गोल गोल घुमा रही थी और

अपने गांड में बड़ा लैंड दरार में फसा महसूस कर रही थी



बलदेव अब दोनों हाथ गांड पर रख गांड की दरार में खूब रगड़ता है लैंड देवरानी आँख बंद कए रहती है

“कितने मोठे है ये माँ”

“ाः जो है सब तेरे है मेरे लाल अह्ह्ह”

“ये सीधा अंदर जाना चाहता है”

ये सुनते हे देवरानी का धयान भांग होता है और वो आगे बढ़ती है “फक्क” की आवाज़ से गांड क. दरार से लौड़ा निकलता है देवरानी शरमाई धोती क ऊपर तंम्बू बने. बलदेव क लौड़े को खा जाने वाली नज़र से देख रही थी

Devrani:ab तुम लेट जाओ मुझे प्यार करना है

अब बलदेव सीता चित लेट जाता है



देवरानी बलदेव क नंगे चौड़े सीने को देख” बलदेव तुम्हारे छाती कितने मज़बूत है”

अपने हाथ से उसके छाती को सहलाने लगती है और बलदेव अपने आँख बंद कए रहता है

“माँ तुमने ये सब कहा से सीखा “

“ये बात बाद में बीटा अभी जो सीखी हु वो तो कर लू”

ऐसे सहलाने से बलदेव का लौड़ा धोती में खड़ा हो कर आसमान की ओरे देख रहा था



“अह्ह्ह माँ तुम सच में रति देवी हो”

“हाँ मेरे काम देव क लये तो रति हे चाहिए”

देवरानी एक बार बलदेव क खड़े लौड़े को देख मन में” कमला सही कहती थी क इसका लौड़ा सब से बड़ा है और एहि मेरे छूट क हिसाब से सही hai,upar से इतना है तो नंगा तो विकराल लैंड होगा”

देवरानी अब बलदेव क जांघो पर अपने मांसल जांघ रख सहला रही थी



और अपने बड़े वक्ष को बलदेव क दूध पर

टिकाये हल्का सा रगड़ लेती है

“ाः मा उह्ह्ह”



देवरानी आधा बलदेव क ऊपर लेट जाती है और बलदेव क लैंड पर अपना छूट रख क रगड़ती है और अपना वक्ष उसके सीने में दबा लेती है और उसके होठो पैर पहुंच जाती है

“ओह्ह मेरे राजा “

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अपना जीभ निकल कर क होठ को पाकर क चूसने लगती है “gallpppppppppppp

गलपपपपपपपपप

उम्म्म्मह्हआआआ

गलपपपपपपपपप

अम्म्मम्म्म्म

बलदेव भी प्रतिक्रया देता है

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“ाः माँ”

गलपपपप

Ummmmmmmmmmmmm

Galpppppppppp gallppppppppppppp

यह ummmmmmmmmmmmmmm

बलदेव और देवरानी खूब एक दूसरे को चूसते है और तभी रुकते है जब देवरानी की सांस लेने में तकलीफ होने लगती है

बलदेव से अब बर्दाश्त करना मुश्किल था वो झट से देवरानी को अपने गॉड में लेने लगता है

देवरानी मुस्कुरा kar”sanyam मेरे राजा”

“राजपाल ने जल्दबाज़ी की मई नहीं चाहती क तुम भी जल्दबाज़ी करो”

बलदेव देवरानी क दोनों जांघो को पाकर ऊपर उठा लेता है और खुद पालथी मर क बैठ

जाता है



देवरानी को अब धीरे धीरे लैंड पर बिठाते हुए

“माँ में राजपाल जैसा नहीं बनूँगा कभी”

“तुम्हे भी इस आसान का ज्ञात है”

“माँ बस तुम हे नहीं हो जो कामसूत्र पढ़ सकती हो”

देवरानी को झटका लगता है

“तुम्हे ये कैसे पता बीटा”

“माँ मैंने वी पुष्तक भी देखा जिसको तुम

पढ़ती हो” “वो मई कमला क हाथो में पकड़ लय था”



“ये कमला भी न”

“हाँ उसने हे बताया ये तुम्हारी माँ की पुष्तक है”

बलदेव अब खूब अचे अपने लैंड पर देवरानी की गांड को मसलत है और पीछे से उसके पीठ पर चुम्बन लेने लगता है और उसके हाथ देवरानी क वक्ष को हल्का सा छू रहे था

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बलदेव का लैंड अब गांड क दरार से होते हुए उसके छूट तक पहुंच रहा था

दोनों आखे बंद कए ानादित हो रहे थे

देवरानी मन me”kitna बड़ा लैंड है कमीने का”

“आह बलदेव उह्ह्ह”

“तुम्हे बुरा नहीं लगा क तुम्हारी माँ ऐसे चित्र देखती है और ऐसी पुष्तक पढ़ती है”

“नहीं माँ मेरी माँ की हर बात सही है मुझे तुम्हारी कोई बात बुरी नहीं लगती”

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“उठ आआह बलदेव”

बलदेव अब देवरानी को उठाये अपने लैंड पर उसके गांड को आगे पीछे करते हुए ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगता है जिसे से उसके हाथ भी उसके वक्ष से बार बार टकरा रहे थे

“ाः बलदेव ओह्ह्ह्ह ुह्ह्ह्ह नहीं बलदेव”

“अह्ह्ह मा तुम कितनी भरी हो”

“अह्ह्ह्ह उह्ह्ह बलदेव इसलिए तो तुम्हे चुना है मैंने उह्ह्ह आआआह क तुम मेरा भर उठा सको”

ुह्ह्हह्ह आआआह नहीं मा”

“आआह ऐसे हे बलदेव और रगड़ो मुझे”

“आह ये मटको जैसी गांड ने मुझे कभी दये कभी बाये हो कर मुझे बहुत सताया है” ाआअह मा

और रगड़ो बीटा

“उठ आआह “

“तो ले लो इनसे अपना बदला उह्ह्ह बीटा “

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देवरानी क पायल और चूड़ी की आवाज़ फ़िज़ा में गूंज रही थी और बलदेव और देवरानी की सिसकी से पूरा माहौल उत्तेजना से भरा था

“ बलदेव उह्ह्ह aaaaaaaaaaah आआआआह नहीं बलदेव ओह्ह्ह्हह में गयी”

और देवरानी झाड़ जाती है

“आह माआ रुको आआआह उठ ये लो मेरा. हथोड़ा अपने तरबूज़े पे उह्ह्ह ाः तोड़ दूंगा इसे आअज”

“उह्ह्ह ाआअह बीटा “

“आआह aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahaaaaaaaaaaaah मा और बलदेव क बड़े लौड़े ने धोती छेड़ से खूब साडी पिचकारी छोर दी जो कुछ उसके धोती और कुछ देवरानी की गांड क ऊपर जा कर गिर गया”

देवरानी उठ टी है उसे अपना कपडा गीला महसूस होता है” ये क्या बलदेव तुमने पूरा पिछवाड़ा ख़राब कर दया”

“माँ बदल लेना कपडा “

देवरानी मुस्कुराती है और बलदेव क गधे पानी को अपने गांड पर से अपने ऊँगली में लिए अपने होठ पर ले जा कर अपने होठ पर लगा कर बलदेव को देख आँख मार्र्टी है

बलदेव अपना लौड़ा पकड़ा बैठा था उसे सहलाने लगता है

देवरानी उसके लैंड क पानी को एक एक अंदाज़ से अपने होठ से छुवा कर चाट लेती है

बलदेव उठ कर अपने माँ को गले से लगा लेता है

“देवरानी मेरी माँ”

“बलदेव मेरे प्रेमी”

“तुम रति से काम नहीं मेरी रानी”

“और तुम कामदेव हो”

तो बे कंटिन्यू
 
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