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देवरानी ने मैं से बलदेव को स्वीकार लिया था और उसने पत्र लिख कर बलदेव को अपनी स्वीकृति भी दे दी थी बस वो इंतज़ार कर रही थी कब बलदेव उसके पत्र का उत्तर देता है
आज सुबह की घटना क बाद बलदेव का मन नहीं लगता है सीमा पर उसे रह रह क आखो क सामने देवरानी क सुबह का दृश्य आजाता है
Baldev:man me)aaj मदिरा क्या पीना देवरानी ने अपने बड़े वक्ष और चुतर दिखा कर मुझे नशा चढ़ा दया hai,Jis दिन हाथ आगयी न तो उसको. इतना मसलूंगा क सब अंगड़ाई लेना निकल दूंगा" ये सोच कर बलदेव अपनी इस सोच पर मुस्कुरा देता है क वो कैसे अपने हे माँ को रगड़ने की सोच रहा है
देवरानी आज जल्दी से रात का खाना खा कर अपने कक्षा में आ कर सो जाती है उसे दर था कही न कही बलदेव का सामना करने से
बलदेव आज जल्दी पहुंच कर अपने कक्षा में जाता है तो उसका कक्षा एक साफ़ सुथरा और उसके लिए 56 भोग रखा हुआ था खाने क लये
Kamla:kya हुआ युवराज आप हाथ मुँह धो कर आईये
बलदेव अपने अश्त्र शाश्त्र निकल कर अपने. कपडे बदल कर हाथ मुँह धो कर अत है
Kamla:kya बात है युवराज आज होश में हो मदिरा नहीं चढ़ाई
Baldev:han वो..
kamla:Han क्या सुबह में महरानी को देख तुमने आखो से पी लिया
बलदेव ये सुन कर मुस्कुराता है
Baldev:tumhe बड़ा दुःख हो रहा है अपने महरानी क लिए
कमला उसको साडी बात बता देती है क कैसे देवरानी को कमला ने पूरी हकीकत बताई और वो हमे गलत नहीं समझती
Baldev:aaj कक्षा ज़्यादा साफ़ सुथरा लग रहा है और ये पकवान इतने सरे व्यंजन
kamla:Bechari देवरानी तुम्हे मानाने क लये सुबह से तुम्हारे कक्षा की साफ़ सफाई की ,बिस्तर झड़ी और उसके चादर बदले ,तकिये का खोल badla,tumhare सब गंदे कपडे धोये और ये सारा तुम्हारे पसंद का पकवान बनाया
बलदेव ये सुन कर स्तब्ध हो जाता है
Baldev:Itna सब कुछ अकेले
kamla:han मैंने कहा में करती हु तो वो मन कर दी ये कह कर " ये. मेरा काम है मेरा धर्म है"
Baldev
agal है वो
kamla:wo अभी प्रेमिका नहीं बानी और अभी से तुम्हरे हर काम करना शुरू कर दी जैसे तुम्हारी पत्नी है वो और वो पत्नी धर्म निभा रही हो
ये सुन कर बलदेव शर्मा कर लाल हो जाता है
kamla:aah है देखो तो पति जी क चेहरे की लाली
Baldev:ab मुझे महराज कहना शुरू कर दो
kamla:wo क्यू
Baldev:q क तुम्हारी महरानी अब मेरी हो jayegi,tumhare महरानी का महराजा मई बनूँगा
Kamla:itni जल्दबाज़ी मत करो वो महरानी है मुँह जल जायेगा इतना गरम खाओगे तो युवराज
Baldev:tumne फिर युवराज कहा ,और जितनी भी
गरम हो तुम्हारी महरानी मेरे पास आते हे ठंडी कर dunga,muh तो जलने की दूर की बात है
Kamla:sharma जाती hai..theek है बाबा तुम समझे देवरानी समझे ये लो तुम्हारा प्रेम पत्र"
कमला प्रेम पत्र अपने ब्लाउज से निकल कर दे देती है
बलदेव भोजन करता हैं फिर कमला बर्तन सब उठा कर रसोई में ले जाती है
बलदेव अपने बिस्तर पैर लेते हुए पत्र खोलता है और पढ़ना शुरू करता है
प्रिय शेर सिंह उर्फ़ बलदेव जी
आशा करती हु आप अभी मेरा पत्र देख मुस्कुरा रहे honge,me आपको सदैव ऐसे हे मुस्कुराते रहते देखना चाहती हु और उसके लिए में अपनी प्राण भी त्याग दू तो मुझे परवाह नहीं होगा
बलदेव मैंने हर
एक बात कमला द्वारा जान ली हु और
तुम्हारे हर निर्णय की वजह सिर्फ में हु और मेरा दुःख hai,mai हे पागल थी जो तुम्हे एक हवसी और मेरे मान सम्मान की परवाह न करने वाला समझ लय क्यू क
तुम मुझे पाने क लये शेर सिंह का भेस अपनाया जिसके वजह से मुझे लगा तुम मेरे जिस्म को पाने क लये किसी हद्द तक गिर सकते पर में गलत थी
तुमने मुझे पाने क लये कमला से मदद. ली जिस से मुझे लगा तुम मेरी मन मर्यादा दुन्या क सामने उजागर कर क मुझे बदनाम कर डोज पर में गलत थी
कमला ने बताया कैसे तुमने मेरे लिए किसी शेर सिंह नमक व्यक्ति क चयन कर लय था यदि में उस दिन घोड़े पे बैठ जाती तुम मुझे उसके पास छोर देते
तुम मेरी ख़ुशी क लये इतना बड़ा बलिदान देने जा रहे थे
मई ने जीवन में किसी से पहले प्रेम नहीं क्या विवाह तो मेरे पिता जी ने जबरदस्ती करवा दी
मेरा पहला प्रेम शेर सिंह है या शायद बलदेव मुझे नहीं पता पर तुम दोनों क लये मेरे दिली में प्रेम क जज़्बात ए और जब अब ये बात हे ख़त्म हो जाती है क में किसका चुनाव करू
मेरे डिल ने पहली बार किसी क सपने सजाये वो था शेर सिंह और किसीने अपने प्यारी बाटे और मेरा ख्याल रख कर मेरे डिल को भय वो था बलदेव
बलदेव उर्फ़ शेर सिंह जी मेरा जीवन अब आपके नाम बास ये डिल कभी मत तोडना क्यू क एक औरत हर मर्यादा नियम और धर्म क विरुद्धा जा कर फैसला लेती है तो उसके साथ कुछ गलत हो तो वो दुबारा अपने जीवन में वापस नहीं जा सकती है.
आपकी देवरानी
देवरानी का पत्र पढ़ कर
"ये औरतो को समझना बहुत मुश्किल है "
"देवरानी तुम्हे किसी से भी प्यार हुआ हो पर बनोगी तो मेरी हे "
पत्र को रख कर बलदेव गहरी नींद में डूब जाता है.
देवरानी ने मैं से बलदेव को स्वीकार लिया था और उसने पत्र लिख कर बलदेव को अपनी स्वीकृति भी दे दी थी बस वो इंतज़ार कर रही थी कब बलदेव उसके पत्र का उत्तर देता है
आज सुबह की घटना क बाद बलदेव का मन नहीं लगता है सीमा पर उसे रह रह क आखो क सामने देवरानी क सुबह का दृश्य आजाता है
Baldev:man me)aaj मदिरा क्या पीना देवरानी ने अपने बड़े वक्ष और चुतर दिखा कर मुझे नशा चढ़ा दया hai,Jis दिन हाथ आगयी न तो उसको. इतना मसलूंगा क सब अंगड़ाई लेना निकल दूंगा" ये सोच कर बलदेव अपनी इस सोच पर मुस्कुरा देता है क वो कैसे अपने हे माँ को रगड़ने की सोच रहा है
देवरानी आज जल्दी से रात का खाना खा कर अपने कक्षा में आ कर सो जाती है उसे दर था कही न कही बलदेव का सामना करने से
बलदेव आज जल्दी पहुंच कर अपने कक्षा में जाता है तो उसका कक्षा एक साफ़ सुथरा और उसके लिए 56 भोग रखा हुआ था खाने क लये
Kamla:kya हुआ युवराज आप हाथ मुँह धो कर आईये
बलदेव अपने अश्त्र शाश्त्र निकल कर अपने. कपडे बदल कर हाथ मुँह धो कर अत है
Kamla:kya बात है युवराज आज होश में हो मदिरा नहीं चढ़ाई
Baldev:han वो..
kamla:Han क्या सुबह में महरानी को देख तुमने आखो से पी लिया
बलदेव ये सुन कर मुस्कुराता है
Baldev:tumhe बड़ा दुःख हो रहा है अपने महरानी क लिए
कमला उसको साडी बात बता देती है क कैसे देवरानी को कमला ने पूरी हकीकत बताई और वो हमे गलत नहीं समझती
Baldev:aaj कक्षा ज़्यादा साफ़ सुथरा लग रहा है और ये पकवान इतने सरे व्यंजन
kamla:Bechari देवरानी तुम्हे मानाने क लये सुबह से तुम्हारे कक्षा की साफ़ सफाई की ,बिस्तर झड़ी और उसके चादर बदले ,तकिये का खोल badla,tumhare सब गंदे कपडे धोये और ये सारा तुम्हारे पसंद का पकवान बनाया
बलदेव ये सुन कर स्तब्ध हो जाता है
Baldev:Itna सब कुछ अकेले
kamla:han मैंने कहा में करती हु तो वो मन कर दी ये कह कर " ये. मेरा काम है मेरा धर्म है"
Baldev
kamla:wo अभी प्रेमिका नहीं बानी और अभी से तुम्हरे हर काम करना शुरू कर दी जैसे तुम्हारी पत्नी है वो और वो पत्नी धर्म निभा रही हो
ये सुन कर बलदेव शर्मा कर लाल हो जाता है
kamla:aah है देखो तो पति जी क चेहरे की लाली
Baldev:ab मुझे महराज कहना शुरू कर दो
kamla:wo क्यू
Baldev:q क तुम्हारी महरानी अब मेरी हो jayegi,tumhare महरानी का महराजा मई बनूँगा
Kamla:itni जल्दबाज़ी मत करो वो महरानी है मुँह जल जायेगा इतना गरम खाओगे तो युवराज
Baldev:tumne फिर युवराज कहा ,और जितनी भी
गरम हो तुम्हारी महरानी मेरे पास आते हे ठंडी कर dunga,muh तो जलने की दूर की बात है
Kamla:sharma जाती hai..theek है बाबा तुम समझे देवरानी समझे ये लो तुम्हारा प्रेम पत्र"
कमला प्रेम पत्र अपने ब्लाउज से निकल कर दे देती है
बलदेव भोजन करता हैं फिर कमला बर्तन सब उठा कर रसोई में ले जाती है
बलदेव अपने बिस्तर पैर लेते हुए पत्र खोलता है और पढ़ना शुरू करता है
प्रिय शेर सिंह उर्फ़ बलदेव जी
आशा करती हु आप अभी मेरा पत्र देख मुस्कुरा रहे honge,me आपको सदैव ऐसे हे मुस्कुराते रहते देखना चाहती हु और उसके लिए में अपनी प्राण भी त्याग दू तो मुझे परवाह नहीं होगा
बलदेव मैंने हर
एक बात कमला द्वारा जान ली हु और
तुम्हारे हर निर्णय की वजह सिर्फ में हु और मेरा दुःख hai,mai हे पागल थी जो तुम्हे एक हवसी और मेरे मान सम्मान की परवाह न करने वाला समझ लय क्यू क
तुम मुझे पाने क लये शेर सिंह का भेस अपनाया जिसके वजह से मुझे लगा तुम मेरे जिस्म को पाने क लये किसी हद्द तक गिर सकते पर में गलत थी
तुमने मुझे पाने क लये कमला से मदद. ली जिस से मुझे लगा तुम मेरी मन मर्यादा दुन्या क सामने उजागर कर क मुझे बदनाम कर डोज पर में गलत थी
कमला ने बताया कैसे तुमने मेरे लिए किसी शेर सिंह नमक व्यक्ति क चयन कर लय था यदि में उस दिन घोड़े पे बैठ जाती तुम मुझे उसके पास छोर देते
तुम मेरी ख़ुशी क लये इतना बड़ा बलिदान देने जा रहे थे
मई ने जीवन में किसी से पहले प्रेम नहीं क्या विवाह तो मेरे पिता जी ने जबरदस्ती करवा दी
मेरा पहला प्रेम शेर सिंह है या शायद बलदेव मुझे नहीं पता पर तुम दोनों क लये मेरे दिली में प्रेम क जज़्बात ए और जब अब ये बात हे ख़त्म हो जाती है क में किसका चुनाव करू
मेरे डिल ने पहली बार किसी क सपने सजाये वो था शेर सिंह और किसीने अपने प्यारी बाटे और मेरा ख्याल रख कर मेरे डिल को भय वो था बलदेव
बलदेव उर्फ़ शेर सिंह जी मेरा जीवन अब आपके नाम बास ये डिल कभी मत तोडना क्यू क एक औरत हर मर्यादा नियम और धर्म क विरुद्धा जा कर फैसला लेती है तो उसके साथ कुछ गलत हो तो वो दुबारा अपने जीवन में वापस नहीं जा सकती है.
आपकी देवरानी
देवरानी का पत्र पढ़ कर
"ये औरतो को समझना बहुत मुश्किल है "
"देवरानी तुम्हे किसी से भी प्यार हुआ हो पर बनोगी तो मेरी हे "
पत्र को रख कर बलदेव गहरी नींद में डूब जाता है.