Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 7 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 56

श्याम और बद्री सैनिक क साथ महल क मुख्या दुवार की ओरे जाने लगते है रास्ते में हे उन दोनों की नज़र कसरत करते हुए बलदेव पैर पड़ती है जो अपने हे धुन में था

Sainik:Yuvraj आपके मित्र आये है

Baldev:Kya सच में

बलदेव पलट कर देखता है तो सामने श्याम और बद्री मुस्कुराते हुए खड़े थे

Baldev:ary तुम दोनों का स्वागत है मित्रो

बलदेव खुला शरीर लये हुए हे अपने मित्रों क समीप जाता है उनका स्वागत करने क लये

Badri:Baldev तुम्हारा शरीर अब हम जैसा नहीं रहा तुम पठार क सामान हो गए हो

shyam:Han भाई आज कल भाई ज़्यादा म्हणत कर रहे है

बलदेव मुस्कुराता हुआ सैनिक से

"ज़रा मेरा परिधान लाना"

"जी युवराज"

Baldev:wo सब छोरो इतना सवेरे कैसे पहुंच गए तुम दोनों

Badri:bhai हम रात हे तुम्हारे छेत्र में आगये थे पर हम पास क एक राज्य में रुक गए थे

Shayam:han और सुबह होते हे वह से हम चल डाई इसलिए सवेरे पहुंच गए

Baldev:tum दोनों का धन्यवाद मेरी मान रखने क लये मित्रो

Badri:Bhai हम मित्र है अगर हम एक दूसरे का साथ नहीं देंगे तो कौन देगा

Shyam:tumhare लये तो जान भी दे सकते है हम तुमने तो हमारे लये बहुत क्या है जब हम आचार्य जी पास शिक्षा ग्रहण कर रहे थे

तीनो चल कर अब महल क मुख्या दुवार पर पहुंच गए थे

Badri:shyam सही कह रहा है बलदेव हम वो दिन भूल नहीं सकते जब तुमने हम सब की गलती की सजा अपने सर ले लये थे

बलदेव बात काट ते हुए

"अब छोरो भी जो हुआ सो हुआ तुम दोनों मेरे मित्र हो में अपनी जान की परवाह नहीं क्या कभी न करूँगा"

Shyam:Bhaio मुझे भूक लगी है और में तो गहतराष्ट्रा आता हु मौसी क हाथो का पकवान खाने

Baldev:Shyam चलो आज तुम्हे हम बहुत बढ़िया पकवान खिलाएंगे

Shyam:Mujhe मौसी के हाथ का हे खाना है

Baldev:Han मई माँ से कह कर तुम्हारे लिए बनवा दूंगा

Badri:tum तो अब भी बचे हो आये नहीं क शुरू हो गए पेटू

Baldev:ary ऐसा नहीं है बद्री इसका पूरा हक़ है

"तुम दोनों झगड़ना बंद करो और चलो मेरे साथ"

तीनो महल में घुस जाते है

देवरानी अपने कक्षा में व्यायाम करने क बाद स्नान कर सुबह का जड़ी बूटी खा रही थी फिर उसके कानो में बलदेव और किसी की बातचीत सुनाई दी

देवरानी अपना घूँघट कए अपने कक्षा से बहार आती है और सामने बलदेव क साथ उनके दोनों मित्र थे

बलदेव देखता है क माँ घूँघट ताने दूसरी ओरे मुँह कए पहचानने की कोशिश कर रही है क आखिर कौन आये है

Baldev:ary माँ इधर आओ ये मेरे मित्र श्याम और बद्री है

अब तक तो देवरानी ने भी चोर नज़रो से देख पता लगा लय था क ये बद्री और शयाम है

देवरानी उनके पास चली जाती है और अपना घूँघट कए हुआ पल्लू हटती है

बद्री और श्याम देखते हे देवरानी क पेअर पद जाते है बी बद्री और shayam:Mausi आप को बहुत दिनों बाद देख बाद ाचा लगा हमे आशीर्वाद दीजिये

Devrani:Ary मेरे बेटो मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है देवरानी दोनों को सर पर हाथ फेरती है दोनों खड़े होते है

ये सब देख बलदेव मुस्कुरा रहा था

Devrani:Baldev इन दोनों को अपने कक्षा में ले कर जाओ में अभी पूजा नहीं की हु

Shayam:Mausi मुझे प्रसाद चाहिए

Badri:shyam तू बस खाने क जुगाड़ में हे रहना बालक ,मौसी आपको पूजा करने की क्या आवश्यकता आप तो खुद देवी लगती हो और देवी जैसी पवित्र हो

देवरानी ये सुन कर मुस्कुरा देती है

Baldev:Badri तुम कह रहे थे न क मेरे गठीले शरीर का राज क्या है तो राज ये है मई इस देवी की पूजा करता हु

देवरानी की ओरे देख आँख मार देता है

देवरानी अपना घूँघट फिर से डेल अपने कक्षा में जाने लगती है देवरानी अपने में लज्जा क साथ अपने ऊपर गर्व भी कर रही थी

Badri:Pooja भर से ये कैसे

Baldev:bhai माँ मेरा खाना पीना सब कुछ का हिसाब रखती है

तीनो सीडीओ से होते हुए बलदेव क कक्षा तक पहुंच जाते है

Badri:to भाई बलदेव कब पारस निकलने का इरादा है

Baldev:jab तुम कहो

Shyam:Han हमे वह खूब प्राचीन चीज़े देखने मिलेगी और वह का पकवान भी मई सुना हु बहुत स्वादिष्ट होता है

Badri:Shyam अब तुम बचे नहीं हो मुर्ख कुछ और भी सोचो खाने से हैट कर

Shyam:Mujhe मुर्ख कहा में मेवाड़ का युवराज हु अभी तुम्हारे उज्जैनी जीभ को खींच लूंगा ,कालू राम

श्याम तहका दे कर हस्ता है जिस से बलदेव की भी हसी छूट जाती है

बद्री श्याम क गर्दन को हाथ में ले कर पीछे से दबा कर

"श्याम अपने गोर रंग पर इतना अहंकार "

"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे मुर्ख कहने की बद्री काली बदल"

Badri:Iski तो में जान ले लूंगा

Baldev:chhoro भी बद्री तुम दोनों कब लड़ना बंद करोगे बचे

बलदेव दोनों को अलग करता है

Baldev:ab हम बरी बरी से स्नान कर लेते है

तभी तीनो क कान में ढोल की आवाज़ आती है

Badri:Koi ढिंढोरा पीट रहा है

तभी तीनो कान लगा कर ढिंढोरे की आवाज़ क साथ कोई संदेह राज्य में सुनाया जा रहा था वो सुन ने लगे

"सुनो सुनो सुनो ...महाराज राजपाल सिंह ने आज अभी अभी सभा बुलाई है कृपया कर क सब पहुंचे महाराज कोई निर्णय लिए है सुनो सुनो गहतराष्ट्रा वासिओ"

Baldev:ab तो समय व्यर्थ करना हे मत में स्नान कर क आया

बद्री और शयाम समझ जाते है और अपने साथ लाया हुआ सामान सैनिक को कह कर कक्षा में रखवाते है और अपने वस्त्र का चुनाव करने लगते है

पहने क लये

थोड़ी देर में बलदेव स्नान कर क आ जाता है और बरी बरी से सभी स्नान कर लेते है और अपने परिधान पहन लेते है

देवरानी इधर आकर अपने कक्षा में पहले अगरबत्ती जलती है और कुछ प्रसाद का चढ़ावा लगा कर रोज़ की तरह अपने पथ पढ़ रही थी ,कुछ देर पथ पढ़ने क बाद पूजा ख़त्म होता है और देवरानी अपने और बलदेव क लये कामना करती है

"भगवन धन्यवाद तूने मेरी हृदय की बात सुन ली और इतने बरसो बाद में अपने मायके पारस जा रही हु हम सब दूर की यात्रा करने जा रहे है हम सब पर अपना कृपा रखना भगवन"

दोनों हाथो जोड़े कड़ी भगवन से मांग रही थी मंदिर में दिया जला कर पूजा की थाली ले कर बलदेव क कक्षा की ओरे जाती है

देवरानी देखती है तीनो तैयार हुए बैठे थे

Devrani:Lo बचो तुम सब का प्रसाद

बद्री और शयाम झट से अपना सर झुका कर अपना हाथ आगे बढ़ा कर प्रसाद ले लेते है पर बलदेव नहीं लेता

Devrani:ary बलदेव तुम भी लो बीटा

बलदेव सर निचे कर क

"माँ मई बाद में ले lunga"or देवरानी को एक अंदाज़ से देखता है

Shyam:Mausi अभी सभा क्यू बुलाये महाराज ने

Devrani:Sabha बुलाया मई तो नहीं सुनी और तुम मुझे मौसी कहते हो और उनको महाराज

Shyam:Q क मौसी महराज राजपाल खड़ूस है इसलिए मौसा नहीं कहता और आप एक डैम अपने सी लगती हो महारानी नहीं कह कर मौसी कहना ाचा लगता है

देवरानी श्याम की बात पर मुस्कुराती है

Badri:Murkha श्याम चुप raho,waise मौसी अभी थोड़ी देर पहले ढिंढोरा सुना हमने ,उस समय शायद आप पूजा कर रही होंगी

Devrani:han मैं पूजा कर रही थी

Badri:Aap तो देवी है मौसी आपने तो सच में कुछ नहीं सुना पुरे गहतराष्ट्रा ने सुन लय ,सच कहु आप क भक्ति को नमन मेरा

Devrani:Ary बास भगवन की कृपा है मेरे जैसी तो करोड़ो है पुजारी

Badri:Mausi इस श्याम को भी सिखाइये कुछ इसे कुछ नहीं आता

Shyam:han जैसे तुम इतने बड़े भक्त हो क शक्चारत शिव जी से वार्तालाप करते हो

ये सुन कर सब हसने लगते है

Devrani:agar ऐसा है तो तुम लोग जाओ हम सब को प्रसाद दे कर आते है

देवरानी प्रसाद की थाली ले कर चली जाती है और बलदेव अपने मित्रो को ले कर महल क बहार सभा में जाने लगता है

देवरानी सबसे पहले षुरूश्ती क कक्षा में जाती है

"दीदी षुरूश्ती "

"आओ देवरानी"

"दीदी ये लीजिये भगवन का प्रसाद "

"आर्य वह देवरानी इतना सवेरे तुमने पूजा पथ भी कर ली"

"हाँ दीदी वैसे आज आप उदास सी लग रही हो क्या हुआ आप की ताब्यात तो ठीक है न"

षुरूश्ती अंदर से जल भून जाती है

"क्यू ऐसा क्यू कह रही हो देवरानी में ठीक तो हु"

"दीदी वो मई रात में उठी तो देखा आप अपने कक्षा में जा रही थी और जब तक आवाज़ देती आप ने दरवाज़ा बंद कर लय"

"षुरूश्ती दीदी लगता है आपका नींद पूरा नहीं हो पाया है"

षुरूश्ती को इतना गुस्सा आया क वो अब थप्पड़ देवरानी क गालो पर रख दे पर वो अपने आप पर काबू रखे

Shurushti:man में) कामिनी तू रणदीनाच कर ली जितना करना था बस आगे आने वाले दो दिन में तेरे चिटा में आग में हे दूंगी

देवरानी :क्या सोचने लगे ये लीजिये prasad,Bhagwan ने कहा है मनुष्य को शक्ति वो उतनी हे देते है जितने की आवश्यकता है इसलिए हमे अपने शक्ति का कभी भी गलत इश्तेमाल नहीं करना चाहिए अन्यथा जो भगवन शक्ति देता है वो छीन भी लेता है

षुरूश्ती हाथ आगे बढ़ा कर अपने मन को मार कर प्रसाद देवरानी क हाथो से लेती है

Shurushti:man में) रंडी बड़ा ज्ञान दे रही है देवी बन ने की कोशिश कर क शुरू से तुमने सोचा अपना सिक्का घर पैर ज़माने का पर आज तक तुम सब क पेअर की धूल हे ho,apne बेटे पैर इत्र लो एक दो दिन फिर तो तुम से में स्वर्ग लोक में हे मिलूंगी ,कामिनी वही अपने बेटे से प्रेम का खेल khelna..Devani देवी माँ

षुरूश्ती क चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान घिर जाता है जिसे देवरानी देख लेती है

Devrani:Kya बात है दीदी मुस्कुरा रही हो बेवजह कही महाराज की कोई रात की बात याद आगयी

Shurushti:Tum कहना क्या चाहती हो देवरानी

Devrani:Yahi क मई आपको देखि थी महाराज क कक्षा से निकलते हुए जब में पानी पीने उठी तो

षुरूश्ती चुप चाप बूट बानी सुन रही थी उसे समझ नहीं आरहा था क वो क्या कहे

Devrani:Waise कल रात खूब आनंद लय आपने इसलिए अब तक मुस्का रही हो

षुरूश्ती की तो जैसे जले पर नमक छिरक दिया हो देवरानी ने षुरूश्ती को प्यासी छोर कर जो तड़प और खुमारी छोर दया था राजपाल ने वो षुरूश्ती अब तक महसूस कर रही थी

षुरूश्ती : मन में) देवरानी की बची मेरा मज़ाक उदा रही है पर इसे कैसे पता राजपाल मुझे प्यासी छोर देता hai,Han ये भी तो राजपाल का लिंग ली है भले वो आज से 17 साल पहले हे चूड़ी हो पर जानती है क 4 इंच लौड़े से क्या होता है

Devrani:man में) अब तुम उस बूढ़े क छोटे से लिंग को खड़ा करते रहना जीवन भर और तीन धक्के में हे खुश रहना ,कद की नाती है पर चालबाज़ी तो भरपारा है कमीनी में

Shurushti:Nahi नहीं देवरानी क्या बकवास कर रही हो अब में 48 साल की हुई अब मेरा डिल नहीं करता वो सब का

Devrani:man में) वो तो तेरा डिल हे जनता है है षुरूश्ती

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Devrani:Aisa क्या दीदी मुझे तो पता हे नहीं था

Shurushti:Han अब बकवास तुम्हारी ख़त्म हो गयी हो तो जाओ मुझे काम है कुछ

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देवरानी को गुस्सा आता है पर अपने सही समय पर बदला लेने की ठानी थी वो वह से चल देती है

देवरानी जीविका क ओरे चल देती है

"माँ जी कहा हो आप"

जीविका अपने कक्षा से बहार आते हुए

"हाँ बहु कहो"

और एक गुस्से से देखते हुए देवरानी से पूछती है

"वो माँ जी आपके लये प्रसाद लायी थी"

जीविका को रात का दृश्य याद अत है जब बलदेव देवरानी क कूल्हों को हाथ से दबोचे देवरानी को गॉड में लये रसोई से ले जा रहा था

जीविका अपने मन में

"देवरानी तू कितनी बड़ी पापिन है मैंने कभी नहीं सोचा था मुझे शर्म आती है अपने ऊपर अब "

"माँ जी क्या सोच रहे है मुझे आशीर्वाद दीजिये कई वर्षो बाद पारस जा रही हु"

देवरानी जीविका क पेअर छू लेती है

जीविका नहीं चाहते हुए भी

"है हाँ जीते रहो"

देवरानी एक क़ातिल मुस्कान क साथ जीविका की प्रस्तिथि समझते हुए कड़ी होती है और जीविका को देखती है जिसका चेहरा उतरा हुआ था

देवरानी को जैसे बहुत खुसी होती है जीविका का चेहरे देख कर

जीविका मन में " में कैसे रोकू इन दोनों को पाप करने से कैसे कहु राजपाल क उसकी पत्नी और उसका बीटा अवैध सम्बन्ध बना रहे है"

देवरानी सबको बाँट देती है प्रसाद और कमला को थाली दे कर

Devrani:kamla इसे बाँट दो

Kamla:kya बात है आज बहुत खिल रही हो

Devrani:q रोज़ अछि नहीं लगती

kamla:nahi महरानी आज ऐसा खिल रही हु जैसे युवराज ने खूब अंदर तक अपने केले से मालिश कर दिया हो

Devrani:chup कर pagli..aisa कुछ नहीं हुआ

Kamla:to कैसा हुआ

Devrani:bass तुझे तो बताया तो था बास वह तक नहीं जाना बिना विवाह क ..दर लगता है कही कुछ

Kamla:q देवरानी डर है क कही युवराज आप को पेट से कर क छोर नहीं दे (तो फिर तुम न घर की रहोगी न घाट k)islye पहले बंधन में बांधना चाहती हो

देवरानी शर्मा जाती है

Devrani:tu छिनाल है ..मुझे भरोषा है बलदेव पैर ..

Kamla:Daro मत मेरी बहना बलदेव तुमसे सच्चा प्यार करता है उसके सामने हूर भी आ जाये तो वो उसको नहीं देखेगा आपके सामने

devrani:pehle मई..

kamla:mai समझ रही हु महरानी आप सोच रही हो कही आगे जा कर उसका मन बदल जाये कुवारी दुल्हन पाने क लये और वो विवाह कर le..par ऐसा नहीं होगा

Devrani:bhagwan न करे ऐसा ho,theek है मुझे काम है

अपने कक्षा में जाती है और सभा में जाने की तैयारी करने लगती है

धीरे धीरे सब सभा में पहुंचते है और सबका जय जयकार से स्वागत होता है

Rajpal:Senapati सोमनाथ खड़े हो कर जनता से सुनाओ

सेनापति somnath:Devio और सज्जनो और गहतराष्ट्रा क 20 गाओ से आये हुए हमारे गाओ क सम्मानित मुखिया आप सब का गहतराष्ट्रा क महाराज राजपाल और सेना स्वागत करते hai,Maharan ने ये निर्णय लय है जहा पर आप सब का योगदान होना ज़रूरी है ,

महाराज ने गहतराष्ट्रा क ऊपर आक्रमण होने की आशंका है और इस बात का दर मुझे भी है सेनापति होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है पर आप सब जानते है क हम आयत निर्यात में पीछे है और गहतराष्ट्रा का खज़ाना भी अब कुछ खास बचा नहीं है और हमे आशंका है क दिल्ली से शाहज़ेब हम पर आक्रमण कर सकता है और उनकी सेना उत्तर की ओरे निकल गयी है ,मई आप सब से निवेदन करता हु क आप सब सेना में शामिल हो क्यू क बादशाह शाहज़ेब क सैनिक 25000 से काम नहीं होती है

क्या आपसब अपने बचो को हमारी सेना में गहतराष्ट्रा बचने क लये भेजोगे?

पूरी सभा में लोग

"हाँ हम अपने बचे भेजेंगे हमारी माँ गहतराष्ट्रा की धरती को बचाएंगे"

Senapati:Or एक मदद और चाहिए आप सब अपने घर पर जो भी हथियार या लोहा हो उसे हमारे हवाले कर दे हम उन्हें गाला कर हमारे सैनिको क लिए हथियार बनैंगे

Senapati:kya आप सब हमारा साथ देंगे?

भीड़ में से एक दस वर्ष का बालक आगे अत है और कहता है

"सेनापति जी में एक लोहार का बीटा हु और में अपने राज्य को बचने क लये अपनी आखिरी सांस तक लडूंगा"

भीड़ सब एक साथ कहती है

"जीयो लाल"

"जब ये बालक आगे आ सकता राज्य क लये हम सब क्यू नहीं "

वो दस वर्षीया बालक अपने झोले में हाथ दाल कर एक हथोड़ी निकलता है

"सेनापति जी मेरे पिता लोहार है और उनका ये हथोड़ी में राज दान करता हु"

सेनापति सोमनाथ अत्यंत खुश होता है और बालक क पास आकर

Senapati:Is गहतराष्ट्रा क लाल का दान में स्वीकार करता हु .लाओ मेरे बचे सेनापति उसके सर पर हाथ फेर कर उसका हथोड़ी ले लेता है

Senapati:aap सब सचेत रहिये अपने अपने गाओ में हम सब सीमा को चारो ओरे से घेर लेंगे

सेनापति somnath:maharaj आप कुछ कहना चाहेंगे

Rajpal:Aaj अगर पिता श्री जीवित होते तो वो बहुत प्रसन्न होते आप सब का धन्यवाद् गहतराष्ट्रा वासिओ और में आप सब से हमारे अतिथि बद्री जो उज्जैन क युवराज है और श्याम जो मेवाड़ से ए है

पूरी भीड़ कहती है

"स्वागत है आप दोनों का अतिथियों"

बद्री और श्याम बलदेव और देवरानी की ओरे देख मुस्कुराते है

Rajpal:Ek बात और कहना चाहूंगा आज रानी देवरानी अपने माँ क यहाँ पारस जाने वाली है

भीड़ में से एक व्यक्ति उठ कर

"महाराज क्षमा करे क्या इस परिस्थिति में हमारे सैनिको को बहार जाना ठीक है"

Rajpal:Dekhiye हम इस बात को भली भाटी समझते है इसलिए देवरानी क साथ बलदेव और श्याम बद्री जायेंगे

Vyakti:maharaj की जय हो

सबलोग पीछे से कहते है महाराज की जय हो

senapati:Maharaj और कुछ कहना है

Rajpal:nahi सभा ख़त्म की जाये

Senapati:Ghatrashtra वासिओ सभा ख़त्म की जाती है और अभी से जिनको सेना में शामिल होना है वो सेना शिविर क मैदान में रुक सकते है

जय गहतराष्ट्रा

पूरी भीड़ एक साथ कहती है

"जय गहतराष्ट्रा"

धीरे धीरे सब अपने आसान से उठ कर महल में जाने लगते है

बलदेव क साथ श्याम और बद्री भी जाने लगता है देवरानी अपने कक्षा में जा चुकी थी

Baldev:Mitro तुम दोनों ऊपर जाओ में माँ को कह दू कुछ खाने क लये तुम दोनों का

Shyam:han ठीक है

श्याम और बद्री ऊपर चले जाते है

बलदेव अपने माँ क कक्षा में घुस जाता है देवरानी अपने सामन जो पारस ले कर जाना उसे एकता कर रही थी

"माँ तैयारी शुरू हो गयी"

"आर्य आओ बलदेव"

बलदेव देवरानी क रूप को निहारते हुए

"माँ तुम बाला की सुन्दर लग रही हो"

"ाचा मेरे राजा "

बलदेव देवरानी को बहो में भर लेता है

Devrani:jao मुझसे बात मत करो

Baldev:q माँ क्या हुआ

Devrani:Me गुस्सा हु तुम से

Baldev:q गुस्सा है मेरी रानी

Devrani:tumne प्रसाद क्यू नहीं खाये जब दी तो

बलदेव हस्ते हुए

"ओह तो ये बात है मेरी रानी "

Baldev:dekho माँ में प्रसाद इसलिए नहीं लिया क्यू क तुम हे मेरी देवी हो और मेरा प्रसाद लेना मुझे आता है

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क होठो को अपने होठो में दबा कर चूसने लगता है

"ुमंठा अगललोप्प सलरपप

गलप्प्प गलप्प उम्म्म सलरपपप

गलप्प्प गल्प उम्मंहा सलरपप"

ऐसे अचानक हमले से देवरानी संभाल नहीं पति और लम्बी साँसे लेने लगती है

एक लम्बी चुम्बन क बाद बलदेव देवरानी क होठ हल्का काट लेता हैडवरानी क होठ छोरता है

Devrani:uff बलदेव ये क्या हरकत है

Baldev:Maa तुमने मुझे बचा क्यू कहा था प्रसाद देते हुए उसकी सजा है ये

Devrani:acha तो इस बात से मुँह गिराए थे तुम और तुमने ये कर क साबित कर दया क बचे हो

बलदेव देवरानी को ले कर दिवार से सत्ता देता है और उसके गर्दन को अपने बड़े हथेली से पकड़

Baldev:Maa वो तो में तुम्हे बताऊंगा कितना बचा हो

देवरानी हल्का खासी करते हुए

Devranu:Jaan से हे मार डोज

बलदेव अपना हाथ गर्दन से निकल कर देवरानी क बड़े गांड पर रख कर दबाता है

Baldev:jaan से तो नहीं पर किसी और चीज़ से मरूंगा ये

और बलदेव एक गांड पर थपकी मरता है

देवरानी लज्जा कर सर झुका लेती है

Devrani:mere प्रेमी क्यू गुस्सा हो रहे हो अगर में तुम्हे बचा समझती तो तुमपर भरोसा कर मई तुम्हे अपना जीवन साथी नहीं चुनती

बलदेव को अपने माँ पैर प्यार क साथ दया आजाता है

"माँ मई आपके इस निर्णय को कभी गलत साबित नहीं होने दूंगा "

तभी राजपाल आवाज़ देता है

"देवरानी ो देवरानी"

Devrani:ji महाराज

बलदेव अपने हाथ में देवरानी क गांड को दबोच क पूरी ताक़त से दबाता है

devrani:aaaaah

देवरानी की ज़ोर से आह सुन कर राजपाल देवरानी क कक्षा की ओरे आता है

devrani:chhoro बलदेव राजपाल आरहा है

देवरानी आकर दरवाज़े पैर कड़ी हो जाती है और राजपाल वह से तेज़ी में चलता हुआ आरहा था पर देवरानी को देख रुक जाता है

Rajpal:kya हुआ क्यों चीखी ऐसे

Devrani:maharaj वो पेअर में ठेस लग गई थी

Rajpal:batao कहा पर लगा चोट

तभी बलदेव सोचता है क अब छुपना बेकार है और दरवाज़े क पीछे से निकल कर सामने आता है

Rajpal:baldev तुम यहाँ ..क्या कर रहे हो

Baldev:Pita जी वो माता का हाथ बता रहा रहा पारस जाने की तैयारी में

Rajpal:acha बीटा

Baldev:acha तो में सामान बांधता हु

बलदेव वापस दरवाज़े क पीछे चला जाता है और राजपाल क आखो से ओझल हो जाता है

राजपाल अभी भी अपने पत्नी देवरानी क दरवाज़े क सामने खड़ा बात कर रहा tha,Jo क दरवाज़े और देवरानी से 4 हाथ क दूरी पर था

Rajpal:Suno श्याम और बद्री को कुछ खिलाया पिलाया की नहीं

देवरानी दरवाज़े पैर कड़ी

"महाराज अभी कुछ देर में हे बन जायेगा कमला और राधा पकवान बना रहे है"

दरवाज़े क पीछे छुपा बलदेव को शरारत सूझती है और वो कवर क पैट से सात कर कड़ी देवरानी क उभरे गांड को देखता है उसे अपने हाथो से सहलाने लगता है जिसका असर देवरानी क चेहरे पर साफ़ दिख रहा था और उसके आँख बीच बीच में बंद हो जाती

Rajpal:Or सुनो जितना हो सके जल्दी आना है तुम्हे वापस और देवराज को मेरा प्रणाम कहना और क्षमा मांगना मेरी ओरे से मेरे सेल साहब से

बलदेव देवरानी क गांड सहलाते हुए दबोच कर ज़ोर से मसलता है

devrani:"aaaah" यह

Rajpal:ab क्या हुआ

Devrani:kuch नहीं वो कड़ी हु न कब सा तो मोच दुःख रहा है

Rajpal:theek है जाओ आराम करो

राजपाल घूम क जाने लगता है

बलदेव एक थप्पड़ मरता है गांड पे और इस बार देवरानी ज़ोर से

"ाआअह"

करती है जो जाते हुए राजपाल को भी सुनाई देती है

राजपाल मन में " ये देवरानी पागल है "

जैसे राजपाल देवरानी क आखो से ओझल होता है देवरानी वापस अपने कक्षा में आती है देखती है बलदेव बिस्तर पर लेता मुस्कुरा रहा था

"बलदेव ये क्या बेवकूफी है राजपाल देख लेता तो"

"माँ बास मेरा मन था मैंने कर दया"

"किसी दिन जान चली जाएगी तुम्हारे इस मन क चक्कर में"

"माँ क्यों परेशां हो रही हो ाचा बोलो तुम्हे मज़ा नहीं आया अपने पति क सामने तुम्हे मसला तो

में"

"

देवरानी ये सुन कर लज्जा जाती है क्यू क अपने बेटे द्वारा अपने पति क सामने ऐसे मसले जाने पर उसे एक अलग हे उत्तेजना का अहसास हुआ था

"पर बलदेव"

"पर वर कुछ नहीं माँ उसकी पत्नी नहीं हो अब तुम और उस बुद्धू राजपाल को बताना है क तुम अब मेरी हो उसकी नहीं"

"बड़े आया मजनू कही क"

"आर्य रे मेरी छमिया वो तो में बताऊंगा तुम्हे क ये मजनू कैसे प्यार करता है"

"देखूंगी क ये बदल गरज़ने वाले है जो बरसते नहीं या फिर सच में.."

बलदेव ये सुन कर देवरानी पर झपट्टा है देवरानी उस से बच निकलती है

devrani:beta संयम रखो नहीं तो ज़्यादा प्रेम दिखाए तो हमारी यात्रा अभी ख़त्म हो जाएगी

Baldev:hmmm माँ संयम और नहीं

Devrani:chalo जाओ अपने मित्रो को बुला लो

Baldev:kya kahu..mausi बुलाई है या भाबी

Devrani:pagal हो तुम ..

Baldev:han वो तो हु तुम्हारे प्यार में ,और वैसे भी मेरे मित्र है श्याम और बद्री तो तुम्हे आज न कल तो भाबी हे कहेंगे

Devrani:Bhabi नहीं मौसी कहेंगे

Baldev:to तुम क्या चाहती हो क मुझे मौसा कहे

और बलदेव हसने लगता है

Devrani:chup कर कमीने तुम से भला कोण जीत सकता है

Baldev:Maa वो मेरे मित्र पहले है बाद में तुम उनकी मौसी हो मुझे तो पक्का यक़ीन है वो लोग तुम्हे मौसी नहीं कहेंगे

Devrani:Tumhe ऐसा लगता है बलदेव ये भी हो सकता है क सच जान ने क बाद वो हमारा मुँह भी नहीं देखना पसंद करे

Baldev:to न करे मुझे किसी की परवाह नहीं जो हमे स्वीकार करे तो ठीक नहीं करे तो वो मेरा कोई नहीं

Devrani:chal जा बड़ी बड़ी बात करना बाद में जा कर खाओ कुछ

बलदेव निकल कर अपने कक्षा में जाता है और कमला से कह कर नाश्ता ऊपर हे मंगवा लेता है तीनो मिल कर खाने लगते है

Baldev:To कहो बद्री आज हे निकले या कल सवेरे

Badri:waise बलदेव आज हे जाना सही होगा क्यू क महाराज ने कहा है क हमे वापस आना है क्यू क गहतराष्ट्रा क लोग सोचेंगे क उन्हें लड़ने क लये कह दया गया और खुद अपने परिवार को पारस घुमाया जा रहा है

Baldev:hmm सही कह रहे हो बद्री

Shyam:Bhai इसका मतलब हम ज़्यादा दिन पारस नहीं रुक पाएंगे

बद्री:2 से 3 दिन श्याम उस से ज़्यादा नहीं

Shyam:itne दिन में हम कहा घूम पाएंगे पूरा पारस

Badri:shyam तुम्हे बास घूमना और खाना सूझता है यहाँ आक्रमण का दर है

Baldev:shyam चिंता मत करो फिर कभी हम जायेंगे तो अचे से घूम लेंगे वैसे भी पारस तो मेरा ननिहाल है

(मन में: और अब तो ससुराल भी है)

और मुस्कुराता है

ऐसे हे दोपहर का समय हो जाता है चारो अपने यात्रा पर लेने जाने वाला हर सामान अचे से तैयार कर एक जगह रखने लगते है और फिर खाने का समय हो जाता है

सब आसान पर बैठ खाने की प्रतीक्षा कर रहे थे श्याम बद्री राजपाल जीविका षुरूश्ती बलदेव

देवरानी कमला और राधा से हर तरह क व्यंजन रखवाती है

Shyam:Mujhse तो रहा नहीं जा रहा देवरानी मौसी क हाथो का व्यंजन खाने क लये

Baldev:maa सबसे पहले श्याम को दो

देवरानी कमला से पनीर की सब्ज़ी ले कर श्याम क थाली में रखती है और फिर बलदेव को पूछती है

"खाओगे क्या पनीर"

देवरानी का पल्लू सड़क जाता है और उसके दूध साफ दिखने लगते है

बलदेव जैसे देवरानी क गहरी घाटी में खो जाता है

बलदेव देवरानी क वक्ष को देखते हुए

"दो न माँ मुझे खाना है"

देवरानी पनीर की सब्ज़ी रख उसके थाली में

एक ऐडा से मुस्कुराती है

और फिर सबको बाँट ने लगती है

बद्री जो बगल में बैठा भोजन कर रहा था अपने चतुराई से दोनों का नैन मटक्का देख लेता है और वो सोच में डूब जाता है

Baldev:pita जी हमे तय क्या है क हम अभी भोजन क बाद निकल जायेंगे पारस क लये

Rajpal:han ठीक है जाओ पर जल्दी आना है इस बात का ध्यान रखना बलदेव

जीविका खाने की कोशिश कर रही थी पर उसके हलक से खाना अंदर नहीं जा रहा था

Jeevika:man में) बता दू क्या राजपाल को

पर कैसे बताऊ

Devrani:aap चिंता मत करे महाराज

हम सही समय पैर आएंगे

Jeevika:Bahu तुम्हे कब से सही गलत की पहचान हो गयी और एक घूरती हुई नज़र से बलदेव की ओरे देखती है

बलदेव को समझते समय नहीं लगता है क दादी क्यू अंदर से इतना गुस्सा है

Baldev:Dadi मैंने वो बात माँ को बताया हु जो आपने मुझे सिखाया था

Jeevika:kya ?

Baldev:Han दादी और आप ने बहुत दुन्या देखा है और आपने समझाया था न क जब डिल और दिमाग में युधा हो हमे हमेशा अपने डिल की सुन नई चाहिए अपने ख़ुशी क लये ....अब में अपने डिल की सुनता हु जब भी मुझे निर्णय लेना होता है ,आपका धन्यवाद दादी

जीविका को अपनी कही हुई बात याद आती है और कही न कही उसका डिल अपने पोते जिसको वो जान से ज़्यादा चाहती थी

Baldev:Dadi अब आप चल कर आकर हमारे साथ भोजन कर रही हो में बहुत खुश हु

Jeevika:man me)Baldev सही तो कह रहा है आज बलदेव क वजह से हे मेरे पेअर थोड़े ठीक हुए नहीं तो बलदेव क आने से पहले मुझे कोई कहा पूछता था एक जगह सोई रहती थी

जीविका बहुत कठिन परिस्थिति में थी एक तरफ उसका बीटा राजपाल का घर उजाड़ रहा था दूसरी ओरे उसके पोते का घर बस रहा था

जीविका एक बार राजपाल को देखती है फिर बलदेव को देखती है बलदेव क आखो में उसे देवरानी क लये बेशुमार प्यार दीखता है

जीविका देवरानी को देखती है देवरानी अपना सर झुकाये दुखी मन क साथ बैठी थी उसके आँख ासु से भरे थे और जैसे जीविका को कह रहे हो क "कृपया कर क हमारा साथ दीजिये में बहुत दुखी हु"

बलदेव चुप्पी तोड़ते हुए

Baldev:dadi ख़ुशी पाने क लये कभी कभी कठिनाईओ का सामना करना पड़ता है

जीविका फिर देवरानी की ओरे देखती है जो अपने आखो में ासु भरे हुए जीविका की ओरे एक आस से देख रही थी

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Devrani:Baldev तुम्हारी तो दादी थी जो तुम्हे ज्ञान दे दी पर मेरे पास न दादी थी न माँ बाप ने परवरिश की उनका भी देहांत हो गया

जीविका को ये बात सुई की तरह चुभता है

जीविका का दिमाग दुखने लगता है क आखिर वो किस मोड़ पर फास गयी है वो अपना सर निचे कर क खाने लगता है

सब भोजन समाप्त कर क उठ ते है

जीविका अपने कक्षा में जाने लगती है

Baldev:ruko दादी हम अब निकलेंगे आशीर्वाद नहीं डोज

बलदेव और देवरानी दोनों साथ में जीविका क पेअर पकड़ कर आशीर्वाद लेते है

जीविका को न चाहते हुए भी आशीर्वाद देना पड़ता है

"सदा खुश रहो"

जीविका अपना विशाखी लिए अपने आखो में ासु लये अपने कक्षा में चली जाती है

जीविका अपने कक्षा में जा कर

"हे भगवन ये कैसी स्तिथि है मई अपने बेटे का साथ क्यू नहीं दे परही हु कही ये देवरानी को जो जीवन भर दुःख हुआ वो तो नहीं रोक रहा मुझे"

और उसके आखो से ासु गिरने लगते है

सेनापति सोमनाथ चार घोड़ो को तैयार कर चारो पर सामान बंधवा रहा था सैनिको से अंदर बलदेव देवरानी और श्याम और बद्री तैयार हो रहे थे

षुरूश्ती अपने कक्षा में आकर अपने रखा पिटारा खोलती है तो उसमे सांप अब भी अपने ज़हर लये मौजूद था

Shurushti:devrani तेरी ये अंतिम यात्रा होगी और उसके बाद तेरे बेटे को भी मई मरवा दूंगी हहहहह

षुरूश्ती बड़ी चालाकी से पटरी छुपाये बहार आती है तो देखती है दो सैनिक और सेनापति सोमनाथ घोड़े पैर सामान लाड रहे थे और घोड़े को उसका चारा दे रहे रहे

Shurushti:uff अब क्या करू

षुरूश्ती कुछ सोचते हुए

Shurushti:Ary सेनापति सोमनाथ

सेनापति somnath:Ji महारानी

Shurushti:wo आप महाराज ने बुलाया है कुछ काम से

सेनापति somnath:ji महारानी

सोमनाथ अपना काम छोर महल क अंदर चला जाता है

Shurushti:sainiko ये किस किसके घोड़े है

Sainik:mahrani ये भूरा वाला युवराज श्याम का है ये कला घोडा पर युवराज बलदेव जायेंगे और ये वाले काळा घोड़े पे युवराज बद्री

Shurushti:or ये सफ़ेद घोड़े पे ?

Sainik:maharani ये घोड़े पे रानी देवरानी जाएँगी

षुरूश्ती एक क़ातिल मुस्कान देते हुए

Shurushti:Aah मेरा गाला सुख रहा है सैनिको ज़रा पानी लाना

सैनिक pehla:tum जाओ ले आओ पानी

सैनिक दूसरा :नहीं नहीं मेरा काम अब होने वाला है तुम ले आओ

shurushti:Gadho दोनों जाओ एक साथ और पानी लाओ अन्यथा

दोनों दर जाते है और भागने लगते है षुरूश्ती मौक़ा देख पिटारा खोल सांप को देवरानी क घोड़े पे बन्दे झोले में रख देती है और पिटारा छुपा लेती है

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दोनों सैनिक भाग कर पानी लाते है

Sainik:ye लीजिये महारानी पानी

Shurushti:tum दोनों ने इतनी देर कर दी मेरी प्यास ख़तम हो गयी

और षुरूश्ती वापस महल में आने लगती है

sainik:ary इतनी जल्दी तो लाये फिर भी

दोनों सैनिक एक दूसरे का मुँह देख अपना बाकि का काम करने लगते है

सब तैयार हो कर महल क बहार आते है जहा पर उनका घोडा तैयार खड़ा था देवरानी सब से विदा लेती है

षुरूश्ती हल्का रोने लगती है

"देवरानी अपना ख्याल रखना"

देवरानी मन में :वापस मत आना कलमुही देवरानी

devrani:Han दीदी आप भी रखना

Rajpal:devrani सेल साहब मेरा प्रणाम मत भूलना

देवरानी मन में :देवराज क जीजा को में साथ ले जा रही तुम्हारे प्रणाम का क्या करू

षुरूश्ती मन me:budhu राजपाल देवरानी ने देवराज का जीजा हे बदल दया है अब भी भ्रम में हो

kamla:Mahrani अपना ख्याल रखना

Devrani:tum भी अपना ख्याल रखना

बलदेव अपने पिता क पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है और फिर सब बरी बड़ी घोड़े पर बैठने लगते है और सब अपने घोड़े को लगाम खींच घोड़े को भागने लगते है

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राजपाल षुरूश्ती अंदर आते है

षुरूश्ती :आखिर बाला ताली

rajpal:par मुझे तो अब उनके ऊपर हमारे शत्रु क हमले का दर है

Shurushti:to मर जाने दो दोनों माँ बेटे को वो कौन सा आपके बात मने

Rajpal:tum सही कह रही हो षुरूश्ती वो मुझे नहीं समझते तो में क्यू सोचु

इधर बलदेव अपने माँ और मित्रो क साथ तेज़ गति से घोड़े पे सवार गहतराष्ट्रा की सीमा पार कर लेता है ,घोड़े को दौड़ते हुए शाम हो जाती है

बलदेव अपना हाथ दिखा कर सबको धीरे होने का इशारा देता है

सब रुक जाते है

Baldev:Badri अँधेरा हो गया है अब हमे मशाल जला लेना चाहिए

Badri:Thek है बलदेव

बद्री मशाल जलने लगता है

Baldev:ab हम सब आगे पीछे चलेंगे सबसे आगे बद्री मशाल लिए चलेगा उसके पीछे श्याम उसके पीछे माँ और उसके पीछे मई

देवरानी घोड़े पे बैठी अपने बेटे की बुद्धिमानी पर गर्व महसूस कर रही थी

बद्री मसल जला कर आगे अत है

Baldev:dhyan रहे हम डिल क पास है हमे आबादी से बच कर जंगल से अधिकतर आगे बढ़ना है और ये चन्द्रमा की रौशनी भी आज हमारे साथ है

अब बद्री हाथ में मसल लिए घोड़े की लगाम दूसरे हाथ से थामे घोड़े को भागता है उसके पीछे श्याम उसके पीछे देवरानी और बलदेव

रात 10 बजे बलदेव की आवाज़ से बद्री अपना घोडा रोकता है

Baldev:badri आधी रत होने को है हमे अब कुछ खा कर आराम करना चाहिए

Shyam:han मई थक गया कुछ खाना चाहिए

Baldev:kya कहती हो माँ

देवरानी एक मुस्कान क साथ "खिला दो मुझे भी"

बद्री :महल में भी मौसी कुछ अलग अंदाज़ से अपने पल्लू हटा कर दिखा रही थी बलदेव को और मुस्कुरा रही थी और अब भी क्या में जो सोच रहा हु वो सही है

Badri:mausi खाने का झोला मेरे पास है आ जाओ सब कहते है

Baldev:yaha पास में झरना है और हम किसी गाओ क करीब है दूर तुम सब देखो खेतो क उस पर दिया जल रहे है

devrani:han यहाँ ठण्ड भी बहुत है

Baldev:badri अपना पसंदीदा घर बनाया जाये

Badri:han क्यू नहीं

Devrani:ghar और यहाँ क्या कह रहे हो तुम लोग

Badri:hum दो बना सकते है

बद्री अपने हाथ से हथोड़ी निकल कर तम्बू बनाने लगता है

अब चारो समझ जाते है क उनको क्या करना है और देवरानी भी हाथ बता ने लगती है

और देखते हे देखते दो तम्बू बन क तैयार हो जाते है

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devrani:wah ये तो हूबहू घर जैसा हो गया

Badri:mausi ये सब हमारे गुरु ने सिखाया है

फिर सब वही बैठ कर चटाई पर खाना कहते है और छोटा सा लैंटर्न जला कर दोनों तम्बू में रख लेते है

खाना खाने क बाद सब इधर उधर की बाते करने लगते है

बलदेव पास क एक वृक्ष स सुखी लकड़ी तोड़ लेता है और उसे जला देता है

Baldev:ise हमे गर्मी महसूस होगी और जानवरो से भी बचाव होगा

ये सब करते हुए 11 बज जाता है

Devrani:mera बदन टूट रहा है सालो बाद घुड़सवारी की हु मुझे सोना है और बलदेव की और देखती है

बलदेव समझते हुए

तो मित्रो अब हमे सोना चाहिए हमे भोर होते हुए फिर पारस की ओरे जाना है

बद्री :हाँ सो जाते है भाई अब दो तम्बू है पर दोनों छोटे है ,मौसी एक तम्बू में सो जाएगी क्यू क उनको जगह चाहिए और हम तीनो एक तम्बू में सो जाते है ऐसे भी हम आचार्य जी क वह साथ हे सोते थे

देवरानी ये सुन कर बलदेव की ओरे निराशा से देखती है

Baldev:badri बात ये है न मित्र क माँ को अकेले दर लगेगा अकेले तो में माँ को ले कर सो जाता हु

बद्री मन में :कुछ तो गड़बड़ है

Shyam:han चलेगा में और बद्री ये तम्बू में सो जाते है

Devrani:han में बलदेव क साथ सो जाती हु

Badri:theek है ठीक है

सब अपने घोड़े को अचे से बांध बिस्तर लगा कर तम्बू में घुस कर तम्बू बंद कर लेते है परदे से

श्याम और बद्री अपने राज्य की कहानी बतया रहे थे वही देवरानी क बगल में लेता बलदेव ऊपर की तरफ देख रहा था

"बलदेव क्या सोच रहे हो राजा"

"माँ में यही सोच रहा हु क कभी सोचा नहीं था तुम मेरी हो जाओगी आज ऐसा लग रहा है जैसे क हम दुन्या से दूर है किसी बंधन क"

"हाँ बलदेव मुझे भी वर्षो बाद सुकून मिल रहा है"

बलदेव और देवरानी अपने अतीत से जुडी हर बाते कर रहे थे

आधा घंटा बाद

"बलदेव क्या हुआ आज मौक़ा है तो हाथ नहीं मरोगे"

बलदेव तम्बू से बहार अत है और देखता है बद्री और श्याम सो रहे थे

बलदेव फिर तम्बू में आकर देवरानी से चिपक जाता है

"महारानी देवरानी बोलो न मेरी पत्नी बनोगी"

"बना पाओगे तो मेरी हाँ है मई इस चन्द्रमा को साक्षी मान कर कह रही हु"

बलदेव क आखो में देखती है

बलदेव देवरानी क होठो पर चूमता है उसको आलिंगन में लेते हुए

बद्री जिसके दिमाग में शक हो गया था वो बलदेव की आहात सुन लय था और बलदेव जब आया था तो खर्राटे लेने लगा था

बद्री श्याम को सोता छोर बहार निकलता है और जैसे हे वो तम्बू की ओरे देखता है उसके पैरो से ज़मीन निकल जाता है लैंटर्न की रोशनी से परछाई बने हुए दिख रहा था क बलदेव और देवरानी क्या कर रहे है

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परछाई में साफ़ पता चल रहा था दोनों एक दूसरे को चुम रहे है बद्री का दिमाग काम करना बंद करने लगता है और वही बूट बना खड़ा देख रहा था..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 57

बूट बना खड़ा बद्री सिंह देख रहा था तम्बू में परछाई को जिस से साफ़ पता चल रहा था अंदर जो खेल खेला जा रहा था वो एक माँ बेटे क बीच नहीं खेला जाना चाहिए बद्री का गुस्सा से लाल हो जाता है

बद्री मन में: अभी पूछता हु कमीने बलदेव को उसको ये सब करने क लये मौसी हे मिली थी और मौसी भी तो सावित्री बनती थी ,मुझे घृणा होरही है

बद्री गुस्से को काबू कए हुए खड़ा था फिर कुछ सोच क वापस तम्बू में जाता है और अपने सामान एकठा करने लगता है इस आवाज़ से श्याम जग जाता है

"क्या हुआ बद्री इतने राते गए तुम क्या कर रहे हो"

"श्याम मई जा रहा हु वापस में और आगे नहीं जा सकता मित्र"

"बद्री क्या हुआ भाई ऐसा क्या होगया जो आधी रात तुम"

ये सुन कर बद्री श्याम का हाथ पकड़ कर तम्बू क बहार लता है

"ये देखो इस अधर्मी बलदेव को मुझे तो इसे अब मेरा मित्र कहते हुए भी घृणा होरही है "

श्याम तम्बू की परछाई में देखता है और वो भी चौक जाता है और उसके मुँह से निकलता है

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"असंभव"

"आशम्भव नहीं है शयाम ये जो देख रहे हो तुम यही सत्य है"

ये कह कर गुस्से में बद्री वापस तम्बू में आ जाता है

गुस्से में देख बद्री को श्याम उसके पीछे आटा है

Shyam:suno भाई इतनी रात गए तुम कहा जाओगे

Badri:hey भगवन मैंने क्या पाप क्या था जो मुझे आज ये सब देखना पद रहा है

Shyam:Hosh में आओ badri,tum कही नहीं जाओगे

Badri:shyam तुम्हे यक़ीन होरहा है इतनी सटी सावित्री और पतिव्रता महिला ऐसा भी कर सकती है ज़रूर उसे बलदेव जबरदस्ती कर रहा होगा

Shyam:Pagal हो तुम अगर मौसी क साथ ज़ोर ज़बरदस्ती करता बलदेव तो इतना चुपचाप नहीं रहती मौसी

Badri:tum समझ नहीं रहे श्याम हमारे माँ जैसी थी वो

Shyam:dekho हम जंगल में है और हमारे दुश्मनो क करीब भी अगर तुम अभी कोई भी कदम उठाओगे तो सोच लो नुक्सान तुम्हारा हे होगा हमारा नहीं

Badri:Mujhe डराओ मत श्याम मुझे अपनी जान की परवाह नहीं

Shyam:Tu ज़िद्दी है ऐसे नहीं मानेगा ,तुझे हमारे दोस्ती की कसम है अगर तू यहाँ से गया तो हमारी दोस्ती ख़त्म

Badri:tu पागल है क्या श्याम

Shyam:chal अपने झोला रख और सो जा

और अगर मौसी और बलदेव अवैध सम्बन्ध बना रहे है तो आपसी सहमति से हे बना रहे है जैसा मुझे लग रहा है

Badri:han मैंने भी इनका इशारा महल में कहते समय देखा था

श्याम बद्री क कंधो पर हाथ रख कर उसको पानी पीने क लये देता है

Shyam:dekho बद्री अगर तुमको इतनी हे दुःख है इस बात की तो कल सुबह बलदेव से पूछ लेंगे मुझे भी कोई ाचा नहीं लगा ये सब देख क

Badri:Han तुम सही कह रहे हो में तो बलदेव से इसका उत्तर ले कर रहूँगा

Shyam:han तो अब सो जाते है

दोने सोने की तैयारी फिर कर रहे थे

shyam:tujhe याद है हम घरेलु चुदाई की पुष्टकेँ पढ़ते थे

Badri:han श्याम

Shyam:or हम ने बलदेव को भी दया था पढ़ने

Badri:tum कहना क्या चाहते हो

Shyam:kahi ये उसका हे तो असर नहीं

Badri:Hum कहाणीआ मज़े क लये पढ़ते थे बलदेव ने तो इतिहास हे रच दया

Shyam:Han मुझे लगता है क एक बार बलदेव जो हम से भी समझ दर है उसे जान न ज़रूरी है क उसकी सोच क्या है ये सब क peeche,Baldev ने तो कहानी को जैसे जीवन दे दया हो जब कहानी में इतना मज़ा अत था तो उसको कितना मज़ा आ रहा होगा

Badri:chup कर और सो जा

तभी दोनों क कानो में छप्प छप्प छू छू की आवाज़ आती है दोनों को लगता है कोई जानवर तो नहीं दोनों ख़ामोशी से आवाज़ क दिशा देखते है तो ये आवाज़ बलदेव और देवरानी क तम्बू से आरही थी जो एक दूसरे को चूमने की थी

ये दोनों समझ जाते है और श्याम बद्री की ओरे देख एक मुस्कान देता है और इशारे कहता है सो जाओ

बद्री गुस्सा से अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा कर लेट जाता है और दोनों सोने की कोशिश करने लगता है

इधर दूसरे तम्बू में बलदेव देवरानी को बेतहाशा चूमे जा रहा था

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"गलप्प्प गलप्प्प सलरपप"

"आह मेरे राजा "

"ुम्मम्ह गल्प "

"मेरी रानी "

"galppppppppppppp galpppppppppp

गलपपपपपप गलप्प्प गलपपपपपप

गलप्प गलललपपपप गलपपपप"

"देवरानी मेरी रानी तू बनेगी मेरी पत्नी"

"हाँ मेरे राजा बनूँगी तेरी पत्नी नहीं धर्म पत्नी"

बलदेव देवरानी को खूब चूस रहा था और देवरानी भी खूब साथ दे रही थी

देवरानी अब छोरती है उसकी सांसे फूलने लगी टी

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"राजा आराम से कही वो दोनों सुन न ले"

देवरानी की चुन्नी हैट जाने से उसके दोनों बड़े वक्ष उसके साँसों क साथ ऊपर नीचे हो रहे थे

बलदेव हाथ पकड़ कर

"इधर आ मेरी जान"

उसके दोनों वक्षो को देखता है

और अपने दोनों हाथ बढ़ा कर

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"माँ क्या पपीते है तेरे आह मज़ा आगया"

दोनों वक्ष को खूब दबाने लगता है

"अह्ह्ह राजा " देवरानी अपने वक्षो को सहलाने जाने से आनंदित होती है बलदेव को सहलाने लगती है

"देवरानी इधर आ मेरे पास"

"हाँ मेरे राजा "

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बलदेव: "आ न मेरी गॉड में बैठ न "

देवरानी इशारा समझ जाती है और बलदेव क तरफ अपना बड़ा गांड करती है

"हाँ ला न ये तरबूज़े जैसी गांड में गणना दाल दू और अपना रास छोर दू इसमें"

"गन्दा बलदेव"

"अभी बता ता हु कितना गन्दा हु माता रानी"

बलदेव देवरानी क गांड पर अपना लैंड लगा देता है और देवरानी अपना गांड पीछे कर मज़ा कर रही थी बलदेव खूब मन से अपना लौड़ा मसल रहा था गांड पैर

देवरानी को अब हल्का झुका कर अपना दोनों हाथ आगे ले जाता है बलदेव और वक्षो को भींच

"आह माँ तुम्हारे ये दोनों तरबूज़ों का

रास पीना है ..पिलाओगी न"

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बलदेव खूब अचे से दोनों भरी स्तनों का मर्दन कर रहा था

"आई है मई मर गयी उफ़ हे भगवन"

"अहह माँ"

"हेय दय्या मेरे दूध उफ़ यह"

"बोलो न डौगी न अपने पति अपने बेटे बलदेव को इस का दूध पीने"

"हाय मेरे पति नहीं तुम मेरे पति परमेश्वर हो सब कुछ ले लो जो चाहो वो"

"समय आने दो "

"हाँ मुझसे विवाह कर लो न बलदेव मुझे अपनी बना लो"

"बना लूंगा तुझे अपनी पत्नी मेरी जान भरोसा रखो"

"बलदेव मुझे और नहीं रहा जाता है मेरे राजा यह"

बलदेव अब भी खूब अचे से दूध दबाये जा रहा था और देवरानी को झुकाये अपना लैंड उसके गांड क दरार में रगड़ रहा था

"अह्ह्ह राजा ऐसे हे"

"मुझे पत्नी बना लो रोज़ मज़े दूंगी इस से भी ज़्यादा"

"मुझे पता है मेरी माँ क तुम डालने नहीं डौगी बिना विवाह कए"

बलदेव अब ज़ोर ज़ोर से अपना लैंड रगड़ रहा थाई देवरानी क गांड पैर बलदेव एक हाथ से अपना लैंड पकड़ कर देवरानी क गांड से सीधा उसके छूट पर लौड़ा सत्ता देता है

"अहह राजा ये लोहा तो गरम है"

"तुम्हारा चूल्हा भी भट्टी बानी पड़ी है"

"अहह राजा "

बलदेव क ऐसे छूट पर लैंड रगड़े से देवरानी का पानी छूट से बहार आ जाता है

"aaaaaaaaaah baldev"devrani इस बार अपने आप को रोक नहीं पति और चिल्ला देती है

बलदेव देवरानी को चिल्लाता देख सीधा कर क अपना लौड़ा उसके छूट क छेड़ पर रख वस्त्र क ऊपर से घुसाने की कोहिश करता है

"यह में तुम्हे पत्नी बना कर हे भोगूँगा"

अब बलदेव का लौड़ा भी अकड़ कर पानी छोड़ने वाला था

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"भोग लेना बीटा "

बलदेव देवरानी क दोनों बड़े पपीता को फिर उसके चेहरे को फिर उसके गर्दन पर चुम्मे की बरसात कर देता है"

"अह्ह्ह्हह देवरानी मेरी पत्नी मेरी माँ"

और बलदेव अपना ायकः बंद कए देवरानी गले लग जाता है और उसे लैंड बड़ी ज़ोर की पिचकारी उसके धोती पर मरता है

बलदेव निढाल हो कर देवरानी क बगल में सो जाता है

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Devrani:kyu थक गए मेरे राजा

बलदेव अपना हाथ आगे बढ़ा कर देवरानी की एक चुकी पकड़ कर मसलने लगता है

"माँ तुम्हे प्यार कर क मई कभी थक नहीं सकता "

"चल जाओ बहुत देखे है"

"माँ हमे अँधेरा छत ते हे पारस की ओरे निकल जाना है"

देवरानी भी अब सीधा लेता सुस्ताने लगती

"आज चाँद क निचे तुमसे प्यार कर क बहुत मज़ा आय्या"

"ऐसा है तो बास हमारी शादी विवाह हो जाने दो फिर तुमको बताऊ चाँद क निचे प्यार करना किसे कहते है मेरी रानी"

"क्यों क्या करेगा तू ऐसा"

"तुझे ठोकूंगा तेरे पिछवाड़े में अपना डंडा दाल क मेरी पत्नी तो बनो"

देवरानी शर्म और लाज से अपना सर झुका कर नज़रे बचने लगती है

"चल हॉट गंदे कमीने"

और दोनों सो जाते है

इधर गहतराष्ट्रा में

दोपहर से सोच में डूबा सेनापति सोमनाथ

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सेनापति सोमनाथ

"क्या करू में ये गुत्थी सुलझाने क लये कहा जाऊ आखिर ये सब करने की वजह क्या हो सकता है"

महल क सामने सेना क लये उद्यान और वही पास में सेना गृह था जहा पर सेनापति क लये खास कक्षा दया गया था

सोच में डूबा सोमनाथ बहार निकल कर अपना घोडा पर बैठ गहतराष्ट्रा क मुख्या बाजार की ओरे चल देता है

सोमनाथ मन में " आखिर ये कौन था जो महारानी षुरूश्ती से मिलने आया था क्या उसका हे हाथ है..

"पर महारानी षुरूश्ती रानी देवरानी को क्यू मरना चाहती है "

सोमंथ मुख्या बाजार में ले जा कर अपना घोडा एक ओरे बांध देता है

बाजार में शोर था हर तरफ दुकाने थी दूर दूर से लोग अपनी खरेदी करने आये हुए थे

Somnath:ab उस दिन जो आदमी रानी षुरूश्ती से मिलने आया था वही बता सकता है पर उसको धुंडु कैसे

सोमनाथ बीच बाजार में खड़ा सोच रहा था उसे बाजार में हर फल वाले और सब्ज़ी वाले अपनी तरफ बुला रहे थे खरीदी करने क लये

तभी सोमनाथ क कान में डमरू की आवाज़ आती है और वो उस ओरे देखता है जहा पर तमाशा वाला अपना तमाशा दिखा रहा था

Somnath:man me)saanp का राज तो सपेरा हे खोलेगा

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 58

बाजार में अपनी पड़ताल करता सेनापति सोमनाथ तमाशा वाले की ओरे बढ़ रहा था

Somnath:man me)Saanp को महारानी शुसूरष्टि क हाथ में तो मई देखा हु देवरानी क घोड़े पे लाडे सामान में रखते हुए पर जो आदमी महारानी से मिलने आया था उसका पता मिले तो काम बने

बड़ा सा घेरा बना कर लोग तमाशा वाले का तमाशा देख रहे थे

"अब देखिये भइओ आपने देखा कैसे हम ये गायब कर डाई अब आप सब को हम सांप का नाच दिखाएंगे"

सोमनाथ भीड़ को चीरता हुआ आगे जाने लगता है

"देविओ और सज्जनो डरने की ज़रूरत नहीं ये सांप जंगली तो है पर मुझे कटेगा नहीं और मेरे रहते हुए किसी और को भी नहीं कटेगा"

"ऐ बचा तुम थोड़ा दूर जाओ"

भीड़ से लोग कहते है

"बचो दूर रहो "

अब तमाशा वाला अपना पिटारा खोलता है और सांप को कहता है

"नाच मेरे राजा तुझे सिक्का मिलेगा"

सांप अपना सर उठाये हवा में चारो और घूमता है

कड़ी भीड़ चारो ओरे से ताली बजती है

सोमनाथ अब आगे आकर खड़ा हो जाता है

सोमनाथ मन में " ये तो वो नहीं है जो महल आया था"

थोड़े देर यु हे खेल दिखा कर तमाशे वाला अपने पेटारे को ले कर सब क पास जाने लगता है

"भइओ और बहनो आप सब ख़ुशी से जो दे दे ये संपेरा उसे रख लेगा"

धीरे धीरे भीड़ छटनी शुरू होती है

और तमाशा वाला अपने पटरी में लोगो दुवारा दया गया सिक्का को निकल कर गमछा में बांधने लगता है

तभी उसकी नज़र सामने खड़े सोमनाथ पर पड़ी

तमाशे wala:Ustad आप क्यू खड़े है खेल तो ख़तम

somnath:Khel तो अब शुरू हुआ hai,me सेनापति सोमनाथ हु इधर आओ

तमाशे वाला दर क

"श्रीमान में कभी कभी यहाँ पर अपना खेल दिखता हु अगर आपको चाहिए तो आज की कमाई आप रख लो"

डरते हुए कहता है

Somnath:Murkh मुझे तुम्हारे सिक्को की कोई आवश्यकता नहीं

डरते हुए तमाशे वाला सोमनाथ क समीप आकर

Tamashewala:shreeman कुछ सैनिक आते है और हम से सिक्को की मांग करते नहीं और नहीं देने पर कहते है क वो हमे यहाँ काम नहीं करने देंगे

सोमनाथ मुस्कुराते हुए

"तुम्हारा नाम क्या तमाशे वाले "

"सर्कार हमारा नाम दुर्जन है"

Somnath:dekho दुर्जन अगर में चहु तो तुम से जो कर वसूला जाता है इस बाजार में वो तुमसे जीवन भर नहीं वसूला जायेगा सैनिको दुवारा

Durjan:sahi में महाराज

Somnath:Par उसके लये तुम्हे मेरा काम करना पड़ेगा

Durjan:Mera जैसा तुच्छ भला आपके क्या काम आएगा श्रीमान

Somnath:Dekho दुर्जन मुझे जितने संपेरा है उनसब से मिलना है

Durjan:q श्रीमान

somnath:mujhse प्रश्न मत करो जो कहता हु वो कहते जाओ

Durjan:to सर्कार हमारी बस्ती यहाँ से 4 कोस दूर है आप चाहे तो चले हमारे साथ

somnath:chalo

सेनापति दुर्जन को ले कर उस संपेरे की खोज में निकल जाता है जिसे उसने महल में देखा था

दोनों संपेरों की बस्ती में पहुंचते है

Somnath:Gao में ढिंढोरा पीट दो क जितने पुरष तमाशे वाले है उन्हें बहार आना है

Durjan:kaun पीटेगा ढिंढोरा

Somnath:tum ये कोई बड़ी बस्ती नै है तुम हर घर जा कर सबको बहार बुलाओ

durjan:thek ह

दुर्जन जा कर हर घर में कह देता है सेनापति आप सब से मिलना चाहते है

कुल मिला कर 35 से 40 लोग इकठा हो जाते है देखते देखते

Somnath:durjan कोई रह तो नहीं गया

durjan:nahi सर्कार

सोमनाथ एक एक को बड़े गौर से देखता है पर उनमे से कोई वो नहीं था जो उस दिन महल में आया था

तभी सोमनाथ की नज़र एक अधेड़ उम्र की व्यक्ति पर पड़ती है

Durjan:shreeman ये हमारे सरदार है अलोक

सोमनाथ एक मुस्कान क साथ

"सुनो तुम सब जा सकते हो सिर्फ अलोक का छोर कर"

अलोक जैसे हे भीड़ छत ते देखता है और सेनापति को अपने ओरे देख दहशत में ाज्जाता है और उल्टा पेअर भागने लगता है

सेनापति उसके पीछे दौड़ने लगते है

durjan:ee का होरहा है

"रुक जाओ अलोक"

अलोक भगा हे जा रहा था और गाओ की गालिओ से दूर निकल जाता है सोमनाथ उसका पीछा नहीं छोरता आखिर कर थोड़ा दूर और भागने क बाद आलोक हाफने लगता है और सोमनाथ उसे दबोच लेता है

Somnath:Somnath की चुंगल से बच नहीं पाओगे आलोक

Aalok:aap मुझे क्यों पकड़ रहे हो मैंने कुछ नहीं किया

Somnath:Durjan मेरा घोडा खोल कर लाओ

दुर्जन घोडा खोल कर लता है

सोमनाथ अलोक का गर्दन पकड़ कर रखा था और अलोक अपना प्रयत्न कर रहा था छूट भागने का

भीड़ जो लौट रही थी वही रुक जाती है और कुछ घरो से बचे और औरते भी बहार आजाती है

भीड़ से एक संपेरा

"महाराज इन्होने क्या किया है जो आप इन्हे पकड़ रहे है ये हमारे सरदार है"

"ऐ व्यक्ति तुम्हारा जीभ पकड़ कर हम खीच लेंगे हम सेनापति सोमनाथ है और राष्ट्र हिट में ये काम क्या जा रहा है अगर ज़्यदा चतुराई दिखाई तो"

सब दर जाते है

somnath:Durjan तुम्हे तुम्हारा उपहार मिल जायेगा आलोक क बदले में

aalok:mujhe छोर दो महाराज

सोमनाथ आलोक को बंद घोड़े पर लाड देता है और उसको लये हुए महल की ओरे आने लगता है

Somnath:man me)Aalok तुम मेरे बरसो का सपना गहतराष्ट्रा का राजा बन ने की कुंजी हो अब सही समय आगया है राजपाल से राजगादी छीन ने का

सोमनाथ अलोक को अपने कक्षा में ला कर रस्सी से बांध देता है

Somnath:bolo आलोक तुम उस दिन महारानी षुरूश्ती से मिलने क्यों आये थे

alok:me तो बास कुछ सामान पहुंचने आया था

सोमनाथ पास रखा कोरा उठा कर एक खींच कर अलोक को मरता है

Somnath:batayega नहीं तो तुझे आज में जान से मर दूंगा आलोक मुझे झूट नहीं सुन न

Alok:maharaj आप महारानी षुरूश्ती से पूछ लीजिये में किस काम से आया था

Somnath:tez बन ने की कोशिश वो भी सोमनाथ क सामने

सोमनाथ बंधे हुए आलोक पर कोरी की बारिश कर देता है पर आलोक कुछ उगलने क लिए तैयार नहीं था

सोमनाथ अपना तलवार निकलता है

"अलोक मुझे जो जान न है वो तो में जान लूंगा क तुम महारानी षुष्टि क साथ षड़यंत्र कर रहे हो और तुमने महारानी को विषैल सांप भी दया था"

ये सुन कर अलोक की आखे फटी की फटी रह जातीहै

"क्यू आलोक फैट गयी"

"देखो आलोक अगर में तुम्हे छोर देता हु तो तुम आज नहीं तो कल फांसी पर चढ़ा दिए जाओगे राज्य में षड़यंत्र करने क जुर्म में उस से ाचा है में आज हे मार देता हु"

आलोक दर जाता है कही वो उसे मार न दे

"नहीं महाराज"

सोमनाथ अपना तलवार उठा कर अपनी एक ऊँगली तलवार पर फेर

"एक झटके में तुम्हारा सर तुम्हारे धार से अलग होगा"

सोमनाथ जैसे हे तलवार को ऊपर उठा ता है

अलोक अपना आँख बंद कर लेता है

"महराज मत मारो में बताता हु"

सोमनाथ अपना तलवार मुस्कुराते हुए निचे करता है और कहता है

"शुरू हो जाओ आलोक"

रात बंद कमरे इधर सोमनाथ अलोक से पूरा षड़यंत्र जान रहा था उधर देवरानी बलदेव क साथ तम्बू में सोइ थी

कुछ 4 बजे बलदेव की नीड टूट टी है तो देखता है देवरानी उसके कंधे पैर सर रखे सोइ है

बलदेव मन me:kitni मासूम लग रही है माँ देवरानी सोते हुए इतनी चैन से सोते हुए मैंने इन्हे कभी नहीं देखा

बलदेव अपना हाथ आगे बढ़ा का देवरानी क बाल जो उसके चेहरे पर आरहे थे उसको सवरता है और देवरानी क सर पर सहलाने लगता हज

थोडेर देर ऐसे हे सहलाने से देवरानी की भी आँख खुलती है तो पति है बलदेव उसे हे देख रहा था और उसे सहला रहा था

"उठ जा मेरी रानी हमे जाना भी है"

"सोने दो न बलदेव"

बलदेव देवरानी क सर को सहला रहा था देवरानी फिर आखे बंद कर लेती है

दस मिंट बाद

"उठ जाओ मेरी माँ हमे चलना है"

"थोड़ी देर बलदेव तुम्हारे बहो में मुझे सोने दो"

"माँ तुम्हारे नखरे बढ़ते हे जा रहे है"

"हाँ तो कौन करेगा नखरे bardasht,badi बड़ी बाते करते हो क पत्नी बनाऊंगा ये वो"

देवरानी की बात सुन कर बलदेव मुस्कुराता है

"माँ अभी बानी तो नहीं हो न और अभी से हक़ जाता रही हो"

"और तू जो रात भर मेरे साथ क्या है तू भी तो मेरा पति नहीं है न"

देवरानी धीमे आवाज़ में कहती है

"आर्य मेरी रानी"

बलदेव देवरानी को अपने से चिपका लेता है

"महारानी जी उठिये हमे जाना है समय रहते हम शत्रुओ की छेत्र से निकलना है"

"हाँ तो अगली बार मत कहना क में हक़ जाता रही हु "

"बिलकुल नहीं मेरी रानी मेरा सबकुछ आपका है मई तो ऐसे हे बोल रहा था"

देवरानी मुस्कुराती हुई

"पता है मेरा राजा कभी मेरे से तंग नहीं आसक्त में भी मज़ाक कर रही थी मेरे रोम रोम में सिर्फ मेरा बलदेव का हक़ है"

देवरानी उठ कड़ी होती है

"बीटा तुम बहार जाओ मुझे कुछ काम है"

"क्या काम है माँ आप कर लो न"

"नहीं बीटा वो मुझे कपडे बदल ने है"

"क्यू माँ अचे भले तो है ये जो आपने अभी पहना है"

"वो बीटा गंदे है.."

देवरानी अपना सर निचे झुका लेती है

बलदेव की नज़र देवरानी क घागरे पे जाता है

और उसे एक धब्बा दीखता है देवरानी क छूट क ठीक ऊपर

बलदेव अनजान बनते हुए

"माँ मई समझा नहीं"

देवरानी फिर बलदेव को देखते हुए

"पगलू वो रात में मेरा घागरा भीग गया था तो "

ये कह कर अपने आँख तरेरे निचे देखती है और अपने पेअर की ऊँगली से ज़मी करउड़ने लगती है

माँ की बात सुन और उसे शर्माता देख बलदेव मुस्कुरा देता है

"तो माँ आप पारस जा कर भी बदल सकते है"

"पर बीटा सुबह होने को है और में पूजा कर क हे निकलूंगी यहाँ से और ऐसे गंदे वस्त्र में.."

देवरानी अब पानी पानी हो गयी थी अपने बेटे को बताये तो बताये कैसे उसके छूट क पानी ने घागरा ख़राब कर दया है

"हम्म माँ तो बदल लो"

"और वैसे बीटा अगर कही गलती से बद्री या श्याम की नज़र इस डेग पर पड़ी तो वो क्या सोचेंगे"

"क्या सोचेंगे माँ यही सोचेंगे कुछ गिर गया होगा और वैसे भी समझ गए तो आपको बोलेंगे नहीं कुछ"

"पर वो दोनों मुझे माँ जैसा समझते है और में भी उन्हें अपना बीटा सा प्यार देती हु"

"देवरानी जी तो कह देना अपने बेटो से क उसके होने वाले पति बलदेव ये दाग क कारन है"

devrani:hatt बदमाश कमीने

"अगर तुम नहीं कहोगी तो में कह दू अपने मित्रो को क तुम दोनों की भाबी देवरानी हे है"

और बलदेव हस्ता है

"तू सुधरेगा नहीं बलदेव"

"तुम्हारे जवानी ने बिगड़ दया है मुझे मेरी रानी"

"अब जाओ न बहार और तुम भी अपनी धोती बदल लो"

और हस्ती है

"माँ तुम मेरे सामने नहीं बदल सकती कहती हो पत्नी बनूँगी और झूठा गुस्सा दिखते हुए बलदेव बहार जाता है

इधर बद्री और श्याम भी उठ जाते है बलदेव देखता है दोनों बैठ दातुन कर रहे थे

Baldev:ary भइओ उठ गए तुम लोग

दोनों चुप थे कोई कुछ नहीं कहता है

"में माँ क लये भी दातुन बना देता हु"

बद्री और श्याम की नज़र बलदेव क धोती पर लगे दाग पर जाती है और वो समझ जाते है

कुछ देर बाद बलदेव दातुन ला कर माँ को देता है धीरे धीरे सब तैयार होते है

देवरानी तैयार हो कर अपने साथ लाये छोटे से मूर्ति की पूजा करती है

Baldev:Maa आपका पूजा हो गया हो तो बहार आजाओ हमे जाना है

बद्री मन me:Pooja कर रही है सुबह में रात में क्या कर रही थी ..कैसे कैसे लोग होते है

देवरानी बहार आती है

बलदेव अब तम्बू में जा कर अपना धोती बदल लेता है और सब मिल कर सब सामान एकता कर घोड़े पर बांध देते है

Baldev:ary तुम दोनों चुप क्यू हो सांप सूंघ क्या

बद्री और श्याम चाहते थे क वो पूछे बलदेव से पर देवरानी क सामने उसे बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी

बद्री हिम्मत कर क

"सुनो बलदेव"

बद्री बलदेव को ले कर देवरानी से दूर जाता है

"बलेव मुझे तुम से कुछ बात करनी थी"

"हाँ कहो बद्री"

"बलदेव हम और आगे तुम्हारे साथ नहीं जा सकते"

बलदेव देखता है बद्री क पीछे कुछ घुड़सवार आरहे थे और उनमे से एक अपने धनुष से तीर खींच दया

बलदेव देखता है क तीर बद्री की ओरे तेज़ी से आरहा है

"बद्री बचो"

बलदेव बद्री को ले कर निचे गिर जाता है

श्याम और देवरानी घोड़ो क पास खड़े थे

Baldev:bhago शत्रु हमारे पीछे है

श्याम जल्दी से सब घोड़े खोल देता है और चारो अपने अपने घोड़ो पे सवार हो कर भागने लगते है और उनके पीछे कुछ 10-15 घुड़सवार तलवार और धनुष लये पीछा कर रहे थे

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 59

बलदेव देवरानी श्याम और बद्री अपने ऊपर इतने सुबह अचानक हमले होने पर अपने जान ले कर भागना उचित समझते है

बद्री भी अचानक हुए हमले पैर हर बात भूल कर बलदेव क साथ भागने लगता है

Baldev:Or तेज़ ,पता नहीं इन्हे हमारी खबर कैसे मिल गयी

Badri:wo अभी भी हमारे पीछे है बलदेव

Baldev:sab अपनी अपनी तलवार निकल लो

"खछ" से खींच बलदेव अपनी तलवार निकल लेता है

कुछ देर भागने क बाद

Shyam:badri वो लोग पीछे नहीं है

Devrani:jaan बची भगवन

तभी बलदेव देखता है क उसके सामने वो घुड़सवार आरहे थे

Baldev:bala अभी ताली नहीं सामने देखो

Devrani:ye यही क बासिन्दे लगते है इन्हे जंगल का चप्पा चप्पा पता है पर ये सब अपने चेहरे को ढके क्यू है

Badri:Chalo अब हो जाये दो दो हाथ दोस्तों

Baldev:Han चलो और माँ आप यही रहे

Devrani:Apni मर्यादा रखो तुम सब में महारानी देवरानी हु एक राजपूतनी मेरा इन सबको सबक़ सीखने का पहला हक़ है

Baldev:par मौसी

Shyam:rani माँ आप को अगर खरोच भी आजाये तो हम महाराज को क्या मुँह दिखाएंगे

Badri:shyam सही कह रहा है

Baldev:Bass ये समय बात करने का नहीं काम करने का है बद्री तुम नीचे उतरो और वो पेड़ को काट सामने से बांध बना दो

श्याम और में आगे जायेंगे माँ तुम यहाँ पर रहना और तीरो से उनको धूल छठा देना

Devrani:mere पास आये तो मेरा तलवार उनका खून चखेगा

बद्री झट से घोड़े से उतर एक पेड़ काट गिरा देता है उसे रस्ते में बिछा देता है बलदेव और श्याम अभी भी सामने से आरहे घुड़सवारों की ओरे बढ़ रहे थे

Baldev:Jaise में इशारा करता हु उनपर तीर की बरसात कर देना

बलदेव और श्याम धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे देवरानी अपना धनुष ताने कड़ी थी और बद्री निचे धनुष ताने बलदेव क इशारे का इंतज़ार कर रहा था

Baldev:Sab तैयार

जैसे जैसे वो करीब आ रहे थे बलदेव उनके हर कदम को गिने रहा था और फिर

Baldev:Chalao

घोड़े पे बैठी देवरानी अपने कमान से तीर छोड़ने लगती है और बद्री भी तेज़ी से तीर छोर रहा था

तीर कुछ घोड़े को घायल कर रहा था कुछ घुड़सवारों को भी लगे

और तभी एक बद्री की तीर एक घुड़सवार क सीने में लगी

"आआआह"

और वो ढेर हो गिर गया

दूसरा तीर देवरानी ने निशाना लगा कर मारा

और अबकी देवरानी ने एक घुड़सवार को मार गिराया

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Baldev:bhut खूब ,अब हमारे बिलकुल पास है तलवार से हमला करना बद्री

Shyam:Jai भवानी

Baldev:jai भवानी

बद्री भी अपने घोड़े पे चढ़ तलवार निकल कर तेज़ दौड़ने लगता है बलदेव और श्याम भी उतने में दोनों गुटों की टक्कर होती है

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बलदेव अपने दूसरे हाथ में एक और तलवार ले लेता है

बलदेव अपने दये बाये से हमला होने पर उनके तलवार पैर अपनी तलवार मरता है दोनों तरफ से बलदेव क सर पर तलवार चलता है बलदेव झुक कर अपने दोनों तलवारो से दोनों पर एक बुरा प्रहार करता है और दोनों गिर जाते है

देवरानी क पास चार घुड़सवार भागते है जिसमे से दो निचे लगे पेड़ से टकरा गिर जाते है और दो को अपने तीर से देवरानी मार गिरा देती है

Devrani:apna घोडा भगा कर घोड़े से गिरे दोनों व्यक्ति को अपना घोडा से कुचलती है फिर अपने तलवार से उन्दोनो क सर को धार से अलग कर देती है

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Devrani:jai भवानी

बलदेव श्याम और बद्री क साथ तलवार से लड़ रहे थे

बलदेव फिर से दो लोगो को अपने तलवार से मार गिरता है

और बद्री और श्याम एक एक से लड़ते हुए जा रहे थे बद्री अपने तलवार से उसका सर धार से अलग कर देता है

अब बस एक बच गया था

देवरानी बद्री श्याम बलदेव क पास आजाते है

अकेला व्यक्ति अपने आप को अकेला ज़िंदा देख दर जाता है और उसके हाथ से तलवार छूट जाती है

Shyam:Q बहादुर फट गयी ?तलवारबाज़ी में हम से तुम कभी जीत नहीं sakte,chaho तो अपने राजा शाहज़ेब से पूछो

Baldev:Shyam उसे मरना मत

श्याम एक तलवार की वॉर उसके हाथ पर देता है वो घुड़सवार निचे गिर जाता है

"मुझे जाने दो मेहेरबानी कर क"

बलदेव बद्री देवरानी अपने घोड़ो से उतर कर उस व्यक्ति क पास जाते है

Baldev:a हमलावर अपनी पहचान बता कौन हो

Devrani:Kahi तुम शाहज़ेब दुवारा भेजे तो नहीं गए

श्याम घोड़े से उतरता हुआ

"इसका पता ये खुद कहेगा क्यू क मरना तो शायद इसे भी पसंद नहीं हो"

श्याम उतर कर वो व्यक्ति जो अपना हाथ जोड़े पीछे खसक रहे थे उसके पास जाता है

Baldev:batao कौन भेजा है तुम्हे

Hamlawar:nahi नहीं

बद्री अपनी तलवार लिए उसके पास जाता है और चिल्ला कर

"aaaaaaaah"apni तलवार क धार से उसके गर्दन को अलग कर देता है

Baldev:ye क्या किया बद्री हमे वो हे बता सकता था क कौन भेजा

बद्री चुप चाप अपना तलवार में लगे खून को अपने अंगूठे से पोछते हुए

"श्याम चलो हम अपने तलवारे पास वाली नदी में साफ़ कर आये "

बद्री और श्याम पास वाले नदी पर जाने लगता है

Baldev:shyam सुनो ये हमारे भी तलवार धो लाओ

श्याम कुछ नहीं बोलता और उनके तलवार ले कर जाने लगता है

श्याम और बद्री नदी पर अपने तलवार धो रहे थे

बलदेव देवरानी क पास जाता हुआ

Baldev:kahi तुम्हे चोट तो नहीं आई न माँ

देवरानी देखती है कितना चिंता कर रहा है बलदेव उसका

Devrani:Jab मेरे पास इतना बुद्धिमान इतना वीर बीटा है तो मुझे कैसे खरोच आ सकती है

देवरानी आ कर बलदेव से गले लग जाती है

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Baldev:devrani

धीमे स्वर में

Devrani:han मेरे राजा

फुसफुसाते हुए बलदेव को भींच कर पकड़ती है

Devrani:beta तुम्हे तो नहीं लगी न मुझे तो दर लग रहा था क कही मेरे राजा बेटे को कुछ नहीं हो जाये

Baldev:jab तक आपका प्यार है मुझे कुछ नहीं हो सकता माता वैसे आपने भी अछि युधा कला दिखाई

देवरानी अपनी प्रशंशा सुन मुस्कुराती है

नदी तात पर बैठे श्याम से

Badri:dekho इन बेशर्मो को फिर चालू हो गए

Shyam:han पर हमे क्या करना चाहिए मुझे समझ नहीं आरहा

दोनों अपना काम कर क नदी से वापस आते है

Baldev:acha हुआ आगये तुम लोग हमे अब जाना चाहिए

Badri:Suno बलदेव

Baldev:han बोलो मित्र आज तुम दोनों ने बहुत ाचा युधा क्या आज आचार्य जी होते तो बहुत खुश होते

badri:man में) अब कैसे बोलू इसको

Badri:bhai मुझे वापस जाना है

बलदेव को जैसे झटका लगता है

Baldev:Par तुम इतनी दूर हो और दुश्मनी से घिरे हो

Devrani:beta बद्री कहा जाओगे तुम तुम्हारा जाना खतरे से खली नहीं

Baldev:humne इंसबको मौत क घाट उतर दया जो इन्हे भेजा है उन्हें हमारे बारे में सब पता है और वो फिर हमला कर सकता है

Shyam:man me)baat तो बलदेव की ठीक है

Badri:Mujhe कुछ नहीं सुन न

Baldev:suno तुम्हे क्या परेशानी है बोलो

तुम्हे अगर सही में घर जाना है तो पारस चलो हम आते समय तुम्हे तुम्हारे राज्य छोर देंगे

Devrani:han बद्री बीटा

Badri:par मौसी (झिंझलाते हुए)

Shyam:Baldev ठीक कह रहा है तुम्हारी जान को खतरा है अकेला जाना और वैसे भी हम दोनों जे महाराज को वचन डाई थे माता रानी देवरानी को सुरक्षित गहतराष्ट्रा पहुंचने का

Badri:par

Shyam:par वॉर कुछ नहीं हमारे साथ चलो नहीं तो कल महाराज को क्या मुँह दिखाओगे और तुम्हारी जो दुविधा है उसपर हम बात करेंगे

श्याम आश्वासन देते हुए कहता है

बद्री भी सब कुछ समझते हुए बलदेव क साथ जाने को तैयार हो जाता है चारो अपने अपने घोड़ो पैर बैठने जाने लगते है

shyam:mausi ये धनुष बाण आप अपने झोले में रख दीजिये

Devrani:theek है बीटा लाओ

श्याम और बद्री अपने घोड़े पैर बैठ जाते है

बलदेव देवरानी क पास खड़ा था

देवरानी धनुष क बाण अपने घोड़े पे लाडे झोले में रखने जाती है

Devrani:ary ये तो सामान से भरा है

Shyam:to मौसी कुछ जगह बना लो

देवरानी ऊपर क सामन को निकलने की कोशिश करती है और अपना दया हाथ अंदर डालती है और वो सामान जो ओढ़ने का था उसे बहार निकल हे रही थी क देवरानी की नज़र उसके हाथ क पास अपना फैन उठाये सांप पर जाती है और वो सांप उड़ क एक डांक मरता है देवरानी का हाथ थोड़ा सा उठ जाता है और सांप का धौंक घोड़े क पीठ पर लग जाता है

"ाआअह बलदेव"

बलदेव भागता हुआ देवरानी क पास आता है

देवरानी सांप को देख अपने आप को संभाल नहीं पति और गिरने लगती है बलदेव आकर पीछे से उसे पकड़ लेता है

देवरानी इशारे से दिखती है सांप काळा रंग का झोला से निकल कर जा रहा था

देवरानी को सीधा खड़ा कर बलदेव अपनी तलवार निकल कर सांप की तरफ जाता है

ये सब बद्री और श्याम भी आ जाते है

Devrani:chhor दो उसे

Baldev:meri माँ पर हमला क्या है इस सांप ने इसकी तो

पर सांप तेज़ी से पास क जंगल में भाग जाता है

बलदेव वापस आता है और देवरानी उसके गले लग जाती है

Devrani:baldev ये क्या था कौन हमारे पीछे पड़ा है

Baldev:jo भी है उसको इसका उत्तर में दूंगा

Shyam:ye जंगली सांप नहीं पालतू था

तभी धप्प की आवाज़ आती है सबकी नज़र उस पर पड़ती है

घोडा गिर गया था

और थोड़े देर में हे उसकी जीभ बहार आजाती है और घोडा मर जाता है

बलदेव क बहो में देवरानी थी

"बलदेव अगर आज ये मुझे काट लेता तो"

"ऐसा नहीं होगा हमने किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा है जो भगवन हमारे साथ कभी ऐसा करेगा"

"भगवन ने मेरी जान बचा ली बलदेव अगर में घोड़े पैर बैठी होती तो आज तो में""

Baldev:bass शुभ शुभ बोलने खुद कहती हो और खुद

बद्री ये सब घर घर क देख रहा था

Badri:wo सब तो ठीक है आगे जाने क लये मौसी क लये घोडा कहा से लाये

Baldev:aapki मौसी मेरे घोड़े पे बैठेगी

Baldev:q रानी माँ

Devrani:Han बैठूंगी

देवरानी लज्जा रही थी

श्याम और बद्री जो दोनों का खेल जान गए थे पर अनजान बनते हुए दोनों क वार्तालाप को भली भांति समझ रहे थे

Badri:to चलो हमे जल्दी निकलना चाहिए

बलदेव माहौल को थोड़ा ठीक करते हुए

"माँ अब ये मत कहना क भगवन ने जान बचा ली तो एक बार यहाँ भी पूजा करनी है"

Shyam:waise हे सुबह क पूजा क वजह से हम देरी से निकले थे

Devrani:tum लोगो को क्या पता हो सकता है भगवन मेरी भक्ति देख मेरी जान बचा ली आज और मेरे पूजा से हे हम सब आज सुरक्षित है

Baldev:Han माँ तुम ठीक कह रही हो

Devrani:islye भगवन को कभी भूलना नहीं चाहिए वही जीवन देता है वही मृत्यु

बद्री मन me:Abhi ज़्यादा पुजारन बन रही हो मौसी संसार को इस बात का क्या पता तुम कितने संस्कारी हो

Shyam:ab देवी माँ चलो भी पूरा पथ यहाँ पर हे शुरू मत कर देना

श्याम और बद्री वापस अपने घोड़ो पर बैठ जाते है

बलदेव मरे हुए घोड़े से सामान निकल कर अपने घोड़े पर और कुछ श्याम क घोड़े पैर लाड देता है

baldev:maa आप बैठो घोड़े पर

Devrani:ab क्या करू बैठना हे पड़ेगा

Baldev:ab हमारे पास दूसरा कोई चारा भी नहीं

देवरानी झट से अपने दोनों लम्बे टैंगो को उठा क घोड़े क पीठ पैर बैठ जाती और उसके बाद बलदेव भी बैठ जाता है

Baldev:Maa थोड़ा पीछे आओ न

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देवरानी मुस्कुराते हुए पीछे आती है

Baldev:devrani अब थोड़ा उठो और फिर बैठो

बलदेव अपने बाये हाथ से घोड़े की लगाम पकडे था और बाये हाथ से अपने धोती में लौड़े को सही करते हुए कहता है

देवरानी सब कुछ समझ रही थी और एक मादक मुस्कान क साथ बैठ जाती है

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देवरानी को अपने पिछवाड़े में हथोड़ा जैसा मेहुश होता है और वो उचक जाती है

हे भगवन"

"माँ बैठो न क्या हुआ"

"बीटा मेरे ध्यान में सांप आगया था"

और अपने बेटे को पीछे मुद कर देखती है

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Devrani:man में) अगर बद्री और श्याम नहीं होते तो ये सांप मेरे अंदर चला जाता में कोई बची नहीं हु

बलदेव: मन में) कितनी गरम और गद्देदाद गांड है माँ की

बलदेव अपना दोनों हाथ आगे ले जा कर देवरानी क पेट पैर रख कर

अपने ओरे खींचता है

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देवरानी हल्का सिसकी छोर दी

"यह "

Baldev:mmhhh

"अचे से बैठो नहीं तो गिर जाओगी माँ"

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और फिर हिम्मत कर क अपने भरी भरकम गांड टिका कर बैठ जाती है

Baldev:aah ..चलो साथिओ पारस की ओरे

बलदेव देवरानी क नरम और अंदर से कठोर चुतरो क बीच लैंड फसते हे आह निकल जाती है

Shyam:han चले दोस्तों हमे सूर्यौदय से पहले पारस क सीमा तक पहुंचना है

Badri:han चलो पर मुश्किल है हमने पहले हे समय बर्बाद कर दया

सब घोड़ो को भागने लगते है पारस की ओरे..

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 60

बलदेव और देवरानी बद्री और श्याम क साथ पारस की ओरे अपने घोड़ो को तेज़ी से भागते हुए चले जा रहे थे

देवरानी देखती है पहाड़ो क बीच से सूर्य उदय होता हुआ दिखाई पड़ता है वो देख बहुत खुश होती है

Devrani:man में) ये सूर्य मेरे देश पारस का है इतना सुन्दर सूर्यौदय

बलदेव तेज़ी से घोड़े को भगाये जा रहा था और देवरानी अपने राज्य जाने की ख़ुशी में फुले नहीं समां रही थी

तभी घोडा एक लम्बी छलांग मरता है सामने गाढा आजाने क वजह से देवरानी अपने ख्याल से वापस निकलती है और उछाल जाती है थोड़ा

devrani:ayy माँ

देवरानी ऊपर को हो कर बैठ टी है फिर

Baldev:ohhh

हुआ ये था क अचानक से उचक जाने से तेज़ी से बैठने से बलदेव क गॉड में जैसे हे देवरानी फिर बैठ टी है उसका भरी गांड बलदेव क लैंड को दबा देता है और उसके ाँद दबने से बलदेव दर्द से आह भरता है

देवरानी को जैसे हे समझ आता है

"ओह्ह राजा मेरे वजह से "

"माँ थोड़ा ऊपर हो कर बैठो ..कोई बात नहीं"

देवरानी लज्जा कर फिर अपना गांड हल्का उठा टी है है और फिर बैठ जाती है

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देवरानी को इस बार लोहे जैसा लैंड उसके गांड में महसूस होती है

"उफ़ भगवन"

बलदेव ज़ोर से घोडा भागने लगता है

"माँ क्या हुआ"

"तुझे नहीं पता क्या हुआ"

बलदेव हस्ते हुए " दर्द तो नहीं हो रहा न"

"चुप कर यह और चलते रह"

"माँ अभी से मुँह बना रही हो पारस पहुंचने तक तुमको ऐसे हे बैठना है"

"हम्म्म बलदेव"

"डर गयी क्या माँ बास महसूस कर क"

"डरे मेरी जुटी बलदेव"

"ाचा तो कैसा लग रहा है गॉड में बैठ क जा रही हो मायके"

देवरानी शर्मा जाती है

"अच्छ आ"

बलदेव देवरानी क दोनों हिलते वक्ष को देख रहा था

"माँ ये बहुत हिल रहे है"

"हाँ तो इतने तेज़ी से घोडा दौर रहा है तो"

"माँ फिर तो मेरा घोडा आपके गुफा में घूमेगा तो और हिलेंगे ये दोनों"

"मतलब बलदेव"

देवरानी अब उत्तेजना लज्जा से भरी अपनी आखे बंद कर लेती है

Baldev:Ary मेरी रानी नादान मत बनो

देवरानी शर्मा क हल्का है देती है

ऐसे हे चारो अपनी मंज़िल की ओरे बढ़ रहे थे

गहतराष्ट्रा

इधर गहतराष्ट्रा में सेनापति सोमनाथ रात में आलोक की कुटाई कर उस से सब कुछ उगलवा लेता है और सुबह होते हे उठ कर सबसे पहले अलोक को सोया हुआ देखता है

सोमनाथ अलोक को रस्सी को मज़बूती से फिर बांधता है और कपडे से उसका मुँह बांध देता है

Somnath:ab आलोक तुम हे मेरी मदद करोगे मेरे सपने को पूरा करने me,Is महल क हर दिवार को तोड़ दूंगा और जैसे हे सब टूट जायेंगे में इस गहतराष्ट्रा का राजा बन जाऊंगा

सेनापति सोमनाथ अपने कक्षा से निकल कर बहार आता है तो सामने से उसे कमला गुनगुनाते हुए चली आती दिखाई देती है

Senapati:Kamla बड़ा सवेरे आगे तुम

Kamla:Han अभी अभी आई सेनापति जी

कमला मन me:kya बात है आज सेनापति मुझ से क्यों बात कर रहा है आज से पहले तो मुझे पूछता नहीं था

Senapati:kamla एक बाताओ न

Kamla:kahiye सेनापति जी

senapati:Ye महारानी षुरूश्ती कहा है

Kamla:Q आपको उनसे क्या काम वैसे में अभी अभी जगी है

सेनापति मुस्कुराते हुए

Senapati:ary वो तो बास मई ऐसे he..mujhe भला क्या काम रहेगा

Kamla:Senapati सोमनाथ तू वो कुत्ता है जो बिना हड्डी क दम नहीं हिलता तू ज़रूर कुछ कर रहा है

Senapati:chalo जाओ कमला यही पूछना था

सेनापति हल्का गुस्सा होते हुए कहता है और चला जाता है

Kamla:ajeeb प्राणी है ,खुद को काम है मुझे रुकवाया और खुद गुस्सा हो रहा है

कमला फिर से गुनगुनाते हुए चलने लगती है और सीधा जा कर अतिथि गृह में जहा पर वैध जी का कक्षा था वह पर रुक जाती है

Kamla:O वैध जी

अंदर से कोई आवाज़ नहीं आने पर

Kamla:ary ो वैध जी उठ भी जाइये सुबह हो गयी

कमला थोड़े देर चिल्लाती रही

उतने में दरवाज़ा खुलता है और वैध जी अपने बड़ी दाढ़ी को सहलाते हुए निकलते है

Vaidh:ary क्यों हंगामा मचा रही हो कमला

Kamla:vaidh जी वो माता रानी जीविका का पेट ठीक नहीं है कोई औषधि हो तो दे दो

Vaidh:aao अंदर

Kamla:me नहीं आती अंदर ,मुझे पता है अंदर जाने का मतलब है एक घंटा लग्न है

Vaidh:muskura कर "क्यू तंग करती हो रोज़"

Kamla:Kaha तंग की

Vaidh:ab बोलो भी अब क्या चाहिए

Kamla:mujhe आज सड़ी चाहिए अपने पति देव जी से

Vaidh:Tumhe कल तक मिल जायेगा

कमला मुस्कुराते हुए अंदर आती है

वैध जी झट से दरवाज़ा बंद कर देते है

Vaidh:Kamla तुम बिना कुछ लिए देती नहीं हो

Kamla:jab मेरे पर हक़ है तुम्हारा तो मेरा भी तो कुछ हक़ बनता है

Vaidh:pura हक़ बनता है इसलिए तुम जब जो मांग करती हो में करता हु

Kamla:Karna पड़ेगा इस उम्र में तुम्हे कमला जैसी जवानी चखने को मिल रही है

वैध जी आगे बढ़ कर कमला को पाकक लेते है

Kamla:Vaidh जी औसधि दो माता रानी जीविका का

Vaidh:Maharani जीविका का औसधि बाद में दूंगा पहले तुम्हारा औसधि तो खिला दू तुमको

कमला मुस्कुरा देती है

Kamla:bass पाप करते रहो और मुझ से भी करवाते रहो पर विवाह नहीं करोगे हमसे

अगर कही हम पेट से हो गए तो

वैध जी कमला को पाकर कर मसलने लगते है

Vaidh:ary मेरी कमला तुम्हे तो पता है क तुम एक विधवा हो और समाज कभी इस बात को नहीं मानेगा क विधवा का विवाह फिर से हो

Kamla:vidhwa हे हु पर मेरी भी िछाये है

वैध कमला को पाकर अपने गॉड में उठा लेता है

"बहुत भरी हो गयी हो कमला"

"तुमने हे कए हो वैध"

"आर्य वैध जी से वैध"

"हाँ क्यू नहीं कहु जब तुम मुझे कमला कह सकते हो बिना जी लगाए तो में क्यू न कहु ,स्त्री पुरुष एक सामान होते है "

"बात तो सही कह रही हो मेरे कमला जी"

कमला को पलंग पर पटक देता है

कमला क पेअर को चूमते हुए

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"कमला युवराज चले गए मिले भी नहीं"

"वैध जी आप जंगल गए थे इसलिए आप से मिल नहीं पाए वो आपके औषधि ले कर गए है"

वैध जी कमला क सदी को ऊपर खसका कर उसके घुटने को चुम रहे रहे और अपने हाथो से कमला क गठीले बदन को सहला रहे थे

kamla:aah उह्ह्ह वैद्ध जी

"कमला तुम्हारे ये जांघ कितने मांसल है"

वैध जी कमला क जांघ को सहला क खूब चुम रहे थे

थोड़े देर चूमने क बाद सादे को परिकत क साथ खींच देते है और कमला अपना हाथ अपने बाल से भरी छूट पर रख देती है

Vaidh:q शर्मा रही हो कमला अपना छूट तो दिखाओ

Kamla:chup करो मेने वह का साफ़ नहीं क्या है मुझे शर्म आती है

vaidh:ary कितने बार हे मैंने इस छूट को अपने मुसल से पेला है मुझसे क्या शर्माना और वैसे भी अगर तुम्हारे छूट पर बाल है तो मज़ा और आएगा

वैध धीरे से कमला क हाथ को हटा कर देखता है छूट बड़े घने बालो से ढकी थी

वैध खूब अचे से छूट क बाल को सहलाते हुए छूट का छेड़ ढूंढ लेता है और अपना एक ऊँगली अंदर दाल देता है

Kamla:ufff हाय

अपना आँख बंद कर लेती है

धीरे धीरे छूट को खूब ऊँगली करते हुए वैध जी ऊपर को आते है और कमला मांसल पेट से उसके सड़ी और पेटीकोट को निकल फेकते है और कमला क पेट पर चुम्मे की बरसात कर देते है

वैध अब अपना एक हाथ कमला क छूट में डाला था और दूसरे हाथ से कमला क ब्लाउज का हुक खोल देता है कमला का बड़ा दूध को देख

Vaidh:aah कमला इसमें दूध कब भरेंगे

kamla:aaah जब तुम मुझसे विवाह करोगे और बचा होगा पर तुम मुझ जैसे सी क्यू करोगे

Vaidh:chup कर कमला तू मेरी जान है

कमला क छूट से ऊँगली निकल कर दोनों हाथ से उसके बड़े दूध को पकड़ कर मसलने लगता है

"ाः वैध जी धीरे यह ाः"

"कमला क्या दूध है तुम्हारे "

दूध को खूब मसलते हुए वैध जी बीच बीच में कमला को होठो को चूस रहे थे

वैध :कमला तुमने मुझे अभी तक मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दया

"अहह उठ कौन सा प्रश्न वैध जी"

"यही क जब मैंने कोई पत्र दया नहीं था तो तुमने महाराज से क्यू कहा था क मैंने युवराज बलदेव को पत्र दया हु"

"वैध जी मेरा उत्तर यही है सही समय आने पर आपको उस पत्र का राज़ पता चल जायेगा"

वैध जी गुस्सा हो कर

"कमला को देखते है फिर उसको छोर कर बैठ जाते है"

"क्या हुआ वैध जी रुक क्यू गयी"

"तुम मुझे अपना पति कहती हो रद्दी भर भरोसा नहीं है"

"वैध जी ऐसा नहीं है पर वो राज़ गहतराष्ट्रा क प्रस्तिष्ट का प्रश्न है"

"में कुछ नहीं जनता कमला मुझे बताओ "

"छोड़ोगे नहीं अपनी कमला को"

"नहीं जब तक तुम बताओ नहीं"

kamla:uff तो खाओ मेरी कसम तुम किसी को नहीं बताओगे बिना मेरे जानकारी क

vaidh:me तुम्हारी कसम खता हु

kamla:are बूढ़े में बताती हु अपना काम चालू करो में बता रही हु

वैध जी फिर से कमला क दूध को पकड़ कर दबोच कर चूसने लगते है

kamla:to सुनो वो पत्र बलदेव ने लिखा था महारानी देवरानी क लये जिसे महाराज राजपाल ने देख लय था

वैध जी अब अपने धोती को खोल अपने लौड़े को कमला क छूट पर मरते है और अपने लौड़े को एक हे झटके में कमला क छूट में पेल देते hi

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"ाआअह वैध जी "

अब झटका लगते हुए

वैध ji:Kamla aah..par बलदेव ने अपने माँ को पत्र लिखा था तो उसे अपने पिता से छुपाने की क्या आवश्यकता पद गयी

Kamla:ah ाः वैध जी क्यू क वो प्रेम पत्र था जिसमे बलदेव ने देवरानी क लये अपना प्रेम पन्नो पर लिख भेजा था

वैध जी ये सुन कर रुक जाते है

Vaidh:Kya बक रही हो कमला

Kamla:-ah तुम छोड़ो वैध ाः

वैध जी फिर झटका मारने लगते है

वैध जी मन me:kaise एक माँ को बीटा प्रेम पत्र लिख सकता है और उस दिन तो देवरानी भी सामने थी तो इसका मतलब क देवरानी जानती थी क उसके बेटे ने क्या लिखा है पत्र में

Vaidh:kya में जो सोच रहा हु वो सही है कमला

एक झटका मर कर वैध जी बोलते है

kamla:han वैध से दोनों माँ बीटा एक दूसरे से बहुत प्रेम करते है ाः और पेलो

Vaidh:par ये तो ..

kamla:ab मैंने बता दया अब तुम इस बात को दुहराओ भी नहीं

वैध :ाचा ाचा ..इसलिए बलदेव और देवरानी जाने क जल्दी में थे

आशम्भव ,घोड़ पाप,

Kamla:tum 60 साल क बूढ़े मुझ जैस गदरायी विधवा को छोड़ रहे हो तो ये संभव है ये पाप नहीं है

Vaidh:par माँ बीटा

Kamla:Jaise माँ बीटा का अवैध सम्बन्ध तुम्हे पाप लग रहा है वैसे हे हम दोनों का सम्बन्ध भी पाप है

कोई पुण्य नहीं

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वैध एक ज़ोर का झटका मरता है उसका लौड़ा माँ बेटे की कहानी सुन ज़ोर से जहर जाता है

वैध आँख बंद कए हुए

"पर कमला"

"पर वॉर क्या वो दोनों एक दूसरे से सच्चा प्रेम करते है और बलदेव अपने माँ क जीवन भर की दुःख को खुशाली में बदल रहा है और क्या पुण्य करेगा बेचारा "

वैध अपना लौड़ा छूट से निकलता है

कमला अपना छूट कपडे से पोछती है

"वैसे वैध जी हमारे बारे में भी देवरानी को पता है और उन्हें कोई आआपाती नहीं"

पहले ये सुन कर वैध घबरा जाता है फिर आपत्ति नहीं सुन कर उसको सांस में सांस आती है

Kamla:Bass उन्हें हम दोनों क सम्बन्ध से आपत्ति नहीं है और हमे उनके सम्बन्ध से कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए

vaidh:hmm बात तो ठीक कर रही हो

Kamla:or वैसे धन्यवाद उस दिन अगर आप हमारा साथ नहीं देते तो

महाराज को शक हुआ था उस पत्र को देख और उस दिन वो पकड़े जाते है

कमला फिर अपने वस्त्र पहन ने लगती है

Vaidh:thek है कमला पर ये सब शुरू कैसे हुआ

kamla:Vaidh जी उतना समय नहीं इस बात का उत्तर आपको मिल जायेगा मुझे महल

में बहुत काम है आप औसधि दो में निकलू

कमला औषध ले कर निकल जाती है

इधर सोमनाथ महल में घुस जाता है और षुरूश्ती क कक्षा को पहचान कर देखता है क दरवाज़ा खुला है वो अंदर घुस जाता है

सामने षुरूश्ती अभी अभी स्नान कर क बहार आई थी षुरूश्ती क बदन को एक झीनी से कपडे में लिप्त देख सोमनाथ क आखे ठहर जाती है

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जैसे षुरूश्ती को आभास होता है कोई उसके कक्षा में है वो देखती है

षुरूश्ती गुस्से से आग बबूला हो जाती है सोमनाथ को अपने सामने देख

"सेनापति सोमनाथ तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई बिना अनुमति क महल में घुसने की"

Somnath:maharani वो

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षुरूश्ती तेज़ी से उसके पास आकर एक थप्पड़ उसके चेहरे पर मार्र्टी है

सोमनाथ अपना गाल पकडे खड़ा था

Shurushti:Tumhe नियम नहीं पता क महल में देश क सिवा बहार का कोई पुरुष को आना वर्जित है और सैनिक सिर्फ महाराज क अनुमति से अंदर आते है युधा की स्तिथि में

सोमनाथ इस तरह से थप्पड़ खा कर खड़ा था

somnath:meri बात सुनो

Shurushti:badtameez मेरे से ज़ुबान लड़ता है तुम्हारे नियम तोड़ने की सजा मेरे कक्षा में घुसे की सजा फांसी है ,में चहु तो आज क आज तुम्हारी फांसी हो जाएगी

सोमनाथ गुस्सा होते हुए

"चुप रहो षुरूश्ती ज़्यादा नियम सीखने की कोशिश मत करो"

shurushti:tum हद्द पार कर रहे हो सोमनाथ

Somnath:Acha तो क्या कहु महारानी षुरूश्ती ..-हहहह सुनो तुम्हारा कच्चा चिता खुल गया है आलोक मेरे हिरासत में है

षुरूश्ती ये सुन कर चुप हो जाती

"कौन ालो आलोक में नहीं जानती"

सोमनाथ षुरूश्ती को ऊपर से निचे देख कर

"वही अलोक जिसने तुम्हे ज़हरीला सांप दया था"

"क्या बक रहे हो"

"हाँ वही सांप जिसको तुमने रानी देवरानी को मरने क लये रखा था"

षुरूश्ती क आखे बहार आजाती है

"क्यू महारानी षुरूश्ती सांप सूंघ गए न"

"में सेनापति ऐसे हे नहीं हु जो तुम मुझे आकर कहोगी क मुझे राजा ने बुलाया है और में चला जाऊंगा "

षुरूश्ती अपने दोनों आखे फाडे कड़ी थी

"मुर्ख षुरूश्ती महारानी तुम्हे मैंने देख लय था सांप रखते हुए और किस चतुराई से तुमने सैनिको को भी भगाया था में वही छुप सब देख रहा रहा"

अब षुरूश्ती क ऊपर जैसे आसमान गिर पड़ा हो

"महारानी षुरूश्ती क्यू क में महाराज से मिल कर आया था उस समय उनके निर्देश ांयसार अपना कार्य कर रहा था हाहाहाःहाहा"

Shurushti:tumko क्या चाहिए सोमनाथ

दांत पीसते हुए

Somnath:jab तक में ज़िंदा हु तुम्हारा राज़ छुपा है इसलिए भूल से भी मेरे विरुदा षड़यंत्र क्या तो सोच लेना

shurushti:Tum आलोक को छोर दो

Somnath:uska क्या करना है वो में बाद बताऊंगा महारानी षुरूश्ती अभी में चला

हाहाहाहा वैसे आपकी जो गलती है उसमे तो नियम अनुसार अभी फांसी हो जाएगी हाहाहा

षुरूश्ती गुस्से से और अपनी बेबसी पर हाथ मल्टी है और उस दिन को कोसने लगती है

Shurushti:Ab क्या करू...

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अपडेट 61

षुरूश्ती सोच हे रही थी क वो आगे क्या करे सेनापति से बचने क लये

उतने में राधा आजाती है

Radha:kya हुआ महारानी ये सेनापति इतना सवेरे क्यों आया था

Shurushti:Wo कोई राज्य में बढ़ रहे लोगो क बीच दर

Radha:kaisa दर महारानी

षुरूश्ती अपने बात को चुभते हुए चतुराई से दूसरी बात राधा को बताने लगती है

Shurushti:ary दिल्ली क बादशाह शाहज़ेब का दर्रे क वो आक्रमण न कर दे

Radha:maharani इसलिए आप भी बहुत दरी हुई लग रही hai,Waise डरने की बात भी है बादशाह शाहज़ेब बहुत निर्दयी और ठरकी राजा है

Shurushti:tumhe कैसे मालूम

Radha:maharani पुरे जग को मालूम है क उसने 9 पत्निया रखा है और उसके हरम में तो न जाने कितने महिलाओ को रखा है

Shurushti:kya बात कर रही हो राधा

Radha:han महारानी वो जिस राज्य पर आक्रमण करता है वह क राणिओ को अपनी रानी बना लेता है और उसके जिस्मो को राउंड देता है

Shurushti:kitna नीच राजा है शाहज़ेब

Radha:han महारानी में सुनी हु क वो तो एक राज्य में लूटपर मचाया था और वह क रानी क सम्भोग क्या ज़बरदस्ती जिस से रानी की जान चली गयी ,कद काठी में हमारे युवराज बलदेव से काम नहीं उनसे भी ुचे है

Shurushti:man में) ये तो पूरी कहानी बनाने लगी मेरी समस्या इसे तो बता नहीं सकती

Shurushti:acha राधा तो तुम जा कर कुछ बना लो मुझे भूक लगी है फिर हम बात करेंगे

षुरूश्ती सोच में पड़ी थी क आगे कैसे खेल खेला जाये

षुरूश्ती: मन में) उस बुद्धू आलोक को मैंने कह दया था राज्य छोर कर चला जाये मुर्ख ने अपने साथ साथ मेरे भी जान जोखिम में दाल दया

षुरूश्ती अपने वस्त्र पहन कर बहार आती है और कमला और देवरानी से कह कर खाना बनवाती है और फिर सब आकर बरी बरी से सुबह का नाश्ता करते है

Shurushti:man में ) बहार जा कर देखती हु सोमनाथ से बात कए बिना कोई बात नहीं बनेगी

षुरूश्ती बहार आती है देखती है सेना गृह क पास बहुत सारे लोग इकठे है खास कर युवा और सेनापति सोमनाथ सबको तलवारबाज़ी सीखा रहा है

Somnath:ae लड़के तलवार को टेढ़ा पकड़ो

"सुनो तुम सब कुछ दिन में तैयार हो जाओगे युधा क लये"

षुरूश्ती दूर कड़ी देख रही थी सेनापति को सिखाते हुए

तभी सेनापति सोमनाथ की नज़र षुरूश्ती पर पड़ती है सोमनाथ का हाथ एक बार अपने गाल पर चले जाते है और वो षुरूश्ती क थप्पड़ को याद करते हुए मुस्कुराता है

सेनापति षुरूश्ती क पास आकर

senapati:aaye महारानी षुरूश्ती

Shurushti:Tum ज़्यादा व्यस्त तो नहीं

Senapati:jeevan में पहली बार आप खुद चल क हमारे पास आयी है भला मेरा व्यस्त रहना कही से उचित नहीं

सेनापति मुस्कुराता है जो षुरूश्ती को काँटा की तरह चुभता है

Shurushti:Mujhe बात करनी है तुमसे सेनापति सोमनाथ

Senapati:hum बात तो कर हे रहे है महारानी ,कहिये क्या कहना है

षुरूश्ती आँख फाडे देखती है

"सेनापति ज़्यादा बनो मत हम एकांत में जा सकते है"

"चलिए महारानी अगर आपको बुरा न लगे तो मेरे कक्षा में आपको हमारे मेहमान आलोक से भी मिलवाते है"

षुरूश्ती चुपचाप सोमनाथ क पीछे चलने लगती है

सोमनाथ सेनगृह क एक कक्षा का दरवाज़ा खोलता है सामने से रोशनदान से हलकी धुप आरही थी और धूल उड़ता है

shurushti:Aaha आहे खासते hue"kitna धूल है यहाँ"

Senapati:ye महल नहीं है सेनगृह है यहाँ लड़ाकू सेना रहती है जिसके मौत कब आजाये उसे पता नहीं फिर ये धूल में हे मिट जाना है

षुरूश्ती अंदर आती है देखती है सामने कुर्सी पर अलोक बंधा है और उसके मुँह भी बंधा है

Shurushti:kya हाल क्या तुमने इसका

Senapati:Oh तो महारानी को दर्द हो रहा है अपने विश्वसनीय अलोक का

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नींद से जगता हुआ आलोक देखता है षुरूश्ती उसके सामने कड़ी है

वो इशारे से कहता है मुझे खोल दो

षुरूश्ती जा कर उसका मुँह खोल देती है और कपडे को हटा फेक देती है

सेनापति ये खड़ा खड़ा देख रहा था और मुस्कुरा रहा था

Alok:maharani मुझे बचा कृपा कर क मुझे बचा लो ये मेरी जान ले लेगा और अलोक रोने लगता है

Shurushti:tumne तो इस से जानवर से भी बदतर सुलूक क्या है सेनापति तुम मनुष्य नहीं हो सोमनाथ

Senapati:maharani अब जो अपने सौतन की जान लेने पर लगी है वो मुझे बताएगी क मनुष्यता क्या है

Shurushti:chup करो सेनापति मेरे हाल ख़राब है पर हु महारानी में चहु तो तुम्हारे खाल निकलवा ..

Senapati:ah आहे चुप हो जाओ महारानी जी

सेनापति सामने से एक पन्ना निकलता है जिसपर अलोक ने अपना जुर्म और हस्ताक्षर क्या है

सेनापति वो पन्ना उठा कर

"ये देखिये महारानी अलोक ने हस्ताक्चर क्या है क वो आपके साथ मिल कर रानी देवरानी को मरने की साज़िश क्या और आपको सांप दया जिसके विष से एक घडी में प्राण चली जाये"

षुरूश्ती गुस्से में चुप चाप कड़ी सुन रही थी

सेनापति :और महारानी आपने बलदेव को मरने क लये भी अपने आदमीओ को बलदेव और देवरानी क पीछे भेजा है

षुरूश्ती अलोक की ओरे देखती है अलोक अपना सर निचे कर लेता है

senapati:to कुल मिला कर रानी देवरानी और युवराज को मरने क लये कोई कसार नहीं छोरा

Shurushti:tumhe क्या chahiye,jo चाहिए मांग लो हम तुम्हारा कक्षा सोने चंडी से भरवा देंगे सोमनाथ

Senapati:Maharani यदि ये बात में गहतराष्ट्रा वासिओ में फैला दया तो वो लोग आपकी फांसी की मांग करेंगे हे और ये भी हो सकता है क यहाँ क लोग आपको खुद सजा दे दे

ये सुन कर षुरूश्ती का डिल पहली बार दहल गया था और उसके आखो में हल्का ासु सा भर गया अपने भविष्य का सोच कर

Senapati:Man me)Tumne सेनापति सोमनाथ को थप्पड़ मारा उसकी कीमत सोना या चंडी नहीं महारानी षुरूश्ती

Shurushti:Tum आलोक को छोर दो में तुम्हे मुँह माँगा इनाम दूंगी

Senapati:Me इसे छोर तो दूंगा पर अगर आपने कोई चाल चली तो में ये पत्र महाराज को भरी सभा में पढ़ क सुना दूंगा और उसके बाद आपकी फांसी पक्का हहहह

Shurushti:tum इसे खोलो

सेनापति अलोक को खोलता है अलोक आज़ाद होते हे षुरूश्ती क पेअर पद जाता है

"महारानी धन्यवाद मेरी जान बचने क लये"

Shurushti:murkha तुम्हे मैंने कहा था गहतराष्ट्रा छोर कर चले जाओ .दुबारा अपना चेहरा मत दिखाना गहतराष्ट्रा में

अलोक अपनी जान बचाये भाग जाता है

Senapati:to महारानी षुरूश्ती

Shurushti:bolo क्या चाहिए हम मुँह मांगी कीमत देंगे

सेनापति सोमनाथ षुरूश्ती क चारो ओरे घूम कर षुरूश्ती को निहारता है

Senapati:Maharani आपके जान बचने की कीमत सोने चंडी से क्या होगी

षुरूश्ती :फिर

सेनापति सहर्षति क करीब आकर उसका हाथ पकड़ कर

"मुझे आपके साथ सोना है महारानी षुरूश्ती"

षुरूश्ती सेनापति का हाथ झटक कर

"ख़बरदाद मुझे छूने की भी कोशिश की तो तुम्हारा सर तुम्हारे धार से अलग कर दूंगी सेनापति सोमनाथ अपनी हद मत भूलो"

सेनापति मुस्कुराते हुए

"देखिये महारानी अगर आप चाहती है क में आपका राज़ महाराज और गहतराष्ट्रा क सभा में नहीं खोलू तो मेरी बात मन न पड़ेगा अन्यथा.."

"तुम होश में आओ सेनापति तुम दो ताके क सैनिक को सेनापति बना दिए नहीं तो तुम भी आज अपने बाप क साथ लोहार होते और कही पर लोहा काट रहे होते नीच जाती नीच सोच "

"महारानी मेरे जाती पैर मत जाओ मुझे नीच कहो पर हर लोहार नीच नहीं तुम जैसे उच्च जाती क लोग राजा सिर्फ हमारे बलिदानो से बनते है"

षुरूश्ती कक्षा से बहार जाने लगती है

Senapati:agar तुम आज शाम में मेरे कक्षा में नहीं आयी और अपने आपको मुझे नहीं सौंपा तो महारानी षुरूश्ती कल की सुबह आपकी आखिरी सुबह होगी

षुरूश्ती गुस्से से कक्षा से बहार जाने लगती है

"सेनापति तुम सपने में भी मुझे भोग नहीं सकते "

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सेनापति: ये मत सोचना क मई अलोक को छोर दया तो तुम महाराज क सामने मुझे झूठा साबित कर दोगे ,में चहु तो फिर से उसे क़ैद कर सभा क सामने प्रस्तुत कर दूंगा

षुरूश्ती एक टाक देखती है सोमनाथ को

somnath:aaj शाम तक का समय देता हु

षुरूश्ती चली जाती है

सोमनाथ वही अपने बिस्तर पे लेट जाता है

Somnath:man me)isi धूल वाले बिस्तर पर तुम्हारे जिस्म को नोच नोच खाऊंगा षुरूश्ती तुम्हारे थप्पड़ का उत्तर देगा सोमनाथ तुम्हे

दोपहर क समय हो गया था और पारस की ओरे जा रहे बलदेव देवरानी

Shyam:Badri यार मुझे भूक सताए जा रही है ये पारस कब आएगा

Badri:dheeraj रखो हम पहुंचने वाले है

तभी बलदेव को दूर एक बाजार नज़र आता है

Baldev:maa देखो वह बस्ती है और बाजार भी

Devrani:han बलदेव हम पारस पहुंच गए है

देवरानी क ख़ुशी का ठिकाना नहीं था

shyam:han मौसी हम पहुंच गए

बलदेव श्याम बद्री अपने घोड़े को तेज़ी से बाजार की तरफ बढ़ता है और वह पर अपने घोड़े रोक

Shyam:kya सुन्दर बाजार है

सब घोड़े से उतारते है देवरानी उतर कर अपने वस्त्र ठीक करती है बलदेव देखता है देवरानी अपने गांड को सहलाते हुए अपने वस्त्र ठीक की

बाजार में बहुत शोर था

पास में एक बूढ़ा व्यक्ति कुछ बेच रहा था

बलदेव वह पर जाता है

grahak:ye अंजीर कितने सिक्के क डाई

दुकानदार:10 सिक्के क

बलदेव ग्राहक से

"श्रीमान या कौन सा बाजार है "

"लगता है मुसाफिर हो तुम पारस में हो बचे"

तभी वह पर श्याम बद्री और देवरानी भी आजाते है और सब ये सुन कर खुश हो जाते है

Badri:Shreeman हमे महल जाना है

Dukandar:Beta यहाँ बहुत महल है

Devrani:hume सुल्तान मेरे वाहिद क महल जाना है

ये सुन कर दुकान दर और ग्राहक दर क देवरानी को देखने लगते है

Baldev:ya तो आप महाराज देवराज का राज्य

Grahak:Lagta है आप लोग सुल्तान क करीबी हो वैसे सुल्तान का महल जहा वो रहते है यहाँ से जुनूब में है और महाराज देवराज का महल सोमल में

Devrani:nahi आप हमे सुल्तान क यहाँ जाने का रास्ता बताये

Baldev:aap क्या कहे कौन सी दिशा में जाना है सुल्तान क महल जाने क लये

Dukandar:yaha से सीधा चले जाओ

बलदेव दिशा समझ कर अपने घोड़े पैर बैठ ता है और अपने माँ को भी सहारा दे कर बैठता है

बद्री और श्याम भी अपने अपने घोड़ो पैर बैठ जाते है और घोड़े दौड़ने लगते है

कुछ देर भागने क बाद गाओ और घर दिखाई देने लगते है और हर तरफ सेना तभी सामने से दो घुड़सवार आकर

"ऐ तुम लोग कौन हो और महल की ओरे जाने की वजह क्या है"

बलदेव समझ जाता है क ये सुरक्षा कर्मी है पारस क

Devrani:me देवरानी हु देवराज की बहिन सुल्तान क खास मित्र की बहिन

Sainik:muaaf करना muhtarma,aap सब का खुश आमदीद

सैनिक चिल्ला कर

"ऐ लोगो रास्ता साफ करो हिन्द से हमारे मेहमान आये है"

बलदेव देवरानी देखते है सामने बहुत बड़ा महल दिखाई पड़ता है

devrani:kya विशाल और सुन्दर महल है

shyam:Oh क्या चमकदार महल है

badri:adhbhut

Baldev:ati सुन्दर

सब अपने घोड़े को धीरे धीरे ले जा रहे थे और जैसे जैसा घोडा महल क करीब जा रहा रहा चारो महल की खूबसूरती में डूब जाते है

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महल क रस्ते में दोनों तरफ से क़तर में खड़े सैनिक थे बलदेव धीरे धीरे घोडा आगे बढ़ा रहा था उसके पीछे श्याम और उसके पीछे बद्री

सामने दो सैनिक आकर खड़े हो जाते है

"बहोशियार हिन्द क महाराजा राजपाल और महारानी देवरानी महल में तसरीफ ला रहे है"

बद्री देखता है सामने से एक बूढ़ा व्यक्ति पर हाथ कथा कुछ सैनिको क साथ आरहा था

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"खैरमकदम मेरी बहिन देवरानी आओ"

देवरानी देखती है ये तो मेरे भाई नहीं है फिर कौन है

बलदेव सैनिक क कहे अनुसार घोडा को एक तरफ ले जाता है फिर देवरानी को पहले उतरता है फिर खुद उतरता है

Sainik:Aayiye आपका स्वागत खुद सुल्तान करने आये है

Devrani:man me)oh तो ये है सुल्तान मेरे वाहिद

देवरानी अपना हाथ जोड़ कर प्रणाम करती है और फिर बरी बरी सब प्रणाम करते है

Sultan:aaayiye आप सबको कोई परेशानी तो पेश नहीं आयी महल पहुंचने में

बलदेव देवरानी क साथ चलते हुए

"नहीं सुल्तान"

सब चल कर महल क दुवार पर आते है

sultan:suno जा कर सब से कह दो क हमारे मेहमान आगये है

Sainik:ji सुल्तान

सुल्तान क दये बलदेव और देवरानी बाये चल रही थी

पीछे श्याम और बद्री चल रहे थे चारो को ले कर सुल्तान सभा में पहुँचता है जहा पर दोनों तरफ से बड़े कुर्सिओं सोफे पैर मंत्री बैठे थे सुल्तान को आता देख पूरा सभा खड़ा हो जातीहै

और दोनों तरफ से लोग बलदेव देवरानी क ऊपर फूलो की बारिश कर देते है

"खुशामदीद खुशामदीद"

श्याम और बद्री अपना स्वागत देख गड गड हो जाते है

सुल्तान जा कर अपने आसान पर बैठ जाते है

Sultan:aap यहाँ बैठिये राजा राजपाल जी

और देवरानी बहिन आप यहाँ पर बैठिये

Badri:man में) ये बूढ़ा इस बलदेव को राजपाल क्यू बुला रहा है

जगह देख कर बद्री और शयाम भी बैठ जाते है

Baldev:sultan वो में वो नहीं ..

Sultan:Ary हमारी आखे आप दोनों को घोड़े पैर बैठे देख हे समझ गयी थी क आप हे देवराज क जीजा राजपाल और ये हमारी बहाना देवरानी है

ये सुन कर देवरानी शर्मा जाती है और बलदेव को भी अंदर से ाचा लगता है पर लोगो को दिखने क लये झूठा नाटक करता है

Baldev:nahi सुल्तान

Devrani:aap से भूल हुई ये मेरा बीटा है

सुल्तान को जैसे एक झटका लगता है

"मुआफ करना बहाना"

Devrani:ary कोई बात नहीं सुल्तान आप पहली बार हे तो मिले है वैसे मेरे पति किसी कारणवश नहीं आसके

Devrani:man me)Mera असली पति तो यही है तो लगेंगे हे न हम पति पत्नी और उसके चेहरे पैर मुस्कान आजाती है

जिसे बलदेव देख लेता है और वो भी मुस्कुराता है

Baldev:man me)maa बॉस मेरी पत्नी कहलाकर इतना खुश है सच में बना लूंगा तो कितनी खुश होगी

Devrani:sultan ..भैया देवराज कहा है

Sultan:Devraj शहज़ादे शमशेर क साथ शिकार पर गए हैं हमने खबर भेजवा दया है

Sultan:dosto ये हिन्द से आये हमारे मेहमान है मई चाहता हु क इनको किसी भी चीज़ की तकलीफ नहीं हो पारस में

Sultan:Behan देवरानी आप सब अंदर जाये देवराज को आने में समय लग सकता है

Sultan:Suno

Sainik:ji जहाँ पनाह

Sultan:in सबके रहने और खाने का बंदोबश्त करो और इनसब से मल्लिका जहाँ से मुलाक़ात करवाओ

सैनिक चारो को अंदर ले जाते है

बद्री श्याम क कान में

"ये क्या नौटंकी है तुम जाओ उन दोनों क साथ मई यही रुक रहा हु"

"हाँ यार बद्री मुझे भी प्यास लगी है"

Badri:Suno हमे पानी पीना है

एक सैनिक वही बद्री और श्याम को पानी पिलाने ले जाता है बाकि सैनिक बलदेव और देवरानी क साथ चल रहे थे

मल्लिका जहाँ क कक्षा क पास रुक कर

Sainik:Gustakhi मुआफ हो मल्लिका जहाँ हमारे मेहमान आपसे मिलने आये है

मल्लिका jahan:ijazat है

बलदेव और देवरानी सैनिको क इशारे पर अंदर आते है सैनिक वही रुक जाते है एक बड़ा सा कक्षा जिसमे हर सोने जवाहरात से चमक रहे रहे बीचो बीच में पलंग जिसमे मखमली बिस्तर लगा हुआ था सामने नक़ाब में कड़ी थी मल्लिका जहाँ

बलदेव और देवरानी दोनों हाथ जोड़ कर

"प्रणाम मल्लिका जहाँ"

मल्लिका जहाँ

"सलाम आप दोनों को"

Mallikajahan:tum दोनों की जोड़ी बेहद खूबसूरत है

Devrani:Muaaf कीजिये पर क्या आप सुल्तान मेरे वाहिद की

Mallikajahan:ji हाँ मई उनकी बीवी हूर इ जहाँ हु प्यार से मुझे भूरिया भी कहते है

Devrani:aap भी हम दोनों को गलत समझ रहे है मल्लिका जी

Mallikajahan:matlab

Devrani:Matlab क ये मेरे पति नहीं है

Mallikajahan:yani तुम कह रही क ये शौहर नहीं है तो फिर कौन है

Devrani:ye मेरा बीटा है

Mallikajahan:Tauba तौबा मुआफ करना मेरी बहिन तुम दोनों की जोड़ी देख कोई भी धोका खा सकता है

Devrani:koi बात नहीं didi,to क्या आप अपने चेहरे को ढके रहते है

Mallikajahan:nahi मेरी बहिन में गैर मर्द भले से वो रिश्तेदार हो उनसे पर्दा करती हु

Devrani:to क्या बलदेव को बहार भेजना होगा आपको देखने क लये हहह

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Mallikajahan:Nahi नहीं ये तुम्हारा बीटा है इसलिए मेरे बीटा जैसा हे है इसलिए ये मेरा चेहरा देख ले तो कोई हर्ज़ नहीं

मल्लिकाजहं उर्फ़ हूर इ जहाँ भूरिया अपना नक़ाब अपने चेहरे से हटा टी है

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देवरानी और बलदेव देखते रह जाते है

Devrani:Kya सुंदरता है आपका नाम सही हूर इ जहाँ रखा गया आप हूर से काम नहीं

Hooriya:devrani शुकरिअ मेरी बहिन तुम भी कोई काम सुन्दर नहीं लगती नहीं हो क हिन्द की हो

Devrani:didi में पारस में हे पैदा हुई पाली बढ़ी हु

भूरिया :इसलिए

बलदेव देख रहा था क दोनों बहुत जल्दी घुल मिल गए

Hooriya:beta तुम क्यू चुप चाप हो

बलदेव मन me:beta तुम यहाँ से निकल हे लो दो औरतो में फसना ठीक नहीं

Baldev:Mallika जहाँ में आपको मौसी बुलाऊ तो चलेगा न

Hooriya:han बीटा तुम बहिन देवरानी क बेटे हो मुझे खला मौसी बुला सकते ho,bada शरीफ बीटा है आपका बहिन देवरानी

देवरानी बलदेव की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए

"बहुत नटखट है"

Baldev:me ये बद्री और श्याम को देखता हु आप लोग बात करो

hooriya:aao बैठो देवरानी कड़ी हे हो

बलदेव वह से बहार आजाता है और देवरानी बैठ जाती है...
 
अपडेट 62

बलदेव अपने माँ को छोर कर बहार आता है तो देखता है बद्री और श्याम बैठे एक दूसरे से बातचीत कर रहे थे

Baldev:Tum दोनों बहार हे क्यू रुक gaye,mallika जहाँ से मिलने क्यू नहीं आये

Shyam:wo बास प्यास लग गई थी तो पानी पीने क लये

Baldev:theek है चलो मिलवाते है

Badri:Rehne दो बलदेव अभी हम थके है बाद में मिल लेंगे वैसे भी हम यहाँ है कुछ दिन तक तो

बद्री का सपाट जवाब सुन जो बद्री ने बिना बलदेव को देखते हुए कहा था

Baldev:man में) मेरी हर बात मन ने वाला बद्री आज कल चिढ़ा क्यू रहता है और इसे जाना भी था बीच रस्ते से wapas,pata नहीं क्या चल रहा है इसके दिमाग में

Baldev:theek है श्याम बद्री तुम दोनों हाथ मुँह धो लो

Sainik:Aap सब पास क कक्षा का गुसलखाने को इश्तेमाल में ले सकते है

Baldev:dhanyawad

तीनो हाथ मुँह धोने चले जाते है

इधर देवरानी क साथ बैठी भूरिया गप्पे लगा रही थी

Hooriya:Acha जी तो तुम पारसी हे हो वैसे में मिश्रा की हु

Devrani:wah मिश्रा तो बहुत बड़ा राज्य है

Hooriya:dekho तुम इतने सालो बाद आई हो और ये शमशेर को भी आज हे देवराज जी को ले कर जाना था

Devrani:ary दीदी उसमे युवराज शमशेर की क्या गलती बेचारे की

Hooriya:bechara ..शैतान है एक no.ka

तभी सैनिक अत है

"मल्लिकाजहं शहज़ादे शमशेर राजा देवराज जी क साथ वापस आगये है"

भूरिया एक मुस्कान से

"देखि देवरानी नाम लेते हे शैतान हाज़िर"

Devrani:hehehe दीदी

Hooriya:jao अपने भाई से मिल लो

देवरानी का मुँह अपने भाई क आने क आभास से हे डिल धड़कना बढ़ जाता है और आखे ख़ुशी क मरे एक एक पल को गुज़ारना मुश्किल था

देवरानी उठ क जाने लगती है तभी उसके कानो में आवाज़ आती है

Sainik:Hoshiyar सुल्तान मेरे वाहिद तसरीफ ला रहे है

Hooriya:ruk जाओ देवरानी लगता है वो सब यही आरहे है

भूरिया क कक्षा क आगे खड़ा सैनिक

"मल्लिका जहा बहार सुल्तान क साथ राजा देवराज है"

भूरिया झट से अपना नक़ाब फिर से अपने चेहरे पे धक् लेती है

Hooriya:aajaye सुल्तान

देवरानी उठ कड़ी होती है

सामने से देवराज लम्बे चौड़े कद काठी चेहरे पर आधी सफ़ेद आधी काली दाढ़ी

देवराज देखता है लम्बे चौड़े बदन की मालिकिन सफ़ेद गोरा रंग अपने बहिन को आज 18 साल बाद देख उसके आखो से ासु चालक जाते है

"देवरानी मेरी बहाना"

देवरानी अपने भाई क आखो में ासु देख क उसके आखो से भी धार धार ासु बहाने लगते है

"भैयाआआअ "

देवरानी अपने भाई क पास जा कर सबसे पहले चरण स्पर्श करती है

देवराज उसके बाहे पकड़ कर

"उठ जाओ मेरी बहिन"

देवराज देवरानी क सर पर हाथ फेर कर उसके सर को अपने सीने पर रख देता है

"मुझे क्षमा कर दो मेरी बहिन में तुमसे मिल नहीं सका इतने वर्षो से"

"भइआ एक आप हे तो है मेरे इस दुन्या में"

"बहिन क्षमा कर में दे में राखी का लाज रख न सका"

देवरानी फुट फुट क रो पड़ती है

देवराज अपनी बहिन क ासु पोछते हुए

"अब हम मिल गए है न में अपने बहिन क ऊपर कोई दुःख नहीं आने दूंगा"

उतने में बलदेव आजाता है

देवरानी अपना ासु पोछते हु

"खड़े क्यू हो बलदेव आकर पेअर छुओ मां क"

बलदेव आकर पेअर छूटा है

"जीते रहो भांजा "

"ये तो मेरे से भी ज़्यादा लम्बा हो गया देवरानी"

"है भइआ आप पर हे गया है"

Sultan:Devraj जी शाम होने आई चलिए पहले इनसब को खाना खिलवाये

Devraj:ji सुल्तान

वह से सब खाने क लये निकल जाते है

गहतराष्ट्रा

महारानी षुरूश्ती तेज़ी से चल कर बहार आती है और महल में घुस कर अपने कक्षा में जा कर लेट जाती है आज कई बर्षो बाद षुरूश्ती इतना परेशां हुई थी पलंग पे आकर लेट जाती है षुरूश्ती अपने बेबसी से परेशां थी उसके आखो में ासु थे जिसे वो न छुपा प् रही थी न किसी को दिखा प् रही थी क्यू क एक स्त्री कितनी भी बुरी हो अपने शरीर का सौदा नहीं कर सकती

Shurushti:radha पानी लाना

राधा :ले महारानी

Shurushti:man me)kya करू में इस कमीने सेनापति ने तो मुझे बड़े असमनजस की स्थिति में दाल दया में किसी की मदद भी नहीं ले सकती ,महाराज को bolu..nahi नहीं वो पूछेंगे क तुम ऐसा क्यू की और गहतराष्ट्रा वासिओ को पता चला क में बलदेव को मरवाना छह रही हो तो वो मेरे फांसी की मांग अवश्य करेंगे

radha:maharani पानी

Shurushti:han लाओ

Radha:kya हुआ आप चिंतित प्रतीत होती है

Shurushti:nahi राधा ऐसी बात नहीं

Radha:to फिर आपके माथे पे पसीने

Shurushti:wo..wo तो बास बहार से आई तो

Radha:aapne दोपहर का भोजन भी नहीं क्या

Shurushti:mera खाने का मन नहीं है तुम जाओ अभी

राधा सोचते हुए चली जाती क महारानी ज़रूर कुछ छुपा रही है

षुरूश्ती मन me:kya करू अपनी इज़्ज़त बचने क लये भाग जाऊ यहाँ से पर कहा जाऊ

सोचते सोचते षुरूश्ती की आँख लग जाती है

जब उठ टी है तो शाम हो गयी थी

षुरूश्ती जा कर स्नान करती है और अपने वस्त्र बदल कर बहार आती है

षुरूश्ती महल से बहार निकल कर

"सैनिको महाराज कहा है"

sainik:maharani वो सीमा पर गए है

षुरूश्ती धड़कते डिल क साथ सुन सां और रास्ता साफ़ देख कर सेना गृह की ओरे चल देती है उसका हर कदम लड़खड़ाहट से साथ आगे बढ़ रहा था

shurushti:man me)bhagwan क्षमा करना मेरे पास अपने जान बचने का कोई चारा नहीं क्षमा करना राजपाल मुझे

चलते हुए षुरूश्ती सेनापति सोमनाथ क कक्षा दुवार पैर पहुँचती है

षुरूश्ती रुक जाती है उसका शरीर कंपनी लगता है हिम्मत कर क षुरूश्ती अपना हाथ दरवाज़े पैर थक थक करती है अंदर से सेनापति सोमनाथ थोड़ी देर बाद दरवाज़ा खोलता है

जैसे हे षुरूश्ती की नज़र सेनापति पर पड़ती है

षुरूश्ती अपने निचे झुका लेती है

senapati:swagat है राजपूतनी महारानी षुरूश्ती का पधारिये महारानी

षुरूश्ती दबे पाँव अंदर आती है और सेनापति फुर्ती से दरवाज़ा को बंद करता है

Senapati:sharma क्यू रही ह महारानी अपना खूबसूरत चेहरा तो ऊपर उठाइये

षुरूश्ती अपना सर ऊपर उठा टी है

Senapati:acha हुआ आप आगयी क्यू क अगर आप कुछ पल और देरी कर देती तो में अभी तक बहार जा कर गहतराष्ट्रा क सामने आपका कच्चा चिता रख देता

षुरूश्ती दुःख और गुस्से क साथ

"तुम्हे इसका पाप ऐसा लगेगा क तुम देखना एक स्त्री क इज्जत से खेलना"

Senapati:rassi जल गयी पर तेवर वही है

हहहह

सेनापति षुरूश्ती क हाथ पकड़ कर बिस्तर की ओरे ले जाता है

षुरूश्ती हाथ झटक देती है

"आर्य मेरी रानी अभी भी लज्जा रही हो"

सेनापति फिर षुरूश्ती क खूबसूरत हाथ को पकड़ क सेहला रहा था

"क्या सुन्दर है आपके हाथ महारानी ये किसी का जान ले सकती है मई सोचा नहीं था"

"जो करना है जल्दी करो नहीं तो इस से हे गाला दबा दूंगी"

"हम तो मर मिटने तैयार है आपकी सुंदरता पर महारानी"

सेनापति झुक कर षुरूश्ती क हाथ पर चूमता है

"उम्मंहहहाआआ"

षुरूश्ती :यह

Senapati:kshama कीजिये महारानी पर इस कक्षा क बिस्तर पैर धुल है ये आपके महल क जितने साफ़ नहीं

षुरूश्ती अपना मुँह दूसरी ओरे फेर लेती है

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सेनापति सोमनाथ षुरूश्ती को बहो में भर लेता है षुरूश्ती अपना मुँह दूसरी तरफ फेर लेती है

षुरूश्ती को अपने बाहो में भर क

"क्या खुशबु है महारानी आपके बदन में क्या मुलायम हो आप"

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सेनापति का हाथ षुरूश्ती क पीठ पर था और षुरूश्ती को लये हुए सेनापति बिस्तर पर लेट जाता है

षुरूश्ती अपनी आखे बंद कर लेती है

Shurushti:man me)ye नीच जाती क लोहार क बिस्तर से कैसी दुर्गन्ध आरही है

सेनापति अब षुरूश्ती क पैरो क नीचे बैठ षुरूश्ती पेअर क अंगूठो को चुमंता है

"ुम्म्हा"

"क्या रसगुल्ले जैसे पेअर है महारानी "

सेनापति पेअर को चाट ने लगता है और षुरूश्ती क अंगूठे को अपने मुँह में ले लेता है

"ahhh"shurushti सिसकती है

सेनापति अब खूब अचे से अंगूठे चूसने लगता है

shurushti:aaah उठ

सेनापति अब पिंडिलियो को चूमते हुए ऊपर बढ़ने लगता है और अपने होठो और जीभा से षुरूश्ती क पेअर को गीला कर क चूमने चाटने लगता है

shurushti:aaah यह उम्

आँख और ज़ोर से बंद कर लेती है

सेनापति अब धीरे से महारानी का घागरा ऊपर उठाने लगता है और उसके पेअर को चाटने लगता है

Senapati:hmmm ुम्मम्ह क्या चिकने पेअर है

अब षुरूश्ती का घागरा घुटनो तक था सेनापति घुटने पर चुम ऊपर करता है जिससे उसके दूधिया जांघ सामने आजाती है

सेनापति अपना हाथ जांघो पर रख सहलाता है

shurushri:aaaaaaah

सेनापति अब ज़ोर से जांघ को दबोच कर दबाता है

Shurushti:aaaaah ओह्ह्ह

सेनापति बरी बरी से दोनों जांघ को चूमता है छत्ता है

सेनापति अब षुरूश्ती क दोनों पेअर को मोड़ षुरूश्ती बीच में बैठ जाता है और षुरूश्ती क घागरे को कमर तक उठा देता है

झाटो से भरी छूट देख सेनापति की आखे फटी रह जाती है

Senapati:Maharani असली खज़ाना तो महाराज ने यहाँ छुपा रखा है और वो पूरा संसार ख़ज़ाने क लये घूमते है

Shurushti:chup कर जल्दी कर जो करना है

सेनापति घाघरा को पकड़ कर निकल फेकता है और अपना धोती खोल षुरूश्ती क ऊपर लेट जाता है

सेनापति एक हाथ कथा मर्द था और सिर्फ 5.5 की कद की 48 वर्ष महारानी क ऊपर लेट गया जिस से महारानी षुरूश्ती को लगा उसका शरीर अब टूट जायेगा

सेनापति 5.10 लम्बाई का तगड़ा मर्द आज महारानी क लये बहुत भरी था क्यू क राजपाल भी महारानी षुरूश्ती से कुछ एक इंच हे ुचा था

shurushti:aaaaah मार दया रे

Senapati:kaha मारा अभी तो मरूंगा सेनापति अपना लौड़ा देवरानी की झटभरी छूट पर रख कर रगड़ता है

shurushti:aaaah

सेनापति देखता है क अब धीरे धीरे महारानी गरम हो रही है

सेनापति चोली क ऊपर से हे षुरूश्ती माध्यम आकर क वक्ष को अपना हाथ से सहलाते हुए दोनों को ज़ोर से दबोच लेता है

shurusti:aaaaaah सेनापति तुम्हारी इतनी ज़ुर्रत

सेनापति :आह क्या मुलायम मखमली वक्ष है आपके महारानी जी

सेनापति झट से उसके चोली खोलने लगता है और महारानी क दोनों वक्ष कूद कर बहार आते है जिसे देख सेनापति सोमनाथ अपने होठ पर अपनी जीभ फेरता है

षुरूश्ती अपने आप को पूरा नंगा देख अपना हाथ अपने चेहरे पर रख लेती है

senapati:sharma रही है महारानी तुम तो छमिया लग रही हो

सेनापति आगे बढ़ कर दोनों वक्षो को हाथ में लये मरोड़ने लगता है उसको दबाने लगता है और निचोड़ते हुए अपना लौड़ा षुरूश्ती क बुर पर रगड़ रहा था

Shurushti:aaah नहीं

सेनापति बारी बारी से वक्षो को मुँह में ले कर चुस्त है

"गलपपपप उम्मठ आआह "

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देवरानी शर्म से अपने चेहरे को ढके रहती है

सेनापति षुरूश्ती क हाथ हटा कर उसके चेहरे क तरफ अपना मुँह ले जाता है

और अपने होठ षुरूश्ती क होठ क तरफ बढ़ता है

षुरूश्ती आँख खोलती है और अपना हाथ सीधे सोमनाथ क गर्दन को दबोच लेती है

senapati:kya हुआ महारानी आपके गुलाबी होठ चूसने दो

Shurushti:nahi

senapati:kyu इस लोहार क होठ चूसने से महारानी राजपूतनी अपवित्र हो जाएगी

shurushti:tumhari तो

षुरूश्ती ज़ोर से सेनापति क गर्दन को दबती है

सेनापति अपना हाथ ज़ोर से षुरूश्ती क वक्षो पैर कसता है और अपना लौड़ा षुरूश्ती क झाटो से भरी छूट पर रगड़ता है

षुरूश्ती का हाथ सेनापति सोमनाथ क गर्दन को छोर देती है और षुरूश्ती की ाखस कामउत्तेज़ना से बंद हो जाती है

सेनापति somnath:Q वैश्यस्य जैसी हरकत कर रहे हो ,खुद भी मज़े लो और मुझे भी लेने दो

सेनापति अपने होठ आगे बढ़ा षुरूश्ती क होठो को अपने मुँह में भर लेता है और चूसने लगता है

"गललललपपप गलललपपपपप गलपपपपपपपप

गलपपपप गलप्प्प गलप्प्प ुम्मम्ह सलरपपप"

निचे से षुरूश्ती की छूट पर 7 इंच का लौड़ा भी रगड़ रहा था और षुरूश्ती की दोनों वक्ष को सेनापति निरंतर रगड़ रहा था

सेनापति होठ छोर कर षुरूश्ती क गाल को अपने दांत से पकड़ लेता है और चूसने लगता है

"ुंहहाआ गलप्प्प "

shurushti:aahhh यह ओह्ह

सेनापति अपना दांत षुरूश्ती क गाल पर लगा देता है

सेनापति अब षुरूश्ती को चूमता हुआ उसके नाभि पर आकर अपने जीभ से चाटने लगता है

Shurushti:jaldi करो महाराज आजाये गए

senapati:maharani वो रात से पहले नहीं आने वाले मैंने हे उन्हें भेजा है और षुरूश्ती को देख आँख मार देता है

Shurushti:kamine हो तुम

senapati:ab क्या करे हमेशा से चाहत थी क कभी कोई महारानी को छोडूंगा आज मिल गयी तो महाराज को भेजना बनता था

Shurushti:hawasi कमीने

Senapati:Maharani अब हम सेनापति बचपन से आपके राज्य को आगे बढ़ने क लये अपना दिन रत एक करते है युधा करते है मिलता क्या है सुखी रोटी सुखी छूट

Shurushti:chii क्या गन्दी बात कर रहे हो

senapati:Aaj आपको छोड़ क मेरा सालो से महाराज क पीछे कुत्ते की तरह घूमना सफल हो जायेगा

सेनापति नाभि को चूमते हुए षुरूश्ती क पैरो क बीच जाकर उसके पैरो को उठा देता है

और उसके झट दर छूट को सहलाते हुए छूट का छेद देखने लगता है

दो ऊँगली से सहलाते हुए एक ऊँगली छूट में घुसा देता है

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shurushti:aaaaaah

ऊँगली छूट क अंदर बहार करते हुए सेनापति षुरूश्ती क छूट पर झुक कर अपना होठ छूट पर रख चूमता है

"ुंहहाआआ"

"क्या प्यारी छूट है महारानी "

अब तेज़ी से ऊँगली अंदर बहार करते हुए सेनापति छूट क ऊपरी हिस्से को चाटने लगता है और ऐसे हे छूट क चारो ओरे चाटने लगता है अब सेनापति क ऊँगली पर गीला महसूस होता है वो अपनी ऊँगली छूट से बहार निकलता है और अपना जीभ अंदर दाल कर अपने होठ से षुरूश्ती क छूट को चूसने लगता है

"उम्म्म आहे सेनापति नहीं"

षुरूश्ती क छूट क पानी रुकने का नाम नहीं ले रही थी और सेनापति हर बून्द पीने लग जाता है अब फिर से ऊँगली रख छूट में घुसा देता है और छूट क डेन पर अपना जीभ रख कर चाटने लगता है

shurushti:aaaaaaaaaah हाय मई मर गयी

"ुह्ह्ह्ह aaaaaaaaaah सेनपाटीईईओ नाआआई"

सेनापति देखता है क षुरूश्ती का शरीर अब गरम और छूट आग की भाटी सा हो गया है वो घुटने क बल बैठ षुरूश्ती का हाथ ले कर अपने लौड़े पर रख देता है

षुरूश्ती अपना हाथ पीछे खींच लेती है

षुरूश्ती अपना आँख खोलती तो देखती है क लौड़ा आसमान को सर उठाये था

shurushti:man me)kitna कला और बड़ा लिंग है महाराज से भी बड़ा है और दमदार है

हाय में ये क्या सोच रही हु

सेनापति फिर से षुरूश्ती का हाथ ले जा कर अपने लौड़े पैर रखता है और सहर्षति इस बाद लौड़े को अपने मुठी में भर लेती है

Senapati:lagta है इतना बड़ा लौड़ा कभी नहीं देखा दर रही हो

षुरूश्ती लौड़े को हाथ में पकडे महसूस कर रही थी

Senapati:ise मुँह में लो महारानी

षुरूश्ती एक चपत लौड़े पे मरती है और लौड़ा छोर देती है

सेनापति मुस्कुराते हुए

"ाचा मुँह में मत लो पर थोड़ा सहलाओ"

इस बार षुरूश्ती खुद अपना हाथ आगे ले जा कर लौड़े को पकड़ कर आगे पीछे करने लगती है

Senapati:ye हुई न बात

सेनापति अब षुरूश्ती क पेट पर था अपने दोनों पेअर दोनों तरफ रखे और अपने लौड़े को षुरूश्ती क हाथ मुठिया रहे थे

सेनापति षुरूश्ती दोनों वक्षो को दबाने लगता है और षुरूश्ती क हाथ को अपने लौड़े से छुरा कर दोनों वक्षो को अपने हाथो से पकड़ कर अपना कला लौड़ा महारानी क वक्षो क बीच में घुसता है और आगे पीछे धकेलने लगता है

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षुरूश्ती आँख फाडे देख रही थी

"ये क्या है सेनापति"

"महारानी मुझे लगता है महाराज ने कभी आपको ढंग से छोड़ा नहीं"

षुरूश्ती उस पल को याद कर रही थी कैसे उसे तड़पता छोर राजपाल दो पांच झटको में हे पानी छोर देते है

ये बात सुन कर षुरूश्ती शर्मा कर अपने आखे निचे कर लेती है

अब सेनापति अपना लौड़ा वक्षो से निकल कर षुरूश्ती क ऊपर लेट जाता है और उसको अपने बहो में भर कर उसके गर्दन पर और उसके होठो को चूमने लगता है और बिस्तर पर पलटने लगता है कभी षुरूश्ती को अपने ऊपर लेता है और उसके गांड को मसलने लगता है

"आह महारानी षुरूश्ती ये आपके गांड मैंने कई बार मटक ते देखा है में तो जब से अपने पिता क साथ सेना में भर्ती हुआ था तब से आपको पसंद करता हु"

सेनापति अपने ऊपर लिए हुए षुरूश्ती क गांड को खूब दबाता है और अपने लौड़ा छूट पर रखे रगड़ता है

अब षुरूश्ती को सीधा लिटा कर उसके पेअर को घुटने से मोड़ देता है और अपना कला लौड़ा षुरूश्ती क छूट पर रख सहलाता है और षुरूश्ती की ओरे देखता है वो ायकः भींचे लेती थी ,सेनापति अपने लौड़ा छूट क मुहाने पर रख एक तगड़ा झटका मारता है

shurushti:aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah

लौड़ा छूट को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया

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Senapati:ahh

सेनापति एक और जहतका मर्रा और इस बार पूरा लौड़ा महारानी षुरूश्ती क छूट में गायब हो गया

श्रुष्टि अब आँख खोल अपने आखो को फाड़े ऊपर की ओरे देख

"ाः हे भगवन"

सेनापति अब अपनी कमर हिलाते हुए ज़ोर ज़ोर से छोड़ने लगता है

"आआह्ह्ह्ह सेनापति नहीं अह्ह्ह्ह ओह्ह"

"ये ले सेनापति का लौड़ा मेरी महारानी"

फट पछ पछ की आवाज़ क साथ लौड़ा तेज़ी से अंदर बहार होने लगा

"आठ नहीं सेनापति तुम्हारा लिंग निकालो बड़ा है"

"ये ले लोहार का लौड़ा महारानी"

"गाहप घप्लप घप्लप

"अह्ह्ह सेनापति"

घप्प घप्प घपघप्प घपल

सेनापति अब षुरूश्ती को घुमा कर पीछे से लैंड पेलने लगता है

"अह्ह्ह्हह नहीं ओह्ह ाः सेनापति"

षुरूश्ती अपना हाथ से बिस्तर क चादर को पकड़ लेती है षुरूश्ती का कभी आँख बंद तो कभी ज़ोर क झटके से आँख खुल जाता था

अब सेनापति अपने बिस्तर से निचे उतरता है और षुरूश्ती को पलंग क किनारे ला कर उसके तंग फैला कर छूट में फिर

घपल से लैंड पेल देता है

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"आआआआह नहीं सेनापति"

सेनापति अब धक्को की बरसात कर देता है

और एक सुर से धक्के लगाने लगता है षुरूश्ती की चीख अब उन्माद और उत्तेजना की सिसकी लेती है और वो आनंदित हुई अपने सेनापति से चुदती रहती है

कोई आधा घंटा छोड़ने पर भी षुरूश्ती नहीं कहती लौड़ा निकलने

इसी बीच वो तीन भर झाड़ गयी थी आखिर कर सेनापति सोमनाथ भी अपने पानी का एक एक बून्द छूट में ुढक देता है षुरूश्ती अपनी आखे बंद कए हुए अपने बरसो बाद अपने छूट में इस सैलाब से अत्यंत खुश थी

उसके चेहरे पर सेनापति अस्सम आनंद देखता है

"मज़ा आया क नहीं महारानी"

षुरूश्ती सेनापति देख क

"अपना ये निकालो"

सेनापति "गल्प" की आवाज़ से छूट से अपना लौड़ा बहार खींचता है

षुरूश्ती कड़ी होती है उसके छूट से गधा सफ़ेद पानी उसके जांघो तक बह रहा था

वो गुस्से में सोमनाथ को देखते हुए उसके धोती उठा कर अपने छूट को पोछती है और अपने जांघ साफ़ कर अपने घागरा चोली पहन कर बहार जाने लगती है

सेनापति सोमनाथ वही मुस्कुराते हुए पलंग पर अपने लौड़े को देखते हुए लेट जाता है

षुरूश्ती अपने अस्त व्यस्त कपडे को देखते हुए ठीक करने लगती है और अपने बाल बांधते हुए सेना गृह से बहार निकलती है सामने अपना काम ख़त्म कर क कमला अपने गाओ जा रही थी तभी उसकी नज़र षुरूश्ती पर पड़ती है

Kamla:andhera हो गया और षुरूश्ती अभी सेना गृह से क्यू आरही है

षुरूश्ती अपना पल्लू ठीक करते हुए हल्का घूँघट कर लेती है

shurushti:man me)hey भगवन अँधेरा हो गया है दिन होता तो सब यहाँ पर देख लेते पारा नहीं महाराज आगये होंगे तो क्या सोच रहे होंगे और घरवाले भी सोच रहे होंगे क भरी शाम कहा हु मई

कमला देखती है सेनगृह से आरही षुरूश्ती महल घुस जाती है कमला से रहा नहीं जाता है वो सेनगृह में जाती है और उसे सेनापति क कक्षा का दरवाज़ा खुला दीखता है जिसे षुरूश्ती खोल कर चली गई थी

कमला दबे पाँव आकर सेनापति क कक्षा की खिड़की की दरार से अंदर देखती है तो पति है सेनापति नंगा लेता अपने हाथ में लौड़ा लये सहला रहा है और उसके लौड़े पर पानी चमक रहा खेली खाई समझ जाती है क ऐसा हाल तो चुदाई क बाद हे होता है लौड़े का कमला देखती है बिस्तर की भी दशा ठीक नहीं है और वस्त्र भी इधर उधर फेके है

Kamla:man me)to षुरूश्ती अपनी प्यास तुम यहाँ बुझा रही हो

और कमला एक मुस्कान क साथ अपने घर चली जाती है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 63

सेनापति से चुद क महारानी चारो ओरे अपने नज़र दौड़ाये अपने बाल को बांधते हुए अपने महल में घुस जाती है

षुरूश्ती घर में माहौल ठीक देख रहत की साँस लेते हुए अपने कक्षा में जा हे रही थी क

Radha:kya हुआ महारानी आप इतने पसीने पसीने क्यू हो

Shurushti:wo बास तेज़ चलने क वजह से

Radha:maharaj आगये है वो माता रानी जीविका क कक्षा में आप का प्रतीक्षा कर रहे है बहुत समय से

ये कह कर राधा चली जाती है

shurushti:man me)ab क्या जवाब दूंगी हे भगवन बचा ले

षुरूश्ती न चाहते हुए भी जीविका क कक्षा में चली जाती है

Shurushti:Saansu माँ

Jeevika:aaao बहु अंदर

अंदर जीविका लेती थी और राजपाल पलंग क किनारे बैठा था

षुरूश्ती चुदाई क बाद से हुए अस्त व्यस्त अपने घागरा चोली को ठीक करते हुए पास जाती है

Jeevika:Kaha थी बहु?

Shurushti:wo माँ जी वैध जी ने कहा है शाम में चलने क लये तो

Rajpal:hum सब आपके लये परेशां थे महारानी और ये आपके माथे पर पसीना क्यू

षुरूश्ती झट से अपना माथा बिना देरी कए अपने हाथ से पॉच लेती है

Rajpal:waise कहा थी आप 1 घंटे से

Shurushti:wo नदी पर चली गयी थी चलते हुए

jeevika:theek है बहु पर भरी शाम मत निकला करो अकेला किसकी नज़र कैसी रहती है हम बता नहीं सकते

Shurushti:ji संसू maa,ab में चलती हु

षुरूश्ती आकर अपने कक्षा में बिस्तर पर आकर पैट लेट जाती है और हांफे लगती है

और जैसे हे आँख बंद करती है

षुरूश्ती को अपनी ज़ोरदार चुदाई याद आती है षुरूश्ती का अंग अंग दुःख रहा था और नस नस फैट रहा था

आँख बंद कए षुरूश्ती सो जाती है

थोड़े समय बाद

Radha:maharani

"ो महारानी"

"महारानी इतनी जल्दी सो गयी"

कुछ देर आवाज़ देने पर षुरूश्ती आँख खोलती है

Radha:maharani खाना खाय लो

षुरूश्ती का शरीर टूट रहा था वो बास अपने हाथ से इशारा करती है सोने दो नहीं खाना

Radha:man me)aisa क्या हो गया इतनी जल्दी सो गयी खाना भी नहीं खाना इतना थक गयी

षुरूश्ती फिर से आखे बंद कर सो जाती है

पारस में

सुल्तान मेरे वाहिद क कहे अनुसार देवराज अपने बहिन और भांजे को खाना खिलने क ले जाते है और एक बड़े कक्षा में ले जाते है जहा पर बहुत बड़ा मेज़ और बहुत सी कुर्सी लगी थी

Devraj:baitho भांजे

Sultan:Baithye आप लोग

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तभी वह पर बद्री और श्याम आजाते है जिसे शमशेर ले कर अत है

देवरानी शमशेर को देख मुस्कुराती है

Sultan:Beta शमशेर महारानी देवरानी से मिलो और ये इनके बीटा बलदेव

शमशेर एक तक दोनों की ओरे देख

"अब्बा हुज़ूर इनसे मेरी मुलाक़ात पहले भी हुई है"

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sultan:kab हुई

Shamshera:bass जब हम गहतराष्ट्रा गए थे

Sultan:to क्या हुआ सलाम करो ये आपके माँ जैसी है इन्हे सलाम करो शहज़ादे

Shamshera:salam खला जान

Devrani:Pranam बीटा

और दोनों मुस्कुराते है

Devrani:Sultan जी बात ऐसी है आज में अपने भाई से इतने बरसो बाद मिली सिर्फ शमशेर क वजह से वो हे मुझे गहतराष्ट्रा में मिले और बताये देवराज भैया क बारे में

Sultan:tab तो आप दोनों की तारुफ़ करवानी हे नहीं चाहीये थी

और हसने लगते है

सुल्तान को देख सब हसने लगते है

devrani:shamshera बीटा तुम बद्री और श्याम से मिले क नहीं

Shamshera:Han मील लय खला

devrani:Han ये बलदेव क बचपन क साथी है

Shamshera:sab से तो मिल लये बलदेव जी आप चुप क्यू है कही आपको भूक ज़्यादा तो नहीं लगी

Baldev:nahi शमशेर भाई में बास अपनी बरी का इंतज़ार कर रहा था और वैसे भी जब बड़े बात कर रहे हो तो छोटो का बोलना उचित नहीं

Shamshera:waah भाई आप तो बहुत नेक हो सब खला की नसीहत का कमल है

है न देवरानी खला?

देवरानी मुस्कुरा देती है

Baldev:waise आपका धन्यवाद हमे अपने मां और माँ को भाई से मिलवाने क लये माँ हमेशा आपकी बात करती थी

Shamshera:Bhai हम धन्यवाद भर से काम नहीं चलते बदले में दो कुछ तो मने

Devraj:kar दी न राजाओ वाली बात

shamshera:Mere अब्बा पुरे दुन्या पैर हुकूमत ऐसे हे नहीं कर रहे है थोड़ी बहुत लें दें तो हम भी जानते है खून जो है शहंशा का

Sultan:aap सब खाना खाये में

मेज़ पर हज़ारो किस्म क फल और खाना सजा हुआ था

श्याम बद्री देवराज एक एक कुर्सी पकड़ कर बैठ जाते है

Devraj:Behan देवरानी आप अंदर जा कर मल्लिका जहाँ क साथ भोजन कर लीजिये

सुल्तान बीच वाली बड़ी कुर्सी पर बैठ ते हुए

"हाँ बहाना आप चले जाये अंदर"

Baldev:Mama

devraj:bolo भांजे

Baldev:mama मई कुर्सी पर बैठ कर नहीं खा सकता मुझे नीचे आसान पर बैठ कर हे खाना है

Sultan:to ऐसा कीजिये बलदेव आप भी भूरिया क कमरे में जा कर खा लीजिये

सब खाने लगते है बलदेव और देवरानी उठ कर भूरिया क कक्षा की ओरे आजाते है और दरवाज़े पैर खड़े हो कर

"मल्लिका जहाँ"

"कौन"

"में देवरानी"

"आर्य आओ बहना"

अंदर आती है देवरानी

"वो बलदेव भी है "

"बुला लो उसको भी देवरानी"

Devrani:baldev अंदर आजाओ

Hooriya:ary मुझे तुम दीदी या आप कहो मल्लिकाजहं तो सब कहते है

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Devrani:theek है दीदी हहह

Baldev:hooriya खला मुझे भूक लगी है

Hooriya:to वह सब खाने गए थे तो क्यू नहीं खाया

Devrani:wo दीदी बलदेव कह रहा था क उसे नीचे बैठ क खाना है

Hooriya:ha हाँ समझ गयी

आओ मेरे साथ

भूरिया पास में एक कक्षा में ले जाती है

"देवरानी तुम दोनों इस दस्तरख़ा पे खा सकते हो हमने खास कर निचे बैठ कर खाने क लये बनाया बाई"

Devrani:theek है दीदी

भूरिया दो बार ताली बजती है

और एक दासी उसके पास आकर

"जी मलिका जहाँ"

"इनदोनो का खाना यहाँ लगा दो"

भूरिया वह से चली जाती है

दोनों का खाना आता है और दोनों बैठ कर खाने लगते है

Baldev:khush तो हो मेरी जान

Devrani:bhut खुश मेरे राजा तुमने मुझे वो ख़ुशी दी है जिसका में जीवन भर क़र्ज़ नहीं चूका सकती

Baldev:Maa तुम्हारे लिए में अपनी जान दे दू तो भी तुम्हे नहीं कहूंगा क़र्ज़ चुकाने ये तो मामूली सी बात है

Devrani:han अब खाना खाओ मजनू मत बन

Baldev:apne हाथो से खिलाओ

देवरानी मुस्कुराते हुए अपने हाथो से निवाला तोड़ कर खिलने लगती है और हर बार बलदेव निवाले क साथ देवरानी का ऊँगली भी चाट लेता है

"बदमाश"

"तुमने हे बनाया है"

भूरिया आकर बैठ टी है फिर कुछ सोचते हुए वापस वही कक्षा में जाती है हो भूरिया क ठीक बगल में था

Hooriya:dekhti हु दोनों को किसी चीज़ की कमी तो नहीं हुई

भूरिया आकर दरवाज़े पैर कड़ी होती है देखती है देवरानी अपने हाथो से अपने बेटे को खिला रही है

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Hooriya:itna बड़ा हो गया फिर भी अपने हाथो से नहीं खता क्या..

बलदेव क मुँह में तभी मिर्ची चला जाता है और

Baldev:hn आह मिर्ची खा लय माँ पानी

देवरानी पास रखे पानी क जग से पानी ढल कर पानी देती है

जैसे हे वो झुकती है उसके आधे से ज़्यादा वक्ष ब्लाउज से बहार आने को थे

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ये दृश्य देख भूरिया हैरान थी

क्यू क पानी पीते हुए बलदेव भी तिरछी नज़रो से अपने माँ क बड़े दूध घूर रहा था

भूरिया मन me:ye लड़की कैसा कपडा पहनती है जवान बेटे क सामने ऐसा पहनेगी तो वो देखेगा हे इसको समझती हु

Hooriya:khane क बाद देवरानी मेरे कक्षा में आओ

कुछ देर बाते करने क बाद देवरानी बलदेव की छोर भूरिया क पास जाती है

"आओ बैठो देवरानी"

Hooriya:or कैसा लगा खाना किसी चीज़ की कमी तो नहीं हुई न

Devrani:dhanywad दीदी ये सब क लये शमशेर से भी मिली

Hooriya:mere बचे ने शैतानी तो नहीं की

Devrani:nahi दीदी आज उसके वजह से हे में यहाँ हु,

Hooriya:han शमशेर 25 का हो गया पर अभी भी मुँह फैट है होशमंदी नहीं आई

जैसे बलदेव में है

Devrani:aisa नहीं है दीदी वो नटखट ज़रूर है पर दिमाग और बूढी में काम नहीं और रही बात बलदेव की तो वो बचपन से हे कड़े अनुशासन में रहा है

Hooriya:waise कितने साल का है वो

Devrani:Baldev तो सिर्फ 18 साल का है पर परिपक्त है

Hooriya:ye तो है उसके उम्र क हिसाब से बहुत आगे है क्र देखने में तो लगता हे नहीं 18 का ऐसा लगता है 28..30 का होगा

वो तुमसे भी बड़ा लगता है देवरानी

Devrani:wo व्यायाम कर क अपने शरीर बढ़ा लय है दीदी इसलिए ऐसा लगता है वैसे आपकी उम्र कितनी है

hooriya:me वही 44..45 की हु और तुम देवरानी?

देवरानी:35 वर्षीया हु में

Hooriya:lagti तो हो काम उम्र की पर इतनी काम उम्र में 18 साल का बीटा

Devrani:ye बलदेव तो

मेरा 18 लगते हे पैदा हो गया था दीदी मेरा विवाह जल्दी करवा डाई थे

Hooriya:shamshera तो तब पैदा हुआ जब में 20 की थी वैसे एक बात पूछनी थी अगर बुराणा मनो बहाना

Devrani:aap बड़ी बहिन हो बहिन भी कहती हो और पूछती भी हो

Hooriya:tum अपने ब्लाउज में कुछ पहनती हो क नहीं

Devrani:Nahi दीदी अंतर्वस्त्र ब्लाउज क साथ पहन न मुश्किल होता है हमारे यहाँ नहीं पहनते उसको

Hooriya:to ब्राज़िएर पहनो

Devrani:aap ऐसा क्यू पूछ रही हो लेकिन

Hooriya:bura मत मन न पर जब तुम अपने बेटे को खाना खिला रही थी तो तुम्हारा ऊपरी हिस्सा दिख रहा था और जवान बेटे क सामने ऐसे हाल में रहना ठीक नहीं

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Devrani:hmmm

Hooriya:Or घर की बरकत ख़त्म होती है इसलिए जितना हो सके अपने आप को धक् क रखो

Devrani:didi में भी पारसी हु मई किसी अनजान क सामने अपना घूँघट तक नहीं उठा टी पर घर में

Hooriya:dusro क सामने घूँघट जैसे करती हो वैसा घूँघट मत करो काम से काम अपने बदन को छुपा क रखो वैसे ये हो सकता है क गलती हो जाती है कभी कभी

devrani:khair में अब से ध्यान दूंगी दीदी वैसे ये ब्राज़िएर क्या होता है

Hooriya:tumhe तो पता हे नहीं

चलो मेरे साथ आज में तुम्हे देती हु

भूरिया अपना अलमीरा खोल कर अपने कपडे हटा ने लगती है और कुछ 6 7 जोड़ी ब्राज़िएर निकल कर

"ये लो देवरानी आज से तुम हे रख लो इसे "

Devrani:par दीदी

Hooriya:Rakh लो ये बहुत कीमती है हम जब फ्रांस गए थे तो हमने लिया था इसे एक बार भी नहीं पहनी में और इसमें जांघिए भी है

Devrani:ab पता नहीं ये कैसा होता है हम तो बास एक वस्त्र का पट्टी बना कर पहन लेते है अपने वक्ष को आकर में रखने क लिए

Hooriya:ye तुम पहन क देखो इसमें तुम और सुन्दर लगोगी और ये कुछ दिनों पहले हे ब्रिटैन क महारानी ने पहनना शुरू क्या तो कुछ दर्ज़ी अब सील कर बड़े पैमाने पे फ्रांस में बेच जाता है बहुत काम लोग ये जानते है

Devrani:me भी पहली बार देख रही हु

hooriya:to चलो में तुम्हारे कमरे तक छोर दू

देवरानी भूरिया का दया हुआ सामान एक कपडे से धक् कर जाने लगती है

Hooriya:badi शर्मीली हो

Devrani:hehhe

तभी सामने से देवराज क साथ बद्री और श्याम आजाते है

Devraj:behan देवरानी तुम मल्लिका जहाँ क बगल वाले कक्षा में रह जाओ और बलदेव बद्री और श्याम मेरे बगल में अतिथि घर में रुक जायेंगे

Devrani:par भैया तीन लोग एक कक्षा me,Baldev को मेरे साथ सोने दो न भैया

Hooriya:par देवरानी

Devraj:Ye क्या कह रही हो बहाना बलदेव अब बचा नहीं रहा जो अब भी पल्लू में बंधा रहे तुम्हारे

Devrani:man में) वो जवान हो गया है भइआ इसलिए तो कह रही हु मेरे साथ सोये और कही और सो कर अपना जवानी व्यर्थ नाह करे

Badri:man me)sone दो दोनों छोड़ा छोड़ी खेलेंगे

Baldev:mama बात ये है न क माँ आज कल दर जाती है रात में इसलिए कुछ दिनों से में हे उनको ले कर सो रहा हु

ये सुन कर श्याम अपने आँख तरेरे बलदेव को देख रहा था

Devrani:han माँ और नयी जगह है तो पक्का में रात में डरूंगी

Devraj:theek है ठीक है सो जाओ बलदेव क साथ

badri:kya घोरकलियुग है भाई खुद कह रहा है जाओ चुद आओ अपने बेटे से

Hooriya:aap सब आराम करे में चलती हु

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Devrani:me भी थक गयी लम्बी यात्रा से

और देवरानी भी भूरिया क पीछे जाने लगती है और उसके साथ बलदेव भी मुड़ता है

devraj:baldev तुम कहा

Baldev:me भी थक गया हु माँ क साथ जा कर सो जाता हु

ये सुन देवरानी अंदर से लज्जा जाती है और मुस्कुरा देती है

देवरानी मन me:"bhut जल्दी है मेरे सानिया को मेरे साथ सोने की"

Devraj:tum रुको बलदेव तुम्हे हम महल घूमते है बद्री और श्याम क साथ

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बलदेव का चेहरा उतर जाता है

जिसे देख देवरानी है देती है

मन me"badmash"

देवरानी जाते हुए

"बीटा जाओ अपने मां क साथ तब तक में बिस्तर कर क रखती हु फिर सोयेंगे"

बलदेव मतलब समझ कर

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ख़ुशी ख़ुशी अपने मां क साथ जाता है और कुछ देर घूमने क बाद अपने कक्षा में जिसे उसके माँ क साथ रहना था वह अत है

"माँ किधर हो "

"मेरी जान किधर हो "

"माँ"

कक्षा में घुस कर बलदेव आवाज़ लगा रहा था तभी वो देखता है स्नानघर से कुछ आवाज़ आरही है और दरवाज़ा खुला है वो अंदर जैसे जाता है अंदर का दृश्य देख उसके आखे वही जैम जाती है और उसकी लगभग साँसे बंद हो जाती है

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देवरानी एक झीनी सी कपडे से अपने बड़े वक्ष को छुपाने की कोशिश कर रही थी और जैसे हे बलदेव पर नज़र पड़ती है अपने नज़र निचे कर

"बलदेव में नाहा रही हु तुम जाओ न यहाँ से"

बलदेव एक टाक देवरानी क बड़े बड़े पपीता जैसे वक्ष को घूर रहा था उसके घुंडी भी साफ़ नज़र आरही थी जो किसी सिक्के क गोलाई में थी

बलदेव देख कर अपने होठ दबाता है

devrani:jao न बलदेव मुझे शर्म आरही है

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Baldev:Q अपने होने वाली पति से क्यू शर्मा रही हो

देवरानी अब और शर्मा जाती है

Baldev:kya खूबसूरत वक्ष है माँ मेरी रानी मेरी पत्नी

Devrani:tumhe मेरी कसम मेरे सैय्या जाओ

बलदेव हर दर कर बहार निकलता है और जा कर कक्षा का दरवाज़ा बंद कर देता है...

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 64

देवरानी बलदेव क स्नान घर से जाते हे दरवाज़ा बंद कर लेती है

Devrani:man me)Bach गयी नहीं तो बलदेव तो आज हे मुझे पटक देता था

और शर्मा जाती है अपनी सोच पर

फिर अपने आपको देख

"तू भी तो अपनी हाल देख देवरानी ऐसे हाल में तुझे देख कर कोई भी तुझे बिना मसले नहीं छोड़ेगा"

देवरानी नाहा कर बहार आती है तो देखती है बलदेव अब भी उसका इंतज़ार कर रहा है

देवरानी एक ऐडा से उसको देखती है

"क्यू राजा शिद्दत से इंतज़ार हो रहा है"

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और जो हे बलदेव की नज़र पर पड़ती है उसकी आखे चौंधिया जाती है क्यू क

देवरानी इस समय छोटे से तौलिया में अपने भरी शरीर को ढके थी जिसमे से उसका आधा वक्ष साफ़ दिख रहा था और उसका तौलिया उसके मांसल जांघो तक हे था

पहले से गरम बलदेव खड़ा होता है और अपना हाथ सीधा अपने तने लौड़े पर ले जा कर मसलने लगता है

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Baldev:maa क्या माल लग रही हो ये तौलिया भी उतर फेको

देवरानी देखती है क बलदेव का धोती तन गया है और उसके हाथ उसके लौड़े को मसाले जा रहे है

देवरानी एक ऐडा से आह भरते हुए कहती है

"बलदेव तुम्हे शर्म नहीं आती मेरे सामने में हे ऐसी हरकत करते हुए"

"माँ तुम्हे शर्म नहीं आती अपने बेटे क सामने आधी नंगी खड़े रहते हुए"

बलदेव अब लौड़ा अपना पूरा ज़ोर से पकड़ आगे पीछे करने लगा

देवरानी झेप जाती है और अपनी आखे निचे कर लेती है

"मुझे क्या पता था तू यही होगा वैसे उसे ज़्यादा अपने हाथ से मत तड़पाओ"

Baldev:Itni दया आरही है मेरे इस पर तो अपने हाथ से इसे शांत कर दो मेरी रानी

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Devrani:dhattt बदमाश

Baldev:Bass इतना हे दया और प्रेम है मुझ पर और मेरे इस पर

देवरानी अब बलदेव क करीब आजाती है

"प्रेम इतना है मेरे राजा क में जान भी दे सकती हु"

बलदेव देवरानी को अपनी बाहो में भर लेता है

"माँ.."

"हाँ राजा"

बलदेव अपने होठ देवरानी क गर्दन पर रख कर चूमने लगता है

devrani:aahhh राजा

Baldev:Maa तुम भीगी हुई बहुत सुन्दर लगती हो

Devrani:Hmm इसलिए मेरे कहने क बाद भी तू मुझे छोर स्नानघर से बहार नहीं आरहा था

बलदेव देवरानी को सहलाते हुए अपने हाथ देवरानी क गांड पर ले जाता है और तौलिये क ऊपर से हे उसके गांड सहलाते हुए दबाता है

"आआह राजा यह उम्म्म्म"

"माँ तुम्हारे ये गांड तो पुरे गोलाई में दिख रहे है तौलिये में"

Baldev:man me)aisa लग रहा है माँ नंगी मेरी बाहो में है

बलदेव अब अपना एक हाथ से देवरानी क दूध को सहलाता है और धीरे धीरे दबाता है

"अह्ह्ह बलदेव धीरे न"

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"माँ एक बात पुछु"

"हाँ पूछो मेरे राजा"

"माँ अगर मेरा कोई भाई बहिन होता तो क्या आज हम ये सब कर पते "

"बीटा जब प्यार सच्चा हो तो भगवन जोड़ी मिला हे देता है"

"अह्ह्ह उम्म्म्म आराम से

बलदेव अब देवरानी को भींच कर कास कर बाहो में ले लेता है और अपने हाथो को देवरानी क दोनों उभरे गांड पर रख ज़ोर ज़ोर से मसलता है

"माँ अगर वो बगावत करते हमारे विरुद्धा तो"

"बीटा तो में उनसे साफ़ साफ़ कह देती क तू मेरा प्रेमी है और तेरे भाई बहिन को तुम्हे पिता कहने कहती थी"

"अह्ह्ह माँ तुम सच में माँ रति देवी हो"

बलदेव देवरानी क होठो को चुम कर चूसने लगता है

"गलप्प्प गलप्प्प गलप्प सलरपपप

गलप्प गलप्प्प गललललपपप"

देवरानी क होठो को चूस कर छोरता है

"माँ में बचपन में हमेशा सोचता था क मेरे कोई भाई बहिन क्यू नहीं है"

"बीटा तुम्हारे पिता जी गईं क 10 बार भी मेरे साथ सोये नहीं में कैसे तुम्हारे भाई बहिन को जन्म देती"

"माँ ये भी सही हुआ नहीं तो आज उन्हें भी समझाना मुश्किल होता "

"हम बीटा"

देवरानी अपना आप को थोड़ा उठा कर अपने होठ बलदेव क छाती पर रख कर चूमती है

बलदेव अपने माँ जो अपनी यदि को उठाये चिपकी थी अपने दोनों हाथो से उसके बड़े गांड को मसलने लगता है

"माँ क्या तुम्हारा कभी डिल नहीं हुआ क तुम्हे और बचे हो"

"बीटा मेरा मन तो था हे क मई भी और बचे पैदा करू और औरतो की तरह खास कर मेरा सपना था क एक राजकुमारी सी मेरी बेटी हो"

"क्या माँ आपका सपना सपना रह गया "

देवरानी अपना सर बलदेव क कंधे पर रख

"कोई बात नहीं है बीटा मेरा कोई सपना पूरा नहीं हुआ ये नहीं हुआ तो क्या हुआ"

"माँ मेरी रानी एक बात कहु "

"कहो मेरे राजा "

"माँ अगर मई तुम्हारे सपने को पूरा करू तो"

बलदेव अपने माँ क गांड और कमर को सहलाते हुए

"मतलब बीटा "

बलदेव अब अपने माँ क पेट को सहलाते हुए

"माँ अगर में इस कोख को भर दू और तुम्हारा सपना पूरा कर दू तो"

देवरानी अपना सर पीछे कर बलदेव को देखती है जो मज़ाक नहीं कर रहा था

देवरानी फिर से बलदेव क गले लग जाती है

"माँ बोलो न "

"बीटा ये मुमकिन नहीं.."

"माँ में तुम्हारा हर वो सपना पूरा करना चाहता हु जो आपके अधूरे है"

"बीटा इतना प्यार मत कर मुझसे तू कही इस प्यार क आग में जल न जाये मुझे दर लगा रहता है"

"माँ में जल कर रख होने तैयार हु अपने पहले और अंतिम प्रेमिका देवरानी क लये"

तभी बलदेव की नज़र पलंग पर रखे कुछ वस्त्र की ओरे जाती है

"माँ वो रंग बिरंगे वस्त्र क्या है"

"बीटा वो अंतर वस्त्र है मल्लिकाजहं भूरिया ने दया है फ्रांस से लायी थी वो "

"फ्रांस से पर इसे कहते क्या है माँ"

"बीटा ये ब्राज़िएर और जांघिया है"

देवरानी ये कह कर शर्मा कर एक मुक्का बलदेव क छाती पर मरती है

"हाय मेरी माँ शर्मा रही है"

"बीटा ये नया शोध है वस्त्र में हमारे यहाँ तो सिर्फ एक वस्त्र की छोटी सी पट्टी पहनते है"

"माँ पर वो आपको क्यू "

"वो सब छोरो ये सुल्तान मेरे वाहिद और मल्लिका हूर इ जहाँ का राज्य पुरे दुन्या में है "

"माँ आधे धरती पर है पुरे पर नहीं"

"बहुत बड़े सुल्तान है वो "

"हाँ माँ उनका राज पारस से ले कर अरब और अरब से ले कर अफ्रीका और मैंने सुना हु फ्रांस तक सुल्तान मेरे वाहिद कब्ज़ा कर लये है"

बलदेव देवरानी को फिर से अपने बाहो में भरता है

"माँ ये उतर दो मुझे इसमें छुपे ख़ज़ाने को देखना है"

"बीटा जाओ खज़ाना रात भर तुम्हारे पास रहेगा मुझे भूरिया दीदी क पास जाना है अब में कपडे पहन लू"

बलदेव समझदारी दिखते हुए देवरानी को अपनी क़ैस से आज़ाद करता है और बहार चला जाता है देवरानी को कपडे पहन क लये छोर देता है

बलदेव बहार आकर एक सैनिक से

"सुनो"

"जी हुज़ूर"

"ये मेरे मित्र कहा है"

"हुज़ूर वो बगीचे क तरफ गए है"

बलदेव समझ जाता है और सैनिक क बताये हुए रस्ते की तरफ जाने लगता है

बलदेव देखता है श्याम और बद्री बात कर रहे थे और टहल रहे थे

Baldev:ary तुम लोग इधर हो में तुम दोनों को कब से ढूंढ रहा हु

Shyam:aao बलदेव

badri:sach में हमे ढूंढ रहे थे या कही और व्यस्त थे

बद्री को गुस्से में देख

Baldev:tumhe क्या हुआ बद्री तुम पहले जैसा नहीं हो

Badri:pehla जैसा कौन नहीं रहा अपने डिल से पूछो झूट नहीं कहता में तुम्हारी तरह

Baldev:sach में में तुम दोनों को माँ क कक्षा से निकलने क बाद ढूंढा पर तुम दोनों महल में दिखे नहीं

Badri:Maa हहहह

बलदेव गुस्सा हो जाता है

"बद्री तुम मेरे मित्र हो इसलिए कह रहा हु कभी माँ शब्द इस तरह उच्चारण मत करना"

Badri:Murkh मुझे मत सिखाओ माँ शब्द की पवित्रता और श्याम अब मुझे वो धर्म सिखाएंगे जो खुद अपनी माँ को ले कर सोते है

बद्री भी गुस्से में आग बबूला हो कर अपनी

भड़ास निकलता है

बलदेव ये सुन कर

"श्याम इसको समझाओ अपनी जीभ को लगाम दे और सब अपने माँ क साथ सोते है इसमें गलत क्या है"

Badri:par तुम तो वो करते हो जो एक पत्नी क साथ करना चाहिए

बलदेव ये सुन कर अचंभित था क बद्री कैसे जनता है

"बीटा बलदेव तुम हमारे साथ बचपन से रहे हो और तुम्हारे अंदर बदलाव आना हमारे साथ काम समय व्यक्तित करना मुझे तो शक बहुत पहले था क तुम्हारे जीवन में कोई आगयी है"

shyam:tum दोनों झगड़ो मत कोई सुन लेगा तो बदनामी हमारी हे होगी एक तरफ चलो हम बैठ क समाधान निकालेंगे

Badri:han मैंने सोचा था किसी क साथ तो तुम्हारा टंका भिड़ा है पर तुम तो अपने माँ को हे अपना वासना का शिकार बन लय

बलदेव का जैसे अंग अंग गुस्से से लाल हो जाता है और वो अपने दोनों मुठी बंद करता है

"बद्री अगर तुम मेरे मित्र न होते तो आज में तुम्हे ज़िंदा इस धरती में गाड़ देता "

"कैसी मित्रता तुमने हम से हर बात छुपाई और अब तो तुम्हारे जीवन में तुम्हारे वासना की पूर्ति करने वाली आगयी न मार दो हमे "

"श्याम इस बद्री को समझाओ"

Shyam:tum दोनों गरम दिमाग क हो शांत रह क भी बात क्या जा सकता है

Shyam:suno बात ये है क हमने तुम्हे जंगल में मौसी क साथ तम्बू में..

श्याम अपना सर निचे कर लेता है

Badri:tum से ये उम्मीद नहीं थी हमे ज्ञान देते थे तुम

Baldev:Suno अपने कान खोल कर मेरा और देवरानी का प्रेम सच्चा है इसे वासना का नाम मत देना ,हाँ में इस बात को मानता हु क तुम दोनों को मुझे पहले बता देना चाहिए था पर नहीं बताया उसके लये मुझे क्षमा कर दो पर मेरे प्यार को गलत शब्द मत देना

ये कह कर गुस्से से चला जाता है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 65

बलदेव अपने माँ अपने प्यार क खिलाफ एक शब्द नहीं सुन सकता था और बद्री का बलदेव और देवरानी क प्रेम को वासना बताने भर से बलदेव का खून खौल जाता है और बद्री और श्याम को चेतावनी दे कर आजाता है

Badri:shyam देखा तुमने इसे कितना गुस्सा आई हमारे बात पर उल्टा चोर कोतवाल को दांते

Shyam:Me तुम्हारी हर बात समझ रहा हु मित्र पर तुम परिस्थिति समझो हम अपने देश से बहुत दूर है पराये राज्य में है और वो भी मौसी देवरानी क भाई क राज्य में अगर तुम्हारी बात कोई सुन लय तो

Badri:to क्या होगा श्याम ज़्यादा ज्ञान मत दो तुमने बलदेव का नहीं सुना कैसे मौसी को नाम ले कर कहता है वो जैसे कही का बड़ा महाराज हो "मेरे और देवरानी क बीच वासना नहीं प्यार है"

इसकी तो..

Shyam:shaant हो जाओ अपनी बूढी का इश्तेमाल करो तुम तो जानते हो बलदेव का गुस्सा वो लाल हो गया था पर वो मित्र समझ कर

Badri:chup कर श्याम में चूड़ियां पहन कर नहीं बैठा इसकी सब अकड़ निकल सकता हु

महल क अंदर तैयार हो कर देवरानी भूरिया क कक्षा में जाती जय

Devrani:didi में आजौ

Hooriya:aajao छोटी

देवरानी कक्षा में आती है और अपने आप को छोटी कहे जाने से झूठा नखरा दिखते हुए

Devrani:Me कहा से छोटी हु दीदी

Hooriya:Mohtarma तुम तक़रीबन 10 साल छोटी हो

Devrani:hmm वो तो है आप को मर्ज़ी जो बुलाये

Hooriya:aao बैठो

Devrani:baith रही हु दीदी पर बुरा न मनो तो एक बात कहु

Hooriya:kaho न

Devrani:aap हमेशा ये पहनी रहती है दिन रात गर्मी नहीं लगती आपको?

Hooriya:nahi पगली हिजाब की आदत हो गयी है

devrani:par आप को में जब से आई हु तब से ऐसे हे देख रही हु

Hooriya:tu कहना चाहती क्या है

Devrani:aap इतनी सुन्दर हो खूब सज सवार क रहा कीजिये न और आप तो पूरी दुन्या क मल्लिका है

Hooriya:devrani तुम्हे पता है दुन्या वाले जो सोचे पर में कभी ऐसा महसूस नहीं की में पूरी दुन्या की मल्लिका जहाँ हु

Devrani:aapko पता भी है क आप क सुल्तान का कितने राज्य में राज है

Hooriya:mujhe नहीं पता वो भी बास इतना पता है क पारस से ले कर अफ्रीका तक सुल्तान की सल्तनत है

Devrani:aapko ज़रा भी अकेला पैन महसूस नहीं होता इतने बड़े महल में आप अकेली

भूरिया मुस्कुराती हुई

Hooriya:akeli..Nahi देवरानी हमारा खंडन बहुत बड़ा है

devrani:to सब कहा है

Hooriya:agar दो दिन पहले तुम आते तो सब से मिल लेते वो सब एक जलसा क लये अरब गए है

Devrani:acha कौन कौन है आपके परिवार में

Hooriya:Saans ससुर मेरी तीन सौतन है उनके बचे है मेरी ननद है

देवरानी: ओह तो सब यात्रा पे है

Hooriya:han वो लोग कुछ दिनों बाद aayenge,or तुम्हारे खंडन में ?

Devrani:didi हमारा छोटा परिवार है मेरी सांस है एक सौतन है और मेरे pa..t और मेरे बलदेव क पिता है

देवरानी पति कहते कहते रुक जाती है

Hooriya:to सौतन तुम्हारी भी है

devrani:haan दीदी मेरी तो एक है और आपकी तीन

Hooriya:han सुल्तान ने चार शादिया की है पर बाकी की रनिया बहुत काम होती है इस महल में पर तुम्हारे वह तो एक हे शादी का रिवाज है

devrani:han दीदी पर अब राजा तो राजा होता है कही का भी हो

Hooriya:han बहिन वैसे 4 बीइओ क अलावा सुल्तान मेरे वाहिद क हरम में 150 कनीज है

Devrani:hey भगवन ..150 स्त्री है सुल्तान क हरम में बुरा मत मन न दीदी पर बहुत रंगीन मिजाज़ क है पति आपके

Hooriya:ab क्या कर सकते है बहिन अब हम पहले ज़माने वाली मोहब्बत कहा करता है कोई और खास कर अगर तुम रानी हो तो राजा चार जगह तो मुँह मरेगा हे

devrani:Is प्रकार तो मेरी दीदी हूर जहाँ जी का प्यार बाँट जाता होगा सुल्तान आपसे एक महीने में मिलते है क 6 महीने में

देवरानी हस्ते हुए तना मरती है

Hooriya:Nahi देवरानी ऐसा नहीं है में खुश हु जैसे भी है सुल्तान मेरी इज़्ज़त और मुझे प्यार करते है क्यू क में सबसे पहली बीवी हु उनकी और रही बात प्यार की तो हफ्ते में एक बार तो मुझे सुल्तान याद करते हे है

Devrani:is मामले में मई फस्स गयी क्यू क में दूसरी पत्नी हु

ये बात सुन कर भूरिया है पड़ती है

Devrani:didi एक सप्ताह में प्यार मिलता है और पूरा सप्ताह तड़पती तो सुल्तान पर गुस्सा नहीं आता

Hooriya:Khuda खैर करे में उनपर गुस्सा होकर गुनाह क्यू कमाऊ

devrani:aap ये झुब्बा उतार दो न

भूरिया मुस्कुराते हुए

"तू नहीं मानेगी छोटी"

भूरिया अपना हिजाब उतार कर दूसरी तरफ रखते

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हुए

Hooriya:bass खुश देख ले इस बूढी को

Devrani:wah आप का तो अंग अंग सुंदरता से चमक रहा है

Hooriya:ab इतनी भी नहीं हु ..उम्र हो गयी अब मेरी

Devrani:ary कही से आप बूढी नहीं लगती आज भी कोई नौजवान युवराज आप पे जान दे दे अगर आपका ये रूप देख ले

Hooriya:ab आधे से ज़्यादा ज़िन्दगी गुज़र गयी परदे में अब क्या सजना सवर्ण

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Devrani:didi आप ऐसी बात मत कीजिये जीवन में जितना होसके खुश रहिये और आप सच्ची अपने आयु से काम लगती है

Hooriya:acha बाबा मान ली

Devrani:aap सज सवार क रहा कीजिये देखिये सुल्तान आपके पास आपके तीनो सौतन को छोर रोज़ आएंगे

Hooriya:acha जी

Devrani:or अपने हरम क किसी भी औरत को देखेंगे भी नहीं

Hooriya:shukria मेरी बहिन मेरे बारे में इतना ाचा सोचने क लये पर तुझे देख कर मेरा मन कहता है तुम भी अपने शौहर से परेशां हो

Devrani:tum भी मतलब आप भी परेशां हो क्या

Hooriya:nahi नहीं

Devrani:nahi में अब परेशां नहीं मुझे मेरा जीवन का उदेश्श्य पता चल गया है

Hooriya:acha वो तो में तुम्हारे शौहर साथ में नहीं इस वजह से कह रही थी

देवरानी हस्ते हुए

"दीदी अब थोड़े डरपोक है वो शत्रु उनके हर तरफ है इसलिए "

hooriya:me तो पहली बार तुम्हारे बेटे को हे तुम्हारा शौहर समझ ली क्यू क देवराज ने कहा था क तुम शौहर क साथ आरही हो

देवरानी मन me:Tum सही समझे दीदी

Devrani:Hota है दीदी

Hooriya:aur तुमने वो ब्राज़िएर पहना क नहीं और है उसमे जांघिए भी थी में बताना भूल गई

देवरानी शर्मा कर

devrani:ji दीदी अब भी पहनी हो

hooriya:islye तुम्हारे सामान काम हिल दोल रहे

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और ठहाके क साथ हस्ती है

devrani:didi आप भी न

तभी दोनों क कान में ढोल की आवाज़ गूंजती है

"खामोश रहना देवरानी कुछ ऐलान होरहा है"

"सुनो सुनो सुनो आज पारस में सुल्तान ने फनकारों की मजलिस राखी है और पारस क मशहूर फनकार आज रात अपना फैन दिखाहयेंगे सुनो सुनो सुनो"

Devrani:didi क्या कह रहे है

Hooriya:aao बहार चले

दोनों बहार आकर अपने कान लगाकर सुन ने लगती है

"सुनो सुनो सुनो ये जश्न महाराज देवराज जी क बहिन क आने की ख़ुशी में मनाया जा रहा है"

तभी वह से शमशेर तेज़ी में चलते हुए आरहा था और अपने माँ को देख

shamshera:ary माँ आप और खला देवरानी आप भी यहाँ

Devrani:beta वो ऐलान सुन ने

Shamshera:Khala वो अब्बा हुज़ूर ने जश्न मानाने का ऐलान क्या है

Hooriya:acha तो कौन कौन फनकार आरहे है शमशेर

Shamshera:ammi आज की महफ़िल

में सब आरहे है पारस क जितने भी फनकार है शायर क़व्वाल

भूरिया ख़ुशी से झूम उठ टी है और उसके साथ हे उसका चेहरा भी खिल जाता है

जिसे देख रहा था गौर से शमशेर

devrani:man me)bada खुश है अपने माँ को देख गौर भी कर रहा है

Shamshera:me आया अम्मी जल्दी में हु

Hooriya:kaha बीटा?

शमशेर बिना कुछ बताये चल देता

है

devrani:kaha गए युवराज शमशेर

Hooriya:kaha जायेंगे अपने पीने का बंदोबस्त करने दोनों बाप बेटे एक जैसे

devrani:to दीदी आप मन क्यू नहीं करती

hooriya:kya मन करू बहिन मेरे मन करने से इसके बाप नहीं मने ये कहा मान जायेगा

फिर वो लोग वापस कक्षा में जा कर बात चीत में लग जाते है

इधर बलदेव गुस्सा हो कर अपने मां को ढूंढ़ते हुए शमशेर से टकराता है

Baldev:aapne मां को देखा क्या

Shamshera:dekha तो है पर

baldev:kaha है वो?

Shamsher:aage तो सुनो पर मुझे नहीं पता है वो अभी कहा है

बलदेव मज़ाक समझते हुए एक गुस्से की निगाह से देखता है

Shamshera:are रे बचा गुस्सा हो गया

Baldev:ye क्या बदतमीज़ी है

Shamshera:dost मुआफ करना वैसे हे मज़ाक क्या मुझे पता नहीं कहा है मां आपके वैसे अगर कोई काम न हो तो चलो मेरे साथ

Baldev:kaha युवराज?

Shamshera:chalo भाई तुम्हे पारस क मशहूर बाजार घुमा कर लता हु

बलदेव क पास कोई काम नहीं था वो भी शमशेर क साथ अपना घोडा निकल दोनों बाजार की ओरे चल देते

कुछ दूर घुड़सवारी करने क बाद बाजार शुरू हो जाता है और भीड़ में भी शमशेर अपना घोडा दौड़ते हुए जा रहा था

Baldev:yuvraj घोडा यही बांध देते है भीड़ है औरते बचे है किसी को भी छाती पहुंच सकती है

Shamshera:kaisi बात करते हो भाई में शमशेर पारस का होने वाला सुल्तान और पूरी दुन्या पर हुकूमत करने वाला हु में

shamshera:hatt जाओ मेरे रास्ते से

कह कर अपने घोड़े से रास्ता बनता हुआ भीड़ को चीरता हुआ जाते रहता है और बाजार में हाहाकार मच जाती है

"हट जाओ सब शहज़ादे है "

और पूरा भीड़ छत जाता है और बलदेव शमशेर क पीछे मजबूरन अपने घोड़े को लये जा रहा था

आखिर कर शमशेर अपनी मंज़िल में पहुंच कर घोड़े क लगाम को खींचते हुए रोकता है

वही पास दुकान वाले आवाज़ देते है

Dukanwala:Shahzade आइये ये मेरी कालीन ले लीजिए इसका काम देखिये इसकी खूबसूरती का कोई शनि नहीं

Baldev:yuvraj सही में बहुत खूबसूरत कालीन है

Shamshera:chhoro बलदेव अगर तुम्हे चाहिए होगा तो इसे हम महल बुलवा लेंगे अभी चलो

शमशेर एक तहखाने क अंदर जाता है सीडीओ से उतारकर वो एक अँधेरे से बड़े घर में पहुँचता है जहा पर अँधेरा था और लैंटर्न क रौशनी में ये पता चल रहा था

Baldev:yuvraj ये तो

Shamshera:ishh और ये युवराज बार बार कहना बंद करो तुम मुझे नाम से पुकारो

Baldev:shamshera ये तो सही जगह नहीं है

Shamshera:tum बचे हो अभी यहाँ पर हर किस्म मदिरा मिलता है और इसके ऊपर माल

baldev:kaisa माल

शमशेर हस्स पड़ता है

शमशेर पास रखे मिटटी क सुराही में रखे मदिरा बेच रहे आदमी क पास जा कर

shamshera:idhar लाओ एक

और कुछ सिक्के उसको दे देता है

और मदिरा गटकते हुए

Shamshera:to सुनो माल क मने ये है क यहाँ ऊपर कोठा है और पूरी दुन्या भर से तवायफ आती है यहाँ जर्मन फ़्रांसीसी मिश्री अरबी हर तवायफ मिलेगी

shamshera:kya बात कर रहे हो

शमशेर एक और गट मरता है

Shamshera:bhai यहाँ पर ऐश करने लोग दुन्या भर से आते है तुम्हे चाहिए

Baldev:nahi नहीं ये पाप hai,tum ये सब कैसे करते हो सुल्तान को पता चला तो

Shamshera:sultan को बताएगा कौन हहहह मेरा जब मन करता है में मज़े कर क जाता हु तुम बचे हे रहोगे

Baldev:Aisi बात नहीं है पर में किसी से प्रेम करता हु उसको धोका दे नहीं सकता शमशेर

Shamshera:bhai बड़े ईमानदार हो अपने मेहबूबा को डिल से चाहते हो लगता है

Baldev:wo मेरे रोम रोम में बस्ती ही उसे धोका देना अपने आप को धोका देना जैसा होगा

Shamshera:ab बास कर मजनू न बनो लो मदिरा तो पियो

baldev:nahi यार उसने मुझे मन क्या है

Shamshera:bhai तो तुम्हे देखने थोड़ी आ रही है वो पारस

Baldev:nahi फिर भी

Shamshera:bhai तुम्हारी मेहबूबा कहा है हिन्द में ?

Baldev:Hmm

Shamshera:aur तुम हो यहाँ पारस में हज़ारो मील दूर उसको क्या इसकी खुशबु जाएगी वह तक हहहहह

Baldev:theek है तो लाओ एक घुट पी लू

बलदेव भी दो घुट पी लेता है

Shamshera:kaisa लगा मज़ा इसका

Baldev:acha है

बलदेव ने पहले भी मदिरा पिया था कई बार इस बार उसे लगता है जैसे वो कोई और दुन्या में पहुंच गया ...

तो बे कॉन्टिनोएड
 
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