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- Dec 5, 2013
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श्याम और बद्री सैनिक क साथ महल क मुख्या दुवार की ओरे जाने लगते है रास्ते में हे उन दोनों की नज़र कसरत करते हुए बलदेव पैर पड़ती है जो अपने हे धुन में था
Sainik:Yuvraj आपके मित्र आये है
Baldev:Kya सच में
बलदेव पलट कर देखता है तो सामने श्याम और बद्री मुस्कुराते हुए खड़े थे
Baldev:ary तुम दोनों का स्वागत है मित्रो
बलदेव खुला शरीर लये हुए हे अपने मित्रों क समीप जाता है उनका स्वागत करने क लये
Badri:Baldev तुम्हारा शरीर अब हम जैसा नहीं रहा तुम पठार क सामान हो गए हो
shyam:Han भाई आज कल भाई ज़्यादा म्हणत कर रहे है
बलदेव मुस्कुराता हुआ सैनिक से
"ज़रा मेरा परिधान लाना"
"जी युवराज"
Baldev:wo सब छोरो इतना सवेरे कैसे पहुंच गए तुम दोनों
Badri:bhai हम रात हे तुम्हारे छेत्र में आगये थे पर हम पास क एक राज्य में रुक गए थे
Shayam:han और सुबह होते हे वह से हम चल डाई इसलिए सवेरे पहुंच गए
Baldev:tum दोनों का धन्यवाद मेरी मान रखने क लये मित्रो
Badri:Bhai हम मित्र है अगर हम एक दूसरे का साथ नहीं देंगे तो कौन देगा
Shyam:tumhare लये तो जान भी दे सकते है हम तुमने तो हमारे लये बहुत क्या है जब हम आचार्य जी पास शिक्षा ग्रहण कर रहे थे
तीनो चल कर अब महल क मुख्या दुवार पर पहुंच गए थे
Badri:shyam सही कह रहा है बलदेव हम वो दिन भूल नहीं सकते जब तुमने हम सब की गलती की सजा अपने सर ले लये थे
बलदेव बात काट ते हुए
"अब छोरो भी जो हुआ सो हुआ तुम दोनों मेरे मित्र हो में अपनी जान की परवाह नहीं क्या कभी न करूँगा"
Shyam:Bhaio मुझे भूक लगी है और में तो गहतराष्ट्रा आता हु मौसी क हाथो का पकवान खाने
Baldev:Shyam चलो आज तुम्हे हम बहुत बढ़िया पकवान खिलाएंगे
Shyam:Mujhe मौसी के हाथ का हे खाना है
Baldev:Han मई माँ से कह कर तुम्हारे लिए बनवा दूंगा
Badri:tum तो अब भी बचे हो आये नहीं क शुरू हो गए पेटू
Baldev:ary ऐसा नहीं है बद्री इसका पूरा हक़ है
"तुम दोनों झगड़ना बंद करो और चलो मेरे साथ"
तीनो महल में घुस जाते है
देवरानी अपने कक्षा में व्यायाम करने क बाद स्नान कर सुबह का जड़ी बूटी खा रही थी फिर उसके कानो में बलदेव और किसी की बातचीत सुनाई दी
देवरानी अपना घूँघट कए अपने कक्षा से बहार आती है और सामने बलदेव क साथ उनके दोनों मित्र थे
बलदेव देखता है क माँ घूँघट ताने दूसरी ओरे मुँह कए पहचानने की कोशिश कर रही है क आखिर कौन आये है
Baldev:ary माँ इधर आओ ये मेरे मित्र श्याम और बद्री है
अब तक तो देवरानी ने भी चोर नज़रो से देख पता लगा लय था क ये बद्री और शयाम है
देवरानी उनके पास चली जाती है और अपना घूँघट कए हुआ पल्लू हटती है
बद्री और श्याम देखते हे देवरानी क पेअर पद जाते है बी बद्री और shayam:Mausi आप को बहुत दिनों बाद देख बाद ाचा लगा हमे आशीर्वाद दीजिये
Devrani:Ary मेरे बेटो मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है देवरानी दोनों को सर पर हाथ फेरती है दोनों खड़े होते है
ये सब देख बलदेव मुस्कुरा रहा था
Devrani:Baldev इन दोनों को अपने कक्षा में ले कर जाओ में अभी पूजा नहीं की हु
Shayam:Mausi मुझे प्रसाद चाहिए
Badri:shyam तू बस खाने क जुगाड़ में हे रहना बालक ,मौसी आपको पूजा करने की क्या आवश्यकता आप तो खुद देवी लगती हो और देवी जैसी पवित्र हो
देवरानी ये सुन कर मुस्कुरा देती है
Baldev:Badri तुम कह रहे थे न क मेरे गठीले शरीर का राज क्या है तो राज ये है मई इस देवी की पूजा करता हु
देवरानी की ओरे देख आँख मार देता है
देवरानी अपना घूँघट फिर से डेल अपने कक्षा में जाने लगती है देवरानी अपने में लज्जा क साथ अपने ऊपर गर्व भी कर रही थी
Badri
ooja भर से ये कैसे
Baldev:bhai माँ मेरा खाना पीना सब कुछ का हिसाब रखती है
तीनो सीडीओ से होते हुए बलदेव क कक्षा तक पहुंच जाते है
Badri:to भाई बलदेव कब पारस निकलने का इरादा है
Baldev:jab तुम कहो
Shyam:Han हमे वह खूब प्राचीन चीज़े देखने मिलेगी और वह का पकवान भी मई सुना हु बहुत स्वादिष्ट होता है
Badri:Shyam अब तुम बचे नहीं हो मुर्ख कुछ और भी सोचो खाने से हैट कर
Shyam:Mujhe मुर्ख कहा में मेवाड़ का युवराज हु अभी तुम्हारे उज्जैनी जीभ को खींच लूंगा ,कालू राम
श्याम तहका दे कर हस्ता है जिस से बलदेव की भी हसी छूट जाती है
बद्री श्याम क गर्दन को हाथ में ले कर पीछे से दबा कर
"श्याम अपने गोर रंग पर इतना अहंकार "
"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे मुर्ख कहने की बद्री काली बदल"
Badri:Iski तो में जान ले लूंगा
Baldev:chhoro भी बद्री तुम दोनों कब लड़ना बंद करोगे बचे
बलदेव दोनों को अलग करता है
Baldev:ab हम बरी बरी से स्नान कर लेते है
तभी तीनो क कान में ढोल की आवाज़ आती है
Badri:Koi ढिंढोरा पीट रहा है
तभी तीनो कान लगा कर ढिंढोरे की आवाज़ क साथ कोई संदेह राज्य में सुनाया जा रहा था वो सुन ने लगे
"सुनो सुनो सुनो ...महाराज राजपाल सिंह ने आज अभी अभी सभा बुलाई है कृपया कर क सब पहुंचे महाराज कोई निर्णय लिए है सुनो सुनो गहतराष्ट्रा वासिओ"
Baldev:ab तो समय व्यर्थ करना हे मत में स्नान कर क आया
बद्री और शयाम समझ जाते है और अपने साथ लाया हुआ सामान सैनिक को कह कर कक्षा में रखवाते है और अपने वस्त्र का चुनाव करने लगते है
पहने क लये
थोड़ी देर में बलदेव स्नान कर क आ जाता है और बरी बरी से सभी स्नान कर लेते है और अपने परिधान पहन लेते है
देवरानी इधर आकर अपने कक्षा में पहले अगरबत्ती जलती है और कुछ प्रसाद का चढ़ावा लगा कर रोज़ की तरह अपने पथ पढ़ रही थी ,कुछ देर पथ पढ़ने क बाद पूजा ख़त्म होता है और देवरानी अपने और बलदेव क लये कामना करती है
"भगवन धन्यवाद तूने मेरी हृदय की बात सुन ली और इतने बरसो बाद में अपने मायके पारस जा रही हु हम सब दूर की यात्रा करने जा रहे है हम सब पर अपना कृपा रखना भगवन"
दोनों हाथो जोड़े कड़ी भगवन से मांग रही थी मंदिर में दिया जला कर पूजा की थाली ले कर बलदेव क कक्षा की ओरे जाती है
देवरानी देखती है तीनो तैयार हुए बैठे थे
Devrani:Lo बचो तुम सब का प्रसाद
बद्री और शयाम झट से अपना सर झुका कर अपना हाथ आगे बढ़ा कर प्रसाद ले लेते है पर बलदेव नहीं लेता
Devrani:ary बलदेव तुम भी लो बीटा
बलदेव सर निचे कर क
"माँ मई बाद में ले lunga"or देवरानी को एक अंदाज़ से देखता है
Shyam:Mausi अभी सभा क्यू बुलाये महाराज ने
Devrani:Sabha बुलाया मई तो नहीं सुनी और तुम मुझे मौसी कहते हो और उनको महाराज
Shyam:Q क मौसी महराज राजपाल खड़ूस है इसलिए मौसा नहीं कहता और आप एक डैम अपने सी लगती हो महारानी नहीं कह कर मौसी कहना ाचा लगता है
देवरानी श्याम की बात पर मुस्कुराती है
Badri:Murkha श्याम चुप raho,waise मौसी अभी थोड़ी देर पहले ढिंढोरा सुना हमने ,उस समय शायद आप पूजा कर रही होंगी
Devrani:han मैं पूजा कर रही थी
Badri:Aap तो देवी है मौसी आपने तो सच में कुछ नहीं सुना पुरे गहतराष्ट्रा ने सुन लय ,सच कहु आप क भक्ति को नमन मेरा
Devrani:Ary बास भगवन की कृपा है मेरे जैसी तो करोड़ो है पुजारी
Badri:Mausi इस श्याम को भी सिखाइये कुछ इसे कुछ नहीं आता
Shyam:han जैसे तुम इतने बड़े भक्त हो क शक्चारत शिव जी से वार्तालाप करते हो
ये सुन कर सब हसने लगते है
Devrani:agar ऐसा है तो तुम लोग जाओ हम सब को प्रसाद दे कर आते है
देवरानी प्रसाद की थाली ले कर चली जाती है और बलदेव अपने मित्रो को ले कर महल क बहार सभा में जाने लगता है
देवरानी सबसे पहले षुरूश्ती क कक्षा में जाती है
"दीदी षुरूश्ती "
"आओ देवरानी"
"दीदी ये लीजिये भगवन का प्रसाद "
"आर्य वह देवरानी इतना सवेरे तुमने पूजा पथ भी कर ली"
"हाँ दीदी वैसे आज आप उदास सी लग रही हो क्या हुआ आप की ताब्यात तो ठीक है न"
षुरूश्ती अंदर से जल भून जाती है
"क्यू ऐसा क्यू कह रही हो देवरानी में ठीक तो हु"
"दीदी वो मई रात में उठी तो देखा आप अपने कक्षा में जा रही थी और जब तक आवाज़ देती आप ने दरवाज़ा बंद कर लय"
"षुरूश्ती दीदी लगता है आपका नींद पूरा नहीं हो पाया है"
षुरूश्ती को इतना गुस्सा आया क वो अब थप्पड़ देवरानी क गालो पर रख दे पर वो अपने आप पर काबू रखे
Shurushti:man में) कामिनी तू रणदीनाच कर ली जितना करना था बस आगे आने वाले दो दिन में तेरे चिटा में आग में हे दूंगी
देवरानी :क्या सोचने लगे ये लीजिये prasad,Bhagwan ने कहा है मनुष्य को शक्ति वो उतनी हे देते है जितने की आवश्यकता है इसलिए हमे अपने शक्ति का कभी भी गलत इश्तेमाल नहीं करना चाहिए अन्यथा जो भगवन शक्ति देता है वो छीन भी लेता है
षुरूश्ती हाथ आगे बढ़ा कर अपने मन को मार कर प्रसाद देवरानी क हाथो से लेती है
Shurushti:man में) रंडी बड़ा ज्ञान दे रही है देवी बन ने की कोशिश कर क शुरू से तुमने सोचा अपना सिक्का घर पैर ज़माने का पर आज तक तुम सब क पेअर की धूल हे ho,apne बेटे पैर इत्र लो एक दो दिन फिर तो तुम से में स्वर्ग लोक में हे मिलूंगी ,कामिनी वही अपने बेटे से प्रेम का खेल khelna..Devani देवी माँ
षुरूश्ती क चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान घिर जाता है जिसे देवरानी देख लेती है
Devrani:Kya बात है दीदी मुस्कुरा रही हो बेवजह कही महाराज की कोई रात की बात याद आगयी
Shurushti:Tum कहना क्या चाहती हो देवरानी
Devrani:Yahi क मई आपको देखि थी महाराज क कक्षा से निकलते हुए जब में पानी पीने उठी तो
षुरूश्ती चुप चाप बूट बानी सुन रही थी उसे समझ नहीं आरहा था क वो क्या कहे
Devrani:Waise कल रात खूब आनंद लय आपने इसलिए अब तक मुस्का रही हो
षुरूश्ती की तो जैसे जले पर नमक छिरक दिया हो देवरानी ने षुरूश्ती को प्यासी छोर कर जो तड़प और खुमारी छोर दया था राजपाल ने वो षुरूश्ती अब तक महसूस कर रही थी
षुरूश्ती : मन में) देवरानी की बची मेरा मज़ाक उदा रही है पर इसे कैसे पता राजपाल मुझे प्यासी छोर देता hai,Han ये भी तो राजपाल का लिंग ली है भले वो आज से 17 साल पहले हे चूड़ी हो पर जानती है क 4 इंच लौड़े से क्या होता है
Devrani:man में) अब तुम उस बूढ़े क छोटे से लिंग को खड़ा करते रहना जीवन भर और तीन धक्के में हे खुश रहना ,कद की नाती है पर चालबाज़ी तो भरपारा है कमीनी में
Shurushti:Nahi नहीं देवरानी क्या बकवास कर रही हो अब में 48 साल की हुई अब मेरा डिल नहीं करता वो सब का
Devrani:man में) वो तो तेरा डिल हे जनता है है षुरूश्ती
Devrani:Aisa क्या दीदी मुझे तो पता हे नहीं था
Shurushti:Han अब बकवास तुम्हारी ख़त्म हो गयी हो तो जाओ मुझे काम है कुछ
देवरानी को गुस्सा आता है पर अपने सही समय पर बदला लेने की ठानी थी वो वह से चल देती है
देवरानी जीविका क ओरे चल देती है
"माँ जी कहा हो आप"
जीविका अपने कक्षा से बहार आते हुए
"हाँ बहु कहो"
और एक गुस्से से देखते हुए देवरानी से पूछती है
"वो माँ जी आपके लये प्रसाद लायी थी"
जीविका को रात का दृश्य याद अत है जब बलदेव देवरानी क कूल्हों को हाथ से दबोचे देवरानी को गॉड में लये रसोई से ले जा रहा था
जीविका अपने मन में
"देवरानी तू कितनी बड़ी पापिन है मैंने कभी नहीं सोचा था मुझे शर्म आती है अपने ऊपर अब "
"माँ जी क्या सोच रहे है मुझे आशीर्वाद दीजिये कई वर्षो बाद पारस जा रही हु"
देवरानी जीविका क पेअर छू लेती है
जीविका नहीं चाहते हुए भी
"है हाँ जीते रहो"
देवरानी एक क़ातिल मुस्कान क साथ जीविका की प्रस्तिथि समझते हुए कड़ी होती है और जीविका को देखती है जिसका चेहरा उतरा हुआ था
देवरानी को जैसे बहुत खुसी होती है जीविका का चेहरे देख कर
जीविका मन में " में कैसे रोकू इन दोनों को पाप करने से कैसे कहु राजपाल क उसकी पत्नी और उसका बीटा अवैध सम्बन्ध बना रहे है"
देवरानी सबको बाँट देती है प्रसाद और कमला को थाली दे कर
Devrani:kamla इसे बाँट दो
Kamla:kya बात है आज बहुत खिल रही हो
Devrani:q रोज़ अछि नहीं लगती
kamla:nahi महरानी आज ऐसा खिल रही हु जैसे युवराज ने खूब अंदर तक अपने केले से मालिश कर दिया हो
Devrani:chup कर pagli..aisa कुछ नहीं हुआ
Kamla:to कैसा हुआ
Devrani:bass तुझे तो बताया तो था बास वह तक नहीं जाना बिना विवाह क ..दर लगता है कही कुछ
Kamla:q देवरानी डर है क कही युवराज आप को पेट से कर क छोर नहीं दे (तो फिर तुम न घर की रहोगी न घाट k)islye पहले बंधन में बांधना चाहती हो
देवरानी शर्मा जाती है
Devrani:tu छिनाल है ..मुझे भरोषा है बलदेव पैर ..
Kamla
aro मत मेरी बहना बलदेव तुमसे सच्चा प्यार करता है उसके सामने हूर भी आ जाये तो वो उसको नहीं देखेगा आपके सामने
devrani
ehle मई..
kamla:mai समझ रही हु महरानी आप सोच रही हो कही आगे जा कर उसका मन बदल जाये कुवारी दुल्हन पाने क लये और वो विवाह कर le..par ऐसा नहीं होगा
Devrani:bhagwan न करे ऐसा ho,theek है मुझे काम है
अपने कक्षा में जाती है और सभा में जाने की तैयारी करने लगती है
धीरे धीरे सब सभा में पहुंचते है और सबका जय जयकार से स्वागत होता है
Rajpal:Senapati सोमनाथ खड़े हो कर जनता से सुनाओ
सेनापति somnath
evio और सज्जनो और गहतराष्ट्रा क 20 गाओ से आये हुए हमारे गाओ क सम्मानित मुखिया आप सब का गहतराष्ट्रा क महाराज राजपाल और सेना स्वागत करते hai,Maharan ने ये निर्णय लय है जहा पर आप सब का योगदान होना ज़रूरी है ,
महाराज ने गहतराष्ट्रा क ऊपर आक्रमण होने की आशंका है और इस बात का दर मुझे भी है सेनापति होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है पर आप सब जानते है क हम आयत निर्यात में पीछे है और गहतराष्ट्रा का खज़ाना भी अब कुछ खास बचा नहीं है और हमे आशंका है क दिल्ली से शाहज़ेब हम पर आक्रमण कर सकता है और उनकी सेना उत्तर की ओरे निकल गयी है ,मई आप सब से निवेदन करता हु क आप सब सेना में शामिल हो क्यू क बादशाह शाहज़ेब क सैनिक 25000 से काम नहीं होती है
क्या आपसब अपने बचो को हमारी सेना में गहतराष्ट्रा बचने क लये भेजोगे?
पूरी सभा में लोग
"हाँ हम अपने बचे भेजेंगे हमारी माँ गहतराष्ट्रा की धरती को बचाएंगे"
Senapati:Or एक मदद और चाहिए आप सब अपने घर पर जो भी हथियार या लोहा हो उसे हमारे हवाले कर दे हम उन्हें गाला कर हमारे सैनिको क लिए हथियार बनैंगे
Senapati:kya आप सब हमारा साथ देंगे?
भीड़ में से एक दस वर्ष का बालक आगे अत है और कहता है
"सेनापति जी में एक लोहार का बीटा हु और में अपने राज्य को बचने क लये अपनी आखिरी सांस तक लडूंगा"
भीड़ सब एक साथ कहती है
"जीयो लाल"
"जब ये बालक आगे आ सकता राज्य क लये हम सब क्यू नहीं "
वो दस वर्षीया बालक अपने झोले में हाथ दाल कर एक हथोड़ी निकलता है
"सेनापति जी मेरे पिता लोहार है और उनका ये हथोड़ी में राज दान करता हु"
सेनापति सोमनाथ अत्यंत खुश होता है और बालक क पास आकर
Senapati:Is गहतराष्ट्रा क लाल का दान में स्वीकार करता हु .लाओ मेरे बचे सेनापति उसके सर पर हाथ फेर कर उसका हथोड़ी ले लेता है
Senapati:aap सब सचेत रहिये अपने अपने गाओ में हम सब सीमा को चारो ओरे से घेर लेंगे
सेनापति somnath:maharaj आप कुछ कहना चाहेंगे
Rajpal:Aaj अगर पिता श्री जीवित होते तो वो बहुत प्रसन्न होते आप सब का धन्यवाद् गहतराष्ट्रा वासिओ और में आप सब से हमारे अतिथि बद्री जो उज्जैन क युवराज है और श्याम जो मेवाड़ से ए है
पूरी भीड़ कहती है
"स्वागत है आप दोनों का अतिथियों"
बद्री और श्याम बलदेव और देवरानी की ओरे देख मुस्कुराते है
Rajpal:Ek बात और कहना चाहूंगा आज रानी देवरानी अपने माँ क यहाँ पारस जाने वाली है
भीड़ में से एक व्यक्ति उठ कर
"महाराज क्षमा करे क्या इस परिस्थिति में हमारे सैनिको को बहार जाना ठीक है"
Rajpal
ekhiye हम इस बात को भली भाटी समझते है इसलिए देवरानी क साथ बलदेव और श्याम बद्री जायेंगे
Vyakti:maharaj की जय हो
सबलोग पीछे से कहते है महाराज की जय हो
senapati:Maharaj और कुछ कहना है
Rajpal:nahi सभा ख़त्म की जाये
Senapati:Ghatrashtra वासिओ सभा ख़त्म की जाती है और अभी से जिनको सेना में शामिल होना है वो सेना शिविर क मैदान में रुक सकते है
जय गहतराष्ट्रा
पूरी भीड़ एक साथ कहती है
"जय गहतराष्ट्रा"
धीरे धीरे सब अपने आसान से उठ कर महल में जाने लगते है
बलदेव क साथ श्याम और बद्री भी जाने लगता है देवरानी अपने कक्षा में जा चुकी थी
Baldev:Mitro तुम दोनों ऊपर जाओ में माँ को कह दू कुछ खाने क लये तुम दोनों का
Shyam:han ठीक है
श्याम और बद्री ऊपर चले जाते है
बलदेव अपने माँ क कक्षा में घुस जाता है देवरानी अपने सामन जो पारस ले कर जाना उसे एकता कर रही थी
"माँ तैयारी शुरू हो गयी"
"आर्य आओ बलदेव"
बलदेव देवरानी क रूप को निहारते हुए
"माँ तुम बाला की सुन्दर लग रही हो"
"ाचा मेरे राजा "
बलदेव देवरानी को बहो में भर लेता है
Devrani:jao मुझसे बात मत करो
Baldev:q माँ क्या हुआ
Devrani:Me गुस्सा हु तुम से
Baldev:q गुस्सा है मेरी रानी
Devrani:tumne प्रसाद क्यू नहीं खाये जब दी तो
बलदेव हस्ते हुए
"ओह तो ये बात है मेरी रानी "
Baldev:dekho माँ में प्रसाद इसलिए नहीं लिया क्यू क तुम हे मेरी देवी हो और मेरा प्रसाद लेना मुझे आता है
बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क होठो को अपने होठो में दबा कर चूसने लगता है
"ुमंठा अगललोप्प सलरपप
गलप्प्प गलप्प उम्म्म सलरपपप
गलप्प्प गल्प उम्मंहा सलरपप"
ऐसे अचानक हमले से देवरानी संभाल नहीं पति और लम्बी साँसे लेने लगती है
एक लम्बी चुम्बन क बाद बलदेव देवरानी क होठ हल्का काट लेता हैडवरानी क होठ छोरता है
Devrani:uff बलदेव ये क्या हरकत है
Baldev:Maa तुमने मुझे बचा क्यू कहा था प्रसाद देते हुए उसकी सजा है ये
Devrani:acha तो इस बात से मुँह गिराए थे तुम और तुमने ये कर क साबित कर दया क बचे हो
बलदेव देवरानी को ले कर दिवार से सत्ता देता है और उसके गर्दन को अपने बड़े हथेली से पकड़
Baldev:Maa वो तो में तुम्हे बताऊंगा कितना बचा हो
देवरानी हल्का खासी करते हुए
Devranu:Jaan से हे मार डोज
बलदेव अपना हाथ गर्दन से निकल कर देवरानी क बड़े गांड पर रख कर दबाता है
Baldev:jaan से तो नहीं पर किसी और चीज़ से मरूंगा ये
और बलदेव एक गांड पर थपकी मरता है
देवरानी लज्जा कर सर झुका लेती है
Devrani:mere प्रेमी क्यू गुस्सा हो रहे हो अगर में तुम्हे बचा समझती तो तुमपर भरोसा कर मई तुम्हे अपना जीवन साथी नहीं चुनती
बलदेव को अपने माँ पैर प्यार क साथ दया आजाता है
"माँ मई आपके इस निर्णय को कभी गलत साबित नहीं होने दूंगा "
तभी राजपाल आवाज़ देता है
"देवरानी ो देवरानी"
Devrani:ji महाराज
बलदेव अपने हाथ में देवरानी क गांड को दबोच क पूरी ताक़त से दबाता है
devrani:aaaaah
देवरानी की ज़ोर से आह सुन कर राजपाल देवरानी क कक्षा की ओरे आता है
devrani:chhoro बलदेव राजपाल आरहा है
देवरानी आकर दरवाज़े पैर कड़ी हो जाती है और राजपाल वह से तेज़ी में चलता हुआ आरहा था पर देवरानी को देख रुक जाता है
Rajpal:kya हुआ क्यों चीखी ऐसे
Devrani:maharaj वो पेअर में ठेस लग गई थी
Rajpal:batao कहा पर लगा चोट
तभी बलदेव सोचता है क अब छुपना बेकार है और दरवाज़े क पीछे से निकल कर सामने आता है
Rajpal:baldev तुम यहाँ ..क्या कर रहे हो
Baldev
ita जी वो माता का हाथ बता रहा रहा पारस जाने की तैयारी में
Rajpal:acha बीटा
Baldev:acha तो में सामान बांधता हु
बलदेव वापस दरवाज़े क पीछे चला जाता है और राजपाल क आखो से ओझल हो जाता है
राजपाल अभी भी अपने पत्नी देवरानी क दरवाज़े क सामने खड़ा बात कर रहा tha,Jo क दरवाज़े और देवरानी से 4 हाथ क दूरी पर था
Rajpal:Suno श्याम और बद्री को कुछ खिलाया पिलाया की नहीं
देवरानी दरवाज़े पैर कड़ी
"महाराज अभी कुछ देर में हे बन जायेगा कमला और राधा पकवान बना रहे है"
दरवाज़े क पीछे छुपा बलदेव को शरारत सूझती है और वो कवर क पैट से सात कर कड़ी देवरानी क उभरे गांड को देखता है उसे अपने हाथो से सहलाने लगता है जिसका असर देवरानी क चेहरे पर साफ़ दिख रहा था और उसके आँख बीच बीच में बंद हो जाती
Rajpal:Or सुनो जितना हो सके जल्दी आना है तुम्हे वापस और देवराज को मेरा प्रणाम कहना और क्षमा मांगना मेरी ओरे से मेरे सेल साहब से
बलदेव देवरानी क गांड सहलाते हुए दबोच कर ज़ोर से मसलता है
devrani:"aaaah" यह
Rajpal:ab क्या हुआ
Devrani:kuch नहीं वो कड़ी हु न कब सा तो मोच दुःख रहा है
Rajpal:theek है जाओ आराम करो
राजपाल घूम क जाने लगता है
बलदेव एक थप्पड़ मरता है गांड पे और इस बार देवरानी ज़ोर से
"ाआअह"
करती है जो जाते हुए राजपाल को भी सुनाई देती है
राजपाल मन में " ये देवरानी पागल है "
जैसे राजपाल देवरानी क आखो से ओझल होता है देवरानी वापस अपने कक्षा में आती है देखती है बलदेव बिस्तर पर लेता मुस्कुरा रहा था
"बलदेव ये क्या बेवकूफी है राजपाल देख लेता तो"
"माँ बास मेरा मन था मैंने कर दया"
"किसी दिन जान चली जाएगी तुम्हारे इस मन क चक्कर में"
"माँ क्यों परेशां हो रही हो ाचा बोलो तुम्हे मज़ा नहीं आया अपने पति क सामने तुम्हे मसला तो
में"
"
देवरानी ये सुन कर लज्जा जाती है क्यू क अपने बेटे द्वारा अपने पति क सामने ऐसे मसले जाने पर उसे एक अलग हे उत्तेजना का अहसास हुआ था
"पर बलदेव"
"पर वर कुछ नहीं माँ उसकी पत्नी नहीं हो अब तुम और उस बुद्धू राजपाल को बताना है क तुम अब मेरी हो उसकी नहीं"
"बड़े आया मजनू कही क"
"आर्य रे मेरी छमिया वो तो में बताऊंगा तुम्हे क ये मजनू कैसे प्यार करता है"
"देखूंगी क ये बदल गरज़ने वाले है जो बरसते नहीं या फिर सच में.."
बलदेव ये सुन कर देवरानी पर झपट्टा है देवरानी उस से बच निकलती है
devrani:beta संयम रखो नहीं तो ज़्यादा प्रेम दिखाए तो हमारी यात्रा अभी ख़त्म हो जाएगी
Baldev:hmmm माँ संयम और नहीं
Devrani:chalo जाओ अपने मित्रो को बुला लो
Baldev:kya kahu..mausi बुलाई है या भाबी
Devrani
agal हो तुम ..
Baldev:han वो तो हु तुम्हारे प्यार में ,और वैसे भी मेरे मित्र है श्याम और बद्री तो तुम्हे आज न कल तो भाबी हे कहेंगे
Devrani:Bhabi नहीं मौसी कहेंगे
Baldev:to तुम क्या चाहती हो क मुझे मौसा कहे
और बलदेव हसने लगता है
Devrani:chup कर कमीने तुम से भला कोण जीत सकता है
Baldev:Maa वो मेरे मित्र पहले है बाद में तुम उनकी मौसी हो मुझे तो पक्का यक़ीन है वो लोग तुम्हे मौसी नहीं कहेंगे
Devrani:Tumhe ऐसा लगता है बलदेव ये भी हो सकता है क सच जान ने क बाद वो हमारा मुँह भी नहीं देखना पसंद करे
Baldev:to न करे मुझे किसी की परवाह नहीं जो हमे स्वीकार करे तो ठीक नहीं करे तो वो मेरा कोई नहीं
Devrani:chal जा बड़ी बड़ी बात करना बाद में जा कर खाओ कुछ
बलदेव निकल कर अपने कक्षा में जाता है और कमला से कह कर नाश्ता ऊपर हे मंगवा लेता है तीनो मिल कर खाने लगते है
Baldev:To कहो बद्री आज हे निकले या कल सवेरे
Badri:waise बलदेव आज हे जाना सही होगा क्यू क महाराज ने कहा है क हमे वापस आना है क्यू क गहतराष्ट्रा क लोग सोचेंगे क उन्हें लड़ने क लये कह दया गया और खुद अपने परिवार को पारस घुमाया जा रहा है
Baldev:hmm सही कह रहे हो बद्री
Shyam:Bhai इसका मतलब हम ज़्यादा दिन पारस नहीं रुक पाएंगे
बद्री:2 से 3 दिन श्याम उस से ज़्यादा नहीं
Shyam:itne दिन में हम कहा घूम पाएंगे पूरा पारस
Badri:shyam तुम्हे बास घूमना और खाना सूझता है यहाँ आक्रमण का दर है
Baldev:shyam चिंता मत करो फिर कभी हम जायेंगे तो अचे से घूम लेंगे वैसे भी पारस तो मेरा ननिहाल है
(मन में: और अब तो ससुराल भी है)
और मुस्कुराता है
ऐसे हे दोपहर का समय हो जाता है चारो अपने यात्रा पर लेने जाने वाला हर सामान अचे से तैयार कर एक जगह रखने लगते है और फिर खाने का समय हो जाता है
सब आसान पर बैठ खाने की प्रतीक्षा कर रहे थे श्याम बद्री राजपाल जीविका षुरूश्ती बलदेव
देवरानी कमला और राधा से हर तरह क व्यंजन रखवाती है
Shyam:Mujhse तो रहा नहीं जा रहा देवरानी मौसी क हाथो का व्यंजन खाने क लये
Baldev:maa सबसे पहले श्याम को दो
देवरानी कमला से पनीर की सब्ज़ी ले कर श्याम क थाली में रखती है और फिर बलदेव को पूछती है
"खाओगे क्या पनीर"
देवरानी का पल्लू सड़क जाता है और उसके दूध साफ दिखने लगते है
बलदेव जैसे देवरानी क गहरी घाटी में खो जाता है
बलदेव देवरानी क वक्ष को देखते हुए
"दो न माँ मुझे खाना है"
देवरानी पनीर की सब्ज़ी रख उसके थाली में
एक ऐडा से मुस्कुराती है
और फिर सबको बाँट ने लगती है
बद्री जो बगल में बैठा भोजन कर रहा था अपने चतुराई से दोनों का नैन मटक्का देख लेता है और वो सोच में डूब जाता है
Baldev
ita जी हमे तय क्या है क हम अभी भोजन क बाद निकल जायेंगे पारस क लये
Rajpal:han ठीक है जाओ पर जल्दी आना है इस बात का ध्यान रखना बलदेव
जीविका खाने की कोशिश कर रही थी पर उसके हलक से खाना अंदर नहीं जा रहा था
Jeevika:man में) बता दू क्या राजपाल को
पर कैसे बताऊ
Devrani:aap चिंता मत करे महाराज
हम सही समय पैर आएंगे
Jeevika:Bahu तुम्हे कब से सही गलत की पहचान हो गयी और एक घूरती हुई नज़र से बलदेव की ओरे देखती है
बलदेव को समझते समय नहीं लगता है क दादी क्यू अंदर से इतना गुस्सा है
Baldev
adi मैंने वो बात माँ को बताया हु जो आपने मुझे सिखाया था
Jeevika:kya ?
Baldev:Han दादी और आप ने बहुत दुन्या देखा है और आपने समझाया था न क जब डिल और दिमाग में युधा हो हमे हमेशा अपने डिल की सुन नई चाहिए अपने ख़ुशी क लये ....अब में अपने डिल की सुनता हु जब भी मुझे निर्णय लेना होता है ,आपका धन्यवाद दादी
जीविका को अपनी कही हुई बात याद आती है और कही न कही उसका डिल अपने पोते जिसको वो जान से ज़्यादा चाहती थी
Baldev
adi अब आप चल कर आकर हमारे साथ भोजन कर रही हो में बहुत खुश हु
Jeevika:man me)Baldev सही तो कह रहा है आज बलदेव क वजह से हे मेरे पेअर थोड़े ठीक हुए नहीं तो बलदेव क आने से पहले मुझे कोई कहा पूछता था एक जगह सोई रहती थी
जीविका बहुत कठिन परिस्थिति में थी एक तरफ उसका बीटा राजपाल का घर उजाड़ रहा था दूसरी ओरे उसके पोते का घर बस रहा था
जीविका एक बार राजपाल को देखती है फिर बलदेव को देखती है बलदेव क आखो में उसे देवरानी क लये बेशुमार प्यार दीखता है
जीविका देवरानी को देखती है देवरानी अपना सर झुकाये दुखी मन क साथ बैठी थी उसके आँख ासु से भरे थे और जैसे जीविका को कह रहे हो क "कृपया कर क हमारा साथ दीजिये में बहुत दुखी हु"
बलदेव चुप्पी तोड़ते हुए
Baldev:dadi ख़ुशी पाने क लये कभी कभी कठिनाईओ का सामना करना पड़ता है
जीविका फिर देवरानी की ओरे देखती है जो अपने आखो में ासु भरे हुए जीविका की ओरे एक आस से देख रही थी
Devrani:Baldev तुम्हारी तो दादी थी जो तुम्हे ज्ञान दे दी पर मेरे पास न दादी थी न माँ बाप ने परवरिश की उनका भी देहांत हो गया
जीविका को ये बात सुई की तरह चुभता है
जीविका का दिमाग दुखने लगता है क आखिर वो किस मोड़ पर फास गयी है वो अपना सर निचे कर क खाने लगता है
सब भोजन समाप्त कर क उठ ते है
जीविका अपने कक्षा में जाने लगती है
Baldev:ruko दादी हम अब निकलेंगे आशीर्वाद नहीं डोज
बलदेव और देवरानी दोनों साथ में जीविका क पेअर पकड़ कर आशीर्वाद लेते है
जीविका को न चाहते हुए भी आशीर्वाद देना पड़ता है
"सदा खुश रहो"
जीविका अपना विशाखी लिए अपने आखो में ासु लये अपने कक्षा में चली जाती है
जीविका अपने कक्षा में जा कर
"हे भगवन ये कैसी स्तिथि है मई अपने बेटे का साथ क्यू नहीं दे परही हु कही ये देवरानी को जो जीवन भर दुःख हुआ वो तो नहीं रोक रहा मुझे"
और उसके आखो से ासु गिरने लगते है
सेनापति सोमनाथ चार घोड़ो को तैयार कर चारो पर सामान बंधवा रहा था सैनिको से अंदर बलदेव देवरानी और श्याम और बद्री तैयार हो रहे थे
षुरूश्ती अपने कक्षा में आकर अपने रखा पिटारा खोलती है तो उसमे सांप अब भी अपने ज़हर लये मौजूद था
Shurushti:devrani तेरी ये अंतिम यात्रा होगी और उसके बाद तेरे बेटे को भी मई मरवा दूंगी हहहहह
षुरूश्ती बड़ी चालाकी से पटरी छुपाये बहार आती है तो देखती है दो सैनिक और सेनापति सोमनाथ घोड़े पैर सामान लाड रहे थे और घोड़े को उसका चारा दे रहे रहे
Shurushti:uff अब क्या करू
षुरूश्ती कुछ सोचते हुए
Shurushti:Ary सेनापति सोमनाथ
सेनापति somnath:Ji महारानी
Shurushti:wo आप महाराज ने बुलाया है कुछ काम से
सेनापति somnath:ji महारानी
सोमनाथ अपना काम छोर महल क अंदर चला जाता है
Shurushti:sainiko ये किस किसके घोड़े है
Sainik:mahrani ये भूरा वाला युवराज श्याम का है ये कला घोडा पर युवराज बलदेव जायेंगे और ये वाले काळा घोड़े पे युवराज बद्री
Shurushti
r ये सफ़ेद घोड़े पे ?
Sainik:maharani ये घोड़े पे रानी देवरानी जाएँगी
षुरूश्ती एक क़ातिल मुस्कान देते हुए
Shurushti:Aah मेरा गाला सुख रहा है सैनिको ज़रा पानी लाना
सैनिक pehla:tum जाओ ले आओ पानी
सैनिक दूसरा :नहीं नहीं मेरा काम अब होने वाला है तुम ले आओ
shurushti:Gadho दोनों जाओ एक साथ और पानी लाओ अन्यथा
दोनों दर जाते है और भागने लगते है षुरूश्ती मौक़ा देख पिटारा खोल सांप को देवरानी क घोड़े पे बन्दे झोले में रख देती है और पिटारा छुपा लेती है
दोनों सैनिक भाग कर पानी लाते है
Sainik:ye लीजिये महारानी पानी
Shurushti:tum दोनों ने इतनी देर कर दी मेरी प्यास ख़तम हो गयी
और षुरूश्ती वापस महल में आने लगती है
sainik:ary इतनी जल्दी तो लाये फिर भी
दोनों सैनिक एक दूसरे का मुँह देख अपना बाकि का काम करने लगते है
सब तैयार हो कर महल क बहार आते है जहा पर उनका घोडा तैयार खड़ा था देवरानी सब से विदा लेती है
षुरूश्ती हल्का रोने लगती है
"देवरानी अपना ख्याल रखना"
देवरानी मन में :वापस मत आना कलमुही देवरानी
devrani:Han दीदी आप भी रखना
Rajpal:devrani सेल साहब मेरा प्रणाम मत भूलना
देवरानी मन में :देवराज क जीजा को में साथ ले जा रही तुम्हारे प्रणाम का क्या करू
षुरूश्ती मन me:budhu राजपाल देवरानी ने देवराज का जीजा हे बदल दया है अब भी भ्रम में हो
kamla:Mahrani अपना ख्याल रखना
Devrani:tum भी अपना ख्याल रखना
बलदेव अपने पिता क पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है और फिर सब बरी बड़ी घोड़े पर बैठने लगते है और सब अपने घोड़े को लगाम खींच घोड़े को भागने लगते है
राजपाल षुरूश्ती अंदर आते है
षुरूश्ती :आखिर बाला ताली
rajpal
ar मुझे तो अब उनके ऊपर हमारे शत्रु क हमले का दर है
Shurushti:to मर जाने दो दोनों माँ बेटे को वो कौन सा आपके बात मने
Rajpal:tum सही कह रही हो षुरूश्ती वो मुझे नहीं समझते तो में क्यू सोचु
इधर बलदेव अपने माँ और मित्रो क साथ तेज़ गति से घोड़े पे सवार गहतराष्ट्रा की सीमा पार कर लेता है ,घोड़े को दौड़ते हुए शाम हो जाती है
बलदेव अपना हाथ दिखा कर सबको धीरे होने का इशारा देता है
सब रुक जाते है
Baldev:Badri अँधेरा हो गया है अब हमे मशाल जला लेना चाहिए
Badri:Thek है बलदेव
बद्री मशाल जलने लगता है
Baldev:ab हम सब आगे पीछे चलेंगे सबसे आगे बद्री मशाल लिए चलेगा उसके पीछे श्याम उसके पीछे माँ और उसके पीछे मई
देवरानी घोड़े पे बैठी अपने बेटे की बुद्धिमानी पर गर्व महसूस कर रही थी
बद्री मसल जला कर आगे अत है
Baldev:dhyan रहे हम डिल क पास है हमे आबादी से बच कर जंगल से अधिकतर आगे बढ़ना है और ये चन्द्रमा की रौशनी भी आज हमारे साथ है
अब बद्री हाथ में मसल लिए घोड़े की लगाम दूसरे हाथ से थामे घोड़े को भागता है उसके पीछे श्याम उसके पीछे देवरानी और बलदेव
रात 10 बजे बलदेव की आवाज़ से बद्री अपना घोडा रोकता है
Baldev:badri आधी रत होने को है हमे अब कुछ खा कर आराम करना चाहिए
Shyam:han मई थक गया कुछ खाना चाहिए
Baldev:kya कहती हो माँ
देवरानी एक मुस्कान क साथ "खिला दो मुझे भी"
बद्री :महल में भी मौसी कुछ अलग अंदाज़ से अपने पल्लू हटा कर दिखा रही थी बलदेव को और मुस्कुरा रही थी और अब भी क्या में जो सोच रहा हु वो सही है
Badri:mausi खाने का झोला मेरे पास है आ जाओ सब कहते है
Baldev:yaha पास में झरना है और हम किसी गाओ क करीब है दूर तुम सब देखो खेतो क उस पर दिया जल रहे है
devrani:han यहाँ ठण्ड भी बहुत है
Baldev:badri अपना पसंदीदा घर बनाया जाये
Badri:han क्यू नहीं
Devrani:ghar और यहाँ क्या कह रहे हो तुम लोग
Badri:hum दो बना सकते है
बद्री अपने हाथ से हथोड़ी निकल कर तम्बू बनाने लगता है
अब चारो समझ जाते है क उनको क्या करना है और देवरानी भी हाथ बता ने लगती है
और देखते हे देखते दो तम्बू बन क तैयार हो जाते है
devrani:wah ये तो हूबहू घर जैसा हो गया
Badri:mausi ये सब हमारे गुरु ने सिखाया है
फिर सब वही बैठ कर चटाई पर खाना कहते है और छोटा सा लैंटर्न जला कर दोनों तम्बू में रख लेते है
खाना खाने क बाद सब इधर उधर की बाते करने लगते है
बलदेव पास क एक वृक्ष स सुखी लकड़ी तोड़ लेता है और उसे जला देता है
Baldev:ise हमे गर्मी महसूस होगी और जानवरो से भी बचाव होगा
ये सब करते हुए 11 बज जाता है
Devrani:mera बदन टूट रहा है सालो बाद घुड़सवारी की हु मुझे सोना है और बलदेव की और देखती है
बलदेव समझते हुए
तो मित्रो अब हमे सोना चाहिए हमे भोर होते हुए फिर पारस की ओरे जाना है
बद्री :हाँ सो जाते है भाई अब दो तम्बू है पर दोनों छोटे है ,मौसी एक तम्बू में सो जाएगी क्यू क उनको जगह चाहिए और हम तीनो एक तम्बू में सो जाते है ऐसे भी हम आचार्य जी क वह साथ हे सोते थे
देवरानी ये सुन कर बलदेव की ओरे निराशा से देखती है
Baldev:badri बात ये है न मित्र क माँ को अकेले दर लगेगा अकेले तो में माँ को ले कर सो जाता हु
बद्री मन में :कुछ तो गड़बड़ है
Shyam:han चलेगा में और बद्री ये तम्बू में सो जाते है
Devrani:han में बलदेव क साथ सो जाती हु
Badri:theek है ठीक है
सब अपने घोड़े को अचे से बांध बिस्तर लगा कर तम्बू में घुस कर तम्बू बंद कर लेते है परदे से
श्याम और बद्री अपने राज्य की कहानी बतया रहे थे वही देवरानी क बगल में लेता बलदेव ऊपर की तरफ देख रहा था
"बलदेव क्या सोच रहे हो राजा"
"माँ में यही सोच रहा हु क कभी सोचा नहीं था तुम मेरी हो जाओगी आज ऐसा लग रहा है जैसे क हम दुन्या से दूर है किसी बंधन क"
"हाँ बलदेव मुझे भी वर्षो बाद सुकून मिल रहा है"
बलदेव और देवरानी अपने अतीत से जुडी हर बाते कर रहे थे
आधा घंटा बाद
"बलदेव क्या हुआ आज मौक़ा है तो हाथ नहीं मरोगे"
बलदेव तम्बू से बहार अत है और देखता है बद्री और श्याम सो रहे थे
बलदेव फिर तम्बू में आकर देवरानी से चिपक जाता है
"महारानी देवरानी बोलो न मेरी पत्नी बनोगी"
"बना पाओगे तो मेरी हाँ है मई इस चन्द्रमा को साक्षी मान कर कह रही हु"
बलदेव क आखो में देखती है
बलदेव देवरानी क होठो पर चूमता है उसको आलिंगन में लेते हुए
बद्री जिसके दिमाग में शक हो गया था वो बलदेव की आहात सुन लय था और बलदेव जब आया था तो खर्राटे लेने लगा था
बद्री श्याम को सोता छोर बहार निकलता है और जैसे हे वो तम्बू की ओरे देखता है उसके पैरो से ज़मीन निकल जाता है लैंटर्न की रोशनी से परछाई बने हुए दिख रहा था क बलदेव और देवरानी क्या कर रहे है
परछाई में साफ़ पता चल रहा था दोनों एक दूसरे को चुम रहे है बद्री का दिमाग काम करना बंद करने लगता है और वही बूट बना खड़ा देख रहा था..
तो बे कॉन्टिनोएड
श्याम और बद्री सैनिक क साथ महल क मुख्या दुवार की ओरे जाने लगते है रास्ते में हे उन दोनों की नज़र कसरत करते हुए बलदेव पैर पड़ती है जो अपने हे धुन में था
Sainik:Yuvraj आपके मित्र आये है
Baldev:Kya सच में
बलदेव पलट कर देखता है तो सामने श्याम और बद्री मुस्कुराते हुए खड़े थे
Baldev:ary तुम दोनों का स्वागत है मित्रो
बलदेव खुला शरीर लये हुए हे अपने मित्रों क समीप जाता है उनका स्वागत करने क लये
Badri:Baldev तुम्हारा शरीर अब हम जैसा नहीं रहा तुम पठार क सामान हो गए हो
shyam:Han भाई आज कल भाई ज़्यादा म्हणत कर रहे है
बलदेव मुस्कुराता हुआ सैनिक से
"ज़रा मेरा परिधान लाना"
"जी युवराज"
Baldev:wo सब छोरो इतना सवेरे कैसे पहुंच गए तुम दोनों
Badri:bhai हम रात हे तुम्हारे छेत्र में आगये थे पर हम पास क एक राज्य में रुक गए थे
Shayam:han और सुबह होते हे वह से हम चल डाई इसलिए सवेरे पहुंच गए
Baldev:tum दोनों का धन्यवाद मेरी मान रखने क लये मित्रो
Badri:Bhai हम मित्र है अगर हम एक दूसरे का साथ नहीं देंगे तो कौन देगा
Shyam:tumhare लये तो जान भी दे सकते है हम तुमने तो हमारे लये बहुत क्या है जब हम आचार्य जी पास शिक्षा ग्रहण कर रहे थे
तीनो चल कर अब महल क मुख्या दुवार पर पहुंच गए थे
Badri:shyam सही कह रहा है बलदेव हम वो दिन भूल नहीं सकते जब तुमने हम सब की गलती की सजा अपने सर ले लये थे
बलदेव बात काट ते हुए
"अब छोरो भी जो हुआ सो हुआ तुम दोनों मेरे मित्र हो में अपनी जान की परवाह नहीं क्या कभी न करूँगा"
Shyam:Bhaio मुझे भूक लगी है और में तो गहतराष्ट्रा आता हु मौसी क हाथो का पकवान खाने
Baldev:Shyam चलो आज तुम्हे हम बहुत बढ़िया पकवान खिलाएंगे
Shyam:Mujhe मौसी के हाथ का हे खाना है
Baldev:Han मई माँ से कह कर तुम्हारे लिए बनवा दूंगा
Badri:tum तो अब भी बचे हो आये नहीं क शुरू हो गए पेटू
Baldev:ary ऐसा नहीं है बद्री इसका पूरा हक़ है
"तुम दोनों झगड़ना बंद करो और चलो मेरे साथ"
तीनो महल में घुस जाते है
देवरानी अपने कक्षा में व्यायाम करने क बाद स्नान कर सुबह का जड़ी बूटी खा रही थी फिर उसके कानो में बलदेव और किसी की बातचीत सुनाई दी
देवरानी अपना घूँघट कए अपने कक्षा से बहार आती है और सामने बलदेव क साथ उनके दोनों मित्र थे
बलदेव देखता है क माँ घूँघट ताने दूसरी ओरे मुँह कए पहचानने की कोशिश कर रही है क आखिर कौन आये है
Baldev:ary माँ इधर आओ ये मेरे मित्र श्याम और बद्री है
अब तक तो देवरानी ने भी चोर नज़रो से देख पता लगा लय था क ये बद्री और शयाम है
देवरानी उनके पास चली जाती है और अपना घूँघट कए हुआ पल्लू हटती है
बद्री और श्याम देखते हे देवरानी क पेअर पद जाते है बी बद्री और shayam:Mausi आप को बहुत दिनों बाद देख बाद ाचा लगा हमे आशीर्वाद दीजिये
Devrani:Ary मेरे बेटो मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है देवरानी दोनों को सर पर हाथ फेरती है दोनों खड़े होते है
ये सब देख बलदेव मुस्कुरा रहा था
Devrani:Baldev इन दोनों को अपने कक्षा में ले कर जाओ में अभी पूजा नहीं की हु
Shayam:Mausi मुझे प्रसाद चाहिए
Badri:shyam तू बस खाने क जुगाड़ में हे रहना बालक ,मौसी आपको पूजा करने की क्या आवश्यकता आप तो खुद देवी लगती हो और देवी जैसी पवित्र हो
देवरानी ये सुन कर मुस्कुरा देती है
Baldev:Badri तुम कह रहे थे न क मेरे गठीले शरीर का राज क्या है तो राज ये है मई इस देवी की पूजा करता हु
देवरानी की ओरे देख आँख मार देता है
देवरानी अपना घूँघट फिर से डेल अपने कक्षा में जाने लगती है देवरानी अपने में लज्जा क साथ अपने ऊपर गर्व भी कर रही थी
Badri
Baldev:bhai माँ मेरा खाना पीना सब कुछ का हिसाब रखती है
तीनो सीडीओ से होते हुए बलदेव क कक्षा तक पहुंच जाते है
Badri:to भाई बलदेव कब पारस निकलने का इरादा है
Baldev:jab तुम कहो
Shyam:Han हमे वह खूब प्राचीन चीज़े देखने मिलेगी और वह का पकवान भी मई सुना हु बहुत स्वादिष्ट होता है
Badri:Shyam अब तुम बचे नहीं हो मुर्ख कुछ और भी सोचो खाने से हैट कर
Shyam:Mujhe मुर्ख कहा में मेवाड़ का युवराज हु अभी तुम्हारे उज्जैनी जीभ को खींच लूंगा ,कालू राम
श्याम तहका दे कर हस्ता है जिस से बलदेव की भी हसी छूट जाती है
बद्री श्याम क गर्दन को हाथ में ले कर पीछे से दबा कर
"श्याम अपने गोर रंग पर इतना अहंकार "
"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे मुर्ख कहने की बद्री काली बदल"
Badri:Iski तो में जान ले लूंगा
Baldev:chhoro भी बद्री तुम दोनों कब लड़ना बंद करोगे बचे
बलदेव दोनों को अलग करता है
Baldev:ab हम बरी बरी से स्नान कर लेते है
तभी तीनो क कान में ढोल की आवाज़ आती है
Badri:Koi ढिंढोरा पीट रहा है
तभी तीनो कान लगा कर ढिंढोरे की आवाज़ क साथ कोई संदेह राज्य में सुनाया जा रहा था वो सुन ने लगे
"सुनो सुनो सुनो ...महाराज राजपाल सिंह ने आज अभी अभी सभा बुलाई है कृपया कर क सब पहुंचे महाराज कोई निर्णय लिए है सुनो सुनो गहतराष्ट्रा वासिओ"
Baldev:ab तो समय व्यर्थ करना हे मत में स्नान कर क आया
बद्री और शयाम समझ जाते है और अपने साथ लाया हुआ सामान सैनिक को कह कर कक्षा में रखवाते है और अपने वस्त्र का चुनाव करने लगते है
पहने क लये
थोड़ी देर में बलदेव स्नान कर क आ जाता है और बरी बरी से सभी स्नान कर लेते है और अपने परिधान पहन लेते है
देवरानी इधर आकर अपने कक्षा में पहले अगरबत्ती जलती है और कुछ प्रसाद का चढ़ावा लगा कर रोज़ की तरह अपने पथ पढ़ रही थी ,कुछ देर पथ पढ़ने क बाद पूजा ख़त्म होता है और देवरानी अपने और बलदेव क लये कामना करती है
"भगवन धन्यवाद तूने मेरी हृदय की बात सुन ली और इतने बरसो बाद में अपने मायके पारस जा रही हु हम सब दूर की यात्रा करने जा रहे है हम सब पर अपना कृपा रखना भगवन"
दोनों हाथो जोड़े कड़ी भगवन से मांग रही थी मंदिर में दिया जला कर पूजा की थाली ले कर बलदेव क कक्षा की ओरे जाती है
देवरानी देखती है तीनो तैयार हुए बैठे थे
Devrani:Lo बचो तुम सब का प्रसाद
बद्री और शयाम झट से अपना सर झुका कर अपना हाथ आगे बढ़ा कर प्रसाद ले लेते है पर बलदेव नहीं लेता
Devrani:ary बलदेव तुम भी लो बीटा
बलदेव सर निचे कर क
"माँ मई बाद में ले lunga"or देवरानी को एक अंदाज़ से देखता है
Shyam:Mausi अभी सभा क्यू बुलाये महाराज ने
Devrani:Sabha बुलाया मई तो नहीं सुनी और तुम मुझे मौसी कहते हो और उनको महाराज
Shyam:Q क मौसी महराज राजपाल खड़ूस है इसलिए मौसा नहीं कहता और आप एक डैम अपने सी लगती हो महारानी नहीं कह कर मौसी कहना ाचा लगता है
देवरानी श्याम की बात पर मुस्कुराती है
Badri:Murkha श्याम चुप raho,waise मौसी अभी थोड़ी देर पहले ढिंढोरा सुना हमने ,उस समय शायद आप पूजा कर रही होंगी
Devrani:han मैं पूजा कर रही थी
Badri:Aap तो देवी है मौसी आपने तो सच में कुछ नहीं सुना पुरे गहतराष्ट्रा ने सुन लय ,सच कहु आप क भक्ति को नमन मेरा
Devrani:Ary बास भगवन की कृपा है मेरे जैसी तो करोड़ो है पुजारी
Badri:Mausi इस श्याम को भी सिखाइये कुछ इसे कुछ नहीं आता
Shyam:han जैसे तुम इतने बड़े भक्त हो क शक्चारत शिव जी से वार्तालाप करते हो
ये सुन कर सब हसने लगते है
Devrani:agar ऐसा है तो तुम लोग जाओ हम सब को प्रसाद दे कर आते है
देवरानी प्रसाद की थाली ले कर चली जाती है और बलदेव अपने मित्रो को ले कर महल क बहार सभा में जाने लगता है
देवरानी सबसे पहले षुरूश्ती क कक्षा में जाती है
"दीदी षुरूश्ती "
"आओ देवरानी"
"दीदी ये लीजिये भगवन का प्रसाद "
"आर्य वह देवरानी इतना सवेरे तुमने पूजा पथ भी कर ली"
"हाँ दीदी वैसे आज आप उदास सी लग रही हो क्या हुआ आप की ताब्यात तो ठीक है न"
षुरूश्ती अंदर से जल भून जाती है
"क्यू ऐसा क्यू कह रही हो देवरानी में ठीक तो हु"
"दीदी वो मई रात में उठी तो देखा आप अपने कक्षा में जा रही थी और जब तक आवाज़ देती आप ने दरवाज़ा बंद कर लय"
"षुरूश्ती दीदी लगता है आपका नींद पूरा नहीं हो पाया है"
षुरूश्ती को इतना गुस्सा आया क वो अब थप्पड़ देवरानी क गालो पर रख दे पर वो अपने आप पर काबू रखे
Shurushti:man में) कामिनी तू रणदीनाच कर ली जितना करना था बस आगे आने वाले दो दिन में तेरे चिटा में आग में हे दूंगी
देवरानी :क्या सोचने लगे ये लीजिये prasad,Bhagwan ने कहा है मनुष्य को शक्ति वो उतनी हे देते है जितने की आवश्यकता है इसलिए हमे अपने शक्ति का कभी भी गलत इश्तेमाल नहीं करना चाहिए अन्यथा जो भगवन शक्ति देता है वो छीन भी लेता है
षुरूश्ती हाथ आगे बढ़ा कर अपने मन को मार कर प्रसाद देवरानी क हाथो से लेती है
Shurushti:man में) रंडी बड़ा ज्ञान दे रही है देवी बन ने की कोशिश कर क शुरू से तुमने सोचा अपना सिक्का घर पैर ज़माने का पर आज तक तुम सब क पेअर की धूल हे ho,apne बेटे पैर इत्र लो एक दो दिन फिर तो तुम से में स्वर्ग लोक में हे मिलूंगी ,कामिनी वही अपने बेटे से प्रेम का खेल khelna..Devani देवी माँ
षुरूश्ती क चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान घिर जाता है जिसे देवरानी देख लेती है
Devrani:Kya बात है दीदी मुस्कुरा रही हो बेवजह कही महाराज की कोई रात की बात याद आगयी
Shurushti:Tum कहना क्या चाहती हो देवरानी
Devrani:Yahi क मई आपको देखि थी महाराज क कक्षा से निकलते हुए जब में पानी पीने उठी तो
षुरूश्ती चुप चाप बूट बानी सुन रही थी उसे समझ नहीं आरहा था क वो क्या कहे
Devrani:Waise कल रात खूब आनंद लय आपने इसलिए अब तक मुस्का रही हो
षुरूश्ती की तो जैसे जले पर नमक छिरक दिया हो देवरानी ने षुरूश्ती को प्यासी छोर कर जो तड़प और खुमारी छोर दया था राजपाल ने वो षुरूश्ती अब तक महसूस कर रही थी
षुरूश्ती : मन में) देवरानी की बची मेरा मज़ाक उदा रही है पर इसे कैसे पता राजपाल मुझे प्यासी छोर देता hai,Han ये भी तो राजपाल का लिंग ली है भले वो आज से 17 साल पहले हे चूड़ी हो पर जानती है क 4 इंच लौड़े से क्या होता है
Devrani:man में) अब तुम उस बूढ़े क छोटे से लिंग को खड़ा करते रहना जीवन भर और तीन धक्के में हे खुश रहना ,कद की नाती है पर चालबाज़ी तो भरपारा है कमीनी में
Shurushti:Nahi नहीं देवरानी क्या बकवास कर रही हो अब में 48 साल की हुई अब मेरा डिल नहीं करता वो सब का
Devrani:man में) वो तो तेरा डिल हे जनता है है षुरूश्ती
Devrani:Aisa क्या दीदी मुझे तो पता हे नहीं था
Shurushti:Han अब बकवास तुम्हारी ख़त्म हो गयी हो तो जाओ मुझे काम है कुछ
देवरानी को गुस्सा आता है पर अपने सही समय पर बदला लेने की ठानी थी वो वह से चल देती है
देवरानी जीविका क ओरे चल देती है
"माँ जी कहा हो आप"
जीविका अपने कक्षा से बहार आते हुए
"हाँ बहु कहो"
और एक गुस्से से देखते हुए देवरानी से पूछती है
"वो माँ जी आपके लये प्रसाद लायी थी"
जीविका को रात का दृश्य याद अत है जब बलदेव देवरानी क कूल्हों को हाथ से दबोचे देवरानी को गॉड में लये रसोई से ले जा रहा था
जीविका अपने मन में
"देवरानी तू कितनी बड़ी पापिन है मैंने कभी नहीं सोचा था मुझे शर्म आती है अपने ऊपर अब "
"माँ जी क्या सोच रहे है मुझे आशीर्वाद दीजिये कई वर्षो बाद पारस जा रही हु"
देवरानी जीविका क पेअर छू लेती है
जीविका नहीं चाहते हुए भी
"है हाँ जीते रहो"
देवरानी एक क़ातिल मुस्कान क साथ जीविका की प्रस्तिथि समझते हुए कड़ी होती है और जीविका को देखती है जिसका चेहरा उतरा हुआ था
देवरानी को जैसे बहुत खुसी होती है जीविका का चेहरे देख कर
जीविका मन में " में कैसे रोकू इन दोनों को पाप करने से कैसे कहु राजपाल क उसकी पत्नी और उसका बीटा अवैध सम्बन्ध बना रहे है"
देवरानी सबको बाँट देती है प्रसाद और कमला को थाली दे कर
Devrani:kamla इसे बाँट दो
Kamla:kya बात है आज बहुत खिल रही हो
Devrani:q रोज़ अछि नहीं लगती
kamla:nahi महरानी आज ऐसा खिल रही हु जैसे युवराज ने खूब अंदर तक अपने केले से मालिश कर दिया हो
Devrani:chup कर pagli..aisa कुछ नहीं हुआ
Kamla:to कैसा हुआ
Devrani:bass तुझे तो बताया तो था बास वह तक नहीं जाना बिना विवाह क ..दर लगता है कही कुछ
Kamla:q देवरानी डर है क कही युवराज आप को पेट से कर क छोर नहीं दे (तो फिर तुम न घर की रहोगी न घाट k)islye पहले बंधन में बांधना चाहती हो
देवरानी शर्मा जाती है
Devrani:tu छिनाल है ..मुझे भरोषा है बलदेव पैर ..
Kamla
devrani
kamla:mai समझ रही हु महरानी आप सोच रही हो कही आगे जा कर उसका मन बदल जाये कुवारी दुल्हन पाने क लये और वो विवाह कर le..par ऐसा नहीं होगा
Devrani:bhagwan न करे ऐसा ho,theek है मुझे काम है
अपने कक्षा में जाती है और सभा में जाने की तैयारी करने लगती है
धीरे धीरे सब सभा में पहुंचते है और सबका जय जयकार से स्वागत होता है
Rajpal:Senapati सोमनाथ खड़े हो कर जनता से सुनाओ
सेनापति somnath
महाराज ने गहतराष्ट्रा क ऊपर आक्रमण होने की आशंका है और इस बात का दर मुझे भी है सेनापति होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है पर आप सब जानते है क हम आयत निर्यात में पीछे है और गहतराष्ट्रा का खज़ाना भी अब कुछ खास बचा नहीं है और हमे आशंका है क दिल्ली से शाहज़ेब हम पर आक्रमण कर सकता है और उनकी सेना उत्तर की ओरे निकल गयी है ,मई आप सब से निवेदन करता हु क आप सब सेना में शामिल हो क्यू क बादशाह शाहज़ेब क सैनिक 25000 से काम नहीं होती है
क्या आपसब अपने बचो को हमारी सेना में गहतराष्ट्रा बचने क लये भेजोगे?
पूरी सभा में लोग
"हाँ हम अपने बचे भेजेंगे हमारी माँ गहतराष्ट्रा की धरती को बचाएंगे"
Senapati:Or एक मदद और चाहिए आप सब अपने घर पर जो भी हथियार या लोहा हो उसे हमारे हवाले कर दे हम उन्हें गाला कर हमारे सैनिको क लिए हथियार बनैंगे
Senapati:kya आप सब हमारा साथ देंगे?
भीड़ में से एक दस वर्ष का बालक आगे अत है और कहता है
"सेनापति जी में एक लोहार का बीटा हु और में अपने राज्य को बचने क लये अपनी आखिरी सांस तक लडूंगा"
भीड़ सब एक साथ कहती है
"जीयो लाल"
"जब ये बालक आगे आ सकता राज्य क लये हम सब क्यू नहीं "
वो दस वर्षीया बालक अपने झोले में हाथ दाल कर एक हथोड़ी निकलता है
"सेनापति जी मेरे पिता लोहार है और उनका ये हथोड़ी में राज दान करता हु"
सेनापति सोमनाथ अत्यंत खुश होता है और बालक क पास आकर
Senapati:Is गहतराष्ट्रा क लाल का दान में स्वीकार करता हु .लाओ मेरे बचे सेनापति उसके सर पर हाथ फेर कर उसका हथोड़ी ले लेता है
Senapati:aap सब सचेत रहिये अपने अपने गाओ में हम सब सीमा को चारो ओरे से घेर लेंगे
सेनापति somnath:maharaj आप कुछ कहना चाहेंगे
Rajpal:Aaj अगर पिता श्री जीवित होते तो वो बहुत प्रसन्न होते आप सब का धन्यवाद् गहतराष्ट्रा वासिओ और में आप सब से हमारे अतिथि बद्री जो उज्जैन क युवराज है और श्याम जो मेवाड़ से ए है
पूरी भीड़ कहती है
"स्वागत है आप दोनों का अतिथियों"
बद्री और श्याम बलदेव और देवरानी की ओरे देख मुस्कुराते है
Rajpal:Ek बात और कहना चाहूंगा आज रानी देवरानी अपने माँ क यहाँ पारस जाने वाली है
भीड़ में से एक व्यक्ति उठ कर
"महाराज क्षमा करे क्या इस परिस्थिति में हमारे सैनिको को बहार जाना ठीक है"
Rajpal
Vyakti:maharaj की जय हो
सबलोग पीछे से कहते है महाराज की जय हो
senapati:Maharaj और कुछ कहना है
Rajpal:nahi सभा ख़त्म की जाये
Senapati:Ghatrashtra वासिओ सभा ख़त्म की जाती है और अभी से जिनको सेना में शामिल होना है वो सेना शिविर क मैदान में रुक सकते है
जय गहतराष्ट्रा
पूरी भीड़ एक साथ कहती है
"जय गहतराष्ट्रा"
धीरे धीरे सब अपने आसान से उठ कर महल में जाने लगते है
बलदेव क साथ श्याम और बद्री भी जाने लगता है देवरानी अपने कक्षा में जा चुकी थी
Baldev:Mitro तुम दोनों ऊपर जाओ में माँ को कह दू कुछ खाने क लये तुम दोनों का
Shyam:han ठीक है
श्याम और बद्री ऊपर चले जाते है
बलदेव अपने माँ क कक्षा में घुस जाता है देवरानी अपने सामन जो पारस ले कर जाना उसे एकता कर रही थी
"माँ तैयारी शुरू हो गयी"
"आर्य आओ बलदेव"
बलदेव देवरानी क रूप को निहारते हुए
"माँ तुम बाला की सुन्दर लग रही हो"
"ाचा मेरे राजा "
बलदेव देवरानी को बहो में भर लेता है
Devrani:jao मुझसे बात मत करो
Baldev:q माँ क्या हुआ
Devrani:Me गुस्सा हु तुम से
Baldev:q गुस्सा है मेरी रानी
Devrani:tumne प्रसाद क्यू नहीं खाये जब दी तो
बलदेव हस्ते हुए
"ओह तो ये बात है मेरी रानी "
Baldev:dekho माँ में प्रसाद इसलिए नहीं लिया क्यू क तुम हे मेरी देवी हो और मेरा प्रसाद लेना मुझे आता है
बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क होठो को अपने होठो में दबा कर चूसने लगता है
"ुमंठा अगललोप्प सलरपप
गलप्प्प गलप्प उम्म्म सलरपपप
गलप्प्प गल्प उम्मंहा सलरपप"
ऐसे अचानक हमले से देवरानी संभाल नहीं पति और लम्बी साँसे लेने लगती है
एक लम्बी चुम्बन क बाद बलदेव देवरानी क होठ हल्का काट लेता हैडवरानी क होठ छोरता है
Devrani:uff बलदेव ये क्या हरकत है
Baldev:Maa तुमने मुझे बचा क्यू कहा था प्रसाद देते हुए उसकी सजा है ये
Devrani:acha तो इस बात से मुँह गिराए थे तुम और तुमने ये कर क साबित कर दया क बचे हो
बलदेव देवरानी को ले कर दिवार से सत्ता देता है और उसके गर्दन को अपने बड़े हथेली से पकड़
Baldev:Maa वो तो में तुम्हे बताऊंगा कितना बचा हो
देवरानी हल्का खासी करते हुए
Devranu:Jaan से हे मार डोज
बलदेव अपना हाथ गर्दन से निकल कर देवरानी क बड़े गांड पर रख कर दबाता है
Baldev:jaan से तो नहीं पर किसी और चीज़ से मरूंगा ये
और बलदेव एक गांड पर थपकी मरता है
देवरानी लज्जा कर सर झुका लेती है
Devrani:mere प्रेमी क्यू गुस्सा हो रहे हो अगर में तुम्हे बचा समझती तो तुमपर भरोसा कर मई तुम्हे अपना जीवन साथी नहीं चुनती
बलदेव को अपने माँ पैर प्यार क साथ दया आजाता है
"माँ मई आपके इस निर्णय को कभी गलत साबित नहीं होने दूंगा "
तभी राजपाल आवाज़ देता है
"देवरानी ो देवरानी"
Devrani:ji महाराज
बलदेव अपने हाथ में देवरानी क गांड को दबोच क पूरी ताक़त से दबाता है
devrani:aaaaah
देवरानी की ज़ोर से आह सुन कर राजपाल देवरानी क कक्षा की ओरे आता है
devrani:chhoro बलदेव राजपाल आरहा है
देवरानी आकर दरवाज़े पैर कड़ी हो जाती है और राजपाल वह से तेज़ी में चलता हुआ आरहा था पर देवरानी को देख रुक जाता है
Rajpal:kya हुआ क्यों चीखी ऐसे
Devrani:maharaj वो पेअर में ठेस लग गई थी
Rajpal:batao कहा पर लगा चोट
तभी बलदेव सोचता है क अब छुपना बेकार है और दरवाज़े क पीछे से निकल कर सामने आता है
Rajpal:baldev तुम यहाँ ..क्या कर रहे हो
Baldev
Rajpal:acha बीटा
Baldev:acha तो में सामान बांधता हु
बलदेव वापस दरवाज़े क पीछे चला जाता है और राजपाल क आखो से ओझल हो जाता है
राजपाल अभी भी अपने पत्नी देवरानी क दरवाज़े क सामने खड़ा बात कर रहा tha,Jo क दरवाज़े और देवरानी से 4 हाथ क दूरी पर था
Rajpal:Suno श्याम और बद्री को कुछ खिलाया पिलाया की नहीं
देवरानी दरवाज़े पैर कड़ी
"महाराज अभी कुछ देर में हे बन जायेगा कमला और राधा पकवान बना रहे है"
दरवाज़े क पीछे छुपा बलदेव को शरारत सूझती है और वो कवर क पैट से सात कर कड़ी देवरानी क उभरे गांड को देखता है उसे अपने हाथो से सहलाने लगता है जिसका असर देवरानी क चेहरे पर साफ़ दिख रहा था और उसके आँख बीच बीच में बंद हो जाती
Rajpal:Or सुनो जितना हो सके जल्दी आना है तुम्हे वापस और देवराज को मेरा प्रणाम कहना और क्षमा मांगना मेरी ओरे से मेरे सेल साहब से
बलदेव देवरानी क गांड सहलाते हुए दबोच कर ज़ोर से मसलता है
devrani:"aaaah" यह
Rajpal:ab क्या हुआ
Devrani:kuch नहीं वो कड़ी हु न कब सा तो मोच दुःख रहा है
Rajpal:theek है जाओ आराम करो
राजपाल घूम क जाने लगता है
बलदेव एक थप्पड़ मरता है गांड पे और इस बार देवरानी ज़ोर से
"ाआअह"
करती है जो जाते हुए राजपाल को भी सुनाई देती है
राजपाल मन में " ये देवरानी पागल है "
जैसे राजपाल देवरानी क आखो से ओझल होता है देवरानी वापस अपने कक्षा में आती है देखती है बलदेव बिस्तर पर लेता मुस्कुरा रहा था
"बलदेव ये क्या बेवकूफी है राजपाल देख लेता तो"
"माँ बास मेरा मन था मैंने कर दया"
"किसी दिन जान चली जाएगी तुम्हारे इस मन क चक्कर में"
"माँ क्यों परेशां हो रही हो ाचा बोलो तुम्हे मज़ा नहीं आया अपने पति क सामने तुम्हे मसला तो
में"
"
देवरानी ये सुन कर लज्जा जाती है क्यू क अपने बेटे द्वारा अपने पति क सामने ऐसे मसले जाने पर उसे एक अलग हे उत्तेजना का अहसास हुआ था
"पर बलदेव"
"पर वर कुछ नहीं माँ उसकी पत्नी नहीं हो अब तुम और उस बुद्धू राजपाल को बताना है क तुम अब मेरी हो उसकी नहीं"
"बड़े आया मजनू कही क"
"आर्य रे मेरी छमिया वो तो में बताऊंगा तुम्हे क ये मजनू कैसे प्यार करता है"
"देखूंगी क ये बदल गरज़ने वाले है जो बरसते नहीं या फिर सच में.."
बलदेव ये सुन कर देवरानी पर झपट्टा है देवरानी उस से बच निकलती है
devrani:beta संयम रखो नहीं तो ज़्यादा प्रेम दिखाए तो हमारी यात्रा अभी ख़त्म हो जाएगी
Baldev:hmmm माँ संयम और नहीं
Devrani:chalo जाओ अपने मित्रो को बुला लो
Baldev:kya kahu..mausi बुलाई है या भाबी
Devrani
Baldev:han वो तो हु तुम्हारे प्यार में ,और वैसे भी मेरे मित्र है श्याम और बद्री तो तुम्हे आज न कल तो भाबी हे कहेंगे
Devrani:Bhabi नहीं मौसी कहेंगे
Baldev:to तुम क्या चाहती हो क मुझे मौसा कहे
और बलदेव हसने लगता है
Devrani:chup कर कमीने तुम से भला कोण जीत सकता है
Baldev:Maa वो मेरे मित्र पहले है बाद में तुम उनकी मौसी हो मुझे तो पक्का यक़ीन है वो लोग तुम्हे मौसी नहीं कहेंगे
Devrani:Tumhe ऐसा लगता है बलदेव ये भी हो सकता है क सच जान ने क बाद वो हमारा मुँह भी नहीं देखना पसंद करे
Baldev:to न करे मुझे किसी की परवाह नहीं जो हमे स्वीकार करे तो ठीक नहीं करे तो वो मेरा कोई नहीं
Devrani:chal जा बड़ी बड़ी बात करना बाद में जा कर खाओ कुछ
बलदेव निकल कर अपने कक्षा में जाता है और कमला से कह कर नाश्ता ऊपर हे मंगवा लेता है तीनो मिल कर खाने लगते है
Baldev:To कहो बद्री आज हे निकले या कल सवेरे
Badri:waise बलदेव आज हे जाना सही होगा क्यू क महाराज ने कहा है क हमे वापस आना है क्यू क गहतराष्ट्रा क लोग सोचेंगे क उन्हें लड़ने क लये कह दया गया और खुद अपने परिवार को पारस घुमाया जा रहा है
Baldev:hmm सही कह रहे हो बद्री
Shyam:Bhai इसका मतलब हम ज़्यादा दिन पारस नहीं रुक पाएंगे
बद्री:2 से 3 दिन श्याम उस से ज़्यादा नहीं
Shyam:itne दिन में हम कहा घूम पाएंगे पूरा पारस
Badri:shyam तुम्हे बास घूमना और खाना सूझता है यहाँ आक्रमण का दर है
Baldev:shyam चिंता मत करो फिर कभी हम जायेंगे तो अचे से घूम लेंगे वैसे भी पारस तो मेरा ननिहाल है
(मन में: और अब तो ससुराल भी है)
और मुस्कुराता है
ऐसे हे दोपहर का समय हो जाता है चारो अपने यात्रा पर लेने जाने वाला हर सामान अचे से तैयार कर एक जगह रखने लगते है और फिर खाने का समय हो जाता है
सब आसान पर बैठ खाने की प्रतीक्षा कर रहे थे श्याम बद्री राजपाल जीविका षुरूश्ती बलदेव
देवरानी कमला और राधा से हर तरह क व्यंजन रखवाती है
Shyam:Mujhse तो रहा नहीं जा रहा देवरानी मौसी क हाथो का व्यंजन खाने क लये
Baldev:maa सबसे पहले श्याम को दो
देवरानी कमला से पनीर की सब्ज़ी ले कर श्याम क थाली में रखती है और फिर बलदेव को पूछती है
"खाओगे क्या पनीर"
देवरानी का पल्लू सड़क जाता है और उसके दूध साफ दिखने लगते है
बलदेव जैसे देवरानी क गहरी घाटी में खो जाता है
बलदेव देवरानी क वक्ष को देखते हुए
"दो न माँ मुझे खाना है"
देवरानी पनीर की सब्ज़ी रख उसके थाली में
एक ऐडा से मुस्कुराती है
और फिर सबको बाँट ने लगती है
बद्री जो बगल में बैठा भोजन कर रहा था अपने चतुराई से दोनों का नैन मटक्का देख लेता है और वो सोच में डूब जाता है
Baldev
Rajpal:han ठीक है जाओ पर जल्दी आना है इस बात का ध्यान रखना बलदेव
जीविका खाने की कोशिश कर रही थी पर उसके हलक से खाना अंदर नहीं जा रहा था
Jeevika:man में) बता दू क्या राजपाल को
पर कैसे बताऊ
Devrani:aap चिंता मत करे महाराज
हम सही समय पैर आएंगे
Jeevika:Bahu तुम्हे कब से सही गलत की पहचान हो गयी और एक घूरती हुई नज़र से बलदेव की ओरे देखती है
बलदेव को समझते समय नहीं लगता है क दादी क्यू अंदर से इतना गुस्सा है
Baldev
Jeevika:kya ?
Baldev:Han दादी और आप ने बहुत दुन्या देखा है और आपने समझाया था न क जब डिल और दिमाग में युधा हो हमे हमेशा अपने डिल की सुन नई चाहिए अपने ख़ुशी क लये ....अब में अपने डिल की सुनता हु जब भी मुझे निर्णय लेना होता है ,आपका धन्यवाद दादी
जीविका को अपनी कही हुई बात याद आती है और कही न कही उसका डिल अपने पोते जिसको वो जान से ज़्यादा चाहती थी
Baldev
Jeevika:man me)Baldev सही तो कह रहा है आज बलदेव क वजह से हे मेरे पेअर थोड़े ठीक हुए नहीं तो बलदेव क आने से पहले मुझे कोई कहा पूछता था एक जगह सोई रहती थी
जीविका बहुत कठिन परिस्थिति में थी एक तरफ उसका बीटा राजपाल का घर उजाड़ रहा था दूसरी ओरे उसके पोते का घर बस रहा था
जीविका एक बार राजपाल को देखती है फिर बलदेव को देखती है बलदेव क आखो में उसे देवरानी क लये बेशुमार प्यार दीखता है
जीविका देवरानी को देखती है देवरानी अपना सर झुकाये दुखी मन क साथ बैठी थी उसके आँख ासु से भरे थे और जैसे जीविका को कह रहे हो क "कृपया कर क हमारा साथ दीजिये में बहुत दुखी हु"
बलदेव चुप्पी तोड़ते हुए
Baldev:dadi ख़ुशी पाने क लये कभी कभी कठिनाईओ का सामना करना पड़ता है
जीविका फिर देवरानी की ओरे देखती है जो अपने आखो में ासु भरे हुए जीविका की ओरे एक आस से देख रही थी
Devrani:Baldev तुम्हारी तो दादी थी जो तुम्हे ज्ञान दे दी पर मेरे पास न दादी थी न माँ बाप ने परवरिश की उनका भी देहांत हो गया
जीविका को ये बात सुई की तरह चुभता है
जीविका का दिमाग दुखने लगता है क आखिर वो किस मोड़ पर फास गयी है वो अपना सर निचे कर क खाने लगता है
सब भोजन समाप्त कर क उठ ते है
जीविका अपने कक्षा में जाने लगती है
Baldev:ruko दादी हम अब निकलेंगे आशीर्वाद नहीं डोज
बलदेव और देवरानी दोनों साथ में जीविका क पेअर पकड़ कर आशीर्वाद लेते है
जीविका को न चाहते हुए भी आशीर्वाद देना पड़ता है
"सदा खुश रहो"
जीविका अपना विशाखी लिए अपने आखो में ासु लये अपने कक्षा में चली जाती है
जीविका अपने कक्षा में जा कर
"हे भगवन ये कैसी स्तिथि है मई अपने बेटे का साथ क्यू नहीं दे परही हु कही ये देवरानी को जो जीवन भर दुःख हुआ वो तो नहीं रोक रहा मुझे"
और उसके आखो से ासु गिरने लगते है
सेनापति सोमनाथ चार घोड़ो को तैयार कर चारो पर सामान बंधवा रहा था सैनिको से अंदर बलदेव देवरानी और श्याम और बद्री तैयार हो रहे थे
षुरूश्ती अपने कक्षा में आकर अपने रखा पिटारा खोलती है तो उसमे सांप अब भी अपने ज़हर लये मौजूद था
Shurushti:devrani तेरी ये अंतिम यात्रा होगी और उसके बाद तेरे बेटे को भी मई मरवा दूंगी हहहहह
षुरूश्ती बड़ी चालाकी से पटरी छुपाये बहार आती है तो देखती है दो सैनिक और सेनापति सोमनाथ घोड़े पैर सामान लाड रहे थे और घोड़े को उसका चारा दे रहे रहे
Shurushti:uff अब क्या करू
षुरूश्ती कुछ सोचते हुए
Shurushti:Ary सेनापति सोमनाथ
सेनापति somnath:Ji महारानी
Shurushti:wo आप महाराज ने बुलाया है कुछ काम से
सेनापति somnath:ji महारानी
सोमनाथ अपना काम छोर महल क अंदर चला जाता है
Shurushti:sainiko ये किस किसके घोड़े है
Sainik:mahrani ये भूरा वाला युवराज श्याम का है ये कला घोडा पर युवराज बलदेव जायेंगे और ये वाले काळा घोड़े पे युवराज बद्री
Shurushti
Sainik:maharani ये घोड़े पे रानी देवरानी जाएँगी
षुरूश्ती एक क़ातिल मुस्कान देते हुए
Shurushti:Aah मेरा गाला सुख रहा है सैनिको ज़रा पानी लाना
सैनिक pehla:tum जाओ ले आओ पानी
सैनिक दूसरा :नहीं नहीं मेरा काम अब होने वाला है तुम ले आओ
shurushti:Gadho दोनों जाओ एक साथ और पानी लाओ अन्यथा
दोनों दर जाते है और भागने लगते है षुरूश्ती मौक़ा देख पिटारा खोल सांप को देवरानी क घोड़े पे बन्दे झोले में रख देती है और पिटारा छुपा लेती है
दोनों सैनिक भाग कर पानी लाते है
Sainik:ye लीजिये महारानी पानी
Shurushti:tum दोनों ने इतनी देर कर दी मेरी प्यास ख़तम हो गयी
और षुरूश्ती वापस महल में आने लगती है
sainik:ary इतनी जल्दी तो लाये फिर भी
दोनों सैनिक एक दूसरे का मुँह देख अपना बाकि का काम करने लगते है
सब तैयार हो कर महल क बहार आते है जहा पर उनका घोडा तैयार खड़ा था देवरानी सब से विदा लेती है
षुरूश्ती हल्का रोने लगती है
"देवरानी अपना ख्याल रखना"
देवरानी मन में :वापस मत आना कलमुही देवरानी
devrani:Han दीदी आप भी रखना
Rajpal:devrani सेल साहब मेरा प्रणाम मत भूलना
देवरानी मन में :देवराज क जीजा को में साथ ले जा रही तुम्हारे प्रणाम का क्या करू
षुरूश्ती मन me:budhu राजपाल देवरानी ने देवराज का जीजा हे बदल दया है अब भी भ्रम में हो
kamla:Mahrani अपना ख्याल रखना
Devrani:tum भी अपना ख्याल रखना
बलदेव अपने पिता क पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है और फिर सब बरी बड़ी घोड़े पर बैठने लगते है और सब अपने घोड़े को लगाम खींच घोड़े को भागने लगते है
राजपाल षुरूश्ती अंदर आते है
षुरूश्ती :आखिर बाला ताली
rajpal
Shurushti:to मर जाने दो दोनों माँ बेटे को वो कौन सा आपके बात मने
Rajpal:tum सही कह रही हो षुरूश्ती वो मुझे नहीं समझते तो में क्यू सोचु
इधर बलदेव अपने माँ और मित्रो क साथ तेज़ गति से घोड़े पे सवार गहतराष्ट्रा की सीमा पार कर लेता है ,घोड़े को दौड़ते हुए शाम हो जाती है
बलदेव अपना हाथ दिखा कर सबको धीरे होने का इशारा देता है
सब रुक जाते है
Baldev:Badri अँधेरा हो गया है अब हमे मशाल जला लेना चाहिए
Badri:Thek है बलदेव
बद्री मशाल जलने लगता है
Baldev:ab हम सब आगे पीछे चलेंगे सबसे आगे बद्री मशाल लिए चलेगा उसके पीछे श्याम उसके पीछे माँ और उसके पीछे मई
देवरानी घोड़े पे बैठी अपने बेटे की बुद्धिमानी पर गर्व महसूस कर रही थी
बद्री मसल जला कर आगे अत है
Baldev:dhyan रहे हम डिल क पास है हमे आबादी से बच कर जंगल से अधिकतर आगे बढ़ना है और ये चन्द्रमा की रौशनी भी आज हमारे साथ है
अब बद्री हाथ में मसल लिए घोड़े की लगाम दूसरे हाथ से थामे घोड़े को भागता है उसके पीछे श्याम उसके पीछे देवरानी और बलदेव
रात 10 बजे बलदेव की आवाज़ से बद्री अपना घोडा रोकता है
Baldev:badri आधी रत होने को है हमे अब कुछ खा कर आराम करना चाहिए
Shyam:han मई थक गया कुछ खाना चाहिए
Baldev:kya कहती हो माँ
देवरानी एक मुस्कान क साथ "खिला दो मुझे भी"
बद्री :महल में भी मौसी कुछ अलग अंदाज़ से अपने पल्लू हटा कर दिखा रही थी बलदेव को और मुस्कुरा रही थी और अब भी क्या में जो सोच रहा हु वो सही है
Badri:mausi खाने का झोला मेरे पास है आ जाओ सब कहते है
Baldev:yaha पास में झरना है और हम किसी गाओ क करीब है दूर तुम सब देखो खेतो क उस पर दिया जल रहे है
devrani:han यहाँ ठण्ड भी बहुत है
Baldev:badri अपना पसंदीदा घर बनाया जाये
Badri:han क्यू नहीं
Devrani:ghar और यहाँ क्या कह रहे हो तुम लोग
Badri:hum दो बना सकते है
बद्री अपने हाथ से हथोड़ी निकल कर तम्बू बनाने लगता है
अब चारो समझ जाते है क उनको क्या करना है और देवरानी भी हाथ बता ने लगती है
और देखते हे देखते दो तम्बू बन क तैयार हो जाते है
devrani:wah ये तो हूबहू घर जैसा हो गया
Badri:mausi ये सब हमारे गुरु ने सिखाया है
फिर सब वही बैठ कर चटाई पर खाना कहते है और छोटा सा लैंटर्न जला कर दोनों तम्बू में रख लेते है
खाना खाने क बाद सब इधर उधर की बाते करने लगते है
बलदेव पास क एक वृक्ष स सुखी लकड़ी तोड़ लेता है और उसे जला देता है
Baldev:ise हमे गर्मी महसूस होगी और जानवरो से भी बचाव होगा
ये सब करते हुए 11 बज जाता है
Devrani:mera बदन टूट रहा है सालो बाद घुड़सवारी की हु मुझे सोना है और बलदेव की और देखती है
बलदेव समझते हुए
तो मित्रो अब हमे सोना चाहिए हमे भोर होते हुए फिर पारस की ओरे जाना है
बद्री :हाँ सो जाते है भाई अब दो तम्बू है पर दोनों छोटे है ,मौसी एक तम्बू में सो जाएगी क्यू क उनको जगह चाहिए और हम तीनो एक तम्बू में सो जाते है ऐसे भी हम आचार्य जी क वह साथ हे सोते थे
देवरानी ये सुन कर बलदेव की ओरे निराशा से देखती है
Baldev:badri बात ये है न मित्र क माँ को अकेले दर लगेगा अकेले तो में माँ को ले कर सो जाता हु
बद्री मन में :कुछ तो गड़बड़ है
Shyam:han चलेगा में और बद्री ये तम्बू में सो जाते है
Devrani:han में बलदेव क साथ सो जाती हु
Badri:theek है ठीक है
सब अपने घोड़े को अचे से बांध बिस्तर लगा कर तम्बू में घुस कर तम्बू बंद कर लेते है परदे से
श्याम और बद्री अपने राज्य की कहानी बतया रहे थे वही देवरानी क बगल में लेता बलदेव ऊपर की तरफ देख रहा था
"बलदेव क्या सोच रहे हो राजा"
"माँ में यही सोच रहा हु क कभी सोचा नहीं था तुम मेरी हो जाओगी आज ऐसा लग रहा है जैसे क हम दुन्या से दूर है किसी बंधन क"
"हाँ बलदेव मुझे भी वर्षो बाद सुकून मिल रहा है"
बलदेव और देवरानी अपने अतीत से जुडी हर बाते कर रहे थे
आधा घंटा बाद
"बलदेव क्या हुआ आज मौक़ा है तो हाथ नहीं मरोगे"
बलदेव तम्बू से बहार अत है और देखता है बद्री और श्याम सो रहे थे
बलदेव फिर तम्बू में आकर देवरानी से चिपक जाता है
"महारानी देवरानी बोलो न मेरी पत्नी बनोगी"
"बना पाओगे तो मेरी हाँ है मई इस चन्द्रमा को साक्षी मान कर कह रही हु"
बलदेव क आखो में देखती है
बलदेव देवरानी क होठो पर चूमता है उसको आलिंगन में लेते हुए
बद्री जिसके दिमाग में शक हो गया था वो बलदेव की आहात सुन लय था और बलदेव जब आया था तो खर्राटे लेने लगा था
बद्री श्याम को सोता छोर बहार निकलता है और जैसे हे वो तम्बू की ओरे देखता है उसके पैरो से ज़मीन निकल जाता है लैंटर्न की रोशनी से परछाई बने हुए दिख रहा था क बलदेव और देवरानी क्या कर रहे है
परछाई में साफ़ पता चल रहा था दोनों एक दूसरे को चुम रहे है बद्री का दिमाग काम करना बंद करने लगता है और वही बूट बना खड़ा देख रहा था..
तो बे कॉन्टिनोएड