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- Dec 5, 2013
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नशे में धीरे धीरे बलदेव डूब रहा था वैसा हे हाल शमशेर का भी था
Shamshera:chalo यार एक माल थोक क आता हु में
Baldev:nahi शमशेर घर chalo..mujhe कुछ ठीक नहीं लग रहा
Shamshera:tum सच मच 18 साल क दूध पीते बचे हो चलो
Baldev:Mujhe बचा कहा
दोनों वह से जाने लगते है तभी वह पर एक सुन्दर नचनिया सब नशेरिओ क लये मनोरंजन करते हुए नाचने लगती है जिसे शमशेर देख रुक जाता है
Shamshera:man में) अम्मी तुम कितनी खूबसूरत हो
शमशेर को उस नचनिया को देख उसकी माँ भूरिया याद आरही थी जिसके हुस्न को अपने बाप सुल्तान क हाथो दिन दहाड़े मसलते हुए अपने दोनों आखो से शमशेर ने देख लय था
Shamshera:Man me)maa कसम अम्मी मुझे एक बार मिल जाओ तो में तुम्हे अब्बा की तरह अधूरा नहीं छोड़ूंगा जैसे उस दिन तुम मिन्नतें करते रही और वो फ़ारिग़ हो गए
Baldev:bhai चलो भी क्या सोचने लग गए
Shamshera:han हाँ चलो बचे
शमशेर और बलदेव तहखाने में बने मेह्खाने से निकल सीडीओ से चढ़ ऊपर आते है और अपने घोड़ो की ओरे चल देते है शमशेर ने इतनी पी ली थी क रह रह क उसे अपनी माँ दिख रही थी जहा भी देखता वो और उसके दिमाग में यही गूंज रहा था "सुल्तान नहीं अभी मेरा नहीं hua"or यु अपने माँ भूरिया को अपने बाप से छोड़ने क ख्याल से शमशेर गरम हो जाता है
बलदेव चुप चाप अपने गलती क बारे में सोचते हुए घोड़े को भगा रहा था
Baldev:man me)devrani ने मन क्या था उसको पता चल गया में मदिरा पिया हु तो आर्य क्या हुआ में मर्द हु पीयू नहीं तो क्या एक औरत क कहने से
बलदेव नशे में धुत कभी अपनी गलती पर खेद करता कभी नशे में सोच रहा था उसने कोई नशा हे नहीं क्या
दोनों ऐसे हे महल पहुंच जाते है
जश्न का माहौल ज़ोरो शोरो से शुरू था रात अपने अँधेरा फैलाये पारस को टीम टिमाते तारो की रौशनी से घेर लिए थे और तारो की ख़ूबसूरती जब पारस क खूबसूरत महलो और दरबारों पर पड़ती तो माहौल और खूबसूरत हो जाता
दरबार में एक तरफ मर्द बैठे थे और वही बगल में एक पर्दा कर क महल की सब औरते भी बैठ कर जश्न मन रहे थे फनकार बारी बारी से आकर अपना फैन दिखा रहे थे
परदे क पीछे से जो बारीक सा कपडे का था जिसके आरपार देखा जा सकता था सब औरतो में मल्लिकाजहं भी तहत से बैठी थी अपने सिंहासन पैर और उसके साथ देवरानी और हरम की 150 रानिया जिसे सुल्तान मेरे वाहिद ने रखा था इन सब क पीछे पारस क अलग अलग कस्बो और सहर से आये औरते भी बैठे थे और फैन का मज़ा ले रहे थे
Devrani:didi ये बलदेव नहीं दिख रहा बहुत समय हो गया
Hooriya:Mujhe पता चला है वो शमशेर क साथ गया था फ़िक़र न करो
Devrani:mujhe दर लग रहा है एक बार उसको देख लेती तो
भूरिया अपने दोनों हाथो को ऊपर उठा क ताली बजती है
ताली की आवाज़ सुन कर वह दासी आती है
Daasi:ji मल्लिका जहाँ
Hooriya:suno बलदेव और शमशेर का पता लगाओ कहा है
Daasi:jo हुकम मल्लिका जहाँ
भूरिया देवरानी की ओरे मुस्कुरा क देखती है
Hooriya:ab खुश मेरी रानी एक मिंट चैन नहीं लेती बलदेव क बिना
देवरानी शर्म से अपना सर निचे कर लेती
devrani:man me)ab कैसे बताऊ आपको भूरिया दीदी बलदेव मेरे पति से भी बढ़ क है और में उनसे कितना प्रेम करती हु
देवरानी मुस्कुराते हुए
Devrani:dhanywad दीदी
बलदेव और शमशेर अपने घोड़ो को सैनिको को सौंप भागते हुए दरबाद की ओरे जाते है
Shamshera:Hume देरी हो गयी बलदेव अगर सुल्तान ने मुझे देख लय तो मेरी खैर नहीं
Baldev:tumhare वजह से मुझे भी सुन न पद सकता है मां देवराज से
दोनों का नशा दर क मरे थोड़ा काम हो गया था
Shamshera:baldev तुम महफ़िल में जाओ हम आते है
Baldev:tum क्यू नहीं जाओगे फैट रही है जाने में बाप क सामने ..बच्चू
Shamshera:tumhara दिमाग तो ठीक है न में जो ये ले कर आया हु इसे अपने होज़रे में सही सलामत पंहुचा कर आता हु रात में सोते वक़्त दो घुट और पी लूंगा
Baldev:kitne बड़े नशेड़ी हो तुम यार ठीक है जाओ में जाता हु
बलदेव महफ़िल में जाता है तो देखता है सब बैठ बहुत ध्यान से देख रहे थे बलदेव चुपके से जा कर सबसे पीछे देवराज और सुल्तान मेरे वाहिद से छुप कर आसान पर बैठ जाता है
देवराज की गिद्ध की आखे बलदेव को ु चुपके आ के बैठ देख लेता देवराज अपने भांजे को एक मुस्कान दे कर इशारे में कहता है क आगये उत्तर में बलदेव भी जी मां कह क इशारा करता है
Devraj:man me)ise शमशेर ले कर गया था इसे दूर रखना होगा उस शमशेर से नहीं तो ये भी बिगड़ जायेगा
पास बैठा सुल्तान मेरे वाहिद भी बलदेव को देख
"ये शमशेर कहा रह गया बलदेव आगया तो"
शमशेर अपना कक्षा में जा कर मदिरा को छुपा देता है
इधर देवरानी भूरिया से कहती है क उसे भूक लगी है अंदर कक्षा में चलने और भूरिया और देवरानी महल में आजाते है अपने कक्षा में
महल में लोगो का ताँता लगा था और सैनिक गरीबो को कपडा और खाना बाँट रहे थे
Sainik:ye लो तुम्हारा कपडा बूढी और सुलन और पारस की सलामती की दवा करो
तभी ये सुन कर भूरिया रुक जाती है और सैनिक से
Hooriya:kya कहा तुमने
sainik:muaf कीजिये मल्लिकाजहं
Hooriya:wo तुम्हारे माँ की उम्र की है तुम उसे बूढी कह रहे हो शर्म नहीं आती तुम्हे
Sanik:muaaf करदे मल्लिकाजहं
Hooriya:hum गरीबो को दे रहे है इसलिए नहीं क हम उनपर अहसान कर रहे है बल्कि इसलिए क खुदा ने हमें सब कुछ दिया है और पारस क हर एक गरीब का हक़ हमारे दौलत पर है ..
भूरिया उस बूढी औरत को देख
"हमे दुवाओ से नवाज़े अम्मा"
बूढी aurat:Khuda आपको हर खुशीअ दे मल्लिकाजहं
देवरानी ये देख कड़ी कड़ी मुस्कुरा रही थी
devrani:man me)Hooriya कितनी पाक डिल की है
वो दोनों अपने कक्षा में जाने लगते है तभी शमशेर अपने कक्षा से आरहा था
Shamshera:salam अम्मी सलाम देवरानी खला
Devrani:Namaskar
Hooriya:salam बीटा कहा थे
Shamshera:wo बास बलदेव को पारस की शेर करवाने
Hooriya:tum देवरानी कुछ खाना मँगवालो या अपने कक्षा में अगर है तो खा लो
devrani:baldev कहा है शमशेर बीटा
Shamshera:wo महफ़िल में है
देवरानी ये सुन कर अपने कक्षा की ओरे जाने लगती है
भूरिया गरीबो में कपडे और खाना बाँट रहे सैनिको को झुक कर देख रही थी और पास खड़ा शमशेर अपने नज़रो से भूरिया को देख रहा था
देवरानी थोड़ा आगे जा कर पीछे मुड़ती है तो उसके होश उड़ जाते है शमशेर अपने अम्मी भूरिया क गांड को घूरे जा रहा था
devrani:man me)hey भगवन ये भी..
देवरानी देखती है शमशेर अपने माँ क गांड को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था
Shamshera:man में) अम्मी मैंने जब से आपको अब्बा से चुड़ते हुए देखा है आपके इस हुस्न का दीवाना हो गया हु
Devrani:didi..
ये सुनते हे शमशेर अपने ख्वाब से बहार आता है और अपने निगाहे अपने माँ से हटते हुए देवरानी को देखता है जो मुस्कुरा कर भूरिया को कहती है
"दीदी आप भी आइये न मुझे अकेला जाना ाचा नहीं लग रहा है"
भूरिया शमशेर को देख
"आर्य बीटा अभी तुम गए नहीं"
"हाँ अम्मी में जा हे रहा था"
और अपनी नज़रो को बचता है
Hooriya:jaldi महफ़िल में जाओ बीटा
Shamshera:ji अम्मी
भूरिया तेज़ कदमो से अपने भरी भरकम बदन को हिजाब में लिए देवरानी की ओरे चलने लगती है
देवरानी कड़ी कड़ी अंदर से मुस्कुराती हुई शमशेर क निगाहो पे हे देख रही थी जो लगातार अपने माँ क चलने पर उसके भरी चुतर को खा जाने वाली नज़र से देख रहा था
देवरानी क पास पहुंच कर
"चलो देवरानी "
"देवरानी और भूरिया अंदर आते है"
और शमशेर महफ़िल में चला जाता है
Devrani:didi आपको दुर्गन्ध आई की नहीं
Hooriya:matlab
Devrani:didi मतलब शमशेर कुछ नशा क्या है महक
Hooriya:han इसलिए तो वो देरी से आया मुझे पता है
Devrani:to दीदी आप ने कुछ कहा क्यू नहीं
Hooriyan:Maine बहुत समझाया पर मेरी ये एक नहीं सुनता बहिन रोज़ पीटा है वो
Devrani:aise तो वो अपने सेहत बर्बाद कर लेगा
Hooriyat:ab वो जाने वो अब बचा नहीं 25 साल का समझदार मर्द हो गया है
Devrani:mera बलदेव तो बॉस अभी 18 साल का हे है और मेरी हर बात मानता है
दोनों अंदर जा कर खाने पीने लगते है
बलदेव क पास जा कर शमशेर भी बैठ जाता है पर सुल्तान ने एक बार उसे घूर कर देखा मतलब आगे जा कर दांत पड़ने वाली थी शमशेर को
देवरानी और भूरिया अब वापस आकर बैठ जाते है और अब कवाल अपनी क़व्वाली सुना रहा था और डफली और टेबल की आवाज़ गूंज रही थी
रात क 11 बज गए बलदेव को सोने का समय हो गया था और उसके साथ उसे अब कुछ समय से देवरानी को इस समय अपने बहो में रखकर रगड़ने की आदत थी
Baldev:man me)ary ये में क्या देख रहा हु मेरी जान देवरानी क साथ होना चाहिए पारस में हम इसलिए आइये है क्या
बलदेव क ऊपर से नशे की खुमारी अभी पूरी तरह से उतरी नहीं थी
बलदेव अपने आसान से उठा कर जाने लगता है और पास लगे परदे क पास जा कर अपने माँ को औरतो की हुजूम ढूंढ़ने लगता है आखिर कर उसे अपनी माँ दिखाई पड़ती है भूरिया क साथ वो उसके करीब जाता है और परदे क पास खड़ा हो कर इशारा करता है
Daasi:Yuvraj आप यहाँ से चले जाये इस तरफ मर्दो को आना मन है
Baldev:ary में उधर नहीं जा रहा हु मेरी माँ को कहो मेरी ओरे देखने
दासी जा कर देवरानी को परदे क पीछे खड़े बलदेव को देखने कहती है
देवरानी इशारे से पूछती है "
क्या हुआ"
बलदेव अपने दोनों हाथ जोड़ कर सोने का इशारा करता है
पास बैठी भूरिया देख रही थी दोनों को इशारे करते हुए
Hooriya:kya हुआ देवरानी बलदेव क्या कह रहा है
Devrani:Usko नींद आरही है सोने क लये कह रहा है
तो बे कॉन्टिनोएड
नशे में धीरे धीरे बलदेव डूब रहा था वैसा हे हाल शमशेर का भी था
Shamshera:chalo यार एक माल थोक क आता हु में
Baldev:nahi शमशेर घर chalo..mujhe कुछ ठीक नहीं लग रहा
Shamshera:tum सच मच 18 साल क दूध पीते बचे हो चलो
Baldev:Mujhe बचा कहा
दोनों वह से जाने लगते है तभी वह पर एक सुन्दर नचनिया सब नशेरिओ क लये मनोरंजन करते हुए नाचने लगती है जिसे शमशेर देख रुक जाता है
Shamshera:man में) अम्मी तुम कितनी खूबसूरत हो
शमशेर को उस नचनिया को देख उसकी माँ भूरिया याद आरही थी जिसके हुस्न को अपने बाप सुल्तान क हाथो दिन दहाड़े मसलते हुए अपने दोनों आखो से शमशेर ने देख लय था
Shamshera:Man me)maa कसम अम्मी मुझे एक बार मिल जाओ तो में तुम्हे अब्बा की तरह अधूरा नहीं छोड़ूंगा जैसे उस दिन तुम मिन्नतें करते रही और वो फ़ारिग़ हो गए
Baldev:bhai चलो भी क्या सोचने लग गए
Shamshera:han हाँ चलो बचे
शमशेर और बलदेव तहखाने में बने मेह्खाने से निकल सीडीओ से चढ़ ऊपर आते है और अपने घोड़ो की ओरे चल देते है शमशेर ने इतनी पी ली थी क रह रह क उसे अपनी माँ दिख रही थी जहा भी देखता वो और उसके दिमाग में यही गूंज रहा था "सुल्तान नहीं अभी मेरा नहीं hua"or यु अपने माँ भूरिया को अपने बाप से छोड़ने क ख्याल से शमशेर गरम हो जाता है
बलदेव चुप चाप अपने गलती क बारे में सोचते हुए घोड़े को भगा रहा था
Baldev:man me)devrani ने मन क्या था उसको पता चल गया में मदिरा पिया हु तो आर्य क्या हुआ में मर्द हु पीयू नहीं तो क्या एक औरत क कहने से
बलदेव नशे में धुत कभी अपनी गलती पर खेद करता कभी नशे में सोच रहा था उसने कोई नशा हे नहीं क्या
दोनों ऐसे हे महल पहुंच जाते है
जश्न का माहौल ज़ोरो शोरो से शुरू था रात अपने अँधेरा फैलाये पारस को टीम टिमाते तारो की रौशनी से घेर लिए थे और तारो की ख़ूबसूरती जब पारस क खूबसूरत महलो और दरबारों पर पड़ती तो माहौल और खूबसूरत हो जाता
दरबार में एक तरफ मर्द बैठे थे और वही बगल में एक पर्दा कर क महल की सब औरते भी बैठ कर जश्न मन रहे थे फनकार बारी बारी से आकर अपना फैन दिखा रहे थे
परदे क पीछे से जो बारीक सा कपडे का था जिसके आरपार देखा जा सकता था सब औरतो में मल्लिकाजहं भी तहत से बैठी थी अपने सिंहासन पैर और उसके साथ देवरानी और हरम की 150 रानिया जिसे सुल्तान मेरे वाहिद ने रखा था इन सब क पीछे पारस क अलग अलग कस्बो और सहर से आये औरते भी बैठे थे और फैन का मज़ा ले रहे थे
Devrani:didi ये बलदेव नहीं दिख रहा बहुत समय हो गया
Hooriya:Mujhe पता चला है वो शमशेर क साथ गया था फ़िक़र न करो
Devrani:mujhe दर लग रहा है एक बार उसको देख लेती तो
भूरिया अपने दोनों हाथो को ऊपर उठा क ताली बजती है
ताली की आवाज़ सुन कर वह दासी आती है
Daasi:ji मल्लिका जहाँ
Hooriya:suno बलदेव और शमशेर का पता लगाओ कहा है
Daasi:jo हुकम मल्लिका जहाँ
भूरिया देवरानी की ओरे मुस्कुरा क देखती है
Hooriya:ab खुश मेरी रानी एक मिंट चैन नहीं लेती बलदेव क बिना
देवरानी शर्म से अपना सर निचे कर लेती
devrani:man me)ab कैसे बताऊ आपको भूरिया दीदी बलदेव मेरे पति से भी बढ़ क है और में उनसे कितना प्रेम करती हु
देवरानी मुस्कुराते हुए
Devrani:dhanywad दीदी
बलदेव और शमशेर अपने घोड़ो को सैनिको को सौंप भागते हुए दरबाद की ओरे जाते है
Shamshera:Hume देरी हो गयी बलदेव अगर सुल्तान ने मुझे देख लय तो मेरी खैर नहीं
Baldev:tumhare वजह से मुझे भी सुन न पद सकता है मां देवराज से
दोनों का नशा दर क मरे थोड़ा काम हो गया था
Shamshera:baldev तुम महफ़िल में जाओ हम आते है
Baldev:tum क्यू नहीं जाओगे फैट रही है जाने में बाप क सामने ..बच्चू
Shamshera:tumhara दिमाग तो ठीक है न में जो ये ले कर आया हु इसे अपने होज़रे में सही सलामत पंहुचा कर आता हु रात में सोते वक़्त दो घुट और पी लूंगा
Baldev:kitne बड़े नशेड़ी हो तुम यार ठीक है जाओ में जाता हु
बलदेव महफ़िल में जाता है तो देखता है सब बैठ बहुत ध्यान से देख रहे थे बलदेव चुपके से जा कर सबसे पीछे देवराज और सुल्तान मेरे वाहिद से छुप कर आसान पर बैठ जाता है
देवराज की गिद्ध की आखे बलदेव को ु चुपके आ के बैठ देख लेता देवराज अपने भांजे को एक मुस्कान दे कर इशारे में कहता है क आगये उत्तर में बलदेव भी जी मां कह क इशारा करता है
Devraj:man me)ise शमशेर ले कर गया था इसे दूर रखना होगा उस शमशेर से नहीं तो ये भी बिगड़ जायेगा
पास बैठा सुल्तान मेरे वाहिद भी बलदेव को देख
"ये शमशेर कहा रह गया बलदेव आगया तो"
शमशेर अपना कक्षा में जा कर मदिरा को छुपा देता है
इधर देवरानी भूरिया से कहती है क उसे भूक लगी है अंदर कक्षा में चलने और भूरिया और देवरानी महल में आजाते है अपने कक्षा में
महल में लोगो का ताँता लगा था और सैनिक गरीबो को कपडा और खाना बाँट रहे थे
Sainik:ye लो तुम्हारा कपडा बूढी और सुलन और पारस की सलामती की दवा करो
तभी ये सुन कर भूरिया रुक जाती है और सैनिक से
Hooriya:kya कहा तुमने
sainik:muaf कीजिये मल्लिकाजहं
Hooriya:wo तुम्हारे माँ की उम्र की है तुम उसे बूढी कह रहे हो शर्म नहीं आती तुम्हे
Sanik:muaaf करदे मल्लिकाजहं
Hooriya:hum गरीबो को दे रहे है इसलिए नहीं क हम उनपर अहसान कर रहे है बल्कि इसलिए क खुदा ने हमें सब कुछ दिया है और पारस क हर एक गरीब का हक़ हमारे दौलत पर है ..
भूरिया उस बूढी औरत को देख
"हमे दुवाओ से नवाज़े अम्मा"
बूढी aurat:Khuda आपको हर खुशीअ दे मल्लिकाजहं
देवरानी ये देख कड़ी कड़ी मुस्कुरा रही थी
devrani:man me)Hooriya कितनी पाक डिल की है
वो दोनों अपने कक्षा में जाने लगते है तभी शमशेर अपने कक्षा से आरहा था
Shamshera:salam अम्मी सलाम देवरानी खला
Devrani:Namaskar
Hooriya:salam बीटा कहा थे
Shamshera:wo बास बलदेव को पारस की शेर करवाने
Hooriya:tum देवरानी कुछ खाना मँगवालो या अपने कक्षा में अगर है तो खा लो
devrani:baldev कहा है शमशेर बीटा
Shamshera:wo महफ़िल में है
देवरानी ये सुन कर अपने कक्षा की ओरे जाने लगती है
भूरिया गरीबो में कपडे और खाना बाँट रहे सैनिको को झुक कर देख रही थी और पास खड़ा शमशेर अपने नज़रो से भूरिया को देख रहा था
देवरानी थोड़ा आगे जा कर पीछे मुड़ती है तो उसके होश उड़ जाते है शमशेर अपने अम्मी भूरिया क गांड को घूरे जा रहा था
devrani:man me)hey भगवन ये भी..
देवरानी देखती है शमशेर अपने माँ क गांड को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था
Shamshera:man में) अम्मी मैंने जब से आपको अब्बा से चुड़ते हुए देखा है आपके इस हुस्न का दीवाना हो गया हु
Devrani:didi..
ये सुनते हे शमशेर अपने ख्वाब से बहार आता है और अपने निगाहे अपने माँ से हटते हुए देवरानी को देखता है जो मुस्कुरा कर भूरिया को कहती है
"दीदी आप भी आइये न मुझे अकेला जाना ाचा नहीं लग रहा है"
भूरिया शमशेर को देख
"आर्य बीटा अभी तुम गए नहीं"
"हाँ अम्मी में जा हे रहा था"
और अपनी नज़रो को बचता है
Hooriya:jaldi महफ़िल में जाओ बीटा
Shamshera:ji अम्मी
भूरिया तेज़ कदमो से अपने भरी भरकम बदन को हिजाब में लिए देवरानी की ओरे चलने लगती है
देवरानी कड़ी कड़ी अंदर से मुस्कुराती हुई शमशेर क निगाहो पे हे देख रही थी जो लगातार अपने माँ क चलने पर उसके भरी चुतर को खा जाने वाली नज़र से देख रहा था
देवरानी क पास पहुंच कर
"चलो देवरानी "
"देवरानी और भूरिया अंदर आते है"
और शमशेर महफ़िल में चला जाता है
Devrani:didi आपको दुर्गन्ध आई की नहीं
Hooriya:matlab
Devrani:didi मतलब शमशेर कुछ नशा क्या है महक
Hooriya:han इसलिए तो वो देरी से आया मुझे पता है
Devrani:to दीदी आप ने कुछ कहा क्यू नहीं
Hooriyan:Maine बहुत समझाया पर मेरी ये एक नहीं सुनता बहिन रोज़ पीटा है वो
Devrani:aise तो वो अपने सेहत बर्बाद कर लेगा
Hooriyat:ab वो जाने वो अब बचा नहीं 25 साल का समझदार मर्द हो गया है
Devrani:mera बलदेव तो बॉस अभी 18 साल का हे है और मेरी हर बात मानता है
दोनों अंदर जा कर खाने पीने लगते है
बलदेव क पास जा कर शमशेर भी बैठ जाता है पर सुल्तान ने एक बार उसे घूर कर देखा मतलब आगे जा कर दांत पड़ने वाली थी शमशेर को
देवरानी और भूरिया अब वापस आकर बैठ जाते है और अब कवाल अपनी क़व्वाली सुना रहा था और डफली और टेबल की आवाज़ गूंज रही थी
रात क 11 बज गए बलदेव को सोने का समय हो गया था और उसके साथ उसे अब कुछ समय से देवरानी को इस समय अपने बहो में रखकर रगड़ने की आदत थी
Baldev:man me)ary ये में क्या देख रहा हु मेरी जान देवरानी क साथ होना चाहिए पारस में हम इसलिए आइये है क्या
बलदेव क ऊपर से नशे की खुमारी अभी पूरी तरह से उतरी नहीं थी
बलदेव अपने आसान से उठा कर जाने लगता है और पास लगे परदे क पास जा कर अपने माँ को औरतो की हुजूम ढूंढ़ने लगता है आखिर कर उसे अपनी माँ दिखाई पड़ती है भूरिया क साथ वो उसके करीब जाता है और परदे क पास खड़ा हो कर इशारा करता है
Daasi:Yuvraj आप यहाँ से चले जाये इस तरफ मर्दो को आना मन है
Baldev:ary में उधर नहीं जा रहा हु मेरी माँ को कहो मेरी ओरे देखने
दासी जा कर देवरानी को परदे क पीछे खड़े बलदेव को देखने कहती है
देवरानी इशारे से पूछती है "
क्या हुआ"
बलदेव अपने दोनों हाथ जोड़ कर सोने का इशारा करता है
पास बैठी भूरिया देख रही थी दोनों को इशारे करते हुए
Hooriya:kya हुआ देवरानी बलदेव क्या कह रहा है
Devrani:Usko नींद आरही है सोने क लये कह रहा है
तो बे कॉन्टिनोएड