Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 8 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 66

नशे में धीरे धीरे बलदेव डूब रहा था वैसा हे हाल शमशेर का भी था

Shamshera:chalo यार एक माल थोक क आता हु में

Baldev:nahi शमशेर घर chalo..mujhe कुछ ठीक नहीं लग रहा

Shamshera:tum सच मच 18 साल क दूध पीते बचे हो चलो

Baldev:Mujhe बचा कहा

दोनों वह से जाने लगते है तभी वह पर एक सुन्दर नचनिया सब नशेरिओ क लये मनोरंजन करते हुए नाचने लगती है जिसे शमशेर देख रुक जाता है

Shamshera:man में) अम्मी तुम कितनी खूबसूरत हो

शमशेर को उस नचनिया को देख उसकी माँ भूरिया याद आरही थी जिसके हुस्न को अपने बाप सुल्तान क हाथो दिन दहाड़े मसलते हुए अपने दोनों आखो से शमशेर ने देख लय था

Shamshera:Man me)maa कसम अम्मी मुझे एक बार मिल जाओ तो में तुम्हे अब्बा की तरह अधूरा नहीं छोड़ूंगा जैसे उस दिन तुम मिन्नतें करते रही और वो फ़ारिग़ हो गए

Baldev:bhai चलो भी क्या सोचने लग गए

Shamshera:han हाँ चलो बचे

शमशेर और बलदेव तहखाने में बने मेह्खाने से निकल सीडीओ से चढ़ ऊपर आते है और अपने घोड़ो की ओरे चल देते है शमशेर ने इतनी पी ली थी क रह रह क उसे अपनी माँ दिख रही थी जहा भी देखता वो और उसके दिमाग में यही गूंज रहा था "सुल्तान नहीं अभी मेरा नहीं hua"or यु अपने माँ भूरिया को अपने बाप से छोड़ने क ख्याल से शमशेर गरम हो जाता है

बलदेव चुप चाप अपने गलती क बारे में सोचते हुए घोड़े को भगा रहा था

Baldev:man me)devrani ने मन क्या था उसको पता चल गया में मदिरा पिया हु तो आर्य क्या हुआ में मर्द हु पीयू नहीं तो क्या एक औरत क कहने से

बलदेव नशे में धुत कभी अपनी गलती पर खेद करता कभी नशे में सोच रहा था उसने कोई नशा हे नहीं क्या

दोनों ऐसे हे महल पहुंच जाते है

जश्न का माहौल ज़ोरो शोरो से शुरू था रात अपने अँधेरा फैलाये पारस को टीम टिमाते तारो की रौशनी से घेर लिए थे और तारो की ख़ूबसूरती जब पारस क खूबसूरत महलो और दरबारों पर पड़ती तो माहौल और खूबसूरत हो जाता

दरबार में एक तरफ मर्द बैठे थे और वही बगल में एक पर्दा कर क महल की सब औरते भी बैठ कर जश्न मन रहे थे फनकार बारी बारी से आकर अपना फैन दिखा रहे थे

परदे क पीछे से जो बारीक सा कपडे का था जिसके आरपार देखा जा सकता था सब औरतो में मल्लिकाजहं भी तहत से बैठी थी अपने सिंहासन पैर और उसके साथ देवरानी और हरम की 150 रानिया जिसे सुल्तान मेरे वाहिद ने रखा था इन सब क पीछे पारस क अलग अलग कस्बो और सहर से आये औरते भी बैठे थे और फैन का मज़ा ले रहे थे

Devrani:didi ये बलदेव नहीं दिख रहा बहुत समय हो गया

Hooriya:Mujhe पता चला है वो शमशेर क साथ गया था फ़िक़र न करो

Devrani:mujhe दर लग रहा है एक बार उसको देख लेती तो

भूरिया अपने दोनों हाथो को ऊपर उठा क ताली बजती है

ताली की आवाज़ सुन कर वह दासी आती है

Daasi:ji मल्लिका जहाँ

Hooriya:suno बलदेव और शमशेर का पता लगाओ कहा है

Daasi:jo हुकम मल्लिका जहाँ

भूरिया देवरानी की ओरे मुस्कुरा क देखती है

Hooriya:ab खुश मेरी रानी एक मिंट चैन नहीं लेती बलदेव क बिना

देवरानी शर्म से अपना सर निचे कर लेती

devrani:man me)ab कैसे बताऊ आपको भूरिया दीदी बलदेव मेरे पति से भी बढ़ क है और में उनसे कितना प्रेम करती हु

देवरानी मुस्कुराते हुए

Devrani:dhanywad दीदी

बलदेव और शमशेर अपने घोड़ो को सैनिको को सौंप भागते हुए दरबाद की ओरे जाते है

Shamshera:Hume देरी हो गयी बलदेव अगर सुल्तान ने मुझे देख लय तो मेरी खैर नहीं

Baldev:tumhare वजह से मुझे भी सुन न पद सकता है मां देवराज से

दोनों का नशा दर क मरे थोड़ा काम हो गया था

Shamshera:baldev तुम महफ़िल में जाओ हम आते है

Baldev:tum क्यू नहीं जाओगे फैट रही है जाने में बाप क सामने ..बच्चू

Shamshera:tumhara दिमाग तो ठीक है न में जो ये ले कर आया हु इसे अपने होज़रे में सही सलामत पंहुचा कर आता हु रात में सोते वक़्त दो घुट और पी लूंगा

Baldev:kitne बड़े नशेड़ी हो तुम यार ठीक है जाओ में जाता हु

बलदेव महफ़िल में जाता है तो देखता है सब बैठ बहुत ध्यान से देख रहे थे बलदेव चुपके से जा कर सबसे पीछे देवराज और सुल्तान मेरे वाहिद से छुप कर आसान पर बैठ जाता है

देवराज की गिद्ध की आखे बलदेव को ु चुपके आ के बैठ देख लेता देवराज अपने भांजे को एक मुस्कान दे कर इशारे में कहता है क आगये उत्तर में बलदेव भी जी मां कह क इशारा करता है

Devraj:man me)ise शमशेर ले कर गया था इसे दूर रखना होगा उस शमशेर से नहीं तो ये भी बिगड़ जायेगा

पास बैठा सुल्तान मेरे वाहिद भी बलदेव को देख

"ये शमशेर कहा रह गया बलदेव आगया तो"

शमशेर अपना कक्षा में जा कर मदिरा को छुपा देता है

इधर देवरानी भूरिया से कहती है क उसे भूक लगी है अंदर कक्षा में चलने और भूरिया और देवरानी महल में आजाते है अपने कक्षा में

महल में लोगो का ताँता लगा था और सैनिक गरीबो को कपडा और खाना बाँट रहे थे

Sainik:ye लो तुम्हारा कपडा बूढी और सुलन और पारस की सलामती की दवा करो

तभी ये सुन कर भूरिया रुक जाती है और सैनिक से

Hooriya:kya कहा तुमने

sainik:muaf कीजिये मल्लिकाजहं

Hooriya:wo तुम्हारे माँ की उम्र की है तुम उसे बूढी कह रहे हो शर्म नहीं आती तुम्हे

Sanik:muaaf करदे मल्लिकाजहं

Hooriya:hum गरीबो को दे रहे है इसलिए नहीं क हम उनपर अहसान कर रहे है बल्कि इसलिए क खुदा ने हमें सब कुछ दिया है और पारस क हर एक गरीब का हक़ हमारे दौलत पर है ..

भूरिया उस बूढी औरत को देख

"हमे दुवाओ से नवाज़े अम्मा"

बूढी aurat:Khuda आपको हर खुशीअ दे मल्लिकाजहं

देवरानी ये देख कड़ी कड़ी मुस्कुरा रही थी

devrani:man me)Hooriya कितनी पाक डिल की है

वो दोनों अपने कक्षा में जाने लगते है तभी शमशेर अपने कक्षा से आरहा था

Shamshera:salam अम्मी सलाम देवरानी खला

Devrani:Namaskar

Hooriya:salam बीटा कहा थे

Shamshera:wo बास बलदेव को पारस की शेर करवाने

Hooriya:tum देवरानी कुछ खाना मँगवालो या अपने कक्षा में अगर है तो खा लो

devrani:baldev कहा है शमशेर बीटा

Shamshera:wo महफ़िल में है

देवरानी ये सुन कर अपने कक्षा की ओरे जाने लगती है

भूरिया गरीबो में कपडे और खाना बाँट रहे सैनिको को झुक कर देख रही थी और पास खड़ा शमशेर अपने नज़रो से भूरिया को देख रहा था

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देवरानी थोड़ा आगे जा कर पीछे मुड़ती है तो उसके होश उड़ जाते है शमशेर अपने अम्मी भूरिया क गांड को घूरे जा रहा था

devrani:man me)hey भगवन ये भी..

देवरानी देखती है शमशेर अपने माँ क गांड को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था

Shamshera:man में) अम्मी मैंने जब से आपको अब्बा से चुड़ते हुए देखा है आपके इस हुस्न का दीवाना हो गया हु

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Devrani:didi..

ये सुनते हे शमशेर अपने ख्वाब से बहार आता है और अपने निगाहे अपने माँ से हटते हुए देवरानी को देखता है जो मुस्कुरा कर भूरिया को कहती है

"दीदी आप भी आइये न मुझे अकेला जाना ाचा नहीं लग रहा है"

भूरिया शमशेर को देख

"आर्य बीटा अभी तुम गए नहीं"

"हाँ अम्मी में जा हे रहा था"

और अपनी नज़रो को बचता है

Hooriya:jaldi महफ़िल में जाओ बीटा

Shamshera:ji अम्मी

भूरिया तेज़ कदमो से अपने भरी भरकम बदन को हिजाब में लिए देवरानी की ओरे चलने लगती है

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देवरानी कड़ी कड़ी अंदर से मुस्कुराती हुई शमशेर क निगाहो पे हे देख रही थी जो लगातार अपने माँ क चलने पर उसके भरी चुतर को खा जाने वाली नज़र से देख रहा था

देवरानी क पास पहुंच कर

"चलो देवरानी "

"देवरानी और भूरिया अंदर आते है"

और शमशेर महफ़िल में चला जाता है

Devrani:didi आपको दुर्गन्ध आई की नहीं

Hooriya:matlab

Devrani:didi मतलब शमशेर कुछ नशा क्या है महक

Hooriya:han इसलिए तो वो देरी से आया मुझे पता है

Devrani:to दीदी आप ने कुछ कहा क्यू नहीं

Hooriyan:Maine बहुत समझाया पर मेरी ये एक नहीं सुनता बहिन रोज़ पीटा है वो

Devrani:aise तो वो अपने सेहत बर्बाद कर लेगा

Hooriyat:ab वो जाने वो अब बचा नहीं 25 साल का समझदार मर्द हो गया है

Devrani:mera बलदेव तो बॉस अभी 18 साल का हे है और मेरी हर बात मानता है

दोनों अंदर जा कर खाने पीने लगते है

बलदेव क पास जा कर शमशेर भी बैठ जाता है पर सुल्तान ने एक बार उसे घूर कर देखा मतलब आगे जा कर दांत पड़ने वाली थी शमशेर को

देवरानी और भूरिया अब वापस आकर बैठ जाते है और अब कवाल अपनी क़व्वाली सुना रहा था और डफली और टेबल की आवाज़ गूंज रही थी

रात क 11 बज गए बलदेव को सोने का समय हो गया था और उसके साथ उसे अब कुछ समय से देवरानी को इस समय अपने बहो में रखकर रगड़ने की आदत थी

Baldev:man me)ary ये में क्या देख रहा हु मेरी जान देवरानी क साथ होना चाहिए पारस में हम इसलिए आइये है क्या

बलदेव क ऊपर से नशे की खुमारी अभी पूरी तरह से उतरी नहीं थी

बलदेव अपने आसान से उठा कर जाने लगता है और पास लगे परदे क पास जा कर अपने माँ को औरतो की हुजूम ढूंढ़ने लगता है आखिर कर उसे अपनी माँ दिखाई पड़ती है भूरिया क साथ वो उसके करीब जाता है और परदे क पास खड़ा हो कर इशारा करता है

Daasi:Yuvraj आप यहाँ से चले जाये इस तरफ मर्दो को आना मन है

Baldev:ary में उधर नहीं जा रहा हु मेरी माँ को कहो मेरी ओरे देखने

दासी जा कर देवरानी को परदे क पीछे खड़े बलदेव को देखने कहती है

देवरानी इशारे से पूछती है "

क्या हुआ"

बलदेव अपने दोनों हाथ जोड़ कर सोने का इशारा करता है

पास बैठी भूरिया देख रही थी दोनों को इशारे करते हुए

Hooriya:kya हुआ देवरानी बलदेव क्या कह रहा है

Devrani:Usko नींद आरही है सोने क लये कह रहा है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
वरिटेरस सेक्स तक पहुंचने से पहले अडुल्टेरी रीडर्स की गालिया सुन सुन क सेक्स को फटाफट भागते है और जो कहानी का मज़ा आरहा होता है वो मज़ा सेक्स सन में नहीं आता है क्यू क वो हड़बड़ी में लिख कर थे एन्ड कर देते है

रीडर्स क अलग अलग दिमाग से चलने से कहानी को खिचड़ी बना देते है

एक थीम बेस्ड नहीं रहती है कहानी तो मज़ा नहीं अत है

भाई में कोई काम जल्दबाज़ी में नहीं करता !!
 
अपडेट 67

देवरानी बलदेव से इशारे से बात कर रही थी जो परदे क पीछे खड़ा था और देवरानी से सोने जाने क लये ज़िद्द कर रहा tha.wahi पर बैठी भूरिया उसे देख कर पूछ लेती है क्या हुआ और देवरानी कहती है

Devrani:didi वो सोनेग जाने क लये कह रहा हम

Hooriya:itna भी क्या जल्दबाज़ी है उसको

Devrani:dekhiye न दीदी वो खड़ा हे है जाऊ में अब तो बहुत देख ली और क़व्वाली अपने कक्षा से भी सुन सकती हु

Hooriya:wo देखो तुम्हारा बलदेव तुम्हारे चक्कर में परदे से झांक रहा है उसे मन करो यहाँ बैठी औरते बुरा मान सकती है और कमरे में जा कर सोना नहीं है तो यही रहो वह जा कर क्या सुनोगी

देवरानी बलदेव को परदे में झांकता देख अपने आसान से उठ कर उसके पास जा कर

"बलदेव ये क्या है बीटा यहाँ झाकना मन है मर्दो को"

"माँ तुम आओ में जा रहा हु "

और गुस्से से चला जाता है

देवरानी मुद कर भूरिया क पास आ कर

"दीदी गुस्सा हो गया वो मुझे जाना होगा सोने"

Hooriya:jao

मन me:Ye तो ऐसे करती है जैसे इसका शौहर हो बलदेव और उस दिन भी अपना पूरा दूध दिखा रही थी

देवरानी जल्दबाज़ी में महफ़िल में अपना घूँघट निचे करती है और दबे पाव तेज़ी से सबके नज़र से बचती हुई अपने कक्षा में जाने लगती है

महल क अंदर जाते हे बलदेव खिस्याना जा रहा था

Devrani:Baldev

बलदेव रुक जाता है और पीछे मुद कर देखता है

"क्यों आई माँ जाओ अपने दीदी क पास जा कर महफ़िल में बैठो"

"गुस्सा क्यू हो रहे हो आज तुम"

देवरानी बलदेव क पास आती है और उसके नाक में दुर्गन्ध अत है

"बलदेव ये कैसा दुर्गन्ध है तुमने पी राखी है"

देवरानी गुस्से से लाल हो जाती है

बलदेव सोच में पद जाता है क्या बोले

मन me:Is से पहले देवरानी आग बन क भड़के मुझे कुछ करना होगा

Devrani:tumhe मेरी पवाह ज़रा भी नहीं है मैंने तुम्हे मन क्या था न क तुम पीयोगे नहीं

ये कह कर देवरानी थोड़ा उदास हो जाती है

बलदेव बात को सँभालते हुए

"माँ मेरी पत्नी आज बास दो घुट पी लय है शमशेर क कहने पर जो मेरी गलती है मुआफ कर दो आज क बाद नहीं पीऊंगा"

बलदेव अपने कान पकड़ लेता है दोनों हाथो से

देवरानी दौड़ कर बलदेव क गले लग जाती है

"मेरे राजा में नहीं चाहती तुम्हारा स्वस्थ ख़राब हो"

बलदेव ज़ोर से जकड लेता है देवरानी को

इधर भूरिया कुछ सोच कर महल आने लगती है और महल में घुस कर जैसे हे अपने कक्षा की ओरे देखती है तो पति है बलदेव और देवरानी एक दूसरे से गले लगते है

Hooriya:man me)kitna प्यार है माँ बीटा में

Hooriya:man me)puchti हु खाना तो खा ले सोने से पहले तुम दोनों

भूरिया अपने मन की बात पूछती उस से पहले जो देखती है उस से वो हैरान रह जाती

Devrani:chhoro न अंदर तो चलो

Baldev:devrani को कस क जकड लेता है और अपना हाथ उसके गांड पैर ले जा क ज़ोर से मसल देता है



Baldev:Sab बहार है माँ

भूरिया देवरानी क पीछे कड़ी बलदेव क हाथ को साफ़ साफ़ देख लेती है देवरानी क गांड को मसलते हुए

भूरिया अपनी आखे बंद कर लेती है

भूरिया मन me:Khuda मुझसे ये गुनाह क्यू दिखा रहा है मुझे मुआफ कर दे ऐसा कैसा हो सकता है एक माँ को बीटा मेरे नज़रो को धोका हुआ

तभी भूरिया अपनी आखे खोलती है

बलदेव अब अपने माँ को गॉड में उठा क उसको किसी बचे की तरह कक्षा में ले जाने लगता है और कक्षा में ले जा कर अपने पेअर से दरवाज़ा पैर एक लात मरता है और बंद कर देता है

भूरिया अपने आखो में ासु लिए वही पर बैठ जाती है

"खुदा इस गुनाह का अजाब इस घर पे आने मत देना ये दोनों हमारे मेहमान न होते तो में अभी धक्के मार क भगा देती"

भूरिया अपने दुप्पट्टे से अपना ासु पोछती है और अपने कक्षा में जा कर लेट कर सोचने लगती है

"क्या शैतानी ज़माना आगया है लोग मज़े क लये किस हद तक जा सकते है"

इधर बलदेव अपनी माँ को गॉड में उठे दरवाज़े की कुण्डी लगाए देवरानी को पलंग की ओरे ले जाता है

Devrani:baldev तुम नशे में हो इतना ज़ोर से क्यू दरवाज़ा बंद किये

Baldev:Me नशे में नहीं हु मुझपे तेरा नशा है देवरानी

Devrani:tumhari आखे लाल है और बोली भी लड़खड़ा रही है

Baldev:chup कर देवरानी मुझे आज तुम्हे जी भर क प्यार करने दे

देवरानी समझ जाती है क अभी बलदेव से उलझना बेकार है वो हलके नशे में है

Baldev:devrani मेरी पत्नी तुम्हारा निर्त्य देखे बहुत दिन हो गए ज़रा अपनी गांड मटका

देवरानी इस तरह से बात कर क अटपटा महसूस करती है फिर ये सोच कर क बलदेव का पूरा हक़ है उसपे पूरा हक़ है टी

देवरानी मन me:Mujhe गुस्सा नहीं कर क पत्नी धर्म निभाना चाहिए अगर मुझे नाचने कह रहा है बलदेव क्यू क उसका हक़ है मुझपे

देवरानी मुस्कुरा कर गांड हिलती हुई बिस्तर से दूर जाने लगती है और बलदेव बिस्तर पर बैठ जाता है और अपने नशीली आखो से देवरानी क हिलते चुतर देखने लगता है

Baldev:devrani तुम्हारी ये चुतर बहुत हिलते है इसने हे मेरे डिल चुरा लिए है

महफ़िल से ढोल और टेबल की आवाज़ आरही थी जो क़व्वाली में बजा रहे थे उसके ताल पे देवरानी भी अपने गांड मटका क निर्त्य करने लगती है

"माँ अपने वस्त्र उतर क नाचो मुझे तुम्हारे दूध और गांड हिलते हुए देखना है"

"ाचा जी पीछे एक महीने से देख रहे हो जी नहीं भरा"

ये सुन कर बलदेव उठ खड़ा हो कर नाचती हुई देवरानी को पकड़ कर अपना चौड़ा सीना उसके वक्ष से दबाता है और देवरानी को अपने बहो में ले कर

बलदेव अपना लैंड देवरानी की गांड पर रगड़ता है

"अहह राजा"

बहार ढोल दुफळी की आवाज़ आरही थी जो काफी था देवरानी को थिरकने क लये जो की निर्त्य कला पसंद करती थी

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बलदेव अब अपना हाथ देवरानी क होठ पर रख

"हाय ये लाल होठ मेरी रानी क "

फिर वो हाथ देवरानी क सीने पैर रख

"हाय ये उभरे वक्ष मेरे रानी क"

फिर वो निचे देवरानी क छूट क ऊपर रख

"हाय ये मेरी फूली छूट मेरे पत्नी रानी क"

बलदेव जैसे हे पहली बार देवरानी क छूट पर अपना पूरा हथेली रख कर दबाता है देवरानी क मुँह से

"आआआह" कर क उत्तेजना भरी सिसकी निकलती है

बलदेव वापस जा कर कुर्सी पर बैठ जाता जो मेज़ क साथ लगा हुआ था और कहता है

"जी तो तब तक नहीं भरेगा जब तक तुम्हारे इस भरी बदन को फैला नहीं दू थोक थोक क"

देवरानी दूर कड़ी अपने दूध और गांड मटका रही रही बलदेव क सामने

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बलदेव देवरानी को अपने हाथ उठा कर ऊँगली से अपने पास आने का इशारा करता है और देवरानी आती है और बलदेव क जांघ पर हल्का बैठ अपने गांड को सहलाने लगती है

देवरानी क गर्दन पर हाथ रखे बलदेव मुस्कुरा रहा था

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देवरानी अब दूसरे जांघ पर बैठ कर अपने गांड मसलती है फिर बलदेव क सामने झुक कर बलदेव क तम्बू बने धोती पर अपना गांड को सहलाने लगती है

बलदेव अपनी आँख बंद कए

"आह मेरी माँ"

देवरानी जैसे देखती है उसका बीटा होश खो रहा है वो तुरंत उसके गॉड से उठ कर दूर जाती

बलदेव जब तक अपना हाथ बढ़ा कर देवरानी को पकड़ता वो चुंगल से निकल जाती है

"छमिया बहुत ललचा रही है अपनी गांड से "

देवरानी दूर खड़े हो कर मुस्कुराते हुए अपना सीना निकल कर

"क्यू मेरे राजा को ये पसंद नहीं"

बड़े दूध कैसे हुए ब्लाउज क बटन को खोल देती है और देवरानी अब सिर्फ एक लाल ब्रा में अपने बड़े मोठे पपीता को लिए अपने बेटे क सामने थी

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बलदेव झट से अपना हाथ अपने लौड़ा पे ले जाता है

"माँ वो मुझे इतना पसंद है क जीवन भर चुसू तो भी नहीं ठाकु"

बलदेव को लौड़ा मसलते हुए देवरानी देख उत्तेजित हो जाती है

Devrani:meetha देखा नहीं मधुमखी झूमने लगते है

देवरानी अपने हुस्न पर इतराते हुए कहती है

और अपना पल्लू अपने आधे नंगे दूध पर रख लेती है

बलदेव देवरानी क पास आकर उसके कमर पर हाथ रख कर अपनी और खींचता है

"देवरानी मुझे आज तुम्हारे योनि का रस पीना है"

Devrani:chi गंदे

Baldev:Chi मत कहो तुम्हारे गांड इतनी मरूंगा क बाप बाप चिल्लाओगी

बलदेव अपना हाथ आगे बढ़ा कर देवरानी क गांड पकड़ कर मसलता है

देवरानी नशे में धुत बलदेव को सँभालते हुए उसके होठो पर ऊँगली रखती है

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"मेरे बीटा होश में नहीं हो तुम अपने माँ को दुःख डोज दर्द डोज"

"मेरी देवरानी "

बलदेव देवरानी क पीच आकर अपना खड़ा लौड़ा देवरानी क गांड पर लगा कर

"देवरानी तूने क्यू पल्लू रख दिया ब्लाउज खोलो न अपना तुमने तो वही वस्त्र पहना है अंदर जो भूरिया खला ने दिया "

"तुम मेरे वस्त्र पर बहुत ध्यान देते हो"

"मेरी रानी में नहीं दूंगा तो और कौन देगा खोलो न "

"वैसे वो ब्राज़िएर है तुम खुद देख लो"



बलदेव देवरानी को हल्का झुकाये एक धक्का मरता है अपने लैंड को देवरानी क गांड पर लगाए

"आहे राजा"

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बलदेव अपने दांतो में देवरानी क ब्लाउज क डोरी को पकड़ खींचते है और देवरानी झुकी अपना गांड बलदेव क लौड़े पैर सहला रही थी

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बलदेव अब अब ब्लाउज को खोल चूका था और उसके आखो क सामने ब्राज़िएर की पट्टी थी जिसमे देवरानी का पीठ बलदेव को बहुत उत्तेजित कर रही थी बलदेव अपना हाथ आगे बढ़ा कर देवरानी क ब्राज़िएर को छूटा है और उसके पीठ को सहलाने लगता है

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बलदेव अब देवरानी क आगे आजाता है और उसके गर्दन पर चूमने लगता है

"माँ इसे निकालो ना मुझे आपको ब्राज़िएर में देखना है "

"आह बीटा हम्म्म"

"माँ तुम इतनी सुन्दर हो दिन रात झुका कर पेलने का डिल करता है"

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"कर लो विवाह फिर दिन रात जो करना है कर लेना"

देवरानी अब बलदेव क पीछे आ कर बलदेव क कान क निचले हिस्से को पकड़ कर चूसने लगती है

देवरानी अब अपना ब्लाउज गिरा देती है और अपने बड़े दूध ब्राज़िएर में कैद बलदेव क पीठ में रगड़ने लगती है

"ाः माँ"

बलदेव आखे बंद कर आह भरता है

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देवरानी को अपने आगे खींच उसके बड़े गांड पर हाथ लगता है और उसके वक्ष को देखता है जो देवरानी क हिलने से हिचकोले मार कर ब्राज़िर से बहार आने को तड़प रहे थे

"माँ क्या मोठे और तने दूध है और ये गांड कितनी बड़ी है पर"

"अहह मेरे लाल पर क्या या"

"पर इस मादक माल को सही हथोड़ा नहीं मिला ये मोठे गांड को में छोड़ छोड़ क फैला दूंगा जो तुम्हारे पति नहीं कर पाए इसलिए ये अभी भी ऐसे लगते है क अभी अभी जवान हुए है"

"अह्ह्ह बलदेव चल हैट बदमाश"

बलदेव देवरानी को अपने आग़ोश में लेते हुए उसके दूध देख कर

"और इस दूध की जवानी और खुमारी जो राजपाल नहीं निकल पाया वो मई निकलूंगा इसे चूस चूस कर इसके घुंडी चौड़ी कर दूंगा"

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बलदेव पास रखे मेज़ पर देवरानी को लिए उसके वक्ष क ऊपरी हिस्से को चूमते हुए लिटाने लगता है

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देवरानी वही पर आँख बंद कए बलदेव क लिटाने जाने से लेट जाती है बलदेव अब अपना मुँह अपनी माँ क पेट पर रख कर चूमने लगता है

"अहह माँ में विवाह भी करूँगा और इस कोख में तेरी अपना बीज दाल कर तुझे माँ भी बनाऊंगा"

देवरानी अपने आखे बंद कए आहे भर रही रही थी

"अह्ह्ह राजा"

अहह आह्ह्ह्ह ओह मेरे राजा"

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बलदेव क हाथो में अपने हाथ फसा लेती है देवरानी और खूब मज़े से आहे भरने लगती है

"राजा समाज क्या कहेगा जब मेरा पेट देखेगा तो"

"माँ यही कहेगा क इसकी छूट कुटाई हुई है ताब्यात से इसलिए पेट से है"

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और बलदेव देवरानी क पेरटिकट क ऊपर से उसके छूट पर हाथ रख देता है

"aaaaaaaaaaaaaaaah मेरे राजा"

देवरानी अपना हाथ निचे ले जा कर बलदेव का हाथ पकड़ती है

बलदेव देवरानी क छूट पर से हाथ हटा कर क

देवरानी क दोनों मांसल जंघे पकड़ लेता है

"ाः माँ ये जांघें कितने मांसल और चौड़े है"

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बलदेव निचे झुक कर सदी को ऊपर उठाये जांघो पर चुम्मो की बर्सर कर देता है

"अह्ह्ह्ह मेरे राजा "

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बलदेव देवरानी को कड़ी कर क पेटीकोट का नैरा खोल देता है और देवरानी अब सिर्फ एक जांघिए में थी जिसे देख बलदेव का डिल ज़ोरो से ढकने लगता है

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देवरानी को बलदेव जांघो से पकड़ कर फिर से ऊपर मेज़ पर बैठता है

"बलदेव आराम से इतनी क्या जल्दी है"

"माँ तुम इस जांघिए में देवलोक की अप्सरा लग रही है तुम्हारे छूट कितनी फूली हुई है इसे तो में छोड़ क भोसड़ा बना दूंगा"

देवरानी एक ऐडा से अपने हुस्न पर इतराती हुई अपना एक पेअर बलदेव क सीने पे रख कर बैठ जाती है

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"ज़रा तमीज से में महारानी देवरानी हु"

"हाँ वही महारानी देवरानी जो अभी महफ़िल में अपना पल्लू ढके बैठी थी और अपने आशिके क बुलाने पर नहीं आरही थी"

"तुम्हे भगवन का अहसान करना चाहिए बलदेव जो स्त्री अपना पल्लू ढके घूमती है वो तुम्हारे सामने सिर्फ ब्राज़िएर और जांघिए में है और तुम नशे में.."

"आर्य मेरी रानी आआआ अभी तुम्हे एक डैम प्यार से मसलता हु"

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बलदेव पास में रखे एक घोल को देवरानी क जांघो पर उढेल देता है

और उसके जांघो को सहलाने लगता है

"अह्ह्ह्ह राजा "

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उसे अपने ऊँगली से ले कर देवरानी क पेट पर रख कर मसलता है और उसके नाभि में गोल गोल घूमता है अपने ऊँगली से ले कर देवरानी क मुँह में वो ऊँगली दाल देता है

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"माँ देखो तुम्हारे ये सुन्दर तन का स्वाद तुम खुद चखो भला में कैसे इन्हे चखे बिना राहु"

बलदेव अब अपना हाथ आगे बढ़ा कर तेल का डिब्बा उठा लेता है और तेल अपने माँ क कंडे पर गिरनेलगता है और तेल फिसल कर कंधे से होते हुए देवरानी क वक्ष और ब्याह तक आने लगता है

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बलदेव अपना हाथ से तेल का डिब्बा छोर देवरानी क ब्याह को मसलने लगता है

"कितने सुन्दर ब्याह है माँ"

"अहह मेरे राजा"

बलदेव अब अपने पास रखे फलो में से पीली और काली ांची में से पीली ांची उठा कर देवरानी क होठों पर घूमता है

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देवरानी क मुँह में दाल कर उसके जीभ को पर फिरता है और उसके बाद निचे आकर देवरानी क मखमली पेट पर सहलाने लगता है

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"अहह राजा गुदगुदी हो रही है"

"गुदगुदी कहा हो रही है तेरे छूट में या तेरे पेट में देवरानी"

देवरानी उत्तेजना और हैरानी से बलदेव को देख रही thi,baldev देवरानी क दोनों पेअर को बिछा देता है और खुद उनके बीच के खड़ा होता है और अपने हाथ से और पीली ांची उठा कर देवरानी क जिस्म पर डालने लगता है

"माँ तुम जैसी माल को दिन रात छोड़ा जाये तो भी काम है"

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"अहह राजा ..हम बड़ा आया महारानी देवरानी क साथ ऐसी वैसी हरकत करने वाला"

"माँ राजपाल जैसा चुटिया नहीं हु में तुम्हारी गांड हे फाड़ दूंगा में पेल पेल क"

इस बार देवरानी अपने आँख तरेर देखने लगती है

देवरानी मन me:"ye लड़का पूरा नशे में धुत है इसको कल बताउंगी"

बलदेव अब अपने हाथो में काली ांची उठता है

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"माँ अपने गुलाब क पखुरिओ जैसे होठो में इसको चुसो क्यों क मेरा लौड़ा भी चूसना है तुम्हे"

"हहह में नहीं करुँगी वो"

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"तुम्हे करना पड़ेगा मेरी रानी तुम्हे अपने पति की आज्ञा का पालन करना पड़ेगा"

बलदेव देवरानी क कमर में हाथ दाल कर खींचता है और अपना लौड़ा देवरानी की छोटी सी जांघिए में क़ैद छूट पर धक्का मारता है

"ये ले मेरा लौड़ा मेरी रानी"

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देवरानी अपने ऊपर ऐसे हवीं होते देख बलदेव क सीने पैर अपना एक हाथ रख कर पीछे करती है

"अह्ह्ह राजा "

और उत्तेजना से अपना आँख बंद कर लेती है

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"तू नहीं मानेगी साली"

बलदेव नशे में धुत हल्का गुस्सा हो कर देवरानी क कमर को और मज़बूती से पकड़ कर अपने ओरे खींचता है और अपना लौड़ा अपनी माँ क छूट पर फिर जांघिए क ऊपर से रख कर रगड़ देता है

"अह्ह्ह्ह राजा"

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देवरानी उत्तेजना में आकर अपना दोनों हाथ बलदेव क कंधे पैर रखती है

"ये ले साली देवरानी बहुत गांड मटकाये फिरती है अपने चेहरे को पल्लू से ढके जैसे वासना शब्द भी ज्ञात नहीं पर तू तो कामदेवी रति है"

बलदेव अपना बड़ा और मोटा लौड़ा देवरानी क छूट पर रगड़ने लगता है

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देवरानी अब ज़ोर से बलदेव क मज़बूत कंधे को पकड़ भींच लेती है

देवरानी अपने बेटे क बलिष्ट छाती देख

"बीटा तुम्हारा ये मरदाना छाती कितना आकर्षक है और कितना शक्तिशाली हो तुम"

Baldev:saali काम की पुजारी ये ले मेरे लौड़े क बारे में भी प्रशंशा करो

बलदेव अब ज़ोर से देवरानी को अपने तरफ खींच रगड़ने लगता है

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"आआआह राजा तेरा लिंग तेरे बाप से दुगुना है हाय दय्या"

बलदेव अब देवरानी को मेज़ से हाथ खींच कर पलंग की तरफ ले जाता है

"ायजा छमिया माँ तुझे लिंग नहीं लौड़ा दिखता हु"

देवरानी बलदेव का हाथ छोर कर आगे भाग जाती है

"नहीं बाबा मुझे नहीं देखना सांप कही वो मेरे बिल में घुस गया तो"

"तो क्या होगा माँ मज़ा आएगा"

"मेरी जान हे ले लेगा वो "

बलदेव देवरानी क पास जा कर खड़ा होता है और अपना लिंग उसके गांड पे सत्ता क

"क्यू पसंद नहीं आया अपने बेटे का लैंड"

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"मेरी रज्जा अगर पसंद नहीं अत तो ये देवरानी जो दुन्या से घूँघट करती है तुम्हारे सामने केवल जांघिए और ब्राज़िएर में नहीं होती"

ये कह कर बलदेव का हाथ अपने मांसल पेट पर देख देती है

"माँ तुम्हारा ये तराशा हुआ हर एक अंग को मस्सल मस्सल क लाल कर देने का डिल चाहता है"

"तो कर दो मेरे राजा मन किसने क्या है"

"माँ ये तुम्हारी फूली हुई छूट "

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बलदेव निचे हाथ बढ़ा कर देवरानी की छूट पर जांघिए क ऊपर से हाथ फिरता है देवरानी की छूट की लकीर ऊपर से हे फूली हुई दिख रही थी

"अह्ह्ह्ह राजा"

देवरानी बलदेव से छूट कर दूर जाती है

और बलदेव को एक ऐडा से देख कर पीछे

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मुद जाती है और अपना एक पेअर उठा कर मोड़ कर कड़ी हो जाती है

"अहह मेरी माँ जान हे ले लोगी क्या आज"

बलदेव देवरानी पर झपट ता है और देवरानी बिस्तर पर जा कर उल्टा लेट जाती है बलदेव जैसे इसक्का हे इंतज़ार कर रहा था अपने हाथो को देवरानी क गांड पर ले जा कर मसल देता है

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"अह्ह्ह्हह रज्जा मेरे राजा एआरएम से"

बलदेव अब बिस्तर पर लेट जाता है और देवरानी को अपने ऊपर ले लेता है

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बलदेव अपना हाथ आगे बढ़ा कर जांघिए में क़ैद बड़े नितम्ब को ले कर खूब मसलता है

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बलदेव देवरानी को चित लेता देता है और उसके पेअर फैला कर अपना हाथ अपने माँ क छूट पर रख रगड़ने लगता है

"अह्ह्ह्ह अहंम हम्म्म मेरे राजा "

"माँ तुम्हारी ये छूट चेतना है "

"अह्ह्ह हम्म मेरे नहीं है मेरे राजा"

बलदेव देवरानी का एक हाथ ले कर अपने धोती क ऊपर उठे लौड़े पर रख देता है

देवरानी तुरंत अपने आखे खोलती है

"ाः ये क्या"

"माँ पकड़ो न"

देवरानी कुछ नहीं कहती

बलदेव फिर अपना हाथ से देवरानी क हथेली को अपने लैंड पर रख देता है

"माँ मेरी रानी कृपया इसका ख्याल करो"

इस बार देवरानी अपना हाथ नहीं हटती है और अपना हाथ बलदेव क 9 इंच क लौड़े पे रखे

"ये बहुत बड़ा है मेरे राजा"

"सिर्फ आपके लये मेरी रानी"

"ये तो मनुष्य का कही से नहीं लगता "

"ऐसे हे लौड़े को तेरे जैसी भरी माल को ज़रूरत है"

"माँ सहलाओ न मेरे लौड़े को"

देवरानी धीरे धीरे हाथ फेरने लगती है बलदेव अपनी आखे बंद कए देवरानी की छूट मसल रहा था और देवरानी अपने बेटे का लौड़ा सहला रही थी

बलदेव देवरानी का हाथ पकड़ कर

"माँ इसे ऐसे गोल बनाओ और आगे पीछे करो"

"नहीं मुझे नहीं करना"

"कर न देवरानी मेरी पत्न्नी नहीं हो"

"ाचा ठीक है"

देवरानी अब बलदेव क लौड़े को मुठियाने लगती है

Baldev:maa आपकी ये गांड बहुत हिलती है सदी में ज़रा हिलाओ न

देवरानी उठ ते हुए

"मेरे राजा बीटा मेरे चुतर इतने देखा फिर भी मन नहीं भरता ये ले"

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देवरानी उठ अपनी छोटी सी जांघिए में अपने दोनों भरी ख़रबूज़े चुतर को हिलने लगती है

"माँ ये तरबूज़ों को फोड़ दूंगा में अपने लौड़े से"

देवरानी मुस्कुरा देती है

"ाचा जी"

और लज्जा जाती है

बलदेव देवरानी को अपने पास ले कर उसके चुतर पर हाथ ले जा कर

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ज़ोर से थपकी देने लगता है

"फट फट " की आवाज़ पुरे कक्षा में गूंज रही थी और बहार ढोल की आवाज़ होने क वजह से दोनों ये कर प् रहे थे नहीं तो इतने ज़ोर से देवरानी की गांड पीट ने से बहार तक आवाज़ जा रही थी

"आआआह राजा इतना ज़ोर से मत मारो"

"माँ इतने भरी और बड़े तरबूज़ोंको धीरे से रगड़ने से इस्पे कुछ असर नहीं होगा"

देवरानी को उल्टा लिटा देता है और अपने दोनों हाथो से दोनों बड़े गांड को पकड़

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"ाः राजा धीरे"

"माँ क्या बड़े मज़बूत ख़रबूज़े छुपा क राखी थी तुम"

"कहा छुपाई आखिर कर तुमने पा हे लिया इसे"

"मेरी जान देवरानी इसे में नहीं पता तो किस साले की हिम्मत मेरी महारानी देवरानी को आँख उठा कर भी देख ले"

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"ाः राजा हम्म्म अगर किसी ने देख लय मुझे तो ?"

"तो देवरानी वो दिन उस मर्द का आखिरी दिन होगा जिस दिन मेरी प्रेमिका मेरी पत्नी पैर बुरी नज़र डालेगा"

बलदेव ज़ोर से गांड को मसलते हुए कहता है

"बलदेव बहार लोग क्या सोच रहे होंगे भैया भूरिया दीदी शमशेर"

"माँ यही सोच रहे होंगे क पति अपने पत्नी को ले कर गया है सोने सोने का समय हो गया"

"बलदेव मज़ाक मत करो"

"माँ हम कब तक छुपेंगे"

"बीटा वैसे आज जब से पी कर आये हो थोड़े चिंतित प्रतीत हो रहे हो आह धीरे"

"हम्म माँ बात हे कुछ ऐसी है पर तुमने कब और कैसे देख लिया मुझे चिंता करते हुए"

"अह्ह्ह आराम से बीटा ..माँ हु तेरी और अब तो तू मुझे पत्नी भी कहता है तो भला मई अपने पति क चेहरे को पढ़ नहीं सकती "

"हाँ माँ वो माँ बद्री और श्याम हमे जंगल में तम्बू में देख लये थे "

"आआह क्या बक रहे हो बलदेव"

बलदेव देवरानी को सहलाते हुए

"हाँ माँ वो दोनों मुझे आज खरी खोटी सुनाये क में चरित्रहीन हूँ जो अपने माँ क साथ ये सब कर रहा हु"

"तो बीटा तुमने क्या कहा "

"माँ में तो कह दया क मेरे और देवरानी क बीच कोई आया तो ..मैंने कहा अगर बद्री मेरा मित्र नहीं होता तो आज उसको फाड़ देता मई"

"ऐसा क्यू कहा बीटा तुमने वो मित्र है न अहह हम्म"

बलदेव अब देवरानी क ऊपर अपना लौड़ा देवरानी की जांघिए क ऊपर से लगा कर लेट जाता है

"आठ आराम से बीटा में मर जाउंगी"

"चुप करो इतनी हठी काठी घोड़ी हो "

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"माँ क्यू क वो मेरे और तुम्हारे प्यार को वासना का नाम दया"

"बीटा हम दुन्या और रीती रिवाज़ क विपरीत जा कर ये प्रेम कर रहे है हमे संयम से काम लेना होगा और वो तुम्हारे मित्र है प्यार से समझा सकते थे तुम"

"वो नहीं मानेगे सेल बद्री और श्याम दोनों हरामी है"

"बीटा ऐसा न कहो उनके जगह पैर तुम होते तो तुम्हे भी ऐसा लगता उन दोनों को मैंने बीटा जैसा मानती हु उनको तो बुरा लग्न हे था तुम प्यार से अपने डिल की बात उनसे करो मुझे भरोसा है वो मान जायेंगे हमारे रिश्ते क लये"

बलदेव आगे झुक कर माँ क होठ को अपने होठ में रख कर चूमता है और अपने हाथ से उसके वक्ष को दबाता है

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"अह्ह्ह राजा"

"माँ तुम कितनी बुद्धिमान हो अगर तुम मेरा कदम कदम पैर साथ नहीं दो तो में कही का न राहु"

"ाचा जी "

"माँ तुम्हारे बिना अधूरा हु मई तुम्हे पत्नी बनाने का निर्णय मेरा आज सही साबित हो रहा है"

बलदेव देवरानी को चूमते हुए उसके गांड पर अपना लौड़ा मसलते हुए झाड़ जाता है

देवरानी अपने गांड पर जेल महसूस कर समझ जाती है क बलदेव अपना पानी छोर दया

देवरानी उठने की कोशिश करती है पर बलदेव उसे झुके हुए हे अपना ऊँगली उसके छूट क दरार पर फेरते हुए

"कहा चली मेरी रानी में राजपाल नहीं जो तुम्हे अधूरा छोर दू"

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"ाः मेरे राज आआ"

बलदेव की ऊँगली अब देवरानी छूट क अंदर महसूस कर रही थी

"आह मेरे राजा आआआआह ओह्ह्ह aaaaaaaaaaaaaaaaaah में गयी मेरे राजा नाहीईईईएडीई"

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क होठ चूमता है

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और देवरानी ाअखे बंद कए झड़ने लगती है बलदेव अब अपना हाथ छूट से हटा कर देखता है तो भीगा हुआ था वो अपने मुँह में ले कर चाट ता है जिसे देवरानी देख मुस्कुरा रही थी

देवरानी वही बेसुध लेती थी और बलदेव भी बगल में लेता हुआ अपने आखे बंद कए नींद क आगोश में जाने लगता है थोड़ी देर बाद अपने साँसों पर काबू प् कर देवरानी उठ टी है और उसका नज़र अपने छूट क हिस्से पर जाता जिसे देख शर्मा जाती है उसका जांघिए पुरे छूट क पानी से भीगा हुआ था

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देवरानी जा कर अपने वस्त्र बदलने लगती है और बलदेव अब खर्राटे ले कर सोने लगा था

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Devrani:man me)Ye बलदेव भी न पूरा रसिया है अब मेरी हिम्मत नहीं बहार जाने की या भोजन करने की पूरा शरीर ैथ रहा है दर्द से

देवरानी अपने वस्त्र पहन कर लेट जाती है और लेट ते हे उसे एक मीठी नींद आ जाती है..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 68

बलदेव देवरानी प्यार का खेल खेल कर थके सो रहे थे पर हूर इ जहाँ मल्लिका इ जहाँ भूरिया क आखो से नींद कोसो दूर थी रह रह क उसके दिमाग में बलदेव और देवरानी का वो दृश्य आरहा था जब वो अपने माँ को बहो में भरे अपने माँ क गांड को दबा रहा रहा

Hooriya:man में) ऐ खुदा क्या क़यामत अब करीब है लोग ऐसे कैसे हवस में आकर लज़्ज़त पाने क लये अपनी माँ को हे ची सोच कर हे घिन आरही है ...दो चार दिन की बात है फिर तो इसे वापस हिन्द जाना हे है अगर सुल्तान को ये बात मालूम पद जाएगी तो वो तो इन दोनों का सर कलम करवा देंगे वो नहीं देखेंगे क ये मेहमान है क कौन है मुझे कुछ करना होगा

ये सब सोचते हुए भूरिया सोने की कोशिश कर रही है

उधर महफ़िल में बैठे शमशेर और सभी लोग महफ़िल ख़त्म होने क बाद खाना खाने बैठ ते है

Devraj:Yuvraj शमशेर ये बलदेव भांजा नज़र नहीं आरहा है

Shamshera:han वो शायद सो गया है जा कर महल में

Devraj:Oh

तभी वह पर कड़ी दासी को

Devraj:Ye बलदेव और देवरानी कहा है

Dasi:maharaj उनका कक्षा तो बंद है दोनों सो रहे है काफी वक़्त से

Sultan:Ary आप खाना खाये वो लोग थके थे सो गए honge,hooriya भी तो नहीं है

dasi:Gustakhi मुआफ sultan..wo भी सो गयी

Shamshera:ae सुनो दासी जा कर देवराज जी क लये खास शाकाहारी सब्ज़ी लाओ

dasi:ji शहज़ादे

Sultan:bhai आज तो काफी ाचा लगा आर्य बद्री और श्याम आप दोनों चुप क्यू है

Badri:nahi बास हम कहते समय बात नहीं करते

Sultan:bhut अचे परवरिश पाए हो

shyam:hum मेवरिओ में खाने की पूजा करते है सुल्तान

Sultan:kya बात है छोटे युवराज मुझे लगा शायद हमारे यहाँ का साग सब्ज़ी ाचा नहीं लगा

Badri:shakahari खाना आप ने हमारे लये बनाया इस से हम बहुत प्रसन्न हुए सुल्तान

Devraj:Paneer तो देवरानी को भी पसंद है बहुत बद्री पर वो सो गयी

Badri:han मौसी तो सो गयी है लगता है

(मन me:Mausi को पनीर की क्या ज़रूरत जब बलदेव का केला खा रही है अपने कक्षा में बंद हो कर)

सब ऐसे हे अपना खाना ख़त्म कर क बरी बरी से उठ क जाते है बद्री और श्याम सब से पहले उठ कर अपने कक्षा की ओरे जाते है

Badri:dekho अब भी मौसी का दरवाज़ा बंद है

shyam:chhor भी बद्री बलदेव अपने माँ से मज़े ले रहा है हमे क्या माता रानी देवरानी भी तो मज़े ले रही होंगी

Badri:theek है चलो हमे क्या हम सोते है

Shyam:han हम अपना अपना लिंग हाथ में लिए सो जाते है उधर बलदेव को तो पकड़ने वाली मिल गयी है

बद्री ये सुन कर मुस्कुरा देता है

Badri:chal कमीने सोते है

दोनों जा कर सो जाते है

इधर सुल्तान मेरे वाहिद अपने कक्षा में जा कर आराम करते है और देवराज भी अपने कक्षा में जा कर आराम करते है शमशेर अपने कक्षा में आकर सब से पहले अपने साथ लाये मदिरा को जातक ता

shamshera:ahh मज़ा आगया ये पी कर अब जा कर एक बार अम्मी की भरी गांड मोठे दूध देख लेता हु

शमशेर भूरिया क कक्षा क पास जा कर

"अम्मी जान क्या में अंदर आजौ"

दो तीन बार इजाज़त लेने क बाद उसे कोई उत्तर नहीं मिलता है वो दरवाज़ा पर हाथ लगता है तो खुला था वो दबे पाँव जाता है देखता है भूरिया बिस्तर पर लेते सो रही है

शमशेर भूरिया क हुस्न को ऊपर से निचे तक देखता है

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"खुदा ने सचमुच तुझे फुर्सत में बनाया है भूरिया मेरी बेगम हूर इ जहाँ"

शमशेर सीधा हाथ अपने लैंड पैर ले जाता है और मसलता है और वापस मुद कर चुपके से दरवाज़ा बंद कर क सोने चला जाता है

चिडिओ की चहक और पारस क खूबसूरत पहाड़ो क दरम्यान से सूर्या उदय होता है

सुबह सुबह सैनिक बल अभ्यास कर रहे थे पारस में

सुल्तान उठ तेहै और शेर पर निकल जाते है शमशेर उठ कर कुश्ती करने क लये बहार अत है और सैनिको संग कुश्ती खेलने लगता है

भूरिया भी उठ जाती है और पाक साफ़ हो कर सुबह क नाश्ते का इंतेज़ाम देश से कह कर करवाने लगती है

बद्री और श्याम भी उठ कर बहार आते है और मैदान में चल रहे सेना अभ्यास को देखने लगते है

एक अंगड़ाई लेते हुए बलदेव उठ ता है तो पता है उसके माँ उसके बाहो में बाहे डेल बचे जैसी चिपक कर सो रही है बलदेव अपनी माँ को देख मुस्कुराता है और अपने माँ को अपने बाहो में समेत लेता है

Baldev:moti पूरा मेरी बाहो में भी नहीं ापरही जबकि में इतना लम्बा हु

चंचलता से मुस्कुराते हुए कह कर देवरानी को जकड लेता है और अपनी आखे बंद कर लेता है

Baldev:man me)devrani नहीं उठ टी तब तक सोता हु अगर उठा तो इसकी नींद टूट जाएगी अपने हाथ से सर को हटाया तो

बलदेव देवरानी को अपने कंधो पैर लिटाये बीते रात की बात सोच मुस्कुराते हुए अपने किस्मत पर गर्व करता है

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Baldev:man में) इतनी मलाईदार माल मुझे शायद हे मिल पति देवरानी सच में अप्सरा है ,मुझे यक़ीन नहीं होता आज माता देवरानी मेरी बाहो में है और मुझे से पैट गयी hai,par ये छोड़ने कब देगी कब इनके प्यारी मुनिया में इनकी योनि में अपना लिंग घुसूंगा ये तो संस्कारी बनती है बिना विवाह क करने नहीं देगी क्या करू में

((देवरानी नींद में देख रही थी एक राजकुमार उड़ते घोड़े पे आता है और वो महल क छत पर कड़ी है वो राजकुमार अपना घोडा देवरानी क महल पर ला कर रोकता है और देवरानी क सामने घुटने क बल बैठ

"देवरानी चलो तुम्हे मई स्वर्ग लोक ले चालू apsara"devrani उसको देख दांग हो जाती है क्यू क वो कोई और नहीं बलदेव था जैसे हे वो निचे देखती है एक 15 इंच का लैंड सामने था उसके जिसे देख देवरानी डर जाती है और बलदेव उसे घोड़े पर बैठा ता है और घोडा उड़ता है पर देवरानी जैसे हे घोड़े पैर निचे बैठ टी है डर क पसीने छूट जाती है और कहती hai"haay में मर्डर जाउंगी" )))

बलदेव देखता है देवरानी सो रही है पर उसके माथे पे पसीना चालू हो गया और अचानक से देवरानी क मुँह से फुट पड़ता है

"है में मर्डर jaaungi"or डर क देवरानी सपने से हकीकत में आती है

Baldev:maa क्या हुआ आप मेरे पास हो मेरे बाहो में डरो मत

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देवरानी अपने आप को बहो में संती पति है

Baldev:dariye मत मेरी रानी किसी की इतनी हिम्मत नहीं मेरी रानी को मर दे

देवरानी अपना सर दर और शर्म से बलदेव क सीने में छुपा लेती है

Baldev:aapne कोई बुरा सपना देखा क्या

devrani:man me)ab कैसे बताऊ इसे

devrani:Beta बुरा भी ाचा भी

और अपने होठ अपने दन्त से कांत लेती है

Baldev:devrani तुम्हारी बात तुम्हे हे समझ आती है

Devrani:acha मेरे राजा

(मन me:tum तो सपने में भी अपने बड़े लिंग से मुझे डरते हो)

और देवरानी मुस्कुराती है

Baldev:hay में मर्डर जाऊ तेरी इस हसी पैर

Devrani:wo मैंने देखा तुम्हारी हरकत रत में

थोड़ा उदास होते हुए कहती है

बलदेव देवरानी क पेअर को सहलाते हुए

"माता पेअर कहा है आपके मुझे क्षमा कर दो"

devrani:huhh सब मर्द ऐसे हे है

"माँ मुझे क्षमा कर दो कल रात शमशेर ने जबर्दस्ती पीला दी और नशे में मैंने आपके साथ गलत सुलूक क्या गालिया भी दी मुझे क्षमा कर दो न"

"Baldev..tum मेरे पति से बढ़ कर हो मेरे हृदय हो मई नहीं चाहती तुम किसी भी बुरी आदत क शिकार हो और अपना शरीर ख़राब करो जैसे तुम्हारे पिता ने मेरा जीवन ख़राब क्या वैसे तुम भी..."

Baldev:sushhsh मेरी maa...aage एक शब्द नहीं मई वचन दया हु और अपने वचन को निभाने क लये सर भी कटा दूंगा

Devrani:chup कर बड़ी बड़ी बाते नहीं चाहिए मुझे बास तू मेरा हो कर रह मेरी कहा मनो मेरे राजा रही बात कल रत गलिअ की तो आवेश में आ कर तुमने गाली तो दी जो नहीं देनी चाहिए थी पर उस से मुझे बुरा नहीं लगा

Baldev:maa मेरी माँ तुम जैसी कोई नहीं बोलो कहा घूमने जाना है

देवरानी बिस्तर से उठ कर अपने सदी ठीक करते हुए

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Devrani:aaj तुम्हे मैं अपने जनम स्थान घूमने ले कर चलूंगी भैया क साथ

Baldev:Maa तुम अपने जनम स्थान तो जा रही हो मुझे कब मेरे जनम स्थान में जाने का शुभ घडी कब आएगा

देवरानी मुस्कुराते हुए बलदेव क बात को समझते हुए सदी ठीक करते हुए कहती है

"बलदेव कमीने ..तुम्हे अपने धर्म स्थान पे जाने की अनुमति रीती रिवाज़ो क अनुसार मिलेगी"

"माँ कैसा रीती रिवाज़ क्या कह रही हो "

"इतनी आग लगी है तो जाओ मांग लो मेरे देवराज भैया से मेरा हाथ"

देवरानी चुटकी लेते हुए मुस्कुराती है

बलदेव चिढ कर उठ ता है और देवरानी क सदी को पकड़ कर खींचने लगता है

"माँ तुम्हारे भैया को ये भी बताऊ क कैसे उसकी बहिन रात भर मेरे से चिपक कर मज़े में सिसक रही थी मेरे लिंग से खेल रही थी अपने हाथो में लिए"

अब शर्माने की बरी देवरानी की थी

"चुप कर बदमाश"

"माँ मुझे चुनौती पसंद है में सच में जा कर तुम्हारा हाथ मांग लूंगा अपने सेल साहब से "

"नहीं नहीं मेरे राजा धैर्य "

देवरानी फिर अपना सदी बलदेव क हाथो से ले कर पहन ने लगती है

"माँ कितना धैर्य जब विवाह कर क हे तुम मेरी बनोगी तो कर लेते है न यही कही"

"बीटा भगवन पर विश्वास रखो और हाँ मुझे पूजा करना है स्नान कर क तुम तंग मत करो जाओ अब योग करो में भी योग कर लू फिर नाहा धो क पूजा कर लू"

बलदेव अपनी आखे बंद कए हल्का गुस्सा हो क सर को झटक ता है और बहार जाने लगता है

"और हाँ बीटा बद्री और श्याम को प्यार से समझाना "

"हाँ माँ ठीक है"

देवरानी स्नान करती है योग करती है और अपने साथ लाये भगवन की मूर्ति को रख मंत्र उच्चारण करने लगती है

फिर कुछ प्रसाद जो साथ में ले कर आयी थी वो चढ़ा कर भगवन से कुछ देर अपने मन में बात करती है

इधर भूरिया अपने कक्षा में बैठे किताब पढ़ रही थी

Hooriya:ye सुबह सुबह ऐसे मंत्र कौन पढ़ रहा है..

भूरिया ताली मरती है

dasi:ji मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:ye सुबह सुबह कौन शुरू हो गया

dasi:gustakhi मुआफ मल्लिका ये महारानी देवरानी क कमरे से आवाज़ आरही है शायद वो पूजा कर रही हो

Hooriya:theek है जाओ

Hooriya:man me)beghairat रात में बेटे क साथ मज़े लेती है और सुबह में खुदा को खुश करती है जहन्नमी

देवरानी पूजा समाप्त कर क प्रसाद ले कर सब से पहले भूरिया क कक्षा में आती है

devrani:shubh प्रभात दीदी ये लीजिए

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Hooriya:subah सुबह तुम थी क्या

देवरानी थोड़ा असमंजस की स्थिति में

devrani:didi कही मेरे पूजा करने से कोई आपत्ति तो नहीं

Hooriya:nahi आप हमारी मेहमान है और आप अपने खुदा की पूजा करे इस से हम कोई ऐतराज़ नहीं है

Devrani:dhanywad दीदी मुझे लगा कही आपको बुरा तो नहीं लगा

Hooriya:mujhe क्या पारस में किसी को बुरा नहीं लगेगा हम यहाँ सब मिल जल कर रहते है हमारे लिए इंसानियत से बढ़ कर कुछ नहीं पर

Devrani:par क्या दीदी

Hooriya:Insaan को समझ होनी चाहिए क धर्म में क्या मन है क्या नहीं अपने मज़े क लये कुछ भी कर ले तो हमारे में जहन्नम और ..

देवरानी भूरिया को रोकते हुए

Devrani:aur हमारे में सीधा नरक में जाते है बिना रुके और देवरानी मुस्कुराती है

भूरिया को अंदर से बहुत गुस्सा आ रहा था

Hooriya:waise बहुत देरी से उठे आप देवरानी

Devrani:deedi वो थके थे तो हम दोनों जल्दी सोये और सुबह उठ कर योग की

Hooriya:hmm तुम कसरत करती हो इसलिए तंदरुस्त हो

devrani:ji दीदी में तो कहूँगी आप भी वयायाम करो

Hooriya:han में मोती हु

Devrani:nahi दीदी आप क बदन पैर थोड़ी ज़्यादा चर्बी है बास इसलिए बाहे टाँगे पेट और आपकी छाती ज़्यादा भरी है पर आपके लम्बाई पर ये ज़्यादा खुंबुरार लगते है

Hooriya:hmm शुकरिअ मेरी बहिन

(भूरिया मन में :इसके अंदर हर अच्छी है फिर ये कैसे अपने बेटे से फस्स गयी बात करना पड़ेगा अब ये समझे कौन सी मेरी ये रिश्तेदार है जो में नसीहत दू बास इसे समझाना होगा क सुल्तान या कोई और इसके रंगरलिया न देख ले )

Devrani:kya सोच में पद गयी ये लीजिए प्रसाद

hooriya:han lao..or सुनो में तुमसे कुछ बात करना चाहती हु

Devrani:boliye न दीदी

Hooriya:abhi जाओ हम इत्मीनान से बैठ कर गुफ्तुगू करेंगे

devrani:theek है में प्रसाद सब को दे कर आयी

Hooriya:chalo में भी देखु बहार बावर्ची सही खाना बना रहे है क नहीं

दोनों साथ में बहार आते है सामने बलदेव था

बलदेव भूरिया को देख पेअर छू लेता है

baldev:shubh प्रबाहत मल्लिआ मौसी

hooriya:aha है बीटा

बहार से कुश्ती कर क शमशेर देवराज और साथ हे कुश्ती देख क बद्री और श्याम आते है महल क अंदर

devrani:acha हुआ तुम सब एक साथ आगये

devrani:shubh प्रभात भैया

देवरानी देवराज क पेअर छू लेती है

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devrani:ye लीजिये प्रसाद

devraj:jeete रहो मेरी बहिन

देवरानी इशारे से बलदेव को भी पेअर छूने क लये कहती है

बलदेव देवराज क पेअर छूटे हुए

"शुभ प्रभात मां जी"

devraj:jeete रहो बीटा

hooriya:Bass मां क पेअर छू रहे हो माँ क नहीं छुओगे

Baldev:wo मल्लिका मौसी में सुबह में हे छू लय उनके पेअर

देवरानी मुस्कुरा देती है

badri:man me)pair छुआ या मौसी का कुछ और हरामी बलदेव

devrani:ary तुम दोनों उधर क्यू खड़े हो

आओ श्याम और बद्री प्रसाद लो

श्याम देवरानी क पेअर छूटा है

shyam:mata रानी

और फिर अपने हाथो से आखे बंद कए प्रसाद ले कर खाने लगता है

badri:khane में तो तू कभी पीछे नहीं रहता

Devrani:badri तुम भी लो

बद्री भी देवरानी क पेअर छूटा है

devrani:ye लो बीटा तुम भी खा लो भगवन क प्रसाद को बाद क लये नहीं रखते

Badri:ji मौसी

shamshera:Khala मुझे प्रसाद नहीं डोज

क्या में भी तो आपके बीटा हे हु

इस बात पर सब हस्ते है

hooriya:de दो इस शैतान को भी

Devrani:ye लो बीटा शमशेर

Shamshera:shukria खला जान

Devraj:aaj मैंने तुम्हारी आवाज़ जब सुना देवरानी तो मुझे माँ याद आगयी वो भी इसी तरह सवेरे सब से पहले उठ कर भजन गति थी और तुम्हारी आवाज़ भी उनसे मिलती है है

Devrani:aakhir मई अपने माँ की हे अंश हु न

Baldev:mama जी माँ एक दिन भी पूजा करना नहीं भूलती यात्रा में भी नहीं कभी कभी तो अति कर देती है

devrani:tumhe क्या पता गधे बलदेव पूजा का महत्तव

Devraj:jhagadna बंद करो दोनों आज हम हमारे गाओ जायेंगे

baldev:sahi में मां में तो इस दिन का प्रतीक्षा बरसो से क्या है

devraj:kab निकलना है देवरानी बता देना

तभी उधर से सुल्तान मेरे वाहिद आते है

Sultan:ary भाई पूरा मजमा यहाँ इकठा है क्या हो रहा है

devraj:aaiye सुल्तान जी

Sultan:devraj जी

Devraj:aaj सोच रहा हु बहिन और बचो को अपना राज्य दिखा दू

Sultan:zarur दिखाओ मेरी बहिन देवरानी एक अर्शे बाद अपनी माद्री वतन आये है

सब वह से जाने लगते है और देवराज और सुल्तान आपस में बातचीत करने लगते है

बलदेव देखता है बद्री और श्याम पतली गली से उसे अनदेखा किये अपने कक्षा की ओरे जा रहे थे

बलदेव उन दोनों क पीछे जाते हुए

बद्री और श्याम अपने कक्षा में आजाते है

बलदेव अंदर आकर दरवाज़ा बंद करता है

बद्री और श्याम घूम कर देखते है तो बलदेव था

badri:q रे हमे मारने आया है क्या बहुत गुस्सा है न तुझे कर हमला

श्याम बद्री को देख रहा था

बलदेव मुस्कुराते हुए बद्री क पास जाता है

"मेरे मित्र बद्री शांत हो जाओ"

badri:kal तो कह रहे थे न क फाड़ देते मित्र न होते तो दिखाओ अपनी मर्दानगी हम भी कोई चुडिया नहीं पहने

बलदेव अपने गुस्से को शांत करते हुए फिर मुस्कुराता है

baldev:mere मित्र तुम हो लो जितना गुस्सा होना है तुम्हारा हक़ है

Badri:tumhari मर्दानगी सिर्फ तुम्हारे माँ पर चलती है क्या

और बद्री मुस्कुराता है

बलदेव ये सुन कर आग बबूला हो जाता है और अपना सर निचे करता है

shyam:chup कर बद्री तुम कही क महाराज नहीं जो बलदेव की कल कही हुई बात तुम्हे इतनी बुरी लग गयी तुम अब हद्द से ज़्यादा बोल रहे हो

बद्री को लगता है जैसे श्याम सही कह रहा है

Badri:to में क्या करू इसकी पूजा करू जो ये कर रहा है

बलदेव सोचता है यही सही मौक़ा है बात को सँभालने का

Baldev:badri अगर तुमने मुझे कभी भी अपना सच्चा मित्र समझा होगा तो मेरी बात सुनोगे

Shyam:baith जाओ

श्याम और बलदेव एक एक कुर्सी पर बैठ जाते है

बद्री पलंग पर अपने दोनों पेअर लटकाये बैठ

Badri:bako

बलदेव पूरी कहानी बद्री और श्याम को सुनाता है कैसे देवरानी और बलदेव एक दूसरे से प्यार कर बैठे

पूरी कहानी शुरू से अंत तक सुना कर

Baldev:ab बोलो बद्री अगर मेरी माँ किसी पराये मर्द क पास जाये क्यू क उसके पति ने उसके ससुराल वाले ने उसे एक बहु का सम्मान नहीं दया तो क्या ाचा होता?

Badri:par मुझे यक़ीन नहीं होता क मौसी तुमसे प्रेम करने लगी है तुम जबरदस्ती..

shyam:q नहीं यार प्रेम अँधा होता है किसी से भी हो सकता है

Baldev:agar तुम लोगो को लगता है क में माँ से जबरदस्ती कर रहा हु तो तुम माँ से बात कर सकते हो

Badri:theek है

baldev:agar माँ ने कह दया क उन्होंने हे मुझे चुना है तो ? फिर क्या तुम ये गुस्सा ख़त्म कर पहले जैसे

Badri:Pehle बात तो करू मौसी से

shyam:wo सब तो ठीक है बलदेव पर मेरा डिल इस बात से दुख क तुम इतने दिनों से मौसी से सम्बन्ध बनाये हो पर हमे सच्चा मित्र बताते हो पर कभी नहीं बताया

baldev:mitra में कैसे तुम सब को बताता

shyam:aur इस बात का दुःख बद्री को भी है हम दोनों ने तुम्हारे लिए क्या क्या सपने देखे थे तुम्हारे विवाह क लये

बद्री अपना सर निचे कए सब सुन रहा था

Baldev:mitro इस बात को समझो क मैंने और माँ ने कितना बड़ा कदम उठाये है और में तुम दोनों से क्या कहता क देखो मुझे प्रेम हो गया है अपनी माँ से और तुम दोनों ख़ुशी ख़ुशी मान जाते रही बात विवाह की वो मई नहीं करने वाला

Shyam:q भाई तुम एकलौता चिराग हो गहतराष्ट का विवाह नहीं करोगे तो आगे का वंश कौन होगा जो गहतराष्ट्रा चलाएगा

बलदेव अपनी आखो में नमी लेट हुए

baldev:mitro मैंने प्रेम क्या है तो निभाउंगा माँ को छोर किसी को देख भी नहीं सकता

ये सुन कर बद्री की मुस्की छूट जाती है

जिसे देख बलदेव और श्याम भी है देते है

shyam:saale बलदेव हमने क्या क्या सोचा था क हमारी भाबी आएगी बलदेव क विवाह में हम ये करेंगे वो करेंगे

Baldev:ab लो तुम दोनों हे घोस्ट थे भाबी ले आओ जो तुम दोनों को पकवान बना क खिलाये तो मेने ढूंढ ली अपनी अर्धांग्नी

इस बात पर बद्री है पड़ता है

Badri:or खोजी भी ऐसी भाबी जिसे हमे भाबी भी नहीं कह सकते

Baldev:dono इधर आओ

श्याम और बद्री दोनों खड़े हो बलदेव क दोनों बगल खड़े होते है

Baldev:tum दोनों मेरे बचपन क मित्र हो मेरी मज़बूरी थी जो ये बात छुपाई मुझे क्षमा कर दो

बलदेव क आखे ासु से नाम होती है

बलदेव अपने बाहे बद्री और श्याम क गले में दाल देता है

बद्री और श्याम दोनों बलदेव को टूट ता हुआ देख अपने गले से लगा लेते है

Badri:ro मत बलदेव मेरे तुम हमारी जान हो

baldev:kabhi दुबारा मत कहना क तुम दोनों मुझे छोर कर चले जाओगे हमारी मित्ररा इतनी कमज़ोर नहीं

shyam:hum है न हम लड़ेंगे तुम्हारे लिए कोई बात नहीं अगर तुमने ये रिश्ता मौसी की जीवन सवारने क लये क्या उनके भी ख़ुशी भी इसी में है तो हमे क्या आपत्ति होगी

Badri:rona मत मित्र नहीं तो में भी रो पडूंगा और मुझे भी क्षमा कर दो मैंने गलत शब्द प्रयोग कए

Baldev:nahi मेरे मित्र में समझ सकता हु तुम दोनों पर क्या बीती होगी

badri:par में मौसी से एक बार तो पूछूंगा हु

shyam:ab माता रानी को मौसी बोलोगे या..

बलदेव बात को समझते हुए मुस्कुराता है

Baldev:Haha तुम दोनों की भाबी लगेगी मेरे तरफ से छूट है बाकी तुम दोनों की मर्ज़ी और तो और श्याम तुम्हे तो उनके हाथ का पकवान भी बहुत पसंद है

shyam:haha अब तो में हक़ से उनसे पकवान बनवा कर खाऊंगा

badri:chup कर पेटू

shyam:par हम उन्हें क्या पुकारेंगे

Baldev:ab तुम दोनों पहले मौसी या माँ माता रानी कहते थे तो ऐसा करो अब तुम दोनों भाबी माँ बोलो

इस बात पर बद्री ज़ोर से हद पड़ता है

Badri:baldev तू इतना दिमाग ऐसी सोच लता कहा से है

Baldev:dekho भाबी की भाबी रहेगी वो तुम दोनों क लये माँ की माँ

shyam:bada सोच कर शब्द चुना है भाबी माँ

बलदेव हस्ता है

baldev:waise आज माँ क साथ तुम दोनों भी चलो हमारे नानी क घर

Badri:theek है हम भी चलेंगे

shyam:han मज़ा आएगा घूमने में

Baldev:chalo मित्रो कुछ कहते है

बलदेव चला जाता है

shyam:ab तो खुश हो न

badri:ab छोरो मेरा मित्र पहले है बलदेव जब उसका डिल आगया है उसको प्रेम हो गया है तो में कैसे कुछ कहु

Shyam:chalo भगवन की कृपा है तुम गुस्से से बहार निकले

shyam:bhai में थोड़ा और सो लेता हु फिर उठ कर खाऊंगा

badri:tumhara तो यही है सोना और खाना

बद्री बहार निकलता है तो देखता है देवरानी देश से खाना निकलवा रही थी

devrani:ary बद्री तुम भूक लग गई क्या थोड़ा समय और दो

तभी वह बलदेव आजाता है देखता है बद्री देवरानी क सामने खड़ा हो कर कुछ बोलने की हिम्मत जूता रहा था

Baldev:maa में अपना चूरन जड़ी बूटी खाना भूल गया वो खा कर अत हु

Devrani:han मैंने वो अपने कक्षा में हे रखा है ले लोगे न

Baldev:han ले लूंगा में

और देवरानी को इशारा करता है मुस्कुरा क बद्री को दिखा क

Baldev:badri माँ तुम दोनों बात करो में आता हु

Devrani:man me)lagta है बद्री को बलदेव ने समझाया है और वो उसी विषय पर मुझे कुछ कहना चाहता है

Badri:mausi वो

देवरानी मुस्कुराते हुए

devrani:kaho बीटा शर्माओ मत

Badri:wo कुछ बलदेव से कहानी सुना

देवरानी थोड़ा मायूस होते हुए

Devrani:Bass में समझ गयी बीटा तुम कहना क्या चाहते हो तो सुनो तुम और श्याम को मैंने बचपन से अपने बलदेव जैसा हे प्यार हे दया और अपना बीटा समझा तो में समझती हु तुम भी मेरी बात समझोगे

Badri:han mausi..hickichate हुए कहता है

Devrani:to सुनो मेरे ससुराल वाले मुझे मरने का प्रयास कर रहे है वर्षो से वो हर तरह का दुःख डाई जिस से में मर्डर जाऊ और तुमने देखा हे कैसे हमारे ऊपर हमला हुआ और मेरे झोले से सांप का निकलना

Badri:hmmm वो तो है कोई आप क जान क पीछे है

Devrani:koi क्या होंगे बीटा मेरे अपने हे मेरे अपने नहीं है जब बलदेव तुम दोनों क साथ आचार्य जी क वह था तब मैं कई बार सोचती थी क में खुद अपनी जान ले लू पर

Badri:par क्या मौसी

Devrani:aaj में तुम्हे ये बात बता रही हु बलदेव को न कहना क्यू क मेरी जान ले कर हे ये लोग खुश नहीं होंगे सब मेरे बलदेव की जान क पीछे भी है जिसे बलदेव नहीं देख प् रहा

बद्री ये सुन कर कैंप जाता है

Devrani:Han बीटा अगर में आत्महत्या कर भी लेती पर फिर मेरे बलदेव क साथ जो होता ..इसलिए में निर्णय क्या क में बलदेव की कवच बन कर रहूंगी भले हे कितनी हे पीड़ा सहना पड़े

Badri:par मौसी सब क्यू जान लेना चाहते है आप दोनों का

Devrani:beta क्यू क वो नहीं चाहते गहतराष्ट्रा का महाराज बलदेव बने और रानी षुरूश्ती पर मेरा शक है पूरा वो गहतराष्ट्रा को हड़पने क लये हम दोनों को रस्ते से हटाना चाहती है क्यू क वो खुद क बचे को जन्म नहीं दे सकीय जो महाराज बने

Badri:par मौसी बलदेव से ये सब

Devrani:beta मई उसे सच्चे मन से स्वीकार क्या है और मई नहीं चाहती क कोई भी षड़यंत्र मेरे बेटे को छू भी ले इसलिए में उसकी कवच बानी इसी प्रकार रहूंगी

Baldev:par धर्म में

Devrani:khush रहना है मुझे अब तुम अपने मौसी को दुखी देखना पसंद करोगे जो बरसो से या खुश

बद्री एक मुस्कराहट क साथ देवरानी क मुरझाये चेहरा को देखता है

Badri:khush देखना है मुझे आपको बास

देवरानी अब मुस्कुराती है

devrani:aur कुछ पूछना है ?

Badri:nahi मौसी मुझे मेरा उत्तर मिल गया

और बलदेव वापस अपने कक्षा में जाने लगता है

devrani:thode देर में आजाना खाना लगवाती हु

बद्री मुद कर मुस्कुरा कर

"जी मौसी"

बद्री अपने कक्षा में चला जाता है और देवरानी अपने काम में लग जाती है

दोपहर का भोजन का समय हो जाता है और सब बारी बारी से खाना खाने बैठ जाते है बद्री और श्याम बार बार मुस्कुरा कर कभी देवरानी को देखते है तो कभी बलदेव को

अपने आप को बार बार देखे जाने से देवरानी शर्मा जाती है वो समझ रही थी दोनों मुझे क्यू ऐसे देख रहे है

badri:mausi वो सब्ज़ी देना

devrani:ye लीजिये बद्री

श्याम अपने आखे बड़ी कर

मन में( बद्री को इतनी इज़्ज़त मौसी लीजिये कह रही है आज तक तो कभी नहीं कही)

तभी श्याम कुछ सोच कर

shyam:mata रानी मुझे भी सब्ज़ी चाहिए

Devrani:ye लीजिये श्याम आपकी पसंदीदा सब्ज़ी

इस बार बद्री क कान खड़े होते है

badri:man me)ye मौसी हम दोनों को इतनी इज़्ज़त से क्यू बोल रही है

shyam:man me)ye मौसी को क्या हुआ आज

बलदेव दोनों को देख समझ जाता है क उसके मित्रो क डिल में क्या चल रहा है

बलदेव दोनों को देख मुस्कुराता है

Baldev:man me)dono बुद्धू हे है

सब धीरे धीरे खाना खा कर उठ जाते है और आखिर में देवरानी भी जाने लगती है

भूरिया ,,देवरानी सुनो मुझे तुमसे कुछ बात करनी है

devrani:han आप सुबह से कहना छह रही है बोलिये न

Hooriya:chalo मेरे होज़रे में

भूरिया देवरानी को ले जा कर अपने कमरे में बंद करती है

Devrani:aisi भी क्या बात है दीदी

भूरिया गुस्से से आखे लाल करते हुए

"देवरानी आप हमारी मेहमान है और आप हिन्द की महारानी है क्या आप पर ये शोभा देता है इतनी अकाल मंद और इमां वाली है आप"

"क्या दीदी मई समझी नहीं"

"देखिये देवरानी मई आपसे बात इतनी जल्दबाज़ी में और बिना वक़्त गवाए करने का राज़ ये है क में आपको आगे मुसीबत में नहीं देखना चाहती"

"दीदी आप क्या कह रही है कैसी मुसीबत कौन सा राज़ मुझे कुछ अर्थ नहीं समझ में आरहा"

"महारानी साहिबा आप इतने नेक डिल है आप क डिल में कोई छल कपट नहीं दिन रत खुदा को यद् करती हो फिर कैसे तुमने गलत कदम उठा लय"

देवरानी को अब हल्का महसूस हो जाता है क बात किस ओरे जा रही है पर वो ये सोच कर क बात कुछ और भी हो सकती है

"दीदी मैंने ऐसा क्या पाप कर दया मल्लिका इ जहाँ"

"तुम जहन्नमी हो देवरानी जिसने अपने बेटे से हे रिश्ता कायम किया है"

ये सुन कर देवरानी क धड़कन बढ़ जाता है और वो कंपनी लगती है

"देवरानी तुम्हे पता है इसकी सजा पारस में क्या है और तुम्हारे भाई को ये बात पता चली तो तुम्हे ज़िंदा दीवारों में चुनवा देंगे"

"दीदी आप गलत समझ रही है"

"चुप कर बद्ज़ात औरत मुझे तो तुझ जैसे गुनहगार से तो बात करना हे नहीं था पर में तुम्हे बता दू क अपना ये घटिया काम चोरी छुपे करना में नहीं चाहती मेरे मेहमान को कल हो कर फांसी हो जाये घिनौने जुर्म में"

देवरानी गुस्से में

"deeeeeeeeeeeeedeeeeeeee"

"अगर आप मेरे है तो मई भी एक राजपूतनी हु मेरे सामने इतना चिल्ला कर बात न करे हम धीरे से बात करते है इसका मतलब ये नहीं क हम चिल्ला नहीं सकते"

Hooriya:tumhare पास क्या है कहने क लये

Devrani:to सुनो दीदी आप भी एक रानी हो अगर आपका पति आप से 18 साल 20 साल तक आपको अपनी पत्नी न समझे और आपको आपका हक़ नहीं दे और न शारीरिक सुख दे तो आपको कैसा लगेगा?

Hooriya:Bura लगेगा हे पारर में..

"अआप बास सुनिए जो में कह रही हु मल्लिका इ जहाँ जी उसके बाद आप चाहे मुझे फांसी पर लटका देना पर एक राजपूतनी को कभी धमकी मत देना"

खूब गुस्से से चिल्ला कर कहती है देवरानी

Hooriya:chup कर देवरानी मई सुन रही हु पर आवाज़ काम दीवारों क भी कण होते है बास तुम्हारे अचे क लये कह रही हु बाकि तुम्हारी मर्ज़ी

Devrani:didi मेरा विवाह मुझसे बिना पूछे काम आयु में करवा दया गया मेरा बलदेव पैदा भी नहीं हुआ था मेरा पति मेरे साथ सोना छोर दया

"पिछले 18 साल से दीदी मेरे ऊपर अत्याचार हुआ न मेरा साथ भाई था न बाप न पति न बीटा में अकेली हर दुःख का ज़हर होता है मैंने तो जीना हे छोर दया था दीदी पर मेरे बलदेव ने मुझे जीने का वजह दया वही है जो मुझे मेरे जीवन में हर घडी मेरा साथ निभाया और उसको मुझसे प्रेम हो गया और मेरे लाख मन करने क बाद भी नहीं मन और मेरे पीछे था तो दीदी मई अपने जीवन जल रहे एक ज्योति को भला कैसे खुद से बुझती और मैंने भी बलदेव को स्वीकार कर लय और धीरे धीरे मुझे भी महसूस हुआ क प्रेम क्या होता है और ये कड़वा सच है जो मेरे हृदय में पहले प्रेम की ज्योति किसी ने जलाई वो बलदेव है और सिर्फ बलदेव"

Hooriya:badi साधु बन रही हो ये मज़हब में किसी क नहीं लिखा क ऐसा करो

devrani:"didi मज़हब धर्म आप से कह दू बास अपने मन की शांति क लये में मानती हु और जीवन भर मानूंगी और आप मुझे ये बताइये ये कौन से धर्म में लिखा है

पति अपने पत्नी को बरसो तक उसे पति सुख नहीं दे?

कौन से ग्रन्थ में लिखा है क पति 10 पत्निया कर ले और पत्नी अपने पति क मृत्यु क बाद भी सटी बानी रहे?

क्या मज़हब यही है दीदी क आपके पति सुल्तान मेरे वाहिद 150 लौंडिया अपने हरम में रखे और उन सबको भोगे और खुद 4 पत्निया रखे उनको भी भोगे और आप को एक हफ्ते में एक बार हे मौका मिले?"

Hooriya:chup करो इसमें सुल्तान की ज़िकर करने की ज़रूरत नहीं

Devrani:zarurat है दीदी आप अपने आखे खोलिये हर छूट हर ऐश सिर्फ मर्द को है पुरुष को स्त्रीया तो दासी है जो अपने मन से कुछ नहीं कर sakti..apko लगी न बुरी बात जब मैंने कहा क सुल्तान क कितने मज़े है और आप सप्ताह में एक बार हे खुश हो पति हो तो सोचो जब आप सप्ताह में एक बार ख़ुशी मिलती है तो दुखी हो तो में तो सालो साल तदपि हु पति सुख क lye,kya ये सही है मेरा पति राजपाल वैश्यों से खूब मज़े करो अपने दूसरी पत्नी को सुख दे मेरे पति तो मुझे नौकरानी समझे और राजा रतन क कुबेरी जा कर रंगरेलिया मानते थे

देवरानी अब चुप हो जाती है और वही पलंग पर बैठ कर सुबुक कर रोने लगती है

भूरिया का कठोर डिल पसीज जाता है और वो जा कर जग से गिलास में पानी ढाल कर देवरानी क पास आ कर

"ये लो पानी पीयो तुम तो घायल शेरनी की तरस बरस पड़ी"

देवरानी गिलास का पानी पीती है और गिलास रख कर कड़ी भूरिया क पैरो पर गिर जाती है

Hooriya:ary देवरानी ये क्या कर रही हो

और उसे अपने हाथो से ऊपर उठती है

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"दीदी हो आप मेरी बड़ी हमारे धर्म में बड़ो क पेअर पड़ते है"

ये सुन कर भूरिया क आखो में भी ासु आजाता है और देवरानी को गले लगा लेती है

"देवरानी तुम इतनी अछि हो क में तुम्हे कहना नहीं चाहती थी कुछ भी पर में तुम्हे बास होशियार करना चाहती थी क यहाँ अगर तुम पकड़ी गयी तो तुम दोनों मरे जाओगे खामखा"

"दीदी अब में बहुत सह ली मुझे अब परवाह नहीं मरने का अगर दुन्या यही चाहती है तो अब हम दोनों मर जाये दुन्या वालो से तो "

"चुप कर पगली में तुम्हारी हर बात सुनी और समझी पूरी ज़िन्दगी मुसीबत उठाई और अब मर जाओगी भले हे मई तुम्हारे इस रिश्ते क खिलाफ हु और कभी इस बात को ाचा नहीं मान सकती जो इतना बड़ा गुनाह है पर तुम हे अगर गुनाह में डूबना चाहती हो और तुम्हे लगता है उसमे हे तुम खुश हो तो तुम्हारी मर्ज़ी"

"दीदी अगर में एक बात गलत कही तो बताइये जब ये राजा महाराजा सबको प्यार नहीं दे सकते तो क्यू करते है इतने विवाह एक पत्नी भी क्या काम है इनके शारीरिक ीचा पूरी करने क लये"

"देवरानी अब हम क्या कर सकते है ये जहाँ में शुरू से ऐसा हे होते आ रहा है हम उसे बदल नहीं सकते "

"दीदी मर्द चार शादी कर ले और हम औरते एक हे उसमे भी जीवन भर तड़पे ये कैसा नियम है और तो और हमारे यहाँ तो जिसके पति की मृत्यु हो जाये वो भले हे 18 साल की स्त्री हो वो जीवन भर सटी रह जाती है"

भूरिया देवरानी को ले कर बिस्तर पर बैठती है और खुद भी बैठ टी है

"देवरानी मई इस गुनाह को गुनाह हे मानूगी पर जब तुम दोनों सच में इश्क़ करते हो तो थोड़ा छुप कर"

"क्यू छुप कर दीदी क्या आपके पति सुल्तान मेरे वाहिद अपने हरम में 150 रखैल छुप कर रखे है?"

Hooriya:nahi

मायूस होते हुए

Devrani:kya प्रजा को पता नहीं क सुल्तान की चार बीविया और 150 लौंडिया है जिसके साथ उनके शारीरिक सम्बन्ध है?

Hooriya:Pata है सबको

Devrani:to आपको बुरा नहीं लगता आपका पति इतने स्त्रीयो से सम्बन्ध बना कर है क्या ये दुन्या वाले को ये सब सही लगता है

भूरिया क आखे भर आती है

"चुप करो देवरानी ये सब बात मत करो"

devrani:q न करू मल्लिका इ जहाँ आपको नाम का मल्लिका इ जहाँ बना डाई मुझे नाम का रानी बना डाई पर हमारे पति अपने रंगरलिया मानते है जो गलत है और में बोलू भी नहीं यही कमी है हम औरतो में मर्द की बात आते हे हम चुपकी मार लेते है

Hooriya:to करू लाडू सुल्तान से में

devrani:mard तो हमारी गलती निकल कर हमारे लिए नियम क़ानून निकल डाई और हम औरते चुप रह कर इन्हे अपने मन की नियम बनाने दिए जिसका भुगतान हमे करना पद रहा है

Hooriya:hmmm देवरानी

devrani:han लड़िये दीदी अपने हक़ क लये अपने सम्मान क लये और इन मर्दो क नियम हम क्यू मने जब ये हमारे नियम नहीं मानते और न हमे बनाने का अधिकार दिया

Hooriya:chhoro मई तुम्हारी बात से कभी इत्तेफ़ाक़ नहीं रख सकती हु कभी भी और रही मेरे शौहर की बात तो उसका िंसाद खुदा करेगा

देवदानी दो टूक भूरिया को देख रही थी

Devrani:theek है दीदी पर में प्रेम करती हु बलदेव से अपनी जान से ज़्यादा

Hooriya:theek है पर ये बात इस घर में किसी को पता न चले ाचा हुआ मेरे सांस ससुर और बाकि लोग पारस में नहीं है नहीं तो

Devrani:theek है दीदी मई इस बात का ध्यान रखूंगी

hooriya:jao बहिन तुम्हे अपने जन्मस्थान भी जाना है न घूमने जाओ जल्दी निकलो शाम तक वापस आजाना

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देवरानी उठ कर जाने लगती है और रुक कर

"धन्यवाद दीदी शाम में मिलते है"

Hooriya:muskura कर "जाओ मेरे बची"

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 69

भूरिया क कक्षा से निकल कर देवरानी ख़ुशी ख़ुशी जा रही थी

Devrani:man में) दीदी भूरिया को अभी ये नहीं पता क शमशेर उन्हें कैसे निगाह से देखता है अगर में आज बोल देती तो मुँह बंद हो जाता पर मुझे क्या दो दिन में वापस जाना हे है

देवरानी अपने कक्षा पहुंच कर जाने की तैयारी करने लगती है

Devrani:man me)aaj पता नहीं मेरे अंदर इतनी ऊर्जा कहा से आई मेरे अंदर सब बलदेव क दें है

बहार देवराज अपने घोड़ो को चारा दे रहे थे

devraj:sainiko सुनो जा कर अंदर सबको कह दो तैयारी करे देवगढ़ जाने की हमारे छोटे से प्यारे गाओ हमारे राज्य

सैनिक आकर खबर पहुँचता है बद्री बलदेव को क सब तैयार हो जाये

बद्री बलदेव और श्याम तीनो बैठ ते है

Shyam:aaj तो मज़ा आने वाला है

Badri:bhai हमे क्या मज़ा आएगा मज़ा तो बलदेव क है

बलदेव ये बात समझ क मुस्कुराता है

Badri:sale तू सच में बहुत प्यार करने लगा है क्या

Baldev:han डिल चीयर क देखो उसका हे नाम होगा

shyam:wah क्या प्रेम कहानी है

Badri:par तूने पटाया कैसे मौसी को

तभी देवरानी दरवाज़ा खोलती है और बलदेव की ओरे देख अपनी आखे झपकते हुए आने का इशारा करती है

shyam:shayad वो तुम्हे इशारे से बुला रही है

Badri:itni तेज़ तर्रार थी मौसी अनुसासन से भरी फिर भी तुझ जैसे छुट्ये से कैसे पैट गयी

Baldev:mausi नहीं भाबी तुम्हारी बहुत म्हणत की है इस को पटाने में भाई अब आता हु म्हणत का फल खा क

Badri:han जाओ mausi..nahi भाबी माँ क पास

shyam:bhabi माँ को दुःख मत देना नहीं तो हम तुम्हे छोड़ेंगे नहीं

श्याम मज़ाक करते हुए कहता है

बलदेव मुस्कुराता हुआ देवरानी क कक्षा में घुस कर दरवाज़ा को फट से बंद करता है और बद्री श्याम आखे फाडे अंत तक देख रहे होते है

अंदर जा कर

"क्यू बलदेव बहुत बात चीत हो रही है बद्री श्याम से देवरानी को तो भूल हे गए"

"माँ देवरानी को बलदेव भूल जाये ऐसा कोई पल हो नहीं सकता "

"क्या कह रहे थे वो दोनों"

"माँ यही कह रहे थे क इतनी कड़क माल तुमने पता कैसे ली"

"तो तुमने क्या कहा "

"मैंने कहा बहुत म्हणत की है पर फल नहीं मिला"

देवरानी बलदेव क ओरे घूम क एक डैम से चिपक जाती है और बलदेव क मुँह पर चुम्मो की बरसात कर देती है

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"गलपपपप गलप्प्प उम्म्ह सलरपपी यह गलपपपप"

"गलपपपपपप हुम्म्म माआ"

"क्या चाहिए मेरे बेटे को फल"

"अआप्के ये दोनों पपीते खाने है मुझे बड़े बड़े"

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देवरानी दो कदम पीछे हैट टी है तो उसके भरी वज़नी दूध एक ताल से हिलते है

"चल हत्तत्त बड़ा आया महारानी देवरानी क वक्षो को पाना इतना आसान नहीं"

"वो तो अभी पता चल जायेगा मेरी रानी"

बलदेव देवरानी को चूमने चाटने लगता है

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कभी देवरानी क गांड को मसलता है कभी गॉड में उठा लेता है कभी दूध पर चूमता है

"हैयय बीटा आराम से तुम तो तीर से तेज़ शुरू हो जाते हो"

"अब माँ हिरणी सी तेज़ी दिखती है मेरा लौड़ा पकड़ने में तो बीटा शेर की दहाड़ लगाएगा हे"

बलदेव देवरानी को लिटा देता है और देवरानी को बेतहाशा चूमने लगता है

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"अह्ह्ह बीटा में कही भागी नहीं जा रही उम् आह आराम से क्या बोले बद्री और श्याम"

"ुम्हाए मेरी जान देवरानी को उन्दोनो ने भाबी मान लिए"

"चल हट में नहीं बनूँगी भाबी वबी किसी की वो दोनों मेरे बेटे जैसे है मौसी हे कहेंगे"

"बड़ी आयी मेरा लौड़ा लेगी और मेरे मित्र तुझे मौसी माँ कहेंगे वो तो भाबी हे कहेंगे वैसे"

"कितना अजीब लगेगा बलदेव"

"गलपपपप आआह बलदेव"

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"में छोडूंगा दिन रात तो अजीब नहीं लगेग"

देवरानी ये सुन कर आखे बंद करे अपना मुँह फेर लेती है लज्जा क

"वैसे देवरानी जी मैंने उन्हें कह दया है क आपको वो भाबी माँ कहे जिसमे माँ और भाबी दोनों आजाये"

"बड़े तेज़ हो"

"आखिर बीटा आपका हे हु तेज़ तर्रार तुम भी हो न मुझे पपीते खाने है"

"मन जाओ"

"नहीं मन न माँ"

"बहार बद्री है"

"मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता देवरानी"

"बहार बद्री है वो लोग सुन लेंगे"

"सुन ने दो उन्हें पता है मई यहाँ पर अपनी माँ को पटक कर प्यार करने हे आया हु"

"बलदेव बहार तुम्हारे मां है देवराज उनको पता चल गया तो"

"सुन ने दो मेरे मां या मेरे होने वाला साला को आज उसके बहिन क ऊपर असली मर्द चढ़ा है उसे भी समझ आये उसकी हे गलती थी राजपाल से विवाह करने की"

"उस राजपाल नपुंसक का नाम न लो"

"आह माँ तुम्हारे ये बड़े पपीते"

देवरानी का ब्लाउज खोल देता है और ब्राज़िएर खोलने जाता है बलदेव

"आह रुको बीटा"

देवरानी उठ क कड़ी होती है और धीरे धीरे

""ये पपीते बास मेरे बेटे क लये"

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"माँ क्या वक्ष है पहाड़ से "

देवरानी कड़ी मुस्कुरा रही थी

"माँ इन दोनों ने मुझे हिल क बहुत तड़पाये है अब इनसे बदला लेने की इन्हे तड़पने की मेरी बरी"

"ले लो बदला मेरे राजा रोका किसने है"

बलदेव देवरानी को अपने बहो के भर क लेता देता है और अपना दोनों बड़े पंजो को देवरानी क बड़े वक्षो को ज़ोर से दबा लेता है

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"आअह्हह्ह्ह्ह aaaaaaaaaa बलदेव नाहिएईईए इतना ज़ोर से नहीं उम्म्म"

"आह क्या गरम दूध है मा ये तो मेरे हाथ में भी नहीं आरहे है हां आआह्ह मा"

बलदेव अब बरी बारी से देवरानी क वक्षो को चूसने लगता है

"स्लुर्प गलपपपप गप्प्प उम्म्म्म क्या दूध है"

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devrani:ahhh मई मर गयी

बलदेव देवरानी क होठो को चूस रहा था कभी उसके भरी मम्मोंको दबा क चूस रहा था

बहार बद्री और श्याम अब भी बैठे थे उतने में देवराज महल में अत है

devraj:ary तुम दोनों इधर हो बलदेव देवरानी कहा है

बद्री और श्याम को मानव सांप सूंघ जाता है उन्हें समझ नहीं आता क्या उत्तर दे

badri:wo तैयार हो रहे है शायद

devraj:acha कक्षा में है क्या

और मुस्कुराता हुआ कक्षा क द्वार पे जाता है

श्याम और बद्री एक दूसरे का मुँह देख रहे रहे क अब क्या होगा

देवराज दरवाज़े को थक थका क

"देवरानी ो बहना "

बलदेव अंदर देवरानी क बड़े वक्ष को चूसे जा रहा था और होठ चुम रहा था

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Devrani:ruko भइआ

baldev:mai नहीं रुकने wala.tumhe जो बोलना है है बोल दो

Devrani:kya बोलू अह्ह्ह उम्

baldev:keh दो सेल साहब से क उनके जीजा उनकी बहिन क वक्षो की मालिश कर रहा है

devrani:ahhh उम् शैतान

देवरानी ज़ोर से बोलती है

"भैया हम दोनों तैयार हो कर आएंगे थोड़ा समय लगेगा अहह"

devraj:kya हुआ देवराआणि तुम ठीक तो हो

devrani:aahh हाँ मैं ठीक हु झुमका डाली कानो में

Devraj:or बलदेव

devrani:ahh उम् आप जाओ न भइआ बलदेव भी अपने काम में लगा है हम आते है तैयार हो कर

ये सुन कर देवराज चला जाता है और उसे देख कर बद्री और श्याम मन मन मुस्कुरा रहे थे

बलदेव था जो रुकने का नाम नहीं ले रहा था

"आआह माँ ाचा क्या तुमने अपने भाई को भगा दया साला अपनी बहिन को अचे से वक्षो की मालिश भी नहीं करने देता"

"अह्ह्ह्ह अम्मम्म बहुत बड़ी बाते कर रहे हो हिम्मत है तो मेरे भाई क सामने में साला हॉल क देखना"

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बलदेव देवरानी क दूध बारी बारी से मुँह में ले कर चूसते हुए

"माँ आह एक न एक दिन तो हिम्मत करनी पड़ेगी उनको साला तो ज़रूर बनाऊगा और मां भी"

"अह्ह्ह्ह मेरे राजा ये मां बनाने वाली बात हजम नहीं हुई"

"जब मेरा लौड़ा हजम कर लोगी तो अपने आप देवराज हमारे बचे का मां बन जायेगा"

"अह्ह्ह है दय्या बास कर न मेरे दूध दुखने लगे"

बलदेव देवरानी क गले को चूमते हुए देवरानी क बड़े वक्षो को बरी बारी से बेरहमी से दबा रहा था

"आआआआआह मा हे भगवन इससष्ठ राजा"

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"हेय दय्या इतना न निचोड़ है में मर गयी "

"बरसो बाद इन वक्षो को इनका साथी मिला है माँ इन्हे मज़े करने दो"

"ाश ाः बीटा नहीं उम्म्म हम्म्म्म बास"

बलदेव था क मन ने का नाम नहीं ले रहा था और चूसे जा रहा था दूध"

"उम्म्म माँ जब ये दूध ले कर तुम ब्लाउज से थोड़ा दिखा कर ललचाती थी तब में ऐसे हे तड़पता था आह इन्हे खा जाऊंगा में"

"बीटा अब तो ये तुम्हारे हे है जितना चाहे बदला ले लेना इनसे"

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"अह्ह्ह मा उम्म्म गलपपपपप अहह सलरपप"

"बहुत स्वाद है इस दूध में उम्म्म्म आह माँ"

देवरानी आज ऐसे बलदेव क प्यार कए जाने से ऐसा महसूस कर रही थी जैसे स्वर्ग में हो वो बलदेव को अपनी ओरे खींच क

"ाः मेरे राजा इधर आ मेरी बाहो में"

"माँ ठहरी गांड इस कच्ची में और सुन्दर लग रही है"

बलदेव झुक कर देवरानी को चूमता है

"गलपपपपप गलप्प्प सलरपपप हम्म्म्म"

"अहह राजा ऐसे हे प्यार कर अपने माँ को"

देवरानी बलदेव को खूब अचे से सहलाती है

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"बीटा अब में तुझे बताती हु तू निचे लेट देवरानी बलदेव क ऊपर चढ़ कर अपने बड़े मम्मोंको उसके छाती पर मसलते हुए"

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बलदेव देवरानी की गांड और जांघ मसलने लगता है

"ाः मा तुम काम देवी रति से काम नहीं ाः"

"ाः ये ले मेरा दूध पी जा आज पूरा "

अब तक बद्री और श्याम जा कर अपने कक्षा में तैयार हो जाते है और देवराज भी तैयार हो कर आजाते है

देवराज वापस आकर देखता है बलदेव और देवरानी का कक्षा अभी भी बंद है

devraj:man me)ye आधा घंटे से बंद है कितना तैयार हो रहे है

देवराज आवाज़ लगता है

"Baldev..devrani हमे देरी हो रही है"

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बलदेव देवरानी क दूध मसल कर उसके होठो को चूस रहा था

"उम्म्म ममममहहब्मा"

"अहह बीटा लगता है भैया वापस आगये"

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बलदेव निचे खसकते हुए देवरानी का दूध की घुंडी अपने दांतो में फसा कर चबाने लगता है

"आठ है आयी भैया"

देवराज की आवाज़ सुन कर बद्री और श्याम भी आजाते है देवराज क पास

devraj:chalna भी है आज या नहीं?

Devrani:chhoro इसको भैया गुस्सा हो गए लगता है

Baldev:to अभी इस हाल में दरवाज़ा कैसे खोलोगी

Devraj:darwaza खोलो

देवरानी अपना दूध बलदेव क मुँह से निकल क जल्दबाज़ी में साडी पहन ने लगती है

ऑर्डर बलदेव लेता हुआ देवरानी क हिलते चुतर और दूध को देख अपने लैंड पर हाथ फेर रहा था

देवरानी जल्दबाज़ी में अपना जांघिए क ऊपर से हे साड़ी बाँध लेती है

जिसे देख बलदेव

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"माँ पीछे से आपके सुन्दर गांड पूरी दिख रही है जांघिए में फांसी"

और बलदेव देवरानी को ऐसी हाल में डेक

"आह क्या माल है"

और अपना लैंड हिलने लगता है

देवरानी तुनक कर पलट टी है

"तुम्हे तो हर घडी एक हे बात अब भैया क सामने जाना हे होगा"

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देवरानी जैसे हे पलटी बलदेव देख

"हाहाहा माँ आपके पपीता की घुंडी भी साफ़ दिख रही है"

और अपने लौडो को ज़ोर से मसलने लगता है

Devrani:kamine अब मुझे ऐसी हे हाल में दरवाज़ा खोलना पड़ेगा भगवन बचा लेना

Devrani:beta तुम चडड ओढ़ लो कही वो अंदर आगये तो

devraj:devrani..

तभी थक्क से देवरानी दरवाज़ा खोलती है

Devrani:ji भैया

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देवराज क सामने मुस्कुराती हुई उसकी बहाना कड़ी थी

देवराज ऊपर से निचे तक देवरानी को देखता है तो पता है उसका अंग अंग दिख रहा है

देवराज अपना सर निचे कर लेता है

Devraj:kshama करना बहाना शायद तुम अभी तैयार नहीं हुई

devrani:bhaiya वो बलदेव को बुखार चढ़ गया था तो पट्टी कर रही थी अब ठीक हो गया है वो अभी आई

देवरानी देवराज क पीछे खड़े बद्री और श्याम को मुस्कुराता पट्टी है और वो भी सर झुका कर मुस्कुराने लगती है

devraj:thek है आराम से तैयार हो

देवरानी ये सुनते हे फट्टाक की आवाज़ से दरवाज़ा बंद कर देती है

"ाः भगवन बचा लिया तूने"

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 70

देवरानी अपने भैया देवराज को बलदेव क बुखार होने का बहाना बना कर फैट से दरवाज़ा बंद करती है और अपने कक्षा में बलदेव की ओरे आ कर

Devrani:tum न एक न एक दिन मरवा क रहोगे

बलदेव पलंग पर लेता अपने माँ क हिलते दूध देख कर

baldev:maa मरवाना तो राजपाल को है मई तो एक दिन मर क रहूँगा

Devrani:ufff

बलदेव बात को सँभालते हुए

Baldev:kya हुआ क्या कह रहे थे मां जी

devrani:bhaiya को लगा में इतनी देर से तैयार क्यू नहीं हुई इसलिए मैंने बता दया क तुमको बुखार था इसलिए नहीं हो पायी तैयार

Baldev:tum तो बड़ी तेज़ हो देवरानी अपने भैया को ाचा बेवक़ूफ़ बनाया

devrani:jao अभी तैयार हो मुझे भी तैयार होना है

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Baldev:par माँ मुझे आपको देख क जाने का दिल नहीं कर रहा

देवरानी बलदेव क पास जा कर उसको धक्का दे कर स्नान घर में धकेलती है

थोड़ी देर में बलदेव तैयार हो कर आजाता है

Devrani:jao बहार में आती हु

baldev:q मेरे सामने तैयार न हो सकती

devrani:uff बलदेव जाओ न बहुत सताते हो

Baldev:q मुझे अपना पति नहीं मानती

Devrani:uff हो मानती हु पर हु तो एक स्त्री हे न मुझे शर्म आती है

देवरानी बलदेव का हाथ पकड़ क दरवाज़े क पास ले जाती है और दरवाज़ा खोल क बहार धक्का देते हुए सामने बैठे बद्री और श्याम को

Devrani:sambhalo अपने मित्र को

और देवरानी एक धक्का मार क बलदेव को कक्षा से बहार कर देती है

श्याम और बद्री एक साथ हस्ते है

बलदेव श्याम और बद्री क पास आते हुए

Baldev:ary तुम लोग तैयार हो

Badri:han भाई हम तो तुम दोनों प्रेमिओ का हे प्रतीक्षा कर रहे ह

shyam:bhabi माँ को ज़्यादा तंग मत करो नहीं तो आज धक्का दी है कल झाड़ू से मारेगी

ये बात पे बद्री है पड़ता है और श्याम भी है देता है

बलदेव का छोटा मुँह देख दोनों फिर से हसने लगते है

Baldev:ary रे मज़ाक बना लो प्रेमी को अपने प्रेमिका से मार कहानी हे पड़ती है चाहे वो कितना हे बड़ा वीर योद्धा हो

Shyam:ary हम मज़ाक कर रहे है आई हम देवगढ़ जा रहे है वह बाजार बहुत बड़ा है

Badri:han बलदेव हम खरीदी करेंगे

Baldev:han अवश्य मित्रो मां कहा गए

Badri:wo तुम दोनों का प्रतीक्षा कर क थक क बहार गए

थोड़ी देर बाद देवराज आजाता है

devraj:bacho आज बात हे करोगे या चलोगे भी हमे फिर आज हे वापस आना है

Baldev:han हमे निकलना चाहिए

devraj:tumhari ताब्यात अब कैसी है भांजे

baldev:Ab ठीक है

देवराज: देवरानी कह रही थी क तुम्हे बुखार होने कारन उसे समय लग गया और तैयार नहीं हो पाई

ये बात सुन क दोनों बद्री और श्याम अपना सर निचे कर क मुस्कुराने लगे और अपनी हसी रोक ली

बलदेव अपनी आखे दिखते हुए बद्री और श्याम को इशारा करता है क ऐसी हरकत न करे

तभी सामने से दरवाज़ा खुलता है और देवरानी सजी धजी आयी

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चारो मर्द वह खड़े सिर्फ देवरानी को निहारने लगे

devrani:kya हुआ सब बूट बने क्यू खड़े हो चलो

devraj:chalo बहाना और बलदेव को औसधि की आवश्यकता तो नहीं बुखार क लये?

देवरानी एक कातिल मुस्कराहट क साथ

devrani:bhaiya वो मैंने आज का खुराक इसे दे दया है

बलदे देवरानी क दूध की ओरे देख

baldev:ausadhi बहुत मीठी थी

बलदेव की नज़र भांप कर देवरानी अपने सदी से अपने वक्ष को छुपन की कोशिश करती है और लज्जा कर मुस्कान क साथ अपना मुँह दूसरी ओरे घुमा क

devrani:chaliye भैया हमे जाना चाहिए

चारो बहार निकलते है

बहार शमशेर अपनी तलवार से खेल रहा था

Shamshera:kaha जा रही है पूरी हिन्द की फ़ौज

Devraj:socha आज बहाना को देवगढ़ घुमा लौ

Shamshera:theek है देवराज जी शाम तक वापस आ जाये

devrani:theek है बीटा

Shamshera:khuda हाफिज खला

सब अपने अपने घोड़े पे बैठ जाते है और देवराज सबसे आगे अपने घोड़े को भागना शुरू करता है और उसके पीछे पीछे सब अपने घोड़े से देवराज क पीछे जाने लगते है

चारो जंगल और कई बस्ती होते हुए एक छोटे से महल पे जा कर अपने घोड़े को रोकते है

देवरानी अपने घर को देख बहुत खुश थी और उसके आखो से ासु टपकते है

देवरानी अपने घोड़े को बद्री को बांधने क लये कहती है ो वो सीधा अपने घर में जाती है

Devrani:baldev यही वो घर है यही वो गाओ है जहा हम पीला बढे यहाँ की मिटटी की सुगंध हे निराली है बीटा

Devraj:chalo बहाना दरबार में

देवराज दरबार की ओरे जाता है अनेको सैनिको की आवाजाही लग जाती है और सब आकर देवराज की जय जयकार करने लगते है

अनेक मंत्रीगण आकर देवराज से भेट करते है और सब से बात चीत करने लगते देवराज

देवराज अपने सिंहासन पर जा कर बैठ था है सेना और मंत्री

"महाराज देवराज की जय हो"

देवराज क आसान क बगल में देवरानी उसके साथ बलदेव बैठ ता है

देवराज क बाये तरफ बद्री और श्याम बैठ ते है

Devraj:priya देवगढ़ वासिओ आज हमारी बहिन देवरानी और भांजा बलदेव आया है बरसो बाद

देवराज इशारा कर क बता ता है

सब चिल्लाते हुए

"रानी देवरानी की जय हो "

mantri:maharaj में तो रानी को पहचान हे नहीं पाया

devraj:itne बरसो बाद आई है न

Mantri:sainiko इन सब क लये जलपान का इंतेज़ाम करो

Devraj:aaj हे हम लौट जायेंगे

देवरानी और बचे सुल्तान क महल हे रुके है एक दिन से

Mantri:ye क्या बात हुई महाराज आज हे आये और आज हे

Devraj:tumhe तो पता है न यहाँ सिर्फ मई हु हमारा कोई नहीं कोई परिवार नहीं तो देवरानी यहाँ कैसे रह पायेगी और वह पर सुल्तान का परिवार है

देवराज ये कहते हुए आखे नाम हो जाती है

Mantri:aisa कह क हमे पराया न करे महारा देवगढ़ का हर एक सैनिक हर एक व्यक्ति आप क साथ था है और रहेगा

Devrani:me हु न आपका परिवार भइआ

mantri:maharaj क्या हुआ युधा ताली की नहीं?

devraj:tum सुल्तान को तो जानते हे हो और हम उनके सुरक्षा में हे है और मुझे न चाहते हुए भी अपने राज्य क लोगो की सुरक्षा क लये युधा करना पड़ता है

devrani:bhaiya आप बात कीजिये में बचो को महल दिखा दू

देवरानी उठ टी है और उसके साथ बद्री और श्याम बह उठ कर देवरानी क पीछे आयने लगते है

devrani:kaisa लगा बलदेव हमारा घर

Baldev:bhut सुन्दर माँ

badri:bhabi माँ पर हम सुल्तान का साथ देते क्यू है

देवरानी ये सुन कर अपने भाव ऊपर कर क बद्री को एक टाक देखने लगती है

बलदेव मुस्कुराते हुए

baldev:ghabrao नहीं माँ मैंने हे कहा

देवरानी गुस्से से

"क्यू मैंने मन क्या था न"

Baldev:maa वो

Devrani:Badri मुझे माँ या मौसी हे बोलो

Baldev:nahi वो भाबी हे कहेगा मेरा भाई है वो

ये सुन कर श्याम और बद्री है देते है और देवरानी चिढ क बलदेव प् झपट टी है

बलदेव भागता है

देवरानी भागने लगती है

बलदेव आखिर कर एक कक्षा में घुस जाता है देवरानी भी उसके पीछे

"आज तुम्हे छोरुंगनी नहीं"

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 71

देवरानी बलदेव को भगा रही थी और बलदेव एक कक्षा में जा कर रुक छुपने की कोशिश करता है पर देवरानी भी उसके पीछे आजाती है

Devrani:kamine क्या सीखता है तू उनको

Baldev:ab माँ अगर आपको भाबी नहीं कहेंगे तो क्या दादी कहेंगे

देवरानी बलदेव पर झपटते हुए धीरे से उसके कंधो पर मारने लगती है

बलदेव हसने लगता है

बलदेव हस्ता जा रहा था और देवरानी उसे मार रही थी

आख़िरकार देवरानी थक कर अपना हाथ पकड़ कर

"उफ़ तुम्हारा बदन है या पठार मेरा हाथ दुखने लगा"

"ः मारो और मुझे माँ"

देवरानी ऐसे बलदेव क हसने से खुद भी है देती है

बलदेव देवरानी को अपने बाहो में समेत लेता है

"रानी तुझे वो मेरे मित्र भाबी हे कहेंगे तुझे आपत्ति हो या न हो"

देवरानी मुस्कुराते हुए शर्म से बलदेव क बाहो में झूल जाती है

devrani:"besharam"

Baldev:devrani मेरी रानी रिश्ता क्या है तो निभाओ डरो मत

बलदेव देवरानी को होठो की ओरे जाता है और उसे चूमना शुरू कर देता है

"गलपपपप गलप्प्प गपपपपप सलरपपपपपपपप

गलपपपपप गलपपपपपपप गलपपपप

गलपपपप गलपपपपप सलरपप उम्म्म ामममः"

बलदेव देवरानी को आगे बढ़ कर उसके चुतर मसल देता है

देवरानी क कानो में लोगो की बातचीत की आवाज़ आती है और वो बलदेव को धक्का दे कर अलग करती है

"चलो राजा हम देवगढ़ घूम ले और मंदिर और पास क बाजार भी घूमना है कई वर्ष हो गए "

"ठीक है जैसा मेरी रात्रि कहे"

दोनों बहार आते है देखते है बद्री और श्याम देवराज से मिल कर कुछ बात चीत कर रहे थे

Devraj:aao बहना कैसा लग रहा है अपना घर

devrani:bhaiya बहुत ख़ुशी हो रही है इतनी जिसको शब्दों में नहीं कह सकती वैसे कुछ बदला सा लग रहा है न

Devraj:aao बैठो ..dono..waise हमारा महल जो पहले था उसे तो शत्रुओ क आक्रमण से बुरी क्षति पहुंची और इसे हमे तोड़ कर बनाना पड़ा

बलदेव और देवरानी अपना अपना आसान ग्रहण करते हुए

Badri:mahal तो है बहुत सुन्दर मां जी

Devraj:hamare देवगढ़ की सुंदरता पहले जैसी नहीं

Devrani:bhaiya आप उदास न हो आप ने हे ये घर सुना कर दया है आपको विवाह कर लेना चाहिए था

Devraj:behana कैसे कर लेता में विवाह जब मेरा राज्य और मेरे राज्य क लोग की जान खतरे में हो और मेरा परिवार तो ख़त्म हे होगया समझो

देवरानी क आखो में ासु आजाते है

Devrani:"bhaiya नहीं हुआ ख़तम आपका परिवार हम सब है न"

Badri:mujhe तो सुल्तान बहुत लालची लगता है जैसा मैंने सुना था वैसा हे है अय्याश किस्म का

Devraj:wo जैसे भी हो पर मंगोलो से हमारे डूबते राज्य को उन्होंने हे बचाया है बीटा बद्री इसलिए में नमक खा कर उनके विरुद्धा नहीं जा सकता

Badri:par उनकी नज़र तो मैंने सुना है कुबेरी राज्य पर है

Baldev:Han मां जी राजा रतन सिंह क खज़ाना क पीछे है सब

Devraj:bacho राजा रतन सिंह ने जो कारनामा क्या है उसका उसे भुगतना होगा उसने छल कपट से मेरी बहिन देवरानी का विवाह करवा दया

Devrani:bhaiya जाने दीजिये जो हो गया वो हो गया

Baldev:nahi बताये मां राजा रतन ने क्या नाना क ऊपर दबाव बना कर विवाह करवाया था उनके सहमति क बिना

Devraj:han मेरे भांजे पर छोरो जो बीत गयी सो बीत गयी मेरी बहिन वह खुश है इस से बढ़कर मुझे और क्या चाहिए

देवरानी अंदर से ये सुन कर टूट कर रो कर भैया से बताना चाहती थी क उसे कितना कष्ट हुआ पर वो मुस्कुरा कर अपना दर्द छुपा लेती है

सब शाम तक रुकते है और शाम में निकल जाते है वापस

रास्ते में मंदिर क पास घोडा रुकवाते हुए

"भैया आएगी ठेहरे "

सब रुकते है

"क्या हुआ बहाना "

"भैया मुझे ये मंदिर गए बहुत बरस हुए आज जाने की ीचा है"

देवराज मुस्कुराते हुए

"तुम एक डैम माँ पर गयी हो बहाना "

देवरानी अपने घोड़े से उतरती है और सब बारी बारी से सीडीओ पर चढ़ने लगते है

देवरानी बलदेव क पास आकर चलने लगती है

devrani:ye भव्य मंदिर बहुत पुराण है बीटा जब में छोटी थी तो माँ क साथ यहाँ रोज़ आती थी

Baldev:maa मुझे राजा रतन की बात

Devrani:chup कर उसका न सोचो ये बात तो है यहाँ पारस में पहले हमारे पूर्वज का राज था पर आज सुल्तान ने कब्ज़ा क्या तो सिर्फ राजा रतन क लालच क वजह से

Baldev:hmmm

सब मंदरी में पहुंच कर हाथ जोड़ कर पूजा शुरू कर देते

Devrani:mata से मांग लो बलदेव जो मांगना है

बलदेव अपना हाथ जोड़े खड़ा हो जाता है

बलदेव मन में" माता मेरे जीवन में देवरानी दे दे में जीवन भर तेरा अहसान मंद रहूँगा "

और बलदेव घंटी बजा कर वापस सीडीओ से निचे आजाता है

देवरानी आँख बंद कए

"माता रानी मेरा बलदेव को और शक्तिशाली बना उसे धैर्य शक्ति दे मेरे राजा को हर शत्रु क वॉर से बचा ,मेरा बलदेव हमेशा ु हे हस्ता खिलखिलाता रहे माता आपके छाया में"

और देवरानी भी घंटी बजती है

सब वापस आकर अपने घोड़ो से निकल जाते है

कुछ देर घोड़ो को भागते हुए वे देवगढ़ क बाजार से निकल रहे थे

इस बार देवरानी अपना घोड़ा देवराज क आगे कर क सामने खड़ा कर देती है

देवराज अचानक से अपना घोड़े को रोकता है

Devraj:ab क्या हुआ बहाना

Devrani:bhaiya वो बाजार भी घूम ले आपकी आज्ञा हो तो

देवराज मुस्कुराते हुए ठीक है

सब घोडा बाजार की ओरे घुमा लेते है

Shyam:wah क्या सुन्दर दृश्य है इस संध्या में बाजार का आकर्षण का क्या कहना

Badri:chup नहीं रह सकते तुम

Shyam:Tumhe कैसे चुप करना है अभी बताता हु

श्याम अपना घोडा बद्री की ओरे भागता है

और बद्री हस्ते हुए बाजार की ओरे तेज़ी से जा रहा था

Shyam:q डर गए युवराज बद्री शेर की हुंकार से

Badri:sher ः छुआ हो तुम

दोनों को ऐसे लड़ते देख

सब हसने लगे

बाजार पहुंच कर सब रंग बिरंगी चीज़ो में खो जाते है और श्याम अपनी खरीददारी करने लगता है

devrani:bhaiya आप भी कुछ..

Devraj:nahi बहाना तुम लोग लो

तभी बाजार में आते जाते हुए लोग देवराज को मिल कर नमन करने लगते है और उसमे से एक व्यक्ति

"महाराज आप"

"आर्य मेरे मित्र कैसे हो"

devraj:acha तुम सब आगे घूम क आओ में अपने एक पुराने मित्र से बात कर लेता हु तब तक

devrani:theek है भैया

श्याम और बद्री खरीदारी करते हुए आगे निकल जाते है उनके पीछे बलदेव और देवरानी भी चल रहे थे

तभी देवरानी की नज़र कही जाती है वो उस दुकान पर खड़ा हो जाता है

baldev:ye क्या भाव क है

Dukandar:shreeman ये देवगढ़ क खास मोती का है पर ये सिर्फ स्त्रीयो क लये है

और ये कह कर दुकानदार हसने लगता है बलदेव को देख देवरानी उसके पास आती है

Baldev:bhaiya ये अंगूठी मुझे चाहिए

पास में खड़े बद्री और श्याम भी आजाते है

Devrani:kya हुआ भैया आप इनपे है क्यू रहे हो

Dukanwala:aapko बड़ी तकलीफ हो गयी में तो श्रीमान को बास ये कह रहा था क ये अंगूठी जो है सब स्त्रीयो का है पर ये ज़िद्द कए जा रहे है

बद्री बात को समझते हुए

Badri:tumhe पता है तुम किस से बात कर रहे हो मुर्ख और अंगूठी उन्हें पसंद आयी तो इसका मतलब ये नहीं क वही पहने किसी और को भी भेट दे सकते है न

दुकानदार डरते हुए

"जी श्री मन ये तो मैंने सोचा हे नहीं"

Badri:murkha

ये सुन कर सब हसने लगते हैं

दुकानदार: ये लीजिये बास 50 सोने की सिक्के दो और ये अंगूठी लो

बलदेव अपने जेब से सिक्के निकल कर देते हुए

dukandar:maharaj ये तो बहुत ज़्यादा है इसका मैंने सिर्फ 50 सिक्के माँगा आप 100 दे रहे हो

Baldev:jiske लये ले रहा हु उसकी कीमत इस क सामने कुछ नहीं

देवरानी अपना सर घुमा कर शर्मा कर इधर उधर देखने लगती है और अपने भाई को दूर खड़ा पति है जो अपने मित्र से बात कर रहे थे

Badri:waise मुर्ख जो तुम्हारे सामने स्त्री कड़ी है उसके लये हे ये अंगूठी लिए है

दुकानदार ये सुन कर देवरानी को ऊपर से निचे तक देखते हुए

dukandar:mujhe ऐसा लगता है मैंने कही इन्हे देखा है

devrani:badri तुम भी न..

badri:q क्या हुआ भाबी माँ आपके लये तो हे लय है मैं तो कहता हु अभी हे पहना दो

Baldev:badri..

dukandar:han महाराज ये लीजिये अंगूठी इनके हाथो पे और सुन्दर हो जाएगी ये तो

बलदेव सोच रहा था कही देवरानी ये सब से कही यही पर तांडव न कर दे

देवरानी अपना सर झुकाये कड़ी थी

dukandar:lagta है कही क राजा रानी है आप दोनों

Badri:han होने वाले है

बलदेव अंगूठी लिए खड़ा था

पास में खड़े लोग भी तब से इन लोगों की बात हसे जा रहे थे वो भी कहते है

"भाई आज तो बाज़ी मार हे दो बाजार है कोई नहीं देखेगा"

बलदेव देवरानी क आखो में देखता है और अपने हाथ में अंगूठी लिए आगे बढ़ता है

देवरानी अपना हाथ जल्दी से आगे बढाती है

baldev:kya आप हमारी बनोगी जीवन भर क लये ?

devrani:Ji बनूँगी

और बलदेव क आखो के देखती है जिसमे उसे सिर्फ प्यार नज़र आता है

बलदेव अंगूठी देवरानी क ऊँगली में पहना रहा था जिसे देख

बद्री ताली मरने लगता है और उसके साथ सब ताली बजने लगते है

जैसे हे अंगूठी पूरा पहनती है देवरानी

"अब चलो "

और देवरानी अपने पेअर देवराज की ओरे घुमा कर चलने लगती है

baldev:yaar बद्री वो नाराज़ हो जाएगी

badri:to तुम मन लेना

बद्री मुस्कुराता है

तीनो देवरानी क पीछे आते है

देवरानी अपने भाई क पास पहुंच कर

"भैया आपके मित्र चले गए"

"हाँ देवरानी तुम लोगो की खरीददारी पूरी हो गयी"

"जी भैया"

सब वह पर पहुंच जाते है श्याम अपना सामान घोड़े पर लाड लेता है

देवराज तभी देवरानी क हाथ में अंगूठी देख

"वाह देवरानी तुमने अंगूठी ली "

"जी भैया वो डिल क्या तो ले ली "

बद्री और श्याम क कान से धुवा निकल रहे थे देवरानी अपने भैया से नहीं बताती है क ये बलदेव ने दया है

सब घोड़े पर सवार हो कर सुल्तान क महल पहुंचते है...

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 72

सुल्तान क महल पहुंच कर सब आराम करने चले जाते है और रात हो जाती है सब धीरे धीरे खाने की तैयारी शुरू कर देते है

सब एक साथ बैठ खा रहे थे

Hooriya,devrani कैसा रहा देवगढ़ का सफर

Devrani,didi बास ऐसी ख़ुशी मुझे कभी नहीं मिली जितनी मुझे देवगढ़ और यहाँ रह कर मिल रही है

Sultan,devraj जी आपने सैनिको को ख़बरदार क्या क नहीं दुश्मनो से हमले की उम्मीद है

Devraj:ji सुल्तान मैंने सब को मंत्री जी को मैंने शत्रुओ की आक्रमण से सचेत कर दया है उन्होंने आश्वासन दया है क देवगढ़ पर अब फिर मंगोलो की हिम्मत नहीं

Sultan:chaliye अछि बात है

सब खाना खा कर उठने लगते है और सोने अपने कक्षा में जाने लगते है

अब बास सुल्तान और भूरिया बैठे बात कर रहे थे और उनके साथ बलदेव भी बात कर रहा था उसको कितना मज़ा आया पारस घूम क

Devrani:tumhe नींद नहीं आरही बलदेव तो तुम पारस की हे बात करते रहो में चली सोने

ये देख कर भूरिया है देती है जिसे बलदेव समझ नहीं पता

Sultan:sone का वक़्त तो अब मेरा भी हो गया hai..bhai बलदेव जाओ माँ का कहना मनो

भूरिया इस बार ठहाका लगा कर हस्ती है और उसका चेहरा लाल पद जाता है और सुल्तान उसे निहारने लगता है

देवरानी क पीछे बलदेव उठ कर जाने लगता है

Hooriya:Sultan आप भी जाए आराम kare.mujhe भी नींद आगयी

Sultan:Mallika इ जहाँ आप जाये अपने होज़रे में हमारा इंतज़ार करे आज हम आरहे है

ये सुन कर देवरानी पलट कर भूरिया को कनखिया से देख आँख मार क्र मुस्कुरा कर चली जाती है

जिसे देख भूरिया शर्म से सर निचे कर

Hooriya:ji सुल्तान जैसी आपकी मर्ज़ी

भूरिया देवरानी और बलदेव क पीछे चल रही थी क्यू क उसका कक्षा भी उसके कक्षा क बगल में था

भूरिया को अपने पीछे आटा देख देवरानी रुक जाती है अपने कक्षा क दरवाज़े पे जिसे देख

Baldev:ab क्यू रुक गयी माँ नींद नहीं आरही क्या अब

तब तक भूरिया देवरानी क पास मुस्कुरा कर आजाती है

Devrani:beta तुम जाओ मई आती हु

Hooriya:q बहिन आज बहुत जल्दी सोने चली

Baldev:chalo न maa,kya बात बनाने लगी

Devrani:bola न जाओ बलदेव अपने वस्त्र बदलो मई आती हु तू हम औरतो की बात क्या सुनेगा ,में कुछ बात कर क आती हु

बलदेव ये सुन कर अंदर चला जाता है

Hooriya:ary रे वो चला गया कैसे बात करती हो वो नाराज़ हो गया लगता है

Devrani:kaise बात करू उस से में आप भी न दीदी

Hooriya:pyar से करो

और मुस्कुराती है

Devrani:wo तो ऐसे रॉब दिखता है जितना पति भी न दिखाए

Hooriya:kamini तुम्हे प्यार तो पति का हे दे रहा है तो

Devrani:abhi बानी तो नहीं हु न और जो आप सोच रही हो वैसा कुछ नहीं हुआ अभी तक

Hooriya:ab तो तुम हे सोचो जो करना है करो गुनहगार भी तुमको होना है

Devrani:ary आप छोड़िये पाप होने दो पर में विवाह कर क हे आगे बढ़ूंगी

Hooriya:ae खुदा बचा ले इस मुसीबत से छोर कब जाना है वापस

Devrani:aap चिंता न करे हम कल हो सके तो निकल जाये क्यू क बलदेव क पिता ने दो दिन में आने क लये कहा था हो सकता है शमशेर हमला कर दे अपनी दिल्ली की सेना ला कर घाट राष्ट्र और कुबेरी पर

Hooriya:me तो जुंग से आजिज़ आ चुकी हो बहिन सुल्तान भी अपने साडी उम्र जुंग में बीता डाई

Devrani:par आज आपकी बरी है लगता है सुल्तान ki..aakhir अपने डेढ़ सौ हरम की स्त्रीयो को छोर आप पे डिल आज्ञा आज

Hooriya:chup कर बदमाश और जा अब कल बात करेंगे ..भाई साहब तेरा इंतज़ार कर रहे होंगे

Devrani:kaun भाई साहब ..फ

फिर बात को समझते हुए

"दीदी तुम न काम नहीं हो"

Hooriya:ab तुम निकाह करने का सोच रही हो बलदेव से तो वो मेरे बहनोई या जीजा हे होंगे न मेरी बहिन

Devrani:sushhh दीदी दीवारों क भी कान hai..ab में जाती हु उनको ज़्यादा प्रतीक्षा करना ठीक नहीं

मुस्कुराते हुए हल्का मायूसी से कहती है

Hooriya:Oh उनको वह जी वह

इस बात पर देवरानी ठहाका लगा कर है कर अपने कक्षा में घुसती है और भूरिया भी अपने कक्षा में घुस कर अपने पलंग पर लेट जाती है

भूरिया भी अपने कक्षा में जा कर अपने शौहर सुल्तान मेरे वाहिद का इंतज़ार करने लगती है

देवरानी दरवाज़ा बंद कर क अंदर आती है

"क्यू हो गया बात पूरी आज देवरानी बहुत जल्दी आगयी"

"तुम न बचो की तरह मत करो "

"में बचो की तरह कर रहा हु और तुम"

"तुम थोड़ी देर रुक नहीं सकते मेरे लये अभी से इतना गुस्सा करते हो विवाह क बाद क्या करोगे बात बात पे तुम"

देवरानी हल्का गुस्सा हो कर कहती है

"तुम्हे ऐसा लगता है क में हमारे विवाह क बाद तुम्हे खुश नहीं रखूँगा तो ठीक है"

ये कह कर बलदेव पलंग क कोने में अपना सर तकिये में घुसा कर उल्टा लेट जाता है

देवरानी फुसफुसाती है

"अब बत्ती भी मई बुझाउ सो गया घोड़े की तरह"

देवरानी जल रहे कक्षा क सब बत्ती बुझती है और कुछ मोमबत्ती को जलता छोर देती है

और जा कर पलंग क एक कोने में लेट जाती है

देवरानी लेती हुई इंतज़ार कर रही थी क अब बलदेव बोलेगा उसे देवरानी की नींद भाग गयी

Devrani:man में) शायद बलदेव सही में गुस्सा हो गया पर इसको तो मेरी भी बात समझना चाहिए न

थोड़े देर बाद देवरानी अपने जगह से उठ टी है और बलदेव क पीठ से लग क

Devrani:mera रज्जा गुस्सा हो गया

देवरानी बलदेव से पीछे से चिपक कर अपना हाथ उसके कंधो पर रखती है

Baldev:Mujhe नींद आरही है सोने दो

Devrani:raja बिना रानी को बहो में लिए सो जायेगा ऐसा भी कही हुआ है

बलदेव देवरानी का हाथ अपने कंधो से हटा कर झटक देता है

"माँ मुझे नींद आरही है तंग मत करो"

"मुझे पता है मेरा राजा को बुरी लगी मेरी बात"

"बुरी नहीं तो अछि लगेगी तुम्हे इतना प्यार करता हु फिर भी तुम ऐसा कैसा सोच सकती हो"

"आर्य मेरी जान मुझे क्षमा कर दो गलती से मुँह से निकल गया"

"नहीं देवरानी मई तो तुम्हे आज इतना तंग कर रहा हु तुम्हे दुःख देता हु तो विवाह क बाद तो और दुःख दूंगा जाओ सो जाओ"

"नहीं मेरे रज्जा अगर ऐसा सोचती तो तुम्हारे साथ इतने सपने नहीं देखती तुम अपने रानी को दुःख नहीं दे सकते बास कभी कभी ज़िद्दी हो जाते हो"

"हाँ तो ढूंढ लो कोई और"

देवरानी ये सुन कर उदास होते हुए बलदेव से दूर जाते हुए

"दूसरा हे ढूंढ़ना होता तो तुमसे क्यू प्रेम करती"

बलदेव देवरानी को पलट कर देखता है और उसके आखो को ासु से भरा पता है बलदेव झट से देवरानी को गले से लगा लेता है

देवरानी ज़ोर से बलदेव को भींच लेती है

देवरानी अपने हाथ से बलदेव क पीठ पर मुक्के से मारने लगती है

"जान से मार दूंगी अगर तुमने कभी मुझे किसी और क पास जाने को कहा"

"माँ तुम्हारे बहो में आये बिना नींद नहीं आती है तुमने हे दीवाना बनाया है इसलिए मई ज़िद्द क्या"

"बीटा मुझे भी कौन सा नींद आजाये अगर जब तक तुम्हारे बहो में झूल न लू उस से पहले"

"मेरी रानी में तुमसे बहुत प्रेम करता हु"

"आह मेरे राजा"

बलदेव देवरानी क होठो को ले कर चूमने लगता है

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"गलपपपप गलप्प्प सलरपपप यह ुम गलप्प्प गलप्प उम्म्म यह गलपपपपप गलप्प्प गलप्प

गलप्प्प गलप्प्प यह गल्प सलरपप गलप्प्प"

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बलदेव देवरानी को लिटा कर उसके मम्मी को दबोचते हुए

"आह माँ मुझे खुद से दूर मत रखा करो"

"उम्म्म ाः बीटा मुझ से नाराज़ भी मत होना तुम जब तक मसलो नहीं नींद नहीं आती है"

बलदेव देवरानी को कड़ी कर क पलंग क पास उसके गांड को मसलने लगता है

"ाः माँ क्या गांड है "

"उम्म्म यह ाः रज्जा"

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"अहह माँ उठ"

"उफ्फ्फ राजः"

बलदेव धीरे धीरे देवरानी को नंगा करने लगता है

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निचे बैठ बलदेव देवरानी की साड़ी को अपने दांतो से उसके नाभि क निचे से खींचता है और साड़ी को खींचता हु खोल देता है

बलदेव खड़ा हो कर देवरानी क पीछे खड़े हो कर देवरानी का ब्लाउज भी उतर देता है

Baldev:tum सुंदरता की मूरत हो महारानी देवरानी

इस बात से देवरानी फूली नहीं समाती

और बलदेव का हाथ अपने कमर पर रखते हु

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Devrani:ye सुंदरता की मूरत तुम्हारे सामने केवल जांघिए और ब्रासिएर में कड़ी है लो प्यार करो

Baldev:aaah मेरी रानी

अपना लौड़ा देवरानी की गांड पर चुबाहते हुए अपना हाथ ब्रासिएर क पीछे ले जा कर खोलता है

"माँ बड़े रंग बिरंगे वस्त्र उपहार क रूप में आपको मिले है मल्लिका से"

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पीछे से बलदेव खोलता है और देवरानी इतराते हुए अपने दूध को आगे से आज़ाद करती है

"ले पी ले तुझे बड़ा शौक़ है न"

"ाः माँ कितने बड़े तरबूज़े है आपके"

"खा जा आह इन्हे लाल "

"माँ इनके कच्चा चबा जाऊँगा"

"बन्दर ाः नहीं"

"चलो माँ बिस्तर पैर तुम्हारी बजता हु"

"रुक जा "

देवरानी अपने दोनों वक्षो को हवा में लहराते हुए कुछ जल रहे मोमबत्ती को बुझा देती है

"माँ ये क्या "

"मुझे शर्म आती है"

"तुम्हारे दोनों गेंद बहुत हिल रहे है सम्भालो गिर न जाये"

"कमीना"

"आह आजा मेरी रानी"

बलदेव देवरानी को अपने ऊपर लिए पलंग पर लेट जाता है

DeterminedImperfectArieltoucan-size_restricted.gif


देवरानी की गांड को हाथ में थामे

बलदेव ज़ोर से भीचते हुए अपने ऊपर ले लेता है

"आराम से न राजा "

"नहीं माँ मेरी रानी तुम्हारे अंदर इतना कामउत्तेज़ना है क ये बीटा आराम से कुछ नहीं कर सकता"

"तू भी तो काम देव से काम नहीं मेरे राजा"

CheerfulDisfiguredKagu-size_restricted.gif


देवरानी बलदेव क होठो को चूसने लगती है और उसके गर्दन को सहलाने लगती है देवरानी की गांड को बलदेव ज़ोर से भींच रहा तह

"ाआअह रआआआज नहीं"

बलदेव अपना लौड़ा धोती क ऊपर से हे धक्के मार रहा था महारानी की छूट पर"

"ये ले मेरी रानी"

"ना ाआअह हआ ऐसे हे राजा यह ामम"

"ाः मा रानी मेरी महारानी"

"ायः राजा aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah मई गयीईइ"

देवरानी अपने आखे बंद कए बेसुध हो कर सीधा लेट जाती है और उसके छूट से पानी की बौछार होने लगती है

बलदेव निचे झुक कर देवरानी क उखड़े साँसों को सँभालते हुए उसके जांघो को सहलाने लगता है

"आराम से मेरी रानी"

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देवरानी की छूट में चेतिया रेंगने लगती है जब बलदेव देवरानी क पानी छोड़ते छूट पर झुक कर चुम लेता है

"ाआअह राजा "

देवरानी तुतंत अपने आखे खोल देखती है बलदेव को अपने छूट पर झुका हुआ पति है

Devrani:man me)ye बलदेव मुझे इतने झाड़ देता है कमला तो घंटो म्हणत करती थी तो भी मई झाड़ टी नहीं थी

जादू है बलदेव में

और देवरानी अपने सोच पर मुस्कुराती है

"माँ क्या सोच रही हो आपका तो हो गया"

बलदेव झट से देवरानी का हाथ अपनस लौड़े पर रखता है

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देवरानी क हाथ कंपनी लगते है और वो अपना हाथ पिछले लेती है

बलदेव देवरानी को देख

"तू ऐसे नहीं मानेगी देवरानी"

बलदेव खड़ा हो कर देवरानी की गांड पर अपना लैंड टिकाये धक्का देता है है देवरानी उसके आगे कड़ी आखे बंद

"ाः" राजा"

बलदेव झट से अपना एक हाथ देवरानी क जांघिए क ऊपर से हे महारानी देवरानी क छूट पे घुसा देता है और एक ऊँगली उसके छूट में घुसा देता है

"aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah राजा"

"क्या हुआ माँ"

"मररररर गयी"

बलदेव अपने हाथ पर कुछ जेल महसूस करता है

"आज बीटा निकालो ना बरसो बाद कुछ उसमे गया है आआह में मर्डर जाउंगी"

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"ाः माँ तुम्हारी छूट क बाल कितने मुलायम है और छूट तो अंदर पूरी गीली है ाः"

"ाः कैसे समझौ इस ज़ालिम को में मर्डर रही हु दर्द से बीटा तू कुछ और कर "

"तो मेरा मुँह में ले"

"की मई नहीं जानती वो सब"

"इतनी कामसूत्र पुष्तक पढ़ी सीखी नहीं"

"ऐसा नहीं है वो सब तो कहानी "

बलदेव अब अपनी छोटी ऊँगली छूट से निकलता है

"फककक se"aawaz करता हुआ ऊँगली निकलता है जैसे बोतल की ढक्कन खुली हो इस बार बलदेव अपनी बीच की ऊँगली देवरानी की छूट में पेल देता है

"aaaaaaaaaaaaaah maaaaaaaaaaaaaaa हे bhagwAaaaaaaaaaaaan में मर्डर गायी"

देवरानी क आखो से ासु छलक जाते है

देवरानी अपना हाथ बलदेव क हाथ पर मरती है जिसे बलदेव समझ जाता है क देवरानी अब न सह सकती देवरानी क आखो में ासु देख अपनी ऊँगली "fakkk"ki आवाज़ से छूट से बहार निकलता है

बलदेव जैसे हे हाथ जांघिए से बहार निकलता है देवरानी रहत की सांस लेती है

बलदेव अपने ऊँगली पर देखता है जो खून से लाल था

"ये क्या माँ खून मुझे लगा पानी है"

"तुम्हे बास वैसे हे लगता है इतने बरसो बाद कुछ गया है योनि पूरी चिपक गयी थी रक्त तो निकलना हे था"

"क्षमा कर दो माँ मई दुःख दे दया"

"कोई बात नहीं बीटा तू मेरा राजा है आज नहीं तो कल .."

ये बोलते हुए शर्मा जाती है

"माँ लज्जाना बाँदा करो और मेरा निकल दो"

बलदेव देवरानी को अपनी ओरे खींच बहो में भर क उसके जांघिए में हाथ दाल अंदर तक उसके मांसल चुतर को मसलने लगता है

"माँ मेरा लौड़ा पकड़ो न "

देवरानी न चाहते हुए बलदेव का लौड़ा अपने हाथ में लिए

"आह राजा कितना बड़ा लिंग है"

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"लिंग नहीं मात ये अआप्के बुर क अनुसार लौड़ा है"

"आह राजा"

देवरानी उत्तेजना से बलदेव क लौड़ा को खूब मसलते है

और देवरानी अपने वक्ष को बलदेव क सीने पे खूब रगड़ती है पर बलदेव था क अपना लौड़ा का पानी निअक्लने क लये राज़ी नहीं थे

"बीटा मेरे हाथ दुःख गए हिलाते हुए"

"माँ इसलिए कहा था मुँह में ले लो निकल जायेगा"

देवरानी जोश में आकर निचे बैठ टी है और बलदेव क लौड़े को

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लंगोट क ऊपर से हे अपने जीभ से बलदेव क लौड़े क टोपे को चाट टी है

"ये ले तेरे माँ का जीभ तेरे लिंग तेरे लौड़े पे"

ये सुन कर बलदेव उत्तेजना से

"aaaaaaaaaaaah मेरी रानी मेरी मा महारानी देवरानी आआह"

देवरानी एक बार अपना जीभ लगा कर उठ टी है और बलदेव उसको अपने ऊपर लिए लेट जाता है और उसके छूट पर अपना लैंड रगड़ते हुए

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देवरानी क जांघिए में हाथ दाल कर गांड को ज़ोर से मसलने लगता है थोड़ी देर ऐसे मसलने से बलदेव अपनी आखे बंद कए

"आआह माआ में गया हम्म ाआअह"

देवरानी बलदेव क माथे को कभी चूमती है कभी उसके होठो को कभी अपने बड़े पहाड़ जैसे वक्ष उसके सीने में लगाती है थोड़ी देर में बलदेव शांत होता है और देवरानी को ढीला छोरता है हफ्ते हुए

"मज़ा आज्ञा माँ"

देवरानी बलदेव क ऊपर हैट कर बगल में लेट ते हुए

"यात्रा से थकी हुई थी और थका दया और साथ में खून भी निकल दया "

दोनों एक दूसरे को देखते है और दोनों की हसी छूट जाती है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 73

बलदेव और देवरानी अपने बिस्तर पर लेते है रहे थे और अभी अभी कए कब्बड्डी से दोनों थक गए थे

Baldev:aapko दुःख तो नहीं रहा वह

देवरानी बलदेव की ओरे अपना सर कर क

"बीटा तेरे लये ये दुःख तो कुछ नहीं है"

"माँ में शायद जोश के आकर अपना .."

"चुप करो ऐसा मत कहना तुम मुझे चाहते हे हो इतना क तुम अपने आप को रोक नहीं पते"

"हम्म मा"

"माँ क बचे अपने ऊँगली साफ़ करो गन्दा खून लगा है"

"पागल हो क्या ये गन्दा खून नहीं ये तो पवित्र है "

देवरानी उठ कर अपना साड़ी पहन ने लगती है और एक कपडे क टुकड़े से अपने छूट पर ले जा कर अचे से पोछती है खून जो एक एक बून्द उसके छूट क मुहाने पे लगा था

तभी बलदेव अपना हाथ धो कर आता है

दोनों की किसी क चलने की आहात सुनाई देती है

Devrani:man me)ab ये क्या मुसीबत है अब कौन हमारी जासूसी कर रहा था देखना होगा

Baldev:maa कहा जा रही हो

Devrani:aati हु देखु तो कौन है

Baldev:maa आप वस्त्र तो पूरा पहन ले

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Devrani:bass दरवाज़ा खोल कर देखती हु बहार नहीं जाउंगी

देवरानी वैसे हे अपने साड़ी को बंधे बिना ब्लाउज क दरवाज़ा खोलती है उसे सामने सुल्तान जाता हुआ देखते है

Devrani:man me)lagta है दीदी का काम हो गया सुल्तान जा रहे है क्या पूरी रात भी नहीं रुकते सुल्तान देखु तो

देवरानी अपने बगल क कक्षा से कुछ आवाज़ सुनती है गौर करने पे

"ाः उठ"

सुनाई पड़ती है

Devrani:hey भगवन दीदी की आवाज़ देखु तो

देवरानी अपने बगल क कक्षा जो भूरिया का था वह पैर जाती है

Baldev:maa

देवरानी देखती है क दरवाज़ा बंद नहीं है बास सताया गया है शायद सुल्तान ने जाते हुए बंद क्या था और भूरिया उठ क बंद नहीं की थी

देवरानी दरवाज़े क बीच में छोटे से छेड़ बन रहे जगह से अपनी आखे अंदर डालती है

देवरानी क पैरो टेल से ज़मींन खिसक जाती है

"हे भगवन दीदी हस्थमैथुन कर रही है"

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भूरिया अपने दोनों टांगो को फैलाये अपने खूबसूरत छूट के ऊँगली अंदर बहार कर रही थी और बीच बीच में अपने डेन से खेल रही थी

Devrani:man me)Bhut ज्ञान देती है दीदी पाप पुण्य का नरक स्वर्ग का क्या ये खुद से ऐसा करना पति क रहते हुए पाप नहीं

देवरानी मुस्कुराती है

Devrani:man me)mujhe कोसती है क में नरक में जाउंगी ,आखिर सुल्तान इन्हे तड़पता छोड़ गया तो भूल गयी न धर्म jaat,mallika जी प्यासे को कुवा चाहिए होता है और मुझे तो बलदेव मिल गया ,मल्लिका जी इस संसार में जब अपनी इच्छा पूर्ति की बात आती है तो मनुष्य जाट पात और धर्म नियम या किसी का नुकसान नहीं देखता बास अपना मज़ा अपनी इच्छा देखता hai..karte रहो ऊँगली और जाओ स्वर्ग में

देवरानी चुपके पाँव वापस अपने कक्षा में ाआजाति है

Baldev:maa आप ऐसे कैसे बहार जा सकते है

Devrani:q मेरे पति को बुरा लगा

Baldev:hm

Devrani:beta कोई नहीं है चलो सो jao..yatra से थक गए हो कल हमे फिर जाना है गहतराष्ट्रा

बलदेव और देवरानी फिर सो जाते है एक दूसरे को बहो में भर क

सुबह होती है बलदेव अपनी रोज़ का व्यायाम करता है देवरानी योग करती है फिर पूजा कर क सब को प्रसाद बनती टी है बहार बद्री और श्याम शमशेर की तलवारबाज़ी देख रहे थे

सुबह सुबह देवराज और सुल्तान चाय की चुस्की लेते हुए राजा रतन सिंह क कुबेरी क ख़ज़ाने को कैसे पाया जाये उसपर अपना जाल बन रहे थे

देवरानी बारी बारी से सबको प्रसाद बाँट टी है

Devrani:bhaiya आज हम लोगो को चलना होगा वापस गहतराष्ट्रा

Sultan:Q बहाना हमारी मेहमाननवाज़ी में कोई कमी रह गयी क्या ?

तभी वह भूरिया आजाती है

Hooriya:behan तुम चली जाओगी तो ाचा नहीं लगेगा मेरा तुमसे ऐसा वास्ता हो गया जैसे हम सदीओ से जानते हो काश बच्चे और सुल्तान क दूसरी बीवीए और बचे भी तुम से मिल पते

Devrani:koi बात नहीं दीदी वो तो अरब गए है अगली बार आउंगी तो वो सब रहेंगे न

Hooriya:ji बिलकुल

तभी शमशेर और बद्री शयाम आते है

Shamshera:salam अम्मी सलाम अब्बू

Hooriya:salam

Shamshera:kya हुआ क्या गुफ्तुगू चल रही है खला देवरानी क साथ

तभी बलदेव अपना कक्षा से निकलता है

Hooriya:wo बीटा तेरी खला देवरानी का जाने का वक़्त आज्ञा है

Shamshera:maa इतनी जल्दी भला कौन भेजता है

Baldev:baat ये है भूरिया मौसी वो पिता जी ने दो दिन क लये हे आज्ञा दिया था

Hooriya:han तुम तो जैसे बड़े आज्ञाकारी हो गए अपने पिता क

और देवरानी को देख कर मुस्कुराती है

देवरानी भी बदले में मुस्का देती है

shamshera:devrani मौसी एक दिन और रुक जाओ न

Devrani:beta शमशेर पारर

Shamshera:aap रुक रही हो आप आज मत जाओ कल चली जाना

Devraj:devrani एक हे दिन की तो बात है रुक जाओ न जीजा जी को कह देना में रोक लय था

Sultan:Han बहिन रुक जाओ

Shamshera:yaar बलदेव तुम मेरे छोटे भाई हो रुक जाओ आज तुम्हे रात का पारस दिखते है

shyam:han रुक जाते है

Badri:tu चुप कर श्याम

Devrani:bass भी करो sab..aaj रुक जाते है कल पक्का निकल जायेंगे हम वापस गहतराष्ट्रा

श्याम खिलखिला क है पड़ता है

Shyam:dekha बद्री मेरी बात मान ली मौसी ने

देवरानी पूजा का थाली ले कर चली जाती है

और बाकी सब धीरे धीरे चले जाते है

Shamshera:baldev आज शाम में चलेंगे

shyam:kaha जायेंगे ?

Shamshera:tum गोलू मोलू भी चलना आज हमारी आखरी रात है इसे यादगार बनाना है

Badri:golu मोलू होंगे तुम ..वैसे रात में बलदेव नहीं जायेगा

shamshera:q भला

बद्री मुस्कुरा क

"क्यू क वो अपने माँ क पल्लू से बंधा है और मौसी कभी जाने नहीं देगी"

shamshera:chup करो बद्री बलदेव मन की मुझसे से 7 साल छोटा है पर फिर भी वो अब 18 का तो हो हे गया है

Badri:tumhe लगता है क वो जायेगा?

बलदेव ये सुन कर भड़क जाता है

Baldev:o बद्री में कोई दूध पीटा बचा नहीं समझे

Badri:to चलो हम सब चले रात भर ऐश करेंगे

शमशेर :हाँ बलदेव चलोगे न इन्हे झूठा साबित कर दो?

Baldev:han में जाऊंगा

ऐसे हे दीं बीत जाता है और शाम में शमशेर बलदेव श्याम और बद्री जाने की तैयारी करते है

शमशेर एक सैनिक से बात करते हुए

Shamshera:bhai ये रेशमा आज कोठे पे आरही है न

sainik:gustakhi मुआफ हुज़ूर

shamshera:batao भी डरो मत मुझे पता है तुम भी जाते हो

Sainik:huzur सुना तो था किसी से आज का

shamshera:chal जा यहाँ से

शमशेर उसको भागते हुए

Shamshera:aaaj तो उसको राउंड दूंगा मेरी प्यारी रेशमा

सैनिक अपनी जान लये वह से जाता है

अंदर बलदेव तैयार हो कर आ रहा था

Devrani:kaha चल डाई ?

Baldev:maa शमशेर क साथ थोड़ा पारस घूम कर आजाता हु वैसे भी अंतिम दिन है

Devrani:Theek है बीटा पर थोड़ा संभल कर और रात में जल्दी आना में तुम्हारा प्रतीक्षा करुँगी

देवरानी मुस्कुराते हुए कहती है जिसका उत्तर बलदेव मुस्कुरा कर देता है

Baldev:pakka रात से पहले आजाऊंगा

बलदेव बहार निकलता है जहा श्याम और बद्री क साथ शमशेर बैठे इंतज़ार कर रहे थे

shamshera:aaj तुम लोगो को जन्नत की शेर करवाता हु

तीनो घोड़े पे बैठ चल देते है

पास में खड़ा वही सैनिक मुस्कुरा क

"आज तो मेहमानो क भी मज़े है"

दूसरे सैनिक से कहता है

तीनो घोड़े पे बैठ निकल कटे है मेह्खाने की ओरे

महल में बैठी देवरानी को कुछ याद अत है और वो बहार णिअकलती है

देखती है वे लोग निकल गए तभी उसे दो सैनिक बात करते हुए नज़र आते है

दूसरा sainik:Bhai मेहमानो क मज़े में समझा नहीं

sainik:bhai बात ऐसी है शहज़ादे मुझसे रेशमा का पूछ रहे थे और आज वो उनको चोदे बिना आएंगे नहीं उनकी आदत है

दूसरा sainik:bhai तो इसमें मेहमानो का क्या सवाल

sainik:bhai अब शहज़ादे छूट मरेंगे तो ये तीनो थोड़ी मुँह उठा क देखेंगे ये लोग भी कोठे पे चुदाई करेंगे मेने सुना है शहज़ादे शमशेर क साथ कोठे पर जाने वाला बिना चुदाई कए वापस नहीं आता

और दोनों सैनिक हसने लगते है

महल क मुख्या द्वार पे परदे क पीछे कड़ी देवरानी क हाथ पेअर जैम जाते है और वो अपने आप को कोसने लगती है क उसने क्यू बलदेव को जाने दया

Devrani:man me)hey भगवन मेरे बेटे से कोई पाप न करवाना मेरी हे गलती है

मेरा बलदेव किसी और क साथ ..नहीं नहीं..

गुस्से और अपने प्रेमी बलदेव क ऐसे कदम से वो किसी और को न भोग ले इस दर से भगवन से प्राथना करती हु देवरानी अंदर चली जाती है

इधर शमशेर तीनो को ले कर उसी जगह पहुँचता है जहा पिछली बार बलदेव को ले कर आया था

Baldev:dekho शमशेर में कोई मदिरा नहीं पीऊंगा इस बार और हो सके तो सोने क समय तक वापस जाना है

Badri:q भाई सोने क समय क्यू

एक हसी क साथ

shyam:hahaha

shamshera:bhai आज जो चीज़ दिखाऊंगा उसे देख तुम सब भूल जाओगे मदिरा भी

तीनो तहखाने क रास्ते से एक कोठा पर पहुंचते है जहा पर हर तरफ राजा और राजकुमार अलग राज्यों से आये हुए आसान पर बैठे थे

शमशेर अपने साथ अपने साथिओ को बिठा लेता है

शमशेर एक ऊँगली से इशारा करता है और मदिरा सब क पास आकर लोग रखते है

Baldev:ise ले जाओ मुझे नहीं चाहिए

बलदेव अपने पास रखा मदीररा उठा क बद्री क पास रख देता है

शमशेर बद्री और बलदेव श्याम शाम की चखा चॉंद देख बहुत प्रभावित होते है

तभी घुँघुरु की आवाज़ सब क कानो में बजती है

shyam:wo देखो वह क्या माल है

Badri:hmm अध्भुत

रेशमा धीरे से चलते हुए बीच में आती है

Shamshera:wo देखो बलदेव मेरी जान रेशमा को

बलदेव देखता है रेशमा को जो अपने पैरो में घुंगरूम बंधे चमकीले वस्त्र धारण कए उसका हर बदन से उत्तेजना छलक रहा था

सब एक साथ कह रहे थे

रेशमा ...रेशमा ...

और फूलो की बारिश कर देते है उसके फूल से बदन पे

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 74

शमशेर क साथ बैठे कोठे पर बैठे बलदेव और उसके दोनों मित्र आँख टिकाये रेशमा की जवानी को खा जाने वाली नज़र से ताड़ रहे the.waha बैठे सब लोग रेशमा की तारीफों की पल बांधते हुए अपने हाथो से उसपे फूल की बारिश कर देते है

रेशमा अब अपनी ऐडा से सब से रूबरू होती है

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Shamshera:Kya चीज़ हों तुम

Badri:Bhut सुन्दर है

रेशमा अपनी मुस्कराहट बिखेरे सब को घायल करते हुए टेबल क धुन पैर अपनी कमर मटकती है सब उसको देख गरम हो रहे थे

रेशमा अब अपने दूध को बारी बारी से हिला रही थी जिसे देख सब

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"वाह क्या बात है "

"बहुत खूब प्यारी रेशमा और हिलाओ इन्हे"

रेशमा कुछ देर में वह आये अपने मेहमानो क पास जा कर अपना कला का प्रदर्शन करने लगती है

कुछ आधा घंटा यु हे अपने जवानी का जलवा बिखेरे जाने क बाद रेशमा सब को सलाम कर क अंदर चली जाती है

सबलोग चिल्लाते है

"रेशमा रुक जाओ"

रेशमा क जाते हे वह बहुत सी लड़किया आजाती है और वो भी नाचने लगती है

Badri:kya भाई ये तो इतनी जल्दी चली गई

Shamshera:Bhai ये कुछ वक़्त क लये हे आती है बहुत महंगी है साली

Badri:Hmmm

Shamshera:Bhai तुम लोग इनमे से किसी को भी चुन लो और अपनी रात रंगीन करो

Shyam:shamshera नहीं यहाँ पर हिन्द क बहुत से राजा है उन्होंने हमें कही पहचान लय तो

Shamshera:to तुम भी उनसे पूछ सकते हो क वो यहाँ क्या कर रहे है आगे तुम सब की मर्ज़ी में चला रेशमा की लेने

श्याम क साथ बद्री बलदेव भी एक साथ

"क्या "

shamshera:han भइओ में जाता हु

शमशेर उठ क अंदर जाता है जहा पर रेशमा अपने पेअर क घुंघरू खोल रही थी और पास में हे उसके एक राजा था जो उस से बात कर रहा था

रेशमा उस राजा से कह रही थी

Reshama:Raja जी आप कैसे अंदर आगये

यहाँ इजाज़त नहीं

Raja:Reshama मुझे तुम्हारे साथ रात गुज़ारनी है चाहे तो तुम मुँह माँगा रकम ले लो

रेशमा अपने घुंघरू खोल कर निकलते हुए मुस्कुराती है

Reshama:kya डोज इस बेसकीमती रेशमा को

Raja:me 100 सोने क सिक्के दूंगा

Shamshera:khabardar

raja:tum कौन

Reshama:tum इन्हे नहीं जानते ये सुल्तान मेरे वाहिद क शहज़ादे शमशेर है ..आये शहज़ादे

Raja:muaf करना शहज़ादे हमने पहचाना नहीं

Shamshera:koi बात नहीं

Raja:par में पहले आया हु और आज क लये रेशमा मेरी हुई

Shamshera:lagta है तुम नहीं manoge..tum सौ 100 सिक्के डोज में 500 सिक्के देता हु आज रेशमा को उसे फैसला करने दो

Reshma:reshma तो यहाँ उसी क साथ जाएगी जो उसे सही कीमत दे

राजा चुप हो जाता है

shamshera:bolo अब में इसे 1000 सिक्के देता हु

Raja:gustakhi मुआफ हुज़ूर में भूल गया था में एक छोटा सा राजा हु

राजा ये कह कर वह से चला जाता है

Shamshera:waise आज क़यामत ध रही हो जानेमन

Reshama:ab आप जैसे बिगड़े हुए शहज़ादे रेशमा की बोली इतनी लगा दे तो वो क़यामत हे ढायेगी

शमशेर आगे बढ़ कर रेशमा को अपनी बाहो में भरने की कोशिश करता है

"आज यह शहज़ादे इतनी भी क्या बेसब्री"

शमशेर वही पास में गद्दे पे बैठ जाता है और रेशमा जाम बना कर शमशेर को अपने हाथ से पिलाने लगती है

जाम का नशा शमशेर क सर चढ़ बोल रहा था वही बहार बैठे बद्री और श्याम से रहा नहीं जाता है और वो भी मदिरा मंगवा लेते है और पीने लगते है बलदेव भी अब तक गरम हो गया था

Baldev:man me)maa की मुझे बहुत याद आरही है इन गोरिओं क देख सोने का समय हो गया होगा माँ का

Badri:ary बद्री क्या सोच रहे हो आज अंतिम दिन है पारस में मदिरा पियो

Baldev:nahi नहीं ..यार

Badri:q भाबी मन की है

और ज़ोर से हस्ता है और श्याम भी बलदेव को देख हसने लगता है

Baldev:maa को अगर पता ..

Badri:bhai जब हम पहुंचेंगे वो सो गयी होगी पी लो

श्याम बद्री की ओरे मदिरा बढ़ा देता है और बलदेव भी अपने आप को रोक नहीं पता है और पी लेता है

अंदर रेशमा अपने कमर को बलखाते हुए नाचते हुए अपने आप को शमशेर क सामने खोल रही थी और धीरे अब वो बिना किसी कपडे क शमशेर क सामने नाच रही थी शमशेर जाम का घुट लेते हुए उसे देख पी रहा था अब रेशम आकर शमशेर क गॉड में बैठ जाती है और शमशेर से रहा नहीं जाता वो उसके भरी मम्मों को पकड़ मसलता है और अपना लैंड रेशमा की गांड पर रगड़ते हुए अपने कपडे भी निअक्लने लगता है

कुछ हे देर में दोनों एक दूसरे को चूमने लगता है चाटने लगते है शमशेर रेशमा को लिटा कर उसपर चढ़ जाता है

"आह रेशमा तुम्हारा बदन कितना गरम है तुम सच में बहुत खूबसूरत हो"

शमशेर रेशमा क ऊपर चढ़ा चुम रहा था और अपने बदन से रेशमा क नाज़ुक बदन को मसल रहा था अब रेशमा अपना हाथ आगे बढ़ा कर शमशेर का लौड़ा पकड़ लेती है

"इसे बहुत बुखार आजाता है मुझे देख क आजाओ अब इसके बुखार निकलू"

रेशमा लौड़ा पकड़ कर अपने छूट क मुहाने पर रखती है और शमशेर ज़ोर का धक्का मारता है और लौड़ा एक बार में हे पूरा जड़ तक चला जाता

"aaaaaaaaaaaaah शहज़ादे आप का बहुत बड़ा है आराम से"

शमशेर धक्के पे धक्का मारने लगता है

"उह्ह्ह ाःह मेरी रेशमा तुम्हारी छूट"

"आआह राजा ओह आराम से"

"ये ले रेशमा मेरा लौड़ा"

"ये लौड़ा नहीं है लौडो का बाप है मुझे इतना दर्द कोई नहीं देता शहज़ादे जितना आप देते हो"

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ये सुन कर वो और जोश में आकर छोड़ने लगता है

कुछ देर यु हे चुदाई क बाद शमशेर अब रेशमा क पेअर उठा कर छोड़ने लगता है और इस वक़्त रेशमा अपने आखे बंद कए हुए सिसकी ले रही थी

अब शमशेर का पानी निकलने क करीब है

"ाः शहज़ादे मणि अंदर न निकले में माँ बन जाउंगी"

"आह आह"

ज़ोर का धक्का देता है और जैसे हे शमशेर की नज़र रेशमा पर जाती उसे उसकी अम्मी जान मल्लिका भूरिया नज़र आती है

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"अम्मी जान"

ये कह कर आएगी बढ़ कर रेशमा क दोनों दूध पकड़ कर दबाता है और अपनी आखे बंद करता है तो उसे कुछ ऐसी तस्वीर उसके दिमाग में आती है

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शमशेर

"यह अम्मी"

कर क रेशमा क छूट में हे झड़ने लगता है

कुछ देर झड़ने क बाद

"है में मर्डर गयी उतरो भी मेरे ऊपर से कितना पानी छोड़ते हो मेरा छूट पूरा भर गया "

बहार बद्री और श्याम जाम का घुट मरते हुए एक मुजरा करती हुई लड़की को अपने पास बुला लेते है

वो दोनों उसके अंग को छुए कर सहला कर मज़े ले रहे थे और वो भी उन्दोनो क गॉड में बैठ कर बारी बारी मज़े ले रहे थे

Baldev:yaar ये शमशेर कहा रह गया रात

badri:chup चाप मज़े लो आजाओ हमारे साथ देखो कितनी सुन्दर है ये

Baldev:nahi मुझे नहीं चाहिए ये गलत है

बलदेव जाम का गिलास लिए वह से दूर हाथ जाता है

Badri:man me)sala खुद तो माँ से मज़े लेते है अपने हम कुछ करे तो गलत है

और बद्री वो नाचने वाली का दूध दबा देता है जिसे बलदेव देख लेता है और वो भी नशे में था उसका लौड़ा खड़ा हो जाता है पर वो जान बूझकर इनसे दूर हैट जाता है क कही कुछ गलत न कर दे

अंदर शमशेर कुछ देर बाद फिर से रेशमा की छूट मरता है और फिर बहार आता है तो देखता है बद्री और श्याम भ्ही मज़े कर रहे है

Shamshera:Ary बलदेव किधर है भइओ

badri:wo कोने में

Shamsher:chalo चले

Badri:ab हम चलते है

वह नाचने वाली कहती है

"हुज़ूर हमारी बखसीस"

Shamshera:Wo में भेजवा दूंगा अपने आदमी क हाथ से महल से

वो खामोश हो कर चली जाती है तीनो बलदेव क पास एते है जो गहरी सोच में था

shamshera:kya हुआ बलदेव तुम परेशां क्यू हो

Baldev:wo माँ ने कहा था जल्दी आजाने और ऊपर से में मदीरा भी चढ़ा लिया अब कैसे उनका सामना करूँगा

Shamshera:chalo वैसे आज में जल्दी जा रहा हु नहीं तो सुबह हे जाता हु

तीनो बहार निकल कर तहखाने क रस्ते से सीडीओ से चढ़ कर ऊपर आते है आसमान में चाँद पूरा था और ठंडी हवाएं बढ़ गयी थी रास्ता सुनसान और परिंदो क चहक से लग रहा था क पहली सुबह हो गयी थी और आधी रात गुज़रे समय बीत गया है

तीनो घोड़े पैर बैठ तेज़ी से महल की ओरे जा रहे थे कुछ देरी में तीनो महल तक पहुंच जाते है

Shamshera:bhaio जा कर छुप क सो जाओ किसी से बात करने की ज़रूरत नहीं

महल में आते हुए हर सैनिक इनको हे देख रहा था जो रात क निगरानी कर रहे थे

शमशेर अंदर आकर अपने कक्षा में घुस जाता है

बद्री और श्याम भी अपने कक्षा में घुस जाता है

बलदेव अपने कक्षा की ओरे जाता है और दरवाज़ा को इस उम्मीद से खोलता है क खुला होगा पर वो बंद था

Baldev:ab तो पक्का माँ को उठाना पड़ेगा

बलदेव लड़खड़ा रहा था उसे होश नहीं थी क क्या करे

Baldev:maaa ो माआ दरवाज़ा खोलो

देवरानी बहुत समय तक बलदेव का राह देख कर उसको कुछ समय पहले हे झपकी लगी थी इसलिए जैसे हे उसके कान में बलदेव की आवाज़ जाती है वो उठ जाती है

"खोलो माँ दरवाज़ा"

devrani:man me)me पूरी रात तदपि हु इंतज़ार की हु ये गुलछर्रे उदा क आ रहा है देखती हु आज

देवरानी जान बुझ कर दरवाज़ा नहीं खोलती है और अपने आखे बंद कर फिर लेट जाती है

बलदेव अब ज़ोर से दरवाज़ा पीट रहा रहा नशे क हालत में इतना शोर गुल सुन कर भूरिया की आँख खुल जाती है

Hooriya:uff ये बलदेव क्यू चिल्ला रहा है आधी रात को

भूरिया समझने क बाद बहार निकलती है

Hooriya:ary बीटा बलदेव तुम आगये क्या

Baldev:jjijj व्वो माँ दरवाज़ा नहीं खोलररहि

बलदेव लड़खड़ाते हुए बोलता है

Hooriya:tumne कितना पी राखी है बलदेव तुम ऐसे हाल में कैसे माँ क पास जाओगे तुम बद्री और श्याम क होज़रे में रह सकते थे

कुछ देर से देवरानी को बलदेव की आवाज़ न अत देख वो उठ कर आती है और दरवाज़ा खोलती है धीरे से

जैसे हे दरवाज़ा खुलता है बलदेव सामने हे खड़ा था और लड़खड़ाते हुए भूरिया से बात कर रहा था

जिसे देख देवरानी का पारा चढ़ जाता है

बलदेव दरवाज़ा खुलने पर आये रौशनी से उस तरफ देखता है और अपनी माँ को खड़ा प् कर

"माँ आप उठ गए"

देवरानी गुस्से में

"जिसका बीटा इतना बड़ा शराबी हो रात रात भर बहार रंग रैलिया मनाये वो भला

कैसे चैन की नींद सो सकती है"

"माँ आप गलत समझ रहे हो"

"चुप कर बलदेव गलत तो में हु तुम तो सही हे रहते हो मुझे सब पता है तुम उस रेशमा"

ये कहते हुए उसके आखो में ासु छलक जाते है

Hooriya:aaram से बात करो बहिन रात

Devrani:mujhe इस से बात हे नहीं करनी जाओ जहा जाना है

Baldev:maa मुझे नींद आई है सोने दो

Devrani:ye कोई कोठा नहीं है जो जब मर्ज़ी आगये और जब मर्ज़ी चले गए

देवरानी ये बात धीरे से अपने आखो में ासु लिए कहती है और अंदर जाने लगती है

बलदेव उसके पीछे जाता है पर तभी अंदर से देवरानी तकिया और चादर लिए आती है और फेकती है जो सीधा बलदेव क मुँह पर जा कर लगता है

"माँ क्या कर रही हो"

"मेरे पास सोने की ज़रूरत नहीं जाओ "

Hooriya:devrani इतना भी क्या गुस्सा करना

Devrani:deedi इसे समझा दो नहीं तो में कुछ गलत कर बैठूंगी मुझे पता है आधी रात में नशे में धुत जब मर्द मुजरा देख कर अत है तो वो क्या क्या कर क आता है इसके शरीर से वही गंध आरही है

ये कह क देवरानी वापस जाने लगती है बलदेव अपना सर झुकाये खड़ा था उसके सामने तकिया ज़मीन पे गिरा था और चादर

देवरानी दरवाज़ा बंद करती है फिर खोल कर

"और सुनो "न तो में बाज़ारू हु और न तो ये कोठा है जो जब जी चाहा मुँह उठा कर आगये मेरा डिल की तुम क़ीमत नहीं लगा सकते बलदेव"

ये कह फट से दरवाज़ा लगा लेती है

ये सब सुन कर बलदेव का तो जैसे नशा हे उड़ जाता है और सोचता है माँ भूरिया क सामने ऐसे कैसे ये सब बात कर रही है

बलदेव अब भूरिया से भी आखे नहीं मिला प् रहा था

Hooriya:beta उठा लो ये तकिया और चादर आओ मेरे साथ

बलदेव भूरिया क पीछे जाता है

Hooriya:beta ये शमशेर तो अब नशे में दरवाज़ा खोलने से रहा तुम ऐसा करा मेरे ससुर क कमरे में सो जाओ आज

बलदेव शर्मिंदा होते हुए

"वो मौसी मुआफ कर दो मेरे वजा से इतना सब"

Hooriya:ary बीटा ..तुम्हे पता है शमशेर रोज़ हे ऐसा करता है पर आज तक मुआफी नहीं माँगा उसने अगर तुम्हे लग रहा है क तुमने गलत क्या है यही काफी है

ये कह कर भूरिया चली जाती है और बलदेव जा कर सीधा बिस्तर पर लेट जाता है उसे दरवाज़ा बंद करने का भी ख्याल नहीं था

Baldev:man में) ये माँ ने ऐसा खुलेआम सब कुछ बक दी पर मलिक्का ने मुझसे मेरे और उनके सम्बन्ध क बारे में क्यू नहीं पूछा ..

सोचते हुए बलदेव गहरी नींद में चला जाता है..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
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