Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 10 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 85

Baldev:Aur देवरानी मुझे मेरे रानी क रूप में चाहिए जिसे सब आदर सत्कार kare..Mujhe बन न है गहतराष्ट्रा का महाराजा और में देवरानी को बनाऊंगा Maharani..agar मेरी मांगे पूरी हुई तो हे में तुम सब की मदद कर सकता हु

ये सुन कर वह पर जितने चौधरी और सैनिक थे सब को सांप सूंघ गया और देवरानी अपने पल्लू को हल्का सा ऊपर उठाये बलदेव को देखती है जो मुस्कुरा रहा था और देवरानी भी मुस्कुरा दी

जीविका को ये सुन चक्कर सा आजाता है

सन्नाटा छ जाता है और सब लोग इस कश्मकश में पद जाते है और सोचने लगते है आखिर क्या किये जाये

Baldev:kya हुआ सांप सूंघ गए सबको?

jeevika:nahi ..तुम हम से ये मांग छोर कर कुछ और मांग लो तुम चाहे तो महाराजा बन जाओ गहतराष्ट्रा का जो चाहे वो करो तुम 10 विवाह कर लो पर देवरानी से विवाह क लये अनुमति दे नहीं सकती

Chaudhari2:Baldev आप महाराजा बन जाये हमे कोई आपत्ति नहीं पर अपनी माँ से विवाह करना तो पाप होगा आप खुद सोचिये

Baldev:Me सोच कर हे बोल रहा हु और देवरानी भी इस बात से सहमत है

Jeevika:Hosh में आजाओ तुम दोनों इस से पहले समय हाथ से निकल जाये तुम्हे पता है इस रिश्ते क वजह से हमारा कितनी बेइज़्ज़ती हुई है और तुम चाहते हो विवाह कर क दुन्या क सामने हमारा नाक काट जाये

तभी देवरानी बोल पड़ती है

Devrani:maa जी ये बात आप कह रही है ?आप का बीटा मुझे जीवन भर परयो सा वयवहार क्या तब आपकी नाक नहीं कटी?

आपके बेटे ने मुझे अपने मित्र रतन सिंह क बिस्तर पर भेजने क लये जबरदस्ती की तब आप की नाक नहीं कटी ?

आपका बीटा राजपाल पीछे 18 वर्ष से वैश्यों क पास जाता है उस से आप की नाक नहीं कटी ?

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wah!Ghatrashtra वासिओ अगर ये सब काम से और मेरी जीवन नरक बनाने क बाद आप सब की नाक नहीं कटी तो में सच्चा प्यार करती हु बलदेव से इसके लये नाक कटी तो भी मुझे परवाह नहीं

ये सुन सब क सब मूरत बन जाते है

Baldev:hamare पास ज़्यादा समय नहीं है और दादी माँ आप चाहे न चाहे हम फिर भी विवाह करेंगे

बलदेव अपने कमर में लगे चाकू से अपनी अंगूठे पर लगता है चाकू क तेज़ धार से अंगूठा हल्का काट जाता है बलदेव जा कर देवरानी क माथे पैर अपना अंगूठे क खून से देवरानी का माथा भर देता है

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देवरानी बलदेव को देखते रह जाती है

Baldev:banogi न मेरी जीवन साथी

देवरानी झट से बलदेव क चरण स्पर्श करते हुए

Devrani:Baldev जी में हमेशा आपका साथ दूंगी चाहे दुःख हो या सुख हो

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Baldev:ye क्या पेअर मत छुओ ..

बलदेव देवरानी को पकड़ कर उठता है

devrani:Pati भगवन सामान होता है और अपने भगवन क पेअर छूना गलत नहीं

ये सब देख कर गुफा में मौजूद जीविका और जितने चौधरी थे और सैनिक सब स्तब्ध हो जाते है

Chaudhari2:Maharani जीविका आप अनुमति दे न दे ये तो वही करेंगे जो ये चाहते है इसके वजह से हमे गहतराष्ट्रा को खोना ठीक नहीं होगा

Jeevika:tumhare कहने का अर्थ क्या है मई इन्हे अनुमति दे दू विवाह का एक माँ बेटे को तुम पागल तो नहीं हो गए

Chaudhari2:pagal हम नहीं महारानी आपका पुत्र राजा राजपाल है जो इस बेचारी को जीवन भर दुःख दया जिसकी सजा तुम सब भुगत रहे हो

Chaudhari1:muaaf करना महारानी पर आप अपनी घर की इज़्ज़त बचने क लये पुरे गहतराष्ट्रा की बहु बेटिओ की इज़्ज़त की परवाह नहीं कर रही हो

Chaudhari1:hum सब पुरे गहतराष्ट्रा क मुखिया है और सालो से गहतराष्ट्रा का पालन पोषण में हमारा योगदान रहा है..

chaudhari2:Maharani जीविका सब बर्बाद हो जायेगा वो शाहज़ेब डिल की तरह यहाँ भी कब्ज़ा कर लेगा और हमारे बहु बेटिओ को वो उठा कर ले जायेगा

chaudhari1:hamara राज्य हम से छीन जायेगा और हमे यहाँ से भागना होगा या तो शाहज़ेब क हाथो मरना होगा

बलदेव और देवरानी एक दूसरे क बाहो में बाहे दाल गुफा क बहार निकल रहे थे

चौधरी2: महारानी अपनी परिवार क मान सम्मान क खातिर पुरे गहतराष्ट्रा क मान सम्मान को खो डौगी आप बलदेव को हाँ कह दीजिये गहतराष्ट्रा की प्रजा आपको कभी मुआफ नहीं करेगी जब उन्हें पता चलेगा क आप उनसब को बचा सकती थी पर आप ने नहीं बचाया

Jeevika:man me)Hey भगवन क्या करू एक तरफ पूरा गहतराष्ट्रा क लोग है दूसरी तरफ मेरे बेटे की पति कैसे में उसे किसी और को दे du..(dusra man)devrani भी तो ठीक है उसने बहुत तकलीफ उठाया है और वैसे भी मेरा पोता हे तो है बलदेव )

पुरे गुफा में जितने सैनिक और चौधरी थे सब ज़ोर ज़ोर से बाते करने लगते है और जीविका को गलत बताने लगते है तभी एक ज़ोर की आवाज़ आती है और सब चुप हो जाते है

"रुक जाओ बलदेव"

जीविका जाते हुए बलदेव और देवरानी को रोकते है बलदेव और देवरानी पीछे घूम कर देखते है

Jeevika:hume तुम्हारी मांगे मंज़ूर है

ये सुन कर तो जैसे बलदेव और देवरानी क ख़ुशी का ठिकाना नहीं होता है देवरानी क आखो में ख़ुशी क ासु छलक जाते है और वो बलदेव क सीने पैर सर रख

Devrani:aakhir हमारी प्रेम कहानी रंग लाइ

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Baldev:Prem अगर सच्चे मन से करो तो आज न कल जीत हे होती है

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बलदेव और देवरानी वापस आते है

Baldev:dhanywad दादी

जीविका अपना मुँह फेर लेती है

Baldev:Daadi अपने पोते की होने वाली पत्नी को पॉट बहु को आशीर्वाद नहीं डौगी

ये सुन देवरानी लज्जा जाती है

Baldev:pair छुओ दादी की भी

देवरानी मुस्कुराते हुए जीविका क पेअर छू लेती है पर जीविका अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लेती है

Jeevika:kaam की बात करो आज शाम में शाहज़ेब जा रहा है अगर वो निकल गया यहाँ से तो

Baldev:Dadi मई शाहज़ेब को यहाँ से किसी भी एक स्त्री को ले कर जाने नहीं दूंगा चाहे में अपनी प्राण दे du..or गहतराष्ट्रा पर जैसे हे हम वापस अपना झंडा लहरायेंगे में विवाह करूँगा देवरानी से

chaudhari2:beta हमारे पास समय बहुत काम है

Baldev:Chaudhari साहब आप चिंता मत कीजिये मुझे पता है शाहज़ेब अपने कुछ सैनिको क साथ कुबेरी क तरफ कुछ करेगा और अपनी आधे से ज़्यादा सैनिको को यही लूट मार करने क लये रखेगा ..पर ऐसी उसकी मंशा है जो में कभी पूरी नहीं होने दूंगा

Chaudhari2:beta तुम से यही उम्मीद थी

Baldev:Chaudhari जी गहतराष्ट्रा की हर स्त्री मेरी माँ बहिन है उनके ऊपर हुए हर एक अपमान का बदला में शाहज़ेब से लूंगा

ये सुन कर वह पर सब बलदेव को गौर से देखने लग जाते है

बलदेव अपना हाथ आगे उठा कर प्राण लेता है

"मई बलदेव सिंह यानि क गहतराष्ट्रा का महाराजा आज प्राण लेना हु शाहज़ेब क किये की सजा उसे मिलेगी और इसका बदला हम उस से डिल छीन कर लेंगे"

सब आश्चर्यचकित हो कर देखते है बलदेव की ओरे..

कुबेरी

इधर कुबेरी में महल में आराम कर रहा राजा रतन सिंह क साथ उसकी पत्नी एलिज़ा थी जो उसे मादरा पैन करवा रही थी रतन सिंह इस बात से अनजान था क उसके राज्य में दो अलग अलग सेना आक्रमण करने क लये लगभग पहुंच चुकी है एक दिल्ली की सेना और उसके पीछे सुल्तान की सेना जिसका साथ देवराज दे रहा था

Ratan:or पिलाओ एलिज़ा इस देवरानी क रूप ने मुझे पागल कर दया है

एलिज़ा उसे गिलास भर क मदिरा देती है और वो पीने लगता है

शाहज़ेब की सेना कुबेरी को पश्चिम दिशा से आक्रमण करने की तैयारी कर रहा था और सुल्तान और देवराज उत्तर दिशा से

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 86

कुबेरी

महल क उत्तर से आक्रमण की तैयारी में सुल्तान और देवराज अपनी सेना लिए खड़े थे वही पश्चिम से शाहज़ेब की सेना धीरे धीरे आगे बढ़ रही thi.Kuberi क सीमा पर आकर सुल्तान अपना हाथ उठा कर इशारा करते है और सब रुक जाते है

Sultan:Fauzio हमे एक नहीं दो गुटों क साथ लड़ना है शाहज़ेब की 15000 फौज है और हमे पता है क कुबेरी की ताक़त क्या है इसलिए आप सब अपने साथ जो कुछ लाये हो वो खा पी लो

सुल्तान देखता है देवराज गहरी सोच में डूबा है सुल्तान अपने घोड़े में लटके बास्ते में से कुछ लड्डू निकल कर देवराज को देते हुए

Sultan:ye लो देवराज खाओ

Devraj:nahi सुल्तान अभी इच्छा नहीं है

sultan:khao भी हमे पता नहीं अभी कितने दिन तक जुंग हो

देवराज सुल्तान से एक लड्डू ले कर खाने लगता है सुल्तान देवराज को पास में हे सैनिको से दूर ले जाता है

Sultan:Aap इतने परेशां क्यू है देवराज जी जब से आप पारस से निकले हों आप कुछ मायूस लग रहे हो

Devraj:Nahi सुल्तान ऐसा नहीं है

Sultan:to वो मुझे वो देवराज नहीं दिख रहा जो हमेशा जुंग में दीखता था ऐसे सोच में डूबे रहोगे तो जुंग कैसे लड़ पाएंगे हम

Devraj:aap चिंता न करे सुल्तान

Sultan:Aap हमारे सालो पुराने दोस्त है आप हमसे न छुपाये अगर आपको देवरानी की बात खाये जा रही है तो बताये ?

देवराज को जैसे झटका लगता है

Sultan:Devraj में ये नहीं कहना चाहता था क शायद आपको लगे में आपका अपमान कर रहा हु पर आप को दुखी देख मुझ से रहा नहीं गया

Devraj:Aaap क्या कहना छह रहे है

Sultan:dekhiye देवराज जी हम जानते है आप कितने अचे और इज़्ज़तदार है अगर आपकी बहिन ने कोई गलत फैसला ले लिया तो उसके लये हमारे आखो क सामने आपकी इज़्ज़त कभी काम नहीं होगी

देवराज की ाझे फटी की फटी रह जाती है और वो चौंक जाता है

Sultan:chaunkiye मत देवराज जी पारस से निकलने से पहले जब हम तैयारी कर रहे थे तो भूरिया ने मुझे सब बता दया था

सुल्तान आगे बढ़ कर देवराज का हाथ पकड़ कर

sultan:aap फिक्र नहीं कीजिये देवराज जी आप हमे ये जुंग जीत कर कुबेरी का खज़ाना दीजिये आपको हम एक नायब तोहफा देंगे

देवराज क जैसे दुखते नस पे हाथ रख दया था सुल्तान ने

Devraj:Sultan कैसे भूल जाऊ में भला क मेरी बहिन मेरे भांजे क साथ एक भद्दा रिश्ता बनाई है मेरा आत्मा तक हिल गया है सुल्तान

देवराज का मुँह एक डैम रोने जैसा हो जाता है

सुल्तान उसको झट से गले लगा कर

Sultan:devraj मेरे दोस्त तुम मेरे छोटे भाई जैसे हो अपना डिल मत दुखाओ किसी ओरे क किये क वजह से

सुल्तान गले लग कर देवराज क कंधे पे थपकी देते हुए उसे छोरता है

Sultan:sher कभी दुखी नहीं होते डट कर सामना करते है

Devraj:hmm सुल्तान पर इन अधर्मिओं को पता नहीं कितना बड़ा पाप कर रहे है ये भगवन को क्या मुँह दिखाऊंगा में

Sultan:unka गुनाह उनके साथ है वैसे भी ऐसा होता है पिछले ज़माने में भी ऐसे रिश्ते कायम होते थे

Devraj:kya बात कर रहे हो आप

Sultan:sahi कह रहा हु हम आरबीओ में बाप क मरने क बाद बाप की जागीर क साथ बेटे को उसकी माँ भी मिलती थी

ये कह कर सुल्तान मुस्कुराता है जिसे देख देवराज का भी डिल थोड़ा हल्का होता है

Sultan:itna हे नहीं मिश्रा में तो कितने राजाओ ने अपनी बहिन या अपने खंडन में शादी की है अपने सल्तनत को किसी और क हाथ में न जाने क लये

Devraj:purane ज़माने की बात कुछ और थी पर अब तो हम समझदार हो गए है न

Sultan:hahahaha क्या समझदार इंसान तो इंसान हे रहेगा भाई और वैसे भी मेरी बात बुरा न मने तो कहु

Devraj:ji कहिये

Sultan:Hooriya कह रही थी क देवरानी ने बहुत दुःख उठाई है उसके साथ बहुत बुरा बर्ताव क्या....

सुल्तान वो हर बात बता देता है जो देवरानी ने भूरिया को बताई थी और देवराज ध्यान से हर बात सुनता है

Sultan:Hamne ये भी पता क्या है अपने गहतराष्ट्रा क नुमाइंदे से क राजपाल तुम्हारी बहिन देवरानी को राजा रतन सिंह क साथ हमबिस्तरी क लये मजबूर क्या

ये बात सुन कर देवराज का गुस्से से आँख लाल हो जाता है

sultan:han देवराज जी अब बेचारी देवरानी इतने परेशानी उठाई हे ज़िन्दगी भर उस से अब नफरत क्या करना

Devraj:Raja रतन की इतनी हिम्मत मेरी बहिन क ऊपर आँख उठाई अब में उसे ज़िंदा जला दूंगा

Sultan:ye हुई न बात ये जुंग हमे कैसे भी जीतना है अपने बहिन क ऊपर गन्दी नज़र रखने वाले को अपने हाथो से सजा दो

Devraj:ab उसके खून मेरे इस तलवार पैर लगने से पहले मेरी तलवार नहीं रुकेगी

Sultan:or बुरा न मनो तो तुम्हे राजपाल जैसे बूढ़े से देवरानी की शादी नहीं करवानी चाहिए थी

Devraj:tab सिर्फ पिता जी निर्णय लेते थे मेरी आयु काम थी इसलिए छह कर भी हम कुछ न कर सके और पिता जी इस कमेने राजा रतन क बहकावे में आगये थे

Sultan:Raja देवराज अपनी बहिन को अपना लो गुस्सा थूक दो उसका कोई नहीं है तुम्हारे सिवा

ये सुन कर देवराज खामोश हो जाता है

Devraj:sainik

सैनिक भाग कर आता है

Devraj:paani लाओ और तुम सब अब जल्दी तैयार हो जाओ आक्रमण करने का समय आगया है सूर्य ढलने वाला है

कुबेरी महल में आराम से मदिरा पी कर सोया था राजा रतन सिंह

गहतराष्ट्रा

इधर बलदेव और देवरानी गुफा में थे जीविका और गाओ क चौधरिओ क साथ उनके साथ कुछ सैनिक भी थे

Baldev:ab हमे चलना चाहिए

Devrani:theek है

Chaudhri2:bhagwan तुम्हे विजय बनाये

sainik2:hum भी आपके साथ जायेंगे युधा में

Baldev:hamare पास बहुत बड़ी सेना है आप अपने तरफ से जो सहायता कर सकते हो कर देना पर मुझे आपकी ज़रूरत नहीं

बलदेव जीविका क पास जा कर उसके पेअर छूटा है

"दादी मुझे आशीर्वाद तो अपने राष्ट्र क सुरक्षा करने क लये "

जीविका न चाहते हुए भी उसके सर पर हाथ फेरती है

बलदेव देवरानी को ले कर गुफा से बहार आता है और अपने घोड़े पे बैठ दोनों शमशेर क पास आजाते है

Shamshera:aagaye तुम लोग क्या हुआ क्यू बुलाये थे

Baldev:Bhai एक खुशखबरी है

Shamshera:Kya बताओ

Baldev:aise नहीं suno..Mujhe दादी ने बुलाया था और हमारे गाओ क सब मुखिया जो सरदार होते है चौधरी सब थे ुणो लगा क तुम मुझे गहतराष्ट्रा से वापस ले जाने क लये आये हो

Shamshera:acha तो फिर

Baldev:fir क्या वो कहने लगे क उनका राज्य खतरे में है सब को क़ैदी बना लय है शाहज़ेब ने और लूट पात मचा रखा है अगर हम उसकी मदद कर सके तो

Shamshera:to फिर तुमने क्या कहा

Baldev:maine कहा क अगर मेरी मांग पूरी हुई तो में शाहज़ेब की फौज को हरा सकता हु पारसी फौज क मदद से

Shamshera:tumne क्या मांग की

Baldev:maine देवरानी को पत्नी क रूप में माँगा और गहतराष्ट्रा की गद्दी और वो मान गए

बलदेव झट से शमशेर क गले लग जाता है जिसे देख कड़ी देवरानी मुस्कुराने लगती है

Shamshera:bass भी करो ..आखिर तुमने अपने माँ को जीत हे लय

शमशेर गले से हैट ता है

Shamshera:to अब तुम दोनों कही नहीं जाओगे बल्कि हमारे साथ जुंग में शरीक हो रहे हो ..हमे सूरज ढलते हे शाहज़ेब को धूल छठा देना है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 87

शमशेर क पास बलदेव और देवरानी पहुंच जाते है और वो पूरी बात बता देते है कैसी उसकी दादी जीविका मान गयी गहतराष्ट्रा को बचने क लये और बलदेव को देवरानी पत्नी क रूप में दे दी

Shamsher:Chalo ठीक है अब तुम दोनों हमारा साथ डोज

Baldev:Han हम कही न जायेंगे अब ये राज्य को और अपनी माँ को जीत कर हे सांस लूंगा

Shamshera:sahi है तुम्हे तो जोरू मिलेगी और मेरे अब्बू सुल्तान को खज़ाना कुबेरी का जो उनका ख्वाब था मुझे क्या

ये कह कर शमशेर मायूस हो जाता है जिसे देख कर देवरानी को बुरा लगता है

Devrani:Sab समय पर छोर दो और अपनी डिल की सुनो अपना प्यार काम मत होने देना कही कोई चमत्कार हो जाये और आपको भी

शमशेर बात काट ते हुए कहता है

Shamshera:aah छोरो भी ऐसा ख्वाब क्या देखना जो पूरा होना नामुमकिन हो देवरानी खला आप तो जानती हे हो अम्मी कितनी सख्त है और कितना खुदा का खौफ है उनको

Devrani:Pyar करना गलत नहीं अगर सच्चे डिल से चाहते हो तो वही खुदा उनके सख्त डिल में निर्मित डालेगा और बुरा न मन न पर दीदी भूरिया छुपाती है उन्हें भी पति का प्यार पूरा नहीं मिल पता जहा तक में समझ पायी हु

Shamshera:ab खुदा जाने क्या hai..chhoriye अब में जा रहा हु फौज़ीओ को बता दू कैसे जुंग की शुरुवात करनी है

शमशेर ये कह कर वह से अपने फौज़ीओ क पास चला जाता है

बलदेव देवरानी को देख रहा था और बिना पालक झपकाए ऊपर से निचे तक निहारता है

Devrani:itna ज़्यादा मत देखो

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Baldev:q न देखु अब तुम तो मेरी हो सिर्फ मेरी

देवरानी मुस्कुरा क

" शादी क लड्डू अभी से मन में फूटने लगे"

Baldev:Abhi तो लड्डू हे फूटे है कल जब हम विवाहित पति पत्नी होंगे तब तुम्हारे क्या क्या टूटेंगे तुम्हे पता नहीं

देवरानी नखरा दिखा क

Devrani:agar में न कह दू तो ?

Baldev:Tab भी तुझे उठा क ले जाऊंगा माँ छोड़ूंगा नहीं जब तक चार बचे न पैदा कर दू

Devrani:huhh बड़ा आया

कह क देवरानी घूम क जाने लगती है

Baldev:devrani कहा ?

देवरानी को चलते हुए जाते देख बलदेव का लैंड खड़ा हो जाता है देवरानी क हिलते चुतर और बड़े दूद एक सुर्र में थिरकते जा रहे थे

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बलदेव फ़ौरन अपना जीभ निकल कर अपने होठ पर फेरता है अपने मतवाली माँ की चल देख कर

Baldev:man में)34 साल की है पर लगती तो 20 की भी नहीं है इतने सुन्दर त्वचा है और गदराई बदन की है

थोड़े दूर चने पर देवरानी मुस्कुरा क मुड़ती है

Devrani:dekhte रहोगे ..इधर आओ

देवरानी एक बड़े पठार क पीछे जाती है

बलदेव तेज़ी से अपने माँ क पीछे भागता है

जैसे हे बलदेव पठार क पीछे जाता है देवरानी बलदेव को ज़ोर से गले लगा लेती है और उसके गले पैर चूमने लगती है

Devrani:baldev मेरे पति मेरी जान

Baldev:devrani मेरी जान मेरी पत्नी

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Devrani:aaj में बहुत खुश हु बलदेव काश आज माता पिता जीवित होते मेरे

Baldev:to क्या वो हमारे रिश्ते को मन लेते तुम ये सोचो अपने भाई का क्या करोगी

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Devrani:aaah मुझे उनसे नहीं लेना देना कुछ अब हम बस बंधन में बांध जाते है

बलदेव देवरानी को बेतहाशा चूमने लगता है

"गलपपपपप गलप्प्प गलप्प ुम अहम्म्म्म गलपपपप गलपपपप गलप्प"

देवरानी आह

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बलदेव देवरानी क होठ को अपने होठ में भर देवरानी क मधुर रस को चूस कर मज़ा ले रहा था और अपने हाथ आगे बढ़ा कर एक दूध को ज़ोर से पकड़ कर ज़ोर से दबाता है

devrani:ooouch ..

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Baldev:kya हुआ

Devrani:aise भी कोई दबाता है क्या

तभी शमशेर की आवाज़ आती है

"बलदेव बलदेव" "देवरानी खला"

Devrani:chalo शमशेर बुला रहा है

Baldev:nahi न

बलदेव दूध एक हाथ से दबाते हुए दूसरा हाथ देवरानी की गांड पर रख देता है और सहलाते हुए

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"उम्म्म क्या माल हो माँ तुम मुझे ये खज़ाना चाहिए"

देवरानी बलदेव की बात समझ कर बलदेव का हाथ अपने गांड से हटा कर

"यहाँ जाना अशुभ मन जाता है इस खज़ाना का मत सोचो दूल्हे राजा किले में प्रवेश करने मिलेगा बास कुछ और धैर्य दिखाओ"

"मुझे नहीं पता है क्या शुभ अशुभ मुझे चाहिए तो चाहिए"

बलदेव देवरानी क गांड क दरार में अपना हाथ घूमता है

Devrani:hatt बदमाश

देवरानी अपना होठ पर लगा बलदेव का थूक साफ़ करती है और अपना ब्लाउज और पल्लू ठीक कर क पठार क पीछे से निकलती है

Devrani:han शमशेर बोलो

Shamshera:kaha हो तुम दोनों हमारे पास समय नहीं है हम अब महल की ओरे कुछ करेंगे

तभी बलदेव मुस्कुराता हुआ निकलता है पठार क पीछे से जिसे देख शमशेर समझ जाता है क क्या चल रहा था

Shamshera:Baldev थोड़ा तो सबर कर लो और थोड़ा आराम करने दो भाबी को बास ये जुंग जीत जाये फिर जो करना है करते रहना दिन रत

ये सुन कर देवरानी का शर्म से बुरा हाल हो जाता है और वो अपने सर को निचे कर झेप जाती है और उसका चेहरा लज्जा क मरे लाल हो जाता है

शमशेर देवरानी और बलदेव अपने सेना को ले कर शाहज़ेब जो पहले से गहतराष्ट्रा पर कब्ज़ा कर लय था और सबको बंदी बना लये था उससे युधा करने क लये निकल जाते है

कुबेरी

वही पड़ोस क राज्य कुबेरी में राजा रतन सिंह आराम कर रहा था और उसके राज्य क ख़ज़ाने क लालच में एक तरफ शाहज़ेब की फौज कड़ी थी और दूसरी तरफ सुल्तान और देवराज कड़ी थी

Devraj:Sultan अब बात ख़त्म कीजिये वो सब हमे शाहज़ेब की सेना क लये रुकने से ाचा हम पहले हे धावा बोल दे और पहले राजा रतन की सेना को धूल छठा देते है फिर शाहज़ेब की सेना को देख लेंगे

Sultan:jaisi आपकी मर्ज़ी देवराज जी

शाहज़ेब क सैनिक सूर्य ढलने का प्रतीक्षा कर रहे होते है और इस बात से अनजान थे क डिल की सेना को सिर्फ कुबेरी की सेना से नहीं पारसी सेना से भी लड़ना है

Devraj:Sainiko तैयार हम सूर्य ढलने का प्रतीक्षा नहीं करेंगे हम शाहज़ेब की सेना से पहले हमला कर देंगे कुबेरी पर

Sultan:Han देवराज जी ठीक कह रहे है सब तैयार ?

Sainik:tayyar तैयार

25000 फौज एक साथ बोलते है जिसे से पूरी फ़िज़ा में आवाज़ गूंजती है

Sultan:yalgaar हो

Devraj:aakaraman

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सुल्तान और देवराज अपने सैनिको क साथ कुबेरी क सीमा में घुसने लगते है और उनसब की घोड़े तेज़ी से भाग रहे थे सीमा पार करते हुए अनेको सैनिक आकर पारसी सेना को रोकने का प्रयास करते है पर पारसी सेना कहा रुकने वाली थी वो सब को कुचलते हुए आगे बढ़ रही थी

महल में राजा रतन अपने पत्नी रुक्मणि सुखमनी और एलिज़ा क साथ था

Sainik:maharaj पारस क सुल्तान ने आक्रमण कर दया है

रतन सिंह क हाथ में मदिरा का गिलास था वो फेकता है और अपने हाथ के तलवार ले कर

Ratan:sena तैयार करो तोपों से भून दो इन पर्सिओ को

Rukmani:Maharaj आप नशे में है

Ratan:Chup करो में होश में हु बिलकुल

sukhmani:is एलिज़ा ने हम दोनों क जीवन को बर्बाद कर क रख दिया है क्यू पिलाई तुमने महाराज को इतना

एलिज़ा जो अंगेज़ मूल की महिला थी जिसे राजा रतन ने जुंग में जीत कर लाया था पर उसकी दो और पत्नी थी जो दो बहाने थी रुक्मणि और सुखमनी

eliza:Maharaj को पीना था थो में क्या गलत की

Sukhmani:man me)Is चुड़ैल वैश्य ने हम दोनों बहनो का जीवन ख़राब कर दी जब से आई है महाराज को वैश्य और शराब क अलावा कुछ नहीं सूझता

Rukmani:man me)ye एलिज़ा आई है तब से कुबेरी बर्बाद होते जा रहा है इसके डिल में ज़रूर खोट है अंग्रेज़ो की दलाली कर क हमारे ख़ज़ाने लूटवाने आई हो

Eliza:bhut सोच रही हो तुम दोनों

ये सुनते हे रुक्मणि और सुखमनी एलिज़ा को देखते है

Eliza:fiqar करना का बात नहीं है हम राजा क लये कभी बुरा नहीं सोचेगी

Rukmani:chup कर अँगरेज़ की बची बुरा हे बुरा हो रहा है हम सब मरने वाले है ,सुल्तान इ जहाँ मेरे वाहिद ने हमला क्या है हम में से कोई नहीं बचेगा

Ratan:chuppp करो तुम सब नहीं तो सुल्तान से पहले में तुम सब का सर काट दूंगा

sukhmani:kaat दो अब और क्या बाकी रह गया है और एलिज़ा का क्यू काटोगे हम दोनों को मर दो

रुक्मणि और सुखमनी आये मुसीबत से घबरा जाते है और अपने कक्षा में जा कर एक दूसरे से बात करने लगते है कैसे अपनी जान बचाये

एलिज़ा मन me:Yahi ाचा मौक़ा है इस राजा से छूट करा पाने का इधर राजा लड़ने जायेगा उधर में बंगाल की कड़ी पहुंच जाउंगी जहा ईस्ट इंडियन कंपनी क शीप पर अपने कंट्री ब्रिटैन चली जाउंगी

और मुस्कुराती है

राजा ratan:jitne सैनिक आस पास सीमा पर तैनात है सबीओ इकठा करो

सैनिक भाग कर पुरे कुबेरी में जा कर ढिंढोरा पीत्वा देता है और धीरे धीरे सैनिक चारो ओरे से महल को घेर लेते है

रतन :सैनिक उस पारसी क बचे को ऐसा हाल करो क कुबेरी क ख़ज़ाने उसके मरने क बाद उसकी आत्मा भी खज़ाना भूल जाये

इधर उत्तर छोर से कुबेरी सीमा को लांघते हुए सुल्तान की सेना आगे बढ़ रही थी सूर्य का हल्का प्रकाश अब भी फैला था

अपने तलवार को चलते हुए आने वाले हर कुबेरी सैनिक को मौत क घाट उतारते हुए पारसी सेना महल क उत्तरी छोर पर पहुंच जाती है किले क ऊपरी भाग पर खड़ा रतन सिंह

Ratan:Sultan तुम से यही उम्मीद थी क तुम रात में हे हमला कर सकते हो कायरो की तरह

देवराज निचे अपने घोड़े पे बैठा ललकारते हुए कहता है

Devraj:raja रतन सिंह हम कुबेरी पैर हमला नहीं करने आये है

ये सुन कर कुबेरी क सैनिक और पारसी सेना भी अचंभित हो जाती है

Ratan:To क्या यहाँ तीर्थ यात्रा पर आये हो देवराज और तुम्हारे सुल्तान की जबान नहीं है क्या

Devraj:Hum हमला करने नहीं ..हम कुबेरी जीतने आये hai..aakaraman

ये कहते हे पारसी सेना महल की ओरे भगति है

Ratan:Sainiko जाओ इन पर्सिओ क खून का अलग हे मज़ा है

सैनिक आगे बढ़ती कुबेरी क इस से पहले उनके ऊपर तीरो की बौछार हो जाती है

और कई सैनिक घायल हो कर गिरने लगते है

ratan:ye पीछे से अपने हे सैनिको को कौन मर रहा है

Sainik:Maharaj वो देखिए पश्चिम से एक और सेना आरही है

Ratan:ab ये कौन है

झिल्लते हुए कहता है

Sainik:maharaj इनके झाने से लगता है ये दिल्ली की सेना है

Ratan:harami शाहज़ेब को आज हे आना था

Ratan:Sainiko शाहज़ेब की सेना पैर गोले दैगो और उन्हें जला कर रख कर दो और मेरे साथ उत्तर की ओरे तुम सब चलो क्यू क शाहज़ेब अभी हम से दूर है

राजा रतन अपने घोड़े पैर बैठ अपने सैनिको क साथ जो अछि खासी सेना थी लगभग 20000 सेना लिए देवराज की ओरे बढ़ता है

Ratan:aakaram वीरो

Sultan:yalgar हो

दोनों तरफ की सेना मिलती है और सब एक दूसरे को मारने लगती है और एक भरी युधा शुरू हो जाता है उधर पश्चिम ओरे से आरहे शाहज़ेब क सैनिको को आग क गोलों से कुबेरी क सैनिक उन्हें महल क पास आने से रोक रहे रहे रहे जवाबी हमले में दिल्ली की सेना तीर की बौछार कुबेरी क सेना पर कर रही थी

राजा रतन सिंह की अंग्रेजी मूल की पत्नी एलिज़ा मौके का फायदा उठती है और अपने साथ महल क ख़ज़ाने में से जितना हो सकता है उठा कर घोड़े पैर रख भागने लगती है अंदर कक्षा में रुक्मणि सुखमनी आपस में रे विचार कर रहे होते है क्या किया जाये और बहार कुबेरी की सेना अपने राज्य और अपने राज्य क कीमृ ख़ज़ाने को बचने क लये युधा कर रही थी धीरे धीरे अँधेरा होता है पर पुरे चाँद की रौशनी में दोनों सेना रुकने का नाम नहीं ले रही थी

गहतराष्ट्रा में

उधर गहतराष्ट्रा में शाहज़ेब अपनी सेना को इकठा करता है

shahzeb:jitni औरते और खज़ाना उठा लिए ले चलो अब तक हमारी फौज कुबेरी पर हमला कर दी होगी अब हमने गहतराष्ट्रा को जीत कर राजा रतन का कमर तोड़ चुके है हमे कुबेरी जाना होगा

शमशेर बलदेव अपनी सेना क साथ चाँद की रौशनी में आक्रमण करने क लये आगे बढ़ रहे थे

Shamshera:Hum शाहज़ेब की फौज को कुबेरी नहीं जाने देंगे उन्हें यही रोके रखेंगे

Baldev:shamshera तुम शाहज़ेब का पीछा करो में शाहज़ेब दुवारा क़ैद किये महिलाओ को बचता हु

शाहज़ेब अपने रथ में महारानी षुरूश्ती को बांध कर रखवा देता है

Shurushti:mujhe कहा ले जा रहे हो

Shahzeb:Is हरामज़ादी का मुँह पर पट्टी लगाओ

Shurushti:dekho में कह रही हु मुझे मत ले जाओ तुम्हारे साथ ाचा नहीं hoga..mai तुम्हारे पाँव पड़ती हु

Shahzeb:Us राजा राजपाल का गाला काट दो और उसके सेनापति का भी

शाहज़ेब क सैनिक राजपाल और सोमनाथ जहा पर बंधे थे उनको मरने जाने लगता है तभी तीर की बौछार आती है जिस से कुछ समय क लये चाँद की रौशनी भी छुप जाती है और शाहज़ेब क कई सैनिक मरे जाते है

Shahzeb:ye कौन कम्बक्त है

Sainik:ji ये पारसी फौज है सुल्तान मेरे वाहिद की

शाहज़ेब देखता है और 25000 सेना देख कर

shahzeb:ye तो फौज की समुन्दर है

शाहज़ेब रथ छोर कर अपने घोड़े पर बैठ ता है

shahzeb:purana हिसाब भी चुकता करना है इस सुल्तान मेरे वाहिद से

shahzeb:hum नहीं जा रहे है पहले हम इनसे निपटेंगे

तभी एक सैनिक आता है भागते हुए

Shahzeb:kya हुआ

sainik:Badshah सलामत सुल्तान की फौज ने कुबेरी पैर भी हमला कर दिया है वह भी हमारी फौज खतरे में आ सकती है

Shahzeb:aaaaaah मतलब ये क सुल्तान जनता था हम इन दोनों राज्य पर हमला करने वाले है

Shahzeb:jaao और लड़ो हम नहीं डरते इन पर्सिओ से

बलदेव अपने माँ देवरानी क साथ घोड़े से शाहज़ेब क सैनिको को मरते हुए उस तरफ जाता है जहा पर गहतराष्ट्रा क महिलाओ को बंदी बना कर ले जा रहा था शाहज़ेब

Baldev:Maa तुम उन सब महिलाओ को आज़ाद करो में इन सब को देखता हु

बलदेव अपने दोनों हाथो में तलवार लिए घूमने लगता है

Baldev:jai गहतराष्ट्रा जय राजपुताना

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Devrani:jai राजपुताना

बलदेव क पास शाहज़ेब क सैनिक आते है और बलदेव अपने सैन्य कला से सबको गाजर मूली की तरह काट रहा था

Baldev:aaaaaah ये ले

"खछ"

से सैनिक का गाला काट जाता है

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उधर शमशेर शाहज़ेब की ओरे बढ़ता है

Shamshera:yalgaar हो जीत हमारी है

sainik:jeet हमारी है

शमशेर की सेना शाहज़ेब की सेना दोनों मिलते है और युधा शुरू हो जाता है

दोनों राज्य में युधा चल रहा था एक हे समय पैर गहतराष्ट्रा में जहा शाहज़ेब और शमशेर की सेना एक दूसरे से लड़ रही थी वही कुबेरी में रतन सिंह की सेना शाहज़ेब और सुल्तान और देवराज दोनों से युधा कर रही थी

कुबेरी

आधी रात हो रही थी और युधा अब भी चल रहा रहा सुल्तान मेरे वाहिद और देवराज सैनिको क मदद से युधा क मैदान से बहार आते है

Sultan:Devraj हम पर तीरो से भी हमला हो रहा है और फौज भी ज़मीन पैर लड़ रही है

Devraj:han हम छह कर भी आगे नहीं बढ़ प् रहे है और उधर शाहज़ेब की फौज को भी रतन सिंह संभल ले रहा है उसकी नीति अछि है

Sultan:iska क्या तोड़ है ऐसे तो हम रात दिन लाडे तो भी हम ..

Devraj:Sultan जी एक रास्ता है हमारे पास हम अपनी कुछ सैनिको को कैसे भी महल में प्रवेश करवाना होगा उनके तेरांडाज़ो को हटाने क लये वह से तभी हम आगे बढ़ सकते है

Sultan:par ये हम पर उल्टा भी पद सकता है

Devraj:hamare पास और कोई चारा नहीं एक बार हम महल में क दीवारों क अंदर गए तो हमारी सेना चुटकिओ में उनको ख़त्म कर देगी

देवराज कुछ सैनिको को पूर्व की ओरे भेज कर महल में जाने क लये कहता है और सैनिक आगे बढ़ कर पूर्व की दिशा जा कर फिर महल की ओरे आकर महल क ऊपर रस्सी फेक एक एक कर सब ऊपर चढ़ते है देखते हे देखते सब तीनरेन्डाज़ो तक पहुंच जाते है

Sainik:teerndazo अब महल पे बैठ क लड़ने का वक़्त नहीं

तीरंदाज़ी रुकते हे रतन सिंह बौखला जाता है

Sainik:maharaj सुल्तान की सेना हमारे महल में प्रवेश कर ली है

राजा रतन सिंह अपने तलवार लिए महल क दीवारों पे चढ़ने लगता है और सुल्तान क सैनिको को मार गिरता है

उधर तीरंदाज़ी बंद होते हे महल क दोनों ओरे से सैनिक महल में घुस जाते है एक तरफ से शाहज़ेब की दूसरे तरफ से सुल्तान की कुबेरी की सेना दोनों तरफ से आक्रमण देख घबरा जाती है और भगदड़ मच जाती है अब शाहज़ेब की सेना सुल्तान की सेना आपस में युधा में लग जाते है और कुबेरी की सेना अपनी जान बचाये यहाँ से वह भागते रहते है

Ratan:bhaago मत कायरो इनके एक लाख क बराबर तुम एक हो डरो मत इन हरमिओ से

राजा रतन देखता है सुल्तान एक सैनिक क साथ तलवारबाज़ी कर रहा था और दोनों लड़ रहे थे रतन अपना तीर कमान निकलता है और निशाना लगा कर सुल्तान मेरे वाहिद क पीठ पर मारता है

Sultan:aaaaah ...नामर्द पीठ पर वॉर करता है

सुल्तान का गिरना था क हड़कंप मच जाती है

पारसी sainik:Maharaj devraaaaaaaaaj....sultaaaaaaan को तीर लग गई

देवराज भाग कर आता है और सुल्तान मेरे वाहिद क सामने दो सैनिको को मार गिरता है और सुल्तान को उठा कर एक कोने में रखता है

पारसी sainik:Sultan को मर दया इन सबको को जहन्नम में पंहुचा दो

पारस ज़िंदाबाद ..पारस ज़िंदाबाद

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पारसी सैनिक अपने सुल्तान को तीर लगाने का सुनते हे आग बबूला हो जाते है और ज़ोरदार तलवार की कला दिखते हुए शाहज़ेब की सेना पर हमला कर रहे थे और शाहज़ेब की सेना धीरे धीरे काम होने लगती है

devraj:sultan आप ठीक तो है न

Sultan:Ye नामर्द रतन पीठ पर हे हमला कर सकता है तुम जाओ उसे छोरना नहीं

देवराज सैनिको क हवाले कर सुल्तान को राजा रतन क पीछे जाता है राजा रतन देवराज को अपने पीछे आता हुआ अपने महल में घुसता है

Ratan:rukmani सुखमनी एलिज़ा भागो हमे जाना होगा

देवराज अंदर आते हुए

Devraj:Hum तुम्हे पंहुचा देंगे जहा जाना है

रतन सिंह अपने तलवार को घुमा कर देवराज पर ज़ोर से अकरम करता है देवराज अपने कवच को आगे कर रतन क पेट पर एक लात मारता है और राजा रतन पीछे जा कर गिरता है

रतन वापस उठ कर आता है और तलवार से लड़ने लगता है देवराज से अंदर कक्षा में रुक्मणि सुखमनी कक्षा का दरवाज़ा बंद कर लेती है

Ratan:Mujhe जाने दो देवराज मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है

देवराज तलवार आगे बढ़ता है और तलवार की नोख इस बार रतन क सीने पे चुभ जाती है

Ratan:tu ऐसे नहीं मानेगा देवराज

रतन इस बार निचे झुक कर देवराज क पीछे जाता है और देवराज क पीठ पर तलवार का वॉर करता है देवराज अपने आप को बचता है पर तब तक तलवार क्षति पंहुचा चूका था

देवराज भड़क जाता है और लगातार अपने तलवार से रतन सिंह क तलवार पर वॉर करने लगता है जिस से रतन सिंह की तलवार उसके हाथ से छूट जाती है और रतन निचे गिर जाता है

Ratan:mujhe जाने दो इसके बदले में तुम खज़ाना ले लो

Devraj:ratan सिंह बात ख़ज़ाने की होती तो तुझे छोर देता पर बात बात सम्मान की प्रतिष्ठा की है

और एक लात मरता है रतन को

Ratan:tum क्या बाके जा रहे हो

Devraj:harami रतन सिंह तू मेरी जाती के कैसे पैदा हो गया जो एक स्त्री क साथ जबरदस्ती करे

रतन सिंह हसने लगता है

Devraj:pagal हो गया है क्या तू रतन singh..Tumne बहुत बड़ी गलती कर दी मेरी बहिन देवरानी पर गन्दी नज़र रख कर

रतन सिंह एक और लात मारता है और इस बार रतन सीधा जा कर दीवार पर टकराता है पर हसना बंद नहीं करता

Ratan:Tumhari बहिन devrani..hahahaha

Devraj:tumne उस से जबरदस्ती करने की कोशिश कैसे की

देवराज इस बार अपने तलवार को तेज़ी से चलता है और रतन सिंह का एक हाथ को काट देता है

ratan:aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah

Devraj:itni वैश्यों क साथ सो कर तेरा मन नहीं भरा जो अपने बेटी जैसी मेरी बहिन पर बुरा नज़र डालता है

Ratan:devraj तुम मुझे ये सब कह रहे हो हाहाहा जिसकी बहिन देवरनिहाहाः तुम्हे जब इतना क्रोध इस बात का है

"तुम्हारी बहिन देवरानी को तुम्हारा भांजा बलदेव पेलता है"

इस पर क्या कहोगे देवराज हाहाहा?

देवराज रतन सिंह क मुँह पर अपना पेअर रख देता है

रतन singh:hummm मेरा मुँह रोक डोज दुन्या का कैसे रोकोगे और ये मत कहना क तुम्हे पता नहीं है ये बात

देवराज अपना पेअर ज़ोर से रतन क मुँह पर मारता है

Ratan:maaro मुझे ..हाहाहाहा तुम्हे तो तुम्हारी भांजे और बहिन करतूत पाप नहीं लगता पुण्य लगता होगा हाहाहा

देवराज इस बार तलवार उठा ता है क्र खछ से रतन सिंह का दूसरा हाथ काट देता है

Devraj:tere हे कहने पैर पिता जी ने मेरे बहिन का विवाह करवा दया और तुम हे वो सांप थे जिसके वजह से हूयमर राज्य पर मांगूलों ने तबाही मचाई

Ratan:acha तो तुम्हे ये पता चल गया तो सुनो तुम्हारे पिता को मरवाने में मैंने हे मंगोलो की मदद क्या और मैंने हे राजपाल से जान बुझ कर तुम्हारी कमसिन बहिन का विवाह करवाया हहहहहा

देवराज निचे बैठ जाता है और रतन सिंह का गर्दन अपने हाथ में ले लेता है

Devraj:q किया तूने ऐसा व खेला हमारे जीवन से

देवराज ज़ोर से गले को दबाये जा रहा था और रतन सिंह छटपटा रहा था कुछ देर बाद सैनिक आता है

Sainik:Maharaj ये मर गया

देवराज को होश आता है और रतन सिंह को छोर

devraj:iska किर्याकर्म करवा दो

Sainik:Humne कुबेरी फ़तेह कर लय है पर सुल्तान की हालत बिगड़ती जा रही है

युधा में हज़ारो सैनिक मरे जाते है और शाहज़ेब की फौज और कुबेरी की फौज तीतत बितर हो कर भाग जाते है

सुल्तान क सैनिक कुबेरी क महल पर अपना पारसी झंडा लगा देते है

सुल्तान को लिटाये सैनिक उनके तीर को निकल रहे थे जो हकीम की मदद कर रहे थे

देवराज जाता है देखता है सुल्तान आँख बंद किये लेते थे

Devraj:Vaidh जी इनका उपचार कीजिये

Hakeem:Beta हमारा काम यही है पर जो तीर लगी है वो काफी ज़हरीली ज़हर लगी थी

सुल्तान आँख बंद कए अपना हाथ उठाते है जिसे समझ कर देवराज उनके पास जा कर

Devraj:Ji सुल्तान

Sultan:Mera ख्वाब पूरा हुआ ..मुझे कुबेरी का खज़ाना दिखा दो एक बार

Devraj:aap हिम्मत रखिये सुल्तान आप को कुछ नहीं होगा...

इधर गहतराष्ट्रा में बलदेव और देवरानी बंदीओ को छुड़ाने में कामयाब होते है और शाहज़ेब की सेना से लड़ रहे थे ..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 88

कुबेरी

आधी रात बीत गयी थी सुल्तान की सेना ने आसानी से रतन सिंह की सेना को हरा कर कुबेरी में अपना झंडा गाड़ दया था वही शाहज़ेब की सेना बिना शाहज़ेब क हौसला पास्ट हो गयी जब पर्सिओ ने उन पर आअक्रमण क्या और भागने lage,pure कुबेरी में भगदड़ का माहौल है और सब सुल्तान को हमला और खुनी दरिंदा कह रहे the,kuberi वासी जानते थे क सुल्तान ने ख़ज़ाने की लोभ में आकर हमला क्या है पर हज़ारो सैनिको को आज अपना जान गवाना पड़ा था पुरे कुबेरी में लाशे बिछी थी कुबेरी क सीमा से ले कर महल क अंदर तक एक तरफ महल में राजा रतन सिंह भी लेता था जिसे देवराज ने बड़े बेरहमी से मारा था रतन की पत्नी एलिज़ा भाग जाती है पर दोनों बहने रुक्मणि और सुखमनी नहीं भाग पति और अपने कक्षा में बंद थी

हकीम जो क पारस से हे सेना क साथ आई थी वो सुल्तान का इलाज कर रहा था

Devraj:himmat मत हरिये सुल्तान आप जहाँ पनाह है आप को ये तीर नहीं मार सकती

सुल्तान दर्द में धीरे धीरे कहते है

Sultan:nahi देवराज मुझे लगता है खुदा का बुलावा है

Devraj:Hakeem जी इनका उपचार कीजिये

Hakeem:janab हम सब कोशिशे कर रहे है पर ये ज़हर का तोड़ अभी हमारे पास नहीं है

Devraj:aapko जो चाहिए वो बोलो

Hakeem:kuch जड़ी बूटी की ज़रूरत hai..shayad उस से काम बन जाये

Devraj:sainiko आकाश पटल एक कर दो पर सुल्तान को कुछ होना नहीं चाइये

Sainik:maharaj ठीक hai..par पुरे कुबेरी में भगदड़ मच गयी है सब भाग रहे है कुबेरी छोर क

Devraj:wo डर रहे है यहाँ क राज परिवार और यहाँ की प्रजा क लये ढिंढोरा पिटवा क कह दो हम उनके साथ कुछ दुव्ययहार नहीं क्या जायेगा हमारी शत्रुता रतन सिंह से थी प्रजा से नहीं

देवराज सुल्तान जिस कक्षा में लेते उपचार करा रहा था वह से बहार आता है देखता है बंद कक्षा से रुक्मणि सुखमनी दरवाज़ा खोल बहार निकल कर भागने की कोशिश कर रही थी

Devraj:suniye

दोनों पलट कर देखती है

Rukmani:mere करीब भी मत आना नहीं तो..

Devraj:aap लोग डरे नहीं हम उनमे से नहीं आप सुरक्षित है

sukhmani:hamare राज्य को लूट कर हूयमर लोगो को मार कर तुम पे कैसे विश्वास कर लू क तुम..

Devraj:Mera धर्म ये नहीं सीखता है क किसी की बेटी बहु या पत्नी को गन्दी नज़र से देखो में आप दोनों की ज़िम्मेदारी लेता हु जब तक आप महल में है और वैसे भी आधी रात में आप दोनों कहा जाओगी

Sukhmani:dekhti हु कितने खड़े उतारते है

Devraj:ye राजपूत का वचन है आप दोनों को किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो आप मुझे कहे

तभी देवराज क पीछे दीवार क एक कोने में रुक्मणि को एक लाश दिखती है

rukmani:wo देखो

sukhmani:aaaah महाराज

रुक्मणि सुखमनी एक दूसरे को पकड़ लेती है और रोने लगती है

देवराज पीछे मुद कर देखता है और वो समझ जाता है

Devraj:sainiko लाशो को ले जा क कर्यक्रम कार्डो

Devraj:aap दोनों अंदर जाइये बहार का दृश्य इस से भी ज़्यादा बुरा है

रुक्मणि सुखमनी दोनों हाथ कटे हुए मारा हुआ रतन को देख हिल जाती है और दोनों अंदर जा कर रट हुए अपना दरवाज़ा बंद कर लेती है

कुछ देर में सैनिक जड़ी बूटी लेट है और सुल्तान का उपचार शुरू होता है

Devraj:Or कुछ चाहिए हकीम जी

Hakeem:Devraj जी अब सुल्तान खतरे से बहार है पर इन्हे कुछ दिनों तक निगरानी में रखा जायेगा

Devraj:sainiko कुबेरी की सीमा पर तैनाती बढ़ाओ और महल को चारो ओरे से घेर लो हम एक दो दिन रुक कर जायेगे जैसे हे सुल्तान ठीक होते है

गहतराष्ट्रा

बलदेव और शमशेर मिल कर शाहज़ेब की सेना का दन्त कर मुक़ाबला कर रहे थे और देवरानी राठो में बंधी महिलाओ का रस्सी खोल कर उन्हें आज़ाद कर रही थी

Baldev:Maa सब महिलाये बच गयी न

तभी सामने से तेज़ तीर बलदेव की ओरे आता है बलदेव अपने कवच से उस तीर को रोकता है और अपना घोडा उस तरफ ले जाता है और अपने तलवार को कस क घूमता है और तीरंदाज़ का सर निचे गिर जाता है

Devrani:bass बीटा एक रथ और बाकी है इन्होने तो हज़ारो महलीलाओ को बंदी बना कर ले जाने की तैयारी थी

तभी देवरानी क सामने दो सैनिक आजाते है

Devrani:aajao तुम्हे भी मज़ा चखौ

देवरानी दोनों से बरी बरी तलवार से लड़ रही थी कभी देवरानी उनपर भरी पड़ती तो कभी वो दोनों देवरानी को अपने तलवार से पीछे कर देते

"आर्य्य तुम औरतो क यह काम नहीं आगयी जुंग लड़ने"

"तुम्हे शर्म नहीं आती एक स्त्री से दोनों मिल कर लड़ रहे हो और हमे पथ पढ़ा रहे हो "

देवरानी इस बार तलवार अपने बाए से ऊपर ले कर तलवार ज़ोर से ऊपर कूदते हुए एक सैनिक क तलवार पर मरती है और उसके तलवार को आधा काट देती है

देवरानी कहती है

"देख लय तुम्हारे तलवार में वो दम्म नहीं जो राजपुताना तलवार में है नामर्द"

"भाई ये तो इतनी भरी भकाम है फिर भी उड़ रही है कूद रही है"

ये कहते हे वो सैनिक चील्लया

"aaaaaaaaaah"

और गिर जाता है देवरानी झट से दूसरे सैनिक क गर्दन पर तलवार रख कर खच से घुमा देती है और ऊपर देखती है तो बलदेव ने उस सैनिक को अपने तीर से गिरा दया था

Devrani:dhanywada मेरा राजा

बलदेव आँख मरता है

Baldev:rani जल्दी करो और घोड़े पे आजाओ तुम्हारा निचे रहना खतरे से खली नहीं

देवरानी झट से आखिरी रथ जो शाहज़ेब की थी उसमे जाती है और देखती है एक महिला रोये जा रही थी

देवरानी जा कर उसके कंधे पर हाथ रखती है

वो जैसे पलट टी है देवरानी क होश उड़ जाते है

Devrani:tum

Devrani:man me)Me इसे नहीं बचाऊंगी जिसने मेरा जीवन नरक बना दया मेरा पति मुझसे छीन कर

देवरानी रथ से उतर कर जाने लगती है वीएस हे षुरूश्ती ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है और उसके ासु थम नहीं रहे थे

षुरूश्ती क मुँह बंधा था और रस्सी से हाथ पेअर को भी शाहज़ेब ने बंधा था

देवरानी मुद कर देखती है षुरूश्ती को

Devrani:man me)Me भी कभी ऐसे हे बेबस थी षुरूश्ती जब तूने मेरे जीवन की हर ख़ुशी छीन ली और आज भी मेरे इस ईर्ष्या और मेरा अपमान करती रही मेरे और बेटे क जान क पीछे पड़ी जब में अपने बेबसी से बहार निकलने लगी तो

षुरूश्ती कड़ी देवरानी को देख अपने पलकों से इशारा कर क कहती है क खोल दे उसे और रोने लगती है

Devrani:man me)khol देती हु मरने वाले से बड़ा बचने वाला होता है इसका बदले में भगवन मुझे पुण्य देगा अगर में भी इसके तरह की तो इसमें और मुझमे कोई अंतर नहीं होगा

देवरानी आगे बढ़ कर षुरूश्ती क रस्सी को खोलती है फिर उसके मुँह पर बंधे कपडे को खोलती है षुरूश्ती शाहज़ेब दुवारा जानवरो की तरह मसले जाने और घंटो से बंधे रहने से एक डैम ढीली हो गयी थी

Shurushti:Devrani मेरी बहिन धन्यवाद

देवरानी षुरूश्ती को देखती है और रथ से उतर कर अपना घोड़े पे बैठ बलदेव की ओरे ाआजाति है

शाहज़ेब अपने फौज़ीओ की अलग अलग टुकड़िओ को भेजता और शमशेर बड़े हे आक्रामकता दिखते हुए उनके हर डाव पर भरी पद जाते

Shahzeb:fauzio अब हमारे फौज बहुत काम लग रही है हमे यहाँ से बहार निकालो

sainik:aapka रथ तैयार है बादशाह सलामत आपकी छमिया रानी षुरूश्ती क साथ

Shahzeb:theek है उस रानी को साथ ले कर जाना है हमारे रथ क पास चलो कुछ सैनिक

शमशेर देखता है शाहज़ेब भागने की कोशिश कर रहा है

Shamshera:Dosto शाहज़ेब भाग ने न पाए ..फ़तेह हमारी है

सैनिक शाहज़ेब क तरफ हल्ला बोल देते है और शाहज़ेब क तरफ से उनके सैनिक आने लगते है

शमशेर अपने हाथ में तलवार लये चलते हुए लाशो की अम्बर लगा देता है

Shamshera:aaaaaaa ये ले शमशेर की शमशीर से मुक़ाबला करना बचो का काम नहीं

खाच कर क गर्दन उदा देता है खून क चहेतो से शमशेर का बदन भर जाता है

शाहज़ेब अपने रथ क पास भाग रहा था उधर से उसे बलदेव और देवरानी आते दिखाई देते है

shahzeb:ye सब एक साथ कैसे

बलदेव और देवरानी भी शाहज़ेब क सैनिको को मरते हुए शाहज़ेब क पास आरहे थे

shahzeb:Fauzio जितने भी रथ है सब में आग लगा दो अगर हम इन औरतो को नहीं ले जा रहे तो इनका जीने का हक़ नहीं

शाहज़ेब अपने घोडा दूसरी ओरे मोड़ते हुए

Sainik:Badshah सलामत हम अपने रथ से नहीं जा रहे है

shahzeb:jo क्या है करो और मेरे पीछे इन्हे मत आने दो चलो सैनिको

शाहज़ेब कुछ सैनिको क साथ भागने लगता है इधर शाहज़ेब की सेना हर रथ में आग लगा देती है और उन रथ पर आग क गोले की बारिश कर देती है

Shamshera:Shahzeb का पीछा करो बलदेव

बलदेव और शमशेर दोनों अपना घोडा शाहज़ेब क पीछे मोड़ते है उतने में जलते हुए रथ को शाहज़ेब की सेना बीच में ले आती जय और बलदेव और शमशेर को मजबूरन अपना घोडा रोकना पड़ता है तभी देवरानी पीछे से आती है

Devrani:chhoro उस भगोड़े को जाने दो

Baldev:Ghatrashtra वासिओ हम जीत गए हमने भगा दया शाहज़ेब को

बलदेव और शमशेर अपने घोड़ो से उतारते है और बचे खुचे शाहज़ेब की सैनिको को मारने लगते है

Shahzeb:aa तुझे जन्नत भेज दू

क्र खच कर क गर्दन काट देता है

कुछ देर में हे अब सिर्फ पारसी सेना और गहतराष्ट्रा की सेना जो थोड़े बहुत थे वो मौजूद थी दिल्ली की अधिकतर सेना मर गयी थी और कुछ भाग गए थे शाहज़ेब क साथ वापस दिल्ली

देवरानी भी घोड़े से उतरती है

Baldev:Dhanywad शमशेर आज मेरे नज़र में तुम्हारा सम्मान और बढ़ गया तुम एक अचे जासूस क साथ एक अचे योद्धा भी हो

Shamshera:or तुम ब्बि काम नहीं हो मेरे दोस्त तुम्हारी उम्र में तो मई जुंग क्या होता है ये जनता नहीं था तुमने तो 18 साल की उम्र में हे जीत हासिल कर ली

devrani:Dhanyawad बीटा अगर तुम न होते तो शायद हे हम दोनों जीवित होते और युधा भी तुम्हारे वजह से हे जीत सके

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shamshera:ab ये तो मेरा फ़र्ज़ था देवरानी खला और खला तो माँ क दर्ज़े की हॉट है उसके लये कुछ भी करना जाएज़ है और वैसे भी मेरा भाई बलदेव का साथ में नहीं दूंगा तो कौन देगा

Baldev:Bade भाई अनजाने में तुम्हे बुरा समझ बैठा था मुझे क्या पता था इतना निर्दयी दिखने वाला जासूस शमशेर का हृदय इतना नरम हो सकता है इतना प्रेम हो सकता है

Shamshera:Ab चुप करो बलदेव ये सब कह कर अहसानन जाता रहे हो या उतर रहे हो

Devrani:shaitan तुम नहीं सुधरोगे

तभी सामने से घोड़े पे चौधरी क साथ कुछ सैनिक और महारानी जीविका आती है

महारानी जीविका का हाथ पकड़ कर सैनिक उतारते है

देवरानी देख कर

"बलदेव आजाओ तुम्हारे दादी क पास"

Baldev:aap वही रुके हम आते है

तीनो जीविका क पास जाते है

Jeevika:badhai हो बलदेव देवरानी तुमने कर दिखाया हमारा गहतराष्ट्रा राक्षसों से छुरा लिया

बलदेव और देवरानी झुक कर महारानी जीविका क पेअर छूटे है

Baldev:sab आपके वजह से हुआ दादी अब में चाहता हु आप भी अपना वचन निभाए

Chaudhari2:Humne हर गाओ गाओ में पंचायत रख कर लोगो को समझा दया है

Chaudhari1:han बीटा और गहतराष्ट्रा का हर व्यक्ति अब तुम दोनों को बुरा नहीं कह सकता

Baldev:kya सच में चौधरी साहब

देवरानी अब फिर से अपने पल्लू को निचे कर अपना मुँह ढके कड़ी थी

Chuadhari2:han बीटा अब तुमने काम क्या अब हमारी वचन निभाने की बारी है

chaudhari1:Tumne हमारी माँ बहनो की इज़्ज़त बचा कर हम पर उपकार क्या है

Baldev:chaudhari साहब क्या वो मेरे माँ बहिन नहीं थी और वैसे सबको बचने का श्रेया देवरानी जी को जाना चाहिए

देवरानी ये सुन कर शर्मा जाती है और अपने आप पर गर्व करती है

chaudhari2:Aise बहु हमे कहा मिलेगी जो राण भूमि में शत्रुओ का मुक़ाबला भी करे ओर फिर राष्ट्र की संस्कृति पर चल कर सब क आदर सत्कार करे घूँघट करे

chaudhari1:hume महारानी देवरानी जैसी बहु नहीं मिलती कही और बलदेव क लये क्यू छुधारी जी

Chaudhari:Han और तो और बलदेव और बहु की जोड़ी भी जचती है

देवरानी ये सुन कर गड गड हो जाती है और झुक कर दोनों चौधरी क पेअर छूती है

Chaudhri2:beti क्या कर रही हो आप महारानी हो

Devrani:aap लोग हमारे पिता सामान पहले है बाद में यहाँ की रानी या महारानी हु

chuadhri1:kya सुन्दर विचार है

Baldev:Chaudhari साहब कुछ घंटो में हे सुबह हो जाएगी में चाहता हु आज सुबह हे में तख़्त पर बैठ जाऊ

Chaudhari2:jaao आराम करो सुबह होते हे सभा लगायी जाएगी तुम्हहि सपथ लेना होगा नए महाराजा क रूप में

Jeevika:mera बीटा राजपाल कहा है

Baldev:maine सैनिको को भेज दया है वो जाकर उनको फांसी घर से ले आएंगे

तीनो महल में आते है और बलदेव अपने कक्षा में शमशेर को ले कर जाता है और देवरानी अपने कक्षा में जा कर स्नान कर क लेट टी है क उसे नींद आजाती है

शमशेर और बलदेव भी अपने वस्त्र बदल स्नान करते है और सो जाते है

सुबह का लगभग 4 बज रहा था और चाँद की अछि खासी रौशनी ज़मीन पर थी जिस से क रात रात जैसा नहीं दिन जैसा था .महल क चारो ओरे सैनिको ने अपना काम शुरू कर दया और मरे हुए सैनिको को आग लगाने लगे

जीविका क पास षुरूश्ती आती है तभी एक सैनिक राजपाल और सेनापति सोमनाथ को छुरा कर ले अत है

Sainik:maharani जीविका

जीविका अपने गले से एक सोने का हार निकल कर उस सैनिक को इनाम देती है और वो सैनिक जो राजपाल को बचा कर लता है धन्यवाद् कह कर चला जाता है

Jeevika:mera बचा राजपाल

राजपाल अपने माँ क गले लग जाता है और षुरूश्ती भी रोने लगती है

थोड़े देर मेल मिलाप चलता है

Somnath:lekin अचानक से शाहज़ेब को कौन मार भगाया

Jeevika:Baldev

ये सुन कर सब आश्चर्यचकित थे

Shurushti:Maa जी ठीक कह रही है

सब चौक जाते है

Jeevika:jao तुम सब आराम करो इस पर हम सुबह सभा में बात करेंगे

सोमनाथ सोचते हुए सेना गृह की ओरे जाता है और जीविका क साथ राजपाल और षुरूश्ती महल क अंदर आकर अपने अपने कक्षों में घुस जाते है और गहरी नींद में डूब जाते है

गहतराष्ट्रा में एक नयी सुबह होती है

गहतराष्ट में चारो ओरे ढिंढोरा पीटा जाता है क शाहज़ेब वापस दिल्ली भाग गया और गहतराष्ट्रा अब सुरक्षित है और सब को आज सभा में आमंत्रित क्या जाता है

सुबह 9 बजे क करीब देवरानी उठ टी है और जैसे हे उसको आने वाले पल का सोचती है उसका डिल दहल जाता है

devrani:man me)Hey भगवन में और बलदेव अब विवाह करेंगे और गहतराष्ट्रा क महाराजा और महारानी बनेंगे

Devrani:man me)Kya कहेंगे सब ..हहहए कहने दो पर बलदेव की पत्नी बन जाउंगी फिर वो बचे की भी मांग करेगा

ये सोच कर देवरानी उल्टा लेट जाती है और अपना सर तकिये में छुपा कर मुस्कुरा रही थी देवरानी का अंग अंग लज्जित हो गया था ये सोच पर

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देवरानी मन में: कमला कहती थी मुझे अचे से रगड़ क कोई पेल कर नस नस ढीली कर सकता है तो वो बलदेव है क्या सच में वो ऐसा करेगा

उधर शमशेर उठ ता है देखता है बलदेव अब भी सो रहा

Shamshera:Baldev भाई utho..ary महाराजा साहब उठो आज तो तुम तो शादी का भी फैसला सुनाने वाले हो

बलदेव की नींद टूट टी है

Baldev:mera बदन दुःख रहा है मुझे और सोना है

shamshera:bhai बहार सभा लग गई होगी चलो

दोनों तैयार हो कर सभा में पहुंचते है जहा पर जीविका क साथ सोमनाथ और षुरूश्ती सब बैठे थे

शमशेर और बलदेव जा कर बैठ थे है हज़ारो की संख्या में प्रजा मौजूद थी तभी देवरानी भी पहुँचती है

एक सैनिक खड़ा हो कर बलदेव और देवरानी का जय जयकार करता है और सब फूलो से स्वागत करते है

Jeevika:baitho देवरानी

Jeevika:Ghatrashtra वासिओ जैसा क आपलोगो को पता है हमारे राष्ट्र में कुछ ठीक नहीं चल रहा था फिर शाहज़ेब ने आक्रमण क्या और बलदेव ने हमारा राज्य जो हमसे छीन गया था वो वापस ले लय

पूरी प्रजा बलदेव की जय जय कर करने लगती है

Mantri:Badhai हो पहली युधा जीता अपने

राजपाल अपना सर झुकाये बैठा था बलदेव और देवरानी राजपाल को देख कर मुस्कुरा देते है

jeevika:Ghatrashtra वासिओ जैसा क आप सब को पता है मैंने वचन दिया था बलदेव को आप सब की जान और आप सब की बहु बेटी सम्मान क खातिर चौधरी जी ने आपलोगो को बता दया होगा

chaudhri2:maharani अब हमने हर गाओ गाओ पंचायत कर क बता दया

jeevika:waise हमारे परम्पराओ क अनुसार महाराजा क मृत्यु क पहले कोई दूसरा महाराज नहीं बन सकता पर में अपना वचन निभाते हुए आज से अभी से बलदेव को गहतराष्ट्रा का महाराजा चुनती हु

पूरा सभा ताली की गड़गड़ाहट से गूंज उठ ता है

Jeevika:Maharaja बलदेव का ताज लाया जाये

राजपाल ये सुन कर अपने आखे बंद कर देता है उसे हर एक बात सुई की तरह चुभ रही थी और वो मजबूरन अपनी गद्दी से उठ कर खड़ा हो जाता है

तभी एक दासी ताज ले कर अति है

Jeevika:aao बलदेव

बलदेव जा कर जीविका क पास घुटनो क बल बैठ जाता है

जीविका अपने हाथो से मुकुट को बलदेव क सर पर रख देती है

Somnath:Maharaja बलदेव की

Chaudhri2:maharaja बलदेव सिंह की

पूरी प्रजा जय जय करने लगती है और बलदेव जा कर महाराजा की राजगद्दी पर बैठ ता है ये सब अपने ायखो में नमी लिए देवरानी देख रही थी

Devrani:man me)Kitna सुन्दर लग रहा है ये ताज में मेरा बलदेव

दूर कड़ी राधा और कमला भी सब देख रही थी और कमला क आखो में भी ासु आजाते है

Mantri:Maharaj बलदेव अब आप शपथ ले लीजिये

Baldev:zarur मंत्री जी

Baldev:Mai बलदेव सिंह यानि क गहतराष्ट्रा का महाराज ये शपथ लेता हु क में अपने पूरा जीवन गहतराष्ट्रा की सेवा में बिताऊंगा और अपने धर्म अपने राष्ट्र क लये जब कभी प्राण भी त्यागना पड़े तो पीछे नहीं हटूंगा में बलदेव सिंह संकल्प लेता हु गहतराष्ट्रा क हर नागरिक क दुःख में और सुख में साथ खड़े रहूँगा और अपने नागरीको क सम्मान और उनके अचे भविष्य क लये हर पर्यटन karunga.me महाराजा बलदेव मेरी हर बात पठार की लकीर

शपथ लेते हे सब चारो और से फूल बरसाने लगते है और पूरा गहतराष्ट्रा ख़ुशी मानाने लगती है

महाराजा Baldev:Ghatrashtra वासिओ इस सभा का जो मेरा पहला सभा है उसमे मुझे एक महत्तव पूर्ण निर्णय लेना है

ये कह कर बलदेव जीविका की ओरे देखता है जीविका उसे हाँ का इशारा करती है

baldev:aap सबको पता है मेरी दो मांगे थी एक तो पूरी हो गयी दूसरी मांग थी मेरी देवरानी जिस से में विवाह करना चाहता हु आप सब को अजीब लग रहा होगा पर कुछ दिन हे लगेगा फिर आप सब अपने कामो में लग जाओगे और भूल जाओगे

Chaudhari2:Han हमे याद है आप को विवाह करना है

Baldev:Is से पहले में ये कहु क हम और देवरानी कब विवाह करेंगे उस से पहले में किसी को उसके किये की सजा देना चाहता हु

सब सोच में पद जाते है

Baldev:Devrani कहो तुम्हारे साथ क्या हुआ

देवरानी अपना पल्लू को थोड़ा उठा टी है और कहना शुरू करती है

Devrani:maharaj बलदेव मेरे साथ राजा रतन सिंह जबरदस्ती करने की कोशिश की थी जिसका श्रेया राजपाल को जाता है

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पूरा गहतराष्ट्रा में हाहाकार मच जाता है

बलदेव राजपाल की ओरे देख कर

Baldev:kya ये सही है ?

Rajpal:han सही है

अपना सर झुका कर अपना जुर्म मन लेता है

Jeevika:ye क्या बलदेव तुम विवाह करो करना है तो ये क्या

Baldev:Dadi महाराजा बन ने क बाद ये मेरा ऐतिहासिक फैसला होगा

Baldev:to गहतराष्ट्रा वासिओ स्त्री क साथ ऐसा करने वाले को क्या सजा होती है?

"मौत मौत मौत फांसी फांसी "

सब प्रजा एक साथ बोलती है

Baldev:Maine प्रेम क्या तो मुझे इतने सजा मिली और जो एक स्त्री को किसी और क साथ मिल कर जबरदस्ती करने की कोशिश की उसे तो सजा मिलनी हे चाहिए

"हाँ मिलनी चाहिए चाहिए मिलनी चाहिए"

पूरी प्रजा एक साथ बोलते है

जितने मंत्री थे और चौधरी सब हैरान थे

Baldev:ghabraye नहीं मई फांसी नहीं दूंगा मई तो तड़पा तड़पा क मरूंगा सोमनाथ इस अपराधी को बंदी बना लो हम इसे आजीवन कारावास की सजा सुनते है

ये सुनते हे सोमनाथ इशारा करता है और सैनिक राजपाल को हिरासत में ले लेता है

Baldev:ruko सोमनाथ इस तुच्छ व्यक्ति को करगहर में डालने से पहले में एक और बात गहतराष्ट्रा की प्रजा को बता दू और ये भी कान खोल कर सुन ले

Baldev:Ghatrashtra वासिओ हम आज सूर्याष्ट से पहले हे माँ रानी देवरानी से विवाह करेंगे और आप सब को गहतराष्ट्रा वापस मिलने का हमारे विवाह का ऊपर एक साथ मिलेगा ..आप लोग जाइये आराम कीजिये संध्या में

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देवरानी गड गड हो कर

देवरानी मन me:Bhagwan धन्यवाद मेरे मन की मुराद सुन ली

ये सुनते हे राजपाल का खून खौलता है

Rajpal:maa ये क्या है मेरे गद्दी लेने तक ठीक है मुझे सजा दी जाये वो भी मंज़ूर है पर माँ बेटे का विवाह

जीविका कड़ी होती है और राजपाल क पास आकर

Jeevika:mai नहीं चाहती थी बीटा पर गहतराष्ट्रा क हज़ारो बहु बेटिओ की इज़्ज़त बचाना मेरी प्राथिमिकता थी

Rajpal:maa हमारे मान मर्यादा का तो ख्याल किया होता

Jeevika:jab जान हे नहीं होती हम सब की और तुम्हारी मेरे लाल तो मान सम्मान प्रतिष्ठा का क्या करते ?

सोमनाथ राजपाल क हाथ बांध कर ले जाता है

षुरूश्ती उठ कर देवरानी क पास आती है

Shurushti:Mujhe क्षमा कर सो बहिन अगर तुम्हे कोई भी सजा देनी है तो मंज़ूर है

ये कह कर षुरूश्ती देवरानी क पेअर पड़ने लगती है

देवरानी उठ कर षुरूश्ती को पकड़ लेती है

Devrani:ye आप क्या कर रही है

shurushti:aap को मैंने बहुत कष्ट दिया

और रोने लगती है

Devrani:bass हमने आपको क्षमा क्या

षुरूश्ती देवरानी का हाथ पकड़ कर बलदेव क बगल में राखी महारानी की कुर्सी पर बैठने कहती है

देवरानी देखती है पूरा गहतराष्ट्रा उल्लास मन रहा है

Baldev:baith जाओ महारानी

Shurushti:tumhare जैसे डिल वाली हे इस गद्दी पर बैठने का हक़दारहै वैसे आज शाम में विवाह क बाद तुम महारानी बन हे जाओगी

shurushti:Maharani देवरानी की

ज़ोर से बोलती है

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बलदेव अपने सर से मुकुट उतार कर देवरानी क सर पर रखता है

Baldev:Vivah होते हे महारानी का मुकुट आपके सर पर होगा

देवरानी ये सुन कर गड गड हो जाती है और ख़ुशी क मरे वो है देती है और उसका चेहरा लाल पद जाता है जिसे बलदेव गौर से देखता है

और देवरानी ये देख अपने सुंदरता पर इतराती है

Baldev:Maharani देवरानी की

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जिसका उत्तर में पुरे मंत्री छुआधरि और गहतराष्ट्रा की प्रजा जय जय करने लगती है

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दूर कड़ी कमला अपने हाथ से ासु पोछती है

Kamla:man me)Kameeni आखिर अपने मन की मुराद पूरी कर हे ली महारानी बन गयी और मुश्तंडे पति से विवाह कर मुश्टण्डा लौड़ा भी लेगी

ये सोच कर कमला है देती है

Kamla:man me)Ye बलदेव भी तो इतनी सी उम्र में इतने बड़े काम कर डाई माँ को पता भी लिया विवाह भी कर रहा है युधा भी जीत लिया

पास खड़े वैध जी देखते है

Vaidh:Ary तुम क्यू रो रही हो कमला

Kamla:hatt बूढ़े ये तो ख़ुशी क ासु है

सभा ख़त्म होती है बलदेव देवरानी का हाथ अपने हाथ में लिए महल में आता है जीविका अपने किये पर ग्लानि महसूस कर रही थी और अपने कक्षा में चली जाती है

बलदेव देवरानी को महल में ले आता है

कमला उन्दोनो को देख आगे आकर दोनों की बलए लेनी लगती है

Devrani:kya कर रही हो कमला

Kamla:jug जग जियो

Baldev:kaha थी तुम कमला

Kamla:wo मुझे राधा को सेनापति और राजपाल क साथ बंधा था खैर छोरो

Baldev:kshama कर दो हम युधा से थक गए थे तुम्हे मिल नहीं पाए

तभी षुरूश्ती आजाती है और शमशेर भी

Shamshera:bhai सब सब कुछ कह रहे है मुझे तो कोई भाव हे नहीं दे रहा

Shurushti:Hum गहतराष्ट्रा वासी जासुओ को भाव नहीं देता

Shamshera:lagta है इस जासूस ने किसी की बहुत बेशकीमती चीज़ की जासूसी कर ली

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ये सुन कर षुरूश्ती समझ जाती है शमशेर क्या कहना छह रही थी

Shurushti:man me)Isne तो मुझे पूरी नग्न अवस्था में देख लये था ये वही बात कर रहा है

और ये सोच शर्मा जाती है

Shamshera:shayad आप हमे भूल गयी रानी षुरूश्ती

Shurushti:choro की तरह महल में घुसने वाले को हम नहीं भूलते

ये सुन कर बलदेव और देवरानी भी हस्स पड़ते है

Kamla:Jab चोर घुस गया था तो चोरी तो हो हे गया होगा

Shamshera:Nahi नहीं चोर को बेशकीमती चीज़े बिना मालिक को इल्तिलाह किये नहीं चुराता ये चोर की खासियत है

ये सुन कर षुरूश्ती शमशेर को देख

Shurushti:acha जी इतना शरीफ चोर

और मुस्कुराती है

Baldev:bhai अब में सोने चला तुम सब तैयारी करो

Kamla:han सो जाओ आज क बाद कहा सोने देगी महारानी देवरानी

और सब है पड़ते है

Baldev:Shamshera सेनापति से कह कर पंडित का और पुरे गहतराष्ट्रा क भोजन प्रबंध करवाओ और कमला तुम मेरी दुल्हन सजा दो और मुझे शाम 4 बजे से पहले मत उठाना 5 बजे हम फेरे ले लेंगे

Kamla:theek है महाराज आपकी महारानी एक डैम दूध की धूलि मिलेगी

Shamshera:Fiqar न करो छोटे भाई हम कोई कमी नहीं छोड़ेंगे

फिर बलदेव जाने लगता है

थोड़ी दूर जा कर

खड़ा हो जाता है

और देवरानी को इशारे से बुलाता है पर देवरानी षुरूश्ती से बात कर रही थी

Devrani:kya पह्नु शुरुश्री दीदी आज

कमला देखती है बलदेव खड़ा था

कमला अपना कोहनी हल्का सा देवरानी क हाथ पर मरती है देवरानी पलट टी है तो उसे बलदेव खड़ा इशारे कर रहा था

Devrani:abhi आई दीदी

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देवरानी बलदेव क पीछे आती है

बलदेव देवरानी क कक्षा में जाता है और देवरानी जैसे आती है उसका हाथ पकड़ कर खींच लेता है

"ाः बलदेव क्या है"

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"देवरानी इधर आओ न "

बलदेव देवरानी को होठो को पकड़ कर चूस लेता है

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"दूल्हे राजा आज शाम में हे विवाह है"

"मुझ से रहा नहीं जाता मेरी रानी"

Baldev:ab नींद आएगी मुझे

Devrani:theek है जाओ सो जाओ

Baldev:tum भी सो लो में सोने नहीं दूंगा रात भर

देवरानी शर्मा कर सर निचे कर लेती है

"ठीक है बलदेव "

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देवरानी बहार आती है और बलदेव सीडीओ से चढ़ कर अपने कक्षा में जाता है सोने

Shurushti:kya हुआ क्यू बुलाया था बलदेव

Kamla:q बुलाएगा एक पल चैन नहीं है दोनों को

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सब है देते है और देवरानी घूरती है कमला को

कमला और षुरूश्ती देवरानी को तैयार करने ले जाती है और शमशेर बहार की तैयारी में जुट जाता है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 89

सुबह 9 बजे

गहतराष्ट्रा

बलदेव अपने कक्षा में जा कर सो जाता है क्यू क रात भर युधा कर क वो थक गया था शमशेर अपने मित्र बलदेव क लये पंडित और अन्य कामो का ब्योरा निकल कर उनको निपटता है

देवरानी को ले कर कमला और षुरूश्ती उसके कक्षा में जाती है

Kamla:Chalo पहले मेहँदी लगाई दू महारानी

Shurushti:Nahi कमला पहले हल्दी लगते है

Devrani:baba ऐसा करो हाथो और पैरो पैर षुरूश्ती दीदी मेहँदी लगा देगी और तब तक तुम हल्दी लगाओ

Shurushti:dekho कितनी जल्दी है बन्नो को और वैसे मुझे दीदी कह रही हो आज से तो तुम मेरे बेटे बलदेव की पत्नी बन ने जा रही हो ..देवरानी बहु

ये बोलते हे जहा कमला खिल खिला क है पड़ती है वही देवरानी लज्जा जाती है

Devrani:didi ..

तुनक कर मन करती है इशारे से न कहो

Shurushti:Bhai बात तो सही है अब हम सौतन नहीं रहे अब तो तुम इस घर की बहहु हो वैसे

देवरानी अपना सर निचे कर क अपने अपने आप पर गर्व करती है

षुरूश्ती पहले देवरानी क पैरो पैर मेहँदी लगाती है और कमला मेहँदी का हिस्सा छोर कर देवरानी क अंग अंग में हल्दी और चन्दन की मालिश करने लगती है

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Devrani:dheere कमला

Kamla:Oh मेरा छूना अब क्यू पसंद आएगा जब नाहा दूल्हा मिल रहा है

Devrani:chup कर रय एक बात भूल गयी..

Kamla:kya महारानी

Devrani:Inke मित्र तो है हे नहीं और उनके भी याद नहीं रहा बुलाना

Kamla:kinke मित्र?

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कमला हल्दी ले कर अब देवरानी क सुन्दर चेहरे पर मल्टी है

Devrani:pagli..raja बीटा क मित्र बद्री और श्याम

Shurushti:wo तो बलदेव को सोचना था न

Devrani:ab वो नहीं याद रख पाए तो मेरी ज़िम्मेदारी है उनको आमंत्रित karna..shurushti दीदी आप कुछ कर सकती है

Shurushti:theek है में सोमनाथ से बात कर क किसी को भेजती हु इनको निमंत्रण भेजवा देते है

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Devrani:dhanyawad दीदी

shurushti:bass धन्यवाद् मत कहना मैंने जितना तुम लोगो का डिल दुखाया उसके बदले तो ये कुछ भी nahi..or तुम लोगो ने मेरी जान बादशाह शाहज़ेब से बचा ली मेरी इज़्ज़त बचाई जिसका आभारी में जीवन भर रहूंगी

ये कह कर षुरूश्ती का चेहरा उतर जाता है

Devrani:chhoriye दीदी सुबह का भुला शाम को वापस आजाये उसे भुला नहीं कहते

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षुरूश्ती भी अब देवरानी को हल्दी लगाती है दो पत्तो को मदद से

Shurushti:theek है अब तुम मेहँदी को सूखने देना फिर सोना में जा कर बद्री और श्याम को निमंत्रण भेजवा देती हु

Kamla:Rani षुरूश्ती फेरे आज 5 बजे हे होंगे न

Shurushti:han बाबा 4 बजे बन्नो को उठा देना

कमला अब षुरूश्ती को महारानी नहीं बुला रही थी जिसे सुन का उसे अटपटा लगता है पर वो समय को भाव समझ रही थी

Devrani:aap भी आराम कर लीजिये दीदी

Shurushti:ab मुझे कहा आराम मिलेगा ,जिसके बेटे का विवाह हो वो एआरएम नहीं करते

इतने में जीविका आती है

Kamla:Aayiye महारानी जीविका

Devrani:aayiye माजी

देवरानी अपना पल्लू ठीक करते हुए कहती है

जीविका पास में हे रखे सोफे पे बैठ जाती है और एक लम्बी सांस लेते हुए

Jeevika:Tum सब को निमंत्रण दे रही हो मेरे बीटा वह कारावास में बंद है

Shurushti:Maa जी आपको पता है बलदेव क निर्णय क विरुद्धा कोई नहीं जा सकता

Jeevika:parantu घर में विवाह है बेटे की और बाप कारावास में रहे क्या ठीक लगेगा और वैसे भी उसे फांसी तो नहीं सुनाई है

ये कह कर जीविका की आखे नाम हो जाती है

Kamla:Ye बात तो है परिवार का सदस्य हे है महाराज राजपाल अगर वो विवाह क समय नहीं होंगे तो बुरा लगेगा हे

Devrani:Maa जी आप रोये नहीं मई महाराज बलदेव से बात करती hu,mujhe विश्वास है मेरा राजा बीटा मान जायेंगे

Jeevika:Manega क्यू नहीं जब उसकी माँ इतने महीनों उसे उसे पत्नी का सुख दे रही है तुम दोनों को विवाह की भी क्या पड़ी थी ऐसे भी कर सब कुछ कर तो रहे थे

Devrani:Maharani jeevika..ye आपकी ग़लतफहमी है मई ऐसी नारी नहीं क प्रेम क भाव में आकर बहक जॉन मई बलदेव को कभी आगे नहीं बढ़ने दी क्यू क मेरा डिल बिना भगवन क साक्षी मने बिना विवाह क सम्भोग या सहवास करने से डरता रहा पर में गलत थी जब ऐसे आरोप मुझे पर लग हे रहे है तो मुझे बलदेव को नहीं रोकना था

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Shurushti:Maa जी रहने दीजिये न आप दोनों बाद में लड़ लीजिये आज इनका विवाह है देवरानी बास बुरा मत मानो इनकी बात का हमे पता है तुम कितनी पवित्र हो

Kamla,dunya वाले कुछ भी बोले पर हमे पता है न आप को अपने मान मर्यादा का कितना परवाह है महारानी देवरानी

Shurushti:chaliye सासु माँ ..देवरानी तुम जल्दी सो जाओ फिर तुम्हारे उठने क बाद में तुम्हे तैयार करती हु

षुरूश्ती जीविका को ले कर चली जाती है

Kamla:ab आप मत सोचिये कुछ मेहँदी सूखने क बाद सो जाये में भी जाती हु 4 बजे आउंगी

Devrani:kamla सुनो न "धन्यवाद्"

Kamla:Kya महारानी

Devrani:aaj जो ख़ुशी मुझे और बलदेव को मिलने जा रही है और जो अब तक मिली है सब तुम्हारे कारन

Kamla:Chhoro भी महारानी वो तुम्हारा मादक शरीर और सुन्दर मुखड़े ने लुभाया है बलदेव को

और है देती है

Devrani:kamini जाओ यहाँ से

कमला चली जाती है देवरानी हल्दी लगाने से और खिल रही थी और उसके हाथो और पैरो पर मेहँदी बहुत जांच रही थी

Devrani,dekhte है मेहँदी का रंग कैसा आता है

बहार शमशेर सैनिको से कह कर पंडित और भंडारा का इंतेज़ाम करवा रहा था

देवरानी जैसे हे देखती है उसके हाथो की मेहँदी अब सूखने लगी तो वो बिस्तर पर पद जाती है

Devrani:so जाती हु बीटा बलदेव आज अपनी माँ को पत्नी बना कर थका तो देगा हे

ये सोच कर देवरानी मुस्कुरा कर सो जाती है

महल को फूलो से सजाया जाता है चारो और मंडप लगाया जाता है जहा पर भंडारा होगा शमशेर बाजार से फूलो क साथ हज़ारो दिया ले अत है जिसे पुरे महल में अँधेरा होते हे जलाया जायेगा

शाम 4 बजे

"बलदेव उठ जाओ "

ये शमशेर था जो बलदेव को उठा रहा था

Baldev:abhi अभी तो सोया था भाई

Shamshera:bhai देखो आज तुम्हारी शादी है नहीं करनी है तो सोते रहो

ये सुनते हे झट से दोनों पेअर पे उठ खड़ा होता है बलदेव

Baldev:Sab तैयारी हो गयी

Shamshera:tumhari माँ तुमसे शादी करने तैयार है बाकी कुछ हो न हो क्या फ़र्क़ पड़ता है

Baldev:jalo मत बड़े bhai..Bolo न पंडित भंडारा का सब कुछ हुआ

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Shamshera:han बास तुम माँ बेटे क लिए सुहागरात की सेज सजाना है इसलिए उठो और जाओ यहाँ से

Baldev:theek है भाई

Shamshera:waise तुम्हारे माँ क होज़रे में मनाओगे सुहरात या बाप क?

Baldev:bhai हम नया रिश्ता शुरू कर रहे है और मई नहीं चाहता क मेरी माँ को कुछ पुराने बुरे दिन यद् भी रहे इसलिए में उनके साथ अपने कक्षा में हे सुहागरात मनाऊंगा

उधर देवरानी अंगड़ाई ले कर उठ टी है और वैसे हे कमला देवरानी क कक्षा में घुसती है

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Devrani:aagayi तुम कमला क्या समय हो गया ?

Kamla:bhug अंगड़ाई ले रही ho..ghabrao नहीं महारानी 1 घंटा और बाकि है फिर तुम्हारी कुटाई होगी रात bhar..waise नींद पूरी हुई की नहीं?

Devrani:subah से सो रही हु नींद पूरी होगी हे न

Kamla:Han भाई रात भर जो जागना है

Devrani:chup कर बेशरम ..पंडित जी आये क नहीं

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Kamla:han वो अपनी तैयारी कर रहे हवन कुंदन लगा कर

Devrani:Mujhe बलदेव से बात करने थी राजपाल क लये

Kamla:tum क्यू उस बूढी क दर्द को समझ रही हो जब वो तुम्हे नहीं समझी कभी

Devrani:kamla में एक नया रिश्ता बनाने जा रही हु अब वो मेरी सांस नहीं मेरे बेटे मेरे पति की दादी है और मुझे सब को जोड़ना है तोडना नहीं है एक परिवार बनाना है

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Kamla:kitne सुन्दर विचार है आपके महारानी पर आप को हल्दी लग गया है अभी आप सुहागरात से पहले अपना चेहरा नहीं दिखा सकते बलदेव को

Devrani:to क्या करू ..अगर माँ जीविका की चाहत है एक दिन क लये हे सही राजपाल को घर में रखना तो क्या कारगर से निकल लेना ठीक होगा

kamla:ab में कैसे कहु पर अगर वो आकर कुछ विवाह में बंधा बने तो?

Devrani:Aisa नहीं होगा कमला क्यू क मेरे बीटा महाराज है उसके निर्णय को सबको मन न पड़ेगा

Kamla:to ऐसा करो युवराज शमशेर से बुला कर कह दो बलदेव से बात करने क लये

Devrani:nahi देवरानी मई इस हल में किसी गैर मर्द से नहीं मिल सकती बलदेव को छोर क ऐसा करो तुम हे शमशेर को कह दो वो समझ जायेगा में क्या चाहती हु वो बात कर लेगा बलदेव से

Kamla:theek है में कह दूंगी चलिए अभी आपको स्नान करा क तैयार भी करना है समय काम है..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 90

शाम क 4 बज रहे थे बलदेव भी उठ कर तैयार हो रहा था देवरानी को भी कमला उठा दी थी महल क बीचो बीच खली जगह पर पंडित जी अपने तैयारी में व्यस्त थे

Kamla:Jaldi चलिए महारानी हमारे पास एक घंटा हे है

Devrani:hmm चलो

देवरानी कमला को ले जाने लगती है स्नान घर में तभी वह षुरूश्ती आजाती है

shurushti:Ary ये क्या दुल्हन को क्या हम नही नहलाएंगे

Devrani:dhatt

Shurushti:peeche देखो महारानी देवरानी

देवरानी षुरूश्ती क पीछे देखती है तो उसे औरतो का झुण्ड दिखाई देता है

Shurushti:meri बन्नो दुल्हन बनेगी तो गीत तो होगा हे

देवरानी अपना सर लज्जा कर झुका लेती है

Shurushti:lajja तो ऐसे रहे है जैसे नहीं बन न है बीटा बलदेव की दुल्हन

देवरानी झट्ट से बोल पड़ती है

Devrani:Ban न है

और ये सुन कर कमला सहित सब है पड़ते है

Shurushti:chal अब हम तुम्हे तैयार करे

साडी औरते अंदर आती है और गीत गाने लगती

"दुल्हन तोरा मर्द बड़ा रसिए

रात भर तोड़े है खटिया

दुल्हन तोरा मर्द जाने सब खेल

ऐसा झटके मरे जैसे हो बैल"

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ये गाते हुए सब औरते हस्स रही थी और ये सुनते हे देवरानी अपनी आखे बंद कर लेती है लज्जा kar,kamla सब से पहले देवरानी क अंग अंग से हल्दी को पानी से धोती है फिर षुरूश्ती उसको दूध से देवरानी को नहाती है

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थोड़े देर में स्नान करा कर देवरानी बहार आती है और उसे देख कर सब औरते तने देने लगती है

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Kamla:Maharani तो दूध से भी गोरी लग रही है

shurushti:lagegi क्यू न मेरे बेटे की पसंद जो है

देवरानी फिर लज्जा जाती है

अब देवरानी एक पेटीकोट को अपने दूध तक चढ़ाई थी तभी कमला देवरानी को ब्लाउज देती है पहन लो

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Devrani:me अंदर से पहन क आती हु मुझे यहाँ पर पहन ने में शर्म आती है

Kamla:badee शर्मीली दुल्हन है

देवरानी अपना वस्त्र ले कर स्नान घर में घुस जाती जय और उसके अंदर आने का दूसरा कारन था अंदर ब्राज़िएर और जांघिए पहन न

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देवरानी सब से पहले अपने जांघिए को हाथ में लेती है और अपने भरी भरकम पैरो को उठा कर जांघिए में दाल लेती है और फिर अपने हाथ निचे ले जाकर ऊपर खसकने लगती है जांघिए घुटने पर आता है तो देवरानी अपना को ऊपर उठा कर जांघिए को पेटीकोट क ऊपर से पकड़ क ऊपर खींचती है और अपने मांसल जांघो से खींचते हुए अपने भरी गांड में फसा लेती है

देवरानी अपने पास से ब्राज़िएर उठा क दोनों कंधो में लेते हुए घुमा क हुक लगाती है फिर दोनों छातिओ क आकर को अपने भरी दूध क पास रखती है एक हाथ से निचे पेटीकोट को दूध से निचे करती है फिर दोनों हाथो से अपने भरी मम्मो को ब्राज़िएर में क़ैद करने की नाकाम कोशिश करती है क्यू क दोनों बगल से मम्मी साफ़ दिख रहे थे और देवरानी की गहरी खाई इतनी गहरी दिख रही थी क कोई भी उसमे खो जाये उसके जांघिए भी उसके ख़रबूज़े से गांड को संभल नहीं प् रहे थे और देवरानी क जांघिए को ज़्यादा ऊपर खींचने क वजह से दोनों गांड की पते जांघिए से साफ़ देखि जा सकती थी और आगे सिर्फ जांघिए छूट क भाग को छुपाया था

Devrani:Haay कितनी पकड़ क बैठ गयी मेरे यौवन को ये जांघिए और ब्रिज़ेर बहुत छोटी है ये

देवरानी अब अपना ब्लाउज पहनती है फिर घागरा पहनती है और नैरा बांधते लगती है

Devrani:man me)Zor से नहीं बांधती हु नहीं तो बीटा बलदेव खोल नहीं पायेगा

और अपने हे सोच पर जहा वो लज्जा जाती है वही उसके छूट में एक चिति रेंगती है

Kamla:Maharani बहार आओ भी सुहागरात अंदर नहीं मानना है

देवरानी बहार आती है साडी औरते फिर से गीत शुरू कर देती है देवरानी का श्रृंगार शुरू हो जाता है

Shurushti:solah श्रृंगार कर क तो अप्सरा जैसी हो जाएगी मेरी बहु

Devrani:didi..

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देवरानी क आखो में काजल लगाया जाता है फिर होठो पे लाली बादाम क चुरा को देवरानी क चेहरे पैर लगाया जाता है कमला और बाकि औरते हाथो और पैरो क नाखुनो को भी लाल रंग से रंग देते है

Kamla:haath लाओ महारानी चुड़िआ पहना दू

दोनों तरफ से देवरानी क हाथो में चुड़िआ पहनाया जाता है

उतने में जीविका आजाती है देवरानी क कक्षा में और सब गीत गण बंद कर देते है

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Shurushti:aaiye माजी और तुम लोग चुप क्यू हो गए गाते रहो आज मेरी बनो का विवाह है

जीविका चुप चाप खड़े हो कर देखने लगती है

देवरानी क ऊपर अब चमेली क तेल से छिड़काव क्या जाता है जिस से देवरानी क शरीर से खुशबु उठ कर पुरे कक्षा में फ़ैल जाती है

कमला निचे बैठ जाती है और बारी बारी से देवरानी क पैरो में पायल पहनती है

और षुरूश्ती उसके हाथो के चुडिओ क साथ कंगन पहना रही थी

Shurushti:Laao अब बन्नो को में हार पहना दू

षुरूश्ती सोने क हार से देवरानी क गले को भर देती है

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Devrani:itna सब

Shurushti:Han इसमें कुछ गहने मेरे पिता जी ने दया था जो आज से तुम्हारे हुए

षुरूश्ती नाथ निकल कर देवरानी क नक् में डालती है

Devrani:ufff यह

Kamla:nath घुसने से आह निकल गयी नाथ महाराज बलदेव अपने माँ का उतरेगा तो क्या होगा

वह पर खड़े सब हसने लगते है

षुरूश्ती देवरानी को कड़ी करती है देवरानी अपना पल्लू संभाले कड़ी होती है

षुरूश्ती अपने हाथ में कमर बंद जो सोने का था देवरानी क कमर पर बांध देती है

Shurushti:ab तुम्हारा कमर बंद हुआ इसे जो खोलेगा उसकी खैर नहीं ,संभालना महारानी कोई खोले नहीं

और षुरूश्ती एक क़ातिल मुस्कान देती जिसे देख कर सब है पड़ते है इस बार तो जीविका क चेहरे पर भी मुस्कान आजाती है

Jeevika:man me)aakhir इन दोनों ने अपने ज़िद्द पूरी कर हे ली

देवरानी की नज़र जीविका पर पड़ती है और अपने होने वाली दादी सास को खुश देख कर बहुत खुश होती है

देवरानी अब ऊपर से निचे तक तैयार थी

shurushti:idhar आओ आईने क पास महारानी

देवरानी जा कर आईने क सामने बैठ जाती है

Shurushti:apne आप को देख कर कहो कही हम से कोई कमी तो नहीं रह गयी

देवरानी अपने आप को आईने में देखती है और खुद को देख उसे खुद विश्वास नहीं होता क वो इतनी सुन्दर लग सकती है

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Kamla:Maharani तो चाँद सी खिल रही है

उधर बलदेव तैयार हो रहा था

Baldev:Shamshera तुमने मेरे लिए ये सब लाये मुझे विस्वास नहीं हो रहा तुम इतने जिम्मेदार हो सकते हो

Shamshera:bhai मुझे ज़िम्मेदारी लेना बखूबी पता है पर वो बात अलग है में लेता नहीं हु

बलदेव क लये शादी का नया जोड़ा और जुटी लाया था शमशेर ने जिसे नाहा धो कर पहन लेता है बलदेव

Shamshera:ye लो मुश्क

Baldev:ye क्या है

Shamshera:mall लो अचे से बीवी कभी दूर नहीं भागेगी

Baldev:aisa है मेरी माँ नहीं भागे मुझे छोर कर बास लगा लेता हु

बलदेव इतर ले कर लगा लेता है और उसके जिस्म से फूलो की खुशबु आने लगती है

Shamshera:tayyar हो न शादी करने को

Baldev:Pure तैयार है हम

तभी वह सोमनाथ आजाता है

Somnath:maharaj वो राजा राजपाल कारगर से भागने की कोशिश कर रहे थे

बलदेव: बांध कर मेरे पास लाओ

Somnath:bandh क?

Shamshera:ary है मुझे याद हे नहीं रहा कमला ने कहा था देवरानी खला कह रही थी क नियम अनुसार शादी में छोर देना चाहिए

Baldev:devrani ने कहा ऐसा

Baldev:man me)ye नियम ज़रूर दादी जीविका ने बताया होगा

Somnath:maharaj ये बात भी है क किसी भी क़ैदी को गहतराष्ट्रा क किसी भी उत्सव या विवाह में हम कारगर से बहार रखते है और गहतराष्ट्रा में बहुत पहले से होता आरहा है

Baldev:par अगर वो हाथो से निकल गया तो

Somnath:Me उसकी ज़िम्मेदारी लेता हु कही भागने न दूंगा

Baldev:nahi नहीं मेरा विवाह होने वाला है में अब कटाई विश्वास नहीं कर सकता उस टुच्चा व्यक्ति पर तुम एक काम करो उसके हाथ बांध कर मेरे समक्ष लाओ

Somnath:Or महाराज वो आपके मित्र को भी हमने खबर भेजवा दिया है पर वो लोग शायद हे अजय

Baldev:Koi बात नहीं ाचा क्या तुमने कल भी आये तो हमारा भंडारा कार्यकर्म चलता रहेगा

somnath:jo ाग्य महाराज

कह कर सोमनाथ चला जाता है

Shamshera:tumne अपने मित्रो को क्यू नहीं बुलाया

Baldev:Unko आने में समय लगता और मेरे पास ज़्यादा समय नहीं क्यू क माँ का प्रिय भाई कभी भी टपक सकता है

Shamshera,h तो क्या वो मंज़ूरी नहीं दिए

Baldev:bhai भला एक भाई अपने बहिन को कैसे कह दे कर लो अपने बेटे से विवाह

Shamshera:han वो भी है

Baldev:Maine हिम्मत तो जुताई थी पर उसने मुझे उत्तर थप्पड़ से दिए

Shamshera:theek है वो सब भूल जाओ अभी तुम खुश रहो और शादी करो

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Baldev:hm ठीक कहते हो चलो

शमशेर और बलदेव निचे आते है सीडीओ से महल क बीचो बीच खली जगह पर मंडप लगा था जहा पंडित अपनी तैयारी कर चुके थे और आगे में घी दाल रहे थे

Pandit:Maharaj की जय हो

पंडित बलदेव को देख उठ खड़ा होता है और हाथ जोड़ कर नमन करता है

Baldev:ary पंडित जी बैठे आप अपना काम करे

पंडित बैठ जाता है और फिर अपने काम में लग जाता है

तभी सोमनाथ राजपाल क हाथो को बंधे ले आता है

Baldev:somnath उसके मुँह पर पट्टी बांधो

पंडित अपने पिछले राजा को इस तरह बंधा देख भयभीत हो जाता है

सोमनाथ झट से कपडे से राजपाल का मुँह बांध देता है

Baldev:Shamshera कोई मेरे कक्षा में तो नहीं है न अभी?

Shamshera:nahi पहले मैंने भेजा था देश को सुहागरात का सेज सजाने में खुद खड़ा रह कर काम करवाया अब वो सब बहार भंडारा बना रहे है

Baldev:theek है ..सोमनाथ तुम इसे मेरे कक्षा क बगल में कक्षा में जो हमने अतिथि क लिए है उसमे इसे ले जा कर कुर्सी पर रस्सी से बांध दो

राजपाल गुस्से अपने आँख तरेरे बलदेव को देखता है

Baldev:Gussa आरहा है हाहाहा देखो सामने पंडित है अब में और माँ देवरानी सात फेरे लेने जा रहे है और तुम ऊपर कक्षा में बंद रहोगे

सोमनाथ झट से राजपाल को खींचता हुआ सीडीओ से ऊपर ले जाता है और बलदेव क बगल वाले कक्षा में कुर्सी पर बैठा क राजपाल को अचे से बांध देता है

सोमनाथ बहार आकर कक्षा का दरवाज़ा बहार से बंद कर देता है

Pandit:aaiye महाराज आकर बैठए

Baldev:Hum तो कब से बैठने को तैयार है

वैध जी बहार से अंदर आते हुए

Vaidh:Beta बलदेव बहुत जांच रहे हो दूल्हा बन क

Baldev,dhanyawad वैध जी

Pandit:Maharaj कन्या को बुलाये 5 बज गए

बलदेव शमशेर को कहता है इशारे से

शमशेर देवरानी क कक्षा क पास जा कर

Shamshera:Kamla जल्दी करो पंडित जी बुला रहे है

Kamla:ye कौन है

shurushti:ye शमशेर है बलदेव का मित्र

Kamla:Mere बन्नो अब जाने का समय आज्ञा है

शमशेर दरवाज़े बंद प् कर वापस आजाता है बोल कर

षुरूश्ती और कमला देवरानी को पकड़ कर उठती है नज़र उतार कर घूँघट करती है

देवरानी अंदर हे अंदर काँप रही थी जिसे कमला भाप जाती है

Kamla:chaliye महारानी हिम्मत कीजिये

देवरानी क मन में हज़ारो ख्याल आरहे थे और वो धीरे धीरे कदमो से षुरूश्ती और कमला साथ चल रही थी

देवरानी मन me:Haay मुझे ऐसा क्यों लग रहा है क ये मेरा पहला विवाह है आज से मेरा पति बलदेव होगा जो मेरा बीटा भी है सब क्या कहेंगे हम कैसे एक दूसरे क साथ आगे का जीवन व्यतीत karenge,kya मुझे बलदेव जीवन भर ऐसा हे प्रेम करेगा लोग क्या कहेंगे आज से रोज़ बलदेव क कक्षा में सोना होगा मुझे

ये सोच कर एक सिहरन सी होती है देवरानी को और एक पल क लये अपनी आखे बंद कर लेती है

kamla:maharani हम सब आप क साथ है और वैसे भी आपका पति आपका बीटा भी है तो घबराये नहीं सुहागरात ाचा हे होगा

कमला परेशां देवरानी का ध्यान भटकने क लये कहती है जिसे सुन कर सब है पड़ते है

और देवरानी भी अब हल्का महसूस कर रही थी पीछे राधा और जीविका भी चल रही थी पर जीविका क चेहरे से देख कर कोई भी कह सकता था क वो खुश नहीं है

जीविका मन me:aakhir इन दोनों माँ बेटे ने अपने मन की किये

सब महल क बीचो बीच पहुंचते है तभी षुरूश्ती की नज़र सीडीओ से उतर रहे सोमनाथ पर पड़ती है और

Shurushti:shamshera ये सेनापति ऊपर से क्यू आरहा है

शमशेर बात पलट कर कह देता है

shuruhsti:Wo किसी काम से भेजा था बलदेव ne..aap छोड़िये शादी का वक़्त है ये

Shurushti:hmm

Kamla:Pandit जी लाये क्या कन्या को

Pandit:han जजमान जल्दी करो समय नहीं है अब

बलदेव अब भी बैठ था वो पलट ता है तो उसकी नज़र सोमनाथ पर पड़ती है और सोमनाथ इशारे से कहता है क वो काम कर दया

बलदेव फिर देवरानी को देखता है

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देवरानी को देखते हे बलदेव देवरानी की सुंदरता में खो जाता है पल्लू की हुई देवरानी का चेहरा चाँद सा चमक रहा था

Baldev:man me)Me कितना भाग्यशाली हु जो ऐसी पत्नी मिली मुझे ,माँ देवरानी तेरा धन्यवाद् कैसे करू

Pandit:maharaj देखते हे रहिएगा कन्या को बैठने क लये जगह दीजिये

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बलदेव चुप चाप खसक जाता है और देवरानी का हाथ पकड़ कर षुरूश्ती बैठा देती है

पंडित अपना मंतर पढ़ना शुरू कर देता है

Somnath,shurushti,kamla ,राधा ,जीविका वैध जी सब खड़े रहे और कुछ औरते जो देवरानी को सवारने आये थे पंडित जी मंतर का उच्चार तेज़ी से कर रहे थे और बलदेव और देवरानी क धड़कन भी उतनी हे तेज़ी से धक् धक् कर रहे थे

Baldev:man me)maa अंदर से घबराई है शायद उनको अजीब लग रहा होगा अपने बेटे से जो सात फेरे लेने वाली है ,थोड़े दिन में आदत हो जाएगी माँ को

बलदेव मन me:sach में ऐसी पतिव्रता पत्नी प् कर में धन्य हो गया भगवन ने मुझे ऐसी माँ को मेरे पत्नी क रूप में दया ज़रूर मैंने पिछले जनम में अचे कर्म कए होंगे

बलदेव देवरानी को देखता है जो अपने हाथ को हाथ पर रख कर बैठी थी हाथ पैर बलदेव देखता है तो उसके सुन्दर मेहँदी लगे हुए हाथ क साथ उसकी नज़र देवरानी क मखमली पेट पर जाता है

Baldev:man me)Maa आज तो कुछ ज़्यादा हे खिल रही है

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Pandit:Maharaj कन्या क हाथ से ये उठा कर चढ़ाये

Baldev:han हाँ

देवरानी पल्लू क अंदर से तिरछी नज़र से बलदेव को देख रही थी

Devrani:man me)beta अपने माँ से विवाह कर रहा है आज से तेरे हे होने वाली हु फिर भी सब क सामने पेट देख रहा है तब से

ये सोच कर क कितना चाहता है बलदेव देवरानी थोड़ा खुश हो जाती है और उसके चेहरे पैर मुस्कान फ़ैल जाती है

देवरानी झट से प्रसाद उठा लेती है बलदेव

भी अपना हाथ बढ़ा कर देवरानी क हाथ को निचे से पकड़ता है और दोनों प्रसाद चढ़ा देते है

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देवरानी अपने हाथ पीछे ले जारही थी क बलदेव अपना हाथ आगे बढ़ता है तो देवरानी अपना हाथ रोक लेती है और बलदेव अपना हाथ देवरानी क हाथ क ऊपर रख देता है

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देवरानी का हाथ हल्का काँप रहा था बलदेव उसके हाथ को पकड़ कर बैठ जाता है

कुछ देर और मंत्र जप करते हुए

Pandit:Fera ले लो अब कन्या को घूँघट को हटा सकते हो अब

बलदेव पंडित की ओरे देखता है

Shurushti:kya हुआ बलदेव एक दिन की हे तो बात है और वैसे भी यहाँ पर पराया कौन है सब अपने है ,चेहरा खोलने दो देवरानी

देवरानी भी नहीं छह रही थी अपना चेहरा खोलना पर षुरूश्ती क बातो से अपना मन बदल लेती है

बलदेव अपने बाये हाथ से देवरानी का घूँघट ऊपर करता है और देवरानी अपना घूँघट ऊपर कर पल्लू सर पर रख लेती है और एक मुस्कान देती है जिस से वो घबराई है किसी को पता न चले

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Pandit:wah बेटी बड़ी सुन्दर हो महाराज अब आप दोनों फेरे लीजिये बलदेव देवरानी का हाथ पकड़ कर खड़ा होता है और फेरे लेने लगते है अग्नी का

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Kamla:ab पांचवा फेरा है भगवन महाराज और महारानी को संतान का सुख दे पंडित जी मंत्र ढंग से पढियेगा है

सब हसने लगते है

Devrani:hey भगवन ये कमला भी न मुँह बंद नहीं होना अभी से मेरे बचे पैदा करवा रही है

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Baldev:man me)Maa का मुँह उतर गया कमला की बात सुन कर और बलदेव हल्का मुस्कुरा देता है

ऐसे हे 7 फेरे पुरे होते है पंडित जी इशारा करते है और दोनों बैठ जाते है

पंडित फिर मंत्र पढ़ने लगता है और कुछ देर बाद एक सिंदूर की डिब्बी ले कर

Pandit:Maharaj कन्या का सुन्दर दान कीजिए

देवरानी ये सुन कर सिहर जाती है

Baldev:man me)Q नहीं पंडित जी इस समय क लये में बहुत तड़पा हु माँ को अपने नाम की सिंदूर से मांग भरने क लये

Devrani:man me)bhar दो मेरे बेटे बलदेव मांग मेरी बना दो इस अभागन को सुहागन मेरा बीटा बन जा मेरा पति देव

षुरूश्ती पीछे से देवरानी क पल्लू को सरका कर मांग खोलती है बलदेव डिब्बी से सिंदूर

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ले कर देवरानी क मांग भर देता है देवरानी अपना आँख बंद कर लेती है

Devrani:Dhanywad भगवन तूने इतना चाहने वाला पति दिया

Baldev:man me)aaj से माँ बास मेरे नाम का सिंदूर लगाएगी जीवन भर्र

Pandit:maharaj अब कन्या को मंगलसूत्र पहनाइए

बलदेव निचे से मनागलसूत्र उठा कर देवरानी क तरफ बढ़ता है

देवरानी उसे देख रही थी

देवरानी मन me:kitna बेसबर हो रहा है

देवरानी क गले में दाल कर मगल सूत्र बांध देता है

Baldev:man me)Meri माँ मेरी पत्नी हो अब तुम

Devrani:man me)Patidev तो आज शादी क जोड़े में किसी अधेड़ आयु क 30 वर्षीया पुरुष लग रहे है कौन इन्हे कहेगा ये 18 वर्षीया hai..shareer से घोड़े जैसा जो हो गया है मेरा बीटा

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Baldev:man me)Maa तो 34,35 साल की बिलकुल नहीं लग रही ऐसा लग रहा है जैसे कोई 17 साल की कुवारी स्त्री हो

Pandit:ab आप दोनों पति पत्नी है

सब फूलो की बारिश कर देते है दोनों पर

Pandit:ab एक दूसरे को वरमाला पहनाये

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देवरानी बलदेव को वरमाला पहनती है और फिर बलदेव भी देवरानी को माला पहनाता है

षुरूश्ती सब सेपहले आकर देवरानी से गले लगती है

Shurushti:meri बन्नो बधाई हो

शमशेर आकर बलदेव से गले मिलता है

Shamshera:shadi मुबारक हो दोस्त

देवरानी देखती है कमला क आखो में ासु थे और दूर कड़ी देख रही थी

Devrani:kamla..

कमला दौड़ क आती है और देवरानी से लिपट जाती है

Devrani:tu रो क्यू रही है पगली

Kamla:ye तो ख़ुशी क ासु है महरानी बधाई हो आप को सदा खुश रहो सुहागन रहो

Shurushti:baldev क्या अपनी माँ से नहीं मिलोगे

बलदेव आकर षुरूश्ती क पेअर छूटा है और देवरानी को इशारा करता है

षुरूश्ती क पेअर दोनों छूटे है

Baldev:maa हमे आशीर्वाद दीजिये

Shurushti:Dudho नहाओ पुतो फलो मेरे बचो

वैध जी वही खड़े देख रहे थे बलदेव और देवरानी उनके भी पेअर छूटे है और आशीर्वाद लेते है

Vaidh:sada सुहागन रहो देवरानी बिटिया

Radha:Maharani शुभ विवाह

वही पास में कड़ी जीविका को देख बलदेव और देवरानी जाते है और झुक कर पेअर छूटे है

Baldev:Hume आशीर्वाद दीजिये दादी और खास कर अपने पोती बहु को क्यू क आपका वंश यही बढ़ाएगी

जीविका न चाहते हुए भी दोनों क सर पर हाथ रख कर

Jeevika:sada खुश रहो ..दूधो नहाओ पुतो फलो

Somnath:maharaj बधाई हो

Baldev:dhanywad somnath..pure गहतराष्ट्रा में भंडारा बटवा दो कोई गरीब दुखी नहीं रहना चाहिए

pandit:is गरीब का दक्षणा तो दीजिये महाराज

Baldev:somnath इन्हे मुँह माँगा इनाम दे दो

पंडित खुश हो कर सोमनाथ क साथ चला जाता है

कमला देवरानी को देख इशारा करती है बलदेव क पेअर छूने को

बलदेव जैसे पलटा है देवरानी उसके कदमो में बैठ उसके पेअर छू लेती है

Baldev:Maharani आपका स्थान मेरे हृदय में है

और देवरानी को झट से अपने गॉड में उठा लेता है

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Baldev:kamla समय क्या हुआ?

Kamla:Suryast हो गया 6 बज रहा होगा

Baldev:agle 18 घंटे तक मेरे कक्षा क आस पास कोई नहीं आये

Kamla:matlab

Baldev:kal 12 बजे दिन तक कोई ऊपर नहीं आना चाहिए और हमारा भोजन समय से ऊपर ला कर कक्षा क बहार मेज़ पर रख देना

बलदेव मन me:Is जैसी माल की प्यास तो 18 घंटे क्या 18 साल तक बुझाऊंगा तो भी नहीं बुझेगी

देवरानी मन me:hey भगवन इसे शर्म नहीं आरही मुझे सब क सामने ऐसे उठा कर क्या क्या कह रहा है बीटा पति बनते हे हक़ जताने लगा ..

ये सुन कर सब बलदेव को हे देख रहे थे

देवरानी इस बात से अनजान थी क ऊपर बलदेव क कक्षा क बगल में राजा राजपाल उसका पहला पति बंधा हुआ है

बलदेव धीरे धीरे देवरानी को अपने गॉड में उठाये सीडीओ से अपने कक्षा की ओरे जाने लगता है..

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 91

गहतराष्ट्रा

शाम 6 बजे

बलदेव अपने माँ देवरानी क साथ सात फेरे लेता है फिर अपने माँ क मांग में सिंदूर भर क और मंगलसूत्र दाल कर अपनी माँ को अपनी पत्नी बना लेता है परिवार क सामने देवरानी अपने पति क पेअर छूती है पर बलदेव अपने माँ को अपने बहो में उठा लेता hai.baldev सबको कहता है क अगले 18 घंटे यानि क अभी 6 बजे से ले कर कल दुपहर 12 बजे तक महल क पहले मंज़िल जहा पर बलदेव का कक्षा था कोई नहीं आये और बलदेव सिर्फ कमला को कह देता है क समय से खाना पानी पंहुचा दे

बलदेव अपने माँ को गॉड में उठाये सीढिआँ चढ़ना शुरू करता है और निचे उसकी दादी जीविका बलदेव की सौतेली माँ और देवरानी की सौतन षुरूश्ती ,कमला और वैध जी क साथ हे शमशेर और सोमनाथ उन दोनों को हे देख रहे थे

Kamla:man me)aaj तो दोनों माँ बीटा ऐसे जा रहे हो जैसे सतो जनम से पति पत्नी हो महारानी की आज खैर नहीं छूट का कचुम्बर बना देगा उनका बीटा

Shurushti:man me)Kitni भाग्यसहाली है देवरानी इतना प्रेम करने वाला पति मिला और ये पता होते हुए भी क देवरानी का ये दूसरा विवाह है जीवन भर बलदेव साथ देने क लये तैयार hai,kash मुझे कोई ऐसा गबरू जवान प्यार करता

Somnath:man me)Maharaja ने बड़ी चतुराई से महल क साथ साथ अपने माँ से भी विवाह कर क उनको पत्नी बना लिया मन न पड़ेगा

Jeevika:man me)Ghor कलियुग में समझती हु तुम दोनों की मज़बूरी थी जिसने तुम दोनों को प्रेम करना पड़ा पर इस तरह दिखा कर करोगे कभी सोचा नहीं था

Shamshera:man me)Baldev बहुत नसीब वाला है जिसको अपनी मुहब्बत अपनी मेहबूबा अपनी माँ को बीवी बना लिया ,मेरी हे नसीब ख़राब है

Vaidh:man me)Meri जड़ी बूटीओ का असर दोनों पर बहुत हुआ है अगर आज लहू मुँह लग गया तो दोनों दिन रत एक दूसरे पे चढ़े रहेंगे

Vaidh:Kamla ो कमला

सबका ध्यान टूट ता है

Kamla:Ji वैध जी

Vaidh:kaha खो गए सब क सब

Kamla:han सही बात है अब उन्दोनो को छोर दो हमे अभी बहुत काम है

Vaidh:wo सब छोरो दूध तो दे आओ और साथ में वो जड़ी बूटी भी

Kamla:han हाँ क्यू नहीं

कमला झट से दूध ढूंढ कर उसमे जड़ी बूटी मिलाने लगती है

उधर बलदेव देवरानी को ले कर सीडीओ से ले कर ऊपर चढ़ रहा था और बलदेव देवरानी को आखो में देख रहा था और देवरानी भी बलदेव को देखे जा रही थी

Devrani:Sambhal क महाराज कही गिरा नहीं दो

Baldev:me जीवन भर तुम्हे उठा कर रख सकता हु रानी माँ फिर भी नहीं गिरने दूंगा

बलदेव अब ऊपर आ चूका था और एक धक्के क साथ अपना कक्षा का दरवाज़ा खोलता है और अपना कक्षा देख कर बलदेव बहुत खुश होता है बलदेव का पूरा कक्षा फूलो से सजा हुआ था गुलाब और चमेली और गेंदों क फूल से पूरा बिस्तर सजा था कक्षा में चारो और कही दिया तो कही मोमबत्ती जल रही थी

देवरानी तो कक्षा देख कर इतनी खुश थी क बिना पालक झपकाए देखे जा रही थी

Baldev:kaisa लगा रानी माँ

Devrani:Ya तो रानी कहो या तो माँ

Baldev:q दोनों नहीं हो सकते

बलदेव पलंग क करीब अत है और देवरानी को पलंग पर बैठता है तभी बहार से आवाज़ आती है

"Maharaj..Maharani "

Devrani,dekhiye न कमला लग रही है

Baldev:theek है पत्नी जी जो हुकम

बलदेव दरवाज़े पैर अत है तो देखता है दो जग और एक गिलास में कुछ लिए कड़ी थी

Kamla:kshama करे महाराज वो दूध रखना भूल गयी थी

Baldev:Andar तो खाने पीने क सामान है पहले से बहुत फल है काजू बादाम सब है

Kamla:Maharaj ये वैध जी क तरफ से है समझने की कोशिश कीजिये और ये कुछ जड़ी बूटी जय जो खास कर महारानी क लये है

बलदेव बात को समझते हुए मुस्कुराता है

Baldev:dhanyawad..par तुम इसके बाद सिर्फ दो बार आना एक रात का खाना ले कर और कल सुबह का नाश्ता ले कर आना बीच में मत आना चाहे कोई मर जाये ठीक है

Kamla:Ji महाराज

बलदेव कमला क हाथ से वो थाली ले लेता है और दरवाज़ा बंद कर क कुण्डी लगा देता है और पास रखे मेज़ पर थाली रख देता है

इधर कमला मुद कर सीडीओ से निचे उतरने हे वाली थी क किसी क हांफने की आवाज़ आती है

Kamla:man me)Upar तो बलदेव क सिवा कोई नहीं होता है फिर ये हांफ कौन रहा है

कमला उस आवाज़ का पीछा करते हुए वापस आती है और देखती है बलदेव क कक्षा बिलकुल सत्ता हुआ कक्षा में राजा राजपाल कुर्सी पर बाँदा है उसका हाथ और उसका मुँह बंधा हुआ है और वो अपने कोशिश कर रहा है खोलने की

कमला कक्षा क पास पहुंचते हे हवा से उड़ रहे कक्षा क परदे क बीच से राजपाल को देख कर चौंक जाती है

Kamla:man में) हे भगवन ये बलदेव क कक्षा क बिलकुल बगल में है और बहार से भी ये कक्षा बंद है इसका मतलब बलदेव ने जान बुझ कर इनको यहाँ बंधवाया है ऐसे तो रात भर यह आह की आवाज़ सुन कर देवरानी की कही मर्डर नहीं जाये राजा राजपाल

कमला ये सोचते हे अपने कदम पीछे ले कर सीडीओ से उतर कर निचे आजाती है

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बलदेव जग और गिलास को मेज़ पर रख कर जैसे हे मुड़ता है देखता है उसकी माँ देवरानी बड़ा सा घूँघट किये हुए पलंग क बीच में बैठी है बलदेव अपने माँ को देख मुस्कुराता है और अपने मच पर हाथ फेरते हुए तव देता है और पलंग क पास जा कर

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Baldev:acha तो मेरी दुल्हन अब घूँघट कर ली है

देवरानी कुछ नहीं बोलती है

बलदेव सामने क मेज़ से जग से दूध गिलास में निकल कर ले आता है और पलंग क कोने पे बैठ कर

"रानी माँ ये लो दूध पी लो"

देवरानी अब भी घूँघट किये बैठे थी देवरानी अपने हाथो को घुटने पैर राखी थी और घुटने मोड़ कर बैठी थी देवरानी अपने पैरो की उंगलिओ से बिस्तर को दबा रही थी

Devrani:Man me)Hey भगवन मेरा बीटा मेरा पति है अब मेरा रोम रोम कैंप रहा है कैसे कर पाऊँगी सब मदद कर मेरी

देवरानी की दशा वही थी जो किसी भी माँ की होगी अगर वो अपने बेटे से विवाह कर क दुल्हन बने अपने बेटे क साथ बंद कमरे में हो

बलदेव दूध का गिलास पलंग क कोने पैर रख देवरानी का हाथ जो हल्का कैंप रहा था उसे अपने हाथो में ले लेता है और सहलाता है

Baldev:Rani माँ हमे ये दिन बहुत म्हणत और आपकी प्राथना का वरदान है जो मिला है आप कोई संकोच है तो आज हम कुछ नहीं करेंगे

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ये सुनते हे देवरानी अपने बेटे बलदेव क तरफ खसक कर उसके सीने में अपना सर रख कर अपने बेटे बने पति से गले लग जाती hai,baldev मुस्कुराता है और देवरानी को अपने आग़ोश में ले लेता है और अपना हाथ देवरानी क सर पर रख कर सहलाते हुए

"आर्य मेरी प्यारी दुल्हन तुम्हे ऐसा लगता है

क कोई इतनी सुन्दर दुल्हन को सुहागरात में ऐसे हे छोर दे"

ये कह कर बलदेव हल्का सा है देता है

देवरानी अपना हाथ उठा का मुक्का बना कर हल्का हल्का बलदेव क चौड़े सीने पर मरती है

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Baldev:ab शर्माओ मत अपना मुँह दिखाओ

बलदेव ये कह कर देवरानी क घूँघट को पकड़ता है और धीरे धीरे ऊपर करता है जैसे जैसे देवरानी का चेहरा दिखने लगता है देवरानी क शरीर में कंपन बढ़ने लगती है आख़िरकार बलदेव देवरानी का घूँघट उठा कर उसके सर पर रख देता है

Baldev:Itne सुन्दर मुखड़े को छुपाया नहीं जाता अपने पति से बोलो देवरानी क्या चाहिए मुँह दिखाई में?

देवरानी अपने पलके ऊपर उठती है और बलदेव को देखती है जो उसके चेहरे को देख रहा था और बलदेव अपने सुन्दर पत्नी पर गर्व महसूस कर रहा था देवरानी खुश होती है क बलदेव अपने पत्नी पर उसकी सुन्दर पर इतना इत्र रहा है

baldev:bolo रानी माँ

Devrani:Mujhe जीवन भर ऐसे हे प्यार करते रहना मुझे और कुछ नहीं चाहिए

ये कह कर बलदेव को देखती है जो आज दूल्हे क जोड़े में बहुत जांच रहा था और उसके माथे क तिलक से बलदेव और सुन्दर लग रहा था

देवरानी अपने बेटे को देखते हे अपने बेटे से गले फिर से लग जाती है

Devrani:Beta मेरा साथ कभी नहीं छोरना

Baldev:maa अब में तेरे बेटे क साथ पति भी हु में एक रिश्ता छोर क भाग सकता हु दोनों रिश्ता छोर कर नहीं

देवरानी आगे बढ़ कर बलदेव क हाथ अपने हाथ में ले कर

Devrani:To वादा करो क तुम दूसरा विवाह नहीं करोगे और राजाओ की तरह

बलदेव देवरानी क हाथ को अपने हाथ में लेते हुए सहलाता है

Baldev:Nahi करूँगा

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देवरानी बलदेव क हाथ से अपना हाथ छुरा कर बलदेव से कस क गले लग जाती है और उसका मोठे मम्मी बलदेव क सीने में धस जाते है

Devrani:waada करो तुम किसी और स्त्री से सम्बन्ध भी नहीं रखोगे

Baldev:Kabhi नहीं में तुम्हे धोखा देने का सोच भी नहीं सकता देवरानी

बलदेव अपना हाथ देवरानी क पीठ पर ले जा कर सहलाता है

Devrani:mere पतिदेव बलदेव सिंह आज से में आपकी हुई आपका हर हुकम में मानूंगी आज से मेरा नाम देवरानी बलदेव सिंह हुआ

देवरानी अपने पति क सामने हाथ जोड़ कर कहती है

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Baldev:bhut तेज़ हो रानी माँ अभी से कब्ज़ा करने लगी

Devrani:q न करू लोगो को मेरा नाम सुन कर पता चलना चाहिए में किसकी पत्नी हु

बलदेव हल्का पीछे हाथ कर देवरानी क माथे को चुम लेता है

Baldev:main हमेशा से ऐसी हे पत्नी चाहता था और भगवन ने भी मेरा विवाह तुम से करवा क मेरा सपना पूरा कर दया

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बलदेव पलंग पर अपने दोनों पेअर सीधा करते हुए देवरानी का सर अपने कंधे पर रख आधा लेट जाता है देवरानी भी बलदेव से चिपक कर अपना एक दूध निचे बलदेव क कंधे पैर सत्ता कर राखी थी और अपना एक पेअर बलदेव क पेअर पर चढ़ा ली

Devrani:Me भी राजपाल से विवाह से पहले एक मज़बूत कद काठी और सुन्दर पति हो ऐसा सोचती थी पर राजपाल से विवाह होने क बाद जैसे मेरा सपना चकचुर हो गया था

बलदेव देवरानी क बालो को लातो को अपने हाथो से सुलझाते हु

"तो माँ आज मुझे अपने पति बना कर ाचा लग रहा है न कही आपके सपने का राजकुमार मुझ से भी तो सुन्दर नहीं "

देवरानी हल्का सा चपत बलदेव क मज़बूत कंधे पैर मरते हुए

"हैट बदमाश तुम से ाचा पति मुझे सात जन्मो में नहीं मिल सकता मेरे सपने क राजकुमार तुम हे हो"

बलदेव ये सुनते हे देवरानी क पीठ से पकड़ कर अपने ओरे खींचता है और अपने होठ देवरानी क होठ पर रख कर पहले एक हल्का सा चुम्मी लेता है और फिर देवरानी क होठो को ले कर चूसने लगता है

"गलप्प्प गलपपपप गलप्प्प ुमंम्हह गलप्प्प सलरपपल गलपपपप गलप्प सुमममहह"

बलदेव देवरानी क होठ चूस कर छोरता है

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Devrani:beta में तो पुरे जीवन भर भगवन से यही प्राथना करुँगी मेरे सतो जनम में तुम हे हे मेरे पति हो

बलदेव देवरानी क कमर पर हाथ रख कर सहलाते हुए देवरानी क कण क निचे चूमता है और अपना जीभ बहार निकल कर चाटने लगता है

Devrani:ah जी धीरे कीजिये न

Baldev:maa तुम्हारे जैसी माल मेरी पत्नी है भला में धीरे कैसे कर सकता हु

कहते हुए बलदेव पूरा बिस्तर पर लेट जाता है और देवरानी को अपने बहो में भरते हुए अपने ऊपर ले लेता है देवरानी अब पूरा बलदेव क ऊपर लेती थी और उसका सर बलदेव क सेने पर था

Baldev:Maa मई सोचा नहीं था क तुम पैट जाओगी और मेरी पत्नी बन जाउंगी ये सब क लये कमला ने भी हमारा मदद की

देवरानी बलदेव क सीने पैर अपना कान लगा कर

Devrani:Me भरी तो नहीं लग रही हु ..

बलदेव देवरानी क कमर पर हाथ रख कर अपने से दबाता है

baldev:bilkul नहीं जी

Devrani:han तुम ठीक कह रहे हो कमला ने हे हम दोनों क बीच प्रेम का बीज बोया था

Baldev:par चाहते तो थे हम दोनों एक दूसरे को अंदर हे अंदर

Devrani:han तुम्हारी धड़कन भी यही कह रही है

Baldev:acha तो अब तुम धड़कन की भासा भी समझने लगी

Devrani:Ek अछि पत्नी बन ने क लये पति क हर भासा को समझना पड़ता है

बलदेव अपने ऊपर लड़ी देवरानी क गांड पर हाथ ले जाता है जो बिलकुल उसके लैंड क ऊपर था और अपना हाथ को गांड से दबाता है जिस से देवरानी क छूट पर खड़ा मुसल लैंड छू जाता है

Baldev,aur इसकी भासा को ?

ये कह कर देवरानी को देख मुस्कुराता है

Devrani:aah..

अपना मेहँदी लगे हुए हाथो से मुक्का बना कर सीने पर एक मुक्का मरती है

"बदमाश"

और अपना सर बलदेव क चौड़े सीने में शर्म से छुपा लेती है

Baldev:Bolo भी

देवरानी एक बार अपना सर ऊपर उठती है और बलदेव क चेहरे पर देख कर

Devrani:han इसकी भासा भी समझना पत्नी का धर्म है

और वापस अपना सर बलदेव क सीने में छुपा लेती है

बलदेव देवरानी मोठे ख़रबूज़े जैसे आकर क गांड को सहलाते हुए पकड़ता है और निचे से अपने खड़े लैंड से ऊपर अपने माँ क छूट पर मरता है

Devrani:aaah

Baldev:to समझो न माँ इसकी भासा

बलदेव इस बार और ज़ोर से अपना लौड़ा देवरानी क बुर पर मारता है

देवरानी क पैरो की पायल छान छान बज रही थी जब भी बलदेव अपने माँ को दबा रहा था और पुरे कक्षा में दोनों प्रेमी जोड़े क अहसास माहौल को मादक बना रहे थे

पर वही बगल क हे कक्षा में बंधा राजा राजपाल को पूरी बात तो नहीं पर इनदोनो माँ बेटे की फुसुर फुसुर आवाज़ आरही थी और राजपाल को समझते देर नहीं लगी क अंदर उसके पत्नी और बीटा क्या गुल खिला रहे है तभी राजपाल को देवरानी की "आआह" ज़ोर से सुनाई दी और राजपाल अपना बंधा हुआ हाथ गुस्से में आकर खोलने की नाकाम कोशिश करने लगता है उधर देवरानी इस बात से बिलकुल अनजान थी क उसका पहला पति राजपाल उसके हर ज़ोर की चीख सुन प् रहा था

पलंग पर दोनों माँ बेटे एक दूसरे में सांप की तरह लिपटे थे और बलदेव देवरानी की पीठ से ले कर गांड तक सहलाये जा रहा था

Devrani:kuch सालो बाद में तो बूढी हो जाउंगी तो फिर अपने इस शेर क लये तो दूसरी पारी ढूंढोगे हे

देवरानी बलदेव क लौड़े पैर निशाना मरते हुए कहती है

Baldev:Maa कौन कहता है तुम से क तुम बूढी हो जाओगी? तुम्हारी आयु अभी 34 है

Devrani:par तुम तो 18 क हे हो

Baldev:maa तुम 60 साल की हो जाओगी तो भी में तुमसे उतना हे प्यार करूँगा पर किसी गैर स्त्री को देखूंगा नहीं

Devrani:dekhte है वो तो समय बताएगा

बलदेव देवरानी को पकड़ कर अपने बहो में कास लेता है और पलट कर देवरानी क ऊपर आजाता है

बलदेव देवरानी क दूध क बेच अपना मुँह रख कर अपना लौड़ा देवरानी क छूट क ऊपर रख कर दबाते हुए

"माँ मेरा ये शेर तुम्हे कभी बूढी नहीं होने देगा और वैसे भ्ही शेर शेरनी कभी बूढ़े नहीं होते "

"तो मेरे राजा तो तुम हमेशा मुझपे ऐसे हे चढ़े रहोगे"

"हाँ माँ तुम्हे राजपाल ने खोल तो दिया पर फैला नहीं पाया "

"भक्क "

"सच्ची माँ इसलिए तुम गदरा गयी पर फैली नहीं में और मेरा शेर मिल क तुम्हारी सेवा कर क फैला देंगे और फिर देखना तुम्हारी जवानी कहर ढायेगी"

"बड़ा आया देखेंगे सही में शेर है या चूहा है"

देवरानी बलदेव को अपने बहो में भर लेती है और बलदेव को अचानक से पलट कर उसके ऊपर आजाती है

"माँ हम से न जीत पाओगी पत्नी हो इसलिए छोर रहा हु"

Devrani:chup रहिये आप क अंदर अभी ताक़त की ज़रूरत है दूध पी लीजिये

देवरानी पास रखे दूध का गिलास ले कर बलदेव को देती है बलदेव उठ कर बैठ जाता है और गिलास हाथ में लिए

"माँ दूध तुम पियो जिस से हमारे आने वाले बचे को दूध की कमी न हो"

देवरानी बलदेव क साथ बैठ कर

"लो पीयो दूध नखरे मत करो बलदेव जी"

"सोच लो देवी जितना दूध पिलाओगी उतना मेरा सांप आपके बिल को खोदेगा"

देवरानी ये सुन कर लज्जा जाती है

"पीयो सब मर्द ऐसे हे कहते है"

बलदेव देवरानी क नज़दीक आकर अपने एक हाथ से गिलास को पकड़ता है और देवरानी एक हाथ से पकड़ी होती बलदेव निचे झुक कर दूध पीने लगता है

"माँ ये दूध में वो मज़ा नहीं जो वो दूध में है"

देवरानी बड़े दूध की थैलियों की ओरे इशारा करता है

"माँ अब तुम भी पी लो ये"

बलदेव गिलास देवरानी की ओरे बढ़ता है और देवरानी भी दूध पीने लगती है ऐसे हे बारी बारी से दोनों दो गिलास ख़त्म कर देते है

Devrani:kehte है पति का जूठा पीने से प्यार बढ़ता है

तभी बलदेव को कुछ ध्यान आता है और वो पलंग से उतर कर उस थाली में से कुछ जड़ी बूटी देवरानी को देते हुए

Baldev:Devrani ये कमला ने दी थी तुम्हे खा लेने क लये क्या है ये

देवरानी बलदेव से हाथ ले कर वो पानी से जातक जाती है

Devrani:ye हम औरतो की बात है

देवरानी पास रखा मोमबत्ती जो बुझ गया था फिर से जला देती है

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देवरानी कड़ी हो कर गिलास और जग को वापस मेज़ पर रखने जाती है और बलदेव देवरानी क लचकते गांड उसके हिलते पपीता जैसे दूध गोरी मखमली पेट हाथो पैरो पे लगी मेहँदी पायल की छान छान देवरानी क माथे पे सिंदूर और गले में बलदेव क नाम का मंगलसूत्र देवरानी इस समय काम देवी से काम नहीं लग रही थी

बलदेव खड़ा होता है और देवरानी क पीछे जा कर अपने बहो में भर लेता है

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"माँ तुम कितने सुन्दर हो"

"आह राजा"

"रानी माँ ऐसे बिजलिया बहार मत गिरना नहीं तो बूढ़ा भी आप पर काबू नहीं कर पायेगा"

बादेव अपना लौड़ा देवरानी क घागरे क ऊपर से हे उसके गांड में रगड़ता है

"माँ आज तुम कितनी मादक महक रही हो आह तुम्हे सूंघ कर मेरा शेर खड़ा हो गया"

"आज राजा तुम भी आज इस शादी क जोड़े में किसी महाराज से काम नहीं लग रहे हो और तुम भी तो महक रहे हो"

"तो आओ न माँ आज तुम्हे अपना बना लू"

"मैंने कब मन क्या"

बलदेव देवरानी को घूमता है और ज़ोर से गले लगा लेता है

देवरानी बलदेव क पीठ को सहलाते हुए

"ाः बीटा मेरे पति"

बलदेव अपना हाथ ले जा कर पीछे देवरानी क गांड पर लगता है पर दबाता है ज़ोर से

"आआआआह बीटा "

इतना ज़ोर से चीखती है आवाज़ राजा राजपाल क कानो में पड़ती है

बलदेव देवरानी क आगे आकर देवरानी क मम्मो को पकड़ कर दबाते हुए बैठने लगता है



"माँ तुम्हारी जैसी सुन्दर स्त्री पुरे संसार में नहीं मुझे आज्ञा दो माँ क में आज बाद में आपका पति बन क पति धर्म निभा सकू"

"माँ मुझे आशीर्वाद दो"



"बीटा ये क्या कर रहे हो"

देवरानी बलदेव को कंधे से पकड़ कर अपने से गले लगा लेती है

"माँ तुम कहती हो माँ में तुम्हे रानी माँ क्यू कहता हु क्यू क में चाहता हु क हम दोनों रिश्ता निभाए जब हम अकेले में हो पर दुन्या वाले क सामने सिर्फ पति पत्नी रहे"

"बीटा आज से में तेरी पत्नी हु तू मेरा पेअर न छूना आज क बाद मुझे पाप लगेगा"

"माँ पारस में चाचा की बेटी से विवाह कर लेते है तो क्या उनका खून बदल जाता है रहते तो भाई बहिन हे है न विवाह क बाद भी और उनके पिता जो आपस में भाई होते है वो समधी बन जाते है और जब वो दोनों रिश्ता निभा सकते है तो हम क्यू नहीं"

"तुम सच कह रहे हो भाई भाई समधी भी होते है और भाई भी अपने बचो की शादी कर क जब वो दो रिश्ता रख कर जीवन आराम से काट सकते है तो हम क्यू नहीं"

"माँ आअज मुझे पत्नी को भी भोगना है और माँ को भी तुम मेरी पत्नी माँ हो इसलिए में आज से रानी माँ कहूंगा"

"ठीक है बीटा आज से तुम मेरे राजा बीटा और में तुम्हारी रानी भी माँ भी खुश"

"रानी माँ मुझे आपके संगमरमरी शरीर को देखना है"

"खुद देख लो"

देवरानी का डिल ज़ोर से धड़कने लगता है बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क पल्लू को उसके भरी दूध से हटाता है

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"माँ तुम्हारे हुस्न क चर्चे यहाँ से पारस तक है में तुम्हे दिन रत प्यार करना चाहता हु"

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बलदेव देवरानी क ब्लाउज को पीछे निकल कर अलग करते हुए

"माँ तुम्हारे हाथो में ये चुड़िआ कंगन बहुत जांच रही है"

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"मैंने ये सब श्रृंगार अपने राजा बीटा क लिए क्या है"

"माँ जब तुम चलती हो तो छान छान तेरी पायल की छानकर से मेरा डिल घायल हो जाता है"

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देवरानी का ब्लाउज निकल कर फेक देता है और निचे बैठ कर देवरानी क सुन्दर पेअर को देखता है देवरानी अपने पेअर क उंगलिअ ज़मीन पर दबा रही थी बलदेव निचे बैठ कर देवरानी क पेअर को चूमता है

"आह बीटा "

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"माँ कितने ऊपर तक मेहँदी लगायी हो कही योनि भी तो नहीं रंग दया"

कहते हुए बलदेव जीभ निकल कर पेअर को चाट ता है

देवरानी ये सुन सिहर जाती है

"हट पगले आह"

बलदेव अब उठ ता है और अपने माँ को बहो में भर कर पलंग पर लिटा देता है और खुद देवरानी क पैरो के आकर देवरानी क पैरो क ऊँगली को मुँह में ले कर चूसने लगता है

"आह बीटा उठ ओममममः"

बलदेव धीरे धीरे ऊपर आता है और अपने माँ क मखमली पेट पर अपना मुँह लगा कर चाट ता है कभी नाभि में अपना जीभ दाल कर चुस्त है ..बलदेव अब देवरानी क पेअर को मोड़ देता है और अपना मुँह देवरानी क जांघो क बीच रख कर जांघो को चूमता है

"िष्ठ बीटा"

"माँ तेरा ये मांसल जांघ आज ुम्म्हा"

"माँ तेरा ये मखमली पेट"

बलदेव अब देवरानी क हाथो को अपने दोनों हाथो में फंसा कर ऊपर होते हुए देवरानी क होठो को अपने होठो के भर लेता है और चूसने लगता है

"गलपपपप गलप्प्प गल्प सलरपपपप ुम्मम्ह गालपप्पगलप्प्प गलपपपपपप

गलप्प्प गलपपपपपप गलप्प गलप्प्प गलप्प"

देवरानी अपना जीभ निकल कर बलदेव क मुँह में भर देती है और बलदेव देवरानी क जीभ को अपने जीभ से पकड़ लेता है और फिर अपने होठो से अपनी माँ क जीभ को पकड़ कर चुस्त है

Devrani:aahhh उम्म्म्म

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Baldev:mHhhmmm यह

देवरानी अपने बेटे क सर को सहला रही थी बलदेव निचे हाथ ले जा कर ब्राज़िएर में क़ैद अपने माँ क 38 क दोनों पपीता को जकड लेता है और ज़ोर से दबा देता है

देवरानी अपने होठ बलदेव से अलग कर क

Devrani:aaaaaaaaaaaah

ज़ोर से चिल्लाती जिसे राजपाल सुन लेता है

Devrani:dheere से मेरे राजा बीटा

Baldev:Rani माँ तुझे देख क अपने आपको रोकना मुश्किल हो जाता है

बलदेव फिर देवरानी क चेहरे को चूमने लागत है कभी उसके कान क जड़ो को चूमता तो कभी उसके आखो को तो कभी उसके माथे को तो

निचे बलदेव क हाथ देवरानी क भरी मम्मो को बुरी तरह से पीस रहे थे और देवरानी सिसकी लेते हुए आँख बंद किये लेती थी

"आह राजा ऐसे हे मेरे पति "

बलदेव निचे हाथ बढ़ा कर देवरानी क लाल घागरा क नदी को खोल देता है अब देवरानी सिर्फ एक गुलाबी ब्राज़िएर और जांघिए में थी

"माँ तुम इस ब्राज़िएर और जांघिए में काम देवी से काम नहीं लग रही हो"

"हाँ बीटा ये छोटा है"

"माँ ये छोटे नहीं आपका शरीर ज़्यादा भरी है"

बलदेव देवरानी को अपने बहो में ले लेता है और उसको बेतहाशा चूमने चाटने लगता है

बलदेव पलंग से उतर कर खड़ा होता है और देवरानी को अपने बहो में ले कर उठा लेता है

"आर्य राजा बीटा कहा ले जा रहे हो"

"माँ मुझे तुम्हारा बुर चेतना है"

"धत्त "

शर्मा जाती है देवरानी

बलदेव देवरानी को उठा कर मखमली गद्देदार कुर्सी पर बिठा देता है और खुद निचे लेट कर

"माँ छूट खोलो मुझे चेतना है"

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"हट बदमाश कही कोई ऐसे बोलते है क्या"

बलदेव जांघिए क ऊपर से अपना जीभ बहार निकल कर देवरानी क जांघो को चाट ता है और फिर अपना जीभ जांघिए क ऊपर से पाव रोटी जैसी फूली हुई अपने भरी भरकम माँ की मोठे होठो वाली छूट को अपने जीभ से छूटा है

"आह बीटा"

बलदेव अपने आखे बंद कए जीभ को ऊपर से हे चाटने लगता है देवरानी से रहा नहीं जाता है और वो अपने ब्राज़िएर क ऊपर से अपने दूध को मसलने लगती है और हाथ निचे ले जा कर अपने जांघिए को खिसकते हुए

"ले बीटा चाट ले अपने माँ का "

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बलदेव अपने माँ क छूट को देख पहले अपने होठो से उसको चूमता है फिर अपना जीभ लगा कर चाट ते हु

"माँ पूरा कहो न"

"आह हम्म यह क्या कहु"

"खा चतु आपका"

"आह राजा मेरा बुर चाट ले"

बलदेव अपने जीभ को नोखिला बना कर चाटने लगता है

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देवरानी सीधी बैठती है और अपना ऊँगली बलदेव क मुँह में रख कर

"बड़ा चटोरा है तू"

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"तेरे छूट में इतना रस हे है माँ क में चटोरा बन गया"

"अब बास चलो बिस्तर पर "

देवरानी उठ कड़ी होती है बलदेव भी उठ कर जा कर बिस्तर पर लेट जाता है

देवदानी उठ ते हे फिर से अपने छूट को जांघिए से धक् लेती है

"माँ क्यू धक् रही हो निकल दो इसे अब"

देवरानी एक ऐडा से अपना जांघिए निकलती है

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"लो अब खुश मेरा राजा बीटा "

"माँ तुम्हारे ये झटेदार मुझे दीवाना बना रही है"

"हट पगले "

और लज्जा कर अपना सर निचे कर क कड़ी हो जाती है

"माँ कड़ी हे रहोगी क्या ज़रा ऐडा से चल कर आओ जैसे वस्त्र में अपने भरी गांड और चुके मटका क मुझे दीवानी की वैसे हे"

देवरानी एक ऐडा से चल कर आने लगती है उसका भरी चुके एक सुर में हिल रहे थे उसके गांड की थिरकन और पेट देख बलदेव अपना वस्त्र निकल कर फेकने लगता है

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"माँ तुम्हारी यही चल ने मेरे लैंड को बहुत परेशां क्या है आज तेरी चाल ख़राब कर दूंगा"

देवरानी देखती है बलदेव अपना पूरा वस्त्र निकल दिया है और अपने लौड़े को हाथ से पकडे लेता है

बलदेव जैसे हे अपना हाथ लौड़े से हटाता है

देवरानी आँख फाडे रुक जाती है

Devrani:man me)me मर्डर जाउंगी आज लगता है कितना बड़ा है

"क्या हुआ रानी माँ शेरनी बनती थी बहुत लो अब

मेरा लौड़ा तो जणू कितनी बड़ी महारानी हो पारस की"

देवरानी डर तो रही थी पर नहीं डरने का नाटक करती है

"में डरने वालो में से नहीं "

बलदेव ये सुन खड़ा हो जाता है

"ायजा मेरी रानी"

"क्या में ये सब नहीं की कभ"

"माँ नाटक न करो कमा सूत्र की पुस्तक में पढ़ी तो हो कैसे क्या जाता है"

देवरानी में सोच में थी क्या करे

"माँ लो न इसे मुँह में यही आज से आपका असल पति है जो आपके और आपके छूट की सेवा करेगा"

देवरानी शर्मा जाती है और धीरे से निचे बैठ जाती है

बलदेव आगे खसक कर देवरानी क मुँह क पास अपना हुल्लाबी लौड़ा 9 इंच का ले जाता है और देवरानी हल्का मुँह खोली hi थी क बलदेव सर पकड़ कर धकेल देता है

"यह ममम यह"

"ले मेरी रानी अपने बेटे का लौड़ा ले"

देवरानी अपने हाथ में जैसे हे

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"गल्प से ले कर चूसने लगती है"

है उससे एक चटका लगता है

"कितना गरम है राजा ये लोहे सा है"

"तुम्हरे जैसी मज़बूत माल क

लये लोहे का लौड़ा लगता है मुँह में भर क चुसो इसे"

"उम्मठ माँ ऐसे हे हम्म्म्म्म"

थोड़े दिन लौड़ा चूसने क बाद

"राजा बीटा बास "

"आज सुहाग रत है हमारी बास नहीं"

बलदेव देवरानी को उठा क बिस्तर पर पटक देता है

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"माँ तुम्हारे भरी मुम्मे हाथ में लो अपने"

देवरानी अपने हाथो में अपने दूध ले लेती है

"आओ चुसो इसे मेरे राजा"

"माँ इनके थिरकन ने मुझे बहुत सताया है "

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बलदेव दोनों मम्मो को बारी बारी से खूब दबा दबा क चुस्त है और फिर देवरानी को पलटा कर देवरानी क गांड पर दो थप्पड़ ज़ोर से मारता है

"आआआआआह बीटा नहीं"

देवरानी अचानक ऐसे मरे जाने से चिल्ला उठ टी है और उसकी आवाज़ फिर से उसके पहले पति क कानो में गूंजती है

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बादेव देवरानी क गांड को बेरहमी से दबाने लगता है

"माँ इन गांड को इतना मटकती हो तुम कभी लिया है क नहीं इसमें लौड़ा"

देवरानी बलदेव क सीने से लग जाती है

"पति देव जी नहीं लिया कभी ऐसी गन्दी बाते न करो न मुझे शर्म आरही है"

बलदेव अपना लौड़ा देवरानी क छूट पर घिसता है और अपने एक हाथ से देवरानी क बाद गांड को पकड़ कर मसल रहा था और दूसरे हाथ से एक दूध को मसल रहा था देवरानी क होठो को अपने होठो में लिए बलदेव चूसे जा रहा था

"तुम्हारा अंग अंग मादक है मेरी रानी"

"आह बलदेव तुमने मेरा शरीर तोड़ कर रख दिया चारो ओरे से सब कुछ मसल रहे हो ऐसा मसलवाने क लिए में बहुत तरसी हु"

"अभी तक तुम्हे कोई मर्द नहीं मिला था माँ आज तुम्हे पता चलेगा"

"हाँ राज्ज्जाआअह आह कमला सही कहती थी मेरे जैसे भरी भरकम स्त्री क लये कोई तगड़ा मर्द हे चाहिए जो अंग अंग निचोड़ दे जैसे तुम निचोड़ रहे है"

बलदेव देवरानी को पटक देता है बिस्तर पर

"देवरानी अभी तुम्हे पता चल जायेगा ये तुम्हारा बीटा चूहा है या शेर"

लिटा कर बलदेव अपना खड़ा लौड़ा देवरानी क बड़े मम्मो क बीच रख देता है और आगे पीक्जए कर पेलने लगता है

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"ये लो मेरी रानी इसे अपने बड़े दूध में बहुत कूदते है ये न ये"

"ाः बीटा यह"

"अपना मुँह खोल मेरी रानी"

देवरानी अपना मुँह खोलती है

बलदेव एक दो घस्से दोनों पपीता क बीच लगता है

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और फिर बलदेव अपना भरी हुल्लाबी लौड़ा देवरानी क खुल्ले मुँह में भर्र देता है

"ये ले चूस"

"उन्ह अम्मम्म आआह ुहममम"

देवरानी चस्का ले कर चूसने लगती है

बलदेव का लौड़ा हल्का पानी छोर रहा था जिसे देवरानी चाट जाती है बलदेव अब सीधा लेट जाता है और देवरानी बैठ कर फिर से बलदेव का लौड़ा पकड़ लेती है

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देवरानी बलदेव क लौड़ा को पकड़ क ऊपर निचे करते हुए मुठ लगाने लगती है

"ाः माँ ऐसे हे"

"बीटा मुझे यक़ीन नहीं होता इतना बड़ा हो सकता है ये "

"आह आ माँ ऐसे हे हिलाओ "

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देवरानी झुक कर "चाप "से मुँह में अपने बेटे का पूरा लौड़ा भर लेती है और चूसने लगती है"

"आआह माआ जीभ से छतो हआ ाः ऐसे हे"

बलदेव अब उठ ता है फिर से देवरानी को सीधा लिटा क छूट को देख कर

"माँ ये वही छूट है जिसके सपनो ने मेरे कई रात ख़राब कए है"

"ाः तो देख ले जितना देखना है"

"सिर्फ देखूंगा नहीं"

बलदेव अपनी बीच की ऊँगली छूट में दाल देता है

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"ाः राजा हे भगवन देवरानी अपना आँख बंद कर लेती है और बलदेव ऊँगली आगे पीछे करने लगता है थोड़े देर ऊँगली करते हुए बलदेव निचे झुक कर देवरानी क छूट क डेन को चाट ता है और दो ऊँगली छूट में घुसा देता है

l"aaaah राजा आआह हे भग्वाआं"

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बलदेव देवरानी क छूट में अपना जीभ से देवरानी क छूट को खुरच रहा था देवरानी क छूट पानी छोड़ने लगती है

देवरानी को बलदेव खींचता है और अपना लौड़ा हाथ में ले कर देवरानी क छूट पर लगता है और अपने लैंड से छूट क चारो ओरे सहलाता है

देवरानी आँख बंद कए पड़ी थी

Devrani:man me)Bhagwan बचा लेना

"रानी माँ दाल दू"

"हाँ राजा"

"देवरानी आखे तो खोलो मेरी जान"

"नहीं में नहीं देख सकती "

"कुछ नहीं होगा रानी डरो

मत नहीं तो में नहीं करूँगा "

देवरानी ये सुनते हे अपने आखे खोल देती है

"राजा बीटा न तड़पाओ करो

न"

"क्या करू माँ"

"अहह राजा जिसका तुम दिन रत सपना देखे वो करो मुझे पूरी तरह से अपनी पत्नी बना लो"

"क्या करू महारानी देवरानी"

"कमीने ..तो सुनो अपना लिंग मेरे योनि में प्रवेश करो देवरानी को ये चाहिए"

"माँ मुझे आपके शब्दों का अर्थ समझ नहीं आया"

"राजा बीटा अपने माँ को पत्नी बना लो अपना मोटा लौड़ा मेरे छूट में डालो"

ये कहते हुए देवरानी अपना हाथ ले जा कर

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लौड़ा अपने हाथो से पकड़ कर अपने छूट क मुहमे पैर रख लेती है और अपनी आखे बंद कए प्राथना करने लगती है

बलदेव मुस्कुरा कर अपने मच पर हाथ फेरता है और देवरानी क संगमरमरी शरीर को ऊपर से निचे तक देख कर एक ज़ोरदार धक्का मारता है

""खच्हहहह" की आवाज़ से लौड़ा देवरानी क छूट में घुस जाता है और देवरानी

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Baldev:aaah मा

बलदेव भी आखे बंद कर लेता है

Devrani:aaaaaaaaaah हाय में मर्डर गयी

देवरानी की पनियाई छूट में खच से लौड़ा घुस जाता है

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बलदेव आँख बंद कए था और देवरानी भी आँख बंद कए चिल्लाये जा रही थी

बलदेव बिना देखे धक्के मार रहा था

Devrani:nikaaaaaaalo nikaaaaaaaaaalo

ये आवाज़ इतने ज़ोर से थी क राजपाल सुन कर अपना सर परकने लगता है और उसके आखो में ासु आजाते है

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बलदेव अपनी आखे खोलता है तो देखता है क देवरानी क छूट से खून बह रहा है

देवरानी अपना पेअर बलदेव क सीने पर रख

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धक्का देती है और खुद पीछे हो जाती है

"पछ की आवाज़ से छूट से लौड़ा निकल जाता है जैसे बोतल का ढक्कन खुला हो

देवरानी दर्द से कहर रही थी उसके आखो में ासु थे

बलदेव झट से पास पड़ा कपडा उठाया और पहले अपने लौड़े पे लगा खून साफ़ किया फिर अपने माँ क पास जा कर उसका छूट साफ़ कर क अपने माँ को बहो में ले कर उसके ऊपर आजाता है

"माँ इतने सालो बाद ले रही हो थोड़ा तो दुखेगा"

देवरानी क होठो को चूमते हुए देवरानी क कण में जा कर

"रानी माँ आज न कल तो लेना हे है आपको आपने कभी इतना बड़ा नहीं लिया और ऊपर से 17 18 बरस बाद आप सम्भोग कर रही हो"

देवरानी हिम्मत कर क बलदेव क पीठ पर हाथ फेरते हु

"मुझे क्षमा कर दो राजा ये तो

मेरा पत्नी धर्म है और इस दिन क लये तो में सालो से तदपि हु पीछे कैसे हैट सकती हु"

बलदेव देवरानी क बल को पीछे करते हुए

"मेरी रानी सिर्फ एक बार जगह बन जाने दो कई बरसो का वीरान है ये जगह इसे हरा भरा करने क लये थोड़ी ज़्यादा म्हणत करनी है हम दोनों को हे"

"आह मेरे राजा आजा छोड़ अपनी माँ अचे से"

अपने माँ का जोश देख कर बलदेव फिर से अपने लौड़ा को छूट क मुहाने पर लगता है और धीरे से छूट क गहराई में डालता है

Devrani:aaah ुहममम

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क होठ को अपने होठ ले कर चुस्त है और एक हाथ से देवरानी क भरी मम्मी को पकड़ कर मसलता है

देवरानी दर्द को सहते हुए अपना हाथ बलदेव क कमर में लपेट लेती है और अपने पैरो को मोड़ कर बलदेव क पेअर में फसा लेती है

बलदेव आधा लौड़ा अंदर दाल दया था थोड़े देर रुकने क बाद जैसे हे देखता है देवरानी अब धीरे धीरे सांस ले रही है वो एक दो और तगड़ा झटका मारता है और देवरानी क मुँह से सिर्फ "ुज्म्म अआप" की आवाज़ आती है और बलदेव फिर से उसके होठ चूसने लगता है देवरानी की छूट अब बलदेव क

पुरे लौड़े को जातक गयी थी

Baldev:man me)abhi निर्दयी नहीं हुआ तो साली जल्दी हाथ नहीं आने वाली

और ज़ोर ज़ोर से झटके मरने लगता है बलदेव का लौड़ा देवरानी क छूट से निकलते खून और उसके छूट क पानी से भीग रहा था

देवरानी की हर चीख घुट कर रह जा रही थी देवरानी को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई उसके पेट में भला घुसा रहा है उसके आखो से ासु दोनों तरफ बह रहे थे और बलदेव अपने धक्को में कोई कमी नहीं करता और लगातार छोड़ते रहता है कुछ 10 मिंट बाद देवरानी को अब उतना दर्द नहीं हो रहा था और वो सामान रूप से लौड़े क झटके को महसूस कर क मज़े लेने लगती है बलदेव समझते हे उसके होठो को छोर दोनों हाथो से उसके बड़े दूध को

मसलते हुए धक्के लगता है

देवरानी बलदेव को धक्के लगते हुए देकते हुए

"आखिर आपने किले पर कब्ज़ा कर हे लिया"

"महारानी किले पैर हे कब्ज़ा किया है अभी तो खज़ाना लूटना बाकी है"

ये कह कर बलदेव अपना एक हाथ देवरानी क गांड पर मरता है

"अहह नहीं राजा वो ख़ज़ाने क आस पास भी नहीं भटका है कोई लूटने की सोचना भी मत"

बलदेव धक्के पे धक्के लगा रहा था

"मेरी पत्नी हो महारानी अब किला भी हमारा और खज़ाना भी"

"आआह यह जान ले लोगे मेरी"

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बलदेव ये सुन कर देवरानी क ऊपर झुक जाता है और देवरानी क होठ को चूसते हुए

"जान तुम्हारी गयी तो में कहा ज़िंदा रहूँगा मेरी प्रेमिका मेरी माँ मेरी धरम पत्नी सब कुछ तो तुम हो "

फच्च फच्च की आवाज़ पुरे कक्षा में गूंज रही थी उसके साथ हे देवरानी की चुडिओ की खनक और पायल की छनक से पूरा माहौल मादक बना था

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"ाः मा मई मर्डर गयी ऐसे हे छोड़ो आह इतना बड़ा है तुम्हारा लिंग तुम्हारे पिता राजा राजपाल तो नपुंसक थे ाः"

"राजपाल का धन्यवाद् जिसके गलती क वजह से मुझे ऐसी छूट मिली"

"आज मुझे इतना मोटा और बड़ा लिंग आह मेरा जीवन सफल हो गया राजा ाः ऐसे हे"

"इतने ज़ोर क धक्के मार रहे हो राजा बीटा लग रहा है मेरे पेट में योनि में लिंग नहीं तलवार दाल रहो आआह उम्म्म मेरे राजा आअज सही मानव मेरा सुहागरात है आह"

घपपप घपपपप घपपप की आआज़ पुरे कक्षा में

गूँज रहा था

"रानी माँ मेरी पत्नी तुम्हारी जैसी माल को पाना हे मेरा लक्ष्य था बहुत तड़पाया तुमने ये लो"

पछ पहच की आवाज़ बलदेव पूरी ताक़त से धक्के लगा रहा था

"हाय मर्डर गयी में हे भगवाना

आआह आह ू ाआअह ोू ाः"

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"ये ले मेरा मुसल अपने छूट में मेरी रानी अब तो पंडित जी ने भी कह दया है दूधो नहाओ पुतो फलो तुझे तो में चूड चूड क हर साल बचे पैदा करूँगा "

"आह में कोई गई नहीं जो हर साल दू आआह बचे ओह आआह ऐसे हे"

"तुम मेरी रांड हो आह "

"हाँ क्यू नहीं कहोगे वैश्यों क पास तो गए थे पारस में आह रेशमा क पास आहे हाँ"

फच्च फच्च घप्प घप्प है से बलदेव पेले जा रहा था

"मेरी रानी तुम्हे बहुत बुरा लगा था मई कोठे पे गया था तो आह इस ले"

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Devrani:Mere राजा में अब तुम्हारी पत्नी हु इतना प्यार हे दूंगी तुम किसी और को देखोगे भी नहीं

ये कह कर बलदेव को लिटा देती है और खुद अपने पेअर दोनों तरफ कर क बैठ जाती है और कूदने लगते है

"ाः मेरे राजा में अपने पति अपने बीटा क लये एक वैश्य की तरह भी छुड़वा लुंगी पर अपने पति को कभी कही और मुँह नहीं मरने दूंगी"

थप ठप्प ठप्प की आवाज़ गूंज रही थी

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देवरानी अपने भरी भरकम गांड लिए ऊपर निचे हो रही थी बलदेव का लैंड देवरानी क छूट क जड़ तक ैथ कर अंदर बहार हो रहा था देवरानी दर्द और मज़े में आखे बंद कए सिसकने लगी

"ाः राजा आआह में गयी आआह नहीं aaaaaaaaaaaaaaah ओह्ह"

बलदेव देवरानी का कमर पकड़ कर ज़ोर से धक्का देता है दो तीन और देवरानी क छूट रस का फव्वारा निकल अत है

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देवरानी कड़ी हो कर अपने छूट पर हाथ फेरते हुए

"आआआआह बीटा हे भगवन न जाने कितने वर्षो बाद ऐसे झड़ी हु ाः मज़ा आज्ञा "

बलदेव देवरानी को कमर से पकड़ता है

"देवरानी इधर आ मेरी माँ मेरा नहीं हुआ अभी"

घपपप कर क्र झुका क देवरानी क छूट में लैंड पेल देता है

"ाआअह राजा धीरे से नहीं दाल सकते क्या"

बलदेव अपने माँ का दोनों हाथो को

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पीछे कहीके पकड़ कर तगड़े झटके मारने लगते है

"अब बोलो रानी माँ कौन शेर है"

"ाआअह आआह आए नही ाः"

"ये ले मेरी रानी और ले"

"ाः ना हआ उम्म्म आआआह ओह्ह उफ़ राजा बीटा आआआह"

देवरानी को जझुका कर बलदेव झटके पे झटके मार रहा था ज़ोरदार झटको को देवरानी सह नहीं पति और उसके आखो में फिर से ासु आजाते है

"आआह माँ अब इधर आओ ाः मेरी पत्नी हमारा पहला सम्भोह हम दोनों को याद रहेगा जीवन भर"



बलदेव देवरानी को अपने गॉड में बिठा लेता है और हलके धक्के मरते हुए झड़ने लगता है

"मेरी रानी माँ आपके छूट में जादू है ाः आए यह"



बलदेव आँख बंद कए झाड़ रहा था देवरानी अपना छूट धीरे धीरे बलदेव क लैंड पर ऊपर निचे कर क घिस रही थी

"आह राजा"

"आह माँ रानी"

बलदेव और देवरानी दोनों एक दूसरे बहो

में ले लेते है और मुस्कुराते हुए

"कैसा लगा हमारा पहला मिलान माँ

आज तुम्हे में पत्नी क रूप में

प् कर में धन्य हो गया"



"अति सुखमयी अति आनंदमयी मेरी आत्मा संतुष्ट हो गयी मेरे पति देव आप ज़रूर पिछले जनम में मेरे पति रहे होंगे और इस जनम में बेटे क रूप में आये हो"

"देवरानी मेरी पत्नी"

बलदेव अपना लैंड अभी भी देवरानी क छूट डेल रखा था और दोनों एक दूसरे को अपने अंदर महसूस करते है..

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 92

"अति सुखमयी अति आनंदमयी मेरी आत्मा संतुष्ट हो गयी मेरे पति देव आप ज़रूर पिछले जनम में मेरे पति रहे होंगे और इस जनम में बेटे क रूप में आये हो"

"देवरानी मेरी पत्नी"

बलदेव अपना लैंड अभी भी देवरानी क छूट डेल रखा था और दोनों एक दूसरे को अपने अंदर महसूस करते है

बलदेव देवरानी को अपने गॉड में बिठाया था और अपना लैंड हलके से धक्के मार रहा था जवाब में देवरानी भी ऊपर निचे हो कर अपने बेटे क लौड़े से खेल रही थी और लौड़े का पानी झाड़ रहा था

देवरानी देखती है निचे छूट से पानी बह रहा है वो बलदेव को बहो में जकड लेती है और पीठ क बल लेट जाती है

"आह माँ "

"आजा बीटा मेरे ऊपर तेरा एक बून्द भी निचे नहीं गिरने दे"

बलदेव अपना लौड़ा पड़ा जड़ तक छूट में तेल देता है और देवरानी क मुँह से हिचकी निकलती है

"क्या हुआ माँ ठीक तो हो न"

"हाँ बीटा ठीक हु वो तुम्हारा इतना बड़ा है हे क पूरा अंदर जाते हे ऐसा लगता है किसी ने पेट में भला मार दया हो"

"रानी माँ आपकी छूट भी बहुत कासी है अभी जैसे जैसे ढीली होगी आप आसानी से लेने लगोगी मेरा लौड़ा"

"ुहम्म यह मेरी पूरी योनि भर्र गयी है पानी से ऐसा लग रहा है बढ़ आगया है मेरे अंदर"

"हाँ ये मेरा पहला सम्भोग था इसलिए पानी गिरना हे था इतना इतने बंजर ज़मीन को हरा भरा करने क लये ये तो ज़रूरी था"

"हाँ ऐसा लग रहा है जैसे बरसो बाद वर्षा ऋतु आई है"

"तुम्हे हर रात में ऐसे हे भीगना चाहता हु माँ "

बलदेव ये कह कर देवरानी क भरी भरकम बदन पर पूरा लेट जाता है और देवरानी क गले को चूमने लगता है

"यह ाः बीटा मुझे विश्वास नहीं होता मुझे इतना प्यार करने वाला पति मिल गया मेरा रोम रोम मस्ती में अंगड़ाई ले रहा है शरीर का अंग अंग ऐसे टूट रहा है जैसे में पहली बार सम्भोग की हु"

बलदेव का लौड़ा अब देवरानी क छूट में ढीला हो जाता है पर देवरानी क छूट की गर्मी झड़े हुए लौड़े को भी हल्का कड़ा रखती है बलदेव का लौड़ा मुरझाने क बाद भी 6 इंच का था और अपने मोटाई से अभी भी छूट में फसा हुआ था

"माँ अब झाड़ गया पूरा में"

"हाँ बीटा तुम्हारा वो भी छोटा हो गया"

"माँ फिर से बड़ा हो जायेगा अपने असले पति को प्यार करो मेरे लौड़े को"

देवरानी मुस्कुराते हुए अपने छूट क दोनों मुहाने को दबाते है जिस से बलदेव का लौड़ा डब्ब जाता है

"ाः माँ छूट में दम्म है तुम्हारे"

"हट इसलिए तुमने पहले बार में हे इसके मरम्मत कर दी"

"अभी कहा कुछ क्या हुआ मेरी धर्म पत्नी देवरानी अभी तो पूरी रात बाकी है"

"कितना समय होगया पिछले एक घंटे से तो मेरे ऊपर चढ़े हुए हो मन नहीं भरा"

"रानी माँ अभी तो 8 हे बजे है"

"पता हे नहीं चला 2 घंटे निकल गए"

"हाँ माँ और आप जैसी पत्नी से भला मन भर सकता है अगर आप का मन भर गया तो बोलो"

देवरानी बलदेव क सर पर हाथ फेरते हुए

"अले ले मेरा राजा बीटा बुरा मन गया में इतने बरसो की प्यासी हु तुम्हे तो पता है न"

और बलदेव को पकड़ कर बलदेव क कान को चूमने लगती है और गले पर अपने गुलाबी होठो से चूमने लगती है

बलदेव देवरानी क दोनों हाथो को जकड कर

"वो तो मुझे पता है इतनी मज़बूत माल इतने जल्दी संतुष्ट नहीं हो सकती तुम्हारे आग को बुझाने क लये दिन रात तुम्हे पेलना होगा माँ"

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क होठो को जकड लेता है अपने होठो में चूसने लगता है

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"गलप्प्प गलप्प्प गलप्प्प गलप्प सलरपपप गलप्प्प गलप्प्प सलरपपप गलप्प सलरपपप गलप्प गलप्प सलरपपप "

Devrani:uhm ाः राजा ाः

बलदेव देवरानी को बाहो में भर कर डॉचते हुए अपने माँ क भरी ममो को अपने हाथो से दबोचते हुए खूब ज़ोर से मसलने लगता है

Devrani:uh अअअअअअ यह राजा

बलदेव अब देवरानी क पीठ क पीछे हाथ लगा कर देवरानी को पलट देता है और खुद निचे आजाता है और ऐसे करते हुए बलदेव इस बात का ध्यान रखता है क उसका लैंड देवरानी क छूट से नहीं निकले देवरानी की चुड़िआ ज़ोर से खनक रही थी और पायल चम् चम् बज रही थी उसके मेहँदी लगे हाथ पेअर में

Devrani:aah आह आराम से

"कितनी भरी हो माँ तुम"

"तो तुम कौन हलके हो कब से मेरे ऊपर पड़े थे "

ये सुन कर बलदेव है देता है

और आगे बढ़ कर देवरानी क दोनों गांड पर हाथ रख कर सहलाता है और देवरानी को अपना सात ऊपर करने करता है फिर उसके दूध को अपने मुँह में भर लेता है

Devrani:aaah

बलदेव देवरानी क बाये दूध को अपने दाहिने हाथ से पकडे चूस रहा था अब वो पूरा घुंडी को अपने मुँह में ले कर चुस्त है अचानक से बलदेव अपने दांत से देवरानी क बड़े मम्मी की घुंडी जो हलके गुलाबी रंग की थी दन्त में दबा देता है

"ाआअह उफ़ ना करो"

देवरानी अपना हाथ से अपना चुकी पकड़ लेती है दर्द से

"खा जाओ काटो मत रोज़ तुम्हे चाहिए तो"

Baldev:uhmm ाह्ममम

Devrani:ah आह ऐसे हे चुसो

देवरानी बलदेव को बेतहाशा चूमने लगती है और बलदेव अब देवरानी क दोनों मम्मो को बारी बारी से चूसने लगता है

"ाः राजा आराम सी आठ"

देवरानी अपने बेटे क सर को सहलरहि थी और बीच बीच में अपना छूट पर ज़ोर देती जिसका असर देवरानी क छूट में फसे बलदेव क लौड़े पैर हो रहा था और दोनों फिर से गरम होने लगते है देवरानी का फिर से अपने छूट की गर्मी से आखे बंद होने लगती है और उसके जिस्म से आग क शोले बाधक उठते है बलदेव भी अब गरम हो चूका और उसका लौड़ा धीरे धीरे अब विकराल रूप ले कर फिर पूरी तरह खड़ा हो कर देवरानी बचे दानी तक पहुंच जा रहा था

"राजा बीटा अपना वो अंदर हे दाल कर रखोगे क्या "

"अहह रानी मेरा लौड़ा आज रात भर तेरे छूट में हे रहेगा "

बलदेव अपने ऊपर लेती देवरानी क चुतर पर थप्पड़ मरता है और भरी तरबूज़े से गोआल चुतर पर बलदेव क लोहे से हाथ पड़ते हे कक्षा में "खट्ट खट्ट" की आवाज़ आती है जैसे कोई लोहा पीट रहा हो

"उठो माँ"

बलदेव सीधा होते हुए अपने माँ को उठा ता है और देवरानी जैसे हे ऊपर होती बलदेव का लैंड धीरे धीरे देवरानी क छूट से फस्स क बहार निकल रहा था बलदेव का लैंड का पानी सुख चूका था और बलदेव क लैंड पर हलके खून क धब्बे भी थी जिसे देवरानी देख डर जाती है

"हे भगवन कितना खौफनाक लग रहा है ये ऐसा लग रहा है जैसे लिंग न हो युधा में लड़ी तलवार हो खून से सनी हुई"

"रानी माँ इसी तलवार से तो आपके छूट पैर फ़तेह पाया हु में अगर ये इतना बड़ा नहीं होता तो शायद तुम भी मुझे नहीं अपनाती"

देवरानी उठ टी है बलदेव का टोपा अब भी देवरानी क छूट में था देवरानी उठने की कोशिश कर रही थी पर बलदेव क लैंड का टोपा देवरानी क छूट क मुहाने से बड़ा था जो दोनों क काम रस से भीग कर देवरानी क छूट में चिपक गया था

"बलदेव खींचो इसे फस्स गया है"

बलदेव को शरारत सूझती है

"किसे खीचू माँ"

"अपने हुल्लाबी लौड़े को खींचे मेरे छूट से चिपक गया है जैसे क जीवन भर यही रहना है"

"ओह माँ तो बेचारे का घर तो वही है तो रहेगा कहा "

ये कहते हुए बलदेव देवरानी जो बलदेव क ऊपर थी और उठ रही थी उसके जांघो को पकड़ कर अपना लौड़ा देवरानी क छूट में धकेलता है

"आआह्ह"

"निकलना है अंदर मत डालो"

Baldev:Oh

करता है जैसे जे देवरानी क छूट में चिपका उसका सुपर अंदर खिसकता है

बलदेव फिर लौड़ा अपना बहार की ओरे खींचता है "pakkk"ki आवाज़ से लौड़ा देवरानी क छूट से बहार निकलता है

देवरानी बलदेव क बगल में बैठ कर बलदेव क लौड़े को ऊपर से निचे तक देखने लगती है और उसके रूप को देख उसके लम्बाई और चौड़ाई को देख अपने आखो से नापने की कोशिश कर रही थी

Devrani:man me)Itna बड़ा लौड़ा भी मनुष्य को होता है क्या इतना मोटा इतना लम्बा लौड़ा मेरे अंदर था तकलीफ तो होनी हे थी

"माँ क्या सोच रही हो मुँह में लो न"

"चल हट देख मेरे इस मुनिया का क्या क्या हाल क्या है"

देवरानी अपने छूट पे इशारे करते हुए कहती हैं

बलदेव देखता है देवरानी क छूट लाल हो गयी थी और उसमे से हलके पानी जो हल्का खून लगने से लाल हो चुके थे उसके छूट क कोने से रिसाव हो रहा था

"माँ क्या सुन्दर लग रही है ये "

"हाँ इसके सुन्दर बनाने का श्रेया आपको हे जाता है हहह"

तुनक कर पलंग से उतरती है और फिर से वही कपडा उठा कर अपना छूट साफ़ करने लगती है और ये सब बलदेव बड़े चाव से देख रहा था

"माँ अपना तो साफ़ कर लय मेरा कौन करेगा"

"ठीक है"

एक मग़रूर हसीना की ऐडा से पलंग पर अपने हिलते दूध क साथ बैठ जाती है और खड़े लैंड को कपडे से साफ़ करने लगती है

"रानी माँ ये दृश्य कितना ाचा है आप मेरी पत्नी हो और जिस लौड़े ने आपकी छूट क पर्चे उतर दिए उसको आप साफ़ कर रही हो फिर से छोड़ने क लये"

देवरानी एक क़ातिल मुस्कान देते हुए

"अब हथियार मेरा है तो इसकी साफ़ सफाई भी तो मुझे हे करनी है"

"माँ तुम्हारे ये हाथो चुडिओ की खनक से मेरे डिल में एक अलग हे जोश आरहा है"

देवरानी लौड़ा साफ़ कर क कपडे को फिर मेज़ पैर ले जा कर रख देती है और जग गिलास ला कर

"बोलिये पति देव दूध पिएंगे या पानी"

"देवरानी आपके छूट का पानी पीना है"

"धत्त बोलो न"

"पहले दूध दो फिर पानी पीऊंगा"

देवरानी एक गिलास दूध देती है बलदेव को फिर एक गिलास पानी पीला कर खुद एक गिलास पानी पीती है

"माँ आपको प्यास लगी थी तो आप पहले पी लेते मुझे बाद में देते"

"राजा मेरा पत्नी धर्म है पहले आपकी सेवा फिर बाद में हे कुछ और "

"आज से हे पतिव्रता पत्नी बन गयी माँ"

"आज से नहीं बानगी तो मेरा ये शेर कही और गुफा न देख ले"

ये कह कर देवरानी बलदेव क लौड़े को अपने हाथो के कास लेती है और पलंग पर चढ़ती है अपने पायल को खनकते हुए फिर अपने हाथो से बलदेव को लौड़े को ऊपर से निचे देखते हुए हिलने लगती है और उसके चुड़िआ खान खान की मधुर संगीत पुरे कक्षा में गूंजने लगती है

"ाः माँ "

"बड़ा कठोर है रे ये"

"माँ मुँह में लो न"

देवरानी अपने पति का बात मानते हुए निचे झुक कर पहले बलदेव क सुपर को मुँह में भर लेती है और अपने होठ गोआल कर क रस्सगुल्ले की तरह चुस्ती है

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Devrani:umm ाम्म्म यह उम्म्म्म

गलप्प्प गलप्प्प गलप्प्प गलप्प्प गलपपपप

Baldev:ahh माँ आआह ओह्ह्ह ऐसे

Devrani:galppp हालप्प हम्म्म्म उम्म्म्मममहह हम्म्म गलप्प

गलपपपपप गलप्प गलप्प्प

देवरानी पूरा झुक जाती है और बलदेव क पुरे लौड़े को लेने की कोशिश करती है पर बलदेव का आधा लौड़ा हे देवरानी क मुँह में समां नहीं प् रहा था

Baldev:ahmmmahmmm आआआआह देवरानी

बलदेव का लौड़ा लोहे की तरह देवरानी क लैंड चूसै से गरम और कड़क हो जाता है बलदेव देवदानी क सर पर हाथ फेरने लगता है और जोश में आकर देवरानी क सर को दोनों हाथ में पकड़ कर एक ज़ोर का धक्का मरता है और अपना पूरा लौड़ा देवरानी क मुँह में दाल देता है

devrani:aahh अहह यह

देवरानी क हलक में बलदेव का टोपा जा कर फास जाता है और देवरानी छह क भी कुछ बोल नहीं प् रही थी वो अपना हाथ बलदेव को इशारा करते हुए कहती है निकलने क लये

बलदेव देवरानी को देखता है देवरानी क मुँह से लार टपक रहा था और उसके आखे ऊपर हो गई थी और ासु भर गए थे

बलदेव आगे बढ़ कर "aaaah"karta है देवरानी क सर पर हाथ रख कर सहलाते हुए लौड़ा धीरे धीरे पीछे खींचता है बलदेव का लौड़ा किसी भी तरह से देवरानी क हलक से निकल जाता है और देवरानी क मुँह में रुक जाता है

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क सर पर हाथ फेरते हुए

"चुसो फिर से देवरानी"

देवरानी बलदेव क मोठे लौड़े क जड़ को अपने हाथ में थामे फिर लौड़े को चूसने लगती है

कुछ देर लैंड चूसै क बाद बलदेव पलंग से निचे उतरता है और देवरानी को खींच कर पलंग क कोने पैर लिटा देता है और खुद निचे खड़ा होजाता है बलदेव देवरानी क पैरो को फैलता है और दोनों टैंगो क बीच खड़ा हो कर

"रानी माँ तो आरम्भ करे आपकी चुदाई आपकी आज्ञा हो तो"

देवरानी की छूट भी रस से भीग रही थी और उसका शरीर भी तप रहा था

देवरानी ये सुन कर क उसका बीटा उससे छोड़ने की अनुमति ले रहा है वो बास मुस्कुरा देती है

बलदेव समझते हुए आगे बढ़ कर देवरानी क छूट पर अपने सुपर को रगड़ता है देवरानी आखे बंद कर लेती है बलदेव हल्का सा टोपा छूट पैर अंदर करता है

देवरानी आगे वाले पल क इंतज़ार में अपने हाथ पेअर कड़ा कर लेती है

"माँ आराम से रहो न इतना कड़ा हो जाओगी तो आपको अंदर लेना और मुश्किल हो जायेगा "

"माँ अपना बदन ढीला रखो"

देवरानी अपना बदन ढीला करती है

बलदेव अपने हाथ में हल्का थूक लगा लेता है और अपने सुपडे पे माल्टा है और फिर निचे झुक कर हल्का थूक देवरानी क छूट क मुहाने पर माल्टा है

फिर बलदेव अपने लौड़े को पकड़ कर एक दो बार देवरानी क छूट पर मरता है जैसे छड़ी से मर रहा हो और अपना लौड़ा छूट क मुहाने पर रख हल्का धक्का देता हां

Devrani:aaah

Baldev:aaaah माँ अंदर कितना गरम है

बलदेव अंदर घुसाने लगता है और देखते देखते ाआधे से ज़्यादा लैंड छूट में प्रवेश कर चूका था

Devrani:aaii राजा मार डाई रे

Baldev:uff माँ तुम्हारी छूट भर्ती सी धड़क रही है गर्मी से

Devrani:aaah राजा तो बुझा दे न ये आग

बलदेव अपना कमर पीछे लेता है और एक ज़ोरदार झटका मारता है

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devrani:aaaaaaaaaaah राजा

ज़ोर से चीखती है

बलदेव अब एक और झटका मारता है और देवरानी फिर से चीख मारती है अब बलदेव झटके पे झटके मरने लगता है बिना देवरानी क चीखो की परवाह कए पुरे कक्षा में पांच पछ की आवाज़ गूंज रही थी देवरानी की चीखो क साथ उसकी चुडिओ और पायल की आवाज़ एक मधुर संगीत का निर्माण कर रही थी

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बलदेव तीर की तेज़ी से अपने लौड़े को आगे पीछे कर रहा था और देवरानी क गीली छूट में जैसे लौड़ा अंदर बहार जाता "पछ pachh"ki आवाज़ गूंजती और साथ हे बलदेव का जांघ जैसे देवरानी क गांड पर लगता

"फट फट "आवाज़ आरही थी

Baldev:ahh माँ क्या कासी छूट है

Devrani:uhh आह और ज़ोर से ाः बीटा

Baldev:ye ले आह यह अम्म्म

बलदेव "घप्प घप्प घप्प "

पेले जा रहा था देवरानी

बलदेव देवरानी क दोनों पैरो को खींचता है और दोनों टैंगो को उठा देता है जिस से देवरानी की छूट ऊपर हो जाती है अब बलदेव खूब ज़ोर से पेलने लगता है और पछ पछ फ़हच फच देवरानी चुद रही थी आवाज़ इतने ज़ोर की थी क अगर महल क पहले मंज़िल पैर अगर कोई होता तो वो साफ़ साफ़ सुन पता क कोई किसी को छोड़ रहा है पर सब निचे रहते थे सिर्फ बलदेव हे ऊपर रहता था पर एक और व्यक्ति था जो ये सब चीखे सुन रहा था वो था बलदेव का बाप राजपाल जिसको बलदेव ने खुद जान बुझ कर अपने कक्षा क बगल में बंधवाया था सोमनाथ दुवारा

कुछ देर खड़े खड़े पेलने क बाद बलदेव क घुटने दुखने लगते है और देवरानी भी अपना पेअर दोनों उठाये हुए थक जाती है

"आजाओ माँ"

बलदेव पास रखे सोफे पैर बैठ जाता है और अपना लौड़ा सहलाते हुए पलंग पर लेती अपनी माँ को बुलाता है

देवरानी देखती है इस बार उसके छूट से बड़े आसानी से लौड़ा निकल गया देवरानी आकर अपने बेटे क पास आकर उसके लौड़े को डेक्टि है

"माँ आओ अब इस्पे बैठो"

देवरानी मुस्कुराते हुए बैठने लगती है और बलदेव का लैंड अपने हाथ में लिए हुए धीरे धीरे अपने छूट को निचे करती है

"बैठो माँ"

देवरानी लौड़े क टोपे को अपने छूट क मुहाने पर हल्का बैठती है और लौड़ा "पछ "से अंदर घुसता है

देवरानी आँख बंद कर लेती

देवरानी अब दोनों हाथ अपने घुटनो पर रख निचे बैठने लगती है

Devrani:uh आआह हम्म

देखते हे देखते पूरा लौड़ा देवरानी क छूट में घुस जाता है

"माँ आखे खोलो न पूरा चला गया "

देवरानी आखे खोल कर देखती है तो शर्मा जाती है

"माँ तुमने बहुत जल्दी ले लिया पूरा कला तो है आपमें"

"चुप कर कमीने"

लज्जित होते हुए कहती है

बलदेव अब निचे से धक्का मारता है

"माँ अब ऊपर निचे हो"

देवरानी ऊपर निचे होने लगती है और बलदेव लैंड तीर की गति से अंदर बहार हो रहा था देवरानी क छूट में

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Baldev:aah माँ

Devrani:ahh यह ाः यह

"घप्प घप्प घप्प"

देवरानी ऊपर निचे हो रही थी और लैंड लिए जा रही थी

"माँ तुम ये कहा से सीखी ाः ऐसे हे उछलो आह ऐसे हे लो मेरा लैंड"

"आह बीटा तुम्हारा लिंग मेरे योनि को चीयर रहा है"

देवरानी कुछ देर ऐसे हे ऊपर निचे होते हुए थक कर धीरे हो जाती जिसे बलदेव समझ जाता है और उठ कर देवरानी को घूमता है और अपने बाहो में भर्र कर गॉड में उठा लेता है और अपना लौड़ा देवरानी क छूट में दाल देता है खड़े खड़े

Devrani:uhh आह राजा गिर जाउंगी

Baldev:Devrani तुम बलदेव क बहो में हो गिरने नहीं दूंगा

बलदेव देवरानी क जांघो को पकड़ कर उठा ता है और निचे से एक और धक्का लगता है

देवदानी बलदेव क गर्दन में अपने बाहे फसाये थी

Baldev:tum उस कमा सूत्र क पुष्तक में देखती थी न ये आसान जिसमे एक पुरुष खड़े खड़े छोड़ता है स्त्री को गॉड में उठाये

Devrani:aah है राजा उसमे एक चित्र भी tha,mujhe क्या पता था ऐसा सच में हो सकता है

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Baldev:khud देख लो

बलदेव देवरानी को उठाये आईने क सामने ले जाता है देवरानी अपना सर घुमा कर देखती है तो पति है बलदेव का लैंड उसके पुरे छूट में घुसा है और उसका भारी गांड लैंड पर टिका है जैसे देवरानी लैंड पर बैठी हो

देखते हे देवरानी अपना सर वापस बलदेव की ओरे मोड़ लेती है और शर्मा क अपना सर बलदेव क कंधे से छुपा लेती है

बलदेव देवरानी को पकड़ कर अपना तरफ खींचता और उसके छूट में लौड़ा पूरा चला जाता फिर देवरानी क जांघ पकडे हुए गांड को उठता फिर लैंड पर लता

देवरानी आँख बंद किये सिसकी ले रही थी बलदेव अब यही प्रकिर्या तेज़ी से करने लगा और देवरानी को उठा उठा क छोड़ने लगा

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Devrani:aaaah आए आआए माआ ाः हे भगवान्

"घप्प घप्प घप्प"

Baldev:ye ले आह ये ले माँ

है"

देवरानी बलदेव क गले पैर चूमने लगती है बलदेव ज़ोर से धक्के मरने लगता है देवरानी को खड़े खड़े पेल रहा था देवरानी बलदेव क गले को अपने होठो से चूसने लगती है और आखे बंद कए अपने हाथो से बलदेव क पीठ पर अपने नाख़ून से छील रही थी पर बलदेव बिना परवाह किये देवरानी को पेले जा रहा था

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कुछ देर खड़े खड़े पेलने क बाद बलदेव देवरानी को ले कर फिर से बिस्तर पर आजाता है और बिस्तर पर पटक कर देवरानी क पीछे आजाता है और लौड़े को पीछे से एक तंग उठा कर देवरानी को लेते लेते हे पेलने लगता है

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"ाः राजा धीरे"

"घप्प घप्प घप्प कर क बलदेव फिर से लौड़ा अंदर बहार हो रहा था और बलदेव एक तंग उठाये पेले जा रहा था अपनी माँ को"

बलदेब आगे बढ़ कर देवरानी क भरी मम्मी को हाथ में ले कर दबाता है और अपने होठ देवरानी क गर्दन पर रख कर चूमने चाटने लगता है

"ाआअह राजा यह ऐसे हे आह राजा "

"यह माँ तुम कितनी सुन्दर हो मेरी पत्नी"

"आह राजा मेरी सब सुंदरता सिर्फ तुम्हारे लिए"

बलदेव देवरानी क गले पर अपने दांत गाड़ने लगता है और और चाटने लगता है

और एक हाथ से भरी गांड को थप्पड़ मरता है "छत्त छत्त"

"आह राजा"

बलदेव अब देवरानी को पकड़ कर झुका देता है और खुद घुटने क बल बैठ पेलने लगता है

"आह राजा मई गयी"

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अभी दो तीन धक्के हे मारे थे क देवरानी की छूट पानी छोर देती है और गधा सफ़ेद पानी बलदेव क लौड़ा को भीगा देती है

Devrani:aah अहह राजा मेरा पति यह

अपने आखे बंद कए स्खलित हो जाती है

पर बलदेव जैसे देखता है क उसकी माँ स्खलित होगयी है वो और तेज़ धक्के मारने लगता है और छूट पानी पानी होने से लौड़ा और तेज़ी से अंदर बहार जाने लगता है

"आह आह राजा आआह आह आह"

है है घपद कर बलदेव पेले जा रहा था झुकी हुई देवरानी को देवरानी क छूट से रस गिर रहा था और बिस्तर को गीला कर रहा था

घप्प घप्प घप्प

पेले जा रहा था बलदेव

"ये ले मेरा लौड़ा तेरे छूट की सब खुली नहीं मिटा दी तो मेरा नाम बलदेव नहीं"

इधर रसोई में काम कर रही कमला की नज़र घडी पे जाती है 9 बज गए थे वो जल्दी से देवरानी और बलदेव का खाना थाली में रख सीडीओ से चढ़ कर बलदेव क कक्षा क पास पहुँचती है वैसे हे उसके कानो में

देवरानी की आवाज़ आती है

"ाः यह आआआह राजा यह और ज़ोर से ाः आह"

"ाः नहीं ाआअह वो मेरे राजा आह"

"फट फट पछ की आवाज़ गूंज रही थी

"ये ले देवरानी जी पत्नी जी"

Kamla:man me)Ye सुनते हे "हाय ये दोनों तो उफान पर है 6 बजे से कैसे बुलाऊ कही बुरा मन गए तो यहाँ तक मुझे ाआवाज़ आरही है तो अंदर बंधे हुए राजपाल भी सब सुन रहा होगा"

Kamla:man me)khair छोडो हमे क्या ये राजा रानी समझे हम देश से क्या लेना

कमला हिम्मत कर क

"महारानी"

"महारानी"

अंदर बलदेव देवरानी को झुकाये हुए पेले जा रहा था

"आह राजा आह नहीं धीरे यह"

"ये ले और ले मेरा लैंड"

Devrani:suniye न जी

Baldev:ghapp घप्प ये ले पेले जा रहा था

Devrani:suniye तो जी

Baldev:bolo देवरानी

Devrani:Kisi की आवाज़ आई

Kamla:Maharani जी

बलदेव रुक जाता है वैसे हे कमला की आवाज़ दोनों सुन लेते है

Baldev:kaun होगा

Devrani:aawaz तो कमला की लग रही hai..bhullakar तुमने हे तो उसे कहा था भोजन पहुंचने समय पर

बलदेव अपना लौड़ा झुकी हु देवरानी क छूट में रखे अपना कमर अब भी आगे पीछे कर रहा था

Devrani:ab जाओ और भोजन ले लो

Baldev:use कहा था बहार रख देना भोजन मेज़ पर

ये कह कर सत् से बलदेव अपना लौड़ा खींचता है और लौड़ा छूटा से बहार आता है जो अब भी खड़ा था

देवरानी देख कर

"गुस्से हो गए महाराज"

बलदेव क लौड़े को देख

"देवरानी में कैसे जाऊ तुम हे जाओ"

"हाँ तुम जाओ भी मत नहीं तो ऐसे हालत में तुम्हारे शेर को देख डर न जाये कमला"

और हस्ते हुए पास क मेज़ से कपडा उठाते हुए अपना छूट पोचतने लगती है

Kamla:Devrani

Devrani:Aaai कमला रुको

Devrani:aji क्या पह्नु

बलदेव चरण एक चादर उठा कर बिस्तर पर लेट जाता है और ओढ़ लेता है चादर पैर बलदेव का लौड़ा बीच खड़ा साफ़ दिख रहा था

"माँ में नहीं जनता कैसे जाओगी अब"

"बुद्धू करवट लेटो दरवाज़े से दिख जायेगा तुम्हारा शेर चादर में भी पूरा तना हु है"

देवरानी कुछ सोचते हुए एक सड़ी लपेट लेती है

"एहि पहन लेती हु कमला हे तो है कौन सा कोई मर्द है"

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देवरानी अपने लचकते हुए गांड को ले कर दरवाज़े पैर जाती है और बलदेव बड़े ध्यान से देख रहा होता है

देवरानी जा कर कुण्डी खोलती है तो सामने कमला को पति है

कमला देवरानी को ऊपर से निचे देखती है और देवरानी का हाल देख कर कोई अँधा भी कह सकता था क वो बहुत चूड़ी है उसके आखो क निचे हलके घेरे पद रहे थे पुरे चेहरे पर और गर्दन पर काटने क निशान थेमेहँदी लगायी और चूड़ी और पायल खनकती

देवरानी क दोनों भरी उरूज़ बिना ब्लाउज क साफ पता चल रहे थे वही हाल उसके गांड का था जो बिना पेटीकोट क था

देवरानी की चेहरा को देख

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"महारानी कब से बुला रही हु"

"हाँ वो आवज़ अभी सुनी में तुम्हारी"

"लगता है अपने नए पति क प्यार में ज़्यादा व्यस्त थी तो कुछ सुना नहीं"

"ऐसा नहीं hai..bolo न खाना ले हो न "

"बड़ी जल्दी है वापस जाने की महारानी"

देवरानी अंदर हे अंदर लज्जा जाती है पर

देवरानी बिना कुछ कहे उसके हाथ से थाली ले लेती है

Kamla:Jaise मैंने कहा था वैसे हे खातिर हो रही है न कोई कमी तो नहीं हुई ?

Devrani:us से कही ज़्यादा खातिर हो रही है चल जा अब सुबह में ाआना

और शर्मा कर अपने आखे निचे कर लेती है

देवरानी अपने एक हाथ से दरवाज़ा बंद करती है

Kamla:man me)Abhi महारानी को कहना ये ठीक नहीं था क उनका पहला पति इनकी सब चीखे सुन रहा है नहीं तो महारानी बलदेव से झगड़ लेती और सुहागरात ख़राब हो जाता

देवरानी दरवाज़ा बंद कर क थाली को मेज़ पर रखती है



बलदेव कमला की आधी लापति सड़ी में उसके बड़े दूध को देख रहा tha..Devrani की नज़र बलदेव से मिलती है

कमला पलट कर निचे उतर कर वापस रसोई में काम में लग जाती है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 93

सुहागरात 9 बजे

देवरानी दरवाज़ा बंद कर क थाली को मेज़ पर रखती है



बलदेव कमला की आधी लापति सड़ी में उसके बड़े दूध को देख रहा tha..Devrani की नज़र बलदेव से मिलती है

देवरानी मुस्कुरा देती है

Devrani:ab बास मुझे ताड़ना बंद करो 9 बज गए है खाना खा लेते है

कहते हुए देवरानी थाली जो ढकी हुई थी कपडे से खोल कर देखती है

बलदेव पलंग पर लेता था अब उसने अपने ऊपर रखे चादर का हटा देता है और उसका लौड़ा अब भी आसमान की ओरे देख रहा था

बलदेव अपने मुचे पर हाथ फेरते हुए

Baldev:Rani माँ मुझे तो तुम्हे खाना है आज बास और किसी चीज़ की भूक नहीं

देवरानी थाली खोल कर देखते है तो उसमे कई प्रकार क व्यंजन थे और उसके सुगंध मात्रा से देवरानी खुश हो जाती है देवरानी जैसे पलटी देखती है बलदेव उसकी ओरे देख अपने लौड़े को हाथ में लिए सहला रहा है और एक हाथ से अपने मुचे पर तव दे रहा है

देवरानी लज्जा कर पानी पानी हो जाती है

Devrani:badmash जाओ हाथ धो कर आओ और पहले खाना खाओ उसके बाद कुछ सिर्फ मुझे कहते रहोगे और खाना नहीं खाओगे तो कमज़ोर हो जाओगे

Baldev:maa तुम्हे खा कर तो बूढ़ा भी जवान हो जाये

Devrani:uh हो जाइये न पति देव मुझे तो खाना है पिछले तीन घंटे से थका डाई आप

Baldev:Rani माँ इतने प्यार से बोलोगी तो अपने पति क लये में जान भी दे दू

बलदेव उठ कर स्नान गृह में घुस जाता है और मुँह हाथ धो कर वापस आजाता है

देवरानी बलदेव क बहार आते हे स्नानघर में जा कर अपने हाथ को अपने चेहरे को अचे से धोती है और बहार आती है

Baldev,devrani हम कुर्सी पर बैठ क खाएंगे निचे नहीं

Devrani:par आप तो हमेशा निचे बैठ कर कहते थे न

Baldev:ab विवाह तुम से कए है देवरानी ससुराल वाले में दहेज़ दया है तो हम उसका इश्तेमाल करेंगे

देवरानी चिढ जाती है और मेज़ पर खाने को लगाने लगती है

Devrani:dahez हे चाहिए था तो कहते अपने साले देवराज से ..अब भी मांग लो तो देखती आपकी हिम्मत

Baldev:ary रानी माँ उसके बहिन को इधर पीछे तीन घंटे से रगड़ रहा हु उसे यही खबर नहीं होगी दहेज़ क्या देगा देवराज साला

Devrani:Chup करो मेरे भाई को गाली न दो

वो तो बास हमारे रिश्ता को मान नहीं रहे वो नहीं तो तुम्हे दुन्या की हर वो चीज़ देते जो तुम्हे चाहिए अपने बहिन को इतना चाहते है वो

Baldev:oh हो मेरी रानी को गुस्सा आया उसके भाई क बारे के कहा तो

बलदेव और देवरानी एक एक कुर्सी पर बैठ जाते है

Baldev:mera पनीर की सब्ज़ी कहा है?

Devrani:chup कीजिये और ये खीर और बादाम का हलवा खाये

बलदेव खीर खाने लगता है और देवरानी बलदेव को देखती रहती है

बलदेव का जैसे ध्यान जाता है तो देखता है देवरानी उसे गुस्से से देख रही है

Baldev:ary माँ मुझे ध्यान हे नहीं रहा इधर आओ मेरी जान तुम्हे भी खिला दू

Devrani:mujhe नहीं खाना में खुद से खा लुंगी

बलदेव देवरानी का हाथ पकड़ कर अपने ओरे खींचता है

"यह इधर आओ मेरी महारानी "

देवरानी अब बलदेव से सात कर कड़ी हो जाती है

बलदेव एक निवाला देवरानी को ऊपर करते हुए बैठे बैठे बढ़ता है

देवरानी अपना मुँह फेर लेती है

Devrani:mujhe नहीं खाना हँ

बलदेव देवरानी क हाथ पकड़ कर

निचे खींचता है और एक हाथ कमर में रख कर देवरानी को निचे कर अपने दाहिने जांघ पर बिठा देता है

"बोलो न माँ गुस्सा हो गई क्या "

"बलदेव में समझ सकती हु तुम्हारे भी अरमान होंगे ससुराल हो ससुराल वाले हो और बहुत साडी अपेक्षा थी जिसको तुम मुझ से विवाह कर क पूरी नहीं कर पाए"

बलदेव अब देवरानी को और अपने ऊपर चढ़ाते हुए

"हट पगली मुझे तुम चाहिए था और आज तुम मेरी हो गयी मुझे किसी और की परवाह नहीं यहाँ तक क मां देवराज की भी नहीं"

बलदेव देवरानी को अपने गॉड बिठाये कस्ते हुए कहता है

"तुम्हारी टंगे थक जाएगी मुझे ऐसे बैठाये रहे तो में मोती हु"

और उठने लगती है

"तुम गदरायी माल हो मेरा लौड़ा नहीं थका देखो तो में क्या थकूंगा"

बलदेव अपने खड़े लैंड पर इशारा करता है

बलदेव इस समय नंगा था और देवरानी सिर्फ एक सड़ी लपेटी थी

देवरानी अपने पति बने अपने बेटे क लैंड को देख शर्मा कर अपना मुँह घुमा लेती है

"सुनिए अगर आपके सेल साहब को पता चल जायेगा क हमने सुहागरात भी मन ली तो वो बहुत क्रोधित होंगे"

"होंगे तो मेरे लैंड से मई तो गया था उनसे हाथ मांगने उनकी बहिन का उन्होंने बदले में थप्पड़ मारा अब बहिन छुड़ाए अपने देवराज"

"ऐसा नहीं कहते जी कितना भी है तो वो आपके साला मेरे भाई है और वो अपने बहिन क्यू देंगे किसी और को"

"किसी और से क्यू छुडवायेंगे जब में हु उनकी हसीं और माल बहिन की छूट को रगड़ने वाला"

देवरानी प्यार से एक हल्का चपत बलदेव क गाल पर मरती है

"हट "

बलदेव फिर से खीर उठता है और देवरानी की ओरे बढ़ता है इस बार देवरानी मुँह खोल कर खाने लगती है फिर देवरानी अपने हाथ से बलदेव को खिलने लगती है और बलदेव देवरानी को खिलने लगते है

देवरानी को गॉड में अब बलदेव पूरी तरह से अपने लौड़े क निचे बैठा लय था जिस से उसका लौड़ा देवरानी क गरम गांड से और खड़ा हो जाता है

Devrani:sambhalo अपने शेर को खाना खा लेने दो

Baldev:ab शेर को गुफा करीब हो तो वो बिना घुसे कहा मानेगा

देवरानी ये सुन कर हल्का उठने को होती है बलदेव कमर में हाथ दाल कर अपने लौड़े पर बिठा लेता है

"खाना तो खा ले मेरी रानी लौड़े क साथ में"

ये कह कर बलदेव देवरानी क सड़ी को खींच देता है और देवरानी फिर से पूरी नंगी हो जाती है

"बलदेव अन्न क सामने ये सब नहीं पाप लगेगा"

बलदेव अब देवरानी को हल्का सा उठता है एक हाथ से पकड़ क और दूसरे हाथ से अपना लौड़ा पकड़ क देवरानी क छूट क मुहाने पैर रखता है

"अब बैठो मेरी रानी माँ"

"आज राजा"

देवरानी छूट पर लैंड लगते हे गरम होजाती है और धीरे से बैठने लगती है बलदेव निचे से हल्का धक्का मारता है और लैंड एक बार में हे आधा घुस जाता है

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"ाः राजा "

"आह रानी थोड़ा और निचे"

"उम्म्म यह दर्द हो रहा है "

बलदेव अब देवरानी क कंधे को पकड़ता है और निचे धकेलता है और निचे से अपना लौड़ा पेलता है देवरानी क छूट में "खछ" से पूरा लौड़ा घुस जाता है और देवरानी अपने आखे बंद कर क

"ाआअह"

कर बलदेव क गॉड में बैठी बलदेव क गर्दन में हाथ बांध देती है

"आह मार डाला रे"

"माँ हलवा खाओगी"

"हम्म खाउंगी पर रुको तुम्हारा हाथ गन्दा हो गया है "

देवरानी आगे बढ़ कर हलवा कभी खुद कहती कभी बलदेव क मुँह में खिलाती

"साली बहुत नखरे करती है मेरे हाथ गंदे हो गए लैंड छुआ तो और खुद पूरा लौड़ा अपने छूट में लिए बैठी है"

"यह चुप कर और जल्दी से खा"

बलदेव एक धक्का निचे से लगता है

"आआह हलवा खा ले बीटा"

"माँ तुम तो हलवा क साथ मेरा केला भी खा रही हो"

ऐसे हे देवरानी बलदेव का लैंड अपने छूट में फसाये कुर्सी पर बैठी खाना ख़त्म करती है फिर गिलास में दूध ढाल कर पहले अपने बेटे को पिलाती है फिर खुद पीती है

"माँ अब सब कुछ हो गया तो चलो "

"राजा हाथ तो धो लो "

बलदेव सामने पड़ा कपडा उठा लेता है फिर अपने माँ का और अपना हाथ पॉच लेता है

बलदेव देवरानी को उठा कर अपने माँ क छूट में लैंड घुसाए बिस्तर पर लेकर पटक देता है और खुद खड़ा हो कर देवरानी क छूट में घस्से मारने लगता है

"आह आराम से राजा"

पहच फच्च की आवाज़ फिर से गूंज रही थी पुरे कक्षा में साथ हे देवरानी क पायल की छान छान आवाज़ ाआरही थी देवरानी अपने दांत को पीसते हुए अपने दोनों हाथ से बिस्तर क चादर को पकड़ी थी बलदेव क धक्के से पीछे न हो जाये इसलिए

"यह मा "

फच्च कर फिर पूरा लौड़ा अंदर उतर देता

है ठप्प की आवाज़ बलदेव की जांघ देवरानी क चुतर पर लगने से निकलते है

और बड़े पपीता को जिसके घुंडी कड़क हो गए थे आगे पीछे हो रहे थे हर धक्के से उसे बलदेव घर रहा था

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Devrani:umm उम् यह

Baldev:ye ले

इधर महल में निचे

कमला देवरानी को खाना दे कर निचे आजाती है और रसोई में अपना काम निपटती है फिर बार बरी सब को बुला कर खाने को बुलाती है

उतने में वैध जी क साथ शमशेर और रतन सिंह आते है

Kamla:ary आप लोग कहा रह गए आज भोजन करना है क नहीं

Shamshera:Wo बहार बहुत भीड़ थी लोगो की उनको हे खाना बंटवाते बंटवाते वक़्त लग गया

Vaidh:han ऐसा लग रहा था पूरा गहतराष्ट्रा दरबार में आगया हो

Kamla:chalo पूरा तो गया न सबको काम तो नहीं हुआ

उतने में षुरूश्ती आती है

Shurushti:Ghatrashtra क महाराज की विवाह का उपहार पुरे राज्य क बचे बचे को मिलना चाहिए

Shamshera:Rani साहिबा हम से जितना हो सका हमने बंटवा दया है एक दिन में तो सब को नहीं बात जा सकता दो चार दिन तक लोग तो आते रहेंगे

Kamla:wo सब छोड़िये रानी षुरूश्ती आप लोग भी खाना खा लीजिये

Shurushti:theek है तुम माँ जी को बुला लो

Kamla:han सेनापति जी और वैध जी आप लोग भी आज महल में खा लीजिये

Somnath:Han भाई हमे भी महल का खाना चाहिए सेनगृह का खाना खा कर थक चुके

सोमनाथ षुरूश्ती को देख कर मुस्कुरा क बोलता है

थोड़ी देर में सब आसान पर बैठ जाते है कमला और राधा खाना लगाने लगती है

Shurushti:Kamla हम सब तो बैठ गए दूल्हे दुल्हन को कुछ खिलाओगी क नहीं?

Jeevika:unhe भूक लगेगी तो खुद आवाज़ देंगे ऊपर से

Shurushti:Maa जी आज हे उनका विवाह हुआ है आज हे दुल्हन कैसे भला रसोई में आकर खाना लेगी

Kamla:bass भी कीजिये आप दोनों कमला कोई बेवक़ूफ़ नहीं सबसे पहले मैंने दूल्हा दुल्हन का खाना हे तैयार कर क उनके कक्षा में पंहुचा दी

Somnath:wah कमला तू तो बहुत चतुर है

और सब हसने लगते है

Vaidh:ab ज़रा चतुराई से थोड़ा खीर और दे दो

कमला आगे बढ़ कर वैध जी को खीर देती है ऐसे हे सब खाना खाने लगते है

उधर ऊपर अपने कक्षा में देवरानी को लिटाये अब बलदेव दोनों टंगे उठा कर पेलने लगता है

"आह राजा"

कुछ धक्को क बाद बलदेव "pakk"ki आवाज़ से अपना लौड़ा खींचता है

"देवरानी अब घोड़ी बन जा तेरा घोडा तुझे झुका कर पलेगा"

देवरानी उठ कर घोड़ी बन ने लगती है

जिसे देख बलदेव का लौड़े और तन जाता है देवरानी क बड़े गांड और बड़े हो जाते है खुल क

बलदेव आगे बढ़ क देवरानी क दोनों गांड क पतों पर बारी बारी दो थप्पड़ मारता है

"ाः "

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"आह"

"क्या कर रहे हो राजा"

"माँ तुम्हारा ये गांड टेबल से काम नहीं "

बलदेव अब देवरानी क गांड पकड़ कर अपना लौड़ा छूट क मुहाने पर टिकाये एक दो बार थपकी मारता है फिर खछ से एक बार में हे पेल देता है अंदर तक

"आआआह में मर्डर गयी"

बलदेव आखे बंद कए

"आह माँ"

बलदेव को लगता है जैसे उसने किसी गरम भट्टी में अपना लैंड दाल दया हो अंदर देवरानी की छूट रिस रही थी और बलदेव क लौड़े पे लग रही थी बलदेव को ऐसा लगता है जैसे लावा फुट कर उसके लौड़े को चटका दे रही देवरानी क छूट का पानी भी इतना गरम था

"घप्प घप्प घप्प"

कर क बलदेव अपना लौड़ा पेलने लगता है और देवरानी ज़ोर से चिल्लाने लगती है

"आह राजा आह दही रे"

"रानी तेरी जैसी माल की छूट धीरे छोड़ने से कभी ठंडी नहीं होगी"

"आह में मर हे जाउंगी इतना ज़ोर से पेल रहे हो"

"ज़ोर से पेलने से हे तुम जैसी माल ठंडी होती है"

"ाः ाः ऐसे हे पेलो फिर मेरे राजा बेताऑ आअज तक ऐसा नहीं पेला कोई ाः"

"ये ले माँ आज क बाद तुझे समझ आएगा क असली छुड़ाए किसे कहते है"

"ाः राजा तुम्हारा लौड़ा मेरे पेट तक महसूस हो रहा है आह"

"देवरानी तेरे पहले पति का लौड़ा कैसा था या था हे नहीं"

घप्प कर हुमच क फिर से अपना लैंड दाल देता है

"ाः राजा उस नपुंसक की याद न दिलाओ उसका लौड़ा 3 इंच का होगा पर तुम्हारा तो उस से तीन गुना बड़ा है आआह उसका लौड़ा तो मेरे छूट क मुहाने पे हे ख़त्म हो जाता था"

"आह माँ मेरा लौड़ा कहा तक ख़त्म हो रहा है "

"आह राजा तेरा लौड़े मेरे बच्चेदानी में फस्स रहा है"

बलदेव सटासट और ज़ोर से अपना लौड़ा देवरानी को झुकाये पेले जा रहा था

"आह बीटा ऐसे हे आह बीटा मेरा घुटना दुखने लगा "

बलदेव देवरानी क कमर को पकड़ कर खुद लेट जाता है और खुद देवरानी को अपने ऊपर ले लेता अब तक लैंड उसके छूट में फसाये हुआ था

"माँ अब खुद सवारी करो अपने घोड़े की"

देवरानी की पीठ बलदेव क मुँह क तरफ थी जिस से देवरानी की बाड़ी गांड दिख रही थी जिसे देवरानी ऊपर निचे कर रही थी धीरे धीरे और बलदेव उसके छूट का छेड़ बंद और खुलते हुए देखता है देवरानी अपने होठ खुद क दन्त से काट रही थी उत्तेजना क मरे और पछ पछ की आवाज़ से से ऊपर निचे हो रही थी

बलदेव अब देवरानी क कमर पर हाथ रख निचे से धक्के लगाने लगा

"माँ ज़ोर से उछलो मेरे लौड़े पैर तेज़ी में उठक बैठक कर"

बलदेव का सुन देवरानी खूब तेज़ से अपने गांड ऊपर निचे कर रही थी और निचे से बलदेव भी झटके मार रहा था और कक्षा में एक सुन्दर संगीत सुन को मिल रही जो काम क सुन्दर ध्वनिओ से मिल कर बन रही थी फच्च फच्च ठप्प ठप्प खान खान छान छान देवरानी की छूट क साथ चूड़ी और पायल भी बज रहे थे

अब बलदेव उठ खड़ा होता है और देवरानी को पलंग से उतर कर कड़ी कर देता है और एक टांग को ऊपर उठा कर अपना लौड़ा देवरानी क छूट पर लगाए घुसा देता है

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"आह राजा"

"रानी पेअर थोड़ा और उठा निचे नहीं आना चाहिए"

"ाः राजा ऐसे कौन करता है भला"

"ऐसे में करता हु हम करते है और रोज़ करेंगे आह माँ आपकी छूट रस से भर गयी है"

घप्प घप्प बलदेव एक हाथ से देवरानी क कमर पर हाथ रखे और दूसरे हाथ से एक तंग देवरानी को ऊपर आसमान की तरफ उठाये हल्का टेढ़ा हो कर अपना लैंड पेले जा रहा था देवरानी भी अपने मज़े क सागर में डूबी थी और बलदेव को कुछ भी करने पूरी आज़ादी दे थी इसलिए बलदेव भी अपने माँ को घप्पाघप चोदे जा रहा था

"ाः आह राजा मेरे अंदर सुर सूरी मची है अब मेरा हो जायेगा आआह"

बलदेव इतना सुन न था क उसकी माँ अब पानी छोरनि वाली है अपने माँ क गांड पर एक थप्पड़ मरता है और आगे बढ़ कर देवरानी क मम्मो को दबोच लेता है

"घप्प घप्प "ज़ोर से धक्के मरते हुए

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क होठ अपने होठ में ले लेता है और चूसने लगता है

"गलप्प गलप्प ुहममम ाः गलप्प्प

गलप्प्प गलप्प्प गलप्प"

देवरानी क तंग को निचे कर देवरानी को दीवार से सत्ता देता है हल्का झुका कर देवरानी अपने दोनों हाथ को दीवार पर रख अपने गांड को बहार निकलती है बलदेव का लैंड अब भी देवरानी क छूट में था और वो फिर से घापा है देवरानी क बचे दानी तक अपने लैंड को पेलने लगता है

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दो चार झटके हे दिए थे क देवरानी अपने आखे बंद कए झड़ने लगती है

"आह आआह राजा में गयी ुहममम आह"

बलदेव धक्के और तेज़ी से मरने लगता है

"आह राजा उनमम ऐसे हे पेलो आह"

बलदेव ज़ोरो से देवरानी को पेलते रहा अगले दस मिंट तक देवरानी झड़ती रही

झड़ने क बाद पीछे देखती है बलदेव को जो उसकी कमर पकड़ कर ज़ोरो से उसे पेले जा रहा था

देवरानी और बलदेव की आखे मिलती है और देवरानी मुस्कुरा देती है

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क होठ अपने होठ में ले लेता है

"ऐसे न मुस्कुराओ मेरी जान नहीं तो अगले दस दिन तक नहीं छोड़ूंगा कक्षा से"

फच्च से लौड़ा पेले जा रहा था बलदेव कुछ देर और पेलने क बाद बलदेव को लगता है जैसे उसका निकलने वाला है और उसे कुछ सूझता है और वो खच से अपना लौड़ा निकल कर

"देवरानी निचे बैठो"

देवरानी निचे बैठ जाती है

बलदेव देवरानी क खूबसूरत चेहरे को पकड़ता है फिर अपना लौड़ा उसके मुँह क तरफ करता है और देवरानी क ठुड्डी पकड़ कर उसका मुँह खोल लैंड अपने माँ क मुँह में दाल देता है

Devrani:hhm आप अम्म

बलदेव अपना लौड़ा जड़ तक घुसा देता है और ऊपर निचे होता है क उसके लैंड से एक तेज़ धार निकलती है और देवरानी हलक से निचे बलदेव क लैंड का रस सीधा देवरानी क पेट में गिरने लगता है बलदेव अपने आखे बंद कए था देवरानी बलदेव क कमर को ऊपर से निचे तक सहला रही थी

बलदेव अब अपना लौड़ा देवरानी क मुँह से खींचता है और अपने लौड़े को आगे पीछे करता है और पिचकारी की धार अपने माँ क सुन्दर चेहरे पैर गिरता है

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देवरानी क मुँह में भी बलदेव का पानी था अब उसके चेहरा पर बलदेव अपने लौड़े क पानी से उसको भीगने लगता है देवरानी अपना मुँह खोले जीभह बहार कर रही थी और पानी को लोकने की कोशिश कर रही थी जिस से पानी उसके मुँह में आजाये

कुछ देर झड़ने क बाद बलदेव एक आह क साथ अपना लौड़ा छोरता है पर देवरानी को देख वो मुस्कुरा देता है देवरानी का आँख नाक गाल होठ माथा जहा पर सिंदूर थी उसको भी भीगा दिया था और देवरानी अपने जीभ से अपने होठ पर लगे पानी अंदर ले कर जातक रही थी

"रानी माँ कैसा लगा अपने बेटे क लैंड का पानी"

"मेरे बेटे नहीं मेरे पति का पानी बहुत स्वादिष्ट नमकीन"

ये कह कर देवरानी शर्मा जाती है और अपना सर निचे करती है जो घुटने क बल बैठी थी

देवरानी क चेहरे पर लगा बलदेव का पानी चेहरे से लटक कर गिरने लगता है

बलदेव देखता है उसकी माँ लज्जा कर चेहरा ऊपर से निचे की और उसके चेहरा पर पानी टपकने लगा और बलदेव मुस्कुरा देता है

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 94

सुहागरात

रात 12 बजे

देवरानी क चेहरे को अपने लैंड क पानी से नहला कर बलदेव देवरानी को मुस्कुरा कर देखता है और देवरानी तुनक कर कपडा उठा कर अपना मुँह पोछती है उसके नज़र घडी पर पड़ती है

Devrani:Hey भगवन 12 बज गए"

ये कहते हुए किसी ज़िंदा लाश की तरह पलंग पर गिरती है जैसे उसके अंदर अब जान हे न बची हो

बलदेव अपना लौड़ा उसी कपडे से पॉच कर बिस्तर पर देवरानी क बगल में जा कर लेट जाता है

"रानी अभी से 12 बज गए आज तो पहली रात है"

"गधे समय 12 बज गए घडी देखो"

"ाचा तो आओ एक बरी फिर करते है"

बलदेव ये कह कर देवरानी को अपने बहो में कसता है

"नहीं राजा मेरा नस नस दुःख रहा है पिछले 6 घंटो से लगातार किये जा रहे हो"

"तुम कहना क्या चाहती हो देवरानी ..म्हणत तो में कर रहा हु सोचो मेरा क्या हाल होगा"

"तुम तो घोड़े हो थकने का नाम नहीं लेते में तो थक गयी बुरी तरह "

"तो बड़ी शेरनी बानी फिरती थी अभी कहा गयी वो शेरनी जो हमेशा मेरे लौड़े को भड़कती थी और चुनौती देती थी "

बलदेव ये कहते हुए देवरानी क गांड पैर हाथ रख कर अपने तरफ खींचता है और देवरानी क छूट पर अपना लैंड जो आद्या सोया था रगड़ता है देवरानी समझ जाती है बलदेव नहीं मन ने वाला कुछ सोचते हुए

देवरानी बैदेव को अपने बहो में कास कर उसके कान क नीचे चूमते हुए

"आह राजा मैंने कब मन क्या है आपको करने क लये बास थोड़ा आराम करने दीजिये न फिर आपकी लिंग की सेवा करेगी आपकी पत्नी मेरे राजा बीटा"

ये सुन कर बलदेव को भी अपने माँ पर तरस आजाता है

बलदेव मुस्कुराते हुए देवरानी क कमर पर हाथ रख अपने ओरे करता है

"आह राजा आराम से बहुत दुःख रहा है अंग अंग मेरा"

"ठीक है अब में आपकी सेवा करता हु"

बलदेव उठ कर जाता है और मेज़ पर रखे सरसों तेल की मालसी उठा लेता है

"ये क्या कर रहा है बीटा"

"माँ आपकी मालिश "

"नहीं नहीं अप्प मेरे पति हो ये तो मेरा काम है आप मत कीजिये मुझे पाप होगा"

"रानी माँ अपने पत्नी की सेवा करना कही से पाप नहीं है ये तो राजाओ ने एक झूटी धरना फैलाया है अपने पत्निओ से सेवा करवाने क"

"तुम कितना समझदार हो राजा बीटा"

"और वैसे भी माँ अगर तुम मेरे लिए अपना सबकुछ त्याग सकती हो तो में क्या इतना भी नहीं कर सकता "

ये सुनते हे देवरानी खुश हो जाती है और अपनी लम्बी केले जैसी टंगे फैला देती है और चित लेट जाती है

"आजा कर ले अपनी माँ की सेवा"

बलदेव देखता है उसकी माँ दोनों टंगे फैलाये लेती थी और उसके टैंगो क बीच उसके छूट क मुहाने खुले थे जो लगातार पेले क वजह अपने रास्ता बना लिया था और वो छूट क फांके बंद होने का नाम नहीं ले रही थी उसके छूट में हल्का पानी का रिसाव भी हो रहा था

बलदेव तेल की मालसी लिए बैठता है और दोनों हाथ में तेल लगा कर देवरानी पेअर क उंगलिओ से ले कर घुटनो तक लगाने लगता है

देवरानी अपनी आखे बंद कए लेती थी और मालिश से उसे एक अलग हे मज़ा आरहा था

"महारानी कैसा लग रहा है मालिश कमला से तो अछि नहीं होगी"

"यह बीटा मर्द क बात हे कुछ और होती है तुम्हारे मालिश से मज़ा आरहा है थोड़ा और ऊपर आओ"

बलदेव ऊपर बढ़ कर घुटनो से ले कर पुरे जांघो की मालिश करने लगता है और फिर तेल लेकर देवरानी क नाभि में गिरता है

"यह ाः राजा"

देवरानी क नाभि में तेल दाल एक ऊँगली नाभि घुसा देता गहरी नाभि में ाचा खासा तेल भर गया था फिर अपनी ऊँगली गोल घूमते हुए अपने ऊँगली निचे की ओरे लता है

और अपने दूसरे हाथ से तेल देवरानी क बाल भर छूट पर गिरता है

"आह राजा ुम्मम्ह"

बलदेव एक ऊँगली घूमते हुए निचे अत है और छूट क चारो और ऊँगली फेरने लगता है जैसे छूट पर अपना नाम लिख रहा हो

कुछ देर ऐसे हे सहलाते हुए छूट को पुरे तेल से भीगा कर अपना पूरा हाथ को छूट को पकड़ कर दबोच लेता है

"ाआअह राजा"

बलदेव अब तेल से पुरे छूट की मालिश करने लगता है फिर ऊपर बढ़ता है और देवरानी क बड़े पपीता जैसे दूध पर तेल गिरता है और उसको दोनों हाथो में दबोच दोनों मम्मो को दबा देता है

"राजाआआ धीरे "

बलदेव दोनों मम्मो को दबाते हुए खूब जैम क मालिश करता है फिर ऐसे हे देवरानी क हाथ पेअर पैर छूट दूध सब पर मालिश करने लगता है बिना रुके

रात ज़्यादा हो गयी महल में सब खाना खा कर अपने अपने कक्षा में चले जाते है सोने

शमशेर भी निचे एक कक्षा में लेता था पर उसके आखो से नींद कोसो दूर थी और उसके मन में हज़ार तरह क ख्याल आ रहे थे

Shamshera:man me)Baldev की चंडी है ऊपर अपने माँ को पेल रहा होगा खूब मज़े से सुहागरात मन रहे hai..mere से छोटा है फिर भी अपने माँ को पता कर शादी कर लय एक मई हु जो इतने सालो से सिर्फ सोच हे रहा हु पर कुछ नहीं कर पाया

Shamshera:man me)Baldev क माँ क तो सिर्फ एक सौतन थी और मेरे माँ क तो तीन सौतन है और अब्बू क हरम में तो 500 से ज़्यादा लौंडिया है जिनसे वो जिस्मानी रिश्ता रखते hai..Devrani खला तो सिर्फ एक सौतन से परेशां हो कर अपना यार अपना बीटा को बना ली तो क्या अम्मी भूरिया को बुरा नहीं लगता होगा उनका शौहर की 4 बीविया है और हज़ारो औरतो से हमबिस्तरी करने का शौक़ ..क्या अम्मी भूरिया का मन नहीं करता होगा क कोई उनसे सच्चा प्यार करे और सिर्फ उनका हे हो क रहे

ये सब सोचते हुए शमशेर सो नहीं प् रहा था और आज कल उसे अलग अलग वैश्यों क साथ रासलीला करने की आदत हो गयी थी जिसे वो अपनी अम्मी भूरिया समझ क रौंदता था पर जुंग क दिनों में वो किसी वैश्य क पास भी नहीं जा प् रहा था

शमशेर अपना बिस्तर से उठ कर कुछ सोचते हुए अपने कक्षा से बहार निकलता है देखता महल में किसी की आवाज़ नहीं आरही थी सब सो रहे थे

शमशेर टहलने लगता है कभी दये तो कभी बाये उसके दिमाग में सिर्फ अपने माँ भूरिया की तस्वीर चल रही थी

ईशर षुरूश्ती जो हलके नींद में थी कदमो की आवाज़ सुन कर अपने आखे खोलती है

"इतने रात कोण है जो चल रहा है "

षुरूश्ती उठ कर अपने कक्षा क लैंटर्न को जलती है और लैंटर्न लिए बहार आती है देखती है अँधेरे में कोई लम्बा चौड़ा पुरुष टहल रहा है

Shurushti:Kaun है वह..

शमशेर पीछे मुड़ता है देखता है षुरूश्ती लैंटर्न लिए कड़ी थी षुरूश्ती इस समय वो वस्त्र पहनी थी जो सोते समय पहनती थी अत्तर्य उत्तरया के वो बहुत कामुक लग रही उसके लटके हुए बड़े दूध उसकी सांवले पेट और छोटे कद की थी तो शमशेर झुक कर देखता है

"रानी षुरूश्ती आप चौकीदारी कब से करने लगे"

रानी षुरूश्ती साढ़े 6 फ़ीट क आदमी क सामने अपने सर उठाये

"जब घर में जासूस हो अतिथि क रूप में तो चौकीदारी करनी पड़ती है"

षुरूश्ती साढ़े 5 फ़ीट से भी काम थी पर फिर भी थी तो रानी हे इसलिए खूब कड़े अंदाज़ में जवाब देती है शमशेर को

"लगता है रानी अब भी आप हमे जासूस समझती हो"

"तो और क्या समझे पहली बार जब आये थे तो अँधेरे में अब भी आधी रात टहल रहे हो कोई भी चोर हे समझेगा"

शमशेर अब मायूस होते हुए कहता है

"रानी साहिबा वो बास नींद नहीं आरही है पर आप अभी तक नहीं सोई"

"में सो गयी थी फिर तुम्हारे कदमो क आवाज़ ने उठा दया वैसे किसकी याद आरही है जो सोने नहीं दे रही"

"अम्मी की.."

शमशेर की मुँह से निकल जाता है और वो अंदर हे अंदर घबरा जाता है

"में समझी नहीं युवराज अम्मी की.."

"वो रानी साहिबा घर से दूर हु न तो घर की याद आरही नीड नहीं आरही अम्मी अब्बू सब की याद आरही है"

"मेरे से तो खड़ा नहीं हुआ जा रहा दिन भर काम कर क थक गयी शादी का काम आसान नहीं."

"युवराज अगर डिल भरी लग रहा है तो आजाओ हमारे कक्षा में बैठ बात कर लो"

"ठीक है रानी साहिबा "

षुरूश्ती लैंटर्न लिए हुए अपने कक्षा की ओरे जा रही थी और शमशेर पीछे पीछे चल रहा था

शमशेर देखता है षुरूश्ती क गांड जो गोल गुब्बारे जैसी थी और उसके आभूषण में मटक रही थी

शमशेर मन में: है क्या गांड है इतनी छोटी सी रानी क इतने मोठे बड़े गांड आज इस कपडे में तो कहर ध रही है रानी षुरूश्ती

षुरूश्ती अपने कक्षा में घुस कर कुछ दिया को जला देती है जिस से कक्षा में रौशनी फ़ैल जाती है

"आजाओ युवराज बैठ जाओ वह लगता है तुम अपने परिवार को बहुत यद् कर रहे हो"

"हाँ रानी साहिबा खास कर अम्मी को"

बलदेव पास रखे सोफे पर बैठ जाता है और षुरूश्ती दूर बिस्तर पर बैठ जाती है

"ाचा तो अम्मी क लादले हो कैसी है तुम्हारी अम्मी"

"मतलब अछि हे है"

"मेरे उम्र के है या बड़ी है"

"अब मुझे क्या पता आपका उम्र क्या है"

"आर्य ऐसे हे अंदाज़न बताओ"

"आप की उम्र कितनी है रानी साहिबा"

"स्त्री से उसके आयु नहीं पूछते जासूस"

"तो फिर कैसे बताऊ क मेरी अम्मी जान आप से उम्र में छोटी है या बड़ी"

"कितनी आयु है उनकी"

"अम्मी जान लगभग 44 की है"

"फिर तो युवराज वो हम से छोटी हे है"

"आप उनसे बड़ी हो लगती तो नहीं हो रानी साहिबा"

"हाँ अब मुझे ताड़ पर मत चढ़ाओ"

"वैसे रानी साहिबा आपने आज बहुत म्हणत क्या थक गयी होंगी"

"हाँ बाबा अब सब विवाह की तैयारी करना मामूली नहीं "

"हाँ आज वो बहुत खुश लग रहे थे "

"युवराज उनके ख़ुशी में हे मेरी ख़ुशी उन्होंने मेरी इज़्ज़त लूटने से बचाई है"

"ओह तो क्या हम यहाँ गिल्ली दानंदा खेलने आये थे"

"हाँ आप सब नहीं आते युवराज तो शाहज़ेब हम साडी औरतो की बांध क दिल्ली ले गया होता मेरे साथ.."

"आप चुप क्यू हो गयी रानी साहिबा "

"अब कैसे बोलू इतनी घटिया बात"

"आप कहिये रानी साहिबा अपना दोस्त समझ कर"

"वो हरामी शाहज़ेब मुझे यहाँ वह हाथ लगाया मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और वैसे मित्र कब से बन गए बच्चू अगर मेरा कोई पुत्र होता तो तुम्हारे जितना बड़ा होता"

"तो क्या हुआ हम मित्र नहीं हो सकते और शाहज़ेब रंडीबाज है हे जल्द हे उसके हाथ से डिल निकल जाएगी"

"ची ऐसे शब्द का प्रयोग न करो युवराज"

"एक बात कहु रानी साहिबा बुरा न मने तो"

"बोलिये न युवराज आप अब हमारे घर वाले जैसे है"

"रानी जी आप हो हे इतनी खूबसूरत क किसी का भी डिल आजाये और वो बादशाह शाहज़ेब तो वैसे भी हरामी है"

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ये सुनते हे षुरूश्ती शर्म से लाल हो गयी अपने बेटे क उम्र क मर्द से ये बात सुन कर

"चुप करो युवराज जो मन में आजाता है"

"ठीक है रानी षुरूश्ती में जाता हु सोने वैसे भी आप दिन भर की थकी हो तो आराम कीजिये"

ये कहते हुए शमशेर उठ ता है पर वैसे हे षुरूश्ती कहती है

"आर्य शमशेर रुको न बुरा लग गया"

Shamshera:man me)Hathoda सही जगह लगा है अब काम बन सकता है

"नहीं रानी साहिबा इतनी सी बात का बुरा क्या मन न आप दोस्त जैसी हो हमारी"

"ाचा तो बैठो अगर मित्र समझते हो तो नहीं तो में समझूंगी बुरा मन गए"

शमशेर वापस बैठ जाता है

"रानी साहिबा आपके दोस्ती क लये कुछ भी"

"क्या सच में सुन्दर हु शमशेर"

शमशेर अपने जगह से उठता है और बिस्तर पर आकर षुरूश्ती क बगल में बैठ जाता है

"रानी जी आप सुन्दर हे नहीं अति सुन्दर हो और ये बात तो में तब से जनता हु जब में पहले बार आपके कक्षा के गलती से घुस गया और आपके हुस्न का दीदार हो गया"

ये शमशेर षुरूश्ती क आखो में देख कर कह रहा रहा षुरूस्ती सर नीचे कर क मुस्कुराते हुए शर्मा रही थी और उस पल को याद कर रही थी जब उसे नंगा शमशेर ने देख लय था

षुरूश्ती सर निचे कए

"तुम ु अचानक से अंदर ाजाओगे मुझे क्या पता था पता होता तो स्नान कर क नहीं निकलती बहार"

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शमशेर और षुरूश्ती क पास खिसक जाता है और शुरुश्री का एक हाथ अपने हाथ में ले कर

"रानी साहिबा अगर आप उस दिन खुले बदन नाहा कर बहार नहीं निकलते तो आप का हुस्न मुझे दीवाना कैसे बनता"

षुरूश्ती ये सुनते हे लम्बी लम्बी सांस लेने लगती है और अपना हाथ शमशेर क हाथ में देख

"बेशरम"

और अपना हाथ शमशेर क हाथ से छुरति है

"तुम पर्सिओ को में जानती हु चिकनी चुपड़ी बाटे तुम अचे कर लेते हों"

"अहा रानी साहिबा में अपने डिल का हाल बता रहा हु"

"अम्मी को कहो युवराज क अछि सी दुल्हन ला दे"

"रानी षुरूश्ती अब आप जैसी मिलने से रही"

"हट"

कह कर षुरूश्ती उठने लगती है

शमशेर हाथ पकड़ लेता है और खड़ा हो जाता है

"में सच कह रहा हु षुरूश्ती जी"

"पागल में अब बूढी हो गयी"

शमशेर षुरूश्ती क दोनों हाथो को अपने हाथो में लिए

"कौन कम्बख्त कहता है तुम बूढी हो आप अब भी जवान हो "

"छोरो मुझे"

"रानी जी अब तो आपके पति राजपाल को ज़िन्दगी भर सजा कटनी है तो क्या आप ऐसे हे अपनी जवानी बर्बाद करोगे"

ये कह कर शमशेर अपने हाथो से षुरूश्ती क कमर को खींच कर अपने तरफ लता है

"उसकी चिंता तुम न करो शमशेर"

सांस ज़ोर ज़ोर से लेते हुए कहती है कही न कही षुरूश्ती भी बहक गयी थी और अपने आपको एक भरी जवान मर्द क बहो में पाकर उसके छूट में चीटिया रेंग रही थी

शमशेर झुक कर अपने होठ षुरूश्ती क कान पर ले जाता है

"जब से हमने आपके फुदकते नंगे दो कबूतरों को देखा है कोई ऐसा दिन नहीं जो इन्हे याद नहीं क्या"

षुरूश्ती क पास कहने को कुछ नहीं था क्यू क उसके भरी ममो को शमशेर ने पहले देखा था

"रानी साहिबा क्या सोच रही hi आजाओ मेरे आग़ोश में आपको जन्नत का सफर करवा दूंगा"

कह कर गले लग जाता है षुरूश्ती से

"ये गलत है शमशेर "

"ऊपर बलदेव अपने माँ क साथ सुहागरात मन रहा है क्या सही है"

"पर शमशेर"

"अगर में आपको पसंद नहीं रानी षुरूश्ती तो कह दीजिये"

"शमशेर मैंने ऐसा तो नहीं कहा"

ये सुन न रहा क शमशेर समझ गया क ये अब उसका मुसल लेने क लये तैयार है और उसकी छूट भी पर अभी भी दर रही है

शमशेर ने अपने दोनों हाथो से कमर में हाथ दाल कर षुरूश्ती को अपने से चिपका लय

"रानी साहिबा आपके खिदमत करने का मौक़ा दीजिये वो बूढ़े राजपाल ने तो कुछ नहीं क्या होगा"

षुरूश्ती उखड़ी सांसो क साथ शमशेर से चिपकी कड़ी थी षुरूश्ती की लम्बाई शमशेर से काम होने क कारन उसका सर शमशेर क पेट तक हे आरहा था

Shurushti:man me)Waise मुझे भी एक मर्द चाहिए राजपाल तो जीवन भर करवास में होगा और इस दुष्ट सेनापति से भी मुझे जान छुड़ाना है और शमशेर हे है जो मेरी मदद कर सकता है

ये सोच कर षुरूश्ती निर्णय ले लेती है और अपने बहो को शमशेर से लपेट लेती है

"यह जानेमन षुरूश्ती ये दबाने का मक़सद मुझसे छूटना है या तुम्हे ाचा लग रहा है"

"शमशेर में तुम्हे देख भी नहीं प् रही हु तुम इतने ुचे हो"

ये सुनते हे शमशेर गड गड हो जाता है और किसी बचे की तरह षुरूश्ती को निचे से पकड़ कर ऊपर उठता है षुरूश्ती ऊपर उठ ते हे शमशेर क गर्दन में बहे दाल कर लटक जाती है अब षुरूश्ती का पेअर हवे में था और उसकी छूट शमशेर क लैंड से चिपकी थी शमशेर पीछे षुरूश्ती क गांड को दबाये जा रहा था

"ाः है "

"रानी अब आगयी न मेरे बराबर में"

"आह हाय हाथ हटाओ"

"कहा से रानी षुरूश्ती"

"मेरे पीछे से"

शमशेर अपने दोनों हाथ को पीछे ले जा कर ज़ोर से दबा रहा था

"रानी षुरूश्ती अभी इन गांड क हिलने पर तो मेरा लैंड खड़ा हो गया था"

"ची कैसी बात कर रहे हो"

"लगता है राजपाल ने कभी आपके साथ नहीं क्या"

शमशेर अपना हाथ देवरानी क छूट पैर लगता है और गरम पाकर

"रानी जी अब आपकी छूट गरम हो चुकी है आपको तो अब पता होगा क अब हमे ऐसी हे बात करनी होगी और मेरा लौड़ा आपके छूट से बात करेगा तब ठंडी होगी"

षुरूश्ती आखे बंद कर क शमशेर क नंगे कंधे पैर दन्त लगा कर ज़ोर से काट टी है

"आआह रानी"

शमशेर षुरूश्ती को पकड़ कर आगे करता है और उसके चेहरे को देखते हुए पहले पास जल रहे दियो को फुक मार कर बुझाता है फिर षुरूस्ती को गॉड में लिए पलंग पर ज़ोर से पटक देता है

"ाः"

षुरूस्ती अपने आखे खोलती है गिरते हे और अपने कक्षा में अँधेरा देख

"शमशेर ये तुमने सब दिया क्यू बुझा दिया"

"अँधेरे में आपको प्यार करना है अगर आप चाहे तो में फिर से जला दू"

"नहीं रहने दो"

शमशेर बिस्तर पर चढ़ षुरूश्ती को बहो में भर्र लेता है और उसके होठो पर अपने होठ रख चूसने लगता है

"गलप्प गलप्प्प गलप्प गलप्प

गलप्प गलप्प्प गलप्प गलप्प्प"

"यह शमशेर"

शमशेर एक हाथ से उसके धोती जैसे अत्तर्य उत्तरया वस्त्र को खींच देता है और सुरुषती पुरनी नंगी हो जाती है

षुरूश्ती तुरंत अपने दूध पर अपने हाथ रखती है शरमाते हुए

"रानी शर्मा क्यू रही हो इसे में पहले भी देखा हु"

शमशेर आगे बढ़ कर षुरूश्ती क हाथ हटा ता है और उसके मम्मो को हाथ में पकड़ने लगता है

"शमशेर ाः ये बात किसी को पता नहीं चले "

"रानी जी कभी नहीं चलेगा किसी को पता बास आप उसकी लैंड का मज़ा चखे"

ये सुनते हे षुरूश्ती की छूट रिसाव करने लगती है

शमशेर षुरूश्ती को लिटा का मम्मो को ज़ोर से दबाता है फिर झुक कर अपने मुँह में भर्र कर बरी बरी से चूसने लगता है

शमशेर अब अपने कपडे निकल फेकता है और षुरूश्ती को एक हाथ से खींच कर अपने ओरे लता है

"ये लो मुँह में रानी"

षुरूश्ती लैंड को देखते हे रुक जाती है

"नहीं शमशेर ये बहुत बड़ा है"

"लो बोलै न "

षुरूश्ती पहली बार ऐसा लैंड देखि थी वो निचे झुकती है और अपने हाथ में ले कद

षुरूश्ती मन me)Ye तो सोमनाथ क लिंग से भी बड़ा लिंग है बाप रे सोमनाथ से छोड़ना मेरे लये मुश्किल होता था ये कैसे लुंगी

"रानी षुरूश्ती आप घबराइए मत सब चला जायेगा आप मुँह में लो पहले"

शमशेर जैसे पढ़ लिया हो षुरूश्ती की मन को

षुरूश्ती हड़बड़ा जाती है और अपना छोटा सा हाथ में 9 इंच का हुल्लाबी लौड़ा लिए आगे पीछे करती है और फिर निचे झुक कर अपने छोटे से होठ क बीच लैंड क सुपर को रखती है शमशेर क लौड़े का सूपड़ा षुरूश्ती क खुले मुँह में जा नहीं प् रहा था क्यू क षुरूश्ती क मुँह खोलने क बाद भी शमशेर का सुपर उसके मुँह क गोलाई से दो गुना मोटा था

Shurushti:ye नहीं जायेगा

"जायेगा कैसे नहीं रानी"

शमशेर षुरूश्ती क जबड़े को पकड़ क ज़ोर से दबाता है जिस से षुरूश्ती का मुँह और खुल जाता है और शमशेर एक ज़ोर का धक्का देता है और "pachh"se पूरा सुपर षुरूश्ती क मुँह में घुस जाता है

Shurushti:ah अम्म

उम्

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शमशेर एक और धक्का देता है और इस बाद आधा लौड़ा अंदर घुस जाता है और षुरूश्ती का मुँह पूरा भर जाता है और उसके गाल लग रहा था अब चिर जायेंगे

शमशेर देखता है क पूरा लौड़ा डालने लायक नहीं है और वो आधा लौड़ा हे षुरूश्ती क मुँह में दाल आगे पीछे कर रहा था और षुरूश्ती क आखो में ासु साफ़ देखा जा सकता था

थोड़ी देर में शमशेर का लैंड और सख्त हो जाता है और पछ कर अपना लौड़ा निकलता है और षुरूश्ती "aaaah"kar क एक लम्बी सांस लेती है

शमशेर षुरूश्ती को पकड़ क लिटा देता है और दोनों टैंगो को खींच उसके छूट को अपने लौड़े क पास लता है

"आह शमशेर आराम से"

शमशेर छूट को देखता है

"रानी तुम्हारी छूट तो किसी छोटी बची जैसी है "

"आह हम्म "

शमशेर अपना सुपर घास रहा था छूट पर और षुरूश्ती आखे बंद कए सांस ले रही थी षुरूश्ती की छूट अब पानी छोर रही थी शमशेर अपनी एक ऊँगली डालता है अंदर और छूट में अंदर बहार करने लगता है थोड़ी देर बाद जब छूट का रास्ता एक डैम चिकना हो जाता है शमशेर षुरूश्ती को अपनी ओरे खींच उसके दोनों टैंगो को ऊपर उठता है और षुरूश्ती क नीचे तकिया लगा देता और अपना लौड़ा छूट पर लगा कर षुरूश्ती को देखता है जो आखे बंद कए सिसक रही थी

"रानी षुरूश्ती आपकी इजाज़त हो तो अंदर दाखिल कर दू"

"यह शमशेर कृपया कर क जल्दी करे "

शमशेर अपना एक हाथ से छूट क मुँह को फैलता है और एक हाथ से अपना लौड़ा छूट पर रख हल्का सा धक्का देता है और सूपड़ा आधा चला जाता है

"ाआअह"

"आर्य अभी गया भी नहीं रानी"

शमशेर झुक कर षुरूश्ती क दोनों हाथो को पकड़ लेता है और जांघो से शुरुश्री क पैरो को दबा कर एक धक्का मारता है

"पछ कर k"aaadha लौड़ा षुरूश्ती क छूट में घुस जाता है

षुरूश्ती :ाआअह

कर क ज़ोर से चिल्लाती उस से पहले शमशेर उसके होठो को अपने होठो में दबा लेता है

और चूसने लगता है

"रानी साहिबा शोर न करे नहीं तो बदनामी आपकी हे होनी है "

शमशेर फिर होठ पकड़ता है और चूसने लगता है षुरूश्ती की साँसे अभी काबू में आई हे थी शमशेर एक और करदा धक्का मारता है और 9 इंच का लैंड पूरा छूट में घुस जाता है

षुरूश्ती खूब ज़ोर से चिल्लाना छह रही थी पर अपने मुँह बंद होने क वजह से गुटक कर रह गयी और उसके आखो से आसुओ की धरे निकलने लगी

शुरुश्री अपने हाथो को शमशेर क छाती पर रख पीछे होने को कहती है

शमशेर हल्का सा अपना लौड़ा बहार निकलता है और षुरूश्ती क होठ छोर कर

"रानी जी लो थोड़ा पीछे खींच लय"

"दुष्ट थोड़ा पीछे गया तुम्हारा लिंग अब भी मेरे बचे दानी के लग रही है"

कहते हुए अपने आँख बंद कर लेती है और उसके आखो से ासु बहने लगते है

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शमशेर फिर ढके मारता है और लौड़ा पूरा न अंदर दाल कर आगे पीछे होने लगता है और षुरूश्ती अपने दोनों हाथो से अपने बगल में रखे तकिए को पकडे आह ाः की आवाज़े निकले जा रही थी

कुछ देर में उसके ासु रुक जाते है और वो हद धक्के क साथ हिल जाती और बड़े मम्मी जो लटक गए थे पर थे बड़े वो भी हिलते

"रानी साहिबा अब कैसा लग रहा है"

पछ पछ की आवाज़ पुरे कक्षा में गूंज रही थी

"ाः ाचा धीरे शमशेर आह"

"रानी साहिबा अगर राजा राजपल का लैंड भी आपके बचे दानी तक पहुँचता तो शायद आप क आज बहुत से बचे होते "

घप्प कर ज़ोर का धक्का मारता है

"ाआअह धीरे "

अब सुर में शमशेर बिना रुके धक्के पेले जा रहा था और षुरूश्ती पिलवायें जा रही थी

"रानी आपकी जितनी कासी हु छूट आज तक नहीं मारी"

"आह लगता है बहुत स्त्रीओ को रिझा चुके हो अपने बातो में और तुम्हारा इतना बड़ा है मेरी योनि क सामने तो तुम्हे कासी हुई हे लगेगी"

"आआह आह शमशेर नहीं आआह "

शमशेर ये सुन कर घापा है पेले जा रहा था

"आह ऐसे हे आह मज़ा आगया मई सोची नहीं थी कभी इतना मज़ा आसक्त है चुदाई में आआह शमशेर"

"चुदाई इसे हे कहते है मूंगफली लैंड से चुड़ोगी तो क्या मज़ा आएगा चुदाई का"

"आआआह में गयी ाआअह ओह आआह"

शमशेर बैठ कर धक्के पेलने लगता है और षुरूश्ती झड़ने लगती है और कुछ देर ऐसे हे धक्के मारने क बाद शमशेर भी झड़ने वाला था

"शमशेर निकालो उस तुम्हारा हो गया निकालो नहीं तो तुम मुझे माँ बना डोज निकालो"

शमशेर होश में आते हुए

सतत्त से अपना सांप जैसा लौड़ा खींचता है और हाथ में लिए मुठियाने लगता है और अपना पानी षुरूश्ती क पेट पर गिराने लगता है

"शमशेर तुम तो अंदर हे छोर देते आज"

"तो क्या होता रानी मेरे बचे की माँ बन जाती"

"और लोग क्या कहते पति कारावास में बंद है पत्नी बचे जन्म रही है"

षुरूश्ती उठ कर अपना बदन साफ़ करती है और अपने छूट को देख अफ़सोस करती है

शमशेर अपने कपडे पहन कर षुरूश्ती को पकड़

"क्या हुआ रानी मज़ा नहीं आया"

"नहीं ऐसी बात नहीं शमशेर"

"तो बोलिये आपको इनाम में क्या चाहिए रानी षुरूश्ती"

रानी षुरूश्ती मौका पे चौके मर कर पूरी बात शमशेर को कह देती है सोमनाथ क बारे में

"देखो शमशेर मैंने भूतकाल में अवश्वया बलदेव और देवरानी को देखना पसंद नहीं करती थी पर जब से तुम सब ने मुझे शाहज़ेब की चुंगल से बचाया में उन्हें सच्चे दिल से अपना मानती हु पर ये सोमनाथ मेरे बेबसी का फायदा उठा कर मेरे ऊपर अब भी बुरी नज़र गड़ाए होता है"

कहते हुए रोने लगी

शमशेर उसको गले लगा कर

"रानी साहिबा हम इसका हल निकालेंगे"

"धन्यवाद शमशेर जी अब आप जाइये"

ये कह कर षुरूश्ती दूर हैट टी है

"आर्य क्या हुआ"

"जाओ शमशेर किसी ने देख क्या तो में मुँह दिखने लायक नहीं रहूंगी "

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"ठीक है रानी जी"

"कृपया अति शीघ्र जाये अपने कक्षा में"

शमशेर उठ कर चला जाता है और षुरूश्ती धम्म से बिस्तर पर लेट जाती है और नंद क आग़ोश में चली जाती है थकने क वजह से और शमशेर भी छूट मर क थक कर जा कर सो जाता है

रत 1 बजे

ऊपर कक्षा में अब भी दोनों प्रेमी जोड़े पति पत्नी या माँ बेटे सोये नहीं थे

Devrani:Kitna मालिश करोगे जी थक जाओगे 1 घंटे से मालिश कर रहे आप

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"रानी माँ आपके संगमरमरी शरीर को में जीवन भर मालिश कर्त तो भी नहीं ठाकु"

"आह राजा इतना पसंद हु में"

"रानी माँ अब कुछ दर्द काम हुआ "

"बहुत काम हुआ दर्द पूरा अंग अंग खुल गया ऐसा लग रहा है"

"तो अब करे शुरू "

"बलदेव जी आप तो मार हे डालोगे"

"माँ देखो न मेरे लैंड को आपकी मालिश कर क क्या हुआ हाल इसका"

ये देख तेल में सनी देवरानी उठती है और आगे बढ़ कर बलदेव का लैंड हाथ में ले लेती है

"इसको तो कुछ काम नहीं है बास रह रह कर मेरी मुनिया पर बुरा नज़र लगाए खड़ा हो जाता है"

देवरानी बलदेव को लिटा देती है और अपने हाथ में तेल ले कर बलदेव क लौड़े को अपने हाथ में ले कर ऊपर निचे कर लौड़े की मालिश करने लगती है

"ाः माँ ुआह"

"कितना बड़ा है ये तेल लगने पर तो और भयानक लग रहा है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
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