अपडेट 91
गहतराष्ट्रा
शाम 6 बजे
बलदेव अपने माँ देवरानी क साथ सात फेरे लेता है फिर अपने माँ क मांग में सिंदूर भर क और मंगलसूत्र दाल कर अपनी माँ को अपनी पत्नी बना लेता है परिवार क सामने देवरानी अपने पति क पेअर छूती है पर बलदेव अपने माँ को अपने बहो में उठा लेता hai.baldev सबको कहता है क अगले 18 घंटे यानि क अभी 6 बजे से ले कर कल दुपहर 12 बजे तक महल क पहले मंज़िल जहा पर बलदेव का कक्षा था कोई नहीं आये और बलदेव सिर्फ कमला को कह देता है क समय से खाना पानी पंहुचा दे
बलदेव अपने माँ को गॉड में उठाये सीढिआँ चढ़ना शुरू करता है और निचे उसकी दादी जीविका बलदेव की सौतेली माँ और देवरानी की सौतन षुरूश्ती ,कमला और वैध जी क साथ हे शमशेर और सोमनाथ उन दोनों को हे देख रहे थे
Kamla:man me)aaj तो दोनों माँ बीटा ऐसे जा रहे हो जैसे सतो जनम से पति पत्नी हो महारानी की आज खैर नहीं छूट का कचुम्बर बना देगा उनका बीटा
Shurushti:man me)Kitni भाग्यसहाली है देवरानी इतना प्रेम करने वाला पति मिला और ये पता होते हुए भी क देवरानी का ये दूसरा विवाह है जीवन भर बलदेव साथ देने क लये तैयार hai,kash मुझे कोई ऐसा गबरू जवान प्यार करता
Somnath:man me)Maharaja ने बड़ी चतुराई से महल क साथ साथ अपने माँ से भी विवाह कर क उनको पत्नी बना लिया मन न पड़ेगा
Jeevika:man me)Ghor कलियुग में समझती हु तुम दोनों की मज़बूरी थी जिसने तुम दोनों को प्रेम करना पड़ा पर इस तरह दिखा कर करोगे कभी सोचा नहीं था
Shamshera:man me)Baldev बहुत नसीब वाला है जिसको अपनी मुहब्बत अपनी मेहबूबा अपनी माँ को बीवी बना लिया ,मेरी हे नसीब ख़राब है
Vaidh:man me)Meri जड़ी बूटीओ का असर दोनों पर बहुत हुआ है अगर आज लहू मुँह लग गया तो दोनों दिन रत एक दूसरे पे चढ़े रहेंगे
Vaidh:Kamla ो कमला
सबका ध्यान टूट ता है
Kamla:Ji वैध जी
Vaidh:kaha खो गए सब क सब
Kamla:han सही बात है अब उन्दोनो को छोर दो हमे अभी बहुत काम है
Vaidh:wo सब छोरो दूध तो दे आओ और साथ में वो जड़ी बूटी भी
Kamla:han हाँ क्यू नहीं
कमला झट से दूध ढूंढ कर उसमे जड़ी बूटी मिलाने लगती है
उधर बलदेव देवरानी को ले कर सीडीओ से ले कर ऊपर चढ़ रहा था और बलदेव देवरानी को आखो में देख रहा था और देवरानी भी बलदेव को देखे जा रही थी
Devrani:Sambhal क महाराज कही गिरा नहीं दो
Baldev:me जीवन भर तुम्हे उठा कर रख सकता हु रानी माँ फिर भी नहीं गिरने दूंगा
बलदेव अब ऊपर आ चूका था और एक धक्के क साथ अपना कक्षा का दरवाज़ा खोलता है और अपना कक्षा देख कर बलदेव बहुत खुश होता है बलदेव का पूरा कक्षा फूलो से सजा हुआ था गुलाब और चमेली और गेंदों क फूल से पूरा बिस्तर सजा था कक्षा में चारो और कही दिया तो कही मोमबत्ती जल रही थी
देवरानी तो कक्षा देख कर इतनी खुश थी क बिना पालक झपकाए देखे जा रही थी
Baldev:kaisa लगा रानी माँ
Devrani:Ya तो रानी कहो या तो माँ
Baldev:q दोनों नहीं हो सकते
बलदेव पलंग क करीब अत है और देवरानी को पलंग पर बैठता है तभी बहार से आवाज़ आती है
"Maharaj..Maharani "
Devrani,dekhiye न कमला लग रही है
Baldev:theek है पत्नी जी जो हुकम
बलदेव दरवाज़े पैर अत है तो देखता है दो जग और एक गिलास में कुछ लिए कड़ी थी
Kamla:kshama करे महाराज वो दूध रखना भूल गयी थी
Baldev:Andar तो खाने पीने क सामान है पहले से बहुत फल है काजू बादाम सब है
Kamla:Maharaj ये वैध जी क तरफ से है समझने की कोशिश कीजिये और ये कुछ जड़ी बूटी जय जो खास कर महारानी क लये है
बलदेव बात को समझते हुए मुस्कुराता है
Baldev:dhanyawad..par तुम इसके बाद सिर्फ दो बार आना एक रात का खाना ले कर और कल सुबह का नाश्ता ले कर आना बीच में मत आना चाहे कोई मर जाये ठीक है
Kamla:Ji महाराज
बलदेव कमला क हाथ से वो थाली ले लेता है और दरवाज़ा बंद कर क कुण्डी लगा देता है और पास रखे मेज़ पर थाली रख देता है
इधर कमला मुद कर सीडीओ से निचे उतरने हे वाली थी क किसी क हांफने की आवाज़ आती है
Kamla:man me)Upar तो बलदेव क सिवा कोई नहीं होता है फिर ये हांफ कौन रहा है
कमला उस आवाज़ का पीछा करते हुए वापस आती है और देखती है बलदेव क कक्षा बिलकुल सत्ता हुआ कक्षा में राजा राजपाल कुर्सी पर बाँदा है उसका हाथ और उसका मुँह बंधा हुआ है और वो अपने कोशिश कर रहा है खोलने की
कमला कक्षा क पास पहुंचते हे हवा से उड़ रहे कक्षा क परदे क बीच से राजपाल को देख कर चौंक जाती है
Kamla:man में) हे भगवन ये बलदेव क कक्षा क बिलकुल बगल में है और बहार से भी ये कक्षा बंद है इसका मतलब बलदेव ने जान बुझ कर इनको यहाँ बंधवाया है ऐसे तो रात भर यह आह की आवाज़ सुन कर देवरानी की कही मर्डर नहीं जाये राजा राजपाल
कमला ये सोचते हे अपने कदम पीछे ले कर सीडीओ से उतर कर निचे आजाती है
बलदेव जग और गिलास को मेज़ पर रख कर जैसे हे मुड़ता है देखता है उसकी माँ देवरानी बड़ा सा घूँघट किये हुए पलंग क बीच में बैठी है बलदेव अपने माँ को देख मुस्कुराता है और अपने मच पर हाथ फेरते हुए तव देता है और पलंग क पास जा कर
Baldev:acha तो मेरी दुल्हन अब घूँघट कर ली है
देवरानी कुछ नहीं बोलती है
बलदेव सामने क मेज़ से जग से दूध गिलास में निकल कर ले आता है और पलंग क कोने पे बैठ कर
"रानी माँ ये लो दूध पी लो"
देवरानी अब भी घूँघट किये बैठे थी देवरानी अपने हाथो को घुटने पैर राखी थी और घुटने मोड़ कर बैठी थी देवरानी अपने पैरो की उंगलिओ से बिस्तर को दबा रही थी
Devrani:Man me)Hey भगवन मेरा बीटा मेरा पति है अब मेरा रोम रोम कैंप रहा है कैसे कर पाऊँगी सब मदद कर मेरी
देवरानी की दशा वही थी जो किसी भी माँ की होगी अगर वो अपने बेटे से विवाह कर क दुल्हन बने अपने बेटे क साथ बंद कमरे में हो
बलदेव दूध का गिलास पलंग क कोने पैर रख देवरानी का हाथ जो हल्का कैंप रहा था उसे अपने हाथो में ले लेता है और सहलाता है
Baldev:Rani माँ हमे ये दिन बहुत म्हणत और आपकी प्राथना का वरदान है जो मिला है आप कोई संकोच है तो आज हम कुछ नहीं करेंगे
ये सुनते हे देवरानी अपने बेटे बलदेव क तरफ खसक कर उसके सीने में अपना सर रख कर अपने बेटे बने पति से गले लग जाती hai,baldev मुस्कुराता है और देवरानी को अपने आग़ोश में ले लेता है और अपना हाथ देवरानी क सर पर रख कर सहलाते हुए
"आर्य मेरी प्यारी दुल्हन तुम्हे ऐसा लगता है
क कोई इतनी सुन्दर दुल्हन को सुहागरात में ऐसे हे छोर दे"
ये कह कर बलदेव हल्का सा है देता है
देवरानी अपना हाथ उठा का मुक्का बना कर हल्का हल्का बलदेव क चौड़े सीने पर मरती है
Baldev:ab शर्माओ मत अपना मुँह दिखाओ
बलदेव ये कह कर देवरानी क घूँघट को पकड़ता है और धीरे धीरे ऊपर करता है जैसे जैसे देवरानी का चेहरा दिखने लगता है देवरानी क शरीर में कंपन बढ़ने लगती है आख़िरकार बलदेव देवरानी का घूँघट उठा कर उसके सर पर रख देता है
Baldev:Itne सुन्दर मुखड़े को छुपाया नहीं जाता अपने पति से बोलो देवरानी क्या चाहिए मुँह दिखाई में?
देवरानी अपने पलके ऊपर उठती है और बलदेव को देखती है जो उसके चेहरे को देख रहा था और बलदेव अपने सुन्दर पत्नी पर गर्व महसूस कर रहा था देवरानी खुश होती है क बलदेव अपने पत्नी पर उसकी सुन्दर पर इतना इत्र रहा है
baldev:bolo रानी माँ
Devrani:Mujhe जीवन भर ऐसे हे प्यार करते रहना मुझे और कुछ नहीं चाहिए
ये कह कर बलदेव को देखती है जो आज दूल्हे क जोड़े में बहुत जांच रहा था और उसके माथे क तिलक से बलदेव और सुन्दर लग रहा था
देवरानी अपने बेटे को देखते हे अपने बेटे से गले फिर से लग जाती है
Devrani:Beta मेरा साथ कभी नहीं छोरना
Baldev:maa अब में तेरे बेटे क साथ पति भी हु में एक रिश्ता छोर क भाग सकता हु दोनों रिश्ता छोर कर नहीं
देवरानी आगे बढ़ कर बलदेव क हाथ अपने हाथ में ले कर
Devrani:To वादा करो क तुम दूसरा विवाह नहीं करोगे और राजाओ की तरह
बलदेव देवरानी क हाथ को अपने हाथ में लेते हुए सहलाता है
Baldev:Nahi करूँगा
देवरानी बलदेव क हाथ से अपना हाथ छुरा कर बलदेव से कस क गले लग जाती है और उसका मोठे मम्मी बलदेव क सीने में धस जाते है
Devrani:waada करो तुम किसी और स्त्री से सम्बन्ध भी नहीं रखोगे
Baldev:Kabhi नहीं में तुम्हे धोखा देने का सोच भी नहीं सकता देवरानी
बलदेव अपना हाथ देवरानी क पीठ पर ले जा कर सहलाता है
Devrani:mere पतिदेव बलदेव सिंह आज से में आपकी हुई आपका हर हुकम में मानूंगी आज से मेरा नाम देवरानी बलदेव सिंह हुआ
देवरानी अपने पति क सामने हाथ जोड़ कर कहती है
Baldev:bhut तेज़ हो रानी माँ अभी से कब्ज़ा करने लगी
Devrani:q न करू लोगो को मेरा नाम सुन कर पता चलना चाहिए में किसकी पत्नी हु
बलदेव हल्का पीछे हाथ कर देवरानी क माथे को चुम लेता है
Baldev:main हमेशा से ऐसी हे पत्नी चाहता था और भगवन ने भी मेरा विवाह तुम से करवा क मेरा सपना पूरा कर दया
बलदेव पलंग पर अपने दोनों पेअर सीधा करते हुए देवरानी का सर अपने कंधे पर रख आधा लेट जाता है देवरानी भी बलदेव से चिपक कर अपना एक दूध निचे बलदेव क कंधे पैर सत्ता कर राखी थी और अपना एक पेअर बलदेव क पेअर पर चढ़ा ली
Devrani:Me भी राजपाल से विवाह से पहले एक मज़बूत कद काठी और सुन्दर पति हो ऐसा सोचती थी पर राजपाल से विवाह होने क बाद जैसे मेरा सपना चकचुर हो गया था
बलदेव देवरानी क बालो को लातो को अपने हाथो से सुलझाते हु
"तो माँ आज मुझे अपने पति बना कर ाचा लग रहा है न कही आपके सपने का राजकुमार मुझ से भी तो सुन्दर नहीं "
देवरानी हल्का सा चपत बलदेव क मज़बूत कंधे पैर मरते हुए
"हैट बदमाश तुम से ाचा पति मुझे सात जन्मो में नहीं मिल सकता मेरे सपने क राजकुमार तुम हे हो"
बलदेव ये सुनते हे देवरानी क पीठ से पकड़ कर अपने ओरे खींचता है और अपने होठ देवरानी क होठ पर रख कर पहले एक हल्का सा चुम्मी लेता है और फिर देवरानी क होठो को ले कर चूसने लगता है
"गलप्प्प गलपपपप गलप्प्प ुमंम्हह गलप्प्प सलरपपल गलपपपप गलप्प सुमममहह"
बलदेव देवरानी क होठ चूस कर छोरता है
Devrani:beta में तो पुरे जीवन भर भगवन से यही प्राथना करुँगी मेरे सतो जनम में तुम हे हे मेरे पति हो
बलदेव देवरानी क कमर पर हाथ रख कर सहलाते हुए देवरानी क कण क निचे चूमता है और अपना जीभ बहार निकल कर चाटने लगता है
Devrani:ah जी धीरे कीजिये न
Baldev:maa तुम्हारे जैसी माल मेरी पत्नी है भला में धीरे कैसे कर सकता हु
कहते हुए बलदेव पूरा बिस्तर पर लेट जाता है और देवरानी को अपने बहो में भरते हुए अपने ऊपर ले लेता है देवरानी अब पूरा बलदेव क ऊपर लेती थी और उसका सर बलदेव क सेने पर था
Baldev:Maa मई सोचा नहीं था क तुम पैट जाओगी और मेरी पत्नी बन जाउंगी ये सब क लये कमला ने भी हमारा मदद की
देवरानी बलदेव क सीने पैर अपना कान लगा कर
Devrani:Me भरी तो नहीं लग रही हु ..
बलदेव देवरानी क कमर पर हाथ रख कर अपने से दबाता है
baldev:bilkul नहीं जी
Devrani:han तुम ठीक कह रहे हो कमला ने हे हम दोनों क बीच प्रेम का बीज बोया था
Baldev

ar चाहते तो थे हम दोनों एक दूसरे को अंदर हे अंदर
Devrani:han तुम्हारी धड़कन भी यही कह रही है
Baldev:acha तो अब तुम धड़कन की भासा भी समझने लगी
Devrani:Ek अछि पत्नी बन ने क लये पति क हर भासा को समझना पड़ता है
बलदेव अपने ऊपर लड़ी देवरानी क गांड पर हाथ ले जाता है जो बिलकुल उसके लैंड क ऊपर था और अपना हाथ को गांड से दबाता है जिस से देवरानी क छूट पर खड़ा मुसल लैंड छू जाता है
Baldev,aur इसकी भासा को ?
ये कह कर देवरानी को देख मुस्कुराता है
Devrani:aah..
अपना मेहँदी लगे हुए हाथो से मुक्का बना कर सीने पर एक मुक्का मरती है
"बदमाश"
और अपना सर बलदेव क चौड़े सीने में शर्म से छुपा लेती है
Baldev:Bolo भी
देवरानी एक बार अपना सर ऊपर उठती है और बलदेव क चेहरे पर देख कर
Devrani:han इसकी भासा भी समझना पत्नी का धर्म है
और वापस अपना सर बलदेव क सीने में छुपा लेती है
बलदेव देवरानी मोठे ख़रबूज़े जैसे आकर क गांड को सहलाते हुए पकड़ता है और निचे से अपने खड़े लैंड से ऊपर अपने माँ क छूट पर मरता है
Devrani:aaah
Baldev:to समझो न माँ इसकी भासा
बलदेव इस बार और ज़ोर से अपना लौड़ा देवरानी क बुर पर मारता है
देवरानी क पैरो की पायल छान छान बज रही थी जब भी बलदेव अपने माँ को दबा रहा था और पुरे कक्षा में दोनों प्रेमी जोड़े क अहसास माहौल को मादक बना रहे थे
पर वही बगल क हे कक्षा में बंधा राजा राजपाल को पूरी बात तो नहीं पर इनदोनो माँ बेटे की फुसुर फुसुर आवाज़ आरही थी और राजपाल को समझते देर नहीं लगी क अंदर उसके पत्नी और बीटा क्या गुल खिला रहे है तभी राजपाल को देवरानी की "आआह" ज़ोर से सुनाई दी और राजपाल अपना बंधा हुआ हाथ गुस्से में आकर खोलने की नाकाम कोशिश करने लगता है उधर देवरानी इस बात से बिलकुल अनजान थी क उसका पहला पति राजपाल उसके हर ज़ोर की चीख सुन प् रहा था
पलंग पर दोनों माँ बेटे एक दूसरे में सांप की तरह लिपटे थे और बलदेव देवरानी की पीठ से ले कर गांड तक सहलाये जा रहा था
Devrani:kuch सालो बाद में तो बूढी हो जाउंगी तो फिर अपने इस शेर क लये तो दूसरी पारी ढूंढोगे हे
देवरानी बलदेव क लौड़े पैर निशाना मरते हुए कहती है
Baldev:Maa कौन कहता है तुम से क तुम बूढी हो जाओगी? तुम्हारी आयु अभी 34 है
Devrani

ar तुम तो 18 क हे हो
Baldev:maa तुम 60 साल की हो जाओगी तो भी में तुमसे उतना हे प्यार करूँगा पर किसी गैर स्त्री को देखूंगा नहीं
Devrani:dekhte है वो तो समय बताएगा
बलदेव देवरानी को पकड़ कर अपने बहो में कास लेता है और पलट कर देवरानी क ऊपर आजाता है
बलदेव देवरानी क दूध क बेच अपना मुँह रख कर अपना लौड़ा देवरानी क छूट क ऊपर रख कर दबाते हुए
"माँ मेरा ये शेर तुम्हे कभी बूढी नहीं होने देगा और वैसे भ्ही शेर शेरनी कभी बूढ़े नहीं होते "
"तो मेरे राजा तो तुम हमेशा मुझपे ऐसे हे चढ़े रहोगे"
"हाँ माँ तुम्हे राजपाल ने खोल तो दिया पर फैला नहीं पाया "
"भक्क "
"सच्ची माँ इसलिए तुम गदरा गयी पर फैली नहीं में और मेरा शेर मिल क तुम्हारी सेवा कर क फैला देंगे और फिर देखना तुम्हारी जवानी कहर ढायेगी"
"बड़ा आया देखेंगे सही में शेर है या चूहा है"
देवरानी बलदेव को अपने बहो में भर लेती है और बलदेव को अचानक से पलट कर उसके ऊपर आजाती है
"माँ हम से न जीत पाओगी पत्नी हो इसलिए छोर रहा हु"
Devrani:chup रहिये आप क अंदर अभी ताक़त की ज़रूरत है दूध पी लीजिये
देवरानी पास रखे दूध का गिलास ले कर बलदेव को देती है बलदेव उठ कर बैठ जाता है और गिलास हाथ में लिए
"माँ दूध तुम पियो जिस से हमारे आने वाले बचे को दूध की कमी न हो"
देवरानी बलदेव क साथ बैठ कर
"लो पीयो दूध नखरे मत करो बलदेव जी"
"सोच लो देवी जितना दूध पिलाओगी उतना मेरा सांप आपके बिल को खोदेगा"
देवरानी ये सुन कर लज्जा जाती है
"पीयो सब मर्द ऐसे हे कहते है"
बलदेव देवरानी क नज़दीक आकर अपने एक हाथ से गिलास को पकड़ता है और देवरानी एक हाथ से पकड़ी होती बलदेव निचे झुक कर दूध पीने लगता है
"माँ ये दूध में वो मज़ा नहीं जो वो दूध में है"
देवरानी बड़े दूध की थैलियों की ओरे इशारा करता है
"माँ अब तुम भी पी लो ये"
बलदेव गिलास देवरानी की ओरे बढ़ता है और देवरानी भी दूध पीने लगती है ऐसे हे बारी बारी से दोनों दो गिलास ख़त्म कर देते है
Devrani:kehte है पति का जूठा पीने से प्यार बढ़ता है
तभी बलदेव को कुछ ध्यान आता है और वो पलंग से उतर कर उस थाली में से कुछ जड़ी बूटी देवरानी को देते हुए
Baldev

evrani ये कमला ने दी थी तुम्हे खा लेने क लये क्या है ये
देवरानी बलदेव से हाथ ले कर वो पानी से जातक जाती है
Devrani:ye हम औरतो की बात है
देवरानी पास रखा मोमबत्ती जो बुझ गया था फिर से जला देती है
देवरानी कड़ी हो कर गिलास और जग को वापस मेज़ पर रखने जाती है और बलदेव देवरानी क लचकते गांड उसके हिलते पपीता जैसे दूध गोरी मखमली पेट हाथो पैरो पे लगी मेहँदी पायल की छान छान देवरानी क माथे पे सिंदूर और गले में बलदेव क नाम का मंगलसूत्र देवरानी इस समय काम देवी से काम नहीं लग रही थी
बलदेव खड़ा होता है और देवरानी क पीछे जा कर अपने बहो में भर लेता है
"माँ तुम कितने सुन्दर हो"
"आह राजा"
"रानी माँ ऐसे बिजलिया बहार मत गिरना नहीं तो बूढ़ा भी आप पर काबू नहीं कर पायेगा"
बादेव अपना लौड़ा देवरानी क घागरे क ऊपर से हे उसके गांड में रगड़ता है
"माँ आज तुम कितनी मादक महक रही हो आह तुम्हे सूंघ कर मेरा शेर खड़ा हो गया"
"आज राजा तुम भी आज इस शादी क जोड़े में किसी महाराज से काम नहीं लग रहे हो और तुम भी तो महक रहे हो"
"तो आओ न माँ आज तुम्हे अपना बना लू"
"मैंने कब मन क्या"
बलदेव देवरानी को घूमता है और ज़ोर से गले लगा लेता है
देवरानी बलदेव क पीठ को सहलाते हुए
"ाः बीटा मेरे पति"
बलदेव अपना हाथ ले जा कर पीछे देवरानी क गांड पर लगता है पर दबाता है ज़ोर से
"आआआआह बीटा "
इतना ज़ोर से चीखती है आवाज़ राजा राजपाल क कानो में पड़ती है
बलदेव देवरानी क आगे आकर देवरानी क मम्मो को पकड़ कर दबाते हुए बैठने लगता है
"माँ तुम्हारी जैसी सुन्दर स्त्री पुरे संसार में नहीं मुझे आज्ञा दो माँ क में आज बाद में आपका पति बन क पति धर्म निभा सकू"
"माँ मुझे आशीर्वाद दो"
"बीटा ये क्या कर रहे हो"
देवरानी बलदेव को कंधे से पकड़ कर अपने से गले लगा लेती है
"माँ तुम कहती हो माँ में तुम्हे रानी माँ क्यू कहता हु क्यू क में चाहता हु क हम दोनों रिश्ता निभाए जब हम अकेले में हो पर दुन्या वाले क सामने सिर्फ पति पत्नी रहे"
"बीटा आज से में तेरी पत्नी हु तू मेरा पेअर न छूना आज क बाद मुझे पाप लगेगा"
"माँ पारस में चाचा की बेटी से विवाह कर लेते है तो क्या उनका खून बदल जाता है रहते तो भाई बहिन हे है न विवाह क बाद भी और उनके पिता जो आपस में भाई होते है वो समधी बन जाते है और जब वो दोनों रिश्ता निभा सकते है तो हम क्यू नहीं"
"तुम सच कह रहे हो भाई भाई समधी भी होते है और भाई भी अपने बचो की शादी कर क जब वो दो रिश्ता रख कर जीवन आराम से काट सकते है तो हम क्यू नहीं"
"माँ आअज मुझे पत्नी को भी भोगना है और माँ को भी तुम मेरी पत्नी माँ हो इसलिए में आज से रानी माँ कहूंगा"
"ठीक है बीटा आज से तुम मेरे राजा बीटा और में तुम्हारी रानी भी माँ भी खुश"
"रानी माँ मुझे आपके संगमरमरी शरीर को देखना है"
"खुद देख लो"
देवरानी का डिल ज़ोर से धड़कने लगता है बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क पल्लू को उसके भरी दूध से हटाता है
"माँ तुम्हारे हुस्न क चर्चे यहाँ से पारस तक है में तुम्हे दिन रत प्यार करना चाहता हु"
बलदेव देवरानी क ब्लाउज को पीछे निकल कर अलग करते हुए
"माँ तुम्हारे हाथो में ये चुड़िआ कंगन बहुत जांच रही है"
"मैंने ये सब श्रृंगार अपने राजा बीटा क लिए क्या है"
"माँ जब तुम चलती हो तो छान छान तेरी पायल की छानकर से मेरा डिल घायल हो जाता है"
देवरानी का ब्लाउज निकल कर फेक देता है और निचे बैठ कर देवरानी क सुन्दर पेअर को देखता है देवरानी अपने पेअर क उंगलिअ ज़मीन पर दबा रही थी बलदेव निचे बैठ कर देवरानी क पेअर को चूमता है
"आह बीटा "
"माँ कितने ऊपर तक मेहँदी लगायी हो कही योनि भी तो नहीं रंग दया"
कहते हुए बलदेव जीभ निकल कर पेअर को चाट ता है
देवरानी ये सुन सिहर जाती है
"हट पगले आह"
बलदेव अब उठ ता है और अपने माँ को बहो में भर कर पलंग पर लिटा देता है और खुद देवरानी क पैरो के आकर देवरानी क पैरो क ऊँगली को मुँह में ले कर चूसने लगता है
"आह बीटा उठ ओममममः"
बलदेव धीरे धीरे ऊपर आता है और अपने माँ क मखमली पेट पर अपना मुँह लगा कर चाट ता है कभी नाभि में अपना जीभ दाल कर चुस्त है ..बलदेव अब देवरानी क पेअर को मोड़ देता है और अपना मुँह देवरानी क जांघो क बीच रख कर जांघो को चूमता है
"िष्ठ बीटा"
"माँ तेरा ये मांसल जांघ आज ुम्म्हा"
"माँ तेरा ये मखमली पेट"
बलदेव अब देवरानी क हाथो को अपने दोनों हाथो में फंसा कर ऊपर होते हुए देवरानी क होठो को अपने होठो के भर लेता है और चूसने लगता है
"गलपपपप गलप्प्प गल्प सलरपपपप ुम्मम्ह गालपप्पगलप्प्प गलपपपपपप
गलप्प्प गलपपपपपप गलप्प गलप्प्प गलप्प"
देवरानी अपना जीभ निकल कर बलदेव क मुँह में भर देती है और बलदेव देवरानी क जीभ को अपने जीभ से पकड़ लेता है और फिर अपने होठो से अपनी माँ क जीभ को पकड़ कर चुस्त है
Devrani:aahhh उम्म्म्म
Baldev:mHhhmmm यह
देवरानी अपने बेटे क सर को सहला रही थी बलदेव निचे हाथ ले जा कर ब्राज़िएर में क़ैद अपने माँ क 38 क दोनों पपीता को जकड लेता है और ज़ोर से दबा देता है
देवरानी अपने होठ बलदेव से अलग कर क
Devrani:aaaaaaaaaaaah
ज़ोर से चिल्लाती जिसे राजपाल सुन लेता है
Devrani:dheere से मेरे राजा बीटा
Baldev:Rani माँ तुझे देख क अपने आपको रोकना मुश्किल हो जाता है
बलदेव फिर देवरानी क चेहरे को चूमने लागत है कभी उसके कान क जड़ो को चूमता तो कभी उसके आखो को तो कभी उसके माथे को तो
निचे बलदेव क हाथ देवरानी क भरी मम्मो को बुरी तरह से पीस रहे थे और देवरानी सिसकी लेते हुए आँख बंद किये लेती थी
"आह राजा ऐसे हे मेरे पति "
बलदेव निचे हाथ बढ़ा कर देवरानी क लाल घागरा क नदी को खोल देता है अब देवरानी सिर्फ एक गुलाबी ब्राज़िएर और जांघिए में थी
"माँ तुम इस ब्राज़िएर और जांघिए में काम देवी से काम नहीं लग रही हो"
"हाँ बीटा ये छोटा है"
"माँ ये छोटे नहीं आपका शरीर ज़्यादा भरी है"
बलदेव देवरानी को अपने बहो में ले लेता है और उसको बेतहाशा चूमने चाटने लगता है
बलदेव पलंग से उतर कर खड़ा होता है और देवरानी को अपने बहो में ले कर उठा लेता है
"आर्य राजा बीटा कहा ले जा रहे हो"
"माँ मुझे तुम्हारा बुर चेतना है"
"धत्त "
शर्मा जाती है देवरानी
बलदेव देवरानी को उठा कर मखमली गद्देदार कुर्सी पर बिठा देता है और खुद निचे लेट कर
"माँ छूट खोलो मुझे चेतना है"
"हट बदमाश कही कोई ऐसे बोलते है क्या"
बलदेव जांघिए क ऊपर से अपना जीभ बहार निकल कर देवरानी क जांघो को चाट ता है और फिर अपना जीभ जांघिए क ऊपर से पाव रोटी जैसी फूली हुई अपने भरी भरकम माँ की मोठे होठो वाली छूट को अपने जीभ से छूटा है
"आह बीटा"
बलदेव अपने आखे बंद कए जीभ को ऊपर से हे चाटने लगता है देवरानी से रहा नहीं जाता है और वो अपने ब्राज़िएर क ऊपर से अपने दूध को मसलने लगती है और हाथ निचे ले जा कर अपने जांघिए को खिसकते हुए
"ले बीटा चाट ले अपने माँ का "
बलदेव अपने माँ क छूट को देख पहले अपने होठो से उसको चूमता है फिर अपना जीभ लगा कर चाट ते हु
"माँ पूरा कहो न"
"आह हम्म यह क्या कहु"
"खा चतु आपका"
"आह राजा मेरा बुर चाट ले"
बलदेव अपने जीभ को नोखिला बना कर चाटने लगता है
देवरानी सीधी बैठती है और अपना ऊँगली बलदेव क मुँह में रख कर
"बड़ा चटोरा है तू"
"तेरे छूट में इतना रस हे है माँ क में चटोरा बन गया"
"अब बास चलो बिस्तर पर "
देवरानी उठ कड़ी होती है बलदेव भी उठ कर जा कर बिस्तर पर लेट जाता है
देवदानी उठ ते हे फिर से अपने छूट को जांघिए से धक् लेती है
"माँ क्यू धक् रही हो निकल दो इसे अब"
देवरानी एक ऐडा से अपना जांघिए निकलती है
"लो अब खुश मेरा राजा बीटा "
"माँ तुम्हारे ये झटेदार मुझे दीवाना बना रही है"
"हट पगले "
और लज्जा कर अपना सर निचे कर क कड़ी हो जाती है
"माँ कड़ी हे रहोगी क्या ज़रा ऐडा से चल कर आओ जैसे वस्त्र में अपने भरी गांड और चुके मटका क मुझे दीवानी की वैसे हे"
देवरानी एक ऐडा से चल कर आने लगती है उसका भरी चुके एक सुर में हिल रहे थे उसके गांड की थिरकन और पेट देख बलदेव अपना वस्त्र निकल कर फेकने लगता है
"माँ तुम्हारी यही चल ने मेरे लैंड को बहुत परेशां क्या है आज तेरी चाल ख़राब कर दूंगा"
देवरानी देखती है बलदेव अपना पूरा वस्त्र निकल दिया है और अपने लौड़े को हाथ से पकडे लेता है
बलदेव जैसे हे अपना हाथ लौड़े से हटाता है
देवरानी आँख फाडे रुक जाती है
Devrani:man me)me मर्डर जाउंगी आज लगता है कितना बड़ा है
"क्या हुआ रानी माँ शेरनी बनती थी बहुत लो अब
मेरा लौड़ा तो जणू कितनी बड़ी महारानी हो पारस की"
देवरानी डर तो रही थी पर नहीं डरने का नाटक करती है
"में डरने वालो में से नहीं "
बलदेव ये सुन खड़ा हो जाता है
"ायजा मेरी रानी"
"क्या में ये सब नहीं की कभ"
"माँ नाटक न करो कमा सूत्र की पुस्तक में पढ़ी तो हो कैसे क्या जाता है"
देवरानी में सोच में थी क्या करे
"माँ लो न इसे मुँह में यही आज से आपका असल पति है जो आपके और आपके छूट की सेवा करेगा"
देवरानी शर्मा जाती है और धीरे से निचे बैठ जाती है
बलदेव आगे खसक कर देवरानी क मुँह क पास अपना हुल्लाबी लौड़ा 9 इंच का ले जाता है और देवरानी हल्का मुँह खोली hi थी क बलदेव सर पकड़ कर धकेल देता है
"यह ममम यह"
"ले मेरी रानी अपने बेटे का लौड़ा ले"
देवरानी अपने हाथ में जैसे हे
"गल्प से ले कर चूसने लगती है"
है उससे एक चटका लगता है
"कितना गरम है राजा ये लोहे सा है"
"तुम्हरे जैसी मज़बूत माल क
लये लोहे का लौड़ा लगता है मुँह में भर क चुसो इसे"
"उम्मठ माँ ऐसे हे हम्म्म्म्म"
थोड़े दिन लौड़ा चूसने क बाद
"राजा बीटा बास "
"आज सुहाग रत है हमारी बास नहीं"
बलदेव देवरानी को उठा क बिस्तर पर पटक देता है
"माँ तुम्हारे भरी मुम्मे हाथ में लो अपने"
देवरानी अपने हाथो में अपने दूध ले लेती है
"आओ चुसो इसे मेरे राजा"
"माँ इनके थिरकन ने मुझे बहुत सताया है "
बलदेव दोनों मम्मो को बारी बारी से खूब दबा दबा क चुस्त है और फिर देवरानी को पलटा कर देवरानी क गांड पर दो थप्पड़ ज़ोर से मारता है
"आआआआआह बीटा नहीं"
देवरानी अचानक ऐसे मरे जाने से चिल्ला उठ टी है और उसकी आवाज़ फिर से उसके पहले पति क कानो में गूंजती है
बादेव देवरानी क गांड को बेरहमी से दबाने लगता है
"माँ इन गांड को इतना मटकती हो तुम कभी लिया है क नहीं इसमें लौड़ा"
देवरानी बलदेव क सीने से लग जाती है
"पति देव जी नहीं लिया कभी ऐसी गन्दी बाते न करो न मुझे शर्म आरही है"
बलदेव अपना लौड़ा देवरानी क छूट पर घिसता है और अपने एक हाथ से देवरानी क बाद गांड को पकड़ कर मसल रहा था और दूसरे हाथ से एक दूध को मसल रहा था देवरानी क होठो को अपने होठो में लिए बलदेव चूसे जा रहा था
"तुम्हारा अंग अंग मादक है मेरी रानी"
"आह बलदेव तुमने मेरा शरीर तोड़ कर रख दिया चारो ओरे से सब कुछ मसल रहे हो ऐसा मसलवाने क लिए में बहुत तरसी हु"
"अभी तक तुम्हे कोई मर्द नहीं मिला था माँ आज तुम्हे पता चलेगा"
"हाँ राज्ज्जाआअह आह कमला सही कहती थी मेरे जैसे भरी भरकम स्त्री क लये कोई तगड़ा मर्द हे चाहिए जो अंग अंग निचोड़ दे जैसे तुम निचोड़ रहे है"
बलदेव देवरानी को पटक देता है बिस्तर पर
"देवरानी अभी तुम्हे पता चल जायेगा ये तुम्हारा बीटा चूहा है या शेर"
लिटा कर बलदेव अपना खड़ा लौड़ा देवरानी क बड़े मम्मो क बीच रख देता है और आगे पीक्जए कर पेलने लगता है
"ये लो मेरी रानी इसे अपने बड़े दूध में बहुत कूदते है ये न ये"
"ाः बीटा यह"
"अपना मुँह खोल मेरी रानी"
देवरानी अपना मुँह खोलती है
बलदेव एक दो घस्से दोनों पपीता क बीच लगता है
और फिर बलदेव अपना भरी हुल्लाबी लौड़ा देवरानी क खुल्ले मुँह में भर्र देता है
"ये ले चूस"
"उन्ह अम्मम्म आआह ुहममम"
देवरानी चस्का ले कर चूसने लगती है
बलदेव का लौड़ा हल्का पानी छोर रहा था जिसे देवरानी चाट जाती है बलदेव अब सीधा लेट जाता है और देवरानी बैठ कर फिर से बलदेव का लौड़ा पकड़ लेती है
देवरानी बलदेव क लौड़ा को पकड़ क ऊपर निचे करते हुए मुठ लगाने लगती है
"ाः माँ ऐसे हे"
"बीटा मुझे यक़ीन नहीं होता इतना बड़ा हो सकता है ये "
"आह आ माँ ऐसे हे हिलाओ "
देवरानी झुक कर "चाप "से मुँह में अपने बेटे का पूरा लौड़ा भर लेती है और चूसने लगती है"
"आआह माआ जीभ से छतो हआ ाः ऐसे हे"
बलदेव अब उठ ता है फिर से देवरानी को सीधा लिटा क छूट को देख कर
"माँ ये वही छूट है जिसके सपनो ने मेरे कई रात ख़राब कए है"
"ाः तो देख ले जितना देखना है"
"सिर्फ देखूंगा नहीं"
बलदेव अपनी बीच की ऊँगली छूट में दाल देता है
"ाः राजा हे भगवन देवरानी अपना आँख बंद कर लेती है और बलदेव ऊँगली आगे पीछे करने लगता है थोड़े देर ऊँगली करते हुए बलदेव निचे झुक कर देवरानी क छूट क डेन को चाट ता है और दो ऊँगली छूट में घुसा देता है
l"aaaah राजा आआह हे भग्वाआं"
बलदेव देवरानी क छूट में अपना जीभ से देवरानी क छूट को खुरच रहा था देवरानी क छूट पानी छोड़ने लगती है
देवरानी को बलदेव खींचता है और अपना लौड़ा हाथ में ले कर देवरानी क छूट पर लगता है और अपने लैंड से छूट क चारो ओरे सहलाता है
देवरानी आँख बंद कए पड़ी थी
Devrani:man me)Bhagwan बचा लेना
"रानी माँ दाल दू"
"हाँ राजा"
"देवरानी आखे तो खोलो मेरी जान"
"नहीं में नहीं देख सकती "
"कुछ नहीं होगा रानी डरो
मत नहीं तो में नहीं करूँगा "
देवरानी ये सुनते हे अपने आखे खोल देती है
"राजा बीटा न तड़पाओ करो
न"
"क्या करू माँ"
"अहह राजा जिसका तुम दिन रत सपना देखे वो करो मुझे पूरी तरह से अपनी पत्नी बना लो"
"क्या करू महारानी देवरानी"
"कमीने ..तो सुनो अपना लिंग मेरे योनि में प्रवेश करो देवरानी को ये चाहिए"
"माँ मुझे आपके शब्दों का अर्थ समझ नहीं आया"
"राजा बीटा अपने माँ को पत्नी बना लो अपना मोटा लौड़ा मेरे छूट में डालो"
ये कहते हुए देवरानी अपना हाथ ले जा कर
लौड़ा अपने हाथो से पकड़ कर अपने छूट क मुहमे पैर रख लेती है और अपनी आखे बंद कए प्राथना करने लगती है
बलदेव मुस्कुरा कर अपने मच पर हाथ फेरता है और देवरानी क संगमरमरी शरीर को ऊपर से निचे तक देख कर एक ज़ोरदार धक्का मारता है
""खच्हहहह" की आवाज़ से लौड़ा देवरानी क छूट में घुस जाता है और देवरानी
Baldev:aaah मा
बलदेव भी आखे बंद कर लेता है
Devrani:aaaaaaaaaah हाय में मर्डर गयी
देवरानी की पनियाई छूट में खच से लौड़ा घुस जाता है
बलदेव आँख बंद कए था और देवरानी भी आँख बंद कए चिल्लाये जा रही थी
बलदेव बिना देखे धक्के मार रहा था
Devrani:nikaaaaaaalo nikaaaaaaaaaalo
ये आवाज़ इतने ज़ोर से थी क राजपाल सुन कर अपना सर परकने लगता है और उसके आखो में ासु आजाते है
बलदेव अपनी आखे खोलता है तो देखता है क देवरानी क छूट से खून बह रहा है
देवरानी अपना पेअर बलदेव क सीने पर रख
धक्का देती है और खुद पीछे हो जाती है
"पछ की आवाज़ से छूट से लौड़ा निकल जाता है जैसे बोतल का ढक्कन खुला हो
देवरानी दर्द से कहर रही थी उसके आखो में ासु थे
बलदेव झट से पास पड़ा कपडा उठाया और पहले अपने लौड़े पे लगा खून साफ़ किया फिर अपने माँ क पास जा कर उसका छूट साफ़ कर क अपने माँ को बहो में ले कर उसके ऊपर आजाता है
"माँ इतने सालो बाद ले रही हो थोड़ा तो दुखेगा"
देवरानी क होठो को चूमते हुए देवरानी क कण में जा कर
"रानी माँ आज न कल तो लेना हे है आपको आपने कभी इतना बड़ा नहीं लिया और ऊपर से 17 18 बरस बाद आप सम्भोग कर रही हो"
देवरानी हिम्मत कर क बलदेव क पीठ पर हाथ फेरते हु
"मुझे क्षमा कर दो राजा ये तो
मेरा पत्नी धर्म है और इस दिन क लये तो में सालो से तदपि हु पीछे कैसे हैट सकती हु"
बलदेव देवरानी क बल को पीछे करते हुए
"मेरी रानी सिर्फ एक बार जगह बन जाने दो कई बरसो का वीरान है ये जगह इसे हरा भरा करने क लये थोड़ी ज़्यादा म्हणत करनी है हम दोनों को हे"
"आह मेरे राजा आजा छोड़ अपनी माँ अचे से"
अपने माँ का जोश देख कर बलदेव फिर से अपने लौड़ा को छूट क मुहाने पर लगता है और धीरे से छूट क गहराई में डालता है
Devrani:aaah ुहममम
बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क होठ को अपने होठ ले कर चुस्त है और एक हाथ से देवरानी क भरी मम्मी को पकड़ कर मसलता है
देवरानी दर्द को सहते हुए अपना हाथ बलदेव क कमर में लपेट लेती है और अपने पैरो को मोड़ कर बलदेव क पेअर में फसा लेती है
बलदेव आधा लौड़ा अंदर दाल दया था थोड़े देर रुकने क बाद जैसे हे देखता है देवरानी अब धीरे धीरे सांस ले रही है वो एक दो और तगड़ा झटका मारता है और देवरानी क मुँह से सिर्फ "ुज्म्म अआप" की आवाज़ आती है और बलदेव फिर से उसके होठ चूसने लगता है देवरानी की छूट अब बलदेव क
पुरे लौड़े को जातक गयी थी
Baldev:man me)abhi निर्दयी नहीं हुआ तो साली जल्दी हाथ नहीं आने वाली
और ज़ोर ज़ोर से झटके मरने लगता है बलदेव का लौड़ा देवरानी क छूट से निकलते खून और उसके छूट क पानी से भीग रहा था
देवरानी की हर चीख घुट कर रह जा रही थी देवरानी को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई उसके पेट में भला घुसा रहा है उसके आखो से ासु दोनों तरफ बह रहे थे और बलदेव अपने धक्को में कोई कमी नहीं करता और लगातार छोड़ते रहता है कुछ 10 मिंट बाद देवरानी को अब उतना दर्द नहीं हो रहा था और वो सामान रूप से लौड़े क झटके को महसूस कर क मज़े लेने लगती है बलदेव समझते हे उसके होठो को छोर दोनों हाथो से उसके बड़े दूध को
मसलते हुए धक्के लगता है
देवरानी बलदेव को धक्के लगते हुए देकते हुए
"आखिर आपने किले पर कब्ज़ा कर हे लिया"
"महारानी किले पैर हे कब्ज़ा किया है अभी तो खज़ाना लूटना बाकी है"
ये कह कर बलदेव अपना एक हाथ देवरानी क गांड पर मरता है
"अहह नहीं राजा वो ख़ज़ाने क आस पास भी नहीं भटका है कोई लूटने की सोचना भी मत"
बलदेव धक्के पे धक्के लगा रहा था
"मेरी पत्नी हो महारानी अब किला भी हमारा और खज़ाना भी"
"आआह यह जान ले लोगे मेरी"
बलदेव ये सुन कर देवरानी क ऊपर झुक जाता है और देवरानी क होठ को चूसते हुए
"जान तुम्हारी गयी तो में कहा ज़िंदा रहूँगा मेरी प्रेमिका मेरी माँ मेरी धरम पत्नी सब कुछ तो तुम हो "
फच्च फच्च की आवाज़ पुरे कक्षा में गूंज रही थी उसके साथ हे देवरानी की चुडिओ की खनक और पायल की छनक से पूरा माहौल मादक बना था
"ाः मा मई मर्डर गयी ऐसे हे छोड़ो आह इतना बड़ा है तुम्हारा लिंग तुम्हारे पिता राजा राजपाल तो नपुंसक थे ाः"
"राजपाल का धन्यवाद् जिसके गलती क वजह से मुझे ऐसी छूट मिली"
"आज मुझे इतना मोटा और बड़ा लिंग आह मेरा जीवन सफल हो गया राजा ाः ऐसे हे"
"इतने ज़ोर क धक्के मार रहे हो राजा बीटा लग रहा है मेरे पेट में योनि में लिंग नहीं तलवार दाल रहो आआह उम्म्म मेरे राजा आअज सही मानव मेरा सुहागरात है आह"
घपपप घपपपप घपपप की आआज़ पुरे कक्षा में
गूँज रहा था
"रानी माँ मेरी पत्नी तुम्हारी जैसी माल को पाना हे मेरा लक्ष्य था बहुत तड़पाया तुमने ये लो"
पछ पहच की आवाज़ बलदेव पूरी ताक़त से धक्के लगा रहा था
"हाय मर्डर गयी में हे भगवाना
आआह आह ू ाआअह ोू ाः"
"ये ले मेरा मुसल अपने छूट में मेरी रानी अब तो पंडित जी ने भी कह दया है दूधो नहाओ पुतो फलो तुझे तो में चूड चूड क हर साल बचे पैदा करूँगा "
"आह में कोई गई नहीं जो हर साल दू आआह बचे ओह आआह ऐसे हे"
"तुम मेरी रांड हो आह "
"हाँ क्यू नहीं कहोगे वैश्यों क पास तो गए थे पारस में आह रेशमा क पास आहे हाँ"
फच्च फच्च घप्प घप्प है से बलदेव पेले जा रहा था
"मेरी रानी तुम्हे बहुत बुरा लगा था मई कोठे पे गया था तो आह इस ले"
Devrani:Mere राजा में अब तुम्हारी पत्नी हु इतना प्यार हे दूंगी तुम किसी और को देखोगे भी नहीं
ये कह कर बलदेव को लिटा देती है और खुद अपने पेअर दोनों तरफ कर क बैठ जाती है और कूदने लगते है
"ाः मेरे राजा में अपने पति अपने बीटा क लये एक वैश्य की तरह भी छुड़वा लुंगी पर अपने पति को कभी कही और मुँह नहीं मरने दूंगी"
थप ठप्प ठप्प की आवाज़ गूंज रही थी
देवरानी अपने भरी भरकम गांड लिए ऊपर निचे हो रही थी बलदेव का लैंड देवरानी क छूट क जड़ तक ैथ कर अंदर बहार हो रहा था देवरानी दर्द और मज़े में आखे बंद कए सिसकने लगी
"ाः राजा आआह में गयी आआह नहीं aaaaaaaaaaaaaaah ओह्ह"
बलदेव देवरानी का कमर पकड़ कर ज़ोर से धक्का देता है दो तीन और देवरानी क छूट रस का फव्वारा निकल अत है
देवरानी कड़ी हो कर अपने छूट पर हाथ फेरते हुए
"आआआआह बीटा हे भगवन न जाने कितने वर्षो बाद ऐसे झड़ी हु ाः मज़ा आज्ञा "
बलदेव देवरानी को कमर से पकड़ता है
"देवरानी इधर आ मेरी माँ मेरा नहीं हुआ अभी"
घपपप कर क्र झुका क देवरानी क छूट में लैंड पेल देता है
"ाआअह राजा धीरे से नहीं दाल सकते क्या"
बलदेव अपने माँ का दोनों हाथो को
पीछे कहीके पकड़ कर तगड़े झटके मारने लगते है
"अब बोलो रानी माँ कौन शेर है"
"ाआअह आआह आए नही ाः"
"ये ले मेरी रानी और ले"
"ाः ना हआ उम्म्म आआआह ओह्ह उफ़ राजा बीटा आआआह"
देवरानी को जझुका कर बलदेव झटके पे झटके मार रहा था ज़ोरदार झटको को देवरानी सह नहीं पति और उसके आखो में फिर से ासु आजाते है
"आआह माँ अब इधर आओ ाः मेरी पत्नी हमारा पहला सम्भोह हम दोनों को याद रहेगा जीवन भर"
बलदेव देवरानी को अपने गॉड में बिठा लेता है और हलके धक्के मरते हुए झड़ने लगता है
"मेरी रानी माँ आपके छूट में जादू है ाः आए यह"
बलदेव आँख बंद कए झाड़ रहा था देवरानी अपना छूट धीरे धीरे बलदेव क लैंड पर ऊपर निचे कर क घिस रही थी
"आह राजा"
"आह माँ रानी"
बलदेव और देवरानी दोनों एक दूसरे बहो
में ले लेते है और मुस्कुराते हुए
"कैसा लगा हमारा पहला मिलान माँ
आज तुम्हे में पत्नी क रूप में
प् कर में धन्य हो गया"
"अति सुखमयी अति आनंदमयी मेरी आत्मा संतुष्ट हो गयी मेरे पति देव आप ज़रूर पिछले जनम में मेरे पति रहे होंगे और इस जनम में बेटे क रूप में आये हो"
"देवरानी मेरी पत्नी"
बलदेव अपना लैंड अभी भी देवरानी क छूट डेल रखा था और दोनों एक दूसरे को अपने अंदर महसूस करते है..
तो बे कॉन्टिनोएड..