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भूरिया वापस मुड़ती है और तेज़ी में बहार जाती है
hooriya:man me)Kamina कैसे उसे पकड़ कर सहला रहा है शर्म हाय नहीं
Shamshera:ammi जान इस लौड़े से मुँह फेर रही हु एक दिन इसे लौड़े क लये सजोगी सरोगी..
आज मुँह फेर रही हो हूरजहाँ मेरे लौड़े से कल इसे लौड़े को वही मुँह में लोगी
शमशेर जल्दी से दरवाज़ा बंद करता है और अपने लौड़े क तरफ जाता है जो अपने अम्मी का नाम लेने से ज़ोर ज़ोर से सर उठा कर हिलने लगता है जैसे क भूरिया को पुकार रहा हो अपनी खिदमत करवाने क लये
Shamshera:bass कुछ दिन की बात है मेरे शेर भूरिया क ज़ालिम गांड में तुम हे घुसोगे उसकी छूट क जड़ में तुम्हारा हे पानी रहेगा उसके होठो को चीयर कर उसके हलक में भी तुम्हे गोते लगाओगे
शमशेर धीरे धीरे अपने लौड़े को सहलाने लगता है और मन को मरते हुए सोने की कोशिश करता है वो ऐसे हाल में मूठ मर लेता है पर शायद भूरिया की हरकत से उसे एक यक़ीन हो गया था क उसकी अम्मी बहुत जल्द उसके निचे होगी भूरिया अपने निक़ाब उतार कर कपडे बदल लेती है जो वो अक्सर सोने क वक़्त पहनती है और बिस्तर पर लेट जाती है
Hooriya:man में) अब ये शमशेर तो मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा मेरी जान क्या बचाई अपने बाप का माल समझ लिया मुझे कैसे आज अपने शर्मगाह को पकड़ रहा था मुझे देख जैसे अब मेरे ऊपर चढ़ जायेगा पर ये बात भी तो सच है क जान बचने वाले का तो हर सांस पर हक़ होता है वो न होता तो सुल्तान मेरे वाहिद क सामने वो मुझे अपने तलवार और तीरो से दर पर हे ख़त्म कर देते पर शमशेर को भी तो समझना चाहिए में उसकी अपनी अम्मी हु कोई और ..भूरिया ये क्या सोच रही हो तुम क्या वो तुम्हारा बीटा न होता तो उसका बिस्तर गरम कर देती तुम बास इसलिए क वो जान bachai..ab जान बचने क बदले तो पूरी दुन्या भर की दौलत दे दो तो काम है वो तो शमशेर बास मेरी मुहब्बत पाना चाहता hai..To क्या में सिर्फ इसलिए रुकी हु आगे नहीं बढ़ रही हु क वो मेरा सागा बीटा है ?उफ्फ्फ में क्या सोच रही हु खुदा मेरे डिल में सिर्फ शमशेर और आखो में शमशेर क्यू है ..नहीं ऐसा नहीं हो सकता में उसको डिल नहीं दे सकती
भूरिया देर रात तक सोचती रहती है और सुबह देर तक सोती रहती है उधर शमशेर सुबह का दवा खाने का इंतज़ार कर रहा था पर जब भूरिया नहीं आती तो शमशेर थोड़ा परेशां होता है और भूरिया क हुजरे क तरफ जाने लगता है शमशेर भूरिया क हुजरे में पहुंच कर परदे क पीछे से
Shamshera:ammi जाएं ..अम्मी जान
भूरिया बेखबर सो रही थी तभी उसके कानो में शमशेर की आवाज़ गूंजती है
भूरिया उठ कर "आजाओ बीटा "
भूरिया उठ कर कड़ी हॉट है और सामने से शमशेर आकर पहले झुक कर सलाम करता है फिर भूरिया क आखो में देखते हुए
"सुबह खैर अम्मी जान"
"सुबह खैर बीटा"
भूरिया मुस्कुरा रही थी क्यू क उसका बीटा उसके बड़े बड़े थान को खा जाने वाली नज़र से देख रहा था और भूरिया क बदन में सुरसुरी होरही थी
भूरिया तुरंत अपना दुपट्टा ले कर अपने भरी वक्षो पर रख लेती है और हल्का मुस्कुरा कर "आओ बैठो शहज़ादे"
"जी अम्मी जान"
"जलवो की साज़िशों को न रखो हिजाब में"
"ये बिजलिया है रुक न सकेंगी निक़ाब में"
शमशेर पहले अपनी माँ क ज़ालिम बड़े गांड को फिर क़ातिल तने दूध को देखता है
hooriya:man me)parde में देख पागल हो गए हो निक़ाब हैट गया तो मर जाओगे बच्चे
भूरिया को इस बार अपने आप पर फख्र महसूस हो रहा था शमशेर की शायरी एक डैम सटीक थी निक़ाब करने क बावजूद कितने लोगो ने भूरिया को छेड़ कर अपनी जान गवा चुके थे पर वो अब भी इस उम्मीद से थी क उसका बीटा अपने कदम पीछे हटा लेगा इसलिए वो अपने मुस्कराहट को दबाते हुए सख्त हो कर कहती है
Hooriya:bass बास करो शेर ो शायरी क्या हुआ कोई बात है
Shamshera:har बात आपको पता तो है अब में क्या बताऊ
Hooriya:chup करो में पूछ रही हु कुछ काम था
Shamshera:ammi जाएं क्यू मई बिना काम क अपने मेहबूबा से नहीं मिल सकता
Hooriya:uffff कोई काम नहीं तो जाओ
भूरिया दांत पीसते हुए कहती है
Shamshera:aap वाक़ई बहुत खूबसूरत लग रही हो
Hooriya:khuda क वास्ते अपनी पागलपंती बंद करो और जाओ हो सके तो सुबह में मत आना कभी
Shamshera:q क्यू नहीं औ में तो आऊंगा
hooriya:maine कहा न में परदे में न होती हु ये ठीक नहीं में तुम्हारी अम्मी हु क्यू कर रहे हो ऐसा भूल जाओ मुझे
Shamshera:Theek है अगर आप आजाओगी मुझसे मिलने तो में नहीं आऊंगा
Hooriya:theek है वैसे में आती तो हु
Shamshera:to आज क्यू नहीं आई में इंतज़ार कर क थक गया
Hooriya:Wo में देर से सोई इसलिए..
Shamshera:acha जी देर रात तक क्या कर रही थी हाँ
शमशेर आँख मार कर मुस्कुरा कर पूछता है
Hooriya:bakwas मत करो तुम मेरे शौहर नहीं जो सवाल पे सवाल कए जा रहे हो
Shamshera:To बना लीजिये अम्मी जान
शमशेर ऊपर से नीचे तक भूरिया को देखते हुए कहता है
भूरिया गुस्से से लाल हो जाती है और शमशेर को मारने क लये भगति है और उसका दुपट्टा फिसल कर गिर जाता है और उसके दोनों मम्मी हवा में तैरने लगते है
शमशेर अपने माँ क भरी दूध को देख जैसे जैम जाता है और खड़े हो कर घूरने लगता है भूरिया मौक़ा का फायदा उठा कर शमशेर पर टूट पड़ती है और हलके हाथो से पीठ पर मारने लगती है
Shamshera:ammi जान छोर दो हहहह मुझे गुदगुदी होरही है ाःहाहा
Hooriya:Han बहुत शौक़ चढ़ा है न तुझे प्यार का
Shamshera:Hahahaha अम्मी जान मुझे आप जान से मार दो फिर भी मेरा डिल कहता रहेगा क आप परिओ से भी खूबसूरत हसीना हो जिसका में दीवाना हु
hooriya:uff मेरे हाथ दुःख गए तुम्हारा बदन पठार जैसा कड़ा है
Shamshera:Shamshera एक शेर है तुम्हारी जैसी बिल्ली क हाथ से चोट नहीं लगेगी
hooriya:tum एक शेर हो तो में भी शेरनी हु अभी खंजर उतार दूंगा सीने में
Shamshera:aahaye मेरी शेरनी शेर का गोश्त खाना है क्या वैसे भी सीने में मेरे डिल था वो भी तुम ले ली
Hooriya:ufff हो अब में कब डिल ले ली तुम्हारा जाओ अब तुम में जाती हु
भूरिया को ज़ोर से पेशाब लग गयी थी और वो उठ कर जाने लगती है और शमशेर उठ कर बैठता है और अपने कपडे सही करता है उधर भूरिया गुसलखाने में पहुँचती है और दरवाज़ा बंद करती है
Shamshera:ammi जान क्या हुआ दरवाज़े को बंद करने की ज़रूरत थी शेरनी कब से पर्दा करने लगी
भूरिया अंदर से चिल्लाती है
"चले जाओ बदबख्त "
भूरिया तेज़ी से अपने जरबन्द खोलती है पाजामे का और जल्दबाज़ी क वजह से उसमे गत लग जाता है भूरिया अब पूरी कोशिश करती है पर गाठ नहीं खुलता
Hooriya:man me)lagta है इसे काटना पड़ेगा ये शमशेर लगता है चला गया है
भूरिया बहार निकलती है तो सामने अब भी शमशेर बैठा कुछ सोच रहा था
Hooriya:ab क्या यही रहना है जाओ तुम
Shamshera:q नहीं मान लेती अब तुम भी मुझे चाहने लगी हो अम्मी जान
Hooriya:uff हो जाओ बाद में आना अभी में उफ़ जाओ मुझे काम है
Shamshera:Aap हमेशा भगति हो आज तो नहीं जाऊंगा में
Hooriya:man me)uff हो कहा रखा है खंजर कैसे काटू जरबन्द
भूरिया इधर उधर ढूंढ़ने लगती है जिसे शमशेर देख कर उसके पास अत है
"क्या हुआ अम्मी जान आप क्या ढूंढ रही हो "
"आर्य जाओ तुम शमशेर में नहीं कह सकती तुमको मेहेरबानी करो"
"अम्मी बता दो शायद में काम आजौ"
"बीटा तुम नहीं क्र सकते कुछ समझो में नहीं बता सकती"
"ाचा तो आप मुझे किसी क़ाबिल नहीं समझती आप एक मौक़ा दे कर देखिये"
भूरिया अब कैसे बताये क उसने पेशाब को रोक क रखा है वो गुस्से से लाल हो जाती है
hooriya:Nalayaq तुम न ..सुनो मेरी जरबन्द में गत बांध गयी है और मुझे ज़ोर की लगी है
Shamshera:jarband में
Hooriya:han पाजामे क नारी me..kamina अब हो गयी tasalli..khanjar ढूंढ रही हु
शमशेर अपनी अम्मी को छटपटाहट देख कर समझ गया क वो पेशाब रोक रही है और उसके वजह से
Shamshera:muaaf कीजिये लगता है मेरे वजह से
Hooriya:khair है काम से काम गलती तो क़ुबूल कए शहज़ादे शब् ने
शमशेर कुछ सोचता है और उसके चेहरे पर मुस्कान फैलती है वो अपने मुस्कान छुपा कर
"अम्मी जान आप चाहे तो में खोल दू आपके सलवार का जरबन्द"
ये कहते हे क शमशेर ने अपनी अम्मी से हे उसके सलवार खोलने की बात कह दी और जरबन्द खोलने की बात कह कर शमशेर का लैंड एक सलामी देता है और भूरिया क कान में जैसे हे ये बात पड़ती है वो सीधा हो कर आँख फाड़े कड़ी हो जाती है उसके तन बदन में एक झनझनाहट महसूस होती है उसके छूट में पेशाब क साथ साथ एक चिति सी रेंगने लगती है
Hooriya:Kya कहा तुमने
अपने आँख फाड़े हुए तल्ख़ लहज़े में अपने बेटे से फिर से पूछती है उसे यक़ीन नहीं होरहा था क उसका बीटा शहज़ादे शमशेर कभी अपनी अम्मी जो पारस की सुल्ताना है उनके सलवार खोलने की बात कह सकता है
Shamshera:ammi जान मैंने कहा आपका नैरा जरबन्द खोल दू आपका सलवार खोल du..aap अगर देरी क्र दी तो..
भूरिया को तो मारे शर्म से मुँह लाल हो गया था शायद उसका बीटा सही कह रहा था
Hooriya:tumse यही उम्मीद थी ..नालायक़ उफ़ खंजर ढूंढो
Shamshera:bass अम्मी जान इधर आओ में अपनी आखे बंद क्र क गत अपने दांतो से खोल देता हु
Hooriya:khabar दार अगर मुझे छूने की कोशिश की
Shamshera:aapke जिस्म पर में अपना ऊँगली तक न छूने दूंगा यक़ीन करे
शमशेर झट से घुटने क बल बैठ जाता है
Hooriya:hmmm उफ़ ये क्या है शमशेर
शमशेर आँख बंद कए घुटनो क बल बैठ जाता है
Shamshera:ammi अपना समीज़ ऊपर कीजिये और मेरे नज़दीक आये
भूरिया मरती क्या न करती मजबूरन कांपते हुए कदमो से शमशेर क तरफ बढ़ती है और अपने हाथो से धीरे धीरे समीज़ ऊपर करती है
शमशेर जैसे महसूस करता है अपने अम्मी को अपने नज़दीक उसके नाक में एक गंध आती है जो खुसबू से मिली जुली थी शमशेर अपने नाक को थोड़ा करीब लेते हुए मदहोश होते हुए सूंघता है
hooriya:ye लो जरबन्द
शमशेर जैसे आँख खोलता है उसके आखो क सामने उसके अम्मी भूरिया का मखमली पेट नज़र आता है
भूरिया देखती है कैसे गौर से उसका बीटा उसके पेट को देख रहा है और नाक से लम्बी सांसे ले क्र सूंघ रहा है
Hooriya:aakhe बंद ..शमशेर कुत्ते
शमशेर फ़ौरन आखे बंद करता है
Shamshera:ammi जान में दांतो से खोलूंगा मुझे दिखेगा कैसे
Hooriya:hoshiyari नहीं में मदद करूंगी
भूरिया अपने एक हाथ से कांपते हुए अपने बेटे क हाथ में जरबन्द देती है जैसे हे शमशेर क हाथ में जरबन्द लगता है उसे सेहला कर
shamshera:man me)ye जरबन्द कितना खुशनसीब है अम्मी क छूट पर लटका रहता है
Shamshera:ab दांत से हे गठन खुलेगी अम्मी मेरे मुँह में अपने सलवार का जरबन्द दे ताके में उसे खींच कर आपका सलवार खोल दू
Hooriya:man me)uff ये ऐसी बाते क्र रहा है मेरे बदन में जैसे आग सा लग गया है
भूरिया धीरे धीरे अपने आपको शमशेर क मुँह क तरफ करती है फिर धीरे से शमशेर क सर पर अपना हाथ रख जरबन्द क गत तक ले जाती है ये इतना धीरे कर रहे थे क दोनों माँ बेटे गरम हो गए थे भूरिया को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वो अपने बेटे का मुँह अपने छूट पर लगाने जा रही है और शमशेर को भी ऐसा लग रहा था उसकी अम्मी अपने हाथो से उसके सर को छूट पर लगा रही है दोनों क लये ये पहली ऐसी नज़दीकी थी अब गठन दांत क पास थी और शमशेर बिना देर कए उसे अपने दांतो से पकड़ लेता है
Shamshera:uh अम्मी जाएं एक बार आखे खोल लू
गरम साँसे शमशेर की भूरिया क पेट पर लग रहा था जिसे भूरिया महसूस कर ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगती है
Hooriya:hmmm खोल ले
शमशेर आखे खोल अपने अम्मी क पेट को खा जाने वाली नज़र से देखता है जिसे देख भूरिया अपनी आखे बंद कर लेती है और ज़ोर ज़ोर से हांफने लगती है
शमशेर एक गहरी सांस छोर कर गत को समझता है और एक हाथ में जरबन्द लिए
Shamshera:ammi जान आपकी सलवार खोल दू
Hooriya:han खोल दे हम्म्म आखे बंद क्र ले नालायक़
शमशेर आखे बंद करता है और दांतो में गठन लिए खींचता है भूरिया अपने सलवार को दोनों हाथो से ऊपर कर क पकड़ी होती है इस दर से कही गिर न जाये और वो नंगी अपने बेटे क सामने आजाये
दो से तीन बार शमशेर गठन को खीचता है और वो खुल जाता है भूरिया निचे देखते हे क गठन खुल गया है अपने हाथो से जरबन्द पकड़ कर ऊपर खींचती है और एक हाथ से शमशेर क चेहरे को पकड़ क धक्का देती है
शमशेर उल्टा हो क्र फर्श पर गिर जाता है
hooriya:besharam अपने अम्मी का सलवार खोलते हुए शर्म नहीं आए आइंदा ऐसा सोचना भी मत
शमशेर फरह पर बैठा था और खा जाने वाली नज़रो से देखता है भूरिया कामउत्तेज़ना से लाल हुई थी और अपने दोनों हाथो में सलवार को पकड़ी है शमशेर देखता है क सलवार पर ठीक छूट क आगे दो बून्द का निशान है और उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट आती है
Shamshera:ammi जान एक दिन आपके नारा जरबन्द में हे खोलूंगा और मई हे बांधूंगा और सलवार भी मेरे पसंद की उतरूंगा में और पहनाउंगा में
शमशेर अपने अम्मी से बिना डरे अपने लौड़े क ऊपर हाथ रख लेता है
Hooriya:huhh अपने ख्वाबो में कर लेना ऐसा
तुनक कर भगति है और उसके बड़ी गांड को देख शमशेर बैठा अपने लौड़े को मसलते रहता है
तेज़ी से भाग कर गुसलखाने का दरवाज़ा बंद कर देती है
शमशेर बेहवास अपने अम्मी क छूट की खुशबु और उसके मखमली पेट क खुमारी में मुस्कुराता जो अब तक उसकी सांसो में थी और अभी भरी कूल्हों को मटकता देख तो शमशेर क डिल क सौ टुकड़े हो गए है तभी उसके कान में एक ज़ोरदार सीटी की आवाज़ आती है अंदर भूरिया बैठ कर पेशाब करने लगी थी
Shamshera:man me)uff अम्मी पहले छूट की खुसबू सुंघाई अब सीटी से मेरे लौड़े को छेड़ रही हो कही ऐसा न हो क मेरा लौड़ा बेकाबू हो जाये
शमशेर उठता है और बहार जाते हुए
"अम्मी जान आज में आपको घूमने ले जाऊंगा तैयार रहना "
भूरिया अब तक बैठी पेशाब कर रही थी उसका चेहरा लाल था और माथे पर पसीने थे अब वो उठ टी है तो उसका नज़र सलवार क आगे क हिस्से पर पड़ती है तो दो बून्द का निशान था वो उसे छू कर देखती है तो चौंक जाती है क्यू क वो एक चिपचिपा चीज़ थी
Hooriya:uff ये क्या हो गया क्या इसलिए शमशेर मज़े से सूंघ रहा था ये तो मणि है
भूरिया अपने छूट पर हाथ लगाती है और उसे वह भी चिपचिपा महसूस होता है
Hooriya:uff अब क्या करू शमशेर ने मेरे शर्मगाह और मेरे मणि दोनों की बू सूंघ ली छी मई कैसे इतनी गरम हो गयी जो ये पानी छोड़ने लगी क्या में अपने बेटे क लये गरम हो गई और मेरे बुर उसके लिए पानी छोर दी
तो बे कॉन्टिनोएड
भूरिया वापस मुड़ती है और तेज़ी में बहार जाती है
hooriya:man me)Kamina कैसे उसे पकड़ कर सहला रहा है शर्म हाय नहीं
Shamshera:ammi जान इस लौड़े से मुँह फेर रही हु एक दिन इसे लौड़े क लये सजोगी सरोगी..
आज मुँह फेर रही हो हूरजहाँ मेरे लौड़े से कल इसे लौड़े को वही मुँह में लोगी
शमशेर जल्दी से दरवाज़ा बंद करता है और अपने लौड़े क तरफ जाता है जो अपने अम्मी का नाम लेने से ज़ोर ज़ोर से सर उठा कर हिलने लगता है जैसे क भूरिया को पुकार रहा हो अपनी खिदमत करवाने क लये
Shamshera:bass कुछ दिन की बात है मेरे शेर भूरिया क ज़ालिम गांड में तुम हे घुसोगे उसकी छूट क जड़ में तुम्हारा हे पानी रहेगा उसके होठो को चीयर कर उसके हलक में भी तुम्हे गोते लगाओगे
शमशेर धीरे धीरे अपने लौड़े को सहलाने लगता है और मन को मरते हुए सोने की कोशिश करता है वो ऐसे हाल में मूठ मर लेता है पर शायद भूरिया की हरकत से उसे एक यक़ीन हो गया था क उसकी अम्मी बहुत जल्द उसके निचे होगी भूरिया अपने निक़ाब उतार कर कपडे बदल लेती है जो वो अक्सर सोने क वक़्त पहनती है और बिस्तर पर लेट जाती है
Hooriya:man में) अब ये शमशेर तो मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा मेरी जान क्या बचाई अपने बाप का माल समझ लिया मुझे कैसे आज अपने शर्मगाह को पकड़ रहा था मुझे देख जैसे अब मेरे ऊपर चढ़ जायेगा पर ये बात भी तो सच है क जान बचने वाले का तो हर सांस पर हक़ होता है वो न होता तो सुल्तान मेरे वाहिद क सामने वो मुझे अपने तलवार और तीरो से दर पर हे ख़त्म कर देते पर शमशेर को भी तो समझना चाहिए में उसकी अपनी अम्मी हु कोई और ..भूरिया ये क्या सोच रही हो तुम क्या वो तुम्हारा बीटा न होता तो उसका बिस्तर गरम कर देती तुम बास इसलिए क वो जान bachai..ab जान बचने क बदले तो पूरी दुन्या भर की दौलत दे दो तो काम है वो तो शमशेर बास मेरी मुहब्बत पाना चाहता hai..To क्या में सिर्फ इसलिए रुकी हु आगे नहीं बढ़ रही हु क वो मेरा सागा बीटा है ?उफ्फ्फ में क्या सोच रही हु खुदा मेरे डिल में सिर्फ शमशेर और आखो में शमशेर क्यू है ..नहीं ऐसा नहीं हो सकता में उसको डिल नहीं दे सकती
भूरिया देर रात तक सोचती रहती है और सुबह देर तक सोती रहती है उधर शमशेर सुबह का दवा खाने का इंतज़ार कर रहा था पर जब भूरिया नहीं आती तो शमशेर थोड़ा परेशां होता है और भूरिया क हुजरे क तरफ जाने लगता है शमशेर भूरिया क हुजरे में पहुंच कर परदे क पीछे से
Shamshera:ammi जाएं ..अम्मी जान
भूरिया बेखबर सो रही थी तभी उसके कानो में शमशेर की आवाज़ गूंजती है
भूरिया उठ कर "आजाओ बीटा "
भूरिया उठ कर कड़ी हॉट है और सामने से शमशेर आकर पहले झुक कर सलाम करता है फिर भूरिया क आखो में देखते हुए
"सुबह खैर अम्मी जान"
"सुबह खैर बीटा"
भूरिया मुस्कुरा रही थी क्यू क उसका बीटा उसके बड़े बड़े थान को खा जाने वाली नज़र से देख रहा था और भूरिया क बदन में सुरसुरी होरही थी
भूरिया तुरंत अपना दुपट्टा ले कर अपने भरी वक्षो पर रख लेती है और हल्का मुस्कुरा कर "आओ बैठो शहज़ादे"
"जी अम्मी जान"
"जलवो की साज़िशों को न रखो हिजाब में"
"ये बिजलिया है रुक न सकेंगी निक़ाब में"
शमशेर पहले अपनी माँ क ज़ालिम बड़े गांड को फिर क़ातिल तने दूध को देखता है
hooriya:man me)parde में देख पागल हो गए हो निक़ाब हैट गया तो मर जाओगे बच्चे
भूरिया को इस बार अपने आप पर फख्र महसूस हो रहा था शमशेर की शायरी एक डैम सटीक थी निक़ाब करने क बावजूद कितने लोगो ने भूरिया को छेड़ कर अपनी जान गवा चुके थे पर वो अब भी इस उम्मीद से थी क उसका बीटा अपने कदम पीछे हटा लेगा इसलिए वो अपने मुस्कराहट को दबाते हुए सख्त हो कर कहती है
Hooriya:bass बास करो शेर ो शायरी क्या हुआ कोई बात है
Shamshera:har बात आपको पता तो है अब में क्या बताऊ
Hooriya:chup करो में पूछ रही हु कुछ काम था
Shamshera:ammi जाएं क्यू मई बिना काम क अपने मेहबूबा से नहीं मिल सकता
Hooriya:uffff कोई काम नहीं तो जाओ
भूरिया दांत पीसते हुए कहती है
Shamshera:aap वाक़ई बहुत खूबसूरत लग रही हो
Hooriya:khuda क वास्ते अपनी पागलपंती बंद करो और जाओ हो सके तो सुबह में मत आना कभी
Shamshera:q क्यू नहीं औ में तो आऊंगा
hooriya:maine कहा न में परदे में न होती हु ये ठीक नहीं में तुम्हारी अम्मी हु क्यू कर रहे हो ऐसा भूल जाओ मुझे
Shamshera:Theek है अगर आप आजाओगी मुझसे मिलने तो में नहीं आऊंगा
Hooriya:theek है वैसे में आती तो हु
Shamshera:to आज क्यू नहीं आई में इंतज़ार कर क थक गया
Hooriya:Wo में देर से सोई इसलिए..
Shamshera:acha जी देर रात तक क्या कर रही थी हाँ
शमशेर आँख मार कर मुस्कुरा कर पूछता है
Hooriya:bakwas मत करो तुम मेरे शौहर नहीं जो सवाल पे सवाल कए जा रहे हो
Shamshera:To बना लीजिये अम्मी जान
शमशेर ऊपर से नीचे तक भूरिया को देखते हुए कहता है
भूरिया गुस्से से लाल हो जाती है और शमशेर को मारने क लये भगति है और उसका दुपट्टा फिसल कर गिर जाता है और उसके दोनों मम्मी हवा में तैरने लगते है
शमशेर अपने माँ क भरी दूध को देख जैसे जैम जाता है और खड़े हो कर घूरने लगता है भूरिया मौक़ा का फायदा उठा कर शमशेर पर टूट पड़ती है और हलके हाथो से पीठ पर मारने लगती है
Shamshera:ammi जान छोर दो हहहह मुझे गुदगुदी होरही है ाःहाहा
Hooriya:Han बहुत शौक़ चढ़ा है न तुझे प्यार का
Shamshera:Hahahaha अम्मी जान मुझे आप जान से मार दो फिर भी मेरा डिल कहता रहेगा क आप परिओ से भी खूबसूरत हसीना हो जिसका में दीवाना हु
hooriya:uff मेरे हाथ दुःख गए तुम्हारा बदन पठार जैसा कड़ा है
Shamshera:Shamshera एक शेर है तुम्हारी जैसी बिल्ली क हाथ से चोट नहीं लगेगी
hooriya:tum एक शेर हो तो में भी शेरनी हु अभी खंजर उतार दूंगा सीने में
Shamshera:aahaye मेरी शेरनी शेर का गोश्त खाना है क्या वैसे भी सीने में मेरे डिल था वो भी तुम ले ली
Hooriya:ufff हो अब में कब डिल ले ली तुम्हारा जाओ अब तुम में जाती हु
भूरिया को ज़ोर से पेशाब लग गयी थी और वो उठ कर जाने लगती है और शमशेर उठ कर बैठता है और अपने कपडे सही करता है उधर भूरिया गुसलखाने में पहुँचती है और दरवाज़ा बंद करती है
Shamshera:ammi जान क्या हुआ दरवाज़े को बंद करने की ज़रूरत थी शेरनी कब से पर्दा करने लगी
भूरिया अंदर से चिल्लाती है
"चले जाओ बदबख्त "
भूरिया तेज़ी से अपने जरबन्द खोलती है पाजामे का और जल्दबाज़ी क वजह से उसमे गत लग जाता है भूरिया अब पूरी कोशिश करती है पर गाठ नहीं खुलता
Hooriya:man me)lagta है इसे काटना पड़ेगा ये शमशेर लगता है चला गया है
भूरिया बहार निकलती है तो सामने अब भी शमशेर बैठा कुछ सोच रहा था
Hooriya:ab क्या यही रहना है जाओ तुम
Shamshera:q नहीं मान लेती अब तुम भी मुझे चाहने लगी हो अम्मी जान
Hooriya:uff हो जाओ बाद में आना अभी में उफ़ जाओ मुझे काम है
Shamshera:Aap हमेशा भगति हो आज तो नहीं जाऊंगा में
Hooriya:man me)uff हो कहा रखा है खंजर कैसे काटू जरबन्द
भूरिया इधर उधर ढूंढ़ने लगती है जिसे शमशेर देख कर उसके पास अत है
"क्या हुआ अम्मी जान आप क्या ढूंढ रही हो "
"आर्य जाओ तुम शमशेर में नहीं कह सकती तुमको मेहेरबानी करो"
"अम्मी बता दो शायद में काम आजौ"
"बीटा तुम नहीं क्र सकते कुछ समझो में नहीं बता सकती"
"ाचा तो आप मुझे किसी क़ाबिल नहीं समझती आप एक मौक़ा दे कर देखिये"
भूरिया अब कैसे बताये क उसने पेशाब को रोक क रखा है वो गुस्से से लाल हो जाती है
hooriya:Nalayaq तुम न ..सुनो मेरी जरबन्द में गत बांध गयी है और मुझे ज़ोर की लगी है
Shamshera:jarband में
Hooriya:han पाजामे क नारी me..kamina अब हो गयी tasalli..khanjar ढूंढ रही हु
शमशेर अपनी अम्मी को छटपटाहट देख कर समझ गया क वो पेशाब रोक रही है और उसके वजह से
Shamshera:muaaf कीजिये लगता है मेरे वजह से
Hooriya:khair है काम से काम गलती तो क़ुबूल कए शहज़ादे शब् ने
शमशेर कुछ सोचता है और उसके चेहरे पर मुस्कान फैलती है वो अपने मुस्कान छुपा कर
"अम्मी जान आप चाहे तो में खोल दू आपके सलवार का जरबन्द"
ये कहते हे क शमशेर ने अपनी अम्मी से हे उसके सलवार खोलने की बात कह दी और जरबन्द खोलने की बात कह कर शमशेर का लैंड एक सलामी देता है और भूरिया क कान में जैसे हे ये बात पड़ती है वो सीधा हो कर आँख फाड़े कड़ी हो जाती है उसके तन बदन में एक झनझनाहट महसूस होती है उसके छूट में पेशाब क साथ साथ एक चिति सी रेंगने लगती है
Hooriya:Kya कहा तुमने
अपने आँख फाड़े हुए तल्ख़ लहज़े में अपने बेटे से फिर से पूछती है उसे यक़ीन नहीं होरहा था क उसका बीटा शहज़ादे शमशेर कभी अपनी अम्मी जो पारस की सुल्ताना है उनके सलवार खोलने की बात कह सकता है
Shamshera:ammi जान मैंने कहा आपका नैरा जरबन्द खोल दू आपका सलवार खोल du..aap अगर देरी क्र दी तो..
भूरिया को तो मारे शर्म से मुँह लाल हो गया था शायद उसका बीटा सही कह रहा था
Hooriya:tumse यही उम्मीद थी ..नालायक़ उफ़ खंजर ढूंढो
Shamshera:bass अम्मी जान इधर आओ में अपनी आखे बंद क्र क गत अपने दांतो से खोल देता हु
Hooriya:khabar दार अगर मुझे छूने की कोशिश की
Shamshera:aapke जिस्म पर में अपना ऊँगली तक न छूने दूंगा यक़ीन करे
शमशेर झट से घुटने क बल बैठ जाता है
Hooriya:hmmm उफ़ ये क्या है शमशेर
शमशेर आँख बंद कए घुटनो क बल बैठ जाता है
Shamshera:ammi अपना समीज़ ऊपर कीजिये और मेरे नज़दीक आये
भूरिया मरती क्या न करती मजबूरन कांपते हुए कदमो से शमशेर क तरफ बढ़ती है और अपने हाथो से धीरे धीरे समीज़ ऊपर करती है
शमशेर जैसे महसूस करता है अपने अम्मी को अपने नज़दीक उसके नाक में एक गंध आती है जो खुसबू से मिली जुली थी शमशेर अपने नाक को थोड़ा करीब लेते हुए मदहोश होते हुए सूंघता है
hooriya:ye लो जरबन्द
शमशेर जैसे आँख खोलता है उसके आखो क सामने उसके अम्मी भूरिया का मखमली पेट नज़र आता है
भूरिया देखती है कैसे गौर से उसका बीटा उसके पेट को देख रहा है और नाक से लम्बी सांसे ले क्र सूंघ रहा है
Hooriya:aakhe बंद ..शमशेर कुत्ते
शमशेर फ़ौरन आखे बंद करता है
Shamshera:ammi जान में दांतो से खोलूंगा मुझे दिखेगा कैसे
Hooriya:hoshiyari नहीं में मदद करूंगी
भूरिया अपने एक हाथ से कांपते हुए अपने बेटे क हाथ में जरबन्द देती है जैसे हे शमशेर क हाथ में जरबन्द लगता है उसे सेहला कर
shamshera:man me)ye जरबन्द कितना खुशनसीब है अम्मी क छूट पर लटका रहता है
Shamshera:ab दांत से हे गठन खुलेगी अम्मी मेरे मुँह में अपने सलवार का जरबन्द दे ताके में उसे खींच कर आपका सलवार खोल दू
Hooriya:man me)uff ये ऐसी बाते क्र रहा है मेरे बदन में जैसे आग सा लग गया है
भूरिया धीरे धीरे अपने आपको शमशेर क मुँह क तरफ करती है फिर धीरे से शमशेर क सर पर अपना हाथ रख जरबन्द क गत तक ले जाती है ये इतना धीरे कर रहे थे क दोनों माँ बेटे गरम हो गए थे भूरिया को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वो अपने बेटे का मुँह अपने छूट पर लगाने जा रही है और शमशेर को भी ऐसा लग रहा था उसकी अम्मी अपने हाथो से उसके सर को छूट पर लगा रही है दोनों क लये ये पहली ऐसी नज़दीकी थी अब गठन दांत क पास थी और शमशेर बिना देर कए उसे अपने दांतो से पकड़ लेता है
Shamshera:uh अम्मी जाएं एक बार आखे खोल लू
गरम साँसे शमशेर की भूरिया क पेट पर लग रहा था जिसे भूरिया महसूस कर ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगती है
Hooriya:hmmm खोल ले
शमशेर आखे खोल अपने अम्मी क पेट को खा जाने वाली नज़र से देखता है जिसे देख भूरिया अपनी आखे बंद कर लेती है और ज़ोर ज़ोर से हांफने लगती है
शमशेर एक गहरी सांस छोर कर गत को समझता है और एक हाथ में जरबन्द लिए
Shamshera:ammi जान आपकी सलवार खोल दू
Hooriya:han खोल दे हम्म्म आखे बंद क्र ले नालायक़
शमशेर आखे बंद करता है और दांतो में गठन लिए खींचता है भूरिया अपने सलवार को दोनों हाथो से ऊपर कर क पकड़ी होती है इस दर से कही गिर न जाये और वो नंगी अपने बेटे क सामने आजाये
दो से तीन बार शमशेर गठन को खीचता है और वो खुल जाता है भूरिया निचे देखते हे क गठन खुल गया है अपने हाथो से जरबन्द पकड़ कर ऊपर खींचती है और एक हाथ से शमशेर क चेहरे को पकड़ क धक्का देती है
शमशेर उल्टा हो क्र फर्श पर गिर जाता है
hooriya:besharam अपने अम्मी का सलवार खोलते हुए शर्म नहीं आए आइंदा ऐसा सोचना भी मत
शमशेर फरह पर बैठा था और खा जाने वाली नज़रो से देखता है भूरिया कामउत्तेज़ना से लाल हुई थी और अपने दोनों हाथो में सलवार को पकड़ी है शमशेर देखता है क सलवार पर ठीक छूट क आगे दो बून्द का निशान है और उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट आती है
Shamshera:ammi जान एक दिन आपके नारा जरबन्द में हे खोलूंगा और मई हे बांधूंगा और सलवार भी मेरे पसंद की उतरूंगा में और पहनाउंगा में
शमशेर अपने अम्मी से बिना डरे अपने लौड़े क ऊपर हाथ रख लेता है
Hooriya:huhh अपने ख्वाबो में कर लेना ऐसा
तुनक कर भगति है और उसके बड़ी गांड को देख शमशेर बैठा अपने लौड़े को मसलते रहता है
तेज़ी से भाग कर गुसलखाने का दरवाज़ा बंद कर देती है
शमशेर बेहवास अपने अम्मी क छूट की खुशबु और उसके मखमली पेट क खुमारी में मुस्कुराता जो अब तक उसकी सांसो में थी और अभी भरी कूल्हों को मटकता देख तो शमशेर क डिल क सौ टुकड़े हो गए है तभी उसके कान में एक ज़ोरदार सीटी की आवाज़ आती है अंदर भूरिया बैठ कर पेशाब करने लगी थी
Shamshera:man me)uff अम्मी पहले छूट की खुसबू सुंघाई अब सीटी से मेरे लौड़े को छेड़ रही हो कही ऐसा न हो क मेरा लौड़ा बेकाबू हो जाये
शमशेर उठता है और बहार जाते हुए
"अम्मी जान आज में आपको घूमने ले जाऊंगा तैयार रहना "
भूरिया अब तक बैठी पेशाब कर रही थी उसका चेहरा लाल था और माथे पर पसीने थे अब वो उठ टी है तो उसका नज़र सलवार क आगे क हिस्से पर पड़ती है तो दो बून्द का निशान था वो उसे छू कर देखती है तो चौंक जाती है क्यू क वो एक चिपचिपा चीज़ थी
Hooriya:uff ये क्या हो गया क्या इसलिए शमशेर मज़े से सूंघ रहा था ये तो मणि है
भूरिया अपने छूट पर हाथ लगाती है और उसे वह भी चिपचिपा महसूस होता है
Hooriya:uff अब क्या करू शमशेर ने मेरे शर्मगाह और मेरे मणि दोनों की बू सूंघ ली छी मई कैसे इतनी गरम हो गयी जो ये पानी छोड़ने लगी क्या में अपने बेटे क लये गरम हो गई और मेरे बुर उसके लिए पानी छोर दी
तो बे कॉन्टिनोएड