Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 17 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 152

भूरिया वापस मुड़ती है और तेज़ी में बहार जाती है

hooriya:man me)Kamina कैसे उसे पकड़ कर सहला रहा है शर्म हाय नहीं

Shamshera:ammi जान इस लौड़े से मुँह फेर रही हु एक दिन इसे लौड़े क लये सजोगी सरोगी..

आज मुँह फेर रही हो हूरजहाँ मेरे लौड़े से कल इसे लौड़े को वही मुँह में लोगी

शमशेर जल्दी से दरवाज़ा बंद करता है और अपने लौड़े क तरफ जाता है जो अपने अम्मी का नाम लेने से ज़ोर ज़ोर से सर उठा कर हिलने लगता है जैसे क भूरिया को पुकार रहा हो अपनी खिदमत करवाने क लये

Shamshera:bass कुछ दिन की बात है मेरे शेर भूरिया क ज़ालिम गांड में तुम हे घुसोगे उसकी छूट क जड़ में तुम्हारा हे पानी रहेगा उसके होठो को चीयर कर उसके हलक में भी तुम्हे गोते लगाओगे

शमशेर धीरे धीरे अपने लौड़े को सहलाने लगता है और मन को मरते हुए सोने की कोशिश करता है वो ऐसे हाल में मूठ मर लेता है पर शायद भूरिया की हरकत से उसे एक यक़ीन हो गया था क उसकी अम्मी बहुत जल्द उसके निचे होगी भूरिया अपने निक़ाब उतार कर कपडे बदल लेती है जो वो अक्सर सोने क वक़्त पहनती है और बिस्तर पर लेट जाती है



Hooriya:man में) अब ये शमशेर तो मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा मेरी जान क्या बचाई अपने बाप का माल समझ लिया मुझे कैसे आज अपने शर्मगाह को पकड़ रहा था मुझे देख जैसे अब मेरे ऊपर चढ़ जायेगा पर ये बात भी तो सच है क जान बचने वाले का तो हर सांस पर हक़ होता है वो न होता तो सुल्तान मेरे वाहिद क सामने वो मुझे अपने तलवार और तीरो से दर पर हे ख़त्म कर देते पर शमशेर को भी तो समझना चाहिए में उसकी अपनी अम्मी हु कोई और ..भूरिया ये क्या सोच रही हो तुम क्या वो तुम्हारा बीटा न होता तो उसका बिस्तर गरम कर देती तुम बास इसलिए क वो जान bachai..ab जान बचने क बदले तो पूरी दुन्या भर की दौलत दे दो तो काम है वो तो शमशेर बास मेरी मुहब्बत पाना चाहता hai..To क्या में सिर्फ इसलिए रुकी हु आगे नहीं बढ़ रही हु क वो मेरा सागा बीटा है ?उफ्फ्फ में क्या सोच रही हु खुदा मेरे डिल में सिर्फ शमशेर और आखो में शमशेर क्यू है ..नहीं ऐसा नहीं हो सकता में उसको डिल नहीं दे सकती

भूरिया देर रात तक सोचती रहती है और सुबह देर तक सोती रहती है उधर शमशेर सुबह का दवा खाने का इंतज़ार कर रहा था पर जब भूरिया नहीं आती तो शमशेर थोड़ा परेशां होता है और भूरिया क हुजरे क तरफ जाने लगता है शमशेर भूरिया क हुजरे में पहुंच कर परदे क पीछे से

Shamshera:ammi जाएं ..अम्मी जान

भूरिया बेखबर सो रही थी तभी उसके कानो में शमशेर की आवाज़ गूंजती है

भूरिया उठ कर "आजाओ बीटा "

भूरिया उठ कर कड़ी हॉट है और सामने से शमशेर आकर पहले झुक कर सलाम करता है फिर भूरिया क आखो में देखते हुए

"सुबह खैर अम्मी जान"

"सुबह खैर बीटा"



भूरिया मुस्कुरा रही थी क्यू क उसका बीटा उसके बड़े बड़े थान को खा जाने वाली नज़र से देख रहा था और भूरिया क बदन में सुरसुरी होरही थी

भूरिया तुरंत अपना दुपट्टा ले कर अपने भरी वक्षो पर रख लेती है और हल्का मुस्कुरा कर "आओ बैठो शहज़ादे"

"जी अम्मी जान"

"जलवो की साज़िशों को न रखो हिजाब में"

"ये बिजलिया है रुक न सकेंगी निक़ाब में"

शमशेर पहले अपनी माँ क ज़ालिम बड़े गांड को फिर क़ातिल तने दूध को देखता है

hooriya:man me)parde में देख पागल हो गए हो निक़ाब हैट गया तो मर जाओगे बच्चे

भूरिया को इस बार अपने आप पर फख्र महसूस हो रहा था शमशेर की शायरी एक डैम सटीक थी निक़ाब करने क बावजूद कितने लोगो ने भूरिया को छेड़ कर अपनी जान गवा चुके थे पर वो अब भी इस उम्मीद से थी क उसका बीटा अपने कदम पीछे हटा लेगा इसलिए वो अपने मुस्कराहट को दबाते हुए सख्त हो कर कहती है

Hooriya:bass बास करो शेर ो शायरी क्या हुआ कोई बात है

Shamshera:har बात आपको पता तो है अब में क्या बताऊ

Hooriya:chup करो में पूछ रही हु कुछ काम था

Shamshera:ammi जाएं क्यू मई बिना काम क अपने मेहबूबा से नहीं मिल सकता

Hooriya:uffff कोई काम नहीं तो जाओ

भूरिया दांत पीसते हुए कहती है

Shamshera:aap वाक़ई बहुत खूबसूरत लग रही हो

Hooriya:khuda क वास्ते अपनी पागलपंती बंद करो और जाओ हो सके तो सुबह में मत आना कभी

Shamshera:q क्यू नहीं औ में तो आऊंगा

hooriya:maine कहा न में परदे में न होती हु ये ठीक नहीं में तुम्हारी अम्मी हु क्यू कर रहे हो ऐसा भूल जाओ मुझे

Shamshera:Theek है अगर आप आजाओगी मुझसे मिलने तो में नहीं आऊंगा

Hooriya:theek है वैसे में आती तो हु

Shamshera:to आज क्यू नहीं आई में इंतज़ार कर क थक गया

Hooriya:Wo में देर से सोई इसलिए..

Shamshera:acha जी देर रात तक क्या कर रही थी हाँ

शमशेर आँख मार कर मुस्कुरा कर पूछता है

Hooriya:bakwas मत करो तुम मेरे शौहर नहीं जो सवाल पे सवाल कए जा रहे हो

Shamshera:To बना लीजिये अम्मी जान

शमशेर ऊपर से नीचे तक भूरिया को देखते हुए कहता है

भूरिया गुस्से से लाल हो जाती है और शमशेर को मारने क लये भगति है और उसका दुपट्टा फिसल कर गिर जाता है और उसके दोनों मम्मी हवा में तैरने लगते है

शमशेर अपने माँ क भरी दूध को देख जैसे जैम जाता है और खड़े हो कर घूरने लगता है भूरिया मौक़ा का फायदा उठा कर शमशेर पर टूट पड़ती है और हलके हाथो से पीठ पर मारने लगती है

Shamshera:ammi जान छोर दो हहहह मुझे गुदगुदी होरही है ाःहाहा

Hooriya:Han बहुत शौक़ चढ़ा है न तुझे प्यार का

Shamshera:Hahahaha अम्मी जान मुझे आप जान से मार दो फिर भी मेरा डिल कहता रहेगा क आप परिओ से भी खूबसूरत हसीना हो जिसका में दीवाना हु

hooriya:uff मेरे हाथ दुःख गए तुम्हारा बदन पठार जैसा कड़ा है

Shamshera:Shamshera एक शेर है तुम्हारी जैसी बिल्ली क हाथ से चोट नहीं लगेगी

hooriya:tum एक शेर हो तो में भी शेरनी हु अभी खंजर उतार दूंगा सीने में

Shamshera:aahaye मेरी शेरनी शेर का गोश्त खाना है क्या वैसे भी सीने में मेरे डिल था वो भी तुम ले ली

Hooriya:ufff हो अब में कब डिल ले ली तुम्हारा जाओ अब तुम में जाती हु

भूरिया को ज़ोर से पेशाब लग गयी थी और वो उठ कर जाने लगती है और शमशेर उठ कर बैठता है और अपने कपडे सही करता है उधर भूरिया गुसलखाने में पहुँचती है और दरवाज़ा बंद करती है

Shamshera:ammi जान क्या हुआ दरवाज़े को बंद करने की ज़रूरत थी शेरनी कब से पर्दा करने लगी

भूरिया अंदर से चिल्लाती है

"चले जाओ बदबख्त "

भूरिया तेज़ी से अपने जरबन्द खोलती है पाजामे का और जल्दबाज़ी क वजह से उसमे गत लग जाता है भूरिया अब पूरी कोशिश करती है पर गाठ नहीं खुलता

Hooriya:man me)lagta है इसे काटना पड़ेगा ये शमशेर लगता है चला गया है

भूरिया बहार निकलती है तो सामने अब भी शमशेर बैठा कुछ सोच रहा था

Hooriya:ab क्या यही रहना है जाओ तुम

Shamshera:q नहीं मान लेती अब तुम भी मुझे चाहने लगी हो अम्मी जान

Hooriya:uff हो जाओ बाद में आना अभी में उफ़ जाओ मुझे काम है

Shamshera:Aap हमेशा भगति हो आज तो नहीं जाऊंगा में

Hooriya:man me)uff हो कहा रखा है खंजर कैसे काटू जरबन्द

भूरिया इधर उधर ढूंढ़ने लगती है जिसे शमशेर देख कर उसके पास अत है

"क्या हुआ अम्मी जान आप क्या ढूंढ रही हो "

"आर्य जाओ तुम शमशेर में नहीं कह सकती तुमको मेहेरबानी करो"

"अम्मी बता दो शायद में काम आजौ"

"बीटा तुम नहीं क्र सकते कुछ समझो में नहीं बता सकती"

"ाचा तो आप मुझे किसी क़ाबिल नहीं समझती आप एक मौक़ा दे कर देखिये"

भूरिया अब कैसे बताये क उसने पेशाब को रोक क रखा है वो गुस्से से लाल हो जाती है

hooriya:Nalayaq तुम न ..सुनो मेरी जरबन्द में गत बांध गयी है और मुझे ज़ोर की लगी है

Shamshera:jarband में

Hooriya:han पाजामे क नारी me..kamina अब हो गयी tasalli..khanjar ढूंढ रही हु

शमशेर अपनी अम्मी को छटपटाहट देख कर समझ गया क वो पेशाब रोक रही है और उसके वजह से

Shamshera:muaaf कीजिये लगता है मेरे वजह से

Hooriya:khair है काम से काम गलती तो क़ुबूल कए शहज़ादे शब् ने

शमशेर कुछ सोचता है और उसके चेहरे पर मुस्कान फैलती है वो अपने मुस्कान छुपा कर

"अम्मी जान आप चाहे तो में खोल दू आपके सलवार का जरबन्द"

ये कहते हे क शमशेर ने अपनी अम्मी से हे उसके सलवार खोलने की बात कह दी और जरबन्द खोलने की बात कह कर शमशेर का लैंड एक सलामी देता है और भूरिया क कान में जैसे हे ये बात पड़ती है वो सीधा हो कर आँख फाड़े कड़ी हो जाती है उसके तन बदन में एक झनझनाहट महसूस होती है उसके छूट में पेशाब क साथ साथ एक चिति सी रेंगने लगती है

Hooriya:Kya कहा तुमने

अपने आँख फाड़े हुए तल्ख़ लहज़े में अपने बेटे से फिर से पूछती है उसे यक़ीन नहीं होरहा था क उसका बीटा शहज़ादे शमशेर कभी अपनी अम्मी जो पारस की सुल्ताना है उनके सलवार खोलने की बात कह सकता है

Shamshera:ammi जान मैंने कहा आपका नैरा जरबन्द खोल दू आपका सलवार खोल du..aap अगर देरी क्र दी तो..

भूरिया को तो मारे शर्म से मुँह लाल हो गया था शायद उसका बीटा सही कह रहा था

Hooriya:tumse यही उम्मीद थी ..नालायक़ उफ़ खंजर ढूंढो

Shamshera:bass अम्मी जान इधर आओ में अपनी आखे बंद क्र क गत अपने दांतो से खोल देता हु

Hooriya:khabar दार अगर मुझे छूने की कोशिश की

Shamshera:aapke जिस्म पर में अपना ऊँगली तक न छूने दूंगा यक़ीन करे

शमशेर झट से घुटने क बल बैठ जाता है

Hooriya:hmmm उफ़ ये क्या है शमशेर

शमशेर आँख बंद कए घुटनो क बल बैठ जाता है

Shamshera:ammi अपना समीज़ ऊपर कीजिये और मेरे नज़दीक आये

भूरिया मरती क्या न करती मजबूरन कांपते हुए कदमो से शमशेर क तरफ बढ़ती है और अपने हाथो से धीरे धीरे समीज़ ऊपर करती है



शमशेर जैसे महसूस करता है अपने अम्मी को अपने नज़दीक उसके नाक में एक गंध आती है जो खुसबू से मिली जुली थी शमशेर अपने नाक को थोड़ा करीब लेते हुए मदहोश होते हुए सूंघता है

hooriya:ye लो जरबन्द

शमशेर जैसे आँख खोलता है उसके आखो क सामने उसके अम्मी भूरिया का मखमली पेट नज़र आता है

भूरिया देखती है कैसे गौर से उसका बीटा उसके पेट को देख रहा है और नाक से लम्बी सांसे ले क्र सूंघ रहा है

Hooriya:aakhe बंद ..शमशेर कुत्ते

शमशेर फ़ौरन आखे बंद करता है

Shamshera:ammi जान में दांतो से खोलूंगा मुझे दिखेगा कैसे

Hooriya:hoshiyari नहीं में मदद करूंगी

भूरिया अपने एक हाथ से कांपते हुए अपने बेटे क हाथ में जरबन्द देती है जैसे हे शमशेर क हाथ में जरबन्द लगता है उसे सेहला कर

shamshera:man me)ye जरबन्द कितना खुशनसीब है अम्मी क छूट पर लटका रहता है

Shamshera:ab दांत से हे गठन खुलेगी अम्मी मेरे मुँह में अपने सलवार का जरबन्द दे ताके में उसे खींच कर आपका सलवार खोल दू

Hooriya:man me)uff ये ऐसी बाते क्र रहा है मेरे बदन में जैसे आग सा लग गया है

भूरिया धीरे धीरे अपने आपको शमशेर क मुँह क तरफ करती है फिर धीरे से शमशेर क सर पर अपना हाथ रख जरबन्द क गत तक ले जाती है ये इतना धीरे कर रहे थे क दोनों माँ बेटे गरम हो गए थे भूरिया को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वो अपने बेटे का मुँह अपने छूट पर लगाने जा रही है और शमशेर को भी ऐसा लग रहा था उसकी अम्मी अपने हाथो से उसके सर को छूट पर लगा रही है दोनों क लये ये पहली ऐसी नज़दीकी थी अब गठन दांत क पास थी और शमशेर बिना देर कए उसे अपने दांतो से पकड़ लेता है

Shamshera:uh अम्मी जाएं एक बार आखे खोल लू

गरम साँसे शमशेर की भूरिया क पेट पर लग रहा था जिसे भूरिया महसूस कर ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगती है

Hooriya:hmmm खोल ले

शमशेर आखे खोल अपने अम्मी क पेट को खा जाने वाली नज़र से देखता है जिसे देख भूरिया अपनी आखे बंद कर लेती है और ज़ोर ज़ोर से हांफने लगती है

शमशेर एक गहरी सांस छोर कर गत को समझता है और एक हाथ में जरबन्द लिए

Shamshera:ammi जान आपकी सलवार खोल दू

Hooriya:han खोल दे हम्म्म आखे बंद क्र ले नालायक़

शमशेर आखे बंद करता है और दांतो में गठन लिए खींचता है भूरिया अपने सलवार को दोनों हाथो से ऊपर कर क पकड़ी होती है इस दर से कही गिर न जाये और वो नंगी अपने बेटे क सामने आजाये

दो से तीन बार शमशेर गठन को खीचता है और वो खुल जाता है भूरिया निचे देखते हे क गठन खुल गया है अपने हाथो से जरबन्द पकड़ कर ऊपर खींचती है और एक हाथ से शमशेर क चेहरे को पकड़ क धक्का देती है

शमशेर उल्टा हो क्र फर्श पर गिर जाता है

hooriya:besharam अपने अम्मी का सलवार खोलते हुए शर्म नहीं आए आइंदा ऐसा सोचना भी मत

शमशेर फरह पर बैठा था और खा जाने वाली नज़रो से देखता है भूरिया कामउत्तेज़ना से लाल हुई थी और अपने दोनों हाथो में सलवार को पकड़ी है शमशेर देखता है क सलवार पर ठीक छूट क आगे दो बून्द का निशान है और उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट आती है

Shamshera:ammi जान एक दिन आपके नारा जरबन्द में हे खोलूंगा और मई हे बांधूंगा और सलवार भी मेरे पसंद की उतरूंगा में और पहनाउंगा में

शमशेर अपने अम्मी से बिना डरे अपने लौड़े क ऊपर हाथ रख लेता है

Hooriya:huhh अपने ख्वाबो में कर लेना ऐसा

तुनक कर भगति है और उसके बड़ी गांड को देख शमशेर बैठा अपने लौड़े को मसलते रहता है

तेज़ी से भाग कर गुसलखाने का दरवाज़ा बंद कर देती है

शमशेर बेहवास अपने अम्मी क छूट की खुशबु और उसके मखमली पेट क खुमारी में मुस्कुराता जो अब तक उसकी सांसो में थी और अभी भरी कूल्हों को मटकता देख तो शमशेर क डिल क सौ टुकड़े हो गए है तभी उसके कान में एक ज़ोरदार सीटी की आवाज़ आती है अंदर भूरिया बैठ कर पेशाब करने लगी थी

Shamshera:man me)uff अम्मी पहले छूट की खुसबू सुंघाई अब सीटी से मेरे लौड़े को छेड़ रही हो कही ऐसा न हो क मेरा लौड़ा बेकाबू हो जाये

शमशेर उठता है और बहार जाते हुए

"अम्मी जान आज में आपको घूमने ले जाऊंगा तैयार रहना "

भूरिया अब तक बैठी पेशाब कर रही थी उसका चेहरा लाल था और माथे पर पसीने थे अब वो उठ टी है तो उसका नज़र सलवार क आगे क हिस्से पर पड़ती है तो दो बून्द का निशान था वो उसे छू कर देखती है तो चौंक जाती है क्यू क वो एक चिपचिपा चीज़ थी

Hooriya:uff ये क्या हो गया क्या इसलिए शमशेर मज़े से सूंघ रहा था ये तो मणि है

भूरिया अपने छूट पर हाथ लगाती है और उसे वह भी चिपचिपा महसूस होता है

Hooriya:uff अब क्या करू शमशेर ने मेरे शर्मगाह और मेरे मणि दोनों की बू सूंघ ली छी मई कैसे इतनी गरम हो गयी जो ये पानी छोड़ने लगी क्या में अपने बेटे क लये गरम हो गई और मेरे बुर उसके लिए पानी छोर दी

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 153

भूरिया अपने छूट पर हाथ लगाती है और उसे वह भी चिपचिपा महसूस होता है

Hooriya:uff अब क्या करू शमशेर ने मेरे शर्मगाह और मेरे मणि दोनों की बू सूंघ ली छी मई कैसे इतनी गरम हो गयी जो ये पानी छोड़ने लगी क्या में अपने बेटे क लये गरम हो गई और मेरे बुर उसके लिए पानी छोर दी

भूरिया अपने अंदर बदलाव साफ़ महसूस कर रही थी पर उसके अंदर हिम्मत नहीं थी क वो अपने अंदर हो रहे उस झुरझुरी वो आएग जो शमशेर क हरकतों क वजह से भड़क चुकी थी भूरिया नाहा धो कर तैयार होती है और एक सूट निकलती है और पहन लेती है फिर एक काळा रंग का निक़ाब पहन लेती है

भूरिया ताली मरती है और कनीज़ अंदर आती है

Kaneez:Hukm कीजिये मल्लिकाजहं

Hooriya:mere नाश्ते का इंतेज़ाम करो

Kaneez:Jo हुक्म मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:apne हुजरे में लगे मेज़ और कुर्सी पर बैठ जाती है और अपने नाश्ते का इंतज़ार करती है कुछ देर में नाश्ता आजाता है और वो खा लेती है वो अपने आप को निक़ाब से चेहरे को छुपाती है और चली जाती है अपने हुजरे से बाहर उधर शमशेर दरबार में चला गया था इसलिए अब भूरिया दरबार में न जा कर अपनी से छोटी सौतन नाज़ क हुजरे में जाती है पर उसे वो वह नहीं मिलती तभी एक किताब पढ़ रही नाज़ बेगम की बेटी समां दिखती है

Hooriya:Beti समां कितनी मशरूफ हो किताब में क आहात नहीं सुनाई दी किसी क आने की

समां अपना ध्यान किताब से हटते हुए एक डर क साथ सीधा बैठ जाती है और घबराते हुए

"मुआफ कर दीजिये सुल्ताना वो में शायरी में मुब्तिलाह थीं"

"समां मेरी बची तू मेरी बेटी है बचपन से तुझे में अपने बेटी की तरह हे पला है भला में अपनी बेटी पर इतनी सी बात क लये गुस्सा हो सकती हु"

"बड़ी अम्मी वो तो में जानती हु आप कितनी अछि है पर आप क गुस्से से पारस में हर कोई वाक़िफ़ है "

"ाचा तो इतना डर्टी है मेरी बेटी छोरो वैसे आज कल शेर ो शायरी तुम भी बहुत कर रही हो"

"में भी मतलब कोई और भी है क्या "

भूरिया सोचते हुए

"हाँ तुम्हारा भाई शमशेर "

Sama:aashiqie में शायर बन गए

धीरे से फुसफुसाती है

Hooriya:kya कहा बेटी

भूरिया सुन ली थी पर वो अनजान बनती हुई

Sama:kuch नहीं वो बास शमशेर भाईजान तो है हे शायर

Hooriya:man me)Han आज कल उसके शायरी की वजह में हु मुझे पता है कितना ाचा है शायर वो

Sama:badi अम्मी उनके होने वाली बीवी बड़ी खुशनसीब होगी भाईजान उसे हमेशा अपने शायरी से खुश क्र देंगे

Hooriya:man me)me तो चाहती हु क वो किसी को अपनी बीवी बना ले और मेरा पचा छोरे

Sama:ary में भूल हे गई वो अम्मी जान ने कहा था आपको दरबार भेजने क लये कोई बड़ा फैसला करना था

Hooriya:acha ये बात है तो फिर चलो

भूरिया क साथ समां दरबार पहुंचते है भूरिया देखती है शमशेर अपने मंत्रीओ से बातचीत क्र रहा है भूरिया क पहुंचते हे सब मल्लिका जहाँ की सदा बुलंद करते है और खुद अफसाना खातून भूरिया की सास कड़ी हो कर जगह देती है

भूरिया बहुत आसानी से हर वो औरत जो अपने दुःख तकलीफ अपनी मुसीबत का हल ढूंढ़ने आई थी सब का हल भूरिया चुटकिओ में कर देती यही वजह है क सुल्तान मेरे वाहिद क नहीं होने पर वो सुल्तान का काम भी संभल लेती थी

कुछ देर यु हे सभा चलती रहती है और धीरे धीरे सुल्तान फिर उसके बाद शान फिर गुलशाह फिर सुल्तान दास्ताँ आख़िरकार शमशेर भी उठ कर जाने लगता है तभी उसे अहसास होता है क उसकी अम्मी भी औरतो क दरबार में शामिल हो चुकी है उसके डिल से रहा नहीं जाता और वो औरतो क दरबार की ओरे चल पड़ता है और वो सामने देखता है



भूरिया अपने चेहरे पर निक़ाब कए बैठी थी और बारी बरी से लोग उनके पास जा रहे थे अपनी समस्या ले कर भूरिया की नज़र जैसे शमशेर से मिलती है

Shamshera:man me)ammi जान आपको देखते हे मेरा डिल किसी घोड़े से भी तेज़ दौड़ने लगता है

अफसाना खातून ये देख लेती है क भूरिया का ध्यान शमशेर की तरफ है और शमशेर भी औरतो क हुजरे क सामने आचुका था जबकि मर्द को आना मन था यहाँ तो शमशेर झक रहा था

Afsana:beti रज़िया बेगम ये शहज़ादे शमशेर क्यू यहाँ आगये जब के उन्हें पता है यह पर आना और झाकना सख्त मन है मर्दो क लये और ऐसे भूरिया को देख रहा है क्या काम है उसे और उसे मन करो दुबारा यह गलती करने

Razia:ji अम्मी जान में देखती हु भूरिया बाजी और नाज़ तो लोगो की बाटे सुन रही है

रज़िया उठ कर समां को बुलाती है

Sama:ji रज़िया अम्मी क्या हुआ

Razia:aao मेरे साथ

समां रज़िया क पास आती है समां को रज़िया हर बात समझा देती है

Sama:aap रहने दीजिये में भाईजान को समझा दूंगी

रज़िया वापस जा कर अपने जगह पर बैठ जाती है और समां धीरे धीरे शमशेर क पास पहुंच जाती है

Sama:bhaijaan आप इधर आये

समां औरतो क हुजरे से दूर शमशेर को ले जाती है

"आर्य्य समां क्या हरकत है ये मुझे क्यू खींच रही हो तुम न"

"हाँ में आपकी बहिन हु इसलिए में नहीं चाहती क आप पर कोई ऊँगली उठाये आप खड़े यहाँ क्या कर रहे है क्या आपको पता नहीं क ये औरतो का दरबार है"

"मुझे पता है समां इसलिए यहाँ खड़ा था"

"उफ़ हो तो क्या आपको ये नहीं पता भाईजान यहाँ मर्दो को सख्त मन है आना या झाकना"

"हाँ वो भी पता है "

"तो फिर आप को क्या चाहिए क्या ज़रूरत है जो आप सबकुछ पता होने क बावजूद ये कर रहे है"

Shamshera:man me)me तो अपनी माल को देख रहा था और बास भूरिया ज़रूरत है ज़िन्दगी में बाकि सब तो है

Sama:boliye भाईजान

Shamshera:pagli में अम्मी को ले कर कही घूमने क लये जाने वाला था पर इतनी भीड़ है लगता नहीं अम्मी को छुट्टी मिलेगी शाम से पहले

Sama:ji भाईजान वो इसलिए क वो आज देरी से आई पर में आपको

Shamshera:acha

थोड़ा उदास होते हुए कहता है

Sama:par में आपका काम कर सकती हु

Shamshera:kaise

Sama:mujhe क्या मिलेगा पर

Shamshera:Jo मांगना चाहे वो मांग लो

Sama:kuch नहीं भाई बास आप जल्दी से शादी कर लीजिये

Shamshera:man me)Ab तुम्हारी भाबी तुम्हारी बड़ी अम्मी भूरिया दिन रत काम में होती है तो कैसे पतौ उसे कैसे भाबी बनाऊ तुम्हारी

Sama:thek है भाईजान में आपका काम कर दूंगी

Shamshera:fir में भी वादा करता हु बहुत जल्द तुम्हे तुम्हारी भाबी की खुशखबरी मिलेगी

Sama:theek है भाईजान पर आप यही रहे वह न आये

Shamshera:man me)kitni भोली है मेरी बहिन समां

समां चली जाती है और दरबार में पहुंच कर तख़्त पर बैठी मल्लिका इ जहाँ भूरिया क कान में सरगोशी करती है

"बड़ी अम्मी वो शमशेर भाईजान आपके इंतज़ार में है शायद वो आपको कही घूमने वाले थे"

भूरिया को याद अत है क वो आज बोलै था क तैयार रहने पर उसके दिमाग से निकल गयी

Hooriya:man me)ye तो मजनू को भी हरा दया अब क्या करू कैसे मिलु शमशेर से

Sama:aap क्या सोच रहे है में आपको बताती हु कैसे निकल सकते है आप ..

Hooriya:kaise?

धीरे से कहती है

Sama:aap दादी जान को कह दीजिये क आपका सर दर्द हो रहा है और वो आपको आराम करने क लये हे कहेंगी

Hooriya:bhut तेज़ हो कहा से सीखा

Sama:me जब छोटी थी तो पढाई क बीच ऐसे हे आजाती थी

समां और भूरिया दोनों मुस्कुराते है

भूरिया अपने तख़्त से खसक कर अपने सास अफसाना खातून शमशेर की दादी क पास जाती है

"अम्मी जान लगता है मेरा सर दुःख रहा है "

"लगता है क क्या मतलब भूरिया बेटी"

"ममम होरहा है अम्मी जान"

"तो आप आराम कर लीजिये भूरिया बेटी में और नाज़ बेटी दरबार संभल लेंगे "

भूरिया अपना सर निचे कर हल्का मुस्कुराती है और समां क तरफ देखती है वो भी मुस्कुरा रही थी पर सब से बचा क

Hooriya:Jitne भी लोग रह गए है मई उनसे मुआफी चाहती हु मेरी ताब्यात ठीक नहीं होने क वजह से मुझे जाना होगा पर अम्मी जान सुल्ताना अफसाना खातून और नाज़ बेगम आप क हर मसले को हल करने क लये रहेगी

ये बात भूरिया कड़ी हो कर कहती है और धीरे धीरे धीरे चलने लगती है भूरिया को जाता देख सबलोग खड़े हो जाते है और सब मल्लिकाजहं ज़िंदाबाद का नारा लगते है

भूरिया बहार आकर शमशेर को इधर उधर देखने लगती है आख़िरकार शमशेर दीखता है और उसके पास जा कर

hooriya:kya हुआ इतना क्या ज़रूरी काम था जो औरतो क हुजरे में तक झक करने लगे

शमशेर भूरिया को देखता है

भूरिया अपने चेहरे को निक़ाब से ढक्की थी



Shamshera:"yu तो चेहरे पर आपके निक़ाब है मगर "

"क़त्ल करने को निगाहे खुली छोर दी हो"

"अम्मी जान ये निक़ाब क्यू चेहरे पे और क्या ज़रूरी काम है और में हुजरे में क्या देख रहा था आपको पता नहीं?

Hooriya:Ab आज कल बुरी नज़रो से बचने क लये ये लगाना हे पड़ता hai,mujhe नहीं बन न किसी का क़ातिल

Shamshera:"jo परदे में खुद को छुपाये हुए है"

"क़यामत वही तो उठाये हुए है"

भूरिया को ऊपर से निचे तक घूरते हुए कहता है भूरिया को इस बार अपने आप को घूरे जाने से शर्म आजाती है क्यू क शमशेर उसके भरी दूद को देख रहा था

Hooriya:pahelia मत बुझाओ बोलो क्या बात है

Shamshera:ammi जान आप जब ऐसे भोली बनती हो न डिल आजाता है आप पे

Hooriya:matlab

Shamshera:matlab ये क हम बाघ की तरफ घूमने जा रहे है

शमशेर आगे आगे चलने लगता है और भूरिया तो पहले कड़ी होती है फिर कुछ सोच कर वो भी शमशेर क पीच चल पड़ती है दोनों महल क पीछे क रास्ते से बाघ की ओरे जा रहे थे

Shamshera:ammi आप पैदल चल लोगी या घोड़े ले ले

Hooriya:jab शेर साथ है तो दूसरा जानवर लेने की क्या ज़रूरत

Shamshera:acha तो अब में जानवर हो गया

Hooriya:ab तुमने हे तो कहा था तुम शेर हो हहहह

भूरिया की हसी देख शमशेर हल्का उदास होते हुए

Shamshera:man me)Khob है लो एक दिन इतना पेलुँगा तब समझ आएगा इस जानवर का लौड़ा क्या करता है

Hooriya:waise तुमने कैसे सोच लय क में तुम्हारे साथ घूमने जाउंगी

Shamshera:isme सोचना क्या है ये पहली बार तो नहीं

Hooriya:han पर जंगल की तरफ तुम्हारे साथ क्या मुझे डरना नहीं चाहिए?

Shamshera:ab तुम खुद को शेरनी कहती हो क्या शोभा देगा तुम्हे डरना?

Hooriya:Tumhe ? ाचा जी तो अब शहज़ादे शमशेर सुल्ताना से ऐसे लहज़े में बात करेंगे

Shamshera:Oh मुआफ कीजिये मल्लिका जहाँ सुल्ताना हूरजहाँ आप इस नाचीज़ को मौत की सजा न सुना दे में आपसे अपनी गलती की मुआफी मांगता हु

ये कह कर शमशेर ज़ोर से हसने लगता है और भूरिया को ऐसे जवाब की उम्मीद नै थी

Shamshera:ammi जान अब हम बाघ में आगये अब तो अपना खूबसूरत चेहरा दिखा दीजिये

Hooriya:nahi तुम्हारी नियत ठीक नहीं लगती और जो तुम सोच रहे हो वैसा कुछ नहीं होने वाला अब घूरना बंद करो

शमशेर:" दीदार की तालाब है तो शमशेर नज़रे जमाये रख"

"क्यू क निक़ाब हो या नसीब सरकता ज़रूर है"

Hooriya:wah इतने शायरी बना लेते हो या फिर चोरी की है

Shamshera:ammi जान आप से इश्क़ ने शायर बना दया

भूरिया मुस्कुराती है

"अच्छा जी तो चलिए हम आपके नसीब खोल हे देते है"

भूरिया थोड़ी दूर जा कर अपने चेहरे का निक़ाब उतर देती है



भूरिया की मदमस्त जवानी देख शमशेर मस्त हो जाता है उसकी नज़र भूरिया क उभरे हुए गांड पर तिकी थी तभी भूरिया एक शर्म क साथ अपने बेटे क तरफ मुड़ती है और उसे घूरता प् कर मुस्कुराती है



भूरिया क पलटने से उसके मम्मी छलक कर हिलते है और शमशेर क ज़ुबान से "उफ़ ammi"nikal जाता है जिसे सुन भूरिया शर्म और लज्जा से भरी मुस्कराहट फ़ैल जाती है

शमशेर: "तेरे हुस्न को निक़ाब की ज़रूरत हे क्या है"

"न जाने कौन रहता होगा होश में तुझे देखने क बाद"

भूरिया अपनी तारीफ सुन कर फूला नहीं समाती और वो बाघ में आगे हो कर टहलने लगती है शमशेर तेज़ी से अपने अम्मी क साथ आजाता है और दोनों एक बहुत बड़े बाघ जहा पर कई तरह फूल और फल लगे हुए उसमे घूमने लगे थे बाघ क अंत में जंगल शुरू होता था

कुछ देर चलते हुए जब भूरिया कुछ नहीं बोल रही थी शमशेर हे आगे बढ़ कर अपनी अम्मी को कहता है

"आज कुछ बोलेगी मुहतरमा या फिर चुप रहने का हे इरादा है"

"अब आप जैसा जिनका बीटा हो उसे तो हर कदम फूंक कर चलना पड़ता है पता नहीं कब क्या कर दे"

"अम्मी जान में आशिक़ हु सब कुछ कर सकता हु अपने मेहबूबा को नाराज़ नहीं कर सकता"

"शहज़ादे शमशेर तुम्हे नहीं लगता तुम्हे किसी अचे सी लड़की देख क शादी कर लेनी चाइये "

"अम्मी जान मैंने तो लड़की देख लिया हु वो हाँ कह दे में तो तैयार हु"

"बकवास बंद कर सुबह भी तुम बहुत बड़ी बात बोल गए थे"

भूरिया सुबह में शमशेर दुवारना जरबन्द खोलने और बांधने वाली बात पर बोलती है

"अम्मी जान आपको ये बाते बुरी लगी हो सकता है क ज़िन्दगी में आगे मुझे आपका जरबन्द बांधने और खोलने का मौक़ा मिले"

भूरिया तुनक कर आगे बढ़ जाती है और शमशेर का जवाब देना वो ज़रूरी नहीं समझती

"अम्मी जान क्या में आपको सत्ता रहा हु "

"हाँ बिलकुल"

"अब क्या करू अम्मी अब जब से जख्मी हुआ हु न कही जाता कोई काम नहीं ऊपर से आप मेरे सामने होती हो में अपने डिल को छह क भी रोक नहीं पता "

"हाँ सब समझती हो में"

"क्या समझ रही है आप"

"एहि क तू तुम मुझे पटाने की कोशिश कर रहे हो"

"हहहह अम्मी जाएं आप कितना गन्दा सोचती हो भला मुझे आपको पटाने की ज़रूरत हे क्या है"

"मक़्क़ार हो तुम शमशेर में सब समझती हु पर वैसा कुछ नहीं होगा जैसे ख्वाब देख रहे हो"

"सब समझती हो तो फिर मेरे डिल की सच्ची मुहब्बत को क्यू नहीं समझ प् रही बात पटाने की तो आप पैट चुकी हो"

भूरिया ये सुन क्र अपने आखे बड़ी कर क रुक जाती है

"बेबुनियाद बाटे तुमसे सीखे कोई शमशेर"

"अम्मी जान आज आप मेरे साथ आई हो अपने महल अपने दरबार को छोर कर ये इस बात की गवाही दे रहा है क आप मेरे साथ रहना पसंद करती हो और आपने ज़रूर कोई बहाना बना कर दादी से आई हो"

भूरिया बात सुन कर स्तब्ध रह जाती है क्यू क ये बात सच थी क वो सर दर्द का बहाना बना कर आई थी

Hooriya:man me)Ye बात तो सच है क में बहाना बना कर आई हु क्या अब मुझे सच में शमशेर क साथ रहना भने लगा है

भूरिया ये सोच हे रही थी क शमशेर एक गुलाब क फूल को तोड़ लता है और अपने अम्मी को आगे देते हुए

"एक गुलाब का तोहफा दूसरे गुलाब को जो गुलाब से भी ज़्यादा खूबसूरत और महक रखती है"

शमशेर गुलाब को अपने नाक क करीब ले जा कर सूंघते हुए भूरिया क झील सी आखो में देखता है

शमशेर अपने आखो से जैसे अपने अम्मी क हुस्न का जाम पी रहा हो

भूरिया अपने हाथ को आगे बढ़ा कर झट से गुलाब ले लेती है

"इस गुलाब को बिना तोड़े भी तो खुशबु ले सकते थे तुम"

"गुलाब को तोड़ कर अपने हाथो में लेने में मज़ा है और अगर इस गुलाब को मसल दो तो हाथो से खुशबु कई दिन तक नहीं जाती इसके रस को निचोड़ने का अहसास मज़ेदार है"

शमशेर अपने अम्मी क आखो में देख ऐसे बोल रहा था उनके जिस्म को निहारते हुए जैसे अभी मसल देगा भूरिया सुल्ताना थी वो शमशेर क हर लफा मतलब समझ रही थी और उसके आखो का इशारा भी

Hooriya:Beta कई गुलाब आसानी से नहीं टूट ते कांटो में घिरे होते है और काँटों से लग जाने पर खून बह जाते है.

भूरिया इशारे में बताती है क वो ऐसी गुलाब है जिसे तोडना और मसलना आसान नहीं और काँटों क बीच है जो किसी को भूरिया क पास जाने नहीं देते

शमशेर अपनी अम्मी की बात समझता है और मुस्कुराते हुए अम्मी क हाथो को चुम लेता है



भूरिया मुस्कुराती है और शमशेर से कहती ज है "इतनी म्हणत अगर किसी और गुलाब पर करते तो टूट जाती पर गुलाब मुरझा चुकी है"

शमशेर मुस्कुराते हुए अपने अम्मी जो उससे कद्द में छोटी थी बहुत झुकता है और उनके पिसानी पर अपने लैब रख देता है और चूमता है भूरिया क आखे बंद होती है फिर वो आँखे खोल मुस्कुराती



है शमशेर कहता है "अम्मी जान मुझे जो गुलाब पस्न्द है अगर वो काँटों क बीच है तो भी में उसे तोडूंगा चाहे खून का दरिया बह जाये"

भूरिया की मुस्कराहट पुरे चेहरे पर फ़ैल जाती है उसे महसूस होता है क शमशेर तो जान छिड़कता है और मेरे लये वो हर मुसीबत उठाने क लये तैयार है

शमशेर भूरिया से दूर हैट जाता है और चुपचाप आगे देख कर चलने लगता है और भूरिया देखती है शमशेर गहरी सोच में है

Hooriya:man me)lagta है शमशेर सोच रहा है काँटों क बारे में और उदास हो रहा है

Hooriya:kya हुआ बीटा मुँह क्यू लटका लिए

Shamshera:kuch नहीं अम्मी

"तुम्हारा लटका हुआ मुँह अच्छा नहीं लगता है"

"तो कैसा ाचा लगता है"

"जब तुम खुश रहते हो"

"चलिए आपको ाचा तो लगता हु काम से काम"

"क्या हुआ बीटा क्या सोच रहे हो बंद करो सोचना"

शमशेर कुछ सोचता है और वो इस मौके का फायदा उठाने का निर्णय कर लेता है

"अम्मी जान में सोचना बंद कर दूंगा बदले में मुझे क्या मिलेगा"

"क्या मतलब"

"आपकी बात मानूंगा तो आप क्या डोज बदले में जब में छोटा था आप कभी फल कभी खिलौना देते थे"

"ाचा क्या चाहिए पर हाँ अब तुम बड़े हो गए हो शैतान भी उल्टा सीधा मांगे तो मार खाओगे"

"अम्मी जान भला उल्टा सीधा आपके पास है क्या जो में मांग लूंगा वैसे बहुत छोटी सी मुराद है"

"हाँ बोलो अगर मेरे बास में होगी तो "

"अम्मी जान अब हम बाघ क आखिरी छोर पर है यहाँ कोई आने जाने वाला नहीं इस वक़्त शाम क 4 बजने वाले है न तो सिपाही आएंगे न हे कोई महल से घूमने"

जैसे जैसे शमशेर बोल रहा था वैसे वैसे भूरिया क आँख बड़े हो रहे थे उसे लग रहा था पता नहीं तन्हाई में शमशेर क्या मांग ले

"साफ़ लफ्ज़ो में कहो "

"अम्मी जान आप कभी महल क बहार बिना निक़ाब क नहीं गए मेरी यह ख्वाइश है क आप इस हिजाब को उतार दे में आपको बिना बुरखे क देखना चाहता हु में चाहता हु क आप भी इस हवा को महसूस कर सके "

भूरिया की हसी छूट जाती है

"मुझे लगा tha..khair शमशेर तुम क्या कहते हो मुझे कभी कभी समझ नहीं आता "

"मेरे आखो से देखो तो सब समझ आएगा "

"तुम अपनी अम्मी को बेपर्दा होने क लये कह रहे हो हिजाब उतरने क लये कह रहे हो"

"अम्मी जान आप ने अंदर तो कुछ पहना हे होगा न में कौन सा.."

"चुप करो फिर भी में आज तक महल क बहार बिना निक़ाब क न गयी तुम्हारे कहने पर अपना चेहरा खोल तो दया "

"अम्मी जान यहाँ तो एक परिंदा भी नहीं फिर आप क्यू शर्मा रही हो"

"बात शर्माने की नहीं बात वसूलो की है तुम्हे क्या पता यहाँ कोई आजाये "

"अब आप बहाना बना रही हो जाने दीजिये आपको यहाँ फूल पौधे या जानवर हे देख सकते है"

"हाँ चाहे जानवर हो या चिड़िया में नहीं चाहती किसी क भी सामने अपने हुस्न को बेपर्दा करू"

ये बात कह कर भूरिया अपने हे बातो पर है देती है क्यू क वो शमशेर से जीतने क लये हर डाव खेल रही थी जो बेवकूफी से भरा था

शमशेर उदास होने का दिखावा करता है और भूरिया को बिना देखे चलते रहता है कुछ देर बाद जब शमशेर न भूरिया को देखता है न बोलता है तो भूरिया बोलती जय

"शमशेर कहा खो गए"

शमशेर चुप रहता है और जवाब नहीं देता यहाँ तक क ऐसा अनसुना कर देता है जैसे उसने अपनी अम्मी की बात सुनी हे न हो

भूरिया कुछ सोचते हुए

"ो शमशेर होने वाले सुल्तान आप की बात मान लेती हु में निक़ाब उतर दूंगी पर एक शर्त पर"

शमशेर मुस्कुराता हुआ अम्मी को देखता है और बिना देरी कए पूछते है

"कैसी शर्त अम्मी जान"

भूरिया ऊँगली दिखते हुए कहती है

"तुम कोई गन्दी बात न करोगे न छेड़ोगे न शायरी बोलोगे "

"अम्मी जान मंज़ूर है"

भूरिया बाघ क कोने में दरख्तों क दरम्यान कड़ी हो जाती है और सबसे पहले अपने सर पर बंधा कपडा खोलती है और उसके रेशमी बाल हवा में एते हे उड़ने लगते है शमशेर अपनी आँख फाड़े देखता है और उसके मुँह से निकलता है "है क्या ज़ुल्फ़े है आपके अम्मी जान" भूरिया अब अपने दूध क ऊपर क बटन को खोलने लगती है जो निचे तक था हर बटन खुलने पर अंदर पीले रंग क कपडे में क़ैद उन्नत चुचिअ नज़र आरही थी जैसे बरसो बाद क़ैदी रिहा हो कर ख़ुशी मनाता है वैसे उछाल रहे थे भूरिया की चुचिअ और उसके साथ हे शमशेर क धड़कन बढ़ रही थी आगे क बटन खोलते हे अपने हाथ में सर का दुप्पट्टा लिए

Hooriya:ab इसे पकड़ो

शमशेर भूरिया क पास आकर दुपट्टा पकड़ लेता है भूरिया क दोनों दूध क जगह से निक़ाब खुला था और दूध क निचे कोई बटन न होने क वजह से ढाका था इस वजह से दोनों दूध पेले रंग क कपडे में समाये थे और काले बुरखे में भूरिया का पूरा बदन भूरिया अब अपने कंधो पर बुरखे क कोने को पकड़ती है दोनों हाथो से दोनों कंधो से बुरखे को खींच ऊपर करती है और धीरे धीरे बुरखा ऊपर होने लगता है और अब बुरखे का ऊपरी हिस्सा भूरिया क चेहरे पर था और वो अपनी भरी गांड में फांसी बुरखे को ऊपर खींचने में परेशानी महसूस कर रही थी शमशेर वह खड़ा हो कर देख रहा था और मौके का फायदा उठा कर अपने पाजामे क ऊपर से हे अपने लैंड को पकड़ कर सहलाता है

hooriya:uff ये निकल क्यू नहीं रही

Shamshera:aap की में मदद कर देता हु बुरखा उतारने में

शमशेर बिना भूरिया क हाँ कहे अपने हाथो में निचे से भूरिया क निक़ाब को पकड़ लेता है और ऊपर उठाते हुए

"उफ़ शमशेर नहीं मत उतारो मेरा बुरखा में कहहुद शमशेराआआ"

शमशेर झट से अपने दोनों हाथो को तेज़ी से ऊपर खींचते हुए ऊपर करने लगता है और भूरिया बेबस हो कर अपने हाथ सीधा करती है और बुरखा तेज़ी से निकल कर शमशेर क हाथो में आजाता है और भूरिया शमशेर शमशेर बोलती रह जाती है

भूरिया का दुपट्टा और निक़ाब शमशेर क पास था और शमशेर अपने माँ की जवानी का रसपान अपने आखो से करने लगता है

"अम्मी जान आप को देख एक आशिक़ क डिल से एक हे शायरी निकेगी आप किसी अप्सरा से ज़्यादा खूबसूरत हो"

"शमशेर तुम दिन बा दिन बिगड़ते जा रहे हो "

शमशेर की बाते कही न कही भूरिया को अछि लगने लगी थी इसलिए वो दिखावा करती है पर अपने बेटे को मन नहीं कर पति

शमशेर अपनी अम्मी क गोर बदन भरी गांड और पहाड़ो जैसे तने दूध को देख रहा tha,Gulabi होठ रेशमी ज़ुल्फ़े और झील सी आखो में शमशेर खो सा जाता है

"अम्मी जाएं आपको देख डिल करता है"



"तेरे जिस्म पे अपने जिस्म को राखु"

"तेरे होठो को अपने होठो से मसलो"

"तुझे प्यार में इतनी शिद्दत से करू"

"की उस मीठे दर्द से तेरी आह निकल जाये"

(भूरिया ये सुनते हे गरम हो जाती है और उसके दूध फूलने लगते है छूट में चीटिए रेंगने लगती hai,shamshera अब दूध से नज़र निचे ले जा कर बड़े गांड को देखता है)



(भूरिया की गांड घूरते हुए शायरी बोलता है भूरिया मुस्कुरा रही थी)

"दर्द से तेरे ासु झलक जाये"

"और तू तन से और मन से सिर्फ मेरी होजाये"

"बदन से तेरी लिप्त राहु और सुबह हो जाये"

"सुबह जब तुझसे मई पुछु तेरी रात का आलम"

"तू शर्म कर मेरे सीने से लिपट जाये"

शमशेर शायरी कहते हुए भूरिया को ऐसे खा जाने वाली नज़र से देख रहा था भूरिया अपने बेटे से ऐसी बाते सुन कर होश खो दी थी पर अपनी बदन का दीवाना को यु घूरता देख बहुत खुश भी थी और मुस्कुरा रही थी



शमशेर की ख्वाइश जान कर भूरिया क तन बदन में आग लग गया था उसे समझ नहीं आरहा था वो क्या कहे शमशेर से भूरिया को उम्मीद नहीं था क शमशेर इतना खुल कर अपने डिल की बात कह देगा

भूरिया होश में आते हुए झट से शमशेर क हाथ से निक़ाब और ओढ़नी छीन लेती है और दुपट्टे से अपने बड़े बड़े दूध को धक् लेती है और अपने सर पर रख लेती है

Shamshera:ammi जान क्या हुआ आप ऐसे हे रहिये न आप जैसी पूरी दुन्या में कोई नहीं



भूरिया अपने मुस्कराहट को रोकती है और अपने चेहरे पे गुस्सा ला कर

"शमशेर अपने हद पार कर रहे हो तुम में तुम्हारी बीवी नहीं जो इतनी गन्दी शायरी मेरे लिए कह रहे हो तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतना गन्दा मेरे लये सोचने ka,hooriya झट से अपने बुरखा पहन लेती है और अपने चेहरे को निक़ाब से धक् कर महल की ओरे चलने लगती है

"अम्मी जान रुकिए तो आप मेरी बात तो सुनिए"



Hooriya:hawasi आदमी हो तुम

शमशेर अपने अम्मी क पीछे खड़ा था और भूरिया तेज़ी से चल रही थी और उसके भरी गांड को देख शमशेर से रहा नहीं जाता है और वो अपने लैंड पर हाथ फेर कर सहलाने लगता है



तभी भूरिया मुड़ती है और शमशेर को देखती है वो लैंड को पकड़ कर आगे पीछे कर रहा है पाजामे क ऊपर से हे सहला रहा है भूरिया गुस्से से लाल हो जाती है इस बार वो मुद कर शमशेर क सामने आती है



भूरिया शमशेर को देख

"छी मुझे शर्म आती है तुम्हे अपना बीटा कहते हुए इसे तुम इश्क़ और मुहब्बत कहते हो ऐसे इंसान से में इश्क़ तो दूर नफरत भी नहीं कर सकती इतनी गन्दी हरकत "

भूरिया मुद कर जाने लगती है और शमशेर खड़ा हो कर अपने किये पर शर्मिंदा होता है और धीरे धीरे भूरिया क पीछे आने लगता है कुछ देर चलने क बाद भूरिया महल में आजाती है और उसके सामने उसकी सास अफसाना खातून कड़ी थी

Afsana:Beti भूरिया शाम होने वाली है अब आई हो कहा बहार गयी थी

Hooriya:wo अम्मी मई..

भूरिया का दिमाग काम नहीं कर रहा था सरेआम अपने बेटे दुवारा की गयी हरकत से वो अंदर से परेशां हो गयी उसे समझ नहीं आरहा था क वो कैसे बोले क वो अपने बेटे क साथ थी पता नहीं क्यू आज उसे अपने बेटे क साथ थी कहने में गलत लग रहा था क्यू क रिश्ता अब वो पहले जैसा नहीं रहा था

तभी शमशेर अंदर आता है

"सलाम दादी जान"

Afsana:aaiye शहज़ादे शमशेर

Shamshera:Daadi जान वो अम्मी को में ले कर गया था

भूरिया सुन कर घबरा जाती है क पता नहीं क्या जवाब देगा शमशेर

Shamshera:dadi जान वो हकीम साहब ने जड़ी बूटी क लये कहा था जख्म पर लगाने क लये अब मुझे तो पहचान नहीं है तो अम्मी जान को ले गए थे बाघ में

Afsana:acha शहज़ादे पर जड़ी बूटी कहा है मई तो इसलिए पूछ रही थी क भूरिया बेटी का सर दर्द कर रहा था

Shamshera:daadi jaan..wo जड़ी मिली नहीं हम घंटो तक तलाश कए

Afsana:koi बात नहीं शहज़ादे में मुहाफिजों को कह कर माँगा दूंगी

Shamshera:acha दादी जान

Afsana:ab सर दर्द कैसा है? सर दर्द होने क बावजूद भी शहज़ादे अम्मी तुम्हारे दवा क लये बाघ गयी बहुत प्यार करती है तुमसे

Hooriya:shukria अम्मी अब ठीक है

ये कह कर भूरिया लहराते हुए अपने हुजरे क तरफ जाने लगती है

Afsana:kya हुआ भूरिया को शमशेर कुछ खफा सी लग रही है

शमशेर भूरिया क पीछे जाता है "अम्मी जान सुनिए"



भूरिया अपने बुरखे को लहराते हुए अपने हुजरे में जाने लगती है शमशेर क तरफ देखती भी नहीं शमशेर रुक जाता है और वापस दादी क पास आता है

Afsana:shehzade क्या आपकी अम्मी गुस्सा है किसी बात से

Shamshera:dadi जान बास आप तो जानते हे है वो सख्त मिजाज़ की है वक़्त पर दवा नहीं खाया इस वजह से नाराज़ है

Shamshera:man me)Daadi जान अब अम्मी जान मेरे डिल का चैन उदा दी है और में उनके जिस्म को देख पागल हो जाता हु और वो है क मेरे इश्क़ को क़ुबूल नहीं करती और मेरा लैंड उनकी याद में खड़ा हे रहता है अब क्या करू मुझसे रहा नहीं गया तो लैंड पकड़ लिया अब कोण इतने गदराई माल देख क लैंड न सहलाये अचे से ठोकूंगा किसी दिन छूट की गहराई तक सब गुस्सा निकल जायेगा

Afsana:kya सोच रहे हो बीटा

Shamshera:ab अम्मी तो बात बात पर गुस्सा होती है छोड़िये न आप में मन लूंगा उनको

Afsana:theek है

शमशेर वह से अपने हुजरे की तरफ चल देता है और भूरिया जा कर अपने हुजरे में दरवाज़ा बंद कर लेती है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 154

Shamshera:dadi जान बास आप तो जानते हे है वो सख्त मिजाज़ की है वक़्त पर दवा नहीं खाया इस वजह से नाराज़ है

Shamshera:man me)Daadi जान अब अम्मी जान मेरे डिल का चैन उदा दी है और में उनके जिस्म को देख पागल हो जाता हु और वो है क मेरे इश्क़ को क़ुबूल नहीं करती और मेरा लैंड उनकी याद में खड़ा हे रहता है अब क्या करू मुझसे रहा नहीं गया तो लैंड पकड़ लिया अब कोण इतने गदराई माल देख क लैंड न सहलाये अचे से ठोकूंगा किसी दिन छूट की गहराई तक सब गुस्सा निकल जायेगा

Afsana:kya सोच रहे हो बीटा

Shamshera:ab अम्मी तो बात बात पर गुस्सा होती है छोड़िये न आप में मन लूंगा उनको

Afsana:theek है

शमशेर वह से अपने हुजरे की तरफ चल देता है और भूरिया जा कर अपने हुजरे में दरवाज़ा बंद कर लेती है और सिसक सिसक कर रोने लगती है "ये सब मेरी हे गलती थी जो आज बिना दर क वो मुझे देख कर गन्दी हरकतें कर रहा है क्या उसे अंदाज़ा भी नहीं कितना बड़ा गुनाह कर रहा है उफ़ में क्या करू"

भूरिया अपने बिस्तर पैर लेते हुए रोटी रहती है शाम हो गयी थी उधर शमशेर भी अपने कक्षा में बैठा सोच रहा था "लगता है मैंने जल्दबाज़ी में काम ख़राब कर दया अब मुझे क्या पता था अम्मी पलट कर देख लेगी ये मेरा लैंड हे काबू में नहीं रहता अब क्या करू में ..शायद अम्मी मेरे लये अब गलत सोच रही hongi..wo भी क्या करे खुले आसमान क निचे में हे अपना लैंड पकडे खड़ा था किसी भी औरत को बुरा लगेगा वो तो मेरी अम्मी है उफ़ अब कैसे बताऊ अम्मी को क में उनसे सच्ची मुहब्बत करता हु उनके बिना किसी और से शादी करने की में सोच भी नहीं sakta..Devrani खला कहती थी बीटा औरत क नज़र में इज़्ज़त बनाओ पर में तो ठेहरा लफंगा आवारा मुझे क्या पता कैसे किसी औरत को बहलाते है में तो 25 साल का हो कर गधा हु मेरे से बेहतर तो वो 18 साल का लड़का बलदेव है जो अपनी माँ को पता भी और शादी कर भी लिया कुछ दिनों में बाल बचे हो जायेंगे उसके और में अपना लैंड हिलता रह जाऊंगा अम्मी क ख्वाब देख k..ab ये बलदेव तो है भी इतनी दूर क मई न उनकी मदद ले सकता हु और न हे खला देवरानी की"

दोनों माँ बीटा अपने अपने कमरे में एक दूसरे क बारे में सोच रहे थे जहाँ एक तरफ भूरिया रोये जा रही थी अपने बेटे क हरकत पे वही शमशेर भी अपने कए पर शर्मिंदा था ऐसे हे रात हो जाती है और भूरिया की कनीज़ आवाज़ देती है

"मल्लिकाजहं गुस्ताखी मुआफ हो क्या में अंदर आ सकती हु"

"हाँ आजाओ कनीज़"

"मल्लिकाजहं आप का खाना लगा दू"

भूरिया बिस्तर पर उलटी लेती थी अपने मुँह को तकिया से छुपाये और कनीज़ क तरफ बिना देखें

"आज नहीं खाउंगी दुबारा मत पूछना "

"आप कहे तो खाना रख देती हु आपको भूक लगे तो आप.."

"चुप करो कनीज़ और यहाँ से दफा हो जाओ एक बात 4 बार मत पूछो"

Kaneez:gustakhi मुआफ मुहतरमा

कनीज़ चली जाती है और भूरिया थोड़ा तेज़ आवाज़ में कहती है

"अब मत आना कनीज़ और न किसी को आने देना "

कनीज़ हुजरे क दरवाज़े पे कड़ी हो कर "जो हुकम मल्लिकाईजहान"

Hooriya:man me)Kya करू में अगर शमशेर को नहीं रोकी आगे बढ़ने से तो वो मेरे साथ कुछ उच्च नीच न कर दे और में भी तो औरत हु कही बहक गई तो

उधर शमशेर भी अपने हुजरे में इधर से उधर घूम रहा था और उसकी भी भूक प्यास मिट गयी थी शमशेर सोच में डूबा था वो भूरिया से अपनी डिल का हाल समझाना चाहता था मगर वो बात कैसे करे क्या करे इसकी न समझ आरही थी न हिम्मत शमशेर कुछ सोचता है और अपने कदम भूरिया की हुजरे क ओरे ले जाता है अभी वो सोच में डूबा हे जा रहा था क सामे से उसे गुल शाह आता दिखाई देता है

Shamshera:Salam चाचा जान

गुल shah:Kaha जा रहे हो शमशेर इतनी रात गए आराम करने का वक़्त है

Shamshera:wo मई अम्मी जान से मिलने जा रहा हु कुछ दवाइयों का मश्विरा लेना है

गुल shah:man me)wo तो तुम्हारी किस्मत अछि थी नहीं तो उस दिन तुम्हारा काम तमाम हो जाता और मेरा सुल्तान बन ने का रास्ता साफ़ हो जाता

गुल shah:Han दवा वक़्त पर खाओ हमे शमशेर फिर से हट कट्टा चाहिए बहुत जुंग लड़नी है भाई

गुल शाह हस्ते हुए अपने भतीजे को बोलता है अपने जज़्बात को छुपाते हुए दिखावट करने की पूरी कोशिश करता है

Shamshera:man me)Agar हमारा शक सही है तो बहुत जल्द शुंग क साथ तुम्हारी भी गिरफ़्तारी होगी

Shamshera:zarur चाचा जान आपके साथ जुंग पर गए हुए अर्श बीत गए

गुल shah:Haha मौक़ा मिलेगा तुम्हे शमशेर वैसे हम सब खुश है क अगला सुल्तान हमारा जांबाज़ शमशेर बने और सबसे ज़्यादा तो तुम्हारी अम्मी भूरिया बेगम

Shamshera:Ji अब अम्मी जान क क़ुर्बानिओ का नतीजा है क में इस क़ाबिल बन पाया में खुशनसीब हु जो मुझे ऐसी अम्मी मिली

गुल shah:man me)Islye तो में तुम्हारे अम्मी भूरिया पैर फ़िदा हु और उसे अपनी बीवी बनाने क लये तड़प रहा हु बहुत जल्द सुल्तान मेरे वाहिद को ख़त्म कर भाबी जान को में अपने रखैल बना लूंगा और उसके कए हुए बेइज़्ज़ती का बदला लूंगा

Shamshera:kya सोचने लगे चाचा जान?

गुल shah:Kuch नहीं तुम ठीक कह रहे हो भूरिया बेगम बेमिसाल है

Shamshera:man me)Gul शाह तुम्हारी नज़र सल्तनत क ताज पर भी है और मेरी अम्मी जान पर भी पर दोनों पर सिर्फ मेरा हक़ है ,पारस सुल्तान भी मई बनूँगा और भूरिया को बीवी भी मई बनाऊंगा तुम्हे भूरिया सूंघने क लिए भी नहीं मिलेगी

Shamshera:theek है चाचा जान में फिर आपसे मिलता हु

Gulshah:theek है जाओ

शमशेर चलते हुए अपने अम्मी जान क हुजरे की ओरे चलने लगते है और हुजरे क आगे कड़ी दोनों कनीज़ को देखता है तो वो दोनों शमशेर को हे देख रहे थे शमशेर देखता है दरवाज़ा खुला है वो अंदर अपने कदम आगे बढ़ता है क कनीज़ अपने हाथ आगे कर लेती है और शमशेर को रोक देती है

"गुस्ताखी मुआफ शहज़ादे पर मल्लिकाजहं ने किसी को भी आने क लये मन क्या है"

Shamshera:kya मतलब है तुम्हारा

Kaneez:wo फिलहाह गुस्से में है आप से इल्तिज़ा है आप कल आये

Shamshera:mai उनका बीटा हु अगर वो परेशां है तो मुझे उनके पास जाना चाहिए समझो कनीज़

Kaneez:par उन्होंने सख्त हिदायत दी है

शमशेर कनीज़ों क हाथो को झटकते हुए अंदर कदम बढ़ता है

Shamshera:ammi जान ..अम्मी जान क्या मई अंदर आ सकता हु?

भूरिया उलटी लेती अपने आसुओ से तरबतर थी और शमशेर की आवाज़ सुन कर भी अनसुना कर देती है

Shamshera:ammi जान आपसे कुछ बात करनी है क्या मई अंदर आजौ

Kaneez:shehzade ये आप ठीक नहीं कह रहे है आप वापस आजाये पता नहीं मल्लिकाईजहान किस हाल में है आपका जाना दुरुस्त नहीं

Shamshera:chup करो कनीज़ एक लफ्ज़ और नहीं में जाऊंगा ये मेरे और अम्मी का मामला है

शमशेर अपने हाथ से पर्दा उठता है और धीरे से चलते हुए हुजरे में आता है और सीधा चलते हुए उस बड़े से कमरे में पहुँचता है जहा सोफे कुर्सी खाने का मेज़ था और उसी से लगा हुआ एक कमरा था जो भूरिया क सोने का खास जगह थी

शमशेर अंदर जा कर पर्दा उठता है और सामने बिस्तर पर भूरिया लेती हुई थी अपने पेट क बल जिसे देख एक बार फिर से शमशेर अपनी अम्मी क ख़ूबसूरती और उनके गांड क भराव से घायल होजाता है



भूरिया सफ़ेद पायजामे में अपने भरी भरकम गांड से इस वक़्त किसी बूढ़े का लैंड भी खड़ा कर सकती थी शमशेर अपने आप पर काबू पते हुए धीरे से

"अम्मी जान"

भूरिया अपने बेटे की आवाज़ सुन समझ जाती है वो अंदर आजाती है उसे पता था क उसकी गांड क ऊपर से समीज़ हैट चुकी है और उसके गदरायी गांड सलवार फाड़ कर बहार आने की कोशिश कर रही थी इसलिए वो सब से पहले अपने गांड पर अपने समीज़ से ढकती है और अपने ओढ़नी ले कर अपने दूध को ढकते हुए अपने कंधो पर फेकते हुए तेज़ी से उठ कड़ी होती है

"बडज़ाआत तुम्हारी ये ज़ुर्रत मेरे बिना इजाजत क मेरे हुजरे में आने की हिम्मत कैसे की शायद तुम भूल गए क मई सल्तनत पारस की सुल्ताना हु"

"अम्मी जान मेरे बात तो सुने"

"चुप कर मेरे एक हुक्म पर तुम्हारी ज़िन्दगी भर की क़ैद हो जाएगी और एक झटके में तुम्हारा सर कलम हो जायेगा तुम अपने आप को समझते क्या हो मत भूलो क में मल्लिकाईजहान हु"

"अम्मी जान आप चाहे जो कह ले पर में किसी से नहीं डरता और न डरूंगा"

"हाँ तुम अपने आपको बहुत ताक़तवर समझते हो तुम्हे पता नहीं लाखो सिपाही पारस से ले कर मिश्रा तक मेरे एक इशारे में क्या से क्या कर सकते है तुम्हारी जान अगर तुम्हे प्यारी है तो निकल जाओ और आइंदा कभी गुस्ताखी करने की सोचना भी मत"

भूरिया में गुस्से में लाल हो कर शमशेर पर बरसती है और शमशेर चुप चाप अपने अम्मी की बातो को सुन रहा था



शमशेर अपनी अम्मी की बातो को सुन अंदर से भड़क चूका था पर अपनी जज़्बात को सँभालते हुए अपनी अम्मी की बातो का जवाब नहीं देता

Hooriya:nikal जाओ बदबख्त नहीं तो अभी तुम्हारा सर कलम कर दूंगी मेरी फरमाबरदारी न करना कभी

भूरिया ये सोच रही थी क उसके ऐसा करने से शमशेर गुस्सा हो जायेगा और शायद वो अपनी ज़िद्द छोर दे पर शमशेर ने तो जैसे ठंड लिया था क वो भूरिया को ऐसे हाथ से जाने नहीं देगा

Shamshera:Ammi जहां बस्स्स अआप को लगता है न क मेरे मर जाने से या दूर जाने से मेरा इश्क़ आपके लये ख़तम हो जायेगा तो लीजिये

शमशेर अपने घुटनो क बल बैठ जाता है भूरिया क सामने और अपने खंजर निकल कर

"लीजिये खंजर अम्मी जान उतार दीजिये मेरा सर मेरे धार से "

भूरिया गुस्से से खंजर अपने हाथो में लेती है और शमशेर को देखते हुए

"तुम्हारा गाला काट दूंगी में इश्क़ जैसे पाक चीज़ को तुम अपने नाम से जोड़े तो"

भूरिया खंजर जैसे शमशेर क हाथ से लेती है शमशेर अपनी आखे बंद कर क अपना गाला आगे करता है

"अम्मी जान आप मेरा क़त्ल कर सकती है पर मेरा इश्क़ आपके लये कभी नहीं मर सकता कभी नहीं मर सकता वो हमेशा मेरे डिल में ज़िंदा रहेगा"

भूरिया खंजर को शमशेर क गर्दन पर लगा कर

"बदबख्त तुम क्यू नहीं समझते ये इश्क़ मुमकिन नहीं बहुत बड़ा गुनाह है"

"जिस गुनाह से मेरे और आपके ज़िन्दगी बेहतर हो जाये और हमारे ज़िन्दगी में फिर से बहार आजाये वो गुनाह नहीं मंटा मई"

शमशेर अपने आखो में ासु लेट हुए कहता है

"अम्मी जान आप क लये मई एक बार हज़ार बार क़ुर्बान हो जाओ "

भूरिया अपने बेटे क आखो में ासु साफ़ देखती है और वो भी थी एक माँ हे अपने बेटे को कैसे मार देती

भूरिया खंजर को अपना हाथ से दूर दीवार पर फेकती है और शमशेर क गिरेबांद पकड़ कर

"शर्म आती है मुझे तुम्हे अपना बीटा कहते हुए जो अपनी माँ को हे अपने हवस का शिकार बनाना चाहता है"

ये कह कर भूरिया रोने लगती है और शमशेर को देख "उठो शमशेर"

शमशेर उठ कर खड़ा होता hai.hooriya उसके करीब जा कर रट हुए

"बीटा तुम इतने अचे हो लम्बे ुचे हो तुम्हे तो दुन्या की एक से एक हसीं ख्वातून मिल जाएगी मेरी बात मानो तुम एक हसीं लड़की देख कर शादी कर लो बीटा मई हिन्द से ले कर फ्रांस तक तुम्हारी मन पसंद लड़की ढूंढ़ने क लये लोगो को खबर कर दूंगी मेरी बात मान जाओ और गुनाह का रास्ता छोर दो "

"अम्मी jaaan..jab हसीं से हसीं ख्वातून मुझसे शादी करने को तैयार हो जाएगी मेरे में कमी नहीं तो आप क्यू मुझे अपने डिल में जगह नहीं दे sakti?aur रही बात किसी से शादी करने की तो आसमान से पारी भी आजाये तो में उसको देखूंगा नहीं मैंने आपसे सच्ची मुहब्बत की है कोई खेल नहीं किया"

भूरिया प्यार से समझे पर शमशेर की बात सुन फिर से वो गुस्से से पागल हो जाती है और चिल्लाते हुए शमशेर से कहती है

"तो फिर एक काम करो उठाओ खंजर और ले लो मेरी जान मार दो मुझे न मई रहूंगी न तुम्हारे डिल ो दिमाग में ये ख़यालात आएंगे उठाआआआआ खंजर शमशेर और मार दो मुझे"

"अम्मी जाआआआं बस्स्स कीजिये अआप जब से चिल्लाये जा रही है और आपके मरने से पहले में पूरी दुन्या में आग लगा दूंगा"



"मुझे नहीं पता था शमशेर क तुम्हारी आवारगी इस हद्द तक बढ़ जाएगी और तुम शराब और वेश्याओं की लत्त से ुब्ब कर इतनी गन्दी हसरत अपने ज़ेहन में रख लोगे "



"तुमने आज दिनन में कितनी गन्दी हरकत की एक माँ का दर्द तुम क्या समझो शमशेर उफ़ मई किसे समझा रही हु तुम क्या कह रहे रहे "ऐसे रगड़ू क ासु झलक jaye"din रात तुम्हारी आखे मेरे जिस्म पैर होती है न लो फिर देखो मेरा जिस्म"



"तुमको यही चाहिए न लो देखो पीछे से देखो"

भूरिया शमशेर क करीब आती है रट hue"jee भर्र क देखो तुम्हे मेरा जिस्म चाहिए न ये लो "

भूरिया अपना दुपट्टा अपने दूध से हटा कर फेकती है



भूरिया अपने ओढ़नी फेक कर रट हुए शमशेर क सामने कड़ी हो जाती है

"कर लो अपनी ख्वाइश पूरी नोच खाओ मेरे जिस्म को आज कर लो अपनी हर मुराद पूरी राउंड दो मेरे जिस्म ko..Loot लू इज़्ज़त मेरी"

शमशेर :अम्मी जाएं मैंने मुहब्बत आपके रूह से की है जिस्म से नहीं मई आपके रूह को अपनाना चाहता हु

शमशेर निचे झुक कर दुपट्टा उठता है और फैला कर अपने अम्मी क जिस्म को ढकते हुए कंडे पर रख देता है

hooriya:Kyu..kar लो अपनी ख्वाइश पूरी ये ढोंग क्यू



भूरिया सुबकते हुए अपने आखे निचे कए रोये जा रही "शमशेर तुम्हारी इस हरकत की भनक भी किसी को लग जाएगी तो सिर्फ हमारी इज़्ज़त हे नहीं सल्तनत की इज़्ज़त पूरी दुन्या में तार तार हो जायेगी हमारी जान तो जाएगी हे पर हमारे खानदान को भी दुन्या में कही सर छुपाने की जगह नहीं मिलेगी"

"आप रोना बंद कर दीजिये में मानता हु गलती थी मेरी इसलिए में आया था आपसे मुआफी मांगने और रही बात दुन्या की तो मई मरने से नहीं डरता आपके लये में पूरी दुन्या से लड़ सकता हु"

"कहना बहुत आसान है शमशेर"

"अम्मी आप को क्या लगता है मुझे नहीं पता आप अपने डिल से पूछ क देखो वो भी कहेगा क शमशेर से आपको इश्क़ है"

"खामोश हो जाओ शमशेर "

"यही सच्चाई है अम्मी आप सच को क़ुबूल करना नहीं चाहती आप को लगता है मुझे इल्म नहीं आप सुल्तान मेरे वाहिद क लये अपनी ज़िन्दगी देव पर लगा दिए और बदले में उन्होंने आपको क्या डाई"

"अपनी जुबां सम्भालो शमशेर वो तुम्हारे बाप है उनका नाम तो मत लो"

"अम्मी जान हकीकत यही है क जो शख्स आपको ज़िन्दगी भर धोका में रखा और आपसे मुहब्बत का नाटक करता रहा और आप क्या समझती है उन्होंने 4 शादीअ इसलिए की वो आपसे सच्ची मुहब्बत करते the?ammi जान आखे खोलिये सुल्तान क हराम में सैकड़ो लौंडिया है और वो उन सब क साथ अपने ज़िन्दगी का लुत्फ़ उठाते है चाहे वो जुंग पर हो या कही और आप अपने बारी का इंतज़ार करती हो महल का हर काम संभालती हो सुल्तान क गैरहाजरी में पूरी दुन्या की हुक्मरानी का बोझ उठती हो फिर भी उस शख्स ने आपसे क्या सच्ची मुहब्बत की ? अपने डिल से पूछो अम्मी जान आप क लये अब्बा जान क्या सोचते है आर्य आप भूल गई जब आप पर हमला हो गया था तो वही सुल्तान दम दबा क छुप गया था आपको मरता छोर कर और मेरी हे मुहब्बत थी जो काम आये कहते है जान बचने वाले की जान होती है फिर भी न मई उसका बदला माँगा न mangunga.aap कहती हो न गुनाह आप को क्या मिला सबके लये ाचा कर क अम्मी जान मुझे आप कह रही हो मई वेश्या और शराब का नशा करता हु तो सुनिए हाँ क्या और उसकी वजह सिर्फ आप थी आप भले हे झब्बे में अपने आप को क़ैद कर लेती थी पर आपके आखो की तासीर ने मेरे डिल में आपके लये मुहब्बत पैदा की जिस्म बहुत देखे बाजार में हुस्न को बहुत लूटा कोठा पैर आपकी मुहब्बत का नशा उतरने क लये पर कम्बख्त जो नशा तेरे आखो में है किसी क जिस्म में नहीं"

शमशेर की बाते सुन भूरिया अपने दोनों आखो से आसुओ की लारी बहाये जा रही थी

"शमशेर भले से तुम्हारा इश्क़ सही हो और में भी कर लू तो क्या सही है तुम भी अपने डिल पर हाथ रख कर बोलो"

सुबकते हुए भूरिया अपनी चुप्पी तोड़ती है

"अम्मी जान बिलकुल सही है जब हम अपने ख़ुशी क लये कुछ करे क्या आप नहीं जानती बलदेव ने खला देवरानी को कैसे पाया? आज वो शादीशुदा है और घर बसा लिए "

"मुझे पता था तुम उनका देख कर हे ये सब सोच लाये"

"नहीं अम्मी जान मेरी मुहब्बत उनसे मुलाक़ात क पहले हे शुरू हो चुकी थी हाँ उनको देख कर हौसला आया आज देखिये वो दोनों कितने खुश है यहाँ तक क उनके खंडन वाले "

"बलदेव और देवरानी एक छोटे से खित्ते में रहते है जहा 20 गाओ होंगे वो वह पर राज करते है पर हम पूरी दुन्या पैर क़ाबिज़ है सब मुझे जनता है क मई कौन हु"

"ठीक है अम्मी जान आप जो चाहते है वही होगा आपको मेरे इश्क़ से ज़्यादा लोगो क बनाये रिवाज़ो की फ़िक़र है सल्तनत की फ़िक़र है आज ये सल्तनत है कल नहीं होगा आज जो मर्दो ने रिवाज़ बनाया है वो कल नहीं होगा और हम दोनों भी नहीं होंगे पर ये वक़्त छूट गया तो सिर्फ आपको अफ़सोस होगा"

"अम्मी जान रही को मंज़िल मिल हे जाती है आप चाहती हो न क में आपका पीछा छोर दू तो ठीक है में इतना दूर चला जाऊंगा क वापस न ासकु "

शमशेर अपने आखो में ासु लिए भूरिया को कहता है भूरिया अपने बेटे क ज़िद्द पर रोये जा रही थी शमशेर दरवाज़े क पास जाते हुए रुक जाता है और पीछे मुद कर

"अम्मी जान आपको ज़िन्दगी ने हसीं तोहफा दया था वो आप गवा दी मई चाहूंगा क आप इस आवारा शमशेर को सिर्फ ावरारगी से यद् न करे बल्कि इस आवारा क डिल में जो मुहब्बत है उसकी पाकीज़गी को याद करे"

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 155

"अम्मी जान रही को मंज़िल मिल हे जाती है आप चाहती हो न क में आपका पीछा छोर दू तो ठीक है में इतना दूर चला जाऊंगा क वापस न ासकु "

शमशेर अपने आखो में ासु लिए भूरिया को कहता है भूरिया अपने बेटे क ज़िद्द पर रोये जा रही थी शमशेर दरवाज़े क पास जाते हुए रुक जाता है और पीछे मुद कर

"अम्मी जान आपको ज़िन्दगी ने हसीं तोहफा दया था वो आप गवा दी मई चाहूंगा क आप इस आवारा शमशेर को सिर्फ ावरारगी से यद् न करे बल्कि इस आवारा क डिल में जो मुहब्बत है उसकी पाकीज़गी को याद करे"

शमशेर अपने आयसु भरे आखो से भूरिया को देखता है और धीरे से कहता hai"Shabba खैर"

भूरिया का डिल तो छह रहा था क वो अपने बेटे को रोके और उसके ासु को पोछे पर वो मजबूर थी दुन्या क रीती रिवाज़ का गाला घोटने को तैयार नहीं थी वो सख्ती दिखा कर किसी भी हाल में शमशेर से बचना चाहती थी इसलिए वो अपने आखो में ासु लिए रोये जा रही थी और कुछ हे पालो में शमशेर उसके आखो क सामने से ओझल हो जाता है भूरिया आकर अपने बिस्तर पर बैठ जाती है और फिर से रोने लगती है उसके होठो से अल्फ़ाज़ फुट पड़ती है

"शमशेर मुझे मुआफ कर देना मई तुम से छह कर भी इश्क़ नहीं कर sakti"hooriya फिर से रोने लगती है और पिछले दिनों हुए हर वाक़्या को याद करने लगती है कैसे शमशेर ने उसकी जान बचाई कैसे मुहब्बत का इज़हार क्या कैसे उसके आगे पीछे किसी सरफिरे आशिक़ की तरह पड़ा था सब सोचते हुए वो बिस्तर पर लेट जाती है

hooriya:man me)Ye हिम्मत इसकी बलदेव देवरानी क वजह से बढ़ी जो शक्श मेरे सामने ायकः उठा कर बात नहीं करता था वो इतना आगे बढ़ जायेगा मई सोच भी नहीं सकती थी ज़रूर उस बलदेव और देवरानी ने इसे कुछ सीखा दया उल्टा सीधा देवरानी भी तो ऐसे हे बाते की थी जैसे शमशेर क्या जब मई देवरानी को समझे थी क बेटे से रिश्ता बनाना गलत है"

(भूरिया उस दिन को याद करती है जिस दिन उसने देवरानी और बलदेव को रेंज हाथ पकड़ा था और भूरिया देवरानी पर गुस्सा हुई थी)

****

"देवरानी आप हमारी मेहमान है और आप हिन्द की महारानी है क्या आप पर ये शोभा देता है इतनी अकाल मंद और इमां वाली है आप"

"क्या दीदी मई समझी नहीं"

"देखिये देवरानी मई आपसे बात इतनी जल्दबाज़ी में और बिना वक़्त गवाए करने का राज़ ये है क में आपको आगे मुसीबत में नहीं देखना चाहती"

"दीदी आप क्या कह रही है कैसी मुसीबत कौन सा राज़ मुझे कुछ अर्थ नहीं समझ में आरहा"

"महारानी साहिबा आप इतने नेक डिल है आप क डिल में कोई छल कपट नहीं दिन रत खुदा को यद् करती हो फिर कैसे तुमने गलत कदम उठा लय"

देवरानी को अब हल्का महसूस हो जाता है क बात किस ओरे जा रही है पर वो ये सोच कर क बात कुछ और भी हो सकती है

"दीदी मैंने ऐसा क्या पाप कर दया मल्लिका इ जहाँ"

"तुम जहन्नमी हो देवरानी जिसने अपने बेटे से हे रिश्ता कायम किया है"

ये सुन कर देवरानी क धड़कन बढ़ जाता है और वो कंपनी लगती है

"देवरानी तुम्हे पता है इसकी सजा पारस में क्या है और तुम्हारे भाई को ये बात पता चली तो तुम्हे ज़िंदा दीवारों में चुनवा देंगे"

"दीदी आप गलत समझ रही है"

"चुप कर बद्ज़ात औरत मुझे तो तुझ जैसे गुनहगार से तो बात करना हे नहीं था पर में तुम्हे बता दू क अपना ये घटिया काम चोरी छुपे करना में नहीं चाहती मेरे मेहमान को कल हो कर फांसी हो जाये घिनौने जुर्म में"

देवरानी गुस्से में

"deeeeeeeeeeeeedeeeeeeee"

"अगर आप मेरे है तो मई भी एक राजपूतनी हु मेरे सामने इतना चिल्ला कर बात न करे हम धीरे से बात करते है इसका मतलब ये नहीं क हम चिल्ला नहीं सकते"

Hooriya:tumhare पास क्या है कहने क लये

Devrani:to सुनो दीदी आप भी एक रानी हो अगर आपका पति आप से 18 साल 20 साल तक आपको अपनी पत्नी न समझे और आपको आपका हक़ नहीं दे और न शारीरिक सुख दे तो आपको कैसा लगेगा?

Hooriya:Bura लगेगा हे पारर में..

"अआप बास सुनिए जो में कह रही हु मल्लिका इ जहाँ जी उसके बाद आप चाहे मुझे फांसी पर लटका देना पर एक राजपूतनी को कभी धमकी मत देना"

खूब गुस्से से चिल्ला कर कहती है देवरानी

Hooriya:chup कर देवरानी मई सुन रही हु पर आवाज़ काम दीवारों क भी कण होते है बास तुम्हारे अचे क लये कह रही हु बाकि तुम्हारी मर्ज़ी

Devrani:didi मेरा विवाह मुझसे बिना पूछे काम आयु में करवा दया गया मेरा बलदेव पैदा भी नहीं हुआ था मेरा पति मेरे साथ सोना छोर दया

"पिछले 18 साल से दीदी मेरे ऊपर अत्याचार हुआ न मेरा साथ भाई था न बाप न पति न बीटा में अकेली हर दुःख का ज़हर होता है मैंने तो जीना हे छोर दया था दीदी पर मेरे बलदेव ने मुझे जीने का वजह दया वही है जो मुझे मेरे जीवन में हर घडी मेरा साथ निभाया और उसको मुझसे प्रेम हो गया और मेरे लाख मन करने क बाद भी नहीं मन और मेरे पीछे था तो दीदी मई अपने जीवन जल रहे एक ज्योति को भला कैसे खुद से बुझती और मैंने भी बलदेव को स्वीकार कर लय और धीरे धीरे मुझे भी महसूस हुआ क प्रेम क्या होता है और ये कड़वा सच है जो मेरे हृदय में पहले प्रेम की ज्योति किसी ने जलाई वो बलदेव है और सिर्फ बलदेव"

Hooriya:badi साधु बन रही हो ये मज़हब में किसी क नहीं लिखा क ऐसा करो

devrani:"didi मज़हब धर्म आप से कह दू बास अपने मन की शांति क लये में मानती हु और जीवन भर मानूंगी और आप मुझे ये बताइये ये कौन से धर्म में लिखा है

पति अपने पत्नी को बरसो तक उसे पति सुख नहीं दे?

कौन से ग्रन्थ में लिखा है क पति 10 पत्निया कर ले और पत्नी अपने पति क मृत्यु क बाद भी सटी बानी रहे?

क्या मज़हब यही है दीदी क आपके पति सुल्तान मेरे वाहिद 150 लौंडिया अपने हरम में रखे और उन सबको भोगे और खुद 4 पत्निया रखे उनको भी भोगे और आप को एक हफ्ते में एक बार हे मौका मिले?"

Hooriya:chup करो इसमें सुल्तान की ज़िकर करने की ज़रूरत नहीं

Devrani:zarurat है दीदी आप अपने आखे खोलिये हर छूट हर ऐश सिर्फ मर्द को है पुरुष को स्त्रीया तो दासी है जो अपने मन से कुछ नहीं कर sakti..apko लगी न बुरी बात जब मैंने कहा क सुल्तान क कितने मज़े है और आप सप्ताह में एक बार हे खुश हो पति हो तो सोचो जब आप सप्ताह में एक बार ख़ुशी मिलती है तो दुखी हो तो में तो सालो साल तदपि हु पति सुख क lye,kya ये सही है मेरा पति राजपाल वैश्यों से खूब मज़े करो अपने दूसरी पत्नी को सुख दे मेरे पति तो मुझे नौकरानी समझे और राजा रतन क कुबेरी जा कर रंगरेलिया मानते थे

देवरानी अब चुप हो जाती है और वही पलंग पर बैठ कर सुबुक कर रोने लगती है

भूरिया का कठोर डिल पसीज जाता है और वो जा कर जग से गिलास में पानी ढाल कर देवरानी क पास आ कर

"ये लो पानी पीयो तुम तो घायल शेरनी की तरस बरस पड़ी"

देवरानी गिलास का पानी पीती है और गिलास रख कर कड़ी भूरिया क पैरो पर गिर जाती है

Hooriya:ary देवरानी ये क्या कर रही हो

और उसे अपने हाथो से ऊपर उठती है

"दीदी हो आप मेरी बड़ी हमारे धर्म में बड़ो क पेअर पड़ते है"

ये सुन कर भूरिया क आखो में भी ासु आजाता है और देवरानी को गले लगा लेती है

"देवरानी तुम इतनी अछि हो क में तुम्हे कहना नहीं चाहती थी कुछ भी पर में तुम्हे बास होशियार करना चाहती थी क यहाँ अगर तुम पकड़ी गयी तो तुम दोनों मरे जाओगे खामखा"

"दीदी अब में बहुत सह ली मुझे अब परवाह नहीं मरने का अगर दुन्या यही चाहती है तो अब हम दोनों मर जाये दुन्या वालो से तो "

"चुप कर पगली में तुम्हारी हर बात सुनी और समझी पूरी ज़िन्दगी मुसीबत उठाई और अब मर जाओगी भले हे मई तुम्हारे इस रिश्ते क खिलाफ हु और कभी इस बात को ाचा नहीं मान सकती जो इतना बड़ा गुनाह है पर तुम हे अगर गुनाह में डूबना चाहती हो और तुम्हे लगता है उसमे हे तुम खुश हो तो तुम्हारी मर्ज़ी"

"दीदी अगर में एक बात गलत कही तो बताइये जब ये राजा महाराजा सबको प्यार नहीं दे सकते तो क्यू करते है इतने विवाह एक पत्नी भी क्या काम है इनके शारीरिक ीचा पूरी करने क लये"

"देवरानी अब हम क्या कर सकते है ये जहाँ में शुरू से ऐसा हे होते आ रहा है हम उसे बदल नहीं सकते "

"दीदी मर्द चार शादी कर ले और हम औरते एक हे उसमे भी जीवन भर तड़पे ये कैसा नियम है और तो और हमारे यहाँ तो जिसके पति की मृत्यु हो जाये वो भले हे 18 साल की स्त्री हो वो जीवन भर सटी रह जाती है"

भूरिया देवरानी को ले कर बिस्तर पर बैठती है और खुद भी बैठ टी है

"देवरानी मई इस गुनाह को गुनाह हे मानूगी पर जब तुम दोनों सच में इश्क़ करते हो तो थोड़ा छुप कर"

"क्यू छुप कर दीदी क्या आपके पति सुल्तान मेरे वाहिद अपने हरम में 150 रखैल छुप कर रखे है?"

Hooriya:nahi

मायूस होते हुए

Devrani:kya प्रजा को पता नहीं क सुल्तान की चार बीविया और 150 लौंडिया है जिसके साथ उनके शारीरिक सम्बन्ध है?

Hooriya:Pata है सबको

Devrani:to आपको बुरा नहीं लगता आपका पति इतने स्त्रीयो से सम्बन्ध बना कर है क्या ये दुन्या वाले को ये सब सही लगता है

भूरिया क आखे भर आती है

"चुप करो देवरानी ये सब बात मत करो"

devrani:q न ळरु मल्लिका इ जहाँ आपको नाम का मल्लिका इ जहाँ बना डाई मुझे नाम का रानी बना डाई पर हमारे पति अपने रंगरलिया मानते है जो गलत है और में बोलू भी नहीं यही कमी है हम औरतो में मर्द की बात आते हे हम चुपकी मार लेते है

Hooriya:to क्या करू लाडू सुल्तान से में

devrani:mard तो हमारी गलती निकल कर हमारे लिए नियम क़ानून निकल डाई और हम औरते चुप रह कर इन्हे अपने मन की नियम बनाने दिए जिसका भुगतान हमे करना पद रहा है

Hooriya:hmmm देवरानी

devrani:han लड़िये दीदी अपने हक़ क लये अपने सम्मान क लये और इन मर्दो क नियम हम क्यू मने जब ये हमारे नियम नहीं मानते और न हमे बनाने का अधिकार दिया

Hooriya:chhoro मई तुम्हारी बात से कभी इत्तेफ़ाक़ नहीं रख सकती हु कभी भी और रही मेरे शौहर की बात तो उसका इन्साफ खुदा करेगा

देवदानी दो टूक भूरिया को देख रही थी

Devrani:theek है दीदी पर में प्रेम करती हु बलदेव से अपनी जान से ज़्यादा

Hooriya:theek है पर ये बात इस घर में किसी को पता न चले ाचा हुआ मेरे सांस ससुर और बाकि लोग पारस में नहीं है नहीं तो

Devrani:theek है दीदी मई इस बात का ध्यान रखूंगी

********

भूरिया का बदन काँप उठता है और पसीने छूटने लगते है वो अपने आप पर काबू करती है वो खुली आखो से अपने और देवरानी की दरम्यान की गई बातो को याद कर एक असमंजस की स्थिति में थी वो जानती थी क वो भी शमशेर से इश्क़ करने लगी है और देवरानी की कही हर बात कड़वी तो थी पर सच थी

Hooriya:man me)Han तुम्हारी हर बात सच है देवरानी आज मुझे अहसास हो रहा है ज़िन्दगी में अगर शुआहार आपको बीवी नहीं समझे आपसे मुहब्बत नहीं करे तो ज़िंदा रह कर भी इंसान ज़िंदा नहीं hota,ye बात तो सच है मेरे सामने एक तरफ ज़िन्दगी है शमशेर क साथ जो मुझे बहुत खुश रखेगा पर हमारी ख़ुशी कितने दिन की होगी ये मालूम नहीं और दूसरी तरफ मई सुल्तान क साथ रह कर सल्तनत को भी बचा लुंगी अपने रिवाज़ को भी पर मेरा बीटा शमशेर न कभी शादी करेगा न मेरी नस्ल आगे बढ़ेगी और वो कही कुछ अपने आप को कर लिया तो ..या खुदा मई क्या करू एक तरफ ख़ुशी है और दूसरी तरफ खुदखुशी

Hooriya:man में) आज पहली बार मेरा डिल सुल्तान का अलावा किसी और क लये धड़का किसी और क लये इश्क़ का अहसास क्या शायद सिर्फ इसलिए क सुल्तान अब मेरे से नहीं प्यार करते उनको में बूढी और मोती बदसूरत लगती hu..Ye सही बात है मर्द क बनाये नियम और हम औरतो की ज़िन्दगी बर्बाद है मर्द तो खुद कई औरतो से हमबिस्तरी करते है और हम औरते सालो साल इंतज़ार में रहती है एक मर्द क लये ,मर्द 4 बीइओ से सच्ची मुहब्बत कर सकते है पर औरत किसी गैर मर्द को भी आँख उठा कर देख ले तो वो बन जाती है वैश्य

"सुल्तान का मैंने इतना खिदमत क्या उनके पैरो टेल रही उनकी हर बात मानी शादी पर शादी कए वो मई मन नहीं की हराम में लौंडिया बढ़ाते रहे सबके जिस्म क साथ खेला मैंने कुछ नहीं की और आज वो मुझे पूछते नहीं सिर्फ उनको कच्ची केलिए पसंद है मैं नहीं तो क्या अब मेरी ज़िन्दगी यही ख़त्म हो गई अब से मई एक बेवा की तरह ज़िन्दगी गुज़ारू बिना शौहर की मुहब्बत क मेरे वजह से हे आज सल्तनत इतना बढ़ पाया पर मेरी इज़्ज़त तो है हे नहीं सुल्तान की नज़रो में सही बोली थी देवरानी एक तो बिना पूछे हमारी शादी करवा देते है हमारे बाप और ज़िन्दगी भर की घुलम बना देते है किसी मर्द क "

भूरिया अपने ासु पोछती है

Hooriya:man me)Jahannam तो ज़िन्दगी बन जाती है अगर आप को सिर्फ दुःख मिले देवरानी की तरह मेरे शौहर भी तो मेरे सामने बूढ़े हे है 12-14 साल उम्र ज़्यादा है फिर में आज तक उनको इज़्ज़त दी और कभी गलत कदम नहीं उठाई पर इसका सिला मुझे यही मिला सिर्फ नाम की सुल्ताना बना डाई पर मेरे से मुहब्बत रत्ती बराबर नहीं ठीक कहती थी देवरानी नरक की ज़िन्दगी जीने से ाचा है क मर jaye,paap पुण्य क चक्कर में अपने जीवन को ख़राब करना सही नहीं " अब भले हे वो मज़हब क हिसाब से गुनाह कर रही है पर किसी का डिल तो नहीं दुख रही राजपाल जो गलती क्या उसकी सजा उसे मिल रही है और वो अपने और अपने बेटे की ख़ुशी से अपने ज़िन्दगी मज़े से गुज़र रही ,देवरानी तो हिम्मत वाली थी हर दर्द सेह कर अपने प्यार को अमलीजामा पहना दी मेरे तो पेअर काँप जाते है गलत सोचते हुए भी मई कैसे कर सकती हु"

भूरिया करवट बदलती है और अपने आखो से आसुओ को पोछते हुए

"मई नहीं कर पाऊँगी भले हे मई इस बात को अपने डिल में हे दफ़न कर दू क मई शमशेर को एक औरत की तरह चाहने लगी हु उसके मर्दानगी की कायल हो गई हु हर बात में मुझे एक अलग तरह की ख़ुशी मिलती hai,mere अंदर की औरत तो उसके प्यार को अहसास कर लेती है पर मेरे अंदर की माँ शमशेर को शायद कभी क़ुबूल नहीं कर पाए ..कैसे न हु कायल शमशेर की अपने जान से बढ़कर मुझसे इश्क़ करता है अपने जान पर खेल कर मुझे बचाया और कैसे कह रहा था क वो आसमान की पारी आजाये तो उसको भी अपनी नहीं बनाएगा पर मुझसे मुहब्बत करता रहेगा मेरे लये वो पूरी दुन्या से लड़ सकता है पर में हे हु जो इतना चाहने वाले आशिक़ को छह कर भी उसका हाथ थम नहीं सकती उस से इश्क़ नहीं कर सकती"

भूरिया देर रात तक देवरानी की कही हुई बातो को सोच कर अपने नए प्यार शमशेर को याद करती रहती है और अपने मज़बूरी पर ासु बहाये जाती और कब उसे नींद आती है उसे पता नहीं चलता

उधर शमशेर भी अपने हुजरे में जा कर सोने की कोशिश करता है पर उसके आखो से नींद कोशो दूर थी और वो फैसला करता है क वो पारस छोर कर चला जायेगा

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 156

भूरिया देर रात तक देवरानी की कही हुई बातो को सोच कर अपने नए प्यार शमशेर को याद करती रहती है और अपने मज़बूरी पर ासु बहाये जाती और कब उसे नींद आती है उसे पता नहीं चलता

उधर शमशेर भी अपने हुजरे में जा कर सोने की कोशिश करता है पर उसके आखो से नींद कोशो दूर थी और वो फैसला करता है क वो पारस छोर कर चला जायेगा

पारस में एक नयी सुबह होती है आज क इस वक़्त में पूरी दुन्या पारस सल्तनत की हुकूमत में थी और किसी फौज या साम्राज्य में न इतनी शक्ति थी न उनके पास फौज जो सुल्तान मेरे वाहिद से मुक़ाबिला कर ले ,पश्चिम पूर्व दोनों ओरे से पारसी सल्तनत दिन दुगनी रात चौगनी तरक़्क़ी कर रही थी और हर रोज़ एक नया राज्य पर पारसी फौज कब्ज़ा कर लेती सुल्तान क बनाये हुए फौज और सुल्तान क दिमाग क क़ाबिलियत का हे हे नतीजा था जो पुरे दुन्या से अब मंगोलो को का खौफ ख़त्म हो गया था मंगोलो क हर राज्य पर सुल्तान हुकूमत करना शुरू कर डाई थे पर सुल्तान मेरे वाहिद पूरी दुन्या को जीतना चाहते थे इसलिए पूरी दुन्या की हर शे की खबर उनके पास होती थी पर वो दुन्या पैर नज़र टिकाये बैठे थे और अनजान थे अपने हे घर की बात se,Sultan ने अपने ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा क उनके छाव टेल उसका अपना बीटा शमशेर अपनी हे अम्मी से इश्क़ कर बैठा है और सुल्तान की कमज़ोरी क वजह से सुल्ताना हूरजहाँ भी अपने हे बेटे शमशेर को एक मर्द क रूप में एक आशिक़ क रूप में देखने लगी थी और अपने हे बेटे से इश्क़ कर बैठी थी पर दुन्या की खौफ और गुनाह क डरने भूरिया क पैरो के जंजीर बंधे हुए थे जिसे तोड़ कर शमशेर क बहो में छह कर भी नहीं जा प् रही थी और उसने शमशेर को सख्ती से मन कर दया क वो दूर रहे जिसके उलट हर कोशिश क बाद हार दार कर एक ऐसा फैसला ले लिया जो उसने कभी सोचा नहीं था वो था अपने अम्मी भूरिया से दूर जाने का अभी शमशेर सो रहा था अपने हुजरे में लेते हुए क अचानक से हफ्ता हुआ उठता है "नहीं अम्मी जान को मत ले jao"ye कहते हुए अपने हाथ को आगे करता है और जैसे हे वो देखता है क वो सामने कोई नाह है और वो बिस्तर पर है सो कर उठा है वो ज़ोर से हफ्ते हुए अपने पलंग क पास राखी मेज़ से पानी का गिलास उठा कर पीने लगता hai,shamshera पसीने से तरबतर था

शायद वो कोई डरावना ख्वाब देखा था शमशेर उठ कर खड़ा होता है और एक कपडे से अपना सर का पसीना पोछते हुए

"साली न चैन से जीने देती है न सोने देती है इस से दूर जाना हे ठीक है "

शमशेर पानी पीकर गिलास रखता है और फिर उसके अंतरात्मा की आवाज़ आती है

"शमशेर तुम उसे छोर कर जाओगे जिसे तुम जागते सोते हर जगह देखते हो जिसके लये तुम जीते हो क्या तुम जी पाओगे भूरिया क बगैर?"

शमशेर अपना सर पकड़ लेता है और झिंझलाते हुए कहता hai"nahi ऐसा नहीं हो सकता मेरे लये भूरिया नहीं बानी मई तो आवारा हु और वो एक पाक औरत है मेरे लिए तो वैश्ये हे .मुझ जैसे गुनहगार को भूरिया नहीं मिल सकती मई तो एक शराबी हु और वो सुल्ताना हमारी जोड़ी हे नहीं बनती मई जी लूंगा उसके बिन"

शमशेर अपने अंतरात्मा को जवाब देता है पर फिर से उसके अंतरात्मा से आवज़ आती है

"खुद से झूट नहीं बोल सकते तुम शमशेर तुम ख्वाब में देखे तुम्हे कोई तुम्हारी अम्मी से दूर कर रहा है और तुम हकीकत में परेशां हो गए तुम उसे देखे बिना जी नहीं पाओगे"

शमशेर इस बार झिन्झिला क सामने रखा शीशे का गिलास उठता है और ज़ोरदार दीवार पर दे मरता है और शीशे टूट कर बिखर जाता है

"मई जी पाउँगा मुझे किसी की ज़रूरत नहीं शमशेर हु मई"

शमशेर गुस्से से अपने हुजरे से बहार आता है और तेज़ कदमो से महल क बहार निकल कर

"मुहाफिजों घोडा लाओ"

एक सिपाही घोडा ले कर अत है और शमशेर उसपर सवार हो कर घोड़े को भागने लगता है और महल से कोसो दूर पहाडिओ क बीच अपने घोड़े को रोक कर एक पेड़ से बांध देता है और एक पठार पर जा कर बैठ जाता है और गहरी सोच में डूब जाता है

"अब तो मैंने फैसला कर लय है क में यहाँ से चला जाऊंगा पर कहा जाऊ मई क्या कहूंगा अब्बा जान से अगर वो पूछेंगे क्यू जा रहे हो तो और कहा जा रहे हो तो "

शमशेर इधर पहाड़ो पर बैठ अपने आगे क कदम क बारे में सोच रहा था और उधर भूरिया अपने कक्षा में सोइ हुई थी देर रात सोने क कारन वो अब तक नहीं उठी thi,Mahal क दरबार लगता है और धीरे धीरे सब पहुंच रहे थे और आकर अपने कुर्सी पर बैठ रहे थे तभी सुल्तान मेरे वाहिद सबको आते हुए दीखते है उनके पीछे दो सिपाही तलवार लये आरहे थे उनकी हिफाज़त क लये सुल्तान को देख पूरा दरबार खड़ा हो जाता है और सब एक सुर में कहते है

"सुल्तान का इक़बाल बुलंद हो"

"सुल्तान का इक़बाल बुलंद हो"

सुल्तान चहल कदमी करते हुए मुस्कराहट क साथ आकर अपने सिंहासन पर बैठते है और अपने हाथ को ऊपर कर सबको इशारा देते हुए बैठने को कहते है सब लोग निचे बैठ जाते है अपने अपने कुर्सी पर

Sultan:Aaj का दरबार शुरू क्या जाए

सुल्तान की नज़र शमशेर की कुर्सी पर जाती है जो खली थी और उसे गुस्सा अत है

Sultan:man me)Ye शमशेर आज भी देरी से आएगा लगता है

Shaan:abba जान हमने एक बार और मंगोलो को शिकश्त दे दी है और उनके एक और खित्ते पैर हुकूमत हमारी हो गयी है कल हे कमांडर ने खबर भेजवाई थी

Sultan:wah शहज़ादे शान तुमने तो बहुत अछि खबर सुनाई बहुत जल्द हमारी हुकूमत पूरी दुन्या पर होगी

Gulshah:Mubarak हो भाईजान

सुल्तान dastan:Mubarak हो बीटा

सुल्तान को सब मुबारकबादी देने लगते है जितने भी मंत्री वह पर बैठे थे सब को सुल्तान मुस्कुरा कर देख रहे थे

Sultan:aap सबको भी मुबारक हो ये फ़तेह सिर्फ मेरी नहीं आप सब की भी है अगर हम यु हे काम करते रहे तो जल्द हे हम दिल्ली पर भी अपना परचम लहरायेंगे

Dastan;.dilli को जीतने क लये मंसूबा बनाने की ज़िम्मेदारी तो तुमने शहज़ादे शमशेर को दिया था न ,क्या हुआ आगे कुछ बात बढ़ी

Sultan:abba जान आपको पता है शमशेर पर कुछ दिनों पहले हे हमला हुआ है जिस वजह से वो आराम कर रहा है

Gulshah:bhaijaan अगर वो घायल है तो हम किसी और को दे सकते है ये काम

Sultan:Gul शाह जासूसी करना इतना आसान नहीं और हमे डिल क बादशाह शाहज़ेब की हर खबर मिलनी चाहिए उसके ताक़त उसकी कमज़ोरी तभी हम दिल्ली फ़तेह कर पाएंगे

Gulshah:Hum जुंग क लये तैयार है हमे वक़्त जाया नहीं करना चाहिए शाहज़ेब अगर कुबेरी में हुई जुंग क चोट से उभर गया तो हमारा हमला करना ठीक नहीं होगा

Dastan:gulshah ठीक कह रहा है इस से पहले क वो नया दस्ता बनाये जुंग क लये हमे उन पर हमला करना चाहिए नहीं तो वो अपनी ताक़त बढ़ाना बखूबी जनता hai,Dilli क मंसूबे पर अगर शमशेर नहीं कर सकता तो हम शहज़ादे शान को भी तो ये काम दे सकते है

Sultan:Par अब्बा जान

Gulshah:abba जान ठीक कह रहे है भाईजान

Sultan:Mai आप सब से ये नहीं कह रहा क आप गलत है पर शमशेर सालो से ये काम करता आरहा है और हम कुछ दिन रुक जाये तो क्या फ़र्क़ पड़ेगा

Dastan:Beta अगर शान से नया काम नहीं करवाओगे तो उसके क़ाबिलियत का अंदाज़ा कैसे लगेगा

Shaan:Dada जान अगर अब्बा जान ने ये फैसला लय है क शमशेर भाईजान इस काम को अंजाम दे तो इसमें कोई वजह होगी

Gulshah:shamshera तो आज भी नहीं है महल में जो दरबार में नहीं आता हो उनसे हम क्या उम्मीद कर सकते है

Sultan:Gul शाह शायद तुम भूल गए क कितने हे जंगो में शमशेर क क़ाबिलियत ने हमे जीताया है

सुल्तान थोड़ा गुस्सा होते हुए कहता है

Dastan:Qabiliyat कितनी भी हो पर इंसान को ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए

Sultan:abba जान वो आजायेगा

छान pasha:Gustakhi मुआफ सुल्तान पर मैंने शमशेर को सुबह सुबह घोड़े से कही जाते हुए देखा

Sultan:man me)Ye मेरी जुबां और मेरी इज़्ज़त ख़राब कर क रहेगा इसके वजह से आज ये सब ऊँगली उठा रहे है

सुल्तान मेरे वाहिद को गुस्से में देख गुल शाह शान को देख कर एक मुस्कान देता है और बदले में शान भी अपना सर हिलता है

Sultan:chan पाशा ...जब भी शहज़ादे शमशेर आये हमे इल्तिलाह kijiye..Inki आवारगी दिन बा दिन बढ़ती जा रही है बेवक़्त कोई काम करना बेवकूफी है

Gulshah:waise शुंग की कोई खबर नै आई

सुल्तान को देखते हुए गुलशाह बोलता है

Gulshah:man me)Gusse पे काबू रखो मेरे वाहिद अब तुम्हारी उम्र हो गई है बहुत जल्द तुम्हारी जान ले लूंगा और तुम्हारी जान भूरिया को अपनी जान लूंगा

Sultan:Jis दिन शुंग मेरे हाथो में आएगा उस दिन शुंग क सर क साथ उस गद्दार का सर भी होगा जिसने महल में रह कर सल्तनत से बगहवाट की है

इधर औरतो क दरबार में सुल्तान की साडी बीवीए लौन्डिए और उनकी माँ अफसाना खातून उनकी दोनों बेश्या समां और महनूर थी पर भूरिया अब तक नहीं आई थी

Afsana:Beti नाज़ ये भूरिया आज नहीं आई

Naaz:ammi आज शमशेर भी नहीं आया और न भूरिया बाजी दोनों माँ बेटे सल्तनत क काम को मज़ाक बना कर रखे है

Afsana:aisa न कहो बेटी ,भूरिया या तुम मेरी बहु नहीं बेटिओं से बढ़ कर हो इसके पीछे कोई न कोई वजह होगी

Naaz:acha में गलत हे ठीक फिर शमशेर तो हमेशा हे नहीं आते या तो देर से आते है ज़िम्मेदारी भी कोई चीज़ होती है बास आवारगी करते रहते है अब बताये क्या ये बात भी गलत है?

Afsana:ye बात तो सच है क शमशेर क अंदर वो ज़िम्मेदारी नहीं आई और वो आवारागर्दी में अपना वक़्त जाया करता है मुझे लगता है इसका एक हे इलाज है

Naaz:kya इलाज है

Afsana:Naaz हमे शमशेर की शादी कर देनी चाहिए उसकी उम्र भी अब 25 की हो गई

Naaz:ab वो शादी क्यू करेंगे कोठो पर जाना जो बंद हो जायेगा आवारा गर्दी कैसे कर सकेंगे इसलिए तो मन करते है शादी से

Afsana:kuch सोच समझ कर बोले कुछ बाटे छुपाये तो अच्छा है

Naaz:Jo सच है वो है उनको तो वैसे भी अगला सुल्तान बनाने की पेशकश कर दी है सुल्तान ने अब उनको किस बात की फिक्र

Afsana:Mujhe अब शमशेर की शादी करवानी पड़ेगी मई बात करुँगी आज मेरे वाहिद से देखती हु कैसे शमशेर बात नहीं मंटा

नाज़ :जैसा आपको ठीक लगे

Afsana:Kaneez सुल्तान मेरे वाहिद को खबर कर दो वो आकर हमसे मिले

Kaneez:Jo हुक्म सुल्ताना

कुछ घंटो तक राज दरबार चलता है और फिर सुल्तान उठ कर जाते है फिर उनके पीछे सब जाने लगते है कनीज सुल्तान को खबर कर देती है क उनकी अम्मी अफसाना उनसे मिलना चाहती है पर सुल्तान पहले अपने हुजरे में जाते है ये कह कर क वो मिल लेंगे वक़्त निकल kar.Gul शाह अपने हुजरे में जा कर शराब क चुस्की ले रहा था तभी उसके कान में आवाज़ अति है

"अंदर आजौ उस्ताद में छान पाशा "

"आओ छान पाशा "

गुलशाह एक और गिलास में शराब रखता है और छान पाशा की ओरे बढ़ा कर

"ये लो छान पाशा मज़े लो इस बेशक़ीमती शराब की खास कर ितलिअ से मंगवाया हु"

"उस्ताद किस ख़ुशी में पीउ में हमारा हर काम बीच में रुका है "

चाँद पाशा ये कहते हुए गिलास उठा लेता है

"छान पाशा गिलास रख दो मत पियो"

"उस्ताद"

"हहह छान पाशा में मज़ाक कर रहा हु पीयो इस ख़ुशी में क हम बहुत जल्द सुल्तानन्त पर हम हुकूमत करेंगे "

छान पाशा चुस्की लेते हुए पूछता है

"पर कब उस्ताद सुल्तान तो मरने का नाम नहीं लेता "

"बहुत हुआ अब में खुद अपने हाथो से सुल्तान को मरूंगा"

"पर उस्ताद ये खतरे से खली नहीं होगा अगर किसी ने सुराग लगा लिया तो हम बुरा फास जायेंगे"

"डरने की बात नहीं है छान पाशा जैसे हुकूमत हमारे हाथ में आएगी हम वो हर सर कुचल देंगे जो हमारे खिलाफ उठेगा "

"हाँ उस्ताद और आपको तो भाबी भी मिल जाएगी "

"हाँ वैसे मैंने तुमसे एक बात नहीं बताई अब तक"

"क्या बात उस्ताद"

तभी किसी की आवाज़ दोनों क कानो में पड़ती है

"गुस्ताखी मुआफ हो छान पाशा को सुल्तान दास्ताँ ने बुलाया है"

बहार से कनीज की आवाज़ थी जिसे सुन गुलशाह कहता है "छान पाशा तुम जाओ में ये बात तुम्हे बाद में बताऊंगा और यद् रखना हमे सुल्तान क लये कोई खास तैयारी करनी है "

"ठीक है उस्ताद शुंग का क्या करना है वो हम से मिलना चाहता है"

"उसका मई सोचता हु क्या करना है "

छान पाशा वह से चला जाता है और गुल शाह फिर से शराब पीने लगता है

Gulshah:man me)Hooriya का नशा ऐसा चढ़ा है क इस शराब से नशा नहीं चढ़ता जब तक भूरिया भाबी को छोड़ न लू मेरे डिल को सुकून नहीं मिलेगा उस रंडी ने मेरी बेइज़्ज़ती की उसे पता चलेगा क गुलशाह से दुश्मनी कितनी भरी पड़ती है

इधर भूरिया उठती है और फुर्ती से उठ क बैठ जाती है

"या खुदा लगता है दुपहर हो गई मई इतना देर तक सो रही हु आज दरबार भी नहीं गई"

भूरिया उठ कर अपने गुसलखाना में घुस जाती है और नाहा धो कर तैयार हो जाती है इतने में समां आती है

"बड़ी अम्मी मई आजौ"

"आजाओ बेटी "

"सलाम बड़ी अम्मी "

"आजाओ मेरी बेटी कैसी हो"

"मई तो ठीक हु अम्मी जान"

"आओ बैठो आज तो में दरबार नहीं जा पाई अभी आँख खुली "

"क्या हुआ बड़ी अम्मी आप की ताब्यात तो ठीक है आज पहली बार आप इतना देर तक सोइ"

Hooriya:man me)ab क्या कहु समां मई जिस हल से गुज़र रहे हु शमशेर ने में ज़िन्दगी को ऐसे मोर पर ले आया क मेरी अकाल काम नहीं कर रही

Hooriya:beti थोड़ा ताब्यात सुस्त है बास और कुछ नहीं

Sama:Badi अम्मी सुबह से शमशेर भाईजान भी गायब है मई सुनी वो घोडा ले कर पहाड़ो की ओरे गए अभी तक न लौटे

Hooriya:man me)ya खुदा ये शमशेर कही कुछ गलत कदम न उठा ले कही वो पारस छोर क तो नहीं चला गया

Sama:kya हुआ बड़ी अम्मी क्या आपको पता है वो कहा है

Hooriya:na नहीं मुझे मुझे कैसे पता होगा

Sama:theek है पर पता नहीं क्यू मुझे उनकी फिक्र हो रही थी तो आपसे पूछे चली आई अब मई चलती हु

Hooriya:theek है बेटी

समां वह से चली जाती है और भूरिया का मन उदास हो जाता है डिल बेचैन हो जाता है और वो बुझे मन से जा कर सोफे पे बैठ जाती है और अपने सोच में डूब जाती है

भूरिया को चक्कर सा महसूस होता है क्यू क वो रात से कुछ नहीं खाई थी वो कुछ सेब अंगूर उठा क खाने लगती है इतने में दासी आती है और भूरिया से खाने का पूछती है पर वो मन कर देती है और उससे शमशेर का पता करने बोलती है और दासी वापस आकर कहती है वो नहीं ए अभी तक ऐसे हे शाम हो जाती है और भूरिया का डिल भरी होने लगता है

Hooriya:man me)lagta है शमशेर चला गया हमेशा क लये ये सब मेरे वजह से हुआ

भूरिया क आखो में ासु आजाते है और वो अपने ासु पॉच कर अपने हुजरे से बहार निकलती है और सीधा शमशेर क कक्षा में जाती है कनीज कहती है वो नहीं आये भूरिया अंदर जाती है और उसका डिल दहल जाता है वो अपने आखो में ासु लिए हुए वही पर बैठ जाती है

Hooriya:man me)mere वजह से आज मेरे लाल को कितनी दुःख सहना पद रहा है हो सके तो मुझे मुआफ कर देना बीटा

इधर सुल्तान अपने हुजरे से निकल कर अपने माँ अफसाना खातून क पास जाता है और उनके हुजरे में पहुंच कर

Sultan:salam अम्मी जान

Afsana:aao मेरे वाहिद बीटा

Sultan:aapne याद किया अम्मी जान

Afsana:pehle इत्मीनान से बैठो फिर बताती हु हमेशा जल्दी में रहते हो अपनी अम्मी क लये वक़्त नहीं

Sultan:ammi जान आप तो जानती है न सुल्तान बन ने क बाद ज़िम्मेदारिया बढ़ जाती है और सल्तनत को आगे बढ़ने में म्हणत तो लगती है न

Afsana:beta सल्तनत बढ़ाना ठीक है पर अपनों को वक़्त नहीं दे पाओगे तो क्या फायदे का जागीर और दौलत

Sultan:theek है अम्मी जान अब से आप से हमेशा याद कर लिया करूँगा

Afsana:Han तो मई इस बात क लये बुलाई थी क आज कल शहज़ादे शमशेर का क्या हाल है

Sultan:thek है वो

Afsana:pakka ?

Sultan:Han बास उसकी आवारगी बढ़ रही है

Afsana:to तुमने कुछ सोचा है उसका?

Sultan:Han आज भी वो सुबह से गायब है और अब तक कोई अत पता नहीं आज आएगा तो उसकी खबर लेता हु

Afsana:Meer वाहिद जब तुम इस तरह आवारगी क्या करते थे तो मैंने तुम्हारी शादी करवा दी थी

Sultan:aap ठीक कह रही हो अम्मी जान वो होने वाला सुल्तान अगर इस तरह हे उसकी हरकत रही तो उसका जीना दुश्वार हो जायेगा वो आता है तो में उस से बात करता हु

Sultan:theek है अम्मी जान आपका शुकरिअ अब मई चलता हु

Afsana:theek है बीटा मई भी थोड़ा टहल लेती हु देखु भूरिया कहा है

Sultan:jaisa आपको ठीक लगे अम्मी जान

सुल्तान और अफसाना बहार आते है और सुल्तान अपने हुजरे में चले जाते है अफसाना चलते हु भूरिया क हुजरे क तरफ जाती है और कनीज़ उसे बताती है क वो शमशेर को ढूंढ़ते हुए गयी है इसलिए अफसाना शमशेर क हुजरे में जाती है और अंदर घुसती है तो देखती है भूरिया बैठी कुछ सोच रही है

Afsana:Hooriya बेटी क्या हुआ

भूरिया हड़बड़ा कर उठ कड़ी होती है और अपने चेहरे पर मुस्कराहट लेट हुए

Hooriya:aaiye अम्मी जान

Afsana:beti क्या हो रहा ये सब मुझे समझ नहीं आती बात

भूरिया क आखे फटी की फटी रह जाती है और वो डर क मरे कंपनी लग जाती है और उसके सर पर पसीने क बुँदे छूट जाती है

Hooriya:man me)kahi इनको कुछ पता नहीं चल गया क्या बोलू

Afsana:kya हुआ तुम डर क्यू रही हो मई शमशेर की बात कर रही हु

अब तो भूरिया हाल बाद से बदतर हो जाता है

Hooriya:ji जी वो

Afsana:beti तुम दर क्यू रही हो डरना तो उस शमशेर को चाहिए वो कोई बचा तो नहीं

ये सुनते हे भूरिया क आखो में ासु भर आते है और यक़ीन कर लेती है उसकी सास को उसके पोते क इश्क़ की खबर हो चुकी है

Hooriya:ammi जान मई उसे ..उसे बहुत समझाई

Afsana:Han बेटी उसे समझाओ वो शादी करे उम्र निकल रही है

भूरिया अपनी आखे बंद कर क एक लम्बी सांस खींचती है फिर छोरती है

Hooriya:to आप शमशेर की शादी की बात कर रहे थे

Afsana:han तुम क्या समझी उसे कहो शादी करे ज़िन्दगी बर्बाद न करे उसकी हरकत ऐसी हे रही तो उसको एवं सुल्तान देखना बिलकुल भी पसंद नहीं करेगा

Hooriya:ammi जान मई तो बहुत समझे पर वो है क मानता नहीं

Afsana:aaj मैंने मेरे वाहिद से बात कर ली हु अब देखती हु शमशेर कैसे मन करता है

Hooriya:man me)ab कैसे बताऊ अम्मी जान वो किसी और से शादी नहीं करेगा वो मुझसे इश्क़ करने लगा है और में छह कर भी उसके इश्क़ को क़ुबूल नहीं कर sakti..pata नहीं वो वापस आएगा या नहीं

तभी अफसाना की नज़र पलंग क बगल में पड़े काच क टुकड़े पर गिरी

Afsana:ye क्या ये कैसे टूटा

Hooriya:wo वो अम्मी जान मेरे हाथ से हे छूट गया

Hooriya:man me)agar किसी को पता चला क शमशेर ने इसे गुस्से से तोडा है तो हर बात खुल जाएगी

Hooriya:kaneez इधर आओ

Kaneez:hukm सुल्ताना

Hooriya:in टूटे शीशे क टुकड़ो को फेक दो

Kaneez:jo हुक्म

Afsana:waise आपकी ताब्यात ठीक तो है न आप भी दरबार में नहीं आये

Hooriya:wo अम्मी आज में देर से उठी कुछ ताब्यात सुस्त थी

Afsana:koi बात नहीं भूरिया आज तुम्हारी दुवाओ और म्हणत क वजह से हे हम पारस को आज दुन्या का सबसे खुशहाल और दौलतमंद बन पाया

Hooriya:shukria मेरे क़ुर्बानिओ को याद रखने क लये नहीं तो लोग आज कल बहुत जल्दी भूल जाते है

Hooriya:man me)kash ये बात आप का बीटा मेरे वाहिद भी समझ पता और उसके डिल में मेरे लिए जगह होती

दोनों अचानक से आई किसी क चलने की आहत से चुप हो जाते है और तभी सामने से एक साढ़े 6 फ़ीट लम्बा चौड़ा आदमी आरहा था वो कोई और नहीं शमशेर था भूरिया की तो जैसे अपने बेटे क वापस आने की ख़ुशी में आखे चमक जाती है

Afsana:ary शमशेर कहा गायब थे तुम

Shamshera:salam..mai किसी काम से गया था

Afsana:Hum तुम्हारी हे बात कर रहे थे बीटा आओ बैठो

Shamshera:Ji दादी जान

Afsana:dekho भूरिया हमारा शमशेर कितना बड़ा हो गया है अब हमे इसके लिए प्यारी सी दुल्हन लानी है



भूरिया अपनी मुस्कराहट को छुपाते हुए

Hooriya:"Ji मई भी चाहती हु क मेरी बहु आजाये

Shamshera:dadi जान मुझसे शादी नहीं करनी

Afsana:Manao अपने बेटे को भूरिया नहीं तो बूढ़ा हों जायेगा

Hooriya:man me)ye तो तैयार है पर कमीना मुझे हे अपनी बीवी बनाना चाहता है

ये सोच कर भूरिया डिल धड़क उठ ता है उतने में कनीज़ की आवाज़ आती है

Kaneez:Sultan ने शहज़ादे शमशेर को याद क्या है मल्लिकाईजहान

शमशेर उठ कर हुजरे क बहार जाने लगता है भूरिया को रहा नहीं जाता उसका बीटा उसके तरफ न तो देख रहा था और न हे बात कर रह था

Hooriya:shamshera आज तुम्नसे सुबह में दवा नहीं खाई

Afsana:beta जख्म अभी भरा नहीं ये क्या कह रही है भूरिया तुम दवा नहीं कहते

शमशेर चलते हुए जा कर दरवाज़ा पर रुकता है और बिना पीछे मुड़े

Shamshera:Dadi जान इनको कह दीजिये मेरी फ़िक़र नहीं करे

ये कह कर शमशेर बहार चला जाता है और अफसाना भूरिया को देखते हुए

Afsana:ye क्या भूरिया क्या शमशेर से कोई लड़ाई हुई है जो वो तुमसे बात नहीं कर रहा ?

Hooriya:wo वो अम्मी आप तो जानते हे है मई उसके सेहत को ले कर परेशां रहती हु इस लिए दन्त दी थी

Afsana:umeed है ऐसा हे हो मई चलती हु

Hooriya:man में) अब आपको क्या बताऊ सासु माँ आपका पोता मेरे प्यार में पागल है और ज़िद्द कए बैठा है

अफसाना खातून और भूरिया शमशेर क हुजरे से निकल कर आजाती है और अपने अपने हुजरे में चली जाती है

उधर शमशेर अपने वालिद सुल्तान मेरे वाहिद क यहाँ पर पहुँचता है और सर झुका कर सलाम करता है

Sultan:aao शहज़ादे शमशेर

Shamshera:aap ने याद क्या अब्बा जान

Sultan:han कुछ ख़ास बात करनी थी मई चाहता हु कुछ काम जल्द से जल्द हो जाये अगर तुम्हे सुल्तान बन ने की सीडीओ तक जल्दी पहुंचना है

Sultan:tumhare खिलाफ महल में लोग एक जुट होरहे है और तुम आज भी दरबार में नहीं आये ऐसा कब तक चलेगा एक और बात

Shamshera:rahi आज की बात तो मई आपको बताऊंगा में कहा था इससे पहले आप दूसरा सवाल कर ले

Sultan:beta तुम्हारी दादी चाहती है क तुम्हारी शादी हो जाये उनके उम्र हो गई क्या उनका हक़ नहीं अपने पोते की शादी देखे ?

Shamshera:abba जान आपके पहले सवाल का जवाब मई आज दिन भर्र कही आवारागर्दी नहीं करने गया बास आगे मुझे सफर जो करना है उसके तैयारी में जूता रहा

Sultan:matlab ..कौन सा सफर

Shamshera:aur रही बात शादी की तो मई नहीं कर सकता मेरी अपनी मज़बूरी है मई आप सब क लये जान दे सकता हु आप सब क मुहब्बत क लये पर शादी नहीं कर सकता

Sultan:baat समझो शमशेर उम्र हो गयी तुम शादी कर लो उसके बाद अगर तुम कुछ भी करो मई मन नहीं करूँगा पर लोगो को ये नहीं लगे क तुम आवारा हो

Shamshera:nahi कर सकता अब में दो दिन बाद यहाँ से चला जाऊंगा

Sultan:kya बोल रहे हो तुम कहा जाओगे

Shamshera:apni मंज़िल क तलाश में

Sultan:par तुम्हे यहाँ सल्तनत को संभालना है तुम अगले सुल्तान हो तुम्हारी मंज़िल यही है तुम्हे तलाशने की ज़रूरत नहीं बास बैठ क राज करो और इतने ताक़तवर बनो क तुम्हारी पुष्टि इस दुन्या पर हुकूमत करे

Shamshera:mujhe पता था क आप यही कहोगे तो अब्बा जान मई मग़रिब क तरफ अपने दस्ते की कमान संभालना चाहता हु और वह अपना राज फैलाना चाहता हु

Sultan:shamshera तुम्हे पता है तुम ये फैसला ले कर अपनी जान को जोखिम में डालोगे तुम सुल्तान क बेटे हो तुम्हे साल भर जुंग क मैदान में देखना मुझे गवारा नहीं

Shamshera:maine ये फैसला ले लिया है आप माने तो ठीक नहीं तो फिर भी मई पारस छोर कर कही और अपनी दुन्या बसा लूंगा

Sultan:shamshera हमारे ख्वाब हमारे काम हमें दिल्ली फ़तेह करना है सब कुछ भूल गए तुम तुम नहीं रहोगे तो तुम्हारी जगह कौन लेगा

Shamshera:mai अपनी ज़िन्दगी कैसे जीऊंगा उसका फैसला मई कर सकता हु अब्बा जान मुझे अब जाना चाहिए

शमशेर पलट कर वापस अपने हुजरे में जाने लगता है और सुल्तान अपने बेटे को देखते रह जाता है

Sultan:man me)shamshera जो हमेशा हर बात हसी मज़ाक में उदा देता है जो हमेशा किसी शेर की तरह दहाड़ता है उसके अंदर इतनी निर्मित कैसे आगयी और क्यू ये पारस छोर क जाना चाहता है मुझे इसके अम्मी भूरिया से बात करनी होगी.

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 157

Shamshera:mai अपनी ज़िन्दगी कैसे जीऊंगा उसका फैसला मई कर सकता हु अब्बा जान मुझे अब जाना चाहिए

शमशेर पलट कर वापस अपने हुजरे में जाने लगता है और सुल्तान अपने बेटे को देखते रह जाता है

Sultan:man me)shamshera जो हमेशा हर बात हसी मज़ाक में उदा देता है जो हमेशा किसी शेर की तरह दहाड़ता है उसके अंदर इतनी निर्मित कैसे आगयी और क्यू ये पारस छोर क जाना चाहता है मुझे इसके अम्मी भूरिया से बात करनी होगी.

सुल्तान परेशां हो जाता है क वो क्या जवाब देगा लोगो को और अपने मंसूबे को अंजाम कैसे देगा उधर भूरिया अपने बिस्तर पर लेती खोयी थी अपने नए आशिके बेटे शमशेर क याद में उसके साथ गुज़ारे हसीं लम्हो को याद करते हुए

Hooriya:man me)Sirf एक दिन शमशेर बात नहीं क्या ऐसा लग रहा है जैसे मेरी दुन्या उजाड़ गयी है ज़िन्दगी में कुछ रखा हे नहीं अगर कही वो हमेशा क क लये चला गया तो मई खुश रहना तो दूर जी भी न पाऊँगी शमशेर का चेहरा उसकी बाते हमेशा मेरे आखो क सामने रहती है अगर यही इश्क़ है तो अब में भी अपने से इश्क़ करने लगी हु जिस बात को में मैंने को तैयार नहीं थी पर हम दोनों का क्या मुस्तक़बिल है और कितने दिनों की ज़िन्दगी होगी हमारी कोई न कोई हमारे गुनाहो क लये जान से मार देगा

ऐसे हे शमशेर अपने बिस्तर पर लेता सोच रहा था क वो आगे आने वाले दिनों में सालो में भूरिया को बिना देखे कैसे गुज़रेगा पर शमशेर भूरिया से निराश था क्यू क वो शमशेर क इश्क़ को अपनाने क लये किसी भी क़ीमत पर तैयार नहीं thi,aise हे कश्मकश में सबकी रात गुज़रती है और पारस क इतिहास क पन्नो में एक अपने आप में अनोखी कहानी लिखी जा रही थी शमशेर और भूरिया दुवारा जिसके अंजाम से वो दोनों भी नावाक़िफ़ थे

सुबह होती है और सुल्तान मेरे वाहिद अपने बेटे क पारस से जाने क फैसले पर चिंतित थे और जल्दी उठ जाते है वो सोच में डूबे थे आखिर कैसे वो शमशेर को रोके

सुल्तान अपने हाथो को उठा कर दो बार ताली बजाते है और एक कनीज अंदर आती है

Sultan:kaneej तुम जा कर शमशेर और हूरजहाँ दोनों को कहो हमने याद क्या है

Kaneej:Jo हुक्म सुल्तान

इधर भूरिया सुबह जल्दी उठ गयी थी और अपने सौतन नाज़ बेगम की बेटी समां से बात कर रही थी

Sama:Ji बड़ी अम्मी बताइये आपने यद् क्या

Hooriya-dekho बेटी मई आप पैर भरोसा करती हु इसलिए कुछ कहना चाहती हु जिसकी खबर किसी को न हो

Sama:badi अम्मी आप आँख बंद कर क हम पर भरोसा कर सकती है

Hooriya:theek है बात ऐसी है क तुम्हारे भाईजान शमशेर मुझसे खफा है और गुस्से में है और दवा नहीं खा रहे

sama:wo क्यू गुस्सा है आपसे बड़ी अम्मी वो तो बहुत प्यार करते है आपसे

Hooriya:man me)Ab इतना प्यार हे करने लगा वो क अब गुस्सा हो गया तुम्हे कैसे बताऊ क उसके सर मेरा इश्क़ सर चढ़ बोल रहा है

Hooriya:beti ये सही वक़्त नहीं समझने का बस किसी वजह से गुस्स्सा है कोई बात नहीं मन ने की वजह से तुम तो जानती हो वो कितना ज़िद्दी है

Sama:han आप भी तो बहुत गुस्से वाली हो इसलिए आपका बीटा भी ऐसा है

Hooriya:man me)ab वो मेरा बीटा कहा रहा अब तो वो मेरा आशिके हो गया है और मई उसकी माशूका

Hooriya:jaao और अपने भाईजान को समझाओ उनके सेहत क लये दवा ज़रूरी है जख्म अभी भरा नहीं है और उन्हें दवा खिलाओ

Sama:Ji ठीक है बड़ी अम्मी में जाती हु

Hooriya:dhyan रहे वो मुझसे गुस्सा है ऐसा किसी को पता नहीं चले

Sama:ji बड़ी अम्मी

Sama:man me)ye बड़ी अम्मी इतनी छोटी सी बात छुपा क्यू रही है सब से अगर शमशेर भाईजान किसी बात से खफा है तो क्या वजह हो सकती है बात छुपाने की

समां वह से चली जाती है तभी वह पर कनीज आजाती है और भूरिया को बताती है क आपसे और शहज़ादे शमशेर दोनों से मिलना चाहते है सुल्तान ये सुन कर भूरिया पेशोपेश में पद जाती है

Hooriya:man me)ab पता नहीं क्यू बुला रहे है सुल्तान वो भी शमशेर क साथ या खुदा हमे बचा लेना मई नहीं चाहती शमशेर पर किसी भी क़िस्म क आफत आजाये

भूरिया चहलकदमी करते हुए सुल्तान क हुजरे क तरफ जाने लगती है उधर शमशेर सुल्तान क पास पहुंच जाता है

Sultan:baitho शमशेर तुम्हारी अम्मी को आने दो

शमशेर घबरा जाता है उसे लगता है कही भूरिया ने उसकी बात सुल्तान से बता तो नहीं दी शमशेर अपने अंजाम से एक बार क लये तो दर जाता है

Shamshera:man me):man me)Ammi जान ने अगर अब्बा जान को मेरी शिकायत की है तो आज हे शायद मेरा सर कलम कर दे ये लोग नहीं मुझे पक्का यक़ीन है क अम्मी भी मुझसे इश्क़ करने लगी है और मेरे जान लेने का सोच नहीं सकती वो

सुल्तान बैठे हुए एक कोरे कागज़ पैर मयूर क पंख में स्याही लगा कर कुछ लिख रहे थे और भूरिया क आने का इंतज़ार कर रहे थे

कुछ देर में भूरिया आती है और वो झुक कर अपने शौहर को सलाम करती है पर सुल्तान जवाब नहीं देता और अपना काम करते रहते है फिर अपना सर उठाते हुए

Sultan:baith जाइये सुल्ताना .आज कल आपके पहनावे हे बदल गए है भूरिया बेगम

Hooriya:ji वो अब कोशिश करती हु महल में आरामदेह कपडे पह्नु बहार जाती हु तो झुब्बा पहन लेती हु

Sultan:tumhe डरने की क्या ज़रूरत तुम बहार भी पहन सकती हो

शमशेर सुन रहा था कैसे सुल्तान भूरिया को देखे जा रहा था और उसे बुरा लग रहा था क उसके सामने हे उसकी अम्मी को कोई घर रहा है शमशेर की नज़र न चाहते हुए भी चोरी सी भूरिया क तरफ घूम जाती है



भूरिया बाला की खूबसूरत लग रही थी शमशेर की हरकत कनखियों से देखते हुए भूरिया अपने हिजाब को सर से ठीक करती है और अंदर हे अंदर वो मुस्कुरा रही थी पर अपने शौहर को पता नहीं चलने देती है क वो अपने बेटे क देखने से मुस्कुरा रही है नहीं तो सुल्तान को शक हो जाता क दोनों एक अलग तरह क रिश्ते में बांध गए है

Sultan:hooriya बेगम आप दिन रात इबादत हे करती रहोगी या कुछ अपने घर का अपने सिलसिले का भी सोचोगी

सुल्तान अपने कागज़ कलम रख कर भूरिया को देखते हुए पूछता है

Hooriya:mai समझनी नहीं जहाँपनाह

Sultan:ab बास इबादत से रियासत में लोगो को सुकून नहीं मिलता उसके लये काम करना पड़ता है

Hooriya:aap तो जानते है मई दिन रात एक कर देती हु पर पारस की एवं या सल्तनत क एवं का कभी हमारे ऊपर से भरोसा नहीं टूटने देती दरबार में सब क दुःख दर्द को सुनती हु सब क मसले हल करती हु

Sultan:aapke बातो से हम इत्तेफ़ाक़ रखते है मल्लिकाईजहान पर क्या आपने खुद अपने घर क लये कुछ सोचा है कैसे आपकी नस्ले आगे बढ़ेगी आप तो पुरे पारस क लये काम कर रही है

Hooriya:mai आपकी बात समझी नहीं

Sultan:bass इसलिए तो आपको बुलाये है ताके आपको समझा सके ,मई आपके इस लाडले बेटे शमशेर की ज़िद्द से परेशां हो गया हु

Sultan:shehzade चाहते है ये अपनी रियासत बनाएंगे मग़रिब में और सालो साल वही बसेरा करेंगे कुल मिला कर ये हमे छोर कर जाना चाहते है

भूरिया ये सुन कर नाटक ऐसा करती है जैसे उसे पता हे न हो अंदर से वो तो जानती थी क शमशेर ने फैसला ले लय है

Sultan:chup क्यू हो समझाओ इस शमशेर को ये दुन्या में अपनी रियासत बनाना इतना आसान नहीं

Hooriya:Ye क्या है शमशेर तुम ऐसे कैसे कर सकते हो

शमशेर भूरिया को देखता नहीं है और अपने बाप क तरफ देखते हुए

"अब्बा जान मई अब कोई दूध पीटा बचा नहीं अपने फैसले खुद ले सकता हु"

सुल्तान ये सुन कर गुस्से से लाल हो जाता है और उठ खड़ा होता है

Sultan:kya कहा तुमने अब तुम बड़े हो गए हो तुम्हे ये कहते हुए शर्म नहीं आती तुमको मैंने हर ख़ुशी दया तुम्हारे लिए मैंने क्या नहीं क्या लेकिन तुम आज भी नशे क हाल में दरबार में आते हो और अक्सर तुम रात भर महल में हे नहीं होते ,तुम शराब और कोठो पर जाते रहे गलती पर गलती रहे और हर बात मई नज़र अंदाज़ करता रहा और आज तुम पारस छोर कर जाने की बात क्र रहे हो

Sultan:agar ये चला जायेगा भूरिया तो मेरी जुबां सबके सामने ख़राब हो जाएगी हमने बहुत से काम सौंपे है इसको हमारे आने वाली जंगो की तैयारी करनी है पर इनको तो कोठो पर जा कर वैश्यों क साथ सिर्फ रंगरलिया माननी है

सुल्तान शमशेर पर गरजते हुए कहता है और इस वक़्त भूरिया और शमशेर दोनों सुल्तान की आवाज़ से काँप उठते है

Shamshera:aap कुछ भी कहे पर इतनी घिनोना इलज़ाम तो नहीं लगाए अब्बा जान आपको अपने बेटे क लये इतनी गन्दी ज़ुबान इश्तेमाल करते हुए शर्म नहीं आई

सुल्तान आगे बढ़ता है और और शमशेर को देखता है उसके आखे लाल थी और वो गुस्से में था सुल्तान अपना हाथ आगे बढ़ा कर एक ज़ोर दर थप्पड़ शमशेर क गाल पर रशीद कर देता है

शमशेर क आखो में ासु भर आता है जिसे देख भूरिया की आखे भर्र आती है

Sultan:teri इतनी ज़ुर्रत सुल्तान मेरे वाहिद से ज़ुबान लगता है

शमशेर अपने गाल पर हाथ रखे हुए

Shamshera:meri बात सुल्तान क लये नहीं अपने बाप क लये थी

Sultan:Hooriya इसे समझा दो नहीं तो गुस्ताखी की सजा में इसे उम्र क़ैद न दे दू और अगर ये पारस छोर कर जाता है तो तुम्हे दुन्या में कही पनाह नहीं लेने दूंगा याद रखना मेरा नाम सुल्तान मेरे वाहिद है मेरी बात न मैंने वाले का अंजाम में बाद से बदतर कर देता हु

Hooriya:shant हो जाये सुल्तान ये आपका बीटा है जिसे आप सुल्तान बनाना छह रहे है

Shamshera:inhone थप्पड़ मार कर आज अपना क़र्ज़ तो उतार लिया हे

Sultan:Hooooriya इसे ले जाओ मेरे सामने से इस से पहले की mai...Ise जो करना है करे हमे जो करना है हम करेंगे

भूरिया शमशेर क सामने आजाती है और उसके आखो में देख रट हुए कहती है

"बीटा शमशेर अपने बाप से मुँह लगा रहे हो खामोश हो जाओ चलो मेरे साथ"

सुल्तान गुस्से उठ कर अपने हुजरे के दूसरे कमरे में चला जाता है और भूरिया शमशेर का हाथ पकड़ कर बहार आने लगती है दोनों क आखो में आयसु भरे थे शमशेर अपने हाथ को छुरता है पर भूरिया भी कोई कमज़ोर औरत नहीं थी ताक़त से पकडे हुई थी शमशेर न चाहते हुए भी अपने अम्मी से पहली बार बोलता है

"अम्मी जाएं छोड़िये मेरा हाथ "

"नहीं छोड़ूंगी अपने दिमाग को ठिकाने पर नहीं रख सकते तुम सुल्तान को उल्टा जवाब देने की क्या ज़रूरत थी"

भूरिया और शमशेर दोनों शमशेर क कक्षा में आजाते है और भूरिया शमशेर को पलंग पर बैठा देती है और पानी का गिलास ले कर उसको पानी पिलाती है

Hooriya:tum सचमुच पागल हो गए हो

Shamshera:ammi जान मई आपसे बात नहीं करना चाहता आप चले जाये मई आपको परेशां करता हु न मई दो दिन क अंदर पारस छोर कर कही दूर चला जाऊंगा मुझे महल क ऐशो आराम की ज़रूरत नहीं

Hooriya:agar तुम चले गए तो सुल्तान तुम्हे छोड़ेंगे नहीं वो तुम्हारी मदद नहीं करेंगे बल्कि तुमसे बदला लेंगे नाफरमानी करने का

Shamshera:jo होगा मई देख lunga,Is थप्पड़ का बदला लूंगा mai,aapko फ़िक़र करने की ज़रूरत नहीं

Hooriya:kaise न फ़िक़र करू मैंने तुम्हे पाल पॉश कर इतना बड़ा क्या इसलिए क तुम अपनी ज़िन्दगी इतनी आसानी से गवा दो दिमाग का इस्तेमाल करो

Shamshera:har तरफ से तो आपको सिर्फ मौत नज़र आती है मई कुछ भी करूँगा तो मारा हे जाऊंगा या तो यहाँ रहूँगा तो भी मेरे इश्क़ क जुर्म में चला गया तो नाफरमानी क जुर्म में पर में शमशेर हु मौत से नहीं डरता आपकी तरह डरपोक नहीं जो डिल में कुछ और होठो पे कुछ और ..मुझे नहीं पता था अम्मी जान आप इतनी डरपोक होंगी

भूरिया शमशेर क बातो का मतलब समझ कर आखो से ासु टपकने लगती है

Shamshera:ammi ये दुन्या डरने वालो को जीने नहीं देती आज न कल तो मरना हे है क्यू न अपने मन की करे क्यू दुन्या क ख़ुशी क ख़ुशी क लये अपनी ख़ुशी मार le..mai तो अपनी ख़ुशी क लये जीऊंगा जब मौत होगी मर जाऊंगा

Hooriya:chup कर मरने का नाम भी मत लेना जुबां से तुम्हे पता है तेरे सिवा मेरा कौन है अपना फिर भी तू चला जायेगा

Shamshera:ab. आप जानती है मई क्यू जाना चाहता मई एक बात को दोहरा कर फिर से आपको रुलाना नहीं चाहता..

शमशेर भूरिया को बिना देखे अपने लम्बे कदम से चलते हुए बहार चला जाता है और भूरिया क ासु से छलक



जाते है भूरिया अपने हाथो से अपने ासु साफ़ करती है

Hooriya:man me)shamshera ठीक कहता है मई एक डरपोक औरत हु जो शमशेर से इश्क़ करते हुए भी उस से नफरत करने का ढोंग कर रही hu,ye सब आफत की ज़िम्मेदार मई हु.

भूरिया उठ कर अपने हुजरे में जाती है और अपना दरवाज़ा बंद कर क पलंग पर लेट जाती है और सोने की कोशिश करने लगती है

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 158

Hooriya:man me)shamshera ठीक कहता है मई एक डरपोक औरत हु जो शमशेर से इश्क़ करते हुए भी उस से नफरत करने का ढोंग कर रही hu,ye सब आफत की ज़िम्मेदार मई हु.

भूरिया उठ कर अपने हुजरे में जाती है और अपना दरवाज़ा बंद कर क पलंग पर लेट जाती है और सोने की कोशिश करने लगती है

भूरिया का सर दर्द होरहा था कुछ दिनों ज़िन्दगी में इतने बदलाव महसूस कर भूरिया अंदर से टूट सी गई थी उधर समां सुबह हे शमशेर से मिलने क लये आती है उसके हुजरे में

Sama:bhaijaan आप कैसे हो

Shamshera:aap कैसे हो बहिन समां मई ठीक हु

Sama:aapne सुबह की दवा खाया

Shamshera:tumhe किसने भेजा है दवा खिलने क लये

Sama:bhaijaan मई तो वो

Shamshera:jhut मत बोलो

Sama:wo अम्मी जान ने कहा था आप उनसे गुस्सा है और दवाई नहीं खा रहे

Shamshera:man me)uff ये अम्मी जान मुझे बेवक़ूफ़ कहती है और खुद अगर समां को पता चल गया तो

Shamshera:Sama क्या मई तुमपे भरोसा कर सकता हु

Sama:bhaijaan आप जानते है में अपने भाई शहज़ादे शान से ज़्यादा आपको मानती हु

Shamshera:to ये बात किसी को भी मत बताना क मेरे और अम्मी क बीच कुछ नाइत्तेफ़ाक़ी है

Sama:ye बाद तो बड़ी अम्मी भी कह रही थी क किसी को न बताऊ क आप उन पर गुस्सा है पर ऐसा क्यू भाईजान मुझे समझ नहीं आई बात

Shamshera:tum अभी बची हो नहीं समझोगी

Sama:han तो में आपको दवा खिला देती हु

समां दवा शमशेर को खिलाती है और कहती है "भाईजान आपके जख्म अचे से भरे नहीं है आप वक़्त पर दवा खाये"

Shamshera:aisa भी अम्मी ने सिखाया होगा तुम्हे

शमशेर क डिल में एक ठंडक हवा बहती है ये सोच कर क उसकी माँ उसका कितना फ़िक़र करती है

Sama:han वो आपको बहुत मानती है

Shamshera:Sama मेरी बहिन मई पारस छोर कर जा रहा हु हो सकता है ये हमारी आखिरी मुलाक़ात हो

Sama:par क्यू भाईजान आप ऐसा क्यू कर रहे है

Shamshera:bass ये ऐशो आराम की ज़िन्दगी से मन भर्र गया

Sama:nahi भाईजान ऐसा मत कीजिये आप तो होने वाले सुल्तान है ऐसे कैसे आपको अब्बा जान जाने दे सकते है

Shamshera:mai आज हे दरबार में जा कर सबके सामने अपने काम की इश्तिफा और पारस से जाने की बात का ऐलान कर दूंगा

Sama:par भाईजान आप क्यू कर रहे है ये सब

shamshera:ye सब समझने का वक़्त नहीं

शमशेर हुजरे से बहार निकलता है और उसके पीछे समां भी आने लगती है शमशेर सीधा महल क दरबार की ओरे जाता है जहा पर पहले से दरबार लग चुकी थी और सारे मंत्री इकठे हो गए थे शमशेर सीधा दरबार में जाता है और समां औरतो क दरबार की तरफ जाती है जो बिलकुल सत्ता हुआ था

शमशेर अंदर जाते हे वह पर खड़े सिपाही चिल्लाते है

"होशियार शहज़ादे शमशेर तसरीफ ला रहे है "

शमशेर अपना हाथ दिखा कर सिपाही को खामोश होने क लये कहता है और धीरे से जा कर सबसे पहले झुक कर अपने अब्बा जान सुल्तान मेरे वाहिद का हाथ चूमता है फिर अपने दादा सुल्तान दास्ताँ का हाथ चूमता है फिर अपने चाचा गुलशाह का हाथ चूमता है

शमशेर को सब बैठने क लये इशारा करते है पर शमशेर न में गर्दन हिला कर

Shamshera:Aap सब क बीच मई आज बैठने क लये नहीं बल्कि कुछ एहम फैसले को आप सब क सामने रखने क लये आया हु

सब आपस में बात करने लग जाते है

"ऐसा क्या फैसला ले लय शहज़ादे ने"

Shamshera:mai आप सब को और इस पारस का अहसानमंद हु जिसने मुझे पला पोषा और एक ाचा जुंगजो और माहिर जासूस बनाया और मई तौमर अहसानमंद रहूँगा पर मैंने फैसला क्या है क अब मई पारस छोर मग़रिबी खित्तों पर अपनी हुकूमत हासिल करू इसलिए मई आज आप सब क सामने अपने ज़िम्मेदारी से इस्तीफा देने आया हु

Gulshah:par तुम ऐसे कैसे इतनी जल्दबाज़ी में इस्तीफा दे सकते हो जबकि तुम जानते हो क हर काम को सुल्तान ने तुम्हारे ज़िम्मे छोरा है शहज़ादे

Shamshera:chacha जान मई मानता हु क उन कामो को करने क लये हमारे सल्तनत में एक से बढ़ कर एक माहिर लोग है आप चाहे तो वो ज़िम्मेदारी आप उठा सकते है

सुल्तान चुप चाप गुस्से से हर बात को सुन रहे थे

Shamsher:mai कल सूरज ढलने से पहले रवाना हो जाऊंगा किसी को कोई सवाल करना है तो कर सकते है

छान pasha:Shehzade आप तो होने वाले सुल्तान थे फिर भी आप इतना ाचा मौक़ा छोर रहे है

समशेरा मुस्कुराता है और कहता है

"छान पाशा सुल्तान किसी को कोई बना नहीं सकता हमारी क़ाबिलियत हमे सुल्तान या रैंक बनती है और रही बात अगले सुल्तान की तो शहज़ादे शान मेरे छोटे भाई जिनके चुनाव को सब बेहतर पहले भी समझे थे वो होंगे अगले सुल्तान"

Shaan:bhaijaan मुझे लगता है क आप सल्तनत को मुझसे बेहतर बढ़ा सकते है इसी वजह से सुल्तान ने मुझे नहीं आपको चुना

Sultan:Shamshera की इस्तीफा लिखा जाये मई अपनी मोहर मर दूंगा तुम जा सकते हो शमशेर

सुल्तान अपने बेटे शमशेर को अपनी लाल आखो से देखते हुए कहता है और पुरे दरबार में लोग आपस में बाटे करने लगते है शमशेर दरबार से धीरे धीरे अपने हुजरे की तरफ जाने लगता है

आखिरकार शमशेर ने फैसला सबको सुना दया और पारस से जाने की तय्यरी करने लगा ,इन सब से किसी को दुःख होरहा था तो कोई ख़ुशी क मारे झूम रहे थे और सबसे ज़्यादा ख़ुशी सुल्तान की दूसरी पत्नी नाज़ बेगम और उनके बेटे शान को थी क्यू क उनका रास्ता साफ़ हो गया था सल्तनत की तख़्त हासिल करने का औरतो क हुजरे में नाज़ बैठी अपने ख्वाब में डूबी थी क कैसे उसका बीटा शेह्ज़ादा शान सुल्तान बनेगा तभी उसे रज़िया बेगम बुलाती है

Razia:Naaz बाज़ी आप कहा खो गई ये तो शहज़ादे शमशेर ने ठीक नहीं क्या सुल्तान क फैसले क खिलाफ जा कर

Naaz:haan शायद तुम ठीक कह रही हो मुझे इस बात का दुःख है

Razia:Han नाज़ बाजी पता नहीं भूरिया बाजी कैसे रह पाएंगी अपने बेटे क बिना और उन्होंने भी तो ख्वाब देखा था क उनका बीटा सुल्तान बने

Muskan:Aap लोग भी न अब जाने वाले जा रहे है हमे ग़म मन कर क्या मिलेगा

मुस्कान बेगम सुल्तान की सबसे छोटी पत्नी अपने सौतनों को टोकते हुए कहती है

Razia:aisa नहीं कहते मुस्कान आप क पास औलाद नहीं है इसलिए आपको पता नहीं औलाद का दर्द

Muskan:aap हमे न समझाए मुझे पता है इन सबके पीछे भी कोई चाल हो सकती है

Naaz:man me)ab इसके पीछे जो चाल हो पर मई तो बहुत खुश क अब मेरा बीटा सुल्तान बनेगा न क भूरिया का भूरिया ने सुल्ताना का ताज मुझे नहीं लेने दया मेरा बीटा सुल्तान का ताज शमशेर को नहीं लेने देगा

Razia:Naaz बाजी आज भी भूरिया सुल्ताना नहीं आई हमे उनसे जा कर मिलना चाहिए

Muskan:wo कल भी नहीं दिखी थी मुझे तो इन माँ बेटो की चल लगती है

Naaz:ab होने को कुछ भी हो सकता है मुस्कान बेगम हमे भूरिया की खबर लेनी चाहिए

Razia:theek है चलिए

Muskan:jab आप लोग को लगता है तो हम भी दुःख बाँट लेंगे थोड़ी सी भूरिया स्कूल तना की..

तीनो सौतने आपस में बातचीत करते हुए भूरिया क हुजरे में आती है और दरवाज़े पे खड़े हो कर आवाज़ लगाती है

Naaz:hooriya बाजी क्या हम अंदर आ सकते है

भूरिया का बदन थकवार से चूर चूर था कई रातो से ठीक से सोइ नहीं थी वो आखे बंद कए लेती थी आवाज़ सुनते हे अपने आप को दुरुस्त करती है और कहती है

"ाआजाओ नाज़ बेगम"

नाज़ क बाद रज़िया उसके बाद मुस्कान अंदर आती है और सब झुक कर सलाम करती है

Naaz:hooriya बाजी आप ठीक तो है न दो दिन से आप मिले नहीं इसलिए हमे फ़िक़र होरही थी

Razia:han भूरिया बाजी हमे लगा आप किसी परेशानी में है आप की ताब्यात तो ठीक है

Hooriya:aaao बैठो अब खड़े खड़े बात करोगे मई बिलकुल ठीक हु

भूरिया क सामने सोफे पैर तीनो सौतन बैठ जाती है और भूरिया ताली मरती है और कनीज़ अंदर आती है

Kaneej:hukam मल्लिकाईजहान

Hooriya:in सब क लये कुछ फल और मेवे का इंतेज़ाम करो

Kaneej:jo हुकम मल्लिकाईजहान

Naaz:baaji ये सब की क्या ज़रूरत थी हम तो आपसे कोई खास बात करने आये है

Razia:hooriya बाजी आपको पता है क शहज़ादे शमशेर पारस छोर कर जाने की बात कर रहे है

Hooriya:han पता है

Razia:aur क्या आपको पता है उन्होंने आज दरबार में ऐलान कर क इस्तीफा दे दया

Hooriya:kya

Razia:han बाजी सुल्तान उनसे सख्त नाराज़ है उनके जाने क वजह से बहुत से काम अधूरे रह जायेंगे

भूरिया सोच में डूब जाती है क अब वो क्या करे कैसे इस गुथी को सुलझाए शमशेर था क किसी की सुन ने को तैयार नहीं था

Naaz:hooriya बाज़ी अब आप हम से उम्र में बड़ी है और सलाहियत में भी क्या ये काम एक शहज़ादे को सोभा देती है जो सुल्तान बन ने वाला हो

Razia:baazi हो सके तो शमशेर को रोक लीजिये बाजी नहीं तो उसकी ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी सुल्तान कही गुस्से में कुछ गलत कदम न उठा ले और आप तो बेहतर जानती है

Muskan:ab भूरिया बाजी ने समझाया हे होगा अपने बेटे को आप लोग भी कैसी बाते कर रहे हो ..क्यू ठीक कही न भूरिया सुल्ताना?

Hooriya:Muskaan बेगम आपको मई पसंद नहीं हो सकती हु ठीक है पर क्या इस वक़्त आपको ये कहना सोभा देता है शमशेर हमेशा क लये हम सब को छोर कर चला जायेगा आप अहसास भी है एक माँ पर क्या बीतेगी

Muskan:ab आपको किसने बता दया क मई आपको पसंद नहीं करती दुश्मनी करती हु

Naaz:chup हो जाओ मुस्कान बेगम बाजी से ज़ुबान मत लगाओ

Muskan:man me)is मोती बूढी भूरिया ने मेरा जीना हराम कर दया है पता नहीं ये कब मारेगी और में सुल्ताना बनूँगी पारस की

Hooriya:man me)Muskan बेगम आप को तो ख़ुशी होती है मुझे दुःख दे कर इसलिए तो आपने मेरे खिलाफ ज़हर भर दया सुल्तान को और नाज़ बेगम तुम तो सोच रही होंगी क कब शमशेर यहाँ से जाये और सुल्तान तुम्हारे बेटे शान को नया सुल्तान बनाने का ऐलान करे

naaz:ab पता नहीं किसे अगला सुल्तान चुना जायेगा

Hooriya:baaji अभी शमशेर गया नहीं है

Hooriya:man me)naaz तुम मेरी जगह सुल्ताना बन न चाही पर नहीं बन पाई अब तुम्हारा बीटा मेरे बेटे की जगह सुल्तान बन न छह रहा है पर मई नहीं बन ने दूंगी

Naaz:ye बात भी है बाजी

Razia:aap अपना ख्याल रखिये भूरिया सुल्ताना अगर हमारी मदद लेनी हो तो बता दे अब हम चलते है

Hooriya:shukria रज़िया मेरी बहिन तुम सब मेरे हर दुःख में मेरी सौतन नहीं बहाने बन जाती हो और इस बात से मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है

Razia,naaz,muskan तीनो भूरिया को हुजरे से अपने अपने हुजरे में चली जाती है और भूरिया उठ कर सीधा शमशेर क हुजरे क तरफ जाती है तो वो वह नहीं था तभी कुछ सामान ले कर वो अंदर आता है

Hooriya:ye क्या कर रहे हो तुम तुमने दरबार में ये ऐलान कर दया क तुमको अगला सुल्तान नहीं बनना और तुम पारस छोर क्र जा रहे हो

शमशेर अपने अलमारी से कपडे निकलता है और उनको देख कर एक तरफ रखने लगता है भूरिया का कोई जवाब नहीं देता ,भूरिया सीधा शमशेर क सामने जाती है और अपने बेटे क हाथ का कपडा ले कर पकड़ लेती है

"शमशेर जवाब दो मेरे सवाल का क्यू अपनी जान जोखिम में दाल रहे हो"

Shamshera:aap अनजान bano..mujhe मेरा काम करने दे

शमशेर फिर से अपने कपड़ो को ठीक कर क उनको इकठा करता है उनको बांधने लगता है

Hooriya:shamshera तुम्हे पता है न सुल्तान ने कहा है क अगर तुम उनके खिलाफ यहाँ से गए तो वो तुम्हे छोड़ेंगे नहीं फिर क्यू तुम्हे पता है तुमको कही पनाह नहीं मिलेगी अगर सुल्तान ने कह दया तो

Shamshera:Mai मर जाऊँगा न उस से ज़्यादा कुछ तो नहीं होगा

शमशेर चेहरे पर बिना अहसास लाये बोलता है

Hooriya:tumhe पता है लोग कितने खुश है मेरे दुश्मन कितने खुश है क तुम जा रहे हो मुझे तनहा छोर क वो जश्न मनाएंगे क अब तुम नहीं कोई और सुल्तान बनेगा



Hooriya:bolo जवाब दो मेरा

Shamshera:aap भी उनके साथ जश्न मन लेना अपनी जीत का मेरी हार का

Hooriya:meri बात मानो और रुक जाओ

Shamshera:Q maanu..bass कीजिये अम्मी मई तंग आएगया आपको जवाब दे कर आप अपने डिल से पूछिए कौन गलत कर रहा hai..mujhe बहुत काम है घोडा चुन लेता हु लम्बा सफर है

शमशेर ये कह कर अपने हुजरे से बहार चला जाता है और भूरिया बेबस हो कर कड़ी रहती है कुछ देर बाद वो शमशेर क कक्षा में से अपने कक्षा में आती है अब रात हो चुकी था पूरा पारस का महल रंग बिरंगी रौशनी से चमक रहा था कोई भी शख्स देखता तो महल को देख देखता रह जाता पर महल क अंदर की साज़िशों से अनजान थे पारस क लोग महल से घोड़े पर सवार रात क अँधेरे को चीरता गुल शाह जंगल की तरफ जा रहा था और एक जगह जा कर वो अपना घोडा रोकता है और उसके साथ एक और घुटसावार जो छान पाशा था दोनों घोड़ो की लगाम को ढील देते हुए तेज़ी से जंगल क अंदर बढ़ रहे थे दोनों एक घने जंगल में जा कर अपने घोड़ो से उतारते है और पैदल झाड़िओ को चीरते हुए आगे बढ़ते है उन्हें रात क अँधेरे में मसल की रौशनी दिखाई देते है और दोनों उस तरफ जाते ही चारो ओरे जंगल से घिरे इस खुफ़िआ जगह पर मसलो की रौशनी में इन दोनों को शुंग दिखाई देता है जो अपने सिपाहीओं क बीच बैठा था

छान pasha:ustaad ये रहा शुंग

Gulshah:Shungu काफी खुफ़िआ इलाक़े में बसेरा डाला है तुमने

शुंग उठ खड़ा होता है और सिपाहीओं को दूर हटने क लये कहता है छान पाशा और गुलशाह चीनी लूटेरे शुंग क पास एते है

Shungu:tumhare सुल्तान से बचने क लये और हम कर भी क्या सकते थे गुल शाह

छान pasha:kaise हो शुंग

Shungu:Hum कैसे हो सकते है जब हमारे सिपाहीओं को आपके रहते हुए मर दया जाता है अगर आप उन्हें सही खबर दी होती तो वो नहीं मरते

Gulshah:shungu..tumhare सिपाही निकम्मे थे जो शमशेर क हाथो मर गए तुम तीन लोगो को मार नहीं पाए

Shungu:Gul शाह तुमने तो कहा था वह सुल्तान अकेला होता है फिर वो जांबाज़ शमशेर कैसे आगया अपने बाप को बचने

Gulshah:janbaaz हाहाहाहा वो हमारा दुश्मन है अगर उसे जान से मार देते तो हमारा काम फिर भी आसान हो जाता

Shungu:Humare आदमीओ ने उसे तीर से छल्ली कर डाई पर वो कम्बख्त मरता नहीं पर मई अपने साथिओ का बदला उस शमशेर से लूंगा

Gulshah:fir मई तुम्हारे लिए बहुत अछि खबर लाया हु

Shungu:bolo गुलशाह

Gulshah:Shamshera कल सूरज ढलने से पहले बिना लश्कर क मग़रिब की ओरे जायेगा

Shungu:achha पश्चिम की तरफ अछि बात है हम उसका नमो निशाँ मिटा देंगे

Gulshah:shabash अब तुम्हारा काम सिर्फ शमशेर को मरना है सुल्तान काम तमाम मई खुद अपने हाथो से करूँगा

Shungu:wo कैसे

Gulshah:shungu हमे ऐसा ज़हर बना क दो जिसे खा कर सुल्तान हमेशा क लये सो जाये और उसे खुद मई अपने हाथो से ज़हर दूंगा

Shungu:theek है हम उसकी तैयारी करेंगे और तुम्हे दुन्या का सबसे क़ातिल ज़हर बना कर देंगे होने वाले सुल्तान गुल शाह

शुंग जितना डरावना दीखता था उतना हे खतरनाक उसकी आवाज़ थी

छान pasha:tum ऐसे बोलते हो तो कभी कभी मुझे भी दर लग जाता है चीनी लूटेरे

Shungu:tum बहुत बचकानी बात करते हो छान पाशा हहहह

तीनो हसने लगते है

Gulshah:man me)Kal शमशेर का काम तमाम हो जायेगा फिर सुल्तान का उसके बाद देखता हु भूरिया तुम्हे कौन बचता है मेरी रखैल बन ने से

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 159

छान pasha:tum ऐसे बोलते हो तो कभी कभी मुझे भी दर लग जाता है चीनी लूटेरे

Shungu:tum बहुत बचकानी बात करते हो छान पाशा हहहह

तीनो हसने लगते है

Gulshah:man me)Kal शमशेर का काम तमाम हो जायेगा फिर सुल्तान का उसके बाद देखता हु भूरिया तुम्हे कौन बचता है मेरी रखैल बन ने से

उधर गुलशाह छान पाशा क साथ मिल कर शुंग को शमशेर की हत्या करने की योजना बना रहे थे और इधर महल में रात क अँधेरे को चीरती चिराग क पास बैठ मल्लिका इ जहाँ भूरिया बैठी अपने ज़िन्दगी में बदलाव और अपने ज़िन्दगी क हर मोड़ पर तूफ़ान को कैसे सामने क्या वो सोच रही थी

Hooriya:man में) जब मेरी शादी नहीं हुई थी तो मैंने कितने ख्वाब देखे थे अपने शौहर क लिए ,हमेशा ये सोचती थी क मेरा शौहर इस दुन्या का सबसे खूबसूरत मर्द होगा न सिर्फ चेहरे से बल्कि डिल से भी और वो मुझे अपने धड़कन से मुझे जोड़ कर रखेगा और कभी मुझे तकलीफ भी होगी तो दर्द उसे होगा और उसे तकलीफ होगी तो मुझे ,ऐसा मर्द जो न सिर्फ लम्बा चौड़ा और ताक़तवर बादशाह होगा पर उसके डिल में गरीबो और मजलूमों क लये एक मुहब्बत होगी और हर शक्श उसे इज़्ज़त से देखते ho,Main हमेशा कहती थी अपनी सहेलिओ को देखना एक दिन मुझे ऐसा शेह्ज़ादा मिलेगा जिसके मर्दानगी देख तुम सब जलेगी

भूरिया अपने अतीत क पैन उलट रही थी और खुली आखो से सोच रही थी क चिराग बुझ जाती जय

Hooriya:uff ये तो बुझ गया

भूरिया चिराग को न जला कर अपने पलंग पर आकर अपने तकिये को अपने बहो में लिए फिर से सोचने लगती है

Hooriya:man me)Kya दिन थे सहेलिओ क साथ घूमना खेलना पर एक दिन किसी ने कहा क पारस से कोई सुल्तान आएंगे मिश्रा और तुम्हे अपनी बना क ले jayenge,Mai चाहती थी क देखु मई किस से शादी करने वाली हु कौन होगा मेरा हमसफ़र कैसा दीखता होगा क्या उसके अंदर वो सब ख़ूबीए है जिसका मैंने हर रात ख्वाब देखा hai,q न सोचती मई भी तो मिश्रा क सबसे खूबसूरत लड़की थी जिसे एक नज़र देखने क लये न जाने कितने लड़के मरते थे कईओ ने तो मुझे देखने क लये अपनी जान भी गवा दी पर मई हमेशा से पर्दा की कभी अपनी नियत ख़राब नहीं की कभी कुछ गलत करने का नहीं सोचा मेरी सहेलिए तो कहती थी अगर मेरी तरह उनका हुस्न होता तो वो खूब मज़े करती किसी को भी अपने हुस्न का दीवाना बना लेती और वो हमेशा मुझे कोसती क मई अपने हुस्न को जाया कर रही hu,fir एक दिन अचानक सुल्तान मेरे वाहिद आये और मेरा निकाह हो गया जब मई पहले रात को उन्हें देखि तो मुझे यक़ीन नहीं हुआ क मेरे घरवाले तो मेरे सामने तारीफ क्र रहे थे पर ये तो मेरे ख्वाबो क शहज़ादे से बिलकुल उलट है खैर मैंने सुल्तान को देखा नैन नक्श भी कुछ खास नहीं और जब वो चल कर आये तो उनके लम्बाई चौड़ाई भी इतनी नहीं थी क मेरा डिल मचल जाये लम्बाई मेरे से एक इंच ुचि थी मई तक़रीबन 5.9 की थी ,जब वो मेरे करीब ए मैंने उनके एक दो बाल सफ़ेद देखि तो मेरी आखे फटी की फटी रह गयी क्यू क वो काम से काम मेरे से 12 से 14 साल बड़े थे मई सिर्फ 18 साल की कच्ची काली थी पर सुल्तान तो जैसे महारत हासिल रखते थे उन्होंने मेरी मरम्मत बना दी और मई हर बात को नज़रअंदाज़ कर दी और ये सोच कर खुश थी क एक औरत को एक मर्द का प्यार मिल रहा है जो मेरे शौहर देंगे और मुझे क्या चाहिए पर ये बात मेरी शादी क अगले हे रात गलत हो गयी जब में सज धज्ज कर तैयार थी और सुल्तान उस रात देरी से आये जब आये तो शराब की बू से मुझे साँस नहीं लिया जा रहा था खैर मैंने उन्हें किसी भी तरह बिस्तर पर लिटाई बिना सवाल कए नयी नवेली दुल्हन क्या सवाल करती अपने शौहर से मई उनके बगल में लेट गई और उनके पैरो पर अपने जांघ रख कर उनको अपनी तरफ करने की कोशिश करने लगी अपने हाथ से उनके सीने को सहलाती रही पर वो कुछ देर में नींद क आग़ोश में चले गए ,मई आज दिन भर आज रात को जो करना था उसके लये सोचती रही पर सुल्तान को मेरी फ़िक़र नहीं थी शायद वो किसी हराम की लौंडिया के साथ सो कर आये थे ,मेरे आखो में ासु थे पर मैं किसी को दिखा नहीं सकती थी डिल में दर्द था किसी को सुना नहीं सकती थी ,सोची थी शादी बाद मेरे शौहर मेरे खाने से ले कर मेरे कपडे तक हर शौक़ पूरा करेंगे और मनपसंद पोषक पहनयेन्गे मुझे घूमने ले जायेंगे पर ये सब तो दूर उनके पास मेरे से बात करने का वक़्त नहीं था बास रात में नशे में आते और कुछ लम्हे क लिए जमा करते फिर सजाते और मई तड़पती हु जिस्म क आग में जगी रहती तब मैंने सब्र क्या और जो होता है होने दिया ऐसे हे एक माह बाद मेरा महीना बंद हुआ और शमशेर मेरे पेट में पलने लगा मेरी ताब्यात ख़राब होने लगी इस वजह से दे माँ ने कहा कुछ दिन हमबिस्तरी न करे जब मैंने ये बात सुल्तान से कहा तो वो गुस्सा हो गए और शयद वही वक़्त था जब उनको दूसरी शादी का बुखार चढ़ा फिर वो दूसरी शादी कर लिए फिर तीसरी फिर चौथी

महल में हर रोज़ 10-20 नै लड़कीअ लौन्डिए आती हराम में और सुल्तान उनके साथ रात गुजरने लगे ऐसे हे करते करते हराम में 100 से ज़्यादा लौन्डिए हो गई अब तो सुल्तान हफ्ते में एक बार भी मुश्किल से मेरे साथ सोते 6 महीने कभी 1 साल तक दूर दर्ज इलाक़े में अपने लौन्डिओ को ले कर रंगरलिए मानते एक दिन मैंने हिम्मत की और अपनी सास को शिकायत की सुल्तान क बारे में तो उन्होंने कहा बेटी ये सबके साथ है मेरे साथ भी हुआ है सुल्तान बादशाह ऐसे हे करते है पर तुम्हे किसी भी तरह की तकलीफ नहीं होगी खाने पीने रहने की ये मेरी ज़िम्मेदारी है अब मैं सुल्तान की अम्मी को क्या कहती क खाना पीना रहना तो मेरे मायके में भी हो जाता था खैर मैंने इसे अपना नसीब समझ लिया और अंदर हे अंदर घुटने क बजाय मैंने पारस की एवं क लये काम करना शुरू कर दया और अपने बचे शमशेर को पलने लगी सुल्तान की और सल्तनत की तरक़्क़ी क लये दिन रात दवा करने लगी और देखते हे देखते सल्तनत पुरे दुन्या में फ़ैल गयी और मेरे ससुर मेरी म्हणत और इबादत दोनों को देखते हुए मुझे पारसी सल्तनत की मल्लिका इ जहाँ और सुल्ताना बना डाई अब मई सुल्तान क गैरमौजूदगी में उनका काम संभालती और पूरा खंडन मुझसे खुश रहने लगा मेरी इज़्ज़त पुरे पारस में बढ़ गयी पर इसका उल्टा असर ये हुआ क में पारस में कही भी निकलती तो बदमाश आवारा लड़के मुझे देखते रहते मैंने तो उन्हें नज़रअंदाज़ कर देती पर कुछ अपनी हद पर कर क मुझ पर गन्दी नज़र डालते उनकी शिकायत अपने ससुर से करती और वो उनको सजा इ मौत दे देते इस से मेरी इज़्ज़त करने क साथ खौफ करने लगे "

"मेरी सौतन नाज़ को पहले शान और फिर समां पैदा हुई और तब मुझे अहसास हुआ क बीटा तो नहीं पर मुझे एक बेटी चाहिए थी पर सुल्तान से बार बार बात करने क बाद भी में उम्मीद से नहीं हो पाई और मेरी बेटी क लये उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया उनको मेरे शौक़ की कोई फ़िक़र नहीं थी उनकी बेटी तो थी हे दूसरे बीवी से"

(भूरिया अपने करवट बदलती है और फिर सोचती है)

"धीरे धीरे शमशेर बड़ा हो गया और एक जंगजू और जासूस बन गया अपने अब्बा क साथ जुंग पर जाने लगा उसे क़ाबिल बना कर मई खुश थी मेरी म्हणत रंग लाइ पर मेरे पास उसके शिकायत आने लगे क वो कोठे पर जाता है मैखाने में शराब में डूबा रहता है लाख समझे पर मन nahi,Devgadh क राजा देवराज सुल्तान का साथ देने लगे और उनका आना जाना महल में हो गया "

"एक दिन पता चला देवराज जी की बहिन और बहनोई आयने वाले है पर आये देवराज जी की बहिन देवरानी और उनका बीटा बलदेव ,में तो उस दिन हैरान हुई जब मैंने बलदेव और उनकी माँ देवरानी को रेंज हाथ एक दूसरे क बहो में बहे दाल प्यार करते हुए देखा मेरे पैरो टालो की ज़मीन खिसक गयी क कैसे ऐसा हो सकता है जब में देवरानी को बुरा भला कहा तो वो मुझे अपनी मजबूरिया बता कर अपने आप को सही साबित कर दी फिर वो चले गए और एक दिन वो लोग आये किसी मदद क लये पर देवराज जी ने उन्हें भगा दया जब मुझे समझ आई बात वो मुसीबत में है तो मैंने शमशेर से कह कर देवराज जी और सुल्तान को भेज बलदेव और देवरानी की और बलदेव की जान बचवाई कुछ दिनों बाद दोनों माँ बेटे ने शादी कर ली और मुझे भी समझा गई क इश्क़ प्यार मुहब्बत में सब जाएज़ है"

भूरिया अपने आखो को अँधेरे में ऊपर देखती है और अब उसका चेहरा रुआंसा हो जाता है और वो फिर से सोचती है

"एहि वो दिन थे जब शमशेर मुझ पर अपनी नज़र रखने लगा और मेरे करीब आने की कोशिश करने लगा उसे लगा क वो भी बलदेव की तरह मुझसे रिश्ता बना लेगा पर मई उस से बचती रही बहाना करती रही अनजान बनती रही शुरुवात में तो मुझे लगा क ये उसकी हवस है पर इतने दिनों में उसने मुझे ये अहसास दिला दिया क वो मुझसे सच्चा इश्क़ करता है अब भला मेरा भी डिल वही डिल था जो शादी क पहले था जिसे मुहब्बत का इंतज़ार था मुझे धीरे धीरे शमशेर से इश्क़ हो गया और मई बहकने लगी तो मई इस गुनाह से बचने का सिर्फ एक हल निकली शमशेर को चोट पंहुचा कर उसे रोकना क्यू क शादी क लये तो मैंने लाख बार कोशिश कर ली थी हाँ ये बात सच है क आज जो शमशेर मुसीबत में है मेरे वजह से है"

भूरिया की आखे भर्र आती है और वो सोचने लगती है

"शमशेर मेरे इश्क़ क वजह से आज कही का नहीं रहा उसके आगे कुवा है पीछे खाई अगर वो यहाँ से चला जायेगा तो भी मरेगा और रुकेगा तो उसका ग़म उसे मार देगी और इसकी ज़िम्मेदार सिर्फ मई होउंगी"

"वो तो कहता है मई डरपोक हु पर अब मुझे इस बात पे शक नहीं मई आज से नहीं तब से दर कर रही जब मेरी शादी हुई अगर तब हे मैंने अपने दर को हटा कर अपने अम्मी को कह देती क मुझे कैसा शुआहार चाहिए तो शायद वो मेरी शादी कही और करवाते ,शादी क बाद अगर में सुल्तान से डरे बिना उनके गलत हरकतों को अपने माँ बाप को बताती तो शायद कोई रास्ता nikalta,aaj भी तो अपने डिल की बात करने से दर रही हु क्यू क बात हे ऐसी है कैसे कहु शमशेर से क मई भी उस से बेपनाह इश्क़ करती हु क्या अंजाम होगा इसका अगर हम दोनों एक हो जाये जहन्नमी तो होउंगी हे साथ हे ज़िन्दगी का कोई ठिकाना नहीं होगा कब मौत अजय "

भूरिया ये सोचती रहती है क उसके दरवाज़े पैर कोई ाजता है और भूरिया पूछती है "कौन है "

Sama:badi अम्मी मई हु

Hooriya:aaaao बेटी

भूरिया उठ कर दरवाज़ा खोलती है और समां को अंदर आने कहती है फिर दरवाज़ा बंद कर लेती है

Hooriya:itni रात गए तुम यहाँ समां

Sama:badi अम्मी नींद नहीं आरही थी सोचा आप तो जग रही हे होंगी तो आपसे हे बात कर लेती हु

Hooriya:aao बैठो तुम्हे कैसे पता में जगी हु

Sama:badi अम्मी अब इतनी बेवक़ूफ़ नहीं 18 साल की हो गयी हु आप क आखो का तारा शहज़ादे शमशेर हमसे दूर जा रहे है भला आप कैसे सो सकती है

Hooriya:Theek कहती हो बेटी

भूरिया समां क हाथ पर हाथ फेरती है

Hooriya:man में) पता नहीं शमशेर किस हाल में होगा उसकी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी मैंने

Sama:kya हुआ बड़ी अम्मी क्या सोच रही हो

Hooriya:kuch नहीं बेटी

Sama:mujhe लगता है बड़ी अम्मी आप रोक सकती है भाईजान को

Hooriya:mai अपनी कोशिश करुँगी

Sama:acha मई आपको शायरी सुनौ

Hooriya:han शायरा जी आप तो लिखती भी ाचा है मई भी जब तुम्हारे उम्र में थी तो शौक़ रखती थी

Sama:theek है तो मैंने एक ये लिखा है

"छुपा लो राजा मुझे सांसो क दरमियान"

"कोई पूछे तो कह देना ज़िन्दगी है मेरी"

Hooriya:wah वह बहुत अचे बेटी

Sama:ek और है

"सोचा था तेरे सिवा कुछ और सोचु"

"अभी तक सोच हे रही हु क और क्या सोचु"

ये शायर सुनते हे भूरिया क नज़रो क सामने शमशेर का चेहरा आजाता है

"अम्मी जान मई आपसे मुहब्बत करता हु आपके बिना जी नहीं सकता"

भूरिया अपने पालक झपकती है और होश में आती है

Sama:kya हुआ बड़ी अम्मी शायद पसंद नहीं आयी

Hooriya:nahi बास किसी की याद आगयी थी तुमने शायरी कहा से सीखी कही किसी से इश्क़ तो नहीं हो गया

Sama:badi अम्मी ये शायरी मई अपने शौहर क लये बना रही हु और वैसे भी मुहब्बत कोई बुरी चीज़ नहीं होती

Hooriya:han शायद तुम ठीक कह रही हो

Sama:shayad..badi अम्मी लगता है आपने कभी मुहब्बत नहीं क्या

Hooriya:aisa नहीं है बेटी मुहब्बत में तुमसे करती तो हु

Hooriya:man me)Jab इश्क़ होना था तो नहीं हुआ जिस से होना था उस से नहीं हुआ ऐसे शक्श से हुआ क मई इश्क़ क लये खुश होऊं या नहीं ये समझ नहीं परही

Sama:badi अम्मी हाँ आप मुहब्बत करती हो पर वो मुहब्बत अलग होती

Hooriya:q जो माँ अपने बचो से करती वो मुहब्बत नहीं मन जायेगा

Sama:aisa नहीं है बड़ी ammi..muhabbat में सब कुछ जाएज़ है ये तो पुराण कहवत सुना हे होगा

Hooriya:sab कुछ जाएज़ है? पक्का?

Sama:ji अम्मी आप लैला मजनू की कहानी तो जानती हे है उनकी जैसे बहुत से लोग है जो दुन्या में मुहब्बत की मिसाल बना डाई मुहब्बत में तो कुछ नहीं देखा जाता है

Hooriya:man me)tum ठीक कह रही हो समां इश्क़ में सब जाएज़ है आज तक किसी ने इश्क़ में नियम क़ानून नहीं मन

Hooriya:tumhe बहुत जानती हो इश्क़ क बारे में वैसे एक सवाल पुछु सच सच बताना

Sama:badi अम्मी में झूट कब से बोलने लगी

Hooriya:theek है तो batao..agarche तुम्हे एक ज़िन्दगी चुन न है दो ज़िंदगीओ में से

Sama:acha ठीक है कैसी 2 ज़िन्दगी होगी

Hooriya:pehli ज़िन्दगी में तुम 100 दिन जीओगी और तुम्हे हर क़िस्म का आराम मिलेगा कोई दुःख नहीं कोई तकलीफ नहीं पर उसमे तुम्हारा मेहबूब नहीं होगा

Sama:aur दूसरी?

Hooriya:dusri ऐसी ज़िन्दगी जिसमे तुम सिर्फ 2 दिन जीओगे और वह सिर्फ दुःख तकलीफ मुसीबते होंगी कोई ऐशो आराम नहीं होगा सिर्फ तुम्हारा मेहबूब होगा

Hooriya:tum दोनों में से कौन सा ज़िन्दगी चुनोगे

Sama:hmmm मुझे सोचने दो अम्मी

Hooriya:khoob अचे से सोच लो

Sama:sawal तो मुश्किल है पर मेरे लिए आसान है

Hooriya:wo कैसे तो बताओ जवाब

Sama:hmm अम्मी मई 100 din...jeena बिलकुल भी पसंद नहीं करुँगी अकेले रहना सारे ऐशो आराम का क्या फायदा जब आपका मेहबूब हे नहीं हो अकेले तो में एक पल नहीं जे सकती

Hooriya:to फिर क्या पसंद करती

Sama:badi अम्मी मई तो 2 दिन जीना पसंद करुँगी अपने मेहबूब क साथ जो मुझसे सच्ची मुहब्बत करता हो भले हे दुःख मुसीबत होगा पर मई अपने मेहबूब क साथ उन मुसीबतो से लड़ सकती हु

Hooriya:hmmm

Sama:ji बड़ी अम्मी अकेले अगर ऐशो आराम में भी रहूंगी तो मुसीबत कभी बिना पूछे नहीं आती अगर आगे तो में अकेले लड़ नहीं पाऊँगी और 100 दिन घुट क जीने से ाचा है 2 दिन सुकून क सुखी रोटी खा क अपने मेहबूब क छाये में मरे

Hooriya:bass समां मुझे जवाब मिल गए तुम सचमुच एक सच्ची डिल की लड़की हो

भूरिया अपने आखो से ासु क बुँदे को समां से छुपाते हुए अपने हाथ से पॉच लेती है और मुस्कुराते हुए देखती है

Sama:badi अम्मी अब मुझे नींद आरही है आप भी सो जाइये

Hooriya:theek है जाओ बेटी

समां उठ कर जाने लगती है और भूरिया उठ कर दरवाज़ा बंद करने आती है

Sama:badi अम्मी आप इतने सिपाहीओं की हिफाज़त में है चारो तरफ से बहार आपकी कनीज़ कड़ी है फिर भी आप डर्टी है और दरवाज़ा बंद कर लेती है

Hooriya:nahi डरने की बात नहीं बास दरवाज़ा बंद हो तो बहार की आवाज़े अंदर नहीं आती

Hooriya:man me)jab से गुल शाह ने मेरे इज़्ज़त पर हाथ डाला है और मेरे हाथ पकड़ा है दर लगा रहता है कही नशे में आ न जाए उस दिन का बदला लेने

भूरिया दरवाज़ा बंद करती है और समां चली जाती है भूरिया आकर अपने पलंग पर लेट जाती है

Hooriya:man me)Kya समां ने मेरे हाँ या न का जवाब दे दी ..मिला हे क्या है सुल्तान से मुझे आज उन्हें मुस्कान बेगम छोर कर कोई दिखती नहीं अगर में उस दिन अपने आखो से नहीं देखती और कानो से नहीं सुनती तो ज़िन्दगी भर इस भरम में रहती क सुल्तान ने मुझे सुल्ताना इसलिए बनाया क वो मुझसे मुहब्बत करते है और उनके हर तारीफ मेरे लिए सही है ,उनसे एक बेटी चाहती थी वो तो दे नहीं पाए और उस रात मुस्कान बेगम क साथ हमबिस्तरी करते हुए कह रहे थे "भूरिया तो एक बूढी और मोती औरत है अब उसमे मज़ा नहीं उसे उठाने क लये भी 4 आदमी चाहिए मुझे तो बास काचीअ केलिए पसंद hai"mai कैसे भूल सकती हु उस लम्हे को जिसके लिए में दिन रात दवा की इबादत की खुदा से यही माँगा क वो सलामत रहे उनके सल्तनत को आगे बधाई वो नफरत करता है मई क्यू करू उनकी परवाह"

भूरिया अब करवट से पैट लेट जाती है और अपने तकिये को अपने सीने में लगा लेती है और सोचती है

"कैसे मई शमशेर का डिल तोड़ सकती हु जिसने मुझसे सच्चा इश्क़ क्या मेरे लये जान पर खेल गया जो मुझसे जान से ज़्यादा चाहता है "भूरिया तुझे ऐसा आशिक़ न मिला है न मिलेगा पछ्तायेगी तू "हाँ मेरे वजह से शमशेर का मुस्तक़बिल तीतर बितर हो जायेगा न तो वो सुल्तान बन पायेगा न वो शादी करेगा और बास मेरी याद में तड़पता रहेगा और मई इधर उसे याद करती रहूंगी और pahctaungi,Shamshera का जान बचने का एक हे तरीक़ा है उसके इश्क़ को क़ुबूल करना

(भूरिया यह सोचते हे पूरा बदन काँप जाता है)

Hooriya:man में) मैंने ज़िन्दगी भर अपने नाख़ून तक किसी को देखने नहीं दिया अपने शौहर सुल्तान मेरे वाहिद क अलावा पर उसका शिला क्या मिला मुझे ,समां ठीक बोली ज़िन्दगी में ऐशो ो आराम रहे ज़िन्दगी लम्बी हो इसका मतलब ये नहीं क हम खुश रह लेंगे बिना अपने मेहबूब क अब मेरा फैसला एहि है क मई दुन्या क रिवाज़ो क वजह से अपनी ज़िन्दगी को बर्बाद नहीं करुँगी मई डरपोक थी पर अब नहीं डरूंगी मई चुनती हु 2 दिन की ज़िन्दगी जिसमे भले हे लाखो तकलीफे आये पर मुझे मेरे मेहबूब पर भरोसा है क वो मुझे खुश रखेगा हर तकलीफ से बचा लेगा ..हाँ मई अब शमशेर क इश्क़ को क़ुबूल करती हु अभी से बिना मौत से डरे वो करुँगी जो डिल को सुकून दे गुनाह तब है जब मई किसी का डिल दुखु अब मुझे अपनी असल ज़िन्दगी जीनी है जिसकी ख्वाइश मुझे हमेशा से थी"

भूरिया ये सोच कर क वो शमशेर क इश्क़ को क़ुबूल करेगी अपने हे बेटे से रिश्ता बनाएगी भूरिया का डिल ज़ोरो से धड़कने लगा और उसका बदन कांपने लगा उसके डिल में थोड़ा प्यार थोड़ा गलत कदम उठाने का दर्द और थोड़ा और थोड़ा उस लज़्ज़त का अहसास जो एक मर्द एक औरत को अपनी आग़ोश में ले कर देता है

Hooriya:man me)Mujhe भी इश्क़ होना हे था तो अपने हे बेटे से अब मई उसके इश्क़ को क़ुबूल करुँगी और अपने शौहर का जगह दे दूंगी तो क्या वो मेरे साथ वो करेगा जो एक शौहर करता है

भूरिया कंपनी लगती है और सीधा हो कर लेट जाती है



Hooriya:man me)Haay तौबा शमशेर तो मुझे छोड़ेगा नहीं अपनी मन मन करेगा मेरे जिस्म को और मुझे पागल की तरह प्यार करेगा पर मई उसको रोक भी नहीं पाउंगी अब दो प्यार करने वाले तो वो सब करते हे hai,Ab भले से ये गलत पर अगर मई ऐसा करती हु तो शमशेर की जान भी बच जाएगी और वो मुझे प् कर खुश भी हो जायेगा और मई उसे पाकर अपना मेहबूब बना कर हाय में ये क्या सोच रही हु

भूरिया लज्जा कर मुस्कुराने लगती है और उसके दोनों थान किसी गुब्बारे की तरह फूल हे रहे थे जिसे वो पलट कर लेट जाती है और तकिये को अपने दूध से दबा लेती है और हल्का सा रगड़ती है

शमशेर की याद में भूरिया अपने आने वाले दिनों क सपने संजोती रहती है और उसके रोअम रोअम में एक नयी तरंग उठी थी एक बार फिर उसे अपने नौजवानी का अहसास हुआ था शायद भूरिया क नसीब में अब तक हे दुःख लिखा था और आने वाले ज़िन्दगी में वो सारे सपने साकार होने वाले थे जिसकी कामना वो बरसो से की थी शादी से पहले की थी ,भूरिया की आखो से नींद गायब थी पर वो ये इरादा कर क सोती है क सुबह किसी भी तरह अपने इश्क़ का इज़हार कर शमशेर को रोक लेगी और उसे अपना बना लेगी

उधर शमशेर भी अपने हार को स्वीकार लिया था और भूरिया को बीता हुआ कल समझ कर उसे पाने की आशा छोर दया था और जल्दी सो गया था ये उम्मीद ले कर क कल वो पारस छोर कर चला जायेगा पर नियति को कुछ और हे मंज़ूर थी

पारस में एक नै सुबह होती ऐसी सुबह जिसे इतिहास में दर्ज़ कर लिया जायेगा आज सल्तनत इ पारस की मल्लिका इ जहाँ भूरिया अपने हे बेटे से अपने इश्क़ का इज़हार करने वाली थी जो उसे छोर कर जा रहा था क्यू क वो उसके प्यार में पागल था और किसी भी क़ीमत पर अपने अम्मी को हासिल करना चाहता tha,Mahal में सुल्तान और सुल्तान मेरे वाहिद का परिवार इस बात से बेखबर थे क दोनों माँ बेटे क्या गुल खिला रहे hai,Subah होते हे पारस क बाजार में चहल पहल शुरू हो जाती है और कुछ घर सवार अपने तलवारो क साथ मग़रिब की तरफ जा रहे थे और वो कुछ दूर नदी क पास जा कर रुक जाते है और अपने घोड़ो को जंगल की झाड़िओ क बीच बांध देते है ,ये कोई और नहीं शुंग और उसके आदमी थे

Shungu:Bhaio ये हमारे पास सुनेहरा मौक़ा है क हम मालामाल हो जाये शहज़ादे शमशेर को मार कर हम सब इतनी जल्दी इस रास्ते की घेरा बंदी इसलिए कए क क अगर हम देरी से आते तो हो सकता है रास्ते में पारसी सिपाही हमे पहचान लेते और हम यहाँ तक नहीं पहुंच पते ..तो सब तैयार हो ?

वह पर खड़े सभी लूटेरे एक साथ हाँ में जवाब देते है

Shungu:ab हम चीन वापस जायेंगे तो हमारे भइओ क क़ातिल शमशेर का सर क़लम कर क हे जायेंगे और इसके बदले हमे सोने की सिक्के मिलेंगे भइओ

पूरी भीड़ उत्साह क साथ चिल्लाती है और शुंग एक खतरानक मुस्कान चेहरे पर लता है

Shungu:aajao शमशेर हम सब आपके याद में पलके बिछाये है

और शुंग सभी साथी हसने लग जाते है

इधर महल में हर शक्श आज शमशेर क जाने की बात कर रहा था शमशेर सुबह उठ कर अपने तैयारी में लग जाता है और अपने घोड़े क नाल को ठीक करवाने लगता है उधर भूरिया उठती है और नींद में हे उसके जुबां से निकलता है "shamshera"aur वो उठ कर वक़्त का अंदाज़ा लगा कर सुकून की सांस लेती है क्यू क अभी ज़्यादा वक़्त नहीं हुआ था सुबह हुए

Hooriya:man me)Ab कैसे कहु उस उल्लू क पाठे को क न जाये मई भी उस से इश्क़ करती हु

भूरिया नहाते हुए भी अपने आशिके शमशेर को याद कर रही थी खूब मॉल कर नहाती है जैसे आज वो अपने आशिक़ से बरसो बाद मिलने वाली हो भूरिया अपने अलमारी को खोलती है और बहुत देर तक सोचती है

Hooriya:man me)uff क्या पहनू इस शमशेर ने तो ऐसे ऐसे कपडे सिल्वा डाई जिसको मई नहीं पहनती अगर वो ज़िद्द न करता पर आज क्या पहनू जो वो बास मुझे देखते हे फ़िदा हो जाये और सारा गुस्सा थूक दे

शमशेर को याद करते हुए अपने जिस्म को देखते हुए कपडे पहन रही थी

Hooriya:man me)Kaise कह रहा था एक दिन क मेरी सलवार खोलेगा हमेशा सलवार की नैरा बंधेगा और खोलेगा ..गन्दा कही का

भूरिया अपने कपडे पहन कर तैयार हो जाती है और कुछ सोचते हुए

hooriya:man में) ऐसा करती हु समां को कह देती हु और में नदी क पास मिलने क लये बुलाती हु अगर यहाँ उसको अपने डिल की बात बताई तो पता नहीं शमशेर क्या कर बैठे

Hooriya:kaneez इधर आओ जल्दी

Kaneez:Ji मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:Jaldi जा कर समां को बुलाओ फ़ौरन

Kaneez:jo हुक्म मल्लिकाईजहान

कनीज़ चली जाती है और कुछ हे पालो में भगति हुई समां जो भूरिया को अपने सौतेली माँ से बढ़ कर मानती थी वो दौड़ी आजाती है

Sama:Salam बड़ी अम्मी आपने सुबह सुबह बुला लय लगता है आप को कोई बेहद ज़रूरी बात करनी है

Hooriya:han बेटी इधर आओ जो मई कहने जा रही हु वो किसी को मत बताना और किसी को कानो कान खबर न हो

Sama:kya बात हो गई बड़ी अम्मी आज किसी बचे की तरह मासूम और खुश लग रही हो



भूरिया मुस्कुराते हुए समां को देखती है "क्यू समां आज से पहले तुम्हे मई बूढी लगती थी "

Hooriya:man में) अब कैसे तुम्हे बताऊ ये ख़ुशी ये चंचलता तुम्हारे भाईजान शमशेर क इश्क़ ने मेरे अंदर लाये है

Sama:badi अम्मी आप क लये तो कितनो हे सरफिरे आशिक़ ने आपको देखने क चक्कर में अपना सर कलम करवा लय आप का चेहरा आपका बदन इतनी सादगी में भी इतनी खूबसूरत है आप बुरखे में भी कहर ढाती है

Hooriya:chup कर बहुत कर ली तारीफ अब मेरी बात सुन समां मई नदी क पास जा रही हु और तुम्हे शमशेर को मेरे पास भेजना है पर किसी को कानो कण खबर न हो समझे

Sama:par क्यू बड़ी अम्मी आप भाईजान से ऐसे क्यू मिलना चाहती हो

Hooriya:dekho समां अब तुम चाहती हो न क मई तुम्हारे भाईजान को पारस से जाने से रोकू

Sama:han बड़ी अम्मी नहीं तो अब्बा जान उनकी जान भी ले सकते है अगर वो उनके खिलाफ यहाँ से गए

Hooriya:tum बहुत समझदार हो बेटी बास जो बात करनी है मई उसे बुला कर हे कर सकती हु ,क्या तुम इतना कर सकती हो

Sama:badi अम्मी आपके लये और भाईजान क लये कुछ भी कर सकती ये तो छोटा सा काम है

Hooriya:theek है मेरी बची

Sama:par मई भाईजान को कहूँगी क्या मुझे समझ नहीं आरहा ह

Hooriya:Apne भाईजान से कहना "अगर आप बड़ी अम्मी से मुहब्बत सच्ची करते है तो उनसे जा कर नदी की पल क पास मिल lijiye"bass

Hooriya:man me)Sama तुम्हे नहीं पता तुम दो डिल को मिलाने में कितना अहम् किरदार निभा रही ho,jis भाबी की बात तुम से शमशेर करता था वो मई हु और आज में तुम्हारे भाईजान की जान बचा कर रहूंगी जिसने मेरे जान बिना सोचे समझे अपने जान का जोखिम ले कर बचाया

Sama:theek है बड़ी अम्मी में ध्यान देती हु भाईजान जैसे दिखेंगे उनसे कहूँगी

Hooriya:theek है अब मई चलती हु दवा करो शमशेर मेरी बात मान जाये

Sama:aap से बहुत मुहब्बत रखते है वो आपकी बात मान लेंगे और में दवा भी करती रहूंगी जाइये आप

Hooriya:shukria तुम्हारा समां बेटी

भूरिया अपने निक़ाब को अपने चेहरे पर ढकती है और महल क पीछे क रस्ते से बहार आती है और घोड़ो क बंधे हुए जगह जा कर उनमे से एक घोडा खोलती है जैसे हे वो उस घोड़े पर सवार होती है घोड़े पर एक तीर कमान भी बंधा था



Hooriya:man में) शायद ये घोडा किसी सिपाही का है उसने यहाँ अपने तीर कमान रख कर गया है इसे छोरना ठीक नहीं होगा वापस आउंगी तो ऐसे हे रख दूंगी

भूरिया तीर कमान को ले लेती है और घोड़े क लगाम को अपने हाथ से पकड़ कर खींचती है



घोडा का लगाम खींचते हे घोडा आवाज़ करता है और भूरिया लगाम को ढीला छोर देती है और घोडा तेज़ रफ़्तार से दौड़ने लगता है और महल क पीछे से घोड़े को ले कर भूरिया नदी क रस्ते क तरफ ले जाने लगती है

कुछ देर में हे जंगल को चीरती हुई भूरिया नदी क पास पहुँचती है और इधर उधर देख कर घोड़े को एक जगह बांध देती है



भूरिया घोड़ो को बांध देती है और घोडा वह घास चरने लगता है hooriya:ab करते है इंतज़ार अपने सनम का शमशेर ने तो बहुत क्या होगा आज मेरी बरी है

भूरिया कड़ी हो कर वाड़ी का नज़ारा ले रही थी क उसे सामने कुछ गुलाब क फूल नज़र आते है वो आगे बढ़ कर गुलाब का फूल तोड़ने लगती है

Hooriya:man me)Aaj मेरे मेहबूब को मई दूंगी गुलाब शायद इसकी खुशबु से उनका गुस्सा शांत हो जाये

और भूरिया अपनी हे सोच पर शर्माती हेयर और है देती है भूरिया चुन चुन कर सबसे बेहतरीन फूलो को तोड़ कर इकठा करती है और उसे अपने हाथो में रख लेती है



Hooriya:aaj पहली बार किसी का इतनी शिद्दत से इंतज़ार कर रही हु जल्दी आजाओ मेरे शमशेर

भूरिया अपने बेटे शमशेर का इंतज़ार नदी क तात पर कर रही थी हाथो में फूल लिए और इधर समां महल में इंतज़ार कर रही थी अपने शमशेर भाई का ,शमशेर कुछ आधे घंटे बाद अपने दोस्तों से मिल कर आता है और आते हे अपने रास्ते क लये कुछ सूखा खाना का इंतेज़ाम करने क लये महल में आता है और कनीज़ को कहता है क उसके लिए कुछ खाना बांध दे रस्ते क लये तभी वह पर समां आजाती है

Sama:bhaijaan मैंने आपको कहा कहा न धुंडी कब से इंतज़ार कर रही हु

Shamshera:kya बात है मेरी बहिन ऐसी क्या बात हो गई

Sama:aap इधर आये में सबको सामने नहीं बता सकती

समां अपने बड़े भाई को एक कोने में ले जाती है और उसको धीरे से कहती है

Sama:bhaijaan आपके लये एक पैगाम है

Shamshera:Jaldi बोलो मुझे बहुत सी तैयारी करनी है सोच रहा हु दुपहर बाद हे निकल जाऊ

Sama:bhaijaan आप मेरी बात नहीं सुन न चाहते

Shamshera:han बोलो समां

Shamshera:bhaijaan आपको पैगाम देने क लये बड़ी अम्मी ने कहा है

Shamshera:man me)ab ये क्या कर रही है अम्मी

Shamshera:ammi जान ने तुम्हे पैगाम दया वो तो खुद कह सकती थी

Sama:aap उनसे पूछ लेना वो ऐसा क्यू नहीं की मुझे तो बताई नहीं आपको बताऊ या नहीं ?

Shamshera:theek है बोलो

Sama:Badi अम्मी ने कहा है क आपको बोल दू क अगर आप सच में उनसे मुहब्बत रखते है तो उनसे आ कर नदी क पास मिले

Shamshera:Mai अभी सबसे मिलकर यहाँ से जाने वाला हु तो ये क्या नाटक है

Sama:aap चले जाइये भाईजान आप से कुछ खास बात करनी होगी इसलिए बुलाया हो

Shamshera:theek है मई देखता हु

Sama:bhaijaan अगर आप मुझे बहिन मानते हो तो जाओ नहीं तो मई समझूंगी

Shamshera:theek है बाबा में जाता हु

Sama:man me)Bhaijan आपकी बहिन क रहते हुए आप हमे छोर कर जा सकते हो और मुस्कुराती है

शमशेर मुद कर महल क बहार जाता है सोचते हु

Shamshera:man में) अब क्या ये नया खेल है जब उनको मेरी मौत से मेरी ज़िन्दगी ख़राब होने से मेरी मुहब्बत से कुछ फ़र्क़ हे नहीं पड़ता तो ..खैर मई तो आज भी उनसे उतनी हे मुहब्बत करता हु और कल भी करता रहूँगा ..देखता हु क्या बात है..

शमशेर अपना घोडा पर कूद कर बैठ जाता है और अपने घोड़े की रफ़्तार बढ़ाते हुए धीरे धीरे जंगल की ओरे बढ़ता है फिर आगे जाते हुए जंगल पार कर नदी की तात पर जा कर घोड़े पर बैठा हुआ था दूर उसे भूरिया बैठी हुई दिखाई देती है



शमशेर पीछे से भूरिया को देखता है भूरिया अपने हाथ में गुलाब का फूल लिए बैठी थी जैसे हे उसे घोड़े की आवाज़ सुनाई देती है

Hooriya:man me)wo aagaya..mera majnu..mera आशिके ..मेरा बीटा शमशेर उफ़ कैसे में बोल पाऊँगी उसे अपने डिल की बात

भूरिया क हाथ पेअर कंपनी लगे थे ये सोच कर वो हिम्मत कर क उठती है और घूम कर अपने बेटे शमशेर को देखती है



शमशेर अपने हाथो से लगाम को खींचता है और घोडा हेहयाते हुए अपने दोनों आगे की टैंगो को उठा लेता है और पिछले टैंगो पर खड़ा हो जाता है

शमशेर की नज़र अपने अम्मी भूरिया से मिलती है



भूरिया एक हाथ में फूल छुपाते हुए शमशेर को घर रही थी इतनी प्यार से पहली बार अपने बेटे को देख रही थी और उसके नक् नक़्शे शरीर की बनावट सबका जायज़ा लेती है

Hooriya:man me)haay कितना प्यारा लग रहा है शमशेर इतना लम्बा चौड़ा इसे तो कोई हूर पारी भी डिल दे बैठेगी ऐसा लग रहा है घोड़े पर कोई शेर बैठा है

शमशेर घोड़े से उतरता है और धीरे से चलते हुए अपनी अम्मी क पास आता है और गुस्से से देखते हुए पूछता है

"अम्मी जान ऐसी क्या आफत आगयी जो आपने मुझे यहाँ बुलाया "



Hooriya:aate हे गुस्सा पहले यहाँ आओ मुझे तुमसे कुछ बात करनी है बीटा

Hooriya:ya खुदा कैसे बोलू उफ़ समझ नहीं आरहा

Shamshera:uff आप क्या कहते और करते हो मुझे कुछ समझ नहीं आता

शमशेर न चाहते हुए भी अपने माँ भूरिया क करीब जाता है और उसके आखो में आखे देख

Shamshera:bataye अम्मी मुझे निकलना भी है क्या ज़रूरी बात है

भूरिया क होठ लरज रहे थे उसके पेअर कैंप रहे थे उसकी डिल की धड़कने इतनी तेज़ थी की शमशेर तक सुन सकता था भूरिया अपने आप पर काबू पते हुए

Hooriya:Shamshera मैंने बहुत सोचा और फिर ये फैसला ली k........Apne बेटे से इश्क़ करना अगर गुनाह है तो क्या मेरे वजह से अगर तुम मर गए तो क्या मुझे गुनाह नहीं होगा मुझे लगता है किसी की जान लेना किसी की ज़िन्दगी बर्बाद करने से बेहतर है रिवाज़ो से परे उठ कर इश्क़ करना और किसी को ख़ुशी देना



भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे क आखो में देखती है और कहती है

"बीटा अगर तुम अब भी नहीं समझे तो सुनो ये भूरिया तुम से बेपनाह इश्क़ करने लगी है और ज़माने क बनाये नियमो से मुझे अब कोई दर नहीं लगता अब से सिर्फ मई दो दिन हे सही डिल से जीना चाहती हु भले हे मुझे तीसरे दिन मौत मिले पर मई अपनी और तुम्हारी ख़ुशी औरो क लये क़ुर्बान नहीं कर सकती"



भूरिया ये कहते हुए शर्मा कर अपने सर को निचे कर लेती है उसके बदन काँप रहा था और उसे सार्ड हवाओ क बीच भी पसीने छूट रहे थे

शमशेर की आखे की आखे फटी की फटी थी मानव उसे सांप सूंघ गया हो और बिना पालक झपकाए भूरिया को देख रहा था बार भूरिया की बाते उसके कानो में गूंज रही थी और शमशेर की धड़कने भी अब भूरिया की तरह तेज़ी से धड़कने लगी

Shamshera:kahi मई ये खवाब तो नहीं देख रहा हु अम्मी जान ..

भूरिया अपने हाथो में रखे गुलाब को आगे करती है और मुस्कुराते हुए

"ये सच है शहज़ादे शमशेर मई तुमसे इश्क़ करती हो बेपनाह मुहब्बत करती hu"shamshera झट से गुलाब का फूल ले लेता है



भूरिया मुस्कुराते हुए शमशेर को देख रही थी और शमशेर अपना हाथ उठा कर एक थप्पड़ अपने आप को धीरे से मरता है

"क्या सच में मेरा खवाब पूरा हो गया कही मई नींद में तो नहीं जिसे दिन रात पाने की तमन्ना थी जिसकी यादो में न जाने कई रात गुज़र दी अब वो मेरी है"



भूरिया शमशेर को प्यार से देख रही थी शमशेर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाये का रहा था ख़ुशी क मरे

"आहे आज मैंने दुन्या फ़तेह कर ली आज दुन्या की सबसे खूबसूरत हसीना मल्लिका इ जहाँ सुल्ताना हूरजहाँ मेरी हो गई जिसे पाने क लये दुन्यवा वालो ने अपनी जाने दे दी वो शोख हसीना मेरी इश्क़ को क़ुबूल कर ली"

शमशेर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगता है और भूरिया को मारे शर्म की गाड़ी जा रही थी



भूरिया अपने दोनों हाथो से अपने चेहरे को शर्म और हाय से छुपा लेती है

Shamshera:ammi जान आपने मेरी इश्क़ को क़ुबूल कर मेरे ऊपर अहसान क्या है जो मई कभी ऐडा नहीं कर पाउँगा अम्मी जान मेरे डिल में हमेशा यही ख्याल आता था आपके लये क "चाहे जितना भी रूठोगी चीखोगी चिल्लाओगी डिल कहता था एक दिन तुम मान जाओगी"

भूरिया अपनी आखे खोलती है और शमशेर क आखो में देख

"बीटा इसमें अहसान की क्या बात अब ये इश्क़ दोतरफा है मई भी तुमसे उतनी hi शिद्दत से करती हु पर दर क वजह से बता नहीं पाई पर अब नहीं डरूंगी किसी से"

"ाहः मेरी बेगम मेरी अम्मी जान में आपको अपने पलकों पर बिठा क रखूँगा मेरी रानी मेरी मेहबूबा मेरी मल्लिका इ जहाँ"

शमशेर आगे बढ़ कर भूरिया को अपने बाजुओं में उठा लेता है



"अम्मी जान आप जैसी हसीं औरत आज तक नहीं देखा मुझे अपना घुलम बना लो पर मेरा साथ न छोरना"

"उफ़ बीटा निचे उतारो गिरा डोज मुझे"

शमशेर धीरे से निचे उतार देता है और भूरिया क आखो में देख

"अम्मी जान मत रोको आपको पाने क लये मई बहुत तड़पा हु बहुत तरसा हु"

शमशेर क आखो क ासु साफ़ बता रही थी वो कितनी मुहब्बत करता है भूरिया से

Shamshera:mai आप हे मेरी पहली और आखिरी इश्क़ हो आखिरी मुहब्बत हो मई आपसे खुद से भी ज़्यादा प्यार करता हु

भूरिया शमशेर को देख रोने लग जाती है और आसुओ की बुँदे उसके आखो से टपक पड़ती है

"हाँ इसलिए मुझे छोर कर जाने वाले थे इधर आओ"

भूरिया अपने बाहे फैला देती है और शमशेर अपने आखो में ासु लये अपने अम्मी क करीब होते हुए अपनी अम्मी को अपनी आग़ोश में ले लेता है



शमशेर अपने अम्मी क पीसनी पर हल्का सा चूमता है और कहता है

"अम्मी आज क बाद मई आपको अपने नज़रो से भी ओझल नहीं होऊंगा मेरी जान हो आप "

"अब तुम भी मेरी जान बन गए हो शमशेर"

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 160

शमशेर अपने अम्मी क पीसनी पर हल्का सा चूमता है और कहता है

"अम्मी आज क बाद मई आपको अपने नज़रो से भी ओझल नहीं होऊंगा मेरी जान हो आप "

"अब तुम भी मेरी जान बन गए हो शमशेर"

भूरिया मुस्कुराती है और अपने बेटे क आखो में देखती है और उसे अहसास होता है शायद वो कभी सच्चे इश्क़ क अहसास को जी नहीं पति अगर वो शमशेर को अपना यार नहीं बनती

भूरिया शमशेर को थोड़ा निचे झुकने लये इशारा करती है क्यू क शमशेर सवा छे फ़ीट लम्बा था और भूरिया सिर्फ 5.9 की थी 6 इंच छोटी थी शमशेर अपने माँ का इशारा समझ कर अपने पीठ मोड़ कर निचे झुकता भूरिया अपने दोनों पेअर की यदि उठा कर शमशेर क सर को दोनों हाथो से पकड़ लेती है



भूरिया शमशेर क पिसानी पर चूमते हुए

"आजा मेरे नूर इ नज़र लखत इ जिगर बेटे मेरे शहज़ादे मेरे आशिके मेरे आखो क तारे मैंने तुम्हे बहुत तड़पाया है"

भूरिया अपने बेटे क पीसनी को चूमती

"अम्मी जान मुझे अब तक यक़ीन नहीं हो रहा क आज वही औरत मेरी बाहो में है जिसे छूने क लये मई सालों से तरसता रहा"

"हाँ बीटा जान अब आज से अभी से मई सिर्फ आपकी हु अब से आप हे मेरे सरताज हो वादा करो हमेशा साथ डोज "

"मई आपका साथ छोड़ने से पहले मर जाना पसंद करूँगा अम्मी जान"

"चुप कर मरने का नाम मत ले तेरे बिना तो मुझे अब एक पल गवारा नहीं बास डर्टी हु जब सुल्तान को ये बात पता चलेगी या कोई हम पर शक कर लिया तो सल्तनत क रिवाज़ो क गुलाम हमे..

"सुष्ष अम्मी जान यहाँ ज़िंदा रहने कौन आया है एक दिन तो मरना हे क्यू नाह हम बिना कल का सोचे हुए आज की ज़िन्दगी क मज़े ले"

"हम्म्म बीटा सही कह रहे हो"

भूरिया मज़े लफ्ज़ को अपने बेटे क मुँह से शर्माती है और अपने नज़र शमशेर से चुराने लगती

"भूरिया सुल्ताना आप तो बहुत शर्माती हो खैर आपकी साड़ी शर्म में निकल दूंगा"



शमशेर भूरिया क आखो में देखते हुए बोलता है और अपना सर भूरिया क सर से सत्ता देता है

"बेशर्म" हल्का सा भूरिया क मुँह से निकलता है और शमशेर अपने माँ क आखो में देखते हुए

"अम्मी जान शर्म करता तो आज अपनी अम्मी भूरिया सुल्ताना को अपने बहो में भरा नहीं hota,aapke आखो में डूब जाने का मन करता है"

भूरिया शर्मा कर अपने आखे बंद कर लेती है और अंदर से वो अपने बेटे क जवाब पर मुस्कुरा रही थी

Hooriya:to रोका किसने है डूब जाओ न

Shamshera:aap खोलोगी तब तो डालूंगा

भूरिया झट से अपने आखे खोल बड़ी कर शमशेर को घूरती है ये बात सुन कर इस बार उसके रोंगटे खड़े हो गए थे और साथ के छूट में हलकी चींटी सी गुज़रती महसूस हुई

Shamshera:kya हुआ अम्मी

Hooriya:kya कहा तुमने

Shamshera:kya kaha..jab आखे खोलोगी नहीं मेरी जान तो आपके नशीली आखो में आपका आशिके बीटा अपने आखे डालेगा कैसे

Hooriya:bhut चालाकी है तुम्हारे अंदर

Shamshera:aise हे थोड़ी सल्तनत इ पारस क सुल्तान मेरे वाहिद का असली खज़ाना भूरिया बेगम को चुरा लिया

Hooriya:to तुम चोर हो

Shamshera:han आपके डिल का चोर

Hooriya:par मेरा डिल तो अपने जगह पर है

Shamshera:ab आपका डिल भी मेरा डिल है इसलिए में हुआ न चोर

Hooriya:tum एक अचे जासूस क साथ चोर भी हो



भूरिया खिलखिला कर शमशेर क बातो पर है देती है जिसे देख शमशेर भी हसने लग जाता है भूरिया शमशेर का हाथ पकड़ा कर पास हे रखे पठार पर बैठने का इशारा करती है और शमशेर को खींचते हुए ले जाती है



"आजाओ बैठते है में थक गई कड़ी हो कर कब से इंतज़ार कर रही थी "

भूरिया शमशेर क हाथो को जब पकड़ती है तो शमशेर की नज़र भूरिया क हाथो क अंगूठी पर जाती है

Shamshera:man me)Zarur ये अब्बा जान की दी हुई अंगूठी है मुझे अम्मी जान क लये मेरी अंगूठी बनवानी होगी

भूरिया पास रखे एक पठार पर बैठ जाती है और शमशेर भी बैठ जाता है पर भूरिया अभी थोड़ी दूरी पर बैठी थी दूसरे पठार पर

शमशेर देखता है उसकी माँ हैट कर बैठी है और वो चाहता था उसके पास बैठे चिपक क शमशेर एक बार अपने माँ को काळा बुरखे में अपने नज़र से जाँच लेता है



भूरिया क ऐसे पठार पर बैठने उसके भरी गोल गदराई गांड बहार को गोल आकर में फैली थी और उसके बड़े बूबी बहार को निकल कर शमशेर को ललचा रहे थे भूरिया का चेहरा चाँद सा खिल रहा था वो शमशेर को देखती है क कैसे बेझिजक अपने माँ को ताड़े जा रहा है और अपने माँ क बदन का जाम आखो से पी रहा है

"अम्मी जान आप इतनी दूर क्यू बैठी मेरे पास आओ "

"बीटा उस पठार पैर हम दोनों कैसे बैठ पाते मई तो मोती हु"

"बैठ जाओगे आप आओ तो और कौन कम्बख्त कहा आप मोती हो आप वही से मोती हो जहा से एक औरत को होनी चाहिए "

"भक्क तू भी न आती हु"

भूरिया आती है और बैठ जाती है पर भरी भरकम औरत थी भूरिया पर शमशेर अपने हाथ को अपने अम्मी क कमर पर रखता है

Hooriya:ufff आह

भूरिया की आह निकल जाती है

Shamshera:aao जानेमन दूर रहोगी तो आशिकी में मज़ा कैसे आएगा और वैसे भी मुझे गर्मी चाहिए ठण्ड लग रही है



शमशेर भूरिया क कमर क गिर्द हाथ दाल कर अपने ओरे कर कर चिपका कर बैठ जाता है और भूरिया शमशेर को है कर कहती है

"जो चाहिए वो बोलो न बहाने क्यू बना रहे हो"

"अब आप ने कई लोगो को तो सिर्फ इसलिए जान से मारी दया क्यू क वो आपको सिर्फ घर रहे थे तो भला मई कैसे भूल जाऊ क मेरे बहो में मल्लिका इ जहाँ है "



भूरिया शमशेर क कंधे पर सर रख कर आराम से बैठ जाती है

"शमशेर तुम उनमे से नहीं जिन्होंने सिर्फ मेरे बदन को घूरा तुम ने तो मेरा डिल जीता है अपने इश्क़ से तुम्हारा हक़ है मुझ पर"

"अम्मी जान डिल को इतना सुकून आज से पहले कभी नहीं आया जितना आरहा है काश आप पहले मिली होती तो अब तक हमारे बचे होते"

"चुप kar..kuch भी कहते रहता hai..waise कब से तुम मुझपे नज़र रखने लगे और इश्क़ करने लगे "

भूरिया अपने बेटे से बचे का नाम सुन कर एक घबराहट सी महसूस करती है और उसके बदन में एक सुरसुरी सी होती है

"अम्मी जान अब आपको कैसे बताऊ जब से होश संभाला आपके ख़ूबसूरती आपके हर एक ऐडा का दीवाना दिन बा दिन होता चला गया मुझे खुद भी पता न चला क कब मई आप से सच्ची मुहब्बत करने लगा"

भूरिया क तरफ नज़र घुमा कर देखता है और शमशेर को सामने से कुछ घुड़सवार आते नज़र दिखाई देते है shamshera:man me)Ye लगता शुंग क लोग है

"अम्मी जहां भआगो यहाँ से "

भूरिया पीछे देखती है तो वो परेशां हो जाती है और शमशेर क तरफ देखती

"ये कैसे आगये बीटा ये लोग कौन है"

"अम्मी ये शुंग क आदमी है ये मेरा पीछा कर रहे थे"

दोनों माँ बीटा अपने घोड़ो क तरफ भागते है उधर शुंग और उनके आदमी चिल्लाते हुए आरहे थे

Shungu:bhaio आज शमशेर बच क न जाये पर याद रहे उसके साथ भूरिया सुल्ताना है उसको कुछ नहीं होना चाहिए हमला करो..

कुछ दूरी पर शुंग और उसके हमलावर नंगी तलवार लये आरहे थे



भूरिया अपने पास रखे तीर बाण को उठा लेती है जो उसके पास था और तीरो की बौछार कर देती है और कई तीर जा कर शुंग की आदमीओ को लगते है और वो गिर जाते है तब तक शमशेर घोड़ो को खोलता है और भूरिया क्यू क भरी वजूद की थी इसलिए तेज़ भाग पाना मुश्किल था शमशेर उसके पास घोड़े लता है और वो घोड़े पर सवार हो जाती है

Shamshera:aaajao अम्मी जान आप साथ नहीं होती तो मई इनको बताता क शमशेर पर हमला करने का अंजाम क्या होता है

भूरिया घोड़े पर बैठ जाती है और शमशेर अपने घोड़े को तेज़ भागता है पर भूरिया घोडा भागते हुए रुक जाती है और घोड़े पर बैठ पीच घूम कर अपने धनुष से तीर को मारने लगती है



भूरिया तीर चलते हुए आगे शुंग क दो आदमी क सीने में तीर मारती है

Hooriya:ye ले बद्ज़ात ..हम पर हमला करोगे

शमशेर अपने अम्मी जान को देख कर चकित हो जाता है वो जनता था उसकी माँ हर कला में माहिर है पर इतना सटीक निशाना तो एक योद्धा का हे होता है

"अम्मी जान चलिए छोड़िये ये तादाद में ज़्यादा है"

Hooriya:theek है बीटा चलो ..

हहह भूरिया घोड़े को आवाज़ दे कर और तेज़ भागते है पीछे से शुंग और उनके आदमी भी अपने घोड़ो की रफ़्तार को तेज़ कए दोनों माँ बेटे क पीछे आने लगते है ऐसे हे दोनों माँ बीटा घोड़ो को ले कर जंगल में घुस जाते है और पीछे से शुंग क आदमी भी जंगल क रास्ते में घुस जाते है ऐसे हे दोनों माँ बीटा अपने घोड़े को दौड़ा रहे थे और पीछे से उन पर हमलावर आरहे थे

शमशेर जंगल का चप्पा चप्पा जनता था और वो भूरिया को घोडा रोकने क लये कहता है उनके पीछे शुंग नहीं था

Shamshera:ammi जान आप इस घोड़े पर ाजैये

शमशेर अपने घोड़े से कुछ सामान उतर कर घोड़े क पीठ पर रख देता है और भूरिया क घोड़े को एक चाबुक मार कर बाए जा रही रास्ता पर छोर देता है और वो पहले अपने अम्मी जान को घोड़े पर बैठता है फिर अपनी अम्मी क भरी वजूद को अपने गॉड में चिपकते हुए घोड़े क लगाम खींचना शुरू करता है और भूरिया की आखे एक अजीब से अहसास में बंद हो जाती है भूरिया और शमशेर महल की ओरे बढ़ने लगते है

इधर शुंग और उसके साथी जब उस जगह पर पहुंचते है तो देखते है भूरिया का घोडा बाये की तरफ आवाज़ करते हुए जा रहा था

Shungu:Wo दाहिने नहीं बाई ओरे गए है मेरे पीछे आओ

शुन्गुए अपने घोड़ो क साथ बाये मुद जाते है और कुछ देर बाद शुंग को भूरिया का घोडा दीखता है जो आगे जा कर रुक जाता है और घास चरने लगता है

Shungu:Ek हे घोडा लगता है मैंने गलती कर दी

शुंग और उसके साथी घोड़े क नज़दीक पहुंचते है तो देखते है सामान से लड़ा हुआ है और भूरिया और शमशेर का कोई अत पता नहीं है

Shungu:shamsheeeeeeeeera मई तुम्हे ज़िंदा नहीं छोड़ूंगा मुझे धोका दया..

शुंग समझ चूका था शमशेर कितना शातिर है और उसके गुस्से से उसकी हार छलक रही थी

शुंगूअ का एक आदमी बोल पड़ता है

"सरदार जब वो दोनों वह बैठे थे तब हे हमे उन्हें तीर मर देना चाहिए था"

Shungu:bakwaas बंद करो अपनी ..भूरिया सुल्ताना सरदार गुल शाह की भाबी है जिनको वो अपनी बीवी बनाने वाले है उसको खुरच भी आई तो एक सिक्का हमे नहीं देगा गुल shah,pichli बार जो गलती हुई थी हमारे लोगो से अब नहीं होनी चाहिए

सब शुंग की बात से सहमत होते है

"हाँ आपने ठीक कहा शुंग सरदार"

इधर हुरिया को अपने गॉड में बिठाये महल की तरफ शमशेर अपने घोड़े को भगा रहा था शमशेर अपने अम्मी क मुलायम बड़े गांड को साफ़ महसूस कर सकता था अपने जांघो पर

Shamshera:kya हुआ अम्मी जान आपके आखे बंद है अब डरने की ज़रूरत नहीं मैंने उन्हें चकमा दे दिया है उन्हें पता नहीं में कोई मामूली आदमी नहीं सुल्तान हु सल्तनत इ पारस का

Hooriya:acha अब शहज़ादे से सुल्तान हो गया

Shamshera:Hooriya सुल्ताना मेरी बहो में है मेरी बेगम है तो मई हुआ न सुल्तान

शमशेर अपने हाथ से लगाम खींचता है और घोडा लम्बी छलांग लगता है भूरिया की गांड खसक कर कूदती हुई शमशेर क लैंड पर गिरती है जो अभी सो रहा था "ahhh"hooriya को जैसे कोई चीज़ अपने गांड क निचे महसूस होती है उसके आखे बंद हो जाती बदन में कंपन शुरू हो जाती है

Hooriya:ah बीटा पीछे क रस्ते से ..आगे से कोई हमे देख लेगा तो ..

Shamshera:ammi जान मई भी तो पीछे क रस्ते में हे जा रहा हु

शमशेर एक बार अपने लगाम को ज़ोर से खेचते हुए घोडा ज़ोर से हेहयता है और एक लम्बी छलांग मरता है

इस बार भूरिया कोशिश करती है उसके गांड शमशेर से न मिले पर इस बार शमशेर खुद आगे बढ़ कर अपने आधे खड़े लैंड को भूरिया क गांड क ठीक दरार में घुसा देता है

Shamshera:ammi एहि तो है पीछे का रास्ता

खच से शमशेर का 9 इंच का मोटा 3 इंच मोटा लौड़ा भूरिया की 40 गांड क छेड़ में "घर्रर" से बुरखे क ऊपर से हे फास जाता है और भूरिया क मुँह से

"आआह उफ़ beta,ummm"apni आखे बंद कर लेती है "जी अम्मी जान"

शमशेर भी कुछ पल क लये आखे बंद कर अपने अम्मी क गद्देदार गांड क मज़े ले रहा था और भूरिया भी पहली बार ऐसे मोठे तगड़े लैंड पर बैठी थी

थोड़ी देर में दोनों महल क पीछे क दुवार पर पहुंच जाते है और शमशेर कहता है

"अम्मी आज आगये utariya..ammi जान उतर जाए "

भूरिया दो बार बुलाने क बाद उठती है जैसे वो नींद से उठी हो

"उफ़ शमशेर किसी ने हमे देख लिया तो"

वो झट से निचे उतरती है शमशेर अपने अम्मी क आखो में देखता है और उस नशीली आखो में वासना साफ़ दिखाई पद रही थी

Hooriya:ary तुम भी चलो बीटा

Shamshera:mai आता हु घोड़े को बांध क आप महल क अंदर जाये किसी को न पता चले इस बात का

Hooriya:theek है मई चलती हु आप आजाये

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 161

भूरिया दो बार बुलाने क बाद उठती है जैसे वो नींद से उठी हो

"उफ़ शमशेर किसी ने हमे देख लिया तो"

वो झट से निचे उतरती है शमशेर अपने अम्मी क आखो में देखता है और उस नशीली आखो में वासना साफ़ दिखाई पद रही थी

Hooriya:ary तुम भी चलो बीटा

Shamshera:mai आता हु घोड़े को बांध क आप महल क अंदर जाये किसी को न पता चले इस बात का

Hooriya:theek है मई चलती हु आप आजाये

पता नहीं क्यू पर भूरिया ने अनजाने में हे अपने बेटे को आप कर क पुकारा जिसे देख शमशेर मुस्कुराता है भूरिया का चेहरा तो पहले से हे लाल था अब अपने की हुई चूक और शमशेर की तेज़ दिमाग ने उसके राग राग में खून की दौरान की तेज़ कर दिया

Hooriya:intezar करुँगी अपने हुजरे में शहज़ादे

Shamshera:aap जाइये में आया अम्मी जान

भूरिया एक ऐडा से पलट जाती है और भूरिया अपने बेटे की हरकत पर आज पहली बार गुस्सा न हुई थी शमशेर क लैंड को अहसास करते हुए अपने बड़े गांड पर इतराते हुए भूरिया चली जा रही थी



भूरिया क दोनों बड़े गांड एक झटके से बुरखे क ऊपर होते और दुगनी तेज़ी से वापस आकर दोनों गांड टकराते और ये सब देखते हुए शमशेर का डिल नहीं कर रहा था जाने से और वो घोड़े पर बैठा घूरे जा रहा था

तभी भूरिया को अहसास होता है क अब तक घोड़े क चलने की आवाज़ नहीं आई और वो समझ जाती है शमशेर उसके गांड को घूर रहा होगा और वो अपने नए आशिके बेटे को देखना चाहती थी कैसे वो ललचा कर देख रहा है और भूरिया अचानक से मुड़ती है



भूरिया अपने बेटे को देखती है और शमशेर भूरिया क आखो में देखते हुए मुस्कुराता है और घोड़े पर बैठे हुए अपने खड़े हुए लैंड को अपने एक हाथ से सहलाता है जिसे देख भूरिया लज्जा कर अपना सर निचे झुका लेती है और फिर महल की ओरे चल क जाने लगती है

Hooriya:man me)Besharam अब तो ऐसे घूरता है जैसे मेरा बीटा नहीं मेरा शौहर हो

भूरिया अपने सोच पर लज्जा जाती है

Shamshera:man me)In ज़ालिम गांड को मार कर इसकी तड़प मिटा दूंगा एक दिन अम्मी जान

शमशेर अपने घोड़े को उसके ठिकाने पर ले कर जाता है और उसे बांधने लगता है इधर भूरिया महल क पीछे दरवाज़े से चोर कदमी करते हुए अपने हुजरे की तरफ बढ़ रही थी आज भूरिया का हर एक कदम में एक डर था क कही उसके और शमशेर का प्यार से पर्दा न उठ jaye,apne आशिक़ से मिलने की ख़ुशी थी और आगे होने ज़िन्दगी में मौज की लहार

भूरिया छह रही थी क वो किसी भी तरह अपने हुजरे में पहुंच जाये पर ऐसा हुआ नहीं जैसे हे वो अपने हुजरे के दाखिल होने वाली थी उसकी सास अफसाना खातून उसे पुकारती है

"भूरिया सुल्ताना ..कहा थी आप"

भूरिया क पेअर वही जैम जाते है और उसके आखे बड़ी होजाती है क्यू क उसके ठीक पीछे उसके सासु माँ कड़ी थी भूरिया क लैब काँप उठ ते है आखिर वो कैसे बताती क वो अपने हे बेटे क साथ इश्क़ का खेल खेल कर आई है भूरिया क लैब थरथरा रहे थे झूट बोलने की भूरिया कभी सोची नहीं थी भूरिया पलट कर

"वो अम्मी जान बाघ में गई थी आज डिल नहीं लग रहा था महल में तो.."

भूरिया का चेहरा तो शमशेर क लैंड क छुवन से लाल था हे अब डर क मारे और लाल हो गया कोई भी भूरिया को देख कह सकता था वो कुछ छुपा रही है

Afsana:Hooriya सुल्ताना ऐसी क्या चीज़ है बाघ में क दुपहर में आप अपना डिल लगाने वह चली गई

Afsana:man me)Hume क्यू ऐसा लग रहा है क भूरिया झूट बोल रही है ..नहीं नहीं भूरिया झूट आज तक नहीं बोली..

Hooriya:ammi जान वो अब इस वक़्त बाघ खली होता है और आप हे तो कहती है क उस वक़्त हे बहार निकलो जब तुम्हे कोई देख नहीं पाए

Afsana:han बेटी आप तो जानती हो आप क हुस्न को देख नौजवान अपने होश खो बैठते है फिर आप को घूर कर अपनी जान गवा देते है और मई नहीं चाहती क आप जैसी नेक औरत लोगो की मौत का सबब बने

Afsana:man me)hum तो खामखा मल्लिका इ जहाँ पर शुबा कर रहे थे

भूरिया देखती है उसकी सास बार बार सोच रहे थी इसलिए झूटी मुस्कान लेट हुए

Hooriya:ammi जान आप किन सोचो में गम है

Afsana:hooriya बेटी हम बहुत खुशनसीब है क आप क जैसी बहु हमे मिली बास आप अकेली बाघ से आई तो

अफसाना अपनी बात भी पूरी नहीं की थी भूरिया बीच में बोल पड़ती है

"अम्मी जान क्या आप हम पर किसी तरह का शक कर रही है "

Afsana:nahi मेरी बेटी आपके जैसी इबादतगुज़ार और नेक औरत की पाकीज़गी पर शक करना खुद पर सक करना है

भूरिया अपने सास की बात सुन रही थी और उसे ऐसा लगता है जैसे वो गलत कर रही है और उसका मुँह उतर जाता है पर वो अपने सास को भांपने नहीं देती

Hooriya:man me)kya मई शमशेर क इश्क़ को अपना कर आप सब को धोका दे रही हु

Afsana:ab तुम क्या सोचने लगी बेटी ..वैसे आज बहुत लाली छै हुई है मेरे बहु पर

अफसाना खातून मुस्कुराते हुए अपने बहु भूरिया की तारीफ करती है

Hooriya:Kya अम्मी आप भी न रोज़ जैसी तो हु

Afsana:nahi बहु उम्र गुज़र दी लोगो क चेहरे को पढ़ते हुए आज आपके चेहरे की रंगत अलग है

Hooriya:Ho सकता है अम्मी जान अब आप कह रही है तो वैसे मई कुछ लगाती नहीं हु चेहरे में

Hooriya:man me)Ammi ये लाली हर किसी क चेहरे पर नहीं आती आज जो अहसास मुझे शमशेर ने करवाया है उसे सच्चा इश्क़ सच्ची मुहब्बत कहते है अब खिलूँगी नहीं तो कब ..

भूरिया अपनी सोच से कैंप उठती है

Afsana:ab इतना खूबसूरत चेहरा है तो तुम्हे सजने सवारने की ज़रूरत हे क्या है जितनीं खूबसूरत तुम हों उस से ज़्यादा खूबसूरत तुम्हारा बदन इसलिए तो मेरे वाहिद की पसंदीदा बीवी हो

Hooriya:man me)pasandeeda बीवी हु दुन्या को दिखने क लये सुल्ताना हु दुन्या को बताने क लये वो अपनी पहली बीवी को तख़्त पर बैठा डाई और मल्लिकाजहं बना डाई पर असलियत ये है क सुल्तान मेरे वाहिद की हवस है जिसने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी आज सुल्तान की 4 बीवीए है 150 ऐसे लौंडिया है हराम में जिसे जब चाहे सुला ले ,सुल्तान ने कभी मुझसे प्यार क्या हे नहीं

Hooriya:aapse तो काम खूबसूरत हु अम्मी जान

भूरिया कहते हुए हस्ती है और बदले में अफसाना खातून भी मुस्कुराती है

Afsana:ary मई तो भूल हे गई मई तो यहाँ अपने पोते और तुम्हारे बेटे शमशेर क बारे में बात करने आई थी इसलिए तुम्हे तलाश कर रही थी

Hooriya:ammi जान हाँ पूछिए न

Afsana:wo ऐसे कैसे जा सकता है भूरिया सुल्ताना पारस छोर कर आपको पता है सुल्तान अपने वडा खिलाफी करने वाले की जान भी ले सकते है चाहे वो कोई भी हो जान नहीं भी ले तो शमशेर को पूरी दुन्या में कोई काम नहीं देगा न ज़मीन ..आप उनकी माँ हो भूरिया सुल्ताना उनको रोकिये नहीं तो वो बाद में वापस आना चाहे तो भी सुल्तान मेरे वाहिद उसे पारस में आने की इजाजत नहीं देंगे

अफसाना अपने चेहरे पर परेशानी लाते हुए भूरिया को बोलती है भूरिया तो पहले हे अपने बेटे क इश्क़ को क़ुबूल कर उसे रोक दी

Hooriya:man me)ab सासु अम्मी कैसे बताऊ मैं एक माँ हु और अपने बचे की ज़िन्दगी बर्बाद होते नहीं देख सकती और अब तो मई उसे एक औरत की तरह इश्क़ करने लगी हु वो अब मुझसे दूर नहीं जा सकता

Afsana:bolo भूरिया बेटी मुझे ये बात समझ नहीं आती आखिर क्यू शमशेर अपने जान क़ुर्बान पर तुला हुआ है

Hooriya:ammi जान अब कैसे बताऊ वो क्यू हम से दूर जाना चाहता है मई अपने तरफ से पूरी कोशिश करुँगी क वो रुक जाये

Hooriya:man me)wajah तो ये है क वो मुझे अपने बेगम बनाना चाहता है अपने माशूका बनाना चाहता पर आप शायद ये सुन कर बेहोश जाओगी क मई भी अब यही चाहती हु

Hooriya:ammi जान चलिए अंदर मेरे हुजरे में बैठ कर बाते करते है

Afsana:nahi बेटी बास जो बात केहनी थी कह दी अब चलती हु

दोनों का ध्यान टूटता है दोनों सास बहु को किसी क कदमो की आवाज़ सुनाई देती है और दोनों पलट कर देखते है सामने से शमशेर अपने चौड़े सीने को ताअने हुए आरहा था जैसे दुन्या जीत ली हो और फख्र महसूस क्यू नहीं करे आज उसके सपनो को सुल्ताना हूर इ जहाँ उसकी अम्मी जान जो मिल गई थी अपनी मेहबूबा क रूप में

अफसाना और भूरिया दोनों खड़े थे शमशेर आकर अपने दादी को सलाम करता है

Afsana:shehzade शमशेर आप से ये उम्मीद नहीं थी क आप हमारा साथ छोर कर चले जाओगे पारस से

शमशेर भूरिया की तरफ देखता है और जैसे जानने की कोशिश करता है क वो तो अब नहीं जा रहा फिर क्या बोले वो

अफसाना खातून को देखते हुए भूरिया शमशेर को बोलती है

Hooriya:shamshera अगर तुम गए पारस छोर कर तो समझ लेना तुम्हारी अम्मी मर्डर गई



भूरिया अफसाना को देखता देख अपने बेटे को आँख मार देती है और शमशेर अपने अम्मी भूरिया की बात समझ जाता है क उसको नाटक करना है

Shamshera:ammi जान मई आज चला जाऊंगा मुझे रोकना मत

शमशेर ये कह कर सावधानी से अपनी अम्मी को आँख मार देता है और भूरिया को इसकी उम्मीद नहीं थी और वो शमशेर की हिम्मत देख दांग रह जाती है जो अपने दादी क सामने अपनी अम्मी को आँख मार दया

Afsana:shamshera मेरे बचे तुम तो मेरा ाचा पोता है क्यू जा रहा है अपने दादी को छोर क

Shamshera:Bass दादी अब अम्मी जान तो मुझे रोकना हे नहीं चाहती तो क्यू रुकू

Afsana:beti भूरिया तुम हे समझाओ शहज़ादे को

Hooriya:beta एक बार मेरी बात सुन लो आओ अंदर हुजरे क

भूरिया ये कह कर अपने हुजरे में चली जाती है और इशारे में अपने नए आशिके शमशेर को आने क लये कह देती है

Afsana:jaao बेटे अम्मी जान से बैठ क इत्मीनान से फैसला लो

Shamshera:Mai नहीं जाता पर आप कह रही हो तो जाता हु

Afsana:theek है अब मई चलती हु तुम दोनों बैठ कर बाटे करो

शमशेर की दादी सुल्ताना अफसाना खातून चली जाती है और उसके जाते हे शमशेर तेज़ी से अपने माँ क कमरे में घुसता है तो देखता है उसकी माँ बैठी है



भूरिया एक ऐडा से बैठी थी शमशेर अपने माँ की बहार भरी निकली हुई गांड और मम्मी जो निक़ाब फाड़ कर बहार आने को बेकरार थे उनको देखता रह जाता है शमशेर पलट कर हुजरे क दरवाज़े को बंद कर देता है ,भूरिया अपने बेटे क इस हरकत को देखते रहती है

Hooriya:aakhir क्या इरादा है जो आप भरी दुपहर दरवाज़ा बंद कर दिए?

शमशेर अपने अम्मी क करीब आते हुए मुस्कुराता है और अपने अम्मी को घूरते हुए

Shamshera:iraade तो नेक है मुहतरमा



Hooriya:lag तो नहीं रहा है शहज़ादे शमशेर

शमशेर अब भूरिया क सामने से चलते हुए अपने अम्मी क बड़े दूध को पी जाने वाली नज़र से देखते हुए आरहा था और उसका लैंड उसके पाजामे में अपने आकर में आने क लये तड़प रहा था



भूरिया अपने बेटे क उभरे हुए लैंड को गौर से देख रही थी और उसके बदन में आग सी लग जाती है



Hooriya:man me)Haaye ये इसका मुझे देखते हे इतना उतावला हो जाता है जिस दिन इसे मिल गई तो क्या हाल करेगा

भूरिया ये सोच कर अपने आखो को निचे कर लेती है और शमशेर भाप जाता है क भूरिया अभी आज हे उसके प्यार को क़ुबूल की है इसलिए शर्मा रही hai,shamshera चुप चाप आकर अपने अम्मी क बगल में सोफे पैर बैठ जाता है

Shamshera:Q आपको मेरे इरादों में क्या दिख गया जी

भूरिया अपना सर उठा कर शमशेर को देखती है फिर उसके उभरे हुए लैंड को देखती है



Hooriya:wo तो आपके हाल को देख कर पता चल रहा है कितने नेक है इरादे



भूरिया अपने बेटे क लैंड क उभर देखते हुए अपने निचले होठ को अपने दन्त में दबा लेती है

Shamshera:Aap कब से मेरे बदन क हिस्सों पर गौर करने लगे सुल्ताना भूरिया

Hooriya:Jab से आप क सर दीवानगी चढ़ी

Shamshera:ammi जान..

Hooriya:ji बीटा जान

शमशेर और भूरिया दोनों एक दूसरे को आखो में देखते हुए

Shamshera:agar आपकी इजाज़त हो सुल्ताना भूरिया तो मई अपने नेक इरादे बताना चाहता हु

Hooriya:bataiye जी

शमशेर: अम्मी जान

"जकड़ना चाहता हु तुझे इस क़दर"

"की हवा भी गुजरने की दवा मांगे"

"खो जाऊ तेरे इश्क़ में इस कदर"

"क आग जलने से पहले धुवा मांगे"

शमशेर खड़ा हो जाता है और अपने बहो को फैला कर अपने अम्मी जान क तरफ देख

"इरादे नेक लगे हो तो ाजैये मेरी बाहो में मेरी दिलरुबा मेरे जान इ बहार"

भूरिया अपने नए आशिके बेटे को मुस्कुरा कर देखती है और बिना इस बात की परवाह कए क उसके बीटा का लैंड खड़ा है वो उठ कर

Hooriya:man me)Hooriya दर मत तेरी ज़िन्दगी हसीं करने वाला रंगीन करने वाला तेरे सामने खड़ा है इस मौके को न छोर नहीं तो जैसे तू बरसो से प्यासी तदपि है वैसे हे तड़पती रहेगी

भूरिया उठ कर चलते हुए अपने बेटे क पास जा कर आखे बंद कए हुए कड़ी हो जाती है



शमशेर अपने हाथो से अपने अम्मी क सर को पकड़ता है और उनके माथे पर चुम लेता है जिस से भूरिया क तनबदन में आग लग जाती जय और वो फ़ौरन अपने बेटे क सीने पर दोनों हाथो को रखती है आज पहली बार भूरिया अपने शौहर का छोर किसी गैर मर्द क साथ एक बंद कमरे में थी भूरिया क तन बदन में झुरझुरी होती है

शमशेर अपने अम्मी जान क पीठ पर हाथ ले जाता है और धीरे से कान में कहता hai"aap बेहद हसीं हो अम्मी जान आपको देख मेरे डिल में एक हलचल सी होती है और मेरा बदन आप में समां जाने क लये बेचैन हो जाता है"



भूरिया अपने बेटे क बाहो में आ चुकी थी और दोनों एक दूसरे क बदन की गर्मी को अहसास कर पारहे थे

Hooriya:mere बादशाह मई भी तो दीवानी हो गई आपकी इश्क़ कर बैठी अपने ज़िन्दगी सिर्फ तुमको मान लय है शमशेर

भूरिया को अहसास होता है शमशेर का खड़ा लैंड उसके जांघ पर अपनी ठोकर मार रहा है भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे को एक हल्का धक्का देती है और जा कर सोफे पर बैठ जाती है

Hooriya:badmash कही क

Shamshera:ab जिसकी माशूका आप जैसी मदमस्त हो जिसपे जवानी कूट कूट क भरी हो भला कैसे न बदमाशी सूझे

Hooriya:han बड़े आये मजनू ,आज कल क मजनू बास दो दिन क लये होते है फिर वो दूसरी लैला तलाश करने लग जाते है

शमशेर आकर ठीक भूरिया क बगल में बैठ जाता है

Shamshera:kabhi आज़मा क देख लेना इस मजनू को सच्चा इश्क़ क्या हु आपसे अम्मी जान आप को छोर क किसी को देखूं भी नहीं आप कहो तो

Hooriya:achha जी देख लेंगे आपको भी कब तक एक पर टिकेंगे

Shamshera:ammi जान आप शायद मुझे अब भी आवारा समझते हो अब आपने मुझे वजह दे दिया है सुधरने का

भूरिया: वजह दे दिए हम?

भूरिया अपनी मुस्कराहट छुपाते हुए अनजान बनती है

Shamshera:aap की इश्क़ और आपके हिस्से की मुहब्बत कभी किसी को नहीं दूंगा

Hooriya:mai भी यही चाहती हु मेरे इश्क़ का बटवारा न हो जो होता आया है

Shamshera:mai पूरी ज़िन्दगी आपके अलावा किसी औरत को देखना तो दूर सोचूंगा भी नहीं मई वादा करता हु

शमशेर ये कहते हुए अपने अम्मी का एक हाथ को अपने हाथ में लेता है और अपने होठो क तरफ ला कर उसे चूमता है



भूरिया का पूरा बदन ख़ुशी और उत्तेजना से दाहक रहा था ,भूरिया भी शमशेर क उस हाथ को अपने लरजते लैब से सत्ता कर "umm"chumti है

"मुझे भी आपसे यही उम्मीद है मेरे सरताज"

तो बे कॉन्टिनोएड
 
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