Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 18 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 162

शमशेर ये कहते हुए अपने अम्मी का एक हाथ को अपने हाथ में लेता है और अपने होठो क तरफ ला कर उसे चूमता है



भूरिया अपने बेटे क हाथ को चूमते हुए एक आस से शमशेर क आखो में देखती है

शमशेर अपने दोनों हाथो से भूरिया क हाथ को अपने हाथो में दबा कर भरोसा जताते हुए अपने अम्मी को कहता है

"अम्मी जान शमशेर ने आपसे सच्चा इश्क़ क्या है आपके हर उम्मीद पर खड़ा उतरूंगा मई"

"अच्छा वो सब छोरो शमशेर अब सुल्तान को क्या जवाब डोज "

भूरिया थोड़ा चिंतित होते हुए कहती है और शमशेर भी सोच में पद जाता है और दोनों कुछ देर सोचते रहते है

Hooriya:agar तुम्हारे अब्बा पूछे क्यू तुम पहले जाना चाहते थे और अब रुकने की वजह क्या है फिर क्या जवाब डोज ?

Shamshera:Keh दू क अब मैंने अम्मी जान को आप से छीन कर अपनी बना लय हु और अपने जान को मई छोर कर नहीं जा सकता

भूरिया थोड़ा मुस्कुराती है और चुटकी लेते हुए कहती है

"शमशेर जिस पल तुमने ये बात कही वो पल तुम्हारे ज़िन्दगी का आखिरी पल होगा .सुल्तान तुम्हे बिना सोचे समझे क़त्ल कर देंगे"

शमशेर अपने माँ को फिकरमंद होते हुए देख कर मुस्कुराते हुए कहता है

"अब जिसके आपके जलवे ने पहले हे क़त्ल कर दिया है उसे क्या कोई मरेगा "

Hooriya:Hamesha मस्ती में रहते हो पता है तुम्हारी दादी भी पूछ रही थी क तुम क्यू जा रहे हो

Shamshera:to बता देती क अब आपके पोते ने मुझे पता लय है तो नहीं जायेगा मुझे छोर कर

Hooriya:chup हो जाओ तुम तो जैसे जानते हे नहीं कितने दुश्मन मौजूद है सल्तनत में हमारे जो तुम्हे सुल्तान नहीं बनाना चाहते

Shamshera:ammi जान कोई मेरा कुछ नहीं कर सकता जब तक आप मेरे साथ हो

Hooriya:achha जी

Shamshera:han जी

Shamshera:q न ये बोल दू क मई शुंग को पकड़ने क लये ये नाटक क्या ताके वो मुझे मारने क लये बहार निकले अकेले प् कर और उसका ठिकाना अंदाज़ा हम लगा सके

Hooriya:bhut खूब बीटा बहुत तेज़ दिमाग क हो

Shamshera:ab आप जैसी शख्त मिज़ाज़ की औरत को अम्मी जान से अपने दुल्हन बनाने वाला हु दिमाग तो होगा हे न

Hooriya:bass कुछ ज़्यादा नहीं कह दिए

भूरिया वह से उठ कर जाने लगती है और शमशेर अपने माँ क ऐडा को देख रहा था जिसमे लज्जा वासना और ममता तीनो दिख रही थी

Shamshera:kaha चली मेरी रानी

Hooriya:din दहाड़े मेरे हुजरे मेरे साथ छेड़ छार कर रहे हो तुम्हे इल्म नहीं क मई सल्तनत की सुल्ताना हु इस जुर्म में तुम्हे सजा भी हो सकती है

Shamshera:aaapne तो अपने इश्क़ में मुझे गिरफ्तार कर लिया है मल्लिका ेजहाँ मई तो पहले हे मुजरिम हु आपका

Hooriya:majnu कही क हर बात का जवाब रखता है अब जाओ कोई देख लेगा तो बात बढ़ जाएगी

Shamshera:kaun देख लेगा अम्मी जान हम तो अंदर है दरवाज़ा भी बंद है

Hooriya:darwaza बंद है इसलिए तो बोल रही हु कोई भी आसक्त है यहाँ कोई पूछ लेगा तो क्या जवाब दूंगी

Shamshera:q अपने आशिक़ का नाम नहीं बता सकती हो डरपोक

Hooriya:darpok तो अब नहीं रही मई जिस दिन बताना पड़ा तो मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ेगा दुन्या को बताने में क तुम हे वो शख्स हो जिसने मेरे डिल को चुराया है और मुझे पहली मुहब्बत का अहसास करवाया है

Shamshera:jaan इ मन मेरी सोहबत में आप की भी हिम्मत वाली हो रही हो

Hooriya:Mai डरपोक तो कभी नहीं थी तुम जैसे दस जंगजू को एक साथ मैंने कई बार अपने तलवार से मात दी है मई मिश्रा में थी तब से तलवारबाज़ी जानती हु

Shamshera:acha जी हम कान पकड़ते है हम आपसे दर भी जाते है आप बहुत ताक़तवर हो हिम्मतवाली हो

Hooriya:han दर क रहोगे तो खुश रहोगे

Shamshera:waise भी अम्मी जान हर मर्द अपने बीवी से दर क हे रहता है अब मुझे भी आपसे डरने की आदत डालनी है

शमशेर मुस्कुराता हुआ बोलता है और भूरिया जैसे छिर्रः जाती है और शमशेर क तरफ भाग कर आती है उसे मरने क लये शमशेर उठ कर खड़ा होता है और अपने अम्मी क भरी मम्मो को हिलते हुए देखते रह जाता है

"शमशेर तुम्हे मई जान से मर दूंगी हमेशा गन्दी नज़र रखते हो"

भूरिया अपने हाथो से शमशेर क सीने पर मरती रहती है और शमशेर अपने अम्मी को बाहो में धीरे धीरे भरने लगता है भूरिया को अहसास भी नहीं होता कब उसका भरी वजूद उसके बड़े दूध उसके मोती जंघे शमशेर क गठीले बदन से चिपक गई



भूरिया और शमशेर एक दूसरे क गले लगे हुए थे और भूरिया का मुँह अपने आप बंद हो जाता है और वो शमशेर क डिल क धड़कन को साफ़ अहसास कर पा रही थी

Shamshera:ammi जान मई आपको रात भर्र प्यार करना चाहता हु आपके बदन क हर बेशकीमती हिस्से को जी भर प्यार करना चाहता हु ताके आपके संगमरमरी बदन का हर हिस्सा को समझ आजाये क वो मेरे नज़र में कितने हसीं hai,ammi जान मेरी ख्वाइश पूरी करोगी न

Hooriya:Ji बीटा मेरे सरताज आशिके

भूरिया अपने बेटे क पीठ पर अपना हाथ फेरते हुए कहती है

भूरिया को तभी उसके झांग पर कुछ कड़ी चीज़ महसूस होती है और वो समझ जाती है ये शमशेर का लैंड है

Shamshera:mai आपके साथ सोना चाहता हु अम्मी जान बोलो सोयेंगे न हम साथ

शमशेर ये कहता है और उसका लैंड पूरा खड़ा हो जाता है और भूरिया क जांघ पर सर उठा कर दो तीन झटका मारता है भूरिया की आखे फटी की फटी रह जाती है

भूरिया शमशेर से दूर होती है झटके से और अपने बड़े गांड को मटकते हुए अपने बिस्तर क दूसरे कोने पर जा कर बैठ जाती है

Hooriya:tum सब मर्द एक जैसे होते हो लड़की ने हाँ नहीं कहा बिस्तर पर लिटाने को तैयार हो जाते ho,Bass अपना बिस्तर गरम करवाने क फ़िराक में हो और कुछ नहीं सूझता

शमशेर अपने लैंड पर हाथ रख कर सहलाते हुए

"आय है इस लाल मिर्च सी ऐडा तो आपको और खूबसूरत कर देती है अम्मी जान वैसे आप अब मेरी हो अब मेरा हक़ है अप्पर"

Hooriya:bass शमशेर कोई सुन लेगा तो क्या होगा अभी दिन में थोड़ा हमे अहतियात बरतना चाहिए

Shamshera:bhut चालक औरत हो अपने हे बेटे से हमबिस्तरी करना है वो भी ाःतय्त बारात क

Hooriya:tum हो ज़्यादा तेज़ मौक़ा मिलते हे ..आपने मेरे साथ घोड़े पर क्या किया पता है मुझे

शमशेर मुस्कुराता है अपने अम्मी की नादानी पर

Shamshera:wahi किया जो आप जैसी हसीं औरत क साथ उसका आशिक़ करता और गलती तो आपके ज़ालिमों की है जो मेरे छोटू को ललचाई और वो बहक गया

भूरिया मतलब समझ कर शर्म से गाड़ी जा रही थी और अपने सर को झुका लेती है अपने बेटे क samne,shamshera खुलेआम कह दया था क उसकी गांड क वजह से उसने घोड़े पर अपना लौड़ा उसके गांड में घुसेड़ा था

भूरिया अपनी आखे निचे कए हुए

"अब जाओ न शमशेर कोई भी आ सकता है"

शमशेर बात को समझते हुए

"ठीक है अम्मी जान पर कब मिलोगी अब"

"तुम जाओ और पहले सुल्तान मेरे वाहिद का गुस्सा शांत करो हम और तम तुम चाहो तो रात में मिल सकते हो"

ये कह कर भूरिया एक हल्का मुस्कराहट क साथ अपने आखो को निचे कर देखने लगती है

शमशेर अपने अम्मी को शर्माता देख जो उसे मिलने क लये रात में बुला रही थी

Shamshera:theek है मई सुल्तान से मिल कर अपनी बात रखता हु फिर आपको बताता हु

शमशेर एक बार ऊपर से निचे तक अपने अम्मी क हुस्न पर नज़र डालता है भूरिया शरमाते हुए निचे देख रही थी पर जैसे हे शमशेर जाने वाला होता है

Hooriya:Shamshera दवाई खा लेना और हाँ रात में आओ तो किसी को पता न चले

Shamshera:theek है मेरी जान चोरी से आऊंगा आपका डिल चुराने

शमशेर मुस्कुरा कर देखता है अपने अम्मी को भूरिया अपना गर्दन मोड़ कर मुस्कुराती है

शमशेर हुजरे का दरवाज़ा खोल कर बहार जाता है और चलते हुए अपने अब्बा जान सुल्तान मेरे वाहिद क पास पहुँचता है जो अभी अभी दरबार से आये थे और खाना खाने क बाद शराब की चुस्किअ ले रहे थे

Shamshera:abba जान क्या मई अंदर आसक्त हु

सुल्तान अपना जाम की गिलास को रखते हुए दरवाज़े की ओरे देख कर बोलता है

Sultan:aa जाओ शमशेर

शमशेर अंदर आता है और झुक कर अपने अब्बा को सलाम करता है पर सुल्तान कुछ नहीं बोलते और अपने जाम का गिलास भरने लगते है

Shamshera:abba जान हम आपसे कुछ बात..

Sultan:baat ..यहाँ से चले जाओ शमशेर

Shamshera:abba जान मई आपको कोई खास बात बताने आया हु

सुल्तान शमशेर को देख गुस्से से आग बबूला हुआ और बोलता है

"शमशेर अब बात करने को क्या रह गई तुम्हे जहा जाना है जाओ पर इसका अंजाम भी तुम्हे हे भुगतना होगा"

Shamshera:man me)dill तो करता है तुम्हे जान से मार दू सुल्तान मेरी जान भूरिया को रुलाया है तुमने पर बदकिस्मती से तुम मेरे बाप हो

Shamshera:Abba जान मई कही नहीं जाने वाला था और न हे जाऊंगा

सुल्तान चौंक जाता है और शमशेर को शक की नज़र से देखते हुए अपने बेटे क आखो में घूरता है

"तुम्हारी आखे झूट बयां कर रही है शहज़ादे शमशेर"

"अब्बा जान झूट या सच तो तब साबित होगा जब मई यहाँ से चला जाऊ या राहु"

"ये भी दुरुस्त है शमशेर पर याद रखना आज जो भी सियासत तुम करते हो वो मेरी दें है और अभी तुम से मुझे सियासत की बू आरही है"

Shamshera:man me)tum बहुत चालक हो सुल्तान तो में भी कोई दूध पत्ता बचा नहीं अब इतना बड़ा हो गया हु क तुम्हारी बीवी भूरिया जिसके ख़ूबसूरती और सीरत पर तुम फख्र महसूस करते थे आज से मेरी हमसफ़र मेरी मेहबूबा है

Sultan:bete शमशेर जो भी बोलना सोच समझ कर तौल कर बोलना भूलना मत क हम सुल्तान है जिसने अपने ज़िन्दगी में फ़तेह देखा हार नहीं

Shamshera:abba जान मुझे यक़ीन है आपका गुस्सा होना ठीक है और उस गुस्से क वजह से हे आपको मेरी बाटे सियासी लग रही है हाँ मई सियासत ज़रूर कर रहा हु पर उनके खिलाफ जो सल्तनत क अमन को ख़राब करना चाहते है आपके खिलाफ सियासत का में कभी ख्वाब में नहीं सोच सकता

Shamshera:man me)abba जान चाहे आपने जितने भी क़िले फ़तेह किये हो पर जिस क़िले पर मैंने आअज फ़तेह की उसकी बराबरी आपके पूरी ज़िन्दगी की फ़तेह नहीं कर सकती मैंने आज आपके बीवी क क़िले पर फ़तेह कर लिया है अम्मी जान अब से अआप जैसे अय्याश की बीवी नहीं बल्कि शमशेर की माशूका कहलाएगी

Sultan:Jo कहना चाहते हो खुल कर कहो

सुल्तान हैरान होता है क आखिर शमशेर कर क्या रहा है

Shamshera:abba जान बात ये है क मई महल क अंदर उस बाघी की तलाश करने में लगा हु जो सल्तनत को तोडना चाहते है और यही वजह है क मई सिर्फ पारस छोर कर जाने की बात सबके सामने रखा ताके दुश्मन मुझे अकेला प् कर हमला करे और मई उन्हें पकड़

लू

Sultan:tum सच कह रहे हो?

सुल्तान अपने बेटे को घूरते हुए उसके आखो में देखता है और पढ़ने की कोशिश करता है शमशेर भी अपने आप को ऐसा रखता है क उसका बाप उसे भांप न सके

Shamshera:Abba जान मुझे अंदेशा था क दुश्मन को जैसे पता चलेगा क मई अकेला हु कमज़ोर हु वो मुझे मिटाना चाहेगा और यही हुआ मुझ पर हमला हुआ

Sultan:kya???

सुल्तान हैरत से अपने बेटे शमशेर को बिना पालक झपकाए देख रहा था

Shamshera:han अब्बा जान मेरे ऊपर शुंग और उनके आदमीओ ने हमला क्या. जिसका मतलब साफ़ है क महल का कोई शक्श फ़ौरन हमारी खबर शुंग तक पंहुचा रहा है

Sultan:tumne मार क्यू नहीं दिया उन लोगो को कहा मिले वो हाथ से कैसे जाने दिए टी

Shamshera:abba जान मुझे यही जानना था क शुंग को मदद करने वाले लोग घर क है या बहार क जो समझ गया हु अब ये बात भी साफ़ हो गई है शुंग को हमारा आदमी कोई पारस में पनाह दिया है इसलिए हमारे सिपाहीओं से बच निकलता है वो

सुल्तान कुछ देर सोचते है फिर अपने गिलास को उठा कर शराब पीते हुए

"तो शमशेर ये सब से हमे फायदा तो हुआ पर काम हुआ अब आगे क्या करना है "

Shamshera:man me)Ohh काम से काम सुतं का शक तो दूर हुआ नहीं तो इन्हे क्या पता मई पारस छोर कर जाने की वजह भी मल्लिका इ जहाँ थी और रहने की भी

Shamshera:jahan पर हमला हुआ है मई अपने लोगो से सुराग निकलवा कर शुंग को ज़िंदा आपके सामने लाऊंगा अब्बा जान

सुल्तान अब अपने बेटे क चालाकी से खुश था और उसे इस बात का भनक भी नहीं थी क शमशेर ने भूरिया को पता लिया है और दोनों इश्कबाज़ी कर रहे है

Sultan:Bhut खूब मेरे शहज़ादे सुल्तान बन ने क असल हक़दार तुम हे थे और रहोगे

Shamshera:shukria अब्बा जान बास अब उनके गिरेबान तक पहुंचना है जो हमे मारना चाहता है

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 163

Shamshera:jahan पर हमला हुआ है मई अपने लोगो से सुराग निकलवा कर शुंग को ज़िंदा आपके सामने लाऊंगा अब्बा जान

सुल्तान अब अपने बेटे क चालाकी से खुश था और उसे इस बात का भनक भी नहीं थी क शमशेर ने भूरिया को पता लिया है और दोनों इश्कबाज़ी कर रहे है

Sultan:Bhut खूब मेरे शहज़ादे सुल्तान बन ने क असल हक़दार तुम हे थे और रहोगे

Shamshera:shukria अब्बा जान बास अब उनके गिरेबान तक पहुंचना है जो हमे मारना चाहता है

सुल्तान को अपने बात पर यक़ीन करने से मजबूर कर दया था शमशेर ने और अपने चालाकी से हर बात की वजह बता दिया सुल्तान उस से खुश हो जाते है शमशेर अपने बाप से वादा करता है क बहुत जल्द शुंग को वो गिरफ्तार कर लेगा ,शमशेर अपने साथ कुछ सिपाहीओं को ले कर पारस क उस नदी क तात पर जाता है और शुंग की छान बीन शुरू कर देता है

इधर सुल्तान अपने बेटे शमशेर से खुश हो कर चहल कदमी करते हुए अपने पहली बीवी भूरिया क हुजरे में आता है और आवाज़ देता है

"भूरिया बेगम क्या हम अंदर आ सकते है"

अंदर भूरिया लेती हुई थी और अपने और अपने बेटे क आने वाले दिनों क ख्वाब सजा रहा थी कैसे उसे शमशेर दिन रात प्यार देगा और उसके बदन की गर्मी शांत करेगा

भूरिया अचानक से अपने शौहर की आवाज़ सुन हड़बड़ाते हुए कहती है

"ाजैये सुल्तान आपको इजाज़त की क्या ज़रूरत"

सुल्तान अंदर चलते हुए आते है और भूरिया उठ कर बैठ जाती है

"भूरिया बेगम भले से मई आपका शौहर हु पर बिना इजाज़त किसी क भी हुजरे में जाना गलत है"

"आइये सुल्तान आज काफी दिनों बाद आये"

"अब आप हमे याद हे नहीं करती भूरिया सुल्ताना तो कैसे आये हम वैसे आज बाला की खूबसूरत लग रही है आप "

"शुकरिअ सुल्तान आपको तो पता हे है मेरा महीना शुरू था अब आज कल पहले वाली बात हे नहीं रही कब वह खून का रिसाव हो जाये पता हे नहीं चलता"

"भूरिया बेगम आपकी जवानी को चखने क लये मई तरस रहा हु जब से कुबेरी पर फ़तेह कर क लौटा हु"

Hooriya:man me)Sultan अब आगे भूरिया को छूने क लये भी तरसोगे मई अब किसी और की हो गई हु

Hooriya:Sultan चाहती तो मई भी हु आपको खुश करना पर मजबूरी है छह क भी आपके साथ हमबिस्तर नहीं हो सकती मुझे मुआफ कर दे अब मेरी उम्र ढल रही है उसके साथ हे मेरा ये सब करने का डिल भी नहीं करता

Sultan:aap ठीक तो है बेगम जुंग पर जाने से पहले तो आप खूब शिद्दत से मुझ से लिपट कर हमबिस्तरी क मज़े लिए

Hooriya:man me)Han सुल्तान जब तुमने मेरी गर्मी भड़का कर मुझे अधूरा छोर डाई और पांच मिंट में हे फ़ारिग़ हो गए और मई मिन्नतें करती रही क फ़ारिग़ न हो

Sultan:lagta है मेरी सबसे प्यारी बीवी मुझसे इसलिए नाराज़ है क उस दिन मई जल्दी फ़ारिग़ हो गया आपको अधूरा छोर क

Hooriya:isme आपकी गलती नहीं है अब आपकी उम्र 57 से ऊपर हो गई तो ये होता हे है

Sultan:par मुझे लगता है क आप हम से खुश नहीं हो पाई काश मई आपसे उतने हे शिद्दत से प्यार कर पता जैसे जवानी में करता था

Hooriya:man me)Sultan मई तो उस दिन से प्यासी हु जिस दिन से आपसे शादी हुई तब भी आप दस से पंद्रह मिनट में फ़ारिग़ हो जाते थे मुझे अधूरा छोर क पर मई समझती थी आप मेरे शौहर है इसलिए कभी शिकायत नहीं क आपके मुहब्बत को में सच्चा समझी पर तुम तो झूठे फरेबी निकले और अय्याश भी

Hooriya:Sultan ऐसी बात नहीं है आपने ज़िन्दगी भर मेरी जेन्सी ख्वाहिशात को पूरी कोशिश की और में बहुत खुश हु क आप जैसा शौहर मिला मुझे ..वैसे भी सुल्तान शायद इस उम्र में औरते थोड़ी बेसबर हो जाती है और अपने शौहर से यही उम्मीद करती है क वो जवानो की तरह जमा करे पर ये मुमकिन नहीं

Sultan:tum सच कह रही हो न

सुल्तान भूरिया को शक की नज़र से देखते हुए कहता है

Hooriya:man me)Sach तो मेरे बारे में जो आपने कहा था अपनी छोटी बीवी मुस्कान को वो सब मैंने सुन लय अय्याश sultan,Budhi मई नहीं तुम हुए हो

Hooriya:sach में सुल्तान क्या मई कभी झूट बोल सकती हु ?

सुल्तान खुश होते हुए अपने बाहे फैलफा है और भूरिया को अपने बहो में आने क लये कहता है

Hooriya:man में) क्या करू मई शमशेर को धोका कैसे दू जो मुझसे इतनी बेपनाह मुहब्बत करता है

Sultan:aajao मेरी बेगम मेरी बाहो में आपके इस खूबसूरत जिस्म की खुशबू सूंघने दो हमे

भूरिया न चाहते हुए भी अपने शौहर क पास जा कर उस से गले लग जाती है भूरिया अपने दोनों हाथो को सुल्तान क कंधे पर रखती है और सुल्तान अपने हाथो को भूरिया क कमर पर रख अपने तरफ खींचता है

Hooriya:man me)mujhe मुआफ कर देना शमशेर

भूरिया से सुल्तान लगातार चिपकने की कोशिश करते है और भूरिया अपने बड़े दूध को सुल्तान क सीने पर लगने से बचती रहती है

Hooriya:sultan ...

Sultan:ji बेगम आप का बदन तो गरमी से तप रहा है आज रात को आऊंगा आपकी गर्मी शांत करने

भूरिया अपना सर सुल्तान क कंधे पर रखे सोच रही थी क अब कैसे बचे वो सुल्तान से

Hooriya:Sultan बैठ जाते है अब आप थक गए होंगे

Sultan:aap अपने बदन को दूर क्यू कर रही है सुल्ताना भूरिया मुझे आपके निक़ाब में छुपे बेशकीमती हीरे की गर्मी का अहसास करवाइये

Hooriya:uh यह छोड़िये न सुल्तान अब बैठ कर बाटे करते है

Sultan:theek है जैसा तुम कहो बेगम

सुल्तान भूरिया को छोरता है और दोनों सोफे पर बैठ जाते है भूरिया सुल्तान को देखते हुए

"सुल्तान आपको तो पता है न क वह से खून निकल अत है किस वक़्त शुरू हो जाये पता न होता "

"भूरिया बेगम आप पुरे महीने ऐसे हे रहोगी तो मई कैसे करूँगा आपको खुश "

"सुल्तान अब मई मन नहीं करना चाहती पर आप तो वाक़िफ़ है मेरे हाल से"

सुल्तान से भूरिया सफ़ेद झोट बोल रही थी उसकी वजह थी उसका नया आशिक़ शमशेर जिसे वो धोका नहीं देना चाहती थी

"भूरिया बेगम आज हम आपके साथ हे सोयेंगे जो होगा देख लेंगे "

भूरिया क बहाने क बावजूद सुल्तान अपने बीवी भूरिया को कहता है क वो आज रात उसके साथ हे गुज़रेगा भूरिया पेशोपेश में थी क अब वो क्या करे

Sultan:waise रात की बात रत में होगी तुम्हे एक खुशखबरी सुनाने आया हु भूरिया

Hooriya:kaisi खुशखबरी

Sultan:Shamshera पारस छोर कर नहीं जा रहा और वो जाना भी नहीं चाहता था ये चाल थी उसकी शुंग तक पहुंचने की

भूरिया एक मुस्कान देती है और सुल्तान पर अफ़सोस करती हुए

Hooriya:man me)Sultan तुम अपने आप को दुन्या क सबसे चालबाज़ आदमी समझते थे पर आज शमशेर ने तुम्हे मात दे दी ,तुम्हे पता नहीं शमशेर ने तुम से तुम्हारी बीवी छीन ली और आगे जा कर ये सल्तनत भी उसका होगा और तुम खुश हो रहे हो सुल्तान मेरे वाहिद अपने हे हार पर

hooriya:ary वाह सुल्तान ये आपने तो बहुत अच्छी खुशखबरी दी मई तो परेशां थी

Sultan:to आओ फिर कुछ मीठा हो जाये इस खुशखबरी पर

Hooriya:kya

Sultan:aapke गुलाबी होठो क मीठे जैम को पीला दो

Hooriya:aap भी न ,मुझे पहले आप ये बताओ क ये सब क्या है कैसे हुआ और शमशेर कहा है

भूरिया अनजान बनते हुए अपने शौहर से बात पूछती है जैसे उसे पता हे न हो क शमशेर नहीं जाने वाला है

Sultan:hooriya मैंने शमशेर को शुंग क उस ठिकाने पर भेजा है जहा पर उसके ऊपर हमला हुआ था आज

Hooriya:kya हमला

Hooriya:man में )कही शमशेर ने ये तो नहीं बता दया क मई भी थी उसके साथ

Sultan:han भूरिया बेगम शहज़ादे शमशेर को अकेला प् कर उन्होंने हमला क्या पर अब हम बहुत जल्द उनके ठिकानो पर पहुंच जायेंगे

भूरिया अपने आखे बंद करती है और गहरी सास लेते हुए

Hooriya:man me)shukr है मेरा नाम नहीं लिया उसने नहीं तो आज फस्स जाती

तभी दोनों क कान में आवाज़ आती है समां की

"बड़ी अम्मी क्या मई अंदर आजौ"

भूरिया अपने शौहर सुल्तान मेरे वाहिद क तरफ देख जैसे पूछती है क क्या करू और इजाज़त मांगती है ,सुल्तान हाँ का इशारा करता है और भूरिया बोलती है

Hooriya:aajao मेरी शहज़ादी

समां अंदर आती है तो देखती है उसकी सौतेली अम्मी भूरिया क साथ उसका बाप भी है

Sama:salam सुल्तान सलाम मल्लिका इ जहाँ ,गुस्ताखी मुआफ मुझे पता नहीं था मई गलत वक़्त पर आगयी

Sultan:sama मेरी बेटी हो आजाओ तुम हमारी बेटी हो आकर बैठो

समां आकर उनके साथ बैठ जाती है

Sultan:kaho समां कुछ काम था

Sama:abba जान वो बास मई बड़ी अम्मी से बात करने आजाती हु डिल नहीं लगता तो

Sultan:dekho भूरिया समां कितनी जल्दी बड़ी हो गयी अब हमे इनके लये कोई ाचा लड़का देखना होगा

Sama:abbaa जान

समां ये सुन कर शर्मा कर अपना सर निचे कर लेती है

Hooriya:han आप ठीक कह रहे हो सुल्तान

Sama:Badi अम्मी आप भी न मई तो अभी छोटी हु मेरे दोनों भाई बड़े है मुझसे

Sultan:ab शमशेर तो शादी क लये मान नहीं रहा तो अब सीधा तुम्हारी और फिर उसके बाद शहज़ादे शान की शादी करेंगे

Sama:badi अम्मी ..मई जब तक शमशेर भाईजान की शादी न देख लू मई नहीं करुँगी

Sultan:Lijiye सुल्ताना भूरिया अब समझाइये अपने लाडला बीटा शमशेर को क जल्दी शादी करें

Hooriya:man me)Sultan अब क्या समझौ शमशेर को शायद वो मेरे ज़िंदा रहते हुए तो कभी शादी नहीं करेगा इतना प्यार करता है मुझसे और अब तो मई खुद शमशेर को किसी और औरत क साथ बर्दाश्त नहीं सकती

Sama:aap समझाइये न भाईजान को बड़ी अम्मी

Hooriya:theek है बेटी मई समझाऊंगा पर वो माने तब तो तुम्हे पता है समां शमशेर हमे छोर कर नहीं जा रहा

समां ये सुनते हे चहक उठती है और अपने बड़ी अम्मी को हैरत से देखती है

Sama:mujhe पता था आप उन्हें नहीं जाने डोज बड़ी अम्मी आप मन लोगे

भूरिया की सिटी पित्ती गुल हो जाती है आखे फटी की फटी रह जाती है समां ने ऐसी बात कह दी थी क सुल्तान भी सोच में पद जाते है

Hooriya:nahi समां मैंने तो उस से आज मिली भी नहीं वो तो शमशेर हमारे महल में रहकर बघवत करने वालो को पकड़ने क लये ये चल थी

Sama:badi अम्मी क्या कह रही है आप

Sama:man me)Ye बड़ी अम्मी झूट क्यू बोल रही है जब क शमशेर भाईजान को मई खुद इनसे मिलने क लये भेजी थी ज़रूर कुछ दाल में कला है

Sultan:Hooriya ठीक कह रही है समां मैंने हे अभी भूरिया को बताया क वो क्यू पारस से जाने का नाटक कर रहा था

Hooriya:han हाँ मुझे तो पता भी नहीं था

समां भूरिया क चेहरे पर साफ़ देख प् रही थी क वो झूट बोल रही है

Sultan:theek है आप दोनों बाते करो मई चलता हु

सुल्तान उठ कर खड़ा होता है भूरिया भी कड़ी होती है सुल्तान चलते हुए हुजरे क बहार चला जाता है

Sama:badi अम्मी आप तो नदी तात पर शमशेर भाईजान से मिली थी तो फिर आप ने क्यू बोलै ऐसा

Hooriya:man में) अब क्या बोलू ये तो झूट पकड़ ली मेरा और इस से अगर और झूट बोली तो कही ये जा कर किसी और को न बता दे इसे बता हे देती हु

Hooriya:beti समां तुम तो जानती हो शमशेर अगर पारस से चला जाता तो उसकी ज़िन्दगी बाद से बत्तर हो जाती इसलिए मैंने उसे समझाया और पारस से न जाने क लये राज़ी क्या

Sama:par बड़ी अम्मी जब सुल्तान को पता चलेगा क आप दोनों ने झोट कहा तो क्या होगा आप शायद नहीं जानती

Hooriya:kaun कहेगा batao?tum भी तो चाहती थी न क शमशेर रुक जाये अब मई उसे रोकने क लये एक झूट बोल दी तो क्या गुनाह क्या अगर सच बोलती तो शमशेर को क्या सुल्तान ख़ुशी ख़ुशी मन जाते ?

Sama:man me)Badi अम्मी ठीक कह रही है अगर सुल्तान को पता चलता क शमशेर भाईजान सच में जाने वाला था वो कभी शमशेर भाईजान को पनाह नहीं देते

Hooriya:bolo समां बेटी क्या मई गलत की?

Sama:nahi बड़ी अम्मी आप ठीक कह रही हो वैसे भी घर और सल्तनत बचने क लये छोटी सी झूट मायने नहीं रखती

Hooriya:Meri समझदार बेटी मई उम्मीद करती हु क ये बात सिर्फ तुम तक रहेगी

Sama:badi अम्मी आप जैसे पाकीज़ह औरत झूट बोली तो मई समझ सकती हु क आप अचे क लये हे बोली होगी ,हमे पता है आप कभी झूट नहीं बोलती ,महल में सब से अछि आप लगती है मुझे आप को बचपन से देखि हु आप क नाख़ून तक गैरमर्द ने नहीं देखे होंगे न आपकी आवाज़ सुनी होगी इतनी परहेज़गार है आप

Hooriya:bass करो इतनी तारीफ ठीक नहीं

भूरिया अपने तारीफ सुन इतराते हुए कहती है

Sama:badi अम्मी मई भी आप जैसी बन न चाहती हु जिसकी इज़्ज़त एवं करे

Hooriya:Tum अपने इज़्ज़त का ख्याल रखोगी तो ज़रुरु एक दिन मेरी जैसी बन जाओगी

Sama:badi अम्मी पर आप पहले निक़ाब ज़्यादा ढीले और बड़े पहनती थी जिसमे आपके बदन का कोई हिस्सा वजे नहीं हो पर आप आज कल थोड़े नए अंदाज़ क पहन ने लगी

Hooriya:beti अब शमशेर ने ज़िद्द कर क सिल्वा डाई काम से काम घर में तो पहन हे सकती हु न

Sama:han बड़ी अम्मी अब घर में तो आप चैन को सास लेने दीजिये अपने बदन को

Hooriya:man me)q न कुछ और कपडे सिल्वा लू और शमशेर को अपने हुस्न क जलवे दिखा कर पागल कर दू

भूरिया अपने हे सोच पर लज्जा जाती है

Sama:kya सोच रहे थे बड़ी अम्मी

Hooriya:mai सोच रही थी कुछ नए कपडे सिल्वा लू

Sama:isme सोचना क्या बड़ी अम्मी मई भेज दूंगी दरजी खला को

Hooriya:theek है भेज देना

समां थोड़ी देर अपने बड़ी अम्मी क साथ बैठ कर बाट करती रहती है फिर चली जाती है समां अपने आप सोचती रहती क है आखिर क्या बात है जो शमशेर और भूरिया को बात करने क लये महल से दूर जाना हुआ ऐसी क्या बात है जिस वजह से शमशेर जो पारस छोर कर जाने वाला था अचानक ख़ुशी ख़ुशी रुक गया और उसके पीछे की वजह सुल्तान को गलत बताया गया

Sama:man me)Jo भी छिपा रही है आप बड़ी अम्मी मई इन सब क पीछे की वजह जान कर रहूंगी

समां सीधा अपने अम्मी यानि क सुल्तान की दूसरी बीवी नाज़ बेगम क हुजरे में जाती है और वह नाज़ क साथ साथ रज़िया बेगम और मुस्कान बेगम भी बैठी थी

Sama:Salam आप सब एक साथ बिलकुल बहाने लगती हो कौन कहेगा क आप सब सौतने हो

Naaz:aajao बेटी तुमने दुरुस्त कहा हम सब सौतने नहीं बहने हे है

Sama:kya बाटे हो रही अम्मी जान

Naaz:beti तुम तो जानती हो सल्तनत पर कितनी बड़ी मुसीबत आगयी है शमशेर क पारस छोड़ने क फैसले से

Razia:Han बेटी समां हम तीनो यही बाटे कर रहे थे क अब सुल्तान बन ने क हक़दार तो बास शहज़ादे शान है

Naaz:razia तुम को पता हे है शहज़ादे शान उस शराबी शमशेर जो अपने राते अक्सर कोठो पर गुज़रता है कही बेहतर है

Sama:aap सब को अब ये बाते करने का कोई फायदा नहीं क्यू क अब शमशेर भाईजान ने पारस नहीं छोड़ने का फैसला क्या है

Naaz:kya ?

चौकते हुए अपने बेटी समां से पूछती है

Sama:aapne ठीक सुना अम्मी शमशेर भाईजान अपने महल में छुपे भागी क़ातिल को ढूंढ़ने क लये ये सब नेटल क्या था

Naaz:kya बक रही हो तुम वो तो आज जाने वाला था कौन कहा तुम्हे ये बात

Sama:ammi जान खुद सुल्तान ने कहा अब्बा जान ने कहा

नाज़ को जैसे झटका लगता है और उसके ख्वाब अपने बेटे को सुल्तान बनाने का टूट जाता है

Naaz:man me)Is भूरिया की चल है कोई न कोई न उसने मुझे कभी तख़्त पर बैठने दी न हे मेरे बेटे शान को तख़्त पर बैठने देगी

Razia:Sama ये तो अछि बात है ऐसे हमारे सल्तनत बहुत से परेशानिओ से बच गया

Muskan:Kya ख़ाक परेशानिओ से बच गए वो शराबी कबाबी शमशेर सुल्तान बन ने क बाद पता नहीं कितनी ऐयाशिए करेगा

Razia:muskan ये भी तो हो सकता है क शमशेर को ज़िम्मेदारी देने से अपनी बुरी आदतों पर काबू प् ले

Muskan:hone को तो कुछ भी हो सकता है

Naaz:man me)ab वही होगा जो मई चाहूंगी मेरे बेटे शान को सुल्तान बन ने से कोई नहीं रोक सकता

Sama:theek है आप सब बाते कीजिये मई चलती हु

समां वह से चली जाती है और सोच में पड़ी रहती है क आखिर भूरिया की सच्चाई तक कैसे pahuche,sochte हुए वो दरजी क पास जाती है और दरजी खला को कह देती है क मल्लिका इ जहाँ कुछ कपडे सिलवाना चाहती है

इधर भूरिया अपने बिस्तर पर उल्टा लेती थी और अपने बेटे शमशेर को याद कर रही थी

Hooriya:man me)kaise शमशेर मुझे हर वक़्त अपने बहो में ले लेता है जैसे मई उसकी अम्मी नहीं दुल्हन हु पता नहीं क्या हाल करेगा मेरा अब तो खुलेआम मेरे साथ सोने की ज़िद्द कर रहा है

भूरिया अपने छूट को बिस्तर पर रगड़ रही थी और एक तकिये से अपने बड़े दूध को दबा क घिस रही थी और तभी उसे अहसास होता है क उसके छूट गीली हो गई

Hooriya:man me)haay ये में सोच कर हे गीली हो गई फिर से नहाना पड़ेगा

भूरिया को तभी उसके कान में किसी की आवाज़ आती है

"मल्लिआ इ जहाँ क्या मई अंदर आजौ"

"कौन हो "

"मल्लिका जहाँ मई दरजी "

"ाजैये दरजी खला बहुत जल्द आगये"

भूरिया अपने नापी दरजी खला को देती है और कुछ नए कपडे सिलवाने की बात करती है

दरजी khala:Kya बात है मल्लिका आज कल आप बहुत जल्दी जल्दी कपडे सिल्वा रही है लगता है सुल्तान का हुक्म है

Hooriya:ab तक हुक्म पर चलती थी दरजी खला अब ये प्यार hai...shamshera का

और धीरे से शमशेर कहती है जिसे दरजी खला सुन नहीं पति

Hooriya:thode कैसे हुए होने चैहिये छाती से और पीछे से और कुछ खुले गले क यहाँ तक

भूरिया अपना एक ऊँगली अपने दोनों दूध क दरमियान रख कर दरजी खला को बताती है

दरजी khala:Kya सच में आप ऐसे कपडे पहन सकोगी मल्लिका आप तो सर. से पेअर तक अपने आप को घर में भी धक् कर रखती थी

Hooriya:waqt और हालत क साथ इंसान को बदलना चाहिए और वैसे भी घर में पहूँगी बास

दरजी khala:lagta है सुल्तान को घायल करने का इरादा है

Hooriya:man me)Ghayal तो करना चाहती हु अपने हुस्न से पर सुल्तान को नहीं अपने बेटे शमशेर को

भूरिया अपनी बात सोचते हुए मुस्कुरा रही थी और दरजी खला को लगा वो उनके बातो से शर्मा रही है

दरजी khala:theek है मल्लिका ेजहाँ आप जैसा चाहती है वैसा हे आपको कपडे मिलेंगे अब मई चलती हु

Hooriya:Umeed करती हु आप मेरा साथ डोज मेरे हमसफ़र को खुश करने में

दरजी khala:Mai सब समझ गई अब आप मेरे कारीगरी देखना कैसे आपको देख कर आपका हमसफ़र लट्टू नहीं होता है

Hooriya:aapko इसका इनाम मिलेगा अगर वो खुश हुए तो

Hooriya:man me)Dekhtu हु शहज़ादे शमशेर कैसे तुम मुझे छोर कर किसी और पर आँख भी उठा क देखते हो

दरजी खला ख़ुशी ख़ुशी चली जाती है और भूरिया ऐसे हे अपने ख्वाबो की दुन्या में खो जाती है कब शाम होती है फिर रात पता हे नहीं चलता

पारस में रात हो रही थी और बाजार की भीड़ से और शोर से पारस क बाजार अब शांत हो गया और खली लोग अपने अपने घर लौट रहे थे पारस क महल में सुल्तान मेरे वाहिद और उनकी राणीअ अपने अपने हुजरे में थी महल क चारो ओरे पहरेदाद मुश्तैदी से अपना राज्य की रखवाली कर रहे थे जगह जगह पर मशाल जल रहे थे जो रात क अँधेरे और महल की खूबसूरत नक़्क़ाशी को और भी खूबसूरत बना रहे थे दूर अँधेरे को चीयर कर कुछ मशाले महल की तरफ बढ़ रही थी कुछ सिपाही आगे आकर महल क दरवाज़े पर अपने तलवार निकले खड़े हो जाते है और वो घुड़सवार आगे की तरफ आते है तभी एक सिपाही कहता है

"रास्ता छोर दे ये हमारे शहज़ादे शमशेर है"

सभी को ये बात समझ आती है क शमशेर आरहा है अपने सिपाहीओं क साथ और वो महल क मुख्या द्वार को खोल देते है और शमशेर अपने सिपाहीओं क साथ घोड़ो पर सवार महल क मुख्या द्वार से अंदर आता है और मैदान में आकर अपने घोड़ो को रोक कर

Shamshera:sipahio आज का दिन हम शुंग का पता तो नहीं ढूंढ पाए पर जो सुराग मिला है उस से उम्मीद है क हम बहुत जल्द शुंग को उसके किये सजा देंगे ..अब जाओ आराम करो कल सुबह दरबार में मिलते है

शमशेर अपना घोडा ले जा कर बांधता है और महल क अंदर आने लगता है महल में आते हुए उसे भूरिया दिखाई देती जो चलते हुए जा रही थी अपने हुजरे क तरफ



भूरिया क दोनों गांड बड़े गेंद की तरह उछाल रहे रहे जिसे शमशेर देख रह नहीं पता और अपने अम्मी क पीछे पीछे चलने लगता है महल बहुत बड़ा था इसलिए गलियारे से चलते हुए दोनों जा रहे थे आगे भूरिया पीछे शमशेर तभी भूरिया को किसी की आहात सुनाई देती है और वो पीछे मुड़ती है

और शमशेर को देख

"तुम भी न शहज़ादे मई तो दर गई थी"

शमशेर चलते हुए आता है अपने अम्मी क पास

"अम्मी जान मेरे अलावा आपका और कौन पीछा कर सकता है"

शमशेर भूरिया को आकर अपने बाहो क गिरफ्त में ले लेता है

Hooriya:umm छोरो न यहाँ कोई देख लेगा तो

भूरिया शमशेर को दोनों हाथ से धकेलती है और शमशेर पीछे हैट जाता है

Shamshera:achha हम से ताक़त आज़मा रही हो अभी बताता हु



शमशेर भूरिया क निक़ाब को खीचता है और भूरिया उसके करीब खींची आजाती है शमशेर आव देखता है नै तव और अपने अम्मी जो अभी अपने चेहरे पर निक़ाब लगाई थी बिना निक़ाब हटाए उसके होठो पर अपने होठ रख देता है

"उफ़ अम्मी जान आपकी चाल ऐसी है क मेरा खड़ा हो जाता है उम्म्म्महा"

भूरिया को इसकी उम्मीद नहीं थी क शमशेर हुजरे क बहार हे बिना डरे उसे पकड़ कर चुम लेगा

Hooriya:umm छोरो

भूरिया का बदन पूरा ठंडा हो जाता है डर और उत्तेजना से शमशेर अपने अम्मी क होठ पर अपने होठ निक़ाब क ऊपर से हे रख कर इतना गरम हो गया था क उसका लैंड सर उठा कर खड़ा था

शमशेर:

"जो तेरे गुलाबी लैब मेरे लबो को छू जाये"

"मेरे रूह का मिलान तेरे रूह से हो जाये"

"ज़माने की साज़िशों से बेपरवाह हो जाये"

"मेरे ख्वाब कुछ देर तेरी बहो में सो जाये"

"मिटा कर फासले हम प्यार में खो जाये"

"आ कुछ पल क लये एक दूजे क हो जाये"

शमशेर ये कह कर भूरिया क आखो में देखता है और भूरिया भी उसे देखती है



Hooriya:bass शमशेर अगर कोई देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी अब मई चलती हु

शमशेर अपने अम्मी को अपने गिरफ्त से छोर देता है और भूरिया जाने लगती है

Shamshera:kab औ आप क पास ये नहीं बताओगी

Hooriya:Jab सब सो जाये पर हो सकता है आज सुल्तान आजायेंगे

ये कह कर भूरिया जाने लगती है और सुल्तान का नाम सुन कर शमशेर परेशां हो जाता है शमशेर वह से सीधा अपने हुजरे में जाता है और नाहा धो कर अचे कपडे पहनता है फिर इतर लगता है फिर कनीज़ उसके लिए खाना लती है वो खा लेता है और इंतज़ार करने लगता है उस घडी का जब वो अपने अम्मी जान क कक्षा में जायेगा मिलने

आज दोनों माँ बेटे अपने अपने हुजरे में बैठ कर अपने प्यार से मिलने को बेकरार थे और उनका एक एक पल भरी हो रहा था

भूरिया भी अपना खाना पीना खा कर नहाती है और अपने आप को सवार कर अपने बेटे अपने आशिके का इंतज़ार करने लगती है

Hooriya:man में) पता नहीं कब आएगा शमशेर पर कही सुल्तान आगये तो क्या जवाब दूंगी

शमशेर अपने हुजरे में इधर से उधर टहल रहा था ऐसा वो तब तक करता जब तक आधी रात नहीं होती और महल में एक सन्नाटा छ जाता है ,शमशेर अपने आपको देखते हुए मुस्कुराता है और चल पड़ता है अपने मेहबूबा से मिलने क लये हुजरे से जैसे वो निकलता है तो उसकी दोनों कनीज़ जो हुजरे क बहार होती थी वो देख कर सोच में पद जाती है क शहज़ादे इतनी रात को बन थान कर कहा जा रहे है ,शमशेर धीरे धीरे अपने माँ क हुजरे तक पहुँचता है जहा पर आसपास कई सैनिक थे और ठीक दरवाज़े पैर दो दसिआ कड़ी thi,shamshera अपने अम्मी और पारस सल्तनत की की सुल्ताना मल्लिका इ जहाँ क हुजरे क सामने जाता है और बिना आवाज़ लगाए अंदर जाने लगता है

Kaneez:Gustakhi मुआफ शहज़ादे पर आप बिना मल्लिका इ जहाँ की इजाज़त क अंदर नहीं जा सकते

Shamshera:kaneez मल्लिका इ जहाँ वो तुम्हारे लये है मेरी अम्मी जान है ..ये लो खुश रहो

शमशेर अपने गले से एक बेशकीमती मोती की माला निकल कर उस कनीज़ को दे देता है

Shamshera:ab अपना मुँह बंद रखना

कनीज़ अपना सर झुका लेती है और शमशेर अंदर जाता है और सीधा सोने वाले कक्षा में पहुँचता है और परदे को हटाता है तो देखता है उसकी अम्मी मल्लिका भूरिया पेट क बल बिस्तर पर लेती है



भूरिया अपने बिस्तर पर लेती रही उसका बुरखा उसके खूबसूरत और चिकने पेअर पर ऊपर चढ़ा हुआ था जिसके उसकी चिकनी पिण्डलिया दिख रही थी शमशेर वही खड़ा हो कर अपने अम्मी क भरे हुए भरी जिस्म का जायज़ा ले रहा था

Shamshera:man me)kya भरपूर माल हो अम्मी जान तुम्हे छोड़ कर तो में निहाल हो जाऊंगा

भूरिया अभी जगी हे थी पर उसे हल्का नींद आगे थी जिस वजह से शमशेर क आने की आहत न सुनी पर जैसे हे उसे इस बात का अहसास होता है क पीछे कोई खड़ा है वो उठ कर बैठ जाती है और उसकी नज़र सीधा शमशेर से टकराती है

Hooriya:tummm

Shamshera:to फिर जान इ मन किसके इंतज़ार में पलके बिछाई हो

भूरिया को जैसे हे ख्याल अत है उसका निक़ाब ऊपर को उठा है वो अपने हाथ से अपने पेअर को ढकने लग जाती है

शमशेर जा कर कुर्सी पर बैठ जाता है और भूरिया को देखते हुए

"लगता है तुम्हारे पास दो डिल है अम्मी जान प्यार तो मुझसे करती हो इंतज़ार किसी और का"

"शमशेर कुछ भी मत बोलो तुम जानते हो मई सिर्फ तुमसे प्यार करती हु"

"तो फिर क्यू सुल्तान क इंतज़ार में थे"

"नहीं वो तो तुम बिना इजाज़त क अंदर आगये इसलिए मुझे लगा"

"ाचा जी सुल्तान बिना इजाज़त क आ सकते है मई नहीं"

भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे को प्यार से देखती है और अपने दोनों बहो को फैला कर अपने बेटे को बिस्तर पर बुलाती है अब भला शमशेर कैसे ये मौक़ा छोरता वो हड़बड़ा कर उठ जाता है और सीधा अपने अम्मी क बगल में बैठ कर अपने बाहो क क़ैद में अपने अम्मी जान को ले लेता है

"उफ़ आराम से बीटा "

"अम्मी जान जब आप जैसी माल हो तो आराम हराम है"

भूरिया चाहती तो थी क वो शमशेर से रिश्ता बनाये एक शौहर बीवी वाला पर अब भी कुछ झिझक उसके अंदर थी वो उठ कर कड़ी होती है

"रुको मई पानी पी कर आई"

भूरिया उठ कर जाने लगती है और शमशेर वही बैठा रह जाता है भूरिया पानी पे कर आकर वह पर बैठी जहा पर पहले शमशेर था शमशेर अब भी बिस्तर पर बैठा था



भूरिया जैसे शमशेर को अपने बदन से ललचा रही थी शमशेर अपनी अम्मी क भरी दूध और गांड देख मचल रहा था जिसे सुल्ताना भूरिया बखूबी समझ रही थी

Shamshera:ammi जान क्या अपने मुझे तड़पने की कसम खाई हो

Hooriya:ab क्या हुआ मेरे भोले सनम

Shamshera:mujhse दूर क्यू जा कर बैठ गई

भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे क मासूमियत और प्यार पर खुश होती है

Hooriya:kya हुआ कौन सा कोसो दूर हो वह से मई नहीं दिख रही हु क्या अपने आशिके को?



भूरिया एक हलकी से अंगड़ाई लेती है जिस से उसके निक़ाब क आगे क बटन कास जाते है और उसके दोनों दूध बहार आने को बेताब दिखने लगते है

Shamshera:ammi जान आपके इतने बड़े है कही आपका निक़ाब क हुक तोड़ कर न बहार आजाये

Hooriya:hatt बदमाश..

भूरिया हस्ती है और एक ऐडा से अपने बेटे शमशेर को देखती है

Hooriya:kya हुआ इतनी देर कहा लगा दी

भूरिया बात को पलट ते हुए कहती है

Shamshera:bass शुंग की छान बीन में था थक्क गया यहाँ आया तो आप भी दूर दूर जा रही हो थकावट कैसे मिटेगी

Hooriya:islye तो कहती थी शादी कर लो

भूरिया अपने आशिके बेटे को छेरते हुए कहती है

Shamshera:aap कर लो अभी कर lunga..par आपको तो बास सुल्तान की हवस मिटानी है मेरी परवाह कहा और आज शायद आपकी हे बरी थी सुल्तान क साथ सोने की

शमशेर ये कह कर अपना चेहरा भूरिया क तरफ से नाराज़ हो कर फेर लेता है

जिसे भूरिया भाप जाती है और चलते हुए अपने बेटे क पास आकर बैठ जाती है

Hooriya:mere नूर इ नज़र शहज़ादे मेरे आशिक़ मेरे जान नाराज़ क्यू हो गए

Shamshera:aapne जब से कहा है सुल्तान आएंगे आज रात आपके पास तब से मेरा दिमाग ख़राब हो रहा है

Hooriya:mere इश्क़ तुम हो सुल्तान का इंतज़ार करना मेरी मज़बूरी है वो आज दिन में आये थे

Shamshera:Kuch उल्टा सीधा तो नहीं कर लिए न

Hooriya:pagal ..मई ऐसा कर सकती हु

Shamshera:han खुद तो चाहती हो मई किसी औरत को देखु तक नहीं आपका छोर कर वैसे हे अगर आप ने अब्बा जान क साथ हमबिस्तरी की तो फिर ..

भूरिया क आखो में ासु भर्र गए थे ये ासु इसलिए था क वो कितनी खुशनसीब है जो उस से कोई इतना प्यार करता है दूसरी वजह ये थी क वो न चाहते हुए भी सुल्तान क चुंगल में फांसी थी और क्यू क वो भूरिया का शौहर था उसको वो मन भी नहीं कर सकती थी

भूरिया शमशेर का हाथ अपने बाहो में ले कर

"मुझे मुआफ कर दो शमशेर"

"आपने ऐसा क्या कर दिया जो .."

"शमशेर मई तुमसे कुछ छुपाना नहीं छाती पर आज सुल्तान कई दिनों बाद आये थे और वो मेरे साथ हमबिस्तरी करने की ज़िद्द करने लगे और मेरे गले लग गए "

"अम्मी जान आपके तरफ कोई आँख उठा कर देखे तो उसका क़त्ल कर दूंगा चाहे वो मेरा बाप हे क्यू न हो "

"मुझे मुआफ कर दो बीटा मई उनसे दूर होती रही पर वो मुझे गले लगा लये और कहने लगे आज रात आएंगे मेरे पास बहुत दिन हो गए "

ये कहते हुए भूरिया क आखो से अब ासु बहने लगते है और शमशेर से रहा नहीं जाता और वो अपने हाथो से अपने अम्मी क ासु को पोछते हुए

"अम्मी जान मुझे पता है आप मुझे कभी धोका नहीं दे सकती पर हमे कुछ न कुछ करना होगा "

तो बे कॉन्टिनोएड.....
 
अपडेट 164

अम्मी जान आपके तरफ कोई आँख उठा कर देखे तो उसका क़त्ल कर दूंगा चाहे वो मेरा बाप हे क्यू न हो "

"मुझे मुआफ कर दो बीटा मई उनसे दूर होती रही पर वो मुझे गले लगा लये और कहने लगे आज रात आएंगे मेरे पास बहुत दिन हो गए "

ये कहते हुए भूरिया क आखो से अब ासु बहने लगते है और शमशेर से रहा नहीं जाता और वो अपने हाथो से अपने अम्मी क ासु को पोछते हुए

"अम्मी जान मुझे पता है आप मुझे कभी धोका नहीं दे सकती पर हमे कुछ न कुछ करना होगा "

Hooriya:beta क्या करोगे सुल्तान तो है मेरे शौहर हे उनको साफ़ मन भी नहीं कर सकती

Shamshera:ammi जान वो शौहर सिर्फ आपका नाम का है आपने पूरी ज़िन्दगी सुल्तान की खिदमत की बदले में क्या दया उन्होंने सिर्फ और सिर्फ रुस्वाई

Hooriya:tum ठीक कह रहे हो बीटा सुल्तान ने तो जो मेरे साथ क्या है वो मई भूल नहीं सकती

Shamshera:wo सिर्फ आपको मुहब्बत क नाम पर छाला है आपके क़ाबिलियत का फायदा उठाया है उनको पता था क आप से बेहतर पारस की सल्तनत को कोई नहीं संभल सकता यही वजह है आपको सुल्ताना बनाये उनके गैरमौजूदगी में आप पारस का हर काम करती रही सल्तनत को आपने अपनी म्हणत से सींचा है सिर्फ जुंग जीत जाने से कोई सल्तनत मजबूत नहीं होती जब तक वह की एवं सुल्तान पर ऐतबार नहीं करने लगे

Hooriya:chhoro जो मैंने क्या अपना शौहर समझ कर क्या पर दुःख इस बात की है उनके हर गलत काम को नज़रअंदाज़ करने क बावजूद उनके डिल में मेरे लिए मुहब्बत नहीं है

Shamshera:mujhe ये बात पता थी वो आप से ज़्यादा अपनी छोटी बीवी मुस्कान को चाहते है

Hooriya:par तुम्हे ये बात कैसे पता शमशेर?

Shamshera:ammi जान अब हम दो जिस्म एक जान हो गए तो मई नहीं चाहता क हमारे दरमियान कोई बात छुपी रहे

Hooriya:Han मेरे सरताज अब से हमे एक दूसरे का सहारा होना है और ज़िन्दगी को मरने से पहले जीनी है

Shamshera:ammi जान मुझे ये बात देवरानी खला ने बताई थी क आप परेशां है क्यू क सुल्तान की बाते आप सुन ली जो वो मुस्कान बेगम क साथ कर रहे थी

भूरिया का ये बात सुन कर मुँह खुला का खुला रह जाता है

Hooriya:dhokebaz तो उस कामिनी देवरानी ने मेरे राज़ तुम्हे बतादि इसलिए तुम शेर बन कर इतनी हिम्मत से कहते थे क सुल्तान से ज़्यादा तुम मुझे प्यार करते हो ..ये तो धोकेबाज़ी है..

Shamshera:ammi जान ..भले से मैंने लाखो चल चली आपको पाने क लये पर हर धोकेबाज़ी मैंने सिर्फ अपने सच्चे इश्क़ को पाने क लये क्या

Hooriya:hato मई बात नहीं करती उस देवरानी की बची ने पता नहीं क्या क्या बताया

Shamshera:ammi जान देवरानी खला आपके दुःख को पहले दिन से हे समझ गई थी क आपके शौहर अआप्को सच्ची ख़ुशी नहीं दे पते है और उन्होंने मुझे बहुत हिम्मत दी आपके प्यार को पाने में

Hooriya:Pata नहीं क्या क्या बता दिया उसने तुमको और क्या बता दिया

Shamshera:sab कुछ जो उस रात सुल्तान और मुस्कान बेगम क बीच हुई

Hooriya:Sab कुछ ?

भूरिया हैरत से अपने बेटे आशिके को देखती है

Shamshera:han सब कुछ अब आप खुद बताएंगी या मई बता दू ..इतना मत शादमो मई खा नहीं जाऊंगा

Hooriya:han खाने वाली नज़र से देखते हो तो क्या पता खा jao..waise उस दिन जब में अपने कान से सुल्तान को मेरी बुराई करते हुए सुनी तो मुझे इतना दुःख हुआ क मई कई दिनों तक रोइ खाना नहीं खा पति थी

Shamshera:acha कौन सी बात इतनी बुरी लग गई थी आपको

Hooriya:Jis सुल्तान क लये में दिन रात दवा करती थी जिस सुल्तान ने मेरे बाद 3 शादीअ और की पर में उफ़ तक नहीं boli,sultan में हराम में 150 क ऊपर लौंडिया रख ली अपने अय्याशी क लये मई कुछ नहीं बोली

भूरिया ये कहते हुए शमशेर क कंधे पर अपना सर रख कर अपने हाथ से शमशेर क हाथ को पकड़ लेती है

Hooriya:sultan हर रोज़ मेरे पास शराब क नशे में आते थे और अपनी मनमानी करते थे मेरी परवाह हे नहीं कए फिर भी मई उनके और उनके सल्तनत को हर मुमकिन कोशिश कर आगे बढाती रही अगर वो शख्स ये कहे क मई बदसूरत हु मोती हु बूढी हु तो क्या मुझे बुरा नहीं लगेगा?

Shamshera:lagega हे उस बूढ़े सुल्तान को आपके खूबसूरती आपकी जवानी और आपके भरी बदन की क़ीमत का अहसास नहीं ,और क्या कहा उसने और

Hooriya:kya कहेगा यही क वो मुझे उठा नहीं सकते इतनी भरी हु

ये बोल कर भूरिया रुआँसी हो जाती है और शमशेर अपने अम्मी क आखो में देखते हुए

Shamshera:ammi जान आप मोती वही से हो जहा से एक औरत को होना चाहिए रही बात उठाने की तो उस बूढ़े सुल्तान में इतना डैम नहीं जो आप जैसे भरी माल को उठा ले तो आपको खुश क्या ख़ाक करेगा कमी सुल्तान में है आप में नहीं

hooriya:shukria बीटा मुझे समझने क लये मेरी जज़्बात की क़द्र करने क लये

Shamshera:ammi जान इतना दूर से शुकरिअ थोड़ा पास आओ इतना दरोगी तो प्यार कैसे करोगी



शमशेर भूरिया को अपने तरफ खींचता है और भूरिया हस्ते हुए खींची चली आती है

Shamshera:aap देखो कितनी हलकी हो इतनी आसानी से खींची आगे

Hooriya:han उस बूढ़े सुल्तान में डैम नहीं क मुझे उठा सके

Shamshera:aap कहो तो मई आपको उठा क दिखाऊ

Hooriya:koi ज़रूरत नहीं है इतनी रात में पहलवानी दिखने की वैसे भी मई दिन में देखि हु कैसे तुमने एक बार में हे मुझे ऊपर उठा लिए थे

Shamshera:to आप डरने क्यू लगी थी क्या आपको ाचा नहीं लग रहा था

Hooriya:mai सोची कही तुम लड़खड़ा गए तो गिरा डोज

भूरिया शरारती अंदाज़ में शमशेर को छेरते हुए कहती है

Shamshera:O सुल्ताना बास करो मई सुल्तान नहीं आपका शौहर तो है हे डेढ़ फुटिया उस से नहीं उठ ता इसका मतलब ये नहीं क आपका वज़न मई नहीं उठा सकता

Hooriya:acha जी आप तो बड़े शेर हो न

Shamshera:han मेरी जान इस शेर को भूक लगी है खाने दो

Hooriya:mai कोई हिरन नहीं जो शिकार कर लो मई भी शेरनी हु इसलिए ढूंढो कोई

Shamshera:mai शेर हु तो सुल्तान क्या है?

Hooriya:sultan गधा है उसकी तो लम्बाई भी मुझसे नहीं मिलती पता नहीं क्या समझ क मेरा रिश्ता कर डाई

Shamshera:Gadha हाहाहा सही कहा जो आप जैसी हसीं औरत को खो दे वो भी अपने बेटे क हाथो वो गधा हे होगा वैसे मेरी लम्बाई पसंद है न

शमशेर अपने लैंड की तरफ इशारा करता है और भूरिया देख तो लेती है पर अनजान बनते हुए

Hooriya:han तुम तो सवा 6 फ़ीट क हो वो सुल्तान कहा 5.10 का 57 साल का बूढ़ा और बुराई करता है मेरी अय्याश नालायक़ गधा

Shamshera:bass बास अम्मी जान क्या आज हे पूरी गालीअ निकल डौगी कल क लये भी रखो कुछ ,वैसे में अपनी लम्बाई नहीं अपने इसके लम्बाई की बात कर रहा था

Hooriya:chup kar..wo तो सुल्तान गधे क वजह से मेरा डिल टूटा है अगर वो मेरी ज़िन्दगी में न हो कर कोई ाचा शौहर होता जो मेरी क़द्र करता तो आज शायद मुझे अपने हे बेटे से मुहब्बत नहीं होती

Shamshera:ammi जान जो होता है अचे क लये होता है वैसे क्या आपको लगता है क कोई मुझसे ज़्यादा आपसे मुहब्बत कर sakega?kya अफ़सोस है आपको इस बात पर ?

Hooriya:Nahi मेरी जान मुझे रत्ती बराबर अफ़सोस नहीं क्यू क मैंने तुमसे इश्क़ डिल से की हु और शायद वो इश्क़ का तूफ़ान तुम्हारे सिवा कोई और नहीं उठा सकता था मेरे डिल में पर

Shamshera:par क्या अम्मी जान

Hooriya:tumhe पता है सुल्तान क अलावा खंडन क हर लोग और यहाँ की एवं मुझ पर कितना भरोसा करते है आज तुम्हारी दादी भी कह रही थी क उनको मेरे पाकीज़गी पर पूरा भरोसा है और में कभी गलत नहीं कर सकती ,समां भी यही बात कर रही थी क वो मेरे नक्से कदम पर चलना चाहती है क्या इन सब का भरोसा नहीं तोड़ रही मई

Shamshera:ammi जान आप इतने सालो से परेशां रही और घुट घुट कर ज़िन्दगी जिए क्या इनमे से कोई आपके पास आया और आपके दुःख को दूर करने का सोचा?

Hooriya:nahi कोई नहीं

Shamshera:jab उनको आपके दुःख से मतलब नहीं तो अगर आप खुश हो जाओ कुछ कर क जो उनके नज़र में गलत है पर आपके नज़र में नहीं तो क्या आप को लोगो की परवाह करनी चाहिए?

Hooriya:bilkul नहीं

Shamshera:aur वैसे भी हमारा रिश्ता राज़ हे रहेगा उन्हें कभी पता हे नहीं चलेगा

Hooriya:tum ठीक कहते हो मई क्यू सोचु उनके लये जो मेरे लये कभी नहीं सोचे जो बची खुची ज़िन्दगी है उसको भी मई लोगो की डर क वजह से खोना नहीं चाहती

Shamshera:sab अपने ज़िन्दगी ऐश से जीते है और आपको भी हक़ है वैसे समां तो भोली है बहुत मानती है मुझे

Hooriya:ab आपकी बहिन समां अपने भाबी पर नज़र रखने लगी है और हर बात पे गौर करती है

Shamshera:kaun भाबी?

Hooriya:mai भाबी और कौन है तुम्हारी

ये कहते हुए भूरिया अपने बेटे क सामने अपने डिल की बात रख कर शर्मा जाती है

Shamshera:aay है मेरी बेगम शर्माती भी है



भूरिया अपना सर निचे कए हल्का सा मुस्कुरा रही थी जिसे देख शमशेर अपना लैंड मसल देता है

Shamshera:waise क्या कहा मेरी बहिन ने मेरी बेगम को

Hooriya:wo मुझे कह रही थी..

शमशेर बीच में काटते हुए

Shamshera:tumhe कह रही थी तुम मेरी बेगम हो?

Hooriya:han हूँ अब सुनो वो जानती है क मई और तुम नदी तात पर मिले आज पर सुल्तान से हमने ये बात छुपाई ,समां ज़िद्द पकड़ ली जानने की तो मैंने बता दया क सुल्तान को अगर कोई और वजह बताते तो वो नहीं मानते इसलिए हमे झूट बोलै

Shamshera:Matlab ये क समां हम पर शक कर चुकी होगी और उसे जानना होगा क हम झूट क्यू बोले

Hooriya:kahi वो किसी को न बता दे

Shamshera:nahi बताएगी वो तेज़ दिमाग की तो है पर डिल की बहुत अछि है काम से काम वो अपने अम्मी नाज़ क जैसी तो नहीं

Hooriya:naaz की तो बात हे मत करो वो तो बास मुझसे बदला लेना चाहती है और शान को सुल्तान बनाना चाहती है

Shamshera:Koi आपका कुछ नहीं कर सकता भरोसा रखो मुझ पर

Hooriya:bass भरोसा कर के हे हर चीज़ देव पर लगा दी हु

Shamshera:tum कोई चीज़ हो तुम तो माल हो अम्मी जान

Hooriya:bhakk वैसे तुम्हारा डिल कब मुझपे आगया मई तो तुम्हारे सामने कभी बिना परदे क नहीं आती थी

Shamshera:ab प्यार होना होता है तो हो जाता है आपकी खूबसूरत आखे काफी है किसी भी जवान डिल को धड़कने क लये

Shamshera:man me)ammi जान कैसे बताऊ क एक दिन मैंने आपको और सुल्तान को चुदाई करते हुए देख लय था और आपके जिस्म देख कर में पागल हो गया था और उम्मीद मेरी तब जगी जब आप सुल्तान से और छोड़ना चाहते थे और वो फ़ारिग़ हो गए और आपको अधूरा छोर दया

Hooriya:hatt झूटी तारीफे मत करो

Shamshera:Aapke अंदर ऐसी कोई चीज़ नहीं जो खूबसूरत नहीं हो मेरी जान आओ मेरी बहो में मुझे प्यार कर लेने दो

शमशेर अपने अम्मी को अपने बाहो में भर कर अपने होठ अपने अम्मी क नाक पर रख चूमता है



"अम्मी जान उम्मा आपके इस नाक पर गुस्सा होता है हमेशा "

भूरिया अपने आखे बंद कर अपने नए आशिके प्रेमी की आशिके क मज़े ले रही थी और शमशेर क चौड़े छाती पर अपने हाथ फेरती है

"शुकरिअ मेरे शेर शमशेर मेरी ज़िन्दगी को फिर से सवारने क लये मुझे जीने की वजह देने क लये"



भूरिया अपने बेटे क नाक पर अपने होठ रख कर चूमता है और शमशेर इस बार ख़ुशी से झूम उठता है और अपने अम्मी को अपने बहो में समेटने लगता है

Shamshera:ye शेर अभी भूका है इसको कुछ खाना है उफ़ ये मुलायम गाल कितने प्यारे है

शमशेर अपने होठ अपने अम्मी क



मुलायम और चिकनी गाल पर रख कर चुम लेता है

Shamshera:ummhaa यह क्या टमाटर जैसे लाल गाल है

शमशेर अब अपने अम्मी क लाल गाल को अपने दांतो में पकड़ लेता है



Hooriya:uhmm छोरो न बीटा आह

शमशेर अपने दांतो से पकड़ कर खींचता है और अपने दन्त क निशान उनपर छोर देता है

Hooriya:ye क्या किया तुमने मई तुम्हे छोड़ूंगी नहीं

शमशेर भूरिया से दूर होते हुए खिसक रहा था पीछे से भूरिया बदले की आग में आगे बढ़ती गई और शमशेर क एक जांघ पर बैठ गई

भूरिया जैसे शमशेर पर टूट पड़ती है और शमशेर को दबोच कर उसके गाल पर अपने होठ रखते हुए अपने होठ खोलती है और अपने दांतो से शमशेर क गालो को पकड़ कर काटने लगती है इतने में शमशेर मौक़ा प् कर भूरिया को खींच कर अपने गॉड में ले लेता है



भूरिया अपने दांतो से अपने बेटे क गालो को पकड़ रही थी और उसका ज़ुबान बार बार अपने बेटे क गले से लग रहा था शमशेर को ऐसा लग रहा था जैसे उसकी माँ उसके गाल चाट रही है

Hooriya:Tum शेर हो तो मई भी शेरनी हु

Shamshera:sherni असली शेर को गुफा दिखा दी है ज़रा निचे देखो तुम कहा पर हो जानेमन



शमशेर क लैंड पर जो अभी आधा खड़ा था भूरिया की गांड डाब रही थी शमशेर ने अपने हाथो से भूरिया क कमर पर हाथ रख कर संभाला हुआ था

भूरिया अपने हारने पर गुस्सा होये या अपने बेटे क गॉड में बैठने से खुश उसे समझ नहीं आरहा था

Hooriya:ye तो तुम धोके से मुझे फसा लय

शमशेर अपने अम्मी क कमर में हाथ दाल कर ऊपर खींचता है और भूरिया की भरी गांड जैसे ऊपर की ओरे लैंड से घिसती है लौड़ा पुरे औकाद में आजाता है और भूरिया क गांड क दरार में फस्स जाता है भूरिया क मुँह से एक ज़ोर की आह निकलती है और वो आखे बंद कर लेती है

"अम्मी जान आप बिलकुल भरी नहीं हो आपके बैठने से मेरी गॉड में बहुत सुकून मिल रहा है ..आपको ाचा लग रहा है ?"

"हम्म्म आह हांजी ऐसा न करो आह हम्म"

भूरिया को अपने लैंड पर बिठाये शमशेर अपने लैंड को हल्का आगे पीछे कर रहा था और उसके रगड़ से भूरिया की छूट क दाने फड़फड़ाने लग जाते hai,hooriya ने कभी ख्वाब में नहीं सोचा था क वो अपने शौहर क अलावा किसी गैर मर्द को अपना चेहरा भी दिखाएगी कभी पर आज वो अपने हे बेटे क गॉड में बैठी थी और उसके भरी गांड को उसका बीटा अपने लौड़े से रगड़ मज़े ले रहा था और भूरिया की सिसकिया तेज़ होती जा रही थी

Shamshera:aah अम्मी जान क्या गद्देदार है आपके ये ज़ालिम गांड मेरे लैंड यह ये लो मेरा लैंड अहसास करो कितना तड़प रहा है आपके यद् में

Hooriya:chup कर इतनी गंदे लफ्ज़ न बोलो ाः हम्म्म छोरो न चुभ रहा है

Shamshera:ammi जान अब इस चुभन की आदत दाल लो मेरी दुल्हनिया

Hooriya:bhut जल्दबाज़ी में हो मई दुल्हन कब बानी तुम्हारी बीटा

Shamshera:jab से आप ने मेरे इश्क़ को क़ुबूल क्या अम्मी जान आप को मेरी दुल्हन बन क रहना है

Hooriya:ah नहीं जाने दो उफ़ दुल्हन नहीं छोरो मुझे जाने दो कोई आजायेगा

Shamshera:chup चाप बैठी रहो मेरी गॉड में शर्म हाय को छोर दो ज़िन्दगी में मज़े करने है तो

Hooriya:sultan आगये तो दरवाज़ा बंद कर दू छोर दो यह

Shamshera:meri अम्मी जान आपका आशिके इतना बेवक़ूफ़ नहीं है मैंने आते वक़्त हे दरवाज़ा बंद कर दया था

Hooriya:tum बहुत शातिर हो

Shamshera:aur आप मेरी पारी हो मेरी मेहबूबा अम्मी आपके बदन को देख बहुत तरसा हु तड़पा हु आप सज सवार क रहा करो

Hooriya:uff अब ये उम्र में क्या साजु

Shamshera:ammi जान बिना झुमके बिना लाली बिना काजल की दुल्हन भला कैसे दुल्हन लग सकती है आप मेरे लिए सजोगी सरोगी

Hooriya:ahmm ठीक है यह सजूंगी अपने बेटे क लये अब खुश अब छोरो

Shamshera:ammi जान आपको देख मेरे डिल में ख्याल अत है

"खुल्लम खुल्ला हम तेरे बुरखे में ढके बदन का जाम पिएंगे"

"तेरे इज़्ज़त को सब क सामने तर तर करेंगे"

"टेल लगा क पहले तुझको तैयार करेंगे

"फिर उंगलिअ दे कर तुझको बेकरार करेंगे"

"लुंड में अपने तुझको सवार करेंगे "

"फिर लैंड को तेरे आर पार करेंगे"

"कभी अंदर कभी बहार कर क तेरी पाकीज़ा छूट को निहाल करेंगे "

शमशेर ये कहते हुए अपने अम्मी क गांड की दरार में लैंड फसा कर हिला रहा था और अपने हाथ से कमर पर चला रहा था



भूरिया का तो हाल बेहाल था वो शर्म क मारे अपने दोनों हाथो से अपने चेहरे को धक् ली और उसके दिमाग में बार बार शमेशर की शायरी आरही थी

Shamshera:aay है मेरी दिलरुबा शर्मा गई

भूरिया अपने चेहरे को अभी भी ढकी हुई थी और उसके मुँह से बास सिसकी निकलती जब भी शमशेर अपना मोटा तगड़ा लैंड निचे से ऊपर की ओरे dhakelta,shamshera जनता था क उसकी अम्मी जो इतनी परहेज़गार औरत है उसका शर्माना लाज़मी है और इसलिए उसकी शर्म लाज को हटाना चाहता था,

शमशेर अभी अपने अम्मी भूरिया क कमर पर अपने हाथ फिर रहा था और जैसे हे शमशेर का हाथ भूरिया क नाभि क निचे गया भूरिया चहक उठी

"ाः बीटा न कर शहज़ादे मई तेरी अम्मी हु"

शमशेर अपने एक हाथ से भूरिया को दबोचे अपने लैंड पर बिठाये रहता है दूसरे हाथ से अपने अम्मी क पेट को सहलाते हुए निचे छूट क तरफ ले जाता है

Hooriya:aah हाथ हटा को बीटा वह नहीं ..हरगिज़ नहीं शहज़ादे

शमशेर क हाथ में लड़खड़ाहट थी क्यू क इस वक़्त उसके गॉड के कोई आम औरत नहीं पारस की सुल्ताना भूरिया थी जिसको देखने भर से लोग क़त्ल हो गए शमशेर हिम्मत कर क अपने अम्मी क छूट क तरफ हाथ बढ़ा रहा था क उसके हाथ पर कुछ महसूस हुआ जो चिकने पेट पर महसूस नहीं हुआ था

Shamshera:aah ये क्या खुर्बुरा और मुलायज़ सी चीज़ है अम्मी कही ये.

शमशेर एक दो बार उस पर हाथ फिरता है कपडे क ऊपर से भी उसके हाथ को ये समझ आजाती है क ये उसकी अम्मी क छूट क बाल है

भूरिया अपने आखो को दबा कर बंद कर लेती है और ज़ोर से चीखती है

"आआआआआह छ्हूओर दे बीटा ये गलतततत है शेताआआं कही क"

Shamshera:ammi जान क्या ये आपके झट है सुल्ताना भूरिया

शमशेर का हाथ ठीक छूट क ऊपर वाले हिस्से पर था और उसको अहसास करते हुए अपने माँ क छूट क बाल पर हाथ फिर रहा था शमशेर क पूछने पर भी भूरिया जवाब नहीं देती तो फिर से शमशेर अपने लैंड को ऊपर की ओरे अपने अम्मी क गांड में धक्का दे कर

Shamshera:ammi जान गलती से आपके छूट क बाल मेरे हाथ में आगये hai.ye आपके झात हे है न?

शमशेर अपने अम्मी को मजबूर कर देता है जवाब देने पर और तभी भूरिया क मुँह से बोल फुट पड़ते है

Hooriya:Ahmm हाँ

Shamshera:ammi जान बहुत मुलायम है दिखने में और प्यारे होंगे इन्हे काटना मत मेरा शेर इस जंगल की गुफा में घुसना चाहेगा

शमशेर एक और धक्का अपने लैंड का देता है और भूरिया भरी होने क बावजूद दो इंच ऊपर उछाल जाती है और खछ से तलवार की तरह भूरिया क गांड की गहरी दरार में घुस जाता है

Shamshera:aah मेरी दिलरुबा अम्मी जान

शमशेर अपने माँ की भरी गांड की लज्जत से मदहोश सा होता है और भूरिया अपने बेटे क भरी लैंड को महसूस करते हुए आखे बंद कर लेती है तभी भूरिया को अहसास होता है क शमशेर का हाथ ढीला हो गया और वो उठ कर भागती है और चार कदम जा कर पीछे मुद कर देखती है शमशेर होश में अत है तो देखता है उसकी अम्मी उसके हाथ से निकल गयी और वो अपने अम्मी की तरफ देखता है जो उसको हे देख रही थी शमशेर उठ खड़ा होता है

भूरिया की नज़र सीधा अपने बेटे क बड़े 9 इंच लम्बे 3 इंच मोठे लैंड पे जाती है जो पूरा अकड़ा हुआ था



भूरिया अपने बेटे क लैंड को देख ताजुब कर रही थी क ऐसा कैसे इतना बड़ा लैंड हो सकता है किसी इंसान का



शमशेर की अम्मी अपने बेटे क लौड़े को पाजामे क ऊपर से हे देख चौकटी है और अपने हाथ से अपने मुँह पर ढकते हुए "ओह्ह्ह इतना bada"shamshera अपने अम्मी को देख कर अपने आप को देखता है और अपने लैंड की उठान देख कर समझ जाता है उसकी अम्मी उसके लैंड की लम्बाई मोटाई देख कर हैरान है

Shamshera:kaha भाग रही हो अम्मी जान ये मेरे शेर को जगा कर

Hooriya:shamshera बीटा ये शेर नहीं बब्बर शेर है ऐसा कैसे इंसान का इतना बड़ा मोटा हो सकता है

Shamshera:lagta है अम्मी जान अब्बा जान का बहुत छोटा था

Hooriya:man में) उफ़ ये कपडे क ऊपर से इतना लम्बा मोटा है तो नंगा कितना खौफनाक होगा और ये मेरे अंदर जायेगा तो उफ़

भूरिया अपने बेटे क लैंड को देख कर पीछे कदम चल रही थी और शमशेर मुस्कुराता हुआ उसके पास आरहा था

Hooriya:beta रहने दीजिये न कही सुल्तान आजाएगे तो

Shamshera:Aajane दीजिये सुल्तान को आप सुल्तान से दर रही है या मेरे इस शेर से

Hooriya:dono से ,,मेरी बात मानो बीटा पीछे चले जाओ मत करो

भूरिया आज पहली बार अपने नए यार शमशेर से इतनी करीब हुई थी उसका हाल ऐसा था क वो छह रही थी क अपने बेटे का साथ दे पर अब भी कोई शर्म लाज हूरजहाँ बेगम क अंदर थी जो अपने बेटे को अपने बदन से खेलने पर लज्जा रही thi,shamshera धीरे धीरे भूरिया क करीब जाता है

"अम्मी जान अभी नहीं तो कभी नहीं मुझे आज हद्द से गुज़र जाने दो मेरी दिलरुबा बेगम"

शमशेर भूरिया क हाथ को पकड़ते हुए अपने अम्मी को अपने आग़ोश में भरने की कोशिश कर रहा था



भूरिया अपने बेटे से बचते हुए पीछे जा रही थी और अपने दोनों हाथो से अपने बदन को अपने बेटे से दूर कर रही थी

"शमशेर नही आज नहीं "

शमशेर अपने अम्मी क होठो पर ऊँगली रखते हुए कहता है "मेरी अम्मी जान आप से मई तहे डिल से मुहब्बत करता हु मुझसे इश्क़ इ जाम पीने दो तुम भी तो मुझे अपना यार अपना प्यार अपना मर्द मानती हो न "

"हाँ बीटा पर ये ग.."

"अम्मी जान कुछ गलत नहीं आप मेरी बेगम हो मेरी दुल्हन हो मेरी बहो में आजाओ मुझे जी भर क आपकी ख़ूबसूरती को देख लेने दो "

भूरिया शमशेर की बाते सुन कर खुश हो जाती है और रुक जाती है अब भूरिया भी तो अपने बेटे को प्यार करने लगी थी तो कैसे न उसकी बात मने

"मल्लिका इ जहाँ भूरिया मेरी आखो में देखिये आपको सिर्फ और सिर्फ मुहब्बत नज़र आएगा आपके आशिके लाखो होंगे पर जितनी मुहब्बत मैंने आपसे की है उतना न कोई किसी से क्या है न कोई करेगा ..अआप्के लाखो आशिके पर भरी है मेरा इश्क़ मेरा प्यार आपके लये अम्मी जान"

भूरिया का रोअम रोअम अपने बेटे क लये खिल जाता है और वो एक चाहत भरी निगाहो से अपने बेटे को देखने लगती है

शमशेर अपने अम्मी क खूबसूरत चेहरे को गौर से देखे जा रहा रहा और आज भूरिया भी उसे रोकना नहीं छह रही थी

Shamshera:ammi जान आपके ये गुलाबी गाल उफ़ कितने मुलायम है



"अम्मी जान आपके ये होठ किसी गुलाब क पंखुरे जैसे है इन्हे देख कर मेरा डिल तड़प उठता है इनके रस को चूसने क लये"

भूरिया अपने तारीफ सुन कर अपने आप पर फख्र महसूस कर रही थी और अपने आप को खुशनसीब समझ रही थी शमशेर जैसा आशिके प् कर

"अम्मी जान

मेरे होठो क करीब है होठ तेरे

ऐसे में शराफत का सवाल कहा

"करने दे जी भर क गुस्ताखिअ

क अब इजाज़त का सवाल कहा"

शमशेर ये शायरी कहते हुए अपने अम्मी क नाक पर अपने नाक रख कर रगड़ता है फिर निचे अपने मुँह को



भूरिया क दूध क दरमियान ऊपरी हिस्से पर रख कर निक़ाब क ऊपर से हे चूमता है

"आह राजा इतनी मुहब्बत करते हो हमे आज मेरे आशिके को इजाज़त है इस लैब को छूने की जिसको पारस में आज तक किसी गैर मर्द ने देखा तक नहीं"

भूरिया अपने बेटे क पीठ पर हाथ फेरते हुए मुस्कुरा रही थी

Shamshera:meri दिलरुबा मेरी अम्मी जान आप की मुस्कराहट इतनी प्यारी है क डिल बाघ बाघ हो जाता है मेरी जान



"उम्मा ये आपके सेब जैसे गाल को खा जाने का मन करता है है मेरी लैला"

भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे शहज़ादे शमशेर का साथ दे रही थी

Hooriya:q मेरे आशिक़ मजनू को सिर्फ मेरे गाल को खाने का मन करता है

shamshera:ammi जान आप जैसी शोख हसीना जिसके बदन का हर हिस्सा संगेमरमर सा चमकता हो उसको तो पूरा खा जाने का डिल करता है

शमशेर अपने अम्मी क हाथ को पकड़ कर चुम लेता है फिर अपने अम्मी क टमाटर से गाल को अपने होठ से चूमता

है "अम्मी जान खा जाऊंगा आपको"



अपने होठो से भूरिया सुल्ताना क गर्दन पर चूमता हज

"आह खा जाओ बीटा मैंने कब मन कए मेरे यार मेरे जिस्म पर अब सिर्फ तुम्हारा हक़ है मेरे सरताज"

भूरिया ख़ुशी ख़ुशी अपने बेटे क हर चुम्बन का अहसास करती है और खूब मज़े से हल्का हल्का सीसक रही थी

"अम्मी जान आपके होठो की लाली को चूस क चुरा लू मेरी माल अम्मी मेरी भूरिया बेगम"

शमशेर अपने होठ भूरिया बेगम की तरफ ले जाता है "अम्मी मुझे आपके होठो की शबनम पी लेने दो"

भूरिया शमशेर क आखो में एक नशीली आखो से देखती hai"aah पी लो बीटा मेरे आशिके मेरे प्यार"



शमशेर अपने होठ भूरिया सुल्ताना क होठो क करीब ले जाता है और अपने होठो से पकड़ने की कोशिश करता है और आधे होठ को हे चुम पता है

"ुम्म्हा मेरी भूरिया अम्मी जान"

भूरिया शमशेर का हाथ पकडे नशीली आखो से अपने बेटे को देखती है भूरिया का तन बदन वासना की आग में जल रहा था जिसे शमशेर समझ

"अम्मी जान मेरी बेगम आप क निक़ाब में छुपे आपके ज़ालिम गांड और क़ातिल चुचिओ ने बहुत ज़ुल्म क्या है मेरे लौड़े पर और आपके होठ को देख तो डिल करता था बास चूस चूस क काट जाऊ इधर आ मेरी अम्मी बेगम मेरी लैला"



शमशेर अपने होठ को लरजते हुए भूरिया को ऊपरी होठ को पकड़ लेता है और भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे का साथ देते हुए शमशेर का निचला होठ पकड़ कर चूसने लग जाते है

"गलप्प गलप्प गलप्प गल्प गल्प गलप्प गलप्प गलप्प गलप्प्प गलप्प हम्म्म्म ुहममम आह गलप्प्प गलप्प गलप्प हम्म्म गलप्प्प गलप्प गलप्प"

भूरिया सुल्ताना और शहज़ादे शमशेर एक दूसरे क होठो को चूसते रहते कहते रहते है शमशेर अपने अम्मी क कमर को सहला रहा था और भूरिया अपने बेटे क कंधे पर हाथ रखे सहला रही thi,shamshera अपनी अम्मी को खींचता है और अपने से चिपका लेता है और फिर से अपने अम्मी क होठो को चबाने लगता है भूरिया की आखे अब बंद होने लगती है अपने बेटे क दोहरे वॉर से निचे से शमशेर का लैंड पुरे उफान पर था और भूरिया क जांघो क दरमियान धक्के मार रहा था जिस वजह से भूरिया की छूट में चीटियन रेंगने लगती है

"गलप्प गलप्प गलप्प गल्प हुम्म्म आह चुसो ाः हम्म्म चूस लो मेरे होठो को मेरे सरताज मेरे बेटे आह प्यास बुझा दो अपने अम्मी जान की आह गलपपपप गलप्प गलप्प हम्म्म ाः "

"गलप्प्प गलप्प हम्म्म आह अम्मी जान क्या मज़ेदार रस है आपके होठो का आह ऐसा नशा तो मदिरा में भी नहीं आह गलप्प गलप्प गलप्प"

दोनों माँ बेटे एक दूसरे को होठ शिद्दत से चूस रहे थे इन्हे देख कर कोई ये नहीं कह सकता था क ये दोनों माँ बेटे है ऐसा लग रहा था पति पत्नी हो पर कभी न ख़त्म होने वाला चुम्मा दोनों की सांस फूलने से टूट जाता है और एक आखिरी बार दोनों एक दूसरे क होठ को रगड़ कर चूसते हुए छोड़ते है



दोनों की डिल की धड़कन दोनों माँ बेटे साफ़ सुन प् रहे थे शमशेर भी हांफ रहा रहा और भूरिया अपने बेटे से ज़्यादा हांफ रही थी दोनों मुस्कुरा रहे थे और एक दूसरे क आखो में एक आस भरी उम्मीद भरी नज़र से देखते है जहा शमशेर का लैंड छूट क आस पास टकरा कर हल्का पानी छोर रहा था वही भूरिया की छूट में भी चीटिए रेंगने लगी थी और उसके छूट भी गीली हो गई थी

भूरिया और शमशेर को देख ऐसा लग रहा था जैसे वो काफी म्हणत कए है उनके कपडे अस्त व्यस्त थे और उनके माथे पर पसीनो की बुँदे टॉपअप रही थी

"आह अम्मी जान आप क लबो को चूस कर मज़ा आगया ऐसा लग रहा है कई पहली दफा किसी को चूमा हु"

"यह आह तुम्हे तो मज़ा आया मेरे होठ छील गए बीटा जी"

"अम्मी जी आप भी तो खूब जोश में आकर मेरे होठो को चूस रही थी आपको मज़ा नहीं आया"

"उफ़ बीटा अब तुमसे क्या छुपाना सोची नहीं थी कभी क इस क़दर मज़ा अत है होठ को चूमने में"

"क्या अब्बा जान आपको चूमे नहीं थे ऐसे कभी"

"हट वो बूढ़े ने चूमा तो था पर चूसा नहीं जैसा आपने चूसा मेरे सरताज आज से मेरे लये मेरा शौहर मर गया अब मुँह भी नहीं देखूंगी सुल्तान मेरे वाहिद का"

"तो आज से मई आपका शौहर अम्मी जान आप को हर रात मेरे बिस्तर गरम करनी होगी"

"हम्म्म"

भूरिया शर्मा कर अपने मुँह से हाँ भी नहीं कह पति और शमशेर से दूर जाते हुए सोफे क तरफ बैठने लगती है

"उफ़ थक गई मई आह"

भूरिया अपने भरी गांड को मटकते हुए सोफे पर ले जा कर टिकती है और शमशेर अपने पहले से खड़े लैंड को हाथ में ले लेता है और सहलाने लगता है

भूरिया जैसे बैठती है शमशेर देखता है भूरिया का बुरखा अस्त व्यस्त हो चूका था अपने बेटे से प्यार का खेल खेलने me,hooriya का निक़ाब आगे से खींच गई थी और सर का हिजाब खुल गया था

भूरिया सुल्ताना का निक़ाब आगे से खींच जाने क वजह से ऊपर का एक बटन टूट गया था ,,भूरिया क बैठने पर वो और नीचे चला जाता है और शमशेर क सामने उसके माँ की वो अनमोल चीज़े आगे थी जिसे वो अब तक सिर्फ कपड़ो क ऊपर से देखा था



भूरिया क बड़े बड़े दूध क ऊपरी हिस्से की घाटी साफ़ खुला था ,भूरिया क निक़ाब क निचे पहने काफटाण भी बैठने पर घुटनो क ऊपर खिसक जाती है और उसके दूधिया रंगत लिए घुटना और उसके ऊपर का गदराया जांघ दिख रहा रहा tha,jise देख शमशेर अपना लैंड को हाथ में ले कर ज़ोर से मसलता है

"अम्मी जान आप क बड़े चुचिओ को पिलाओ मई इन्हे खा जाऊंगा "

शमशेर अपने लैंड को मसलते हुए देखता है अपने अम्मी को

भूरिया थक कर बैठी थी उसने जब शमशेर को देखा अपने तरफ देखते हुए तो उसको अहसास हुआ क उसका बीटा उसके चुचिओ की गली जो निक़ाब क बहार झक रही है उसको देख कर अपना लैंड मसल रहा है

भूरिया क छूट में चिति रेंग रही थी और वो अब ये देख कर उसकी छूट पानी छोर देती है और भूरिया अपने आखे बंद कर अपने छूट को बहुत दिन बाद झड़ते हुए महसूस कर रही थी

"आह आह यह हम्म्म ाः "

शमशेर समझ जाता है क उसकी अम्मी फ़ारिग़ हो रही है तभी दोनों किसी की आवाज़ सुन कर चौकते हुए दरवाज़े की ओरे देखते है है वो कोई और नहीं समां थी

"बड़ी अम्मी आप ने आज भी दरवाज़ा लगाया हुआ है बड़ी अम्मी आप सो गयी क्या "

भूरिया अपने आखे बंद कए जहर रही थी वो आवाज़ सुनते हे होश में आने की कोशिश करती है और शमशेर का लैंड आसमान की तरफ देख रहा था

दोनों एक दूसरे को देखते है और जैसे पूछ रहे हो क अब क्या करे तभी फिर से समां आवाज़ लगाती hai"badi अम्मी कहा हो आप"

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 165

भूरिया थक कर बैठी थी उसने जब शमशेर को देखा अपने तरफ देखते हुए तो उसको अहसास हुआ क उसका बीटा उसके चुचिओ की गली जो निक़ाब क बहार झक रही है उसको देख कर अपना लैंड मसल रहा है

भूरिया क छूट में चिति रेंग रही थी और वो अब ये देख कर उसकी छूट पानी छोर देती है और भूरिया अपने आखे बंद कर अपने छूट को बहुत दिन बाद झड़ते हुए महसूस कर रही थी

"आह आह यह हम्म्म ाः "

शमशेर समझ जाता है क उसकी अम्मी फ़ारिग़ हो रही है तभी दोनों किसी की आवाज़ सुन कर चौकते हुए दरवाज़े की ओरे देखते है है वो कोई और नहीं समां थी

"बड़ी अम्मी आप ने आज भी दरवाज़ा लगाया हुआ है बड़ी अम्मी आप सो गयी क्या "

भूरिया अपने आखे बंद कए जहर रही थी वो आवाज़ सुनते हे होश में आने की कोशिश करती है और शमशेर का लैंड आसमान की तरफ देख रहा था

दोनों एक दूसरे को देखते है और जैसे पूछ रहे हो क अब क्या करे तभी फिर से समां आवाज़ लगाती hai"badi अम्मी कहा हो आप"

भूरिया अपने आप को देख रही थी फिर उसकी नज़र शमशेर क लैंड पर जाती है जो पजामा क ऊपर से हे खड़ा था

Shamshera:ammi जान कह दो जाने क लये समां को

भूरिया क दूध क दर्शन आज पहली बार किसी ने क्या था नंगी गोरी चिकनी दूध को शमशेर घूरे जा रहा था

भूरिया को शमशेर धीरे से कहता है

Hooriya:nahi शहज़ादे उसे शक हो जायेगा उसे पता है मई इतनी जल्दी नहीं सोती हु

Shamshera:is समां की बच्ची को भी अभी टपकना था मेरे खड़े लैंड पर धोका हो गया

शमशेर की ये बात सुन कर भूरिया हल्का सा हस्स देती है

"बीटा शमशेर जल्दी अपने आप को ठीक करो "

भूरिया अपने निक़ाब को ठीक करने लगती है और अपने दूध क ऊपरी हिस्से को ढकती है जो बटन टूट जाने क वजह से दिख रहा था

Shamshera:uff अब ये तो बैठने से रहा

Hooriya:ek काम करो अपने हाथ में रुमाल ले लो और उसे अपने कमर क पास रख लो

भूरिया एक बड़ा रुमासल या गमछा अपने बेटे को देती है और फिर कहती है

"आए समां क्या बात है"

Hooriya:jaldi से बिस्तर का चादर ठीक करो में दरवाज़ा खोलती हु



भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे से कहती है जो समां क आजाने से गुस्सा हो गया था

भूरिया जा कर दरवाज़ा खोलती है और सामने समां कड़ी थी

Sama:badi अम्मी मई कब से आवाज़ दे रही हु कहा थी आप जो दरवाज़ा खोलने में इतना वक़्त

लग गया

भूरिया को समझ नहीं आता वो क्या बोले पर समां बिना भूरिया क तरफ देखे सीधा अंदर आजाती है और उसकी नज़र शहज़ादे शमशेर पैर पड़ती है जो अंदर वाले कमरे में बिस्तर पर बैठा था

Sama:badi अम्मी शमशेर भाईजान इतने रात गए आपके बिस्तर par??kya कर रहे है ?

भूरिया का तो हाल बुरा हो जाता और उसके लैब खुल नहीं रहे थे वो समझ नहीं प् रही थी आखिर क्या बोले क्यू क झूट कभी भूरिया बोलती हे नहीं थी समां वापस से पूछती है और भूरिया क चेहरे को फिर उसके बदन पर गौर से देखते हुए अंदर वाले कमरे में आती है

Hooriya:beti wo...Shamshera क जख्म पर मरहम लगाना था न तो

भूरिया और समां अब शमशेर क पास आजाते है और शमशेर तो अंदर से इतना गुस्सा था क क वो समां को मर हे डेल क्यू क उसने माँ बेटे क बीच खलल कर दी थी

Shamshera:aao Sama..tum यहाँ!?

मन me(Kamini कही की अभी हे आना था तुम्हे"

sama:salam भाईजान यही सवाल तो मई आपसे करना चाहूंगी क आधी रात को आप मल्लिका इ जहाँ क हुजरे में क्या गुल खिला रहे हो

शमशेर का तो सवाल सुन कर दिमाग काम करना बंद कर देता है क्यू क वो पहले से हे वासना क आग में जल रहा था और उसका लैंड अब भी तन्नाए खड़ा था अपने अम्मी क लये

Hooriya:beti कितनी बार एक सवाल करेगी बोलै न शमशेर क जख्म अभी तक भरे नहीं है और तुम्हे तो पता है न उसके पीठ पर अब भी घाव है तो मई मरहम नहीं लगाउंगी तो कौन लगाएगा?

Shamshera:han अम्मी सही कह रही है

Sama:q भाईजान आप मुझे कहते तो क्या मई आपको मरहम न लगा देती

Shamshera:Sama अभी तुम बची हो जैसे अम्मी जान मरहम लगाती है वैसे तुम नहीं लगा पाओगी

भूरिया शमशेर क बातो का मतलब बखूबी समझ रही थी और वो शर्मा सी जाती है अपने बेटे का यु खुलेआम



दोहरे माने की बात करते हुए

Shamshera:sama तुम चाहो तो अम्मी से पूछ लो अम्मी जान को पता है कैसे मरहम लगाने से दर्द ठीक होगा

Sama:ab हो सकता है बड़ी अम्मी की उम्र हो गई मरहम लगते हुए तो वो मुझसे बेहतर लगा ले

समां अपने बड़ी अम्मी को देखती है और उसके चेहरे को गौर से देखती है जो लाल हो चूका था उसका निक़ाब सर पैर ठीक तरीके से बंधा नहीं था और निक़ाब को देख कर कोई भी कह सकता था क भूरिया ने ज़रूर किसी मर्द क साथ कुश्ती की है

Sama:ammi जान आप सो रही थी क्या ?

Hooriya:nahi बोली न मरहम लगा रही थी

Sama:fir अम्मी जान आपके बुरखे में इतनी सिलवाते है इसलिए लगा ,वैसे आपका चेहरा भी लाल हो रहा है और सांसे तेज़ चल रही है लगता है आपकी अंदर से ताब्यात ठीक नहीं

Hooriya:nahi बेटी वो अब उम्र हो गई तो थोड़ा बहुत चलती हु तो थक जाती हु

समां अपने बड़ी अम्मी को गौर से देख कर मुस्कुराते हुए जैसे हे उसका नज़र फर्श पर जाता है तो पलंग क पेअर क निचे उसे एक बटन दिखाई देता है समां फिर से भूरिया को देखती है और उसके बुरखे क ऊपर वैसा हे बटन लगा था समां का दिमाग न चाहते हुए भी गलत सोच बैठता है...

..sama:badi अम्मी अभी इतनी उम्र भी तो नहीं हुई आपकी

Shamshera:baitho समां

Sama:man me)Badi अम्मी का हुलिया देख तो ऐसा हे लगता है क जैसे वो निक़ाब पहन कर लेती हो और उनके निक़ाब पर सिलवाते आगे हो और उनके निक़ाब का बटन टूट कर गिरा हुआ है ,ऐसे तो तब हे मुमकिन है जब शौहर बीवी एक साथ मस्ती करें और बड़ी अम्मी भी दर दर क जवाब दे रही है ,इस वक़्त शमशेर भाईजान कही बड़ी अम्मी और शमशेर भाईजान कुछ ? छी ये मई कैसे सोच सकती हु

Shamshera:kya हुआ शहज़ादी समां

Sama:kuch नहीं भाईजान वो तो मई बास आजाती हु बढ़िए अम्मी क पास जब भी रात में नींद नहीं आती

Shamshera:achha करती हो समां

Hooriya:waise तुमने खाना खाया समां बेटी

Sama:ji बड़ी अम्मी खा लिए आपने खाया?

भूरिया शमशेर क तरफ देख कर बोलती है जो गुमशुम था

Hooriya:thoda सा खाई थी थोड़ा बाक़ी है



भूरिया अपनी नज़रे समां से बचा क अपने बेटे को आँख मार देती है जिसे देख शमशेर जो गुमशुम था वो मुस्कुराने लगता है

Sama:badi अम्मी आप के हाथो का खाये हुए काफी वक़्त हो गया बावरचिओ क हाथ में वो जादू नहीं जो आपके हाथ में है

Shamshera:han तुमने ठीक कहा समां

Hooriya:par अब इस उम्र में कहा रसोई में जाऊ

Sama:badi अम्मी आपके हाथो का जादू आप हमे तो सीखा दीजिये ताके मई अपने ससुराल में जाऊ तो सबको आपके नुस्खों से सबको खुश कर दू

Shamshera:Ham मुझे भी सीखा दीजिये अम्मी जान

Hooriya:kya तुम दोनों भी आधी रात को ये बाटे करने लगे वैसे भी मई कौन सा इतना अच्छी बावर्ची हु

Sama:bhaijaan आपको सीखने की क्या ज़रूरत है आप की बीवी तो सीखी सीखे आएगी और आपको तरह तरह क लज़ीज़ खाना बना कर खिलाएगी

Shamshera:haaye मेरी फूटी किस्मत पता नहीं कब आएगी तुम्हारी भाबी समां और कब मुझे लज़ीज़ कबाब और बिरयानी खाने को मिलेंगे

शमशेर अपने अम्मी को देखते हुए तंज कसता है और ाजे भरता है

Sama:aap जब शादी हे नहीं करेंगे तो आपकी बीवी आएगी कैसे वैसे जब तक आपकी बीवी नहीं आये तब तक बड़ी अम्मी क हाथो का खा सकते है

Shamshera:nahi मुझे अपने बीवी क हाथो का हे खाना है

और इस बार शमशेर अपने अम्मी को आँख मार देता है जैसे कह रहा हो अम्मी जान तुम हे मेरी बीवी हो तुम्हारे हाथ का खाना है और भूरिया मुस्कुराते हुए शर्मा रही थी

Sama:aap आज हाँ कह दो कल अब्बा जान आपकी शादी करवा देंगे भाईजान

Shamshera:Nahi मुझे शादी नहीं करनी

Sama:to फिर बीवी कैसे आएगी बिना शादी क?

Shamshera:ye भी बात सही है ,तुम बहुत तेज़ हो गई हो अब समां

Hooriya:bass करो दोनों मई कोशिश करुँगी कबाब और बिरयानी बनाने की जिसे खाना होगा खा लेंगे

Shamshera:ammi जान आप भी क्यू नहीं कहती समां की तरह क मई शादी कर लू और अपने बीवी क हाथो क लज़ीज़ खाने का मज़ा लू

Hooriya:chup हो जाये आप शहज़ादे क्या मेरे हाथो क खाना मज़ेदार नहीं होता अब तुमको मिलेगा भी नहीं सब मेरी बेटी समां khayegi..q समां

समां हसने लग जाती है अपने लये भूरिया का प्यार देख क

Sama:han बड़ी अम्मी भाईजान को चखने भी नहीं देंगे ये तो तब हे खाएंगे अब जब इनकी बीवी आएगी

Shamshera:theek है अब नसीब हे ऐसी है समां जिसे मई तुम्हारी भाबी बनाना चाहता हु वो तो बनेगी हे नहीं तो समझ लो ज़िन्दगी भर बास बावर्ची क हाथ का खाना है

शमशेर भूरिया को बिना देखे एक मासूम अंदाज़ में कहता है और भूरिया का डिल इस बात से खुश हो जाता है क शमशेर उसे अपनी बीवी बनाना चाहता है इतना प्यार करता है

भूरिया शमशेर क चेहरे को देखते हुए सोचती है



Hooriya:man me)haay कितना मासूम लग रहा मेरा saajan,Dill तो मेरा भी चाहता है क दुन्या क सामने इस खंडन क सामने तुम्हारा हाथ पकड़ लू बीटा और सबको बता दू क तुम और हम दो जिस्म एक जान है ,काश मई तुमसे शादी कर तुम्हारी बीवी बन कर तुम्हे वो हर ख़ुशी दे पति

Sama:shamshera भाईजान आप एक बार लड़की का नाम तो बताये हम सब आपके लये उनका हाथ मांग लेंगे

Shamshera:Ye मुमकिन नहीं ..मई चलता hu..Shabba खैर

भूरिया देखती है उसके बेटे ने अब भी वो रुमाल अपने हाथ पर रखे अपने लैंड को ढाका हुआ था भूरिया को अपने बेटे पैर तरस आता hai,shamshera भूरिया को देखते हुए सुल्ताना भूरिया क हुजरे से बहार चला जाता है

Hooriya:man me)Mere सरताज शमशेर मुझे मुआफ कर देना आपको मेरी वजह से कितना तड़पना पड़ता है और ये बात मुझ से बेहतर कौन जान सकता है जो खुद सुल्तान की यादो क सहारे ज़िन्दगी घुट घुट कर जिया ho,shamshera तो अब कोठे पर भी नहीं जाता मैंने जब से मन क्या है इसलिए वो बेताब हो रहा है हमबिस्तरी करने क लये,

Sama:badi अम्मी क्या हुआ किस सोच में डूब गए

Hooriya:kuch नहीं बेटी बास ऐसे हे

Sama:badi अम्मी आप हमसे अपनी डिल की बात बता सकती है

Hooriya:bass ज़िन्दगी इंसान को कैसे कैसे मोर दिखती है

Sama:wo तो है हे बड़ी अम्मी आज शमशेर भाईजान क पारस न जाने से कई लोग नाखुश है

Hooriya:mujhe पता है मेरी बेटी लालच इंसान को अँधा बना देती है

Sama:ji अम्मी इसलिए मई सोची हु क मुझे कोई शेह्ज़ादा या सुल्तान से शादी नहीं करनी पर उस से करनी है जो मुझे अपने सल्तनत की नहीं अपने डिल की मल्लिका बनाये

Hooriya:meri समां अब बड़ी बड़ी बाते करने लगी है

Sama:ab बची नहीं हु मई वैसे आप उदास क्यू हो गई अचानक से

Hooriya:nahi नहीं ..मई ठीक हु

Sama:acha मुझे लगा शमशेर भाईजान चले गए उलटी सीढ़ी बाटे कर क इसलिए

Hooriya:nahi नहीं वो तो हमेशा से नाटक करता है

Sama:aap गुस्से से कह रही थी इसलिए लगा मुझे आप नाराज़ है या उदास

Hooriya:aisa कुछ नहीं है

भूरिया और समां देर रात तक बैठे गप्पे मार रहे थे फिर समां को नींद आने लगती है और वो भूरिया क पास हे सो जाती है उधर शमशेर भी अपने कक्षा में पहुँचता है और अपने खड़े लैंड को मसलते हुए बैठने की कोषिष करता रहता है पर जब भी उसके अम्मी का चेहरा उसके सामने आता शमशेर का लैंड खड़ा हो जाता

Shamshera:man me)ammi

जान आज आपको रगड़ क मज़ा आगया आपके होठो को चूस क कसम से आप को पेलुँगा तो निहाल हो jaunga,aise हे सोचते हुए शमशेर कब नींद क आग़ोश में जाता है उसे पता भी नहीं चलता

पारस में एक नै सुबह होती है ,सूरज की हलकी रौशनी पारस क अन्धकार को चीरती हुई दुन्या क सबसे सुन्दर राष्ट्र पारस को और भी सुन्दर कर रही थी ,पारस सल्तनत न सिर्फ अपनी ख़ूबसूरती क लये जाना जाता था पर लोगो का कहना था क पारस सल्तनत क जितनी बड़ी और ताक़तवर सल्तनत दुन्या में कभी न थी न है और न कभी banegi,sultan मेरे वाहिद और सुल्ताना हूर इ जहाँ क देख रेख में पारसी सल्तनत दिन दुगनी रात चौगनी तरक़्क़ी कर रहा था आज क वक़्त में पारस पुरे दुन्या क व्यापर का मुख्या केंद्र था यहाँ लोग व्यापर क लये तो आते हे साथ हे खरीदारी क लये भी आते दुन्या क सबसे क़ीमती घोड़े और चमड़े यहाँ क बाजार में हे मिलता पारस क बाजार की तलवार दुन्या का हर राजा की पसंदीदा तलवार थी पारस इन सब क लये पूरी दुन्या में जाना जाता हे था पर यहाँ अय्याश और अय्याशिओ क लये हर सुविधा थी यहाँ की मैखाने और कोठो पर दुन्या क हर प्रान्त क बादशाह अपनी ज़िन्दगी में एक बार तो आते हे थे अपनी हवस की आग ठंडा करने



पारस क महल में भी सुबह से हे चहल पहल शुरू हो जाती hai,mahal क घुलम महल की साफ सफाई में लग जाते है एक ओरे जहाँ पारसी सल्तनत दिन बा दिन बुलंदियों पर चढ़ रहा था वही महल क दीवारों ने कई साजिशो को होते हुआ देखा tha,sultan और सुल्तान का परिवार अपने सल्तनत क तरक़्क़ी से खुश थे पर अनजान थे मल्लिका इ जहाँ भूरिया और उनके बेटे क बीच नए रिश्ते se,koi जाने न जाने महल की दीवारे शहज़ादे शमशेर और सुल्ताना भूरिया इन दोनों की प्रेम कहानी की गवाही दे रहे थे अगर दीवारों क पास ज़ुबान होता तो शायद वो चीख चीख कर कह देते कैसे शमशेर ने अपने वालिदा भूरिया क साथ मुहब्बत क्या और दोनों का इश्क़ दिन बा दिन परवान चढ़ रहा है

भूरिया की सुबह नींद खुलती है और उसके आखो क सामने उसके आशिक़ बेटे का चेहरा दीखता है और मुस्कुराने लगती है तभी भूरिया का ध्यान जाता है समां पर जो रात वही सो गई थी

Hooriya:Sama उठ जाओ शहज़ादी सुबह हो गई

भूरिया उठ कर बैठती है और अपने काले घने ज़ुल्फो को सवारने लगती है और अपने यार शमशेर को याद करने लगती है

"उठ जाओ समां बेटी कब तक सोती रहोगी"

समां इस बार अपने आखे खोलती है और उसकी नज़र सीधे भूरिया पर पड़ती है और समां बास भूरिया को देखते रह जाती है

"बड़ी अम्मी आप गज़ब की खूबसूरत लग रही हो इस लिबास में"

Hooriya:Kya वाक़ई हम खूबसूरत है समां

भूरिया अपने खूबसूरती पर इठलाते हुए अनजान बनते हुए समां से पूछ कर समां क तरफ देखती है



Sama:man me)Badi अम्मी क दूध इतने बड़े बड़े है लग रहा है कुरता फाड़ कर बहार अजय और इनके पीछे का हिस्सा बाप रे बाप पहाड़ो जैसे है इतने खूबसूरत नैन नक्श चमकता हुआ चेहरा काले घने लम्बे ज़ुल्फ़े

Sama:badi अम्मी आप क इस रूप को देख कर तो शैतान भी आपसे डिल लगी करने क लये नेक हो जाये और वो भी आपके इशारे पर नाचे

Hooriya:hat इतनी भी खूबसूरत नहीं मई

Sama:badi अम्मी आप जब निक़ाब में ढकी होती है तो जवानो क डिल मचलते है और कितनो ने तो अपनी जान दे दी आपको देखने क चक्कर में पर आप ने किसी को अपना चेहरा तक नहीं दिखाया

Hooriya:tumhe लगता है समां मई ये हाल में बहार जाउंगी ? वो तो बास सोने क वक़्त हल्का लिबास पहन लेती हु

Sama:aap बिना निक़ाब क जाना भी मत बड़ी अम्मी नहीं तो क़यामत से पहले क़यामत हो जायेगा

Hooriya:han और तुम भी चाहे तुम्हारी शादी हो जाये बिना निक़ाब क घर से बहार कदम मत रखना हमेशा इस बात पर ध्यान देना क कोई गैर मर्द तुम्हारे जिस्म क किसी भी हिस्से को देख न ले

Sama:badi अम्मी मई ध्यान रखूंगी इस बात का वैसे भी आपने हे मुझे पढ़ाया लिखाया है आपने मेरी अम्मी से ज़्यादा जीने का सलीका सिखाया है और मुझे भी आप जैसा बन न है तक़ी हर जगह लोग मेरी पाकीज़गी की भी तारीफ करे आपकी तरह

Hooriya:theek है मेरी बेटी दवा है तुम हमेशा नेक रहो अब चलो जाओ और नाहा धो कर तैयार हो जाओ मेरी शहज़ादी

Sama:jaisa आप ठीक समझे बड़ी अम्मी

Sama:man me)aap डिल से इतनी अच्छी है इतनी परहेज़गार है फिर भी आप झूट क्यू बोल रही है क्या छुपा रही है बड़ी ammi..mai इस बात का पता बहुत जल्द लगा लुंगी

समां को रात की घटना याद आती है कैसे भूरिया समां क सवाल से दर गई थी और भूरिया क बुरखे क बटन को ज़मीन पर टूटा पाया समां अपने आप सोचते हुए भूरिया क हुजरे से चली जाती है और भूरिया नाहा धो कर तैयार होने लगती है

Hooriya:aaj क्या पह्नु हम है ये पहन लेती हु पर इस लिबास में तो ..जो होगा देखा जायेगा कौन सा मई गैर मर्दो क बीच जाउंगी औरतो से हे मिलना होता है दरबार में और शमशेर भी तो यही चाहता है क मई अपनी जिस्म की नुमाइश कर उसके सामने

भूरिया अपने सोच से बुरी तरह शर्मा जाती है क्यू क वो अपने बेटे क सामने हे अपने भरी भरकम जिस्म का नुमाइश करने का सोच रही थी जैसे शमशेर उसका बीटा न हो क शौहर ho,hooriya घंटो तक सजती सवारती है और अपने यादो में मगन रहती है उसको पता हे नहीं चलता वक़्त ka,udhar शमशेर भी उठ कर नाहा धो कर तैयार हो जाता है और वो अपने अम्मी क हुजरे में जाने का हे सोच रहा था क एक सिपाही आकर शमशेर से कुछ कहता है और वो उसके साथ चला जाता है

महल क दरबार में दोनों तरफ से कुर्सिओं पर आकर लोग बैठने लगते है और धीरे धीरे सल्तनत पारस का परिवार सुल्तान क भाई गुल शाह और उनके वालिद सुल्तान दास्ताँ आ चुके थे तभी शमशेर का सौतेला भाई शहज़ादे शान आजाते है पर अब भी सुल्तान और शमशेर नहीं आये थे सब इंतज़ार करने लगते hai,Gul शाह अपने सहयोगी और मित्र छान पाशा से कहता है

Gulshah:Chan पाशा हमे कब तक इस सुल्तान का इंतज़ार करने से छुटकारा मिलेगा

Chanpasha:bhut जल्द उस्ताद कुछ दिन की बात है फिर सल्तनत क दरबार में किसी का इंतज़ार नहीं करना होगा

उधर भूरिया अपने आप को तैयार कर क अपने चेहरे पैर निक़ाब लगा कर दरबार की ओरे चल पड़ती है और दरबार पहुंचते हे साड़ी औरते भूरिया का इस्तेकबाल करती है

Afsana:Aaiye सुल्ताना भूरिया हम सब आपका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे

Naaz:aaiye बैठिये बाजी

Sama:badi अम्मी

समां आकर अपने बड़ी अम्मी का झुक कर हाथ चुम लेती है

Afsana:Naaz ..शहज़ादी समां को देख कर लगता नहीं वो तुम्हारी बेटी है ऐसा लगता है सुल्ताना भूरिया की हे बेटी है

Naaz:ab अम्मी जान वो समां को अपनी बेटी मानती है तो समां का भी हक़ है क भूरिया बजी को अपनी माँ से बढ़ कर माने

Afsana:tumne ठीक कहा

भूरिया सबसे बड़ी कुर्सी जो उसके सास अफसाना खातून क बगल में थी वह पर जा कर बैठती है और सभी लोग जो भूरिया को देख कर खड़े हो गए उन सबको बैठने को कहती है

Razia:hooriya बाजी आप दरबार में नहीं होते तो दरबार सूना सा लगता आप रहते हो तो एवं को भी इन्साफ की उम्मीद रहती है

Hooriya:Haq पर चलने वाले सल्तनत है हमारी और हम बिना इंसाफ क अमन कायम नहीं कर सकते रज़िया बेगम बिना इन्साफ क सल्तनत ताश क पत्तो की तरह बिखर जाती है

Sama:badi अम्मी गुस्ताखी मुआफ ..पर यहाँ तो सिर्फ औरते है आप चेहरे से हटा लीजिये निक़ाब थोड़ा उलझन काम होगी

Hooriya:Sama एक मजदूर को बिना पसीना बहाये दो वक़्त की रोटी नसीब नहीं होती उसे रोज़ पसीना बहाना होता है तो क्या इज़्ज़त बचने और अपने बदन को पर्दा करने क लये थोड़ी सी उलझन हम रोज़ बर्दाश्त नहीं कर सकते

Afsana:Ary खामखा गुस्सा हो रही हो बहु वो समां बची है अभी वैसे यहाँ साड़ी औरते हे है

Hooriya:Ammi जान आप को ये पता नहीं मर्द हो या औरत पर्दा तो गैर आखो से की जाती है

naaz:hooriya बाजी आप भी न पूरा फलसफा सुनाने लगी हाँ ये बात सही है क गैर औरत क ज़रिये तुम्हारे हुस्न की चर्चा मर्दो तक जा सकती है समां बेटी

Sama:Mujhe मुआफ कर दीजिये मल्लिका इ जहाँ मई सिर्फ आपको बड़ी अम्मी समझ कर kaha.aapne हे तो एक दिन कहा था क औरतो क सामने हम अपने चेहरे को खुला रख सकते है

Hooriya:ary मेरी बेटी क्यू मायूस होती हो

Afsana:Mard मुलाज़िमों को सख्त हिदायत दी जाये क वो औरतो क दरबार की तरफ न आये

Kaneez:Jo हुक्म

Afsana:Ab यहाँ कोई नहीं आने वाला भूरिया सुल्ताना अब ये आपकी मर्ज़ी है क आपको पर्दा रखना है या नहीं

Naaz:Hooriya बाजी चेहरा तो खोल लीजिये बास हवा आने दीजिये



Hooriya:man me)uff ये लोग तो पीछे हे पद गए मई आज इतना सजी सॉरी हु ये सब देख लये तो सवाल करेंगे कही शक करे तो

Razia:Hooriya बाजी खोल दीजिये न चेहरे से निक़ाब

Afsana:jab आपकी सौतने इतना कह रही है तो खोल लीजिये

भूरिया न चाहते हुए भी अपने चेहरे से निक़ाब हटती है और जैसे हे निक़ाब चेहरे से हैट ता है हरम में बैठी साडी औरते का मुँह खुला का खुला रह जाता है



भूरिया क होठो पर आज लाली थी आखो में काजल थे आज भूरिया घंटो तक श्रृंगार की थी अपने बेटे क कहने पर भूरिया को सब चारो ओरे से कुछ देर देखते रह जाती है है और भूरिया अपना निगाह निचे कए बैठी रही

Afsana:Wah खुदा ने क्या बनाया है आपको मल्लिका इ जहाँ वाक़ई सुल्तान मेरे वाहिद बहुत खुशनसीब है

Naaz:Hooriya बाजी आज पहली बार इतनी सजी सॉरी है आप ठीक कहती हो आप जैसी खूबसूरत औरत को मर्दो से नहीं औरतो से भी छुपकर रहना चाहिए

Sama:badi अम्मी आप पारी लग रही हो आपकी ख़ूबसूरती देख क हे आपका नाम भूरिया रखा होगा

Razia:Hooriya बाजी मैंने आज तक आप जैसी हसीं औरत नहीं देखि मिश्रा से ले कर अरब तक घूमी पर आप उन मिश्री और अरबी औरतो से कही ज़्यादा खूबसूरत हो

Sama:par रज़िया अम्मी ..बड़ी अम्मी तो मिश्रा की हे है न

Afsana:Han समां भूरिया अरबी नस्ल की है मिश्रा से हे है पर अब हमारी भूरिया सुल्ताना पारसी है

Naaz:ab पारस में रहने वाला कुछ दिन में हे पारसी हो जाता है

Hooriya:bass कीजिये आप लोग अब कितनी तारीफे करेंगी रोज़ तो देखती हो आप लोग

Afsana:Nahi आज जैसी सजी सॉरी हो पिछली बार तुम्हे इस रूप में तब देखा था जब तुम मिश्रा से शादी कर क आई थी

Hooriya:man me)Tab मई ख्वाबो को जीने आई थी और सुल्तान ने उन ख्वाबो पर पानी फेर दया आज फिर से वही ख्वाब मेरे बेटे ने दिखाया है और इस बार मई अपने ख्वाबो को पूरा करुँगी

भूरिया अपने बेटे को याद हे कर रही थी क उसके कानो में आवाज़ गूंजती है

"बा अदब बा होशिया सल्तनत इ पारस क होने वाले सुल्तान शहज़ादे शमशेर तसरीफ ला रहे है "

Gulshah:man me)Ye शुंग इस बार भी शमशेर को मार नहीं पाया

दरबार क सभी लोग उठ खड़े होते है और शमशेर आकर अपने दादा सुल्तान दास्ताँ क हाथ को चूमता है फिर अपने चाचा गुल शाह क हाथ को चूमता है और अपने कुर्सी पर बैठ जाता है

Dastan:tumhe दुबारा देख कर ख़ुशी हुई शहज़ादे

Shamshera:shukria किसी को तो हमारा यहाँ से न जाने की ख़ुशी हुई

शमशेर आखे तिरछी करते हुए अपने चाचा गुलशाह को देखता है

Gulshah:ary बीटा हम सब खुश है आखिरी आप हमारे होने वाले सुल्तान हो

तभी एक ज़ोरदार आवाज़ ाआवाज़ आती है

"बा अदब बा होशियार जहाँ पनाह शेहन शाह इ पारस सुल्तान मेरे वाहिद हम सब क बीच तसरीफ ला रहे है ,होशियार होशियार होशिया"

सुल्तान मेरे वाहिद क आने पर न सिर्फ मर्दो की सभा कड़ी हो जाती है बल्कि औरते भी हरम की उठ कड़ी हॉट है सिपाही अपने तलवार निकल कर ऊपर की ओरे करते है और सुल्तान ज़िंदाबाद की सदा बुलंद करते है

सुल्तान क आगे पीछे नंगी तलवार लिए चल रहे थे और सुल्तान मेरे वाहिद धीरे कदमो से दरबार की ओरे आ रहे थे ऐसे हे धीरे कदमो से वो अपने सिंहासन क तरफ जाते हुए अपने सिंहासन पर बैठने से पहले अपने हाथ को ऊपर उठा कर सबको बैठने क लये कहते है और पुरे दरबार में हर शख्श अभी अपना सर झुकाये खड़ा था वो सब बैठ जाते है जैसे हे सुल्तान बैठते है

Sultan:Aaj का दरबार शुरू होने से पहले मई परसवासी को यह खुशखबरी देना चाहता हु क शहज़ादे शमशेर पारस छोर कर नहीं जा रहे

दरबार क सामने कड़ी पारस की आवाज़ शहज़ादे शमशेर ज़िंदाबाद कहने लगते है और शमशेर अपना हाथ उठा कर उन्हें चुप होने क लये कहते है

छान pasha:Gustakhi मुहाफ़ सुल्तान पर कल तो शहज़ादे शमशेर ने इस्तीफा दिया और आज इनके वापस आजाने की वजह जान न चाहेंगे यहाँ की एवं

Shamshera:chan पाशा वजह तुम जानना चाहते हो या एवं?

Sultan:Wajah..chan पाशा हम बताते है

Gulshah:Ji सुल्तान हम सब जान न चाहेंगे क आखिर इतना बड़ा फैसला लेने की वजह क्या थी

Shamshera:man me)Gul शाह तुम्हारे भेजे हुए हमलावर शमशेर की तलवार क आगे कभी टिक नहीं पाएंगे चाहे जो मर्ज़ी कर लो

Sultan:Gul शाह ये शमशेर की चाल थी हमारे दुश्मन जो महल क भीतर रह कर हमसे दुश्मनी कर रहे है

छान pasha:Jahanpanah आप क कहने का क्या मतलब है क्या कोई सुराग मिला ?

Shamsheda:chan पाशा सब्र करो बहुत जल्द मिल जायेगा और रही बात मेरे पारस छोर क जाने की बात तो यही मेरी चल थी जिसमे मेरा दुश्मन फस्स भी गया ..

छान pasha:Wo कैसे शहज़ादे

Shamshera:chan पाशा जो भी सुल्तान और सुल्ताना पर हमला करवाए हो वो इसी महल में है

गुल shah:tum इतने दावे क साथ कैसे कह सकते हो

Shamshera:Chacha jaan..Jab मैंने ये फैसला सुनाया क मई पारस छोर कर जा रहा हु और जैसे हे मई महल से निकला शुंग ने मुझे अकेला प् कर हमला कर दया अब आप हे बताइये महल की बात शुंग तक इतनी जल्दी पहुंची कैसे ?

Gulshah:Lekin शमशेर इस से तुम्हारे पारस जाने या न जाने का क्या सवाल

Shamshera:Chacha जान आप हो समझदार पर कभी कभी आप का ज़ेहन काम नहीं करता hai..mai सिर्फ ये जान न चाहता था क जो भी शुंग का साथ दे रहा है वो घर का है या बहार का

Dastan:Shamshera अगर ऐसी बात है तो खतरा हम सब पर है ये भागवत है सल्तनत क खिलाफ

Gulshah:man me)Abba जान बग़ावत तो बहुत पहले कर देनी चाहिए थी मुझे खैर देर आये दुरुस्त आये

Shamshera:Ek और बात मई सब को बताना चौंगा जो इस खेल से जुडी है

Shaan:Aur क्या बात इनसब से जुडी है भाईजान?

Shamshera:Kal मई पारस का चप्पा चप्पा छान मारा पर शुंग का नमो निशान नहीं मिला पर हमे कुछ ऐसा मिला

Gulshah:kya मिला

गुलशाह थोड़ा परेशां होते हुए कहता है

Shamshera:hume एक सिपाही जो हमारे महल में दरबान था उसकी लाश दूर किसी गाओ में कुछ दिन पाया गया था और लोगो ने उसकी पहचान की

Gulshah:kaun सा सिपाही ऐसा भी तो हो सकता है कोई और हो

Shamshera:chacha जान ये वही सिपाही था जो हमला क दिन महल क पहरेदारी पर था उन्होंने सिपाही को मार दया क्यू क वो जनता था क शुंग को महल क अंदर का रास्ता कौन दिखाया है

गुल शाह क माथे पर पसीने की बुँदे आजाती है और वो छान पाशा क तरफ देखता है ये वही सिपाही था जिसको अपनी धौस दिखा क गुलशाह ने शुंग को महल क अंदर लाया था

Gulshah:man me)Ye छान पाशा एक लाश को ठिकाने पर नहीं लगा पाया

Sultan:ab मई शमशेर को वो सरे काम सौंपता हु जो उसके पास पहले से थे और जैसा की आप सबको पता है क शमशेर को मैंने अगला सुल्तान बनाने का ऐलान कर दया था और वही होगा जो मैंने कहा था

ये सुन कर गुल शाह छान पाशा क साथ साथ शहज़ादे शान जो सुल्तान बनने का ख्वाब देखने लगे थे उनसब को झटका लगता है उधर शान की माँ नाज़ बेगम भी सुल्तान क फैसले से खुश नहीं थी

परदे क पीछे दूसरी ओरे औरतो क दरबार में बैठी सुल्तान का फैसला सुन नाज़ बेगम तिलमिला जाती है जैसे किसी ख्वाब से जगी हो

Hooriya:kya हुआ नाज़ बेगम

Naaz:kuch नहीं बाजी वो तो बास देख रही थी क आप का हर फैसला कितना ाचा है आप हे सुल्ताना की गद्दी की असल हक़दार hai..kaneez और कोई बच गया हो तो भेज दो

कनीज़ एक औरत को भेजती है वो रट हुए आकर भूरिया क सामने बैठ जाती है

Aurat:Mallika इ जहाँ मुझे इन्साफ चाहिए मई कई दिनों से इंतज़ार में हु पर आपके दरबान मुझे अंदर आने नहीं देते

Naaz:Ae औरत यहाँ हज़ारो लोग रोज़ अपना मसला ले कर आते है हम सब की बातो को एक दिन हे नहीं सुन सकते

भूरिया अपना हाथ उठा कर नाज़ को चुप होने क लये कहती है

Hooriya:Batao बेटी क्या मदद चाहिए तुम्हे

Aurat:Mallika इ जहाँ मेरी शादी दो साल पहले हे हुई थी और इस बार मेरे शौहर जुंग में

औरत ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है

Hooriya:hum तुम्हारा दुख समझ सकते है क्या मदद चाहिए

Aurat:mujhe मदद नहीं इंसाफ चाहिए मुझे तो बोलते हुए भी शर्म आती है क मेरे शौहर का बड़ा भाई मुझे अकेले प् कर ज़बरदस्ती करने की कोशिश करते है मुझ पर गन्दी नज़र रखते है

Hooriya:kya तुम उसे पसंद करती हो?

Aurat:nahi वो मेरे से दोगनी उम्र का है

Hooriya:kya वो शादीशुदा है और बचे है?

Aurat:ji है मल्लिकाजहं

Hooriya:kya उसने तुम्हारे साथ कुछ गलत क्या है ?

Aurat:nahi पर वो कोशिश करता है

Hooriya:bass !कनीज़ उस शख्स क एक आँख और एक हाथ को उस क तन से जुड़ा कर दो ताके वो कभी किसी औरत को आँख उठा कर न देखे और न हे अपना हाथ बढ़ा sake,Ek हाथ और एक आँख से वो अपने बचे की परवरिश करेगा तो उसे समझ आएगा वो कितना बड़ा गुनाह क्या

Aurat:Aapke पेअर चुम लेने का मन करता है मल्लिकाईजहान आपका लाख लाख शुकरिअ

Hooriya:bass और याद रखना हम सबकी फरियाद सुनते है पर हो सकता है क तुम से पहले भी लोग अपने बरी क इंतज़ार में हो ,जब तक हम है फैसला होगा

Aurat:aapke पाकीज़गी और इन्साफ से हम सब सीखते है ऐसा फैसला आप जैसी पाकीज़ा औरत हे सुना सकती है

औरत खुश हो कर चली जाती है और वह पर सब भूरिया क तरफ देख रहे थे

Afsana:wah सुल्ताना भूरिया आपके तारीफ़ जितनी की जाये काम है

Hooriya:shukria अम्मी जान आप जैसी सास मिली जिस वजह से मई पारस क औरतो को कुछ सीख दे पाई

Razia:hamari भूरिया बाजी से तो हर औरत कुछ न कुछ सीखती है

Hooriya:theek है आज का दरबार यही ख़त्म करते है शुकरिअ आप सब का

Muskan:theek है सुल्ताना भूरिया मई चलती हु आपकी इजाज़त हो तो

Hooriya:tum जा सकती हो मुस्कान बेगम

भूरिया भी अपने तख़्त से उठ कर अपने हुजरे क तरफ जाने लगती और सारे औरते भी अपने अपने हुजरे में जाने लगती है उधर मर्दो का दरबार भी ख़त्म होता है और शमशेर भी अपने वालिद मेरे वाहिद क साथ चलते हुए दरबार से आने लगता है

भूरिया अपने हुजरे में पहुँचती है और सबसे पहले बैठ कर पानी पीती है क्यू क वो काम कर क थक गई थी

Hooriya:uff पारस क दरबार को संभालना इतना आसान भी नहीं चलो कोई किताब ढूंढ कर पढ़ती हो क्यू न शायरी पढू वैसे भी शमशेर आज कल बहुत शायर बन रहा है

भूरिया उठ कर अपने हुजरे में किताबो क बीच शायरी की किताब ढूंढ़ने लगती है उधर शमशेर अपने अब्बा जान से मिलते हुए अपने हुजरे में न जा कर सीधा अपनी अम्मी हूरजहाँ क हुजरे में आता है और उसे दो कनीज़ दरवाज़े पर कड़ी मिलती है

Shamshera:man me)Ye कनीज़ों का कुछ न कुछ करना होगा हमेशा अंदर जाने में दिक्कत देते है

Shamshera:Jane दो कनीज़ अब कितना रोकेगी

Kaneez:shehzade हम सुल्तान क हुक्म और मल्लिकाजहं क हुक्म पर अपना काम अंजाम दे रहे है आप को इजाजत ले कर जाये तो बेहतर होगा

Shamshera:ammi जान क्या मई अंदर आ सकता हु

भूरिया दरवाज़े क पास दौड़ कर आजाती है जैसे कई बरसो बाद उसका आशिक़ आया हो फिर वो अपने आप पर काबू रखते हुए धीरे से बोलती है

"आजाओ शहज़ादे इजाज़त है"

शमशेर जैसे हे अंदर आता है भूरिया क चाँद से मुखड़े पर नज़र जाता है भूरिया ने आज ख़ास शमशेर क लये साज श्रृंगार क्या था

शमशेर का मुँह खुला था और वो अपने अम्मी को इतना सजी सॉरी पहली बार देखा था भूरिया हल्का मुस्कुराते हुए जाने लगती है और शमशेर बूट बना खड़ा था

भूरिया अपना हिजाब सर पर सही से बांधते हुए जाने लगती है पर भूरिया क मुड़ते हे शमशेर का लैंड तन्ना जाता



भूरिया का पहाड़ो जैसा गांड निक़ाब क ऊपर से हे कभी दाए कभी बाए ऐसे मचल रहे थे जैसे लैंड को दावत दे रहे हो अंदर घुसने का शमशेर का हाथ फ़ौरन अपने लैंड पर चला जाता है

Shamshera:man me)ah अम्मी आपके गांड ऐसे मटकता है जैसे बड़े गेंद उछाल रहे हो



भूरिया मुस्कुराते हुए जा रही थी उसे पता था क उसका बीटा उसके गांड को खा जाने वाली नज़र से देख रहा है और वो अपने गांड और झटके देने लगती है

Shamshera:ammi जान

"पलट क देख ऐ ज़ालिम

तमन्ना हम भी रखते है "

"हुस्न तुम रखती हो तो

जवानी हम भी रखते है"

"गहराई तुम रखती हो तो

लम्बाई हम भी रखते है"

शमशेर ये कह कर अपने लैंड को मसलने लगता है वही भूरिया सुन कर रुक जाती है



भूरिया अपने गांड को शमशेर क तरफ करते हुए एक ठंडी आह भर्ती hai"haay उफ़ "और अपने आक्खे बंद कर लेती है

Hooriya:man me)Meri गहराई को नाप रहे हो बीटा तुम्हारी लम्बाई तो किसी जानवर जैसी है यह

शमशेर अपने अम्मी को रुका हुआ देख खुश हो जाता है और घूम कर फट से दरवाज़ा बंद करने लगता है पर जैसे हे पलटा भूरिया नहीं थी

Shamshera:ammi जान कहा गई आप

शमशेर भूरिया को ढूंढ़ने लगता है और उसे वो कुछ ढूंढ़ते हुए नज़र आती है

Shamshera:kya कर रही हो अम्मी जान

Hooriya:ab तुम्हारी तरह थोड़ी मुझे हर वक़्त एक हे काम सूझता है

भूरिया अपने किताब को ऊपर रखे हुए किताब घर में देखने लगती है

Hooriya:uff यही तो राखी थी किताब कहा गई

Shamshera:ammi जान आप बाद में पढ़ लेना किताब

Hooriya:q सुबह से अभी याद आई मेरी

भूरिया ये कह कर जान बुझ कर झुक जाती है और किताब ढूंढ़ने लगती है शमशेर का लैंड पहले हे भूरिया की मदमस्त चल से तन गया था अब झुकने से उसका लैंड झटके मरने लगता है भूरिया अपने बेटे को ललचा रही थी और अंदर हे अंदर मुस्कुरा रही थी

शमशेर से रहा नहीं जाता और वो आगे बढ़ कर भूरिया क तगड़े हिलते गांड को अपने हाथ में पहली बार पकड़ता है "ाः अम्मी जान ये मुझे बहुत तड़पते है आह कितने बड़े है



"आह छोरो बीटा आह हम्म्म"

"आह अम्मी जान इन्हे अहसास करने दो"

भूरिया ने पहली बार अपने बेटे का हाथ अपने गांड पर सहलाया था उसका रोअम रोअम रोमांचित हो उठता है और वो पीछे मुद कर मुस्कुराते हुए अपने बेटे को देखती है

"निचे आजाओ अम्मी आपके बड़े गांड ने मेरा जीना हराम कर दया है इन्हे जी भर्र क प्यार कर लेने दो आजाओ मेरी बहो में"

Hooriya:chhoro न आह हम्म उफ़ शमशेर"

शमशेर चाव से अपनी अम्मी जान क गांड को अपने हाथ से मसल रहा था



"आह क्या मुलायम गांड है अम्मी जान आह आजा मेरी जान मेरी बेगम मेरी बहो में"

शमशेर अपने अम्मी जान क पुरे गांड को अपने हाथो के लेने की कोशिश कर रहा था पर वो मुश्किल से एक हिस्सा अपने हाथो में भर्र पा रहा था

भूरिया शमशेर क सहारे से कुर्सी क निचे उतरती है और शमशेर उसे बहो में ले कर

"जाने मैं इतनी गहरी गांड की दरार है जी करता है खड़े खड़े पेल दू "

"छी तुम कितने गन्दी बाटे करने लगे हो"

"अम्मी जान मुझे कल रात में हे दाल देना था "

अब भूरिया भी सोचती है क शमशेर क साथ मज़े करने है तो खुल क साथ देना होगा और बहुत हिम्मत कर क बोलती है

"तो दाल देते मन किसने क्या था "

"आह अम्मी पकड़ो मेरे लैंड को"

शमशेर अपने अम्मी का हाथ ले कर अपने लैंड पर रख देता है



शमशेर अपने अम्मी जान की गांड को हाथ में ले कर दबाते हुए अपने उंगलिअ उनकी मोती गांड की दरार में फसा कर गांड को जड़ से ले कर ऊपर तक सहलाता है और मसलता है भूरिया अपना आँख बंद कए थी उसके एक हाथ लैंड था शमशेर का

Hooriya:man me)uff कितना बड़ा और कड़ा लैंड है इसको झेल पाना मुश्किल हे है आह क्या गरम है आह ुहममम आह कितनी ज़ोर से दबा रहा है

Hooriya:aah उम् धीरे दबाओ न आह हमममाः उफ्फ्फ नहीं बीटा आह ऐसे हे ाः

Shamshera:ammi जान मज़ा आरहा है आपको अपने बेटे क लैंड से खेल रही हो अपने बेटे से गांड मसलवा रही हो मेरी पाकीज़ा अम्मी जान

Hooriya:ahh आह बीटा हाँ बहुत मज़ा आरहा है मेरे सरताज बेटा आह

शमशेर अपने अम्मी को बाहो में भरे उसके कानो क इर्द गिर्द चुम रहा था कभी उसके गले को अपनी जीभ से चाट रहा था भूरिया की सिसक तेज़ होते जा रही थी भूरिया अपने बेटे क लैंड को कभी दये हाथ में लेती तो कभी बाये में लेती और लैंड को आगे पीछे कर रही थी

Shamshera:Jitni मासूम बनती हो उतनी हो नहीं अम्मी जान बहुत खेली खाई माल हो

भूरिया अपने बीटा का लैंड छोरती है और झटके से सोफे पर जा कर बैठ जाती है

Hooriya:han मई खेली खाई हु तुम तो नादाँ हो पहली बार हे कर रहे हो न कुंवारे जो हो

Shamshera:acha तो मेरी सजनी रूत गई

शमशेर अपनी अम्मी क बगल में आ कर बैठ जाता है और जैसे हे शमशेर की नज़र अपने अम्मी क बड़े दूध पर पड़ती है तो वो अपना ज़ुबान निकल कर अपने होठ पर फेरते हुए छत्ता है



भूरिया क बड़े बड़े थान हिजाब को फाड़ कर बहार आने को तैयार बैठे थे शमशेर को घूरता देख भूरिया मुस्कुरा उठती है

Hooriya:Kitna घूरते हो आखे ख़राब हो जाएगी

Shamshera:ab आप को पीछे से देखु तो भी आपके भरी ज़ालिम गांड मेरे डिल क चैन चुराते है आगे से देखु तो ये क़ातिल बड़े थान मेरे होश उदा देते है

Hooriya:iske अलावा तो मेरे अंदर है हे नहीं कुछ न

Shamshera:waise अम्मी आज आप कमल की लग रही हो आज आपको देख कर कोई नहीं कह सकता आप 44 साल की हो आप किस 20-25 साल की नौजवान हसीना लग रही हो

Hooriya:shukria मेरे सरताज

Shamshera:aaj पहली बार आपके होठो पैर लाली देखि है आज से पहले आपको कभी इतना सजी सॉरी नहीं देखा

Hooriya:maine आज घंटो तक अपने आपको सवार है वो हर कोशिश की जिस से मई तुम्हे अछि लागु

Shamshera:waise आप बिना लाली काजल क भी मुझे माल लगती हो पर आज तो मेरी दुल्हन जैसी लग रही हो



"अम्मी जान एक डैम पटाखा लग रही हो डिल छह रहा है अभी आपको पटक क छोड़ दू उसके बाद निकाह करू"

भूरिया जैसे अपने बेटे से ये तारीफ सुनने को बेकरार थी शमशेर की बात सुनते हे भूरिया क बांचे खिल उठते है

"हट बेशरम वो काम निकाह क पहले कौन करता है"

"अम्मी जान जब आप जैसी माल पास हो तो फिर निकाह तक इंतज़ार कौन मर्द करेगा"

भूरिया अपने बाहे फैलाती है और शमशेर को आने का इशारा करती है शमशेर अपने अम्मी क आखो में देखते हुए अपने होठो को खोल कर



अपनी अम्मी को होठो को दबोचते हुए चूसने लगता है "आह अम्मी जान""

"गलप्प गलप्प गैलप गलप्प्प गलप्प हम्म्म गलप्प्प गलप्प्प गलप्प गलप्प गलप्प्प गलप्प गलप्प ह्म्मम्गलपपप आआह गलप्प"

दोनों बिना रुके एक दूसरे को चूस रहे थे जैसे बरसो क प्यासे हो जब तक दोनों नहीं रुकते जब तक दोनों की सांस फूल नहीं जाती

"आह शमशेर थका दया मुझे"

सांस को सँभालते हुए भूरिया कहती है शमशेर क होठो पर भूरिया की लाली आ गई थी जिसे देख भूरिया मुस्कुराती भी है

"अम्मी जान अब आपके इन ख़रबूज़े जैसे दूध को प्यार करना चाहता हु"

"आह आजा बीटा ये दोनों भी अपने सरताज क हाथो मसल जाने को तैयार है मेरे साजन"



शमशेर बिना रुके पहले अपनी अम्मी क एक थान को तौलते हुए दबाता है फिर दूसरे थान को

"अम्मी जान कितने भारी मम्मी है आपके आह इन्हे खा जाने का डिल करता है"

"अहह उनमम राजा धीरे कोई सुन लेगा आह"

भूरिया ये कहते हुए दरवाज़े क तरफ देखती है

"अम्मी जान आप को पता है जब आप चलती थी तो आपके ज़ालिम गांड और ये भरी क़ातिल थान मेरे लैंड का क्या हाल करते थे"

"ाः इसलिए तुम मेरे से बदला ले रहे हो इन्हे दर्द दे काह हम्म"

"आह अम्मी मेरे लैंड को पकड़ो ..आह आपके मम्मी दोनों हाथो में आएंगे ऊपर से इतने बड़े है नंगे कितने बड़े होंगे"



भूरिया अपने बेटे क लैंड को पकड़ कर धीरे से सहलाने लगती है और शमशेर बरी बरी अपने अम्मी क दूध को दबा रहा था

"अम्मी जान मैंने कितनी हे वैश्यों को छोड़ा पर आप क जितने बड़े गांड और दूध किसी का नहीं देखा आज तक"



शमशेर अपने दोनों हाथो से अपने अम्मी जान क बड़े बड़े थान को दबा कर मसल जाता है और भूरिया की ज़ोर की सिसकी निकल जाती है

"उफ्फ्फ ाः बीटा है धीरे से मई कही भागी नहीं जा रही और तुम तो बास वैश्यों क पास जा क वेह्शी हो गए हो आह हम्म आह धीरे से"

"अम्मी जान मेरा लैंड फटा जा रहा है ज़ोर से सहलाओ आह मेरी जान मल्लिका इ जहाँ आह उठ जाओ अब खड़े हो कर मसलूंगा आपको मेरी दिलरुबा अम्मी"

शमशेर भूरिया को अपने बहो में ले कर खड़ा हो जाता है और पीछे से अपने खड़े लैंड को भूरिया क गांड क दरार में फसता है

"अम्मी जान आप अपने छूट क बाल मत काटना आपके झट देखना चाहता हु मई"



शमशेर भूरिया क दूध को दबा रहा था और पीछे से अपना कहता गांड क दरार में फसाये अपने अम्मी क मज़े लूट रहा था तभी शमशेर ठीक छूट क ऊपर हाथ मरता है

Hooriya:isshh क्या कर रहा है यह बीटा

Shamshera:wahi जो मर्द अपनी औरत अपनी बीवी अपने मेहबूबा क साथ करता है

शमशेर पीछे से भूरिया क गर्दन पर चूमता है और लैंड को आगे पीछे भूरिया की गांड क दरार में घुसा रहा था

"अम्मी जान उठ आप जैसी माल को तो दिन रात पेलू तो काम है कैसे सुल्तान ने आपको छोर दया अकेला तड़पने क लये"

"आह वो कहते है न बीटा हीरे की परख सिर्फ जौहरी जनता है "

"अम्मी जान आप को तो मई उठा उठा क पेलुँगा आप जैसी हे भरी भरकम माल औरत कहने लायक है आह क्या गांड है आपके आह क्या बड़े थान क दूध है आह हम्म्म आह अम्मी कपडे खोलो न "

"आह बीटा ऐसा न करो अभी दुपहर का वक़्त है कोई भी आ सकता है आह"

शमशेर ज़ोर ज़ोर से दूध दबाने लगता है

"ाः माँ मुझे इनका दीदार करा दो"

"उफ़ बीटा मेरे कुछ ख्वाब है जो मैंने शादी से पहले देखे थे वो ख्वाब सुल्तान तो पूरा नहीं कर सके मई चाहती हु तुम करो"

शमशेर भूरिया क गांड को एक हाथ से पकड़ा था और गांड क फाक में जगह बनाये अपना लैंड घुसेड़ रहा था वही ऊपर अपने एक हाथ से भूरिया क दूध को दबाये जा रहा था

"अम्मी जान आपके हर ख्वाब को पूरा करेगा ये आपका शौहर शमशेर आप कहिये तो"

"बीटा आह हम्म आह बीटा इतनी जल्दबाज़ी में मुझे नहीं करना वो सब"

शमशेर समझ जाता है भूरिया क्या कह रही है पर फिर भी मुस्कुराते हुए भूरिया से अनजान बनते हुए पूछते है

"क्या करना है अम्मी जान मई समझा नहीं"

"बीटा हम बिस्तारी नहीं करनी दर क माहौल में वो मज़ा नहीं आएगा अगर तुम मेरे नंगे बदन को देख लिए तो रोक नहीं पाओगे"

"अच्छा तो आप अंदर कुछ पहनी हो न अपने बड़े दूध क ऊपर"

"हाँ बीटा ब्राज़िएर है"

"ाचा तो आप निक़ाब ऊपर करो न अम्मी जान"

"जिसको देखना है वो खुद कर ले आह हम्म"

शमशेर अपने लैंड से ज़ोर ज़ोर का घस्सा मारता है और गांड क छेड़ में भूरिया का निक़ाब फस्स चूका था भूरिया की छूट पानी पानी हो रही थी आखे लाल हो गए थे और उसका दूध शमशेर क मजबूत हाथ में आकर ऐसे डाब कर उछाल रहे थे जैसे पहले कभी इतने खुश न हुए हो

"मेरी अम्मी जान उफ़ मुझे खोल लेने दो आपके शर्म का पर्दा बना लेने दो अपनी बीवी बन जाओ मेरी औरत "

शमशेर धीरे धीरे से भूरिया क आगे से निक़ाब को उठाना शुरू करता है और भूरिया का मखमली पेट दिखना शुरू हो जाया है उसके गहरी नाभि क ऊपर से गुलाबी रंग का ब्राज़िएर देख

"अम्मी मेरा लैंड पकड़ो ज़ोर से हिलाओ आह"

भूरिया अपना हाथ पीछे ले जा कर अपने बेटे का लैंड आगे पीछे करती है और शमशेर धीरे धीरे से अपने अम्मी क दूध क ऊपर से निक़ाब ऊपर करता है अब भूरिया क बड़े बड़े वक्ष सिर्फ एक पतले से ब्राज़िएर में था जिसे देख शमशेर क मुँह से लार टपकने लगता है "आह हाय अम्मी जान मेरी भूरिया बेगम आप को अपने साथ ज़िन्दगी भर रखूँगा और अपने लैंड पर रोज़ बिठाऊंगा आपके इन बड़े मम्मो की मालिश रोज़ करूँगा आह"

ये कहते हुए शमशेर अपने बड़े पंजो को अपनी अम्मी जान क दोनों दूध पर रखता है और उसके आखे बंद हो जाती है भूरिया भी अपने बेटे का हाथ ब्राज़िएर क ऊपर से उसके दूध को छूटे हुए महसूस कर रही थी

"ाः शमशेराआ ाआअह मेरे शेर मेरे पीछे की तो खुजली बरसो की मिटा दी अब इनकी भी मिटा दो इन दोनों को मजबूत हाथ नहीं मिला आह इनके अरमान पूरी कर दो मेरे शहज़ादे मेरे सरताज"

शमशेर अपने दोनों हाथो में अपने अम्मी क बड़े थान को भर्र ज़ोर ज़ोर से मसलना शुरू कर देता है



"आह ामम्मि ाः मेरे लैंड को ज़ोर से हिलाओ आह क्या खूबसूरत दूध है आपके आह इन्हे पीने दो अम्मी जान"

"बीटा आह हम्म्म ऐसे हे मसलो मेरे दूध को ये तुम्हारे लिए हे है मेरे मजनू मेरे आशिक़ आह पर अभी नहीं आह उफ़ और ज़ोर से मसलो"

शमशेर का लैंड हिलाते हुए अपने दूध को दबवाते हुए पारस को सुल्ताना मल्लिका भूरिया अपने बेटे क साथ भरी दुपहर गुलछर्रे उदा रही थी सुल्तान इस बात से अनजान थे

शमशेर अब अपनी अम्मी को थोड़ा झुका देता है और अपने लैंड को निक़ाब क ऊपर से हे उनके गांड में पेलने लगता है और कुछ झटके मारते हे उसके पानी निकलने लगता है उधर भूरिया भी तगड़े झटको और अपने थान को मसलवा कर शमशेर क साथ हे फ़ारिग़ होने लगती है शमशेर गांड पर एक दो थप्पड़ मारता है और दूध को मसलते हुए झाड़ रहा था और भूरिया

आहे भर रही थी

"आआआह मेरे ाआअशिक बीटा आआह आपकी अम्मी फ़ारिग़ हूऊऊ गयी हम्म्म्म्म ाआअह हम्म्म्म ाआअह मज़ा आएगया"

"ाआअह अम्मी मई भी गया ाः हम्म्म मेरी सबसे अच्छी अम्मी मेरी लैला ाः"

दोनों झाड़ रहे थे रुकने का नाम नहीं ले रहे थे कुछ देर बाद दोनों माँ बीटा हफ्ते हुए रुकते है दोनों पसीने से तरबतर थे शमशेर अपने अम्मी को देखता है और वही सोफे पर बैठ जाता है भूरिया अपने दूध को फिर ढकती है और फिर वो भी सोफे पर शमशेर क बगल में बैठ जाती है भूरिया की नज़र शमशेर क लैंड क पास पाजामे पर जाती है. जो भीग गया था और शमशेर की नज़र अम्मी जान पर पड़ती है जिसके निक़ाब छूट क पास बिलकुल जेल था तभी शमशेर अपने लैंड की ओरे देखता है तो उसके पाजामे पैर मणि गिरी हुई दिखाई दे रही थी फिर भूरिया अपने छूट क पास देखती है और मारे शर्म और हाय क उसके आखे बड़ी हो जाती है ,भूरिया शमशेर की ओरे देखती है और दोनों एक दुस्र्रे क आखो में देख मुस्कुरा देते है.

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 166

शमशेर अब अपनी अम्मी को थोड़ा झुका देता है और अपने लैंड को निक़ाब क ऊपर से हे उनके गांड में पेलने लगता है और कुछ झटके मारते हे उसके पानी निकलने लगता है उधर भूरिया भी तगड़े झटको और अपने थान को मसलवा कर शमशेर क साथ हे फ़ारिग़ होने लगती है शमशेर गांड पर एक दो थप्पड़ मारता है और दूध को मसलते हुए झाड़ रहा था और भूरिया

आहे भर रही थी

"आआआह मेरे ाआअशिक बीटा आआह आपकी अम्मी फ़ारिग़ हूऊऊ गयी हम्म्म्म्म ाआअह हम्म्म्म ाआअह मज़ा आएगया"

"ाआअह अम्मी मई भी गया ाः हम्म्म मेरी सबसे अच्छी अम्मी मेरी लैला ाः"

दोनों झाड़ रहे थे रुकने का नाम नहीं ले रहे थे कुछ देर बाद दोनों माँ बीटा हफ्ते हुए रुकते है दोनों पसीने से तरबतर थे शमशेर अपने अम्मी को देखता है और वही सोफे पर बैठ जाता है भूरिया अपने दूध को फिर ढकती है और फिर वो भी सोफे पर शमशेर क बगल में बैठ जाती है भूरिया की नज़र शमशेर क लैंड क पास पाजामे पर जाती है. जो भीग गया था और शमशेर की नज़र अम्मी जान पर पड़ती है जिसके निक़ाब छूट क पास बिलकुल जेल था तभी शमशेर अपने लैंड की ओरे देखता है तो उसके पाजामे पैर मणि गिरी हुई दिखाई दे रही थी फिर भूरिया अपने छूट क पास देखती है और मारे शर्म और हाय क उसके आखे बड़ी हो जाती है ,भूरिया शमशेर की ओरे देखती है और दोनों एक दुस्र्रे क आखो में देख मुस्कुरा देते है.

कुछ देर तक दोनों यही अपने साँसों को सँभालने की कोशिश कर रहे थे और हफ्ते रहते है और भूरिया बार बार शमशेर को देख रही थी और शमशेर उसे देख मुस्कुरा देता और भूरिया शर्मा कर अपनी निगाहे निचे कर लेती

Shamshera:ammi जान आपके छूट ने तो पानी छोर दया

Hooriya:chup कर तुम बहुत गंदे लफ्ज़ का इश्तेमाल करते हो

Shamshera:Q अम्मी जान अब मई आपके खूबसूरत जिस्म की तारीफ भी नहीं कर सकता

Hooriya:tum तो ऐसे लफ्ज़ इश्तेमाल करते हो जो लोग गालिओ में इश्तेमाल करते है ये सब तुम कोठो पर जा कर हे सीखे हो

Shamshera:ammi जान कोठे पर जाना भी तो आपकी ख़ूबसूरती देख कर सीखा हु

Hooriya:chup करो अब मुझे नहाना होगा दुपहर क वक़्त भला कौन ये काम करता है

Shamshera:Kya करू अम्मी जान आपको देखते हे मेरे लैंड अकड़न हो जाती है फिर रुका नहीं जाता ये नहीं सूझता दिन है या रात बास आपके जिस्म से प्यार करने को डिल चाहता है

Hooriya:Han पद गई ठंडक अब तुमको और उसको भी बड़ा शेर बन रहा था देखो चूहा बन कर दुबक गया है

Shamshera:aapki मेहेरबानी जो आपने मेरे लैंड को हिला कर फ़ारिग़ कर दया पर आप चाहे तो ये फिर से शेर बन जायेगा मेरे लौड़ा मुँह में ले लो अम्मी जान

शमशेर की बात सुनते हे भूरिया का गुस्सा सातवे आसमान पर आजाता है और वो कड़ी हो जाती है और अपने बेटे क तरफ ऊँगली दिखते हुए कहती है

"ख़बरदार जो ऐसी नीच हरकत मुझसे करने की उम्मीद राखी"

शमशेर अपने अम्मी क इस रूप को देख कर दर सा जाता है और उसे कुछ समझ नहीं आता फिर कुछ सोचते हुए

Shamshera:meri प्यारी अम्मी जान आप ऐसा क्यू कह रही हो

Hooriya:shamshera तुम गन्दी चीज़ मेरे मुँह तक ले जाने का सोच भी कैसे लिए यही इश्क़ है तुम्हारा यही मुहब्बत है

Shamshera:Ammi जान इसमें गुस्से की क्या बात है आपको नहीं पता एक मर्द और एक औरत जिस्म का हर हिस्सा चूसते है चूमते है चाहे वो छूट हो या लैंड बदले में आप चाहे तो में आपका छूट चूस दूंगा

Hooriya:bakwas नहीं करो मई तो आज तक नहीं सुनी ऐसा क शौहर बीवी ऐसा करते हो और ये कोई तरीक़ा नहीं इतना घिनौनी हरकत भी कोई कर सकता है

Shamshera:mai करूँगा आपके छूट को अपने ज़ुबान से चाट कर आपके छूट का रास पियूँगा बदले में आप मेरा लैंड मुँह में ले कर चूसना

Hooriya:nahi मई न तुम्हे मेरे शर्मगाह को अपने ज़ुबान से छूने दूंगी और न तुम्हारे उसको अपने लैब से छुंगी

Shamshera:mai तो आपके इन खूबसूरत लैब को खोलते हुए अपना लैंड अंदर आपके खूबसूरत मुँह में डालूंगा

Hooriya:tum जबरदस्ती करोगे ?

Shamshera:ammi जान छूट मरवाने क लये तो बेकरार हो रही तो क्या इतना नहीं कर सकती रेशमा को तो मेरा लैंड चूसने में सबसे ज़्यादा मज़ा आता था

Hooriya:ab ये रेशमा कौन है

भूरिया जैसे अपने बेटे क मुँह से किसी और औरत का नाम सुन कर जल भून जाती है

Shamshera:aay है मेरी अम्मी जलन हो रही है रेशमा बाजार की सबसे महंगी औरत है कोठे पर नाचती है

Hooriya:Han तो जाओ उसी क पास मई कोई रेशमा जैसी कोठे पर नाचने वाली वैश्य नहीं जो घिनोने काम करू जानवरो वाली सोच अपने दिमाग से निकल दो

Shamshera:ammi जान एक दिन आप भी मेरे लिए नाचोगी ,रक्ष karogi,mujra karogi,waise आप कभी कहती हो कोठो पर नहीं जाने कभी कहती जाओ समझ नहीं आती आप अम्मी जान

Hooriya:khwabo में हे पूरी कर लेना ये हसरते इतनी वाहयात ख्याल तो तुम्हारे अब्बा ने भी अपने ज़ुबान से नहीं निकला

भूरिया ये कहते हुए नहाने क लये जाने लगती है और शमशेर अपने अम्मी की मटकती गांड को देख

"अम्मी जान मुझे अफ़सोस है क सुल्तान इतना बेवक़ूफ़ कैसे हो सकता है इतने प्यारे लबो को अब तक लैंड नहीं नसीब हुआ "

शमशेर चिल्लाते हुए अपने अम्मी को कहता है और वो बिना सुने अपने गांड को मटकते हुए नहाने चली जाती है

Shamshera:uff ये साली खुद तो चली गई अपने आप को साफ़ करने पर मेरे लैंड ने जो पानी छोरा है उसका क्या

शमशेर सोच रहा था तभी भूरिया का निक़ाब का वो हिस्सा जो वो चेहरे पर लगाती थी निचे गिरा हुआ दीखता है और वो झट से उठा कर

"अम्मी जान जब तक आप मुँह में नहीं लेती हो तब तक ये हे सही"

ये कह कर शमशेर अपने लैंड का पानी अच्छे से साफ़ करता है और फिर उठ कर अपने कक्षा में आजाता है

शमशेर और भूरिया आज दोनों कई महीनो बाद झड़े थे शमशेर आकर नहाने घुस जाता है और फिर खाना खा कर सोने क लये बिस्तर पर लेट जाता है

Shamshera:man me)aaj कितना मज़ा आया अम्मी जान को दिन दहाड़े लपेटे में ले लिया अब अम्मी जान की छूट पता नहीं कब मरने को मिलेगी बेचारी तो लैंड मुँह में लेना हे पहली बार सुन रही है अगर मई ये कह दू क मुझे उनकी गांड मारनी है तो वो तो शायद मुझे पागल हे समझे अब गलती उनकी भी नहीं है अब्बा जान कभी उनके साथ ये सब कए हे नहीं और न बात किये तो भला सीढ़ी सधी अम्मी को क्या पता चुदाई क खेल में इंसान किस हद को पार कर देता है चलो ाचा हे है अम्मी की छूट न सही मुँह और गांड ने कभी लैंड नहीं लिया है और मेरा लैंड उनके मुँह में पहली बार घुसेगा और गांड का ताला भी मई हे खोलूंगा

पारस का सूरज अपने आखिरी साँसे ले रहा था और ढलता हुआ पश्चिम को डूब रहा था सूरज का लालिमा सुन्दर साम्राज्य पारस को अति सुन्दर बना रही थी महल में शमशेर की आखे खुलती है तो वो अपने आप को पलंग पर लेता हुआ पता है नींद आज उसे काफी चैन की आई थी वजह थी उसकी अम्मी हूरजहाँ शमशेर उठ कर तैयार होता है और चहल कदमी करते हुए महल से बहार आता है

Shamshera:mera घोडा तैयार करो

एक सिपाही फ़ौरन घोड़े को ला कर शमशेर क सामने खड़ा कर देता है और शमशेर अपने घोड़े पर कूद कर बैठ जाता है और घोडा को पारस क बाजार की ओरे ले जाता hai,kuch देर घुड़सवारी करते हुए वो एक सुनार क पास पहुँचता है और वो अपने घोड़े को रोक एक तरफ बांधता है और चलते हुए एक घर क अंदर घुसता है और तभी अंदर से आवाज़ आती है

"आर्य कौन है वह बिना पूछे अंदर घुसे ाआर्हे हो "

वो शख्स ये कहते हुए बहार निकलता है और सामने से शमशेर को आते देख

"शहज़ादे आप गुस्ताखी मुआफ "

Shamshera:Suno हमे तुमसे कुछ चाहिए

Sunar:Aaiye शहज़ादे बैठिये आप ने इस गरीबखाने में आकर मेरा मान बढ़ाया है

शमशेर को अपने सोफे पर बैठा कर वो सुनार खुद निचे बैठने लगता है

Shamshera:upar बैठिये आप

Sunar:aap हमारे जहाँपनाह होने वाले सुल्तान है मई बराबर में कैसे बैठ सकता हु

Shamshera:ary बोलै न आओ बैठो

सुनार डरते हुए सामने रखे कुर्सी पर बैठ जाता है

Sunar:bataye शहज़ादे इस नाचीज़ को आपने कैसे याद कर लिया

Shamshera:Hum तुम्हारे कारीगिरी से बखूबी वाक़िफ़ है और मुझे कुछ खास तोहफा देना है किसी खास को

Sunar:aap को जैसा जेवर चाहिए आपको मिल जायेगा शाही खान्दानु क लये मेरे दादा परदादा तक जेवर बनाते आये है

Shamshera:Mujhe एक अंगूठी चाहिए जो दुन्या की सबसे बेशक़ीमती हो

Sunar:kya मई जान सकता हु इतनी क़ीमती अंगूठी किसके लये चाहिए

Shamshera:tumko इस से क्या लेना देना है

Sunar:Gustakhi मुआफ शहज़ादे पर आप अंगूठी की नाप और नक़्श तो मुझे उस हिसाब से हे बनाना होगा

Shamshera:hmm तो वो मई अपने बीवी को दूंगा

सुनार का ये सुन कर मुँह खुला का खुला रह जाता है और थोड़ी देर सोचते हुए

"पर शहज़ादे ये बात तो पुरे पारस को पता है क आप की शादी नहीं हुई है अब तक "

"अब बिना शादी कए क्या मई रिश्ता नहीं रख सकता "

"आप रख सकते है शहज़ादे आप बादशाहो की बात हे जुड़ा है वैसे एक लड़की क लये बनाऊ अंगूठी"

"हम्म हाँ एक औरत क लये"

"शहज़ादे औरत क लये मई समझा नहीं"

Shamshera:man me)ab इसे कैसे कहु क मुझे अपने अम्मी को हे देना है

Sunar:lagta है आप शर्मा रहे है बहुत मुहब्बत करते है उनसे

Shamshera:han मेरी जान है वो उसके लये लेनी है अंगूठी लड़की हे है पर थोड़ी सेहतमंद है इसलिए औरत कहा

Sunar:samajh गया शहज़ादे और कुछ चाहिए आपको अपने खंडन वालो क लये या अपने अम्मी जान क लये

Shamshera:man me)Kahi ये न हो भूरिया क ऊँगली में आये नहीं कही इसके पास भूरिया का नाप होगा तो

Shamshera:acha पर मई किसी और क लये कैसे ले जाऊ कोई जेवर कही छोटा बड़ा हुआ तो

Sunar:shehzade आप फ़िक़र क्यू करते है आपके खंडन क हर इंसान क जेवर हम बनाते है सबके नाप है हमारे पास

Shamshera:kya मेरी अम्मी जान भूरिया सुल्ताना का भी है

Sunar:han है क्यू

Shamshera:to आप उनके नाप का हे दे दो

Sunar:to कितनी अंगूठी चाहिए 2?

Shamshera:nahi सिर्फ 1 अपनी मेहबूबा क लये और ये बात किसी को पता नहीं चले

Sunar:par आप कह रहे है क आपको भूरिया सुल्ताना क नाप का भी लेना है

Shamshera:wo दरअसल अम्मी जान क जैसी सेहत है तो जो उनके ऊँगली में आजायेगी वो मेरी मेहबूबा क ऊँगली में भी आजायेगी

Sunar:haha ाचा तो ये बात है लगता है अपने अम्मी क लये आपने बहु हूबहू उनके जैसी हे धुंडी है

Shamshera:man me)Hubahu नहीं अम्मी की बहु अम्मी खुद hai..meri बीवी अम्मी खुद है

Sunar:theek है आपको कब तक चाहिए

Shamshera:abhi इस वक़्त ?

Sunar:par शहज़ादे अगर बना कर देता तो बेहतर होता वैसे मेरे पास आपके अम्मी क नाप की अंगुठिए है जो बेहद खूसबूरत है आप चाहे तो उनमे से पसंद करते है

शमशेर को सुनार बहुत साड़ी अंगुठिए दिखता है और उसमे से एक अंगूठी को शमशेर उठा कर

Shamshera:man में )ये भूरिया क खूबसूरत ऊँगली जचेगी

Shamshera:iski क्या क़ीमत है

Sunar:Shehzade अब आपको क्या क़ीमत लागू वैसे ये अंगूठी में बहुत अचे दर्ज़े की कारीगरी की गई है

Shamshera:qeemat बोलो

Sunar:shehzade आप जो देंगे क़ुबूल कर लूंगा

शमशेर अपने जेब से सोने क सिक्के निकल कर सुनार को देता है जो एक पोटली थी सुनार उसे खोलता है और सोने क सिक्के को देख कर

Sunar:shehzade आपने इस अंगूठी की किम्मत बहुत ज़्यादा दे रहे है मुझे लगता है

Shamshera:meri मेहबूबा मेरी जान इन सिक्को से ज़्यादा क़ीमती है

Sunar:lagta है आप बहुत मुहब्बत करते है उनसे वैसे हम भी चाहेंगे क आप दोनों की जल्दी शादी हो और आप अपने वालिद सुल्तान मेरे वाहिद की तरह हे अपने बच्चो की तरबियत करे और जांबाज़ जंगजू बनाये जो हमारे पारसी सल्तनत को दुन्या पर हुकूमत करे

Shamshera:zarur आपकी दवा रही तो ऐसा हे होगा अब हम चलते है

Sunar:Shehzade अपने शादी पर इस नाचीज़ को याद कर लीजियेगा मई आपके बीवी क लये दुन्या क सबसे खास जेवरात बनाऊंगा

Shamshera:zarur

शमशेर मुस्कुरा कर उठता है और बहार की तरफ जाने लगता है पीछे से सुनार अपने हाथो को बंधे हुए चल कर आने लगता है और शमशेर से पहले हे घोडा को खोल कर शमशेर क पास लता है

Sunar:Shehzade आप बिना सिपाहीओं क चलते है सुना था कुछ दिनों पहले हे आप पर हमला हुआ था

शमशेर घोड़े पर बैठ जाता है और लगाम पकड़ते हुए सुनार क आखो में देखते हुए

"शमशेर की जान इतने नाज़ुक नहीं क चाँद लोग मिल कर ले ले आज भी अकेला घूम रहा हु कल भी अकेला घूम रहा हु इन चीनीओं और मंगोलो लूटेरो से खौफ नहीं मुझे"

Sunar:Shehzade का इक़बाल बुलंद हो

शमशेर मुस्कुराते हुए अपने घोड़े की लगाम खींचते हुए पारस क महल की ओरे बढ़ने लगता है

उधर भूरिया सो कर उठती है और तैयार हो कर अपने सौतन नाज़ क पास जाती है और नाज़ से बाते करने लगती है

Naaz:Q भूरिया बजी आज कल खूब सज सवार रही हो लगता है सुल्तान को इस बार घुलम बना हे डौगी अपने हुस्न क जाल से

Hooriya:Nahi बहिन जो शख्स इतने अर्शे से मेरी जाल में नहीं फसा वो अब क्या फसेगा

Naaz:acha हुआ आप आगयी मेरा डिल भी अकेला नहीं लगता बाजी ऐसा लगता है सुल्तान की बीवी बन कर फास गई हु

Hooriya:Jo है शुक्र मनाओ नाज़

Naaz:ab इंसान हे हु बाजी हर किसी औरत की ख्वाइशे होती है अब मई आप जितनी खूबसूरत भी तो नहीं जो मुझे देखने क लये लाखो मर्द तड़पते हो नहीं तो

Hooriya:nahi तो क्या?

Naaz:nahi तो अपनी प्यास बुझवा लेती किसी न किसी से

Hooriya:tum ऐसा सोच भी कैसे सकती हो तुम्हे पता भी है अगर सुल्तान को पता चल गया तो

Naaz:to क्या होगा जान से मर देंगे पर पता चलने हे न दे तो पर कोई मर्द देखता तक नहीं अब आप मेरी इस बात से मुझे जो समझना है समझे

Hooriya:tumhara दिमाग ठिकाने पर नहीं है

Naaz:aap तड़प कर बर्दाश्त कर क रह सकती है पर मेरे अंदर उतना सब्र नहीं जितना आपमें है

Hooriya:man me)islye तो तुम अपने फायदे क लये शहज़ादे शान को सुल्तान बनाना चाहती हो

Hooriya:ab तुम्हारे बचे भी जवान हो गए है नाज़ बेगम ये शोभा नहीं देता

Naaz:aur बूढ़े हो चुके सुल्तान को शोभा देता है अपने बेटी क उम्र क लड़की क साथ हमबिस्तरी करने का बाजी कौन सी मई बूढी हो गयी हु

Hooriya:chup कर नाज़ कुछ बातो को डिल में हे रखो

Naaz:aap बनो पाकीज़ा मुझे नहीं बन न

Hooriya:man me)ab कैसे तुम्हे बताऊ नाज़ क मई भी नाजायज़ रिश्ता जोड़ ली हु या यु कहु मुझे अपने हे बेटे से इश्क़ हो गया है अब तो मेरा मुँह भी नहीं तुम सबको राह दिखने का

Naaz:aap ऐसे हे चुस्त लिबास पहन कीजिये भूरिया बाजी ऐसी सजी सॉरी रहती है तो लगता है क आप सुल्ताना है नहीं तो पहले तो आप अपने नाख़ून तक को बड़े से झब्बे में बंद कर क रखती थी इस लिबास में आपके बदन का कटाव तूफानी लग रहा है

Hooriya:chup कर besharam,waise ये समां कहा है

Naaz:sama गयी है बाघ से फूल तोड़ने मेरे मन करने क बावजूद ये नहीं मानती शाम क वक़्त नहीं जाना चाइये बहार अब आप हे समझाए उसको मेरी बेटी काम आपकी ज़्यादा लगती है वो मेरी तो एक नहीं सुनती

Hooriya:theek है मई समझाउंगी

Naaz:ary हाँ भूल गई वो कह रही थी आज भी वो आपके हुजरे में हे सोयेगी

Hooriya:kya ???

भूरिया सुन कर चौंक जाती है क्यू क आज शमशेर फिर से रात में आने वाला था

Naaz:kya हुआ बजी आप तो ऐसे चौंक रही जैसे आपको किसी आशिक़ क साथ रात गुज़ारनी है और समां कबाब में हड्डी बन रही है

भूरिया ये बात सुन कर चौंक जाती है और उसके रोंगटे खड़े होजाते है

Hooriya,oot पतंग क्यू बोलती हो नाज़ ऐसी कोई बात नहीं ठीक है मई चलती हु

तभी दरवाजेसे अंदर सुल्तान की सबसे छोटी पत्नी मुस्कान बेगम अंदर आती है

Naaz:bhut देर कर दी मुस्कान आते आते

Muskan:aap तो जानते हे है सुल्तान पकड़ लेते है तो छोड़ते हे नहीं अब रात की तैयारी कर रही थी बिस्तर वगैरह

मुस्कान ये कह कर भूरिया को तिरछी नज़र से देखते हुए ताना मारती है

Hooriya:theek है मई चलती हु तुम दोनों बाते करो

भूरिया वह से निकल कर अपने हुजरे में आने लगती है

Hooriya:man me)Muskan बेगम अब मुझे इस बात से दुःख नहीं होता क तुम सुल्तान को ले कर सोई रहती हो क्यू क अब मैंने अपना नया मर्द बना लय है मेरा सुल्तान मेरा बीटा है शमशेर

भूरिया अपने चेहरे को निक़ाब से धक् क अपने बड़ी गांड को मटकते हुए अपने हुजरे में जाने लगती है उधर शमशेर महल में आजाता है और अपने अम्मी की दीदार करने क लये सीधा उनके हुजरे में जाता है पर भूरिया उसे नहीं मिलती और वही इंतज़ार कर रहा था तभी शमशेर को किसी क कदमो की आवाज़ सुनाई देती है भूरिया अचानक से किसी मर्द को बैठा देख दर सी जाती है



Hooriya:ary शमशेर तुम इस वक़्त ?

शमशेर अपनी अम्मी क भरे बदन को पहले ऊपर से निचे तक देखता है और आहे भरते हुए

"अम्मी जान क्यू आपको किसी और आशिक़ का इंतज़ार था "

Hooriya:chup करो ऐसा कह रहे हो जैसे मई 10 आशिके राखी हु

Shamshera:aap इतनी सख्त मिजाज़ की कैसे हो सकती हो अब तो तुम्हे मुझे आप कह कर पुकारना चाहिए अब मई आपके शौहर जो हुआ

Hooriya:shadi कब कए ?

Shamshera:Aap चाहो तो अभी कर ले हम दोनों

Hooriya:Han इतनी हिम्मत है तो सबके सामने मुझसे निकाह कर लो मई भी क़ुबूल कर लुंगी

Shamshera:bhut तेज़ तर्रार हो अम्मी मई अपने मेहबूबा क लये

ये कहते हुए शमशेर घुटने पर बैठ जाता है और एक बेहद खूबसूरत अंगूठी को अपने अम्मी क सामने करते हुए

"अम्मी जान मेरी दिलरुबा मेरी मेहबूबा हूर पारी भूरिया क लये एक छोटा सा तोहफा "

भूरिया अपने जज़्बात को सँभालते हुए अपने हाथ आगे बढाती है और शमशेर वो अंगूठी पहना देता है

"अम्मी जान मई चाहता हु क आप पुराणी अंगूठी उतार दे जो अब्बा जान की दी हुई है "

"बीटा मई भी चाहती हु पर कही सुल्तान की नज़र इस पर पड़ी क मैंने नया अंगूठी पहनी हु और उनकी उतर दी हु तो क्या सोचेंगे"

"मेरा डिल तोड़ दया अम्मी जान अब इसके बदले मुझे कुछ और चाहिए"

"क्या चाहिए मेरी जान को बताओ "

"अम्मी जान मई चाहता हु क एक बारी आप आप मेरा न लैंड चूस ले"

"कभी नहीं "

"अपने आशिक़ की इतनी सी ख्वाइश पूरी नहीं कर सकती सिर्फ एक बार आपको दुबारा नहीं कहूंगा"

"समझो शमशेर मैंने आज तक ऐसा नहीं क्या नहीं कर पाऊँगी "

"अम्मी पर मई आज आपको अपना लैंड चुसवा क रहूँगा प्यार में सब जाएज़ है"

शमशेर हे कह कर अपने लैंड को हाथ लगते हुए अपने अम्मी को घूरते हुए आगे बढ़ता है और भूरिया दर से पीछे कदम ले जाती है



"आय हाय अम्मी आपके ये बड़ी चुचिअ आह क्या कहने कहा भागोजी मेरी मल्लिका"

"शमशेर मई कह रही हु इतनी गलीज़ हरकत मत करो ऐसा कौन करता है भला"

"मई करता हु बहुत बार क्या है आपको भी बहुत मज़ा आएगा आप एक बार तो लैंड ले लो मुँह में अम्मी जान"

शमशेर भूरिया क तरफ बढ़ रहा था और भूरिया जिसके चेहरे पर अब भी निक़ाब था क्यू क वो अभी नाज़ से मिल कर आई थी वो शमशेर को हर बार मन कर रही थी और लैंड मुँह में लेने को राज़ी हे नहीं हो रही थी



"शमशेर मेरे आशिके बात मान लो प्यारे मेरी कोई नापाक जगह को मुँह से लगता है क्या मई सब कुछ कर लुंगी तुम्हारे साथ हमबिस्तरी भी कर लुंगी पर ये नहीं"

"क्या अम्मी जान मई चाहता हु क आप हर मज़े को महसूस करे पर देखिये अभी तक आपके चेहरे पर निक़ाब है आप महल में भी चेहरे पर निक़ाब लगा कर घूमती हो मई चाहता हु आप खुल कर जिए"

"मई हर बात मानूंगी पर ये नहीं बीटा मान जा नापाक जगह होती है वो "

"मई पाक कर दूंगा इधर आजा मेरी दिलरुबा अम्मी जान"

शमशेर अपने अम्मी की तरफ लपकता है और भूरिया समझते हुए पीछे जा रही रही



"मई आपके सामने हाथ जोड़ती हो मेरे सरताज मेरे जिगर शमशेर ये न करो मेहेरबानी कर क"

शमशेर अपने अम्मी क दोनों हाथो को पकड़ता है और निचे बैठने क लये कहता है और भूरिया न चाहते हुए भी घुटने क बल बैठ जाती है

"शमशेर न कर बीटा देखो दरवाज़ा भी खुला है कही कोई आगया तो"

"अम्मी जान आपके इजाज़त क बिना किसकी हिम्मत क सुल्ताना भूरिया क हुजरे में

कदम रख दे"

ये कहते हुए शमशेर अपने अम्मी क आखो में देख कर

"अम्मी जान मेरा लैंड नहीं देखना चाहोगी"

भूरिया समझ रही थी क शमशेर आगे क्या करेगा इसलिए उस से हाँ न कुछ बोलै नहीं जाता

"बोलो न अम्मी आप तो बड़े गौर से देखती हो लैंड का उभर देखना नहीं ?"

"हम्म बीटा"

शमशेर पालक झपकते हे अपने पजामा को निचे कर देता है और शमशेर का हुल्लाबी लौड़ा बहार आकर हिलने लगता है



शमशेर का लैंड अभी पूरा खड़ा भी नहीं था पर 9 इंच की लम्बाई और 3 इंच की चौड़ाई लये लैंड दये बाये हिल रहा था जिसे देखते हे भूरिया क मुँह से निकलता है "बाप रे इतना बड़ा और मोटा "



भूरिया अपने बेटे क लैंड को पहली बार थोड़ा घबरा जाती है और अपने हाथो से अपने चेहरे को लज्जा कर छुपा लेती है

"अम्मी जान अआप्की खिदमत करने क लये हे मैंने इसे तैयार क्या है इसे पकड़ो"

"चुप कर ये तो किसी सांप जैसे नाच रहा है ये खिदमत क्या करेगा मेरी उल्टा दस् लिया तो मई मर्डर जाउंगी"

"अम्मी जान यक़ीन माने ये आपकी ऐसी खिदमत करेगा क आपके बदन क हर गर्मी शांत कर देगा "

भूरिया हिम्मत करती है और ज़रा सा अपने आखो को खोलती है और उसके सामने अब शमशेर का लैंड तन्नाए इधर उधर हिल रहा था



भूरिया एक पल क लये अपनी आखे खोलती है फिर बंद कर लेती है जिसे देख शमशेर मुस्कुरा देता है

"अम्मी जान ये सिर्फ ये सोच कर क आपकी छूट में घुइसगा खड़ा हो गया और आपको सलामी दे रहा है इसको दुलार करो ये आपको जैम क छोड़ेगा और खुश रखेगा"

भूरिया शमशेर का हाथ अपने पर ढीला प् कर उठने की कोशिश करती है

"मुझे जाने दो मई नहीं लुंगी मुँह में"

शमशेर अपने अम्मी क दोनों बहो को पकड़ कर बैठता है

"कैसे नहीं लेगी लैंड अब देख मेरे लैंड को आखे खोलो भूरिया बेगम"



"आह न ये बहुत मोटा और लम्बा है मई नहीं ले पाऊँगी मुँह में इतना बड़ा लैंड तो घोड़े का होता है तुम जानवर हो पुरे"

"लगता है अब्बा जान का लैंड छोटा था "

"मैंने ख्वाब में नहीं सोची थी इतना बड़ा होता है और तुम्हारे अब्बा का तो इसका आधा है"

"आह मेरी बेगम भूरिया मेरी अम्मी जान ये ले"



शमशेर अपना खड़ा लैंड निक़ाब से ढके चेहरे क ऊपर से हे भूरिया क मुँह में डालने लगता है

"ये लीजिये आजका आपका दूसरा तोहफा ..क़ुबूल कीजिये अम्मी जान"

भूरिया लैंड की गर्मी से जल रही थी और उसके छूट में चीटिना रेंगने लगी थी तभी दोनों माँ बेटो क कान में किसी की आवाज़ आई

"भूरिया बाजी क्या मई अंदर आसक्ति हु"

Shamshera:Ye नाज़ अम्मी है इनको फ़ौरन यहाँ से दफा करो

भूरिया तो नाज़ की आवाज़ सुन कर सोच में पद गई वो क्या कहे और शमशेर अब भी अपने लैंड को भूरिया क मुँह पर निक़ाब क ऊपर से धकेल रहा था

Naaz:Hooriya सुल्ताना क्या मई अंदर आसक्ति हु कुछ आज क खाने क बारे में गुफ्तुगू करनी थी

भूरिया मरती क्या न करती अपने मुँह को लैंड से थोड़ा दूर करते हुए

"न नाज़ बेगम मई आऔंगी मई अभी कुछ कर रही हु"



भूरिया ज़ोर से बोलने क लये अपने हाथ को आगे बढाती है और शमशेर का लैंड जो गरम लोहे जैसा जल रहा था वो हूरजहाँ क हाथ में आजाता है और शमशेर क मुँह से एक "aaaah"nikal जाती है

उधर नाज़ कड़ी हो कर सोच रही थी

"पता नहीं क्या कर रही है भूरिया इस वक़्त बड़ी आई सुल्ताना साड़ी घमंड निकल दूंगी एक दिन "

नाज़ ये सोच कर वापस चली जाती है

शमशेर क लैंड पर जैसे हे भूरिया का हाथ पड़ता है गलती से वैसे हे शमशेर अपने मदहोशी से भूरिया क चेहरे क निक़ाब को खींचता है और भूरिया का चेहरा बे निक़ाब हो जाता है



भूरिया जैसे हे देखती है क शमशेर का हाथ अब उसको नहीं पकडे हुए है वो झट से उठ कर कड़ी हो जाती है पर शमशेर भी अपने माँ क पीछे झट से भागता है और भूरिया आख़िरकार दीवार से चिपक कर कड़ी हो जाती है

"अब शहज़ादे आप अपनी अम्मी जान से जबरदस्ती करेंगे"



"अम्मी जान मई कोई काम ऐसा नहीं करूँगा जिस से आपको रुस्वा होना पड़े मई आप को असल चुदाई का मज़ा असल प्यार का मज़ा देना चाहता हु जो बेवक़ूफ़ सुल्तान ने कभी नहीं दिया आपको"

भूरिया अब चुपचाप अपने बेटे क चेहरे को देख रही थी और सोच रही थी शमशेर अपने होठ अपने अम्मी जान क रसीले लैब से मिला देता है और चूसने लगता है

"अम्मी जान पकड़ो न मेरे लैंड को देखो कैसे तड़प रहा है आपके जिस्म की खुशबु सूंघ क "



शमशेर अपने अम्मी भूरिया का हाथ ले कर अपने लैंड पर रख देता है और पहली बार भूरिया अपने मुठी में अपने बेटे क लैंड क अहसास से ऐसे सुख का अहसास होता जैसे मरते हुए मछली को पानी मिल गया हो

"अम्मी जान हाथ आगे पीछे करो मेरे लैंड की खिदमत करो तब हे ये आपकी खिदमत करेगा"

भूरिया क हाथ पर लैंड चिपक कर आगे पीछे होरहा था भूरिया को ऐसा लग रहा था मानव उसने जलते लोहे पर हाथ रख ली हो

"आह अम्मी जान आपके हाथ में लैंड दे कर कितना मज़ा आरहा है हम्म्म आह ऐसे हे आगे पीछे करो"

शमशेर भूरिया क होठ को चूसने लगता है और उसका लैंड का अकड़न बढ़ते हे जा रहा था और भूरिया अब तेज़ी से अपने बेटे क लैंड को मुठियाने लगती है



"ुहममम ाः शमशेर ये तुमने तो सांप पाल रखा है हम्म्म यह कितना गरम है तुम्हारा ये जानवर"

भूरिया का लैंड अब सीधा भूरिया क छूट क ऊपर जा कर लग रहा था और दोनों वासना की आग में जल उठते है इतना तक ख्याल नहीं रहता क अब भी दरवाज़ा खुला है और कही कोई महल क शाही परिवार से अंदर आजाये और सुल्ताना भूरिया को देख ले अपने बेटे क साथ रेंज हाथ फिर क्या होगा

शमशेर अब भूरिया को पकड़ कर झुकाते हुए

"आह अम्मी जान आपके गांड पर रगड़ लू अपना लौड़ा इनकी मचलती हुई अदाओ को रगड़ क शांत कर दू"



शमशेर भूरिया क होठ को चूसना बंद कर क भूरिया को झुका देता है और अपना लैंड अकड़ा हुआ अपने अम्मी क गांड क दरार में लगा कर खूब मसलता है

"आह अम्मी जान इस गांड की दरार में लैंड पेल दू आह आपके गांड बहुत मटकती है चलते हुए आह"

"यह ाः हम्म्म ाः बीटा आह ऐसे हे हम्म्म आह शहज़ादे दरवाज़ा तो बंद कर देते आह हम्म्म"

शमशेर धीरे धीरे अपने अम्मी का निक़ाब ऊपर उठाने लगता है और साथ हे निक़ाब क अंदर का काफ्तान भी उठ रहा था धीरे धीरे निक़ाब क उठते हे भूरिया की दूधिया टाँगे दिखने लगती है

"आह अम्मी जान आपके पेअर कितने चमक रहे है "

शमशेर अब अपने अम्मी क निक़ाब को जांघो तक उठा देता है और अपने हाथो से मांसल जांघ को छूटे हुए मसलने लगता है" क्या मोठे तनददरुस्त जाँघे और कूल्हे है हम्म्म अम्मी जान और ये आपके गांड आह चमक रहे है इन्हे आपने अपनी निक़ाब में छुपा कर मटकते हुए बहुत तड़पाया"

शमशेर अपने हाथो से अपने अम्मी की गांड को पकड़ कर पीछे से दबा रहा था और भूरिया झुकी हुई अपने गांड को अपने बेटे से दबवा रही थी

"ाः हम्म उठ बीटा आह धीरे ज़ालिम "

शमशेर गांड पर हाथ फेरते हुए दबाने लगता है और भूरिया सिसकने लगती है



शमशेर अपने अम्मी की गांड को दबाते हुए चाट रहा था और भूरिया दर क दरवाज़ा बंद करने क लये कह रही थी शमशेर अपने अम्मी को एक धक्का देते हुए "अभी आया मेरी दिलरुबा "भूरिया धक्के से पेट क बल गिरती है और उसके मुँह से एक हे लफ्ज़ निकलता hai"zaalim" शमशेर जा कर दरवाज़ा बंद कर देता है और वापस आकर भूरिया की गांड को अपने हाथ में

ले कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगता है

"आह अम्मी जान इतने गोल मटोल चर्बीदार गांड को चाटने में जो मज़ा है और कही नहीं है"



"ाः मेरे शेर इतना भी क्या चाहत हम्म आह बहुत गन्दा है तू बीटा"

भूरिया अभी है हे रही थी क चटक से दो थप्पड़ मार देता है शमशेर भूरिया की गांड पैर और भूरिया की मुँह से दर्द भरी चीख निकल जाती है

"उफ्फ्फ क्या हां ना"

"अम्मी जान आपकी गांड की हालत ऐसी कर दूंगा क जो देखेगा मटकते हुए समझ जायेगा क आप किसी शेर मर्द क साथ सो कर आई ह"

"हाँ बड़ा आया शेर मैंने न जाने कितने शेरो को फांसी दे दी जो मेरे सामने शेर बन रहे थे "

"भूरिया बेगम वो शेर नहीं चूहे थे शमशेर जो थान लेता है वो करता है अभी बताता हु"

भूरिया को शमशेर खींचते हुए बैठा देता है और खुद खड़ा हो कर अपने हाथ में लैंड पकड़ कर भूरिया क चेहरे क तरफ करता हेयर अब शमशेर का हुल्लाबी लौड़ा भूरिया क आखो क ठीक सामने था

Shamshera:Lijiye मुँह में मेरा लौड़ा अम्मी जान



भूरिया इतने लम्बे और मोठे लैंड को करीब से देख कर अपना मुँह खोले ताज़्ज़ुब कर रही थी और अपने सीने पर हाथ रखते हुए

"बीटा मेरे छोटे से मुँह में जायेगा ये "

भूरिया मन me:jab छोटे से लैंड से इतना मज़ा आता है तो इतना बड़ा लैंड से तो मज़ा दुगुना आएगा

Shamshera:ammi जान पकड़ो मेरे लौड़े को अगर आप मुझसे सच्चा इश्क़ करती हो तो

भूरिया भी अब तक गरम हो गयी थी और अपने हाथ आगे बढ़ा अपने मुठी में अपने बेटे क लैंड को पकड़ लेती है



Shamshera:ammi जान अपना मुँह खोलो

भूरिया अपना मुँह खोलती है और फिर से लैंड को जड़ तक देख कर उसकी मोटाई और लम्बाई से ख़ौफ़ज़दा हो कर वापस मुँह बंद कर लेती है

Shamshera:ammi जान ऐसे दरोगी तो तो ऐश कैसे करोगे अपने बेटे क लैंड से रुको मई हे पेलता हु अपना लैंड आपके मुँह में खोलो मुँह अपना



शमशेर अपने लैंड को हाथ में पकड़ कर पहले तो एक बार ताक़त से अपने अम्मी की छोटे मुँह में पेलता है भूरिया क मुँह में लैंड जाते हे भूरिया की आवाज़ निकलने लगती है "ुघठ जगह अह्ह्ह ughh"aur भूरिया की आखो में ासु आजाते है जिसे शमशेर देखते हुए लैंड बहार खींचता है और लैंड को भूरिया क चेहरे क इर्द गिर्द लैंड को ऐसे मरता है जैसे थप्पड़ मार रहा हो

"ाः अम्मी जाएं आपके मुँह में मेरा लैंड है अम्मी जान इसको अपना मुँह आएगी पीछे कर क चुसो अम्मी जान यही आपके जिस्म की आग बुझायेगा आह"

"हम्म ाः ुघ्घ ाः गलललप गलप्प"



भूरिया एक बार फिर से अपने बेटे क लैंड क टोपी को अपने छोटे से मुँह में घुसती है और अपने खूबसूरत लबो में दबती है पर लैंड फिर से फिसल कर बहार आजाता है

"अम्मी जान क्या कर रही हो काम से काम आधा लैंड तो लो मुँह में "

"बीटा में कोशिश तो कर रही हु पर तुम्हारा इतना लम्बा है क मेरा मुँह भर्र जाता है सांस नहीं ले पति हु में "

शमशेर अपने माँ क जज़्बात को समझते हुए भूरिया को खड़ा करता है

"अम्मी जान आप सीख जाओगी बहुत जल्द इधर आओ मेरी बाहो में "

शमशेर भूरिया को गले लगता है और उसके सर पर हाथ फेरते हुए

"मेरी जान को तकलीफ हुई मुँह में लेने में"

"हम्म्म"

भूरिया अपना हाथ अपने बेटे क सीने पर रख कर कहती है

शमशेर अपने माँ को ज़ोर से गले लगते हुए

"बदन तो आपका भी जल रहा है मेरी बेगम आपको ज़ोरदार चुदाई की ज़रूरत है"

"हाँ मेरे शेर तुम सही कह रहे हो मुझे अब साडी हाडे पर कर देनी है तुम्हारे प्यार में"

"तो आज रात रगड़ कर छोड़ दूंगा रात भर में शांत हो जाओगी "

"बीटा पर ये मुमकिन नहीं वो आज समां आरही मेरे साथ सोने"

"ये क्या अम्मी जान मुझे आपकी छूट की झलक नहीं दिखाओगी और ये समां की बची आपसे क्यू चिपकी रहती है कह दो न उसे हमे अकेला छोर दे"

"क्या कहु उसको बीटा क मुझे अपने बेटे क साथ सोना है एक बिस्तर पर तुम मत आओ मई भी मजबूर हु पर कुछ न कुछ रास्ता निकलती हु मुझसे अब और रहा नहीं जाता "

"अम्मी जान सुल्तान तो आपको छोड़ हे लेते होंगे हफ्ते में एक बार पर मुझे तो कोठे पर गए हुए रेशमा क पास महीनो बीत गए"

"चुप कर खबरदार अगर तू किसी वैश्य क पास गया मुझे छूना भी मत फिर ,मई हु न तुम्हारी हर ख्वाइश पूरी करने क लये वैसे मई भी कई महीनो से प्यासी हु सुल्तान ने आखिरी बार तब कए थे जब वो कुबेरी जुंग पर जा रहे थे "

"तो जब से हम लौटे है आप चूड़ी नहीं अब्बा जान से ?"

"नहीं बीटा तुम्हे तो पता है जब से मुझे इस बात का अहसास हुआ तुम्हारे अब्बा कितने वहसि इंसान है और मुझसे नफरत और उस मुस्कान कच्ची काली से मुहब्बत करते है तब से मई उन्हें कोई न कोई बहाना से दूर रखती हु"

"मेरी प्यारी अम्मी जान अब सुल्तान का कोई हक़ नहीं आपके जिस्म पर सिर्फ मेरा है उसे छूने भी मत देना"

शमशेर ये कहते हुए अपने अम्मी क निक़ाब को ऊपर करने लगता है और भूरिया क बड़े थान को नंगा करने लगता है



"अम्मी जान आपके बड़े चुचिओ को चूसने दीजिये मेरी सुल्ताना"

शमशेर निक़ाब उठा कर भूरिया क बड़े दूध को ब्राज़िएर क ऊपर से अपने दोनों हाथो में भर कर चूमने लगता है

"ाः मेरे शेर शमशेर ाः धीरे से काटो मत हम्म आह"

शमशेर अपने अम्मी क पीछे आजाता है और अपना लौड़ा गांड पर लगा कर रगड़ते hue"mera लौड़ा पकड़िए मेरी अम्मी जान"



शमशेर अपने दोनों हाथो से भरी वज़नी चुचिओ को मसल रहा था भूरिया भी अब अपने बेटे का खुल कर साथ दे रही थी और सिसकीओ क साथ अपने बेटे क लैंड को पकड़ कर आगे पीछे कए जा रही थी

"अम्मी जान आज उतार दो शर्म और लिहाज का पर्दा अपने चुचिओ का दीदार करवा दो मेरी गरम माल उतार दो अपने ब्राज़िएर"

"आह उनमम धीरे मसलो न बेटा आह उतार लो खुद आह उनमममम आह ऐसे हे"

शमशेर खट्ट से अपने अम्मी क ब्राज़िएर क पीछे क हुक को खोलता है और दोनों भरी चिचिअ उछाल सी जाती है जैसे बरसो से क़ैद हो और उन्हें आज़ादी नसीब हुई हो

शमशेर क हुक खोलते हे भूरिया अपने हाथो से अपना ब्राज़िएर निकलने लगती है और शमशेर का मजबूत हाथ अब अपने अम्मी क भारी नंगे चुचो को मर्दन कर रहा था भूरिया की चीखे निकल जा रही थी पर अभी शाम का वक़्त था इसलिए वो अपनी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही थी



"उतार फेको ये अम्मी इन मासूम जानो को मुझे प्यार करने दो इन बड़े गेंदों से मुझे खेलने दो ये क़ातिल दूध आपके अम्मी जाएं ाः हम्म्म"

शमशेर अपने अम्मी क दोनों दूध को ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था



भूरिया पीछे से अपने गांड क दरार में शमशेर का लैंड क चुभन से पनिया कर अपने गुलाबी छूट क छेड़ से पानी छोर रही थी वही अपनी रसिया लज्जतदार और पूरी भरपूर माल हूरजहाँ बेगम क बड़े गांड ने शमशेर का लैंड भी गीला कर दया था

"ाह्मम हम्म्म अम्मी जान इन क़ातिल चुचिओ ने मुझे बहुत तड़पाया था उछाल कर आह इन्हे तो दबा दबा क पूरी शरारत निकल दूंगा इनकी"

"हम्म्म ाः अहह हम्म्म यह आआह बीटा अअअअअअअअअ से ाआअह नहीं बीटा आआह धीरे से दबाओ नाआ मेरे मरद मेरे साजन मेरे हमसफ़र मई भागी जा रही हु आआआआ उफ्फ्फ मार हे डाला रे "

"क्यू चिल्ला रही हो मेरी बेगम जान ाः आपको मज़ा नहीं आरहा क्या अपने बेटे से अपने चुकी मसलवा क और अपने गांड क दरार में लैंड हिश्व क"

"हम्म्म ाः हम्म आआह बेटा ाः आरहा आ है रे बेशरम हो ाः मुझे भी बनाओगे"



"आह अम्मी जान कितने वज़नी दूध है आपके एक काम से काम 5किलो क होंगे अहम हम्म्म "

शमशेर अपने अम्मी क बड़े चुचिओ को तराज़ू से नहीं हाथो से हे तौल रहा था और भूरिया आहे भर अपने बेटे क लैंड को खूब मुठिया रही थी

"अम्मी जान अब आएगी से देखूंगा आपके गाय जैसे थान

शमशेर ये कह कर भूरिया क आगे आता है और जैसे हे भूरिया अपने बेटे को पीछे से आगे आते देखती है वो तुरंत अपने दोनों हाथो से अपनी चुचिओ को छुपाने की एक नाकाम कोशिश करती है



"आहे मेरी सजनी अम्मी शर्मा रही हो छुपा रही हो अपने बेटे से अपने क़ातिल चुचिओ को देखो फिर भी आपके गोल मटोल दूध की घुंडी आप क हाथो में समां नहीं प् रही"

भूरिया की नज़र अपने चुचिओ पर जाती है तो वो मुस्कुरा देती है क्यू क सच में भूरिया अपने दोनों हाथो से भी अपने दूध को छुपाने में असमर्थ थी पर आज भूरिया छुपाने का अपने बदन को ढकने का कोई प्रयास नहीं कर रही थी जो किसी गैर मर्द क आखो को अपने पैरो नाख़ून तक नहीं दिखती थी वो आज खुश थी और मुस्कुरा रही अपने नाकामी पर वो खुश थी क उसका बीटा उसके चुचिओ को ताड़ रहा है

"अम्मी जाएं हटाओ न हाथ देख लेने दो मुझे इन क़ातिलों को जिसने मेरे चैन चुराए है"

भूरिया लज्जाते शरमाते अपने पाकीज़ा दूध पर से अपने हाथ हटती है और उसका दोनों दूध शाम की हलकी रौशनी में किसी गोल सूरज मुखी सा शमशेर की ओरे ताकने लगते है मानव शमशेर हे वो सूरज है जो इन फूलो को खिला सकता है



"वह अम्मी जान ये बेश्किमिति तोहफा मेरा था जो आप मुझसे वर्षो से छुपा कर आती रही"

हुरिये बुरी तरह से शर्मा कर पानी पानी हो जाती है और अपने सर क हिजाब से अपने मुँह मरे शर्म क धक् लेती है



शमशेर झुक कर अपने अम्मी क दूध को हाथो से दबाते हुए चूसने लगता है "आह अम्मी जान क्या नरम और खूबसूरत चुचिअ है आपके आह हम्म्म आह"

"आह बेटा आआ कहातो मत आआह उफ़ ऐसे कहौं काटता है ाः मेरे साजाआं धीरे से "

"मई कट्टा हु ऐसे मेरी सजनी मेरे भोले सनम भूरिया बेगम आप को अब्बा जाएं ने जिस किसी खुसी से महरूम रखा वो सब आपको दूंगा जो एक औरत को चुदाई का सुख मिलना चाहिए मेरी गरम अम्मी जान"

शमशेर अब अपने अम्मी को पास रखे सोफे पर बैठते हुए अपने अम्मी क दूध को दबाने लगता है और दोनों हाथो से बड़े बड़े चुचिओ को पकड़



अपना लैंड अपने अम्मी क चुचिओ के दरमियान दाल देता है

"उफ़ बीटा आह ये क्या कर रहे हो ाः हम्म्म"

"अम्मी जान आप बास मज़े लीजिये आपके दूध मेरे लैंड को तरसाये है बहुत इनके खुजली तो इन चुचिओ को छोड़ क मिलेगी"

"उफ़ बीटा तू कितना गन्दा है भला कोई दूध क साथ ऐसा करता है ाः हम्म ाः"

"मज़े भी ले रही हो आह अम्मी कितनी चिकनी हो तुम और आपका दूध जैसे गद्देदार चीज़ हो बिना परेशानी क लैंड आर पार हो रहा hai..ammi मज़े लो अपने बेटे क लौड़े से आम खाओ गुठलीआ न गिनो"

"उफ़ ाः यह धीरे से करो धीरे से कही मेरी दूध छील न जाये ाः हम्म्म"



शमशेर अपने अम्मी क सर को पकड़ क अपने तगड़े लैंड से मोती चुचिओ क बीच लैंड को दबाये पेले जा रहा था और भूरिया सिसकी ले रही थी आहे भर्र रही थी उसके छूट गीली हो गई थी अब शमशेर क लैंड से हल्का पानी का रिसाव होता है जिसे शमशेर देखते हुए

"अम्मी जाएं अपने जुबां से छतो मेरा लौड़ा आह जल्दी लो मुँह में"

"अम्म्म आह बीटा ले लू तुम्हारा मुँह में पर वो मुँह में आये तब तो"



भूरिया अपने हाथ में शमशेर क लैंड को थम लेती है और तभी इन दोनों क कान में आवाज़ आती है जो बहार कनीज़ की थी

Kaneez:Gustakhi मुआफ मल्लिका इ जहाँ सल्तनत की अदालत में आपको याद क्या है किसी पेचीदा मामला क तहत आप से मश्विरा चाहते है सुल्तान दास्ताँ

कनीज़ दरवाज़े क बाहर से बोलती है वो सोच रही थी क आज इतनी जल्दी दरवाज़ा क्यू बंद कर ली भूरिया भूरिया जैसे हे कनीज़ की आवाज़ सुनती है तो उसका नज़र शमशेर पर पड़ती है और इस बार भूरिया से बर्दाश्त नहीं होता

Hooriya:khabardaar कनीज़ अगर दुबारा मुझे आवाज़ लगाई तो ये शाम क वक़्त में कोई सल्तनत का काम नहीं करुँगी अगर दुबारा बुलाई तो आज तुम्हारा महल में आखिरी दिन होगा

ये कह कर जैसे हे भूरिया की नज़र शमशेर पैर पड़ती है तो वो देखती है वो उसे हे देख मुस्कुरा रहा है

"अम्मी जान ये हुई न एक बीवी बेगम वाली बात आओ अब मेरा लैंड चूस लो अम्मी जान नहीं तो ये फट जायेगा "

भूरिया शमशेर की बात पर मुस्कुराती है और फिर लैंड को अपने हाथ में ले कर नापते हुए देखती है और सोच में पद जाती है इतना बड़ा लैंड मुँह में कैसे ले पायेगी

"अम्मी जान देखो मेरा लैंड रास टपका रहा है आपकी जवानी को देख चाट लो न चूस लो न अपने बेटे का लैंड"

"नहीं तुम्हारा मणि निकल रहा है नापाक चीज़ कैसे मुँह में लू"

"अम्मी जान मुँह खोलो"

भूरिया न चाहते हुए भी मुँह खोलती है और शमसेर अपना लैंड हल्का धक्का देता है और भूरिया भी थोड़ा सा लैंड का टोपा अपने मुँह में पकड़ती है



भूरिया की जुबां पर जैसे हे वीर्य लगता है भूरिया अपने होठो को बंद कर चुस्ती है और लैंड का पूरा वीर्य भूरिया क मुँह में आजाता है और उसका मुँह ऐसा हो जाता है जैसे उसने कुछ खट्टा दाल चख लिया हो

"उफ़ शमशेर इसका मज़ा कितना भद्दा है की "

"अम्मी जान लैंड का मणि पीने क लये तो आज कल की औरते तरसती है आपको भद्दा लग रहा है मज़ा"

शमशेर अपने अम्मी क सर पर हाथ फिरते हुए "चाट लो मेरे लौड़े को अम्मी जान ज़िन्दगी क मज़े ले लो दुबारा नहीं मिलेगा ऐसा मौक़ा खा लो मेरा लैंड "

भूरिया को भी जोश आता है और वो इस बार बिना दर झिजक क लैंड को अपने ज़ुबान पर रगड़ती है और होठो पर रगड़ती है

"ाः अम्मी जान बहुत अच्छे ऐसे मुँह क अंदर लो"



शमशेर अपने अम्मी क सर पर हाथ रख कर अपने लैंड की तरफ करता है और आधा से काम लैंड मुँह के घुस जाता है

भूरिया क मुँह से "arghhh"kar क आवाज़ आती है भूरिया क मुँह क पानी में लैंड का ऊपरी हिस्से पाचक से तैर जाता है और उसके आवाज़ सुन कर शमशेर का लैंड झटका मरता है और भूरिया को लैंड का टोपा उसके मुँह क ऊपरी हिस्से तालु में टकराता है



हुलरिया लैंड क टोपे को हे सही पर अपने पूरी कोशिश से मुँह में ले कर आगे पीछे करने की कोशिश करती है पर लैंड बहार आजाता है

"अम्मी जान एक हाथ से लैंड क जड़ को पकड़ लीजिये फिर मुँह को आगे पीछे कर लैंड चूसिये आह"



भूरिया अपने नए आशिके बेटे की बात मानते हुए एक हाथ से लैंड क जड़ को पकड़ती है और दूसरा हाथ उसका अपने आप शमशेर क गोश पर चला जाता है

"आम अम्मी मेरी गोतो को चूस लो आह हम्म ऐसे हे चुसो मेरा लौड़ा आआह अम्मी जाएं मेरे लैंड से आग निकल रही है जब जब आपका ज़ुबान मेरे लैंड से टकरा रही है ाआअह हम्म"

भूरिया अब लैंड को उसी गति से मुँह में ले कर अंदर बहार कर क चूसने लगती है और शमशेर क आखो में देखती है जो मज़े क समुन्दर में गोते लगा रहा रहा

"अम्मी जान मेरे गोते को सहलाओ"

भूरिया अपने एक हाथ से गोतो को सहलाते हुए लैंड को बिना रुके चुस्ती जाती

"अम्मी जहां ायः मई फ़ारिग़ होने वाला हु ाः मेरे मणि को पी जाओ मेरी बीवी भूरिया"

भूरिया का ये सुन्ना था वो लैंड को बहार निकल लेती है और अपने हाथ से लैंड को ज़ोर से मुठियाने लगती है

"ाः अम्मी जहां ाआअह उम्म्म्म ाआअह आपके मुँह में ाः ऐसा मज़ा है जैसा ाआज तक किसी वैश्या क मुँह में नहीं आया आआआआआ aaaaaaaaaaaaaaaah aaaaaaaaaah मई गया aaaaaaaaaaaah उफ्फ्फ्फ़ मेरी हूरजहाँ मेरी बेगम जहां ammiieeeeeeeeeeeeeeeeee jaaaaaaaaaaaaaaaaan"



भूरिया लौड़े क निकलते पिचकारी से दूर हटना छह रही थी पर वो जब तक अपने चेहरे को दूर करती शमशेर का लौड़ा लम्बी लम्बी धार मरने लगता है और भूरिया क हिजाब क ऊपरी हिस्से सर पर पहली पिचकारी जाती है मणि

"अम्मी जान मुँह क अंदर नहीं लिए मेरा मणि चेहरे पर गिरने दो मेरी बेगम"



"ाः मेरे सरताज जैसा आपका हुक्म ाः मई आपका मणि नहीं पी सकती आप ऊपर हे गिरा दीजिये मेरे सुल्तान बेटे अपनी कनीज़ समझ मेरी पाकीज़गी की धज्ज्जिया उदा लीजिये आह मैंने डिल जो दे दया आपको मेरे शहंशाह शमशेर अब मेरी ख़ुशी आपकी ख़ुशी में है"

भूरिया अपने बेटे क लैंड को हिला कर झाड़ रही थी और एक एक बून्द अपने चेहरे पर ले लेती है थोड़े देर बाद लैंड पानी छोरना बंद करता है और दोनों माँ बेटे थक कर हांफने लगते है कुछ देर बाद शमशेर की नज़र अपने अम्मी जान क चेहरे पर जाती है



"अम्मी जान आप अगर मेरा मणि पी लेती तो आपको एक अलग मज़ा आता पर आपने तो अपना चेहरा भररणा पसंद क्या पेट नहीं देखिये तो कैसे लग रही हो मेरी पाकीज़ा अम्मी जान"

भूरिया झट से आईएनए क सामने जाती है और अपने रूप को देख लज्जा जाती है और ऐसा हाल हो जाता है जैसे मरे शर्म क ज़मीन में धस्स जाएगी

"अम्मी जान शर्माओ मत ये हमारे इश्क़ का सुबूत है क हम एक दूसरे को कितना मुहब्बत करते है एक दूजे की प्यास को किस हद तक बुझाने क लये बेकरार है आपको अगर कोई इस हाल में देख लेगा तो पहचान नहीं पायेगा"

"शमशेर पहचान तो दूर लोग मेरी इज़्ज़त करना बंद कर देंगे क्यू क सब मेरी इज़्ज़त हे इसलिए करते है क मई परहेज़गार औरत हु"

"अम्मी जान आपको देख कर तो नहीं लगता इस वक़्त तो आप किसी वैश्य से भी ज़्यादा गरम छोड़ने लायक माल लग रही हो"



भूरिया शमशेर की बात सुन कर मुस्कुरा उठती है

"तो क्या मई वैश्य हु "

" नहीं अम्मी आप मेरी दिलरुबा हो पर आप क जिस्म की जितनी आग किसी वैश्य में भी नहीं आपको छोड़ने क लये लोग दुन्या से भागवत कर सकते है"

"हाँ इसलिए तो तुमने अपने अब्बा से हे भागवत कर ली और मुझे अपना बना लिया अब जाल मई नाहा लेती हु"

शमशेर झट से अपने अम्मी का निक़ाब उठा कर लैंड पोछने लगता है

"शमशेर ये रोज़ रोज़ मेरे निक़ाब से हे पोछते हो "

"अम्मी अब ऐसे भी साफ़ होगा"

"अगर धुलाई करने वालो ने देख लय तो"

"देख लेने दो मुझे डर नहीं अब दुन्या से क्यू क मुझे पता है मेरी मल्लिका इ जहाँ भूरिया अम्मी कभी भी मेरा साथ नहीं छोड़ेगी"

दोनों एक दूसरे को देख मुस्कुराते है और भूरिया नहाने क लये अंदर चली जाती है शमशेर अपने कपडे पहन कर आईएनए क सामने खड़े हो कर अपने बाल सही करता है और अपनी तलवार को और खंजर को अपने बगल में फसा कर दरवाज़ा खोलता है तो दोनों कनीज़ शमशेर को देकते रह जाते है शमशेर अपने सर क बाल पर हाथ फेरते हुए अपने वस्त्र ठीक करते हुए बिना कनीज़ को देखे जा रहा था जैसे हे शमशेर कनीज़ों क आखो से ओझल होता है

Kaneez1:Ye शहज़ादे शमशेर इतनी देर से क्या कर रहे थे

Kaneez2:Wahi तो मल्लिका जहाँ को भी आवाज़ देने पर वो गुस्सा हो गई

Kaneez1:shehzade का हाल देख कर तो ऐसा लगता है जैसे सो कर आये हो

Kaneez2:Ary पागल कुछ उल्टा सीधा मत बोलो नहीं तो नौकरी जाएगी हे जान भी ले लेंगे ये लोग

KaneeZ1:sahi कहती है तू अब बादशाहो मल्लिकाओ में कुछ हो हमे क्या बड़े लोग है जो करते है सब जाएज़ है

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 167

पारस महल



दोनों एक दूसरे को देख मुस्कुराते है और भूरिया नहाने क लये अंदर चली जाती है शमशेर अपने कपडे पहन कर आईएनए क सामने खड़े हो कर अपने बाल सही करता है और अपनी तलवार को और खंजर को अपने बगल में फसा कर दरवाज़ा खोलता है तो दोनों कनीज़ शमशेर को देकते रह जाते है शमशेर अपने सर क बाल पर हाथ फेरते हुए अपने वस्त्र ठीक करते हुए बिना कनीज़ को देखे जा रहा था जैसे हे शमशेर कनीज़ों क आखो से ओझल होता है

Kaneez1:Ye शहज़ादे शमशेर इतनी देर से क्या कर रहे थे

Kaneez2:Wahi तो मल्लिका जहाँ को भी आवाज़ देने पर वो गुस्सा हो गई

Kaneez1:shehzade का हाल देख कर तो ऐसा लगता है जैसे सो कर आये हो

Kaneez2:Ary पागल कुछ उल्टा सीधा मत बोलो नहीं तो नौकरी जाएगी हे जान भी ले लेंगे ये लोग

KaneeZ1:sahi कहती है तू अब बादशाहो मल्लिकाओ में कुछ हो हमे क्या बड़े लोग है जो करते है सब जाएज़ है

Kaneez2:han आज कल मल्लिकाईजहान बहुत सजती सवारती है और देखो तो कैसे मटक क चल रही है



भूरिया बेगम का रोअम रोअम अपने बेटे दुवारा प्यार जताने से रोमांचित हो उठा था और वो अपने ज़िन्दगी में एक बार फिर से खुश रहने लगी थी कई दिनों बाद भूरिया फिर से चहक रही रही खिल खिला रही थी और वजह थी उसका और उसके बेटे क बीच पनपता हुआ इश्क़ जो दोनों माँ बेटे क बीच दूरी को मिटा रहा था और दोनों जवानी की समुन्दर में गोते लगा लेते जब भी मौक़ा मिलता

भूरिया चलते हुए अपने सौतन नाज़ बेगम क हुजरे में जाती है और बहार से आवाज़ लगाती है अंदर बैठी नाज़ उठ का सुल्तनत इ पारस की सुल्ताना भूरिया का इस्तेकबाल करती है

Naaz:aaaiye मल्लिका इ जहाँ सुल्ताना हूरजहाँ आपको इस नाचीज़ से इजाज़त लेने की क्या ज़रूरत आप तो दुन्या की सबसे ताक़तवर औरत हो

Hooriya:shukria मेरी बहिन

नाज़ भूरिया को बैठते हुए खुद भी अपने सौतन क पास बैठ जाती है

Naaz:kabhi कभी हमारे लिए भी वक़्त निकल लीजिये भूरिया बाजी क्या हम आपके सल्तनत क हिस्सा नहीं है

Hooriya:naaz बहिन कैसी बात कर रही हो तुम तो मेरी बहिन हो

Naaz:Han आप तो हमेशा इबादत में मशरूफ रहती हो या फिर सल्तनत क काम में आपसे कुछ काम था इसलिए गई थी..

Naaz:man me)Kamini मुझे तो भगा दी जैसे मई तुझे तेरे यार से चुड़ते देख लेती बहुत घमंड है न तुझे अपनी सुल्ताना होने का एक दिन साड़ी अकड़ निकल दूंगी

Hooriya:naaz मुझे मुआफ करना मई कुछ कर रही थी बोलो न क्या बात है

Hooriya:man me)Ye कामिनी नाज़ दिमाग बहुत लगाती है इसको शक नहीं हो क मई अपने बेटे क साथ इश्क़ का खेल खेल रही थी और ये आ टपकी थी

Naaz:nahi बाजी मुझे पता है आप किसी न किसी काम में लगी रहती हो अब मेरे जैसी फ़ारिग़ औरत क्या समझे सल्तनत क काम काज का

Hooriya:Naaz ज़िम्मेदारी होती है कंधो पर जब बड़ी तो म्हणत करनी पड़ती है ताके कोई हमारे तरफ ऊँगली नहीं उठा सके

Naaz:waise भूरिया बाजी अआप का चेहरा आज दमक रहा hai,kya वजह है क आज इतना खिला है आपका चेहरा



भूरिया की ज़ेहन में फ़ौरन अभी कुछ देर पहले का मंज़र याद आता है कैसे शमशेर उसके बदन क हर हिस्से को दबा क भूरिया की जवानी क मज़े लूटा था और भूरिया अपने आखो में शर्म लिए अपने पलके निचे कर लेती है

नाज़ बेगम अपने जगह से कड़ी होती है और बिना वक़्त जाया कए भूरिया क चेहरे क पास अपना नाक रख कर सूंघते हुए

"भूरिया बाजी ाः क्या खुशबु आरही है आपके चेहरे से बताइये आपने क्या लगाया है"

भूरिया का तो मनो काटो तो खून नहीं बदन में सिहरन से मच जाती है और उसके लैब से निकलता है

"कुछ नहीं लगाया है नाज़"



भूरिया अपने पलके उठाते हुए अपने सौतन नाज़ बेगम को देखती है जो झुक कर सूंघ रही थी

Hooriya:man me)ab नाज़ तुम्हे कैसे बताऊ ये खुशबु मेरे बेटे ki..uff

तभी नाज़ चिहुंकते हुए बोलती है

"भूरिया बाजी आपके चेहरे से जाफरान और दूध की खुशबु आरही है "

भूरिया उस पल को याद करती है जब शमशेर ने अपने माँ क पुरे चेहरे को अपने गधे लैंड क पानी से भर दया था और उसका चेहरा वीर्य से छुप गया था

Hooriya:man me)ufff हो बेवक़ूफ़ नाज़ ये जाफरान और दूध नहीं मेरे बेटे शमशेर क मणि की खुशबु है

भूरिया ये अपने मन में कह कर मुस्कुरा उठती है

Naaz:Hooriya बाजी आप रोज़ ऐसे हे सज धज क रहे और खासकर ये जाफरान और दूध ज़रूर मेल चेहरे पैर

Hooriya:Naaz मैंने कोई जाफरान नहीं लगाया

Naaz:ab मुझसे क्या छुपाना बाजी आप का चेहरा चमकते रहे बास मई इतना तो कह रही हु

Hooriya:tum से हुज़्ज़त करना बेकार है हाँ ठीक है मॉल लुंगी रोज़ जो आज लगाया है

Hooriya:man me)ab शमशेर की मणि की खुशबु लोगो को को जाफरान की खुशबु लग रही है अब तो रोज़ मलाङ्गी तो शमशेर अपना दूध निकल निकल क थक जायेगा

भूरिया है देती है जिसे देख नाज़ सोचने लगती है

Naaz:man me)Mujhe इस भूरिया का पहनावा और चाल चलन बदले बदले से लग रहे है ऐसा तो औरत तभी करती है जब उसकी शादी नयी हो यार फिर यार नया मिला ho,din में 4 बार तो लिबास बदलती है नाहा कर ,कुछ न कुछ गड़बड़ है पता करना होगा

Hooriya:naaz बेगम कहा खो गई तुमने तो हर बात बता दी पर काम क्या था वो नहीं

Naaz:wo बाजी आपको तो पता है न समां बेटी को आपके हाथ का खाना कितना पसंद है वो कह रही थी आप कुछ बना देते तो मज़ा आता

Hooriya:achha और ससुर जी मुझे किस मुक़दमे क लये यद् कए थे

Naaz:ary हाँ भूल गई थी आज शाम में कोई औरत आई थी तलाक़ का मसला था इसलिए सुल्तान दास्ताँ ने आपको फैसला करने क लये बुलाया था अब औरत का मामला है तो वो फैसला तो सुना नहीं सकते और वैसे भी आपको इस बात का ज़्यादा इल्म है

Hooriya:Koi बात नहीं इस का हल हम कल निकल लेंगे वैसे शहज़ादी समां कहा है

Naaz:kaha होगी अपने शेर ो शायरी में लगी होगी

Hooriya:ye उम्र हे ऐसा होता है करने दो उसे शेर ो शायरी

भूरिया और नाज़ कुछ देर बैठ कर बाते करते है और फिर भूरिया अपने हुजरे में आजाती है रात क खाने का वक़्त हो जाता है और वो खाना खा कर बैठी हे थी क उसकी सौतेली बेटी समां आजाती है

Sama:badi अम्मी आपको कोई मसला तो नहीं यहाँ पर सोउ तो

Hooriya:nahi बेटी तू रहती है तो मेरा भी मन लगा रहता है

Hooriya:man me)Tere वजह से शमशेर रूठ गया आज तू न आती तो हम दोनों आराम से रात गुज़रते इसी बिस्तर पर

Sama:badi अम्मी आप सख्त क साथ नरम डिल भी रखती है

Hooriya:jaha पर शख्ती ज़रूरी है वही रखती हु वैसे तुम्हे अकेले सोने में क्या परेशानी है

Sama:wo बड़ी अम्मी मुझे दर लगता है अकेले

समां एक बचे की तरह मुँह बना कर बोलती है अब भूरिया भी समां को बेटी मानती थी क्यू क उसका ख्वाब था बेटी का जो उसको हुई नहीं इसलिए सौतन की बेटी को हे प्यार कर वो अपने डिल की ख्वाइश पूरी कर लेती thi,kuch देर तक दोनों इधर उधर की बाते करते है और समां अपने आखे बंद क्र क सोने लगती है पर भूरिया क आखो से नींद तो शमशेर ने शाम में हे भूरिया क बदन को मसल कर भूरिया क बरसो से दबी उत्तेजना को भड़का दी थी आज फिर से भूरिया क डिल में अपने प्यास बुझ जाने की उम्मीद जगी थी जो प्यास सुल्तान कभी नहीं बुझा सके

Hooriya:man me)Kaash आज समां नहीं आती तो आज मई अपने बेटे क साथ मज़े करती साड़ी रात और वो भी तो बेपनाह इश्क़ करता है मुझे तो रात भर नहीं छोरता मेरे जिस्म की आग ठंडी करता पर ये समां की बच्ची सारा खेल ख़राब कर दी कितना मायूस होगा मेरा sanam..haay मेरे साजन का वो कितना बड़ा है मुँह में ले कर इतना मज़ा आ सकता है सोचा भी नहीं था पर आज पहली बार मुँह में ले कर मुझे अहसास हुआ सुल्तान बहुत पुराने ज़माने क है शमशेर क हथियार का आधा भी नहीं है उनका उफ़ तौबा मई ये क्या सोच रही hu..sach तो कह रही हु जिसके अंदर शमशेर का हथियार चला गया फाड् कर रख देगा उफ़ तो मेरा क्या होगा मुझे डरना नहीं है नहीं तो ज़िन्दगी में मज़े नहीं ले पाऊँगी वैसे भी बहुत मज़ा आएगा इतने बड़े हथियार से करवाने में



"उफ़ सच में शमशेर जैसा लम्बा चौड़ा इतने बड़े हथियार का मालिक इतनी मुहब्बत करने वाला आशिके पाना मेरे लये खुशनसीबी है"

भूरिया अपने बेटे क लैंड और उसके गठीले बदन को सोचते हुए अपने दूध पर हाथ फिरने लगती है और उसके छूट में चीटियन रेंग रही थी और उसको बहुत शिद्दत से लैंड लेने की बेताबी थी

भूरिया तभी अचानक समां को करवट लेते देखते है और वो रुक जाती है

"उफ़ ये लड़की ने देख लिया मुझे ऐसे हल में तो मेरी इज़्ज़त का क्या होगा"

भूरिया अपना निक़ाब बदलती है और एक सूती का हल्का कपडा पहन लेती है और अपने बिस्तर पर लेट जाती है भूरिया को बार बार उसके आखो क सामने अपने बेटे का लैंड आरहा था

उधर शमशेर भी रात में अपने हुजरे में सोने की कोशिश कर रहा था और अपने अम्मी जान की ख़ूबसूरती का कायल हो चूका था

Shamshera:man me)uff अम्मी जान जितनी ऊपर से खूबसूरत और गदराई माल लगती थी अंदर से तो और ज़्यादा खूबसूरत है उनके जिस्म का हर हिस्सा खुशबूदार है उनके बड़े दूध की गोलाई उनके मखमली पेट उनके डिल दहला देने वाले गांड और उनकी मोती जाँघे है अम्मी जान मैं सुल्तान की जगह होता तो दिन रात तुमको छोड़ता और किसी क तरफ देखता तक नहीं और अब तक न जाने कितने बचे तुम्हारे छूट से निकल देता ,ये समां कामिनी का कुछ न कुछ करना होगा नहीं तो मुझे नहीं छोड़ने देगी अम्मी जान को वैसे महल में चुदाई करना खतरे से खली नहीं पर बहार कहा ले क जाओ भूरिया कोई आम औरत भी तो नहीं जो कही भी ले जा कर थोक du,hooriya तो सल्तनत की सुल्ताना है और वो महल से दूर जाएगी तो बिना फौज और सिपाहीओं क नहीं जाएगी और न सुल्तान जाने देगा अब माल पैट गई तो उसको छोड़ने का मसला है ,कल बात करूँगा अम्मी से और कुछ न कुछ हल निकलते है

शमशेर और भूरिया एक दूसरे क बारे में सोचते हुए सो जाते है और उधर सुल्तान मेरे वाहिद अपने सबसे छोटी पत्नी मुस्कान बेगम क साथ सम्भोग कर क थक कर लेते थे

Sultan:man में) कल रात में भूरिया क पास नहीं जा पाया और आज मुस्कान नहीं जाने दी जब से हिन्द से लौटा हु भूरिया को छोड़ा नहीं एक बार रगड़ दूंगा मोती को तो उसके पेअर फिसलने का दर नहीं रहेगा नहीं तो आज क दौर में भले हे औरत कितनी भी भरोसेमंद हो पर कुछ कहा नहीं जा सकता

सुल्तान ये सोचते हे नींद क आग़ोश में चले जाते है सुल्तान हफ्ते में एक बार तो भूरिया को छोड़ हे लेते थे ताके वो उसकी बन क रहे कही मुँह न मरने की सोचे पर सुल्तान इस बात से अनजान था क भूरिया बहक चुकी है और उसने अपना जीवनसाथी अपना मर्द बना लय था अपने बेटे को जो उसका आशिक़ था

सुल्तान सुबह उठता है तो देखता है मुस्कान बेगम उसे उठा रही है

Muskan:uthiye सुल्तान सुबह हो गई

सुल्तान डरते हुए अचानक से उठ कर बैठ जाता है और वो अभी पसीने पसीने था

Muskan:aap ठीक तो है जहाँ पनाह

Sultan:han में ठीक हु मैंने कोई बुरा खवाब देख लय पानी लाओ

मुस्कान झट से पानी का गिलास आगे बढाती है और सुल्तान उठ कर तैयार होने लगते है और मुस्कान बेगम अपने सुल्तान क साथ रात गुज़र कर ख़ुशी ख़ुशी अपने हुजरे में चली जाती hai,sultan अपने कपडे पहन कर अपना ताज अपने सर पर पहनता है और कुछ सोचते हुए बहार चल पड़ता है

सुल्तान भूरिया क हुजरे क तरफ से गुज़र रहा था और वो सोचता है क भूरिया से मिलता चालू और वो भूरिया क हुजरे क पास जा कर बहार से आवाज़ लगता है

"क्या मई अंदर आ सकता हु मल्लिका इ जहाँ"

भूरिया अपने आईएनए क सामने बैठी सज धज रही थी और अचानक से आवाज़ सुन कर

"जी सुल्तान आजाये "

सुल्तान मेरे वाहिद अंदर आता है और अपने बीवी को सजते सवारते देख बास देखता रह जाता है

Hooriya:baithein सुल्तान मई अभी आई

Sultan:koi बात नहीं भूरिया बेगम वैसे आज आप बेहद खूबसूरत लग रही है

Hooriya:shukria सुल्तान बास आज लग रही हु?

Sultan:nahi ऐसा बात नाही

Hooriya:aap हे तो कह रहे हो आज

Sultan:han आज आपका चेहरा खिल रहा है और आपका बदन से अलग हे खुसबू आरही है आपको देख कर मन कर रहा है अभी लिटा दू आपको

Hooriya:aap भी न सुल्तान आप तो दो दिन से गायब थे आप तो आने वाले थे न मेरे साथ रात गुजरने

Sultan:mujhe मुआफ कर दो बेगम वो परसो रात में शराब पीने की वजह से जल्दी सो गया था इसलिए नहीं आया

Hooriya:achha जी तो आप कल तो आसक्ति थे पता है मई कितना इंतज़ार की

Sultan:Wo..wo कल रात मुस्कान बेगम आगे थी इसलिए ..

Hooriya:man me)Mujhe अब तुम्हारा इंतज़ार नहीं है मेरे वाहिद अब मेरा हमसफ़र सिर्फ एक है वो है शमशेर

Hooriya:koi बात नहीं सुल्तान आप सुल्तान है आप को मुआफी मांगने की कोई ज़रूरत नहीं

Sultan:Suno आज चाहे कुछ हो तुम्हे मेरे हुजरे में आना है साड़ी कसार निकल दूंगा में

सुल्तान चलते हुए आईएनए क सामने मेज़ पर बैठी भूरिया क बाजुओं को पकड़ लेता है जिसकी छुवन से भूरिया को गुस्सा आजाता है और वो आखे बंद कर लेती है

Hooriya:man me)dill तो करता है उठ कर एक थप्पड़ जड़ दू सुल्तान आपको और बताऊ क दो रात जब आप शराब क नशे में थे और मुस्कान बेगम क साथ रंग रैलिया कर रहे थे तब मेरी याद नहीं aai,ab मेरा बीटा है जो मेरे हर ख्वाइश को पूरा करेगा ,सुल्तान तुम छू कैसे रहे हो मुझे

भूरिया ये सोचते हुए तिलमिला कर उठती है और चलते हुए सुल्तान से दूर जाती है

Sultan:kya हुआ भूरिया बेगम ऐसे भाग क्यू रही हो

Hooriya:nahi सुल्तान वो तो वो अब आप सारा प्यार अभी कर लेंगे तो रात में मेरी गर्मी कैसे शांत करेंगे

भूरिया झूटी मुस्कान लिए हुए अपने जज़्बात को छुपाते हुए कहती है

Sultan:hahaha तुम ठीक कहती हो भूरिया आज रात तो आपको ठंडी कर दूंगा साड़ी गर्मी उतार दूंगा इतना प्यार करूँगा

Hooriya:man me)ab क्या करू ये तो मुझे अपने पास बुला रहा है रात में मन भी तो नहीं कर सकती अगर नहीं गई तो ये शक करेगा और चली गई तो शमशेर का डिल टुकड़ा टुकड़ा हो जायेगा

Sultan:kya सोचने लगी बेगम आज भी आपका महीना शुरू है क्या आज तो खुश कर दो हमे मल्लिका जहाँ बदले में हम आप की आग बुझा देंगे

Hooriya:man me)Sultan हफ्ते में एक बार मेरे पास आते थे मेरे पास और पांच धक्को में हे मुझे गरम कर क छोर जाते थे और ये कह रहे है क मुझे शांत करेंगे शर्म नहीं है तुम्हे सुल्तान

Sultan:bolo भूरिया बेगम आओगी या नहीं मई किसी भी हालत में तुम चाहिए मुझे

Hooriya:han हाँ सुल्तान आप कहे और हम नहीं आये आखिर बीवी हु आपकी

सुल्तान भूरिया का हाँ सुन कर मुस्कुराता है और भूरिया क आखो में देख कर

Sultan:Aaj कल खूब कैसे हुए हिजाब पहनती हो आअज भी कुछ खास पहन कर आना मेरे लिए

Sultan:zarur सुल्तान

Sultan:waise कल शाम में कोई ज़रूरी फैसला सुनना था किसी औरत का मुक़दमा है अब्बा जान तुम्हे याद कए थे पर

Hooriya:wo मई कुछ कर रही थी सुल्तान और वैसे भी अब शाम होने क बाद सल्तनत क दरबार का काम करना अब मुझसे नहीं होता

Sultan:acha ठीक है में जाता हु अब दरबार में और याद रखना आज रात का..

सुल्तान भूरिया क बदन को घूरते हुए बहार चला जाता है और भूरिया लम्बा सांस ले कर छोरती है और पलंग पर बैठ जाती है

Hooriya:uff जान बची ये सुल्तान तो एक मौक़ा नहीं छोरता और चिपक जाता है

Hooriya:man me)sultan चाहे कुछ हो जाये अब तुम मेरे जिस्म से खेलना तो दूर जिस्म को देख भी नहीं पाओगे पर ये कैसे होगा उफ़ ये कैसी आजमाइश है एक तरफ आशिके है जो मुझे बेपनाह इश्क़ करता है दूसरी तरफ शौहर जो मुझसे नफरत करता है

भूरिया अभी सोच हे रही थी क शमशेर बिना इजाज़त लिए हुजरे में दाखिल होता है और अपने अम्मी को बैठा देख मुस्कुराते हुए



shamshera:subah खैर अम्मी जान

Hooriya:subah खैर शमशेर

(मन me:ek पल नहीं रहता है मेरे बिना सुबह हुई नहीं क आगया)

Shamshera:ammi क्या हुआ आप इतनी गुमशुम क्यू बैठी हो

Hooriya:kuch नहीं बीटा

मन me)kaise बताऊ इसे क सुल्तान क्या कह क गया है अभी

Shamshera:ammi जान मेरे आखो में देखो

भूरिया अपने बेटे क आखो में देखती है और वो घूरते हुए फिर पूछता है

"अम्मी जान बताये क्या मसला है आप फिकरमंद क्यू है आप छुपा रही हो मुझसे ऐसी क्या बात है जो आप मुझसे नहीं बता सकती"

Hooriya:Beta तुम मेरे सबकुछ हो तुमसे तो अब मेरा जिस्म भी नहीं छुपा है तो बाते क्या छुपाऊ पर बात हे ऐसी है

Shamshera:bataye अम्मी जान क्या वजह है मई हरगिज़ नहीं देख सकता मेरी अम्मी जान क चेहरे पे शिकन

Hooriya:wo वो सुल्तान अभी आये थे और परसो नहीं आ सके उसके लिए मुआफी मांगी वो कह रहे रहे शराब क नशे में वो सो गए

Shamshera:Wo ाचा हुआ नहीं आया नहीं तो उस दिन अगर वो आपसे जबरदस्ती करता तो मई बर्दाश्त नहीं करता

Hooriya:beta..shamshera सुल्तान आज किसी भी हल में मुझे अपने साथ सुलाना चाहता है और मुझे आज रात हाज़िर होने की दावत दे कर गया है

Shamshera:aur आपने क्या कहा?

Hooriya:kya कहती ..एक बीवी अपने शौहर को कैसे न कहेगी

Shamshera:ameeeeeeeee जाआआआं ये मीर वाहीद इस से पहले आप क जिस्म को नोच खाये मई इसे जान से मार दूंगा

शमशेर गरजते हुए अपने तलवार निकल लेता है और उसके आखो में खून साफ़ देखा जा सकता था

Hooriya:ye क्या पागलपन है शमशेर कहा जा रहे हो

भूरिया शमशेर का हाथ पकड़ लेती है और शमशेर चलते हुए रुक जाता है

Shamshera:ammi जान अगर इस पागलपन से सुल्तान हमारे ज़िन्दगी से दूर चला जायेगा अगर इस पागलपन से मेरी मोहब्बत मेरी मेहबूबा मुझे मिल जाएगी तो मई इस पागलपन को करने में गुरेज़ नहीं करूँगा इस सुल्तान का सर कलम कर दूंगा और क़िस्सा हे ख़त्म

शमशेर अपने हाथ को भूरिया क हाथ से छुड़ाने की कोशिश करता है और भूरिया अपने दोनों हाथो से अपने बेटे क हाथ को पकड़ी होती है

Hooriya:tumhe मेरी कसम शमशेर तुम ऐसी वैसी कोई हरकत नहीं करोगे

शमशेर अपने अम्मी क चेहरे को देखते हुए जो अपने आखो में ासु लिए हुए रोक रही थी शमशेर अपने नंगनी तलवार को वापस मियां में रखता है और अपने अम्मी क ासु को पोछते हुए

Shamshera:ye कसम दे कर ाचा नहीं कए अम्मी जान और इस बात को आप अपने दिमाग से निकल दीजिये क वो आपका शौहर है

Hooriya:Tumhari एक गलती हम दोनों की ज़िन्दगी तबाह कर देगी शमशेर और तुम सुल्तान को क्यू मारना चाहते हो क्या गलती है उसकी आखिर तुम समझे क्या हो अपने आपको वो दुन्या क सामने अब भी मेरा शौहर है और वो अपना हक़ मांग रहा है

Shamshera:acha तो दे दो न उसे अपना हक़ जाओ छुड़वा लो उस से मई तो कुछ नहीं हु तुम्हारा भूरिया एक बात याद रखना मई ज़मीन आसमान एक कर दूंगा अगर मेरे अलावा तुम्हे छुवा भी



Hooriya:tumhare डिल में इतने गंदे ख़यालात आ कैसे गए तुम जानते हो मई तुमसे कितना मुहब्बत करती हु तुम्हे क्या पता मुझे कितना दर्द होता है जब सुल्तान मुझे छूटा है तो और मई उसका बिस्तर गरम करने की सोच भी नहीं सकती हु

Shamshera:to क्यू हाँ कह दया अपने अम्मी जान आपने मन क्यू नहीं कर दया

Hooriya:beta गुस्सा न हो हमे कुछ न कुछ हल निकलना होगा

Shamshera:Theek है आप लगाओ अपना दिमाग अब हमारे पास यही बच गया अब देखते है कैसे आपको बचा सकते है आपको सुल्तान की चुंगल से

ये कह कर शमशेर चला जाता है गुस्से में बहार निकलता है और भूरिया वही बिस्तर पर बैठ अपने आखो में ासु लिए सोचने लगती है

Hooriya:kaise रास्ता निकलू मई

भूरिया और शमशेर अपने आप को सँभालते हुए दरबार में पहुंचते है और दोनों की नज़र जब भी मिलती दोनों एक दूसरे को चिंतित पते और अपने दिमाग में सोचने लगते है कैसे बचे सुल्तान से

Sultan:kya हुआ शमशेर आगे की बात तुमने नहीं बताया क्या सोच रहे हो

Shamshera:kaun सी बात अब्बा जान

छान pasha:Shehzade पूरा दरबार जानना चाहता है क जो सिपाही की लाश बरामद हुई है वो आखिरी महल से गायब कैसे हुआ जो किसी को कानो कण खबर नहीं हुई

Gulshah:man me)ye छान पाशा तो ऐसे पूछ रहा है जैसे इसे पता हे न हो कुछ

शमशेर उठ खड़ा होता है अपने कुर्सी से और दरबार में बैठे सभी मंत्रीओ और सुल्तान की ओरे देखते हुए

Shamshera,darbar से कोई बात छुपी नहीं रहेगी आपसबको हक़ है इस बात को जानने का तो मई तहक़ीक़ात पूरी की और पता चला जो सिपाही हमारे महल से गायब हुआ था उसको मार कर नहीं बेहोश कर क ले जाया गया था ताके किसी को कानो कान खबर नहीं और यही वजह है क न तो महल में किसी खून का निशान न किसी झड़प हुई और हमारा सिपाही को उन लोगो ने सफाई से ले जा कर मौत क घात उतार दया और दूर एक ऐसे नदी में लाश को बांध क फेका क वो नदी क रास्ते किसी और मुल्क में चला जाये और ये राज़ हमेशा राज़ रहे

सुल्तान dastan:Shamshera क्या ये साड़ी बाते सही है इसका सबूत ?

Shamshera:dada जान इस से बड़ा सुबूत क्या हो सकता है उस सिपाही क घरवालों ने उसकी पहचान की ये तो इस राज़ को पर्दाफाश होना था जो नदी पर नहाते हुए बचे को लाश दिखी और उन्होंने गाओ वालो को बुलाया ..खुनी क गले क हम बहुत करीब है शुंग क मिलते हे खुनी को हम फांसी क फंदे पर लटकते देख्नेगे और सल्तनत इ पारस से बगावत करने वाले का अंजाम पूरी एवं क सामने होगा

Sultan:bhut अच्छे बीटा बिलकुल ऐसा हे होगा

शमशेर अपने बाप को देखता है और उसे गुस्सा आरहा था पर फिर भी अपने आप काबू रखता है तभी उसके दिमाग में कुछ आता है

Shamshera:man me)agar वही दवा मई सुल्तान को दे दू तो वो भी बेहोश हो सकते है और अम्मी जान क साथ रात गुज़ारना तो दूर वो छू भी नहीं पायेगा पर होगा कैसे..

शमशेर क चेहरे पर बड़ी मुस्कान फ़ैल जाती है और वो अपने अब्बा जान को देखते हुए खुश होता है

Shamshera:man me)abba जान शुकरिअ आपका मुझे अपनी बीवी तोहफा में देने क लये आज रात सजेगी सव्रेजी भूरिया आपके नाम पर और भूरिया क भरी वजूद को मई अपने लौड़े पर बैठा कर चाँद दिखाऊंगा

उधर भूरिया औरतो क खेमे में बैठ कर पारस की जनता की सेवा कर रही थी और पारस की औरते एक एक कर क आरही थी और अपना दुःख दर्द बता कर सुल्ताना भूरिया से मदद मांग रही थी और भूरिया बखूबी हर मसले का हल निकल रही थी तभी एक औरत आती है रट गिरगिराते

Aurat:Sultana हमारी सुनवाई क्यू नहीं होती दरबार में मई कई दिन से चक्कर लगा रही हु

Hooriya:Bolo औरत इन्साफ सबके साथ हो हम इसलिए बैठे है

Aurat:mai कल भी आई थी पर आप मिली नहीं मुझे अपने शौहर से तलाक़ चाहिए और वो जबरदस्ती मुझे रखना चाहता है

Hooriya:acha कल शाम में आई थी तुम उस वक़्त हम अपने हुजरे में आराम कर रहे थे

अब भूरिया क्या बताती क कल शाम वो अपने हुजरे में अपने बेटे से दूध और गांड मसलवा रही थी

Aurat:Han सुल्ताना सुल्तान दास्ताँ ने कहा है क इस मसले का हल आपके पास हे है बताइये मेरी शादी जबरदस्ती कर दी गई पर मई उसकी मार पीट सहती रही अब मई और सह नहीं सकती अब मुझे अलग होना है

Hooriya:iska क्या सबूत है क वो आपको

खुश नहीं रखता

Aurat:iska सबूत है मेरे पास क रहने वाले कई

औरते आई है आप उनसे पूछ सकती है

Hooriya:inke साथ जो औरते है वो आगे आये और बताये क्या ये सच है ?

कुछ औरते जो पीछे कड़ी थी आगे आकर कहती है क जो ये कह रही है सच है

Hooriya:to आप निकाह तोडना चाहती है

Aurat:ji हाँ वो मर्द नहीं नामर्द है मई तो शादी क अगले दिन हे भाग जाती पर माँ बाप की इज़्ज़त क वजह से नहीं भागी एक औरत को दो वक़्त की रोटी क साथ मर्द की ख्वाहिश होती है और मई जब उनसे इलाज करवाने क लये कहती हु वो मुझे मारता है

Hooriya:to पहली बात जब से आप ने सोचा क वो आपका शौहर नहीं है तलाक़ हो गया क्यू क शौहर बीवी डिल से रिश्ता होता है

Aurat:kya मुझे उससे छुटकारा मिल जायेगा

Hooriya:han हम फैसला करते है क आपको वो तलाक़ दे और आप चाहे तो दूसरी शादी कर सकते है

Aurat:shukria मेरी सुल्ताना भूरिया आपको खुदा हर खुशीअ दें आपके खूबसूरत बच्चे नसीब हो

ये सुन कर साड़ी औरते हसने लगती है

Naaz:ae औरत तुझे पता नहीं सुल्ताना भूरिया की उम्र रह गई बचे पैदा करने की होश हवस में बात करो

Hooriya:Theek है बाक़ी क लोगो की सुनवाई कल होगी आज का अदालत बंद करते है मेरी ताब्यात ठीक नहीं

भूरिया उठ कड़ी होती है और भूरिया क उठते हे सब उठ खड़े होते और हुरिये जाने लगती है



भूरिया सर से ले कर पेअर तक ढकी अपने निक़ाब को लहराते हुए चल रही थी

Aurat:Gustakhi मुआफ हो सुल्ताना भूरिया लगता है आप नाराज़ हो गई

Hooriya:nahi तुम्हारी दवा तो ठीक है पर मेरी अब उम्र नहीं बच्चे करने की

Aurat:mujhe मुआफ कर दे सुल्ताना

Hooriya:kooi बात नहीं आइंदा सोच समझ कर बाते करना

भूरिया वह से अपने हुजरे क तरफ जाने लगती है और सब औरते भूरिया की सम्मान में कड़ी थी भूरिया अपने भरी वजूद को लचकते हुए जा रही थी

Aurat:man me)ab सुल्ताना भूरिया आपको हमने कभी देखा हे नहीं निक़ाब क ऊपर से तो आप जवान हे लगती हो वैसे कितनी पाक डिल की है सुल्ताना इतनी परहेज़गार और पर्दा वाली औरत आज तक नहीं देखि

भूरिया चलते हुए अपने हुजरे में हे जा रही थी क अचानक से पीछे से आवाज़ आती है "बड़ी ammi"hooriya दर सी जाती है और पीछे मुड़ती है तो शहज़ादी समां कड़ी थी

Hooriya:sama तुमने तो डरा दया था

Sama:badi अम्मी वैसे आज आप जल्दी फ़ारिग़ हो गई दरबार से क्या बात है

Hooriya:baat कुछ नहीं बात क्या होगी

समां भूरिया का चेहरा पढ़ने का सोच रही थी

Sama:to फिर आज हमे आपके हाथो का जादू दिखा दीजिये

Hooriya:kya

Sama:badi अम्मी आप कबाब और बिरयानी बनाये न या तो आप बावर्ची से कड़ी रह क बनवाये पर हमे आपके हाथो का ज़ायका की बहुत यद् आरही

Hooriya:theek है चलो

Hooriya:man me)ab कैसे बताऊ समां मेरा तो किसी काम में मन नहीं लग रहा है पर तुम्हे शक नहीं होने दूंगी मई

भूरिया और समां बावर्चीखाने में जाती है जहा पर कई नौकरानी काम कर रहे थे भूरिया उन्हें समझते हुए आगे खाना बनाने का तरीक़ा समझती है और खुद भी कुछ कुछ काम करने लगती है



समां देखती है भूरिया कबाब देख रही थी समां की नज़र भूरिया क बड़े मोठे थान पर जाती है जो हिलने क वजह से एक ऐडा से दये से बाये हिल रहे थे किसी गुब्बारे की तरह

Sama:man में) आय है बड़ी अम्मी का वजूद कमल का है जवान लड़कीओ को भी इनके मदमस्त भरी वजूद से जलन हो जाये

कुछ देर में भूरिया खाना तैयार करवाती है और फिर उसे शमशेर की याद आजाती है

Hooriya:man me)mere हाथो का तो शमशेर भी खाना पसंद करता है पर इस वक़्त वो गुस्से से लाल है गुस्सा हो भी क्यू न आखिर मजनू क सामने लैला किसी और क रात रंगीन करे तो कोई भी इंसान पागल होगा

भूरिया कुछ सोचते हुए बावर्ची को खाना लेने क लये कहती है ,दो बावर्ची उठ कर खाना को बड़े थालिओ में रखते है 4 टहलिए भर जाती है हर क़िस्म क खाने से फिर उसे कपडे से ढकते ह

Hooriya:Chalo अब हम चलते है

Sama:kaha बड़ी अम्मी

Hooriya:aapko जो खाना हो आप यहाँ से ले जा सकती है शहज़ादी भूरिया मई शमशेर को खिला दू

Sama:acha ठीक है

Sama:man me)Aaj कल शमशेर भाईजान से बहुत घुल मिल रही हो और उस दिन ऐसी हाल में अंदर थे दोनों क्या खिचड़ी पाक रही है इन दोनों को बिना सबूत क नहीं पकड़ सकती न पूछ सकती हु

भूरिया अपने धीरे कदमो से चल रही थी और दो कनीज़ उसके दये बाए खाने की टहलिए ले कर चल रही थी

Hooriya:pata नहीं शमशेर आया होगा या नहीं

भूरिया कुछ देर चलते हुए शमशेर क हुजरे क पास पहुँचती है और अंदर की हलकी सी चलने की आहात सुन कर मुस्कुराती है

Hooriya:man me)mere सनम शमशेर अंदर हे है

Hooriya:kya हम अंदर आ सकते है शहज़ादे ?

शमशेर अभी अभी दरबार से अपने हुजरे में आया था और अपने अम्मी की आवाज़ सुनते हे डिल पर पठार रख गुस्से को छुपाते हुए

"ाजैये अम्मी जान"

भूरिया अंदर आती है और दोनों कनीज़ को मेज़ पर खाना रखने क लये कहती है

Hooriya:ab तुम दोनों जा सकते हो

दोनों कनीज़ चली जाती है और शमशेर अब अपने तलवार को निकल कर एक तरफ रखता है भूरिया अपने बेटे को देखते हुए

Hooriya:Maine तुम्हारे लिए अपने हाथो से खाना बना कर लाया है बिरयानी कबाब

Shamshera:man me)thoda मज़े लेता हु इनको परेशां कर क

Shamshera:mujhe नहीं खाना जाओ उस सुल्तान को खिलाओ

शमशेर बनावटी गुस्सा करते हुए बोलता है

Hooriya:par में सिर्फ आपके लिए बनाई हु मेरे सरताज अब तो गुस्सा थूक दो

Shamshera:q खाओ मई कौन हो तुम मेरी अम्मी जान

भूरिया खाने क मेज़ से एक प्लेट उठा कर शमशेर क पास आकर बैठ जाती है जो पलंग पर बैठा था

Hooriya:mai कौन हु ये तुम्हे पता है अब सुन न चाहते हो तो सुनो खा लो बीवी लगती हु मई आपकी

भूरिया अपने हाथ से कबाब उठा कर शमशेर क मुँह क तरफ करती है और शमशेर दीवारों को देख रहा था

Hooriya:muh तो खोलिये सनम जी

Shamshera:meri बीवी हो किसी और क साथ रात गुज़रोगी और उस दिन तो कह रही थी जाओ मेरे हाथ का मत खाना अपने बीवी क हाथ का खाना

भूरिया मुस्कुराती है और अपने बेटे क तरफ कबाब करते हुए अपने भरी जांघ गांड को अपने बेटे क पेअर से चिपकती है और अपना भरी दूध शमशेर क हाथ क कोहनी पर रगड़ते हुए

Hooriya:Apne बीवी से रूठोगे नहीं मानेंगे आप अपनी बीवी की बात ? उस दिन आप किसी और क हाथो क खाने की ज़िद्द कर रहे थे अब मई गुसा नहीं होती तो क्या आप की बीवी कोई और नहीं बन सकती मेरे साजन

Shamshera:acha इतना प्यार करती हो मुझसे

Hooriya:han हद्द से ज़्यादा आप कहेंगे तो जान दे दूंगी

Shamshera:ishhh ऐसी बात कभी अपने ज़ुबान से नहीं निकलना

शमशेर मुस्कुराता है और अपने अम्मी को अपने एक हाथ से अपने तरफ खींच कर अपने गॉड में बैठा लेता है

"आह मई गिर जाउंगी"

"अम्मी जान आपका मर्द इतना कमज़ोर नहीं जो अपने बीवी को गिरा दे"

भूरिया बड़े आराम से अपने बेटे क गॉड में बैठी थी शमशेर अपने हाथ में कबाब ले कर भूरिया क मुँह क तरफ करता है और भूरिया शमशेर क आखो में देखते हुए अपना मुँह खोलती है

"ये मेरी प्यारी बीवी क लये "

भूरिया खाने लगती है उसे अपने बेटे पर बहुत प्यार ाराहा था

भूरिया गॉड में बैठी थोड़ी ठीक से अपने भरी गांड को खिसकते हुए ऊपर होती है शमशेर अपना दोनों हाथो से अपने अम्मी मोती गदराई जांघो को पकड़ कर ऊपर करता है और भूरिया शमशेर क लैंड को अपने गांड क दरार से पीसते हुए ऊपर बैठती है तब तक लैंड अकड़ चूका था और भूरिया की गांड क दरार में फास कर चुभने लगता है भूरिया अपने हाथ का कबाब शमशेर क मुँह में खिलाती है और शमशेर अपने अम्मी को शर्माता dekh"kya हुआ अम्मी jaan"hooriya कुछ कह नहीं पति और अपने दोनों भरी दूध शमशेर क सीने से चिपकते हुए शमशेर क सीने में अपने मुँह छुपा लेती है ऐसा करने से लैंड को जगह मिलती है और वो पूरा खड़ा हो कर अपने ताक़त से भूरिया क गांड को थोड़ा ऊपर रहने क लये मजबूर कर रहा था

Hooriya:uff आपका ये गुस्से में भी खड़ा हो जाता है

Shamshera:mera शेर अपने गुफा की खुशबु सूंघ उसमे आराम करने की चाहत लिए खड़ा होगया है अम्मी जान

Hooriya:acha तो तुमने कुछ सोचा आज कैसे बचाओगे मुझे अपने बाप से

Shamshera:ammi जान आज रात आप सुल्तान क हुजरे में जाओगी

Hooriya:ye क्या कह रहे हो मई नहीं जाउंगी

Shamshera:tum जाओगी

Hooriya:shamshera अगर मई गई तो फिर मेरा बच पाना मुश्किल होगा सुल्तान मेरी इज़्ज़त ताड़ ताड़ कर देगा मई ऐसा नहीं चाहती

Shamshera:ary मेरी अम्मी जान आपके बेटे क रहते हुए अब्बा जान क्या पूरी दुन्या आपके इज़्ज़त पर हाथ डालने का सोच नहीं sakti,aapko आज सजना है सवर्ण है और सुल्तान क पास जाना है

Hooriya:saaf साफ़ बताओ न

Shamshera:ammi जान आज रात सुल्तान क पास आप जाओगी सजधज की उनकी दुल्हन बन कर पर आपके जिस्म को चूसूंगा मई आपके छूट की मालिश मई करूँगा अपने लैंड से

Hooriya:par कैसे बीटा?

Shamshera:Ammi जान हम सुल्तान को बेहोश कर देंगे अआप्को सिर्फ सुल्तान क दूध में दवा देनी है जो आपको मई दूंगा

भूरिया शमशेर की बात सुन सन्न रह जाती है

Hooriya:ye मुमकिन है बीटा अगर किसी की भनक लगी

Shamshera:ammi जान बिलकुल हमारी सुहाह्रत होगी और सुल्तान रत भर खर्राटे लेगा

शमशेर ये कह कर हसने लगता है

Hooriya:bhut शातिर हो शमशेर

Shamshera:aap जैसी पाकीज़ा औरत को पता लिया अम्मी जान और अभी अपने लैंड पर बिठाये मसल रहा हु अब भी शक है मेरे तेज़ दिमाग पर

भूरिया ये सुनते हे अपने आखो को बंद कर लेती है और उसके सामने वो साडी तस्वीरें दौड़ने लगती है कैसे शमशेर ने उसे पटाया

Shamshera:hooriya तैयार होजाना एक दुल्हन की तरह आज आप की हर मुराद पूरी कर दूंगा रात भर आपकी जैम क चुदाई करूँगा

भूरिया ये सुनते हे बुरी तरह शर्मा जाती है जो बीटा कुछ दिन पहले तक ुचि आवाज़ में बात नहीं करता था दर से आज वो अपने लैंड पर बिठाये सल्तनत की सबसे इज़्ज़तदार औरत सुल्ताना को अपने अम्मी को हे छोड़ने की बात कर रहा था और भूरिया भी तो यही चाहती थी पर वो शर्म से पानी पानी होती है और चिहुंकते हुए उठ कड़ी होती है और दीवार क पीछे जा कर कड़ी हो जाती है

Shamshera:aay है शर्मा गई मेरी जान भूरिया

भूरिया अपना मुँह दीवार से आधा निकलती है उसके एक आखे दिख रही थी शमशेर को जो शर्म से लाल हो चुकी थी

Hooriya:ab आप नाम से पुकारेंगे मुझे

शमशेर उठ खड़ा होता है और अपने अम्मी क आखो में देख

"क्यू अपने बीवी को एक मर्द नाम से नहीं पुकारे तो क्या माल कह क पुकारू आपको"

भूरिया अपने आखे बंद कर लेती है आखो को शमशेर से मिलाने की हिम्मत नहीं थी

"बोलो अम्मी जान आपको पसंद नहीं आया आपका नाम लेना"

"नहीं बीटा ाचा laga..bhut दिनों बाद कोई मेरा नाम लय बहुत अपनापन सा महसूस हुआ "

"मुझे पता है अम्मी जान आपको सब सुल्ताना मल्लिकाजहं कोई बजी कोई बड़ी अम्मी कहता है तो क्या तुम तैयार हो मेरी भूरिया अम्मी जान मेरे से छोड़ने क लिए"

भूरिया अपने आखे बंद किये थार थार काँप रही थी उसका पूरा बदन उत्तेजना और शर्म क गरम हो गया था माथे पर पसीने की बुँदे आगयी थी अपने अम्मी क भरी वजूद को देखते हुए शमशेर फिर पूछता है

"अम्मी जान क्या आज रत आप मेरा लैंड लोगे अपने छूट में "

शमशेर का लैंड जो पहले से खड़ा था अपने अम्मी से ये सवाल करते हुए झटका मरता है ,भूरिया की नज़र अपने बेटे क तम्बू पर पड़ती है और वो अपने बेटे क आखो में देखती है जिसमे चुदाई की तड़प साफ़ दिख रही थी भूरिया अपने लैब खोलती है और कहती है

"हैं"



भूरिया अपने बेटे से नज़रे नहीं मिला प् रही थी शर्म से शमशेर फिर पूछता hai"kya हाँ अम्मी जान क्या लोगे मेरा लैंड अपने छूट में"

Hooriya:"Han लुंगी "

शमशेर अपने अम्मी क भरी वजूद उनके निकली हुई भरी गोआल गांड और बड़ी चुचिओ को देखते हुए अपने लैंड को सहलाने लगता है जिसे देख भूरिया शर्म से गड़े जा रही थी

Shamshera:ammi जान एक बारी अपने क़ातिल दूध तो दिखा दो

Hooriya:nahi कोई आजायेगा जी

Shamshera:koi नहीं आएगा दिखा दो मेरा लैंड नहीं मान रहा



भूरिया इधर उधर देखते हुए अपना निक़ाब ऊपर उठती है और अपना गुब्बारे जैसा बड़ा दूध ब्राज़िएर में शमशेर क सामने आजाता है और शमशेर अपना लैंड को एक बार सहलाते हुए अपने मुठी में भींच कर आगे पीछे करता है तभी भूरिया अपना निक़ाब निचे कर क जाने लगती है

Shamshera:kaha जा रही हो अम्मी जान अपनी क़ातिल गांड तो दिखा दो

Hooriya:ja रही हु अपने सुहागरात की तैयारी करने

शमशेर आखे फाडे हुरिये क हिलते हुए बड़े चुतर देख रहा था तभी भूरिया को पता नहीं क्या सूझता है और अपने निक़ाब को थोड़ा खिसका कर ऊपर करती है



भूरिया अपने दोनों हाथो से निक़ाब क निचे क हिस्से को ऊपर करती है और उसके गोर दूधिया गदराई हुई टांग घुटने क ऊपर तक दिख रहे थे शमशेर को

Shamshera:uff मेरी रांड जान हे ले लोगी

शमशेर अपने लैंड को ज़ोर से मुठियारे हुए धीरे से कहता है पर भूरिया रांड शब्द को सुन लेती है और उसका मुब खुला का खुला रह जाता है फिर कुछ सोचते हुए अपने मन में कहती है "कमीना कही ka"aur अपने निक़ाब को छोर अपने गांड को मटकते हुए बहार चली जाती है और शमशेर खड़ा अपने अम्मी क तगड़ी गांड की रगड़ देख आहे भर रहा था

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 168

पारस

भूरिया अपने दोनों हाथो से निक़ाब क निचे क हिस्से को ऊपर करती है और उसके गोर दूधिया गदराई हुई टांग घुटने क ऊपर तक दिख रहे थे शमशेर को

Shamshera:uff मेरी रांड जान हे ले लोगी

शमशेर अपने लैंड को ज़ोर से मुठियारे हुए धीरे से कहता है पर भूरिया रांड शब्द को सुन लेती है और उसका मुब खुला का खुला रह जाता है फिर कुछ सोचते हुए अपने मन में कहती है "कमीना कही ka"aur अपने निक़ाब को छोर अपने गांड को मटकते हुए बहार चली जाती है और शमशेर खड़ा अपने अम्मी क तगड़ी गांड की रगड़ देख आहे भर रहा था

भूरिया ख़ुशी ख़ुशी अपने बेटे क हुजरे से दूर जा रही थी पर उसका हर कदम अपने बेटे से मिलने की फरमाइश कर रहा था और वो सोचन्ते हुए क क्या पह्नु कैसे तैयार हो आज अपने मेहबूब क साथ रात गुजरने क लिए ये सोच कर भूरिया क बदन में एक नै फुर्ती और जोश दिख रहा था वो अपने हुजरे में जाती है और सबसे पहले अपने कपडे की तैयारी करने लगती है फिर अपने शीरनगर का सामान देखती है और अपने आज रात का कपडा देखने लगती है भूरिया अपने बड़े से अलमारी में अपने हज़ारो निक़ाब को पलट कर देखने लगती है तभी भूरिया क कान में आवाज़ आती है

Kaneez:Gustakhi मुआफ हो मल्लिकाजहं बहार दरजी खला आपसे मिलने आई है

Hooriya:uff हो मई तो भूल हे गई थी क मैंने दरजी खला से कपडे लेने है नए देखती हु कैसे कपडे सिली है

भूरिया खुश होते हुए दरजी को आने की इजाज़त देती है और दरजी खला क साथ एक औरत थी जो अपने हाथो में रखे कपड़ो को निचे रखती है

Darji:Salam मल्लिकाजहं आपके ने जैसा कहा था मैंने कपडे बना डाई आप देख सकती है

दरजी खला सब कपड़ो को खोल कर दिखने लगती है

Hooriya:shukria दरजी खला आपने सही वक़्त पर मेरा काम कर दया है

Darji:lagta है आप आज सुल्तान क पास जाओगी रात में

Hooriya:ji हाँ आपका शुकरिअ आप अब जा सकती है मुझे कुछ तैयारी करनी है

Darji:mallika जहाँ गुस्ताखी मुआफ इन लिबास में आप सुल्तान का डिल चुरा लोगे इतना चुस्त लिबास आपके अंग अंग को बेहतरीन तौर पर दिखायेगा

Hooriya:aapko आपके काम का इनाम मिल जायेगा दरजी खला

दरजी खला भूरिया की जल्दबाज़ी की वजह समझते हुए मुस्कुराती है

Darji:man me)kaise बेताब हो रही है सुल्तान क साथ हमबिस्तरी करने क लये आखिरी करे भी क्यू न हफ्ते में एक बार हे तो मौक़ा मिलता है इन्हे

दरजी सोचते हुए अपने साथी क साथ हुजरे क बहार चली जाती है और भूरिया निचे बैठ सारे कपड़ो को उलट पलट कर देखने लगती है

Hooriya:wah बहुत खूबसूरत कपडे है अब मई शमशेर क लये एक नए अछि लिबास पहन लुंगी इनमे से

भूरिया हर कपडे को पलट कर देखती है आखिरकार एक चुस्त काफ्तान और एक मोती से ज्यादा निक़ाब चुन कर एक तरफ रख देती है और फिर सोचते हुए

Hooriya:man me)uff अंदर जांघिए और ब्राज़िएर क्या पह्नु हम्म ये पहन क भी क्या फायदा शमशेर तो ऐसे भी एक पल में मुझे नंगी कर देगा

भूरिया सोच कर रोमांचित हो रही थी और अपने लिए एक छोटी सी जांघिए जो उसके बड़ी गांड को अचे से दिखाए ज़्यादा छुपाये काम चुन लेती है और ब्राज़िएर भी अपने दूध क आकर से छोटे नाप का चुन कर रखते हुए

Hooriya:man me)mere शर्मगाह क बाल तो बड़े है क्या काट लू कही शमशेर को घुसाने में परेशानी हो

भूरिया अपने सोच पर बुरी तरह पानी पानी होती है पर फिर अपने आप से बात करते हुए क वो कैसे अपने हे बेटे क लैंड को अपने छूट में छूट क झट क वजह से लैंड घुसने में परेशानी होगी

Hooriya:man me)nahi शमशेर ने तो बोलै था क पेट क निचे क बाल नहीं काटने उसे पसंद है पर कही घुसनी में इतने घने hai..chi ये क्या सोच रही hu..waise उसका इतना बड़ा हथियार है इन बालो से परेशानी क्या होगी वो तो एक झटके में मेरे शर्मगाह क बाल जकड से निकल जायेगा असल परेशानी तो मेरे अंदर घुसने में होगा इतना मोटा इतना लम्बा मेरे अंदर समां पाना तो मुश्किल है

भूरिया फिर अपने बगल क बाल देखती हेयर और मुस्कुराते हुए उसे भी साफ़ नहीं करती

भूरिया सोचते हुए अपने आने वाले पल का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी और अपने चेहरे को दूध से धोने लगती है और दिन भर अपने साज श्रृंगार में निकल देती है उधर शमीरा भी अपने अम्मी जान की छूट को छोड़ने क लये बेकरार था और उसका किसी काम में मन नहीं लग रहा था रह रह क उसे अपने अम्मी क गदराई जंघे और बहार को निकले हुए गांड आरही थी शमशेर दिन में अपने पूरी कोशिश करता है दवा ढूंढ़ने की जिस से बेहोश हो जाये सुल्तान पर कही नहीं मिलता और सब यही कहते है क ये दवा हर जगह नहीं मिल सकती सिर्फ महल क हकीम क पास मिलेगी अब शाम होने वाली थी और शमशेर इरादा कर लेता है क अब जो होगा देखा जायेगा हकीम से ले लेता हु dawa,shamshera फिर कुछ सोचते हुए हकीम साहब क पास पहुँचता है

"हकीम साहब "

Hakeem:aaiye शहज़ादे आपने आज कैसे याद कर लिया

Shamshera:hakeem साहब आपको तो पता हे है हमारा एक सिपाही को बेहोश कर क महल से दूर ले जा कर मार दया गया

Hakeem:Ji शहज़ादे मई जनता हु ये बात बताइये आप की क्या मदद कर सकता हु

Shamshera:mujhe ये जानना ज़रूरी है क ये दवा कहा मिलती है और इसका असर कैसा होता है मई नहीं चाहता क आगे से हमारा दुश्मन हमारे किसी सिपाही क साथ ऐसा करे

Hakeem:aapki सोच अछि है आप सुल्तान बनने लायक दिमाग रखते है आइये मई आपको ऐसे दवाई दिखता हु जिस से आपकी परख हो जाये पहचानने में

Shamshera:ji ज़रूर

हकीम शमशेर को कई शीशी दिखता है और शमशेर अंदर हे अंदर मुस्कुरा रहा था और अपने आप को शाबाशी दे रहा था

Shamshera:ye सब शीशी एक हे काम की है

Hakeem:nahi ये बड़ी वाली शीशी में से अगर किसी को दो चुटकी किसी चीज़ में मिला कर खिला दे तो इंसान अभी सोये तो सीधा सुबह नहीं तो कल दुपहर हे उठेगा वो ऐसी गहरी नींद में चला जाता है ये दवा पहाड़ो की ऐसी जड़ी बूटी..

Shamshera:bass बास हकीम साहब बास अब हमे कैसे बनता है वो नहीं जानना इसे मई साथ ले जाना चाहता हु और इस दवा की असर समझना चाहता हु और अपने फौज को भी समझाना चाहता हु ताके एक एक सिपाही आगे से ऐसी चल में न फसे और शायद हम इसे दुश्मनो क खिलाफ इश्तेमाल करे

शमशेर वो शीशी उठा लेता है अपने हाथ में बिना वक़्त गवाए जिसे हकीम देखते हे

Hakeem:shehzade इतनी बड़ी शीशी बेहोशी की दवा बनाने में कई महीने लगते है आप चाहे तो थोड़ा सा दूसरी शीशी में ले जाये

Shamshera:hakeem साहब आप दूसरा बना सकते है पर अभी मुझे ये पूरी शीशी चाहिए मेरे काम की है

Hakeem:Jo आपका हुक्म शहज़ादे

Shamshera:man me)ye शीशी अब सुल्तान को सुलाए रखेगा जब भी वो मेरे अम्मी क साथ सोने की सोचेगा

शमशेर जल्दबाज़ी में वह से निकलता है और हकीम उसे देखता रह जाता है

पारस में एक और रात होती पर ये मामूली रात नहीं थी आज पारस की सुल्ताना हूरजहाँ अपने बेटे क लये सज रही थी अपने बेटे को शौहर का सारा हक़ देने वाली thi,paras का क़िला अपने रौशनी से पारस क दूर दर्ज क इलाक़ो को भी रोशन कर रहा था और महल क अंदर भूरिया तैयार होने लगी थी वो सबसे पहले अपने भारी चुतर पर जांघिए को फसती है जो काले रंग की थी फिर अपने बड़े दूध को अपने ब्राज़िएर जो क दूध हिसाब से छोटा था उससे पहन लेती है

Hooriya:man me)uff काफी कासी हुई है बास कुछ देर की बात है फिर मेरे इन कबूतरों को तो आज़ाद कर देगा शमशेर और जांघिए भी खोल देगा

भूरिया क छूट में चितना रेंग रही थी और फिर वो अपने कपडे पहनने लगती है

Hooriya:man me)aakho में काजल लगा लेती हु आखिर शमशेर ने मेरी आखो को देख कर हे तो मेरे पीछे पड़ा था

भूरिया अपने आखो को सजाने लगती है अपने जेवर पहनने लगती हेयर फिर अपने होठो को देखते हुए

hooriya:man me)shamshera मेरी होठो को तो खूब चाहत से चुस्त है इनको भी लाल कर लू

भूरिया लाली उठा कर अपने होठो से लगाती है भूरिया अपने श्रृंगार से



दमक रही थी वो धीरे से अपने बेटे को याद करते हुए अपने होठो पर लाली लगा रही थी

Hooriya:man me)uff ये लाली भी तो कुछ देर बाद शमशेर चाट जायेगा पहले अपने मुँह से फिर अपने हथियार दाल क मेरे मुँह में

भूरिया ये सोच हे रही थी क उसे किसी की आहत सुनाई देती है और वो आईएनए में देखती है तो दांग रह जाती है शमशेर आकर चुपके से उसके हरकत को देख रहा था

Hooriya:kitne बेसब्री हो रहे हो बीटा इतनी जल्दी आगये

Shamshera:haay मेरी जान आपके सुर्ख होठ देख डिल चाहता है क अभी अपना लैंड पेल दू आपके मुँह में



भूरिया अपने हुस्न पर इतराते हुए एक ऐडा से अपने बेटे को चिढ़ाते हुए अपने निचले होठ पर लाली को कुछ ऐसे रखती है जैसे लैंड रख रही हो और शमशेर अपने माँ की वासना से भरी इस ऐडा को देख अपने लैंड पर हाथ लगता है और भूरिया मुस्कुरा देती हो जैसे उसने अपने हुस्न से अपने बेटे का क़त्ल कर क जीत गयी हो

Hooriya:tumhe तो हर वक़्त बास मुँह में देने का सूझता है गन्दी चीज़ क अलावा कुछ नहीं

शमशेर अपना हाथ में लैंड ले कर सहलाते हुए

Shamshera:to क्या हर वक़्त आपके छूट में लौड़ा देने की बात कर या फिर आपके गांड में

शमशेर ये बात हस्ते हुए अपने अम्मी को छेरते हुए कहता है

भूरिया ये सुन कर बनावटी गुस्से क साथ कड़ी होती है और उसके भरी दूध भी हिल जाते है और अपने पास रखा खंजर उठा कर



Hooriya:mai हूरजहाँ हु इस खंजर से अभी हथियार काट दूंगी शेरनी को चूर्ण खतरे से खली नहीं

भूरिया अपने भरी दूध को शमशेर क नज़रो से बचते हुए दुपट्टा रखती है

Shamshera:ammi जान

चाकू से क्या काट टी हो, धार तो तलवार में है; चाकू से क्या काट टी हो धार तो तलवार में है; दुपट्टे से क्या धक् टी हो, माल तो सलवार में है!

भूरिया तो जैसे अपने बेटे को शायरी सुन का चहुमुई फूल की तरह सिमट कर रह जाती है और उत्तेजना से अपने दोनों जांघो को सताए अपने छूट को रगड़ती है

Shamshera:ammi जान ये लीजिये वो दवा जो आपको दूध में मिलाना है

भूरिया वो दवा झट से शमशेर क हाथ से ले लेती है

Shamshera:mai आऊंगा रात में मेरी मेहबूबा आपको दिखाऊंगा आज असली आशिक़ अपने मेहबूब क जिस्म से खेल कर कैसे मज़ा लेते और देते है

Hooriya:aadhi रात को महल में जब सब सो जाये तो आना तब तक मई तुम्हारे अब्बा जान को ये दवा पीला कर बेहोश कर dungi..Intezar करेगी आपकी दुल्हन मेरे मजनू शमशेर

Shamshera:Aaj क बाद मेरी दुल्हन भूरिया को कभी प्यार पाने क लये तड़पना नहीं पड़ेगा आपकी साड़ी ख्वाइशे पूरी करूँगा अम्मी जान

दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते है और शमशेर बहार चला जाता है भूरिया फिर से सजने सवारने में लग जाती है तभी समां आजाती है और अंदर आते हे उसकी नज़र शीशी पर पड़ती है जो शमशेर ने दी थी भूरिया को जैसे ये दीखता है वो अपने हाथ में छुपा लेती है

Hooriya:ary बेटी इतनी रात गए क्या हुआ आज भी नींद नहीं आरही क्या

Sama:badi अम्मी आपके हाथ में क्या है

Hooriya:kuch नहीं ये बचो को कहने की बात नहीं

Sama:acha बड़ी अम्मी आप कहा जा रही हो इतना सज धज्ज क

Hooriya:bass वो सुल्तान क पास जाना है तुम चाहो तो यहाँ सो सकते हो समां

Sama:badi अम्मी तो आप आज अब्बा जान क लये सज रही हो लाये मई आपकी मदद कर दू

समां की मदद से भूरिया तैयार होने लगती है और फिर कुछ देर बाद खाने का वक़्त होता है पर भूरिया को खाने का बिलकुल डिल नहीं था और वो नहीं कहती है और समां सोचते हुए भूरिया क पास से चली जाती है क आखिर उस शीशे में ऐसा क्या था जो छुपाई सुल्ताना भूरिया ने

रात का खाना खा कर सब महल में अपने अपने हुजरे में आराम कर रहे थे भूरिया अपने मोतियों से जेड नए निक़ाब को निकल कर पहन कर अपने आप को आईने में देखती है और खुद की ख़ूबसूरती देख खुद शर्मा जाती है

Hooriya:aaj ऐसा लग रहा है जैसे पहली बार सुहागरात हो रही है आज मेरा डिल उतना हे मचल रहा है जितना सुल्तान से शादी क बाद मचलता था सुल्तान तो मेरे ख्वाबो पर पानी फेर डाई अब देखती हु शमशेर को मौक़ा दे कर आखिर वो मुझे कितना इश्क़ करता है और मेरी ज़िन्दगी में खुशीअ आती है क नहीं

भूरिया अपने आप को अचे से ठीक कर क सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे में जाने लगती है उसके हर कदम पर उसे अहसास होता है और शमशेर की बात यद् आती है कैसे शमशेर ने पहली बार जब उस से अपनी मुहब्बत का इज़हार क्या तो वो उसको थप्पड़ मार कर शमशेर क गाल लाल कर दिए थे कल वही अम्मी थी जो आज है पर आज की भूरिया अपने ज़िन्दगी जीना चाहती थी अपने जिस्म की हर भूक मिटने क लये तैयार thi.hooriya अपने पास वो दवा रख ली थो जो शमशेर ने दया था और जैसे हे सुल्तान क हुजरे क दरवाज़े पर पहुँचती है तो सुल्तान मेरे वाहिद सामने हे इधर से उधर टहलते हुए दिख जाते है भूरिया समझ जाती है सुल्तान उसे छोड़ने क लये तड़प रहा है और वो पर्दा हटा कर अंदर आती है

Hooriya:Kya हुआ सुल्तान किसका इंतज़ार क्या जा रहा है

Sultan:Hooriya बेगम आप का इंतज़ार और किसका आज तो आप हे मेरे रात रंगीन करोगी

Hooriya:aaj बड़े उतावले हो रहे हो आप

Hooriya:man me)Na जाने कितनी राते आपके इंतज़ार में तदपि हु मई उसका क्या सुल्तान

Sultan:darwaza बंद कर दीजिये भूरिया बेगम और आइये मेरी बहो में समां जाइये

भूरिया एक क़ातिल मुस्कान देती है और मुद कर दरवाज़ा बंद करते हुए इठलाते हुए अपने शौहर सुल्तान क पास अति है और सुल्तान बिस्तर पर खिसकते हुए भूरिया को जगह देता hai,sultan अपने दोनों बाहो को फैलते हुए

"आजाओ मेरी जान आप इस लिबास में बहुत खूबसूरत लग रही हो"

भूरिया अपने बड़े गांड को बिस्तर पर रखते हुए

"सुल्तान इतनी भी क्या जल्दी है आपने दूध भी नहीं पिया अब तक "

Sultan:Aapka दूध पी लूंगा न आजाओ भूरिया बेगम

भूरिया की नज़र पलंग क पास रखे दूध की ग्लास पर जाती है और वो चालाकी नज़र से सुल्तान को देखते हुए अपने बहो को सुल्तान क तरफ करती है और सुल्तान से आधा गाला लग जाती है और पूरी कोशिश करती है क उसके बड़े दूध सुल्तान क सीने से न लगे सुल्तान अपने आखे बंद कए अपना सर भूरिया क कंधे पर रख देता है

Sultan:aah भूरिया बेगम आज कई महीनो बाद आपके खूबसूरत जिस्म का मज़ा लूंगा

भूरिया मौक़ा देख कर अपने दूध क बीच हाथ डालती है और वो शीशी निकलती है जिसमे नशे की दवा थी भूरिया फ़ौरन उसके ढक्कन को खोलती है और एक हाथ से दूध क तरफ बढ़ा कर गिलास में वो दवा गिरा देती है और अपने एक हाथ से सुल्तान क पीठ को सहलाते हुए

"सुल्तान आप इतने महीनो से जुंग पर थे और जब वापस आये तो घायल थे इस दरमियान मई आपसे हमबिस्तरी करने क लये रोज़ तरसी पर मेरा महीना शुरू हो गया और अब वो जवानी वाली बात भी नहीं रही "

हुरिये ये कहते हुए दवा की शीशी को बंद करती है और सुल्तान क पीठ क पीछे रखा दूध क ग्लास में भूरिया ने बहुत हे चालाकी से दवा मिला दया था और फिर उस छोटी सी शीशी को अपने बड़े दूध क बीच फसा लेती है सुल्तान अब भी भूरिया क बदन की खुशबु में खोया था

Sultan:hooriya आपने कौन सा इतर लगाया है खुशबु लाजवाब है इसकी

Hooriya:Q मेरे बदन की खुशबु अछि नहीं

Sultan:Aapke बदन दिन बा दिन भरी होते जा रहा है सच कहु तो आप जैसी भरी वजूद की औरत को संभालना जुंग लड़ने से काम नहीं

Hooriya:to आअज आप कैसे संभालेंगे मुझे जब मई इतनी भरी हु दूध तो पी लीजिये

Sultan:han तुम ठीक कहती हो बेगम दूध का गिलास मेज़ प् होगा

Hooriya:acha देती हु छोड़िये तो सही आप तो एक मौक़ा नहीं छोड़ते

भूरिया अंदर हे अंदर सुल्तान को अपने बदन से करीब प् कर गुस्सा हो रही थी और वो उठ कर दूध का गिलास उठा कर उसे थोड़ा हिलती है और सुल्तान उसे हे देख रहा था

Hooriya:Ise पी कर आप मेरा काम आसान कर देंगे सुल्तान

Sultan:kya काम

Hooriya:uff हो सुल्तान मिया बीवी का क्या काम होता है

Sultan:han वो तो करूँगा हे बेगम

भूरिया क हाथ से ग्लास चहेते हुए एक सांस में सुल्तान दूध गटकने लगता है

भूरिया मुस्कुराते हुए अपने शौहर को देख रही थी कैसे वो दूध पी कर अपने बीवी और बेटे का काम आसान कर दया था

Hooriya:man me)pee लो सुल्तान यही दूध मेरे दूध पीने का असल हक़दार शमशेर है और अब से सिर्फ वही पियेगा मुबारक हो सुल्तान आज आपकी बीवी आपके ठरक और अय्याशीयो क वजह से किसी और की बीवी होने वाली hai..aaj आपका बीटा हे आपके बिस्तर पर मुझे आपके सामने हे रात भर मेरी जिस्म से खेलेगा और तुम एक लावारिस कुत्त्ते को तरह पड़े रहोगे ठीक वैसे हे जब तुम अपने दूसरे बीइओ क साथ रंगरलिया मानते थे और में तड़पती रहती थी

Sultan:kya हुआ भूरिया आजाओ जल्दी

Hooriya:aaj जल्दी नहीं करना सुल्तान आज मुझे बहुत देर तक करना है कर पाओगे

Sultan:meri भूरिया बेगम आज आपकी हर अधूरी ख्वाइश पूरी कर दूंगा मई कुछ दवा खाने लगा जिस से ज़्यादा देर तक टिक सकू

Hooriya:haay आज तो मेरी खैर नहीं वैसे बहार दोनों कनीज़ों को छुट्टी दे दू मई नहीं चाहती मेरी चीख उनके कानो में जाये क्यू क आज आप पर भूत सवार है

Sultan:han जाओ भगा दो उन्हें और जल्दी आओ

भूरिया बहार जाती है और दोनों कनीज़ को छुट्टी दे देती पहरेदारी से वापस आती है तो सुल्तान अपने ऊपर क कपडे खोल कर बैठा था जिसे देख भूरिया मुस्कुराती है

Hooriya:budhapa आगया पर आज भी उतावले रहते हो

Sultan:jiski बेगम इतनी प्यारी हो वो मर्द कभी बूढ़ा नहीं होता आओ मेरी जान

सुल्तान अपने बहो को फैलता है और भूरिया न चाहते हुए भी सुल्तान क पास जा कर बैठ कर उसके कंधे पर अपना सर रख देती है

Sultan:aap निक़ाब में भी बहुत अछि लगती हो आप की पाकीज़गी क क़िस्से दुन्या भर में चलते है आप जैसी परहेज़गार बीवी प् कर हे मई इस मुक़ाम पर पंहुचा हु क पूरी दुन्या पर हु को. को को मत..

ये कहते हे सुल्तान की आखे बंद होने लगती है और भूरिया मुस्कुराते हुए अपने शौहर को देखने लगती है जैसे उसने बाजी पलट कर जीत हासिल कर ली हो भूरिया कुछ देर तक देखती रहती है सुल्तान क हाथ जो भूरिया को बाहो में लेने क लये उठे थे वो अब नीचे जाने लगते है और देखते हे देखते सुल्तान बेहोश हो जाता है और भूरिया सुल्तांस को हिला कर देखने लगती है क वो सच में बेहोश हुए या नहीं "सुल्तान क्या हुआ आप सो गए क्या सुल्तान जहाँपनाह आप सो गए क्या "पर सुल्तान क ऊपर दवा का असर कर चूका था भूरिया सुल्तान क गिरेबांद को पकड़ कर गुस्से से

"हरामज़ादे सुल्तान तुम्हारी नामर्दानगी हे वजह है क मई अपने बेटे को हे अपना शौहर बनाने वाली मर जाओ सुल्तान तुम से मेरी जवानी सम्भली नहीं gayi"hooriya सुल्तान को धक्का देती है और सुल्तान किसी ज़िंदा लाश की तरह पलट कर पलंग क कोने में चला जाता है

Hooriya:man me)ab मुझे आएगी आने वालो पालो को सोचना है इस मनहूस सुल्तान का नाम भी नहीं लुंगी अपने ज़ुबान से आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मई पहली शादी की हु और मेरा आज सुहागरात मेरे चाहने वाले आशिक़ क साथ hai..par ये दूल्हे राजा रह कहा gaye,hooriya हुजरे का दरवाज़ा अपने आशिक़ क लये खुला छोर देती है और अपने चेहरे पर मोतिओं का निक़ाब लगा कर पलंग पर बैठ अपने बेटे का इंतज़ार करने लगती है उधर शमशेर भी तैयारी में लगा था वो अपने अम्मी क दिमाग पर भरोसा था वो एक नयी शेरवानी पहनता है और खुसबू लगा कर अपने आप को आईने में देख

"बीटा शमशेर तू बहुत खुसनसीब है आज तेरी अम्मी तेरा इंतज़ार सेज़ पर कर रही है सुहागरात मानाने क लये आज मर्दानगी दिखने का वक़्त है आज दुन्या की सबसे ताक़तवर औरत सुल्ताना हूरजहाँ को ऐसा छोड़ की वो तेरे लैंड की दीवानी हो जाये"

शमशेर ये सोचते हुए महल का जायज़ा लेने लगता है आधी रात हो चुकी थी महल में सब अपने अपने हुजरे में सो रहे थे शमशेर चुपके से अपने अब्बा सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे क तरफ जाने लगता है हर कदम पैर उसे ऐसा महसूस होता है जैसे आज हे उसकी शादी है क्यू क वो जिस औरत से मोहब्बत करता था आज उसकी होने वाली थी.

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 169

"बीटा शमशेर तू बहुत खुसनसीब है आज तेरी अम्मी तेरा इंतज़ार सेज़ पर कर रही है सुहागरात मानाने क लये आज मर्दानगी दिखने का वक़्त है आज दुन्या की सबसे ताक़तवर औरत सुल्ताना हूरजहाँ को ऐसा छोड़ की वो तेरे लैंड की दीवानी हो जाये"

शमशेर ये सोचते हुए महल का जायज़ा लेने लगता है आधी रात हो चुकी थी महल में सब अपने अपने हुजरे में सो रहे थे शमशेर चुपके से अपने अब्बा सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे क तरफ जाने लगता है हर कदम पैर उसे ऐसा महसूस होता है जैसे आज हे उसकी शादी है क्यू क वो जिस औरत से मोहब्बत करता था आज उसकी होने वाली थी.

शमशेर अपने लम्बे कदमो से अपने पिता सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे की तरफ बढ़ रहा था जहा उसकी अम्मी सुल्ताना भूरिया अपने बेटे का बेसब्री से इंतज़ार कर रही thi,shamshera का हर कदम उसके अम्मी से उसको नज़दीकी बढ़ा रही थी और शमशेर का लैंड आगे आने पालो को सोच कर हे अकड़ना शुरू हो गया था और उसके आखो क सामने भूरिया की सख्ती और निक़ाब में अपने भरी वजूद को छुपाती हु अम्मी नज़र ाआरही थी अपने कदमो को बिना आवाज़ कए शमशेर किसी चोर की तरह अपने अम्मी से मिलने क लये आगे बढ़ रहा था जैसे आज अपने बाप की सबसे क़ीमती चीज़ भूरिया बेगम की इज़्ज़त लूट कर अपने बाप से जुंग जीतने जा रहा हो शमशेर अब सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे क सामने खड़ा था और वो देखता है क सुल्तान की कनीज़ जो रत में पहरा देती थी वो दोनों गायब है और वो समझ जाता है ये ज़रूर अम्मी ने क्या है और उसके चेहरे पर एक मुस्कान आजाती है शमशेर अपने आप को किसी जोखिम में नहीं डालना चाहता था इसलिए दरवाज़े पर खड़ा हो कर एक बार अंदर का जायज़ा लेता है और अपने अम्मी को पुकारता है

"अम्मी जान क्या आप है अब्बा जान आपसे कुछ बात करनी थी"

शमशेर की आवाज़ जैसे हे भूरिया क कानो में पड़ती है भूरिया का बदन में बिजली दौर जाती है और एक बार अपने आखो को बंद कर सोचती है

"हाय मेरा बीटा आगया मेरे साथ हमबिस्तरी करने क लये"

भूरिया का बदन कांपने लगता है ये सोच कर तभी शमशेर फिर आवाज़ लगता है और भूरिया समझ जाती है और फिर अपने सोये हुए पति सुल्तान को देख कर अपने मन में कहती है "सुल्तान अगर तुम मेरी जवानी को संभल लेते तो आज हमारा बीटा चौखट पर खड़े हो कर मेरी इज़्ज़त लूटने क लये मेरी जिस्म की आग बुझाने क लये खड़ा न होता और अंदर आने का हुक्म नहीं मांग रहा होता खैर मुझे तुम जैसे कुत्ते को याद नहीं रखना मुझे अब अपने बेटे क साथ ज़िन्दगी क मज़े लेने है अपनी रात क्यू ख़राब करू सुल्तान जैसे मनहूस का नाम ले कर"

भूरिया ये सोचते हुए धीरे से अपने बेटे को अपने हुजरे में आने क लये कहती है

"आए जाओ"

भूरिया अपने चेहरे का निक़ाब को ठीक करते हुए बिस्तर पर बैठ जाती है उसके जिस्म का रोअम रोअम खिल रहा था और एक अजीब सी घबराहट भी हो रही थी और उधर अपने अम्मी की बात सुनते हे शमशेर समझ जाता है क उसके अम्मी ने सुल्तान को नींद की दवा दे कर सुला दया होगा शमशेर क चेहरे पर एक क़ातिल मुस्कराहट फैलती है और वो अपने लैंड को अपने हाथ से मसलते हुए सोचता है

"अम्मी जान आज आपका बीटा आपको बताएगा चुदाई कैसे की जाती है आप जैसे भरी माल की"

शमशेर अंदर आता है तो देखता है भूरिया एक बहुत हे खूबसूरत लिबास में बिस्तर पर किसी दुल्हन की तरह बैठी है और अपने चेहरे पर एक बहुत हे खूबसूरत मोतिओं का निक़ाब लगाया है जिस से उसका आधा चेहरा दिख रहा था पुरे हुजरे से खुशबु आरही थी और मोमबत्ती और चिराग क रौशनी में भूरिया का जिस्म किसी चाँद की तरह दमक रहा था शमशेर देखता है क उसी पलंग पर सुल्तान मेरे वाहिद एक कोने में ऊपर से नंगा सोया था जिसे देख शमशेर क चेहरे पर फिर से अपने बाप को देख मुस्कान फ़ैल जाती है और भूरिया अब भी अपने निगाहे निचे अपने आने वाले पालो को याद कर रही थी

शमशेर पीछे मुद कर दरवाज़ा बंद करता है और जैसे हे कुंडी लगता है भूरिया का डिल ज़ोर से धड़कता है क्यू क उसका बीटा आज उसे रौंदने क लये दरवाज़ा बंद कर रहा था शमशेर दरवाज़ा बंद कर क धीरे कदमो से आगे बढ़ते हुए अपने अम्मी क हुस्न को निहारते हुए कहता है

"सलाम मल्लिका इ हुस्न मल्लिका इ जहाँ हुस्न पारी ,सुल्ताना इ सल्तनत पारसी मेरी अम्मी उर्फ़ बेगम हूरजहाँ को सलाम पेश करता हु"

भूरिया अपने नज़रे उठा कर शमशेर की तरफ देखती है तो उसके डिल क तार हिल जाते है और किसी दीवानी की तरह देखते हुए अपने बेटे को सजा सारा देखती है शमशेर साढ़े 6 फ़ीट का जवान था और इस वक़्त एक खूबसूरत शेरवानी में किसी पहाड़नुमा मर्द लग रहा था



शमशेर एक नीले रंग की शेरवानी में जांच रहा था जिसे देख भूरिया बेगम खो सो जाती है



Hooriya:man me)haay मेरी जान न चली जाये शमशेर तो हूबहू वैसा लग रहा है जैसे शहज़ादे की तमन्ना मैंने कुवारी में की थी उफ़ कितने चौड़े सीने है चेहरा कितना प्यारा है हम्म पर इसके हथियार तो मेरी जान हे निकल देंगे

ये सोचते हे भूरिया क चेहरे पर एक दर सा झलक जाता है और उसके छूट में चीटियन रेंगने लगती है और वो अपने निगाहे निचे कर फिर से बिस्तर पर देखने लगती है शमशेर अपने अम्मी का हाल समझते हुए धीरे कदमो से पलंग क पास आने लगता है और रात क सन्नाटे में शमशेर का हर कदम भूरिया क कानो में गूंज रहा था और वो अंदर से खुश तो थी पर दर भी रही थी क शमशेर का बड़ा हथियार उसके छूट को तहस नहस कर देगा

शमशेर बिलकुल अम्मी क पास खड़ा हो कर अपने अम्मी जान क जिस्म से आरही खुशबु को सूंघते हुए आखे बंद करता hai"Kya खुशबु है बेगम अम्मी ाचा लगा आप बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रही है अपने बेटे का अपने नए शौहर का"



भूरिया अपने दोनों हाथो को मिला लेती है और उसके हथेली से हलके पसीने रिसने लगते है ये बात सुन कर अपने नज़रो को झुकाये अपने बेटे क अगले कदम का इंतज़ार कर रही थी शमशेर अपने अम्मी की ख़ामोशी देख बिस्तर क कोने पर बैठ जाता है और अपने अम्मी क तरफ हाथ बढ़ा कर उनकी थोड़ी पकड़ कर

"अम्मी जान आपको ज़्यादा इंतज़ार तो नहीं करना पड़ा वैसे आप डरे नहीं ये सुल्तान अब कल दुपहर से पहले नहीं उठेगा"

सुल्तान जो बिस्तर क कोने पर लेता था उसे देखते हुए शमशेर कहता है

शमशेर और भूरिया क करीब जाता है और अपने अम्मी क चेहरे से मोतियों क निक़ाब को पकड़ कर उठाने वाला हे होता है क भूरिया अपने भरी गांड पीछे लेते हुए खिसक जाती है शमशेर अपनी जुटी निकलता है क्यू क भूरिया दूर चली गई थी और फिर शमशेर भी थोड़ा बिस्तर पर बैठ कर खिसकते हुए भूरिया क तरफ जाता है और अपना हाथ आगे बढ़ता है पर भूरिया इस बार फिर से खिसक जाती है और शमशेर अपने अम्मी की चल समझ नहीं पता और अपने अम्मी क झुकी हुई निगाहो में देखते हुए

"अम्मी आप तैयार है न आज रात हमबिस्तरी करने क लये"

भूरिया क रोअम रोअम में आग सा लग जाता है अपने बेटे क सवाल पर बस वो हाँ में अपना सर निचे झूलती है

"अम्मी जान फिर क्यू दूर भाग रही हो मेरी हूरजहाँ बेगम आज अपने आशिक़ को तडपाओगी बात भी नहीं कर रही"

शमशेर की बात सुन कर भूरिया धड़कने बढ़ जाती है और एक तरफ अपने बेटे से छोड़ने क बेक़रारी में छूट का पानी रिस रहा था वही अपने बेटे से हे प्यार कर उसे अपने शौहर का हक़ देने पर उसके बदन में एक झुरझुरी से होरही थी तभी शमशेर अपने अम्मी को देखते हुए कहता है "अम्मी जब आप आगे नहीं बढ़ने देना चाहती तो मई आपकी इज़्ज़त नहीं लूटना चाहूंगा चलना चाहिए मुझे"

शमशेर अभी हिला हे था क भूरिया अपना हाथ आगे बढ़ कर अपने सुन्दर कंगना से लड़ी हु हाथ को शमशेर क हाथ पर रख देती है और अपने कांपते होठो से बोली फुट पड़ते है "रुकिए न"

ये कह कर भूरिया अपने निगाहे फिर से निचे कर लेती है और अपने हाथ से अब भी अपने बेटे क हथेली को पकड़ी थी

शमशेर अपने अम्मी की ऐडा पर मुस्कुरा उठता है और अपने हाथो को आने हाथ में ले कर सहलाते हुए

"अम्मी जान आज से रोज़ मेरी बिस्तर गरम करने का काम आपके ज़िम्मे है आपके हाथ कैंप रहे है आज ज़िन्दगी भर कैसे मुझे प्यार कर पाओगी"

शमशेर अपने अम्मी को पूरी बेशरम बना देना चाहता था और तंज कस्ते हुए अपने अम्मी को कहता है जिस पर भूरिया अपने हिम्मत दिखते हुए

"जी वो आज पहली रात है न इसलिए थोड़ी सी घबराहट है मई पूरी कोशिश करुँगी क हर ख़ुशी आपको दू मेरे सरताज"

भूरिया अब शमशेर क हाथ को सहलाने लगती है और शमशेर मुस्कुराते hue"to मेरी मल्लिका इ जहाँ तैयार तो है आज रात को अपने आशिके की होजाने क लये पर दर रही hai"Shamshera ये कहते हुए आगे बढ़ कर चेहरा का निक़ाब उतरने की कोशिश करता है इस बार भूरिया हटती नहीं है पर अपने सर को दूसरी तरफ घुमा लेती है

"अम्मी जान अपने हुस्न आपके चाँद से चेहरे का दीदार कर लेने दीजिये "

भूरिया क लैब लरजते हुए खुलते है अब कुछ हद तक भूरिया सामान्य हो गई थी

"अच्छा जी आप चाँद को देखना तो चाहते है पर इस चाँद की झलक पाने क लये कई जवानो ने अपनी जान दे दी आप मुझे क्या देंगे मुँह देखे का"

शमशेर हैरत में था अब उसे समझ आती है क भूरिया किस वजह से दूर हो रही है शमशेर अपने अम्मी को देखते हुए कहता है "अम्मी जान आप चाहो तो मेरी जान मांग सकते है मई हस्ते हस्ते दे दूंगा अप्पके लये मेरी laila"shamshera की ये बात सुनते हे भूरिया अपना सर उठा कर शमशेर क आखो में देखते हुए कहती है "आपकी जान जाने से पहले मेरी जान चली जाये मेरे सरताज मेरे सुल्तान शमशेर"

शमशेर अपने अम्मी क आखो में देखता है और भूरिया भी अपने बेटे क आखो में देखती है दोनों अपने हाथो को पकडे एक दूसरे क तरफ धीरे धीरे खिसकते हुए आरहे थे "अम्मी जान आप जो मांगोगी वो मिलेगा बताइये क्या हुक्म है "भूरिया अब शमशेर क पास आगे थी और अपने बेटे क आखो में देखते hue"mere जान आप में बस्ती है शमशेर बास मुझे कभी धोका मत देना नहीं तो मई जीते जी मर जाउंगी"

शमशेर अपने अम्मी क आखो में देखते हुए "अम्मी जान चाहे मई अपने जान दे दूंगा पर किसी गैर औरत पर बुरी निगाह से नहीं देखूंगा अब आपका शमशेर बदल जायेगा आपका प्यार पाकर मई सारे गलत आदते छोर दूंगा आपकी कसम मेरी जान"

भूरिया अपने बेटे द्वारा इतना प्यार देख गड गड होजाती है और उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट आजाती है और वो पलके झुकाये अपने बेटे को दावत देते हुए कहती है "आज से ये मिश्रा की सबसे खूबसूरत शहज़ादी पारस इ सल्तनत की सुल्ताना मल्लिका इ जहाँ हूरेजाह्न आपकी हुई मेरे जिस्म हे नहीं मेरी हर सांस आपके नाम मेरे सरताज आप मेरा निक़ाब उतर कर मेहेरबानी kijiye"shamshera इतना सुन कर अपने अम्मी को देखते हुए मुस्कुराता है और अपने हाथ आगे बढ़ा कर चेहरे का निक़ाब को धीरे धीरे हटाने लगता है भूरिया का चाँद से मुखर धीरे धीरे पूरा खुल जाता है और भूरिया को देखते हे शमशेर क भाव ऊपर को उठ जाती है



भूरिया आखे बंद की थी और अपने हुस्न का दीदार अपने आशिक़ बेटे को करवा रही थी भूरिया क होठो की गहरी लाली आखो में काजल हाथो में बलिया भूरिया हर जेवर हर साजो सिंगार से अपने आपको सजाई थी शमशेर अपने अम्मी को देख आहे भरता है और अपने जेब से एक हार जो हीरो से चमक रहा था अपने हाथ आगे बढ़ा कर भूरिया क गले में बांधने लगता है तभी भूरिया अपने आखे खोलती है और हार को देख

"वाह कितना खूबसूरत है ये आज तक मई इतना चमकता हुआ हीरा नहीं देखि शुकरिअ बीटा "

भूरिया अपने बेटे की मदद करती है और भूरिया उस हार को पहन लेती है

"अम्मी जान आप जैसी चाँद सी खूबसूरत लड़की क लये उसका शौहर भला मामूली तोहफा कैसे लता "

भूरिया जो लगभग 44 की उम्र की थी अपने आप को लड़की कहे जाने पर हद्द



से ज़्यादा खुश हो जाती है और एक ऐडा से अपने बेटे को देखती है शमशेर अपने अम्मी की ऐडा देख अपने डिल पर हाथ रख कर "है मेरी जान अपने अदाओ से हे क़त्ल कर डौगी kya"hooriya मुस्कुराते हुए उठती है और पलंग से उतर कर जाने लगती है तभी शमशेर

"अम्मी जान कहा चली अपने शौहर को सेज पर छोर k"hooriya मुस्कुराती है और कहती है "चिराग तो बुझा दू रौशनी ज़्यादा है"



भूरिया मुस्कुराते हुए मुद कर अपने बेटे को शर्मीले अंदाज़ में कहती है जिस पर शमशेर कहता hai"ammi जान रौशनी नहीं होने पर कही मेरा शेर गलत गुफा में न घुस jaye"hooriya ये सुनते हे पानी पानी हो जाती है और शमशेर को देखती है तो वो अपने लैंड को मसल रहा था वो झुकती है और फूक मार कर चिराग बुझती है फिर मोमबत्ती बुझाने क लये झुकती है तो उसके बड़े गांड निक़ाब क ऊपर से हे दो भाग में बात जाते है और थिरकने लगते है जिसे देख शमशेर आप खो देता है और तेज़ी से अपने अम्मी जान को पीछे से जा कर पकड़ लेता है भूरिया अपने बेटे क इस हमले से जैम सी जाती है और अपने आखे बंद कए अपने बेटे का लैंड अपने चुतर क दरमियान महसूस कर रही थी

"अम्मी जान मुझे आपकी झांटो भरी छूट रौशनी में देखनी है मेरी मुराद पूरी नहीं करोगी अँधेरे में मज़ा नहीं आएगा चुदाई का बेगम"

भूरिया अपने बेटे क बाहो से निकलने की कोशिश कर रही थी "उफ़ छोड़िये न"

भूरिया अपने बेटे क लम्बाई चौड़ाई क सामने अपने भरी बदन की रगड़ का मज़ा लेते हुए कहती है जिस पर शमशेर अपने अम्मी क कमर पर हाथ रख कर अपने दोनों हाथो को ऊपर करते हुए भरी वजूद की भूरिया को ऊपर उठा लेता है "मई गिर जाउंगी ahh"shamshera अपने अम्मी क गांड क दरार में लैंड पिस्टे हुए "अम्मी जान मई सुल्तान नहीं जो आपका वज़न नहीं संभल पाउ आपके छूट में घाचे लगाने क लये देखिये मेरा लैंड तड़प रहा hai"shamshera अपने अम्मी कंदो को चूमते हुए सूंघता है और भूरिया को पूरी ताक़त से उठाये हुए था और उसका भरी गांड अपने लैंड पर लटकाये हुआ था तभी भूरिया अपना हाथ आगे बढ़ा कर शमशेर को हल्का धक्का देती है और शमशेर लड़खड़ाता है और भूरिया उसके बाहो में गिर सी जाती है और उसके मुँह से आवाज़ आती है "उठ गिर gai"shamshera अपने अम्मी को अपने बाहो में झुलाये खड़ा था और धीरे से कहता hai"aapka जवान बीटा अब आपकी वज़नी बदन का भर उठाएगा मेरे रहते हुए आप गिर जाओ ये होने नहीं दूंगा "

भूरिया मुस्कुराती है और अपने बेटे की मर्दानगी पर नाज़ करते hue"acha जी आप तो मेरे डिल को जीत हे चुके हो और क्या क्या जीतोगे"



शमशेर अपने होठो को अपने अम्मी क पेसानी पर रख चूमता है और भूरिया आखे बंद कर इस पल क अहसास में डूब सी जाती है "अम्मी जान आपको इतनी ख़ुशी दूंगा क आप भूल जाओगी क मई आपका कभी बीटा हुआ करता था आप मुझे अपना शौहर हे मानोगी बास"

भूरिया ये बात सुन कर लज्जा से गाड़ी जा रही थी वो सीढ़ी हो कर शमशेर से दूर जाती है और कड़ी हो जाती है जिसे शमशेर पकड़ने की कोशिश करता है पर वो आगे बढ़ जाती है "अम्मी जान आप आज बच क जाओगी कहा आपके छूट क परखच्चे निकल दूंगा मेरी बेगम जान"



भूरिया अपने बेटे की बात सुन कर शर्म ो हाय क मरे कंपनी लगी पर अब क्यू क वो अपने बेटे से खुद छोड़ना चाहती थी तो उसके लबो पर मुस्कराहट फ़ैल जाती है और अपने निगाहे निचे कए मुस्कुराती hai,shamshera अपने अम्मी को दबोचने क लये दौड़ता है और भूरिया अपने और किसी शेर की तरह दहाड़ते शमशेर को देख पलांग्की तरफ भगति है और शमशेर अपने अम्मी क हिलते हुए भरी चुतर और दूध को देख कर पागलो की तरह भूरिया क तरफ लपकता है और भूरिया आख़िरकार पलंग क पास आ कर कड़ी हो जाती है क्यू क उसके आगे वो भाग नहीं सकती थी भूरिया की साँसे उखड गई थी और उसके दोनों बड़े थान ऊपर निचे हो रहे था शमशेर अपने अम्मी क नज़दीक आते हुए "अम्मी जान अपने गदराये जवानी को ले कर दौडोगी तो जवानी छलकेगी आपके क़ातिल गांड ऐसा लगता है किसी नशे में है उसका नशा उतरना पड़ेगा अपने लौड़े से"



Hooriya:itna गुरूर है अपने हथियार पर क आप सुल्ताना भूरिया की नशा उतर दे

Shamshera:Mallika इ जहाँ आपके छूट पर आज अपना लैंड का ठप्पा लगा दूंगा फिर देखना आपकी छूट कभी किसी और लैंड का सोच हे नहीं सकती

Hooriya:itna भरोसा है अपने आप पर



भूरिया गरम हो गई थी अपने बेटे क आखो में देखते हुए

"देखती हो कितने सच साबित होती है तुम्हारी दलीले"

शमशेर झुक कर अपने अम्मी क हाथ पकड़ कर अपने होठो पर रख चूमता है

"अम्मी जान आज आप मेरी दुल्हन लग रही हो किसी हूर पारी से काम नहीं लग रही हो आपके इस क़ातिल गांड और ज़ालिम दूध क साथ साथ आपके चेहरे भी आज दमक रहा है आपके आखो को देख वो दिन यद् अत है जब मई सिर्फ आपके आखो को हे देख पता था आपके होठो की लाली देख डिल करता है इस प्यारे से छोटे मुँह में दिन रात लैंड पेलू"

"शुकरिअ मेरे सरताज मेरी तारीफ क लये पर आपको नहीं लगता मुँह में डालना गलत है कल तो आप कए हे थे बहुत अजीब लगता है मुँह में मज़ा भी नहीं है उसमे"

"अम्मी जान आपकी अछि से मुँह पेले क्या कहा अभी आज आपको पता चलेगा क मुँह पेले और चुदाई किस चिड़िआ का नाम है"

भूरिया अपने गाल पर हाथ फेरते हुए अपने बेटे को खा जाने वाली नज़र से देखती है



Hooriya:to बता दीजिये आखिर ये कौन सी चिड़िया है

भूरिया अपने बेटे को हरी झंडी दिखा दी थी अब वो बिलकुल गरम हो गई थी उसके छूट ने रस छोर क्र भूरिया का हल ख़राब कर रखा था इसलिए अपने बेटे को इशारे से कह देती है क अब और वो बर्दाश्त नहीं कर sakti,shamsherra अपने अम्मी का इशारा समझते हुए अपने अम्मी क दोनों हाथो को जकड कर भूरिया को अपने बाहो में भर्र लेता है और भूरिया भी बिना देरी कए अपने बेटे क बहो में समय चली जाती है शमशेर

"अहह अम्मी जान मेरी begum"hooriya क गले पैर चूमते हुए दबोचने लगता है और ऐसे हे भूरिया पीछे होते जा रही थी और आखिरकार दीवार पर उसका पीठ लगता है "अह्ह्ह शमशेर बीटा आराम से आज रात पूरी है मेरे sartaj"hooriya अपने हाथ से शमशेर क पीठ को सहला रही थी और शमशेर अपने अम्मी क भारी भरकम बदन को अपने चौड़े बाहो में ले कर पुरे बदन को अपने बदन से मसल रहा था भूरिया अब बीच बीच में आहे भरते हुए आखे बंद कर leti,shamshera रुकता है और अपने अम्मी क खूबसूरत चेहरा को देखता है भूरिया शर्मा कर अपने आखो को बंद कर लेती hai"ammi जान आपके हुस्न क जैसा हुस्न कही नहीं dekha"shamshera अपने अम्मी क हाथो को चूमते हुए बाहो तक चूमने लगता है

शमशेर अपने अम्मी क खूबसूरत होठो को देखते हुए "अम्मी जान आपके होठो से जाम पीला दो अपने प्यासे बेटे को"



भूरिया क होठो को अपने होठो में भर कर शमशेर अपने अम्मी की लबो को चूसने लगता है जैसे आज हे पूरा रस निचोड़ लेगा

"गलललपपपप गलप्प्प हम्म्म्म ाः अम्मी जान ाआअह गलप्प गलप्प्प गलप्प्प गैलप गैलप गैलप गैलप गैलप"

शमशेर कुछ देर तक अपने अम्मी क होठो को चूसते हुए पीछे हत्ता है शमशेर की साँसे फुल जाती है जिसे देख भूरिया अपने बड़े दूध जो उसके हर सांस से ऊपर निचे हो रहे थे अपने दूध को झटकते हुए अपने बेटे को ललचाती है और कहती है "दूर क्यू चले गए मेरे लबो को चूस लये अब मुझे भी अपने आशिके क होठो को चूसने दिजीये"



भूरिया अपने बाते रखते हुए अपने बेटे क आखो में देखती है और शमशेर खुश होता है क उसकी अम्मी अब खुल रही है वो आगे बढ़ता है भूरिया किसी भुकी शेरनी की तरह शमशेर क होठो को पकड़ लेती है और चूसने लगती है

"गलप्प गलप्प गैलप गलप्प्प गलप्प्प आह बीटा ाः शहज़ादे ुहम्म्म्म ाः हम्म्म्म आआआह गलप्प गलप्प्प गलप्प्प गलप्प गलप्प गलप्प"



भूरिया अपने बेटे क शेरवानी को उतार देती है और अपने बेटे क चौड़े छाती और कंधे और कटावदार मांसल शरीर देख उसपर हाथ फेरने लगती है

"आह बीटा किसी जानवर की तरह बदन मजबूत है तुम्हारा ाः ुहममम गलप्प गलप्प्प गलप्प हममममहह ाः गलप्प"

भूरिया और शमशेर ऐसे हे एक दूसरे को चूसने चाटने लगते है शमशेर कभी अपने अम्मी क निचले होठो को तो कभी अपने अम्मी क ऊपर क लैब को दबा कर चूस रहा था



भूरिया अचानक से शमशेर का लैंड पाजामे क ऊपर से हे पकड़ लेती है और शमशेर मुस्कुराते हुए अपने अम्मी क बड़ी गांड को थाम लेता है और कसरत से मसलने दबाने लगता है भूरिया की सिस्किअ निकल रही थी पुरे हुजरे में उठ आह की आवाज़ अब ज़ोर हो गई थी शमशेर अब बीच बीच में अपने हथेली में अपने अम्मी क दूध को भी दबोच रहा रहा कुछ देर ऐसे हे जी भर क एक दूसरे को चूसते चाटने और मसलने में लगे होते है दोनों माँ बेटे तभी शमशेर चुप्पी तोड़ता है

"अम्मी जान अब आपकी मुँह पेले करूँगा बैठ जाओ मेरी भूरिया begum"hooriya भले हे अपने बेटे क प्यार को क़ुबूल कर ली थी पर अब भी वो बहुत हे शरीफ औरत थी जिसका पर्दा लाज और शर्म हे गहना होता है भूरिया हल्का मुस्कुराते हुए निचे बैठने लगती है शमशेर भी अपने अम्मी का वो दिनन याद करता है जब वो इतनी शख्त थी क शमशेर की आवाज़ अपने अम्मी क सामने नहीं निकलती थी आज उसी अम्मी को हुक्म दे रहा था घुटनो पर बैठने कर लैंड मुँह में लेने क लये भूरिया किसी भी तरह अपने शर्म लाज मिटते हुए निचे बैठ जाती है और भूरिया बड़े आस से शमशेर की तरफ देख अपने लैंड को खोलने का इशारा करती है शमशेर अपने अम्मी को देखते हुए "अम्मी जान ये आपका सबसे ाचा और सच्चा दोस्त बनेगा इस से प्यार करो अम्मी आप खुद हे इसे अपने पास bulao"hooriya कुछ सोचते हुए शमशेर क लैंड पर हाथ रखती है और उसके लैंड की तपिश से ऐसा लगता है जैसे भूरिया ने किसी गरम लोहे को पकड़ ली हो भूरिया अपने बेटे क लैंड की गर्मी को कुछ देर महसूस करते हुए पहले शमशेर का जरबन्द खोलती है अपने हाथो से अब लैंड चड्डी क ऊपर से किसी सांप की तरह छत्तर कटे बहार आने को उतावला था शमशेर मुस्कुराता हुआ उस पल को याद कर रहा था जब भूरिया ने उसके गाल को थप्पड़ से मार कर लाल कर दी थी जब उसे पता चला था क उसका बीटा उसे कितना चाहता है इसी बीच भूरिया हिम्मत करते हुए अपने बेटे क चड्डी को खिसका देती है



भूरिया जैसे हे चड्डी को निचे करती है 9 इंच का लौड़ा जो लगभग 3 इंच की गोलाई लिए था भूरिया का तो मुँह खुला का खुला रह जाता है और उसका हाथ अपने आप लैंड को पकड़ लेता है

hooriya:ufff तुम वाक़ई जानवर हो शहज़ादे शमशेर इतना बड़ाआआ

Shamshera:Han आप जैसी वज़नी माल को खुश करने क लये इंसान का नहीं जानवर का लैंड हे कारगर है मेरी मल्लिका इ जहाँ अब इसे मुँह में लो

भूरिया अपने मुँह को खोलती है और डरते हुए लैंड क तरफ अपना मुँह बढाती है तभी शमशेर अपने लैंड पर ज़ोर देता है और लैंड छिटक कर दूसरी तरफ चला जाता है



भूरिया अपना ज़ुबान बहार कर लैंड को पकड़ने की कोशिश कर रही थी पर शमशेर तो जैसे अपने अम्मी क जज़्बात से खेल रहा था और लैंड इधर से उधर हिला रहा था भूरिया लैंड को ज़ुबान से चाट कर मुस्कुराने लगती है

"क्या कर रहे है आप मेरे शहज़ादे नहीं लू मुँह में"

"अम्मी जान आज आप मेरी दुल्हन हो इस महल में किसी को अंदाज़ा भी नहीं होगा आप मेरे लैंड क निचे बैठी हो आज भला मई आपको कैसे छोर सकता हु पर आज आपको अचे से लैंड चूसना है पर उस से पहले मेरे ाँद को चुसो अम्मी jaan"hooriya ये सुन सन्न रह जाती है और अपने आखे बड़े कए अपने बेटे क तरफ देखती hai"shamshera तुमने तो सिर्फ अपने हथियार को चूसने की बात की थी वह कैसे मई चुम सकती हु "

शमशेर अपने अम्मी क सर को पकड़ कर निचे लता है "अम्मी जान आप मेरी बीवी हो और हर काम मिया बीवी में बता कर नहीं होते आपको चूमना नहीं मेरे ाँद को चेतना है आजा साली"

"उफ़ शमशेर आप भी न"

भूरिया न चाहते हुए भी अपने बेटे क ाँद को अपने होठ से चूमती है



शमशेर अपना लैंड हाथ में ले कर हिलने लगता है और भूरिया अब अपना ज़ुबान निकल कर अपने बेटे क ाँद को चाटने लग जाती है

Hooriya:Mere सरताज हाथ से न हिलाये मेरे रहते हुए

Shamshera:tum हर बात में पीछे हैट जाती हो अम्मी जान तो कैसे न हिलाऊ अपना लौड़ा जब बीवी जब इतनी कच्ची खिलाडी है

Hooriya:aisa न कहे मई कोई कच्ची खिलाडी नहीं मेरे जिस्म क आगे ने हे आज आपको ये मौक़ा दया है

Shamshera:to दिखा दो भूरिया क तुम्हारी जिस्म में कितनी गर्मी है लो लैंड मेरा मुँह में

शमशेर अपना लैंड भूरिया क मुँह क तरफ बढ़ता है और भूरिया भी जोश के आगे बढ़ कर लैंड को अपने मुँह में समां लेती है



भूरिया अपने बेटे क लैंड क सुपर को मुँह में लेकर किसी गन्ने की तरह चूसने लगती है और अपने बेटे क ाँद को हाथ में ले कर सहलाने लगती है

"आह अम्मी जाएं ऐसे हे हम्म्म ऐसे हे अपने मुँह में ऐसे ले कर चुसो जैसे इसमें से तुम्हे रस निकल लेना है आज आह"



शमशेर अब जोश में आजाता है और अपने लैंड को भूरिया क मुँह में आगे पीछे धकेलता है और अपने अम्मी क सर को पीछे से पकड़ लेता है "ाः अम्मी जान आप की मुँह के इतनी गर्मी है तो छूट में कितनी hogi"chap चाप की आवाज़ पुरे हुजरे में गूंज रही थी भूरिया क मुँह से उठ आह्हः उह्ह्ह की आवाज़े आरही थी और शमशेर अपने अम्मी जान क मुँह में अपने लैंड को पेल रहा था

"अम्मी जान पूरा लैंड मुँह में लेना है आपको आज"

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 170

शमशेर अब जोश में आजाता है और अपने लैंड को भूरिया क मुँह में आगे पीछे धकेलता है और अपने अम्मी क सर को पीछे से पकड़ लेता है "ाः अम्मी जान आप की मुँह के इतनी गर्मी है तो छूट में कितनी hogi"chap चाप की आवाज़ पुरे हुजरे में गूंज रही थी भूरिया क मुँह से उठ आह्हः उह्ह्ह की आवाज़े आरही थी और शमशेर अपने अम्मी जान क मुँह में अपने लैंड को पेल रहा था

"अम्मी जान पूरा लैंड मुँह में लेना है आपको आज"

भूरिया क मुँह में शमशेर अपना लैंड को आगे पीछे कर रहा था और भूरिया बेचारी न चाहते हुए भी अपने मुँह को और बड़ा कर क अपने बेटे दुवारा हर घस्से का दर्द चोट बर्दाश्त कर रही थी अब भूरिया कैसे न करती क्यू क आज की रात भूरिया अपने बेटे से वो प्यार पाने क लये बुलाई थी जो सिर्फ शौहर दे सकता है आज भूरिया जिसे पुरे पारस में पर्दादार औरत और परहेज़दार औरत मन जाता है जिसकी आवाज़ भी सुन ने क लये लोग तरसते थे वो हूरजहाँ मल्लिका पारस की शान महल में अपने हे पति सुल्तान क हुजरे में अपने बेटे का लैंड अपने मुँह में लिए गन्ने की तरह चूस रही थी

शमशेर अपने अम्मी क सर पर हाथ फेरते हुए अपने अम्मी क कंठ तक अपना हुल्लाबी लौड़ा उतार दे रहा था और भूरिया भी जोश में अब अपने बेटे क लैंड को गले तक ले रही थी "आह अम्मी जान ऐसे हे अंदर तक लीजिये मेरा लैंड आह मज़ा आरहा है अम्मी जान"

शमशेर अपनी आखे बंद कर लेता है और सिसकने लगता है भूरिया देखती है क अब उसके लैंड चूसै से उसका बीटा लुत्फ़ ले रहा है तो उसे फख्र महसूस होता है और वो तेज़ तेज़ अपने बेटे का लैंड मुँह में लेने लगती है



"अह्ह्ह अम्मी जाएं आह हम्म्म आह"

"गलप्प गालपप्पगलप्प्प गलप्प गलप्प्प "

पांच पांच की आवाज़ पुरे कमरे में गूंज रही थी और भूरिया अपना जोश दिखते हुए रुकने का नाम नहीं ले रही thi,shamshera अपने अम्मी की बाहे पकड़ कर उठता है और अपने अम्मी को ऊपर से निचे तक निहारता है भूरिया क मुँह क पास शमशेर क वीर्य की बुँदे थी ऊपर से भूरिया निक़ाब में थी शमशेर अपने अम्मी का ये रूप देख कर तेज़ी से उन्हें गले लगता hai"ammi जान मई आपसे बहुत बहुत बहुत प्यार करता हु आप नहीं मिलती तो मई जी नहीं pata,hooriya अपने बेटे क सीने में अपने दूध को धसते हुए मसलने लगती "ाः मेरे शहज़ादे बेटे मई भी कौन सा खुश थी अपने ज़िन्दगी से तुम जब से आये हो मेरी राते रंगीन हो गई है नहीं तो हर रात रट हुए सुल्तान की याद में गुज़रता tha"shamshera अपने अम्मी जान को कस क चिपट जाता है और उनके भरी गांड को अपने बड़े हथेली से पकड़ कर दबाने लगता hai"aah बीटा धीरे से कही तुम्हारे अब्बा जान न उठ jaye"hooriya की बात सुन शमशेर अपना लैंड भूरिया क हाथ में देते हुए "अम्मी जान आप मेरे लैंड की खिदमत कीजिये पारस का नया सुल्तान अब मई हु आपका शौहर मई हु मेरी सुल्ताना मेरे वाहिद तो बस आज चैन से सोयेगा और मई आपको चैन से सोने नहीं दूंगा मेरी मेहबूबा "भूरिया लैंड को पकड़ कर हिलने लगती है शमशेर अपने अम्मी क हाथो से कंगन उतारते hue"ammi जान अब अपने जेवरात और निक़ाब से ले कर जांघिए तक उतर दीजिये अब आपकी ठुकाई करूँगा mai"hooriya शर्म से अपने बेटे क सीने में अपना चेहरा घुसा देती है तभी शमशेर ज़ोरदार थप्पड़ बहार को निकली हुई गोल चर्बीदार चुतर पर मर्रा और भूरिया की चीख निकल गई "आह शहज़ादे धीरे महल में किसी ने सुन लय तो "शमशेर अपने अम्मी क हाथो से कंगना को उतरने लगता hai"ammi जान सबको यही लगेगा क अब्बा जान आपसे मज़े ले रहा है पर यहाँ तो आपका बीटा हे आपके छूट में घाचे मर रहा hai"ye कह कर शमशेर अपने लैंड को पकड़ क्र भूरिया क छूट पर घिसता है और भूरिया की एक ज़ोरदार सिसकी निकल जाती hai"uff हाय शमशेर मेरी jaan"shamshera बिस्तर पर बैठ जाता है और भूरिया को देखते hue"aao मेरी जान मेरे लौड़े पर baitho"hooriya मुस्कुराते हुए एक ऐडा से सब से पहले अपने बेटे का लैंड पकड़ कर अपने गांड क बीच में लगाती है और धीरे से बैठ जाती है शमशेर अपने अम्मी क ऐडा पर आखे बंद क्र मज़े लूटने लगता है "क्या हुआ मेरे शेर ढेर तो नहीं हो gaye"hooriya चुटकी लेते हुए कहती है जिस पर शमशेर अपने दोनों हाथो को आगे बढ़ा कर अपने अम्मी क भरी ममो को पकड़ कर ज़ोर से दबाने लगता है अब भूरिया अपने आखे बंद कर ज़ोर से सिसकती है निचे से गांड पर शमशेर का लौड़ा अपने जगह बनाने में लगा था और ऊपर शमशेर क हाथ भूरिया क मम्मो मर्दन कर रहे थे तभी शमशेर अपने अम्मी क गर्दन पर अपने होठ रख कर चूमता hai"haaaye मेरे शेर उफ़ aah"shamshera अपने अम्मी की सिसकी सुन अपने ज़ुबान निकल कर होइया क कान क जड़ो में चाटने लगता है ,भूरिया तो जैसे सातवे आसमान पर थी और ज़ोर ज़ोर से उह्ह्ह ाआअह की आवाज़े निकलने लगती है शमशेर भी अपने अम्मी को अपने नंगे लैंड पर बिठा कर उनके दूध को दबाते हुए बेतहाशा चुम रहा था तभी भूरिया अपना आप खो देती है और पलट कर शमशेर क तरफ घूम कर अपने गांड को फिर से अपने बेटे क लौड़े पर रखती है और शमशेर क सीने में अपना पपीता जैसा दूध को मसलते हुए अपने बेटे को बेतहाशा चूमने चाटने लगती है शमशेर अपने अम्मी का ये रूप देख चौक जाता है और उनका साथ देने लगता है ये सब भूरिया इतनी जल्दी की थी क शमशेर भी अपने अम्मी की तेज़ी से हैरान था "उठ ाः अम्मी खा जाऊंगा आपके होठ हम्म गलपपपप गलपपपप गलपपपप फलपपपप गलप्प्प"

"अह्ह्ह शहज़ादे खा जाये मेरा जिस्म आह बुझा दीजिये मेरी आग मेरे सरताज गलप्प गलप्प मममहह आह उठ ुहम्म्मम्म्म्माआआ आह गलपपपप गलप्प्प"

दोनों बहुत देर तक ऐसे हे एक दूसरे को चूमते छत्ते है मलते है मसलते है फिर दोनों लम्बी सांस लेते हुए रुकते है और दोनों एक दूसरे को देख मुस्कुराते है ,शमशेर वक़्त जाया कइने बिना भूरिया क गले में से जेवरात निकलने लगता है "अम्मी जान आपकी ये सजावट मुझे ज़िन्दगी भर्र याद रहेगी आपने जिस अंदाज़ में अपने आपको पेश क्या क आज मेरी जगह कोई बूढ़ा भी होता तो आपको रात भर पेलता"

भूरिया अपनी तारीफ सुन कर शर्माती है पर अब शमशेर क लैंड पर बैठे हुए हे "अच्छा जी जब जवान रात भर क्र सकते है तो आप तो जवान है मेरे majnoo"ye कह कर कर भूरिया अपने गांड को लैंड पर दबती है "अम्मी जान आप कहे तो आपको दिन रात अपने लैंड पर बैठाये राहु पर ये मुमकिन नहीं इस महल में"

भूरिया अपने बेटे की चाहत सुन कर मदमस्त हो जाती है "ाचा जी देखेंगे आप कितने देर तक बैठा लेते हो मुझे"

"अम्मी जान मई बूढ़ा सुल्तान नहीं समझी मई अब्बा जान नहीं जो आपको उठाने में मुझे मुश्किल पेश आएगी आप जैसी भरी वज़नी औरत को उठा क पेलने में जो मज़ा है वो किसी और चीज़ में नहीं"

"लगता है बहुत औरतो क साथ ऐसा क्या है क्यू मेरे पीछे अपना हथियार डाले बैठे हो उन औरतो क पास हे जाते"

ये सुनते हे शमशेर एक मुस्कराहट क साथ अपने अम्मी क गांड में एक झटका मरता है और लैंड गांड की दरार में पूरा घुस चूका था इस बार अगर ऊपर कपडा न होता तो गांड की छेड़ में घुस गया होता

"अम्मी जान आप जैसी भरी वज़ूद की औरत तो मैंने आज तक नहीं देखि आपके बड़े गांड और दूध हे तो मुझे कायल कए थे मेरी सुल्ताना अब आपको छोर किसी और को नहीं छोडूंगा क्यू क जो मज़ा आपके छूट की दीवारों में अपना लैंड दाल कर आएगा वो कही नहीं"

शमशेर की बात सुन भूरिया शर्मा सी जाती है और अपने ख़ूबसूरती पर इतराते hue"acha जी वो देखा जायेगा क अपने अब्बा की तरह बीटा भी फिसल जाता है या साथ निभाता है"

शमशेर अपने हाथो से बरी बरी हर गहना उतार रहा था गले क हार क बाद कान क झुमके भूरिया खुद निकलती है और एक तरफ फेक देती है शमशेर हाथ शंकर उतरने लगता है और एक तरफ फेक देता है तभी उसकी नज़र अपने अम्मी क हाथ में अंगूठी पर पड़ती है

"अम्मीजान मैंने आपको कहा था न आप मेरी हो तो सिर्फ मेरी हे अंगूठी

पहनोगी"

"पर बीटा सुल्तान ने सवाल क्या तो क्या जवाब दूंगी"

"अम्मी जान कह देना जब उनके लैंड में डैम नहीं तो अब तुमने अपना नया शौहर चुन लय है "

"चुप करो बदमाश शहज़ादे सुल्तान मेरा क़त्ल कर देंगे ऐसा कही तो"

शमशेर अपने हाथ में भूरिया का हाथ ले कर उसकी उंगलिओ से सुल्तान की अंगूठी निकलता है और निचे फेक देता है

"बीटा फेक क्यू डाई "

"अम्मी जान अब से सिर्फ आप मेरी हो समझी अब्बाजान की नहीं"

शमशेर अपने अम्मी क गले लगजाता है और फिर से बुरी तरह से दबाने और मसलने लगता है भूरिया अब अपने सर क हिजाब को खोलने क लये हाथ आगे बढ़ा रही थी पर शमशेर कहता है "अम्मी जान सब उतर दीजिये पर ये नहीं abhi"hooriya अपने निक़ाब बुरखा को खोलने क लये कड़ी होती है



बेशक़ीमती निक़ाब में भूरिया मदमस्त माल को शमशेर बेनक़ाब करने लगता hai,hoorya क निक़ाब क बीच में चैन को खींचते हुए निक़ाब को अलग करता है और भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे का साथ देने लगती है

"अम्मी जान अपने बड़े दूध को खोल दो आज इन पपीता को काट काट क्र खाऊंगा"



भूरिया अपने ब्राज़िएर में क़ैद दोनों बड़े मम्मो को खोलने क लये हाथ पीछे करती है और अपने बेटे क आखो में देखती है तो वो बास इंतज़ार में था कब उसके अम्मी क ममे आज़ाद हो और वो तोड़ पड़े



भूरिया अपने ब्राज़िएर क हुक को खोलती है और पटक से दोनों दूध उछाल पड़ते है जिसे देख शमशेर अपना लैंड पकड़ कर अपने अम्मी को देखता है जिसे देख भूरिया बुरी तरह शर्मा जाती है और अपने मुँह पर अपना सर का हिजाब रख लेती है भूरिया का ब्राज़िएर खुल चूका था पर अब भी उसके मम्मो पर अटका था "अम्मी जान इन कबूतरों को आज़ाद कर दो आज आपके इस क़ातिल दूध को पी लेने दो मेरी जान"

भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे क तरफ देखते हुए अपने ब्राज़िएर को अपने दूध से हटाने लगती है और हर एक पल शमशेर अपने अम्मी को देख अपने लैंड को हिलाते हुए मज़े ले रहा था



भूरिया मुस्कुरा रही थी और शमशेर अपने अम्मी क नंगे दूध को अब पूरी तरह देख रहा था भूरिया अपने आप में शर्मा रही थी और अपने मुँह को धक् कर हे कड़ी थी "अम्मी जान आपके इन दो बड़े गेनो की क़ीमत क्या बताऊ इस दुन्या में इतने खूबसूरत दूध कही नहीं होंगे मेहेरबानी कर क आप अपना हाथ हटाइये और शर्माना बंद कीजिये"

शमशेर का ये कहना था भूरिया अपने हाथ को निचे कर लेती है और उसके दोनों दूध हवा में झूल जाते है और कुछ देर तक हिलते रहते है और शमशेर अपने अम्मी क भरी दूध को देखता रह जाता है



"क्या हुआ मेरे बेटे को पसंद नहीं आया मेरा दूध"

भूरिया अपने बेटे को चुप चाप खड़ा देख बोलती है ये पहली बार था जब शमशेर क सामने अपने जिस्म क हिस्से का नाम ली थी वो

"अम्मी जान आप क बड़े दूध और आपकी छूट का दीवाना हु मई आप जैसी माल को को ठोकना मेरी खुशनसीबी होगी आप क छूट का कुचुमार बना दूंगा आज देखिये मेरे लौड़े को कैसे हिल रहा है



भूरिया की छूट जो गरम हो गई थी घिस घिस क वो पानी छोड़ने लगती है शमशेर की बात सुन कर और वो अपने बेटे क बाते सुन कर मदहोश सी हो जाती hai,shamshera बिना वक़्त गवाए आगे बढ़ता है और अपने अम्मी क बड़े मम्मो को अपने हाथो में थम लेता है



"ुहम्म ाः अम्मी आआह क्या गोल और मोठे दूध है "

भूरिया क दोनों दूध को चाप चाप कर चाटने चूसने लगता है भूरिया आहे भरते हुए अपने बेटे क मजबूत कंधो को शाबाशी दे रही थी जैसे उसने उसके दूध को चुम चार और दबा कर उसके बरसो की तमन्ना पूरी क्र दी हो

शमशेर भूरिया क मम्मो को खूब चूमता है चुस्त है छत्ता है और फिर भूरिया को निचे बैठा देता है और उसके दोनों दूध क दरमियान अपने हुल्लाबी लौड़े को रख अपने अम्मी क दूध को छोड़ने लगता है



"ाः मेरे शेर शमशेर मेरी दूध में बहुत खुजली होती थी बहुत तदपि हु मई इसकी खुजली मिटा दीजिये मेरे सरताज आह बहुत खूब मेरे शेर"

शमशेर अपने अम्मी क तरफ एक मुस्कान क साथ देखता है जैसे अब वो अपने मन की करेगा और इस मुस्कराहट को भूरिया भी समझ रही थी क उसका बीटा अब बहुत जोश में आगया है और आज उसकी खैर नहीं

"अम्मी जान लौड़ा मुँह में लो अपने और चुसो आज आपको बताऊंगा क मुँह पेले क्या होती है मोहतरमा "

"शहज़ादे आपने कर लय मुँह में और कितना अब आगे बढिये न "

भूरिया नहीं चाहती थी क वो और लैंड चूसे क्यू क ये ज़िन्दगी में दूसरी मरतबाह हे था जब भूरिया ने लैंड अपने मुँह में लिया था

"अम्मी जाएं आअज आपको ऐसा सिखाऊंगा क आप मुँह में लेने क लये परेशां रहोगी लैंड चलो मुँह खोलो और इस बार हलक तक लेना"

"उफ़ बीटा मेरी साँसे बंद हो गयी तो इतना बड़ा"

"चुप करो आओ मेरी मल्लिका जहाँ आपके शबनमी होठो की प्यास बुझाउ अपने लौड़े से"

भूरिया ये सुन कर बिस्तर पर लेट जाती है और अपने बेटे का लैंड मुँह में भरने क लये आगे बढ़ती है



"आह अम्मी जान ऐसे हे आपका सुर्ख होठ मेरे लौड़े को ठंडक पंहुचा रहे है ज़ुबान से कहते लौड़े को"

ये सुनते हे भूरिया अपने ज़ुबान से छत्ते हुए अपने बेटे को देख मंद मंद मुस्कुराने लगती है

"वाह अम्मी जान आप तो बहुत जल्द सीख रही हो हम्म्म ाः ऐसे हे अंदर तक लो"



भूरिया शमशेर क आखो में देखते हुए छापा चाप अपने बेटे क तगड़े लैंड को मुँह के लेने लगती है और चूसने चाटने लगती है शमशेर का लैंड पानी छोड़ने लगता है और भूरिया क मुँह में गिरता है तो भूरिया लैंड बहार खींच लेती है "क्या हुआ अम्मी जाएं मेरे मणि मजेदारी नहीं रखते क्या मल्लिका इ जहाँ"

"नहीं बीटा उफ़ अजीब लगता है अंदर मणि कभी ली नहीं न "

"कभी तो अपने बेटे का लैंड भी नहीं लेने का सोची थी खुल कर अपनी आग शांत करो भूरिया डर्टी बहुत हो तुम रुको में पेलता हु तुम्हारे मुँह को"

शमशेर उठ जाता है और भूरिया का सर पकड़ क झटका मार कर भूरिया क मुँह में धक्के पेलने लगता है और भूरिया पहली बार न चाहते हुए भी अपने बेटे का वीर्य चख रही थी और उसका रोअम रोअम जल उठता है रुवे खड़े हो जाते है



शमशेर बिना सोचे समझे अपना पूरा लैंड बहार निकल कर ज़ोरदार धक्के क साथ अंदर दाल रहा था और भूरिया की आखे फटी जा रही थी पर वो बर्दाश्त करती रही कुछ देर ऐसे हे पेलने क बाद शमशेर भूरिया को देखते हुए कहता है "भूरिया आप कहती थी नहीं जायेगा लैंड मुँह में कैसे पूरा लैंड अंदर जा रहा है"

ये कहते हुए अपना पाछाक से बहार निकलता है और भूरिया लम्बी साँसे लेती है उसके चेहरे पर पसीने साफ़ दिख रहे थे पर वो अपने बेटे की बात सुन मुस्कुराती है "अब मुझे क्या पता था ये सब भी होता है मेरे मजनू अब इतने वैश्यों क साथ सोये हो तो"

"आजा फिर ले मेरा लैंड मुँह में भूरिया "

शमशेर लेट जाता है और भूरिया झुक कर फिर लैंड मुँह में लेती है इस बार शमशेर ज़ोरदार धक्का मारने लगता है और हर धक्के में पलंग की आवज़ छू छू कर रही थी तभी भूरिया रुकते हुए मुँह ऊपर उठा कर "आह इतना ज़ोर से मत कीजिये न चोट लग रही है हलक में"

शमशेर भूरिया का सर का हिजाब अपने हाथ में पकड़ कर "आजा मेरी जानेमन तुम्हारे मुँह में बहुत मज़ा है "ये कह कर अपने लैंड पर भूरिया क मुँह को ला कर झटका मारता है भूरिया का आधा खुला मुँह पूरा खुल जाता है और भूरिया क मुँह में लैंड पूरा घुस जाता है



शमशेर अपने एक हाथ भूरिया क सर को पकड़ दूसरे हाथ से अपने अम्मी क गाल पर धीरे धीरे मरता है

"अम्मी जान पूरा अंदर लो मुँह में डरिये मत सुल्ताना वैसे तो बहुत शेरनी बनती थी "

भूरिया से रहा नहीं जाता वो लैंड को अपने मुँह से बहार करती है और शमशेर हल्का झिनहलाते हुए "ये क्या अम्मी जल्दी से लैंड मुँह में लीजिये उस से पहले अपने चेहरे पर मालिया मेरे लैंड क पानी ko..maine कहा न फ़ौरन"

भूरिया मरती क्या न करती अपने बेटे का लैंड ले कर पुरे मुँह पर मलने लगती है



"ुहममम ाः अम्मी जान ऐसे आपके खूबसूरत चेहरे ने इस लैंड को बहुत तड़पाया है ाः अब मुँह में लीजिए"

भूरिया मुँह खोलती है और शमशेर पूरा लैंड एक हे झटके में मुँह में दाल देता है और धक्के मारने लगता है



भूरिया क मुँह में लैंड किस तीर से तेज़ अंदर बहार हो रहा था और शमशेर भी लगातार अपने लैंड से अपने माँ क मुँह में अपना गधा वीर्य छोर रहा था भूरिया का चेहरा वीर्य और पसीने की मिश्रण से भर गया था

"ाः अम्मी जान आपके मुँह में तो मेरा लैंड पिघल सा गया है आआह अम्मी जाआआआं ाआअह अआप कमल की माल हो आआह"



भूरिया का मुँह शमशेर क लैंड क पानी से भर गया था और वो ऊपर होती है और उसके मुँह से वीर्य का ढेर बहार बाह जाता है जो उसके होठ से ले कर नाक तक भिगो देता है

"ाः ामम्मि जहां मेरी भूरिया बेगम मेरी बीवी आआआह अआप्को प् कर मैंने ज़िन्दगी की सबसे बड़ी जुंग जीत ली ाः"



शमशेर फिर से अपने अम्मी क मुँह में अपना लैंड पेल देता है और अपने हाथो से भूरिया क सर को पकड़ कर अपना लैंड से अपनी अम्मी का मुँह पेल रहा रहा भूरिया की आखे लाल हो जाती है झुकी झुकी और उसके हलक तक शमशेर का लैंड अपना जगह बना लय था

"अम्मी जाएं ाआअह जड़ तक लैंड लो अपने मुँह में हम्म्म आआह"

भूरिया फिर से अपने पूरी हिम्मत दिखते हुए लैंड को अपने मुँह में ऊपर निचे हो कर लेने लगती है और तभी अपना मुँह ऊपर करती है



भूरिया का मुँह इस बार शमशेर क छोरे हुए पानी से पूरा भीग जाता है और उसकी आखे लाल हो जाती है "अहंमम ाः ाआअह बीटा बास मई तेरी माँ हु अपने अम्मी जान को बख्श दे आह अब रहने दीजिये मेरे सरताज अब मेरी प्यास बुझा दीजिये अपने हथियार से ाः"

शमशेर अपने माँ की इल्तिजा सुन कर रेहम खा जाता है और अपने अम्मी को खींच कर अपने तरफ लेता है भूरिया बिस्तरपर लेटते हे ज़ोर से हांफने लग जाती है उसका पूरा मुँह वीर्य से सना था उसके आखे लाल हो चुकी थी शमशेर अपने माँ की ऐसी हाल पर पहले तो मुस्कुराता है फिर एक तौलिया लता है और धीरे से अपने अम्मी क चेहरे को पोछने लगता है

"अम्मी जान मैंने आपको सताया तो नहीं"

भूरिया ये देख कर अपने नए शौहर को देख मुस्कुरा देती है और शरमाते हुए कहती है

"पुरे जानवर हो तुम शमशेर आज तो मेरी साँसे हे रुक जाती"

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 171

शमशेर अपने माँ की इल्तिजा सुन कर रेहम खा जाता है और अपने अम्मी को खींच कर अपने तरफ लेता है भूरिया बिस्तरपर लेटते हे ज़ोर से हांफने लग जाती है उसका पूरा मुँह वीर्य से सना था उसके आखे लाल हो चुकी थी शमशेर अपने माँ की ऐसी हाल पर पहले तो मुस्कुराता है फिर एक तौलिया लता है और धीरे से अपने अम्मी क चेहरे को पोछने लगता है

"अम्मी जान मैंने आपको सताया तो नहीं"

भूरिया ये देख कर अपने नए शौहर को देख मुस्कुरा देती है और शरमाते हुए कहती है

"पुरे जानवर हो तुम शमशेर आज तो मेरी साँसे हे रुक जाती"

शमशेर अपने अम्मी क चेहरे को तौलिया से पोछता हुए "अम्मी जान आपकी साँसे रुक जाती तो मई कौन सा ज़िंदा rahta"hooriya अपने बेटे को गौर से देखने लगती है अपने बेटे को देख भूरिया का आँख भर जाता है उसे अहसास होता है शमशेर जैसा पति उसे नहीं मिल सकता था "शुकरिअ मेरे सरताज आपने मुझे अपना कर मेरे बरसो की तमन्ना पूरा कर dya"shamshera अपने अम्मी क पैरो क निचे बैठ जाता है और अपने अम्मी क गोर पैरो को अपने होठो से चूमने लगता है "अम्मी जान आपकी खिदमत में मई पूरी ज़िन्दगी गुज़ारना चाहता हु आप से बेहतर बीवी मुझे कही नहीं मिल सकती ..अब मुझे वो जगह दिखाइए जहा से मई इस दुन्या में आया आपकी सबसे अनमोल चीज़ आपकी chuttt"shamshera ये कहते हुए छूट पर ज़ोर देता है भूरिया मुस्कुराते हुए "अब से सबकुछ आपका है शमशेर आप खुद देख lijye"shamshera अपने अम्मी क गोर पेअर की उंगलिओ को चाटने लगता hai"uff आह शमशेर ये क्या है पैरो में नहीं मेरे सीने में आइये मेरे सरताज आपकी हर चाहत पूरी karungi"hooriya अपने बेटे क सर पर हाथ फेरते हुए कहती है "ाचा अम्मी जान तो आपके उस बेशक़ीमती क़ातिल गांड को आज खूब रगडूंगा और अपने लैंड से और चौड़ी कर दूंगा आपके गांड ने तो मेरा जीना दुश्वार कर दया hai"hooriya अपने मुँह फाडे "ऐसा भी कोई कहता है kya"shamshera को भूरिया अपनी आखे बंद कए हुए अपने मुँह से गांड मरने क खिलाफ बोलती है शमशेर भी मुस्कुराते हुए अपने हाथ ऊपर बढ़ता है



भूरिया क शलवार क ऊपर अपना हाथ रख

"अम्मी जान मैंने कहा था न एक दिन आपके शलवार का नाडा मई हे खोलूंगा और बंद भी मई karunga"naada पकड़ कर खीचता है और भूरिया क मुँह से "आह beta"nikal जाता है भूरिया का पजामा एक झटके में निचे था पर भूरिया अपने छूट जो जांघिए में छुपी थी दोनों पैरो को भींच दबा लेती है शमशेर अपने अम्मी क मोती जांघो को उसकी दूधिया कमर को घर रहा था भूरिया क पेट पर हलके चर्बी थे जिससे वो एक डैम मोती जांघो की भरी हुई माल लग रही थी "अम्मी जान आखे खोलिये मैंने आपका शलवार उतार दिया हु अब आपके जांघिए खोल du"hooriya अपने आखो को और ज़ोर से भींच कर अपने दोनों हाथो को अपने मुँह पर रख लेती है "शमशेर मुझे शर्म आरही है तुम मेरे बेटे भी तो हो उफ़ मत घूरो न बीटा "भूरिया की लाज शर्म देख शमशेर को अपने अम्मी पर और प्यार उम्र अत है "अम्मी जान अब से तो रोज़ आपको मेरी बहो में सोना है मेरे लैंड से रोज़ खेलना है और छूट में ले कर हे राते गुजरने है फिर कैसी sharm"hooriya एक बार कुछ पल क लये आखे खोलती है और एक मुस्कराहट क साथ गुस्सा दिखते हुए "शमशेर मई सिर्फ जांघिए में hu"fir से अपना चेहरा निचे कर लेती है शमशेर मुस्कुराता हुआ "अम्मी जान मई आप की तरफ नहीं देखता पीछे मुद जाता हु पर 5 गिनते हे आप या तो खुद जांघिए उतार दो अपने बड़े गांड से नहीं तो में फाड़ dunga"shamshera ये कह कर अपने अम्मी की तरफ पीठ कर क खड़ा हो जाता है

भूरिया का छूट कुलबलाहट में थी डिल छह रहा था अभी शमशेर का लैंड ले अपने छूट में पर दिमाग बार बार कह रहा था भूरिया तू उसकी माँ है कैसे उस से चुद सकती है उधर शमशेर गिनती शुरू करता है तभी भूरिया अपने पास रखा निक़ाब जल्दबाज़ी में पहन लेती है तभी शमशेर पीछे मुद जाता है

"अम्मी जान रुको आज तो पर्दा छोरो"

भूरिया अपने निक़ाब को पहनी तो थी पर उसके निक़ाब से उसका भरी बदन साफ़ झलक रहा था और उसके दोनों थान बहार को लटक रहे थे



भूरिया को इस रूप में देख शमशेर का लैंड ज़ोर दर झटके मरता है क्यू क भूरिया निक़ाब में भी नंगी हे थी तभी भूरिया आएगी बढ़ कर अपना ब्राज़िएर उठती है और अपने दूध को ढकते हुए पहन लेती है "बीटा ये गलत है न ज़माने को क्या मुँह दिखाएंगे "अपने निक़ाब ठीक करने क लये मुड़ती है



भूरिया की मोती जंघे निक़ाब क ऊपर से सिर्फ एक जांघिए में दिखती है जो उसके बड़े गांड को मुश्किल से छुपा रही thi,shamshera से रहा नहीं जाता है और वो आगे बढ़ कर "अम्मी जान अब इस निक़ाब को उतार दो मेरे जनम हुस्न को छुपाओगी तो आपका आशिके आपके छूट की प्यास कैसे शांत karega,Zamane की फ़िक़र हम क्यू kare"hooriya भी चाहती थी क वो शमशेर से खुल क प्यार करे पर उस से अनजाने में ये सब हो गया था शमशेर आगे बढ़ कर एक झटके में निक़ाब को खींच देता है और इतनी ताक़त से खींचने से भूरिया अपने आपको संभल हे नहीं पति और घूमती हुई किसी मदमस्त लौंडिया की तरह एक जांघिए में अपने बड़े गांड मटकते हुए अपने बेटे क सामने कड़ी हो जाती hai,shamshera सिर्फ एक जांघिए में क़ैद अपने अम्मी क बड़े टेबल जैसे गांड जो हर लचक में बेशुमार हिल रहा था "अम्मी जान वाक़ई आप की गांड दुन्या में सबसे खूबसूरत चीज़ है इसलिए न जाने कितने लोगो



ने अपनी जान क़ुर्बान कर दिया आपके गांड की मटक देखने क लये वाह क्या गांड है अम्मी जान "शमशेर हे कहते हुए अपने लैंड पर हाथ फेरता है भूरिया मुद कर अपने बेटे को देखती है जो आगे पीछे हो कर अपने अम्मी क गांड को घूरे जा रहा था



"अम्मी जान मैंने अपना मणि आपके इस गांड को याद करते हुए न जाने कितनी मरतबाह बर्बाद कर दया"

भूरिया का तो मनो काटो तो खून नहीं वो शमशेर से दूर हट्टे हुए अपने गांड को जांघिए में मटकते हुए बिस्तर क तरफ चली जाती है और पीठ अपने बेटे क तरफ कर क उसके आखो से बचने की कोशिश करती है पर इससे उलट शमशेर अपने माँ क गांड को तबियत से हिलते हुए मटकते हुए देख रहा था

"अम्मी जान आपके गांड हे शायद वो पहला नशा था आपने जो आपकी मुहब्बत में मैंने कई रेट जग कर गुज़री"



भूरिया क मुँह से आह निकल जाती है और वो वही बिस्तर पर बैठ जाती है और अपने गांड को अपने आशिक़ क्रफ झुका कर अपने गांड को अचे तरीके से अपने बेटे क आखो को सकती है

Hooriya:man me)ab आर या पार हे करना है मुझे डरना नहीं चाहिए आज इतना खूबसूरत दूल्हा जिसका लैंड इतना बड़ा है वो मिला है अब रुकना मेरी बेवकूफी होगी

ये सोचते हुए इठलाती है और उसके चेहरे पर मुस्कराहट फ़ैल जाती है वो अपने बेटे को पीछे मुद कर देखती है और उसके आखो में देख



"अच्छा तो इश्क़ जनाब ने मेरे पिछवाड़े से क्या था हम से नहीं तो आइये अपने सबसे प्यारी चीज़ को खोल कर देख lijiye"hooriya ये कहते हुए अपने ब्राज़िएर को खोलती है और पीछे फेक कर शमशेर क मुँह पर मारती है शमशेर अपना हाथ बढ़ा कर ब्राज़िएर पकड़ लेता है और नाक पर लगा कर "अब तेरी गर्मी शांत कर दूंगा भूरिया begum"hooriya मुस्कुराते हुए अपने हाथ उठा कर अपने उंगलिओ से अपने ओरे आने का इशारा करती है जिसे देख शमशेर तेज़ी से आगे बढ़ता है और भूरिया क गांड पर दो थप्पड़ रख देता है "ाओछ्ह धीरे से betaa"shamshera अपना लैंड भूरिया क गांड क दरार में फसा कर जांघिए क ऊपर से हे रगड़ता है और अपने होठो से ताबरतोड़ चुम्बन लेने लगता hai"aah अम्मी जहां क्या मोठे क़ातिल गांड है आपके आह मुझे इसे छू लेने दो आज hmm"shamshera अपने हाथो से भूरिया क कमर को पकड़ कर पीछे लता है और भूरिया अब सिर्फ अपने कच्ची में कड़ी थी पर अब भी उसके सर पर हिजाब था शमशेर अपने अम्मी क चारो ओरे गोल गोल घूमते हुए "अम्मी जाएं इतनी तंदरुस्त माल हो भला एक बूढ़ा आपकी ख्वाइशे कैसे पूरी कर सकता था अब मई करूँगा आपके इस मखमली बदन का सही ishtemal"shamshera क ऐसे घूरे जाने से भूरिया मुस्कुराती है और उसे वो मंज़र याद आता है जब उसके पति उसकी सौतन को कह रहे थे क भूरिया मोती और बूढी है

शमशेर आगे बढ़ता है और अपने अम्मी क उभरे हुए पेट पर चुम्बा लेता है और निचे बैठ कर अपने अम्मी क छूट क जगह को सूंघता है और उसके सुगंध से मदहोश होते हुए आखे बंद करता है "अम्मी जान ऐसी खुसबू तो गुलाब में होती hai"shamshera अपने होठो को पहले छूट क ऊपरी हिस्से में चूमता है तो उसे खुर्बुरा लगता है और वो समझ जाता है क ये उसकी अम्मी क झात है फिर वो निचे आते हुए छूट पर अपना होठ रख कर धीरे धीरे पहली बार अम्मी क छूट पर अपने तपते होठ को रखता है और छूट क लबो को अपने लबो से छूट है जांघिए क ऊपर से हे छूट की गर्मी क अहसास से शमशेर का खून का दौरान तेज़ हो जाता है और भूरिया अपने आखे बंद कए सिसकने लगती है "ुहम्म्म्म आआआह betaaaahmmm"shamshera धीरे से अपने अम्मी क कमर पर हाथ रख धीरे से उनके जांघिए क कोनो को पकड़ लेता है भूरिया अपनी आखे भींच लेती है

Hooriya:man me)haay ये मेरे हे ज़िन्दगी में होना था जो बीटा कल तक मेरी परछाई से डरता था आज मेरी जांघिए खींच रहा है मेरी शर्मगाह को चुम रहा है

शमशेर अपने अम्मी क चेहरे को देखते हुए धीरे धीरे जांघिए नीचे कर रहा था और भूरिया क जांघिए निचे होते हे सबसे पहले उसके सुनहरे रंग क घने झात क बाल ऊपर आते है जिसे देख शमशेर का लैंड झटका मारता है और भूरिया अपने आखे बंद कए इस पल का मज़ा ले रही थी

"अम्मी जान आप तो सच में मेरे कहने पर अपने छूट क झात काटे नहीं आप एक अछि बीवी बनोगी"

भूरिया क मुँह से कुछ नहीं निकल रहा था उसके दोनों पेअर में हल्का कंपन शुरू हो गया था वो बास हम्म्म करती है और अपने बेटे क सर पर हाथ रखती hai,shamshera मुस्कुराते हुए "मेरी पकजीअ अम्मी जान अब आप मेरी हो begum"shamshera एक ज़ोरदार खींच से जांघिए निचे करता है और चर्रर्र की आवाज़ से जांघिए दो हिस्से में फैट जाता है और भूरिया क झाटो से भरी छूट सामने आजाती है भूरिया का गांड जांघिए फत्ते हे कूद कर हिलने लगता है

"आहाहा उह्ह्ह ाआअह ामममममममी jaaaaaaaaaaaaan आआआआह आपके छू कछहहयतततततत क्या खूबसूरत नज़ारा है वह मेरी अम्मी क्या भरव्दार गांड है ाआअह आपके गांड को तो कच्चा चबा जाओ"



भूरिया की तो हालत ऐसे थी क उसे समझ नहीं आता कैसे क्या करे वो तो करना भी चाहती थी अपने बेटे क साथ ऐश पर उसके लाज शर्म अपने बेटे को अपने छूट दिखने पर हावी हो रही thi,shamshera फिर से चारो ओरे भूरिया क घूमता है टहलते हुए अपने अम्मी क संगमरमरी बदन का जायज़ा लेता है

भूरिया से अब रहा नहीं जाता और वो अपने चेहरे को अपने हिजाब से धक् लेती है जो वो अपने सर पर बंधी थी शमशेर अपने अम्मी का हाल देख मुस्कुराता है क्यू क भूरिया क हाथ उठाने से अब उसके बगल क बाल भी दिख रहे थे जिसका अंदाज़ा भूरिया को नहीं था



"अम्मी जान आपने ऐसा भरपूर छोड़ने लायक माल निक़ाब में छुपा रखा था वाक़ई ये सच है एक बार आपको छोड़ने की क़ीमत जान भी हो तो भी काम है वैसे आपने मेरे लये अपने बगल क बाल भी नहीं काटे"

शमशेर की बात सुन भूरिया फ़ौरन अपना हाथ निचे करती है और सामने शमशेर को मुस्कुराता देख पहले तो कड़ी रहती है और अपने आखे निचे कए अपने पैरो क निचे ज़मीन पर कुरेदने लगती hai,shamshera अपने दोनों हाथो को फैलता है भूरिया देखती है उसका नंगा बीटा जिसका लैंड उसे हे देख रहा था अपने नंगी माँ को अपने पास बहे खोल कर बुला रहा है

Shamshera:aaajao मेरी बाहो में भूरिया मेरी सुल्ताना मल्लिका इ जहाँ अम्मी जान आपके संगमरमरी बदन को मुझे महसूस करने दीजिये अम्मी जान

Hooriya:man me)jee ले अपनी ज़िन्दगी भूरिया ऐसा मौक़ा हर औरत को नहीं मिलता

भूरिया अपने बेटे को देख मुस्कुराती है और अपने भरी वजूद को लिए हुए शमशेर की ओरे भगति है उसके भरी जांघ और गांड एक सुर से हिल रहे रहे और मम्मी तो इतने कूद रहे थे क कभी भूरिया क गुलाबी घुंडी पेट पर लगती तो कभी कंधे क ऊपर लहरारी ये पल थम सा गया था एक भारी वजूद की औरत अपने बेटे से मिलान क लये दौरे आरही थी जिसके सर पर हिजाब था कुछ हे पालो में भूरिया बेगम अपने नए शौहर उर्फ़ शमशेर बीटा क बहो में क़ैद सी हो जाती है और उसके नंगी चुचिअ छप्प से शमशेर क कसरती बदन से टकराती है और लैंड अपना रास्ता ढूंढ़ता हुआ सीधा छूट पर वॉर करता है और भूरिया की आखे फैट सी जाती hai,hooriya अपने बाहो का हार अपने बेटे को पहनाये हुए थी शमशेर अपने हाथो को भूरिया क बड़े गांड पर ले जाता है और ज़ोर से अपनी अम्मी क मांसल और थोड़े चर्बीदार गांड को जो काम से काम 38 की थी उसे मसलने लगता hai"aaaaah अम्मी जाहां उफ़ क्या मुलायल गांड है आपके हम्म्म aaah"hooriya अपने बेटे क पीठ पर अपने नाख़ून से खुरचने लगती है और शमशेर को दर्द का अहसास तक नहीं होता भूरिया अपने होठो को शमशेर क गर्दन पर रख चूमती है और शमशेर एक धक्का मारता है और लैंड झाटोदर छूट क बगल में जा कर लगता है पर छूट को छू जाने से भूरिया सिसकती है "आआआह बीटा hmmm"aur अपने बेटे क गले पर अपने दांत को गदा देती है शमशेर को इस बार दर्द हॉट है और वो बदले में भूरिया को पकड़ कर भींच देता है और गांड पे ज़ोरदार थप्पड़ मारने लगता hai"uhh आआह यह ाआअह बीटा उठ aaaaaaaaaaaah नहीं अअअअअअराम से बीटा आआआआह"

शमशेर अपने हाथ ऊपर करता है और भूरिया क दूध को ज़ोर से पकड़ कर दबाते हुए अपने मुँह से चबाने लगता है भूरिया का हालत ख़राब हो चूका था शमशेर का लैंड बर्बाद चूर क मुहाने पर अपनी दस्तक से कई महीनो से तरसी हुई छूट को और भड़का रहा था भूरिया सिसकते हुए "उह्ह्ह आआआआह ऐसे हे आआआह ुहम्म्म्म ाः मर्डर गाआआअई हम्म्म आआआह uhhh"hooriya अपने होठो से शमशेर क गर्दन को चूसते हुए बोल रही थी तभी शमशेर अपने मुँह में रखे दूध को चूसते हुए दांत से खाने की कोशिश करता है और किसी आम की तरह दूध को काटने लगता है दूध क ऊपर हिस्से में दांत चुभ रहे थे और भूरिया दर्द से तिलमिला कर शमशेर क गर्दन पर अपने दांतो से काटने लगती है

"ुह्ह्हह्ज aaaaaaaaaaaaaah बेताआआ ाः मररेरे गयी मई ाआअह नाहीईईई ाः उफ्फ्फ्फ़ आह मर्डर गई"

"अह्ह्ह अम्मी जाआआआआ आपके बड़े दूध ाः ये गांड ाआअह उफ्फ्फ आपके इस दूधिया बदन को खा जाऊंगा ाः"

शमशेर ये कहते हुए निचे भूरिया क पेट कर चूमते हुए बैठ जाता है

"अम्मी जान अपने टाँगे खोलो अपने आशिक़ को अपने छूट का फाक दिखाओ "

भूरिया बात मानते हुए अपने एक पेअर को टेढ़ा करती है और छूट क दोनों लैब जो आपस में जुड़े थे वो खुल जाते है



भूरिया की रस से भरी छूट थोड़ी सी फैलते हे रस की बुँदे हल्का टपकती है जो निचे बैठा शमशेर क मुँह पर गिरती है और शमशेर अपना ज़ुबान बहार निकल कर अपने अम्मी क छूट क रास को छत्ते हुए "हम्म्म्म ाः अम्मी क्या मज़ेदार है आपके छूट का पानी हम्म्म देखिये अम्मी आपके ये झातेदार छूट क लैब खुल गए है और चीख चीख क कह रहे है क इसे लैंड चाहिए वो भी तगड़ा ये छूट को तो सिर्फ लौड़ा चाहिए ये नहीं देखती है किसका है बीटा का है या भाई ka"shamshera अपना जुबां ऊपर करते हुए नोखिला कर भूरिया क छूटा क सलूरर्पपप कर क चाट जाता है "हम्म्म ाः अम्मी जान" भूरिया अपने आखे बंद कए हुए अपने पेअर को अकड़ती है "aaaaaaaaaaaAh मेरे शहज़ादे बेटे आआआआह अआखिरकर तुमने मेरे शर्मगाह पर भी कब्ज़ा कर लये उफ्फ्फ्फ़ ाः"

शमशेर खड़ा होता है उसका मन छूट देख कर भर गया था वो भूरिया को इशारे से पलटने क लये कहता है "अम्मी जान झुक जाओ अपने गांड का दीगर karao"ye सुनते हे हे भूरिया बिस्तर पर बैठ कर झुक जाती है और अपने भारी भरकम गांड को अपने बेटे क तरफ करते हुए एक ऐडा से गोल घूमती है



शमशेर अपने अम्मी क झुकी हुई गांड को खा जाने वाली नज़र से देखता है "अम्मी जान दुन्या में मिश्रा की गांड तो मशहूर है पर आपके गांड का कोई सांई नहीं"

शमशेर अपने हाथ आगे बढ़ा कर भूरिया की गांड को सहलाते हुए ज़ोर से दबोच लेता है



शमशेर एक हाथ से अपने माँ की गांड को पकड़ कर फैलता है "अम्मी जान गान पे भी बहाल है aapke"hooriya पीछे देख मुस्कुराती है

तभी शमशेर अपने एक ऊँगली गांड क छेड़ पर फेरता है "उफ्फ्फ्फ़ नहीं बीटा वह नहीं छी वो गन्दी जगह है"

"अम्मी जाएं आपके जिस्म का हर हिस्सा दमकता है गमकता है आपके गांड को अपने जुबां से चाट कर साफ़ करूँगा"

"बीटा काम से काम वह तो मत लगाई ज़ुबान वह से तो छी कितने गंदे हो तुम शमशेर "

ये कहते हुए भूरिया ऊपर पलंग पर जा कर बैठ जाती है



भूरिया अपने छूट और गांड को अपने बेटे से छुपाते हुए अपने पैरो को मोर लेती है जिसे देख शमशेर "अम्मी जान ठीक है नहीं चाटूँगा आपकी गांड छूट तो देखने dijiye"hooriya को शरारत सूझती है और वो अपने पैरो को खोल कर छूट को अपने बेटे क सामने पड़ोसती है "ये लीजिये मेरे सरताज आपके अम्मी की शर्मगाह यही से आप पैदा हुए थे बीटा"



"और मई यही से अपने बच्चे पैदा करूँगा मेरी अम्मी बेगम आपके छूट को तहस नहस कर दूंगा अपने मोठे तगड़े लैंड से "

शमशेर आगे बढ़ता है और अपने माँ क छूट क निचे बैठ जाता है भूरिया क पेअर कंपनी लग जाते है और छूट में खलबली होने लगती है भूरिया की साँसे तेज़ चल रही थी और उसके दोनों पहाड़ जैसे चुके हवा में ज़ोरो से हिल रहे थे शमशेर अपने हाथ अपने अम्मी क झाटो में लगते हुए सहलाता है और भूरिया मरे उन्माद क अपने आखे बंद क्र "aaaaaaaaaaaaaah betaaaaaaaaaaa"

शमशेर अपने ऊँगली से हलके सुनहरे झाटो को पकड़ कर अपने ऊँगली घुसाने की कोशिश करता है "उफ्फ्फ अम्मी ये सेविओ जैसी झाते आपने मेरे लिए संभल क रखा था हम्म्म कितने मुलायम और घुंगरले hai"shamshera की बात सुन भूरिया भी जोश में ात hue"han बीटा सिर्फ आपके lye"shamshera अपने जुबां से भूरिया क झाटो को चाटने लगता है और भूरिया ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगती है उह्ह्ह आआह की आवाज़े पुरे हुजरे में फ़ैल जाती है अब शमशेर अपने अम्मी क छूट क झट को अपने मुँह में भर्र लेता है "हम्म्म आआह अम्मी "भूरिया से रहा नहीं जाता और ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगती है "उफ्फ्फ बीटा ये भी कोई खाने की चीज़ है "शमशेर अपने थूक से पुरे झाटो को भिगो देता है फिर अपने अम्मी को देखते हु "तो क्या खाओ ामी jaaaann"shamshera आगे बढ़ते हुए अपने अम्मी क बगल तक पहुँचता है और इस बार बीने पूछे हे उनके हाथ उठा कर उनके घुंगराले बगल क बाल को अपने जुबां से चाटने लगता है "छी गंदे शमशेराआ ाआअह हम्म्म्म ufff"shamshera चपुड़ चपुड़ कभी पुरे बगल को चाट जाता तो कभी बगल क बाल को अपने मुँह में भर्र खाने की कोशिश करता ऐसे हे वो दूसरे बगल में भी अपने मुँह लगाकर भूरिया को एक नए नए सुख का आभास करवा रहा था

"अम्मी जाएं अब आपको मैंने आपके झात और बगल रखने क लये कहा था ताके आपके झांट और बगल को चाट सकू पर वाक़ई मज़ेदार लगे"

भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे को देख "मेरे गंदे सनम मजनू"

शमशेर वापस से छूट क पास बैठ जाता है और अपने ऊँगली छूट क दरार में



घुसते हुए फेरता है और अपने ज़ुबान से चाट जाता है भूरिया क पेअर कांपते हुए अकड़ने लगते है "हम्म्म्म आआआआह नहीं बीटा ऐसा कौन अपने ज़ुबान वह लगता है"

"अम्मी जाएं मई लगता हु अपनी अम्मी जान की मखमली छूट में जिसमे से गुलाब की खुशबु आ रही है हम्म"



शमशेर अपने अम्मी क छूट को मुँह में भर्र कर चबाने लगता है चूसने लगता है "उह्ह्ह aaaaaaaaaaaaah बीटा ाआअह कभी सुल्तान ने मेरे साथ ऐसा नहीं क्या उफ्फ्फ आआआआआह में मर्डर गई उफ़ बरसो बाद आराम मिला है आआआह"



"गलप्प्प गलपपपप गलप्प्प गलपपपप गलप्प्प गलप्प्प गलप्प गलप्प गलप्प

ह्म्म्मम्म aaaaaaaaaah बीटा ाः ऐसे हे चुसो आआआह ह्म्मम्म्म्म अम्मी जाआआआं गलपपपप गलप्प गलप्प्प गलप्प ाआअह आपके छूट की खशबू आआह हम्म्म"

"बीटा आआआआह मेरे शेर मैंने गुलाब का पानी चिरका था अपने शर्म गाः में आआआआह ुहम्म्म्म ऐसे हे चुसो ाआअह हम्म्म्म "

"अच्छा तो मेरी प्यारी अम्मी मेरे लये अपने छूट में गुलाब का पानी लगा कर आआए है वह हम्म्म ाः"

"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah ह्म्म्मम्म्म्म betaaaaaaaaaaaa मेरे आआआआशिक़ुए मेरे मजनुओवो मेरे शौहर मेरी प्याआआअआस बुझा दो मेरे sartaaaaaaaaaaaaaaaj आआह कहातो नाहीईईएसी उफ्फ्फ मई मर्डर गई अब अपना हथियाकर दाल डोह नाआ ाआअह"

शमशेर अपने अम्मी क छूट से मुँह हटा कर अपने अम्मी क खूबसूरत पंजो को प्यार से चाटने लगता है और पैरो की उंगलिओ को अपने मुँह में ले कर चूसते हुए



"अम्मी जहां अभी तो पूरी रआआआअट है हम्म्म्म आह आपकी तो छुड़ाए जैम कर करूँगा घबराओ नहीं"

शमशेर ये कहते हुए अपने अम्मी को झुका देता है और उसके सर पर हाथ रख कर भूरिया क बड़े गांड को बेरहमी से थप्पड़ मारने लगता है



चटकककक चटकककक चटकककक की आवाज़े गूंज रही थी "अम्मी जान दीखिये ज़िन्दगी कितनी बदल गई जो सख्त मिज़ाज़ की अम्मी कल तक थप्पड़ मारती थी अपने बेटे को आज खुद अपने गांड पर थप्पड़ खा रही है और वो भी मज़े लेते हुए"

शमशेर अपने उस दिन को याद करता है जब वो अपने अम्मी से अपना इज़हार इ मुहब्बत क्या था तो भूरिया लगातार मार मार कर शमशेर क गाल लाल कर दी थी

Shamshera:man me)ammi जान आपके गांड उससे दुगनी लाल कर दूंगा जितनी आपने मुझे थप्पड़ मार कर की ,मेरा नाम शमशेर है आखिर पता कर आज बिस्तर में ले हे लय न

भूरिया झुकी हुई थी और शमशेर अपने दोनों हाथो से ताबड़तोड़ थप्पड़ मारने लगता है दोनों हाथो से चटक चटक से आवाज़े अब पुरे हुजरे में गूंज रही थी यक़ीनन अगर कनीज़ होते दरवाज़े पे कड़ी तो सुन लेती भूरिया सिसकिया और तेज़ होने लगती है



"Aaaaaaaaaaah डीईईएडीई हम्म्म्म नहीं आआआआह तो बीटा आप बदला लोगे अपनी लाइलाहा से हम्म्म"

"मेरी जाआआआं मई तो यही कह रहा हु क कल आपने मुझे मार कर गाल लाल कए थे आअज मई आपकी गांड लाल कर रहा हु मुझे तो तकलीफ हुई थी आपको तो मज़ा आरहा है "

शमशेर ये कहते हुए अपने मुँह में भूरिया क गांड को भरने लगता है और छूट को चाटने लगता है भूरिया ज़ोर ज़ोर से सिसकिया लेने लग जाती है छूट से रस बहाव शुरू हो जाता है जिसे शमशेर अपने जुबां से छत्ता है और अपने ज़ुबान को नोखिला बना कर कभी छूट तो कभी गांड को कुरेद देता है



शमशेर अपने दो ऊँगली को छूट क दरार में घुसा कर रास्ता बनाने लगता है अपने लैंड क लये "हम्म्म अम्मी जाएं काफी कासी हुई छूट है आपकी ऊँगली भी नहीं जा रही पूरी"

"उफ्फफ्फ्फ़ ाआअह नही आआआह हाआआ बीटा जब तुम्हारे ऊँगली से भी छोटा तुम्हारे अब्बा का हथियार है तो भला ाआअह कैसे जाआए ऊँगली अंदर वह तक कोई पंहुचा हे नहींआआआह"

"अम्मी जहां आपका बीटा पहुंचेगा वह जहा कोई नै जा सका मेरा लौड़ा आपके ुंचुवे छूट की दीवारे तोड़ेगा अआप्को पेल पेल कर ाः मेरी अम्मी जान कितनी गरम माल हो तुम"



शमशेर अपने हाथो से भूरिया क गांड को पकड़ कर फैलता है और छूट में थूक देता है और फिर छूट से ले कर गांड तक अपने जुबां से चाटने चूसने लग जाता है "हम्म्म्म आआआआह अम्मी जाआआं क्या मसालेदार छूट है आपकी hmmm"shamshera अपने अम्मी की छूट चाट रहा था और भूरिया अपने छूट से पानी चोरते हुए "aaaaaaaaaaaaah उहहहहजह मेरेईईई सीईएर रेहाआआम कार अपने अम्मी पैर आआआआह डाल दीजिये अपना हथियार ाः हआ दाल दीजिये अपना हथियार मेरे शर्म गाह में बना लीजिये मुझे अपनी बीवीएएएएए मेरे बेटे जी आआआआह नहीं होरहा बर्दाश्त कई महीनो से प्याजआसी हु बुझा दीजिये मेरा पयाआस आआह"

शमशेर अपने माँ की तड़प देख उठता है और अपने माँ को गॉड में उठा लेता है दोनों माँ बेटे मादरजात नंगे एक दूसरे को बाहो में जकड लेते है भूरिया मारे उत्तेजना से अपना छूट लैंड पर थोक रही थी और छह रही थी क किसी भी तरह लैंड अंदर ले ले

"अम्मी जहां मेरी बीवी हो तुम बोलो hmmm"shamshera अपनी माँ को चूमते हुए छत्ते हुए कहता है जिसका भूरिया जवाब देती है "हाआआ मई सिर्फआपकी हु मेरी जाहां मेरे सरताआज आहाज से माछक अआप्की घुलाआम हुई मेरे महालिक ाआअह जल्दी से दाल दीजिये"

शमशेर जोश में अपने भारी भरकम अम्मी को गॉड में उठाये हुआ था भूरिया को शमशेर क ताक़त का अंदाज़ा हो गया था और शमशेर ने ऐसा गरम क्या क इस वक़्त भूरिया बेगम किसी कुत्ते से भी छूट जाती शमशेर तो एक गबरू नौवजवान था शमशेर अपने अम्मी को बिस्तर फेकता है और भूरिया को कहता है "अपने ताआआंगे फैलाओ अम्मी जाएं अपना लौड़ा आआप्के छूट में दाल दू "

"आआआआअह्जाआओ मेरे सरताआज मेरे सुलताआआआं मेरे नए शौहर"

टांग फैलाआते हुए अपने छूट का दवार भूरिया अपने सेज बेटे क लये खोल देती है जिसे देख शमशेर अपना लैंड को देखता है जो हर सेकंड एक झटका मार रहा था और अपने अम्मी क छूट में घुसने क लये बेकरार था

शमशेर निचे झुकते हुए अपने लौड़े को भूरिया की छूट क दाने पर लगा कर रगड़ता है



अपने अम्मी की गीली छूट पर लैंड को ज़ोरो से रगड़ते हुए घिसह्णे लगता है मारे उत्तेजना क भूरिया चिल्लाने लगती है हम्म्म aaaaaaaaaaaaah नहीं aaaaaaaaaaaah hmmmmmmmmmm मेरी jaaaaaaaaaaan मेरे ाआअशीके बीटा" ाआअह मेरी अम्मी जाआआं आआह कितने गरम छूट है आआप्के अआप्की ये झातेदार छूट ाआअह हम्म्म आआह मेरी बेगम"



भूरिया अपने आखे बंद कए अपने छूट पर अपने बेटे क लैंड क अहसास का भरपूर मज़ा ले रही थी और उसके पुरे बदन में एक अजीब तरह की सुर सूरी शुरू हो जाती है

"अम्मी जाआआआं इस से पहले क मई आपको छोड़ कर आपको अपनी बीवी बना लू पहले अपने पुराने शौहर को मेरे आखो क सामने से लात मार कर दूर करो मेरी नज़रो से "

"मई सब कुछ करुँगी अआप्के लये मेरे आशिके मजनूओं आआह सुल्तान मेरे वाहिद तो उधर कोने में है ाः दाल दीजिये ना"

भूरिया थोड़ी इस बार रुआँसी हो जाती है और अपने बेटे से भीक मांगने लगती है छोड़ने क लये शमशेर मुस्कुराता हुआ देखता है

"अम्मी जाएं अआप इस बूढ़े को लागत मार कर बिस्तर से निचे गिराए दीजिये इस नालायक़ की शकल नहीं देखना चाहता मई इसने मेरी भूरिया को दुःख दिया जिसे मई बेपनाह मुहब्बत करता हु मेरे वाहिद को लात मारो अम्मी "



भूरिया एक हलके मुस्कराहट और उत्तेजना क साथ अपने बेटे को देखती है जो अपने बाप का नाम ले कर पुकार रहा था और अपने हे अम्मी से कह रहा था क उसके बाप को लात मार कर पलंग से निचे गिरा दे ताके वो अपने अम्मी को छोड़ सके

"शमशेर मई कैसे लात मार सकती हु कही वो गिरे तो .."

"अम्मी जहां वो गिर क मर्डर जाये पर आपको अपने पुराने शौहर को लात मारनी होगी अगर मेरा लौड़ा लेना है छूट में"

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
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