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- Dec 5, 2013
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अघोरी - तो इस बार देव और पूनम नहीं उनके परिवार हमारे निशाने पे है जो हमारे सामने तिनको के सामान है और उन्हें मए उखड दुगा उनके गम में जब देव डूबा होगा तो देव का सर धड़ से अलग कर के उसकी आत्मा को कैद करुगा रूद्र भी मरेगा और उनके मरने के बाद नीलम और पूनम बनेगी मेरी रंडी. हहहहहहहहहहहह.
गढ़ – एक आखरी बात देव, पूनम, रूद्र और नीलम इन सब के प्रतिरूप (क्लोन ) यहाँ मौजूद है. उन्होंने अपनी गैर मोजुदगी छुपाने के लिए अपने घरवालों को धोखे में रखने के लिए ये प्रतिरूप रखे है. जिनमे उनकी hi शक्तिया है. तू अपनी शक्तियों से उन प्रतिरूपो की शक्तिया कैद कर ले. और उनके घरवालों के सामने उन्हें मार दे इससे उनके घरवालों के हौसले टूट जायेगे और वो जल्दी काबू में आएंगे.
अघोरी - जो आज्ञा गुरुदेव अब ऐसा hi होगा.
यहाँ तिलिस्मी चक्र में देव और रूद्र अघोरी की इस खतरनाक साजिश से अनजान थे. और आगे बढ़ते जा रहे the.unke मित्र शेर और ड्रेगों वापस अपनी अपनी जगह पे जा चुके थे. इतने में ये लोग भी आराम कर चुके थे. और पिछले 3 घंटे से चले जा रहे थे. कही धुप थी तो कही छाँव कही पथरीली जमीन तो कही उबड़ खाबड़ तो कही एक डैम नरम घांस. ये लोग चलते hi जा रहे थे के तभी इन्हे दूर से एक आदमी दौड़ता हुआ आता नजर आया.
रूद्र – ये कौन है जो इस तरफ भगा चला आ रहा है अब तक के सफर में हमें कोई सामने से आता तो दिखा नहीं ये कौन है. लगता है त्रिकाल का सताया हुआ है या उसी का कोई जाल ?
देव – आने दो पास सब पता चल जायेगा उसी से.
लेकिन जब सामने वाला दौड़ता हुआ उन के पास आया तो उसे देख के सब का दिमाग hi ख़राब हो गया और रूद्र तो सर पकड़ के hi बैठ गया उकडू. और उसे जलती आँखों से दक्खने लगा. क्यों की वो कोई और नहीं बल्कि खतरा था. जो इनके सामने पहुंच कर अपने घुटनो पे हाथ रख कर हांफ रहा था और गहरी गहरी सांसे ले रहा था.
रूद्र – अबे इतना भाग क्यों रहा है कोई तेरी इज्जत लूटने को पीछे पड़ा है क्या? और चल भाग hi रहा है तो यहाँ क्यों रुक गया थोड़ा और दौड़ ले ता की तेरी साँस अटक जाये और तुझसे हमारा पिंड छूटे.
खतरा – ये बात ठीक नहीं रूद्र मए तो तुम लोगो को बचने के लिए तेजी से दौड़ता आ रहा हु और तू है के मुझे hi ऐसा बोलता है.
रूद्र – सेल अब तक तूने खूब बचाया है न हमें. जो अब बचाएगा . चल देव हमें इसकी बात नहीं सुन्नी.
सब आगे बढ़ने लगे. खतरा भी उन्हें आवाज़े देता उनके पीछे आ रहा था.
खतरा – अरे सुनो तो मेरी बात वार्ना पछताओगे.
रजनी - अब तक तुम्हरी बातो ने hi हमें भटकाया है खतरा. अब बाज आ जा अपनी हरकतों से.
खतरा – तू मेरा हाथ थम ले मए अभी बाज आ जाउगा. फिर तेरे शिव किसी से बात hi नहीं करुगा.
रजनी ने घूर के देखा. खतरा दन्त फाडे उसे देखने लगा.
रजनी – सपने भी वही देखने चाहिए जितनी औकात हो.
खतरा – मए देवा से भी ज्यादा काबिल हु रजनी तू समझ नहीं रही है मए चहु तो फिर से तुझे उसी नगरी की महारानी बना सकता हु कहा इन लोगो के साथ ठोकरे कहती फिर रही है.
रजनी - ओह्ह्ह अच्छा तू देव से बेहतर है वो भला कैसे?
खतरा – क्या देव तुझे महारानी बना सकता है? क्या वो तुझे इन खतरों से बचा सकता है? क्या वो तुझे त्रिकाल के कहर से बचा पायेगा? लेकिन ये सब मए कर सकता हु. और फिर भला मुझ में कमी hi क्या है अच्छा खासा जवान मर्द हु तुझे हर तरह से खुश रख सकता हु.
रजनी अभी कुछ बोलने hi वाली थी के वो सब एक दोराहे पे पहुंच गए दो रस्ते थे वह दये और बाये. दोनों hi बिलकुल एक जैसे रत्ती भर का फरक नहीं. एक तरफ जहा पेड़ था दूसरी तरफ भी वही पे पेड़ था. ऐसा लग रहा था के आईने में देख रहे है.
देव और रूद्र की आंखे मिली लेकिन कुछ समझ नहीं प् रहे थे.
पूनम – ये तिलिस्म है देव एक रास्ता सही है दूसरा गलत. यानि एक में हम फ़िलहाल सुरक्षित है दूसरे में कदम रखते hi खतरा है.
रूद्र – भाभी अब तक हर रास्ता ऐसा hi तो मिला है इसमें क्या नयी बात है?
पूनम - देखो हम तिलिस्मी चक्र में है. इसीलिए खतरा तो हर तरफ hi है कोई भी ऐसा रास्ता नहीं मिलेगा जो सीधा हमें स्वर्ण मणि तक ले जाये सुरक्षित . लेकिन बात है काम और ज्यादा की बस.
खतरा – तुम लोग तो मेरी बात hi नहीं सुनते हो मए यही बताने के लिए तो दौड़ा आया था के आगे तुम लोग फंस जाओगे वही रुक जाते और मेरी बात सुनते तो इस पूरे रस्ते में तय हो चूका होता की किस तरफ जाना है. अब यहाँ धुप में खड़े हो के भी क्या फायदा. चलो मए hi बता देता है. एक काम करो दायी तरफ चलो वह से सीधा रास्ता मिलेगा तुम्हारी मंजिल का.
देव – यानि उसमे खतरा नहीं है?
खतरा – मैने ये नहीं कहा है देव.
रूद्र – एक बात बता खतरा तू कमीना ज्यादा है या मक्कार?
खतरा – मए बस त्रिकाल का सेवक हु
रूद्र ने होठ भींच कर खतरा को देखा
देव – रहने दो ये हमें उलझाएगा hi इसकी बातो पे ध्यान मत दो.
नीलम - लेकिन हम लोग इतना सोच hi क्यों रहे है?
रूद्र – वो इसीलिए मेरी जान क्यों के हम इन रास्तो से अनजान है.
नीलम - अरे वही तो मए कह रही हु जब हमारे लिए दोनों hi रस्ते अनजान है तो सोचना कैसा और यहाँ तो आप कुछ पता भी नहीं कर पाएंगे दोनों hi एक सामान है रस्ते तो फिर किसी भी रस्ते पे आगे बढ़ लो. खतरा भी दोनों में hi होगा जैसे की पूनम ने अभी कहा.
पूनम – ी थिंक नीलम इस राइट. जब खतरा हर तरफ है hi तो बस आगे बढ़ो सोचना कैसा?
देवा चलो फिर बाये तरफ चलते है.
खतरा – अरे देव जब किसी भी तरफ जाना है तो दये जाओ बाये मत जाओ वह आग का दरिया है. तुम लोग भस्म हो जाओगे.
रूद्र – तू सेल झूठ hi बोलेगा हम जानते है.
खतरा – मए दोनों बाटे बोलता हु. एक सही एक गलत. न मए पूरा सच बोलता हु न झूठ लेकिन मेरी इस बात में सच है.
देव - चलो बाये तरफ चलते है.
खतरेरा उन्हें आवाज देता रहा लेकिन उन लोगो ने नहीं सुना और बाये तरफ वाले रस्ते पी आगे बढ़ गए. रस्ते में कोई बुराई नहीं थी साफ़ सुथरा रास्ता था. वो लोग मजे से चले जा रहे थे.
पूनम - देव उस नक़्शे में देखो न किस तरफ जाना है और कितना जाना है हमें.
देव – मैने रात में देखा था. उसी हिसाब से चल रहे है हम. लेकिन अभी मंजिल से दूर है पूनम.
तभी सब के कदम ठिठक गए क्यों के सामने का नजारा बेहद होलनाक था. जिन्दा नर्क की आग उनके सामने थी. एक सच मच का आग का दरिया था. जिसमे लावा बहता नजर आ रहा था. और चट्टानों के टुकड़े उस लावे में बहते नजर आ रहे थे. छोटे छोटे पठारों के रूप में. लेकिन इस नदी के इस किनारे से उस किनारे तक एक लकड़ी के पत्तो का पल भी बना हुआ था. वो काफी उचाई पे था जिससे आग वह तक नहीं पहुंच रही थी. पर उस पल का कोई भरोसा नहीं था दिखने में hi इतना कमजोर लग रहा था. के उस से होकर जाना मूर्खता hi साबित होती. लेकिन ये नदी भी पार कैसे हो?
तभी एक आवाज ने उन्हें अपनी तरफ आकर्षित किया
कहो तो मए पार लगा दू.
जब इन सबने उस तरफ देखा तो वह खतरा एक मछुआरे के भेस में लुंगी पहन के बैठा बीड़ी पी रहा था और और उसके पास hi एक बड़ी सी नाव पड़ी थी.
रूद्र – आ गया तू सेल और ये नव किस की चुराई?
खतरा – त्रिकाल ने भेजी है तुम लोगो के लिए मुझसे कहा बेचारे फंस गए है. तो नव में बिठा कर नदी पर करा दे. तो मए आ गया तुम सबकी मदद करने
रूद्र – अबे सेल ये आग की नदी है इसमें तेरी ये नव पापड़ की तरह सिक जाएगी. और हम सबका बन जायेगा कबाब.
खतरा – है यार ये तो मैने सोचा hi नहीं चलो लोहे की नाव ले के आता हु.
रूद्र – खतरा तू मरेगा मेरे हाथो से अबे लोहे की नव में ले जाकर हमें टलेगा क्या ?
खतरा – हम्म्म्म ये भी सही कहा यानि किसी नव में तुम लोग जा नहीं सकते पल की हालत ख़राब है. अगले महीने बनवाने का सोचा है त्रिकाल ने तब तक यही रुक जाओ मए झोपडी बनवा देता हु. अगले महीने जब पल बन जाये तो निकल पड़ना.
देव ने रूद्र का हाथ पकड़ के उसे शांत रहने को कहा और ध्यान से देखने लगा आग की नदी को.
देव – खतरा तू हमारा साथ क्यों नहीं छोड़ता?
खतरा – मए तो आपकी सेवा के लिए हु त्रिकाल का एक मामूली सेवक आपकी हर जरुरत पूरी करने के लिए हु. और आपको रास्ता दिखने के लिए.
रूद्र – रास्ता देखने के लिए या रस्ते से भटकने के लिए साला जब आता है नयी मुसीबत ले आता आहे. हमारी दुनिया में चल वह तुझे बीटा ऐसी भूल भुलैया में दाल दुगा के तेरा त्रिकाल भी नहीं निकल पायेगा तुझे.
देव रूद्र को हाथ के इशारे से चुप रहने को कहता है और – खतरा क्या तुम हमारे यहाँ रुकने का इंतजाम कर सकते हो? हम अब यही रुकेंगे और कल सुबह जायेगे.
खतरा – मए तो पहले hi कह रहा था के यही रुक जाओ महीना भर देखा रूद्र देव समझदार है तू बहोत उतावला है .
अघोरी - तो इस बार देव और पूनम नहीं उनके परिवार हमारे निशाने पे है जो हमारे सामने तिनको के सामान है और उन्हें मए उखड दुगा उनके गम में जब देव डूबा होगा तो देव का सर धड़ से अलग कर के उसकी आत्मा को कैद करुगा रूद्र भी मरेगा और उनके मरने के बाद नीलम और पूनम बनेगी मेरी रंडी. हहहहहहहहहहहह.
गढ़ – एक आखरी बात देव, पूनम, रूद्र और नीलम इन सब के प्रतिरूप (क्लोन ) यहाँ मौजूद है. उन्होंने अपनी गैर मोजुदगी छुपाने के लिए अपने घरवालों को धोखे में रखने के लिए ये प्रतिरूप रखे है. जिनमे उनकी hi शक्तिया है. तू अपनी शक्तियों से उन प्रतिरूपो की शक्तिया कैद कर ले. और उनके घरवालों के सामने उन्हें मार दे इससे उनके घरवालों के हौसले टूट जायेगे और वो जल्दी काबू में आएंगे.
अघोरी - जो आज्ञा गुरुदेव अब ऐसा hi होगा.
यहाँ तिलिस्मी चक्र में देव और रूद्र अघोरी की इस खतरनाक साजिश से अनजान थे. और आगे बढ़ते जा रहे the.unke मित्र शेर और ड्रेगों वापस अपनी अपनी जगह पे जा चुके थे. इतने में ये लोग भी आराम कर चुके थे. और पिछले 3 घंटे से चले जा रहे थे. कही धुप थी तो कही छाँव कही पथरीली जमीन तो कही उबड़ खाबड़ तो कही एक डैम नरम घांस. ये लोग चलते hi जा रहे थे के तभी इन्हे दूर से एक आदमी दौड़ता हुआ आता नजर आया.
रूद्र – ये कौन है जो इस तरफ भगा चला आ रहा है अब तक के सफर में हमें कोई सामने से आता तो दिखा नहीं ये कौन है. लगता है त्रिकाल का सताया हुआ है या उसी का कोई जाल ?
देव – आने दो पास सब पता चल जायेगा उसी से.
लेकिन जब सामने वाला दौड़ता हुआ उन के पास आया तो उसे देख के सब का दिमाग hi ख़राब हो गया और रूद्र तो सर पकड़ के hi बैठ गया उकडू. और उसे जलती आँखों से दक्खने लगा. क्यों की वो कोई और नहीं बल्कि खतरा था. जो इनके सामने पहुंच कर अपने घुटनो पे हाथ रख कर हांफ रहा था और गहरी गहरी सांसे ले रहा था.
रूद्र – अबे इतना भाग क्यों रहा है कोई तेरी इज्जत लूटने को पीछे पड़ा है क्या? और चल भाग hi रहा है तो यहाँ क्यों रुक गया थोड़ा और दौड़ ले ता की तेरी साँस अटक जाये और तुझसे हमारा पिंड छूटे.
खतरा – ये बात ठीक नहीं रूद्र मए तो तुम लोगो को बचने के लिए तेजी से दौड़ता आ रहा हु और तू है के मुझे hi ऐसा बोलता है.
रूद्र – सेल अब तक तूने खूब बचाया है न हमें. जो अब बचाएगा . चल देव हमें इसकी बात नहीं सुन्नी.
सब आगे बढ़ने लगे. खतरा भी उन्हें आवाज़े देता उनके पीछे आ रहा था.
खतरा – अरे सुनो तो मेरी बात वार्ना पछताओगे.
रजनी - अब तक तुम्हरी बातो ने hi हमें भटकाया है खतरा. अब बाज आ जा अपनी हरकतों से.
खतरा – तू मेरा हाथ थम ले मए अभी बाज आ जाउगा. फिर तेरे शिव किसी से बात hi नहीं करुगा.
रजनी ने घूर के देखा. खतरा दन्त फाडे उसे देखने लगा.
रजनी – सपने भी वही देखने चाहिए जितनी औकात हो.
खतरा – मए देवा से भी ज्यादा काबिल हु रजनी तू समझ नहीं रही है मए चहु तो फिर से तुझे उसी नगरी की महारानी बना सकता हु कहा इन लोगो के साथ ठोकरे कहती फिर रही है.
रजनी - ओह्ह्ह अच्छा तू देव से बेहतर है वो भला कैसे?
खतरा – क्या देव तुझे महारानी बना सकता है? क्या वो तुझे इन खतरों से बचा सकता है? क्या वो तुझे त्रिकाल के कहर से बचा पायेगा? लेकिन ये सब मए कर सकता हु. और फिर भला मुझ में कमी hi क्या है अच्छा खासा जवान मर्द हु तुझे हर तरह से खुश रख सकता हु.
रजनी अभी कुछ बोलने hi वाली थी के वो सब एक दोराहे पे पहुंच गए दो रस्ते थे वह दये और बाये. दोनों hi बिलकुल एक जैसे रत्ती भर का फरक नहीं. एक तरफ जहा पेड़ था दूसरी तरफ भी वही पे पेड़ था. ऐसा लग रहा था के आईने में देख रहे है.
देव और रूद्र की आंखे मिली लेकिन कुछ समझ नहीं प् रहे थे.
पूनम – ये तिलिस्म है देव एक रास्ता सही है दूसरा गलत. यानि एक में हम फ़िलहाल सुरक्षित है दूसरे में कदम रखते hi खतरा है.
रूद्र – भाभी अब तक हर रास्ता ऐसा hi तो मिला है इसमें क्या नयी बात है?
पूनम - देखो हम तिलिस्मी चक्र में है. इसीलिए खतरा तो हर तरफ hi है कोई भी ऐसा रास्ता नहीं मिलेगा जो सीधा हमें स्वर्ण मणि तक ले जाये सुरक्षित . लेकिन बात है काम और ज्यादा की बस.
खतरा – तुम लोग तो मेरी बात hi नहीं सुनते हो मए यही बताने के लिए तो दौड़ा आया था के आगे तुम लोग फंस जाओगे वही रुक जाते और मेरी बात सुनते तो इस पूरे रस्ते में तय हो चूका होता की किस तरफ जाना है. अब यहाँ धुप में खड़े हो के भी क्या फायदा. चलो मए hi बता देता है. एक काम करो दायी तरफ चलो वह से सीधा रास्ता मिलेगा तुम्हारी मंजिल का.
देव – यानि उसमे खतरा नहीं है?
खतरा – मैने ये नहीं कहा है देव.
रूद्र – एक बात बता खतरा तू कमीना ज्यादा है या मक्कार?
खतरा – मए बस त्रिकाल का सेवक हु
रूद्र ने होठ भींच कर खतरा को देखा
देव – रहने दो ये हमें उलझाएगा hi इसकी बातो पे ध्यान मत दो.
नीलम - लेकिन हम लोग इतना सोच hi क्यों रहे है?
रूद्र – वो इसीलिए मेरी जान क्यों के हम इन रास्तो से अनजान है.
नीलम - अरे वही तो मए कह रही हु जब हमारे लिए दोनों hi रस्ते अनजान है तो सोचना कैसा और यहाँ तो आप कुछ पता भी नहीं कर पाएंगे दोनों hi एक सामान है रस्ते तो फिर किसी भी रस्ते पे आगे बढ़ लो. खतरा भी दोनों में hi होगा जैसे की पूनम ने अभी कहा.
पूनम – ी थिंक नीलम इस राइट. जब खतरा हर तरफ है hi तो बस आगे बढ़ो सोचना कैसा?
देवा चलो फिर बाये तरफ चलते है.
खतरा – अरे देव जब किसी भी तरफ जाना है तो दये जाओ बाये मत जाओ वह आग का दरिया है. तुम लोग भस्म हो जाओगे.
रूद्र – तू सेल झूठ hi बोलेगा हम जानते है.
खतरा – मए दोनों बाटे बोलता हु. एक सही एक गलत. न मए पूरा सच बोलता हु न झूठ लेकिन मेरी इस बात में सच है.
देव - चलो बाये तरफ चलते है.
खतरेरा उन्हें आवाज देता रहा लेकिन उन लोगो ने नहीं सुना और बाये तरफ वाले रस्ते पी आगे बढ़ गए. रस्ते में कोई बुराई नहीं थी साफ़ सुथरा रास्ता था. वो लोग मजे से चले जा रहे थे.
पूनम - देव उस नक़्शे में देखो न किस तरफ जाना है और कितना जाना है हमें.
देव – मैने रात में देखा था. उसी हिसाब से चल रहे है हम. लेकिन अभी मंजिल से दूर है पूनम.
तभी सब के कदम ठिठक गए क्यों के सामने का नजारा बेहद होलनाक था. जिन्दा नर्क की आग उनके सामने थी. एक सच मच का आग का दरिया था. जिसमे लावा बहता नजर आ रहा था. और चट्टानों के टुकड़े उस लावे में बहते नजर आ रहे थे. छोटे छोटे पठारों के रूप में. लेकिन इस नदी के इस किनारे से उस किनारे तक एक लकड़ी के पत्तो का पल भी बना हुआ था. वो काफी उचाई पे था जिससे आग वह तक नहीं पहुंच रही थी. पर उस पल का कोई भरोसा नहीं था दिखने में hi इतना कमजोर लग रहा था. के उस से होकर जाना मूर्खता hi साबित होती. लेकिन ये नदी भी पार कैसे हो?
तभी एक आवाज ने उन्हें अपनी तरफ आकर्षित किया
कहो तो मए पार लगा दू.
जब इन सबने उस तरफ देखा तो वह खतरा एक मछुआरे के भेस में लुंगी पहन के बैठा बीड़ी पी रहा था और और उसके पास hi एक बड़ी सी नाव पड़ी थी.
रूद्र – आ गया तू सेल और ये नव किस की चुराई?
खतरा – त्रिकाल ने भेजी है तुम लोगो के लिए मुझसे कहा बेचारे फंस गए है. तो नव में बिठा कर नदी पर करा दे. तो मए आ गया तुम सबकी मदद करने
रूद्र – अबे सेल ये आग की नदी है इसमें तेरी ये नव पापड़ की तरह सिक जाएगी. और हम सबका बन जायेगा कबाब.
खतरा – है यार ये तो मैने सोचा hi नहीं चलो लोहे की नाव ले के आता हु.
रूद्र – खतरा तू मरेगा मेरे हाथो से अबे लोहे की नव में ले जाकर हमें टलेगा क्या ?
खतरा – हम्म्म्म ये भी सही कहा यानि किसी नव में तुम लोग जा नहीं सकते पल की हालत ख़राब है. अगले महीने बनवाने का सोचा है त्रिकाल ने तब तक यही रुक जाओ मए झोपडी बनवा देता हु. अगले महीने जब पल बन जाये तो निकल पड़ना.
देव ने रूद्र का हाथ पकड़ के उसे शांत रहने को कहा और ध्यान से देखने लगा आग की नदी को.
देव – खतरा तू हमारा साथ क्यों नहीं छोड़ता?
खतरा – मए तो आपकी सेवा के लिए हु त्रिकाल का एक मामूली सेवक आपकी हर जरुरत पूरी करने के लिए हु. और आपको रास्ता दिखने के लिए.
रूद्र – रास्ता देखने के लिए या रस्ते से भटकने के लिए साला जब आता है नयी मुसीबत ले आता आहे. हमारी दुनिया में चल वह तुझे बीटा ऐसी भूल भुलैया में दाल दुगा के तेरा त्रिकाल भी नहीं निकल पायेगा तुझे.
देव रूद्र को हाथ के इशारे से चुप रहने को कहता है और – खतरा क्या तुम हमारे यहाँ रुकने का इंतजाम कर सकते हो? हम अब यही रुकेंगे और कल सुबह जायेगे.
खतरा – मए तो पहले hi कह रहा था के यही रुक जाओ महीना भर देखा रूद्र देव समझदार है तू बहोत उतावला है .