अपडेट - 62
इतना बोल कर माजिद और आलम , खलील को एक तक देखते हुए उससे वाजिब जवाब की उम्मीद लगाए इंतज़ार करने लगे....
आखिर ऐसा क्या tha....jise सोच कर hi खलील का चेहरा उतर gaya.....kya था वो surprize...jisne खाईल की जिंदगी hi बदल डाली.....???????
अब आगे.........
मजीद और आलम की सवालियां नजरों को देखते हुए खलील ने एक गहरी सांस ली और फर आगे की कहानी बताने लगा.....
[ खलील की जवानी.........]
असल में जब हम अपने टेंट के पास पहुंचे तो थकान मिटने के लिए हम सब apne-apne टेंट में आराम करने चले gaye.....kyoki रास्त को हिमे मेला जो देखना था.....
पर मेरी नीड कुछ जल्दी hi खुल gai....us वक़्त शाम ढलने को thi....par अभी भी काफी रोधनी थी और मेला सुरु होने में अभी काफी वक़्त था.....
मैंने देखा की राजू अभी सोया हुआ hai...islite मैं टेंट से निकल कर बहार आ गया और फिर पता नहीं kyo...main सीधा गोलू भाई के टेंट में जा पंहुचा....
पर वह गोलू भाई नहीं the...to मुज्जे लगा की पक्का गोलू भाई मेरी अम्मी के टेंट में होंगे और उन्हें छोड़ रहे होंगे......
ये सोचते hi मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई और मैं अम्मी के टेंट की तरफ गया और बहार से झांक कर देखने लगा....
पर ये kya...yaha तो सिर्फ अम्मी thi...wo भी सोइ hui....golu भाई यहाँ भी नहीं थे.....
Main(man में)- are...golu भाई यहाँ भी nhi...to गए kaha....huh...mujhe लगा था की अम्मी की चुदाई dekhuga....sala पूरा मूड खराब हो गया.....
पता नहीं kyo....par गोलू भाई को अपनी अम्मी के साथ न देख कर मैं मायूस हो गया और फिर टाइम पास करने के लिए मेले के पास वाले जंगल की तरफ चल पड़ा.....
और जब मैं तफरी करते हुए थोड़ा आगे पंहुचा तो मुझे एक तरफ से कुछ आवाज aai...jaise की कोई लड़की चीखी हो....
मैंने कान लगा कर सुना तो कुछ जी देर में मुझे फिर से आवाज़ aai....aur इस बार ये आवाजे ऐसी थी की जैसे कोई कराह रहा हो....
ये सब सुन कर पहले तो मैं दर गया सुर बसपिस जाने का socha....par फिर हिम्मत जूता कर आगे बड़ा और आवाज की तरफ लगी झाड़ियों को हौले से अलग कर के देखने लगा....
और जैसे hi मैंने झाड़ियों के पीछे देखा तो मैं चौंक utha...kyoki मेरे सामने एक ताकतबर मर्द एक नाजुक सी लड़की को छोड़ रहा था....
हलाकि मुझे अब तक किसी की सकल समझ नहीं आई thi...par मैं साफ़ देख सकता था की वो मर्द उस लड़की को ज़मीन पर कुटिया बना कर ताबड़तोड़ उसकी छूट मर रहा था....
पता नहीं kaise...par ये नजारा देखते हुए कुछ hi सेकंड में मेरा लुंड अकड़ gaya....aur मैं वही छिप कर उस लड़की की चुदाई देखने लगा.....
और कुछ देर बाद जब उस मर्द ने अपना लुंड छूट से बहार खींच यो लुंड देखतर hi मैं समझ गया की ये तो गोलू भाई है....
कमाल है na....main लुंड देख कर उसके मालिक को समझ gaya.....aur ऐसा इसलिए हुआ tha...kyoki मैंने गोलू भाई का लुंड बड़े करीब से देखा tha....wo भी अपनी अम्मी के छेड़ो में aate-jate....aur मुझे वो इस कदर पसंद था की क्या bolu....to.pahchan तो बनती hi है न....
Khair....jaise hi मैं जान गया की ये गोलू भाई hi hai...to मैं लड़की के बसरे में जानने के लिए बेताब हो gaya....ki आखिर इस मेले में ऐसी कौन सी लड़की मिल गई unhe...jo खुले मैदान में उनका लुंड खाने आ गई......
पर मुझे अब तक उन दोनों की सूरत समझ नहीं आ रही thi...kyoki रक तो शाम होने को थी और गिर सूरज की रौशनी उसी तरफ से मेरी आँखों में आ रही thi...isliye चेहरा धुंधला hi दिख रहा था....
Khair...waha गोलू भाई ज़मीन पर पड़े एक कपडे पर लेते और उस लड़की को अपने ऊपर baithaya....aur फिर वो लड़की तुरंत अपनी गांड उछलते हुए चुदाई करवाने लगी......
मैं ये देख कर खुसब भी था और हैरान भी की गोलू भाई एक छोटी सी लड़की को ताबड़तोड़ छोड़ रहे थे.....
ख़ुशी इस बात की thi...ki चलो मेरी अम्मी अकेली hi नहीं जो गोलू भाई का लुंड देख कर रंडी बन gai.....yaha तो कुवारी लड़कियां भी उनके साथ मज़ा लेने तैयार हो जाती है...
और हैरानी की वजह थी वो ladki......ki वो गोलू भाई से मिली kab....unki बात कब hui....aur फिर वो यहाँ खुले में hi छोड़ने को क्यों mani.....kya उसे जरा भी खौफ्फ़ नहीं....
Khair....main यहाँ सोचता hi रहा और वह वो लड़की एक तेज चीख के साथ झाड़ कर पास्ट हो गई....
तो गोलू जी ने तुरंत उसे घुमाकर अपने ऊपर लिटाया और नीचे से जोरदार धक्के मरते हुए उसे छोड़ने लगे....
मैंने देखा की उस लड़की के दोनों दूध हर धक्के के साथ हवा में लहरा रहे the..aur वो लगातार चीखते हुए चुदाई का भरपूर मज़ा मार रही थी....
ये सब देखते हुए पता नहीं kyo...par मुझे उस लड़की पर गुस्सा आने लगा tha....mujhe ऐसा लग रहा था की जैसे उसने मेरी अम्मी की जगह ले ली हो....
मैं सोचने लगा की कही इस लड़की का जवान जिश्म गोलू भाई को ज्यादा न भा जास्ये तो वो मेरी अम्मी को छोड़ दे....
और अगर उन्होंने मेरी अम्मी को छोड़ फिया तो उनका क्या hoga....kis से मरवायगी वो अपनी choot....kaise ठंडी होगी उनके जिश्म की आग.....
ये सब सोच कर मैं उदास होने लगा था की तभी वो लड़की एक बार फिर से जोर से चीखी और पास्ट पद gai....jisse मैं समझ गया की वो फिर से झाड़ चुकी है.....
Khair...wo यो झाड़ gai....par गोलू भाई अभी बाकि the....isliye उन्होंने उस लड़की को फिर से कुटिया बनाया और उसकी कमर पकड़ कर जोरदार चुदाई सुरु कर दी.....
और इस बाद उनकी चुदाई तब ख़त्म hui...jab गोलू भाई ने पूरा लुन्द्रास उस लड़की की छूट में उतार दिया....
फिर चुदाई ख़त्म जार के गोलू भाई ने कपडे पहने और लड़की को भी जल्दी करने को bola....aur मेरी तरफ hi आने लगे....
ये देख कर मैं दावे पाँव बापूस आ कर थोड़ा दूर छिप gaya.....aur जब गोलू भाई निकल गए तो मैं उस लड़की को देखने वह gaya...par तब तक वो लड़की भी वह से गायब हो चुकी थी....
मैं (मन में)- are....ye कहा gai....aur गई कहा se.....is तरफ तो मैं hi tha....hmm..lagta है उस तरफ कोई गाओं hoga....aur सायद वो गाओं से आई होगी....
Khair....main भी कुछ देर बाद बापिस टेंट पर आ गया और मेले के लाइट तैयार हो कर इंतज़ार करने लगा.....
खैर जब हम सही वक़्त पर मेले में पहुंचे तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना न raha...kyoki मुझे मेले में रूबी मिल गई थी......
रूबी मेरे पदोष में रहने वाली लड़की thi...jise मैं दिल hi दिल बेहद प्यार करता tha....par आज तक उससे कुछ कहने की मुझ में हिम्मत नहीं हुई थी....
मैं रूबी को देखते hi ख़ुशी से उछाल pada...par अपने जज्बातों को दिल में दवाये रखा.... की कही किसी को कोई शक न हो जाए......
इस वक़्त मेरे फील और फिमाग पर दिर्फ़ रूबी hi छै हुई thi....main भूल गया था की आज दिन भर क्या हुआ tha...kaise मेरी अम्मी रंडी बन गई थी और कैसे गोलू भाई किसी अनजान लड़की को खुले मैदान में बुरी तरह छोड़ रहे थे....
अभी मेरा पूरा ध्यान रूबी की तरफ hi लगा tha....aur वह रूबी haste-muskurate मेरी अम्मी से बातें कर रही थी....
और जब वो बातें करते हुए मुझे देखती तो मेरे दिल में एक प्यारी गुदगुदी हो जाती.....
अम्मी- ruby....tum यहाँ आई किस के साथ हो....
रूबी- वो chachijaan...meri 2 सहेलियां आई hai...hum तीनो कॉलेज में एक साथ पढ़ते है....
अम्मी- accha....wo दोनों कहा है....
रूबी- wo....wo दोनों यही घूम रही hai....waise आप किसके साथ आई है...
अम्मी- वो मैं to...ye खलील जिद कर रहा था मेले ki...to हम इनके साथ आ गए....
ये कहते हुए अम्मी ने हरे पीछे की तरफ खड़े गोलू भाई की तरफ इसरा कर दिया....
Ruby(muskura कर)- ohh..golu जी के साथ आई है aap....accha hai....chaliye हम साथ में मेला घुमते है....
अम्मी- क्यों nhi....chalo....
फिर रूबी हमारे साथ hi हो li....aur मैं इस से बहुत खुश था की रूबी हमारे साथ है...
पर उस रात जब भी हम झिओला झूलने gaye...to रूबी सिर्फ गोलू भाई के साथ hi baithi.....ye बात मुझे बड़ी ख़राब लगी...
पर इसमें मेरी hi गलती thi....main hi उसे नहीं बोल पाया की हम साथ में झूलते hai.....uper से मेरी अम्मी गोलू भाई से बोल देती थी की रूबी के साथ बैठे ताकि उसे दर न लगे.......
Khair.....mela घूम कर हमने साथ में खाना कगाया और अपने टेंट में सोने को चले गए......
पर मुझे नीड कहा thi...ek तक आज रूबी ने मेरे दिल में हलचल मचा राखी थी और ऊपर से मुझे पता था की रात को गोलू भाई अम्मी को जरूर छोड़ेगे....
तो मैं राजू के सोने तक लेता रहा और फिर टेंट से निकल कर अम्मी के टेंट में jhaka....par वह सिर्फ अम्मी thi....wo भी सोइ हुई....
Main(man में)- ये kya....ammi सोइ हुई hai...par kyo...kya इनकी छूट आज ज्यादा hi चुद gai...ya फिर गोलू भाई आज chodte-chodte थक गए....
Khair....jo भी ho....mera मज़ा तो ख़राब कर hi diya...ab तो सोना hi पड़ेगा....
ये सोच कर मैं बापिस hi जा रहा था की पता नहीं kyo...mera दिल किया की गोलू जी को भी एक बार देख lu....pata तो चले की वो क्या कर रहे है......
ये सोच कर मैं गोलू जी के टेंट के पास पंहुचा और एक सुराख देख कर अपनी आँख लगाई....
और जैसे hi मैंने भीतर का नजारा देखा तो मेरा दिल धक् कर गया और मैं सहम कर पीछे हो गया.....
मजीद- kya...par kyo...bheeter कौन tha...kya हो रहा था...
ालन- है बोल न ....
Khaleel(najren झुका कर)- भीतर रूबी thi.....wo भी गोलू भाई के sath...aur....majid- और kya...bol न....
खलील- और वो दोनों नंगे थे.....
आलम- ता al**h.....ruby...golu भाई के sath...nangi...par kyo....kaise....
मकिद- है khaleel...ruby को तो हम भी कांटे hai......to वो गोलू भाई के साथ nagi....aakhir ये सब हुआ kaise...bata न.....
मजीद और आलम अपने दिल में चल रहे सवाल के जवाब का इंतज़ार hi कर रहे थे की तभी घर के दरवाज़े पर दस्तक hui....aur साथ में मजीद की अम्मी की आवाज़ सुनाई दी....
जिसे सुनते hi माजिद, आलम और खलील चौंक गए और जल्फी से अपने कपडे सही तरीके से पहन कर तैयार हो गए....
आलम- यार majid...teri अम्मी को भी अभी hi आना tha...thoda रुक नहीं सकती थी.....
Majid(man में)- लगता है गोलू भाई बिजी hoge....warna अभी भी अम्मी चुद रही होती....
खलील- अबे aalam....ab इसमें मजीद की क्या galti....aur majid...tu जा कर दरवाजा khol...baki की कहानी हम नदी पर जा कर ख़त्म कर lege...ja...
माजिद ने खलील की बात सुन कर सर हिलाया और फिर तीनो हॉल में आ gaye....jaha यजीद ने दरवाजा खोला और सामने अम्मी को देख कर चौंक गया....
क्योकि मजीद की अम्मी की हालत ऐसी thi...jaise की उन्हें किसी ने कुटिया की तरह मारा ho....wo कभी थकी हुई दिख रही थी...
ालन- सलाम चचीजां....
मुमताज- सलाम baccho....wo मैं थोड़ा थक गई hu...to...main अभी आई.....
असल में मजीद की अम्मी आलम और खलील को देख कर दर गई thi...isliye बिना नजरें मिलाये hi जल्दी से अपने कमरे में चली गई.....
मजीद- चलो हम नदी पर चलते है....
आलम - अरे nhi...abhi nhi...abhi मुझे काम hai...saam तक चलेंगे....
खलील- है yaar....kaam तो मुझे भी hai...chal साम को मिलेंगे....
इतना बोल कर आलम और खलील अपने घर चले gaye...aur मजीद उदास हो कर अपने कमरे में आ गया.....
माजिद- पक्का अम्मी आज भी बुरी तरह मार खा कर चूड़ी hai.....kaisi हालत बना राखी thi....huh...pata नहीं मेरे दोस्त क्या सोच रहे hoge.....ye अम्मी भी na.....ab तो पूरी रंडी हो गई hai....na घर का काम ठीक से करती है और न कुछ aur....bas गोलू भाई से छोड़ने जाती और घर आ कर सो jati...taki फिर से छोड़ने की ताक़त आ sake.....huh...
माजिद काफी देर तक अम्मी को दिल hi दिल में कोस्टा raha....aur फिर वो कुछ सोच कर घर से निकल gaya....aur पहुंच गया सीधा अपनी नाज़िआ भाभीजाण के घर.....
वह जैसे hi नाज़िआ ने माजिद को देखा तो वो खुस हो गई और अपने कमरे में ले जा कर उसके लिए chai-nasta ले आई....
नाजीअ- अब बोलो majid....aaj कल कहा बिजी रहता hai....dikhta hi नहीं...
मजीद- कही नहीं bhabhijaan...bas पढ़ाई और khel....aur कुछ नहीं....
नाज़िआ- hmm...fir भी kabhi-kabhi भाभीजाण के लिए वक़्त निकाल लिया kar....main तो अकेली सारा दिन बोर होती रहती हो....
मजीद- kyo...nasir भाईजान कहा गए....
नाज़िआ- wahi....apne kaam-dhandhe par...wo साम को आते है....
मजीद- ohh..aur chachijaan.....wo कहा है....
नाज़िआ- वो यही पड़ोस में गई hai....aati hi होगी.....
मजीद- और gul....wo भी नहीं दिख रही....
नाज़िआ- gul...wo..wo भी किसी सहेली के घर गई hai.....saam तक hi aaygi....acvha अब bata.....aaj भाभीजाण की याद कैसे आ गई.....
Majid(man में)- क्या भाभीजाण से seedhe-seedhe पूछना सही होगा....
नाज़िआ- क्या hua...kuch बोल न....
मजीद- huh...wo..thoda पानी दे दो...
Nazia(muskura कर)- अभी लाइ....
Majid(man में)- अब क्या सोच रहा है majid....aaj पूछ hi le.....dekh...ye तेरा कुछ बुरा तो कर सकती nhi.....aur फिर तू भी तो इनको रोकने नहीं आया na....bas जानने आया है की ये गोलू भाई की कैसे और कब bani.....hai न....
नाज़िआ- ये ले पानी.....
मजीद- हम्म....
नाज़िआ- अब बता bhi...aaj मेरे घर का रास्ता कैसे भूल gaya....hehe....
मजीद- bhabhijaan....dekho....aap मुझे गलत मत samjhna....bas मेरी बात सुन लेना.....
Nazia(hairani से)- ऐसे क्यों बोल रहा hai...tujhe आज तक कुछ भी बोलने से टोका है क्या maine....haa...
मजीद- nhi....par जो मैं बोलने जा रहा hu....use सुन कर सायद आपको गुस्सा आ jaaye...par आप गुस्सा मत hona...bas मुझे जवाब दे देना....
नाज़िआ- are...theek hai...main गुस्सा नहीं karugi...tu puch...kis बात का जवाब चाहिए तुझे....
मजीद- वो आप aur....wo...
नाज़िआ- मैं aur....aage बोल....
मजीद- वो आप और गोलू bhai....plz गुस्सा मत hona....main बस जानना चाहता हु...
माजिद की बात सुन कर नाज़िआ चौंक गई और उसके फील में थोड़ा दर भी पैदा हो gaya....par वो अपने आपको सम्हाल कर बोली....
नाज़िआ- मैं और गोलू ji....tera मतलब क्या hai....saaf-saaf बोल न.....
मजीद- अगर ऐसा hi सुन्ना है तो ठीक hai....main आपको गोलू भाई के घर में देखा tha....aur वो सबकुछ भी जो आपने किया.....
Nazia(gusse से)- ये क्या बकवास कर रहा hai....tujhe छूट कुआ दे राखी है maine...iska मतलब तू कुछ भी बोलेगा....
मजीद- मैं कोई बकवास नहीं कर raha....maine सब अपनी आँखों से dekha....wo saraab...wo mujra....wo aapki....samjh गई न.....
इतना saaf-saaf सुनने के बाद नाज़िआ सन्न रह gai....dar और परेशानी से उसके जिश्म में कम्पन होने laga...aur उसकी aakhe.....jo कुछ देर पहले hi मजीद को गुस्से से घूर रही thi...wo अब दर और शर्म से झुक गई थी.....
मजीद- bhabjijaan....aap डरो mat...main यहाँ आपको डरने या परेशान करने नहीं आया tha...main तो बस जानना चाहता हु की ये सब कैसे सुरु hua...aur kab...plz...aap डरिये मत....
नाज़िआ- तूने जो dekha....wo...wo किसी को बोलै तो नहीं.....
मजीद- मैं पागल हु kya...jo अपनी hi भाभीजाण की अस्मत को ज़माने में रुशवा karu....maine किसी से कुछ नहीं kaha....bas मैं आपसे सब जानना चाहता हु.....
नाज़िआ- पर क्यों.....
मजीद- kyoki...kya bolu....asal में मुझे मज़ा आता है.....
Nazia(chounk कर)- kya...tujhe अपनी hi भाभीजाण को गैर मर्द के साथ देख कर मज़ा आता hai....wo भी एक गैर मजहबी मर्द के sath...haa....
माजीद्द- ha.....aur सिर्फ आपको hi nhi...balki अपने घर की किसी भी अविरत या लड़की को मैं गोलू भाई के साथ देख कर मज़ा hi करुगा....
Nazia(hairani से)- kya....tu...tu क्या पागल है....
मजीद- आप जो samjho...par सच यही hai...jab मैंने देखा की गोलू भाई मेरी प्यारी भाभीजाण को रगड़ जार पेल रहे the.....to ये देख कर hi मेरा rome-rome मज़े से झीओम utha....bas तभी मैंने सोच लिया था की मैं आपसे सुरु से ले कर अब तक की साड़ी जहनि jaanu...taki मैं और मज़ा कर सकू....
Nazia(man में)- ये सच में सच बोल रहा है या fir...khair....agar इसे काबू में करना है तो इसे खुश रखना hoga....nhi to....chalo...iske मन की मुराद पूरी करती hu...dekhu तो ये सब सुन कर क्या करता hai.....agar कोई पन्गा भी किया to.....huh...mera कुछ नहीं उखाड़ sakta....golu जी है na.....to मैं क्यों दारू...
मजीद- bhabjijaan....aap बताएगी न....
नाज़िआ- huh....ha....theek hai....main बताती hu...par ये बात अपने तक hi रखना.....
मजीद- कसम खता hu....kisi से नहीं boluga.....ab बताओ na.....aap गोलू भाई से कहा mili...aur ये सब सुरु कैसे हुआ....
नाज़िआ- बताती hu....aaja....bistar पर बैठ कर बताती हु....
और फिर नाज़िआ , मजीद को साथ ले कर बिस्तर पर टिक कर बैठी और मजीद को देखते हुए अपनी बात सुरु की......
[ आगे की KAHANI.........NAZIA की जवानी.........]
Majid....ye सब आज से 4 महीने पहले सुरु हुआ tha.....jab मैं और तुहरे भाईजान (नासिर) सहर में hi रहते थे....
सहर में नासिर के अब्बू ने काफी पहले hi एक दो मंजिला मकान खरीद रखा tha...aur वो मकान मेरे आबू केकाण के करीब भी tha.....isliye मुझे वह रहने में कोई तकलीफ नहीं होती थी....
नासिर वह एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे और मैं सारा दिन अकेले hi अपने घर का ख्याल रखती thi....bas इसी तरह काट रही थी हमारी जिंदगी.....
Ha...kabhi-kabhi मैं अपनी अम्मी के घर भी चली जाती थी तो कभी मेरी अम्मी और मेरी छोटी बेहेन मेरे पास आ जाती थी...
कुल मिला कर मैं खुश thi..bas तकलीफ थी तो नासिर ki......ek तो नासिर की पगार काम थी तो वो परेशान रहता था और रबिबार की छुट्टी मिलते hi दूसरी नौकरी ढूढ़ने में पूरा दिन बर्बाद कर देता था....
और रोज का तो कहो hi mat...wo इतना थक कर घर आता था की खाना खाते hi उसकी आँखे बंद हो जाती थी....
इसलिए हम दोनों का जिश्मानी रिश्ता बहुत काम बन पता tha....bas यही एक कमी थी हमारी जिंदगी me...fir भी मुझे कोई शिकायत नहीं thi...main नासिर की बेगम बन कर अपने आपको खुसनसीब मानती थी....
फिर एक दिन हमारी जिंदगी में गोलू जी aaye...aur उस दिन से हमारी जिंदगी का बदलाब सुरु हो गया......
असल में गोलू जी की एक कमपनी थी सहर me...aur वो उसी वजह से कुछ दिन के लिए सहर आये थे.....
और क्योकि गोलू जी और नासिर पहले से अच्छे दोस्त the....isliye नासिर उन्हें एक दिन घर ले आये.....
उस दिन मुझे गोलू जी को देख कर कुछ भी गलत ख्याल नहीं aaya...aur न hi वो गलत लगे......
मुझे वो एक बिहाफ hi नेक और सरीफ इंसान lage...ha...unki बात करने का तरीका और उनकी kad-kathi.....unke बदन का कड़कपन देख कर मैं खुश जरूर हुई पर किसी गलत ख़याल की वजह से nhi....balki ये देख कर की उन्होंने कितनी अच्छी तरह से अपने जिश्म का ख्याल रखा है.....
Khair....golu जी ने बताया की उन्होंने पास के होटल में कमरा लिया हुआ hai....aur उन्हें यहाँ सायद 1-2 महीने का काम हो सकता है.....
Bas..us दिन और कुछ खास नहीं hua....par 3 दिन बाद एक खास खबर हमारी जिंदगी में aai...aur वो थी नासिर की नै नौकरी को ले कर....
नासिर ने मुझे बताया की गोलू जी की वजह से उसे दुबई में नै नौकरी मिली hai....aur उसकी पगार पहले से 10 गुना ज्यादा है....
ये सुन कर मैं खुश thi....par थोड़ी hi देर में मेरी खुसी काफूर हो gai....jab मुझे याद आया की मेरे पास तो पासपोर्ट hi nhi...isliye मैं नासिर के साथ नहीं जा सकती.....
ये सुन कर नासिर ने भी दुबई जाने से मन कर diya....par मैं नासिर को जाने से नहीं रोकना चाहती thi....isliye मैंने उसे मन कर दुबई के लिए तैयार कर दिया.....
फिर नासिर ये वादा कर के गया की वो हर महीने 4 दिन के लिए बापिस आएगा.....
और फिर नासिर चला gaya....auf उसके जाने के बाद मेरा अकेलापन बढ़ने लगा......
Raat-din अकेले रहने पर मेरे दिल और जिश्म की बेचैनी बढ़ने लगी तो मैंने अपने खली वक़्त को भरने का socha....aur तब नादिर ने कहा की क्यों न इस वक़्त me....main कार चलना सीख लू....
मैं ये सुन कर खुश thi..kyoki मेरी ये तमन्ना थी की मैं भी कार chalaau...par सवाल था की किस्से seekhu...nasir तो यहाँ है nhi.....aur जब था तो उसे िग्न वक़्त hi नहीं मिला की वो मुझे सीखा सके....
तब नासिर ने गोलू जी की बात ki....jise सुन कर मैं थोड़ा jhijhki.....par नादिर ने कहा की वो उनका दोस्त hai...aur बेहद सरीफ bhi.....tab जा कर नासिर के कह इ पर मैंने है बोली.....
और फिर दूसरे दिन hi गोलू जी मेरे घर आ gaye....aur यही वो दिन tha...jis दिन से मेरी जिंदगी की एक नै कहानी सुरु होने वाली थी....
गोलू जी- नमस्ते जी...
मैं- salaam...aaiye न....
गोलू जी- अभी nhi...matlab अभी मुझे काम से जाना hai...main तो बस ये बताने आया था की अगर आप चाहे तो हम आज रात से hi कार चलना सुरु कर सकते है....
मैं- पर रात ko....kyo...
गोलू जी- असल में दिन भर तो मैं बिजी रहता hu...kabhi भी कोई काम आ सकता hai..isliye....aur मैंने नासिर को ये बता दिया hai...aur उसे कोई परेशानी nhi...baki आपकी मर्जी....
मैं- अब उन्होंने बोलै है तो सही hi hai....mujhe कोई परेशानी nhi...bas इतना ख्याल रखना की हमे कोई देखे na..nhi तो लोग....
गोलू ji(beech में)- समझता hu....isliyr मैंने नासिर को बोल दिया था की हम सहर के बहार सुनसान सड़क पर jayge...waha कोई परेशानी नहीं hogi.....bas आप तैयार हो तो...
मैं- मैं तैयार hu...aap जब कहे....
गोलू जी- ठीक है तो fir....aaj रात 8 बजे मिलते hai....chalo अभी चलता हु...
मैं- अरे aise-kaise...kuch chai-nasta.....
गोलू ji(beech में)- वो सब तो होता hi rahega....ab रोज जो मिलना hai....filhaal जसने dijiye...kaam hai...bye...
मैं- जैसा आप kahe...bye.....
और फिर गोलू जी चसले गए और उनके जाते hi मैंने नासिर को कॉल कर के सब तय कर liya......jo असल में नासिर पहले hi कर चूका था....
और फिर उस रात मैं पहली बार गोलू जी के साथ कार चलने निकल पड़ी.....
हलाकि उस रात हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं hua...jisse मेरे दिल में कोई गलत ख़याल पनप pate...par haa....us टाट गोलू जी का मुझसे बात करने का तरीका और मुझे कार के बारे में हिदायत देने का तरीका देख कर मैं ये जरूर सोचने लगी थी की वो एक बेहद hi सरीफ और नेक इंसान है....
उस रात उन्होंने मुझे कार के बारे में कुछ आम बातें hi बताई thi...jaise की कौन सा पुर्जा क्या का करता है और उसे इस्तेमाल कैसे करते है...
गोलू जी- तो अब आप तैयार हो कार चलने को.....
मैं- अरे nhi....aaj तो nhi....ha कल पक्का chalaugi.....pata नहीं आज मुझे कुछ दर सा लग रहा है.....
गोलू जी- hmm..aisa होना आम बात hai....sabko सुरु में दर लगता hi hai....theek hai...kal chslana....abhi चलते hai...waise आप ice-cream पसंद करती है न....
मैं- ha...par आप पूछ क्यों रहे है....
गोलू ji(muskura कर)- क्योकि मैं सोच रहा हु की अपने नए स्टूडेंट को आज पहले दिन ice-cream खिला कर उसका मुँह मीठा करू....
मैं- ohh...theek hai...par मेरी एक शर्त है....
गोलू जी- accha....chaliye बताइये....
मैं- dekhiye....aap मुझे स्टूडेंट बना कर मुँह मीठा करा रहे hai...to आपको मुझे स्टूडेंट की तरह hi ट्रीट करना hoga....matlab वैसे hi बात करना hogi...jaisa एक टीचर अपने स्टूडेंट से करता है......
गोलू जी- haa...aur मैं वैसे hi तो बोल रहा हु....
Main(muskura कर)- accha....to बताइये कौन सा टीचर अपने स्टूडेंट को आप कह कर बुलाता है.....
गोलू जी- ohh...to ये बात hai...teek hai...main अब से तुम hi boluga...ab bolo..tum मुँह मीठा करने के लिए तैयार हो....
Main(muskura कर)- hmm...ab तैयार hu...chaliye.....
फिर गोलू जी ने मुझे ice-cream खिलाई और हम घर आ gaye....waha से गोलू जी भी कल मोलने का बोल कर अपने घर चले गए.....
और फिर ये रोज का सिलसिला चल pada....aur इस बीच हमारे बीच काफी बातें, masti-majaak भी hui....jisse मेरे दिल में गोलू जी के लिए एक खास जगह बनना सुरु हो गई थी.....
पता नहीं kyo...par गोलू जी जिस तरह से मुझे कार चलना सिखाते the....aur जिस तरह मेरा मोइड ख़ुशी से भर देते the...usse मेरा दिल कही न कही उनके करीब होने लगा था....
हलाकि मेरे फील में अभी तक कोई गंधा ख्याल नहीं आया था ...पर न जाने क्यों उनके साथ रहना मुझे बेहद पसंद आने लगा था....
मैं अब रोज रात होने का बेसब्री से इंतज़ार करने लगी thi.....itna ki...jit ा मैंने कभी अपने सौहार का भी नहीं किया था....
मैं रोज गोलू जी से मिलने के लिए ैव्हे से sajti-sawarti...aur मन hi मन ये चाहती की उनकी नजरों में मेरी खास अहमियत ho....aur ये सब क्यों हो रहा tha....iska मुझे अब तक कोई अंदाज़ा भी नहीं था.....
पर जैसा की सब जानते hi hai...ki roj-roj किसी के साथ वक़्त बिताने से उसके लिए दिल में एक खास जगह बन जाती hai....aur खास कर उस ायरत के liye...jiska सौहार उसे प्यासी छोड़ कर दूर कही गया ho....us ायरत को बहकने में ज्यादा वक़्त नहीं लगता....
बिलकुल यही मेरे साथ hua....mujhe पता hi नहीं चला की मैं कब गोलू जी के इतने करीब आ गई की मैं पुरे दिन बस उन्ही से मिलने का इंतज़ार करने लगी थी....
सच बोल रही hu...itna इंतज़ार तो मैंने कभी अपने सौहार का भी नहीं किया tha...jitna अब मुझे गोलू जी का रहता था.....
Khair...car चलना सीखते हुए मुझे 15-16 फिन गुजर गए the...aur इस दौरान मेरे और गोलू जी के बीच सिर्फ बातों और दिल के अरमानो का hi nhi...balki इसके अलावा काफी बार हमारे जिश्मो के बीच भी काफी बार lena-dena हुआ था.....
इसका मतलब चुदाई या कोई अश्लील हरकत nhi...balki ये तो हमारे जिश्मो का ek-dusre के जिश्मो को छूने का अहसास था.....
असल में कार चलते हुए काफी बार मेरा और गोलू जी का जिश्म ek-dusre से मिल hi जाता tha....jaise कभी मैं कुछ गलत करती तो वो मेरे हाट को स्टेरिंग पैर पकड़ कर sahi-sahi batate....ki ऐसा ghumao...waisa nhi...aisa pakdo......waisa करो.....,
और haa....mujhe सीट बेल्ट बांधने नहीं आती thi.....to गोलू जी ने कहा की मैं लगा देता hu.....aur ये बोल कर वो मेरे आगे से झुक कर बेल्ट लगाने lage.....to उस वक़्त उनका कन्धा मेरे दूध से टकरा गया.....
अब ये गलती से हुआ था या जान kar...ye तो मुझे नहीं pata....par haa....jaise hi उनका कन्धा मेरे दूध से takraya....to मैं एकदम से सिहर gai....kyoki ये पहली मर्तवा tha...jab किसी गैर मर्द का जिस्म मेरे बदन के इस नाजुक हिस्से से टकराया था......
उनका कन्धा मेरे दूध से जैसे hi रगड़ khaya....waise hi मेरे सरे बदन में एक अजीब सी हलचल होने लगी thi.....par मैंने गोलू जी को इस बात का कुछ भी अहसास नहीं होने दिया.....
खैर उस दिन इसके अलावा तो कोई और नै बात नहीं hui.....aur उस दिन इस हरकत के बाद पुरे वक़्त मुझे गोलू जी बड़े नार्मल hi लगे थे.........
पर कही न कही उस दिन की हरकत से hi हम दोनों एक कदम आगे बाद गए थे.....
क्योकि उस दिन के बाद मैंने महसूस किया की गोलू जी मुझसे थोड़ा ज्यादा खुल चुके थे......
उस दिन क बाद वो जब भी मेरा शीट बेल्ट बढ़ते तो उनका हाथ मेरे सीने पर रगड़ खा jata......aur रगड़ भी aisi-waidi nhi...balki एक मजबूत रगड़....
और मैं भी बेल्ट बढ़वाते हुए खुद hi थोड़ा सा आगे को हो जाती thi...taki गोलोजी का कन्धा मेरे दूध को थोड़ा मजबूती से रगड़ सके.....
इसके अलावा भी गोलू जी कार चलवाते हुए गियर बदलने के लिए मेरे हाथ पर हाथ रख कर बताते रहते के ऐसे गियर चेंज करते हैं.....
हलाकि वो पहले भी बताते the....par तब वो जल्दी hi हाथ हटा लेते the....par अब वो हाथ रखने के बाद हटाना भूल hi जाते the....aur मैं भी बिना मतब उनको ऐसा बोलती की उनका हाथ गेरा पर बा hi रहे.....
khair.....aur उनकी इन हरकतों से मुझे कोई ऐतराज़ नहीं होता tha.....kyoki मुझे भी कही न कही उनका ये अहसास अच्छा लगने लगा tha......aur मैं भी चाहती थी की गोलू जी मुझे chhuye...mujhe pakde....mera सीना रगड़े.....
Khair...ye सिलसिला चलता अगले 4-5 दिन और रहा और करीब 22-23 दिन में hi मैं गोलू जी से कार सीखते हुए पूरी तरह खुल चुकी thi....ya यु कहे की उनको पसंद करने लगी थी......
अब मैं उनसे किसी भी बात पर और किसी भी तरह का मज़ाक करने लगी thi....main उनसे कुछ भी बोलने के पहले कुछ नहीं सोचती thi...bas फील में आया और बोल diya....jaise की वो कोई गैर nhi...balki अपने ख़ास हो....
और इसकी एक वजह सयाद मेरे सौहार भी the...kyoki मेरे सौहार की नै नौकरी का इमे कुछ ऐसा था की हमारी बहुत hi काम बात हो पति thi...na के barabar....aur इस वजह से इन दिनों में मेरी सबसे ज्यादा बात गोलू जी से होती थी....
इसलिए मुझे उनकी baaten....unka मेरा ख्याल rakhna...mujhe कार चलना सीखना और मेरे मूड को खुश rakhna....ye सब बाते मुझे उनकी तरफ खींच ले गई थी....
अब तो ऐसा था की जब मैं गोलू जी के साथ होती थी तो मुझे याद hi नहीं रहता था की मैं किसी की sareeke-hayaat hu....mera एक सौहार भी hai....jo मेरे लिए din-raat बाहर रह कर म्हणत कर रहा है....
पता नहीं kyo....par गोलू जी के पास होते हुए मुझे दुनिया की कोई फ़िक्र नहीं रहती थी.....
इसी बीच मेरे शोहर 1 दिन के लिए बापिस भी aaye...unhe कुछ कागजाद लेने the........aur वो ये जान कर काफी खुश हुए की गोलू जी मेरा बेहतर ख्याल रख रहे है......
फिर मेरे सौहार ने वो बात बोली जिसे सुन कर मैं दिल hi दिल में झूम उठी....
मेरे शौहर ने कहा की अब गोली जी हमारे घर के ऊपर वाले फ्लैट में रहने वाले है.....
Main(khushi दवा कर)- kya.....par kyo....aapko तो किसी का यहाँ रहना पसंद नहीं thi...aur अभी तो अम्मीजान और अब्बूजान भी गाओं में hai....aur आपकी बेहेन भी तो आने वाली है.....
नासिर- तो क्या hua......golu भाई गैर nhi...mere दोस्त hai....aur आज उन्ही की वजह से मैं दुबई में नौकरी कर रहा hu...samjhi....par अगर तुम्हे कोई परेशानी....
Main(beech में)- अरे nhi....mujhe क्यों परेशानी hogi....main तो बस आपके लिए बोल रही thi....par जब आपको सही लगता है तो मुझे क्या.....
नासिर- तो तय raha....aaj से गोलू जी यही rahege...aur haa...unke khane-pine के लिए पास वाले होटल में बोल देता हु...
मैं- kyo...hotel में kyo....main बना दिया करुँगी na....agar....aapko ऐतराज़ न हो तो....
नासिर- अरे nhi....mujhe क्या aitraz...main तो इसलिए नहीं बोलै की कही तुम.....
Main(beech में)- मैं kya....mujhe कोई परेशानी नहीं hogi....aur वैसे bhi...wo आपके दोस्त hai.....aapko इतनी ैवहि नौकरी dilwai.....aur फिर मुझे कार चलना भी सीखा रहे hai....to हमारा भी कुछ फ़र्ज़ बनता है न....
नासिर- क्या बात hai...sahi kaha...to ये भी तय रहा की उनका khana-pina तुम्हारी jimmedari....theek...
मैं- हम्म...
फिर शाम को hi नासिर फिर से दुबई चले gaye...aur गोलू जी हमारे घर में hi रहने आ गए.......
फिर क्या tha.....main रोज सुबह गोलू जी के लिए chai-nasta banati....dophar के लिए डिब्बे में खाना lagati.......aur रात में साथ बैठ कर खाने के बाद गोलू जी के साथ कार सीखने जाती.......
इस दौरान मैं गोलू जी के और ज्यादा करीब आ गई thi....aur मुझे यकीन था की वो भी मेरे करीब आ चुके the.......par अभी तक न hi हमने ek-dusre को कुछ ऐसा बोलै tha...na कुछ किया tha....jo की अजीब lage...ya हमे समझ आये की हम दोनों के बीच कुछ है....
Khair.....hum दोनों hi ख़ामोशी के साथ अपने दिल के जज्बातों को दवाये जिंदगी जी रहे थे......
पर फिर वो दिन aaya.....jab हमारे दिल के अहसास बाहर आ hi गए.....
उस दिन हम रोज की तरह कार से nikle....aur उस दिन गोलू जी ने मुझे भीड़ में कार चलने को di...kyoki अब मुझे काफी वक़्त हो गया था कार सीखते huye....to गोलू जी चाहते थे की मैं भीड़ में कार को कंट्रोल करना सीखू.......
पर जहा वो मुझे कार चलवा रहे the.....waha पर कुछ ज्यादा hi भीड़ thi....ya यु कहे की मेरे जैसी नौसिखिया ड्राइवर को वो ज्यादा लग रही थी......
खैर जो भी samjho......par वह की भीड़ की वजह से मुझे baar-baar ब्रेक लगाना पद रहा था.......
पर मैं इतनी अच्छी ड्राइवर तो थी नहीं की सब आसानी से संभल lu.....isliye गोलू जी ने मेरे पेअर पर पेअर रख दिया और जब भी ज़रुरत पड़ती thi.....wo ब्रेक लगा देते थे......
पर खास बात ये thi...ki जब वो मेरे पेअर पर पेअर रखे हुए the...to उनका एक हाथ मेरी जांघ पर रखा हुआ था......
जब मुझे मेरी जांघ पर उनके हाथ का अहसास hua.....to मैंने एक बार उनकी तरफ देखा.....
गोलू जी - kya....koi परेशानी हो तो......
Main(sir हिला कर)- ुम hu....kuch नहीं....
अब मैं उनसे क्या kahti.....kyoki असल बात तो यही थी की मुझे अपनी जगह पर उनके कड़क हाथ का अहसास अच्छा लग रहा था...........
Khair......us दिन के बाद तो गोलू जी मुझे रोज भीड़ वाले इलाके में कार chalwate...aur रोज मेरे पेअर पर पर rakhte.....aur अपने मजबूत हाथ से मेरी मुलायम जगह मसलते rahte......aur मुझे इससे कोई भी ऐतराज़ नहीं होता tha....ulta मज़ा आता था.....
फिर कुछ दिन बाद की बात hai......roj की तरह उस दिन भी गोलू जी मेरी जगह पर हाथ रखे हुए कार चलवा रहे the.....aur मैं मज़े से कार चला रहा थी....
पर कुछ देर बाद मुझे अहसास हुआ की गोलू जी हाथ रखे हुए ahista-ahista मेरी जगह को सहलाने लगे थे.......
जैसे hi मुझे ये अहसास हुआ तो मेरे बदन में एक आग सी लग gai....kyoki चाहती तो मैं भी यही थी की गोलू जी पहल करे.......
Khair...main दिल से बहुत खुश thi...par मैंने ये बात ज़ाहिर नहीं होने di...aur न hi गोलू जी को कुछ kaha...aur न hi उन्हें roka.....bas चुपचाप इस अहसास का मज़ा लेने लगी....
पर जब गोलू जी ने देखा की मैंने उन्हें टोका nhi..to उन्होंने एक कदम आगे बड़ा diya....aur अपना हाथ मेरी छूट की तरफ खिसका diya......aur वैसे hi सहलाने लगे.....
जब उनका हाथ मेरी छूट के करीब आ- जा रहा tha......to मेरी छूट में एक अजीब हलचल मचने लगी थी.....
और न चाहते हुए भी कुछ hi देर में मेरी छूट गीली होने लगी thi......us वक़्त कार मैं एक चालू होने पर भी मुझे गर्मी का अहसास होने laga.....aur दिमाग में तो ऐसी हलचल होने लगी की क्या बोलू......
Khair...kuch देर तक सहलाने के बाद गोलू जी ने नजरें घुमा कर मेरी तरफ dekha....aur एक सवाल kiya.....jise सुन कर मैं चौंक कर रह गई.....
गोलू जी - कैसे लग रहा है.......
उनका सवाल सुन कर मैंने उनकी तरफ देखा लेकिन कुछ बोल नहीं pai......kyoki मुझे समझ नहीं आ रहा था की क्या bolu....par मेरे दिल की बात मैं छिपा न saki....aur मैंने उन्हें देखते हुए मुस्कुरा दिया........
Bas.....meri मुस्कराहट से गोलू जी को सब समझ आ gaya....aur उन्होंने थोड़ा आगे ले जा कर कार साइड मैं रोक दी......
और इससे पहले की मैं कुछ समझ pati.....unhone मेरी कमर में हाथ दाल कर मुझे अपनी तरफ खींच लिया....
और एक मुस्कान देने के बाद मेरे चेहरे और गार्डन पर चुम्मियों की बरसात करने लगे......
गोलू जी मुझे पागलो की तरह बेतहासा चूम रहे the....aur उनके चुम्बनों ने कुछ hi देर में मुझे भी पूरी तरह से गरम कर दिया......
जिस से मैं भी उनका साथ देने को मजबूर हो gai.....aur मैंने भी उनको बाहों में कास लिया......
ये देख कर गोलू जी ने अपने होंठ मेरे होठो पर टिका दिए और मैंने भी उनके होंठो की खुशामत करते हुए अपने होंठ खोल diye.....aur हम दोनों ek-dusre के होंठो को चूसते हुए एक होने लगे.......
थोड़ी देर बाद गोलू जी ने अपनी ज़बान मेरे मुँह मैं दाल di...aur मैं भी उनकी जवान को प्यार से चूसने लगी.......
इसी तरह चूमते हुए गोलू जी अपना एक हाथ खिसका कर मेरे दूध पर फिरने lage.........aur उनकी इस हरकत से मेरा जोश और ज्यादा बाद gaya......aur मैं सब कुछ भूल कर उनका साथ देने लगी........
उस वक़्त मैं पूरी तरह से भूल गई थी की वो मेरे शोहर के दोस्त hai.......mere सौहार nhi....balki एक गैर mard...aur मैं एक सरीफ निकाहि खातून हु.....
गोलू जी ने मुझे इस कदर पागल कर रखा था की मुझे कुछ सोचने का होश hi नहीं था.....
वो मेरे होंठो को चूसते हुए अपने एक हाथ से मेरे मुलायम दूध को मसल रहे the....aur मैं भी पूरी सिद्दत से उनको बाहों में भर कर चूस रही थी.....
थोड़ी देर बाद गोलू जी ने हाथ से मेरी कुर्ती को साइड किया और जगह बना कर हाथ भीतर दाल दिया और मेरी ब्रा पर अपना हाथ फिरने लगे,.....
मुझे उनकी हरकत से बहुत मज़ा आ रहा tha......kyoki एक तो मैं दिल hi दिल से गोलू जी के करीब हो चली thi.....aur फिर ये पहली बार tha.....jab मैं किसी गैर मर्द के साथ इन हालाओं में थी.....
मुझे गोलू जी से ये सब करवाने में इतना मज़ा आ रहा था की क्या bolu.....par तभी हमारी कार के सामने दूसरी कार आ गई......
और लाइट पड़ते hi हम दोनों को अहसास हुआ की हम खुली सड़क के किनारे कार में hai...na की बंद कमरे में एक बिस्तर पर.....
कार की लाइट पड़ते hi हम दोनों चौंक गए और जल्दी से दूर हैट गए.......
उस वक़्त न गोलू जी ने कुछ कहा और न maine.........bas मैंने अपने आप को सही किया और कार स्टार्ट कर के घर की तरफ दौड़ा दी........
घर आ कर भी हमने कोई बात नहीं ki....car पार्क कर के चुपचाप apne-apne कमरे में सोने चले गए......
और जब मैं अपने कमरे में आई तो मेरा दिमाग एकदम से झटका और मेरे दिमाग में गोलू जी की जगह मेरे सौहार आ गए.....
मैं सोचने लगी की आज जो कुछ hua...wo क्यों hua....kiski मर्ज़ी से hua....kya मेरी...???
और इस सवाल जा जवाब था haa....kyoki अगर ायरत है नहीं बोलती तो मर्द उसके साथ कुछ नहीं कर sakta.....bhale hi वो उसका सौहार hi क्यों न ho....ha...rape की बात अलग hai...par प्यार से कुछ करना तभी मुमकिन होता है जब उसमे ायरत की मर्ज़ी हो......
ये सब सोचते हुए अचानक से मेरा फील बुझ सा gaya....mujhe अब नादिर का चेहरा दिखाई देने लगा tha....lag रहा था की जैसे वो मुझसे पूछ रहा हो की kyo...kyo तुम गोलू जी के इतने करीब aai...kyo तुमने उन्हें अपने जिश्म को छूने diya......aur क्यों तुमने उनका पुरे जोश से साथ दिया....
पता नहीं kyo...par कुछ hi लम्हों बाद मैं अपने आपको गुनहगार मैंने lagi...aur मैंने दोच liya....ki आज जो हुआ सो hua....par आज के बाद ये सब कभी नहीं hoga....kuch भी नहीं.....
इतना बोल कर नाज़िआ चुप हो गई और मजीद उसे एक तक देखने लगा.....
मजीद- तो आपको अपने किये का अफ़सोस tha....haa...
नाज़िआ - ha...bahut ज्यादा अफ़सोस था.....
मजीद- यो फिर आज आप गोलू भाई के sath....matlab उसके आगे क्या hua....kya गोलू भाई ने आपको dhamkaya....ya फिर कोई जबरदस्ती....
Nazia(muskyra कर)- nhi....aisa कुछ नहीं hua...wo ऐसे मर्द नहीं है जो जबरन या डरा कर ायरत को हासिल kare....wo तो bas....pata नहीं क्या है unme...jo कोई भी लड़की या ायरत उनकी बाहों में चली आती है.....
मजीद- मतलब आप खुद से उनके पास गई थी....
नाज़िआ- जितना तुम सोच रहे हो ये सब उतना आसान नहीं tha.....samjhe....
मजीद- नहीं samjha...tabhi तो पूछ रहा hu....bataiye na....ki आखिर आप दोनों मिले kab..matlab आपके beech....wo...
Nazia(beech में)- चुदाई na....yahi पूछना चाहते हो न की मैंने उनसे कब और कैसे छुड़वाया.....
मजीद- hmm...bataiye na....ye कैसे hua...kyoki उस रात तो आप अपने कमरे में अकेली hi thi....aur गोलू भाई अपने कमरे me....to fir...kab हुआ ये सब....
नाज़िआ- बताती हु baba.....batati hu....mana की उस रात मैं कमरे में अकेली thi...par रात अभी ख़त्म नहीं हुई thi....wo तो अभी सुरु hi हुई थी.....
और फिर से एक बार नाज़िआ अपने अतीत में खो gai....aur मैं इंतज़ार करने लगा उस पल ka....ki कब नक्सिआं भाभीजाण bataygi...ki उन्हीने गोलू भाई का तगड़ा लुंड अपनी नाजुक छूट में लेने का मन बना liya....aur कैसे....??????
नोट - अपडेट पोस्टेड frnds.....hope ु लिखे आईटी......
थैंक्स फ्रेंड्स......
कीप रीडिंग........