Incest कैसे कैसे परिवार - Page 11 - SexBaba
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Incest कैसे कैसे परिवार

अध्याय ४७

दृश्य ५: सुजाता:

“ये निश्चित है न कि तुम्हें कोई आपत्ति नहीं है?” अविरल ने सुजाता के सिर पर हाथ घुमाते हुए पूछा.

सुजाता जो इस समय सूजी डार्लिंग की भूमिका में थी उसने अपना सिर उठाया और अविरल ले पैरों के अंगूठे को अपने मुंह से निकालते हुए स्वीकृति में सिर हिलाया.

“सूजी डार्लिंग, देखो तुम्हें मिलने कौन आया है?” अविरल ने बोला।

सूजी डार्लिंग ने सिर उठाकर देखा और स्नेहा और विवेक को देखकर उसकी आँखों में चमक आ गई.

“सूजी डार्लिंग, मैंने तुम्हें ऐसा करने के लिए नहीं कहा. चलो, मेरे पैर साफ करो. और फिर लौटकर आना तो मेरे लंड पर भी कुछ गंदगी लगी है, उसे भी तुम्हें ही निकालना है.”

सूजी डार्लिंग की आँखों की चमक लौट आई और वो अपने कार्य में लग गई.

“सूजी डार्लिंग, यू आर बीइंग ए गुड गर्ल.”

सूजी डार्लिंग उसकी बात सुनकर विवेक के लंड को चाटने में जुट गई.

*************

अविरल ने सुजाता को ये समझाया था कि उसे अगर अपने इस व्यसन को पोषित करना है तो उसे परिवार से छुपाना ठीक नहीं होगा. अगर परिवारजन उसकी इस विकृति को स्वीकार कर लेंगे तो उसका जीवन बिना किसी संकोच के अपने दोनों व्यक्तित्वों में सामंजस्य बनाने में सफल हो सकेगा. अन्यथा उस पर एक तनाव सदा बना रहेगा. जब श्रेया उसके इस रूप को जान चुकी है तो विवेक और स्नेहा से छुपाना हानिकारक सिद्ध हो सकता है. सुजाता को अपने पति का तर्क उचित जान पड़ा और आज वो अपने बच्चों के आगे भी दासी की भूमिका निभा रही थी.

ये अवश्य अचरज का विषय था कि स्नेहा और विवेक ने इसे इतनी शीघ्रता और सरलता से स्वीकार कर लिया था. परन्तु अभी तो इस व्यक्तित्व को पूर्ण रूप से अनावृत भी नहीं किया गया था. इसीलिए आगे के कुछ मिनट निर्णायक होने वाले थे. अविरल ने निश्चित किया था कि वो सूजी के तिरस्कार सहन करने की सीमा को चुनौती देकर देखेगा कि वो किस स्तर तक जा सकती है. इन कुछ दिनों में ही सुजाता के रहन सहन और व्यवहार में आमूलचूल परिवर्तन आया था. पर अपने बच्चों के सामने वो स्वयं को कितना गिरा पायेगी ये देखना शेष था.

सूजी डार्लिंग पूरी तन्मयता से विवेक के तलवे और पैरों को चाट कर चमकाने के बाद स्नेहा की ओर मुड़ी और वही प्रक्रिया में जुट गई.

अविरल उसे देखकर सोच रहा था कि वो हमला कब करे?

“सूजी डार्लिंग, मेरी चूत और गाँड भी भीतर से गन्दे हैं. उन्हें भी तुम्हें ही साफ करना है. ठीक है न?” स्नेहा ने अपनी माँ को आज्ञा दी.

सूजी डार्लिंग ने सिर हिलाकर स्वीकृति दी और पैरों को चाटती रही. कुछ समय बाद जब उसे लगा कि कार्य सम्पन्न हो गया है तो घुटनों पर बैठकर स्नेहा के सामने झुक गई. स्नेहा समझ गई और उसने नीचे उतरकर घोड़ी लिया.

“ठीक से चाटना, सूजी डार्लिंग। मुझे मेरे पापा और भाई चोदने वाले हैं. उन्हें बिलकुल चिकने चिकने छेद मिलने चाहिए. अगर अच्छा काम करोगी तो उनका माल तुम्हें खाने दूँगी। समझीं?”

सूजी डार्लिंग ने फिर से सिर हिलाकर स्वीकृति दी और स्नेहा के पीछे आ गई. अविरल ने घड़ी देखी और निश्चय किया कि इस कृत्य के बाद वो अपना वार करेगा.

“सूजी डार्लिंग, आप समुदाय के लड़कों से उनकी ट्रेनिंग में यही करवाती थीं न? अपनी चूत और गाँड़ की चटाई? अब मेरी चाटो!” स्नेहा ने झिड़कते हुए कहा तो सुजाता को अपने पूर्व कर्मों पर पछतावा हुआ. सूजी डार्लिंग स्नेहा की चूत को चाटने के बाद उसकी गाँड़ में जीभ डाल डाल कर उसे गीला कर रही थी. चाहे जो भी हो स्नेहा थी तो उसकी बेटी ही. अब पिता या भाई उसकी गाँड मारने वाले थे तो माँ का कर्तव्य था कि उनकी राह सुगम करे जिससे बेटी को कष्ट न हो.

अभी वो अपने कार्य को सम्पन्न करके हटने ही वाली थी कि अविरल का कर्कश स्वर गूँज उठा.

“इतना बहुत है, सूजी. पर तुम्हें ये करने के पहले इसे पहनने के लिए आदेश दिया था न?” अविरल के हाथ में एक कुत्ते को बाँधने वाला पट्टा था जिसमें चेन भी लगी थी.

सूजी डार्लिंग ने झटके से अविरल को देखा. ऐसी कोई बात नहीं हुई थी. अविरल झूठ बोल रहा था. अविरल के हाथ में पट्टा और चेहरे पर एक मुस्कान थी. अचानक सूजी डार्लिंग को रहस्य समझ आ गया. उसका पति उसकी परीक्षा ले रहा था. क्या वो उसके झूठ पर प्रतिउत्तर देगी या चुपचाप अपने दासी स्वरूप में उसे स्वीकारेगी. उसके मन और मस्तिष्क में कुछ पलों के लिए एक द्वन्द चला. पर अंततः चुनाव कर लिया.

घुटनों पर रेंगते हुए वो अविरल के सामने गई और उसके पैरों के अँगूठे चाटे।

“क्षमा करें स्वामी. दासी आपकी आज्ञा भूल गई थी. इसके लिए आप जो भी दण्ड देना चाहें दीजिये.”

“हाँ दण्ड तो अवश्य मिलना चाहिए. पर उसके पहले मुझे बाथरूम जाना है. तुम समझती हो न सूजी डार्लिंग इसका क्या अर्थ है और इसमें तुम्हारी क्या भूमिका है?

सूजी डार्लिंग अब कुछ घबराई. वो अपने बच्चों को अपना अत्यंत घ्रणित और विकृत रूप नहीं दिखाना चाहती थी. मन मस्तिष्क फिर लड़ने लगे.

“जी स्वामी. मैं आपके पीछे आती हूँ.”

“स्नेहा और विवेक, आओ तुम भी. देखो अपनी सूजी डार्लिंग क्या करती है.”

अविरल ने पट्टा यही वहीँ छोड़ दिया. उसके पीछे सूजी डार्लिंग और स्नेहा और विवेक उन दोनों के पीछे हो लिए. बाथरूम में जाकर अविरल खड़ा हो गया. उसका लंड असामान्य रूप से तना हुआ था. सूजी डार्लिंग उसके सामने खड़ी हो गई. विरल ने लंड उसके मुंह में डाला.

“चूस!”

स्नेहा और विवेक नहीं आया कि लंड चुसवाने के लिए उसके पिता यहाँ क्यों आये. और इसका कारण उन्हें चार मिनट बाद स्पष्ट हो गया.

“ओह शिट!” स्नेहा और विवेक के मुंह से निकला. कारण स्पष्ट था. उनके पिता ने उनकी माँ के मुँह में मूत्र त्याग करना आरम्भ कर दिया. और अचम्भा ये था कि उनकी माँ भी उसे बड़े प्रेम से पिए जा रही थीं. थोड़ा मूत्रपान करने के बाद सूजी डार्लिंग ने मुँह थोड़ा बंद किया और अपने चेहरे को सामने कर दिया। अविरल ने उनके चेहरे को धोया और फिर उनके स्तनों पर अंतिम बौझार कर दी.

“सूजी डार्लिंग को मेरा मूत्र बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक लगता है. दिन में तीन बार तो पी ही लेती है. सूजी डार्लिंग अपना मुँह खोलकर इन दोनों को दिखाओ.”

सूजी डार्लिंग ने इतना तिरस्कार कभी नहीं झेला था. आज उनसे दो बच्चों के सामने उसके ही पति ने उसकी अपमान किया था. उसने अपना मुँह खोलकर दोनों को दिखाया.

“और कुछ भी करती हो न?” अविरल ने उलाहना दी.

सूजी डार्लिंग ने अपने चेहरे और वक्ष पर लगे मूत्र को मलना आरम्भ किया.

“ये केवल सूजी डार्लिंग और मेरे बीच का खेल है. इसमें किसी और के जुड़ने का कभी भी कोईभी अवसर नहीं आएगा. न मेरे कहने से सूजी डार्लिंग ऐसा करेगी, न सूजी डार्लिंग की इच्छा से ही ऐसा हो सकेगा. ये हमारे बीच का विशिष्ट खेल है. तुम्हें आज मात्र इसीलिए दिखाया है जिससे कि तुम अपनी माँ की इस कुंठा से अवगत हो जाओ.”

“जी, पापा.” दोनों बोले.

“सुजाता, अब उठो और स्नान करने के बाद कमरे में लौट आओ. कुछ ड्रिंक्स के बाद तुम फिर से सूजी डार्लिंग का रूप लोगी और हम तीनों की सेवा करोगी.”

“ओके. ओह! मेरे बच्चों. तुमको ये सब देखना पड़ा.”

स्नेहा: “इट्स ओके मॉम, वी लव यू.”

अविरल, स्नेहा और विवेक सुजाता को छोड़कर बाहर आये और ड्रिंक बनाने लगे. सुजाता अंदर स्नान करने लगी और दस मिनट के बाद बाहर आई तो उसके चेहरे की कान्ति ही भिन्न थी. अविरल के पास बैठते ही विवेक ने उसके हाथ में ग्लास थमा दिया. सुजाता दोनों बच्चों के भाव देखकर समझ गई कि वे सच जानने के लिए उत्सुक हैं. पर एक विकट समस्या थी. स्नेहा की अब तक मेहुल चुदाई नहीं कर सका था. इस सप्ताह का निर्धारित कार्यक्रम शेट्टी परिवार ने बिगाड़ दिया था. सुजाता ने एक गहरी श्वास भरी.

“मैं जानती हूँ कि तुम दोनों मेरे इस परिवर्तन के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो. मैं भी तुम्हें इस विषय में बताऊँगी। परन्तु अभी मैं एक वचन से बँधी हूँ और उसे तोड़ नहीं सकती. पर जिस दिन वो वचन पूरा होगा, सम्भवतः अगले पाँच सात दिनों में, मैं तुम सबको इसका रहस्य बता दूँगी।”

विवेक और स्नेहा को निराशा हुई. फिर स्नेहा ने ही पूछा.

“पर मॉम, आप सूसू पी रहे हो, इस प्रकार से व्यवहार कर रहे हो, बहुत आश्चर्य हो रहा है.”

“मैं समझ सकती हूँ, पर मेरे मन में अवश्य ऐसी कोई ग्रंथि थी जिसके कारण मैं असंतुष्ट थी. जिस दिन से मेरा ये रूप मेरे सामने आया है, मेरा जीवन आनंद से भर गया है. तुम्हारे पापा का इसमें विशेष योगदान है.”

“विशेष योगदान? क्या कोई और भी है.”

तभी अविरल बोला, “सबका उत्तर देगी. उसे प्रताड़ित मत करो. विवेक, एक पेग और बनाओ. फिर आगे का कार्यक्रम करेंगे.”

सबके लिए पेग बने और पीने लगे. जैसे ही पेग समाप्त हुआ, अविरल ने कहा, “तो सूजी डार्लिंग, अब तुम्हें मेरी बेटी को चुदाई के लिए मेरे और मेरे बेटे के लिए......”

इससे पहले कि अविरल अपनी बात को पूरी करता सूजी डार्लिंग नीचे जा बैठी और अविरल के पैर चाटने लगी. उसके बाद उसने स्नेहा को देखा तो स्नेहा ने अपने पैरों को फैला लिया और सूजी डार्लिंग उसकी चूत चाटने में जुट गई. इस अवस्था में सूजी डार्लिंग की गाँड ऊपर उभरी हुई थी और विवेक का मन मचल गया. उसने अविरल को देखा तो अविरल ने उसे प्रतीक्षा करने का संकेत दिया. विवेक मन मसोस के रह गया.

उधर सूजी डार्लिंग ने अपनी जीभ को स्नेहा की गाँड खोलने के लिए उपयोग में लाया तो स्नेहा की सिसकारी निकल गई.

“बस इतना पर्याप्त है. सूजी डार्लिंग आओ मेरे लंड को चाटो।”

सूजी डार्लिंग लपक कर अविरल का लंड चाटने लगी. अविरल ने विवेक को अपने पास बुलाया.

“इसके लंड पर भी ध्यान दो. तुम्हारी बेटी की गाँड मारने वाला है.”

सूजी डार्लिंग विवेक के लंड की ओर मुड़ी तो विवेक का लंड स्नेहा की गाँड मारने की बात सुनकर कुछ अधिक ही कठोर हो गया. उसे भी इस खेल में आनंद मिल रहा था.

सूज़ी डार्लिंग ने लपककर अपने बेटे विवेक के लंड को मुँह में लिया और पूरे मन से चाटने लगी. वो उसे इतना कठोर और चिकना कर देना चाहती थी कि स्नेहा की गाँड में जाने के समय सरलता भी हो और भेदने में भाई बहन को आनंद भी मिले. स्नेहा को लेकर अविरल पलंग पर जा चुका था और लेट कर स्नेहा की प्रतीक्षा कर रहा था. स्नेहा उसके ऊपर चढ़ी और लंड को अपनी चूत पर रगड़ने लगी और फिर उसके ऊपर बैठ गई. धीमी गति से उसने अपने पिता के लंड को अपनी चूत की गहराइयों में समा लिया. दोनों के मुँह से एक संतोष की सिसकी निकली.

“मॉम बहुत चेंज हो गई न पापा? पर अब अधिक प्रसन्न रहती हैं. हमें भी व्यर्थ में सताना भी बंद कर चुकी हैं.”

“हाँ, अब देखना है समुदाय में उनका क्या स्थान बनता है. इस बार तो वो प्रबंधन समिति में भी चली ही जाएगी. स्मिता के हटने से इसका बनना तय है. इसके व्यवहार के कारण जो इससे द्वेष रखते थे उन्हें अपनी राय बदलने में समय लगेगा पर अब मुझे लगता है कि ये शीघ्र हो जायेगा.”

अब चूत में लंड हो और कोई इस प्रकार की बातों में व्यस्त हो ये तो अद्भुत ही है, पर ये स्थिति ही ऐसी थी.

“पर पापा, मॉम का ये सूसू पीना मुझे अच्छा नहीं लगा.”

“चिंता मत करो, इसीलिए मैंने उसे किसी भी और के साथ ये करने से बाधित किया है. मैं धीरे धीरे उसे इससे दूर करने का प्रयास करूँगा। अगर पूरा बंद नहीं भी किया तो उसे सीमित अवश्य कर दूँगा।”

“हम्म्म, पापा अब मेरी चूत खुजला रही है. आपका लंड फूलकर उसे तड़पा रहा है. अब चुदाई करें? विवेक जब आएगा तब देखेंगे.” ये कहकर वो लंड पर उछलने लगी और पिता पुत्री की चुदाई का आरम्भ हो गया.

अभी कुछ ही मिनट बीते होंगे कि स्नेहा की गाँड पर किसी का हाथ रुका. स्नेहा रुक गई और पीछे मुड़ी तो देखा कि विवेक अपना लंड लिए खड़ा था. फिर उसे अपनी गाँड में कुछ अंदर जाता हुआ अनुभव हुआ.

“ओह, सूज़ी डार्लिंग। चाटो मेरी गाँड।” उसने कहा तो सूज़ी डार्लिंग ने अपना परिश्रम और बढ़ा दिया. अपनी बेटी की गाँड को भलीभांति चिकना करके सूज़ी डार्लिंग हट गई और घुटनों पर बैठकर आगे होने वाली घटना की प्रतीक्षा करने लगी. इस समय उसकी चूत से भी झरना बह रहा था और गाँड में भयंकर खुजली हो रही थी. परन्तु वो किसी भी प्रकार से उन दोनों को छूने से भी बाधित थी.

विवेक ने अपने फनफनाते हुए लौड़े को स्नेहा की गाँड पर लगाया और धीरे से अंदर की ओर धकेलने लगा. स्नेहा ने अपनी श्वास रोकी हुई थी. नीचे से उसके पिता का लंड पहले ह उसकी चूत की शोभा बढ़ा चुका था. अब वो शान्ति से विवेक की प्रतीक्षा कर रहे थे. सूज़ी डार्लिंग घंटों पर बैठी थकने लगी थी. वो सामान्य आसन में बैठ गई और स्नेहा की गाँड में विवेक के लंड की यात्रा देखने लगी. ये दृश्य उसने पहले भी कई बार देखा था पर आज इसका आशय और प्रभाव भिन्न था. आज तक वो एक निर्देशक की भाँति गतिविधियों को चलाती थी, पर आज वो मात्र एक मूक दर्शक थी और अन्य सभी की आज्ञा पालन करने के लिए विवश. इस विचार ने उसके शरीर नई ऊर्जा और उत्तेजना भर दी थी. उसे आशा थी कि उसके पति उसके शरीर की आग को बुझाने आएँगे।

विवेक ने पूरे संयम का परिचय देते हुए अंततः स्नेहा की गाँड में अपना पूरा लंड स्थापित कर ही दिया. अचानक सूज़ी डार्लिंग को स्मिता और श्रेया की गाँड चुदाई का स्मरण हो आया, जब उसे बीच बीच में गाँड से निकले लंड को चाटने का आदेश थे. वो साहस करते हुए उन तीनों के पास आ गई. मात्र अपने मूक संकेत से ही उसने विवेक को अपनी इच्छा बताई. विवेक ने मुस्कुराते हुए अपनी स्वीकृति दे दी. अब सूज़ी डार्लिंग को प्रतीक्षा करनी थी.

जब पिता पुत्र ने दोनों छेदों में अपने खम्बे गाड़ दिए तो अगले चरण का आरम्भ किया गया. कुछ देर अविरल चूत में लंड चलाता फिर विवेक गाँड में. एक सधी गति से ये दुहरी चुदाई आगे चलने लगी. स्नेहा की सिसकारियों ने अब चीखों का रूप ले लिया था पर इसमें कष्ट नहीं आनंद का भाव अधिक था. कुछ धक्के मारने के बाद विवेक ने अविरल को बताया कि वो सूज़ी डार्लिंग से लंड साफ करवाना चाहता है. अविरल ने अपनी गति धीमी की और फिर विवेक ने अपना लंड स्नेहा की गाँड से निकाला. सूज़ी डार्लिंग तो मानो इसी पल के लिए जीवित थी. तीव्र गति से उसने विवेक के लंड को चाटना आरम्भ किया और कुछ ही पलों में उस पर लगे रस और अन्य अवशेषों को ग्रहण कर लिया. सूज़ी डार्लिंग यहाँ नहीं रुकी, उसने स्नेहा की खुली लपलपाती गाँड में मुंह लगाया और जीभ को अंदर डालकर उसे भी चाट लिया. फिर विवेक के लंड को अंदर प्रविष्ट करवा दिया.

“ओह! सूज़ी डार्लिंग, यू आर टू गुड!” स्नेहा ने कहा तो सूज़ी डार्लिंग का सीना फूल गया.

“यस, सूज़ी डार्लिंग, यू आर ए गुड स्लेव.” विवेक ने सूज़ी डार्लिंग के सर पर थपकी दी, “पर अब जाओ. कुछ देर में फिर आना.”

सूज़ी डार्लिंग गर्व से अपने स्थान पर लौट गई और चुदाई देखने लगी.

अब ये सिद्ध हो गया कि सूज़ी डार्लिंग इस कार्य के लिए चुदाई में विघ्न डाल सकती है तो उसकी अपनी उत्तेजना भी बढ़ गई. अब वो चुदना चाहती थी पर इसकी अभिव्यक्ति नहीं कर सकती थी. उसे अपने पति की दया पर ही निर्भर रहना था. सामने चुदाई का खेल चलता रहा. स्नेहा की चुदाई की गति अब तीव्र हो चली थी. सूज़ी डार्लिंग को लग रहा था कि इस समय व्यवधान डालना उचित है या नहीं.

तभी उसे स्नेहा की पुकार सुनाई दी, “सू ज़ी डा र्लिं ग, मेर्री गाँड!”

अब स्नेहा का इस कथन से क्या तात्पर्य था इसका चिंतन किये बिना ही सूज़ी डार्लिंग उसके पास जा पहुँची। विवेक ने देखा तो समझ गया और अविरल को बताया. चुदाई को विराम दिया गया और विवेक ने लंड को बाहर निकाला और अपनी माँ या कहें कि सूज़ी डार्लिंग के मुंह में दे दिया. सूज़ी डार्लिंग ने उसे पूरी श्रध्दा से चाटा और चमका दिया. फिर सूज़ी डार्लिंग ने अपनी बेटी की गाँड को फिर अंदर से अंदर तक चाटा। विवेक के लंड को मुँह में लेकर चूसने के बाद उसे स्नेहा की गाँड में डाला और इस बार वहीँ खड़ी रही.

सूज़ी डार्लिंग की आँखें अपने पति की ओर मुड़ीं तो अविरल उसे ही देख रहा था. अविरल ने अपना सिर हिलाकर उसे न का संकेत दिया. वो अब किसी प्रकार की रुकावट नहीं चाहता था. सूज़ी डार्लिंग ने भी उसके संकेत का प्रतिउत्तर दिया. और तभी स्नेहा की एक चीख निकली. ये अविरल का उसकी चूत में लंड को तेजी से पेल देने का परिणाम था. विवेक ने समझा कि स्नेहा ने पापा को कुछ बोला होगा तो उसने भी अपने लंड को उसी शक्ति से पेलना आरम्भ किया. अब पिता पुत्र दोनों तीव्र गति से स्नेहा की चूत और गाँड मारने में लग गए और स्नेहा की प्यासी माँ वहीं खड़ी उन्हें देखती रही.

सूज़ी डार्लिंग को ये बोध था कि उसे एक और कृत्य करना है जो अत्यंत घिनौना है. परिवार में उसका स्थान उसके बाद सदा के लिए परिवर्तित हो जायेगा. और जैसे जैसे चुदाई अपने चरम पर पहुंच रही थी वो समय निकटतर आ रहा था. सूज़ी डार्लिंग ने अपने गले में पड़े पट्टे को छुआ और अपने दासी होने की पुष्टि की. घ्रणित ही सही, वो इसके लिए अत्यंत उत्साहित थी. मानो उसकी कुंठा की अंतिम गाँठ खुलने के लिए लालायित थी.

अविरल और विवेक की साँसे फूल रही थीं तो वहीँ स्नेहा की चीखें मद्धम पड़ चुकी थीं. अविरल की जांघों पर बह रहे जल से स्नेहा की चूत की व्यथा कथा को समझा जा सकता था. वहीँ उसकी गाँड से निकलती फच फच की ध्वनि विवेक के लंड से निकलने वाले रस की कहानी सुना रही थी.

“ओह पापा, मैं गया. स्नेहा मैं गया! मॉम!” विवेक ने ये कहते हुए अपना पानी स्नेहा की गाँड में छोड़ा तो अविरल भी पीछे न रहा. एक शब्द कहे स्नेहा की कोख में पानी छोड़ दिया. तीनों गहरी सांसे लेते हुए शांत हो गए. सूज़ी डार्लिंग पुनः उत्तेजित हो गई. वो लालची दृष्टि से विवेक के स्नेहा की गाँड में समाये लंड को देख रही थी. जब तीनों की साँसे संभलीं तो विवेक ने अपना लंड बाहर निकाला. इससे पहले कि वो पूरा निकलता सूज़ी डार्लिंग की जीभ स्नेहा की गाँड के चारों और घूमने लगी. स्नेहा को गुदगुदी हुई और वो हंस पड़ी.

“सूज़ी डार्लिंग, गाँड से अब क्या भैया का पानी पियोगी?” ये कहने के समय उसे ये आभास नहीं था कि सूज़ी डार्लिंग के लिए यही आदेश था. सूज़ी डार्लिंग अपने आदेश का पालन करते हुए अपनी बेटी की गाँड से अपने बेटे के वीर्य को उसके साथ मिश्रित अन्य रसों के साथ पीने का भरसक प्रयास कर रही थी. समर्पण ही सफलता की सीढ़ी है, इसे सिद्ध करते हुए सूज़ी डार्लिंग ने स्नेहा की पूरी गाँड अच्छे से चाट चूस कर साफ कर दी. फिर विवेक के लंड को मुँह में लेकर चाटा। विवेक के हटने के बाद स्नेहा अपने पिता के ऊपर से हटी.

उसके हटने से सूज़ी डार्लिंग ने अविरल को देखा जिसने उसे सकारात्मक संकेत दिया. सूज़ी डार्लिंग के चेहरे पर मुस्कान आ गई. इस बार उसने अनगिनत बार किये हुए कार्य को फिर सम्पन्न किया और स्नेहा की चूत से अविरल का रस सोख लिया. अविरल के लंड पर वो अंत में आई और उसे लगभग पूजते हुए चाटकर साफ किया. अविरल ने उसके सिर पर प्रेम से हाथ घुमाया.

“सुजाता, जाओ. मुँह इत्यादि धोकर आ जाओ. आज के लिए सूज़ी डार्लिंग की भूमिका यहीं समाप्त होती है. विवेक अपनी माँ के गले से पट्टा निकाल दो.”

“पापा, मैं एक बार उन्हें इस पट्टे में घूमना चाहती हूँ.” स्नेहा ने हठ किया.

“नहीं, आज नहीं। इस प्रकार के खेल का एक महत्वपूर्ण नियम है. कब रुकना है ये निर्धारित होना ही चाहिए. जो तुम चाहती हो वो हम फिर किसी दिन कर सकते हैं. सूज़ी डार्लिंग कहीं जा नहीं रही थी. पर अब सुजाता का समय है.”

“ओके पापा. सॉरी मॉम.”

“मेरी बच्ची, कोई बात नहीं. तेरी इच्छा भी पूरी कर दूँगी.” सुजाता ने कहा और बाथरूम जाने लगी. फिर मुड़कर बोली, “आप दोनों देर मत करना मैं बहुत देर से चुदने के लिए तड़प रही हूँ.”

विवेक: “आप आओ तो मॉम. आपको कैसे मना करेंगे?”

सुजाता ये सुनकर प्रसन्नता से बाथरूम में चली गई. विवेक सबके लिए पेग बनाने लगा.

सुजाता जब बाथरूम से लौटी तो पिछली बार से अधिक प्रसन्न और खिली हुई लग रही थी. स्नेहा ने उसे अपने गले लगाया और अविरल के साथ बैठाया. विवेक ने उसे उसका ग्लास थमाया. ऐसा लग रहा था मानो सब उसकी सेवा करना चाह रहे थे.

“कैसा लग रहा है?” अविरल ने उसे अपनी ओर खींचते हुए पूछा.

“बहुत अच्छा. आप सही कह रहे थे. अब मेरे मन पर से एक बड़ा बोझ उतर गया. इन दोनों ने भी मेरी इस छाया को स्वीकार कर लिया है तो अब मुझे कोई डर नहीं रहा.” सुजाता ने कहा.

“हाँ, ये आवश्यक था. मैं देख रहा था कि तुम विचलित थीं और कुछ परामर्श के बाद यही निष्कर्ष निकला था कि कारण यही होगा कि तुम्हें इन दोनों की प्रतिक्रिया डर है. आज ये डर निराधार सिद्ध हो गया.”

“हाँ. अपने परामर्श किससे किया?”

“अपने मित्र और उसकी भाभी से.” अविरल ने कहा और आँख मारी. सुजाता समझ गई कि अविरल ने मेहुल और श्रेया से बात की थी. वो मेहुल के आभार तले दबी जा रही थी. और इस बात से उसे स्मरण हुआ कि श्रेया और उसका परिवार इस समय नायक परिवार के साथ उनके समुदाय के रिसोर्ट में हैं.

“श्रेया का कोई समाचार?” सुजाता ने पूछा.

“अधिक नहीं. स्थिति अनुकूल है. जो स्थान ठहरने के लिए दिया है, वो अतिश्रेष्ठ है. श्रेया चाहती है कि हम शीघ्र वहाँ पहुचें.” अविरल ने बताया.

“तो अपने क्या सोचा है?”

“कल शाम चल सकते हैं. कल कार्यालय जाना है, कुछ आवश्यक कार्य है और कुछ लोगों से मिलना भी है.”

“ठीक है, आप बता देना, मैं सब बैग लगा लूँगी।”

अविरल ने सुजाता के मम्मे दबाते हुए बोला, “वो कल देखेंगे. अब तुम्हें चोदने की बहुत इच्छा है. तो फटाफट एक और पेग मारो फिर आरम्भ करते हैं.”

“मैं तो कबसे तरस रही हूँ. पर आप जो मुझे सताने में लगे थे.” सुजाता ने इठलाते हुए कहा.

“अरे तुम मेरी गर्लफ्रेंड सूज़ी से मिलोगी तो तुम स्वयं समझ जाओगी कि क्यों तुम्हें सता रहा था.”

“छोड़िये, मुझे नहीं मिलना आपकी गर्लफ्रेंड से, मेरी सौत के लिए मुझे तरसा रहे हो. अब देखो मैं क्या करती हूँ.”

इस छेड़छाड़ के साथ ही सुजाता ने झुकते हुए अविरल के लंड को निगल लिया.

“अरे मेरा लंड कहाँ चला गया? स्नेहा देखो कहाँ गुम गया?”

“पापा, मैं ढूँढती हूँ.” स्नेहा ने कुछ स्वांग भरा फिर बोली, “पापा, आप बहुत बड़े संकट में हैं. आपका लंड मॉम ने खा लिया है. मैं बोलती हूँ उनसे आपको छोड़ने के लिए.” स्नेहा, “मॉम, प्लीज़ पापा का लंड छोड़ दो. चाहे तो विवेक का खा लो.”

“हाँ ये ठीक है, युवा लंड खाने में अधिक स्वादिष्ट होगा.” ये कहकर सुजाता ने अविरल के लंड को छोड़ा और विवेक को पास बुलाया और उसके लंड को चूसने लगी.”

“ऐसा करने के लिए आज तुम्हें मेरे प्रतिशोध का सामना करना होगा. गाँड मारकर हरी कर दूँगा।”

सुजाता: “बहुत आये मेरी गाँड हरी करने वाले और चले भी गए.”

अविरल: “लगता है तुम्हें पाठ पढ़ाना पड़ेगा. विवेक इधर आकर लेटो.”

विवेक लेट गया और उसका लंड ऊपर की ओर तना हुआ था. सुजाता के मुंह में पानी आ गया. िवेक का लंड उसके थूक से गीला था और चमचमा रहा था.

“आप रहो यहाँ, मैं चली अपने बेटे के पास.” सुजाता ने अपना आसन बदला और विवेक के लंड पर जा चढ़ी. उसकी पानी छोड़ती चूत ने सरलता से लंड अंदर ले लिया. उसने एक गहरी सांस भरी. कब से वो इस भावना और आनंद के लिए तरस रही थी. लौड़ा अंदर जाते ही उसकी आत्मा तृप्त हो गई. वो कुछ समय तक इसी प्रकार से बैठी रही. विवेक, स्नेहा और अविरल भी शांत ही रहे. फिर विवेक ने अपने हाथ उसके मम्मों पर रखे और उन्हें दबा दिया. सुजाता का तो मानो जैसे ज्वालामुखी ही फट पड़ा. उसकी चूत से इतना पानी छूटा कि विवेक की जांघें और नीचे बिस्तर सब लथपथ हो गए.

कुछ समय तक सुजाता यूँ ही कांपते हुए झड़ती रही. फिर जब सामान्य हुई तो उसके चेहरे पर असीम शांति थी. कुछ पलों के बाद उसने अपनी कमर उठाकर चढ़ाई आरम्भ कर दी. विवेक ने भी उसका साथ दिया और सुजाता के मम्मों को निचोड़ते हुए वो सशक्त धक्के लगाने लगा. माँ बेटे का ये आनंदमयी मिलन शीघ्र ही एक प्रतिस्पर्धा बन गया.

इसे रोकना आवश्यक था. स्नेहा ने अविरल के लंड को मुंह में लेकर दो मिनट चूसा और फिर उसे भी रणभूमि में भेज दिया. अविरल लंड को पकड़े हुए सुजाता के पीछे गया. स्नेहा ने सामने जाकर विवेक को रुकने के लिए कहा और अविरल ने सुजाता की कमर पर हाथ रखा और उसे आगे झुका दिया. विवेक ने कमर थाम ली और इससे पहले कि सुजाता के मुंह से कुछ निकलता उसके मुंह से अपना मुंह जोड़ लिया. अविरल ने उपयुक्त अवसर देखा और सुजाता की गांड पर थूक लगाया और अपने लंड को गाँड पर रखते हुए दो ही धक्कों में रणक्षेत्र में अपनी विजय पताका लहरा दी.

“ओह! क्या कर दिया आपने! मेरी गाँड में पूरा लौड़ा दे दिया?”

“जैसा तुम्हें अच्छा लगता है, प्रियतम. अब तक तुम तरस रही थीं अब चुदाई का भरपूर आनंद लो. विवेक, चलो अब चोदो अपनी माँ को. बहुत देर से प्यासी है. आज पूरी रात इसकी चुदाई करना है. और कल हमें रिसोर्ट जाना है जहाँ इसे और भी चुदाई का अवसर मिलेगा. पर आज इसके कसबल निकाल दो.”

बस अब क्या था पिता पुत्र ने अपनी पूरी शक्ति से सुजाता की चुदाई आरम्भ की. सुजाता की आनंद और पीड़ा से मिश्रित चीखों से कमरा हिल गया. स्नेहा ने अपने लिए एक पेग बनाया और अपनी माँ की चुदाई का दृश्य देखने लगी. उसे पता था कि आज उसकी चुदाई होने की संभावना कम ही है. आज उसकी माँ की ही माँ चोदी जानी है. पर तब तक उसे केवल देख कर ही आनंद लेना था.

रात अभी शेष थी.

क्रमशः

1269100
 
Nahin Raji. Main tumahre last 2 update padh nahin paya isiliye comment nahin kar paya.

Jhoote comment dene ka koi meaning nahin hota.

Par aaj 136 podh raha hoon.

Party ke liye maine to haan kahi hai.

Kaise karni hai ye batao.

Ek kaam karein? ek special episode mikhte hain milkar. 2-3 character tumhari story ke, 2-3 character Disha ki sasural ke.

Batana kya sochti ho.
 
Ye stories hain.

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Incest - नेहा का परिवार

दोस्तों, मैं तो बस बड़े मामाजी और नेहा और उनके परिवार के प्यार का विस्तृत वर्णन ही कर रहीं हूं। उन्हें किस किस तरह तरह की रति-क्रिया से सुख मिलता है उस पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है। आशा है कि पाठकगण भी उनकी निजी काम-इच्छाओं का आदर करेंगे और बुरा नहीं मानेगें। सीमा

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Incest - GULNAZ KA PYAAR By Seema

This is one of my long stories in english but quite a few dialogues strewn in Hinglish here and there. Strong incest based theme. This was posted on Xossip. Thought as that site has been closed, to put it on Xforum. Hope it will find some readers.

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अध्याय ४८: दिंची क्लब में राशि

********************

राशि का प्रवेश:

शोनाली ने मंजुल और नूतन के साथ मिलकर चार पाँच दिनों में ही राशि का कमरा सजा दिया. या यूँ समझिये कि चुदाई के लिए उपयुक्त बना दिया. कमरे को ऐसे व्यवस्थित किया कि किसी भी स्थान पर चुदाई की जा सकती थी. रूचि को बुलाकर अंतिम सज्जा दिखाई तो वो भी संतुष्ट हो गई. एक ही समस्या सबसे बड़ी थी, और वो थी भोजन का प्रबन्ध। पर राशि ने इसका दायित्व स्वयं पर ही ले लिया. हर दिन उसकी आवश्यकता की वस्तुएं आने वाले रोमियो अथवा नूतन और मंजुल में से कोई लेकर आने वाला था. क्लब में एक बड़ी रसोई थी तो ये समस्या भी हल हो गई.

रूचि की समझ में ये नहीं आ रहा था कि उसकी माँ इतनी सरलता से ऐसे स्थान पर जाकर रहने को क्यों मान गईं जिसे उन्होनें देखा भी नहीं था, बस सुना ही था. राशि की बातों से ये भी विदित था कि उसकी उन दोनों सहेलियों को जिन्हें उसने क्लब में प्रवेश दिलवाया था, वो समय समय पर आमंत्रित करेगी. इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी. पार्थ, शोनाली और रूचि की एक मंत्रणा में इस बात पर विचार हुआ कि क्या उनकी किसी अन्य सहेली को भी प्रवेश दिया जाये, क्योंकि तीन नए रोमियो जुड़े हैं? पर तीन नयी सदस्याओं का जुड़ना तय था इसीलिए इसे कुछ समय के लिए टाल दिया.

दूसरी ओर अस्थाई रोमियो की जो परिकल्पना थी उससे व्यापकता बढ़ाई जा सकती थी. उनके इस थीम पार्टी में प्रदर्शन के बाद इस विषय में चिंतन किया जा सकता था. अंततः वो दिन भी आ ही गया जब राशि को क्लब में रहने जाना था. पार्थ, शोनाली के साथ मंजुल भी आई हुई थी. शुचि भी अपनी माँ को छोड़ने आई थी. रूचि, शुचि और राशि की आँखों में आँसू थे, पर किसी भीषण दुःख के नहीं. बिछड़ने के. वे जब चाहे एक दूसरे से मिल सकते थे. जब राशि के बैग गाड़ी में रख दिया गए तो उसने पार्थ और रूचि को अपने पास खींचा.

“तुम दोनों को अब मेरा व्यवधान नहीं रहेगा. प्रेमपूर्वक रहना. चाहे भविष्य में जो भी निर्णय लो, पर तुम दोनों एक दूसरे के पूरक हो.”

“आपके रहने से हमें कोई व्यवधान नहीं था, माँ!” रूचि बोली.

“नहीं ऐसा नहीं है. अपने व्यापार के साथ तुम्हें मेरा भी ध्यान रखना पड़ता था. सच तो ये है कि मैं स्वयं कुछ समय से कहीं और में जाने के बारे में सोच रही थी. अभी मैं बूढ़ी नहीं हूँ, अपना ध्यान और काम कर सकती हूँ. तुम्हारा क्लब में रहने का प्रस्ताव मानो मेरे लिए एक वरदान है. अब प्रसन्न रहो. वैसे भी मैं अब पार्थ से नियमित मिलती रहूँगी और बीच बीच में यहाँ भी आ जाया करुँगी.”

ये कहकर सबने भीगी आँखों के साथ राशि को गाड़ी में बैठाया. मंजुल और शोनाली ने राशि को लेकर एक नयी यात्रा का शुभारम्भ किया.

जैसे जैसे कार क्लब की ओर बढ़ रही थी राशि की धड़कन भी तेज हो रही थी. उसने अपनी बेटी के सुख के लिए एक नए स्थान पर रहने का निर्णय ले तो लिया था, पर आज तक उसने क्लब को देखना तो दूर उसका कोई चित्र भी नहीं देखा था. हालाँकि उसे विश्वास था कि रूचि ने उचित स्थान ही चुना होगा. कुछ समय बाद बाहर का दृश्य परिवर्तित होने लगा और हर ओर हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य की भरमार हो गई. और इसके कुछ ही समय बाद एक गेट दिखा जिस पर दो द्वारपाल थे.

“बहुत सुंदर स्थान है.”

“जी माँ जी. अभी आगे देखिये. और भी अच्छा लगेगा.”

गेट के अंदर सच में और सुंदरता थी. दोनों ओर पूरा पथ फूलों से सजा हुआ था. कोई ३०० मीटर के बाद क्लब आ गया और सब रुक गए. राशि ने देखा तो उन्हें मात्र २५ मिनट ही लगे थे और क्लब उसके घर से लगभग दस किलोमीटर ही था. गाड़ी रुकते ही नूतन बाहर आई और उसके पीछे दो रोमियो थे. नूतन के होंठों की लिपस्टिक उसके व्यस्त रहने का प्रमाण थी. मंजुल और राशि बाहर आईं तो नूतन ने दोनों का स्वागत किया. गाड़ी शोनाली चला रही थी तो उसने डिक्की खोली और दोनों रोमियो ने राशि के बैग निकाले और अंदर ले गए.

राशि चारों ओर क्लब को देख रही थी. अत्यन्त नयी बनावट का भवन था. मंजुल और नूतन उसे अंदर ले गयीं जहाँ रिसेप्शन देखकर वो प्रभावित हुई. बहुत ही सुंदर कलाकृतियाँ से सजावट की गई थी. कुछ ही पलों में शोनाली गाड़ी लगाकर आ गई. राशि को शीतल पेय दिया और अन्य सबने भी पिया.

“आइये माँ जी, अब आपको पहले आपका कमरा दिखा दें. उसके बाद नूतन आपको पूरे क्लब की यात्रा करवा देगी. आप जब चाहें काम और स्थान समझना आरम्भ कर सकती हैं. आज से दो तीन दिन तक भोजन इत्यादि लेकर कोई न कोई आएगा. उसके बाद जैसा आप चाहें.” शोनाली ने कहा.

शोनाली और मंजुल राशि को उसके कमरे में ले गयीं. कमरे की विशालता और सुंदरता देखकर राशि का मन भावविभोर हो गया. ये उसकी कल्पना से कहीं अधिक था. उसे अपनी बेटी पर गर्व हुआ. दोनों रोमियो उसके बैग रखने के बाद वहीँ खड़े थे.

कमरा एक डबल स्टूडियो था. (स्टूडियो कमरे में बैठक, शयन, रसोई और बाथरूम एक ही कमरे में होते हैं. इनका आकार लगभग ३०० sft होता है.). कमरा लगभग ६०० sft का था, इसीलिए बहुत विशाल लग रहा था.

भोजन करने के लिए एक चार लोगों के योग्य टेबल थी. सोफे और टीवी इत्यादि का प्रबंध भी था. एक कोना ऑफिस के समान बनाया गया था, जहाँ एक लैपटॉप इत्यादि रखे हुए थे. कमरे में दो पलंग लगे थे. इसका कोई औचित्य समझ नहीं आया तो मंजुल ने समझाया.

“ये रूचि मैडम ने लगवाया है. जो वो बड़ा पलंग है, वो आपका है. उसके बड़ा होने का कारण आप समझ सकती हैं. दूसरा अगर आपका कोई अतिथि आ जाये उसके लिए है. रूचि मैडम ने कहा है कि वो, या आपकी दूसरी पुत्री और आपकी सखियाँ हैं. अगर वो आपके साथ रहना चाहें तो अगर आवश्यक न हो तो कोई और कमरा न उपयोग में लाना पड़े.”

राशि को ये तर्क उचित लगा. मंजुल ने कमरे में उपस्थित उपकरण इत्यादि के बारे में समझाया. राशि ने बाथरूम जाकर देखा तो वो भी किसी सात सितारा होटल से कम न था. राशि एक सोफे पर बैठ गई. कमरे में चार अलमारियाँ लगी हुई थीं, हालाँकि अभी राशि के पास इतना सामान नहीं था. एक मिनी रसोई थी, चाय इत्यादि के लिए, पर किसी प्रकार की तलने की मनाही थी.

शोनाली ने इस समय जाने की आज्ञा माँगी तो राशि ने उसे गले से लगाकर धनयवाद किया. शोनाली के जाने पर मंजुल ने पूछा कि क्या वो अपने बैग खोलना चाहती हैं, तो राशि ने मना कर दिया कि मैं स्वयं ही कर लूँगी। उसने चारों अलमारियों का निरीक्षण भी किया, चारों लगभग एक समान थीं. बाथरूम में भी एक कपड़ों के लिए अलमारी थी. राशि ने कहा कि ये उसके लिए पर्याप्त हैं.

जब मंजुल ने कहा कि अब नूतन आपको क्लब घुमा देगी तो राशि ने दोनों रोमियो, जिनमे से एक से वो चुदवा चुकी थी, की ओर देखकर पूछा कि क्या वो यहीं रुकेंगे. मंजुल के कुछ कहने के पहले ही एक रोमियो बोल पड़ा.

“नहीं मैडम. आज नहीं. हम सब कल से आपकी सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे.”

मंजुल ने आगे बात संभाली, “आपके लिए आज कुछ विशेष आयोजन किये गए हैं. कुछ अन्य प्रबंध भी करने शेष हैं. आज से नूतन या मैं भी रात्रि में क्लब में रुकेंगे. एक सप्ताह में एक रहेगी. हमारे तीन रोमियो भी यहाँ रहने के लिए मान गए हैं. उनके लिए भी एक कमरा लगा दिया गया है. आज आप क्लब घूमो, इसके विभिन्न छेत्र देखो और उन्हें किस प्रकार से अधिक उपयोग में लाया जा सकता है इस विषय में सोचो. शाम को आपके लिए विशेष आयोजन है और कल से आप क्लब का प्रबंधन संभाल सकती हैं.”

मंजुल ने बात समाप्त की ही थी कि उसे स्मरण आया, “माँ जी, आपको रोमियो के कमरे में जाने की अनुमति नहीं है. इस विषय पर पार्थ, शोनाली और रूचि मैडम का कठोर आदेश है. कृपया इसका पालन करियेगा.”

राशि को आभास हुआ कि जहाँ पार्थ और शोनाली का नाम लिया गया था, वहीँ रूचि को मैडम करके सम्बोधित किया जा रहा था और उसे माँ जी.”

इसके बाद राशि को नूतन को सौंप कर मंजुल रिसेप्शन के पास के कमरे में गई जहाँ शोनाली बैठी थी. उसे आते देख शोनाली उठी और फिर दोनों क्लब से निकल गए. कार में बैठकर दोनों ने आगे बातें कीं.

“सब ठीक रहा न?” शोनाली ने पूछा.

“हाँ. मुझे नहीं लगता कि वो किसी भी प्रकार की समस्या खड़ी करेंगी. बहुत सादी और सरल महिला हैं.”

“हाँ, ये तो सच है. चलो, आशा है कि इससे आगे भी कुछ लाभ होगा.”

“अभी भी हो ही है.” मंजुल हंसी।

शोनाली ने उसे देखा, “कैसे?”

“अरे रूचि की माँ यहाँ है और पार्थ रूचि को उसके घर पर चोद रहा होगा.”

इस बात पर दोनों हंस पड़े.

राशि को लेकर नूतन क्लब दिखाने लगी. क्लब में कई प्रकार के कमरे और हॉल थे. कुल आठ कमरे थे, जिनमें से सबसे बड़ा राशि को को ही दिया गया था. दो कमरे शोनाली और पार्थ के लिए थे, जिनमें वो रोमियो और नई सदस्याओं का परीक्षण करते थे. इसके बाद पाँच अन्य कमरे थे, ये भी आकार में छोटे थे,पर अन्यथा हर प्रकार से परिपूर्ण. रोमियो का कमरा छोड़कर नूतन ने सभी कमरे दिखाए. इसके बाद तीनों हॉल दिखाए. जिस हॉल में इस माह की पार्टी होनी थी वो सबसे बड़ा था. नूतन ने बताया कि इसमें अन्य प्रबंध एक दिन पहले ही किया जाता है. उसमें एक स्टेज भी बना हुआ था. दो अन्य हॉल भी थे. इन दोनों में १०० लोग आ सकते थे और बड़े वाले में लगभग २५०.

इसके बाद राशि को रसोई दिखाई गई जो एक कोने में थी और एक प्रकार से शेष क्लब से कटी हुई थी. ऐसा इसीलिए था कि इसका उपयोग पार्टी के ही समय अधिक होता है और गोपनीयता के लिए इसे दूर बनाया गया है. राशि ने देखा कि रसोई हर रूप से परिपूर्ण है.

उसका दूर होना ही एक समस्या थी, पर इतनी बड़ी भी नहीं। तो उसने नूतन से अपनी संतुष्टि व्यक्त की. राशि ने एक बार फिर क्लब का चक्कर लगाया. इस बार उसका उद्देश्य क्लब में सुधर और उन्नति करने का था. क्लब का प्रथम उद्देश्य था अतृप्त विवाहित, तलाक या विधवा महिलाओं की शारीरक और उससे सम्बन्धित मानसिक संतुष्टि करना. इस विषय में नूतन से कुछ प्रश्न पूछने आवश्यक थे. कमरों का भी एक बार और निरीक्षण किया गया. शोनाली और पार्थ के कमरों को एक बार फिर देखा गया. राशि के मन में एक योजना थी पर कुछ उत्तर मिलने आवश्यक थे.

इसके बाद वो राशि के कार्यालय में गए. ये पहले एक अस्थाई कार्यालय था जिसे अब क्लब के मुखिया के अनुसार परिवर्तित कर दिया गया था. राशि को उसके स्थान पर बैठाने के बाद नूतन उसके सामने बैठ गई.

“माँ जी, पहले तो आपको बधाई हो. हमें पूरा विश्वास है कि आपके निर्देशन में क्लब अब और उन्नति करेगा. अब तक इसे एक हॉबी या रूचि के रूप में चलाया जा रहा था. रूचि मैडम के जुड़ने से कुछ व्यावसायिकता में बढ़ोत्तरी हुई है. अब आपके आने से उसमें और प्रशस्ति होगी.”

“मैं प्रयास करुँगी, मैंने पहले कभी कोई व्यवसाय नहीं सँभाला है. पर मैं अपनी पूरी निष्ठां से कार्य करूंगी.”

“वैसे माँ जी. मेरा भी एक छोटा सा व्यापार है, तो मैं कुछ तो आपकी सहायता कर ही सकती हूँ.”

“ये अच्छा रहेगा, पर अब मुझे क्लब के विषय में कुछ प्रश्न पूछने हैं. ये वित्त संबंधी नहीं हैं. वो कार्य रूचि का है और वही देखेगी. मुझे क्लब के सामान्य कार्य-कलापों में अधिक रूचि है.”

इसके बाद राशि ने कई प्रश्न पूछे जिनका उत्तर देते देते नूतन समझ गई कि रूचि की अपार बुद्धि और सफलता का श्रोत क्या है. उसे विश्वास था कि अब क्लब को सफल होने से कोई रोक नहीं सकता.

दोपहर का भोजन भी हुआ और शाम भी हो गई. राशि पूरी तन्मयता से अपने कार्य में लगी हुई थी. नूतन उसे लगभग हर प्रश्न का उत्तर देने में सक्षम थी. परन्तु कुछ उसके लिए भी कठिन थे. राशि एक डायरी में ये सब लिख रही थी. प्रश्न, फिर उत्तर. उनसे निकले अन्य प्रश्न और अनुत्तरित प्रश्न. इस बीच में वो दो बार कुछ विशेष स्थानों को देखने के लिए भी गई. चूँकि पूरे क्लब में CCTV का विस्तार था तो किन स्थानों पर कैमरे हैं ये भी जानना आवश्यक था. कैमरे सामान्य कैमरों के समान बाहर दिखाई नहीं देते थे पर थे अत्यंत शक्तिशाली.

शाम को छह बजे तक राशि यूँ ही कार्यरत रही. नूतन भी उसकी क्षमता से प्रभावित हो गई. छह बजे दोनों राशि के कमरे में लौटे. राशि स्नान करने के लिए गई तो नूतन एक सोफे पर बैठी टीवी पर कुछ देखने में व्यस्त रही. राशि स्नान के बाद एक बहुत झीना गाउन पहन कर बाहर आई. सोफे पर बैठने से पहले उसने कमरे में बने बार में से दो बियर के कैन निकाले. एक नूतन को देते हुए वो भी टीवी देखने लगी.

“तो क्या विशेष आयोजन है आज? क्लब में तो मुझे कोई हलचल नहीं दिख रही है.” इससे पहले कि नूतन कुछ कहती राशि ने आगे कहा, “इससे मुझे ध्यान आया. क्या मुझे यहाँ पर CCTV के कैमरों को देखने का प्रावधान हो सकता है? तो अगर हो सके तो एक रिकॉर्डर की व्यवस्था कर दो. हमारी बातें अगर में आज रिकॉर्ड कर पाती तो अच्छा रहता.”

नूतन बोली, “ठीक है, मैं बोल देती हूँ. जो भी कल दोपहर का खाना लाएगा वो ये दोनों वस्तुएँ भी ले आएगा. अगर कुछ और भी हो तो दस बजे तक बता दिजियेगा. लाइए आपके फोन में मैं अपना और मंजुल का नंबर डाल देती हूँ.”

“हाँ और शोनाली का भी डाल दो.”

“ठीक है.”

तभी कमरे पर किसी ने खटखटाया.

“लगता है आपका विशेष आयोजन आ गया.”

राशि ने स्वयं की कमरा खोला तो पार्थ को खड़ा पाया. उसके हाथ में एक बैग था, जिसमें खाना था.

“ओह! पार्थ तुम?” राशि ने आश्चर्य से पूछा.

“जी. और आपका खाना लाया हूँ.”

“वो तो ठीक है पर तुम तो रूचि के.....”

“उसने ही भेजा है.” पार्थ ने मुस्कुराते हुए कहा तो राशि को ‘उन्होंने’और ‘उसने’ का अंतर सुनाई दिया. इसका अर्थ था कि वे दोनों निकट आ रहे थे.

“कह रही थी कि मेरी माँ नए स्थान पर गई हैं. तो उन्हें कहीं डर न लगे. तो रात में उनके साथ सो जाना.” पार्थ के चेहरे की मुस्कराहट बनी रही. पीछे से नूतन की हँसी का स्वर गूँज उठा. राशि का चेहरा लाल हो गया. वो कुछ भी न कह सकी. वो एक ओर हट गई और पार्थ अंदर आ गया.

नूतन: “मैं अपने कमरे में जाती हूँ.”

राशि: “नहीं. अभी रुको. मैंने आज बहुत कुछ समझा है. मैं चाहती हूँ कि कल रूचि और शोनाली, आ जाएँ जिससे कि मैं अपने सुझाव तुम तीनों को बता सकूँ. अगर तुम सबकी सहमति मिली तो कुछ परिवर्तन और कुछ वृद्धि करना चाहूँगी। इसमें व्यय बहुत अधिक नहीं आना चाहिए, परन्तु हमारी आय में कुछ वृद्धि अवश्य होने की संभावना है.”

पार्थ: “ठीक है. मैं दोनों को कहता हूँ. बुआ रूचि के साथ ही आ जाएँगी.”

पार्थ ने दोनों से फोन पर बात की तो रूचि ने शोनाली को अपने साथ लेकर आने का विश्वास दिलाया.

“चलिए, ये हो गया.”

“मेरा एक अनुरोध भी है. चूँकि नूतन और मंजुल अब यहाँ रात में रुकेंगी तो मैं चाहूँगी कि उन्हें शोनाली का कमरा दिया जाये. इस विषय में कल हम विस्तार से बात कर सकते हैं, पर आज क्या वो उस कमरे में रह सकती है?”

“अवश्य, इसमें कोई समस्या ही नहीं है. इन दोनों को वैसे भी किसी भी कमरे में रहने की अनुमति है, इस कमरे में भी. भले इनके पास क्लब की भागीदारी न हो, पर ये क्लब की सबसे महत्वपूर्ण प्रबंधक हैं. इन्हें किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है.”

ये सुनकर नूतन की आँखें भीग गयीं.

पार्थ: “चलिए, अब खाना खाया जाये.” ये कहकर उसने टेबल पर पैकेट रखा.

दोनों रोमियो को भी बुला लिया गया और चार की टेबल पर पाँचों ने प्रेमपूर्वक भोजन किया. भोजन समाप्त होने से पहले पार्थ ने नूतन को संकेत कर दिया था. प्लेट इत्यादि हटाकर उन्हें एक ओर रखा तो एक नई समस्या का ध्यान आया. बर्तन धोने का कार्य कौन करेगा. किसी भी क्लब के कर्मी को ये कार्य देना उचित नहीं था. एक बर्तन धोने की मशीन लगी थी, पर उसे एक अकेले के लिए चलना व्यर्थ था. राशि ने कहा कि इस विषय में अभी चिंता नहीं करते हैं. दो तीन दिनों में कोई समाधान निकल ही जायेगा.

नूतन ने कहा कि अब वो जाना चाहेगी. उसने दोनों रोमियो को भी कहा कि वे भी अपने कमरे में जाएँ. उनके जाने के बाद राशि ने पार्थ से बैठने को कहा.

“मुझे ये जानना है कि मुझे पूरे क्लब में जाने का अधिकार है, केवल इन लड़कों के कमरे में नहीं, ऐसा क्यों?”

“क्योंकि आप क्लब की मुख्य प्रबंधक हैं. आपके उनके पास जाने से उनके मन में आपके प्रति आदर कम या समाप्त हो जायेगा. आपके कमरे में आकर आपको चोदना उन्हें आपके अधीन रखता है. ऐसा करने से आप उन पर आश्रित हो जाएँगी.”

“ये बात सही है. तुम्हारी सोच ठीक है.”

“ये रूचि का नियम है. यहाँ आने के पहले उसने कुछ नियम बनाये हैं. केवल यही ऐसा है जिसमें आप पर अंकुश है. शेष नियम अन्य लोगों के लिए हैं. मैं आपको बताता हूँ.”

पार्थ ने अन्य नियम बताये, जिनका सार ये था कि राशि को पूर्ण सम्मान दिया जाना चाहिए. राशि के बुलाये बिना कोई भी रोमियो उनके कमरे में नहीं जायेगा. कोई कार्य होने पर नूतन या मंजुल को बताकर राशि से मिल सकते हैं. राशि को समझ आया कि इन नियमों के बिना उसे यहाँ रहने में अड़चनें आना स्वाभाविक था. उसने पार्थ को धन्यवाद किया.

पार्थ: “तो अब मुख्य बात. मुझे रूचि ने आज रात्रि आपके साथ रहने के लिए इसीलिए कहा है कि आपके क्लब में जुड़ने के लिए जो आवश्यक नियम था उसे त्याग दिया था. पर अब आप अगर यहाँ रहेंगी और प्रबंधन करेंगी तो उसका पालन करना ही होगा.”

राशि: “ओह, और वो क्या नियम है?”

पार्थ: “आपकी चुदाई. आज मुझे आपके मुँह, चूत और गाँड तीनों को अपने रस से भरना है. जो स्त्रियाँ जिन्होंने पहले गाँड नहीं मरवाई होती हैं, अगर वो संकोच करें तो उन्हें इसके लिए विशेष सत्र के लिए बुलाया जा सकता है. उनकी सदस्यता उसके बाद ही स्वीकृत होती है. आज आपको मेरी हर आज्ञा माननी होगी. कल से सब सामान्य हो जायेगा.”

राशि का मन मचल उठा. “तो मुझे क्या करना है?”

पार्थ के चेहरे पर मुस्कराहट फ़ैल गई, “आपको ये भूलना होगा कि आप रूचि की माँ नहीं हैं. आपको मेरी आज्ञा माननी होगी.”

राशि इठलाते हुए बोली, “कौन रूचि?”

पार्थ हंस पड़ा. “जाइये पहले स्नान करके आइये. और पोंछियेगा नहीं, यूँ ही आइयेगा।फिर आपका क्लब में स्वागत समारोह करेंगे.”

“मुझे भी भीगे शरीर में चुदना बहुत अच्छा लगता है.” राशि ने उत्तर दिया और नहाने चली गई.

पार्थ अपने कपड़े उतारकर बियर लेकर सोफे पर बैठ गया. अपने फोन से उसने एक संदेश भेजा. उसे तुरंत ही उत्तर मिल गया. वो मुस्कुराया और खड़ा हो गया. वो अपनी प्रेयसी की बात कैसे टाल सकता था.

**************

उधर नूतन की आज लॉटरी लगी हुई थी. कार्य में व्यस्तता और सदस्याओं की अपेक्षाओं को पूरा करने में उसे अपनी इच्छा की पूर्ति का कम ही अवसर मिलता था. आज पार्थ उसे दोनों रोमियो की सेवाएँ उपयोग करने के लिए कहा था. जब पार्थ ने उसे संकेत दिया था तब उसने उसका अर्थ उल्टा समझा था. उसने पार्थ की दो उँगलियाँ का हिलाने कर अर्थ ये समझा था कि पार्थ राशि के साथ उसे भी चोदना चाहता है. पर पार्थ ने तुरंत ही दोनों रोमियो की ओर ऑंखें कीं तो नूतन को समझ आया और उसका मन उछल गया. और अब वो शोनाली के लिए आरक्षित कमरे में उन दोनों के बीच सिमटी हुई खड़ी थी.

उसे आगे और पीछे से दोनों मसल रहे थे पर उनके होंठ उसके होंठों और गर्दन पर ठीके हुए थे. नूतन को कई दिनों बाद ये सुअवसर प्राप्त हुआ था. अधिकांश बार उसे अपनी प्यास क्लब में उपस्थित किसी रोमियो से ही बुझानी पड़ती थी. पर आज वो इस राजसी कक्ष में इसका आनंद ले रही थी. तीनों के कपड़े कमरे में कहीं तितर बितर पड़े थे. उन्हें अगर ध्यान था तो एक दूसरे के नंगे शरीरों से धधकती ज्वाला का जो उन्हें झुलसा रही थी.

“आप पहली बार हाथ में आई हो मैडम! हमें तो आप देखती भी नहीं हो!” पीछे से उसे मसलते हुए रोमियो ने कहा तो नूतन ने घर श्वास भरी पर कुछ कहा नहीं. इस समय उसके कहे हुए कथन उसे बाद में हानि पहुंचा सकते थे. वैसे भी को कुछ बोलने के लिए अक्षम थी क्योंकि उसके होंठ तो सामने वाले रोमियो ने अपने होंठों से जोड़े हुए थे. पर सामने वाले रोमियो ने अपने होंठ हटाए और उसे डपटा.

“ये बकवास मत करना. इस क्लब में हमारा स्थान है, उससे अधिक उड़ने का प्रयास मत करना. आगे आकर मैडम से क्षमा माँगो।”

ये सुनकर उस रोमियो की गाँड फट गई वो आगे आया और नूतन के पैरों में गिरकर उससे क्षमा माँगने लगा.

“उठो. और जिन नियमों को तुम्हें समझाया था उन्हें फिर से पढ़ना कल. अब कुछ मत बोलो और जिस कार्य के लिए मेरे पास आये हो उसे अपनी क्षमता के अनुरूप पूरा करो.”

“जी मैडम। एक बार फिर मैं सॉरी बोल रहा हूँ.”

नूतन ने उन दोनों रोमियो को देखा जो उसके सम्मुख थे. धीरज जिसने अभी क्षमा माँगी अपना सिर झुकाये खड़ा था. और दूसरा सुक्खी (सुखविंदर) था. नूतन को ये देखकर सांत्वना मिली कि धीरज का केवल सिर ही झुका था, लौड़ा अभी भी पूरे वैभव में था.

“ओके, धीरज. अब आगे से ध्यान रहे. पार्थ और शोनाली नियमों के लिए बहुत कठोर हैं. पर इस व्यवधान से बहाव टूट गया है तो जाओ सबके लिए ड्रिंक लेकर आओ.”

***********

जैसा रूचि का संदेश था उसको मानकर पार्थ भी बाथरूम में घुस गया. राशि अभी स्नान ही कर रही थी. उसने नंगे पार्थ को देखा तो वो कुछ शर्मा गई. पार्थ उसकी बेटी का प्रेमी जो था.

“मैंने सोचा कि स्नान तो मुझे भी करना ही है, तो क्यों पानी व्यर्थ किया जाये.” ये कहते हुए पार्थ राशि से सट गया. ऊपर से फौहारा दोनों को भिगोने लगा.

पार्थ ने राशि को अपनी बाँहों में समेटा और उसे चूम लिया. राशि ने उसका साथ दिया और फौहारे के नीचे दोनों एक दूसरे से लिपट गए. पार्थ ने चुंबन तोड़ा और राशि के कंधे पर हाथ रखा. राशि ने उसे देखा तो पार्थ मुस्कुरा रहा था। पार्थ ने राशि के कंधे पर दबाव डालते हुए उसे नीचे बैठा दिया.

“मैं सोच रहा हूँ कि आप मुझे मुख मैथुन का आनंद यहीं दे दें तो अच्छा होगा.”

पार्थ ने अपने लंड को राशि मुँह से लगा दिया. फौहारे के पानी को कुछ कम कर दिया जिससे कि राशि को कठिनाई न हो. राशि ने मुँह खोला और पार्थ के विशाल लंड को निगल लिया. क्लब के रोमियो से चुदवाने का अनुभव होने के कारण राशि को पूरा लौड़ा मुँह में लेने में अधिक कठिनाई नहीं हुई. पार्थ ने उसके भीगे बालों में हाथ घुमाया और फिर राशि को उसका कार्य करने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया. वो चाहता था कि वो एक बार झड़ जाये जिससे कि अगली बार अधिक समय तक चुदाई कर सके. उसने अभी ये निर्णय नहीं लिया था कि वो पहले राशि की गाँड मारेगा या उसकी चूत को भोगेगा.

राशि अपनी पूरी तन्मयता से पार्थ के लंड को चूसने में मग्न थी. ऊपर गिरती हल्की पानी की फौहार उसे भली लग रही थीं. आज पहली बार वो स्नान करते हुए किसी का लंड चूस रही थी और उसे आशा थी कि अब ये एक नियमित घटना हो जाएगी. राशि ने लंड चूसने में अधिक जोर लगाया पार्थ ने उसकी सहायता करने हेतु उसके मुँह में अंदर बाहर करके उसके कार्य को सरल बनाने का प्रयास किया. राशि के दस मिनट के परिश्रम के फलस्वरूप पार्थ ने उसे बताया कि वो झड़ रहा है और राशि को पूरा रस पीना है. पार्थ ने फौहारा बंद किया जिससे राशि को पूरा पानी पीते हुए देख सके.

जब पार्थ ने झड़ना आरम्भ किया तो राशि ने अपना अनुभव दिखाया. पार्थ को आशा थी कि कुछ रस बाहर गिरेगा. पर राशि ने स्वयं को इस प्रकार से उसके नीचे आसन लगाया कि जो रस मुँह में नहीं गया वो उसके वक्ष पर गिरा. जब पार्थ का झड़ना बंद हुआ तो राशि ने लंड चाटा और अपने स्तनों पर गिरे रस को उँगलियों में लेकर चाट लिया.

“ये स्वीकार्य है न?” पूरा रस ग्रहण करने के बाद राशि ने पूछा.

“हाँ. और आप सच में निपुण हैं. मुझे बहुत आनंद आया, इस प्रकार से पानी की बौछार के नीचे लंड चुसवाने में.”

“और मुझे चूसने में.”

पार्थ ने फिर से फौहारा चला दिया. राशि ने पानी से कुल्ला किया। पार्थ ने केवल भीगने के ही लिए फौहारा चलाया था और उसे बंद कर दिया. फिर राशि का हाथ पकड़कर वो कमरे में आ गया.

“पार्थ कुछ पूछूँ?”

“जी”

“क्या तुम रूचि के लिए गंभीर हो?”

पार्थ ने गहरी श्वास ली, “हाँ, पर रूचि विरोध कर रही है. उसके अनुसार उसका मुझसे पंद्रह वर्ष बड़ा होना एक बड़ी अड़चन है. मुझे इसमें समस्या नहीं है.”

“मैं उसका कारण समझ रही हूँ, मैं कल सुबह तुम्हें बताऊँगी। क्या तुम जानते हो कि उसने कई दिनों से किसी भी अन्य पुरुष को छुआ भी नहीं है?”

“हाँ. मैंने उसे इस प्रकार से बंधने के लिए मना किया है. वो कहती है कि ये मेरे लिए आवश्यक हो सकता है, उसके लिए नहीं. इसका मेरे पास कोई उत्तर नहीं है.”

राशि पलंग पर बैठी तो पार्थ उसे देखने लगा. राशि कुछ देर में शर्मा गई.

“क्या देख रहे हो?”

“रूचि की सुंदरता का रहस्य. और नूतन ने जो बताया है उसके अनुसार उसकी प्रखर बुद्धि का स्त्रोत भी.”

“ऐसा कुछ नहीं है. मैं समझने के लिए ही प्रश्न पूछ रही थी.”

“किस समय, किससे क्या पूछना है, यही जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान होता है. चलिए उसके विषय में कल विस्तार से चर्चा करेंगे. रूचि और मामी १० बजे आएंगे.”

“तब तक के लिए मैं तुम्हारी आज्ञा मानने को विवश हूँ. पर मैं क्या पहले मेरी गाँड मारने का अनुरोध कर सकती हूँ?”

“आप अनुरोध कर सकती हैं, उसे मानना मेरी इच्छा पर निर्भर है. पर मैं आपसे सहमत हूँ. मैं भी इस सुंदर चिकनी गाँड मारने के लिए लालायित हूँ.”

राशि ये सुनकर तुरंत घोड़ी के आसन में आ गई और अपनी गाँड हिलाने लगी. राशि की इस चपलता को देखकर पार्थ के लंड ने करवट ली और फनफनाकर फुँफकारने लगा.

“हाय रे, कैसे नाच रहा है मुझे देखकर.” राशि ने कहा.

“हाँ. पर कह रहा है कि इसे इसके साथ नाचने वाली भी चाहिए.” पार्थ ने उसके पास आकर कहा और धीरे से राशि को आगे झुका दिया.

इस आसन में राशि की गाँड अब उसके सामने आ गई. पार्थ ने एक बार तो सोचा कि उसका स्वाद ले, फिर उसे दूर कर दिया. उसने टेबल की ओर देखा जहाँ जैल की ट्यूब होनी चाहिए थी. पर वहाँ कुछ न दिखा.

“रुकिए, मैं जैल लेकर आता हूँ.” पार्थ ने कहा तो राशि ने उसे रोका.

“मैंने ही हटाया था उसे. स्वाभाविक और प्राकृतिक ढंग से ही मारो. जैसे तुमने रूचि की मारी होगी.” राशि ने कहा तो पार्थ ने सोचा कि इन्हें कैसे बताऊँ कि राशि की गाँड जब पहली बार मारी थी तो नितिन का लौड़ा उसकी चूत में था. परन्तु उसने सास-तुल्य राशि की बात मान ली. गाँड को उसने थूक सी गीला किया और उँगलियों से उसे स्वाभाविक रूप से खोलने की चेष्टा करने लगा. जब उसे लगा कि अब राशि की गाँड मारने के योग्य हो गई है तो उसने उँगलियाँ निकालीं.

“ध्यान रहे, सासू-माँ, आज मेरी इच्छा चलेगी और कल से आपकी.”

पार्थ के मुँह से सासू-माँ का सम्बोधन सुनकर राशि का मन प्रफुल्लित हो गया.

उसने पीछे मुड़कर देखा और बोली, “पार्थ, मैं जानती हूँ कि रूचि तुमसे प्रेम करने लगी है. तुम्हारे और रूचि के बीच में जो भी हो, मैं तुम्हें मन में अपना दामाद स्वीकार कर चुकी हूँ. और आज मैं तुम्हें अपना तन और मन दोनों न्यौछावर कर रही हूँ. आज मैं पूर्ण रूप से तुम्हारी हूँ. आज तुम्हारी हर इच्छा पूरी करना मेरा कर्तव्य है.”

पार्थ ने अपने लंड के टोपे को गाँड के छेद पर रखा और दबाव बनाया. फक्क की धीमी ध्वनि के साथ सुपाड़े ने अंदर प्रवेश कर लिया, और रही की हल्की सी आह निकल गई. पार्थ चाहता तो दो या तीन धक्कों में ही अपने लंड का प्रताप दिखा सकता था. परन्तु राशि की भावनात्मक वचन के कारण वो अत्यंत धीमे लंड को एंड की ओर धकेल रहा था. समय के साथ उसका लौड़ा राशि की गाँड में अपना आधिपत्य जमा रहा था. राशि श्वास रोके हुए पार्थ के लंड को अपनी गाँड की गहराइयों में बढ़ता हुआ अनुभव कर रही थी. अचानक ही वो चिहुंक पड़ी. उसे लगा कि उसकी गांड अब पूर्ण रूप से बंद हो चुकी है. पार्थ के लंड का अवसान भी रुक गया था. उसने पीछे देखा। पार्थ के चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे. और इसका एक ही अर्थ था कि पार्थ उसकी गाँड पर विजय प्राप्त कर चुका था.

“क्या?”

“आपकी गाँड बहुत टाइट है, सासु माँ. और बहुत बहुत गर्म. ऐसा लग रहा है जैसे किसी भट्टी में लंड डला हुआ है.”

“सब तुम्हारे ही लंड का प्रताप है बेटा। इतने दिनों से गाँड मरवाने के बाद भी आज जो सुख और संतोष मिल रहा है उसका वर्णन करना भी मेरे लिए सम्भव नहीं है. कुछ देर यूँ ही रुके रहो. बाद में जो करना हो कर लेना.”

पार्थ ने उनके मम्मों को अपने हाथों में लिया और उनसे खेलने लगा. उसका लंड उसी प्रकार से राशि की गाँड में स्थापित रहा. पर राशि की चूत ने रोना आरम्भ कर दिया. उसके आँसुओं की धारा इतनी तीव्र हो गई कि बिस्तर भीगने लगा. पार्थ को उसके स्त्राव की सुगंध आई तो उसने एक हाथ मम्मों से हटाकर उसके भग्नाशे पर रखा और उसे छेड़ने लगा. गाँड में लौड़ा, और मम्मे और भग्न से छेड़छाड़ के कारण राशि का शरीर काँपने लगा. उसकी चूत से रस की धार और बढ़ गई.

पर पार्थ रुका नहीं. बल्कि उसके इसे सही समय मानकर अपने लंड को धीमी गति से राशि की गाँड में अंदर बाहर करना आरम्भ कर दिया. राशि की कामोत्तेजना और बढ़ गई. उसके मुँह से सिसकियों की ध्वनि अब और तेज होने लगीं.

“उई माँ. उई माँ!” राशि की ये बात सुनकर पार्थ ने अपना लंड पूरा बाहर खींचा और एक शक्तिशाली धक्के के साथ रही की गाँड में जड़ दिया. रही की सिसकारी बंद हो गई और चीखें निकलने लगीं.

“मैंने कहा था सासू माँ. आज मैं जैसे चाहूँगा वैसे चोदुँगा। आपकी मलमली गाँड बहुत आनंद देने वाली है.” पार्थ ने गुर्राते हुए कहा तो राशि की गाँड फट गई. ये दुष्ट गाँड तो मार ही रहा है अब और क्या करेगा?

परन्तु अब उसके वश में नहीं था. पार्थ ने अपने पूरे लौड़े को न केवल उसकी गाँड में डाला हुआ था बल्कि वो अब उसकी गाँड को मथ रहा था जैसे ओखली में किया जाता है. राशि ने अपनी गाँड को ढ़ीला किया और ऐसा करते ही उसके शरीर में आनंद की एक लहर दौड़ गई. पार्थ ने लंड की गति बढ़ा दी और राशि की सिसकारियों और चीत्कारों के बीच का अंतर मिटने लगा.

“क्या मस्त गाँड है सासू माँ. इतने दिन तक इसे क्यों छोड़ा इसका खेद रहेगा मुझे। पर अब मुझे रूचि से अनुमति लेनी होगी. जब भी में क्लब में आऊँ तो एक बार इस गाँड का आनंद लेकर ही जाऊँ। अगर रूचि मान गई तो सच में मैं उसकी हर बात मान लूँगा।” पार्थ बोल तो रहा था पर इसका अनुकूल प्रभाव राशि पर पड़ रहा था. वो स्वयं भी यही चाहती थी और उसे आशा थी कि रूचि उसकी बात नहीं टलेगी. और सम्भव हुआ तो शुचि को भी पार्थ की भेंट चढ़ा देंगे.

पार्थ के धक्के अब तीव्र थे और राशि होनी गाँड उछाल उछाल कर उसके लंड को अपनी गाँड में ले रही थी. सास दामाद (झूठे ही सही) इस कामक्रीड़ा में पूरे डूबे हुए थे. कमरे में ठप ठप की ध्वनि छाई हुई थी.

राशि इतने दिनों से रोमियो से चुद रही थी कि उसे उनकी क्षमता का पूरा अनुभव था. पार्थ भी उसपर भलीभांति खरा उतर रहा था. गाँड मारने में न उसकी गति कम हुई न ही धक्कों की शक्ति. राशि की गाँड ने अवश्य हार मान ली थी, पर वो अब विवश थी. जब तक पार्थ स्वयं नहीं झड़ता तब तक उसे मुक्ति नहीं मिलनी थी. राशि की आत्मा शांत हो गई. उसे अपने दामाद की शक्ति पर गर्व हो रहा था और अपनी बेटी के भाग्य से ईर्ष्या.

कई मिनट तक राशि की गाँड का भर्ता बनाने के बाद पार्थ ने झड़ने की घोषणा की. और राशि की गाँड में अपना वीर्यपात कर दिया. पार्थ इसके बाद भी राशि की गाँड मारता रहा और फिर अंततः जब उसका लंड सिकुड़ गया तो उसे बाहर निकाला.

“सासू माँ. बहुत आनंद आया आपकी गाँड मारकर. अब इससे दूर नहीं रहा जा सकता.”

“तेरी ही बेटा, जब चाहे आकर मार लिया कर.”

“पर अभी आपको मेरे लंड को साफ करना है.”

राशि को इससे कोई आपत्ति नहीं थी सो उठकर उसने पार्थ के लंड को चाटकर चमका दिया. और फिर लगी.

पार्थ हंस पड़ा, “क्या हुआ सासू माँ?”

“मुई चूत बहुत तरस रही है इसके लिए.”

पार्थ ने अपने लंड को उन्हें चूसने दिया क्योंकि वो स्वयं आज पूरी रात अपनी कथित सासू माँ की चूत और गाँड का निर्विघ्न भोग लगाने के लिए आतुर था. उसका ध्यान एक बार के लिए नूतन की ओर गया जो आज दो रोमियो से चुदवा रही थी. पर उस विषय में उसने बाद में विचार करना ही उचित समझा. रही के सिर को सहलाते हुए वो अपने लंड को उसके मुंह में चलाने लगा.

रात शेष थी और चुदाई की गाथा भी.

क्रमशः

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अध्याय ४९

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दृश्य ६: मिशेल का तलघर:

मिशेल अपने तलघर के तरणताल में बैठी अंदर देख रही थी जहाँ ईव की भयंकर चुदाई चल रही थी. पार्थ और नितिन ने ईव को सैंडविच बनाया हुआ था. पार्थ नीचे लेटे हुए ईव की चूत चोद रहा था तो नितिन उसकी गांड मार रहा था. मिशेल स्वयं इस समय अकेली बैठी हुई बियर के घूँट ले रही थी. इन दोनों युवकों से वो कुछ देर ही पहले इसी प्रकार से चुदी थी, बस लंड और छेद भिन्न थे. पार्थ के लंड ने उसकी गांड में बहुत तहलका मचाया था.

“याह, इट वास ग्रेट. मामी इस गेटिंग फक्ड वेल नाउ.” डेविड ने कहा तो मिशेल ने अंदर झाँका जहाँ ईव की चुदाई में कोई कमी नहीं आई थी, “पर मॉम, आप अधिक देर तक अकेले नहीं रहने वाली. मार्क और डैड भी आ चुके हैं पर अभी ऊपर हैं. मामा भी आने ही वाले होने इसीलिए रुके हैं.”

“ओह! गुड. आई वांट टू गेट फक्ड अगेन!” ये कहते हुए मिशेल ने बियर का एक घूँट लिया.

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थोड़ी ही देर में तलघर की सीढ़ियों पर पदचाप सुनाई दी तो मिशेल की चूत पनिया गई. सामने ईव की चुदाई का अंतिम चरण प्रगति पर था. और अगर उसका अनुमान सही था तो नितिन झड़ चुका था क्योंकि उसकी कमर के झटके अत्यंत धीमे थे. मार्क ने सीटी बजाई।

“आंट मॉम इस गेटिंग फक्ड. वाओ. और आप भी लगता है कि चुदने के लिए रेडी हो.”

“आई एम आल्वेस रेडी तो फक. कम हियर। गिव मी योर कॉक.” मिशेल ने मार्क को अपने निकट खींचा और उसके लंड पर हाथ फेरा.

“ओके, आंटी।” ये कहकर मार्क ने अपने कपड़े उतारे और मिशेल के सामने खड़ा हो गया. मिशेल ने उसके लंड को मुँह में लिया ही था कि उसे लगा कि उसने किसी और को भी देखा. उसका अनुमान सही था. उसका भाई जैसन और पति रिचर्ड भी आ चुके थे और उन्हें चल रहे कार्यक्रम को देखकर ही समझ आ गया था कि आज भी पूरी रात चुदाई में निकलने वाली है. दोनों ने अपने लिए बियर ली और एक ओर शांति से चल रहे खेल को देखने लगे.

नितिन ईव की गाँड मारकर उसमें पानी छोड़ चुका था और अब अपने लंड को बाहर खींच रहा था. ईव का शरीर शिथिल था, हालाँकि उनके मुंह में डेविड का लंड डला हुआ था. नितिन ने उठकर ईव को सहायता देकर पार्थ के लंड से हटाया. डेविड को अपना लंड ईव के मुँह से निकालना पड़ा. ईव के हटने से पता चला कि उसकी चूत पार्थ के वीर्य से भरी हुई थी. ईव की अवस्था देखकर डेविड ने उसे अपना लंड दोबारा खिलाने का प्रयास नहीं किया. हालाँकि नितिन ने एक प्रयास किया.

“क्लीन अप?” अपने लंड की ओर संकेत करते हुए ईव से पूछा तो ईव ने मना कर दिया. सामान्य रूप से उसे इसमें आपत्ति नहीं होती, पर उसका पति बाहर दिख रहा था और ऐसा करने के बाद वो उसे चूम नहीं सकती थी.

“तुम्हारी मॉम्स कब आएंगी?” ईव ने पूछा. आज के लिए सुमति और सुप्रिया को भी आना था, पर अब तक दोनों नहीं आये थे.

“ओह! वो कभी भी आ सकते हैं. मॉम ऑफिस से निकल चुकी होंगी.” नितिन ने बताया.

ईव और शैली समर्थ के घर गए हुए थे. यही निर्धारित हुआ था. इससे इन परिवारों का मिलन एक निचले स्तर पर हो रहा था. इससे अधिक इन दिनों की सफलता पर निर्भर था. ईव उठकर बाथरूम चली गई, तो पार्थ, नितिन ने कपड़े पहने. हालाँकि डेविड ने इसे व्यर्थ बताया पर वे दोनों रिचर्ड और जैसन के सामने अभी नंगे जाने में हिचकिचा रहे थे. बाहर गए तो रिचर्ड ने उन्हें बियर का न्योता दिया जिसे दोनों सहर्ष स्वीकारा. तभी घर की घण्टी की ध्वनि सुनाई दी तो रिचर्ड ऊपर चला गया. मिशेल ने मार्क को हटाया और उसे कपड़े पहनने को कहा. जब तक रिचर्ड अपने अतिथियों के साथ नीचे आया तब तक सभी सामान्य वेश में आ चुके थे और लगभग सभी बियर पी रहे थे. मिशेल खड़ी हो गई.

रिचर्ड आया तो उसके साथ सुप्रिया और सुमति थीं. पार्थ और नितिन को देखकर उनकी माताओं के चेहरे खिल उठे. कार्यक्रम के अनुसार आज सभी लड़कों और उनकी माताओं को यहाँ रहना था और लड़कियों को वहाँ। किन्ही कारणों से निखिल और सजल पहले नहीं आ पाए थे. दोनों सुरेखा के साथ ऑफिस से कार्य से बाहर गए थे और सम्भवतः रात आने की संभावना थी. मिशेल ने सुप्रिया और सुमति को गले लगाया और उनके गाल चूमे. सुप्रिया और सुमति ने भी उसके गाल चूमे. फिर यही प्रक्रिया ईव के साथ हुई. फिर चारोँ महिलाएं एक ओर बैठ गयीं.

रिचर्ड और डेविड ने अतिथियों के स्वागत में उनसे उनका प्रिय पेय पूछा और फिर बियर दे दी गई. कुर्सियाँ पास खींच कर सब एक गोले में बैठ गए. जैसन के परिवार के बारे में उत्सुकता था. उसने और ईव ने अपने जीवन कथा संक्षिप्त में सुनाई. पार्थ और नितिन ने आज पहली बार किसी अश्वेत महिला की चुदाई की थी. अब तक उनका अनुभव भारतीय मूल की स्त्रियों तक ही सीमित था. पार्थ ईव को अपने क्लब से जोड़ने के विषय में चिंतन कर रहा था. ईव के जुड़ने से उनके क्लब में भी विविधता आएगी. क्या उसे मिशेल को भी जोड़ना पड़ेगा? क्या जैसन और रिचर्ड स्वीकृति देंगे? जिस सरलता से ईव ने उन दोनों के लौड़े लिए थे, उससे ये अवश्य लगता था कि वो इनकी अभ्यस्त है. तो क्या वो अपने देश में भी दूसरों से चुदती है?

इन सब विषयों के बारे में जहाँ पार्थ स्वयं में खोया था, वहीँ अन्य सभी इस जीवन शैली को अपनाने के विषय में बात कर रहे थे. एक दूसरे के बारे में जानने के लिए उत्सुक थे. इस प्रकार की जीवनशैली कितने भिन्न वातावरण में भी स्वाभाविक रूप से पनप सकती है ये एक सुखद आश्चर्य का विषय था. जहाँ बड़ों को आगे जानने और बातें करने की इच्छा थी, वहीँ युवा अपना संयम खो रहे थे. डेविड और मार्क विशेषकर अब तक सुप्रिया और सुमति को देखकर अपने लौड़े न जाने कितनी ही बार अपने पैंट में चुके थे. ये किसी से छुपा न था, पर कोई इस पर कुछ कह भी नहीं रहा था. जब लगा कि बातों में समय अधिक निकल रहा है तो डेविड ने पहल की.

“मॉम, डैड. मैं अशिष्ट नहीं सिद्ध होना चाहता पर यहाँ पार्थ और नितिन दोनों मॉम और मामी को चोद चुके हैं. हम बहुत समय से आंटियों की प्रतीक्षा में थे, पर यहाँ तो कोई आशा ही नहीं दिख रही है.”

उसकी बात सुनकर सब अचम्भित हो गए. डेविड इस प्रकार से कभी अपनी भावनाओं को दिखाता नहीं था, वो भी अतिथियों के सम्मुख तो कभी नहीं. इससे पहले कि रिचर्ड कुछ बोलता मिशेल ने बात संभाली.

“तुम ठीक कह रहे हो. हम चाह रहे थे कि सुरेखा, सजल और निखिल भी आ जाते तो अच्छा रहता. सुप्रिया, क्या तुम पता कर सकती हो उन्हें कितनी लगेगी?”

सुप्रिया ने सुरेखा से बात की तो पता चला कि सुरेखा ने निखिल और सजल के साथ ही रुकने का निर्णय लिया था और वो तीनों अब आने वाले नहीं थे. ये सुनकर रिचर्ड ने एक अच्छे रेस्त्रां से भोजन मँगवा लिया और उन्हें आठ बजे भेजने के लिए निर्देश दिया.

“मेरे विचार से डेविड और मार्क को अब रुकने की आवश्यकता नहीं है. पर क्यों न हम इस तरणताल का कुछ आनंद लें और फिर उनकी इच्छा पूरी करें?” सुप्रिया यूँ ही पहले नँगी होना नहीं चाहती थी. ये एक प्रकार से मिशेल को संकेत था, जिसे मिशेल ने समझ लिया.

“यस. आई थिंक इट इस ए ग्रेट आइडिआ। तो क्यों न बिना वस्त्र ही इस ताल का आनंद लिया जाये.” ये कहते हुए वो खड़ी हुई और वस्त्रों को उतार केर एक ओर लगाने लगी. ईव ने उसका अनुशरण किया तो फिर अन्य पीछे नहीं रहे. ताल में छपाक छपाक के स्वर गूँज उठे.

मार्क और डेविड का तरणताल में लक्ष्य सुप्रिया और सुमति ही थे. एक बार तो मिशेल और ईव को ईर्ष्या हुई, पर उन्हें ध्यान आया कि वे भी उन दोनों के बेटों से चुदवा चुकी हैं. पार्थ और नितिन रिचर्ड और जैसन के उपस्थित होने के कारण कुछ संयत थे. रिचर्ड ने जहाँ सुप्रिया को लक्ष्य बनाया तो जैसन मिशेल से आकर सट गया. उचित अवसर देखकर पार्थ ईव के पास जाकर खड़ा हुआ तो ईव ने उसे अपनी ओर खींच लिया और चूमने लगी. नितिन बहुत दिनों बाद सुमति को मिला था तो उसके साथ तैरने लगा. यूँ ही कुछ देर तक पानी में खेलने के बाद सब बाहर निकले और तौलियों से पौंछकर एक दूसरे को देखने लगे.

इस बार सबको नग्नता का आभास हुआ पर कोई लज्जा नहीं आई. ये मानो एक सामान्य बात हो. सुप्रिया और सुमति ने एक दूसरे को देखा और मिशेल से पूछा कि अब क्या करना है. मिशेल ने बताया कि वो और ईव पार्थ और नितिन से चुदवा चुकी हैं और कुछ समय के लिए बियर का आनंद लेते हुए सुप्रिया और सुमति की चुदाई देखना चाहेंगी. पार्थ और नितिन ने भी कुछ समय विश्राम करने की इच्छा जताई.

“यू कैन हैव फादर सन टुगेदर.” मिशेल ने सुझाव दिया कि सुप्रिया और सुमति पिता पुत्र की जोड़ी से चुदने का आनंद लें.

“यस, वी विल लाइक दैट!” सुप्रिया ने सहमति जताई. इसके पहले कि कोई कुछ और कहता डेविड ने सुमति का हाथ पकड़ लिया और रिचर्ड से कहा, “कम ऑन डैड. सुमति आंटी इस सो हॉट!”

रिचर्ड ने कहा, “हाँ. कहीं हम जल न जाएँ.” ये सुनकर सुमति शर्मा सी गई, पर उसकी जाँघ के ऊपर से कुछ बहने लगा जो उसकी चूत के रिसने का प्रमाण था.

जहाँ पार्थ को अपनी माँ के विषय में ये सुनकर गर्व हुआ तो नितिन को कुछ ईर्ष्या हुई.

“वेट टिल यू गेट टू फक माई मॉम! (जब तक मेरी माँ को नहीं चोद लेते तब तक ऐसा सोच सकते हो!)” नितिन ने कहा तो सुप्रिया का सीना चौड़ा हो गया. पर उसने प्रेम से उसे झिड़का.

“कुछ भी बोलता रहता है. सुमति जो करती है मैं तो उसे अभी सीख ही रही हूँ.” सुप्रिया ने कहा तो सुमति ने उसे नए आदर से देखा.

“अरे अरे अरे, ऐसे ही बातों में उलझे रहोगे तो हमें शो कब दिखने मिलेगा?” पार्थ ने हँसते हुए मिशेल की जाँघों पर हाथ फेरा.

“या गाइस डोन्ट वेस्ट टाइम. डिनर आने से पहले ये राऊंड फिनिश होना चाहिए.” सुप्रिया ने मार्क और जैसन को अपने दोनों हाथों से पकड़ा. “मुझे पहली बार अफ़्रीकी लौंड़ों से चुदने का सुख मिलने वाला है. तो मैं तो चली.”

मिशेल हंसने लगी. “दीस इंडियन कॉक्स आर आल्सो सो सो बिग.” ईव और मिशेल ने नितिन और पार्थ के लौंड़ों को छुआ तो वो टनटना गए.

मिशेल जहाँ पूर्णतया अफ़्रीकी थी, पर रिचर्ड के भारतीय वर्ण के कारण डेविड और शैली का रंग साँवला था, पर जैसन का परिवार शुद्ध अफ़्रीकी था. यही कारण था कि पार्थ और नितिन को ईव को चोदने में अधिक आनंद आया था. ईव को भी उन दोनों से असीम सुख मिला था. परन्तु अभी के लिए ध्यान का केंद्र वो क्रीड़ास्थल था जहाँ सुप्रिया और सुनीति जैसन तथा मार्क और डेविड तथा रिचर्ड के साथ एक दूसरे से सटे हुए चुंबनों में खोये थे.

“तुम लोग और बियर लेकर अंदर क्यों नहीं आ जाते. वहाँ से क्लोसअप में देखने में अधिक आनंद आएगा.” मिशेल ने पार्थ से कहा और उठ खड़ी हुई.

पार्थ, ईव और नितिन भी उठे. पार्थ और नितिन ने बियर ली और मिशेल और ईव की मटकती हुई गाँडों के पीछे हो लिए. दोनों उन कसी हुई गाँडों को देखकर फिर से उत्तेजित होने लगे. उनके लौड़े फनफना उठे. स्वयं पर संयम रखते हुए वो उस हॉल में पहुंचे जहाँ उनकी माताओं को पिता पुत्र की जोड़ियाँ मसल रही थीं. सुप्रिया के श्वेत शरीर पर मार्क और जैसन के काले हाथ नाच रहे थे. मार्क उसे आगे से चूम रहा था तो जैसन उसके पीछे से उसके मम्मों को मसलते हुए उसकी गर्दन चूम रहा था. सुमति के साथ भी यही हो रहा था. पर सुमति ने अपने हाथ में रिचर्ड के लंड को पकड़ा हुआ था जो अब अपने पूरे चरम पर था.

मिशेल और ईव सोफे के बीच में बैठी हुई बियर की चुस्कियाँ ले रही थीं. उनके एक एक ओर पार्थ और नितिन बैठे हुए सामने चल रहे दृश्य को देख रहे थे. मिशेल और ईव ने अवसर देखकर पार्थ और नितिन के लौडों को सहलाना आरम्भ कर दिया था. सुमति को रिचर्ड ने नीचे बैठाया और अपना लंड उसके मुँह में दे दिया. डेविड ने पीछे न रहकर सामने आकर अपना लंड लहराया तो सुमति ने उसे अपने हाथ में ले लिया और मुठ मारने लगी. फिर उसने डेविड के लंड को चूसना आरम्भ किया और रिचर्ड के लंड की मुठ मारी। इस प्रकार से वो दोनों पिता पुत्र के लौंड़ों का आनंद ले रही थी और उन्हें भी आनंद दे रही थी.

जैसन ने सुप्रिया को बिस्तर पर लिटाकर उसकी चूत में अपना मुँह डाल दिया. मार्क ने तुरंत अपने लंड के लिए उचित स्थान खोजा और सुप्रिया का मुँह भी व्यस्त हो गया. अगर दोनों महिलाओं के मुँह में लौड़े न होते तो कमरे में कुछ सिसकारियाँ अवश्य ही सुनाई देतीं.

“डैड, लेट उस फक हर.” मार्क से अब संयम नहीं हो रहा था. (डैड, अब इन्हें चोदा जाये.)

“ओके, सन, यू गो फर्स्ट.” जैसन ने पिता की भूमिका निभाई. (ठीक है, तुम पहले चोदो।)

“नो डैड, आई नो यू विल फक हर आस इफ आई फक हर.” (नहीं, ऐसा किया तो आप उनकी गाँड मारोगे.)

“वो तो मैं वैसे भी करूँगा, डियर बॉय. पर ऐसा नहीं किया तो तुम्हें केवल लंड चुसवा कर ही संतोष करना होगा.”

“क्या मैं कुछ कहूँ?” सुमति ने बड़े भोलेपन से पूछा.

“ओह, यस.”

“तो दोनों मुझे एक साथ चोदो और भिन्न भिन्न आसनों में चोदो। इस प्रकार से आप दोनों को मेरी चूत और गाँड दोनों मारने का अवसर मिलेगा. और मैं अपने बेटे के लंड को चूसकर उन्हें आपकी पत्नी और माँ को चोदने के लिए उपयुक्त बना दूँगी।”

“बहुत उत्तम सुझाव है.”

“सुमति दी, मैं भी आपसे सहमत हूँ.”

“लो, तुम्हारी मम्मियाँ तुम्हें पुकार रही हैं.”

“पहले उन्हें चुदाई आरम्भ करने दीजिये. फिर जाएँगे।” ये कहकर पार्थ ने मिशेल की चूत में ऊँगली डाली और उसे चोदने लगा. ये देख नितिन ने भी ईव की चूत की ऊँगली से चुदाई आरम्भ कर दी.

“मैं चाहूँगी कि हमारे पति ही गाँड मारने का पहले आनंद लें. मगर कैसे बोलें?” मिशेल ने कहा तो पार्थ ने कहा कि बस बोल दीजिये, उधेड़बुन में मत पड़ो. परन्तु मिशेल और ईव को ये चिंता थी कि कहीं उनके बेटे उनसे क्रोधित होकर उन्हें चोदना बंद न कर दें. पार्थ ये समझ रहा था इसीलिए उसने समझाया.

“आप जैसी माँ को चोदे बिना वो एक दिन भी नहीं रह सकते. हो सकता है कि इस आक्रोश में आपकी वो कुछ अधिक ही निर्ममता से चुदाई कर दें, पर जैसा हमने देखा आपको वो भी आनंद ही देगा.”

पार्थ के इस तर्क का अर्थ जानकर दोनों उठीं और जाकर अपने बेटों को समझाया कि क्यों गाँड मारने का पहला अवसर उनके पिताओं को मिलना चाहिए. मार्क और डेविड पहले विचलित हुए, फिर डेविड बोला, “ठीक है, पर अगले कुछ दिनों तक अगर ऐसी स्थिति आई तो उन्हें ही गाँड मारने का पहले अवसर दिया जायेगा. दोनों माताओं ने इसे सहर्ष स्वीकारा। पर जैसन और रिचर्ड को लगा कि अब सिंह और चटर्जी परिवार की किसी भी महिला की गाँड उनके हाथ से निकल जाएगी.

“परन्तु ऐसा सदा के लिए सम्भव नहीं है. केवल अगले मिलन के लिए. अन्यथा तुम दोनों हर बार यही हठ करोगे. हाँ, हम दोनों इसके लिए सहमत हैं.”

मार्क और डेविड समझ गए कि उनकी माताओं ने उनकी चाल समझ ली है. उन दोनों के प्रेम के अधीन उन्होंने भी इसे स्वीकार कर लिया.

पार्थ ने उठकर एक ओर रखी टेबल से एक ट्यूब निकाली और रिचर्ड को थमा दी. ये उसकी ओर से सुमति की गाँड मारने की सहमति थी. रिचर्ड ने अपना सिर झुकाकर उसे स्वीकार किया. सुमति ने भी पार्थ को ये कार्य करते देखा और उसकी ओर वात्सल्य भरी दृष्टि से देखा. अपनी माँ से अत्यधिक प्रेम करने वाला पुत्र ही ऐसा कर सकता था. नितिन इस सब से अनिभिज्ञ ईव की चूत में ऊँगली करने में ही व्यस्त था. अब उसने उसके एक मम्मे को भी मुँह में ले लिया था. पार्थ लौटकर आया तो मिशेल के मन में उसके प्रति आदर भाव बढ़ गया था और उसने उसे बैठने न दिया, बल्कि उसके लंड को चूमकर चूसा और उसके बाद बैठाया। पार्थ अपनी बियर पीने लगा.

सुप्रिया की चूत का स्वाद लेने के बाद जब जैसन ने सिर उठाया तो उसका चेहरा पूरा भीगा हुआ था. चटखारे लेते हुए उसने एक बार फिर सुप्रिया कि गीली चूत पर जीभ फिराई और खड़ा हो गया. मार्क ने उसे देखा तो समझ गया कि अब उसे हटना होगा. उसने जैसन का स्थान लिया और सुप्रिया की चूत पर अपना लंड घिसने लगा. जैसन ने उसे अंगूठा दिखाकर सफलता का संकेत किया और जाकर मार्क का स्थान ले लिया. सुप्रिया ने अपने खाली मुँह को इस बार पिता के लंड से भरने में कोई हिचक न दिखाई.

“तुम्हारी मॉम की चुदाई हो रही है.” ईव ने नितिन को हटाते हुए कहा. नितिन ने अपना चेहरा उसके मम्मे से हटाया और मार्क के काले लौड़े को अपनी माँ की श्वेत चूत में प्रवेश करते हुए देखने का सौभाग्य प्राप्त किया. मार्क ने बड़ी सधी गति से अपना लंड सुप्रिया की चूत में डालने में अधिक समय नहीं लगाया. और जब लंड पूरा अंदर चला गया तो पिता पुत्र ने एक दूसरे के हाथों पर ताली दी, जिसे हाई फाइव भी कहा जाता है. सुप्रिया अगर इतनी चुड़क्कड़ न होती तो इस पर आपत्ति ले सकती थी. पर इस समय वो अपने जीवन के पहले अफ़्रीकी लौंड़ों का आनंद लेने में ही खोई हुई थी.

सुमति की स्थिति भिन्न थी. उसकी एक आँख सुप्रिया की ओर थी और जब उसने देखा कि सुप्रिया की गाँड में अभी लौड़ा नहीं गया है तो उसे मानसिक संतोष मिला. वो नहीं चाहती थी कि सुप्रिया की गाँड से अफ़्रीकी लौड़े का रस पीने में वो पीछे रह जाये. उसे पार्थ पर पूरा विश्वास था कि वो किसी और को उसे चट करने से रोक लेगा, पर अगर वो स्वयं ही चुदाई में व्यस्त रहा तो? पर अब उसे वो डर नहीं था. डेविड उसे खड़ा कर रहा था तो रिचर्ड उसके पीछे से उसे सहारा दे रहा था. सुमति की चूत से बहता हुआ पानी उस स्थान को गीला कर चुका था जहाँ वो बैठ कर लौड़े चूस रही थी. पार्थ ने भी ये देखा और अपनी हंसी दबा ली.

डेविड जाकर बिस्तर पर लेट गया और काँपते पैरों से सुमति उसके ऊपर चढ़ी और लंड को हाथ में पकड़कर उसपर बैठ गई. गीली चूत ने डेविड के लंड को निगलने में देर न लगाई और सुमति लंड पर धीरे से उछलकूद करने लगी. उसके मोटे मम्मे नाचने लगे तो रिचर्ड ने उन्हें थामा और मसलने लगा. जब सुमति ने गति पकड़ ली तो रिचर्ड ने ट्यूब में से जैल निकाला और सुमति की गाँड में लगाने लगा. उछलती सुमति की गाँड में जैल लगाना एक चुनौती थी पर रिचर्ड इस प्रकार की चुनौतियों का अभ्यस्त था. जैल लगाने के बाद उसने गाँड में ऊँगली डालकर उसे अंदर तक फैला दिया.

पार्थ ने मिशेल के सिर को पकड़कर अपने लंड की ओर झुकाया और मिशेल ने संकेत समझकर उसे मुँह में लेकर थोड़ा चूसा और हट गई. पार्थ खड़ा हो गया. रिचर्ड ने सुमति की कमर पर हाथ रखा तो उसने उछलना बंद कर दिया. रिचर्ड ने अपना लंड सुमति की गाँड पर लगाया तो पार्थ सुमति के आगे जाकर खड़ा हो गया. सुमति की आँखों की चमक उसकी वासना की साक्षी थीं. और पार्थ के लंड को देखकर वो चमक और बढ़ गई. सुमति ने पार्थ में लंड के लिए मुँह खोला. पार्थ का लंड उसके मुँह में गया ही था कि उसे रिशर्ड के लंड का अपनी गाँड में प्रवेश करने का भी आभास हुआ. उसके तीनों छेदों में लंड थे. और ये धरती पर स्वर्ग का अनुभव था.

मार्क और जैसन किसी भी प्रकार की शीघ्रता नहीं दिखा रहे थे. मार्क बड़ी शांति के साथ सुप्रिया की चुदाई कर रहा था और सुप्रिया भी उतने ही संयम से जैसन का लंड चूस रही थी. उन्हें इस बात का सम्भवतः आभास भी नहीं था कि उनके ही निकट सुमति के मुँह, चूत और गाँड में लौड़े पिले हुए थे. मार्क जिस गति से चोद रहा था उसका प्रयोजन ये था कि सुप्रिया जैसी अति चुड़क्कड़ स्त्री उनसे इतनी प्रभावित हो जाये कि ये मिलन नियमित रूप से सम्भव हो सकेगा. उसे अब तक ये पता नहीं था कि जितनी चुदाई सुप्रिया ने अपने पुत्रों और पिता के साथ की थी उस स्तर पर उसकी माँ को पहुंचने में अभी कई वर्ष लग सकेंगे.

“सुमति कितना इन्जॉय कर रही है, जाओ अपनी मॉम को भी वैसे ही चुदवाने के लिए मनाओ.” ईव ने नितिन को समझाया.

“नहीं, वो स्वयं ही ऐसा करेंगी. मैं यहाँ ही ठीक हूँ.” नितिन ने उत्तर दिया.

नितिन चाहता था कि उसकी माँ अफ़्रीकी लौंड़ों से चुदने की अपनी इच्छा को स्वयं ही संचालित करें. सम्भवतः सुप्रिया ने उनके मन की बात जान ली थी. उसने जैसन के लंड को मुँह से निकाला।

“अब मुझे आप दोनों चोदो। जैसे सुमति चुद रही है.” उसने बोला तो जैसन ने मार्क को संकेत किया. मार्क अपने लंड को बाहर निकाल कर लेट गया. जैसन ने सुप्रिया को हाथ देकर उठाया और मार्क के लंड पर चढ़ने में सहायता की. ये देख नितिन खड़ा हो गया और ईव को देखकर मुस्कुराया. जब सुप्रिया मार्क के लंड पर चढ़ गई तो जैसन ने ट्यूब उठाई और उसके पीछे आकर उसकी गाँड में जैल लगा दिया. सुप्रिया मार्क के लंड पर कुछ सेकंड कूदी फिर ठहर गई. अब मार्क नीचे था, जैसन पीछे और नितिन आगे आ खड़ा हुआ था.

जैसन ने सावधानी से सुप्रिया की गाँड में लंड डालना आरम्भ किया. सुप्रिया चाहती तो थी कि वो एक बार में पेल दे पर चुप रही. मार्क की शांतिपूर्ण चुदाई से उसका मन नहीं भरा था. उसने नितिन को आँखों से संकेत किया कि वो कुछ करे और फिर उसका लंड चूसने लगी.

“अंकल, डरिये मत. मॉम को गाँड में लौड़े लेने का बहुत अनुभव है. ऐसी धीमे धीमे चोदोगे तो वो बोर हो जाएँगी. अच्छे से जम कर चोदो आप दोनों.” नितिन ने अपनी माँ के निर्देश उन्हें पारित कर दिए. मार्क और जैसन तो मानो इसी की प्रतीक्षा में थे. वो सोच रहे थे कि अफ़्रीकी लौंड़ों से सुप्रिया आहत न हो जाये. उन्हें क्या पता था कि वो लम्बे मोटे लौंड़ों को हर छेद में वर्षों से ले रही थी. जैसन ने अब एक भी झटके में लंड अंदर उतार दिया. अब सुप्रिया के तीनों छेद बंद थे और उसका मन अब जाकर शांत हुआ था. अब चुदाई का समय था.

मिशेल और ईव आने वाले चक्रवात की प्रतीक्षा कर रही थीं. उन्हें पता था कि उनके पति और पुत्र किस प्रकार की चुदाई में सुख पाते हैं. और ऐसा प्रतीत होता था कि सुप्रिया और सुमति भी उसमें आनंद पाती हैं. एक धीमी गति के साथ पिता पुत्र की जोड़ियाँ सुमति और सुप्रिया की चूत और गाँड में अपने लौडों से प्रहार कर रहे थे. दोनों माताएं अपने बेटों के लौड़े मुँह में लेकर चूस रही थीं.

“लेट अस फक देम हार्ड एंड फ़ास्ट!” रिचर्ड ने कहा तो बिना उत्तर की प्रतीक्षा किये हुए चारों ने अपने प्रहार तीव्र कर दिए. सुप्रिया और सुमति के मुँह से मात्र गूँ गूँ की ही ध्वनि निकल रही थी क्योंकि उनके मुँह भी बंद थे.

“आई होप वी विल आल्सो गेट फक्ड दिस वे.” ईव ने अपनी चूत मसलते हुए बोला।

“ओह देट इस स्योर!” मिशेल ने आह भरते हुए अपने परिवार के पुरुषों को सुप्रिया और सुमति की चुदाई करते देखा। उसे विश्वास था कि अब उनकी बारी भी शीघ्र आएगी और इस बार उनकी और निर्ममता से चुदाई की जाएगी. दोनों जोड़ियों की चुदाई की गति अब इतनी तीव्र थी जैसे बिजली कौंध रही हो. पार्थ और नितिन भी अपने पड़ोसियों के सामर्थ्य से प्रभावित हुए बिना न रहे. उन्हें अब मिशेल और ईव को भी ऐसे ही चोदना होगा. पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार कुछ देर के बाद रिचर्ड और जैसन ने अपने स्थान बदले और अब सुप्रिया और सुमति की गाँड मारने में जुट गए. उसके बाद एक क्रम बनाया और इसमें मार्क और डेविड को भी गाँड मारने का सुअवसर प्राप्त हुआ. सुप्रिया और सुमति ने भी इतनी शीघ्रता से भिन्न भिन्न लौंड़ों के आनंद नहीं लिए थे.

कई मिनटों के बाद जब सुमति और सुप्रिया धराशाई ही चुकी थीं तब एक एक करके झड़ने का क्रम आया.

पार्थ बोला, “आप केवल सुप्रिया आंटी की गाँड में ही पानी छोड़ना. मम्मी की नहीं.”

इस कथन से सुमति में फिर से चेतना आ गई. इस समय मार्क का लंड सुप्रिया की गाँड नाप रहा था और उसने वहीँ अपना पानी छोड़ दिया. उसके हटते ही रिचर्ड जा चढ़ा और कुछ धक्कों के बाद स्खलित हो कर हट गया. फिर जैसन ने मोर्चा संभाला और अंत में डेविड ने अपना योगदान दिया. सुप्रिया की गाँड में तो इतना स्थान था नहीं तो बहुत सारा रस उसकी गाँड से बाहर निकल कर बहने लगा. सुमति अब तक बैठ चुकी थी और लालच से देख रही थी. जैसे ही डेविड हटा उसने आक्रमण कर दिया.

गाँड से निकलते रज को पहले चूसकर उसने पी लिया. और फिर इधर उधर जो भी बिखरा हुआ था उसे चाट लिया. अंत में सुप्रिया की गाँड खोलकर उसपर मुँह लगा कर जितना सम्भव था वीर्य सोख लिया. जब देखा कि अब कुछ शेष नहीं है तो पार्थ को देखकर मुस्कुराई.

“बहुत स्वादिष्ट हैं इनका वीर्य.”

“चिंता न करो, आज पूरी रात सब गाँड में ही पानी छोड़ेंगे और आपको भरपूर पीने को मिलेगा.” पार्थ ने एक प्रकार से आगे का कार्यक्रम बता दिया.

सुमति ने चारों ओर देखा तो डिसूज़ा परिवार उसे आश्चर्य से देख रहा था. पर उनकी आँखों में कोई घृणा नहीं थी. ईव सुमति को देखकर मुस्कुराई.

“देट वास वंडरफुल डियर. आज रात बहुत आनंद आने वाला है. है न?”

सबने हामी भरी और जहाँ सुप्रिया और सुमति लेट कर विश्राम करने लगीं वहीँ अन्य सब बियर लेने के लिए निकल गए.

रात अभी शेष थी.

क्रमशः

1286500
 
अध्याय ५०

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दृश्य ७: सुरेखा:

अब तक:

“सब ठीक है बाबूजी. आप जाइये और मेरी सुरेखा को ले आइये. और इन दोनों को मेरे साथ छोड़ने के लिए धन्यवाद.”

कुछ और भावनात्मक पलों के बाद सुप्रिया और समर्थ चले गए. सुप्रिया की आँखों में आँसू थे. उसे अचानक ही अपने अकेले होने का आभास हुआ और एक पति की कमी का अनुभव हुआ. सुरेखा को समर्थ ने नागेश के पास छोड़ा तो कुछ देर और अश्रु-मिश्रित मिलन हुआ. फिर शनैः शनैः एक सामान्यता आ गई और मानो वो परिवार अपने पूर्व की स्थिति में आ गया.

**************

अब आगे:


सुरेखा समर्थ के घर पर थी. पूरा परिवार साथ बैठा चिंतन में डूबा था.

“मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि नागेश ने हमारा इतना आदर किया. ऐसा कैसे हो सकता है कि उसके मन में कोई भी द्वेष न हो?” समर्थ ने पूछा.

“मेरे विचार से उसने सुरेखा से विच्छेद इसीलिए ही स्वीकारा था क्योंकि इन तीनों को कोई क्षति नहीं पहुँचाना चाहता था. उसने इसे नियति माना होगा.”

“पापा पहले मम्मी पर गुस्सा थे कि उन्होंने उनसे बात भी नहीं की. पर बाद में कहने लगे थे कि पूरी सच्चाई नहीं बता सकता था. इसके बाद उनका व्यवहार भी अच्छा हो गया था.”

“अब क्या?” सुप्रिया बोली.

“प्रतीक्षा. दो महीने बाद ही वो अपना निर्णय बताएगा.” समर्थ ने कहा.

“पापा. डाइवोर्स अभी प्रक्रिया में ही है. क्या उसे हम रोक सकते हैं?” सुरेखा ने पूछा.

समर्थ को मानो एक झटका लगा.

“ये तो मैंने सोचा ही नहीं. भला हो हमारे देश की न्याय प्रणाली का जो इतनी धीमी चलती है. मैं अभी वकील से बोलकर इस पर रोक लगाता हूँ. अगर दो महीने बाद नागेश नहीं माना तो पुनः आरम्भ कर देंगे ” समर्थ ने अपने फोन पर किसी का नंबर ढूँढ़ते हुए बोला।

ये सुनकर सुरेखा ने सिर झुका लिया और मन ही मन प्रार्थना की. संजना जो उसके साथ बैठी थी उसका हाथ पकड़कर बोली, “मम्मा, आप चिंता न करो. मैं पापा को ले आऊँगी।”

सुरेखा ने अश्रु भरी आँखों से संजना को देखा और मुस्कुरा कर सिर हिला दिया. दूर बैठी सुप्रिया के मन में एक हूक उठी. जीवन में उसने इस प्रकार के संबंध का मूल्य नहीं समझा था. पर अपनी बहन और भतीजी को देख उसे अपनी क्षति का आभास हुआ. पर क्या अब इस क्षति की भरपाई की जा सकती थी? इसका उत्तर तो भविष्य के गर्भ में छुपा था.

**********************

“मेरी पत्नी चाहती है कि मैं घर लौट आऊँ।“ नागेश ने अपने साथ लेटी स्त्री से कहा.

“मुझे इस बात का सदा भय था कि ऐसा किसी दिन ऐसा ही होगा. जिस दिन उन्हें इस बात का आभास होगा कि तुम्हारी स्थिति का उत्तरदाई मेरे पति थे, उन्हें अपने किये पर पश्चाताप होगा.”

“उसने इसका मूल्य चुकाया. न जाने किस गाड़ी ने उसे टक्कर मारी जो आज तक नहीं मिली पुलिस को.”

“हाँ. और इस कारण मुझे अब तक बीमे का भुगतान नहीं हुआ है.”

“हो जायेगा. वैसे भी कम्पनी में भागीदारी के कारण तुम्हें किसी प्रकार की कोई कमी तो है नहीं.”

“हाँ. और जो कमी होती है वो तुम पूरी कर देते हो. वैसे कल घर में क्या कर रहे थे? हर दिन के समान यहाँ क्यों नहीं आये थे?”

“कुछ कपड़े और लेने थे. दो महीने के अनुसार. उनका आना अप्रत्याशित था.”

“तो अब क्या विचार है?”

“सोचा नहीं उतनी दूर. तुमसे बात किये बिना कुछ नहीं करूँगा, ये निश्चित है.”

“अच्छा जी!”

“हाँ, और अब आओ और इसे चूसो। एक बाद और तुम्हारी चुदाई अब हो ही जानी चाहिए.”

ये सुनकर वो स्त्री नागेश के लंड को चूसने लगी.

“मैं तुमसे दूर नहीं जाऊँगा,” अचानक नागेश ने उस स्त्री के सिर पर हाथ फिराते हुए कहा, “ऐसा मैं नहीं करूँगा, सुमन.”

लंड चूसना रोक कर सुमन ने नागेश की ओर देखा, “क्या हुआ?”

“मैं ये कभी नहीं भूल सकता कि जिस स्थिति में तुमने आकर मेरा साथ दिया था, उस समय में नितांत अकेला था. परिवार छूट चुका था और आत्मविश्वास भी अपने निम्नतर स्तर पर था. पता नहीं, पर ऐसा अंदेशा है कि अगर तुम न आतीं तो सम्भवतः मैं आत्महत्या ही कर लेता. नहीं, मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकता. और अगर सुरेखा को ये स्वीकार्य नहीं होगा तो यथास्थिति बनी रहेगी. अब बच्चे भी मिलने आने लगेंगे.”

सुमन नागेश के चेहरे पर छाई पीड़ा को समझ गई. वो नागेश के सीने से लग गई.

“जब मुझे पता चला था कि मेरे पति ने तुम्हारे साथ क्या किया था तो मैं तुमसे क्षमा माँगने ही आई थी. तुम्हें सम्भवतः याद न हो, पर उस समय तुम्हारी टेबल पर डाइवोर्स पत्र पड़ा था. जिसे मैंने उस समय चोरी से देख लिया था. मेरे पति के पाप का प्रमाण मेरे सामने था. उस समय ही मैंने तुम्हारे दुःख को कम करने का बीड़ा उठाया था. पर ये भी वचन लिया था कि अगर कभी भविष्य में तुम्हारा परिवार एक होता है तो मैं बाधा नहीं बनूँगी।”

“पर मैं तुम्हें बाधा नहीं मानता। अब दो माह के लिए हूँ, कुछ प्रेम भी कर लो.”

“इस बार मैं हर शनिवार आऊँगी और दो दिन तुम्हारे ही साथ रहूँगी। पर आज के लिए तो बात सही लगती है.” ये कहते हुए सुमन फिर नागेश के लौड़े को चाटने में जुट गई.

******************

“उनके घर में कोई और महिला भी रहती है.” सुरेखा ने कहा. वो सुप्रिया के कमरे में उसके साथ बैठी थी. सुप्रिया ने उसकी आँखों में पीड़ा देखी तो उसे समझाया.

“देख, अगर उसे पाना है तो ये भूलना होगा. तुमने तलाक दिया था, चाहे वो पूर्ण हुआ हो या नहीं. पर उसे तुमने ही मुक्त किया था. और वैसे भी इतने महीनों से जो जीवन शैली तुमने अपनाई है उसे भी तुम्हें नागेश को बताना ही होगा. अन्यथा जैसे वो छुपा रहा था वही तुम करोगी. हालाँकि उसका आशय तुम्हें बचाने का था.”

“पर ये जानकर तो वो कभी नहीं लौटेंगे!” सुरेखा ने अत्यंत भावुक होकर कहा.

“क्या पता? जीवन में कुछ निश्चित नहीं होता. अगर वो इतने दिनों के व्यभिचार को क्षमा कर दे तो क्या तुम इस सबके बिना जीना चाहोगी?”

सुरेखा इतने दिनों के असीमित आनंद का स्मरण करने लगी. ये सच था कि इस आनंद का कोई पर्याय नहीं था. क्या करे? पति और पतन इनमें से एक का चुनाव करना था. सुप्रिया के होंठों पर एक मुस्कान थी. वो जानती थी कि ये निर्णय कितना कठिन है. उसने स्वयं इस शैली से दूर होने का कई बार प्रण किया था, पर हर बार हार गई थी. और जिन कारणों से हारी थी वे आज भी इस घर में उपलब्ध थे. अपने फोन से एक संदेश भेजकर वो ठहर गई. सुरेखा क्या उससे अधिक संयमी सिद्ध होगी? ये परीक्षण के परिणाम ही बताएगा कि नागेश के साथ सरल जीवन व्यतीत करने की क्षमता सुरेखा में है या नागेश को भी अपनी कामलीला में सम्मिलित करने का प्रयास करना होगा.

कमरे के अंदर तीन परछाइयाँ दिखीं तो सुप्रिया ने उस ओर देखा. सुरेखा अब भी आँखें बंद किया चिंतन में थी. सुप्रिया ने संकेत किया तो निखिल समझ गया कि आगे क्या करना है. वो अपने भाई के साथ अपनी माँ को इस प्रकार के संकट से कई बार निकाल चुका था. उसने और नितिन ने निःशब्द कपड़े उतारने आरम्भ किये तो सजल ने भी उनका अनुशरण किया. सुप्रिया ने उन्हें एक ओर जाकर खड़े होने का संकेत दिया. निखिल और नितिन इस भावनात्मक उलझन को कई बार देख चुके थे और उन्हें रुकने में कोई आपत्ति नहीं थी. सुरेखा को लग रहा था कि कमरे में कोई आया है. पर वो अपने अंतर्द्वंद में इतनी खोई थी कि इस ओर ध्यान नहीं दे पाई.

नागेश के साथ जीवन के इतने वर्षों के आनंद की तुलना इन कुछ महीनों से करने में उसे बहुत कठिनाई हो रही थी. वो दोनों को पाना चाहती थी. हो न हो, उसका परिवार उसे इस प्रयोजन में अवश्य सहायक सिद्ध होगा. वो नागेश को मनाने का भरपूर प्रयत्न करेगी. चाहे उसे नागेश की प्रेमिका को भी स्वीकार क्यों न करना पड़े. उसके चेहरे के बदलते भावों को सुप्रिया ध्यान से पढ़ रही थी और जान गई कि सुरेखा अब मन बना चुकी है. उसने तीनों भाइयों को देखा जो अपने लंड सहला रहे थे. सजल को ये पता न था कि उसे किसे चोदना है. वो तो अपने भाइयों की राह पर चल रहा था.

***************

समर्थ और शीला ने अपने कमरे से ये देखा और फिर एक दूसरे की ओर देखकर एक साथ बोल उठे, “काश, सब ठीक हो जाये.”

समर्थ ने शीला को चूमा, “विश्वास करो. सब ठीक ही होगा.”

शीला: “आप पता लगाओ न कौन है जो नागेश के साथ रह रही है.”

समर्थ: “मैंने अपने आदमी को काम पर लगा दिया है. मुझे भी नागेश के घर में एक इत्र की सुगंध का आभास हुआ था. चिंता न करो एक दो दिन में सब पता चल जायेगा.”

शीला: “फिर क्या करोगे?”

समर्थ: “कुछ नहीं. सुरेखा और सुप्रिया को बता दूँगा। इस बार पहले जैसी गलती नहीं करूँगा। इस बार सुरेखा को स्वयं निर्णय लेना होगा. वो वैसे भी इसके लिए स्वयं को ही दोषी मान रही है.”

शीला: “फिर संजना का क्या करोगे? वो आपसे चुदने के लिए उत्सुक है.”

समर्थ: “नहीं. वो चुदने के लिए उत्सुक है, आवश्यक नहीं है कि मुझसे. मेरे विचार से नागेश के लौटने तक हमें कुछ नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से स्थिति बिगड़ सकती है और नागेश फिर कभी क्षमा नहीं करेगा. ध्यान रहे संजू के कारण ही वो अब तक हमसे बंधा हुआ है.”

शीला: “अपने सही कहा. उसे समझा देंगे.”

समर्थ: “सम्भवतः उसकी आवश्यकता ही न पड़े.”

शीला: “मैं उसे देख कर आती हूँ.”

समर्थ: “जाओ. पर देर मत लगाना.”

शीला संजना के कमरे में गई तो वो लेटी हुई कोई पुस्तक पढ़ रही थी. शीला को देखकर वो बैठ गई.

शीला: “कैसी है, गुड़िया?”

संजना: “अच्छी हूँ नानी. और अब लगता है और अच्छी हो जाऊँगी। पापा लौट आएँगे।”

संजना के दृढ़विश्वाश को देखकर शीला को अचरज हुआ.

“एक समस्या है,” शीला ने कहा, “तुम्हारे पापा के पास कोई और भी रहता है.”

“हाँ. वो सुमन आंटी हैं. क्यों?”

“तुम जानती हो उन्हें?”

“मुझे पापा के विषय में सब पता है.” संजू गर्व से बोली.

“ओह! कौन हैं ये सुमन आंटी?”

“पापा के पिछले बॉस की पत्नी. उन्हें जब पता चला था कि उनके पति के कारण हमारा घर टूटा तो वे प्रायश्चित करने आई थीं. फिर पापा की अवस्था देखकर उन्होंने ही पापा को सँभाला था. वैसे वो पापा के घर कम रहती है. पापा ही वहाँ रहते हैं. इस घर में तो कभी कभार ही आते हैं अब.”

“तो वो तुम्हारे घर क्यों आएँगे?”

“सुमन आंटी ने मुझे बोला था कि अगर पापा हमारे पास आना चाहेंगे तो वो रोकेंगी नहीं. सच कहूँ नानी तो बस यही एक कारण है जिससे मैं दुविधा में हूँ. व् न होतीं तो सम्भवतः पापा आज जीवित ही न होते, और हम उन्हें ही पापा से दूर करना चाहते हैं. समझ नहीं आता क्या करूँ.”

“तुम चिंता न करो. तुम्हारे नाना सब ठीक कर देंगे. हम सब कल सुबह मिलकर बात करेंगे.”

“ओके, नानी.”

शीला कमरे से निकलने को ही थी तभी संजना बोली, “नानी. अब मैं नाना से अपना कौमार्य भंग नहीं कराऊँगी। कौन होगा पता नहीं. पर नाना से मेरी ओर से सॉरी बोल देना.”

“चिंता न करो. नाना ने मुझे अभी कुछ देर पहले यही कहा है. अब तुम सो जाओ. सुबह देंखेंगे.”

शीला ने जाकर समर्थ को पूरी बात बताई तो वो घर चिंतन में पड़ गया. फिर उसने शीला से कहा कि कल सुबह ही बात करना ठीक है. ये एक दुविधा है जिसका समाधान सुरेखा को ही करना होगा.

******************

सुरेखा ने जब आँखें खोलीं तो सुप्रिया को ही सामने बैठा देखा. सुप्रिया को देखकर उसकी आँखों में आँसू भर आये.

“मैं क्या करूँ, दीदी?”

सुप्रिया का मुँह खुला रह गया. सुरेखा ने उसे न जाने कितने ही वर्षों बाद दीदी पुकारा था. इसका अर्थ यही था कि सुरेखा ने जो निर्णय लिया था वो उसे स्वयं ही स्वीकार्य नहीं था.

“वो उसे नहीं छोड़ेंगे.” सुरेखा के मन की पीड़ा ने सबको हिला दिया, “मैं क्या करुँगी?”

“श्श्श्शश, इतना नहीं सोचते। पापा कुछ प्रयास कर रहे हैं. फिर हम दोनों चलेंगी उसके पास. उससे विनती करेंगी कि वो नागेश को मुक्त कर दे. पर तुम इससे अधिक कोई और प्रलोभन मत देना. और अब मन को थोड़ा विश्राम दो. देखो तुम्हें मिलने कौन आया है?”

ये कहते हुए उसने तीनों भाइयों को संकेत दिया जो आगे आ गए. सुरेखा ने उन्हें देखा तो उसके मन की व्यथा को लालसा और कमलौलुपता में परिवर्तित होने में अधिक समय नहीं लगा.

“अब तुम इनके साथ अपना दुःख भूलने का प्रयास करो. मैं चली अपनी संजू पास.”

ये कहकर सुप्रिया उठी और जब तक द्वार खोला तब तक तीनों भाई सुरेखा को घेरकर अपनी बाँहों में बाँधने लगे थे.

*******************

अपने कमरे पर एक ही रात में दो बार खटखट सुनकर संजना मुस्कुरा उठी. उसके पापा ने आज सबकी नींद उड़ा दी थी. कमरा बंद तो था नहीं तो उसने अपनी मौसी को अंदर आते देखा तो उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. वो मौसी को देखकर मुस्कुराई तो सुप्रिया ने भी उसे प्रेम भरी दृष्टि से देखा.

“मौसी! आओ न!”

“मैंने सोचा आज अपनी संजू के ही पास क्यों न सो जाऊँ।”

“सच मौसी. तब तो बहुत मजा आएगा.”

“मेरा भी यही विचार है.” सुप्रिया ने नँगे होते हुए कहा तो संजना को ध्यान आया कि वो उचित पोशाक में नहीं है. उसने तुरंत खड़े होकर अपने वस्त्र त्यागे तो सुप्रिया के सामने जा खड़ी हुई.

“मेरी मिश्री की डली.” सुप्रिया ने उसके होंठों को चूसने के पहले कहा और दोनों प्रेमालिंगन में लिपट गए.

कुछ ही देर में संजू पलंग पर लेटी अपनी मौसी के सिर को अपनी चूत पर लगाए हुए सिसकियाँ ले रही थी और सुप्रिया उसके रस को चूस चूस कर पी रही थी. संजना के रस को पीने के बाद वो उसे बाँहों में लेकर लेट गई.

“नानी आईं थीं. पापा के बारे में बात करने.”

“अच्छा!” सुप्रिया ने संजना के उभरते हुए स्तनों के छेड़ते हुए पूछा.

“हाँ, मैंने उन्हें सुमन आंटी के बारे में भी बता दिया.”

“सुमन आंटी कौन?”

इसके बाद संजना ने वही कथा सुनाई और सुप्रिया को सुरेखा का कार्य और जटिल लगने लगा. उसने निर्णय लिया कि वो जाकर सुमन से बात करेगी. सम्भवतः वो नागेश से दूर हो जाये. उसकी प्रतिक्रिया जानकर ही वो सुरेखा को आगे के लिए कुछ सलाह देगी. वो ये नहीं जानती थी कि कल अपना चक्र चल चुका था. नियति ने अपना निर्णय ले लिया था. और वो निर्णय उन सबके जीवन को अस्त व्यस्त करने वाला था.

कुछ देर के विश्राम के बाद इस बार संजना ने सुप्रिया की चूत चाटी। वो अब इस कला में पारंगत होने लगी थी. अपना कौमार्य खोने के पहले ही वो एक चतुर चूत चटोरी बनने वाली थी. दोनों इसी प्रकार से एक दूसरे की बाँहों में सिमट कर सो गए.

**********************

नागेश पूरी शक्ति और सामर्थ्य से सुमन की चुदाई में जुटा हुआ था. आज उसकी चुदाई में एक नई ऊर्जा थी. सम्भवतः अपनी पत्नी और परिवार से मिलने का सुख उसे प्रेरित कर रहा था. सुमन की घुटी हुई चीखों ने उसके मन में एक शांति का उद्बोध कराया था. दोनों इस समय पसीने से लथपथ थे और चुदाई के अंतिम चरण पर थे. नागेश के काम पर जाने के पहले की ये अंतिम रात थी और दोनों इसका भरपूर लाभ उठा रहे थे. कुछ और मिनटों की चुदाई के पश्चात नागेश झड़ गया और सुमन के ऊपर ही लेटकर हाँफने लगा. सुमन ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसे चूम लिया.

“आई लव यू.” सुमन ने कहा.

“आई लव यू टू.” नागेश ने कहा तो सुमन की आँखें भीग गयीं. आज पहली बार दोनों ने अपने प्रेम की अभिव्यक्ति की थी.

नागेश फिर उसके साथ लेट गया और दोनों एक दूसरे को देखते हुए मुस्कराने लगे.

“इस बार जब मैं आउंगी तो अपना अंतिम कौमार्य भी तुम्हें सौंप दूंगी.” सुमन ने उसकी आँखों में झांकते हुए कहा.

“तुम जानती हो कि इसकी आवश्यकता नहीं है.”

“तुम्हें न हो. पर अब मैं सम्पूर्ण रूप से तुम्हारी होना चाहती हूँ. इन दिनों मैं उसके लिए तैयारी करूंगी और फिर तुम मेरी गाँड का उपहार प्राप्त करोगे.”

नागेश समझ गया कि अब व्यर्थ बात करने से कुछ न होगा. सुमन हठी थी और अगर उसने अपनी गाँड मरवाने का निर्णय लिया था तो उसे इससे डिगाना असम्भव था. एक नई कुँवारी गाँड मारने के अवसर से उसका सोया लौड़ा फिर जाग उठा.

“मेरे विचार से तुम्हारा नाग मेरे विचार से सहमत है. अब इसे कुछ प्रतीक्षा करनी बस.”

ये कहते हुए वो इस बार नागेश के ऊपर चढ़ी और उसके लंड को अपनी चूत में लेकर चुदवाने लगी. नागेश का मन कुछ पलों के लिए सुरेखा की ओर गया. क्या कर रही होगी सुरेखा?

******************

जो सुरेखा कर रही थी वो नागेश ने अपने स्वप्न में भी कल्पना नहीं की थी. सुप्रिया के बिस्तर पर बैठी वो तीनों लौडों को एक साथ चूस रही थी, एक के बाद एक. अब उसके मन का दुःख कही जाकर छुप गया था. वो अपना सिर भी उठाएगा या नहीं ये अनिश्चित था.

सुरेखा के थूक से गीले लौड़े अब उसके हाथ से फिसल रहे थे. और मुँह में भी अधिक नहीं टिक पा रहे थे. निखिल ने अपनी मौसी के सिर पर हाथ रखा.

“मौसी, अब कुछ परिश्रम हमें भी करने दो.”

सुरेखा खड़ी हुई तो निखिल उसके सामने ही बैठ गया और चूत पर अपनी जीभ चलाने लगा. नितिन ने सजल को संकेत दिया और वो सुरेखा के पीछे जाकर उसकी गाँड पर जीभ घुमाने लगा. दोनों भाइयों का ये बहुत पुराना खेल था. लगभग एक ही समय में दोनों की जीभों ने अपने सामने के छेद में प्रवेश किया. सुरेखा इतने समय से कामोत्तेजना से व्यथित थी निखिल के मुँह में झड़ गई. निखिल पर इसका कोई प्रभाव न हुआ. वो अपने कार्य पर निरंतर लगा रहा. चूत और गाँड में घूमती जीभों के प्रताप से सुरेखा के हाथ पैर काँपने लगे.

नितिन ने अपना हाथ बढ़ाया और सजल के हाथ से ट्यूब ले ली. फिर ट्यूब से पर्याप्त मात्रा में जैल निकाल कर अपनी मौसी की तंग गाँड में डालकर ऊँगली से फ़ैलाने लगा. सुरेखा के पैर अब टिक नहीं रहे थे. निखिल ने उठकर उसकी कमर में हाथ डाला और उन्हें अपनी सशक्त बाँहों में उठा लिया. सुरेखा के होंठों को चूमा और उसे विश्वास दिलाया कि आज की रात की चुदाई उनके जीवन की अविस्मरणीय चुदाई होगी. सुरेखा उसके होंठों को चूसते हुए आश्वस्त हो गई कि कल उसका हर अंग एक मीठी पीड़ा का अनुभव करेगा.

नितिन बिस्तर पर लेट गया और निखिल ने सुरेखा को उसके ऊपर स्थापित किया. सुरेखा ने स्वयं ही नितिन के मोटे लौड़े को पकड़ा और अपनी चूत पर लगाते हुए उसपर बैठती चली गई. सजल आज पहली बार अपनी माँ का ये रूप देख रहा था. अब तक उसे अपनी माँ को इस प्रकार से चुदते देखने का अवसर नहीं मिला था. सुरेखा अपनी चूत में पूरा लौड़ा लेने के बाद रुक गई.

“जा भाई, अब मौसी की गाँड मार. पर बहुत धीरे से अंदर जाना. अभी बहुत संकरी गली है. कुछ देर में खुलेगी तब मस्ती से गाँड मारना. आज तुझे पता चलेगा कि दुहरी चुदाई का आनंद क्या होता है.” निखिल ने सजल को समझाया. सजल के मन में आया कि वो बता दे कि वो सुप्रिया मौसी की डबल चुदाई कर चुका है, पर उसने ये समय व्यर्थ के विवाद में खोने से टाला. अपने लंड को सुरेखा की गाँड के छेद पर रखा तो सुरेखा ने अपनी गाँड मटकाई।

“अच्छे से चोदना मेरी गाँड मेरे बच्चे. अपनी पापी माँ को उसके पापों का दण्ड दे. तुम्हें तुम्हारे पिता से दूर करने का दण्ड दो.”

“मौसी, बकवास मत करो. नहीं तो यूँ ही बिना चोदे छोड़ देंगे. सजल, मौसी की बात पर मत ध्यान दे. जैसा कहा है वैसे ही करना.” निखिल ने बड़ा भाई होने का कर्तव्य निभाया, और सजल ने आज्ञाकारी भाई और लाडला बेटा होने का और अपने लंड को सुरेखा की मखमली संकरी गाँड में धकेलने लगा.

नितिन इस समय शिथिल लेटा था. सुरेखा मचल रही थी पर कुछ कर न पा रही थी. चूत में गढ़े नितिन के मोटे लंड के कारण सजल को गाँड भेदने में बहुत अड़चन आ रही थी. गाँड अत्यधिक कस गई थी. उस पर सुरेखा की चपलता भी कठिनाई बढ़ा रही थी. उसने एक बार निखिल को देखा जो उसके लंड की प्रगति को ही था. निखिल के सिर के संकेत को समझ कर उसने लंड बाहर निकाला और इस बार कुछ अधिक बल के साथ गाँड में धकेला. सुरेखा आगे की ओर झुक गई और लंड ने अपना रास्ता बनाते हुए एक तिहाई यात्रा पूरी कर ली.

“ओह माँ. मेरी गाँड!” सुरेखा ने कहा तो निखिल हंस पड़ा.

“अरे मौसी, नानी की गाँड तो इससे भी ताबड़तोड़ हमले झेल लेती है. उनको क्यों बुला रही हो.” फिर सजल को देखकर बोला, “भाई अब कूट दे मौसी की गाँड। मम्मी बोल कर गई हैं कि आज की चुदाई इन्हें कभी नहीं भूलनी चाहिए.”

“ऐसा बोली मौसी. ओके.” इसके साथ ही सजल ने अपने लंड को पूरा निकाला और सुरेखा की गाँड में पूरा डालने का प्रयत्न किया. अधूरी सफलता मिली, तो फिर प्रयास किया और अंततः चौथे धक्के में सजल का लंड उसकी माँ की गाँड में पूरा जा बैठा.

“गुड बॉय!” निखिल ने कहा, “पर अब मेरे लंड को भी कुछ ध्यान चाहिए.”

निखिल पलंग पर चढ़कर सुरेखा के सामने जा खड़ा हुआ. सुरेखा की आँखें बंद थीं पर लंड की महक ने उसकी आँखें खोल दीं और उसने मुँह खोलकर निखिल के लंड का स्वागत किया. अब सुरेखा के तीनों छेदों में लौड़े थे और चुदाई का महासंग्राम आरम्भ होने वाला था. और इसकी दुंदुभि सजल ने बजाई जब अपने लंड को बाहर निकालकर फिर से गाँड में पेल दिया. इसके उत्तर में नितिन ने चूत में यही कार्य किया. और फिर एक समन्वय के साथ दोनों भाई सुरेखा की चूत और गाँड की पिलाई में जुट गए. निखिल ने ये निश्चिन्त किया कि सुरेखा के मुँह से उसका लंड न निकले और जितना सम्भव हो सके उसका लंड सुरेखा के मुँह के उतने अंदर तक जाये.

कुछ देर इसी गति और ताल से चुदाई के बाद निखिल ने कहा, “मौसी, अब तुम अपनी गाँड का स्वाद चखो!” और सजल से कहा, “आजा भाई, मौसी को उनकी गाँड का स्वाद चखा दे!”

सजल ने निसंकोच कि वो अपनी माँ को उसकी ही गाँड से निकले लंड को चटाने जा रहा है अपना लंड निकाला और निखिल के उतरते ही उसके सामने जा खड़ा हुआ. सच है वासना मनुष्य का विवेक हर लेती है. और ये मात्र सजल के साथ नहीं था जो अपनी माँ के सामने उसके रस से ओतप्रोत लौड़े को लेकर खड़ा था, बल्कि यही स्थिति सुरेखा की भी थी. उसने केवल एक बार सिर उठाकर अपने बेटे को देखा और फिर मुँह खोलकर उसके लंड को चाटने लगी.

“मस्त स्वाद है न मौसी?” निखिल ने छेड़ा. सुरेखा ने सजल के लंड को मुँह में लेकर निशब्द ही उत्तर दे दिया. और फिर उसका मुँह खुल गया क्योंकि पीछे से निखिल ने अपना मुसल उसकी गाँड़ में पेल दिया था. पर कुछ ही क्षणों की रूकावट के बाद वो सजल के लंड को चाटने और चूसने में जुट गई. आज पूरी रात वो तीनों से भरपूर चुदने वाली थी. तीनों युवा इसके सक्षम थे. और वो भी इसके लिए उत्सुक थी.

कुछ दस मिनट तक इस स्थिति के बाद निखिल ने सजल को लेटने के लिए कहा और फिर सुरेखा को उसके लंड पर चढ़ा दिया. उसने नितिन से पूछा तो उसने पहले अपना लंड चुसवाने की इच्छा बताई तो निखिल फिर गाँड मारने में जुट गया. इसी प्रकार तीनों भाई भिन्न भिन्न जोड़ों में कई घण्टों तक सुरेखा को चोदते रहे. जो झड़ जाता वो कुछ देर विश्राम करता और फिर रिक्त स्थान की भरपाई कर देता. सुरेखा को भी आसन बदल कर चोदा जिससे कि अकड़ न जाये. पर एक पल भी ऐसा नहीं निकला जब सुरेखा के किसी छेद में लंड न हो. हर छेद से वीर्य टपकता रहा पर तीनों उसे अनवरत चोदते रहे. कई बार सुरेखा अचेत हो गई, पर फिर जाएगी और चुदाई का आनंद लेने लगी.

अंततः सुबह के चार बजे भाइयों के इंजन में तेल समाप्त हो गया. कुछ देर तक स्वयं विश्राम करके उन्होंने सुरेखा को उठाया और स्नान करवाया. बिस्तर अब सोने के योग्य न था तो तीनों सुरेखा को उसके कमरे में ले गए और लिटा दिया. सुरेखा अब भी उस सुख का अनुभव कर रही थी और थकान के बाद भी उसके चेहरे पर मुस्कान थी. वो लेटते ही नींद में खो गई. सजल उसके ही पास लेट गया और उसे अपनी बाँहों में लेकर सो गया. निखिल और नितिन अपने कमरे में चले गए और सो गए.

जब तक ये सोये तब तक शीला और सुप्रिया उठ चुकी थीं. आज का दिन बहुत निर्णायक था.

और दिन का अभी आरम्भ ही हुआ था.

क्रमशः

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अध्याय ५१: दिंची क्लब डिगबो, ओडुम्बे, गातिमु

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आप सब इन तीनों रोमियो के विषय में पढ़ चुके हैं. उनके दिंची क्लब में जुड़ने का प्रकरण यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है.

डॉग परीक्षण:

“डॉग आ गए” मंजुल ने संदेश भेजा, जिसे पढ़कर शोनाली हंस पड़ी. तीनों नए अफ़्रीकी रोमियो के नाम ही ऐसे थे कि उन्हें इस प्रकार से पुकार सकते थे. डिगबो, ओडुम्बे, गातिमु (डी ओ जी डॉग). और ये नामकरण करने वाला कोई और नहीं उनका ही मित्र कालिया था. अगर किसी और ने उन्हें ये नाम दिया होता तो उसे रंगभेद माना जाता. शोनाली ने निश्चय किया कि वो अपने लोगों को इस नाम के उपयोग से बचने के लिए कहेगी. कालिया की अनुशंसा या कथन पर ही उन तीनों का एक ही दिन परीक्षण रखा गया था. ये एक अर्थ में शोनाली का भी परीक्षण था, क्योंकि ऐसा पहली बार कर रही थी. पर पार्थ को उस पर विश्वास था. हालाँकि हर परीक्षण के बाद दो घण्टे का विराम था.

“उन्हें बैठाओ और उनके महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करो.” शोनाली ने कहा. आधे घंटे बाद मंजुल का फिर फोन आया. उसने तीनों के विषय में बताया.

“ठीक है, डिगबो को भेजो.”

पर आज शोनाली अकेली नहीं आई थी. उसने अपने साथ बैठी महिला को कहा, “अब आपके छुपने का समय आ गया है.”

“मैं बाहर जाती हूँ.” ये कहकर वो महिला उस कमरे से निकली और निकट के कमरे में चली गई. कुछ ही पलों की देरी के बाद मंजुल एक लम्बे पतले लड़के को लेकर आई. उसके रंग रूप से ही अफ़्रीकी दिख रहा था।

“गुड़ मॉर्निंग, मैडम. आई ऍम डिगबो। यू कैन कॉल मी डिक.” उसने मुस्कुराते हुए कहा जिससे कि उसके श्वेत दाँत चमक गए.

(इसके बाद बातचीत का हिंदी अनुवाद लिखा जा रहा है.)

“देट इस ए नाइस नेम, डिक. पर मैं तुम्हें डी पुकारूँगी।” शोनाली ने कहा और पूछा, “नाम ही डिक है या सच में डिक में कुछ दम है?”

“कालिया ने मुझे बताया है कि मुझे यहाँ के मापदण्ड पर उत्तीर्ण होना है. पर मैं ये बता सकता हूँ कि मेरा लंड दस इंच से अधिक है. और मैंने अपने देश की कई महिलाओं को इसके आनंद का अनुभव दिया है.”

“ओके, पर मुझे नापना होगा.” शोनाली ने कहा तो मंजुल ने डिक को डिगबो को बाथरूम में जाकर नहाने और फिर तौलिया लपेट कर आने की आज्ञा दी. डिगबो के जाने पर मंजुल ने शोनाली को देखा.

“आज आपकी अच्छी चुदाई होनी है. तीन तीन मस्त लौड़े आये हैं. कहिये तो एक को मैं निपटा दूँ?”

“लालची. नहीं आज नहीं. पर तुझे मैं कुछ विशेष देकर जाऊंगी। इनको यहाँ कौन लाया है?”

“कालिया, पर वो चला गया. कहा शाम को आएगा इन्हें लेने।”

इतने में ही डिगबो बाहर आ गया. काले शरीर पर तौलिया एक भिन्नता प्रदान कर रहा था. मंजुल सोफे पर बैठ और अपने हाथ में लिए हुए टेप को एक ओर रख दिया. डिगबो को पास बुलाया और फिर उसके तौलिये को हटा दिया. आधे खड़े लौड़े को देखकर ही वो जान गई कि ये दस इंच पर कर लेगा. पर अपने कार्य को सुचारु रूप से सम्पन्न करना ही उसका कर्तव्य था. उसने लंड को हाथ में लेकर सहलाया और फिर मुँह में लेकर चूसना आरम्भ किया. मुँह में उसके बढ़ते आकर का आभास उसे था और कुछ देर चूसकर उसने लंड बाहर निकाला और टेप ने नापा.

“१०.३ इंच. ये पास होता है.”

“गुड. बधाई हो. तुमने पहली परीक्षा उत्तीर्ण कर ली. अब ये देखना है कि क्या इसका उचित और समुचित उपयोग करना भी जानते हो? मंजुल, तुम जाओ और ओडुम्बे और गातिमु का ध्यान रखो.”

शोनाली को कालिया के कमियों का पता था. जब वो पहली बार आया था तब उसे चूत चाटने का कोई अनुभव न था. इस कारण ही उसे क्लब की महिलाओं की सेवा के पहले इस कला का प्रशिक्षण दिया गया था. कालिया ने बताया था कि डॉग भी इस कला में पूर्ण पारंगत नहीं हैं, परन्तु उसकी समान अशिक्षित भी नहीं हैं. शोनाली की परीक्षा का पहला विषय यही था.

“लंड के बड़े होने से कोई महान चोदू नहीं बनता. उसके लिए चुदाई की कला का ज्ञान होना आवश्यक है. और इस कला के कई आयाम हैं. पर उन सबसे विशेष और महत्वपूर्ण है स्त्री की चूत को अपने मुँह और जीभ से संतुष्ट करना. कई पुरुष जिनके लंड बहुत प्रभावी नहीं होते वो इस कला में इतने निपुण होते हैं कि स्त्रियां उनसे समागम के लिए उत्सुक रहती है. अब तुम्हें मुझे इस प्रकार से संतुष्ट करना होगा.”

डी को बता दिया गया था कि मात्र इस एक कारण उसका आवेदन अस्वीकार नहीं होगा. परन्तु उसे ये अवश्य दर्शाना होगा कि वो इसमें आगे सीखने के लिए उपयुक्त है.

“मैं प्रयास करूँगा, मैम.”

“गुड.” ये कहते हुए शोनाली बिस्तर ओर चल दी. बीच में ही तौलिया उसके तन से नीचे गिर गया. शोनाली की गाँड की थिरकन देखकर डी का लौड़ा लहराने लगा. शोनाली बिस्तर के पास जाकर मुड़ी और डी के लौड़े को देखा और उसका मन नाच उठा. उसके बलिष्ठ शरीर को देखकर विश्वास हुआ कि ये लड़का उत्तीर्ण हो जायेगा. बिस्तर पर लेटकर शोनाली ने अपने पैरों को फैलाया और अपनी चूत के सम्पूर्ण दर्शन डी को कराये. ऊँगली के संकेत से डी को आमंत्रित किया और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया. डी बिस्तर पर घुटनों के बल बैठा और अपनी नाक शोनाली की चूत पर लगाई और एक गहरी श्वास भरी. एक मनभावन सुगंध फेफड़ों तक जा बसी.

डी के लिए ये सुगंध निराली थी. अब तक उसने अपने देश में लौड़ा डाला, धक्के लगाए और खेल समाप्त किया, यही सीखा था. भारत आकर अब उसे सानिध्य नहीं मिला था. ऐसी लुभावनी सुगंध ने स्वतः ही उसकी जीभ को निकालकर उस स्त्रोत को चाटा जहाँ से ये अमृत का रस बाहर झर रहा था. वो न जानते हुए थी सही दिशा में अग्रसर हो गया था.

“गुड, ऐसे ही चाटो!” शोनाली ने आग्रह किया तो डी को मानो प्रशस्ति पत्र मिल गया. उसने आगे बढ़कर अपनी जीभ को चूत की फाँकों पर घिसते हुए भग्न को भी छेड़ा तो शोनाली को मानो एक झटका सा लगा. चूत को भी ये अच्छा लगा होगा क्योंकि डी को अपने मुँह में खारे पानी के प्रवेश करने का आभास हुआ. डी बिना रुके अपनी जीभ को चलाता गया और शोनाली की चूत उसके मुँह अमृत वर्षा करती रही. डी इस सीमा तक इस क्रीड़ा में तल्लीन हो गया कि कब उसकी जीभ ने शोनाली की चूत में प्रवेश किया इसका उसे पता भी नहीं चला.

उसकी जीभ को जब अपने हर ओर कोमल त्वचा का अनुभव हुआ तब डी को खेद हुआ कि उसने इस सुख और स्वाद का आनंद पहले क्यों नहीं लिया. उसने प्रण लिया कि आज से वो हर स्त्री के कामांग का स्वाद लेने के पश्चात ही उसकी चुदाई करेगा. उसने अनजाने में ही दिंची क्लब की महिलाओं को सुख देने की दिशा में पहल कर ली थी. उसकी लम्बी जीभ शोनाली की चूत के अंदर घुसकर उसका निरीक्षण कर रही थी. कोमल त्वचा पर बहता हुआ रज उसकी जीभ को सुगमता से अपना मार्ग पर सफलता दे रहा था. आज का रंगरूट अवश्य भविष्य में झंडे गाढ़ने के लिए दीक्षित हो रहा था.

शोनाली अब झड़ कर तृप्त हो चुकी थी और नियमानुसार डी इस चरण में सफल हुआ था. डी के सिर पर हाथ घुमाकर उसे उठाया और उसके मुँह पर लगे अपने रस को देखकर शोनाली का मन प्रसन्न हो गया. वो डी के अपने कार्य के प्रति समर्पण से भी प्रभावित हुई थी. अब इस परीक्षण के अगले चरण में अग्रसर होने का समय था.

“यू हैव डन वैल. आई ऍम हैप्पी.” शोनाली ने कहा तो डी का चेहरा चमक उठा.

“अब देखना है कि तुम्हारा लंड केवल देखने के लिए ही है या कुछ काम भी करता है.” शोनाली ने कहा.

डी को आशा थी कि शोनाली उसके लंड को चूसेगी, पर उसे समझ आ गया कि ऐसा होगा या नहीं बताया नहीं जा सकता. उसका लंड इस आशा में खड़ा हो चुका था और अब उसे नीचे झुकाने के लिए किसी गुफा में प्रवेश करना आवश्यक था. शोनाली अब तक उसी आसन में थी और उसकी खोह अब और भी अधिक गीली प्रतीत हो रही थी. डी ने शोनाली को देखा तो वो मुस्कुरा दी. ये डी के लिए आगे बढ़ने का संकेत था.

अपने लंड को हाथ में पकड़कर वो बिस्तर पर बैठा और शोनाली की चूत पर रगड़ने लगा. गीली चूत पर लंड घिसने से उसपर भी रस लगा और डी ने उँगलियों से उस रस को अपने लंड पर मला और फिर चूत के मुंह पर लंड रखते हुए शोनाली को देखा. शोनाली उन दोनों के मिलन को देखने को लालायित थी. डी ने एक धक्का मारा और लंड चूत में प्रवेश करते हुए एक चौथाई लुप्त हो गया. अधिक प्रतिरोध न पाकर एक और धक्का मारा और आधे लंड को अंदर गाढ़ दिया.

शोनाली की खाई में खोते हुए उस काले मांसपिंड को देखने वाले मुग्ध हो सकते थे. परन्तु इसका आनंद कुछ ही लोगों को प्राप्त था, वो भी तब जब वो इसकी रिकॉर्डिंग देखते, जो बहुत ही सीमित अवसरों पर ही होता था. डी ने शोनाली से कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया न पाकर अपने लंड को पूरा बाहर निकाला और एक शक्तिशाली धक्का मारा तो लंड पूरा अंदर चला गया. शोनाली के मुँह से सुख भरी आह निकली और उसने अपनी कमर लचका कर डी का स्वागत किया. एक बार तो डी भी अचम्भित रह गया. उसके लंड को पूरा लेने के बाद कई मिनटों तक महिलाएं आँसू पौंछती तो उसने देखीं थीं, पर कमर मटकाने वाली से पहली बार पाला पड़ा था.

शोनाली डी के मन से उसके लंड के आकार का घमंड निकाल देना चाहती थी. इस राह पर कई पथिक आकर निकल चुके थे. डी से उन्नीस उनमें से एक दो ही थे. डी को ये समझना आवश्यक था कि इस क्लब की सदस्याओं को उसके जैसे लम्बे और मोटे लौंड़ों से चुदने का भरपूर अनुभव था और उसके जैसे तीस और इस क्लब में सेवारत थे.

“क्या हुआ? रुक क्यों गए?” शोनाली ने पूछा.

“मै मै मैडम आपको कोई प्रो प्रो प्रॉब्लम तो नहीं हुआ?” उसने हकलाते हुए पूछा.

शोनाली ने ऑंखें मिचकाते हुए कहा, “नहीं तो? ऐसा क्या हुआ?”

डी को आकाश से पृथ्वी पर गिरने में मात्र कुछ क्षण ही लगे, पर अब वो सदैव के लिए पृथ्वीवासी हो गया. वो जान गया कि अब तक जिन महिलाओं से उसका सामना हुआ था वो इतनी परिपक्व नहीं थीं, और इस क्लब में उसे एक से बढ़कर एक चुड़क्कड़ नारी से संसर्ग करना होगा. उसका लंड उनके लिए अपने मनोरंजन के हेतु मात्र एक साधन है. इस आत्मबोध ने उसको जीवन की नयी दिशा दिखाई.

शोनाली मुस्कुरा रही थी, वो जान रही थी कि उसकी इस प्रतिक्रिया से डी का मानमर्दन हो गया था. और यही उसका अभिप्राय भी था. रोमियो का कर्तव्य क्लब की सदस्याओं की सेवा करना था, न कि उन पर रोब दिखाने का. क्लब की अधिकतर सदस्याएँ उनसे गन्ने के समान चूसकर एक ओर फेंकने की क्षमता रखती थीं और किसी प्रकार का भी भाव दिखाना उन्हें कदापि रास नहीं आता था. डी के लंड की अकड़ निकल गई. शोनाली मुस्कुराती रही और फिर उसने अपनी चूत की मांसपेशियों को कुछ इस प्रकार से सक्रिय किया कि डी के लंड में फिर से शक्ति का संचार हो गया और उसने फिर से अपनी पूर्व कठोरता को प्राप्त कर लिया. डी अब शोनाली के आगे नतमस्तक हो गया. पल भर में उसे क्षीण और उतने ही पलों में सम्पूर्ण बनाने वाली नारी पर वो विजय की कल्पना भी नहीं कर सकता था. उनका केवल पूजन और सेवा ही करना उसका कर्तव्य था.

इस आभास के साथ डी ने शोनाली की चुदाई आरम्भ कर दी. पहले कुछ हल्के धक्कों के बाद उसने तीव्रता पकड़ी और शोनाली ने भी उसका उत्साह बढ़ाते हुए उसे और अच्छे से चोदने के लिए प्रेरित किया. डी कुछ ही देर में सामान्य हो गया. उसका घमंड तो चूर चूर हो चुका था पर चुदाई की क्षमता अभी शेष थी. हालाँकि उसकी चुदाई की कला का उतना ज्ञान नहीं था. न तो वो स्त्री के कामांगों के विषय में जनता था न ये कि स्त्री को सम्भोग के समय किस प्रकार से उत्तेजित रखा जाता है. ऐसे धक्के मारने को चुदाई की संज्ञा देना उपयुक्त नहीं था. उसे इस कला का ज्ञान और प्रशिक्षण देना आवश्यक था, अन्यथा क्लब की प्रतिष्ठा पर प्रश्न उठने लगेंगे. पर कौन ये ज्ञान देगा?

डी भरपूर शक्ति के साथ शोनाली की चुदाई कर रहा था. शोनाली को ये समझ आ गया कि डी का पूरा ध्यान अब उसे संतुष्ट करने में है तो उसने और उत्साह से अपनी कमर उछालकर डी का साथ दिया. कई मिनट तक यूँ ही एक ही आसन में धक्के दे दे कर डी झड़ने के निकट आ गया. न जाने क्या सोचकर शोनाली ने उसे अपना रस उसके पेट पर छोड़ने के लिए कहा. डी जब झड़ चुका तो आशा से शोनाली को देखने लगा.

“तुममे शक्ति और सामर्थ्य तो है पर कुशलता नहीं है. मेरे विचार से इसे सिखाया जा सकता है. इस चरण में मैं तुम्हें केवल उत्तीर्ण होने के लिए ही अंक दे रही हूँ. पर इसमें हताश होने की बात नहीं है. क्लब में सेवारत होने के पहले तुम्हें प्रशीक्षित किया जायेगा. अब कुछ देर विश्राम करो, फिर अंतिम चरण का खेल खेलेंगे.”

“ओके मैडम”, डी ने अपने लंड को चूत से निकालकर कहा और सोफे पर जा बैठा.

शोनाली ने उठकर अपने लिए बियर निकाली और फिर एक बियर डी को भी दी. डी एक नए आदर से शोनाली को देख रहा था. उसके सम्मुख बैठी हुई स्त्री किसी भी रूप में सामान्य नहीं थी. और उसे अब ये आभास हो रहा था कि सम्भवतः वो अकेली ऐसी महिला नहीं थी.

“जिस प्रकार से चूत की चुदाई कर रहे थे, उस प्रकार ही गाँड मारते हो क्या?”

डी ने हाँ कहते हुए सिर झुका लिया.

“कोई बात नहीं. हम तुम्हें सिखाएंगे कि स्त्रियों को गाँड मरवाने में कब आनंद आता है और कब कष्ट होता है. किस समय ये कृत्य नहीं करना चाहिए. अगर स्त्री सहमत न हो तो कभी भी गाँड मारने चेष्टा मत करना. हालाँकि ये चूत पर भी उतना ही उपयुक्त है, पर चूत में लचीलापन अधिक होता है और अगर थोड़ा भी उचित संवेदन हो तो अपने रस से वो इसे सरल कर देती है. गाँड के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है.”

डी एक अच्छे विद्यार्थी के समान सुन रहा था.

“इसीलिए, गाँड मारने से पहले उसे उपयुक्त बनाना अति आवश्यक होता है. और इसके लिए तुम्हें न केवल जैल का उपयोग करना चाहिए बल्कि मुँह, जीभ और उँगलियों का भी उपयोग करना आना चाहिए. तुमने जिस प्रकार से मेरी चूत को चूसा है, उससे मुझे विश्वास है कि तुम इसमें भी सफल रहोगे.”

डी ने गाँड चाटने के विषय में सुना तो उसका मुँह टेढ़ा हो गया. पर उसने सोचा कि कालिया भी तो करता होगा. और अन्य रोमियो भी यही करते होंगे. अगर इस कला को वो सिख ले तो अपने देख में अत्यंत लोकप्रिय हो जायेगा.

“मैं पूरा प्रयास करूँगा, मैडम. पर…”

“क्लब की सभी महिलाएं गुदा-मैथुन (गाँड मरवाने) के पहले उसे पूर्णरूप से साफ करती हैं. ये नितांत आवश्यक है और सभी इसकी उपयोगिता भी समझती हैं. मैं भी अभी फिर से सफाई करुँगी। ये सब भी तुम्हारे प्रशीक्षण के अंतर्गत आएगा. परन्तु आज मैं ये समझना चाहूँगी कि तुम इसके प्रति कितने इच्छुक हो.”

“मैं सीखूँगा। आप जैसा सिखाओगे मैं सीखूँगा।”

“तो चलो, देखें तुम क्या जानते हो. मैं अभी आती हूँ.” ये कहकर सोनाली बाथरूम में चली गई. डी को सांत्वना मिली.

शोनाली की मटकती गाँड को देखकर डी का लौड़ा फिर टनटना गया. उसने निकट में पड़ी जैल की ट्यूब देखी तो उसे उठाकर अपने लंड पर मला. इसकी आवश्यकता तो हर बार ही रहती है. और इससे चाहे जितनी भी चुदक्क्ड़ हो, गाँड मरवाने का सम्पूर्ण आनंद उठाती है. अपने लंड को सहलाते हुए वो शोनाली के लौटने की प्रतीक्षा करने लगा. शोनाली ने भी अधिक समय नहीं लिया और उसे देखकर ये पता चल गया कि वो स्नान भी करके आई है. उसने डी के निकट में रखी ट्यूब देखी और उसे लंड सहलाते हुए देखा तो मुस्कुराई.

“मुझे अच्छा लगा कि तुमने समय का सदुपयोग किया है. मैंने भी अपनी गाँड को भलीभांति धो लिया लिया है. परन्तु मेरी गाँड के साथ खेलने से पहले एक बात का तुम्हें ध्यान रखना है.”

“जी”

शोनाली ने अपनी हथेली खोली और उसके हाथ में गाँड को बंद करने वाला एक प्लग था.

“मेरी गाँड मारने के बाद अपना रस उसमें ही छोड़ना है, और इस प्लग से उसे बंद कर देना है. उसके बाद तुम्हें बिना कुछ कहे कमरे से निकल जाना है. हाँ कपड़े पहन कर. इसके आगे का निर्णय मंजुल तुम्हें बताएगी.”

“जी”

“गुड, सो लेट अस प्ले.”

ये कहते हुए शोनाली बिस्तर पर घोड़ी बन गई. इस आसन में शोनाली की गाँड और उभर कर सामने आई. न जाने क्यों डी के मुँह में पानी आ गया. अब तक इस प्रकार की भावना उसके मन में कभी नहीं आई थी. इसका अर्थ यही था कि वो भी इस कला के रंगों में रंगने लगा था. चूत में मीठे स्वाद के बाद अब उसे गाँड का स्वाद चखने का मन था. वो शोनाली के पीछे गया और उसकी गाँड पर हाथ फिराते हुए उसके कसाव को ताड़ने लगा.

इस आयु में भी शोनाली के कसाव यथावत थे. नियमित चुदाई से उसका व्यायाम अच्छा होता था. हालाँकि वो अन्य कई प्रकार के व्यायाम और योग भी करती थी. ऐसा क्लब जो महिलाओं के बल पर चलता हो, स्वयं को सही रूप में दिखाना आवश्यक होता है. विशेषकर तब जब आप उस क्लब की स्वामिनी हों. महिलाओं की परस्पर पर्तिस्पर्धा में वो पीछे नहीं रह सकती थी. ऐसी मखमली गाँड देखकर डी की लार टपक गई और संयोगवश गाँड के छेद पर ही जाकर बिखर गई. शोनाली को तो इसका आभास नहीं हुआ पर डी की जीभ चंचल हो गई.

डी ने झुककर जीवन में पहली बार गाँड पर जीभ लगाई. शोनाली इसकी अपेक्षा कर रही थी तो उसने गाँड हिलाकर डी को आगे बढ़ने का संकेत दिया. डी अब वैसे भी रुकने की स्थिति में नहीं था. वो जीभ को चारों ओर घुमाते हुए केंद्र की ओर बढ़ रहा था. अनुभव की कमी को वो अपने उत्साह से पूरा करने के लिए प्रयासरत था. शोनाली उसके इस मनोवृत्ति से प्रभावित हो गई और गाँड को ढीला छोड़ दिया जिससे कि डी को भेदने में समस्या न हो.

डी की जीभ ने उसे टटोला तो गाँड स्वतः ही खुल गई और उसकी जीभ उसमें प्रवेश कर गयी. डी के नथुनों को एक तीखी गंध का आभास हुआ. परन्तु वो रुका नहीं और अपनी जीभ को अंदर से बाहर करने लगा. शोनाली अपने कर उसका उत्साह बढ़ा रही थी. किसी ऐसे व्यक्ति की तुलना जिसने ये कार्य पहली बार किया हो, डी अत्यंत दक्षता से गाँड चाट रहा था. इस प्रकार से उसने कुछ देर गाँड का आनंद लिया कि शोनाली ने उसे कहा कि अब वो गाँड मारे। डी ने कुछ जैल शोनाली की गांड में डाला और फिर अपने लंड को ऊपर रखते हुए एक धक्का लगाया.

उसके गाँड चाटने के उपक्रम और जैल से सनी गाँड में लौड़ा मक्खन में छुरी की भांति अंदर चला गया. शोनाली ने एक सिसकी ली और फिर अपनी गाँड को पीछे धकेला. डी ने उसका अभिप्राय समझ लिया और शेष लंड भी अंदर डाल दिया. इसके बाद शोनाली नीचे से और डी ऊपर से धक्के लगाने लगे. शोनाली की गाँड से निकलती ऊष्मा से डी का काला मोटा लंड और फैल गया. शोनाली को इससे और आनंद आने लगा और वो डी को चीख चीख कर और तेजी से गाँड मारने के लिए कहने लगी. डी भी अपनी पूरी शक्ति के साथ शोनाली की गाँड मार रहा था और अचरज कर रहा था कि जहाँ उससे गाँड मरवाने वाली महिलाएं उसे धीमे चोदने की विनती करती थीं वहीँ शोनाली उसे और भी अधिक गति और शक्ति से गाँड मारने के लिए उकसा रही थी.

जिस गति से डी चोद रहा था उतनी ही गति से शोनाली भी अपने कूल्हे उछाल रही थी. दस मिनट की चुदाई के बाद शोनाली ने डी को लेटने को कहा और फिर उसके ऊपर चढ़कर लौड़ा अपनी गाँड में ठूँस लिया. अब शोनाली उछाल मार रही थी और डी नीचे से धक्के लगाए जा रहा था. जब शोनाली थक गई तो पहला फिर से बनाया और डी ऊपर से गाँड मारने लगा. अब इस खेल का अंतिम पड़ाव निकट था और दोनों थक रहे थे. डी ने एक चिंघाड़ के साथ अपना लंड शोनाली की गाँड में डाला और अपना रस उसमें छोड़ने लगा. शोनाली अपनी गाँड की मांसपेशियों से उसके लंड को सोखने लगी और जब डी का स्खलन समाप्त हुआ तो उसे प्लग लगाने की आज्ञा दी.

डी को निर्देश भूला न था, उसने लंड बाहर निकाला, उसे शोनाली की गाँड पर पोंछा और प्लग लगाकर गांड बंद कर दी. उसने अपने कपड़े पहने और चुपचाप कमरे से निकल गया. जब वो मंजुल के पास पहुँचा तो मंजुल उसे देखकर मुस्कुराई और ओडुम्बे तथा गातिमु के साथ बैठने को कहा. उसके अंदर जाने के बाद एक फोन मिलाया.

डिग्बो अपने साथियों को नियम समझाने लगा जैसे परीक्षा के पहले विद्यार्थियों को समझाया जाता है. अगर ओडुम्बे और गातिमु में कोई घमंड था तो उसे भी मिटा दिया. अब उन्हें दो घंटे का समय मिला था.

मंजुल ने जिसे फोन किया था वो महिला पवन गति से शोनाली के कमरे में घुसी.

शोनाली: “आओ दी. आज तुम्हारे लिए विदेशी पकवान बनाया है.”

सुमति को किसी आमंत्रण की आवश्यकता न थी वो अब तक नंगी हो चुकी थी और शोनाली की गाँड से उसने प्लग निकाला और अपनी क्षुधा शांत करने में जुट गई. शोनाली ने भी उन्हें पूरे प्रेम से अपनी गाँड को खोल खोल कर रस पिलाया. सुमति जब संतुष्ट हो गई तो शोनाली के साथ लेट गई.

“मैं एक बात कहना चाहती हूँ.”

“बोलो दी.”

फिर सुमति ने अपनी बात कही तो शोनाली ने उसे कहा कि वो इसका प्रबंध कर देगी. उसने मंजुल को बुलाया और कुछ निर्देश दिए. उन्हें सुनकर मंजुल की भी बाँछें खिल गयीं और वो लपककर उन निर्देशों को पूरा करने चली गई.

घण्टे के बाद ओडुम्बे की परीक्षा की गई. जब सुमति उसके वीर्य को शोनाली की गाँड से पी चुकी तो शोनाली ने उसे बताया कि उसकी इच्छानुसार प्रबंध कर दिया है. और कुछ सुरक्षा का भी प्रबंध कर दिया है जो वो उसे गातिमु के परीक्षण के उपरांत बताएगी. गातुमी का परीक्षण भी सफल हुआ. और सुमति को उसका रस पिलाकर उन्हें पंद्रह मिनट में लौटने का निर्देश दिया, परिणाम बताने के लिए. मंजुल ने आकर बताया कि उसने सभी कार्य सम्पन्न कर लिए हैं.

“दी, आपकी इच्छा के अनुसार, तीनों नए रोमियो आज यहीं रुकेंगे. अभी मैंने ये उन्हें नहीं बताया है पर कुछ देर में बता दूंगी. अपनी सुरक्षा के लिए मैंने कालिया जो इन्हें जानता है उसे भी बुला लिया है और दो और रोमियो भी आएंगे पर वो मुख्यतः सुरक्षा के लिए ही होंगे. मंजुल भी आपके साथ रहेगी क्योंकि मैं आपको यूँ अकेले नहीं छोड़ सकती. आशा है आप पूरा आनंद लेंगी.”

“धन्यवाद, मैं प्रकाश को बता देती हूँ.”

“ओके, पर आप अभी जाइये. मैं फिर बुलाऊँगी”

सुमति मंजुल तीनों को लेकर आ गई.

“मुझे तुम तीनों को रोमियो बनने के लिए बधाई देती हूँ. तुम तीनों ने अपने अनुभव की कमी को परिश्रम से पूरा किया है. मैं चाहती हूँ कि तुम्हारी आगे का शिक्षण आज ही आरम्भ किया जाये. तो तुम्हें आज यहीं रुकना है. किसी को इसमें कोई समस्या तो नहीं है?”

तीनों ने कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं.

“ठीक है. मंजुल तुम इनके आवेदन ले आओ.”

मंजुल के हाथ में ही आवेदन पत्र थे जिन पर शोनाली ने हस्ताक्षर किया और इस प्रकार से तीन नए रोमियो क्लब में सम्मिलित हो गए. इसके बाद उन्हें उसकी कमरे में जाकर बैठने के लिए कहा गया. कमरे को साफ किया गया और चादर इत्यादि बदली गयीं.

“मंजुल, दीदी का ध्यान रखना. कैमरा अवश्य चलने देना। हम घर से बीच बीच में देखते रहेंगे. वैसे दो कौन से रोमियो आ रहे हैं? उन्हें भी थोड़ी थोड़ी देर में जांच करने के लिए कह देना.”

फिर सुमति को बुलाया गया. शाम छह बजे कालिया और अन्य दो रोमियो भी आ गए. कालिया के साथ डिग्बो, ओडुम्बे और गातिमु को कमरे में बुलाया. चारों सुमति को देखकर ठिठक गए. उनके पीछे मंजुल मुस्कुरा रही थी.

“आज ये मंजुल के साथ तुम्हारी ट्रेनिंग करेंगी, कालिया तुम्हें इन्हें समझने के आशय से बुलाया है.”

“ओके, मैम. मैं ध्यान रखूँगा। नमस्ते सुमति मैम!”

कालिया ने कहा तो शोनाली को ध्यान आया कि सुमति तो एक बार पहले भी विदेशी वीर्य पी चुकी है. पर अब ये निरर्थक था. उसने सबको बाई कहा और निकल गई. बाहर दोनों रोमियो को फिर से समझाया और उन्हें भी खेल में सम्मिलित होने के लिया कहा. पर एक समय पर एक ही.

चारों अफ़्रीकी रोमियो अब सुमति और मंजुल को देख रहे थे जो अपने कपड़े उतार रही थीं. आज की रात उन दोनों की हर नस में सुख का संचार होने वाला था.

रात अभी शेष थी

क्रमशः

1302300
 
bhai,

आठ परिवारों को एक साथ यूँ ही तो मिला नहीं सकते. उनके मिलन के लिए कोई तो साधन होना चाहिए. और साधन मनोरंजक भी होना चाहिए.

दिंची क्लब और समुदाय यही आवश्यकता पूर्ण करते हैं. अन्यथा कहाँ को बांधना अत्यंत कठिन हो जाता.

इस बार पुनर्लिखित अध्यायों में से कुछ भाग छाँट दिया था, क्योंकि लिखते समय जो विचार श्रृंखला थी वो कहानी में सटीक नहीं बैठी.
 
SIr Ji,

Itane din baad aaye aur vo bhi complaint ke sath.

Maine iska uttr bhai ko bhi diya tha.

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Incest - कैसे कैसे परिवार

Chapter 50 is posted अध्याय 50: दिंची क्लब में डॉग

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अध्याय ५२: जीवन के गाँव में शालिनी

*************************

दृश्य २: जीवन के गाँव में शालिनी:

“भाई मुझे तो लगता है की शालिनीजी हमारी समधन बनने के लिए उत्सुक और सहमत हैं?” बलवंत ने दूसरा पेग समाप्त करते हुए कहा.

“क्योंकि, अब मैं चाहूँगी कि आप सब देखें और होने वाले समधीजी मेरी गांड मारकर मुझे अपने गुट में सम्मिलित करें.” शालिनी ने कहा तो सब ने आनंद से चिल्लाया और फिर तालियाँ बजाईं.

और इन सबके बीच में शालिनी गांड मटकाती हुई कमरे के बीच में जाकर खड़ी हो गई और बलवंत को ऊँगली के संकेत से बुलाया. दर्शकों ने अपने लिए एक और पेग बनाया.

************************

अब आगे:

जीवन ने गीता से कहा, “जाओ, जाकर उसकी सहायता कर दो.”

गीता को जीवन का अभिप्राय समझ आ गया और उसने निर्मला को भी बुला लिया. निर्मला ने बलवंत के लंड पर धावा बोला तो गीता ने शालिनी को बिस्तर पर घोड़ी बनाकर उसकी गाँड से खेलना आरम्भ किया. कुछ देर यूँ ही छेड़ने के बाद उसने जीवन को संकेत किया तो जीवन ने एक ओर रखी तेल की शीशी उसे लाकर दे दी.

जीवन: “मेरे कहने का अर्थ कुछ और था.”

गीता: “चिंता न करो. अपने काम से काम रखो.”

इससे पहले कि जीवन उत्तर देता गीता शालिनी की गाँड पर अपनी जीभ घुमाने लगी और फिर आँखों से जीवन को देखा. जीवन मुस्कुराया और सिर हिलाता हुआ हट कर अपने पोतों के पास जा खड़ा हुआ.

“दादा जी , आपने दादी के लिए मस्त आइटम ढूँढा है. आपको मानना पड़ेगा.”

“नहीं, ऐसा कुछ नहीं है. मानो मेरी झोली में आ गिरी है. न जाने मुझे लगता है कि ये मेरी स्वर्गीय पत्नी और उसके स्वर्गीय पति के आशीर्वाद से ही हुआ है. पलक झपकते ही हम यहाँ तक पहुंच गए. अन्यथा ऐसा कैसे सम्भव है?”

“हाँ, दादा जी, ये हो सकता है.” असीम ने कहा, फिर कुछ सोचकर बोला, “निर्मला नानी की विशेष डबलिंग करने का मन है. मम्मी को भी वैसे चोदे हुए बहुत दिन हो गए हैं.”

जीवन ने घूरकर उन दोनों को देखा, “जो भी करना नाना लोगों के सहमति से करना. नानियाँ तो तुम्हें कुछ मना नहीं करने वालीं, पर इन सब की सहमति भी ले लेना.”

कुमार: “आपका अर्थ है कि हम अन्य नानियों की भी विशेष डबलिंग कर सकते हैं?” उसके चेहरे पर प्रसन्नता छा गई.

जीवन: “तुम क्या सोचते हो निर्मला के देखने के बाद ये दोनों रुकने वाली हैं? और गीता नानी को तो उनकी सामने चोदना।”

कुमार: “दादा जी, यू आर ग्रेट. मैं सुशील नाना से पूछ कर आता हूँ.”

असीम: “अभी संयम रख, उधर देख नई दादी की गाँड को गीता नानी कैसे चाट रही हैं.”

सबका ध्यान उस ओर ही चला गया.

गीता बहुत मन लगाकर शालिनी की गाँड चाट रही थी. शालिनी आहें भरे जा रही थी. निर्मला ने बलवंत के लौड़े को अच्छे से चाटकर उसे चिकना और कठोर कर दिया था. गाँड मारने के लिए लौड़े का अधिकतम कठोरता पाना अनिवार्य होता है. गाँड में जीभ डाल डाल कर गीता ने भी शालिनी की गाँड को अपने पति के लौड़े के लिए उपयुक्त बना दिया था. फिर उसने तेल लिया और शालिनी की खुली गाँड में डाल दिया. शालिनी की गाँड बंद होने लगी तो कुछ तेल बाहर निकल आया जिसे गीता ने उँगलियों से फिर गाँड में डाल दिया. उसके हाथों पर लगे तेल को उसने अपने पति के लंड पर लगाने के पहले उसे चूमा.

तेल लगाकर अपनी पति को देखते हुए बोली, “अच्छे से गाँड मारना समधन जी की. मेरा और हम सब का सम्मान बनाये रखना.”

“उसे कभी भी कम नहीं होने दूँगा, भागवान.” बलवंत ने गर्व से कहा.

तभी जीवन आगे आकर शालिनी के सामने आ खड़े हुए. उन्होंने शालिनी के सिर को उठाया और आँखों में आँखें डालकर कहा, “हम जिस सम्मान की बात कर रहे हैं वो ये है कि......” उसने देखा बलवंत अपने लंड को शालिनी की गाँड पर रख चुका है, “.... गाँड मारने में कोई कोताही और कमी नहीं होनी चाहिए. इन सबकी गाँड जब पहली बार मारी गई थी तब ये युवा लड़कियाँ थीं और गाँड भी कोरी थीं. पर हमने कोई दया नहीं की थी.”

शालिनी की आँखों में उतपन्न हो रहे वासना और भय के मिलेजुले भाव देखते हुए उसने आगे कहा, “और न आज ही करने वाले हैं. पर आपकी गाँड खुली हुई है तो आपको उतना कष्ट नहीं होगा.”

बलवंत का लंड अब शालिनी की गाँड में अग्रसर हो चुका था. गीता ने जीवन के पास खड़े होते हुए उसे झिड़का.

“क्यों डरा रहे हो बेचारी को. गाँड मरवाना आता है इन्हें और बड़े आनंद के साथ मरवाएँगी. हैं न समधन जी.”

अब गाँड में लौड़ा हो तो कोई क्या ही बोल सकता है. शालिनी ने स्वीकार किया तो गीता ने बलवंत को हरी झंडी दिखा दी. शालिनी को बलवंत का लंड बाहर निकलता हुआ अनुभव हुआ और फिर उसका शरीर एक झटके के साथ आगे की ओर चला गया. बलवंत के लंड ने अपना आधा लक्ष्य एक धक्के में प्राप्त कर लिया था. शालिनी की गाँड में एक तीव्र जलन हुई और उसकी आँखों में आँसू आ गए. वो पीछे को हुई ही थी कि फिर आगे धकेल दी गई. इस बार उसकी गाँड में मानो आग लग गई. वो चीखने को हुई तो उसके खुले मुँह पर किसी ने हाथ रख दिया. कोई उसकी पीठ भी सहला रहा था.

“बस हो गया. पूरा लंड अंदर चला गया है. बस अब कुछ ही देर में पीड़ा भी कम हो जाएगी. परन्तु हमारी यही परम्परा है और आज आप भी उसकी भागीदार हैं.”

शालिनी को जीवन की बातें सुनाई तो दे रही थीं पर उसके कानों में सीटियाँ भी बज रही थीं. आँसुओं ने उसके गलों को गीला कर दिया था. उसने सिर उठाकर जीवन को देखते हुए मुस्कुराने का असफल प्रयत्न किया. जीवन ने उसके आँसू पोंछे.

“अब मेरा यहाँ रुकना ठीक नहीं होगा. गीता और निर्मला आपकी सहायता करेंगी.” ये कहकर जीवन हट गया. वो स्वयं भी शालिनी की होने वाली दुर्दशा से आहत होने वाला था. परन्तु उन सबका एक नियम था तो उसे तोड़ना उसके लिए सम्भव न था.

असीम ने उसे एक पेग दिया, “रिलैक्स दादू. दादी सम्भाल लेंगी. अपन व्यथित न हों.”

जीवन ने डबडबाई आँखों से उसे देखा और सिर हिला दिया. अन्य सभी जीवन को देख रहे थे. बलवंत के मन में कुछ दया आने लगी तो निर्मला ने उसे चेताया कि वो नियम के विरुद्ध नहीं जा सकता. जीवन हट कर ऐसे स्थान पर चला गया जहाँ बलवंत उसे देख न सके. बलवंत ने एक गहरी श्वास भरी और अपने लंड को देखा जो शालिनी की गाँड में खो चुका था. अब इस चरण को पूरा करने का आव्हान शालिनी की गाँड कर रही थी.

बलवंत को बलिष्ठ शरीर के ही अनुपात में लंड भी प्रकृति ने दान किया था. और उसके उपयोग की क्षमता भी दी थी. उसे गाँड मारने से अत्यन्त प्रेम था पर जीवन के समान उसके गाँड मारने का ढँग भी निर्ममता से भरा हुआ था. शालिनी अगर सुशील, कँवल या जस्सी को चुनती तो सम्भवतः उसकी गाँड में भूचाल उस तीव्रता से न आता जितना अब आने वाला था. स्त्रियाँ एक ओर से श्वास रोके देख रही थीं. और दूसरी ओर से पुरुषगण. जीवन देखने में असमर्थ था पर उसके पोते पूर्ण रूप से इस क्रीड़ा को देख रहे थे. वे दोनों भी निर्दयता से चुदाई करते थे और उनके नीचे से निकली हुई स्त्री उनके इस रूप से या तो सदा के लिए उनसे दूर हो जाती थी, या उनकी चुदाई की आसक्त. ऐसी महिलाएं उन्हें निरंतर बुलाती रहती थीं और दोनों भाई समय समय पर उनकी इच्छा भी पूरी करते थे.

बलवंत ने अपने लंड को धीमी गति से शालिनी की गाँड में चलाना आरम्भ किया. शालिनी कुछ आश्वस्त हुई कि उसकी गाँड का विनाश नहीं होगा. मन में ये भाव आते ही उसकी गाँड स्वतः ही कुछ ढीली हो गई और बलवंत का कार्य सरल हो गया. एक स्थिर वृद्धि के साथ उसने गति बढ़ाई पर इसका आभास शालिनी को नहीं हुआ क्योंकि उसका मन और तन दोनों शांत थे. बेचारी को प्रलय के पूर्व की शांति छल रही थी. उसकी गाँड खुलते हुए बलवंत के आक्रांता लौड़े को समाहित करने में स्वयं को समर्थ मान रही थी. बलवंत भी उसे कुछ और समय इस भुलावे में रहने देना चाहता था. उसका पूरा ध्यान इस समय उसके लंड और शालिनी के गाँड के संगमस्थल पर केंद्रित था.

जिस प्रकार से वो अपने लंड को उस गहरी अँधेरी खाई में लुप्त होते और फिर बाहर आते देख रहा था उसे अपने परममित्र और संबंधी जीवन के लिए एक प्रसन्नता का भाव था. अगर जो शालिनी और जीवन में मध्य में चल रहा था वो फलीभूत हुआ तो उन सबको अत्यंत संतुष्टि होगी. और इसके हेतु शालिनी की गाँड नियमानुसार मारकर उसे जीवन के लिए प्रस्तुत करना उसका कर्तव्य था. खुलती गाँड, मन में हर्ष की भावना के कारण शालिनी सोच कि इस गाँड मरवानी हो तो डरना किस बात का. बलवंत ने अब गियर बदलने का निर्णय लिया और एक बार जीवन को ढूँढा नहीं तो उसके मन को शांति मिली.

अपने पूरे लौड़े को बाहर निकालकर वो ठहर गया. लंड का टोपा अब गाँड के छेद पर जब चुदाई आरम्भ हुई थी उसी अवस्था में था. उसने शालिनी की कमर पर हाथ रखकर उसे थोड़ा आगे झुकाया. फिर लंड को एक दो बार बहुत धीमे से अंदर बाहर किया और फिर एक शक्तिशाली धक्के के साथ पूरा एक बार में गाँड में पेल दिया. समधन का परिवार में जुड़ने का अनुष्ठान आरम्भ हुआ. शालिनी की एक तीखी चीख ने कमरे को हिला दिया. असीम और कुमार ने अपने दादा के हाथों को पकड़कर उन्हें कुछ भी करने से रोक लिया. जीवन की आँखों में भी आँसू थे जो शालिनी की आँखों से बहते आँसुओं के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ रहे थे.

बलवंत अब न तो रुकने वाला था और न ही किसी भी प्रकार की दया दिखाने वाला था. शालिनी की चीखें उपस्थित स्त्रियों को भी दहला रही थीं, परन्तु वो स्वयं इस कर्मकाण्ड की भुक्तभोगी थीं. और जानती थीं कि शालिनी का मन अब से निरंतर इस प्रकार से गाँड मरवाने के लिए उत्सुक रहेगा. बलवंत गाँड में पूरी शक्ति के साथ लंड पेले जा रहा था. शालिनी की चीखें अब घुट गयी थीं. गाँड में जलन और पीड़ा कम होने लगी थी. बलवंत अभी भी किसी प्रकार से उस पर कोई ममता नहीं दिखा रहा था. उसका लंड विद्युत गति के साथ शालिनी की गाँड में आतंक मचाये हुए था. बलवंत इस नयी गाँड मारकर बहुत प्रसन्न था. बहुत दिनों बाद उसे एक नई गांड का आनंद जो मिला था.

अन्य पुरुष बलवंत की शक्तिशाली चुदाई को देखकर उससे प्रभावित थे. वो वर्षों से बलवंत की चुदाई की भीषणता और तीव्रता देख रहे थे. परन्तु आज ऐसा लगता था कि इस बलवंत में किसी की आत्मा प्रवेश कर गईं हो. एक क्षण के लिए भी उसके धक्कों में कोई कमी नहीं आई थी. चुदाई के खेल में जीवन और बलवंत इस गुट के प्रतिष्ठित खिलाड़ी थे. उनकी पत्नियाँ भी उनसे सहवास में अत्यंत सुख पाती थीं. ऐसा न था कि वे किसी भी प्रकार से कम थे, परन्तु उनमे वो निर्दयता का आभाव था जो कभी कभी स्त्रियों को रास आता है.

बलवंत के कूल्हे जिस गति से चल रहे थे वो विद्युत् को भी मात देने का प्रयास कर रहे थे. हर धक्के में बलवंत पूरा लंड अंदर डालता और लगभग पूरा ही बाहर निकालता था. इस गति में वो कैसे इतना सुचारु रूप से ये कर पा रहा था ये विस्मय का विषय था. शालिनी की गाँड अब पूर्ण रूप से खुलकर उसके लंड को झेल रही थी. शालिनी के मुंह से अब केवल उत्साह देने वाले शब्द फूट फुटकर निकल रहे थे. धक्कों की भीषणता के कारण उसका शरीर इतना झूल रहा था कि कुछ भी बोलना असम्भव था. पर उसके मन ने अवश्य ये प्रतिज्ञा ले ली थी कि वो इस प्रकार की चुदाई अंतिम बार नहीं कर रही है. अगर जीवन के बारे में बताई हुई बातें सही थीं तो उसकी इस प्रकार की नियमित चुदाई की सम्भावनाएँ अनंत थीं.

अपने पति के चेहरे पर पड़ते बल और भिंचते हुए जबड़ों के गीता को चेता दिया कि वो अब झड़ने के निकट है. वो जाकर उसकी पीठ सहलाने लगी जिससे कि वो कुछ शांत होकर आगे की चुदाई करे. उसके इस कार्य से बलवंत कुछ शांत हुआ और उसकी गति में कुछ कमी आ गई. हालाँकि उसने लंड के आघात की लम्बाई और गहराई को कम न किया. इस कारण शालिनी अब बोलने की स्थिति में आ गई.

“आह, समधीजी. सच में आपने तो मेरी गाँड फाड़ ही दी. पर अब खुल गई है तो हर दिन यूँ ही मरवाया करुँगी. मेरा बेटा और पोता भी अच्छी गाँड मारते हैं, पर बड़े प्रेम से. उन्हें समझाऊँगी कि मुझे यूँ ही चोदा करें.”

जीवन जो दूर खड़ा बिना देखे बस सुन रहा था इस कथन से प्रफुल्लित हो गया. वो आगे आकर खड़ा हुआ.

“उनसे भी कहना और मैं भी तुम्हारी गाँड को हर दिन मारा करूँगा. और हमारे मिलन के बाद तुम्हें चोदने और गाँड मारने वालों की कमी न होगी. मेरा बेटा और मेरे पोते भी ऐसे ही चुदाई करते हैं.”

“अच्छा है. अब तो मैं आपकी होने का नियम भी पूरा कर चुकी हूँ.”

बलवंत ये सुनते ही चिंघाड़ मारकर झड़ने लगा. पर उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया जिससे कि वीर्यपात शालिनी की गाँड के भीतर न होकर ऊपर और पीठ पर हुआ. दो मिनट तक बलवंत कांप काँप कर अपना रस छोड़ता रहा. गीता इस मात्रा को देखकर अचम्भित हो गई. निर्मला, पूनम और बबिता भी उसके पास आकर खड़ी हो गयीं. जब बलवंत का झड़ना रुका तो बबिता ने उसके लंड को चाटकर उसे धन्यवाद दिया. वहीँ पूनम और निर्मला शालिनी के शरीर पर बिखरे वीर्य को चाट गयीं. जब तीनों ने गीता को देखा तो उन्हें ग्लानि हुई कि उसे छोड़ दिया.

पर गीता मुस्कुराई और शैली की गांड को खोलकर उसे अंदर से चाटने लगी. शालिनी अब ढेर हो चुकी थी. उसकी आँखें बंद थीं और वो जीवन से गाँड मरवाने की कल्पना में खो गई थी. कुछ देर बाद शालिनी को उठाया गया और वो लड़खड़ाती हुई जीवन के सीने से लग गई.

“अब हमें एक दूसरे से दूर रखने का अंतिम कारण भी समाप्त हो चुका है.”

“सच में. अब हमें एक होने से कोई नहीं रोक सकता.” जीवन ने कहा तो वहां उपस्थित सब तालियाँ बजाने लगे.

सुशील ने असीम और कुमार को इसे उत्सव बनाने के लिए मदिरा पिलाने की आज्ञा दी.

क्रमशः

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