Incest कैसे कैसे परिवार - Page 12 - SexBaba
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Incest कैसे कैसे परिवार

अध्याय ५२: राशि और शिखा

दृश्य १: रूचि का घर:

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गौरव, फिलिप और मेहुल ने राशि को भिन्न भिन्न आसनों में चोदा था और अब झड़ रहे थे. एक एक करके वो रणभूमि से हटते गए और राशि संतुष्टि के साथ पलंग पर ही ढेर हो गई. उसके मुँह, चूत और गाँड से रस भी जा रहा था. पर वो अचेत सी पड़ी हुई थी. उसके चेहरे की मुस्कान और संतुष्टि के भाव ही उसके सुख का प्रमाण थे. चुदाई के इस संग्राम में अब एक विश्राम का समय था. सो व्हिस्की के पेग बने और सब पीने में व्यस्त हो गए.

रूचि अपनी माँ की एक ओर ले गई और उन्हें क्लब में रहने के विषय में पूछा. राशि सहर्ष ही मान गई. रूचि के मन से एक बोझ उतर गया. उसने पार्थ को संकेत दिया कि सब ठीक है.

शिखा आज रात्रि यहीं रुकने वाली थी. रोमियो में से तीन अपने घरों को जाने वाले थे. पार्थ ने रूचि के ही साथ रुकने का निर्णय लिया। अब शिखा और राशि की रात भर चुदाई होने वाली थी.

अब आगे:

पार्थ और रूचि जाकर रूचि के कमरे में लेट गए. कुछ ही समय में दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. शिखा की गाँड मारने के बाद भी पार्थ का लंड फिर उठ खड़ा हुआ था. उधर सचिन दो अन्य रोमियो के साथ जा चुका था. सचिन सबीना के घर जा रहा था. वो उसे क्लब में होने वाली कुछ चुदाई के प्रकरण दिखाना चाहता था. इस उद्देश्य से पहले वो नूतन के घर गया जहाँ से नीलम ने उसे कुछ हार्ड डिस्क दे दीं. पार्थ ने उसे बता ही दिया था कि किन दृश्यों और क्रीड़ाओं के डिस्क देनी थीं. नूतन सचिन को देकर मुस्कुराई और सचिन चला गया.

राशि के कमरे में अब तीन अफ़्रीकी रोमियो जिन्हें प्रेम से डॉग पुकारा जाता था उपस्थित थे. उनके साथ मेहुल और दो अन्य रोमियो भी थे. मेहुल रुकने के लिए इस वचन पर माना था कि अगले चार दिनों तक उसे किसी और की सेवा के लिए नहीं बुलाया जायेगा. उसे अपने परिवार में कुछ लंबित कार्यों को पूर्ण करना था.

राशि ये नहीं जानती थी कि ये सम्भवतः उसके घर में होने वाली अंतिम सामूहिक चुदाई होने वाली थी. शिखा के तन में एक नया उन्माद था. वो एक चुड़क्कड़ स्त्री थी और कई बार इस प्रकार के सम्मेलनों में भाग ले चुकी थी. पर न जाने क्यों आज उसे एक भिन्नता का अनुभव हो रहा था. अब तक उसकी चूत और गाँड की चुदाई हो चुकी थी और दोनों की चुदाई के लिए वो रात्रि भर के व्यभिचार के लिए उत्सुक थी. उसके सुरक्षा कर्मियों ने उससे पूछने के बाद बंगले में ही अपनी व्यवस्था कर ली थी. ये सब उनके लिए नया नहीं था.

राशि ने सबको एक ड्रिंक लेने के लिए कहा. “इसके बाद बहुत देर तक तुम सबको पानी भी नहीं मिलने वाला.”

सबने अपनी रूचि का ड्रिंक लिया और पीने लगे.

मेहुल को देखकर राशि बोली, “वैसे तुम नए आये हो, पर अगर अन्य किसी को आपत्ति न हो तो मैं चाहूँगी कि आज तुम इनके मुखिया की भूमिका निभाओ.”

मेहुल ने कुछ न कहा, और अन्य सब जानते ही थे कि जो भी क्लब की सदस्या कहती हैं उसका पालन करना ही उनका धर्म और कर्तव्य है.

“गुड, तो अब मैं ये बताना चाहती हूँ कि मेरी चुदाई तो जिस सब अब तक करते रहे हो वैसी ही होगी, परन्तु शिखा कैसी चुदाई चाहती है ये वो बताएगी. शिखा ने उसे ओर देखा जहाँ पर कैमरे के माध्यम से उसके पति बॉबी ये सब देख रहे थे.

“मैं भी वैसी ही चुदाई चाहती हूँ. मेरा रोम रोम कराह उठे. शरीर में उठने की शक्ति न रहे. और मेरा हर छेद इतना संवेदनशील हो जाये कि अगर फूँक भी मारे तो सरसरी हो जाये. क्या ऐसा हो सकता है?”

“बिलकुल,” मेहुल के तो मन की बात हो गई, “परन्तु मैं चाहूँगा कि आप एक सुरक्षा शब्द और एक सुरक्षा संकेत निर्धारित लें ताकि अगर आपको अधिक कठिनाई हो तो हमें पता चल सके.”

शिखा सोच में पड़ गई. फिर उसने बॉबी की पुत्री मनीषा का नाम लेना ही सही समझा.

“मनु”

“और संकेत?” मेहुल ने पूछा.

ये प्रश्न कठिन था. फिर राशि ने सुझाव दिया.

“अगर एक एक करके दोनों हाथ उठाये तो रुक जाना.”

मेहुल ने सोचा फिर कहा कि एक हाथ ही ठीक है. बस मुट्ठी बंद करके हाथ उठाये. जब सब इसे समझ गए तो मेहुल ने शिखा के सिर पर हाथ रखा.

“आप जानती हैं न कि हम आपके साथ अपने ढंग से चुदाई करने वाले हैं. आपके पास सुरक्षा शब्द और संकेत के सिवाय कोई और ढाल नहीं है.”

“हाँ. और मैं इस प्रकार से पहले भी कई बार चुद चुकी हूँ. अंतर ये है कि उनके लंड तुम सबकी तुलना में छोटे थे. अधिक या कम ये मैं नहीं बताऊँगी।”

“तो फिर हम सब एक एक करके आपकी चुदाई करेंगे. पहले चरण में केवल चूत और मुँह का प्रयोग किया जायेगा. दूसरे में गाँड और मुँह और फिर चूत और गाँड। उसके बाद जो भी होगा, होगा. और मैडम भी इस में सम्मिलित हैं और उन्हें भी इसी प्रकार से चोदा जायेगा.”

“ठीक है.”

इसके बाद मेहुल ने अन्य रोमियो को निर्देश दिया कि उन्हें किस प्रकार से घूमना है. पहला रस चेहरे पर छोड़ना होगा, दूसरा स्तनों पर, तीसरा गाँड पर, चौथा मुँह में उसके बाद जहाँ इच्छा हो. फिर मेहुल ने रोमियो बंधुओं को बताया कि हर आसन में केवल पाँच मिनट ही चोदना है. उसके बाद दूसरी महिला को चोदना होगा परन्तु दूसरे छेद में. अगर अब तक मुँह चोदा तो अगली बार मुंह नहीं चोदना है. इस प्रकार उन्हें परिवर्तन के कारण विराम मिल जायेगा और अधिक देर तक चुदाई कर सकेंगे. उसने ये स्पष्ट किया कि पूरी रात राशि और शिखा के किसी ने किसी स्थान में लौड़ा होना ही चाहिए. सभी रोमियो ने अँगूठा दिखाकर मेहुल की योजना का अनुमोदन किया.

उसने फिर राशि और शिखा को देखा जो उसके इस संचालन की क्षमता से प्रभावित हो रही थीं. उसके इतनी बार पानी के छोड़ने के अंक से ही उन्हें पता चल गया कि आज की पूरी रात चुदाई का संग्राम होना है.

“आप दोनों के लिए भी कुछ नियम हैं.” राशि और शिखा ने सहमति में सिर हिलाया.

“आपको दूसरे के तन पर गिराए हुए रस को चाट कर पीना होगा. इसके लिए चुदाई कुछ क्षणों के लिए रोकी जा सकती है. परन्तु ये गति पर निर्भर है. अगर दूसरे की चुदाई नहीं रोकी जा सकती तो आपकी चुदाई सफाई होने तक स्थगित रह सकती है. ये हम रोमियो पर निर्भर है कि हम क्या चाहते हैं.”

“ओके.” राशि और शिखा ने एक दूसरे को देखते हुए एक स्वर में कहा.

“तो पहले आप दोनों हम सबके लौंड़ों को चाटकर खड़ा कीजिए.”

मेहुल ने अपने रोमियो को निर्देश दिया और वे राशि और शिखा के चारों ओर एक गोले में खड़े हो गए. राशि और शिखा घुटनों पर बैठीं और अपने सम्मुख वाले लौड़े को चूसने लगीं. घुटनों के बल घूम घूम कर वे सारे रोमियो को लंड चूस रही थीं. रोमियो इसका भरपूर आनंद उठा रहे थे और एक दूसरे को देखकर हाथ मिला रहे थे. रोमियो उस समय की प्रतीक्षा में थे जब उनके लौड़े चूत और गाँड में उत्पात मचाएँगे।

और मेहुल की योजना के अनुसार उन्हें अधिक देर तक रुकना भी नहीं पड़ा. मेहुल ने पहली चुदाई से दूर रहकर रोमियो की चुदाई को देखकर सीखने और समझने का मन बना लिया था. उसके विस्तृत अनुभव के बाद भी वो नया सीखने के लिए उत्सुक था. इसका लाभ उसे अपने परिवार, समुदाय और क्लब तीनों में मिलने वाला था. उसने लंड चूसना बंद करवाते हुए राशि और शिखा को पलंग पर लेटने के लिए कहा. उसने ओडुम्बे को रुकने का संकेत दिया और उसके साथ इस नए संयोजन को देखने लगा. वो इसे स्वाभाविक रूप से चलने देना चाहता था.

राशि और शिखा को एक ही ओर लिटाकर एक एक रोमियो ने अपने लंड उन्हें चूसने के लिए प्रस्तुत किये. दो अन्य रोमियो उनके पैरों के बीच स्थान बनाकर अपने लंड उनकी चूत पर घिसने लगे. और फिर एक सशक्त धक्के के साथ अपने लंड अंदर धकेल दिए. कुछ देर पहले हुई चुदाई के कारण चूतें सरलता से उनके आधे लंड निगल गयीं. अगले धक्के में दोनों चूतों में दस इंच से बड़े लौड़े पूर्ण रूप से समा गए. अगर उनके मुँह लंड से बंद न होते तो अवश्य कुछ चीखें सुनाई देतीं. उन्हें शांत रखने का ये सर्वोत्तम उपाय था.

चूँकि व्यवस्था ही ये थी कि चुदाई घनघोर की जाये तो चारों रोमियो अपने पूरे बल के साथ चुदाई में जुट गए. मुँह में लंड अवश्य कुछ ठहर कर जा रहे थे ताकि श्वास जाये, पर चूत में ऐसी कोई कोताही नहीं की जा रही थी और लम्बे तगड़े धक्कों के कारण शिखा और राशि की चूतें चरमराने लगीं. पाँच मिनट के अंतराल के बाद स्थान परिवर्तन का समय हो गया जिसकी घोषणा ओडुम्बो ने की. शिखा चूत से निकला लंड राशि के मुँह में चला गया और राशि के मुँह से निकले लंड ने शिखा की चूत में प्रवेश किया. इसी प्रकार से दूसरे लौड़े भी स्थान परिवर्तन कर लिए. चुदाई का दूसरा चरण आरम्भ हुआ और फिर पाँच मिनट तक चलने के बाद स्थान बदले गए. इस बार राशि की चूत से निकले लौड़े ने मुँह और मुँह से निकले लौड़े ने चूत का आनंद लेना आरम्भ किया और यही शिखा के साथ भी हुआ.

शिखा इस खेल में बहुत आनंद ले रही थी. उसे अब समझ में आया कि दिंची क्लब की विशेषता क्या है. न केवल उनके रोमियो मोटे और लम्बे लौंड़ों के स्वामी थे, बल्कि उनके इस प्रकार से नए नए आयोजन में चोदने से महिलाओं की संतुष्टि का स्तर ही भिन्न रहता है. कुछ देर के लिए जब लौड़े उनकी चूत खाली छोड़ते थे तो शीतल पवन के झोंकों से एक सिरहन का आभास होता था. और फिर नया लंड उसका स्थान ले लेता था. शिखा अब तक झड़कर शाँत हो जाती अगर ये पाँच मिनट के अल्पविराम न लगते. होता ये था कि जैसे ही वो झड़ने के निकट होती कि लंड चूत छोड़ देता और वो फिर लौट आती. यही स्थिति राशि और रोमियो की भी थी. इस प्रकार चुदाई को बहुत लम्बे समय तक खींचा जा सकता था.

चारों छेदों की चुदाई करने के पश्चात चारों रोमियो हट गए और अब ओडुम्बो और मेहुल को अवसर मिला. दोनों चूतें मोटे लौड़े खा कर फैली और फूली हुई थीं. सामूहिक चुदाई में ये सामान्य घटना होती है. दोनों ने अपने लौड़े चूत में स्थापित किया और फिर चुदाई आरम्भ हो गई. जहाँ मेहुल शिखा की आँखों में आँखें डालकर चोद रहा था वहीँ राशि की धाकड़ चुदाई के कारण आँखें बंद थीं. ओडुम्बो का ध्यान अपने लंड पर था जो राशि की चूत को मानो फाड़ देना चाहता था, हालाँकि इस राह से निकले हुए हर यात्री को इसमें असफलता ही प्राप्त हुई थी.

मेहुल ने निर्देश दिया कि इस बार लगातार चुदाई करते हुए राशि और शिखा मैडम को झड़ाना है और सम्भव हो तो एक दो रोमियो भी झड़ जाएँ, जिससे की निर्धारित कार्यक्रम को पूरा किया जा सके. अन्य सभी रोमियो मान गए. हालाँकि इसमें मेहुल की एक चाल भी थी. वो चाहता था कि अगले चरण में शिखा की गाँड सबसे पहले उसे मारने का अवसर मिले. उसकी गाँड मारने की कल्पना वो उसके आने के समय से कर रहा था. पार्थ उसका बॉस था तो पार्थ को तो वो पीछे धकेल नहीं पाया, पर अब वो ऐसा कर सकता था, पर इसकी भनक उसके अन्य रोमियो साथियों को नहीं लगनी चाहिए थे. जो झड़ जायेगा वो अगले चरण के लिए पीछे चला जायेगा.

इसी कारण ओडुम्बो और वो राशि और शिखा की बदल बदल कर चुदाई कर रहे थे. फिर उसने अपने पीछे संकेत किया और एक रोमियो उसके पीछे आ खड़ा हुआ. अपना लंड राशि की चूत से निकालकर उसने शिखा को चटाया और फिर हट गया. अपने लिए एक पेग बनाकर चुस्कियाँ लेने लगा. ओडुम्बो ने ये देखा तो उसने अपना स्थान गतिमु को थमा कर अपने लंड को राशि से चटवाया और मेहुल के पास चला गया. मेहुल के कहे अनुसार दोनों रोमियो राशि और शिखा की धुआँधार चुदाई कर रहे थे. राशि और शिखा अब झड़ने लगीं और जैसे ही वो चीखकर झड़ी दोनों रोमियो हट गए और उनके पीछे के रोमियो ने मोर्चा संभाल लिया. इन दोनों की झड़ने की इच्छा तीव्र थी और उन्होंने भी अपनी क्षमता का पूरा परिचय देते हुए शिखा और राशि को दो बार और झाड़ दिया.

अंत में जब स्वयं झड़ने के निकट पहुंचे तो अपने लंड निकालकर शिखा और राशि के चेहरे के पास जाकर लंड की मुठ मारने लगे. उनका गाढ़ा श्वेत वीर्य उनके लौडों से पिचकारियां मारते हुए शिखा और राशि के चेहरे पर गिरने लगा. शिखा और राशि ने आंख और मुंह बंद किये हुए थे. चिपचिपा लेसदार वीर्य उनके चेहरे से चिपकते हुए नीचे बहने को हुआ तो उँगलियों से उसे रोक दिया गया. दोनों रोमियो झड़ने के बाद हट गए. शिखा और राशि कुछ समय तक यूँ ही लेती रहीं. फिर एक दूसरे को देखा. पर राशि ने पहल की और शिखा के चेहरे से वीर्य को चाटना आरम्भ किया. वो चाटती एक बार स्वयं पी लेती, और दूसरी बार शिखा में मुँह में डोल देती. अच्छे से चेहरे को चाटकर शिखा का चेहरा चमका कर वो लेट गई. फिर शिखा ने अपना कर्तव्य पूरा किया. फिर दोनों उठीं और विराम का लाभ उठाते हुए एक एक पेग पीने लगीं.

“तो आपका अनुभव कैसा रहा?” मेहुल ने शिखा से पूछा तो शिखा की आँखों में एक नशा सा दिखाई पड़ा.

“बहुत उत्कृष्ट. मुझे ये हर कुछ मिनटों में बदलने का प्लान अच्छा लगा. सम्भवतः इसी कारण मुझे इसमें अधिक आनंद मिला है. सामूहिक चुदाई तो मैंने पहले भी कई बार की है और उसका आनंद भी अनूठा है. परन्तु आज की चुदाई का स्तर उनसे भिन्न था. सम्भवतः तुम सबके लौड़े उन स्थानों छू पा रहे थे जहाँ पहले कोई नहीं पहुँचा था. तुम तीनों___” शिखा ने डॉग बन्धुओं को देखकर कहा, “अच्छी चुदाई भी करते हो और बिना किसी ताल के करते हो. इसका भी अपना सुख है. जब पता न हो कि अगला धक्का कैसा पड़ेगा, तब तन और मन दोनों एक उत्सुकता में रहते हैं.”

“आपने बहुत अच्छे से समझाया.” मेहुल ने कहा, “और अब आगे के लिए आपकी क्या विचार है?”

शिखा मुस्कुराई, “इस बार तो हमारी गाँड मारी जानी है, तो उसके लिए भी एक आतुरता है. पर उसके आगे सोचकर मन में अधिक कुतूहल है. तुम जब मेरी चूत और गाँड एक साथ मारोगे तब क्या होगा ये अभी सोचना भी कठिन है.”

“अरे, स्वर्ग दिखेगा तुझे, स्वर्ग.” राशि ने विश्वास दिलाया, “ये ऐसी चुदाई करेंगे कि तुझे स्वर्ग की झलकी दिखा देंगे. एक से बढ़कर एक हैं ये और इनका तालमेल तो क्या कहना. मैं तो इनकी इतनी बड़ी प्रशंसक हो गई हूँ कि क्या ही बताऊँ.”

शिखा, “मुझे भी ऐसा लगता है. जिस प्रकार से पार्थ ने गाँड मारी और इन्होनें चूत मारी है, मुझे विश्वास है कि उसमें परमानंद की प्राप्ति होगी.”

“तो मेरे विचार से समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए.” मेहुल ने उठकर शिखा के हाथों से ग्लास लिया और ग्लास रखकर शिखा को बिस्तर की ओर ले गया. शिखा की थिरकती गाँड देखकर सबके मुँह में पानी आ गया. परन्तु पहले हाथ रखने के कारण उसे ही गाँड का आनंद सबसे पहले मिलने वाला था. वो ये सोच रहा था कि शिखा की गाँड उसकी अपनी माँ स्मिता के समान मारे, धीरे और प्रेम से या सुजाता के समान। इसका निर्णय शिखा को करना होगा. वो मंत्री से कोई पंगा नहीं लेना चाहता था.

राशि ने अपने ओडुम्बो का हाथ पकड़ा और चल दी. गौरव और डिग्बो अभी झड़े थे तो वो पीछे रुक गए, उन्हें बीस मिनट का विश्राम भी मिल गया. गातिमु शिखा की ओर चला तो फिलिप राशि की ओर चला गया.

पलंग के सामने मेहुल ने शिखा को देखा। शिखा मुस्कुराई और उसने मेहुल के लंड को थाम लिया.

“अगर मैं सही हूँ तो तुम मेरी गाँड मारने वाले हो. बस यही कहूँगी कि मिनट भर के लिए धीरे करना फिर चाहे जैसे मारना हो मार लेना. आगे जो होना है वो तुम ही जानो.”

मेहुल को ये खुला निमंत्रण था, अपने ढँग से शिखा की गाँड मारने का. और वो पहले मिनट के बाद अगले चार मिनट में अपनी पूरी शक्ति के साथ इस मंत्री की पत्नी की गाँड मारने के लिए प्रेरित हो गया था. शिखा भी उसके भाव देखकर समझ गई कि उसकी गाँड की माँ चुदने वाली है, पर बॉबी को अपनी ऐसी चुदाई दिखाना ही उसका लक्ष्य था. अगर उसका अनुमान ठीक था तो पारसजी की माँ कुछ दिनों के लिए रिसोर्ट में ही थीं और आज बॉबी भी वहीँ था. तो उसकी चुदाई अवश्य ही पारसजी की माँ की भी घनघोर चुदाई होना निश्चित था.

मेहुल ने धीमे से शिखा को घोड़ी के आसन में बिस्तर पर झुकाया. गातिमु शिखा के आगे जाकर खड़ा हो गया. शिखा की कसी गाँड के उभार देखकर मेहुल की लार टपक गई और शिखा की गाँड के छेद पर जा गिरी. शिखा सिहर गई और मेहुल ने उसकी गांड में ऊँगली डालकर थूक को अंदर धकेल दिया. शिखा ने गातिमु के लंड को चाटा और फिर मुँह में भर लिया. अपनी ऊँगली से शिखा की गाँड को खोलकर मेहुल ने उसके अंदर और थूक डाला और उँगलियों से फैला दिया. जैल का प्रयोग न करने का निर्णय शिखा द्वारा दी गई अनुमति पर आधारित था.

मेहुल को जब लगा कि गाँड लौड़ा खाने के लिए उपयुक्त हो गई है तो उसने अपने लंड को गाँड पर लगाया और धीरे से अंदर डाल दिया. इस कारण शिखा के मुँह से लंड बाहर निकला और उसने हल्की सी सिसकारी ली. चूँकि मेहुल ने लंड बहुत धीरे से अंदर डाला था तो शिखा ने फिर से गातिमु के लंड को चूसना आरम्भ कर दिया. मेहुल ने पूरे लौड़े को एक सधी गति के साथ पूरा अंदर डाला और फिर ओडुम्बे की ओर देखा.

वहाँ का दृश्य भी लगभग वैसा ही था. हालाँकि ओडुम्बे ने लौड़ा डालने में तेजी दिखाई थी और उसका लंड राशि की गाँड के अंदर बाहर हो रहा था. फिलिप का लंड राशि के मुँह में था और वो स्वयं ही अपने कूल्हे हिलाकर राशि का मुँह चोद रहा था. मेहुल मुस्कुराया. राशि की चुदाई से अभ्यस्त रोमियो उसे किस प्रकार से चोदना अच्छा लगता है जान चुके थे और उसके साथ उसी प्रकार का व्यवहार करते थे. किसी भी संभ्रांत परिवार की प्रौढ़ महिला उसे देखकर अचम्भित हो जाती कि राशि कैसे ये सब सहन करती है.

ओडुम्बे की ताल में ताल मिलाते हुए मेहुल ने शिखा की गाँड मारना आरम्भ किया. उसने घड़ी देखी तो उसके पास अब केवल साढ़े तीन मिनट ही शेष थे. समय की कमी देखते हुए उसने गति बढ़ाई और पूरी शक्ति के साथ शिखा की गाँड मारने लगा. शिखा ने इतनी तीव्रता की कल्पना नहीं की थी और उसके मुँह में गातिमु का लंड ठहर नहीं पा रहा था. गातिमु ने फिलिप का ढंग अपनाया और शिखा के सिर को पीछे से पकड़कर उसके मुँह में लंड पेलने लगा. मेहुल के धक्कों से झूलती शिखा के मुँह में लंड डालने में उसे अधिक परिश्रम भी नहीं करना पड़ा.

पाँच मिनट की समाप्ति के बाद स्थान परिवर्तित हुए और फिलिप ने मेहुल का स्थान लिया. गाँड की स्थिति देखकर उसे दो पल के लिए दया आई, पर फिर ध्यान आया कि शिखा की यही इच्छा है और उसके पास भी पाँच ही मिनट का समय है इस गाँड को मारने के लिए. उसने आव देखा न ताव एक बार में लंड पेला और दे धकाधक चोदने लगा. ओडुम्बे के लंड को शिखा ने मुँह में लिया तब उसे ध्यान आया कि ये तो राशि की गाँड के रस से लथपथ है. पर अब तक देर हो चुकी थी. राशि को मेहुल के लंड को चूसने में कोई आपत्ति नहीं थी. वो अपनी दूसरी बेटी शुचि के साथ ये सब पहले भी कई बार कर चुकी थी. मेहुल ने उसके सिर को पकड़कर उसके मुँह में लंड डाला और पीछे से गातिमु का लंड राशि की गाँड में प्रवेश कर गया. चुदाई का एक नया संग्राम आरम्भ हुआ.

इस चक्र के अंत में गौरव और डिग्बो भी सम्मिलित हो गए और कुल लगभग तीस मिनट की धुँआधार चुदाई के बाद सब शांत हो गए. इस चक्र में गातिमु और मेहुल को बैठना पड़ा क्योंकि वो झड़ गए थे और जैसा निर्धारित था उन्होंने वीर्यपात के स्तनों पर किया था जिसे पूरी रूचि के साथ दोनों ने चाट लिया था. गाँड के छेद पूरे लाल थे और खुले हुए थे. एक बार फिर से मदिरा का सेवन किया गया. अगला चरण और उसके बाद की क्रीड़ा के विषय में सोचकर ही शिखा उत्तेजित हुए जा रही थी. उसने राशि को दो लौडों से चुदते देखा था और अब तक उसने भी उनका आनंद ले ही लिया था तो उसके मन में भी तो नहीं था.

सभी रोमियो अब शिखा को भोगने के ही पक्ष में थे. परन्तु अगला चरण दुहरी चुदाई का था. हुए इसमें उन्हें राशि की भी चुदाई करनी थी. राशि को चोदने में अब उनके लिए कोई नयापन नहीं था पर वो चुदवाती पूरे उत्साह से थी. राशि, शिखा, मेहुल सभी रोमियो आज की रात में होने वाली घटनाओं को सोचकर उत्तेजित हो रहे थे.

रात अभी शेष थी.

क्रमशः

1319100
 
Chapter 52 is posted

अध्याय ५२: राशि और शिखा

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मित्रों,

ये अपडेट भी मैं पूर्ण नहीं कर पाया हूँ. कल पोस्ट करने का कोई अवसर नहीं है क्योंकि टूर पर निकलना है. तो ५१ और ५२ को मैं आगे पूरा कर दूँगा। सबीना बहुत दिनों से प्रतीक्षा कर रही है कि मैं उसके परिवार की कथा आगे बढ़ाऊँ तो अगले अपडेट मैं उसकी कथा रहेगी, फिर इन दोनों को पूरा करूँगा।

वैसे भी इस बार कोई अधिक कमेंट भी नहीं मिले न ही व्यूस. देखते हैं क्या होता है.
 
अध्याय ५३: सबीना की कहानी -

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अब तक:

राशि के घर से निकलकर सचिन सबीना के घर जा रहा था. वो उसे क्लब में होने वाली कुछ चुदाई के प्रकरण दिखाना चाहता था. इस उद्देश्य से पहले वो नूतन के घर गया जहाँ से नीलम ने उसे कुछ हार्ड डिस्क दे दीं. पार्थ ने उसे बता ही दिया था कि किन दृश्यों और क्रीड़ाओं के डिस्क देनी थीं. नूतन सचिन को देकर मुस्कुराई और सचिन चला गया.

अब आगे:

सचिन जब सबीना के बँगले पहुंचा तो शाम के सात बजे थे. उसने पहले ही से खाने के लिए भी कुछ ले ही लिया था. और पीने की भी व्यवस्था की थी. हालाँकि उसे ये नहीं पता था कि सबीना मदिरा पान करती है या नहीं. परन्तु पार्थ के अनुसार उच्च वर्ग के लोगों में इसका सेवन सामान्य था. पार्थ ने ही उसे एक महँगी व्हिस्की लेने के लिए पैसे भी दिए थे. अब पाँच लाख की ग्राहक पर भी अगर पैसा नहीं व्यय करेंगे तो अन्याय होगा.

सबीना के साथ घर में प्रवेश करते ही सबीना उससे लिपट गई. और उसे चूमने लगी. वो इस समय अत्यंत कामोदमादित थी. सचिन ने उसकी व्यथा को समझा और उसे शीघ्र ही शयनकक्ष में ले गया. लाया हुआ थैला भी वहीँ रख दिया और सबीना के वस्त्र उतारने लगा. वैसे भी सबीना ने एक नाइटी ही पहनी थी जिसे नीचे गिरने में कुछ ही क्षण लगे. समय सचिन के वस्त्रों को निकलने में लगा था. सचिन के नंगे होते ही सबीना उसके लंड को चूसने लगी और बाद दो तीन ही मिनट चूसकर बिस्तर पर पैर फैलाकर लेट गई. उसकी चूत दूर से ही गीली दिखाई पड़ रही थी.

सचिन ने अपने मिशन को बाद में पूर्ण करने का वचन लेते हुए सबीना के ऊपर चढ़करउसकी चूत में एक ही शॉट में लंड पेला और सबीना की आनंद भरी चीख के साथ उसकी चुदाई करने लगा. ये शुद्ध चुदाई ही थी.

सचिन स्वयं भी चुदाई छोड़कर आया था और बहुत जोश में था. इसका परिणाम ये हुआ कि आधे घण्टे तक सचिन और सबीना चार पाँच आसनों में चुदाई में जुटे रहे. अंततः दोनों झड़े और हाँफते हुए एक दूसरे को बाँहों में लेट गए. जब श्वास एकत्रित हुई तो सबीना उठी.

“क्या लेकर आये हो? मैं बना देती.”

“अरे खाना बनाने में क्यों समय खोना? उतने समय में तो एक बार चुदाई हो जाएगी. एक बार क्लब में सम्मिलित हो गयीं तो मेरा आना कम हो जायेगा. नए नए लौंडे मिलेंगे चोदने के लिए. तो मेरे लिए तो एक प्रकार से अंतिम रात है जब मैं आपको जी भर कर चोद सकूँगा।”

सबीना ने सचिन की बात का अर्थ समझा और सिर हिलाकर स्वीकृति दी, “पर मैं फिर भी चाहूँगी कि तुम समय निकालकर मेरे पास आया करो.”

सचिन ने नकारते हुए कहा, “अगर ऐसा भी है तो आपको क्लब के माध्यम से ही आना होगा. अधिकतर ऐसे अनुरोध स्वीकार किये जाते हैं. पर मैं स्वयं नहीं आ पाउँगा.”

सबीना ने थैला खँगाला, “ओह तो व्हिस्की लाये हो. अच्छा ब्रांड है. बहुत महँगा है ये तो.”

सचिन उठा और सबीना को बाँहों में लेकर कहा, “तुमसे न अधिक नशीली है न कीमती. वैसे और भी कुछ लाया हूँ. क्लब में किस प्रकार के सुख और चुदाई इत्यादि की आप आशा कर सकती हैं उसका नमूना. और कुछ अन्य स्थानों का है जिसे आप चाहें तो परख सकती हैं. परन्तु ये सब आपकी इच्छा पर आधारित है. आपकी रूचि के अनुसार मैं वीडियो लाया हूँ. देखो फिर बताओ.”

“अम्मी ने भी एक वीडियो भेजी है. नूर (सबीना का बेटा) और आमिर (निगार का बेटा) का विशेष प्रकरण है. कह रही थीं कि मेरे बेटे को भी ट्रेन कर दिया है. न जाने क्या ट्रेन किया है. मेरी तो गाँड लुपलुप कर रही है.मैं तुम्हारे ही आने के लिए रुकी थी. सोचा साथ देखूँगी। अब पहले व्हिस्की पीते हैं फिर एक बार गाँड मारना फिर खाना खाएंगे.”

सचिन को कोई आपत्ति भी नहीं थी. पार्थ की बात सत्य होती दिखी कि उच्च घरों में मदिरापान एक सामान्य कार्य है. सबीना ने एक बार भी कोई नाक भौंह नहीं सिकोड़ा. सबीना रसोई से ग्लास और प्लेट ले आई. सचिन के लाये अल्पाहार को प्लेट में सजाया और दोनों के लिए बहुत अनुभवी ढँग से पेग बनाये. सचिन ये देखकर अचरज में था कि सबीना ने ये सारे कार्य यूँ ही नग्नावस्था में ही किये थे.

“हाँ तो क्या सोचा है तुम लोगों ने हम तीनों की सदस्यता के विषय में?”

“देखिये, ये वैसे तो इंटरव्यू के बाद ही निर्णय किया जाता है, पर मैंने अपने बॉस से आप तीनों के लिए विशेष अनुरोध किया है.” सचिन ने इसके आगे बात बनाते हुए कहा, “आपके लिए तो बॉस आश्वस्त है, परन्तु आपकी अम्मी और भाभी के विषय में हमें कुछ भी नहीं पता है. इसीलिए, उसमें कुछ अड़चन है.”

“अड़चन काहे की मादरचोद, वो तो मुझे भी बड़ी चुड़क्कड़ हैं. देख लेना जब लौटेंगी. तुम्हें तो ऐसे चट कर जाएँगी कि पता भी नहीं चलेगा.” सबीना अपने पुराने चिर परिचित स्वरूप में आ गई.

पर सचिन को अपनी बात पूछनी ही थी. उसने साहस जुटाया और अपना पेग एक ही बार में पी लिया. सबीना ने देखा तो पूछ बैठी.

“गाँड क्यों फट रही है तेरी. जो पूछना है पूछ.”

“क्या वो दोनों भी आपके समान मूत्र क्रीड़ा में रूचि रखती हैं?”

सबीना का मुंह खुला रह गया. फिर उसने उत्तर दिया.

“निगार का बेटा आमिर तो उसका मूत पीता है. ये हम सबको पता है. सबके सामने पी लेता है वो तो. पर निगार ने मुझे बताया था कि वो भी कभी कभी, नियमित नहीं, पर कभी कभी अपने पति नदीम और बेटे आमिर का मूत पीती है. पर अधिक कुछ नहीं बोली. अम्मी का मुझे पता नहीं.”

“ओके, क्योंकि हमें अपनी सदस्याओं की रूचि का ध्यान रखकर उनके लिए उसे प्रकार के कार्यक्रम बनाने होते हैं.”

“ओह, मैं पूछ लूँगी। अम्मी और निगार से प्राइवेट में पूछूँगी.”

सचिन ने एक और पेग बनाया और सबीना को भी उसका पेग दिया.

“आओ न मेरी गोद में बैठो.” सचिन ने कहा तो सबीना उसकी गोद में आ बैठी.

“मैं तो चाहती थी कि मेरी बेटी सना को भी तुम्हारे जैसे लम्बे मोटे लौंड़ों से चुदने का सुख मिले. पर तुम मना कर रहे हो.”

“मैं क्लब की ओर से ऐसा नहीं कर सकता, न ही किसी और को आमंत्रित ही कर सकता हूँ क्लब में से, पर व्यक्तिगत रूप से तो उसे चोद ही सकता हूँ. इसके लिए कोई मनाही नहीं है.”

सबीना प्रसन्न हो गई और सोचने लगी कि अब अपनी बेटी को घर आने के लिए मनाने का उपाय मिल ही गया.

सना के बारे में सोचकर सचिन का लौड़ा तन गया जिसे सबीना ने भी अनुभव किया. अब सना के चित्र पूरे घर में लगे हुए तो और उसकी सुंदरता से कोई अछूता नहीं रह सकता था. ऐसी लड़की चोदने की कल्पना मात्र से सचिन उत्तेजित हो गया. सचिन के रेंगते हुए लौड़े से सबीना की गाँड की खुजली बढ़ गई और वो कसमसाने लगी.

“सना के बारे में सोच कर उसकी माँ को चोदने वाले हो क्या?” सबीना ने पूछा.

“हाँ, जिसकी माँ इतनी रसभरी हो उसकी बेटी में कितना नशा होगा यही सोच रहा था.”

“हाँ, सच है और वो उन टट्टुओं से चुद कर बड़ी खुश हो रही है. जब उसके अब्बू चोदते हैं तो इतना चीखती है जबकि इन लौडुओं की चुदाई से ऊँह भी नहीं करती. यही उसके नानू और मामू से चुदने का है. और नूर और समीर उन्हें तो छोड़ ही दो.”

“अब ये आप ठीक नहीं कर रही हैं. उसके साथ आप भी तो उन तीनों से ही चुदवाती थीं. हम मिले तो आपको सही चुदाई का आनंद मिला. अब बेचारी उसके पहले ही चली गई तो क्या जानेगी?”

हर माँ को अपनी बेटी का पक्ष लेने वाले से प्रेम होता है और यही सबीना के साथ भी हुआ. सचिन के मन में पहले तो आया कि यहीं बैठे हुए ही सबीना की गाँड मार ले, पर फिर उसे ध्यान आया कि उसे सबीना को क्लब के वीडियो भी दिखाने हैं. और सबीना ने भी किसी वीडियो के विषय में कहा था.

“आपकी अम्मी ने क्या भेजा है?”

“अरे मैं तो भूल ही गई. चलो उधर बैठो, मैं टीवी पर लगती हूँ.”

सचिन ने पूछा कि क्या एक पेग और बनाये तो सबीना ने स्वीकृति दे दी. सचिन ने नए पेग बनाये और बिस्तर पर बैठ आया. सबीना आई और उसके साथ बैठ कर अपना ग्लास उठा लिया. फिर रिमोट से टीवी पर एक चैनल पर लगाया और टीवी पर चल रहे दृश्य को देखकर सचिन का लौड़ा टनटना गया.

दो सोफों पर अमीना बी और निगार बैठी हुई थीं. ये दिखाई दे रहा था कि उनके नीचे दो पुरुष थे पर उनके चेहरे नहीं दिख रहे थे, बस पाँव दिखाई दे रहे थे. अमीना और निगार सामने कैमरे को देख रही थीं. और उनके पैरों के बीच में दो पुरुष बैठे थे. उनकी शरीर बनावट से पता चल रहा था कि वे युवा थे. उनके चेहरे अमीना और निगार की चूतों पर लगे हुए थे. सबीना को समझते देर न लगी कि दोनों की गाँड में लंड थे.

अमीना: “देख सबीना, मैंने तुझे कहा था न तेरे बेटे को सिखाकर लाऊँगी। तो देख कैसे मेरा मूत पी रहा है अपना लाडला नूर.”

उस लड़के ने केवल सिर हिलाया.

निगार: “और मेरा मूत तो मेरा लाडला आमिर ही पीने से नहीं थकता, पर तेरे बेटे को भी पिला रही हूँ कल से. अब तेरे पास आएगा तो तेरा भी पियेगा.”

ये सुनते ही बिना कुछ किये ही सबीना झड़ गई.

“चलो, आपके लिए ये अच्छा हुआ. अब माँ बेटे मिलकर एक दूसरे का मूत पिया करना.”

इतने में नूर और आमिर हट गए और उन्होंने कैमरे की ओर देखा. दोनों के चेहरे भीगे हुए थे पर आँखों में एक चमक थी.

“अम्मी, बहुत मस्त है ये काम. बस अब आपके पास आने के लिए मन मचल रहा है. फिर आपका भी मूत्र पियूँगा और आप चाहोगे तो मामी के समान आपको भी पिलाऊँगा।” नूर ने निगार का रहस्य खोल दिया.

पर निगार तो अब अपनी गाँड में घुसे लौड़े पर उछल रही थी. उसे इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ा कि उसका रहस्य खुल गया है. कैमरे वाले ने उन दोनों को चुदाई में सम्मिलित होने के लिए कहा तो पता चला कि वो निगार का पति नदीम था.

अमीना बोली: “आजा बेटा, अपने बाप के साथ मिलकर चोद मुझे.”

नूर ने अपना लौड़ा अपनी नानी की चूत में पेला और ये पता चल गया कि अमीना की गाँड सबीना का पति नासिर मार रहा था और निगार अपने ससुर सलीम के लौड़े पर कूद रही थी और जिसकी चूत में उसके बेटे आमिर ने अपना लौड़ा पेल दिया था. सम्भवतः अमीना सबीना को केवल मूत्र पिलाने के दृश्य के लिए ही ये वीडियो भेजी थी क्योंकि इसके बाद वीडियो समाप्त हो गया.

सचिन ने सबीना की ओर देखा जो अपने होंठों पर जीभ फेर रही थी.

“चलो बाथरूम में, तुम्हें भी मूत्र पीने का मन हो गया है न?”

सबीना ने उसकी ओर देखा और चमकती हुई आँखों से उठी और बाथरूम में चली गई.

सचिन अब तक सबीना के स्वभाव और उसकी विकृतियों को भली भाँति समझ चुका था. इसमें उसकी सबसे बड़ी सहायिका उसकी माँ रमोना थी. सबीना के साथ निकले समय और कर्मों के विषय में वो रमोना से विमर्श करता था और रमोना उसे सबीना के विषय में कुछ और उपयोग करने के सुझाव देती थी. उनके कारण ही वो सबीना की कुंठाओं से अब परिचित हो चुका था. सबीना प्रेम की प्यासी थी, परन्तु उसके परिवार के व्यवसाय ने उसके भाग का प्रेम छीन लिया था. पति को पिता ने अपने व्यवसाय में दस वर्ष पूर्व लगाया था, उसके पहले उसका जीवन अत्यंत सुख से बीत रहा था.

विगत दस वर्षों में पति दूर होता गया. जब तक उसका बेटा नूर उसके साथ था तब तक उसका मन लगा रहा फिर नासिर ने नूर को भी अपने साथ लगा लिया. अब उसके पास केवल सना थी. परिवार में चुदाई की परम्परा बहुत पहले से थी. परिवार और संबंधियों की लगभग हर स्त्री को उसने अपने अब्बू और भाई से चुदते देखा था तो वहीँ अम्मी को भी. निगार के आने के बाद ये और बढ़ गया था. बिना किसी पुरुष के सना और वो दोनों चिड़चिड़ी होने लगी थीं. फिर उसकी नन्द फातिमा ने अपने लड़कों को पढ़ाई के लिए भेजना का प्रस्ताव दिया। सबीना को इसमें एक अवसर का आभास हुआ.

फातिमा का पति एक गाँडू था. न जाने उसने क्या खा कर तीन लड़के निकाल दिए थे. पर अपनी पत्नी फातिमा और अम्मी ज़रीना के लाख कहने पर भी उसकी गाँड मरवाने की आदत नहीं छूटी तो फातिमा ने उससे शारीरिक संबंध तोड़ लिए. अपने लड़कों के बड़े होने पर उन्हें अच्छे से चुदाई में प्रशिक्षित किया था. पर वो भी बाप पर ही गए थे और उसे कई बार असंतुष्ट छोड़ देते थे. सबीना के पास आने पर सबीना ने भी उन्हें कुछ नए गुर सिखाये थे. वो अब ठीक ठाक चुदाई कर लेते थे. पर जबसे नीलम के बँगले पर उसकी चुदाई सचिन और साथियों ने की थी, उसे अपने जीवन में एक नए आनंद का संचार होता अनुभव हुआ था. अब उसके पति और अब्बू ने उसे क्लब में जाने की अनुमति भी दे ही दी थी.

सचिन सबीना के पीछे उसके बाथरूम में गया. सबीना कमोड पर बैठ गई और आशा से सचिन को देखने लगी.

“ऑंखें बंद करो.” सचिन ने कहा तो सबीना ने मुँह खोला और ऑंखें बंद कर लीं.

सचिन ने अपने लंड को उठाया और फिर पहले सबीना के मुँह में धार छोड़ दी. फिर उसके चेहरे पर धार छोड़कर उसे पूरा भिगा दिया. और फिर उसके मम्मों पर मूतने के बाद अंत में फिर उसके मुँह में रहा सहा मूत्र डाल दिया. सबीना ने जैसे ही चेहरे पर से धार हटी थी ऑंखें खोल ली थीं और सचिन को देख रही थी. जब सचिन का कार्य सम्पन्न हुआ तो सबीना ने हाथों से उसे अपने ऊपरी भाग पर मल लिया. सचिन उसे देखकर मुस्कुराया. उसे ज्ञात था कि उसे किस प्रकार के वीडियो दिए गए हैं. उसे एक बात का खेद रहने वाला था. सबीना अब उसके साथ अब कम ही चुदाई करने वाली थी. क्लब में प्रवेश का अर्थ ये भी था कि किसी प्रकार के भावनात्मक संबंध न बनाये जाएँ.

“मैं नहा कर आती हूँ.” सबीना उठी और फौहारे के नीचे जा खड़ी हुई. जाते हुए उसने अपनी गाँड में ऊँगली डालकर सचिन को संकेत कर दिया कि अब उसे आगे क्या करना है. सचिन कमरे में लौटा और एक एक पेग अपने और सबीना के लिए बनाया. फिर न जाने उसने कुछ सोचा और एक ग्लास उठाकर उसमे मूत्र भर दिया. सबीना नहाकर नंगी आई और उसने स्वयं को पोंछा भी नहीं था उसके मादक शरीर से पानी की बूंदें टपक रही थीं. सचिन सब भूल गया और सबीना को अपनी बाँहों में भींच लिया.

“छोड़ो न. क्या खा जाओगे?” सबीना ने हँसते हुए कहा पर उसे भी सचिन के इस व्यवहार से आनंद मिल रहा था. जिस प्रकार से सचिन और उसके मित्र उसे रगड़ रगड़ कर चोदते थे उसे अपने परिवार के पुरुषों की चुदाई का स्मरण हो आता था. उसका पति और अब्बू उसे ऐसे ही चोदते थे. पर नूर उसे बड़े प्यार से चोदा करता था. अब मूत्र पीने पिलाने के बाद उसमें कितना परिवर्तन होगा ये देखना होगा. सचिन पीछे से सबीना के मम्मों को मसलते हुए उसकी गर्दन और कानों को चूम रहा था. उसका मोटा तना लौड़ा सबीना की गाँड से टकरा रहा था. आज की रात ये गाँड उसके लिए थी. दो दिन बाद से कब वो क्लब की सम्पत्ति हो जाएगी तब उसे बिना आज्ञा सबीना को छूना भी असम्भव होगा. इसीलिए आज वो इस सुंदर मांसल स्त्री का पूरा भोग करना चाहता था.

“खा सकता और पा भी सकता तो कबका खा लिया होता आपको. सच में आपमें जो नशा और स्वाद है वो अपर्याय है. मुझे आपसे दूर होने का दुःख होगा.”

“क्यों दूर होंगे?”

“नियम है. अब आप जब मेरा साथ चाहेंगी तो क्लब के माध्यम से ही आना होगा. और वो भी महीने में दो से अधिक बार नहीं कर सकते. अन्यथा हम दोनों के लिए समस्या हो जाएगी.”

“ओह! कोई बात नहीं. तब की तब देखेंगे. आज तो मुझे चोद चोद कर लाल कर दो. रगड़ दो मुझे फाड़ कर रख दो मेरी चूत और गाँड। जब तुम्हारा बॉस मुझे चोदे तो उसे इतनी खुली मिलें कि उसे अपने लौड़े पर संदेह हो जाये.”

“ऐसा ही करूँगा” सचिन ने मन में हँसते हुए कहा. पार्थ का लौड़ा ऐसी महा चुड़क्कड़ स्त्रियों को भी छठी का दूध याद दिलाने में सक्षम था. सबीना में मम्मों को भींचते हुए उसने उसे आगे बढ़ाया और बिस्तर पर घोड़ी बना दिया. सबीना के शरीर से पानी की बूँदे गिर रही थीं. सबीना के पैरों को चौड़ा करते हुए उसने गाँड के छेद पर थूक लगाया.

“मेरी अम्मी और निगार के लिए वीडियो बना दो. उन्हें भी तो पता चले कि मेरी गाँड कैसे मारते हो.” सबीना ने अनुरोध किया.

सचिन ने सबीना के आई-फोन को रिकॉर्डिंग पर डाला फिर सबीना के चेहरे की ओर से जाकर उसकी गाँड तक का वीडियो बनाया. फिर अपने लंड की ओर करते हुए दिखाया कि सबीना की गाँड में जाने वाला लौड़ा किस स्तर का है. फिर उसे पास में बिस्तर की ओर इंगित करते हुए देखा कि सही कोण से दिखाई दे रहा है या नहीं.

“तो मैडम, आप अपनी गाँड मरवाने के लिए रेडी हो?” सचिन ने वीडियो के लिए ये कहा.

“हाँ. और फाड़कर रख दो मेरी गाँड जैसे मेरे अब्बू और मेरे पति फाड़ते हैं. कोई दया मत करना. अम्मी को भी पता चले कि उनकी चुदाई कैसे लौडों से होने वाली है यहाँ इंडिया लौटकर.”

“और आपकी भाभी? उनका क्या?”

“अरे वो भी देखेगी. अम्मी और वो हर लौड़े से मिलकर चुदती हैं.”

सचिन ने अपने लंड को सबीना की गाँड पर लगाया और फोन की ओर देखा और मुस्कुराया. फिर सबीना के कूल्हों पर हाथ रखा.

“ओके अब सम्भलो!” ये कहते हुए एक दमदार धक्के के साथ लगभग एक चौथाई लौड़ा सबीना की गाँड में पेल दिया.

“उई अम्मी!” सबीना ने हल्की सी चीख के साथ अपनी माँ को पुकारा जैसे अब वो उसकी गाँड बचा लेगी.

अचानक सचिन के मन में एक प्रश्न कौंधा, उसने अपना मुँह आगे किया और सबीना से पूछा, “क्या ये वीडियो आपकी अम्मी ही देखेंगी या पूरा परिवार.”

“सब देखेंगे. पर तुम चिंता न करो. सबको पता है कि मैं चोदते हुए कोई सीमा नहीं बाँधती। तुम चोदो मस्ती से उन्हें मैं देख लूँगी अगर कोई बात हुई भी तो. अब्बू को मनाना मेरे बाएँ हाथ का खेल है.”

ये सुनकर सचिन का साहस लौटा और उसने सिर पीछे किया और अगले धक्के में आधे लंड को गाँड में धँसा दिया. और फिर अगले दो धक्कों ने उसके पूरे लंड को सबीना की गाँड में स्थापित कर दिया. सचिन ने फोन की ओर देखकर थम्ब्स अप किया और फिर सबीना से कहा कि वो अपनी अम्मी को सलाम भेजे. सबीना ने फोन की ओर मुँह करते हुए आँख मारी क्योंकि हाथ तो उठाने की उसकी अभी स्थिति नहीं थी.

“अब मारो गाँड,” फिर फोन को देखकर, “देखो अम्मी, कैसे मारेगा ये मेरी गांड अब. जैसे अब्बू मारा करते हैं.”

सचिन हर बार अपनी तुलना सलीम से सुनकर कुछ गुस्सा गया. उसने पूरे लौड़े को बाहर खींचा और ऐसा शक्तिशाली धक्का मारा कि लंड एक ही बार में गाँड पार कर गया. सबीना की चीख ने कमरे को हिला दिया. सचिन ने मन ही मन में सोचा कि अब इसे अपने अब्बू नहीं याद रहने वाले. अगला धक्का उससे भी तीव्र था और सबीना की चीख का स्तर भी उतना ही अधिक था. इसके बाद के अगले दस धक्के पिछले धक्कों की तुलना में तीव्र और गहरे थे. सबीना की चीखों ने अपना शिखर पा लिया था और अब क्षीण हो चली थीं. जब सबीना ने घुटने तक दिए तब सचिन ने धक्के धीमे किया और सामान्य गति से गाँड मारने लगा. दो तीन मिनट के बाद सबीना जैसे चैतन्य हुई.

“क्या हुआ भोसड़ी के? गाँड मेरी मार रहा है और फट तेरी गई है क्या? धक्के क्यों धीमे कर दिए? अपनी माँ समझा क्या मुझे मादरचोद?”

सचिन के तन मन में आग लग गई. यही गलती सबीना ने नीलम के बँगले पर भी की थी. ये उसकी मानसिक समस्या थी. वो अधिक उत्साह में उल्टा पुल्टा बोल देती थी और बाद में पछताती थी. सचिन का लहू अब उबाल पर आने के कारण वो बिना रुके पूरे लौड़े के साथ सबीना की गाँड मारने में जुट गया. ऐसा लगता था कि वो कोई राक्षस था जिसमे असीम शक्ति का प्रवाह हो गया था. ठप ठप की ध्वनि तो गूंज ही रही थी पर देखने पर पता चलता कि सबीना की मोटी गाँड अब लाल हो गई थी. जिस जकड़ के साथ सचिन ने उसके नितम्ब थामे हुए थे उनके चिन्ह उसकी गाँड पर दिखाई देने लगे थे.

सबीना का शरीर आगे पीछे झूल रहा था और उसका वश अपने शरीर पर नहीं था. जो भी उसका शरीर अनुभव कर रहा था वो सचिन के परिश्रम का ही फल था. आज की सबीना उस दिन नीलम के बँगले की सबीना भी नहीं थी. अब तक वो सचिन के विशाल लौड़े से चुदने की अभ्यस्त हो चुकी थी. और कई बार सचिन उसकी गाँड बाहर निर्दयता से मार भी चुका था. पर आज उसके लौड़े में एक विशेष बल था और उसकी चुदाई भी एक दानवीय क्रूरता का रूप ले चुकी थी. सबीना को इसमें कष्ट अवश्य था पर रह रह कर उसे ये भी लग रहा था कि क्लब में उसे इस प्रकार से चोदने के लिए नए नए युवा लौड़े मिल जायेंगे. उसका मन और तन इसी कल्पना से टूट रहा था और चूत ! वो तो बहे जा रही थी और बिस्तर को गीला किये जा रही थी.

सबीना ने सचिन को छेड़ना बंद कर दिया था. उसकी गाँड जितनी निर्ममता झेल सकती थी झेल चुकी थी.

“अब थोड़ा धीरे, प्लीज़।” सबीना ने विनती की तो सचिन ने अपनी गति कम कर दी. क्लब की ट्रेनिंग ने उसे उसे इसके लिए उपयुक्त ज्ञान दिया था. गति कम होते ही सबीना की आहें और सिसकारियाँ कमरे में सुनाई देने लगीं.

कुछ समय और लगा और फिर सचिन के लंड ने भी अपना रस सबीना की गाँड में छोड़ दिया. सचिन उसके ऊपर लेट गया फिर उसके ऊपर से हटकर उसके साथ लेट गया.

“आज तुमने बहुत अधिक बर्बरता दिखाई है, ऐसा क्या हुआ?” सबीना ने पूछा. उसने सचिन के लंड को हाथ में लिया हुआ था और उसे सहलाकर अपने हाथ को चाट रही थी.

“तुम्हें मेरी माँ को बीच में नहीं लाना चाहिए था.” सचिन ने उत्तर दिया.

“वो तो मैंने झोंक में कह दिया होगा. मेरा ऐसा कोई आशय नहीं था.” सबीना को जैसे याद ही नहीं था कि उसने क्या बोला था. वो सचिन की ओर देखने लगी और फिर सचिन के भाव देखकर अचानक उसे समझ आ गया.

“हाँ, और उन्हें भी ऐसी ही चुदाई अच्छी लगती है. वो भी हमारे क्लब में हैं. मुझे सामान्यतः ऐसी बातें नहीं चुभतीं पर आज न जाने क्यों?”

“कोई बात नहीं सचिन. आगे से मैं ध्यान रखूँगी। जब मुझे ऐसे चुदने की इच्छा होगी तब उनका नाम ले लिया करुँगी.” ये कहकर सबीना हंस पड़ी. वो रमोना से नीलम के बँगले पर मिल चुकी थी और जानती थी कि सचिन उसे भी चोदता है.

“दुष्ट.” सचिन भी हंस पड़ा.

सचिन कुछ समय सोच में डूबा रहा. अब उसे अपने मिशन के अगले भाग को पूरा करना था. उसने सबीना की गाँड में ऊँगली डालकर अपना वीर्य निकाला और ऊँगली सबीना के मुंह में डाली. सबीना उसे चट कर गई. सचिन ने फिर यही उपक्रम दोहराया.

“मैं कुछ वीडियो लाया हूँ, जैसा आपको पता है.” इससे पहले कि सचिन कुछ और कहता सबीना ने उठकर अपना फोन बंद कर दिया. अपनी अम्मी को दिखने योग्य उसके पास पर्याप्त सामग्री हो चुकी थी.

“हाँ मैं लगाती हूँ.”

“पहले मैं बता दूँ कि उनमें क्या है, उसका सार समझा देता हूँ. आपको क्लब में किस प्रकार की सुविधाएँ या ये कहें कि अपनी इच्छापूर्ति के अवसर मिलेंगे.”

“ओह! ये तो अच्छा है. मैं फिर निर्णय ले सकूँगी कि हमें क्या क्या करना है.” सबीना अपनी माँ और भाभी के विषय में भी सोचते हुए बोली.

सचिन ने बताना आरम्भ किया भी नहीं था कि उसे टेबल पर रखे तीनों ग्लास दिखे.

“चलो, एक ड्रिंक लेते हैं. आपके लिए एक विशेष प्रबंध किया है अगर अच्छा लगे तो.” सचिन ने कहा.

दोनों जाकर सोफे पर बैठे. दो ग्लास में मदिरा तो स्पष्ट रूप से दिख रही थी, पर तीसरे ग्लास में पानी का रंग हल्का पीला ही था. सबीना ने उसे उठाकर सूँघा तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई.

“अपना मूत्र मिलाकर व्हिस्की पिलाओगे? बहुत चतुर हो गए हो. पर ये बासी है.” ये कहते हुए सबीना ने उसे दो ही घूँट में पी लिया. फिर अपना व्हिस्की का ग्लास सचिन को दिया. इसमें बोतल की व्हिस्की और अपनी व्हिस्की दोनों डालो. जब पीना ही है तो ढँग से पिया जाये.

सचिन कब मना करने वाला था. उसने सबीना के ग्लास में थोड़ी व्हिस्की और डाली और अपने लंड से हल्के से उसे मूत्र से ऊपर रक भर दिया. सबीना ने एक घूँट लिया.

“मिला जुला स्वाद है, कुछ तीखा सा. पर अच्छा है. तो अब बताओ क्लब के बारे में क्या बता रहे थे.”

सचिन ने सिर हिलाया. सबीना के द्वारा उसके हर सुझाव पर स्वीकृति ने उसे विश्वास दिलाया कि सबीना क्लब में सबसे अधिक आनंद लेने वाली स्त्रियों में से एक होगी. उसने बताना आरम्भ किया.

इसके कुछ अंश आप इस अध्याय में भी पढ़ सकते हैं जिसमें नूतन मेहुल को क्लब के विषय में बताती है.

अध्याय ३५: आठवाँ घर - स्मिता और विक्रम शेट्टी ६

“क्लब में हमें रोमियो के नाम से पुकारा जाता है. क्लब की सदस्याओं की हर उचित इच्छा को पूरा करना हमारा दायित्व है. उचित का अर्थ है जहाँ किसी प्रकार की अतिरिक्त हिंसा न हो और किसी भी प्रकार से किसी को भी चोट न लगे. ये महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकतर स्त्रियाँ उच्च समाज से आती हैं और उन्हें अपने देख और रूप का बहुत ध्यान है. क्लब में एक रोमियो के साथ आप एक माह में दो से अधिक बार नहीं मिल सकतीं. हाँ अगर समूह हो तो तीन या कभी कभी चार बार की अनुमति है. पर ऐसा कम ही होता है.”

“क्लब की अधिकतर महिलाओं को सामान्य सम्भोग से भी संतुष्टि मिल जाती है. वे एक समय में अधिकांश एक ही रोमियो से चुदवाती हैं. परन्तु कभी कभी वो दो या तीन रोमियो की सेवाओं का भी लाभ उठाती है. ये लगभग एक तिहाई हैं. अन्य दो तिहाई एक से कम ही चुदाई करवाती हैं और ग्रुप सेक्स में अधिक रूचि रखती हैं. एक साथ मुँह, चूत और गाँड मरवाने में इन्हें सुख मिलता है. ये कई बार दो या तीन रोमियो को बुक करती हैं और उनसे घंटों तक चुदवाती हैं.”

“ये भी लगभग एक तिहाई हैं. इनके अतिरिक्त जो महिलाएं हैं वो सेक्स के हर बार नए आयाम खोजती हैं. इन्हें गैंगबैंग और अन्य विकृत चुदाई में रूचि है. ये एक साथ कई रोमियो बुक करती हैं और कई बार एक या दो दिन तक चुदाई में मग्न रहती हैं. इनमें से कई एक साथ दो दो लौड़े अपनी चूत और गाँड में लेने में संकोच नहीं करतीं. ऐसी चुदाई के समय इनमें से कुछ मूत्र पान से भी आपत्ति नहीं करतीं हैं, हालाँकि इसके सिवाय वे इसमें कोई रूचि नहीं रखतीं.”

सचिन ये बताते हुए सबीना के चेहरे के भाव देख रहा था जो कुछ विस्मयकारी थे. उसने इस प्रकार के आयोजनों के विषय में कभी कल्पना भी थी.

“एक साथ चूत में दो लंड और गाँड में भी?” उसने धीमे स्वर में पूछा.

“दो चूत में और एक गाँड में या दो गाँड में और एक चूत में.”

“और मूत भी पीती हैं? मेरे जैसे?”

“हाँ. कई बार तो चुदवाती हुई भी पी लेती हैं या उनके ऊपर मूत्र त्याग किया जाता है.”

“ओह!” सबीना सच में अचरज में थी.

“इसके बाद एक विशेष वर्ग है जो चुदाई तो करवाती ही हैं पर कुछ को दूसरी चूतों और गाँड को चाट कर साफ करने में आनंद आता है.” सचिन ने आगे बताया, “इनकी हमारी पार्टियों में सबसे अधिक माँग होती है. चुदने के बाद महिलाएं इन्हें बुलाती हैं और अपनी चूत और गाँड को इनसे साफ करवाती हैं.”

सबीना अब बिलकुल ही अविश्वास की भूमिका में थी. पर सचिन को अंतिम तीर चलाना था.

“और अंत में अति विशिष्ट वर्ग है, जिसमें मुझे लगता है कि आप भी शीघ्र ही जुड़ जाएँगी.”

सचिन ने सबीना का रिक्त ग्लास लिया, उसमें व्हिस्की और मूत्र मिलाया और उसे थमा दिया.

“ऐसा क्यों कह रहे हो?”

“क्योंकि वो महिलाएं पार्टी में एक दो बार चुदाई करने के बाद बाथरूम में टब में जाकर लेट जाती हैं. और फिर पूरे समय हर महिला या रोमियो उन्हें मूत्र पिलाता है या उनके ऊपर मूत्र त्याग करता है. इसे हमारे क्लब में गोल्डन शॉवर कहते हैं. और पार्टी के अंत के पहले ही वो निकलती हैं और फिर कई रोमियो से चुदवाने के बाद ही संतुष्ट होती हैं.”

“ऐसा भी होता है क्लब में?”

“हाँ, जिसकी जैसी रूचि वैसा उसका सम्मान.”

“ये सम्मान है?”

“अगर आपकी इच्छा पूर्ण की जाये तो क्या वो सम्मान नहीं है? किसी की इच्छा के विरुद्ध कुछ भी नहीं किया जाता.”

सचिन ने सबीना को देखते हुए कहा.

“इस बार की पार्टी तीन सप्ताह बाद आयोजित है. और मैं आपको आधी पार्टी के बाद उस टब में मूत्र स्नान करते हुए देखना चाहूँगा। क्या आप ऐसा करेंगी?”

“तीन सप्ताह? तब तो अम्मी और निगार भी होंगी.”

“तो क्या हुआ? यही तो क्लब का मंत्र है. अपनी इच्छाओं को पूरा करना. उन्हें संतुष्ट होने के अपने ढ़ंग मिल जायेंगे.”

सबीना सोच में पड़ गई. अपने ग्लास से व्हिस्की पीती हुई वो कुछ न बोली. फिर उठी और बाथरूम जाने लगी और सचिन को संकेत से बुलाया. सचिन उसके पीछे गया और सबीना की प्यास मिटाकर लौटा. सबीना मुँह धोकर आई.

सबीना ने सचिन की ओर देखा और अपना निर्णय सुना दिया.

क्रमशः

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Chapter 53 is posted

अध्याय ५३: सबीना की कहानी -१

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अध्याय ५४: जीवन के गाँव में शालिनी

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दृश्य २: जीवन के गाँव में शालिनी:

बलवंत से गाँड मरवाने के पहले शालिनी:


इससे पहले कि जीवन उत्तर देता गीता शालिनी की गाँड पर अपनी जीभ घुमाने लगी और फिर आँखों से जीवन को देखा. जीवन मुस्कुराया और सिर हिलाता हुआ हट कर अपने पोतों के पास जा खड़ा हुआ.

“दादा जी , आपने दादी के लिए मस्त आइटम ढूँढा है. आपको मानना पड़ेगा.”

“नहीं, ऐसा कुछ नहीं है. मानो मेरी झोली में आ गिरी है. न जाने मुझे लगता है कि ये मेरी स्वर्गीय पत्नी और उसके स्वर्गीय पति के आशीर्वाद से ही हुआ है. पलक झपकते ही हम यहाँ तक पहुंच गए. अन्यथा ऐसा कैसे सम्भव है?”

“हाँ, दादा जी, ये हो सकता है.” असीम ने कहा, फिर कुछ सोचकर बोला, “निर्मला नानी की विशेष डबलिंग करने का मन है. मम्मी को भी वैसे चोदे हुए बहुत दिन हो गए हैं.”

जीवन ने घूरकर उन दोनों को देखा, “जो भी करना नाना लोगों के सहमति से करना. नानियाँ तो तुम्हें कुछ मना नहीं करने वालीं, पर इन सब की सहमति भी ले लेना.”

कुमार: “आपका अर्थ है कि हम अन्य नानियों की भी विशेष डबलिंग कर सकते हैं?” उसके चेहरे पर प्रसन्नता छा गई.

जीवन: “तुम क्या सोचते हो निर्मला के देखने के बाद ये दोनों रुकने वाली हैं? और गीता नानी को तो उनकी बेटी और अपनी माँ के सामने चोदना।”

कुमार: “दादा जी, यू आर ग्रेट. मैं सुशील नाना से पूछ कर आता हूँ.”

असीम: “अभी संयम रख, उधर देख नई दादी की गाँड को गीता नानी कैसे चाट रही हैं.”

बलवंत से गाँड मरवाने के बाद शालिनी:

पर गीता मुस्कुराई और शालिनी की गांड को खोलकर उसे अंदर से चाटने लगी. शालिनी अब ढेर हो चुकी थी. उसकी आँखें बंद थीं और वो जीवन से गाँड मरवाने की कल्पना में खो गई थी. कुछ देर बाद शालिनी को उठाया गया और वो लड़खड़ाती हुई जीवन के सीने से लग गई.

“अब हमें एक दूसरे से दूर रखने का अंतिम कारण भी समाप्त हो चुका है.”

“सच में. अब हमें एक होने से कोई नहीं रोक सकता.” जीवन ने कहा तो वहां उपस्थित सब तालियाँ बजाने लगे.

सुशील ने असीम और कुमार को इसे उत्सव बनाने के लिए मदिरा पिलाने की आज्ञा दी.

अब आगे:

कुछ देर तक चुप रहकर असीम ने फिर अपनी पुरानी विनती दोहराई.

“चारों परिवारों के मिलने का कोई प्रबंध करो न दादाजी.”

जीवन ने घड़ी देखि फिर बोला, “ठीक है. देखता हूँ. मेरा फोन लेकर आ.”

असीम उठकर जीवन का फोन उठा लाया. जीवन ने गिरधारी को फोन मिलाया और स्पीकर पर कर दिया जिससे कि सभी सुन सकें.

“हैलो वैद्यराज!”

“अरे जीवन. कैसे हो?”

“अच्छा हूँ. आप कैसे हो?”

“अब तो मेरा जीवन सुखमय है. तुम सबका भला हो. बताओ कैसे फोन किया?”

“मैं इधर गाँव आया हुआ था. और…”

“तो मुझे क्यों नहीं ले गए. एक बार फिर से निरीक्षण कर लेता सबका.” ये कहते हुए गिरधारी हंसने लगे.

“यार, मुझे सूझा ही नहीं. अब आ जाओ.”

“देखता हूँ. क्या बात है?”

“क्या तुम अपने बेटे लोकेश से उस रिसोर्ट में हम सबको परिवार सहित कुछ दिनों के लिए कोई स्थान दिलवा सकते हो?”

“क्यों नहीं. रुको लोकेश यहीं है तुम स्वयं ही बात कर लो.” ये कहकर गिरधारी ने लोकेश को बताया कि जीवन का फोन है और उसे दे दिया.

“नमस्ते सर.”

“नमस्ते बेटा। हम सभी पुराने मित्र और उनके परिवार कुछ समय एक साथ बिताना चाहते थे. तो मैं जानना चाहता था कि क्या तुम्हारे रिसोर्ट में प्रबंध हो सकता है. और हाँ, ये परिवारिक मिलन का अवसर होगा.”

“बिलकुल. कितने लोग होंगे?”

जीवन ने मन ही मन गिना, “बीस”

लोकेश ने सीटी बजाई।

“ठीक है. हमने इस प्रकार के गुट के लिए भी कमरे इत्यादि बनाये हुए हैं. बहुत ही उत्कृष्ट प्रबंध है. आप सबको बहुत आनंद आएगा. आप कब आएंगे?”

“मैं कल तक बता पाउँगा. वैसे लोकेश कितना चार्ज होगा?”

“सर, आप सबने जो पापा के लिए किया है और उन्हें एक नया जीवन दिया है उसके सामने ये नगण्य है. आपसे मैं १०१ रूपये लूंगा हर दिन का. आप मुझे बस एक सप्ताह पहले बता दीजियेगा.”

“ये तो बहुत कम है लोकेश. तुम्हारा इससे अधिक व्यय होगा.”

“नहीं सर, पापा की प्रसन्नता के सामने पैसे का क्या मोल है. अब आप इस विषय में कुछ नहीं कहेंगे.”

“ठीक है लोकेश, जैसा तुम कहो. वैद्य जी को दो.”

“वैद्य जी?”

“अरे तुम्हारे पापा.”

“ओह!”

गिरधारी ने फोन उठाया तो जीवन ने पूछा, “क्यों घर पर अपने वैद्य बनने की चर्चा नहीं की?”

“जैसे ये मेरी बात पर विश्वास कर लेते. पर अब बता दूँगा।”

“गिरधारी, तुम भी आ जाओ न गांव, चाहो तो मधुजी को भी ले आना.”

“वो तो नहीं आ पायेगी. वैसे पूछ लूँगा।” फिर कुछ सोचकर, “चल मित्र परसों आता हूँ. कल कुछ कार्य हैं और मधु भी रिसोर्ट पर ही है और कल आएगी.”

“हम सब आपकी प्रतीक्षा करेंगी, वैद्यजी.” चारों स्त्रियों ने एक सुर में फोन में गीत गाया।

“ठीक है, मैं इंजेक्शन लेकर आता हूँ.” गिरधारी ने हँसते हुए कहा और फोन रख दिया.

जीवन ने अपने मित्रों को देखा.

“अब लगे हाथ बच्चों से भी पूछ ही लो.”

कँवल और बबिता के पुत्र उदय का विवाह सुशील और निर्मला की पुत्री सुरभि से सम्पन्न हुआ था. उन्हें एक पुत्री और एक पुत्र का सुख प्राप्त हुआ था. अब वो एक दूर नगर में रहते थे. उदय की अच्छी नौकरी थी और सुरभि ने दोनों बच्चों पर ही ध्यान देकर उन्हें बड़ा किया था. अब वो एक संस्था में अपना समय देती थी. जीवन द्वारा भी उन्हें हर वर्ष उनके विवाह की तिथि पर एक निश्चित राशि देता था. पहले कुछ वर्षों तक आपत्ति करने के पश्चात वे समझ गए कि ये रोकना सम्भव नहीं है. दूसरी ओर से जस्सी और पूनम भी उन्हें उपहार देते थे, पर जीवन के समझने के बाद वे भी एक राशि उनके नाम पर देने लगे. उनके बच्चे जब पाँच वर्ष के हुए तो जीवन ने वो राशि दोगनी कर दी थी. जब अठारह वर्ष की आयु पर करने पर पोते पोती के नाम से एक SIP चला दी थी.

फोन की बात सुनकर निर्मला असहज हो गई, “अरे ये कोई समय है? सब व्यस्त होंगे. कल सुबह बात करेंगे.”

बबिता बोली, “सब पता है किसमें व्यस्त होंगे. अपने माँ बाप चाचा चाची के लिए ठहर जाएँगे थोड़ी देर तो क्या प्रलय आ जाएगी?”

इन मित्रों में ये एक विशेषता थी. सबके बच्चे अपने माता पिता को छोड़कर अन्य को चाचा चाची ही बोलते थे. अब चूँकि सब एक ही आयु के थे तो ताऊ ताई बनने को कोई न माना था.

जीवन ने आना तर्क जोड़ा, “अगर व्यस्त हैं तो मेरे फोन से वीडियो कॉल करते हैं. देखें किस खेल में व्यस्त हैं रात में इतनी देर तक.”

निर्मला ने हार मान ली, “लगा लीजिये. आपको तो अपनी बेटी और पोती को ताकने का अवसर चाहिए है न?”

“क्यों नहीं? और तुझे अपने दामाद और नाती को.” जीवन ने उदय को वीडियो कॉल मिलाया। कुछ समय बाद उसी का पसीने से लथपथ चेहरा सामने आया.

“नमस्ते चाचा.” उसने हाँफते हुए कहा. “आप कैसे हो?”

“मैं ठीक हूँ, उदय. पर तुम क्यों हाँफ रहे हो?” जीवन ने हँसते हुए पूछा.

“अरे चाचा, अभी उतरा हूँ शुभि की सवारी कर के. आप कहाँ हो और इस समय कैसे मुझे फोन कर लिया?” शुभि उदय और सुरभि की बेटी थी. अभि उनका बेटा था जो शुभि से एक वर्ष छोटा था. दोनों से मिले हुए सबको लगभग एक वर्ष से ऊपर हो चुका था.

“और अगर मेरा अनुमान सही है तो अभि सुरभि की सवारी कर रहा होगा.”, एक हल्की सी चिंघाड़ सुनाई दी, “वैसे मैं गाँव आया हुआ था. हम सब बैठे बात कर रहे थे. इस बार असीम और कुमार भी आए हैं मेरे साथ.”

“अभि भी उतर गया है चाचा. ये तो बहुत अच्छा है जो आप गाँव इतने नियमित रूप से जाते हो. हम तो यहीं फँसे रह गए हैं.”

“तो आ जाओ, लाओ सुरभि की बात करवाओ निर्मला से, वो कुछ कहना चाहती है.”

थोड़ा फोन इधर उधर घुमा जिससे ये ज्ञात हो गया कि सब चुदाई ही कर रहे थे. फिर सुरभि का चेहरा दिखाई दिया तो जीवन ने निर्मला को फोन थमा दिया.

“नमस्ते अम्मा! कैसी हो?” सुरभि आज भी निर्मला को अम्मा ही पुकारती थी. हालाँकि उनके बच्चे उसे मम्मी कहते थे. “वैसे जीवन चाचा आये हैं तो मस्त ही होगी.” सुरभि हंस पड़ी.

“हाँ. इस बार तो वो असीम और कुमार को भी लाये हैं. हम सब सोच रहे थे कि क्यों नहीं तुम सब कुछ दिन के लिए आ जाते?”

“हमने भी यही सोचा है. आज ही इनकी दो सप्ताह की छुट्टी स्वीकृत हुई है. तो उसमें से पाँच दिन आपके साथ रहने का मन बनाया है और अन्य किसी रिसोर्ट इत्यादि में.”

“हम्म, हम सोच रहे थे कि यहाँ गाँव में न मिलकर हम किसी रिसोर्ट में ही मिलें. जीवन चाचा के एक मित्र हैं जिनका अपना रिसोर्ट है. हम वहीँ जाने का विचार बना रहे हैं.”

“पर अम्मा, वहां हमारा ये सब खेल कैसे होगा?”

“वो वैसा ही रिसोर्ट है.”

“सेक्स रिसोर्ट?”

“हाँ, पारिवारिक सेक्स रिसोर्ट.”

“ओह! ये पहली बार सुना है.:

“देश बहुत आगे बढ़ चुका है. बस हम ही पीछे रह गए.”

उदय ने फोन लिया, “चाची हम आ जायेंगे. आप बताना कहाँ है. मेरी छुट्टी अगले माह के पहले सप्ताह से है. आप बताना मैं टिकट कर लूँगा।”

“चलो, ये अच्छा हुआ. लो जीवन चाचा से पूछो.”

जीवन ने स्थान का नाम बताया और कहा कि वो उन्हें लेने छोड़ने का प्रबंध कर देगा. या स्वयं आ जायेगा. जीवन फोन रखने लगा तो निर्मला बोली, “अरे बच्चों के मुंह तो दिखा दो.”

अपने पोते पोती से दो एक मिनट बात करने के बाद फोन काट दिया. अभी कुछ और करने के पहले जीवन ने गिरधारी को फोन लगाया और तिथि बता दीं.

गिरधारी: “ठीक है, लोकेश सब कर देगा. जब तक चाहो रह लेना. और मैंने मधु से बात की तो मैं गाँव तो नहीं आ रहा हूँ. वो कह रही थी कि एक दिन के लिए रिसोर्ट ही आ जायेंगे तुम सबसे मिलने.”

“ये तो और भी अच्छा होगा. चलो फिर मिलेंगे.”

जीवन ने फोन रखा और असीम को एक पेग बनाने के लिए कहा. तुरंत अगला पेग सबको बाँटा गया.

असीम ने जीवन को देखकर संकेत दिया. जीवन समझ गया उसने बोला कि अपने नाना लोगों से पूछ लो. पर असीम सकुचा रहा था. जीवन ने उसकी सहायता करने का निर्णय लिया.

“चलो यारों! दो मिनट बाहर की सैर कर लेते हैं. असीम, कुमार तुम दोनों भी आओ.” सभी पुरुष अपने ग्लास लेकर बाहर चले गए.

बाहर पहुंचते ही जस्सी बोला, “क्या बात है जीवन? बाहर क्यों बुलाया?”

“असीम और कुमार तुम सबसे अनुमति चाहते हैं.”

“इन्हें अनुमति की क्या आवश्यकता है. ये जो भी चाहें उसके लिए हमारी स्वीकृति है.” सुशील ने कहा.

“पहले सुन लो.” जीवन ने कहा तो सब असीम और कुमार को देखने लगे.

“क्या हुआ बच्चों? ऐसा क्या है जो तुम अपनी नानियों के सामने नहीं कह सकते थे?” ये कँवल था.

असीम दो पल के लिए निशब्द हो गया. फिर साहस जुटाकर बोला, “नाना, मारना मत, चाहे मना कर देना और अगर गलत लगे तो क्षमा कर देना.”

किसी ने कुछ न कहा.

असीम: “मैं और कुमार ने दुहरी चुदाई का नया ढंग अपनाया है. मम्मी पर तो कई बार इसका उपयोग भी कर चुके हैं. एक दो बार सलोनी काकी पर भी. मम्मी को तो बहुत आनंद आता है और सोनी काकी भी उतना ही आनंद लेती हैं.”

“अच्छा तो फिर इसमें समस्या क्या है? तुम अपनी नानियों पर भी प्रयोग करना चाहते हो? तो ठीक है. क्यों भाई, किसी को कोई समस्या है? जस्सी फिर बोल पड़ा.

“नाना, उसमें चूत में दो लंड एक साथ डालते हैं. और गाँड में भी.” असीम ने अपनी बात कही और सिर नीचे कर लिया.

उसकी बात सुनकर सब सकते में आ गए.

जीवन: “मैंने भी सुनीति को आशीष के साथ ऐसे चोदा है. हम सबको बहुत आनंद आया था. इन्हें आज्ञा दे दो. वो सब भी नयी चुदाई का रस लेंगी और हमें भी नए ढंग से उन्हें चोदने का अवसर मिलेगा.”

सुशील: “चोट तो नहीं लगेगी? बुढ़िया रही हैं. ऐसा न हो कि चोटिल हो जाएँ.”

“नहीं नाना, हम बहुत ध्यान से करते हैं. इसमें उतनी गति नहीं बढ़ा सकते पर समंजस्य बहुत अधिक रखना होता है. पापा और नाना इसीलिए एक बार के बाद दोबारा मम्मी को ऐसे नहीं चोदे क्योंकि उनकी ताल नहीं मिल रही थी.”

चारों मित्र एक दूसरे को देखने लगे.

“हमें स्वीकार है. पर बहुत ध्यान से. उनकी आयु का ध्यान रखना. पहले किसे चोदने वाले हो?”

असीम और कुमार की बाँछें खिल गयीं.

“जिसे आप चाहो, नाना.”

“पूनम।” सबके मुँह से एक साथ ही निकला.

“जी.”

“चलो भीतर, हम उन्हें बता देते हैं. पूनम तो वैसे भी दिन में चुदवा कर भी ठंडी नहीं हुई है.”

सब अंदर आ गए. महिलाओं ने उन्हें प्रश्न भरी दृष्टि से देखा. जस्सी ने गला खँखारा और बाहर हुई बात बता दी. दो पल के लिए तो सारी महिलाएं विस्मित हो गयीं. फिर पूनम उठी और असीम और कुमार के सामने आ खड़ी हुई.

“तुम दोनों मेरी आँखों के तारे हो. अब आज रात मुझे नए तारे दिखा दो.”

“जी नानी.” कुमार ने उन्हें बाँहों में भर लिया.

पीछे से असीम ने भी उसे बाँहों में लिया और उसके मम्मे भींच दिए.

“दुष्ट, ऐसे दबाता है कोई? अब मैं जवान नहीं रह गई जो इतनी जोर से दबाओ.”

“अरे नानी, दोपहर में तो आपकी जवानी बड़ी निखर रही थी चुदते हुए. अब क्या हो गया?”

गीता बलवंत के पास आ बैठी, शालिनी जीवन के, बबिता कंवल और जस्सी के बीच में बैठ गई और निर्मला सुशील और जस्सी के बीच. जस्सी को दोनों ओर से घेर लिया था. क्योंकि उसकी ही पत्नी थी जो इस नए ढंग से पहले चुदने वाली थी.

“बच्चों से हमें सीखने होगा यारों. मैंने देखा है इन्हें सुनीति को चोदते समय. बहुत अच्छा तालमेल चाहिए. एक बार देखो फिर हम सब भी प्रयास करेंगे. बाद में.” जीवन ने कहा.

गीता बलवंत से बोली, “अपनी सुनीति तो हमसे भी आगे निकल गई.”

बलवंत केवल मुस्कुराया. जीवन ने भी यही किया.

शालिनी ने जीवन से पूछा, “ऐसी भी चुदाई होती है क्या?”

“हाँ. और भी बहुत ढंग हैं. साथ रहोगी तो आपका भी ज्ञान बढ़ेगा, जिसका उपयोग आप अपने परिवार में कर सकती हैं.”

शालिनी ने कोई उत्तर नहीं दिया. सबकी आँखें असीम और कुमार के बीच में पिसती पूनम पर केंद्रित थीं.

पूनम कसमसाते हुए उनसे बचने का स्वांग कर रही थी. और इस स्वांग में कुमार और असीम भी पूरा साथ दे रहे थे. शालिनी को नहीं पड़ रहा था.

“अगर वो छूटना चाहती है तो ये दोनों उसे छोड़ क्यों नहीं देते?” उसने जीवन से पूछा.

“किसने कहा कि वो छूटना चाहती है?”

“देखिये, आपको दिखाई नहीं दे रहा है?”

“ओह! ये तो नौटंकी है. ऐसा करने से सबकी ऊर्जा बढ़ेगी और चुदाई में अधिक शक्ति का संचार होगा. देखिये उन दोनों के लौड़े क्या तने हुए हैं. और पूनम की जाँघों पर आपको उसका पानी बहता हुआ दिख रहा है न?”

शालिनी ने ध्यान दिया तो जीवन की बात सही थी. उसे इस अठखेली का अर्थ समझ में आ गया. असीम जिस प्रकार से पूनम के मम्मे मसल रहा था उसके कारण वो लाल हो गए थे. कुमार ने असीम के हाथ हटाए और उन्हें जीभ से चाटने लगा और फिर मुँह में लेकर चूसने लगा. पूनम आनंद से दूभर हो गई. असीम ने हाथ मुक्त होने पर पूनम की चूत पर धावा बोल दिया. पूनम की चूत से पानी बहकर नीचे जमा होने लगा था. असीम की उँगलियों सरलता से उसमें अंदर बाहर आ जा रही थीं. कुमार ने अपना चेहरा उठाया और पूनम को चूमा. मानो पूनम किसी तंद्रा में चली गई. वो इतनी शक्ति साथ कुमार को चूमने लगी जैसे उसके होंठ ही चबा जाएगी. कुछ देर बाद पूनम ने हाँफते उसे चुंबन तोड़ा।

कुमार ने असीम से कहा, “लगता है नानी की चुदास बहुत उमड़ रही है. लौड़े लेने के लिए तड़प रही है.”

असीम ने अपने नानाओं को देखा और फिर जस्सी की ओर देखकर मूक आज्ञा माँगी। जस्सी ने सिर हिलाकर स्वीकृति दी. बबिता और निर्मला ने जस्सी की जाँघों पर हाथ रखा और धीरे से दबाया. जस्सी का लौड़ा फुँफकारने लगा.

“अपने नाती पोतों से अपनी पत्नी की चुदाई देखने का सुख कितने ही लोगों को मिलता है. है न?” बबिता ने कहा तो जस्सी ने सहमति में सिर हिलाया.

“नानी, अब असीम नीचे लेट रहा है. आपको उसके लंड पर बैठना है, पर उलटे. लंड चूत में लेना है. मैं आपके सामने रहूँगा।” कुमार ने बताया तो पूनम बोली.

“ऐसे तो मैं गाँड और चूत एक साथ मरवा चुकी हूँ. कर लूँगी।”

असीम नीचे लेटा और पूनम उसके सिर की ओर पीठ करते हुए उसके लंड पर बैठती गई जब तक कि लंड पूरा समै नहीं गया. चूत इतनी गीली थी कि लंड गप्प से चला गया. कुमार ने पूनम को कुछ उछलने का संकेत किया तो पूनम असीम के लौड़े पर उछलकूद करने लगी. फिर कुमार ने उसे रोका.

“नानी, अब आप संयम रखना। इधर उधर मत हिलना.” कुमार ने कहा तो असीम ने पूनम के सीने को हाथों से घेरा और उसे थोड़ा सा अपनी ओर खींच लिया. अधिक खींचने से लंड बाहर निकल सकता था. अब कुमार आगे बढ़ा और पूनम की चूत पर लौड़ा रखा.

“नानी. अब आप देखना कितना आनंद आएगा. मम्मी की चीखें निकल जाती हैं ऐसी चुदाई में.”

कुमार ने धीमे से अपने लंड को अपने भाई के लंड के समतल अंदर धकेलना आरम्भ किया. पूनम श्वास रोके इस नए संवेदन को अनुभव कर रही थी. चौथाई लंड डालकर कुमार ने लंड बाहर निकाला और असीम ने भी अपना लंड आधा बाहर कर लिया. कुमार फिर असीम के लंड के साथ साथ पूनम की चूत में उतरने लगा. इस बार आधे से अधिक लंड अंदर चला गया और असीम का पूरा लंड अंदर ही था.

“ओके. अब तक कैसा है नानी?” कुमार ने पूछा.

“पूरा भरा भरा. चूत पूरी फ़ैल गई है. पर अच्छा भी लग रहा है.”

“ठीक है. आप अब एक नयी यात्रा पर जा रही हो.”

असीम और कुमार अपने लंड एक साथ अंदर बाहर करने लगे. कुमार का लंड इस क्रिया से धीरे धीरे पूरा अंदर चला गया. दोनों भाई एक ताल में पूनम की चुदाई करने लगे. दर्शक ध्यान से देख रहे थे. आयु के इस पड़ाव में भी वे नई युक्तियाँ सीखने के लिए उत्सुक थे. उन्हें कुछ ही पलों में ये स्पष्ट हो गया कि इस चुदाई में संयम और लयबद्धता की अत्यधिक आवश्यकता थी. संयम से उन्हें कोई समस्या नहीं थी. परन्तु लय बैठाना कुछ कठिन था. असम्भव नहीं परन्तु कठिन अवश्य था. महिलाएं भी पूनम की इस विशिष्ट चुदाई को देखकर अपनी चूतें मसल रही थीं. वो देखना चाहती थीं कि पूनम इस प्रकार की चुदाई में कितना सुख पाती है, या उसे कष्ट होता है. अभी तक दोनों में से किसी का कोई प्रमाण नहीं था.

पूनम को अपनी चूत वर्षों बाद पूरी भरी हुई अनुभव हो रही थी. इतने वर्षों की निरंतर चुदाई ने चूत के पाट खोल दिए थे. उसके पति और मित्रों सामर्थ्य, शक्ति और क्षमता के कारण उन्हें सम्भोग में आज भी लगभग उतना ही आनंद मिलता था. कुछ विशेष तैल इत्यादि के प्रयोग ने उनकी चूत और गाँड की संकीर्णता को एक सीमा तक सुरक्षित रखा था. परन्तु आज का अनुभव अविस्मरणीय होने वाला था. असीम और कुमार अकेले ही सम्पूर्ण चोदू थे, साथ में उनकी चुदाई में आनंद दोगुना हो जाता था.

पूनम की चूत मानो बीस वर्ष पूर्व जैसी अनुभव कर रही थी. दोनों लंड सरलता से अंदर बाहर आ जा रहे थे और उसे आशा थी कि अब से उन्हें इस प्रकार का सुख अपने पति और मित्रों से भी मिलेगा. कुमार ने लंड बाहर निकाला तो पूनम ने उसकी ओर अचरज से देखा.

“नानी, अब अपनी चूत खुल गई है. आप पलट जाओ. मैं पीछे से लंड डालूँगा। आपको और भी अधिक आनंद आएगा.”

कुमार ये बताना भूल गया कि अब उसकी चुदाई की गति तीक्ष्ण होने वाली है. उसने सहारा देकर पूनम को पलटने में सहायता की. जब पूनम पलट गई तो उसे आगे झुकाया और असीम में उसके मम्मों को अपने मुँह में ले लिया. कुमार ने फिर लंड अपने भाई के लंड के साथ अंदर डाल दिया. कुछ मिनट की धीमी चुदाई के साथ उनकी ताल मिल गई. और इसी के साथ उन्होंने अपनी गति बढ़ा दी. पूनम की अब सिसकारियों ने हल्की धीमी चीखों को स्थान दे दिया था. उसका आनंद उसकी संतुष्टि की कथा उसकी बढ़ती हुई चीखें सुना रही थीं.

असीम और कुमार को इस प्रकार की चुदाई का बहुत अनुभव था. अपनी माँ पर तो वो इसका उपयोग करते ही थे, पर अन्य स्त्रियों को जो उनके प्रेम या वासना में अभिभूत होती थीं, उन्हें भी इसका सुख देने से हिचकते नहीं थे. विवाहित और विधवा महिलाएं इसमें अधिक रूचि रखती थीं. बबिता, निर्मला, गीता और शालिनी उसकी आनंद भरी चीखों से स्वयं इस प्रकर की चुदाई के लिए लालायित हो रही थीं. गीता को पता था कि उसे ये सुख अपनी बेटी के घर जाने पर ही प्राप्त होगा. शालिनी के विषय में भी उसे शंशय था. उसे बबिता और निर्मला के लिए विश्वास था कि वो उसके नातियों को छोड़ने वाली नहीं थीं.

बहुत समय तक इस प्रकार से चुदाई के बाद असीम और कुमार ने घोषणा की कि वो अब झड़ने वाले हैं. परन्तु उन्होंने रुकने का कोई प्रयत्न नहीं किया. एक के बाद लगभग एक ही समय दोनों ने अपना रस पूनम की चूत में उढ़ेल दिया. कुछ समय अपना लंड अंदर रखने के बाद कुमार ने लंड बाहर किया और खड़े होकर पूनम को असीम के लंड से उतारा, पूनम वहीँ लेट गई. उसकी आँखों में तारे चमक रहे थे. गीता ने बबिता को देखा और उन्होंने ने शालिनी और निर्मला को लिया और पूनम की ओर चल दीं।

शालिनी को कुमार के लंड की ओर करते हुए उसने स्वयं अपने नाती असीम के लंड को मुँह में लिया और चाटने लगी. बबिता और निर्मला ने पूनम की जाँघों और चूत पर धावा बोल दिया. सब चट करने के बाद उन्होंने पूनम को उठाया और प्रश्नों की झड़ी लगा दी. पूनम ने अपने अनुभव को स्वर्ग से भी सुंदर बताया और उन्हें भी इसे अनुभव करने की सलाह दी. पूनम न कहती तो भी ये तो होना ही था. निर्मला और बबिता ने असीम और कुमार की ओर देखा.

“आज आप दोनों को भी हम चोद सकते हैं. और अवश्य ही आपको चोदे बिना नहीं सोने देंगे. और कल इसका दूसरा भाग होगा.” कुमार शालिनी के मुँह में लंड डालते हुए बोला।

“दूसरा?” पूनम धीमे से पूछ बैठी.

असीम: “नानी, अपने क्या सोचा कि आपकी गाँड ऐसे ही मारे बिना हम घर लौटने वाले हैं?”

पूनम: “क्या? गाँड भी मारोगे एक साथ?”

असीम और कुमार ने एक साथ कहा, “बिलकुल.”

गीता ने सुशील और जस्सी की ओर देखा. उसका प्रयोजन था कि इतनी घनघोर चुदाई देखकर जस्सी की चुदाई की इच्छा भड़क चुकी होगी. और सुशील इसीलिए क्योंकि उसे विश्वास था कि अब असीम और कुमार निर्मला की ही चुदाई करने में इच्छुक होंगे क्योंकि बबिता को तो चोद ही चुके थे. उसने शालिनी का हाथ पकड़ा.

“जाओ अपने होने वाले पति को पूर्ण रूप से अपना लो. अब कोई बाधा नहीं है.”

पूनम की अब चुदने की शक्ति नहीं थी. असीम और कुमार को भी कुछ विश्राम चाहिए था. बबिता अब फिर से चुदने के लिए उत्सुक थी और उसने बलवंत और कँवल के बीच बैठकर अपना अधिकार जमाया. शालिनी को जीवन ने अपनी गोद में बैठा लिया और उसके मम्मों से खेलने लगा. गीता जस्सी और सुशील के बीच जा बैठी. असीम और कुमार सबके लिए पेग बनाने लगे. उन्हें इसकी अधिक ही प्यास थी. और उनके अनुमान में पूनम नानी को भी. पेग लेकर सब पूनम की ओर देखने लगे तो वो शर्मा गई.

अंततः जस्सी ने ही उसे छेड़ा, “मैं तो समझा था कि ये बुढ़ा गई है, मुझे क्या पता था कि ये अभी भी चुदाई में झंडे गाढ़ सकती है. सच में पूनम, तुम पर मुझे गर्व है. अब देखना तेरी चुदाई ऐसे भी करेंगे हम.”

“न मैं बुढ़ाई हूँ जी, न आप. अब बलवंत भाई साहब न जा रहे होते तो अच्छा होता, पर अब आप कँवल और सुशील भाईसाहब को ही संभालना होगा.”

“अरे हम आते रहेंगे, जैसे जीवन आता है. अब तो शालिनी भाभी भी आएँगी साथ में. ये न सोचना कि हम जायेंगे तो लौटेंगे ही नहीं. जीवन जैसे अभी आता है, वैसे ही आते रहेंगे. तुमने क्या सोचा हम तुम सबसे दूर रह पाएंगे?” बलवंत ने रुंधे कंठ से बोला तो सबका मन भर आया.

“हाँ नानी. और हम भी आएँगे दो दिन की हो तो बात है. आ जाया करेंगे अपनी प्यारी प्यारी नानियों चोदने के लिए.”

“हाँ हाँ, बस चोदने ही आना. जैसे और कोई संबंध ही नहीं है.” बबिता ने कहा तो असीम उसके पैरों में लोट गया.

“नहीं नानी. ऐसा नहीं है. अब बात जिस संदर्भ में चल रही थी उसी संदर्भ में मैंने कहा है. आपका प्रेम, आपके हाथ का खाना, बहुत कुछ है जिसके लिए आएँगे।”

बबिता ने उसके बालों को सहलाया।

“आ जाया करो. मेरे बच्चे तो न जाने क्यों नहीं आते. मेरा मन रोता है उनके लिए.”

जीवन ने ये सुना तो उसने मन में कुछ निर्णय लिया. अपने मित्रों से दूर रहना उसे भी रास न आता था. उसने आशीष से इस विषय में बात करने की ठान ली.

जीवन: “मैं उनसे बात करूँगा. उन्हें इतनी दूर रहने की आवश्यकता नहीं है. मेरे मन में एक विचार है. एक बार मुझे नायक परिवार से बात करनी होगी. समीर और पवन का भी खेती का ही कार्य है. देखते हैं अगर हम मिलकर कुछ कर सके तो. ऐसा हुआ तो उदय और सुरभि भी निकट ही आ सकेंगे. परन्तु अभी इस विषय में कुछ कह नहीं सकते. मैं प्रयास अवश्य करूँगा।”

ये सुनकर पूनम, बबिता और निर्मला की आँखों से ऑंसू निकल पड़े. यही कारण था कि वे जीवन से इतना प्रेम करते थे. उसके मित्रों ने भी उसे अपनी बाँहों में भर लिया. उनकी आँखें भी भीगी हुई थीं. जीवन के मन में संकल्प लिया कि वो इसे सम्भव करने का भरसक प्रयत्न करेगा. इस समाचार से सबके मन फिर से प्रफुल्लित हो गए और एक पेग और बनाया गया. सबके चेहरे दमक रहे थे. शालिनी जीवन के व्यक्तित्व से अत्यधिक प्रभावित थी.

जब तक सबके पेग समाप्त हुए तब तक एक नई स्फूर्ति भर गई थी. उत्कृष्ट मदिरा ने भी इसमें उचित योगदान किया था. निर्मला किसी युद्द में जा रही वीरांगना के समान उठी और जहाँ पूनम की गाँड मारी गई थी वहाँ जाकर बैठ गई. कुमार और असीम उसके सामने खड़े हुए और उनके लौड़े उसके मुँह में समा गए. गीता ने सुशील और जस्सी के लंड मुँह में लेकर चूसना आरम्भ किया तो बबिता ने कँवल और बलवंत के लंड मुँह में ले लिए. जीवन ने हाथ बढ़ाकर शालिनी को उसी बिस्तर की ओर अग्रसर किया जहाँ बलवंत ने उसका स्वागत किया था.

किसी ने घड़ी की ओर देखने का कष्ट भी नहीं किया. आज की रात भरपूर चुदाई की रात थी. और इसका अंत सुबह सूर्योदय से पूर्व नहीं होना था.

रात अभी शेष थी.

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क्रमशः

13,33300
 
Chapter 54 is posted

अध्याय ५४: जीवन के गाँव में शालिनी

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अध्याय ५५: राशि, शिखा और सबीना

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अगला चरण दुहरी चुदाई का था. सभी रोमियो अब शिखा को भोगने के ही इच्छुक थे. राशि को चोदने में अब उनके लिए कोई नयापन नहीं था, हालाँकि वो चुदवाती पूरे उत्साह से थी. राशि, शिखा, मेहुल तथा अन्य रोमियो आज रात होने वाली घटनाओं को सोचकर उत्तेजित हो रहे थे. एक बार फिर मदिरा सेवन किया गया. अगला चरण और उसके बाद की क्रीड़ा के विषय में सोचकर ही शिखा उत्तेजित हुए जा रही थी. उसने राशि को दो लौडों से चुदते देखा था और अब वो स्वयं इसका सुख लेना चाहती थी.

अब आगे:

मेहुल ने इस बार फिर पीछे रहकर देखने का निर्णय लिया. वो देखना चाहता था कि उसके अफ़्रीकी मित्र किस प्रकार से चुदाई करते हैं. अब तक जो उसने देखा था उससे वो अधिक प्रभावित नहीं था. ऐसा प्रतीत हटा था मानो उनके पास लम्बे काले और मोटे लौड़े तो अवश्य थे परन्तु उनका उपयोग उन्हें उपयुक्त रूप से नहीं आता था. उसे राशि की बात ध्यान में आई जिसमे उसने यही कहा था. पर ये अवश्य था कि उनकी चुदाई में जिस शक्ति का वो प्रयोग करते थे उसके कारण भी स्त्रियों को उनसे सुख प्राप्त होता होगा.

मेहुल क्लब की सदस्याओं की रूचि अरुचि से अभी तक अभ्यस्त नहीं था. उसके क्लब से जुड़े हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे. उसे ये भी लग रहा था मानो उसे किसी विशेष प्रयोजन के लिए उपयोग किया जा रहा था. इस समय वो अपने अफ़्रीकी रोमियो के कूल्हों की गतिविधि का अध्ययन करना चाहता था. जो बल वो चुदाई में झोंकते थे वो उनके कूल्हों के माध्यम से ही प्रभावी होता था.

राशि ने सबको अपने अगले कथन से हतप्रभ कर दिया.

“मुझे अब और चुदने का मन नहीं है. मैं थक गई हूँ और शुचि के कमरे में जा रही हूँ. मुझे मत जगाना. मैं जब जागूँगी तब आ जाऊंगी।” ये कहते हुए वो कमरे से निकलने लगी.

मेहुल उसके पीछे गया और कमरे से बाहर निकलते ही उसे रोक लिया.

“मैम क्या हुआ. आप अचानक ही…”

मेहुल रुक गया. राशि की आँखों में आँसू थे.

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फिर शीर्षक में “Type 2 Videos” लिखा हुआ आया. इस बार की चुदाई में दो पुरुष थे. मुँह और चूत, मुँह और गाँड में चुदाई के अनेक दृश्य थे. महिलाएँ चूत और गाँड से निकले लौडों को चाटने में संकोच नहीं कर रही थीं. न ही उन्हें वीर्य पीने में कोई हिचक थी. पिछली शृंखला से ये केवल दो पुरुष होने तक ही भिन्न थे.

अब अगली शृंखला आई जिसमें शीर्षक में “Type 3 Videos” लिखा था. सबीना और सचिन समझ गए कि इस प्रकार से चुदाई के बढ़ते और अधिक विकृत होने की श्रेणी के अनुसार ये संकलन किया गया है. इस बार की शृंखला में भी दो ही पुरुष थे, पर इस बार दुहरी चुदाई के दृश्य थे. इस बार दुहरी चुदाई में चूत और गाँड एक साथ मारी जा रही थी. इसमें भी चूत और गाँड से निकले लौड़े चाटने और उनका रस पीने के दृश्य थे.

चौथी शृंखला में पिछली शृंखला के ही समान दृश्य थे, अपितु इसमें दो से अधिक पुरुष थे. इस बार मुँह, चूत और गाँड में एक साथ चुदाई के दृश्य थे. तीनों में एक साथ लौड़े लिए हुए महिलाएं बहुत उत्साहित प्रतीत हो रही थीं. इस शृंखला के बाद ये डिस्क समाप्त हो गई. सबीना और सचिन बहुत उत्तेजित हो चुके थे और सचिन सबीना पर चढ़ गया और उसकी पूरे बल से चुदाई करने लगा. सबीना उसका भरपूर सहयोग कर रही थी. दोनों इस बार शीघ्र ही झड़ गए और हाँफते हुए एक दूसरे से लिपटे रहे.

सचिन उठा और उसने नूतन द्वारा दी हुई अगली डिस्क लगाई. अब तक की चारों श्रंखलाओं को क्लब में अभिनीत किया जा चुका था. सचिन डिस्क लगाकर हटा तो सबीना ने एक पेग और बनाने की माँग रख दी. सचिन ने सबीना का पेग बनाया और उसमें अपना वीर्य मिश्रित मूत्र डाला और सबीना को थमा दिया.

“लगता है तुम आज मुझे सामान्य व्हिस्की पीने ही नहीं दोगे।” सबीना ने मुस्कुराते हुए कहा.

सचिन ने अपना पेग लिया और उत्तर दिया, “आप चाहेंगी तो वो भी पी सकती हैं. परन्तु ये आपकी इच्छा पर है.”

“नहीं, ये ठीक है. नया स्वाद है.” सबीना ने इठलाते हुए उत्तर दिया.

सचिन और सबीना को ये भली भांति समझ आ चुका था कि अगले दृश्य और अधिक विकृत और अप्राकृतिक होने वाले हैं. मुख्य बिंदु ये था कि इनमें सी कितने प्रकरण क्लब में उपयोग किये जा चुके थे. सचिन को कई प्रकरण पता थे क्योंकि वो लगभग आरम्भ से ही क्लब में था, परन्तु सारे पता नहीं थे. कई समारोहों में वो उपस्थित नहीं रहता था. हालाँकि क्या कुछ घटा था ये अवश्य ही साझा किया जाता था, परन्तु सम्मिलित होने और सुनने में बहुत अंतर होता है. अब देखना था कि इस दूसरी डिस्क में क्या था. तीसरी सबसे अधिक विकृत होने वाली थी.

इस बार श्रृंखला सामान्य रूप के दो पुरुष और एक महिला के साथ ही आरम्भ हुई थीं. परन्तु बाद में एक चूत में दो लौड़े का दृश्य आया तो सबीना की आह निकल गई. सचिन ने उसे देखा.

“ऐसा भी होता है?” सबीना ने पूछा.

“मैंने आपको बताया था न? अभी तो ये नेट की वीडियो है पर ये सभी क्लब में हो चुका है. हालाँकि सारी महिलाओं ने नहीं उठाया है.”

“फिर भी ये बहुत कठिन लग रहा है?”

“कुछ कठिन नहीं है. महिलाओं को तो दोगुना या उससे भी अधिक आनंद आता है. हाँ, हमें सम्भल कर संयम के साथ चुदाई करनी होती है.”

चूत में दो लंड की शृंखला के बाद स्वाभाविक रूप से गाँड में दो लौंड़ों की शृंखला ही अपेक्षित थी. श्रृंखला सामान्य रूप के दो पुरुष और एक महिला के साथ ही आरम्भ हुई थीं.

कुछ देर तक सामान्य चुदाई चलती रही, फिर गाँड मारने के दृश्य आये और फिर एक गाँड में दो दो लौड़े जाने लगे. महिला के चेहरे पर कुछ पीड़ा और आनंद के भाव थे. कुछ ही देर में उसके आनंद के भावों ने पीड़ा को दबा दिया। इस पहले वीडियो के बाद कुछ और वीडियो चले जिनमें केवल गाँड मारने और दो दो लौंड़ों से गाँड मारने के ही दृश्य चलते रहे. सबीना को अब विश्वास हो गया था कि ऐसे भी गाँड मारना सम्भव है. परन्तु क्या वो स्वयं इस प्रकार के आक्रमण को सह पायेगी? उसके मन में दुविधा थी. उसे आभास हुआ कि वो चूत और गाँड में दो दो लंड लेने के विषय में सोचने लगी थी. सोचने और करने में बहुत अंतर होता है,

इस शृंखला के समाप्त होते होते उसकी गाँड में खुजली होने लगी. उसने सचिन को बताया तो सचिन ने उसे घोड़ी बनने का आदेश दिया. बिना किसी पूर्व उपक्रम के उसने अपने लौड़े को गाँड में डाला और सबीना की गाँड पूरी शक्ति से मारने लगा. सबीना भी बहुत उत्तेजित थी और उसने भी इसका पूर्ण आनंद उठाया. गाँड मारने के बाद सचिन ने जब रस उसकी गाँड में छोड़ दिया तो उठकर सबीना का ग्लास उठाया और उसकी गाँड के नीचे लगाकर बाहर बहते हुए वीर्य को एकत्रित किया. उसने सबीना को दिखाकर उसमे व्हिस्की डाली और फिर ग्लास को अपने मूत्र से भर दिया.

“लीजिये, एक और नए स्वाद का आनंद उठाइये.”

सबीना बैठ गई और अपनी गाँड में ऊँगली के माध्यम से कुछ और रस निकाला और ग्लास में गिरा दिया. फिर ऊँगली को ग्लास में घुमाया तो तीनों पदार्थ घुल गए. सचिन की ओर ग्लास उठाते हुए उसने अपने होंठों से लगाया और चुस्कियाँ लेने लगी.

“नाइस टेस्ट. आई एम लविंग योर आइडियास. तुम बहुत ही विकृत मानसिकता रखते हो.”

“आपके मन के भीतर दबी छुपी भावनाओं को बाहर निकालना और उन्हें संतुष्ट करना ही हमारा उद्देश्य है. और हम यही ढूँढ रहे हैं.” सचिन ने अपने ग्लास में व्हिस्की लेकर चुस्की लेते हुए कहा.

“और जिस प्रकार से तुम इसमें सफल हो रहे हो वो बहुत प्रभावशाली है. क्या इस प्रकार से सभी महिलाओं के साथ करते हो?”

“नहीं, हम उन्हें संकेत देते हैं. परन्तु अगर वो स्वयं नहीं आगे आती तो हम कुछ नहीं करते. उनकी संतुष्टि ही हमारा ध्येय है.”

“तो अब क्या दिखाओगे?”

सचिन ने देखा कि दूसरी डिस्क अभी समाप्त नहीं हुई थी. उसे तीसरी डिस्क में क्या है इसका कुछ अनुमान होने लगा था.

“पता नहीं. मैंने ये संकलन पहली बार देखा है.” सचिन ने अपना पेग समाप्त किया और लंड को सबीना के सामने कर दिया जिसे सबीना ने चाटकर साफ किया

“चलो आगे भी देखते हैं क्या क्या करते हो तुम क्लब में.” सबीना ने सचिन को अपने साथ बैठते हुए देखा तो बोली.

सचिन ने रिमोट से अगली शृंखला आरम्भ कर दी. जैसा उसे अनुमान था इस शृंखला में कई पुरुष थे, अर्थात ये गैंगबैंग की शृंखला थी. हाँ, इसमें एक या दो महिलाएँ थीं. जैसे जैसे शृंखला आगे बढ़ी, पुरुषों की संख्या और चुदाई की भीषणता भी बढ़ती गई. इनमें का प्रकार के जोड़ रहे. एक महिला के साथ चार या पाँच पुरुष एक साथ चुदाई कर रहे थे. मुँह, चूत, गाँड और हाथ सबमें लौड़े थे. चूत में दो लौड़े थे, फिर गाँड में दो लौड़े, फिर दो चूत में और एक गाँड में, दो गाँड में और एक चूत में. भीषण व्यग्र चुदाई. देखने में ही रोंगटे खड़े कर देने वाली चुदाई. और लौड़ा खड़ा और चूत गीली करने वाली चुदाई. गाँड की खुजली बढ़ाने वाली चुदाई.

महिलाएं हर छेद में लौड़े ले रही थीं. हर लौड़े का रस उनके मुँह और चेहरे पर बरसता था. उन्हें उस रस को पीने और चाटने में कोई संकोच न था, चाहे लौड़ा किसी भी छेद से निकला हुआ क्यों न हो. और देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था की मानो वो महिलाएँ भी इसका आनंद ले रही थीं. जहाँ भी दो महिलाओं का दृश्य आता था उसमें दोनों एक दूसरे के शरीर पर बहते हुए वीर्य को चाटने में देर नहीं करती थीं. कई दृश्यों में वीर्य को चेहरे पर लेप दिया जाता था और फिर उसे चाट कर हटाया जाता था. सबीना ये सब देख कर अचरज में थी. वो समझती थी कि केवल उसका परिवार ही अनूठा है. परन्तु जो इन महिलाओं ने दर्शाया था वो उनकी चुदाई से कई मीलों आगे थे.

ये सत्य था कि ये फिल्म थी इसी कारण इसमें अभिनय का पुट अधिक मात्रा में था. पर फिर भी जितने आनंद का वो अभिनय कर रही वो सम्पूर्ण अभिनय नहीं हो सकता था.

“हम ऐसा कर चुके हैं.” सचिन ने बताया. “एक से अधिक बार, कई सदस्याओं के साथ ऐसी चुदाई की जा चुकी है.”

इसके बाद के दृश्य देखकर सबीना का ह्रदय काँप उठा. इस वीडियो में एक चूत में तीन लंड थे. और इसके बाद के वीडियो में गाँड में तीन लौड़े थे. सबीना ने सचिन की ओर देखा.

“ये भी.”

सबीना देखकर ही विस्मृत थी. अब उसे लगा कि चूत या गाँड में दो लौड़े लेना सम्भव है. कुछ ही क्षणों में ये शृंखला भी समाप्त हो गई. सबीना की श्वास फूल रही थी. वो क्लब में शीघ्रतिशीघ्र समीलित होकर अनेकों प्रकार की चुदाई का अनुभव लेना चाहती थी. सचिन को पता था कि सबीना अब जिस मोड़ पर खड़ी है वहाँ से अब लौटना सम्भव न था. और वो उस विशिष्ट सदस्याओं में जुड़ेगी जो हर प्रकार की विकृत चुदाई में सुख पाती थीं.

ये डिस्क भी अब समाप्त हो चुकी थी. सबीना ने अंतिम डिस्क की ओर देखा. अगर इतनी वीभस्तता अब तक देखी है तो आगे क्या होगा? सचिन का अनुमान था कि आगे जो है वो सबीना को या तो पूर्णतया प्रतिबद्ध कर देगा या उसे क्लब से जुड़ने से रोक देगा. उसके मन में दूसरी घटना के होने का संशय था. इसीलिए उसने सबीना से कुछ समय माँगकर बाहर जाकर पार्थ से बात की. पार्थ ने उसे समझाया कि हमारा केवल सदस्याओं की इच्छापूर्ति है. अगर वो नहीं चाहेगी तो कुछ भी नहीं होगा. फिर उसने एक सरल उपाय बताया और सचिन संतुष्ट होकर सबीना के पास लौट आया.

“क्या हुआ?” सबीना ने पूछा.

“सर से बात कर रहा था. अंतिम डिस्क के बारे में.”

फिर उसे याद आया कि पार्थ ने उसे क्या निर्देश दिया था.

“क्या कहा उन्होंने?” सबीना ने पूछा.

“बताता हूँ, पर मुझे बाथरूम जाना है. आप चलोगी?”

सबीना बिना कुछ बोले सहर्ष उसके साथ चल पड़ी.

“मुझे लगता है कि मुझे सादा पानी अब अच्छा ही नहीं लगेगा.” सबीना ने कहा तो सचिन समझ गया कि वो उसे लेकर जाने का आशय समझ गई थी.

“अब तो आप व्हिस्की में भी मिलाकर पी चुकी हो. लगता है मुझे आपके लिए बोतल में रखकर जाना होगा जब तक आपके परिवार वाले लौटें. क्लब में जुड़ने के बाद तो मैं आ नहीं पाउँगा.”

“हाँ ये ठीक रहेगा.” सबीना ने कहा.

सचिन समझ नहीं पा रहा था कि सबीना इतना शीघ्र हर बार के लिए मान क्यों जा रही थी. क्या उसके परिवार की दूरी उसके इस व्यवहार के लिए उत्तरदाई थी?

बाथरूम में हर बार के समान सबीना नीचे बैठी और सचिन ने उसके मुँह और चेहरे पर अपनी धार छोड़ दी. परन्तु इस बार सबीना ने कुछ ऐसा किया जिससे कि सचिन अचम्भित हो गया. उसने अपना सिर नीचे कर दिया और धार उसके बालों में गिरने लगी. सबीना ने उसे अपने बालों में यूँ लगाया मानो शैम्पू हो. फिर उसने सचिन के लंड को चूमा.

“अगर आज के बाद नहीं आओगे तो मैं कुछ यादें रखना चाहूँगी। तुम पहले हो जिसको मैंने अपने शरीर को इस प्रकार से उपयोग करने दिया है. अब मैं अन्य लोगों के साथ भी ये करने वाली हूँ. पर तुम सदा पहले रहोगे. ये कहना अनुचित अवश्य है, पर मैं तुम्हें चाहने लगी हूँ. तुमसे दूरी मुझे व्यथित करेगी.”

सचिन ने उसकी ओर देखा.

“यही कारण है कि क्लब का दूरी का नियम है. हम सेवा के लिए हैं, संबंध के लिए नहीं. मैं भी आपको भूलने वाला नहीं हूँ. परन्तु सम्भवतः आज की रात हमारी अंतिम रात है. हाँ, आप मुझे महीने में दो बार बुला सकती हैं. और अगर बुलाया तो आऊंगा भी. सना के लिया अगर आया भी तो आपको नहीं चोद सकता. इसीलिए कई रूप में हमारी इस प्रकार से अंतिम रात है. तो इसका पूरा लाभ उठाना चाहता हूँ.”

क्लब के नियम का कारण सचिन को आज विदित हो रहा था. उसने कभी सोचा भी न था कि वो किसी से प्रेम करने योग्य है. वो मात्र एक चुदाई की मशीन था. उसकी माँ और फिर क्लब ने उसे स्त्री के उन रूपों को दिखाया था जिसे देखकर वो प्रेम से दूर भागता था. सबीना के विरह की पीड़ा को देखकर उसे मन से कष्ट हुआ था. वो उससे प्रेम करने लगा था, परन्तु वो विवाहित थी. भले ही उसका विवाहित जीवन कैसा भी हो, पर वो उसमें कोई गतिरोध नहीं डाल सकता था. वो उसके जीवन की कमी में प्रेम की कमी भले ही पूरी करने में असमर्थ हो पर उसकी वासना को पूरी करने में समर्थ था.

कल सुबह के बाद वो सबीना से कभी कभार ही मिल पायेगा. पार्थ ने फोन पर कुछ संकेत दिया था कि सम्भवतः सबीना का क्लब में प्रवेश दो तीन आगे टल जायेगा, क्योंकि कुछ परिवर्तन होने वाले थे. सचिन ने नीचे सबीना के चेहरे और बालों से अपने मूत्र को टपकते देखा. न जाने क्यों पर सचिन को उसके चेहरे के स्थान पर अमीना बेगम का चेहरा दिखाई देने लगा. कैसी लगेंगी अमीना बी इस प्रकार से भीगी हुई? जीभ से अपने होंठों को चटकारती हुई? फिर यही उसके मन में निगार के लिए आये. उसका लौड़ा टनटना गया. सबीना भी उसे ही देख रही थी. वो भी उसी प्रकार के विचारों में खोई थी और और सचिन के स्थान पर नूर और आमिर की कल्पना कर रही थी. स्वयं को धोने के लिए भी नहीं उठी थी.

“फ्रिज से बोतलें निकाल लाओ. अब मुझे पिलाने के स्थान पर उसमें भरते रहो. अब न जाने कब मिलोगे।”

“अगर ऐसा है तो मैं आपको हर दो तीन दिन में नई माल दे जाया करूँगा.” सचिन ने हँसते हुए उत्तर दिया. “पर तब तक आपको पिलाने वाले भी अनेक हो जाएँगे। आपका बेटा और भतीजा भी आ ही रहे हैं. फिर आपकी भाभी और अम्मी भी आएंगी ही. फिर क्लब के रोमियो. आपको कमी नहीं होगी.”

“हाँ ये तो है. नूर और आमिर तो रहेंगे ही.” सबीना ने निगार और अमीना का नाम नहीं लिया. “चलो तुम, मैं नहा कर आती हूँ.”

सचिन ने तीसरी डिस्क लगाई और दो पेग बनाये. सबीना का विशेष पेग उसकी ओर की छोटी टेबल पर रखा और अपना पेग लेकर बिस्तर पर जा बैठा. कुछ ही देर में सबीना आ गई. उसने अपना पेग उठाया और एक घूँट भरा फिर बिस्तर पर सचिन से आ चिपकी. सचिन ने प्ले का बटन दबा दिया.

सामने चेतावनी लिखी हुई थी. और लिखा था कि ये “गोल्डन शावर” इत्यादि से संबंधित है और अगर इसमें रूचि न हो तो न देखें.

सचिन ने सबीना को देखा और पूछा.

“चलने दो.” सबीना ने कहा. मानो इतने समय का अंतर वीडियो में इसी कारण रखा हुआ था. सबीना के कहने के कुछ ही क्षणों में पहला वीडियो प्रदर्शित होने लगा.

और पहले ही दृश्य में ये स्पष्ट हो गया कि इस शृंखला का उद्देश्य क्या है. पहले ही दृश्य में एक महिला बैठी हुई थी और उसके मुँह में एक पुरुष मूत्र त्याग कर रहा था. ये दृश्य समाप्त होते ही वो चेतावनी फिर आई. सबीना सचिन से लिपट गई और आगे चलने देने के लिए स्वीकृति दे दी.

इसके बाद के दृश्य किसी भी साधारण पुरुष और स्त्री को घृणा से भर सकते थे. सचिन क्योंकि ऐसे कई आयोजनों में भाग ले चुका था तो उसे इससे कोई कुंठा नहीं हुई. उसे सबीना की चिंता थी, कहीं वो व्यथित न हो जाये।

“क्या क्या करते है लोग, है न?” सबीना फुसफुसाकर बोली और उसका शरीर अकड़ गया.

सचिन ने उसे देखा तो वो बिना कुछ किये ही झड़ गई थी. सचिन मन ही मन मुस्कुराया. उसे विश्वास हो गया कि आगे की शृंखला देखने के बाद वो अवश्य क्लब की विशिष्ट सदस्याओं की श्रेणी में जुड़ जाएगी. इसके आगे शृंखला इसी प्रकार से आगे बढ़ती गई.

कई दृश्यों में महिलाएँ एक या अधिक पुरुषों के मूत्र का सेवन करती रहीं. कुछ ने तो ग्लास और बड़े काँच के कटोरों में भी भर कर पिया। उनके चेहरे के भाव उनके आनंद का दर्शन कर रहे थे. सबीना अपनी चूत रगड़ रही थी.

अगली शृंखला में चुदाई हुई और फिर उसी प्रकार से उन्हें मूत्र पिलाया गया और उसमें स्नान कराया गया. चुदाई के दृश्य पिछली शृंखला के समान ही थे. कई लौंड़ों से चुदने के बाद उनका मूत्र पीना ये उनका भावार्थ था. इसमें से बहुत कुछ उनके शरीर पर भी गिरता था. सबीना से रहा नहीं गया.

“मुझे चोदो प्लीज़. मुझे चोदो।” सबीना घोड़ी बन गई और उसका चेहरा टीवी की ओर था. सचिन उसके पीछे गया और उसकी चूत में लौड़ा पेलकर उसे चोदने लगा. सबीना की चूत इतनी गीली थी कि सचिन का मोटा लौड़ा भी सरलता से अंदर बाहर हो रहा था. सामने टीवी पर चुदाई और सिँचाई के दृश्य चल रहे थे. जिस शक्ति के साथ टीवी पर चुदाई चल रही थी उसी गति की सचिन भी अनुशरण कर रहा था. अब टीवी पर दर्शाये दृश्यों में कलाकारों को बीच में विश्राम भी मिलता है, और वो हट कर दूसरे को अवसर देते हैं. सचिन के पास ये लाभ नहीं था. और वो कुछ ही दृश्यों के बाद झड़ गया.

वहाँ टीवी पर खेल और अधिक विकृत होते जा रहा था. अब स्त्रियों को चुदाई के साथ ही मूत्र पिलाया जा रहा था. अधिकतर दृश्यों में महिला घोड़ी बनकर गाँड मरवाते हुए मूत्र सेवन का रही थी, पर कुछ दृश्यों में चूत और गाँड में लौड़े लेते हुए भी ऐसा करते हुए दर्शाया गया था. सबीना उसी स्थिति में ये सब देख रही थी और सचिन का लंड अब फिर तना तो उसने इस बार सबीना की गाँड की गहराई नापने के निर्णय लिया. सबीना ने गाँड हिलाकर उसका स्वागत किया. सचिन फिर गाँड मारने लगा और सबीना उसका साथ देती रही.

टीवी पर फिर एक चेतावनी झलकी कि अगले दृश्य अत्यधिक विकृत हैं. एक महिला पर कई सारे पुरुष मूत्र त्याग कर रहे थे और वो अपने सिर पेट बाल हर एक पर उनके मूत्र से स्नान कर रही थी मानो साबुन लगा रही हो. ये देखकर सचिन को सबीना के साथ हुई कुछ देर पहले की घटना स्मरण हो आई. ऐसे एक दो दृश्य और चले फिर दोबारा चेतावनी आई.

उसके बाद एक महिला जिसके शरीर पर मूत्र विसर्जन किया जा रहा था वो गाँड भी मरवा रही थी. अचानक गाँड मारने वाला लंड बाहर निकला और महिला की गाँड से एक तेज धार निकली. उस पुरुष ने उसकी गाँड को मूत्र से भर दिया था. ऐसा एक दो दृश्यों में हुआ फिर एक में उस धार को एकत्रित किया गया और एक ग्लास से उस महिला ने उसे पी भी लिया. और जैसे ही उसने अपना रिक्त ग्लास दिखाया वीडियो समाप्त हो गया. सचिन बिना रुके सबीना की गाँड मारता जा रहा था.

“बाथरूम में चलकर मारो, मुझे वो लास्ट वाला सीन ट्राई करना है.” सबीना बोली तो सचिन अचम्भित हो गया.

“आप होश में तो हो?”

“हाँ. मैंने कहा न, मैं हर क्रीड़ा तुम्हारे साथ पहले करना चाहती हूँ. क्या पता ये आगे करुँगी भी या नहीं, पर तुम केवल आज ही मेरे पास हो, तो अधिक चिंतन का समय भी नहीं है मेरे पास.”

सचिन ने अपना लौड़ा बाहर खींचा और दोनों बाथरूम में चले गए. सबीना ने वहां से एक मग उठाया और सचिन को थमा दिया.

“वीडियो केवल मूत्र ही निकला था, पर मैं चाहती हूँ कि उसमें तुम्हारा वीर्य भी मिला हो. न जाने मुझे क्यों लग रहा है कि मुझे उसमें अधिक स्वाद आएगा.”

सचिन कुछ कहने की स्थिति में नहीं था. गाँड मारने से रोकने के कारण उसकी नसें फट रही थीं. उसने मग को निकट में रखा जिससे कि सरलता से हाथ में आ पाए. सबीना घोड़ी बन गई और सचिन ने उसकी गांड फिर से मारनी आरम्भ कर दी. सबीना आने वाली घटना से इतनी उत्तेजित थी कि लगातार उसकी चूत पानी छोड़ रही थी. सचिन भी आगे के लिए उत्सुक था और पूरी शक्ति से सबीना की गाँड खोल रहा था. कई मिनट गाँड मारने के बाद सचिन झड़ने लगा. सबीना के घुटने अब दर्द करने लगे थे. जब सचिन की वीर्य की बौछार ने उसकी गाँड को सींचा तो उसे कुछ विश्राम मिला.

सचिन ने अपना लंड जड़ तक पेल दिया और अपना पूरा रस सबीना की गाँड में भर दिया. फिर उसने मग उठाकर सबीना की कमर पर रखा और अपने लंड को उसी प्रकार से डाले हुए उसकी गाँड में मूतने लगा. उसे शीघ्र ही ये पता चल गया कि किसी भी स्थिति में सबीना की गाँड में वो अपना पूरा मूत्र त्याग नहीं पायेगा. उसने कुछ अंकुश लगाया और किसी प्रकार से स्वयं को रोका. ये सम्भवतः उसके जीवन का सबसे कठिन कार्य था.

“ओके, अब मैं लंड निकाल रहा हूँ. आप ध्यान रखना.” सचिन ने चेतावनी दी.

सबीना ने सिर हिलाकर उसे निकलने का संकेत किया. सचिन ने मग को सबीना की गाँड के निकट किया और अपना लंड एक झटके से बाहर खींच लिया. वीडियो के ही समान सबीना की गाँड से एक तीव्र धारा निकली जिसने मग को भर दिया. धीरे धीरे उस धारा की गति धीमी हुई और फिर ठहर गई. सचिन ने मग में देखा तो उसका मन मचल गया. उसने मग को एक ओर रखा और हट गया. सवीना वहीं लेट गई. उसके घुटने दर्द कर रहे थे. कुछ पल यूँ ही ऑंखें बंद किये हुए लेटने के बाद आँखें खोलीं. सचिन उसके पास बैठकर उसके घुटनों की मालिश कर रहा था. सबीना उसे देखकर मुस्कुराई.

“ये आज की अंतिम इस प्रकार की चुदाई है. इसके बाद सामान्य चुदाई ही करना, प्लीज़. और बोतलों में छोड़ना अपने दोनों पानी.”

“ठीक है.” ये कहकर सबीना का हाथ पकड़कर उसे उठाया. सबीना ने मग लिया और दोनों कमरे में चले गए.

सोफे पर बैठकर सबीना ने अपने ग्लास में मिश्रण डाला और एक घूँट लिया. सचिन ने ये देखा पर कुछ कहा नहीं. उसके पेट में कुछ हलचल अवश्य हुई.

“स्वाद भिन्न है, पर बहुत अच्छा तो नहीं है.” सबीना ने कहा और ग्लास को मग में डालकर बाथरूम चली गई. लौटी तो उसका मुँह गीला था. उसने सचिन को देखकर एक अशक्त सी मुस्कान दी. फिर अपने लिए सामान्य पेग बनाया. सचिन की ओर देखा और फिर उसके लिए भी एक बना दिया.

“मेरे विचार से मैंने ये वीडियो देखकर अपनी सीमा निर्धारित कर ली है. समय आने पर उस पर निर्णय लूँगी। मैं तुम्हारी आभारी हूँ जो तुमने मुझे कुछ कृत्य करने दिया. विशेषकर अंतिम. मैं अगर किसी और के साथ ये करती तो घृणा से भर जाती. अब शेष रात्रि में सामान्य प्रेम और चुदाई ही करेंगे.”

“जैसी आपकी इच्छा. मुझे भी अच्छा लगा कि अपने अंतिम कृत्य को रुचिकर नहीं पाया. अन्यथा मेरे प्रेम में कमी आ सकती थी.”

सबीना: “अम्मी और निगार के आने के बाद देखेंगे, क्या कुछ घटित होता है. न जाने वो सब इस समय क्या कर रहे होंगे?”

************

लगभग दो हज़ार किलोमीटर दूर दुबई में सलीम खान और अमीना बी एक सोफे पर नंग धड़ंग बैठे बात कर रहे थे.

अमीना बी: “मुझे सबीना की अब चिंता होने लगी है. निगार की भी है. पर सबीना की अधिक है.”

सलीम: “क्यों? क्योंकि सबीना अपनी बेटी है?”

अमीना कुछ न बोलीं पर उनका तात्पर्य यही था.

सलीम ने पूछा, “क्या करना चाहती हो?”

अमीना: “आप नदीम और नासिर से बात कीजिये. मुझे लगता है कि अब आमिर और नूर को भारत का व्यवसाय संभालने दीजिये. दोनों भाई साथ काम भी करेंगे और यहाँ आने के लिए भी समय निकालेंगे. इतने अधिक समय तक अपना काम नौकरों के भरोसे छोड़ना ठीक नहीं है. मैं और निगार सारी बातें भी नहीं समझती हूँ.”

सलीम सोच में पड़ गए.

“पर मुझे यहाँ भी मार्केटिंग के लिए सहायता चाहिए.”

“उसके लिए आप अर्शी और सना को बुला लीजिये अपने पास. दोनों कुछ काम करेंगी तभी सीखेंगी. नहीं तो चौबीस घण्टे लौंड़ों के सपने देखती रहती हैं. यहाँ आप तीनों संभाल सकते हो.”

“बात में तो दम है, बेगम. अब आपके जाने में भी बस छः दिन शेष हैं. सोच रहा हूँ इस बार मैं भी आप चारों के साथ चलूँ.”

“ये तो बहुत अच्छा रहेगा.”

सलीम का मुख्य उद्देश्य उस क्लब के विषय में जानने का था जिसमें उसकी बेटी, पत्नी और बहू चुदाई के लिए सम्मिलित होना चाहती थीं. उसने सबीना और नासिर के विश्वास पर उसे स्वीकृति दे दी थी. परन्तु वो इसके विषय में जानने का इच्छुक था.

“और अगर सब मान गए तो सना और अर्शी को साथ ले आऊंगा.” सलीम ने मुस्कुराते हुए कहा. अपनी पोती और नातिन का ध्यान आते ही उसका मन हर्षित हो गया और लौड़ा फ़नफ़ना उठा. अमीना ने ये देखा और हंसने लगी. उसने सामने पलंग पर चल रहे द्वन्द की ओर संकेत करते हुए कहा.

“जाइये, आप भी अपनी निगार की चुदाई में जुड़ जाइये.”

पलंग पर निगार की चूत और गाँड में लौड़े पिले हुए थे. और उसके मुँह में एक एक करके दो लौड़े आ जा रहे थे. अपने पति, पुत्र, नन्दोई और उसके पुत्र से चुद रही थी.

सलीम ने अमीना का हाथ पकड़ा और उठ खड़े हुए.

“आपको कैसे अकेले छोड़ दे बेगम, आइये आप भी जुड़िये.”

सलीम और अमीना पलंग के पास पहुंचे और सलीम ने कहा.

“बच्चों, अपनी अम्मी का भी कुछ ध्यान करो.”

सबने हटकर अमीना बी को स्थान दिया और कुछ ही पलों में नए मिश्रण में चुदाई आरम्भ हो गई.

रात अभी शेष थी.

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क्रमशः

1349500
 
ससुराल की नई दिशा के सवा छह लाख व्यूस पूरे होने के उपलक्ष में एक अपडेट दिया जायेगा.

इससे आपका विश्वास बना रहेगा कि ये कहानी अभी समाप्त नहीं की है.

Chapter 55 is posted

अध्याय ५५: राशि, शिखा और सबीना

Please read and give your views.
 
अध्याय ५६: सुमति का पटेल मिलन

दृश्य ३ में अब तक:

रूचि ने चंद्रू और प्रकाश के उपक्रम हेतु धन की व्यवस्था कर दी. अब प्रकाश का यहाँ रहना निश्चित हो चुका था. वहीँ दोनों परिवारों की महिलाओं के षड्यंत्र के कारण सुमति और प्रकाश को दोनों के परिवारों में व्यभिचार का रहस्य खुल गया. सुमति के व्यसन से प्रकाश अति प्रसन्न हुआ. सुमति और प्रकाश चार दिन के लिए ऊटी के लिए निकले पर अंततः दो सप्ताह बाद लौटे.

पार्थ ने शोनाली को सबीना, अमीना और निगार के विषय में और राशि को क्लब में ही रहने के लिए भी सूचित किया. उसने कुछ कार्यों में अपना योगदान करने के विषय में भी चिंतन किया. राशि क्लब में रहने के लिए चली गई. राशि के क्लब में रहने के अधिकाधिक लाभ मिले.

इस माह की पार्टी संचालन हेतु एक मंत्रणा की गई. सचिन ने ऐसे आयोजनों के लिए अस्थाई रोमियो का प्रबंध करने का सुझाव दिया. सभी सदस्याओं और रोमियो से इस विषय में संदेश दिया गया. इस बार पार्टी की थीम थी “परिवार”. इनका एक विशेष शो होना था. उसके बाद दो दिनों तक व्यभिचार की अनूठी कथा लिखी जानी थी. राशि ने अस्थाई रोमियो का इंटरव्यू लेने का दायित्व ले लिया. सबीना, उसकी माँ और भाभी के साक्षात्कार कल से निर्धारित थे. वहीँ राशि अस्थाई रोमियो का परीक्षण करने वाली थी.

चटर्जी और पटेल परिवारों में इतनी रात होने के बाद भी ऐसा वातावरण था मानो सब अभी उठे हों. शोनाली ने सुमति को पार्थ और जॉय के हाथ सौंपा.

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अध्याय ४४ से आगे:

दिंची के अस्थाई रोमियो:


दो दिन भी समाप्त नहीं हुए थे कि अस्थाई रोमियो के लिए पर्याप्त नाम आ गए. सचिन ने नूर, समीर, दर्शन और हितेश के नाम सुझाए। मेहुल ने असीम, कुमार और सिद्धार्थ के नाम आगे बढ़ाये. पार्थ ने नितिन और मार्क के नाम का सुझाव दिया, डेविड उसके अनुसार मापदंड पर पूरा नहीं उतरता था. मार्क के पक्ष में एक और गुण था, वो अश्वेत था और पहली बार किसी पार्टी में पाँच अफ़्रीकी रोमियो उपस्थित रहने वाले थे. कुछ अन्य स्त्रोतों से और भी नाम आ गए. कुल सत्रह नामों का सुझाव आया था.

अब उनका क्लब के मापदंडो पर परीक्षण होना था. राशि ये देखकर मन ही मन उत्तेजित हो रही थी. पर उसके पहले उनके विषय में और गहराई से छानबीन करनी थी और ये पुष्टि भी करनी थी कि वे इसे पूर्ण रूप से गुप्त रखने के योग्य हैं. उसके बाद उनका राशि द्वारा परीक्षण करने में पूरा समय उपयोग हो जाए वाला था. राशि ने विश्वास दिलाया कि वो एक दिन में दो परीक्षाएँ ले लेगी. फिर भी समय कम था.

पटेल परिवार का प्रकाश:

उधर पटेलों ने कल रात अपनी बैठक में ही कामक्रीड़ा करने का निर्णय लिया था. आज सुमति भी आने वाली थी और यही उपक्रम दोहराया जाना था. दर्शन कुछ ही समय में आने ही वाले था तो कल से भी अधिक बड़ा समारोह होना था.

कल रात में दिया, सिया और नीलम के साथ कनिका की भी भरपूर चुदाई हुई थी. दर्शन के न होने से आकार, आकाश, चंद्रू, हितेश और प्रकाश पर ही सारा दायित्व था जिसे उन्होंने सहर्ष निभाया था. सुबह सब उठकर अपने कमरों में जा कर फिर से सो गए थे. सुमति को अपने बेटे और भाई से भी असीमित प्रेम मिला और दोनों ने उसके इतने दिनों न होने की भरपाई की. अंततः सब उसी बिस्तर पर सो गए थे. शोनाली पारुल के कमरे में चली गई थी.

देर सुबह लगभग एक ही समय दोनों घरों की घण्टी एक ही साथ बजी. दिया ने उठकर दर्शन का गले मिलकर स्वागत किया. दर्शन को दिया से कल की चुदाई की गंध से पता चल गया कि उसकी माँ कल अच्छे से चुदी है.

“हैलो मॉम, लगता है कल अच्छी चुदाई हुई है.”

“हाँ, और आज भी होगी. अब बात मत कर जाकर नहा ले. मैं जाकर सबको उठती हूँ. बहुत देर हो गई आज सोते सोते.”

सागरिका का स्वागत अपने घर में पारुल ने किया और दोनों बहनें पहले सागरिका की बातें करती रहीं. सागरिका सुप्रिया के घर से ही स्नान करके आई थी. तो वो रसोई में घुसकर चाय बनाने लगी. पारुल ने जाकर सबको उठाया और कुछ ही देर में सभी आँख मलते हुए बैठक में आ गए. सबने प्रेमपूर्वक चाय पी और फिर अपने नित्य कर्म में लग गए.

दो घंटे बाद पार्थ, शोनाली और जॉय कार्य के लिए निकले तो वहीँ उन्हें सामने से पटेल परिवार के चारों पुरुषों भी निकल रहे थे. हिलाकर उन्हें एक दूसरे का अभिवादन किया और निकल पड़े.

सुमति सुबह जब जॉय के कमरे से निकली तो खिली हुई थी. रात भर उसके भाई और बेटे ने उसे चोदा था. पार्थ ने तो इस बार कुछ अधिक ही उग्रता दिखाई थी. जॉय अपने पूर्व रूप में ही था और उसने अधिक प्रेम से चोदा। पार्थ ने लेकिन उसके सुबह उठने के बाद उससे क्षमा माँगी और कहा कि न जाने क्यों उसे इस बात का भी डर है कि सुमति उससे दूर चली जाएगी. सुमति ने विश्वास दिलाया कि वो किसी के भी लिए पार्थ से होगी, चाहे वो प्रकाश ही क्यों न हो.

शाम को सुमति के पटेल परिवार के यहाँ जाने से पहले शोनाली ने उसे अपने पास बैठाया.

“दी, सुनो. आप फूल इंजॉय करना. मेरी नीलम से बात हुई है. पहले आप उसके ही साथ रहना. वही पूरे कार्यक्रम का निर्देशन करने वाली है. उसे आपकी रूचि भी अच्छे से पता है और उसने विश्वास दिलाया है कि आज सबके रस पर आपका ही अधिकार होगा. आप सोचिये नीलम, दिया, सिया और कनिका सबकी गाँड से आपको उस घर के सभी पुरुषों का पानी पीने का अवसर मिलेगा. विशेषकर प्रकाश का. नीलम बता रही थी कि प्रकाश को आपका ये स्वभाव अत्यधिक रास आया है. और वो आपको सदा इसे पूरा करने की अनुमति देगा.”

फिर शोनाली ने सुमति को आँख मारी, “नीलम से कुछ राज भी उगलवाना. सुना है उसकी कोई किट्टी पार्टी है. हो सके तो उसमें भी सम्मिलित हो जाना. आपको भी अन्य महिलाओं से मिलकर अच्छा लगेगा.”

सुमति ने सहमति दी. फिर शोनाली ने गाँड बंद करने वाला प्लग अपने हाथ से निकाला और सुमति को दिया, "मेरी गाँड में तो इसने हर नए रोमियो के पानी को आपके लिए रोका है, पर आज आप इसके द्वारा अपनी गाँड से भी पानी पीने का प्रयास करना.”

शोनाली और सुमति एक दूसरे से लिपट गयीं. दोनों के प्रेम को देखकर किसी की भी आँखों में आँसू आ जाते. छह बजे सुमति पटेल निवास पहुंची और नीलम ने उसका स्वागत किया. अन्य सभी उस समय कहाँ थे ये जानने का प्रयास भी नहीं किया गया. नीलम उसे अपने कमरे में ले गई.

पार्थ ने फोन करके ये बता दिया था कि वो क्लब सीधे रूचि के घर जायेगा. तो शोनाली, जॉय और उनकी बेटियाँ ही आज घर में बहुत समय बाद अकेले थे. शोनाली जानती थी कि उसका सदुपयोग कैसे करना है.

नीलम सुमति के विषय में अधिक जानना चाहती थी. चुदाई के अतिरिक्त भी व्यक्तित्व के विषय में समझना नितांत आवश्यक था. सुमति ने बताया कि वो अब समर्थ के व्यवसाय में उसका हाथ बटाती है, हालाँकि अभी उसे केवल दो घंटे ही जाना होता है. उसके विषय में जानकर नीलम को उसका स्वभाव बहुत भाया। उसने फिर पार्थ के विषय में पूछा. सुमति सोचने लगी कि क्या कहे? वो अपने इस नए संबंध को झूठ से नष्ट नहीं करना चाहती थी.

“पार्थ एक क्लब का स्वामी है, जिसमें शोनाली भी भागीदार है. उनके क्लब में ३५ वर्ष से अधिक आयु की स्त्रियों की सेक्स की इच्छा पूरी की जाती है. महिलाएं विवाहित या विधवा होती हैं. अब तक कोई अविवाहित सदस्य नहीं बनी है. विवाहिताओं के पतियों की सहमति आवश्यक है.”

“वाओ! ये तो बहुत अचंभित ही. कितनी आयु तक की महिलाएँ हैं?”

“मुझे अधिक तो पता नहीं पर ६५ या ७० की एक दो हैं. मैं केवल एक से ही मिली हूँ और वो ७० के निकट हैं.” सुमति ने ये नहीं बताया कि वो शीला सिंह की बात कर रही थी.

“ओह!” नीलम सोच में पड़ गई. “सदस्य बनने की पात्रता क्या है?”

“पैसा!” सुमति हँसी, फिर बोली, “पूर्ण गोपनीयता और एक इंटरव्यू. वैसे किसी की अनुशंसा के बिना किसी को भी नहीं लिया जाता. और सबसे विशेष बात ये है कि सारे लड़कों के लौड़े दस इंच से लम्बे और अच्छे मोटे हैं और चुदाई में पारंगत हैं. और सदस्या जितने चाहे उतने लड़कों से चुदवा सकती हैं.”

नीलम का मुँह आश्चर्य से खुला रह गया.

फिर सुमति को शोनाली की बात याद आई, “तुम्हारी कोई किट्टी है न? क्या करती हो उसमें?”

नीलम हँस पड़ी, “वही हम महिलाओं की गपशप और क्या?”

सुमति, “क्या मैं भी आ सकती हूँ?”

नीलम सोचने लगी, “मुझे नहीं लगता इसमें कोई समस्या होगी. अगली किट्टी अगले सप्ताह ही है. मैं पूछकर तुमको अतिथि बनाकर ले चलूँगी। फिर सोचकर बताना.”

नीलम बोली, “सुमति एक बात पूछूँ?”

“क्या मैं किसी का नाम सुझा सकती हूँ?”

“हाँ, मुझे शोनाली को बताना होगा, उसके बाद वो ही आगे का कार्य संभालेगी. किसकी बात कर रही हो?”

“हैं मेरी किट्टी की एक सदस्या, विधवा हैं बेचारी. अभी अपने रसोइये और ड्राइवर से चुदवाती हैं. पर लगता नहीं कि वो इससे संतुष्ट हैं. धन की कोई कमी नहीं है. अपने पति के व्यवसाय को अच्छे से संभाल रही हैं. कोई संतान भी नहीं है. अगर उन्हें पूछूँगी तो वो अवश्य ही इच्छुक होंगी. वैसे कितनी फ़ीस है?”

“मुझे शोनाली से पूछना होगा. उससे ही बात कर लो न? लगाऊँ फोन?”

“ठीक है.”

सुमति ने शोनाली को कॉल किया तो उसने कहा कि वो आकर समझाती है. कुछ ही देर में वो भी आ गई और नीलम को सब समझाया. नीलम ने कल अपनी मित्र से बात करने के लिए कहा. फ़ीस उसे अधिक लगी थी पर ये उसका विषय नहीं था. शोनाली ने पूछा कि किसकी बात हो रही है.

“श्रीमती गुप्ता. राखी गुप्ता.” नीलम बोली.

“क्या वो पीयूष गुप्ता की पत्नी हैं जिनका देहांत कुछ वर्ष पहले ह्रदय आघात से हो गया था? गुप्ता इंडस्ट्री के स्वामी?”

“हाँ. वही. आप जानती हो उन्हें.”

“उन्हें तो नहीं पर उनके पति से मेरे पति के व्यवसायिक संबंध थे. हम उनका स्वागत करेंगे अगर वो आना चाहेंगी.”

“मैं पूछूँगी, पर अभी ये बात हम तीनों तक ही सीमित रहनी चाहिए.” नीलम ने कहा.

“मुझे पार्थ को बताना होगा, क्योंकि उसकी स्वीकृति भी आवश्यक है. पर हम चारों से बाहर ये बात नहीं जाएगी.”

ये कहकर शोनाली चली गई. एक नया संभावित सदस्या जो मिल गई थी. उसे राखी गुप्ता के विषय में पता था और विश्वास था कि वो अवश्य आ जाएगी. वो अभी गई ही थी कि पटेल परिवार के अन्य सदस्य भी घर लौटने लगे और सबने सुमति का स्वागत किया.

उधर जब शोनाली ने फोन पर पार्थ को राखी गुप्ता के विषय में बताया तो उसे अचरज अवश्य हुआ पर उसने इसे व्यवसायिक कोण से ही देखा. उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि इस एक सप्ताह में उसे चार नई सदस्याएं मिलने वाली थीं और अगर उनकी अस्थाई रोमियो की योजना सफल हुई और उनमें से कुछ स्थाई रोमियो बने तो क्लब की स्थिति में सुधार हो जायेगा. वैसे भी रूचि और मंत्रीजी के सहयोग के कारण अब क्लब लाभ की ओर बढ़ रहा था.

शोनाली: “सबीना के लिए क्या सोचा है?”

पार्थ: “परसों आएगी. आप जानती हो कि राशि ने उसे तीन दिन रहने का आमंत्रण दिया है. आखिर पाँच लाख जो दे रही है. आगे के लिए भी ये विकल्प दिया जायेगा. वैसे उसकी माँ और भाभी को भी ३ दिनों का ही आमंत्रण दिया जायेगा. और यही हमारे क्लब का नई सदस्याओं के लिए नया स्वरूप होगा. ”

“राशि के आने से बहुत कुछ सम्भल जायेगा. सच में उसका योगदान अभी ही दिखने लगा है.”

“हाँ, शी इज़ गुड़.”

“जो नए सुझाव उसने दिए हैं क्या उन पर क्लब में कार्य आरम्भ हो गया है?” शोनाली ने पूछा.

पार्थ: “हाँ, अपने देखा नहीं क्या पिछली बार? राशि का प्रयास है कि पार्टी से दो दिन पहले सब पूरा हो जाये. बाथरूम में कार्य चल रहे हैं. और भी सब हो जायेगा. नगर के सबसे बड़े आर्किटेक्ट की पत्नी का जो हाथ है.” कहते हुए वो हंस पड़ा. वो उनके क्लब की सदस्या जो थी और उनके क्लब के अधिकांश कार्य उनके ही द्वारा सम्पन्न किये जाते थे. इसके कारण पूर्ण गोपनीयता बनी रहती थी. इसके शुल्क के रूप में उन्हें एक पूरे दिन उनकी रूचि के अनुसार चुदाई का उपहार दिया जाता था. हालाँकि फ़ीस में कोई कमी नहीं होती थी, पर कार्य समय पर उच्च कोटि का होता था.

शोनाली: “सचिन का भी योगदान अब क्लब में बढ़ गया है. उसे भी कोई पुरुस्कार देना चाहिए.”

पार्थ: “हाँ, मैं भी यही सोच रहा था. पर क्या दूँ? क्या आप रमोना से पूछोगी? मैंने कभी उससे इस विषय में बात नहीं की है. सम्भवतः रमोना उचित सुझाव दे.”

शोनाली अचानक गंभीर हो गई, “पार्थ तुम सुमति के लिए कोई संशय तो नहीं पाले हो? क्या तुम्हें इस पूरे प्रकरण में कोई दुविधा दिख रही है?”

“नहीं. आई एम हैप्पी फॉर हर. उन्हें अपने जीवन में सुख पाने का पूर्ण अधिकार है. उन्होंने अपना अधिकांश जीवन अकेले मुझे पालने में ही बिताया है. जब तक हम यहाँ नहीं आये थे, मैंने उन्हें संघर्ष करते हुए देखा है. आज उनके चेहरे पर जो एक शांति है, उसे देखे मुझे एक युग हो गया है. मैं उनके लिए बहुत प्रसन्न हूँ.”

“हम सबका भी यही विचार है.” शोनाली ने उसे फोन पर चुंबन दिया और कॉल काट दी.

***********

पार्थ दिन के समय क्लब जाकर चल रहे कार्यों का निरीक्षण करने गया था. राशि ने उन कार्यों की प्रगति के विषय में उसे बताया और विश्वास जताया कि सब समय से पूर्व सम्पन्न हो जायेगा. राशि ने उसे समझाया कि क्लब में प्रवेश के उपरांत नई सदस्याओं को तीन दिन तक क्लब में रहने का अवसर दिया जाये. इससे एक लाभ तो ये था कि वो आरम्भ के शुल्क को बढ़ा सकते थे. नई सदस्याएँ भी उनके क्लब से प्राप्त अन्य सुविधाओं को भोग सकती थीं और आवश्यकता पड़ने पर अपने ढंग से सहायता भी कर सकती थीं. इसमें रिसेप्शन को संभालना और अन्य कार्य भी जोड़े जा सकते थे.

पार्थ उसके हर सुझाव से सहमत था. उसके मन में ये आया कि अगर उसकी माँ भी इससे जुड़ जाये तो उन्हें एक व्यवसाय चलाने का और अनुभव मिलेगा और वो समर्थ के कार्य को और अच्छे से पूरा कर सकेंगी. उसने इसका उल्लेख राशि से किया तो उसने भी सहमति जताई. शोनाली से बात करने का बीड़ा पार्थ ने उठाया तो रूचि को राशि ने. इसके बाद पार्थ सिमरन से जाकर उसके केटरिंग के काम को देखने गया जहाँ सिमरन ने उसे उन तीनो दिनों के विषय में बताया. इसके बाद वो रूचि से बात की और शाम को उसके घर आने के लिए कहा.

नीलम के घर में सभी लोग नहा धोकर बैठक में आ चुके थे. ये किसी भी परिवार की एक साधारण शाम के समान ही था. अपने दिन के कार्यकलापों के विषय में सबने बातें कीं. सबके हाथों में उनकी रूचि के अनुसार ड्रिंक भी थे. अंत में सबने प्रकाश और चंद्रू से उनके कार्य की स्थिति के विषय में पूछा.

“आज सब आवेदन और अनुमति पत्र दे दिए गए हैं. पूरी आशा है कि एक ही सप्ताह में अनुमति मिल जाएँगी. क्योंकि ये मात्र सेवाओं का व्यवसाय है इसीलिए इतनी झंझट नहीं है. अपने उत्पाद बनाने के लिए हम छह महीने बाद आवेदन देंगे. तब तक मैं अपने यहाँ से आपूर्ति करता रहूँगा। अगर आवश्यकता पड़ी तो वहां विस्तार कर लेंगे जो अधिक सरल है. इससे प्रकाश को भी अन्य कार्यों पर ध्यान देने का समय मिलेगा.”

उसकी इस बात पर सब हंस पड़े और प्रकाश और सुमति शर्मा गए.

“हाँ उनको तो किसी और उत्पाद पर कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए.” आकाश ने द्विअर्थी संवाद बोला जिसका अर्थ था कि प्रकाश को सुमति को माँ बनाने का प्रयास करना चाहिए। सुमति का चेहरा लाल हो गया और प्रकाश का सीना चौड़ा हो गया.

दो पेग के बाद भोजन करने की बात आई तो आकार ने सुझाया कि इस विश्राम के समय के लिए रहने दिया जाये। फिर नीलम ने सुमति को बताया.

“कल रात हम सबने इसी स्थान पर चुदाई की थी. और आज भी यही योजना है. अगर आपको इसमें कोई आपत्ति हो तो बता दीजिये. पर हम सब आपको देखने और चोदने के लिए लालायित हैं.” फिर उसने परिवार की अन्य महिलाओं से कहा, “मैंने शोनाली को वचन दिया है कि आज हर रस का सेवन सुमति को ही करने का अवसर मिलेगा. और उसे किस प्रकार का विशेष रस प्रिय है ये अब हमसे छुपा नहीं है. अगर किसी कारण हम में से किसी के मुँह में कोई झड़ भी जाये तो उसे सुमति से साझा करना होगा.”

कनिका बोली, “दैट इस सो कूल. सुमति मौसी के लिए हम सब सहमत हैं.”

सुमति अपने प्रति इतने प्रेम को देखकर भावुक हो गई.

“तो बच्चों चलो कमरे को सेट करो. और तब तक मैं सबके लिए एक और पेग बनाती हूँ.” नीलम ने आदेश दिया.

कुछ ही देर में हॉल एक बड़े शयनकक्ष में परिवर्तित हो गया. अपने ग्लास से चुस्कियाँ लेते हुए सबने नीलम को देखा.

नीलम ने कहा, “मैंने एक लॉटरी का प्रबंध किया है. इसमें सुमति का नाम नहीं है. हम महिलाओं की पर्ची लाल हैं और पुरुषों की नीली. सुमति एक महिला और एक पुरुष की पर्ची निकालेगी। उनकी जोड़ी बनेगी. हम पांच महिलाएं है तो पुरुषों की संख्या छह है. तो अंत के दोनों बचे हुए पुरुष सुमति के हिस्से में आएंगे. इसमें एक ही अंतर है. अगर उन दोनों में प्रकाश हुए तो उन्हें किसी और को अपना स्थान देना होगा. ये उनका चयन होगा और इसमें किसी का कोई वोट नहीं होगा. जिस महिला की अंतिम पर्ची निकलेगी, वो अगले राउंड में सुमति का स्थान लेगी. किसी को कोई आपत्ति या प्रश्न है?”

सबने सहमति दर्शाई और सुमति को बीच में बुलाया और दो कटोरियाँ सामने कीं। सुमति ने पर्चियां निकालीं और जोड़ियां बन गईं. प्रकाश को पहले ही साथी मिल गया तो कोई समस्या ही नहीं रही. जोड़ियां इस प्रकार से थीं.

१. सिया के साथ दर्शन

२. कनिका के साथ प्रकाश

३. नीलम के साथ चंद्रू और

४. दिया के साथ आकार

और सुमति के लिए हितेश और आकाश के नाम बचे. नीलम फिर से बोली.

“सब अपने साथियों के साथ आगे बढ़ो. अगले राउंड में दिया को सुमति का स्थान मिलेगा. और उसके साथ आकाश भाईसाहब नहीं रह सकते. कम ऑन लेट अस इंजॉय!”

क्रमशः

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