Incest कैसे कैसे परिवार - Page 13 - SexBaba
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Incest कैसे कैसे परिवार

Chapter 56A is posted

अध्याय ५६ अ: सुमति का पटेल मिलन

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अध्याय ५: सुमति का पटेल मिलन - २

पलक झपकते ही कपड़े एक ओर जाकर गिरने लगे. एक दूसरे के आलिंगन में बंधे जोड़े चुंबन में जुड़ गए.

दर्शन ने सिया को अपनी बाँहों में जकड़ा हुआ था और वो उसके होंठ और स्तन चूम रहा था. सिया भी उसे एक एक करके अपने स्तनों का पान करवा रही थी. उसका एक हाथ नीचे से दर्शन के लौड़े को सहला रहा था जो अब तन कर खड़ा हुआ था.

उसके पास ही कनिका प्रकाश से गुत्थमगुत्था थी. प्रकाश को कनिका को चोदे एक लम्बा समय हो चुका था. सुमति के साथ ऊटी जाने के कारण वो उसके युवा शरीर का उपभोग नहीं कर पाया था. आज वो इस कमी को दूर करने की चेष्टा कर रहा था. उसने अधिक देर न लगाई और नीचे बैठकर कनिका की चूत चाटने लगा. कनिका ने उसका सिर अपनी चूत पर दबा लिया.

चंद्रू के लौड़े को नीलम चूसने में जुटी थी. सिया और चंद्रू का ही उपकार था जिसके कारण वो अपने परिवार से पुनः मिल पाई थी. चंद्रू भी लंड को चटवाने में सहायता कर रहा था और उसके बालों को सहला रहा था. उनके पास में दिया आकार से अपने मम्मे चुसवाते हुए उसके लौड़े को हाथ में लिए थी.

और सुमति! सुमति तो मानो स्वर्ग में थी. आकाश और हितेश उसे आगे पीछे से चूम रहे थे और उसके मम्मे और गाँड दबा रहे थे. हितेश आगे था और उसके होठों को चूस कर गाँड दबा रहा था तो आकाश पीछे से उसके मम्मे निचोड़ रहा था. उसे नीलम का ये सुझाव अच्छा लगा था कि पहली ही बार उसे दो लौडों से चुदने का अवसर दिया था. कल रात्रि में वैसे भी उसके भाई और बेटे ने उसकी धुरंधर चुदाई की थी. और आज फिर उसे ये सुअवसर प्राप्त हो गया था. उसने कल रात की चुदाई ने विषय में सोचने का प्रयास किया पर उसके आज के दोनों प्रेमी उसका ध्यान बँटाने में सफल हो गए.

दर्शन इतने दिनों से बाहर रहकर चुदाई के लिए बहुत लालायित था और सिया के द्वारा उसके लंड को सहलाया जाना उसे और अधिक उत्साहित कर रहा था.

“मौसी, अब ये सब छोड़ो, प्लीज मुझे चोदने दो. इतने दिनों से सूखा हूँ. अब प्लीज रुका नहीं जा रहा है.”

सिया ने उसकी विनती सुनी और वहाँ बिछे गद्दे पर लेट गई और दर्शन को अपने ऊपर खींच लिया. दर्शन ने बिना रुके अपने लंड को सिया की चूत पर लगाया और एक धक्के में अंदर धकेल दिया. रिया के मुँह से एक सिसकी निकली और उसने अपनी गाँड उठाकर दर्शन का स्वागत किया. और दर्शन ने इस स्वागत के उत्तर में धक्कों की झड़ी लगा दी.

कनिका को प्रकाश का चुदाई का ढंग पता था कि वो हमेशा तीव्र चुदाई ही करता है. इसीलिए जब प्रकाश ने उसकी चूत चाटने में इतना समय दिया तो वो हतप्रभ रह गई. उसका पिछले अनुभव तो ये था कि वो गाँड मारने के लिए अधिक आतुर रहता था. अगर सुमति के संसर्ग से उसमें ये अंतर आया है तो बहुत अच्छा हुआ है. कुछ देर और चूत चाटने के पश्चात प्रकाश ने अपना चेहरा ऊपर किया और पूछा कि क्या कनिका उसका लंड चूसना चाहेगी? कनिका ने हामी भरी और प्रकाश खड़ा हुआ और कनिका बैठकर उसका लंड चूसने लगी.

नीलम ने चंद्रू से कहा कि वो पहले उसकी गाँड मारें और फिर चूत. नीलम के इस कथन से ये सिद्ध हो गया कि ये चरण लम्बा चलने वाला है. चंद्रू को भला इसमें क्या आपत्ति हो सकती थी. उसका लंड पहले ही नीलम के थूक से गीला था. नीलम घोड़ी बनी और उसने अपने दोनों हाथों से अपनी गाँड फैलाकर खोल दी. चंद्रू ने उसमे कुछ लार टपकाई और फिर लंड को ऊपर लगाकर धीमे से अंदर धकेलने लगा.

दिया ने आकार से कहा कि अब उसे चोदे क्योंकि वो अत्यधिक उत्तेजित है. दिया को लिटाकर आकार ने कुछ देर उसकी चूत को चाटा और फिर अपना लंड लगाकर उसे चोदने लगा.

और सुमति कुछ कहने की स्थिति में ही नहीं थी. आगे पीछे से आक्रमण से वो आनंद से दुहरी हो रही थी. उसका शरीर कम्पन कर रहा था.

“मौसा, नई मौसी मस्त माल हैं. क्या टाइट गाँड है मौसा, मन करता है कि अभी लौड़ा पेल दूँ.” हितेश ने सुमति की गाँड को मसलते हुए कहा.

“अरे इनके मम्मे तो इतने सुडौल हैं कि दिन भर दबाते रहेंगे तेरे चाचा. काम पर जायेगा भी या नहीं कहना कठिन है.”

सुमति अपनी प्रशंसा सुनकर फूली जा रही थी.

“आप दोनों भी कुछ कम नहीं हो. अकेली देखकर कितना नोच रहे हो मुझे. जब चोदोगे तो न जाने क्या करोगे मेरे साथ. कहीं मेरी चूत और गाँड एक साथ मत मारने लगना।” सुमति ने अपनी इच्छा जताई.

“अरे ऐसा कैसे हो सकता है कि हम ऐसा न करें? क्यों हितेश?”

“और क्या. मौसा आप क्या चाहते हैं?” हितेश ने पूछा तो आकाश उसकी इच्छा समझ गया.

“मैं तो चूत ही मारूँगा, देखो तो सही कैसी बही जा रही है. तू गाँड मार लेना.”

सुमति भी इस खेल का आनंद ले रही थी. उसने हितेश की आँख में देखा.

“कल रात भाई और बेटे ने जम कर चोदा है मुझे. आज तुम भी रही सही कमी पूरी कर दो. दबा के चोदो, जैसे चाहे चोदो।”

फिर सुमति उन दोनों से हटकर अपने कपड़ों की ओर गई और उसमें से गाँड का प्लग निकाला और हितेश को थमा दिया.

“अपना रस गाँड में छोड़कर उसे इससे बंद कर देना.”

अब उसका तात्पर्य स्पष्ट था. वो चुदने को लालायित थी. आकाश नीचे बिछे गद्दे पर जा लेटा तो सुमति उसके सामने बैठकर उसके लौड़े को चूसने लगी. हितेश भी सामने आ खड़ा हुआ तो सुमति झुककर आकाश का लंड चूसती और फिर सिर उठाकर हितेश का. कुछ ही समय में दोनों लौडों पर उसके थूक का समुचित मात्रा में लेप हो गया. सुमति उठी और आकाश के लंड पर बैठकर उसके लंड को अपनी चूत में ले लिया.

लंड पर बैठकर उसने पीछे देखा और हितेश को मूक संकेत किया. हितेश का लौड़ा तो पहले से ही फड़फड़ा रहा था तो वो नीचे बैठा और अपने लंड को सुमति की गाँड़ पर रखा.

“मौसी, वैलकम टू द फैमिली!” ये कहकर एक झटके में अपने लंड को अंदर डालने का प्रयास किया. पर आकाश के लंड के चूत में होने के कारण उसे व्यवधान का सामना करना पड़ा. वहीँ सुमति ने भी एक चाल चली और अपनी गाँड को सिकोड़ लिया. सामान्य रूप से ये क्रिया कष्टकारी हो सकती है, पर सुमति की गाँड इतनी बार मारी गई थी कि उसमें हितेश का लंड शीघ्र समा जाता, जो वो नहीं चाहती थी.

“मौसी, आपकी गाँड तो बहुत टाइट है. लगता है इसे ठीक से मारा नहीं गया कभी.” हितेश ने कहा तो सुमति ने सोचा कि बेटे मेरी गाँड अपने बेटे के लौड़े से नहीं डरती तू किस खेत की मूली है. पर वो चुप रही, वो चाहती थी कि हितेश का भ्रम बना रहे. अब उसे इस परिवार में जो हर दिन चुदना जो था. अगले धक्के के लिया सुमति ने गाँड को कुछ ढ़ीला किया और हितेश ने अपना लंड इस बार पूरा अंदर डाल दिया.

आकाश सुमति के कान में फुसफुसाया, “बहुत पहुँची हुई चीज़ हो, बच्चों को मूर्ख बना रही हो.”

“बच्चों का मन भी रखना पड़ता है, भाईसाहब.” सुमति ने उसी प्रकार उत्तर दिया, “अब चोदो मुझे और चाँद तारे दिखा दो.”

आकाश ने हितेश से कहा कि अब मौसी को पता लग जाना चाहिए कि हम कैसे चुदाई करते हैं. और इसी के साथ दोनों अपने लौड़े सुमति की चूत और गाँड में पेलने लगे.

अन्य जोड़ों में भी चुदाई का कार्यक्रम पूर्ण रूप से स्थापित हो चुका था. दर्शन अपने इतने दिनों की कमी को पूरा करने का भरसक प्रयत्न कर रहा था. उसकी चुदाई की गति में तनिक भी कमी न आई थी. वो पूरी शक्ति के साथ सिया की चूत चोदे जा रहा था. सिया आनंद से चीखने लगी थी. उसे आभास न था कि दर्शन इतनी तीव्रता से भी चुदाई करने में सक्षम है. ये भी सम्भव है कि इतने दिनों तक उससे न चुदने के कारण वो दर्शन के इस रूप को भूल चुकी थी, या दर्शन ने ये अपने घर में उसकी माँ दिया और चाची नीलम से सीखा था. कारण चाहे जो भी रहा हो, इसका सम्पूर्ण लाभ सिया को मिल रहा था. अब तक उसकी चूत के पानी ने दर्शन के लंड के घर्षण को कम कर दिया था. पर दर्शन को इससे कोई अंतर नहीं पड़ रहा था. वो तो निर्बाध गति से सिया को चोदे जा रहा था.

कनिका की चूत चाट चुकने के बाद अब प्रकाश कनिका से अपना लंड चुसवा रहा था. इतनी कम आयु में भी कनिका की लंड चूसने की कला बहुत परिष्कृत थी. परिवार की दोनों स्त्रियों से ज्ञान प्राप्ति करने का उसे जो सुअवसर मिला था उसे इस संस्कारी बाला ने आत्मसात कर लिया था. उसे अपनी कला का अभ्यास करने के लिए भी बाहर नहीं जाना पड़ा था. उसके पिता, ताऊ और भाई उसे इसमें महारथ पाने के लिए सदा उपलब्ध हो जाते थे. प्रकाश को भी कनिका से संसर्ग किये हुए एक अवधि हो चुकी थी. उसे भी आभास हुआ कि पिछले समय की तुलना में कनिका अब अधिक प्रवीण हो गई थी. लंड को भलीभांति चूसने के उपरांत कनिका ने वासना भरी दृष्टि से प्रकाश को देखा तो प्रकाश समझ गया कि कन्या अब चुदने के लिए लालायित है. उसने प्रेमपूर्वक उसे गद्दे पर लिटाया और अपना लौड़ा उसकी गीली संकरी चूत पर रख दिया.

चंद्रेश नीलम की गाँड में लंड डालकर कुछ समय के लिए रुका और गाँड की ऊष्मा का आनंद लेने लगा. नीलम अपनी गाँड हिलाकर उसे प्रोत्साहित कर रही थी.

“बहुत गर्मी है तुम्हारी गाँड में नीलम, लौड़ा मानो एक भट्टी में डाल दिया हो.”

“तो इसकी गर्मी को शांत कर दो जीजाजी. अपनी पिचकारी चलाओ और इसमें पानी डालकर ठंडा करो.”

“उसके लिए कुछ देर पिचकारी को रास्ता ढूँढना होगा.” चंद्रू ने भी हँसते हुए कहा.

“तो रोका किसने है आपको. आपकी पत्नी तो मेरे बेटे से अपनी आग ठंडी करवा रही है. आप मेरी ठंडी कर दो.”

चंद्रू ने आननफानन अपने लौड़े को नीलम की गाँड में अंदर बाहर करना आरम्भ किया और नीलम की सिसकारियों से उसका उत्साह और बढ़ गया. उसका लंड उसे दो फुट का प्रतीत होने लगा था जबकि नीलम अपनी गांड उछाल कर और लौड़ा अपनी गांड में समाने के लिए आतुर थी. चंद्रू ने एक लय पकड़ी और नीलम की गाँड का कल्याण करने में जुट गया.

आकार और दिया शांतिपूर्वक चुदाई कर रहे थे. उनके बीच अनगिनत चुदाई के प्रकरण लिखे जा चुके थे और उन्हें कोई व्यग्रता नहीं थी. सम्भवतः पूरे कमरे में वही एक जोड़ा ऐसा था जो प्रेमालाप कर रहा था. और एक दूसरे के साथ बहुत संयम के साथ संसर्गरत थे. होंठों से होंठ मिलाकर, एक दूसरे को चूमते हुए एक दूसरे के शरीर से खेलते हुए उनकी चुदाई चल रही थी. और क्योंकि होंठ व्यस्त थे तो कोई ध्वनि भी नहीं थी. परन्तु जितना उन दोनों का मिलन शांत था उनके साथ में सुमति ने मानो आकाश को सिर पर उठाया हुआ था. मानव रूपी आकाश नीचे से उसकी चूत चोद रहा था. परन्तु सबसे अधिक परिश्रम सुमति की गाँड मारने में हितेश कर रहा था.

सुमति की आनंद भरी चीत्कारों ने बैठक को गुंजायमान किया हुआ था. अन्य जोड़ों की सामान्य सिसकारियाँ मानो दब कर रह गई थीं. प्रकाश कनिका को चोदते हुए उस ओर ही देख रहा था जहाँ उसकी भावी पत्नी का मर्दन हो रहा था. हितेश और उसकी आँखें मिलीं तो प्रकाश ने अपना अँगूठा उठाकर उसकी प्रशंसा की. ये देख हितेश में और ऊर्जा भर गई और वो सुमति की गाँड को और शक्ति के साथ चोदने में लग गया. पर इस का परिणाम ये हुआ की उसे थकान होने लगी. ये देख आकाश ने कहा कि स्थान परिवर्तन का समय आ गया है.

थके हारे हितेश ने अपने लौड़े को सुमति की गाँड से निकाला और गद्दे पर लेट गया. सुमति छलांग मार कर आकाश के लंड से उतरी और हितेश के लंड पर सवार हो गई. आकाश उठा और अपने शरीर, जो अकड़ गया था, उसे मोड़कर ठीक किया और सुमति के पीछे चला गया. सुमति की गाँड अब बंद होने लगी थी पर उसकी लालिमा अभी भी दिख रही थी. आकाश ने गाँड को बंद न होने दिया और अपने लौड़े को उसमें एक ही बार में पेल दिया. सुमति फिर आनंद के सागर में गोते लगाने लगी.

उनकी देखा देखी सिया ने दर्शन से कहा कि वो अब उसकी गाँड मारे. दर्शन के मन की बात हो गई पर वो इतना आतुर था कि उसने दिया के पैरों को उठाकर अपने कन्धों पर रखा और अपने लंड को उसकी चूत से निकालकर गाँड में डाल दिया. इसमें उसे कुछ व्यवधान आया पर उसके दृढ़ निश्चय ने उसे विजय दिलवा दी. एक बार सुपाड़े के अंदर प्रवेश करने के बाद उसके लंड की यात्रा सिया की गाँड में सरलता से पूरी हो गई. सिया दूभर थी, पर इस आसन में दर्शन का लौड़ा उसकी गाँड में बहुत मोटा अनुभव हो रहा था. एक बार लंड के पूरे भीतर जाने के बाद दर्शन ने गाँड मारने का कार्य आरम्भ किया और कुछ ही पलों में अब सिया की चीखें सुमति के साथ ताल मिला रही थीं.

कनिका ने प्रकाश की ओर देखा क्योंकि अब सिया, नीलम और सुमति की गाँड मारी जा रही थी और प्रकाश को गाँड मारने में अत्यधिक रूचि थी.

“क्या आप मेरी गाँड मारना चाहते हो?” कनिका ने काँपते स्वर में पूछा क्योंकि प्रकाश गाँड बहुत निर्ममता से मारता था.

“नहीं, बिटिया. आज नहीं. आज तो तेरी चूत में ही इतना आनंद मिल रहा है कि गाँड के बारे में सोचना भी नहीं है.”

अब कनिका को दृढ़ विश्वास हो गया कि सुमति ने प्रकाश के भीतर के पशु को एक सीमा तक वश में कर लिया है और अगर ऐसा हुआ है तो सुमति एक अत्यंत समर्थ स्त्री थी जो उसके परिवार में सरलता से जुड़ जाएगी. फिर एक बार उसने सुमति की चूत और गाँड मारते हुए अपने भाई और ताऊजी को देखा और सोचा कि सही जुड़ रही है. उसने फिर प्रकाश द्वारा उसकी चुदाई पर अपना ध्यान लगाया और अनायास ही उसकी चूत ने ढेर सा पानी छोड़ दिया.

चंद्रू ने नीलम की गाँड लगभग दस मिनट तक मारी. वो झड़ने की कगार पर चुका था. उसने नीलम को बताया।

नीलम ने आकाश की ओर देखते हुए संकेत दिया कि अब सुमति को चुदाई से मुक्त करना होगा क्योंकि अब उसके जलपान का समय निकट है. आकाश ने नीचे झुककर सुमति को ये बताया तो वो सहर्ष सहमत हो गई. पर उसने आकाश से पूछा कि उन्हें झड़ने में कितनी देर लगेगी? आकाश ने कुछ अधिक समय लगने की दुविधा बताई तो सुमति ने कहा कि वो बाद में गाँड फिर मार लें तो अच्छा होगा। आकाश ने अपना लौड़ा सुमति की गाँड से निकाला तो सुमति ने उसे चाटने की इच्छा जताई. आकाश उसके सामने गया और सुमति ने उसका लंड चाटकर चमका दिया. फिर उसने हितेश से रुकने के लिए कहा और उसके ऊपर से उतर कर उसके लंड को चाटकर साफ किया और अपने चारों और चल रहे चुदाई के ऊपर ध्यान देने लगी.

सुमति की दृष्टि नीलम और चंद्रू पर जाकर रुक गई. वहीँ सबसे पहले झड़ने की संभावना थी. और वो भी नीलम की गाँड में उसके होने वाले जेठ का रस छूटने वाला था. सुमति के मुँह में पानी आ गया. और इससे पहले कि उसकी लार टपकती चंद्रू के लौड़े ने अपना रस नीलम की गाँड में छोड़ दिया. लंड को अंदर रखते हुए वो कई पलों तक यूँ ही जड़ बना रहा और फिर उसने सुमति की ओर देखा जो अब उसके साथ खड़ी थी.

“लो, तुम्हारे लिए हमारा पहला उपहार!” चंद्रू ने कहा और धीमे से अपना लंड नीलम की गाँड से निकाल लिया. अभी लंड बाहर भी नहीं आ पाया था कि सुमति की जीभ नीलम की गाँड पर घूमने लगी. चंद्रेश के लंड के बाहर निकलते ही बाहर बहने का प्रयास करता हुआ श्वेत गाढ़ा वीर्य सुमति की चटोरी जीभ का शिकार हो गया. जब स्वतः निकलता रस रुका तो सुमति ने जीभ को गाँड में डालकर खोद खोद के रस को सोखा. जब लगा कि नीलम की गाँड में अब कुछ भी शेष नहीं है तब जाकर सुमति हटी पर इस बार उसका लक्ष्य चंद्रेश का लंड था. चंद्रू इसकी अपेक्षा कर रहा था इसीलिए वो वहीँ खड़ा इस घ्रणित क्रिया को देख रहा था. अगर उसके भाई को कोई आपत्ति नहीं थी तो उसे भला क्यों ही होती? उसके लंड को चाटकर सुमति हट गई.

सुमति को पता था कि अब विकेट का पतन एक शृंखला में होगा, इसीलिए वो अगले पतन होने वाले की ओर देखने लगी. और ये कोई और नहीं प्रकाश ही निकला.

सुमति ने कनिका के पास जाकर उसकी चूत को चाटना आरम्भ किया और कनिका की आनंदित चीख ने कमरा हिला दिया. प्रकाश भी इससे अछूता न रहा और उसने भी अपना लावा कनिका की चूत में उढेल दिया. जब उसने अपना लंड बाहर निकाला तो पहले तो सुमति ने उसे प्रेम से चाटा और फिर कनिका की चूत पर धावा बोल दिया. अंदर तक जीभ डालकर उसने कनिका की चूत से उसका और प्रकाश के रस को पीकर ही अपना मुँह हटाया. कनिका निढाल पड़ गई पर अब सुमति का लक्ष्य सिया थी जिसकी गाँड में दर्शन का लौड़ा अंतिम पदचाप कर रहा था.

उसने पास जाकर दर्शन से कहा कि वो झड़ने के बाद सिया की टाँगें यूँ ही पकड़े रहे जब तक सुमति अपना भोग नहीं लगा लेती. दर्शन ये सुनकर ही झड़ने लगा और फिर उसने बहुत सावधानी से अपना लंड बाहर निकाला और सिया की गाँड को सुमति के आहार के लिए प्रस्तुत कर दिया. सुमति ने फिर से अपनी जीभ और होंठों के बल से सिया की गाँड से दर्शन के रस को सोखा और फिर दर्शन के लंड को भी चाटकर चमका दिया.

“आप अद्भुत हो!” सिया ने आह भरते हुए कहा. इसके उत्तर में सुमति ने सिया के होंठ चूमे और अपने अंतिम भोज के लिए सिया की बहन दिया की ओर चल दी. दिया ने उसे देख आकार से कहा कि अब बस करिये और सुमति को उनका आहार ग्रहण करने दीजिये. सच ये था कि आकार कुछ पलों पहले ही झड़ा था पर अपने लंड से दिया को चोदे जा रहा था. उनकी धीमी गति से की गई चुदाई के कारण किसी को शंका भी नहीं हुई की दिया की चूत में पानी भरा हुआ है. आकार ने अपना लंड निकालकर सुमति को आमंत्रित किया और सुमति फिर अपने भोग में लीन हो गई.

अब केवल एक समस्या थी, हितेश और आकाश अब तक झड़े न थे. पर अब सुमति और उनकी ताल टूट चुकी थी. तो इसका समाधान करने के लिए उनके लौड़े चूसकर सुमति को उनका रस पिलाने का निर्णय हुआ. कनिका ने आकाश के लंड को मुँह में लिया तो हितेश के लंड को सुमति चूसने लगी. कुछ देर के प्रयासों से दोनों ने पानी छोड़ा. सुमति ने हितेश के रस को सीधे ही पी लिया और फिर कनिका ने अपने मुँह से आकाश के रस को उसे पिलाया.

अब ये राउंड समाप्त हो चुका था. नीलम ने आधे घंटे के विश्राम की घोषणा की. दिया का मन मचल उठा क्योंकि इस बार उसके साथ दो पुरुष चुदाई करने वाले थे. बच्चों ने सबके लिए पेग बनाये और सब यूँ ही नंगधड़ंग बैठ कर सुस्ताने लगे. नीलम, सिया और कनिका अपनी दुहरी चुदाई की कल्पना में खो गयीं. पुरुष इस चिंतन में थे कि क्या वो पूरी रात चुदाई के लिए सक्षम हैं?

क्योंकि रात अभी शेष थी.

क्रमशः

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Chapter 56B is posted

अध्याय ५६ ब: सुमति का पटेल मिलन - २

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अध्याय ५: नायक, शिर्के और शेट्टी मिलन

(अध्याय ४५ से आगे )


दृश्य ४:

वर्षा और मोहन, सुलभा और मेहुल, श्रेया और पवन, महक और समीर, अंजलि और विक्रम, स्मिता और राहुल तथा जयंत उस गोल बिस्तर को घेरे में खड़े हुए थे, जो अभी बाहर नहीं निकाला था. तीनों परिवार के सदस्य एक दूसरे को ताकते हुए उनकी समीक्षा कर रहे थे. शेट्टी परिवार को अवश्य गौड़ा परिवार की कमी अनुभव हो रही थी. अगर वो होते तो इस रंगारंग कार्यक्रम में चार चाँद लग जाते. परन्तु इसकी संभावना आज रात तो नहीं ही थी.

स्मिता चूँकि इस गठबंधन की कथित मुखिया थी और समुदाय के कारण इस प्रकार के कार्यक्रमों से भलीभांति परिचित थी, उसने ही पहल की.

“मुझे लगता है कि हमें एक साथ चुदाई न करके एक के पीछे एक चलना चाहिए.”

उसकी ये बात किसी को समझ न आई.

उसने समझाया, “ मेरा कहना है कि हम एक जोड़े को व्यवस्थित होने का अवसर दें उसके बाद ही अगला जोड़े आगे बढ़े. इस प्रकार के बिस्तर का हममें से किसी को भी अनुभव नहीं है, इसीलिए वर्षा फिर सुलभा, श्रेया, महक और अंजलि एक क्रम में बढ़ें और अंत में मैं भी जुड़ूँगी।”

“ऐसे तो जब तक आप होगी तब तक वर्षा आंटी का समाप्ति पर होगा. क्या मैं कुछ बोलूँ ?” श्रेया ने पूछा।

सबने स्वीकृति दी.

क्यूँकि ये बिस्तर गोलाई में है तो एक जोड़ा एक ओर और दूसरा उसके विपरीत जाकर व्यवस्थित हो जाएँ.” श्रेया ने अपनी सास के शब्दावली का प्रयोग किया. इससे समय की बचत होगी और एक साथ सब आनंद उठाने में सफल होंगे.”

उसका सुझाव व्यवहारिक था और सबको भा गया.

*********

और सबमें उस रिसोर्ट के एक दूसरे कमरे में उनका अवलोकन कर रहे सात और भी लोग थे. मधुजी ने अपनी चुदाई रुकवा कर टीवी की ओर ध्यान कर लिया था. रिसोर्ट के लड़के बेचारे अपने लौड़े लिए बैठे थे पर रिसोर्ट के स्वामी की माँ के सामने वो कर ही क्या सकते थे. मधुजी उनकी ओर से निश्चिन्त टीवी पर उस आवास को देख रही थी जहाँ वो तीन परिवार एक होने वाले थे. जिस प्रकार से रिसोर्ट के लड़कों की स्थिति थी, लगभग वही सिद्धार्थ, रवि और विलास की भी थी. सिद्धार्थ का लौड़ा रजनी की गाँड पर लगा ही रह गया और रजनी ने उसे हटाकर मधुजी के साथ टीवी की ओर ध्यान कर लिया.

पाँचों युवाओँ को ये आभास हो गया कि वो मात्र उपयोग करने ही हेतु इस कमरे में हैं. इससे उनके गर्व को ठेस तो लगी, पर समुदाय वाले लड़कों को नियम पता थे और रिसोर्ट वाले लड़कों को अन्य अलिखित नियमों का ज्ञान था. वो मन मार कर टीवी को देखने लगे. उन्होंने ये नहीं देखा कि मधुजी और रजनी के बीच में उनकी स्थिति को लेकर मूक संकेत हुआ था. वो चाहती थीं कि इस प्रकार के तिरिस्कार के प्रतिशोध में वो पाँचों उनकी धुआंधार चुदाई करें.

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उधर विक्रम ने रिमोट से बिस्तर को बाहर निकाल लिया था. एक बार फिर सब उसके विशाल आकार से विस्मित रह गए. ये सब बनाने के लिए जितना धन व्यय हुआ होगा उसका अनुमान कठिन था. और ऐसा ये अकेला आवास नहीं था. गोल बिस्तर के बीचों बीच एक छोटी गोल टेबल भी थी. विक्रम ने रिमोट एक ओर रखा तो अंजलि ने उसे ले लिया और देखा कि उसपर एक और छोटा बटन था. उसे दबाया तो टेबल भी ऊपर से खुल गई. और उस पर कई प्रकार की क्रीम, जैल, तेल के साथ गाँड के प्लग इत्यादि रखे हुए थे. सबकी आँखें आश्चर्य से खुली रह गईं।

विक्रम बोला, “मैं इतना विस्मित हूँ कि मुझे एक दो पेग चाहिए।”

“नो प्रॉब्लम, अंकल. वी ऑल कैन यूज़ ए कपल ऑफ़ ड्रिंक्स.” अंजलि ने उसका साथ दिया.

महक, श्रेया और अंजलि बार कैबिनेट की ओर गयीं जहाँ कहे अनुसार कई उच्च ब्रान्ड की कई प्रकार की मदिरायें थीं. विक्रम ने सोचा कि लोकेश मुझे जो कुल बिल देगा उसमें तो इनमें से एक बोतल भी नहीं आएगी. उसने लोकेश के परिवार को इसका उचित उपहार देने का वचन लिया. ड्रिंक्स लेकर सब बड़े सामान्य ढंग से बातें करने लगे. किसी को इस बात का ध्यान भी न था कि वे सब नंगे हैं. एक दूसरे के अंगों को अवश्य वो आँखें चुराकर देख रहे थे.

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मधु और रजनी ने एक दूसरे को देखा कि ये खेल तो आधे घण्टे स्थगित हो गया. उन्होंने अपने पाँचों लौंड़ों की ओर देखा और फिर मुस्कुरा दीं. लड़के खड़े हो गए और रिसोर्ट वाले लड़कों ने मधुजी के मुँह के सामने अपने लंड लगा दिया. मधुजी ने मुस्कुराकर उन्हें चाटना आरम्भ किया तो रजनी भी सिद्धार्थ के लौड़े को चूसने लगी. रवि और विलास सामने के बिस्तर और टीवी पर ध्यान रखे हुए थे.

इस बार मधुजी और रजनी के अनुमान के अनुसार लड़कों के मन में उन्हें पाठ पढ़ाने की इच्छा थी. उन्हें क्या पता था कि दोनों घाट घाट का पानी पीकर ही चुदने के लिए उन्हें उकसाना चाहती थीं. रिसोर्ट के लड़कों को अगर रजनी का साथ मिला होता तो वो उसे निर्ममता से चोदते पर उनके साथ तो मधुजी थीं.

रजनी ने उनके इस भाव को समझा और सिद्धार्थ के लौड़े से मुँह हटाकर उन दोनों से पूछा.

“क्यों बच्चों, तुम क्या करने जा रहे हो?”

“जी, मैडम की चुदाई.”

“उसमें उसे आनंद नहीं मिलेगा. ये कहो कि तुम अपने मालिक की माँ चोदने जा रहे हो और उसे रगड़ रगड़ कर चोदो, तब इस बुढ़िया को शांति मिलेगी.”

“ये सही कह रही है, पर तू कौन सी मुझसे कम है? मुझसे एक दो वर्ष ही कम होगी और ऐसे जवान लौंडो से चुदवाती है? सिद्धार्थ बेटा, अब तू इसकी गाँड मार ही ले बहुत बोले जा रही है.” मधुजी ने अपने सामने के दोनों लौडों पर जीभ घुमाते हुए कहा. फिर रवि और विलास से बोली.

“इसका मुँह बंद करने के लिए कहती लेकिन इसकी चीखें सुनने की बड़ी इच्छा है. सिद्धार्थ के लौड़े से गाँड फड़वाएगी तो चीखेगी चिल्लायेगी, तब सुख मिलेगा मुझे.”

लड़कों को ये न पता था कि ये उन दोनों वृद्धाओँ का आपसी खेल था. रजनी को लम्बे मोटे लौंड़ों से गाँड मरवाने में जो सुख मिलता था जिसके कारण ही मधुजी ने अपने बिस्तर से सिद्धार्थ उन्हें भेंट किया था.

अब तक मधुजी के प्रेमी उनके ही अनुसार उन्हें चोद रहे थे पर रजनी के साथ चुदने में एक नया ही सुख मिलता था. इसीलिए इन युवाओं को भड़काना आवश्यक था जिससे कि वे उनकी रगड़कर चुदाई करें. आक्रोश में की हुई चुदाई का आनंद ही भिन्न होता है. सम्भवतः रिसोर्ट के लड़के भी अब मधुजी को पाठ पढ़ाने के बार में सोच रहे थे. उन्होंने एक खतरा उठाया जिसके लिए वो क्षमा माँग सकते थे. उन्होंने मधुजी के बालों को पकड़ा और अपने लौंड़ों से दूर किया.

“अब बहुत हुआ दादी माँ. पिछली बार अपने चुदाई रोक दी थी तो लौड़े भड़क गए थे. अब अपने मालिक की माँ चोदे बिना नहीं हटने वाले. समझीं आप?”

उनके इस कथन पर स्वांग के अनुसार रजनी हंसने लगी.

“अब पता चलेगा इस बुढ़िया को. पर बच्चों तुम्हारे जैसे लौंडो से कई बार चुदी है ये माँ की लौड़ी. तुममे है इतना दम की लोकेश की माँ चोद पाओ?”

अब उन दोनों लड़कों में जोश भर गया और उनके लौड़े तन कर ऊपर नीचे होने लगे. मधुजी ने उन्हें हाथ में लिया.

“मुझे तो लगता है कि ये मेरी प्यास मिटा सकते हैं. पर परखे बिना विश्वास नहीं करना चाहिए, है न रजनी?”

“बिलकुल.” फिर उसने चयन किया और एक लड़के से कहा कि वो लेट जाये. ये लड़का पिछली बार गाँड मार रहा था पर बीच में ही रुकना पड़ा था. उस लड़के ने बिस्तर पर लेटकर अपना लंड पकड़ लिया। मधु उस पर बैठ गई और पूरा लंड अपनी पौराणिक चूत में ले लिया. रजनी ने देखा और कहा.

“इसकी गाँड और मेरी गाँड एक साथ मारना है. देखते हैं तुममे से कौन जीतता है. जो बाद में झड़ेगा उसे जीता माना जायेगा.”

“और उसे मिलेगा क्या दादी माँ?” सिद्धार्थ ने पूछा.

“ये सोचना होगा. पर कुछ अच्छा ही मिलेगा. अब चलो मेरी गाँड बहुत कुलबुला रही है.”

सिद्धार्थ फिर रजनी की गाँड के पीछे आ गया. और रिसोर्ट के दूसरे लड़के ने भी मधुजी की गाँड के पीछे आकर अपना लंड उनकी गाँड पर लगाया.

“स्टार्ट?” उस लड़के ने कहा तो सिद्धार्थ ने कहा “ओके” और इसी के साथ दोनों लौड़े दो वृद्धाओं की गाण्डों में प्रवेश कर गए.

इस पूरे कथानक में ये समझना होगा कि रिसोर्ट के लड़के किसी भी मापदण्ड में समुदाय के लड़कों से भिन्न नहीं थे. सिद्धार्थ को अवश्य प्रकृति ने एक बड़े लंड का उपहार दिया था, पर ये लड़के भी एक प्रक्रिया से निकले थे. हालाँकि नौकरी होने के कारण उन्हें एक सीमा में रहना होता था, जिसे उनके अतिथि तय करते थे. मधुजी ने कुछ न कहकर उन्हें दुविधा में डाल दिया था. सिद्धार्थ ने उस लड़के को देखा चूँकि अभी मधुजी और रजनी का चेहरा दूसरी ओर था और उसे संकेत में समझाया कि कोई दया न करे और उन्हें दबा कर चोदे. उस लड़के ने ये संदेश नीचे लड़के तक प्रसारित कर दिया.

मधुजी को पता न चला कि अचानक क्या हुआ, पर उनकी चूत और गाँड में चल रहे लौड़े तीव्रता में उन्हें चोदने लगे. चूँकि ये उनकी रूचि के अनुसार ही था तो उन्होंने इसका भरपूर आनंद उठाने का निर्णय लिया. और वैसे भी दोनों लौड़े उनके दोनों निचले छेदों को भरपूर तीव्रता और गहराई से पेल रहे थे. उन्होंने अपना शरीर नीचे झुकाया और रिसोर्ट के लड़के के मुँह में अपनी जीभ डालकर उसे चूमने लगीं. सिद्धार्थ ने देखा कि उसकी युक्ति कार्य कर गई है तो उसने रजनी की गाँड पर ध्यान दिया, पर उससे पहले उसने अपने समुदाय के भाई रवि और विलास को आगे आने का संकेत दे दिया. ये मधुजी की आज्ञा के अनुसार नहीं था.

“दादी, अगर चीखने का मन करे तो जी भर कर चीखना. पर तब तक मेरे भाइयों के लौड़े भी चूस दो.” सिद्धार्थ ने रजनी के कान में कहा.

रजनी ने तुरंत अपने सामने के दोनों लंड चूसने आरम्भ कर दिए. सिद्धार्थ ने अपनी गति बढ़ाई और रजनी की गाँड में पूरे लंड से चुदाई करने लगा. रजनी ने कुछ समय प्रतीक्षा की फिर अपने मुँह निकाले और चीखने लगी.

“क्या लौड़ा है मादरचोद. गाँड फाड़ दी मेरी. और पेल मेरी गाँड भोसड़ी के. आअह क्या लंड है रे मधु. सच में तेरी बार सही निकली. गाँड मरवाने का सच्चा सुच ऐसे ही लौड़े से है. मेरी बहू को भी बताऊँगी इसके बारे में. वो भी अपनी गाँड मरवाने के लिए सदा उत्सुक रहती है. चोदेगा न मेरी बहू को भी सिद्दार्थ. उसकी गाँड मुझसे अधिक तंग है, पर मरवाने में नंबर वन है.”

सिद्धार्थ मन ही मन मुस्कुरा रहा था. जब से उसने समुदाय में प्रवेश किया था इन दादी, नानी और मम्मियों ने उसके लौड़े का भरपूर सुख उठाया था. उसकी माँ अब उसे गाँड मारे बिना घर से नहीं जाने देती थी कि जहाँ जायेगा किसी को चोद कर ही आएगा.

मधुजी रजनी की बकवास सुन रही थीं पर उनका अपना सुख उन्हें इस पर ध्यान देने से रोक रहा था. उनको चोदने वाले दोनों लड़के भी उसे पूरे जोश और शक्ति से चोद रहे थे. कल रात की चुदाई के बाद भी उनकी प्यास मिटी न थी और ये दोनों उनके दोनों छेद पूरे सामर्थ्य से मथ रहे थे. अब उन्होंने भी चीख कर अपना संगीत रजनी के संगीत में मिला दिया था. रवि रजनी से हटकर उनके सामने जा खड़ा हुआ और उनका सिर पकड़ कर उनके मुँह में लौड़ा पेल दिया. अब मधुजी के तीनों छेदों में लंड थे और रजनी भी अपने सामने खड़े विलास के लंड को लालच से देख रही थी.

अपना लंड चुसवाने का कारण केवल ये नहीं था कि वो लड़के इसके लिए उत्सुक थे. पर वो मधुजी और रजनी को टीवी देखने से रोकना चाहते थे. वे नहीं चाहते थे कि इस बार उन्हें फिर से नायक और शेट्टी परिवार के समागम को देखना नहीं चाहते थे. और इसमें वो सफल थे, क्योंकि जो वहाँ हो रहा था उसे देखकर उनकी चुदाई में अवश्य विराम लग सकता था.

**************

मोहन ने वर्षा को अपनी बाँहों में भींचा और उसे चूमते हुए धीरे से उसके कान में कहा, “आप आज मुझे अपना दामाद समझकर चुद सकती हैं.”

इस बार वर्षा ने उसके होंठ चूमे, “नहीं, ये ठीक नहीं होगा, पर तुम मुझे जो समझो वो मानकर चोद सकते हो.”

मोहन ने तर्क न करना भी ठीक समझा। और उन्हें लेकर गोल बिस्तर पर बैठाया और वर्षा के पैरों के बीच में बैठकर उसकी चूत को हाथों से सहलाया और फिर अपनी जीभ से छेड़ा. उसने अपनी जीभ को वर्षा के भगनाशे पर चलाया तो वर्षा की सिसकी निकली और उसने मोहन के सिर को पकड़ लिया. मोहन उसके भग्न और चूत पर जीभ से हल्के प्रहार करने लगा और वर्षा की उत्तेजना उत्कर्ष पर पहुंचने लगी. उसकी चूत से गाढ़ा पानी मोहन के मुँह में छोड़ दिया जिसे मोहन ने निःसंकोच पी लिया. वर्षा उसी अवस्था में हाथों को पीछे करके बैठ गई. इतनी देर का ठहरा हुआ जवालामुखी जो फूटा था.

अन्य सब उन दोनों के इस प्रेमालाप को देख रहे थे और कुछ ईर्ष्या कर रहे थे, जो स्वाभाविक था. इसमें मेहुल अग्रणी होता अगर सुलभा उसका हाथ पकड़कर उसे गोल बिस्तर के दूसरी ओर न ले गई होती. सुलभा ने उसकी आँखों में झाँका.

“वर्षा को क्यों देख रहे हो, मैं तुम्हें उतना ही सुख दूंगी.”

“नहीं आंटी, मैं उन्हें इस कारण नहीं देख रहा था. ये देख रहा था कि मोहन भैया ने उन्हें दो ही मिनट में पानी छोड़ने पर विवश कर दिया। मैं भी देखना चाहता हूँ कि मैं ये कर सकता हूँ भी या नहीं.”

“ये जानने का एक ही ढंग है.” सुलभा भी वर्षा के ही समान गोल बिस्तर पर बैठी और अपने पैर फैला लिए. “जिस आग में वो जल रही है दिन भर से उसमें ही मैं भी पक रही हूँ. मुझे नहीं लगता तुम्हें अधिक परिश्रम करना होगा.” फिर मानो उसे छेड़ते हुए बोली, “अगर तुम जानते हो कि क्या करना है.” ये कहते हुए सुलभा धीमे से मुस्कुराई. मेहुल उसकी इस चाल को समझ गया.

“हम्म्म, अब देखना होगा कि क्या मुझे पता है कि क्या करना है. हैं न आंटी?” ये कहते हुए मेहुल ने अपनी उँगलियों से सुलभा के भग्नाशे को हल्के से मसला और फिर अपने होंठों में दबाकर चूस लिया. सुलभा के तन में मानो विद्युत् का संचार हो गया. उसका शरीर अकड़ा और जड़ हो गया. मेहुल ने अपनी जीभ से उसकी चूत चाटनी आरम्भ की और उँगलियों से भग्न को सहलाता रहा. सुलभा को लगा कि वो किसी भी पल झड़ जाएगी. दिन भर की प्रतीक्षा अब उस पर भी भारी पड़ने लगी थी.

पवन अपनी पत्नी के सामने आया और उसके सिर पर हाथ फेरा. “क्यों रोक रही है, झड़ ले, यहाँ कौन सी कोई प्रतियोगिता चल रही है?”

ये सुनकर सुलभा ने अपना शरीर ढ़ीला किया और मेहुल ने अवसर देखकर अपनी जीभ उसकी चूत में उतार दी और भग्नाशे को जोर से मसल दिया. सुलभा का रुका हुआ बाँध टूट गया और वो मेहुल के मुँह में झड़ने लगी. पवन ने उसका सिर थपथपाया और श्रेया के पास लौट गया. उसने श्रेया का हाथ पकड़ा और उसे वर्षा और मोहन के पास के स्थान पर बैठा दिया.

“जब तक चूत का पानी नहीं पी लेता मेरी प्यास नहीं बुझेगी, श्रेया बेटी. मुझे सेवन कराओगी न?”

“जी, अंकल.” श्रेया ने उन्हें अपनी जाँघों के बीच आने का न्योता दिया.

और पवन उसकी चूत की सौंधी महक को ढूंढते हुए चाटने में जुट गया.

श्रेया और पवन को आगे जाते देख महक ने समीर को देखा और मुस्कुरा दी. समीर ने उसे श्रेया और पवन के दूसरी ओर चलने का संकेत दिया और महक को आगे जाने दिया। पीछे से वो महक के हिलते हुए चूतड़ देखकर उन्मादित हो गया.

“लगता है कि चूत चाटने का ही कार्यक्रम पहले करने का निर्णय हुआ है.”

“जी अंकल, एक बार चुदने के बाद आप पुरुषों में से कोई इसे चाटने चूमने जो नहीं आएगा.”

“ये भी सच है. तो आओ बैठो और मुझे अपनी चूत का स्वाद चखाओ.”

इसके साथ ये जोड़ा भी व्यस्त हो गया.

समीर को अपनी बेटी के साथ संलग्न देख विक्रम ने अंजलि का हाथ पकड़ा और बिना किसी प्रकार की बात किये उसे चूमने लगा. अंजलि ने उसका पूरा साथ दिया और फिर दोनों श्रेया और पवन के एक ओर जाकर बैठ गए. कुछ और देर चूमने के बाद विक्रम अंजलि की जाँघों के बीच बैठकर उसकी चूत चाटने लगा.

सभी जोड़ों को एक ही प्रकार के कृत्य में लीन देखकर स्मिता दुविधा में पड़ गई क्योंकि उसके साथ राहुल और जयंत जो थे. राहुल ने उसकी इस दुविधा को दूर करने में देर न की. उसकी ऊँगली ने स्मिता की गाँड को कुरेदा और फिर राहुल ने उसके होंठ चूमकर उसे आँख मारी. स्मिता उसका तात्पर्य समझ गई और मुस्कुरा दी. जयंत को राहुल आगे का किला संभालने का आमंत्रण दिया तो जयंत गोल बिस्तर के अंतिम स्थान पर जाकर लेट गया, पर उसका चेहरा बाहर की था. स्मिता उसके मुँह पर जाकर बैठी और जयंत की लपलपाती जीभ ने शीघ्र ही अपने लक्ष्य को भेद दिया. राहुल स्मिता की गाँड को देखकर लार टपका रहा था पर स्मिता के स्थगित होते ही उसने गाँड फैलाकर उसमें अपनी लार टपकाई और फिर उसे चाटने में जुट गया.

छहों जोड़े अब प्रथम चरण में संलग्न थे.

*********

दूसरी ओर मधुजी के कमरे में वासना का चक्रवात अपने अंतिम चरण पर था. अब मधुजी और रजनी का ध्यान नायक और शेट्टी परिवारों के बीच चल रहे वृत्तांत पर नहीं था. उनकी अपनी तृप्ति ही अब उनका एकमात्र ध्येय था. और इसमें रिसोर्ट के लड़के और सिद्धार्थ पूर्ण रूप से उन्हें केंद्रित करने में सफल थे. सिद्धार्थ के विशाल लौड़े ने रजनी की गाँड के धागे खोल दिए थे. उन्हें स्मरण नहीं पड़ रहा था कि पिछली बार कब उनकी गाँड की इस क्षमता से इस प्रकार के लौड़े से चुदाई की गई थी. उनकी चूत से बहता रस इसका साक्षी था कि उन्हें इस भीषण चुदाई से आनंद मिल रहा था.

सिद्धार्थ न केवल एक बड़े मोटे लौड़े का स्वामी था परन्तु उसकी युवावस्था के कारण उसमें कई मिनटों तक चोदने का सामर्थ्य भी था.उसकी माँ उसके लंड से चुदने में असीम सुख पाती थी. और अन्य स्त्रियां जो भी उससे चुदवाती थीं उसकी चुदाई सदा के लिए मन मस्तिष्क में समा जाती थी. समुदाय की जिन स्त्रियों से उसका संसर्ग हुआ था उनमें उससे अनेकानेक बार चुदने की इच्छा घर कर जाती थी. मधुजी और रजनी भी उनमें से ही थीं. और मधुजी जिस प्रकार से उसका प्रचार कर रही थीं उसके कारण उसकी प्रतिष्ठा और माँग कई गुना बढ़ चुकी थी. रजनी स्वयं अब अपनी बहू को उससे चुदवाने की इच्छा जता चुकी थीं. उसके मुँह में जो लंड था वो अब फूलने लगा था और उन्हें ज्ञात था कि अब उन्हें युवा वीर्य का पहला स्वाद मिलने वाला है.

मधुजी की गाँड मारने वाले लड़के के मुँह से अब अंतिम पड़ाव पर पहुँचने की ध्वनि निकल रही थी. मधुजी के साथ हुए पिछले अनुभव के आधार पर उसे मधुजी की गाँड में ही वीर्यपात करना था. उसके फूलते हुए लौड़े के आभास से मधुजी ने आने मुँह में उपस्थित लौड़े से मुँह हटाया और अनुमान अनुसार उस लड़के को गाँड में ही पानी छोड़ने की आज्ञा दी. और फिर से लंड चूसने लगीं. उस लड़के ने कुछ देर और धक्के लगाए और फिर अपना रस मधुजी की गाँड में छोड़ दिया. लंड निकालने का कोई प्रयास नहीं किया. चूत चोदते हुए लड़के को भी गाँड में तनाव कम होने का अनुभव हुआ और उसने कुछ और देर के परिश्रम के बाद अपने लंड का रस मधुजी की चूत में छोड़ दिया. तीनों उसी स्थिति में बने रहे जब तक कि मधुजी ने रवि के लंड का रस पी नहीं लिया.

सिद्धार्थ ने बिना तक तोड़े आगे झुककर रजनी के कान में कहा, “क्यों दादी? गाँड भर दूँ तुम्हारी?”

रजनी ने हाँफते हुए उत्तर दिया, “बेटा, तुझसे माँग तो भरवाने से रही, गाँड ही भर दे.”

ये सुनकर मधुजी के शरीर में सिहरन सी उठी. उन्होंने एक कुटिल मुस्कान के साथ विलास की ओर संकेत किया जिसका लंड रजनी के मुँह में था. विलास ने स्वीकृति दी और अपने लंड से रजनी के मुँह को और तीव्रता से चोदने लगा. सिद्धार्थ ने अब अंतिम कुछ धक्के लगाए और अपना रस रजनी की गाँड में छोड़ दिया. उसकी आयु के अनुसार बहुत समय तक उसका लंड रजनी की गाँड में पानी भरता रहा. विलास जो अब झड़ने वाला था उसने अपने लंड को रजनी के मुँह से निकालने का असफल प्रयत्न किया. पर रजनी की चूत ने फिर पानी छोड़ा तो उसका मुँह खुल गया. विलास ने अपना लंड बाहर निकालकर रजनी के बालों के ऊपर लंड रख दिया और जैसे ही पानी छोड़ा रजनी की माँग गाढ़े वीर्य से भर गई.

विधवा रजनी आज फिर से सुहागन बन गई थी. जब उसे इस बात का आभास हुआ तो वो आक्रोश में आ गई और मधुजी से बोली.

“देख क्या किया इस लड़के ने? इस विधवा की माँग भर दी.”

मधुजी ने उसे देखा. “रजनी, क्यों इतना ढोंग कर रही है. क्या तू कभी भी मन से विधवा हुई है. तेरे पति की तेरहवीं के अगले ही दिन तू अपने पति की इच्छानुसार अपने पोतों से चुदवा रही थी. कितने पुरुषों और महिलाओं के साथ चुदाई कर चुकी है. ये समझ कि तू आज रात फिर से दुल्हन बन गई है. एक रात की दुल्हन.”

ये सुनकर रजनी कुछ शाँत हुई और विलास के लंड को चाटकर साफ किया. वो बैठने लगी तो उसकी गाँड से धीरे सारा रस बिस्तर पर फ़ैल गया. उसकी गाँड की तृप्ति हो गई थी. अब उसका ध्यान टीवी पर गया जहाँ पर चूत चटाई का अभियान चल रहा था. उसने मधुजी का उस ओर ध्यान खींचा।

मधुजी ने उस ओर देखा और बोला, “अरे रुक जा, अभी उन्हें समय लगेगा। तब तक ऐसा कर कि तू मेरी चूत साफ कर दे.

रजनी बोली,”हाँ हाँ, क्यों नहीं?” और उसने मधुजी को सीधा किया और उनकी चूत को ऊपर चाटने लगी.

“आह!” मधुजी ने सिसकी ली. उनके पाँचों प्रेमी अब उन दोनों की इस रतिक्रिया को और टीवी को देख रहे थे. अपने रस को इस प्रकार से चाटे जाते देख रिसोर्ट के दोनों लड़के प्रसन्न हो गए. बस उनकी एक और इच्छा था, पर वो कुछ बोल नहीं सकते थे.

रजनी ने मधुजी की चूत के बाहर चाटने के बाद अपनी जीभ को अंदर डाला और कुछ और वीर्य निकालकर चखा. फिर अपने होंठ चूत पर लगाकर से जोर सोखा। जब वो निश्चिन्त हो गयीं तो अपना चेहरा उठाया और रिसोर्ट के लड़कों से कहा.

“बहुत स्वादिष्ट है तुम्हारा रस. और पीने की इच्छा है.” लड़के गर्व से फूल गए और फिर रजनी ने जो किया उससे उनकी मूक इच्छा भी पूरी हो गई. रजनी ने मधुजी के पैरों उठाया और अपना मुँह उनकी गाँड पर रखा और बाहर बहते रस चाट लिया. लड़के आशा कर रहे थे कि गाँड के अंदर के रस को भी रजनी चाटेगी, पर उसने ऐसा कुछ न किया और मधुजी को सामान्य स्थित में कर दिया.

“अरे इतना तो मैं भी तेरे लिए कर सकती हूँ. आ मेरे ऊपर आ.”

रजनी ने कोई समय व्यर्थ नहीं किया और अपनी बहती हुई गाँड को मधुजी के मुँह पर लगाया. जो कमी रजनी ने रखी थी उसे मधुजी ने पूरा कर दिया और गाँड के अंदर के रस को चूस लिया. पाँचों लड़कों के लौड़े फिर से फनफना उठे, पर अब उन्हें रुकना था.

क्योंकि टीवी पर अगला चरण आरम्भ होने वाला था.

***********

और यही सच था. चूतों का पानी छूट चुका था. और अब लौडों की बारी थी. परन्तु वर्षा और स्मिता ने कहा कि इसमें अधिक समय न व्यय किया जाये और उन्हें केवल चुदाई के लिए उपयुक्त बनाया जाये। उनकी बातों पर किसी को आपत्ति नहीं थी क्योंकि सभी चुदाई के लिए लालायित थे.

सहमति पाते ही लौड़े मुँह में खो गए और स्त्रियों ने अपने साथियों के लंड चाटकर, चूसकर चुदाई के लिए गीले करने का कार्यक्रम आरम्भ कर दिया. और ये बहुत थोड़े समय के लिए चला. चूतों को चुदने और लौंड़ों को छोड़ने की लालसा थी.

और लंड मुँह से बाहर निकले और अपने साथी के चेहरों के सामने झूमने लगे.

रजनी और मधुजी ने टीवी पर मेहुल का लंड देखा तो उनकी आँखें खुली रह गयीं. मेहुल का लंड सिद्धार्थ से बीस ही था. और मोटाई में भी कुछ अधिक प्रतीत होता था.

रजनी: “मधु, ऐसा लौड़े को चोदकर अगर जीवन भी समाप्त हो जाये तो दुःख नहीं होगा.”

मधुजी: “मैं न मरने वाली इससे भी. मैं तो मेहुल और सिद्धार्थ से एक साथ चुदने की योजना बना रही हूँ. सोच, ऐसे लम्बे मोटे दो दो लौड़े चूत और गाँड खंगालेंगे तो क्या आनंद आएगा.”

रजनी: “सच कहती है. इसको अपने समुदाय में लेना चाहिए.”

मधुजी: “ये स्मिता और विक्रम का छोटा बेटा है. इस माह इसका उद्घाटन होना है अपने मिलन समारोह में.”

रजनी: “वचन दे, तू इससे चुदने के बाद मेरे ही पास भेजेगी.”

मधुजी: “तुम जानती हो मैं ऐसा नहीं कर सकती, पर उसे ये सुझाव अवश्य दे दूँगी और स्मिता से भी कहलवा दूँगी।”

रजनी: “अच्छा है.”

उधर सारी महिलाएं अब गोल बिस्तर पर लेट चुकी थीं और चुदाई आरम्भ होने वाली थी.

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वर्षा की चूत को चूमने के बाद मोहन ने अपना लंड उसकी चूत में उतार दिया और वर्षा ने अपने पैरों से उसकी कमर को बाँध लिया. हल्के धक्कों के साथ मोहन और वर्षा की चुदाई का शुभारम्भ हुआ. मेहुल ने पवन और राहुल के लौंड़ों का आकार देखकर ये जान लिया था कि सुलभा की चूत खुली हुई है और उसके लंड को लेने में सक्षम भी है. उसने अपने भाई के विपरीत एक लम्बे धक्के के साथ सुलभा की चूत में अपना लंड डाला पर आरम्भ में उसने चुदाई की गति धीमी ही रखी. पवन श्रेया को प्रेम से ही चोदने का इच्छुक था और उसने अपने लंड को श्रेया की चूत में डालने में कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई. और फिर धीमी गति से चुदाई आरम्भ कर दी.

श्रेया के साथ पवन का व्यवहार देख समीर ने भी महक को धीमे चोदने का निर्णय लिया। और यही विक्रम ने अंजलि के साथ भी किया. परन्तु स्मिता की चुदाई में राहुल और जयंत कोई कमी नहीं रखना चाहते थे. राहुल ने अपने साले जयंत को पहले स्मिता की चूत का आनंद लेने के लिया बोला और स्वयं स्मिता के मुँह के सामने लंड झुला दिया. स्मिता ने राहुल का विशाल लंड मुँह में लिया और जयंत ने तगड़े धक्के के साथ उसकी चूत में अपना लंड पेल दिया.

अब छहों जोड़ियां चुदाई में मग्न हो गयीं. सिसकारियों और आहों कराहों के साथ धीमी गति से आरम्भ हुई चुदाई शीघ्र ही वेग पकड़ने लगी. और कुछ ही देर में थप थप की अनेक ध्वनियों से कमरे का वातावरण गुंजायमान हो उठा.

पूरे दिन का रोका हुआ लावा पुरुषों के लौंड़ों से निकलने के लिए उद्द्यत था. यही कारण था कि नीलम और स्मिता ने लंड चूसने को सीमित ही रखा था. अगर ऐसा न किया होता तो अब तक इस स्थिति में न होते. चुदाई की गति और भीषणता अब बढ़ चुकी थी. जिन्होंने प्रेम से चुदाई आरम्भ की थी वो भी अब तीव्र चुदाई में व्यस्त थे. पुरुषों का एक ही लक्ष्य था, किसी प्रकार से इस चरण को पार किया जाये जिससे कि अगले चरण में उन्हें गाँड मारने का अवसर मिले. पर्याप्त समय की चुदाई के बाद एक एक करके सभी झड़ने लगे. पुरुष और स्त्रियां दोनों की पहली खुजली अब शांत होने लगी थी.

मौखिक सहवास से अवश्य स्त्रियां एक बार झड़ी थीं पर लंड की चुदाई का आनंद ही विशिष्ट होता है. झड़ने के पश्चात् भी सब एक दूसरे से ही जुड़े रहे और चूमा चाटी में लीन हो गए थे. स्मिता ने निर्देशक की भूमिका में फिर घोषणा की कि ये चरण समाप्त हुआ है और कुछ देर के विश्राम के बाद अगले चरण में गाँड मारने का कार्यक्रम चलेगा. ये सुनकर सबकी आँखों में चमक आ गई. महक और श्रेया उठकर सबके लिए पेग बना लायीं और फिर बाथरूम में जाकर सफाई करके लौट आयीं.

दिन भर का वासना का ज्वर अब उतर गया था और सबके मन में एक शांति थी. अब बैठकर बातें की जा सकती थीं. अगले चरण में स्मिता ने कुछ समय रुकने का सुझाव दिया. उसका कहना था कि हम यहाँ तीन दिन हैं तो किसी प्रकार का तनाव नहीं है. वैसे भी ये सब जोड़े बनाने की योजना कल शाम तक की है. उसके बाद सब अपनी रूचि के अनुसार अपने साथी का चयन कर सकते हैं.

ये सुनकर सबने प्रत्यक्ष तनाव कम होने का अनुभव किया. और कल शाम से उन्मुक्त होकर अपना साथी चुना जा सकता था, ये सुनकर अत्यंत प्रसन्नता हुई.

सब अपने पेग पीने लगे.

रात अभी आरम्भ ही हुई थी.

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क्रमशः

1388200
 
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अपडेट लगभग समाप्त है. पर बहुत बड़ी होने के कारण दो भागों में पोस्ट करूँगा।

पहला भाग आज और दूसरा कल.

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कैसे कैसे परिवार: Chapter 57 B is posted

अध्याय ५७: नायक, शिर्के और शेट्टी मिलन - २

ससुराल की नई दिशा: Chapter 57 is posted

अध्याय ५७: अगली पीढ़ी – २

Please read and give your views.

अगले 3 अपडेट का कैलेंडर:


कैसे कैसे परिवार: अध्याय ५८ अ: दिंची क्लब के नए पंछी - १ 14 October

कैसे कैसे परिवार: अध्याय ५८ ब: दिंची क्लब के नए पंछी - २ 15 October

ससुराल की नई दिशा : अध्याय ५८
 
ससुराल-की-नयी-दिशा.

Chapter 57 is posted

अध्याय ५७: अगली पीढ़ी – २

Please read and give your views.
 
अध्याय ५९: नायक, शिर्के और शेट्टी मिलन -2

(अध्याय ५८ से आगे )

दृश्य ४:

रजनी और मधुजी ने टीवी पर मेहुल का लंड देखा तो उनकी आँखें खुली रह गयीं. सिद्धार्थ से बीस ही था. और मोटाई भी थी.

मधुजी: “इस माह मिलन समारोह में इसका उद्घाटन होना है. मैं मेहुल और सिद्धार्थ से एक साथ चुदने की योजना बना रही हूँ. लम्बे मोटे दो दो लौड़े चूत और गाँड खंगालेंगे तो क्या आनंद आएगा.”

रजनी: “वचन दे, तू इससे चुदने के बाद मेरे ही पास भेजेगी.”

मधुजी: “उसे ये सुझाव अवश्य दे दूँगी और स्मिता से भी कहलवा दूँगी।”

नीलम ने निर्देशक की भूमिका में फिर घोषणा की कि ये चरण समाप्त हुआ है और कुछ देर के विश्राम के बाद अगले चरण में गाँड मारने का कार्यक्रम चलेगा. ये सुनकर सबकी आँखों में चमक आ गई. महक और श्रेया उठकर सबके लिए पेग बना लायीं और फिर बाथरूम में जाकर सफाई करके लौट आयीं.

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पवन, समीर और विक्रम एक ओर खड़े होकर बातें रहे थे.

पवन: “मैं तो गाँव का रहने वाला हूँ. मुझे इस प्रकार आयोजित ढंग से चुदाई इत्यादि में उतना आनंद नहीं आता। श्रेया अत्यधिक सुंदर है पर इस प्रकार स्वचालित खिलौनों के समान इन खेलों में आनंद नहीं आता.”

विक्रम कुछ सोचते हुए बोला, “आपकी बात सही है, पर किसी भी अन्य रूप में अव्यवस्था सी हो जाएगी.”

“जोड़े बनाने तक ठीक है, पर उन्हें क्या और कितना करना है ये तो उनके ही ऊपर छोड़ देना चाहिए न?”

“हम्म्म” समीर ने सोचते हुए कहा. “इस विषय में अवश्य विचार किया जा सकता है. इस चरण के बाद ही वैसा करना सम्भव होगा.”

“ठीक है, मैं स्मिता से बात करता हूँ.”

“अच्छा होगा कि इसे सबके सामने ही प्रस्तावित किया जाये.”

“ठीक है.” ये कहकर सब अपने पेग पीने में व्यस्त हो गए. कुछ समय में उन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

“हमारा ये विचार है कि जोड़े बनाने का कार्य तो जैसे स्मिता और वर्षा कर रही हैं, उसे उसी प्रकार से चलने दिया जाये. परन्तु वो किस क्रम में क्या करना चाहते हैं ये उनके ही ऊपर छोड़ दिया जाये.”

सबने इसके लिए स्वीकृति दी तो समीर, पवन और विक्रम को अचरज हुआ,

फिर वर्षा बोली, “ये अच्छा सुझाव है. मेरा एक और भी सुझाव है.” उसने स्मिता आँख मारते हुए कहा. “जैसे आप मंत्रणा कर रहे थे, वैसे ही हमने भी किया. हम दोनों परिवारों की पर्चियां बनाएँगे। पुरुषों की पर्चियाँ ग्लास में डालेंगे और महिलाओं की कटोरी में. महिलाएं दूसरे परिवार के पुरुषों की पर्ची चुनेंगी.”

“पर इसमें तो एक पुरुष बच जायेगा.”

“हाँ, उस बेचारे का क्या करेंगे?” स्मिता और वर्षा ने खिलखिलाते हुए कहा. फिर हंसी पर लगाम लगाई और बताया, “उस पुरुष को किसी भी जोड़े के साथ जाने की अनुमति होगी.”

“वैरी नाइस आइडिया.” विक्रम ने सराहना में कहा.

“यस, वैरी नाइस.” सबने साथ दिया.

“तो अगले चरण में ऐसा करेंगे. पर अब मेरी गाँड कुलबुला रही है.” स्मिता ने राहुल और जयंत का हाथ पकड़ते हुए कहा.

और इसी के साथ सभी जोड़े अपने पूर्व स्थान पर चले गए.

मोहन तो पहले से ही वर्षा पर आसक्त था तो उसका मन तो बल्लियों उछल रहा था कि उसे अपनी स्वप्न सुंदरी की गाँड मारने का सुअवसर प्राप्त हो ही गया था. वर्षा मन ही मन मुस्कुरा रही थी और जानती थी कि मोहन के मन में क्या है.

उसे स्वयं भी मोहन के प्रति आकर्षण था और उसे इस बात का दुःख था कि अंजलि का विवाह उससे न हो पाया था. पर उसके दामाद राहुल ने अब उसे अपनी आकांक्षा पूरी न होने का खेद दूर कर दिया था. सच तो ये था कि राहुल सम्भवतः मोहन से कई गुना अच्छा दामाद सिद्ध हुआ था. जिस प्रकार से उसने अपने माता पिता के साथ घर और व्यवसाय को संभाला था वो मोहन करने में सक्षम था या नहीं इसमें संदेह था. राहुल की गाँव का लालन पालन उनके अपने कृषि व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था. और फिर उसकी चुदाई की अपार क्षमता भी उसके पक्ष में ही बैठती थी.

“जब से मैंने चुदाई सीखी है, कोई ही दिन रहा होगा जब आपको देखा हो और चोदने का मन न किया हो. गाँड मारने का तो मेरा दिवा स्वप्न जैसा हो गया था.”

“और अगर मैं नहीं दिखती थी तो भूल जाते थे?” वर्षा ने उसे छेड़ा.

“भूलता तो नहीं था पर पीछे अवश्य धकेल देता था. मम्मी, श्रेया और चारु ही मुझे सम्पूर्ण रूप से बाँधे रखती थीं.”

वर्षा ने पासा फेँका, “स्नेहा और सुजाता को क्यों भूल रहे हो?”

मोहन ने उसे सकपका कर देखा तो वर्षा ने उसके लंड को पकड़ा और हथेली में सहलाते हुए बोली, “इतना समझती हूँ, अगर श्रेया इसमें संलिप्त है तो उसका परिवार भी होगा ही. पर चिंता न करो मुझे कोई आपत्ति नहीं है. मुझे गाँड मरवाने में बहुत आनंद आता है. परिवार के चारों पुरुषों में से कोई भी जब चाहे मेरी गाँड मार सकता है. इट इज़ ऑल्वेज़ ओपन फॉर ए गुड़ फक!” ये कहकर वर्ष हंस दी.

“तो फिर आपको निराशा नहीं होगी. मुझे भी गाँड मारने में अधिक आनंद आता है.” मोहन ने कहा. वर्षा बिस्तर पर जाकर घोड़ी के आसन में आ गई और पीछे मुड़कर बोली, “मुझे आज तक ऐसा कोई पुरुष नहीं मिला जिसे गाँड मारने में आनंद न आता हो. पर मुझे प्रेम से गाँड मारने वाले अच्छे नहीं लगते. तुम समझ गए न?” वर्षा ने अपनी गाँड मटकाते हुए कहा.

गोल पलंग के बीच की टेबल से मोहन ने जैल की ट्यूब की और किंचित मात्रा में वर्षा की गाँड में लगाई. और उतनी ही अपने लंड पर. अगर वर्षा को निर्मम गाँड मराई सुहाती थी तो इसका उपयोग केवल आरम्भिक प्रवेश के ही लिए आवश्यक था. घोड़ी अपनी गाँड हिला रही थी और घोड़ा सवारी के लिए उद्द्यत.

मेहुल सुलभा के साथ आगे बढ़ा तो उसका लौड़ा फनफना रहा था. उसे मध्यम आयु की स्त्रियों को चोदने में अत्यधिक आनंद आता था. इसका एक कारण ये भी था कि उसके लम्बे मोटे लौड़े को देखकर उसकी आयु की लड़कियों की गाँड फट जाती थी. पर अधिक आयु की महिलाएं उसके लौड़े से चुदने में कोई झिझक नहीं दिखाती थीं. और अब तो उसकी सूची में ऐसी कई वरिष्ठ स्त्रियाँ जुडी हुई थीं. उसकी प्रिंसिपल मैरी और मैरी की माँ मरियम तो उसके लौड़े पर इतनी आसक्त थीं कि उनके वश में होता तो उसे अपने ही घर में रोक लेतीं।

आज उसका संगम ऐसी ही एक भरे शरीर की अत्यधिक मादक महिला से होने वाला था. उसकी पहली चुदाई में ही मेहुल को उसकी वासना की प्रबलता का अनुमान हो गया था. अब गाँड मारने में और अधिक आनंद आने वाला था. सुलभा भी गाँड मरवाने में दक्ष थी. और उसकी ही चीखों ने आज इन तीन परिवारों को मिलाया था. और मेहुल की इच्छा थी कि आज फिर वैसी ही चीखें फिर निकलें.

लगभग यही कामना सुलभा के भी मन में थी, पर उसे ज्ञात था कि उसकी चीखें निकालने के लिए मेहुल अकेला पर्याप्त नहीं था. और इसीलिए अगले किसी चरण में उसे इसका अवसर मिलने की संभावना थी. इन तीन दिनों में तो अवश्य ऐसा अवसर आना ही था. गोल पलंग पर गाँड ऊँची करके वो घोड़ी बनी और मेहुल ने कूद कर मध्य टेबल से जैल लिया और अपने भाई के ही समान लेश मात्र ही उपयोग में लाया. अब वो भी मोहन के साथ गाँड मारने के लिए उपयुक्त स्थिति में आ गया.

पवन का लौड़ा श्रेया की गाँड देखकर ही टनटना चुका था. अंजलि के सिवाय उसने अब तक कम आयु की किसी और लड़की की गाँड नहीं मारी थी. कुसुम की बेटी काम्या की गाँड में उसके लौड़े को जाने का अब तक अवसर नहीं मिला था. परिवार में मात्र वही एक था जिसके लंड ने काम्या की गाँड को भेदा न था. अब उसे अपनी बहू की आयु की एक और महिला की गाँड मारने का सुअवसर मिल रहा था और इसके लिए वो अपनी पत्नी का कृतज्ञ था जिसकी उस रात की चीखों ने ये नए द्वार खोले थे. और अगर उनका अनुमान सही था तो अब उसके लंड को ऐसी कई गाण्डों को मारने का भविष्य में सुयोग मिलेगा.

श्रेया पवन के भारी हथियार से प्रभावित थी और अब उसे अपनी गाँड में अपने देवर मेहुल की तुलना के लंड को लेने की ललक थी. उसने भी सुलभा के साथ वाले स्थान में घोड़ी का आसन बनाया. पवन ने ट्यूब से उसकी गाँड को भर दिया, क्योंकि वो नहीं चाहता था कि श्रेया को किसी भी प्रकार का कष्ट या पीड़ा हो. अपने लंड पर भी लेप करने के बाद वो श्रेया की गाँड मारने की स्थिति में आ गया.

जो स्थिति पवन की थी, लगभग वही समीर की थी. हालाँकि उसे काम्या की गाँड मारने का आनंद प्राप्त हो चुका था और अब महक, एक अविवाहित (चाहे कितनी भी चुदी हो) कन्या, की गाँड मारने का सुख मिलने वाला था. और इस आभास ने उसके लौड़े को तान कर लोहा बना दिया था.

महक ने उनकी इस भावना को समझा और उन्हें चूमकर कहा, “आप अपने समय और ढँग से मारिये मेरी गाँड! मुझे आपसे चुदवा कर बहुत आनंद आया है. तो इस बार भी ऐसा ही होगा, मुझे विश्वास है.” महक ने अपना आसन लिया और समीर के हाथों में ट्यूब आई और महक की गाँड को उसने जैल से पूरा भर दिया और अपने लंड पर भी जैल लगाकर स्मिता की घोषणा की प्रतीक्षा करने लगा.

विक्रम के लिए इस आयु की लड़की को चोदना कोई नया अनुभव नहीं था. समुदाय से जुड़ने वाली लगभग सभी लड़कियों को वो चोद चुका था. पर जैसी मनुष्य की प्रवत्ति होती है, एक और नई कन्या की गाँड मारने का सुख अलौकिक होता है. इसी कारण उसके लंड में भी नए रक्त का संचार हो चला था. अंजलि ने गोल पलंग पर अपना स्थान लिया और अपने पिता को देखा जो अब उसकी सखी महक की गाँड मारने को लालायित थे. दोनों की आँखों में एक मूक स्वीकृति हुई और विक्रम की उँगलियों को समीर ने अपनी बेटी की गाँड में जैल का सम्पादन करने का दृश्य देखा और फिर विक्रम को अपने लंड पर भी जैल लगाते हुए देखा. इस बार दोनों पिताओं ने एक दूसरे को देखकर मुस्कुराया और स्मिता के बुलावे के लिए ठहर गए.

अंत में स्मिता जो इस पूरे व्यवस्था की अग्रणी थी राहुल और जयंत के साथ अपने स्थान पर पहुंची. अन्य सबको ओर देखकर उसे हंसी से आ गयी. सारे लौड़े गाँड भेदने के लिए उत्सुक थे. बस उसके संकेत के लिए रुके हुए थे.

“आप सब आगे बढ़ो, मुझे इन दोनों लौंड़ों को चूसने में कुछ समय लगेगा.” उसने कहा ही था कि कमरे में जैसे चक्रवात आ गया. इससे पहले कि उसका कथन समाप्त होता मोहन का लौड़ा वर्षा की गाँड भेदकर अंदर जा चुका था. लगभग यही स्थिति सुलभा की गाँड की भी थी, पर मेहुल के लंड की गोलाई और लम्बाई के कारण वो इतनी बार मारी हुई गाँड को एक बार में नहीं जीत सका. समीर और विक्रम ने अपने मित्र की बेटियों की गाँड में लंड डालने में पूरे संयम का परिचय दिया.

स्मिता ने पहले जयंत और फिर राहुल के लंड को चूसा पर वो इसमें समय व्यर्थ नहीं करना चाहती थी. उसने घोड़ी का आसन बनाया और जयंत को गाँड में आमंत्रित किया. एक कुशल संचालिका होने के कारण राहुल को अपने आगे बुलाया और उसके लंड को चूसने लगी. जब तक जयंत के लंड ने उसकी गाँड में अपनी यात्रा पूरी की, तब तक अभी सन्नारियों की गाँड में लौड़े अपना स्थान बना चुके थे और धक्कों की प्रतियोगिता आरम्भ हो चुकी थी.

********

“वाह! क्या दृश्य है! काश अगर उस पलंग के ऊपर भी कैमरा होता तो और भी अच्छा होता! लोकेश से कहूँगी मैं.” मधुजी ने टीवी पर दिख रही गाँड मारो प्रतियोगिता पर अपने विचार रखे.

“सच कह रही है मधु, और मुझे तो ये देखकर उस समय की स्मृति हो रही है जब मैं स्मिता की आयु की थी. अपने पति और बेटों से चुदवाने का वो सुख आज भी नहीं भूलता.” रजनी ने आह भरी.

“अरे कौन सी हम अभी कम हैं? देख कैसे मोटे लम्बे वाले इन लड़कों से चुदवा रही हैं अब भी. हाँ, पहले जैसी शक्ति नहीं है, पर इनकी चुदाई में पूरा साथ देती हैं अभी भी, क्यों बच्चों?”

“जी मैम,”” “जी दादी जी” के साथ उन युवा लड़कों ने उनकी बात पर सहमति जताई.

उन सबका ध्यान अब टीवी पर ही था. लड़कों के लौड़े अंगड़ाई लेने लगे थे, पर उन्हें पता था कि अभी उनकी सेवा के आदेश में कुछ देर है.

*********

“आह!, वाह, ऊई माँ!” महिलाओं के स्वरों के बीच पुरुषों के “हम्म्फ उफ्फ आह” मिलकर नया संगीत बना रहे थे. वर्षा और मोहन की चुदाई में एक अधीरता थी. मोहन वर्षा की गाँड पूरी शक्ति के साथ मार रहा था जैसी इच्छा वर्षा ने की थी, और मेहुल तो इसमें पारंगत था तो सुलभा की चीखें निकलने लगी थीं, हालाँकि अब तक वो उस सीमा तक नहीं पहुंची थीं जिसने इस मिलन में योगदान किया था. पवन, समीर और विक्रम श्रेया, महक और अंजलि की गाँड अपनी विशिष्ट शैली में मार रहे थे जिसमे स्फूर्ति और कोमलता का संतुलित मिश्रण था. श्रेया, महक और अंजलि इसका आनंद उठाते हुए अनुभवी पुरुषों के सान्निध्य का लाभ ले रही थीं. और स्मिता तो जयंत के लंड को अपनी गाँड में चलते हुए राहुल के लंड को चूसते हुए स्वर्ग का अनुभव कर रही थी.

कुछ देर समान्य, कुछ देर तीव्र चुदाई का कार्यक्रम चल रहा था. अपने पौरुष की छाप छोड़ने की कोई लालसा नहीं थी, बल्कि अपने साथी की संतुष्टि ही एकमात्र लक्ष्य थी. और उनके इस परिश्रम का फल प्राप्त करने वाली स्त्रियाँ भी अपनी गाँड को कभी ढीला तो कभी संकुचित करते हुए अपने पुरुष साथियों के आनंद को बढ़ाने का प्रयास कर रही थीं.

आसन बदले गए पर गाँड मारने का कार्यक्रम निरंतर चलता रहा. बस स्मिता ने एक परिवर्तन किया. उसने जयंत को लिटाया और अपनी चूत में उसके लंड को लेकर राहुल को गाँड मारने का न्योता दिया. और जब राहुल के लंड ने जयंत के साथ उसकी चुदाई आरम्भ की तो स्मिता स्वर्ग के साक्षात दर्शन करने में सफल हुई. जयंत और राहुल की जोड़ी वर्षा, सुलभा, अंजलि और कुसुम को ये सुख कई बार प्रदान कर चुके थे. उनका ऐसा अनूठा तालमेल था कि स्मिता के आनंद में कई गुना वृद्धि हो गई. और उसकी चीखें उस कमरे में अपने सुख की पराकाष्ठा की घोषणा करने लगीं. नायक परिवार में ये सामान्य ध्वनि थी, पर शेट्टियों ने उसे इतना मुखर होते हुए कम ही सुना था.

कई मिनटों तक इस प्रकार से रण चलता रहा. भिन्न भिन्न आसनों में गाँड मारने का ये प्रकरण चलता रहा. कुछ बार महिलाएं ऊपर चढ़कर गाँड मरवाते हुए दिखाई पड़ीं तो कुछ बार गोद में बैठकर. स्मिता भी अनेक आसनों में अपनी चूत और गाँड में जयंत और राहुल के लौड़े बदल बदल कर चुदवाती रही. अंततः इसका समापन होना ही था. और एक एक करके सभी झड़ते गए और एक दूसरे के पास लेट गए. हाँफते हुए पुरुष और थरथराती हुई महिलाएं अपनी साँसे संभालते रहे. कुछ देर यूँ ही लेटे रहने के बाद सब उठकर खड़े हुए और बाथरूम का उपयोग करने के लिए चले गए.

उसके बाद वहाँ उपस्थित सोफे पर बैठ गए. कुछ समय सुस्ताने के बाद सबने स्वयं अपनी रूचि का पेग बनाया. कुछ ने बियर ली तो महिलाओं ने वाइन चुनी. कुछ देर की शांति के बाद समीर ने ही चुप्पी तोड़ी.

“समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूँ. इतने वर्षों से हम पड़ोसी हैं और अचानक एक ही सप्ताह में इस प्रकार से सम्भोग में लिप्त हो गए हैं. दोनों परिवारों में ये रहस्य गुप्त रहा ये एक अचम्भा ही है.”

“हाँ. उस रात अगर मेरी पत्नी इतना न चीखती, तो आज भी ये राज ही रहता.” पवन ने हंसकर कहा.

“आप दोनों ने उस दिन जितनी निर्ममता दिखाई थी कोई भी होती यूँ ही चीखती. बड़े आये मुझे दोष देने वाले!” सुलभा ने मुँह बनाकर बोला।

“अरे तुझे कौन दोष दे रहा है. तुझे तो आभार दिखा रहे हैं. देख हममें सो किसी को भी इस राज के खुलने का दुःख है. सब तेरे ऋणी हैं. क्यों मैं सही कह रहा हूँ न?” पवन के पूछने पर सबने सहमति सुलभा का चेहरा खिल उठा.

समीर अब गंभीर हो गया.

“अगर मेरा संदेह सही है तो राणा परिवार भी हमारी जीवन शैली अपनाता है? अन्यथा महक का विवाह असीम से कैसे तय हुआ?”

विक्रम और स्मिता ने एक दूसरे को देख.

विक्रम: “हाँ. पर इस विषय में हम कल बात करेंगे. अभी हम इस समूह तक ही सीमित रहेंगे.”

श्रेया: “जी, अंकल. पापा जी ठीक कह रहे हैं. वैसे मेरे परिवार में भी यही चलन है. पर इसे कल के लिए रहने दीजिये.”

पवन और समीर ने एक दूसरे को देखा और समझ गए कि कल उनकी शंकाओं का निवारण हो जायेगा. बात को अधिक न खींचते हुए समीर ने वर्षा को देखा.

“अब क्या प्लान है?”

वर्षा ने स्मिता को देखा और फिर पुरुषों की पर्चियों का गिलास और महिलाओं की कटोरी आगे कर दी.

“ये.”

सबके चेहरों पर मुस्कुराहट आ गई. वर्षा आगे बढ़ी और उसने कटोरी में से एक पर्ची निकाली और फिर दूसरे हाथ से गिलास में से एक. उन्हें खोला और चुप रही. सबके ह्रदय धड़क रहे थे. फिर उसने पुरुष वाली पर्ची लौटाई और दूसरी निकाली.

सुलभा और विक्रम.

सबने इसका स्वागत किया और विक्रम जाकर सुलभा के पास बैठ गया. पर सुलभा खड़ी हो गई और उसने जाकर अगली दो पर्चियाँ निकालीं.

श्रेया और राहुल ये कहकर वो अपने स्थान पर जा बैठी और श्रेया ने आकर अगली पर्चियाँ निकालीं.

स्मिता और पवन. स्मिता उठी और उसने अगली पर्चियाँ निकालीं.

अंजलि और मोहन। अंजलि ने अगली पर्ची निकाली।

महक और जयंत. अब बिना कहे ही अगला जोड़ा बन गया था.

वर्षा और मेहुल. समीर छूट गया था और अब उसे किस जोड़े के साथ जाना था ये निर्णय लेना था.

उसने श्रेया और स्मिता को देखा. फिर सोचा कि स्मिता पहले ही दुहरी चुदाई का आनंद उठा चुकी है और श्रेया के सौंदर्य ने उसका निर्णय सरल कर दिया.

श्रेया और राहुल, उसने घोषणा की और उनकी ओर चल दिया.

स्मिता खड़ी हुई और बोली.

“इस बार कोई बंधन नहीं है. जिसको जैसे मन चाहे वैसे चुदाई करे. जितनी देर तक चाहे तब तक चुदाई करे. ये आज रात्रि का अंतिम सत्र है. इसके बाद हम सोने जायेंगे. और यहाँ भी जो जिसके साथ चाहे जा सकता है. किसी को कोई आपत्ति?”

फिर उसने पुरुषों को सम्बोधित किया, “आप जिसके साथ जाना चाहें उसका नाम अपने नाम की पर्ची पर अभी लिख दीजिये. मैं, वर्षा और सुलभा देखेंगी कि कोई छूट न जाये. कहीं ऐसा न हो कि सारे वोट श्रेया, महक और अंजलि को ही मिल जाएँ और हम तीनों रात भर बस इनकी चुदाई की चीखें ही सुनते रहें.”

सब हंस पड़े पर अपनी नाम की पर्ची पर नाम लिख दिए. वर्षा, सुलभा और स्मिता ने एक ओर बैठकर उनका सत्यापन किया और कुछ परिवर्तन भी किये. उनका अनुमान सही था. तीनों युवतियों को अधिक वोट मिले थे जिन्हें उनकी माँ या सास को हस्तांतरित कर दिया गया. तीनों ये करते हुए खिलखिला रही थीं. एक वोट सुलभा को हस्तांतरित किया और फिर सूची बंद कर दी गई.

लौटने पर सबकी आँखें उनकी ओर ही थीं.

“पहले अब का खेल खेलते हैं. उसके बाद पर्ची खोलेंगे. ओके?” वर्षा ने उत्सुक दर्शकों को बताया.

सारे जोड़े अब अपने साथी के साथ सोफे पर ही बैठे रहे. अब कोई शीघ्रता नहीं थी. जिसका जब मन करना था तब वो जाकर चुदाई कर सकता था. एक बहुत ही आत्मीय वातावरण था.

सुलभा ने पहल की और वो विक्रम के सामने बैठी और उसके लंड को कुछ देर सहलाने के बाद चूसने लगी. श्रेया राहुल और समीर के लौड़े सहला रही थी और वो दोनों उसकी चुचियाँ दबा रहे थे. समीर की ऊँगली भी श्रेया की चूत से खेल रही थी. स्मिता ने पवन के लंड को कुछ देर तक सहलाया और फिर वहीँ झुककर उसे मुँह में ले लिया. अंजलि ने मोहन के कान में कुछ कहा जिसे सुनकर उसका लंड तन गया. महक जयंत के साथ उठी और गोल पलंग पर चली गई जहाँ उन दोनों ने बिना किसी अवरोध चुदाई आरम्भ कर दी. वर्षा मेहुल के लंड से अपने दामाद के लंड की तुलना कर रही थी और उसे अपनी गाँड में लेकर अपनी इच्छा पूरी करने का मन बना चुकी थी.

अंजलि मोहन को लेकर जब पलंग पर पहुंची तब भी मोहन के कानों में अंजलि की बात गूंज रही थी. “अगर अपने मुझे अवसर दिया होता तो मैं आपकी पत्नी बनने की प्रबल इच्छा रखती थी. पर अब राहुल मुझे तन मन से जीत चुके हैं. आज मैं अपने उस स्वप्न को पूरा करना चाहती हूँ, केवल एक बार. पर अब मेरा सब कुछ राहुल का ही है. आप समझ रहे हैं न?”

मोहन को एक बार समुदाय से जुड़ने की हानि का अनुमान हुआ पर श्रेया किसी भी तुलना में अंजलि से कम न थी. और उसने भी इसे एक बार के संसर्ग को मान कर समाप्त किया.

धीरे धीरे जोड़े पलंग पर चले गए और विभिन्न आसनों में रात्रि की सामूहिक चुदाई का ये अंतिम चरण भी आरम्भ हो गया.

************

वहीँ मधुजी के कमरे में भी चुदाई का अंतिम चरण आरम्भ हो गया था. मधुजी और रजनी दोनों की चूत और गाँड में लौड़े थे और एक लंड उनके मुँह में कुछ समय के लिए आता और चला जाता. दोनों की चुदाई करने वाले लड़के बदलते रहे और वो वरिष्ठ और वयोवृद्ध महिलाओं ने उनसे चुदवाने में कोई कमी न की. उनके मुँह, चूत और गाँड में वीर्य भरता तो वो उसे अपनी सखी से बाँट लेतीं। चूत और गाँड को उनकी सखी चूस कर खाली करती और दोनों उसे मिल बाँट कर पी लेतीं। उनकी चुदवाने की सहनशक्ति अपार थी. जब पाँचों लड़के ध्वस्त हो गए तब भी उन दोनों ने एक दूसरे की चूत को चाट और चूस कर ही विश्राम लिया.

अब वो लेटी हुई थीं. मधुजी ने समुदाय के नियमों में कुछ वृद्धि करने का निर्णय लिया. प्रबंधन समिति में इन पर विचार करने के पश्चात इस माह के मिलन में इसकी घोषणा की जाएगी. उन्हें विश्वास थे कि उनके सुझाव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया जायेगा.

***********

अगले दिन सुबह आठ बजे के लगभग धीरे धीरे एक एक कमरा खुला और उनसे सब बाहर निकलने लगे. सब हल्के वस्त्र पहने हुए थे. मोहन सुलभा का हाथ थामे हुए था. श्रेया जयंत के साथ बाहर निकली. कुछ समय में समीर और स्मिता हँसते हुए आये और अंजलि मेहुल की बाँह पकड़े हुए थी. महक के दोनों ओर पिता पुत्र पवन और राहुल थे और महक का चेहरा खिला हुआ था. विक्रम अपनी बेटी को संतुष्ट देखकर वर्षा के साथ बैठक में आ गया. सब एक ओर बैठे और सुबह का नाश्ते पर जाने की योजना बनी.

अपने कमरों में जाकर सबने उचित वस्त्र पहने और रेस्ट्राँ में चले गए. वैसे आज उनका दोपहर का भोजन रिसोर्ट के स्वामी लोकेश की माता जी मधुजी के साथ था. वहाँ वो मिलीं और उन्होंने उन्हें फिर आमंत्रित किया. उनके साथ एक और वृद्धा थी जिसका परिचय मधुजी ने रजनी नाम से कराया. नाश्ता करने के बाद सब अपने आवास में लौटे.

पवन और समीर में एक मूक संकेत हुआ. जब सब सामान्य रूप से बैठ गए तो पवन ने बोलना आरम्भ किया.

“मैं गाँव का रहने वाला हूँ और सीधी बात करता हूँ.” उसने चारों ओर देखा.

“अब आप मुझे बताइये कि हम सब को यहाँ किस उद्देश्य से आमंत्रित किया था. अगर दो परिवारों को ही मिलाना था तो हमारे घर ही इतने बड़े हैं कि यहाँ आने का औचित्य नहीं था. अन्य अतिथियों को मिलकर भी यही लगा कि ये रिसोर्ट किसी विशेष प्रयोजन के लिए बनाया गया है. क्या आप किसी संस्था या समाज का हिस्सा हैं जो हमारी जीवन शैली को अपनाया हुआ है? और क्या आप चाहते हैं कि हम भी उसमें जुड़ें?”

कुछ समय के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया. अचानक स्मिता का फोन बजा और उसने देखा कि मधुजी का कॉल है. उसने उठाया और मधुजी ने कहा, “बता दो, और नियम भी बता दो कि इसे पूर्ण रूप से गुप्त रखना है.”

“जी”

स्मिता ने विक्रम को देखा और कहा, “मधुजी का निर्देश है कि इन्हें सब बता दिया जाये.” फिर वर्षा को देखकर बोली, “पर आपको ये वचन देना होगा कि इसे पूर्णतया गुप्त रखेंगी. इसी में हम सबको भलाई है.”

वर्षा ने वचन दिया और सुलभा ने भी उसका साथ दिया. विक्रम ने बताना आरम्भ किया. लगभग आधे घण्टे तक वो समुदाय के नियम, संगठन इत्यादि के विषय में बताता रहा.

“परन्तु, इसमें कौन कौन है, ये मैं नहीं बता सकता. इसका निर्णय समिति ही करेगी या आपको आपके उद्घाटन के समय ही पता चलेगा.”

कुछ देर की शांति बाद विक्रम ने पूछा, “आपका क्या विचार है, समीर और वर्षा?”

समीर और वर्षा ने कुछ देर विचार किया और अपने परिवार के सदस्यों से संकेत में पूछा. सबकी सहमति लग रही थी.

“हम जुड़ना चाहेंगे.”

“वेरी गुड़. ग्रेट न्यूज़.” स्मिता ने कहा.

“पर एक बात और है जो आपको बताना आवश्यक है.” वर्षा ने काँपते स्वर में कहा.

“क्या?” स्मिता ने पूछा.

“हमारे परिवार में हमारे सिवाय भी चार और सदस्य हैं. संबंधी नहीं हैं, पर उन्हें हम परिवार ही मानते हैं.”

“कौन?”

“कुसुम, संतोष, काम्या और कमलेश.”

“ओह!” श्रेया के मुँह से निकला, “क्या वो भी?”

“हाँ.”

स्मिता कुछ देर तक चिंतन करती रही. उन्हें तत्काल रूप से तो नहीं जोड़ सकते, और सम्भवतः बाद में भी नहीं. पर उनके रहने से आपकी सदस्यता बाधित नहीं होना चाहिए. वैसे इस विषय में भोजन के समय मधुजी से भी पूछ लेंगे.”

“ठीक है.”

भोजन के समय मधुजी ने उनका समुदाय में स्वागत किया। रजनी ने भी उनके निर्णय पर उन्हें बधाई दी. कुसुम के परिवार के विषय में जो स्मिता ने कहा था उसे ही माना गया. पर एक वर्ष के समापन पर इस पर पुनर्विचार करने का आश्वासन भी दिया गया. इस बीच मेहुल कुछ समय के लिए सिद्धार्थ, रवि और विलास से मिल लिया. उसने सिद्धार्थ से ढाँपे शब्दों में उसके लौड़े के आकर के विषय में पूछा और उसका नंबर लिया और कहा कि उसके पास एक प्रस्ताव है जिसके विषय में वो घर लौटकर बात करेंगे.

इसके बाद सब अपने आवास पर लौट गए. अब उनके मन में एक उन्मुक्तता थी. और सबसे बड़ी बात.

अभी रिसोर्ट में दो दिन शेष थे.

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क्रमशः

1402400
 
अध्याय ६०: दिंची क्लब के नए पंछी -

सबीना:

अगले दिन सुबह जब सचिन की आँख खुली तो वो बिस्तर पर अकेला ही था. वो उठा और बाथरूम गया और नित्य कर्म निपटा कर बाहर निकला तो देखा कि सबीना रसोई में थी. उसके पीछे जाकर उसकी गर्दन चूमकर उसे को बाँहों में भर लिया।

“रुक जाओ, नहीं तो चाय मेरे ऊपर गिर जाएगी.”

सचिन ने उसे छोड़ा और सोफे पर बैठ गया. ये सम्भवतः उसका इस घर में अंतिम दिन था. हालाँकि सना को चोदने के लिए उसे आना होगा. पर सबीना के साथ ये अंतिम दिन था. सबीना को ये पता था और वो रसोई में अपने आँसू छुपाने का प्रयास कर रही थी. सचिन की बात सही थी और क्लब के नियम भी. इस प्रकार प्रेम में पड़ कर वो अपना जीवन नष्ट कर सकती थी. उसके पति और अब्बू ने उसे क्लब जाने की अनुमति इसीलिए दी थी. पर अगर वो किसी एक व्यक्ति का नाम लेती तो बहुत समस्या हो जाती.

मन पर संयम रखकर वो चाय और अल्पाहार लेकर सचिन के पास बैठ गई. दोनों बिना कुछ कहे चाय नाश्ता करते रहे.

“अब आगे क्या है?” सबीना ने काँपते स्वर में पूछा.

“कल मैं आपको क्लब ले चलूँगा और आपको तीन दिन वहीं रहना होगा. पहले आपको राशि मैडम से मिलना होगा जो आपको नियम इत्यादि से परिचित करवाएंगी. उसके बाद मेरे बॉस आपका इंटरव्यू लेंगे. ये आपकी चुदाई की क्षमता और सीमाओं की परीक्षा होगी. जैसा मैंने कहा है, आपके इच्छाओं की पूर्ति ही हमारा ध्येय है. पर एक बात मैं अभी बता देता हूँ. इन तीन दिनों में अधिकतर आपको हमारी आज्ञा के अनुसार ही चलना होगा. अगर कोई कर्म आपको उचित न लगे तो बताइयेगा. कोई भी कृत्य आपकी इच्छा के विरुद्ध नहीं होगा.”

“मुझे कुछ होगा तो नहीं” सबीना ने डरते हुए पूछा.

“बिलकुल भी नहीं! ये उस प्रकार का क्लब नहीं है. ये विशुद्ध चुदाई क्लब है. किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होती.”

“तुम रहोगे न?”

“मैं पहले दिन रुकूँगा। पर अगले दो दिन आप रहेंगी. चिंता न करो राशि मैडम आपका पूरा ध्यान रखेंगी.”

“तुम रहोगे तो मुझे कोई डर नहीं है.”

“अब मुझे चलना होगा. कल नौ बजे आऊंगा आपको लेने. अपना ध्यान रखना. वैसे आपकी अम्मी और भाभी कब आ रहे हैं?”

“पाँच दिन बाद. नूर भी आ रहा है. मैंने तो निगार से कहा है कि वो भी मेरे साथ रुके. या मैं अम्मी और उसके घर चली जाऊँगी।”

“मेरी मानें तो उनके घर जाइये. मन भी लगा रहेगा साथ रहने से.”

“फिर सना की चुदाई कैसे करोगे?”

“उसका प्रबंध यहाँ कर लेंगे. अब चलता हूँ.” सचिन भरे मन से उठा.

सबीना उठी और उसके सीने से चिपक गई. दोनों यूँ ही खड़े रहे फिर सचिन ने उसके होंठों को चूमा और उसे हटाते हुए उसे देखकर बोला, “ऐसा किया तो जा सकूँगा और सब सत्यानाश हो जायेगा.”

फिर वो पलटा और तीव्र गति से घर से निकल गया. दोनों की आँखों में आँसू थे. अब उन्हें कल ही मिलना था.

***********

दिंची क्लब:

सचिन वहाँ से निकल कर सीधा क्लब पहुँचा। वहाँ राशि थी और कुछ देर में पार्थ, शोनाली और रूचि भी आ गए. इस माह की पार्टी के विषय में गहन चर्चा हुई. पार्थ और शोनाली ने बताया कि अस्थाई रोमियो के लिए उनके पास कुछ नाम आ चुके थे. सचिन ने नूर का नाम सुझाया और बताया कि वो अभी दुबई में हैं पर पांच दिन बाद लौट रहा है. उसके नाम पर निर्णय बाद में ही करना होगा, सबीना की सदस्यता की पुष्टि होने पर. राशि ने अस्थाई रोमियो की परीक्षा करने के लिए एक सूची बनाई. इस में एक ही त्रुटि थी, उनका सामूहिक चुदाई का परीक्षण नहीं किया जा सकता था. इस पर बाद में विचार करने का निर्णय लिया गया.

इसके बाद चारों नई सदस्याओं के विषय में बात हुई. राशि का तीन दिनों का परिचय का सूत्र अधिक अनुभवी महिलाओं के लिए उचित था, परन्तु सबके लिए सार्थक नहीं हो सकता था.

सबीना कल आने वाली थी. अमीना बी और निगार अगले सप्ताह से पहले आने की संभावना नहीं थी. श्रीमती राखी गुप्ता अवश्य इस बीच में आ सकती थीं और इसके लिए शोनाली ने उनसे बात भी कर ली थी. तो सबीना के जाने के पश्चात राखी को निमंत्रण दिया जा सकता था. शोनाली ने उसी समय राखी को फोन लगाया और राखी ने उसे सहमति दे दी. शोनाली ने उन्हें कुछ बातें बताईं फिर पार्थ की देखकर मुस्कुरा दी.

“क्या हुआ, बुआ?”

“कुछ नहीं. राखी बोल रही थी कि जो सुना है वो सच होना चाहिए नहीं तो काट के साथ ले जाएगी!”

“ओह! तब तो सचिन को ही अवसर देते हैं.” पार्थ ने कहा तो सब ठहाका मार के हंस पड़े.

“वैसे जिनसे वो अभी चुदवाती हैं, मुझे उनके लंड कटने का डर है. हमारे क्लब के जैसे लौड़े उन्हें इस नगर में तो मिलने से रहे.”

“ऐसा नहीं है बुआ. अब देखो न, अस्थाई के लिए ही इतने नाम आये हैं. आपको क्या लगता है कि और ऐसे लड़के नहीं होंगे?”

“हाँ, ये भी सच है.”

फिर सचिन ने सबीना की कुंठाओं और रुचियों के विषय में बताया। सचिन ने सबीना की विभिन्न क्रीड़ाओं के प्रति क्या प्रतिक्रिया रही थी. शोनाली ने फिर एक सुझाव दिया जिसे मान लिया गया. राशि ने इसमें कुछ और जोड़ा जिसे सुनकर सब भौंचक्के रह गए. शोनाली और पार्थ ने सभी रोमियो और सदस्याओं को राशि के विषय में बता दिया था तो राशि ने उचित प्रबंध करने का विश्वास दिलाया. इसके बाद राशि को छोड़कर सब अपने अपने अन्य कार्यों पर चले गए. शोनाली और पार्थ ने उनके पास भेजे हुए अस्थाई रोमियो को दिन और समय बताया.

*********

सबीना:

सचिन के जाने के बाद सबीना सो गई. रात भर की चुदाई ने उसे संतुष्टि तो दी थी, पर सोने का अवसर नहीं मिला था. चूत और गाँड को विश्राम चाहिए था. और सचिन के अनुसार अगले तीन दिन उसकी इतनी चुदाई होनी थी कि जीवन पर्यन्त नहीं भूली जानी थी. जब वो उठी तो लगभग एक बज गया था. उसने थोड़ा बहुत कुछ खाया फिर अपनी अम्मी को फोन लगाया.

अमीना ने फोन उठाया और माँ बेटी की सामान्य बातें होती रहीं. सबीना ने अमीना को दुबई से कुछ वस्तुएँ लाने के लिए कहा. अमीना ने बताया कि उसके अब्बू सलीम भी आने की योजना बना रहे हैं. इस पर सबीना ने उन्हें बोला कि वो उन्हें क्लब की पार्टी होने के बाद ही आने को बोलें अन्यथा उनके रहते अमीना तो क्लब नहीं जा पाएंगी. अमीना ने कुछ देर सोचा और फिर ऐसा ही करने का आश्वासन दिया. सबीना ने बताया कि अगले तीन दिन वो क्लब में ही रहेगी तो सम्भव है बात न हो पाए.

पर अमीना ने कहा कि ये ठीक नहीं है. तो सबीना ने सुबह और शाम फेसटाइम पर वीडियो कॉल करने का आश्वासन दिया. बात समाप्त करने के बाद उसने सचिन को फोन किया और अमीना की माँग बताई. सचिन ने कहा कि चूँकि फोन साथ रखने की सदस्याओं को अनुमति नहीं है, इसके बारे में वो राशि से बात करे. राशि अवश्य उसकी सहायता करेंगी. इसके बाद सबीना ब्यूटी पार्लर गई और शरीर के हर अंग से अनचाहे बाल निकलवा दिए. हर प्रकार के फेशियल इत्यादि करवाए और जब वो समाप्त हुए तो उसका पूरा शरीर चमक दमक रहा था. संतुष्ट होकर वो घर आ गई और फिर सना से कुछ देर बातें कीं और उसे नूर के लौटने के बारे में बताया तो वो उनके आने वाले दिन लौटने के लिए सहमत हो गई.

रात का भोजन करने के बाद, अगले तीन दिन क्या होना था इसकी कल्पना करते हुए सबीना शीघ्र सो गई.

***********

दिंची क्लब:

अगले दिन सुबह सचिन आया और सबीना के साथ हल्का नाश्ता करने के बाद उसे क्लब ले गया. वहाँ मंजुल ने उससे आवेदन भरवाया और दस हजार का चेक लिया। फिर वो सबीना को राशि के कार्यालय में ले गई जहाँ राशि ने उसका भरपूर स्वागत किया. कॉफी पीते हुए दोनों बड़ी सामान्य बातें करती रहीं. कुछ एक दूसरे के विषय में भी बताया. सबीना का राशि की आयु का अनुमान अमीना के निकट ही था. उसे इससे संतुष्टि हुई कि उसकी माँ अकेली नहीं होगी.

इसके बाद क्लब के नियम इत्यादि बताये. सबीना को ये समझाया गया कि क्लब की हर चुदाई का वीडियो बनता है जो एक गुप्त स्थान पर रखा जाता है. इसका तात्पर्य क्लब के कार्य कलापों की गोपनीयता बनाये रखना है. रोमियो की चुप्पी का अन्य कारण भी हैं जिसे सबीना को जानने की आवश्यकता नहीं है.

इसके बाद सबीना के आज के पूरे कार्यक्रम के बारे में बताया गया. पहले दो घण्टे पार्थ के साथ उसका साक्षात्कार था. इसमें उत्तीर्ण होने पर उसकी सदस्यता की पुष्टि होगी और शुल्क की भरपाई करनी होगी. एक घंटे के विश्राम के बाद, जिसमे कुछ जलपान भी होगा, उसका अगला चरण लगभग तीन घंटे का होगा. इसके लिए उन्होंने किसी विशेष अथिति को आमंत्रित किया है, इसी कारण यही समय उपलब्ध है. भोजन इसी कारण देर से होगा. इसके बाद उसे क्लब का टूर कराया जायेगा, फिर सात बजे से अन्य कार्यक्रम होंगे. रात्रि के भोजन का समय वो स्वयं तय कर सकती है.

इसके बाद उसे फिर बताया कि उसे हर आज्ञा का पालन करना होगा पर वो कोई भी क्रीड़ा अपनी इच्छा के विरुद्ध न करे, परन्तु जितना सम्भव हो अपनी सीमाएं जानने का प्रयास करे. इन तीन दिन वो किसी को कोई आज्ञा देने की स्थिति में नहीं होगी. पर उसके बाद हर रोमियो उसकी आज्ञा का पालन करेगा.

“तीन दिन हमारे, शेष सब तुम्हारे!” राशि ने उसका हाथ अपने हाथ में लेकर कहा. फिर अपने सामने के टीवी को ऑन किया और बताया कि वो दोपहर के सत्र से हर क्रीड़ा पर ध्यान देगी. अगर कहीं भी उसे लगेगा कि सबीना असुविधा में है, वो हस्तक्षेप करेगी.

“अब चलो, पार्थ तुम्हारी प्रतीक्षा में होगा.” राशि ने समय देखा और सबीना को लेकर पार्थ के कमरे में चल दी.

राशि सबीना के साथ कमरे में गई और फिर उसका चेहरा अपने हाथों में लिया.

“सबीना, तुम जाकर स्नान करो और वहाँ जो गाउन है उसे पहन लेना. पार्थ कुछ ही समय में आएगा. मैं तुम्हें विश्वास दिलाती हूँ कि तुम्हारा निर्णय तुम्हारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और उचित निर्णय है. तुम अब से हमारे इस परिवार का हिस्सा हो, जिसका उद्देश्य केवल तुम्हें सुख देना है. जो भी तुम्हें रुचिकर लगेगा तुम यहाँ उसको पा सकती हो. अब जाओ और आनंद लो.”

राशि के इन शब्दों ने सबीना के मन की शंका को दूर कर दिया.

“थैंक यू, मैडम.”

“सचिन के साथ तुम्हें जो आनंद मिला है, उससे तुम अनुमान लगा सकती हो कि जीवन में अब कितना सुख रहेगा. पार्थ इतना पारखी है कि तुम्हें ऐसा सुख देगा जो तुम्हें आज तक नहीं मिला होगा. तुम्हारे अतीत के बाद भी ये तीन दिन तुम्हें सदा स्मरण रहने वाले हैं. अब जाओ.”

राशि उसे बाथरूम तक छोड़कर चली गई. सबीना ने सुगंधित तेल मिलाकर स्नान किया और गाउन पहन लिया. सुगंधित तेल से अधिक उसकी चूत की सुगंध कमरे में फैली हुई थी. वो कुछ देर खड़ी रही फिर सोफे पर बैठ गई. सामने एक अल्बम रखी थी जो उसने उठाई और देखने लगी. ये राशि का सुझाव था. उसमें क्लब के सभी रोमियो अपने खड़े लौंड़ों के साथ चित्रित थे. उन्हें देखकर सबीना की गीली चूत और पानी छोड़ने लगी. जैसे ही उसने अंतिम पृष्ठ देखा कमरे का द्वार खुला और एक लम्बा चौड़ा अति सुंदर व्यक्तित्व का लड़का अंदर आया. अगर ये पार्थ है तो इससे तो मैं हर दिन चुदवा सकती हूँ.

वो लड़का आगे आया और सबीना के सामने खड़ा हो गया.

“हैल्लो सबीना जी. मेरा नाम पार्थ है और मैं इस क्लब का स्वामी हूँ. आज मैं आपकी क्लब की सदस्य्ता के लिए आवेदन का सम्पादन करने आया हूँ.”

“हैलो। मैं सबीना हूँ.” सबीना ने लड़खड़ाते स्वर में पूछा.

“जी, आप कुछ पीना चाहेंगी? सचिन ने बताया है तो क्या आप एक ड्रिंक लेना चाहेंगी?”

“हाँ.”

पार्थ ने दो पेग बनाये, पर इनका उद्देश्य सबीना के मन को शांत करना था. दोनों शांति से चुस्कियां लेते रहे और एक दूसरे के विषय में बताते रहे. पार्थ पूर्ण स्वामी नहीं था, इसमें दो और भागीदार थे. पर अधिकतर प्रबंधन पार्थ के ही हाथ में था. राशि अभी नई थीं, परन्तु अत्यंत कुशल थीं और क्लब में उन्नति करने के लिए संकल्पबद्ध थीं. पार्थ ने बताया कि उसे शाम को क्लब में घुमाया जायेगा जिससे कि वो क्लब की सुख-सुविधाओं का आकलन कर सके.

“वैसे सचिन के कहने मात्र से आपको मैं सदस्यता दे सकता हूँ. मुझे उसपर पूरा विश्वास है.” पार्थ ने सबीना की आँखों में झाकते हुए कहा, “पर उन आपकी इतनी प्रशंसा की है कि चखे बिना भी नहीं रह सकता. और इसका अधिकार तो मुझे है ही कि आपको क्लब में प्रवेश करने में सबसे पहले मैं ही वो व्यक्ति रहूं जिसके साथ आप सम्भोग करें.”

पार्थ की बातों ने वातावरण को सामान्य से गर्म कर दिया.

“हाँ, बनता तो है.” सबीना ने भी अब अपना आवरण हटाने का निर्णय लिया.

“गुड, क्योंकि चुदाई में कोई बंधन नहीं होना चाहिए.” ये कहकर पार्थ बाथरूम में गया और कुछ ही पलों में गाउन पहने हुए लौट आया. उसके बालों को देखकर पता लग रहा था कि उसने भी स्नान किया है.

पार्थ उसके सामने खड़ा हुआ और अपना हाथ बढ़ाया. सबीना उसके साथ खड़ी हुई तो पार्थ ने उसका गाउन उतार दिया. सचिन का वर्णन सही था. सबीना अत्यंत रूपवती और सुडौल थी. और चुदक्क्ड़ भी.

“सचिन ने जो आपके बारे में बताया था आप उससे भी अधिक सुंदर हो. आप मेरे क्लब में चार चाँद लगा देंगी.”

सबीना ने कुछ कहा नहीं पर उसका कल का ब्यूटी पार्लर जाना सफल हुआ था.

“आइये अब हमें समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए। आपका दूसरा सत्र लम्बा है.” सबीना के कंधे पर हाथ रखकर उसे घुटनों पर बैठा दिया. सबीना के सामने पार्थ का लंड झूल रहा था जो सचिन के लौड़े के लगभग ही था. और अगर क्लब के सभी लौंडों के लौड़े ऐसे थे तो उसकी तो चाँदी होने वाली थी. सबीना मुस्कुराई और पार्थ के लंड को निगल गई.

सबीना के लंड चूसने की कला अद्भुत थी. इतने वर्षों से जो वो अपने अब्बू के लंड को चूस कर सीखी थी. और फिर उसके पति और भाई ने उसे अभ्यास करने का असीम अवसर दिया. उसकी अम्मी और निगार ने भी उसे लंड चूसने के कई ढंग सिखाई थी. इसका लाभ सचिन उठा चुका था और आज पार्थ उसका लाभार्थी था. पार्थ उसकी इस कला का लोहा मान गया. कई भिन्न भिन्न ढंग से वहीँ बैठी हुई सबीना ने पार्थ के लंड को इस प्रकार चूसा कि उसे लगा कि उसकी बुआ और माँ को सबीना सीखना होगा. दस मिनट में ही पार्थ के लंड ने अपना पहला स्खलन सबीना के मुँह में छोड़ दिया जिसे सबीना ने निसंकोच पी लिया और एक बूँद भी बाहर न गिरने दी. पार्थ के साथ ये पहला अवसर था जब किसी स्त्री ने बिना एक बूँद गिराए हुए पूरा रस पी लिया था.

पार्थ का लंड अब भी तना हुआ था और सबीना उसे बहुत समय तक चाटती रही. उसे सच में वीर्य से प्रेम था. पार्थ ने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटाया और उसके पैरों को फैलाकर उसकी चूत चाटना आरम्भ कर दिया. सबीना अभी लंड चूसने के आनंद के शिखर से लौटी भी नहीं थी कि पार्थ के इस आक्रमण ने उसे फिर से आनंद के शिखर की ओर धकेल दिया. उसकी चूत जो पहले ही बह रही थी अब और भी अधिक मात्रा में रस छोड़ने लगी. पार्थ पूरी तन्मयता से सबीना की चूत चाटता रहा और उस रस का सेवन करता रहा. और ये क्रम तब तक चला जब तक कि सबीना की चूत से रस बहना बंद न हुआ. तब जाकर पार्थ ने अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच में से हटाया. सबीना इतनी ही देर में संतुष्टि की पराकाष्ठा पार कर चुकी थी. और अभी उसकी चुदाई होना शेष थी और वो जान गई कि क्लब से जुड़कर उसने जीवन का सबसे सार्थक निर्णय लिया था.

पार्थ उसके साथ लेट गया और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.

“सचिन ने सच कहा था.” दोनों के मुँह से एक साथ निकला और फिर दोनों हंसने लगे.

कुछ देर यूँ ही लेटने के बाद पार्थ उठा और दो और पेग बनाये. दोनों सोफे पर बैठ गए और पार्थ ने सबीना से उसकी इच्छाओं के विषय में फिर से पूछा.

“सचिन ने आपके मूत्र प्रेम के विषय में भी हमें बताया है. और ये भी बताया है कि आप क्लब में भी इसमें भाग लेने की इच्छुक हैं. क्या ये सही है? मैं आपसे सुनना चाहता हूँ ताकि कोई शंका न रहे.”

सबीना ने अपना सिर हिलाया, “हाँ मुझे इसमें अब बहुत आनंद आता है. सचिन ने पता नहीं आपको बताया है या नहीं पर मैं अपने बेटे नूर के साथ अब इसका आनंद लेना चाहूँगी।”

“सचिन ने मुझे बताया है निगार और आमिर के विषय में भी बताया है, तो आप खुलकर बात कर सकती हैं.”

“धन्यवाद. निगार और अम्मी ने नूर को भी मूत्र पीना सीखा दिया है और अब वो घर लौटकर मेरा मूत्र चखने के लिए आतुर है. और मैं उसका.”

“फिर सचिन की बोतलों का क्या करेंगी?” पार्थ ने हंसकर पूछा.

“वो विशेष है. क्या आप भी मुझे उसी राह पर ले जाना चाहते हो, पार्थ?”

“अभी नहीं.” पार्थ ने उत्तर दिया और सबीना के चेहरे पर छाए निराशा को पढ़ लिया.

अब तक उनका पेग समाप्त हो चुका था और सबीना की चूत अब लौड़े के लिए तड़प रही थी. वो पार्थ के सामने बैठी और उसके लंड को चूसने लगी. उसका संकेत था कि अब उसकी चूत की आग को बुझाने का समय आ चुका था. पार्थ ने उसे कुछ देर लंड चूसने दिया और फिर उसे खड़ा किया.

“आप जानती हो न कि आपकी चुदाई किसी दया भावना से नहीं की जाएगी. हमारे क्लब में महिलाएं चुदवाने के उद्देश्य से आती हैं और उन्हें वही प्राप्त होता है.”

“मैं भी निर्ममता से चुदने के लिए बैचेन हूँ. अब देर न करो और मेरी चूत की आग बुझा दो!” सबीना उसके लंड को छोड़कर खड़ी हुई और पलंग पर जाकर पसर गई.

“सुंदर, अति सुंदर!” पार्थ में धीरे से कहा और सबीना के चेहरे पर मुस्कुराहट फ़ैल गई. पार्थ ने अपने शक्तिशाली मोटे लंड को सबीना की गीली चूत पर रखा. वो जानता था कि सबीना मोटे लौड़े लेने की अभ्यस्त थी इसीलिए उसने अपने लंड को उसकी चूत पर दबाया और सुपाड़े के अंदर जाने के बाद लंड बाहर खींचा और एक लम्बे धक्के के साथ चूत में पूरा धकेल दिया.

“हाय अम्मी!” पूरी अपेक्षा होने के बाद भी पार्थ के लंड की शक्ति ने उसकी चीख निकाल दी.

“उन्हें भी चोदुँगा बस कुछ ही दिन रुकिए, पर आज तो आपकी बारी है.” पार्थ ने धीमी गति से धक्के लगते हुए कहा.

“ऊह ऊह!” सबीना के मुँह से बस इतना ही निकल पाया और पार्थ ने उसकी भीषण चुदाई आरम्भ कर दी. सबीना मिमियाती रह गई और पार्थ पूरी शक्ति के साथ उसकी चूत की माँ चोदता रहा. कई मिनट तक इस आसन में चोदने के बाद उसने सबीना को घोड़ी बनने की आज्ञा दी. सबीना हिलती कांपती हुई घोड़ी बन गई और पार्थ ने उसे फिर चोदना आरम्भ किया. इस आसन में वो अधिक गहराई तक चोद सकता था जिसका अनुभव सबीना को भी हो रहा था. उसकी चूत से पच्च पच्च की ध्वनि आ रही थी जो उसके अपने रस से बने झाग के रूप में बाहर बह रहा था.

पार्थ न जाने आज किस मनोदशा में था कि उसे थकान का आभास ही नहीं हो रहा था. वो एक मशीन के समान सबीना की चुदाई किये जा रहा था और सबीना इसमें कुछ आनंद तो कुछ कष्ट का अनुभव कर रही थी. पार्थ ने अपने लंड को कुछ देर की इस वीभत्स चुदाई के बाद बाहर निकाला और लेट गया.

“मेरे लंड पर चढ़िये!” उसने सबीना को कहा. सबीना बेचारी पहले ही इतनी काँप रही थी, पर उसने साहस जुटाकर पार्थ के लंड की सवारी कर ली.

“अब उछलो और मुझे चोदो!” पार्थ ने कहा तो सबीना उसके लंड पर उछलकूद करने लगी. पार्थ ने उसकी ताल को मापा और फिर अपने धक्के लगाने लगा. जब सबीना नीचे आती तो पार्थ ऊपर धक्का लगता. दोनों ओर से कार्यवाई होने के कारण अब पार्थ का फूला हुआ लौड़ा अब और अधिक चोट कर रहा था. जिस स्थान से सबीना ने नूर और सना को जन्मा था वहाँ आज पार्थ का लंड दस्तक दे रहा था. कई मिनटों की चुदाई के बाद अंततः सबीना उसके ऊपर ढह गई. अब उसमें शक्ति शेष न थी. पार्थ मुस्कुराया और सोचने लगा कि क्या सोच कर आई थी कि हम इससे हार जाएँगे!

कुछ और धक्के लगाने के बाद उसने सबीना को अपने ऊपर से हटाया. सबीना की आँखें बंद थीं और होंठ काँप रहे थे. सबीना की नीचे लिटाकर पार्थ फिर उस पर चढ़ गया और उसको चोदने लगा. कुछ देर तक चुदाई के बाद पार्थ के लंड ने अपना वीर्य सबीना की चूत में छोड़ दिया और वो भी सबीना के साथ लेट गया.

पार्थ ने उसके होंठों को चूमा तो सबीना ने आँखें खोलीं.

“मैं मरी नहीं क्या?”

“अभी नहीं. पर अब आप उठिये और मेरा लंड चूसकर साफ कीजिये.”

“तुम ही मेरे ऊपर चढ़कर कर दो, मेरी शक्ति नहीं है.”

पार्थ ने उसके सीने के पास जाकर अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और सबीना ने साफ किया.

“बहुत निर्दयी हो! मेरी माँ चोद दी.” फिर हंसने लगी और पार्थ भी उसके साथ हंस पड़ा.

अब विश्राम का समय था. और बातचीत का.

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क्रमशः

1408700
 
कैसे कैसे परिवार: Chapter 58 A is posted

अध्याय ५८ अ: दिंची क्लब के नए पंछी - १

ससुराल की नई दिशा: Chapter 57 is posted

अध्याय ५७: अगली पीढ़ी – २

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कैसे कैसे परिवार
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कैसे कैसे परिवार
: अध्याय ५८ ब: दिंची क्लब के नए पंछी - २

ससुराल की नई दिशा : अध्याय ५८
 
मित्रों,

“कैसे कैसे परिवार” के अब तक 397 पृष्ठ हुए हैं और १४ लाख २७ हजार व्यूज़ हुए हैं

अब तक इसे आगे के मैं ११००० शब्द लिख चुका हूँ.

“ससुराल की नई दिशा” के २३२ पृष्ठ हुए हैं और ६ लाख ८२ हजार व्यूज़ हुए हैं.

अगर मेरी कहानियों पर गतिविधि अच्छी रही तो मैं अपडेट देता रहूँगा। परन्तु इसका निर्धारण आपको करना है. अगर आप समर्थन करते रहेंगे तो आगे भी कहानियाँ चल सकती हैं.
 
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