Incest कैसे कैसे परिवार - Page 14 - SexBaba
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Incest कैसे कैसे परिवार

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अध्याय ६१: दिंची क्लब के नए पंछी -

सबीना:

पार्थ ने फिर दो पेग बनाये और सबीना को उसका पेग दिया. सबीना ने एक चुस्की ली ही थी कि पार्थ ने उसे आँख मारी.

“क्या हुआ?” सबीना ने पूछा.

“सचिन बता रहा था आपके पेग के विषय में.” पार्थ ने कहा.

“इस सचिन मादरचोद को तो मैं अच्छे से कुटूंगी जब मिलेगा.” सबीना हँसते हुए बोली.

फिर उसका चेहरा गंभीर हो गया. वो कुछ समय तक अपने ग्लास को देखती रही फिर एक घूँट में उसे समाप्त किया और पार्थ को ग्लास दे दिया.

“अब देखूँ तुम्हारे पानी के साथ कैसा स्वाद आता है.”

पार्थ ने कहा,”पहले टूंटी से असली स्वाद तो ले लो, नहीं तो समझ भी नहीं पड़ेगा.”

सबीना समझ गई कि पार्थ का संकेत किस ओर था. उसने कहा कि पेग तो बनाओ. पेग लेकर पार्थ आया तो सबीना खड़ी हुई थी और बाथरूम की ओर गाँड मटकाते हुए चल दी. पार्थ उसके पीछे गया और सबीना वहाँ जाकर नीचे बैठ गई और ग्लास अपने सामने रख लिया.

“अब चखाओ.” सबीना ने कहकर मुँह खोल दिया. उसके सुंदर दाँत चमक रहे थे.

पार्थ ने अपने लंड को पकड़ा और सबीना के खुले मुँह के सामने कर दिया. उसके लंड से धार निकली और सबीना के मुँह में समा गई. जब सबीना घूँट भरती तो मूत्र नीचे गिर जाता. पार्थ ने अपनी धार रोकी और सबीना से कहा कि ग्लास भरने वाला है, सबीना ने ग्लास हटाया और इस बार मुँह नहीं खोला बल्कि आँखें बंद करते हुए चेहरा ऊपर कर लिया. पार्थ ने उसके चेहरे पर अपनी धार छोड़ी और फिर नीचे को ओर ले गया. जब पार्थ ने मूतना बंद किया तब तक सबीना भीग चुकी थी. सबीना ने ग्लास उठाया और वहीँ बैठे हुए उसकी चुस्कियाँ लेती रही.

“स्वादिष्ट है. मुझे इसकी लत लगने का डर है. पर सच में इसमें अभूतपूर्व आनंद मिलता है.” सबीना ने अपना पेग समाप्त किया और फिर उठी और स्नान करने के लिए बढ़ गई. पार्थ लौटकर सोफे पर बैठ गया. उसे अब सबीना की क्लब में प्रविष्टि में कोई बाधा नहीं दिख रही थी. उसने आवेदन पर "Pass” लिखा और एक ओर रख दिया. सबीना की गाँड मारे बिना उसे दिखाने का कोई अर्थ न था. सबीना उसी समय कमरे में आई और इस बार अपना पेग बनाया और पार्थ के साथ बैठ गई.

“तुम मेरे इस व्यसन के बारे में क्या सोचते हो?” सबीना के स्वर में झिझक थी.

“सबकी अपनी रूचि है. मैं ये निर्णय नहीं लेता. क्लब का उद्देश्य आपकी इच्छाओं की पूर्ति है, आपके बारे में राय बनाना नहीं.” पार्थ ने उससे कहा, “मैं एक ऐसी महिला को जानता हूँ जिन्हें गाँड में से वीर्य सोखने और खाने में सुख मिलता है. पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है.” पार्थ ने अपनी माँ के विषय में उनका नाम बताये बिना कहा तो सबीना आश्वस्त हो गई.

“कुछ और महिलाएं हैं जो हमसे केवल गाँड ही मरवाती हैं. आज तक उनकी चूत में उनके पति के अतिरिक्त दूसरा लंड नहीं गया.”

“तो फिर उनका इंटरव्यू कैसे हुआ?”

“वो हमारे क्लब की प्राथमिक सदस्याएं थीं. तब तक नियम भी पूरे बने नहीं थे. इसीलिए. पर हमने कभी उन्हें नए नियम मानने के लिए भी बाध्य नहीं किया. फिर दो ऐसी सदस्याएँ भी हैं जो यहाँ केवल पार्टी के लिए आती हैं अन्यथा हमारे रोमियो ही एक हमारी शाखा में जाकर उनकी सेवा करते हैं. और उनके पति उनकी चुदाई देखने में आनंद लेते हैं.”

“ओह! आपकी होम सर्विस भी है?”

“हाँ. पर विशेष परिस्थितियों में ही.”

सबीना के ध्यान में उसकी ननद फातिमा आ गई, जिसका गाँडू पति भी अपनी पत्नी को अपने बेटों से चुदते देखकर मुठ मारता था या स्वयं गाँड मरवाने चला जाता था. पर उसने इसके विषय में सचिन से बात करने का निर्णय लिया. पर सम्भव है इस सुझाव से उसके अपनी ननद से संबंध सुधर जाएँ और उसका जीवन.

क्योंकि दूसरे सत्र का समय निकट था और सबीना की गाँड अब तक बजी नहीं थी तो पार्थ ने सबीना से कहा कि अब आइये, आगे का खेल खेलें. ये सुनकर सबीना की गाँड में फुलझड़ी छूट गई और वो खड़ी हुई.

सबीना: “क्या मेरी गाँड भी इतनी ही निर्ममता से मारोगे क्या?”

उसके स्वर में जो भाव था वो यही दर्शा रहा था कि पार्थ उसकी गाँड का भर्ता बना दे. कल पूरे दिन सबीना की गाँड में ऊँगली तक नहीं गई थी. अब वो चाहती थी कि आज इसका उपचार किया जाये.

पार्थ मुस्कुराया, “आप क्या चाहती हैं. मैं तो जैसे चाहता हूँ वैसे ही मारने वाला हूँ. क्या आपकी डर के मारे गाँड फट रही है?”

“गाँड फ़टे तेरी माँ की. मैं तो तेरे जैसे लौड़े गाँड में लेकर थूक देती हूँ.”

सबीना का ये उद्देश्य था कि पार्थ अपनी माँ का नाम सुनकर सचिन के समान दानवी रूप में आ जायेगा और उसकी गाँड के सारे तार खोल देगा. वो इसमें सफल भी हो गई, पार्थ के चेहरे के भाव देखकर वो समझ गई कि तीर ने लक्ष्य को भेद दिया था. पर पार्थ इतने बड़े क्लब का स्वामी यूँ न था. उसके चेहरे पर क्रोध बस पल भर के लिए दिखा. पर उसने मन में ठान लिया की सबीना इस कथन के लिए उससे क्षमा याचना करेगी, पर वो उसे क्षमा नहीं करेगा.

“वो देख लेंगे मैडम. आइये, अब चलिए.” उसने शांत स्वर में कहा पर सबीना की आत्मा कांप गई.

पार्थ के स्वर में जो भाव था उसे देखकर उसे अपने कथन पर खेद होने लगा. पर अब तीर निकल चुका था और इसका मूल्य उसकी गाँड चुकाने वाली थी. पहले पार्थ सामान्य रूप से सबीना की गाँड पलंग पर ही मारने का इच्छुक था. पर अब उसने अन्य ही मन्तव्य बना लिया. वो सबीना की ओर देखकर धूर्तता से मुस्कुराया.

“हम एक नए ढँग से गाँड मारेंगे. अब बिस्तर पर आधी ऊपर होंगी और आधी घुटनों के बल नीचे. चिंता न करें आपके घुटनों के नीचे तकिया लगा दूँगा नहीं तो आपको कष्ट होगा।”

सबीना समझ गई कि पार्थ खड़े होकर उसकी गाँड मारेगा और इस आसन में वो अधिक बल प्रयोग कर सकेगा. अब उसकी गाँड में खुजली ने जलन को स्थान दे दिया. सबीना को विश्वास था कि वो इस चुदाई के बाद चलने योग्य नहीं बचेगी. पर अब ओखली में सिर दे ही दिया था और मूसल विनाश के लिए मुँह फनफनाये उसके सामने खड़ा था. सच में इस समय पार्थ का लौड़ा बहुत भयावह लग रहा था.

उस पर उसकी कुटिल मुस्कान उसे खलनायक बना रही थी. पार्थ ने सबीना के लिए नीचे तकिया लगाया और उसका हाथ पकड़ कर उस पर झुका दिया. सबीना को ऐसा लग रहा था कि कसाई बकरी को काटने के लिए ले जा रहा हो. उसके पैर काँपने लगे थे. उसे अपनी जीभ पर क्रोध आया जिसने व्यर्थ में ही पार्थ को छेड़कर अपनी दुर्दशा को आमंत्रण दिया था.

एक तकिये से काम न होने के कारण एक और तकिया लगाया और अब सबीना की गाँड पलंग के कोने पर थी. सबीना ने चेहरा ऊपर रखने के लिए हाथों का सहारा लिया तो पार्थ ने उन्हें हटाकर एक ओर कर दिए और एक अन्य तकिया उसके सिर के नीचे लगा दिया. जब सबीना उचित स्थिति में स्थापित हो गई तो पार्थ ने दृश्य का अवलोकन किया. बहुत सुंदर दृश्य था. सबीना ने कल जो ब्यूटी पार्लर में खर्चा किया था उसके कारण उसकी गाँड भी चिकनी थी. पार्थ ने अपना हाथ उस पर फेरा तो सबीना को फिर बकरी और कसाई की तुलना मन में आई.

पार्थ एक ओर गया और सबीना ने अपनी गाँड को फैलते हुए अनुभव किया फिर उसमें कुछ ठण्डा तरल पदार्थ अंदर गिरा. सबीना ने सोचा कि चलो तेल लगा के मार रहा है, कम से कम इतनी तो दया की इसने मुझ पर. उसे ये समझ नहीं आया कि पार्थ अपनी ग्राहिका को पीड़ित नहीं करना चाहता था, न ही उसे क्लब छोड़ने के लिए बाध्य करने का इच्छुक था. सबीना की गाँड में पार्थ ने उँगलियों से तेल को अच्छे से फैलाया. जब उसे पूरी राह की चिकनाई का विश्वास हो गया तो वो हट गया. कुछ देर तक कोई ध्वनि न हुई क्योंकि पार्थ अपने लंड पर तेल लगा रहा था और सबीना श्वास रोके हुए लेटी थी.

सबीना ने पार्थ को उसके पीछे दोनों ओर पैर रखते हुए आभास किया. अब आहुति का समय आ चुका था. गाँड की दोनों गोलाइयों को पार्थ के हाथों से फैलाया जाने लगा तो सबीना ने अपनी गाँड ढ़ीली छोड़ दी क्योंकि अब उसके बचने की कोई आशा नहीं थी. क्या वो बचना भी चाहती थी, ये प्रश्न उसके मन में कौंधा ही था कि उसे अपनी गाँड पर पार्थ के लंड का दबाव अनुभव हुआ. उसकी गाँड ने सिकुड़ने का प्रयास किया पर अनुभवी सबीना ने उसे ढीला कर दिया. पक्क की हल्की ध्वनि के साथ पार्थ का सुपाड़ा उसकी गाँड में धँस गया. सबीना ने गाँड को ढीला ही रहने दिया और पार्थ अपनी यात्रा में आगे बढ़ता चला गया. आधे लंड के गाँड में जाने के बाद पार्थ रुक गया.

सबीना ने फिर अपनी गाँड को हाथों से फैलाकर उसमे और तेल के गिरने का आभास हुआ. पार्थ ने हल्के से लंड आगे पीछे करते हुए तेल को अंदर जाने में सहायता की. पार्थ ने अपने लंड को अंदर बाहर करना आरम्भ कर दिया. गति इतनी धीमी थी कि सबीना आश्वस्त हो गई कि उसकी गाँड फटेगी नहीं। पार्थ भी सबीना को इसी धोखे में रखना चाहता था क्योंकि उसकी माँ के अपमान का प्रतिशोध तो आवश्यक था, पर एक ओर माँ का अपमान था और दूसरी ओर व्यावसायिक नीति का सम्मान. इनके बीच में सामंजस्य रखते हुए ही उसे इस कार्य को पूर्ण करना था. धीमे धीमे गाँड मारते हुए पार्थ इसी उधेड़बुन में था.

मनुष्य का अचेतन मन भी एक उलझन है. जब हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में असमर्थ होते हैं तो अचेतन उसका समाधान स्वयं ढूँढ लेता है. और हम अनजाने में उस समाधान पर चल पड़ते हैं. पार्थ के साथ भी ऐसा ही हुआ. न सबीना ने कुछ कहा, न उसकी तंद्रा टूटी, पर उसने अपने हाथ आगे किये और सबीना के हाथों पर रख दिए. अब उसका शरीर आगे झुक गया था. और इस समय लंड पूर्ण रूप से अंदर था. पार्थ के शरीर को सामने सहारा मिलने से नई शक्ति मिली और उसने अपने धक्कों की गति को बढ़ाया.

और बढ़ाता ही चला गया. सबीना जो एक प्रकार से गाँड में धीमी चुदाई से आनंदित थी अब एक तीव्र चक्रवात में फँसा हुआ अनुभव करने लगी. उसके हाथ बंधे होने के कारण वो कुछ भी न कर सकती थी और पार्थ निर्दयता से उसकी गाँड में अपना लम्बा और मोटा लौड़ा तीव्र गति से अंदर बाहर कर रहा था. कुछ पलों की गाँड की चुदाई के बाद पार्थ ने गति कम की, फिर रुक कर लंड बाहर निकाला. उसने सबीना के हाथों को पकड़कर उसे घुटनों पर बिठाया.

“मेरा लंड चूसो!”

सबीना को जो विश्राम मिला था उसके आभार में उसे अपनी गाँड से निकले लंड को भी चूसने में कोई अड़चन नहीं हुई. चाटकर लंड को चूसने लगी पर पार्थ ने लंड मुँह से निकाल लिया.

“बस, इतना ही.”

उसे फिर से पलंग पर उसी आसन में अधलेटा किया और फिर से गाँड मारने में जुट गया. अब पार्थ ने यही शैली अपना ली. गाँड मारता, लंड चटवाता और फिर से गाँड मारने लगता. जब कई मिनट तक इस आसन में सबीना की गाँड मार चुका तो उसने आसन बदला और सबीना को पीठ के बल लिटा दिया और उसके पैरों को अपने सीने से लगा कर उसकी गाँड में लौड़ा पेलने लगा. सबीना इस आसन में कभी नहीं चुदी थी और इस आसन में पार्थ का लौड़ा और मोटा लग रहा था. गाँड मरवाने की अभ्यस्त सबीना अब थक चुकी थी. उसकी चूत ने अब रस छोड़ना बंद कर दिया था. पर पार्थ अबाध्य गति से उसकी गाँड मार रहा था.

पार्थ ने फिर एक दो और आसन बदले जिनका उपयोग सबीना ने कभी न किया था और कामसूत्र का ज्ञान उसे वैसे भी न था. आनंद के शिखर पर जाकर अब उसे नीचे आने में समय लगना था. पर इसके लिए जलस्राव का आयोजन पार्थ ने किया. अपने गाढ़े वीर्य से सबीना की गाँड को भरने के बाद ही पार्थ रुका. कुछ देर तक गाँड में लंड रखने के बाद बाहर निकाला और सबीना ने स्वयं ही आगे आकर उसके लंड को साफ कर दिया और चूसकर ठंडा किया.

“अब रुको.” पार्थ उठा और सबीना का ग्लास ले आया और गाँड के नीचे लगा दिया. सबीना ने गाँड में कुछ जोर लगाया और मल मिश्रित वीर्य गिलास में भर दिया. वो जानती थी कि पार्थ का उद्देश्य क्या था और वो आपत्ति नहीं करना चाहती थी. ये सब क्रीड़ाओं से सचिन उसे पहले ही अवगत करा चुका था. पार्थ ने जाकर उसके ग्लास में व्हिस्की डाली और वहीँ खड़े हुए उसमे मूत्र भी डाला.

“आपको सम्भवतः ये नया पेय रुचिकर लगे.”

“अगर तुम कहते हो तो मुझे विश्वास है कि मुझे भी लगेगा.” सबीना ने ऊँगली से पेय घुमाया और फिर सिप करते हुए पीने लगी.

“इसका स्वाद ही भिन्न है.” ये कहने के बाद सबीना ने कुछ देर में अपना पेग समाप्त किया और बाथरूम की ओर चल दी. बाथरूम के द्वार पर रुकी और पार्थ को देखकर उँगलियों से आने का संकेत किया. पार्थ उसके पीछे चल दिया. बाथरूम में पिछले कर्म को दोहराने के बाद जब सबीना ने स्नान करने के लिया कहा तो पार्थ ने उसे रोक दिया.

“इसकी आवश्यकता नहीं है. आप अपना गाउन पहन लीजिये. आपके अगले सत्र का समय हो चुका है. मैं आपको उसके विषय में अभी नहीं बताऊँगा पर आपको मैं किसी से मिलवाने जा रहा हूँ. उनका परिचय वहीँ दूँगा। वो भी क्लब की सम्मानित सदस्या हैं और अगले तीन घण्टे उन्होंने आपको देने की कृपा की है. आपको उनकी समस्त निर्देशों का पालन करना है. ये जान लीजिये कि ये चरण आपकी वर्तमान सीमा निर्धारित करने के लिए है. आप इससे आगे समय के साथ जा सकती हैं पर चाहें तो आज भी उसका आनंद ले सकती हैं.”

“आज आपको अधिकतर समय केवल दर्शक के रूप में ही निकालना होगा। अगर वो आपको सम्मिलित होने का निर्देश देंगी तो आपको जाना होगा. अगर आपको इन क्रीड़ाओं को देखने में आनंद आएगा तो यही सत्र कल आपके लिए आयोजित किया जायेगा.”

“अब आप गाउन पहनिए और मेरे साथ चलिए. आपकी इच्छा की अनुसार सचिन आपके साथ रहेगा परन्तु अगर उनकी आज्ञा हुई तो वो भी आपके साथ सम्मिलित हो सकता है. आप दोनों दो शरीर होंगे पर एक साथ ही हर कार्य में रहेंगे. ठीक है न, क्या आपको कोई आपत्ति है?”

“नहीं, पर बहुत कौतुहल में डाल दिया हैं तुमने.” सबीना ने गाउन पहनकर उसे बाँधा। पार्थ ने भी यही किया. फिर उसने कमरे का फोन उठाया और बताया कि वे आने वाले हैं. पार्थ ने उसके आवेदन को दिखाया और उसका क्लब में स्वागत किया. सबीना प्रसन्न हो गई. अब उसकी चुदाई में कोई कमी नहीं होगी. उसके बाद पार्थ ने पाँच मिनट तक प्रतीक्षा की और सबीना के साथ अगले सत्र के लिए चल पड़ा.

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क्रमशः

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अध्याय ६: दिंची क्लब के नए पंछी -

मंजुल और राशि एक स्थान पर खड़े हुए थे. मंजुल सबीना की चाल देखकर मुस्कुराई क्योंकि उसकी चाल में जो लचक थी, उससे सिद्ध होता था कि उसकी गाँड की भीषण चुदाई हुई थी. सबीना उसे देखकर मुस्कुराई और जब वो निकट पहुंची तो उसके शरीर से मूत्र की गंध सूँघ कर मंजुल कुछ पीछे हट गई. पर राशि तो प्रबंधक थी, उसने सबीना का हाथ पकड़ा.

“मुझे आशा है कि तुम्हें पूर्ण आनंद मिला होगा. तुम्हारी गंध बता रही है कि तुम हर प्रकार का सुख उठा चुकी हो. तुम्हारा दिंची क्लब में स्वागत है, तुम्हें यहाँ असीम सुख मिलेगा. अब जाओ अगले सत्र में तुम्हारी प्रतीक्षा हो रही है.” राशि ने सामने का द्वार खोला और सबीना को एक चुंबन दिया.

“ये मत भूलना कि जब चाहो तुम रुक सकती हो. तुम्हारी सदस्यता पुष्ट हो चुकी है. इसीलिए कोई बंधन नहीं है. ओके?”

“जी.”

और पार्थ के साथ वो उस कमरे में चली गई.

“क्या लगता है मैडम? क्या वो सफल होगी?”

“सौ प्रतिशत. मुझे कोई संदेह नहीं है. चलो अब देखें वहाँ हो क्या रहा है.”

कमरे की तीव्र गंध ने सबीना और पार्थ को रोक दिया. पर कुछ मिनटों में वे इसके अभ्यस्त हो गए और आगे बढ़े. सचिन आगे आया और उसने सबीना को थाम लिया. पार्थ ने उसकी सराहना की. ये कमरे के बाहर का एक छोटा कमरा था जहाँ से अंदर दिखाई नहीं दे रहा था.

“आइये. आपको अब कुछ अंदेशा हो गया होगा कि आप यहाँ किसलिए आई हैं. जो अपने वीडियो में देखा था उसका आज आप लाइव शो देखेंगी.” पार्थ ने उसे समझाया. सबीना भी कोई नौसिखिया नहीं थी. सचिन उसकी हर विकृति का पोषण करने का संकल्प लिए था. उसने सचिन की ओर देखा.

“ये ध्यान रहे कि आप मात्र दर्शक हैं, जब तक कि आपको बुलाया न जाये.” इसके बाद पार्थ और सबीना को बाहर रोककर उसने अंदर जाकर घोषणा की.

“वो आ गई हैं!”

और इसके साथ उसने पार्थ और सबीना को भी अंदर बुला लिया.

अंदर एक महिला बैठी हुई थी. वो बोली.

“आओ सबीना, मुझे तुम्हारे लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है और मुझे इसमें अत्यंत आनंद मिल रहा है.”

सबीना कम प्रकाश में उस महिला को देख रही थी. फिर कमरे के बल्ब जल उठे और सबीना उस महिला को देखकर चौंक गई. वो एक विदेशी महिला थी, एक अभिनेत्री जिसने कुछ फिल्मों में कार्य किया था. अधिक प्रसिद्धि तो नहीं पाई थी पर नगर के एक प्रसिद्ध व्यवसाई से कुछ वर्ष पहले विवाह किया था. अब दोनों पति पत्नी कुछ दिनों विदेश में रहते थे. उनके पति का व्यवसाय उनके आने के बाद कई गुना उन्नति कर चुका था और ये कहा जाता था कि उनकी उन्नति में रीटा का बड़ा योगदान था. उनके घर की पार्टियाँ विख्यात थीं, पर उनमें अधिकतर केवल विदेशी अतिथि ही रहते थे. आज रीटा पचपन वर्ष की आयु में भी उतनी ही सुंदर थी जितनी तीस वर्ष पहले.

“रीटा?”

“यस माई डियर.” रीटा ने उनके ही समान एक गाउन पहना हुआ था. पार्थ ने सबीना की ओर देखा.

“रीटा जी हमारे क्लब की विशिष्ट सदस्या हैं. इन्हें भी मूत्र क्रीड़ा में उतनी ही रूचि है जितनी सम्भवतः आपको, या आपसे कई गुना अधिक. और इस क्लब में हैं तो लम्बे मोटे लौंड़ों से चुदने में भी उतना ही आनंद आता है.”

“ओह याह, आई लव टू बी फक्ड एंड पिस्सड अपॉन. आई लव बिग बिग कॉक्स एंड पार्थ है देम हियर इन द क्लब।”

“तो क्या आपके घर की पार्टियों में भी आप!” सबीना ने अचरज से पूछा.

रीटा ने अट्ठास किया, “ओह याह, ऑल्वेज़. यू सी डियर सबीना वी फॉरेनर्स लव दिस टाइप ऑफ़ शिट. एंड दे गिव माई हस्बैंड ए लॉट ऑफ़ बिज़नेस फॉर फकिंग मी एंड मोर टू पिस ऑन मी.”

“मेरी हिंदी भी उतनी ही अच्छी है, माई लवली सबीना. हम अंग्रेजों को इन सब खेलों में बहुत आनंद आता है. और मुझे चोदने और मुझे अपना मूत्र पिलाने के पुरुस्कार में वो मेरे पति को और अधिक व्यापार देते हैं.”

फिर वो गंभीर हो गई. उसने अपने सामने रखे एक प्लास्टिक के टब की ओर संकेत किया. ये टब अधिकतर लोग अपने घरों में रखते हैं जिसे हवा से फुलाया जा सकता है.

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सबीना ने अब ध्यान दिया कि उस टब के पास में कुछ अधिक बड़े सोफे लगे हुए थे.

“ये अस्थाई है, राशि मेरे लिए आने वाली पार्टी से पहले एक उत्तम टब बनवा रही है, जिसमें चार लोग तक आ सकते हैं.” रीटा ने अपनी चूत सहलाते हुए कहा, “और सबका मूत भी. सोचो क्या आनंद आएगा. इस टब में से तो आधा छलक कर बाहर गिर जाता है.”

सचिन सबीना के भाव पढ़ने का प्रयास कर रहा था, पर उसे वहां आश्चर्य के अतिरिक्त कुछ न दिखा. उसने सोचा कि सम्भवतः सब ठीक होगा.

“कम हियर माई डियर एंड सिट हियर.” रीटा ने उसे अपने पास बुलाया. सबीना के बैठते ही उसने सबीना के चेहरे को अपने हाथों में लिया और एक गहरा चुंबन दिया. फिर उसका चेहरा चाटने लगी.

“हम्म्म, पार्थ तुम्हें अपना मूत्र पिलाकर लाया है न? आई लव इट.” पूरे चेहरे को चाटने के बाद रीटा ने अपना गाउन उतारा और टब में बैठ गई. सबीना के गाउन को एक ओर सरका कर उसकी चूत पर मुँह रखा और अपने दोनों हाथों से पार्थ और सचिन को संकेत दिया.

“सबीना डियर, प्लीज़ मुझे पिलाओ न अपना पानी!”

सबीना ने देखा कि पार्थ और सचिन भी नंगे हो गए थे. उसने अपनी चूत पर दबाव डाला और रीटा के मुँह में धार छोड़ दी. टब के दो ओर खड़े पार्थ और सचिन ने रीटा के ऊपर मूतना आरम्भ कर दिया. जब तीनों का जल समाप्त हुआ तो रीटा के बाल और पीठ भीगी हुई थी.

“पार्थ माई लव, शी इज़ वेरी वेरी टेस्टी.” फिर सबीना से पूछा, “इस खेल में मेरी सहभागी बनोगी?”

सबीना उस सुंदर विदेशी महिला को देखकर मुस्कुराई.

“यस, श्योर.”

“गुड़ गर्ल.”

पार्थ ने पूछा, “सो व्हाट इज़ योर प्लान रीटा मैडम? शी विल सिट एंड वाच. और ज्वाइन इफ यू वांट.”

“नो ज्वाइन, लेट हर वाच. आई विल कॉल हर व्हेन आई नीड हर.”

पार्थ ने कहा, “ओके, आई ऍम गोइंग नाउ एंड योर रोमियो विल कम इन ए फ्यू मिनिट्स.” पार्थ ने अपना गाउन पहना और बाहर चला गया. बाहर जाकर उसने दस बारह गहरी साँसे लीं तब जाकर उसके फेफड़ों से दुर्गंध दूर हुई. धंधा भी मनुष्य से क्या क्या करवाता है. ये सोचते हुए वो अपने कमरे में स्नान करने के लिए चला गया.

पार्थ के जाने के बाद रीटा फिर आकर सबीना के पास बैठ गई और उसे चूमने लगी. सबीना पहली बार अपने ही मूत्र का स्वाद ले रही थी. रीटा ने सचिन को एक ओर बैठने के लिए कहा और वो जाकर बैठ गया.

“स्वीटहार्ट, मेरे घर की पार्टियाँ भी मेरी चुदाई के ही लिए होती हैं. उनमें मेरे अतिथियों की साथिनें भी जुड़ती हैं, पर हर खेल में नहीं. और उनमें कई खेल होते हैं जो यहाँ नहीं की जा सकतीं हैं. पर अधिकतर पुरुषों के लौड़े इस क्लब के रोमियो की तुलना के नहीं होते. यही कारण है कि मुझे यहाँ भी परम सुख मिलता है और वहाँ भी. अगर चाहोगी तो किसी पार्टी में तुम्हें भी आमंत्रित करुँगी पर अभी नहीं. जब तुम अपनी सीमाएँ तय कर चुकी होगी तब, और तब भी अगर तुम उन पार्टियों की सीमा तक पहुँच जाओगी.”

रीटा ने सबीना के चेहरे पर आये भाव देखे तो बोली, “नहीं नहीं, हम मूत्र से अधिक नहीं बढ़ते और न ही बढ़ेंगे. पर वहाँ पुरुष भी मूत्रपान करते हैं और ये यहाँ सम्भव नहीं था. पर अब यहाँ भी दो अफ़्रीकी रोमियो आये हैं जिन्हें उससे कोई वितृष्णा नहीं है. तो यहाँ आना अब और आनंददायक हो गया है.”

“तुम्हारा कार्य मैं तुम्हें बताती हूँ.” रीटा ने उसकी आँखों में आँख डालकर बोला, “तुम्हारा कार्य ये है कि तुम मेरी चूत और गाँड को साफ सुथरा रखोगी जिससे मुझे चोदने वाले रोमियो के लौंड़ों की मोटाई का मैं पूरा आनंद ले सकूँ। क्या तुम ये कर सकती हो?”

“हाँ.”

“गुड़, और क्योंकि मैं बिना विराम चुदाई करुँगी तो जब मुझे मूतना होगा तो तुम स्वयं को प्रस्तुत करोगी.”

“हाँ.”

“और मेरे साथ स्नान करोगी।”

“जी.”

“ये पानी वाला स्नान नहीं है. ओके?”

“ओके”

“तुम चाहो तो सचिन से चुद सकती हो, पर मेरे आनंद में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए. और तुम सचिन का मूत्र नहीं पियोगी, उस पर केवल मेरा अधिकार है.”

“जी”

“अब तुम जाओ और मेरी चुदाई का खेल देखो. रोमियो आते होंगे.”

सबीना सचिन के पास जा बैठी.

“आप को सच में कोई समस्या नहीं है न? इनकी चुदाई बहुत विकृत और भीषण होती है. और मूत्र का खेल भी बहुत गंदा होता है.”

“नहीं, मैं देखना चाहती हूँ कि मेरी क्या सीमा है. क्या कल में भी यही खेल खेलना चाहूँगी?”

“ओके. पर जब भी चाहो हम जा सकते हैं.”

“इसकी आवश्यकता नहीं है. मैं देखूँगी।”

इतने में ही द्वार खुला और आठ रोमियो अंदर आये. सबीना को ये देखकर अचरज हुआ कि इनमे चार अफ़्रीकी थे.

“दस इंची क्लब: दिंची क्लब” सचिन ने कहा.

आठों रोमियो ने अपने गाउन हटाए और सबीना की आँखे फ़ैल गईं. सबके लौड़े एक से बढ़कर एक थे. उसे क्लब के नाम का अर्थ अब समझ आ गया और चूत से पानी बहने लगा.

दो रोमियो आगे बढ़े और उन्होंने रीटा को पकड़कर सोफे पर बैठाया और अपने लंड उसके सामने कर दिए. रीटा ने एक बार सबीना की ओर देखा और उसे आँख मारी फिर लंड चूसने में व्यस्त हो गई. दो चार मिनट के बाद वो रोमियो हटे और उनका स्थान अन्य दो ने ले लिया. इस क्रम में सारे लंड चूसकर वो उठ खड़ी हुई. उसने सबीना की ओर देखा और रोमियो को कुछ कहा. उनमें से एक सबीना के पास आया.

“मैडम ने कहा है कि वो व्यस्त होंगी इसी कारण हममें से कोई आपको बुलाएगा।”

“ओके. मैं आ जाऊँगी।”

सचिन सबीना की अधीरता देख रहा था. अब उसे पूर्ण विश्वास हो गया कि सबीना क्लब का सबसे अधिक उपयोग करने वाली सदस्याओं में से एक रहेगी और क्लब की प्रगति में पूरा योगदान करेगी. दूसरी ओर सबीना कुछ और ही सोच रही थी. उसे रीटा में अपनी अम्मी दिखाई दे रही थीं जिनकी अगर क्लब में प्रविष्टि हो गई तो इसी प्रकार से लम्बे मोटे लौंड़ों से भरपूर चुदाई होगी. उसका ध्यान निगार की ओर न जाकर फिर अपनी ननद फातिमा की ओर चला गया. पर सामने खेल अगले चरण में था.

एक रोमियो सोफे पर बैठ गया था और रीटा उसके ऊपर चढ़ चुकी थी. चूत में लौड़ा लेने के बाद वो कुछ देर कूदी फिर एक अन्य रोमियो ने उसकी गाँड में तेल लगाया और अपना लंड पेल दिया. रीटा की आनंदकारी चीख कमरे में गूँज उठी. रोमियो रीटा की चुदाई की शैली जानते और जो नए थे उन्हें पीछे रखा गया था. दोनों रोमियो पूरी शक्ति के साथ रीटा की चुदाई करने में जुट गए. कोई पाँच मिनट के बाद एक रोमियो ने सबीना को बुलाया और वो उठकर चल दी.

सारे रोमियो एक ओर हो गए और सबीना ने रीटा की चूत और गांड को चाटकर उसे अगली चुदाई के लिए उपयुक्त बना दिया. वो अपने स्थान पर लौट गई और दो अन्य रोमियो रीटा की चुदाई करने लगे. ये क्रम कुछ देर चला, चुदाई होती, सबीना सफाई करती फिर अगले रोमियो चुदाई करने लगते। इस शृंखला के समापन पर रीटा टब में बैठ गई और उसे सब ओर से रोमियो ने घेर लिया, सबीना को पूरा दृश्य दिख नहीं रहा था पर वो अनुमान लगा सकती थी क्योंकि लौंड़ों से मूत्र की धार अवश्य दिख रही थी. अपना निवारण करने के बाद रोमियो हटे और उन्होंने बियर पीनी आरम्भ कर दी. अब उनके अगले निस्तार के लिए जल जो एकत्रित करना था.

सामने टब में रीटा अधलेटी सी थी और अपने ऊपर टब में एकत्रित मूत्र हथेलियों से डाल रही थी. कुछ पी भी रही थी, कुछ चेहरे पर डालकर जैसे उसे धो रही थी. सबीना को हँसी आ गई, पर उसने अपने मुँह पर हाथ रखकर उसे दबा लिया. और ये अच्छा किया क्योंकि उसके हाथ हटते ही रीता ने उसकी ही ओर देखा. उसकी मुस्कुराहट ने सबीना को भी प्रसन्न कर दिया.

फिर रीटा खड़ी हुई और उसे एक रोमियो ने एक तौलिया दिया जिससे उसने शरीर पोंछा और फिर सोफे पर बैठ गई. एक बियर उसे भी थमा दी गई. उसने सबीना को बुलाया और उसे सामने बैठने की आज्ञा दी. सबीना के पेट में चूहे कूदने लगे. रीटा ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा और मुँह खोलने के लिए कहा. सबीना के मुँह खोलते ही सबीना के मुँह में रीटा ने मूत्र त्याग कर दिया. कुछ चेहरे पर भी गिरा. इस पूरे समय रीटा सामान्य रूप से बियर पीती रही. जब उसका त्याग समाप्त हुआ तो उसने सबीना को निर्देश दिया कि वो मुँह न धोये, न पोंछे. सबीना ने सिर हिलाया और अपने स्थान पर लौट गई. सचिन ने कुछ न कहा, क्योंकि वो इसका अनुमान लगा चुका था.

सभी रोमियो बियर का सेव करते रहे और जब उन्हें लगा कि अगली बार के लिए पर्याप्त हो गयी है तो रीटा के पास आ गए. एक अफ़्रीकी रोमियो रीटा के सामने बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा.

“कम ऑन मोम्मा, गिव मी योर पिस!” उसने कहा.

उसने नूर और आमिर को ये करते हुए देखा था तो इतना भी अचरज नहीं हुआ. उसे उस रोमियो को चूत चाटते देख अवश्य आश्चर्य हुआ क्योंकि उसमें से लंड निकले थे. रीटा ने उस रोमियो की इच्छा पूरी की और एक और बियर की माँग की. उसने बियर लेकर सबीना को देखा और हाथ से बियर उठाकर चियर्स किया. सचिन ने उठकर दो बियर लीं और एक सबीना को दी और एक स्वयं पीने लगा.

“ये राउंड बहुत साहसी है. रीटा की क्षमता का आप लोहा मान जाओगी.” सचिन ने कहा. सबीना जो रीता कि दुहरी चुदाई देख चुकी थी ये सोचने लगी अब क्या होगा.

“हमें पास जाकर देखना होगा.” सचिन ने उठते हुए कहा और सबीना के साथ रीटा के निकटतम लगे सोफे पर दोनों जा बैठे.

“ओके, बॉयज! नाउ फक मी तो हैल एंड बैक!”

एक रोमियो सोफे पर जा बैठा और रीटा उठकर उसके लंड पर बैठ गई. एक रोमियो अब उसे सामने आ खड़ा हुआ जिसका लौड़ा रीटा के मुँह में गुम गया.

“अब देखो!” सचिन ने धीरे से कहा.

अब एक रोमियो रीटा के पीछे आ गया. सबीना ने सोचा था कि वो लंड गाँड में डालेगा पर उसकी आँखें फ़टी रह गईं जब उस लम्बे मोटे लौड़े ने भी चूत में प्रवेश करना आरम्भ किया. रीटा के सामने खड़े रोमियो ने अपना लंड रीटा के मुँह से निकाल लिया.

“हाय अम्मी!”

कुछ क्षणों के परिश्रम के बाद वो लौड़ा भी चूत में समा गया. फिर दोनों ने अंदर बाहर आने जाने का कार्य आरम्भ किया. “उफ्फ उफ्फ आई आई !” के स्वरों से रीटा ने उनका स्वागत किया. उसकी इन उत्साह से भरे शब्दों ने दोनों रोमियो की गति बढ़ाने में सहयोग दिया. कुछ ही देर में दोनों दस इंच से बड़े और मोटे लौड़े रीटा की चूत में तीव्रता से आने जाने लगे. कुछ देर में उन्होंने गति कम की और लंड निकाल लिया. उन्होंने सबीना को देखा जिसने जाकर अपना कर्तव्य निभाया. और अगले दो रोमियो फिर से रीटा की चूत में समा गए. ये क्रम भी पिछली प्रकार से चला और आधे घंटे में समाप्त हुआ.

रीटा फिर जाकर टब में बैठ गई. पर इस बार सबीना को सब कुछ दिखाई दे रहा था और रीटा के मुँह, चेहरे और सीने पर गिरती मूत्र की धाराओं ने उसकी चूत में उफान ला दिया. पर अब वो कुछ करने की स्थिति में नहीं थी. उसका मन अब बार बार अपनी अम्मी अमीना को रीटा के स्थान पर चित्रित कर रहा था. रीटा अपने ऊपर गिरती हुई धार को अमृत के समान पीने का प्रयास कर रही थी. टब में अब पिछली बार के साथ नया माल भी जुड़ता जा रहा था. कमरे में अब गंध आने लगी थी. पर एग्जॉस्ट पंखे उसे बाहर करने का प्रयत्न कर रहे थे. रोमियो अपना कार्य सम्पन्न करने के बाद अगली बार के लिए बियर पीने लगे. उनमें से एक ने आकर सबीना और सचिन को भी बियर दी. सचिन अभी बियर पी ही रहा था कि मंजुल आई और नाक सिकोड़ते हुए बोली कि राशि ने सचिन को बुलाया है. और वो सबीना के पास रुकेगी. सचिन चला गया.

मंजुल: “कैसा लग रहा है ये खेल?”

सबीना: “मुझे तो बहुत रोमांचक और उत्तेजक लग रहा है. इसकी तो मैंने स्वप्न में भी कल्पना नहीं की थी.”

“अब वो सपने भी पूरे हो जायेंगे जो तुमने देखे भी नहीं.” मंजुल ने उसकी ओर आँख मारते हुए कहा तो सबीना फिर से कल्पना लोक में चली गई.

जब सचिन राशि के कार्यालय पहुँचा तो पार्थ भी वहाँ था.

“सचिन,” सचिन के बैठने के बाद राशि बोली, “हमें कार्यक्रम ने कुछ परिवर्तन करना होगा. तुम्हें सबीना से पूछना होगा कि अगर वो भी रीटा वाली क्रीड़ा का आनंद उठाना चाहती है तो उसे आज रात ही करना होगा. मेरी कुमुद से बात हुई अभी. तुम जानते हो कि सबीना के उद्घाटन के लिए हमने आज क्लब में उसके कर्मियों को आने से रोका था. कुमुद ने मुझे कहा है कि अगर हम उन्हें कल भी क्लब नहीं आने देंगे तो कार्य पार्टी के पहले सम्पन्न नहीं हो पायेगा” कुमुद उस आर्किटेक्ट की पत्नी थी जिसके माध्यम से क्लब का नवीकरण किया जा रहा था, और जो स्वयं भी क्लब की सदस्या थी.

“पर इसका अर्थ ये है कि आज रात तुम्हें भी क्लब में ही रुकना होगा.”

ये सुनकर सचिन ने आपत्ति की और पार्थ से बोला, “भाई, मैं तीन दिन से घर नहीं गया हूँ. मॉम बहुत चिढ़ी हुई हैं. आप समझते हो न कि उन्हें शान्त करने के लिए मुझे जाना होगा.”

पार्थ, “सचिन मैं समझ रहा हूँ. राशि मैडम आंटी से बात करेंगी और हमने ये सोचा है कि निखिल और एक अन्य रोमियो को तुम्हारे घर भेज देंगे. मेरे विचार से इस प्रबंध से आंटी का क्रोध शान्त हो जायेगा.”

“अगर ऐसा है तो आप अभी बात करो,प्लीज. अगर वो न मानी तो मुझे भी क्षमा करना.”

राशि ने रमोना को फोन लगाया और स्पीकर पर कर दिया.

“हैलो राशि मैडम, मुझे कैसे फोन कर लिया आज.”

“तुम्हारी सहायता चाहिए, रमोना.”

“बोलिये.”

राशि ने संक्षेप में उसे समस्या बताई. और फिर समाधान भी. कुछ देर तक दोनों और चुप्पी रही.

“राशि मैडम, सचिन का स्थान कोई नहीं ले सकता है.” रमोना बोली तो राशि निराश हो गई.

“पर इस बार के लिए मैं ये प्रबंध स्वीकार करती हूँ. परन्तु आगे से उसे आप दो दिन से अधिक मत रोकना, प्लीज. और आपका दो रोमियो का प्रस्ताव मुझे स्वीकार है. कल सुबह सचिन को तड़के भेज देना, तो दो से भले तीन का भी आनंद ले लूँगी।”

पार्थ, राशि और सचिन ने थम्ब्स अप किया और राशि ने स्वीकृति दे दी. फिर फोन काटा.

राशि आगे बोली, “तीन दिन और भी उन्हें आने से रोकने वाले हैं, क्योंकि राखी, अमीना और निगार का उद्घाटन भी पार्टी के पहले ही करना था.” राशि ने कहा

“ठीक है, वो जितनी उत्साहित हैं, मुझे नहीं लगता कि वो आज रात के लिए नहीं मानेंगी. पर मैडम मेरा एक सुझाव है.”

“बोलो.”

“क्यों न हम राखी मैडम के उद्घाटन करने के बाद उन्हें मंजुल या नूतन के घर पर आगे के कार्यक्रम के लिए ले जाएँ. इससे एक दिन बचेगा और मुझे नहीं लगता कि पार्थ भाई को सुबह सुबह उनका उद्घाटन करने में कोई समस्या होगी. सात से दस के बीच ये कार्य निपट जायेगा और क्लब में काम किया जा सकता है.”

“और रही बात सबीना की अम्मी और निगार की, उनका भी एक ही दिन में सुबह और रात को उद्घाटन करने के बाद उन्हें नूतन और मंजुल के घर ले जाया जा सकता है. इस प्रकार दो दिन की बचत होगी.”

राशि और पार्थ एक दूसरे देखकर मुस्कुराये.

“ये सुझाव अच्छा है. पर निगार की मूत्र क्रीड़ा सम्भव नहीं होगी क्योंकि उस कमरे में काम चल रहा होगा.”

“तो सबीना के घर कर लेंगे, मुझे नहीं लगता इन सब में कोई समस्या है. हाँ क्लब के नियम कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए परिवर्तित किये जा रहे हैं, पर इसमें कोई आपत्ति नहीं होने चाहिए.”

“ओके तुम जाओ और अपनी गर्लफ्रेंड को सम्भालो. रीटा अब अपने पूरे फॉर्म में आ रही है. तुम्हारा सबीना के निकट रहना आवश्यक है.”

सचिन लौट आया और मंजुल बाहर चली गई.

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क्रमशः

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अध्याय ६३: दिंची क्लब के नए पंछी - ४

सबीना अपने स्थान पर नहीं थी, वो तो रीटा की चूत के सामने मूत्रपान कर रही थी. सचिन मन ही मन में हँसा कि कितने कम दिनों में सबीना एक गाली वाली मैडम से शान्त प्रेमिका बन गई थी. उसकी चुदाई की भूख और मूत्र की प्यास इस सीमा तक आ चुकी थी कि उसे सामान्य चुदाई अब उसे संतुष्ट करने में सक्षम नहीं थी. सबीना का मन और स्वभाव शीतल थे, एकाकीपन ने उसे एक क्रुद्ध स्त्री बना दिया था. पर अब उसे प्रेम भी मिल रहा था और उसका एकांत भी अब कुछ सीमा तक घटने लगा था.

सचिन को एक बार समझ नहीं आ रही थी, क्लब के नियमों के अनुसार उसे सबीना से दूर रहना था, परन्तु राशि और पार्थ उन दोनों को साथ रखने में लगे हुए थे. उसे पार्थ से पूछना होगा कि क्या कारण है. सबीना अपनी प्यास बुझाकर उठी तो रीटा ने उसे रोका और सोफे पर बैठाया. अब रीटा ने उसकी चूत पर मुँह लगाया और पहली बार सबीना ने अपने मूत्र का विसर्जन किसी अन्य के मुँह में किया. समाप्ति के बाद सबीना और रीटा दोनों उठे और रीतने उसे चूमते हुए उसके मम्मे दबा दिए. फिर उसने सबीना से कुछ कहा जिसका उत्तर सबीना ने स्वीकृति में दिया.

सबीना फिर महकती हुई सचिन के पास बैठ गई. सचिन ने कुछ पूछा नहीं, पर सबीना स्वयं बोली, “वो कह रही हैं कि अगले स्नान में मैं उनके साथ जुड़ सकती हूँ.”

“और.”

“मैंने हाँ कह दी. ओह! सचिन मैं कितनी रोमांचित हूँ. उस शाम जब नीलम बँगले पर तुम सब ने मुझ पर मूता था मुझे पता न था कि मुझे वो इतना उत्तेजक लगेगा. और आज फिर मुझे वो अवसर मिल रहा है.”

“ओके, मुझे राशि मैडम और पार्थ ने एक बात करने के उद्देश्य से बुलाया था.” सचिन ने उसे बताया तो सबीना उसे चूमने को मुड़ी पर शर्माकर रुक गई.

“ये तो बहुत अच्छा होगा. आई लव यू, सचिन. तुम भी मेरे साथ जो होंगे. पर रीटा के समान मेरी भी चूत और गाँड को साफ रखने वाली कोई होती तो भला होता. परन्तु फिर भी मैं रोमांच से भर गई हूँ.”

सचिन ने जब कहा कि निगार के उद्घाटन के बाद सबीना के ही घर में शेष कार्यक्रम होगा तो वो और प्रसन्न हो गई. हालाँकि वो चाहती तो थी कि उसकी अम्मी की भी उद्घाटन के बाद की चुदाई उसके घर में ही हो, पर उसके लिए नितांत आवश्यक था कि उसकी अम्मी भी मूत्र क्रीड़ा में रूचि दिखाएँ. अन्यथा उन्हें मंजुल या नूतन के घर पर ही आगे के कार्यक्रम के लिए जाना होगा.

“क्या नूर और आमिर भी जुड़ सकते हैं?”

“पता नहीं, आप राशि मैडम से पूछ लेना.”

उधर रीटा अब अगले चरण के लिए उद्द्यत थी. पिछली बार के समान एक दूसरे अफ़्रीकी रोमियो ने रीटा की चूत पर मुँह रखा और रीटा ने शांति से बियर की चुस्कियाँ लेते हुए उसे अपना मूत्र पिलाया. और इसके समाप्त होते ही अपनी बियर की कैन एक ओर धकेल दी और उठ खड़ी हुई.

“ओके बॉयज. आर यू फुल फॉर मी?”

“यस मैम!” सबने उत्तर दिया.

“ओके, सबीना डार्लिंग, क्लीन मी अप फॉर फकिंग.”

सबीना गई और रीटा के सामने बैठकर उसकी चूत को चाटी और फिर जब रीटा मुड़ी तो उसकी गाँड को भी साफ कर दिया.

जिस अफ़्रीकी रोमियो ने रीटा का मूत्र पिया था वो उस सोफे पर बैठ गया. एक अन्य रोमियो ने उसके पैरों के नीचे एक मोटा गोल कुशन लगा दिया जो उस सोफे के ही समान था. रीटा ने अब उस रोमियो की ओर मुँह रखते हुए अपनी गाँड को उसके काले मोटे और लम्बे लौड़े पर रखा और उस पर बैठती चली गई. कुछ ही पलों में काले रंग का लंड उसकी श्वेत त्वचा को भेदते हुए गाँड में समा गया. रीटा कुछ देर तक उछली.

“अब देखना!” सचिन ने सबीना से कहा.

रीटा ने अपने दोनों हाथ ऊपर कर दिए थे. उसके पीछे से से एक रोमियो ने उसके हाथों को पकड़ा और उसे धीमे से पीछे की ओर झुकाने लगा. गाँड से लंड को निकाले बिना ही रीटा अब उलटी हो चुकी थी.

अब उस अफ़्रीकी रोमियो ने रीटा की गाँड मारने का कार्यक्रम आरम्भ किया. सबीना रीटा के शरीर की लचक की प्रशंसा करती इसके पहले ही रीटा की आनंद भरी चीखों ने उसका मन मोह लिया. कुछ पल इस प्रकार की चुदाई के पश्चात एक रोमियो आगे आया.

“ओके, मम्मा, मुँह खोलो!”

रीटा ने उसकी ओर देखा और मुस्कुराते हुए मुँह खोल दिया. वो रोमियो रीटा के चेहरे के दोनों ओर पैर करके झुक गया और उसने रीटा के मुँह में मूतना आरम्भ कर दिया. रीटा प्यासी मछली के समान गट गट करके उसे पीने लगी. सबीना की चूत ने पानी छोड़ने की इच्छा जताई, पर उसने संयम रखा. जब उस रोमियो का मूतना समाप्त हुआ तो उसने गाँड मारने वाले रोमियो को संकेत दिया। गाँड से लंड निकालने के बाद उस अफ़्रीकी रोमियो के सबीना की ओर देखा तो सबीना ने जाकर रीटा की गाँड का निरीक्षण किया. पूरी खुली गाँड के अंदर तक वो भली भांति देख सकती थी. उसने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए रीटा की गाँड को चाटा और हट गई. उसने रीटा को देखा जिसने अपनी जीभ को होठों पर घुमाया तो सबीना से रुका न गया. वो रीता के मुँह के पास जाकर उसके मुँह में मूतने लगी, आधा मूत्र मुँह में तो शेष रीटा के चेहरे, बालों इत्यादि पर गिरा. इसके बाद सबीना अपने स्थान पर चली गई.

“गुड शो!” सचिन ने उसकी सराहना की. सबीना बस मुस्कुरा दी.

उधर गाँड से निकले लौड़े को अफ़्रीकी रोमियो ने बियर से धोया और टब में डाल दिया. उसने फिर एक दूसरी बियर ली और अपने साथियों को आँख मारते हुए पीने लगा और रीटा की गाँड में दूसरे लौड़े से चुदाई आरम्भ हो गई. सबीना ने अफ़्रीकी रोमियो को लंड धोकर टब में डालते देखा तो सचिन से प्रश्न करना चाहा.

सचिन: “मैडम को पता है. उनकी ही आज्ञा के अनुसार है. क्लब में कोई भी क्रीड़ा न तो सदस्या की इच्छा के विरुद्ध की जाती है न ही उनसे छुपकर.”

सबीना के प्रश्न का उत्तर उसे मिल गया था और वो रीटा की इस आसन में चुदाई देखने लगी. पिछली बार के ही समान इस बार भी एक अन्य रोमियो रीटा के निकट आया और उस पर मूत्र त्याग करने लगा. इसके बाद गाँड मारने वाले रोमियो ने अपना लंड निकाला और सबीना को बुलाया. सबीना ने फिर जाकर रीटा की अब और अधिक खुली गाँड को साफ किया और हट गई. उसने गाँड मारने वाले रोमियो को भी अपने लंड को धोकर टब में डालते हुए देखा और सचिन के पास आ बैठी.

यही क्रम अन्य छह रोमियो के साथ भी चला. इस बीच सबीना ने भी रीटा के मुँह में अपना योगदान दिया और एक बार सचिन ने भी जाकर रीटा पर मूत कर अपना दबाव कम किया. इस चरण की समाप्ति होते होते अब लगभग दो घण्टे होने को थे. रीटा को फिर से सोफे पर विश्राम करने के लिया बैठा दिया गया और उसके गर्दन पर एक भीगा तौलिया लगा दिया जिससे कि इतनी देर से मुड़ी गर्दन सामान्य हो सके. रीटा पीछे सिर झुकाकर आँखें बंद किया हुए लेट गई. कमरे में पूर्ण शांति थी, कोई उनके विश्राम में विघ्न नहीं डालना चाहता था.

सभी रोमियो, सबीना और सचिन बियर पीते रहे क्योंकि उन्हें इस बात की कोई चिंता न थी कि उन्हें बाथरूम के चक्कर लगाने होंगे. बीस मिनट की इस शांति के बाद रीटा ने तौलिया हटाया और फिर आँखें खोलकर सबीना को बुलाया. अपनी चूत पर ऊँगली रखकर उसने चेता दिया कि सबीना से क्या अपेक्षा है. साथ ही उसने अपने लिए भी बियर लाने का संकेत दिया. सबीना जब रीटा के निकट पहुंची तो रीटा ने सचिन को संकेत दिया जिसे देखकर सचिन ने सिर हिला दिया. रीता मुस्कुराकर सोफे पर आगे की ओर आ गई जिससे सबीना उसकी चूत तक सरलता से पहुँच सके. जब सबीना ने रीटा की चूत पर मुँह लगाया तो रीटा ने उसे रोका.

“नो, माई डियर. नीचे लेटो. और आँखें बंद कर लो कहीं तुम्हारी आँखों में पानी न चला जाये.” ये कहकर रीटा और आगे सरक गई. “और अगर तुम्हरे पैर टब में चले भी जाएँ तो कोई समस्या नहीं है.”

गोल कुशन अभी भी यथास्थान ही था तो सबीना उस पर लेट गई और अपना मुँह खोला और आँखें मीच लीं.

“गुड़ गर्ल.” रीटा ने कहा और सबीना के मुँह में मूत्र की धार छोड़ दी. सबीना घूँट भर रही थी कि उसे अपने चेहरे और मम्मों पर गर्म धार गिरने का आभास हुआ. आँखें खोले बिना ही उसे समझ आ गया कि अब रोमियो उस पर मूत रहे हैं. और उसका अपना मूत भी छूट गया. टब का स्थान इस प्रकार से था कि ये सारा मलिन पदार्थ उसमें ही गिर रहा था. हाँ, कुछ अवश्य ही बाहर जा रहा था, पर अधिकतर सही लक्ष्य को पाने में सफल था. जब सबने अपना कार्य समाप्त किया तो रीटा ने सबीना से आँखें खोलने के लिए कहा.

सबीना ने आँखें खोलीं और स्वयं को लम्बे मोटे लौंड़ों से घिरा पाया. आज रात ये उसकी सेवा में होंगे, ये सोचकर उसने रीटा को देखा.

“यस डियर. ये तुम्हारी चुदाई भी ऐसे ही करेंगे. मुझे प्रसन्नता होती अगर मैं रुककर तुम्हारी चुदाई देख पाती, पर मुझे इस अंतिम चरण के बाद जाना होगा. अब जाओ और अपने स्थान पर बैठो.”

सबीना उठकर सचिन के पास बैठी और प्रश्न भरी आँखों से देखा. सचिन ने उसके होंठों को छूकर कहा, “मुँह में डाला मैंने. और किसी को नहीं डालने दिया. रात में तो तुम्हें उनका मूत्र पीना ही है.”

“आई लव यू, सचिन. तुम मेरा बहुत ध्यान रखते हो.” ये कहकर उसने रीटा की ओर देखा और उसे फिर अपनी अम्मी उसमें दिखाई देने लगीं. क्या उसकी अम्मी रीटा के समान इस प्रकार की क्रीड़ा की इच्छुक होंगी?

सामने अब रीटा की चुदाई के अंतिम चरण के लिए आसन बनाये जा रहे थे.

सचिन: “ये इनकी सबसे विकृत चुदाई होगी. और समापन भी अत्यंत घ्रणित होगा. इसी कारण इन क्रीड़ाओं में क्लब के गिनती के ही रोमियो सम्मिलित होते हैं. वैसे अब आपका भी बुलावा आने ही वाला है.”

मानो ये बात रीटा को सुनाई दे गई हो, और एक रोमियो ने सबीना को बुलाया. रीटा पीठ के बल लेटी हुई थी. सबीना पहुँची तो वो रोमियो रीटा की गाँड में ऊँगली अंदर बाहर कर रहा था. उसने अपनी ऊँगली निकाली और सबीना के लिए स्थान छोड़ दिया. सबीना ने रीटा की गाँड चाटकर अपना कर्तव्य पूरा किया। एक रोमियो जो रीता के साथ बैठा था. जिस रोमियो ने सबीना को बुलाया था उसने रीटा की गाँड के नीचे दोनों हाथ रखते हुए उसे उठाकर बैठे रोमियो के ऊपर कर दिया. कुछ कठिनाई के बाद रीटा की गाँड उस लौड़े पर आ गई और बैठे रोमियो ने रीटा के कंधे पर हाथ रखे और बल प्रयोग करते हुए उसे नीचे दबा दिया. रोमियो का मोटा लम्बा लौड़ा रीटा की गाँड को चीरता हुआ अंदर समा गया.

रीता को अपने हाथ का सहारा देकर खड़े हुए रोमियो ने उसे कुछ समय उस लंड से परिचित होने दिया. फिर रीटा उसका हाथ पकड़कर गाँड में लंड पर उछलने लगी. ऐसा करते हुए उसने अपने सामने झूलते लंड को मुँह में ले लिया. कुछ ही पलों के बाद उसने लंड मुँह से निकाला और कूदना बंद कर दिया. सबीना वहीँ खड़ी हुई देख रही थी. अब खड़े हुए रोमियो ने रीटा को पीछे की ओर धकेला और लेटे रोमियो ने अपने बलिष्ठ हाथों से उसके वक्ष पर हाथ रखकर सहारा दिया. लेटे रोमियो ने रीटा को अपने ऊपर लगभग पूरा ही लिटा लिया जिससे कि अब रीटा की गाँड में उसका लंड दिखने लगा.

अब जो हुआ वो सचिन के द्वारा दिखाए वीडियो से मिलता हुआ था. खड़े रोमियो ने अपने लंड को भी गाँड पर रखा. पहले से ही उसमें एक मोटा लौड़ा उपस्थित था पर उसे इससे कोई अंतर नहीं पड़ा. उसने कुछ दबाव डाला और साथ ही लेटे रोमियो ने रीटा को उठाना आरम्भ किया. ये सब एक अत्यंत धीमी गति में हो रहा था. जब रीटा लगभग आधी बैठ गई तो खड़े रोमियो ने अपने लंड का दबाव बढ़ाया और उसका लंड भी अपने साथी के लंड के साथ अंदर प्रवेश कर गया.

इसी धीमी गति के साथ वो धीरे धीरे अपने लंड को अंदर डालता रहा. सबीना श्वास रोके ये आश्चर्यजनक कृत्य को अपने सामने घटित होते देख रही थी. लगभग आधे लंड के अंदर जाने पर लेटे रोमियो ने अपना लंड बाहर किया। सबीना को आभास हुआ कि ये सब रीटा के शरीर को भिन्न कोण में करते हुए किया जा रहा था. जब लेटे रोमियो का लंड आधे के लगभग बाहर आया तो दोनों लंड गाँड में आधे अंदर और आधे बाहर थे. रीटा के चेहरे पर परम सुख के भाव थे. उसने आँखें खोलीं और अपने सामने के रोमियो को देखा. उसे एक ओर खड़ी सबीना भी दिख गई.

“ओके, बॉयज़. टाइम टू फक मम्माज़ आस.” रीटा ने कहा. (ओके, लड़कों. मम्मी की गाँड मारने का समय आ गया है.”

सबीना ने अपने सामने दोनों विशाल लौडों को एक साथ रीटा की गाँड में जाने का अद्भुत दृश्य देखा. गति धीमी थी और दोनों रोमियो इसमें कुशल थे, एक दो बार एक साथ लंड अंदर बाहर करने के बाद उन्होंने एक ताल पकड़ी और कुछ गति भी.

“इसमें अधिक शक्ति और गति का प्रयोग नहीं किया जाता.” उसने अपने पीछे से सचिन को बोलते हुए सुना. “और इसके लिए अनुभव और असीमित संयम की आवश्यकता होती है. अन्यथा तीनों में से कोई भी चोटिल हो सकता है. पर इसका आनंद विलक्षण होता है.”

सबीना रीटा के चेहरे के भाव देखकर ये जान रही थी.

“ऊई ऊई ऊई” रीटा के मुँह से ये पहली ध्वनि थी.

सबीना को ये भी समझ आ चुका था कि रीटा की चुदाई एक बार में कोई भी पूरी नहीं करता. आठों रोमियो उसकी चुदाई करते हैं. और उन रोमियो के संयम की प्रशंसा करनी होगी क्योंकि वो अब तक झड़े नहीं थे पर युद्धक्षेत्र में खड़े हुए थे. क्लब का सिद्धांत कि सदस्या का सुख सर्वोपरि है इस कृत्य से चरितार्थ होता था. रीटा की उस जोड़ी ने कुछ देर और चुदाई की फिर खड़े रोमियो ने लंड बाहर निकाला और फिर रीटा को लंड पर से उठा दिया. नीचे वाला रोमियो वहीँ सोफे पर खड़ा हो गया. खड़े रोमियो ने सबीना की ओर देखा.

सबीना ने देखा कि इस बार रीटा की गाँड और भी अधिक खुली हुई थी. उसने कुछ संकोच किया परन्तु नीचे बैठकर उसे चाटकर साफ कर दिया. दो दो लौडों से चुदी गाँड में झाग रूपी बहुत पदार्थ जमा था. अपने कार्य को सम्पन्न करने के बाद वो उठ गई और खड़े रोमियो ने रीटा की गाँड में फिर से लंड पेल दिया और सोफे पर खड़े रोमियो को संकेत दिया. सोफे वाले रोमियो ने रीटा के चेहरे को ऊपर उठाया तो रीटा ने स्वतः मुँह खोल दिया और उस रोमियो के मूत्र की धार उसके मुँह और चेहरे पर गिरने लगी. सबीना ये देख रही थी पर उसे अचरज हुआ कि गाँड में लंड डालने वाले रोमियो ने धक्के नहीं लगाए थे.

सचिन ने उसके कंधे पर हाथ रखा और पीछे खींचा.

“ओके, मम्मा!” उस रोमियो ने कहा और धीरे से लंड बाहर निकाला और तेजी से एक और हट गया. सबीना को समझ आ गया कि क्या हुआ था जब रीटा की गाँड से मूत्र की धार निकल कर टब में गिरने लगी.

रीटा के मुँह में मूतने वाले रोमियो ने अपना कार्य पूरा किया और उतर गया. दोनों रोमियो अपने खड़े लौड़े सहलाते हुए हट गए और रीटा उसी मुद्रा में कुछ देर लेटी रही. फिर उसने एक बियर माँगी और बैठकर पीने लगी. सबीना ने जब देखा कि अब उसका कोई काम नहीं है तो पूर्वस्थान पर जाकर बैठ गई. सचिन उसके पास बैठ गया.

“ये सब उसे मम्मा क्यों पुकारते हैं?” सबीना ने पूछा.

सचिन ने रीटा की ओर देखा और धीमे स्वर में बोला: “क्योंकि ये निःसंतान हैं. जब समय था तब इन्होने अपने कार्य पर अधिक ध्यान दिया, हालाँकि उसमे अपेक्षित सफलता नहीं मिली. जब विवाह किया तो इन सब खेलों में इतना लिप्त हो गयीं कि मातृत्व का समय बीत गया. अब इसी प्रकार हम सबको उन्हें मम्मा कहने के लिए बोली हैं. परन्तु सम्भवतः ये स्वयं को प्रताड़ित करने के लिए करती हैं, कि जो सुख वो चाहती थीं उससे स्वयं ही वंचित रह गयीं.”

“उनके पति?”

सचिन के चेहरे पर घृणा के भाव आ गए, “उनके लिए ये मात्र व्यवसाय में उन्नति का साधन हैं. मुझे नहीं पता वो इनसे प्रेम भी करते हैं या नहीं. जिस प्रकार से उनकी पार्टियों में इनका उपयोग होता है वो निंदनीय है. पर अब लगता है कि इन्हें भी इन क्रीड़ाओं में अधिक आनंद आता है. क्लब में तो विशेषकर क्योंकि यहाँ केवल उनके सुख पर ध्यान रखा जाता है.”

“अपने पति को क्यों नहीं छोड़ देतीं?”

“आप क्यों नहीं छोड़ रही हैं?”

सबीना चुप हो गई. उसे उत्तर मिल गया था.

“मैं आपको दुःख नहीं देना चाहता था, सॉरी!” सचिन कहने लगा.

“नहीं, तुमने सही कहा. छोड़ना सरल नहीं होता. पति जैसा भी हो, हालाँकि नासिर बहुत ही भले हैं, पर इस व्यापार ने उन्हें मुझसे दूर कर दिया है.”

“सम्भव है इनका भी कोई कारण हो. हम इनके विषय में अधिक नहीं जानते. पर ये बहुत ही अच्छी महिला हैं. हालाँकि चुदाई में अत्यंत ही विकृत सेक्स चाहती हैं.”

सबीना ने सिर हिलाकर कहा, “जैसे मैं?”

“आप तो मेरी सर्वप्रिय हो. क्लब के नियम न होते तो मैं आपको अपना बना लेता.”

“और नासिर?”

“उनको मना लेता.” सचिन ने हंसकर कहा और दोनों हंस पड़े.

“वो न मानने वाले.”

रीटा के पास अब अन्य दो रोमियो आ चुके थे और सबीना को अपनी भूमिका निभानी थी. इसके बाद वही क्रम चला. रीटा की गाँड को सबीना चाटकर साफ करती, फिर दो रोमियो एक साथ उसकी गाँड मारते, फिर सबीना उनके लंड बाहर आने पर फिर से गाँड चाटती। फिर एक रोमियो मुँह में तो एक गाँड में मूत्र विसर्जन करता. और टब में गाँड से निकला मूत्र जुड़ जाता.

इसके बाद सब सुस्ताने लगे. समय समाप्त होने वाला था. कुछ ही देर में रीटा खड़ी हुई.

“ओके, बॉयज़. तुम सबने बहुत संयम दिखाया है. अब मुझे चोदकर अपना पानी मेरी चूत और गाँड में डालो. सबीना बेचारी बहुत देर से भूखी है.”

इस बार दूसरे सोफे पर एक रोमियो बैठा और रीटा उस के लंड पर चढ़ गई. दूसरे रोमियो ने उसकी गाँड मारना आरम्भ किया. पंद्रह मिनट में दोनों रोमियो झड़ गए और सबीना को उनके रस को रीटा की चूत और गाँड से चखने का अवसर मिला. इस प्रकार आठों रोमियो ने अपना पानी छोड़ा और सबीना का पेट भर गया. जब अंतिम रोमियो की जोड़ी ने अपना काम पूरा किया तो रीटा ने सबीना को उनके वीर्य के साथ अपने मूत्र का भी सेवन करवाया. फिर उसने सचिन को पुकारा.

“सचिन स्वीटहार्ट. तुम समझ चुके हो कि अब मुझे क्या चाहिए है.”

“यस, मम्मा।”

रीटा उठी और टब में जाकर बैठ गई. सबीना को सचिन ने आगे झुकाया और उसकी गाँड में लंड पेलते हुए उसकी गाँड मारने लगा. सबीना का मुँह टब के दूसरी ओर था पर उसे टब में गिरते पानी की ध्वनि से समझ आ रहा था कि रोमियो सेना रीटा पर मूत्र छोड़ रही है. उसकी गाँड में सचिन का लौड़ा और पीछे से ये संगीत उसे उत्तेजना के परे ले गया. सचिन भी इतनी देर से भरा बैठा था और कुछ ही पलों में उसने सबीना की गाँड में अपना रस छोड़ दिया.

सबीना संतुष्ट नहीं थी, पर उसे गाँड मरवा कर कुछ शांति मिली थी. सचिन ने लंड बाहर नहीं निकाला और सबीना को अपनी गाँड फूलने का आभास हुआ. सचिन अब उसकी गाँड में मूत रहा था. जब सचिन ने उसकी गाँड भर दी, तो उसकी नितम्बों पर थपकी दी.

“गाँड पर कन्ट्रोल रखना. मैं लंड निकाल रहा हूँ.” उसने आगे झुकते हुए सबीना के कानों में कहा. फिर जोर से बोला, “ओके. मम्मा, आर यू रेडी?”

“यस माई सन.”

सचिन ने सबीना की गाँड से लंड निकाला और तीव्रता से हट गया. सबीना बस पल भर ही अपनी गाँड को रोक पाई और फिर उसकी गाँड ने सचिन के वीर्य और मूत्र का मिश्रण बाहर निकल पड़ा. रीटा नीचे टब में उसकी इस धार के लिए मुँह खोले बैठी थी. उसके मुँह, चेहरे और अन्य अंगों पर जब मूत्रपात समाप्त हुआ तो वो जोर से खिलखिला कर हँसने लगी.

“मम्मा, कैन वी गो नाउ? हम थोड़ी देर में सफाई के लिया आएंगे.” एक रोमियो ने पूछा.

“यस. यू कैन गो. एंड यू बॉयज़ वेयर वंडरफुल. आई ऍम वेरी हैप्पी एंड सैटिस्फाइड।”

“थैंक यू, मम्मा.” सारे रोमियो एक स्वर में बोले.

“सुनो!” सबीना ने उन्हें पुकारा.

“यस मैम.”

“ये कैसी सफाई की बात कर रहे हो?”

“मैम, टब सोफे और कमरे की.”

“ओह!, क्या इसे रात को मुझे चोदने के बाद नहीं कर सकते?”

“तब भी करेंगे, मैम.”

“मेरे विचार से तो तब ही करना, तब भी नहीं.”

“ओह!” “ओके, ओके. थैंक्यू मैडम.” उन रोमियो के चेहरे पर एक विकृत मुस्कान आ गई. सचिन सबीना के पीछे मुँह खोले खड़ा था. और रीटा तब में पानी से खेल रही थी.

“रीटा जी!” सबीना बोली, क्या मैं कुछ देर आपके साथ खेल सकती हूँ?”

“कम डियर!”

सचिन हतप्रभ सा अपने स्थान पर जाकर बैठ गया और रीटा और सबीना को एक दूसरे पर मूत्र से खेलते हुए देखता रहा. दस मिनट के बाद सबीना निकली और ये पूछकर कि बाथरूम कहाँ है, स्नान करने चली गई. बीस मिनट के लम्बे अंतराल के बाद निकली तो चमक रही थी. उसने सचिन का हाथ पकड़ा.

“मुझे बहुत भूख लगी है. कुछ खिला दो प्लीज़.”

उन्होंने कमरे से बाहर निकलने के पहले पीछे मुड़कर देखा तो रीटा अपने खेल में व्यस्त थी.

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क्रमशः

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अध्याय ६४: दिंची क्लब के नए पंछी - ५

सोफे पर जब सबीना को बैठाया और चारों रोमियो ने अपने गाउन उतार दिए. उनके मोटे तगड़े लौड़े पूरे अकड़े हुए थे. सबीना के मुँह में पानी आ गया. एक रोमियो ने उसके मुँह की ओर अपना लंड किया तो सबीना ने गपाक से उसे निगल लिया. उसने अपने पैरों को फैलते हुए अनुभव किया तो नीचे देखा. एक अफ़्रीकी रोमियो उसकी चूत चाट रहा था. उसके मुँह से एक सीत्कार निकली.

“कम ऑन मामा, अपना पानी पिलाओ न!” उस रोमियो ने कहा तो मानो सबीना का बाँध टूट गया और उसकी चूत से मूत्र की एक धार निकल कर उस अफ़्रीकी रोमियो के मुँह में गिरने लगी. उस रोमियो ने पूरा मूत्र पीने में कोई संकोच नहीं किया और जब सबीना का पानी रुका तो उस रोमियो ने चटखारे लेते हुए कहा.

“मामा यू आर सो टेस्टी.” ये कहकर वो खड़ा हो गया और उसने उस रोमियो को हटाया जिसका लंड सबीना के मुँह में था.

“अब मेरी बारी, मामा!” ये कहते हुए उसने सबीना के मुँह की ओर लंड किया और उसके मुँह में मूत्र की धार छोड़ दी. सबीना इस अप्रत्याशित हमले पर कुछ कह न सकीय और गट गट करके उस रोमियो का मूत्र पीने लगी. उस रोमियो के हटते ही अन्य तीनो रोमियो ने भी सबीना के मुँह और चेहरे पर मूता और सबीना की आज की रात्रि का शुभारम्भ कर दिया.

राशि उठी और वो जाकर सबीना के सामने जा खड़ी हुई. फिर उसने अपना गाउन उतारा और सोफे पर चढ़कर उसने भी सबीना के मुँह और चेहरे को अपने मूत्र से भिगो दिया.

“ओके स्वीटहार्ट, अब तुम चुदाई कर सकती हो, पर पहले एक एक बियर हो जाये. तुम्हें बहुत पानी पिलाना है आज!”

उसकी बात समाप्त होने के पहले ही दो रोमियो छह बियर लेकर आ गए और सबने फटाफट अपनी बियर समाप्त कर दी. फिर एक रोमियो ने उसे सही स्थिति में बैठाया और अपना लौड़ा बिना किसी झिझक उसकी चूत में उतार दिया. दो तीन धक्कों में पूरे लौड़े ने सबीना की चूत की गहराई नाप ली. इसके बाद उसने पूरे सामर्थ्य के साथ सबीना की चुदाई आरम्भ कर दी. पाँच सात मिनट के बाद वो हटा तो राशि आ गई और उसने सबीना की चूत को चाटा और फिर अपने हाथों से अगले रोमियो के लौड़े को सबीना की चूत में डाल दिया.

यही क्रम दो बार और घटित हुआ कुछ देर की चुदाई के बाद रोमियो हटता और राशि सबीना की चूत चाटती और अगले रोमियो के लौड़े को अंदर डालने में सहायता करती. इस पूरे घटनाक्रम में आधा घंटा व्यतीत हो गया. सबीना की चूत को चाटने के बाद राशि ने दूसरे अफ़्रीकी रोमियो को आमंत्रित किया. उसने भी सबीना के मूत्र का भोग लगाया और फिर कुछ देर के लिए सब विश्राम करते हुए बियर पीने लगे.

“तो तुम्हें कैसी लगी अब तक की चुदाई, सबीना?” एक रोमियो ने पूछा तो सबीना ने राशि को देखा क्योंकि अब तक उसे मैडम कहकर पुकारा जाता रहा था.

“मैंने आज से सबको नाम से बुलाये जाने का नियम बनाया है. जब हम सब चुदाई कर सकते हैं तो ये औपचारिकता का कोई अर्थ नहीं है. कल तक ये नियम क्लब में स्थापित कर दिया जायेगा और सभी सदस्याओं और रोमियो को बता दिया जायेगा. परन्तु ये क्लब की सीमा के अंदर ही उपयुक्त है.”

“ये ठीक भी है. वैसे भी सचिन मुझे मेरे नाम से बुलाने लगा था.” सबीना ने बियर समाप्त करते हुए बताया.

राशि ने उसे एक बार देखा तो सबीना बोली, “नहीं, मैं समझती हूँ कि वो हमारा अतीत है. वैसे भी आज वो कुमुद के साथ है और मैं इन सबके साथ.”

“तो अब अगले चरण की ओर चलें? तुम्हारी गाँड अब कुलबुला रही होगी.”

“बिलकुल!” सबीना खिलखला कर बोली.

और फिर सबीना के पैरों के बीच एक अफ़्रीकी रोमियो आया और उसने सबीना को मूत्रपान कराया और सोफे पर बैठ गया. फिर सबीना को उसके मोटे काले लौड़े पर बैठाया गया. इस आसन में सबीना की गाँड में लौड़ा घुसने में कुछ देर लगी परन्तु अंततः उसकी गाँड में वो अफ़्रीकी लंड पूरा स्थापित हो गया. सामने फिर एक कुशन लगाया गया और उसके हाथों को उठाकर उसे भी पीछे की और झुकाया गया जैसे कि रीटा के साथ किया था. सबीना अब गाँड मरवाने के साथ मूत्रपान और स्नान भी कर सकती थी.

रोमियो ने उसकी गाँड मारना आरम्भ किया तो सबीना को आभास हुआ कि इस आसन में उसकी गाँड में लौड़ा अत्यधिक बड़ा अनुभव हो रहा है. उसने नूर और अपने परिवार के पुरुषों के साथ इस आसन का अभ्यास करने का निर्णय लिया और पहली बार उसे लगा कि वो भी अपनी अम्मी को कुछ सिखा सकती है. गाँड में मोटे लम्बे लौड़े का आनंद लेते हुए सबीना झड़ने लगी. राशि उसके चेहरे के दोनों ओर पैर करके खड़ी हुई और सबीना ने मुँह खोला और राशि की मूत्र की धार ने उसके मुँह और चेहरे को सुशोभित कर दिया.

कुछ देर गाँड मारने के बाद सबीना को उस रोमियो के लौड़े से उठाया गया और दूसरे रोमियो ने उसका स्थान ले लिया. राशि ने सबीना की गाँड को अच्छे से चाटा और उसकी गाँड में लंड डालने में सहायता की. फिर उसे पीछे झुकाया गया और वही क्रम फिर से दुहराया गया. जब चौथा रोमियो उसकी गाँड मार रहा था तो अन्य तीनों रोमियो सबीना के पास खड़े हो गए और उसपर मूत्र की वर्षा कर दी. सबीना इस सबसे इतनी आनंदित थी कि वो न जाने कितनी ही बार झड़ चुकी थी.

“वाह! क्या मनोहर दृश्य है!” ये सुनकर सब उस ओर देखने लगे जहाँ पार्थ, सचिन और कुमुद खड़े थे.

गाँड मारने वाला रोमियो बिना रुके अपने पराक्रम में लगा रहा.

“मैं कुमुद को दिखाने लाया हूँ कि सबीना को किस प्रकार से सुख मिलता है.” पार्थ ने कहा.

“क्या मैं भी?” कुमुद ने उत्सुकता से पूछा.

“ओके. जाइये.”

कुमुद सबीना के मुँह पर बैठ गई. सबीना ने उसकी चूत में जीभ डाली तो उसे वीर्य का स्वाद आया और गाढ़ा श्वेत पदार्थ उसके मुँह में चला गया.

“ये सचिन का रस था.” कुमुद ने बताया, “और ये मेरा है.” ये कहते ही कुमुद सबीना के मुँह में मूतने लगी. सबीना ने अपने पूर्व प्रेमी के रस के साथ उसकी आज रात की प्रेमिका के मूत्र को पीने में कोई झिझक दिखाई.

कुमुद खड़ी हुई और उसका कुछ मूत्र सबीना के पेट पर गिर गया.

“वाओ, दिस इस सो एक्साइटिंग!” कुमुद बोली और हट गई. उसके हटते ही पार्थ और सचिन ने सबीना को घेरा और उस पर मूतने लगे.

इसके बाद वो जाने लगे तो राशि ने उन्हें कुछ बोला जिस पर तीनों सहमत हो गए. अब तक चौथे रोमियो की चुदाई का समय समाप्त हो चुका था तो सबीना को उठाया गया. राशि ने उसकी गाँड साफ की और फिर सब बियर पीने लगे. एक बियर के बाद कुमुद, पार्थ और सचिन चले गए. सबीना को इतना अधिक उन्माद था कि वो शीघ्र अगले चरण में जाना चाहती थी. पर राशि ने उसे समझाया कि ऐसा करने से उसे अपेक्षा और व्यग्रता का आभास नहीं होगा. दस बजने में मात्र चालीस मिनट ही शेष थे, तो ये चुदाई का अंतिम चक्र था.

सबीना को इस बात का आभास था कि उसकी दुहरी चुदाई तो होगी, पर सम्भवतः सामान्य ढंग से ही होगी. एक लौड़ा चूत में और एक गाँड में. नीलम के बँगले के बाद इसका आनंद उसे केवल एक ही बार प्राप्त हुआ था तो इसके लिए वो उत्सुक थी. पर मन में वो चाहती थी कि चूत में या गाँड में दो लौड़े लेने का अनुभव भी मिल जाता तो अच्छा होता. परन्तु राशि की बातों से प्रतीत होता था कि ये आज की रात तो नहीं ही होगा.

अपनी बियर समाप्त करने के बाद एक रोमियो राशि के पास गया और कुछ मंत्रणा की. उसके बाद वो लौटा और सोफे पर बैठ गया. उसने सबीना की ओर देखा और उसे अपने लंड पर चढ़ने का आमंत्रण दिया. सबीना उसकी ओर मुँह करके बैठे लगी तो रोमियो ने बताया की उसकी ओर पीठ करे और लौड़ा गाँड में ले.

सबीना उसकी बात मानते हुए उसकी ओर पीठ करके लंड को अपनी गाँड के छेद पर लगते हुए बैठने लगी. गाँड कुछ देर पहले ही चार लौड़े खा चुकी थी तो उसे पूरा लौड़ा अंदर लेने में अधिक समय नहीं लगा न ही कोई कठिनाई हुई. पर जब लंड पूरा अंदर चला गया तब अवश्य उसे अपनी गाँड पूरी भरी हुई अनुभव हुई. फिर लेटे हुए रोमियो ने सबीना को पीछे की ओर खीँचा.

पीछे झुकने से गाँड में लौड़ा और भी अधिक मोटा अनुभव हो रहा था. सबीना ने आँखें आनंद से बंद कर लीं. उसे अपनी चूत पर कुछ रेंगता हुआ लगा तो उसने आँखें फिर से खोलीं तो देखा कि राशि उसकी चूत को चाट रही थी. सबीना ने उसे देखते हुए लंड पर उछलने का प्रयास किया पर नीचे लेटे रोमियो ने उसकी कमर को जकड़ा हुआ था. राशि ने कुछ देर चूत चाटी फिर हट गई. फिर एक अफ़्रीकी रोमियो ने उसका स्थान ले लिया.

“ओके, मामा! गिव मी माई ड्रिंक!” ये कहते हुए उसने अपने होंठ सबीना की चूत पर रख दिए. सबीना की गाँड में डले लौड़े से कुछ किया भी नहीं था कि सबीना की चूत से एक धार निकलकर उस अफ़्रीकी रोमियो के मुँह में समा गई. जब सबीना बहाव थमा तो वो रोमियो खड़ा हुआ और नीचे लेटे रोमियो से बोला।

“ओके, ब्रदर! आई ऍम कमिंग इन हर पूसी.”

“ओके, मैन, कम आई ऍम वेटिंग!”

अफ़्रीकी रोमियो ने सबीना के होंठों को चूमा तो सबीना को अपने मूत्र का स्वाद मिला और फिर उस रोमियो ने सबीना की चूत में अपना अफ़्रीकी लौड़ा धकेलना आरम्भ कर दिया. अन्य दो रोमियो बियर लेकर राशि के पास गए और उसके पास खड़े होकर अपने क्रम की प्रतीक्षा करने लगे.

इस बार रोमियो सबीना को तब तक चोदते रहे जब तक कि दोनों झड़े नहीं. गाँड मारने वाला रोमियो झड़ने के बाद भी लेटा रहा जब तक कि ऊपर से चूत मारने वाले रोमियो ने अपना वीर्य भी सबीना की चूत में नहीं छोड़ दिया. इसके बाद ऊपर से रोमियो हटा और राशि ने अपना कार्य पूरा करते हुए सबीना की चूत से वीर्य सोख कर सबीना से होंठ मिलाकर साझा किया. फिर अफ़्रीकी रोमियो ने सबीना के पैरों को ऊपर उठाया और सबीना की गाँड को ही राशि ने सोख कर सबीना को आधा रस अर्पित किया.

फिर सबीना को उठाया गया और उन दोनों रोमियो ने फिर उसके ऊपर मूत्र की वृष्टि कर दी. राशि ने अपना योगदान सबीना के मुँह में किया। भीगी बैठी हुई सबीना के बालों से लेकर नीचे तक बहते हुए मूत्र से वो अत्यधिक कामुक दिख रही थी. इस बार प्रतीक्षारत रोमियो में से देसी रोमियो सोफे पर बैठा और सबीना को उसके लौड़े पर पिछली बार के समान बैठाया गया. दूसरे अफ़्रीकी रोमियो ने सबीना से उसके मूत्र का दान माँगा और फिर उसकी चूत में लंड पेल दिया.

इस बार की चुदाई के बाद फिर राशि ने अपना कार्य दुहराया। सबीना पर खड़े होकर उसके चोदने वाले रोमियो ने उस पर मूता। राशि ने भी चेष्टा की और कुछ बूँदे सबीना को भेंट कीं. कमरे में फिर से सचिन, पार्थ और कुमुद आये और आते ही अपने गाउन एक ओर कर दिया.

कुमुद राशि के पास आई और पूछा, “क्या सच में इसे हम?”

“हाँ.” ये कहते हुए राशि ने पार्थ को बुलाया, “तुम्हें कुमुद की गाँड में त्याग करना है.”

राशि ने सबीना की आँखों में झाँका, “अब तुम्हें एक नया अनुभव देने जा रहे हैं, ये रीटा का सुझाव है. और तुमने उसे ये करते हुए देखा है. पार्थ कुमुद की गाँड मारेगा और उसकी गाँड से तुम्हें मूत्र पीने का सौभाग्य मिलेगा. और फिर इनमें से एक रोमियो मेरी गाँड से तुम्हें अपना मूत्र पिलायेगा. फिर तुम जिस का भी चाहो, उसका भोग पी सकती हो, इसके लिए हमनें ये बाउल रखा है.”

सबीना अब एक ऐसे नशे में थी कि उसे ये स्मरण नहीं रहा कि सचिन के साथ उसे इस कार्य में अधिक रूचि नहीं थी. परन्तु आज वो मान गई.

“कम कुमुद एंड पार्थ.”

इसके बाद कुमुद सोफे पर झुक गई और पार्थ ने अपने तमतमाए लौड़े को उसकी गाँड में जड़ दिया. सबीना को उचित स्थान पर बैठाया गया जिससे कि वो धार की सीध में रहे. सचिन खड़ा हुआ सबीना को देख रहा था कि उसकी भूतपूर्व प्रेयसी वासना में कितनी चूर थी.

पार्थ का कुमुद की गाँड मारने का कोई आशय नहीं था, वो तो सबीना के लिए उसकी गाँड धो रहा था. जब पार्थ ने कुमुद की गाँड भर दी तो उसने बोला कि वो हटने वाला है. राशि ने सबीना के सिर पर हाथ रखकर उसे सीधा किया और पार्थ ने कुमुद की गाँड से लंड निकाला और एक और हो गया. कुमुद कठिनाई से दो सैकंड ही अपनी गाँड बंद रख पाई क्योंकि दबाव बहुत था. फिर उसकी गाँड खुली और धार सीधे सबीना की ओर बढ़ी.

सबीना की लालसा और राशि के हाथ का सहारा दोनों ने ये सुनिश्चित किया कि अधिकतर जल सबीना के मुँह में ही गिरे. पर बाहर गिरने में भी कोई हानि नहीं थी, क्योंकि वो भी टब में ही जाने वाला था. कुमुद ने गाँड खाली होने के बाद पलटकर सबीना की ओर देखा जिसकी आँखें चमक रही थीं.

कुमुद ने मुस्कुराकर कहा, “यू आर वंडरफुल. रीटा विल लव यू.”

फिर वो हट गई और राशि ने उसका स्थान लिया और एक अफ़्रीकी रोमियो को उसकी गाँड धोने का आमंत्रण दिया. राशि की गाँड से निकले बहाव को ग्रहण करने के बाद सबीना को एक विचित्र सी आत्म-संतुष्टि का अनुभव हुआ. राशि ने उससे पूछा कि वो अपनी गाँड से किसका मूत्र पीना चाहेगी तो इस बार सबीना ने दूसरे अफ़्रीकी रोमियो को चुना. बाउल में एकत्रित अपनी गाँड से निकले रज और मूत्र के मिश्रण को सबीना ने थोड़ा ही पिया और फिर उसे अपने चेहरे पर उढेल लिया.

सबीना के सत्र समाप्त हो चुका था. कुमुद पार्थ और सचिन के साथ कमरे से निकल गई.

बाहर आकर कुमुद बोली, “मुझे उस नए टब के लिए कुछ नया सोचना होगा। ये अंतिम चरण अभी की रचना में सही नहीं रहेगा.”

पार्थ ने चलते हुए उसकी गाँड को दबाया और बोला, “उसके लिए कल सोचेंगे. अभी के लिए हमारे पास आपकी सेवा करने की योजना है.”

“ओह! वो मैं जानती हूँ, और भरपूर सेवा करवाने वाली हूँ.”

तीनों यूँ ही बात करते हुए पार्थ के कमरे में प्रवेश कर गए और तुरंत ही अपने गाउन उतार फेंके.

*******

राशि ने चारों रोमियो की ओर देखा.

“तुम अब इन्हें स्नानादि करवाने के बाद कमरा साफ कर देना. उन चारों को भी मैं भेजूँगी। उसके बाद सबीना जिसे साथ ले जाना चाहे अपने साथ चले जाना.” फिर देसी रोमियो को देखकर बोली, “तुम चाहो तो मेरे पास आ जाना, अगर सबीना छोड़े तो.”

ये कहकर राशि चली गई. सबीना ने अपने सामने खड़े रोमियो को देखा.

“स्नानादि करवा दो!” वो खिलखिला कर बोली.

रोमियो उसके साथ हँसे और उसे खड़ा किया. सबीना के शरीर में सनसनी फैल गई. इतने में उसके पीछे खड़े एक रोमियो ने उसकी बाँहों के अंदर से उसे पकड़ा, या यूँ कहें जकड़ा और ऊपर उठा लिया. इससे पहले कि वो कुछ समझ पाती उसके पैरों को पकड़ा जा चुका था.

“ऐसे नहाने में क्या आनंद आएगा सबीना! कुछ खेला हो जाये.”

सबीना उनकी बलिष्ठ पकड़ से छूटने की कल्पना भी नहीं कर सकती थी. उसे ये समझ आ गया कि उसे अब मूत्र से भरे टब में उसे फेंका जाना है. परन्तु उसे धीरे से पलटाया गया जिससे कि उसका मुँह अब नीचे की ओर हो गया.

“आपको नहाने और पिलाने का एक ही बार में कार्य पूरा करेंगे!” ये कहकर चारों रोमियो हंसने लगे. सबीना को अब समझ आया कि उसे उस टब में डुबाया जायेगा जिससे कि उसे टब में भरे मूत्र को पीने का अवसर मिले. ये विकृत मानसिकता की पराकाष्ठा थी और उसके शरीर ने कँपकँपी सी होने लगी.

“ध्यान रखियेगा. गर्दन ऊपर रखना ताकि नाक में कुछ न जाये.” पीछे उसके पैर पकड़े रोमियो ने कहा. सबीना को धीरे से टब की ओर नीचे किया गया और उसका सर ऊपर रखते हुए उसके शरीर को टब में उतार दिया. सबीना ने सिर ऊपर रखा हुआ था. जब उसकी गर्दन डूबी तो रुक गए. सबीना ने मुँह नीचे किया और टब में भरे मूत्र को पीने लगी.

“गुड मामा!” सामने वाले रोमियो ने कहा. “अब अपना चेहरा टब के ऊपर कर लो.” ये कहकर उसने सबीना के दोनों हाथ टब के ऊपर रख दिया. सबीना ने ऐसा ही किया। तभी उसने टब में किसी को प्रवेश करने का अनुभव किया.

“अपनी गाँड उठाइये.” सबीना ने अपनी गाँड ऊपर की तो उसकी गाँड पर एक लंड आकर उसे छेड़ने लगा.

“मामा, अब आपकी गाँड मारने वाले हैं इस टब में. थोड़ा संयम रखना क्योंकि फिसलने का डर रहेगा. ओके?”

सबीना क्या ही बोलती. मूत्र से भरे टब में उसकी गाँड मारी जानी थी. उसकी गाँड में लंड धीरे से अंदर गया और चुदाई आरम्भ हो गई. सामने खड़े रोमियो ने सबीना के चेहरे को ऊपर किया और उसमें अपनी धार छोड़ दी. पर मुँह से हटाकर उसे उसके चेहरे और बालों पर केंद्रित किया. पहले से भीगी सबीना अब और गीली हो गई. उसे अपनी गाँड के लौड़े के फूलने का आभास हुआ और फिर गाँड के फूलने का. वो समझ गई कि उसकी गाँड में मूता जा रहा है. पर अब वो इस व्यसन में इतना रंग चुकी थी कि उसे इसमें अपार आनंद मिल रहा था. गंदी और विकृत चुदाई में उसे अत्यधिक सुख मिल रहा था.

उसकी गाँड से लंड बाहर निकला और लाख प्रयास के बाद भी वो अपनी गाँड बंद न रख पाई और उसमें से धार निकलकर टब में जुड़ गई. वो रोमियो बाहर निकल गया और फिर उसे अपनी गाँड पर फिर एक धार के गिरने का आभास हुआ, मानो उसकी गाँड को धोया जा रहा हो!

“अब आप पलट जाइये! और सिर टब के कोने पर ऊपर रखिये.”

सबीना स्वतः ही उचित स्थिति में आ गई. एक लंड उसके माथे पर रखा गया और उसमें से निकलती मूत्र ने उसके चेहरे, मुँह से यात्रा करते हुए टब में मिलन कर लिया. सबीना सोचने लगी कि अब और बचा ही क्या है? तभी कमरा खुला और अन्य चार रोमियो जिन्होंने रीटा को चोदा था वो कमरा धोने का सामान साथ लेकर अंदर आये.

“ओह! अभी तक आप व्यस्त हो!” उनमें से एक ने बोला।

“हाँ, और अभी कुछ और देर लगेगी. सबीना ने ठीक से नहाया नहीं है. तुम भी आकर सहायता करो.”

वो चारों रोमियो भी आ गए और सबीना के ऊपर अपने मूत्र का योगदान किया.

“ओके, मामा। अब आप टब में अकेले इंजॉय करो, हम कमरे की धुलाई सफाई करते हैं.”

आठों रोमियो दो दो के गुट में कमरे को धोने लगे. सोफे को अच्छे से धोया परन्तु किसी साबुन का प्रयोग नहीं किया. कोई सुगंधित पदार्थ था, जिसके कारण धीरे धीरे कमरे का वातावरण अत्यंत मनोरम हो गया. सबीना टब में लेटी अपनी हथेलियों से टब में भरे पानी को डालती रही. इस अवधि में उसने स्वयं भी दो बार टब में मूत्रत्याग किया.

जब रोमियो शेष कमरे को धो चुके तो उसके पास आये.

“अब आपको निकलना होगा. हमें टब को भी धोना है, और कमरे को साबुन से धोना है. इसीलिए प्लीज़ अब आप बाहर आ जाइये और उधर जाकर स्नान कर लीजिये. उसके बाद आपको आपके कमरे में छोड़ देंगे.”

सबीना का मन और पेट अब भर चुके थे. उसने अपना हाथ ऊपर किया और खड़ी हो गई. एक बार टब के स्नेह से देखकर वो स्नान करने चली गई. उसने अच्छे से स्वयं को धोया और फिर बाहर आई. आठों रोमियो पूरी कर्मठता से सफाई में लगे थे. उसे देख एक रोमियो आगे बढ़ा और उसे लेकर उसके लिए निर्धारित कक्ष में ले गया. वहाँ राशि बैठी हुई थी. उसके हाथ में व्हिस्की का ग्लास था. रोमियो सबीना को छोड़कर चला गया. राशि ने कुछ न कहकर सबीना को पेग बनाने का संकेत दिया. पेग लेकर सबीना राशि के सामने बैठ गई. कुछ पलों तक कोई कुछ न बोला। फिर सबीना ने ही चुप्पी तोड़ी.

“आप सबका बहुत धन्यवाद, मैंने जीवन का अभूतपूर्व अनुभव प्राप्त किया है.” उसने अपने ग्लास से व्हिस्की पीते हुए कहा, “और सबसे अधिक अचरज की बात ये है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या गाली के बिना सब कुछ हुआ, जबकि इस प्रकार के खेल में ऐसा होने ही अत्यधिक संभावना रहती है.”

“हाँ, ये सच है. पर यही हमारे क्लब की विशेषता भी है. चाहे चुदाई कितनी भी भीषण और निर्मम हो, किसी भी सदस्या को अपशब्द नहीं कहे जाते. पहले सबको मैडम कहकर सम्बोधित किया जाता था, पर अब मैंने नाम से सम्बोधित करने का आदेश दिया है. इससे कुछ आत्मीयता का अनुभव होगा.”

“ये सच है. सचिन जब मुझे नाम से पुकारता था तब मुझे बहुत अच्छा लगता था.” फिर वो कुछ सोचने लगी. “क्या ये सब लड़के मेरे विषय में घृणित धारणा बनाएँगे? उनके मूत्र को पिया, चाटा और उसमें नहाई हूँ. क्या उन्हें मुझसे घृणा नहीं होगी?”

“नहीं, ऐसा कुछ नहीं होगा. उन्हें इस बात की समझ है, यूँ ही नहीं उन्हें हम इतना अच्छा वेतन देते हैं. जब तक वो क्लब छोड़ेंगे, उनके पास आगे के जीवन के लिए पर्याप्त धनराशि होगी.” राशि ने समझाया.

“वैसे हमारे दोनों नए अफ़्रीकी रोमियो ने इस खेल में नई ऊर्जा भर दी है. उन्हें विश्वास है कि उनके अन्य दो मित्र भी इस क्रीड़ा में सम्मिलित हो जायेंगे. उनकी संस्कृति में इसमें कोई हीनता नहीं मानी जाती. सम्भव है कि उन्हें आज ही इसका अनुभव भी हो जाये.” राशि ने अर्थपूर्ण ढँग से आँखें नचाते हुए कहा.

“क्या?”

“हाँ, आज वो चारों तुम्हारे साथ रहेंगे, कल दोपहर के भोजन तक. वैसे कल नाश्ते के बाद पार्थ और सचिन का एक सत्र रहेगा. वो तुम्हें एक नए सम्मिश्रण से अवगत कराएँगे. अन्य सभी अनुभव तुम्हें इन चारों के ही साथ मिलेगा.”

“पर अपने तो कहा था कि सचिन अब नहीं आएगा.”

“हाँ, पर मैंने ये सोचा कि इस आसन के लिए सचिन के होने से तुम्हें सरलता होगी. इसीलिए, मैंने ये निर्णय लिया है. हालाँकि पार्थ बहुत न नुकुर कर रहा था.”

सबीना सोचने लगी कि ऐसा कौन सा आसन है जिसके लिए राशि ने सचिन को फिर उसके साथ संलग्न किया है. उसके मन में एक ही उत्तर आया पर उसने इसके विषय में अधिक नहीं सोचा. कल की कल देखेंगे. आज की रात तो उसकी चुदाई चार चार अफ़्रीकी लौंड़ों होने वाली थी. यही सोचकर उसकी चूत पनिया गई. राशि उसे देखकर मुस्कुराई.

“ध्यान रहे कुछ खेल बाथरूम में ही खेलना, कमरे में बिलकुल भी नहीं!”

“मैं समझती हूँ.”

“ठीक है, तो मैं चलती हूँ. रोमियो मेरे कमरे में आने वाले होंगे.”

सबीना ने उसे देखा, “अगर हम दोनों को रात भर चुदना ही है तो यहीं रहिये.”

राशि उसे कुछ देर तक देखती रही.

फिर बोली, “ठीक है. पर मेरे कमरे में चलते हैं.”

सबीना और राशि ने अपने ग्लास समाप्त किये और राशि के कमरे में चले गए.

सबीना राशि के कमरे को देखकर समझ गई कि उसे यहाँ क्यों लाया गया है. कमरा न केवल बड़ा और विस्तृत था, परन्तु उसमें एक और पलंग भी था. उसने राशि की ओर प्रशंसा से देखा.

“पार्थ और रूचि ने यही कमरा मुझे दिया है. उनका कहना था कि अगर कोई अतिथि आ गया तो उपयोग में आएगा.”

राशि ने ये बताना उचित न समझा कि वो अतिथि उसकी बेटियाँ हो सकती थीं. रूचि के तो इस कमरे में रुकने का कम ही संयोग बनेगा क्योंकि वो पार्थ के ही साथ रुकेगी. सबीना ने भी ये न पूछा कि रूचि कौन है.

“आओ तुम्हारी रूचि का भी कमरा देख लो.” वो सबीना को लेकर बाथरूम में गई, जिसे देखकर सबीना प्रफुल्लित हो गई. बहुत विशाल बाथरूम था, जिसमें एक टब भी था.

“टब तुम्हारे ‘उस’ उपयोग के लिए नहीं है.” राशि ने उसे छेड़ा.

“मैंने तो कुछ भी नहीं कहा!” सबीना शर्मा गई.

राशि ने उसके चेहरे को हाथ में लिया और उसके होंठ चूमकर कहा, “मैं यूँ ही कह रही थी. अगर तुम चाहोगी तो मैं रोकूँगी नहीं. पर इसे धोना तुम्हें ही पड़ेगा.”

सबीना ने सिर हिलाकर अपनी सहमति दे दी. वो ऐसे सुनहरे अवसर को जाने नहीं दे सकती थी.

“आओ एक ड्रिंक और लेते हैं, हमारी रात के साथी आने ही वाले होंगे.” राशि कमरे में लौट कर दो पेग बनाने लगी. दोनों एक दूसरे के सामने खड़ी होकर चुस्कियां लेती रहीं.

“जो भूमिका मैंने तुम्हारी चुदाई के समय निभाई थी वो क्या तुम मेरी चुदाई में निभाना चाहोगी?”

“हाँ, मैंने रीटा के भी साथ यही किया था. मुझे अच्छा लगा था.”

“चलो तो आज की रात बहुत संतुष्टि देने वाली है.” राशि ने अपना ग्लास समाप्त किया और अपना गाउन निकाल दिया. सबीना ने भी उसका अनुशरण किया. राशि सोफे पर बैठी और सबीना को चूत चाटने का निमंत्रण दिया.

सबीना निःसंकोच राशि के सामने बैठी और उसकी चूत को तत्परता से चाटने लगी. राशि को उस पर बहुत स्नेह आ रहा था. उसे ये विदित हुआ कि सबीना मन से निश्छल थी. राशि ने उसकी हर कल्पना को पूरा करने की प्रतिज्ञा की.

“अपनी अम्मी की भी चूत चाटी है कभी?” राशि ने पूछा तो सबीना ने सिर हिलाकर सहमति दी.

“हम्म्म, अभी क्या समय हुआ होगा दुबई में?”

“साढ़े नौ हुए होंगे.”

“क्या कर रही होंगी तुम्हारी अम्मी और निगार.”

सबीना ने सिर ऊपर किया. फिर मुस्कुराते हुए बोली.

“अगर खाना खा चुके होंगे तो चुदवा रही होंगी, और अगर अभी तक नहीं खाया तो भी चुदवा ही रही होंगी.”

इस बात पर दोनों हंसने लगीं.

“सबीना, मैं सोच रही थी कि रोमियो आने ही वाले हैं, क्यों न तुम्हारी अम्मी और निगार को ट्रेलर दिखाया जाये. पर केवल उन्हें. क्या सोचती हो?”

“ठीक है, पर मेरा फोन तो आपके ऑफिस में है.”

“मैं लाती हूँ. तुम एक पेग बनाओ.”

जब तक सबीना ने पेग बनाया राशि उसका आई-फोन ले आई. सबीना ने अमीना को फोन लगाया. अमीना ने फोन उठाया तो वो सामान्य दिख रही थी.

“कैसी है मेरी लाडो? अब ध्यान आया अपनी अम्मी का?”

“अच्छी हूँ. आप कैसी हो? कहाँ हो? क्या कर रही हो?” सबीना ने प्रश्नों की झड़ी लगा दी.

“अरे थोड़ा धीरे बोल. घर पर हूँ, सारे पुरुष एक मीटिंग में गए हैं. आएंगे लगभग एक घण्टे बाद. बस मैं और निगार बैठे हुए है उनके लिए. क्या कर रही हो?”

राशि मुस्कुराई, नियति ने कितना अच्छा अवसर बनाया है.

सबीना ने कहा: “अम्मी निगार को भी बुलाओ न, मुझे कुछ दिखाना है.”

अमीना ने निगार को बुला लिया और सबीना ने उसे चुम्मा दिया.

अमीना: “अब बोल क्या दिखाना है?”

सबीना: “अम्मी आपको पता है न मैं उस क्लब में आई हुई हूँ आज सुबह से. ओह! अम्मी! ओह! निगार! मैं बता नहीं सकती कि क्या क्या किया मैंने आज. बहुत आनंद लिया है. इतनी चुदाई की है और अभी और होनी शेष है. ये तीनों दिनों में मेरी इतनी चुदाई होगी जितनी एक महीने में भी नहीं होती है.”

अमीना का चेहरा खिल उठा. उसे अपने लिए भी भविष्य उज्ज्वल दिखने लगा. पर निगार ने अपना प्रश्न पूछा.

“अरे सबीना, जो तेरी नई रूचि बनी है, उसका भी कुछ हुआ? कुछ पिया?”

“अरे भाभी, पूछो मत, पाँच लीटर पी लिया होगा आज तो, और भाभी!”

निगार का खुला मुँह देखकर सबीना रुक गई.

“पाँच लीटर! क्या कह रही हो?”

“हाँ मेरी प्यारी भाभी. पाँच लीटर और तो और मैं उसमें नहाई भी और लोटी भी. बहुत मजा आया भाभी.”

निगार को तो सब समझ आ रहा था पर अमीना को समझ नहीं पड़ा.

“क्या पी लिया? किसमें नहाई हो?” अमीना ने पूछा.

निगार ने उनकी ओर देखा और बोली, “अम्मी सबीना ने पाँच लीटर मूत पिया है और उसमें ही नहाया भी.”

अमीना की आँखें और मुँह खुले रह गए. पर सबीना अब रुकने वाली कहाँ थी.

“अरे भाभी, एक मेरी गाँड मारता था तो दूसरा मेरे मुँह में मूतता था. क्या बताऊँ भाभी मेरी क्या स्थिति हो गई थी. दस इंच से बड़े लौड़े मेरी चूत, गाँड मारते फिर मुझे मूत्र पिलाते.”

“दस इंच से बड़े? इतने बड़े?”

“हाँ अम्मी और मोटे मोटे भी. आप सच में बहुत सुखी रहोगी इनसे चुदवा कर. आप भी भाभी. आप रुकना मैं आपको दिखाऊंगी। अभी आने वाले हैं वो मुझे और राशि को चोदने।”

“राशि कौन?”

सबीना ने राशि की ओर फोन किया, “मैं राशि हूँ क्लब की मैनेजर.”

अमीना: “आप तो मेरी ही आयु की लगती हो.”

राशि ये नहीं बताना चाहती थी कि वो अमीना से कुछ वर्ष छोटी थी.

“हाँ, पर हूँ आपके जितनी ही चुड़क्कड़. रात में जब तक गाँड न मरवा लूँ नींद नहीं आती है.”

“ओह!”

“आपके आने की राह देख रहे हैं. आपको भी सच में बहुत आनंद आएगा.”

तभी कमरे का द्वार खुला और आठों रोमियो अंदर आये.

राशि: “लो, हमारी सेवा के लिए हमारे रोमियो आ गए.” फिर उन रोमियो को संकेत दिया कि वो गाउन फेंक दें और उसके पीछे खड़े हो जाएँ. उसने सबीना को अपने पास बैठने का संकेत किया.

सबीना भी बैठ गई और अमीना और निगार ने उनके पीछे आठ रोमियो खड़े होते हुए देखे. पर उनके लौड़े सोफे से छुपे थे. राशि ने इसका समाधान किया और सबीना को बैठे रहने दिया और खड़ी हो गई और फोन को आठों रोमियो के खड़े तमतमाए लौंड़ों की ओर इंगित किया.

“हाय रे निगार, ये तो सच में मोटे और लम्बे हैं. चुदने में बहुत आनंद आएगा.”

राशि ने फोन अपनी ओर किया और बोली, “अब आप जब आएंगी तब देखेंगी. अभी हम दोनों को चुदने को मन है. बाय बाय!”

राशि ने फोन काटा और सबीना को उठाया.

“चलो, अब कुछ चुदाई हो जाये.” सबीना के साथ वो गाँड मटकाते हुए पलंग को ओर चल दी.

रात अभी शेष थी.

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क्रमशः

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अध्याय ६५: जीवन के गाँव में शालिनी 2

अध्याय ५४ से आगे

अब तक:

जीवन के गाँव में नए समीकरण बन रहे थे. शालिनी उनके परिवारिक समूह में सम्मिलित होने की अपेक्षा में उत्तीर्ण हो चुकी थी. अपनी गाँड को बलवंत को अर्पण करके उसने जीवन के साथ आगे के संबंध के लिए राह सुगम कर दी थी. असीम और कुमार ने पूनम की चूत की एक साथ चुदाई करके उसे नए आकाश की यात्रा कराई थी. अब बबिता और निर्मला ने भी इस प्रकार से चुदने की इच्छा जताई।

असीम और कुमार के कहने पर जीवन ने कँवल और बबिता के पुत्र उदय और सुशील और निर्मला की पुत्री सुरभि से बात की और एक बार सभी मित्रों को सपरिवार मिलने का आमंत्रण दिया. उदय और सुरभि के पुत्र अभि और पुत्री शुभि से मिलने के लिए सब उत्सुक थे, क्योंकि उनसे मिले हुए एक वर्ष से अधिक हो चुका था.

रात्रि का चुदाई समारोह अब आगे बढ़ रहा था.

निर्मला किसी युद्द में जा रही वीरांगना के समान उठी और जहाँ पूनम की धुँआधार गाँड मारी गई थी वहाँ जाकर बैठ गई. कुमार और असीम उसके सामने खड़े हुए और उनके लौड़े उसके मुँह में समा गए. गीता जस्सी और सुशील के लौड़े चूसकर आनंद का आदान प्रदान कर रही थी. वहीँ बबिता ने कँवल और बलवंत के लंड मुँह में ले लिए और चूसने लगी. उधर जीवन शालिनी को लेकर उसी बिस्तर की ओर अग्रसर हुआ जहाँ बलवंत ने शालिनी का स्वागत किया था.

अब आगे:

निर्मला अपने नातियों के लौड़े चूसने लगी. उसे आशा थी कि पूनम की जैसे धुँआधार चुदाई हुई थी कुमार और असीम उसे भी उसी प्रकार से चोद कर नया सुखद अनुभव देंगे. कुमार और असीम के लिए ऐसे सुनहरी अवसर कम ही आते थे जब उन्हें इस प्रकार की दुहरी चुदाई करने के लिए महिलाएं पंक्ति में खड़ी हों. उनकी अपनी नानी गीता को अवश्य इसके लिए उनके घर पहुंचने की प्रतीक्षा करनी होगी. परन्तु पूनम के बाद, अब निर्मला और फिर बबिता नानी भी इसका आनंद लेने के लिए व्यग्र प्रतीत हो रही थीं. उनकी होने वाली दादी इस प्रकार का प्रयोग करने की इच्छुक होंगी इसका उन्हें विश्वास न था. परन्तु उनके दादा ने उनकी भेंट चढ़ाने में अधिक समय व्यर्थ नहीं करना था. निर्मला के अथक परिश्रम से उनके लौड़े अब पत्थर के समान कठोर हो चले थे.

“नानी, अब बस करो नहीं तो मुँह में ही निकल जायेगा. आपका मुँह बहुत प्रतिष्ठित है लौड़े झाड़ने के लिए.” असीम ने निर्मला से कहा तो निर्मला गर्व से फूल गई.

“बातें न बनाओ बिटवा, सब जानते हैं. तुम चोदने के लिए तड़प रहे हो.” निर्मला ने सिर ऊपर उठाकर कहा, “पर हम भी उतने ही आतुर हैं. देखें पूनम को ऐसा कौन सा सुख दिया है कि अब तक मस्त है.”

सबने पूनम को देखा जो आँखें बंद किये लेटी हुई मुस्कुराते हुए अपनी चूत सहला रही थी.

“आप भी उनके जितना ही सुख पाने वाली हो नानी. कोई कमी नहीं रखेंगे तुम्हारी चुदाई में. निश्चिन्त रहो, नहीं तो नाना को क्या मुँह दिखाएँगे?” असीम ने निर्मला को विश्वास दिलाया.

निर्मला भी पूर्णतः आश्वस्त हो गई कि दोनों नाती कोई दया नहीं करेंगे और उसे इस नए सुख पूरा अनुभव कराएंगे.

उधर बबिता ने कंवल और बलवंत के लंड चूसते हुए अचानक अपना सिर ऊपर किया और गीता को कोहनी मारी. गीता उसकी ओर देखने लगी तो बबिता पूछा, “आप कब जा रहे हो सुनीति के घर?”

बलवंत ने शालिनी और जीवन की ओर देखा फिर कहा, “आज से दो दिन बाद. क्या हुआ?”

बबिता बोली, “मैं सोच रही थी कि कुछ और दिन रुक जाते. आपके जाने के बाद बस हम तीन परिवार ही बचेंगे.”

गीता ने उसका हाथ पकड़ा तो बबिता बोली, “सच कहूँ तो मेरी इच्छा है कि जाने से पहले आप सारे पुरुष एक एक रात हममें से एक एक की सामूहिक चुदाई करो.”

ये सुनकर गीता की चूत और गाँड में कीड़े रेंगने लगे. उसने बलवंत की ओर देखा. बलवंत मुस्कुरा दिया.

“ये तो ठीक है, पर बाकी चारों क्या करोगी?”

“वो सोचेंगे, सहायता करेंगे. और एक दूसरे का मन बहलाएँगे। आपके लौड़े तने रखेंगे. आप बताओ क्या ये सम्भव है?”

“ठीक है, जीवन मान जायेगा, पर उसकी भावी पत्नी का पता नहीं.”

“उसे हम मना लेंगे.”

“तो ठीक है, पक्का. कल से हर रात तुममें से एक की सामूहिक चुदाई होगी और दिन में दूसरी.”

सब प्रसन्न हो गए और फिर से बबिता और गीता लंड चूसने में व्यस्त हो गईं.

जीवन शालिनी को चूम रहा था.

“बलवंत ने कोई कष्ट तो नहीं दिया न तुम्हारी चुदाई में?”

“नहीं, मुझे आनंद ही आया. और जो थोड़ा कष्ट हुआ तो आपके समूह में जुड़ने के भाव से अनुभव ही नहीं हुआ. अब अपनी गाँड आपको समर्पित करने के लिए लालायित हूँ.” शालिनी ने उत्तर दिया तो जीवन ने उसके नितम्ब अपनी हथेलियों से दबा दिए.

“उई !” शालिनी के मुँह से निकला तो पूनम की तंद्रा टूटी.

“भाईसाहब! थोड़ा प्रेम से करो. कहीं भागी नहीं जा रही हैं.!” उसने हँसते हुए कहा.

फिर शालिनी से बोली, “ये इन सब पुरुषों के अनुपात में अधिक निर्दयी है, गाँड मारने में तो जैसे पागल हो जाता है. पर सच में इससे गाँड मरवाने में सुख भी बहुत मिलता है.”

जीवन बोला, “क्यों डरा रही है? अभी देखना कल मेरे पोते जब तेरी गाँड की बखिया उधेड़ेंगे तो तू मुझे दयालु समझेगी.”

“मरवा चुकी उनसे गाँड दिन में. पर तेरे जैसे जानवर नहीं हैं मेरे नाती!”

“कल जब दो दो लौड़े गाँड में पेलेंगे न तब बोलना. अब बस कर!”

जीवन ने शालिनी के होंठों से आरम्भ करते हुए नीचे चूमते हुए आना आरम्भ किया तो शालिनी खड़ी हुई सिहर उठी. चूत को चूमने के बाद उसने शालिनी को पलटा और उसकी गाँड को चूमते हुए ऊपर की ओर आने लगा. शालिनी के पाँव काँपने लगे. जीवन ने उसे धीमे से पलंग पर घोड़ी बना दिया और पूनम को संकेत दिया जिसने तुरंत उठकर तेल की कटोरी उठा लाई.

“आप अपने लौड़ा चुसवाओ, इनकी गाँड मैं संभालती हूँ.” पूनम ने जीवन को कहा तो वो हट गया और शालिनी के सामने जाकर अपना लंड लेकर खड़ा हो गया. शालिनी ने उसे प्रेम से चाटना आरम्भ किया।

पूनम ने शालिनी की गाँड को चूमा फिर चाटा और अपनी जीभ से कुरेदा. फिर अपनी ऊँगली में घी लगाकर उसे शालिनी की गाँड में डाल दिया. बलवंत से चुदी गाँड सरलता से खुल गई. पूनम ने प्रेमपूर्वक शालिनी की गाँड को घी से चिकना कर दिया. फिर जीवन को बुलाया और उसके लौड़े पर भी घी लगाकर उसे चिकना कर दिया.

“देखो देखो देखो! अब भाईसाहब अपन दुल्हनिया की गाँड की आहुति लेने जा हैं.” उसने घोषणा की तो अन्य सब उस ओर ही देखने लगे. उन्हें कुछ पलों के लिए अपने सुख में विराम लगाने में कोई समस्या नहीं थी.

पूनम ने जीवन के मोटे लम्बे लौड़े को शालिनी की चिकनाई युक्त गाँड पर रखा तो सभी दर्शक निकट आ गए. शालिनी को कुछ लज्जा आई कि सब उसकी गाँड मरवाने के साक्षी बनने जा रहे थे. जीवन ने पूनम को संकेत किया तो पूनम शालिनी के सामने जा बैठी और पैर फैला लिए. शालिनी के सामने उसकी दो लौंड़ों से चुद कर लाल हुई पड़ी चूत सामने थी. अदिति और अनन्या की चूत तो उसने चाटी हुई थी, पर आज एक नई चूत उसके सामने परोसी गई थी. शालिनी ने अपनी जीभ बढ़ाकर उसपर घुमाई ही थी कि उसे अपनी गाँड में अपने भावी पति जीवन के मूसल लौड़े का प्रवेश होने का आभास हुआ.

पूनम ने आगे खिसकते हुए शालिनी का मुँह अपनी चूत पर धीरे से दबा दिया. पूनम ने सोचा था कि जीवन शालिनी की गाँड भी उसी प्रकार से मारेगा जैसा उसका स्वभाव है, इसीलिए उसने शालिनी की चीख दबाने के लिए ऐसा किया था. पर जीवन ने ऐसा कुछ न किया, वो शालिनी की गाँड की परतें खोलने से पूर्व उसकी गाँड को नहीं फाड़ना चाहता था. पूनम को कुछ निराशा हुई, उसने शालिनी के सिर पर से अपना हाथ हटा लिया. शालिनी अपनी गाँड में आगे बढ़ते लौड़े को अनुभव करते हुए झड़ने लगी.

धीमी गति से आगे बढ़ते हुए जीवन ने अंततः अपना पूरा लंड शालिनी की गाँड में डाल ही दिया. शालिनी श्वास रोके इस पल की ही प्रतीक्षा कर रह थी. उसने अपना सिर पीछे किया.

“जैसे आप मेरी इन बहनों की गाँड मारते हैं, वैसी ही मेरी भी मारना। मैं नहीं चाहती कि ये मुझे सौतन समझने लगें.”

शालिनी की बार सुनकर महिलाओं की आँखें भर आयीं और पुरुषों को उस पर गर्व हुआ. जीवन के गाँड मारने की शैली देखने के बाद अगर वो इस प्रकार से बोल रही थी तो उसके साहस की प्रशंसा करनी तो बनती थी. जीवन ने उसकी गाँड पर अपना खुरदुरा हाथ घुमाया.

“ठीक है, अगर यही चाहती हो तो. अब मैं तुम्हें मना तो कर भी नहीं सकता.” जीवन ने द्विअर्थी संवाद से शालिनी का डर कम किया तो उसकी गाँड स्वतः कुछ ढीली पड़ गई.

पूनम ने शालिनी के मुँह पर फिर अपनी चूत लगा दी. और अन्य सभी अपने पूर्व जोड़ियों में यथास्थान चले गए. लौड़े अब और तमतमा चुके थे पर उन्हें कुछ गीला करना आवश्यक था. निर्मला ने असीम और कुमार के लौड़े चाटे तो गीता ने जस्सी और सुशील के लौड़े और बबिता ने कँवल और बलवंत के लंड मुँह में ले लिए.

कुमार नीचे लेट कर अपने लंड को पकड़े हुए था. निर्मला ने उसका हाथ हटाया और उसके दोनों ओर पैरों को करते हुए उसके तने लंड को अपनी चूत में उतार लिया. उसकी पीठ कुमार सिर की ओर थी और लंड को चूत लेकर पीछे झुकी तो कुमार ने उसे सहारा दिया. इस कारण उसके दोनों हाथ मुक्त थे. उसने अपने भग्नाशे को रगड़ते हुए असीम की ओर देखा.

“पेल दो बिटवा अब अपना लौड़ा भी पेल दो मेरी चूत में. देखूँ क्या सुख दिया है तुमने पूनम को.”

असीम कब मना करने वाला था.

“नानी, एक बार में पेल दूँ या धीरे धीरे!”

“अब तुम दोनों समझो ये. जैसा ठीक लगे सो करो. वैसे मेरी चूत कुमार के लौड़े से भी भरी हुई अनुभव हो रही है.”

असीम समझ गया कि संयम से चोदने में ही भलाई है. कहीं चोट लग गई तो उनके नाना उनके लौड़े लगा देंगे. उसने कुमार की जाँघ को थपथपाया तो कुमार ने अपना लंड बाहर खींच लिया. असीम ने अपने भाई के लंड से समकक्ष अपने लंड को रखा और दोनों भाइयों के तालमेल से बनी लय के साथ निर्मला की चूत में दोनों लंड एक साथ धकेलने लगे. कई पलों के पश्चात दोनों के लंड निर्मला की वयोवृद्ध चूत में पूरे प्रविष्ट हो गए. इसके बाद दोनों भाई रुक गए और असीम निर्मला के चेहरे को देखने लगा जहाँ उसे एक संतुष्टि का भाव दिखाई पड़ा.

निर्मला ने आँखें खोलीं, “सच में चले गए तुम दोनों के लंड मेरे भीतर. कितना भरा भरा लग रहा है, बता नहीं सकती. ऐसा लग रहा है मानो मेरी चालीस वर्ष पहले वाली तंग चूत हो. अब करो जो करना है. मेरी तो चूत इतना पानी छोड़ रही है कि एक तालाब बन जाये.”

ये सच था, निर्मला की चूत से झरते पानी के ही कारण इतने मोटे मोटे दो दो लौड़े इतनी सरलता से उसकी चूत में जा सके थे. असीम और कुमार दुविधा में थे. जहाँ निर्मला नानी उन्हें बड़ी सरलता से आगे बढ़ने के लिए उत्साहित कर रही थीं, वहीँ उन्हें अपने नानाओं का भय भी था. कहीं ऐसा न हो कि वो अपने ढँग से नानी को चोद दें फिर लेने के देने पड़ जाएँ. इसका समाधान उनके नाना और निर्मला नानी के सुशील ने दिया.

उन्होंने दूर से ही नातियों से कहा कि वे अपनी नानी का कहा मानें और जैसी भीषण चुदाई का आनंद उन्होंने पूनम को दिया था उससे लेशमात्र कम भी उनकी पत्नी को न दें.

“बुढ़िया को चलने योग्य मत छोड़ना.” उनके इन शब्दों ने निर्मला भविष्य निर्धारित दिया.

“अब सुन लिया बिटवा अपने बूढ़े नाना की आज्ञा को. अब ठूँठ के समान लौड़े डालकर मत पड़े रहो मेरी चूत में. कुछ हिलो डुलो और चोदो अपनी नानी को.” निर्मला ने भी आज्ञा दी.

असीम और कुमार के मन में अगर कोई संशय था तो वो दूर हो गया. उनकी आँखें मिलीं और दोनों ने निर्मला को अपने पूरा उपचार देने का निर्णय लिया. धीमी गति से दोनों ने अपने लंड अंदर बाहर करने आरम्भ किया और कुछ ही देर में पूरी गति के साथ निर्मला की भीषण चुदाई में जुट गए. निर्मला को एक नए आनंद का बोध हुआ और उसकी सिसकारियों ने चीखों का रूप लेने में अधिक देर न लगाई. कुछ पलों के लिए अन्य जोड़ों ने उनकी ओर देखा फिर सब अपने कर्मकांड में व्यस्त हो गए. निर्मला की चुदाई की वीभत्सता पूनम से अधिक थी. पूनम को बहुत प्रेम से दोनों ने दो लौंड़ों का आनंद दिया था. पर अपने नाना नानी के आशीर्वाद पाकर उन्हें निर्मला को अपने ढंग से चोदने में कोई संकोच न था.

जहाँ एक ओर निर्मला को चूत दो दो लौड़े खाकर पानी छोड़ रही थी, वहीँ जीवन के लंड ने मंथर गति से शालिनी की गाँड में अपने लंड को पूर्ण रूप से स्थापित कर दिया था. पूनम की चूत पर अब शालिनी की जीभ स्वतः ही नर्तन थी और पूनम के रस का भोग कर रही थी. पूनम में जीवन की ओर देखा और संकेत में पूछा कि अब तक वो इतना संयम क्यों रखे हुए है? जीवन ने शालिनी की गाँड को आक्रमक चुदाई के लिए उपयुक्त बना लिया था. उसने इसका बोध पूनम को कराया तो पूनम मुस्कुरा दी. अब शालिनी को पता चलेगा कि उसका भावी पति किस भयावहता और निर्ममता से गाँड का संहार करता है.

परन्तु उसके पहले पूनम शालिनी के सामने से उठी और शालिनी की गाँड के पास जा खड़ी हुई. जीवन अपनी शैली को भलीभाँति समझता था, इतने वर्षों का साथ जो था. उसने अपना लंड धीमे से बाहर निकाला तो पिघला हुआ घी शालिनी की गाँड से बह निकला. पूनम ने शालिनी की गाँड में जीभ डाली और घुमा दी. अब शालिनी की गाँड पूरी खुली हुई थी. उसके बाद उसे जीवन के लंड को चाटने में भी कोई संकोच न हुआ और फिर से उसने जीवन के लौड़े को शालिनी की गाँड पर रख दिया.

“अब जब दुल्हनिया जम के गाँड मारने को बोल रही है तो झिझक क्यों रहे हो. फाड़ दो इसे भी जैसे हमारी फाड़ते हो. हम पर तो कभी अपने दया नहीं दिखाई. जब तक दीदी थीं उनकी भी आपने भयंकर ढंग से ही गाँड मारी थी. अब क्यों ढीले पड़ रहे हो?”

“सच कहती हो. अब हटो मैं अपनी दुल्हन की कैसे गाँड मारता हूँ ये देखो.” जीवन ने दो शक्तिशाली धक्कों में अपना पूरा लम्बा मोटा मूसल शालिनी की गाँड में पेल दिया.

शालिनी इस अकस्मात आक्रमण से ढल गई और उसकी चीख कमरे में गूँज उठी. कमरे में उपस्थित सर्वजन इस चीख को सुनकर प्रसन्न हो गए. उनका जीवन अब भी पहले वाला जीवन ही था. और शालिनी की चीखें निरंतर कमरे में गूँजती रहीं। जीवन अपने पूर्व रूप में किसी दैत्य की गति और शक्ति से शालिनी की गाँड मार रहा था. पूनम ने अपना कार्य सम्पन्न हुआ जानकर निर्मला की ओर जाने का निर्णय लिया.

पूनम ने असीम और कुमार को निर्मला की चूत को एक साथ चोदते देखा तो उसे अपनी कुछ देर पहले हुई चुदाई ध्यान में आई और उसने एक सुझाव दिया.

“बच्चों, ऐसी चुदाई इस आसन में न करके तुम्हें इसके लिए सोफे का उपयोग करना चाहिए. उससे तुम्हें निर्मला को सँभालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उसे और भी गहराई से चोद सकोगे.”

“वाह नानी, क्या सुझाव दिया है. अपने समय क्यों नहीं सोचा?” असीम ने अपना लौड़ा निर्मला की चूत से बाहर निकालते हुए पूछा.

“बिटवा, तब चुदने में इतनी खोई थी कि और कुछ ध्यान में ही न था. अभी निर्मला की चुदाई देखी तो समझा कि मेरी चुदाई में क्या कमी रह गई थी.” पूनम ने बताया.

अब तक निर्मला भी कुमार के लंड को छोड़कर उठ गई थी.

“तेरी चुदाई हो और कमी न रहे ऐसा तो आज तक हुआ नहीं है. तेरी जैसी चुड़क्कड़ तो सदियों में एक ही जन्म लेती है.” निर्मला हँसते हुए बोली.

पूनम कौन कम थी, “हाँ, ये तो है, पर इस सदी में हम चारों एक साथ ही आ गई हैं.”

असीम अब सोफे पर जा बैठा था और निर्मला उसकी ओर बढ़ी कि पूनम ने उसे रोका. फिर लपक कर असीम के लंड को मुँह में लिया और चाट लिया.

“दीदी, तुम्हारा स्वाद बहुत निराला है. रुक नहीं पाई.”

“कोई बात नहीं कुमार के लौड़े पर भी वही रस है, जा उसे भी चाट ले.” निर्मला ने प्रेम से कहा तो पूनम ने इस अवसर का लाभ उठाया. निर्मला फिर से पीठ के बल असीम के लौड़े पर जा बैठी और सोफे के हत्थों का सहारा ले लिया. उसे पूनम के सुझाव का लाभ समझ आ गया. अपना लंड चटवाकर कुमार सामने आया और फिर से निर्मला की चूत में लंड पेल दिया.

“भाई पूनम नानी का आइडिया बहुत उत्तम है. अब हमें इसी आसन में चुदाई करेंगे.” कुमार ने कहा.

“सही बात है. अब मैं नानी के मम्मों से भी खेल सकता हूँ.” असीम ने निर्मला के मम्मों को हाथों में लेकर मसलते हुए बोला।

“और मैं उनकी चुम्मी ले सकता हूँ.” कुमार ने निर्मला के होंठों को अपने होंठों से जोड़ दिया.

दोनों भाई उसे पूरी शक्ति से उसे चोदने लगे और निर्मला अब आनंद की अनंत ऊँचाई की ओर अग्रसर होने लगी.

जीवन अपनी प्रेयसी की गाँड उसी प्रकार से मार रहा था जिसके लिए वो विख्यात था. उसके मोटे और लम्बे लौड़े ने शालिनी की गाँड में हाहाकार मचाया हुआ था. शालिनी की चीखें अब कुछ दब चुकी थीं. उनका स्थान अब कुछ घुटी हुई सिसकारियों ने ले लिया था.

बबिता अब बलवंत के लंड के ऊपर बैठकर उसे अपनी चूत में समा चुकी थी. कंवल अब पीछे आया और उसकी गाँड पर रखा और घिसने लगा.

“ क्यों सता रहे हो. कितनी देर से तड़प रही हूँ चुदने के लिए. अब पेल दो मेरी गाँड में अपना लौड़ा. अब और मत रुको.”

कँवल तो मानो इसी की प्रतीक्षा में था, उसने बबिता की गाँड पेला तो बबिता जाकर बलवंत के सीने पर गिर गई. बलवंत ने अपनी बाँहें उसकी पीठ पर बाँध लीं जिससे कि अब कँवल और वो उसे जम कर चोद पाएं. बबिता अब सम्भल ही न सकी थी कि उसकी चूत और गाँड में दोनों मित्रों के लंड भीषण उत्पात मचाने लगे.

गीता जस्सी के लंड पर उसकी ओर पीठ करते बैठी और जस्सी का लंड उसकी गाँड में समा गया. सामने उसकी चूत खुली हुई थी और सुशील ने बिना समय गँवाये उसे अपने लंड से भर दिया. दोनों मित्र अब गीता की चुदाई में व्यस्त हो गए. कमरे में चुदाई का मादक संगीत सुनाई पड़ रहा था. पूनम घूम घूम कर सबके कुकृत्य का अवलोकन कर रही थी. बीच बीच में वो किसी लंड को तो किसी की चूत या गाँड को चाट लेती. उसे इस बात का कोई दुःख न था कि वो इस चुदाई के समारोह में सम्मिलित न थी.

बबिता और गीता की चुदाई भिन्न आसनों में हुई. बबिता की गाँड में कभी कँवल का लौड़ा होता तो कभी बलवंत का, दूसरा लंड उसकी चूत में होता. यही स्थिति गीता की भी थी. उधर शालिनी अब अपनी गाँड में जीवन के लौड़े से धन्य होकर चादर गीली चुकी थी. निर्मला की चुदाई में दोनों भाई स्थान परिवर्तित करते हुए कर रहे थे. सब अब अपने अंतिम पड़ाव पर थे. और कुछ ही पलों में सब झड़कर शांत होने लगे. मुरझाये लौंड़ों ने अपने लंड बाहर निकाले और थककर बैठ गए. पूनम ने इस स्थिति को भाँप कर सबके लिए पेग बनाये हुए थे.

पसीने से लथपथ व्यभिचारियों ने एक पेग तो यूँ ही पी लिया. कुछ शक्ति का सँचार होने पर सब अपने लिए नए पेग बना लाये. स्त्रियाँ शांति से अपने पेग पीती रहीं और एक दूसरे को निहारती रहीं. पुरुष बस शांत बैठे रहे.

फिर पूनम ने चुप्पी तोड़ी.

“तो शालिनी दीदी का स्वागत हो चुका है. अब उन्हें भी इस सबमे सम्मिलित होना है या नहीं इसका निर्णय जीवन भाईसाहब और उन्हें करना है.”

जीवन ने शालिनी की ओर देखा तो उसने सिर हिलाकर सहमति दे दी. सबके मन प्रफुल्लित हो गए. असीम और कुमार अपने दादा को आशा से देखने लगे.

“तुम अभी पीछे हो. मेरे मित्रों का मेरी पत्नी पर पहला अधिकार है.”

“जी दादा जी.” दोनों ने एक स्वर में कहा.

“वैसे अब रात बहुत हो रही है. हमें सोना चाहिए.” गीता बोली.

“हाँ, बस एक पेग और मार लें, फिर चलते हैं.” जस्सी ने कहा.

रात अब ढल चुकी थी और कल के लिए सभी नए सूर्योदय के लिए सोने चले गए.

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क्रमशः

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अध्याय ६६: जीवन के गाँव में शालिनी 3

अध्याय ६५ से आगे

अब तक:

जीवन के गाँव में नए समीकरण बन रहे थे. असीम और कुमार ने पूनम और निर्मला की चूत की एक साथ चुदाई करके नए क्षितिज की ऊँचाई दिखाई.

कँवल और बबिता के पुत्र उदय और सुशील और निर्मला की पुत्री सुरभि से बात की और उनके पुत्र अभि और पुत्री शुभि से लोकेश के रिसोर्ट पर मिलने की योजना बनाई.

एक ही रात्रि में शालिनी की गाँड मारने का सुअवसर पहले बलवंत फिर जीवन को प्राप्त हुआ. शालिनी को अन्य पुरुषों से संसर्ग का आनंद उठाने के लिए अगले दिन की प्रतीक्षा थी. वो भी इस अनाचार के वातावरण में रंग चुकी थी. गीता बबिता सामान्य दुहरी चुदाई का आनंद ले चुकी थीं. अब सब विश्राम के लिए अपने कमरों में लौट गए थे.

अब आगे:

कुमार और असीम अपने कमरे में गए तो कुछ निराश थे. उन्हें आशा थी कि आज रात उन्हें भरपूर चुदाई का अवसर मिलेगा.

असीम: “भाई, चलो सलोनी चाची के घर चलते हैं.”

कुमार: “पगला गए हो क्या? इतना रात उनके पूरे मोहल्ले को शंका हो जाएगी.”

असीम: “वो तो है. पर इस लौड़े को कैसे बैठाएं?”

उनके कपड़े वहीँ क्रीड़ागर में पड़े हुए थे और दोनों नंगे ही अपने कमरे में आ जाये थे.

“सो जाओ. सुबह उठते ही किसी न किसी नानी को दबोच लेंगे.”

कमरे के बाहर बबिता ये सुनकर अंदर जाने से रुक गई. उसने भी इन दोनों को सुबह तड़के ही दबोचने का निर्णय किया और अपने पति के कमरे में चली गई. कंवल ने उसे देखा तो हंसने लगा.

“क्या हुआ? भगा दिया तुझे?”

“भगाएँगे क्यों? वो तो दोनों सलोनी के घर जाने की बात कर रहे थे पर कुमार ने रोक दिया. कह रहा था कि सुबह हममें से किसी एक को दबोच कर चोद देंगे.”

“चल फिर सो जा.”

“हाँ. मुझे तड़के ही उनके कमरे में चुदवाने के लिए जाना होगा, नहीं तो कोई और घुस न जाये.”

“आ जा, अब लेट कर सो ले.”

उधर शालिनी को जीवन अपने कमरे में ले गया और दोनों स्नान करने लगे. शालिनी ग्रामीण परिवेश में भी बाथरूम की नवीनता देखकर प्रभावित हुई. स्नान के बाद जीवन ने दो पेग बनाये और बिस्तर लेटकर दोनों चुस्कियाँ लेते हुए बतियाने लगे.

“मैंने कभी स्वप्न में भी गाँवों में इस प्रकार के संबंधों की कल्पना नहीं की थी. हमारे गाँव में भी ये सुनने में आता था, पर न कभी देखा न किसी ने पुष्टि की. पर आज लगता है वो सत्य ही रहा होगा. पर आप चारों के संबंध सच में अविश्वसनीय हैं. ऐसा प्रतीत ही नहीं होता कि किसी में कोई भी ईर्ष्या हो. सारी महिलाएँ अपने पतियों के सम्मुख आपकी चुदाई की इतनी प्रशंसा करती हैं, पर कोई बुरा नहीं मानता।”

“ये सच है. हम सबमें केवल समाज के लिए ही एक पति और एक पत्नी है. अन्यथा हम सब चार पुरुष और चार ही स्त्रियों का विवाह है. मेरी पत्नी कई बार रात्रि में मेरे किसी अन्य मित्र के घर चली जाती थी. मैं अकेला रहता था या कोई और आ जाता था. ये सबके साथ होता था. इसीलिए कभी हमारे बीच कोई दुर्भावना नहीं आई.” जीवन ने बताया.

“और एक और सच ये भी है कि हममें से किसी को नहीं पता है कि हमारी संतानों के पिता कौन हैं. माता तो स्वाभाविक ही पता चल जाती है.”

शालिनी ने अचरज से जीवन की ओर देखा.

“आपको पता हो न हो, उनकी माताओं को पता होगा. स्त्रियों की छठी इन्द्रिय पुरुषों से अधिक प्रभावी होती है. परन्तु उन्होंने सम्भवतः इसे गुप्त ही रखना उचित समझा होगा.”

“क्या अंतर पड़ता है. हम सबकी चार पत्नियां और चार संतानें हैं. बस यही सत्य है. परन्तु ये अवश्य जानता हूँ कि जिनका विवाह हुआ है वो भाई बहन नहीं है. इस विषय में एक बार बात हुई थी और स्त्रियों ने सही जोड़े बनने पर प्रसन्नता जताई थी.”

पेग समाप्त करने के बाद जीवन ने दूसरा बनाया. न जाने दोनों की नींद कहाँ खो गई थी. बातें करने से मन ही नहीं भर रहा था.

“तुम जानती हो न कल से तुम्हें जस्सी और कँवल भी चोदने वाले हैं. और मेरे पोते तो मानो चोदने के लिए सदा तत्पर रहते हैं. जितना चाहो उतना ही चुदना, कोई दबाव नहीं है.” जीवन ने उसकी आँखों में झाँका, “और जैसे चाहो वैसे चुदना, अपनी किसी इच्छा को दबाना मत. तुम भी विवाह के बाद हम चारों की ही पत्नी बनोगी, समाज में चाहे जो भी दिखे.”

शालिनी ने अपनी सहमति जताई. उसे भी दुहरी चुदाई का आनंद लेना था. असीम और कुमार के युवा लौंड़ों से चुदने की उसकी इच्छा प्रबल थी.

जीवन ने जम्हाई लेते हुए अपनी अंतिम बात कही. “सबने कुछ दिन और रुकने का आग्रह किया है. बबिता, पूनम, गीता और निर्मला चाहती हैं कि एक एक दिन उनका गैंगबैंग किया जाये.”

“गैंगबैंग?” शालिनी ने कौतुहल से पूछा.

“हाँ, इसमें हम सब सात पुरुष एक या दो महिलाओं की मिलकर चुदाई करेंगे. वैसे बबिता की इच्छा तो एक अकेली के गैंगबैंग की ही है.”

“अकेली झेल लेती हैं ये सब आप सब को?”

“अरे बड़ी सरलता से. हाँ असीम और कुमार के जुड़ने से सम्भवतः कुछ अंतर पड़े क्योंकि हम पाँच तो उन्हें उनके सामर्थ्य के ही अनुसार चोदते हैं, पर उन दोनों को नियंत्रित करना कठिन होता है. उनकी नानियों ने वैसे भी उन्हें बहुत बिगाड़ रखा है.”

“हाँ हाँ, जैसे दादा तो सुधारने में लगे रहते हैं.” शालिनी ने मुस्कुराकर जीवन के सीने पर हल्का मुक्का मारा तो दोनों हँस पड़े.

“तो क्या तुम भी गैंगबैंग का आनंद उठाना चाहोगी? अगर हाँ, तो मैं उन्हें सम्भाल कर चोदने के लिए कह दूँगा दो चार बार में तुम स्वयं ही इसमें अपूर्व सुख का अनुभव करने लगोगी. बोलो, गैंगबैंग करोगी? रुकोगी तो नहीं?”

“मैं नहीं रुकूँगी। आप तो नहीं रोकेंगे न?”

“मुझे क्या आपत्ति हो सकती है भला.”

जीवन ने समुदाय के विषय में अभी बात न करना ही उचित समझा. उसे गिरधारी और मधु से बात करने के बाद इस विषय पर निर्णय करना होगा. पेग समाप्त करने के बाद दोनों एक दूसरे से लिपट कर गहरी नींद में सो गए.

************

तड़के सुबह कुमार की नींद खुली तो उसे अपने लंड पर कुछ संवेदन का आभास हुआ. आँख खोल कर देखा तो उसकी नानी बबिता उसके लंड को चूस रही थी.

“अरे लल्ला, उठ गया. मैं तो सोची थी कि तेरा रस पीने के बाद जगाऊँगी” बबिता ने अपने मुँह से लंड निकालते हुए कहा.

“नानी, अभी हटो, मुझे मूतना है, मुझे उठने दो!”

“ठीक है लल्ला, तब तक मैं इसे चूसती हूँ.” बबिता ने साथ लेटे असीम के लंड अपने मुँह में ले लिया.

जब तक कुमार निकलता असीम भी बाथरूम में आ गया.

“नानी को क्या हुआ? क्या समय है?” असीम ने अपने लंड को कमोड की ओर करते हुए पूछा.

“ठरक चढ़ी है. समय पता नहीं, पर बहुत दिनों से किसी ने ऐसे नहीं उठाया.” कुमार हंसकर बोला।

“हाँ, सही है. नानी को निपटाकर फिर सो जाएँगे। वैसे भी यहाँ आये ही इस उद्देश्य से हैं.”

“वैसे भाई, अपनी होने वाली दादी पर भी ध्यान देना. उनको चोदे बिना घर नहीं लौटना है.”

“चिंता न करो, दादा सब संभाल लेंगे. अब चलो.”

वहाँ पलंग पर बबिता नंगी लेटी हुई अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी.

“क्या नानी इतनी देर भी सहन नहीं हुआ?” कुमार ने उसके हाथ हटाकर अपनी ऊँगली चूत में घुसेड़ दी.

“रात भर सोई नहीं तुम दोनों से चुदवाने की कल्पना से. तेरे नाना ने कहा कि तड़के धावा बोल दूँ, नहीं तो कोई और तुम्हें दबोच लेगा. तो आ गई. अब पहले मेरी चूत और गाँड मारो और फिर पूनम और निर्मला जैसे दोनों एक साथ मेरी चूत का भी कल्याण कर दो.”

“हम्म्म, नानी पहले हमारे लौड़े चूस दो, फिर हम तुम्हारी चुदाई करते हैं. पर चीखना चिल्लाना मत, सबको जगाने का अभी समय नहीं हुआ है.”

“अरे लल्ला, मुँह साड़ी से बंद कर लूँगी पर अब चटवाने का समय नहीं है, बस चोद दो. फिर चूस दूँगी तुम्हारे मूसल.”

कुमार ने अपने बड़े भाई असीम की ओर देखा।

“तू गाँड मार नानी की, मैं चूत का आनंद लेता हूँ.” असीम ने बड़े भाई का कर्तव्य निभाते हुए कुमार के मन को पढ़ लिया. “पर उल्टा करते हैं. तू नीचे से गाँड मार और मैं ऊपर से चूत चोदता हूँ.”

कुमार तुरंत ही बबिता के पास लेट गया. अचानक कमरे में गीता ने पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए प्रवेश किया. बबिता को देखकर वो ठिठक गई.

“क्यों री! तुझे नींद नहीं आई क्या जो सुबह सुबह मेरे नातियों से चुदवाने आ धमकी! जागते ही चुदने के लिए आ गई.” गीता ने कृत्रिम क्रोध दिखाया।

“अरे उन दोनों की चुदाई देखकर जागने की क्या बात करूँ, मैं तो सोई ही नहीं. अब दया कर मुझ पर चुदवा लेने दे, फिर तेरे पास भेज दूँगी।”

“अरे यही तो ससुरी समस्या है. जीवन भाईसाहब और तुम्हारे भाईसाहब (गीता के पति बलवंत, गाँव में अधिकतर स्त्रियाँ अपने पति का नाम नहीं लेतीं.) ने मुझे यहाँ इनसे दूर रहने को कहा है. कह रहे थे सुनीति के घर पर अपने मन की कर लेना. ये सो रहे हैं तो मैं चोरी से आ गई. अब जाकर चाय नाश्ते का प्रबंध करती हूँ.” गीता ने उदास मन से कहा.

“सुन, मैं, पूनम और निर्मला उन्हें समझाएँगे कि ऐसा न करें. हो सका तो शालिनी को भी जोड़ लेंगे. तुझे यहीं तेरी इच्छा पूरी करवा देंगे. पर अभी मेरी चुदाई होने दे.”

“नानी, दादी को पटाओ, अभी सारा नियंत्रण वहीँ है दादा का. आप तीनों से अधिक उनकी सुनी जाएगी.” असीम ने हंसकर कहा तो सबने उसका साथ दिया.

“ये सही है. मैं शालिनी से ही प्रार्थना करुँगी.”

“वो मान जाएगी. अब तू चल निकल!” बबिता ने उसे भगाने के लिए कहा.

गीता पलट कर बाहर निकल गई. कुमार लेटा ही था और इस बीच में बबिता भी बैठ चुकी थी. असीम ने बबिता को सहारा देकर कुमार के लौड़े के ऊपर आसन बनाया। कुमार ने अपने तने लंड को हाथ में लिया और असीम ने बबिता की गाँड को कुमार के लंड पर रख दिया.

“बैठ जाओ नानी.” असीम ने कहा तो बबिता धीमे से कुमार के लंड पर बैठती गई और पूरा लंड गाँड में लेकर ही रुकी.

“कल से तरस रही थी तुमसे गाँड मरवाने के लिए. अब जाकर गाँड की जलन कुछ कम हुई.”

“थोड़ा रुको नानी, पूरी जलन सोख लेगा कुमार का लंड और उसे ठंडा करने के लिया पानी भी छोड़ेगा.”

“हाय लल्ला, कितनी मीठी बातें करता है तू.” बबिता कुमार के लंड पर उछलने लगी तो कुमार ने उसके स्तन पकड़ लिए और मसलने लगा.

“नानी को पीछे खीँच ले अब.” असीम ने कुमार को आज्ञा दी तो कुमार ने अपने हाथों के सहारे ही बबिता को अपने ऊपर लिटा लिया. इस आसन में लंड और भी तन कर बबिता को गाँड में घुस गया. बबिता की आँखें पलट गयीं.

“आ जाओ भाई, अब आप भी नानी की चूत का उद्धार कर दो, मेरी तो जाँघें गीली कर दीं इतना पानी छोड़ रही है.”

असीम भी बबिता की चूत से रस की अविरल बहती धार को देख चुका था और अब उसके भी धावा बोलने का अवसर आ चुका था. असीम ने नानी के गले में हाथ दिया जिससे कि उनका चेहरा उठ गया. बबिता नानी की आँखों में झांकते हुए उसने अपने लंड के एक प्रबल धक्के के साथ उनकी गुफा में लगभग आधा लंड डाल दिया. इस आसन में गाँड में उपस्थित लंड के कारण कुछ प्रतिरोध हुआ पर दूसरे धक्के में बबिता की चूत में लंड पूरा समा ही गया. असीम बबिता की फटी आँखों में झाँकते हुए मुस्कुरा दिया.

“नानी, इसकी भी जलन मिटानी है न?”

बबिता की तो साँसे ही ठहरी हुई थीं. वो कुछ समय बाद ही उत्तर दे पाई.

“हाँ मेरे बच्चों, मिटा दो अब आगे पीछे की जलन. जम कर चोदो अपनी नानी को. जैसे अपनी माँ को चोदते हो.”

“नानी. आपकी जलन मिटाने के लिए हमारे दोनों इंजेक्शन उद्द्यत है. बस आप चीख पुकार मत करना. नहीं तो आपको बचाने कोई आ गया तो विघ्न पड़ेगा.”

“न न बिटवा, कोई न आई. सबको पता है कि बीच में नहीं पड़ना है. ऊई माँ, हाँ रे क्या मोटे मोटे लौड़े हैं तुम दोनों के. अपने बाप दादा पर गए हो, अब चोदो भी उनके ही समान.”

कुमार और असीम जो अब तक संयम रखे हुए थे अचानक ही आक्रांता बन गए. एक साथ लंड अंदर बाहर करते हुए उन्होंने बबिता की भीषण चुदाई आरम्भ कर दी. बबिता, असीम और कुमार के दिन का शुभारम्भ हो चुका था. अब बबिता बिना पूर्ण संतुष्टि पाए बिना कमरे से जाने वाली न थी. जहाँ तक दोनों भाइयों की बात थी, तो उन्हें तो संतुष्टि कभी मिलती ही न थी, बस विराम तथा विश्राम ही मिलता था.

************

गीता रसोई में चाय बना रही थी कि उसने शालिनी को आते देखा.

“अरे दीदी, बड़ी सुबह सुबह जाग गयीं, क्या भाईसाहब से ठीक से सेवा नहीं की?”

“नहीं ऐसा नहीं है, हम बातें की करते रहे.” शालिनी ने शर्माकर उत्तर दिया.

“ये अच्छा किया. चुदाई जो जब मन चाहे कर लो, बातें करने के लिए उचित समय और मन चाहिए होता है.”

शालिनी उसकी बात सुनकर स्तब्ध रह गई. एक वाक्य में कितना गूढ़ अर्थ निहित था. आज के समाज में परिवारों के बिखराव का मूल कारण यही था.

“वैसे दीदी, मैं आपसे कुछ माँगना चाहती हूँ, अगर आप सहमत हो.” गीता ने अवसर भाँपते हुए कहा.

“हाँ, हाँ, पर मुझे दीदी मत कहो. नाम से ही पुकारो. जब हम चार पति और चार पत्नियों का परिवार हैं तो मैं दीदी क्यों हो गई?”

गीता समझ गई कि जीवन ने उनकी मित्रता की गहराई के विषय में शालिनी को अवगत करा दिया है.

“शालिनी, मैं इतने दिनों से अपने नातियों की राह देख रही थी. अब वो आये हैं तो उन्हें कहा गया है कि मुझे न चोदे। अब हमारा जाना भी टल गया है.” गीता ने शालिनी की ओर विनती की दृष्टि से देखा, “क्या तुम भाईसाहब से बोलकर इस प्रतिबंध को हटवा सकती हो? हम चारों बहनों को इसमें कोई आपत्ति नहीं है. बस भाईसाहब और मेरे पति ही हठ किये बैठे हैं. मेरे नाती भी उत्सुक हैं. क्या मेरी सहायता करोगी?”

शालिनी ने सिर हिलाया, “मैं इनसे बोलूँगी, पर क्या आपको लगता है कि ये मान जायेंगे?”

“उचित समय और उचित स्थिति में बोलोगी तो मानेंगे. समय और स्थिति का निर्माण करने में हम महिलाओं से अधिक पारंगत कोई नहीं होता.” गीता बोली तो शालिनी हंस पड़ी.

“सच है. समझो आपके नातियों से आपकी चुदाई का कार्यक्रम निर्धारित हो गया. हो सके तो आज ही!”

“शालिनी, तुम भी उनकी युवा शक्ति और क्षमता का आनंद लेने से मत चूकना, भाईसाहब बुरा नहीं मानेंगे.”

“वो मुझे कल रात ही इसकी आज्ञा और अनुमति दोनों दे चुके हैं, और गैंगबैंग की भी. मेरा अर्थ है सही पुरुषों से एक साथ चुदाई.”

गीता मुस्कुराई, “ये बहुत अच्छा है. वैसे हम गाँव वाले अवश्य हैं पर गैंगबैंग अर्थ भली भांति समझते हैं.”

शालिनी बोली, “मुझे तो कल ही रात को पता चला है. लाओ चाय दो, अब आपका उद्देश्य पूरा करने का अभियान आरम्भ करती हूँ.”

“आप सच में बहुत अच्छी हो, हम सब भाग्यशाली हैं जो जीवन को आप मिलीं.”

“मैं भी उतनी ही भाग्यशाली हूँ, गीता. मुझे आप लोगों जैसा परिवार जो मिला है.”

शालिनी ने चाय की ट्रे ली और अपने अभियान पर निकल गई. गीता की चूत से पानी रिसकर रसोई को सुगंधित बनाने लगा. उसी समय पूनम और निर्मला आ गईं और एक गहरी श्वास भरी और खिलखिला उठीं. गीता ने भी उनका साथ दिया और तीनों एक दूसरे से लिपट गयीं.

नाश्ते का समय हो चला था और चारों मित्र बैठे गपशप कर रहे थे. रसोई में गीता के साथ पूनम, निर्मला और शालिनी भी लगी हुई थीं. शालिनी ने मूक संदेश से गीता को अवगत कर दिया कि उसके अनुरोध पर जीवन की सहमति लेने में वो सफल रही थी. गीता की प्रसन्नता की सीमा न थी और इसका प्रभाव नाश्ते पर हुआ जिसका स्वाद अनूठा था. उसके हाथ थिरकते हुए सारी सामग्री को डाल रहे थे. शालिनी के सिवाय किसी को इसका कारण विदित नहीं था.

उधर बबिता अपनी नातियों से अपनी चूत और गाँड मरवाने के पश्चात उनके बीच में लेटी हुई थी. दोनों छेदों से बहते रस को अपनी उँगलियों से समेट कर अपनी जीभ से चाट रही थी. पर तीनों शांत लेटे हुए आज के विषय में ही चिंतन कर रहे थे. इस चढ़ाई में ही कुमार और असीम में इतना अधिक समय लगा दिया कि चूत की दुहरी चुदाई का समय नहीं था. बाहर बैठक से चहलपहल की ध्वनि सुनाई दे रही थी और उनका बुलावा शीघ्र ही आने वाला था.

असीम उठा और एक बार अपनी नानी को देखते हुए बाथरूम में चला गया. कुछ देर में कुमार गया और अंत में दोनों ने बबिता को अपने साथ ले जाकर स्नान कराया.

“तुम दोनों से चुद कर मेरी प्यास तो मिट गई है पर मुझे भी अपनी चूत में दो लौड़े लेने हैं.” बबिता ने पोंछते हुए बोला तो असीम ने कहा कि इसका निर्णय तो बाहर ही होगा क्योंकि वे चाहते तो थे कि इसी समय उसको भी परिणाम कर देते पर समय नहीं मिला.

“पर आप निश्चिन्त रहो, आपको चूत में और फिर गाँड में भी दो दो लौडों से चोदे बिना हम नहीं लौटने वाले.”

“जुग जुग जियो, लल्ला. बस यूँ ही अपनी नानियों की सेवा करते रहो.” बबिता के सिर पर आशीर्वाद का हाथ फेरते हुए कहा.

तीनों ने वस्त्र पहने और बैठक में चले गए, जहाँ से बबिता रसोई में चली गई.

असीम और कुमार जब बैठक में पहुँचे तो कँवल ने आँख मारते हुए पूछा, “अरे तुम दोनों कहाँ रह गए थे? बड़ी देर कर दी. जाओ अपनी चाय ले आओ.”

“नाना जी, आप को पता ही है कि हम कहाँ व्यस्त थे. वैसे इस प्रकार अगर कोई उठाये तो जीवन ही धन्य जाये.” असीम ने उत्तर दिया.

“अब जीवन तो धन्य हो ही गया है.” कँवल ने उनके दादा की ओर देखकर कहा, “अब तुम दोनों भी विवाह कर लो तो ऐसा आनंद हर दिन प्राप्त कर सकते हो.”

“अब इसका तो तय कर ही दिया है, कुमार के विषय में एक दो वर्ष बाद सोचेंगे.”

तभी सारी महिलाएं रसोई से आ गयीं.

“सोचना क्या है, अपनी शुभि भी एक दो वर्ष में विवाह करने की इच्छा जता चुकी है.” निर्मला ने अपनी नातिन के विषय में बोला तो सब चकित रह गए.

“हाँ भाईसाहब, आपने असीम के लिए तो बहू अपने मन से चुन ली है, पर अब कुमार की बहू हमारा चुनाव होगी.” बबिता ने भी अपनी पोती का पक्ष लिया.

जीवन: “मुझे कोई आपत्ति नहीं है, पर कुमार का भी विचार सुनना चाहिए.”

कुमार: “दादाजी, उदय चाचा और सुरभि चाची से मिलने की बात किसने की थी?”

कुछ सोचने के बाद जीवन ने कहा, “तुमने.”

कुमार: “अकेले चाचा चाची से थोड़े ही मिलना था.”

“ओह!” जीवन की आँखें खुली रह गयीं.

गीता, निर्मला और बबिता ने कुमार को जकड़ लिया और उसे चूमने लगीं. उनके इस वात्स्ल्य को देखकर पूनम और शालिनी की आँखें भीग गयीं. वहीँ कंवल और सुशील उठकर बलवंत और जीवन के साथ गले मिलने लगे. घर में उत्सव का वातावरण बन गया.

निर्मला ने आँखें पोंछी और बोली, “मैं सुरभि से बात करके आती हूँ.”

गीता ने उसे पकड़ा, “कहाँ जा रही है, यहीं बता न सबके सामने. और उससे कहना कि शुभि का भी मन टटोल ले.”

निर्मला ने सुरभि को फोन लगाया।

सुरभि: “क्या हुआ अम्मा, सुबह सुबह फोन कर रही हो आज?”

निर्मला: “सुरभि, गुड़िया तुझे गीता का नाती कुमार कैसा लगता है?”

सुरभि: “अच्छा लड़का है. और मोटा लम्बा भी.” सुरभि हंसने लगी.

निर्मला: “वो तो ठीक है, तुझे लगता कैसा है?”

सुरभि: “पहेली न बुझाओ, अम्मा. सीधे बोलो क्या बात है.”

निर्मला: “हम सोच रहे थे कि एक दो वर्ष बाद कुमार और शुभि का विवाह कर दें तो कैसा रहेगा?”

सुरभि की सिसकी सुनाई दी: “अच्छा विचार है अम्मा. आप सब ने मिलकर सोचा है क्या? और कुमार पूछा?”

निर्मला: “यहाँ तो सब सहमत है, कुमार भी. तू भी एक बार शुभि का मन टटोल न?”

सुरभि: “ठीक है अम्मा, मुझे तो लगता है मानी बैठी है. जब देखो दोनों एक दूसरे से फोन पर बतियाते रहते हैं. मुझे तो डर था कहीं भाग न जाएँ. अब चिंता दूर हुई.” सुरभि की हंसी सबको सुनाई दी और उन्होंने कुमार की ओर देखा.

“तो लाटसाहब फोन पर बात करते हैं और हमें मूर्ख बना रहे हैं.” जीवन ने कुमार के कान खींचे तो कुमार शर्मा गया.

“दादा जी, हम दोनों एक दूसरे को प्रेम करते हैं. इतनी दूरी सहन नहीं होती है तो फोन पर ही मन भला लेते हैं. इस बार मैं यही सोचकर आया था कि नाना नानी से कहूँगा कि चाचा चाची से बात करें.”

“अब हो गई बात बेटा”, फोन से सुरभि का स्वर फूटा, “अब सबको ये संबंध स्वीकार है. अब मैं रखती हूँ. अभी मिलते हैं कुछ दिनों में.”

“चलो एक शुभ कार्य और सम्पन्न हुआ.” जीवन ने कहा. शालिनी ने अपना अवसर निकाला।

“एक और शुभ कार्य भी कर ही दीजिये जिसके लिए मैंने आपसे अभी पूछा था.”

जीवन मुस्कुराकर उसकी ओर देखते हुए बोला, “अब तुम्हारी आज्ञा कैसे टालूँ।”

फिर सबको सम्बोधित करते हुए बोला, “ऐसा है कि जो हमने सोचा था कि असीम और कुमार को गीता की चुदाई घर लौटने पर ही करने देंगे, उसमे संशोधन किया है. अब हम इतने दिन और जो रुक रहे हैं तो वो दोनों चाहें तो अपनी प्यारी नानी की चुदाई कर सकते हैं.” ये सुनते ही गीता का शरीर काँपा और वो वही खड़ी हुई लहराने लगी.

“ये ससुरी तो बात सुनकर ही झड़ गई. चुदने के बाद कहीं निपट ही न जाये.” बलवंत बड़बड़ाया.

“शुभ शुभ बोलिये भाई साहब! ऐसा भी कोई बोलता है? इतने दिनों से तरस रही है बेचारी इनके लिए बोलते हैं?”

“अरे मैं तो यूँ ही उपहास कर रहा था. मुझे तो अच्छा लगेगा कि इसकी इच्छा पूरी हो जाये.”

“अब नाश्ता कर लीजिये, फिर आप लोगों को खेतों पर भी जाना है और हम स्त्रियों को भी बहुत काम हैं.”

सब नाश्ता करने में व्यस्त हो गए. नाश्ते के बाद पुरुष अपने खेतों पर चले गए जहाँ उन्होंने अपने मैनेजर से बात की और उसे आवश्यक निर्देश दिए. लौटते हुए दोपहर के भोजन का समय हो चुका था तो सबने प्रेम से भोजन किया। इसके पश्चात आज के कार्यक्रम के विषय में बात चल निकली. गैंगबैंग का समय रात्रि भोज के बाद निर्धारित हुआ. अचानक बबिता का संयम टूट गया.

बबिता: “आप जो मन हो सो कार्यक्रम बनाओ. मुझे मेरे नातियों से चुदाई पूरी करनी है. सो मैं तो चली उनके कमरे में.”

सुशील: “अरे भागवान, उनके कमरे में क्यों जाने लगी, नीचे चलो, हम सब भी आते है वहीं।हम भी तो देखें तेरी चुदाई का दृश्य. और फिर हमें भी तो अपने डंडे ठंडे करना है. शालिनी को भी पूरा सम्मिलित करना है.”

“ऐसा है तो मैं साथ ही चलूँगी।”

अब सुशील ने जीवन से कहा, “जीवन, अब मुझे शालिनी को चोदने की आज्ञा चाहिए.”

जीवन: “इसकी कब से आवश्यकता पड़ गई. वो मेरी ही नहीं हम सबकी पत्नी होगी, हमारी अन्य पत्नियों के समान. शालिनी ने भी इसमें अपनी सहमति दे दी है. तो आगे औपचरिकता को आड़े मत आने देना.”

“जी भाईसाहब, आइये मैं आपके साथ चलती हूँ.” शालिनी ने सुशील का हाथ थामा।

जस्सी और कँवल हाथ मलने लगे. शालिनी उन्हें देखकर मुस्कुराई.

“आप भी मन छोटा न करो. अभी से रात तक बहुत समय है. आप दोनों को भी मैं मना नहीं करुँगी।”

“और दादी हम?” असीम और कुमार ने पूछा.

“हम्म्म, बच्चों को सिर पर नहीं चढ़ाना चाहिए, है न? तुम्हारे लिए मुझे उचित समय देखना होगा. आज तो मैं व्यस्त हूँ.” शालिनी ने इठलाते हुए उत्तर दिया तो सब हंसने लगे जिसमें कुछ पलों में कुमार और असीम भी जुड़ गए.

क्रीड़ागार में सब पहुँचे तो वासना का ज्वर प्रबल होने लगा था. बबिता ने कुमार और असीम के हाथ यूँ पकड़े हुए थे मानो उन्हें कोई छीन ले जायेगा. पर नियति को ये स्वीकार न था. निर्मला के फोन की घंटी ने सबको चौंका दिया.

निर्मला: “बोल सुरभि!” ये कहकर उसने फोन को स्पीकर पर कर दिया.

सुरभि: “अम्मा, मैंने शुभि से पूछा वो तो मानो आज ही ससुराल जाने को आतुर है. वो और कुमार एक दूसरे से प्रेम करते हैं और चाहे वो किसी को भी चोदे पर साथ रहना चाहते हैं. पर वो भी अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ही विवाह करेगी.”

निर्मला: “चल ये अच्छा हुआ. सब की सहमति हो गई. अब रखती हूँ, कुछ काम है.”

सुरभि: “हाँ हाँ, होगा ही जीवन चाचा जो आये हुए हैं.” हंसकर बिना उत्तर सुने सुरभि ने फोन काट दिया।

जीवन: “अब जब सब कुछ तय हो चुका है तो मुझे मेरी होने वाली समधन से मिल लेने दो.” वो बढ़ा और निर्मला को अपनी बाँहों में थाम लिया, “और मेरे पोतों को मेरी दूसरी समधन से मिलने दो.”

बबिता, शालिनी और निर्मला असीम, कुमार, सुशील और जीवन की जोड़ीदार बन चुकी थीं. गीता और पूनम के लिए जस्सी, कंवल और बलवंत उपलब्ध थे. उन्होंने एक ही साथ चुदाई करने का निर्णय लिया और आगे की कार्यवाही आरम्भ की.

अभी दिन भी शेष था और रात भी.

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क्रमशः

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अध्याय ६७: जीवन के गाँव में शालिनी ४

अध्याय ६६ से आगे

अब तक:

जीवन ने शालिनी को मित्र मंडली के गहरे संबंधों के विषय में बताया. शालिनी समझ गई कि उसका विवाह चाहे ही जीवन से हो, पर वो पत्नी सम्पूर्ण मित्र मंडली की होगी। वहीं निर्मला की नातिन शुभि और कुमार के बीच में प्रेम का रहस्य खुल गया. सबके मन में आगे चल कर और प्रगाढ़ संबंध होने का आश्वासन मिला और अगली पीढ़ी में भी संबंध बने रहेंगे इसका उल्लास था. बबिता कुमार और असीम के साथ अपनी विशेष चुदाई के लिए उत्सुक थी. गीता पर अपने नातियों से चुदने के प्रतिबंध को भी हटा दिया गया था. दोपहर के भोजन के बाद सब क्रीड़ागर में जा पहुँचे। आज रात से गैंगबैंग की शृंखला का भी आरम्भ होना था.

अब आगे:

क्रीड़ागार में सब पहुँचे तो वासना का ज्वर प्रबल होने लगा था. बबिता ने कुमार और असीम के हाथ यूँ पकड़े हुए थे मानो उन्हें कोई छीन ले जायेगा.

जीवन: “अब जब सब कुछ तय हो चुका है तो मुझे मेरी होने वाली समधन से मिल लेने दो.” वो बढ़ा और निर्मला को अपनी बाँहों में थाम लिया, “और मेरे पोतों को मेरी दूसरी समधन से मिलने दो.”

बबिता, शालिनी और निर्मला असीम, कुमार, सुशील और जीवन की जोड़ीदार बन चुकी थीं. गीता और पूनम के लिए जस्सी, कंवल और बलवंत उपलब्ध थे. उन्होंने एक ही साथ चुदाई करने का निर्णय लिया और आगे की कार्यवाही आरम्भ की.

गीता ने अचानक घोषणा की कि वो कल रात की पूनम की भूमिका का निर्वाह करेगी. ये सुनकर सबको आश्चर्य हुआ परन्तु बलवंत की मुस्कुराहट छुपाये न छुपी. गीता अपने नातियों से चुदे बिना किसी और से चुदने से बचना चाहती थी. बलवंत ने अपनी सहमति दे दी. और गीता बबिता की ओर चली गई.

“आ अब एक को तू संभाल और एक को मैं. फिर दोनों को मैं संभाल लुंगी.” कुमार के लंड को गीता के चेहरे के सामने लाते हुए बबिता ने कहा.

गीता ने एक क्षण की भी देर किया बिना कुमार के लंड को चाटा और फिर मुँह में लेकर चूसने लगी. बबिता ने अपना ध्यान असीम के लंड पर लगाया. फिर कुमार ने अपना लंड गीता के मुँह से निकाला और सोफे पर बैठ गया. बबिता का हाथ पकड़ गीता ने उसे उठाया और कुमार के लंड पर बैठा दिया. बबिता की पनियाई चूत सरलता से कुमार के लंड को निगल गई.

“अब अपने नातियों से एक साथ अपनी चूत चुदवा ले. फिर मेरी और शालिनी की बारी आएगी.” गीता ने कहा और असीम को बबिता के सामने खड़ा कर दिया. अपनी चूत को पहले से ही भरा हुआ अनुभव करते हुए एक बार बबिता को लगा कि क्या ऐसा सम्भव हो पायेगा? परन्तु उसे पूनम और निर्मला की कल रात की चुदाई का स्मरण हो आया और उसने असीम के मोटे लौड़े को अपनी चूत की ओर अग्रसर होते देखा.

“डरो मत नानी, मस्त चुदाई करेंगे. मम्मी भी चुदवाती हैं ऐसे और बहुत आनंद पाती हैं.”

“जानती हूँ बिटवा, तुम दोनों मुझे कोई चोट नहीं देने वाले. डाल दे अपना भी लंड और मुझे भी पूनम और निर्मला वाले स्वर्ग की सैर करवा दे.” बबिता ने अपने पैरों को थोड़ा और फैलाया.

असीम ने अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और धीरे से कुमार के लंड के समतल अंदर धकेलने लगा. और अगले ही पल बबिता भी आनंदलोक में विचरण करते हुए चीखने लगी.

सुशील और शालिनी एक दूसरे से लिपटे हुए चुंबनों के आदानप्रदान में व्यस्त थे. सुशील शालिनी के मम्मों को दाएं हाथ से दबाते हुए उसके होंठ चूस रहा था. वहीँ शालिनी अब निर्लज्ज होकर सुशील के लंड को मुठिया रही थी. संगति से मनुष्य कितना परिवर्तित हो जाता है उसका वो ज्वलंत उदाहरण थी. जीवन के साथ गाँव पहुँचने से पहले उसने कभी सामूहिक रूप में चुदाई की कल्पना भी नहीं की थी. यहाँ वो न स्वयं इसमें संलग्न थी, बल्कि कमरे में अन्य उपस्थित भी किसी न किसी रूप में व्यभिचार में लिप्त थे.

उसने गीता को अपनी ओर आते देखा.

“सुशील भाईसाहब चूत और गाँड चाटने में प्रवीण हैं, इसमें ये स्त्रियों को भी पीछे छोड़ देते हैं. और आज इस समय तक तुम्हारी चुदाई नहीं हुई है, तो अपने दोनों छेदों की सेवा का इन्हें अवसर अवश्य देना.” गीता ने सुशील की विशेषता बताई.

“ऐसा है तो हमें देर नहीं करनी चाहिए. मुझे भी इसमें बहुत आनंद मिलता है.” शालिनी ने कहा तो गीता ने उसे सोफे पर बैठाकर उसके पैरों को फैला दिया गाँड के नीचे सोफे की तकिया रख दी जिससे कि उसकी गाँड को सुशील के लिए सुगम बना दिया.

सुशील ने अपने सामने परोसी हुई सुंदर चिकनी चूत और भूरे रंग की गाँड के छेदों को देखा तो उसके मुँह में पानी भर आया. उसने चूत पर अपनी जीभ घुमाई तो शालिनी की सिसकी निकल पड़ी. परन्तु सुशील एकमात्र चूत का स्वाद लेकर संतुष्ट कहाँ होने वाला था. चूत पर कुछ दूर तक ऊपर ही ऊपर जीभ चलाने के बाद उसका गंतव्य नीचे का छेद था. गाँड पर जीभ का आभास होते ही शालिनी के तन में जैसे विद्युत् का प्रवाह हो गया. उसका शरीर उछल गया और एक झटके में फिर नीचे आया. शालिनी की चूत से एक धार निकली और सुशील के चेहरे को भीगा गई. सुशील ने ऐसी प्रतिक्रिया का अनुमान ही नहीं किया था. उसे अपनी कला पर गर्व हुआ.

एक बार स्थिर होने के बाद सुशील फिर अपनी कला के प्रदर्शन में जुट गया. गीता का कथन सच था, सुशील की विद्या की कोई तुलना ही नहीं थी. वो जिस सरलता से अपने होंठ, जीभ और दाँतों का प्रयोग कर रहा था वो अद्वितीय था. जीभ शालिनी की चूत की कलियाँ और गहराई को सहला रही थीं तो होंठ और दाँत उसके भग्न को रह रह कर मसल रहे थे. सुशील की प्रतिभा की ये विशिष्टता थी कि दाँतों से मसले जाने के बाद भी भग्न में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती थी. उसका दबाव इतना नापा हुआ होता था. चूत की चटाई के साथ सुशील ने शालिनी की गाँड पर भी पर्याप्त ध्यान केंद्रित किया हुआ था. शालिनी तो बिना चुदे ही आनंद की लहरों में झूल रही थी. उसे विश्वास हो चला कि विविधता ही जीवन के आनंद में वृद्धि कर सकती है.

शालिनी की चूत और गाँड का भरपूर सेवन करने के बाद उसने जब अपना चेहरा ऊपर किया तो वो रस से भीगा हुआ था. अपने होंठो पर जीभ घुमाकर चटकारे लेते हुए उसने शालिनी की ओर देखा तो शालिनी ने उसके प्रयासों की सफलता को स्वीकार किया और अब लंड चूसने का आमंत्रण दिया. सुशील ने खड़े होकर अपना लंड शालिनी के सामने लहराया तो शालिनी ने उसे हाथ में लेकर चूमा, फिर चाटा और अंत में मुँह में लेकर चूसने लगी. गीता को लगा कि अब उसे अपने अगले पड़ाव की और जाना चाहिए.

गीता ने अब अपना ध्यान अपने समधी जीवन की ओर किया, जहाँ वो गीता और जीवन की होने वाली नई समधन से अपना लौड़ा चुसवा रहा था. निर्मला जीवन के लंड पर आसक्त थी और उसे किसी लॉलीपॉप के समान चूसने और चाटने में लगी हुई थी. एक हाथ से वो अपनी चूत में भी ऊँगली किये हुए थी परन्तु उसमे अधिक संचालन नहीं था क्योंकि उसका पूरा ध्यान अपने मुँह में उपस्थित लौड़े को आनंद देने पर था. उसे पता था कि जितना वो जीवन के लंड पर ध्यान देगी, जीवन पलट कर उसकी चूत और गाँड की उतनी ही भरपूर चुदाई करेगा.

निर्मला ने अपने हाथ को अपनी चूत पर से हटने का अनुभव किया तो कोई विरोध नहीं किया. और फिर उसने पाया कि दो उँगलियों ने उसकी चूत की गहराई में डुबकी लगा दी. गीता को निर्मला की चूत से खेलने में कोई व्यवधान नहीं था. उसने अपनी उँगलियों से निर्मला की चूत को चोदना आरम्भ कर दिया. उत्तेजित निर्मला ने जीवन के लंड को भी उतने ही उत्साह से चूसने की गति बढ़ा दी.

कुछ ही देर में गीता ने अपनी उँगलियाँ निकालीं और बोली, “भाईसाहब, अब सवारी करिये, बहुत गरमा रही है इसकी चूत. आपके लंड के पानी से ही ठंडी होगी.”

जीवन भी बेचैन था अपने तने लंड को निर्मला की चूत में डालने के लिए और उसने तुरंत ही अपने लंड को निर्मला की बहती चूत पर लगाया और अपने स्वाभाविक ढंग से एक ही धक्के में अंदर तक डाल दिया. निर्मला की आनंद से चीख निकली और उसने जीवन को अपने ऊपर खींच लिया. गीता को आभास हुआ कि अब यहाँ उसका कार्य समाप्त हो गया है और उसने जस्सी, कंवल और बलवंत के बीच पिस रही पूनम की सहायता करने का बीड़ा उठाया.

“क्यों एक बेचारी पर तीनों पिले हो, इतना मत चोदो कि इसकी साँस ही रुक जाये.” गीता ने हंसकर कहा क्योंकि वो जानती थी कि पूनम भी इसका पूरा आनंद ले रही थी. बलवंत ने उसकी चूत चाटने का कार्य संभाला हुआ था तो पूनम के मुँह में जस्सी और कंवल के लौड़े अंदर बाहर हो रहे थे. गीता ने जस्सी के लंड को आने मुँह में ले लिया तो पूनम को कँवल के लंड पर पूरा ध्यान देना का अवसर मिल गया.

बलवंत: “अब चुदाई हो जाये, इसकी चूत का रस तो बहता ही रहेगा.”

ये कहते हुए उसने उठकर अपना लंड पूनम की चूत में डाला और चोदने लगा. पूनम ने कुछ कूँ कूँ की ध्वनि की पर लंड मुँह से निकलने नहीं दिया.

गीता ने जस्सी के लंड को मुँह से निकालते हुए कहा, “भाईसाहब, आपको मुँह की नहीं किसी और छेद में जाना चाहिए.” फिर उसने बलवंत को सम्बोधित करते हुए कहा, “थोड़ा हटिये, जस्सी भाईसाहब को भी आने दीजिए.”

बलवंत ने पूनम को अपनी बलिष्ठ बाँहों में समेटा और बैठ गया. पूनम की चूत से उसका लौड़ा पल भर के लिए भी न निकला. अब जस्सी के लिए उसका लक्ष्य सामने था. पूनम की गाँड मानो उसे पुकार रही थी. उसकी पुकार सुनते हुए जस्सी ने आव देखा न ताव और अपने लौड़े को पूनम की लुपलुपाती गाँड पर रखा और उसकी गाँड मारने लगा. बलवंत और जस्सी पूनम की चूत और गाँड चोद रहे थे तो पूनम ने कँवल के लंड पर अपना आधिपत्य बनाये हुए था.

गीता ने फिर अपने नातियों की ओर चल दी. अब तक दोनों भाइयों ने अपने स्थान परिवर्तित कर लिए थे और निर्मला की चूत में धुआँधार अपने लौंड़ों से आतंक मचाया हुआ था. इतनी प्रबल चुदक्कड़ निर्मला की भी गाँड से धुआँ निकल रहा था. उसकी आँखें पलटी हुई थीं और उसे देखकर लगता था कि वो किसी अन्य लोक में थी. आँखें शून्य को टाक रही थीं, परन्तु उसके चेहरे पर वासना का ज्वर स्पष्ट दिखाई दे रहा था. वो आनंद की चरम सीमा पर थी और गीता ने उन्हें छेड़ना उचित न समझा, बस अपने नातियों की चुदाई की कला और शक्ति पर गर्व करते हुए उन दोनों के सामंजस्य से अत्यंत प्रभावित थी. कुछ ही देर में वो भी उनके बीच में इसी प्रकार से चुद रही होगी. यही सोचकर वो अपनी चूत में ऊँगली डालने लगी.

कुमार ने उसे ऐसा करते देखा तो पास बुलाया और फिर अपने लंड को निर्मला की चूत से निकालकर उन्हें चूसने के लिए आमंत्रित किया. निर्मला को सम्भवतः चूत में कुछ रिक्तता का आभास हुआ तो उसने आँखें खोलीं और गीता को कुमार के लंड को चूसते पाया.

“चाट ले मेरा पानी, मेरी प्यारी गीता रानी.” उसने कहा, “तेरे लौंडे सच में मस्त चुदाई करते हैं. मेरी इस बूढी चूत को आज अपनी जवानी में लौटा दिए. तू भी चुदवा कर देखना, सारी नसें खोल देंगे मेरे प्यारे नाती. तू बड़ी भाग्यशाली है जो इनके साथ रहेगी.”

गीता ने कुछ न कहा, बस कुमार के लंड को निर्मला की चूत में फिर से धकेल दिया. फिर निर्मला के होंठों से होंठ मिलाये और निर्मला को उसकी चूत के रस का स्वाद दिलाया.

“मैं हूँ भाग्यशाली, पर तू भी कुछ कम नहीं. अपनी बेटी के दामाद से चुद रही है. अब तो तेरा इन दोनों पर और भी अधिक अधिकार बनता है. जब चाहे आकर इन दोनों से चुदवा लिया करना. अपनी नातिन से भी मिल लेना और अपनी चुदाई भी करवा लेना.”

ये सुनकर निर्मला की चूत ने ढेर सारा पानी उगल दिया, जिसने दो दो लौड़े अंदर होने के बाद भी बाहर की राह ढूंढ ही ली. ढह गई पर कुमार और असीम की गति में कोई कम न हुई. वो दोनों मशीनों के समान निर्मला को चोदे जा रहे थे. उनकी शक्ति और गति को देखकर गीता कुछ क्षणों के लिए विचलित हो गई. परन्तु उसे आभास हुआ कि उसकी चूत से बहता हुआ रस उसकी जाँघों को गीला कर रहा था. सम्भवतः उसकी चूत भी इस प्रकार से चुदने के लिए लालायित थी. निर्मला की अब रह रह कर सिसकियाँ या कराहें निकल रही थीं और उसकी चूत से आती छप छप की ध्वनि साक्षी थी कि चूत अति आनन्दित थी.

“भाई, अब मेरा निकलने वाला है.” कुमार ने कहा तो तत्क्षण निर्मला की आँखें खुल गईं.

“मुझे पिला दे बिटवा, अंदर मत छोड़ना नहीं तो मुई गीता सब चट कर जाएगी.” उसने कुमार से कहा और गीता की देखकर अपनी शंका बताई.

“पिला दे इसे ही. जब मुझे चोदोगे तब मैं भी बूँद न दूँगी.” गीता ने कुछ आक्रोश में कहा तो निर्मला को अपनी गलती का आभास हुआ.

“मैं तो इसे छेड़ रही थी. मेरे मुँह में डाल मैं इसे पिलाऊँगी।” उसने कुमार से कहा जो अब अपना लंड बाहर निकाल चुका था. उसे अपनी दोनों नानियों के बीच में सुलह हो जाने से बहुत शांति मिली. निर्मला के मुँह में लंड डालकर कुछ धक्कों में उसने अपना रस उसे पिला दिया. निर्मला के मुँह से लंड निकाला तो निर्मला के होंठों से गीता ने अपने होंठ जोड़ दिए. दोनों सखियों ने अपने नाती का रस मिल बांटकर पिया. असीम की हुँकार ने उनका ध्यान उसकी ओर खींचा.

“जा मेरी चूत में से उसका पानी निकालकर मुझे भी चखा.” निर्मला ने गीता के होंठ चूमकर बोला तो असीम को अपना रस अपनी नानी की चूत में छोड़ने की हरी झंडी मिल गई और उसने निसंकोच उसे अपनी पानी से लबालब कर दिया. इससे पहले कि उसका लंड बाहर निकलता गीता ने उनके जोड़ पर मुँह रखकर सोखना आरम्भ दिया. इतना रस था कि उसका मुँह तुरंत ही भर गया. उसने निर्मला के साथ उसे बाँटा और तब तक असीम ने भी अपना लंड बाहर निकाल लिया. अब गीता के लिए पूरी गली खुली पड़ी थी इसमें से रस को सोख सोख कर निर्मला से तब तक बाँटती रही जब तक कि अंतिम बूँद शेष थी. असीम के लंड को मुँह में लेकर उसे चाटा तो कुमार ने निर्मला से अपना लंड चटवा लिया.

निर्मला, असीम और कुमार अब रुक गए और गीता अगले पड़ाव की ओर चल पड़ी, जहाँ जीवन और निर्मला की चुदाई चल चल रही थी.

“भाईसाहब, अब इसकी गाँड का भी कल्याण कर ही दीजिये, चूत मैं संभालती हूँ.” गीता ने जीवन से कहा तो जीवन ने अपने लंड को निर्मला की चूत से निकाल लिया.

“नीचे लेटिए, मुझे कुछ देर में आगे जाना होगा. मैं ऊपर से ही इसकी चूत चाटूँगी.” गीता ने बताया।

जीवन बिना समय गँवाए लेट गया. गीता ने उसके मोटे लौड़े को देखा और अपने मुँह में लेकर चाटा और फिर चूमा. फिर उसने निर्मला का हाथ पकड़ा और उसे जीवन के तमतमाए लंड पर बैठाया. जीवन के लंड ने निर्मला की गाँड भेदने में कोई संकोच नहीं किया. निर्मला की फूली और गीली चूत अब उभर कर सामने थी. गीता ने उस पर अपना मुँह लगाया और चाटना आरम्भ कर दिया. निर्मला की चूत से इतना पानी छूट रहा था कि गीता से पीना दूभर हो रहा था. फिर जीवन ने नीचे से एक दो बार धीरे धीरे अपना लंड निर्मला की गाँड में अंदर बाहर किया तो निर्मला की चूत ने एक उबाल लिया और इस बार गीता का मुंह भर गया.

गीता को लगा कि अब उसका कार्य यहां सम्पन्न हो गया है तो उसने अपना मुँह पोंछा और निर्मला के होंठ चूमने के बाद अच्छे से गाँड मरवाने का सुख लेने की इच्छा को पूरा करने के लिए कहा. वहीँ उसने जीवन को भी आज्ञा दी कि वो किसी भी प्रकार की कमी न रखे और निर्मला की गाँड को जम कर चोदे. जीवन को ऐसे किसी सुझाव की आवश्यकता नहीं थी और ये सिद्ध करने के लिए उसने निर्मला के मम्मों को अपने हाथ में भींचा और दो तीन ऐसे शक्तिशाली धक्के लगाए की निर्मला की नींव हिल गई और इतने बार गाँड मरवाने के बाद भी उसकी आँखें चौड़ी हो गयीं. गीता ने जीवन की सराहना की और आगे चल दी.

अब उसकी चूत और गाँड भी लौड़े की माँग कर रही थीं. परन्तु उसे ज्ञान था कि अभी उनकी खुजली मिटाने में समय लगेगा. तब तक वो अन्य सबको संतुष्ट देखना चाहती थी. इस बार उसका लक्ष्य शालिनी थी. हर जोड़ी के साथ रुकने के कारण यहाँ भी अब खेल आगे बढ़ चुका था. सुशील ताबड़तोड़ गति से शालिनी की चूत में लंड पेले जा रहा था. शालिनी भी धक्कों का कुछ सीमा तक साथ दे रही थी. परन्तु कहाँ स्व पाँच फुट की हल्की फुलकी शालिनी और कहाँ छह फुट से अधिक का बलिष्ठ बलवान सुशील, कोई तुलना ही नहीं थी. सुशील के तीन धक्कों के उत्तर में शालिनी एक ही बार अपनी गाँड उठाकर उसका साथ दे पा रही थी.

गीता ये देखकर मुस्कुराई. कुछ दिनों जीवन और उन सबसे चुदने के बाद वो ये भी सरलता से कर लेगी. उसे इस बात की प्रसन्नता अवश्य थी कि शालिनी ने उनके सामने खुलने और खुलकर चुदने में अधिक समय नहीं व्यर्थ किया. सम्भवतः वो और जीवन किसी प्रकार की भी कोई बाधा अपने संबंध में नहीं रखना चाहते थे. उसे अब इन दोनों के साथ भी वही करना पड़ा जो जीवन और निर्मला के साथ किया था.

“भाईसाहब, अब इसकी गाँड का भी उद्धार कर दो. मैं चूत संभालती हूँ.”

और फिर उसी प्रकार से सुशील को लिटाकर शालिनी की गाँड में उसके लौड़े का प्रवेश करवाने के बाद शालिनी की चूत पर आक्रमण कर दिया. अपना कार्य पूर्ण करने के बाद उसने जीवन और शालिनी की ओर देखा. जीवन लेटा हुआ निर्मला की गाँड मार रहा था तो शालिनी सुशील को नीचे लिटाकर उससे गाँड मरवा रही थी. उसके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव छा गया. अब उसे पूनम का भी ध्यान रखना था, तो स्वतः वो उस ओर मुड़ गई.

ये अच्छा हुआ कि गीता पूनम की ओर गई. कँवल, जस्सी और बलवन्त जिस प्रकार से उसे एक गुड़िया के समान उछाल उछाल कर चोद रहे थे पूनम कुछ भी प्रतिकार करने की स्थिति में नहीं थी. बलवंत और जस्सी खड़े हुए थे और उनके लौड़े उनके बीच में धँसी हुई पूनम की चूत और गाँड मो मथ रहे थे. वो स्वयं खड़े थे पैंटी जस्सी ने उसके नितम्ब थामे हुए थे तो बलवंत ने उसकी काँखों के बीच में हाथ रखे हुए थे. दोनों एक समंजस्य के साथ उसे लौंडों पर उछाल रहे थे. पूनम की अवस्था देखकर पूनम ने क्रोध से कँवल को देखा को बलवंत को हटाकर उसका स्थान लेने के लिए उत्सुक था.

“ये क्या कर रहे हो तुम सब? ऐसे भी कोई चोदता है क्या? देखो, उसको देखो! कैसी निरीह सी है. क्या तुम सबको कोई दया भाव नहीं है?”

“तू चुप कर!” पूनम ने आँखें खोलकर गीता को डपटा, “मुझे तो बहुत आनंद मिल रहा है. रुको मत आप सब, चोदते रहो!”

गीता आश्चर्य से उसकी ओर देखने लगी. पहले भी ऐसे चुदाई उन सब ने की हुई थी, परन्तु आज उसे क्यों आक्रोश आया वो समझ न पाई. इसका उत्तर भी उसे शीघ्र मिल गया. थोड़ा रुककर कँवल ने बलवंत का स्थान ले लिया तो बलवंत गीता के पास आया.

“तुझे बोला था कि हमारे साथ आ जा. कल से सूखी है, कुछ चुदवा लेती तो मन शांत हो जाता. पर तुझे तो अपने नातियों से ही चुदना था आज पहले. हम सब कितनी बार ऐसी चुदाई कर चुके हैं? तुझे तो स्वयं ऐसे चुदने में असीम आनंद मिलता है. अब मेरे साथ आ, मैं तेरी चूत का रस पीता हूँ, तू मेरे लंड को चूस ले. अब जस्सी और कँवल को पूनम की चुदाई करने देते हैं.”

बलवंत ने क्षण भी में उसकी भावनाओं को समझ कर समाधान भी बता दिया था. उसने अपने पति को देखा और उसके साथ चल पड़ी. से लिटाकर बलवंत उसे साथ ६९ के आसन में आ गया और गीता ने अपने पति के लंड को चूसना आरम्भ किया तो बलवंत ने उसकी चूत को चाटने का कार्य. दोनों पति पत्नी अन्य सबको भूल कर एक दूसरे को प्रसन्न करने में जुट गए.

दोनों एक दूसरे में इतने खोये हुए कि उन्हें इस बात का आभास भी नहीं हुआ कि कमरे में कोई संगीत नहीं बज रहा था. हाँ साँसों की सरगम अवश्य थी, पर उसे सुनने का उनके पास ने समय था न ही कोई इच्छा. मानो दोनों एक दूसरे से पुनर्मिलन कर रहे थे. बबिता अपने नातियों से दोनों लंड अपनी अपनी चूत में लेकर पूर्णतः संतुष्ट थी और उसने उन दोनों के लंड चूसकर उन्हें चमका दिया था. निर्मला की गाँड से जीवन का रस बह रहा था तो शालिनी की गाँड से सुशील का. पूनम थकी हुई जस्सी की गोद में लेटी हुई हल्की नींद में थी तो जस्सी और कंवल उसके सुंदर शांत चेहरे को देखकर संतुष्ट थे.

बलवंत और गीता का प्रेमालाप कुछ समय बाद समाप्त हुआ तो उन्होंने अन्य सभी को देखा. उनकी गतिविधि को देखकर निर्मला ने ताली बजे तो अन्य सभी तालियों से उनके प्रेम की प्रशंसा करने लगे. असीम और कुमार ने आकर उन्हें गले से लगाया और बलवंत और गीता ने उनके माथे चूमे। इसके बाद दोनों भाइयों ने सबके लिए पेग बनाये और सब बैठ कर आगे की योजना बनाने लगे. सभी अपने पति अथवा पत्नियों के साथ बैठे अपने पेग से व्हिस्की पी रहे थे. असीम और कुमार एक ओर बैठे हुए थे.

पर शालिनी के मन में कुछ प्रश्न उमड़ रहे थे.

शालिनी: “क्या आप सब बस दिन रात चुदाई ही करते रहते हैं. जब से मैं आई हूँ तब से तो बस यही देख रही हूँ.”

उसकी बात सुनकर सबकी हंसी छूट गई.

उत्तर पूनम ने दिया जो अब संतुष्टि से व्हिस्की पी रही थी, “नहीं ऐसा नहीं है. सामान्य रूप से तो हम सप्ताह में दो या तीन दिन मिलते हैं. पर जब जीवन भाईसाहब आते हैं तो ऐसा ही होता है. इनको तो चुदाई के सिवाय कोई कार्य ही नहीं है. यही हम सबको चोदने के चक्कर में रहते हैं. इस बार तो हमारे नाती भी आये हैं तो आप सकबे जाने के बाद सप्ताह भर तो शांति ही रहेगी.”

सुशील बोल पड़ा, “अरी ओ क्या बोल रही है, हम सब क्या यूँ ही मुठ मारेंगे?”

“नहीं नहीं, इसका अर्थ है कि हम कुछ दिन सामान्य रूप से रहेंगे.” निर्मला ने बात संभाली.

“तब ठीक है.”

इस बीच असीम और कुमार को देखकर गीता ने बलवंत से कुछ कान में कहा. बलवंत आश्चर्य से उसे देखने लगा. उसने जीवन की ओर एक संकेत किया तो जीवन ने मुस्कुराकर सहमति दे दी.

“अब तीन बजने को हैं, तो आगे क्या करना है?” जीवन ने पूछा.

गीता बोली, “मुझे तो अपने नातियों से चुदना है. और मुझे अपनी चूत में भी दो लंड का अनुभव करना है.”

जीवन: “और? गैंगबैंग किसका होना है?”

सुशील ने कहा: “पर्ची निकालो, नहीं तो ये लड़ मरेंगी.”

ये सुनकर गीता एक पैन ले आई और उसने पर्चियाँ बनाईं। इसमें उसने अपना और शालिनी का नाम नहीं जोड़ा. पूनम, बबिता, निर्मला में से एक को ये अवसर मिलना था. उसने कुमार को बुलाकर एक पर्ची निकालने के लिए कहा. कुमार ने पर्ची निकाली तो गीता ने उसे रात्रिभोज के बाद खोलने के लिए कहा. कुमार ने जाकर वो पर्ची एक ग्लास में रख दी और ग्लास अलमारी के अंदर रख दिया. गीता ने अन्य पर्चियाँ फाड़ दीं. चूँकि गीता और शालिनी गैंगबैंग का नहीं होना था तो केवल उनकी ही चुदाई का निर्णय हुआ. शालिनी के लिए जस्सी का नाम निर्धारित हुआ.

“मेरा एक सुझाव है, अगर मानो तो.” बबिता बोली.

“बताओ.”

“मेरा ये सोचना है कि कँवल भाईसाहब को भी शालिनी की चुदाई का अवसर आज ही मिलना चाहिए. वो गैंगबैंग में बाद में जुड़ सकते हैं, वैसे भी वो लम्बे समय तक चलना है. और, यही अवसर शालिनी को अपने होने वाले पोतों के साथ मिलना चाहिए. इन दोनों पर जीवन भाईसाहब और शालिनी की सहमति चाहिए.”

जीवन और शालिनी एक दूसरे से बात करने लगे.

जीवन: “हमें स्वीकार है. परन्तु मैं कुमार और असीम को अभी से बोल रहा हूँ कि वो थोड़ा संयम से अपनी दादी को चोदे।”

असीम और कुमार ने सहर्ष इसे स्वीकार किया। और एक और पेग बनाकर बाँट दिया. उधर गीता ने बाहर जाकर किसी से फोन पर बात की और लौट आई. उसने बलवंत को देखा और सिर हिलाकर बताया कि काम हो गया है.

अभी तो शाम भी नहीं हुई थी. शाम और रात अभी शेष थी.

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क्रमशः

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