Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 17 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२४

कहेते दोनोही जड गये.. तब देवायतके मुहसे हसी नीकल गइ.. ओर वो चुपचाप वहासे हवेलीकी ओर चलने लगा.. आज उसे बाबाकी अ‍ेक अ‍ेक बाते याद आने लगी.. वो सोचता घरकी ओर बढ गया की ना जाने गांवमे अ‍ैसे कीतने रीस्ते पल रहे होगे.. हमे सबको सम्हालना होगा.. ओर गांव वालोको अ‍ैसे रीस्तोको अपनानेके लीये समजाना पडेगा.. बहुतही मुस्कील काम था.. यही सब सोचते वो हवेलीमे आगया....अब आगे

तो सबभी लोग सो चुके थे.. तब वो होलमे आगया ओर जैसेही अपने कमरेकी ओर बढने लगा तो उसे सामनेके कमरेके दरवाजेपे भावना खडी नजर आइ.. जब दोनोकी नजर मीली तो भावनाने इसारलसे देवायतको बुलाया ओर दरवाजेसे थोडी हट गइ.. हटके देवायतको अंदर आनेका रास्ता दे दीया.. तब देवायत समज गया.. ओर चुपचाप भावनाके कमरेमे चला गया तो भावनाने धीरेसे अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तब उनके दिलकी धडकन तेज हो गइ.. ओर वो पलट गइ..

तो देवायत उनसे थोडी दुर खडाथा.. तो भावना दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो नाजाने कब दोनोके होंठ मील गये.. भावना अचानक देवायतके चहेरेको थामते पागलोकी तराह चुमने लगी.. तो देवायतभी उनका साथ देने लगा ओर भावनाके चहेरेको वो भी चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. ओर भावना कदहोसत होते उतेजीत होगइ.. ओर उनकी सांसे उखडने लगी..

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भावना : (मदहोसीमे) जी..जु.. मुजे.. प्यार कजीये.. मे आपको बहुत प्यार करती हु.. मुजे मसल डालीये.. आज अच्छा मौका हे..

देवायत : (भारी आवाजमे) भावु.. प्यारतो मे भी तुजे करना चाहता हु.. लेकीन अभी नही.. तुजे सीर्फ दो महीनाही हुआ हे.. फीर तुजे जीभरके प्यार करुगा.. तेरी सारी कशर पुरी करदुगा.. तेरे अपने घरमे..

भावना : (उनके होंठ चुमते) जीजु.. प्लीज.. बस थोडासा उपर उपरसे ही प्यार करलो.. मे आपके बीना नही रेह सकती.. अब मुजे सीर्फ आपसेही मतलब हे.. आजसे ये तनपे सीर्फ आपका अधीकार हे.. बस अ‍ेक बार मुजे प्यार करलो.. मे कबसे हमारे मीलनके लीये तरस रही हु.. सीर्फ अ‍ेक बार..

देवायत : भावु.. मेभी तुम्हारे साथ जल्दसे जल्द मीलन करना चाहता हु.. बस कुछ दिन ठहेर जाओ.. जबतक सृती तुजे ये सब करनेकी परमीशन नही देगी.. तबतक हमारा मीलन बहुत मुस्कील हे.. बस थोडा सबर करले.. फीर हम अपनी सुहागरात मनायेगे.. मे तुजे पुरी रात प्यार करुगा..

भावना : (जोरोसे भाहोमे भीचते) बस जीजु.. मुजे उसी दिन का इन्तजार हे.. आप मुजसेभी सादी करलो.. मे आपकी बीवी होना चाहती हु.. (सरमाते) जीजु.. मुजे आपकी नीशानी चाहीये.. हम दोनोकी नीशानी.. मेरे गर्भमे.. फीर भलेही मुजे अलगसे रहेना पडे.. मे मम्मीके घर आपकी बीवी बनके रहुगी..

देवायत : (गोदमे उठाते बेडकी ओर जाते) हां भावु.. तुभी मेरी सीक्रेट वाइफ होगी.. हमारे बच्चे भी होगे.. लेकीन अभी सही समय नही हे.. फीर तु जो कहेगी उतने बच्चे तुजे देदुगा..

भावना : (सरमाते लडखडाती आवाजमे) हां जानु.. मे आपके ढेर सारे बच्चे पैदा करुगी.. बस मुजे प्यार करलो.. मे आपके बीना नही रेह सकती.. आपने मुजे बहुत इन्तजार करवाया.. बस अ‍ेक बार आपका बडा हथीयार मुजे नीचे टच करवादो.. मुजे बहुत इच्छा हो रही हे..

कहातो देवायतने भावनाको वही बेडपे लीडा दीया तो भावना फोरन बेठ गइ ओर देवायतके सामने वासना भरी नजरोसे देखते उनके कपडे नीकालने लगी.. ओर खुदभी अपने कपडे नीकालके नंगी होयइ.. तब देवायतका विकराल लंड भावनाकी चुत देखतेही हवामे लहेराते जटके मारने लगा.. ओर वो भावनाके पास बैठते उनको कंधेसे पकडकर लीटा देता हे.. ओर खुदभी उनके बुब्सको मसलते उनके चहेरे पे जुकते होंठ चुमने लगता हे..

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तब भावना देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीजते उसे अपने उपर खीच लेती हे.. ओर देवायतके होंठ चुमने लगती हे.. तब कुछही देरमे दोनो मुह खोलते अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीते जीभको चुस रहेथे.. ओर देवायतने धीरेसे अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते भावनाकी चुतपे रख दीया.. तब भावना सरसे पांव तक कांपने लगी.. ओर उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते अपने तनसे चीपका लीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. आज भावनाके तनमे पुरी तराह वासना हावी हो चुकी थी..

भावना : (मदहोसीमे लडखडाती आवाजमे) जी..जु.. मुजे अभी.. चोदलो.. मे नही रेह सकती.. आपके लीये कीतनी तडपी हु.. बस अ‍ेक बार इसे अंदर डालदो.. मुजे आज बहुत मन कर रहा हे.. फीर जोभी होगा देखा जायेगा.. मे इसे अंदर लेना चाहती हु.. चोदलो मुजे..

देवायत : (मदहोसीमे होंठ चुमते) नही भावु.. बस डार्लींग थोडासा कंट्रोल करले.. वरना तेरी हालत खराब होजायेगी.. इस हालतमे करना ठीक नही हे.. मे तुम दोनो बहेनोको साथमे चोदुगा.. वरना अभी कुछ हो गया तो चंदा.. ओर तेरे मम्मी पापाको जवाब देना मुस्कील हो जायेगा..

भावना : (कामुक आवाजमे) ठीक हे जानु.. पहेले हम दोनो अपनी सुहागरात मनायेगे.. ओर वोभी सीर्फ हम दोनो अकेले.. फीर चाहे आप बादमे हम दोनो बहेनको साथमे चोद लेना.. बस अभी थोडा प्यार करलो..

तब देवायत भावनाके उपरसे उठ जाता हे.. ओर सीक्ष नाइन पोजीसनमे हो जाता हे.. तब भावना समज गइ.. ओर देवायतकी कमर पकडते उनके बडे लंडको देखतेही मुहमे पानी आगया.. ओर लंडको जटसे मुहमे लेनेकी कोसीस करने लगी.. फीर धीरेसे लंडको मुहमे लेलीया ओर उसे अंदर बहार करने लगी.. तो दुसरी ओर देवायत भी भावनाकी चुतमे जीभ डालके उनके चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगा.. तब भावना बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर अपनी कमर उछालने लगी..

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फीर जोरोसे लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी.. दोनोके उपर काम वासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. भावना आज पहेली बार देवायतके साथ अ‍ेकही बीस्तरमे उनसे खुलके मील रहीथी.. आखीर उसे अपना मन चाहा प्यार जो मील गया.. जो अभी उनकी चुतको बडेही बेहरेहमीसे खरोद रहाथा.. तब भावना ओर बरदास्त नही कर पाइ.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. ओर देवायतका मुह भर गया..

तो देवायतभी आज नइ चुतके साथ खेलते कांपते हुअ‍े जल्दी जडने लगा.. ओर उसने अपना पुरा माल भावनाके मुहमे उडेल दीया तो भावनाका पुरा मुह भर गया.. तो बहुत सारा पानी भावनाके हलकमे उतर गया ओर भावना लंडको मुहसे नीकालते खांसने लगी.. तब देवायत जटसे बेडसे उतर गया ओर भावनाको गोदमे उठाकर बाथरुममे चला गया.. वहा दोनोने अपने अपने मुहको साफ कीया ओर सही होगये.. फीर दोनोही बहार आगये.. तब..

भावना : (सरमाते देवायतकी बाहोमे समाते) जीजु.. आज बहुत मजा आया.. बस मुजे अ‍ैसेही प्यार करते रहेना.. आजसे आपकी ये साली आपकी अमानत होगइ हे.. बस अब मुजे आधीसे पुरी घरवाली बनादो..

देवायत : (हसते सरको चुमते) बस भावु.. अ‍ेकबार तु सही होजा.. फीर तुजे इतना प्यार दुगाकी तुने अपने पतीकी कमी महेसुस नही होगी.. बस अ‍ेकही बीनंती हे.. तुम भानुको मत छोडना..

भावना : (हसते) हा जीजु.. मेरी इस बारेमे दीदीसे बात होगइ हे.. आप फीकर मत करो.. अब मे उनको नही छोडुगी.. ओर उनके साथ अच्छा रीलेशन रखते उनके साथ भी रहुगी.. मुजे दीदीने सारा प्लान समजा दीया हे.. लेकीन अब सही मायनोमे मेरे पती आपही होगे.. आप मुजे प्रोमीस करो..

देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे.. आइ प्रोमीस.. अब तुम सीर्फ मेरी ही बीवी कहेलायेगी.. बस.. चल अब सोजा.. काफी देर होगइ हे.. मेभी सो जाता हु..

भावना : (हसते बाहोमे भीचते होंठ चुमते) जीजु.. बस अ‍ैसे मौका देखकर आते रहेना.. मे इन्तजार करुगी..

कहेते देवायतको अपनी बाहोसे आजाद करदीया तो देवायत उनके होठ चुमते वहासे नीकल गया.. तो भावनाने खुस होते हसते अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया ओर अपने बेडपे जाकर सोगइ.. तो देवायतभी अपने रुममे आगया ओर चेन्ज करके अपनी दोनो बीवीओके बीच जाकर लेट गया तो मंजुने आंख खोलके देखलीया ओर हसती हुइ करवट लेके देवायतके सीनेपे सर रखते उनकी बाहोमे समा गइ..

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मंजुला : (धीरेसे) मेरी बहेनको प्यार करके आगये..? चलो अब सो जाओ.. अब कुछभी नही मीलेगा..

देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे.. लेकीन तेरी बहेनने मुजे लुटलीया.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सीनेको सहेलाते) अभी कहा लुटा हे.. बस अ‍ेक बार कमीनी आपका हथीयार अंदर लेगीनां तब उसे पता चलेगा.. की मेरे पतीको लुटना इतना आसान नही हे.. कमीनी बहुतही कामी हे.. अपनी मां पे गइ हे हें..हें..हें..

देवायत : मंजु.. आज मे सुधीरके घरपे गया था.. वहा मुजे अ‍ेक बात पता चली.. ओर आते वक्त अ‍ेक ओर रीस्ता मेरी नजरमे आया.. वो हमारे सामतके घरपे.. आने वाले दिनोमे हमे कीतने लोगोको समजाना पडेगा..

मंजुला : हां.. सामतभाइकी विधवा बहेन ओर उनके लडकेकी बात कर रहे होनां..? जानु.. उनकी बीवीभी कुछ कम नही हे.. उनकाभी रीस्ता हमारे रमेशभाइके साथ हे.. इस बारेमे कीसीको कुछभी नही पता.. लेकीन जल्दही सबको पता चल जायेगा.. वो सब हम देख लेगे.. बस अ‍ेक बार हम दोनोको बाबाको मीलने जाना होगा.. तब वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. अभी सोजाओ मुजे बहुत नींद आ रही हे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? हमारा रमेश.. लेकीन वोतो बहुत सीधा हे.. साला अपनी बीवीकोभी ठीकसे नही चोद पाता.. ओर सामतकी बीवीके साथ..? वो जयाभाभीनां..?

मंवुला : (हसते) हां.. जानु.. सबको यहीतो चाहीये.. उनको पता हे अपनी बीवीतो घरका खाना हे.. कभीभी मील सकती हे.. बस सबको बहारका नास्ता करना अच्छा लगता हे.. ओर ये बात सीर्फ मर्दोपे नही ओरतोपे भी लागु होती हे.. चारुभाभी भीतो कम नही हे.. वोभी आपसे मजे करती हे.. कमीनी ये आगही अ‍ैसी हे.. अब सोभी जाओ हम कल बाते करेगे.. मुजे बहोत नींद आ रही हे..

फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे नींदकी आगोसमे चले गये.. तो दुसरी ओर गांवसे बहुत दुर गौवामे दोनो कपलने घुमकर बहुत अ‍ेन्जोय कीया.. जब लता लखन ओर पुनम अ‍ेक राइडमे बेठे तब धिरेनने चकर आनेका बहाना बनालीया.. ओर वो नही बैठा.. तब उसी मौकेका फायदा उठाकर वो थोडा दुर चला गया.. ओर अपना फोन नीकालकर फटाफट नीलमको फोन कर दीया.. जब नीलमने फोन उठाया तब वो बात करने लगा..

नीलम : (सरमाते हसते) हां धिरेन.. आप लोग पहोंच गये गौवामे..? कैसेहो..?

धिरेन : (हसते) हां.. नीलु.. बस मजेमे.. आज दो पहोरकोही पहोचे.. ये छोड पहेले ये बता.. तेरे रुममे कोइ हेतो नही..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही धिरेन.. यहा डरनेकी कोइ जरुरत नही.. अभी सीर्फ मे अकेली हु.. मेरे रुममे सीर्फ अ‍ेकही पार्टनर हे अभी वो ट्युसनपे गइ हे.. कहो क्या कहेना चाहते हो.. आपकी बहोत याद आती हे..

धिरेन : नीलु.. आइ लव यु.. सोरी उस दिन मेरी वजहसे तुजे दीदीकी डांट खानी पडी.. आइ अ‍ेम सोरी..

नीलम : हंम.. जानु.. आपके लीये मे कुछभी सहेन करनेको तैयार हु.. बस मुजे छोडना नही.. मेभी आपसे बहोत प्यार करती हु.. आप अपना खयाल रखना.. क्या अभी आप अकेले हो..? मेरी सौतन कहा हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) नीलु वो तीनो राइडमे बैठे हे.. तो तुमसे बात करनेका मौका मील गया.. कहो..

नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. आप इधर सहेरमे कब आओगे.. मुजे आपको मीलना हे..

धिरेन : ( बस नीलु.. बहुत जल्द आउगा वहा.. अभीतो हम चारो इधर आयेहे.. पहेले तेरी सौतनको तो अच्छेसे मीललु.. फीरतो हम दोनो तो हेही..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. क्या अपनी सुहागरातमे उनके साथ कुछ कीया कीया..? मतलब.. आप समज गयेनां..? हें..हें..हें..

धिरेन : (जुठ बोलते) हां नीलु.. समज गया.. मेने पुरी रात उनकी बजाइ.. नीलु.. मेने पुनोको चार बार चोद लीया.. उनकी चीखे नीकलवादी.. बस अब तेरी बारी हे.. हें..हे..हें.. देखना जब हमारी सुहागरात होगी तो मे तुजेभी इसी तराह चोदुगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते धीरेसे) क्या..? छी.. गंदे कहीके.. जानु.. कोइ अपनी बीवीके साथ अ‍ैसा करता हे..? क्या उसे दर्द नही हो रहा था..? मेनेतो सुनाहे पहेली बारमे दर्द होता हे..

धिरेन : नही नीलु.. बस पहेली बार डालते हे तब मामुली थोडी देरके लीये दर्द होता हे लेकीन बादमे बहुत मजा आता हे.. पुनोको भी बहुत मजा आया.. अबतो मुजे बार बार चोदनेके लीये केह रही हे.. देखना तुजेभी बहुत मजा आयेगा.. मानो हम जनतकी सेर कर रहेहो..

नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. क्या आप मुजे उनको करते हुअ‍े दीखा सकते हो.. आप फोनमे वीडीयोकोल चालु रखना मुजे देखना हे.. की कैसे करते हे.. क्या दिखाओगे..?

धिरेन : हां.. आज रातमे देख लेना मे फोन लगाके छुपाकर रखुगा.. तुम देख लेना.. लेकीन तुम कोइ आवाज मत करना.. चल अब रखता हु.. सायद वो लोग आ रहे हे..

कहेते धिरेनने फोन काट दीया ओर फटाफट अपनी जेबमे रखते तीनोके पास चला गया.. ओर वहा सबने बहुत मजे कीये ओर घुमते सामको वापस होटेलपे आगये.. ओर वापस आकर लंच करलीया.. फीर सभी लोग अपने अपने कमरेमे घुस गये.. ओर होटेलमे हनीमुन कपलके बीच चुदाइका दौर चल पडा.. तब लखनको आजभी लताने वायग्रा नही खानेदी.. लखन ओर लता दोनोही चुदाइमे मसगुल थे..

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तो इधर पुनम चेन्ज करने बाथरुममे घुस गइतो धिरेनने फटाफट नीलमको विडीया कोल करके फोनको अ‍ेक कोनेमे छुपा दीया.. जहासे पुरा बेड दिख सके.. तभी पुनम बहार आगइ.. तो धिरेन हडबडा गया.. ओर वो भी जटसे बाथरुममे चला गया.. लेकीन येतो पुनम थी.. उसे सब पता चल गया.. ओर वो फोनकी ओर देखते कातील मुस्कान करते अपने बेडपे आगइ.. क्युकी वोभी चाहतीथी की जीतनी जल्दी हो सके नीलम ओर धिरेन मील जाये..

ताकी अपने लीये देवायतको मीलनेका रास्ता साफ हो सके.. तब धिरेनभी आगया.. तो पुनमने उसे रुमकी लाइट बंध करनेको कहा.. लेकीन धिरेनने उसे केह दियाकी वो आज उनको अ‍ैसेही लाइटमे देखते चोदना चाहता हे.. तब पुनम सब कुछ समज गइ.. ओर कुछही देरमे दोनो प्यारकी आगोसमे चले गये.. अब धिरेन पुनमकी मददके बीनाही अपना लंड उनकी चुतमे डालने लगा.. ओर वो कामयाबभी हो गया..

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वो ओर पुनम धीरे धीरे करते चुदाइमे मसगुल होगये.. तो सहेरकी होस्टेलमे नीलम अपना फोन लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर कमोडपे बेठकर धिरेन ओर पुनमकी चुदाइ देखने लगी.. ओर कुुछही देरमे वोभी गरम होने लगी.. तब अ‍ेक हाथसे फोन पकडते दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर सीसकारीया करने लगी.. तभी उसने फोनको साइडमे रख दीया ओर अपना लोअर नीचे करते अपनी पेन्टीभी नीचे करदी..

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ओर अपनी चुतमे धीरेसे उंगली घुसाते फोनमे धिरेन पुनमकी चुदाइ देखते उंगलीको अंदर बहार करने लगी.. नीलम पुरी तराह मदहोसीमे छा गइ.. ओर कुछही देरमे उनकी चुतसे अ‍ेक तेज फवारेकी धार नीकल गइ.. तब नीलम आंख बंध करते सातवे आसमानपे चली गइ.. कीतना प्यारा अहेसास था वो.. ओर उसने मनही मन जल्दसे जल्द धिरेनसे चुदवानेका मन बना लीया.. बस.. यहीतो पुनम चाहती थी..

लखन लताकी दो बार जबरदस्त चुदाइ कर लेता हे.. तब लताभी थकके चकना चुर हो चुकीथी.. फीर दोनो अ‍ैसेही नंगे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपककर सो जाते हे.. तब धिरेनभी अ‍ेक बार पुनमकी चुतमे अपना माल उडेलके उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब पुनम अ‍ेक बार फीर प्यासी रेह गइ.. ओर उसने धीरेसे धिरेनको साइडमे सुला दीया तो धिरेनभी नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर पुनम अपने आपको बाथरुममे जाकर सांत करती हे.. ओर वोभी धिरेनके साथ आकर लेटके सो जाती हे..

दुसरे दिन सुबह गौवामे सभी कपल रुटीन टाइमपे उठ गये.. ओर अपनी टुरके तैय कार्यक्रमपे चले गये.. तो इधर गांवमेभी देवायत चंदा मंजु सब उठके कंपलीट होगये.. तो सबने चाइनास्ता करलीया.. लेकीन आज राजीव घरपेही रहा.. क्युकी उसे गांवमे लटार मारने जाना था.. तो खेतोपे सीर्फ देवायत अकेलाही चला गया.. ओर जातेही गोडाउनकी ओफीस मे बेठकर फोन घुमाने लगा.. ओर अपने बीजनेसके लीये मार्केटकी पुरी जानकारीया लेने लगा..

तबतक भानुभी आगया ओर वोभी खेतोका काम देखकर देवायतके पास ओफीसमे आगया.. दोनोही बीजनेसकी बाते करते मालकी सोदे बाजी करने लगे.. पीछले कुछ दिनोसे काम काजकी वजहसे बीजनेस नही होपाया.. तो देवायतने कइ जगाहपे बाते करते कइ सौदे करलीये.. तभी रीटा चाइ लेकर आगइ.. ओर दोनो अपने कामको देखते हुअ‍े चाइ पीने लगे.. तब भानु खडे होकर बात करने लगा.. तो रीटा वही खडी रही.. वो देवायतकी हाजरीकी वजहसे रीटाके सामने देखता भी नही हे..

भानु : भाइ.. लखन नही हे तो मे छोटुको लेकर सहेर चला जाता हु.. वही माल अपने सहेरके गोडाउनमे रखके वापस आजात हु.. अगर कुछ ओर काम होतो बोलो..?

देवायत : नही भानु.. ओर कुछतो नही लेकीन अब लखन आजाये तो तुमभी उसे सहेरका वहीवट समजादो.. तुम कबतक सहेरका चकर लगाते रहोगे.. क्युकी अब लखन ओर लताको मे वही सहेरमे सेट कर रहा हु.. बस हमारा वो मकान ओर ओफीस हे.. उनको अच्छेसे साफ सफाइ करवा देना.. दोनो आयेगे तब उसे वहा रहेने भेज देगे..

भानु : भाइ.. क्या लखनके लीये ये थोडी जल्द बाजी नही हे.. क्यु अभीसे उनपे इतनी जीम्वेवारी डालते हो..? मे सब देख लुगानां..

देवायत : भानु.. अगर उनपे जीम्वेवारी नही डालेगे तो वो कब सीखेगा..? बस तुम उनके साथ रहेना..

भानु : (हसते) तो फीर ठीक हे.. तो वहीसे सीधा बंगलेपे चला जाउगा.. ओफीस हम बादमे देख लेगे.. छोटु साथ हेतो.. सामकोही सब काम नीपटाकर आयेगे.. चलो मे चलता हु..

कहेते भानु चला गया.. तब रीटाभी खाली कप लेकर फटाफट चली गइ.. तो देवायत फीरसे फोनपे बाते करते बीजनेसका वहीवट देखता रहा.. तब भानु छोटुको लेकर कारमे सहेरकी ओर चला गया.. तो कुछही देरमे रीटा वापस आगइ.. ओर सरमाते देवायतकी ओर कामुक ओर प्यासी नजरोसे देखते वही खडी रही..

उनको समजमे नही आ रहाथा की वो देवायतसे कैसे बात करे.. क्युकी कुछ दिनोसे उनके पुरे दिलो दिमागमे सीर्फ देवायतही छाया हुआ था.. ओर उसे आज सही मौका मील गयाथा.. तभी

देवायत कुछ कामसे फ्री हुआ तभी उसे खयाल आयाकी कोइ यहा खडा हे.. तभी

देवायत : (हसते) अरे रीटा तुम..? बोल कुछ काम था क्या..? कुछ कहेना हे..?

रीटा : (सरमाते हसते) मालीक.. वो हरीयाभाइ ओर मालती गांवमे चले गये हे.. ओर अभी भानुभाइ भी मेरे पतीको लेकर सहेरमे गये हे.. तो मालतीने मुजे आपका खयाल रखनेको कहा हे.. अगर आपको कीसीभी चीजकी जरुरत होतो मुजे आवाज देकर बुला लीजीयेगा.. मे आजाउगी.. बस अ‍ेक बार मेरे हाथोका खाना खा लीजीये.. आप मालतीको भुल जायेगे.. बस मे यही कहेने आइ थी.. (सर्मसार होते धीरेसे) क्या अभी आपको भुख नही हे..? अगर खानेका मन कर रहा हे तो कहीये.. आज अच्छा मौका हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते रीटाके कहेनेका मतलब समज गया) जी.. रीटा.. लेकीन क्या तु मुजे अच्छेसे खीला पायेगी..? फीर सोचले.. मुजे खाना खालाके तेरी हालत बीगड जायेगी.. हें..हें..हें..

रीटा : (सरमाते पैरोके अनुठेसे जमीन खरोदते) जी.. मालीक.. सोचलीया हे.. वो छोटु ओर भानुभाइतो सामको आयेगे.. तो मे आराम करलुगी.. बस अ‍ेक बार.. जबसे आपको देखा हे.. तबसे बहुत मन कर रहा हे..

देवायत : (अपने नीजी कमरेकी ओर इसारा करते हसते) ठीक हे रीटा.. जा अंदर जाकर खाना परोस.. मे आता हु..

कहातो रीटा बहुत खुस होगइ.. ओर सरमाते हसते हुअ‍े देवायतके ओफीसके कमरेमे चली गइ.. जहा देवायत मालती ओर जमीलाकी कइ बार जमकर चुदाइ कर चुकाथा.. ओर आज रीटाभी सामनेसे आइ.. वो कइ दिनोसे देवायतके साथ चुदाइ करवाना चाहती थी.. ओर आज उसे मौका मील गया.. वो अंदर जाते बेडपे बैठ गइ तब देवायत ओफीसका दरवाजा बंध करके अपने रुममे चला गया तो रीटा उसे देखते ही बहुतही सरमाइ..

ओर फोरन खडी होके चलकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतने भी जोरोसे रीटाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उसे गोदमे उठाकर बेडपे पीठके बल सुला दीया तब रीटा बहुतही सर्मसार होगइ ओर सरमाते मुस्कुराती रही.. उनकी आंखोमे वासनाके डोरे साफ मंडराते दीखाइ देने लगे.. वो नाजाने कबसे इस मीलनकी धडीके इन्तजारमे थी.. जैसेही देवायत उनपे जुक गया.. रीटाने उसे फोरन अपनी बाहोमे भरलीया..

रीटा : (धीरेसे सरमाते) मालीक.. आज मुजपे कोइ रहेम मत करना.. जबसे मालतीके मुहसे आपकी तारीफ सुनी.. तबसे मे हमारे मीलनके लीये तरस रही थी.. मे आपको हर तराहका सुख दुगी.. बस अभी मुजे ठंडी करदीजीये.. आपसे चुदवानका बहुत मन कर रहाथा.. तो आज मुजे चोद डालीये.. मे रेडी हु..

देवायत : (होंठ चुमते) अच्छा इसीलीये तुम कबसे मुजे खानेके लीये केह रहीथी.. चल आजतो तुजेही खाता हु.. देखुतो सही तेरा स्वाद कैसा हे.. अब तक कीतनेको अपना स्वाद चखा चुकी हे..

रीटा : (सरमाते हसते) मालीक बादमे सब बता दुगी.. बस अभीतो मुजे पहेले अ‍ेक बार ठंडी करदो.. आपके हथीयारकी बहुत तारीफ सुनी हे.. तबसे मेरा मन आपसे मीलन करनेके लीये तरस रहा हे.. वैसेतो मे अ‍ैसी ओरत नही हु.. बस मुजे इन सब चीजोका बहुत सौक हे.. लेकीन अभी नही.. बादमे सब बता दुगी..

कहेके देवायतको अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. रीटा बहुतही कामुक तरीकेसे अपना मुह खोलते देवायतके मुहके रसको पीने लगी.. तब उसे अपने बुब्सपे देवायतका हाथ उनके बुब्सको मसलते महेसुस हुआ.. तो रीटा बहुतही उतेजीत होते सीसकारीया करते देवायतके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. उनकी आंखे लाल होने लगी.. उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. मानो रीटा पहेलेसेही इस खेलमे माहीर हो..

वो चाहतीथी की जल्दसे जल्द देवायतका लंड उनकी चुतमे घुस जाये.. तब वो फौरन बेडपे बैठ गइ ओर देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. तब कुछही देरमे देवायतको नंगा करदीया.. ओर खुदके कपडे नीकालके नंगी होगइ.. तब देवायतका लंड देखतेही अ‍ेक बारतो वो थोडा डरके गभरा गइ.. ओर उसे देवायतसे चुदवानेकी अपनी जल्दबाजी पे पछतावा होने लगा..

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देवायत : (हसते) क्यु..? क्या हुआ..? तुजे चुदवानेकी बहुत जल्दी थीनां..?

रीटा : (थोडा गभराते) मालीक.. येतो वाकइ बहुत बडा हे.. अगर मेरी चुत फट गइतो..?

देवायत : (हसते) आज तकतो कीसीकी नही फटी.. ओर वैसेभी तुमतो इस खेरमे काफी खेली खीलाइ लगती हो.. बस सीर्फ दीखनेमे ही भोली लगती हो..

रीटा : (सर्मसार होते हसते) मालीक अब आपसे क्या कहे..? बस साली ये तनकी आगही अ‍ैसी हे.. जबसे जवानीमे कदम रखा हे तबसे अ‍ेक चस्का लग गया हे.. बस इनकी अ‍ेक आदतसी होगइ हे.. अब देर मत कीजीये.. इसे देखकर तो लगता हे मुजे आज आराम भी करना पडेगा.. सही मायनेके मुजे आज बसली लंड मील गया हे.. आइअ‍े.. चोद लीजीये मुजे..

कहेते रीटा वापस बीठके बल लेटते देवायतको अपने उपर खीच लेती हे.. ओर पलटते देवायतको पीठके बल सुलाते अ‍ेक हाथ नीचेकी ओर लेजाते उनके होठ चुमते देवायतके लंडको पकड लेती हे.. ओर मुठीमे पकडते धीरे धीरे सहेलाने लगती हे.. तब देवायतको पुरा यकीन होगयाकी रीटा इस मामलेमे पुरी तराह अनुभवी हे.. ओर रीटा लंड सहेलाते उनके सीनेको चुमते नीचेकी ओर सरक के उनके पैरके बीच बैठ जाती हे..

ओर धीरेसे लंडपे जुकते लंडपे अपनी जीभ फीराते लंडको भीगोने लगी.. जब लंड गीला होगया तो पुरा लंडको मुहमे लेकर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. ओर मदहोस होने लगी.. तब देवायतभी धीरे धीरे मदहोसीके आलममे चला गया.. रीटा नजर उठाते देवायतकी ओर वासनाभरी नजरोसे देखते उनके लंडको चुस रहीथी.. तब देवायतके मुहसे सीसकारीया नीकलने लगी.. ओर उनके मनमे वासना पुरी तराह हावी होगइ.. उनको यकीन हो गयाकी आज उसे रीटा पुरा मजा देगी..

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देवायत : (कामुक आवाजमे) बस..सी.. आह..आह.. री..टा.. क्या मस्त चुसती हे तु.. मजा आगया..

रीटा : (मुहसे लंड नीकालते कामुक आवाजमे) मालीक.. इस चीजका अच्छा खासा अ‍ेक्सीपीरीन्स हे.. मुजे ये सब करना बहुत अच्छा लगता हे..

देवायत : (हसते आस्चर्यसे) अ‍ेक्सीपीरीयन्स..? अरे वाह.. कहा तक पढी हो..?

रीटा : (हसते) जी.. बारवी तक पढाइ की हे मेने.. कोलेजभी जाना चाहती थी.. लेकीन घरवालोने पढने नही दीया.. मुजे बीचमेही कोलेज छुडवादी ओर इस छोटृुसे सादी करदी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बडी दीलचस्प कहानी लगती हे तेरी.. चल बादमे सुन लुगा अब आकर लेटजा..

तब रीटा सरमाते हसती हुइ आकर पीठके बल लेट गइ.. तो देवायत उनके पैरके बीच बैठ गया ओर अपना लंड रीटाकी चुतपे घीसने लगा तब रीटा आंख बंध करके मदहोसीमे सीसकारीया करने लगी.. ओर आने वाले हसीन पलका इन्तजार करने लगी.. तभी देवायतने लंडको घीसते धीसने उनके टोपेको रीटाकी चुतके लव होलमे डालके थोडा फसा दीया.. ओर रीटापे जुकते उनपे छा गया..

ओर रीटाके दोनोहाथ पंजेसे कपडकर रीटाको लीपलोक करलीया.. रीटा कुछ समज पाये उनसे पहेलेही देवायतने रीटाकी चुतपे दबाव बनाते कमरको अ‍ेक जोरोका जटका दे दीया.. तो पुरा लंड रीटाकी चुतमे घुस गया.. तब रीटाकी चीख देवायतके मुहमे ही दब गइ ओर उनकी आंख बडी होगइ.. वो छटपटाते अपने होंठ छुडानेकी कोसीस करते अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. ओर उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. जब देवायतने लोपलोक छुडालीया.. तब..

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रीटा : (दर्दसे मुहको इधर उधर करते) मालीक... बस.. बस.. नीकाल लीजीये.. मुजे नही चुदवाना प्लीज.. बहुत दर्द हो रहा हे.. कीतना बडा ओर मोटा हे आपका मे सहेन नही करपाउगी.. नीकाल लीजीये..

देवायत : (कामुक आवाजमे) रीटा.. उनपे ध्यान मतदे.. बस मुजे चुमती रहे अभी दर्द चला जायेगा..

कहेते देवायत रीटाके बुब्सको ओर उनके होठोको बारी बारी चुमने लगा.. तब कुछ देरके बाद दर्द कम होने लगा ओर रीटा छटपटाते सांत होगइ.. आखीर देवायतका तगडा लंड अपनी चुतमे ले ही लीया.. अभी वो लंडको अपनी चुतमे लेकर देवायतके नीचे लेटीथी..

ओर सरमके मारे देवायतसे नजरे चुराते इधर उधर मुह कर रहीथी.. तब देवायत रीटाको धीरे धीरे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब कुछही देरमे रीटाकी दर्द भरी आवाजे सीसकारीयोमे तबदील होगइ.. ओर वोभी कमर हीलाते देवायतका चुदवानेमे साथ देने लगी..

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ओर कुछही देरमे देवायत ओर रीटाके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. रीटा देवायतकी पीठ सहेलाते अपनी कमर उछाल उछालके देवायतको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. तब कुछही देरके बाद वो अकडने लगी.. तब उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके साथ लीपलोक करतेही जडने लगी.. फीरभी देवायतने उनको चोदना जारी रखा.. तब देवायत हाथके बल उचा होकर रीटाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा..

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रीटा : (कामुक आवाजमे) मालीक.. बस.. बस.. थोडा धीरे.. आप क्या मस्त चोदते हे.. मेतो आपकी दिवानी होगइ.. बस अबतो में आपसेही चुदवाउगी.. जबभी आपका चोदनेका मन करे मुजेही बुला लीजीयेगा.. मे कोइ बहाना करके आजाउगी.. क्या आपको आज मुजे चोदनेमे मजा आरहा हे..की नही..?

देवायत : (होंठ चुमते) हां रीटा.. तुभी मस्त तरीकेसे चुदवाती हे.. बीलकुल मालतीकी तराह..

रीटा : (हसते) मालीक.. अ‍ेक बार हम दोनोको साथमे चोदीयेगा.. वोभी आपकी दिवानी हे.. मेरी पकी सहेली होगइ हे..

तभी देवायत रीटाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा तो रीटाकी हालत पतली होने लगी.. ओर हल्कासा चीखने लगी.. ओर देवायत उनपे जुकते छागया.. तो रीटाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर दोनोके होठ लीपलोक होगये.. ओर देवायतने रीटाकी चुतमे जडतक लंड घुसा दीया.. फीर रुक रुक कर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तभी रीटाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उसे अपने बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ.. तब वोभी उतेजीत होकर साथमे जडने लगी..

आज रीटाके चहेरेपे संतुस्टीके भाव थे.. कुछही देरमे दोनो सांत होगये ओर अपनी सांसेको दुरस्त करते अ‍ैसेही सांत पडे रहे तबतक रीटा देवायतकी पीठको प्यारसे सहेलाते रही.. देवायतका लंड अबभी रीटाकी चुतमे सख्त होकर घुसा हुआथा.. तब रीटाकोभी थोडा अजीब लगा.. ओर मनही मन खुस होते दुसरी बार देवायतसे चुदवानेकी मनमे कामना करने लगी.. तभी देवायतने प्यारसे गालको सहेलाते रीटाको पुछही लीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२५

आज रीटाके चहेरेपे संतुस्टीके भाव थे.. कुछही देरमे दोनो सांत होगये ओर अपनी सांसेको दुरस्त करते अ‍ैसेही सांत पडे रहे तबतक रीटा देवायतकी पीठको प्यारसे सहेलाते रही.. देवायतका लंड अबभी रीटाकी चुतमे सख्त होकर घुसा हुआथा.. तब रीटाकोभी थोडा अजीब लगा.. ओर मनही मन खुस होते दुसरी बार देवायतसे चुदवानेकी मनमे कामना करने लगी.. तभी देवायतने प्यारसे गालको सहेलाते रीटाको पुछही लीया....अब आगे

देवायत : (हसते) हां रीटा.. अब बता.. तुजे अ‍ैसी आदत कहासे लग गइ.. तेरे खानेका वाकइ मस्त स्वाद हे.. तुजे बार बार खानेका जी कर रहा हे..

रीटा : (सर्मसार होते हसते) मालीक मेने कहाथाना मे मालतीसेभी मस्त खाना खीलाउगी.. बस मेरे लीये यही बहुत हे आपको मेरा खाना अच्छा लगा.. अब मुजे मौका दीजीयेगाकी मे ही आपको अ‍ैसेही खीलाती रहु.. मे कबसे आपके नीचे लेटनेको तैयार थी.. बस सही मौकेका इन्तजार था.. सो आज मील गया..

देवायत : रीटा मुजे तेरी पुरी स्टोरी जाननी हे.. क्या राघवभी तुजे चोदताथानां..?

रीटा : (सरमाते हसते) हां मालीक.. जब छोटीथी तब ही बाप गुजर गया.. ओर मेरी मा ने दुसरी सादी करली.. तबवो मुजेभी साथ लेगइ.. वहा मेरा सोतेला बाप ओर अ‍ेक सोतेला भाइ ही था.. वो उमरमे मुजसे ८ साल बडाथा.. तब मे सीर्फ १७ सालकी थी.. ओर जवानीकी ओर कदम रख रहीथी.. ओर मेरे सोतेले बापने मुजे अच्छी सक्ुलमे दाखला दीलवा दीया ओर मे पढने लगी.. तब भाइने भी कोलेज पुरी करके कोइ कंपनीपे नोकरीपे लग गयेथे..

देवायत : तो क्या उनकी सादी नही हुइथी..?

रीटा : नही.. बस उनके रीस्तेकी बाते चल रही थी.. लेकीन वो मुजे हमेसा कुछ अजीब नजरोसे देखते रहेता था.. तब मे पढाइमे मेथ्स मे थोडी कमजोर थी.. तो मेरे बापुने स्कुलकेही अ‍ेक टीचससे अ‍ेकस्ट्रा ट्युसन रखवा दीया जो हमारी गलीके पीछली गलीमे ही रहेता था.. ओर मे सु्कुलसे घर आकर खाना खाकर वही ट्युसनमे चली जाती थी.. तब वोभी अपनी मांके साथ अकेला ही रहेता था..

देवायत : तो क्या तेरा टीचरभी कुआरा था..?

रीटा : (हसते) नही सादी सुधाथा.. लेकीन उनकी बीवी उनको छोडकर कीसीके साथ चली गइथी.. उनकी माके पैरमे दर्द थातो वो उपरकी मंजीलपे नही आ सकती थी.. ओर हम उनकी उपरकी मंजसीपे ही पढाइ करते थे.. हम दोनोको ही अकेलेमे टाइम स्पेन्ट करनेका काफी मोका मीलने लगा.. ओर आपतो जानते हे अ‍ेक जवान लडकी ओर अ‍ेक मर्द ज्यादा टाइम अकेले रहेते हेतो क्या होता हे.. बस यही हमारे साथभी हुआ..

देवायत : (हसते) हंम.. कतलब दोनो प्यार करने लगे..

रीटा : (हसते) क्या मालीक.. मर्दके लीये प्यारकातो अ‍ेक बहाना हे.. असलमे उनको कुछ ओरही चाहीअ‍े.. बस.. अ‍ेक दिन मुजे मेथ्समे पास करवानेकी लालच दे दी.. ओर बदलेमे उसने मुजे प्यारके लीये कहा.. तब मेरी भी जवानी उछल रहीथी.. मुजेभी खुजली हो रहीथी.. ओर मेने उनको हां केह दीया..

उसी दीन पढाइ छोडके दोनोही बहेक गये.. ओर हमारे बीच सबकुछ हो गया.. उसी दिन मेरे टीचरने मेरा कौमार्य भंग कीया.. फीरतो ये सीलसीला रोजके लीये चल पडा.. मेरे जातेही पहेले हम दोनो अपने तनकी प्यास बुजाते फीर थोडी देर पढके मे घरपे वापस आजाती..

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देवायत : अच्छा.. तो फीर तुजे इनकी आदत वहासे लग गइ.. तो फीर उनसे सादी करलेती..

रीटा : (सरमाते धीरेसे) हां हमने भी वोही तैय कीयाथा.. लेकीन मेरे सरीरमे बदलावकी वजहसे मांको पता चल गया.. ओर उसने भाइको मेरे उपर नजर रखनेको कहा.. ओर अ‍ेक दिन भाइने हम दोनोको रंगे हाथो चुदाइ करते पकड लीया.. उसी दीन भाइने उन टीचरको खुब मारा.. ओर मेरा ट्युसन छुडवा लीया.. लेकीन भाइने घरपे कीसीको ये बात नही बताइ.. मम्मीने पुछा फीरभी उनको कुछ नही कहा.. तब मेने राहतकी सांस ली.. लेकीन मुजे क्या पताथा की उनके दिमागमे क्या चल रहा हे..

देवायत : क्यु नही बताइ..? कोइ खास वजह..? क्याथा उनके दिमागमे..?

रीटा : (हसते) मालीक बीना वजह कोइ रहेम करता हे..? उनकी भी नीयत ठीक नही थी.. वोतो मे माके साथ इधर आइ तबसे ही सुरुसे मुजपे घात लगाके बैठाथा.. ओर अ‍ेक दिन मम्मी पापा दो दीनके लीये कीसी रीस्तेदारके यहा गांवमे सादीके लीये गये.. तब उसे मौका मीलही गया.. ओर उसने चुपकेसे दो दीनकी नोकरीसे छुटी लेली.. जब मम्मी पापा चले गये तो नोकरीसे घर आगये.. असलमे वो नोकरीपे गये ही नही थे.. ओर घरपे आकर सबसे पहेलेतो दरवाजा बंध करके लोक करदीया..

ओर सीधेही मेरे रुममे आगये.. तब मे नहाकर नीकलीही थी ओर उसने मुजे तभी दबोच लीया.. मेने उनको भाइ बहेनका हवाला दीया.. तो मुजे मम्मी पापाको टीचरके साथ चुदाइकी बात केहे देगे.. कहेके बल्ेकमेइल करते मुजे बेडपे पटक दीया.. अ‍ेकतो मे नहाकर आइथी तो सीर्फ टोलीयाही लपेटाथा.. ओर उसने टोलीया खीचलीया ओर मेरे उपर चड गया.. बस उसी दिन भाइने मुजे जबरदस्ती चोद लीया..

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ओर जबतक मम्मी पापा वापस नही आये वो मेरी चुदाइ करते रहे.. उन दो दीनमे भाइने मुजे सातसे आठ बार चोद लीया.. घरका अ‍ेकभी कौना बाकी नही रखा.. खाना बनातेभी कीचनमे मुजे चोद लेते..

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ओर भाइका लंडभी टीचरके लंडसे बडा था.. सुरुआतमे दो बार मेने उसे ना नुकुर की.. फीरतो मुजेभी अच्छा लगने लगा.. ओर मेने इस रीस्तेको अपना लीया.. फीर जबभी हम दोनोको मौका मीलते दोनो अ‍ेक होजाते..

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भाइ ओर मे अक्सर देर रात घरकी छतपे चले जाते ओर दोनो मजेसे कभी तीन बजे तक.. तो कभी कभी चार बजे तक चुदाइ करते.. ओर वापस आकर सोजाते.. तब अ‍ेक दिन मुजे उल्टीया हुइ तो मम्मीने देख लीया.. ओर उनको संका हुइ तो मुजे डोक्टरके पास लेगइ.. ओर चेक करवाया..

तो मे भाइसे प्रेगनेन्ट हो चुकीथी.. घर आकर मम्मीने मुजे खुब मारा.. लेकीन मेने भाइका नाम नही लीया.. ओर भाइने ही बीचमे आकर मम्मीसे मुजे बचाया.. फीर मम्मीने पापाको कहेकर आनन फाननमे लडका ढुढंकर मेरी सादी इन छोटुसे करवादी.. मेरा अभी जो बच्चा हेनां.. वो मेरे भाइकी नीशानी हे.. फीर तो भाइ ओर मुजे खुलकर मौके मीलने लगे.. मेरी सादीके बादभी मेरा भाइके साथ रीलेशन चालु रहा..

देवायत : (हसते) तो क्या तेरे मम्मी पापाको इसका पता नही चला.. की ये बच्चा कीसका हे..?

रीटा : (फीकी मुस्कानसे) मालीक.. क्या फर्क पडता हे..? जब लडकीकी सादी होजाती हेना तो कोइ नही पुछता..की बच्चा कीसका हे.. सब इस छोटुका बच्चाही समजते हे.. फीरतो मे जबभी मायके जाती या मुजे भाइसे चुदवानेकी इच्छा होती.. तब मायके जाकर भाइसे कोइना कोइ जुगाड करके उनसे चुदवा लेती.. मेने हमारी सादीके बादभी भाइसे रीस्ता रखाथा.. मुजे भाइसे चुदवानेकी आदत जो पड गइ थी.. लेकीन अब मेने मायके जानाही छोड दीया.. मे उस घरसे सभी रीस्ते खतम करके आइ हु..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्यु..? कोइ खास वजह..?

रीटा : (सरमाते हसते) आइ.. सीससइइइ.. अभीभी अंदर सख्त लग रहा हे.. मालीक.. मुजे धीरे धीरे चोदीयेनां हम चुदाइ करते बाते करते हे..

देवायत : (धीरे कमर हीलाते चोदते) हां अब बता.. मायकेसे रीस्ता क्यु तोड दीया..?

रीटा : (अपनी कमर हीलाते) हां.. मालीक.. बस अ‍ैसेही.. चोदते रहीये.. सुनीये.. जब बापु गुजर गये तो घरकी सारी जीम्वेवारी भाइके कंधोपे आगइ.. तो बापुके गुजरजानेके बाद अ‍ेक दिन मे माइके गइ.. तब भाइने जुगाड करके मुजे दिनमे ही अपने रुममे बुलाकर चोद लीया.. तो उस दिन छोटु मुजे वापस लेने नही आयातो मुजे रातमे वही रुकना पडा.. तो मेरी माका चहेरा बदल गया.. ओर वो नीरास होगइ.. तब मेने उनपे कोइ खास ध्यान नही दीया.. ओर उस रात मे माके साथ ही बच्चेके साथ सोगइ..

जब रातमे बच्चा दुध पीनेके लीये उठा.. तब मेने उसे दुध पीलाया ओर वापस सुला दीया.. तब देखातो मा मेरी बगलमे नही थी.. तो मेने सोचाकी कही पीसाब बीसाब करने गइ होगी.. लेकीन काफी देरके बादभी मा नही आइतो मे उठकर बहार देखने गइ.. तो भाइके रुमसे मुजे कुछ सीसकारीयोकी ओर धीरेसे बाते करनेकी अजीब आवाज सुनाइ दी.. तब मे समज गइकी भाइके रुममे जरुर कीसीके साथ चुदाइ हो रही हे.. जब मेने बहार जाके खीडकीसे देखातो मेरी मां मेरे भाइके नीचे लेटी हुइ थी ओर भाइ उसे चोद रहा था..

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ओर दोनो बातेभी कर रहेथे.. तब उनकी बातोसे लगाकी दोनो मा ओर बापुकी सादीके कुछ दिन बाद ही रीलेशनमे आगये थे.. उनके बीच कइ दीनोसे अवैध रीस्ता था.. तभीतो भाइ सादी नही कर रहेथे.. मेरा भाइ इतना कमीनाथा की वो मेरे साथ रीलेशनमे अया उनसे पहेलेही वो मा को चोद रहाथा..

फीरतो वो हम मां बेटी दोनोको चोद रहाथा.. ओर मे वापस अंदर आगइ.. ओर उनका दरवाजा खुलवाया तो मा ओर भाइ दोनोही गभराये हुअ‍े थे.. दोनोके कपडे अबभी अस्त व्यस्त थे.. तब दोनोको मुजसे कहेनेलीये कुछभी नही था.. ओर मे मेरे रुममे आकर सोगइ..

देवायत : तो क्या सुबह तेरी मां ने तुजे कुछभी नही कहा..?

रीटा : (फीकी मुस्कानसे) मालीक वो क्या कहेती..? भाइतो सुबहही जल्दी घरसे नीकल गया.. तब माने मुजसे इतनाही कहाकी तेरे बापुके साथ सादीके कुछही दीनोमे हम दोनोमे मंदिरमे जाकर सादी करली हे.. तेरे भाइने मेरी मांग भरदी हे.. असलमे मे तेरे भाइकी ही बीवी हु.. तेरे बापु मुजे वो सारीरीक सुख देनेमे सक्षम नही थे.. तो मेने तेरे भाइसे सादी करली..

देवायत : हंम तो फीर.. तुम वापस घर आगइ..

रीटा : तो क्या करती.. मेने माको केह दीयाकी अब हमारा रीस्ता खतम.. मेने इस बच्चेके बोरेमे माको नही बताया.. वरना उनका घरभी टुट जाता.. ओर मे वापस अपने घर आगइ.. इस दिनके बाद मे वहा कभी नही गइ.. कुछ दिन पहेलेही मुजे अ‍ेक रीस्तेदारसे पता चलाकी माको भी भाइसे अ‍ेक लडकी हुइ हे.. मालीक.. बुहत मजा आ रहा हे थोडा जोरोसे चोदीयेनां..

देवायत : तो फीर राघवकी चुंगालमे तुम कब आगइ..

रीटा : (हसते) मालीक आपतो जानतेहे मुजे इनकी आदत लग चुकीथी.. ओर उपरसे छोटुभी मुजसे ठीकसे नही चोद पाता.. उपरसे उसने सरपंचसे कुछ पैसेभी लीये थे.. ओर हम दोनो उनके घरपे ही काम करते थे.. तो छोटु उनको पैसा नही लौटा सका.. ओर बदलमे अ‍ेक दिन सरपंचने मुजे चोद लीया.. फीरतो आये दीन वो मुजे बुलाकर चोदने लगा..

ओर उपरसे कही दिनोसे मेभी प्यासी थी.. तो उसमे मेरीभी रजामंदी थी.. लेकीन अ‍ेक दिन हम दोनोही चुदाइ करते पकडे गये.. तो मेने छोटुको केह दियाकी कर्जके बदले ये मेरा फायदा उठाता हे.. ओर छोटुने वो नोकरी छोडदी.. तब अ‍ेक बार फीर मे बीना चुदाइके दिन काटने लगी.. मालीक अब मे इनके बीना नही रेह सकती..

देवायत : (थोडा जोरोसे चोदने लगा) तो.. फीर.. छोटुकी टांग टु..ट.. गइ.. तो इतने दिन चुदाइके बगैर कैसे रेह पाइ..?

रीटा : (सरमाते हसते) नही रेह पाइ.. ओर मे हमेसा चुदवाती रही.. बस आप कही नाराज ना होजाये.. वरना नामभी बता देती.. आह.. आह.. सीइइइइ मालीक.. धीरेसे.. क्या मस्त चुदाइ करते हो.. अबतो मे सीर्फ आपसेही चुदवाउगी.. ओर जोरसे चोदीयेना मेरा होने वाला हे.. आपतो दो दो बार जडा देते हो..

देवायत : (जोरोसे चोदते) अरे नाम बताना मे नाराज नही होता.. मुजे तेरे कीसीभी रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही बता कीनसे चुदवाती थी..

रीटा : (सरमाते हसते) मालीक.. वो.. वो छोटे मालीक मेरी प्यास बजाते हे.. ओर तीन बारतो भानुभाइने भी मुजे चोद लीया हे.. लेकीन अब वो नही आते.. तो छोटे मालीकही मेरी प्यास बुजाते हे.. मुजे जबभी इच्छा होती हम दोनो वो ट्युबवेल वाली रुममे चले जाते.. ओर यहाकी ज्यादातर मजदुरन हमारे छोटे मालीकपे फीदा हे.. ओर उनसे अपनी प्यासभी बुजा चुकी हे.. हें..हें..हें..

तब देवायत रीटाको जोरोसे चोदने लगा तो रीयाने उसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर लीपलोक करते जडने लगी.. अ‍ैसेही दोनोके बीच धमासान चुदाइ होती रही.. ओर देवायतने अ‍ेक बार फीर रीटाकी चुतको अपने पानीसे भरके हरी भरी करदी.. तब रीटाकी हालत पतली हो चुकीथी.. ओर दोनोने बाथरुममे जाकर अपने आपको सही करलीया.. तब रीटाकी चाल बदल चुकीथी.. ओर वो अपने दोनो पैर सीकुडके लंगडाते चल रहीथी..

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रीटा : (सरमाते हसते) मालीक आजतो आपने मेरी हालत खराब करदी.. मेरी अ‍ैसी हालततो कीसीने नही की..

देवायत : (अपनी ओफीसमे आते) रीटा.. ये ले कुछ पैसे तेरे काम आयेगे.. आजतो तुमने मुजे खुस कर दीया.. मुजे तेरे कीसीभी रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. बस मे जब बुलाउ तब आजाना..

रीटा : (हसते) थेन्क्स मालीक.. मुजे पैसे नही चाहीये.. आपकी हम पर बहुत महेरबानी हे.. बस मेरा अ‍ैसेही खयाल रखीयेगा.. जबभी मौका मीले मुजे बुला लीजीयेगा मे हाजीर होजाउगी.. चलो अब चलती हु.. आजतो आराम करना पडेगा.. हें..हें..हें..

कहेते रीटा थोडा लंगडाते अपने घरकी ओर चली गइ.. तब उनके चहेरेपे आज पुरी तराह संतुस्टीके भाव थे.. तबतक दो पहोर होनेको आइथी तो देवायतभी खेतोसे नीकल गया ओर सीधा हवेलीपे आगया.. आकर सीधाही बाथरुममे धुस गया ओर नहाकर कंपलीट होगया तब मंजु रुममे आगइ.. ओर देवायतपे जुठा गुसा करते उनको मारनेके लीये दोडी तब देवायत समज गयाकी वो रीटाकी चुदाइ करके आया हे वो बात मंजुको पता चल गइ हे.. ओर वो हसते हुअ‍े मंजुसे बचनेके लीये बेडका चकर लगाता रहा..

मंजुला : (जुठे गुसेसे) आप कीतने कमीने हो.. उन ठरकी कोतो छोड देते.. कमीनीने मेरे पतीको लुट लीया..

देवायत : (जोरोसे हसते) अरे मेने कहा उनको कहाथा.. वोतो सामनेसे आइथी..

तब देवायत रुक गया तो मंजुने उनको पकडलीया ओर देवायतके सीनेपे हसते हुअ‍े दांत पीसके मुके मारने लगी.. तब देवायतने भी हसते हुअ‍े मंजुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया तब मंजुभी हसने लगी.. ओर उसने देवातके होठ चुमलीये.. ओर उनके सीनेमे सर छुपाते कहेने लगी..

मंजुला : जानु.. सोरी.. मेतो अ‍ैसेही आपके साथ मजाक कर रहीथी.. बस यहीतो करना हे.. जानु वो बहुतही दुखी ओर कामुक लडकी हे.. सुरुमे उनके साथ बहुत बुरा हुआ हे.. तभी वो अ‍ैसी होगइ.. वैसेतो अभी बारा भी नही बजे आप इतनी जल्दी घर कैसे आगये..?

देवायत : (बाहोमे भीचते) मंजु.. मुजे सुधीरकी क्लीनीकपे जाना हे.. लगता हे अब वक्त आगया हे.. की हमे सबको समजाने जाना पडेगा..

मंजुला : (सीनेको सहेलाते) जानु.. अभीतो आज जाकर उन दोनोको समजादो.. की तुम दोनोकी सादी करदी जायेगी.. लेकीन हमे इस बारेमे बात करने अ‍ेक बार बाबाको मीलने जाना पडेगा.. आप फटाफट खालो.. की वापस आकर खाओगे..? अभी पापाभी नही आये.. लगता हे रमेशभाइके पास बैठ गये हे..

देवायत : (हसते) हां वही देखकर आउगा चल चलता हु.. सुधीरने उन दोनोको रोकके रखा होगा..

मंजुला : जानु.. उन दोनोको प्यारसे समजाना.. हम उन दोनोकी सादी करदेगे.. अभी आप उनसे बात करलो.. अगर जरुरत पडी तो मे उनकी मम्मीसेभी बात करके उनको समजाउगी.. जाइअ‍े.. ओर जल्दी वापस आइअ‍े.. तबतक पापाभी आजायेगे फीर हम सब साथमे लंच करते हे..

ओर देवायत मंजुके होठोको चुमकर वहासे बाइक लेकर नीकल गया ओर सीधाही सुधीरकी क्लीनीकपे आगया.. तो वहा सुधीर मुना ओर उनकी बहेन बरखाको बीठाकर अपनी ओफीसमे बैठाथा तब उन दोनोके चहेरेपे कुछ गभराहटके भाव थे.. ओर देवायतको देखतेही दोनो थोडा ज्यादा गभरा गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर रोने जैसी सुरत बनाली.. तब देवायतने जातेही मुनाकी पीठपे प्यारसे हाथ रखा ओर दोनोकी ओर मुस्कुराते अंदर सुधीरके पास चला गया..

सुधीर : (हसते) आगये भाइ.. मेने दोनोको रुकनेके लीये कहा हे तो बैठे हे मेने अभी उसे कुछ नही कहा आपही उनसे बात करलो.. चाबी मुनाके पास हे.. वो क्लीनीक बंध करके चले जायेगे.. चलो मे चलता हु..

देवायत : हां सुधीर तुम जाओ मेभी उनसे बात करके नीकलता हु.. बस कुछ अकेलेमे बात करनी हे..उन दोनोको अंदर भेजदे..

कहातो सुधीर नीकल गया.. तब कुछही देरमे दोनो भाइ बहेन थोडा गभराते देवायतके पास आगये.. तो देवायत सुधीरकी चेरपे बेठते मुनाको दरवाजा बंध करनेको कहेता हे तब मुना ओफीरका दरवाजा बंध करके वापस आया तो देवायतने दोनोको सामनेकी चेरपे बेठनेके लीये कहा.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर डरके मारे धीरेसे बैठ गये.. ओर देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगे.. तभी..

देवायत : (हसते) अरे डरते क्यु हो..? आरामसे बैठो मुजे सीर्फ तुम लोगोसे बातही तो करनी हे.. क्या तुम दोनो रमेशके यहा काम करता हे वो विभुके लडके होनां..? क्या नाम हे तुम दोनोका..?

मुना : (थोडा गभराते) जी.. ठाकुरसाहब.. मे मुना.. ओर ये मेरी बहेन बरखा हे..

देवायत : हंम.. दोनो कहा तक पढे हो..?

मुना : जी.. दोनोही ग्रेज्युअ‍ेशन कर चुके हे.. ठाकुरसाहब अब सहेरमे सरकारी नोकरी मीलनातो मु्सकील हे.. इसीलीये हम दोनो भाइ बहेन सुधीर अंकलके यहा नोकरी करते हे.. आपतो हमारे घरकी परीस्थीतीके बारेमे सब जानतेही हे.. बापुको अ‍ेक बार दिलका दौरा पड चुका हे.. तो उनको हम भारी काम करने नही देते इसीलीये वो रमेशकाका के यहा नोकरी करते हे..

देवायत : (हसते) चलो अच्छा हुआ.. तुम दोनो अपने बापुके लीये इतनातो अच्छा सोचते हो.. तो अब तुमने अपनी सादीके बारेमे क्या सोचा हे.. देख अबतो तेरी बहेनभी सादीके लायक हो गइ हे.. तो इनके बारेमे नही सोचोगे..?

मुना : (बरखाकी ओर अ‍ेक नजर डालते) जी..

बरखा : (नजर जुकाते धीरेसे) ठाकुरसाहब.. मे सादी करना नही चाहती.. आप भाइको टेन्शन मत दीजीये..

देवायत : (हसते) हंम.. कोइ खास वजह..? इसमे टेन्शन देनेकी क्या बात हे.. मे सीर्फ पुछ रहा हु..

बरखा : (नजर नीचे करती बैठी रही) नही.. बस.. मे इस घरको छोडके कही नही जाना चाहती..

देवायत : हंम.. क्या घरके लोगोको इतना प्यार करती हो..? की सादीभी नही करोगी..

बरखा : (सरमाते) जी.. आप यही समजलो.. लेकीन मे सादी नही करुगी..

मुना : (थोडा जीजकते) हां.. ठाकुरसाहब.. हम दोनो भाइ बहेनने फैसला करलीया हे की हम सादी नही करेगे.. ओर हमारे घरका खयाल हम दोनोही रखेगे.. हमे बापुको ओर काम नही करने देना..

देवायत : (हसते) तो ठीक हे.. मुजे खुसी हुइ.. की तुम दोनोने अपने परीवारके लीये इतना कुछ सोच रखा हे.. लेकीन सादीभी तो जरुरी हे.. तुम दोनो भाइ बहेन अभी अभीतो जवान हुअ‍े हो.. तो फीर पुरी जींदगी कैसे काटोगे..? मेने तो दो दो सादीया करली हे.. ओर अभी तीसरी बीवी ला रहा हु.. हें..हें..हें..

मुना : (नजर जुकाते मुस्कुराते) जी.. लेकीन ठाकुर साहब आपतो राजा हे.. तो आप कर सकते हे..

देवायत : हा तो मेतो कर ही रहा हु.. मेरा मतलब.. आप दोनोभी करलो.. मेरा अ‍ेक सजेसन हे.. अगर मानोतो..?

मुना : (पहेली बार सामने देखते) क्या..? हम आपका सजेसन क्यु नही मानेगे..? जरुर मानेगे कहीये..

देवायत : (हसते) थेन्क्स.. अगर तुम दोनो बहार सादी करना नही चाहते.. तो फीर तुम दोनो आपसमे ही सादी करलो.. ताकी कीसीको घर छोडके जानेकी जरुरत ही ना पडे.. क्या कहेते हो..?

बरखा : (चोंकते अ‍ेकदम सर्मसार होते) व्होट..? ठाकुरसाहब ये आप क्या केह रहे हे..? अ‍ैसा कैसे हो सकता हे.. हम दोनो तो भाइ बहेन हे.. आपने अ‍ैसा सोचाभी कैसे..?

देवायत : (कातील मुस्कानसे) बरखा.. ज्यादा भोली मत बनो.. तो क्या भाइ बहेन आपसमे प्यार नही कर सकते..? हंम..? मुजे पता हे तुम दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हो.. ओर आपसमे दोनोके बीच जीस्मानी रीस्ताभी हे.. तो फीर इसमे मेने क्या गलत कहा.. क्या मे जुठ बोल रहा हु..? मुजे तुम दोनोके बारेमे सबकुछ पता हे.. ओर मे इस माममलेमे आप दोनोकी मदद करने आया हु..

कहातो मुना ओर बरखा दोनोकी गांड फट गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने गभराते देखने लगे.. जैसे उनकी कोइ बडी चोरी पकडी गइ हो.. ओर बरखाकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. दोनोही सोक्ट होते अपनी नजर नीचे करते आंसु बहाने लगे.. तब देवायतने उसे कहा..

देवायत : देखो मुना.. ओर बरखा.. मे ये रीस्तेको गलत नही मानता.. अगर तुम दोनो चाहोतो मे तुम दोनोकी मदद कर सकता हु.. तुम दोनोकी आपसमे सादी करवा सकता हु.. बस अ‍ेक बार मुजे तुम दोनोके मुहसे हा सुननी हे..

मुना : (आंसु पोछते) ठाकुरसाहब.. क्यु हमे सर्मीन्दा कर रहे हे.. हम मानतेहे की हम अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. लेकीन आजके जमानेमे ये सब पोसीबल नही हे.. पहेलेतो हमारे घरवाले ही हमे मार डालेगे.. ओर अगर वो मानभी गयेतो गांववाले को हम क्या मुह दीखायेगे.. हमारे बापुकी क्या इजत रेह जायेगी.. हम दोनोको हमारे हालपे ही छोड दीजीये.. हमारे साथ अ‍ैसा मजाक मत कीजीये..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे मुनाकी ओर देखते) मुना.. मे कोइ मजाक नही कर रहा.. मे सच कहेता हु.. ओर ये गांवमे सीर्फ तुम दोनोही अ‍ैसे रीस्तेसे नही बंधे हो.. मे इसी गांवमे बहुत लोगोको जानता हु.. जो अ‍ैसे रीलेशनमे हे.. ओर मे इस रीलेशनको गलतभी नही मानता.. बस अ‍ेक बार अपने मुहसे हां कहेदो.. बाकी मे सब देख लुगा..

बरखा : (सर्मसार होते नजरे जुकाते धीरेसे) ठाकुरसाहब.. ये सच हे.. मे मेरे भाइको बहुत प्यार करती हु.. ओर हमारे बीच सभी रीलेशन हे.. अगर ये पोसीबल हे तो मे भाइके साथ सादीके लीये तैयार हु..

मुना : (आस्चर्यसे देखते) बरखा..? फीर हमारे बा बापुजीके बारेमे सोचा हे.. उनपे क्या बीतेगी..

बरखा : भाइ.. वैसेही हम दोनोके रीस्तेके बारेमे सबको पता चलही जायेगा.. तो अब बातको छुपानेका कोइ मतलब नही.. मे दुनीयासे लड जाउगी मुजे कीसीकी परवाह नही हे.. ओर मुजे ठाकुरसाहबपे पुरा भरोसा हे.. वो हम दोनोकी सादी जरुर कवादेगे.. उन्होने कुछ सोच समजकेही बात की होगी..

देवायत : (हसते) साबास बरखा.. बस मुजे यही हीमत देखनी थी.. अब तुम दोनो फीकर मत करो.. मे तुम्हारे बा बापुजीसे बात कर लुगा.. बस मुजे तुम दोनोका साथ चाहीये.. क्युकी मुजे गांवमे बहुत सारे लोगोको इस नये रीस्तोके बारेमे कन्वीस कराना हे.. बस मुजे तुम्हारी मदद चाहीये.. खास करके मुनाकी..

मुना : (सरमाते हसते) ठाकुरसाहब.. अगर आप हमारी सादी करवाते हो तो मे आपकी मदद कैसे नही करता..? कहो मुजसे क्या मदद चाहीये..

बरखा : (थोडा सरमाते मुस्कुराते) जी.. ठाकुरसाहब अगर मेरी भी कुछ मदद चाहीयेतो मुजसे भी कहेना..

देवायत : (हसते) चलो ठीक हे.. अब जबभी अ‍ैसे मामलोपे गांवमे चर्चा होगी तुम दोनोको मुजे समर्थन देना हे.. बस.. बाकी मे सब सम्हाल लुगा.. अब तुम दोनो घर जाओ.. मे कुछ सोचता हु क्या हो सकता हे.. अब तुम्हारे बा बापुजीको भी मनाना पडेगा.. तबतक के लीये बी केरफुल.. अपना ध्यान रखना.. समज गयेनां..? ओर मुना.. तुम सामको मेरे खेतोपे आना.. मुजे तुमसे कुछ कामभी हे.. ओर अपनी बहेनका खयाल रखना..

बरखा : (खुस होकर खडी होते) जी ठाकुरसाहब.. थेन्क्यु वेरी मच.. हमारे प्यारको समजनेके लीये..

कहेते बरखा खडी होगइ.. ओर देवायतके पास आकर उनके पाव छुने लगी.. फीर सरमाते हसते हुअ‍े बहार चलते अपने घरकी ओर चली गइ.. तो मुनाभी हसते हुअ‍े देवायतका पांव छुने लगा.. तब देवायतभी खडा होगया ओर मुनाके कंधेपे हाथ रखते उनसे धीरसे बाते करते बहार जाने लगा.. तबतक बरखा अपने घरकी ओर चली गइ थी..

देवायत : (हसते) देख मुना.. मुजे कुछ जानकारीया चाहीये.. तो बी केरफुल.. इस बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. सुधीर रमेशकोभी नही.. समज गयेनां..? बाकी मे खुद तेरी सादी तेरी बहेनसे करवाउगा..

मुना : (बहुत खुस होते हसते) जी ठाकुरसाहब समज गया.. आप जोभी कहोगे मे करुगा.. सुक्रीया..

देवायत : (हसते) हंम.. चल ठीक हे मे चलता हु.. सामको उधर खेतोपे आजाना..

कहेते देवायत हवेलीपे आगया.. ओर मुना क्लीनीक बंध करके अपने घर खुस होते हुअ‍े चला गया.. देवायत घरपे आया तब राजीवभी आ चुकाथा.. ओर सब लोग उनकाही इन्तजार कर रहेथे.. तब देवायत दोडकर अपने रुमके बाथरुममे फ्रेस होने चला गया तो सब हसने लगे.. ओर खानेके लीये खडे होकर डाइनींगकी ओर जाने लगे.. तबतक देवायतभी फटाफट फ्रेस होकर बहार आकर सबके साथ बैठ गया..

मंजुला : (हसते) देवु.. बहुत देर करदी..? कही फस गये थे क्या..?

नीर्मला : (हसते) फस नही गया.. अबतो बहेन भाइकी सादी करवाकर फ्रि होगया हे.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) हां भाइ.. अब कामभीतो देखना हे.. ओर गांवका कामभी देखना होता हे.. तो देरतो लगेगी ही.. देवु बेटा.. कल मुजे ओर नीमुको भुमीके घर छोड देना.. वहा वो बेचारी अकेली होगी.. क्युकी उनकोभी सादीकी तैयारीया करनी हे..

चंदा : क्या भैया.. अभीतो सीर्फ दो दिन ही हुअ‍े हे.. अ‍ेक दिन रुक जाइअ‍ेनां.. परसो चले जाना..

भावना : (देवायतकी ओर कातील स्माइल करते) मोम.. मेतो यही रहुगी.. इस बच्चीको लेकर कहा घुमुगी..? फीर सादीमे इनके साथही आजाउगी.. फीर हम हमारे घर चले जायेगे..

मंजुला : (हसते) तो चंदादीदी आप ही देवुके साथ चली जाना.. सृतीके लीये सीर्फ मंगलसुत्र ओर तीन चार सारीया ही तो लेनी हे.. ओर आप खरीदी करनेमे मास्टर भी हे.. तो मे विजयको यही सम्हाल लुगी.. हम दोनो बहेने घरपेही रहेगी.. वैसेभी आप अपनी सादीके बाद बहार नही नीकली.. तो दोनो घुमके आइअ‍े.. हें..हें..हें..

चंदा : (सर्मसार होते हसते) नही.. मंजु तुम साथ चली जाओ.. मे विजयको सम्हाल लुगी..

देवायत : (हसते) ठीक हे.. वो तुम दोनो साम तक आपसमे डीसाइड करलेना कीसको आना हे.. वरना मे दया ओर रजीयाको लेकर चला जाउगा.. हें..हें..हें..

दया : (रोटीया देते जोरोसे हसते) हां.. हां.. मालीक हम दोनो रेडी हे.. हें..हें..हें..

कहातो सब जोरोसे हसने लगे.. तब..

मंजुला : (जोरोसे हसते) ओ.. खयाली पुलाव.. तो मे ओर चंदादीदी क्या यहा भजन करने आइ हे.. हें..हें..हें..

अ‍ैसेही मजाक मस्तीमे प्लीनींग करते सब लंच कर लेते हे.. फीर सब अपने अपने रुममे आराम करने चले जाते हे.. तो देवायत अपने रुममे जातेही सो गया.. तब कुछ देरके बाद चंदा ओर मंजु अपने रुममे आइतो देवुको सोते हुअ‍े देखते ही हसने लगी.. ओर दोनो बेडपे बैठकर बाते करने लगी..

चंदा : (सरमाते हसते धीरेसे) मंजु.. तुमही चली जाना.. वरना वापसी मे मुजे ये पका.. हमारे घरपे ले जायेगे.. ओर वहा घरपे भी कोइ नही हे.. तो पका वहा ये मेरी हालत खराब करेगे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) दीदी.. तो अच्छा हेना.. वैसे अपनी सादीके बाद आप इनसे ठीकसे मीली भी नही हो.. तो दोनो आरामसे सामको चले आना.. ओर अब आप भी बच्चेके बारेमे कुछ सोचीये..

चंदा : (सर्मसार होते हसते धीरेसे) नही मंजु.. अभी नही.. हम बादमे सोचेगेनां..? क्या ये जरुरी हे..? मेरा बेटा अब विजय हेनां.. मे उसे अपना बेटा मानकर पालुगी..

मंजुला : (धीरेसे) दीदी.. वोतो आपहीका बैटा हे.. लेकीन आपसे अ‍ेक बच्ची भी होगी.. अपनी भावुके बेटे भावेशकी बहु.. आप समज गइनां.. आप अभीसे प्लानींग करलो.. भलेही दो तीन साल अभी मजे करलो.. लेकीन बादमे करलेना..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) मंजु.. क्या सचमे मुजे लडकी होगी..? तुजेतो सब पता चल जाता हे.. तो यही होगा.. लेकीन क्या इसके लीये सही समय आगया हे..? हंम.. तुम मुजे बताना.. तो मे कर लुगी..

मंजुला : दीदी बस अभीसे कोसीस सुरु करदो.. सायत दो सालमे कुछ हो सके..

चंदा : (सरमाते हसते) क्या दो साल..? अरे बाबा ये अंदर इतना पानी छोडते हे.. दो साल क्या अ‍ेकही बारमे मुजे प्रेगनेन्ट कर देगे.. अच्छा हे मे आइपील लेती हु.. मंजु.. अभी अ‍ेक साल रहेनेदे.. मे इनके साथ मजे करना चाहती हु.. फीर कर लुगी..

मंजुला : (हसते) ठीक हे दीदी.. लेकीन कल आपही इनके साथ चली जाओ.. फीर वापसीमे दोनो आपके घर होते आना.. यहा महेमानोकी वजहसे हम इसे ठीकसे मीलभी नही पाती.. आप दीनमे मजे करलो.. मे रातमे इनसे ठीकसे मील लुगी.. मेरा भी बहुत मन कर रहा हे.. कल हम दोनोही इनको जगाअ‍ेगी.. आप रातके लीयेभी तैयार रहेना.. अभीतो सो गये हे.. वरना अभी इसे लुट लेती.. हें..हें..हें..

दोनोही बाते करती वही देवायतके पास लेट गइ.. ओर नींदकी आगोसमे चली गइ.. तो नीर्मलानेभी राजीवको दवाइ पीलाकर सुला दीया ओर भावनाके पास जाकर लेट गइ.. तब भावनाभी अपनी बच्चीको दुध पीलाते नींदमे चली गइ.. तो नीचे कीचनमेभी दया रजीया ओर चंपाभाभी तीनो सब काम नीपटाकर अपने रुममे आराम करने चली गइ.. तो सहेरमेभी भानुभी अपना काम नीपटाकर बंगलेकी सफाइ करवा रहाथा..

इसी बीच.. गौवामे दोनो कपल आपसमे मस्तीया करते अपने हनीमुनका लुप्त उठा रहेथे.. अबतक पुनम धिरेनके साथ छे सात बार चुदाइ करवाके पुरी तराह धिरेनको अपना चुकीथी.. ओर वोभी धिरेनके साथ घुलमीलके उनकी मस्तीया करने लगी थी.. जब दोनो अकेले होते तो वोभी धिरेनके साथ खुलकर कामुक बाते ओर उनकी छेडखानी करते धिरेनको रातकी चुदाइके लीये उक्सानेकी कोसीस करने लगी..

इसी तराह साम होगइ.. तो सबने फ्रेस होकर चाइ नास्ता करलीया.. तब देवायत अपने खेतोपे चला गया.. तो आधे घंटेके बीच भानुभी छोटुको लेकर आगया.. तब दोनोही सीधे खेतोपे चले गये.. ओर कुछ सामान वही अ‍ेक रुममे रखकर भानुने छोटुको कहेकर रीटाको चाइके लीये कहेते अपने घर आराम करने भेज दिया.. ओर खुद देवायतके पास आकर सीधे बाथरुममे जाके फ्रेस होकर सामने बैठ गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२६

इसी तराह साम होगइ.. तो सबने फ्रेस होकर चाइ नास्ता करलीया.. तब देवायत अपने खेतोपे चला गया.. तो आधे घंटेके बीच भानुभी छोटुको लेकर आगया.. तब दोनोही सीधे खेतोपे चले गये.. ओर कुछ सामान वही अ‍ेक रुममे रखकर भानुने छोटुको कहेकर रीटाको चाइके लीये कहेते अपने घर आराम करने भेज दिया.. ओर खुद देवायतके पास आकर सीधे बाथरुममे जाके फ्रेस होकर सामने बैठ गया....अब आगे

देवायत : (हसते) क्यु..? थक गये..? हो गया सब..?

भानु : (हसते) हां यार.. सब काम खतम करके छोटु ओर दो मजदुरको लेकर पुरा घर साफ करवाया.. यार वहा लखनको रहेने भेजदो.. कमसे कम घरतो अच्छा रहेगा.. कीतनी मीटी भरी हुइ थी.. बस अब ओफीस साफ करवानी हे..

देवायत : भानु वही प्लान हे.. ताकी तुजेभी सहेरका धका खाना नही पडेगा.. तुम लखनको सब समजादे.. ओर थोडा कामभी सीखादे.. ताकी हम दोनोमेसे कीसीको वहा जाना ना पडे.. अब यहा गांवमेभी काम बढ जायेगा.. यार.. सबका कीसीना कीसीके साथ टाका भीडा हुआ हे.. अबतो साला उसीमे फसा रहुगा..

भानु : भाइ.. क्या भाभीने भावुसे बात की हे की नही..? आप उसे समजाओ.. मे भावुको छोडना नही चाहता..

देवायत : भानु.. मंजुने उनसे बात करली हे.. तेरी भाभीने उसे मनालीया हे.. वो कुछ दिन अपने मम्मी पापाके साथ रहेकर वहा वापस आजायेगी.. ओर तेरे साथही रहेगी.. बस तुमसे थोडी नाराज थी तो मंजुने उसे समजा दीया हे..

भानु : (खुस होते हसते) भाइ तबतो ठीक हे.. साला मेतो टेन्शनमे आगया था.. अच्छा हुआ वो मान गइ..

देवायत : भानु.. तुम दोनो बीवीओपे बोरबर ध्यान दे.. कीसी अ‍ेकको अ‍ैसा नही लगना चाहीये की वो मुजसे ज्यादा दुसरी बीवीपे ध्यान देता हे.. दोनोको बरोबर न्याय मीलना चाहीये..

भानु : (हसते) भाइ.. समज गया.. अब वही होगा.. लेकीन तेरी नइ भाभी मुजपे कुछ ज्यादा ही महेरबान हे.. हें..हें..हें.. उनको अब हर दिन प्यार चाहीये.. लगता हे कुछ ही दिनमे साली मुजे नीचोड लेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां यार.. बेचारी इतने दिनोसे पतीसे वंचीत थी.. तो क्या करेगी.. बस यही प्यार भावुको भी देना.. वो खुस रहेगी..

तभी छोटु चाइ लेकर आगया ओर दोनोको चाइ पीलाइ तो देवायतने रीटाका पुछ लीया.. तो छोटुने कहाकी आज रीटाकी तबीयत ठीक नही हे.. तो मुजे चाइ देने भेज दीया.. कहातो देवायतस समज गया लेकीन उसने चहेरेपे कोइ भाव आने नही दीया.. फीर चाइ पीली तो देवायतने भानुकोभी अपने घर आराम करने भेज दिया.. तब भानुभी चाइ पीकर चला गया.. ओर छोटुभी खाली कप लेकर चला गया.. तब कुछही देर मे मुना आगया.. तो देवायतने उसे अपनी ओफीस मे बुलालीया ओर मुना देवायतके सामने बेठ गया..

देवायत : (हसते) आओ मुना.. बैठो..

मुना : (हसते सामने बैठते) जी.. ठाकुरसाब बरखाने आपको सुक्रीया कहा हे.. कहीये मेरे लीये क्या सेवा हे.. हुकुम कीजीये..

देवायत : मुना.. देख.. जीस तराह तुम्हारे ओर तुम्हारी बहेन बरखाके बीच रीस्ता हे.. उसी तराह गांवमे बहुत सारे अ‍ैसे रीस्ते हे.. मुजे सबकी इन्फोर्मेशन चाहीये.. तु बता तुजे कीस कीसके अवैध रीस्तोके बारेमे पता हे.. क्युकी तुम जानते हो हमारे कुलगुरुने अ‍ैसा कहा हे.. की आने वाले दिनोमे यहा बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. तो हमे सबको अ‍ैसे रीस्तोके लीये मनाना पडेगा.. अब हमे प्रकृतीकी ओर ढलके जीना हे..

मुना : (थोडा जीजकते) माफ कीजीये ठाकुरसाहेब.. कुछ बाते अ‍ैसी सुनी हे.. जो मे आपको केह नही सकता.. ओर नाही कीसीमे हिमत हे जो आपको ये बात केह सके.. सच क्या हे मुजे भी नही पता.. क्युकी हमने भी हमारे बुजुर्गो ओर बडोसे सुना हे..

देवायत : (थोडा चोंकते अ‍ेक नजरसे मुनाको आस्चर्यसे देखते) क्या..? मुना.. मुजे आज सब कुछ सच जानना हे.. तु गभराना नही.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी.. बता तुमने हमारे बारेमे अ‍ैसी कोनसी बाते सुनी हे.. क्युकी इस बारेमे मुजेभी नही पता.. ओर यकीन मानो मे तुमसे कुछभी नही कहुगा.. हमारे बारेमे जो भी बाते सुनी हे आज मुजे सब बतादे.. मुजे कोइ फर्क नही पडेगा..

मुना : (थोडी हीमत आगइ तब) ठाकुरसाहेब.. आपको पतातो होगाकी आपके दादाजी ओर पीताजी यानी बडे ठाकुर ओर गांव वालोके बीच कुछ अनबन होनेकी वजहसे काफी वक्त तक अच्छे सबंध नही थे.. उनका रीजन आप जानते हे..? मेने कइ बुजुर्गके मुहसे सुना हे.. बडे ठाकुरसाहबने आपके कुलगुरुकी कही यही भविस्यवाणीकी बाते गांव वालो से कहीथी.. तब सभी गांव वाले भडक गये थे.. ओर आपके खानदानके बारेमे बाते करने लगेथे.. जो मे आपको नही बता सकता..

देवायत : (चोंकते) मुना.. जो भी बाते हो.. आज मुजे खुलकर बतादे.. मुजे सब सच जानना हे.. तु गभरा मत मे तुजे कुछभी कहेने वाला नही हु.. ओर मे तेरी सादीभी तेरी बहेनसे करवा दुगा.. आइ प्रोमीस..

मुना : (खुस होते हसते) ठाकुरसाहब.. गांव वालेको पता चल गयाथा.. की आपके दादा ओर आपके पीताजी दोनोने उनकी बहेनके साथ सादी करली थी.. इसीलीये आप सबको अ‍ैसे रीस्तोमे सबंध रखनेके लीये गांव वालोको आपके कुलगुरुके माध्यमसे मजबुर कर रहे हे.. तभीतो गांव वालोने हवेलीसे अपने रीस्ते खतम करलीये थे.. लेकीन कीसीकी हीमत नही होपाइ की सच आपके सामने केह सके..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) व्होट..? क्या हमारे बारेमे सबको पताथा..?

मुना : (मुस्कुराते) हां ठाकुरसाहेब.. सब जानते थे.. की दोनोने अपनी बहेनसे सादी करली थी.. गांववाले भी आश्रमपे जाते थे.. ओर उनको वहीसे पता चल गयाथा की वहा जो लडकी रहेती थी.. वो दादा ठाकुरकी लडकी थी.. जो बादमे बडे ठाकुरसाहबने उनसे सादी करली थी.. इसीलीये गांवके लोग हवेलीसे दुर रहेने लगे थे.. ओर आप लोगोसे रीस्ता नही रख रहेथे..

देवायत : (हसते) अरे वाह.. मुना तुमतो हमारे खानदानके ओर गांवके बारेमे बहुत कुछ जानते हो..? तो फीर अब गांवमे सबमे इतना परीवर्तन क्यु आगया..? मेभी तो उसी खानदानसे हु..

मुना : (हसते) क्युकी उस दिनो आपने कुलगुरुने जोभी भविस्यवाणी कहीथी सब सच होती जा रही हे.. आपके परीवारके बारेमे उसने जोभी कहाथा वो सब सच होगया.. ओर गांवके बारेमे उसने जोभी कहाथा वही सब अब सच हो रहा हे.. इसीलीये सब दुवीधामेहे की अब क्या करे..? क्युकी इनका समाधान भी आपको ओर बाबाको ही पता होगा.. इसीलीये सब आपकी बातोको माननेके लीये मजबुर हो रहे हे..

देवायत : (हसते) हंम.. अच्छा गांव वालोको मेरे बापु ओर बाबाने कोनसी बाते कही थी..?

मुना : (मुस्कुराते) ठाकुरसाहेब.. उन्होने आने वाले दिनोमे गांवमेभी अ‍ैसे अवैध रीस्तोके बारेमे ओर समाजमे रीस्तोमे परीवर्तनके बारेमे कहाथा.. जो आज सब सच हो रहा हे.. क्युकी सबको मालुम हे.. अब अ‍ैसे रीस्तेको रोकना नामुमकीन हे.. गांवमे सबको पता हे की कीसका टाका कीसके साथ भीडा हुआ हे..

ओर वो अ‍ैसे रीस्तोको लाख रोकनेके बावजुदभी कामयाब नही हुअ‍े.. अब सबके पास आपकी बाते सुनने ओर माननेके अलावा कोइ चारा नही.. ठाकुरसाहेब.. आज हमारे गांवमे ज्यादातर घरोमे अ‍ैसे अवैध रीस्ते पनप रहे हे.. ओर ये सब क्यु हुआ कीसीको पता नही.. अब सबलोग खुलके अपने साथीके साथ प्यार जताने लगे हे..

देवायत : (हसते) वाह मुना.. तुमने मेरा बहुत सारा काम आसान करदीया.. बता कीतने घरोमे अ‍ैसे रीस्ते पनप रहे हे..? मेने तुजे यही जाननेके लीये आज इधर बुलाया था.. लेकीन तुमने तो मुजे मेरी कल्पनासेभी ज्यादा जानकारी देदी हे.. बता.. कीसका टाका कीसके साथ भीडा हुआ हे.. आज सब खुलके बतादे.. तो हम इस बारेमे कुछ सोच सके..

मुना : (हसते) ठाकुरसाहेब.. मे आपको सब बतातो दुगा.. लेकीन आप देखना कही मेरा नाम कीसके सामने ना आये..

देवायत : (हसते) तुम फीकर मत करो.. कीसीको पता नही चलेगा की ये सब तुमने मुजे बताया हे.. कहो..

मुना : (हसते) ठाकुर साहब.. वो हमारे बनवारीलाल हे जीनका लडका दुबइ मे हे.. हमे लगता हे उनके लडकेने दुबइमेही कीसी लडकीसे सादी करली हे.. तो यहा उनकी बीवीने अपने ही ससुरसे रीस्ता बनालीया हे.. ओर उसने दो बार प्रेगनेन्टभी हो चुकी हे..

लेकीन दोनो बार अपने बच्चेको गीराके आगइ.. ओर अबतो दोनो मीया बीवी बनके साथ रहेने लगे हे.. तो दुसरे आपके पंचायतका सदस्य सामतभाइ.. उनकी अ‍ेक विधवा बहेन हे सांतीदीदी.. जो सामतभाइके लडके बंसीके साथही उनका रीलेशन हे..

ओर खुद सामतभाइकी बीवी जयाबहेनका रीलेशन हमारे रमेश अंकलके साथ हे.. कीसीका उनकी भाभीके साथ हे तो कीसीका उनकी बुआके साथ..ओर ज्यादातर लडकेका उनकी सगी बहेन यातो कजीन बहेनके साथ चकर हे.. सीर्फ लडके ही नही बडोभी कीसीना कीसीके साथ लगे रहेते हे.. ठाकुरसाहब.. हमारे गांमे जीतनीभी विधवा या त्यक्ता ओरते हे.. वो कीसीना कीसीके साथ रीलेशनमे हे.. अब सबके रीस्ते बहार आने लगे हे..

देवायत : मुना.. अब हमे वही बातोके लीये सबको समजाना हे.. सबको अ‍ैसे रीस्तेको अपनानेके लीये मनाना हे.. बाबाकी सब बाते सच हो रही हे.. बिलकुल उन हिमाचलकी तराह करना हे.. ताकी यहाभी कोइ विधवा या त्यक्ता ना रहे.. सब सुहागन बनके अपने पतीके साथ हसी खुसी रेह सके.. तुमभी अपनी बहेनके साथ हसी खुसी जींदगी बताओगे.. बस कुछ दिन इन्तजार करलो.. जब सब लोग मुजे सामनेसे कहेगे तब हमे बाबाको बुलाकर सबको यही समजाना हे.. बस यही जानना था..

मुना : (सरमाते हसते) ठाकुरसाहेब.. मेरा अ‍ेक दोस्त हे.. उनकी ताइभी विधवा हे.. अकेली हे.. उनकी कोइ संतान नही हे.. तो मेरे दोस्तकाही उनके साथ चकर हे.. वो अपनी बडी अमाके साथ रीलेशनमे हे ओर अक्सर दोनो अपने तनकी प्यास बुजाते हे.. ओर अ‍ैसे तो कइ रीस्ते हे.. मे आपको कीन कीनके बारेमे बताउ.. मेरा खुद मेरी बहेनके साथ अ‍ैसा रीस्ता हे.. इनमे मेरी कोइ मददकी जरुरत होतो कहेना.. मे आपके साथ हु..

देवायत : मुना.. जीस तराह तुम मेरे साथ हो.. उसी तराह तुम ओरभी लडकोसे बात करके सबको अपने साथ सामील करले.. सबको अ‍ेक अ‍ेक करके मीलना.. ओर मेरी बात उन तक पहोचाना.. सबको कहेना ठाकुरसाहब हमारे साथ हे.. ओर सबकी सादी उनकी पसंदकी लडकीसे करवा देगे.. सबको हमारे साथ सामील करले..

मुना : (खुस होते हसते) जी.. ठाकुरसाहब मे सब समज गया.. येतो मेरे बाये हाथोका खेल हे.. मेरे ज्यादातर दोस्तोमे हम सबको अ‍ेक दुसरेके रीलेशनके बारेमे पता हे.. ओर हम इनकी खुलकर आपसमे चर्चाभी करते हे.. तो सबसे बात करनेमे आसानी रहेगी.. जब ये बात नीकलेगी.. तब हम सभी लडके आपके साथ होगे.. आइ प्रोमीस..

देवायत : (खुस होते हसते) ओर हां अ‍ेक इन्पोटर्न बात कहेनातो रेह गइ.. कल तुम्हारी बहेनकी तबीयत बीगड गइ थी..?

मुना : (आसच्र्यसे देखते) हां ठाकुरसाहेब.. उनको कल क्लीनीकपे ही उल्टी हुइ थी.. तो सुधीर अंकलने उनको दवाइ दी तो उल्टीया बंध होगइ..

देवायत : (हसते) मुना.. मेरी सुधीरसे इस बारेमे बात होगइ हे.. इसीलीये मे तुम दोनो भाइ बहेनको मीलने आयाथा.. सायद तुम्हारी बहेन प्रेगनेन्ट हे.. अगर तुजे उनके साथ सादी करनी हेतो ये बच्चा मत गीराना.. ताकी तुजे उनके साथ सादी करनेमे आसानी रहेगी.. या फीर अभी इस बारेमे उनको कुछ कहेना ही मत.. ताकी बच्चे गीरानेका टाइम नीकल जायेगा तो तेरे माता पीताको मजबुरन उनकी सादी तुमसे करवानी पडेगी.. तु समय गया नां..?

मुना : (थोडा परेसान होते) जी.. ठाकुर साहब.. क्या सचमे बरखा प्रेगनेन्ट हे..?

देवायत : (हसते) अरे तो इसमे इतना गभराता क्यु हे..? देख मेरी तीसरी बीवी इन्हीकी डोक्टर हे.. तो मे जब कहु तुम अ‍ेक बार उनको दीखाकर कंन्फोर्म कर लेना.. बाकी सब मे सम्हाल लुगा.. ओके..?

मुना : (कुछ सोचते) जी.. ठाकुरसाहेब.. अभीतो मे इस बारेमे उनको कुछ नही बताउगा जब वो सामनेसे कहेगी तब मे डोक्टरके पास चला जाउगा.. अब मे चलु..?

देवायत : (हसते) ठीक हे.. मुना.. अब तुम्हे जाना होतो जा सकते हो.. बस अब तुम सुधीरसे दुर रहेना.. उनकी बुरी आदत हमे छुडवानी हे..

मुना : (सरमाते हसते खडा होते) जी.. ठाकुरसाहेब मेतो दुर रहुगा.. लेकीन वो दुर नही रेह पायेगे.. उनको आदतजो होगइ हे.. हें..हें..हें.. चलो अब में चलता हु.. बाय..

कहेते मुना चला गया.. तो आज देवायतकोभी गांवके बारेमे बहुत सारी जानकारीया मील गइथी.. जीनसे आगे चलके उनको बहुत फायदा होने वाला था.. देवायत खुस होते अपने घरकी ओर चल पडा.. तो दुसरी ओर मुनाभी अपनी क्लीनीकपे चला गया.. तो सुधीरने उसे पुछातो कुछ जरुरस बातोको छोडकर मुनाने सुधीरको बहुत कुछ बता दीया.. फीर दोनोही क्लीनीक बंध करके अपने घर चले गये..

दुसरी ओर लखन लता ओर धिरेन पुनम दोनोही कपल अपने हनीमुनको अ‍ेन्जोय करनेमे व्यस्त होगये थे.. दोनोही कपल अ‍ेक दुसरेके साथ खुलकर घुल मील गये थे.. ओर अबतो रातमे भी खुलकर प्यार करने लगे थे.. खास करके धिरेन ओर पुनम.. पुनमने धिरेनको पुरी तराह अपने प्यारमे पागल कर दीयाथा तो इसी चकरमे धिरेनभी नीलमको फोन करना भुल गया.. जीनकी वजहसे नीलमभी थोडी परेसानीमे रहेने लगी..

तो दुसरी ओर भानुभी घर पहोचा गया.. उस रात सबने खाना खालीया ओर सोने चले गये.. तो रुममे जातेही भानु रमा दोनोही प्यारके आगोसमे चले गये.. तब भानु रमाको चोदते हुअ‍े देवायतके साथ भावनाकी कही हुइ बात करता हे.. तो रमा मनही मन भावनाके साथ समाधानकी बात सुनकर भानुसे चीड जाती हे.. ओर भानुको थकनेका बहाना बनाते अपने उपरसे हटाकर दुसरी ओर करवट लेकर सो जाती हे.. तब भानुभी थोडा परेसान होगया..

भानु : (थोडा परेसानीमे) रमा अचानक क्या हुआ..? अ‍ैसा क्यु कर रही हे..? चोदने देना.. अभी मेरातो हुआ भी नही..

रमा : (दुसरी ओर मुह करते सोते) भानु.. आज मे बहुत थक गइ हु.. कल कर लेना.. मुजे नींद आ रही हे..

भानु : रमा मुजे पता हे तुम जान बुजकर अ‍ैसा कर रही हो.. भावुभी मेरी बीवी हे.. तो मे उसे कैसे छोडदु..

रमा : भानु.. मुजे इस बारेमे अभी कोइ बहेस नही करनी.. तुम सो जाओ.. हम कल बात करेगे..

कहातो भानुभी नीरास होकर सोने लगा.. तब रमाके दिलमे आज पहेली बार भानुके लीये गुसा आगया था.. ओर यही भानुसे थोडे दुर होनेकी सुरुआत थी.. तो इधर महेलमेभी देवायत अ‍ेक बार मंजु ओर दो बार चंदाकी जबरदस्त चुदाइ करलेता हे.. तो चंदाकी हालत पतली होजाती हे.. फीर तीनो अ‍ेक दुसरोसे चीपककर सो जाते हे.. तो भावना ओर नीर्मलाभी सो चुकी थी.. तब गांवमे आज मुना देवायतसे बात करके खुसीकी वजहसे अपनी बहेन बरखाको देर रात अपने रुममे चोद रहा था.. तब..

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बरखा : (सरमाते खुस होते) भाइ.. बस अ‍ैसेही चोदते रहो मुजे.. आज मे बहुत खुस हु.. लगता हे अब हम दोनोके मीलनेका रास्ता आसान होगया हे.. अब हम सादी करके पती पत्नीकी तराह रेह सकते हे..

मुना : (चोदते हुअ‍े होंठ चुमते) हां बरखा.. आज ठाकुरसाहेबने हमारी राह आसान करदी.. क्या मस्त दीखती हे तु.. तुमने तो मुजे पागल कर दीया हे.. जी चाहता हे आजही तुमसे सादी करलु..

बरखा : (चुदवाते) भाइ बस थोडा सबर करलो.. फीरतो हमारे बच्चेभी होगे.. बस मम्मी पापा मान जाये..

मुना : बरखा ठाकुर साहेबने मुजे कुछ कामभी सोपा हे.. तुजे पता हे.. गांवमेभी हमारी तराह अ‍ैसे बहुत सारे रीस्ते पनप रहे हे.. बस उसीकी इन्फोर्मेशन मुजे ठाकुरसाहबको देनी थी.. वो सबकी सादी करवा देगे..

बरखा : (चुदवाते) सीइइ.. आह..आह..आह..इइइइइ भाइ थोडा जोरोसे.. क्या मस्त चोदते हो आप.. सुनो.. मेरे पास अ‍ेक विडीयो क्लीप हे.. जो मेने आज तक कीसीको नही दिखाइ.. मे आपकोभी नही दीखाउगी.. अगर हमारी सादीके लीये कुछ आना कानी हुइ तो मेही सब नीपटा लुगी.. आप फीकर मत करना..

मुना : (चोदते गलेको चुमते) बरखा.. चुजे चोदनेमे बहुत मजा आ रहा हे.. क्या कसी हुइ चुत हे तेरी.. मुजे बताना.. कीसका विडीयो हे..? क्या अपने पतीको नही बतायेगी.. आह.. आह..इइइ बरखा.. मे आने वाला हु.. येस.. येस.. आइ.. मे गया.. आह.. आह..इइइइइ

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कहातो बरखाने मुनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर वोभी मुनाके साथ जडने लगी.. तब कुछही देरमे मुना जडके बरखाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. तब बरखा मुनाकी पीठ ओर उनके बालको सहेलाते अपनी सांसे दुरसत करती रही.. ओर सोचने लगीकी मुनाको वो विडीयो क्लीपके बारेमे बताना चाहीयेकी नही.. ओर उसने बातको अपने तरीकेसे नीपटानेकी ठानली.. ओर मुनाको नही बतानेका फैसला करलीया..

क्युकी ये मामला खुदके घरसे जुडा हुआ था.. जब दोनो सांत हो गये तब मुनाका लंड बरखाकी चुतसे सीकुडके बहार नीकल गया.. तो मुना साइडमे लुढक गया तब बरखाने अपनी नीकरसे अपनी चुतको बेडपे बैठकर जुकते साफ करलीया.. फीर नंगीही मुनाके सीनेमे सर रखते उनसे बाते करने लगी..

बरखा : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. आप बीना कोन्डमके करते हो.. देखना कही मे पेटसे ना हो जाउ..

मुना : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) बरखा.. तो फीर अच्छा हेना.. तुम हमारे बच्चेको जन्म देना.. हें..हें..हें..

बरखा : (सरमाते हसते) भाइ.. अ‍ेक मारुगीनां..? क्या बीना सादीका बच्चा पैदा करुगी..? लोग क्या कहेगे..? हां अगर हमारी सादी होगइ होती तो बात अलग थी..

मुना : (देवायतकी बातोपे आगे बढते) बरखा.. हमने खुब मजे कीये हे.. जबसे हम कोलेजमे थे तबसे हम दोनो रीलेशनमे हे.. ओर अबतो हमारी सादीकी उमर बीतने लगी हे.. हमारा प्यार आपभी अ‍ैसे गहेरा हे.. बल्की अबतो ओरभी बढ गया हे.. हम बा बापुजीको कीतने दीनो तक सादीके लीये मना करते रहेगे.. अबतो हम दोनोकी सादी होजायेतो अच्छा हे.. बरखा.. मेरी मानो.. मेरे मनमे अ‍ेक आइडीया आया हे.. हम बा बापुजीको हमारी सादीके लीये मजबुर कर सकते हे.. अगर तुम मुजे थोडासा साथ देदो तो..

बरखा : (सरमाते सीनेको सहेलाते) भाइ.. मुजे आपके साथ पुरी जींदगी बीतानी हे.. इसके लीये मे कुछभी कर सकती हु.. कहो आपके दिमागमे क्या आइडीया हे.. मे कुछभी करनेके लीये तैयार हु..

मुना : (अपनी बातोपे आगे बढते) बरखा.. हम दोनो कुछ अ‍ैसा करेकी हमारे बा बापुजी.. मजबुरन हमारी सादीके लीये मान जायेगे.. इनमे ठाकुरसाहेब भी हमारा साथ देगे..

बरखा : (खुस होते) भाइ कहो.. मुजे क्या करना होगा.. मे तैयार हु.. कहो आपका क्या आइडीया हे..?

मुना : (सरमाते हसते) बरखा.. तुम प्रेगनेन्ट होजाओ..

बरखा : (आस्चर्यसे) भाइ.. आप पागल होगये हो क्या..? बीना सादीके बच्चा..? अगर मानलो मे हमारी सादीके लीये प्रेगनेन्ट हो भी गइ तो क्या होगा..? मम्मी पापापे क्या गुजरेगी..

मुना : इसीलीये कहेता था मुजे तुम्हारा साथ चाहीये.. जब मम्मीको तुम्हारी प्रेगनन्सीके बारेमे पता चलेगा तो तुम बिनदास्त मेरा नाम लेलेना.. बाकी सब मे सम्हाल लुगा.. इनमे ठाकुरसाहबभी हमारा साथ देगे.. तु समज गइनां..? ओर लोगोके बारेमे हमे नही सोचना.. क्युकी मेरे पास सबकी कुंडली हे..

बरखा : (कुछ सोचते) भाइ.. इनमे बहुत रीस्क हे.. मानलोकी अगर मे प्रेगनेन्ट होगइ..? फीरभी बा बापुने हमारी सादीके लीये मना कीया तो..? तो फीर मे कहा जाउगी..? कुछतो सोचो..

मुना : (हसते) बरखा सुन.. जब सबको पता चलेगाकी तुम प्रेगनेन्ट हो.. तब कोइभी बहार वाला तुमसे सादीके लीये मना करेगा.. तब बा बापुके पास तुम्हारी सादी मेरे साथ करवानेके अलावा कोइ रास्ता नही बचेगा.. ओर वो हमारी सादीके लीये मान जायेगे.. ओर तुमभीतो कहेती थी की तुम्हारे पास कोइ विडीयो क्लीप हे.. तो उनकाही इस्तेमाल करना.. क्या कहेती हो..?

बरखा : (सरमाते हसते) भाइ.. आपकी बाततो सही हे.. लेकीन क्या अ‍ैसा हो सकता हे..? अगर अ‍ैसा होता हेतो मे तैयार हु.. करदो मुजे प्रेगनेन्ट.. वैसेभी आप मुजे कइ दिनोसे बीना कोन्डमसे तो करते ही हो.. फीरभी मे कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी.. तो आइपीलभी लेती थी.. लेकीन अ‍ेक महीनेसे वोभी खतम हो गइ हे.. तो वोभी नही लेपाइ.. ठीक हे.. भाइ.. अब मुजे आइपील नही चाहीये.. मे रेडी हु.. आप करदो मुजे प्रेगनेन्ट..

मुना : (जोरोसे बाहोमे भीचते) चल तो फीर आजसेही हम कोसीस करते हे.. तैयार होजा दुसरे राउन्डके लीये.. अबतो मे मेरी बहेनको पेटसे करही दुगा.. बरखा तु गभराना नही मे तेरे साथ हु.. मे तेरा साथ कभी नही छोडुगा.. चाहे कुछभी होजाये.. वरना हम इस गांवसे कही दुर जाकर जींदगी बीतायेगे..

बरखा : भाइ.. तो फीर मम्मी पापाका क्या होगा..? पापाकी तबीयतभी ठीक नही हे.. हमोर अलावा उनका हेही कौन..? भाइ.. आप मम्मी पापाको छोडनेकी बात मत करो.. हम सादी करके उनके साथही रहेगे..

मुना : (होठोको चुमते) बरखा तुम कुछ विडीयोकी बात कर रहीथी.. क्या बता सकती हे मुजे..?

बरखा : सोरी भाइ वो मे आपको नही दीखा सकती.. पर यकीन कीजीये.. वो हमारी सादीके लीये मदद रुप हो सकती हे.. बस कुछ राज मुजतकही सीमीत रहेने दिजीये.. इसमे कीसीकी इजतभी जा सकती हे..

मुना : (कुछ सोचते) बरखा.. क्या वो क्लीप हमारे घरकी हे..? आइ मीन.. मोम..

बरखा : (जटसे थोडा गभराते) नही.. भाइ.. प्लीज.. मत पुछो मुजसे.. मे नही बता पाउगी..

मुना : (हसते) चल ठीक हे.. तो फीर वो सब तुमही जानो.. मुजे तुमपे पुरा भरोसा हे.. चल आजतो मे मेरी बहेनको प्रेगनेन्ट करके ही रहुगा.. क्या मस्त दीखती हे तु.. मेतो तेरा दिवाना हो गया हु.. आइ लव यु..

बरखा : (सरमाते हसते) भाइ.. आइ लव यु टु.. चलीये लग जाये मीशन सादीपे.. हें..हें..हें..

तब कुछही देरके बाद मुना ओर बरखा फीरसे बहेकने लगे.. ओर ना जाने दोनो कब अ‍ेक हो गये.. मुना हाथके बल उचा होकर बरखाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा तो बरखाभी अपनी कमर उछालते मुनाको चुदवानेके साथ देने लगी.. ओर कुछही देरकी घमासान चुदाइके बाद मुना अ‍ेक बार फीरसे बरखाकी चुतको अपने पानीसे भरके हरी भरी करदेता हे.. तब बरखाको नही पताथा की वो ओलरेडी पहेले प्रेगनेन्ट हो चुकी हे..

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तब गौवामेभी दोनो कपल अपनी अपनी चुदाइमे मसगुल थे.. अबतो धिरेनभी चुदाइके मामलेमे थोडा अनुभवी होगया था अब वो पुनमकी मददके बगैरही अपना लंड उनकी चुतमे घुसा देता.. ओर पुनमकी चुदाइ अ‍ेक बार करके तीन घंटेके बाद धिरेनने फीरसे दुसरी बार पुनमको चोद लीया.. ओर हर बार पुनमकी चुतमे खलास होते पुनमकी चुतको अपने पानीसे भर दीया.. तो पुनमभी खुस होने लगी.. उनको अपनी प्रेगन्सीको धिरेनके सामने जाहीर करनेकी बात आसान लगने लगी..

तो दुसरी ओर लखन ओर लता दोनोही जमकर चुदाइका आनंद लेते रहे.. लखन लतासे छुपकर वायग्राकी गोली खा लेता ओर पुरी रात तीन बजे तक लताकी जमकर चुदाइ करता रहा.. तब लताभी थकके चकना चुर होगइ.. तब सहेरमे नीलमको अपनी उंगलीसे काम चलाना पडा.. दो दिनसे धिरेनका फोन नही आया तो वो थोडी नीरास हो गइथी.. तो दुसरी ओर सृतीभी देवातसे मीलन करनेके लीये बेकरार होने लगी.. ओर अ‍ैसेही दिन ओर रातभी नीकल गइ..

आज देवायत राजीव ओर नीर्मलाको भुमीकाके घरपे छोडने सहेर जाने वाला था.. तो मंजुने चंदाको भेजना चाहा.. लेकीन रातमेही देवायत चंदाकी हालत खराब कर चुकाथा ओर चंदाको पता थाकी वापस आते देवु उनको बीचमे अपने घरपे लेजाकर दुबारा चोद लेगा.. तो अपनी हालत अकेली दुबारा खराब करना नही चाहती थी.. इसीलीये चंदाने अपने साथ मंजु ओर भावनाको अपने बच्चोके साथ जबर दस्तीसे साथ लेलीया..

तब देवायतने अपनी बडी कार लेली.. ओर सभी लोग चाइ नास्ता करके सहेरकी ओर नीकलने लगे.. तो मंजुने सृतीको वहा आनेकी सुचना देदी.. तो सृती बहुत खुस हो गइ.. ओर उसने क्लीनीपे आज ना आनेकी फोनपे बात करली.. नीर्मलाने अपना सब सामान लेलीया.. भावना सामको मंजु चंदाके साथ वापस आने वालीथी.. जब वो नीकल गये तब घरपे सीर्फ दया रजीया ओर चंपाही रेह गइ..

सब लोग आरामसे बाते करते जा रहेथे.. तो अ‍ेक घंटेके बाद ही सभी भुमीकाके घर आगये.. तो भुमीका ओर सृती दोनोही खुस होते बहार दोडके आगइ.. ओर आतेही नीर्मला राजीव मंजु चंदा सबको गले लगाकर मीली.. तब सृती देवायतको देखतेही बहुतही सरमाने लगी.. तो चंदाने विजयको ओर सृतीने भावनाकी बच्चीको अपनी गोदमे लेलीया ओर सभी लोग अंदर आगये.. तब राजीवतो घर देखतेही खुस हो गया..

राजीव : (हसते) भुमी.. तुमने घरतो बहुत बडा लीया हे.. ये घर थोडीना हे.. येतो बंगलो हे.. बंगलो..

भुमीका : (खुस होते हसते) आओ आओ भाइ.. अंदरतो आओ.. देखो.. ये हमारे देवुने दिलवाया हे..

मंजु : (हसते) पापा.. देवुने हमारे लीयेभी यही अ‍ेक बगलो लेलीया हे.. अभी खाली पडा हे.. इसी सोसायटीमे पीछली गलीमेही हे..

राजीव : (हसते) हां बेटी.. वो मुजे पता हे.. जब कीशन जीन्दाथा तबही लेलीया था.. चलो अच्छा हे.. सहेरमेभी रहेनेके लीये कुछतो होना चाहीये..

देवायत : (हसते सोफेपे बैठते) पापा.. अब सोच रहा हु.. जब लखन वापस आजाये तो इसे वही रहेनेके लीये भेजदु.. ताकी यहाका कामभी वो सम्हालले.. क्या कहेते हो..?

राजीव : (बेठते हसते) हां देवु.. ये सही सोचा आपने.. आपतो गांवमे रहेते हो.. तो लखनको यही रहेनेके लीये भेजदो.. इधरका कामभी बहुत होता हे.. तो उसे सब सीखादो.. तो यहा सम्हाल लेगा..

तभी सृती ओर भावना सबके लीये पानी लेकर आइ तो सभीने पानी पीया.. तब भावना ओर सृती कीचनमे सबके लीये चाइनास्ता बनाने चली गइ.. तो नीर्मला मंजु भुमी सब सोफेपे बेठकर बाते करने लगे.. तब भुमीका चोर नजरोसे देवायतको देखते कुछ ज्यादाही सरमाते हसती रही.. तब नीर्मलाने उनकी मनोदसा जानके हसते भुमीके हाथपे हाथ रखदीया.. तब भुमीका सम्हल गइ.. ओर हसने लगी..

तभी देवायतने खडे होकर राजीवको नीचे नीचेसेही भुमीका बंगलो दीखाने लगा.. क्युकी राजीवको अभी सीडीया चडनेकी मना थी.. तो राजीव भुमीका बंगला देखकरही खुस हो गया.. क्युकी सृतीने अपने घरको पुरी तराह सजाया था.. फीर वापस सोफेपे आकर बैठ गये तो मंजु उठकर कीचनमे चली गइ.. तो भावना कीचनसे बहार आइ.. तो चंदा ओर भावना बच्चेको लेकर नीचेके रुममे चली गइ.. ओर उनको सुलाने लगी.. तभी कीचनमे..

मंजुला : (जातेही सृतीको बाहोमे भीचते) क्युरी कुती.. क्या कर रही हे मेरी सौतन.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) कमीनी.. देखती नही मेरी प्यारीसी सोतनके लीये चाइनास्ता बना रही हु..

मंजुला : (हसते) सोतनके लीये की अपने होनेवाले पतीके लीये..? हें..हें..हें.. कमीनी इनको खाना बाना खीलाके कुछ ताजा माजा करदे.. ताकी तेरी अच्छेसे बजा सके.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते मंजुको पीठमे मुका मारते) छी.. कीतनी कमीनी सौतन हो तुम.. बीलकुल बेसर्म.. अभीभी नही सुधरी..

मंजुला : (कीचनके प्लेटफोर्मपे बेठते) सृती.. चल चाइ नास्ता करके फटाफट तैयार होजा.. हमे मार्केट जाना हे.. तेरे लीये कुछ गहेने ओर मंगलसुत्र लेना हे.. ओर कुछ कपडेभी लेने हे.. फीर हम सामको चले जायेगे..

सृती : (प्यारसे देखते) मंजु.. रातका डीनर करके चले जाना.. सामको क्यु जाना..? रुक जाओनां..

मंजुला : (हसते) नही सृती.. अब अ‍ेक दो दीनमे लखन धिरेनभी अपना हनीमुन मनाकर वापस आजायेगे.. तब दुसरेही दीन तुम दोनोकी सादी आश्रमपे रखी हे.. फीर लखन लताकोभी यही रहेने भेजना हे.. तुम पास होतो उनका खयाल रखना.. ओर साथमे हम रजीयाकोभी यहा भेज रहे हे.. तो काममे कोइ दिकत नही होगी..

दोनोही बाते करते चाइनास्ता बनाने लगी.. तब कुछही देरमे चाइनास्ता बन गयातो सबने साथमे बैठकर चाइ नास्ता करते साथमे खरीदी करने जानेका ओर लंच कीसी होटेलमे करनेका फैसला करलीया.. तब सृती भुमीका.. दोनोही तैयार होने चली गइ.. तब कुछही देरमे भुमीका ओर सृती तैयार होकर आगइ तो घरको ताला लगाकर सब मार्केटमे चले गये.. राजीव ओर देवायत बाते करते रहे..

ओर सभी लेडीस खरीदी करने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीकाने भावना ओर मंजुके बच्चेको सम्हाला.. वहा सब सृतीकी पसंदकी सारीया ओर गहेने लेलीये.. फीर सभी लोग लंच करने अ‍ेक बडी होटेलमे चले गये.. ओर वहा लंच करके वापस भुमीके बंगलेपे आगये.. तबतक दो पहोरके २ बज चुके थे.. आज राजीवको दवाइ लेनेमे लेट हो गया.. तो आतेही नीर्मलाने उसे दवाइ देदी तो वो अ‍ेक रुममे जाकर सो गया..

तो मंजुने देवायतको आराम करनेके लीये उपर सृतीके रुममे भेज दीया.. ओर सभी लेडीस वही होलमे लेटते आराम करते बाते करती रही.. तब ज्यादातर बाते गांवमे बदलावके बारेमे मंजुही कर रहीथी.. तब सृतीके साथ नीर्मला भुमीका भावना सब आस्चर्यके साथ गौरसे सुन रहीथी.. तो दुसरी ओर आज रमा भावुके साथ कुछभी बोल नही रही थी.. ओर मुह फुलाकर चुपचाप अपना काम करती रही.. तो भानुभी थोडा परेसान होने लगा..

तो गौवामे धिरेन ओर पुनम बीचमे अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके चलते हसी मजाक के साथ बाते करते चल रहेथे..तो लखन लताको अपनी गोदमे उठाकर दोनोके आगे चल रहाथा तब लता जोरोसे हसते खुब सरमा रहीथी.. ओर पुनमको पीछे देखकर अपने भाइसे छुडवानेकी मनते कर रहीथी.. तब पुनम ओर धिरेन दोनोही हस रहेथे.. कुलमीलाके दोनो कपल अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते खुब अ‍ेन्जोय कर रहेथे..

तो सहेरमे नीलम अपने क्लासमे पढते भी कुछ परेसान दीख रहीथी.. उनकी धिरेनके साथ तीन दिनसे बात नही हुइ थी.. ओर उपरसे धिरेनने उनको फोन करनेको मना कीयाथा.. तो वो मनही मन पुनमको गालीया देने लगी.. ओर क्लास खतम होतेही वो होस्टेलमे आगइ.. ओर सीधेही फोन लेकर बाथरुममे चली गइ.. ओर सोचने लगीकी फोन करु की नही.. ओर आखीर हीमत करके उसने धिरेनको फोन लगाही दीया..

तब धिरेन लता पुनम ओर लखन अ‍ेक जगाहपे आइसक्रिम खा रहेथे.. तभी धिरेनके फोनकी रींग बजी.. तो धिरेनने फोन उठाकर देखा तो नीलमका नाम देखतेही वो थोडा गभरा गया.. ओर उसने जटसे फोनको काट दीया.. फीर कुछ देरके बाद बाथरुम जानेका बहाना करके वो बाथरुममे चला गया.. तब पुनम सबकुछ समज गइ.. ओर मनही मन मु्सकुराने लगी.. तब धिरेन बाथरुममे जातेही फोन लगा देता हे..

धिरेन : (फोनपे धीरेसे) हेलो.. नीलम..?

नीलम : (थोठा नाराज होते) हां धिरेन.. आपने मुजे तीन दिन होगये.. फोन क्यु नही कीया.. क्या मेरी सौतन इतनी पसंद आगइ आपको..? की मुजे फोन करनेकाभी टाइम नही मीला..?

धिरेन : (हसते धीरेसे) अरे सुनतो सही मेरी मां.. कीतना बोल गइ तुम..? सुन.. बेबी.. आइ लव यु.. क्या हेना.. की पुनो हर वक्त मेरे साथ होती हे.. तो मे फोन कैसे करता.. बस अब दो दिनके बाद हम वापस आजायेगे तब तुजे मीलने होस्टेलमे आउगा.. ओर अगर तुम चाहोतो हम कही घुमनेभी जायेगे..

नीलम : (धीरेसे सरमाते) जानु.. आपके बीना यहा मेरा जी नही लगता.. पढाइमेभी मन नही लगता.. आपने मुजपे क्या जादु करदीया हे.. प्लीज.. आजाओ.. फीर आप जहा कहोगे मे आपके साथ चलुगी..

धिरेन : देख नीलु.. अभी तुम पढाइमे ध्यान दे.. तो फीर मेरी बेंकमेही तुजे जोबपे लगा दुगा.. तो हम मीया बीवी अ‍ेकही जगाहपे नोकरीपे साथमे जायेगे ओर साथमे आयेगे.. बस तुम ग्रेज्युअ‍ेशन करलो..

नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. क्या वाकइ पुनोदीदीके साथ.. आइ मीन.. उनके साथ मजा आता हे..?

धिरेन : (जुठ बोलते) अरे नीलु.. जो बात तुममे हे वो पुनममे कहा.. तुम क्या मस्त प्यार करतीथी उस दिन..

नीलम : (सरमाते हसते) जाओ.. जुठी तारीफ मत करो.. तबतो मुजे फोन करलीया होता..? जुठे कहीके..

धिरेन : (हसते) नही नीलु.. सच कहेता हु.. तेरी कसम.. बस अ‍ेक बार हमारा मीलन होजाये.. नीलु.. तुम ग्रेज्युअ‍ेशन करलो.. तब हम दोनोही फौरन सादी करलेगे.. ओर मेने तेरे लीये बहुत प्लान कीया हे.. बस वही मीलने आउगा तब तुजे सब बता दुगा.. चल अब फोन रखता हु.. वो तीनो मेरा वेइट कर रहे हे.. बाय..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) अरे सुनो.. धिरेन.. क्या मेरी कीस नही चाहीये..? आइ लव यु.. बाबु..

धिरेन : (हसते फोनको चुमते) आइ लव यु टु.. मुहा.. बुच..बुच..

नीलम : (जोरोसे चुमते) बु..च.. बुच.. बुच.. लव यु जानु.. बाय..

फोन काटतेही धिरेन पीसाब करके अपना हाथ साफ करते बहार आगया.. ओर चारो दुसरी जगाहपे घुमने चले गये.. तब नीलम धिरेनसे बात करके कुछ ज्यादाही अ‍ेक्साइटेड होगइ.. ओर फोन कट करतेही वही कमोडपे बैठ गइ.. ओर धिरेनको इमेजींग करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर धीरेसे चडी नीचे करते चुतमे उगली घुसा देती हे.. ओर आंख बंध करके जोरोसे चुतमे उंगलीको अंदर बहार करने लगी.. तब कुछही देरमे उनकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया तो सरमाके हसने लगी.. ओर सही होकर बहार आगइ..

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तो गांवमे भानुभी खाना खा रहाथा तब रमाने उनसे कोइ बात नही की.. ओर चुपचाप वोभी खाना खाती रही.. वो भावनाको भी खोना नही चाहता था.. तो रमाको इस बारेमे इग्नोर करते भानुभी बीना कुछ बोले खाना खाकर वापस खेतोपे आगया.. ओर सीधा देवायतकी ओफीसमे जाकर आराम करने लगा.. ओर भावनाके साथ की हुइ हर चुदाइको याद करने लगा तब उनका हथीयार खडा होने लगा.. तो उसे कुछ याद आतेही अपना मुह धोकर गांवमे चला गया.. तब अ‍ेक गलीमे कीसीको ना देखकर अ‍ेक घरमे घुस गया....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२७/१

तो गांवमे भानुभी खाना खा रहाथा तब रमाने उनसे कोइ बात नही की.. ओर चुपचाप वोभी खाना खाती रही.. वो भावनाको भी खोना नही चाहता था.. तो रमाको इस बारेमे इग्नोर करते भानुभी बीना कुछ बोले खाना खाकर वापस खेतोपे आगया.. ओर सीधा देवायतकी ओफीसमे जाकर आराम करने लगा.. ओर भावनाके साथ की हुइ हर चुदाइको याद करने लगा तब उनका हथीयार खडा होने लगा.. तो उसे कुछ याद आतेही अपना मुह धोकर गांवमे चला गया.. तब अ‍ेक गलीमे कीसीको ना देखकर अ‍ेक घरमे घुस गया....अब आगे

तब उस घरमे अ‍ेक ओरतके सीवा कोइ घरपे नही था.. पती कामपे गयाथा तो उनके दोनो बच्चेभी नोकरीपे गये थे.. ओर भानु दरवाजा बंध करके घरके अंदर चला गया.. तो उस ओरत भानुको देखतेही खुस होगइ.. ओर चुपचाप अपने कमरेमे चली गइ.. तब भानुभी घरका दरवाजा अच्छेसे बंध करके उस कमरेमे चला गया तो उस ओरत भानुसे लीपट गइ.. ओर भानुके चहेरेको कीसी पागलोकी तराह चुमने लगी.. मानो कीतने सालोसे वासनाकी आगमे जल रही हो.. फीर दोनोके होंठ मील गये..

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भानु : (बुब्स मसलते होठ चुमते) बसंती.. आज तेरी याद आ गइ.. मेरी प्यास बुजादे.. कीतने दिनोके बाद हमे ये मोका मीला हे..

बसंती : (सरमाते सीनेपे सर रखते) भानुजी जुठ मत बोलो.. मे तो घरमे सारा दीन अकेली ही होती हु.. आप नही आते.. क्या अब इस बसंतीसे आपका मन भर गया हे..? आपने मुजसे वादा कीयाथा.. की आप मेरी प्यास बुजाते रहेगे.. तो हमसे कम हप्तेमे अ‍ेक बारतो आते..

भानु : (होंठ चुमते) नही बसंती.. अब कामभी थोडा बढ गया हे.. तो टाइमही नही मीलता.. चल कोइ आजाये इनसे पहेले हम अपना काम नीपटा लेते हे.. क्या गदराया माल हो गइ हे तु.. हें..हें..हें... ओर सादीमे भी तुम मस्त लग रही थी.. तुजेतो उसी दिन चोदनेका मन कर रहा था.. खेतोपे चली आती वहा कोइ नही था..

बसंती : (बेडपे पेटीकोट उचा करते लेटते) तो फीर इसारा करदेना चाहीयेनां.. मे वही चली आती.. सबतो सादीमे बीजी थे तो कीसीको भनकभी नही लगती.. ओर ये गदराया तन आपही की महेरबानी हे.. आपहीने मुजे चोद चोदके अ‍ैसा करदीया हे.. बाकी अब आपके भाइमे तो वो दम हे नही.. जबसे बीमार हुअ‍े हे तबसे आपही मुजे चोद रहे हे.. चलीये मेरीभी प्यास आज बुजा दीजीये.. कीतने दिनोके बाद आये हे आप..

तब भानुभी अपनी पेन्ट नीचे करते बेडपे चला जाता हे.. ओर बसंतीके पैरके बीच बैठते अपना लंड बसंतीकी चुतपे घीसने लगता हे.. तो बसंती आंख बंध करके सीसकारीया करने लगी ओर उनकी चुतसे पानीका रीसाव सुरु होगया.. तब भानुने लंडको थोडा चुतमे फसालीया ओर बसंतीपे जुकके लेट गया तो बसंतीने भानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर होने वाले कमलेके लीये तैयार होगइ..

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तब भानुने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड बंसंतीकी चुतमे उतार दीया.. ओर अपनी कमर हीलाते बसंतीको चोदने लगा तब बसंतीभी मदहोस होकर आधी आख चडाते भानुके साथ मजेसे चुदाइका आनंद लेने लगी.. तब कुछही देरमे भानु चोदनेकी स्पीड बढा देता हे.. ओर दोनोके बीच अ‍ेक धुआधार चुदाइ होने लगती हे..

तभी बसंती बानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. ओर कुछही देरमे भानु बसंतीकी चुतको अपने पानीसे भरते हरी भरी करदेता हे.. तो बसंती भी साथमे जडते सांत होजाती हे.. ओर भानुकी पीठको सहेलाने लगती हे..

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बसंती : (पीठको सहेलाते) भानुजी.. मेतो दो पहोरको घरपे अकेली ही होती हु.. तो आजाते.. ओर अगर आपके खेतोपे कोइ नही होता तो मुजे बुला लेते.. मे वही आजाती.. अब आपके सीवा मेरी प्यास बुजायेगे कोन..? ओर आप चोदते भी मस्त हे.. आपके भाइने तो मुजे कभी अ‍ैसे नही चोदा.. अबतो हप्तेमे आपको अ‍ेक बार आनाही पडेगा.. मे आपसे केह देती हु..

भानु : (उपरसे हटते अपनी पेन्टको सही पहेनते) चल अब आउगा.. अबतो टाइमही टाइम मीलेगा.. क्युकी छोठे ठाकुर अब सहेरमे रहेने जाने वाले हे.. तो वहीका काम वोही सम्हाल लेगे तो मे फ्रि.. हें..हें..हें.. वैसे क्या कर रहा हे तेरा लडका.. देख.. आजकल उनका नाम वो डोक्टरके साथ आ रहा हे.. तुम खयाल रखना..

बसंती : (अपनी चुतको साफ करते) भानुजी अब वो जवान हो गया हे.. ओर मेरी लडकीभी जवान हो चुकी हे.. ओर दोनोही सादीके लीये मना कर रहे हे.. अब आपही ठाकुरसाहबको कहेके उनको मनवा लीजीये.. कबतक सादी नही करेगे..? आजकल मेरी लडकीके लक्षणभी मुजे ढीक नही लग रहे.. वोभी कीसी ओरतकी तराह गदराइ हो गइ हे.. लगताहे उनकाभी कीसीके साथ टाका भीडा हुआ लगता हे..

भानु : (हसते) तुम उनका खयाल रखना.. क्या कीसी लडकेके साथ उनका कोइ चकर बकरतो नही..?

बसंती : भगवान जाने.. अगर होगा तोभी अच्छा हे.. कमसे कम उनके साथ उनका घरतो बस जायेगा.. मेतो उनको केह केहके थक गइ.. मगर वो सादीके लीये मानती ही नही.. ओर मुनाभी सादी करनेको मना कर रहा हे.. कहेता हे अभी नही जब मन करेगा तो केह दुगा.. पता नही दोनोके मनमे क्या हे..

भानु : (होठ चुमते) चल ठीक हे मे चलता हु.. अगर मीलेगातो उनसे बात करुगा.. वरना देवुसे बात कर लुगा.. तुम अपना खयाल रखना.. अगर पैसेकी कोइ जरुरत होतो बताना..

कहेते भानु आजु बाजु देखकर वापस खेतो पे चला गया.. जीहा आप सोच रहे हे वोही हे.. मुना ओर बरखाकी मां बसंती.. जबसे उनके पतीको पेरेलीसीसका अ‍ेटेक आया तबसे वो भानुसे ही चुदवाती हे.. भानु बसंतीको कइ बार चोद चुका हे.. ओर बरखाने अ‍ेक दिन अपनी मांको चुदवाते देख लीया.. तब उसने अपने माोबाइलमे वो विडीयो क्लीप बनाली.. ताकी भविस्यमे उनका इस्तमाल अपने भाइके साथ सादीके लीये कर सके..

इधर सहेरमे साम होतेही चाइ नास्ता बन गयातो नीर्मलाने राजीवको जगाकर फ्रेस करवाया.. तो मंजुने चंदाको देवायतको जगानेको कहा.. तो चंदा सरमाते जुठा गुसा करते मंजुकी पीठमे मुका मारने लगी.. तो भावना सृती मंजु तीनो हसने लगी.. तभी मंजुही हसते हुअ‍े उपरकी मंजीलपे देवायतको जगाने चली गइ.. मंजुके जगातेही देवायत उनको अकेली रुममे देखता हे.. ओर मंजुको हाथ पकडकर अपने उपर गीरा देता हे..

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फीर मंजुको बाहोमे भरके पलटके अपने नीचे सुलाते उनके होठोको चुमने लगते हे.. तब कुछही देरमे मंजुभी देवायतका साथ देने लगी.. तो देवायत धीरेसे उनका पेटीकोट उपर उठाते मंजुकी चुतको सहेलाने लगा.. तो मंजु मदहोस होकर सीसकारीया करते देवायतको अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. तब मंजुको पताही नही चलाकी देवायतने कब अपना लंड पेन्टके बहार नीकाल लीया.. ओर मंजुकी चुतपे सेट कर दीया..

मंजुला : (सीसकारीया करते मदहोसीमे) नही देवु.. प्लीज.. दरवाजा खुला हे.. कोइभी आ सकता हे यहा नही.. आप घर जाकर मुजे चोद लेना.. प्ली..ज..

देवायत : (होंठ चुमते) मंजु सीर्फ अ‍ेक बार.. अभी होजायेगा.. पता नही तुजे देखते ही कंट्रोल नही होता..

मंजुला : (सरमाते हसते) लेकीन देवु इधर नही.. यहा मेरी सब सौतने हे.. कमीनी कोइभी उपर आ सकती हे.. आप घर जाकर कर लेना.. आइइइ.. उह.. मां.. घुसा दीया.. कहेके तो डालते.. चलो फटाफट चोदलो.. बहुत कमीनेहो आप..

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देवायत : (धीरेसे कमर हीलाते) मंजु.. बस अभी होजायेगा.. आज क्या मस्त तैयार हुइ हे तु..

मंजुला : (अपनी कमर हीलाते) जानु.. अभी कोइ आजाये इनसे पहेले आप फटाफट चोदलो.. आपभीना..? अ‍ेक नही सुनते.. कमीनी कीसीने देखलीया तो मेरा मजाक उडायेगी..

तब उनको नही पता थाकी मंजुके जाते ही.. चंदा सृतीको इसारा करती हे.. ओर उनको लेकर मंजुके पीछे चली आती हे.. दोनो ही दरवाजेके बहार छुपकर देवायत मंजुकी मस्ती भरी बाते सुनते हस रही थी.. तभी मंजुकी सीसकारीया सुनकर सृतीने दरवाजेके अंदर थोडा सर नीकालके जांकते देखा तब देवायत मंजुके उपर चडके उनको जोरोसे चोद रहा था.. ये देखतेही सृती सर्मसार होते हसती हुइ वहासे हट गइ..

चंदा : (बहुत धीरेसे) सृती.. दोनो क्या कर रहे हे..? बतानां..

सृती : (बहुत धीमी आवाजमे सरमाते हसते) मौसी.. आपही देखलो.. क्या इसीलीये आप मना कर रही थी..?

चंदा : (अंदर जांकते हसते) हां.. इनको जगाने जाओतो यही सरारत करते हे.. आजतो मंजु गइ कामसे.. हें..हें..हें..

तब दोनोही छुपकेसे मंजु देवायतकी चुदाइ देखने लगी.. तभी अचानक सृतीको सरारत सुजी.. ओर उसने चंदाको धका मारते अंदर धकेल दीया.. जहा देवायत ओर मंजु चुदाइ कर रहेथे.. तब चंदा हडबडाते देवायतके उपर जाके गीरी.. तो देवायत मंजु दोनोही हडबडाते गभरा गये..

ओर देवायतने फौरन पलटके देखा तो सृती चंदाको धका माकर नीचेकी ओर जोरोसे हसती हुइ भाग रही थी.. तब देवायत सबकुछ समज गया.. ओर उसने फौरन चंदाको पकड लीया.. फीर उनको खीचके बेडपे लीटाते उनके उपर चड गया.. तो चंदा जोरोसे हसती हुइ देवायतसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तब..

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मंजुला : (हसते बेडसे कपडे सही करते उतरते) देवु.. आज इन कमीनीको मेरे सामनेही चोदलो.. आपको जगाने भेजा तो मना करदीया था.. ओर पीछेसे छुपके हमारा लाइव सो देखने आगइ.. बहुत नखरे कर रही हे.. आज लेलो बदला.. घुसादो अपना तगडा हथीयार.. हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते छुटनेकी कोसीस करते) मंजु.. कीतनी कमीनी हो.. इनको उक्सा रही हो.. हें..हें..हें.. वो कुतीने मुजे धका दे दीया.. सोरी देवु.. यहा नही प्लीज.. छोडदो मुजे.. आप घर जाकर कर लेना.. नही नही.. वहा नही.. मत उचा करो.. कोइ देखलेगा.. नही.. नही.. प्लीज.. आइइइ.. देवु... आहइइ आह.. उइइइ मां.. घुसा.. दीया.. कीतने कमीने हो.. कह.करतो डालते.. उइइइ मां.. आह.. आह.. कुती.. कमीनी इनका बदला लुगी मे.. ओर वो कमीनीको भी देख लुगी.. उनको मेरे सामने चुदवाउगी..

मंजुला : (हसते) कमीनी.. धीरे बोल नीचे सब सुनते होगे.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे कमर हीलाते चोदते) मेरी मंजुको गाली देती हे.. आजतो तुम गइ कामसे.. आतो तुजे दो बार चोदुगा..

चंदा : (हसते) नही नही.. देवु भुल होगइ मेरी.. हें..हें..हें.. आहइइइ.. धीरे करोना.. तुम कीतने कमीने हो.. फट जायेगी मेरी.. आह.. सीससइइइ उइइ मां..

ओर देवु चंदाकी ताबड तोब चुदाइ करने लगा.. तब कुछही देरकी धमाकेदार चुदाइके बाद चंदाभी मदहोस होकर चुदवाने लगी.. कुछही देरकी घमासान चुदाइके बाद देवायत चंदाकी चुतमे जटतक अपना लंड घुसा देता हे.. ओर चंदाकी चुतमे अपना माल उडेलने लगता हे.. तो चंदानेभी देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर वोभी साथ जडने लगी.. तबतक मंजु वही खडी रहेकर हसते हुअ‍े दोनोकी चदाइ देखती रही..

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ओर देवायत खलास होतेही जटसे लंड बहार नीकालकर बाथरुममे भाग गया.. तब चंदा बेडपे बेठकर अपनी चुतको साफ करते मंजुकी ओर जुठे गुस्सेसे देखते हसने लगी.. तभी मंजुलाभी हसती हुइ नीचे भाग गइ.. ओर चंदा चुतको साफ करके बेडसे उतर गइ ओर अपने कपडे सही करने लगी.. तभी देवायत फ्रेस होकर बहार आगया.. तो चंदा जुठा गुस्सा करते उनको मारने लगी..

तब देवायतने अ‍ेक बार फीरसे चंदाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते पकड लीया.. ओर चंदाके होंठोको चुमलीया.. तो चंदाने उनके सीनेपे मुका जड दीया ओर हसने लगी.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते हसते रहे.. तभी अ‍ेक बार फीर देवायतने चंदाको बाहोमे भरलीया ओर उनके होठोको चुमलीया.. फीर दोनोही अ‍ेक साथ चलके नीचे आगये.. तब सब अपनी बातोमे बीजी थे.. तो भावना दोनोकी ओर देखते हस रही थी..

चंदा सीधेही कीचनमे चली गइ तो वहा सृती ओर मंजु चंदाको देखतेही जोरोसे हसने लगी.. तब चंदाने वहाभी सृतीको पीठमे दो तीन मुके हसते हुअ‍े जड दीये.. फीर तीनो ही सबका चाइ नास्ता लेकर बहार आगइ.. तब सृती अबभी चंदाकी ओर देखते हस रहीथी.. आज सृतीकोभी अपनी सौतनसे अ‍ैसा मजाक करते अच्छा लगा.. उनको आज अच्छेसे पता चल गयाकी पतीके साथ बेडरुममे कैसी सरारते ओर मजाक मस्ती होती हे..

फीर चाइ नास्ता करते सब सृती देवायतकी सादीकी प्लानींग करने लगे.. आश्रमपे कौनसी तारीखपे कीतने बजे पहोचना हे.. सब प्लानींग होगइ.. तो मंजुने वहीसे फोनपे बाबासे आश्रमपे सादी करनेकी बात करली.. फीर सब घर चलनेकी तैयारीया करने लगे.. तब भुमीका ओर सृतीने सबको बहुत आग्रह कीया की रातका डीनर करके नीकले.. लेकीन देवायत मंजु ओर चंदाने कामका बहाना करके मना करदीया..

ओर सब अ‍ेक दुसरेको गले मीलने लगे.. तब देवायतने जान बुजकर सृती नीर्मला ओर भुमीकाको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तो तीनोही सरमा गइ.. सृती सबकी नजर बचाते देवायतको आंख मारके हसने लगती हे.. तो मंजुभी उनकी सरारत देखते हसने लगी.. तो सृती बहुतही सरमाइ.. भावनाभी देवायतके साथ रहेना चाहती थी तो वोभी अपनी बच्चीको लेकर वापस आने लगी.. ओर देवायत अपनी दोनो बीवीया ओर भावनाको लेकर वहासे नीकल गया..

चंदा देवायतके पास बैठीथी तो मंजु भावना अपने बच्चोको लेकर पीछली सीटमे आरामसे बच्चोको दुध पीला रहीथी तब मंजुने धीरेसे चंदा ओर देवायतकी सरारतके बारेमे बता दीया.. तो भावना चंदाकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी.. तो चंदाभी समज गइकी मंजु ओर भावना उनके बारेमेही बाते कर रही हे.. तब चंदा अ‍ेक बार फीर सर्मसार होगइ.. ओर अपने दांत पीसते हसते हुअ‍े पीछे मंजुको मुका जड दीया..

चारो अ‍ैसेही मजाक मस्ती करते हवेलीपे पहोंच गये.. तो वहा दया रजीया ओर चंपाने सबका खाना कंपलीट रखाथा तो सब फ्रेस होकर खानेपे बैठ गये.. इस रात देवायतने मंजु ओर चंदाको जमकर दो दो बार चोदलीया.. ओर चोद चोदके देवायतने दोनोकी हालत पतली करदी.. ओर अ‍ैसेही दिन बीतने लगे.. इसी दौरान धिरेन पुनमके बीचभी नजदीकीया बढ गइ..

ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेके साथ खुब सारीरीक सुख भोग लीया.. धिरेन हर वक्त पुनमको चोदनेकी फीराकमे रहेता.. ओर जैसेही पुनमको चोदने लगता.. तो कुछ ही देरमे उनके सीनेपे लुढक जाता.. वो पुनमको हर बार प्यासी छोड देता.. लेकीन इस बारेमे पुनमभी धिरेनको कुछ नही बोलती.. क्युकी पुनमको भी पताथा की उनको अपना भाइ देवायत ही संतुस्ट कर सकता हे.. उनका तो अब धिरेनसे चुदवानेका अ‍ेकही मक्सद था.. ओर वोहे उनके बच्चेको धिरेनका नाम देनेका..

तो लखन लताने भी अपने हनीमुनमे खुब मजे कीये.. इसी बीच धिरेनको नीलमसे बात करनेका अ‍ेकभी मौका नही मीला.. ओर आखीर दोनो कपलकी हनीमुन टुर खतम होगइ.. ओर घरकी ओर वापस नीकल गये.. तो इन दिनोमे रमानेभी भानुको अपने तनसे हाथ नही लगाने दिया.. तो फीर भानुने भी भावनाके बारेमे बात ना करके रमाको कुछ ज्यादा भाव नही दिया.. तो रमाभी थोडी नीरास होगइ..

उनको लगाथा की भानुको चोदने नही दुगीतो वो उनकी बात मान लेगा.. लेकीन जब भानुने रमाको ज्यादा भाव नही दीयातो रमा खुदभी बीना चुदाइके तडपने लगी.. ओर हार मानकर वोभी भानुसे बात करने लगी.. हालाकी ये बातके लीये अबभी भानुसे नाराज थी.. लेकीन रमाने समयके साथ समजोता करलीया.. तब रमाको नही पताथा की भानु बहुतही ठरकी इन्सान था जो अपने तनकी प्यास कही ओर बुजा लेता हे..

इसी दिनोके बीच भानुने अ‍ेक बार फीर बसंतीकी चुदाइ उनके घरपे जाकर करली.. तो अ‍ेक बार उनके वो ट्रक वाले दोस्त जीवा जो मुनीमके घरके पास रहेता था.. वही दोस्तकी बीवीको भी दो बार चोद चुकाथा.. वरना खेतोपे ट्युबवेल वाले रुममे चला जाता ओर वही उनकी दो तीन चहीती मजदुर थी उनमेसे कीसी अ‍ेकको बुलाकर चोद लेता.. आजकल वहा मालती नहीथी वरना उनसेही अपनी प्यास बुजा लेता..

ओर आजकल अ‍ेक नइ ओरत उनके फांसमे फस चुकीथी.. तो दो बार उनकोभी चोद लीया.. ओर वो ओरत थी छोटुकी बीवी रीटा.. जो बहुतही कामी ओर भानुकी तराह ठरकी ओरत थी.. इसी बीच वंदना ओर उनकी मां चारु ओर नीशाकी देवायतको मीलनेकी तडप बढ गइथी.. वोभी रश्मीभाभीको मीलकर देवायतसे मीलनेकी प्लानींग करने लगीथी..

तो दुसरी ओर जबसे मुना बरखाने देवायतसे खुलकर बाते की तबसे वो दोनोभी बीन्दास्त होकर मीलने लगेथे... अबतो मुनासे बात होनेके बाद बरखाने मुनासे प्रेगनेन्ट होनेके मक्सदसे आइपील लेना बंध करदीयाथा.. कोन्डमके बगैर ही चुदवाने लगी.. लेकीन मुनाने उनकी बहेनको ये नही बताया की वो प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. ओर वो अपनी बहेनके साथ मजे करता रहा.. ओर इसी बीच मुना सुधीरके कहेने पे उनकोभी खुस कर चुकाथा..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२७/२

आज दोपहरको दो बजे धिरेन पुनम ओर लखन लता अपना हनीमुन मनाकर वापस आने वाले थे.. तो आज सुबह देवायत ओर मंजु.. दोनोही कार लेकर सुबह सहेर चले गये.. दोनो कपल दो पहोरको आने वाले थे तो देवायत मंजुने कारको सीधेही आश्रमपे ले लीया.. ओर दोनोही मंदिरमे दर्शन करके सीधेही बाबाके पास चले गये.. तब बाबा दोनोको देखते ही खुस होगये.. तब सेवक देवायतका अभीवादन करते चला गया तो देवायत मंजु उनके पैर छुकर वही बैठ गये..

बाबा : (हसते) आखीर तुम दोनो आही गये.. बस इसी दिनका मे इन्तजार कर रहाथा.. कहो.. क्या कहेने आये हो..?

मंजुला : (हसते) बाबा आपतो सब जानतेही हे.. अब गांवमे अ‍ैसी परीस्थीती नीर्माण हो रही हे.. की हमे अब गांव वालोको समजाना ही पडेगा.. वरना सबलोग आपसमे ही जगडा करते रहेगे.. अब आपही कुछ मार्गदर्शन दीजीये.. ताकी गांव वालोको हम समजा सके.. आजकलतो गांवमे बहुत कुछ होने लगा हे..

बाबा : (हसते) बेटी.. बात थोडी ओर बढनेदो.. जब सभी लोगोके रीस्ते उजागर होने लगेगे.. तब अ‍ेक दिन सभी गांव वालोको इकठा करके अ‍ेक सार्वजनीक कार्यक्रम रखदो.. मे समजाने आजाउगा.. उनमे आसपासके सभी गांव वालोको भी बुलाना हे.. यहाभी जीतने सरपंच ओर लोग आते हे उनको मेभी केह दुगा.. अब सब लोग समज जायेगे.. ओर कुछ लोग नाराज होगे तो बादमे वोभी सहमत होजायेगे.. क्युकी उनके घरमेही अ‍ैसे रीस्ते नीकलेगे तो वो कहा जायेगे..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बाबा.. अ‍ैसे दो तीन रीस्ते तो मेरे पास आभी गये हे.. क्या ये सब सही हो रहा हे..? क्युकी गाव वांले इसीलीये तो बापुसे ओर दादासे नाराज थे.. क्युकी उन सबको पताथा की उन्होने अपनी बहेनसे ही सादी करली थी.. इसीलीये सबने हमसे सबंध तोड दीयाथा..

बाबा : हां.. ये बात मुजसे किशनने कहीथी.. क्युकी गांवके कुछ लोग यहाके सेवक थे.. तो यही आते जाते उनको यहा कीसीसे पता चल गयाथा.. इसीलीये हमे फुंक फुंकके कदम रखने पडेगे.. ताकी तुजे कीसी तराह की कोइ बाधा ना आये..

देवायत : (हसते) हां बाबा देखना.. यहातो ज्यादातर रीस्ते आपसमे ही हे.. तो हमे उसी रीस्तेको अपनाने समजाना हे.. ओर सबकी आपसमे सादीया करवानी हे.. बहुत ही मुस्कील काम हे ये..

बाबा : अरे.. तुम इतनी बीवीया होनेके बावजुदभी अबभी वही अटके हुअ‍े हो..? ये सब तुम्हारे लीये थोडीना हो रहा हे.. बस हमे उनके लीये रास्ता बनाना हे.. अभीतो सुरुआत हे.. तब गांवतो क्या सहेरमेभी सब अ‍ैसे रीस्तेको अपनाते आपसमे सादीया करते होगे.. अब कलयुग आगया हे..

हम सब प्रकृतीकी ओर ढल रहे हे.. ओर आने वाले दिनोमे तो कोइ नात जात भेद भाव नही होगे.. तुजे कहीपे अ‍ेकभी त्यक्ता या विधवा महीला नही दीखेगी.. सब उन हिमाचलकी तराह जी रहे होगे.. सभी अ‍ेक दुसरेको खुलके प्यार करते होगे..

मंजुला : (हसते) हां देवु.. ये मत सोचोकी सब हमारी वजहसे हो रहा हे.. हमतो मात्र नीमीत हे.. बाकी सब तैय हे.. वो होकर ही रहेगा.. तुम संकोच मत करो.. हमेतो सबको जीतनी मदद हो सके करना हे.. अगर हम कुछभी ना करे तबभी ये सब होकर रहेगा.. हमेतो इसीलीये मदद करनी हे क्युकी वो स्वंम हमारे घर जन्म लेने वाले हे.. क्यु बाबा..?

बाबा : हां बेटा.. ये सब प्रकृतीका खेल हे.. हमे सीर्फ ओरत ओर मर्दके रीस्तेको ही याद रखना हे.. ओर हर ओरतका सन्मान करना हे.. अ‍ेक जमाना था.. जब कोइ लडकी विधवा होती थी.. तो गांवके लोग उनका मुंडन करके उनको समाजसे दुर रखते थे.. ओर उस बेचारीको सब अपसुकनीयाल मानकर जलील करते थे..

ओर त्यक्ता लडकीको भी सब भेडीयेकी नजरसे देखते थे.. ओर अपनी हवसका शीकार बनाते थे.. इनसे तो अच्छा हे.. कोइ घरके आदमीसे ही सादी करके सुहागनकी जींदगीतो बीतायेगी.. ओर उनके साथ खुसभी रहेगी.. फीर चाहे वो दुसरी बीवी हो या तीसरी क्या फर्क पडता हे.. कमसे कम अपने आपको सुरक्षीत तो महेसुस करेगी..

मंजुला : बाबा.. ठीक कहा आपने.. बस हमे यही बाते लोगोको समजानी हे.. कीतनी ओरते अपने पतीकी बुरी आदतकी वजहसे बांज रेह जाती हे.. अगर दुसरोसे सबंध बाधलीये ओर बच्चेका सुख पाती हे तो उनमे क्या बुरा हे..? देखते नही कीतने पुरुष अपनी सादीके बावजुदभी दुसरी ओरतसे अवैध रीस्ता रखते हे.. तो क्या ये अधीकार सीर्फ पुरुषके लीये ही हे..? उन ओरतोके लीये नही..? जो अपने पतीसे अ‍ेक बच्चेका सुखभी नही पा सकती..? देवु.. सब प्रकृतीपे छोडदो.. अभीतो आपको बहुत कुछ करना हे.. ओर देखना हे..

बाबा : (हसते) हां बेटा.. मेरी बेटी बहुत समजदार हे.. इसीलीये तो तुजे अपनी सौतनोके बीच बाट रही हे.. ओर तुजेभी कहा सामनेसे कीसीके पास जाना हे.. जो सामनेसे आती हे.. उनकोही न्याय देना हे.. कोइभी मर्द हो या ओरत.. अगर आपसमे अ‍ेक दुसरेकी रजामंदीसे रीलेशन रखते हे तो फीर क्या क्षोभ करना..? हंम..?

बेटा जोभी होता हे होनेदो.. हमे प्रकृतीके बीच नही आना.. जब तेरा बेटा बडा होजायेगा तो तुजे अ‍ैसा बहुत कुछ दिखनेको मीलेगा.. जीनके बारेमे तु सोचभी नही सकता.. तब दुखी मत होना.. ओर सब स्वीकार करलेना.. क्युकी तुम अभी मनुस्य हो.. तो कर्मतो तुजेभी भुगतना पडेगा..

देवायत : (हसते) ठीक हे बाबा.. देखते हे आगे क्या होता हे.. अभीतो पुनो लखन सब घुमने गये थे.. उसीको लेने सहेर जा रहे हे.. ओर आपको मीलनाभी था तो दोनो चले आये.. अब यहा भोजन करके नीकल जायेगे.. अबतो पुनोका पतीभी सहेरमे अ‍ेक घर ले रहा हे..

बाबा : सुन बेटा.. उन लडकेकी जींदगीमे भी अ‍ेक ओर लडकी आगइ हे.. बस वोही लडकीकी वजहसे तेरी बहेन तुमसे वापस मीलेगी.. तुम उनके बारेमे सुनकर वीचलीत मत होना.. क्युकी आगे बहुत कुछ होने वाला हे.. जीनके बारेमे जानकर तुजे अभी दुख हो सकता हे..

मंजुला: (हसते) बाबा वो सब मे देवुको बादमे समजा दुगी.. बस अभी जो परीस्थीती नीर्माण होने वाली हे या हो रहीहे.. उन्हीका समाधान करना हे.. बस आप अ‍ेक बार आजाइअ‍े ओर लोगोसे बात करलीजीये फीर हम सम्हाल लेगे.. क्यु देवु..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां बाबा..

बाबा : (हसते) हां बहुत कुछ जल्दी होने लगा हे.. तुम जब कहो मे आजाउगा.. ओर सुन.. बेटा अ‍ेक बार वो कबीलेमे जाकरभी सबको मील लेना.. खास करके वो तेरी दिवानीको.. बस उनके माध्यमसे वहा भी बहुत कुछ सम्हालना हे.. अब उनको कबीलेकी रानी बनादे.. ताकी उनके माध्यमसे वहा बहुत कुछ करना हे..

देवायत : (हसते) जी बाबा.. आजतो समय नही हे.. बस दो तीन दिनमे वहा सबको मील लुगा..

मंजुला : (हसते) बाबा.. अब वो चारोको लेने जाना हे.. तो फीर कल इनकी सादीभी यहा करवानी हे.. तो कल सुबह हम सबको लेकर आजायेगे.. कहो मुजे क्या तैयारीया करनी हे..?

बाबा : (हसते) अरे कुछ नही करना.. बस ये दोनोको लेकर आजाना.. वही मंदिरमे सादी कर देगे.. फीर सबको भोजनभी यही करना हे.. चलो अब जाओ तुम दोनो भीजन करलो.. फीर आरामसे सहेर जाना..

फीर देवायत ओर मंजुला काफी देर तक बाबासे बाते करते वहा बैठे रहे.. बाबाने भवीस्यके बारेमे दोनोको बहुत सारी जानकारीया देदी.. फीर बाबाको दक्षीणा देकर वहासे नीकलकर भोजन खंडमे चले गये.. वहा दोनोने भोजन करलीया.. तो दोनोही कार लेकर सहेरकी ओर नीकल गये.. देवायतने कारको सीधेही होस्टेलपे लेली.. वहा नीलमको मीलकर उनको कुछ पैसे देदीये.. फीर दोनो टड्ढावेल्सकी ओफीसपे चले गये..

यहा देवुने जाकर पुछातो बस आधे घंटेमे ही पहोचने वाली थी.. तो देवायत कार पार्क करके मंजुको लेकर अ‍ेक आइसक्रिम पार्लरमे चला गया.. ओर वहा दोनोके लीये आइसक्रिम ओर्डर करदीया.. तब कुछही देरमे वेटर दोनोको पानी पीलाकर आइसक्रिम देकर चला गया ओर दोनो आइसक्रिम खाते बाते करने लगे..

देवायत : मंजु अभी आधे घंटेमे बस पहोंच जायेगी.. मुजे ये बता.. ये धिरेन नीलमका क्या चकर हे..?

मंजुला : (हसते) देखो देवु.. जानकर दुखी मत होना.. सब आपके फायदेके लीये ही हे.. बस उस नीलमकी वजहसे ही पुनो आपको वापस मील जायेगी.. क्युकी पुनो धिरेनकी सगाइके बाद.. धिरेन सादीसे पहेलेही पुनोके साथ फीजीकल होना चाहता था.. लेकीन पुनोने उनको मना करदीया था.. क्युकी वो आपके साथ रीलेशनमे आना चाहती थी.. ओर आपको ही अपना कौमार्य सोपना चाहती थी..

देवायत : (हसते) हंम.. हां वोतो ठीक हे मगर नीलम धिरेनकी जींदगीमे कैसे आगइ..? हें..हें..हें..

मंजुला : जानु याद हे हम सब खरीदी करने यहा सहेरमे आयेथे..? तबही दोनोके बीच नजदीया बढ गइ.. क्युकी धिरेन वो सुख पाना चाहता था जो पुनोने उसे मना करदीया था.. तो वही सुख पानेके चकरमे उसने नीलुको अपने प्यारमे फसा लीया.. ओर नीलुभी जवान होचुकी हे.. ओर वोभी अपनी मा की तराह बुहत कामी ओर ठरकी लडकी हे..

इसीलीये धिरेनके साथ इजीली रीलेशनमे आगइ.. सादीके दिनही मेने भावुको उपर नही भेजा होता तो उसी दिन धिरेन नीलुका काम तमाम कर देता.. हें..हें..हें.. ओर भावुने दोनोको फटकार लगाइ ओर नीलुको बचा लीया.. लेकीन आगेकी गेरंटी मे नही दुंगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. तो ये बात हे..? मंजु.. तुम कबतक नीलुको बचायेगी.. यहातो वो अकेली रहेती हे.. ओर धिरेनभी यहा जोब करता हे.. तो दोनो यहा आसानीसे मील सकते हे.. जैसे हम मीलते थे..

मंजुला : (कामुक स्माइलसे) जानु.. हमे कहा नीलुको बचाना हे.. हमभी यही तो चाहते हेकी नीलु धिरेनको मील जाये.. ताकी उनकी वजहसे धिरेन वहा सहेरमे अपने नये मकानमे पडा रहेगा जीनकी वजहसे पुनो आपको मील जायेगी.. ओर नीलु इतनी कामी हेकी अ‍ेक अकेला धिरेन उनको नही सम्हाल पायेगा..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) तो फीर..? तुम क्या कहेना चाहती हो..? नीलु कीसी ओरके साथ भी..

मंजुला : (कामुक स्माइलसे) हां देवु.. तुमने सही सोचा हे.. वो धिरेनके साथ सादी करकेभी कीसी ओरसे अपने तनकी प्यास बुजाती रहेगी.. ओर उन्हीके बच्चेकी मां भी बनेगी.. बस सबको यही लगेगा की ये बच्चा धिरेनका हे.. लेकीन असलीयत वो दोनो ओर हम ही जानते होगे..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे देखते) मंजु.. वो लडका कौन हे.. क्या बता सकती हो मुजे..?

मंजुला : (हसते) जानु.. वादा करो.. इस बारेमे तुम उसे कुछभी नही कहोगे.. तभी उनका नाम बता सकती हु..

देवायत : (हसते) मंजु.. अबतो कीसीके भी रीलेशनके बारेमे जानकर मुजे कोइ आस्चर्य नही होता.. फीरभी आइ प्रोमीस.. मे कीसीको कुछभी नही कहुगा.. बता वो लडका कौन हे..?

मंजुला : (हसते) जानु वो लडका हे.. हमारा लखन.. उनकाभी आपही की तराह बहुत लडकीया ओर ओरतोके साथ रीस्ता हे.. ओर हमारे लखनकी जींदगीमे भी दो पत्नीया हे.. हमारे लखनने भी हमारी तराह गांधर्व सादी करली हे.. हमारी लता उनकी दुसरी बीवी हे..

देवायत : (चोंकते) व्होट..? क्या ये लखनकी दुसरी सादी थी..? तो फीर उनकी पहेली बीवी कौन हे..?

मंजुला : (हसते) जानु चोंकीये मत.. लखनभी आपहीका खुन हे.. वोभी आपहीकी राहपे चल रहा हे.. हमारी रजीया ही उनकी पहेली बीवी हे.. जब आप ओर पुनमने सादी करलीथी तबही वो दोनो रीलेशनमे आगये थे.. जीस दिन आपने हमारी पुनमकी कोख भरदी उसी रात दोनोने गांधर्व सादी करके अपनी सुहागरात मनाइ.. ओर जबतक लखनकी सादी नही हुइ तबतक रजीया लखनकी बीवी बनकर उनका बीस्तर गरम करती रही..

देवायत : (हसते सर पकडते) ओह गोड.. इतना तो पुनोने मुजे कहाथा की लखन रजीया रीलेशनमे हे.. पर ये पता नही थाकी दोनोने सादी करली हे.. मेरे ही घरमे इतना कुछ हो रहा हे.. ओर मुजेही नही पता.. मंजु.. तुजेतो सब पता चलजाता हे.. तो फीर तुमने लखनको क्यु नही रोका.. कोइ खास वजह..?

मंजुला : (आइसक्रिम खाते हसते) जानु.. क्या मे आपको रोक रही हु..? तो फीर लखनपे क्यु पाबंदी लगाउ..? उसेभी अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेका अधीकार हे.. ओर मत भुलो.. वोभी आपका भाइ हे.. ओर जानु.. हमारी रजीयाकी जींदगीभी सवर जायेगी.. हमने दया ओर रजीयाको कभी हमारी नौकरानी नही माना.. तो उनकेभी कुछ सपने होगे.. तो क्या हम उन दोनोके सपने पुरे नही कर सकते..?

देवायत : (मु्स्कुराते) मंजु.. हम रजीयाका सपनातो पुरा कर सकते हे.. लेकीन दया..? वोतो बेचारी पुनोके साथ चली जायेगी.. तो उनका क्या होगा..? क्या उनके बारेमे तुने पता हे..?

मंजुला : (हसते) हां जानु.. जीस तराह रश्मीभाभी चंपाभाभी अभी आपकी सीक्रेट बीवीया हे उसी तराह दयाभी आपकी सीक्रेट बीवी होगी.. पुनो खुद आप दोनोकी गांधर्वसादी करवा देगी.. ओर दया आपसे प्रेगनेन्टभी होगी.. क्युकी मत चुलो.. वोभी आपकी बहेन हे..

देवायत : (हसते) हंम.. मंजु आइ अ‍ेम सोरी.. मे सब समज गया.. ना जाने कीतने रीस्तोको मुजे नीभाना पडेगा.. मुजे लखनको रोकनेके लीये तुजे नही कहेना चाहीये था.. लखनको मेने अ‍ेक मजदुरनकी लडकीसे भी प्यार करते देखा हे.. ओर वो उन छोटुकी बीवीके साथभी रीलेशनमे हे जो पहेले रश्मीभाभीके यहा नोकरी करती थी.. सोरी मंजु..

मंजुला : जानु.. प्लीज.. सोरी मत कहो.. आगेतो इनसेभी ज्यादा बहुत कुछ होने वाला हे.. तब आप क्या करोगे..? लखनका हमारे गांवकी अ‍ेक ओर लडकीके साथभी चकर हे.. जानु.. अगर कीसीके भी रीस्तेके बारेमे आपको पता चले तो दुखी मत होना.. क्युकी जोभी होगा वो दोनोकी आपसी रजामंदीसे होगा.. तो क्यु दुखी होना..? जो होता हे होने दो.. ओर देखते जाओ..

देवायत : मंजु.. बात वो नही हे.. बस मुजे लताकी चीन्ता हो रही हे.. जब उसे पता चलेगा तब उन बेचारीपे क्या गुजरेगी..? कही. वोभी हमारी भावुकी तराह नाराज होगइ तो..? तो फीर हम क्या करेगे..?

मंजुला : (हसते) जानु.. अ‍ेक बात कहु.. कोइ भी चीज बीना वजह नही होती.. अगर रजीया लखनकी जींदगीमे आइ हे तो फीर उनकीभी कुछ वजाह होगी.. तभी तो लता लखनसे दुर होपायेगी.. क्या वोभी आपको प्यार नही करती..? जानु बुरा मत मानना.. पीछले कुछ दिनोसे उनका लगाव आपकी तरफ बढ गया हे.. वो मनही मन आपको चाहने लगी हे.. ओर अ‍ेक वक्त अ‍ैसाभी आयेगाकी वोभी आपसे सादी करके आपके साथ रीलेशनमे आजायेगी.. ओर वही हमारे पोतेकी चहीती रानीको जन्म देगी..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु..? तुमतो बहुत कुछ जानती हो.. क्या मुजे आगेका बता सकती हो..?

मंजुला : नही जानु.. कुछ बाते हे जो आपको सुख दे सकती हे.. तो कुछ बाते अ‍ैसीभी हे जो आपको दुखभी दे सकती हे.. ज्यादा जाननेकी कोसीस मत करो.. जोभी होता हे होने दो ओर देखते जाओ.. जानु.. हमे गांव वालोको समजाना हे तो हमे अपने घरके रीस्तोकोभी अपनाना पडेगा.. तभीतो हम दुसरोको समजा सकेगे.. अब चलो भी उन लोगोके आनेका टाइम होगया हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते खडे होते) मंजु.. ठीक कहा तुमने.. आज तुमसे ओर बाबासे बाते करते बहुत मजा आगया.. बहुत कुछ नया जाननेको मीला.. बस अ‍ैसेही बाते मुजे बताती रहेना.. अब हमारे घरके भी कीसी रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही करुगा.. ताकी मुजेभी आगे चलनेमे पता चले.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां जानु.. जो जरुरी बाते हे वो सब बाते मे आपको बताती रहुगी.. हें.. हें.. हें.. बस आपकी तो मोजही मोज हे.. पता नही आपकी जींदगीमेभी कीतनी लडकीया ओर औरते आयेगी.. सबको आपको वही सुख देना हे.. बस आपतो अपना फर्ज नीभाते जाइअ‍े.. अब चलीयेभी.. हें..हें..हें..

कहातो देवायत हसते हुअ‍े बहार नीकलने लगा तो मंजुभी उनका हाथ पकडके साथ चलने लगी.. दोनोने काउन्टरपे बील पे करदीया ओर ट्रावेल्सकी ओफीसपे आगये.. तब कुछ ही देरके बाद अ‍ेक लक्जरी बस आकर खडी होगइ.. तो उनमेसे सभी कपल खुस होकर हसते हुअ‍े नीकलने लगे.. तब लखन लता ओर धिरेन पुनमभी अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके नीचे उतर गये.. तो पुनमने मंजु ओर देवायतको देख लीया..

तो पुनम जोरोसे भाभी.. कहेते धिरेनका हाथ छोडकर दोडती हुइ देवायत मंजुके पास आगइ.. ओर मंजुके गले लग गइ.. फीर सरमाते हसती हुइ देवायतके पास चली गइ.. ओर अ‍ेक नजर उनको देखते हसते हुअ‍े वही खडी रही.. ओर अचानक पुनम देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तब धिरेन हसते हुअ‍े दोनो भाइ बहेनका मीलन देखता रहा.. तब उनको नही पताथाकी पुनम अपने भाइको नही अपने पहेले पती ओर अपने यारको मील रही हे..

तबतक लखन धिरेनभी दोनोके पैर छुकर वही खडे रहे तब लताने मंजुके पैर छुलीया तो मंजुने उसे खडी करके अपने सीनेसे लगालीया.. ओर लता सरमाती देवायतके पास चली गइ.. ओर उनके पैर छुने लगी.. तब देवायतने उसे कंधेसे पकडकर रोकके अपने गले लगा लीया.. तब लताने देवायतको कुछ ज्यादाही बाहोमे भीचलीया.. ओर हसने लगी.. फीर चारोने अपना सामान बसकी डीकीसे नीकाल लीया.. ओर वापस दोनोके पास आगये..

पुनम : (हसते) भाभी.. अब चले..? हमारा सभी सामान लेलीया हे..

मंजुला : (हसते) अरे हां चलो.. चलो.. बाबा हमतो आधे घंटेसे आप सबका इन्तजार कर रहे हे.. आपका सामान कारमे रखदो.. वही कार खडी हे.. चलो..

लता : (धीरेसे मंजुके साथ चलते) भाभी.. क्या हम नीलुको मीलकर चले..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) नही लता.. हम उनको मीलकर ही इधर आये हे.. तेरे भाइने उसे कुछ पैसे दिये हे.. ओर अभी खतरा भी साथमे हे.. हें..हें..हें.. तु समज गइनां..?

लता : (हसते) हां भाभी.. सब समज गइ.. अब देखना उनकी सकल कैसे होजाती हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सामान कारमे रखते) भाइ.. अब सीधे हमरे गांवही जाना हेनां..? वो नीलुके पास जाना हे..?

देवायत : नही लखन.. हम उनको मीलकरही इधर आये हे.. वहा जानेकी कोइ जरुरत नही हे.. वो वहा ठीक हे.. अब सीधे गांवही चलना हे.. वहाभी आज बहुत काम हे..

कहातो धिरेन तो मायुस होगया.. लेकीन आज लखनभी ना सुनके कुछ नीरास होगया.. तब मंजु ओर लता दोनोही धिरेनपे नजर गडाये हुइ थी.. जैसेही उनकी सकलपे बाराह बज गये दोनोही अ‍ेक दुसरेकी सामने देखकर हसने लगी.. ओर कारमे बैठने लगी.. तब पुनमभी सबकुछ समज गइ.. ओर लता मंजुकी ओर देखते वोभी हसते हुअ‍े कारमे दोनोके पास बैठ गइ.. तो लखनने धिरेनको आगे देवायतके पास बीठा दीया ओर खुद पीछेकी सीटमे चला गया.. ओर देवायतने कारको गांवकी ओर जानेदी.. तब कारमे..

मंजुला : (हसते) धिरेनभैया.. लखन.. कहो कैसा रहा आपका हनीमुन ट्रीप..? हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) दीदी.. वहा हमने खुब अ‍ेन्जोय कीया.. टुर वालोने हमे बहुन जगाहपे घुमाया.. वहा केसीनो बेसीनो.. साइट सीन.. वहा बहुत कुछ देखनेके लीये हे.. ओर होटेलभी मस्त थी..

मंजुला : (हसते) चलो अच्छा हे.. यानीकी कुल मीलाके आपका हनीमुन अच्छा रहा.. अब कहो आगेका क्या प्रोग्राम हे आपका..? बस कलके दिन रुकना हे.. फीर तुम दोनो मीया बीवी आजाद.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) दीदी.. क्या कल सृती दीदी ओर भैयाकी सादी हेनां..?

मंजुला : (हसते) हां लता.. हम दोनो सुबहसेही नीकलेहे.. सुबह हम बाबाके पासही थे.. ओर खाना खाकर आप लोगोको लेने चले आये.. कल फीर हम सबको यहा आश्रमपे आना हे.. अभी सबको कहेनाभी बाकी हे..

पुनम : (हसते) भाभी.. क्या वंदु चारुभाभी ओर नीशाकोभी कहेना हे..?

मंजुला : (हसते) हां पुनो.. वो रश्मीभाभीको भी कहेना हे.. मतलब हमारे नजदीक जीतनेभी लोग हे सबको लेकर यहा आना हे.. जब सादी होजायेगी.. तब तुजे ओर धिरेनको अपने घर रहेना होतो चले जाना..

धिरेन : दीदी.. अब मुजे बेन्कपे भी जाना पडेगा.. क्युकी सीर्फ तीन चार दिनकी छुटी लेकर ही आयाथा.. येतो जीजुने ये सब प्रोग्राम फीक्स करदीया तो फोन करके बता दीया हे.. अब मुजे ओर छुटी नही मील सकती तो मे ओर पुनो सादीसे सीधेही घरपे चले जायेगे..

मंजुला : (हसते) हां भाइ कोइ बात नही.. कल हम दयाका सामान भी साथ लेलेगे.. ताकी वोभी तुम्हारे साथ आजाये.. अब दया वही रहेगी.. ताकी पुनोको काम काजमे हेल्प कर सके..

धिरेन : जीजु.. अब अ‍ेक हप्तेमे घरभी देख लुगा.. अगर पुनोको पसंद आजाये तो आप आजाना.. ओर सौदा कर लेना.. मुजे बेन्क हाउसींग लोन दे रहा हे.. तो इसी बहाने अ‍ेक प्रोपर्टी ओर होजायेगी..

देवायत : (हसते) हां धिरेन तुम ओर पुनम देखलो.. अगर पसंद आजाये तो मुजे कहेना मे आजाउगा..

अ‍ैसीही बाते करते सब अपने गांवकी ओर जा रहेथे.. तब पुनम मंद मंद मंजुकी ओर देखकर मुस्कुरा रहीथी.. क्युकी उन दोनोको पता थाकी धिरेन ये घर क्यु ले रहा हे.. ओर पुनमको अपने भाइको जल्द मीलनेकी संभावना दीखने लगी.. तब अ‍ेक बार फीर उनके साथ मीलन करनेकी बेकरारी बढ गइ.. ओर यही सब सोचते उसे अपनी चुतपे गीलापन महेसुस होने लगा.. तब वो खुब सरमाइ..

तो दुसरी ओर लताभी बात करते बार बार देवायतको चोर नजरसे देखती रही.. तो पुरे रास्ते धिरेन नीलमके बारेमे सोचता उनको मीलनेकी आगेकी प्लानींग करता रहा.. तो दुसरी ओर जबसे लखनने लतासे नीलम ओर धिरेनके बारेमे सुना तबसे ही लखनके लीये नीलमको फसाना बहुत आसान हो गयाथा.. वो नीलमको ब्लेकमेइल करके बहुत आसानीसे अपने नीचे लीटा सकता था..

यही सब सोचते वोभी नीलमको जल्द से जल्द मीलनेकी प्लानींग करता रहा.. इसीलीयेतो आज उसने देवायतको नीलमसे मीलनेकी बात कही.. लेकीन सबके बारेमे देवायत मंजुसे बहुत कुछ जान चुकाथा.. ओर देवायतने सबको नीलमको मीलनेके लीये मना करदीया.. देवायतभी जानताथा की धिरेन ओर लखनको नीलमको मीलनेके लीये ज्यादा दिन दुर नही रख सकता.. सब अपे अपने विचारोमे खोये हुअ‍े थे.. तब लता पुनम ओर मंजुला धीरेसे बाते करती रही.. ओर सब लोग हवेलीपे आगये....

कन्टीन्यु
 
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