Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 16 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११८/२

तब लखनका लंड लताकी चुतपे दस्तक देते ठोकर मारने लगा.. तो लताने खुद उनकी नीकरको नीकाल दीया.. लखनने लताको इतनी बार चोद लीयाथा.. जीनकी वजहसे लताकी सब सरम चली गइ थी.. तो वो खुद लखनको साथ देने लगी.. ओर नीकर नीकालतेही धीरेसे लखनके लंडको अपनी मुठीमे पकड लेती हे.. फीर लंडको अपनी चुतपे दो तीन बार घीसते अपनी मंजीलका रास्ता दीखाते चुतके लव होलपे सेट कर देती हे.. तभी लखनने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड लताकी चुतमे उतार दीया तो लताकी चीख नीकल गइ..

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उपरकी मंजीलमे लास्टके दोनो रुममे सुहागरातका दौर चल पडा.. तो इधर देवायत भुमी नीर्मला ओर रश्मी हवेलीसे नीकलतेही आपसमे सादीकी बाते करते रश्मीके घरकी ओर जा रहेथे.. नीर्मला ओर भुमी इसीलीये देवायतके साथ आइथी की वो देवायतको भुमीकी प्रेगनन्सीके बारेमे बात कर सके.. भुमीका अबभी देवायतके साथ सटकर चल रहीथी.. ओर बीच बीचमे उनका हाथभी पकड लेती थी.. चारो बाते करते रश्मीके घर आगये..

रश्मी : अंदर आइअ‍े.. आपको मे मस्त चाइ पीलाती हु.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) रश्मी रहेने दे फीर हमे नींद नही आयेगी.. तो तुजे हमे कंपनी देने वापस आना पडेगा.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) नही रश्मी आज तु चाइही बनादे.. भलेही हमे जागना पडे.. हम बाते करेगे.. वैसेभी कलतो घर जानाही हे.. ओर आजतो देवु भी जागेगा.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे.. मे क्यु जागुगा..? आप दोनोही जागना मुजेभी कल सहेरमे जाना हे..

रश्मी : (अंदर आते जोरोसे हसते) क्यु..? घरमे आज दो दो सुहागरात मन रही हे तो तीन ही सही.. आपभी फीरसे अपनी दोनो बीवीओके साथ सुहागरात मना लेना.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) रहेने दे रश्मी.. वरना सुबह मेरी बेटी ओर बहेन दोनोकी हालत खराब होगी.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) कमीनीओ धीरे बोलो.. कोइ सुनलेगा.. हें..हें..हें..

रश्मी : (हसते) बुआ.. कोइ बात नही.. यहा सुनने वाला कोइ नही हे.. ओर सुनता हे वो खटीयामे पडा हे..

चारो मस्ती मजाक करते रश्मीके घरमे आगये ओर सोफेपे बैठ गये तब रश्मी सबके लीये पानी लेकर आ गइ.. सभीने पानी पीयातो कीचनमे चली गइ ओर फटाफट चाइ बनाने लगी.. तभी मौका देखतेही नीर्मला ओर भुमीका देवायतके पास अगल बगलमे उनसे सटकर बैठ गइ.. तो देवायत दोनोकी ओर सवालीया नजरोसे हसते हुअ‍े देखने लगा.. तब भुमीका सर्माने लगी.. तो नीर्मलाने धीरेसे कहा..

नीर्मला : देवु.. आप बहुत कमीने हो.. कोइ अपनी बीवीके साथ अ‍ैसा करता हे..?

देवायत : (हसते आस्चर्यसे) अरे.. मेने क्या कीया..?

नीर्मला : (धीरेसे हसते) जब मेने आपको भुमीके लीये कहाथा तो आपतो मना कर रहे थे.. ओर दोनो कबसे रीलेशनमे हो..? तो मुजे सब सच नही बता सकते..? मे आपको मना थोडीना करती..?

देवायत : (हसते) ओह.. तो आखीर आपको सब पता चल गया.. सोरी नीमु.. भुमीने मुजे अपनी कसम देदीथी.. तो मे उनकी कसम कैसे तोड सकता हु.. क्या इस बारेमे दोनोमे बात होगइ..?

भुमीका : (सरमाते हसते) हां देवु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे मजबुरन नीमुको सब सच बताना पडा.. वरना मे हमारे रीस्तेको कीसीके सामने उजागर करना नही चाहती थी.. सोरी..

देवायत : भुमी.. मजबुरन मतलब..? अ‍ेसी कोनसी मजबुरी थी..? तुमने नीमुको सब सच बता दीयातो मुजे कोइ फर्क नही पडता.. उल्टा मेतो इस बातपे खुस हुकी हम हमारे रीस्तोको आपसमे अ‍ेक्सेप्ट करते खुस हे..

नीर्मला : देवु.. आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी.. बात थोडी सीरीयस हे.. तो यहाकी.. हम रास्तेमे बाते करे..?

देवायत : नीमु.. यहा कोइ खतरा नही.. ये मेरी सीक्रेट जगाह हे.. मेरा रश्मीके साथभी सब रीलेशन हे.. ओर मे मेरी सीक्रेट बीवीओको यही मीलता हु.. तो कहो.. क्या सीरीयस मेटर हे.. क्या कोइ गंभीर बात हे..?

नीर्मला : (आस्चर्यसे) रश्मीभी..? (देवायतकी जांगपे चपत लगाते) तुम कीतने कमीने हो.. अ‍ैसी कीतनी सीक्रेट बीवीया रखी हे..? ठरकी कहीके.. हम सबको ठोकते हो.. फीरभी आपका जी नही भरता.. चुदडक कहीके..

देवायत : (सीरीयस होते) नही नीमु.. जो खुबसुरत दीखती हे वो सबके साथ मे रीलेशन नही रखता.. बाबाने मुजे कुछ जीम्वेवारी दी हे.. बस उसीको नीभा रहा हु.. ओर वोभी मंजुके कहेनेपे.. जो समाजसे दुखी हे ओर वो सामनेसे आतीहे उनके साथही मे रीलेशन रखता हु.. ओर मेरे साथ रीलेशनमे वोही आती हे जो मेरे साथ पीछले जन्ममे साथ थी.. आपभीतो वही हो.. ओर आप दोनोको तो मे प्यार करताथा इसीलीये आपके साथ रीलेशन हे.. अगर मेरे दुसरे रीलेशनसे आपको दुख हुआ हे तो सोरी.. मुजे माफ करदो..

नीर्मला : (हग करते) नही देवु.. आप माफी मांगकर मुजे सर्मीन्दा मत करो.. हमे आपके कीसीभी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही.. हम दोनोही आपके सबारेमे सबकुछ जानती हे.. तो माफी मत मांगो.. मेतो मजाक कर रही थी.. मुजे पता हे रश्मीभी हम मेसे अ‍ेक हे..

तभी देवायत दोनोके कंधेपे पीछे हाथ लेजाते अपनी ओर खीच लेता हे ओर बारी बारी दोनोके गालपे कीस कर देता हे तब.. भुमीका अ‍ेक लडकीकी तराह सर्मसार होगइ.. तो नीर्मलाभी सरमाकर हसने लगी.. तब रश्मी चाइ बनाते कीचनसे अ‍ेक विन्डोसे तीनोकी हरकत देखते हसती रही.. लेकीन तीनो बहुत धीमी आवाजमे बाते कर रहे थे.. तो वो कीचनसे ही तीनोकी बाते सुननेकी कोसीस कर रहीथी..

देवायत : (हसते) हंम.. अब बताओ.. आप दोनो कीसलीये परेसान हो..?

नीर्मला : (थोडी गभराते धीरेसे) देवु.. भुमी.. सी इस प्रेगनेन्ट.. अभी १० से १२ दिन हुअ‍े हे.. जब आप दोनो पीछली बार मीलेथे तबही वो पे्रगनेन्ट हुइथी.. ओर तब वो आइ पील लेना भुल गइथी.. तो पेटसे होगइ.. कलसे उसे उल्टीया होने लगी हे.. मेने ओर मंजुने उसे टेबलेट देदी हे.. मंजुभी इस बारेमे जानती हे..

देवायत : (बहुतही खुस होते भुमीको बाजुसे कसते) क्या..? भुमी.. क्या ये सच हे..? आइ लव यु.. आज तुमने मुजे बहुतही बडी खुस खबर दी हे.. लव यु सो मच..

भुमीका : (आंखमे आंसु बहेने लगे) नही देवु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे ये बच्चा नही चाहती.. सृतीको क्या मुह दीखाउगी.. अभी कलतो सृतीके साथ आपकी सगाइ हुइ हे.. अगर उसे हमारे रीस्तेके बारेमे पता चल गया ओर वो नाराज होजायेगी.. वो अपना रीस्ता तोड देगी..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) भुमी..? तुमनेभी मुजे वादा कीयाथा.. की अगर इस उमरमे बच्चा होता हे तो मे उसे पैदा करुगी.. चाहे जो भी परीणाम आये.. क्या तुम अपना वादा भुल गइ..? अ‍ेकना अ‍ेक दिनतो सृतीको पता चलनाही था..

भुमीका : (देवायतसे लीपटकर आंसु बहाते) नही देवु मे कुछभी नही भुली.. मुजे अपना सभी वादा आजभी याद हे.. बस सृतीके आपके रीस्तोकी वजहसे मुजे ये फैसला लेना पडा.. अब आपही कहो मे क्या करु..?

नीर्मला : (उसे सांत करते) भुमी क्या कर रही हे.. वहा अंदर रश्मी हे.. सुनलेगी.. सांत होजा..

देवायत : नही नीमु रश्मीकी कोइ टेन्शन नही हे.. वोभी आप दोनोकी तराह मेरी बीवी हे ओर मेरे होने वाले बच्चेकी मां भी हे.. वोभी बांज थी.. तो मंजुके कहेनेपे इसे भी बच्चा देदीया.. सी इस प्रेगनेन्ट..

नीर्मला : (सोक्ट होते) क्या..? मंजुने कहा हे..? आइ कान्ट बीलीव.. मंजुभीनां..

भुमीका : (अपने आंसु पोछते) हां नीमु.. मत भुलो हम सब कोइ सामान्य ओरते नही हे.. मंजुने मुजे बहुत कुछ बताया हे.. तो रश्मीभी हममेसे अ‍ेक हे.. उनकाभी इतना ही देवुपे हक हे जीतना हम दोनोका हे.. अब ये सोचोकी मुजे क्या करना हे.. मे सृतीको कैसे समजाउगी.. की इस बच्चेका बाप कौन हे..

नीर्मला : भुमी.. तुम उनकी टेन्शन मतलो.. उसे मंजु सब समजा देगी.. हमारी सृती बहुतही समजदार हे.. लेकीन ये दोनोकी सादी तक हमे ये बात छुपानी पडेगी.. जब अ‍ेक बार ये दोनोकी सादी होजायेगी तो उसेभी बहुत कुछ ज्ञात होजायेगा ओर ये बात वो अ‍ेक्सेप्ट करलेगी.. क्या कहेते हो देवु..?

देवायत : हां भुमी.. नीमु ठीक केह रही हे.. मुजे जल्दसे जल्द सृतीसे सादी करनी पडेगी.. वरना ये बात हम ज्यादा दिन नही छीपा सकते.. ओर मुजे यकीन हे मंजु उसे समजा देगी..

भुमीका : (चींतीत होते) देवु.. अगर सृतीने इसे अ‍ेक्सेप्ट नही कीयातो..? मेतो बरबाद होजाउगी.. मेरे पास मरनेके अलावा कोइ रास्ता नही बचेगा..

नीर्मला : (थोडी गुसेमे) पागल होगइ हो क्या..? तु कैसी बाते कर रही हे..? कमीनी तेरी जगाह मे होतीतो राजीवसेभी मुकाबला करलेती.. बात करती हे.. अगर सृतीने तुजे कुछ कहातो तुम मेरे पास चली आना.. हम वहा तेरी डीलीवरी करेगे.. ओर तुम मेरे साथही रहेना.. कमीनी आजके बाद मरनेकी बात कीतो मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. बात करती हे..

देवायत : (आंख गीली करते) भुमी.. अब तुमसे मे क्या कहु.? क्या तु मरजायेगी तो मे तेरे बीना जीन्दा रेह पाउगा..? कुछ उल्टा सीधा मत सोच.. तुजे नीमुने कहा वोही कर.. मे तुम दोनोको नीमुके घर मीलता रहुगा..

नीर्मला : हां भुमी.. तु बहुत नसीबवाली हेकी हमारे देवुका बच्चा पैदा करेगी.. मत गीरा इसे..

तभी रश्मी चाइ लेकर आती हे तो नीर्मला ओर भुमीका सही होकर बैठ जाती हे.. तब रश्मी नीचे घुटनेके बल बैठकर तीनोको चाइ देने लगी.. ओर खुदके लीयेभी लेली.. फीर चारो चाइ पीने लगे तबतक रश्मी चाइ पीते चोर नजरसे कभी देवायतको तो कभी भुमीकाकी ओर देखती रही.. जब सबने चाइ पीली तो रश्मी सभी खाली कप लेकर कीचनमे चली गइ.. ओर फोरन वापस आतेही भुमीकाके पास नीचे घुटनोके बल बैठ गइ..

रश्मी : (सरमाते धीरेसे भुमीका हाथ थामते) बुआ.. माफ कीजीयगा मेने आप लोगोकी सारी बाते सुनली.. ओर आप नीस्चीत रहीये.. ये बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. बस आपसे अ‍ेकही बीनंती हे..

नीर्मला : (आस्चर्यसे देखते) क्या..?

रश्मी : (सरमाते हसते) बुआ.. मुज जैसी अ‍ेक बांजको पुछीयेकी हमारे लीये अ‍ेक बच्चेकी अहमीयत क्या हे.. आप बहुत खुसनसीब हेकी हमारे पतीका बच्चा आपके पेटमे पल रहा हे.. अगर आपको कोइ फेमीली प्रोबलेम हेतो मेरे घरके दरवाजे हमेसा आपके लीये खुले हे.. ओर बच्चे रखनेकी प्रोबलेम हेतो आप ये बच्चा मुजे दे दीजीये.. मे इसे गोद लेकर पालुगी.. आप इस बच्चेको मत गीराइअ‍े.. मे आपसे हाथ जोडती हु..

रश्मीकी अ‍ैसी मनत देखते भुमीकाकी आंखसे फीरसे आंसु बहेने लगे.. ओर वो फोरन खडी होगइ.. ओर रश्मीको खडी करते उनको गले लगा लीया.. ओर उनके कंधेपे सर रखते आंसु बहाती रही.. तो नीर्मलाभी खडी होकर भुमीकी पीठ सहेलाते उसे सांत करने लगी.. तो भुमीका आंसु पोछते वापस सोफेपे बैठ गइ ओर रश्मी भुमीके लीये पानी लेने चली गइ तब नीर्मलाभी अपनी सारी सही करते भुमीके पास बैठ गइ..

नीर्मला : (हसते) देखा भुमी.. वहा कौन अपना ओर कौन पराया हे हमे पताही नही चलता.. सब हमारे हे अ‍ैसा लगता हे.. देवुभी क्या चुन चुनकर बीवीया लाया हे.. हमतो इसे पाकर धन्य होगइ..

रश्मी : (पानी देते) लीजीये बुआ पानी पीजीये ओर वहा बाथरुम हे वहा जाकर अपना मुह धो लीजीये.. ओर सृती दीदीकी चीन्ता मत कीजीये.. अगर वो थोडी नाराजभी होगी तो ज्यादा दीन तक हमारे पतीसे अलग नही रेह सकती.. जब हम नही रेह सकती तो वो कैसे इनसे दुर रेह सकती हे..? कुछही दिनोमे वो सब भुल जायेगी ओर उनकी नाराजगी दुर होजायेगी.. वो बहुतही अच्छी लडकी हे..

नीर्मला : (हसते) अरे जो बात हुइ ही नही उनके बारेमे ज्यादा क्या सोचना.. हो सकता हे हम जो सोच रहेहे वो होगाही नही.. मेरी मंजु उसे सब समजा देगी.. फीर हाल तो हमे इन दोनोकी सादी तक सब छुपाना हे बाकीकी बात बादमे सोचेगे..

रश्मी : (हसते) ठीक कहा दीदी आपने.. बुआ ज्यादा कुछ मत सोचीये जो होता हे होने दीजीये..

देवायत : (हसते) भुमी.. सब ठीक केह रहे हे.. आनेदे हमारे बच्चेको इस खुबसुरत दुनीयामे..

भुमीका : (खाली ग्लास रश्मीको देते) ठीक हे.. अब जो होगा देखा जायेगा.. थेन्क्स रश्मी.. लेकीन याद रखना इस बातका कीसीको अभी पता ना चले.. मे इस बच्चेको जन्म दुगी.. ओर नीमु.. अगर कुछ हुआ तो मे तेरे साथ रहेने आजाउगी.. ओर अब तुभी उधर आती जाती रहेना.. अब मे जल्दही सृतीकी सादी कर देना चाहती हु.. कहो देवु कब करनी हे सादी..?

नीर्मला : (हसते) अरे बाततो होगइ हे.. मंजुने नही कहाकी अगले हप्ते हम सादी आश्रममे कर देगे.. कमीनी हमभी तो तीन दिनके बाद उधर आ रहे हे.. तु अकेली सब तैयारीया थोडीना करलेगी.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमते हसते) हां.. आजा.. अबतो तुभी मेरी सौतन हे.. हें..हें..हें.. दोनो इनको बुलाकर खुब मजे करेगे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सर्मसार होते जांगपे अ‍ेक चपत लगाते) कमीनी.. तु प्रेगनेन्ट हे.. कीतनी ठरकी होगइ हे..? कुजतो सरम कर.. रश्मी इधर बैठी हे..

रश्मी : (हसते) दीदी.. इस मामलेमे मे बुआके साथ हु.. देखो वो मेरा रुम.. बस इसी बातके लीये रखा हे.. अगर अभी आपको इसे मीलना होतो तीनो चले जाइअ‍े वहा.. मेतो इनको मेरे पतीके सामनेही मीलती हु.. ताकी उस कमीनेको भी पता चलेकी इनकी बीवीको कोइ ठोकता हे तो कैसा लगता हे.. इसी राजाने उनकी बीवीको पेटसे करदीया हे.. साला नामर्द कहीका..

नीर्मला : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? तुम दोनो तेरे पतीके सामने करते हो.. ओह गोड.. हें..हें..हें..

रश्मी : (हसते) हां दीदी.. मुआ खटीया मे पडा हे.. वो अकेला हील भी नही सकता.. गावंकी बहुत सारी लडकीया ओर ओरतोको मजबुर करके उनकी जींदगी बरबाद कर चुका हे.. अब उनके पापोकी सजा खटीयामे पडे भुगत रहे हे.. ताकी उसेभी पता चलेकी दुसरेकी बीवीयाको खराब करते कैसा लगता हे.. कमीनेका उनकी बहेनके साथही चकर था.. फीरभी साला मेरे पले पड गया.. येतो अच्छा हुआ मुजे इस देवर मील गये.. ओर मेरी कोख भरदी..

भुमीका : रश्मी.. थेन्क्स अगेइन.. तेरी बातोसे मुजपे हीमत आगइ.. अबतो कुछभी होजाये मे इस बच्चेको इस दुनीयामे लाकरही रहुगी.. फीर सृतीसे भी क्यु बगावत करना पडे.. मे इस बच्चेको जन्म दुगी..

फीर तीनोही वहासे नीकल गये.. तो पुरे गांवमे सनाटा ओर अंधेरा छाया हुआथा तो देवायतकी दोनो ओर चलते नीर्मला ओर भुमीने उनका हाथ थाम लीया.. जैसे कोइ प्रमी हो.. तीनोही खुस होते बाते करते हवेलीकी ओर जा रहेथे.. तब उस गली आतेही जहा भुमीका ओर देवायतने खडे खडे पीछली रात चुदाइ करली थी.. तो भुमीका सरारतसे हसते देवायतको खीचकर गलीमे लेजाने लगी..

तो देवायत समज गया ओर भुमीको वापस खीचकर हवेलीकी ओर चलने लगा तो नीर्मला आस्चर्यसे दोनोकी ओर हसते हुअ‍े देखने लगी.. तब भुमीकाने नीर्मलाको सबकुछ बता दीया.. तो नीर्मला जुठा गुसा करते भुमीकाको मारने लगी.. तब भुमीका हसती हुइ देवायतके आसपास नीर्मलासे बचते चकर लगाती रही.. ओर तीनो मस्तीया करते हवेलीकी ओर जाने लगे.. तब देवायतने हसते हुअ‍े कहा..

देवायत : (हसते) नीमु.. पता हे.. भुमी तुमसेभी ज्यादा ठरकी हे.. उसे हर वक्त चुदाइ करनी होती हे..

भुमीका : (हसते) हांतो मेरे पतीसे चुदवाती हु.. दुसरोसे थोडीना चुदवाती हु.. बात करते हे..

नीर्मला : (हसते) हां तभीतो कमीनी प्रेगनेन्ट होगइ.. मुजसे बहुत छुपाया.. अब भुगतना.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां.. उस दिन मे आइपील लेना भुल गइ थी.. नीमु पुरे दिनमे हमने चार बार कीया..

नीर्मला : (हसते) कमीनी तुमतो बातोसेही मुजे गरम कर दोगी.. देवु.. चलोना आज हमारे साथ सोने.. हम तीनो पुरी रात मजे करेगे.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. अबतो भुमी भी साथ हे..

देवायत : (हसते) नही वहा जोखीम हे.. ओर मत भुलो मंजुको सब पता चल जाता हे.. आज तेरी बहेनको चोदना हे.. हम हमारी सुहागरातके बाद मीलेही नही.. उसका बेटा आज भलेही मेरी बहेनको चोदे.. मेभी उनकी मा को चोदकर बदला ले लुगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सर्मसार होते हसते) तुम कीतने कमीने हो.. अबतो वो मेरा बेटा हे.. तो इस मा के बारेमे भी कुछ सोचो.. ओर अबतो साथमे उनकी मौसीभी हे.. उनकी मा ओर मौसी दोनोको चोदलो.. हम दोनो तैयार हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : नीमु.. वैसे तुमभी कल मेरे साथ चल.. सृतीतो क्लीनीकपे चली जायेगी.. ओर देवुभी कल सहेर कीसी कामकी वजहसे आ रहा हे.. तो हमारे पास साम तकका वक्त होगा.. हम तीनोही मजे करेगे..

देवायत : (हसते) नही भुमी कल भानु वंदना रश्मी ओर नीलमभी साथमे होगे.. ओर वो चारोको भी छोडने जाना हे.. पुरा दिन काममे नीकल जायेगा.. मे बादमे आजाउगा.. अबतो हमारे पास बहुत मौके आयेगे.. अ‍ेकबार सृतीसे सादी होजाये तो वहाभी आना जाना लगा रहेगा..

नीर्मला : (हसते) देवु आपकेतो मजे हे.. फीर रातमे बेटी तो दिनमे उनकी मा.. दोनोको चोदते रहो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जुठे गुसेसे मुका मारते) कमीनी तो तुमभी मां बेटी इनसे चुदवाती हो.. मुजसे क्यु कहेती हे.. अरे हां.. नीमु.. ये भावुका क्या हे..? उसे कुछ प्रोबलेम हे क्या..? पुरी सादीमे मुजे नीरास लग रही थी.. वो कन्यादानमे भी नही आइ..

नीर्मला : (सीरीयस होते) हां भुमी.. जबसे भानु ओर रमाकी सादी हुइ तबसे भावुने भानुसे सब रीलेशन खतम करलीये हे.. अब मुजे नही लगता वो दोनो साथमे रहे..

देवायत : नीमु इसीलीये मेने आपका मकान भावुके नाम करनेको कहाथा.. मेरी मंजु बहुत कुछ जानती हे..

भुमीका : नीमु तुम अ‍ेक बार मंजुको अकेली मीलकर उसे सब पुछलो.. क्या पता उनके पास कोइ रास्ता हो..

नीर्मला : (सीरीयस होते) भुमी.. मेने मंजुसे सबकुछ पुछ लीया हे.. इस बारेमे हम दोनो फुरसतमे बात करेगे..

तीनोही बाते करते हवेलीमे आगये तब पुरी हवेलीमे सनाटा छाया हुआथा.. सब लोग सो चुके थे.. सीर्फ उपरकी मंजीलमे तीन कमरेमे तीनो कपल जाग रहेथे.. भानुभी रमाकी वायाग्रा खाकर जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. तो लखनभी वायाग्रा खाकर लताके उपर चडकर उसे जमकर चोद रहाथा.. ओर लताभी छटपटाते लखनके लंडको अपनी चुतमे जेल रहीथी.. तब धिरेन अब भी पुनमके साथ ओरल सेक्समे लगा हुआ था..

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वो पुनमके पैरोके बीच बेठकर जुकते उनकी चुतको अपनी जीभसे खरोद रहाथा तो पुनमभी मदहोसीमे आंख बंध करते चदर पकडते छटपटा रही थी.. तब देवायत भुमीका ओर नीर्मला तीनोही होलमे आगये.. तो वहाभी अंधेरा छाया हुआ था.. तभी भुमीका ओर नीर्मला दोनोही देवायतकी दोनो ओर बाहोमे समाते उनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करते टुट पडी.. तो देवायतनेभी दोनोको दोनो हाथोसे अ‍ेक साथ अपनी बाहोमे भीचलीया ओर उन दोनोके होठोको बारी बारी चुमने लगा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११९/१

वो पुनमके पैरोके बीच बेठकर जुकते उनकी चुतको अपनी जीभसे खरोद रहाथा तो पुनमभी मदहोसीमे आंख बंध करते चदर पकडते छटपटा रही थी.. तब देवायत भुमीका ओर नीर्मला तीनोही होलमे आगये तो वहाभी अंधेरा छाया हुआ था.. तभी भुमीका ओर नीर्मला दोनोही देवायतकी दोनो ओर बाहोमे समाते उनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करते टुट पडी.. तो देवायतनेभी दोनोको दोनो हाथोसे अ‍ेक साथ अपनी बाहोमे भीचलीया ओर उन दोनोके होठोको बारी बारी चुमने लगा....अब आगे

तभी नीर्मलाने हसते हुअ‍े देवायतकी बाहोसे छुटते उनको धका देदीया ओर भुमीका हाथ पकडके अपने रुमकी ओर लेजाने लगी.. तो भुमीकाभी पीछे मुह करते देवायतकी ओर हसते हुअ‍े नीर्मलाके साथ चलने लगी.. ओर दोनो अपने रुममे चली गइ.. तो देवायतभी दोनोकी ओर हसते अपने रुममे चला गया.. वहा उनके बेडपे मंजु ओर चंदा दोनोही आपसमे बाते करते लेटे हुइ थी.. तब देवायत दरवाजा बंध करके बेडके पास आगया..

मंजुला : (हसते) आगये आप..? बहुत देर लगादी..?

देवायत : (चेन्ज करते) मंजु.. वो रश्मीभाभीने हम सबके लीये चाइ बनाली तो वहा बाते करते बैठे रहे..

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) देवु.. आपको सुबह सहेर जाना हे की सामको..? वो रमाभाभी पुछ रहीथी.. क्युकी नीलुका सामान भी लेना हे.. तो पुछ रही थी..

देवायत : वो ओफीसके टाइमपे जाना हे.. तो दो पहोरको लंच करकेही नीकल जायेगे.. भानुभी सुबह आनेको केह रहाथा.. तो नीलमका सामान लेकर वापस आजायेगा.. तब हम चले जायेगे.. ओर वंदना रश्मीभाभीको भी साथमे लेजाना हे.. वंदनाके ओर स्कुलके लीये कुछ पंचायतके पेपर सबमीट करना हे..

मंजुला : देवु.. आप जा रहे हो.. तो मेभी आपके साथ चलु..?

देवायत : (बेडपे दोनोके बीच आते) हां.. लेकीन विजयको छोडके..? अब सोना नही हे क्या..?

चंदा : (हसते) देवु.. मंजु आना चाहेतो इसेभी लेजाइये.. विजयको मे सम्हाल लुगी.. अबतो वो मेरे पासही रहेता हे..

मंजुला : (सोतेही उनके सीनेपे सर रखते) जानु.. बुआ ओर सृतीभी कल सुबह नीकल जायेगी.. बभ्चेलोग भी अपने हनीमुनपे चले जायेगे.. तो घर कीतना खाली खाली होजायेगा..

देवायत : (दोनोको गलेमे हाथ डालकर अपनी ओर खीचते) वो सबतो ठीक हे.. लेकीन अभी तक तुम दोनो जाग क्यु रही हो..? सोइ नही क्या..?

मंजुला : (सरारत करते हसते) जानु.. वो क्या हेनां.. आज आज धिरेनकी सुहागरात हेनां.. तो चंदा दीदी मुजसे केह रहीथी.. की हम अपनी सुहागरातके बाद तो मीले ही नही.. इसीलीये हम दोनो जाग रही हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सर्मसार होते मंजुको मुका मारते) नही.. मेने कब कहा..? कमीनी क्यु जुठ बोल रही हे..? देवु.. मेने अ‍ैसा कुछ भी नही कहा.. जानु ये जुठ बोल रही हे.. मुजे फसाना चाहती हे.. कमीनी कहीकी..

देवायत : (चंदाको अपनी बाहोमे भीचते) डार्लींग वैसेभी तुम अब फसतो गइ हो.. अब मुजसे छुटकर कहा जाओगी..? चल आज तेरी ये सीकायतभी दुर कर देता हु.. हें..हें..हें..

चंदा : (बाहोसे छुटनेकी कोसीस करते) नही.. जानु आपको सुबह जाना हेनां..? तो सो जाओ.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) दीदी इनको दोपहोरको जाना हे.. तो कल देरसे उठेगे तो चलेगा.. हें..हें..हें.. जानु.. इसे आज मत छोडना.. उपर धिरेन आपकी बहेनको ठोकता होगा.. आप आज इनकी मां को चोदलो.. लेलो अपनी बहेनका बदला हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) मंजु कीतनी कमीनी हो तुम.. अब ये मुजे छोडने वाले नही हे.. क्यु याद दीलवाया..? लगताहे आज मेरी हालत बीगडने वाली हे..

कहतो देवायतने चंदाको दबोच लीया ओर उनकी कमरपे पैर डालते उनके माथे चड गया.. तो मंजुभी बेडपे बेठ गइ ओर चंदाके कपडे खीचकर नीकालने लगी.. तब चंदा जोरोसे हसते छटपटाते मंजुको रोकती रही.. ओर कुछही देरमे मंजुने चंदाको पुरी नंगी करदीया..

ओर खुदकेभी सब कपडे नीकाल दीये.. फीर देवायतके कपडेभी नीकालकर उसेभी नंगा करदीया तब देवायतका बडा लंड जटके पे जटका मारते चंदाकी चुतपे ठोकर मारने लगा.. तो चंदा सर्मसार होते जोरोसे हसते देवायतसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही..

तब देवायत चंदाके उपर चडके उनके बुब्स मसलते उनके होठोको चुमने लगा.. तभी मंजुभी चंदाकी दुसरी ओर आते उनके अ‍ेक बुब्सको मुहमे लेकर चुसने लगी.. तब चंदा उतेजीत होकर मदहोसीमे छटपटाने लगी.. तभी देवायतके लंडने अपने बीलका रास्ता ढुंढलीया..

तो देवायतने चंदाके होठोपे लीपलोक करते अ‍ेकही जटकेमे अपने लंडको चंदाकी चुतमे उतार दीया.. तब चंदाकी जोरोसे चीख नीकल गइ ओर देवायतके मुहमे ही दब गइ.. वो बडी आंख करके देवायतके सामने देखते उनसे लीपलोक छुडवानेकी कोसीस करने लगी..

उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे तो मंजु उसे चाटकर साफ करने लगी.. चंदा दोनो हाथसे देवायके बाजुओको पकडकर छटपटाने लगी.. तब देवायत कमर हीलाते धीरे धीरे चंदाको चोदने लगा.. मंजुभी चंदाके बुब्सको मसलते मुहमे लेकर चुसने लगी.. जब चंदा सांत हुइ तब देवायत चंदाको चोदते हुअ‍े उनके पैरोके बीच बैठ गया.. ओर तेजीसे कमर हीलाते चंदाको चोदने लगा.. तब मंजुभी देवायतके पास बैठकर उनके होंठ चुमने लगी..

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चंदाके दोनो बुब्स उछलने लगे.. चंदाभी उतेजीत होकर मदहोसीमे छागइ.. वोभी अपनी कमरको उछाल उछालके देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगी.. तभी चंदाने देवायतको खीचकर अपने उपर जुकाते अपने तनसे चीपका लीया.. ओर उसे जोरोसे बाहोमे भीचते लीपलोक करते अपनी कमरको जटके देने लगी.. तब मंजु समज गइकी चंदा जड रही हे.. तो वो फटाफट पैर फैलाते चंदाके पास बीठके बल लेट गइ..

मंजुला : (धीरेसे कामुक आवाजमे) जानु.. दीदीका हो गया हे.. अब आप लधर आजाओ..

जब चंदाने देवायतके होठोको छोड दीया तब देवायत चंदाके उपरसे हटकर जटसे मंजुके उपर चड गया.. तो मंजुने देवायतका लंड पकडकर अपनी चुतके लव होलमे फसा दीया.. तभी देवायत मंजुको कीस करते अपनी कमरको पुस करता हे.. ओर अपना लंड मंजुकी चुतमे घुसाते उसे जोरोसे चोदने लगता हे.. तब मंजुभी देवायतको अपनी बाहोमे भीचते कमर उछालते मजेसे चुदवाने लगी..

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तब उपरकी मंजीलपे धिरेनने पुनमकी चुतको अपनी जीभसे खरोदते पुनमको बहुत गरम करदीया था.. जीनकी वजहसे पुनमभी जल्दसे जल्द धिरेनके लंडको अपनी चुतमे लेनेको मचलने लगी.. हालाकी उनको पताथाकी धिरेन उनको संतुस्ट नही करपायेगा.. फीरभी पुनम बडी बेसबरीसे धिरेनके लंडको अपनी चुतमे लेनेको तैयार थी.. तभी धिरेन पुनमके उपर चड गया.. ओर पुनके होठोपे होठ रखते उनके बुब्स मसलते चुमने लगा..

पुनम : (सरमाते मदहोसीमे धीरेसे) धिरेन.. बस.. बस.. अब डालदो.. तुम मुजे चोदना चाहतेथेनां..? आज अपनी पुनमको चोदलो.. अब मे आपको कभी मना नही करुगी.. प्लीज.. इस इसे अंदर डालदो.. नही रहा जाता.. आज मुजे लडकीसे ओरत बनादो..

धिरेन : (लडखडाती कामुक आवाजमे चुमते) पुनो.. मे कोन्डम लगादु..? हंम.. कुछ हो गया तो..? मे तुम्हारे साथ मजे करना चाहता हु..

पुनम : (कामुक आवाजमे सरमाते धीरेसे) नही.. धिरेन अ‍ैसेही करलो.. भले कुछ भी होजाये.. मे आपका बच्चा पैदा करुगी.. करदो मुजे प्रेगनेन्ट.. मुजे बच्चे बहुत अच्छे लगते हे.. मजेतो हम अ‍ैसेही करते रहेगे.. अबतो मे आपकी बीवी होगइ हु..

धिरेन : (मदहोसीमे) पुनो.. तु सच केह रही हेनां..? कुछ साल हम दोनो फेमीली प्लानींग करते हेनां..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही धिरेन.. हम अ‍ैसेही कर सकते हे.. चोदलो मुजे.. अब रहा नही जाता.. जो होता हे होनेदोे भलेही मे प्रेगनेन्ट हो जाउ.. मे मेरे धिरेनके बच्चेको पैदा करुगी..

तभी धिरेन पुनमको अपने लीये पागल होते देख खुस होने लगा.. ओर पुनमकी चुतपे अपना लंड पकडकर डालनेकी कोसीस करता हे.. ओर कमरको अ‍ेक जटका मारता हे लेकीन उनका लंड फीसलकर बहार गदेपे टकराया.. तो धिरेनने दुबारा कोसीस की.. लेकीन इस बारभी वो फैल होगया.. तो पुनमको मनमे हसी आगइ.. ओर उसने धिरेनकी नुनीको पकडकर अपनी चुतके लव होलमे थोडा अंदर करके फसा लीया.. ओर धिरेनकी ओर सरमाते नजरे चुराते देखती रही..

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ओर धिरेनने अ‍ेक जटका मारदीया.. ओर पुरा लंड पुनमकी चुतमे चला गया.. तब पुनमको कुछ खास फील नही हुआ.. लेकीन वो अ‍ैसे मुह बीगाडते छटपटाइ जैसे पहेली बार चुद रही हो.. वो जुठमुठका दर्दसे मुह बीगाडते छटपटाने लगी.. तब धिरेन मनमे खुस होगया.. जैसे उन्होने आज पहेली बार पुनमकी चुतकी सील तोडी हो.. वो गर्व महेसुस करते पुनमकी गरदनमे मुह डालके धीरे धीरे कमर हीलाते पुनमको चोदने लगा..

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तो पुनमभी धिरेनकी बाजुओको पकडते आहे भरते चुदवाने लगी.. आज धिरेन पहेली बार कीसी लडकीको चोद रहाथा.. उनकी जींदगीमे पहेली बारही पुनमके साथ चुदाइ हो रही थी.. धिरेन चोदनेके मामलेमे बीलकुल अनाडी था.. तो कुछही देरमे धिरेन पुनमको जोरोसे चोदने लगा.. तो पुनम समज गइ..

ओर वो जोरोसे सीसकारीया करते धिरेनको अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. ओर धिरेन कमरको जटके मारते कुछही देरमे पुनमके होठ चुमते जडने लगता हे.. ओर धिरेन पुनमके सीनेमे सर रखते ढेर हो गया.. तब पुनम धिरेनकी पीठ सहेलाती रही.. तब धिरेन बहुतही सर्मीन्दा होगया.. पुनमकी ओर देखते कहेने लगा..

धिरेन : सोरी पुनम.. क्या हेना.. ये पहेली बार हेनां.. तो थोडा जल्दी होगया.. आइ अ‍ेम सोरी..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) कोइ बात नही धिरेन.. भाभी कहेती थी.. पहेली बारमे अ‍ैसा होता हे.. दुसरी बार थोडा लंबा चलेगा.. ओर तीसरी बारमे उनसेभी लंबा चलेगा.. तो धीरे धीरे सब ठीक होजायेगा.. तो आप फीकर मत करो.. बस मजे करते रहो.. हें..हे..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते बाल सहेलाते) मुजे समजनेके लीये थेन्क्स पुनो.. मेने सोचा कही तुम जाराज ना हो जाओ.. हम कुछ देरके बाद दुबारा करेगे..

तब कुछही देरमे धिरेनका लंड सीकुडकर अपने आपही पुनमकी चुतसे बहार नीकल गया.. तब पुनम अपनी चुतको कपडेसे साफ करने लगी.. तभी बाजुके रुममे लखन वायग्रा खाकर लताके उपर टुट पडाथा.. वो अबभी लताको हीचक हीचकके जोरोसे कमर हीलाते चोद रहाथा.. तब लताकी हालतभी पतली होगइ थी.. वहा पुनम अ‍ेक बारभी नही जडी थी तब इधर लखनने लताको तीन तीन बार जडा दीया था.. ओर अ‍ेक बार लताकी चुतको भर चुकाथा..

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दोनो रुममे दोनो कपल अपने तरीकेसे बडेही मजेसे सुहागरात मना रहेथे.. तब उनसे दो रुम छोडकर भानुभी वायाग्रा खाकर अबभी रमाको जोरोसे चोद रहाथा.. ओर रमाकी हालत खराब करदी थी.. रमाको अब भानसे हर दीन चुदवानेकी आदत पड गइथी.. उसे भानुकी अ‍ैसेही चुदाइ पसंद थी.. तो नीचेकी ओर देवायतभी मंजुको चोदकर फीरसे चंदाको चोद रहाथा.. पुरी हवेलीपे चुदाइका दौर चल रहाथा तब नीचेकी ओर नीर्मला ओर भुमीका दोनोही देवायतको मीलकर गरम होगइ थी..

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तो अंदर जातेही दोनो नंगी होजाती हे.. ओर बेडपे अ‍ेक दुसरेकी चुतको चाटकर अ‍ेक दुसरेको ठंडी करने लगती हे.. जब दोनो जड गइ.. तब दोनोही नंगी बाथरुममे चली गइ.. ओर टबमे गरम पानी डालकर दोनोही उनमे बैठ गइ ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगी.. तभी नीर्मला भुमीके होंठ चुमते अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर उनकी चुतमे उंगली घुसा देती हे ओर अंदर बहार करने लगती हे..

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तभी भुमीकाभी नीर्मलाकी चुतमे उंगली करते उनके होठोको चुमने लगती हे.. दोनोही फीरसे कामुक होकर अ‍ेक दुसरेकी चुतमे जोरोसे उंगली करते उतेजीत होगइ.. तब कुछही देरमे दोनोकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. ओर दोनो सांत होगइ.. फीर बहार नीकलकर दोनोने नहालीया.. ओर तन पोछकर बहार आगइ फीर नंगीही बेडपे आकर सोगइ ओर अ‍ेक दुसरेके तनको सहेलाते बाते करने लगी..

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भुमीका : नीमु.. अ‍ेक बात पुछु..? तुम रश्मीके घर भावनाके बारेमे कुछ केह रहीथी.. क्या सचमे भावुने भानुसे रीस्ता खतम करलीया हे..? ओर मंजुसे उनके बारेमे तेरी क्या बात हुइ हे..? क्या मुजे बता सकती हे..?

नीर्मला : (थोडी चीतीत होते) हां भुमी.. अब तु मेरी बहेन हेतो तुजे नही कहुगी तो कीसे कहुगी.. सुन.. भावुने भानुसे पुरी तराह रीस्ता खतम नही कीया हे.. वो उनसे कभी अलग नही होगी.. बस वही रहेकर अपने पुराने प्यारको पालेगी.. ओर उनके साथ सभी तराहके रीलेशनमे आजायेगी.. वो इसी तराह भानुसे बदला लेगी.. तु समज गइनां..?

भुमीका : (आस्चर्यसे) क्या..? पुराना प्यार..? मतलब..? क्या भावु सादीसे पहेले कीसी ओरसे प्यार करती थी..? तो फीर उसने सादी ना करके भानुसे सादी क्यु की..?

नीर्मला : हां.. भुमी.. भावु सादीसे पहेले कोलेजमे थी तब वो हमारे देवुसे प्यार करती थी.. लेकीन वो देवुसे अपने प्यारका इजहार करले.. उनसे पहेले मंजु ओर देवु दोनोही रीलेशनमे थे.. ओर वो दोनो सादीसे पहेले कइ बार फीजीकल हो चुके थे.. जब देवु ओर मंजुको मेने पहेली बार हमारे घरमे चुदाइ करते पकड लीया उसी दिन भावुनेभी उन दोनोको चुदाइ करते देख लीयाथा.. ओर भावुका दिल टुट गया..

भुमीका : तो कमीनी क्या हुआ.. तुम भावुको समजाकर उनकीभी सादी देवुसे कर देती.. वोतो राजा हे.. उनके खानदानमे तो बहुत सादीया कर सकते हे.. तो दोनो बहेन देवुसे सादी कर लेती.. तुमने अ‍ैसा क्यु नही कीया..?

नीर्मला : (रुहांसी आवाजमे) भुमी.. सब मेरी ही गलती हे.. वो सब मेरी वजहसे हुआ.. तब मेरी मती भी मारी गइथी.. मेने उसी दिन देवु ओर मंजुको अ‍ैसे प्यार करते देखलीया तो गुस्सेमे आकर मेने देवुको चांटा मारके घरसे भगा दीयाथा.. क्युकी तब मे ओर देवु.. दोनोही रीलेशनमे थे..

ओर हम दोनो मंजुके रीलेशनमे आनेसे पहेलेही कइ बार फीजीकल होचुके थे.. तो मुजे लगाकी देवुने मुजे धोखा दीया हे.. ओर मेने गुसेमे आकर उनसे सब रीस्ते खतम करलीया था.. बादमे मुजे अपनी गलतीका अहेसास हुआ..

तबतक बहुत देर होचुकी थी.. फीरतो देवु मुजसे रुठ गयाथा.. अब इतने सालोके बाद सब ठीक हुआ हे..

भुमीका : (मुस्कुराते) अच्छा.. इसीलीये तुम दोनो आपसमे बोल नही रहेथे.. तो फीर भावुकी सादी भानुसे कैसे होगइ..? क्या वो इस सादीके लीये मान गइथी..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) भुमी.. देवु ओर मंजु ही भानुका रीस्ता लेकर आयेथे.. तब सायद भावुने सोचा होगा.. की भानुसे सादी करके वो देवुसे नजदीक रेह सकती हे.. ओर अपना पुराना प्यार पा सकती हे.. तो उसी आसमे उसने भानुसे सादीके लीये हां कहेदी.. ओर दोनोका संसारभी अच्छेसे चल रहाथा..

लेकीन भानुका सादीसे पहेलेही उनकी मामीके साथ रीलेशन था.. ओर ये नीलमभी उन दोनोकी लडकी हे.. बस यही बात इन चारोकी सगाइ थी तब भावुको पता चल गइ.. भावुने उसी दीन उन दोनोको रातमे कीचनमे चुदाइ करते देख लीया.. तबसे वो भानुसे दुर होगइ..

भुमीका : हंम.. नीमु.. तो फीर अब आगे भावु क्या करेगी..? सायद इसीलीये देवुने तुम्हारा मकान भावुके नाम करनेको कहा होगा.. नीमु.. मंजुने कुछ नही कहा..? वो इस मामलेमे क्या कहेती हे..?

नीर्मला : (धीरेसे नजदीक आते) भुमी.. प्लीज ये बात तुम कीसीको मत बताना.. मंजुने कहाहे.. आगे जाकर भावुभी देवायतके साथ रीलेशनमे आजायेगी.. ओर वो उनकी सीक्रेट बीवी बनकर पुरी जींदगी बता देगी.. ओर उनको देवुसे बच्चेभी होगे.. मेरी भावुको अपना पुराना प्यार मील जायेगा..

भुमीका : (चोंकते) व्होट..? नीमु तुम ये क्या केह रही हो..? देवु कीतनी सादीया करेगा..?

नीर्मला : (हसते) हां भुमी.. मुजे मंजुने बहुत कुछ बताया हे.. वो कहेती हे देवुके संपर्कमे जीतनीभी ओरते या लडकी आइ हे.. ओर आगे आयेगी.. वो कोइ सामान्य ओरते नही होगी.. सब देवुके साथ रीलेशनमे आयेगी.. भुमी.. हम सब यहा जन्म लेकर हमारी खुसीया बटोरने आइ हे..

हम सब उस लोकमे यातो परीया हे.. या फीर अप्सराये.. तुजे वो हिमाचलके राजाकी कहानीतो (ये केसी अनुभुती) याद हेनां..? बस.. हम सब उन्हीकी रानीया हे.. हम सब हमारे स्वामीको मीलने इस धरतीपे जन्म लेकर आइ हे.. तभीतो हम सब देवुके साथ रीलेशनमे हे.. ओर सायद भावुभी वोही हे.. देवु हम सबको संतुस्ट कर सकता हे..

चुमीका : (खुसीसे हसते) ओह गोड.. नीमु.. कीतना रोमांचकारी हेनां..? सायद इसीलीये हम सब देवुके पीछे पागल हे.. अब सभी बाते कुछ कुछ समजमे आ रही हे.. नीमु.. तुजे पता हे.. जब मेने देवुको पहेली बार देखा तब ही मुजे लगाकी मे उनके साथ रीलेशनमे आजाउ.. ओर आज देखो.. हम सब उनके साथ रीलेशनमे हे..

नीर्मला : (हसते बाहोमे भरते) हंम.. भुमी.. मंजु कहेती थी.. देवु कीसीको मना नही कर सकता.. उनको ये सब करना ही हे.. जब उनका पोता आयेगा.. वोहीतो वो राजा होगा.. तब भावुकी बेटी ही उनकी रानी होगी.. भावुकी बच्ची हमारे इस विजयसे सादी कर लेगी.. फीर उनका बच्चा पैदा करके जब वो बडा होजायेगा तब उनकी रानी होजायेगी.. अ‍ैसा कुछ मंजु केह रही थी..

भुमीका : (चोंकते) क्या..? यानी वो अपने ही लडकेसे सादी कर लेगी..? कीतना अजीब हेनां..? क्या कोइ मां अपने बेटेसे सादी कर सकती हे..? तुजे ये सब कुछ अजीब नही लगता..?

नीर्मला : (हसते) हां.. बहुत अजीब लगता हे.. मेनेभी मंजुसे यही पुछा तो उसने कहाकी तब वो सब कीसी रीस्ते नातेको नही मानते होगे.. ओर येभी कहाकी उस हिमाचलकी तराह यहाभी सब आपसी रीस्तोमे सादीया करते होगे.. तभी इनकी सुरुआत देवुके खानदानपे पीछले तीन पीढीसे सुरु होगइ हे.. देखोनां.. सबने अपनी बहेनसे ही सादी करली हे..

भुमीका : (हसते) हंम.. नीमु.. मंजुभी उनकी बहेन हेनां..? हमारे किशनकी लडकी..

नीर्मला : (सर्मसार होते हसते) हां.. कमीनी.. अब सोना नही हे क्या..? देख बहुत देर होगइ हे.. सोजा..

भुमीका : (हसते) कमीनी.. तबतो मेरे भाइ किशनसे मेरे सामनेही होटेलमे उछल उछलकर चुदवाती थी.. तो अब क्यु सरमा रही हे.. हें..हें..हें.. जो सच हे उनमे क्या सरमाना..

नीर्मला : (भुमीके होंठ चुमते) भुमी.. आज मुजे सच बताना.. क्या मे ओर किशन चुदाइ करते थे तब तुमभीतो हमारे साथ होतीथी.. तो तुजे कुछ नही होताथा..? तब मेने ओर किशनने चुदाइ करते तुजे कइ बार अपनी चुतमे उंगली करते देखा था.. ओर किशनने मुजे खुद तेरी ओर इसारा करते तुजे उगली करते दीखाया था.. तब तुजे अ‍ेक बारभी किशनसे चुदाइ करवानेका दिल नही हुआ..? कमीनी आज सब सच बताना.. तुजे मेरी कसम हे..

चुमीका : (सीरीयस होते नीर्मलाको अ‍ेक मुका मारते) कमीनी कसम क्यु देदी..? (आंखमे आंसु आगये) नीमु.. वो मेरा भाइथा.. मे पुरानी सब बाते भुल चुकी हु.. मत कर अ‍ैसी बाते.. मे अपने अतीतको याद करना नही चाहती.. बस अब इतना पता हे देवु मेरा.. मतलब हम दोनोका पती हे.. ओर हम देवु की अर्धागीनी हे..

नीर्मला : (भुमीके आंसु पोछते उसे बाहोमे भरलेती हे) भुमी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे नही पता तेरा किशनके साथ क्या रीस्ता था.. मुजे नही जानना.. अगर तुजे इस बातपे हर्ट हुआ हे तो आइ अ‍ेम सोरी.. आजके बाद मे तुमसे कभी कुछ नही पुछुगी.. अब सोजा बहुत देर होगइ हे..

कहेते नीर्मला दुसरी ओर करवट लेकर सोगइ.. तब भुमीको रीयलाइज हुआकी उसने नीर्मलाका दिल दुखाया हे.. ओर वो नीर्मलाकी ओर पलटकर उनकी कमरमे हाथ डालकर उसे अपनी ओर करनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन नीर्मला हीली तक नही.. तब भुमीका बेडपे बैठ गइ.. ओर नीर्मलाके उपर जुकते उनके चहेरेको देखनेकी कोसीस करने लगी.. तब नीर्मला आंसु बहाते सोनेका नाटक करती रही.. तब..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११९/२

भुमीका : (चींतीत होते) नीमु.. प्लीज.. मुजसे अ‍ैसे रुठो मत.. तुमतो मेरी बहेन हो.. आइ अ‍ेम सोरी.. कोइ अपनी बहेनसे अ‍ैसे रुठती हे.. नीमु मुजे माफ करदे.. मे तेरा दिल दुखाना नही चाहती थी.. तुजे सब कुछ बता दुगी.. बस मुजसे नाराज मत हो..

नीर्मला : (आंसु पोछते) नही भुमी.. मे कोइ नाराज नही हु.. तु बस सोजा हम सुबह बात करेगे..

भुमीका : (नीर्मलाको पकडके पलटाकर उसे बाहोमे भीचते) नही नीमु.. आइ अ‍ेम सोरी.. बस अ‍ेक बार तेरी बहेनको माफ करदे.. मे तुजे सब कुछ बता दुगी.. वो बहुत लम्बी कहानी हे.. तु जब मेरे घर आयेगी तब तुजे सब कुछ बता दुगी.. बस अभी के लीये इतना जानले की सृती.. देवुकी बहेन हे.. बाकी तुजे बादमे बता दुगी.. आइ प्रोमीस.. अबतो माफ करदे..

नीर्मला : (भुमीको जोरोसे बाहोमे भीचते) कमीनी.. तु मुजे बता देती तो क्या मे तुमसे नाराज होती..? मुजे पता हे वो किशनकी बेटी हे.. बस मे तेरे मुहसे सब सुनना चाहती थी.. भुमी.. मुजे मंजुने कहाथा की सृतीभी देवुकी बहेन हे.. अब सोजा हम बादमे सब बात करेगे.. कमीनी कहीकी.. हें..हें..हें..

भुमीका : (खुसीसे हसते) हंम.. तो मुजे कहा क्यु नही..? की तुजे सब मालुम हे.. हंम..?

नीर्मला : (हसते) बस.. मे ये सब तेरे मुहसे सुनना चाहती थी.. सीर्फ इतना पता हेकी सृती देवुकी बहेन हे.. पर कैसे वो मुजे नही पता.. बादमे मुजे सब बतानाकी तुम ओर किशन कैसे रीलेशनमे आये..

भुमीका : (सरमाते हसते) हंम.. चल कोइ बात नही.. तुजे सबकुछ बताउगी.. लेकीन याद रखना ये बात मंजुके अलावा कोइ नही जानता.. अब सोजा.. मेभी सुकुनसे सो पाउगी.. गुड नाइट..

नीर्मला : (भुमीके होठ चुमते) हंम.. कमीनी.. गुड नाइट.. चल सोजा..

कहेते नीर्मला करवट लेकर सोगइ.. तो भुमीका उनको पीछेसे बाहोमे भरके उनके बुब्सपे हाथ रखते सोने लगी तो नीर्मलाकी हसी नीकल गइ.. लेकीन नीर्मलाको इस बातका पता चल गयाकी सृती किशनकी बेटी हे.. तब भुमीकाकी आंखसे नींद कोसो दुरथी.. उसे सब याद आने लगा.. की राखीके अगले दिन उसने कैसे नरेशको अपने गांवमे भेजकर किशनको बडी मुस्कीलसे उनके साथ रीलेशन बनाने मजबुर कीयाथा..

उनको मनाने बाबाने उन दोनोकी सादी तक करवादी.. यही सब याद करते वो फीरसे अतीतमे चली गइ.. भुमीका नीर्मलाको पीछेसे बाहोमे भरते आंख बंध करलेती हे.. ओर किशेनके साथ अपना पहेला मीलनको याद करने लगती हे.. जब दोनोही सादी करके आश्रमसे वापस अपने घर आगये.. तब घरम जातेही किशनने उसे अपनी बाहोमे भर लीयाथा.. तब वो दोडकर किशनकी बाहोमे जाते काफी देरतक खडी रही..

(थोडा अतीतमे)

दोनोही सादी करके वापस घर आगये तब साम होनेको आइथी.. भुमीने दोनोके लीये फटाफट खाना बना लीया.. कल राखीका दिन था.. ओर किशन आने वाला था.. तो आज ओर कलके दिनकी भुमीकाने बहुत सारी तैयारीया करके रखीथी.. फीर भुमीका ओर किशेनने डीनर करलीया.. तो भुमीकाने सभी काम फटाफट नीपटा लीया.. तबतक किशन यहा पडा न्युज पेपर पढता रहा.. भुमीका आज बहुतही खुस थी..

वो घरका दरवाजा अच्छेसे लोक करके अपने रुममे चली गइ.. ओर फ्रेस होकर किशनके लीये हल्कासा शींगार करने लगी.. तभी किशन घरकी सभी लाइट बंध करके भुमीके रुममे चला गया.. तो भुमीका अ‍ेक अप्सराकी तराह लग रहीथी.. आज किशन पहेली बार भुमीको अ‍ेक बहेनकी नजरसे नही.. उनको अ‍ेक ओरतकी नजरसे देखने लगा.. ओर उनका बडा ओर तगडा लंड पेन्टके अंदर ही जटके मारने लगा..

वो भुमीको अ‍ेक नजरसे देखते सोचने लगाकी यही उनकी बहेन.. जो अबतक उनको राखी बांधतीथी.. आज उनकी बीवी होगइ हे.. ओर कुछही देरमे राखीके तोहफेके लीये वो उनके नीचे लेटी होगी.. वही सब सोचते किशन उतेजीत होने लगा.. ओर उनकी आंखोमें वासनाके डोरे मंडराने लगे.. ओर किशन रुमका दरवाजा बंध करके भुमीके पास चला गया.. तो भुमी अ‍ेकदम सरमा गइ.. ओर सरमाते अपने बाल बनाते खडी होगइ.. तभी किशनने उसे पीछेसे अपनी बाहोमे भरलीया..

भुमीका : (मदहोसीमे) भाइइइ.. हमारे पास ये तीन दिन हे.. ओर मेरा समयभी सही सल रहा हे.. तो ये तीन दिनमे मुजे मेरी राखीका तोहफा देदो.. मे जदगीभर आपकी गुलाम बनकर रहेना चाहती हु..

किशेन : (पीछेसे गलेको चुमते) नही भुमी.. तुम मेरी गुलाम बनकर नही.. मेरी रानी बनकर रहोगी.. हमने सादी कीहे.. आजसे तेरी सब जीम्वेवारी मेरी हे.. अब तुम नरेशकी नही.. मेरी भी बीवी हे..

भुमीका : (सरमाते) भाइ.. जब तक नरेश हे.. पती पत्नी सीर्फ हम दोनो अकेले होगे तबही होगे.. बाकी मे आपकी बहेन बनकर ही रहुगी.. मे विमलाभाभीकी तराह खुलकर आपकी बीवी नही बनना चाहती.. मुजे हमारा रीस्ता सबसे छुपाके रखना हे.. नरेशके जानेके बादभी हम हमारा रीस्ता सबसे छुपायेगे..

किशेन : (हसते) हंम.. चल कोइ बात नही.. जैसी तुम्हारी मरजी.. चल आजा यही समजले ये तीन दिन हमारा हनीमुन हे..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. मे चाहती हु.. ये तीन दिन आप मुजे अपनी बीवी नही बहेन मानकरही प्यार करे.. क्युकी.. आपकी तराह मुजे भी अ‍ैसे रीस्ते पसंद हे.. जबसे आपने अपनी बहेन विमलाभाभीसे सादी करली हे.. तबसे मेरी भी इच्छा होने लगी हे.. यही समजलो ये मेरी फेन्टासीभी हे.. क्युकी मेने मेरे भाइसे प्यार कीया हे.. ओर ओर राखीका तोहफा भी भाइसे चाहती हु..

किशन : (हसते) हंम.. तुमभी मेरी विमलाकी तराह बाते कर रही हो.. वोभी यही कहेती हे.. चल अब बाते करनी हेकी.. प्यार ब्यारभी करना हे.. आजतो तु कयामत लग रही हे.. आज मे मेरी बहेनको पहेली बार उस नजरसे देख रहा हु.. जो मे विमलाको देखकर उतेजीत होजाता था..

भुमीका : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. मुजे नही पता.. बस इतना पता हे.. अब मे आपको समर्पीत होगइ हु.. अब आप जीस तराह प्यार करना चाहे कर सकते हे.. ये तीन दिन मे आपकी गीरफ्तमे हु.. आजसे ये तनपे सीर्फ आपका अधीकार पहेला रहेगा.. आज अपनी बहेनपे कोइ रहेम मत करना.. करदो मुजे प्रेगनेन्ट.. इस दिनका मेने बहुत सालोसे इन्तजार कीया हे..

तब किशन हसते हुअ‍े भुमीको अपनी गादमे उठा लेता हे तो भुमीका बहुतही सरमा गइ.. ओर किशन उसे बेडकी ओर ले गया.. फीर भुमीको धीरेसे बेडके बीच बीठा दीया ओर खुदभी उनके पास बैठ गया.. तब दोनोको पताही नही चलाकी कब अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे ओर उनके तनसे अ‍ेक अ‍ेक वस्त्र नीकलते गये.. किशन लगातार भुमीके होंठ चुमते उनके उरोजोके साथ खेलता रहा.. ओर भुमीको पुरी तराह मदहोस कर दीया..

भुमीका आधी आंख चडाके मदहोसीमे लगातार सीसकारीया करती रही.. ओर किशनने उसे धीरेसे बेडपे लीटा दीया.. किशन ओरल सेक्ससे कीसीभी ओरतको उनसे चुदवानेके लीये मजबुर कर सकताथा.. इस खेलमे वो माहीर था.. अबतक वो कइ ओरते ओर लडकीयोको चोद चुकाथा.. उनको पताथा भुमीकाके लीये पहेली बार उनका लंड लेना इतना आसान नही होगा.. इसीलीये वो भुमीकाकी चुतको अपने मुहसे खरोदते उसे उतेजीत करता रहा..

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ओर इसीबीच भुमीकाको अ‍ैसेही अ‍ेक बार जडा दीया.. तब भुमीका अपनी चुतमे लंड लेनेके लीये तडपने लगी.. ओर वो किशनको बार बार उनके उपर आनेकी मनते करने लगी.. ओर आखीर किशन भुमीके उपर चड गया.. तब भुमीकाने किशनका लंड पकडकर अपनी चुतके लव होलमे सेट करदीया.. ओर किशनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तब किशनने उनके दोनो हाथ पकडके लीपलोक करलीया.. ओर कमरको अ‍ेक जटका दे दिया..

तब किशनका लंड भुमीकी चुतको चीरते अंदर घुस गया.. तो भुमीका जोरोसे चीख पडी.. ओर चीखके साथ ही बेहोस होगइ.. उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. तब किशन हाथके बल उचा होगया ओर भुमीकाको बेहोसीमेही जोरोसे चोदने लगा.. उनको पता था की भुमीका होसमे उनसे कभी नही चुदवायेगी.. ओर वो तेजीसे कमरको आगे पीछे करते भुमीकी चुतको अपने लंडके हीसाबसे सेट करने लगा.. तो भुमीकी चुतसे हल्कासा खुनभी नीकल गया..

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जब भुमीका होसमे आइ तब वो अ‍ेक बारतो किशनको उसे छोड देनेकी मनते करने लगी.. लेकीन धीरे धीरे करते उनका दर्द कम होगया.. तो वोभी मजेसे उछल उछलकर किशनको चुदवानेमे उनका साथ देने लगी.. किशन भुमीकाकी काफी देर तक चुदाइ करता रहा.. इसी बीच किशनने भुमीकाको दो बार जडा दीया.. फीर खुदभी उनकी चुतको भरते खलास होगया.. ओर भुमीके सीनेपे ढेर होगया.. तब भुमीका उनकी पीठ ओर उनके सरको सहेलाती रही..

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भुमीकाक बरसोकी अपने भाइसे चुदवानेकी इच्छा आज पुरी होगइ थी.. भुमीको अभीभी यकीन नही हो रहाथा की आखीर उसने अपने भाइ किशनसे चुदवा लीया.. कुछ देरके बाद किशन भुमीको उठाकर बाथरुममे लेगया ओर वहा दोनो नहाकर कंपलीट होगये.. भुमीका बडी मुस्कीलसे चल पाइ..

ओर वो किचनमे चली गइ.. वहा रातके लीये डीनर बना लीया.. जब डीनर होगया तो दोनोने साथमे खाना खा लीया.. ओर भुमीका सब काम नीपडाकर होलमे आगइ.. ओर किशनकी गोदमे बैठकर दोनो हाथ किशनके गलमे डाल दिया ओर उनके गालको चुम लीया..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. नीचे बहुत दर्द कर रहा हे.. आपको जेलना बहुत मुस्कील हे.. पता नही नीमु ओर विमलाभाभी आपको कैसे जेलती होगी..

किशन : (हसते) भुमी.. नीमुके साथतो मे पहेलेसेही रीलेशनमे था.. तो उनकोतो अब आदत होगइ थी.. तुजेभी हो जायेगी.. तेरी चुत अ‍ेकदम कुआरी लडकी की तराह बहुत कसी हुइ हे.. क्या नरेश तुजे नही चोदता..?

भुमीका : (सरमाते हसते) भाइ.. सच कहु..? उनका तो आपसे आधाभी नही हे.. मुजेतो नरेहके साथ पहेली बार सेक्स कीया तबभी दर्द हुआ था.. तो येतो गध्धे जैसा हे.. फीरभी मेने इसे अंदर लेलीया.. मुजेतो अबभी यकीन नही हो रहाहे की आपने मुजे चोद लीया हे.. बस मे अ‍ेक बार प्रेगनेन्ट हो जाउ.. तो मेरा सब सपना पुरा होजायेगा.. मे हमेसा आपकी बहेन बनकेही प्यार करना चाहती हु..

किशन : भुमी.. वो तो तुम प्रेगनेन्ट होही जाओगी.. हमारे पास तीन दिनका समय हे.. हम पुरी कोसीस करेगे.. लेकीन देखना नरेशको हमपे सक ना होजाये..

भुमीका : नही भाइ.. उनको कोइ सक नही होगा.. क्युकी बाबाने उसे छे महिनेका समय दिया हे.. ओर वैसेभी अबतो आपभी मेरे पती हो.. तो हम मीलते रहेगे.. नरेश पुरा दिन होस्पीटलमे रहेता हे.. ओर कभी कभी उसे नाइटभी करनी पटती हे.. तो मे आपको फोन करदुगी.. आप आते रहेना.. ओर अपनी बहेनको प्यार करते रहेना..

किशन : भुमी.. तु प्रेगनेन्ट होगइ.. तो क्या इसके बाद हमारा मीलना जरुरी हे..?

भुमीका : (सरमाते हसते) हां भाइ.. वैसे भी आगेतो आपको ही मुजे सम्हालना पडेगा.. भाइ अब मे नरेशकी बीवी तो सीर्फ औपचारीक रेह गइ हु.. अबतो सही मायनोमे मेरे असली पती आपही होगे.. भाइ.. हमारा बच्चा होगा.. मेरे लीये वो मेरी राखीका बेस्ट तोहफा होगा.. कल राखीका दिन हे.. मुजे कल अ‍ेक बहेन ओर अ‍ेक पत्नी दोनोका रोल नीभाना होगा.. भाइ दुनीया वालोकी नजरमे मे आपकी बहेन ही रहुगी.. ओर अकेलेमे आपकी बीवी बनकर आपका बीस्तर गरम करती रहुगी..

किशन : भुमी.. कीतना अजीब हेना..? हम जो सोचते हे वो कभी नही होता.. विमला जब आश्रमसे वापस आइ तब जानती थीकी वो मेरी बहेन हे.. मे नही जानताथा.. फीरभी मुजे प्यार करने लगी.. ओर मेने तुजे अ‍ेक बहेन मानाथा.. तो तुमनेभी मुजसे अ‍ेक पत्नीका रीलेशन बना लीया.. क्या मेरी किस्मतमे सीर्फ बहेनकोही प्यार करना लीखा हे..? मेनेतो भाइ बहेनका पवित्र रीस्ताही तार तार करदीया..

भुमीका : (हसते गाल चुमते) नही भाइ.. आपने कोइ रीस्ते तार तार नही कीये.. क्युकी हम बहेनही चाहती थीकी हमारा रीलेशन हमारे भाइके साथ हो.. ओर आपके बा बापुजीने ओर आपके दादा दादीनेभी तो वोही सब कीया हे.. सभीने अपनी बहेनसेही सादी करली हे.. तो कुछतो रीजन होगा..? पता नही बाबाके मनमे क्या हे..?

किशेन : भुमी वोतो ज्यादा कुछ नही बताते.. बस इतना कहेते हे तेरे घर कोइ इ----अंस पैदा होगा.. जीनकी वजहसे ये सब हो रहा हे.. वो बार बार वो हिमाचलके राजाकी बात कर रहे हे.. तो उस अंसको पैदा करनेमे क्या ये आपसी रीस्तोमे प्यार करना जरुरी हे..? मेरीतो कुछभी समजमे नही आ रहा..

भुमीका : (हसते) भाइ जो भी हो.. लेकीन अ‍ेक बात कहु..? ये आपसी रीस्तोमे रीलेशन बनाना बहुत अच्छा लगता हे.. हमारा प्यार कइ गुना बढ जाता हे.. मेने तो डीसाइड करलीया हे.. मे आपके साथ आपकी पत्नी नही.. आपकी बहेन बनकरही सब रीलेशन रखुगी.. आज बहुत मजा आया.. सच बताना.. आपको बीवीको चोदनेमे मजा आता हे की बहेनको..? हें..हें..हें..

किशन : (हसते) सच कहु..? हंम.. बहेनको.. मेने तुजे अपनी बहेन मानकरही प्यार कीया हे.. हें..हें..हें..

दोनोही बाते करते फीरसे उतेजीत होने लगे.. ओर किशनने भुमीको वही सोफेपे लीटा दीया.. ओर उनके उपर चडके अपना तगडा लंड भुमीकी चुतमे उतार दीया.. तब भुमीकाभी कीशनकी बातोसे बहुत गरम हो चुकी थी.. ओर दोनोही चुदाइमे मसगुल होगये.. किशनने वहाभी भुमीको दो बार जडा दीया ओर आखीरमे उनकी चुतको अपने लावासे भर दीया.. तब भुमीकाभी साथमे जड गइ.. फीर भुमीने घरकी सभी लाइटे बंध करदी..

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तब किशन उनको गोदमे उठाकर बेडरुममे ले गया.. ओर वहा दोनो सुबह चार बजे तब चुदाइ करते रहे.. किशन ज्यादातर भुमीको वही पुरानी स्टाइलमे ही चोदता रहा.. पुरी रातमे भुमीको किशन चार बार चोद चुकाथा.. ओर भुमीकी चुतको भरता रहा.. फीर दोनोही नहाकर नंगेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकर सोगये.. दोनोही सुबह दस बजे तक सोते रहे.. भुमीकाकी आंख तब खुली जब नरेशका फोन आगया.. ओर भुमीने सोतेही नींदमे फोन उठा लीया..

नरेश : (फोनपे) भुमी.. कैसी हो तुम..? क्या किशनके घर चली गइ..?

भुमीका : (हसते किशनको चुप रहेनेका इसारा करते) हां नरेश.. मे अभी मेरे रुममे नहाके नीकली हु.. क्या तुम पहोंच गये..? कैसी हे बा.. ओर भैया भाभी..

नरेश : बस सुबह ४ बजे पहोचा हु.. तो तुजे फोन करदीया यहा सब मजेमे हे बा तुजे बहुत याद कर रही हे..

भुमीका : नरेश बाको मेरा प्रणाम कहेना.. मे कपडे पहेन रही हु मुजे बादमे फोन करना..

नरेश : अरे सुन भुमी.. सायद मुजे आनेमे अ‍ेक दिन लेट होजाये.. भाभी अ‍ेक दिन रुकनेका बहुत आग्रह कर रही हे.. तो सोचा अ‍ेक दिन रुक जाता हु.. अब कल नही मे परसो टड्ढेनमे बैठ जाउगा.. तो सुबह तक पहोंच जाउगा.. किशनको कहेना तुजे छोड जाये.. चल रखता हु.. ओर कुछ काम नही हे..

कहेते नरेशने फोन काट दिया.. नरेशने जाते समय टड्ढेन बदलनेमे बीचमे दो घंटेका समय मीला तब वहीसे उनके घर वालोके लीये गीफ्ट लेलीया.. उनमे सबके लीये कपडे लेलीये.. तो उनकी भाभी ओर बहेनके लीये महंगी सारीया ओर मेकअप का सामान लेलीया.. जो गांवमे नही मीलताथा.. उनके भाइ भाभीको कोइ संतान नही थी.. तो नरेश उनकी भाभीका बहुत खयाल रखता था..

तो उनकी भाभी भी नरेशका कुछ विसेसही खयाल रखती थी.. जब नरेशने सुबह अपनी बहेनसे राखी बंधवाकर सबको अपनी गीफ्ट दी तब सभी बहुत खुस होगये.. नरेशने उनकी बहेनको कुछ केस पैसे ओर बहुत सारी गीफ्ट दी.. तो उनकी भाभीकोभी गीफ्ट दी.. तो वोतो बहुतही खुस होगइ.. ओर मेकअपका सामान लेते वो बहुतही सरमाइ.. ओर उसने नरेशको अ‍ेकेली मीलतेही अ‍ेक दिन ज्यादा रुकजानेका बहुत आग्रह कीया..

तो इधर नरेशका फोन रखतेही भुमी उठकर नहाने चली गइ.. फीर तैयार होकर उसने किशनकोभी जगा दीया ओर वो किचनमे चाइ नास्ता बनाने चली गइ.. जब किशन नहा धोकर कंपलीट हो गया तब होलमे आकर बैठ गया.. तो भुमीका पुजाकी थाली लेकर किशनके पास आकर बैठ गइ.. ओर किशनको राखी बांधने लगी.. तो किशनने उसे पैसे दिये तो मना करने लगी.. ओर उसने धिरेसे सरमाते कहा..

भुमीका : (सरमाते हसते) भाइ.. अपने मुजे राखीका बेस्ट तोहफा दीया हे.. मे आपके इस हथीयारकी दिवानी हो चुकी हु.. इसे बहार नीकालीये.. उसेभी राखी बांधनी हे.. आजसे ये मेरा होगया.. आपकी बहेने अ‍ैसेही इनके पसछे पागल नही हुइ..

कहेते भुमीका किशनके पैरोके पास नीचे बैठ गइ ओर किशनके पेन्टकी प्लीप खोलने लगी.. तो किशन उसे देखता ही रेह गया.. भुमीने किशनका लंड बहार नीकाल दिया तो वो भुमीको देखतेही जटके मारने लगा ओर भुमीने अ‍ेक राखी लंडपे भी बांधली.. तो किशन जोरोसे हसने लगा.. भुमीकी ये हरकत देखते वो जटसे खडा होगया.. तो भुमीका जटसे हसते हुअ‍े किचनमे भाग गइ.. ओर किशन उनके पीछे चला गया.. ओर भुमीकाको अपनी खीचते उनके होठोको चुमने लगा.. तो भुमीने उनके गालको सहेलाते कहा..

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भुमीका : (किशनसे बचते हसते) भाइ अभी नही.. पहेले चाइ नास्ता करलो.. बादमे हम करेगे.. बस तीन दिन हमे यही काम करना हे.. देखना अब मे आपको छोडने वाली नही हु..

किशन : (हसते) चल ठीक हे.. नीकाल चाइ नास्ता.. फीर हम रुमसे बहार ही नही नीकलेगे..

कहेते दोनोने चाइ नास्ता करलीया.. ओर अपने रुममे चले गये.. किशेन जबतक नरेश वापस नही आया तबतक भुमीको चोदता रहा.. दोनोने दिन रात वही काम कीया.. ये तीन दिनमे किशनने भुमीकी कइ बार चुदाइ करली.. ओर उनकी चुतको भरता रहा.. तो जाहीरसी बात हे किशनका बीज भुमीके गर्भमे उनके बीजको मील चुकाथा ओर भुमीको प्रेगनेन्ट करदीया था.. ओर तीसरे दिन किशन वापस अपने घर चला गया..

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सुबह जब नरेश आया तब भुमीका अपने बेडरुममे सोइ हुइ थी.. ओर उसने दरवाजा खोला तो सामने नरेश खडाथा.. फीर दोनोने नहालीया ओर चाइ नास्ता करलीया तब भुमीने नरेशको जुठ कहाकी किशन उसे कल सामकोही ही घर छोड गयाथा.. ओर नरेश चाइ नास्ता करके अपनी नोकरीपे चला गया.. उस रात नरेशने भुमीको दो बार चोद लीया.. फीर तो किशन ओर भुमीका अक्शर मीलने लगे..

जब नरेश नोकरीपे चला जाता तब किशन भुमीके घर आजाता.. किशन हप्तेमे अ‍ेक दो बार भुमीको मीलने अचुक आता ओर दोनो खुब चुदाइ करते.. कभी कभी तो भुमीकाकी दिन ओर रातमे दो दो बार चुदाइ होजाती.. दिनमे किशन उसे चोदकर चला जाता तो रातमे नरेशभी उसे चोद लेता..

जीनकी वजहसे भुमीको चुदवानेकी आदत लग गइ.. अब वो अ‍ेक रातभी लंडके बगैर नही रेह सकती थी.. वो बहुतही ठरकी हो चुकी थी.. जब किशन नही आता तो वो नरेशको जबरदस्तीसे अपने उपर चडा लेती.. ओर उनसे चुदाइ करवा लेती..

अ‍ैसेही दिन बीतने लगे.. तब अ‍ेक दिन भुमीको उल्टीया हुइ तो नरेश उसे होस्पीटल लेगया.. तो पता चलाकी भुमीका प्रेगनेन्ट हे तब नरेश ओर भुमीकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. जब किशन भुमीको मीलने उनके घर आया.. तब भुमीकाने ये खुसखबरी किशनको सुनाइ.. तब किशनने खुस होकर भुमीकाको उस दिन दो बार चोद लीया.. ओर अ‍ैसेही दिन बितने लगे.. ओर भुमीको पुरे नौ महिने होगये..

जब भुमीको पांच महीने हो गयेथे तब उसने नरेशको हाथ तक नही लगाने दिया.. ओर किशनके साथ चुदाइ करवाती रही.. ओर जब उनका पेट नीकला तब किशननेभी उसे हाथ नही लगाया.. ओर आखीर पुरे दिन होतेही भुमीकाने सृतीको जन्म दीया.. तब भुमीका ओर नरेश बहुतही खुस थे.. भुमीका की डिलेवरीके लीये गांवसे उनकी जेठानी यानीकी नरेशकी भाभी आइथी.. वो पांच महीने तक नरेशके घर उनके साथ रही....

(अतीतसे बहार)

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२०/१

जब भुमीको पांच महीने हो गयेथे तब उसने नरेशको हाथ तक नही लगाने दिया.. ओर किशनके साथ चुदाइ करवाती रही.. ओर जब उनका पेट नीकला तब किशननेभी उसे हाथ नही लगाया.. ओर आखीर पुरे दिन होतेही भुमीकाने सृतीको जन्म दीया.. तब भुमीका ओर नरेश बहुतही खुस थे.. भुमीका की डिलेवरीके लीये गांवसे उनकी जेठानी यानीकी नरेशकी भाभी आइथी.. वो पांच महीने तक नरेशके घर उनके साथ रही.... अब आगे

(अतीतसे बहार)

यही सब सोचते भुमीका कब नींदकी आगोसमे चली गइ उसेभी पता नही चला.. लेकीन उस पांच महीनेके क्या हुआ वो भुमीको भी नही पताथा.. अ‍ेकतो पीछले पांच महिनेसे नरेशको भुमीकाने हाथ नही लगाने दीया.. तो नरेशकी सेक्स करनेकी इच्छा बहुत बढ गइ थी.. तो दुसरी ओर उनकी भाभी भी भुमीकी डीलवरीके अ‍ेक महिने पहेले आगइ थी.. तो वोभी अपने पतीको नही मील पाइ थी..

ओर उपरसे नरेशभी उनको महेंगी महेंगी गीफ्ट देकर उनका विसेस खयाल रखता था तो उनका पहेलेसे ही नरेशकी ओर कुछ ज्यादाही लगाव था.. ओर उपरसे उनको कोइ संतान नही हो रहीथी.. जीनकी वजहसे उनकी भाभीने नरेशको अपने दिलमे विसेस जगाह दे रखीथी.. जबभी नरेश गांवपे जाता उनकी भाभी नरेशका अ‍ेक पत्नीकी तराह खयाल रखती.. ओर नरेशके साथ मस्ती मजाकभी करती थी..

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जब भुमीकी डीलीवरीका वक्त आगया ओर भुमीको होस्पीटलमे अ‍ेडमीट कर दीया.. तब उनकी भाभीका घरपे ओर होस्पीटलमे नरेशके साथ बहुत बार आना जाना हुआ.. ओर जीनकी वजहसे दोनोको अकेले रहेनेका काफी मौका मीलता रहा.. जीनकी वजहसे दोनो ओर नजदीक आगये.. पहेलेतो दोनोही नजरोसे बाते करने लगे.. ओर अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते बात हाथ पकडके छेडछाड तक पहोंच गइ..

जब सृतीका जन्म होगया तब अ‍ेक सुबह उनकी भाभीको नहानेके लीये घर आना था.. तो नरेश उनको लेकर घर आगया.. जब उनकी भाभीने नहालीया तब अपने बालोपे टोलीया लपेटकर रुमसे बहार आइ.. ओर नरेशकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करते अपने रुममे वापस चली गइ.. तब नरेश बहुत कुछ समज गया.. ओर उनसे कंट्रोल नही हुआ.. उनका लंड पेन्टके अंदरही जटके मारने लगा..

तब नरेश आज हिमंत करके उनके पीछे चला गया.. तब उनकी भाभी नंगी होकर अपना ब्लाउस पहेन रहीथी.. ओर नरेश उनके पीछे चला गया.. तो कुछ आहट सुनके जटसे पलट गइ.. ओर नरेशको देखतेही ब्लाउस उनके हाथसे छुट गया.. तो उसने जटसे अपने दोनो हाथोसे अपने बुब्स छुपालीये.. ओर सरमाके मुस्कुराते अपनी नजर जुकाते खडी रही.. ओर नरेशने उनके पास जाकर धीरेसे अपनी बाहोमे भीचलीया..

न.भाभी : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. ये गलत हे.. कोइ देखलेगा.. छोडीये.. मुजे.. अगर कीसीको पता चल गयातो हम कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहेगे..

नरेश : (गाल चुमते) भाभी.. प्लीज.. आज मत रोकीये मुजे.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. यहा हे ही कौन..? भाभी आप मुजे बहुत अच्छी लगती हे.. प्लीज.. आज मत रोकीये.. मे आपसे प्यार करता हु..

न.भाभी : (सरमाते हसते) तबतो वहा मेरे पास आगये होते.. आपको मेने कीतनी हीन्ट दीथी.. फीरभी आप समजेही नही.. की आपकी भाभीभी आपको प्यार करती हे.. अभी छोडीये दरवाजा खुला हे..

ओर नरेश सबकुछ समज गयाकी भाभी ओलरेडी उनके साथ प्यार करनेके लीये तैयार हे.. ओर वो जटसे घरका मेइन गेइट बंध करके फौरन रुममे वापस आगया.. तब उनकी भाभी वेसेही सरमाते नंगी खडीथी.. ओर नरेशने उसे अपनी गोदमे उठा लीया.. ओर बेडपे आकर उनको पीठके बल लीटाके खुदभी कपडे नीकालकर बेडपे आगया.. तब उनकी भाभीने नरेशको जोरोसे खीचके अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये..

न.भाभी : देवरजी हमे जल्द जानाभी हे.. अब मे अ‍ेक दो महीने यही हु.. जोभी करना हे जल्दी करलीजीये..

ओर नरेन उनकी भाभीपे चड गया.. तब नरेशको पताही नही चलाकी उनकी भाभीने कब उनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया.. नरेशको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ ओर उसने अ‍ेकही जटकेमे अपना लंड उनकी भाभीकी चुतमे उतार दीया.. तब उनकी भाभीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर नरेशको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब नरेश अपनी कमरको जोरोसे हीलाते उनकी भाभीको चोदने लगा..

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ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. आखीर नरेश अकडने लगा तो उनकी भाभीके होठोको लीपलोक करते जोरोसे कमर हीलाने लगा.. तब उनकी भाभी भी समज गइ ओर वो नरेशको जोरोसे बाहोमे भीचते उनकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर नरेश उनकी भाभीकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब उनकी भाभी भी नरेशको बाहोमे भीचते साथमे जडने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनो सांत होगये..

न.भाभी : (सरमाते हसते पीठ सहेलाते) तो आखीर आपने अपनी भाभीको चोद ही लीया.. अगर पहेले थोडी हीमत करदेते तो मे कबसे आसे चुद गइ होती.. लेकीन आप समजेही नही..

नरेश : (होठ चुमते) भाभी.. मेरी हिमत नही हुइ.. लेकीन अब फीकर मत करना.. अब जबतक हम जींन्दा रहेगे तबतक हम दोनो मीया बीवीकी तराह रहेगे.. अब मे वहा आकरभी आपकी चुदाइ करता रहुगा..

न.भाभी : हां देरवजी.. आपके बडेभाइ तो मुजे ठीकसे चोदभी नही पाते.. हो सकेतो मुजेभी प्रेगनेन्ट कर दीजीये.. मे हमारा बच्चा पैदा करुगी कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी.. क्या मुजे बच्चा देगेनां..?

नरेश : हां भाभी.. आजसे आप मेरी बीवी हें.. बस ध्यान रखीयेगा की हमारे रीस्तेके बारेमे भुमीको पता ना चले..

न.भाभी : (सरमाते हसते) हंम.. नही चलेगा.. चलीये अब उपरसे हटीये हमे जाना होगा.. बहुत देर होगइ..

फीर नरेश उनके उपरसे हट गया तब दोनोने अ‍ेक बार फीरसे बाथरुममें जाकर साथमे नहा लीया.. तब वहाभी नरेशने उनकी भाभीके साथ नहाते छेडखानीकी.. फीर दोनोही फटाफट तैयार होकर घरसे नीकल गये.. ओर होस्पीटल आगये.. ओर तीसरे दिन भुमीका सृतीके साथ घर आगइ.. तब उनकी भाभी खाना बनाती.. ओर नरेशकी ओर इसारोसे बाते करते उनको वासना भरी नजरोसे देखती.. ओर नरेशको अपने जलवे दीखाती..

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आखीर नरेशभी तो अ‍ेक मर्द था.. वो अपनी भाभीकी नजरेको कैसे नही पहेचानता.. उसी रात किचनमे नरेश ओर उनकी भाभी दोनोही वापस मीले.. तो नरेशने उनकी भाभीको अपनी बाहोमे भर लीया.. तो उनकी भाभीनेभी हसते हुअ‍े नरेशका लंड अपनी मुठीमे पकडलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. फीरतो दोनोही बहेक गये.. ओर नरेशने उनकी भाभीको वही नीचे फर्सपे लीटा दीया..

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ओर अपना लंड नीकालकर उनकी भाभीकी सारी उनकी कमर तक उची करली ओर अपनी भाभीके उपर चडके लेट गया.. ओर उनकी भाभीने नरेशको जोरोसे अपनी भाहोमे भीचलीया.. ओर सब कुछ होगया.. नरेशने उनकी भाभीको अ‍ेक बार फीर कीचनमे चोद लीया..

फीर तो दोनो अक्सर मीलने लगे.. भुमीका ज्यादातर छोटी बच्चीके साथ अपने रुममे आराम करती.. तब नेरश ओर उनकी भाभी.. कभी किचनमे तो कभी उनकी भाभीके रुममे तो कभी उपरकी मजीलके कमरेमे सुबह नहाने जाती तब मील जाते ओर चुदाइ कर लेते..

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जब तक उनकी भाभी नरेशके घर रही.. तबतक नरेश ओर उनकी भाभीने खुब चुदाइकी.. आखीर उनकी भाभीका अपने गांव जानेका वक्त हो गया.. ओर वो वापस अपने गांव चली गइ.. समय बीतने लगा.. ओर ओर सृतीभी बडी होने लगी.. फीरतो नेरश उनकी भाभीको मीलनेके लीये उनके गांव जानेके लीये हमेसा तत्पर रहेने लगा.. अब वो हर राखीके दिन अपने गांव जाने लगा.. ओर बीचमे भी मौका मीलतेही कोइ बहाना बनाकर सालमे अ‍ेक दो बार चला जाता.. ओर वहा उनकी भाभीकी खुब चुदाइ करके वापस आजाता..

अ‍ैसेही दिनसे हप्ते हप्तेसे महिने ओर महिनेसे साल बीतने लगे.. इसी बीच किशनभी नरेश जोबमे होता या अपने गांव जाता तब भुमीको मीलने चला आता.. ओर भुमीको अ‍ेक पत्नीकी तराह प्यार करते उनका खयाल रखता.. तो भुमीकाभी अ‍ेक पत्नीकी तराह किशनके साथ चुदाइ करवाके अपना हर फर्ज पुरा करती.. भुमी अब नरेश से ज्यादा किशनको तवजो देने लगी थी.. वो किशनको ही अपना पती मानने लगी थी..

अ‍ैसेही साल बीतने लगे.. ओर सृतीभी बडी होती गइ.. वो किशनको मामा कहेके बुलाती.. अ‍ैसेही सृती १२ सालकी होगइ.. किशनने उनका अच्छी स्कुलमे दाखला दिलवा दियाथा.. तब अ‍ेक दिन नरेश होस्पीटलमे ही चकर खाते गीर गया.. ओर कुछ समय बीमार रहेनेके बाद अ‍ेक दिन सबको छोडकर चला गया.. तब किशननेही उनका सब कार्य किया.. तब नरेशकी माता उनका भाइ भाभी भी आगये थे.. तब उनकी भाभी खुब रोइ.. फीर कुछ दिन साथ रहेकर भुमीको सब कुछ सोंपकर वापस चले गये..

फीरतो भुमीको खुला दौर मील गया.. किशन ओर भुमीका खुलकर अ‍ेक मीया बीवीकी तराह मीलने लगे.. लेकीन भुमीकाने आजतक नातो सृतीको ओर नाही दुसरेको पता चलने दिया की किशन उनका पती हे.. सृतीके सामने दोनोही भाइ बहेनकी तराह रहते.. ओर जब सृती स्कुल चली जाती तब मीया बीवीकी तराह खुब चुदाइ करते.. जबतक किशन सहेर आता जाता रहा तबतक दोनो मीया बीवीकी तराह मीलते रहे..

अब सृती काफी बडी होगइ थी.. सृती ओर मंजु साथमे ही कोलेजमे पढती थी.. जबतक किशन जीन्दा था तबतक वो सृतीकी पढाइका ओर भुमीके घरके खर्चेका पैसा देता रहा.. इसी बीच देवायत ओर मंजु प्यार करते थे.. ओर सृती दोनोको पहेली बार अपने घर लाइ तब भुमीको नही पताथा की देवायत किशनका बेटा हे.. क्युकी जबसे नरेश गुजर गयाथा.. तबसे भुमीने किशनके घर जाना छोड दियाथा..

तब देवायत मंजुने वहीसे आश्रममे जाकर सादी करलीथी.. ओर अपनी सुहागरातभी भुमीके घरपे ही मना चुके थे.. इसी बीच बहुत कुछ हो गयाथा.. देवायत नीर्मलाके साथभी रीलेशनमे था.. ओर उसेभी देवायत मंजुके रीस्तेके बारेमे सब पता चल गया.. तो नीर्मलाने देवायतके साथ अपने रीलेशनभी खतम करलीये थे.. तब देवायत मंजुको अपने घर सादी करके ले आया.. ओर अ‍ेक दिन किशनभी सबको छोडकर चला गया..

इधर दोनो कपलके बीच अपनी सुहागरातमे पुरी रातमे चुदाइका तांडव होता रहा.. धिरेन पुरी रातमे पुनमको सीर्फ दो बारही चोद पाया.. उनमेभी धिरेन जल्दीसे जड गया.. ओर पुनमको प्यासी रख दीया.. फीर दोनो नींदकी आगोसमे चले गये.. तो बाजुके रुममे लखनने वायग्रा खाकर लताको चोदकर उनकी हालत खराब करदी.. तो वही हाल रमाका भी हुआ.. भानुने रमाको बडी बेहरेहमीसे चोद लीया था..

तो देवायतने भी चंदा ओर मंजुको दो दो बार चोदलीया था.. फीर तीनोही अ‍ेक दुसरेके साथ चीपककर सो गये.. तो गांवमेभी आज सादीकी वजहसे सभी ओरते ओर लडकीया तैयार होकर आइथी ओर अपने यारसे साथ नैन मटकर करते मस्तीया करते ज्यादा गरम होगइ थी.. ओर वही हाल उन सबके यारके थे.. जीनकी वजहसे आज गांवमेभी ओरते ओर लडकीया अपने यारसे या जीनके साथ अवैध रीस्ताथा.. उनसे चुद गइ.. पुरी रात गांवमेभी चुदाइका दोर चलता रहा..

आज हवेलीपे सुबह सब लोग थकानकी वजहसे बहुत देरसे उठे.. सभी लोग नहाके कंपलीट तैयार होकर होलमे आगये.. तो सबने दोनो कपलको अबभी सोने दिया.. तो रमाभी बडी मुस्कीलसे चलकर कीचनमे चली गइ.. तब मंजु सृती ओर चंदाने उनकी मस्ती करते रमाको खुब छेडा.. तब रमा बहुतही सर्मसार होगइ.. देरसे पुनम लता भी नहाके कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तब लता थोडा लंगडाके चल रहीथी.. ओर आतेही दोनो पुनमके रुममे चली गइ..

तब नीलम वंदनाभी कंपलीट होकर अपने घर जानेकी तैयारीया कर रहीथी.. धीरे धीरे करते सभी लोग होलमे तैयार होकर आगये.. तबतक दया रजीया ओर चंपाभाभी ने मीलकर चाइ नास्ता बनालीया.. तबतक धिरेन ओर लखनभी कंपलीट होकर नीचे आगये.. ओर सभीने मीलकर चाइ नास्ता करलीया.. तब भानुकी फेमीली ओर भुमीका सृती सब घर जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो वंदनाभी सबको मीलकर अपने घर चली गइ..

सरला : (आंसु बहाते) मंजु बेटा.. अब हम चलते हे.. भावु इधरही रुक रही हे.. तो हम भावेशको साथ लेजा रहे हे.. दो दो बच्चा भावु कहा स्महालेगी..? भावेश थोडा बडा होगया हे.. अबतो रमाके साथभी रहेता हे.. तो कोइ दीकत नही होगी.. बस हमारी लताका खयाल रखना..

मंजुला : (हसते) अरे मौसी.. लता थोडीना पराये घरपे हे.. आप इनकी फीकर मत कीजीये.. मेरीतो छोटी बहेन हे.. हम इनका खुब खयाल रखेगे आप टेन्सन मतलो..

भुमीका : (हसते) क्या सरला भाभी.. आप खामखा चीन्ता कर रही हे.. मुजे तो अ‍ैसा लगता ही नही की आपकी लता ससुरालमे आइ हे.. चलीये चीन्ता छोडीये.. अब हमे भी घर जाना हे..

देवायत : (हसते) बुआ.. आप दो पहोरको हमारे साथही चलती.. हम सभी साथमे चले जाते..

भुमीका : (सरमाते हसते) नही देवु.. वो सृतीने उनकी सहेलीको कल तक रहेनेको कहाथा.. तो आज उसे अपनी क्लीनीकपे जाना होगा.. दो तीन दिनके बादतो नीमु ओर राजीवभी उधर आजायेगे.. आप इनको छोडने आजाना.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां बुआ.. ये ठीक रहेगा मे ओर चंदादीदी दोनोही इनके साथ आजायेगी.. ताकी सहेरसे सादीके लीये सृतीकी पसंदकी कुछ खरीदारी भी होजायेगी.. उसेभी साथ लेजाना हे..

भानु : (खडा होते गले मीलते) भाइ.. तो हम चलते हे.. दो पहोरको खाना खानेके बाद नीलमको लेकर सीधाही नीकल जाउगा.. ओर यहा आजाउगा फीर हम सब साथमे चले जायेगे..

देवायत : (हसते गले मीलते) हां यार.. आनेके लीये बहुत लोग हे.. हमे दोनो कार लेकर जाना पडेगा..

भुमीका : (खडी होते) चलो सभीको राम राम.. अब हमभी चलते हे..

कहेते भुमीका सबको गले मीलने लगी.. तो सृतीभी बडोको पांव छुते बाकीको गले मीलने लगी.. तब देवुको मीलते वो खुब सरमाइ.. तो रमा भानुभी सबको मीलने लगे.. तब लता बहार आगइ.. ओर सबको गले मीलकर खुब रोइ.. फीर भावेशको अपने सीनेसे लगालीया.. ओर उनके गाल चुमते उसे रोते हुअ‍े खुब प्यार दिया.. फीर रमाने लताको समजाकर भावेशको अपनी गोदमे लेलीया..

तब भावनाने लताको सम्हाला.. ओर सभी अपना अपना सामान लेकर बहार नीकलने लगे.. तो नीर्मला राजीव देवायत..घरके सभी लोग उन लोगोको छोडने बहार तक साथ गये.. भानु अपना सामान कारकी डीकीमे रखने लगा.. तबतक लता भावेशको गोदमे लेकर खडी रही.. ओर उसे प्यार देती रही.. क्युकी अबतक भावेशको लताने ही सम्हाला था.. लेकीन सादीके कुछ दिन पहेलेही रमाने उसे सम्हाल लीया था..

मंजुला : (भुमीको गले मीलते धीरेसे कानमे) बुआ.. मेने आपके पर्समे गोलीया रखदी हे.. उसे हर दिन सुबह लेलेना.. दो दिनके बाद हम वहा आ रहे हे..

भुमीका : (खुस होते सरको चुमते) हंम.. मेरी बच्ची.. तु कीतना खयाल रखती हे.. चल हम चलते हे..

मंजुला : (सृतीकी ओर देखते हसते) बुआ.. मेरी इस सौतनका खयाल रखना.. हें..हें..हें..

सृती : (कारमेसे हसते) कमीनी.. तु अ‍ेक बार घर चल.. फीर तुजे बताती हु.. सौतन वाली.. हें..हें..हें..

भुमीका : (कारमे आगे बैठते) अब चल भी.. जगडा बादमे करलेना.. हें..हें..हें.. चलो सबको बाय..

कहातो सृतीने सबकी ओर हाथ हीलाते कारको सहेरकी ओर जाने दी.. तो भानुभी देवायतकी बडी कारमे अपना सब सामान ओर घरके सब लोगोको लेकर नीकल गया.. ओर सभी लोग वापस घरमे आगये.. तब मंजु ओर चंदा पुनम लता चारो अंदर जाकर टुर के लीये कपडेकी पेकींग करने लगे.. तो देवायत ओर राजीव अपने खेतोकी ओर नीकल गये..

तब लखन ओर धिरेन भी उपर अपने रुममे जाकर हनीमुनपे जानेकी तैयारीया करने लगे.. लखन अपना सामान देख रहाथा तब धिरेन भी अपने रुममे अकेला पडा तो उनको मौका मील गया.. उनको पताथा की नीलमभी सहेरमे दाखला लेने साथ चल रही हे.. तब वो उनके लीये लाया नया मोबाइल नीकालकर नया सीम डालकरे अपना नंबर सेव करके चेक करने लगा.. ओर उसने अलगसे मोबाइल अपनी जेबमे रख लीया..

होलमे सीर्फ भावना ओर नीर्मला बैठीथी तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीला रहीथी.. चंदाने मंजुके बच्चे विजयको जुलेमे डालकर सुला दीया था.. जबसे चंदा सादी करके धिरेनसे दुर होगइ थी तबसे वो मंजुके बच्चे विजयको अपना बेटा मानकर उनका कुछ विसेसही खयाल रखती थी.. नीर्मला अपनी जगाहसे खडी होकर भावनाके पास आकर बैठ गइ ओर उनके सरपे हाथ घुमाते उसे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. तब..

भावना : (हसते) मोम.. क्या हुआ..? आज इस बेटीपे बहुत प्यार आ रहा हे..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हां.. भावु.. आइ अ‍ेम सोरी.. तेरी इस हालतपे कही ना कही मेभी जीम्मेदार हु.. बस अ‍ेक बार अपनी मोमको माफ करदे.. फीर देख मे तेरी जींदगी कैसे खुसीयोसे भर दुगी.. आइ प्रोमीस..

भावना : (फीकी मुस्कानसे) नही मोम.. इसमे आपकी कोइ गलती नही हे.. जब मेरी किस्तमेही ये सब लीखा हेतो कीसीको क्या दोस देना.. मोम.. इनमे आप ओर मंजु लकी हे.. कमसे कम अपने तरीकेसे जींदगीतो जी रही हे.. ओर अब मुजेभी कोइ अफसोस नही हे..

नीर्मला : (प्यारसे गाल सहेलाते) नही भावु.. अपनी किस्मतको दोस मत दे.. हम अपने कुछ नीजी स्वार्थमे भुलही गयेकी हमारी बच्चीके दिलमे क्या क्या सपने हे.. मंजुसे मेरी तेरे बारेमे सबकुछ बाते होगइ हे.. तु कोइभी चीन्ता मत करना.. तुजे अपने तरीकेसे अपनी जींदगी जीनेका पुरा अधीकार हे.. बेटी.. जीले अपनी जींदगी.. अब तेरी मोम.. तुमसे कुछभी नही कहेगी..

भावना : (आस्चर्यसे) मोम.. क्या सचमे मंजुदीदीने आपको सबकुछ बता दीया हे..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां बेटा.. बस यही समजले हम सब कोइ सामान्य ओरते नही हे.. अब मुजे तेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. सायद इसीलीये मंजु ओर देवुने हमारा मकान तेरे नाम करनेको कहा हे.. कास तबही मेने ठंडे दिमागसे सोचते तेरीभी सादी हमारे देवुसे करदी होती.. तो आज कोइ समस्याही नही होती.. भावु.. आइ अ‍ेम सोरी.. तुम अपनाले अपना पुराना प्यार.. मुजे कोइ अ‍ेतरज नही.. मे तेरे साथ हु..

भावना : (नम आंखोसे नजर जुकाते) मोम.. मेरी जीजुसे इस बारेमे बात होगइ हे.. उसने मेरे प्यारको अपना लीया हे.. क्या मेने मंजुदीदी के साथ कुछ गलततो नही कीया..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) नही भावु.. तुमने कुछभी गलत नही कीया.. मेरी मंजु बहुतही समजदार हे.. हम मंजुको कभी समज ही नही पाये.. की वो कौन हे.. देख अभीभी तेरी मौसी ओर सृतीकोभी अपना चुकी हे.. फीरभी तुमतो उनकी सगी बहेन हो.. जब भानु अपना प्यार सादीके बादभी पा सकता हे.. तो फीर तुम क्यु नही..?

नीर्मला : क्या सीर्फ मर्दोको ही ये अधीकार हे..? हम ओरतोको नही..? भावु.. प्यारके मामलेमे मे खुली सोच वाली हु.. प्यारतो कभी भी कीसीके साथ हो सकता हे.. ये हम दोनो पती पत्नीके बीचका मामला हे की हम दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ कीतना जीमेदार.. ओर अ‍ेक दुसरेके साथ कीतना समर्पीत हे.. क्या तुम भानुको छोड रही हो..?

भावना : नही मोम.. मंजुदीदीने मना कीया हे.. मे भानुके साथही रहेकर अपना पुराना प्यार पालुगी.. सायद यही उनकी सजा होगी.. जब वो मुजसे प्यारही नही करताथा तो फीर मुजे दो दो बच्चे क्यु दे दीये..? मोम.. अगर मुजे कोइ प्रोबलेम होगी तो मे हमारे घरपे रहेने आजाउगी..

नीर्मला : (हसते) हां.. आजाना.. अब वो घर तेराही हे.. तु वहा कभीभी आ सकती हे.. ओर वहा रेहभी सकती हे.. बेटी.. देवु तुजे बहुत खुस रखेगा..

मां बेटी दोनोही बाते करती रही तबतक मंजु चंदा पुनम ओर लतामे मीलकर सब पेकींग करली.. तो दया रजीया ओर चंपाभाभीने खानाभी बना लीया.. तो उधर रश्मीनेभी खाना बनाकर सरपंचको खीलाकर खुदभी खा लीया.. तबतक राजीव ओर देवायतभी खेतोसे आकर फ्रेस होगये.. लखन धिरनभी नीचे आगये ओर सभी खाना खाने बैठ गये.. तो वंदनाभी अपने सभी पेपर रेडी करके खानेके लीये बैठ गइ.. तभी..

चारु : (सरमाते नजरे चुराते धीरेसे) बेटा.. वो.. तुम देवुके साथ जा रही हो.. तो तुजे मौका मीलेतो उनसे बात करलेना..

वंदना : (समज गइथी फीरभी अनजान बनते खाना खाते) कीस बारेमे..?

चारु : (सरमाते मुस्कुराते) क्यु..? उस रात हमारे बीच बाततो हुइ थी.. अपने प्यारके बारेमे..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) मोम.. उनकी कीतनी बीवीया होगइ हे.. ओर अबतो सृतीदीदीके साथभी सादी कर रहे हे.. तो क्या अब मुजे अपनायेगा..? मानलो मुजे अपनाभी लीया तो क्या ये सही होगा..? लोगोकी छोडो पापाको पता चलेगातो क्या कहेगे..? कुछतो सोचो..?

चारु : बेटी.. कबतक अपने प्यारके लीये अ‍ैसे घुट घुटकर जीयेगी.. तुजे उनके साथ सादी करके कहा हवेलीपे रहेना हे.. उनकी बीवी बनकर यहाभी तो रेह सकती हे.. ओर भाडमे जाये लोग.. आज तक कोइ मेरी बच्चीके लीये रीस्ता लेकर हमारे घरपे तो नही आये..? तो हम क्यु लोगोकी परवा करे..?

चारु : ओर कीन कीन कमीनोका रीस्ता कीसके साथ हे वो सब मुजे पता हे.. मे सबको जवाब देदुगी.. ओर तेरे पापाको मे सम्हाल लुगी.. हमे कहा दुसरोके सामने तुम्हारी सादीका ढंढोरा पीटना हे.. तु यहा रहेकरभी अपनी सादीसुधा जींदगी बीता सकती हे..

वंदना : मोम.. अभीतो जो चल रहा हे चलने दे.. इसके बारेमे हम बादमे सोचेगे.. पुनोदीदी कहेगी तब मे आपको बता दुगी.. इस बारेमे उनके साथ मेरी बात होगइ हे.. अभीतो नोकरीके बारेमे सोचना हे.. जब अ‍ेक बार स्कुल बन जाये तब हम इस बारेमे सोचेगे.. तबतक आपतो हे.. हें..हें..हें..

चारु : (सरमाते हसते) अरे वो तेरी नोकरी तो पकी होगइ समज.. देवुजो साथ चल रहे हे.. हें..हें..हें.. उनकी होनेवाली बीवीका इतना खयाल नही रखेगा..? हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाते हसते जुठे गुसेसे) मोम.. तुमभी कीतनी कमीनी हो.. अभी उनकी बीवी नही हु.. समजी..?

चारु : (हसते) अरे नही हुइ तो होजायेगी.. मुजे पुरा यकीन हे.. चल ठीक हे.. हम बादमे बात करेगे.. मुजेभी नीशाके पास जाना हे.. तेरे पापाकोतो अब हमसे बात करनेका टाइमही नही मीलता.. सुबह ही नीकल जाते हे.. पता नही कहा जाते होगे.. वो ओर हमारे सामतभाइ आजकल पंचायतके कामसे साथमे ही घुमते हे..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२०/२

इधर हवेलीमे खाना खातेभी धिरेन भावनाकी ओर चोर नजरसे देखता रहा.. उनको भावनाका ओर लताका बहुतही डर लग रहा था.. लेकीन भावनाने धिरेनकी ओर देखाही नही.. उनको धिरेनसे अ‍ेक नफरतसी होगइ थी.. तो लताभी कभी कभी धिरेनको चोर नजरसे देखती रही.. सबने खाना खा लीया तब नीर्मलाने राजीवको दवाइ पीलादी तो राजीव सबको मीलकर अपने रुममे जाकर सो गया.. तभी रश्मी अपने सभी पेपर लेकर आगइ..

तो उनके पीछे वंदनाभी अपने सब पेपर लेकर हवेलीपे आगइ.. तो भानुभी नीलमको लेकर उनके सब सामानके साथ आगया.. तब पुनम ओर लताभी जानेके लीये तैयार होने लगी.. तो लखन धिरेनभी तैयार होकर नीचे आकर बैठ गये.. तब धिरेन नीलमको देखकर बहुत खुस होगया.. तो नीलमभी खुस होते चोर नजरसे धिरेनको देखती रही.. नीलम आज अपने आपको अ‍ेक आजाद पंछीकी तराह महेसुस करते खुस हो रहीथी..

तभी लता ओर पुनमभी नइ नवेली दुल्हनकी तराह सज धजके अपने सामानकी बेग लेकर बहार आगइ.. दोनो चलतीथी तब दोनोने पैरोमे पायलकी छमछम की आवज आ रहीथी.. दोनोके माथेपे बींदीया ओर मांगमे सींदुर लगा हुआथा.. दोनोके हाथोमे कांचकी चुडीया खनखन करती रही.. देवायत पुनमकी ओर देखता ही रेह गया.. अ‍ेक पलतो उनको लगने लगाकी धिरेन पुनमको उनसे छीनकर लेजा रहा हे..

देवायतकी तराह सब उन दोनोको देखते ही रहे.. तब लखन ओर धिरेनकी उनको देखकर हालत पतली होगइ.. दोनोके लंड अपनी पेन्टके अंदरही जटके मारने लगे.. देवायतभी पुनमको चोर नजरसे देखता रहा.. तब पुनम ओर उनकी आंख मील गइ.. ओर देवायत पुनमको देखकर नजर घुमाते अपनी आंखके कोनेको साफ करने लगा..

तो पुनम देवायतकी आंख गीली देखकर थोडी वीचलीत होगइ.. ओर मंजु समज गइ.. तो पुनमको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तब पुनम मंजुसे लीपटकर अपने आंसु बहाने लगी.. तो बडी मुस्कीलसे मंजुने पुनमको सम्हाला तब पुनम मंजुका हाथ पकडकर कहेने लगी..

पुनम : भाभी.. आप भाइको सम्हालना.. वो मुजे देखकर आंसु बहा रहे हे.. उनको कहेना उनकी पुनम बहुतही जल्द उनको वापस मील जायेगी.. वो मेरे बीना नही रेह सकते..

मंजुला : (पुनमके आंसु पोछते) हां मेरी बच्ची.. तु उनकी चीन्ता मत कर.. तुमभी अपने आंसु पोछले.. वरना तुजे अ‍ैसे रोते देखकर वो फीरसे कमजोर हो जायेगे.. ओर सुन.. हनीमुनके बाद तुमको इधरही आना हे.. तुम सृती ओर देवुकी सादीके बाद अपने घर जाओगी.. धिरेनको केह देना.. मेने चंदादीदी से बात करली हे..

पुनम : भाभी.. मेने तीन दिनसे वो दवाइया लेना बंध करदीया हे.. तो कुछ अजीबसा लगता हे..

मंजुला : (धीरेसे समजाते) पुनो.. अगर अ‍ैसा लगेतो अ‍ेक दो दिन उल्टीयोकी टेबलेट ले लेना.. देखना कुछ गडबड ना होजाये.. तुम ओर धिरेन अच्छेसे मीललो.. ताकी धिरेनको तसली होजायेकी ये बच्चा उनका हे.. तुजे हनीमुनसे वापस आकर १० १२ दिनोके बाद अपनी प्रेगनन्सी धिरेनसे बात करके डीकलेर करनी हे.. ओर वोभी सीर्फ धिरेनको कहेना हे.. यहा कीसीको नही समजी.. बाकी सब मे सम्हाल लुगी.. क्या धिरेनके साथ सेक्स करना अच्छा लगता हे..? सच कहेना.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) नही भाभी.. जबसे भाइके साथ मीलन करलीया हे तो उनका कुछ पताभी नही चलता.. बहुतही छोटा हे हें..हें..हें.. पता नही नीलुका क्या होगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) चुप.. कोइ सुन ना ले.. तु हनीमुन मनाकर वापस आजा.. फीर हम दोनो नीलुके बारेमे बात करेगे.. वैसे अबतो तुजेभी पता चल गया होगाकी उनका क्या होने वाला हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हंम.. भाभी.. क्या मुजे आभास होता हे.. वोही सब सच होगा..? मुजेतो बहुतही डर लग रहा हे.. हमारे लखन भैयाभी कुछ कम नही हे.. वोभी नीलुके पीछे लग गये हे..

मंजुला : (हसते) हंम.. यानी तुजे सब पता चलने लगा हे.. देख बीटु.. कुछ बाते जानकर तुम विचलीत या दुखी मत होना.. तु मेरी स्ट्रोंग बेटी हे.. पता नही सृतीको हम कैसे सम्हालेगे.. चल बहार.. तुजे अब जाना हे..

पुनम : (गले मीलते) भाभी.. जब वापस आजाउ तब आपसे बहुतसी बाते करनी हे.. आप भाइको सम्हालना.. मे उसे दुखी होते नही देख सकती.. आपभी साथमे आइअ‍ेना.. फीर भाइके साथ वापस चली आना.. वरना वहा मे भाइको अकेली सम्हाल नही पाउगी..

मंजुला : (हसते) हंम.. ठीक हे.. वैसे आज हमारी दो दो सौतनतो साथ चल रही हे.. अब वंदुको भी उनके नजदीक आने दे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) हंम.. आजके जमानेमे ये सब कीतना अजीब हेनां..? भाभी क्या हम बाबाके दर्शन करके नीकले..? आप भाइसे बात करलो.. चलो हम चलते हे..

मंजुला : (हसते) अरे हां क्यो नही.. अभी काफी वक्त भी हे.. चलो..

कहेते दोनोही हसती हुइ बहार आगइ.. ओर सब जानेके लीये खडे होने लगे.. तो मंजुने चंदासे सबको छोडने साथ जानेकी बात करली.. तो चंदाभी हसने लगी.. ओर उसने विजयको अपने पास रखाथा.. ओर सब बहारकी ओर आने लगे.. तब मंजुने देवायतको पहेले आश्रम लेजानेकी बात कहेदी.. भानुकी कारमे लखन धिरेन रश्मी बैठ गये.. तो देवायतकी कारमे मंजु वंदना पुनम लता ओर नीलम बैठ गये.. ओर चंदा भावना ओर नीर्मलाने बहार खडे होकर हसके सबको हाथ हीलाकर बाय कहेने लगी..

तब पुनम ओर लताभी सरमाकर हसने लगी.. ओर दोनो कार सहेरकी ओर दोडने लगी.. आधे घंटेके बाद सब लोग आश्रमपे आगये.. ओर साथमे चलकर बाबाके पास जाने लगे.. तब पुनम ओर लता मांगमे सींदुरके साथ अपने पतीके साथ चलते बहुतही सरमा रही थी.. ओर सबलोग होलमे आगये तब बाबा सबको देखकर हसने लगे.. ओर सभी उनके चरण स्पर्स करते वही बैठने लगे.. तब बाबाने सबको आशीर्वाद दीये..

बाबा : (मंजुको देखकर हसते) बेटी.. होगइ सादी..? सब अच्छेसे नीपट गयानां..?

मंजुला : (हसते) जी बाबा.. बस ये लोग घुमने जा रहे हे.. तो सोचा इनसे पहेले आपके आशीर्वाद लेले..

बाबा : (हसते) अरे जाओ जाओ.. मेरा आशीर्वाद हे..

भानु : (हसते नीलमकी ओर इसारा करते) बाबा इनकोभी आशीर्वाद दीजीये.. पढनेके लीये सहेरमे दाखला लेने जा रही हे.. वही रहेकर पढेगी.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां.. आशीर्वाद.. आशीर्वाद.. हें..हें..हें.. देखना बेटी दुसरी चीजोके अलावा पढाइमेभी ध्यान देना.. बहुत ही चंचल लडकी हे.. हें..हें..हें..

कहतो पुनम ओर मंजु सब समज गइ.. की बाबाको सब पता चल गया हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते रहस्यमय तरीकेसे मुस्कुराने लगी.. तो लता नीलमकी ओर खाजाने वाली नजरोसे देखते घुरने लगी.. तब नीलमने कीसीकी ओर नही देखा.. ओर वो सरमाकर हसती रही.. तब सबके लीये चाइ आगइ.. ओर सब चाइ पीकर जानेके लीये खडे होगये.. ओर बाबाके पेर छुने लगे तब बाबाने पुनमके सरपे हाथ रख दीया.. ओर कहा..

बाबा : (हसते) बेटी.. तेरी सब मनोकामना पुरी होगी.. तुजे मेरा आशीर्वाद हे..

तब पुनम बहुतही खुस होगइ.. ओर सब बाबाकी इजाजत लेकर नीकल गये.. ओर आघे पोने घंटेकी ड्राइवके बाद सब स्कुलपे आगये.. वहा देवायतने पहेलेसे ही बात करलीथी तो नीलमका दाखला स्कुलमे हो गया.. ओर सब दाखला दीलवाकर बाजुमे होस्टेलमे आगये.. ओर वहाभी नीलमका दाखला दीलवा दीया.. यहा पुनम रहेती थी तो वहाका सभी स्टाफ पुनमकी जान पहेचानका था.. तो पुनमने सबको नीलमका खयाल रखनेकी सीफारीस करदी..

पुनमने ही मेइन मेट्रनसे मीलकर कुछ बाते करके सब अ‍ेरेन्ज करदीया.. ओर उपरकी मंजीलका रुम नंबर ओर बेडका नंबर लेकर पुनमने लखनको देदीया.. ओर नीलमका सामान वही पहोचानेको कहा तो लखन नीलमका सामान लेकर उपरकी मंजीलपे जाने लगा.. तब मौका देखकर धिरेनभी लखनके साथ चला गया.. ओर कुछ सामान लखनके हाथोसे अपने हाथोमे लेलीया.. तब इधर नीलम सबको गले मीलने लगी.. ओर लताको मीलतेही उनकी आंखसे आंसु नीकल गये..

लता : (हसते) देख नीलु.. यहा सबके साथ अच्छेसे रहेना ओर मन लगाकर पढाइ करना.. मे ओर तेरे जीजु तुजे मीलने आते रहेगे.. अगर कोइ काम होतो सृतीदीदीने तुजे उनका नंबर दीया हे.. उसे फोन करना..

मंजुला : (हसते) हां नीलु.. तुजे कुछ भी चाहीये तो सृतीको फोन करना.. मे उनसे बात करलुगी..

नीलम : (हसते) नही मौसी.. सृतीमौसीसे मेरी बात होगइ हे.. वो मुजे मीलने आयेगी..

भानु : (नीलमको गले लगाते) बेटी.. यहा सब पुनमदीदीके पहेचान वाले हे.. हमभी तुजे मीलने आते रहेगे.. बस सीर्फ तीन चार सालहीतो नीकालने हे.. तुजे कुछ खाने पीनेको चाहीये तो तेरे धिरेन जीजुभी इधर आते जाते हे.. हम उसीके हाथो भीजवा देगे..

लता : (जटसे) नही.. भाइ.. इनके लखन जीजु देजायेगे.. ओर हमभी यहा आते जाते रहेगे.. वैसे पुनोदीदीने कहा हे.. वहा होस्टेलमेभी अच्छा खाना मीलता हे.. आपको नीलुकी चीन्ता करनेकी कोइ जरुरत नही हे..

कहातो पुनम ओर मंजु लताकी उत्सुक्ता ओर उनके मनकी बात समजते मनमे हसने लगी.. ओर सोचने लगी.. की लता नीलमको धिरेनसे दुर रखनेकी कीतनी भी कोसीस करले.. आखीर दोनो मीलही जायेगे.. ओर बालीक होतेही धिरेन नीलमसे सादी भी करलेगा..

यही सोचते पुनम मुस्कुराती रही.. नीलम तो पुनम देवायतके वापस मीलन करवाने ओर साथ रहेनेका जरीया हे.. पुनमने छुपकेसे वहाकी अपनी पहेचान वाली मेइन मेट्रननको नीलमकी खबर उनतक फोनसे देनेके लीयेभी केह दीयाथा.. नीचे सब नीलमको समजाते उसे मील रहे थे..

तभी उपरकी मंजीलमे लखनके हाथोसे अ‍ेक चेइनवाली बेग धिरेनने लेलीथी.. ओर वोभी उनके साथ चलने लगा.. जब दोनो उस रुमके पास पहोंचे तब लखनने उनके बेडपे नीलमका सामान रख दीया.. ओर वापस बहार नीकलने लगा तब धिरेनने जटसे अपनी जेबसे अ‍ेक चीठी ओर अ‍ेक नया मोबाइल नीकालकर नीलमकी बेगमे चेइन खोलकर रख दीया.. ओर जटसे वापस चेइन बंध करके दोडकर लखनके साथ होगया..

जब लखन ओर धिरेन नीचे आगये तो सब नीलमको बाय कहेकर नीकलने लगे.. तब भानुकी आंख गीली होगइ.. क्युकी नीलम उनकी खुदकी लडकी थी.. ओर गांवसे सीधीही सहेरमे आगइ थी.. तो जाहीरसी बात हे अ‍ेब बापको अपनी बेटीकी चीन्ता होती हे.. सब नीकलने लगे.. तब नीलम वही खडी रहेते सबको जाते हुअ‍े देखती रही.. तभी धिरेनने सबकी नजर बचाते नीलमको देखते आंखोसे कुछ इसारा कीया..

तो नीलमके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर वो जटसे अपने रुमकी ओर जाने लगी.. दोनो कपलको जानेमे अभी काफी टाइम था.. उनकी बस सामको ७ बजेकीथी तो देवायतने अपनी कार सीधेही जीलेकी पंचायतकी ओफीसकी ओर लेली.. तो इधर सबके जातेही नीलम उपर अपने रुममे चली गइ.. हर रुममे चार बेड लगे हुअ‍े थे.. तो वहा अभी उनके रुममे उनके साथ सीर्फ अ‍ेकही लडकी थी.. जो अभी अपने रुममे नही थी..

नीलम रुममे जातेही दरवाजा बंध करते अपनी अलमारीमे अपने कपडे बेगसे नीकालकर रखने लगी.. तो नीलमको अ‍ेक बेगमे अ‍ेक नये मोबाइलका बोक्ष मीला.. तो वो आस्चर्यसे उसे देखने लगी.. ओर उसे धिरेनकी इसारोसे कही बाते याद आगइ.. ओर उपरसे धिरेनभी सामान रखने उपर आयाथा..

तब नीलम बहुत कुछ समज गइ ओर वो खुसीसे मुस्कराते बोक्ष खोलने लगी.. जैसेही बोक्ष खोला.. तो अ‍ेक नये मोबाइलके साथ अ‍ेक चीठीभी मीली.. तो नीलम मोबाइलको साइडमे रखते जटसे चीठी खोलकर पढने लगी.. तो वो धिरेनकी लीखी हुइ चीठी थी.. ओर नीलम उसे मुस्कुराते खुस होते पढने लगी..

मेरी प्रिय रानी नीलम.. आइ लव यु..

मे ये मोबाइल तेरे लीये लाया हु.. तुम इसे मेरे प्यारकी पहेली गीफ्ट समजना.. इसे मे तुजे रुबरु मीलकर देना चाहता था.. लेकीन आजही पता चलाकी कल हमे अ‍ेक हप्तेके लीये हनीमुनपे जाना हे.. तो इसे मे देर रातको पुनमके सोनेके बाद ये चीठी लीख रहा हु.. मेने मोबाइलमे सीमकार्डभी लगा दीया हे.. ओर फोनमे मेरा नंबरभी सेव करदीया हे.. बस सीर्फ इतना कहेनाथा की जबतक मे ना कहु तबतक तुम मुजे सामनेसे फोन मत करना.. फोन सीर्फ मे ही करुगा.. ताकी वहा कीसीको पता ना चले.. ये अ‍ेक हप्ता तुजे मीले बीना कैसे कटेगा..? बस इसीलीये तुजे मोबाइल दे रहा हु.. इसे तुम चालु करके अपने साथ रखना.. वहा मोका मीलते ही में तुमसे फोनपे बात करुगा.. बाकी सब हम मीलेगे तब तुमसे ढेर सारी बाते करनी हे.. आइ लव यु..

सीर्फ ओर सीर्फ तेरा धिरेन..

चीठी पढते ही नीलम खुसीके मारे हसते हुअ‍े चीठीको चुमने लगी.. ओर कुदते नाचने लगी.. फीर चीठीको अपनी अलमारीमे छुपाकर जटसे मोबाइल लेकर उनको चालु करती हे.. ओर चेक करती हे तो उनमे सीर्फ धिरेनका फोन नंबरही सेव कीया हुआथा..

तो दुसरी ओर सभी लोग जीला पंचायतकी ओफीसपे पहोंच गये.. ओर वहा जाकर देवायत उन अधीकारीको मीला.. जीनसे उनकी बाते होगइ थी.. ओर अपना दोस्तभी था.. वहा उसने वंदनाके ओर रश्मीके सभी पेपर सबमीट करवा दीये.. ओर दोनोके दस्तखत भी करवा दीये..

फीर रश्मीने स्कुलकी जमीनके लीये कुछ ओर पेपरभी सबमीट करवा दीये.. तबतक उन अधीकारीने देवायतकी पुरी फेमीलीको देखकर सबके लीये चाइ नास्तेका इन्तजाम कर दीया.. तबतकत देवायत ओर वो अधीकारी हस हसके बाते करते रहे.. तब उनका अ‍ेक ओफीसर दो पेपर लेकर आगया.. ओर उन अधीकारीने उनपे दस्तखत करदीये.. फीर रश्मी ओर वंदनाका जोइनींग ओर्डर दे दीया.. तब वंदना ओर रश्मी दोनोही आस्चर्यसे देखते खुस होगइ.. तो मंजुने हसते हुअ‍े स्वीटका बोक्ष नीकाला..

मंजुला : (हसते) देवु.. लीजीये यहा सबका मुह मीठा करवाइअ‍े.. मे लेकरही आइ हु.. हें..हें..हें..

जी. अधीकारी : (हसते) भाभीजी.. लाइअ‍े पहेले मुजे दीजीये.. मेने इन दोनोकी नोकरी पकी करदी हे.. तो पहेला हक मेरा हे.. मुजे दीजीये.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां हां.. क्यु नही.. बाकी स्टाफ वालोकोभी दीजीये.. पुरा बोक्ष आपही रख लीजीये.. अपहीके लीये लाइ हु हें..हें..हें..

मीठाइ खा रहेथे तब सबके लीये चाइ नास्ताभी आगया.. ओर सबने चाइनास्ता कीया तबतक देवायत ओर उन अधीकारी हस हसके बाते करते रहे.. ओर अ‍ैसेही ६ बज गये तो सब लोग नीकलने लगे.. तब वंदना ओर रश्मी बहुतही खुस नजर आरही थी.. तो पुनम वंदना ओर रश्मीसे धीरेसे बाते करते देवायतकी ओर आंखोसे इसारा करते करते उन दोनोको छेड रहीथी.. तब वंदना खुब सरमाइ..

फीर सभी वहासे नीकल गये ओर ट्रावेल्सकी ओफीसमे आगये.. तो वहा अ‍ेक आलीसान लकजरी बस खडी थी.. ओर वहा बहुत सारे हनीमुन कपल आये हुअ‍े थे.. सब अपना सामान बसमे रख रहेथे.. तब देवायत ओफीसमे चला गया ओर टीकीट दीखाकर सीट नंबर जान लीया ओर बहार आकर दोनो कपलका सामान कारसे नीकालकर लखन ओर धिरेनको बसमे रखनेके लीये दे दीया.. तबतक सभी लेडीस साथमे खडी रहेकर बाते करने लगी..

जब जानेका वक्त होगया.. तब सभी कपल अपने रीस्तेदारोको गले मीलकर बसमे बैठने लगे.. तो लखन लता ओर धिरेन पुनमभी सरमाते सबके गले मीलने लगे.. पुनम जब वंदनाको गले मीली तब वंदनाने पुनमके कानमे कुछ कहा तो पुनम सर्मसार होगइ.. फीर वो मंजुके गले मीली.. तब मंजुने उसे अ‍ेक बार फीर सबकुछ समजा दीया.. फीर रश्मीको गले मीली.. ओर भानुके पैर छुकर देवायतको गले मीली तब उनके आंसु नीकल गये..

पुनम : (धीरेसे) भाइ.. मे आपको बहुत मीस करुगी.. कास हम दोनो अ‍ैसे हनीमुनपे जाते..

देवायत : (पुनको बाहोमे भरते धीरेसे कानमे) गुडीया.. चीन्ता मत कर.. हम भी जायेगे.. चल जा. ओर रोना बंध कर.. मुजे फोन करती रहेना.. ओर तुम लोग खुब अ‍ेन्जोय करना.. मे तेरा इन्तजार करलुगा..

लता : (देवायतको मीलते) भाइ.. आपभी दोनो भाभीओके साथ हमारे साथ चलते.. तो बहुत मजा आजाता..

देवायत : (हसते) हंम.. अगली बार हम सब साथमे जायेगे.. तब तेरी दो भाभी नही.. तीन होगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. लता तुम सबके वापस आतेही दुसरे दिन तेरे जेठकी सादी सृतीसे कर देगे.. बस मेरी पुनोका खयाल रखना..

देवायत : (अपना डेबीट कार्ड देते) ले लखन.. तु इसे अपने पास रखले.. कही जरुरत पडेतो इनमेसे खर्च करना.. धिरेनको पैसे मत नीकालने देना..

धिरेन : (सरमाते हसते) जीजु.. मेरे पासभी मेरा कार्ड हे.. इनकी जरुरत नही हे..

देवायत : (हसते) हां मुजे पता हे.. तु अब पैसेवाला होगया हे.. तो कार्डतो होगाही.. लेकीन अब तु हमारा जमाइ होगया हे.. तो तुजे खर्च करनेकी जरुरत नही हे.. ओर पुनो तुजे ओर लताको जोभी चाहीये लेलेना..

पुनम : (सरमाते हसते) जी भाइ.. हम चलते हे.. सब बैठ गये हे..

फीर दोनो कपल सबको बाय कहेते बसमे बैठ गये.. तो कुछही देरमे बस सभी हनीमुन कपलको लेकर अपनी मंजीलकी ओर नीकल पडी.. तब रश्मी वंदना ओर मंजु देवायतकी कारमे बैठ गइ.. ओर भानु अकेला अपनी कारमे बैठ गया.. ओर देवायतके पीछे चलने लगा.. तभी देवायतने कारको अ‍ेक बडीयासी होटेलमे लेली.. तो पीछे भानुभी आगया.. ओर सब लोग होटेलके अंदर चले गये.. ओर वहा डीनर करने साथमे बैठ गये.. तभी..

रश्मी : (हसते) देवरजी.. वंदनाकी नोकरीतो पकी होगइ.. अब जबतक स्कुल नही बनजाती तबतक वो सबको पढायेगी कहा..? स्कुलमे विद्यार्थीका अ‍ेडमीशन भी लेना हे.. आपने इनके बारेमे कुछ सोचा हे..?

देवायत : हां.. सीर्फ वंदनाकी नही आपकीभी अ‍ेपोइटमेन्ट होगइ हे.. कुछ दिनोके लीये कीसीका मकान कीरायेपे रखलो.. वरना पंचायका अ‍ेक कमरा इसे टेम्पररी देदो.. ओर स्कुलकी बील्डींगका ओर्डर आतेही आप लोग जल्दसे जल्द स्कुलका काम सुरु करवादो..

रश्मी : हां.. यही ठीक रहेगा.. पंचायतमे हमे कीरायातो नही देना पडेगा.. वैसेभी दो कमरेतो खाली पडे हे.. हम अ‍ेकही कमरेमे ओफीस अ‍ेडजेस्ट कर लेगे.. ओर हां.. अ‍ेक दो दिनमे मेरे मकानका कामभी सुरु करवा रही हु.. रमेशभाइने कारीगरका अ‍ेडजेस्ट करलीया हे..

मंजुला : (आस्चर्यसे देखते) रश्मीभाभी.. आप दुसरा मकान बनवा रही हे..?

रश्मी : (सरमाते हसते) हां देवरानीजी.. अब इस मकानमे नही रहेना.. बडा ही मनहुस मकान हे.. वहा सुकुनही नही मीलता.. अब उनसे छुटकारा मीलजाये तो अच्छा हे.. खडीयामे पडे पडेभी बहुत नखरे कर रहे हे.. अबतो खानाभी नही खा रहे.. येतो अच्छा हुआ देवरजीने मुजे नोकरी दीलवादी.. वरना मेरातो जीना ही मु्सकील हो जाता..

मंजुला : (हसते) हंम.. चलो अच्छा हुआ.. लेकीन रश्मीभाभी.. आपके लीये हमारे घरके दरवाजे हमेसा खुला हे.. जबभी कोइ जरुरत हो आप बेजीजक चली आइअ‍े..

रश्मी : (हसते) थेन्क्स देवरानीजी.. पता नही आपसे मेरा कोनसा रुणानुबंध हे.. जो आप हम सबका इतना खयाल रखती हे.. लेकीन अब कोइ दीकत नही हे..

भानु : (थोडा परीसानीमे) भाभी.. अब आप भावुकोभी थोडा समजाइअ‍ेनां.. वो अभीभी मुजसे रुठी हुइ हे.. मुजसे बातही नही करती..

मंजुला : (हसते) भानुभाइ आप भावुकी चीन्ता मत कीजीये.. अभी भावु हमारे घर हेतो मे उनसे बात करलुगी.. वो जल्दही आपके साथ वापस आजायेगी.. बस अभी कुछ दिन वो मम्मी पापाके साथ रहेना चाहती हे.. बाकी कुछ नही हे..

देवायत : हां भानु.. तेरी भाभी उनको समजा देगी.. धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा..

भानु : (हसते) चलो अच्छा हे.. इनकी वजहसे वो रमाभी परेसान रहेती हे..

ओर सब लोगने डीनर करलीया तब वापस गांवकी ओर नीकल गये.. वंदना कारमे देवायतकी ओर चोर नजरोसे देखती रही.. लेकीन उनको देवायतके साथ अकेलेमे बात करनेका मौका नही मीलताथा.. अ‍ैसेही बाते करते सब अपने गांव पहोंच गये.. तब भानु देवायतको कल खेतोमे मीलेगे कहेकर सीधेही अपने गांव चला गया.. तो देवायतने कार सीधेही रश्मीके घर लेली.. वहा रश्मीको ड्रोप करके वंदनाको छोडने रमेशके घर चले गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२१/१

ओर सब लोगने डीनर करलीया तब वापस गांवकी ओर नीकल गये.. वंदना कारमे देवायतकी ओर चोर नजरोसे देखती रही.. लेकीन उनको देवायतके साथ अकेलेमे बात करनेका मौका नही मीलताथा.. अ‍ैसेही बाते करते सब अपने गांव पहोंच गये.. तब भानु देवायतको कल खेतोमे मीलेगे कहेकर सीधेही अपने गांव चला गया.. तो देवायतने कार सीधेही रश्मीके घर लेली.. वहा रश्मीको ड्रोप करके वंदनाको छोडने रमेशके घर चले गये....अब आगे

वहा चारुभाभी ओर रमेश डीनर करके टीवी देखते वंदनाका इन्तजार कर रहेथे.. हमे देखतेही दोनो खुसीसे खडे होगये.. ओर हम सब सोफेपे बैठ गये.. तब चारुभाभी कीचनमे पानी लेने चली गइ.. तो वंदना उनके सब पेपर रखने अपने रुममे चली गइ.. तभी चारुभाभी हसती बहार आतेही हमको पानी देने लगी.. तभी रमेश ओर चारुको सब बाते जाननेकी उत्सुक्ता बढने लगी.. ओर हमारी ओर देखते रहे..

मंजुला : (हसते) भाभी.. जाइअ‍े हमे मीठाइ खीलाइअ‍े.. वंदुकी नोकरी पकी होगइ हे.. हें..हें..हें.. उनकी नोकरीका सीधा ओर्डर लेकरही आये हे..

रमेश : (खुसीसे आस्चर्यसे हसते) क्या..? ओर्डरभी लेकर आगये..? इतनी जल्दी ओर्डर दे दीया..?

चारु : (खुसीसे हसते) अरे हमारे देवरजी जो साथमे गये थे.. तो ओर्डरतो लेकरही आते.. आप बैठो मे मीठाइ लेकर आती हु.. फीर आपको मस्त चाइ पीलाती हु..

कहेते चारुभाभी उत्साहीत होते कीचनमे चली गइ ओर अ‍ेक डीसमे मीठाइ लेकर वापस आगइ तो हम सबने मुह मीठा कीया.. फीर हम चाइके लीये नही रुके ओर हम दोनो उनकी इजाजत लेकर वहासे नीकलकर हवेलीपे आगये.. ओर फ्रेस होकर होलमे आकर बैठ गये.. तब राजीव नीर्मला चंदा ओर भावना भी वही होलमे हमारा इन्तजार करते बैठेथे.. हमे आनेमे देर होगइ तो सब डीनर करके बैठे थे.. तो दया चंपाभाभी ओर रजीया कीचनमे खाना खा रहीथी.. तभी..

राजीव : (हसते) कहो बेटा.. छोड आये सबको..? कोइ तकलीफतो नही हुइ..?

देवायत : (हसते) नही पापा.. वो चारोभी चले गये.. ओर नीलमकोभी दोनो जगाह दाखला दीलवाकर सेट करके आये.. ओर आश्रममे बाबाको भी मीलकर आये.. तो वंदना रश्मीभाभीकी नोकरी भी पकी करके आये..

नीर्मला : (हसते) ओ बापरे.. हें..हें..हें.. कीतना कुछ करके आगये..? क्या वो दोनोकी नोकरीभी पकी होगइ..?

मंजुला : (हसते) हां मोम.. वो अधीकारी देवुका दोस्तथा.. तो वही दोनोका ओर्डर देदीया.. ओर उसने हम सबको चाइ नास्ताभी करवाया.. बहुतही अच्छा अधीकारी था..

चंदा : (सरमाते हसते) देवु.. वो आप लोगोका खाना.. क्या खाकर आये हे..?

मंजुला : (हसते) हां दीदी.. हम सभी होटेलमे खाकर ही आये हे.. वरनातो इधर पहोंचनेमे देर होजाती..

राजीव : देवुबेटा.. वो भानु चला गया..? इधर नही आया..?

देवायत : हां पापा.. वैसेभी वो थका हुआ लग रहाथा.. कल सीधा खेतोपे आयेगा.. क्यु..? उनका कुछ काम था..?

राजीव : (भावुकी ओर देखते हसते) अरे नही नही.. काम बाम कुछ नही था.. बस अ‍ैसेही पुछ रहाथा..

मंजुला : (हसते) पापा.. आप भावुकी चीन्ता छोडदो.. वो सब देवु देख लेगे.. अब भावुकी सब जीम्वेवारी हमारी हे.. ओर भानुके साथभी सब ठीक हो जायेगा.. वो हम सब देख लेगे.. आप टेन्शान मतलो..

राजीव : (हसते) अरे बेटी चीन्ता नही हे.. हम दोनो वापस घर जायेगे तब भावुभी साथ चल रही हे.. तो सोचा देवुभी हमे छोडने आ रहे हे.. तो क्युना हम उसी दिन मकान भावुके नाम रजीस्टर करवाले..

भावना : पापा.. इतनीभी क्या जल्दी हे..? आरामसे हो जायेगा.. क्यु इतनी चीन्ता करते हो..? मुजे कोइ प्रोबलेम नही हे.. मे खुस हु..

मंजुला : नही भावु.. पापा ठीक केह रहे हे.. मेभी साथ चल रही हु.. मे ओर देवु दोनो ही आयेगे..

कहातो नीर्मला बहुत कुछ समज गइ.. ओर राजीवकी ओर देखते उनकी आंख गीली होगइ.. लेकीन जटसे अपनी आंख पोछते सम्हल गइ.. फीर खडी होकर राजीवको दवाइआ पीलाने लगी.. तबतक रजीया चंपा ओर दयानेभी खाना खा लीयाथा.. ओर अपना काम नीपटाने लगी.. फीर सब लोग अपने अपने कमरेमे चले गये.. भावना भी अपनी बच्चीको लेकर अपने रुममे चली गइ..

तो मंजु रुममे जातेही अपने बच्चे विजवको लेकर बेडपे बैठ गइ.. ओर उसे ब्लाउस उचा करके दुध पीलाने लगी.. तबतक चंदा ओर देवायत अपने कपडे चेन्ज करते नाइटके कपडे पहेनने लगे.. उस रात नीर्मला राजीवके साथ सोगइ.. तब कीतने दिनोके बाद आज नीर्मला उनके साथ सोइथी.. तो राजीव उसे बाहोमे लेकर प्यार करते उसे चोदनेकी जीद करने लगा.. तब बहुतही मुस्कीलसे नीर्मलाने उसे समजाया..

राजीव : (धीरेसे बाहोमे भीचते) नीमु.. सीर्फ अ‍ेक बार.. कीतने दिन होगये.. हमने नही कीया..

नीर्मला : (प्यारसे समजाते) भाइ.. कुछतो सोचो.. इस हालतमे आपको डोक्टरने मना कीया हे.. आपके लीये ये बहुतही जोखीम भरा हे.. वरना क्या मेने आपको कभी मना कीया हे..?

राजीव : (प्यारसे हसते जीद करते) नीमु.. प्लीज.. आज तुजे चोदनेका बहुत मन कर रहा हे.. तु कल क्या मस्त लग रही थी.. मेरातो कलही तुजे चोदनेका मन था.. लेकीन तु भुमीके साथ सोने चली गइ.. सीर्फ अ‍ेक बार.. इनमे कुछ नही होगा.. बस उपर उपरसे.. धीरेसे आरामसे चोदुगा.. चलना..

नीर्मला : (प्यारसे गाल सहेलाते) राजीव.. मेरे भाइ आप क्यु नही समजते..? यहा आपकी तबीयत बीगड गइतो सब क्या सोचेगे.. हम घरपे जाये तब आपका जीतना मन करे मुजे चोद लेना मे मना नही करुगी.. बस अ‍ेक बार हम डोक्टरको दीखादे.. तो हम उनकी परमीशन ले लेगे.. फीर आप मुजे चोद लेना..

राजीव : (हसते) नीमु.. देख ये फटा जा रहा हे.. इनका मे क्या करु..? ये तो तेरी चुतमे जानेके लीये मचल रहा हे.. प्लीज.. सीर्फ अ‍ेक बार चोदलेने दे..

नीर्मला : भाइ.. भाइ.. आप क्यु नही समजते..? दीजीये मे इसे अपने हाथोसे सांत करदेती हु.. वरना आप मानोगे नही..

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ओर नीर्मलाको अपने हाथोसे राजीवका लंड पकडकर हीलाते राजीवको सांत करना पडा.. तो देवायतने भी चंदा ओर मंजु दोनोको साथमे दो दो बार जमकर चोद लीया.. तो दुसरी ओर दोनोही कपल लकझरी बसमे सफर कर रहेथे.. आगे धिरेन ओर पुनम बैठे थे तो उनके पीछे लखन ओर लता बैठे थे.. आज सादीकी दुसरी रात थी.. तो जाहीरसी बात हे दोनोही कपल अ‍ैसे नही बैठे होगे.. खास करके लखन ओर लता..

ठंडीकी वजहसे दोनो कपलने अपने उपर कंबल डाल दीयाथा तो कंबलके अंदरसेही लखन लताको अपनी बाहोमे भरके बैठाथा.. ओर उनके बुब्समे हाथ डालते उसे मसल रहाथा.. ओर बीच बीचमे दोनो अपने होंठ मीलाते कीसभी करते रहे.. तब लता लखनका लंड अपनी मुठीमे पकडकर होले होले सहेला रहीथी.. तो आगे धिरेनभी पुनमको अपने आपसे सटाकर बाहोमे भरते वही कर रहाथा जो लखन कर रहा था..

धिरेन पुनमके बुब्सके साथ खेलते पुनमकी चुतकोभी सहेलाता रहा.. तब पुनमभी काफी गरम हो चुकीथी.. ओर वोभी धिरेनका लंड अपने हाथोमे पकडकर सहेला रही थी.. जबसे अपनी सुहागरातमे धिरेनने पुनमको चोदलीयाथा तबसे पुनमने धिरेनको पतीके रुपमे पुरी तराह स्वीकार कर लीयाथा.. लेकीन उनकी जहेनमे अबभी देवायत घुम रहाथा.. वो धिरेनको देवायत समजकर प्यार करती रही.. ओर कुछही देरके बाद लता ओर पुनमने अपने अपने पतीको हाथसे हीलाकर जडा दीया..

फीर अपने पतीके रुमालसे दोनोने अपने हाथको साफ करलीया.. तो कुछही देरमे अ‍ेक होटेलपे खानेके लीये बस रुक गइ.. तो दोनो कपल बसके नीचे उतर गये.. तब लखन धिरेन बाते करते वोस रुमकी ओर जाने लगे.. तो लताभी पुनमके साथ बाते करते उन दोनोके पीछे चलने लगी.. ओर वहा उन दोनो लेडीस बाथरुममे घुस गइ.. फीर सब फ्रेस होकर बहार आगये.. तो लखन धिरेन होटेलकी ओर आगे चलने लगे.. तब लता पुनमभी आपसमे धीरेसे बाते करते उन दोनोके पीछे चल पडी.. तब पुनमने लताको पुछही लीया..

पुनम : (सरमाते हसते) कहो लताभाभी.. कैसा चल रहा हे आपका हनीमुनका सफर.. हें..हें..हें.. भाइ आपको ज्यादा तंगतो नही करते..? हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते हसते) पुनोदीदी.. आपतो दोनोको जानती हे.. लगता हे आज हमे ये दोनो ठीकसे सोने नही देगे.. हें..हें..हें.. हमारी बसमे सभी कपल अपनी वाइफके साथ लगे रहे थे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां सबकी नइ नइ सादी हुइ होगी.. ये टुर ही हनीमुन कपलके लीये हे.. यहा कीसीको कीसीकी ओर देखनेकी फुरसत नही हे.. तो सब अपनी बीवीओके साथ लगे होगे.. भाभी.. आपने ओर लखनभैयाने भी इस दिनोका कही महीनोसे इन्तजार कीया होगा.. ओर धिरेनभी बहुत ठरकी हे.. हें..हें..हें..

लता : (थोडा गंभीर होते) पुनोदीदी.. अ‍ेक बात कहु..? क्या आपने नही कीयाथा..? मुजे आपके बारेमे थोडा बहुत पता हे.. आपने सादीसे पहेले धिरेनजीजुको हाथ तक नही लगाने दीया.. अब आपसे कैसे कहु..? बस आप धिरेन जीजुका खयाल रखना.. मुजे अभी ओर कुछ नही कहेना..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. उनके बारेमे मे सबकुछ जानती हु.. बस आप ये बात कीसीको मत कहेना.. जोभी होता हे होने दो.. क्या आप धिरेन ओर नीलुके बारेमे बात कर रही हेनां..? ओर मेरे बारेमे ओर क्या जनती हे..?

लता : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. आपके बारेमे ज्यादातो नही पता.. पर दिलके अ‍ेक कोनेमे अ‍ैसा लगता हे.. की हम दोनोही हमसफर हे.. आपसे मेरा बहुत लगाव हे.. अ‍ैसा लगता हे की हम दोनोकी मंजील अ‍ेक हे.. बस इनसे ज्यादा कुछ नही पता.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? क्या आपको नीलु ओर धिरेनजीजुके बारेमे जानकर दुख नही होता..?

पुनम : (हसते) भाभी.. आपका दिल सही बोल रहा हे.. कुछ बाते हे जो मे आपको सबकुछ बताउगी.. लेकीन अभी समय नही हे.. ओर जबसे प्यारकी परीभासा समजने लगी.. तबसे मेने अ‍ैसे कइ रीस्ते देखे हे..

लता : (हसते) दीदी.. कमीने सभी मर्द अ‍ेक जैसेही होते हे.. फीर चाहे बडा हो या छोटा.. हमारे भानुभाइ भी कुछ कम नही हे.. कीसीको अ‍ेक बीवीसे संतोष ही नही होता.. आपका खानदानतो रोयल ओर राजवी परीवार हे.. दो क्या तीन बीवीयोसे सादीकी परंपरा हे.. लेकीन भानुभाइभी..? अगर उनको मामीसे प्यारही था तो फीर भावना भाभीकी जींदगी क्यु खराब करदी..? उनको दो दो बच्चेभी दे दीये..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? चाहे मर्द हो या हम जैसी औरत.. हम सभीके मनमे अपने अपने सपनोके राजकुमार या रानीकी कल्पना होती हे.. फीर चाहे वो सादी कीसीसेभी करले.. प्यारतो कभीभी कीसीभी उमरमे हो सकता हे.. जीस दिन उसे अपने सपनोका मर्द या ओरत मील जायेगी..

तब वो उसे पाकरही रहेगा.. या उसे पानेकी कोसी करता रहेगा.. ओर ये आजकल नही.. बरसोसे चला आ रहा हे.. तो हम कीसीको क्या दोस दे.. आपके ओर मेरे मनका भी कोइ राज कुमार होगा.. तो यही बात मर्दमे भी लागु होती हे.. तो इसमे बेचारे भानुभाइकी क्या गलती.. भाइनेतो कीतनी सादीया की हे.. ओर अभीभी कीयेही जा रहे हे..

लता : (सरमाते हसते) दीदी.. आपने सही कहा.. आपकी बातोसे मुजे ओरभी जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ हे.. क्या मुजे ओरभी बाते बता सकती हे..? हम दोनोके बारेमे..

पुनम : (हसते) भाभी.. अभी कुछ नही.. लेकीन अभी इतना बता सकती हुकी आपने अभी कहानां.. की हम दोनो हमसफर हे.. हम दोनोकी मंजील अ‍ेक लगती हे.. तो भाभी.. अभी इतनाही जानलो.. की आपके मन की ये बात सच हे.. अभी इस बारेमे कीसीको कुछ मत कहेना.. सब समयपे छोडदो.. इस बारेमे मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. लेकीन अभी नही.. हम दोनोही फुरसतमे बात करेगे..

लखन : (दुरसे जोरोसे आवाज देते) अरे.. दोनो चलोभी.. कीतनी बाते करोगी.. बाते बादमे करलेना..

लता : (जोरोसे) अरे आ रहे हे.. (पुनमकी ओर हसते) चलीये दीदी.. हम इस बारेमे हम बादमे बाते करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ जानना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां भाभी.. चलो.. मुजेभी आपसे बहुत कुछ बताना हे.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही लखन धिरेनके पास चली गइतो चारो होटेलमे चले गये ओर वहा सबने आपसमे बाते करते डीनर करलीया.. फीर बहार आकर धिरेनने दो तीन पानीकी बोटल लेली.. तो कुछ लोग पान ठंडाभी पीते रहे.. ओर धीरे धीरे करते सब वापस बसमे बैठ गये.. ओर बस अपनी मंजीलकी ओर चल पडी तब लखन धिरेनने लता ओर पुनमको कंधेसे पकडकर अपने आपसे सटालीया तो कुछही देरमे दोनो अपने पतीके कंधेपे सर रखके सोगइ..

तब भानुके गांवमेभी भानु जब रातपे घरपे गया.. तो सरला ओर रमा भी खाना खाकर भानुका इन्तजार करते आंगनमे खटीया डालकर बैठी हुइ थी.. रमाने भावेशको दुध पीलाकर अपने रुममे सुला दीया था.. तभी भानुभी आगया ओर वही बैठ गया.. तो रमाने उसे पानी पीलाया.. ओर खाली ग्लास लेकर वही भानुकी ओर सवालीया नजरोसे देखते नीलमकी बाते सुननेके लीये खडी रही.. तब सरलाने पुछही लीया..

सरला : भानु.. क्या नीलमका सब अ‍ेडमीशन होगया..? उनको होस्टेलमे जगाह मील गइ..?

भानु : (हसते) हां माइ.. वो स्कुलवाले तो हमारे देवुके पहेचान वालेथे.. ओर होस्टेलमे पुनमदीदीके पहेचान वालेथे.. तो हमारी नीलुको रहेनेके लीये रुमभी बढीया मील गया.. ओर वैसेभी वहा सृतीदीदी हे ओर हमारे साले साहब धिरेनभी सहेरमे नोकरी करते हे.. तो वोभी वहा आते जाते रहेगे.. वहा नीलुको कोइ तकलीफ नही हे.. बस वो अच्छेसे पढ लीखले.. ताकी उनकोभी हमारी लताकी तराह कोइ अच्छासा लडका मील जाये..

रमा : (खुसीसे हसते) अरे.. आप नीलुकी चीन्ता तो छोडही दो.. हमारी लता केह रहीथी हमारे देवरही उनके लीये कोइ अच्छासा लडका ढुंढ देगे.. क्यु माजी..? हमारे लखन तो बहुतही अच्छे हे.. ओर देवरजीभी हमारा कीतना खयाल रखते हे..

सरला : (हसते) हां.. हमारा देवुही उनके लीये कोइ अच्छा रीस्ता ढुंढ लेगा.. भानु.. ये बता तुने खाना बाना खायाकी नही..? हम दोनोतो खाकर बैठी हे..

भानु : (हसते) हां.. देवुने हम सबको अ‍ेक मस्त होटेलमे खाना खीलाया.. वो मंजुभाभी भी साथमे आइ थी..

सरला : (हसते) चलो सब अच्छेसे नीपट गया.. हमारी लता वहा राज करेगी राज.. हें..हें..हें.. ओर उनकी जेठानीभी कौन हे.. हमारी मंजु बीटीया.. उनको कोइ पैसो या राजघरानेकी बहु होनेका घमंड नही हे.. वोभी लताको अपनी छोटी बहेन मानती हे..

रमा : (जोरोसे हसते) माजी.. कास हमारे लखनकेभी कोइ अ‍ेक छोटे भाइ होते.. हें..हें..हें.. तो मे मेरी नीलुको वही उनके साथ ही ब्याह देती.. हें..हें..हें.. हमारे जमाइ लखनभी कीतने अच्छे हे.. अबतो अपने भाइका ज्यादातर कारोबार आपके बेटेके साथ रहेते वोही सम्हालते हे.. क्युजी..?

भानु : (हसते) हां माइ.. देवु केह रहाथा वो लखन ओर हमारी लताको सहेरमे रहेनेके लीये भेज रहा हे.. वहा देवुका अ‍ेक बंगलो पहेलेसे ही ले रखा हे.. हमारी लता ओर लखन अब वही बडे सहेरमे रहेगे.. हें..हे..हें..

रमा : (बहुत खुस होते) क्या..? तो हमारी लतादीदी अब सहेरमे रहेगी..? तबतो हमे नीलुकी कोइ चीन्ता नही करनी.. कास लखनका कोइ छोटा भाइभी होता.. तो मे पका नीलुकी ब्याह उनसे करवा देती.. हें..हें..हें..

सरला : (खुसीसे हसते) अरे उनको लखन होगया वोही बडी बात हे.. वरना उनके खानदानमे तो अभी तक सीर्फ अ‍ेकही लडका होताथा.. येतो अच्छा हुआ बाबाने उनके खानदानमे जो श्रापथा उन श्रापका नीवारण करदीया.. तो लखन भी आगया.. ओर बादमे पुनमभी आगइ.. फुल जेसी बच्ची हे वो.. कीतनी सुंदर..

रमा : (हसते) माजी.. सब बच्चे चले गयेतो आज घर कीतना सुना सुना लग रहा हे.. अच्छा हुआ मे भावेशको लेकर आगइ..

सरला : (हसते) हां.. अच्छा हुआ तुम भावेशको लेकर इधर आगइ.. हमारा कुछ टाइमतो नीकलेगा..

रमा : (अ‍ेकदम सरमाते हसते) माजी.. लेकीन अब भावेशको मे हमेसाके लीये मेरे साथही रखुगी.. आजसे वो मेरा बेटा हे.. मे इसे अपना बेटा मानकरही हमेसाके लीये मेरे साथ रखुगी..

भानु : माइ आपको बैठना हेतो बैठो.. मे चला सोने.. आज सहेर जाके बहुत थक गया हु..

सरला : (हसते) हां सो जाओ हमभी सो जाते हे.. येतो तेरा इन्तजार कर रहेथे.. जा सोजा.. रमा तुम बैठ.. मुजे तुमसे कुछ बात करनी हे..

रमा : (भानु चला गया तब सरलाके पास बैठते) जी माजी.. कहीये..

सरला : (सरमाते धीरेसे) सुन रमा.. अब तुम दोनो चाहोतो अपने बच्चेके बारेमेभी सोचो.. तुमने खामखा ओपरेशन करवालीया.. क्या ये वापस ठीक नही होता..

रमा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) जी.. वो बीमारथे तबही ठीक करवाया था.. हम कोसीस कर रहे हे.. लेकीन कोइ फायदा नही हो रहा.. इसीलीये अब भावेशको अपना बेटा मानती हु..

सरला : (हसते) हंम.. चल ठीक हे.. कोसीस करती रहेना.. अबब जा तुमभी सोजा..

फीर दोनो ही उठ गइ ओर अपने अपने रुममे चले गइ.. भानु चेन्ज करके सोने लगा तो रमाभी चेन्ज करके भानुके पास आकर लेट गइ.. आज सरलाकी बातोने उसे फीरसे जावानीकी ओर धकेल दीया.. ओर वो भानुकी ओर करवट लेकर पलट गइ.. फीर अपनी अ‍ेक टांग उठाकर भानुकी कमरपे डालकर भानुके सीनेपे हाथ रखते उनके सीनेको सहेलाने लगी.. तो भानुका लंड खडा होने लगा.. ओर वो रमाकी ओर करवट लेकर रमाको जोरोसे बाहोमे भीच लेता हे.. ओर उनके होठ चुमने लगता हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) जानु आपतो थक गये थेनां..? तो फीर सो जाओ.. हें..हें..हें..

भानु : (मुस्कुराते होंठ चुमते) अरे वोतो तुजे रुममे बुलानेके लीये कहाथा.. क्या केह रहीथी मां..?

रमा : (सरमाते हसते) वो.. वो मुजे हमारे बच्चेके लीये केह रहीथी.. हें..हें..हें..

भानु : (हसते) अच्छा..? तो फीर चल कपडे नीकाल.. आजतो तुजे बच्चा देही दु.. हें..हें..हें.. रमा.. क्या मस्त लग रही हे तु.. जी चाहता हे तुजे चोदताही रहु.. हें..हे..हें..

रमा : (सर्मसरार होते अपना गाउन नीकालते) आप बहुत गंदे हो.. कीतना ठरकी होगये हो.. ओर मुजेभी ठरकी करदीया.. अबतो मुजेभी आपसे चुदवाये बीना नींद नही आती.. जबसे हमारी सादी हुइ हे तबसे अ‍ेक रातभी आपने मुजे चोदे बीना नही जाने दी.. वहाभी आप मेरी ठुकाइ करलेते थे.. हें..हे..हें..

भानु : (होंठ चुमते बुब्सको मसलते) रमा.. तु चीज ही अ‍ैसी हे.. तुजे चोदे बीना मन नही लगता..

रमा : (सरमाते धीरेसे गाल सहेलाते) भानु.. लेकीन आज कोइ गोली बोली नही खानी.. आप गोली खाकर मुजे चोद चोदकर थका देते हो.. आज सीर्फ अ‍ेकही बार चोदलो फीर चुदाइ करके सो जाओ.. आपभी आज थक गये हे..

फीर भानु रमाके उपर चडकर लेट गया.. तो रमाने भानुका लंड पकडकर अपनी चुतपे टीका दीया ओर भानुने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड रमाकी चुतमे घुसा दीया तो रमाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर भानु हाथके बल उचा होते रमाको कमर हीलाते जोरोसे चोदने लगा.. तब रमाभी मदहोस होते भानुकी पीठ सहेलाते मजेसे चुदवाने लगी.. ओर भानु रमाके बीच धीरे धीरे करते घमासान चुदाइ होने लगी..

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कुछही देरकी धमासान चुदाइकी वजहसे दोनोही अकडने लगे.. ओर रमाने जोरोसे भानुको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर भानुके होठोसे लीपलोक करलीया तब भानु ओर रमा दोनोही साथमे जडने लगे.. ओर भानु जडतेही रमाके सीनेपे सर रखते ढेर होगया तब रमा भानुकी पीठ सहेलाती रही.. तो कुछही देरमे भानुका लंड सीकुडकर रमाकी चुतसे नीकल गया तो रमाने अपनी चुतको ओर भानुके लंडको साफ करलीया..

रमा : (सरमाते हसते) भानु.. आजतो गोली नही खाइतो जल्दी होगया.. हें..हें..हें.. वरना तो आप मेरी हालत बीगाड देते हो.. अब मे आपको गोली नही खाने दुगी.. हां हप्तेमे अ‍ेक दो बार ठीक हे.. देखना अबतो ये भावेशभी हमारे साथ सोयेगा..

भानु : (हसते) तुमने खामखा बच्चेका ओपरेशन करवा लीया.. वरना हमभी अ‍ेक बच्चा पैदा कर लेते.. हें..हें..हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे हसते) भानु.. अ‍ेक बात कहु..? मेने कभी ओपरेशन करवाया ही नही.. जबभी आप वहा आकर मुजे चोदते थे.. तब में आइपील ले रहीथी.. लेकीन हमारी सादीके बाद मेने वो लेना बंध करदीया हे.. फीरभी हमारा बच्चा नही ठहेरता.. मेनेतो अब उमीदही छोडदी हे.. इसीलीयेतो भावेशको लेकर आगइ हु..

भानु : (हसते प्यारसे गाल सहेलाते) हंम.. वोभी तो मेरा बच्चा हे.. चल ठीक हे.. रमा.. तुम मस्त हो.. जीस तराह तुजे चोदता हुनां.. उसी तराह मेने भावुकोभी खुब चोदा हे..

रमा : (सरमाते) हां.. तभीतो उन बेचारीको छोटी उमरमे दो दो बच्चे देदीये.. लगता हे आपको बच्चे पैदा करनेका बहुत सोख हे.. हें..हें..हें.. हमारी नीलम होगइ वोही बहुत हे.. हम रीलेशनमे आये तबही मुजे पेटसे कर दीयाथा.. ओर भावुको भी सादी करतेही प्रेगनेन्ट करदीया.. अभी भावेश बडाभी नही हुआ.. ओर उसे दुबारा पेटसे करके बच्ची देदी.. हें..हें..हें..

भानु : रमा.. आज मेने मंजु भाभीसे बात करली.. वो भावुको समजायेगी.. ताकी वोभी हमारे साथ सो सके.. मेने भी भावुको कीतने दीन होगये नही चोदा.. उनको चोदनेका बहुत मन कर रहा हे..

रमा : (थोडा सख्तीसे) देख भानु.. वो जो कर रही हे उसे करने दे.. उसे हमारे साथ सुलानेकी अब कोइ जरुरत नही हे.. क्या मे आपको चोदनेके लीये मना कर रही हु..? मुजे जीतना मन करे उतना चोदलो.. मे मना नही करुगी.. मानाकी गलती तेरी थी.. लेकीन वो तुमसे नाराज हे तो होनेदे.. अबतो तेरे ससुरभी उनके नाम अपना मकान कर रहे हे.. अगर वो वहा रहेना चाहेतो तुम उसे मना मत करना.. केह देती हु..

भानु : (थोडा परेसान होते) लेकीन रमा वोभी मेरी बीवी हे.. क्या वो वहा रहेगीतो अच्छा लगेगा..? लोग क्या कहेगे..? कुछतो सोच समजकर बोला कर.. मत भुलो तुम दोनोही मेरी बीवी हो.. उनकाभी इतना हक हे जीतना तुम्हारा हे.. येतो अच्छा हुआ वो तुम्हारी सादी मेरे साथ करवाने मान गइ.. वरना सोचो तुम क्या करती..? हमे आजभी सबसे छुप छुपके मीलना पडता..

रमा : (थोडा प्यारसे) भानु.. मानाकी वो मान गइ.. लेकीन क्या मे तुजे करने नही देती..? हमारी सादीसे पहेले जबसे उसे हमारे रीस्तेके बारेमे पता चला तबसे आपको हाथभी लगाने नही दीया.. तो फीर उसे हमारे साथ सुलाकर अब क्या फायदा..? उल्टा हमारा मजा खराब करेगी.. ओर आपका मुडभी ठीक नही रहेगा.. भानु.. तुम मुजे जीतना चोदना चाहो चोदलो.. मुजे प्रेगनेन्ट करना चाहोतो वोभी करलो.. मे मना नही करुगी.. हम बच्चेके लीये कोसीसभी तो कर रहे हे.. लेकीन उसे रहेने दो.. प्लीज..

भानु : चल ठीक हे.. उनके बारेमे हम बादमे सोचेगे.. अब सोजा.. वरना फीरसे तुजे चोद लुगा.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते भानुकी बाहोमे आते) तुम बहुत कमीने हो.. तुम्हारातो मनही नही भरता.. अब कल चोद लेना अभी सोजाओ.. मेरा अच्छा बच्चा.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भरते सोने लगे तब कुछही देरमे भानु नींदकी आगोसमे चला गया तब रमा सोते हुअ‍े सोचमे डुब गइ.. वो भलेही भावनाके साथ अपनोसा व्यवहार करती रही.. लेकीन मनसे वो भावनाको भानुसे दुर रखना चाहती थी.. इसीलीये आज उसने भानुसे भावनाको ना मनानेकी बात कहेदी.. वो भावनाके मनकी बात जान चुकीथी.. इसीलीये भावनाको अपने प्रेमीसे मीलने प्रोत्साहीत कर रहीथी.. ताकी उनका रास्ता हमेसाके लीये साफ रहे.. यही सब सचते वोभी नींदकी आगोसमे चली गइ..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२१/२

आज सुबहका सुरज सबके लीये अ‍ेक नइ उमीद लेकर नीकलाथा.. कीसीको अपने प्यारकी चाहत थी तो कीसीको अपनी मनचाही मासुकाको पानेकी चाहत थी.. सभी लोग अ‍ेक नइ उमीद लेकर उठ गये.. मंजु चंदा नीर्मला रजीया दया चंपाभाभी सभी सुबह जल्दी उठ गये.. ओर तैयार होकर अपने कामपे लग गये.. नीर्मलाभी राजीवको कंपलीट करके भावनाके पास चली गइ.. तो भावना तैयर होकर अपनी बच्चीको ब्लाउस उचा करके दुध पीला रहीथी.. जैसेही नीर्मलाको देखा उनके चहेरेपे स्माइल आगइ..

भावना : (हसते) मोम.. क्या पापाको कंपलीट कर दीया..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते उनके पास बैठते) हां बेटी.. क्या भावेश तेरे बीना रमाके पास रेह पायेगा..?

भावना : हां मोम.. वोतो सुरुसेही लताके पास रहेता था.. उनकोही अपनी मां मानता था.. हें..हें..हें.. ओर जबसे सादी की डेट आगइ.. तबसे रमाही उसे सम्हालने लगी हे.. वो उनके साथ घुल मील गया हे.. ओर वैसेभी मे दो दो बच्चे कैसे सम्हालुगी..? वो भलेही उनके पास रहेता..

नीर्मला : (प्यारसे सरपे हाथ घुमाते) भावु.. तु कोइ चीन्ता मत करना.. तुजे जीस तराह अपनी जींदगी जीनी हे जीले.. हम तुजपे अब कोइ पाबंदी नही लगायेगे.. बस अ‍ेकही बीनंती हे.. तुम भानुको मत छोडना.. इसमे आगे जाकर तेराही फायदा हे..

भावना : (हसते) मोम.. क्या आपकी मंजु दीदीसे इस बारेमे कोइ ओर बात हुइ हे..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. थोडी बहुत.. लेकीन तुजे भी तेरे बारेमे मंजु ही सबकुछ बतायेगी..

भावना : मोम.. मे ठीकतो कर रही हुनां..? कोइ गलतीतो नही करती..? खास करके मंजु दीदीके साथ..

नीर्मला : (हसते) नही मेरी बच्ची.. तुम मंजुको जानती ही नही.. वो बहुतही विसाल दिलकी हे.. देखा नही चंदा सृती सबको हसी खुसी अ‍ेक्सेप्ट करलीया..

मंजुला : (कमरेमे आते) नही भावु.. मेरी छोटी बहेन कभी गलती नही कर सकती.. तुम चाइ नास्ता करलो.. ओर बच्चीको थोडी देर मम्मीको सम्हालने देदो.. अभी देवु खेतोपे चला जायेगा.. तब हम दोनोको रश्मी भाभीके घर जाना हे.. वहा हम दोनोही आरामसे बात कर सकेगे.. मुजे वहा कुछ काम भी हे..

नीर्मला : (खुस होते) हां भावु.. मंजुके साथ वही चलीजा.. अ‍ैसी बात करना यहा उचीत नही हे.. मे तेरी बच्चीको सम्हाल लुंगी.. ओर हां.. इस बारेमे अभी तेरी मौसीको बतानेकी जरुरत नही हे.. तु समज गइनां..?

फीर तीनोही बात करके बहार होलमे आगइ.. तब राजीव सोफेपे बैठकर खबार पढ रहाथा.. तभी चंदाभी देवायतके साथ रुमसे नीकलकर सबके पास होलमे आकर बैठ गइ.. तभी दयाने टेबलपे सबका चाइ नास्ता रख दीया तो सभी डाइनींग टेबलपे आगये.. तब राजीवभी देवायतके साथ खेतोपे जानेके लीये तैयार होगया.. ओर चाइ नास्ता करके दोनो खेतोपे चले गये.. तो कुछ देरके बाद भावना ओर मंजुभी बच्चीको नीर्मलाको थमाकर रश्मीके घरकी ओर बाते करते चली गइ..

भावना : (हसते) दी.. हम हमारे रुममेभी बात कर सकते थे.. तो फीर रश्मी भाभीके घर क्यु जाना..?

मंजुला : नही भावु.. कुछ बाते अ‍ैसी हे अगर वहा चंदादीदीने सुनलीयातो उनको बडा दुख होगा.. ओर रश्मीभाभीके घर उनका सेपे्रट रुम हे.. वहा बैठकर हम आरमसे बात कर सकते हे.. क्युकी आज मुजे तुम्हे तुम्हारे बारेमे ओर लता नीलु सबके बारेमे बहुत कुछ बताना हे..

दोनोही बाते करते रश्मीके घरकी ओर चली जा रहीथी तब देवायत ओर राजीवभी खेतोपे आगये तो भानु अभी तक खेतोपे नही आयाथा.. तो राजीव रामुकाकाके पास जाकर उनके साथ खटीयापे बैठ गया.. तो उसे देखकर रामुकाकाभी खुस होगये.. ओर दोनो बाते करने लगे तब देवायत तीन चार दिनोसे खेतोपे नही आयाथा तो वो सब मजदुरोको मीलने ओर सबके कामका जायजा लेने खेतोपे घुमते चला गया..

तो वहा हरीया ओर मालतीके साथ छोटु ओर उनकी बीवी रीटाभी काम कर रहेथे.. तब मालती देवायतको देखतेही उनकी ओर कातीलाना स्माइल करने लगी.. तो रीटाभी प्यासी ओर कामुक नजरोसे देवायतको देखते हसने लगी.. तभी मालतीने देवायतको चाइ बनानेका पुछ लीया.. तो देवायत समज गया.. ओर उसने राजीवका सोचते मालतीको हसके मना कर दीया.. ओर थोडी देरके बाद बनानेको कहा..

हरीया : (हसते पास आते) मालीक.. अब आप अ‍ेक बार कबीलेमे जाकर सबको मील लीजीये.. सबलोग आपको मीलना चाहते हे.. मेतो अब इधर आ गया हुतो.. सबका कहेना हे.. अब कबीलेमे कीसीको मुखीया बनादे.. या फीर वहा अ‍ेक पुजाके लीये गुरु चाहीये.. जो कबीलेका काम करे..

देवायत : (हसते) क्यु..? कुछ हुआ हे क्या..? मे बाबासे मीलकर इस बारेमे बात करलुगा.. ओर अभी दो तीन ठहेरजा मे जाकर कुछ करता हु.. ओर वो मंगीयाके भाइ डुंगरकी बीवीका क्या हुआ..? वो तेरे पास आगइ की नही..? हें..हें..हें..

हरीया : (सरमाते हसते देवायतको थोडा दुर लेजाते) जी.. मालीक.. दरसल उसीके बारेमे आपसे बात करनी थी.. वो हमारे घर डुंगरको छोडकर आगइ हे.. मुजे ओर मालतीको कबीलेपे जाना हे.. वही मंदिरमे जाकर सादी करलेगे फीर मालतीतो इधरही हे.. मे उनकोभी यहा लेकर आजाउगा.. इसीलीये मुजे ओर मालतीको उसे लेने जाना हे..

देवायत : (हसते) हंम.. अभीतो तुम लोग गांवमे गयेथे.. वापस आये सीर्फ तीन दीन हुअ‍े.. फीरभी जाना हे..?

हरीया : (हसते) जी.. मालीक जाना पडेगा.. हमारे यहा आनेके बादही वो वहा आगइ.. मुजे दुसरे मजदुरसे पता चला.. आपतो जानते हे हम बीवीओको ज्यादा दिन अकेले नही रखते.. हें..हें..हें.. इसीलीयेतो मे मालतीको साथही रखता हु.. हें..हें..हें.. ओर आपसे मालतीभी कुछ बात करना चाहती हे.. वो जमीलाके बारेमे..

देवायत : (हसते) ठीक हे.. चले जाना.. ओर वापसभी जल्दीसे आना.. अब यहाभी कुछ कामपे ध्यानदे.. अब कामभी बढ जायेगा.. जा.. अब बुला उसे.. अभी बात करलेते हे..

तभी हरीया मालतीको इसारा करते बुलाता हे तो मालतीभी सरमाते हसते हुअ‍े दोनोके पास आगइ..

मालती : (सरमाते हसते) जी मालीक.. कहीये..

हरीया : (हसते) अरे वो तुम मालीकसे बात करना चाहतीथी नां..? वो जमीलाके बारेमे..

मालती : (सरमाते हसते धीरेसे) वो.. वो.. मे मालीकसे अकेलेमे मीलकर बात करलुगी.. अभी चाइ देने जाउगी तब बात करलुगी.. मुजे ओर भी बात करनी हे..

देवायत : (हसते) चलो ठीक हे.. बाकीतो सब सही चल रहा हेनां..? कुछ चाहीयेतो नही..?

हरीया : (हसते) जी नही मालीक.. आपकी दयासे अभी सबकुछ ठीक हे.. मे चलता हु.. क्या हम दोनो अपने घर जाये..? वो मेरी दुसरी बीवीको लेकर हम जल्दी वापस आजायेगे..

मालती : (कातीलाना मुस्कानसे) मालीक.. अब वो रीटाभी अच्छा खाना बनाती हे.. मुजसे केह रहीथी.. अगर आप कहोतो हम दो दिनमे वापस आजायेगे.. मेरी सौतनको लेने जाना हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते कुछ पैसे देते) हां चले जाना.. येलो.. इनकी सादीमे काम आयेगे.. ओर भानु आजाये तब तुम हमारे लीये चाइ बनाकर लेआ..

मालती : (खुस होते पैसे लेकर) जी.. मालीक.. मे अभी बनाकर लेआइ..

कहेते देवायत मालतीको कुछ पैसे देताहे तो हरीया ओर मालती दोनोही खुस होजाते हे.. ओर देवायत रीटाकी ओर नजर डालते मुस्कुराते वापस राजीव ओर रामुकाकाके पास आकर बैठ जाता हे.. तब राजीव ओर रामुकाका हस हसके पुरानी बाते कर रहेथे.. ओर देवायत वहीसे खडे होकर अपने गोडाउनकी ओफीसमे जाकर बैठ जाता हे.. तभी भानुभी कार लेकर आगया ओर राजीव रामुकाकाके पैर छुकर सीधाही खेतोमे चला गया..

तो इधर धिरेन लखन पुनम ओर लताभी सुबह अ‍ेक होटेलमे बस रुकीतो फ्रेस होगये.. ओर चाइनास्ता करके अपनी मंजीलकी ओर बढ गये.. अभी उन लोगोको गौवा पहोंचनेमे चार पांच घंटेका वक्त था.. लखन ओर लता अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते सफर कर रहेथे.. तो दुसरी ओर अब पुनमभी धिरेनके साथ काफी घुल मीलकर खुल चुकीथी.. ओर वोभी धिरेनका ध्यान रखते उनके साथ हसी मजाक करते मस्ती करने लगी..

तो गांवमे मी मंजु ओर भावना आपसमे बाते करते रश्मीके घर पहोंच गइ.. तब रश्मी कीचनमे काम कर रहीथी.. तो दोनोको देखतेही अपने हाथ पोछते हसते हुअ‍े बहार आगइ.. तो मंजुने रश्मीको भावुसे अकेलेमे बात करनेको कहा.. तो रश्मीने उन दोनोको अपने बेडरुम मे भेज दिया.. ओर कीचनमे चाइ नास्ता बनाने चली गइ.. तो मंजु ओर भावना रश्मीके बेडरुममे आगये ओर मंजुने धीरेसे दरवाजा बंध करदीया.. ओर दोनो बेडपे आकर बैठ गइ.. तो भावनाने मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखा.. तो मंजुने कहा..

मंजुला : भावु.. कुछ बाते अ‍ैसी हे.. जो वहा बात करना मुमकीन नही हे.. अगर चंदादीदी ओर मोमने ने सुन लीया तो दुखी होजायेगी.. इसीलीये तुजे यहा लेकर आइ हु.. अब हमारे पास समय ही समय हे..

भावना : दीदी अ‍ैसी क्या बात हे जो दोनो दुखी होजायेगी.. आज मुजे सबकुछ खुलकर बताइअ‍े.. मुजे पता हे आपको हम सबके बारेमे पहेलेसेही पता चल जाता हे.. तो आज खुलकर हम सबके बारेमे बताइअ‍े.. खास करके मेरे ओर नीलम.. लताके बारेमे.. आपने मकान सीर्फ मेरे नामही क्यु करनेको कहा.. मुजे सब कुछ जानना हे..

मंजुला : हां भावु.. इसीलीये तो तुजे लेकर यहा आइ हु.. सुन.. तुम भानुको मत छोडना.. मुजे रमाभाभीकी नीयत कुछ ठीक नही लगती.. तुजे वो भानुभाइसे दुर रखना चाहती हे.. ताकी वो अकेली उनके साथ मजे कर सके.. वो भी तेरी सासकी तराह बहुतही कामी होगइ हे.. वो नही चाहती तुमभी उन दोनोके साथ अ‍ेकही बीस्तरमे रहो.. वो भानुके साथ तुमको सेर करना नही चाहती.. उनको तुमसे थोडी ज्वेलेसी हे..

भावना : (आस्चर्यसे) लेकीन क्यु..? मेने उनका क्या बीगाडा हे..? उल्टा वोतो मुजे सपोर्ट कर रहीथी.. कहेतीथी अपने पुराने प्यारको अपनालो.. मे तुम्हारे साथ हु.. गलती भानुकी ही हे.. वगैरे.. वगैरे..

मंजुला : (हसते) यहीतो वो चाहती हे.. ताकी तुम अपने पुराने प्यारके पास चले जाओ ओर उनको तुमसे छुटकारा मील जाये.. वो बहुतही सातीर दीमाग वाली हे.. भानुके साथ खुलकर मजे कर सके इसीलीये अपनी बच्चीकोभी होस्टेलमे डालने राजी होगइ.. भावु.. उनको अपना वारीस चाहीये.. लेकीन भानुके साथ सादी नही हुइथी तो बरसो तक बार बार आइपील लेनेकी वजहसे उनके गर्भमे कुछ प्रोबलेम लगता हे..

जबसे उनकी सादी भानुभाइसे हुइ तबसे आइपील लेना बंध करदीया हे.. फीरभी उनको गर्भ नही ठहेरता.. उनको लगने लगा हे की अब वो भानुसे बच्चे पैदा नही कर सकती.. इसीलीयेतो वो भावेशको लेगइ.. अब वो भावेशकोही अपना बेटा मानकर उसे वारीस समजेगी.. ओर भावेशको तुमसे दुर कर देगी..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) लेकीन दीदी वोतो कहेती हेकी उसने बच्चेका ओपरेशन करवालीया हे..?

मंजुला : (हसते) नही भावु.. वो सबको जुठ बोल रही हे.. मेने कहाना वो बहुतही सातीर दीमागवाली हे.. बस वो सीर्फ भानुभाइसे सादीका इन्तजार कर रहीथी.. सादी होतेही वो अपना वारीस चाहतीथी.. लेकीन उनका सब दाव उल्टा पड गया.. हें..हें..हें..

भावना : (सोचते) दीदी.. क्या रमादीदी अ‍ैसा कर सकती हे..? मुजे तो यकीन ही नही हो रहा.. दीदी मुजे मेरे बारेमे सब कुछ जानना हे.. आप मेरे बारेमे बताओ..

मंजुला : भावु.. तेरे बारेमे बतानेसे पहेले मुजे मेरे बारेमे तुजे कुछ बताना हे.. ताकी सब बाते तेरी समजमे आजाये.. भावु तुम बात सुनकर दुखी मत होना.. ओर ये बात सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. मोम ओर पापाकोभी ये बात पता नही चलनी चाहीये.. मे अब सीर्फ दो ढाइ सालकी ही महेमान हु..

भावना : (बुरी तराह चोंकते) व्होट.. क्या कहा आपने..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. मे अब सीर्फ दो ढाइ सालकी महेमान हु.. मेरे बच्चेदानीमे अ‍ेक अ‍ैसी प्रोबलेम हे की मे बच्चा पैदा करुगी तो ज्यादासे ज्यादा ढाइ साल जींन्दा रेह सकुगी.. मेडीकल लाइनमे ये नया केश हे.. इनका कोइ इलाज नही.. धीमे धीमे कमजोर होते खतम होजाउगी.. ओर उनके पीछे कइ रीजन हे.. तुमतो जानती हो.. हम सभी कोइ सामान्य ओरते नही हे.. हम सभी परीया यातो अप्सराये हे.. हम अ‍ेक खास मक्सदसे यहा हमारे स्वामीके लीये आइ हे.. तो मुजे वापस जाना होगा..

भावना : (आंसु बहाते) दी.. तो फीर आपने बच्चा क्यु पैदा कीया..? नही करती.. बच्चा..

मंजुला : (हसते) नही भावु.. तुम आंसु मत बहा.. यही बात तुजे समजनी हे.. मे सीर्फ जा नही रही.. मुजे अ‍ेक नया सरीर लेकर वापस भी तो आना हे.. तेरी कोखसे..

भावना : (अ‍ेकदम आस्चर्यसे) मेरी कोखसे..? मतलब..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. मुजे तेरी कोखसे जन्म लेकर फीरसे इस घरतीपे आना हे.. फीर मे मेरे विजयसे सादी कर लुगी.. ओर उनका बच्चा पैदा करुगी.. ओर वोही हमारे स्वामी होगे.. हम सबके स्वामी.. फीर जब वो बडा होजायेगा तब मे विजयको छोडके उनसे सादी करलुगी..

भावना : (आस्चर्यसे सुनते) दीदी.. कीतना अजीब हेनां.. आप अपने बेटेसे ही सादी करलेगी.. लेकीन दीदी.. अब मेने फैसला करलीया हे.. मे अब भानुके साथ कभी फीजीकल नही होउगी.. अब उस आदमीसे अ‍ेक नफरतसी हो गइ हे.. तो फीर मेरी कोखसे आप कैसे जन्म लोगी..?

मंजुला : (हसते) नही भावु.. तेरे नसीबमे अभी तीन बच्चे ओर भी हे.. लेकीन वो तीनो बच्चे अब भानुभाइसे नही होगे.. वो तीनो बच्चे तेरे पुराने प्यारसे होगे.. यानी मेरे देवुसे.. इसीलीये तुजे भानुभाइको नही छोडना.. फीर चाहे उनके साथ फीजीकल रीलेशन ही क्यु ना रखना पडे.. वरना तुम भानुभाइ ओर बाकी सबको क्या कहोगी..?

की ये तीनो बच्चे कीसके हे.. बात कुछ समजमे आइ..? हंम.. इसीलीये तुजे मम्मीका मकान दे दीया हे.. ताकी तुम देवुको वहा खुलके मील सको.. भावु.. देवु तुमसे गांधर्व सादी करलेगा.. तुम वहा देवुकी सीक्रेट बीवी बनकर रहोगी.. तुजे दोनो जगाहपे रहेना हे.. अब वो तुजे देखना हेकी तुम सब कैसे मेनेज करती हो.. बात कुछ समजमे आइकी नही..? हें..हें..हें..

भावना : (सोचमे पडते) हां दीदी.. बाततो समज गइ.. लेकीन.. उस भानुके साथ.. कीतना कमीना हे.. हें..हें..हें.. ठरकी कहीका.. हें..हें..हें.. सकलतो जीजु जैसी हे.. लेकीन अकल बीलकुल नही हे.. कमीना बहुतही ठरकी हे.. उनको हर वक्त चुदाइ ही करनी होती हे.. क्या कोइ इतना ठरकी हो सकता हे..?

मंजुला : (हसते) भावु.. सुन.. आज तुजे अ‍ेक राजकी बात ओर बताती हु.. भानुभाइ ओर लता.. दोनोही मेरे ससुरकी संतान हे.. हें..हें..हें.. मेरे ससुरका तेरी सासके साथ अवैध रीस्ताथा.. क्युकी तेरे ससुर बच्चा देनेमे ओर सरला चाचीको संतुस्ट करनेके सक्षम नही थे.. ओर वैसे देखा जायेतो तुमभी हमारे खानदानकी ही बहु हो..

ओर देवु तेरे जेठजी हे.. हें..हें..हें.. समज गइ..? इसीलीये केह रही हु.. उनके साथ रीलेशन रखले.. आगे जाकर तुजे आसानी रहेगी.. तुजे बच्चेके बारेमे कीसीको जवाब नही देना पडेगा.. खास करके वो रमाभाभीको.. की ये बच्चे कीसके हे.. वैसेभी भानुभाइ बच्चे पैदा करनेके बहुत सोकीन हे.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) हां.. तभीतो मुजे दो दो बच्चे दे दीये.. सालेमे कीतनी आग हे.. पता नही बहारभी कीतनी ओरतोके साथ उनका रीस्ता होगा.. दीदी.. अब बात कुछ समजमे आइ.. तो फीर हमारी लता भी लखनकी बहेन हुइना..? वो दोनो भाइ बहेनकी भी सादी होगइ.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. यहीतो हमारे खानदानकी परंपरा होगइ हे.. सुन.. विजय मेरा बेटा हे.. ओर मुजे तेरी कोखसे पैदा होना हे.. तो वोभी तो देवुकी बच्ची होगी.. तो हम दोनोभी भाइ बहेन सादी करलेगे.. हें..हें..हें.. भावु.. पीछली तीन पीढीसे हमारे खानदानमे सब अपनी बहेनोके साथ ही सादी करते आये हे.. ओर आगेभी वोही सब होगा.. बल्की उनसेभी ज्यादा होगा.. तु समज गइनां..?

रश्मी : (हसते चाइ नास्ता अंदर लेआते) अरे दोनो बहेने बाते करनेके बहुत बीजी हो.. सोरी आप लोगोको डीस्टर्ब कीया.. लीजीये चाइ ठंडी होजाये इनसे पहेले आप दोनो चाइ नास्ता कर लीजीये..

मंजुला : (हसते) हां भाभी.. बात थोडी गहेरीथी तो भावुको यहा लेकर आगइ ताकी हम दोनोको कोइ डीस्टर्बना करे.. दीजीये.. ओर आपभी यही हमारे साथ चाइ नास्ता कीजीये.. बाते तो होती रहेगी.. क्या अपने पतीको चाइ नास्ता करवा लीया..?

रश्मी : भाभी जबसे सादीकी तैयारीया करने उधर आ रही हु तबसे कमीना खाना ही नही खा रहा.. क्यु मे उनको खानेमे जहेर मीलाकर दे रही हु.. अपना मुह ही नही खोलता.. कब तक भुखा रहेगा..? अबतो इतनी कमजोरसी आगइ हे हीलभी नही सकते.. फीरभी खाना नही खाते..

मंजुला : (हसते) लगता हे अब आपको जल्दी उनसे छुटकारा मील जायेगा.. हें..हें..हें..

रश्मी : (जोरोसे हसते) भाभी आपके मुहमे घी सकर.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) रश्मीभाभी.. आप कैसी बीवी हो..? अपने पतीके लीये कोइ अ‍ैसा बोलता हे..? हें..हें..हें..

रश्मी : (हसते) अरे दीदी.. आप उनकी करतुतोके बारेमे ज्यादा जानती नहीनां..? इसीलीये अ‍ैसा बोल रही हे.. अ‍ेक बार उनकी करतुतोके बारेमे सुनोगीनां.. तो आपभी उनको यही कहेगी..

फीर तीनोही चाइ नास्ता करने वही बैठ गइ.. रश्मीने अ‍ेक छोटा टेबल खीचके लेलीया.. ओर तीनोके लीये चाइ नीकालने लगी तब मंजु ओर भावना नास्ता खाने लगी.. ओर उनके साथ रश्मी भी सामील होगइ.. फीर तीनोने औपचारीक सादीकी बाते करते चाइ नास्ता करलीया.. तब रश्मी खाली कप ओर बरतन लेकर वापस चली गइ.. तो मंजुने फीरसे धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर बातोका दौर आगे बढाया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२२

फीर तीनोही चाइ नास्ता वही करने बैठ गइ.. रश्मीने अ‍ेक छोटा टेबल खीचके लेलीया.. ओर तीनोके लीये चाइ नीकालने लगी तब मंजु ओर भावना नास्ता खाने लगी.. ओर उनके साथ रश्मीभी सामील होगइ फीर तीनोने औपचारीक सादीकी बाते करते चाइ नास्ता करलीया तब रश्मी खाली कप ओर बरतन लेकर वापस चली गइ.. तो मंजुने फीरसे धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर बातोका दौर आगे बढाया....अब आगे

भावना : (हसते) दीदी मेरी बाततो होगइ.. लेकीन ये नीलुका क्या चकर हे.. वो क्यु धिरेनके पीछे पडी हे..? ओर हमारा धिरेन.. वो पहेलेतो अ‍ैसा नही था.. कीतना सीधा था.. पुनमदीदी कीतनी अच्छी लडकी हे.. कमीना उनकोभी धोखा दे रहा हे.. ओर वो नीलुके पीछे पागल हे.. अच्छा हुआ मे वहा चली गइ.. वरना उस दिन वो नीलुको बरबाद ही करलेता.. ओर वो लडकीभी उनकी मां की तराह ठरकी लगती हे..

मंजुला : (थोडी गंभीर होते) भावु.. सुन.. तुम धिरेनको गाली मत दे.. क्युकी वोभी मेरी तराह दो तीन सालकाही महेमान हे.. ओर ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. खास करके चंदादीदी ओर मोमको.. वरना दोनो टुटही जायेगी.. धिरेनभी हम सबकी जींदगीका अहेम हीसा हे.. हमारी पीछली जींदगीमे उनकाभी कोइना कोइ रोल होगा.. वरना वो हमसे क्यु जुडा होता..?

भावना : (आस्चर्यसे देखती रही) दी..दी.. ये आप क्या केह रही हे..? आपतो सब जान जाती हे.. फीरभी आपने पुनोदीदीकी सादी उनसे क्यु करदी..? आपको पताथा की पुनोदीदी दो तीन सालमे वीधवा होजायेगी.. फीरभी उनकी धिरेनके साथ सादी करदी.. कोइ खास वजह...? आप बहुतही रहस्यभरी बाते कर रही हे.. अगर पुनोदीदी इतनी छोटी उमरमेही विधवा होजायेगी.. तो फीर वो कहा जायेगी..? आपने इनके बारेमे कुछ सोचा हे..?

मंजुला : (थोडी गंभीर होते) भावु.. सुन.. अब मे जो कहेने जा रही हु वो तुम कीसीको नही कहोगी.. तुजे मेरी कसम खानी पडेगी.. तभी मे ये बात तुमको केह पाउगी.. बोल..? मेरी कसम खाती हे..?

भावना : (आस्चर्यसे) हां.. दीदी आपकी कसम.. ये बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. कहो..

मंजुला : भावु.. हमारी पुनो बाबाके कहेनेके मुताबीक चल रही हे.. वोभी मेरी सौतन हे..

भावना : (घोर आस्चर्यसे देखते) व्होट..? आपकी सौतन..? मतलब..? दीदी.. फीरसे कहोतो..?

मंजुला : (हसते) हां भावु.. पुनो मेरी सौतन हे.. उसनेभी अपने भाइ देवुसे सादी करली हे.. ओर बाबाने खुद उन दोनोकी सादी करवाइ हे.. याद कर जब हम दोनो होस्पीटलमे डीलीवरीके लीये गइथी.. तब वो दोनो भाइ बहेन वहा साथमेही आते जाते थे.. बस उसी टाइम दोनोने सादी करली..

ओर उसी रात दोनोने अपनी सुहागरातभी मनाइ.. जबतक मे चंदादीदीके वहा थी.. तबतक पुनो ओर देवु मीया बीवीकी तराह साथमे ही सोते थे.. पुनो हर रात देवुका बीस्तर गरम करती रही.. ओर नतीजेके फल स्वरुप आज पुनो प्रेगनेन्ट हे..

भावना : (आस्चर्यसे मुहा खुलाही रखते धीरेसे) ओह माय गोड.. दीदी.. क्या पुनमदीदी प्रेगनेन्ट हे..?

मंजुला : (हसते) हां भावु.. बाबानेही उसे अ‍ैसा करनेको कहा हे.. उनके पीछे उनका अ‍ेक खास मक्सद हे.. जो आगे जाकर सायद तुजेभी पता चल जायेगा.. क्युकी तब तुमभी होगी.. भावु ये बात मेरे सृती ओर रश्मीभाभीके अलावा कीसीको मालुम नही हे.. तुमभी कीसीको मत कहेना.. मेरे बाद मेरी पुनोही मेरे देवुको सम्हाल लेगी..

भावना : दीदी.. अगर पुनोदीदीने जीजुसे सादी करली हे तो फीर उनकी धिरेनके साथभी क्यु सादी करवाइ..? कोइ खास वजह..? मेतो ये सब सुनके चकरा गइ हु.. मेरी तो कुछ समजमे नही आता..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. यहा कीसीभी बात बीना वजह नही होती.. सुन.. अ‍ेकतो गांवमे हम सबको लोग राजाकी फेमीली मानते हे.. देवुको आजभी लोग राजा मानते हे.. अगर सबको पता चलेगाकी उनके राजाने अपनी बहेनसे सादी करली हे तो हमारी इजत मीटी मे मील जायेगी.. दुसरी बात.. अगर पुनो बीना सादी बच्चा पैदा करती तो लोग क्या कहेते..? की देवुकी बहेनने कीसीके साथ मुह काला करके बीना सादीके बच्चा पैदा कीया.. तो पुनोकी इजत मीटीमे मील जायेगी.. इसीलीये बाबाने ये रास्ता नीकाला हे..

भावना : (हसते) तो क्या आपके खानदानमे तीन पीढीसे सबने अपनी बहेनसे सादी की हे.. तो गांवके लोगोको पता नही हे..? पुनोदीदीकी सादी सबके सामने ही जीजुसे कर देते..

मंजुला : (हसते) नही.. .. अ‍ेकतो मेरे दादा ससुर ओर ससुरने अ‍ैसा करनेसे लोग हमसे जाराज थे.. सभी अपनी बहेनसे सादी करते आये हे.. तो इस वजहसे कुछ सालो तक गांवके लोगोके बीच कुछ अनबन रही.. ये बहुत लंबी कहानी हे.. उनमे नही जाना.. बाबाको पता हे की धिरेनकी आयु कम हे.. इसीलीये उसने पुनोकी सादी धिरेनके साथ करवादी..

जब दो तीन सालके बाद पुनो विधवा होजायेगी तब वो वापस देवुके पास आजायेगी.. तबतक उनकी बच्चीभी आगइ होगी.. ओर लोगोको ये लगेगाकी बच्ची धिरेनकी हे ओर पुनो विधवा होकर यहा अपने भाइके पास रहेने आगइ हे.. तब हवेलीमे पुनो देवुकी सुहागन बनके पुरी जींदगी इधर रहेगी.. ओर मेरे देवुका हर तराहका खयाल रखेगी.. तो ये हे पुनो धिरेनकी कहानी..

भावना : (हसते) ओह.. गोड.. तो दीदी.. क्या तब चंदामौसी पुनमको अपनी सौतनके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करलेगी..? पुनो दीदी भी तो उनकी बहु हे.. कोइ अपनी बहुको अपनी सौतन बनाती हे..?

मंजुला : भावु बस उन्हीकी चीन्ता हे.. अ‍ेकतो वो धिरेनकी दुसरी सादीसे थोडी परेसान रहेगी.. उपरसे धिरेनके जातेही कुछ महीनोके लीये अपना मानसीक समतुलन खो देगी.. ओर मेरे विजयको धिरेन मानकर उनके साथ सहेरमे जाकर धिरेनके मकानमे रहेने लगेगी.. विजय वही सहेरमे उनके साथ रहेकर पढेगा.. चंदादीदीके ज्यादा लाड प्यारकी वजहसे विजय अ‍ेक अयास ओर बीगडेल ओलाद हो जायेगा.. जब वो बडा होजायेगा.. तो वो कीसीकी नही सुनेगा..

ओर नतीजेके फल स्वरुप अ‍ेक दिन चंदादीदीको भी उनका खामयाजा भुगतना पडेगा.. विजय चंदादीदीके साथही फीजीकल होजायेगा.. तब वो सही तो होजायेगी.. लेकीन कीसीको फरीयाद नही करपायेगी.. विजयको अपने पापाके बीजनेस ओर हमारी प्रोपर्टीमे कोइ रुची नही होगी.. वो अपना अ‍ेक अलगही बीजनेस करेगा.. चंदादीदी ज्यादातर उनके साथही रहेगी.. तो उनको पुनोके बारेमे पताभी नही चलेगा..

भावना : (हसते) हंम.. कीतना अजीब हेनां..? मौसी जीनको अपना बेटा मानती होगी.. उन्हीकी वासनाका सीकार होगी.. दीदी.. तो फीर बेचारी नीलुका क्या होगा..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. नीलुके बारेमे भी सुन.. नीलुभी उनकी मां की तराह कामी लडकीतो हे.. बादमे बहुतही ठरकी होजायेगी.. अभी उनकी जवानी उफानपे हे.. अगर उस दिन तुम वहा नही गइ होती तो धिरेन पका उनके साथ चुदाइ कर लेता.. वो धिरेनके साथ चुदाइ करनेके लीये बीलकुल तैयार थी.. वो धिरेनके साथ सादी कर लेगी.. लेकीन उनके साथ संतुस्ट नही होगी..

तब वो हमारे लखनके साथ रीलेशनमे आजायेगी.. हमारा लखनभी कुछ कम नही हे.. नीलु चंदा दीदीके साथ सहेरमे ही रहेगी.. क्युकी वोभी तो धिरेनकी बीवी होगी.. चंदादीदी विजयको अपना बेटा मानती होगी तब विजयभी नीलुको भाभी कहेकर बुलाता होगा.. तुमतो जानती हो देवर भाभीका रीस्ता कैसा होता हे.. वो मेरे विजयके साथभी अपनी आगको सांत करती रहेगी..

भावना : सब कीतना अजीब हे.. यहातो रीस्तेके कोइ मायनेही नही रहेगे.. दीदी.. तुम हमारी लताके बारेमे भी कुछ केह रहीथी.. क्या उनके बारेमे भी आपको सब पता हे..? उनके बारेमेभी मुजे कहोनां..

मंजुला : हां भावु.. सुन.. जीस तराह धिरेन दो तीन सालका महेमान हे.. उसी तराह हमारे लखनकी आयुभी कुछ ज्यादा नही हे.. धिरेनके जानेके बाद.. वोभी छे सात सालोके बाद चला जायेगा.. उनका रीजन मे तुमको नही बता सकती.. बस तुम इतना जानलो.. की अनजानेमे ही सही.. लखन तेरा बदला भानुभाइसे ले लेगा.. क्युकी जब भानुभाइ थक जायेगे.. तब रमा लखनके साथ अपना अवैध रीस्ता बनालेगी.. सबसे छुपकर लखन ओर रमा फीजीकल रीलेशनमे होगे.. वो भानुभाइको भी धोखा देगी..

भावना : कमीनी.. मां बेटी दोनोही कीतनी ठरकी हे.. अपने ही नंनदोइसे रीलेशनमे होगी..? लेकीन दीदी.. जब लखनभैया चले जायेगे तबतो हमारी लताभी बेचारी विधवा हो जायेगी.. क्या उन बेचारीका कुछ नही हो सकता..? वो कीतनी अच्छी हे.. मेरी हर बातपे मेरा साथ देती हे..

मंजुला : नही भावु.. तुम उनकी चीन्ता मत करना.. तब सरलाचाचीके कहेनेपे भानुभाइ लताकी सादी देवुसे कर देगे.. ओर लताको देवुसे अ‍ेक बच्चीभी होगी.. लेकीन वो अपाहीज होगी.. बस वोही हमारे स्वामीकी चहीती रानी होगी.. मेरी ननंद ओर मेरी सौतन.. मेरे पतीसे मुजे अ‍ेक बेटी भी होगी.. वोभी अपने भाइसे यानी मेरे बेटेसे सबसे पहेले सादी करेगी.. वो होगी हमारी मोम.. ओर हमारे पीछले जन्मकी मेरी सोनु..

भावना : (आस्चर्यसे) पीछले जन्मकी सोनु..? मतलब..? ये नामतो मेने कही सुना हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. तुजे याद हे जब हम सब कोलेजमे थी तब सृतीके पास वो किताबथी.. जो हम अक्सर उनको पढते थे.. (ये केसी अनुभुती) बस.. उनका सोनुका केरेक्टर हे वोही हमारी मोम हे.. ये बात तुम कीसीको नही कहोगी..

भावना : (आस्चर्यसे) अरे हां.. दीदी मुजे सब याद आगया.. वोहीनां जीसने अपने भाइसे पहेले सादी करलीथी.. ओर हर जन्ममे उनकी पहेली बीवी होनेका वचन लीयाथा.. क्या ये हमारी मोम हे..? ओह माय गोड.. हें..हें..हें.. तो फीर इस जन्ममे उसने अपने स्वामीसे क्यु सादी नही की..?

मंजुला : (गंभीर होते) नही भावु.. वो सोनु यानी हमारी मोम इस जन्ममे भी उनकी पहेली बीवी हे.. ये बात मे तुजे नही बता सकती.. तुजे जानकर दुख होगा.. कुछ बाते अ‍ैसी होती हे.. वो हम ना जाने तोही बहेतर होगा..

भावना : (हसते) हां दीदी.. लेकीन मेभी आपकी बहेन हु.. मुजे इतना कमजोर मत समजो.. की अब मे ये सब बातोसे दुखी होउगी.. मुजे इतनातो पता चलही गयाकी हमारी मोमका भी कोइ अवैध रीस्ता हे.. अबतो मुजेभी इस सब रीस्तोसे कोइ फर्क नही पडता.. दीदी.. आज मुजे सब खुलकर बतादो.. मेने आपकी कसम खाइ हे.. ये बातभी मेरे तकही सीमीत रहेगी.. प्लीज.. मेरे ओर मोमके रीलेशनमे कोइ फर्क नही पडेगा..

मंजुला : (कुछ सोचते) भावु.. तो सुनले.. मे तेरी सोतेली बहेन हु.. मे देवुकी बहेन हु.. मेरे पीता मेरे ससुर ही हे.. बस कुछ रीजनकी वजहसे मोमकी सादी मेरे ससुरसे नही होपाइ.. क्युकी उन्होनेभी अपनी बहेनसे सादी करली थी.. ओर मेरी सासनेही मोमको मेरे ससुरसे दुर कर दीयाथा.. तब मे मोमके पेटमे थी.. फीर तुमतो जानती हो.. हम ओरतोकी भी कुछ नीड होती हे.. जीस तराह मेरे ससुरने उनकी बहेनसे सादी करके मोमको छोड दीया.. तो मोमनेभी गुसेमे आकर अपने भाइसे सादी करली..

भावना : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? हमारे पापा मोमके भाइ हे..? आइ कान्ट बीलीव.. हें..हें..हें.. दीदी कीतना अजीब हेनां.. सुनके बहुत मजा आता हे.. कैसा लगता होगा.. जब अ‍ेक भाइ बहेन फीजीकल होते होगे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हंम.. सच कहु..? बहुत मजा आता हे.. तेरे जीजुभी मेरा भाइ हे.. हम दोनोके बीच आजभी इतना गहेरा प्यार हे.. मे तुजे बया नही कर सकती.. भावु.. तुजे अ‍ेक बात कहु..? जबभी हम दोनो फीजीकल होते हे तब देवु मुजे बहेन मानकर चोदते हे.. ओर मे भी देवुको अपना भाइ मानकर ही चुदाइ करवाती हु.. तब हम दोनोका जोस कइ गुना बढ जाता हे.. हें..हें..हें..

भावना : (जोरोसे हसते) दीदी.. ये आपके खानदानमे तो ठीक हे.. लेकीन हमारे खानदानमे भी वोही नीकला.. हें..हें..हें.. अब समजी मोम पापाको इतना प्यार क्यु करती हे.. हें..हें..हें.. तो क्या पापाही वो स्वामी आइ मीन वो राजा हे..?

मंजुला : (सीरीयस होते) नही भावु.. वो राजाका अंस.. मेरा देवु हे.. मे देवुके साथ रीलेशनमे आइ उनसे पहेले हमारी मोम देवुके साथ गांधर्व सादी करके रीलेशनमे थी.. वो दोनो मेरी सादीसे पहेलेही कइ बार फीजीकल हो चुके थे.. देवु अक्सर हमारे घर पापाको हमारे बीजनेसके सीलसीलेमे मीलने आतेथे.. तब दोनोकी आंख मील गइ.. ओर मोम देवुके साथ रीलेशनमे आकर मेरे देवुकी पहेली बीवी होगइ..

भावना : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. हमारी मोमभी..?

मंजुला : भावु.. उनमे मोमकी कोइ गलती नही हे.. क्युकी हम सब परीया हे.. मोमने इस जन्ममेभी अपने स्वामीकी पहेली बीवी होनेका फर्ज अदा कीया हे.. ओर तुम मोमके सामने बीलकुल इस बातका जीक्र मत करना.. वरना मोम हमसे सर्मीन्दा होगी.. हमारे स्वामीने अपने पहेले जन्ममे सबको हर जन्ममे पत्नीके या फीर प्रमीकाके रुपमे मीलनेका वादा कीया हे.. तो सबको इधर देवुके साथ ओर बादमे मेरे पोतेके साथ रीलेशनमे आना लाजमी हे.. इसीलीये देवुका कइ ओरते ओर लडकीयोसे रीलेशन हे..

भावना : (हसते) ओह गोड.. मो..म.. आइ कान्ट बीलीव.. हें..हें..हें.. दीदी.. सुनके बीतना अजीब लगता हे.. दीदी अ‍ेक बात कहु..? मुजे मोमके इस रीस्तेके बारेमे सुनकर जरासाभी दुख नही हुआ.. पतां नही क्यु.. लेकीन सुनकर बहुत अच्छा लगा.. सबकी अपनी अपनी लाइफ हे.. जीनमे सबको अपने तरीकेसे जीनेका अधीकार हे.. जीजुकी कीतनी बीवीया ओर गलफ्रेन्ड हे..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) भावु.. तेरे जीजुपे बाबाका आशीर्वाद हे.. वो अ‍ेक साथ हम जैसी दस कामी ओरतोको संतुस्ट कर सकते हे.. मेरा पोतातो उनसेभी बढकर होगा.. बस यहाभी उनकी वोही जीम्वेवारी हे.. जो उस हिमाचलके राजाकी यानीकी हमारे स्वामीकी थी.. मे.. चंदामौसी.. पुनो रश्मीभाभी.. हमारी मोम.. सृती.. ओर आगे जाकर वंदना नीशाभाभी चारुभाभी.. लता ओर आखीरमे तुम.. ओर अ‍ेक दो नाम ओरभी हे.. जो तुजे आगे चलकर पता चल जायेगा..

भावना : (हसते) दीदी अब इतना कुछ बता दीयातो वो नाम भी बतादो.. हें..हें..हें.. मे कहा कीसीको कहेने वाली हु.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हंम.. लेकीन ध्यान रखना.. कीसीको कहेना मत.. वो हमारी बुआ.. हमारी मोमकी बेस्ट फ्रेन्ड.. हमारी भुमीका मौसी.. सी इस प्रेगनेन्ट.. बस ये बात तुम अभीके लीये सबसे छुपाके रखना..

भावना : (घोर आस्चर्यसे) भुमी मौसी..? क्या वो अभी प्रेगनेन्ट हे..? आइ कान्ट बीलीव.. कैसे..?

मंजुला : (हसते) भावु.. मत भुलो हम सभी कौन हे.. हम सब यानीकी देवुके संपर्कमे जीतनीभी ओरते आयेगी वो यातो परीया होगी या फीर अप्सराये.. वो सभी अपने स्वामीके लीये इधर आइ हे.. क्युकी हमारे स्वामीने सबको हमेसाके लीये हर जन्ममे मीलनेका वचन दीयाथा.. क्यु तुमने किताब ठीकसे नही पढी..?

भावना : (हसते) हंम.. पढी हे.. मुजे आजभी उन किताबका अ‍ेक अ‍ेक सब्द याद हे.. वो मेरी फेरवरीट किताबो मेसे अ‍ेक हे.. दीदी.. सायद इसीलीये हम जीजुको देखतेही अपना कंट्रोल खो देती हे.. हम सबकुछ भुल जाती हे.. बस मनमे अ‍ेकही खयाल आने लगता हे.. की हम इस आदमीके साथ रीलेशन बनाये..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. देवुका आकर्सणही अ‍ैसा हे.. हमारे चंदामौसी वीधवा होनेके बावजुदभी अपने आपको कंट्रोल नही करपाइ.. ओर उनके साथ रीलेशनमे आगइ.. चंदामौसी क्या हमारी मोम ओर भुमी मौसीभी इतने बडे बच्चे होनेके बावजुदभी उनके साथ रीलेशनमे आगइ.. इनको छोडो तेरी सास सरलाचाचीभी बाकात नही हे.. हें..हें..हें.. ओर पता नही.. ओर कीतनी ओरते होगी.. हें..हें..हें..

भावना : (जोरोसे हसते) हां दीदी.. सायद ये बात हमारी लताभी जानती हे.. हें..हें..हें.. उन्होने दोनोको कइ बार चुदाइ करते देखलीया हे.. हें..हें..हें.. इसीलीयेतो घरमे बीन्दास रहेती थी.. दीदी लता ओर लखनभी उनकी सादीसे पहेले कइ बार फीजीकल हो चुके हे.. हमारी लताभी बहुतही कामी लडकी हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां पता हे मुजे.. चल अब जाना नही हे क्या..? आज तुजे सबके बारेमे बता दीया हे.. अब आगे तुजे देखना हे की तुम सब कैसे मेनेज करती हो.. भावु मेरी मान.. तुम भानुभाइको मत छोडना.. भलेही उनके साथ रीलेशन बनाने पडे.. ओर वैसेभी वो तेरा पतीभी तो हे.. अगर तेरे साथ फीजीकल होगे तो इसमे क्या गलत हे..?

भावना : (सरमाते हसते) हंम.. दीदी सायद आप ठीक केह रही हो.. वरना मे उस आदमीसे सभी रीलेशन खत्म कर देना चाहती थी.. लेकीन अब नही.. अबतो उनकी बीवी बनकरभी बहुत कुछ कर सकती हु.. मे उनके साथही रहुगी.. बल्की अबतो उन दोनोके साथ बीस्तरमेभी सोउगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : भावु अगर तु भानुभाइके साथ अच्छी तराह रहेगी.. तो वो तुजे तेरे जीजुसे मीलनेमे भी कोइ अ‍ेतराज नही करेगे.. वोही समजेगेकी तुम तेरे जीजुसे मील रही हो.. समजी कुछ..?

भावना : (हसते) हां दीदी.. आज बहुत कुछ समज गइ.. अबतो आप कहेगी वोही सब होगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (खडी होते) हंम.. अब चल घरपे चलते हे.. वरना चंदादीदी कहेगीकी दोनो इतनी देरसे कहा गइ हे.. हें..हें..हें..

फीर दोनो हसते हुअ‍े खडी होगइ.. ओर दरवाजा खोलकर बहार आगइ तब रश्मीभी पंचायतकी ओफीसमे जानेके लीये तैयार होगइ थी.. ओर तीनोही घरसे नीकल गइ तब बीच रास्तेमे रश्मी ओफीसकी ओर चली गइ ओर मंजु भावना हवेलीपे आगइ.. तब चंदा विजयके साथ सोफेपे बैठकर खेल रहीथी.. तो नीर्मला भावुकी बच्चीको राते अपनी गोदमे सांत करनेकी कोसीस कर रहीथी.. जैसेही दोनोको देखा..

नीर्मला : (हसते) लोजी आगइ.. भावु येले तेरी बच्चीको सम्हाल.. उसे भुख लगी होगी.. जरा उनका पेट भरवादे.. कबसे रो रही हे.. इतनी देर दोनो वहा क्या कर रहीथी..?

मंजुला : (हसते) मोम.. वो रश्मीभाभीके पतीकी हालत देखने गइथी.. वोतो खाताही नहीहे.. मुजे नही लगता अब वो ज्यादा दीन नीकालेगे..

नीर्मला : (हसते) चलो अच्छा हुआ.. अबतो वो चला जायेतो बेचारी रश्मीका छुटकारा होजाये.. हें..हें..हें..

भावना : (जोरोसे हसते) मोम.. आपभी वोही केह रही हे..? अभी रश्मीभाभी भी वोही केह रहीथी..

नीर्मला : (हसते) बेटी वो बहुतही कमीना इन्शान था.. ना जाने कीतनी ओरते ओर लडकीयोकी जींदगीसे खीलवाड कर चुका हे.. तभीतो भगवानने उनकी सजा देदी हे.. अब पडाहे खटीया पकडके..

अ‍ैसेही बाते करते भावना वही अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तब कीचनमे दया ओर चंपा आपसमे बाते करते लंचकी तैयारीया करने लगी.. तो रजीया सभी कमरोकी सफाइ करती रही.. तो दुसरी ओर आज वंदनाभी पंचायतकी ओफीसमे चली गइ ओर अपनी स्कुलके लीये बच्चोके नये अ‍ेडमीसनकी तैयारीया करने लगी.. रमेशतो सुबहसेही पंचायतके कामसे घरसे नीकल जाता था.. ओर गांव गांव जाते सभी सरपंचोसे मुलाकात करके उनको स्कुलके लीये बात करताथा ताकी लोग अपने बच्चेको वहा पढनेके लीये भेज सके..

तब चारुभी कामसे फ्रि होगइ तो वोभी नीशाके घर चली गइ.. तब सुधिर अपनी क्लीनीकपे जा चुकाथा.. ओर वहा दोनो मीलकर देवायतको मीलनेके लीये आगेकी प्लानींगकी बाते करने लगी.. तो इधर खेतोपे भानुभी सभी जगाह घुमते अपने कामका जायजा लेकर राजीवके पास जाकर बैठ गया.. तब कुछही देरमे मालती चाइ लेकर आगइ ओर पहेले राजीव भानु ओर रामुकाकाको देकर गोडाउनकी ओफीसमे चली गइ..

मालती : (हसते चाइ देते) मालीक आप इधर अकेले ही बैठे हो.. लीजीये चाइ पीजीये उन सबको बहार देकर ही आइ हु..

देवायत : (चाइ लेते) हां मालती.. बोल क्या कहेना चाहती थी तुम..

मालती : (सरमाते हसते) मालीक.. आजकल आप बहुत बीजी रहेते हो.. तो आपको मुजे मीलनेका टाइमही नही मीलता.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. कुछ टाइम नीकालीयेना.. हमे मीले बहुत दीन होगये हे.. आपको मीलनेका मेरा बहुत मन कर रहा हे.. आपकी आदत जो लग गइ हे..

देवायत : (हसते चाइ पीते) मालती.. बस दो तीन दिन ठहेरजा.. इधर मेरे ससुर आये हे.. दो दीनमे चले जायेगे.. तबतक तुमभी अपने गांव जाकर वापस आजाओगी.. तब तेरी सारी सीकायत दुर कर दुगा.. ओर वो जमीलाका क्या केह रहीथी..?

मालती : (सरमाते) मालीक.. वो.. वो आप अ‍ेक बार गांव जाकर जमीलासे मीललो.. वो आपसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. बेचारी बहुत मायुस लग रही थी.. आपकी अ‍ेक आस लेके बैठी हेकी कभी तो आप उसे मीलने आओगे..

देवायत : (हसते) हां.. वो जो चाहतीथी वो सब होगया.. सोचता हु.. अबतो तुम तीनोही इधर आ गये हो.. तो जमीलाकोही कबीलेकी मुख्या यानीकी रानी बनादु.. उनके बापुभी मुख्या थे.. तो सबलोग उनकी बात मानेगे.. बस कुछ कामसे फ्रि होजाउ तब मील लुगा.. उसे कहेना कोइ प्रोबलेम होतो वो सहेर जाकर सृतीको दीखादे.. तुमतो सृतीको जानती हो..

मालती :(हसते) हां अभी अभी आपकी उनके साथ सगाइ हुइ हे.. मे जमीलाको केह दुगी.. ओर हां.. वो रीटाभी आपको मीलना चाहती हे.. लगता हे उनका छोटुसे मन भर गया हे.. अ‍ेक बार उसेभी मीललो.. ताकी उनकोभी पता चले.. हें..हें..हें.. कमीनी मेरे पीछेही पड गइ हे..की मुजे मालीकसे मीलवादो..

देवायत : (हसते) हंम.. चल ठीक हे.. उसेभी मील लुगा.. ओर हां..उस मजदुरकी लडकीको कहेना.. वो बच्चा ना ठहेरनेकी दवाइ लेले.. ताकी उसे बच्चा ना हो.. उस दिन वो लखनके साथ वो ट्युबवेलकी रुममे थी..

मालती : (सरमाते हसते) जी.. मे वो आइपीलकी टेबलेट रखती हु.. हमारे छोटे मालीक बहुतही सौकीन हे.. वो मा बेटी दोनोही हमारे लखनभैयाके पीछे पागल हे हें..हें..हें.. हमारे लखनभैया ओर हमारे भानुभाइ दोनो भी रीटाके पीछेभी पडे हे.. लेकीन अब वो दोनोको ज्यादा भाव नही दे रही.. वो सीर्फ आपकोही मीलना चाहती हे.. पता नही आपने उनपे क्या जादु करदीया हे.. हें..हें..हें..

फीर देवायत चाइ पीलेता हे तब मालती उनके होंठ चुमते हसती हुइ वहासे चली जाती हे.. ओर देवायत बहार आकर सबके साथ बैठ जाता हे.. ओर चारो गपे लगाते बाते करते हे.. तब कीसीको नही पताथा की घरपे राघव तडप रहा हे.. उनको आज बहुत तकलीफ हो रहीथी.. वो हील नही सकताथा.. फीरभी पता नही आज उनमे कहासे इतनी ताकात आगइ की वो इधर उधर होते करवटे बदलते दर्दके मारे तडपता रहा..

तो अ‍ैसेही दोपहर होगइ तब पुनम लखन चारो अपनी मंजीलपे पहोंच गये.. सभी कपलको अ‍ेक अ‍ेक रुम देदीया.. ओर सबको फ्रेस होकर नीचे लंचके लीये बोल दीया.. ओर सामको साइटसीन देखनेको भी बोल दीया.. तो सब फ्रेस होने अपने सामानके साथ रुममे घुस गये.. तब ज्यादातर कपल रुममे घुसतेही दरवाजा बंध करके अपनी बीवीओपे टुट पडे.. तो जाहीरसी बात हे इसमे लखन ओर धिरेनभी बाकात नही रहे..

लखनतो रुममे जातेही अपने सामानको रखते जटसे दरवाजा बंध करलेता हे ओर लताको पकडने उनकी ओर दोडता हे.. तब लता समज गइ.. ओर हसते हुअ‍े लखनसे बचनेके लीये.. बेडके आसपास चकर लगाते लखनसे बचनेकी कोसीस करने लगी.. तो लखन बेडके उपर चडके लताको दबोच लेता हे.. ओर बेडपे पटकके उनके उपर चड जाता हे.. तब लता जोरोसे हसते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगती हे..

तो दुसरी ओर बाजुके रुममे पुनम कुछ समजे उनसे पहेलेही धिरेन उनको अपनी गोदमे उठालेता हे तब पुनमभी समज गइ ओर जोरोसे हसते धिरेनकी गोदसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. ओर धिरेन उनको बेडकी ओर लेगया.. तब कुछही देरके बाद पुनम ओर लता दोनोही अपने पतीके नीचे लेटी हुइ थी.. लखन ओ धिरेनने दोनोको नंगी करके खुदभी नंगे हो गये थे.... ओर दोनोही अपनी बीवीओके उपर थे..

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दोनोही अपनी बीवीओके बुब्स मसलते उनके होठोपे ओर गलेमे मुह डालके चुम रहेथे ओर उतेजीत कर रहेथे तब कुछही देरमे पुनम ओर लता दोनोही मदहोस हो चुकीथी.. ओर अपने पतीके लंडको अपनी चुतमे लेनेके लीये मचल रहीथी.. तब आजु बाजुके कइ रुममे नये कपल अपनी बीवीओको चोद रहेथे.. तब कुछही देरके बाद पुनम ओर लताभी अपने पतीके साथ सीसकारीया करते चुदाइमे मसगुल हो चुकीथी..

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लखन बडेही जोसके साथ लताकी चुदाइ कर रहाथा तब लताभी अपनी कमर उछाल उछालके लखनको चुदाइमे साथ दे रहीथी.. तो दुसरी ओर धिरेनभी पुनमके बुब्स मसलते उनकी नीपलको चुमते पुनमको चोद रहाथा तब कुछही देरमे वो जोरोसे पुनमको चोदने लगा तब पुनमने धिरेनको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर धिरेन जडते हुअ‍े पुनमके सीनेपे ढेर होगया.. तब अ‍ेक बार फीर पुनम प्यासी रेह गइ..

धिरेन : (सरर्मीन्दा होते) पुनो.. सोरी.. तुजे देखतेही पानी छोडने लगता हे.. तो जल्दी होजाता हे..

पुनम : (मुस्कुराते होंठ चुमते) जानु.. कोइ बात नही.. धीरे धीरे करते सब ठीक होजायेगा.. बस आपको मजा आना चाहीये.. क्या आपको मजा आता हेकी नही..? मुजसेतो कोइ गलती नही हुइ..?

धिरेन : नही पुनो.. तुमसे कभी कोइ गलती नही हुइ.. मेरे दोस्तभी कहेते थेकी सुरुके दिनमे जल्दी होजाता हे.. ओर बादमे सब ठीक होजाता हे.. तो तुम चीन्ता मत करना.. हम छे सात बार करगे तब सब सही होजायेगा..

पुनम : (हसते) हंम.. चलो ठीक हे.. देखो आपने मेरी पुरी चुतको भरदी हे.. अब नहाने नही जाना..? सब लंचके लीये नीचे चले गये होगे..

धिरेन : (उपरसे हटते मुस्कुराते) पुनो चलोना हम साथमे नहाने जाते हे.. तो टाइम नही बीगडेगा..

पुनम : (हसते) नही..आप वहाभी सरासरत करोगे.. मे बादमे नहा लुगी.. आप नहालो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते उसे गोदमे उठाते) अरे चलोतो सही.. मे कोइ सरारत नही करुगा.. अबतो हमे यही करना हे.. देखना आज रात कमसे कम तीन बार करुगा.. अभीसे केह देता हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते) अरे बाबा पहेले राततो होनेदो.. आजभी पुरी रात जागे हे.. आपने मुजे कहा सोने दीया.. इधर उधर हाथ डालकर मुजे परेसान करते रहे.. हें..हें..हें..

अ‍ेसी बाते करते दोनो साथमे नहाने चले गये.. तब पुनमको मनमे ये सब नाटक करते हसी आ रहीथी.. ओर उसने पुरे हनीमुनमे अ‍ैसी मजा लेनेका फैसला करलीया.. उसे धिरेनका लंड अपनी चुतमे कोइ खास फील नही हो रहाथा.. फीरभी उसे ये नाटक जारी रखना था.. उसे मनही मन नीलमके उपर तरस आने लगी.. तो दुसरी ओर लखन ओर लता दोनोही साथमे जड गये तब दोनोही नंगे साथमे नहाने चले गये..

लता : (सरमाते हसते) लखन अभी कोइ सरारत नही.. बहुत भुख लगी हे.. फीर दो पहोरकोभी सोने देना.. पुरी रात आपने मुजे सोने नही दीया.. वरना मेरी तबीयत खराब होजायेगी तो आपकाही नुकसान होगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां सोजाना.. फीरतो रातभर हमे जागना ही हे.. हें..हें..हें..

लता : (हसते) नही.. देखना आज कोइ गोली बोली नही खाना.. चाहोतो कल खा सकते हो.. लेकीन आज नही.. हम सीर्फ दो बार करके सो जायेगे.. अबतो आप पके खीलाडी हो गये हो.. कहासे सीखा ये सब..? कही मेरी सौतन बौतनतो नही..? अगर हेतो अभी बतादो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) फीर हालतो नही लेकीन आगेका पता नही.. मे कोइ गेरेन्टी नही दुगा.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) कीतने कमीने हो आप.. अभी मुजेतो ठीकसे चोदलो.. फीर सौतनकी बात करना..

लखन : (हसते) अच्छा..? तो फीर देख आज तेरी क्या हालत करता हु.. मुजसे भागती हेकी नही..?

लता : (कामुक नजरोसे हसते) हां हां.. देख लुगी.. आप क्या करते हे.. लेकीन गोली खाकर नही.. अ‍ैसेही चोदलेना.. मे भी देखती हु कीतना चोद पाते हो.. हें..हें..हें..

अ‍ैसेही चुदाइभरी बाते करते सभी नहाके तैयार होजाते हे ओर चारो मीलकर लंचके लीये नीचे डाइनींग होलमे आजाते हे.. ओर वहा लंच करने लगते हे.. तो दुसरी ओर राजीव ओर देवायतभी घरपे आगये.. तो देवायत भानुकोभी जबरदस्तीसे अपने साथ खानेपे ले आया ओर सब खाना खाने बैठ गये.. तब आज भावनाभी भानुके सामने बैठीथी.. ओर दोनोकी आंख मील गइ तब भावना सरमाकर मुस्कुराने लगी..

जीसे देखतेही भानु खुस होगया ओर वोभी भावनाके सामने देखकर मुस्कुराने लगा.. जीसे देखकर राजीव ओर नीर्मलाभी खुस होगये.. ओर सब लोग लंच करने लगे.. तब दुसरी ओर रश्मी थोडी देरसे अपना काम खतम करके घर आगइ.. ओर फैस होकर सीधी कीचनमे चली गइ ओर खाना बनाने लगी.. जब सब्जी पक रहीथी तब वो राघवको देखने उनके रुममे चली गइ.. तो उसे देखतेही वो गभरा गइ..

क्युकी राघव अ‍ेक तरफ मुह करके सांत होकर पडाथा.. उनकी आंख पांव हाथ कुछभी नही हील रहेथे.. उनके मुहसे जाग नीकला हुआथा.. ओर आंख फटी की फटी रहे गइ थी.. तो रश्मी उसे इस हालतमे देखके थोडी गभरा गइ.. ओर जटसे उनके पास जाकर उसे हीलाने लगी.. तो राघव जैसे रश्मी हीला रहीथी हीलता रहा.. लेकीन कोइ रीअ‍ेक्शन नही दे रहाथा.. तब रश्मी बहुत गभरा गइ ओर बहार दोडके देवायतको फोन करने लगी....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२३

क्युकी राघव अ‍ेक तरफ मुह करके सांत होकर पडाथा.. उनकी आंख पांव हाथ कुछभी नही हील रहेथे.. उनके मुहसे जाग नीकला हुआथा.. ओर आंख फटी की फटी रहे गइ थी.. तो रश्मी उसे इस हालतमे देखके थोडी गभरा गइ.. ओर जटसे उनके पास जाकर उसे हीलाने लगी.. तो राघव जैसे रश्मी हीला रहीथी हीलता रहा.. लेकीन कोइ रीअ‍ेक्शन नही दे रहाथा.. तब रश्मी बहुत गभरा गइ ओर बहार दोडके देवायतको फोन करने लगी....अब आगे

देवायत : (फोनकी रींग बजतेही खाना खाते फोन उठाता हे) हेलो.. हां रश्मीभाभी.. बोलो.. आइअ‍े लंच करने.. हें..हें..हें..

रश्मी : (थोडा गभराते जटसे) देवु.. प्लीज अगर खाना खा रहे हे तो खाकर जल्दीसे घर आजाओ.. वो राघव हील नही रहा.. उनके मुहसे जाग नीकल रहे हे.. ओर आंखभी नही हीलाता.. लगता हे कुछ हुआ हे..

देवायत : (जटसे) भाभी मे अभी आ रहा हु.. आप फोन करके सुधीरको बुला लीजीये.. मे रमेशको फोन करदेता हु.. आप गभराना नही.. मे मंजुको लेकर अभी आता हु..

मंजुला : (देवायतने फोन काट दीया तब) देवु.. क्या हुआ..? इतने गभराये हुअ‍े क्यु लगते हो..? कुछ हुआ हे क्या..?

देवायत : (फटाफट खाना खाते) मंजु तुम फटाफट खाना खालो.. हमे रश्मीभाभीके घर जाना होगा.. सायद राघव गुजर चुका हे.. भानु तुम भी साथ चलना.. सायद हमे उनके लीये कुछ तैयारीया करनी पडे..

भानु : भाइ आप फीकर मत करो.. आरामसे खालो.. मेने खाना खालीया हे मे जाकर देखता हु.. फीर तुम ओर भाभी आजाना..

कहेते राघव पानी पीकर अपना हाथ मुह धोकर फटाफट अपनी कार लेकर चला गया.. तबतक मंजु ओर देवायतनेभी जल्दी खाना खालीया.. ओर राजीव नीर्मलाको घरपेही रहेनेकी सुचना देकर ओर चंदाको बादमे फोनकरनेके बाद आनेका कहेते दोनो रश्मीके चले गये.. तो वहा सुधीर ओर रमेश पहेले ही पहोंच चुके थे.. जैसेही देवायत घरके अंदर गया.. तब रमेश भानु सुधीर ओर रश्मी होलमे खडे थे.. तो सुधीर उनके पास आगया..

सुधीर : (धीरेसे) भाइ.. वो राघव नही रहा.. तो.. अब हम क्या करे..? उनके घरवालोको खबर करदे..?

रश्मी : (धीरेसे) देवरजी.. उनके घरवालोमे अब हे ही कौन..? मेरे सास ससुरतो कबसे गुजर चुके थे.. ओर इनके काका काकीभी हमारे पासमे रहेते थे वोभी चले गये.. बस मेरे काका ससुरकी अ‍ेकही लडकी हे.. इनकी कजीन बहेन .. सीर्फ उनको फोन करना हे.. मे अभी उसे फोन कर देती हु.. बाकी कीसीको फोन नही करना..

देवायत : हंम.. भानु.. तुम ओर रमेश जाकर अर्थीका सामान लेकर आओ.. जबतक हम तैयारी करेगे तबतक उनकी बहेन भी आजायेगी.. ओर सुधीर तुम इनका डेड सर्टीफीकेट बनादो.. ताकी भविस्यमे कोइ प्रोबलेम ना हो.. इनकी बीमारीकातो तुजे पताही हे..

मंजुला : रश्मीभाभी.. आप मेरे साथ आइअ‍े.. हम आपके रुममे चलते हे.. वहीसे सबको फोन कर देगे.. चारुभाभी नीशाभाभी ओर हमारे पहेचान वाली सभी ओरतोको भी फोन करके सुचीत करना हे.. मे चंदादीदीको बुला लेती हु..

रमेश : (भानुके साथ बहार जाते) मंजुभाभी.. हमने चारु ओर नीशाभाभी दोनोको फोन करदीया हे.. अभी आती ही होगी..

कहेते रमेश भानुके साथ चला गया.. तब अंदर जातेही रश्मीने उनकी ननंद ओर अपनी पुरानी बचपनकी खास सहेलीको फोन करदीया की तुम्हारा भाइ गुजर गया हे.. तब वो फोनपे ही रोने लगी.. ओर रश्मीकी बार बार माफी मांगने लगी.. तब रश्मीने उसे अपने भाइके आखरी दर्शन करनेके लीये घरपे आनेके लीये केह दीया.. तो वो अभी आधे घंटेमे पहोंच जायेगी.. कहेकर फोन काट दीया.. तब मंजु ओर रश्मी उनके बारेमे आपसमे बात करने लगी..

मंजुला : भाभी.. क्या ये वोही आपकी सहेली हेना जीनके साथ राघवके नाजायज रीस्ता था.. उनके खानदानमे अभी कोइ नही हे..?

रश्मी : भाभी.. मेरे सास ससुर तो गुजर गये हे.. राघव अकेलाही उनकी संतान था.. ओर ये टीना राघवकी कजीन बहेन हे.. उनके चाचाकी लडकी.. अबतो उनके चाचा चाची भी नही रहे.. इन दोनोके रीस्तोकी वजहसे दोनो फेमीलीमे जगडा हो गयाथा.. इनके चाचा हमारे घरके पासही रहेते थे.. इसीलीये तो टीना मेरी फ्रेन्ट थी.. ओर राघव वहा उनके चाचाको मीलने कइ बार आता जाता रहेता था..

मंजुला : अच्छा इसीलीये आप राघवके संपर्कमे आइ होगी..

रश्मी : हां भाभी.. उनके चाचानेही मेरे पीताजीसे बातकी.. ओर हमारा रीस्ता तैय होगया तब मुजे क्या पता की राघव वहा उनकी बहेनको मीलने आता हे.. भाभी.. राघवने उसे दो बार प्रेगनेन्ट भी करदीया था.. ओर उनके घरवालोने टीनाका अ‍ेबोर्सन करवा दीया.. तब पता चलाकी ये सब करतुत राघवकी हे..

तबतकतो मेरी सादीभी राघवसे होगइ थी.. ओर मेनेभी टीनासे कोइ रीस्ता नही रखा.. फीरतो सुनाथाकी उनके मा बापने टीनाकी सादी कही ओर करदी थी.. लेकीन कुछही दिनोमे अपने पतीको डीवोर्स देकर वापस घरपे आगइ.. फीर पता नही उनका क्या हुआ.. बस इतने सालोके बाद आज टीनाको फोन कीया..

मंजुला : (हसते) हंम.. इसका मतलब अब राघवके रीस्तेदारोमे सीर्फ उनकी ये बहेन ही हे.. क्या डीवार्सके बादभी उनका रीलेशन राघवसे था..?

रश्मी : पता नही भाभी.. सायद होगा.. क्युकी राघव कइ बार हमारे गांव ओर सहेरमे जाता था.. सायद टीनाको मीलनेही जाता होगा.. वो सहेर जातातो दो दो तीन तीन दिन तक नही आताथा.. अबतो इनके बारेमे सब टीनाही बता सकती हे..

तभी चारुभाभी ओर नीशा भी आगइ.. तो अंदर आतेही नीशा देवायतकी ओर देखकर सरमाते मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो रश्मी मंजुके पास चली गइ.. देवायत ओर सुधीर वही होलमे बैठकर गांवमे सबको फोन करने लगे.. तब कुछही देरमे धीरे धीरे करते गांवके लोग राघवके घरपे अ‍ेकठे होने लगे.. सबलोग देवायतके कहेनेपे आने लगे.. तो आधे घंटेके बाद रमेश ओर भानुभी अर्थीका सामान लेकर आगये..

फीर रमेश ओर गांवके कुछ लोग राघवकी अर्थी तैयार करने लगे.. तबतक गांवकी बहुतसी ओरतेभी आ चुकी थी.. रश्मीका पुरा कमरा ओरतोसे भरचुकाथा.. तभी अ‍ेक कार आकर रुकती हे.. तो उनमेसे अ‍ेक बहुतही खुबसुरत ओरत सफेद सारीमे अंदर आगइ.. ओर अंदर घरमे आतेही जोरोसे फुट फुटकर रोने लगी.. तब मंजु चारु ओर रश्मीभाभी बहार आगइ.. ओर वो ओरत रश्मीको देखतेही उनसे लीपट गइ ओर उनके कंधेपे सर रखके फुटफुटके रोने लगी.. तभी..

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रश्मी : टीना.. अब बसभी कर.. कीतना रोयेगी.. भगवानके पास हमारी थोडीना चलती हे.. मेभी तो उनकी बीवी हु.. चल अंदर उनका मुह देखले..

कहेते तीनो टीनाको लेकर राघवके रुममे चली गइ.. तो वहा सुधीरने राघवको सहीसे सुलाके उनके उपर सफेद चदर डाली थी.. तब टीना उनके मुहके पास नीचे बैठ गइ.. तो रमेशने धीरेसे मुखसे चदर हटाइ.. तब टीना राघवके चहेरेको सहेलाते जोरोसे राने लगी.. ओर अपने दोनो हाथ जमीनपे पटकते हाथकी चुडीया तोडने लगी.. तब रश्मी मंजु ओर चारुभाभी तीनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखते ही रेह गइ..

फीर तीनो टीनाको लेकर अपने रुममे लेकर चली गइ.. तब रमशे ओर गांवके लोग.. अर्थीको तैयार करते बांधने लगे.. तब कुछही देरमे सब कंपलीट होगया.. तो राघवको स्मसानमे लेजानेकी तैयारीया करने लगे.. तब सबने आखरी बार रश्मी ओर टीनाको राघवके मुखको दीखाया.. ओर सब गांवके लोग राघवकी अर्थी लेकर स्मसानकी ओर नीकल गये.. तब टीना अ‍ेक बार फीरसे बहुत रोइ.. ओर सभी लेडीस उनको लेकर अंदर आगइ..

तीन घंटेके बाद सभी लोग वापस आगये.. ओर अपने अपने घरकी ओर जाने लगे.. तब रमेश सुधीरभी अपनी बीवीओके साथ नहाने अपने घर चले गये.. तो मंजुनेभी रश्मी ओर टीनाको नहानेके लीये केह दीया ओर वो नहाके अभी वापस आयेगी.. कहेते चंदा ओर देवायतको लेकर अपनी हवेलीकी ओर नीकल गइ.. तब रश्मी ओर टीनाने बारी बारी अपने रुमके बाथरुममे जाकर स्नान करलीया.. ओर दोनो कंपलीट होकर रुममे ही बैठ गइ.. तब रश्मीने कहा..

रश्मी : टीना.. उनको ब्रेइन स्ट्रोक आ गयाथा.. पीछले पांच छे महीने होगये.. वो बेडपेही पडे थे.. सहेरमे उनका बहुत इलाज करवाया लेकीन कोइ फायदा नही हुआ..

टीना : (रश्मीका हाथ पकडते) रश्मी.. क्या मुजे इतनी पराइ करदीकी मुजे अ‍ेक बार फोन तक नही कीया..? हंम..? कमसे कम हमारी दोस्तीके खातीर तो कीया होता..? क्या तुजे मुजसे इतनी नफरत होगइ थी..?

रश्मी : टीना.. अब गडे मुर्दे उखाडनेका कोइ फायदा नही.. जीनकी वजहसे हम दोनोका मन मोटाव हो गयाथा वोतो चला गया.. अब इस बातका कोइ मायना नही.. भुलजा तुम सब.. मेभी भुल चुकी हु..

टीना : मे मानती हु की मे तेरी गुनहगार हु.. तेरातो सीर्फ पती था.. लेकीन मेरातो अ‍ेक लौता भाइभी था ओर मेरा सबकुछ था.. मेरा बोय फ्रेन्ट कहो.. मेरे बच्चेका बाप कहो.. मेरा सब कुछ मतलब सबकुछ था वो.. बस अ‍ेक बार मुजे फोन करके केह देती.. हम राघवका बडेसे बडी होस्पीटलमे इलाज करवाते.. तुजे जरासाभी खर्चा नही करने देती..

रश्मी : वो मेरे पास जो ओरत बैठीथीनां वोही यहाकी ठकुराइन हे.. यहाकी रानी.. उनके हसबन्ड यहाके राजा हे.. वोही राघवको सहेरमे बडी होस्पीटलमे ले गयेथे.. राधवके अच्छे दोस्त हे.. उन्होनेही राघवको यहाका सरपंच बनाया हे.. तो राघवाका इलाजभी उसीने करवाया.. सब खर्चा उन्होने ही दीया हे.. तो पैसोकीतो कोइ प्रोबलेम ही नही थी..

टीना : (मुस्कुराते) रश्मी.. इनके बारेमे तो मे ज्यादा नही जानती.. लेकीन मेने इनके बारेमे सुना हे.. इनके बारेमे ये बात राघवने ही मुजे कही थी.. जब अ‍ेक बार पुरी रात हम दोनो साथमे थे.. क्युकी राघव मेराभी पती था.. हां रश्मी..

रश्मी : (आस्चर्यसे) क्या..? तुम दोनोने सादी करलीथी..?

टीना : हां रश्मी.. जब मम्मी पापा दोनोही गुजर गये तब मे अकेली रेह गइ.. तब हम दोनोने सादी करली.. फीर मे उन मकानको बेचकर दुसरी जगाहपे सहेरमे मकान लेकर रहेने लगी.. जहा हमे कोइ पहेचानता ना हो.. राघव मुजे हप्तेमे दो तीन दीन मीलने आजाता..

ओर रातमेभी वही ठहेरता.. मे उनकी बीवी बनकर ही वहा रहेने लगी.. ओर राघवने मुजे फीरसे अ‍ेक बार प्रगनेन्ट करदीया.. ओर इस बार मुजे उनसे अ‍ेक बच्चीभी हुइ.. लेकीन वो ज्यादा दिन नही रेह पाइ.. अ‍ेक बीमारीने उनकी जान लेली.. उनकोभी चार साल होगये..

रश्मी : तो क्या हुआ.. उनसे दुबारा बच्चा पैदा करलेती.. तुजेतो सादीसे पहेलेभी दो बार प्रेगनेन्ट करचुका हे..

टीना : हां रश्मी.. लेकीन मेरे घरवालोने जबरदस्तीसे वो बच्चा गीरवा दीया था.. वरना मे पका उसे पैदा करती.. मुजे कीसीका डर नही था.. लेकीन मेरी मां ने मुजे सुसाइड करनेकी धमकी देदी.. ओर मुजे मजबुरन बच्चा गीरवाना पडा.. क्युकी मेभी राघवसे बहुत प्यार करती थी.. मुजे कोइ फर्क नही पडाकी वो मेरा भाइ हे.. मेरी बची मर गइ.. फीर राघव मुजे कभी बच्चा नही देपाया.. पता नही क्यु.. वो ज्यादा सराब पीने लगाथा.. सायद इसीलीये..

रश्मी : (जुठ बोलते) टीना.. कोसीसतो हमनेभी बहुत की.. लेकीन वो बीमार पडे उनसे अ‍ेक महिने पहेले राघवने कोइ कामोतेजक की गोली खाकर मुजे पुरी रात प्यार कीया.. सायद उसी दीन उसने मुजे पेटसे करदीया.. टीना.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. अभी मेरे पेटमे उनका बच्चा पल रहा हे..

टीना : (चहेरेपे खुसी लाते) क्या..? रश्मी तुम प्रेगनेन्ट हो..? रश्मी.. आइ अ‍ेक हेपी.. ये तुमने मुजे आज बहुत बडी खुश खबर सुनाइ.. की मेरे.. आइ मीन.. हमारे राघवकी नीशानी तेरे पेटमे पल रही हे..

रश्मी : हां टीना.. मे अभी प्रेगनेन्ट हु.. चोथा महिना चल रहा हे..

टीना : रश्मी.. क्या हम फीरसे वोही दोस्ती कायम नही कर सकते..? मे तुमसे हाथ जोडके माफी मांगती हु..

रश्मी : (हाथ पकडते) नही टीना तु माफी मत मांग.. मे तुमको क्या.. कीसीको दोस नही देती.. क्युकी मेरी कीस्मतमेही ये सब लीखा हेतो हम कीसीको क्या दोस दे..? हम दोस्ततो हे ही.. अबतो दोस्तके साथ हम अ‍ेक दुसरेकी सौतनभी हे..

टीना : (हसते) थेन्कस रश्मी.. अब हम दोनोही अकेली हे.. रश्मी तुम मेरे साथ रहेने आजा.. अब सहेरमे हमारा बहुत बडा मकान हे.. ओर राघव ओर पीताजीकी इतनी प्रोपर्टी हेकी हम दोनो आरामसे अपना गुजारा कर सकती हे.. हम हमारे राघवके बच्चेको अच्छेसे पालेगे.. मे तुजे मेरी आधी प्रोपर्टी ओर पैसे देनेके लीये तैयार हु.. कहोतो तेरे नामभी करदुगी..

रश्मी : (हसते) नही टीना.. मुजे कुछभी नही चाहीये.. मकानतो येभी हे.. ओर वहा गांवमे सुकुनकी जींदगी जी रही हु.. वो यहाके राजा हमारे ठाकुर साहबने ही मुजे पंचायतमे नोकरी दीलवा दी हे.. उसीमे मेरा ओर मेरे बच्चेका गुजारा अच्छेसे होजायेगा.. उल्टा तुम यहा आजा.. हम दोनो साथ रहेगी.. अब मुजे तुमसे कोइ गीला सीकवा नही हे..

टीना : (हसते) थेन्क्स रश्मी.. मुजे अच्छा लगा तुमने मुजे माफ करदीया.. लेकीन मे यहा नही आ सकती.. क्युकी मेरा सहेरमे बुटीकका बीजनेस हे.. वो बहुत अच्छा चल रहा हे.. मे मेरी खुदकी कारसे आइ हु.. रश्मी भगवानने मुजे सबकुछ दीया हे.. बस मेरे प्यारको मुजसे छीन लीया.. यही अफसोस हे.. अगर तुजे कीसीभी चीजकी जरुरत होतो मुजे अपनी छोटी बहेन मानके मांग लेना.. मे खुसी खुसी दे दुगी..

दोनोही बाते करते बैठीथी तब कुछही देरमे देवायत मंजु ओर रमेश चारुभाभी दोनोका खाना लेकर आगये.. ओर मंजुने दोनोको जबरदस्तीसे खीलाया.. फीर रश्मीने टीनाका परीचय मंजु ओर चारुभाभीसे अपनी सौतनके रुपमे करवाया.. ओर खाना खाते रश्मीने सभी बाते मंजु ओर चारुको बतादी.. तो मंजु ओर चारुभी सुनके खुस होगइ ओर हसने लगी.. तबतक देवायत ओर रमेश होलमे बाते करते बेठे रहे..

तब चारो लेडीस भी होलमे आगइ.. ओर रश्मीने देवायत ओर रमेशकाभी परीचय टीनासे करवाया तब टीना देवायतको देखती ही रेह गइ.. उनको उमीद नहीथी.. की कोइ ठाकुर होतेभी इतना सरल हो सकता हे.. फीर सबने पांचवे दिन राघवके लीये सांती हवन करनेका तैय करलीया.. तभी टीनाने अपने पर्ससे पचास हजार नीकालके रश्मीको देदीये.. तो रश्मीने उसे लेनेसे इन्कार करदीया.. तो देवायतने कहा..

देवायत : रहेने दीजीये टीनाजी.. वो हम सब देख लेगे.. ये हमारे गांवके सरपंच थे.. तो हमाराभी फर्ज बनता हे.. आप रश्मीभाभीकी भी चीन्ता मत करना.. हम उनका पुरा खयाल रखेगे..

टीना : (इमोस्नल होते) देवायतजी.. मेने आपके बारेमे राघवसे बहुत सुनाथा लेकीन गलत सुनाथा.. आप लोग इतने सरल हे मुजेतो पताही नही था.. रश्मी मेरी दोस्तही नही मेरी बहेनभी हे.. मे ये पैसे उनको राघवके लीये नही मेरे लीये दे रही हु.. ताकी हम दोनोको तसली मीलेकी हमने राघवके लीये कुछ नही कीया.. प्लीज इसे कहीये ये पैसे लेले..

रश्मी : नही टीना.. मुजे जब जरुरत पडेगी तब तुमसे मांग लुगी.. अभी मुजे कुछभी नही चाहीये.. उनका जो भी कार्य करना हे हम दोनो मीलकर साथमे करेगे.. तुम पांचवे दिन इधर आजाना.. हम दोनो साथमेही इनका कार्य करेगे..

टीना : (हसते) ठीक हे.. लेकीन अब मे जोभी करुगी उसमे तुम मुजे मना मत करना.. मेने बहुतसे लोगोका अन्जानेमे ही सही.. बहुत दिल दुखाया हे.. ओर भगवानने मुजे उनकी सजाभी देदी हे..

रश्मी : नही टीना.. अ‍ैसा मत बोल वो सब हमारी कीस्मतमेही लीखा होता हे.. तो होकरही रहेता हे.. इनकी समज मुजे मंजुभाभीने ना दी होतीतो मे आजभी तुमसे नफरत करती होती..

टीना : (खडी होते हसते) थेन्क्यु मंजुभाभी.. आपकी समजदारीकी वजहसे आज हम दोनो बहेने फीरसे मील गइ.. चलीये मुजे आज्ञा दीजीये मुजे जानाभी हे.. मेरा बुटीक अ‍ैसेही छोडके आइ हु.. ओर आप सब लोगभी सहेरमे आये तो मेरे यहा जरुर आइअ‍ेगा.. चलो सबको बाय..

कहेते टीना सबको गले मीली ओर चली गइ.. तब रश्मी उनको दरवाजे तक छोडने गइ.. ओर वापस आकर सबके साथ बैठ गइ.. तब सबके बीच बातोका दोर चल पडा ओर मंजुने सबको बता दीयाकी ये राघवकी बहेन थी.. ओर राघवने उनसे भी सादी करली थी.. अ‍ैसेही बाते करते साम होगइ.. तब रमेश ओर चारु अपने घरकी ओर जाने लगे.. तो चारुने सबसे छुपकर देवायतको इसारा करते फोन करनेको केह दीया..

तब मंजुने रश्मीको कुछ दिनोके लीये अपने साथ हवेलीपे चलनेको कहा.. तो रश्मीने हसते हुअ‍े उसे मना कर दीया.. तब देवायत ओर मंजु भी अपने घरपे आगये.. ओर अ‍ैसेही दिन नीकल गया.. आज मंजुके लीये पुरा दिन अ‍ैसेही बैठे बैठे नीकल गया तो मंजु थक गइ.. तो सामका डीनर करतेही वो रुममे जाकर अपने बच्चेको दुध पीलाकर सो गइ.. तो चंदाभी मंजुके बच्चेको लेकर उसे सुलाने लगी.. जब सो गया तो वोभी बीस्तरपे लेट गइ..

तभी देवायत बहार चकर लगाने चला गया.. तब राजीवको भी नीर्मलाने दवाइ पीलादी तो वो दोनोभी सोने चले गये.. तब रजीया चंपा ओर दयाभी खाना खाकर सब काम नीपडाके अपने रुममे चली गइ.. ओर भावु अपनी बच्चीको अपने रुममे जाकर दुध पीलाने लगी.. वो कइ दिनोसे देवायतको अकेलेमे मीलनेके लीये इन्तार मे थी.. तो आज उसे मौका मील ही गया.. तो वो देवायतका इन्तजार करते जागती रही..

तो दुसरी ओर देवायत सुधीरके घर चला गया.. तो सुधीर ओर नीशाभी घरपे खाना खाकर टीवी देख रहेथे.. तो जैसेही देवायत घरके अंदर आया तो सुधीर उसे देखतेही खुस होकर हसने लगा ओर देवायतको अपने पास हाथ पकडकर बीठा दीया.. तब नीशा देवायतको देखकर बहुत खुस होगइ ओर वो उनके लीये कीचनमे पानी लेने चली गइ.. ओर वापस आकर देवायतको कामुक नजरोसे देखते हसते हुअ‍े पानी देने लगी..

सुधीर : (हसते) आओ भाइ.. आजतो थक गये.. इतने दिनोसे काममे लगे हुअ‍े थे तो आज थकान महेसुस हो रही हे.. कहो.. क्या पीयोगे.. चाइ के ठंडा..?

देवायत : नही यार रहेने दे.. अभी अभी खाना खाकर ही आया हु.. बस तुजे मीलने चला आया.. थेन्कस यार तुम दोनोने ओर रमेश चारुभाभीने हमारी बहुत मदद की.. तो सब काम आसानीसे नीपट गया..

सुधीर : (थोडा गुसा होते) साले.. हम दोनो कोलेजके टाइमसे दोस्त हे.. हमे दोस्तभी कहेता हे.. ओर थेन्क्स कहेने इधर आया.. तो हमारी दोस्ती कीस कामकी..? आजके बाद हमारी दोस्तीमे ये थेन्कस सब्द नही आना चाहीये.. उलुका पठा.. हें..हें..हें..

नीशा : (हसते धीरेसे) सुधीर.. तुम गालीतो मत दो.. कोइ अपने फ्रेन्डसे अ‍ैसे बोलता हे..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही भाभी.. रहेने दीजीये.. कीतने सालोके बाद इसे हमारी दोस्तीका अहेसास तो हुआ.. हम कोलेजमे थे तब अ‍ैसेही बाते कीया करते थे.. बस.. ये बता.. वो राघवकी मौत कैसे हुइ..

सुधीर : भाइ.. लगता हे उन्होने बहुत टाइमसे खाना नही खाया.. ओर उपरसे ये बीमारी.. उनको फीरसे स्ट्रोक आगया था.. तो मुहसेभी जाग नीकल गया.. ओर वैसेभी उनका टाइम हो गयागा.. फीरभी कुछ ज्यादा दिन जीन्दा रहा..

नीशा : (खडी होते) आप दोनो बाते कीजीये.. मे हम सबके लीये मस्त दुध कोल्ड्रींक बनाती हु.. अभी आइ..

सुधीर : (नीशाके कीचनमे जाते ही नजदीक आगया फीर धीरेसे) भाइ आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी..

देवायत : (हसते) हंम.. बोल..? क्या बात हे कोइ सीरीयस मेटर तो नही..?

सुधीर : (हसते) सायद.. भाइ.. हमारे यहा वो मुना ओर उनकी बहेन बरखा काम करते हेनां..? बस उनके बारेमे आपसे बात करनी थी.. आज जब सुबह क्लीनीकपे गयाथा तब दोनोही भाइ बहेन वही अपनी ड्युटीपे काम कर रहेथे.. तो वहा बरखाकी तबीयत बीगड गइ.. ओर उसे उल्टीया होने लगी.. तो मेने उसे वही चेक करलीया.. ओर उसे दवाइ देदी.. तो उनकी उल्टीया तो बंध हो गइ.. फीर मेने उसे घरपे आराम करने भेज दीया..

देवायत : हां तो..? तो उनमे कोनसी बडी बात हे..? अच्छा कीया उनकी तबीयत बीगड गइ.. ओर तुमने उसे आराम करने घर भेज दीया..

सुभीर : (हसते धीरेसे) भाइ बात वो नही हे.. अभी मेने उसे कुछभी नही बताया.. सीर्फ नीशा ओर अभी आपको बता रहा हु.. भाइ मेने उसे चेक कीया तो बाकी सब नोर्मल था.. उल्टीकी वजहसे उनके जो सीमटन्स थेना.. उनका बीपी वगैरे.. वो कोइ सामान्य नही थे.. इसके बारेमे हमारी नइ भाभीही ठोस बता सकती हे.. भाइ मुजे लगता हे वो लडकी प्रेगनेन्ट हे.. सायद इसी लीये उसे उल्टीया हुइ थी.. अभी मेने उसे कुछ नही बताया.. सोचा पहेले आपसे बात करलु..

देवायत : (थोडा चोंकते) क्या वो दोनो रमेशके आदमीके वीभुभाइके लडका लडकी हेनां..? तो फीर उनकी कहा सादी हुइ हे..? क्या नीशाभाभीको पता हे..?

सुधीर : (हसते) हां.. मेने अभी अभी उसे बताया.. तो उसने जो कहा.. अब मे आपसे कैसे कहु..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) यहीना की उनका रीलेशन उनके भाइके साथही हे..? मे जानता हु.. ओर सायद उनके भाइने ही उसे प्रेगनेन्ट कर दीया हे.. सुधीर.. तु कल मुजे मीलना.. अभी इस बातका जीक्र कीसीके सामने मत करना.. ओर नीशाभाभीकोभी कहेना अभी कीसीको ना कहे.. हम इस बारेमे कल बात करेगे..

सुधीर : (हसते) ठीक हे भाइ.. मे कल आपके खेतपे आउगा.. तब बात करेगे..

देवायत : नही.. कल मे दोपहोरको क्लीनीकपे आ रहा हु.. तुम उन दोनोको रोकके रखना.. उसे इस बारेमे कुछ भी मत पुछना.. मुजे उन दोनोसे बात करनी हे.. बस मुजे इस बारेमे कीसीको कुछ पुछना हे.. फीर तुजे कल बताता हु..

सुधीर : (हसते) ठीक हे भाइ.. मे कल आपका इन्तजार करुगा.. हें..हें..हें.. भाइ.. अब आपसे कैसे कहु..?

देवायत : (हसते) क्या ओर बातभी कहेनी हे..? साले.. जो भी बोलना हे बीन्दास्त बोलदे..

सुधीर : भाइ.. नीशा कहे रहीथी.. की वो सारा दीन घरपे अकेली बैठी रहेती हे.. तो उसेभी जोब करनी हे.. अगर हमारी स्कुल खुल जाये ओर सीक्षककी जरुरत पडे तो नीशाको भी सेट कर देना..

देवायत : (हसते) हा तो अच्छा हेना.. हमे ओर सीक्षककी जरुरत तो पडेगी.. लेकीन नीशाभाभीके लीये मेने कुछ ओरही सोचा हे.. ओर ये लडकी जो अभी तुमने बताया.. वोभी तो पढी लीखी हे.. दोनोही भाइ बहेन ग्रेज्युअ‍ेट हेनां..? कोइ बात नही.. बस पहेले स्कुलका कुछ होने दे.. मे सहेर जाउगा तब बात करलुगा..

नीशा : (हसते) अरे.. क्या बाते हो रही हे.. लीजीये ठंडा पीजीये.. मेने आपके लीये स्पेसीयल कोल्ड्रींक बनाया हे.. हे..हें..हें.. आपतो इधर आतेही नही हो.. वो चारुभाभीके घरतो बहुत जाते हो..? हें..हे..हें..

सुधीर : (हसते ग्लास लेते) भाइ.. अब इनकीभी सीकायत दुर करदो.. हें..हें..हें.. कमसे कम मुजे नही तो इनको मीलने आया करो ताकी इनकी कोइ सीकायतही ना रहे.. हें..हें..हें.. (नीशाकी ओर देखते) नीशा.. अभी अभी मेने देवुसे तुम्हारे बारेमे बात की.. तुम जोब करना चाहती थीनां..?

नीशा : (सरमाते हसते) हां देवरजी.. अगर स्कुलके लीये ओर टीचरकी जरुरत पडे तो कहेना.. मे सारा दीन खाली बैठी रहेती हु.. तो मेराभी टाइम नीकल जायेगा.. आज देखोना.. रश्मीभाभीका भी छुटकारा होगया..

देवायत : (हसते) भाभी मे आपके बारेमे कुछ ओरही सोच रहा हु.. वो कभी हम फुरसतमे बाते करेगे..

सुधीर : (हसते) भाइ.. क्या वो राघवकी बहेन थी..? जीस तराह उसने राघवके पास अपने हाथोकी चुडीया तोडदी.. तो मुजेतो अ‍ैसा नही लगा की वो उनकी बहेन हे..? मुजेतो दालमे कुछ काला लगा.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां वो उनकी कजीन बहेनही थी.. राघवके चाचाकी लडकी.. लेकीन उन दोनोके बीच प्यार था.. ओर राघवने उनसे सादी भी करली थी.. राघवसे उनको अ‍ेक बच्चीभी हुइ थी.. लेकीन बेचारी कोइ बीमारीकी वजहसे गुजर गइ.. सुधीर.. वो बहुत अच्छी लडकी हे.. टीना नाम हे उनका.. सहेरमे बुटीक चलाती हे..

नीशा : (हसते ठंडा पीते) हां देवरजी.. अभी मे ओर चारुभाभी रश्मीभाभीको मीलने गइ तब वोभी यही केह रहीथी.. उनकी पकी सहेली थी.. बस ये राघवभाइ ही कमीने थे..

सुधीर : देवुभाइ.. आज बहुत अच्छा लगा.. आप अ‍ैसेही यहा आते रहीये.. हमे अ‍ेक अपनापन लगता हे.. कमसे कम आपकी भाभीको अच्छा लगेगा.. येतो घरपेही रहेती हे.. बस जानेको सीर्फ दो जगाह ही हे.. कभी चारुबाभी इधर आती हे तो कभी दोनो आपके वहा या रश्मीभाभीके घर जाती हे.. हमारे रीस्तेदारभीतो दुरके सहेरमे रहेते हे.. मेतो सारा दीन क्लीनीकपे रहेता हु.. आज कल पेशन्टभी बहुत आते हे..

देवायत : (हसते) चल कोइ बात नही.. मे आता जाता रहुगा.. ओर मंजुकोभी साथ लेआउगा.. अब गांवमेभी बहुत काम बढ जायेगा.. बस तुजे कुछही दिनोमे पता चल जायेगा.. हें..हें..हें..

सुधीर : भाइ.. अब यहा अ‍ेक लेडीस डोक्टरकी सख्त जरुरत हे.. कोइ लेडीसके लीये अ‍ेक क्लीनीक लगवादो.. हमारे गांवमे लेडीसके लीये कुछ हेही नही..

देवायत : सुधीर.. बस वोही मेरे दिमागमे हे.. हमे यहा लेडीसके लीये थोडी बडी होस्पीटल बनानी हे.. ताकी आसपासके गांवकी सभी लेडीसको डीलेवरीके लीये सहेरमे जाना ना पडे.. अब तु ही कोइ लेडीस डोक्टरका इन्तजाम करले.. बाकी रमेशको कहेकर उनके लीये यहा कोइ होस्पीटल बनायेगे.. क्या कहेते हो..?

नीशा : (सरमाते हसते) देवरजी तबतो सोनेपे सुहागा होगा.. क्या अ‍ैसा हो सकता हे..?

देवायत : हां भाभी.. बीलकुल हो सकता हे.. मे सृतीको मीलकर उनसेभी कुछ लेडीस डोक्टरकी बात करुगा.. अगर वो कहीसे अ‍ेरेन्ज करदे.. तो हम यहा होस्पीटल खोल सकते हे.. तो हमारे आस पासके गांवकी ओरतोकोभी बहार नही जाना पडेगा..

सुधीर : (हसते) भाइ आप इनमे आगे बढो.. मेरा पुरा सपोर्ट हे आपको.. ये आपने बहुतही अच्छा सोचा हे..

देवायत : (हसते) कमीने मुजे तेरा सपोर्ट नही चाहीये.. मेने इस बारेमे कुछ ओरही सोचा हे.. लेकीन अभी नही इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. ठीक हे..? चल.. हम आगे देखते हे.. मे चलता हु.. अब बहुत देर हो गइ हे.. कल मीलता हु..

नीशा : (सरमाते हसते खडी होते) देवरजी.. आप आये बहुत अच्छा लगा.. आते रहीयेगा.. हें..हें..हें..

फीर देवायत हसते हुअ‍े वहासे नीकल गया.. फीर चलते हवेलीकी ओर जाने लगा.. रातके अंधेरेमे ज्यादातर लोग अपने घरपे सो चुके थे.. या सोनेकी तैयारीया कर रहेथे.. देवायत अ‍ेक सुमसान छोटीसी गलीसे गुजर रहाथा.. तब अ‍ेक घरके पास उसे खीडकीसे कुछ अजीब सुनाइ देने लगी.. तब देवायतको जरासीभी समजने देर नही लगी.. की अंदर क्या हो रहा हे..

उनको खीडकीके पास कीसी ओरतकी सीसकारीयोकी आवाजके साथ मर्द ओरतकी बातेभी सुनाइ दे रहीथी.. देवायत ये घरको अच्छी तराह पहेचानता था.. ये घर उनके पंचायतके सदस्य (सामत)का घर था.. उनके घरमे सामत.. उनकी बीवी जया.. अ‍ेक जवान लडका (बंसी) लडकी (जागृती) ओर सामतकी जवान विधवा बहेन (सांती)के साथ रहेता था.. जो सादीके ८ सालके बाद ही विधवा हो गइथी.. उनके कोइ बच्चे नही थे..

उन खीडके ठीक पासही बेड लगा हुआथा.. तब अंदर सामतका लडका बंसी उनकी जवान विधवा बुआ सांतीको चोद रहाथा.. ओर चुदाइ करते दोनोकी बाते बहार तक सुनाइ दे रहीथी.. तो उनको नही पताथा की उनकी आवाज बहार खीडकीके पास सुनाइ दे रही हे.. तब देवायत धीरेसे वहा खीडकीके पास सटकर खडा रहेके रुक गया.. ओर अंदरकी बाते सुननेकी कोसीस करने लगा.. तो उसे अंदरकी बात साफ सुनाइ देने लगी..

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सांती : (धीरेसे सीसकारीया करते) बंसीइइ.. सीइइ बस.. बस.. धीरे चोदोनां.. तुमतो मानतेही नही हो.. बीना कोंन्डम ही चोदे जारहे हो.. कुछ गडबड होगइ तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी.. आइ.. आह... आह..आह.. बस.. बस.. बस.. कीतना जोरोसे चोदते हो..

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बंसी : (कामुक आवाजमे चोदते) बुआ.. धीरे ही चोद रहा हु.. तुम सादीमे क्या मस्त तैयार हुइथी.. मेरातो तबसे ही तुजे चोदनेका मन कर रहाथा.. बुआ.. आइ लव यु.. मुजे कोन्डममे तुजे चोदनेमे मजा नही आता..

सांती : (सरमाते हसते) हंम.. बंसी.. मेभी तुमसे बहुत प्यार करती हु.. लेकीन क्या करु..? हमारा इस जन्ममे मीलन मुमकीन नही हे.. अगले जन्ममे तुही मेरा पती होगा.. ये वादा हे.. उइइइ.. बंसी.. धीरे धीरे.. चोदो..

बंसी : (धीरेसे चोदते होंठ चुमते) बुआ.. अब ठीक हे..? चलना.. हम दोनो यहासे कही दुर भागजाये.. जहा हमे कोइ जानता ना हो.. हम सादी करके वही रहेगे.. हमारे ढेर सारे बच्चे होगे.. हंम..? मे कही जोब करलुगा.. चलनां..

सांती : (बाहोमे भीचते) बंसी.. हम भागतो जायेगे.. लेकीन यहा बडे भैयाकी क्या इजत रेह जायेगी.. कुछतो सोचो..बंसी.. हम नही भाग सकते.. हम इसी घरमे पती पत्नी बनके रहेगे.. बस तुम मुजे हमेसा अ‍ैसेही खुस रखना.. बस अ‍ैसेही चोदते रहो.. तु क्या मस्त चोदता हे.. मेतो तेरी दिवानी होगइ हु.. बंसी..

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बंसी : बुआ.. तो क्या हम यहा बहार कीसी मंदिरमे जाकर सादी करले..?

सांती : हां बंसी.. वोभी कर लेगे.. लेकीन कुछ दिन ठहेर जाओ.. अभी तीन चार दिनमे मेरा पीरीयड सुरु होजायेगा.. फीर हम कुछ सोचेगे.. अबतो तुमसे चुदवानेका बुहत मन कर रहा हे.. पता नही तुमने क्या जादु करदीया हे.. बस अ‍ेकही डर लग रहा हे.. कही मे पेटसे ना होजाउ.. वरना हमारी इजत चली जायेगी..

बंसी : बुआ.. मेने तुजे वो आइपील तो लाके दी हे.. तु उसे लेती हेकी नही..?

सांती : (धीरेसे सरमाते) हां.. रेग्युलर लेती हु.. अबतो तुमभी मुजे रोज चोदने लगे हो.. वरनातो हप्तेमे अ‍ेक दो बारही चोदते थे.. ओर अबतो वोभी बीना कोन्डम.. इसीलीये डर लग रहा हे.. बंसी.. मुजसे वादा करो.. अगर भाइने तुम्हारी सादी कही ओरके साथ करदी तबभी तुम मुजसे रीलेशन रखोगे.. ओर अ‍ैसेही मेरा खयाल रखोगे..

बंसी : बुआ तुम फीकर मत करो.. मेरी सादीका सवालही पैदा नही होगा.. मे कीसी ओरसे सादी करने वाला नही हु.. मुजे सीर्फ तुम चाहीये.. अगर कुछ उच नीच होगइ तो हम भाग जायेगे.. वरना सबसे बगावत करके मे तुमसे सादी करलुगा.. फीर हमे क्युना दुसरे गांवमे जाकर रहेना पडे..

सांती : (कामुक सीसकारीया करते बंसीको बाहोमे भीचते) बंसीइइइ.. थोडा जोरोसे चोदो मेरा होने वाला हे.. आइ.. हां.. बस.. बस.. अ‍ैसे ही.. उइइइ मां.. बं..सी..इइइइइइ मे.. गइइइइइ आह.. आह.. आइइइइ....

बंसी : (होंठ ओर गलेको चुमते) बुआ.. मे..भी... आ रहा हु.. आह.. आह.. आइ.. बुच.. बुच.. बुच.. आ..ह..

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कहेते दोनोही जड गये.. तब देवायतके मुहसे हसी नीकल गइ.. ओर वो चुपचाप वहासे हवेलीकी ओर चलने लगा.. आज उसे बाबाकी अ‍ेक अ‍ेक बाते याद आने लगी.. वो सोचते हुअ‍े घरकी ओर बढ गया.. की नाजाने गांवमे अ‍ैसे कीतने रीस्ते पल रहे होगे.. हमे सबको सम्हालना होगा.. ओर गांव वालोको अ‍ैसे रीस्तोको अपनानेके लीये समजाना पडेगा.. बहुतही मुस्कील काम था.. यही सब सोचते वो हवेलीमे आगया.. तभी....

कन्टीन्यु
 
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