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- Dec 5, 2013
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बरखा : (धीरेसे मुस्कुराते) हां जयश्री.. कल अगर ब्रीन्दा आंटीका कीसी ओरके साथ चकर हो गया.. तो क्या तुम दोनो मीया बीवीको अच्छा लगेगा..? ओर अकेली ओरतकी आग भी बहुत ज्यादा होती हे.. बाकी रही बात हमारे पतीकी.. तो मुनाने सबको ना जाने कोनसी जडी बुटी पीला दी हे..
की वो हमे बीस्तरमे आज भी चीखे नीकलवाते हे.. ओर हमे ठोक ठोकके थका देते हे.. कमीने दो बार ठोकनेसे पहेले हमे छोडते ही नही हे.. ओर फीर भी उनको करना होता हे.. कमसे कम हमारे पतीमे इतनी काबीलीयत ओर स्टेमीना तो हे ही.. की वो दो दो ओरतोको अेक साथ सम्हाल सकते हे..
जागुती : (मुस्कुराते धीरेसे) हां जयश्री.. बरखा की सभी बाते सही हे.. तुम भी अेक बार आंटीके बारेमे सोचले.. बाकी तेरी मरजी.. हम उनको केहतो नही सकते.. की आप अपने बेटेके साथ रीलेशन रखलो..
जयश्री : (कुछ सोचते सरमाकर मुस्कुराते) हां यार.. बात तो तुम दोनोकी सही हे.. लेकीन उनको मेरे ससुरसे अलग तो होने दो.. ओर मे भाइको कैसे कहु..? की आप अपनी मम्मीको पटालो.. देखते हे आगे क्या होता हे.. बाकी बादमे देखा जायेगा.. अगर वो मां बेटे खुद आगे बढे तो अब मे कोइ अेतराज नही करुगी.. दोनोको आगे बढने दुगी.. बस..? जागु.. छोड ये सब.. ये सब बाते हम बादमे करेगे.. अभी ये बता तुमसे क्या सोचा हे..? बंसी भैयाको मीलोगी की नही..? देख अभी भी तेरी ओर देख रहे हे.. हें..हें..हें..
जागृती : (सरमाते धीरेसे) नही यार.. उनकी खुद की सादी हे.. तो महेमानोकी वजहसे नही मील सकती.. फीर भी देखती हु.. अगर हमे आज मीलनेका मौका मीला तो मील लेगे.. वरना सादीके बाद तो वो मेरे ही हे.. बस..? अब तो खुस..? हें..हें..हें..
जयश्री : (जोरोसे हसते धीरेसे कानमे) कमीनी खुस मुजे नही तुजे होना हे.. तु उसे अकेली मीलेगी तो वो तुजे ठोकेगा मुजे नही.. समजी..? हें..हें..हें..
जागृती : (सर्मसार होकर उतेजनासे कानमे धीरेसे) तो कमीनी तुम भी इनसे ठुकवाले.. मुजे कोइ अेतराज नही.. हें..हें..हें.. जयश्री.. जबसे लखनको छोड दिया तबसे मुजे भी बहुत इच्छा हो रही हे.. ओर भाइ भी अभी इतनी हिंमत नही कर रहे.. तो मे उनको सामनेसे कैसे कहु..? की मुजे चोदलो..
जयश्री : (मुस्कुराते कानमे) हां जागु.. मुजे भी आज भी भाइसे मीलनेका बहुत मन करता हे..
बरखा : (हसते धीरेसे) कमीनी तु इतनी मस्त तैयार हुइ हे.. अैसा लगता हे सांती दीदीकी सादी नही तेरी हे.. ओर तु खुबसुरत हे.. तो थोडा आगे बढकर अपने बदनके जलवे दीखादे.. वो तेरे पीछे पागल होजायेगे..
जयश्री : (सरमाकर हसते कानमे) हां जागु.. तुम उनको अकेलेमे मीलनेकी कोसीस तो कर.. वो कुछना कुछ जरुर करेगे.. साली ये अेकांत चीज ही अैसी हे.. मुजे भाइको मेरे उपर चडानेमे अेक दिनका वक्त भी नही लगा.. जब उनको पता चलाकी मे उनको प्यार करती हु..
तब प्यारका इजहार होते ही अेक घंटेके बाद उसने मेरा कौमार्य भंग कर दीया था.. ओर जबतक हमारे मम्मी पापा वापस नही आये.. तबतक उस अेक हप्ते तक हम दोनोने अपना हनीमुन ही मनाया.. पता नही इस अेक हप्तेमे भाइने मुजे कीतनी बार चोदलीया था.. तो तुम भी बंसीभाइको मीलनेकी कोसीस जारी रखो..
सादीके माहोलमे तीनो सहेलीया आपसमे धीरे धीरे हस हसके कामुक बाते करते अेक दुसरेकी मस्तीया कर रही थी.. तब अेक घंटेके बाद देवायत भी सहेरसे सबको लेकर वापस घरपे आगया था.. तो मंजु सृती पुनम चंदाके साथ देवायत भी सादीमे सामील हो गया.. उसे देखकर सामतभाइ भी बहुत खुस होगये.. इसी बीच नाच गानका प्रोग्रामभी हुआ.. तब देर साम दुसरे गांवके सरपंच ओर सदस्यो भी आये हुअे थे..
जब भोजनका समय हुआ तो सबलोग भोजनकी ओर जाने लगे.. तभी बसंती अेक चहेरेको देखकर चोंक गइ.. ओर अपना चहेरा सारीसे ढकते धीरेसे सरकते मुनाके पास चली गइ.. ओर उनके पास जाकर धीरेसे इसारा करते उन सख्सको मुनाको दीखाने लगी.. ओर दबी आवाजमे मुनासे बाते करने लगी..
जो उनका भाइ विनोद था.. तो मुना उनको गौरसे देखने लगा.. ओर बसंती मुनाको अपने मामाको दीखाकर वापस चली गइ.. तब मुना लखनसे अकेलेमे मीलकर बाते करते करते उस सरपंचके बारेमे सभी जानकारीया लेने लगा.. ओर इस बारेमे उसने लखनसे भी बात करली.. तो लखन भी मुस्कुराने लगा..
लखन : (मुस्कुराते) मुना.. क्या ये कमीना तेरा मामा हे..? अभी रहेने दो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. मे उस मीया बीवी दोनोको अच्छी तराह पहेचानता हु.. कमीना पास ही के गांवका सरपंच हे.. उनकी बीवी घरपे गांवके बच्चोको पढाती हे.. कमीनीकी मेरे साथ बहुत पटती हे.. वो बहुतही मस्त पटाका माल हे.. बस.. थोडीसी कोसीस करनी हे.. तो पट जायेगी.. उनकी कोइ ओलाद नही हे..
मुना : (धीरेसे हसते) हां भाइ.. आपकी सभी बाते सही हे.. इनके साथ आपको जोभी करना हो करना.. बस.. अेक बार उस कमीनीको मुजसे चुदवा देना.. मुजे मेरे मामासे बदला लेना हे.. कमीनेने मम्मीकी सादीसे पहेले उनका धोखेसे बहुत ही गलत फायदा उठाया हे.. कमीनीके की बीवीको ठोक ठोकके पेटसे कर दुगा..
लखन : (आस्चर्यसे) मुना.. क्या वो दोनो सचमे तुम्हारे सगे मामा मामी हे..? कभी तुमने बताया तो नही..?
मुना : (मुस्कुराते) हां भाइ.. मेने भी कमीनेको आज ही देखा.. भाइ.. हम इनके बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे.. कमीनेकी पुरी स्टोरी आपको सुनाउगा.. मम्मीने आजही मुजे सुनाइ हे..
लखन : (धीरेसे हसते) मुना.. मे इनके बारेमे सब कुछ जानता हु.. तुजे बादमे बताउगा.. पहेले ये बता.. क्या आंटीको मीला की नही..? वरना जा.. मीलले उसे यहा मे सब सम्हाल लुगा.. वैसे तुम दोनो सादी कब कर रहे हो..?
मुना : (सरमाते धीरेसे हसते) भाइ.. अभी बापु हे.. तो वो मुजसे सादी नही कर सकती.. हां.. आज मेने उनको दो बार मील लीया.. तो केह रही थी हम सादी करलेगे.. देखा नही.. तभी तो वो खुस हे.. हें..हें..हें.. भाइ.. आज हमारा श्रीधर भी उनकी मम्मीके पीछे कुछ ज्यादा ही लगा हुआ हे.. हें..हें..हें.. क्युकी मेरी मां ओर ब्रिन्दा आंटी सुबहसे साथ ही हे.. लगता हे दोनो अेक दुसरेके बारेमे सब कुछ जानती होगी.. मम्मीको पुछना पडेगा.. कही श्रीधर भी तो उनकी मम्मीको ठोककर नही आया..? हें..हें..हें..
लखन : (श्रीधरकी ओर देखते हसते) मुना.. तेरी बात सही हे.. उन दोनोका भी तेरी तराह हे.. चल वो सब हम बादमे देख लेगे.. अभी तो भोजन मे चल.. कुछ काम करते हे.. ओर भैया भी इधर ही हे.. वरना वो हमे डाटेगे.. फीर हम आरामसे बैठकर बाते करेगे..
अैसी ही हसी मजाक ओर मस्तीयाके साथ सबका भोजन हो गया.. तो सब लोग अपने अपने घरकी ओर जाने लगे.. तो आज बरखा ओर जयश्री भी अपनी सासके साथ घरकी ओर नीकल गइ.. देवायत भी सभी लेडीसको लेकर हवेलीकी ओर नीकल गया.. तो वंदना ओर रश्मी भी साथमे चली गइ.. तो घरके लोग भी सोनेकी तैयारीया करने लगे.. तब लखनके सभी दोस्त ही अेकठा होकर बैठे थे..
सुबल जल्दी सादीका मुहुर्त था.. तो सभी दोस्तोने बंसीको भी सोनेके लीये भेज दिया.. ओर आपसमे बैठकर बाते करने लगे.. तब आज सबको भोजनके वक्त बहुत कुछ नया जाननेको मीला की कीसका चकर कीसके साथ चल रहा हे.. तो सभी दोस्तो उनकी चर्चा करने लगे.. लेकीन अब बाते करते लखनका बार बार मन भटकने लगा था.. क्युकी पीछले तीन दिनसे वो खुद चुदाइसे वंचीत था..
की वो हमे बीस्तरमे आज भी चीखे नीकलवाते हे.. ओर हमे ठोक ठोकके थका देते हे.. कमीने दो बार ठोकनेसे पहेले हमे छोडते ही नही हे.. ओर फीर भी उनको करना होता हे.. कमसे कम हमारे पतीमे इतनी काबीलीयत ओर स्टेमीना तो हे ही.. की वो दो दो ओरतोको अेक साथ सम्हाल सकते हे..
जागुती : (मुस्कुराते धीरेसे) हां जयश्री.. बरखा की सभी बाते सही हे.. तुम भी अेक बार आंटीके बारेमे सोचले.. बाकी तेरी मरजी.. हम उनको केहतो नही सकते.. की आप अपने बेटेके साथ रीलेशन रखलो..
जयश्री : (कुछ सोचते सरमाकर मुस्कुराते) हां यार.. बात तो तुम दोनोकी सही हे.. लेकीन उनको मेरे ससुरसे अलग तो होने दो.. ओर मे भाइको कैसे कहु..? की आप अपनी मम्मीको पटालो.. देखते हे आगे क्या होता हे.. बाकी बादमे देखा जायेगा.. अगर वो मां बेटे खुद आगे बढे तो अब मे कोइ अेतराज नही करुगी.. दोनोको आगे बढने दुगी.. बस..? जागु.. छोड ये सब.. ये सब बाते हम बादमे करेगे.. अभी ये बता तुमसे क्या सोचा हे..? बंसी भैयाको मीलोगी की नही..? देख अभी भी तेरी ओर देख रहे हे.. हें..हें..हें..
जागृती : (सरमाते धीरेसे) नही यार.. उनकी खुद की सादी हे.. तो महेमानोकी वजहसे नही मील सकती.. फीर भी देखती हु.. अगर हमे आज मीलनेका मौका मीला तो मील लेगे.. वरना सादीके बाद तो वो मेरे ही हे.. बस..? अब तो खुस..? हें..हें..हें..
जयश्री : (जोरोसे हसते धीरेसे कानमे) कमीनी खुस मुजे नही तुजे होना हे.. तु उसे अकेली मीलेगी तो वो तुजे ठोकेगा मुजे नही.. समजी..? हें..हें..हें..
जागृती : (सर्मसार होकर उतेजनासे कानमे धीरेसे) तो कमीनी तुम भी इनसे ठुकवाले.. मुजे कोइ अेतराज नही.. हें..हें..हें.. जयश्री.. जबसे लखनको छोड दिया तबसे मुजे भी बहुत इच्छा हो रही हे.. ओर भाइ भी अभी इतनी हिंमत नही कर रहे.. तो मे उनको सामनेसे कैसे कहु..? की मुजे चोदलो..
जयश्री : (मुस्कुराते कानमे) हां जागु.. मुजे भी आज भी भाइसे मीलनेका बहुत मन करता हे..
बरखा : (हसते धीरेसे) कमीनी तु इतनी मस्त तैयार हुइ हे.. अैसा लगता हे सांती दीदीकी सादी नही तेरी हे.. ओर तु खुबसुरत हे.. तो थोडा आगे बढकर अपने बदनके जलवे दीखादे.. वो तेरे पीछे पागल होजायेगे..
जयश्री : (सरमाकर हसते कानमे) हां जागु.. तुम उनको अकेलेमे मीलनेकी कोसीस तो कर.. वो कुछना कुछ जरुर करेगे.. साली ये अेकांत चीज ही अैसी हे.. मुजे भाइको मेरे उपर चडानेमे अेक दिनका वक्त भी नही लगा.. जब उनको पता चलाकी मे उनको प्यार करती हु..
तब प्यारका इजहार होते ही अेक घंटेके बाद उसने मेरा कौमार्य भंग कर दीया था.. ओर जबतक हमारे मम्मी पापा वापस नही आये.. तबतक उस अेक हप्ते तक हम दोनोने अपना हनीमुन ही मनाया.. पता नही इस अेक हप्तेमे भाइने मुजे कीतनी बार चोदलीया था.. तो तुम भी बंसीभाइको मीलनेकी कोसीस जारी रखो..
सादीके माहोलमे तीनो सहेलीया आपसमे धीरे धीरे हस हसके कामुक बाते करते अेक दुसरेकी मस्तीया कर रही थी.. तब अेक घंटेके बाद देवायत भी सहेरसे सबको लेकर वापस घरपे आगया था.. तो मंजु सृती पुनम चंदाके साथ देवायत भी सादीमे सामील हो गया.. उसे देखकर सामतभाइ भी बहुत खुस होगये.. इसी बीच नाच गानका प्रोग्रामभी हुआ.. तब देर साम दुसरे गांवके सरपंच ओर सदस्यो भी आये हुअे थे..
जब भोजनका समय हुआ तो सबलोग भोजनकी ओर जाने लगे.. तभी बसंती अेक चहेरेको देखकर चोंक गइ.. ओर अपना चहेरा सारीसे ढकते धीरेसे सरकते मुनाके पास चली गइ.. ओर उनके पास जाकर धीरेसे इसारा करते उन सख्सको मुनाको दीखाने लगी.. ओर दबी आवाजमे मुनासे बाते करने लगी..
जो उनका भाइ विनोद था.. तो मुना उनको गौरसे देखने लगा.. ओर बसंती मुनाको अपने मामाको दीखाकर वापस चली गइ.. तब मुना लखनसे अकेलेमे मीलकर बाते करते करते उस सरपंचके बारेमे सभी जानकारीया लेने लगा.. ओर इस बारेमे उसने लखनसे भी बात करली.. तो लखन भी मुस्कुराने लगा..
लखन : (मुस्कुराते) मुना.. क्या ये कमीना तेरा मामा हे..? अभी रहेने दो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. मे उस मीया बीवी दोनोको अच्छी तराह पहेचानता हु.. कमीना पास ही के गांवका सरपंच हे.. उनकी बीवी घरपे गांवके बच्चोको पढाती हे.. कमीनीकी मेरे साथ बहुत पटती हे.. वो बहुतही मस्त पटाका माल हे.. बस.. थोडीसी कोसीस करनी हे.. तो पट जायेगी.. उनकी कोइ ओलाद नही हे..
मुना : (धीरेसे हसते) हां भाइ.. आपकी सभी बाते सही हे.. इनके साथ आपको जोभी करना हो करना.. बस.. अेक बार उस कमीनीको मुजसे चुदवा देना.. मुजे मेरे मामासे बदला लेना हे.. कमीनेने मम्मीकी सादीसे पहेले उनका धोखेसे बहुत ही गलत फायदा उठाया हे.. कमीनीके की बीवीको ठोक ठोकके पेटसे कर दुगा..
लखन : (आस्चर्यसे) मुना.. क्या वो दोनो सचमे तुम्हारे सगे मामा मामी हे..? कभी तुमने बताया तो नही..?
मुना : (मुस्कुराते) हां भाइ.. मेने भी कमीनेको आज ही देखा.. भाइ.. हम इनके बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे.. कमीनेकी पुरी स्टोरी आपको सुनाउगा.. मम्मीने आजही मुजे सुनाइ हे..
लखन : (धीरेसे हसते) मुना.. मे इनके बारेमे सब कुछ जानता हु.. तुजे बादमे बताउगा.. पहेले ये बता.. क्या आंटीको मीला की नही..? वरना जा.. मीलले उसे यहा मे सब सम्हाल लुगा.. वैसे तुम दोनो सादी कब कर रहे हो..?
मुना : (सरमाते धीरेसे हसते) भाइ.. अभी बापु हे.. तो वो मुजसे सादी नही कर सकती.. हां.. आज मेने उनको दो बार मील लीया.. तो केह रही थी हम सादी करलेगे.. देखा नही.. तभी तो वो खुस हे.. हें..हें..हें.. भाइ.. आज हमारा श्रीधर भी उनकी मम्मीके पीछे कुछ ज्यादा ही लगा हुआ हे.. हें..हें..हें.. क्युकी मेरी मां ओर ब्रिन्दा आंटी सुबहसे साथ ही हे.. लगता हे दोनो अेक दुसरेके बारेमे सब कुछ जानती होगी.. मम्मीको पुछना पडेगा.. कही श्रीधर भी तो उनकी मम्मीको ठोककर नही आया..? हें..हें..हें..
लखन : (श्रीधरकी ओर देखते हसते) मुना.. तेरी बात सही हे.. उन दोनोका भी तेरी तराह हे.. चल वो सब हम बादमे देख लेगे.. अभी तो भोजन मे चल.. कुछ काम करते हे.. ओर भैया भी इधर ही हे.. वरना वो हमे डाटेगे.. फीर हम आरामसे बैठकर बाते करेगे..
अैसी ही हसी मजाक ओर मस्तीयाके साथ सबका भोजन हो गया.. तो सब लोग अपने अपने घरकी ओर जाने लगे.. तो आज बरखा ओर जयश्री भी अपनी सासके साथ घरकी ओर नीकल गइ.. देवायत भी सभी लेडीसको लेकर हवेलीकी ओर नीकल गया.. तो वंदना ओर रश्मी भी साथमे चली गइ.. तो घरके लोग भी सोनेकी तैयारीया करने लगे.. तब लखनके सभी दोस्त ही अेकठा होकर बैठे थे..
सुबल जल्दी सादीका मुहुर्त था.. तो सभी दोस्तोने बंसीको भी सोनेके लीये भेज दिया.. ओर आपसमे बैठकर बाते करने लगे.. तब आज सबको भोजनके वक्त बहुत कुछ नया जाननेको मीला की कीसका चकर कीसके साथ चल रहा हे.. तो सभी दोस्तो उनकी चर्चा करने लगे.. लेकीन अब बाते करते लखनका बार बार मन भटकने लगा था.. क्युकी पीछले तीन दिनसे वो खुद चुदाइसे वंचीत था..