Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 48 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

बरखा : (धीरेसे मुस्कुराते) हां जयश्री.. कल अगर ब्रीन्दा आंटीका कीसी ओरके साथ चकर हो गया.. तो क्या तुम दोनो मीया बीवीको अच्छा लगेगा..? ओर अकेली ओरतकी आग भी बहुत ज्यादा होती हे.. बाकी रही बात हमारे पतीकी.. तो मुनाने सबको ना जाने कोनसी जडी बुटी पीला दी हे..

की वो हमे बीस्तरमे आज भी चीखे नीकलवाते हे.. ओर हमे ठोक ठोकके थका देते हे.. कमीने दो बार ठोकनेसे पहेले हमे छोडते ही नही हे.. ओर फीर भी उनको करना होता हे.. कमसे कम हमारे पतीमे इतनी काबीलीयत ओर स्टेमीना तो हे ही.. की वो दो दो ओरतोको अ‍ेक साथ सम्हाल सकते हे..

जागुती : (मुस्कुराते धीरेसे) हां जयश्री.. बरखा की सभी बाते सही हे.. तुम भी अ‍ेक बार आंटीके बारेमे सोचले.. बाकी तेरी मरजी.. हम उनको केहतो नही सकते.. की आप अपने बेटेके साथ रीलेशन रखलो..

जयश्री : (कुछ सोचते सरमाकर मुस्कुराते) हां यार.. बात तो तुम दोनोकी सही हे.. लेकीन उनको मेरे ससुरसे अलग तो होने दो.. ओर मे भाइको कैसे कहु..? की आप अपनी मम्मीको पटालो.. देखते हे आगे क्या होता हे.. बाकी बादमे देखा जायेगा.. अगर वो मां बेटे खुद आगे बढे तो अब मे कोइ अ‍ेतराज नही करुगी.. दोनोको आगे बढने दुगी.. बस..? जागु.. छोड ये सब.. ये सब बाते हम बादमे करेगे.. अभी ये बता तुमसे क्या सोचा हे..? बंसी भैयाको मीलोगी की नही..? देख अभी भी तेरी ओर देख रहे हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) नही यार.. उनकी खुद की सादी हे.. तो महेमानोकी वजहसे नही मील सकती.. फीर भी देखती हु.. अगर हमे आज मीलनेका मौका मीला तो मील लेगे.. वरना सादीके बाद तो वो मेरे ही हे.. बस..? अब तो खुस..? हें..हें..हें..

जयश्री : (जोरोसे हसते धीरेसे कानमे) कमीनी खुस मुजे नही तुजे होना हे.. तु उसे अकेली मीलेगी तो वो तुजे ठोकेगा मुजे नही.. समजी..? हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होकर उतेजनासे कानमे धीरेसे) तो कमीनी तुम भी इनसे ठुकवाले.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें.. जयश्री.. जबसे लखनको छोड दिया तबसे मुजे भी बहुत इच्छा हो रही हे.. ओर भाइ भी अभी इतनी हिंमत नही कर रहे.. तो मे उनको सामनेसे कैसे कहु..? की मुजे चोदलो..

जयश्री : (मुस्कुराते कानमे) हां जागु.. मुजे भी आज भी भाइसे मीलनेका बहुत मन करता हे..

बरखा : (हसते धीरेसे) कमीनी तु इतनी मस्त तैयार हुइ हे.. अ‍ैसा लगता हे सांती दीदीकी सादी नही तेरी हे.. ओर तु खुबसुरत हे.. तो थोडा आगे बढकर अपने बदनके जलवे दीखादे.. वो तेरे पीछे पागल होजायेगे..

जयश्री : (सरमाकर हसते कानमे) हां जागु.. तुम उनको अकेलेमे मीलनेकी कोसीस तो कर.. वो कुछना कुछ जरुर करेगे.. साली ये अ‍ेकांत चीज ही अ‍ैसी हे.. मुजे भाइको मेरे उपर चडानेमे अ‍ेक दिनका वक्त भी नही लगा.. जब उनको पता चलाकी मे उनको प्यार करती हु..

तब प्यारका इजहार होते ही अ‍ेक घंटेके बाद उसने मेरा कौमार्य भंग कर दीया था.. ओर जबतक हमारे मम्मी पापा वापस नही आये.. तबतक उस अ‍ेक हप्ते तक हम दोनोने अपना हनीमुन ही मनाया.. पता नही इस अ‍ेक हप्तेमे भाइने मुजे कीतनी बार चोदलीया था.. तो तुम भी बंसीभाइको मीलनेकी कोसीस जारी रखो..

सादीके माहोलमे तीनो सहेलीया आपसमे धीरे धीरे हस हसके कामुक बाते करते अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया कर रही थी.. तब अ‍ेक घंटेके बाद देवायत भी सहेरसे सबको लेकर वापस घरपे आगया था.. तो मंजु सृती पुनम चंदाके साथ देवायत भी सादीमे सामील हो गया.. उसे देखकर सामतभाइ भी बहुत खुस होगये.. इसी बीच नाच गानका प्रोग्रामभी हुआ.. तब देर साम दुसरे गांवके सरपंच ओर सदस्यो भी आये हुअ‍े थे..

जब भोजनका समय हुआ तो सबलोग भोजनकी ओर जाने लगे.. तभी बसंती अ‍ेक चहेरेको देखकर चोंक गइ.. ओर अपना चहेरा सारीसे ढकते धीरेसे सरकते मुनाके पास चली गइ.. ओर उनके पास जाकर धीरेसे इसारा करते उन सख्सको मुनाको दीखाने लगी.. ओर दबी आवाजमे मुनासे बाते करने लगी..

जो उनका भाइ विनोद था.. तो मुना उनको गौरसे देखने लगा.. ओर बसंती मुनाको अपने मामाको दीखाकर वापस चली गइ.. तब मुना लखनसे अकेलेमे मीलकर बाते करते करते उस सरपंचके बारेमे सभी जानकारीया लेने लगा.. ओर इस बारेमे उसने लखनसे भी बात करली.. तो लखन भी मुस्कुराने लगा..

लखन : (मुस्कुराते) मुना.. क्या ये कमीना तेरा मामा हे..? अभी रहेने दो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. मे उस मीया बीवी दोनोको अच्छी तराह पहेचानता हु.. कमीना पास ही के गांवका सरपंच हे.. उनकी बीवी घरपे गांवके बच्चोको पढाती हे.. कमीनीकी मेरे साथ बहुत पटती हे.. वो बहुतही मस्त पटाका माल हे.. बस.. थोडीसी कोसीस करनी हे.. तो पट जायेगी.. उनकी कोइ ओलाद नही हे..

मुना : (धीरेसे हसते) हां भाइ.. आपकी सभी बाते सही हे.. इनके साथ आपको जोभी करना हो करना.. बस.. अ‍ेक बार उस कमीनीको मुजसे चुदवा देना.. मुजे मेरे मामासे बदला लेना हे.. कमीनेने मम्मीकी सादीसे पहेले उनका धोखेसे बहुत ही गलत फायदा उठाया हे.. कमीनीके की बीवीको ठोक ठोकके पेटसे कर दुगा..

लखन : (आस्चर्यसे) मुना.. क्या वो दोनो सचमे तुम्हारे सगे मामा मामी हे..? कभी तुमने बताया तो नही..?

मुना : (मुस्कुराते) हां भाइ.. मेने भी कमीनेको आज ही देखा.. भाइ.. हम इनके बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे.. कमीनेकी पुरी स्टोरी आपको सुनाउगा.. मम्मीने आजही मुजे सुनाइ हे..

लखन : (धीरेसे हसते) मुना.. मे इनके बारेमे सब कुछ जानता हु.. तुजे बादमे बताउगा.. पहेले ये बता.. क्या आंटीको मीला की नही..? वरना जा.. मीलले उसे यहा मे सब सम्हाल लुगा.. वैसे तुम दोनो सादी कब कर रहे हो..?

मुना : (सरमाते धीरेसे हसते) भाइ.. अभी बापु हे.. तो वो मुजसे सादी नही कर सकती.. हां.. आज मेने उनको दो बार मील लीया.. तो केह रही थी हम सादी करलेगे.. देखा नही.. तभी तो वो खुस हे.. हें..हें..हें.. भाइ.. आज हमारा श्रीधर भी उनकी मम्मीके पीछे कुछ ज्यादा ही लगा हुआ हे.. हें..हें..हें.. क्युकी मेरी मां ओर ब्रिन्दा आंटी सुबहसे साथ ही हे.. लगता हे दोनो अ‍ेक दुसरेके बारेमे सब कुछ जानती होगी.. मम्मीको पुछना पडेगा.. कही श्रीधर भी तो उनकी मम्मीको ठोककर नही आया..? हें..हें..हें..

लखन : (श्रीधरकी ओर देखते हसते) मुना.. तेरी बात सही हे.. उन दोनोका भी तेरी तराह हे.. चल वो सब हम बादमे देख लेगे.. अभी तो भोजन मे चल.. कुछ काम करते हे.. ओर भैया भी इधर ही हे.. वरना वो हमे डाटेगे.. फीर हम आरामसे बैठकर बाते करेगे..

अ‍ैसी ही हसी मजाक ओर मस्तीयाके साथ सबका भोजन हो गया.. तो सब लोग अपने अपने घरकी ओर जाने लगे.. तो आज बरखा ओर जयश्री भी अपनी सासके साथ घरकी ओर नीकल गइ.. देवायत भी सभी लेडीसको लेकर हवेलीकी ओर नीकल गया.. तो वंदना ओर रश्मी भी साथमे चली गइ.. तो घरके लोग भी सोनेकी तैयारीया करने लगे.. तब लखनके सभी दोस्त ही अ‍ेकठा होकर बैठे थे..

सुबल जल्दी सादीका मुहुर्त था.. तो सभी दोस्तोने बंसीको भी सोनेके लीये भेज दिया.. ओर आपसमे बैठकर बाते करने लगे.. तब आज सबको भोजनके वक्त बहुत कुछ नया जाननेको मीला की कीसका चकर कीसके साथ चल रहा हे.. तो सभी दोस्तो उनकी चर्चा करने लगे.. लेकीन अब बाते करते लखनका बार बार मन भटकने लगा था.. क्युकी पीछले तीन दिनसे वो खुद चुदाइसे वंचीत था..
 
इस बारेमे उसने पुनमसे बात करनेका तैय भी करलीया था.. लेकीन उनको अकेलेमे मीलनेका मौका नही मीला था.. ओर उसने अभी घर जाते समय पुनमसे बात करनेका तैय करलीया.. तभी पुनमके बारेमे सोचते ही लखनका लंड अंगडाइ लेने लगा.. ओर तनके सख्त होने लगा.. तो लखन मन ही मन मुस्कुराते खुस होने लगा.. क्युकी वो आज भी पुनमको इतना ही चाहता था..

ओर पीछले तीन चार दिनोसे पुनमके साथ फ्लर्ट करते काफी खुल चुका था.. तो पुनम भी उनको थोडा रीस्पोन्स दे रही हे.. यही समजते लखनको अ‍ेक बार फीर पुनमको पानेकी चाहत बढने लगी.. उनको फीरसे अ‍ेक आसाकी कीरण नजर आने लगी.. वो कीसी भी तराह अ‍ेक बार पुनमको हासील करना चाहता था.. बस.. यही सब सोचते पुनमकी याद आते ही उनका लंड अंगडाइ लेने लगा..

कल सुबह बंसीकी सादी हे तो सुबह सबको जल्दी आना हे.. तो अभी सब लोग आराम करलो.. कहेकर लखन खडा हो गया.. ओर सबको अपने अपने घर भेजदीया.. ताकी वो अभी जाकर पुनमसे मील सके.. तो दुसरी ओर आज ब्रीन्दा ओर बसंती भी अपने अपने बेटेके साथ सुबह ओर दो पहोरको दो दो बार चुदाइके कारण थकके चकना चुर होगइ थी.. तो वोभी घर जाते ही सो गइ..

तो सांती ओर जागृती अपने रुममे चुडीयोका बोक्ष लेकर बैठी थी.. ओर कल सादीकी तैयारीया करते आपसमे धीरे धीरे बाते कर रही थी.. जागृतीका मन सांतीसे बाते करते भी बंसीकी ओर भटक रहा था.. आज बंसीने उसे कइ बार इसारोसे उपर छतमे मीलनेके लीये कहा था.. तो जागृती भी बंसीको अकेलेमे मीलनेके लीये तडप रही थी.. लेकीन सांतीने जागृतीको बातो ओर काममे फसाके रखा था.. तो बंसी भी मन मारके सो गया..

तो दुसरी ओर लखन भी घरपे आगया.. तो मंजु नीर्मला भुमीका भावना ओर पुनम होलमे बैठकर बाते कर रही थी.. सरला चाची अपने रुममे जाकर सो गइ थी.. तो उपरकी मंजीलपे लखनके रुममे लता ओर रमा बैठकर सहेरमे रहेने जानेकी प्लानींगकी बाते कर रही थी.. वहा नीलम दोनोकी बाते गौरसे सुन रही थी.. तो रजीया दया ओर चंपा भाभी भी सभी काम नीपटाकर अपने रुममे सोनेके लीये चली गइ थी..

आज चंदाकी दो पहोरको जबरदस्त चुदाइ हो गइ थी.. उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग अभी भी दर्द कर रहा था.. तो वो भी सादीमेसे आते ही सो गइ थी.. तब रुममे सृती देवायतके नीचे पुरी तराह नंगी होकर अपनी चुतमे देवायतका तगडा लंड घुसाकर लेटी थी.. ओर देवायत हाथके बल उनकी धमासान चुदाइ कर रहा था.. तो सृती पुरी तराह मदहोसीमे नसेकी हालतमे देवायतसे कमर उछाल उछालके चुदाइ करवानेमे साथ दे रही थी.. तभी बहार लखन आकर सबके साथ बैठ जाता हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. क्या वहा सब काम हो गया..? सो गये सब..?

लखन : (मुस्कुराते) हां आंटी.. सुबह सादीका जल्दी मुहुर्त हे.. तो सब काम नीपटाकर सबको सुलाके आगया.. हें..हें..हें..

मंजुला : (लखनका सर सहेलाते) मेरा बेटा.. बहुत काम करता हे.. तो थक गया होगा.. जा बेटा अब तु भी आराम करले.. पुरा दिन दोडधाम की होगी.. सादीका काम करना इतना आसान थोडीना हे..

लखन : (मुस्कुराते मंजुकी गोदमे सर रखते) भाभीमां.. क्या हुआ..? ये लोग जीजुके लीये मकान देखने गये थे.. क्या सबको पसंद आया..? खास करके पुनो दीदीको..

भुमीका : (हसते) हां लखन बेटा सबको पसंद भी आया ओर उनको टोकन भी देदीया.. अ‍ेक दो दिनमे लोन भी होजायेगी.. तो दस्तावेज भी होजायेगा.. धिरेनने वो मकान लेलीया हे.. बीलकुल छोटे बंगले जैसा दीखता हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) लखन बेटा.. क्या तुम मंजुको भाभी भी कहेते हो ओर मां भी कहेते हो..?

लखन : (मुस्कुराते) हां आंटी.. अ‍ेक भाभी ही तो थी.. जो हम दोनो छोटे थे.. तो इसीने मुजे ओर दीदीको सम्हाला हे.. बस.. सीर्फ यही मेरी मां हे.. बाकी सब मेरी भाभीया हे.. हें..हें..हें.. ओर कहा गइ वो डोक्टरनी साहीबा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सर सहेलाते) वो आज बहुत थक गइ होगी.. तो सो गइ हे.. हें..हें..हें.. चल.. जा.. अब तुम भी जाकर सोजा.. सुबह हम सबको सादीमे जल्दी जाना होगा..

तब पुनम ओर भावना बार बार लखनके पेन्टके उभारको देखते हस रही थी.. तो लखनका लंड पुनमको देखते ही पेन्टके अंदर जटके मार रहा था.. तभी भावना पुनमकी ओर देखकर सरमाके मुस्कराने लगी.. तभी लखन भी पुनमकी ओर देखने लगा.. जैसेही लखन ओर पुनमकी आंखे मीली.. तो पुनम लखनकी ओर देखते सरमा गइ.. क्युकी लखनने उनको आंख मारके फोन करनेका इसारा कीया..

vekkam-shruti-haasan.gif


ओर पुनम सबकी ओर देखकर सबकी नजर बचाते धीरेसे हां मे गरदन हीलाते अपना मुह दुसरी ओर करते मुस्कुराने लगी.. पुनमको इस तराह सबसे छुपकर हां कहेते ओर लखनकी हरकतसे सर्मीन्दगी महेसुस होने लगी.. पता नही क्यु.. लेकीन आनजाने मे ही सही.. पुनमको लखनकी सभी हरकते अच्छी लगने लगी थी.. ओर उनकी तरफ कुछ ज्यादा ही जुकने लगी थी.. तभी पुनमने अ‍ेक बार फीर टेडी नजर करते लखनके पेन्टका उभार देख लीया.. तो उसे लखनका लंड बहुत बडा होते जटके मार रहा था..

तब पुनम की चुत अ‍ेक बार फीर गीली होने लगी.. तो वो बहुत ही सरमाने लगी.. तभी पुनमने खडी होते भावनाको रुममे चलनेका इसारा कीया.. तो भावना ओर पुनम खडी होकर पुनमके रुममे चली गइ.. फीर कुछ देरके बाद लखन भी उपर सोने जाने लगा.. तो मंजु लखनकी तकलीफ समज गइ थी.. तभी सब लोग सोने के लीये खडे हो गये.. तब मंजु लखनके साथ चलने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीका अपने रुममे जाने लगी.. तभी मंजुने लखनको सीडीयोके पास ही रोकलीया.. तो लखन सीडीपे ही रुक गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९३

तब पुनम की चुत अ‍ेक बार फीर गीली होने लगी.. तो वो बहुत ही सरमाने लगी.. तभी पुनमने खडी होते भावनाको रुममे चलनेका इसारा कीया.. तो भावना ओर पुनम खडी होकर पुनमके रुममे चली गइ.. फीर कुछ देरके बाद लखन भी उपर सोने जाने लगा.. तो मंजु लखनकी तकलीफ समज गइ थी.. तभी सब लोग सोने के लीये खडे हो गये.. तब मंजु लखनके साथ चलने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीका अपने रुममे जाने लगी.. तभी मंजुने लखनको सीडीयोके पास ही रोकलीया.. तो लखन सीडीपे ही रुक गया....अब आगे

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभीमां.. कहीये.. क्या कुछ काम था..?

मंजुला : (मुस्कुराते पास आकर) हां.. बीटु.. मुजे पता हे अभी तुजे क्या प्रोबलेम हे.. वो जडी बुटीसे तुजे कोइ तकलीफ तो नही हुइ..? हंम..?

लखन : (थोडा सरमाते मुस्कुराते) जी.. नही.. भाभीमां.. वो.. वो.. अब सब ठीक हे.. कोइ तकलीफ नही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. मे जानती हु तुम पुनोसे क्या पुछना चाहते हो.. अगर सब ठीक होगया हे.. तो तुम अपनी लाइफ पहेलेकी तराह नोर्मल जी सकते हो.. अब कीसीको कुछ पुछनेकी जरुरत नही हे.. ओके..?

लखन : (सरमाकर हसने लगा) जी.. जी भाभीमां.. मोम.. आइ लव यु.. बस.. अ‍ेक आप ही मेरी मां हो.. जो मेरी सब तकलीफ बीना बताये समज जाती हो.. थेन्क्स मोम..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. बीटु.. लव यु टु.. मे तेरी मां ही हु.. अगर कोइ परेसानी होतो मुजे कहेना.. जा अब सोजा.. अ‍ेक बार सादी नीपटजाने दे.. फीर मुजे तुमसे भी बुछ बाते कहेनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां अभी केहीयेनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. अभी नही.. जब आप सहेर जाओगे इनसे पहेले मे आपको बता दुगी.. अभी जाकर सोजाओ.. बहुत रात हो चुकी हे..

लखन : (मुस्कुराते जाते) नी भाभीमां.. गुड नाइट..

मंजुला : (जाते) हंम.. गुड नाइट..

कहातो लखन बहुत खुस होते हसते हुअ‍े उपर चला गया.. तो मंजु उसे खुस होते देखकर हसने लगी.. ओर अपने रुममे चली गइ.. तब देवायत सृतीकी दुसरी बार धमाकेदार चुदाइ कर रहा था.. तो सृतीकी हालत पतली होगइ थी.. मंजु दोनोकी ओर देखते हसने लगी.. तो सृतीकी हसी भी नीकल गइ.. ओर हाथके इसारोसे मंजुको भी अपने पास बुलाने लगी.. तो मंजु अपने सब कपडे नीकालने लगी.. ओर हसते हुअ‍े नां मे गरदन हीलाते नंगी होकर नीचे गदा बीछाकर देवायतका इन्तजार करने लगी.. तभी..

सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे मंजु आनां.. देख जालीम कीतना जोसमे करते हे.. मुजपे कोइ रहेम भी नही करते.. लेकीन आता हे बहुत मजा.. अ‍ैसा लगता हे मे स्वर्गमे हु.. ओर इनसे चुदवाती ही रहु..

मंजुला : (मुस्कुराते) कमीनी अभी तो तुही चुदवाले.. फीर तु सहेर चली जायेगी.. तो फीर पता नही देवु कब वापस तेरे हाथ आयेगा.. इसीलीये ये दो दीनमे जीतना चुदवाना हे चुदवाले..

सृती : (मुस्कुराते होठ चुमते) जानु.. यहासे जानेका मन नही कर रहा.. क्या मे कुछ दिन ओर नही रुक सकती..?

देवायत : (बुब्सको चुमते) हां रुक सकती हे.. रुकजा.. सबलोग चले जायेगे तब सीर्फ तुम ओर मंजु ही होगी.. तुम दोनोको खुब रगड रगडके चोदुगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जुठ मुठका गुस्सा करते) क्या रगड रगडके चोदुगा..? वहा क्लीनीकपे कौन जायेगी.. मेरी मां..? कमीनी जब यहा होस्पीटल होजायेगी तब हमेसाके लीये आजाना इधर.. तुजे कोइ मना नही करेगा..

सृती : (थोडासा सेड मुह करते) सोरी जानु.. मंजुदीदीकी बात भी सही हे.. मुजे जाना होगा.. हें..हें..हें..

इस रात देवायतने दो बार चुदाइ करके सृतीको बाथरुममे भी खडे खडे चोदलीया.. तो सृतीकी हालत पतली होगइ.. तो सृती बीस्तमे गीरते ही नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब मंजु हसने लगी.. ओर देवायत मंजुके पास जाकर सो गया.. तब कुछही देरमे देवायत मंजुकी चुतमे पुरा लंड डाल चुका था ओर मंजुको हाथके बल उचा होकर चोद रहा था.. मंजुको दो बार जडाकर उनकी चुतमे खलास हो गया..

दोनोने अ‍ेक बार चुदाइ करली.. तब मंजुने देवायतको नीचे पीठके बल सुला दीया.. ओर उसने देवायतकी कमरपे बैठकर उनका पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया.. तो देवायत भी मदहोस होकर दुसरी दुनीयामे खो गया.. तब मंजु देवायतके साथ संभोग करते अपनी साधनामे लीन होगइ.. तो दुसरी ओर लखनके साथ मंजुने सब बाते करली थी.. फीर भी लखनको आज पुनमसे बात करनेका बहुत मन होने लगा..

लखन आज भी पुनमको पानेकी चाहत रखता था.. लखनके मनमे पुनमकी छबी इतनी हसीन ओर कामुक थी.. की पुनमके बारेमे सोचते ही लखनका लंड अ‍ेक बार फीर जटके मारते खडा होने लगा.. क्युकी उनको पुनम कामदेवकी मुरत लग रही थी.. तो उपरकी ओर जैसे ही लखन आया तो रमा नीलम ओर लता आपसमे हस हसके बाते करनेमे मसगुल थी.. तो तीनोकी नजर बचाते लखन सीधा ही तीसरी मंजीलपे हवेलीकी छतपे चला गया..

ओर अपना फोन नीकालकर पुनमको फोनपे मीस्ड कोल देने लगा.. तो दुसरी ओर पुनम ओर भावना जैसे ही रुममे आइ पुनमने रुमको लोक कर दीया.. ओर हल्कीसी रोसनी करते रुमकी सभी लाइटे बंध करदी.. तब भावना पुनमकी ओर देखते हसने लगी.. ओर उनकी बच्चीको लेकर बेडपे बैठ गइ.. फीर अपना ब्लाउस उचा करते बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तब पुनम भी सरमाते उनके पास आकर बैठ गइ..

तभी कुछ ही देरके बाद उनका फोन वाइब्रन्ट होने लगा.. तो पुनमने टेडी नजर करते फोनमे देख लीया.. तो लखनका नाम देखते ही वो सरमाने लगी.. क्युकी अ‍ैसा पहेले कभी नही होता था.. जब भी लखनका फोन आता दोनो बीन्दास्त घंटो तक बाते करते.. लेकीन जैसे ही उनको पता चला की लखन भी उनको चाहता हे.. तबसे लखनके प्रती पुनमका नजरीया ही बदल गया था..

आजकल वो ना चाहते हुअ‍े भी लखनकी ओर ढलती जा रही थी.. अब वो देवायतकी तराह लखनको भी अपने प्रेमीके रुपमे देखने लगी थी.. लेकीन फीर भी लखनको स्वीकार करने उनका मन नही मान रहा था.. लेकीन पुनमका दिल ओर अपना तन पुरी तराह लखनको स्वीकार कर चुका था.. अ‍ैसा दो तीन बार फोन वाइब्रेट हुआ.. तो पुनम बेडसे खडी होगइ तो भावना भी पुनमकी ओर देखने लगी..

भावना : (हसते धीरेसे) पुनोदी.. क्या हुआ..? कीसका फोन आ रहा हे..? जो अ‍ैसे अचानक खडी होगइ.. कुछ हुआ क्या..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अब आपसे क्या कहु..? वो.. वो.. हमारा देवर.. बहार मुजे सबसे छुपकर फोन करनेका इसारा कर रहे थे.. मुजे तो बहुत सरम आइ.. अगर कीसीने देखलीया होता तो..? पता नही उनको क्या काम होगा.. अभी वो बार बार मुजे मीस कोल कर रहे हे..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) क्या लखन भैया..? तो इनमे सरमानेकी क्या बात हे..? उनको जरुर कुछ जरुरी काम होगा.. आप उसे फोन करके बात तो कर लीजीये.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) नही भाभी.. जबसे उनको पता चला हेकी मे उनकी भाभी हु.. तबसे वो मेरी कुछ ज्यादा ही मस्तीया करने लगे हे.. ओर बडी बात.. अब तो वो सृतीभाभी ओर मेरे साथ फ्लर्ट भी करने लगे हे.. ओर अभी बहार उसने सबसे छुपकर इसारोसे फोन करनेको कहा हे.. पता नही उनको क्या काम होगा.. अ‍ैसे आधी रात बात करगे तो सरम नही आयेगी..?

भावना : (मुस्कुराते) अरे उनको जरुर कोइ खास काम होगा.. तभी तो फोन करनेको कहा होगा.. जाइअ‍े बाथरुममे जाकर उनसे आरामसे बात कर लीजीये.. हें..हें..हें.. दीदी.. हमारा देवर आदमी बहुत मस्त हे.. हें..हें..हें.. मेरी ननंद बहुत नसीब वाली हे.. जो उसे लखन भैया जैसा पती मीला.. जाइअ‍े.. बात करलीजीये उनसे..

तभी वापस लखनका फोन आने लगा.. तो पुनम टेढी नजर करके फोनमे देखने लगी.. तो लखन का नाम देखते ही सरमाकर मुस्कुराने लगी.. पुनमने सरमाते भावनाको फोनकी डीस्पले दीखाइ.. तो भावना भी देखते हसने लगी.. ओर पुनमको इसारोसे फोनपे बात करलेनेको कहा.. तो पुनम बहुत ही सर्मसार हो गइ.. तब भावनाने उसे आंखोकी सरारत करते बाथरुमकी ओर धकेल दीया.. तो पुनम मुस्कुराते फोन लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर उसने अंदर जाते ही लखनका फोन उठा लीया.. तभी..
 
पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां लखन भैया.. आपने फोन करनेको क्यु कहा..? बहार सबके होते हुअ‍े भी क्या हरकत की आपने..? ओर फोन करनेका इसारा कर रहे थे.. अगर कीसीने देखलीया होता तो..?

लखन : (धीरेसे मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. कीसीने नही देखा.. सुनो.. अभी देखोना कही आस पासमे भावना भाभी तो नही..? मुजे आपसे बहुत जरुरी बात करनी हे..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) नही.. मे बाथरुममे अकेली हु.. देवरजी आप बहुत ही कमीने हो.. अ‍ैसे आधी रात कोइ मीस कोल करता हे..? अगर कीसीको पता चल गया तो क्या सोचेगा..? (जुठ बोलते) अच्छा हुआ भावना भाभी सो गइ हे.. वरना वो क्या सोचती..? कहीये.. फोन करनेके लीये क्यु इसारा कीया था..? अगर वहा भी कीसीने देखलीया होता तो हमारी फजीहत हो जाती..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. आप बहुत ही डरपोक हो.. मुजे आपसे कुछ बात करनी थी.. इसीलीये तो फोन करनेको कहा.. भाभी.. आज आप बहुत मस्त लग रही थी.. पता नही उस कमीने धिरेनमे आपने क्या देखलीया..

पुनम : देवरजी प्लीज.. मत करो अ‍ैसी बाते.. अब गडे मुर्दे उखाडनेका कोइ फायदा नही.. जो होना था हो चुका.. मुजे तो सीर्फ दुनीयाको दीखानेके लीये उनके साथ सादी करनी पडी.. वरना तो आपको भी पता हे मे बडे भाइसे प्यार करती हु.. ओर असलमे आज भी उनकी बीवी हु..

लखन : (हींमत करते) भाभी.. माना की आप बडे भाइको प्यार करती थी.. तो फीर क्या मेरी सकल इतनी बुरी थी..? क्या कमी थी मुजमे..? धिरेनके बदले आप मुजसे सादी करलेती.. मे भीतो आपसे प्यार कता था.. करलेती मुजसे भी सादी.. मेरा यकीन मानो.. मे धिरेनसे ज्यादा आपको प्यार देता.. वैसे भी हमारे खानदानमे तो सब दो दो तीन तीन सादीया करते ही हे..

पुनम : (सरमाते भीरेसे) देवरजी.. आप समजते क्यु नही..? अभी धिरेनको मेरे प्यारके बारेमे नही पता.. ओर आपतो हमारे बारेमे सबकुछ जानते हो.. मानाकी आप मुजसे प्यार करते थे.. तो फीर मुजे बतानेकी हिंमत भी तो नही की.. ओर वैसे भी इस घरके मर्द दो दो तीन तीन सादीया करते हे हम ओरते नही.. समजे..? ओर आपसे सादी करके मे भाइके साथ रीलेशन रखती तो क्या आपको अच्छा लगता..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. तो क्या हुआ..? पुराने जमानेमें भी अ‍ैसा हो चुका हे.. अ‍ेक ओरतके तो पांच पांच पती थे.. तो क्या आपके दो पती नही हो सकते..? मुजे भाइके साथ आपके रीलेशनसे कोइ बुरा नही लगता.. क्युकी वो भी तो हमारे भाइ हे..

पुनम : (बहुत ही सरमाते धीरेसे) देवरजी आप बीलकुल पागल होगये हो.. अगर आपको कोइ अ‍ेतराज नही था तो तब ही आपको मुजसे अपने प्यारका इजहार कर देना चाहीये था.. जब बडे भैया धिरेनका प्रस्ताव लेकर आये थे.. हमारे बीच तब भी कोइ पर्दा तो नही था..? हमने इस बारेमे कइ तराहकी काफी खुलकर चर्चा भी की हे.. तो आप तबही मुजे बता देते.. मे नही करती धिरेनसे सादी.. करलेती आपसे.. अब भुलजाइअ‍े सब पुरानी बाते.. कहीये ओर कुछ काम था..? वरना फोन रख देती हु..

15.gif


लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) अरे.. आपतो नाराज होगइ.. भाभी.. अगर आपको मेरी बातोसे बुरा लगातो.. सोरी.. अब मे इस बारेमे कभी आपसे बात नही करुगा.. मैने तो इसीलीये फोन कीया था.. क्युकी आपसे कुछ पुछना था..

पुनम : (धीरेसे) देवरजी.. प्लीज.. मे कोइ नाराज नही हुइ.. ओर मुजे कोइ बुरा नही लगा.. क्या मे आपका कभी बुरा मान सकती हु..? मुजे अफसोस हे.. की मे आपकी तम्मना पुरी नही करपाइ.. कहीये ओर क्या पुछना था..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. थेन्क्स.. क्या हेना थोडी इमरजन्सी थी.. तो फोन करना जरुरी लगा.. इसीलीये फोन करनेको कहा था.. क्युकी अ‍ैसी बात सबके सामने नही पुछी जाती..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) कैसी बाते..? इतनी सारी बाते तो करली.. अब ओर पुछनेमे क्या हर्ज हे..? कहीये क्या पुछना था..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अब आपसे कैसे कहु..? ओर आपसे बात करनेके अलावा मेरे पास दुसरा रास्ता भी नही हे.. क्युकी जडी बुटी भी आपने दी हे.. ओर इस बारेमे लतासे बात करनेको भी आपने मना कीया हे.. वरना वो ही आपको सब पुछ लेती..

पुनम : (सरमाते हसते) हंम.. लखन भैया.. अगर आप इस बारेमे लता भाभीको बताना चाहोतो अब बता सकते हो.. लेकीन याद रखना ये जडी बुटी हमने आपको कीस मक्सदसे ओर क्यु दी हे.. उनके बारेमे उनको नही बताना.. वो सब मे हेन्डल कर लुगी.. कहीये आपको क्या प्रोबलेम हे..?

लखन : (धीरेसे हसते) भाभी.. क्या हेना आपने जडी बुटी दी हे उनको तीन दिन होगये.. तो क्या अब मे.. आइ मीन.. अब कैसे कहु..? भाभी.. मतलब क्या अब मे लताको मील सकता हु..? भाभी.. बहुत मन कर रहा हे.. आप समज गइनां..?

पुनम : (बहुत ही सर्मसार होते धीरेसे) क्या..? देवरजी आप बहुत ही कमीने हो.. अ‍ैसी बाते भाभीसे पुछी जाती हे..? अरे बहुत मन कर रहा हे तो मेने तो सीर्फ दो दिनके लीये ही मना कीया था.. तो फीर क्यु पुछ रहे हो..? हां.. अगर आपको कोइ तकलीफ नही हे तो अब मील सकते हो.. कमीने कहीके.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. अगर भाभीसे नही पुछुगा तो कीसको पुछुगा..? पत्नीके बाद अ‍ेक भाभी ही होती हे.. जो देवरके करीब होती हे.. लेकीन आपतो मेरी पत्नीसे भी ज्यादा करीब हे.. भाभी.. आपको जीतनी गालीया देनी हे बादमे दे दीजीयेगा.. पहेले मेरी बात ध्यानसे सुनीये..? फीर मुजे कहेना..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. कहीये..? आपको बाते बनाना अच्छी तराह आता हे.. क्युकी आप मानने वाले तो हो नही.. स्कुलमे थे तब भी आप मेरे साथ अ‍ैसी बाते करते थे.. ओर पत्नीसे भी करीब मानते हे.. तो कभी प्यार जतानेकी हिंमत तो कर नही पाये.. अब कहीये भी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. प्लीज.. आप ताने मत मारो.. तब मुजे ये नही पता थाकी हमारे खानदानमे बहेनसे भी सादी कर सकते हे.. वरना मेतो तबही आपसे अपने प्यारका इजहार कर चुका होता.. ओर आज आप धिरेनके बाजाये मेरी बीवी होती.. खैर जाने दीजीये ये सब बाते.. वरना आपको वापस बुरा लगेगा..
 
पुनम : (आंख गीली करते) देवरजी.. सोरी.. मे कुछ ज्यादा ही बोल गइ.. सच कहु..? अब इस बातका मुजे भी अफसोस हो रहा हे.. की मे आपका सपना पुरा नही करपाइ.. कास.. अगर उस वक्त आपने थोडीसी हिंमत करली होती.. तो मे धिरेनके बजाये आपको पसंद करती.. क्युकी कुछ मेरी पर्सनल बाते अ‍ैसी हे जो मे आपके साथ सैर भी नही कर सकती..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आपको कुछ कहेनेकी जरुरत नही.. धिरेनके बारेमे कुजे सबकुछ पता हे.. खैर अब इस बातका कोइ मतलब नही.. कहेते हेनां.. उमीदपे ही दुजीया कायम रहेती हे.. अगर कीस्मतको मंजुर होगा तो हम इस जन्ममे जरुर मीलेगे.. वरना अगले जन्ममे आपको मुजसे कोइ छीन नही सकेगा.. तब आप मेरी बीवी होगी.. देखलेना..

पुनम : (आंख पोछते मुस्कुराते) लखन भैया.. आइ होप.. की आपका सभी सपना पुरा होजाये.. तो सबसे ज्यादा खुसी मुजे होगी.. खैर.. कहीये.. ओर कुछ काम था..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. आप अ‍ेक बार लतासे बात कर लीजीयेनां.. वो आपसे इस बारेमे बात करना चाहती हे.. क्या हेना.. लता मेरा पेनीस देखकर बहुत ही डर गइ हे.. मुजे मीलनेके लीये मना कर रही हे.. कहेती थी मे इस बारेमे पहेले पुनोदीदीसे या सृती भाभीसे बात करलु.. फीर कुछ सोचुगी.. भाभी.. अब उसे आप ही समजाइअ‍ेनां.. मेने इसीलीये आपको फोन कीया हे..

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. इसमे डरनेकी क्या बात हे..? बीवी हे आपकी.. आप उसे प्यारसे समजाइअ‍ेनां.. मे उसे कैसे कहु..? की आप लखन भैयाको चोद.. आइ मीन मीलने दो..

लखन : (मुस्कुराते) हें..हें..हें.. भाभी.. खुलकर बोलीयेनां.. हमने तो अ‍ैसी बहुत चर्चा की हे.. आपके साथ अ‍ैसी बात करनेके बहुत मजा आता हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन भैया.. आप बहुत कमीने हो.. हमने अ‍ैसी बाते कब कीथी..? मुजे पता हे आप जान बुजकर मेरे साथ अ‍ैसी बाते कर रहे हो.. लगता हे आप बीलकुल पागल होगये हो.. अब मे आपके बडे भाइकी बीवी हु.. आपको मेरे साथ अब अ‍ैसी बाते नही करनी चाहीये.. आप लता भाभीको प्यारसे समजाइअ‍ेनां.. वो करने देगी..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने सुबह उनको बहुत समजाया था.. कहेती हे इस बारेमे अ‍ेक बार आपसे बात करेगी.. फीर कुछ नीर्णय लेगी.. भाभी.. उसे समजाइअ‍ेनां.. मुजे बहुत तकलीफ होती हे.. मे सेक्सके बगैर नही रेह सकता.. अगर उसने मुजे मना करदीया तो कहा जाउगां..?

पुनम : (जुठा गुस्सा करते) बडे कमीने हो आप.. कोइ भाभीके साथ अ‍ैसी बाते करता हे..? ठीक हे.. मे इस बारेमे सुबह लता भाभीसे बात कर लुगी.. सुनीये.. (सरमाते धीरेसे) देवरजी.. क्या सचमे आपका.. वो.. आइ मीन.. आपाका.. पेनीस.. क्या वो वाकइ बहुत बडा होगया हे..? अगर आपको बहुत इच्छा हुइ हे.. तो आज वो दोनो सीकार हमारे घरपे ही हे.. आप कुछ आगे बढे की नही..? अगर लता मना कर रही हे.. तो उनमेसे अ‍ेक को पकडलो.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाकर धीरेसे) नही भाभी.. अगर कीसी अ‍ेक को भी पकडलीया तो यहा कमीनी बहुत चीखेगी.. क्युकी ये कुछ ज्यादा ही बडा हो गया हे.. तो यहा बडा बखेडा होजायेगा.. उनको तो फुरसत मे वही सहेरमे ही नीपट लुगा.. थोडासा वक्त दीजीये.. वो दोनो हमारे साथ सहेर ही आ रही हे.. बस.. अ‍ेक तो ओल मोस्ट सेट हो गइ हे.. अब दुसरीको सेट करना हे.. वो भी कोइ मुस्कील काम नही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) कौन..? आपने कीसको सेट करलीया..? क्या मुजे बता सकते हो..?

15.gif


लखन : (हसते धीरेसे) हां भाभी.. मे आपसे कोइ बात नही छुपाउगा.. आप मेरी सभी बातोकी राजदार होगी.. तो आपको सब बतानेमे कोइ प्रोबलेम नही.. वो.. मेरी सहेलज.. रमा भाभी.. मानोना वो ओल मोस्ट सेट हो चुकी हे.. अब हम दोनोको अकेलेमे मीलने की ही देरी हे..

बस.. कमीनीको अ‍ेक बार मेरे नीचे लेटने दीजीये.. तब उनका काम तमाम.. हें..हें..हें.. कमीनीको सेट करनेमे मुजे क्या क्या पापड बेलने पडे.. तब जाके मुस्कीलसे सेट हुइ हे.. यहा बंसीकी सादी ओर अंकलकी सब वीधी नीपट जाये.. फीर मे आजाद.. बस.. फीर मुजे सीर्फ यही काम करना हे..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे सरमाते) सीर्फ यही काम करना हे..? आप बहुत ही कमीने हो.. कोइ भाभीके साथ अ‍ैसी बाते करता हे..? आपको सरम भी नही आती.. ओर कुछ काम धंधेपे भी ध्यान देना.. लखन भैया.. वहा जाकर जो भी करो.. बस.. थोडी सावधानीसे.. उनको पता नही चलना चाहीये.. की हम उनके सब प्लानके बारेमे जानते हे.. आप अ‍ेक बार उस कमीनीकी हालत बीगाड दो.. वैसे भी कमीनीओ दोनो मां बेटी बहुत ही कामी हे.. बस.. थोडीसी महेनत ओर करो.. मुजे यकीन हे.. आप नीलुको भी पटा लोगे..

लखन : (हसते धीरेसे) भाभी.. अ‍ैसा ही होगा.. जो आप चाहती हे.. नीलुको पटाना कोइ बडी बात नही हे.. क्युकी आपको तो पता हे.. उनकी ओर धिरेनकी विडीयो क्लीप मेरे पास हे.. जब उनको मील लुगा तब आपको सब बता दुगा.. फीर मुजे आगेका बताना उनके साथ क्या करना हे..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) ठीक हे देवरजी.. मे सुबह लता भाभीसे बात करलुगी.. अब आप फोन रख दीजीये.. अ‍ैसे देर रात फोनपे भाभीसे बात करना अच्छी बात नही हे.. समजे..? हें..हें..हें.. गुड नाइट..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे भाभी.. लेकीन जरुरत पडी तो लताकी बात आपसे करवाउगा.. आप फोन उठाना.. भाभी.. आइ रीयली लव यु.. अ‍ेन्ड गुड नाइट..

पुनम : (बहुतही सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. ठीक हे.. लव यु टु देवरजी.. हें..हें..हें.. मे भी आपसे बहुत प्यार करती हु.. लेकीन वो वाला प्यार नही अ‍ेक भाइ बहेन वाला प्यार.. समजे..? हें..हें..हें.. सुनो.. सहेरमे उन कमीनीसे सादी तो करली.. क्या उनके साथ सुहागरात बुहागरात मनाइ की नही..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. अब जो भी होगा सहेर जाउगा तब ही होगा.. क्या आपकी उनके साथ कोइ बात हुइ..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) नही.. अ‍ेक बार हुइ थी.. फीर कल बात कर लुगी.. अब तो आपकी तो बले बले हे.. तीन तीन बीवीया तो हे.. अब क्या प्रबलेम हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. मे कीतनी भी सादीया करलु.. फीर भी मेरे दिलको कभी तसली नही मीलेगी.. मे अपना पहेला प्यार कभी नही भुल पाउगा.. आप आज भी मेरे दिलपे राज करती हो.. भाभी.. आपकी बहुत याद आ रही हे.. आइ रीयली लव यु.. मे आज भी आपको इतना प्यार करता हु.. लेकीन भाइ बहेन वाला नही.. वो प्यार.. जो आप समजते भी अन्जान बन रही हो..

पुनम : (बहुत ही सर्मसार होते धीरेसे) लखन प्लीज..

कहातो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर उसने फोन काट दीया.. पुनम सब कुछ समज गइ की लखन उनसे क्या कहेना चाहता हे.. तब लखनका प्यार ना स्वीकारनेसे पुनमको बहुत बुरा लग रहा था.. उनका मन अभी इस बातके लीये राजी नही था.. तो दुसरी ओर उनका दिल ओर उनका तन पुरी तराह लखनको अपनानेके लीये बेताब था.. जो अब पुनमके वसमे नही था..
 
क्युकी लखनसे सेक्सके बारेमे बाते करते उनकी चुत काफी गीली होते अभी भी फडफडा रही थी.. ओर पानीका रीसाव करते गीली होगइ थी.. तो पुनम बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. फीर पुनमने अपनी चुतको साफ करते करते धीरेसे आंख बंध करली.. ओर लखनके बडे लंडको इमेजींग करते चुतमे उंगली घुसादी.. तो आंखोके सामने लखनका चहेरा आगया..

37715.gif


ओर पुनम धीरे धीरे लखनको इमेजींग करते उंगलीको चुतमे अंदर बहार करने लगी.. आज पुनम को खुदकी चुत भठीकी माफीक गरम लग रही थी.. तभी कुछ देर हीलानेके बाद अचानक उनकी चुतसे अ‍ेक तेज धारसे फवारा नीकल गया.. तब वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर फ्रेस होकर बहार आगइ.. तो भावना पुनमकी ओर आस्चर्यसे देखते हस रही थी.. तब पुनम भावनाकी ओर देखकर सरमा गइ.. ओर हसने लगी..

36747.gif


भावना : (हसते धीरेसे) पुनोदी.. क्या केह रहे हे हमारे देवरजी..? आपके साथ कोइ सरारत तो नही की..? क्युकी आपको बहार नीकलनेमे बहुत देर होगइ.. हें..हें..हें.. देखो आपकी सलवार गीली हो गइ हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) क्या भाभी.. आप भीनां.. अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. वो क्या कहेगे..? जबसे हमने उसे जडी बुटी दिहे तबसे वो लताको नही मील सके इसीलीये सेक्सके बीना पागल होगये हे.. कहेते थे अब मे लताको मील सकता हु की नही.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते धीरेसे) क्या..? वो आपसे यही पुछ रहे थे..? दीदी.. तो क्या उसने तबसे सेक्स नही कीया..? बापरे.. हें..हें..हें.. तब तो आज लता गइ कामसे.. आज उनको छोडेगे नही.. हें..हें..हें.. दीदी.. क्या उनका सचमे इतना बडा होगया होगा..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे थोडी बात छुपाते) भाभी.. वो मुजे कहा पता होगा..? वो तो सुबह अब लता ही बता सकती हे.. हें..हें..हें.. सायद.. मे बी.. जो आप केह रही हे..

भावना : (हसते) दीदी.. आपको भी तो सब पता चल जाता हे.. लगता हे आप मुजे खुलकर सच बताना नही चाहती.. वैसे भी देवर भाभीके बीच काफी अन्डर स्टेन्डींग हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (थोडा गंभीर होते) भाभी.. हमारे बीच कहा कोइ पर्दा हे..? अब तो हम चारोको ही सबकुछ सम्हालना हे.. भाभी.. सच कहु..? हमारे बीच अन्डर स्टेन्डींग तो बहुत हे.. लेकीन वो अपना पहेला प्यार आज भी नही भुले.. वो आज भी मुजे इतना प्यार करते हे.. कास मे उनका प्यार कबुल करपाती.. भाभी.. वो अपना प्यार भाइसे भी बांटनेके लीये तैयार हे.. आज हमारे बीच बहुत सारी बाते हुइ.. भाभी.. उनकी बातोसे लगा.. की वो आज भी मुजे पानेकी चाहत रखते हे.. लेकीन प्यार ना मीलनेकी वजहसे वो अंदरसे बहुत दुखी हे..

भावना : (सामने देखकर धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात कहु..? अब तो इस हवेली के साथ साथ हमारे गांवमे भी इतना सारा बदलाव हो रहा हे.. तो फीर आपको उनका प्यार कबुल करनेमे क्या दीकत हे..? मेरे खयालसे आपको लखन भैयाका प्यार कबुल कर लेना चाहीये.. करलीजीये उनका प्यार कबुल.. आपको भी पता हे आगे क्या होने वाला हे.. तो इस बातसे क्यु भागना..? दीदी.. प्यार करके मीलन करनेका मजा ही अलग हे.. मे भी जीजुसे प्यार करती हु.. बस.. अब सीर्फ उस पलका इन्तजार कर रही हु.. जब हम दोनोका मीलन होगा..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. बात तो आपकी सही हे.. लेकीन फीर भी मे बहुत दुवीधामे हु.. मुजे इस बारेमे आपकी राइ जाननी थी.. आपने बता दीयाकी मुजे हमारे देवरका प्यार कबुल करलेना चाहीये.. भाभी.. उन्होने तो अपने प्यारका इजहार करते मुजे उलजनमे डाल दीया था.. मे कोइ नीर्णय नही लेपा रही थी.. की क्या करना हे.. ओर भाभीने भी मुजे बहुत सारी जीमेवारी दी हे.. तो उसे भी नीभाना हे..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. अब हम चारो साथ ही तो हे.. हम चारो मीलकर वो जीम्वेवारी भी नीभायेगे.. ओर चारो मीलकर मजे भी करेगे.. इतना हसीन मजा करना कौन नही चाहेगा.. हें..हें..हें.. आपकी जगाह मे होती.. तो मे लखन भैयाका प्यार कबसे कबुल कर चुकी होती.. कीतना प्यारा देवर मीला हे हमे..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभी.. फीकर मत करो.. आपकी भी बारी आयेगी.. तब देखती हु.. आप हमारे देवरसे कीतना प्यार करती हो.. पहेले बडे भैयाको तो ठीकसे प्यार करलो.. लगता हे बहुत ही जल्द आप दोनोका मीलन होने वाला हे.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपके मुहमे घी सकर.. मुजे पता हे आपको ओर दीदीको सबकुछ पता हे.. फीर भी दोनो मुजे नही बताती.. ठीक हे.. मे उस पलका इन्तजार कर रही हु.. जब हम दोनो मीलेगे..

तो इधर लखन भी फोन कट होते ही मुस्कुराते नीचे अपने रुममे आगया.. तो नीलम लखनको देखते ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. ओर सरमके मारे खडी होकर अपने रुममे सोने चली गइ.. तब रमा बहुतही कामुक नजरोसे लखनकी ओर देखते हस रही थी.. ओर वोभी खडी होकर अपने रुममे सोने जाने लगी..

तब लखनने लताकी नजर बचाते रमाको आंख मारते उनका हाथ पकडलीया.. तो रमा बहुत ही सर्मसार होते हाथ छुडाकर मुस्कुराते वहासे चली गइ.. तभी लताने जटसे रुमका दरवाजा बंध करदीया.. तो लखनने लताको अपनी गोद मे ही उठा लीया..

लता : (सरमाते हसते धीरेसे) लखन छोडीये क्या कर रहे हे..? मे गीर जाउगी.. हें..हें..हें..

लखन : (गाल चुमते) डार्लींग मे आज तुजे छोडने वाला नही हु.. मुजे सब परमीशन मील गइ हे.. आज तो तु गइ कामसे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमसे पानी पानी होगइ) लखन.. प्लीज.. यार आपका बहुत बडा होगया हे.. मे नही जेल पाउगी.. मुजे बहुत डर लग रहा हे..

लखन : (बेडपे सुलाते) लता.. कुछ नही होगा.. भाइका भी बडा हे.. तो क्या कीसी भी भाभीको कुछ हुआ हे..? तु खामखा डर रही हे.. मुजे मंजु भाभीने सब परमीसन देदी हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते धीरेसे) क्या मंजु भाभीने..? लेकीन ये सब हुआ कैसे..? येतो बताइअ‍े.. पहेले तो इतना बडा नही था..

लखन : (पासमे बैठते हसते धीरेसे) लता.. कीसीको कहेना नही.. भाभीने पुनम दीदीको कहेकर मुजे थोडीसी जडी बुटी देदी हे.. इसीलीये ये थोडासा बडा ओर मोटा होगया हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) क्या थोडासा बडा होगया हे+.. हें..हें..हें.. ये थोडासा हे..? बापरे.. आपका तो कीसी गध्धे जैसा हो गया हे.. मुजे भाभीसे बात करनी पडेगी.. बाबा ये तो मेरी हालत बीगाड देगा.. भाभी भीनां.. क्या जरुरत थी आपको जडीबुटी देनेकी..? आपको मुना भाइने तो आयुर्वेदिक का कोर्षतो करवाया हे.. अरे बाबा उनकी दवाइसे भी आप मेरी हालत खराब कर देते हो.. मुजे कल इस बारेमे पुनो दीदीसे बात करनी पडगी..

लखन : (थोडा नाराज होते) लता.. अ‍ैसा दीदीको पुछते हे क्या..? तुम होनां.. ओरत तो इतना बडा लंड देखकर पागल होजाती हे.. ओर चुदवानेके लीये तैयार होजाती हे.. ओर अ‍ेक तुम हो.. जो बातका बतंगंड बना रही हो.. हां.. जा कल उसे बात करलेना.. फीर मेरे पास आना.. बहुत नखरे कर रही हो.. कुछ नही करना मुजे.. जा सोजा..

लता : (सरमाते हसते) अरे.. आपतो नाराज हो गये..? मे पुनम दीदीसे थोडीना पुछुगी.. अब वो कहा आपकी दीदी हे.. (हसते धीरेसे) मेतो हमारी पुनम भाभीसे पुछुगी.. हें..हें..हें.. अब वो भी तो मेरी जेठानी हे.. ओर मत भुलो.. हम दोनो पकी सहेलीया भी हे.. हमारा पहेला मीलन उसीने तो करवाया था.. हें..हें..हें.. तो मे उनसे कुछ भी पुछ सकती हु..

लखन : (जुठ मुठ नाराज होते दुसरी ओर करवट लेते) ठीक हे.. जा यार.. मुजे तुमसे बात ही नही करनी.. मेरा सारा मुड खराब करदीया..

लता : (लखनसे चीपकते हसते) अले..ले..ले.. मेरा बच्चा नाराज हो गया.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. चोदलो मुजे.. मे रेडी हु.. पर याद रखना अगर मुजे कुछ हो गया तो सब जीम्वेवारी आपकी होगी..

कहातो लखन दुसरी ओर करवट लेकर सोने लगा.. तो लता लखनकी नाराजगीसे हसने लगी.. तभी लताने लखनसे चुदवानेकी हिंमत करली.. यही सोचकर की वो कब तक लखनसे दुर रहेगी.. अ‍ेक दिन तो उसे इस लंडसे चुदना ही पडेगा.. ओर यही सोचते लता लखनके उपर जुकते उनके गालपे कीस करने लगी.. ओर लखनको मनानेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन लखन थोडी देर जुठ मुठ नाराज होनेका नाटक करता रहा..
 
तभी लता बेडसे उतर गइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते हुअ‍े अपने कपडे नीकालने लगी.. तब कुछ ही देरमे लता पुरी तराह नंगी होगइ.. ओर लखनके पास आकर जबरदस्तीसे लखनके कपडे नीकालने लगी.. तो लखन लताकी सभी हरकते मुस्कुराते देखता रहा.. ओर लताने लखनको भी नंगा करदीया.. फीर लता लखनके पैरोके पास बैठ गइ.. ओर उनके लंडको पकडकर मसलने लगी..

लता : (सरमाते धीरेसे हसते) देखलो.. कैसे गध्धे जैसा हे.. देखले लता तुभी.. आज तो इसेही अंदर लेना हे.. आज तेरा बलमा फाडेगा तेरी चुतको.. तब चीलाती रहेना.. इनको कोइ रहेम नही आयेगी.. हें..हें..हें..

लता लखनके लंडको सहेलाते खुदसे बात करने लगी.. तब लखनकी हसी नीकल गइ.. ओर बैडपे बैठकर लताको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेता हे.. तो लता भी सरमाके हसने लगी.. तब कुछही देरमे दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करते प्यारकी आगोसमे खो गये.. लखन हल्केसे लताके उरोजोको मलसते उनका मर्दन करने लगा.. तब लता पुरी तराह कामातुर होगइ.. ओर उनकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. ओर आखीर लताने लखनके लंडको अपने दोनो हाथोमे थाम लीया..

31497.gif


लता : (नसीली आंखोसे देखते धीरेसे) जानु.. देखना.. अगर मुजे कुछ होजाये तो आप सम्हाल लेना..

लखन : (होंठ चुमते) डार्लींग तुजे कुछ नही होने दुगा.. मे हुनां..? मे बहुत प्यारसे करुगा.. चल आजा..

कहातो लता अपने दोनो पैर फैलाकर बेडपे लेट गइ.. ओर लखन उनके दोनो पैरोके बीच आगया.. ओर जुकते लताकी चुतपे अपना मुह लगा दीया.. तो लता बहुतही उतेजीत होने लगी.. ओर उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. तभी लखनने उनकी चुतके दानेको अपने दातोसे दबाके छेड दीया.. तो लता जोरोसे सीसकारीया करते नसेकी हालतमे चली गइ.. ओर आधी आंख चडाते पागलोकी तराह अपनी कमर उछालने लगी..

24026.gif


लखन अब कीसीभी लडकीको इसी तराह उतेजीत करते उसे पागल बनानेमे माहीर हो चुका था.. ओर ये सब रजीया.. ओर होस्टेलकी मालकीन राधीका.. जो अब लखनकी बीवी हे.. सब उसीका कमाल था.. कुछ ही देरमे लखनने लताको अ‍ैसेही छेडकर जडा दीया.. तो लता बहुत ही सरमा गइ.. लखनने अपना मुह साफ करलीया.. उनकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. वो लताकी ओर कामुक नजरोसे देखते लताके उपर आने लगा..

तब लता बहुत ही सरमा रही थी.. ओर अंदरसे डरी हुइ थी.. जब लखन लताके उपर छागया तो लताने आंख बंध करते लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया तभी लखनका तगडा लंड लताको अपनी चुतपे ठोकर मारते महेसुस हुआ.. ओर उसने जोरोसे अपनी आंख बंध करली.. तब लखन लताके होठोको चुम रहा था.. ओर लखनने धीरेसे हाथ नीचेकी ओर लेजाते लंडको अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर लताकी चुतपे सेट करने लगा..

लता : (धीरेसे डरते) सीससस..... लखन.. प्लीज.. धीरे धीरे डालना.. वरना मे सहेन नही करपाउगी.. ये बहुत बडा हे..

लखन : (धीरेसे होठ चुमते) अरे.. तु पहेली बार इसे थोडीना अंदर ले रही हे..? तुम खामखा डर रही हे.. कुछ नही होगा.. क्या डालु..? हंम..?

लता : (अपना होंठ भीचते हां मे गरदन हीलाते) लेकीन तब इतना बडा नही था.. हंम.. प्लीज.. धीरेसे.. मे पहेली बार इतना बडा ले रही हु.. अगर मुजे कुछ होजाये.. तो आप सृतीभाभी या पुनमदीदीको बुला लेना..

लखन : (बुब्स चुमते धीरेसे) अरे पागल होगइ हो क्या..? कहानां तुजे कुछ नही होगा..

ओर लखन लताके उपरसे हट गया.. फीर लताके पैरोके बीच घुटना मोडकर बैठ गया.. तो लताने अपने दोनो पैर फैला दीये.. ओर अपनी कमरके नीचे अ‍ेक तकीया भी रखदीया.. ताकी उनको ज्यादा तकलीफ ना हो.. तभी लखनने अपना लंड पकडकर लताकी चुतपे घीसने लगा.. क्युकी अब लखनको भी अंदाजा हो चुका था की लता इस लंडको सहेन नही कर पायेगी.. ओर लखनने धीरेसे लंडके टोपेको थोडासा लताकी चुतमे फसालीया.. तो लता जोरोसे अपनी आंखे भीचते दर्दके मारे मुह बीगडने लगी..

really-painfull-nithya-menon.gif


तब बाजुके रुममे नीलम ओर उनकी मां रमा दोनो ही अ‍ेक बेडपे साथ सोनेकी तैयारीया कर रही थी.. रमा ओर नीलम अ‍ेक दुसरेके सामने मुह रखते अपने उपर अ‍ेक ही कंबल डालकर लेटी हुइ थी.. तब रमा नीलमसे जानना चाह रही थी.. की वो लखनके साथ आंख मीचोली खेलते कहा तक आगे बढी.. क्युकी यहा आनेसे पहेले रमाने नीलमको सबकुछ समजा दीया था..

ओर नीलमको अभीसे लखनको रीजाने पे लगा दीया था.. अब अ‍ैसी बातोमे दोनो मां बेटी खाफी खुल चुकी थी.. ओर सभी तराहकी बाते खुलकर करने लगी थी.. दोनो मां बेटीके बीच अब कोइ पर्दा नही था.. तभी दोनो मां बेटीको बाजुके लखनके रुमसे लताकी अ‍ेक जोरोसे चीखनेकी आवाज सुनाइ दी.. क्युकी लखनने लंडको फसाकर थोडासा पुस करते अंदर डाल दीया था.. तो लता उनके लंडको जेल नही पाइ..

ओर लंड चुतके अंदर जातेही लताकी जोरोसे चीख नीकल गइ.. लता लखनके सीनेपे हाथ रखते उनको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस करने लगी.. ओर अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. जैसे कीसीने उनकी चुतमे कोइ बडा डंडा घुसा दीया हो.. लता रो रही थी.. तो लखनने जटसे जुककर लताके मुहपे हाथ रख दीया.. तब लता छटपटाते आंसु बहाते लखनको लंड बहार नीकालनेकी मनते करने लगी..

21665.gif


इधर नीलम ओर रमा दोनो समज गइकी लखनके रुममे क्या हो रहा हे.. तो मा बेटी दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी ओर देखकर सरमाके मुस्कुराने लगी.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. क्युकी वो भी धिरेनका लंड पहेली बार अंदर लेकर अ‍ैसेही चीलाइ थी.. तो रमा नीलमको सरमाते देखकर हसने लगी.. तब नीलमको लखनने कही अ‍ेक अ‍ेक बाते याद आने लगी.. लखनकी सभी बाते उसे सच लगने लगी.. की लखनने उसे पहेली बार गोडाउनमे दबोचा तब ही उसे कहा था.. की वो आज भी उनकी लता दीदीकी चीखे नीकलवाता हे.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९४

इधर नीलम ओर रमा दोनो समज गइकी लखनके रुममे क्या हो रहा हे.. तो मा बेटी दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी ओर देखकर सरमाके मुस्कुराने लगी.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. क्युकी वो भी धिरेनका लंड पहेली बार अंदर लेकर अ‍ैसेही चीलाइ थी.. तो रमा नीलमको सरमाते देखकर हसने लगी.. तब नीलमको लखनने कही अ‍ेक अ‍ेक बाते याद आने लगी.. लखनकी सभी बाते उसे सच लगने लगी.. की लखनने उसे पहेली बार गोडाउनमे दबोचा तब ही उसे कहा था.. की वो आज भी उनकी लता दीदीकी चीखे नीकलवाता हे.. तभी....अब आगे

रमा : (हसते धीरेसे) नीलु.. क्या हस रही हे..? हें..हें..हें.. लगता हे तेरे जीजु ओर तेरी दीदी दोनो अपने रुममे प्यार कर रहे हे.. ओर प्यारमे अ‍ैसा ही होता हे..

नीलम : (सर्मसार होते जानकर भी अनजान होते धीरेसे) मोम.. दीदी कीतना जोरसे चीलाइ.. क्या इसमे इतना दर्द होता हे..? मुजे तो बहुत डर लग रहा हे..

रमा : (नीलमके पास सरकते आते धीरेसे) अरे नही रे.. तुम खामखा डरा रही हे.. इनमे इतना दर्द नही होता.. तेरी लता दीदी दर्दसे नही.. वो तो प्यारसे मदहोस होकर चीलाती हे.. इनमे बहुत मजा आता हे.. अ‍ैसा लगता हे हम स्वर्गमे हे.. बस.. अ‍ेक बार तु तेरे जीजुको अच्छेसे सेट करले.. फीर देखना कमाल.. तुरी भी तेरी लता दीदीकी तराह अ‍ैसी ही चीलायेगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते हसते रमाको मुका मारते) मोम.. आपको सरम नही आती..? आप बहुत ही सरारती हो.. कोइ अपनी बेटीके साथ अ‍ैसी बाते करती हे.. हें..हें..हें..

रमा : (हसते मस्तीमे) हां.. अब तु सीर्फ मेरी बेटी थोडीना हे..? अब तो हम दोनो सहेली हे.. हें..हें..हें.. ओर सहेलीयोके बीच अ‍ैसी ही बाते होती रहेती हे.. समजी..? हें..हें..हें..

नीलम : (हसते अनायास ही मुहसे नीकल जाता हे) मोम.. जैसा जीजुने कहा था अ‍ैसा ही हुआ.. हें..हें..हें..

रमा : (चोंकते अ‍ेक नजरसे धीरेसे) मतलब..? नीलु.. तुजे जीजुने कब अ‍ैसा कहा था..? क्या तुम लखनजीसे अकेलेमे मीली हो..?

नीलम : (थोडी गभराते सरमाते धीरेसे) हां मोम.. अभी अभी आपने कहानां अब तो हम दोनो सहेलीया हे.. अगर आप नाराज ना होतो मे आपसे अ‍ेक बात कहेना चाहती हु..

रमा : (सरकते नीलमकी कमरमे हाथ डालकर चीपकते) नीलु.. क्या मे अब तुमसे कभी नाराज हो सकती हु..? हंम..? अब तो तुम ही अ‍ेक मेरा सहारा हो.. नीलु.. अब तुम बडी हो गइ हो.. अब हमारा रीस्ता मां बेटीका नही हे.. हम दोनो अब पकी सहेलीया हे.. तो मे चाहती हु की अब हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे अपनी बाते सेर करे.. अब तुम मेरी लाइफ मे.. ओर मे तेरी लाइफमे मे दखल नही देगे.. अब दोनो खुलकर बाते करेगे तो मजेसे जीयेगे.. तो हम दोनो मीलकर बहुत कुछ हासील कर सकते हे.. बता.. क्या बात करनी हे..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. आपको पता हे..? जब जीजु मुजे घरपे छोडने आये थे..? तब क्या हुआ था..? मुजे तो कहेते हुअ‍े भी सरम आ रही हे..

रमा : (उत्सुक्तासे मुस्कुराते) अरे बताना.. इनमे सरमानेकी क्या बात हे..? क्या उसने तेरे साथ कोइ सरारत की थी..? हंम..? हां वो अ‍ैसा कर भी सकते हे.. वो बहुत ही सरारती ओर रंगीन मीजाजके हे.. बीलकुल अपने बडे भाइपे गया हे.. हें..हें..हें.. बता क्या हुआ था..?

नीलम : (मुस्कुराते) मोम.. बडे भाइपे गया हे मतलब..? क्या बडे जीजु भी अ‍ैसे हे..? क्या उसने कभी आपके साथ अ‍ैसी कोइ सरारत की हे..? वो तो बहुत सीधे सादे दीखते हे.. हें..हें..हें..

रमा : (मनमे बडबडाते धीरेसे) कमीना.. जरुरतसे ज्यादा ही सीधा हे.. उनको कीतना इसारा कीया.. कीतनी हिंन्ट दी.. फीर भी कुछ नही समजा.. मेरी ओर देखा तक नही.. उनके दोस्तकी बीवी जो हु.. वरना दुसरी कोइ होती तो कमीना उसे पटक पटकर चोद लेता.. इसीलीये तो तुजे लखनको फसानेके लीये केह रही हु.. वरना मे ही उनको फसाकर माला माल नही होजाती..?

नीलम : (मुस्कुराते सामने देखकर) मोम.. मनमे क्या बड बडा रही हे.. आपके साथ कुछ हुआ हे क्या..?

रमा : (मुस्कुराते) अरे.. नही रे.. वो सीधे सादे ही हे.. लेकीन जरुरतसे ज्यादा सीधे हे.. नीलु.. कीसीको कहेना नही.. मैने भी उनको पटानेकी बहुत कोसीस की.. तो मेरी ओर देखते भी नही थे.. क्युकी वो तेरे पापाके दोस्त हे.. तो वो उनको धोखा देना नही चाहते होगे..

नीलम : (हसते) मोम.. मतलब आप बडे जीजुपे ट्राइ कर चुकी हो.. हें..हें..हें..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) ओर नही तो क्या..? अगर पट गये होते तो आज हमारे पास थोडा बहुत पैसे नही होते..? तो फीर मे तुजे लखनजीको फसानेके लीये थोडीना कहेती..? देखा नही दोनो भाइ कीतने हेन्डसम हे.. उनकी कीतनी बीवीया हे.. मुजे लगता हे उनका अपनी बीवीओके अलावा बहार भी रीलेशन होगा.. छोड उनकी बात ये बता लखन भैयाने क्या कीया था तेरे साथ..? तेरे दुधु बुधु तो नही दबाये.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) मोम.. आप भीनां.. मुजे तो बतानेमे भी सरम आ रही हे.. हां.. कुछ अ‍ैसा ही हुआ था.. जब वो मुजे घरपे छोडने आ रहे थे.. तब वो मुजे अपना खेत दीखानेके बहाने पहेले उनके खोतेपे ले गये थे.. वहा अ‍ेक चाचासे मीलावकर वो मुजे अपने गोडाउनमे ले गये.. देखा तो वहा ओफीसके साथ अ‍ेक कमरा भी था.. जहा वो आराम करते हे.. उनमे बेड टी.वी. फ्रिज सबकुछ सुवीधा थी.. ओर वो मुजे उसी कमरेमे ले गये..

रमा : (नीलमकी कमरपे पैर डालते उत्सुक्तासे मुस्कुराते) क्या..? तब तुम दोनो वहा अकेले थे..? वहा ओर कोइ नही था..? फीर..?

नीलम : (सरमाकर हसते) नही मोम.. वहा सीर्फ हम दोनो अकेले ही थे.. (धिरेनकी बात छुपाकर थोडा जुठ बोलते) फीर.. मे बैडपे बैठ गइ.. तो वो भी मेरे पास आकर मुजसे सटकर बैठ गये.. फीर कुछ अजीब अजीब बाते करने लगे.. कहेने लगेकी साली भी आधी घरवाली होती हे.. वगैरे.. वगैरे.. ओर बाते करते करते मुजे यहा वहा छुने लगे.. मुजे तो बहुत सरम आ रही थी.. फीर छुते छुते वो मेरे साथ छेडखानी करने लगे..

रमा : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) सही तो कहा उसने.. सब लोग साली को आधी घरवाली ही मानते हे.. ताकी उनके साथ अ‍ैसी सरारत कर सके.. तुम भी उनकी आधी घरवाली हो.. क्या वो सीर्फ छेडते रहे..? ओर कुछ नही कीया..? हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) मोम.. आप भीनां.. अ‍ैसी बातोका कैसे मजा लेती हे.. कोइ दुसरी मां होती तो अ‍ैसी बातोसे अब तक तो आसमान हीला दीया होता..

रमा : (सरमाके हसते धीरेसे) अरे मे मां होकर थोडीना पुछ रही हु..? अब तो हम सहेलीया हे.. तो बताना उन्होने तेरे साथ कुछ कीयाथा क्या..?

नीलम : (सरमाते कातील नजरोसे मुस्कुराकर धीरेसे) हां मोम.. उन्होने क्या कुछ नही कीया..? मुजे छेडते छेडते उसने अचानक मेरे होठोपे कीस करली.. ओर अभी जो आपने कहा वोही करने लगे.. मे उनको रोक पाती उनसे पहेले ही वो मेरे दुधु मसलते दबाने लगे.. बारी बारी दोनो दुधुसे छेडखानी करने लगे.. तो मुजे तो कुछ अजीब होने लगा था.. वहा थोडा दर्द होने लगा.. तो मे बहुत गभरा गइ.. ओर उनको ये सब करनेके लीये मे मना करने लगी..
 
रमा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? लेकीन क्यु..? तुमने उनको ये सब करनेको मना क्यु कीया..? अच्छा ये बता.. फीर क्या हुआ..? फीर वो कुछ आगे बढे की नही.. हें..हें..हें..

नीलम : (सामने देखते) हां मोम.. तो फीर मे क्या करती..? मे उनको ये सब करनेको मना करने लगी.. तो उसने अपना पेन्ट खोलकर अपना वो नीकाल दीया.. पेनीस कहेते हे उसे.. जहासे मर्द सुसु करते हे.. बापरे कीतना बडा था.. (थदडा जुठ बोलते) मोम.. मे तो देखते ही गभरा गइ.. क्युकी मेरी जींदगीमे ये सब पहेली बार देख रही थी.. फीर उसने जबरखस्तीसे मेरा हाथ पकडकर उनपे रख दीया.. ओर मुजसे मुठीमे पकडाकर हीलवाकर सहेलवाने लगे..

रमा : (मनमे खुस होते उत्सुक्तासे) फीर..? अरी बताना.. क्या सीर्फ यही करवाया.. कुछ आगे बागे बढे की नही..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) हां मोम.. सहेलवाने लगे तो वो बहुत बडा ओर खडा हो गया.. ओर उपरकी ओर जटके मारने लगा.. बापरे कीतना सख्त होगया था.. ओर उन्होने मेरे साथ सेक्स करनेकी डीमांन्ड की.. तो मे रोने लगी.. ओर उनको ये सब करनेको मेने मना करदीया.. तो कहेने लगे.. देखले.. इनसे तेरी लता दीदीकी चीखे नीकलवता हु.. मुजे तो देखकर बहुत सरम आइ.. ओर मे रोने लगी.. तो उसने मुजे छोड दीया.. ताकी वहा कोइ हंगामा ना हो.. वो चाचा बहार ही बैठे थे.. ओर हम दोनो घर आगये..

रमा : (आस्चर्यसे धीरेसे) क्या.. वो तेरे साथ सेक्स करना चाहते थे..? तो कमीनी तुमने उसे मना क्यु कीया..? करने देती सब.. नीलु.. तुमने कीतना अच्छा मौका हाथसे जाने दिया.. हमारा काम कीतना आसान हो जाता.. कुछ देरकी तो बात थी.. चुदवा लेती उनसे..

नीलम : (आस्चर्यसे) मोम.. कही आप पागल तो नही होगइ..? तो क्या मे उसे सब करने देती..? अ‍ैसे कैसे चुदवा.. आइ मीन करने देती..? हंम..? तब कहा हमारी कोइ अ‍ैसी बात हुइ थी..? वो तो बादमे बात हुइ की हमे जीजुको फसाना हे.. वरना मे उनको सब करनेके लीये मना थोडीना करती..?

रमा : (थोडा अफसोस जताते) हंम.. हां नीलु.. ये भी सही हे.. नीलु हमे उनको कहा फसाना हे..? तुजे तो बाकायदा उनसे सादी करनी हे.. तेरे हाथमे कीतना अच्छा मौका था.. चुदवालेती उनसे.. हमे कहा पता चलता..? कास इस बारेमे पहेले हमारी बात हुइ होती.. तो आज तेरे जीजुके पीछे तुजे इतनी महेनत नही करनी पडती.. अब मे समजी.. सायद आज इसीलीये तेरे सामने देखते नही होगे.. लगता हे वो इसी वजहसे तुमसे नाराज होगे..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) मोम.. आप फीकर मत करो.. लखन जीजुको वसमे करना कोइ मुस्कील काम नही हे.. लगता हे वो इन सब चीजोके सौकीन हे.. बस.. अ‍ेक बार ओर हमे अकेलेमे मीलनेका मौका मीलने दीजीये.. वो जरुर मेरे साथ कोइना कोइ सरारत करेगे.. तब मे उनको नही रोकुंगी.. लेकीन मोम.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? अगर मे ये सब करुगी तो कही आपको बुरा तो नही लगेगा..?

रमा : (मुस्कुराते गाल चुमते) अरे मेरी बच्ची.. तेरे लखन जीजुके साथ तु कुछ भी कर.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा.. अब तो हम सहेलीया हे.. तुम मुजे कुछ भी पुछ सकती हो.. वो भी बीन्दास्त.. पुछो क्या पुछना चाहती हो..

नीलम : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) मोम.. आज मे देख रही थी.. लखन जीजु.. मेरे बजाये आपके पीछे पडे हुअ‍े थे.. वो कुछ ज्यादा ही आपसे चीपक रहे थे.. ओर आप भी उनपे कुछ ज्यादा ही ध्यान दे रही थी.. तो.. क्या आप भी..? आइ मीन्स..? तो मे क्या समजु..?

रमा : (नीलमकी ओर अ‍ेक नजरसे देखते) नीलु.. क्या तुम अपनी मोम पे सक कर रही हो..?

नीलम : (धीरेसे जटसे) अरे नही नही.. मोम.. आप मुजे गलत समज रही हे.. मे आपपे सक नही कर रही.. मे तो मेरी सहेलीसे पुछ रही हु.. वहा जो मेने देखा वोही तो सीर्फ पुछ रही हु.. अगर अ‍ैसा हे तो भी मुजे कोइ प्रोबलेम नही हे.. मोम.. हमारा मक्सद तो उनकी जायदासे हे..

फीर चाहे वो मे हु.. या फीर आप.. हमे क्या फर्क पडता हे.. वैसे भी अब तो हम दोनो अ‍ेक दुसरेकी राजदार ओर पकी सहेलीया होगइ हे.. इसीलीये मेने आपको पुछने की हिंमतकी.. वरना मे अ‍ैसी बात आपको कभी नही पुछती.. मोम.. अगर आपको बुरा लगा तो सोरी..

रमा : (जटसे) अरे नही नही.. मेरी बच्ची.. मुजे कोइ बुरा नही लगा.. नीलु.. तुम कीतनी समजदार हो गइ हो..? अब हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे कुछ भी बात नही छीपायेगे.. मे तुमसे वादा करती हु.. क्युकी अब तेरे सीवा मेरा इस दुनीयामे हे भी कौन..? ओर तुम भी मुजसे वादा कर..

की तुम मुजसे कभी जुठ नही बोलोगी.. हमे जो भी बात करनी हे दोनो बीन्दास्त बात करेगे.. फीर वो चाहे कीसी भी टोपीक पे क्यु ना हो..? लेकीन हम दोनो अ‍ेक दुसरेकी जींदगीमे कोइ दखल नही देगी.. आजसे हम दोनो अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेके लीये पुरी तराह आजाद हे..

नीलम : (मनमे खुस होते हग करते धीरेसे) ये..स.. मोम.. आइ लव यु.. आइ प्रोमीस.. आजसे मे आपसे कुछ भी बात नही छीपाउगी.. ओर कभी आपके सामने जुठ नही बोलुगी.. आपकी कसम.. मैने तो सीर्फ सब देखा इस लीये पुछ रही थी.. मोम.. मे सभी बाते आपके साथ सेर करुगी.. बस.. अब आप भी अपनी सभी बाते मेरे साथ सेर करना.. हम दोनो अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीयेगी.. मे वादा करती हु.. मे आपकी जींदगीमे कभी दखल नही दुगी.. ओर आप भी मेरी जींदगीमे कोइ दखल नही दीगी..

रमा : (सरमाते धीरेसे नीलमसे चीपकते) ठीक हे नीलु.. आइ प्रोमीस.. अब अ‍ैसा ही होगा.. तेरी सभी बाते सही हे.. आजसे मे भी तुमसे कुछ भी नही छीपाउगी.. लेकीन अभी नही.. अभी बहुत रात हो चुकी हे.. हम दोनो इस बारेमे कल फुरसतमे बात करेगे.. चल अब सोजा.. कल सादी मे भी जाना हे..

नीलम : (मुस्कुराते) येस मोम.. मोम.. आइ लव यु.. गुडनाइट..

रमा : (नीलमसे चीपकते मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु बेटा.. गुड नाइट..

कहेते रमा ओर नीलम अ‍ेक दुसरोसे चीपककर सोने लगी.. तब रमा सोचमे डुब गइ.. क्युकी आज उनको नीलममे लखनके साथ आंख मीचोली खेलते पकडलीया था.. तब अ‍ेक पलके लीये तो रमाने नीलमको सब कुछ खुलकर बतानेका फैसला करलीया था.. क्युकी रमा भी लखनसे प्यार करने लगी थी.. ओर आने वाले वक्तमे वो भी लखनके साथ आगे बढना चाहती थी.. लेकीन इस बारेमे नीलमको अभी बताना उसे उचीत नही लगा..

कीसी दिन नीलम उसे लखनके साथ देख लेती तो उनको नीलमको कोइ सफाइ देनेकी जरुरत ना पडे.. लेकीन अभी वो इस बातको कुछ दिनके लीये नीलमसे छुपाना चाहती थी.. ओर वो अ‍ेक बार नीलमसे छुपकर लखनको मीलना चाहती थी.. रमा अ‍ैसा खतरनाक मंसुबा लेकर सोने लगी.. तब रमाको ये नही पता था की नीलम भी उनकी बेटी हे.. वो भी अपनी तरफसे दिमाग लगाकर अपनी मर्जीसे जीना चाहती थी..

वो भी धिरेनको लेकर अभी अंसमजमे थी.. वो भी अभी तक कोइ नीर्णय नही लेपा रही थी.. की धिरेनके साथ सादी करके जींदगी गुजारे या लखनके साथ..? लेकीन धिरेनकी बात छुपाकर अपनी जींदगी लखनके साथ खुलकर जीनेके लीये जो बात कही इसी बातसे नीलमके मनमे रमाका जो थोडा बहुत डर था.. वो भी खतम हो गया.. ओर इसी बातका नीलम फायदा उठाकर अपनी मन मरजी करना चाहती थी..
 
तब दुसरी ओर मंजु देवायतके नीचे लेटे उनसे चुदवाते आंख बंध करते नीलम रमाकी सब बाते सुन रही थी.. तो बाजुके रुममे भावनाके सो जानेके बाद पुनम भी नीलम ओर रमाके उपर ध्यान जमाये बैठी थी.. तो दोनोको रमा ओर नीलमकी बाते सुनकर गुस्सा आ रहा था.. तो इधर लखनके रुममे आज लखन ओर लता दोनोके रीस्तेमे दुरीया होने की सुरुआत हो चुकी थी..

यही तो हे रीस्तोमे बदलाव होने की सुरुआत.. अ‍ेक तरफ आज लखन लतासे थोडा दुर हो रहा था तब लता भी तो देवायतके नजदीक जा चुकी थी.. तो दुसरी ओर देवायतकी कुछ बीवीओके दिलमे भी लखनके प्रती सोफ्ट कोर्नर हो चुका था..जो अनायस ही लखनकी ओर ढलती जा रही थी.. अभी वो बाते सीर्फ मंजु ओर पुनम ही जानती थी.. की आने वाले वक्तमे रीस्तोमे कीतना उथल पाथल होने वाला था.. तभी लताके रुममे..

लखन : (लताके मुहपे हाथ रखते थोडा गभराते) लता.. क्या कर रही हे..? चुप होजा.. अ‍ैसे जोरसे कोइ चीलाता हे क्या..? तु पहेली बार थोडीना चुदवा रही हे..? इतना तो तुजे पहेली बार चोदा तब भी नही चीलाइ थी..

5880.gif


लता : (छटपटाते आंसु बहाते) लखन.. प्लीज.. नीकालदो.. आपका बहुत बडा हे.. मे इसे नही जेल पाउगी.. प्लीज.. नही चुदवाना मुजे.. मेरी फट जायेगी.. नीचे बहुत जलन होती हे.. प्लीज.. मे आपसे हाथ जोडती हु..

लखन : (थोडा परेसान होते धीरेसे) लता..कहानां कुछ नही होगा.. आज तक कीसीकी फटी हे क्या..? ठीक हे.. मे अ‍ैसे ही रखता हु.. जब दर्द खतम होजाये तब कहेना.. बस..? वरना तु मुजसे कभी चुदवा नही पायेगी.. कभीनां कभी तो इसे अंदर लेना ही हे.. मे बहुत प्यारसे डालुगा..

लता : (दर्दसे मुह बीगाडते छटपटाते) नही लखन.. प्ली..ज.. नही चुदवाना मुजे.. आज छोड दीजीये मुजे.. मे आपको हाथ जोडती हु.. आपका बहुत बडा होगया हे.. मे इसे जेल नही पाउगी.. माफ करदो मुजे..

लखन : (थोडा गुस्सेसे) लता.. पागल हो गइ हे क्या..? अगर तुम मुजे प्यार नही करने दोगी तो मे कहा जाउगा..? अ‍ेक तो तीन दिनसे मेने चुदाइ नही की.. ओर उपरसे तेरे नखरे.. अ‍ैसा थोडीना चलेगा..?

लता : (आंसु बहाते रोते) लखन प्लीज.. नीकाल दीजीये.. मे कहा नखरे कर रही हु.. क्या मैने कभी आपको मना कीया हे..? कल मे सृतीभाभी या पुनोदीदीसे बात करलुगी.. फीर आप करना.. अ‍ैसा लगता हे आपने नीचे कोइ बडा डंडा घुसा दीया हे.. प्लीज.. मे आपसे हाथ जोडती हु.. देखो.. बहुत जलन होती हे..

लताकी हाथ जोडते मनत देखकर लखन बहुत नीरास होगया.. ओर उसने जटसे अपना लंड लताकी चुतसे नीकाल दीया.. तो लता दर्दके मारे दोनो पैर सीकुडकर करवट लेते आंसु बहाने लगी.. ओर लखन उनको देखता ही रहा.. तब लताकी हालत देखकर लखनकी आंख भी गीली होगइ.. आज उसे लताके उपर बहुत गुस्सा आ रहा था.. लेकीन लताकी हालत ओर उनकी मनत देखकर उनपे तरस भी खा रहा था..

लखन खडा होकर बाथरुममे चला गया.. उनका लंड भी फटा जा रहा था.. उसे अ‍ेक पल तो लगाकी वो अभी के अभी रजीयाको फोन करके अपने रुममे बुलाले.. ओर लताके सामने ही उनकी चुदाइ करले.. लेकीन अभी तक रजीयाके साथ रीलेशनके बारेमे लताको नही पता था.. तो लखन मन मारके अ‍ैसेही लंडको मुठीमे लेकर हीलाने लगा.. तब कुछ ही देरमे लखनके लंडसे पीचकारीया छुटने लगी.. जीसे देखकर लखन भी हेरान रेह गया..

क्युकी लखनके लंडसे इतना पानी कभी नही नीकला था.. तो लखन मन ही मन खुस होने लगा.. फीर फ्रेस होकर अपने आपको सही करके बाथरुमसे बहार नीकलकर लताकी ओर नजर डालते गुस्सेसे देखने लगा.. ओर बेडपे आकर लताकी बगलमे करवट लेकर सोने लगा.. तो लता अब भी आंसु बहा रही थी.. जैसे ही लखन आया.. लता लखनकी ओर मुडकर उनपे जुक गइ.. ओर लखनको मनानेकी कोसीस करने लगी..

लता : (आंसु बहाते) लखन प्लीज.. आप नाराज मत होना.. सीर्फ आजके दिनके लीये.. कल आपको मुजे जीतना चोदना हो चोद लीजीयेगा.. फीर चाहे कुछ भी होजाये.. मेरी जान ही क्यु ना नीकल जाये.. मे आपको कभी मना नही करुगी..

लखन : (सामने देखे बगैर) लता.. तुम सो जाओ यार.. मुजे तुमसे बात नही करनी.. अभी मेरा मुड खराब हे.. क्या बीवीया अ‍ैसी होती हे..?

लता : (रोते मनते करते) लखन.. प्लीज.. यार माफ करदो मुजे.. मुजसे गलती होगइ.. आप नाराज तो मत होइअ‍े.. आप मेरी तकलीफ तो देखते ही नही.. दैखो नीचे.. अभी भी खुन नीकल रहा हे.. में आपको अ‍ैसे ही मना नही कर रही थी.. अ‍ेक बार देख तो लो..

कहातो लखन चोंक गया.. ओर जटसे बेटपे बैठ गया.. तो लताकी ओर अ‍ेक नजरसे देखता रहा.. तो लता अब भी रो रही थी.. तो लखनने जटसे लताको बेडपे लीटा दीया.. ओर उनकी चुतको चेक करने लगा.. तो वाकइ लताकी चुतसे हल्कासा खुन नीकल रहा था.. ओर ये कोइ सामान्य बात नही थी.. तब लखन खुन देखकर बहुत गभरा गया.. ओर उसे लगने लगाकी उन्होने बहुत बडी गलती करदी हे..

लखन : (थोडा गभराते) लता आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे तेरी बात मान लेनी चाहीये थी.. सोरी.. क्या बहुत जलन हो रही हे..? मे सृती भाभीको बुलालु..? हंम..? कहोतो पुनो दीदीसे तुम्हारी बात करवाता हु.. देखो बहुत खुन नीकल रहा हे..

लता : (मुह बीगाडते धीरेसे रोते) नही लखन.. सृती भाभी इस वक्त भाइके साथ होगी.. तो वहा वो दोनो भाभीया भी होगी.. तो वो सब क्या सोचेगी..? उल्टा आपको टाटेगी.. मुजे तो बहुत सरम आयेगी.. मत बुलाइअ‍े.. अभी खुन बंध होजायेगा..

लखन : (थोडा परेसान होते) अरे पागल हो क्या..? देखो ज्यादा खुन नीकल रहा हे.. तुजे कुछ नही होगा.. इसमे सरमानेकी क्या बात हे..? मे उनकी डांट खा लुंगा.. मे अभी तुमको कपडे पहेनाता हु.. फीर पुनो दीदीसे तेरी बात करवाता हु.. तुही उनसे बात करले..

लता : (अपने आंसु पोछते धीरेसे) क्या.. पुनो दीदीसे..? वो आपकी दीदी हे.. आपको सरम नही आयेगी..?

लखन : (कपडे पहेनाते मुस्कुराते) अरे इसमे सरम काहेकी.. ये सब उसीकी वजहसे तो हुआ हे.. ना वो मुजे जडी बुटी देती ओर ना ये सब होता.. ओर मत भुलो वो अब मेरी दीदी नही.. मेरी भाभी हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) आप वाकइ बहुत कमीने हो.. अब आप भी अपने सब कपडे पहेन लीजीये.. ओर बहार चले जाइअ‍े.. वरना वो ओर आप दोनो सरमाओगे..
 
Back
Top