Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 55 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०५

तब लता रजीयाकी ओर देखती ही रही.. क्युकी रजीयाका पुरा मुह लखनके पानीसे भरा हुआ था.. लखनका इतना सारा पानी नीकलते लताके साथ साथ रजीयाको भी आस्चर्य हुआ.. उसके बाद दोनो बाथरुममे जाकर सही होकर वापस आगये.. तो लखनने रजीयाको पीठके बल लीटा दीया.. ओर खुद उनके उपर चड गया ओर बुब्सको चुमने लगा.. अब लखन रजीयाके उपर पुरी तराह सवार हो चुका था.. तभी.... अब आगे

रजीया : (सरमाते धीरेसे) लखन आप धीरेसे डालना.. ये तो बहुत बडा हो गया हे.. दीदी.. आप यहा ही रहेना.. मुजे बहुत डर लग रहा हे..

लता : (मुस्कुराते बुब्स चुमते) रजुदीदी मे यही हु.. आपको कुछ नही होगा.. आपतो इनका कइ बार लेचुकी हे.. तो क्यु गभरा रही हे..?

रजीया : (सरमाते धीरेसे) दीदी तब इनका इतना बडा नही था.. प्लीज.. लखन.. जरा आरामसे..

जबसे लखनको जडी बुटी दी थी.. तबसे उन्होने कीसीकी चुदाइ नही कीथी.. लखन रजीयाके बुब्सको मुहमे लेकर चुसने लगा.. थो रजीयाके दोनो बुब्स कठोर हो चुके थे.. बुब्सकी नीपल तनके सख्त होचुकी थी.. जीसे लखन मुहमे लेके हल्केसे अपने दातोसे दबाकर खचने लगा.. तो रजीया बहुत ही उतेजीत होकर सीसकारीया करने लगी.. लखनका सख्त लंड रजीयाकी चुतपे ठोकर मारने लगा.. ओर अपने बीलमे जानेका रास्ता ढुंढने लगा..

लखन रजीयाके साथ खेलते तावमे आ गया.. ओर वो जल्दसे जल्द अ‍ेक बार रजीयाको चोदलेना चाहता था.. तो दुसरी ओर आज रजीया भी चुदनेके लीये रेडी थी.. आज वो बहुत ही कामुक दीख रही थी.. जीनसे अ‍ेक बार तो लताको भी जलन होने लगी थी.. तब रजीयाने धीरेसे लखनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करते उनमे घुसनेका रास्ता दीखा दीया.. ओर आंख बंध करते लखनको जोरोसे बाहोमे भीचकर लेटी रही.. तब..

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लता : (सरको सहेलाते) रजीया दीदी गभराना नही मे यही हु.. (लखनकी ओर देखते) जानु.. आप आरामसे धीरे धीरे डालना.. आजसे आपकी पहेली बीवी यही हे.. यही समजलो.. आज आप दोनोकी सुहागरात हे.. इस नये हथीयारसे आप रजुदीदीका फीरसे उद्घाटन करदो.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) लता मे तुमसे भी बहुत यार करता हु.. मुजे तुम भी चाहीये..

लता : (सरमाते हसते धीरेसे) अरे हां बाबा मे कहा मना कर रही हु.. जब मेरा पीरीयड खतम होजाये तब आप मुजे भी चोद लेना.. लेकीन अभीतो अपनी पहेली बीवीको चोदलो.. कबसे आपके लीये तडप रही हे..

कहातो लखन मुस्कुराते रजीयाके होठोको चुमने लगा.. वो लताको ये दिखाना नही चाहता थाकी उनके बारेमे उसे सबकुछ पता चल गया हे.. वो लताके साथ पहेलेकी तराह ही व्यवहार कर रहा था.. ओर रजीयाके दोनो हाथोको कसके पकड लीया.. फीर धीरेसे कमरको पुस कीया.. तो लखनका थोडासा लंड रजीयाकी चुतमे घुस गया.. तब रजीयाकी चीख नीकल गइ.. ओर लखनके मुहमे ही दब गइ..

वो गुं.. गुं.. करते लखनसे मुह छुडवानेकी कोसीस करने लगी.. तब लता उनके सरको सहेलाते रजीयाको सांत करने लगी.. तो रजीयाकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. वो लखनके लंडको बरदास्त नही करपाइ.. उनको लगा कीसीने उनकी चुतमे बडा डंडा घुसा दीया हे.. उनकी चुतमे बहुत जलन हो रही थी.. तब लताने लखनकी ओर देखा.. ओर मुस्कुराते आंख मारदी.. ओर इसारोसे कीला फतेह करनेको कहा..

लखन लताके इसारोको समज गया.. लखन कुछ दैर अ‍ैसे ही रजीयाके उपर लेटा रहा.. तो कुछ ही देरमे रजीया भी सांत होगइ.. तो लखन अ‍ैसेही लेटे रहेते रजीयाके होठोको छोडके उनके बुब्सको चुमने लगा.. तब कुछ ही देरमे रजीया फीरसे उतेजीत होने लगी.. ओर मदहोस होकर लखनकी पीठको सहेलाने लगी.. लखन रजीयाके दोनो बुब्स बारी बारी चुस रहा था.. जब रजीया नोर्मल होगइ..

लखनने फीरसे अपना होंठ रजीयाके होठोपे रख दीया ओर चुमने लगा.. तभी चुमते चुमते अचानक रजीयाके होठोपे लीपलोक करदीया.. ओर अपनी कमरको जोरोसे जटका देदीया.. तो लखनका पुरा लंड रजीयाकी चुत चीरते पुरा अंदर घुस गया.. ओर रजीया जोरोसे चीखते बेहोस होगइ.. तो लखनने गभराकर रजीया के होठोको छोड दीया.. ओर डरके मारे रजीयाकी ओर देखते लताकी ओर देखने लगा.. तब लता मुस्कुरा रही थी..

लता : (लखनके होठ चुमते) साबास मेरे सेर.. मुबारक हो.. आखीर आपने कीला फतेह कर ही लीया.. आप अ‍ैसे गभराइअ‍े मत वो सीर्फ बेहोस हुइ हे.. अब आप इनको होंसआनेसे पहेले बेहीसी मे ही चोदलो.. ओर उनकी चुतको अपने हथीयारके लायक करदो ताकी इनको दुबारा कोइ तकलीफ नाहो..

लखन : लता.. देखतो जरा इनको कुछ हुआ तो नही..?

लता : (होंठ चुमते) अरे कुछ नही हुआ हे.. सीर्फ रजीयाकी चुतसे थोडासा मामुली खुन नीकल गया हे.. बस.. थोडी देरके लीये बेहोस हुइ हे.. जानु.. आज फीरसे दोनोकी सुहागरात हे.. अब आपको सबके साथ अ‍ैसे ही करना हे..

लखन : (लताकी ओर आस्चर्यसे देखते) सबके साथ अ‍ैसे ही करना हे मतलब..?

लता : (अपनी गलतीका अहेसास होते ही) वो.. वो.. अरे कुछ नही.. मतलब मेरे साथ भी.. अब आप इनको फटाफट चोदलो वरना इनको होस आजायेगा तो आपको चोदने नही देगी.. आप फटाफट चोदना चालु करो.. जब इनको होस आने लगे.. तब आप रुक जाना..

तब लखन हाथके बल उचा हो गया.. ओर रजीयाको बेहोसीमे ही चोदने लगा तो रनीयाके दोनो बुब्स तालमेलमे उछलने लगे.. ओर रजीया अ‍ैसेही बेहोसीमे लखनसे चुदती रही.. अब लखनका लंड बडेही आरामसे रजीयाकी चुतमे अंदर बहार हो रहा था.. तब कुछ ही देरमे रजीया मुह बीगाडते होसमे आने लगी.. तब लताने इसारा करते लखनको चोदनेसे रोकदीया ओर उनके होठोको चुमने कहेने लगी..

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तो लखन रजीयाके उपर जुकते लेट गया.. ओर अ‍ेक हाथसे बुब्सको सहेलाते रजीयाके होठोको चुमने लगा तब रजीयाने धीरेसे आंख खोलदी.. तब उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तो लता उनके सरको सहेलाते मुस्कुराने लगी.. अब रजीया बीलकुल सांत हो चुकी थी.. तब लखनने उनके होठोको छोड दीया तो रजीया बहुत ही सर्मसार होते लताकी ओर देखने लगी.. तब वो बहुत सरमाइ.. ओर धीरेसे कहा..
 
रजीया : (धीरेसे) दीदी.. नीचे बहुत जलन हो रही हे.. अ‍ैसा लगता हे कीसीने बहुत बडा डंडा घुसा दीया हे..

लता : (मुस्कुराते गाल चुमते) बस रजुदीदी हो गया.. मुबारक हो.. आपने हमारे पतीका पुरा लंड अंदर लेलीया हे.. अब आपको कभी तकलीफ नही होगी.. बस.. कुछ ही देरमे सब ठीक होजायेगा.. अब तो आपके मजे ही मजे हे.. बस.. अ‍ेक बार मुजे भी ये दर्द जेलना हे.. लेकीन यहा नही.. तब हम सहेरमे हमारे बंगेलेपे होगे..

रजीया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. क्या वाकइ पुरा अंदर हे..? देखना नीचे कुछ हुआ तो नही..?

लता : (मुस्कुराते होठ चुमते) अरे रजुदीदी कुछ नही हुआ.. बस थोडासा मामुली खुन नीकला हे.. समजोना आज सही मायनोमे आपकी सहागरात हुइ हे.. अब तो लखनपे पहेला हक आपका ही होगा.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाकर मुस्कुराते) नही दीदी.. ये आपको भी बहुत प्यार करते हे..

लता : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. हम दोनोका बराबर हक हे.. बस..? मेरा लखन तो इस मामलेमे बीलकुल अनाडी था.. उनको सब आपनेही तो सीखाया हे.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये आपको सब पता चल जायेगा.. दीदी.. अब कैसा लग रहा हे..?

रजीया : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. अब दर्द कम होगया हे..

लता : (मुस्कुराते) लखन.. अब आप धीरे धीरे दीदीको चोदीये.. अबतो आपकी बले बले हे.. हें..हें..हें..

कहतो तीनो हसने लगे.. ओर लखन धीरे धीरे कमर हीलाते रजीयाको चोदने लगा.. तब अ‍ेक बार फीर रजीया तावमे आने लगी.. वो धीरे धीरे मदहोस होने लगी.. उनकी आज तब अ‍ैसी चुदाइ नही हुइ थी.. उनको लखनसे चुदवाते इतना मजा आ रहाथा जीतना मजा देवायतके साथ चुदवाकर भी नही आया था.. रजीया अपनी कमर हीलाकर लखनका साथ देने लगी.. ओर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी..

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अब रजीया पुरी तराह तावमे आचुकी थी.. तभी लता उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको भी चुस रही थी.. तब लखन हाथके बल उचा होते रजीयाकी जबरदस्त तरीकेसे चुदाइ कर रहा था.. तो कुछ ही देरकी जबरदस्त चुदाइके बाद रजीया अकडने लगी.. ओर लताको जोरोसे बाहोमे भीचते जडने लगी.. तब लखन अब भी जोरोसे कमर हीलाते रजीयाकी चुदाइ कर रहा था.. तो लखनकी स्टेमीना देखकर आज लता ओर रजीया दोनो ही खुस होने लगी..

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अ‍ैसे ही अबतक रजीया दो बार जड चुकी थी.. फीर भी लखन बीना थके उनकी चुदाइ करता रहा.. आज चुदाइका दौर बहुत ही लंबा चला.. तब लखनने चोद चोदकर रजीयाका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. तभी वो अचानाक रजीयाके उपर जुक गया तो रजीया समज गइ.. ओर उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अपनी कमरको भी जटका देते लखनसे लीपलोक करलीया..

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तब कुछही देरमे रजीयाको अपने बच्चेदानीमे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर वो उतेजनासे कांपते लखनके साथ जडने लगी.. तब लखन रजीयाके सीनेपे ढेर हो गया.. तब रजीया उनकी पीठको सहेलाती रही.. आज लखन ओर रजीया दोनो ही पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. रजीयाके सभी बाल बीखरे हुअ‍े थे.. आज सही मायनोमे वो सादी सुधा लग रही थी.. तब लखनका लंड अब भी अ‍ैसे तना हुआ रजीयाकी चुतमे था..

देखा तो लखन र्खराटे मारते सो गया था.. तो रजीया ओर लता दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने दखकर हसने लगी.. फीर रजीया ओर लताने मीलकर लखनको रजीयाके उपरसे हटाया.. तो रजीया जटसे बेडपे बैठ गइ.. ओर अपने नीकरसे चुतको पोछकर लंखनके लंडको भी साफ करने लगी.. तबतक लताने लखनको अच्छेसे सुला दीया था.. तब रजीया बेडसे उतरने लगी.. तो लताके दोनो पैर कांपने लगे.. ओर लताकी ओर देखते वापस बैड गइ..

लता : (पास बैठते) दी.. क्या हुआ..? कुछ तकलीफ हे क्या..?

रजीया : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. नीचे बहुत जलन हो रही हे.. मुजसे चला नही जायेगा..

तब लताने उनको सहारा दीया ओर दोनो धीरे धीरे बाथरुममे चली गइ.. तबतक रजीयाकी सारी सरम जा चुकी थी.. वहा दोनो साथमे सावर लेने लगी.. तो लता रजीयाकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करने लगी.. फीर उनके तनमे साबुन लगाने लगी तो रजीया बहुत ही सरमाइ.. तभी रजीयाने भी हिंमत करते लताको साबुन लगा दीया.. फीर दोनो सावरके नीचे चीपककर खडी होगइ.. ओर अ‍ेक दुसरेके बुब्सको मसलते साफ करने लगी..

लता : (सरमाते धीरेसे बुब्स मसलते) दीदी.. आजसे हम दोनो के बीच अ‍ेक नया रीलेशन हो गया हे.. अब आप मेरी सौतन होगइ हे.. तो अब हमे अ‍ेक दुसरेका अ‍ैसे ही खयाल रखना हे..

रजीया : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) ठीक हे दीदी.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. कमसे कम हम अ‍ेक दुसरेकी आगको सांत तो कर सकेगे..

तभी अचानक लताने रजीयाके होठोपे अपना होठ रखदीया.. ओर मदहोस होकर चुमने लगी.. तो रजीयाभी मदहोस होने लगी.. ओर वो भी लताके बुब्सको मसलते लताका साथ देने लगी.. तब कुछ ही देरमे लता रजीयाकी चुतको अपने मुहसे खरोदने लगी.. तो रजीया फीरसे बहुत उतेजीत होगइ.. ओर आंख बंध करते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. तब कुछ ही देरमे रजीयाकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया..

तो रजीया सांत होगइ.. ओर बहुत सरमाने लगी.. तभी लता जटसे खडी होगइ.. ओर अपनी चुतमे उंगली घुसाकर अंदर बहार करने लगी.. उनकी उंगलीपे चुतसे नीकला खुन चीपग गया था.. तब कुछ ही देरमे लताभी जडकर सांत होगइ.. ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो सावर लेकर बहार आगइ.. फीर बेडपे साथ लेटकर अ‍ेक दुसरेके सामने मुह रखते अ‍ेक दुसरेसे चीपक गइ.. ओर सो गइ..
 
तो दुसरी ओर गांवमे आज बंसी भी सांतीको दो बार चोदकर उनसे चीपककर सो गया था.. आज सादीके बाद दोनोकी दुसरी रात थी.. जब रातको सांती बंसीके रुममे जा रही थी.. तब उसने हसते हुअ‍े जागृतीको भी साथ आनेको कहा.. तो जागृती जुठा गुस्सा करते नामे गरदन हीलाकर हसने लगी.. तो आज जया भी सामतभाइके साथ ही सो गइ थी.. तब जागृती भी आज अपने भाइके सपने देखते सोगइ..

तो दुसरी ओर आज श्रीधरने कामोतेजक गोली खाकर बहुत ही बेरहेमीसे जबरदस्त तरीकेसे जयश्रीको दो बार चोदलीया.. तो जयश्रीका अ‍ेक अ‍ेक अंग ढीला होगया था.. ओर वो तीसरी बार भी जयश्रीको चोदना चाहता था.. तब जयश्री पुरी तराह थक चुकी थी.. प्रेगनेन्ट होनेकी वजहसे वो श्रीधरको तीसरी बार जेलनेमे असमर्थ थी.. तो उसने तीसरी बार श्रीधरको चोदने नही दीया.. ओर श्रीधरसे चीपककर सो गइ..

तब उनको बरखा ओर जागृतीकी कही अ‍ेक अ‍ेक बातोपे सचाइ नजर आने लगी.. ओर मन ही मन चाहने लगी की डीवोर्सके बाद श्रीधरका रीस्ता भी उनकी मां ब्रीन्दाके साथ होजाये.. लेकीन उनको नही पता था की श्रीधर ओर ब्रीन्दाका रीस्ता पहेलेसे ही था.. ओर दोनोकी सादी भी हो चुकी थी.. तब घरकी उपर छतपे आज भी जीतुलाल वृन्दाको जोरोसे चोद रहा था.. ओर वृन्दा उछल उछलके जीतुसे चुदवा रही थी..

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तो मुनाके घरपे भी यही हाल था.. मुना अब भी बरखाको तीसरी दुसरी बार चोद रहा था.. तब बरखाकी हालत भी पतली होचुकी थी.. लखनके सभी दोस्तोने जडी बुटी खाइ थी.. तो उनके कीसी भी दोस्तको जेलना इतना आसान नही था.. सबकी बीवीया दो बारमे ही ढेर हो जाती थी.. तो आज भी बरखा चुदवाते हुअ‍े मुनाको उनकी माके साथ सादी करलेनेकी बात कर रही थी.. ओर अ‍ैसेही रात बीत गइ..

आज हवेलीपे सबलोग जल्दीसे जाग गये थे.. क्युकी सबको आज जाना था.. तो आज लताने रजीयाको वही आराम करनेको कहा.. ओर उनकी जगाह वो खुद काम करने चली गइ.. तब दया ओर चंपाभाभीने उनको काम नही करने दीया.. सब लोग नहा धोकर तैयार होने लगे.. तो थोडी देरके बाद लखन रजीया भी कंपलीट हो गये.. तो आज पुनमको भी अपने घरपे जाना था.. तो उनका मुह भी लटका हुआ था..

सब लोग चाइ नास्ता करने टेबलपे आगये.. तो आज मंजु देवायतके पास ही बैठी थी.. तो पुनम ओर सृती बार बार लखनकी ओर देख रही थी.. लेकीन लखन आज भी उन दोनोकी ओर नही देख रहा था.. तब पुनम थोडी वीचलीत होने लगी.. आज लता ओर रजीया दोनो कीचनमे ही थी.. फीर दया लताने सबको चाइ नास्ता देदीया.. क्युकी रजीया अब भी थोडा लंगडाते चल रही थी.. तो उनको बहार आनेमे बहुत सरम आ रही थी.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) सुनीये सबलोग.. आज हमारा देवर सहेरमे रहेनेके लीये जा रहे हे.. तो आज पुनोदीदी भी अपने ससुराल जा रही हे.. तो मम्मी लोग भी दस बाराह दिनके लीये यात्रापे जा रही हे.. तो सबको अ‍ेक जरुरी बात बतानी हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) अरे हां बेटा बोलनां.. सबको क्या बात करनी हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते लखनकी ओर देखते) मोम.. आप सबतो जानती हे.. हमारे खानदानमे सभी मर्दोने कीतनी सादीया कीहे.. तो फीर इनमे हमारा देवरभी कैसे बाकात रेह सकता हे.. हें..हें..हें.. तो उसने भी दो सादीया ओर करली हे.. अ‍ेक सहेरमे ओर अ‍ेक यहा.. ओर इस बातपे हमारी लता भी सहेमत हे..

भुमीका : (हसते) अच्छा..? कोन हे वो खुस नसीब लडकीया.. जो हमारे लखनकी बीवीया हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) बुआ.. अ‍ेक तो जब वो सहेरमे पढते थे.. तब पुनमकी होस्टेलकी जो मालकीन हे वो.. जीनके साथ हालही मे हमारे लखन भैयाने सादी करली हे.. ओर दुसरी हमारी रजीया.. जो लताके साथ सादी हुइ उनसे पहेले ही दोनो गांधर्व सादी करचुके हे.. तो आजसे ये दोनो भी हमारे खानदानकी बहु होगइ हे.. तो बहुत जल्द हम यहा उनकी सहेर वाली बीवीको भी मीलेगे.. जब मम्मी लोग वापस आजायेगे..

कहा तो सबलोग खुस होकर लखनको बधाइआ देने लगे.. तब लखन बहुत ही सरमाने लगा.. ओर मुस्कुराते खडा होकर अपने रुममे चला गया.. तो सबलोग उनको देखकर हसने लगे.. तब रजीया भी कीचनमे बहुत सरमा रही थी.. तभी दया ओर चंपा भाभीने उसे गले लगाकर बधाइआ देदी.. तो रजीया भी सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. तब पुनम अ‍ैसेही गंभीर होकर कीसी सोचमे डुबी हुइ थी..

ना जाने क्यु.. आज उनको लखनके बारेमे सबकुछ जानते हुअ‍े भी मंजुकी बाते सुनकर अच्छा नही लग रहा था.. तो दुसरी ओर सृतीको भी मंजुकी बात सुनकर रजीया ओर राधीकासे थोडी ज्वेलेसी फील होने लगी.. दोनोको मनमे थोडा डर लग रहा था.. की कोइ लखनको इनसे छीन रहा हे.. पुनम सोचमे डुबी हुइ थी.. तब सृतीने उनके हाथपे हाथ रख दीया.. तो पुनम तंद्नासे बहार आगइ..

ओर मुस्कुराते नोर्मल होनेकी कोसीस करने लगी.. तब सृती भी पुनमकी मनो दसा समज गइ.. सबने चाइ नास्ता करलीया तो पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ.. तो सृती भी उनके पीछे पीछे चली गइ.. तब पुनम बेडपे बैठकर अपने चहेरे पे हाथ रखते रो रही थी.. तो सृती दरवाजा बंध करके पुनमके पास आकर बैठ गइ.. तो पुनम उनके कंधेपे सर रखकर रोने लगी.. ओर सृती उनके सरको सहेलाती रही..
 
सृती : (धीरेसे समजाते) दीदी.. क्या कर रही हे..? सम्हालीये अपने आपको.. अगर सबको पता चल गया तो सबको क्या कहोगी..?

पुनम : (रोते हुअ‍े) भाभी मुजसे गलती होगइ हे.. तो मे क्या करु..? वो तो हमारे सामने देखते भी नही हे.. तो मे उनकी माफी कैसे मांगु..?

सृती : दीदी.. अभी उनसे बात करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. दो तीन दिन हमसे रुठे हुअ‍े रहेगे.. फीर अपने आप ही बोलने लगेगे.. मे भी वहा जाकर उनको समजाउगी.. फीर फोनपे आपकी बात करवाउगी.. तब आप उनसे माफी मांग लेना.. देखना वो अपसे ज्यादा दिन दुर नही रेह पायेगे.. आपसे प्यार जो करते हे..

पुनम : (आंसु पोछते) नही भाभी वो अ‍ैसे नही मानेगे.. मुजे ही उनसे बात करनी पडेगी.. मैने आज तक कीसीपे हाथ नही उठाया.. तो मुजसे ये गलती कैसे होगइ..? गलती मेरी ही हे.. वो तो हमारी मस्तीया कर रहे थे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) पुनोदीदी.. अ‍ेक बात कहु..? क्या हमारे देवरकी अ‍ैसी मस्तीया जायज हे..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. वैसे देखा जायेतो अ‍ैसी मस्तीया जायज नही हे.. लेकीन हम भी तो दिलसे यही चाहती थी.. की हमारा देवर हमारी अ‍ैसीही मस्तीया करते हमारे साथ फ्लर्ट करे.. ओर हमारे घरकी तो बात ही कुछ ओर हे.. क्या हमको नही पता की हमारे साथ भवीस्यमे क्या होने वाला हे..? अगर हमे ये सही नही लगता तो हमे उसे तबही रोकना चाहीये था.. जब वो हमारे साथ फ्लर्ट करने लगे थे.. हमने उसे आगे क्यु बढने दिया..? भाभी.. कमसे कम हम दोनोके लीये सब जायज हे..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. बात तो आपकी भी सही हे.. तो फीर हम क्या करे..? दीदी.. तो क्या हमे इस रीस्तेको स्वीकार कर लेना चाहीये..? जो मंजु दीदीने कहा हे..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां भाभी.. हमारे चाहने या ना चाहनेसे कुछ नही होगा.. हमे ये रीस्तेको स्वीकार करना ही पडेगा.. ओर वो भी दिलसे.. आपने मंजु दीदीकी बात नही सुनी..? अगर हमे अ‍ैसेही जवान रहेना हेतो हमारे पास दुसरा कोइ रास्ता भी तो नही हे..

सीर्फ लखन भैया ही नही.. हमे विजयके लीये भी तैयार रहेना पडेगा.. तब जाके हम हमारे स्वामीको मील सकेगी.. अगर हमारे देवरने अ‍ैसी थोडीसी मस्ती की तो हमे स्वीकार करलेनी चाहीये थी.. भाभी.. ये तो अभी सुरुआत हे.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ..

सृती : (हसते सामने देखते) दीदी.. तो क्या मे मानलु.. अब आप हमारे देवरके प्यारको स्वीकार करलोगी..?

पुनम : (सरमाते नजरे जुकाते) भाभी.. आपसे सच कहु..? मेने कल उसे चांटा मारा.. तब ही उनका प्यार स्वीकार करलीया था.. जब वो हमसे रुठके चले गये.. भाभी.. मे वो बात भी जानती हु.. जो मंजु दीदीने हमे नही कहा.. सुनकर आपको भी अच्छा नही लगेगा..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. क्या केह रही हो..? क्या आप मुजे बता सकती हो..? प्लीज.. बताइअ‍ेना.. मुजे सुनकर कोइ बुरा नही लगेगा.. आइ प्रमीस..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. ज्यादा तो नही बता सकती.. सीर्फ इतना केह सकती हु.. की अब हम दोनोको बडे भाइका प्यार बहुत कम.. मतलब कभी कभार ही मीलेगा.. अब हमे लखन भैयाकाही सहारा हे.. भाभी.. आगे चलकर हम दोनो लखन भैयाको पुरी तराह समर्पीत होजायेगी.. बस.. इतना ही केह सकती हु..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) बस.. इतनीसी बात..? दीदी.. तो फीर चलीये.. अब हमे इस रीस्तेको स्वीकार करना ही हे.. तो फीर हमारे देवरको मनाना कोइ मुस्कील काम नही हे.. मे उनसे बात कर लुगी.. देखती हु वो अब कब तक हमसे नाराज रहेते हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी.. देखना इनको मनाना.. मतलब इनमे खतरा भी हे.. जरा सम्हालके.. वरना मंजु दीदीकी बात सच होजायेगी.. हें..हें..हें.. कही सचमे उनकी पहेली चपटमे आप आ सकती हो..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. कोइ बात नही.. उनकी बाते सच होजायेगी नही.. सच ही होगी.. क्युकी आपको ओर उस कमीनीको सब पता चल जाता हे.. तो मुजे तो लगता हे हमारे देवरकी चपेटमे सबसे पहेले मे ही आउगी.. हें..हें..हें.. दीदी.. फीकर मत करो.. इसके लीये मे तैयार हु..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अपना खयाल रखना.. क्युकी उनका हमारे पतीसे बहुत बडा हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे खडी होते) दीदी.. देखा जायेगा.. अगर हमारे पती ओर हमारी सौतनने ही सब छुट देदी हे.. तो अब हमे कीसका डर..? अ‍ेक सुहागरात ओर सही.. कमसे कम हमे सुहागरातकी फीलींग्स तो आयेगी.. हें..हें..हें.. चलीये बहार..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभी.. लगता हे आपने तो हमारे देवरसे मीलन करनेका पुरा मन बनालीया हे.. वैसे भी अब कुछ दिनो तक उनके पास ही तो रहेना हे.. वहा हमारे पती कहा आपको मीलेगे..? तो देवरसे ही मन बहेलाइअ‍ेगा.. हें..हें..हें..

सृती : (दोनो बहारकी ओर जाते धीरेसे) हां दीदी.. सही कहा आपने.. अब सब तैय कर ही लीया हे तो क्यु पीछे हटना.. हम यही समजेगे की हमने दोनो भाइसे सादी करली हे.. ओर दोनो हमारे पती हे.. आप भी सब तैयारीया सुरु करदो.. मे आपका भी मीलन करवा दुगी.. कमीने वो आपको प्यार जो करते हे.. देखती हु.. वो कब तक आपसे दुर रेह पाते हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अब इसके अलावा कोइ रास्ता भी तो नही हे.. हें..हें..हें.. बस अ‍ेक बार मान जाने चाहीये.. वोतो अभी हमारे सामने तक नही देखते..

सृती : (हसते) देखगे.. देखेगे.. अब सब तैय कर ही लीया हे.. तो क्यु डरना.. चलीये..

बाते करते पुनम ओर सृती दोनो बहार आगइ.. तब दोनो ही मन ही मन लखनसे रीलेशन रखनेका मन बना चुकी थी.. ओर सृती तो इस बातको लेकर बहुत ही अ‍ेक्साइटेड हो गइ थी.. क्युकी अब वो कही दिनो तक सीर्फ लखनके साथ ही रहेने वाली थी.. तब वहा सब लोग अपना अपना सामान बहार नीकाल रहे थे.. पुनम भी वापस जाकर अपना सामान लेकर बहार आगइ..
 
तो सृती भी अपने रुममे अपना सामान लेने चली गइ.. तब लता रमा नीलम भी अपना सब सामान लेकर नीचे आगइ.. तो रजीया पुनमने भी अपना सामान लाकर रख दीया.. तब चंदा ओर मंजु नीर्मला भुमीका ओर सरला काकीका सामान बहार रख रहे थे.. तभी भावना विजयको लेकर आगइ.. तो चंदाको देखते ही वो रोने लगा.. तब चंदाने दोडकर उसे अपनी गोदमे ले लीया ओर अपने सीनेसे लगा लीया..

फीर उनके चहेरेको चुमते आंसु बहाने लगी.. तो मंजु देवायत सब देखकर मुस्कुराने लगे.. तो चंदा विजयको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो पीछे मंजु ओर सृती भी हसती हुइ चली गइ.. तभी अंदर जाके देखा तो चंदा विजयको अपने दुधुसे लगाकर बैठी थी.. जैसे उनको दुध पीला रही हे.. जैसेही सृती मंजु अंदर आये वो अपना आंचल छुपाते बहुत ही सरमाने लगी.. क्युकी आज सृती ओर मंजुने उनको विजयसे दुध पीलाते देख ही लीया..

मंजुला : (हसते) अरे दीदी.. क्या आप इसे दुध भी पीलाती हे..?

चंदा : (सरमाते धीरेसे) मंजु.. सोरी.. विजयको देखकर मेरी ममता जाग गइ.. मे उनको अ‍ैसे ही सुलाती हु..

मंजुला : (मुस्कुराते पास बैठते) दीदी.. गभराइअ‍े नही.. मे जानती हु.. सचमे विजय आपका ही बेटा हे.. इनपे सबसे पहेले आपही का हक हे.. मेतो खुस नसीब हु.. की मेरे विजयका खयाल रखनेके लीये उनकी इतनी माताये हे..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) नही मंजु.. मे मेरे विजयको कीसीके साथ बांट नही सकती.. ये हमेसा मेरे साथ ही रहेगा.. अगर तुजे ओर बेटा चाहीये तो हमारे पतीको कहेदे.. वो तुजे फीरसे प्रेगनेन्ट कर देगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) दीदी.. वो तो ठीक हे.. लेकीन अभी आपके पेटमे हमारे पतीका बच्चा पल रहा हे उनका क्या..? सृती.. इनको कुछ उल्टी बुल्टीकी दवाइआ देदे.. वरना बीच रास्ते उल्टीया होगी तो ये जायेगी कहा..? हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे खुस होते धीरेसे) मंजुदी.. क्या केह रही हो..? क्या चंदादीदी सचमे प्रेगनेन्ट होगइ हे..?

मंजुला : (हसते) हां.. जब तुम लोग सहेर गये थे.. तब खाना खानेके बाद ये दोनो ही उपर तेरे रुममे चले गये थे.. ओर तभी हमारे पतीको अपने उपर चडा दीया था.. तो फीर सामको अपने उपरसे उतारा.. ओर जब तक हमारे पतीने अपना बीज अंदर नही डालदीया तबतक उनका हथीयार बहार ही नही नीकालने दीया.. हमारी ये सौतन सीर्फ दीखनेमे भोली लगती हे.. कमीनी हे तो हमसे भी बडी चुदकड.. हें..हें..हें..

कहातो चंदा दुसरी ओर मुह घुमाकर हसती रही.. तो सृती ओर मंजु दोनो उनकी ओर देखते हसने लगी.. तब चंदा अ‍ेक बार फीर बहुत सर्मसार होगइ.. ओर उसने विजयको अपने दुधुसे हटाया तब विजय सबकी ओर देखते मुस्कुरा रहा था.. तब चंदाने अपना बुब्स अंदर रखते ब्लाउसको सही कीया ओर खडी होकर विजयको मंजुको थमा देती हे.. ओर मुस्कुराते कहेती हे..

चंदा : (हसते) ले कमीनी संभाल मेरे विजयको.. ओर इनका खयाल रखना अच्छेसे.. चल अब जानेका समय भी हो गया हे..

सृती : (मुस्कुराते कुछ दवाइआ देते) दीदी.. लीजीये ये सब गोलीया अपने पास रखीये.. अब कुछ बैचैनी या उल्टी जैसा लगे तो इनमेसे ये दो गोली खालेना.. ओर कुछ अ‍ैसा लगे तो वहा कीसी लेडी डोक्टरको दीखा देना..

चंदा : (विजयको देते सरमाते धीरेसे) मंजु.. क्या सचमे मे प्रेगनेन्ट होगइ हु..?

मंजुला : (विजयको लेते) हां दीदी.. आपको अ‍ेक फुल जैसी बच्ची आयेगी.. जो हमारी भावनाके बेटे भावेसकी बीवी होगी.. तो आप उनको सम्हालीयेगा ओर अच्छेसे पढाइअ‍ेगा..

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हंम.. मतलब हमारी भावु मेरी समधन हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. मे मेरी बच्चीको खुब पढाउंगी..

कहते चंदा हां मे गरदन हीलाते बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर मंजुको गले लगाकर हसने लगी.. तब सृती भी दोनोकी ओर देखते हसती रही.. फीर तीनो बहार आगइ.. तब देवायतने अपनी बडी कार रेडी रखी थी.. तो देवायतने लखनको अपनी जीप लेनेके लीये कहा.. ओर वहा जाकर दुसरी कार लेनेको कहेते जीप वापस यहा भेज देनेको कहा.. फीर जीपको सृतीकी कार के पीछे चलानेको कहा..

तभी नीर्मला भुमीका सरला काकी ओर चंदा सबको गले मीलने लगी.. तब सरला काकीने रमाको मीलते घरका ओर भावेसका ध्यान रखनेको कहा.. फीर नीलमको मीलते भी उनके सरको चुम लेती हे.. तो लता भी सबको गले मीलते मंजु भावनाको गले मीलते खुब रोइ.. फीर पुनमको मीलते भी रोने लगी.. तब पुनमने भी आंसु बहाते अपने घरपे आनेका न्योता दीया..

तबतक पुनम बार बार लखनकी ओर देखती रही.. उनको लगाकी लखन भी हमेसाके लीये सहेर जा रहा हे.. तो उनको मीलने आयेगा.. लेकीन लखन अ‍ैसेही कीसीके सामने देखे बीना जीपमे बैठा रहा.. तब पुनमका दिल टुट गया.. ओर वो अ‍ेक बार फीर लताको गले मीलते रोने लगी.. तब सृतीने उन्को सम्हाला.. फीर सबलोग कारमे सामान रखकर बैठने लगे.. लखनका ओर पुनमका सब सामान लखनकी खुली जीपमे पीछे रख दीया..

तब सृतीने अपनी कारमे आगे पुनमको ओर पीछे दया रजीया ओर नीलमको बीठा दीया.. देवायतकी कारमे नीर्मला चंदा भुमीका ओर सरलाकाकी बैठ गइ.. तो लखनकी जीपमे लखनकी बाजुकी सीटमे सीर्फ लता ओर रमा ही बैठ गइ.. तब देवायतने अपनी कारको जाने दी.. तो पीछे सृतीने अपनी कार जाने दी ओर लास्टमे लखन अपनी जीप लेकर सृतीकी कारके पीछे चलाने लगा.. तब जाते वक्त सबलोग मंजु ओर भावनाको हाथ हीलाते बाय कहेने लगे..

आज हजेलीपे सीर्फ तीनो बच्चोके साथ मंजु भावना ओर चंपाभाभी ही रेह गये.. दया ओर रजीयाके जानेकी वजहसे चंपाभाभी भी आंसु बहा रही थी.. तब मंजुने विजयको भावनाको थमाते चंपाभाभीको गले लगाकर सांत कीया.. ओर तीनो अंदर चली गइ.. तो इधर पुरे रास्ते लखन खामोस बैठा रहा.. तब रमा लखनके साथ बैठकर बहुत खुस हो रही थी.. ओर बार बार लखनकी ओर देखते मुस्कुराने लगती थी..

तो सृतीकी कारमे पुनम भी खामोस बैठी रही.. तब आधे घंटेके अंदर ही सबलोग धिरेनके गांवमे उनके घरके सामने खडे थे.. तब पुनम ओर दया वहा उतर गइ.. तो सृती भी अपनी कारसे उतरके उनके गले लगते जल्द से दुबारा मीलनेको कहेने लगी.. तब पुनम भी मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाती हे.. ओर दयाके साथ अपना सामान लेनेके लीये लखनकी जीपके पीछे चली गइ.. तब भी लखन अ‍ैसे ही बेठा रहा तभी लताने कहा....

कन्टीन्यु
 
Bhai.. Lagta hai AApko thodi galat fami hui hai.. ye kahani RISTE me nahi RISTO me hai.. to muje kuchh corrector ke baremai thoda bahut to likhna hi padega.. agar aap devayt ko main hiro samjate hai.. to Unke Pitajiki bhi bat hui hai.. or lakhan bhi chala jayega.. ab jo bhi aayega is khandan se hi aayega.. or vaise bhi bahut kam like or coment mil rahe hai to mai is kahaniko lamba khichane ke paksh me nahi hu.. dhanyavad..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०६

तो सृतीकी कारमे पुनम भी खामोस बैठी रही.. तब आधे घंटेके अंदर ही सबलोग धिरेनके गांवमे उनके घरके सामने खडे थे.. तब पुनम ओर दया वहा उतर गइ.. तो सृती भी अपनी कारसे उतरके उनके गले लगते जल्द से दुबारा मीलनेको कहेने लगी.. तब पुनम भी मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाती हे.. ओर दयाके साथ अपना सामान लेनेके लीये लखनकी जीपके पीछे चली गइ.. तब भी लखन अ‍ैसे ही बेठा रहा तभी लताने कहा.... अब आगे

लता : (लखनकी ओर देखते) अरे लखन.. क्या कर रहे हे..? पीछे दीदी अपना सामान नीकाल रही हे.. जाइअ‍े उनकी मदद कीजीये.. उनका सामान अंदर लेजाइअ‍े..

कहातो लखन जटसे जीपसे उतर गया.. लखन पुनमकी ओर बीना देखे उनके हाथसे सामान लेता हे.. ओर पुनमके घरकी ओर चल पडा.. तो पुनम ओर दयाभी उनके पीछे चलने लगी.. वहा जाते ही पुनमने दरवाजा खट खटाया.. तो कुछ ही देरमे धिरेनने दरवाजा खोला.. तो सबको देखकर खुस होगया.. ओर लखनको गले मीलकर देवायतकी कारके पास चला गया.. ओर वहा सबके पैर छुने लगा..

तबतक पुनम ओर दया घरके अंदर चली गइ.. तो घरमे पैर रखते ही पुनमको इस घरका सारा राज पता चल गया.. ओर वो थोडी गुस्से होगइ.. तभी लखनने भी पुनमका सामान अंदर रख दीया.. ओर मुडकर बहारकी ओर जाने लगा.. जैसेही पुनकी ओर देखे बगैर सामान रखते बहार जाने लगा.. तब पुनमने उनका हाथ पकडलीया.. तो लखनने हाथ छुडालीया ओर बहार जाने लगा..

तो पुनमने दो तीन बार लखन भैया.. कहेते पुकारा ओर उनको रोकनेकी कीसीस की.. लेकीन लखनने उनकी अ‍ेक बात भी नही सुनी.. यहा तक उसने मुडकर पुनमके सामने तक नही देखा.. ओर बहार जाकर अपनी जीपपे चुपचाप बैठ गया.. तब सृती लखनकी ओर उनकी प्रतीक्रिया देखनेकी कोसीस करने लगी.. तो अंदरकी ओर पुनमकी आंख अ‍ेक बार फीर गीली होगइ..

ओर वो जटसे उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर वहा दरवाजा बंध करके अपने बेड पे बैठकर थोडा जोरोसे रोने लगी.. आज अ‍ेक बार फीर उनको अपने कीये पे पछतावा होने लगा.. तब बहार नीर्मला चंदाको मीलकर धिरेन लखनके पास चला गया.. तो लखन उनको देखकर मुस्कुराने लगा.. तो लता गुस्सेसे धिरेन ओर लखनकी ओर देखने लगी..

तभी लखन धिरेनको गले मीलते लता ओर रमासे छुपकर नीलमकी ओर आंख मारते इसारा करता हे.. तो धिरेन सृतीकी कारकी ओर नीलमको देखते मुस्कुराने लगा.. फीर सब लोग कार लेकर सहेरकी ओर चले गये.. तो धिरेन भी वापस अंदर आगया.. उनका भी जोबपे जानेका टाइम होगया था.. तो वो भी जल्दसे जल्द पुनमको मीलना चाहता था.. ओर वो उपर अपने जाने लगा..

तभी पुनम धिरेनके आनेकी आहट सुनते ही खडी होकर बाथरुममे चली गइ.. ओर अपना मुह पानीसे साफ करते सही होगइ.. जब वापस बहार नीकली.. तब धिरेन उनके इन्तजारमे ही खडा था.. जैसे ही पुनम बहार नीकली धिरेनने उनको अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर पुनमके चहेरेको बेइम्तहा पागलोकी तराह चुमने लगा.. तब पुनम कोइ प्रतीक्रिया दीये बगैर अ‍ैसेही खडी रही.. तो धिरेन थोडा गुस्से होगया..

धिरेन : पुनो.. क्या होगया हे..? क्या अपने पतीके पास आकर तुजे खुसी नही हुइ..? क्यु मुड खराब हे..? लगता हे अभी तक वहा रुकनेका तेरा जी नही भरा हे.. रुकती वहा.. क्यु वापस आइ..?

पुनम : (हथेली दीखाते) धिरेन.. प्लीज ताने मत मारो.. मुने वहा रुकनेका कोइ सौक नही था.. बस ये तो मम्मीके कहेने पे पापाके कार्यके लीये रुकना पडा.. वरना मे उसी दिन वापस आजाती.. ओर आप भी तो वहा नही आते थे.. क्या इतना काममे बीजी थे..?

धिरेन : (थोडा परेसान होते) यार मुजे जोबपे जाना होता हे.. तो वहा सीर्फ खानेके लीये आउ क्या..? जब जब मेरी वहा जरुरत थी तब तो आगया था.. सोरी.. वो.. मे थोडा सख्तीसे बोल गया.. चलो मे जोबपे जाता हु.. तुम थोडा मुड ठीक करलो..

पुनम : (सामने देखते) वो.. आपका नास्ता.. अभी दया बहेनको कहेती हु.. बना देगी..

धिरेन : (मुस्कुराते) नही.. कोइ जरुरत नही.. मेने चाइ नास्ता करलीया हे..

पुनम : (सामने बडी आंखसे देखते धीरेसे) धिरेन.. चाइ नास्ता करलीया हे..? आपने कैसे बनाया..? तो फीर इतने दिन आप खानेके लीये आये नही.. तो फीर आपका खाना..? क्या आपको सब खाना बनाना आता हे..? कही मेरी गेर हाजरीमे आपने कोइ सौतन बौतन तो नही रखली..?

धिरेन : (हडबडाते मुस्कुराते) अरे नही नही.. तुम बीवीया सक बहुत करती हो.. तुम मेरी चीन्ता मत करो.. मेरे खानेका सब इन्तजाम यही होगया था.. दो पहोरको तो सहेरमे ही खालेता था.. ओर सुबहका चाइ नास्ता.. ओर रातका खाना पायल भाभीके वहासे आता था.. या मे वहा उनके घर जाकर खालेता था..

पुनम : (आस्चर्यसे देखते) पायलभाभी..? वो कौन हे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) अरे वो हमारे भीमा अंकलकी बीवी.. भीमा अंकल ओर जीजु साथ मे पढते थे.. ओर उनका अच्छा दोस्त भी हे.. अब जीजु इनको यहाका सरपंच बना रहे हे.. हमारे घरका पुराना नाता भी हे..

पुनम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. ठीक हे.. अब जाइअ‍े.. ओर सुनो.. सामको जल्दीसे आजायेगा.. इतने दिनके बाद तो मे आइ हु.. बस.. थोडासा मुड खराब था तो मेने आपको रोक लीया था.. सोरी..

धिरेन : (मुस्कुराते होठ चुमते) हंम.. ठीक हे.. आजाउगा.. ओर रातको तैयार रहेना.. आज तो पुरी रात तुजे सोने नही दुगा.. आज हम दोनो अ‍ेक बार फीर सुहागरात मनायेगे.. हें..हें..हें..

पुनम : (समरमाते हसते धका मारते) अब जाइये भी.. रातकी बात रातमे करेगे.. ज्यादा रोमेन्टीक होनेकी जरुरत नही हे.. हें..हें..हें.. वरना चंदा भाभीको केह दुगी.. (धीरेसे) सुहागरात मनानी हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (बाहोमे भीचते) अच्छा.. मम्मीकी धमकी दे रही हो.. ठीक हे.. मे रातमे देख लुगा तुजे.. फीर देखना कैसे मुजसे छुटनेकी मनते करती हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (कामुक नजरोसे देखते हसते) हां अब जाओ भी.. आज मे भी देख लुगी.. आप अ‍ेक ही बारमे ढेर होजाते होकी नही.. अब जानेमे लेट नही होता क्या..? अब जाइअ‍े भी.. वरना..

धिरेन : (कामुक नेरोसे देखकर मुस्कुराते) वरना..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) वरना छुटी रखनी पडेगी.. हें..हें..हें.. जाओना बाबा..

कहातो धिरेनने अ‍ेक बार फीर पुनमको अपनी बाहोमे भरके होठोपे कीस कर दीया.. तो पुनमने हसते हुअ‍े उनको धके मारते बहार नीकाल दीया.. तो धिरेन भी खुस होकर मुस्कुराते बहार नीकल गया.. ओर अपनी बाइक लेकर जोबपे चला गया.. क्युकी जबतक धिरेनके साथ हालात बीगड नही जाते तबतक पुनमको धिरेनके साथ अ‍ेक पत्नी जैसा अच्छा व्यवहार करना था.. तब पुनम फ्रेस होकर नीचे आगइ..
 
तो दया कीचनकी सफाइ कर रही थी.. तब पुनम भी नीचेके रुममे चली गइ.. ओर वहाकी सफाइ करने लगी.. पुुरा बेड अस्त व्यस्त था.. तो पुनमको भी अपनी शक्तिओके माध्यमसे पता चल गया था.. की धिरेन अ‍ेक ओरतके साथ रीलेशनमे हे.. इसीलीये इनके साथ यहा सोता होगा.. ओर उसने चदर बदलकर बेडको सही कर दीया.. ओर चदरको लेकर वोस रुममे वोशींग मशीनमे डालने चली गइ.. तभी उसे चदरपे कुछ हल्केसे धब्बे दीखाइ दीये.. तो पुनम उनको सुंघने लगी..

तब उनको धबेकी स्मेल जानी पहेचानी लगी.. लेकीन पुनमने कोइ खास ध्यान नही दीया ओर चदरको वोशींग मशीनमे डालदी.. फीर वहाकी अलमारीकी सफाइ करने लगी.. तब अलमारी के अ‍ेक ड्रोअरमे उनको बहुत सारे कोन्डम ओर कुछ कामोतेजक गोलीके साथ साथ आइपीलकी गोलीया भी हाथ लगी.. तब पुनमने अपनी शक्तिीओके माध्यमसे जो भी जाना वो सब सचाइ सामने आने लगी..

उनके मनमे विचारोका घमासान युध्ध चलने लगा.. धिरेनने अभी नास्ते ओर खानेकी जो बात कही.. तो पुनमको पायल भाभी पे सक होने लगा.. ओर उसे कंन्फर्म करनेके लीये आंख बंध करते बैठ गइ.. फीर मंजुने दी हुइ शक्तिओका इस्तमाल करते सब बाते जानने लगी.. तो धिरेन ओर पायल भाभीकी पुरा पीक्चर सामने आगइ.. पहेले तो पुनम पहेलेतो आग बबुला होने लगी..

फीर कुछ सोचकर वो अचानक सांत होगइ.. ओर मुस्कुराने लगी.. क्युकी अब उसे धिरेनसे छुटनेका रास्ता अनायास ही मील गया था.. ओर पुनमने पायल भाभीकी कुंडली भी जानली.. वो धिरेनकी स्टेमीनाको अच्छी तराह जानती थी.. आखीर धिरेन उनका पती जो था.. वो जानती थी की धिरेनको कामोतेजक की गोलीकी क्यु जरुरत पडती हे.. कुछ ही देरमे ढेर होजाने वाले धिरेनको कामोतेजककी गोलीकी जरुरत पडना लाजमी था..

फीर वो वापस कामपे लग गइ.. ओर लास्टमे जाडुसे सफाइ करके कचरेको डस्टबीनमे डालने जा ही रही थी.. तभी उसे डस्टबीनमे युस कीये हुअ‍े कुछ कोन्डम भी मीले.. अब पुनमको पुरा यकीन होगया.. की धिरेन उनकी गेर हाजरीमे यहा पायल भाभीको ठोकता हे.. तब पुनमको पायलभाभीको देखनेकी इच्छा होने लगी.. ओर उनके बारेमे लखन भैयासे बात करनेकी ठानली.. फीर उसने सब कचरा डस्टबीनमे डाल दीया..

वो खुद धिरेनको रंगे हाथ पकडना चाहती थी.. ओर इसमे दयाकी मदद भी लेनी थी.. तभी उसे लखनकी याद आगइ.. तो उसने लखनको फोन लगा दीया.. लेकीन दो तीन बार ट्राइ करनेके बावजुद भी लखनने फोन नही उठाया.. तब अ‍ेक बार फीर उनकी आंख गीली होगइ.. उनके जहेनसे अब लखन पुरी तराह छा चुका था.. उनको भी पता था की वो लखनके लीये इतना बेचेन क्यु रहेती हे..

ओर इस मामलेमे सीर्फ अ‍ेक लखन ही था.. जो पुनमकी मदद कर सकता था.. पुनम धीरे धीरे अपनी शक्तिओके माध्यमसे सबकुछ जानने लगी थी.. उनको पता था.. की वो इस घरमे ज्यादा दिन रहेने वाली नही हे.. उनको ये भी पता था.. की अब उनकी मंजील देवायत नही लखन हे.. फीर भी उनमे थोडा आत्म विस्वासका अभाव था.. इसीलीये इस मामलेमे बार बार मंजुसे बात करते अपनी बात कन्फोर्म करती थी..
 
तो दुसरी ओर देवायत सृती लखन भी अपनी अपनी कार लेकर सहेरमे पहोंच गये.. ओर सबको लखन सीधा ट्रावेल्सकी ओफीसपे ले गया.. जहासे टुर जाने वाली थी.. सबलोग २० मीनीट पहेले ही पहोंच गये.. वहा जाकर लखनने ओफीसमे सबका सीट नंबर लेलीया.. ओर ड्राइवर ओर बसका नंबर भी लेलीया.. फीर चारोका समान रख दीया.. तब बहुत सारे लोग अपनी जगहपे बैठ गये थे..

तो नीर्मला चंदा सरला काकी ओर भुमीका अ‍ेक बार फीर सबको गले मीलने लगी.. तभी देवायतने अपनी कारसे अ‍ेक छोटीसी केरी बेग नीकालकर नीर्मलाको थमादी.. तब नीर्मलाकी आंख गीली होगइ.. ओर देवायतको थेन्क्स कहेने लगी.. क्युकी जानेकी जल्दीमे नीर्मलाका ध्यान ही नही था.. की जीस कामके लीये जा रही हे.. वो ही भुल गइ.. उस केरी बेगमे राजीवका अस्थी था.. जो नीर्मलाने सम्हालके अपने पास रख लीया..

नीर्मला : (इमोस्नल होते) सोरी देवु.. मेतो भुल ही गइ थी.. क्या आपको याद था..?

देवायत : (मुस्कुराते) नही.. ये सब लखनको याद था.. तो रातको ही लाकर कारमे रख दीया था..

कहातो नीर्मलाने लखनको गले लगा लीया.. ओर आंसु नीकल गये.. तब लखनने हसते नीर्मलाको थोडा जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तभी नीर्मलाको नीचेकी ओर कुछ चुभन हुइ.. तो वो जटसे लखनसे अलग होगइ.. ओर नैन जुकाते लखनके पेन्टकी ओर देखने लगी.. तब नीर्मलाका मुह खुला ही रेह गया.. क्युकी लखनके पेन्टके अंदर ही बहुत बडा उभार दीख रहा था.. तभी सब लोग बसमे बैठने लगे.. तभी..

सृती : मोम.. मौसी सबलोग बैठ रहे हे.. अब आप लोग भी बैठ जाइअ‍े.. ओर अपना खयाल रखीयेगा..

भुमीका : (हसते) अरे हां बाबा.. साथमे चंदा हेनां.. तु क्यु चीन्ता करती हे..? ओर सुन.. जबतक हम वापस नही आजाती तबतक तुम लखनके साथ उनके घरपे ही रहेना.. हमारे घरपे अकेली मत रहेना समजी..?

सृती : (लखनकी ओर देखते) अरे हां मोम.. अब वही रहुगी.. अब आप लोग जाइअ‍े.. हें..हें..हें..

भुमीका : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. तुम सृतीका खयाल रखना.. वो खाने पीनेमे बहुत ही लापरवाह हे.. अगर कुछ नखरे करे तो उसे डांटकर फटकार भी लगाना.. हें..हें..हें..

लखन : (सृतीकी ओर देखकर मुस्कुराते) अरे बुआ.. आप इनकी फीकर मत करो.. इनका खयाल मे खुद रखुगा.. अब आप लोग बसमे बैठ जाइअ‍े.. चलो मे आपकी मदद करता हु..

कहा तो सृती लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. तभी चारो बसमे बैठ गइ तब लखन भी बसमे चडकर उन चारोको अपनी जगाहपे बीठाकर वापस नीचे उतर गया.. ओर कुछ ही देरमे बस चली गइ.. तब देवायतने लता रमा ओर नीलमको अपने साथ कारमे लेलीया.. ओर सबलोग लखनके बंगलोपे आगये.. ओर अ‍ेक अ‍ेक सामान लेकर उतरने लगे.. तब बाकीका सामान उतारनेमे नीलम ओर रमा भी साथ देने लगी..

तब अ‍ेक बार सामान उतरते वहा कोइ नही था तब लखनने रमाके बुब्सको पकडकर छेड दीया.. तब रमा बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर जटसे बंगलेकी ओर देखने लगी.. की वहा कोइ हेतो नही.. जो उन दोनोको देख रहा हो.. तब वहा कोइ नही था.. सब लोग अंदर थे.. तो रमा लखनकी ओर देखकर कातीलाना अंदाजमे मुस्कुराने लगी.. ओर लखनकी ओर आंख मारते इसारोसे अंदर आनेको कहा..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी यहा कोइ सरारत नही.. अगर कीसीने देखलीया होता तो..? अब जो भी करना हो अंदर हमारे कमरेमे.. देखना यहा कीसीको पता ना चले..

लखन : (रमाको सामान देते) अरे भाभी.. यहा कीसीको पता नही चलेगा.. ओर अभी सब लोग अंदर हे.. देखना अब आपको छोडने वाला नही हु..

रमा : (कातील नजरसे मुस्कुराते) हां हां.. पता हे मुजे.. आप अ‍ैसे नही मानोगे.. इसीलीये तो मे यहा आइ हु.. सीर्फ आपके लीये.. अब आपकी जो भी मरजी हो कर लीजीयेगा.. बहुत तडपाया हे आपने अपनी इस भाभीको.. लेकीन हम दोनो अकेले हो तब.. बंध कमरेमे.. समज गयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) हां भाभी.. समज गया.. मुजे हमारी सुहागरात मनाने केलीये इस दिनका बडी बेसब्रीसे इन्तजार था.. देखना अब आपको छोडने वाला नही हु..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) हां.. देखती हु मे.. आप कैसे सुहागरात मनाते हो.. कही अ‍ेक ही बारमे ढेर मत होजाना..

लखन : भाभी.. वो नीलम.. क्या वो आपके साथ ही सोती हेनां..?

रमा : नही.. लता दीदी केह रही थी उन्होने नीलमको अलगसे कमरा देदीया हे.. वैसे भी मैने सुना हे यहा भी बहुत कमरे हे.. सायद छे कमरे हे.. तो हमे मीलनेमे कोइ दिकत नही होगी..

लखन : (मुस्कुराते) हां लेकीन आप नीलमके साथ मत सोना.. आप अलग कमरेमे रहेना.. ताकी हमे मीलनेमे आसानी रहे.. अब चलीये.. अभी भाइ चले जायेगे तब आपको पुरा बंगला दीखाता हु.. अब जब तक आप यहा हे आप मेरी गीरफ्तमे हे.. हें..हें..हें..

रमा : (अंदरकी ओर जाते मुस्कुराते धीरेसे) सीर्फ गीरफ्त मे रखोगे.. या अपनी भाभीको कुछ सहेर मे घुमाओगे भी..? सीर्फ खाली फोकट इस भाभी हाथमे आने वाली नही हे.. हें..हें..हें..

लखज : (सामान लेकर साथ चलते) अरे चलीये तो सही.. आपको पुरा सहेर घुमाउगा.. ओर जो कहोगे सब दीलवाउगा.. क्युकी मुजे वसुल करना भी आता हे.. अब आपको छोडने वाला नही हु..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) चलो हटो बदमास.. देखती हु मे.. अब आप कैसे मेरी खातेदारी करते हो..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. आपकी खातेदारीमे कोइ कशर नही रखुगा.. देखना आप भी मेरी खातीरदारीमे कोइ कशर मत रखना.. फीर देखना आप बार बार इधर आती हो की नही.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते धीरेसे) कहोतो यही रुक जाती हु.. हें..हें..हें.. लखनजी.. प्लीज.. देखना हमारे रीस्तेके बारेमे कीसीको पता ना चले.. ओर हां.. रात मे मेरे रुममे आओ तो जरा मुजे मीस कोल कर देना.. क्युकी कभी कभी नीलु मेरे साथ होती हे.. तो मे उनको उनके रुममे भगा दुगी..
 
दोनोही मस्ती मजाक के साथ फ्लर्ट करते सामान अंदर रखने लगे.. तब लताने नीलमको अपना सामान लास्ट वाले रुममे रखनेको कहा.. लताने नीलमको अ‍ेक लास्ट वाला अलग कमरा ही देदीया ताकी उनको पढाइमे डीस्टर्बना हो.. तब नीलम अपना सब सामान लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो सृती फ्रेस होकर अपनी क्लीनीकपे जानेकी तैयारीया करने लगी.. तभी लता उनके पास आगइ..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. अब आप दो पहोरको यही खानेके लीये आजाइअ‍ेगा.. हम अभी खाना बना लेगी..

सृती : (सामने देखकर मुस्कुराते) नही लता.. अभी तुम लोग अपना सब काम नीपटालो.. सब अच्छेसे सेट करलो.. मे कलसे खाना खाने आजाउगी.. आज मे वही मंगा लुगी.. ओर हां.. मे देवुको भी साथ लेजा रही हु.. हम दोनो वही खा लेगे.. फीर वो वहीसे वापस गांव चले जायेगे.. क्युकी वहा मंजु ओर भावना भी अकेली हे..

लता : (हसते) नही मतलब नही.. अरे बाबा आज यहा हमारा पहेला दिन हे.. तो सुकुनकी खीर बनानी हे.. आप मेरे जेठजीको भी इधर लेकर आइयेगा.. वो भी खाना इधर ही खाकर जायेगे.. मुजे आपके देवरकी डांट नही खानी.. समजी..? हें..हें..हें..

सृती : (हसते) अरे हां बाबा.. मे तो भुल ही गइ.. ठीक हे.. आजाउगी.. ओर तेरे जेठको भी लेआउगी.. बस..? ओर सुन.. (धीरसे) लता.. पुनम दीदीने कहा हे.. इन दोनोको लखनसे मीलनेका पुरा मौका देना.. समजी.. मे उस कमीनीकी चीखे सुनना चाहती हु.. हें..हें..हें..

लता : (हसते धीरेसे) हां दीदी.. मेरी भी यही तम्मना हे.. मेरी पुनम दीदीसे सब बाते हो चुकी हे.. इसीलीये दोनोको मेने नीचे ही ठहेराया हे.. ताकी लखन दोनोको आसानीसे मील सके.. दीदी.. मेने भाभीके रुमकी खीडकी भी खुली रखी हे ओर उपरसे पडदा लगा दीया हे.. ताकी हमे बहारसे देखनेमे आसानी रहे.. हम दोनोका कमरा उपर ही हे.. आप फीकर मत करना.. दीदी.. क्या आपकी मंजुदीदी या पुनम दीदीसे ओर कुछ बात हुइ हे..?

सृती : (सामने देखकर मुस्कुराते धीरेसे) हां.. दोनोसे बात हुइ हे.. तुम फीकर मत करना.. अभी देवु मेरे साथ ही आ रहे हे.. तो मे तेरे बारेमे उनसे बात कर लुगी.. अब तो तेरी पुनो दीदीसे सभी बात हो चुकी हे.. तब तो तुजे ये भी पता लग गया होगा की आगे क्या होने वाला हे.. हंम..?

लता : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) हां दीदी.. मुजे सब कुछ पता हे.. आप फीकर मत करना.. मे कीसी भी रीलेशनसे अ‍ेतराज नही करुगी.. क्युकी आप भी तो मेरे बारेमे सबकुछ जानती हे.. दीदी.. अब आपके देवरको देखना हे.. क्या इस बारेमे आपके देवरको कुछ पता हे..? क्युकी अब तो उनका भी हम सभीके साथ रीलेशन.. मतलब..

सृती : (सरमाते धीरेसे) लता.. मे समज गइ.. की तुम क्या कहेना चाहती हो.. फीकर मत करो.. सायद.. कल रात मंजुसे उनकी बात हो चुकी होगी.. क्युकी मंजु केह रही थी वो उनसे सब बाते कर लेगी.. तो हो सकता हे वो भी सब जानते हो..

लता : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. अगर आप कहोतो इस बारेमे मे लखनसे बात करलु..?

सृती : (मुस्कुराते) वो तुम मंजुको फोन करके पुछ लेना.. अगर उसने नही बताया ओर वो तुजे बतानेकी परमीशन देती हे.. तो तुम देवरजीसे बात कर लेना.. अब हमे कीसी भी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. लता.. फीर भी इस रीलेशनको अ‍ेक्सेप्ट करना इतना आसान भी नही हे.. तु समज गइनां..?

लता : (बहारकी ओर जाते) हां दीदी.. साज गइ.. आप अपने हीसाबसे देखलेना.. दीदी मे चलती हु.. अभी लखनके साथ मार्केट जाना पडेगा.. दुध ओर सब्वीया लेनी हे.. फीर सामको कुछ ओर सामान भी लेने जाना पडेगा.. आज हमारा कोइ सामान सेट नही करना.. वो अब हम आरामसे करती रहेगी.. अभी तो चार पांच दिन रमाभाभी इधर ही हे.. आप जेठजीको लेकर जल्दी आजाइअ‍ेगा..

सृती : (मुस्कुराते) चल ठीक हे.. मे भी नीकलती हु.. क्लीनीकपे जानेका टाइम भी होगया हे..

कहेते सृती भी तैयार होकर बहार नीकल गइ.. तब देवायत लखनको कुछ पैसे दे रहा था.. तब सृती लखनकी ओर देखते मुस्कुराती रही.. फीर देवायत अपनी कारमे सृतीके साथ उनकी क्लीनीकपे चला गया.. ओर लता रजीयाको घरका ध्यान रखनेको कहेकर लखनके साथ मार्केट जानेके लीये उपर तैयार होने चली गइ.. तब रजीया कीचन साफ करते वहाका कुछ सामान भी सेट करने लगी..

तो नीलम अपने रुममे अपना सामान नीकालकर सेट करने लगी.. इसी दौरान लताने फोन लगाकर मंजुलासे बात करली.. तो मंजुने उसे बता दियाकी कल रात ही उनकी लखनसे बात हो चुकी हे.. ओर फीर भी वो इस बारेमे लखनसे बात करना चाहती हे.. तो कर सकती हे.. सुनक लताने इस बारेमे अ‍ेक बार लखनसे बात करनेका नीस्चय करलीया.. ओर वो तैयार होकर नीचे आगइ..

आज लताने ढीला जुडा बांधके रखा था.. जीनकी वजहसे वो बहुत ही कयामत ओर कामुक दीख रही थी.. जो अभी लखनके साथ कारमे बैठकर बाजार जा रही थी.. तब लखन उनकी ओर बार बार देखकर मुस्कुरा रहाथा.. ओर लताको देखकर उनका हथीयार अंगडाइ लेने लगा.. तभी अ‍ेक सुमसान जगहमे जहा लोग नही थे.. तो लखनने कार चलाते लताके होठोको चुम लीया तब लता बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनको रास्ता दीखाते चलनेको इसारा करते हसने लगी.. तभी..
 
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