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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २१३
कहातो देवायत मंजु ओर भावनाके होठोपे बारी बारी कीस करते अपने रुममे चला गया.. ओर फ्रेस होकर बहार आगया.. तब भावना ओर मंजु होलमे सोफेपे देवायतके इन्तजारमे बैठी आपसमे पुनम ओर लखनके बारेमे बाते कर रही थी.. जैसे ही देवायत उनके पास आकर बैठ गया तो मंजुने पुनम ओर धिरेनके बीच सुरुसे यहा आने तक हुआ सारा वाक्या सुना दीया.. जीसे सुनकर थोडी देरतो देवायत भी सोक्ट हो गया.. ओर उसे पुनमकी चीन्ता होने लगी.. तभी.... अब आगे
देवायत : (मनमे) ओह.. गोड.. ये क्या हो गया..? पुनो मुजसे कीतना प्यार करती हे.. मेरा बच्चा भी उनके उदरमे पल रहा हे.. कही धिरेनको इस बातका पता तो नही चल गया होगा..? ये सब मेरी वजहसे तो नही हुआ..? मुजे लगता हे कहीना कही मेरी वजहसे पुनोका घर उजड रहा हे.. नही.. अब मे पुनोसे दुर ही रहुगा.. मंजु ओर पुनो तो बहुत कुछ जानती हे.. पता नही मंजु पुनोके बारेमे मुजे क्या बात करने वाली थी..
मंजुला : (मनकी बात जानते) जानु.. क्या सोच रहे हो..?
देवायत : मंजु.. तुम पुनोके बारेमे क्या यही सब कहेने वाली थी..?
मंजुला : (मुस्कुराते) नही देवु.. सीर्फ यही नही.. मुजे इनके बारेमे कुछ ओर भी बाते करनी हे.. अब आप अब पुनोकी चीन्ता मत करना.. उनकी कीस्मतमे जो लीखा हे वोही सब हो रहा हे..
देवायत : (मुस्कुराते) हां मंजु.. तुजे ओर पुनोको तो सबकुछ पता चल जाता हे.. बोल.. ओर क्या बात करना चाहती थी..?
मंजुला : (अेक नजरसे देखते) जानु.. आपको पता हे पुनो कौन हे..? वो पीछले जन्ममे कीसकी बीवी थी..? ओर इस जन्ममे उसने आपसे क्यो सादी की..?
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? बता.. मुजे यही सब जानना हे.. मंजु.. मुजे लगता हे इस बातके लीये कहीना कही मे भी जीम्वेवार हु.. मे अब पुनोसे दुर ही रहुगा..
मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. इसके लीये आप गील्टी फील मत करो.. जो इनकी किस्मतमे लीखा था वो सब हो चुका.. लेकीन.. हां.. अब आप पुनोसे दुरीया रखना चाहो तो रख सकते हे.. पता हे क्यु..?
देवायत : (आस्चर्यसे सामने देखते) क्यु..? बता मुजे..
मंनुला : (मुस्कुराते) जानु.. तो फीर सुनो.. असलमे पुनो आपकी बीवी थी ही नही.. वो हमारे लखनकी बीवी हे.. जो पुनोके पीछले जन्मकी अेक कामनाकी वजहसे इस जन्ममे आपसे सादी करनी पडी.. जो बाबाने अेक मक्सदसे करवादी.. जो मक्सद अब पुरा हो चुका हे.. जानु.. वो पीछले जन्ममे आपकी बेटी थी.. पीयु.. आपके छोटे भाइ बबलुकी बीवी..
देवायत : (आस्चर्यसे) मंजु.. ये क्या केह रही हो तुम..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानुं.. मेरी बात ध्यानसे सुनो अब..
फीर मंजुने पुनम ओर लखनके पीछले जन्मसे लेकर इस जन्म तक सबकुछ देवायतको बता दीया.. जीसे सुनकर देवायत भी सोक्ट हो गया.. क्युकी पीछले जन्ममे उस राजाने उनको अपनी बेटी माना था.. उसी क्षण देवायतके मनमे पुनमको लेकर थोडा क्षोभ होने लगा.. उनको अफसोस होने लगाकी अपनी ही बेटीके साथ..? बस.. मंजुने बडी ही सीफततासे देवायतको पुनमसे दुर करदीया.. ओर देवायतको पता भी नही चला..
बस.. यही तो मंजु चाहती थी.. ताकी अब पुनम लखनके साथ उनकी बीवी बनकर अपनी लाइफ खुलकर जी सके.. इसी तराह वो लताको भी लखनसे दुर करना चाहती थी.. ताकी लता देवायतके साथ सादी कर सके.. मंजु ये सब काम जल्दसे जल्द नीपटाना चाहती थी.. ओर उसे सबसे बडी टेन्सन सृती भुमीका ओर चंदाकी होने लगी.. क्युकी कुछ ही दिनोमे इन तीनोकी जींदगीमे बहुत बडा भुचाल आने वाला था..
हालाकी मंजुको ये भी पता था की इस मुसीबतको लखन ओर पुनम अच्छी तराहसे सम्हाल लेगे.. फीर भी उनको आने वाले तुफानकी थोडीसी चीन्ता होने लगी.. तो दुसरी ओर उनको भी आभास होने लगा था.. की अब उनके जानेका वक्त नजदीक आने लगा हे.. क्युकी दुसरे जन्ममे उनको खुद अपने ही बेटे विजयकी सोतेली बहेन बनकर अपनी ही छोटी बहेन भावनाकी कोखसे वापस आना था.. जीसके लीये आजकल देवायत ओर भावना बहुत महेनत कर रहे थे..
तो दुसरी ओर सहेरमे सृती भी १० बजे अपनी कार लेकर क्लीनीकपे चली गइ थी.. तो अेक घंटेके बाद लखन भी नीलमको लेकर उनके स्कुल चला गया.. तब नीलम बहुत ही अेक्साइटेड हो रही थी.. क्युकी उसे धिरेनके साथ बात करनेकी बहुत जल्दी थी.. वहा जाकर लखनने उनकी प्रीन्सींपालसे बात करली.. फीर छुटीका समय जानकर वहासे होस्टेलकी ओर नीकल गया..
फीर अपनी होस्टेल वाली बीवीके पास चला गया.. तो पता चला राधीका अपनी मम्मीको लेकर होस्पीटल गइ थी.. ओर वो आज होस्टेलपे आइ ही नही हे.. तो लखन उसे फोन करके सीधा ही होस्पीटल पहोंच गया.. जहा राधीकाने उनकी मम्मीको अेडमीट कीया था.. तो लखनको देखते ही उनके गले लग गइ.. ओर रोने लगी.. तब लखनने उनको सम्हाला.. फीर उनकी मम्मीका हालचाल जाना.. तो पता चलाकी उनकी मम्मीको फीरसे पेरेलीसीसका अेटेक आगया था.. तो सुनकर राधीकाके उपर भडक गया..
लखन : (थोडा गुस्सा होते) राधु.. क्या मुजे इतना पराया कर दीया..? की अेक फोन तक नही कीया..?
राधीका : (आंसु पोछते) लखन.. प्लीज.. आप गुस्सा मत करो.. सबकुछ इतनी जल्दीसे हो गया.. मे जस्ट इनको आधे घंटे पहेले ही यहा लेकर लाइ हु.. जब मे मम्मीको नहेला रही थी.. तब ही ये सब हो गया..
लखन : (हग करते) चलो ठीक हे.. कहा हे मम्मीजी..? चलो उनके पास बैठते हे.. मे अभी लताको फोन करके बताता हु..
राधीका : (थोडी परेसान होते साथ चलते) यार.. अभी उनको मत बताओनां.. वो सब खामखा परेसान हो जायेगे.. अब मम्मीकी तबीयत भी स्थीर हे.. तो सबको क्यु परेसान करना..
लखन : (मुस्कुराते) चुप.. अेक दम चुप.. राधु.. मत भुलो अब तुम हमारे खानदानकी बहु हो.. अगर मैने घरपे नही बताया तो उल्टा सब लोग मुजे डांटेगे.. क्या तुम मुजे सबकी डांट खीलवाना चाहती हो..?
राधीका : (सरमाते हसते) नही.. चलीये इधर रुममे मम्मी हे.. देखना आपको देखकर खुस होजायेगी.. पता नही होस्टेलपे क्या हाल होगा..
लखन : (मुस्कुराते साथ चलते) राधु.. तु वहाकी फीकर मत कर.. मे दो पहोरको खाना खाकर होस्टेलपे चला जाउगा.. ओर वहा चकर लगाता रहुगा.. अभी तो मेरा काम फोनपे ही चल जाता हे.. तो वही बैठकर काम करता रहुगा.. मेरी ओफीस बादमे खोलुगा..
राधीका : (प्यारसे लखनकी ओर मुस्कुराते) लखन.. थेन्क्स..
लखन : (मुस्कुराते सरपे टपली मारते) तु बहुत बीगड गइ हे.. कभी पतीको थेन्क्स कहेते हे..? चल आजा..
कहातो राधीका सरमाके हसने लगी.. ओर दोनो रुममे चले गये.. तो राधीकाकी मम्मी लखनको देखते ही खुस होजाती हे.. फीर लखनने लता ओर सृतीसे बात करते सबकुछ बता दीया.. तो रजीयाने घरपे ही उन लोगोका खाना भी बना दीया.. तबतक लता ओर रमाने घरका बहुत सारा सामान सेट करलीया था.. जब दो पहोरको सृती घरपे खानेके लीये आइ.. तब लखन भी घरपे आ चुका था.. फीर सब मीलकर खाना खाने बैठ गये.. तभी..
लता : दीदी.. आपके देवर नीलुको छोडने गये तब राधीका दीदीको मीलने गये थे.. तो पता चला उनकी मम्मीको फीरसे पेरेलीसीसकी असर होगइ हे.. तो दोनो मां बेटी अभी होस्पीटलमे हे..
सृती : देवरजी.. तब तो दोनो मां बेटी अकेली होगी.. हमे उनके पास जाना चाहीये.. क्युकी अब तो वो भी आपकी बीवी हे.. तो हमारा फर्ज बनता हे.. हम मुसीबतके वक्त उनके साथ रहे..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. मे अभी तक उनके पास ही था.. ओर रजीयाने उनका टीफीन भी तैयार करदीया हे.. मे खाना खाकर अभी टीफीन लेकर जाता हु.. सीफ राधुका टीफीन ही हे.. उनकी मम्मीको वहाका खाना खीलाना हे..
सृती : (मोकेका फायदा उठाकर) अरे.. तो चलो मे भी आती हु.. हमारी समधनकी खबर भी पुछ लुगी.. ओर मेरी देवरानीसे भी मील लुगी.. हें..हें..हें..
लता : (हसते) दीदी.. मे भी साथ चलती हु.. देखु तो सही मेरी सौतन कैसी हे.. हें..हें..हें.. तबतक भाभी थोडा आराम कर लेगी.. आज उन्होने बहुत काम कीया हे..
ओर इनके बाद लता सृती ओर लखन टीफीन लेकर होस्पीटल चले गये.. तो वहा लता सृतीको देखकर राधीका बहुत सरमाइ.. ओर सृतीने उनको देखते ही अपने गले लगालीया.. फीर लता भी उनको गले मीली.. फीर राधीकाने उनकी मम्मीका परीचय करवाया.. तब राधीकाकी मम्मी बहुत ही खुस होगइ.. क्युकी ये जानकर की इनकी बेटीको लखनके परीवारने स्वीकार करलीया था..
तब राधीका ओर लता सृती हस हसके बाते करने लगी.. तो लखन राधीकाकी टांगे खीचकर उनकी मस्तीया करते राधीकाकी मम्मीको खुब हसा रहा था.. जीसे देखकर राधीका के साथ सृती भी बहुत खुस हो रही थी.. अब सृतीकी नजरमे लखनके लीये फीलीग्स बदल गइ थी.. ओर वो लखनकी ओर ज्यादा ढलने लगी थी.. तो वो कातील नजरोसे लखनकी ओर देखते हसती रही.. ओर लखनको रीजानेकी कोसीस करने लगी..
फीर राधीकाने खाना खालीया तो तीनो वापस घरपे आगये.. इसी दौरान सृतीने कइ बार लखनसे बाते करते उनसे नजदीया बढाइ.. अब तो लखन भी पहेलेकी तराह सृतीसे हस हसके खुलकर बाते करने लगा था.. ओर अपने अपने रुममे आराम करने चले गये.. फीर दो घंटे आराम करके सृती वापस अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. तो लखन भी वापस राधीकाके होस्टेल पे चला गया ओर उनकी ओफीसमे जाकर बैठ गया..
अध्याय - २१३
कहातो देवायत मंजु ओर भावनाके होठोपे बारी बारी कीस करते अपने रुममे चला गया.. ओर फ्रेस होकर बहार आगया.. तब भावना ओर मंजु होलमे सोफेपे देवायतके इन्तजारमे बैठी आपसमे पुनम ओर लखनके बारेमे बाते कर रही थी.. जैसे ही देवायत उनके पास आकर बैठ गया तो मंजुने पुनम ओर धिरेनके बीच सुरुसे यहा आने तक हुआ सारा वाक्या सुना दीया.. जीसे सुनकर थोडी देरतो देवायत भी सोक्ट हो गया.. ओर उसे पुनमकी चीन्ता होने लगी.. तभी.... अब आगे
देवायत : (मनमे) ओह.. गोड.. ये क्या हो गया..? पुनो मुजसे कीतना प्यार करती हे.. मेरा बच्चा भी उनके उदरमे पल रहा हे.. कही धिरेनको इस बातका पता तो नही चल गया होगा..? ये सब मेरी वजहसे तो नही हुआ..? मुजे लगता हे कहीना कही मेरी वजहसे पुनोका घर उजड रहा हे.. नही.. अब मे पुनोसे दुर ही रहुगा.. मंजु ओर पुनो तो बहुत कुछ जानती हे.. पता नही मंजु पुनोके बारेमे मुजे क्या बात करने वाली थी..
मंजुला : (मनकी बात जानते) जानु.. क्या सोच रहे हो..?
देवायत : मंजु.. तुम पुनोके बारेमे क्या यही सब कहेने वाली थी..?
मंजुला : (मुस्कुराते) नही देवु.. सीर्फ यही नही.. मुजे इनके बारेमे कुछ ओर भी बाते करनी हे.. अब आप अब पुनोकी चीन्ता मत करना.. उनकी कीस्मतमे जो लीखा हे वोही सब हो रहा हे..
देवायत : (मुस्कुराते) हां मंजु.. तुजे ओर पुनोको तो सबकुछ पता चल जाता हे.. बोल.. ओर क्या बात करना चाहती थी..?
मंजुला : (अेक नजरसे देखते) जानु.. आपको पता हे पुनो कौन हे..? वो पीछले जन्ममे कीसकी बीवी थी..? ओर इस जन्ममे उसने आपसे क्यो सादी की..?
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? बता.. मुजे यही सब जानना हे.. मंजु.. मुजे लगता हे इस बातके लीये कहीना कही मे भी जीम्वेवार हु.. मे अब पुनोसे दुर ही रहुगा..
मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. इसके लीये आप गील्टी फील मत करो.. जो इनकी किस्मतमे लीखा था वो सब हो चुका.. लेकीन.. हां.. अब आप पुनोसे दुरीया रखना चाहो तो रख सकते हे.. पता हे क्यु..?
देवायत : (आस्चर्यसे सामने देखते) क्यु..? बता मुजे..
मंनुला : (मुस्कुराते) जानु.. तो फीर सुनो.. असलमे पुनो आपकी बीवी थी ही नही.. वो हमारे लखनकी बीवी हे.. जो पुनोके पीछले जन्मकी अेक कामनाकी वजहसे इस जन्ममे आपसे सादी करनी पडी.. जो बाबाने अेक मक्सदसे करवादी.. जो मक्सद अब पुरा हो चुका हे.. जानु.. वो पीछले जन्ममे आपकी बेटी थी.. पीयु.. आपके छोटे भाइ बबलुकी बीवी..
देवायत : (आस्चर्यसे) मंजु.. ये क्या केह रही हो तुम..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानुं.. मेरी बात ध्यानसे सुनो अब..
फीर मंजुने पुनम ओर लखनके पीछले जन्मसे लेकर इस जन्म तक सबकुछ देवायतको बता दीया.. जीसे सुनकर देवायत भी सोक्ट हो गया.. क्युकी पीछले जन्ममे उस राजाने उनको अपनी बेटी माना था.. उसी क्षण देवायतके मनमे पुनमको लेकर थोडा क्षोभ होने लगा.. उनको अफसोस होने लगाकी अपनी ही बेटीके साथ..? बस.. मंजुने बडी ही सीफततासे देवायतको पुनमसे दुर करदीया.. ओर देवायतको पता भी नही चला..
बस.. यही तो मंजु चाहती थी.. ताकी अब पुनम लखनके साथ उनकी बीवी बनकर अपनी लाइफ खुलकर जी सके.. इसी तराह वो लताको भी लखनसे दुर करना चाहती थी.. ताकी लता देवायतके साथ सादी कर सके.. मंजु ये सब काम जल्दसे जल्द नीपटाना चाहती थी.. ओर उसे सबसे बडी टेन्सन सृती भुमीका ओर चंदाकी होने लगी.. क्युकी कुछ ही दिनोमे इन तीनोकी जींदगीमे बहुत बडा भुचाल आने वाला था..
हालाकी मंजुको ये भी पता था की इस मुसीबतको लखन ओर पुनम अच्छी तराहसे सम्हाल लेगे.. फीर भी उनको आने वाले तुफानकी थोडीसी चीन्ता होने लगी.. तो दुसरी ओर उनको भी आभास होने लगा था.. की अब उनके जानेका वक्त नजदीक आने लगा हे.. क्युकी दुसरे जन्ममे उनको खुद अपने ही बेटे विजयकी सोतेली बहेन बनकर अपनी ही छोटी बहेन भावनाकी कोखसे वापस आना था.. जीसके लीये आजकल देवायत ओर भावना बहुत महेनत कर रहे थे..
तो दुसरी ओर सहेरमे सृती भी १० बजे अपनी कार लेकर क्लीनीकपे चली गइ थी.. तो अेक घंटेके बाद लखन भी नीलमको लेकर उनके स्कुल चला गया.. तब नीलम बहुत ही अेक्साइटेड हो रही थी.. क्युकी उसे धिरेनके साथ बात करनेकी बहुत जल्दी थी.. वहा जाकर लखनने उनकी प्रीन्सींपालसे बात करली.. फीर छुटीका समय जानकर वहासे होस्टेलकी ओर नीकल गया..
फीर अपनी होस्टेल वाली बीवीके पास चला गया.. तो पता चला राधीका अपनी मम्मीको लेकर होस्पीटल गइ थी.. ओर वो आज होस्टेलपे आइ ही नही हे.. तो लखन उसे फोन करके सीधा ही होस्पीटल पहोंच गया.. जहा राधीकाने उनकी मम्मीको अेडमीट कीया था.. तो लखनको देखते ही उनके गले लग गइ.. ओर रोने लगी.. तब लखनने उनको सम्हाला.. फीर उनकी मम्मीका हालचाल जाना.. तो पता चलाकी उनकी मम्मीको फीरसे पेरेलीसीसका अेटेक आगया था.. तो सुनकर राधीकाके उपर भडक गया..
लखन : (थोडा गुस्सा होते) राधु.. क्या मुजे इतना पराया कर दीया..? की अेक फोन तक नही कीया..?
राधीका : (आंसु पोछते) लखन.. प्लीज.. आप गुस्सा मत करो.. सबकुछ इतनी जल्दीसे हो गया.. मे जस्ट इनको आधे घंटे पहेले ही यहा लेकर लाइ हु.. जब मे मम्मीको नहेला रही थी.. तब ही ये सब हो गया..
लखन : (हग करते) चलो ठीक हे.. कहा हे मम्मीजी..? चलो उनके पास बैठते हे.. मे अभी लताको फोन करके बताता हु..
राधीका : (थोडी परेसान होते साथ चलते) यार.. अभी उनको मत बताओनां.. वो सब खामखा परेसान हो जायेगे.. अब मम्मीकी तबीयत भी स्थीर हे.. तो सबको क्यु परेसान करना..
लखन : (मुस्कुराते) चुप.. अेक दम चुप.. राधु.. मत भुलो अब तुम हमारे खानदानकी बहु हो.. अगर मैने घरपे नही बताया तो उल्टा सब लोग मुजे डांटेगे.. क्या तुम मुजे सबकी डांट खीलवाना चाहती हो..?
राधीका : (सरमाते हसते) नही.. चलीये इधर रुममे मम्मी हे.. देखना आपको देखकर खुस होजायेगी.. पता नही होस्टेलपे क्या हाल होगा..
लखन : (मुस्कुराते साथ चलते) राधु.. तु वहाकी फीकर मत कर.. मे दो पहोरको खाना खाकर होस्टेलपे चला जाउगा.. ओर वहा चकर लगाता रहुगा.. अभी तो मेरा काम फोनपे ही चल जाता हे.. तो वही बैठकर काम करता रहुगा.. मेरी ओफीस बादमे खोलुगा..
राधीका : (प्यारसे लखनकी ओर मुस्कुराते) लखन.. थेन्क्स..
लखन : (मुस्कुराते सरपे टपली मारते) तु बहुत बीगड गइ हे.. कभी पतीको थेन्क्स कहेते हे..? चल आजा..
कहातो राधीका सरमाके हसने लगी.. ओर दोनो रुममे चले गये.. तो राधीकाकी मम्मी लखनको देखते ही खुस होजाती हे.. फीर लखनने लता ओर सृतीसे बात करते सबकुछ बता दीया.. तो रजीयाने घरपे ही उन लोगोका खाना भी बना दीया.. तबतक लता ओर रमाने घरका बहुत सारा सामान सेट करलीया था.. जब दो पहोरको सृती घरपे खानेके लीये आइ.. तब लखन भी घरपे आ चुका था.. फीर सब मीलकर खाना खाने बैठ गये.. तभी..
लता : दीदी.. आपके देवर नीलुको छोडने गये तब राधीका दीदीको मीलने गये थे.. तो पता चला उनकी मम्मीको फीरसे पेरेलीसीसकी असर होगइ हे.. तो दोनो मां बेटी अभी होस्पीटलमे हे..
सृती : देवरजी.. तब तो दोनो मां बेटी अकेली होगी.. हमे उनके पास जाना चाहीये.. क्युकी अब तो वो भी आपकी बीवी हे.. तो हमारा फर्ज बनता हे.. हम मुसीबतके वक्त उनके साथ रहे..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. मे अभी तक उनके पास ही था.. ओर रजीयाने उनका टीफीन भी तैयार करदीया हे.. मे खाना खाकर अभी टीफीन लेकर जाता हु.. सीफ राधुका टीफीन ही हे.. उनकी मम्मीको वहाका खाना खीलाना हे..
सृती : (मोकेका फायदा उठाकर) अरे.. तो चलो मे भी आती हु.. हमारी समधनकी खबर भी पुछ लुगी.. ओर मेरी देवरानीसे भी मील लुगी.. हें..हें..हें..
लता : (हसते) दीदी.. मे भी साथ चलती हु.. देखु तो सही मेरी सौतन कैसी हे.. हें..हें..हें.. तबतक भाभी थोडा आराम कर लेगी.. आज उन्होने बहुत काम कीया हे..
ओर इनके बाद लता सृती ओर लखन टीफीन लेकर होस्पीटल चले गये.. तो वहा लता सृतीको देखकर राधीका बहुत सरमाइ.. ओर सृतीने उनको देखते ही अपने गले लगालीया.. फीर लता भी उनको गले मीली.. फीर राधीकाने उनकी मम्मीका परीचय करवाया.. तब राधीकाकी मम्मी बहुत ही खुस होगइ.. क्युकी ये जानकर की इनकी बेटीको लखनके परीवारने स्वीकार करलीया था..
तब राधीका ओर लता सृती हस हसके बाते करने लगी.. तो लखन राधीकाकी टांगे खीचकर उनकी मस्तीया करते राधीकाकी मम्मीको खुब हसा रहा था.. जीसे देखकर राधीका के साथ सृती भी बहुत खुस हो रही थी.. अब सृतीकी नजरमे लखनके लीये फीलीग्स बदल गइ थी.. ओर वो लखनकी ओर ज्यादा ढलने लगी थी.. तो वो कातील नजरोसे लखनकी ओर देखते हसती रही.. ओर लखनको रीजानेकी कोसीस करने लगी..
फीर राधीकाने खाना खालीया तो तीनो वापस घरपे आगये.. इसी दौरान सृतीने कइ बार लखनसे बाते करते उनसे नजदीया बढाइ.. अब तो लखन भी पहेलेकी तराह सृतीसे हस हसके खुलकर बाते करने लगा था.. ओर अपने अपने रुममे आराम करने चले गये.. फीर दो घंटे आराम करके सृती वापस अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. तो लखन भी वापस राधीकाके होस्टेल पे चला गया ओर उनकी ओफीसमे जाकर बैठ गया..