Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 60 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१५

ओर वो भी पायलके साथ जडने लगा.. दोनो ही अपने चरम सुख पे पहोंच गये.. पायलने अपने दोनो पैरसे धिरेनकी कमरपे आंटी लगाली.. ओर भारी सांसोसे धिरेनकी पीठको सहेलाती अ‍ैसे ही पडी रही.. तो धिरेन भी पायलके बुब्सपे सर रखते ढेर हो गया था.. इसी दौरान दयाने पुरी फील्म सुट करली थी.. तो पुनम भी दोनोकी चुदाइ देखकर काफी उतेजीत हो चुकी थी.. ओर दयाके पीछे खडी रहेकर अपनी चुतको सहेला रही थी.. तभी.... अब आगे

दया : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. दोनोका सुटींग हो गया..

पुनम : (धीरेसे कानमे) दया बहेन चलो अंदर.. आज दोनोको रंगे हाथ पकडनेका अच्छा मौका हे.. अ‍ैसा मौका बार बार नही मीलता.. आप इस क्लीपको मेरे फोनपे सेन्ड करदो.. चलो..

दया : (हाथ पकडकर थोडी दुर लेजाते धीरेसे) नही दीदी.. अभी पकडेगे तो बडा हंगामा होजायेगा.. हमे दिमागसे काम लेना हे.. अगर जगडा बढ गया तो हमे रातको ही वापस जाना होगा.. ओर बडे भैया ओर लखन भैया भी नही हे.. तो रातको अकेले जाना ठीक नही हे.. हम जैसे भी करते आजकी रात नीकालते हे.. आप जीजुको सुबह ये क्लीप दीखाकर बात कर लेना.. तबतक हो सकता हे सुबह तक लखन भैयासे भी बात होजाये..

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. बात तो आपकी सही हे.. ये लखन भैयासे बात करनेका अच्छा मौका हे.. हम अ‍ैसा ही करेगे.. तो फीर अभी तो हमे इस कुतीयाको जाना देना पडेगा.. हम धिरेनको सुबह ही नीपट लेगे.. दया बहेन.. आज रात आप हमारा बोरीया बीस्तरा बांधलो.. हो सकता हे हमे सुबह ये घरको छोडना पडेगा..

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दया : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. आपकोतो सबकुछ पता चल जाता हे.. क्या सचमे सुबह आप जीजुसे अलग होजायेगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. मेरी मंजील यहा धिरेन नही हे.. लेकीन हम इतनी जल्दी अलग हो जायेगे इतनी उमीद नही थी..

दया :(मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर हमे थोडी देर यहा वेइट करना पडेगा..

कहातो पुनम वापस धीरेसे दबे पाव खीडकीके पास चली गइ.. ओर अंदर छुपकेसे जांकने लगी.. तो पायल खडी रहेकर अपना पेटीकोट पहेनकर ब्लाउस पहेन रही थी.. तब धिरेन अपने कपडे पहेनते उनके पीछे चला गया.. ओर पीछेसे ही पायलको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके गलेको चुमने लगा.. तो पायल मदहोस होते सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर ब्लाउसके बटन बंध करके धिरेनकी ओर पलटकर उनकी बाहोमे समा गइ..

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पायल : (होंठ चुमते) जानु.. मत छेडोना.. फीर मुजसे रहा नही जायेगा.. ओर अभी आपकी बीवी भी आजायेगी..

धिरेन : नही डार्लींग.. अब आजाये तो भी उनसे डरनेकी जरुरत नही हे.. क्युकी मे उनको डिवोर्स दे रहा हु..

पायल : (चोंकते) अरे..? पागल होगये हो क्या..? कीतनी खुबसुरत बीवी मीली हे आपको..? कही ये सब आप मेरे लीये तो नही कर रहे..? देखना बाबा अगर आपके भाइको पता चला तो वो तो मुजे जानसे मार देगे..

धिरेन : (मुस्कुराते गाल चुमते) अरे नही नही भाभी.. आप गलत समज रही हे.. मे ये सब आपके लीये नही कर रहा.. बीवी अगर खुबसुरत होती हे तो भी कुछ नही होता.. अ‍ैसा प्यार भीतो मीलना चाहीये जो मुजे आपसे मीलता हे.. (थोडा जुठ बोलते) मुजे पता हे.. आप भीमा भाइको नही छोड सकती.. वरना मे आपसे ही सादी कर लेता.. हें..हें..हें..

पायल : (सरमाते धीरेसे) हटो पागल.. अगर पहेले मीले होते तो मे जरुर आपसे सादी करलेती.. देवरजी.. देवरानी कीतनी खुबसुरत ओर अच्छी हे.. कीसी अप्सरासे कम नही लगती.. तो फीर आप उसे क्यु छोडना चाहते हो..? मुजे नही लखता वो आपको प्यार नही देती होगी.. दोनोके बीच जमती नही हे क्या..? की उनका कही ओर चकर हे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. यही समजलो.. क्युकी वो मुजे ज्यादा सेक्स नही करने देती.. मुजे लगता हे वो कीसी ओरको प्यार करती हे.. ओर उसने मुजसे कीसी मजबुरीमे सादी की हे.. मुजे तो सक हे अभी जो उनके पेटमे बच्चा पल रहा हे.. सायद वो भी मेरा नही हे..

पायल : (सोक्ट होते) देवरजी.. ये आप क्या अनाप सनाप बोल रहे हे..? मेरी देवरानी अ‍ैसी दिखती तो नही हे..? सायद आपको कुछ गलत फेहमी हे.. ओर अगर वो प्रेगनेन्ट हे.. तो फीर वो आपको डिवोर्स क्यु देगी..?
 
धिरेन : (कातील मुस्कानसे) भाभी.. देखना वो जरुर देगी.. मेरे पास पुरा प्लान हे.. ओर मेने तो मेरे डिवोर्स पेपर भी रेडी रखे हे.. बस.. मौका मीलते ही उनसे साइन करवा लुगा..

पायल : (साडी पहेनते) देवरजी.. बडे कमीने हो आप.. कीतनी अच्छी बीवी मीली हे आपको.. मुजे लगता हे.. उनको छोडनेका कारण कुछ ओर ही हे.. आपकी मम्मीकी ननंद हेनां.. आपके भाइ केह रहे थे उनके दोस्त तो वहाके राजा हे.. वो बहुत रहीस हे.. ये उसीकी बहेन हेनां..? तो फीर क्यु छोड रहे हो..?

धिरेन : (थोडा गुसेसे) भाभी.. आपको पता नही उन कमीनोने हमारे साथ क्या कीया.. उसने मेरी मम्मीको अपने जुठे प्यारमे फसाकर फायदा उठाया.. मेरी गैर हाजरी मे रोज आकर मेरी मम्मीको ठोकते थे.. तभी मैने ठान लीया था.. की मे भी इनकी बहेनको ठोकुगा.. ओर उसे प्रेगनेन्ट करके छोड दुगा.. ताकी कमीनेको पता चले.. की कीसीकी मांको फसाकर ठोकनेमे क्या होता हे.. लेकीन कमीनीने हमारी सादीसे पहेले ही मुजे सेक्स करनेको मना करदीया.. ओर मुजे मजबुरन उनसे सादी करनी पडी..

पायल : (कपडे पहेनकर पलटते) हंम.. तो ये बात हे.. देवरजी.. बुरा मत मानीयेगा.. मे तो आपको अ‍ेक अच्छा इन्सान समजती थी.. लेकीन आपकी सोच इतनी घटीया होगी मुजे नही पता था.. पता हे मैने आपसे क्यु रीलेशन रखा..? क्युकी हम ओरतोकी अ‍ेक जरुरत होती हे.. जो मुजे मेरे पतीसे नही मीलती.. ओर मुजे तो अ‍ेक बच्चेकी चाहत हे.. सोचा मे आपसे रीलेशन रखते अपनी चाहत पुरी करुगी.. लेकीन आपतो..

धिरेन : (कपडे पहेनकर पास आते) नही भाभी.. आप मुजे गलत समज रही हे.. मे आपसे सचमें प्यार करता हु..

पायल : (थोडी दुर जाते) देवरजी.. बुरा मत मानीयेगा.. क्या आप प्यारका मतलब भी जानते हे..? प्यार तो वो होता हे.. जो अ‍ेक दुसरेके प्रती समर्पीत होते हे.. ओर अ‍ेक दुसरेके लीये त्याग भावना रखते हे.. ना ही आपकी तराह दुस्मनी नीकाले.. आप मुजसे प्यार करते हेनां..? चलो मे आपके भाइको छोड दुगी.. वैसे भी आप अपनी बीवीको डीवोर्सतो देही रहे हो.. करलो मुजसे सादी.. मे वादा करती हु जींदगी भर आपका साथ नही छोडुगी.. कहीये.. हम कब कर रहे हे सादी..?

धिरेन : (थोडा सकपकाते) अरे भाभी.. ये क्या बात हुइ..? इतनी जल्दी कैसे..? मुजे थोडा सोचनेका वक्ततो दीजीये.. ओर मे भीमाभाइको कैसे धोखा दे सकता हु..?

पायल : (अ‍ेक नजरसे देखते) क्यु.. ? अभी तो आपने कहानां..? की मे आपसे सचा प्यार करता हु..? अपने भीमा भाइकी बीवीको ठोक तो रहे हो.. तो ये धोखा नही हे..? लेकीन उनसे सादी नही कर सकते.. उनकी बीवीके साथ बीस्तर गरम करके भीमा भाइको धोखा तो दे रहे हे.. हंम..? तुम मर्द जातको मे अच्छी तराह जानती हु.. आप लोगोको सीर्फ मजे करने हे.. आप लोग ओरतोको सीर्फ मजे करनेका साधन समजते हे.. देवरजी.. आपको मेरी कसम.. सच बताओ आप देवरानीको कीसके लीये छोड रहे हे..?

धिरेन : (कंधेपे हाथ रखते) भाभी.. कसम मत दो.. मे.. मे.. मेरे दुसरे जीजुकी लडकीसे प्यार करता हु.. नीलम नाम हे उनका.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे बहुत प्यार करते हे.. ओर हम दोनो आपसमे सादी करना चाहते हे..

पायल : (सामने देखते) हंम..? अब समजी.. की आप देवरानीको क्यु छोडना चाहते हो.. कीतने घटीया इन्सान हो आप.. अ‍ेक लडकीके लीये बेचारी अ‍ेक मासुम बीवीपे जुठा इल्जाम लगाते आपको सरम नही आइ..? कल अगर आपने उस लडकीसे सादी करली.. ओर उसे हम दोनोके रीस्तोके बारेमे पता चल गया.. जीनकी वजहसे वो आपको छोडके चली गइतो..? तो फीर आप क्या करोगे..?

धिरेन : (बाहोमे भरते) नही भाभी.. इनको हमारे रीस्तेके बारेमे कभी पता नही चलेगा.. क्युकी उनको मे सहेरमे मेरे दुसरे घरपे ही रखुगा.. ओर यहा तो आप हे ही.. हें..हें..हें..

पायल : (दुर हटते) हंम.. दुर रहो मुजसे.. मतलब यहा आप मुजे अपनी रखेलकी तराह रखना चाहते हे.. की जब चाहा आप यहा आकर मुजे ठोक सके.. देवरजी.. मे कोइ रंडी नही हु.. जीसे जब चाहा यहा आकर भोग लीया.. मेरा आपके साथ रीलेशन रखनेका कुछ ओर ही कारण था.. ताकी मुजे लोगोके बांजके ताने सुनना ना पडे लेकीन आजसे हम दोनोका रीस्ता खतम.. आजके बाद मुजे फोन भी मत करना..

धिरेन : (बाहोमे भरते) भाभी.. मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. मे सचमे आपसे प्यार करता हु.. अगर आप कहोगी तो हमारा बच्चा भी होगा.. मे आपको कभी नही छोडुगा.. आइ प्रोमीस..

पायल : (धका मारते दुर जाते) मत छुओ मुजे.. मुजे अफसोस हेकी मेने आपके साथ रीलेशन रखा.. अरे वो मेरी देवरानी तो बेचारी कुछ जानती भी नही हे.. वो कीतना प्यार करती हे आपसे.. ओर आपकोतो पता हेनां आपकी मम्मी अ‍ेक विधवा थी.. जो इतने बरसो तक अपनी इच्छाओको दबाये रखी थी..

अगर इनको कीसी मर्दसे थोडासा प्यार मील भी गया तो क्या बुराइ हे..? क्या उसने आपकी मम्मीको रंडीकी तराह इस्तमाल कीया..? नहीनां..? अरे उन दोनोका प्यार तो सचा था.. जो उसने आपकी मम्मीसे सादी भी करली.. ओर आज वो अ‍ेक सुहागनकी जींदगी गुजार रही हे.. कभी वहा जाकर देखना वो कीतनी खुस हे..

धिरेन : (पास आते) भाभी.. प्लीज..

पायल : (थोडा गुस्सेसे) मत छुओ मुजे.. मुजसे दुर रहो.. मे कोइ रंडी नही हु.. जो आप समज रहे हे.. आजके बाद हम दोनोका रीलेशन खतम.. मुजे कभी कोल भी मत करना.. मुजे तो आपकी बीवीपे तरस आ रही हे.. जीनका तुम जैसे घटीया इन्सानसे पाला पडा हे.. जा रही हु में..

कहेते पायल गुस्सा करते बहार जाने लगी.. तो पुनम दोनोकी बाते सुनकर सोक्ट होगइ.. ओर वो दोडकर आगेकी ओर आते दरवाजा खटखटाने जा ही रही थी तभी पायलने दरवाजा खोल दीया.. तो सामने पुनमको देखकर चोंक गइ.. ओर थोडा गभराने लगी.. तभी पुनम उनका हाथ पकडकर वापस अंदर ले गइ.. ओर पीछे दया भी अंदर आगइ.. तब पायल सीर्फ डरते पुनमकी ओर ही देख रही थी.. तभी..
 
पुनम : (प्यारसे गले लगाते) भाभी.. थेन्क्स.. मुजे माफ कर दीजीये.. मैने आपको कीतना गलत समजा था.. मेने सोचा थाकी आप अ‍ेक हवसखोर ओरत हे.. जो मेरे पतीको फसाया हे.. लेकीन मे गलत थी.. मेने आप दोनोकी सभी बाते सुनली.. हवसखोर आप नही मेरा पती हे..

पायल : (आंख गीली करते) नही देवरानीजी.. मे हवसखोर नही हु.. ये सब मेने अ‍ेक बच्चेके लीये कीया था.. जो इस धोखे बाज नामर्दका काम नही हे.. आज मेने देखली इनकी मर्दानगी.. जो अ‍ेक ओरतको सीर्फ मजा करनेका साधन समजता हे.. इनकी सोच कीतनी घटीया हे..

पुनम : (गले लगते) बस.. बस भाभी.. अब कुछ मत बोलीये.. मेरे पती हे वो.. मेने आप दोनोकी पुरी बात सुनली हे.. अब जो भी हुआ सब भुल जायेइये.. मुजे आपसे कोइ गीला सीकवा नही हे.. आपको बच्चा चाहीनां..? मे वादा करती हु.. अब आप बांज नही रहेगी.. मे आपको अ‍ेक बच्चा दिलवाउगी..

पायल : (जटसे अलग होते) नही देवरानीजी.. ये आप क्या बोल रही हे..? नही चाहीये मुजे बच्चा.. ओर कमसे कम इस कमीनेसे तो बीलकुल नही..

पुनम : (अलग होते) भाभी.. अब आप आरामसे घर जाइये.. मे कल सुबह अपने घर जानेसे पहेले आपको मीलकर जाउगी.. तब आपको सब कुछ बता दुगी.. जाइअ‍े..

पायल : (आस्चर्यसे देखते) देवरानीजी..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अब देवरानीजी नही.. दीदी कहीये.. क्युकी कलसे मे इस आदमीकी बीवी नही रहुगी.. वो जहा कहेगे साइन करदुगी.. ओर गभराइअ‍े मत.. इस रीस्तेके बारेमे कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. विस्वास कीजीये मुजपे..

पायल : (जटसे बहार नीकलते) दीदी.. थेन्क्स..

कहेते पायाल बीना मुडके धिरेनकी ओर देखे बगैर बहार नीकल गइ.. ओर अपने घर चली गइ.. तबतक धिरेन रुमके दरवाजेके पास खडे रहेकर सोक्ट होते सबकुछ देखता रहा.. उसे पता ही नही चला की बातो ही बातोमे इतना कुछ हो गया.. धिरेनको पता चल गयाकी उनकी सारी करतुत पुनमको पता चल गइ हे.. अब धिरेनके पास सचाइका सामना करनेके अलावा कोइ चारा नही था..

तो वो भी पीछे हटनेके मुडमे नही था.. ओर पुनमसे जगडा करके उसे नीलमकी सारी बाते बता देना चाहता था.. लेकीन ये तो पुनम थी.. उसे सबकुछ पता थाकी आगे क्या होने वाला हे.. वो धिरेनको कंट्रोल करना अच्छी तराह जानती थी.. धिरेनको भी लगाकी अभी पुनम इनके साथ जगडा करने लगेगी.. लेकीन पुनम कुछ नही बोली.. ओर वो धिरेनकी ओर देखे बीना चुपचाप उपर अपने कमरेमे चली गइ..

तो धिरेन भी पुनो.. पुनो.. पुकारता उपर पुनमके पीछे चला गया.. तो रजीया अपने करमेमे जाकर फ्रेस होकर बहार आगइ.. ओर कीचनमे जाकर रातका डीनर बनानेकी तैयारीया करने लगी.. तो धिरेन थोडा गभराते पुनमके पीछे पीछे अपने रुममे चला गया.. तो पुनम बाथरुममे फ्रेस होने चली गइ.. फीर कुछ देरके बाद पुनम चेन्ज करके नीकली.. ओर धिरेनको बीना कुछ कहे नीचेकी ओर चली गइ..

तो धिरेन पुनमके इस बरतावको देखकर सन्न रेहते उनको मुह फाडते देखता ही रेह गया.. ओर वो भी पुनमसे बात करनेके लीये पुनमके पीछे नीचे चला गया.. देखा तो पुनम ओर रजीया कीचनमे खाना बनानेकी तैयारीया कर रही थी.. वो कीचनके पास पुनमसे बात करनेके लीये खडा रहा.. लेकीन पुनमने उनके सामने तक नही देखा.. तो धिरेन तीलमीलाने लगा.. पुनम कुछ लेने दयाके रुममे गइ..

तो धिरेन वहा भी चला गया ओर दरवाजेके बीच खडा रहा.. तो पुनम उनके सामने आकर आंख बडी करते देखने लगी.. तो धिरेन थोडा डरते साइड हो गया.. तो पुनक बहारकी ओर जाने लगी.. तभी..

धिरेन : (थोडा जोरोसे) पुनो.. क्या हो गया हे तुजे.. मुजसे बात करो..

पुनम : (अचानक पीछे मुडते गुस्सेसे) क्या बात करु..? (जोरोसे चीलाते) मे तुमसे क्या बात करु..? हंम..? देखो धिरेन.. मुजे जो जानना देखना था देख लीया.. अभी तुमसे बात करनेका मेरा मुड नही हे.. कीतने कमीने हो तुम.. जाओ मुजसे तुमसे कोइ बात नही करनी..

धिरेन : (थोडा गुस्से) देखो पुनो.. तुम मुजसे इस तराह बात नही कर सकती.. मे पती हु तेरा..

पुनम : (अदब लगाते गुस्सेसे) अच्छा..? तुम पती हो मेरे..? थु.. तुमको पती कहेनेमे भी सरम आती हे.. देखो अभी मुजसे बात मत करो.. मेरा जगडा करनेका कोइ मुड नही हे.. अब जो भी बात होगी सुबह होगी.. समजे..? अभी खाना बन जायेगा.. चुपचाप खालेना ओर सो जाना.. मे यहा दया बहेनके पास सोजाउगी..

कहेते पुनम धिरेनकी ओर घुरते वापस कीचनमे चली गइ.. तो धिरेन मुह फाडते पुनमको देखता ही रहा..? क्युकी वो भी जानता थाकी अब बाजी बीगड चुकी हे.. जो पुनम उनके साथ इस तराहसे बाते कर रही हे.. जब खाना बन गया तो पुनमके कहेनेपे दयाने आज भी धिरेनकी सब्जीमे दो नींदकी गोली डालदी.. ताकी धिरेन चुइनकी नींद सोजाये.. ओर रातमे कोइ हंगामा ना करे..

तो दुसरी ओर नीर्मला भुमीका चंदा ओर सरलाकाकी भी हरीद्वार पहोंच चुके थे.. जहा सबने राजीवकी अस्थीयाका विसर्जन कीया.. फीर वहा आजु बाजुके सभी तीर्थ स्थानोके दर्शन करने चले गये.. फीर साम होते ही चारो वापस अपनी होटलकी ओर आ रहे थे.. तब चंदाको रास्तेमे ही उल्टीया होने लगी.. तो नीर्मला गभरा गइ.. ओर तीनो चंदाको लेकर वहा पासकी कोइ लेडीसकी होस्पीटलपे चले गये..

तो वहा लेडी डोक्टरने चंदाको चेक कीया.. ओर उनको प्रेगनेन्ट होनेकी बात कही.. तो नीर्मला भुमीका ओर सरलाकाकी तीनो ही खुस होगये.. तब चंदाने अपने पास रखी कुछ दवाइआ नीकालकर दीखाइ तो वहाकी डोक्टरने उसी दवाइमेसे गोली खीलाइ.. ओर चंदाको कुछ सुचनाये देदी.. फीर चारो होटेलमे आगइ.. तो आते ही नीर्मलाने फोन लगाकर मंजुसे बात करली.. ओर चंदाके प्रेगनेन्ट होनेकी खुस खबरी सुनाइ..

तो दुसरी ओर मुम्बइमे भी सुधीरकी तबीयतमे काफी सुधार हो रहा था.. सुधीर पहेलेसे बीलकुल अलग दीख रहा था.. तो चारु ओर नीशा दोनो ही इनकी देख भाल करते उनकी टांग खीचाइ करते मस्तीया कर रही थी.. जीसे सुधीर बहुत ही सरमा जाता.. ओर दोनोके उपर जुठा गुसा करने लगता.. सुधीरके सरीरमे काफी बदलाव हो रहा था.. धीरे धीरे करते उनके स्तन बढ रहे थे.. ओर वो अ‍ेक पुर्ण ओरत होने लगा था..

तो वहा भी अ‍ेक अ‍ेक दिनके अंतरालमे नीशा ओर चारुको उल्टीया हुइ.. तब दोनोने वही होस्पीटलमे चेक करवाया तो पता चला दोनो ही इस वक्त प्रेगनेन्ट होचुकी हे.. तब दोनोही बहुत सरमाइ ओर उसने ये बात सुधीरको कही.. तो सुधीर उन दोनोको देवायतको लेकर छेडने लगा.. तो चारु ओर नीशा दोनोही सर्मसार होते सुधीरको बाजुमे मुका मारने लगी.. वहा अ‍ैसेही हसी मजाक चलता रहा..

तो दो दिनसे रश्मी ओर वंदना भी सहेरमे टीनाके घरपे थी.. टीना खुद अपनी कार लेकर दोनोको अपने घरपे लेगइ थी.. फीर टीनाने दोनोको अपनी बुटीक दीखाइ.. ओर वहा अलग अलग जगाहपे खुब घुमाया.. अब तीनो ही अ‍ेक सहेलीकी तराह अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते धमाल करने लगी थी.. तो रश्मीके साथ वंदना भी टीनाके साथ काफी धुल मील गइथी.. ओर वो टीनाको दीदी दीदी कहेकर बुलाने लगी थी..
 
तो इधर सहेरमे भी सृती कबसे ६ बजनेका इन्तजार कर रही थी.. आज वो लखनके साथ स्कुटर लेने जाने वाली थी.. तो वो बहुत ही अ‍ेक्साइटेड हो रही थी.. तब उनको भी थोडा अजीब लग रहा था.. की वो लखनके साथ जानेके लीये इतनी बेताब क्यु हो रही हे..? कही उसे भी तो लखनसे प्यार नही होगया..? यही सब सोचते ६ बज गये.. तो सृती फटाफट अपनी रीसेपनीस्टको सुचना देकर अपनी कार लेकर नीकल गइ..

ओर घरपे आगइ.. देखा तो लखन होलमे बेठकर कीसीसे फोनपे बीजनेसकी बाते कर रहा था.. तो सृती उनकी ओर देखकर स्माइल करती फटाफट उपर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर चेन्ज करके बाथरुममे घुसकर फ्रेस होने लगी.. फीर नहा धोकर अच्छेसे बाल बनाते तैयार होने लगी.. जैसे अपने बोय फ्रेन्टके साथ डेटपे जा रही हो.. उन्होने आज जीन्स ओर सोर्ट ज्ञीसर्ट पहेनली..

ओर अपने होठोपे अच्छेसे लीपस्टीक लगाकर गालोपे लाली लगाते अपने आपको आयेनेमे देखते सजाने लगी.. इस ड्रेसमे आज सृती बहुत ही कयामत के साथ साथ वो अ‍ेक छोटी लडकीकी तराह लग रही थी.. ओर वो ढेर सारा मेकअप करके नीचे आगइ.. तो लता तो उनको देखते ही खुस होगइ.. ओर उनके गले लग गइ.. तो रमाको सृतीको देखकर थोडीसी जलन होने लगी.. क्युकी वो लखनके साथ जा रही थी.. तब इस वक्त लता ओर रमा घरका सामान सेट कर रही थी.. तभी..

रमा : (हसते) वाह देवरानीजी.. क्या कयामत लग रही हे.. कही आज हमारे नंनदोयपे बीजली गीरानेका इरादातो नही.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे) क्या भाभी आपभीनां.. वो मेरे देवर हे.. हमारे लीये आपके बडे देवर ही ठीक हे.. क्या तो हम बाजारमे अ‍ैसे ही जायेगे.. मत भुलो.. हम स्कुटर लेने बडे शो रुम मे जा रहे हे.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. आप भाभीकी बातोका बुरा मत मानीयेगा.. वोतो आपसे मजाक कर रही थी.. लेकीन आज आप सचमे बहुत खुबसुरत लग रही हे.. बीलकुल परीकी तराह.. अ‍ेकदम छोटी.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) लता.. थेन्क्स.. तुम फीकर मत करो.. मुजे भी पता हे वो मजाक कर रही हे.. चलो हम चलते हे.. कहा हे हमारे देवर..

लखन : (फोन रखकर खडा होते सृतीको देखताही रेह गया) भाभी.. मे यही हु.. आ रहा हु.. चलीये..

सृती : (मुस्कुराते) अरे लता.. तुजे कोनसा कलर पसंद हे..? बता.. हम तेरी मसंदका ही कलर ले लेगे..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. वो सब मुजे कहा पता चलता हे.. आपको जो पसंद हो वोही ले लेना..

लखन : (मुस्कुराते चलते) भाभी चलीये.. उनको कौनसा कलर पसंद हे वो मुजे पता हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते साथ चलते) अरे हां.. मेतो भुल ही गइकी आपको सबकी चोइसका पता हे.. चलीये.. देवरजी.. मेरी ही कारमे चले जाते हे.. लीजीये चाबी.. आप ही चला लीजीये.. फीर वापसीमे आप स्कुटर ले लेना..

लखन : (मुस्कुराते चाबी लेते) जी भाभी.. हमे कोनसा स्कुटर लेना हे..? आइ मीन कोनसी कंपनीका..?

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. वो.. आज कल अ‍ेक्टीवा बहुत चलता हे.. मुजे तो वही पसंद हे.. हें..हें..हें..

सृती :(हसते) अरे वाह.. वोतो मुजे भी बहुत पसंद हे.. देवरजी.. फीर भी आपको जो भी पसंदहो लेलेना.. तो फीर हम चले..?

लखन : (कारकी ओर जाते) नही भाभी.. हम आपका ओर लताकी पसंदका ही स्कुटर लेगे.. वैसे आज इस डे्रसमे आप बहुत सुंदर लग रही हे.. कहासे लीया ये ड्रेस..? बहुत अच्छा हे.. हें..हें..हें..

सृती : (जुठा गुसा करते बाजुमे अ‍ेक मुका मारते) देवरजी.. आप बहुत ही कमीने हो.. भुलकड कहीके.. अरे ये वोही ड्रेस तो हे.. जो आपने दिलवाया था.. आपही ने तो सीलेक्ट कीया था.. याद हे आपको..?

लखन : (कारमे बैठते मुस्कुराते) ओह.. सोरी सोरी भाभी.. क्या हेना.. आपने इसे कभी पहेना नही हेना.. तो मे भुल गया था.. सोरी.. हें..हें..हें..

सृती : (लखनकी बाजुमे बैठते कातील नजरोसे मुस्कुराते) वैसे तारीफके लीये थेन्क्स.. देवरजी.. क्या मे सचमे अच्छी लग रही हु..? कही मेरा दिल रखनेके लीयेतो तारीफ नही कर रहे..?

लखन : (कार स्टार्ट करते) अरे नही नही भाभी.. आज आप सचमे बहुत खुबसुरत लग रही हो.. आपको मेरे साथ देखकर कोइ नही कहेगा की आप मेरी भाभी हो.. वो लोग तो हमे साथमे.. सोरी भाभी.. हें..हें..हें..

सृती : (कातील नजरोसे हसते) अरे हां हां.. बोलोनां.. सोरी क्यु बोलते हो.. बोलो.. क्या केह रहेथे.. मे कुछ नही कहुगी.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) नही भाभी.. जाने दीजीयेनां.. कहीये हम कोनसे शोरुममे जाये..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे.. बातको मत काटो.. अच्छा मे ही कहेती हु.. वहीनां की हम दोनो मीया बीवी.. या फीर लवर्स लगते हे.. यहीनां..? ठीक हे.. यही समजलो.. की आज आपके साथ आपकी गर्लफ्रेन्ड आइ हे.. हें..हें..हें.. वो भी डेटपे.. तो क्या हम पहेले थोडी देरके लीये कीसी कोफी शोपपे बैठ सकते हे..? मुजे आपसे कुछ जरुरी बाते भी करनी हे.. क्युकी यहा रमा भाभी ओर नीलम हर वक्त साथ ही होती हे..

लखन : (कार चलाते सामने देखकर) जी भाभी.. हम पहेले वही जाते हे.. क्या कोइ सीरीयस मेटरतो नही..?

सृती : (सामने देखते) सायद.. क्युकी मेरी बात सुनकर फीर आपही डीसाइड करना.. की बात सीरीयस हे की नही..

कहा तो लखनने कारको अ‍ेक कोफी शोपपे लेली.. सृती आज बहुत ही खुबसुरत ओर अ‍ेक छोटी लडकीकी तराह लग रही थी.. तो लखनको छेडते उनके साथ रोमेन्टीक बात करना सृतीको बहुत अच्छा लग रहा था.. दोनो कार पार्क करके साथ चलने लगे.. सृती जटसे चलकर लखनके साथ होगइ..

ओर उनके हाथमे हाथ डालकर लखनके साथ चलने लगी.. आज वो बहुत ही खुस नजर आ रही थी.. तो लखनभी सृतीके व्यवहारसे खुल हो गया.. ओर दोनो कोफी शोपमे अ‍ेक कोनेपे जाकर बैठ गये.. तो लखनने सृतीको पुछकर दो कोल्ड्रीन्क्स.. ओर्डर करदीये.. ओर सृतीकी ओर देखने लगा.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१६

कहा तो लखनने कारको अ‍ेक कोफी शोपपे लेली.. सृती आज बहुत ही खुबसुरत ओर अ‍ेक छोटी लडकीकी तराह लग रही थी.. तो लखनको छेडते उनके साथ रोमेन्टीक बात करना सृतीको बहुत अच्छा लग रहा था.. दोनो कार पार्क करके साथ चलने लगे.. सृती जटसे चलकर लखनके साथ होगइ.. ओर उनके हाथमे हाथ डालकर लखनके साथ चलने लगी.. आज वो बहुत ही खुस नजर आ रही थी.. तो लखनभी सृतीके व्यवहारसे खुस होगया.. ओर दोनो कोफी शोपमे अ‍ेक कोनेपे जाकर बैठ गये.. तो लखनने सृतीको पुछकर दो कोल्ड्रीन्क्स.. ओर्डर करदीये.. ओर सृतीकी ओर देखने लगा.. तभी.... अब आगे

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कहीये.. क्या कुछ जरुरी बात करनी थी..?

सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे..? आज आपके साथ आकी गर्लफ्रेन्ड आइ हे.. इसे पहेले जरा पुछोतो सही.. की तुम क्या पीओगी..? क्या कीसी लडकीको लेकर कभी डेटपे नही गये क्या..? हें..हें..हें..

लखन : (सरमाकर हसते) नही.. अब आप ही सब सीखादो.. हें..हें..हें.. कहीये.. पहेले आपके लीये क्या ओर्डर करु..? ठंडा या गरम..? साथमे कुछ स्नेक्स.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) हां.. ये हुइनां बात.. देवरजी.. इनसे लडकीया थोडी इम्प्रेस होथी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अरे आप इम्प्रेस होने वालोमे थोडीनां हे.. सीधे चांटा ही मारदेती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) अरे..? मेने कहा आपको चांटा मारा था..? आपको भी पता हेनां आपने हमारे साथ क्या कीया था..? फीर भी मेने आपसे कुछ कहा..? नहीनां.. तो फीर भुल जाइअ‍े इन सब बातोको..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. सब भुल ही गया हु.. सोरी भाभी.. उस दिन मे थोडा बहेक गया था.. खैर छोडीये इसे.. कहीये.. आप मुजसे क्या बात करने वाली थी..

सृती : (थोडा सीरीयस होते) अरे हां देवरजी.. आज सुबह पुनो दीदीका फोन आया था.. वो धिरेनके साथ खुस नही हे.. वहा जाते ही उनके साथ थोडी बहेस होगइ थी.. ओर धिरेनका वहा कीसी ओरतके साथ चकर भी हे.. तभी तो इतने दिन वो हमारे घरपे खानेके लीये नही आ रहा था.. (लखनको मनानेके लीये थोडा जुठ बोलते) देवरजी.. वो बाते करते बहुत रो रही थी.. पुनो दीदीने आपको भी फोन कीया था.. लेकीन आपने उठाया ही नही..

लखन : (सांत लहेजेमे) भाभी.. सोरी.. तब मे उनसे थोडासा नाराज था.. क्या आपको पुनोने कही सभी बाते मुजे खुलकर बता सकती हे..?

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) हां देवरजी.. लेकीन कुछ बाते अ‍ैसी हे मे आपको खुलकर नही बता पाउगी.. वो बाते आपको सीर्फ पुनम दीदी ही बता सकती हे.. क्युकी अ‍ैसी चर्चातो आप दोनोने कइ बार की हे.. अ‍ैसा आप ओर पुनम दीदीने ही मुजे बताया हे.. क्या नीलु भी धिरेनके साथ रीलेशनमे हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. नीलु सीर्फ रीलेशनमे ही नही.. उनका धिरेनके साथ जीस्मानी रीस्ता भी हे.. वो धिरेनके साथ सादी भी करना चाहती हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) व्होट..? क्या नीलु धिरेनसे..चु.. मतलब धिरेनसे जीस्मानी रीसता..? वोभी इतनी छोटी उमरमे..? ओर उनसे सादी भी करना चाहती हे..? लेकीन रमा भाभी तो उनकी सादी आपके साथ करवाना चाहती हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. नीलु इतनी भी छोटी नही हे.. अ‍ेक महीनेके बाद वो उनीसकी होजयेगी.. मेने कहा थानां मे सबकुछ सम्हाल लुगा.. बस.. आप सीर्फ देखती जाओ.. उन मां बेटीको दोनोको मे अपने कंट्रोलमे करके रखुगा.. फीर देखो वो दोनो कैसे मेरी दिवानी हो जाती हे.. मे रमा भाभीका सारा प्लान ही चोपट कर दुगा.. लगता हे पुनो दीदीके साथ आपकी काफी चर्चा हो चुकी हे.. क्या ओर कोइ बात हुइ..?

सृती : (मुस्कुराते अपना पासा फेकते) हां.. बहुत सारी बाते हुइ हे.. लेकीन मेरी भी बतानेकी कुछ मर्यादाअ‍े हे.. ओर अब आप भी हमारे साथ खुलकर बाते नही करते.. तो आपके साथ अब मुजे भी अ‍ैसी बाते करनेमे डर लग रहा हे.. क्युकी मे अब हमारे देवर भाभीके सबंध आपकी नजरोमे ओर खराब करना नही चाहती.. मुजे लगता हे.. उस हादसेके बाद हमारे बीच काफी दुरीया बढ गइ हे.. आप जो हमसे बात नही करते थे.. पता नही इसमे मेरी क्या गलती थी..

लखन : (आंख गीली करते) सोरी भाभी.. भुल जाइअ‍े सब.. मे भी भुल चुका हु.. इसमे आपकी कोइ गलती नही थी.. तब मुजे गुस्सा ही इतना आया.. लेकीन सब गलती मेरी थी.. जो मे अपनी मर्यादा भुल गया था.. मुजे आप दोनोके साथ अ‍ैसा नही करना चाहीये था.. भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेरी वजहसे आप हर्ट हुइ..

सृती : (सरमाते नजरे चुराते) अरे नही नही देवरजी.. इसमे आपकी भी कोइ गलती नही थी.. क्युकी जो बात आपको यहा आनेसे अ‍ेक दिन पहेले मंजु दीदीसे पता चली.. वो बाते मे पुनोदीदी ओर भावनादीदी कइ दिनो पहेले ही जानती थी.. मंजुदीदीने आपको वो बात बतानेकी जीम्वेवारी पुनम दीदीकोे इसीलीये दी थी.. की आप दोनोके बीच अच्छी पटती थी.. आप दोनो बहुत क्लोज भीतो थे..

लखन : (आंख गीली करते) भाभी.. मे उनसे क्लोज तो आज भी हु.. पता नही वो मुजसे कैसे दुर होगइ..

सृती : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. आप दोनो अ‍ैसी चर्चा पहेले भी खुलकर करते थे.. जो अ‍ेक बोय फ्रेन्ड गर्ल फ्रेन्डके बीच होती हे.. लेकीन पता नही फीर भी पुनोदीदी आपको ये बात खुलकर क्यु नही बता पाइ..

लखन : (अपनी आंख पोछते) भाभी.. मे उनको बहुत प्यार करता था.. ओर अभी भी करता हु.. अपनी जानसे भी ज्यादा.. तो फीर वो ये बात मुजसे पहेले क्यो नही केह पाइ..? आपको पता हे..?

सृती : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? क्यु..?

लखन : (फीकी मुस्कानसे) भाभी.. क्युकी उनके मनमे अ‍ेक डर हे.. अब वो बडे भैयाकी अमानत होगइ हे.. तो उनको डर लग रहा हे.. की मे उनकी मस्तीया ओर उनके साथ फ्लर्ट करते उनको बडे भैयासे छीन लुगा.. भाभी.. मुजे मेरी मर्यादा पता हे.. पता नही उस दिन मस्ती मस्तीमे मे कैसे बहेक गया था..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) नही देवरजी.. इसमे आपकी कोइ गलती नही हे.. क्युकी आपको नही पता था.. लेकीन हम तीनो तो जानती थी.. की आगे हमारे साथ क्या होने वाला हे.. इसीलीये तो हमने आपके फ्र्लट करनेसे भी अ‍ेतराज नही कीया.. इस बातके लीये मे ओर पुनोदीदी पहेलेसे ही प्रीपेर थी.. इसीलीये हम दोनो खुद आगे बढ रही थी.. हम दोनोने इस बदलावको सवीकार करलीया था.. तो फीर अचानक उसने अ‍ैसा क्यो कीया..? सायद आपकी बात सच हे.. सायद उनको वही डर लग रहा होगा..

तभी वेइटर दोनोको कोल्ड्रीन्क्स ओर कुछ नास्ता देकर चला जाता हे.. तो दोनो खाना खाते ठंडा पीने लगते हे.. ओर साथमे बाते भी करते हे.. तब सृतीने बातको जारी रखते आगे पुछा..

लखन : (सरमाते) भाभी.. क्या सचमे आप सभीने इस भाभीमांने कहा वो बदलावको स्वीकार करलीया हे..?

सृती : (नजर जुकाते सरमाते धीरेसे) हां देवरजी.. क्युकी हम जानती थी आगे क्या होने वाला हे..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर पुनो दीदीने मुजे चांटा क्यु मारा..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) पता नही.. लेकीन उनको अपनी गलतीका अहेसास फौरन होगया था.. देवरजी.. अ‍ेक बात कहु..? सायद वो भी आपको प्यार करने लगी हे.. आप अ‍ेक बार उनसे बात कर लीजीये.. हो सकता हे.. आपको अपना पहेला प्यार मील जाये..
 
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. वो.. भी.. का मतलब..? क्या आप मुजे बता सकती हे.. दुसरी कौन मुजे प्यार करने लगी हे..

सृती : (सर्मसार होते नजरे चुराते धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. मेरे कहेनेका मतलब.. आप भीतो उनको प्यार करते हेनां..? तो वो भी आपको प्यार करने लगी हे.. मेरा अ‍ैसा कहेना था..

लखन : (सरमाकर धीरेसे) भाभी.. अभी आपने कहा.. की हम दोनोने इस बदलावको स्वीकार करलीया हे.. मतलब..? क्या आप भी..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. हां.. आइ मीन.. अभी नही.. प्लीज.. मेरे खयालसे कुछ बाते आपको समयपे छोड देनी चाहीये.. मतलब.. मंजुने कहा हे.. सायद इसके लीये इतनी जल्दी हम प्रीपेर नही हे.. इसके लीये आपको कुछ दिनोका इन्तजार करना चाहीये.. आपको खुद ब खुद पता चल जायेगा..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. गभराइअ‍े नही.. भाभीमांने मुजे अ‍ेक ओर बात भी कही हे.. की जो भी होगा.. अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे होगा.. जबरदस्तीसे कुछ भी नही.. ओर मेभी जबरदस्तीके प्यारको नही मानता.. इसीलीये तो आज मे मेरे पहेले प्यारसे वंचीत हु..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) देवरजी.. थेन्क्स.. मेरे खयालसे आप अ‍ेक बार पुनोदीदीसे बात कर लीजीये.. सायद वो धिरेनके साथ जगडा ओर वो ओरतके साथ रीलेशनकी बात करना चाहती हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. धिरेनकी जो बात आपको आज पुनोने कही.. वो बाते मे धिरेन हमारे घरपे आया था तबसे जानता हु.. ओर वो ओरत कोइ ओर नही.. हमारे बडे भैयाके दोस्त भीमा भाइकी दुसरी बीवी हे.. पायल नाम हे उनका.. इनकी पहेली बीवी अपने देवरके साथ.. यानीकी भीमा भाइके छोटे भाइके साथ भाग गइ हे.. ओर ये ओरत भीमाभाइके सालेकी बीवी थी.. जो भीमाभाइ इनको पटाकर उठा लाये हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) अरे.. आप तो इस ओरतकी पुरी कुंडली जानते हे.. तो फीर ये बात आपने पुनो दीदीको क्यु नही बताइ..?

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लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. कहासे कहेता..? ये बात मुजे भी धिरेन हमारे घरपे आया तब पता चली.. आप फीकर मत करो.. इस केसको मे मेरे हिसाबसे हेन्डल कर लुगा.. क्युकी ये बात खुद धिरेनने मुजे बताइ हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? खुद धिरेनने बताइ हे..? मतलब..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. मैने धिरेन ओर नीलुको अपने विस्वास मे लेलीया हे.. उनको यकीन दिला दिया हे.. की मे उन दोनोकी सादी करवानेमे मदद करुगा..धिरेनको विस्वास होगया हे की मे उनका सबसे अच्छा दोस्त हु.. तो वो उनकी सभी बाते मेरे साथ सेर करता हे.. क्युकी जब पुनोदीदी ओर धिरेन अलग हो जायेगे तब उनके घरपे जानेका रास्ता मेने खुला छोड रखा हे.. ताकी उनके घरपे मेरा आना जाना लगा रहे..

सृती : (सरमाके मुस्कुराते) क्या आपको यकीन हे पुनोदीदी ओर धिरेन अलग होजायेगे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. इस बारेमे मेरी ओर पुनोदीदीकी चर्चा हो चुकी हे.. खुद पुनो दीदीने मुजे ये बात कही हे.. ओर वो खुद भी धिरेनसे अलग होजाना चाहती हे..

सृती : (मुस्कुराते) मतलब.. इस मामलेमे आप काफी कुछ जानते हे.. ओर आगे भी बढ चुके हो.. क्या इस बारेमे पुनो दीदीको सब पता हे..? की आप उनका काम कर रहे हो..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. दीदी तो सबकुछ जान जाती हे.. ओर वो खुद चाहती हे.. की वो जल्दसे जल्द धिरेनसे अलग होकर वापस हवेलीपे आजाये.. इसीलीये तो पुनो दीदीने वहा नीलुको धिरेनसे मीलवानेके लीये कहा था.. जो मेने वही दोनोकी मुलाकात करवादी थी.. अबतो हम पायल भाभीको भी जरीया बनाकर आसानीसे पुनम दीदीको धिरेनसे अलग कर सकते हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? वहा आपने नीलुको धिरेनसे मीलवाया था..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सीर्फ इतना ही नही.. नतीजेके तौरपे आज धिरेन ओर नीलु होस्टेलमे नीलुकी फ्रेन्डके रुममे अ‍ेक ही बेडपे अकेले मील भी चुके हे.. वो भी मेरी आंखोके सामने.. आप समज गहइनां..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. समज गइ.. मे इतनी भी बुध्धु नही हु.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. तब उन दोनोको नही पताथा.. की मे वही राधुकी ओफीसमे था.. तो मैने दोनोकी फील्म बना डाली.. ओर इनकी विडीयो क्लीप भी पुनोदीदीके मोबाइलमे सेन्ड करदी हे.. जो पुनोदीदी उसे हथीयारके तौरपे इस्तेमाल कर सकती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (कातील नजरोसे हसते) देवरजी.. आप वाकइ कमीने हो.. क्या अ‍ैसी फील्म अपनी दीदीको भेजदी..? हें..हें..हें..

लखन : (सरमाके मुस्कुराते) भाभी.. पुनो दीदी सीर्फ मेरी बहेन ही नही हे.. वो मेरी सबकुछ हे..

सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) अरे वाह.. देवरजी.. आपतो छुपे रुस्तम नीकले.. तो फीर आपको अ‍ेक बार पुनोदीदीसे बात करलेनी चाहीये.. वैसे भी वो आपके लीये बहुत आंसु बहा चुकी हे.. बस अ‍ेक बार उनको माफ कर दीजीये.. आइ प्रोमीस हम दोनो अ‍ैसा दुबारा कभी नही करेगी..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. मे आपकी बात नही टाल सकता.. अगर आप इतना कहेती हो तो मे उनसे कल फुरसतमे बात कर लुगा.. क्युकी अभी तो धिरेन भी घरपे जा चुका होगा.. तो अभी पुनोदीदीसे बात करना ठीक नही हे..

सृती : (खुस होते मुस्कुराते) हां ये हुइना बात.. देवरजी.. मेरी बात रखनेके लीये थेन्क्स..

लखन : (हसते) भाभी.. कैसी बाते कर रही हो..? कभी अपनोको थेन्क्स नही कहेते.. मे आप सभीको दिलसे अपना मानता हु..

सृती : (सरमाते हसते) देवरजी.. अब हमसे पहेलेकी तराह खुलकर बाते करते रहीये.. हमसे मस्तीया करते रहीये.. हम भी आपको दिलसे अपना मानती हे.. फीर मे ओर पुनोदीदी तो आपको हमारा चहीता देवर मानती हे.. जो हमारी मस्तीया करते हमारे साथ फ्लर्ट भी करते हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) भाभी.. बुरा मत मानीयेगा.. मुजे पहेलेकी तराह नोर्मल होनेमे थोडा वक्त लगेगा.. वैसे थेन्क्स.. आज इस ड्रेसमे आप वाकइ बहुत ही खुबसुरत लग रही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर कातील नजरसे हसते) हां.. बस.. अ‍ैसे ही हमारी तारीफ करते रहीये.. थेन्कयु.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) भाभी.. मे मजाक नही कर रहा हु.. सचमे ये ड्रेस आपकी खुबसुरतीपे चार चांद लगा रहा हे.. हें..हें..हें.. आप बहुत ही छोटी ओर होट लग रही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते लखनको बाजुमे मुका मारते) हटो बदमास.. अभी छुट क्या दी.. आपतो फीरसे सुरु होगये.. अपनी भाभीको होट बोल रहे हे..? लगता हे अब मुजे भी आपको पीटना पडेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) हां.. अब बाकी रहे गइ होतो आप भी पीट लीजीये.. मे तो कबसे आपसे पीटनेके लीये तरस रहा हु.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) देवरजी.. आप भीनां.. अच्छा..? अगर पीटनेके लीये तरस रहे थे.. तो फीर पुनम दीदीसे नाराज क्यु होगये..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. सोरी.. सब कुछ अचानक होगया.. लेकीन आइ प्रोमीस.. अब मे आप दोनोसे कभी नाराज नही होउगा.. क्युकी सीर्फ आप दोनो ही मेरी चहीती भाभी हो..

सृती : (कातील नजरसे हसते) अच्छा..? हें..हें..हें.. तो फीर बाकी सब भाभीया.. ओर आस करके आपकी मंजुभाभी आपकी चहीती भाभी नही हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. सभी भाभीको मे बहुत चाहता हु.. लेकीन भाभीमांका दर्जा आप सभी भाभीओसे उपर हे.. वो सीर्फ मेरी भाभी नही.. मेरी मां भी हे.. ओर मांको कीसीके साथ कंपेयर नही कीया जाता.. कास मैने उनकी कोखसे जन्म लीया होता..

सृती : (प्यारसे मुस्कुराते) अच्छा.. अपनी भाभीमां से इतना प्यार करते हो..? सारा प्यार भाभीमां पे मत लुटा देना.. इनमेसे थोडा प्यार हमारे लीये भी बचाके रखना.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते धीरेस) भाभी.. आप दोनोतो मेरे लीये स्पेसीयल हो.. तो आपको प्यार कैसे नही करता..?

कहातो सृती सरमाके हसने लगी.. उसे पुनमकी कही सभी बाते याद आने लगी.. ओर उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. सृती बार बार लखनकी ओर देख लेती थी.. जैसे वो लखनके साथ डेटपे आइ हो.. वो अब लखनके साथ आगे बढनेका पुरा मन बना चुकी थी.. लेकीन सबसे पहेले वो पहेल करना नही चाहती थी.. इसके लीये लखनको खुद आगे बढनेका इन्तजार कर रही थी.. तभी बातोका दौर आगे बढाते..
 
सृती : (कोल्डड्रीन्कस पीते अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. अभी रमाभाभी ओर नीलु हमारे घरपे हे.. तो पुनोदीदीने कहा हे.. लखन भैयाको कहेना.. ये अच्छा मौका हे.. आप समज गयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. तो इसमे इतना सरमानेकी क्या बात हे..? अब तो मुजे अ‍ैसे ही काम करना हे.. तो आप कब तक मुजसे सरमायेगी..? भाभी.. क्या आप भी पुनो दीदीकी तराह मुजसे खुलकर बाते नही कर सकती..? मेरे खयालसे अब अ‍ैसी बातोमे हमारे बीच कोइ पर्दा या सरम नही होनी चाहीये.. दीदीको केह दीजीये मुजे मेरी जीम्जेवारी अच्छी तराह मालुम हे.. उनका काम जल्द होजायेगा..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) देवरजी.. क्या हेना इस तराहकी चर्चा मेने आपके साथ कभी नही की.. तो कहेनेमे सर्म आ रही थी.. अब मे अ‍ैसी बाते खुलकर कहेनीकी कोसीस करुगी.. देवरजी.. अभी आपने कहा.. क्या नीलु सचमे धिरेनसे सादी कर लेगी..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. रमा भाभी नीलुकी सादी मुजसे करवाना चाहती हे.. वो कोइ उल्टा पुल्टा प्लान सोचे इनसे पहेले मे चाहता हु की नीलुकी सादी जल्द से जल्द धिरेनसे होजाये.. तो रमा भाभीका सारा प्लान चोपट होजायेगा.. इसीलीये मे खुद नीलुकी सादी जल्दसे जल्द धिरेनसे करवा देना चाहता हु.. ओर वो सब काम आप मुजपे छोड दीजीये.. आप लोगोको सीकायतका मौका नही मीलेगा..

सृती : (सरमाकर हसते) अरे नही नही देवरजी.. हमे आपपे पुरा भरोसा हे.. मुजे पता हे आप ये काम बखुबी नीभायेगे.. तभी तो पुनो दीदीने आपको जडी बुटी पीलाइ हे.. हें..हें..हें.. (हिंमत करते सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. क्या.. मे आपको कुछ.. मतलब.. मे आपकी कुछ.. पर्सनल बाते पुछ सकती हु..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. क्या आपको लगता हे..? की अब हमारे बीच कोइ पर्सनल या फीर पर्दा हे..? आप सबके लीये तो मेरी जींदगी खुली कीताब हे.. आप दोनोके बीच मेरा कुछ भी पर्सनल नही हे.. कमसे कम आप ओर पुनो दीदीके के सामने तो बीलकुल नही.. तो दोनोको सबकुछ पुछनेका हक हे.. तो बीन्दास्त पुछीये..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) देवरजी.. थेन्क्स.. पता नही कैसे पुछु..? वो.. वो.. आइ मीन.. क्या आप बता सकते हे..? की आपके अंदर सचमे इतना बडा बदलाव आगया हे..? आइ मीन.. नीचे.. वो.. बुरा मत मानीयेगा.. क्युकी मे अ‍ेक डोक्टर हु.. तो मुजे ये जडी बुटीओपे इतना यकीन नही होता.. इसीलीये पुछ रही हु..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) बस..? सीर्फ इतनीसी बात जाननेके लीये पुछ रही थी..? हां भाभी.. हमारे गुरुजीने दि हुइ जडी बुटीया कभी गलत नही होती.. मेरे अंदर सचमे बहुत बडा बदलाव आगया हे.. जो मेने भी कल्पना नही की थी.. भाभी.. मे इस बदलावसे बहुत खुस हु..

सृती : (थोडा जुठ बोलते धीरेसे) देवरजी.. प्लीज.. बुरा मत मानीयेगा.. ओर इसे गलत भी मत समजना.. क्युकी मे अ‍ेक रीसर्च कर रही हु.. तो अ‍ेक डोक्टर होनेके नाते मुजे ये बात कन्फोर्म करनी हे.. तो क्या इनमे आप मेरी मदद कर सकते हे..? प्लीज..

लखन : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. जरुर.. कहीयेनां.. इसमे मे इतना सरमानेकी क्या जरुरत हे.. कहीये.. मे आपकी क्या मदद कर सकता हु..

सृती : (अ‍ेकदम सर्मसार होते नजरे चुराते धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. क्या मे अ‍ेक डोक्टर होनेके नाते इसे अ‍ेक बार देख सकती हु..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. ये आप क्या बोल रही हे..? आप मेरी भाभी हे.. मे अ‍ैसा नही कर सकता..

सृती : (मुस्कुराते थोडासा जुठ बोलते) अरे..? नही नही.. देवरजी.. आप गलत समज रहे हे.. इसमे सरमाना क्या..? लेकीन यहा या घरपे नही.. मेरी क्लीनीकपे.. ओर भाभी हु तो क्या हुआ.. मे अ‍ेक डोक्टर भी तो हु.. मेरा तो काम ही यही हे.. अभी तो कहा.. मे इसमे रीसर्च भी कर रही हु..

तो मुजे कइ बार कोन्फरन्समे जाना होता हे.. तो मे दावेके साथ सबके सामने अपनी बात रख सकती हु.. इसीलीये आपको केह रही थी.. इसमे मेरा कोइ अलग इन्टेन्स नही हे.. तो प्लीज.. आप कुछ गलत मत सोचना.. आपका ये दीखाकर उल्टा आप मेरी रीसर्चमे मदद करोगे.. प्लीज..

लखन : (सरमाते) नही भाभी.. आपको नही पता अ‍ैसी बातोमे मे बहुत जल्दी कंट्रोल खो देता हु.. तभी तो आप दोनोके साथ वो हादसा होगया.. जीसका खामीयाजा मे अभी तक भुगत रहा हु.. तो भाभी.. प्लीज.. मत कीजीये ये जीद..

सृती : (हाथसे बाजी नीकलते) अरे..? यार मे केह तो रही हु.. की इस बार आपकी कोइ गलती नही होगी.. मुजपे यकीन कीजीये.. मे सब सम्हाल लुगी.. ओर बाय चान्स आप कंट्रोल नही करपाये.. तो मे आपको दोस नही दुगी.. बस..? अब तो हां केह दीजीये..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. तो फीर इसमे मेरी कोइ गलती नही होगी.. ओर देखना कही कीसीको पता ना चल जाये.. क्युकी अ‍ेक बार आप दोनोकी मस्तीया करते मे फस चुका हु.. अब मे आप दोनोकी नजरोमे दुबारा गीरना नही चाहता..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) अरे नही नही.. आप फीकर मत कीजीये.. ओर मे भी मेरी रीसर्चके लीये केह रही हु.. ओर सीर्फ देखना ही नही.. बस.. साथमे कुछ टेस्ट भी करने हे.. ओर आपको कीसने कहा..? की आप हमारी नजरोमे गीर गये हो..? आपने हमारे

साथ इतना कुछ कीया.. तो क्या तब मेने कोइ अ‍ेतराज कीया था..? ये तो पुनम दीदीने आपको चाटा मार दीया.. वरना मैने कहा आपको कुछ कहा था..? इसमे मेरी क्या गलती थी..? आप फीकर मत करो.. ये बात सीर्फ मेरे तक ही सीमीत रहेगी.. ओके..?

लखन : (मुस्कुराते सामने देखते धीरेसे) ठीक हे भाभी.. जब आप कहोगी मे क्लीनीकपे आजाउगा.. भाभी.. मुजे आपसे अ‍ेक बात जाननी हे.. तो फीर उस दिन पुजोदीदीकी तराह आपने क्यु अ‍ेतराज नही कीया..? आप भी तो मेरी भाभी हो.. कोइ खास वजह..?

सृती : (थोडी सकपकाते सरमाकर धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. मैने अभी आपको कहा तो था.. की अ‍ेकतो आप हमारे चहीते देवर हो.. तो भाभी देवरमे कभी कभी अ‍ैसी थोडीसी मस्तीया तो होती ही हे.. ओर दुसरा.. अब हमने सब कुछ स्वीकार करलीया हे.. बस.. मुजे इनमे थोडा सोचनेमे टाइम लगेगा.. मुजे इतना पता हे.. इसमे आपकी कोइ गलती नही थी.. बस..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. वही तो.. अगर मेने गलत कीया ही था.. तो फीर आपने मुजे क्यु नही डाटा..? आप भी तो मेरी भाभी हो.. क्या भाभी देवरमे अ‍ैसी मस्तीया जायज हे..? फीर भी अगर आपको अ‍ेतराज नही था तो फीर पुनमदीदी ने क्यु अ‍ेतराज कीया..?

सृती : (मुस्कुराते) देवरजी.. जायज हे या नाजायज हे.. वोतो मुजे नही पता.. कहानां पुनोदीदीसे गलती होगइ.. अभी आप हीने तो कहा.. की उसने डरकी वजहसे कीया.. उस दिन वो सब इतनी जल्द बाजीमे होगया.. अब तो वो भी पछता रही हे.. ओर इसके

लीये बहुत आंसु भी बहा चुकी हे.. तो क्या इतनीसी गलतीके लीये उनको इतनी बडी सजा दोगे..? वो आपकी माफी मांगनेके लीये भी तैयार हे.. कहोतो मे आपकी उनसे फोनपे बात करवाउ..? वरना उनकी ओरसे मे ही आपकी माफी मांग लेती हु.. बस..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही भाभी.. इसमे आप क्यु माफी मांगती हो..? इनकी कोइ आवस्यक्ता नही हे.. गभराइअ‍े नही.. कल मे खुद दीदीसे बात कर लुगा.. अब मुजे आप दोनोसे कोइ गीला सीकवा नही हे.. भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? जो बात मुजे भाभीमां ने कही.. इस बदलावको मे भी स्वीकार करनेमे डर रहा हु.. क्या आपकी नजरोमे ये सब सही हे..?

सृती : (समसर होते धीरेसे) देवरजी.. सही क्या हे.. ओर गलत क्या हे वो तो मुजे नही पता.. लेकीन इतना बता सकती हु.. मंजु ओर पुनोदीदी के कहेने मुताबीक हम सभी कोइ सामान्य इन्सान नही हे.. ओर दो तीन पीढी पहेलेकी बात होती तो ये सब

मुमकीन ही नही था.. फीर भी यही सचाइ हे.. की हमारे खानदानके सभी मर्दोने अपनी बहेनसे सादी की हे.. ओर इसके लीये हमारे खानदानको उनकी कींमत भी चुकानी पडी.. मंजु केह रही थी.. काफी सालो तक हमारा गांवके साथ कोइ रीलेशन नही था..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. वो सभी बाते मे जानता हु.. मे तो सीर्फ आपकी राय ले रहा हु.. की क्या ये सब सही हे..?

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) अगर मेरी राय जाननी हे.. तो हां.. मेरी नजरमे सब सही हे.. क्युकी आजके जमानेमे तो अ‍ैसा ना जाने क्या क्या देखनेको मील रहा हे.. ओर हमारे इस बदलावका मक्सद भी कुछ ओर हे.. तो फीर इस बदलाव मे गलत भी क्या हे..?

क्युकी आपके भैयाने कीतनी सारी सादीया करली हे.. तो अब उनके पास हमारे लीये टाइम ही नही होगा.. तो मुजे मंजुदीदीकी बात सही लगी.. ओर मैने तो मेरी क्लीनीकपे अ‍ैसा बहुत कुछ देखा हे.. जो आप सोच भी नही सकते..

लखन : (मुस्कुराते) यानी की..? क्या मुजे खुलकर बता सकती हे.. आपने क्या देखा..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हां.. अब आपसे क्या छीपाना.. देवरजी मैने तो कुछ रीस्ते अ‍ैसे भी देखे हे जीसके बारेमे हम सोच भी नही सकते.. मेरे यहा बहुत सारी लडकीया ओर ओरते अ‍ेबोर्सनके लीये आती हे.. मे तो अ‍ैसा काम नही करती.. इसी

लीये उनको मेरी सहेलीके वहा भेज देती हु.. वो अ‍ैसा गैर कानुनी काम करती हे.. क्युकी उनका पती अ‍ेक पोलीटीसयन हे.. वो मेरी क्लासमेट थी.. वो आज भी मेरी बहुत अच्छी दोस्त हे.. उनकी हर बाते मुजसे सेर करती हे..
 
लखन : (थोडी मस्तीया करते) अच्छा..? तो फीर उनको अ‍ैसे टेस्ट करनेकी जरुरत नही पडती..? कभी मुलाकात करवाइअ‍ेनां.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) लखन.. अ‍ेक मारुगीनां.. आप अपनी हरकतोसे बाज नही आओगे.. कभी उनके पतीको देखा हे..?

लखन : (हसते) ओह.. सोरी सोरी भाभी.. मे तो मजाक कर रहा था.. लेकीन बताइअ‍ेनां.. आपके पास कौन कौन से रीस्ते आते हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) हां.. अ‍ेक तो हमारे गांवके ही थे.. जो आप उनको अच्छी तराह जानते हे.. क्या नाम हे..? हां.. बनवारीलाल.. वो खुद उनकी बहुको लेकर आते थे.. वो तीन चार बार अपनी बहुका ओबेर्सन करवा चुके हे.. फीर अ‍ेक तो हमारे रमेशभाइ खुद जया भाभीको लेकर आये थे.. तब मेरी आपके भाइके साथ सादी नही हुइ थी.. तो मुजे नही पहेचानते थे.. फीर अ‍ैसे कइ लोग हे.. जो अभी मेने हमारे गांवमे देखा हे.. लेकीन उनको पहेचानती नही..

लखन : (जोरोसे हसते) भाभी.. आपके पास तो गांवकी पुरी कुंडली हे.. हें..हें..हें.. ओर कौन कौन आता था..?

सृती : (हसते) यार.. कहानां.. सबको नही पहेचानती.. वैसे अ‍ैसी बातोमे तो बडा इन्ट्र्रेस हे आपको..? हें..हें..हें.. ठीक हे.. दुसरा अ‍ेक आदमी था.. वो कइ बार अपनी भतीजीको लेकर आता था.. तो अ‍ेक आपकी ही उमरका लडका उनकी चाचीको लेकर आया था..

कोइ अपनी मौसीको तो कोइ अपनी बुआ या मामीको लेकर आते हे.. ओर ज्यादातर लडके उनकी सगी बहेन.. या फीर कजीन बहेनको लेकर ही आते हे.. जब मेरी सहेली उसे अकेलेमे चेक करते पुलीसका डर दीखाती.. तो सब सच बात उगल देती.. पता नही सब आपसी रीस्तोमे कैसे जीस्मानी तालुकात रखते हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. वो बात आप नही समजेगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) अच्छा..? तो फीर आपही समजाइअ‍ेनां.. लोग आपसमे रीस्ता क्यु रखते हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अ‍ेक तो जवान होते ही सबको अपने जीस्मकी आग बुजानी होती हे.. तो बहार वालोसे आग बुजानेमे बदनामीका डर भी लगता हे.. ओर घरके रीस्तोमे अ‍ैसा कोइ डर नही.. दोनो आसानीसे अपने ही घरपे मील सकते हे.. दुसरा.. हमारा ह्युमन नेचर हे.. की जो चीज हमे जींदगीमे कभी नही मीलने वाली.. उस चीजको पानेके प्रती हमारा आकर्सण ज्यादा होता हे..

सृती : (हसते) मतलब..? हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) भाभी.. हमे पता हे हमे हमारी बहेन हो.. या फीर भाभी मामी चाची.. बुआ.. ये सभी रीस्ते कभी हमे अपनी जीस्मानी आग बुजानेके काम नही आयेगे.. ओर हम सबसे ज्यादा प्यारभी तो इसीसे करते हे.. तो सबसे पहेले हमारी चाहत इसी रोस्तोमे होती हे.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. आपको भी पता चल जायेगा.. क्युकी अब तो हमारे ही गांवमे आपको अ‍ैसे कइ रीस्ते दीखनेको मीलेगे..

सृती : (सरमाते हसते कातील नजरसे) हें..हें..हें.. देवरजी.. आपतो बडी इन्ट्रेस्टींग बाते करते हे.. हें..हें..हें.. क्या अभी आपकी नजरोमे अ‍ैसा कोइ रीस्ता हे..? तो बताइअ‍ेनां..

लखन : (सरमाते हसते) हां भाभी.. बहुत सारे रीस्ते हे.. अ‍ेक तो मेरा दोस्त मुना ओर श्रीधर.. जो अपनी बहेनको चाहता हे.. दुसरा वो बंसीको तो आप जानती हे.. जीनकी सादीमे हम गये थे.. वो उनकी व्धिरजा बुआ हे.. ओर वो उनकी बहेनसे भी सादी करना चाहता हे.. ओर साहीलसे तो आप मील ही चुकी हे.. उनके बारेम भी आपको सब पता हे.. ओर खुद हमारे भानु भाइने अपनी मामीसे सादी करली हे.. ओर कीतने रीस्ते दीखाउ आपको..? अब चलीये.. बहुत होगइ बाते.. वरना हम यही बेठे रहेगे..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) अरे हां.. चलीये.. आपसे बाते करनेमे बहुत मजा आया.. आपसे बाते करते समयका पता ही नही चलता.. चलीये.. हें..हें..हें..

फीर लखनने बील पे करदीया.. ओर दोनो बहार आगये.. तो सृती लखनके साथ ही चलने लगी.. ओर दोनो कारमे आकर बैठने लगे.. तभी सृतीको कुछ व्होमीट जैसा होने लगा.. तो वो कारके पास ही रुक गइ.. ओर व्होमीट करने लगी.. तो लखन सृतीकी हालत देखकर थोडा गभरा गया.. ओर दोडकर सृतीके पास आगया ओर उनकी पीठको सहेलाने लगा.. तब सृतीको उल्टीया करके थोडी राहत महेसुस हुइ..

लखन : (थोडी चीन्तासे) भाभी.. आप ठीक तो होनां..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे मे बीलकुल ठीक हु.. प्लीज.. अंदरसे थोडा पानी दोनां..

तो लखनने कारमे रखी पानीकी बोतल नीकालकर सृतीको देदी.. ओर सृतीने मुह साफ करके अपने आपको सही करलीया.. इतने दिनोसे वो देवायतके साथ सोती थी.. तब उनको कुछ आसंकाये होने लगी.. तो उसने फौरन अपने पर्ससे अ‍ेक गोली नीकालकर खाली.. ओर पानी पीलीया.. फीर दोनो कारमे बैठ गये.. तब सृती लखनकी ओर देखकर बहुत ही सरमाने लगी.. ओर सरमाके मुस्कुराने लगी.. तबतक लखन उनकी ओर देखता ही रहा.. तभी..

लखन : (थोडी चीन्तासे) भाभी.. क्या आपकी तबीयत ठीक नही हे..? तो फीर हम कीसी होस्पीटलपे चलते हे..? हम स्कुटर खरीदने बादमे आयेगे..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे नही नही.. आप कारको कीसी शो रुममे ही ले लीजीये.. मे अब ठीक हु.. इसमे इतना गभरानेकी जरुरत नही हे.. चलीये..

लखन : (सामने देखते) भाभी.. आपको उल्टीया हुइ हे.. तो फीर आपको उल्टीया क्यु हइ..? कुछ उल्टा सीधा खा लीयाथा क्या..? आप क्लीनीकपे बहारका खाना मंगवाकर खाती हेनां..? आजसे वो सब बंध..

सृती : (सरमाते धीरेसे) लखन.. वो.. वो सब मे कल देख लुगी.. प्लीज.. चलीयेनां.. आप मेरी कीतनी चीन्ता करते हो..? अरे बाबा.. मुजे कुछ नही हुआ.. चलो.. हें..हें..हें..

लखन : भाभी.. जो भी हो.. अब आप घरपे ही खाना खाने आयेगी.. केह देता हु..

सृती : (साथ चलते) अरे हां बाबा हां.. अब घरपे खाना खाउगी बस..? अब चलो.. शो रुमपे लेलो..

कहा तो लखनने मुस्कुराते कारको अ‍ेक शो रुमपे लेली.. वहा दोनोने अ‍ेक अ‍ेक्टीवा स्कुटर सीलेक्ट करलीया.. तो सृती लखनकी कलर चोइस देखकर बहुत ही खुस होगइ.. क्युकी वो इनका भी फेरवीरट कलर था.. फीर लखनने पेमेन्ट करदीया.. ओर कुछ रजीस्ट्रेशनके कागजातपे दस्त खत करदीया.. तब सृतीने अपनी कार लेली.. ओर लखन स्कुटर लेकर उनके पीछे चलने लगा.. ओर रास्तेमे कुछ मीठाइआ लेली..

ओर दोनो घरपे आगये.. तो लता रजीया रमा ओर नीलम चारो ही खुस होकर बहार नीकल गइ.. ओर नये स्कुटरको देखने लगी.. फीर सृतीने लताको पीछे बीठाकर स्कुटरका चकर लगाया.. तो लता बहुत ही खुस होगइ.. फीर लताके कहेने पे लखनने रजीयाको पीछे बीठाया.. तो रजीया बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनने उनको भी चकर लगवाया तो रजीया भी बहुत खुस होगइ..

फीर लखनने रमा ओर नीलुको भी चकर लगवाया तो दोनो भी बहुत खुस होगइ.. तभी सृतीने स्कुटर लेलीया.. ओर उसने सरमाते लखनको पीछे बैठनेके लीये कहा.. तो लखन मुस्कुराते सृतीके पीछे बैठ गया.. तो सृती जान बुजकर थोडा पीछे हट गइ.. तब उनको पीछे लखनका लंड महेसुस होने लगा.. तो वो बहुत ही अ‍ेक्साइटेड होगइ.. ओर अ‍ेक लंबी चकर लगाने लेगइ..

सृती अब हर हालमे लखनको रीजाना चाहती थी.. उसने कोफी सोपमे लखनके लंडको देखनेकी बात भी कहेदी.. इस वक्त उनके पीछवाडेमे लखनका लंड फसा हुआ था.. जीसे सृती बहुत ही उतेजीत होते अ‍ेन्जोय करने लगी.. तो लखन भी सृतीकी नीयतको पहेचान चुका था.. तो वो भी सृतीके साथ मजे लेने लगा.. उसने धिरेसे सृतीकी कमरमे हाथ डालकर सृतीको पेटसे पकडलीया..

तो सृती बहुत ही सर्मसार होते हसने लगी.. उनके तनमे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोडके चली गइ.. ओर उनकी चुत गीली होने लगी.. तभी सृतीने अपने कंधेपे कुछ भारीपान महेसुस हुआ.. ओर उसने अ‍ेक बार पीछे मुडकर देखा तो लखन उनसे पुरी तराह चीपकते सृतीके कंधेपे सर रखकर बैठा अ‍ेन्जोय कर रहा था.. तो सृती भी अ‍ेक्साइटेड होते लखनकी सभी हरकतोको अन्जोय कर रही थी..

आज लखन ओर सृती पुरे रोमेन्टीक मुड मे थे.. फीर दोनो वापस घरपे आगये.. ओर अंदर चले गये.. फीर सृतीने सबका मुह मीठा करवाया.. तब लखनके मुहमे मीठाइआ देते सृती लखनकी ओर कातीलाना नजरोसे देखते हसती रही.. तो लखनने भी मीठाइका पुरा पीस सृतीके मुहमे ठुस दिया.. तो सृती जोरोसे हसते मीठाइ मुहसे बहार नीकालने लगी.. तो लखनने उनके मुहको पकडकर अपनी बाहोमे दबोच लीया..

ओर मीठाइका पुरा पीस खीला दीया ओर उनका मुह मीठा करवाया.. तब सृती बहुत ही सरमाइ.. ओर कातील नजरोसे देखते हसते हुअ‍े लखनको बाजुमे अ‍ेक मुका भी मार दीया.. फीर लखनने नीलम ओर रमाके मुहमे भी मीठाइ खीलाइ.. तो रमा ओर नीलम भी बहुत सरमाइ.. तब लता भी लखन ओर सृतीकी मस्तीया देखते हसती रही.. फीर लखनने लता ओर रजीयाको भी मीठाइया खीलाइ.. तक रजीयाने राधीकाका खाना भी बनालीया था....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१७

ओर ओर मीठाइका पुरा पीस खीला दीया ओर उनका मुह मीठा करवाया.. तब सृती बहुत ही सरमाइ.. ओर कातील नजरोसे देखते हसते हुअ‍े लखनको बाजुमे अ‍ेक मुका भी मार दीया.. फीर लखनने नीलम ओर रमाके मुहमे भी मीठाइ खीलाइ.. तो रमा ओर नीलम भी बहुत सरमाइ.. तब लता भी लखन ओर सृतीकी मस्तीया देखते हसती रही.. फीर लखनने लता ओर रजीयाको भी मीठाइया खीलाइ.. तक रजीयाने राधीकाका खाना भी बनालीया था.... अब आगे

तो वो लखनको राधीकाके लीये टीफीन देती हे.. आज रमाने पुरा दिन घरको सजानेमे लताकी मदद की थी.. ओर उपरसे पुनमके कहेनेपे लता रमाको लखनके साथ अकेलेमे टाइम स्पेन्ड करवाना चाहती थी.. तो लता लखनको अपने साथ रमा भाभीको भी साथ लेजानेको कहेती हे.. ताकी उसे बहार घुमकर थोडा चेन्ज भी मीले.. ओर लखनके साथ अकेलेमे समय भी बता सके.. तो रमा भाभी लताकी बात सुनकर बहुत खुस होते लखनके साथ जानेको राजी होगइ..

लता : (लखनकी ओर कातील नजरोसे स्माइल करते) लखन.. आप रमा भाभीको साथ लेजाओ.. उनको हमारी नइ सौतनसे भी मीलवा देना.. ओर इनको कही घुमा भी देना.. आज सारा दिन घरमे काम करते बोर होगइ होगी.. क्यु भाभी..? हें..हें..हें..

रमा : (मौकेका फायदा उठाते) हां.. अगर हमारे जमाइ मुजे घुमाने लेजाये तो मे मना थोडीना करुगी..? हें..हें..हें.. चलीये मे भी आती हु.. आप थोडा इन्तजार कीजीये मे अभी चेन्ज करके आइ..

कहेते रमा जटसे अपने रुममे चली गइ.. ओर अपने आपको हल्कासा मेक अप करते सजाने लगी.. जैसे वो होस्पीटल नही.. अपने यारके साथ घुमने जा रही हो.. फीर कुछ ही देरमे वो तैयार होकर बहार आगइ.. तो सृतीने लखनको अपनी कारकी चाबी देदी.. तब नीलमको अपनी मम्मीको देखकर थोडी ज्वेलेसी फील होने लगी.. ओर लखन रमाको लेकर बहार चला गया.. तब लता ओर सृती.. दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने रहस्य भरी मुस्कान करने लगे..

लखन रमाके जाते ही सृती फ्रेस होने ओर चेन्ज करने उपर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर बाथरुममे जाते ही दरवाजा बंध करते उनके पीछे आंख बंध करते खडी होगइ.. आज लखनके साथ उसने कैसी कैसी बाते करली थी.. यहा तक उनको अपना लींग दीखानेके लीये भी केह दीया था.. ओर स्कुटर चलाते उनका लंड भी पीछे महेसुस करलीया.. तब लखन उनकी कमरमे हाथ डालकर कैसे इनके पेटको सहेला रहा था..

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यही सब सोचते सृती सरमाकर मुस्कुराने लगी.. उनकी चुत हरकतमे आगइ.. ओर पानीका रीसाव करते गीली होने लगी.. तब सृती बहुत ही सर्मसार होयइ.. फीर धीरेसे आयनेके सामने चली गइ.. ओर अपने आपको आयनेमे नीहारते अलग अलग पोज मे देखने लगी.. फीर अपने बुब्सपे हाथ रखते दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाने लगी.. आज लखनसे इतनी सारी बाते करते वो बहुत ही उतेजीत होगइ थी..

फीर भी सृतीने बडी मुस्कीलसे अपने आपको कंट्रोल कीया.. वो फ्रेस होते ही चेन्ज करके नीचे आगइ.. तो लता होलमे अकेली बैठी थी.. नीलम अपने रुममे थी ओर अपना होमवर्क करते अपनी मां रमाके बारेमे सोचमे डुबी हुइ थी.. तभी रजीया सरमाती जटसे उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तो सृती लताके पास आकर बैठ गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने हसने लगी.. तो लता सरमाते धीरेसे सृतीके पास सरकते आगइ.. ओर उनसे धीमी आवाजमे बात करने लगी..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. मेने रमा भाभीको इनके साथ भेजकर सही कीया हेनां..? क्युकी पुनो दीदीने मुजसे कहा था.. की इन दोनोको मीलनेका पुरा मौका देना हे.. तो मेने भेज दीया..

सृती : (मुस्कुराते) हां लता.. तुमने बीलकुल सही कीया.. ओर देख अभी पास ही नीलु इनके रुममे हे.. कही हमारी बात सुनकर उनको सक ना होजाये.. तो फीर हम उपर ही मेरे कमेरेमे बैठकर बात करते हे.. तु ये बता.. जो मंजु दीदीने मेरे देवरसे बदलावके बारेमे बात की.. उस बारेमे तुम दोनोके बीच कोइ चर्चा हुइ..?

लता : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) हां भाभी.. कल हम सुबह सब सामान लेने बाजार गये.. तब ही इस बारेमे हम दोनोके बीच चर्चा हुइ.. भाभी.. इनको सब पता हे.. की मैने उनसे सादी क्यु की.. उसने पुनम दीदीके साथ अपने प्यारको भी स्वीकार करलीया.. भाभी.. इस नीर्णयसे उनको कोइ अ‍ेतराज नही हे.. वो खुसी खुसी भाइके साथ मुजे बाटनेके लीये राजी हो गये हे..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) लता.. चलो.. अ‍ेक टेन्शन तो खतम होगइ.. वरना मुजे ओर पुनोदीदीको तेरी ही चीन्ता सता रही थी.. लता.. अ‍ेक बात पुछु..? तुम तो इनकी बीवी हो.. तो क्या वाकइ इनका देवुसे बडा हो गया हे..? आज मुजे खुलकर बतानां.. उस दिन हमारी इतनी बात नही हुइ..

लता : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हां भाभी.. अरे बापरे.. कीसी अजगरकी तराह होगया हे.. भाभी.. पहेले इनका इतना बडा नही था.. उस दिन अभी थोडासा फसाया ही था.. ओर मुजे इतनी जलन हुइ.. मे तो समजी मेरी मुनीया फट गइ हे.. भाभी.. कभी मौका मीले तो आप भी देख लेना.. क्युकी अब तो हमे सभी तराहकी छुट मील गइ हे.. अगर आप चाहो तो आप भी अजमा लेना.. हें..हें..हें..

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सृती : (सर्मसार होकर अ‍ेक मुका मारते) अरे यार इतनी जल्दी..? अरे नही नही.. लता तु बहुत बीगड गइ हे.. भले ही मंजुने वो सब कहा हो.. वो मेरे देवर हे.. ओर हम अभी इसके लीये इतनी प्रिपेर भी नही हे..

लता : (धीरेसे हसते) ओ भाभी.. अब क्या सरमाना.. पुनो दीदीसे सुना नही..? की अब हमे चारोको ही सब कुछ सम्हालना हे.. तो फीर अब हमारे बीच कैसा पर्दा..? आज नही तो कल.. ये सब तो अब होने ही वाला हे.. भाभी.. अब आप भी मेरी तराह सब खुलकर बाते कीजीये.. अब हमे अ‍ेक दुसरेसे सरमानेकी कोइ जरुरत नही हे.. अब जब भी लखनको मीलनेका मन करे.. मील लीजीयेगा.. हमे अब कीसी तराहका कोइ अ‍ेतराज नही करना.. मे भी तो बडे भैयासे मीलुगी..

सृती : (सर्मसार होते हसते धीरेसे) कमीनी तो फीर बोलना तुजे हमारे पतीको मीलनेकी जल्दी हे.. अरे हां लता.. भैयासे याद आया.. मंजुने कहा हे.. की यहाका सब सेट होजाये.. तो तुजे वापस गांव जाना हे.. हम घरसे नीकले तब अ‍ैसा कुछ मंजु केह रही थी..

लता : (मनमे खुस होते) हां भाभी.. बस.. इस बारेमे अ‍ेक बार लखनसे बात करनी हे.. ओर मे चाहती हु.. इस बारेमे मंजु दीदी खुद लखनसे बात करले.. मेतो जानेके लीये तैयार हु.. बस.. फीर आप सम्हाल लेना मेरे लखनको.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) अरे यार.. तुमने तो पुरी तैयारीया करली हे.. लता.. थेन्क्स.. तुम कीतनी समजदार होगइ हो.. लेकीन अभी नही.. जब वक्त आयेगा तब मे उनसे मील लुगी.. फील हाल तो हम दोनोको वो भाइ बहेनके बीच सुलह करवानी हे..

लता : (आस्चर्यसे देखते धीरेस) भाइ बहेन के बीच सुलह..? भाभी.. आप क्या केह रही हो..? क्या हुआ दोनोके बीच..? कुछ जगडा बगडा तो नही हुआ..? मुजे तो कुछ पता ही नही हे..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) लता.. प्लीज.. कीसीको कहेना नही.. तुम भी मेरी तराह खुली सोच वाली हो इसीलीये तुजे बता रही हु.. चल हम दोनो उपर मेरे रुममे जाकर बैठते हे ओर वही बात करते हे..? तबतक देवरजी ओर रमा भाभी भी आजायेगे.. फीर हम साथमे डीनर कर लेगे..

लता : (मुस्कुराते खडी होते धीरेसे) हां भाभी चलीये.. यहा बात करना थोडा खतरा भी हे.. तबतक रमा भाभी भी आजाअ‍ेगी..

सृती : (हसते साथ चलते धीरेसे) अरे हां.. रमा भाभीसे याद आया.. लता तुमने कुछ नोटीस कीया..? तुमने उनको देवरजीके साथ जानेको कहा तो कैसे खुस होगइ.. ओर तैयार होकर पटाका बनके चली गइ.. अब देवरजीको कहेकर इनका भी उधार करवादो.. मे कमीनीकी चीखे सुनना चाहती हु.. हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. चीखेतो मेभी सुनना चाहती हु.. लेकीन इस कमीनीकी.. क्युकी ये भी हमारी पुनोदीदीका घर उजाडनेके तुली हुइ हे.. क्या आपको सीर्फ चीखे ही सुननी हे..? मे तो इनका पुरा लाइव सो भी देखना चाहती हु.. हें..हें..हें.. देखु तो सही मेरा पती कैसे मेरी भाभी भतीजीकी चुतको फाडता हे.. कमीनीकी नजर हमारी जायदाद पे हे..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) लता.. लेकीन हम देखेगे कैसे..? क्या बहारकी ओर कुछ खीडकी बीडकी नही हे..? अभी वो अपने कमरेमे भी नही हे.. तो जरा देख तो ले..

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. चलीये.. हम देखकर आते हे.. वैसे भी यहा बात करनेमे थोडा खतरा हे.. वो नीलु भी यही हे.. चलीये..

कहेते दोनो रमाके रुममे चली गइ.. देखा तो बहारकी साइड खीडकी लगी हुइ थी.. तो दोनो देखकर खुस होगइ.. ओर अ‍ेक दुसरेके सामने देखते हसने लगी.. फीर लताने जाकर खीडकीकी कुंडी खोलदी.. ओर हल्कासा धका मारते खीडकीको थोडासा खोल दीया.. फीर आगे पर्दा लगालीया ताकी खुली खीडकी ना दीखे.. फीर बहार नीकलकर धीरे धीरे बाते करते उपरकी मंजीलपे चली गइ..
 
आम तोरपे उपर कोइ नही आता था.. तो जब भी लता नीचे होती तब दरवाजा खुला ही रखती.. तो आज भी रजीया दरवाजा खुला रखकर अपनी चुतपे पेड लगा रही थी.. दरसल रजीयाका पीरीयड सुरु हो गया था.. तभी तो वो जटसे उपरकी मंजीलपे चली गइ थी.. तब लता ओर सृतीने उसे देखलीया.. तो दोनो रजीयाके पास चली गइ.. तब रजीया दोनोको देखकर बहुत ही सर्मसार होने लगी.. तभी..

लता : (मुस्कुराते) दीदी क्या हुआ..? कुछ तकलीफ तो नही..?

रजीया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो अचानक पीरीयड सुरु होगया.. तो इधर आगइ..

सृती : (मुस्कुराते) रजीया दीदी तो फीर अब आप आराम करो.. आपका खाना मे यहा देजाउगी.. ओर अब खाना बनानेकी फीकर मत करना.. वो सब मे ओर लता देख लेगे.. ओके..?

रजीया : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. आप खाना मत लाना.. मे वही आजाउगी..

लता : (मुस्कुराते) रजीया दीदी आप सरमाओ मत.. सृती भाभी सही केह रही हे.. आप आराम करलो.. दो दिनके बाद काम करना.. वरना कमजोरी आजायेगी..

रजीया : (सरमाते मुस्कुराते) जी दीदी.. तो फीर मे यही हु..

सृती : रजीया दीदी.. हम दोनो मेरे रुममे हे.. कुछ जरुरी बाते करनी हे.. अगर देवरजी आये तो आवाज लगाना हम डीनर कर लेगे..

रजीया : (मुस्कुराते) जी दीदी.. आप जाइअ‍े वो आयेगे तो मे आपको बुला लुगी..

कहा तो सृती ओर लता सृतीके रुममे चली गइ.. तो दुसरी ओर लखन पहेले सीधा ही होस्पीटलपे चला गया.. ओर वहा राधीकाको खाना देदीया.. ओर रमाका परीचय करवाया तब राधीका सरमाकर नमस्ते कहेने लगी.. फीर लखनने वहा राधीकाकी मम्मीसे खुब बातेकी ओर उनको बहुत हसाया.. तो राधीका खाना खाते उन दोनोको देखकर बहुत खुस होगइ.. फीर जब राधीकाने खाना खालीया.. तो..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) लखन.. वो.. आप होस्टेलपे गये थे..? वहा कोइ दिकत तो नही..?

लखन : (मुस्कुराते) नही राधु.. तुम वहाकी फीकर मत करो.. मे फुरसतमे वही रहुगा.. मुजे तो सीर्फ फोनसे ही बीजनेस देखना हे.. जब मम्मी ठीक होजाये ओर तुम हमारे घरपे आजाओ.. तब मे हमारी ओफीसपे जाउगा.. तुम मम्मीका खयाल रखो..

राधीका : (आंख गीली करते) लखन.. थेन्क्स.. वरना मे सब कुछ कैसे सम्हालती..?

लखन : (थोडा गुस्से होते) अ‍ेक जापट लगाउगानां.. अपने पतीको थेन्क्स कहेती हो..? सरम भी नही आती.. अ‍ेक बार मम्मीको घरपे आनेदो.. फीर हम दोनो मीलकर तुजे खुब पीटेगे.. क्यु मम्मी..? हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते) अरे राधीका दीदी.. आप फीकर मत करो.. आप भी मेरी ननंद हो.. बस.. कल अ‍ेक दिनका काम हे.. तो घरपे सब सेट होजायेगा.. फीर मे भी यहा माजीकी देखभाल करने आजाउगी.. तो आप होस्टेलपे चली जाना..

राधीका : (सरमाकर हसते) जी भाभी.. लेकीन सायद अ‍ेक दो दिनमे तो मम्मीको भी यहासे छुटी मील जायेगी.. तो फीर कोइ दिकत नही हे..

लखन : नही.. अगर छुटी मील भी जाये तो भी मम्मीजीको कुछ दिन हमारे घरपे ले जायेगे.. वहा सृती भाभी लता रमा भाभी सबलोग होगे.. तो मम्मीजी की देख भाल होजायेगी.. जब मम्मीजी बीलकुल ठीक होजाये.. तब हम सोचेगे.. की क्या करना हे.. अभी तो तुजे बोला हे इतना ही करना हे..

राधीका : (सरमाते हसते) जी.. लखन.. ये लीजीये हमारी ओफीसकी अ‍ेक चाबी आपके पास रखीये.. ओर वो रसोयपे ध्यान रखीयेगा.. लडकीओको अच्छा खाना मील रहा हे की नही..

लखन : (मुस्कुराते चाबी लेते) ठीक हे.. तुम वहाकी फीकर मत करना वो सब मे देख लुगा.. चलो हम चलते हे..

रमा : (जानेके लीये खडी होते) राधु दीदी मे परसो आउगी.. ओर यही रहुगी.. आप फीकर मत करना..

राधीका : (सरमाकर धीरेसे) जी भाभी.. बाय..

कहातो लखन ओर रमा बाय बोलकर वहासे नीकल गये.. तब साम ढलनेको आइ थी.. दोनो कारमे आकर बैठ गये.. तब रमा बहुत ही सरमाने लगी.. कारके अंदर बैठते ही लखनने रमाकी जांगोपे हाथ रख दीया.. तो रमाके तनसे बीजलीकी तराह करंट दोडने लगा.. वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनसे नजरे चुराते मुस्कुराने लगी.. ओर उसने हिंमत करते लखनके हाथपे हाथ रख दीया..

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लखन : भाभी.. चलोना मुजे आपसे प्यार करना हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. यहा नही प्लीज.. कोइ देख लेगा.. पहेले आप कही जाने दीजीये..

लखन : (हाथ हटाते मुस्कुराते) भाभी.. पहेले कहा जाना हे..? चलो.. पहेले कही घुमकर आते हे.. फीर हमारे पास अ‍ेक जगाह हे.. हम वही चले जायेगे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. तो पहेले वही ले लीजीयेनां.. अभी खानेका टाइम भी होगया हे.. तो घरपे सबलोग हमारा इन्तजार करते होगे.. हम कल परसो फुरसतमे कही घुमने जायेगे..

लखन : (मुस्कुराते कार चलाते) ठीक हे भाभी.. मे तो आपके साथ समय बीताना चाहता था.. तो आज हमे वही चले जाते हे.. ये राधुकी होस्टेल ही हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. देखनां.. वहा कोइ खतरा तो नही हेनां..

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही भाभी.. वहा उनकी ओफीसमे अ‍ेक पर्सनल कमरा हे.. मे ओर राधु वही मीलते थे..क्या भानु भाइका फोन बोन आता हेकी नही..?

रमा : (थोडी नीरास होते) नही.. लखनजी.. अब उनको तो हमारी कुछ फीकर ही नही हे.. जबसे आपके यहा आइ हु.. तबसे उन्होने मुजे अ‍ेक फोन भी नही कीया.. पता नही वो अकेले कैसे रहेते होगे.. अ‍ेक आप दोनो भाइ हो.. जो अपनी कीसी भी बीवीओको छोडते ही नही हो.. ओर अ‍ेक आपके भाइ.. जो हमारी खबर तक नही लेते..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. अब मे हुनां.. अब मे आपका खयाल रखुगा..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) लखनजी.. बस.. अब तो हम मां बेटीको आपहीसे उमीद हे.. कास हमारी जींदगीमे कोइ आप जैसा पती होते.. जो अपनी बीवीओको खुस रखते हे..

लखन : (सामने देखते) भाभी.. हम मां बेटीसे मतलब..? क्या वो नीलुका भी खयाल नही रखते..?

रमा : (गलतीका अहेसास होते ही) अरे नही नही.. खयाल तो हम दोनोका रखते हे.. हम मां बेटी. मतलब.. वो नीलुसे ज्यादा बात नही करते.. लखनजी.. बस अ‍ेक ही चीन्ता हे.. नीलुको भी आपके जैसा प्यार करने वाला पती मील जाये तो मेरी चीन्ता ही खतम होजायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. जरुर मील जायेगा.. मे ओर लता हेनां.. ओर वैसे भी आपने अभी मेरा प्यार देखा ही कहा..? देखना अ‍ेक बार हम दोनो मीलेगे तब आप मेरी दिवानी होजायेगी.. अ‍ेक बार चलीये तो सही..

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) लखनजी.. प्लीज.. अभी ज्यादा कुछ नही.. सीर्फ उपर उपरसे.. क्युकी हमे जल्दी घरपे वापस भी जाना हे.. दो दिन होगये.. आप तो आते ही नही.. मे तो रातमे भी दरवाजा खुला रखती हु.. मत भुलो मे यहा सीर्फ आपके लीये आइ हु.. फीर मे रातमे आपका इन्तजार करते नीलुके साथ सो जाती हु..

लखन : (मुस्कुराते बुब्सको दबाते) भाभी.. आज आप अपने कमरेमे ही रहेना.. मे देर रात आजाउगा.. फीर हम दोनो पुरी रात प्यार करेगे.. आखीर आज हम दोनोका मीलन होही जायेगा.. फीकर मत करो..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) लखनजी.. मैने सुना हे आपको कुछ जडी बुटी दी गइ हे.. जीनकी वजहसे आपका काफी बडा लग रहा हे.. तो मुजे कोइ तकलीफ तो नही होगीनां..? देखना बाबा मेरी ननंदको हमपे सक ना होजाये..

लखन : (हसते चुटकी लेते) भाभी.. मेरा क्या बडा हो गया हे..? मतलब..? क्या बडा होगया हे..?

रमा : (सर्मसार होते नजरे चुराते) चलो. हटो बदमास.. मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो.. जैसे आपको पता ही नही हे..

लखन : (मुस्कुराते सामने देखते) अरे भाभी बताइअ‍ेना.. अब हम दोनोके बीच कैसा पर्दा..? हम आपसमे प्यारजो करते हे.. आप मेरी इतनीसी बात नही मानेगी..? बताइअ‍ेना..?

रमा : (बहुत ही सर्मसार होते कारकी बहारकी ओर देखते मुस्कुराते) नही..

लखन : (मुस्कुराते) क्या नही..? भाभी.. अ‍ैसे सरमाइअ‍े मत.. आपको मेरी कसम.. बताइअ‍े..

रमा : (थोडा नाराज होते बाजुमे अ‍ेक मुका मारते) लखनजी.. आप बहुत गंदे हो.. इतनीसी बातमे कोइ कसम देता हे क्या..? जाओ मे आपसे बात नही करती.. कटी..

लखन : (हसते) अरे.. आपतो नाराज होगइ.. ठीक हे मे कसम नही देता.. अब तो कहीये.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते हसते) मतलब आप नही मानोगे..? लतादीदी सही केह रही थी.. आप बहुत जीदी हो.. ठीक हे.. मे वो.. वो.. आपके सुसु करनेकी जगाहकी बात कर रही थी..

लखन : (चुटकी लेते हसते) भाभी.. इसका भी कोइ नाम तो होगा.. बताइअ‍ेनां.. हें..हें..हें..

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) आप बहुत कमीने हो.. मुजसे नाम बुलवाकर ही मानोगे.. वो.. वो.. मे.. मे.. आपके लं..ड..की बात कर रही थी.. बस.. अबतो तसली मील गइ..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे भाभी.. फीकर मत करो.. हम प्यारसे करेगे.. भाभी.. अभी हम जा रहे हे.. तो वही देख लेना.. मुजे भी आपसे मीलनेका बहुत मन कर रहा हे.. आज आपको छोडने वाला नही हु..

रमा : (सरमाते कातील नजरोसे देखते) जोओजी.. मीलते तो हो नही.. लखनजी.. इसीलीये तो मे यहा आइ हु.. मे भी कही दिनोसे इसी दिनके इन्तेजारमे हु.. आपने तो मेरी रातोकी नींद ही हराम करके रखी हे.. मे भी आपसे मीलनेके लीये तरस रही हु.. लेकीन अभी नही.. हम रातमे फुरसतमे मीलन करेगे.. अभी सीर्फ उपर उपरसे.. चलीयेना हमे देर होजायेगी..

कहातो कारको लखनने सीधे ही राधीकाकी होस्टेलपे लेली.. तब सभी लडकीया खाना खाने डाइनींग रुममे थी.. तो लखन रमाको लेकर धीरेसे ओफीस खोलकर अंदर चला गया.. ओर दरवाजा लोक करके अंदरके कमरेमे चला गया.. ओर उनका दरवाजा बंध करके लाइट जलादी.. तो रमा दोनोका सीक्रेट रुम देखकर सर्मसार होगइ.. उनके दिलकी धडकन तेज होने लगी..
 
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