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- Dec 5, 2013
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पुनम : (धीरेसे) भाइ.. मुजे माफ करदो.. वो मेरी आखरी गलती थी.. अब मे आपको सीकायतका मौका कभी नही दुगी.. बस.. सीर्फ अेक बार अपनी बहेनको माफ करदो.. मे वादा करती हु.. जींदगी भर आपका साथ नही छोडुगी..
लखन : (सरको सहेलाते) दी.. क्या कर रही हो..? यहा सबलोग हे.. हम आरामसे मीलकर बात करेगेनां.. मेने आपको माफ करदीया हे.. चलीये.. हम बादमे मीलते हे..
पुनम (मुस्कुराते आंसु पोछते) हां भाइ.. मे भावनाओमे बहेक गइ थी.. चलीये.. मुजे आपसे ढेर सारी बाते करनी हे.. भाइ.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु.. चलो..
फीर पुनम ओर लखन जटसे चलकर सबके साथ होगये.. आश्रमपे आते ही पुनमने दयाको सादीके जोडेमे सजा दीया था.. तो दया देवायतके साथ चलते बहुत ही सरमा रही थी.. तब उनके साथ लता ओर सृती भी हस हसके बाते करने लगी.. तो आज नीलम लखनके साथ चलते उनसे हस हसके बाते करने लगी.. जीसे देखकर रमा भी बहुत खुस होगइ.. ओर उसे अपना सपना पुरा होते नजर आने लगा..
सब लोग मंदिरमे आगये.. तो ओर वही खडे होगये.. तो लखन भी आकर सबके साथ खडा होगया.. तो पुनम उनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर लखनको आंखोके इसारोसे पास आकर खडे रहेनेको कहा.. तो लखन मुस्कुराते पुनमके पीछे आकर खडा होगया.. तो पुनम भी लता सृतीसे बाते करते धिरेसे सरकते लखनके पास आगइ.. ओर उसने हिंमत करते नीचेसे ही लखनका हाथ थाम लीया..
तब लखनकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. ओर वो मुस्कुराते हुअे पुनमकी ओर देखने लगा.. तो पुनम हां मे गरदन हीलाते हसने लगी.. ओर लखनने पुनमके होथोमे पंजा फसालीया.. ओर कसके पकड लीया.. जैसे दो प्रेमी दुनीयासे छुपर अपना प्यार जता रहे हो.. तभी मंजुने केरी बेगसे दो हार नीकालके देवायत ओर दयाको थमा दीया.. तो बाबाने हवनके सामने देवायत ओर दयाको साथ बीठा दीया..
ओर हवन जलाकर दोनोके हाथसे कुछ आहुती डलवाइ.. फीर दोनोको अेक दुसरेको हार पहेनाया.. ओर बाबाने दोनोको अग्नीके सामने सात फेरे लगवाये.. फीर देवायतसे दयाकी मांग भी भरवाइ ओर उसे मंगलसुत्र भी पहेनाया.. पुरी सादीके दौरान कीसीको ना दिखे अैसे पुनम ओर लखन अेक दुसरेके हाथ थामे खडे रहे.. तब ना लखनके मनमे कोइ वासना या गीला सीकवा था..तो ना पुनमके मनमे..
जैसे ही सादी संपन हुइ पुनमने लखनसे अपना हाथ छुडवा लीया.. ओर लखनसे थोडी दुर जाकर खडी होगइ.. तब देवायत ओर दया बाबाके पांव छुकर आशीर्वाद लेते ही फीर दोनो रामुकाकाके पास आकर उनके पैर छुते हे.. तब रामुकाकाकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तो मंजुने उसे हसते हुअे सम्हाल लीया.. फीर सबलोग भोजन खंडकी ओर जाने लगे.. तब पुनम सृती लता ओर नीलम लखनके साथ चलने लगी..
तो पुनम लखनके साथ कोइ बात नही करपाइ.. फीर सबलोग भोजन करने बैठ गये.. तो आज पहेली बार दया सादीके जोडेमे देवायतके पास बैठकर भोजन कर रही थी.. जीसे वो बहुत सरमा रही थी.. तो लखनके अेक तरफ लता बैठ गइ.. ओर उसने जान बुजकर लखनकी दुसरी ओर पुनमको बीठा दीया.. तो सृतीको अच्छी नही लगा.. उसे समजमे नही आ रहा था.. की लता उनके साथ अैसा क्यु कर रही हे..?
सृती बार बार लखनकी ओर देखती रही.. इस उमीदमे.. की लखन अेक बारतो उनके सामने देखेगा.. लेकीन लखन तो पुनमके साथ बातोमे लगा रहा.. दोनो धीरेसे बाते करते रहे.. तब भी पुनम बार बार लखनकी माफी मांगते साथ साथ अपने प्यारका इजहार भी कर रही थी.. फीर सबने भोजन करलीया तो सबलोग वापस होलमे आकर बाबाके पास बैठ गये..
तब देवायत ओर दया बाबाको प्रणाम करते उनको दक्षीणा देते हे.. तो बाबा भी मंजु सृती ओर पुनमसे वही अकेलेमे कुछ बात करते हे.. जीसे सुनकर पुनम ओर सृती बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. तो मंजु पुनमकी ओर देखते हसने लगी.. फीर सब लोग बाबाकी इजाजत लेकर वहासे नीकलने लगे.. ओर कारकी ओर जाने लगे.. तबभी पुनम बार बार लखनकी ओर देखते सरमाते हसती रही.. सब कारमे बैठने लगे..
तो लखनने इसारोसे पुनमको अपने साथ बैठनेको कहा.. तो पुनमने सरमाकर हसते नांमे गरदन हीलाते मना कर दीया.. ओर आंखोसे सृतीकी ओर इसारा कीया तो लखन समज गया.. फीर पुनम ओर लता सृतीकी कारमे बैठ गइ.. तो नीलम लखनके साथ ओर बाकीके सब देवायतके साथ बैठ गये.. तब मंजुने लखनको पुनमके घरपे रुकनेको कहा.. ओर सबलोग हवेलीकी ओर नीकल गये.. तो रास्तेमे..
सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनोदी.. लखन भैयासे आपकी काफी बाते हुइ.. तो क्या मेरे बारेमे कोइ बात हुइ..?
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) नही भाभी.. सबलोग थे.. तो उनसे कैसे बात करती..? क्या अभी भी आपसे नाराज हे..?
सृती : (सेड मुह करते) हां.. क्या करु दीदी.. मुजसे गलती होगइ.. ओर ये लता भी उनका साथ दे रही हे..
लता : (थोडी नाराज होते धीरेसे) भाभी.. तो क्या जरुरत थी उनको खरी खोटी सुनानेकी..? पता हे आपको वो रुममे आकर आंसु बहा रहे थे.. वो केह रहेथे जब आप दोनो स्कुटर लेने गये तब ही उसने मना करदीया था.. ये तो आपकी जीद थी.. आपको कुछ टेस्ट जो करने थे.. ओर उपरसे अपने घर जानेकी बात कहेदी..
सृती : (धीरेसे गीडगीडाते) यार लता.. मुजे माफ करदे.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ.. अब क्या करु? जबसे मेने कहा तबसे मेरे सामने तक नही देखते.. तो मेरा तो दिमागही काम नही कर रहा.. तो मुहसे नीकल गया.. लता.. तेरे साथ तो बात करता हे.. अब तुही उनको मनानां.. कहोतो उनसे माफी मांगनेके लीये भी तैयार हु..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. मे उनसे बात करलुगी.. लगता हे वो मेरी बात मान जायेगे..
सृती : (खुस होकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको तो सब पता ही हे.. ठीक हे.. आप ही बात करलेना..
पुनम : (थोडी सीरीयस होते) भाभी.. आज मे आजाद होगइ हु.. मेने धिरेनको डीवोर्स देदीया हे..
सृती : (सोक्ट होते) क्या..? क्या केह रही हे दीदी..? अैसे अचानक..? हमारे इस पतीको पता हे क्या..?
पुनम : (मुस्कुराते) नही भाभी.. सीर्फ आप दोनोको बताया.. ओर मंजुदीदी जानती हे.. ओर कोइ नही..
फीर पुनम सृती ओर लताको अपनी पुरी स्टोरी सुनाती हे.. जीसे सुनकर लता ओर सृती दोनो ही सोक्ट होजाती हे.. तो दुसरी ओर लखन ओर नीलमको आज बाते करनेका पुरा मोका मील गया था.. तो पीछली रातकी बाते करते दोनो अेक दुसरेकी मस्तीया करते पुनमके गांव पहोंच गये.. तब नीलम ओर लखनके बीच काफी नजदीकीया बढ गइ थी.. तभी देवायतने अपनी कार रोकदी तो पीछे सबने अपनी कार रोकली.. तब मंजुने लखनको कहा..
लखन : (सरको सहेलाते) दी.. क्या कर रही हो..? यहा सबलोग हे.. हम आरामसे मीलकर बात करेगेनां.. मेने आपको माफ करदीया हे.. चलीये.. हम बादमे मीलते हे..
पुनम (मुस्कुराते आंसु पोछते) हां भाइ.. मे भावनाओमे बहेक गइ थी.. चलीये.. मुजे आपसे ढेर सारी बाते करनी हे.. भाइ.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु.. चलो..
फीर पुनम ओर लखन जटसे चलकर सबके साथ होगये.. आश्रमपे आते ही पुनमने दयाको सादीके जोडेमे सजा दीया था.. तो दया देवायतके साथ चलते बहुत ही सरमा रही थी.. तब उनके साथ लता ओर सृती भी हस हसके बाते करने लगी.. तो आज नीलम लखनके साथ चलते उनसे हस हसके बाते करने लगी.. जीसे देखकर रमा भी बहुत खुस होगइ.. ओर उसे अपना सपना पुरा होते नजर आने लगा..
सब लोग मंदिरमे आगये.. तो ओर वही खडे होगये.. तो लखन भी आकर सबके साथ खडा होगया.. तो पुनम उनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर लखनको आंखोके इसारोसे पास आकर खडे रहेनेको कहा.. तो लखन मुस्कुराते पुनमके पीछे आकर खडा होगया.. तो पुनम भी लता सृतीसे बाते करते धिरेसे सरकते लखनके पास आगइ.. ओर उसने हिंमत करते नीचेसे ही लखनका हाथ थाम लीया..
तब लखनकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. ओर वो मुस्कुराते हुअे पुनमकी ओर देखने लगा.. तो पुनम हां मे गरदन हीलाते हसने लगी.. ओर लखनने पुनमके होथोमे पंजा फसालीया.. ओर कसके पकड लीया.. जैसे दो प्रेमी दुनीयासे छुपर अपना प्यार जता रहे हो.. तभी मंजुने केरी बेगसे दो हार नीकालके देवायत ओर दयाको थमा दीया.. तो बाबाने हवनके सामने देवायत ओर दयाको साथ बीठा दीया..
ओर हवन जलाकर दोनोके हाथसे कुछ आहुती डलवाइ.. फीर दोनोको अेक दुसरेको हार पहेनाया.. ओर बाबाने दोनोको अग्नीके सामने सात फेरे लगवाये.. फीर देवायतसे दयाकी मांग भी भरवाइ ओर उसे मंगलसुत्र भी पहेनाया.. पुरी सादीके दौरान कीसीको ना दिखे अैसे पुनम ओर लखन अेक दुसरेके हाथ थामे खडे रहे.. तब ना लखनके मनमे कोइ वासना या गीला सीकवा था..तो ना पुनमके मनमे..
जैसे ही सादी संपन हुइ पुनमने लखनसे अपना हाथ छुडवा लीया.. ओर लखनसे थोडी दुर जाकर खडी होगइ.. तब देवायत ओर दया बाबाके पांव छुकर आशीर्वाद लेते ही फीर दोनो रामुकाकाके पास आकर उनके पैर छुते हे.. तब रामुकाकाकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तो मंजुने उसे हसते हुअे सम्हाल लीया.. फीर सबलोग भोजन खंडकी ओर जाने लगे.. तब पुनम सृती लता ओर नीलम लखनके साथ चलने लगी..
तो पुनम लखनके साथ कोइ बात नही करपाइ.. फीर सबलोग भोजन करने बैठ गये.. तो आज पहेली बार दया सादीके जोडेमे देवायतके पास बैठकर भोजन कर रही थी.. जीसे वो बहुत सरमा रही थी.. तो लखनके अेक तरफ लता बैठ गइ.. ओर उसने जान बुजकर लखनकी दुसरी ओर पुनमको बीठा दीया.. तो सृतीको अच्छी नही लगा.. उसे समजमे नही आ रहा था.. की लता उनके साथ अैसा क्यु कर रही हे..?
सृती बार बार लखनकी ओर देखती रही.. इस उमीदमे.. की लखन अेक बारतो उनके सामने देखेगा.. लेकीन लखन तो पुनमके साथ बातोमे लगा रहा.. दोनो धीरेसे बाते करते रहे.. तब भी पुनम बार बार लखनकी माफी मांगते साथ साथ अपने प्यारका इजहार भी कर रही थी.. फीर सबने भोजन करलीया तो सबलोग वापस होलमे आकर बाबाके पास बैठ गये..
तब देवायत ओर दया बाबाको प्रणाम करते उनको दक्षीणा देते हे.. तो बाबा भी मंजु सृती ओर पुनमसे वही अकेलेमे कुछ बात करते हे.. जीसे सुनकर पुनम ओर सृती बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. तो मंजु पुनमकी ओर देखते हसने लगी.. फीर सब लोग बाबाकी इजाजत लेकर वहासे नीकलने लगे.. ओर कारकी ओर जाने लगे.. तबभी पुनम बार बार लखनकी ओर देखते सरमाते हसती रही.. सब कारमे बैठने लगे..
तो लखनने इसारोसे पुनमको अपने साथ बैठनेको कहा.. तो पुनमने सरमाकर हसते नांमे गरदन हीलाते मना कर दीया.. ओर आंखोसे सृतीकी ओर इसारा कीया तो लखन समज गया.. फीर पुनम ओर लता सृतीकी कारमे बैठ गइ.. तो नीलम लखनके साथ ओर बाकीके सब देवायतके साथ बैठ गये.. तब मंजुने लखनको पुनमके घरपे रुकनेको कहा.. ओर सबलोग हवेलीकी ओर नीकल गये.. तो रास्तेमे..
सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनोदी.. लखन भैयासे आपकी काफी बाते हुइ.. तो क्या मेरे बारेमे कोइ बात हुइ..?
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) नही भाभी.. सबलोग थे.. तो उनसे कैसे बात करती..? क्या अभी भी आपसे नाराज हे..?
सृती : (सेड मुह करते) हां.. क्या करु दीदी.. मुजसे गलती होगइ.. ओर ये लता भी उनका साथ दे रही हे..
लता : (थोडी नाराज होते धीरेसे) भाभी.. तो क्या जरुरत थी उनको खरी खोटी सुनानेकी..? पता हे आपको वो रुममे आकर आंसु बहा रहे थे.. वो केह रहेथे जब आप दोनो स्कुटर लेने गये तब ही उसने मना करदीया था.. ये तो आपकी जीद थी.. आपको कुछ टेस्ट जो करने थे.. ओर उपरसे अपने घर जानेकी बात कहेदी..
सृती : (धीरेसे गीडगीडाते) यार लता.. मुजे माफ करदे.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ.. अब क्या करु? जबसे मेने कहा तबसे मेरे सामने तक नही देखते.. तो मेरा तो दिमागही काम नही कर रहा.. तो मुहसे नीकल गया.. लता.. तेरे साथ तो बात करता हे.. अब तुही उनको मनानां.. कहोतो उनसे माफी मांगनेके लीये भी तैयार हु..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. मे उनसे बात करलुगी.. लगता हे वो मेरी बात मान जायेगे..
सृती : (खुस होकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको तो सब पता ही हे.. ठीक हे.. आप ही बात करलेना..
पुनम : (थोडी सीरीयस होते) भाभी.. आज मे आजाद होगइ हु.. मेने धिरेनको डीवोर्स देदीया हे..
सृती : (सोक्ट होते) क्या..? क्या केह रही हे दीदी..? अैसे अचानक..? हमारे इस पतीको पता हे क्या..?
पुनम : (मुस्कुराते) नही भाभी.. सीर्फ आप दोनोको बताया.. ओर मंजुदीदी जानती हे.. ओर कोइ नही..
फीर पुनम सृती ओर लताको अपनी पुरी स्टोरी सुनाती हे.. जीसे सुनकर लता ओर सृती दोनो ही सोक्ट होजाती हे.. तो दुसरी ओर लखन ओर नीलमको आज बाते करनेका पुरा मोका मील गया था.. तो पीछली रातकी बाते करते दोनो अेक दुसरेकी मस्तीया करते पुनमके गांव पहोंच गये.. तब नीलम ओर लखनके बीच काफी नजदीकीया बढ गइ थी.. तभी देवायतने अपनी कार रोकदी तो पीछे सबने अपनी कार रोकली.. तब मंजुने लखनको कहा..