Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 67 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

पुनम : (धीरेसे) भाइ.. मुजे माफ करदो.. वो मेरी आखरी गलती थी.. अब मे आपको सीकायतका मौका कभी नही दुगी.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार अपनी बहेनको माफ करदो.. मे वादा करती हु.. जींदगी भर आपका साथ नही छोडुगी..

लखन : (सरको सहेलाते) दी.. क्या कर रही हो..? यहा सबलोग हे.. हम आरामसे मीलकर बात करेगेनां.. मेने आपको माफ करदीया हे.. चलीये.. हम बादमे मीलते हे..

पुनम (मुस्कुराते आंसु पोछते) हां भाइ.. मे भावनाओमे बहेक गइ थी.. चलीये.. मुजे आपसे ढेर सारी बाते करनी हे.. भाइ.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु.. चलो..

फीर पुनम ओर लखन जटसे चलकर सबके साथ होगये.. आश्रमपे आते ही पुनमने दयाको सादीके जोडेमे सजा दीया था.. तो दया देवायतके साथ चलते बहुत ही सरमा रही थी.. तब उनके साथ लता ओर सृती भी हस हसके बाते करने लगी.. तो आज नीलम लखनके साथ चलते उनसे हस हसके बाते करने लगी.. जीसे देखकर रमा भी बहुत खुस होगइ.. ओर उसे अपना सपना पुरा होते नजर आने लगा..

सब लोग मंदिरमे आगये.. तो ओर वही खडे होगये.. तो लखन भी आकर सबके साथ खडा होगया.. तो पुनम उनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर लखनको आंखोके इसारोसे पास आकर खडे रहेनेको कहा.. तो लखन मुस्कुराते पुनमके पीछे आकर खडा होगया.. तो पुनम भी लता सृतीसे बाते करते धिरेसे सरकते लखनके पास आगइ.. ओर उसने हिंमत करते नीचेसे ही लखनका हाथ थाम लीया..

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तब लखनकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. ओर वो मुस्कुराते हुअ‍े पुनमकी ओर देखने लगा.. तो पुनम हां मे गरदन हीलाते हसने लगी.. ओर लखनने पुनमके होथोमे पंजा फसालीया.. ओर कसके पकड लीया.. जैसे दो प्रेमी दुनीयासे छुपर अपना प्यार जता रहे हो.. तभी मंजुने केरी बेगसे दो हार नीकालके देवायत ओर दयाको थमा दीया.. तो बाबाने हवनके सामने देवायत ओर दयाको साथ बीठा दीया..

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ओर हवन जलाकर दोनोके हाथसे कुछ आहुती डलवाइ.. फीर दोनोको अ‍ेक दुसरेको हार पहेनाया.. ओर बाबाने दोनोको अग्नीके सामने सात फेरे लगवाये.. फीर देवायतसे दयाकी मांग भी भरवाइ ओर उसे मंगलसुत्र भी पहेनाया.. पुरी सादीके दौरान कीसीको ना दिखे अ‍ैसे पुनम ओर लखन अ‍ेक दुसरेके हाथ थामे खडे रहे.. तब ना लखनके मनमे कोइ वासना या गीला सीकवा था..तो ना पुनमके मनमे..

जैसे ही सादी संपन हुइ पुनमने लखनसे अपना हाथ छुडवा लीया.. ओर लखनसे थोडी दुर जाकर खडी होगइ.. तब देवायत ओर दया बाबाके पांव छुकर आशीर्वाद लेते ही फीर दोनो रामुकाकाके पास आकर उनके पैर छुते हे.. तब रामुकाकाकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तो मंजुने उसे हसते हुअ‍े सम्हाल लीया.. फीर सबलोग भोजन खंडकी ओर जाने लगे.. तब पुनम सृती लता ओर नीलम लखनके साथ चलने लगी..

तो पुनम लखनके साथ कोइ बात नही करपाइ.. फीर सबलोग भोजन करने बैठ गये.. तो आज पहेली बार दया सादीके जोडेमे देवायतके पास बैठकर भोजन कर रही थी.. जीसे वो बहुत सरमा रही थी.. तो लखनके अ‍ेक तरफ लता बैठ गइ.. ओर उसने जान बुजकर लखनकी दुसरी ओर पुनमको बीठा दीया.. तो सृतीको अच्छी नही लगा.. उसे समजमे नही आ रहा था.. की लता उनके साथ अ‍ैसा क्यु कर रही हे..?

सृती बार बार लखनकी ओर देखती रही.. इस उमीदमे.. की लखन अ‍ेक बारतो उनके सामने देखेगा.. लेकीन लखन तो पुनमके साथ बातोमे लगा रहा.. दोनो धीरेसे बाते करते रहे.. तब भी पुनम बार बार लखनकी माफी मांगते साथ साथ अपने प्यारका इजहार भी कर रही थी.. फीर सबने भोजन करलीया तो सबलोग वापस होलमे आकर बाबाके पास बैठ गये..

तब देवायत ओर दया बाबाको प्रणाम करते उनको दक्षीणा देते हे.. तो बाबा भी मंजु सृती ओर पुनमसे वही अकेलेमे कुछ बात करते हे.. जीसे सुनकर पुनम ओर सृती बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. तो मंजु पुनमकी ओर देखते हसने लगी.. फीर सब लोग बाबाकी इजाजत लेकर वहासे नीकलने लगे.. ओर कारकी ओर जाने लगे.. तबभी पुनम बार बार लखनकी ओर देखते सरमाते हसती रही.. सब कारमे बैठने लगे..

तो लखनने इसारोसे पुनमको अपने साथ बैठनेको कहा.. तो पुनमने सरमाकर हसते नांमे गरदन हीलाते मना कर दीया.. ओर आंखोसे सृतीकी ओर इसारा कीया तो लखन समज गया.. फीर पुनम ओर लता सृतीकी कारमे बैठ गइ.. तो नीलम लखनके साथ ओर बाकीके सब देवायतके साथ बैठ गये.. तब मंजुने लखनको पुनमके घरपे रुकनेको कहा.. ओर सबलोग हवेलीकी ओर नीकल गये.. तो रास्तेमे..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनोदी.. लखन भैयासे आपकी काफी बाते हुइ.. तो क्या मेरे बारेमे कोइ बात हुइ..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) नही भाभी.. सबलोग थे.. तो उनसे कैसे बात करती..? क्या अभी भी आपसे नाराज हे..?

सृती : (सेड मुह करते) हां.. क्या करु दीदी.. मुजसे गलती होगइ.. ओर ये लता भी उनका साथ दे रही हे..

लता : (थोडी नाराज होते धीरेसे) भाभी.. तो क्या जरुरत थी उनको खरी खोटी सुनानेकी..? पता हे आपको वो रुममे आकर आंसु बहा रहे थे.. वो केह रहेथे जब आप दोनो स्कुटर लेने गये तब ही उसने मना करदीया था.. ये तो आपकी जीद थी.. आपको कुछ टेस्ट जो करने थे.. ओर उपरसे अपने घर जानेकी बात कहेदी..

सृती : (धीरेसे गीडगीडाते) यार लता.. मुजे माफ करदे.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ.. अब क्या करु? जबसे मेने कहा तबसे मेरे सामने तक नही देखते.. तो मेरा तो दिमागही काम नही कर रहा.. तो मुहसे नीकल गया.. लता.. तेरे साथ तो बात करता हे.. अब तुही उनको मनानां.. कहोतो उनसे माफी मांगनेके लीये भी तैयार हु..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. मे उनसे बात करलुगी.. लगता हे वो मेरी बात मान जायेगे..

सृती : (खुस होकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको तो सब पता ही हे.. ठीक हे.. आप ही बात करलेना..

पुनम : (थोडी सीरीयस होते) भाभी.. आज मे आजाद होगइ हु.. मेने धिरेनको डीवोर्स देदीया हे..

सृती : (सोक्ट होते) क्या..? क्या केह रही हे दीदी..? अ‍ैसे अचानक..? हमारे इस पतीको पता हे क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही भाभी.. सीर्फ आप दोनोको बताया.. ओर मंजुदीदी जानती हे.. ओर कोइ नही..

फीर पुनम सृती ओर लताको अपनी पुरी स्टोरी सुनाती हे.. जीसे सुनकर लता ओर सृती दोनो ही सोक्ट होजाती हे.. तो दुसरी ओर लखन ओर नीलमको आज बाते करनेका पुरा मोका मील गया था.. तो पीछली रातकी बाते करते दोनो अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते पुनमके गांव पहोंच गये.. तब नीलम ओर लखनके बीच काफी नजदीकीया बढ गइ थी.. तभी देवायतने अपनी कार रोकदी तो पीछे सबने अपनी कार रोकली.. तब मंजुने लखनको कहा..
 
मंजुला : लखन बेटा.. तुम पुनमके साथ जाकर उनका ओर दयाका सभी सामान लेआओ.. ओर अपनी जीपमे रखकर लेआओ.. हम नीकलते हे..

लखन : (जीपसे उतरते) जी भाभीमां.. भैया आप नीकलीये मे सामान लेकर आता हु..

तब सृती ओर लता दोनो पुनम ओर लखनको अकेले मीलनेका मौका देते हे.. तो कारसे सीर्फ पुनम ही उतरती हे.. तब उनके दिलकी धडकन तेज होने लगी.. ओर वो सरमाते वही सृतीके पास खडी रही.. तो लताने आवाज देकर नीलमको अपनी कारमे बुला लीया.. ताकी घर तक पुनम लखनके साथ टाइम स्पेन्ड कर सके.. तो नीलम मुस्कुराते जीपसे उतरके सृतीकी कारमे बैठ गइ..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी हम कारमे ही बैठी हे.. आप लखन भैयाको लेकर फटाफट अपना सामान ले आइअ‍े.. हम यहा ही रुके हे..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. थोडी देर लगेगी.. क्युकी घरकी चाबी वो भीमा भाइके वहा छोडनी हे..

लखन : (पास आते मुस्कुराते) दीदी.. वो आप फीकर मत करो.. मेने भीमा भाइका घर देखा हे.. मे देकर आउगा..

ओर लखन पुनमके साथ सामान लेने पुनमके पीछे चलने लगा.. तब सृती लताकी ओर देखकर कातील स्माइल करती हे.. जैसे वो लतासे कोइ बदला ले रही हो.. तो लता भी सृतीकी ओर जुठे गुस्सेसे घुरने लगती हे.. ओर उनकी पीठमे अ‍ेक मुका जडती हे.. तो सृती लताकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी.. तब पुनम घरका ताला खोलते अंदर चली गइ.. ओर उनके पीछे पीछे लखन भी अंदर चला गया..

जैसे ही दोनो अंदर चले गये.. तो अंदर जाते ही अचानक पुनम जोरोसे लखनसे लीपट गइ.. ओर लखनको बाहोमे भीचते उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. जैसे कोइ दो प्रेमी बरसोसे बीछडे हुअ‍े हो.. ओर पहेली बार मील रहे हो.. तो लखन भी आस्चर्यसे हसते पुनमको अपनी बाहोमे भीच लेता हे.. ओर पुनमकी ओर देखते हसता रहेता हे.. तभी..

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पुनम : (लखनके चहेरेको चुमते) भाइ.. मुजे माफ करदो.. बस.. अ‍ेक बार मुजे माफ करो.. आइन्दा कभी आपको सीकायतका मौका नही दुगी.. भाइ.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (पुनमके चहेरेको हाथोमे थामते) दीदी.. आइ लव यु टु.. आपको माफ करदीया.. बस..? सोरी.. बहुत रुलाया आपको..

पुनम : (सीनेमे सर रखते) भाइ.. मे इतना रोइ तभी तो आपके प्यारकी अहेमीयतको समज पाइ.. भाइ.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत बहुत प्यार करती हु.. मुजे आपका प्यार कबुल हे.. बस.. मेरे प्यारको आप कबुल कर लीजीये..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) बस.. बस दीदी.. कर लीया.. क्या आपको सचमे मेरा प्यार कबुल हे..?

पुनम : (मुस्कुराते आंखोमे देखते) हां भाइ.. मे नादान आपके प्यारको समज नही पाइ.. ओर धिरेनके पले पड गइ.. बस.. जब हम पढते थे तब आपने थोडीसी हींमत करली होती.. तो आज मे धिरेनकी नही आपकी बीवी होती.. भाइ.. आज मे आजाद होगइ हु.. मेने धिरेनको डीवोर्स देदीया हे.. ओर अब मे बढे भैयाके साथ भी कोइ रीलेशन नही रखुगी.. आइ प्रोमीस.. अब मे हमेसा हमेसाके लीये आपकी होना चाहती हु.. भाइ.. मुजे अपनालो.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) दीदी.. आइ लव यु टु.. आज मेरा सभी सपना पुरा होगया.. चलो हम घरपे आरामसे बात करेगे.. बहार वो सब खडे हे.. मुजे आपसे ढेर सारी बाते करनी हे.. कहा हे सामान..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. क्या अ‍ैसे ही चले जाओगे..? अपनी दीदीका प्यार नही चाहीये आपको..?

कहेते पुनम प्यारसे लखनकी आंखोमे देखती रही.. ओर उसने हिंंमत करते अपने होठ लखनके होठोपे रख दीया.. ओर आंख बंध करते चुमने लगी.. तो लखनभी मदहोस होने लगा.. ओर वो भी पुनमके होठोको चुमते पुनमका साथ देने लगा.. दोनो सबकुछ भुलकर मदहोस होने लगे.. तभी लखनका हाथ पुनमके बुब्सपे चला गया.. ओर वो उनको मसलते पुनमके होठोका रसपान करने लगा..

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तो पुनम सरसे पांव तक कांपने लगी.. वो जोरोसे लखनको बाहोमे भीचते आंखोकी पुतलीया पलटाने लगी.. ओर कीसी नसेकी हालतमे होने लगी.. आज उसने लखनको नही रोका.. उसने अपना बुब्स मसलवाते थोडासा मुह खोल दीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे जीभ डालते पेच लडाने लगे.. पुनम काफी गरम होगइ.. ओर वो कंट्रोल खोने लगी.. उसने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर लखनके लंडपे रख दीया..

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ओर पेन्टके उपरसे ही पकडकर मसलने लगी.. पुनमकी इसी हकरतकी वजहसे लखन पुरी तराह पागल हो गया.. पुनमकी आंखे लाल होने लगी.. वो लखनकी आंखोमे देखने लगी.. तब लखनको उनकी आंखोमे वासना साफ दीखाइ दे रही थी.. तभी लखन अचानक पुनमसे दुर होगया.. तो पुनम होसमे आगइ.. ओर सर्मसार होते मुहको दुसरी ओर करते मुस्कुराने लगी.. फीर मुस्कुराते लखनको अपना सामान दिखाने लगी.. तो लखनने दोनोका सामान लेलीया.. तब..
 
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) सोरी भाइ.. अभी सीर्फ इतना ही.. वरना मे फीरसे बहेक जाउगी.. आइ लव यु सो मच.. अब ये पुनम सीर्फ आपकी हे.. भाइ.. आजसे मुजे नाम लेकर बुलाना..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) नही दी.. मेने अपनी दीदीको प्यार कीया हे.. भले ही हमारा रीस्ता कुछ भी हो.. मे आपको दीदी ही कहुगा.. क्युकी मेरी अपनी बहेनको प्यार करनेकी फेन्टासी हे.. आइ लव यु दी..

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पुनम : (सर्मसार होते सीनेमे सर छुपाते) भाइ.. अपनी दीदीको इतना प्यार करते हो..? ओर मे नादान आपके प्यारको समज नही पाइ.. भाइ.. आजसे हम दोनो बोय फ्रेन्ड गर्ल फ्रेन्ड.. भाइ.. मे आपकी हर फेन्टासी पुरी करुगी.. आइ प्रोमीस.. हो सकता हे इन सबकी वजहसे हमे घरपे ज्यादा मीलनेका मौका ना मीले.. ओर हमारी बात ना होपाये.. तो आप मुजे व्होटसेप पे बात करते रहेना हम फोन पे ही बाते करेगे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. वेरी स्मार्ट.. लेकीन देखना मुजे रीप्लाय देना पडेगा.. केह देता हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर हसते) हां.. अब आप मेरे बोय फ्रेन्ड जो हो गये हे.. तो रीप्लाइतो देना ही पडेगा.. हें..हें..हें.. वरना मेरा यार मुजसे फीरसे नाराज होजायेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां होजाउगा.. अब चलीये.. सब हमारा इन्तजार करते होगे.. दीदी मुजे आपसे ढेर सारी बाते करनी हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. बाते तो मुजे भी करनी हे.. लेकीन (फोन खीआते) ये हेना हमारे पास.. हम विडीवो कोलपे बाते करगे..

लखन : (मुस्कुराते सामान लेते) दीदी.. इनकी आदत तो नही हे.. लेकीन मे कोसीस करुगा.. अब चलीये.. आपमे कीतना बदलाव आ गया..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. ये बदलाव सीर्फ आपके लीये.. मे सबकुछ भुलकर सीर्फ आपकी होना चाहती हु.. भाइ.. मे आपके अंदर समा जानेके लीये बेकरार हु.. आजसे लखन ओर पुनम अ‍ेक ही हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आप तो अउसी बाते करते मुजे भी पागल करदोगी.. अब चलीये.. हें..हें..हें..

कहेते लखन बहार चला गया.. तो पुनम भी घरसे नीकलकर ताला लगाने लगी.. तब सृती ओर लता कारसे दोनोको देखने लगे.. ओर दोनोको इतनी जल्दीसे बहार नीकलते देखकर दोनो थोडी मायुस होगइ.. तब उनको नही पता थाकी पुनमने लखनका प्यार कबुल करलीया था.. तब लखनने सामान जीपमे रख दीया.. फीर वो लखनके साथ भीमा भाइके घरपे चली गइ.. तो पायल भाभीने दरवाजा खोला..

पायल : (मुस्कुराते) अरे देवरानीजी आप..? कुछ काम था क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) अरे नही भाभी.. बस.. आपको घरकी चाबी देने आइ थी.. आप इसे धिरेन लेने आये तो दे देना.. ओर हां.. अब मे आपकी देवरानी नही.. आपकी ननंद हु.. क्युकी मे ओर धिरेन अलग होगये हे..

पायल : (आस्चर्यसे) ये आप क्या केह रही हो..? अच्छा हुआ उस कमीनेको छोड दीया.. ठरकी कहीका.. होता तो कुछ हे नही.. ओर.. ओह.. सोरी.. दीदी कौन हे ये..? आप केह रही थी.. वो.. कही ये लखन भैयातो नही..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. मेने आपसे कहाथानां.. यही लखन भैया हे.. आपके अ‍ेक लौते देवर.. मे इनको आपसे मीलवाने ही आइ हु.. ओर ये घरकी चाबी देनी थी.. बस..

पायल : (हसते) अरे तो बहार क्यु खडे हे दोनो..? अंदर आइअ‍ेनां.. चाइ पीकर जाइअ‍ेगा..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. इसके लीये हम दोनो फीर कभी आयेगे.. अभी तो इजाजत दीजीये.. बहार मेरी भाभीया हमारा इन्तजार कर रही हे.. हम फीर कभी आयेगे.. चलो हम चलते हे..

पायल : (लखनकी ओर कातील नजरलसे हसते) देवरजी.. कभी कभी इधरसे नीकलो तो आते रहेना.. ये भी आपके भाइका ही घर हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभी.. जरुर आउगा.. अब आपसे पहेचान होगइ.. तो कोइ दीकत नही.. भीमा भाइको यादी देनां.. कहेना लखन भैया आये थे.. फीर मीलता हु आपसे.. चलो बाय.. हम फीर मीलेगे..

पायल : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) जी.. जरुर.. ये आपहीका घर हे.. आते रहेना.. हें..हें..हें..

फीर दोनो सृतीकी कारके पास आते हे तब पुनम सृतीको लखन भैयाके साथ आनेकी बात करते लखनके साथ बैठ जाती हे.. आज खुले बालोके साथ पुनम बहुत ही कामुक दीख रही थी.. खुली जीपमे उनके बाल हवामे लहेराते जा रहे थी.. ओर वो बार बार अपने बालोको अपने कानके पीछे रखते लखनकी ओर देखकर हसने लगती थी.. आज पुनम लखनसे प्यारका इजहार करते बहुत खुस थी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आज आप बहुत खुबसुरत लग रही हे.. अ‍ैसा लगता हे मे आपको ब्याहकर अपने ससुराल लेजा रहा हु.. हें..हें..हें..

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पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे कामुक मुस्कानसे) भाइ.. वो वक्त भी बहुत जल्द आयेगा.. अभी तो मेरे मायके जा रही हु.. मेरा ससुराल तो सहेरमे हे.. जब मेरा ये बोयफ्रेन्ड मुजे ब्याहकर लेजायेगा.. तब ससुराल भी आजाउगी.. हें..हें..हें.. भाइ.. सुना हे आजकल आपकी सृती भाभीके साथ कुछ अनबन हो गइ हे..? दोनो नही बोलते क्या..?

लखन : (सामने देखकर धीरेसे) दीदी.. आपको ओर भाभीमांको तो सब पता चल जाता हे.. तो फीर आप नही जानती क्या..? की हमारे बीच क्या हुआ हे.. अब आप ही बताइअ‍े इसमे मेरी गलती कहा थी..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे पता हे इस बार आपकी गलती नही थी.. ओर नाही भाभीकी गलती हे.. क्युकी जब दोनोका काम खतम होगया तब भाभीको भाइको लेकर गील्टी फील होने लगी.. उसे लगाकी उसने कोइ बडा अपराध कर दीया हे.. ओर वो गुस्सेमे आकर आपको खरी खोटी सुनाने लगी.. बाकी कुछ नही.. अब तो उसे भी अपनी गलतीका अ‍ेहसास होगया हे.. ओर आपकी माफी मांगना चाहती हे.. भाइ.. उसे माफ करदो..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या आपको नही लगता.. की दोनो नावमे अ‍ेक अ‍ेक पैर रखकर सफर करना आसान हे..? आप भी तो भाइसे प्यार करती हो.. तो आपको गील्टी नही होगी..?

पुनम : (आंख गीली करते धीरेसे) नही भाइ.. करती थी.. अब नही.. जीस तराह मे धिरेनसे आजाद होगइ हु उसी तराह मेने भाइके साथ भी रीलेशन खतम करलीया हे.. ओर ये बात मंजुदी ओर भाइ भी जानते हे.. सायद अब सृती दीदीका भी भाइके साथ रीलेशन खतम होजायेगा.. क्युकी कुछ बाते हे जो मे आपको अभी नही बता सकती..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. क्या केह रही हो आप..? लेकीन क्यु..? क्या कीसीने आपको कुछ कहा हे..? अरे आपको तो सबकुछ पता चलजाता हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाइ.. आपसे सीर्फ इतना बता सकती हु.. लास्ट मे आते वक्त हम बाबाको मीलने गयेथेनां.. तब बडी दीदीने मेरा मंगलसृत्र लेलीया ओर बाबाको देदीया हे.. जो मुजे भाइने पहेनाया था.. आप समज गयेनां..? बाबाने सृती भाभीको ओर मुजे आपको अपनानेके लीये केह दीया हे..

लखन : (सामने देखते) क्या सृती भाभी भी..? लेकीन वोतो भाइकी अमानत हेनां..?

पुनम : (सामने देखते) हां भाइ.. सीर्फ अ‍ेक दिन इन्तजार करलो.. कल आपको सबकुछ पता चल जायेगा.. भाइ.. अब मे सीर्फ आपकी हु.. ओर बडी दीदी ही हमारी सादी करवायेगी.. देख लेना..(कातील नजरसे सरमाकर मुस्कुराते) वैसे आपको जडी बुटी देकर मेने कोइ गलती नही की.. अभी देखा मेने.. हें..हें..हें..
 
लखन : (सरमाकर हसते) क्या दीदी.. वही तो..? उस दिन आपको कीस करदी तो चाटा जड दीया.. ओर आज सीधा डायरेक्ट अ‍ेटेक..? हें..हें..हें.. मे तो गभरा गया था.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. सोरी.. तब मे बडे भैयाकी अमानत थी.. तो मुजे भी सृती भाभीकी तराह गील्टी फील हुइ थी.. ओर आज मे आजाद पंछी हु.. जो सीर्फ मेरे नये बोय फ्रेन्डकी अमानत हो गइ हु.. तो इतनातो हक बनताहे मेरा.. हें..हें..हें.. भाइ.. अब फीकर मत करो.. वो सबकुछ होगा जो आप चाहते हो.. ओर ये पुनम सीर्फ आपकी हे.. आइ लव यु भाइ..

लखन : (मुस्कुराते) लव यु टु डार्लींग सीस्टर.. हें..हें..हें.. अब मेरी गर्ल फ्रेन्ड होगइ हो.. तो इस बोय फ्रेन्डका ध्यान रखना पडेगा.. क्युकी ये बोय फ्रेन्डकी बहुत सारी फेन्टासी भी हे.. देखना फीर मुकर मत जाना.. हें..हें..हें..

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पुनम : (सरमसे पानी पानी होते मुस्कुराते) नही भाइ.. मुजे आपकी हर फेन्टासीके बारेमे सबकुछ पता हे.. आप फीकर मत करो.. आपकी हर फेन्टासी पुरी होगी.. अब आपकी ये गर्ल फ्रेन्ड मुकरने वाली नही हे.. आपकी वो बहेनको मेने मार दीया हे.. जो अपने भाइका प्यार ठुकराके दुसरेकी बीवी होगइ थी.. आजसे आपकी बहेनका नया जन्म हुआ हे.. जो सीर्फ अपने लखन भैयाकी अमानत हे.. बस.. सृती भाभीको माफ करदो..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. मे उनसे नाराज ही कब था..? जो माफ करनेकी बात करती हो.. बस.. उसे तो अपनी गलतीका अहेसास करवाना चाहता हु.. अभी उसे थोडा तडपाने दीजीये.. ताकी दुबारा अ‍ैसी गलती कभीना करे..

पुनम : (हसते) भाइ.. अब तो मछलीकी तराह तडपने लगी हे.. उसे ज्यादा मत तडपाना.. वरना वो बीख जायेगी.. जब लोहा गरम होजाये तो सीधा हथोडा मारदेना.. आप समज गयेनां..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. क्या.. बीना सादी.. आइ.. मीन.. हथोडा मार देना.. क्या ये सही होगा..?

पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) क्यु..? आपकी तो ये फेन्टासी हेनां..? की अ‍ेक बार सादीसे पहेले मीलन.. आइ मीन.. आप समज गयेनां..? हें..हें..हें..

लखन : (सामने देखते मुस्कुराते) हंम.. लगता हे आप मेरे बारेमे काफी कुछ जान चुकी हे..? सादी तो मे आपके साथ भी करना चाहता हु.. तो फीर सोचलो.. हें..हें..हें..

पुनम : (बाजुमे मुका मारते) भाइ.. आप बहुत नोटी हो.. आपकी सब बात मे समज गइ.. अब आपकी गर्ल फ्रेन्ड होगइ हु.. तो मेरे बोय फ्रेन्डके लीये इतना तो कर ही सकती हु.. भाइ.. मे रेडी हु.. आप जब चाहो.. बस.. आप अपनी भाभीमांको सम्हाल लेना.. हें..हें..हें..

पुनम ओर लखन रोमेन्टीक बाते करते हवेलीपे पहोंच गये.. तो इसी बीच पुनमने लखनको अपने ओर धिरेनके बीच जो भी कुछ हुआ.. वो सबकुछ बता दीया.. जीसे सुनकर लखनका गुस्सा सातवे आसमानपे चला गया.. लेकीन पुनमने उसे सयंमसे काम लेनेको कहा.. तो लखन सांत होगया.. सबलोग घरपे आगये.. तो मंजुने दयाके गृह प्रवेसकी बाकी रसम पुरी करली.. फीर लता ओर चंपाभाभीने सबको चाइ नास्ता करवाया..

तो घरमे आते ही रमाने भावेसको अपनी गोदमे लेलीया ओर उनके साथ खेलने लगी.. सबलोग होलमे बैठे बाते करते रहे.. लेकीन आज सृती ओर पुनमका मन पहेली बार देवायतसे नही लग रहा था.. तभी लखन खेतोकी ओर अपने दोस्तोके पास मीलनेके लीये जानेकी बात करता हे.. तो रामुकाका उनके साथ जानेके लीये खडे होगये.. फीर दोनो अपने खेतोकी ओर नीकल गये..

तो देवायत भी पंचायचतकी ओफीसकी ओर चला गया.. तो मंजुने उसे रातको घरपे जल्दीसे आनेके लीये कहा.. तो लता रमाके साथ भावेसको लेकर उपर अपने कमरेमे चली गइ.. तो पीछे नीलम भी चली गइ.. तब मोका देखते ही पुनम भावना ओर सृतीको लेकर अपने रुममे घुस गइ.. ओर अपने ओर धिरेनके बीच हुअ‍े जगडेकी पुरी कहानी दोनोको सुनादी..

तब सृती ओर भावना पुनमकी ओर आस्चर्यसे देखती रही.. क्युकी पुनम अपने डीवोर्सकी बात खुस होते केह रही थी.. तब सृती ओर भावनाको पुनमकी खुस होनेकी वजह मालुम नही थी.. की पुनमने लखनसे अपना प्यारका इजहार करलीया हे.. तो दुसरी ओर मंजु ओर दया अपने रुममे बैठी थी.. ओर मंजु दयाको अपने सबके बारेमे सब कुछ बताकर समजा रही थी.. तभी..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. आप फीकर मत कीजीये.. मुजे पुनमदीदीने सबकुछ बता दीया हे.. ओर ये भी बता दीया हेकी हम सब आपसमे बहेने हे.. दीदी.. मुजे खुसी हेकी आप लोगोमे मुजे बहेनके रुपमे स्वीकार करलीया हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया.. येतो स्वीकार करना ही था.. इसीलीये तो आपकी सादी देवुसे करवादी हे.. दया.. तुमने सादी भले देवुसे करली.. लेकीन आजसे यही समजलो.. दोनो भाइ तुम सबके पती हे.. तुम अपनी मरजीसे चीसे चाहो मीलन कर सकती हो.. अब हमारे घरपे कोइ पाबंधी नही हे.. आगे यहा तुजे लता ओर भावुको ही सम्हालना हे..

दया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. वो.. पुनमदीदी..? क्युकी आज उसने अपने डीवोर्स पेपरपे साइन करदी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया.. वो सब मुजे पता हे.. सुन.. पुनो अभी तो कुछ दिन यहा रहेगी.. फीर वो भी सहेर चली जायेगी.. अपने ससुराल.. मे पुनोकी सादी लखनसे करजाना चाहती हु.. वहा रजीया पुनम ओर सृती.. हमारे लखनके साथ रहेते उनको सम्हाल लेगी.. जबतक मेरा विजय बडा नही हो जाता.. फीर तो पुनम ओर सृती भी यहा आजायेगी.. ओर हां.. अभी इस बारेमे हमारे पतीको कुछ मत बताना..

दया : (मुस्कुराते) जी दीदी.. नही बताउगी.. दीदी.. मुजे तो अभी भी यकीन नही हो रहाकी मेने बडेभाइसे सादी करली.. बापु कीतना खुस हो रहे थे.. मुजे तो सब सपना लग रहा हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया ये कोइ सपना नही हे.. हकीकत हे.. आज हमारे भाइके साथ तेरी सुहागरात हे.. तुजे जीतना प्यार बटोरना हे.. बटोरले.. ओर तेरा वक्त भी सही चल रहा हे.. मां बननेकी तेरी बरसोकी तम्मना थीनां..? आज अच्छा मोका मीला हे तुजे.. करले अपना सपना पुरा..

दया : (सर्मसार होते नजरे जुकाते) जी दीदी..

मंजुला : (हसते) सुन.. तुजे अ‍ेक ओर बात बताती हु.. पता नही इसे सुनकर खुस होना चाहीयेकी नही.. सृती प्रेगनेन्ट हे.. लेकीन कोइ फायदा नही.. वो क्यु..? वो तुजे मे अभी नही बता सकती.. ओर बहुत जल्द तेरी सहेली जो रजु हेनां..? वो भी प्रेगनेन्ट होजायेगी.. क्युकी आजकल मेरा लखन बेटा बहुत महेनत कर रहा हे.. हें..हें..हें..

कहा तो दया सर्मसार होते हसने लगी.. फीर मंजुने पुनम भावनाको कहेकर देवायत ओर दयाके लीये सेज सजानेको कहा.. तो पुनम ओर भावना खुस होते दोनोके लीये बेड सजाने लगी.. तो उपर नीलम भावेसके साथ खेल रही थी.. तब लता अपना सब सामान वापस रुममे सेट करने लगी.. तो रमा उनकी मदद करते.. अपने ओर भानुके बीचके रीलेशनेकी बात करती हे.. की दोनोके बीच कुछ अच्छा नही हे....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२८

कहा तो दया सर्मसार होते हसने लगी.. फीर मंजुने पुनम भावनाको कहेकर देवायत ओर दयाके लीये सेज सजानेको कहा.. तो पुनम ओर भावना खुस होते दोनोके लीये बेड सजाने लगी.. तो उपर नीलम भावेसके साथ खेल रही थी.. तब लता अपना सब सामान वापस रुममे सेट करने लगी.. तो रमा उनकी मदद करते.. अपने ओर भानुके बीचके रीलेशनेकी बात करती हे.. की दोनोके बीच कुछ अच्छा नही हे.... अब आगे

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. अब आपके पैरकी चोट कैसी हे..? ठीक हुआ की नही..?

रमा : (नजरे जुकाते धीरेसे) हां दीदी.. ठीक होगइ.. दीदी.. अब आपसे क्या छीपाना.. जो प्यार पतीसे मीलना चाहीये आजकल वो प्यार मुजे नही मीलता.. ओर आपको तो पता हे हम ओरतोकी कीतनी जरुरत होती हे..

लता : (अनजान बनकर मुस्कुराते) भाभी.. आपतो मेरी सहेली जैसी हे.. जरा खुलकर बताइअ‍ेनां..

रमा : (सर्मसार होते नजरे चुराते) दीदी.. अब आपसे क्या कहु.. आजकल आपके भाइ बहुत कमजोर हो गये हे.. जो प्यार उनसे मुजे मीलना चाहीये वो मुजे नही मील रहा.. अब तो हम दोनोके बीच जगडे भी होने लगे हे.. ओर अ‍ेक माजी हे.. जो रट लगाये बैठी हे.. की उनको मुजसे अ‍ेक बच्चा चाहीये.. अब आपही बताओ मे क्या करु..? कहासे बच्चा लाउ..? मेने तो भावेसको ही अपना बच्चा मानलीया हे.. उसे ही पालुगी..

लता : (अ‍ेक नजरसे देखते) दीदी.. क्या केह रही हे आप..? तो फीर मांको केह दीजीये मे बच्चा नही दे सकती.. ओर भावेस सीर्फ आपका नही मेरा भी बेटा हे.. देखो.. कीतना बडा होगया हे.. क्या वो अभी भी आपका दुध पीता हे..?

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) हां दीदी.. अब नीलु कीतनी बडी होगइ हे.. तो दुध कहासे आयेगा.. बस.. मुहमे लेकर चुसते रहेता हे.. ओर सो जाता हे.. पता नही आपने इसे कैसी लत लगाइ हे.. क्या आपभी वही करती थी..?

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. वो भावना दीदीके बजाये मुजे मां मानता था.. ज्यादातर मेरे पास ही रहेता था.. बहुत सरारती हे.. मे भी उसे अ‍ैसे ही सुलाती थी.. ओर तब कहा मेरी सादी हुइ थी.. बस.. चुसता रहेता था..

रमा : (हसते धीरेसे) दीदी.. अब तो होगइनां..? तो लखनजीसे कहेकर आप भी अ‍ेक बच्चा कर लीजीयेनां.. देखो.. आपकी सादीको कीतना टाइम हो गया.. दोनो भाइ बहेनकी साथमे ही तो सादी हुइ थी.. ओर आज पुनम दीदी प्रेगनेन्ट हे.. तो आप इतनी देरी क्यु कर रही हे..?

लता : (थोडी मायुस होते) भाभी.. हमारे घरकी कुछ बात हे.. जो मे आपको नही बता सकती.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. मे भी बच्चा पैदा करलुगी..

रमा : (थोडी संकासे धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? कही लखनजीमे तो.. कुछ..

लता : (थोडा जुठ बोलते जटसे) अरे नही नही.. लखनजी बीलकुल फीट हे.. बस.. कमी सीर्फ मुजमे हे.. अभी दवाइ चल रही हे.. तो कुछना कुछ तो होगा.. भाभी.. अ‍ेक बात पुछु..? अगर अब भानुभाइ इतना सक्षम नही हे.. तो फीर अब आप क्या करोगी..?

रमा : (आंसु बहाते धीरेसे) दीदी.. अब आपसे क्या कहु..? आपको भी पता हे हम ओरतोकी कीतनी जरुरत होती हे.. इनसे तो आपका खानदान कीतना अच्छा हे.. सब आपसी रीस्तोमे ही अ‍ेडजेस्ट कर लेते हे.. कीसीको कोइ पाबंदी नही.. कास मे भी आपके खानदानमे होती.. तो कोइ जंजट हस नहस होती..

लता : (रमाके पास सटकर बैठते धीरेसे) भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? हमारे खानदानके बारेमे आपको इतना कुछ कैसे पता..? क्या आपकी कीसीके साथ कोइ बात हुइ हे..?

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. मे इतने दिन यहा रही.. फीर आपके साथ भी अ‍ेक हप्ता रही.. तो इतना तो पता चल ही जाता हे.. अ‍ेक दुसरेकी जरुरतको कीतनी आसानीसे पुरी कर लेते हे.. ओर मे इसे गलत भी नही मानती.. मुजे भी ये सब पसंद हे..

लता : (अ‍ेक नजरसे सामने देखते धीरेसे) नीलु.. तुम जरा भावेशको लेकर बहार जा.. मुजे भाभीसे कुछ प्राइवेट बाते करनी हे..

नीलम : (भावेशको लेकर बहार जाते) जी दीदी..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. आपको ये सब पसंद हेना..? इसीलीये मेरे लखनके साथ रीलेशन बनाया हेनां..? हमे पता हे आपको पैरमे कैसी मोच आइ हे.. ये दर्द मेरे लखनने दीया हेनां..?

रमा : (सोक्ट होते लताकी ओर देखते) दीदी.. वो.. मे.. वो..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. डरीये मत.. मुजे आपके ओर लखनके रीलेशनके बारेमे सबकुछ पता हे.. इनसे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. कमसे कम घरकी बात घरमे तो रहेगी.. ओर फीकर मत कीजीये.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगा.. हमारे घरके सभी मर्दो ओर ओरतोको पुरी छुट हे.. की वो घरमे जीसके साथ संधन बनाना चाहे बना सकते हे.. बस.. इनमे दोनोकी रजामंदी होनी चाहीये.. अगर भानु भाइ आपको वो सुख देनेमे सक्षम नही हे.. तो ये सुख आप लखनसे पा सकती हे..? हमे कोइ अ‍ेतराज नही..

रमा : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. ये आप क्या बोल रही हे..? क्या आपको हमारे बारेमे सबकुछ पता था.. तो फीर आपको मेरे बारेमे जानकर बुरा नही लगा..?

लता : (मुस्कुराते) नही भाभी.. क्युकी मे आपकी तकलीफ समजती हु.. कही आप बहार दुसरे मर्दके साथ मुह मारे इनसे तो लखन ही अच्छा हे.. कमसे कम घरकी बात घरमे तो रहेगी.. ओर ओरतोके दिलकी बात समजने वाला कोइ हेही नही.. कमसे कम हमारा खानदानतो अच्छा हे.. यहा हम सब अ‍ेक दुसरेकी दिलकी बात समज जाते हे.. ओर अ‍ेक दुसरोकी जरुरत पुरी करते हे.. आपको पता हे मे यहा क्यु आइ हु..?

रमा : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? बताइअ‍ेनां.. यहा क्यु आइ हे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. हमारे घरमे कीसीने मेरे दिलकी फीलीग्सको जाननेकी कोसीस ही नही की.. ओर मेरी सादी लखनसे करवादी.. हालाकी अब मे भी उनसे प्यार करने लगी हु.. लेकीन पता हे मे कीसको प्यार करती थी..? मेने उनके साथ ना जाने क्या क्या सपने सजाये थे.. वो मेरे सपनोके राजकुमार थे.. मेरी सादीसे पहेोे मे उनके साथ सबकुछ करनेको तैयार थी.. जो मेरे दिलकी बात मंजुदी जान गइ..

रमा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? आप उनको इतना प्यार करती थी..? तो क्या आपकी सादी लखनजीसे अपनी मरजीसे नही हुइ थी..? आपके दिलमे कौन था जो आप इसे प्यार करती थी..? बताइअ‍ेना मुजे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने लखनसे सादी मेरी मरजीसे कीथी.. ताकी मे अपने पहेले प्यारके साथ रेह सकु.. मेरा पहेला प्यार मेरे जेठजी थे.. जीनके साथ मे सादी करना चाहती थी.. लेकीन हमारे बीच उमरके फासलेकी वजहसे मुमकीन नही था.. तो मेने अपने दिलसे ही समजोता करलीया.. ओर लखनके साथ सादी करली.. ताकी मे भाइके साथ रेह तो सकु.. कमसे कम हर दिन उनका चहेरातो देख सकती हु..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. तो क्या इसीलीये आपका सभी सामान लेकर इधर आगइ हो..?

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. क्युकी यहा सीर्फ मंजुदी.. ओर पुनोदी हे जो मेरे दिलकी बात जानती हे.. इसीलीये मंजुदीने मुजे हमेसाके लीये इधर बुलालीया.. ताकी वो मेरी सादी बडे भैयाके साथ करवादे.. भाभी.. मेने लखनको भले ही छोड दिया हो.. लेकीन वो आज भी मेरे दिलमे बसे हे.. मे बडे भैयासे सादी कर रही हु.. हमारे घरमे तो मेरा सपना पुरा नही हुआ.. लेकीन यहा आकर हो गया..

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रमा : (लताको गले लगाते) दीदी.. यहा आप सबलोग कीतने अच्छे हे.. जो अ‍ेक दुसरेकी फीलींग्सके बारेमे जानते हे.. ओर उनकी कद्र भी करते हे.. ओर अ‍ेक आपके भाइ हे.. जो उनको मेरी कोइ परवा ही नही.. दीदी.. आपके भाइ बहुत ही अयास आदमी हे.. बहार कीतनी ओरतोके साथ उनका चकर हे.. सुना हे अबतो खेतीकछ मजदुरनको घरपे भी लाते हे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. हमे सब पता हे.. सायद इसीलीये तो भावना दीदीने उनको डीवोर्स देनेका फैसला करलीया हे.. अब वो वहा कभी नही आयेगी.. अगर मां आपको बच्चेके लीये फोर्स करते तो आप लखनको केह सकती हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. फीर आप भावेशका क्या करोगी..? अ‍ेक बार भावना दीदीसे बात करलीजीयेगा..

रमा : (आंग गीली करते) दीदी.. मुजे भावेशसे बहुत लगाव हो गया हे.. आप भावना दीदीको कहे मे इसे अच्छेसे पालुगी.. भले ही मेरा बच्चा होजाये.. मे भावेशको कभी नही छोडुगी.. अब यहीतो अ‍ेक सहारा होगा मेरा.. नीलु भी ससुराल चली जायेगी.. दीदी मुजे हर रात प्यार चाहीये.. तभी तो मे लखनजीकी ओर ढल गइ.. मुजे माफ कर दीजीये..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. इसीलीये तो हमने लखनको जडी बुटी दी हे.. ताकी वो अ‍ेक साथ दस दस ओरतोको संतुस्ट कर सके.. आप लखनके साथ रीलेशन रखीये.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस.. आपके अंदर अ‍ेक बुरी ओरत हे.. उसे मार दीजीये.. वरना आपकी जींदगी बरबाद होजायेगी.. मुजे कुछ ओर नही कहेना..

कहा तो रमा खामोस होगइ.. ओर अपनी नजरे जुकाते आंसु बहाने लगी.. तब लताको रमाके उपर दया आगइ.. ओर उसे गले लगालीया.. तभी नीलम मुस्कुराते भावेशको लेकर अंदर आगइ.. जो रोने लगा था.. ओर उन दोनोको देखती रही.. तभी नीचेकी ओर सृतीको मंजुसे अकेले मीलनेका मोका मील गया.. ओर दोनो बाते करते होलमे जाकर बैठ गइ.. तब मंजु सब कुछ समज गइ.. की अब सृती उनको क्या पुछना चाहती हे..
 
मंजुको भी पता थाकी अब सृतीको सब सचाइ बतानेका वक्त नजदीक आगया हे.. ओर इसके लीये उसे सृतीकी नाराजगी भी जेलनी पडेगी.. इसीलीये मंजुने अभी इस बातको टाइनेकी कोसीस करनेका फैसला करलीया.. लेकीन फीर भी वो इस बातको ज्यादा वक्त नही छीपा पायेगी.. तब मंजुने बातको लखनकी ओर घुमानेका फैसला करलीया.. अब देखते हे मंजु इसमे कामयाब होती हेकी नही..

मंजुला : (हसते) हां बोल कुती.. क्या कहेना चाहती हे तु..? देख रही हु.. जबसे आइ हे कुछ परेसान दीख रही हे.. बता.. क्या बात हे..? मेरे लखन बेटेने तो कुछ परेसान नही कीया..? हें..हें..हें..

सृती : (मंजुकी ओर देखते) दीदी.. जैसे आपको तो कुछ पता ही नही.. की मे क्यु परेसान हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे बाबा अ‍ैसे परेसान मत हो.. तेरे बच्चेपे बुरा असर पड सकता हे.. अब तो खुसीओका दिन हे.. खुस रहा करो.. बता.. क्या कहा तेरी उस डोक्टरनीने..?

सृती : (आंख गीली करते) मंजुदी.. मेरी प्रेगनन्सी तो ठीक हे.. सच तो अ‍ेक महीनेके बाद ही पता चलेगा.. तब अ‍ेक रीपोर्ट ओर होगी.. लेकीन उसने मुजे जो बात कही.. तबसे मेरा दिमाग काम नही कर रहा..

मंजुला : (मुस्कुराते) अच्छा..? अ‍ैसा क्या कहा तेरी उस डोक्टरनीने..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) मंजुदी.. कुछ दिन पहेले उनकी क्लीनीकपे दो ओरते आइ थी.. उनमेसे अ‍ेक प्रेगनेन्ट थी जो इनकी सकल हुबहु मेरी मम्मीसे मीलती थी.. उसने दोनोसे पुछा तो दोनोने हमारे गांवका नाम लीया.. तो क्या यहा गांवमे कीसीकी सकल मेरी मम्मीसे मीलती हे..? उसने दोनोका फोटो भी अपने मोबाइलमे खीच लीया हे..

मंजुला : (बातको टालते) अरे होगी कोइ.. जो उनकी सकल तेरी मम्मीसे मीलती होगी.. अब मे पुरे गांवकी ओरतोको तो जानती नही.. क्या अभी वो फोटो हे तेरे पास..?

सृती : नही.. क्युकी उसी वक्त उनका फोन रीपेरींगमे दीया हुआ था.. जब आजायेगा तब वो मुजे सेन्ड करदेगी.. लेकीन अभी तक तो आजाना चाहीये था.. अभी आया क्यु नही..? लगता हे वो भुल गइ होगी.. मे अभी मंगवा लेथी हु.. (फोन लगाती हे)

सृ. फ्रेन्ड : (फोन उठाते ही) हां सृती.. अभी मे डीलीवरीमे बीजी हु.. कुछ काम था क्या..?

सृती : (जटसे) अरे नही बस.. तु वो फोटो सेन्ड करने वाली थी.. नही मीला.. आगया फोन..?

सृ. फ्रेन्ड : हां आगया हे.. मे फ्रि होते ही तुजे सेन्ड कर देती हु.. आज तो दो तीन डीलीवरी हे.. बहुत बीजी हु.. ओके.. चलो बाय..

सृती : (थोडी मायुस होते) बाय.. (फोन रखते ही) दीदी.. हमारे देवरके साथ वहा जाते वक्त मे कीतनी खुस थी.. बस.. वहासे आनेके बाद कुछ भी अच्छा नही लग रहा.. मुजसे गलती पे गलती हो रही हे.. कुछ समजमे ही नही आता की मे क्या करु..?

मंजुला : (सामने देखते थोडा सख्त लहेजेमे) क्यु..? सब कुछ अच्छा तो चल रहा था.. क्या जरुरत थी लखनको खरा खोटा सुनानेकी.. तु सही तो जा रही थी.. ओर सुन.. ताली सीर्फ अ‍ेक हाथसे नही बजती.. उनका देखनेकी तेरी ही जीद थीनां..? उसने तो मना भी कीया था.. तुही नही मानी.. तो इसमे बेचारे मेरे बेटेकी क्या गलती थी..? तुम दोनो तो पहेलेसे ही सबकुछ तैय करके बैठी हो..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) तेरा बेटा..? क्या तुम उसे अपना बेटा मानती हो..? वो देवर हे हमारा..

मंजुला : (अ‍ेक नजरसे देखते) नही.. पहेले था.. जब मे कुछ नही जानती थी.. अब वो सीर्फ तुम सबका देवर हे.. लेकीन मेरा बेटा हे.. मेरा बबलु.. क्या भुल गइ उस कीताबको..? (ये कैसी अनुभुती)

सृती : (आस्चर्यसे देखते) व्होट..? तो फीर क्या तुम.. दे..व..या..नी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सही पहेचाना तुमने.. मे ही उस देवयानी हु.. ओर लखन ही मेरा बबलु हे.. ओर जो तेरी सहेली हेनां.. आज कल तेरे बहुत करीब हे.. तेरी पुनो दीदी.. यही तो वो पीयु हे.. जो मेरे बबलुकी बीवी थी.. लेकीन इनकी अ‍ेक इच्छाकी वजहसे इस जन्ममे उसे देवुकी बीवी बनना पडा.. जो स्वयंम कामका अंस हे.. ओर मेरा लखन भी वोही हे.. जो तुम उसे दुख पहोचांके आइ हो..

सृती : (अपने हाथोमे मुह छीपाते आंसु बहाते) दीदी.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ.. पता नही मे उसे कैसे मनाउगी.. ओर अब तो हमारे पतीके पास भी हमारे लीये समय नही हे.. मे इस उमीदसे यहा आइ थी.. की चलो.. वहा जाकर मील लुगी उसे.. लेकीन ये तो सादीपे सादी कीये ही जा रहे हे.. जबसे यहा आइ हु मेरे सामने तक नही देखा..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. उस राजाने जीतनी भी ओरतोको रानी बनाया था.. उसे तो यहा अपनी काम इच्छा पुर्ती करनेके लीये आना ही था.. मेने ये फैसला युही नही लीया था.. सबकुछ सोच समजकर ही लीया था.. अभी भी वक्त हे.. सम्हलजा.. जैसे मेरी पुनो सम्हल गइ.. सुन.. पुनोने धिरेनको डीवोर्स देदीया हे.. तो मे बहुत जल्द पुनोकी सादी लखनसे करवा रही हु.. अब तुजे सोचना हे.. की तुजे क्या करना हे..

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सृती : (आंसु बहाते हां मे गरदन हीलाते) हां.. ठीक केह रही हे आप.. अब मे भी हमारे देवरको अपना लुगी.. पुनो दीदी कीतनी सहेजतासे अपनी दिलकी बात केह देती हे.. जो मे नही केहपाइ.. मुजे बहुत गील्टी फील होती हे.. मे अ‍ैसे रीस्तोको जल्दीसे अ‍ेक्सेप्ट नही कर पा रही.. तो क्या करु..? तुही बता..

मंजुला : (मुस्कुराते) क्यु..? अभीसे हार मानली..? अभी तो तुमने देखा ही कहा हे..? तुजे अ‍ैसे बहुत रीस्ते देखने हे.. क्या यही जाननेके लीये इधर आइ हेनां..? अ‍ेक तो मेरे लखनके साथ रीलेशनको तुम अ‍ेक्सेप्ट नही करपाइ.. तो दुसरे रीलेशनको तुम कैसे अ‍ेक्सेप्ट करपाओगी..? सृती.. तुजे सभी रीलेशन अ‍ेक्सेप्ट करना ही पडेगा.. क्युकी तेरी मंजील मेरा देवु नही हे.. मेरा बेटा हे.. अपनाले उसे..

सृती : (अ‍ेक नजरसे देखते) हां.. बस.. अब यही करुगी.. लेकीन मंजुदी.. मे अभी थोडा उलजनमे मे फसी हु.. मुजे मेरे बारेमे ओर मम्मीके बारेमे सबकुछ जानना हे.. अ‍ेक बार तुमने ही कहा थानां.. की देवुकी जीतनी बहेने हे सब उनकी बीवीया होगइ हे.. तो क्या मे भी.. मतलब मुजे मेरे बारेमे जानना हे.. बता..

मंजुला : (मुस्कुराते) क्या करोगी जानकर..? तुम अ‍ेक रीलेशनको भी अ‍ेक्सेप्ट नही कर पा रही हो.. तो दुसरे रीलेशनके बारेमे जानकर तुजपे क्या बीतेगी..? मत जानो.. तुजे केवल दुख ही होगा.. तुम दयाकी तराह इतनी स्ट्रंोग नही हो.. अभी बता दुगी तो तुम यहासे भाग जाओगी..

सृती : (आंख गीली करते) नही भागुगी.. मंजुदी.. मुजे इतनी कमजोर भी मत समजो.. मे सीर्फ तेरी सौतन ही नही तेरी दोस्त भी हु.. तुम मेरे बारेमे अच्छी तराह जानती हो.. तुजे तो पता हे मेने कीतने दुख जेले हे.. तो अ‍ेक ओर सही.. वैसे भी मुजे सक तो कबसे हे.. बस.. तेरे मुहसे सुनकर सीर्फ कंन्फोर्म करना चाहती हु.. क्या मे भी तेरी ओर पुनो दीदीकी बहेन हुंना..?

मंजुला : (आंख गीली करते सृतीका हाथ थामते) हां.. हां सृती.. तुम भी हमारी बहेन हो.. हमारे ससुर कहो या हमारे बापु.. हम सब इनकी संतान हे.. हम सब अपने भाइओकी बीवीया हे.. तो कभी भुमी आंटी भी हमारे बापुको अपना भाइ मानती थी..

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इतना सुनते ही सृती अपने हाथोमे अपना चहेरा छुपाते थोडी जोरोसे रोने लगी.. तब मंजुने उसे बैठे बैठेही अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर सृतीकी पीठ ओर सरको सहेलाने लगी.. तब सृतीने मंजुके कंधेपे सर रख दीया ओर आंसु बहाती रही.. मंजुने उसे थोडी देर अ‍ैसे ही रोने दिया.. जब रो रोके सृतीका दिल थोडा हल्का हुआ.. तब उसने देखा.. तो उनके आस पास पुनम भावना दया.. सब खडे थे.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) रो लीया..? अभी तो कहेती थी मे इतनी कमजोर नही हु.. तो फीर दुसरी सचाइ जानकर तेरा क्या होगा..? अब जा थोडा अपना हुलीया धोकर ठीक करले.. फीर हम आरामसे अकेलेमे बात करेगे.. मुजे पता हे तुजे क्या जानना हे..

सृती : (मुस्कुराते खडी होते) दीदी.. तुम बहुत ही कमीनी हो.. सब कुछ जानलेती हो.. हें..हें..हें..

कहेते वो नीचे पुनमके रुममे घुस गइ.. ओर बाथरुममे जाकर अपना हुलीया ठीक कर लीया.. ओर बहार आगइ.. तब मंजुके कंधेपे पुनम अपना सर रखके बैठी थी.. ओर मंजु प्यारसे पुनमके सरको सहेला रही थी.. तो दया ओर भावना भी वही बैठकर दोनोका प्यार देखते हस रही थी.. तभी सृती भी वहा आकर बैठ गइ तो पुनम उनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर कहा..
 
पुनम : (हसते) हां तो भाभी.. अब आपको क्या कहु..? भाभी कहु या दीदी.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर हसते) नही.. अब दीदी ही ठीक हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. तुम दोनो ही बहुत कमीनी हो.. आप मुजे पहेले भी सब बता सकती थी.. आप भी तो मेरे बारेमे सबकुछ जानती थी..

पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. मे सब जानती जरुर हु.. लेकीन मंजुदीदीसे पुछे बगैर आपको कैसे बताती..? इन्होने मुजे मना कीया था.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) दीदी.. यहा तो अब सब अपनी बहेने ही हे.. तो मम्मी ओर हमारे बापुके बारेमे बता दीजीयेनां.. वैसे भी इन सबसे क्या छुपाना.. सब अपने ही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. रहेने दीजीये.. क्युकी कुछ बाते अ‍ैसी हे जो आपको अच्छी ना लगे.. अगर जानना हे तो दोनो हमारे पीछे जो गार्डन हे वहा चली जाओ.. ओर आरामसे बैठकर बात करो.. तबतक डीनर भी बन जायेगा.. क्युकी अभी बहुत टाइम हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती पुनो सही केह रही हे.. वैसे भी पुनो भी सब कुछ जानती हे.. तो तुम इनके साथ क्यु नही चली जाती..? तेरी पकी सहेली जो हे.. हें..हें..हें.. जा पुनो.. तुम दोनो आरामसे बात करो..

पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. आप ही जाओ हम तो हमारी नइ भाभीका बेड सजा रहे थे.. ये तो सृतीदीदी की रोनेकी आवाज सुनकर हम यहा चली आइ.. चलो भावनादीदी हम हमारा काम करते हे.. इन दोनोको बतीयाने दो.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते पीठमे मुका मारते) अरे..? दीदी तो गांवकी भासा भी बोलने लगी.. हें..हें..हें..

फीर पुनम भावना ओर दया वहासे हसते हुअ‍े खडी होगइ.. ओर वापस रुममे चली गइ.. ओर देवु ओर दयाके लीये बेडको सजाने लगी.. तब मंजु ओर सृती धीरे धीरे बात करते बहारकी ओर जाने लगी.. तो सृतीको अपने बारेमे जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे चलते) हां दीदी.. अब बताइअ‍े.. मुजे मम्मी ओर हमारे ससुरकी पुरी कहानी जाननी हे..

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मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सुन.. तेरे मम्मी पापा हमारे बापु मेरी मम्मी भानुभाइके पीता.. सबलोग आपसमे अच्छे दोस्त थे.. ओर अ‍ेक साथ कोलेनमे पढते थे.. तेरी मम्मी हमारे बापुको पसंद करती थी.. बापुका नाम किशन था.. लेकीन वो अपने दिलकी बात कहे इनसे पहेले ही मेरी मम्मी ओर हमारे बापु अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे थे.. ओर दोनोके बीच जीस्मानी रीस्ता भी कायम होगया था..

सृती : (हसते) मंजु लगता हे हमारे बापु बहुत रंगीन मीजाजके ओर ठरकी थे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (थोडी सीरीयस होते) नही सृती.. ये सब गलत हे.. बहुत अ‍ैसे रीस्ते थे.. जो उनको मजबुरीमे उनके साथ रीलेशन बनाना पडा.. इनमे सीर्फ हमारे बापुका दोस नही हे.. ओर जो भी रीलेशन था.. सब अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे था.. मम्मी ओर बापुके बीच सबकुछ अच्छा चल रहा था.. ओर अ‍ेक दिन हमारी दादी आश्रमसे अ‍ेक लडकीको लेकर आगइ.. विमला नाम था उनका.. बस.. फीर सबकुछ बीखर गया..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) लडकी..? विमला..? कौन थी वो..? कही हमारी सांस तो नही..?

मंजुला : हां सृती.. वो कोइ ओर नही.. हमारी सगी बुआ ओर हमारी सांस ही थी.. हमारे बापुकी छोटी बहेन.. जो कीसी श्रापकी वजहसे हमारे दादी दादाने उसे आश्रमपे छोडा था.. लेकीन जब गलत फहेमी दुर हुइ तो दादी उनको वापस हवेलीपे लेकर आइ.. ओर तबतक वो भी जवान हो चुकी थी.. ओर गांवके डरकी वजहसे कीसीको केह भी नही पाये की ये लडकी मेरी ओलाद हे.. सबको यही कहा.. की ये अनाथ थी तो हमने गोद लेली..

सृती : (आस्चर्यसे) क्या वो सचमे हमारी सगी बुआ थी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. लेकीन वो बहुत ही सातीर थी.. उनको पता थाकी बापु उनके सगे भाइ हे.. फीर भी उसने ये बात बापुसे छीपाइ.. क्युकी वो भी बापुसे प्यार करने लगी थी.. ओर बापुको अपने प्रेम जालमे फसाकर हर रात उनसे अपने तनकी आग बुजाने लगी.. ओर बापुको मेरी मम्मीसे अलग करदीया.. लेकीन तबतक तो मम्मी भी बापुसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर अपनी प्यास बुजाते बुजाते वो खुद भी प्रेगनेन्ट हो चुकी थी..

फीर मंजुने सृतीको विमला किशन ओर नीर्मलाकी पुरी कहानी सुनाइ.. की कीस तराह विमलाने साजीस करके नीर्मलाको किशनसे दुर करदीया ओर किशनसे सादी करली.. फीर सृतीने खानदानके श्रापके बारेम भी बता दीया.. की कीस तराह श्रापका नीवारण हुआ.. ओर देवायतके बाद लखन ओर पुनमका जन्म हुआ.. सृतीने देवायतके खानदानके बारेमे सबकुछ सृतीको बता दीया..

सृती : (हसते गार्डनमे आते) मंजु.. ये तो बडी दिलचस्प कहानी हे.. अब समजी.. इस खानदानके सभी मर्द अपनी बहेनसे ही क्यु सादी करते हे.. इनमे मेरी मम्मी भी बाकात नही रही.. सृती.. मेरी मम्मीके बारेमे बताओनां.. चल यही बैठते हे..

मंजुला : (मुस्कुराते बैठते) हां सुन.. जब भुमी आंटीको पता चलाकी बापु मेरी मम्मीको प्यार करते हे.. तब भुमी आंटीका दिल टुट गया.. ओर उपरसे तेरी मम्मीके साथ वो विरजी अंकलका हादसा हो गया.. फीर तेरे मम्मी पापाने आपसमे सादी करली.. ओर सादी करके सभी दोस्तोके साथ अपना रीस्ता खतम करलीया.. सीर्फ बापुके साथ ही रीस्ता रखा.. क्युकी बापु उनको अपनी बहेन मानते थे ओर हर साल उनको सहेर जाकर राखी बंधवाते थे..

सृती : (हसते) मंजुदी.. अगर बापु मेरी मम्मीको सचमे बहेन मानते थे.. थो फीर बापुने उनके साथ रीलेशन क्यु बनाया..? क्या वो जवानीमे इतनी खुबसुरत थी..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) खुबसुरत..? अरे कमीनी वो दोनो सहेलीतो कीसी हीरोइनसे कम नही थी.. ओर खुबसुरत तो वो दोनो अभी भी हे.. मेरी मम्मी भी कुछ कम नही हे.. देखा नही.. दोनो कैसे पटाका लग रही हे..? सुन.. रीलेशन बापुने नही.. भुमी आंटीने बनाया था.. तेरे पापा सेक्स ओर संतुस्ट करनेमे तो सक्षम थे..

दोनोकी सेक्स लाइफ बहुत अच्छी थी.. मगर तेरे पापाके स्पम मे उतने काउन्ट नही थे.. की वो भुमी आंटीको प्रेगनेन्ट कर सके.. इस बारेमे तो अच्छी तराह जानती हेनां..? दोनोने कइ जगह अपना इलाज भी करवाया.. मगर फीर भी भुमी आंटी प्रेगनेन्ट नही हो पाइ..

सृती : (सामने देखते) अच्छा.. अब समजी.. इसीलीये दोनो रीलेशनमे आये..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. तेरे मम्मी पापा दोनो सहेरमे रहेते थे.. तब सीर्फ बापुही जानते थे की दोनो कहा रहेते हे.. उन्होने सीर्फ बापुके साथ ही रीस्ता रखा था.. बापु दोनोकी तकलीफके बारेमे जानते थे.. इसीलीये दोनोको अ‍ेक दिन हमारे आश्रमपे लेकर गये.. ओर बापुने बाबाको दोनोकी तकलीफके बारेमे बात की..

जब बापु ओर तेरे पापा वही इधर उधर धुम रहेथे तब भुमी आंटीने मोका देखकर बाबाको अपनी तकलीफके बारेमे पुछा.. तब बाबाने उसे तेरे पापासे संतान नही होनेकी बात कही.. ओर उसे ये भी कहा.. की तेरे नसीबमे संतान हे.. मगर तेरे पतीसे नही हमारे बापुसे..

सृती : (आस्चर्यसे) क्या..? ये बात खुद बाबाने कही..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. पहेले तो तेरी मम्मीने मना कर दीया.. लेकीन बादमे उसने अपना मन बदल दिया.. क्युकी अ‍ेक जमानेमे प्यार जो करती थी उनसे.. ओर धीरे धीरे करते भुमी आंटीका पुराना प्यार जाग उठा.. ओर अ‍ेक दिन उसने राखीके तोहफेके बदले बापुसे संतान सुख मांग लीया.. तो बापु उनपे बहुत गुस्से हो गये.. ओर उन्होने भुमी आंटीको मना करदीया..

सृती : (हसते) कमीनी तुमतो बडा सस्पेन्स रखती हो.. बताना तो फीर मेरा जन्म कैसे हुआ..?

मंजुला : (हसते) सुन.. जीस तराह बापु आंटीको राखी बांधने आते थे उसी तराह तेरे पापा भी अपने गांव अपनी बहेनको राखी बांधने जाते थे.. उनका गांव दुसरे राज्यमे था.. तो उनको आने जानेमे ओर वहा रुकनेमे अ‍ेक हप्ता लग जाता था.. तो उनको राखीके तीन दिन पहेले ही नीकलना होता था.. तो अ‍ेक दिन तेरे पापा गांव चले गये.. तब उनके जाते ही भुमी आंटी बापुको लेकर आश्रमपे चली गइ..

सृती : (हसते) क्यु..?

मंजुला : (हसते) क्युकी बाबा हमारे बापुको समजा सके.. क्युकी बापु उनको बच्चा देनेके लीये मान नही रहे थे.. तब बाबाने बापुको समजाया.. तो बापुने कहा ये मेरी बहेन हे.. तब बाबा भी थोडा गुस्से होगये.. ओर बापुको कहा.. की तुमने तेरी सगी बहेनसे तो सादी करली.. तो फीर येतो मुह बोली बहेन हे.. फीर भी तुजे बुरा लगता हे तो चल.. मे तुम दोनोकी सादी करवादु.. ओर बाबाने वहा दोनोकी गांधर्व सादी करवादी..
 
सृती : (आस्चर्यसे) क्या..? मम्मीने बापुसे सादी करली थी.. तो फीर पापा..? मंजुदी आगे बताओनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) सुन.. फीर तो बापुको भी भुमी आंटीकी बात माननी पडी.. देर साम आश्रमसे आते ही दोनो सुरु हो गये.. उसी रात दोनोने अपनी सुहागरात मनाइ.. सुहागरात क्या छोटसा हनीमुन ही मानलो.. पुरी रात दोनो जागे.. ओर प्यार करते रहे.. ओर जबतक तेरे पापा वापस नही आये तबतक दोनो मे से कोइ घरसे बहार ही नही नीकले.. दोनो अ‍ेक हप्ते तक लगातार मीलन करते रहे.. ओर नतीजेके फल स्वरुप भुमी आंटी बापुसे प्रेगनेन्ट होगइ.. ओर तु उनके पेटमे ठहेर गइ..

सृती : (मुस्कुराते) क्या इस बातका पापाको पता नही चला..? तो फीर उनका क्या हुआ..?

मंजुला : (सामने देखते) सृती.. फीर तो भुमी आंटीका तेरे पापासे सीर्फ नामका ही रेह गया.. क्युकी अब भुमी आंटी बापुको ही अपना पती मानती थी.. तब भुमी आंटीने तेरे पापासे जुठ बोला था.. कहाकी हम आश्रम गये थे बाबाने उसे देसी दवाइ दी थी.. इसीलीये वो प्रेगनेन्ट हुइ हे.. ओर जब तेरा जन्म हुआ.. सृती.. अब जो मे तेरे पापाके बारेमे जो बात केह रही हु.. हो सकता हे तुजे बुरा लगे.. लेकीन ये सच हे..

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सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? बता नही लगेगा बुरा.. इतना कुछ तो सुनलीया.. तो फीर क्या फर्क पडता हे.. कही तु केह रही थी दुसरी सचाइ.. कही ये वोही तो नही..? बता..

मंजुला : (सामने देखते) नही सृती.. वो सचाइ तो कुछ ओर ही हे.. जो तु सुन नही पायेगी.. खैर जानेदे.. कल तुजे सब पता चल जायेगा.. तब देखती हु.. तेरे मे सचाइ बरदास्त करनेकी कीतनी हिंमत हे..

सृती : (मुस्कुराते) कमीनी तुम तो मुजे डरा रही हो.. सुन.. तु मेरे पापाके बारेमे कुछ केह रही थी.. बता..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सुन.. तेरे पापाका भी उनकी भाभीके साथ अवैध रीस्ता था.. जब आंटीकी डीलीवरी हुइ ओर तेरा जन्म हुआ.. तब आंटीकी देखभालके लीये उनकी जेठानी गांवसे आइ थी.. ओर तेरे पापाका रीलेशन उनसे होगया.. वो अ‍ेक महीना यहा रुकी.. ओर जबतक यहा थी तबतक दोनो मौका मीलते ही अ‍ेक होजाते.. दोनो हर दिन रात सेक्स करते रहे..

सृती : (आंख गीली करते) मंजुदी.. मे मेरे मम्मी पापासे कीतना प्यार करती थी.. लेकीन मम्मी पापा दोनो अ‍ेक दुसरेको धोखा दे रहे थे.. तुमतो उनके बारेमे सबकुछ जानती हो.. क्या बापुका रीलेशन मेरे जन्म तक ही थानां..?

मंजुला : (भारी सांस लेते) नही सृती.. ये साली आग ही अ‍ैसी हे.. जब अ‍ेक बार चस्का लग जायेनां..? फीर तो ये पीछा ही नही छोडती.. मीलन करनेकी बार बार इच्छा होती हे.. ओर बापु ओर तेरे पापाका भी यही हुआ.. तेरे पापा सीर्फ राखीके दिन ही जाते थे.. लेकीन जबसे उनकी भाभीके साथ रीलेशन हो गया..

तबसे सालमे तीन चार बार अपने गांव जाने लगे.. ओर हमारे सास सुसरके बारेमे जानकर उनका भी मन हो गया.. ओर अपनी भाभीके साथ साथ अपनी बहेनको भी पटाकर सेट करलीया.. फीर तो वहा तीन चार दिन रुकते.. ओर अपनी भाभी ओर अपनी बहेनकी प्यास बुजाकर वापस आजाते..

सृती : (सामने देखते) ओह गोड..? पापा भी..? अपनी बहेनके साथ..? तो फीर मम्मी ओर बापु..?

मंजुला : सृती.. ये कीमीनी आग ही अ‍ैसी हे.. कोइ रीस्ते नाते नही देखती.. ओर बापु भी जब सहेर जाते तब भुमी आंटीको मीलकर ही आते.. दोनो तब मीलते जब तेरे पापा अपनी जोबपे होते.. ओर तु अपनी स्कुलपे.. दुनीयाकी नजरमे दोनो भाइ बहेन थे.. लेकीन अकेले मे दोनो मीया बीवी बनकर पुरा दिन प्यार करते अपनी प्यास बुजाते.. ओर तबतक दोनो पती पत्नी रहे जबतक बापु गजर ना गये..

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सृती : (आंख गीली करते) मंजुदी.. मे बापुको मामा कहेती थी.. तो समजती थी मामा अपनी बहेनको मीलने आते हे ओर उनका बहुत खयाल रखते हे.. मेरी पुरी पढाइका खर्चा भी देते थे.. लेकीन मुजे क्या पता थाकी वो अपनी बहेनका नही अपनी बीवी ओर बेटीका खयाल रखने आते हे.. मंजुदी.. ये दुनीया कीतनी अजीब हे.. कोइ रीस्ते नाते तक नही देखती.. मेरे पापा भी वोही नीकले.. बस.. लडकी या ओरत देखी नही के अपने नीचे लीटानेमे लग जाते हे.. फीर चाहे अपनी भाभी हो या सगी बहेन..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. तु उल्टा सोच रही हे.. इनमे सीर्फ मर्द नही हम ओरते भी यही चाहती हे.. ओर यही तो संसार हे.. सबको अपने अपने तनकी प्यास बुजानी हे.. जहा प्यार करते अ‍ेक दुसरेके वंसको आगे बढाते हे.. फीर चाहे कीसी भी तरीके से हो.. अपने अपने देखनेका नजरीया हे.. हमारे बापुका अ‍ैसी कइ ओरतोके साथ रीलेशन था.. जो सीर्फ बच्चेके लीये बनाया था.. फीर तो उनके सामने देखा तक नही.. जैसे हमारी रजीया ओर दयाकी मां.. उसने सीर्फ बच्चेके लीये बापुके साथ रीलेशन बनाया..

सृती : (हसते) क्या..? रजु ओर दया दीदी..? वो दोनो भी बापुकी संतान हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. रामु काकातो बापुके दोस्त थे.. जो वो भी बच्चा देनेमे सक्षम नही थे.. तब उनकी बीवी बापुसे प्रेगनेन्ट होगइ.. ओर रजुकी मां तो हमारे यहा काम करती थी.. वो बापुकी ओर आकर्सीत होगइ थी.. ओर उनसे बच्चा चाहती थी.. ओर अ‍ेक दिन वो भी बापुसे प्रेगनेन्ट होगइ..

बापुने अपनी दोनो बेटीकी सादी भी करवाइ.. अ‍ेक कोतो उनके पतीने छोड दीया.. ओर अ‍ेक विधवा होगइ.. तबसे दोनो हमारे साथ हे.. दया बहेनकोतो पता हेकी वो हमारी बहेन हे.. लेकीन रजुदीदीको तो बेचारीको पता भी नही.. की वो भी हमारी बहेन हे..

सृती : (मुस्कुराते) लगता हे तब बापु बहुत ही हेन्डसम होगे.. तभी तो ओरते उनके पीछे इतनी पागल होगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. सीर्फ हेन्डसम ही नही.. उनमे आकर्सण ही इतना था.. जो आप हमारे देवु ओर लखन मे हे.. देख.. कीतनी खुबसुरत दुनीया हे ये.. जहा सीर्फ प्यार ही प्यार नजर आता हे.. तु कीसीसे प्यार करेगी तो तुजे भी प्यार मीलेगा.. ओर अगर पीछे हट गइ.. तो केवल दुख ही मीलेगा.. साथी होना जरुरी हे.. फीर चाहे वो पती हो या प्रेमी.. अगर दोनोमे से कोइ नही हेतो इस दुनीया उस ओरतको जीसका कोइ नही उसे नोचनेके लीये तैयार ही हे.. क्या सही कहाना मैने..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर हसते) हां.. सही कहा.. ओर देख भी लीया.. अभी तक मुजसे रुठे हुअ‍े हे.. मंजुदी.. प्लीज.. आप उनसे बात करोनां.. आपके कहेनेपे मान जायेगे.. आपका बेटा जो हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) ना बाबा ना.. तुमने उसे नाराज कीया हे तो तुही मना.. मे तुम दोनोके बीच पडने वाली नही हु.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते पीठमे मारते) कीतनी कमीनी हे तु.. क्या मेरी इतनीसी बात नही मानेगी..? अब तो तेरी दीदी भी हु.. कमसे कम अपनी दीदीके लीये तो बनाले.. हें..हें..हें..

पुनम : (अंदर आते जोरोसे) अरे.. दोनो यहा बैठी हो..? देखो कीतने बज गये.. खाना भी बन गया हे.. चलो दोनो.. फीर बाते कर लेना..

मंजुला : (खडी होते धीरेसे) लोजी.. आगइ मेरी बहु.. हें..हें..हें.. (जोरोसे बोलते) अरे आ रही हे बाबा.. क्यु चीला रही हे.. बाते कर रही थी.. चलो सृती..

सृती : (खडी होते धीरेसे हसते) बहु..? दीदी इसे बहु क्यु कहा..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) अरे मेरे लखन बेटेकी बीवी हे ये.. तो बहु ही कहुगीनां.. हें..हें..हें.. चल..

पुनम : (दोनो पास आतेही हसते) क्यु भाभी.. अपने बारेमे जान लीया सब.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते पीठमे मुका मारते) भाभीकी बच्ची बहेन हु आपकी.. हां जान लीया सब.. हें..हें..हें.. दीदी.. आपको भी तो सब पता था.. तो बता देती मुजे..

पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. बडी दीदीकी परमीशनके बगैर कैसे बताती..? लेकीन अब कुछ पुछना होतो पुछ सकती हो.. अब बता दुगी.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते घरकी ओर चलते) हां पुछ लुगी.. देखो.. अमारी बहेन कीतनी खुस हे.. कोइ केह सकता हे.. इनका आज ही डीवोर्स हुआ हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां खुस तो होगीना कमीनी.. अ‍ेकसे छुटकारा मील गया तो दुसरेको सेट भी करलीया हे.. हें..हें..हें.. मेरी बहु जो होने वाली हे.. क्यु बहु.. बनोगीनां मेरे लखन बेटेकी रानी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते मुस्कुराते भागते) दीदी.. आप भीनां..

कहेते पुनम सर्मसार होते वहासे दोडकर चली गइ.. तो मंजु ओर सृती दोनो ही उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. फीर वो दोनो भी घरपे आगइ तो पुनम दोनोको देखते हसती रही.. तब लता रमा ओर नीलम नीचे होलमे बैठी थी.. तो मंजु ओर सृती भी वही जाकर बैठ गइ.. तभी देवायत भी आगया.. ओर वो भी सबके साथ बैठ गया.. तो पुनम उनसे सरमाकर मुस्कुराते अपने रुममे चली गइ....

कन्टीन्यु
 
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