चंपा : (हडबडाते जटसे करवट लेते) कौन..? कौन हे..?
लखन : (मुहपे हाथ रखते धीरेसे) भाभी.. मे हु.. लखन.. जोरोसे मत बोलो..
चंपा : (हाथ हटाते धीरेसे) अरे देवरजी आप..? इस वक्त..? लेकीन यहा तो आपकी बीवी नही हे..
लखन : (धीरेसे बुब्सपे हाथ रखते) भाभी.. जानता हु.. उस वक्त मे गलतीसे आगया था.. लेकीन आज जान बुजकर आया हु.. आपसे मीलने.. उस दिन आप बहुत अच्छी लगी.. आपने क्या खुब मजा दीया.. मे तो आपका दिवाना होगया हु.. तो आगया..
चंपा : (धीरेसे मुस्कुराते) आप बहुत बदमास हो.. अगर कीसीने देखलीया नां.. मे तो बदनाम होजाउगी.. ना बाबा ना.. उस दिन आपने मेरी हालत खराब करदी थी..
लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) भाभी.. कुछ नही होगा.. आप तो जानती हे.. अब हमे सबके साथ सेक्स करनेकी छुट मील गइ हे.. बस.. जो होगा अेक दुसरेकी सहमतीसे होगा.. तो काहेकी बदनामी..?
चंपा : (मुस्कुराते) हां.. बात तो आपकी सही हे.. मेने भी सुना हे.. दया बता रही थी.. लेकीन उस दिन आपका देखा.. बाबा कीतना बडा हे.. दो दिन लगे.. तब जाके ठीक हुइ हु.. आज कुछ नही..
लखन : (पैर डालकर उपर चडते) भाभी.. उस दिन पहेली बार थाना.. तो तकलीफ हुइ.. लेकीन इस बार देखना आपको कोइ तकलीफ नही होगी.. रजुको भी तकलीफ नही होती.. मुजसे कैसे मजेसे चुदवाती हे.. अब तो मेरे बगैर रेह भी नही सकती..
चंपा : (बाहोमे कसते) अगर मुजे भी आपका चस्का लग गया तो..? तो फीर मे कहा जाउगी..?
लखन : (मुस्कुराते गाल चुमते) अरे मेरी भोली भाभी.. बडे भैयातो हे यहा.. या फीर मेरे पास चली आना.. कहेना रजुको मीलने जा रही हु.. या फीर मे इधर आजाउगा.. दोनो खुब मजे करेगे.. ओर वैसे भी आप अकेली हो.. तो आपका खयाल रखनेके लीये हम दोनो भाइ हेना..
चंपा : (सरमाकर हसते धीरेसे) ठीक हे.. लेकीन देखना.. अब जब भी यहा आओ.. कमसे कम अेक बार मीलने आओगे.. केह देती हु.. अब जो भी करना हे करलो.. देखना मुजे सुबह जल्दी उठना भी हे.. कल तो बहुत काम हे.. तो बाबा मुने काम करनेके लायक छोडना.. चलो.. सुरु होजाओ.. कीतने दिनोसे प्यासी हु.. अब तो बडे देवरके पास भी मुजे मीलनेका टाइम नही हे..
तो चुमा चाटी ओर बुब्सके साथ खेलते लखनने चंपाभाभीको गरम करदीया.. ओर वो मादक सीसकारीया करते लखनको चोदनेके लीये मनत करने लगी.. तब जाके धीरे धीरे करते लखनने पुरा लंड चंपाभाभीकी चुतमे घुसा दीया.. तब चंपा भाभी हवामे उडने लगी.. तब कुछ ही देरके बाद दोनो घमासान चुदाइ करते हवामे गोते लगाने लगे.. लखन चंपाभाभीकी जमकर चुदाइ करने लगा..
तो दुसरी ओर आज देवायत ओर दयाकी भी सुहागरात थी.. आज दया घुंघटमे बेडके बीच बैठी थी.. मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र दयाके चहेरेपे चार चांद लगा रहे थे.. जीसे देवायत आते ही दयाको देखकर पागल जैसा होने लगा.. उनके मनमे पुनम धिरेनको लेकर जो दुख था.. वो दयाको देखते ही अेक पलमे दुर हो गया.. ओर वो सबकुछ भुलकर दयाको बेडपे लीटाते प्यार करने लगा..
कुछ ही देरमे दोनो फोर प्लेय खेलते नंगे होगये.. दया भी बहुत उतेजीत होगइ थी.. ओर आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोसीमे देवायतके बाल खीचते अपने उपर खीचने लगी.. देवायत उनके उपर चडकर छा गया.. ओर दयाके बुबस्को मुहमे लेकर चुसने लगा.. तभी दयाने हाथ नीचे लेजाते देवायतका लंड मुठीमे पकड लीया.. ओर अपनी चुतपे घीसने लगी..
जब लंड गीला होगया.. तो दयाने लंडके टोपेको अपनी चुतमे फसा लीया ओर देवायतके होठोको चुमते उनको कसके बाहोमे भीच लीया.. तो देवायतने भी देर ना करते अपनी कमरको अेक जटका दीया तो देवायतका आधा लंड दयाकी चुतमे घुस गया.. ओर दया हल्कासा चीखते देवायतको जोरोसे बाहोमे कस लेती हे.. तभी देवायतने अेक ओर जटका मारा ओर पुरा लंड दयाकी चुतमे उतार दीया..
तो दयाकी आंखसे आंसु नीकल गये.. वो फीर भी कामुक्तासे देवायतकी ओर देखती रही.. ओर अपनी कमरको जटके मारते देवायतको चोदनेके लीये उक्साने लगी.. फीर क्या..? देवायत हाथके बल उचा हो गया.. तो दयाने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडकर देवायतके हाथोमे फसा लीया.. देवायत लंबे लंबे सोट मारते दयाको चोदने लगा.. तो दयाका मुह खुला ही रेह गया.. ओर वो मजेसे चुदवाने लगी..
अबतक दया दो बार जड चुकी थी.. ओर तीसरी बार जडनेके लीये रेडी थी.. तभी देवायत कांपने लगा.. जैसे वो सातवे आसमानको छुने लगा.. दयासे चीपकते पुरा लंड दयाकी चुतमे घुसा दीया.. ओर कमरको जटके देते दयाकी बच्चेदानीपे विर्यकी बौछार करते भीगोने लगा.. तो दया आंखोकी पुतलीया पलटते जैसे स्वर्गमे पहोंच गइ.. ओर देवायतसे चीपकते कांपते हुअे जडने लगी..
देवायतका पुरा लंड भीगो दीया.. तब दोनो ही परम आनंदकी अनुभुती करने लगे.. फीर देवायत दयाके सीनेपे सर रखते उनके बुब्सको चुमने लगा.. दया देवायतके सरको सहेला रही थी.. दयाकी पुरी चुत देवायतके पानीसे लबालब भरी हुइ थी.. दयाको पता नही था.. की उनको गर्भवती करनेके लीये बच्चेदानीमे जानेके लीये देवायतके स्पमकी होड लगी हुइ हे.. दोनो आनंद मय होते इस पलको अेन्जोय कर रहे थे..
तो इधर लखनने अब तक चंपा भाभीको चोद चोदके दो बार जडा दीया था.. चंपा भाभी बहुत थक गइ थी.. क्युकी लखन उनको काफी देरसे चोद रहा था ओर अभीभी उनका चोदना जारी था.. जब चंपा भाभी जड जाती तो उनका जोस ठंडा होजाता.. लेकीन लखनके लगातार चोदनेसे कुछ देरके बाद वो फीरसे उतेजीत होजाती ओर लखनका साथ देने लगती.. अेक बार फीर वो जोसके साथ लखनसे चुदवा रही थी..