Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 68 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२९

कहेते पुनम सर्मसार होते वहासे दोडकर चली गइ.. तो मंजु ओर सृती दोनो ही उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. फीर वो दोनो भी घरपे आगइ तो पुनम दोनोको देखते हसती रही.. लता रमा ओर नीलम नीचे होलमे बैठी थी.. तो मंजु ओर सृती भी वही जाकर बैठ गइ.. तभी देवायत भी आगया.. ओर वो भी सबके साथ बैठ गया.. तो पुनम उनसे सरमाकर मुस्कुराते अपने रुममे चली गइ....अब आगे

देवायत : (मुस्कुराते) मंजु.. चंदाका फोन आया था.. वो सबलोग कल सुबह आ रहे हे.. तो उनको लेने जाना पडेगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. तो फीर अगर लखनका काम ना होतो आप लखनको ही भेजदो.. सबको लेकर आजायेगा..

देवायत : (मुस्कुरात.) हां.. यही ठीक रहेगा.. लेकीन वो हे कीधर..? आते ही चला गया..

मंजुला : (हसते) अरे अपने दोस्तोसे मीलने गया होगा.. वैसे बंसी भैयाकी सादी जो हे.. वहा कुछ काम बाम कर रहा होगा.. लेकीन आप कीधर थे..?

देवायत : (थोडा सीरीयस होते) मे बस.. पंचायतकी ओफीस गया था.. रमेशको मीलने.. वो सरपंचके पदसे इस्तीफा दे रहा हे.. ओर हमेसा हमेसाके लीये सहेर रहेने जा रहा हे.. ओर उपरसे यहा नइ स्कुल ओर होस्पीटलका काम भी सुरु हो गया हे..

सृती : (आस्चर्यसे) क्यु..? क्या हुआ..? तो फीर यहां..? आइ मीन.. वो चारुभाभी ओर वंदना..?

देवायत : (मुस्कुराते) सृती.. वो दोनो अलग होगये हे.. दोनोका डीवोर्स होगया हे.. यहा वो अपनी सब प्रोपर्टी चारु ओर वंदनाके नाम कर चुका हे.. तो कल सुबह पंचायत सदस्योकी मीटींग बुलाइ हे.. मुजे जाना होगा.. मंजु.. क्या सोच रही हो..? कुछ कहेना हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. मे सोच रही हु.. क्युना हम इस गांवमे अ‍ेक मीसाल कायम करे..?

देवायत : (हसते) क्या..? कुछ नया सोचा हे क्या..?

मंजुला : (हसते) हां.. देवु मे चाहती हु.. अब इस गांवमे सभी वहीवटदार महीला हो.. क्या कहेते हो..? मेरी मानो तो आप चारु भाभीको सरपंच बनादो.. फीर धीरे धीरे करते सभी सदस्य बदलते जाइअ‍े.. ओर महीलाको जीम्वेवारी दीजीये.. वहा रश्मी भाभी ओर वंदना भी बहुत मस्त काम कर रही हे.. क्या कहेते हो..? ओर वेसे अब होस्पीटलमे भी महीला डोक्टर आ रही हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. आइडीया तो मस्त हे.. ठीक हे.. मे कल डी.अ‍ेम. से बात करलुगा.. फीर सभी सदस्यको भी बता दुगा.. वैसे सरपंचके लीये चारु ही ठीक हे.. ओर चंदाके गांवमे भी वो भीमाको सरपंच बनाना हे.. बेचारा कबसे हमारी आस लेकर बैठा हे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) जानु.. वैसे होस्पीटलका काम सचमे सुरु होगया हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां हो गया हे.. सब टेन्डर दे दीये थे.. तो पास होगये.. साथमे स्कुलका काम भी सुरु होगया हे.. तो कंपलीट होनेमे अ‍ेकाद साल लग जायेगा.. फीर तुम आजाना इधर..

सृती : (मुस्कुराते) देखती हु बाबा.. लेकीन यहाके लीये मेने अ‍ेक डाक्टरनी ढुंढली हे.. हमारे गांवकी ही हे.. सरकारसे अ‍ेपोइन्ट होगी.. आप देखलेना..

देवायत : (हसते) अरे हां.. लखन ओर तुम बतातो रहे थे.. क्या हुआ इस लडकीकां..? बेंगलोर गइ की नही..?

सृती : (मुस्कुराते) नही.. काफी होसीयार हे.. बस.. अ‍ेकाद महीनेमे चली जायेगी..

सबलोग बाते करते बैठे थे.. तब लखन घरसे नीकलते ही रामुकाकाको खेतपे छोड दीया.. फीर वो गोडाउनकी ओफीसकी ओर जाने लगा.. तभी लखनको गोडाउससे छोटुकी बीवी रीटा अपनी सारीको सही करते बहार नीकलते नजर आइ.. जैसे ही लखनकी ओर नजर गइ.. वो थोडी गभराते डर गइ.. फीर लखनकी ओर देरकर सरमाते हसती हुइ वहासे नीकल गइ.. तब लखन गोडाउनमे चला गया..

ओफीसकी बगलकी रुममे जाकर देखा तो भानु अपनी पतलुन पहेन रहा था.. तो लखनकी ओर नजर जाते ही वो थोडा जेंप गया.. फीर सरमाकर हसने लगे.. तो लखन समज गया.. की अभी अभी अंदर क्या हुआ हे.. ओर वो ओफीसमे आकर बैठ गया.. तो कुछ देरमे भानु भी बहार आगया.. ओर लखनके पास बैठ गया.. फीर दोनो ही अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगे..

लखन : (जोरोसे हसते) क्या भैया.. भाभी घरपे नही हे तो बडा फायदा उठा रहे हो..

भानु : (हसते) क्या करु लखन.. पता नही कमीनी कब वापस आयेगी.. तबतक इन बहारकी बीरीयानीसे ही काम चलाता हु.. साली क्या कडक माल हे.. बहुत मजे देती हे.. तुम उनकी लेगा क्या..? तो अभी बुलाता हु..

लखन : (मुस्कुराते) नही भैया आपही लीजीये.. अब मेने बहारकी बीरीयानी खाना ओल मोस्ट बंध करदीया हे.. तीन तीन बीवीया हे.. तो इनमे ही खुस हु.. कहो.. कामकाज कैसा चल रहा हे यहा..?

भानु : (मुस्कुराते) बस.. कटाइ हो रही हे.. ओर अगली फसल उगानेकी तैयारीया चल रही हे.. आप सुनाओ.. वहा काम सुरु करदीया..? ओफीस बोफीसमे जाते होकी नही..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भैया ओफीसतो नही गया.. पर काम सुरु हो गया हे.. वहा हमारे पार्टनरके कोन्टेक्टमे रहेता हु.. सब फोन मे ही नीपट जाता हे.. भाइसे पुछकर तीन चार सोदा करलीया.. बहुत अच्छा रहा.. भाइ.. मे भाभीको साथमे लेकर आया हु.. नीलुभी साथमे आइ हे.. हम सब श्रीधरकी सादीमे आये हे.. तो भाभी अब चाचीके साथ ही घरपे आजायेगी.. सायद कल वोभी सब लोग आजायेगे..

भानु : भाइ.. मा आजाये तो आप ही घरपे छोड जाना.. कटाइ चल रही हे.. तो इधर भी ध्यान रखना पडेगा.. क्या भाइने दयासे सादी करली..? मुजे कहा था लेकीन मे नही आ सका..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. होगइ.. मे रामुकाकाको छोडने ही आया था.. चलो मे चलता हु.. अभी बंसीके घरपे जाना हे.. फीर वहीसे सब दोस्तो श्रीधरके घरपे जायेगे.. कल उनका मंडप मुहुर्त हे..

भानु : (थोडा हीचकीचाते) भाइ.. आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी.. पर कैसे कहु..? क्या वहा कोइ अच्छा डोक्टर बोक्टर हेकी नही..? बस.. थोडा दीखाना हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्यु..? क्या हुआ हे आपको..? कोइ तकलीफ हे क्या..?

भानु : (सरमाकर हसते) अरे इतनी भी नही हे.. सुनो.. वो.. आजकल नीचे थोडा दर्द हो रहा हे.. इसीलीये..

लखन : (हसते) अच्छा.. तो छोटुकी बीवीपे थोडी कम महेनत करो.. हें..हें..हें.. सुना हे आजकल वो आपके साथ ही रेहती हे..?

भानु : (सरमाकर हसते) तो क्या करु..? अ‍ेक आपकी भाभी यहा हे.. तो घरपे आनेका नाम ही नही ले रही.. तो क्या करता..? ओर वैसे भी आजकल कमीनी कुछ ज्यादा ही बच्चा बच्चा कर रही हे.. ओर मां भी नही समजती.. अब इस उमरमे आपकी भाभीको बच्चेके लीये केह रही हे..

लखन : (हसते) तो दिकत क्या हे..? देदोनां.. अ‍ेक ओर सही.. हें..हें..हें.. ओर भाभीकी उमर भी इतनी नही हे.. की वो बच्चा पैदा ना कर सके.. आप तो बच्चा पैदा करनेके मास्टर हो.. क्या दिकत हे..?

भानु : (हसते) तो क्या करु..? मुजे वो कोन्डम बोन्डम लगाना अच्छा नही लगता.. उनमे मजा ही नही आता.. तो बच्चा ठहेर जाता हे.. ठीक हे यार.. आप कहेते होतो ट्राइ करलेगे.. ओर क्या..? लेकीन कमीनी घरपे आये तबनां.. कीतने दिन होगये हम नही मीले..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. बस अ‍ेक ही दिनकी तो बात हे.. अगर चाची कल आजायेगी तो सामको ही दोनोको घरपे छोड दुगा.. फीर ट्राइ करते रहेना.. हें..हें..हें..

भानु : (मायुस होते) भाइ.. आपसे अ‍ेक बात ओर कहेनी हे.. क्या आपको पता हे..? मे ओर भावना अलग हो रहे हे..? वो मुजे डीवोर्स दे रही हे.. क्युकी उनको मेरे ओर रीटाके बारेमे सब पता चल गया हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. पता तो नही था.. लेकीन यहा आकर सब पता चला.. सीर्फ भावना भाभीको ही नही.. घरपे सबको पता चल गया हे.. की आप छोटुकी बीवीको घरपे लेजाते हो..

फीर लखन वहासे बंसीके घरपे चला जाता हे.. ओर बंसीके घरवालोको मीलता हे.. तब वहा जागृती उनसे मीलती हे.. ओर लखनको अपना वादा याद दीलाते बहुत ही सर्मसार होते अपनी भाभी सांतीके पास चली जाती हे.. फीर बंसी ओर लखन मुनाको मीलने उनके घरपे जाते हे.. तब बरखा ओर बसंती लखनकी बहुत टांग खीचाइ करती हे.. फीर दोनो मुनाको लेकर श्रीधरके घरपे चले जाते हे.. तो श्रीधर तीनोको देखकर बहुत खुस होता हे..
 
फीर सभी दोस्तो मीलकर वहाका कामकाज देखते हे.. तब श्रीधरकी बीवी जयश्री लखनकी बहुत मस्तीया करती हे.. तो श्रीधरकी मम्मी ब्रिन्दा भी चोर नजरसे लखनके पेन्टके उभारको देखती रहेती हे.. तब उनके मनमे अ‍ेक बार फीर वासनाका कीडा जाग जाता हे.. ओर वो कामके बहाने लखनके आस पास ही मंडराने लगती हे.. ओर बार बार चोर नजरसे लखनको देखते मस्तीया करते उनसे बाते करती रहेती हे..

अ‍ैसेही साम ढल गइ.. ओर रात होगइ.. ब्रिन्दाने लखनको वही खानेका बहुत आग्रह कीया लेकीन लखन नही माना.. ओर वो खानेके लीये घरपे आगया.. तब सबलोग डाइनींगपे बैठकर खानेकी तैयारीया कर रहे थे.. तो पुनमने आंखोके इसारोसे लखनको उनके पास बैठनेके लीये कहा.. तो लखन हाथ मुह धोकर पुनमके पास बैठ गया तो पुनम बहुत खुस होगइ.. तब सृतीको थोडी ज्वेलेसी फील हुइ.. तभी..

मंजुला : लखन बेटा.. कल मम्मी लोग आ रहे हे.. तो तुजे सुबह उनको लेने जाना पडेगा.. तेरे भाइको यहा कुछ काम हे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभीमां.. मे चला जाउगा.. वहाका कुछ ओर काम होतो वो भी बोलीये..

देवायत : लखन.. हमारी बडी कार लेकर ही चले जाना.. साथमे सामान भी बहुत होगा.. ओर हां.. तुमने कोइ नइ कार बार लेली की नही..? क्युकी अब जीप तो तु यही छोड रहा हे..

लखन : (सृतीकी ओर देखते) नही भाइ.. यहासे जाते ही ले लुगा..

सृती : (मोकेका फायदा उठाते) जानु.. वहा दो दो कारकी क्या जरुरत हे.. मेरी कार तो हे.. ओर वहा हमने नया स्कुटर भी लेलीया हे..

लखन : (सृतीकी ओर देखते) नही भाइ.. भाभीको भी कारकी जरुरत पडती हे.. तो हम दुसरी कार ही लेलेगे..

मंजुला : लखन.. वो सब छोड.. सुनो सब.. खाना खानेके बाद सब लोग होलमे आजाना.. मुजे तुम सब लोगोसे अ‍ेक जरुरी बात करनी हे..

देवायत : (मुस्कुराते) मंजु सब लोग यही तो हे.. तो यही बतादोनां..

मंजुला : (पुनमकी ओर देखते) नही.. यहा नही.. अब सब लोग सांतीसे बीना कोइ बात करे खाना खालो..

तब पुनम समज जाती हे.. की मंजु उनके ओर धिरेनके बारेमे सबको बताने वाली हे.. तो वो थोडी मायुस होजाती हे.. तभी लखनने देख लीया.. तो डाइनींगके नीचेसे ही पुनमका हाथ थाम लीया.. ओर आंखोसे तसली देने लगा.. तो पुनमके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर उसने लखनके हाथोमे उंगलीया फसाकर जोरोसे दबादी.. जैसे केह रही हो.. की तुम होतो मुजे क्या गम..

तो दुसरी ओर बहुत दुर मुम्बइमे डो. सुधीर अपना जेन्डर चेन्ज करवाने गया था.. आज उनको १० दिन होगये थे.. तो सुधीरके तनपे अब काफी बदलाव आ चुका था.. उनके नीतंबसे लेकर उनके स्तन.. बाल.. चहेरे.. मतलब उनकी पुरी बोडीमे बदलाव आना सुरु होगया था.. अबतो अ‍ेकदम जवान ओरत बन गया था.. ओर अ‍ेक दो दिनमे ही उनको होस्पीटलसे छुटी मीलने वाली थी..

तो दुसरी ओर नीर्मला भुमीका चंदा ओर सरला भी बसमे बैठ गये थे.. ओर वापस आ रहे थे.. तब बीच रास्ते अ‍ेक होटेलपे फ्रेस होने रुके थे.. सरला बसमे सो रही थी तो नीर्मला भुमीका ओर चंदा बाथरुमकी ओर जाने लगी.. अचानक भुमीकी तबीयत बीगड गइ.. उनको उल्टीया होने लगी.. तो नीर्मला उनको थोडी दुर लेगइ.. ओर उनकी मदद करते चंदाकी ओर देखते उनसे कुछ बाते करने लगी..

भुमीका : नीमु.. ये उल्ज्ञीको भी अभी होनाथा.. देख हमे चंदा देख रही हे.. अब क्या होगा..?

नीकर्ला : अब देखलीया हे तो देखने दे.. अ‍ेक दिनतो उसेभी पता चल ही जायेगा.. ये बात हम कबतक छुपायेगे..? मुजे चीन्ता चंदाकी नही हे.. हमारी सृतीकी हे.. चल जो भी हो आगे देखा जायेगा..

भुमीका : (मुस्कुराते) हां.. अब उसे भी पता चले तो चलने दे.. तुम मेरे साथ होतो क्या दिकत..?

उल्टीया हुइ तो चंदा उन दोनोको देखती रही.. फीर तीनो फ्रेस होकर चाइ पीकर बसमे आकर अपनी अपनी जगहपे बैठ गइ.. तो भुमीका ओर चंदा पास पास ही बैठे थे.. तब भुमीकाने अपनी बेगसे अ‍ेक टेबलेटकी स्ट्रीप नीकालकर उनमेसे अ‍ेक गोली खाली.. तो चंदा स्ट्रीप देखते ही चौंक गइ.. क्युकी अ‍ैसी ही स्ट्रीप उनके पास थी.. जो उनको सृतीने दीथी.. तब चंदाको भुमीकाके उपर कुछ आसंकाये होने लगी..

चंदा : दीदी.. आप ये गोली क्यु खा रही हे..? ये तो प्रेगनेन्सीमे उल्टीया होती हे.. तब लेनी होती हे..

भुमीका : (थोडा जेंपते) अरे.. वो.. वो.. कुछ नही उल्टीयाकी सब अ‍ेकही टेबलेट आती हे.. मुजे सृतीने दीथी.. कहाथा कीसीको उल्टीया जैसा लगे तो इनमेसे खा लेना.. तु चीन्ता मत कर.. कुछ नही होता..

कहेते भुमीकाने बातको टाल दीया.. ओर उनके चहेरेपे थोडी चीन्ताके भाव आगये.. ओर वो साइडमे नीर्मलाकी ओर देखने लगी.. तब नीर्मलाने उसे आंओके इसारोसे तसली दी.. ओर सोनेकी कोसीस करने लगी.. कल सुबह उनको वापस ट्रावेल्सकी ओफीसमे पहोचना था.. ओर उनकी बस वापस आनेके लीये नीकल पडी.. तब नाही चंदाको पता था ओर नाही भुमीकाको.. की कल सुबह उनके साथ क्या होने वाला था..
 
तो दुसरी ओर सबने खाना खालीया.. तो मंजुने सबको होलमे अ‍ेकठा कीया.. तो सब लोग उनकी ओर सवालीया नजरोसे देख रहे थे.. मंजुने पुनम ओर धिरेनके बीच जोभी कुछ जगडा हुआ उनके बारेमे सबको बता दीया.. ओर ये भी केह दीया की अब दोनोके बीच डीवोर्स हो चुका हे.. तब नीलम धीरेसे वहासे सरक गइ.. ओर उपर अपने कमरेमे चली गइ.. क्युकी इन सबमे कहीना कही वो भी जीम्वेवार थी..

तो देवायतके अलावा ओर कुछ ओर लोग थे.. जीनको इस बारेमे नही पता था.. तो ये सब सुनतेही सोक्ट होगये.. पुनम मंजुके पास ही बैठी थी.. उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. लेकीन मंजुने कीसीको इस डीवोर्सकी वजह नही बताइ.. क्युकी कहीना कही इस डीवोर्सकी साजीस खुद पुनमने ही रची थी.. फीर सब लोगोने सुबह चंदाके आनेतक इन्तजार करनेका फैसला लीया..

कीसीको इस फैसलेसे दुख नही हुआ.. क्युकी ज्यादातर लोग इस बदलावको जानते थे.. ओर जो नही जानते थे उनमे सीर्फ रमा थी.. फीर कुछ देर बाते करके सब लोग सोनेके लीये जाने लगे.. पुनमके साथ सृती ओर लता चली गइ.. तो रमा नीलम उपर साथ सोने चली गइ.. आज मंजु ओर भावना दुसरे कमरेमे सोने चली गइ.. क्युकी आज देवायत ओर दयाकी सुहागरात थी.. तो मंजु दोनो अकेले सोने देना चाहती थी..

लता पुनम ओर सृती अ‍ेक ही बेडपे लेटी हुइ थी.. लता ओर पुनम आपसमे बाते कर रही थी.. तो सृती आज मंजुसे हुइ बाते याद करते सोचमे डुबी हइ थी.. आज उसने अपनी मम्मीका ओर अपने ससुरका राज जान लीया.. तबसे सृती अपने आपको रोमांचीत फील कर रही थी.. लेकीन जबसे उनकी डोक्टर फ्रेन्डसे बात हुइ तबसे उसे अपनी मम्मीकी चीन्ता होने लगी थी.. ओर अपना फोन देखते मनमे सोच रही थी..

सृती : (फोन देखते मनमे) इस कमीनीने अभी तक फोटो भी नही भेजा.. कही भुलतो नही गइ..? अब रातमे उनसे कैसे बात करु..? सुबह ही बात करते मंगवा लुगी.. क्या वो सचमे मेरी मम्मी ही होगी..? नही नही.. मम्मी नही कोइ ओर होगी.. क्युकी अब तो हमारे ससुरभी नही हे.. तो फीर वो कीनसे प्रेगनेन्ट होगी..? ओह.. गोड.. क्या मुसीबत हे ये..

अगर सचमे वो मम्मीकी तसवीर होगी तो..? तो फीर मे क्या करुगी..? क्या मम्मीका कीसी ओरके साथ अफैर होगा..? लेकीन कीसके साथ..? अ‍ैसा तो कोइ हेभी नही.. जीसे मे जानती हु.. तो फीर कौन होगा..? दे..वु.. नही नही.. ये नही हो सकता.. वो तो उनका दामाद हे.. कल वो आयेगी तो देखुगी.. अगर सचमे मेरी मम्मी होगी तो उनके सरीरमे कुछ तो बदलाव होगा..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. कबसे क्या सोच रही हे.. हमसे बाते कीजीयेनां..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. पुनोदीदीने मुजे सब बताया.. अब तो आप भी हमारी बहेन हो.. सुनो.. येलो.. आप ये सुनो.. पुनोदीदीने उनका ओर धिरेनके बीच जो जगडा हुआ हे.. उसे रेकोर्ड कीया हे.. आप भी सुनालो..

सृती : (मुस्कुराते) अरे यार सुनलीया हे मेने.. लखन भैयाने ही क्लीप भेजीथी मुजे..

तीनो बाते कर रही थी तब लखन अपने दोस्तोके पास चला गया था.. वहा उनको साहील मीला तो उसने उनके चाचा फीरोज.. चाची जरीना.. ओर खास करके उनकी बहेन सबानाका हाल जान लीया.. तो बातो ही बातोमे साहीलने बता दियाकी उनके चाचा चाची यहा आनेके लीये राजी होगये हे.. ओर उन्होने अपने बडे बेटे कादीर ओर बडी बहेन सायराके नीकाहको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. उनका मकान भी उनको देने राजी हो गये हे.. बस.. अब सबाना दीदीकी बेंगलोर जानेकी देरी हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. ये तो तुमने अच्छी खबर सुनाइ.. भाभी केह रही थी सबाना बहुत होसीयार हे.. तो वो बहुत जल्द बेंगलोर जाने वाली हे.. वो सृती भाभीके संपर्कमे ही हे.. तु फीकर मत कर..

साहील : (सरमाते) भाइ.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? उनका तीन चार बार फोन भी आगया हे.. कहेती हे.. जब मे बेंगलोर जाउ तब उनको ट्रेनमे छोडनेके लीये मे भी वहा जाउ.. वरना वो नही जायेगी.. ओर जानेसे पहेले वो अ‍ेक बार मुजे अकेलेमे मीलना चाहती हे..

लखन : (खुस होकर हसते) कमीने.. तो फीर जाकर मीलले उसे.. ओर इनका मतलब भी जानता हे..? साहील.. मुजे लगता हे वो तुजे प्यार करने लगी हे.. मेरी मान तु चलेजा.. ओर मे भी तो वहा हु.. हम दोनो जायेगे.. बस..?

साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. प्यारतो मे भी करता हु.. लेकीन अपने दिलकी बात कहेनेकी हिंमत नही होती.. वो अ‍ेक डोक्टर ओर मे कहा अ‍ेक अनपढ गांवका कीशान.. वो मेरे प्यारको कभी अ‍ेक्सेप्ट नही करेगी.. ओर मेरी बहेन भी हे.. अ‍ेक तो कादीर भाइ ओर सायरा दीदीने चाचाको धोखा दीया हे.. तो ना उनकी हींमत होगी ओर नाही मेरी..

लखन : (हसते) अरे मे साथ हुनां.. तु क्यु गभराता हे..? सुन.. अभी जो घरपे भाभी हे उनका क्या हुआ..? तु सृती भाभीको दीखाने जाता हेकी नही..? कोइ दिकत तो नही..?

साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) नही भाइ अ‍ेक बार दिखने गया था.. सब नोर्मल हे.. भाइ.. जब चाचा ओर चाची इधर आयेगे तब इनकी भी टेन्शन हे.. क्युकी ये बात हम कब तक छीपाके रखेगे..

लखन : (मुस्कुराते) यार तु उनकी टेन्शन मतले.. मे बडे भैयासे बात करलुगा.. वो तेरे चाचा चाचीको समजा देगे.. साहील.. मे तुजे भी अ‍ेक बात कहेना चाहता हु..

साहील : (मुस्कुराते) हां भाइ बोल..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. पुनोदीदीका डीवोर्स हो गया हे.. उनका धिरेनके साथ जगडा हुआ था..

साहील : (आस्चर्यसे) कीस बातका जगडा..? भाइ.. सीर्फ जगडेकी वजहसे कोइ डीवोर्स देता हे क्या..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) यार.. तुजे कैसे समजाउ..? सुन.. धिरेनमे कुछ गडबड हे.. दोनोकी सेक्स लाइफ अच्छी नही थी.. तो पुनोदीको ये डीसीजन लेना पडा..

साहील : (कातील मुस्कानसे धीरेसे) भाइ.. तो अब..? आपकी लाइन तो क्लीलीयर होगइ.. क्या सोचा हे आपने..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) सुन यार.. पुनोदीने मेरा प्यार अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. सायद मे उनसे सादी भी करलु..

साहील : (खुस होते ताली बजाते) ग्रेट यार.. क्या मस्त खबर सुनाइ हे तुमने..

दोनो बात करते थे तब बंसी ओर मुना भी आगया.. फीर सब लोग श्रीधरके घरपे चले गये.. ओर कलकी तैयारीया देखने लगे.. अ‍ैसेही देर रात होगइ तो सबलोग अपने अपने घरकी ओर सोनेके लीये चले गये.. लखन भी हवेलीपे आगया.. तो पुरी हवेलीपे अंधेरा था.. लखन उपर चला गया तो वहा उनको लता नही मीली.. तो बाजुके रुममे खीडकीसे देखने गया..
 
तो वहा नीलम ओर रमा.. नंगी होकर अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट करनेके लगी हुइ थी.. लखन लताको ढुंढने नीचे आया.. ओर पुनमके रुममे हल्कासा धका मारा.. तो दरवाजा खुल गया.. तो वहा पुनम लता ओर सृती लेटे बाते कर रही थी.. जैसे ही दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ तो पुनम सृती देखने लगी.. तो लखन वहा अंदर देख रहा था.. तो पुनमने उसे धीरेसे आवाज देकर अंदर बुला लीया..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया.. अंदर आजाये.. बैठीये इधर.. आज लता दीदी इधर ही सोयेगी..

लखन : (अंदर आते) ओह.. सोरी.. मे बस यही देखने आया था.. आप लोग सोजाइअ‍े.. मे उपर रुममे जाके सोजाता हु..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) सोरी जानु.. आज पुनोदीदी ओर सृती भाभी हे तो इन्होने मुजे यही बुला लीया.. (लखनकी मस्तीया करते जोरोसे हसते) हां फीर भी आपको अकेला लगे.. तो उपर रमा भाभी हे आपको कंपनी देनेके लीये.. हें..हें..हें.. (तीनो जोरोसे हसने लगी तब)

लखन : (जुठा गुस्सा करते) कोइ जरुरत नही मुजे.. तुम अपना काम करो चुपचाप.. चलो मे चलता हु..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. आओना.. थोडी देर इधर हमारे पास बैठोना.. मुजे आपसे कुछ बात कहेनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. पता हे मुजे आपको क्या बात करनी हे.. हम सुबह बात करेगे.. मुजे नींद आ रही हे.. ओर सुबह आंटी ओर भाभीको लेने भी जाना हे.. तो आप लोग बात करे.. चलो गुड नाइट..

पुनम : (लखन जातेही लताको धीरेसे) कमीनी क्यु मेरे भाइको तडपा रही हे..? अ‍ेक बार सीधा सीधा बोलदेना.. की अब बडे भैयासे ठुकवाकर ही तुमसे मीलुगी..

सृती : (हसते धीरेसे) कमीनी सब हमारे पतीके पीछे ही क्यु पडी हे..? अब तो लखन भैयाको भी जडी बुटी दीहे.. देखती नही इनका कीतना बडा हो गया हे..

लता : (थोठी परेसान होते धीरेसे) अरे यार प्यार करतीहु उनसे.. तबसे जब मे इन सब चीजोको समजने लगी थी.. लेकीन भाइकी इतनी सादीया होगइ.. ओर उपरसे हम दोनोकी उमरम. भी काफी फर्क हे.. तो अपने दिलकी बात कहेनेकी हिंमत ही नही हु.. वरना आपसे पहेले ही मेरी सादी भाइके साथ होजाती..

सृती : (मुस्कुराते) सोरी यार.. मे तो सीर्फ मजाक कर रही थी..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) नही दीदी.. लताका बडे भैयासे मीलना जरुरी हे.. अभी इनका सही समय भी चल रहा हे.. तो वो आसानीसे प्रेगनेन्ट हो सकती हे.. बाकी आपकोतो मंजुदी लता ओर मेरे बारेमे पता ही हे..

सृती : (मुस्कुराते) हां यार.. मेरा तो ये सब प्रोफेशन हे.. मुजे भी आपलोगोसे नया सीखनेको मीला.. की अ‍ैसी योनी वाली लडकी मां नही बन सकती..

लखन दरवाजा बंध करके चला गया तो सृती बहुत नीरास होगइ थी.. जब लखन आया तो उनको अ‍ेक आसा जगी.. की चलो बातो बातोमे वो लखनसे बात करते उसे मना लेगी.. पुनमने भी पहेल की फीर भी लखन चला गया.. तो सृतीको बहुत बुरा लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. लेकीन हल्की रोसनीमे कसीको दीखाइ नही दीया.. ओर लखन उपरकी ओर जा ही रहा था.. तभी मनमे..

लखन : (मनमे) साला के.अ‍ेल.पी.डी. हो गया.. वैसे भी लताका पीरीयड चल रहा हे.. तो वो थीडीना करने देगी.. ओर रजीयाका भी यही हाल हे.. वो यहा हेभी नही.. ओर उपर वो मां बेटी भी साथ हे.. अब क्या करु..? भाइके तो कीतने मजे हे.. आज वो भी दया बहेनके साथ अपनी सुहागरात मनाते होगे..

ओर अभी चोदनेकी इच्छा भी हो रही हे.. (अचानक मनमे खुस होते) अरे हां.. आज चंपाभाभी अकेली होगी.. क्युना उनके रुममे चला जाउ..? वैसे भी वो चुदवानेकी सौकीन हे.. देखा नही उस दिन उनको पता था.. फीर भी मुजसे चुदवा लीया.. चलो कोइ नही तो आज चंपा भाभी ही सही..

सोचते ही सलखन खुस होते धीरेसे दबे पांव चंपा भाभीकी रुमकी ओर चला गया.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका मारते अंदर घुस गया तो वहा चंपा भाभी कामकी थकानकी वजहसे खरराटा मारते सो रही थी.. ओर लखन दरवाजा लोकर करते उनके पास चला गया.. ओर अपने कपडे नीकालकर नंगा ही आहीस्तासे चंपा भाभीकी बगलमे जाकर कंबल उठाकर घुसके लेट गया.. तभी..
 
चंपा : (हडबडाते जटसे करवट लेते) कौन..? कौन हे..?

लखन : (मुहपे हाथ रखते धीरेसे) भाभी.. मे हु.. लखन.. जोरोसे मत बोलो..

चंपा : (हाथ हटाते धीरेसे) अरे देवरजी आप..? इस वक्त..? लेकीन यहा तो आपकी बीवी नही हे..

लखन : (धीरेसे बुब्सपे हाथ रखते) भाभी.. जानता हु.. उस वक्त मे गलतीसे आगया था.. लेकीन आज जान बुजकर आया हु.. आपसे मीलने.. उस दिन आप बहुत अच्छी लगी.. आपने क्या खुब मजा दीया.. मे तो आपका दिवाना होगया हु.. तो आगया..

चंपा : (धीरेसे मुस्कुराते) आप बहुत बदमास हो.. अगर कीसीने देखलीया नां.. मे तो बदनाम होजाउगी.. ना बाबा ना.. उस दिन आपने मेरी हालत खराब करदी थी..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) भाभी.. कुछ नही होगा.. आप तो जानती हे.. अब हमे सबके साथ सेक्स करनेकी छुट मील गइ हे.. बस.. जो होगा अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे होगा.. तो काहेकी बदनामी..?

चंपा : (मुस्कुराते) हां.. बात तो आपकी सही हे.. मेने भी सुना हे.. दया बता रही थी.. लेकीन उस दिन आपका देखा.. बाबा कीतना बडा हे.. दो दिन लगे.. तब जाके ठीक हुइ हु.. आज कुछ नही..

लखन : (पैर डालकर उपर चडते) भाभी.. उस दिन पहेली बार थाना.. तो तकलीफ हुइ.. लेकीन इस बार देखना आपको कोइ तकलीफ नही होगी.. रजुको भी तकलीफ नही होती.. मुजसे कैसे मजेसे चुदवाती हे.. अब तो मेरे बगैर रेह भी नही सकती..

चंपा : (बाहोमे कसते) अगर मुजे भी आपका चस्का लग गया तो..? तो फीर मे कहा जाउगी..?

लखन : (मुस्कुराते गाल चुमते) अरे मेरी भोली भाभी.. बडे भैयातो हे यहा.. या फीर मेरे पास चली आना.. कहेना रजुको मीलने जा रही हु.. या फीर मे इधर आजाउगा.. दोनो खुब मजे करेगे.. ओर वैसे भी आप अकेली हो.. तो आपका खयाल रखनेके लीये हम दोनो भाइ हेना..

चंपा : (सरमाकर हसते धीरेसे) ठीक हे.. लेकीन देखना.. अब जब भी यहा आओ.. कमसे कम अ‍ेक बार मीलने आओगे.. केह देती हु.. अब जो भी करना हे करलो.. देखना मुजे सुबह जल्दी उठना भी हे.. कल तो बहुत काम हे.. तो बाबा मुने काम करनेके लायक छोडना.. चलो.. सुरु होजाओ.. कीतने दिनोसे प्यासी हु.. अब तो बडे देवरके पास भी मुजे मीलनेका टाइम नही हे..

तो चुमा चाटी ओर बुब्सके साथ खेलते लखनने चंपाभाभीको गरम करदीया.. ओर वो मादक सीसकारीया करते लखनको चोदनेके लीये मनत करने लगी.. तब जाके धीरे धीरे करते लखनने पुरा लंड चंपाभाभीकी चुतमे घुसा दीया.. तब चंपा भाभी हवामे उडने लगी.. तब कुछ ही देरके बाद दोनो घमासान चुदाइ करते हवामे गोते लगाने लगे.. लखन चंपाभाभीकी जमकर चुदाइ करने लगा..

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तो दुसरी ओर आज देवायत ओर दयाकी भी सुहागरात थी.. आज दया घुंघटमे बेडके बीच बैठी थी.. मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र दयाके चहेरेपे चार चांद लगा रहे थे.. जीसे देवायत आते ही दयाको देखकर पागल जैसा होने लगा.. उनके मनमे पुनम धिरेनको लेकर जो दुख था.. वो दयाको देखते ही अ‍ेक पलमे दुर हो गया.. ओर वो सबकुछ भुलकर दयाको बेडपे लीटाते प्यार करने लगा..

कुछ ही देरमे दोनो फोर प्लेय खेलते नंगे होगये.. दया भी बहुत उतेजीत होगइ थी.. ओर आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोसीमे देवायतके बाल खीचते अपने उपर खीचने लगी.. देवायत उनके उपर चडकर छा गया.. ओर दयाके बुबस्को मुहमे लेकर चुसने लगा.. तभी दयाने हाथ नीचे लेजाते देवायतका लंड मुठीमे पकड लीया.. ओर अपनी चुतपे घीसने लगी..

जब लंड गीला होगया.. तो दयाने लंडके टोपेको अपनी चुतमे फसा लीया ओर देवायतके होठोको चुमते उनको कसके बाहोमे भीच लीया.. तो देवायतने भी देर ना करते अपनी कमरको अ‍ेक जटका दीया तो देवायतका आधा लंड दयाकी चुतमे घुस गया.. ओर दया हल्कासा चीखते देवायतको जोरोसे बाहोमे कस लेती हे.. तभी देवायतने अ‍ेक ओर जटका मारा ओर पुरा लंड दयाकी चुतमे उतार दीया..

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तो दयाकी आंखसे आंसु नीकल गये.. वो फीर भी कामुक्तासे देवायतकी ओर देखती रही.. ओर अपनी कमरको जटके मारते देवायतको चोदनेके लीये उक्साने लगी.. फीर क्या..? देवायत हाथके बल उचा हो गया.. तो दयाने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडकर देवायतके हाथोमे फसा लीया.. देवायत लंबे लंबे सोट मारते दयाको चोदने लगा.. तो दयाका मुह खुला ही रेह गया.. ओर वो मजेसे चुदवाने लगी..

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अबतक दया दो बार जड चुकी थी.. ओर तीसरी बार जडनेके लीये रेडी थी.. तभी देवायत कांपने लगा.. जैसे वो सातवे आसमानको छुने लगा.. दयासे चीपकते पुरा लंड दयाकी चुतमे घुसा दीया.. ओर कमरको जटके देते दयाकी बच्चेदानीपे विर्यकी बौछार करते भीगोने लगा.. तो दया आंखोकी पुतलीया पलटते जैसे स्वर्गमे पहोंच गइ.. ओर देवायतसे चीपकते कांपते हुअ‍े जडने लगी..

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देवायतका पुरा लंड भीगो दीया.. तब दोनो ही परम आनंदकी अनुभुती करने लगे.. फीर देवायत दयाके सीनेपे सर रखते उनके बुब्सको चुमने लगा.. दया देवायतके सरको सहेला रही थी.. दयाकी पुरी चुत देवायतके पानीसे लबालब भरी हुइ थी.. दयाको पता नही था.. की उनको गर्भवती करनेके लीये बच्चेदानीमे जानेके लीये देवायतके स्पमकी होड लगी हुइ हे.. दोनो आनंद मय होते इस पलको अ‍ेन्जोय कर रहे थे..

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तो इधर लखनने अब तक चंपा भाभीको चोद चोदके दो बार जडा दीया था.. चंपा भाभी बहुत थक गइ थी.. क्युकी लखन उनको काफी देरसे चोद रहा था ओर अभीभी उनका चोदना जारी था.. जब चंपा भाभी जड जाती तो उनका जोस ठंडा होजाता.. लेकीन लखनके लगातार चोदनेसे कुछ देरके बाद वो फीरसे उतेजीत होजाती ओर लखनका साथ देने लगती.. अ‍ेक बार फीर वो जोसके साथ लखनसे चुदवा रही थी..
 
चंपा : (कामुक नजरोसे) देवरजी.. ओर कीतनी देर चोदते रहोगे.. मे तो दो दो बार जड चुकी हु.. फीर भी आप जडनेका नाम ही नही ले रहे.. आज तो थका दीया मुजे.. थोडा जल्दी करोनां..

लखन : (जोरोसे चोदते) बस.. बस भाभी होगया.. अभी थोडी देर ओर.. आपको चोदनेमे बहुत मजा आता हे.. आह.. आह.. आह.. आइ... भा..भीइइइइइ.. मे गया.. आइइइइ...

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कहेते लखन जटके मारते अपना पुरा लंड चंपाभाभीकी चुतमे घुसा देता हे.. तो लंड चंपाभाभीकी बच्चेदानीसे टकरा गया.. तो चंपा भाभीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उसे बच्चेदानीपे गरम महेसुस हुआ.. तो वो उतेजनासे कांपने लगी.. ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते अपनी कमरको जटके देते लखनके साथ ही जडने लगी.. फीर कुछ ही देरमे लखन चंपाभाभीके सीनेपे सर रखते ढेर होगया..

तो चंपाभाभी अपनी सांस दुरस्त करते लखनकी पीठको सहेलाने लगी.. फीर भी लखन चुतमे लंड डालके पडा रहा.. चंपाभाभीने उसे अपने उपरसे हटानेकी कोसीसकी लेकीन लखन नही माना.. तो चंपाभाभी हसने लगी.. ओर चुदवानेके लीये फीरसे तैयार होगइ.. इस बार लखनने चंपा भाभीको अपनी गोदमे बीठाकर चोद लीया.. ओर चंपाभाभीकी चुतको अ‍ेक बार फीर अपने पानीसे सीचते हरी भरी करदी..

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फीर लखन अपने रुममे जाकर सो गया.. तो दुसरी ओर देवायत दयाको फीरसे चोदने लगा.. दया फीरसे उतेजीत होने लगी.. उनको देवायतकी स्टेमीनाका पता था.. आज दया अपनी सुहागरातको यादगार बनाना चाहती थी.. उसने देवायतसे पुरी रात चुदवानेका मन बनालीया था.. तो इस बार भी दो दो बार जडके दोनो साथमे जड गये.. दयाने अपने दोनो पैर देवायतके कंधेपे रख दीया..

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ताकी वो देवायतसे गर्भवती होजाये.. इस रात देवायत दयाको अलग अलग पोजीसनमे चोदता रहा.. कभी घोडी बनाकर पीछेसे चोदता तो कभी दयाको अपने उपर चडाके सवारी करवाता.. दोनो सुबह चार बजे तब अलग अलग पोजीसनमे चुदाइ करते रहे.. दयाका अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहा था.. पुरी रातमे देवायतने दयाकी चुतको अपने पानीसे पांच बार सीच दीया था.. फीर दोनो बाथरुममे जाकर नहाते हे.. ओर बहार आकर दोनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकते सो जाते हे..

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आज सुबह श्रीधरके घरपे सबलोग जल्दीसे उठ गये.. क्युकी पंडीतने सुबहका मुहुर्त थोडी जल्दीमे नीकाला था.. तो आज जीतुलाल ओर वुन्दा बहुत खुस थे.. आखीर वो दिन आही गया.. जो दोनो आजाद पंछी बनकर उडने वाले थे.. तब उनको पता नही थाकी ब्रीन्दाने क्या तैयारीया करली थी.. अ‍ेक तो वो जीतुलालके साथ पुजामे बैठना नही चाहती थी.. ओर उपरसे वो अपने बेटे श्रीधरकी बीवी थी..

तो वो कैसे पुजामे बैठ सकती हे..? वही सब सोचकर उसने अगले ही दिन अपनी खास सहेली बसंती ओर उनके पती वीभुको पुजामे बैठनेके लीये तैयार करलीया था.. तो सुबह सुबह ही उनके घरपे मुना बरखाके साथ ब्रीन्दाकी खास सहेली बसंती ओर विभु भी तैयार होकर आगये.. श्रीधर ओर जयश्रीका अलग अलग मंडप लगा हुआ था.. तभी जयश्रीके साथ जवेरीलाल ओर वृन्दा बैठ गये..

श्रीधरके लीये पुजामे बैठनेके लीये ब्रीन्दाने जीतुलालके साथ बैठनेके लीये मना करदीया.. तो जीतुलाल तीलमीलाते गुस्सा करने लगा.. तभी ब्रीन्दाने जीतुलालकी ओर कातील स्माइल करते श्रीधरके पास बसंती ओर उनके पती विभुको बीठा दीया.. तो जीतुलाल उन दोनोको देखकर सन्न रेह गया.. ओर वहासे उठकर जवेरीलाल ओर वृन्दाके पास जाकर बैठ गया.. तो वृन्दा उनको अपने पास बैठे देखकर बहुत खुस होगइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३०

श्रीधरके लीये पुजामे बैठनेके लीये ब्रीन्दाने जीतुलालके साथ बैठनेके लीये मना करदीया.. तो जीतुलाल तीलमीलाते गुस्सा करने लगा.. तभी ब्रीन्दाने जीतुलालकी ओर कातील स्माइल करते श्रीधरके पास बसंती ओर उनके पती विभुको बीठा दीया.. तो जीतुलाल उन दोनोको देखकर सन्न रेह गया.. ओर वहासे उठकर जवेरीलाल ओर वृन्दाके पास जाकर बैठ गया.. तो वृन्दा उनको अपने पास बैठे देखकर बहुत खुस होगइ.... अब आगे

तो दुसरी ओर हवेलीपे सबलोग सुबह थोडी देरसे जगे.. तब मंजु जागते ही अपने रुममे चली गइ.. तब दया नंगी ही देवायतसे चीपककर उनके बाजुओको तकीया बनाकर सो रही थी.. मंजु दोनोको देखकर हसने लगी.. ओर उसने दरवाजा बंध करदीया ओर दोनोके पास आकर जगाने लगी.. तब दया अपनी हालत देखकर गभराते हुअ‍े जटसे बैठ गइ.. ओर सर्मसार होते अपनी सारीसे अपने तनको ढकने लगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया बहेन.. रहेने दीजीये.. यहा तो सब कमीनी सुबह सुबह अ‍ैसी हालतमे ही मीलेगी.. कहो.. कैसी रही दोनोकी सुहागरात..? आपको नीचे कोइ तकलीफ तो नही हुइ..?

दया : (सरमाते नामे गरदन हीलाते) नही दीदी.. बहुत अच्छी रही.. दीदी.. थेन्क्स.. आपने मेरा सपना पुरा कर दीया.. आपका ओर पुनम दीदीका बहुत बहुत सुक्रीया..

मंजुला : (पास बैठपे प्यारसे सरको सहेलाते) दया बहेन.. कैसी बाते कर रही हे..? अपनोका सुक्रिया अदा नही करते.. आप तो हमारी अपनी बहेन हे.. हम सबसे बडी.. ओर आपका सपना तो तब पुरा होगा जब आप नौ महिनेके बाद हमे अ‍ेक फुल जैसी बच्ची देगी.. हें..हें..हें..

दया : (खुसीके मारे मंजुके गले लगते) दीदी.. आपको ओर पुनोदीदीको तो सब पता चल जाता हे.. आज मे बहुत खुस हु.. आपने अ‍ेक नोकरानीको इतना बडा दर्जा दिया.. मेरे पास बोलनेके लीये सब्द नही हे..

मंजुला : (सरको सहेलाते) नही दयाबहेन.. आप ओर रजीया कभी हमारी नौकरानी थी ही नही.. बस.. सीर्फ कुछ समयका इन्तजार था.. जो आगया.. अब आपको यही रहेना हे.. चलीये नहा लीजीये.. सबलोग आजाये तो वहा साहुकारके यहा सादीमे भी जाना हे.. मे लखनको जगाके आती हु.. आप हमारे पतीको भी जगा दीजीये..

दया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? चलो मे तो आपकी बहेन हु.. हमारे बापुकी सुतान.. तो फीर रजुदीदी..? उसने भी लखन भैयासे सादी करली हे.. तो क्या वो भी..

मंजुला : (पास सटकर बैठते धीरेसे) दीदी.. आज तक कीसीने उनके बारेमे पुछा नही.. लेकन आज आपको बताती हु.. याद रखना ये बात रजु दीदीको पता नही लगनी चाहीये.. जीस तराह वो हमारे घरपे काम कर रहीथी उसी तराह अ‍ेक जमानेमे उनकी मां भी यहा काम करती थी.. जो अ‍ेक विधवा थी.. आप समज गइनां..?

दया : (मुस्कुराते) जी दीदी.. सबकुछ समज गइ.. मुजे ओर कुछ नही जानना.. बस.. इतना सुनकर ही खुस हुकी वो भी हमारी बहेन हे..

मंजुला : (मुस्कुराते खडी होते जाते) दीदी.. कुछ राज राज ही रहेने देना चाहीये.. हें..हें..हें..

कहेते मंजु उपरके रुममे चली गइ.. तो रमा ओर नीलमके रुममे नजर डालती हे.. तो वो मां बेटी भी नंगी अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सोइ हुइ थी.. तो मंजु मुस्कुराते लखनके कमरेमे चली गइ.. तो लखन घोडे बेचकर सो रहा था.. ओर उनके लोअरमे अब भी बहुत बडा तंबु दीख रहा था.. तब मंजु उनके पास बेडपे बैठ गइ.. ओर थोडी देर उस तंबुकी ओर देखती रही.. फीर मुस्कुराते लखनके सरको सहेलाते उसे जगाती हे..

लखन : (जटसे बैठते) अरे भाभीमां आप..? मुजे आवाज लगाती.. मे आजाता..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. मे मेरे राजा बेटेको देखने ओर उनसे कुछ बाते करने आइ थी.. क्युकी तेरे पास तो इस मांके साथ बैठकर बाते करनेका टाइम ही नही हे.. तो मुजे आना पडा..

लखन : (बैठेही हग करते) नही मोम.. बस आप हुकुम कीजीये आपका बेटा हाजीर होजायेगा.. कहीये क्या बात करनी थी..? कुछ खास बात थी क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) हां बेटा.. वो भी सीर्फ तुमसे बात करनी थी.. इसीलीये तो मे यहा आइ हु.. सुन.. अब मे चाहती हु तुम तेरी सभी जीम्वेवारी अच्छी तराह सम्हाल लो..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. मेने हमारे बीजनेसका काम भी सुरु करदीया हे.. ओर सुरुआत भी अच्छी हुइ.. हमारे पार्टनर भी बहुत अच्छे हे.. तो कोइ प्रोबलेम नही हे.. फीर भी मे सब देख रहा हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) गुड.. बेटे मे सीर्फ बीजनेसकी बात करने नही आइ.. वोतो तुम अच्छेसे सम्हालने लगे हो.. हमे सब दीख रहा हे.. मुजे कुछ ओर बात भी करनी हे.. सुन.. क्या सृतीके साथ कुछ अनबन हुइ हेनां..?

लखन : (सर जुकाते धीरेसे) जी भाभीमां.. आपको ओर पुनोदीदीको सब पता हे क्या हुआ था.. इसमे मेरी कोइ गलती नही थी.. मेने उनको बहुत मना कीया था.. पर वो नही मानी.. ओर मुजे खरी खोटी सुननी पडी..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. जानती हु मे.. की तेरी कोइ गलती नही थी.. सुन.. तुम हम ओरतोको कभी समज नही पाओगे.. इसीलीये तुजे थोडा समजाने आइ हु.. वो तो यहासे जाते वक्त ही तुमसे रीलेशन बनानेका मन बनाकर गइ थी.. बस.. तेरी ज्यादा सरीफाइ ओर अच्छाइसे बात नही बनी.. क्युकी तुम दोनोके बीच देवर भाभीका रीस्ता आडे आ रहा था.. तुम इतना भी सरीफ मत बनो.. कमसे कम इस घरकी ओरतोके सामने तो कभी नही.. समज गया..?

लखन : (आस्चर्यसे सामने देखते) भाभीमां.. मे कुछ समजा नही.. आप खुलकर बताओनां.. क्युकी मुजे दिलके अ‍ेक कोनेमे अब भी लगता हे मे बडे भैयाको चीट कर रहा हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. कोइ चीट नही हे.. वो भीतो यही करेगे.. अब तुजे कैसे समजाउ..? क्या जमाना आ गया हे.. अब मुजे अपने बेटेको ही थोडा बदमास बननेका ज्ञान देना पड रहा हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) मोम.. अब ये सब आप नही कहोगी तो कौन कहेगा..? बताइअ‍ेनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे बेटा.. सुन.. ओरत चाहे कीतनी ही कामी क्युना हो.. वो पहेल कभी नही करेगी.. हर ओरत हमेसा चाहती हेकी पहेल हमेसा पुरुष ही करे.. ओर हमारे घरकी तो सभी ओरते कामी हे.. वो क्यु..? ये तुजे भी पता हे.. इस बारेमे तुजे बतानेकी जरुरत नही हे.. तो तुम कीसको भी मीलनेमे संकोच मत करो की वो क्या सोचेगी.. रीस्तेमे क्या हे.. बस.. तुजे अपना कर्तव्य नीभाना हे..
 
लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभीमां.. ये आपने मुजे कैसी जीम्वेवारी देदी..? मे कीस कीसको नाराज करुगा..? कल पुनो नाराज हुइ थी तो अब सृती भाभी.. ओर यहा तो ज्यादातर मेरी भाभीया ही हे.. बस.. यही बातसे डरता हु.. ओर कुछ नही..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानती हु.. इसीलीये तो तुमसे बात करने आइ हु.. बीटु.. तुम डरो मत.. दुसरे लोगोकी बात अलग हे.. ओर हमारे घरकी बात अलग हे.. हम सब कोइ सामान्य मानवी नही हे.. हम अ‍ेक खास मक्सदसे यहा जन्म लेकर आये हे.. अगर तुम संकोच करोगे तो कैसे चलेगा..? हमारा वंस आगे कैसे बढेगा..? क्युकी अब तुम्हारे बडे भैयाके पास सबके लीये टाइम ही नही हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. वंस आगे बढानेके लीये हमारा विजय तो हे.. तो फीर क्यु चीन्ता करती हो..?

मंजुला : (सामने देखते धीरेसे) सुन.. वो अभी छोटा हे.. आगे तो तुजे बहुत कुछ करना हे.. मानाकी वंस आगे बढानेके लीये मेरा विजय हे.. लेकीन वो तभी वंस आगे बढा पायेगा जब उनकी भी बीवीया होगी.. तो तुम उनकी बीवीया कहासे लाओगे..? मत भुलो.. वो भी इस खानदानका खुन हे..

जो उसे अ‍ेक बीवी नही सम्हाल पायेगी.. ओर तुम तो जानते हो हम बहारकी लडकीओसे सादी नही करते.. इसके लीये भी आप दोनो भाइका ही अंस चाहीये.. यानी मेरे विजयकी बहेने.. जैसे अभी आप दोनो भाइकी बीवीया आपकी सभी बहेने हे.. समज गया..?

लखन : (मुस्कुराते) मोमो.. मानाकी ज्यादातर हमारी बहेने ही हे.. लेकीन रजीया..? वो कहा हमारी बहेन हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते धीरेसे) बीटु.. कुछ राज राज ही रहेने दे.. फीकर मत कर वो भी तेरी ही कहेन हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते धीरेसे) क्या..? वो भी हमारी बहेन हे..? भाभीमां.. समज गया.. मतलब अभी जो करना हे.. हमे हमारे विजयके लीये करना हे.. यहीनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सही समजा.. सुन.. हमारी सभी ओरोतोको तुम दोनो भाइको ही सम्हालना हे.. ओर खास करके चंदा दीदीको.. सृतीको.. वंदनाको.. बस.. मेरे अलावा सबको.. क्या सम्हाल पायेगा..?

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? चंदा भाभीको भी..? भाभीमां.. मगर वो तो.. उनसे बात करनेमे भी डर लगता हे.. भाइ भी तो हे.. इनको भाइको ही सम्हालने दीजीयेनां.. मुजसे नही होगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) क्यु..? चंदाभाभीसे डर गया क्या..? सुन.. आज तुजे अ‍ेक राजकी बात बताती हु.. मेरे जातेही तेरे भाइकी शक्तिया धीरे धीरे करते खतम होजायेगी.. तब इस घरकी ओरते कहा जायेगी..? बेटा.. मेने जो भी नीर्णय लीया हे कुछ सोच समजकर ही लीया हे..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. फीर भी वो मुजसे बहुत बडी हे.. इसके लीये वो कभी तैयार नही होगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. तुम हम ओरतोको जानते नही.. ओर सबसे कामी ओर तो तेरी वो ही भाभी हे.. अगर उनको सेक्स करनेको नही मीला तो वो पागल होजायेगी.. सबपे गुस्सा करने लगेगी.. उनका स्वभाव चीडचीडा होजायेगा.. तब तुम समज लेना उनको क्या चाहीये.. तब तुजे ही उनको सम्हाल पडेगा.. फीर देख वो कैसे तेरी दिवानी हो जाती हे..

लखन : (सरमाकर हसते धीरेसे) ठीक हे मोम.. देखता हु मुजसे क्या होता हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) बस.. मेरे विजयके बडे होने तक तुम सबकुछ सम्हाल ले.. फीर तो मेरा विजय ही सब सम्हाल लेगा.. फीर तुम आजाद..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. अभी तो वो बहुत छोटा हे.. क्या वो भी यही सब करेगा..? हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां बेटा.. लेकीन ये सब अ‍ैयासीके लीये नही हे.. यही विजयसे हमे हमारे उस स्वामीको इस दुनीयामे लाना हे.. जो कभी उस जमानेमे तुम अपना बडा भाइ मानते थे.. बस.. इसके आगे मे तुजे कुछ नही बता सकती.. बेटा.. मुजे ओर कीसीकी नही.. बस.. सृती ओर चंदादीदीकी चीन्ता हे.. जो उसे सीर्फ तुजे ही सम्हालना हे.. बाकी सृती तुम्हारे साथ कैसा भी व्यवहार करे.. उसे मत छोडना..

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभीमां.. समज गया.. लेकीन ये चंदा भाभी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां बीटु.. हमारी पुनो ओर धिरेनके डीवोर्सकी वजहसे वो कुछ दिन अपसेट रहेगी.. उनकी दिमागी हालत ठीक नही होगी.. तो सायद ये घर छोडकर अपने घर चली जायेगी.. वो भी मेरे विजयको लेकर.. क्युकी वो विजयको बहुत प्यार करती हे.. ओर उसे अपना बेटा मानती हे.. वो धिरेनकी हरकतकी वजहसे सबको फेइस नही कर पायेगी.. वो अपने आपको दोसी मानते देवुसे नजरे नही मीला पायेगी.. तब उनको तुजे ही सम्हालना हे.. वो भी बडे प्यारसे.. समज गयानां..?

लखन : (धीरेसे) भाभीमां.. आप चंदा भाभीकी फीकर मत करना.. मे उनका अच्छेसे खयाल रखुगा.. ओर इस बातके लीये कहीना कही मे भी जीम्वेवार हु.. क्युकी मे चाहता थाकी पुनोदीदी धिरेनसे अलग हो जाये.. ताकी मे अपना पहेला प्यार पा सकु.. मोम.. मेरे दिलमे भी खोट थी.. आइ अ‍ेम सोरी..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही बेटा.. तुम अपने आपको दोसी मत मान.. क्युकी सीर्फ तुम ही नही.. पुनो ओर हम सब भी वही चाहते थे.. बीटु.. पुनो सीर्फ तेरी हे.. मेरी पीयु.. ओर ये सबतो होने ही वाला था.. तो फीर तुम अपने आपको क्यु दोस देते हो..? मे भी दिलसे चाहती हुकी पुनो तेरी बीवी होजाये.. ओर अब तो पुनो भी तुजे जी जानसे चाहने लगी हे.. वो तुजे अपनानेका मन बना चुकी हे.. लखन.. तुम जानते नही.. चंदा दीदीको अपनानेमे खुद पुनो तेरी मदद करेगी.. बस.. पहेल तुजे करनी पडेगी..

लखन : (नीचेकी ओर देखते) मोम.. कही हम गलत तो नही कर रहे..? क्युकी अपनोसे रीलेशन बनाना कोइ आसान बात नही हे.. ओर वो भी मेरी भाभीओसे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. लेकीन तुम इस रीस्ते नातो मे मत उलजो.. सीर्फ यही सोचो.. जो कभी उन जमानेमे सोचता था.. तुजे सीर्फ अ‍ेक ही रीस्ता देखना हे.. तुम इस खानदाका अ‍ेक लौता मर्द हो.. ओर सभी ओरते इस खानदानकी ओरते.. जीसे सीर्फ तुम दोनो भाइको ही सम्हालना हे..

धेट्स ओल.. बात रही चंदा दीदीकी तो सुन.. उनको पहेली बार तुजे अपनानेमे थोडी तकलीफ होगी.. लेकीन बादमे वो भी तुजे अपना लेगी.. तब जाके वो ठीक होगी.. लेकीन यहा कभी नही आयेगी.. वो अब हमेसाके लीये वहा तेरे घर यातो फीर अपने घर रहेगी..

लखन : (हां सर हीलाते) भाभीमां.. तो फीर लता.. क्युकी वो केह रही थी.. अब वो यहा रहेगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. मेने ही उसे कहा हे.. सुन.. अब लताको तुम तेरी जींदगीसे आजाद करदे.. मानाकी वो भी तुजे प्यार कने लगी हे तो तेरे साथ रीलेशन रखेगी.. मगर अब वो देवुकी बीवी होजायेगी.. जैसे सृती ओर पुनो देवुकी बीवीया होते तेरी बीवी होगी.. वैसे भी सब कीसीकी भी बीवीया हो.. तुम दोनो भाइको क्या फर्क पडेगा..? सुन.. जा जल्दीसे तैयार होजा.. तुजे मम्मी बुआ.. ओर भाभीको लेने भी जाना हे.. फीर आकर सादीमे भी तो जाना हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. वो पुनो केह रही थी.. जब चंदा भाभी आयेगी.. तब सबकी हाजरीमे वो धिरेनको अपना डीवोर्स पेपर देगी.. मेने दोनोका जगडा सुना हे.. पुनोदीदीने रेकोर्ड कीया हे.. क्या आपने सुना..?

मंजुला : (मुस्कुराते) जी.. नही सुना.. लेकीन मुजे सब पता हे.. जा.. फटाफट नहाले.. फीर देखते हे यहा क्या क्या हंगामा होता हे.. सुन.. इनमेसे अभी तेरी अ‍ेक बीवी नाराज होकर चली जायेगी.. तब सम्हाल लेना तुम दोनो.. कमीनी बहुत नखरे करेगी.. ओर वहा भी कुछ हंगामा करे तो अ‍ेक खीचकर देना उनके कानके नीचे.. कमीनीकी अकल ठीकाने आजायेगी.. जा.. कंपलीट होकर आजा.. फीर चाइ नास्ता करके तु चले जाना.. नौव साडे नौव बजे बस आजायेगी.. ओर सुन.. तुमसे अ‍ेक ओर बात कहेनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभीमां.. कहीये..

मंजुला : (खडी होकर) बीटु.. सायद तुजे दो ओर ओरतोको भी सम्हालना हे.. वो कीसे..? मे नही बता पाउगी.. तुम अपनी होने वाली बीवीको पुछ लेना.. जीसे तु बहुत प्यार करता हे.. समज गयानां..?

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभीमां..
 
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