Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 7 - SexBaba
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Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

अपडेट - 40 ~ गेटिंग ा जॉब

अब तक...

ये सब कुछ पारी के लिए प्रश्न जनक था.

पर...

पारी के सवाल पर...

वीर के मुँह से एक hi उत्तर निकला...

"माँ... तोह आखिर माँ होती है... पारी!!!"


अब आगे...

आतिश की डेथ के बाद, वीर उस रात थोड़ा बुरी हालत में घर पहुचा था. पर घर पहुचने से पहले उसने क्लिनिक में अपनी फर्स्ट अिध करवा ली थी.

घर में उसने बिलकुल भी ऐसा नहीं दिखाया की वो लड़खड़ा रहा है या उसके परर में कुछ गड़बड़ है, वर्ण सभी उसकी जान खा जाते. वो सीधा डिनर करके अपने रूम में जा के लेत चूका था. जो भी मेडिकेशन्स डॉक्टर ने प्रोवाइड किये थे, उससे टाइम तो टाइम उसने लिया और बस आराम फरमाने लगा.

पर भला वीर किसी का खून करने के बाद इतनी आसानी से कैसे आराम फार्मा रहा था?? और ऐसे hi कैसे उसने आतिश जैसे आदमी को ठिकाने लगा दिया?

इस सवाल का जवाब एक hi था.

~सुहाना!

जिस दिन वीर सुहाना से मिलने गया था. तोह भूमिका की होटल से सुहाना उससे अपनी गाडी में बैठा के अपने घर ले गयी थी. और उन् दोनों के बीच जो भी कंवर्सशन्स हुई थी, उसमे hi इस बात का उत्तर छिपा था.

वीर : वेट! आप मुझे अपने घर क्यों ले जा रही हो!?

सुहाना : शट उप okay! एक तोह मुझ से कहते हो की मुझसे आके मिलो. वाह! देख रहे हो? सुहाना यानी की में तुमसे मिलने आ रही हु. अपने सारे काम चोरर के. और फिर मिलते से hi एक बम पटकते हो की तुम उस आतिश को मारोगे... मज़ाक चल रहा है क्या!?

वीर : में झूठ नहीं बोल रहा. I'll डेफिनिटेली...

सुहाना : वही! इडियट! It's नॉट ा स्माल मटर. घर पे चल के डिसकस करना पड़ेगा.

वीर : फाइन!

जब दोनों hi घर पहुचे, तोह घर में सभी सर्वेन्ट्स उन् दोनों को hi देखे जा रहे थे.

सुहाना : इग्नोर थे मैड्स एंड सर्वेन्ट्स. आओ! मेरे रूम में hi डिसकस करते है.

और सुहाना वीर को अपने रूम में ले गयी. पर उसके ऐसा करने से सर्वेन्ट्स की बीच बातें न बने, भला ऐसा कैसे हो सकता था?

सर्वेंट 1 : सुहाना Ma'am एक लड़के के साथ!? वो भी अपने रूम में ले गयी उससे!?

माइड 1 : सोनिआ मैडम को पता है ये बात? कौन है ये लड़का भला? आज के पहले कभी किसी लड़के को सुहाना मैडम अपने कमरे में नहीं ले गयी. फिर आज कैसे? उस दिन भी आया था ये... पर है कौन!?

सर्वेंट 2 : हम्म! कुछ गड़बड़ तोह नहीं!?

माइड 2 : तुम लोग अपना काम करो और फ़ालतू की बातें न बनाओ. यदि सुहाना मैडम को पता चला तोह पता है न क्या होगा!?

उस दूसरी माइड के इतना कहते hi वह मौजूद बाकी सभी सर्वेन्ट्स की बोलती बंद हो गयी और वो कुछ अतीत के बारे में सोच के फौरन hi अपने कामो में लग गए.

इधर अंदर वीर सुहाना के कमरे में दाखिल हुआ तोह वह चकित रह गया. कमरा वाक़ई नेट एंड क्लीन था और एक लेडी का hi कमरा प्रतीत हो रहा था.

पर इस वक़्त उसकी नज़रे जैसे किसी चीज़ को ढूंढ रही थी.

सुहाना : हम्म? क्या हुआ? क्या देख रहे हो ऐसे?

उसके सवाल पर अगले hi पल वीर को सुहाना की वही इमेज याद आ गयी.

"वाहहहहहहह फ़क यू चोरररर..."

जब वो टेडी की धुलाई बड़ी hi बेरहमी से कर रही थी. और ये याद आते hi वीर के पसीने छूटने लगे.

सुहाना : ओह hello? कहा खो गए?

वीर : हँ!? No... ी... जस्ट...

सुहाना : बोलो? क्या देख रहे हो ऐसे!?

वीर एक बार फिर इधर उधर देखा और जैसे hi उसकी नज़र बीएड के नीचे पड़ी उसकी आँखों में जैसे एक चमक आ गयी.

वो टेडी वही ठूसा हुआ पड़ा था. जब सुहाना ने उसकी नज़रो को फॉलो किया और उससे ये एहसास हुआ की वीर क्या देख रहा है. उसकी आँखें हैरानी और फिर गुस्से के मारे फेल गयी.

अगले hi पल उसने टेडी को लात से और अंदर ठूस दिया और वीर के पास अपनी गांड मटकाते हुए वो आयी और धीरे से बोली,

"तुमने कुछ नहीं देखा. राइट!?"

'फुसक्कक्कककककक! She's स्केरी!'

वीर : Y-Yeah!!

सुहाना (स्माइल्स) गुड! थें... बैठो!

और दोनों hi आमने सामने बैठ गए.

सुहाना : अब बोलो!

वीर : में पहले hi बता चूका हु. और कितनी बार बताऊ?

सुहाना (शिघ्स) : तुम्हे पता है न तुम क्या बात कर रहे हो? यदि मेरी नज़रो से देखोगे तोह तुम्हे पता चलेगा की तुम कितना बड़ा जोके मार रहे हो.

वीर : I'm नॉट जोकिंग.

सुहाना : देखो! अभी तुम्हारी बोहत लाइफ है यार. तुम इन् सब के चक्करो में कहा पद गए!? तुम तोह एक कॉलेज स्टूडेंट हो. और वो आतिश मुंबई का डॉन आदमी जैसा है. अरे वो एक फूक में hi तुम्हे उदा सकता है. फिर क्यों मौत के मुँह में जा रहे हो? में खुद उसके खिलाफ कुछ करने से डर रही हु. वर्ण तुम्हे लगता है में शांत बैठी रहती? ये जान के की मेरी बहिन की जान के पीछे कोई पड़ा है? डेफिनिटेली नॉट!

और वो बोलते बोलते उठ कड़ी हुई और पलट के विंडो के पास जा पहुची.

सुहाना : जस्ट लाइव ा नार्मल लाइफ मन. इन् सब में कुछ नहीं रखा...

वीर : उसने मेरे दोस्त को मारा है...

*साइलेंस*

सुहाना : ???

वीर : हे प्लांड आईटी. That's व्हाई... चाहे कुछ भी हो जाए... ी हैवे तो टेक हिम डाउन.

सुहाना : ...

वीर : और इसलिए... मुझे आप से हेल्प चाहिए!

सुहाना : ??

वीर : ी वांट यू तो हैंडल थे पुलिस एंड इन्वेस्टीगेशन.

सुहाना : हम्म! तोह तुम चाहते हो की में तुम्हारी करतूत के बाद सारा कुछ हैंडल करू?

वीर : कुछ ऐसा hi...

सुहाना : और मुझे क्या मिलेगा? No वेट! तुम इतना यकीन के साथ कैसे कह सकते हो की तुम उस आदमी को मारने में कामयाब हो जाओगे? हँ?

वीर : ट्रस्ट में! ी विल ब्रिंग हिम डाउन.

सुहाना (शिघ्स) : मुझे अभी भी ये एक जोके hi लग रहा है चाहे किसी भी एंगल से क्यों न देखु. ऑलराइट! मान लो में एग्री कर गयी और पुलिस को हैंडल कर लिया... बूत... मुझे क्या!? मुझे क्या मिलेगा? एक्सचेंज इक्वल होता है यू क्नोव राइट? में तुम्हारी इतनी हेल्प कर रही हु तोह... यू क्नोव...

वीर : में आतिश को आपकी बहिन के रास्ते से अलग कर रहा हु क्या वो काम नहीं!?

सुहाना : ओह c'mon! वो आतिश अभी तक मेरी बहिन का कुछ नहीं कर पाया है. तोह उसका होना ऑब्वियस्ली थ्रेट है पर ऐसा भी नहीं है की उसके होने से मेरी बहिन जी hi नहीं पा रही है. तोह इतने से कुछ नहीं होने वाला. गिव में समथिंग इक्वल तो माय फवौर...

वीर : थें... मेरे पास और कुछ नहीं है देने को... आप वैसे hi क्रोरेपति लोग हो. ऊपर से आपने hi मुझे वो डेबिट कार्ड दिया था. तोह पैसे देना तोह मूर्खता होगी.

सुहाना : हम्म! थें प्रॉमिस में...

वीर : ???

सुहाना : यू विल दो तवो फवोर्स.

वीर : कैसे फवौर?

सुहाना (स्माइल्स) : पहला ये की... मुझे जाना है नेक्स्ट वीक दिल्ली. सोनू भी साथ में रहे इसलिए वो अभी ज़्यादा बिजी है और सारे यहाँ के काम सचेडूले से आगे hi कर रही है. ताकि वो मेरे साथ चल सके. मेरे हस्बैंड की तरफ से मुझे वह जाना है. बसीकली, बोहत बड़ा फंक्शन है जहा धेरर सारे अलग अलग कम्पनीज के लोग आएँगे... कुछ आगे की टेक्नोलॉजीज से रिलेटेड इनोवेटिव फंक्शन रखा गया है.

वीर : हम्म! तोह!?

सुहाना (स्माइल्स) : You'll के विथ उस.

वीर : ???

"Kyaaaaaaaaaaaaaa????"

और वीर झटके से खड़ा हो गया.

सुहाना : येह! देखो में तोह बिजी हो जाउंगी वह पहुँच के. तोह सोनू को कंपनी देने वाला कोई होना चाहिए न? और तुम दोनों वैसे hi एक दूसरे से फेमिलिअर हो.

वीर : वह...!? No... वेट!!! में क्यों??? ी मैं... आपके इतने सारे कॉन्टेक्ट्स...

सुहाना : यू don't अंडरस्टैंड.

वीर : हँ?

सुहाना (शिघ्स) : आये दिन इन् अमीर घरानो से रिश्ते आते है सोनू के लिए तुम्हे पता है? बूत शी नेवर पायस अन्य अटेंशन तो थम. क्युकी, वो सभी की पर्सनालिटीज एक झटके में देख के hi पहचान जाती है. ी मैं... एहम... एक्सक्लूडिंग माइन.

वीर : ??

सुहाना : इसलिए... कोई ऐसा होना चाहिए उसके साथ जिसके संग वो उनकंफर्टबले न फील करे, इजी तो टॉक हो बाँदा... और तुम से बेहतर कौन है?

वीर : No... ी मैं... उनकी फ्रेंड्स भी तोह होंगी न... जो...

सुहाना : उसकी सिर्फ 2 hi फ्रेंड्स है. एक और था पुष्कर... बूत वो अब इस दुनिया में नहीं है. बाकी 2 फ्रेंड्स... वेल... It's कॉम्प्लिकेटेड. इसलिए... अब तुम hi बचते हो... सो? में हां समझू या...!?

वीर कुछ देरर सोचा... पर आखिर उससे ये शर्त तोह maan'ni hi थी. क्युकी तभी सुहाना उसकी हेल्प करने राज़ी होती...

वीर (सिघ) : फाइन!

सुहाना (स्माइल्स) : That's गुड तो हेअर. पासपोर्ट वगैरह तोह होगा hi तुंहरे पास है न?

'दमन! पासपोर्ट तोह मेरा उस घर में है. अब में वह नहीं जा सकता...'

[Aap Ragini se keh ke passport mangwa sakte ho Master.]

'अहह! राइट! थैंक्स पारी!'

[You are welcome Master!]

वीर : जी! पासपोर्ट है.

सुहाना : गुड! थें ी एग्री...

वीर : वेट ा मिनट! दूसरा फवौर!?

सुहाना (स्माइल्स) : समय आने पर... उसकी भी मांग करुँगी. फिलहाल तोह यही है... Okay नाउ... यू कैन लीव. पुलिस एंड इन्वेस्टीगेशन में देख लुंगी. आल्सो, कुछ आदमी भी भिजवा दूंगी... पर ध्यान रहे... वो तुम्हारे साथ एकदम अंदर नहीं जाएंगे.

वीर : चलेगा... एंड थैंक्स! आल्सो...

सुहाना : हम्म??

वीर : 2 फवौर और जोड़ लीजिये...

सुहाना : हँ??

वीर : मुझे पुलिस स्टेशन जाना है और वह से कुछ बरामद करना है. मेरे फ्रेंड की साइकिल. उसकी आखिरी निशानी... थाने में hi है. आपको मेरी हेल्प करनी होगी.

सुहाना : ओह्ह्ह्ह! हो जाएगा. और दूसरा क्या!?

वीर : दूसरा ये की... हेल्प में फंड समवन!

सुहाना : ???

वीर तभी धीरे से आगे आया, उसने टेबल पर रखे पेन और एक डेरी से पेपर फाड़ सुहाना को कुछ लिख के उससे थमा दिया.

सुहाना : क्या है ये? हम्म? भावना सिंह!? अलियास नाम गीता!? जॉब... अर्चेओलॉजिस्ट!?

वीर : मेरी माँ... रियल माँ... उनकी डिटेल्स... ी क्नोव आपके कनेक्शंस काफी है. हेल्प में फंड हेर लोकेशन. मुझे विश्वाश है आप करवा लोगी ये...

सुहाना (स्माइल्स) : ओह्ह्ह्ह! ी सी!

[Damn master! What a perfect plan. Suhana can really help you. Uski madad se jald hi location mil jaegi aapko apni mom ki...]

'येअहहह!'

सुहाना : तोह तुम्हारे अब तीन फवौर हो गए. चौथा तोह यही है की... यू अरे किंग विथ उस. रेमेम्बेर थिस.

वीर : हम्म! चलता हु...

सुहाना : Okay!... एंड....

वीर : ???

सुहाना : गुड लक! आल्सो... Don't दिए...

वीर जाने के लिए जैसे hi मुदा... तोह सुहाना के बोल के चलते एक बार फिर वो रुक गया.

सुहाना : वैसे... तुम्हे कैसे पता चला की मेरे इतने कॉन्टेक्ट्स है!? इतने यकीन के साथ कैसे आ गए तुम मेरे पास? कुछ तोह पता चला होगा कही से!?

उसकी बात सुन्न, वीर धीरे धीरे उसके करीब आया और ठीक उसके पीछे खड़ा हो गया. सुहाना अभी भी विंडो से बाहर hi देख रही थी. उसकी पीठ अभी भी वीर की तरफ थी. वो महसूस कर पा रही थी की वीर उसके ठीक पीछे खड़ा हुआ है.

पर अगले hi पल वीर ने कुछ ऐसा कहा, जिसके चलते उसकी आँखें हैरानी और शॉक के मारे फटती चली गयी...

वीर : आपका रिएक्शन कुछ ओड सा था. होटल में मेने किसी को मारने की बात आपके सामने राखी, और आप ऑफ़ कोर्स थोड़ा शॉक हुई बूत आफ्टर तहत... आपके लिए जैसे ये उतना शॉकिंग भी नहीं था. ये मेरी गेस्सिंग है... बूत ी फील आईटी... यू हैवे किल्ड समवन before...Right?

वो धीरे से कहे गए शब्द, जैसे सुहाना के कानो में घंटी को तरह बज रहे थे. वो लास्ट सेंटेंस जैसे किसी बम की तरह आके गिरा था सुहाना के ऊपर. पल भर के लिए तोह उसका शरीर भी सिहर उठा.

फिर तोह उसने न आव देखा न ताव, वो तेज़्ज़ी से यु पलटी और वीर की कल्लोर को भींच उसने उससे पीछे धकेला जहा एक काउच रखा था. और दोनों hi उस काउच पर गिर पड़े.

सुहाना वीर के ठीक ऊपर थी. उसके ज़ुल्फ़े वीर के गाल के बगल से होते हुए लटक रही थी.

वीर की कल्लोर उसकी गिरफ्त में थी और वो एकदम गुस्से से वीर को देख रही थी.

सुहाना : हाउ दीद यू क्नोव?

वीर : ी... ी जस्ट गेस्सेड.

सुहाना (गल्र्स) : वाक़ई!? क्युकी मुझे अब तुमपे डाउट हो रहा है.

वीर : वाक़ई!

सुहाना हल्का सा आगे झुकी, उसका बदन पूरा वीर के सीने पर टिका हुआ था. वो उसके कानो के समीप आयी और बड़ी hi धीमी पर थोड़ी भयानक सी आवाज़ में बोली,

"तुम्हारी गेस्सिंग कुछ ज़्यादा hi सटीक जा रही है. आगे से... इस बात का ज़िक्र कभी तुम्हारे मुँह से नहीं निकलना चाहिए. किसी को पता नहीं चलना चाहिए. सोनू को तोह बिलकुल भी नहीं. जिस दिन ऐसा हुआ... वो तुम्हारा प्रॉबब्ली लास्ट दिन होगा."

सुहाना ने डराते हुए उस से कहा. यदि कोई और होता तोह वाक़ई थोड़ा घबरा जाता. पर वीर तोह वीर था... और वो भी पहले वाला नहीं. उसके अंदर पारी जो थी अब.

अपने हाथ को उठाते हुए उसने सुहाना की नरम गर्दन को थामा और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै,

"Don't टेम्प्ट ा यंग मन लिखे तहत सुहाना जी... दुसरो के सीक्रेट्स को फैलाना... मेरी आदत नहीं! और हो सके तोह... उठिये प्लीज!"

ऐसा रिस्पांस सुहाना ने बिलकुल भी एक्सपेक्ट नहीं किया था. उससे लगा था वो वीर को थोड़ा दर्रा देगी पर यहाँ तोह सिचुएशन hi अलग बन्न गयी थी. और जब उससे अपनी हालत का ध्यान आया तोह अचानक hi उसके गालो पर हलकी लाली सी छाने लगी और वो एकदम झटके से उठ के दो कदम पीछे हो गयी.

वीर (स्माइल्स) : चलता हु... थैंक्स अगेन!

और वीर सुहाना को अकेला चोरर वह से निकल गया. सुहाना केवल उससे जाते हुए देखती रही.

सुहाना वीर की मदद करने के लिए केवल एक hi कारण से राज़ी हुई थी. और वो ये की वीर आतिश से भीड़ चूका था और अभी तक ज़िंदा था. साथ hi साथ वीर की दुश्मनी भी आतिश से थी.

ये कहना गलत नहीं होगा की वो वीर को अस ा पवन उसे कर रही थी. और साथ hi साथ उससे एक्स्ट्रा फवोर्स भी मिल चुके थे. पर उससे डाउट था की क्या वीर वाक़ई एक मामूली सा लड़का कुछ कर पाएगा?

सुहाना शातिर थी. उससे पता था यदि वीर फ़ैल हुआ तोह क्या करना है. वो सोनिआ को कुछ भी पता नहीं चलने देती की इसमें उसका हाथ था. पर यदि वीर पास हुआ, तोह सबसे पहला सवाल उसके मैं में यही आने वाला था की आखिर ऐसा कैसे कर लिया उसने? आतिश जैसे आदमी को ख़तम करना?

यदि ऐसा हुआ तोह इसका मतलब साफ़ होने वाला था की वीर कुछ छिपा रहा है उस से. और इसलिए सुहाना ने पहले hi दूर की सोच ली.

वो वीर से दो कदम आगे चल रही थी.

यदि वीर पास हुआ, तोह उससे अपना फवौर निभाना पड़ेगा. और ऐसा करने के लिए उससे उसके साथ जाना पड़ेगा दिल्ली.

और इसी ट्रिप में... वो वीर के सीक्रेट्स ढूंढ़ने का प्रयत्न करेगी. की आखिर कैसे... एक मामूली सा इंसान कैसे आतिश को मार दिया? पर उससे क्या पता था...

की वीर कोई मामूली इंसान नहीं था.

जब वीर घर आया तोह वो रागिनी से मिला.

रागिनी : क्या हुआ वीर?

वीर : भाभी वो... अब कैसे कहु... मेरा पासपोर्ट रखा है घर में... पुराने वाले...

रागिनी : पासपोर्ट? नाहीइ! अरे मेने तुम्हारे सारे डाक्यूमेंट्स और िदश पहले hi सर्वेंट से मंगवा ली थी वीर. मेरे रूम के कप्बोर्ड में राखी है. तुम लेलो जाके.

वीर : हँ? रियली?

रागिनी : हाँ!

और नेक्स्ट सेकंड hi वीर ने वो किया जिसके चलते रागिनी हक्की बक्की सी मूर्ति बानी कड़ी रही.

वीर ने रागिनी को अपनी बाहो में जोरर से खींचा और उससे दबोच लिए,

"ओह्ह थैंक यू भाभी! आपने मेरी समस्या hi हल करदी! थैंक्स ा लोट!"

और वो रागिनी के कमरे में चला गया. पर इधर बेचारी रागिनी, भौचक्की सी अपने सुर्ख लाल गाल लिए कड़ी रही. उससे समझ में नहीं आया की ये अचानक से क्या हो गया.

वही दूसरी ऑर्डर,

इधर सुहाना खायलो में घूम थी जब कुछ देरर बाद उससे वीर की तरफ से एक मैसेज आया,

"शाम को थाने में मिलिएगा. मुझे फ्रेंड की साइकिल बरामद करवानी है. नीड यू हेल्प!"

सुहाना : ुघ्घ! रियली... एक साइकिल भी नहीं ली जाएगी इस से...

और उसने "फाइन" रिप्लाई कर मोबाइल साइड में फेक दिया.

***

और ये थी आतिश की डेथ की पहले की पूरी प्लानिंग. वीर ने सुहाना के आदमियों की मदद से जलसा में उन् गुंडों की ठिकाने लगाया था. बाकी तोह उसने अपने hi बल बूते पर किया था.

अब सवाल था की वो 110 पॉइंट्स कहा इन्वेस्ट करने वाला था? और उसकी नयी स्किल हव्कये क्या थी?

'पारी! शो में माय स्टैट्स'

[Yes master!]

[ स्टैट्स :

स्ट्रेंथ - 50/100

इंटेलिजेंस - 35/100

अगिलिटी - 30/100

ेंदुराने - 45/100

अपीयरेंस - 22/100]

'ऑलराइट! इंटेलिजेंस में 15 दाल दो. अगिलिटी में 20. ेंदुराने में 5.'

*डिंग*

[15 points have been added to Intelligence.]

[20 points have been added to Agility.]

[5 points have been added to Endurance.]

[70 points remaining.]

[Kisi aur me Master?]

'हम्म! अपीयरेंस में भी 18 ऐड कर दो.'

*डिंग*

[18 points have been added to Appearance.]

[Stats :

Strength - 50/100

Intelligence - 50/100

Agility - 50/100

Endurance - 50/100

Appearance - 40/100]

'गुड'

[52 points remaining hai. Kuch karna hai? Wese mujhe kuch baatein bataani hai aapko.]

'किसी बातें?'

[50 points se ab upar jaane ke liye. Aapke 2 points keval 1 hi point consider kiye jaenge.]

'हँ? No... एक मिनट!'

[Yes! That's right! Ab yadi aapko 50 se 52 par kisi stat ko badhaana hai toh aapko 2 nahi balki 4 points invest karne honge tab jaake wo 52 par aaega.]

'Wtf????? ये तोह पागलपन है. ऐसे तोह मेरे...'

[Yes! Aapko kya laga? Stats badhaana itna asaan hai? It will take time. And a lot of hard work.]

'फुक्कक्कक्ककककक!'

[Toh? Kisi me invest karna hai?]

'अभी नहीं! यदि कोई स्किल है काम की तोह वो दिखाओ. बी थे वे, ये हव्कये क्या है.'

*डिंग*

[Skill : Hawkeye.


डिस्क्रिप्शन : ा डायमंड टियर स्किल. ग्रांट्स थे यूजर ा परफेक्ट एआईएम फॉर एनीथिंग. No टारगेट कैन स्लिप अवे फ्रॉम Hawk's ऑय.]

'होलियीय शीट्ट्ट्ट!!!!'

स्किल पढ़ते hi वीर को पता चल चूका था की ये क्या थी. एक डायमंड टियर स्किल. सिस्टम की सबसे हाईएस्ट स्किल्स होती है डायमंड टियर स्किल्स. उसके नीचे आते है गोल्ड, फिर सिल्वर और ब्रोंज.

वीर के पास जो बेसिक मार्टिकल आर्ट्स स्किल थी वो एक ब्रोंज स्किल थी. साथ hi साथ सेक्स प्रोटेक्शन जो उसने परचेस की थी वो एक सिल्वर टियर स्किल.

और ये थी... एक डायमंड टियर स्किल.

जिसे अपग्रेड करने की कोई ज़रुरत नहीं थी. परफेक्ट एआईएम मतलब परफेक्ट एआईएम. परमानेंट ों hi रहने वाली थी ये.

'फुक्कखकक! थिस इस इंसाने. वेट! तोह में शॉप से डायमंड टियर स्किल्स एक्सेस कर सकता हु?'

[No way! Ye toh aapka reward tha. Aur... Reward randomly select hoke aaya. Isliye aapko jhatke me mil gayi. Warna iski probability boht kam rehti hai. You are lucky.]

वीर अभी और फंक्शन्स के बारे में जानता की अचानक hi उसका फ़ोन बजने लगा.

देखा तोह पाया की श्रेया का फ़ोन था.

वीर : Hello?

श्रेया : गेस व्हाट?

वीर : गेस व्हाट क्या?

श्रेया : ाररीी बुद्धू मेरी जॉब लग गयी... तुमने जो भेजा था न मुझे एड्रेस कंपनी का. ी वेंट तेरे... मेरा इंटरव्यू हुआ एंड Omg... लिखे... थे हिरद में... I'm सो हैप्पी राइट नाउ...

वीर (स्माइल्स) : कोंग्रटुलतिओन्स!

श्रेया : आल थैंक्स तो यू... मुझे तोह पता hi नहीं था तुम्हारा इतनी बड़ी कंपनी में कनेक्शन है. लिखे मेरा बस इंटरव्यू हुआ और कुछ नहीं... और सुनो... अभी के अभी मुझे क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स मॉल में मिलो. में शॉपिंग करने जा रही हु. तुम साथ में चलोगे.

वीर : हम्म! आता हु.

और बताये गए समय पे वीर पहुँच चूका था, क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स मॉल में.

कुछ hi देरर में श्रेया भी आ गयी.

श्रेया : किसी लग रही हु?

वीर : हम्म? ग्रेट!!

श्रेया (ब्लशेस) : थैंक्स! तोह चले?

वीर : सूरे!

और दोनों hi शॉपिंग करने निकल गए.

श्रेया : वैसे... अब केसा फील कर रहे हो तुम? दी बतायी थी तुम काफी परेशान थे कुछ दिनों से...

वीर (स्माइल्स) : I'm फाइन नाउ. निधि ma'am और जूही किसी है?

श्रेया (स्माइल्स) : जूही तोह रोज़ तुम्हारे बारे में पूछती है. और... दी भी तुम्हे याद करती है. दोनों अच्छे है... बस... तुम थे तोह घर का माहौल और खुशनुमा सा था.

वीर : ी... ी सी!

श्रेया : अन्य्वयस! आज मेरी जॉब लगी है. तोह आज में अपनी सेविंग्स से साड़ी शॉपिंग करुँगी. और तुम्हे भी मेरे साथ चल के एक शर्ट लेनी पड़ेगी.

वीर : नाह! It's okay! बल्कि, आप चलो... आज में आपको आपकी पसंद की चीज़ दिलवाऊंगा.

श्रेया : व्हाट थे हेलल? जोके मार रहे हो? हाहाहा~ ज़्यादा नहीं फेकते... चलो अब.

और वो वीर को खींच के ले गयी. पर उससे नहीं पता था, की वीर के पास सुहाना का दिया हुआ डेबिट कार्ड था. और इस अकाउंट में 5 से 6 लाख अमाउंट भरा हुआ था.

[Master! Aap Nidhi ko kyu nahi de dete ye paise? After all, she needs money.]

'No! इतने में उनका कुछ नहीं होने वाला पारी. काम से काम... 45 लक्ष होने चाहिए. तब जाके कुछ हो सकता है. यदि अभी में उन्हें दूंगा... शी विल क्वेश्चन में. की इतने पैसे कहा से आये? कोई गलत काम तोह नहीं कर रहा में? वो वैसे hi टेंशन में है. उन्हें और टेंशन नहीं देनी है.'

वो निधि के खयालो में खोया हुआ था जब श्रेया की आवाज़ उससे वापस से होश में लायी.

"ोये!? कहा खो गए? लुक! हाउ दो ी लुक? इस आईटी गुड?"

और वो एक फुल स्लीव टॉप पेहेन के बाहर आयी जिसमे वो अलग hi क़यामत लग रही थी.





वीर (स्माइल्स) : आपके ऊपर सब कुछ अच्छा लगता है. आफ्टर आल, यू अरे ब्यूटीफुल.

श्रेया (झेपते हुए) : हँ?? W-Wh-What??? Y-Ye अचानक से, तुम्हे...!?

और उसके गोर से गालो पर हलकी सी लाल परत चढ़ गयी.

वो भाग के गयी और फिर कुछ और कपडे पेहेन के उसने वीर को दिखाए.

वीर ने फिर उससे अपनी तरफ से भी एक टॉप खरीदवाया और अपनी निधि Ma'am के लिए एक सूट भी और जूही के लिए प्यारी सी फ्रॉक भी.

जब श्रेया ने ये प्रश्न किया की इतने पैसे कहा से आये तोह उसने यही कहा की म्हणत की कमाई है.

श्रेया आज बेहद खुश थी. नौकरी लगने से उसके अंदर का कॉन्फिडेंस बढ़ चूका था.

श्रेया को घर पे ड्राप कर वीर अपने घर के लिए जाने hi वाला था जब वो उसके पास आयी और एक बार फिर से उससे थैंक्स बोली,

श्रेया : H-Hey!!

वीर : हम्म?

श्रेया : Th-Thanks... वन्स अगेन!

वीर : बार बार थैंक्स नहीं कहा जाता...

श्रेया (ब्लशेस) : R-Right!

वीर : यू शुड जो नाउ! Ma'am और जूही वेट कर रही होंगी आपका.

श्रेया : हम्म! T-Tum नहीं आओगे अंदर?

वीर : No! में दो दिन बाद दिल्ली जा रहा हु. वह से आके hi मिलूंगा...

श्रेया : हँ??? दिल्ली?? क्यों??

वीर : काम है...

श्रेया : O-Okay...

वीर : जाइये अब...

श्रेया (ब्लशेस) : हम्म!

वो जाने के लिए हुई तोह वीर अपनी गाडी में के लगाने लगा.

पर अचानक hi वो पलटी और अगले hi पल, वीर को अपने गालो पर कुछ गीलापन सा महसूस हुआ.

इसके पहले की वो कुछ समझ पाटा, श्रेया शर्माते हुए jhat-pat तेज़्ज़ कदमो के साथ लिफ्ट की ऑर्डर भाग गयी.

और बेचारा वीर अपनी आँखें फाड़े, हैरानी में उससे केवल जाता हुआ hi देखता रहा.

'हहहहहह!?'

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आज के लिए इतना hi गाइस!

बाकी जो लोगो को तोह पता hi है की क्या करना है? 😁


धन्यवाद!
 
एडिट हो रहा है. सॉरी फॉर थे वेट ! 😁
 
अपडेट - 41 ~ It's हेर...!?

अब तक...

वीर : जाइये अब...

श्रेया (ब्लशेस) : हम्म!

वो जाने के लिए हुई तोह वीर अपनी गाडी में के लगाने लगा.

पर अचानक hi वो पलटी और अगले hi पल, वीर को अपने गालो पर कुछ गीलापन सा महसूस हुआ.

इसके पहले की वो कुछ समझ पाटा, श्रेया शर्माते हुए jhat-pat तेज़्ज़ कदमो के साथ लिफ्ट की ऑर्डर भाग गयी.

और बेचारा वीर अपनी आँखें फाड़े, हैरानी में उससे केवल जाता हुआ देखता रहा.

'हहहहहह!?'


अब आगे...

*यौनस*

सुबह सुबह वीर अपने बिस्तर पर से जब उठा तोह आज उससे कुछ अलग सा महसूस हो रहा था.

'हम्म? व्हाई दो ी फील डिफरेंट?'

[Pata chal jaega Hehe~]

'हम्म?'

उसने न hi कोई शर्ट डाली और बस यु hi अपने लोअर में बिस्तर से उठ वो दरवाज़े के पास आया. दरवाज़ा खोलते hi उससे बगल के कमरे से hi निकलती हुई सुमन दिखाई दे गयी.

जैसे hi सुमन की नज़रे वीर पर पड़ी, वो हैरानी के मारे वही स्थिर होक ठहर गयी.

सुमन : मालिक...!? ये...

वीर : हम्म?? क्या हुआ!?

अगले hi पल सुमन वीर की तरफ आयी, उसका हाथ थामी और उससे अपने संग उसके कमरे में लाकर शीशे के सामने खड़ा कर दी.

जब वीर ने अपना रंग रूप देखा तोह वो खुद चकित रह गया था.

'Wtf!???'

[Haha~]

उसका चेहरा पहले से काफी खिला हुआ लग रहा था. रंग भी थोड़ा फेयर नज़र आ रहा था. और इतना hi नहीं, केवल फेस hi नहीं उसका चेस्ट भी काफी वेल डिफाइंड नज़र आ रहा था.

जगह जगह मुस्कले कट्स थे और फोर पैक्स आलरेडी बन्न चुके थे. हैरत के मारे उसने अपने हाथो से खुद के सीने को टच किया.

और टच करते hi उससे एक नया अनुभव हुआ. उसकी मसल्स कड़क हो रही थी. ठोस एकदम.

'Wtf!???'

[Aapne kal ek saath 18 points invest kiye the Master Appearance me. Toh ye toh hona hi tha. Aur appearance me changes karne ke baad ye sirf face ko effect nahi karta.]

'Don't तेल्ल में...!?'

[Yes! Hehe~ It affects your whole body. Aapke poore physical appearance ko change karta hai. Yahi reason hai ki aapki body me bhi aapko changes dekhne ko mile hai. But dhyaan rakhiyega. Kabhi eksaath itne points na add kar lena appearance me ki ghar ke log pehchaan hi naa paaye. Haha~]

'दमन! मुझे नहीं पता था इतने सिग्नीफिकेंट चंगेस देखने को मिलेंगे.'

[Well! Now you know...]

सुमन : देखा आपने मालिक!? आपका चेहरा... यहाँ तक की आपका शरीर... *ब्लशेस* एकदम से बदला बदला सा लग रहा है.

वीर : एहम! वेल... ः~ क्यों नहीं होगा. में अपने खान पान का पूरा ध्यान जो रख रहा हु. और ये तोह उम्र hi वैसी है... यू क्नोव... शरीर में चंगेस आते है.

सुमन (ब्लशेस) : J-Jii!

वो इतना बोल पलट के जाने के लिए हुई तोह वीर ने अचानक hi उसका हाथ थामा और एक झटके से उससे अपने करीब खींच अपने सीने से लगा लिया.

सुमन : अहह!???

उसके नग्न पेट में हाथ फेरर, जो हर्र स्पर्श सुमन को सिसकी लेने पर मजबूर कर रहा था, वीर ने धीरे से उसके कान की तरफ बढ़ते हुए कहा,

"पर... ये बदलाव तोह अच्छे है न!?"

लम्बी लम्बी सासें लिए, सुमन केवल हां में सर्र hi हिला पायी क्युकी वीर के होंठ आलरेडी उसकी मखमली गर्दन पर जैम चुके थे.

सुमन (ब्लशेस) : मालिक... स्स्सस्स्स्स...!

आज वीर का मूड कुछ ज़्यादा hi नॉटी हो रहा था. अपने हाथो में उसने सुमन की उन् नरम दूध की थैलियों को थामा और पूरी शिद्दत से उन्हें मसलने लगा.

बेचारी सुमन केवल झटके पर झटके hi लिए जा रही थी. आज उसके मालिक कुछ ज़्यादा hi आक्रामक हो रहे थे. पर कही न कही, उससे अपने मालिक का ये रूप बड़ा भा रहा था. वो जैसे चाहती hi यही थी की इसी तरह उसके मालिक उसपे अपना हक़ जताये.

कुछ hi पालो में सुमन की छुछियैअ उसके मैरून कलर के ब्लाउज से बाहर थी और उन् थानों का मज़ा वीर भरपूर उठा रहा था. उन् निप्पल्स को मरोड़ मरोड़ के वो सुमन को एक उत्तेजित स्वर निकालने पर मजबूर कर रहा था.

पर ये मज़ा जैसे बस कुछ पल के लिए hi था. क्युकी अगले hi पल, पायलो की खान खान की आवाज़ वीर और सुमन दोनों के hi कानो में padi,aur उन्हें समझ आया की कोई ऊपर आ रहा है.

झटके से वीर अलग हुआ और अपनी शर्ट pehn'ne लगा वही सुमन ने भी अपना ब्लाउज बस सीने से लगाया और ऊपर पल्लू दाल के सामने कड़ी हो गयी.

देखा तोह ऊपर आने वाला शख्स कोई और नहीं, रागिनी hi थी.

रागिनी : अरे वीर!? उठ गए!? S-Suman जी आप!?

उसने सुमन को देखा तोह थोड़ा आश्चर्य चकित ज़रूर हुई वो पर जब दुबारा से उसकी नज़रे वीर पर गयी, तोह मानो एक झटका सा लगा उससे.

वो बड़ी बड़ी आँखें लिए वीर को देख रही थी जो अपनी शर्ट पेहेन रहा था और अचानक hi उसकी नज़रे फिरसे सुमन पर जा कर जम्म गयी. सुमन को जैसे आभास हो गया था की रागिनी क्या सोच रही है तोह उसने फौरन hi जवाब दे दिया,

सुमन : हाँ रागिनी जी! में... देखने आयी थी... की वीर जी ठीक से सोये कल रात या नहीं!?

कहते हुए उसने अपना ब्लाउज गिरने से बचाया. उसके गालो पर भी हलकी हलकी लाली छायी हुई थी.

रागिनी : O-Ohh!

रागिनी की आँखें एक बार फिर वीर के चेहरे पर जाकर थम गयी. आज वीर इतना आकर्षक लग रहा था की इसके पहले रागिनी ने कभी उससे ऐसा नहीं देखा था.

रागिनी : K-Kuch लगाया था क्या वीर? कल चेहरे पे...??

वीर (सौघ्स) : J-Jii? नहीं तोह...!?

रागिनी : O-Ohh! आज... आज तुम्हारी स्किन बोहत फेयर लग रही है.

वीर (स्माइल्स) : आप इतने प्यार से हम सब के लिए इतना प्यारा प्यारा खाना बनाती हो, हमारी केयर करती हो तोह रंग रूप में निखार तोह आएगा hi न?

रागिनी : H-Huh!?

वीर : और आप ये क्यों भूल गयी!? की आप खुद भी इतनी प्यारी लग रही हो? आप भी तोह पहले से कही ज़्यादा सुन्दर होती जा रही हो भाभी! आपको किसी की नज़र न लगे...

रागिनी (ब्लशेस) : आह्हः!??

ये कहना गलत नहीं था, की रागिनी के गाल इस वक़्त टमाटर की तरह लाल हो गए थे. इसके पहले वीर ने कभी उसके साथ ऐसी बातें नहीं की थी. कल से hi वो कुछ बदला बदला सा बेहवे कर रहा था.

कल अचानक hi उससे अपनी बाहो में भर लिया था तोह आज ये... न जाने आगे क्या क्या होने वाला था!?

पर इतना तोह साफ़ था...

की रागिनी को ये सब, कही से भी बुरा नहीं लग रहा था. इन फैक्ट, उसका दिल ज़र्रों से धड़क रहा था. जब जब वीर उसकी तारीफ करता, एक जीब सी ख़ुशी होने लगती उससे.

रागिनी (ब्लशेस) : T-Tum फ्रेश होक आओ... M-Mein नाश्ता तैयार करती हु.

और वो jhat-pat बिना वीर से दुबारा नज़रे मिलाये नीचे की ऑर्डर भाग गयी.

पर जाते जाते उसके मैं में सवाल ज़रूर उमड़ रहे थे.

'Y-Ye वीर...!? अचानक क्या हो गया इससे!? कल भी... उघ!!! में क्या सोचने लगी... पागल कही का... सुमन जी भी वही कड़ी थी. अरे किसी के सामने ऐसा बोलना ज़रूरी था क्या!? कितनी शर्म आ रही थी मुझे... न जाने वो क्या सोच रही होंगी?'

पर रागिनी के खयालो से उल्टा, यहाँ सुमन वीर को मुस्कुराते हुए देख रही थी.

सुमन : रागिनी जी शर्मा गयी आप की बातो से...

वीर (स्माइल्स) : हम्म! बी थे वे... चलो नीचे! में आता हु.

***

कुछ देरर बाद सभी डाइनिंग टेबल पर मौजूद थे. काव्य और आरोही पहले hi घर जा चुकी थी. पर हां, अब उन्होंने रागिनी के घर आना भी शुरू कर दिया था. वो कॉलेज से लौटते वक़्त एक बार ज़रूर आती और सभी से मिल के जाती.

आरोही की बात वीर से होने लगी थी पर अभी भी... वो उस से खुल के बात करने में थोड़ा हिचकिचाती थी. शायद... समय के साथ ये दुरी काम हो जाए!?

वीर अपना नाश्ता कर रहा था जब रागिनी ने अचानक hi सवाल किया,

"कल! कल तुम पासपोर्ट किस लिए ढूंढ रहे थे वीर!? कही पे लग्न है क्या?"

वीर : हम्म? ओह्ह! वेल... में दिल्ली जा रहा हु.

वो यु चबाते चबाते hi बोलै. और रागिनी ये सुन्न उससे मुँह खोल के देखने लगी.

रागिनी : हँ?

वीर : क्या हुआ?

रागिनी : T-Tum दिल्ली जा रहे हो?

वीर (नॉड्स) : Mmm-Hmm!

रागिनी : K-Kiske साथ!?

वीर : कुछ फ्रेंड्स है. फ्रेंड्स तोह नहीं कहूंगा बूत थे अरे फेमिलिअर...

रागिनी (फ्रोंस) : पर ऐसे बिना बताये तुम फिरसे...

वीर : रिलैक्स भाभी! में बस कुछ दिन में आ जाऊंगा. एंड don't वोर्री! मेने कहा है न आपको... में साड़ी बातें शेयर करूँगा आपसे. Don't वोर्री!

रागिनी : O-Okay! पर... क्या उन्होंने वाक़ई तुम्हे अपना पासपोर्ट लाने के लिए कहा है?

वीर (नॉड्स) : Uh-Huh...

रागिनी : पफ्फफ्टत्त~

वीर : ???

रागिनी (चुक्केस) : N-No नथिंग... में हर्र बार यही कहती हु और फिरसे कह रही हु. एकदम साफल्य ट्रेवल करना okay? फ़ोन करते रहना समय समय पर. में कोई बहाने नहीं सुनूंगी... और काम होते hi जल्द से जल्द आना. साड़ी बातें बाद में मुझे बताओगे. Okay!?

वीर : J-Jii!

'Wtf! व्हाई दीद शी लाफ!?'

[I-I don't know Master!]

***

ये दिन वीर ने रात में अपनी पैकिंग करते हुए गुज़ारा. और अगले hi दिन, उसके घर के सामने एक बड़ी सी सेडान कड़ी हुई थी.

ये सुहाना ने उससे एयरपोर्ट पर लाने तक के लिए भेजी थी. सभी को गुडबाय बोल वो अपनी इस नयी ट्रिप पर निकल चूका था. न जाने क्या क्या होने वाला था उसके साथ!? वैसे hi... इतनी रुशैद हो चुकी थी उसकी लाइफ. दिल्ली में उसके लिए किसी स्थिति उसका इंतज़ार कर रही थी, ये किसी को नहीं पता था.

कुछ चाँद पालो में hi वीर एयरपोर्ट पहुँच चूका था. इस बीच रास्ते में उसने पारी से हव्कये के बारे में भी कई डिटेल्स जानी...

हव्कये उससे लउकीली मिली थी. वर्ण डायमंड टियर स्किल का इतनी आसानी से मिलना बोहत hi रेयर चांस माना जाता है.

उससे पता लगा की उसका एआईएम कभी नहीं चूकेगा. आईटी विल बे परफेक्ट.

फिलहाल के लिए तोह वीर को ये स्किल इतनी पावरफुल लगी की उसने ये भी सोचा की वो इसको एब्यूज भी कर सकता है. क्युकी सिस्टम ने उससे कोई डेमेरिट्स नहीं बताये थे. पर...

क्या हव्कये वाक़ई अबूसाबले थी!? या फिर...!?

कुछ और भी सचाई थी? ये तोह समय hi बताने वाला था.

जब वीर एयरपोर्ट पर पहुचा तोह उससे सुहाना और सोनिआ दोनों hi साइड में एक जगह कड़ी हुई नज़र आयी.

सुहाना (स्माइल्स) : एंड he's हेरे...! वेट!!!! हँ???


सोनिआ~





सोनिआ जो की एक कासुअल ऑउटफिट में थी, पलट के वीर को देख इतनी सुरप्रीसेड थी की उसका चेहरा hi बतला रहा था.

सोनिआ : V-Veer!????? हँ???

दोनों वीर का चेहरा देख के शॉकेड सी थी. इतना बदलाव जो नज़र आ रहा था उसके चेहरे में.

वीर : Y-Yeah!?

सोनिआ : तुम यहाँ क्या कर रहे हो... No वेट! व्हाट थे हेलल दी? तोह आप वीर की बात कर रही थी? He's थे ओने? जो हमारे साथ आ रहा है?

सुहाना : वेल यस! क्यों? इसमें क्या प्रॉब्लम है भला?

सोनिआ : अरे पर... क्यूँउउउउउउ?? वीर को क्यों??? में आलरेडी उससे इतना परेशां कर चुकी हु एंड नाउ you're ड्रॉग्गिंग हिम ईंटो थिस?

सुहाना (स्माइल्स) : चिल बहना चिल! वेल, कन्सिडरिंग हाउ गुड योर फ्रेंड सर्किल इस... वीर एक परफेक्ट चॉइस है. है की नहीं?

सुहाना के बोल कड़वे ज़रूर थे पर जैसे सीधा सोनिआ के दिल पर जा के लगे.

सोनिआ : ुघ्हहह!

और वो चुप्प हो गयी.

वाक़ई!

सुहाना की हर्र बात सच थी. सोनिआ का फ्रेंड सर्किल जो था. वो था न के बराबर. पुष्कर उसका चाइल्डहुड फ्रेंड इस दुनिया से जा चूका था. और बाकी जो 2 फ्रेंड्स थे उनको शायद दोनों hi बहनो ने कंसीडर नहीं किया.

वो अपना सर्र झुकाये बस वीर और सुहाना से नज़रे चुराने लगी.

वीर : उम्...!?

सुहाना : अहह! राइट! तुम पासपोर्ट लाये?

वीर (नॉड्स) : हां ऑफ़ कोर्स!

"पफ्फफ्टटटटट हहहहहहहहह~"

और अगले hi पल सुहाना वही जोरर जोरर से ठहाके लगा के हस्सन लगी.

वीर : ????

सोनिआ : ????

सुहाना : हे एक्चुअली ब्रौघत.... हाहाहाःहाहा~

वो अपना पेट पकड़ के हिस्से जा रही थी. और वीर और सोनिआ दोनों hi उससे प्रश्न भरी नज़रो से घर रहे थे. खासकर वीर.

'Wtf? She's गॉन माध और व्हाट?'

सुहाना : हाहाहाहाहा~ कैन यू इमेजिन!? कैन यू इमेजिन सोनू??? ये लड़का... हाहाहाहा~ ये पासपोर्ट लाया है ट्रेवल करने के लिए. वो भी मुंबई तो दिल्ली... हाहाहाहाहा~

जब सुहाना की बात सोनिआ ने सुनी तोह वो हैरत में वीर को देखि और अगले hi पल...

सोनिआ (चुकलेस) : फुफु~

हलकी सी हस्सी उसके मुँह से भी चूत hi गयी. वीर को ज़्यादा बुरा न लगे इसलिए वो खुद को कण्ट्रोल करने लगी पर फिर भी... हलकी सी मुस्कान अभी भी उसके चेहरे पर बरक़रार थी.

'फुक्कक्कक्ककककक! व्हाट थे हेलल???'

[Passport ko lekar kuch chakkar hai Master!]

जब दोनों hi बहनो का हस्सना बंद हुआ तोह फाइनली सोनिआ वीर के करीब आयी और प्यारी सी आवाज़ में उससे समझायी...

सोनिआ (स्माइल्स) : वीर! डोमेस्टिक फ्लाइट्स में पासपोर्ट की कोई ज़रुरत नहीं पड़ती है... केवल ईद की hi ज़रुरत पड़ती है. तुम्हारा अभी का पासपोर्ट केवल ईद प्रूफ के लिए hi काम आएगा... बिकॉज़ हम डोमेस्टिक hi ट्रेवल कर रहे है.

'फुसक्कक्ककककक ोुउउउउ सुहानाआआ!!!'

सोनिआ का जवाब सुन्न, वीर के मैं में यही निकला बस.

'पारी! तुमने मुझे कुछ क्यों नहीं बताया!?'

[Master! I only know what you know. Mein iske alaawa aur kese jaankaari de sakti hu? It's not possible right now.]

'ारररह्ह्ह! राइट! में भूल गया था! बूत ये सुहाना. शी दीद आईटी ों पर्पस. सोनिआ जी के सामने मेरी बेइज़्ज़ती करना चाहती है ये. ी सी... ीेट का जवाब पत्थर से देना आता है मुझे...'

सोनिआ : क्या तुम्हे नहीं पता था वीर!?

वीर : N-No! मेने कभी ट्रेवल नहीं किया फ्लाइट में. मुझे एहम... इसके बारे में कोई नॉलेज नहीं था.

सोनिआ (स्माइल्स) : It's okay!!! पहली बार होता है वीर.

पता नहीं क्यों, पर सोनिआ को मुस्कान देख, वीर अपने आप शांत सा पद गया.

वीर (ब्लशेस) : Th-Thank यू!

सोनिआ (स्माइल्स) : Don't मेंशन आईटी.

वीर : आप दिखी नहीं... में... आपके घर आया था दो बार...

सोनिआ (सुरप्रीसेड) : यू चामे!?????

और वो पलट के सुहाना को घर के देखती है जिसने उस से ये बात छिपाई हुई थी.

सुहाना : एहम! वेल! तुम बिजी थी तोह मेने तुम्हे नहीं बताया!

सोनिआ : रियली डीई!????

सुहाना : ुघ्घ! अब ठीक है न... Let's जो!! फ्लाइट का टाइम हो रहा है.

वीर : वेट! मेरी टिकट!? में कैसे...

सोनिआ (स्माइल्स) : Don't वोर्री! हम चारो की टिकट आलरेडी अरेंज्ड है.

वीर : हँ?? बूत... आपने कहा न... वो ईद लगती है... एंड... मेरी ईद तोह मेरे पास है... और...

सोनिआ (स्माइल्स) : ी हैवे आल योर डिटेल्स वीर!

वीर : H-Huh!??

वीर इस से पहले कुछ कह पाटा तभी उससे अपने बगल से एक आवाज़ सुनाई दी,

"गुड आफ्टरनून सर!"

'आआआआ....'

अचानक hi बगल से एक सूट पहना हुआ आदमी उसके सामने था.

प्रकाश!

सोनिआ का पर्सनल असिस्टेंट जिससे वो अपना P.A काम अंकल ज़्यादा मानती थी.

'T-This मन... सकारेद थे सहित ोुट्टा में...'

[Ye kab prakat hua!? Even I couldn't see.]

वीर : G-Good आफ्टरनून ः~

सुहाना : let's गोऊ यार... कितना टाइम लगाओगे...!?? और ये... ये तुम्हारे चेहरे को क्या हुआ!? वीर!?

सोनिआ : रिघटत!!!??

वीर : एहम... कुछ भी तोह नहीं!? में ठण्ड में गोरा होने लगता हु...

सुहाना : व्हाट थे हेलल?

***

कुछ hi देरर बाद सभी फ्लाइट में अपनी सीट्स पर विराजमान थे.

सुहाना का मज़ाक वीर भुला नहीं था. और उसने मैं में ये नोट लिख लिया था की सुहाना के साथ भी एक प्रैंक करना है.

इस दौरान सोनिआ वीर को फ्लाइट्स से रिलेटेड साड़ी बातें समझा रही थी. क्युकी वो उसके बगल से जो बैठी हुई थी. वही सुहाना विंडो सीट के पास बैठी हुई अपने hi ख्यालो में घूम थी.

सोनिआ : वीर! तुमने पूछा वीसा किस काम आता है राइट?

वीर : Y-Yeah!

सोनिआ : वेल, जब आप फॉरेन कंट्री में एंट्री लेना चाहते हो तोह ये ज़रूरी होता है वीर. ये भी अलग अलग टाइप्स के होते है. किसी दिन... तुम्हे पूरा डिटेल्स में समझाउंगी... ी मैं... िफ़ यू वांट.

वीर : यह! सूरे! N-No प्रॉब्लम!

***

कुछ दिन पहले...

दिल्ली...

होटल xxxxxxxxxxxx...

एक आदमी फ्लोरल शर्ट पहने और ट्रॉउज़र पहने बैठा हुआ था. सामने उसके बड़ी सी डाइनिंग टेबल पे धेरर साड़ी अलग अलग खाने की डिशेस राखी हुई थी. और स्पून, फोर्क हाथो में लिए वो अपना लंच कर रहा था जब अचानक hi एक आदमी भागता हुआ कमरे में एंटर किया.

आदमी : D-Dadaaaa....!!

दादा : ??

इसके पहले की वो आदमी कुछ बोल पाटा. एक दूसरा आदमी जो गन लिए साइड में खड़ा था उसने अपनी गन को अंदर आये आदमी के ऊपर तानते हुए कहा,

आदमी : पता है न ये दादा के खाना का समय है!? हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी अंदर घुसने की?

आदमी : स्टीव भाई! वो... वो बात hi कुछ ऐसी है. बोहत इम्पोर्टेन्ट बात है. और बात बोहत hi दुःख भरी है...

स्टीव : बोलो जल्दी!

और स्टीव पीछे हो गया.

अंदर आया हुआ आदमी दररते हुए डाइनिंग टेबल के पास आया और अपनी टोपी निकाल हाथ जोड़ के खड़ा हो गया.

आदमी : दादा... दादा... बोहत बुरी खबर है.

दादा : सुना मेने! कहो!

आदमी : W-Wo.... *गुलप्स*

दादा : ???

आदमी (शिवेर्स) : A-Aatish... आतिश भौ नहीं रहे. कल hi... M-Mujhe पता चला की A-Aatish भौ को बोहत hi बुरी तरह से मौत के घात उतारा है किसी ने... उनके अपने... अपने पालतू जानवर क्लच के हाथो... किसी ने...

बस!

उसका इतना sunn'na था की चेयर पर बैठे दादा ने साइड में रखे कांच के गिलास को जोरर से भींचते हुए सामने की ऑर्डर फक्क दिया.

*क्रायष्ठहह*

आदमी : *गुलप्स*

स्टीव : दादा...!

दादा : डिटेल्स...

स्टीव : जी दादा...

और बस एक शब्द बोल, दादा उठाते हुए अपना खाना वही चोरर बाहर निकल गया.

स्टीव को जैसे पता था की क्या करना है.

***

इधर वीर और बाकी सभी बस कुछ घंटे की दुरी तय करने के बाद दिल्ली पहुँच चुके थे.

वीर : तोह!? कहा चलना है हमे!?

सुहाना : हम्म? ओह्ह्ह!

वीर : ....

सुहाना (स्माइल्स) : होटल में...!

वीर : आपने तोह कहा था की कोई इनोवेटिव फंक्शन है. है न?

सुहाना (स्माइल्स) : वो तोह कल है. आज शाम को... हमे होटल में जाना है. There's ा पार्टी. मेरी प्रजेंस वह ज़रूरी है. सो पहले वह. काफी साड़ी कम्पनीज के बड़े बड़े लोग आएंगे... सो ड्रेस वेल okay!?

वीर : ुघठ!

सुहाना : अब ये मत कहना की तुम सूट वगैरह नहीं लाये!??

वीर : ी... ी रियली didn't...

सुहाना (शॉकेड) : व्हाट थे हेलल??? अरे मेने जो डेबिट कार्ड दिया था उसका क्या किया तुमने?

वीर : वो? वो रखा है मेरे पास.

सुहाना : और तुमने उसमे से अपने लिए कुछ नहीं खरीदा???????

वीर : फिलहाल तोह ऐसा कुछ नहीं खरीदा...

वीर की बात सुन्न सुहाना अपना सर्र पकड़ ली. और तब hi डीडे हुआ, की सबसे पहले वो शॉपिंग पर जाएंगी और वीर के लिए एक सूट लेंगी.

और यही हुआ...

एक टुक्सेडो वीर के लिए सोनिआ ने पसंद किया. वीर को थोड़ा ावक्वार्ड लग रहा था. ये सब कुछ वो पहली बार pehn'ne वाला था. थोड़ा नर्वस भी था वो. आज से पहले उसने कभी भी इतनी बड़ी होटल में अपने कदम नहीं रखे थे. न जाने कितने बड़े बड़े लोग मौजूद होंगे वह. क्या वो वाक़ई अपने आप को संभाल के रख पाएगा!?

शाम का समय था और होटल अंदर से लाइट्स से जगमगा रहा था. बड़े बड़े लोग हाथो में वाइन का गिलास लिए एक दूसरे से बात कर रहे थे.

वीर ावक्वार्डली सोनिआ और सुहाना के बगल से खड़ा हुआ था. ये कहना गलत नहीं होगा की उसके पसीने चूत रहे थे इस वक़्त. क्युकी दोनों hi सोनिआ और सुहाना आइटम बम लग रही थी.

और दोनों hi वीर के अगल बगल से लग के कड़ी हुई थी. वीर को जहा प्राउड तोह फील हो hi रहा था पर साथ hi साथ उतना hi नर्वस भी था वह...

'ये सभी लोग... मुझे ऐसे क्यों देख रहे है? पारी? मेरे मुँह पे कुछ लगा तोह नहीं है न!?'

[Haha~ You are the public enemy number 1.]

'???'

[Sonia ke kayi saare suitors hai. There's no way usse dekh ke ameero ke shehzaade usse nahi pehchaanenge. Aur wo aapke bagal se khadi hui hai. So... You are their enemy! Haha~]

'फुककककक!'

सुहाना : वेल! में किसी से मिल के आती हु. यू तवो एन्जॉय!

और सुहाना वह से जा चुकी थी.

सोनिआ : और गयी वो... *शिघ्स*

वीर : आपको पसंद नहीं पार्टीज!?

सोनिआ : हम्म? पसंद है वीर! पर... नॉट थी टाइप्स ऑफ़ पार्टीज... इन् पार्टीज में... फ्रीडम छीन जाता है.

वीर : ???

और जैसे सोनिआ की बात सच हो गयी...

क्युकी अगले hi पल, एक बड़ा hi रईस सा बाँदा पूरा महंगे सूट में सजा हुआ उनके करीब आया. हाथो में एक वाइन का गिलास था और नज़रो में पहले hi घमंड नज़र आ रहा था.

गाए : िफ़ आईटी isn't थे ओने एंड ओनली, थे मोस्ट ब्यूटीफुल, मिस सोनिआ!??

और करीब आके वो वीर को साइड कर सोनिआ के सामने खड़ा हो गया.

जैसे मानो वीर उसके सामने किसी वेटर के सामान था.

[Screw this guy....]

अपनी बॉहे सिकोड़े वीर चुप चाप खड़ा रहा. उसने कुछ कहना ज़रूरी नहीं समझा...

सोनिआ ने ये नोटिस किया और वो फौरन hi दो कदम पीछे हुई और वीर के बगल से कड़ी होक उसके कंधे पर अपना एक हाथ रख दी,

गाए : हम्म??

सोनिआ (स्माइल्स) : नीस तो मीट यू मिस्टर रोहन!

रोहन : क्या में पूछ सकता हु? Who's थिस?

सोनिआ : He's विथ में... ओने ऑफ़ माय प्रेसियस फ्रेंड!

सोनिआ ने मुस्कुराते हुए कहा तोह रोहन को मानो ये बात कुछ हज़म सी नहीं हुई. उसने वीर को ऊपर से नीचे देखा और धीरे से दबे होंठो से बुदबुदाया,

"जस्ट ा 'गुड फॉर नथिंग' हम्फ!"

वीर (फ्रोंस) : यू साइड समथिंग...!?

रोहन कुछ कहता की तभी पीछे से तालिया बजने की आवाज़ आने लगी और न चाहते हुए भी सभी की नज़रे पीछे की ऑर्डर चली गयी.

और क्यों न जाती!? पीछे से एक बेहद hi सुन्दर हुस्न की मल्लिका जो आ रही थी.

पर जैसे hi वीर और सोनिआ की नज़रे उस लड़की पर पड़ी दोनों की hi नज़रे हैरानी के मारे फैलती चली गयी.

'It's... It's हेर...!????'

वीर को तोह जैसे झटका सा लगा था.

वो लड़की... जिसके ऊपर सभी की नज़रे थी. उसने जैसे hi

वीर और सोनिआ की तरफ देखा उसके कदम वही ठहर गए.






और सोनिआ और उस लड़की की आँखें एक दूसरे से जा मिली...

सोनिआ उससे देख के पूरी तरह से स्तब्ध थी. उससे बिलकुल भी ये उम्मीद नहीं थी. उस लड़की के यहाँ होने की...

उसके होंठ खुले और बस धीरे से एक hi शब्द निकला...,

"क.... करा!?"

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आज के लिए इतना hi गाइस!

Don't फॉरगेट तो लिखे! 😁

धन्यवाद!
 
अपडेट - 42 ~ स्ट्रेंज रिलेशनशिप

अब तक...

वो लड़की... जिसके ऊपर सभी की नज़रे थी. उसने जैसे hi

वीर और सोनिआ की तरफ देखा उसके कदम वही ठहर गए.

और सोनिआ और उस लड़की की आँखें एक दूसरे से जा मिली...

सोनिआ उससे देख के पूरी तरह से स्तब्ध थी. उससे बिलकुल भी ये उम्मीद नहीं थी. उस लड़की के यहाँ होने की...

उसके होंठ खुले और बस धीरे से एक hi शब्द निकला...,

"क.... करा!?"


अब आगे...

करा की नज़रे और सोनिआ की नज़रे दोनों hi आपस में भिड़ी हुई थी, और न जाने कितनी अनगिनत बातें उन् दोनों की निगाहें एक दूसरे से कह गयी.

वीर को करा ने अभी तक नहीं देखा था. उसका पूरा ध्यान सोनिआ पर hi था. और इसी मौके का फायदा उठाते हुए वीर धीरे धीरे कुछ कदम पीछे की ऑर्डर लिया और पलट के वो वह से निकलने लगा.

'फुककककक... ये तोह वही है... शीट्ट्ट्ट!!! क्लब वाली... पारी! रेमेम्बेर??'

[Yes Master! But aap bhaag kyu rahe hai?]

'तोह क्या करू? ी don't वांट तो फेस हेर. तुम्हे पता है न मेने उसके साथ क्या किया था? और ऊपर से... सुहाना ने कहा था न. बोहत बड़े बड़े लोग आएँगे. इसका मतलब... She's डेफिनिटेली नॉट ा नार्मल पर्सन.'

[But aisa thodi hai ki wo aapko kha jaegi.]

'न्यू... खाएगी नहीं पर यदि गलती से भी उसने सोनिआ जी के सामने कुछ कह दिया तोह..... शीट्ट्ट्ट! वो दोनों एक दूसरे को जानती है. कही उसने मेरी बात बता दी तोह?'

[Ohhhhh!!!]

'में ऐसे भागना नहीं चाहता पर अभी सिचुएशन hi ऐसी है.'

और वीर लोगो के अगल बगल से निकल दूर जाने लगा.

इधर करा धीरे धीरे सीढ़ियों से नीचे उत्तरी, उसका और hi ऐसा था जिसके चलते सभी उसके सामने खड़े लोग उससे निकलने के लिए जगह देने लगे और साइड हट गए.

एकदम से जैसे सब शांत पद गए थे. बस उन् हाई हील्स की hi आवाज़ आ रही थी जो सोनिआ की तरफ बढ़ रही थी.

वो आते हुए सीधे सोनिआ के सामने कड़ी हुई. दो इतनी ख़ूबसूरत लड़किया आमने सामने कड़ी हुई थी और आस पास के सभी लोगो की नज़रे उन् दोनों पर hi थी.

सब का ध्यान अपने ऊपर केंद्रित करवा के राखी हुई थी करा.

और फाइनली, सोनिआ ने इस ख़ामोशी को दूर किया.

सोनिआ (फ्रोंस) : करा...!! ी थॉट यू वेरे इन अमेरिका...!?

करा : प्रकाश सर अभी भी सभी को इन्वेस्टीगेट करने का काम करते है? तेल्ल हिम तो गेट हिज न्यूज़ अपडेटेड थें.

सोनिआ : *फ्रोंस*

करा : में अमेरिका से कल hi यहाँ आ गयी थी. व्हाट अबाउट यू? ी थॉट... सिर्फ सुहाना hi दिखेगी यहाँ पे...

हलाकि करा उम्र में सोनिआ जितनी hi थी पर...

उसके बावजूद वो सुहाना को उसके नाम से hi बुलाती थी.

सोनिआ : में उनके साथ चली आयी. अन्य प्रोब्लेम्स!?

करा : That's सो नॉट लिखे यू...

सोनिआ (स्माइल्स) : बिकॉज़ I'm नॉट अलोन.

करा : ???

करा को सोनिआ का ये जवाब कुछ अटपटा सा लगा और वो प्रश्न भरी नज़रो से उससे देखनी लगी. जैसे मानो उसके हाव भाव देख के सच jaan'ne का प्रयास कर रही हो. पर सोनिआ की मुस्कान उससे और भी चिंतन में डूबने के लिए विवश कर रही थी.

उसका सोचना, इस बार काम न आया. वो नहीं जान पा रही थी की आखिर सोनिआ क्या कहना चाह रही थी. ऐसा पहला कभी नहीं हुआ था. वो तोह सोनिआ के सारे एक्शन्स से वाक़िफ़ रहती थी. फिर आज क्यों...!?

क्यों वही मुस्कान उसकी समझ में नहीं आ रही थी. आखिर उस मुस्कान के पीछे का कारण क्या था?

इन् दोनों को अकेला चोरर इधर वीर निकलते हुए बाहर जाने hi वाला था जब अचानक hi उसकी कलाई किसी ने पकड़ी और उससे खींच के पलटा दिया.

वीर : व्हाट थे...!? हँ!?

उसका हाथ थामे सुहाना उससे कन्फूसिओं में देख रही थी.

सुहाना : किधर चले तुम? सोनू कहा है? मेने तुम्हे कहा था न उसके साथ रहने के लिए...

वीर : वो... वो किसी से बात कर रही है शायद.

सुहाना : हँ? किस से?

वीर : उम्... उधर देखिये...

जब वीर की नज़रो को सुहाना ने फॉलो किआ और जो नज़ारा उसने देखा, तोह उससे देख उसकी खुद की hi आँखें हैरानी के मारे फेल गयी.

सुहाना : ी कनेव आईटी... इतनी बड़ी पार्टी हो... और ये यहाँ न आये... भला ऐसा कैसे हो सकता है?

वीर : A-Aap उन्हें जानती हो?

सुहाना : जानती हु? अरे... बोहत अच्छे से जानती हु... हम्फ!

वीर : ??

सुहाना : मेने तुम्हे बताया था न...!?

वीर : क्या?

सुहाना : सोनिआ हद थ्री चाइल्डहुड फ्रेंड्स. एक पुष्कर जो अब इस दुनिया में नहीं रहा... एंड तेरे वेरे तवो मोरे...

वीर : हम्म!

सुहाना : वेल... एंड she's ओने ऑफ़ थम. करा!

'करा... एक सुन्दर नाम...'

[I agree Master!]

सुहाना : चलो अब...

और सुहाना वीर को खींचते हुए सोनिआ और करा के पास ले जाने लगी.

वीर : व्हाआटट?? No no no no.... M-Mujhe बाहर जाना है... वेट!

सुहाना : उघ!!! बाहर क्यों जाना है? व्हाट थे हेलल? अंदर हो रहा है सब कुछ...

वीर : वो... हाँ! मुझे वाशरूम जाना है...

सुहाना : हां तोह वाशरूम अंदर है अब चलो... और वाशरूम बाद में जाना... पहले तुम मेरे साथ चलो जल्दी...

'फुसक्ककककककककक...'

सुहाना वीर को घसीट कर ले जाने लगी. न चाहते हुए भी वीर को अब तोह जाना hi था.

नर्वस्नेस तोह इतनी हो रही थी अब उससे की पूछो मत. क्या होगा जब करा उससे देखेगी और उससे पता चलेगा...!? की वीर वही बाँदा है जिसने उसकी विर्जिनिटी ली थी.

'वेट! मेने उससे नंबर चोर्रा था अपना... एंड शी didn't कॉल में... कही वो भूल तोह नहीं गयी!? नहीं! थें व्हाई...!? क्या वो मुझे पहचान पाएगी!? ऑब्वियस्ली! No वेट... वो नशे में भी तोह थी... शीट्ट्ट्ट!!!!'

[Ab jo hoye so hoye Master! We'll face it. No matter what aap ko ab peeche nahi hatna hai. You are the Alpha Master. Be the dominator.]

'एअआहहह! राइट!'

और कुछ hi पालो में वीर सुहाना के संग सोनिआ और करा के सामने था.

जैसे hi करा ने दोनों को आते देखा, तोह सबसे पहले तोह उसकी नज़र सुहाना पे गयी और उसके चेहरे पे संतुष्टि के भाव आये. जैसे मानो वो इसी चीज़ की उम्मीद में थी.

करा (मैं में) : अस एक्सपेक्टेड...

पर जैसे hi उसकी नज़रे सुहाना से हट बगल में खड़े वीर पर गयी तोह वो अपनी बॉहे सिकोड़े उससे देखने लगी.

उसने देखा, की सुहाना के हाथ वीर की बाज़ू को थामे हुए थे.

करा : हम्म?

फिर अगले hi पल उससे जैसे वीर का चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लगा. और धीरे धीरे जैसे साड़ी पिक्चर क्लियर होती चली गयी.

उसकी आँखें सरप्राइज के चलते बड़ी होती चली गयी. और मुँह हल्का सा खुल गया.

उसका ये रिएक्शन सोनिआ की नज़रो से बच के नहीं जा पाया.

शी नोटिसद.

और सुहाना ने भी ये नोटिस किया.

करा (मैं में) : It's हिम...!!!!! बूत... हाउ!? इतना कैसे चेंज्ड...!?

'फुकककक! गया में... उससे याद है... उससे डेफिनिटेली याद है...'

और अगले hi पल, वो वीर की तरफ बढ़ी और उसके समीप आयी.

उसके होंठ कुछ कहने के लिए खुले...

'फुक्कखकक...!!'

पर अचानक hi वो होंठ बंद हो गए. और उसकी नज़रे भी वीर से हट सुहाना की तरफ जा पहुची...

करा : ी कनेव यू वोउल्ड के...

सुहाना : हम्फ! केवल हस्बैंड बिजी थे... इसलिए...

करा : ऑफ़ कोर्स! ी क्नोव! ी क्नोव आल थे डिटेल्स...

सुहाना : *फ्रोंस*

करा : एंड... Who's थिस जेंटलमैन...!?

'हँ!? वेट! ये भूल गयी क्या? No no no... उससे याद है डेफिनिटेली. इस शी ट्राइंग तो सेव में? अनजान बन्न रही है!? हम्म!'

सुहाना : वेल... ये... एहम! वीर... मीट हेर. She's

करा. Sonu's चाइल्डहुड फ्रेंड. एंड उम्... He's वीर... सोनू का फ्रेंड.

करा : वीर हँ....!? सोनिआ मेड ा फ्रेंड!? इंटरेस्टिंग!

वीर : N-Nice तो मीट यू...!

जब वीर ने अपना हाथ आगे बढ़ाया तोह करा के चेहरे पर एक मुस्कान थी. हलकी सी hi थी पर थी ज़रूर.

और ये देख थोड़ी दूर खड़े दो आदमी आपस में बातें करने लगे.

"अबे जससीई....!"

जस्सी : हम्म! देख रहा हु...

रघु : वहीईई!!

जस्सी : मिस के होंठो पर मुस्कान आयी थी. भले hi कुछ पल के लिए थी. पर मेने देखा...

रघु : हाँ! अबे एक मिनट... अबे ये तोह वही है न? मेरी आँखें कभी धोका नहीं खा सकती... अबे जिसने मिस को वह क्लब से बचाया था...

जस्सी : हम्म? अरे हाँ... वाक़ई! ये वही है.

रघु : ये यहाँ क्या कर रहा है? नहीं... उससे से भी बड़ा सवाल. मिस के चेहरे पर उससे देख मुस्कान क्यों है...!?

जस्सी : अहह! अब समझ आया... ज़ाहिर सी बात है उनके चेहरे पर स्माइल है. उन्हें याद है की उन्हें किसने बचाया था. हम ने hi तोह बाद में उन्हें बताया था न... क्या कुछ हुआ था क्लब में.

रघु : ओह्ह्ह्हह!

जस्सी : काम से काम उनकी स्माइल तोह देखने मिली...

रघु (स्माइल्स) : हम्म... हम्म...

ये दोनों करा के वही बोडीगार्ड्स थे जिनसे वीर की मुलाक़ात क्लब में हुई थी.

इधर करा ने वीर का हाथ थामा. उन् हाथो को थामते hi वीर को करा की मखमली त्वचा का जब अनुभव हुआ तोह अंदर hi अंदर उसका शरीर गरमाने लगा.

वीर ने जब पास से फिरसे उसी चेहरे को देखा तोह ये कहना गलत नहीं था की उससे शर्म आणि शुरू हो चुकी थी.

करा थी hi इतनी सुन्दर. ऊपर से... वो उसके इतने क़रीब थी की वीर का नज़रे मिलाना hi मुश्किल हो रहा था.

पर वीर भी अब पहले की तरह नहीं था. उसने करा की आँखों में देखा. वो इस बात से कन्फ्यूज्ड था की आखिर करा ने उसका सच उजागर क्यों नहीं किया!?

इतनी बड़ी बात... और वो वीर को ऐसे hi जाने दे रही थी? इतनी बड़ी पर्सनालिटी... ऐसे में तोह उससे पहले hi वीर की खटिया कर देनी चाहिए थी. पर उसके बावजूद न तोह एक कॉल आया उसका... और न hi.. उसने कुछ किया.

भला क्यों!? कोई लड़की कैसे अपनी विर्जिनिटी को लेके इतनी इंसेंसिटीवे रह सकती है? ये तोह हर्र लड़की के लिए बोहत इम्पोर्टेन्ट मटर होता है. नॉट तो मेंशन की करा एक बोहत बड़ी पर्सनालिटी थी. फिर उसके लिए तोह ये और भी इम्पोर्टेन्ट होना चाहिए था.

थें क्यों!? वीर जैसे साधारण से लड़के को वो बचा रही थी? यही सवाल वीर के मैं में चल रहे थे. पर उससे दूर दूर तक इन् प्रश्नो का उत्तर दिखाई नहीं दे रहा था.

'जस्ट व्हाई...!?'

[Wo ye jaan bujh ke kar rahi hai Master. Kaaran toh mujhe bhi nahi pata...]

'वेट! ी कैन चेक हेर...'

'चेक'

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और ये पढ़ते hi एक ज़ोरदार झटका लगा वीर को.

'व्हाट थे फ़क!?'

पारी लेवल 4 पर थी. उसके बावजूद ये नोटिफिकेशन जैसे वीर को और दुविधा में दाल चूका था. क्या स्टेटस होगा करा का जब पारी लेवल 4 पे भी नहीं देख पायी उसके स्टेटस को.

वीर ने अगले hi पल सोनिआ को देखा और...

'चेक!'

[Name - Sonia


आगे - 26 यरस

बायो - सोनिआ! एक बोहत hi टैलेंटेड, ख़ूबसूरत और मेहनती लड़की है. एक स्ट्रांग इंडिपेंडेंट बिज़नेस वुमन. सुहाना उससे बोहत प्रिय है. 3 चाइल्डहुड फ्रेंड्स थे उसके~ पुष्कर, करा, और ******. कुछ उलझनों में रहती है. करा इस हेर रोले मॉडल.

फवौराबिलिटी - 39

रिलेशनशिप - क्लोज फॅमिलियर्स]

सोनिआ का पूरा डाटा उसके सामने खुला हुआ था.

और एक कोशिश फिरसे कर वीर ने फिरसे करा को स्कैन किआ. आखिर सोनिआ का स्टेटस भी वो अब पढ़ने में सक्षम था.

पर...

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'शीट्ट्ट्ट!!!'

वीर चाह कर भी, करा का स्टेटस नहीं देख पा रहा था.

'जस्ट हु इस शी...!?'

अब इसका जवाब तोह उससे सोनिआ के थ्रू यु hi मिल जाता. पर सिस्टम द्वारा दिया गया डिस्क्रिप्शन एक अलग hi चीज़ होती है अपने आप में.

"नीस तो मीट यू.... वीर!"

करा के शब्द जैसे उससे अपनी सोच से बाहर लाये. वो पीछे हटी और एक अंतिम नज़र वीर पर दाल वो यु hi वह से जाने लगी.

तोह रोहन जो अब तक इस पूरे नज़ारे को देख रहा था वो अपनी आस लिए भागता हुआ करा के बगल में आया और बड़ी hi रेस्पेक्ट के साथ करा से कुछ कहना चाहा...

पर करा ने उससे ऐसे ट्रीट किया जैसे मानो रोहन केवल एक हवा को झोका हो. वो बिना रुके, बिना किसी से बात किये सीधे hi एक टेबल की ऑर्डर जाने लगी. वो अपनी सीट पर बैठी तोह अगले hi पल एक और बिज़नेस अत्तिरे में एक प्रोफेशनल लेडी उसके बगल में आ कर बैठ गयी.

इधर रोहन बेचारे की गांड जलना स्वाभाविक था. वो कहते है न, जो जैसा करता है वो वैसा hi भरता है.

जो उसने वीर के साथ किया था. वैसा hi रवैय्या उससे करा से मिला. और ये सभी वह खड़े हुए लोगो ने देखा. रोहन ने जैसे hi देखा की वीर उससे देख के मुस्कुरा रहा है, तोह उसकी गांड और भी जल गयी. और सुलगी गांड लिए वो अपने डाट मीस्ते हुए वह से निकल गया.

[Haha~ Such a jerk. That's what you get for disrespecting my Master!]

वीर : सोनिआ जी... आपकी फ्रेंड... यु hi निकल गयी...??

सुहाना (शिघ्स) : ये तोह हर्र बार का है.

वीर : क्या मतलब!?

सुहाना : Let's मूव तो आवर टेबल... डिनर स्टार्ट हो चूका है. वही समझाती हु.

और सोनिआ और वीर को लिए सुहाना अपनी टेबल की सीट में विराजमान थी.

उस से कुछ hi दुरी पर करा की टेबल थी जहा केवल वो और शायद उसकी P.A बैठी हुई थी.

और हर्र एक न एक पल, करा की नज़रे वीर से भिड़ती. नज़रो के यु मिलाप से वीर अपनी निगाहें हटाने पर मजबूर हो जाता. पर ये नैनो के खेल में केवल वही नहीं शामिल था.

वीर के सामने बैठी सोनिआ, उससे और करा को घर घर को साइड ऑय कर के देख रही थी. हर्र एक एक्शन उसकी नज़रे पकड़ रही थी.

और पता नहीं क्यों... एक अजीब सी बेचैनी सी हो रही थी उससे करा के यु इस तरह से वीर को देखने पर...

सोनिआ (मैं में) : जस्ट व्हाट इस गोइंग ों बिटवीन थम!? K-Kya करा...?? वीर को जानती है...!? दोनों ऐसे बार बार क्यों देख रहे है... थिस इस सो ... उघ! It's मेकिंग में अन्सियस...

सुहाना : हां! तोह... बात ऐसी है की...

सोनिआ : ये बताना ज़रूरी है...!?

सुहाना : हम्म? क्यों? क्या तुम्हे वीर पे भरोसा नहीं..!?

सोनिआ : ऐसी बात नहीं है. ी ट्रस्ट हिम... It's जस्ट...

सुहाना : तोह क्या दिक्कत है...!? वेल, वो हमारे साथ है सो there's no हरम इन टेलिंग हिम.

वीर : !??

सुहाना : दरअसल... जब सोनू छोटी थी. तब से hi उसके 3 ख़ास दोस्त थे.

वीर : ओह्ह्ह!

सुहाना : और तीनो hi वेल... हमारी तरह रिच फॅमिली को बिलोंग करते है. ी मैं... पुष्कर अब नहीं रहा... बूत करा और नट अभी भी है.

वीर : नट!?

सुहाना : हम्म! नट... मतलब नतालया. She's ा सिंगर. वो यहाँ नहीं रहती अब. फॉरेन में है. सोनू ने उसके साथ भी अपना टच खो दिया.

वीर : उसके साथ मतलब!?

सुहाना (शिघ्स) : करा से भी... सोनू की पटरी नहीं खाती... ी don't क्नोव उस करा को अचानक क्या हुआ है की वो बस ऐसे बेहवे करती है कैसे सोनू उसकी बचपन की दोस्त नहीं बस एक स्ट्रेंजर है.

वीर : ऐसा क्यों भला?

सुहाना : ी don't क्नोव. वो पहले ऐसी नहीं थी. ी हेट तो से आईटी... बूत... She's दमन इंटेलीजेंट. ी मैं... वो बोहत hi ज़्यादा टैलेंटेड है. एक अलग hi लेवल पे है वो. सोनू से भी ज़्यादा...

वीर (सुरप्रीसेड) : R-Really!???

'फुकककक! ये सुहाना मुझे दर्रा रही है या बता रही है....!?'

सुहाना : हम्म! बचपन से hi... सोनू उससे अपना रोले मॉडल मानती आयी है. ये कहना गलत नहीं होगा की आज यदि सोनू इस मुकाम पर है तोह उसका बोहत बड़ा कारण करा है.

सुहाना के ऐसा कहने पर सोनिआ का चेहरा अपने आप नीचे उदासी में झुक गया जो वीर देख पा रहा था.

सुहाना : करा और सोनू के बीच बोहत गहरा रिश्ता था. बोहत गहरा. पर अचानक hi... करा फॉरेन शिफ्ट हो गयी थी. उसके बाद सोनू और उसके बीच कई सालो तक मुलाक़ात नहीं हुई. और जब हुई... तोह उसकी पर्सनालिटी कम्प्लीटली बदल चुकी थी.

वीर : ी सी... ऐसा क्या हुआ होगा भला...!?

सुहाना : इसका कोई फायदा नहीं. लाख बार पूछ चुकी है सोनू और में भी... बूत शी रिमेंस इंडिफ्रेंट. वो बस... ी don't क्नोव कहके हमे जवाब दे देती है. न जाने क्या हुआ है.

वीर : बूत... ऐसा कैसे... बात करने से कोई न कोई तोह हल निकलेगा hi...

सुहाना : यू don't अंडरस्टैंड वीर. मामला बोहत पेचीदा है. ट्रस्ट में!

ऐसा क्या हुआ था इन् दो सहेलियों के बीच भला!? जो आज दोनों इतनी गहरी दोस्ती रखने के बाद एक दूसरे से ऐसे पेश आ रही थी जैसे मानो अनजान हो.

सोनिआ का यु मायूसी से भरा चेहरा वीर को कही न कही अंदर से बड़ा hi तंग कर रहा था. उसका दिल खुद बेचैन हुए जा रहा था.

और अगले hi पल सुहाना ने फिर और कुछ बातें उजागर की,

सुहाना : बात सिर्फ इतनी नहीं है. सोनू को इन्फेरियरीत्य काम्प्लेक्स है...

सोनिआ : डीइइइइइइइइ....

सुहाना : शठ! जो सच है वो सच है.

सोनिआ : ुघठ!!!!

वो वीर से नज़रे चुराए एक बार फिर अपना सर्र झुका ली.

सुहाना : यानी की... सोनू अपने आप को करा के सामने तुच्छ समझती है. उससे लगता है की वो कभी भी करा से आगे नहीं निकल पाएगी. हमेशा उस से पीछे hi रहेगी. चाहे वो सुंदरता हो, चाहे इंटेलिजेंस, चाहे लीडरशिप, चाहे रिचनेस, पर्सनालिटी, एवरीथिंग.... यू नाम आईटी. हर्र बार... मेरी सोनू... बेचारी मात खा जाती है.

वीर : अहह! ी सी... की क्यों आप उन्हें अपना रोले मॉडल मानती है...

सुहाना : पर यही हीं भावना सोनू की और बढ़ जाती है जब जब उससे ये रीलीज़ होता है की वो और करा एक hi उम्र की है. फिर भी... लुक ात थे डिफरेंस.

सोनिआ : एंड थैंक यू फॉर अगेन मेकिंग में रीलीज़.

सुहाना : सॉरी सोनू! ी हद तो...

वीर : इसका कोई न कोई सलूशन तोह होगा...

सुहाना : हम्म! पर ये यही ख़तम नहीं होता...

वीर : हँ??

सुहाना : जब जब... सोनू ने कुछ पाना चाहा है... करा वो पहले hi पा चुकी थी.

वीर : ??

सुहाना : बचपन में स्कूल में फर्स्ट आने के लिए म्हणत करती थी सोनू पर टॉप पे हमेशा से करा का नाम होता था. स्पोर्ट्स में रेस में फर्स्ट आने के लिए सोनू प्रैक्टिस करती थी तोह उससे पता चलता था की करा पहले से hi टॉप रैंक होल्डर है. बड़े हुए तोह बिज़नेस में आलरेडी करा अपनी कंपनी को कहा से कहा लेके आ गयी... और सोनू अभी भी उस से बोहत पीछे है... इतना hi नहीं... जिस यूनिवर्सिटी से करा थी, सोनू ने भी वही एडमिशन लिया था, इस आस में की वो इस बार करा को एकेडेमिक्स में पीछे चोर्रेगी...

वीर : थें!?

सुहाना (शिघ्स) : फिरसे मुँह की खानी पड़ी... करा यूनिवर्सिटी की टोपर इन एकेडेमिक्स बानी. दोनों के बीच hi एक ब्रिज बना हुआ है जो इतना लम्बा है की बेचारी मेरी सोनू... बस उससे पार करने के लिए दिन रात म्हणत करती रहती है.

वीर : पर इतनी म्हणत क्यों? सोनिआ जी... आप के पास इतना पैसा है... भले hi करा जी से काम है. पर... आपके पास अपने आप में एक संतुष्टि जनक संपत्ति है. फिर इसमें इतनी म्हणत क्यों!??

सुहाना : वीर! समझो...!

वीर : ??

सुहाना : पहले... सोनू ये सब करती थी बिकॉज़ शी वांटेड तो बीट करा... वो करा से आगे निकलना चाहती थी. तब उससे जलन भी होती थी. पर अब...

वीर : अब!?

सुहाना : अब सोनू उससे हराना चाहती है तो गेट हेर अटेंशन. केवल एक बार उसका ध्यान खींचना चाहती है. अपनी उस पुरानी सबसे क्लोज सहेली का...

सोनिआ : बोहत हुआ दी... स्टॉप आईटी नाउ. प्लीज!

सुहाना : फाइन! यही है ट्रुथ वीर...

वीर : हम्म! It's कॉम्प्लिकेटेड.

सुहाना : एक्साक्ट्ली!

और कुछ देरर में hi डिनर शुरू हो चूका था.

डिनर करने के बाद जब वीर उठने के लिए हुआ तभी उसके करीब एक लेडी चलते हुए आ रही थी.

और सोनिआ और सुहाना ने जैसे hi उस लेडी को आते हुए देखा तोह वो दोनों hi हैरानी में पद गयी.

वो लेडी वीर के पास आके कड़ी हुई और उस से बोली,

"मिस वांट्स तो सी यू इन प्राइवेट फॉर ा मोमेंट!"

वीर : हम्म????

पर वीर से ज़्यादा हैरान कर देने वाला सोनिआ का रिएक्शन था.

सोनिआ : व्हाआआअत्तत्तत्त!???

वो अपनी जगह से कड़ी हुई उस लेडी को स्तब्ध निगाहो से घर रही थी.

सोनिआ : W-Whyyy!????? व्हाई डस शी वांट्स तो मीट वीर? क्या करा वीर को जानती है?

सामने कड़ी लेडी, करा की वही P.A थी जो उसके साथ बैठी हुई थी और वो अपनी मिस का इंस्ट्रक्शन लेके यहाँ पर आयी थी. पर जैसे ये सब कुछ सोनिआ को ज़रुरत से ज़्यादा hi एफेक्ट कर रहा था.

वीर : K-Kya में पूछ सकता हु क्यों?

लेडी : मुझे नहीं पता! I'm सॉरी! उन्होंने बस कुछ मोमेंट्स के लिए hi अपनी टेबल पर बुलाया है. ओनली यू! No ओने ेल्स.

उसने एक नज़र सोनिआ और सुहाना पर मारते हुए कहा. वो क्या कहना चाह रही थी मतलब साफ़ था. सोनिआ अपना निचला होंठ दातो टेल दबाये बेचैनी में वीर को देख रही थी जैसे मानो उस से गुहार लगा रही हो की मत जाओ.

पर वीर का जाना ज़रूरी था. कही करा ने उससे उस रात के बारे में डिसकस करने के लिए तोह नहीं बुलाया?

वीर : O-Okay!

सुहाना : फॉर ओनली फ्यू मोमेंट्स... वे हैवे तो लीव तू. तेल्ल योर मिस करा अबाउट थिस...

लेडी : ी अंडरस्टैंड. ी विल तेल्ल हेर फॉर सूरे.

और वीर अगले hi पल सोनिआ की नज़रो से दूर जा चूका था. करा की टेबल की ऑर्डर...

सुहाना अपनी बहिन के रवैय्ये को देख चिंतित थी पर उसने वो भाव अपने चेहरे पर न आने दिए. वो जानती थी की उसकी बहिन सोनू इतनी बेचैन क्यों है. सोनिआ को एक डर था...

करा बचपन से लेके आज तक... उसके हाथो से हर्र चीज़ पहले लेती गयी है. चाहे वो टॉप पोसिशन्स हो या अवार्ड्स हो या कुछ भी...

कही ऐसा न हो... आज वीर को भी वो...

सोनिआ के पास से दूर कर अपने पास ले जाए.

बस! इसी कारण एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी सोनिआ को... वो अभी भाग के वीर को पकड़ के अपने पास लाना चाहती थी पर वो खुद को रोके हुए थी.

सोनिआ (मैं में) : ी कनेव आईटी. ी कनेव की करा वीर को जानती है... पर... पर कैसे!??? और क्यूँउउ???

इधर वीर जैसे hi उसके सामने पहुचा तोह करा ने उससे उसके सामने बैठने के लिए कहा.

लेडी : मिस! सुहाना मिस है साइड तहत थे हैवे तो लीव सून.

करा : थैंक यू रुचिका! एंड don't वोर्री... मुज्जे ज़्यादा समय नहीं लगेगा...

रुचिका : अस यू से मिस. ी विल जो एंड इन्फॉर्म मिस सुहाना.

करा : प्लीज दो सो...!

और वो रुचिका वीर और करा को अकेला चोरर सुहाना को इन्फॉर्म करने चली गयी.

करा : वीर!

वीर : आठ! Y-Yes!??

करा : It's बीन ा लॉन्ग टाइम... Isn't आईटी!?

'फुककककक! शी रेमेम्बेरेद...'

वीर : आह! Y-Yeah!!

करा : I'm ग्लैड की तुमने होनेस्त्ली कहा.

वीर : Th-Thanks!? ाहः...

इतनी ख़ूबसूरत लड़की के सामने बैठ वीर का कॉन्फिडेंस डगमगा ज़रूर रहा था पर स्टिल वो पहले से सिचुएशन को काफी बेहतर हैंडल कर रहा था. पर करा के अगले कुछ शब्द जैसे उससे पूरा हैरत में दाल दिए.

करा : लाइफ इस मर्सिलेस. ज़िन्दगी को गम देना बखूबी आता है. जितना इस ज़िन्दगी से दोस्ती करना चाहोगे, ये उतना hi दूर भागती है. कुछ लोगो के पास काबिलियत होती है तोह वो अपनी ज़िन्दगी बदल लेते है. कुछ के पास काबिलियत होती है पर हालात उन्हें अपनी ज़िन्दगी न बदलने पर मजबूर कर देते है. और जिनके पास काबिलियत नहीं होती वो बस किस्मत के लिए बैठे रहते है. की किसी न किसी दिन उनकी किस्मत चमकेगी.

वीर (शॉकेड) : !??????

करा : फिर एक समय ऐसा भी आता है, जब आपके पास सब कुछ होता है, पर जीने की तमन्ना hi नहीं रहती. ऐसा लगता है मानो की बस ये ज़िन्दगी अपने आप hi थम जाए. खुद को मारने की हिम्मत भी नहीं होती कभी. बस तलाश रहती है तोह कुछ ऐसी चीज़ की जो सब कुछ बदल के रख दे. और... बाद में वो मिलता भी है. वो किसी भी रूप में मिल सकता है, एक इंसान के रूप में, या एक जानवर, या फिर कुछ और... जो आपको एक राह दिखाता है, खुशिया देता है, एक नया जीवन देता है. बस उसका इंतज़ार करना पड़ता है. और जब उस से मुलाक़ात होती है, तब पता चलता है की लाइफ क्या चीज़ है.

वीर : Y-Ye...!???

करा : Weren't यू थे ओने हु टोल्ड में थिस?

ये शब्द वही थे, जो वीर ने उस रात करा को तब कहे थे जब उसने ये सवाल पूछा था ~ 'व्हाट इस लाइफ??'

करा को हर्र एक बात जैसे बी हार्ट रत्ती हुई थी.

'Wtf?? व्हाट एब्नार्मल मेमोरी इस थिस!?'

[I must say! She's damn good!]

करा : तेल्ल में वीर! तुमने hi ये सब कहा था न?

वीर (नॉड्स) : R-Right!

करा : ी स्टिल don't अंडरस्टैंड. ी फंड आईटी रेलाताब्ले. बूत स्टिल... ी don't फील एनीथिंग... तुम्हे hi उन् बातो का मतलब मुझे समझाना होगा...

वीर : हँ????

'Wtf???'

करा उससे अजीब सी नज़रो से देख रही थी. उसके चेहरे पर कोई मुस्कराहट नहीं थी. बस अजीब सी एक आस थी उन् आँखों में...

दुविधा में फसा वीर करा से नज़रे चुराते हुए उसने सुहाना की टेबल पर नज़र मारी तोह पाया की सोनिआ खुद बोहत बेचैनी सी भरी निगाहो से वीर को देख रही थी. बल्कि घर रही थी.

"वेयर अरे यू लुकिंग!?"

वीर : ???

करा की आवाज़ जैसे उससे होश में लायी.

करा ने नोटिस कर लिया था की वीर कहा देख रहा था. और शायद उससे वीर का ये रवैय्या पसंद नहीं आया था. कही और देखना जब वो उस से बात कर रही हो...

करा : लुक ात में... यू अंडरस्टैंड!?

अगले hi पल उसकी आँखों में इतना तेज था और निडरता जिससे देख कोई भी भयभीत हो जाए.






वीर : *नॉड्स*

तभी रुचिका लौट के आयी और कुछ चिंतित सी लग रही थी.

रुचिका : मिस! There's ा प्रॉब्लम!

करा : हम्म्म? क्या हुआ?

रुचिका : वो... सक्सेना याद है न आपको? उसका कॉल आया था अभी. उसका कहना है की वो अपनी ज़मीन उतने अमाउंट में बिलकुल नहीं बेचेगा... उसका कहना है की वो ज़मीन बोहत hi फलदायक है और बोहत hi शुभ है. कह रहा है की उससे हम से ज़्यादा अमाउंट देने के ऑफर्स आ रहे है तोह भला वो सस्ते अमाउंट में हमे क्यों बेचे ज़मीन!?

करा : He's जस्ट ब्लफिंग. वो चाहता है की हम ज़्यादा पैसा देके उसकी उस ज़मीन को ले जो आउटर एरिया में है? और आलरेडी तीन बार रिजेक्ट हो चुकी है...!? हे शुड थैंक उस की हमने इतना ऑफर दिया है.

रुचिका : ी क्नोव बूत वो वही कह रहा है की... अमाउंट डबल करो वर्ण वो किसी और को दे देगा.

करा : ओह्ह्ह!? वो किसी को नहीं दे पाएगा. कोई लेने वाला hi नहीं है. He's जस्ट ब्लफिंग. हे वांट्स तो प्ले... थें ी विल प्ले अस वेल...

रुचिका : ???

करा : स्प्रेड थे रमौरस की वो ज़मीन एकदम अशुभ है. वह भूतो का वास था या कुछ भी... मेक आईटी एक्सट्रीम. प्रेस को इन्फॉर्म करो की कंपनी क्सक्सक्सक्सक्सक्स की मिस करा उस ज़मीन को विजिट करने गयी और वह से आने के बाद उन्हें करोडो का नुक्सान हुआ... पहले पेज पर डिस्प्ले होनी चाहिए ये न्यूज़... जो! I'll सी... की कैसे अमाउंट बढ़ाता है अब सक्सेना.

रुचिका (डेड) : अह्ह्ह! Y-Yess!!!

करा : हम्म? सो वेयर वेरे वे...!?

उसने वीर को फिरसे देखा जो उससे मुँह खोले घर रहा था.

'हु थे हेलल इस थिस गर्ल...!???'

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आज के लिए इतना hi गाइस!

Don't फॉरगेट तो लिखे! ✨


धन्यवाद!
 
अपडेट - 43 ~ थे टीचिंग

अब तक...

करा : स्प्रेड थे रमौरस की वो ज़मीन एकदम अशुभ है. वह भूतो का वास था या कुछ भी... मेक आईटी एक्सट्रीम. प्रेस को इन्फॉर्म करो की कंपनी क्सक्सक्सक्सक्सक्स की मिस करा उस ज़मीन को विजिट करने गयी और वह से आने के बाद उन्हें करोडो का नुक्सान हुआ... पहले पेज पर डिस्प्ले होनी चाहिए ये न्यूज़... जो! I'll सी... की कैसे अमाउंट बढ़ाता है अब सक्सेना.

रुचिका (डेड) : अह्ह्ह! Y-Yess!!!

करा : हम्म? सो वेयर वेरे वे...!?

उसने वीर को फिरसे देखा जो उससे मुँह खोले घर रहा था.

'हु थे हेलल इस थिस गर्ल...!???'


अब आगे...

रात का समय हो चूका था, पार्टी ख़तम हो चुकी थी और गेस्ट्स अपनी अपनी होटल के रूम्स के लिए निकल चुके थे.

वीर और बाकी सब भी अपनी होटल में आ चुके थे पर... सोनिआ का तोह जैसे मुँह रुकने का नाम hi नहीं ले रहा था. वो सवाल पे सवाल किये जा रही थी.

सोनिआ : वीर! पलासी! बताओ... क्यों बुलाया था करा ने तुम्हे!? There's no वे शी doesn't क्नोव यू... मुझे पता है की वो तुम्हे जानती है

है न? तेल्ल में!

वीर (शिघ्स) : जी हां! वो मुझे जानती है.

खिड़की के पास कड़ी सुहाना जो वीर के सारे एक्शन्स को ऑब्सेर्वे कर रही थी, उसने अपनी बुद्धि चलानी शुरू कर दी. आखिर उसका मक़सद यहाँ वीर को लाके उसके सीक्रेट्स ढूंढ़ना hi था. की आखिर वीर जैसे बन्दे ने आतिश को कैसे ठिकाने लगा दिया?

सुहाना (मैं में) : कही... ये वीर और करा मिले हुए तोह नहीं? क्या करा ने मदद की थी वीर की आतिश को मारने में? मुझे इस्पे पूरी नज़र रखनी पड़ेगी.

सुहाना : एहम! वीर... में क्या कहती हु? यहाँ बैठो न... और विस्तार से बताओ. में और सोनू कोई अनजान तोह है नहीं अब राइट? इतनी साड़ी बातें आखिर मेने भी तोह शेयर की न सोनू के पास्ट की तुम्हारे साथ? काम से काम सोनू को इतना तोह बता hi सकते हो राइट?

वीर : फाइन! दरअसल... जैसे मेने सोनिआ जी को उस रात बचाया था... एक्सिडेंटली... कुछ उसी प्रकार से... मेने करा जी को एक रात बचाया था... कुछ गुंडों से...

सोनिआ : हँ!? K-Kaha बचाया था? वेट!!! गुंडों के पास तुम क्या कर रहे थे उधर!?

वीर : लम्बी कहानी है... बस इतना समझिये की उस रात इत्तेफ़ाक़ से करा जी और में मिल गए. फिर हालात कुछ ऐसे थे की वह जान को खतरा था. करा जी की जान को सबसे ज़्यादा. और उस स्थिति में मेने उन्हें वह से बचाया था. बस... इसलिए वो मुझे जानती थी.

वीर की बात में गुंडों का ज़िक्र सुन्न, सोनिआ और सुहाना ने आपस में एक दूसरे को देखा और हां में सर्र हिलाया.

अगले hi पल, सुहाना कुछ कदम आगे बढ़ी और वीर की तरफ आयी और बोली,

"तोह... वो गुंडे कौन थे...!?"

वीर : वो... मुझे कैसे पता रहेगा भला!?

सुहाना उसका चेहरा अच्छी तरीके से भांप रही थी. उसके बाद वो धीरे से वीर के कान के समीप आयी और अपनी गरम सासें चोरर उसके कानो में धीरे से बोली,

"मुझे पता है तुम जानते हो... बोलो! क्या वो आतिश के आदमी थे?"

उसकी बात सुन्न वीर ने सुहाना को पल भर के लिए देखा और हां में सर्र हिलाते हुए फिर हामी भरी.

सुहाना (मैं में) : इसका मतलब में सही थी. आखिर जब करा जैसी लड़की पर हमला हुआ हो तोह ऐरे जर्रे गुंडों को काम हो hi नहीं सकता ये. ज़रूर... ये आतिश का hi काम रहा होगा. अन्य्वयस he's डेड नाउ...

सोनिआ की कुछ समझ में नहीं आया की वीर और सुहाना ने क्या बातें करि खुसुर पुसुर करके. उसने पूछना भी चाहा पर सुहाना ने ये कह दिया की कोई बात नहीं थी.

दरअसल, सोनिआ इतना जानती थी की उसकी जान के पीछे कोई आदमी लगा हुआ था. वो ये भी जानती थी की वो आदमी यानी की आतिश अब मर्डर चूका है. पर उसको किसने मारा और वीर और सुहाना के बीच क्या डील थी, वीर आतिश से कैसे जुड़ा हुआ था... ये साड़ी बातो से सोनिआ अनजान थी.

उससे कुछ भी नहीं पता था की वही वीर जो उसके सामने खड़ा था वही आतिश का खुनी है.

यहाँ तक की उसकी बहिन, सुहाना भी अतीत में क्या कुछ करि बैठी है. इन् सभी बातो से अनिभिज्ञ थी वो.

कारण!?

कारण था की सुहाना ने कभी उसपे कोई आंच आने नहीं दी और न hi देगी कभी वो. उसकी छोटी बहिन उसके लिए बेहद अनमोल जो थी और हमेशा रहेगी. बस इसलिए... सोनिआ की ज़िन्दगी में जो भी अड़चने आती थी, उससे पीठ पीछे सुहाना हैंडल कर के मामला सेटल कर देती थी.

तोह भला सोनिआ को इन् सब अंधरुनि बातो का कहा से पता चलने वाला था??

सोनिआ : अह्ह्ह!?

सुहाना : हँ? क्या हुआ!?

सोनिआ (ब्लशेस) : वो...

सुहाना : बोलो न...

सोनिआ को न जाने क्या हुआ जो वो एकदम से ऐसा रिएक्शन दी... पर वो कभी वीर को देखती तोह कभी सुहाना को. उससे न जाने किस बात की शर्म आ रही थी.

सुहाना : अरे बाबा बोल भी...

सोनिआ (ब्लशेस) : वो...

सुहाना : हाँ!?

सोनिआ : इधर आइये न आप...!

और सुहाना को अपने समीप बुला के सोनिआ के उसके कान में कुछ बातें कही.

सुहाना : क्या!? तू भी न... पहले से सब रेडी करके चलना चाहिए न. अब रुको... प्रकाश अंकल को बोलती हु...

सोनिआ (ब्लशेस) : ेहठ!?? व्हाट थे हेलल दी!?? क्या कर रही हो आप!?? प्रकाश अंकल??? रियली!?? No वैयय्य!!!!

सुहाना : उघ!! तोह अब में इतनी नीचे जाऊ!? सोनू वह होटल में इतनी माथा पछि करि हु..

अब मुझसे नीचे नहीं जाय जाएगा.

सोनिआ : ुघठ!!! डीई....

सुहाना : हाँ! एक काम करते है... वीर तोह है hi... उस से मंगवा लेते है... क्यों वीर!?

वीर : हम्म??

सोनिआ (ब्लशेस) : व्हाट थे हेलल?? न्यूऊऊऊ... डीईई!! हाउ कैन यू...!??? वीर कैसे...!?

सुहाना : व्हाट!? इसमें इतना क्या शर्माना? बच्ची hi रहोगी तुम भी...! वीर...!

वीर : हाँ!?

सुहाना : सोनू को... सोनू के लिए पैड्स ले आओगे!? उसके पीरियड्स है... नीचे जाना पड़ेगा. ले आओगे न? ये रहे पैसे!?

वीर : हँ? W-Well! Okay!!

वीर तोह उतना नहीं शरमाया पर बेचारी सोनिआ तोह जैसे पूरी लाल टमाटर हो चुकी थी. अपना चेहरा वो हाथो से छिपाए पीछे मुद गयी और सुहाना को बातें सुनाने लगी.

सोनिआ : डीई!!!! यू अरे सो बाद... में आपसे कभी बात नहीं करुँगी...

सुहाना : अरे बाबा... तू भी न... बच्ची है रे...

सुहाना सोनिआ को कंसोल करने लग गयी और वीर दोनों hi बहनो को केवल मुस्कुरा के देखता रहा.

सोनिआ की ये अदा, वीर को कही न कही बेहद पसंद आयी.

'She's क्यूट...!'

[......]

वीर उन् दोनों बहनो को अकेला चोरर जब नीचे निकला तोह अब सेनेटरी पैड्स ढूंढ़ने की चिकल्लस थी.

11 बज रहा था और अब उससे मेडिकल शॉप ढूंढ़नी थी. उसने फ़ोन में मैप्स ों किया तोह कुछ दूर पर उससे एक मेडिकल शॉप का नाम नज़र आया और वीर चल दिया उस दिशा की ऑर्डर.

पर अभी वो कुछ दूर hi चला था की उससे सामने एक अजब hi नज़ारा देखने को मिला.

एक लड़का जो की एक अच्छा सा सूट पहने हुए था वो किसी लड़की पर चिल्ला रहा था.

लड़का : यार कितनी बेइज़्ज़ती करवाऊंगी तुम हाँ मेरी?

'ये सब क्या हो रहा है!?'

वीर कुछ सोच के उनके पास गया तोह उससे माजरा समझ में आया...

लड़का : तुम्हे लाना hi नहीं चाहिए था यहाँ.

वो लड़का खीजते हुए अपनी कमर पर हाथ रख सर्र न में हिलाने लगा. तोह वही लड़की जो खुद भी अच्छे कपडे पहने हुए थी वो रोने लगी.

वीर : क्या हुआ भाई!? ऐसे क्यों चिल्ला रहे हो?

वीर इस वक़्त खुद होटल से जब लौटा था तोह उसी सूट में था. जब उस लड़के ने वीर को देखा तोह वो समझ गया की वीर कोई ऐरा गेर्रा नहीं है. वाक़ई! आज ये ज़माना था की आदमी को कपड़ो से जाचा जाता था.

लड़का : अरे भाई... क्या बताऊ... में यहाँ आज अपने पुराने स्कूल फ्रेंड्स से मिलने यहाँ था. आज स्कूल का रीयूनियन था.

वीर : हम्म...

अभी वीर और वो लड़का बातें hi कर रहे थे की तभी उनके पीछे एक कार आके रुकी, जिससे दोनों ने hi गौर नहीं किया. क्युकी वो बस रुकी हुई थी.

पर...

"मिस! आपने यहाँ क्यों रुकवाई कार!?"

कार के अंदर करा बैठी हुई थी. साथ में hi रघु जस्सी और रुचिका भी.

जहा सभी करा के कार रुकवाने के इस इंस्ट्रक्शन से कन्फ्यूज्ड थे तोह वही करा की नज़रे वीर और उन् लड़के और लड़की पर थी.

उसने अपनी विंडो हलकी सी नीचे की ताकि सब कुछ सुनाई दे सके...

लड़का : अरे भाई... आज रीयूनियन था... तोह स्कूल की पुरानी कुछ फ्रेंड्स भी आने वाली थी. अब मेरे हर्र एक पुराने दोस्त की एक न एक गफ है, तोह वो उनके साथ आयी थी.

वीर : हम्म!

लड़का : अब... मेरी कोई गफ नहीं है भाई... पर वो लोगो को पता चलता तोह हस्ते न मेरे ऊपर!? इसलिए...

वीर : ???

लड़का : इसलिए मेने फिर इससे चलने को कहा... की ये मेरी गफ बन्न के चले...

वीर : तोह!?

लड़का : पर इसमें अकाल नाम की चीज़ hi नहीं है कुछ.

वीर : ऐसा क्या हो गया!?

लड़का : अरे... में इससे स्कूल से जानता हु. ये दूसरे स्कूल में पढ़ती थी. पर इसके घर की कंडीशन बिलकुल खराब है. ये कपडे भी मेने दिलाये है इससे. वो तोह ये मेरे घर के आस पास रहती है और ऊपर से सुन्दर है, इसलिए मेने इस से पूछा की ये मेरी गफ बन्न जाए. भला वह किसी को क्या पता चलता की ये किस घराने से है. कौन इसके घर आता कोई डिटेल्स मांगने...

वीर : ....

लड़का : उधर तक तोह ठीक था... पर इससे कोई मैनर्स hi नहीं है. वही गांव देहात वाला एक्सेंट उसे कर रही थी... इतनी धज्जिया उड़वा दी वह मेरी... अरे मेरी फ्रेंड्स इस से पूछी की इसकी ड्रेस किस कंपनी की है... तोह वह भी मैडम जी का मुँह जैम गया. अब कहा से बताएंगी ब्रांड्स? साला सुना होगा तब न बता पाएंगी ब्रांड्स के बारे में...!? एक तोह मेने इतनी महंगी ड्रेस दिलवाई इसको... ऊपर से इसने पूरी इज़्ज़त का फालूदा बना दिया.

वीर सब कुछ चुप चाप सुन्न रहा था. पर उसकी नज़रे... उसके नज़रे एकदम उस लड़के पर स्थिर थी.

लड़का : अरे हद्द तोह तब हो गयी... एंडिंग में...

वीर : ??

लड़का : एंडिंग में खाना खाने के बाद बाउल में लेमन स्लाइस और पानी दिया जाता है न भाई?? हाथ दोने के लिए???

वीर : हम्म!!

लड़का : तोह ये झंडू उससे पीने जा रही थी... मेरी सभी फ्रेंड्स इतना हस्स के गयी है न... भाई तुम सोच नहीं सकते... पूरी इज़्ज़त डवा दी इसने मेरी आज... टच!!

जब सारा मामला वीर को क्लियर हुआ तोह उसने उस बेचारी लड़की को देखा... जो ओने पीेछे ड्रेस पहने हुए थे. और वाक़ई... काफी सुन्दर लड़की थी. पर इस वक़्त उस सुन्दर चेहरे पर आसुओ की बुँदे सजी हुई थी.

बेचारी वो... डर के मारे और हलकी ठण्ड के मारे अपनी नज़रे नीचे कर काँप रही थी.

वीर : गलती तुम्हारी है... भला तुम्हारी इस दोस्त को कैसे पता रहेगा की क्या करना होता है!? आखिर... ये सब उसके लिए नया अनुभव था... और तुम इससे अपना दोस्त कैसे कह सकते हो जब उसकी इतनी सी बात बर्दाश्त नहीं कर सकते?

लड़का : इतनी सी बात? भैई... ये मेरे लिए बोहत बड़ी बात है. और में गलत हु??? भाई ज़माना आगे बढ़ रहा है... इतनी तोह अकाल होनी hi चाहिए न इसमें? और विकास की तरफ तोह हर्र इंसान को बढ़ना hi चाहिए न? फिर ये खुद पर विकास क्यों नहीं लाती!? विकास होना तोह अच्छी बात है... है की नहीं?

वीर (स्माइल्स) : विकास हँ!? तुम्हे पता है...!?

लड़का : ...!?

वीर ने एक नज़र उस लड़की को देखा जो उस से नज़रे चुराए सर झुकाये सुबक सुबक कर बिना कोई शोर करे रो रही थी और उसने बोलै,

"विकास यदि इंसान की उन्नति के लिए हो..."

लड़का : ???

वीर (स्माइल्स) : तोह वो विकास सही है..

लड़का : हां वही में...

पर इसके पहले की वो कुछ कह पाटा वीर ने उसकी ऑर्डर देखा और उसके चेहरे से वो मुस्कान अगले hi पल गायब हो गयी. फिर धीमी पर बुलंद आवाज़ में वीर के शब्द उसके मुँह से निकले...

वीर : पर यदि... वही विकास... किसी इंसान को नीचे दिखने के लिए किया जाए... या अमीरो को और अमीर बनाने के लिए... तोह वो विकास गलत है.

लड़का : हँ??

लड़के की तोह कुछ समझ नहीं आ रहा था पर इस वक़्त पीछे कड़ी कार के अंदर बैठी करा का रिएक्शन देखने वाला था.

मानो एक झटका सा लगा था उससे.

उसके होंठ एक दूसरे से जुड़ा हुए और उसका मुँह हल्का खुला का खुला रह गया...

वो बस एक तक वीर की पीठ को देखे जा रही थी.

और अगले hi पल वीर ने अपना ब्लेजर निकाला और उस लड़की के पीछे से उसके ऊपर दाल दिया.

लड़के को देखते हुए वीर ने कठोर आवाज़ में कहा,

"जो अवे! इसके पहले की में वायलेंट हो जाऊ..."

लड़का : हँ!? T-Tum...

वीर : जाते हो या नहीं!??

लड़का वीर पे हमला तोह यही करना चाहता था पर जब उसकी नज़र वीर के शर्ट की ब्रांड पर गयी तोह वह वही ठहर गया. आखिर इस ब्रांड की शर्ट पहना हुआ व्यक्ति कोई साधारण व्यक्ति हो hi नहीं सकता.

लड़का : टच.... देख लूंगा...

इतना बोल वो वह से निकल गया.

और इधर वीर उस लड़की को देखने लगा.

वीर : तुम ठीक हो!?

लड़की (रट हुए) : H-Hmm...!

वीर : अब चली जाओगी न घर!? या में टैक्सी करू!?

लड़की : M-Mera घर ज़्यादा दूर नहीं है... में चली जाउंगी...

वीर (स्माइल्स) : Okay!

लड़की : W-Wo... मेरी मदद करने के लिए आपका बोहत बोहत धन्यवाद... पर आप अपना ब्लेजर रख लीजिये... Y-Ye काफी कीमती लग रहा है.

वीर : पैसो की बात मेरे सामने नहीं करने का... जाओ तुम... ठण्ड में गर्माहट दे रहा है ये ज़्यादा ज़रूरी है. उसका दाम क्या है ये ज़रूरी नहीं है. समझी?

लड़की (स्माइल्स) : J-Jii! वैसे... क्या नाम है आपका!?

वीर : में वीर हु...

लड़की (स्माइल्स) : में माधुरी... धन्यवाद एक बार फिरसे... और में ये आपको ज़रूर लौटाउंगी... आप अपना एड्रेस दे दीजिये...

वीर : मेने कहा न...! इसकी कोई ज़रुरत नहीं है. जाओ अब.

लड़की : P-Par...

वीर : अब जाती हो या नहीं? या टैक्सी में दालु तुम्हे??

लड़की : J-Jaati हु... Th-Thank यू..

और वो वह से जाने लगी. पर कुछ कदम चलते hi वो ठहर जाती और वीर को पीछे मुद देखती और फिर चलने लगती.

जब वो गयी तोह वीर को फाइनली याद आया,

'फ़क! पैड्स लेने निकला था में तोह... कही दूकान बंद न हो जाए.'

और वो तेज़्ज़ी से भागते हुए निकल गया.

पर...

इधर कार के अंदर...

करा के हाव भाव देखने लायक थे.

अगले hi पल वो अपने ट्रांस से बाहर आयी और जस्सी जो गाडी ड्राइव कर रहा था उससे देखि.

करा : जस्सी... वो लड़की के पास चलो... जल्दी. टेक थे ु टर्न...

जस्सी के मैं में तोह कई सवाल थे. पर उसका काम था अपनी मिस के इंस्ट्रक्शंस फॉलो करना. न की उन् इंस्ट्रक्शंस पर सवाल करना.

और इसलिए उसने फौरन hi ु टर्न ले ली और कुछ सेकण्ड्स में hi करा और वो सभी लड़की के पास पहुँच गए जो अपने घर की ऑर्डर जा रही थी.

माधुरी ने जब अपने पास आ रही इतनी महंगी और बड़ी गाडी देखि तोह वो हड़बड़ा गयी. अगले hi पल करा गाडी से उतर उस लड़की के सामने आयी तोह वो लड़की करा की खूबसूरती देख hi वही जम्म से गयी.

माधुरी : ???

करा : एक काम है तुमसे...

माधुरी : H-Huh? M-Mujhse!??

करा : दर्रो नहीं... बस एक छोटा सा काम है.

माधुरी : ???

करा : कैन ी हैवे तहत?

करा ने कहते हुए अपनी आँखों से माधुरी के कंधो पर वीर के टंगे हुए ब्लेजर की ऑर्डर इशारा किया.

माधुरी (सुरप्रीसेड) : Y-Ye!??

करा : Don't वोर्री! में वीर को जानती हु... हे won't मंद. सो कैन ी?? बाकी... यू कैन हैवे थिस इन रेतुर्न...

बोलते हुए उसने अपने हाथो में मौजूद एक बोहत hi महंगा woman's कोट माधुरी को थमा दिया.

कपडा छींटे hi माधुरी को समझ आ गया था की भला ये कितना महंगा कपडा था.

बेचारी माधुरी... करा को देख भांप चुकी थी की ये कोई बड़ी हस्ती है. इसलिए उसने फौरन hi धीरे से सर्र हां में हिला दिया और वीर का वो ब्लेजर करा को थमा दिया.

वीर का ब्लेजर अपने हाथ में लेते hi करा ने उससे एक पल देखा और फिर लड़की को उसने थैंक्स कहा और वापस से कार में आके बैठ गयी.

इधर जस्सी रघु और रुचिका अपनी मिस के इस रवैय्ये से बेहद hi कन्फ्यूज्ड थे, पर किसी ने कोई सवाल नहीं किया.

पर हमारा बेचारा वीर...

इन् सभी बातो से अनजान था.

***

अगला दिन...

एक नयी सुबह...

मुंबई में यहाँ निधि अपने फ्लैट में सुबह सुबह उठ चुकी थी और बस फ्रेश होने के बाद वो निकली hi थी और अब उससे नाश्ता बनाना था.

अपने खुली हुई ज़ुल्फ़े बाँधने के लिए वो टेबल पर राखी क्लिप लेने गयी और बालो को पीछे कर उन्हें जकड के वो जैसे hi क्लिप लगाने के लिए हुई तोह अचानक hi उसके हाथ वही थम गए.

और उससे वो दृश्य याद आ गया...

वो दृश्य जिस दिन वीर आया था... और उसके पीछे खड़े होक उसने अपने हाथो से उसके बालो में वो क्लिप लगाई थी. उसकी गरम गरम सासें जो निधि ने उस दिन अपने नग्न कंधे पर महसूस करि थी. कितनी तेज़्ज़ हो गयी थी उसकी धड़कने उस वक़्त...

"हँ!?"

एक बार फिर... निधि अपने खयालातों से बाहर आयी तोह उसने गौर किया की फिरसे... उसकी धड़कने तेज़्ज़ हो चुकी थी.

'Y-Ye क्या हो गया है मुझे!?'

अपना सर्र न में हिलाते हुए वो बाल बाँध चलने को हुई तोह तभी वह जूही अपनी आँखें मलते हुए उठ के उसके पास आ गयी.

जूही : मुम्ममइय्य्यी!!

निधि : जूही??? उठ गयी बीटा!? चलो जल्दी स्कूल जाना है न?

जूही : नहीं मम्मीयियय... आज नहीं जाना... आज मैं नाहीईई...

निधि : अरे पर....

वो इस से पहले की जूही को थोड़ा डाट पाती की एक बार फिर वीर के कुछ बोल उसके दिमाग में गूंजने लगे, जब वो उसके घर में ठहरा करता था.

"जूही को इतना मत डाटा करिये Ma'am. बच्ची है वो. कभी कभी स्कूल जाने का मैं नहीं करता है. बिलकुल वैसे hi जैसे हम लोगो का कभी कभी कॉलेज जाने का मैं नहीं करता है!? तोह जूही तोह बच्ची है. एक दो दिन स्कूल मिस हो जाने से कुछ नहीं होता ma'am!"

"तुम बिगाड़ रहे हो जूही को वीर...!"

"थोड़ी शरारत भी ज़रूरी है Ma'am. बचपन तोह यादगार रखिये जूही का उसके लिए. हलकी फुलकी शरारते चलती है. क्यों है न जूही??"

"हा माहामुउउउउ!!!"

"ुघ्घ! फाइन! तुम कहते हो तोह..."

और उन् बातो को याद कर... निधि का मैं एकदम शांत हो गया.

निधि : अच्छा ठीक है... रहने दो. आज मज़े करो घर में...

जूही : याययययययय!!! ी लव यू मम्मी...

निधि (स्माइल्स) : ये तुम्हारे वीर मामू की करतूते है सब...

जूही दौड़ती हुई भागती हुई अंदर जा रही थी जब अंदर से आती श्रेया ने उससे फौरन hi गॉड में उठा लिया और उसके गाल चुम लिए...

श्रेया : अरे कहा जा रही है मेरी बार्बी गर्ल!?? सुबह सुबह!??

जूही : आज मेरी छुट्टी है मासीय... मम्मी ने वीर मामू के चक्कर में मुझे छुट्टी देदी हहै~

मम्मी को वीर मामू की याद आ रही है...

श्रेया : हम्म???

निधि (ब्लशेस) : अहह!??

जूही के बोल सुनते hi बेचारी निधि अपने सुर्ख लाल गाल लिए फौरन hi अंदर किचन में बिना कुछ बोले hi भाग गयी.

श्रेया (मैं में) : इन्हे क्या हुआ?

***

दिल्ली...

इधर एक बड़ी hi आलीशान सी होटल के एक रूम में, एक आदमी अपने हाथ जोड़े हुए खड़ा था.

आदमी : माफ़ कर दो मुझे प्लीज मैडम... माफ़ कार्डो... पर मुझे डूबने से बचा लो... मेरी गलती थी साड़ी... साड़ी गलती हैं... में पैसो की लालच में अँधा हो गया था. माफ़ कर दो मुझे मैडम जी...

ये आदमी और कोई नहीं बल्कि सक्सेना था जो करा को चुना लगाने की सोच रहा था पर बदले में उसकी hi खटिया कड़ी हो गयी थी.

कारण?

कारण था नेवसपपेर में फ्रंट में न्यूज़ जो छाप चुकी थी.

की करा को सक्सेना को ज़मीन पर जाने के बाद करोडो का नुक्सान हुआ. बस! अब क्या था? उसकी ज़मीन के बारे में जो लोग पहले सोच भी रहे थे अब तोह वो भी दूर हो चुके थे उस से.

करा सामने बैठी वही नेवसपपेर थामे बड़ी hi संतुष्टि भरी निगाहो से सक्सेना को देख रही थी.

पर साथ hi साथ उसकी नज़र एक खबर और पे थी.

उसी खबर के ठीक नीचे, एक और खबर थी. जिसमे वीर और करा अकेले टेबल के पास, आमने सामने सीट्स पर बैठे हुए थे. और हैडलाइन थी ~ "Who's थे जेंटलमैन व्होम मिस करा हरसेल्फ़ सेकेंड आउट?"

पर करा अकेली नहीं थी..

यही हाल इस वक़्त वीर की होटल में उनके रूम में था. सोनिआ पेपर को जोरर से थामे दातो टेल अपना अंगूठा दबाये बड़ी hi बेचैन सी थी.

सोनिआ : Y-Ye नेवसपपेर वालो को कुछ आता है या नहीं? क्या ज़रुरत थी तुम्हारी और करा की तस्वीर डालने की!? ुघठ!!

सुहाना : चिल! बस एक खबर hi तोह है...

सोनिआ : बात वो नहीं है... ी don't वांट वीर तो गेट दरग्गेड ईंटो थिस.... ग्लैमर एंड शिट्टी company's पॉलिटिक्स...

वीर : हम्म?

सोनिआ : वीर... मुझे गलत मत समझना... में करा से जेलस नहीं हु. कभी नहीं. ी मैं पहले हुए करती थी... बूत अब नहीं... भगवान् का दिया हुआ सब कुछ है मेरे पास... मुझे कोई पैसो की नदियों में नहीं नहाना है...

वीर : ???

सोनिआ : में बस... उससे हराना चाहती हु बिकॉज़ ी वांट तो गेट हेर अटेंशन... करा तभी मुझे अटेंशन देगी जब वो मुझसे हारेगी. और तब hi हमारे बीच बातें शुरी होंगी... शी विल टेक इंटरेस्ट इन में... में उससे हमेशा के लिए खोना नहीं चाहती... इसलिए... में इतना तरय करती हु...

वीर : ी सी!

सोनिआ : हम्म! और इसलिए... में तुम्हे भी... इन् सब चीज़ो से दूर रखना चाहती हु.

वीर (स्माइल्स) : Don't वोर्री! I'll बे फाइन.

सोनिआ : नहीं... ऐसे में...

वीर (स्माइल्स) : Don't वोर्री! ी हैवे यू बेसीडे में. I'll बे फाइन...

सोनिआ (ब्लशेस) : हँ!?!!

सोनिआ : उम्... वो R-Right....

और कुछ देरर बाद...

माहौळ ठंडा हुआ.

पर...

वीर के चेहरे पर शिकन थी.

बेहद hi चिंता और गंभीरता भी.

'पारी! जो तो स्लीप मोड!'

[Huh??? Whaaaaattt!??]

'मेने कहा न...! जो तो स्लीप मोड! It's ान आर्डर!'

[Ughhh! Fine!]

*डिंग*

[System has entered into the sleep mode.]

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

पसंद आये तोह लिखे थोक के जाने का.


धन्यवाद! 😁
 
किंग वीथिन 10 तो 15 मिनट्स. एडिटिंग...
 
अपडेट - 44 ~ ब्रोकन सोल

अब तक...

वीर के चेहरे पर शिकन थी.

बेहद hi चिंता और गंभीरता भी.

'पारी! जो तो स्लीप मोड!'

[Huh??? Whaaaaattt!??]

'मेने कहा न...! जो तो स्लीप मोड! It's ान आर्डर!'

[Ughhh! Fine!]

*डिंग*

[System has entered into the sleep mode.]


अब आगे...

"अरे....!? ये इससे अचानक क्या हो गया!? कहा चला गया ये!?"

ये बोल थे सुहाना के.

जो इस वक़्त कमरे में मौजूद थी सोनिआ और वीर के संग, पर अचानक hi वीर उन् दोनों के सामने से ये कहके चला गया की वो कुछ देरर में वापस आएगा.

अब वो कहा गया था, किस काम से... !? ये कुछ भी बता के नहीं गया.

सोनिआ : उम्... शायद नीचे तक गया है. यदि उसने कहा है तोह जल्द hi आ जाएगा.

सुहाना : अरे पर बता के तोह जाए. हम्फ! हम दोनों को वो कुछ ज़्यादा लिघ्टलय नहीं ले रहा!?

सोनिआ (स्माइल्स) : यही बात तोह मुझे उसकी पसंद है. वो हर्र एक इंसान को एक मतलब... पूरा इंसान की तरह hi देखता है. मतलब ऐसे नहीं की, कोई बड़ा व्यक्ति आये तोह उसके सामने उसका बेहेवियर अलग हो और कोई गरीब व्यक्ति आये तोह उसके सामने वो अलग बेहवे करे. हर्र किसी से वो एक जैसा बेहवे करता है. That's व्हाट ी लिखे अबाउट हिम.

सुहाना : उम्? हम्म.... यू अरे राइट. वेट! तुम कब से ये सब नोटिस करने लगी उसमे!?

सोनिआ (ब्लशेस) : ेहः!?? N-Noooo... अब वो हम दोनों hi एक दूसरे से फेमिलिअर है तोह ये छोटी छोटी बातें ऑब्वियस्ली दिमाग पकड़ लेता है मेरा... यू क्नोव न दी!? I-I'm शार्प आफ्टर आल... ाहः~

सुहाना : हम्म्म....

सोनिआ ने अपनी शर्म को छुपाने की कोशिश करि जिसमे शायद इस बार वो कामयाब भी हो गयी क्युकी सुहाना ने केवल हामी भरी और उसकी बातो को ज़्यादा डीपली नहीं सोचा.

पर सवाल अभी भी वही था...

आखिर वीर उन् दोनों को बिना कुछ बताये यु अचानक कहा निकल लिया!?

***

इधर वीर, होटल में hi ऊपर कॉरिडोर के एन्ड में विंडो के पास खड़ा हुआ था.

न जाने क्या बातें चल रही थी उसके मैं में. पर इतना ज़रूर था की वो इस समय किसी चिंतन में डूबा हुआ था.

यहाँ तक की उसने पारी को भी स्लीप मोड में दाल दिया था.

'कुछ... कुछ गड़बड़ है... ी शुड हेड डौन्स्टैर्स.'

वो मैं में सोच नीचे जाने लगा तोह नीचे से ऊपर आती एक वेट्रेस उससे देखे जा रही थी और ऊपर बढ़ती जा रही थी.

वीर को इस बात का आभास भी नहीं हुआ. अब वो एक एवरेज पर्सन से भी थोड़ा ज़्यादा स्मार्ट जो दिखने लगा था. न जाने क्या होगा जब उसका अपीयरेंस स्टेट 80 -90 के ऊपर जाएगा.

फिर तोह शायद वीर को देखते hi लड़कियों की पैंतीस में सुनामी आ जाएंगी...

खर्र! वीर उस वेट्रेस की नज़रो से अनिभिज्ञ नीचे आया और होटल के रेस्टिंग एरिया साइड hi वो चल दिया जहा लक्ज़री सोफस डेल हुए थे, रिसेप्शन था और काफी सारे लोग इधर से उधर अपने कामो में लगे हुए थे. और गाने भी बज रहे थे जिससे लोग भली भाति सुन्न पा रहे थे.

एक सोफे पकड़ वो फिरसे अपने चिंतन में डूब गया. ये जगह गहरे चिंतन के लिए सही तोह नहीं थी. पर वीर खुद hi इतना अपने थॉट्स में डूबा हुआ था की उससे कोई फ़र्क़ hi नहीं पड़ा.

'पारी... लेवल 4 पे होने के बावजूद मिस करा का स्टेटस नहीं देख पायी. वही दूसरी तरफ... शी वास् अबले तो सी... Sonia's एंड Suhana's स्टेटस. इसका मतलब एक hi बात है. मिस करा का ओहदा कुछ और hi है... मिस सोनिआ से भी ज़्यादा... और ऐसी हस्ती के साथ... मेने वो सब किया है. पर इसके बावजूद उन्होंने ये बात छिपाई हमारी. न hi मेरे खिलाफ कोई कार्यवाही करि... क्यों??'

'क्या वो अपनी इमेज ख़राब नहीं करवाना चाहती इसलिए? हम्म! ये एक रीज़न हो सकता है. पर... वो मेरे खिलाफ सेक्रेटली एक्शन तोह ले hi सकती थी... फिर क्यों? क्या में उनकी नज़र में वॉर्टलेस हु? हम्म! ये भी एक रीज़न हो सकता है...'

'सुहाना ने एक पल में hi गेस कर लिया की वो गुंडे आतिश के थे. यानी की आतिश मिस करा और मिस सोनिआ दोनों के पीछे था. बूत व्हाई!? वेट! ये दोनों hi एक दूसरे से रिलेटेड है... और आतिश ने... फर्स्ट टाइम... मिस करा को क्लब में... आह्हः!!! सो that's व्हाट आईटी वास्... हे वास् आफ्टर मिस करा.'

'पर फिरसे वही सवाल... क्यों!???'

'और ये पारी... She's हिडिंग समथिंग. पारी को स्लीप मोड में डालना ज़रूरी था. वर्ण अभी में जो भी सोचता वो उससे सुन्न लेती. एटलीस्ट स्लीप मोड में वो मेरे कोई भी थॉट्स नहीं सुन्न पाएगी.'

'पारी के रिएक्शंस कभी कभी अजीब होते है. आखिर क्या है ये सिस्टम की पहेली!? मुझे धीरे धीरे इससे सुलझाना होगा. और उससे करने के लिए..

मुझे पारी को जितना जल्द हो सके उतनी जल्द लेवल उप करना पड़ेगा.'

अभी वो अपने थॉट्स में घूम था जब अचानक hi उसके पीछे से एक आवाज़ आयी,

"कैन ी हैवे ा सीट!? िफ़ यू don't मंद!?"

और जैसे hi उसने पलट के देखा तोह वह स्तब्ध रह गया.

उसके पीछे करा कड़ी हुई थी.

एक मॉडर्न सी ड्रेस में वो इतनी ख़ूबसूरत प्रतीत हो रही थी की वीर शब्दों में उसके सौंदर्य का वर्णन नहीं कर सकता था. और ये पहली बार नहीं था. हर्र बार...






जितनी बार वो उससे देखता, उसका मुँह खुला का खुला रह जाता था. करा परफेक्ट थी. हर्र एंगल से...

कही से भी ऐसा महसूस नहीं होता था उससे देख के की इस लड़की से ये काम नहीं बनता होगा. शी वास् दमन परफेक्ट.

ये वीर के थॉट्स थे करा के प्रति...

वीर : S-Sure!

और वीर की हामी पाते hi वो आयी और उसके बगल से बैठ गयी.

और बस...

अगले hi पल पूरी होटल का वातावरण बदल गया. जो लोग पहले वीर को देख तक नहीं रहे थे, वो सभी अब उससे और करा को देख खुस पुसाने में लगे हुए थे. ये था करा की प्रजेंस का जादू...

जो इस क़दर फैला हुआ था...

वीर ने देखा की फौरन hi कई सारे मीडिया रिपोर्टर्स अंदर घुस उसकी फोटोज लेने लगे पर अगले hi पल, करा ने किसी को इशारा किया और कुछ hi मोमेंट्स में सभी रिपोर्टर्स बाहर थे.

ये काम था उसके बॉडीगार्ड जस्सी का, जो रघु के साथ थोड़ी दूर खड़ा हुआ था.

रघु : आखिर मिस इस लड़के में इतना इंटरेस्ट क्यों ले रही है!? हम्फ! नार्मल सा लड़का hi तोह है वो...

जस्सी : अबे चूतिये! उस लड़के ने उनकी जान बचाई थी और तूने देखा नहीं था कल?

रघु : क्या?

जस्सी : वो लड़का मिस की बचपन की दोस्त मिस सोनिआ के साथ था. इसका मतलब वो मिस सोनिआ को जानता है. तोह भला हमारी मिस को जिज्ञासा तोह होएगी hi न...!?

रघु : ओह्ह्ह्हह्ह!

जस्सी : बेवक़ूफ़ रहेगा तू एकदम...

रघु : पर मिस ने कल रात... उसका ब्लेजर को लिया हम्फ... मेरा ब्लेजर भी तोह इतना अच्छा है...

जस्सी : चल हट बे... तेरे ब्लेजर से क्या लेना देना उन्हें... पर इसका जवाब मेरे पास भी नहीं है.

रघु : ारररह्ह्ह! मेरा सर्र फटा जा रहा है सोच सोच के.

जस्सी : तोह उधर जा के पहात, इधर नहीं...

इन् दोनों से थोड़ी दूर करा और वीर बैठ अपनी बातो में लगे हुए थे. और वीर ने आखिर कर हिम्मत कर वो सवाल पूछ hi लिया...

वीर : यू...

करा : हम्म?

वीर : एहम... वो... हमारे बीच... फर्स्ट टाइम... ी मैं... उस रात जब में और आप मिले थे उस क्लब में...

करा : येह...!?

वीर : तोह... उसके बाद... हमारे बीच वो सब हुआ था... एहम...

करा : हम्म?

वीर : ी मैं... यू रेमेम्बेर राइट? W-We... *कुघ* वे... वे हद सेक्स...

करा : .....

करा का ये बात सुन्न अपने आप मुँह एकदम एक्सप्रेशनलेस हो गया.

और वीर बेचारा थोड़ा सेहम गया. की कही उसने गलत टॉपिक तोह नहीं चेरर दिया.

'सहित! इस शी पिस्सेद...!?'

करा : ी...

वीर : हम्म?

करा ने फिर वो जवाब दिया जिसकी उम्मीद वीर को बिलकुल भी नहीं थी. उसने ऐसा जवाब तोह बिलकुल भी एक्सपेक्ट नहीं किया था.

करा : ी don't क्नोव... शुड ी बे साद? ी don't फील एनीथिंग...

वीर : हँ!??

करा : ...

'क्या कहा इसने!??'

वीर : K-Kya कहा? पार्डन...!?

करा : ी साइड ी don't फील एनीथिंग. शुड ी बे साद? और हैप्पी?

ये सब क्या था? वीर के मैं में यही चल रहा था अभी. एक लड़की ने उसके कारण अपनी विर्जिनिटी खोयी और सवाल पूछने पर वो कह रही है की उससे कुछ फील नहीं हुआ? उससे ये भी नहीं पता की वो खुश होये या दुखी इस बात पे? भला ये केसा जवाब था? ये केसा रिएक्शन था? एक नार्मल लड़की को तोह अब तक उसके ऊपर चढ़ जाना चाहिए था और उसकी खटिया कड़ी कर देनी चाहिए थी. पर यहाँ करा ने तोह...

जैसे बिलकुल hi अलग जवाब दिया था. ऐसा जवाब, जिसकी वीर को कतई उम्मीद नहीं थी.

वीर : वेट! यू साइड यू don't फील एनीथिंग!?

करा : येह...! तेल्ल में... शुड ी बे साद?

'ये... कही ये पागल तोह नहीं न? No वे! इसके जैसा दिमाग तोह मेने किसी लड़की में नहीं देखा है. She's नॉट माध... बूत फिर वियययय? क्योऊ?? व्हाट इस थिस रिएक्शन?? फ़क! पारी को भी मेने स्लीप मोड में डाला हुआ है.'

वीर : देखिये... वे... हमारे बीच... वो सब हुआ... राइट? यू रेमेम्बेर!? इतनी बड़ी बात है ये... Y-You don't फील एनीथिंग?

करा : ी don't... That's व्हाई... तेल्ल में... आल्सो, व्हाट इस लाइफ? तुमने आंसर दिया था. बूत ी couldn't अंडरस्टैंड.

वीर : T-This....

'आखिर चल क्या रहा है बहनचोद ये सब!????? फुसक्कककककक!!!!'

करा उससे आशा की नज़रो से देख रही थी. पर जैसे अचानक hi वीर को कुछ आभास हुआ और उससे एक ज़ोरदार झटका सा लगा. उसने फिरसे सवाल करना शुरू किये.

वीर : वेट! तोह आपका कहना है... यू don't फील एनीथिंग...

करा : राइट...

वीर ने उन् आँखों को देखा... जो झील सी प्रतीत हो रही थी. इतने सुन्दर वो काले काले नैन...

इतना मनमोहक चेहरा... वो खुले हलके गीले बाल जिन्हे वो अपने माथे के पीछे करे हुए थी. कानो में लगी वो चमकती बालिया... सब कुछ इतना आकर्षक की पूछो मत.

मानो वीर पल भर के लिए उसकी सुंदरता में डूब गया था.

पीछे hi एक जाना पहचाना गाना बज रहा था.

जिसकी कुछ पंक्तियों ने वीर को एकदम मौन कर दिया.


सोचे दिल के ऐसा काश हो...

तुझको... एक नज़र मेरी तलाश हो...

जैसे... खाब है आँखों में बेस मेरी...

वैसे... नींदों पे सिलवटे पड़े तेरी...

भीगे भीगे अरमानो की वो हद्द है...

हाय... गीली गीली ख्वाइश भी तोह बेहद है...

मर जावा... मर जावा...


और ये पंक्तिया... गायिका की वो मधुर आवाज़ और सामने करा के वो कुछ बेचैन से चेहरे ने जैसे वीर को एक पल के लिए वही बाँध के रख दिया था. मानो जैसे वो पंक्तिया करा अपने मुँह से कहना चाह रही थी, ऐसा महसूस हुआ वीर को.

उन् आँखों में कही न कही... वीर को अत्यंत hi दर्द और पीड़ा नज़र आ रही थी. इतनी ज़्यादा की वीर को अपनी नज़रे हटानी पद गयी.

या यु कहे की उसकी नज़रे अपने आप hi करा की आँखों से अलग हो गयी.

'No No No No.... She's नॉट परफेक्ट. नॉट ात आल. She's... She's ब्रोकन...'

उसने अपनी बॉहे सिकोड़े करा को देखा. और उसके इस तरह से देखने पर बेचारी करा भी कन्फ्यूज्ड हो गयी.

पर अगले hi पल...

वीर ने उसका हाथ थामा और उससे उठाते हुए ले जाने लगा,

"के विथ में..."

"हँ???"

ये पहली बार था, जब किसी लड़के ने उसका हाथ थामा था इस प्रकार से. और उससे यु खींच के ले जा रहा था.

वो अपने हाथ को देखि, जो इस वक़्त वीर के उन् हाथो की गिरफ्त में था. उसकी रूखी रूखी हथेली की त्वचा वो अपने मखमली नरम हथेली में भली भाति महसूस कर पा रही थी. और एक अजीब सी फीलिंग उसके अंदर जाग रही थी. या यु कहे की जागना चाहती थी... या जागने की कोशिश कर रही थी.

रघु : ोये... इसकी तोह...

रघु सामने का नज़ारा देख फौरन hi बढ़ने के लिए हुआ पर तभी जस्सी ने उससे रोक दिया.

जस्सी : रुको...

रघु : ुघठ... जस्सी चोरर... वो देख वो लड़का... मिस को कहा ले जा रहा है!? और उसकी हिम्मत कैसे हुई उन्हें ऐसे छीने की?

जस्सी : शट उप... मिस ने मुझे इशारा किया अभी. की हम उन्हें फॉलो न करे...

रघु : पर...

जस्सी : मेने कहा न... और वो लड़का... ी थिंक की हम उसपे भरोसा कर सकते है...

रघु : क्या??? तुम एक अनजान लड़के पर कैसे भरोसा कर सकते हो?

जस्सी : मिस ने उसके बारे में मुझे डिटेल्स निकालने कहा था कल. साड़ी की साड़ी... उसका नाम वीर है. कुछ याद आया!? जहा तक मेरा अनुमान है... मिस के लिए वो खतरा नहीं है.

रघु : पर...

जस्सी : मेने कहा न... हम फॉलो नहीं करेंगे उन्हें.

रघु (डाट मीस्ते हुए) : फाइन!!!

***

करा को थामे वीर उससे एक थोड़ी शांत सी जगह लाया और उसके सामने खड़ा हो गया.

उसने करा को देखा और अपने दोनों हाथ उसके कंधे पर रखे और अपना माथ उसके माथे से लगा के खड़ा हो गया.

बेचारी करा... उसकी आँखें फटी की फटी थी. वो बस वीर को देखे जा रही थी. पूरी कन्फ्यूज्ड थी वो इस रवैय्ये से... पर...

कहने के लिए कोई शब्द न निकले उसके होंठो से.

"ी थिंक नाउ ी गेट आईटी..."

करा : ??

वीर : यू अरे...

करा : ??

वीर : यू अरे ब्रोकन इडियट...

करा : हहहहहह?? *गैप*

ऐसे शायद hi कभी किसी की हिम्मत हुई होगी उस से बात करने की. पर आज उससे यु इस तरह एक लड़का थामे हुए बोल पे बोल सुनाये जा रहा था.

और ये कोई और नहीं, उसकी hi विर्जिनिटी लेने वाला इंसान था ~ वीर.

करा अभी भी कन्फ्यूज्ड थी...

पर तभी उससे वीर की आँखों से निकलते हुए ासु दिखे और वो और ज़्यादा कन्फ्यूज्ड हो गयी...

भला वीर क्यों रो रहा था इस वक़्त...!?

वो एकदम प्रश्नजनक भाव से उससे देखे जा रही थी. पर वीर तोह बस उससे होल्ड किये रो रहा था.

वीर : यू अरे ब्रोकन... और उस से भी बड़ी दर्द भरी बात ये है की...

करा : ??

वीर : ...की यू don't इवन रीलीज़ आईटी यू इडियट...

करा : ...??

और अगले hi पल वीर ने कस के उससे थाम लिया और अपनी बाहो में जकड लिया.

कुछ देरर तक वो दोनों hi एक दूसरे की बाहो में थे. न तोह वीर ने उससे आज़ाद किया और न hi करा की कुछ समझ आया की ये चल क्या रहा था.

जब वीर ने उससे अपने से अलग किया तोह उसने करा की आँखों में आँखें डालते हुए देखा और कहा,

"यू वांट तो क्नोव थे मीनिंग ऑफ़ लाइफ राइट? ी विल तेल्ल यू... No! इन फैक्ट, ी विल टीच यू... क्या होती है ज़िन्दगी"

करा : Y-You विल...!?

वीर : ी विल... ी विल टीच यू एवरीथिंग... यू अरे ब्रोकन राइट नाउ.... लोनली... हर्ट... डिप्रेस्ड... फ़्रस्ट्रेटेड... अन्सियस... ापथेटिक... परप्लेसेड... राइट!?

करा : ???

वीर : आज पहली बार... किसी की मदद करने का इतना मैं कर रहा है... *स्माइल्स* ी विल मेक यू फील... एवरीथिंग...

करा : ...

वीर और करा जिस स्थिति में थे अभी, यदि उस स्थिति में कोई उन्हें देख लेता तोह आज पक्का बवाल खड़ा हो जाना था.

वीर के पास आते hi करा आज अचानक hi इतनी तिमीड सी हो गयी की वो बस वीर के फ्लो के साथ बहती सी चली गयी. और सबसे शॉकिंग ये था की... उससे ज़रा भी इसका आभास नहीं हुआ और न hi बुरा लगा.

करा : ी...

पर इसके पहले वो कुछ कह पाती वीर ने अपने बोल रख दिए,

"अब मुझे जाना होगा. ी प्रॉमिस्ड मिस सोनिआ की में जल्द hi आ जाऊंगा. आप... यू टेक केयर. We'll मीट अगेन."

और बस... उन् बातो को रख वो वह से निकल गया. करा इधर केवल उसकी जाती हुई पीठ देखती रही.

वो वही कड़ी कभी अपनी हथेली को देखती तोह कभी अपने माथे को टच करती तोह कभी अपने नग्न कंधो को...

जहा जहा उससे अभी भी... वीर का टच महसूस हो रहा था.

***

वापस आते hi वीर से कायो सवाल सोनिआ और सुहाना ने किये जिसका जवाब उसने घुमा फिर के दे दिया. फिर वो सीधे सुहाना के सामने बैठा और कहा,

"ी वांट तो टॉक तो यू..."

सुहाना : हम्म? हां तोह कहो न...

वीर : वो... सोनिआ मिस भी यही है... It's इम्पोर्टेन्ट...

सुहाना : ओह्ह्ह!

सुहाना : सोनू! जाओ... जाके बाथ ले लो...

सोनिआ : Okay!!

सोनिआ जो कोई मैगज़ीन पढ़ने में लगी थी वो अगले पल hi उठी और वाशरूम में चली गयी.

सुहाना : हम्म... अब कहो...

वीर : आपके तीन फवोर्स है न मेरे पे...!?

सुहाना : राइट...

वीर : वेल... एक और बढ़ा लीजिये...

सुहाना : यू सूरे? पहले hi तीन वाडे कर चुके है. तीन फवौर तुम्हे चुकाने है. कही... खुद के hi वादों में न फस्स जाओ.

वीर : मुझे पता है में क्या कर रहा हु.

सुहाना : ओह्ह्ह...!

वीर : बताइये फिर... विल यू हेल्प में?

सुहाना : फाइन...! तुम्हारे 4 फवोर्स हो गए अब. बोलो... व्हाट दो यू वांट!?

उसने पूछा... वो भी jaan'na चाह रही थी की आखिर वीर इतना उतावला किस बात को लेकर था. और साथ hi वो वीर के सीक्रेट्स भी jaan'na चाहती थी इसलिए वो राज़ी हो गयी. पर वीर के जवाब ने जैसे उससे पूरा चौंका के रख दिया.

वीर : ी वांट तो दो बिज़नेस.

सुहाना : हहहहह!??

***

वीर तोह अपनी ज़िन्दगी में था hi व्यस्त. आतिश को मारने के बाद उसने उस तरफ jaan'ne की कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी.

पर उससे नहीं पता था... की उसने अनजाने में hi सही पर आतिश को मार के एक नयी मुसीबत को अपने सर्र ले लिया था.

स्लोगन जो इस वक़्त अपनी एक पसंदीदा रोक्किंग चेयर पर बैठा हुआ था.

उससे साड़ी बातें अब पता लग चुकी थी. उससे इतना पता चल गया था की वीर नाम के बन्दे ने आतिश को मारा है, वो वही मुंबई का रहने वाला है, एक कॉलेज स्टूडेंट है, और उसके कुछ घर के सदस्य है...

इतनी बातें वो जान चूका था.

और अभी वो बस खुद के मैं में एक चक्रव्यूह में फसा हुआ था.

'इससे बाद में देखूंगा... पहले... मेरा मक़सद... आतिश की मौत का बदला उसके बाद. आखिर वो मेरा सबसे ख़ास स्टूडेंट था.'

वो कहते है न, बुद्धिमान लोग निर्णय लेने में ज़्यादा समय नहीं लगाते. स्लोगन जानता था की उससे इस वक़्त किस चीज़ को प्रायोरिटी देनी है.

भले hi उसका दिल आतिश का बदला लेने के लिए ज़्यादा कर रहा था पर वो हमेशा दिल की नहीं अपने दिमाग की सुनता था. और इसलिए वो अब तक ज़िंदा था.

'बोहत जल्द... मेरा मक़सद पूरा होगा. बोहत जल्द...'

***

ग़िज़ा पिरामिड्स...

ेगीपत...

हमारे भारत से कई कोसो दूर...

ेगीपत में ग्रेटर कैरो नामक एक जगह संसार की सबसे ज़्यादा पॉपुलर आर्कियोलॉजिकल साइट्स में से एक मानी जाती है.

क्यों? क्युकी यहाँ थे ग्रेट पिरामिड ऑफ़ ग़िज़ा जो था.

जिससे थे ग्रेट पिरामिड ऑफ़ खुफु के नाम से भी जाना जाता है. ये ग़िज़ा का सबसे पुराना और सबसे बड़ा पिरामिड जो था.

यहाँ भर भर के इंवेस्टीगेशंस होती थी. आये दिन कोई न कोई अर्चेओलॉजिस्ट्स की टीम आती और वो कुछ न कुछ इन्वेस्टीगेट करती और अपनी फिंडिंग्स को पब्लिक के सामने उजागर करती.

पर ऑफ़ कोर्स... इसके लिए परमिशन लेनी पड़ती थी.

और इन्ही कुछ टीम्स में से एक टीम और भी थी.

आज से इन्हे यहाँ पर इन्वेस्टीगेशन करने का मौका दिया गया था.

"Let's जो... लुक it's हूजे! राइट?"

टीम में एक अँगरेज़ लेडी थी जिसने ये वाक्य कहा तोह टीम के सभी लोगो में उसकी बात में हामी भरी. वाक़ई... पिरामिड भव्य था.

उसकी ग्रेटनेस वह खड़े होकर hi भापि जा सकती थी.

और इसी टीम में... एक औरत एक जीन्स पहने और एक शर्ट डाले अपना लगेज लिए आगे की ऑर्डर बढ़ती जा रही थी.

"वव्वव्वव्व!!"

उसके बगल से चल रही लड़की ने कहा. तोह उसका रिएक्शन देख वो केवल मुस्कुरा दी.

"ी can't बिलीव आप यहाँ पहले भी आ चुकी हो माँ. थिस इस अमेजिंग... It's फेनोमेनल."

"ये तोह कुछ भी नहीं बीटा. अंदर चलो... यू विल सी सम बिज़ार थिंग्स."

"ओह्ह्ह्ह! Don't मेक में क्यूरियस माँ"

जी हां~ ये औरत कोई और नहीं बल्कि भावना hi थी.

जो अपनी बेटी के साथ यहाँ आयी हुई थी.

और अब इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था की वीर की ये माँ कितनी क़ाबिल अर्चेओलॉजिस्ट थी. जिससे यहाँ पर आने का दूसरा मौका मिला था.

अपनी बेटी के चेहरे पर ख़ुशी देख वो बेहद खुश थी. पर जहा वो इस बात से खुश थी वही...

उससे जैसे कुछ याद आया और अगले hi पल वो वही ठहर गयी.

"हम्म!? क्या हुआ...!?"

भावना : हँ!? K-Kuch नहीं... आओ... अंदर आओ... संभल के... इसके बाद हम सीधे अंदर जाएंगे... इनसाइड थे एक्चुअल पिरामिड okay..!? के!

वो बोलते हुए अपने चेहरे के भाव को छुपाते हुए आगे बढ़ गयी. पर...

पीछे कड़ी उसकी बेटी...

उससे जाता हुआ देख रही थी. जो उत्साह थोड़ी देरर पहले था उसके चेहरे पे वो गायब हो चूका था. और एक एक्सप्रेशनलेस चेहरा सामने आ चूका था.

'चाहे आप कितना भी क्यों न छुपा लो... कितना भी क्यों न झूठ बोल लो... बूत ी कैन सी थ्रू योर एव्री एक्शन माँ. एंड ी क्नोव थे ट्रुथ यू अरे हिडिंग... ी आलरेडी क्नोव आईटी... तहत...

ी हैवे ा बरोथेर अस वेल.'

अपने मैं में सोच वो फिर धीरे धीरे आगे बढ़ी और भावना के समीप आके उसके साथ चलने लगी. उसके चेहरे पे वापस से वही उत्साह आ चूका था. जो शायद... इस बार थोड़ा बनावटी था.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!

Don't फॉरगेट तो लिखे एंड शेयर योर थॉट्स. 😁

नेक्स्ट अपडेट से एक्शन है. बे प्रेपरेड़.
 
सो सॉरी फॉर थे इनकन्वेनैंस गाइस. ी couldn't के ऑनलाइन यस्टरडे. प्लस, थोड़ा स्टोरी को लेके भी काफी ब्रेनस्टॉर्म किया में कल. और थोड़ा स्टोरी के प्लाट में भी चंगेस हुए है. अपडेट 45 विल के टुनाइट. आईटी विल बे ा मेगा अपडेट. थैंक्स फॉर वेटिंग थौघ. ✨
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 45 ~ डबल डेट!?

अब तक...

पीछे कड़ी उसकी बेटी...

उससे जाता हुआ देख रही थी. जो उत्साह थोड़ी देरर पहले था उसके चेहरे पे वो गायब हो चूका था. और एक एक्सप्रेशनलेस चेहरा सामने आ चूका था.

'चाहे आप कितना भी क्यों न छुपा लो... कितना भी क्यों न झूठ बोल लो... बूत ी कैन सी थ्रू योर एव्री एक्शन माँ. एंड ी क्नोव थे ट्रुथ यू अरे हिडिंग... ी आलरेडी क्नोव आईटी... तहत...

ी हैवे ा बरोथेर अस वेल.'

अपने मैं में सोच वो फिर धीरे धीरे आगे बढ़ी और भावना के समीप आके उसके साथ चलने लगी. उसके चेहरे पे वापस से वही उत्साह आ चूका था. जो शायद... इस बार थोड़ा बनावटी था.


अब आगे...

आज का सन बिलकुल वैसा hi था जैसा वीर ने एक्सपेक्ट किया था. सुबह उसकी हुई करा से मुलाक़ात, और फिर सुहाना से बिज़नेस करने की डील के बाद शाम को केवल वो और सोनिआ hi एकमात्र बचे हुए थे अकेले रूम में.

सुहाना को जैसा की उसने पहले hi इन्फॉर्म किया था की वो यहाँ एक इनोवेटिव फंक्शन के लिए आयी थी तोह बस, शाम को hi वो तैयार होक निकल चुकी थी. वो चाहती थी की वीर और सोनिआ भी उसके साथ hi चले पर सोनिआ ने मन कर दिया.

अब भला वीर वह अकेला क्या करता तोह इसलिए उसने भी रुकने का hi निर्णय लिया.

सुहाना से उसने बिज़नेस को लेकर जो बात करि थी वो बड़ी hi रोचक थी. सुहाना उसकी मदद करने को तैयार थी, यहाँ तक की वो पैसा लगाने भी तैयार थी. पर उसका शातिर दिमाग वीर को फसाने में इस बार काम न आया.

वीर जानता था की यदि उसने सुहाना से इन्वेस्टमेंट लिया तोह वो एक और फवौर बढ़ा देगी और बदले में न जाने क्या मांगे वो उस से.

इसलिए वीर ने इस बात पर राज़ी न होना hi बेहतर समझा.

फिलहाल यही तय हुआ की वीर अपने खुद के hi पैसे लगाएगा. पर दिक्कत ये थी उसके पास इतना पैसा नहीं था.

सुहाना : तोह तुम बिज़नेस करना चाहते हो?

वीर : हम्म!

सुहाना : क्यों?

वीर : क्यों? बिज़नेस क्यों करता है आदमी? काम समय में ज़्यादा एअर्निंग कर सके इसलिए...

सुहाना : तुम्हे पता है बिज़नेस करना कितना टफ होता है? ी एग्री की बिज़नेस तुम्हे फौरन hi अमीर बना सकता है. पर... पर वैसे hi ये तुम्हे सड़क पे भी ला सकता है.

वीर : तोह आप हो न... यू विल हेल्प में. Don't यू?

सुहाना : ओह्ह्ह...! इतने यकीन के साथ कैसे कह सकते हो की में तुम्हारी हेल्प करुँगी? हम्म?

वीर (स्माइल्स) : यू विल हेल्प में...

सुहाना : फाइन! अब बताओ... व्हाई बिज़नेस!?

वीर : ी जस्ट वांट तो ग्रो...

सुहाना : तुम्हारे कॉलेज का क्या?

वीर : I'll दो तहत इन पैरेलल...

सुहाना : हवा में उड़द रहे हो बच्चू...

वीर ने सुहाना के इस व्यंग पे कुछ ख़ास रिएक्शन न दिया. वो बस अपनी सीट पर बैठा रहा और उसकी आँखें एकदम फोकस्ड थी सुहाना पे, जो सुहाना को बड़ा hi अजीब सा महसूस करवा रही थी.

वीर : ी क्नोव व्हाट I'm दोंग...

सुहाना (मैं में) : ये... आखिर क्या है ऐसा जो ये छिपा रहा है. ाअरररह्ह्ह!! ी वांट तो क्नोव! थिस गाए इस नॉट नार्मल ात आल. बच्छु... तुझे पूरा खोल के, तेरे अंदर से सारे राज़ निकालूंगी में... आज नहीं तोह कल.

वीर : क्या सोचने लगी?

सुहाना : हँ!? N-Nahi... कुछ नहीं...

वीर : तोह?

सुहाना : वेल! ी कैन हेल्प यू. फाइन! में इन्वेस्ट करने तैयार हु... तेल्ल में योर आईडिया!

वीर : नौपे! मुझे इन्वेस्टमेंट नहीं चाहिए. ी विल इन्वेस्ट ों माय ओन.

सुहाना : Okay! पैसे है!?

वीर : वही दिक्कत है.

सुहाना : व्हाट थे हेलल? पैसे भी नहीं है और बिज़नेस भी करना है? यू थिंक I'm ा फूल और व्हाट?

वीर : वैसे... मेरे पास... वो कुछ लक्ष रखे हुए है.

सुहाना : हम्फ! उलटिमटेली थे अरे माइन...

वीर : आपने अपनी मर्ज़ी से मुझे दिए थे. सो थे अरे माइन नाउ. सो? किस चीज़ में मुझे बिज़नेस स्टार्ट करना चाहिए!?

सुहाना : वेल... यदि मुझसे पूछो तोह... कपड़ो का बिज़नेस बढ़िया रहेगा. ज़्यादा कुछ टॉम जहां नहीं है इसमें. और ये ऐसा बिज़नेस है को चलता hi है.

वीर : बूत आज कल तोह ऑनलाइन शॉपिंग भी होती है अब. विल आईटी बे...!?

सुहाना : मेने कहा न... यदि बिज़नेस एक ब्रांड बन जाए तोह वो फिर चलता hi है.

वीर : दोने थें...

सुहाना : वेट! इतनी जल्दी? यू सूरे!?

वीर : येह!

सुहाना : O-Okay! वेल... जितने तुम्हारे पास पैसे है उतने में कुछ नहीं होने वाला. में तुम्हे जगह दे सकती हु. वह तुम अपना शोरूम खुलवा सकते हो, उसके बाद उस जगह का रेंट तुम्हे मुझे देना होगा. शोरूम बनवाने की कॉस्ट अलग. यदि कपडे तुम बड़ी बड़ी ब्रांड्स के साथ कलब करके रखना चाहते हो तोह वो खर्चा अलग, और बाकी में तोह जोड़ hi नहीं रही अभी, लिखे अपने वर्कर्स को देने का खर्चा, इलेक्ट्रिसिटी बिल, शिपिंग चार्जेज, कॉन्ट्रैक्ट्स, ेट्स.

सुहाना की बातें सुन्न वीर को इतना तोह पता चल गया था की एक अच्छे बिज़नेस की शुरुआत करने के लिए उससे धेरर सारा पैसा लगने वाला था.

वीर : हम्म! प्लान यही रहेगा. बूत we'll स्टार्ट वन्स ी गेट मोरे मनी...

सुहाना : O-Okay!

कुछ यही बातें उसने सुहाना से करि थी उसके जाने से पहले. और ये सभी बातें तब हुई थी जब सोनिआ वाशरूम में नहाने गयी हुई थी.

यदि उससे ये पता चलता की वीर कॉलेज की पढ़ाई चोरर बिज़नेस लाइन में आ रहा है तोह पक्का से वो फिर से अपनी चिंता व्यक्त कर उससे बिज़नेस से दूर रहने कहती.

इसी कारण के चलते, वीर ने सोनिआ से उसके और सुहाना के बीच हुई बातें साझा नहीं की.

अँधेरा होना शुरू हो चूका था और वीर और सोनिआ दोनों hi तैयार होक नीचे आ चुके थे.

कमरे में बैठे बैठे बोरियत तोह होनी hi थी. तोह दोनों ने डीडे किया की वो दोनों hi एक वाक पर जाएंगे और बाहर hi साथ में डिनर करके लौटेंगे. आज यहाँ उनकी ये लास्ट नाईट जो थी दिल्ली में. पर... क्या माहौल वाक़ई इतना शांत रहने वाला था?

खर्र! सोनिआ और वीर दोनों hi निकल चुके थे होटल के बाहर. मौसम तोह बड़ा hi सुहाना था. पर हमारी सुहाना यहाँ नहीं थी.

सोनिआ : अच्छा हुआ हम नहीं गए...!

वीर : हम्म? राइट! उधर आप लोग तोह अपनी बातो में लग जाते में बोर होता. नॉट तहत ी कुड कम्प्लेन...

सोनिआ : केवल तुम hi नहीं वीर... में भी बोर होती.

वीर : यू don't लिखे पार्टीज राइट? फ्रीडम छीन लेती है!? इसलिए....!?

सोनिआ : येह! कल देखा था न... वह होटल में...

वीर : येह! हु वास् हे... ी फॉरगॉट...

सोनिआ : वो याद करने लायक है भी नहीं. He's रोहन. आईटी कंपनी में उसके डैड अच्छी पोस्ट पे है. और वो भी एक अच्छी पोस्ट पे है. जस्ट सम ानोथेर रिच गाए ट्राइंग तो फ्लॉन्ट में...

वीर (स्माइल्स) : तोह!? आपको केसा लड़का पसंद है!?

सोनिआ : M-Mujhe!??

वीर : Mmm-Hmmm!

सोनिआ : उम्... वेल... ी don't लिखे पीपल जो शो ऑफ करते है. ेस्पेशलय जब वो पैसो का दिखावा करते है. ी लिखे सिम्पलिसिटी. नेचुरल पर्सन जो दिखावा न करे, हु विल चेरिश में, जो हैंडसम हो, ी don't केयर यदि वो मुझसे काम कमाता हो. बूत हे शुड बे केयरिंग एंड थे ओने हु कैन प्रोटेक्ट में. कुछ ऐसा!?

वीर : ः~ वेल! That's ा लॉन्ग लिस्ट ऑफ़ क्वालिटीज़...

सोनिआ : मूउउ~ Don't जज में. आखिर तुम लड़के भी तोह लड़कियों में यही सब देखते हो न? की वो सुन्दर हो, सुशील हो, खाना अच्छा बनाती हो, वगैरह वगैरह.

वीर : वेल...

सोनिआ : तेल्ल में... तुम्हे किसी लड़किया पसंद है वीर!?

ये सवाल सुन्न, पता नहीं क्यों पर वीर के मैं में एक ख़ूबसूरत चेहरे की छवि बन्न के आयी और न चाहते हुए भी वीर उस छवि का वर्णन करने लगा,

वीर : सुन्दर... प्यारी... मददगार... जो अपना सुख चोरर दुसरो को सुख देने में व्यस्त हो जाए... जो परेशानी में फसे लोगो की हमेशा मदद करती हो... वो... जिससे देख कर बस प्यार करने का मैं करे. वो... जिस से बात कर आदमी अपना सारा दर्द भूल जाए. वो... जिससे अपने सीने से लगाते hi परम सुख की अनुभूति हो... वही है...

वीर आगे कुछ कह पाटा की उसके पहले hi सोनिआ उसकी बातें सुन्न खिल खिला के हस्सन लगी.

सोनिआ : फुफु~ ऐसा तोह तुम्हे कही कोई नहीं मिलेगा वीर आज के इस ज़माने में...

वीर (स्माइल्स) : येअहहह! यू अरे राइट... अब ऐसा कोई नहीं मिलेगा...

सोनिआ : हम्म?

वीर : चले!? बताइये! कहा चलना है!?

सोनिआ : मेने कल मैप्स में चेक किया था. देखा था यहाँ आस पास hi एम्यूजमेंट पार्क है. हाउ अबाउट तहत!?

वीर : सूरे! Let's जो!

और दोनों वीर और सोनिआ निकल पड़े एम्यूजमेंट पार्क की ऑर्डर. सुहाना को प्रकाश लेके गया हुआ था तोह आज वीर और सोनिआ नार्मल टैक्सी में सफर कर रहे थे. आज दोनों hi बोहत hi जांच रहे थे. वीर जहा एक ब्लैक शर्ट और जीन्स में था, वही सोनिआ एक मैरून कोलोउरेड ओने पीेछे ड्रेस में थी जो उसकी तइस तक hi आ रही थी.

वीर : आपको आदत नहीं होगी, नार्मल टॉक्सिस में बैठने की राइट?

सोनिआ : हम्म! बूत ऐसा भी नहीं है की मेने कभी सफर नहीं किया वीर. अस ी साइड... ी लिखे सिम्पलिसिटी. कभी कभी... थिस इस गुड तू...

उसने मुस्कुराते हुए कहा तोह वीर भी उसकी वो स्माइल देख बदले में मुस्कुरा दिया. और वो सोचने लगा... की कितना अंतर था दोनों hi बहनो में. एक जहा इतनी सिंपल तोह वही दूसरी...

'फ़क यू चोरररर मुवाहहहह~'

और एक बार फिर... वीर को सुहाना का वो रौद्र रूप याद आ गया, जब वो टेडी को घुसे पर घुसे बरसा रही थी.

वीर : *गुलप्स*

सोनिआ : ऐसे ... ऐसे क्या देख रहे हो वीर!?

वीर : No... उम्... यू लुक ब्यूटीफुल!

सोनिआ (ब्लशेस) : थैंक यू! यू लुक हैंडसम अस वेल.

वीर : एहम... वेल! हेरे वे अरे...

उतारते hi उन्हें अब आभास हुआ की वो अपने होटल में नहीं थे, जहा इतनी शान्ति थी. अब उनके सामने मौजूद थी एकदम खचा खच भीड़, ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर जाती राइड्स, शोर, हो हल्ला, और आते जाते लोग.

वीर (स्माइल्स) : चले!?

सोनिआ : हम्म!

जैसे hi दोनों काउंटर के पास टिकट लेने आये तोह टिकट वाला भी उन्हें देख के समझ गया था की ये कोई बड़ी पार्टी है. और जैसे hi उसने सोनिआ को देखा वो अगले hi पल उठ के खड़ा हो गया.

वीर : कितना हुआ भैया!?

आदमी : अरे आप तोह वही हो न??? अभी हाल hi में जिनका इंटरव्यू आया था अखबार में ...

सोनिआ : हम्म? ओह्ह! यस!!

आदमी : आप तोह अखबार में फोटू जो आयी थी उस से भी ज़्यादा ख़ूबसूरत हो मैडम...

सोनिआ (स्माइल्स) : थैंक यू!

वीर : वेल... कितना हुआ?

आदमी : अरे साहब कमाल करते हो क्या? में आप लोगो से टिकट के पैसे क्यों लूंगा? जाइये आप... एकदम फ्री है आप लोगो के लिए...

वीर (स्माइल्स) : क्यों भाई!? टिकट के पैसे क्यों नहीं लोगे? क्या हम एलियन है? या भगवान् है? हम भी इंसान hi है न? जो नियम है वो नियम है. फ्री में नहीं भाई... तुम टिकट काटो और ये लो पैसे.

आदमी : अच्छा अच्छा... वैसे ज़रुरत तोह नहीं थी. पर आप कहते हो तोह...

और उस आदमी ने उन् दोनों से पैसे लेते हुए उन्हें टिकट थमा दी.

अंदर आते hi सोनिआ ने वीर को देखा...

सोनिआ : ी लिखे आईटी वीर. I'm रियली इम्प्रेस्सेड.

वीर : हम्म?

सोनिआ (स्माइल्स) : तहत वास् सो थौघ्त्फुल ऑफ़ यू. फ्री टिकट्स मिलने के बावजूद, तुमने उस से उसकी कमाई नहीं छीनी. तहत वास् नीस.

वीर : O-Ohhh!

सोनिआ (स्माइल्स) : के! शॉल वे!?

वीर (स्माइल्स) : सूरे!

और वीर का हाथ थामे सोनिआ उससे अपने साथ ले जाने लगी. पर उससे खुद कुछ नहीं पता था की आखिर उससे जाना कहा था.

यहाँ वो दोनों तोह घूम hi रहे थे साथ में पर उन्हें नहीं पता था की उन्हें पीछे से कोई था जो देख रहा था.

"मिस! भला यहाँ क्यों आये है हम??"

"हे लीड तो में..."

"हँ!?"

पीछे खड़े रघु और जस्सी अपनी मिस को देख रहे थे जो इस वक़्त बॉहे सिकोड़े वीर और सोनिआ को हाथ में हाथ डाले जाता देख रही थी.

रघु : अबे यार... ये मिस को अचानक से क्या हुआ है?

जस्सी : मुझे नहीं पता. पर ये तोह अच्छी बात है न की मिस आखिर ये सब चीज़े के बारे में jaan'ne के लिए उत्सुकता जाता रही है?

रघु : हम्म्म... शायद हाँ...

करा रघु और जस्सी की खुसुर पुसुर से अनिभिज्ञ अपना फ़ोन निकाल आज पहली बार वीर को कॉल करि...

वीर जो की इन् सब बातो से अनजान था की साला उसके पीछे hi कुछ दुरी पर करा कड़ी उससे कॉल कर रही है, वो बिना किसी टेंशन के फ़ोन उठाया.

वीर : Hello?

करा : यू टोल्ड में... यू विल के इन इवनिंग. तो मीट में.

और बस आवाज़ सुनते hi वीर को अंदाजा लग गया था की ये आवाज़ किसकी थी. आवाज़ में अलग hi वो वज़न था. ऐसा नहीं था की करा की आवाज़ बुलंद थी. उसकी आवाज़ कोयल जैसी मीठी थी. पर उसके बावजूद, उसकी पर्सनालिटी में जो तेज था वो उसकी आवाज़ में भी झलकता था.

वीर अब बुरा फस्स चूका था. बगल में hi सोनिआ कड़ी हुई थी. यदि वो अब उसके सामने करा से बात करता है, और यदि कुछ गलत सलत मुँह से निकला... तोह पक्का दिक्कत होने वाली थी. क्युकी वैसे hi वो वीर की जान खा गयी थी कल पूछ पूछ के करा उस से मिलने के लिए क्यों उससे बुलाई थी.

तोह सोनिआ के सामने करा का ज़िक्र करने का सवाल hi पैदा नहीं होता.

वीर : वो... अर्जेंट कॉल है. िफ़ यू don't मंद!?

सोनिआ : सूरे! ी विल वेट हेरे!

वीर : थैंक्स!

और वीर थोड़ी दूर आते हुए फिरसे करा से बात करने लगा.

वीर : रियली सॉरी! ी वास् बिजी...

करा : बिजी इन व्हाट!?

वीर : उम्म्म... बिजी हु... थोड़ा काम है...

करा : लिखे!?

वीर : उम्... वो... बिज़नेस रिलेटेड...

करा : ओह्ह्ह!

वीर : Y-Yeah!!!

और वीर ने सोचा की अब वो फ़ोन काट सकता है पर तभी उसकी गर्दन के पास से दो गुलाबी होंठ खुले और अंदर से गरम गरम निकली मंद मंद सासें... और कुछ बोल... उसके कान में पड़ी.

"व्हाट काइंड ऑफ़ बिज़नेस अरे यू दोंग इन ान एम्यूजमेंट पार्क अलोन विथ सोनिआ हँ???"

वीर : ????????

एक दम से ऐसे कोई किसी को बोले तोह आदमी डर hi जाए और वीर के साथ भी वही हुआ. वो झटके से पीछे मुदा. पल भर के लिए hi सही पर उसके रौंगटे खड़े हो गए थे.

वीर : K-Kaera!???

उसने देखा की करा उससे कुछ अप्रसन्न निगाहो से घर रही थी.

वीर : अहह! वो...

करा : दोंग बिज़नेस हँ!?

वीर : No एक्चुअली...

इसके पहले की वो कुछ बोल पाटा उसने वीर का हाथ थामा और उससे ले जाते हुए साइड में ले आयी.

वीर ने जस्सी और रघु दोनों को स्पॉट किया जो यहूदा सा hi दूर खड़े हुए थे.

'व्हाट थे फ़क!? ये कैसे चूतिये बोडीगार्ड्स है? व्हाई अरे थे नॉट सतोप्पिंग हेर? सहित!! ी shouldn't हैवे लीड.'

[Sometimes it's not good to lie master.]

'हँ!? तुम कब से सच बोलने लगी? Don't तेल्ल में... तुम तोह खुद मुझसे झूठ बोलती आ रही हो.'

[Ughh!! Nooooo! My dear master. My lovely master... You know that I love you right? Please don't say such things. It hurts your Pari...]

'She's एक्टिंग वीयर्ड अगेन...'

करा उसका हाथ थामे आगे बढ़ी तोह उससे एक काउंटर नज़र आया.

करा : What's तहत!?

जब वीर ने उसकी नज़रो का पीछा किया तोह देखा की उस काउंटर पे धेरर सारे बैलून्स लगे हुए थे और गन से लोग शूट कर उन्हें फोड़ने का प्रयास कर रहे थे.

वीर : यह! ये...

करा : यू क्नोव आईटी?

वीर : हम्म! बस उन् बैलून्स को फोड़ना है... विथ तहत गन... शूट एंड विन.

करा : विन व्हाट!?

वीर : प्राइज है. लुक! वह लिखा है. 1 बैलून पर... कैंडी... 3 बल्लोंस पर... कुछ गिफ्ट है. 5 बैलून्स पर... There's ा स्माल सॉफ्ट तोय.

करा : ओह्ह्ह्ह!

वीर (स्माइल्स) : के!

करा : हँ? वेट! दो वे रियली हैवे तो...!?

पर करा कुछ न पायी. वीर आलरेडी उसका हाथ थामे उससे ले आया.

वीर : भैया एक राउंड... इनके लिए...

उस काउंटर वाले ने गन करा को थमाई और उससे चलाने दी.

वैसे तोह करा सभी चीज़ में माहिर थी. शी इवन कनेव सम मार्टिकल आर्ट्स. पर वेअपनरी में वो माहिर नहीं थी. कभी ज़रुरत hi नहीं पड़ी उससे हथियार उठाने की या इस्तेमाल करने की.

इसलिए, जैसे hi उसने गन थामी, इतने सारे बैलून्स देख उसने निशाना लगाया और चलाने लगी एक के बाद एक...

करा : इतने सारे बैलून्स है. There's मोरे थान हाफ प्रोबेबिलिटी की में ात लीस्ट एक हिट कर पाऊँगी.

*बंग*

*बंग*

*बंग*

*बंग*

*बंग*

पाछो के पाछो शॉट्स करा ने चलाये पर नतीजा!? बोले तोह निल बाटे सन्नाटा.

एक भी बैलून नहीं फूटा था. और जो थोड़ा सा उत्साह उसके अंदर पहले भरा हुआ था वो एकदम से जैसे गायब हो गया. और करा के फेस में वही एक्सप्रेशनलेस वाला चेहरा आ गया. यहाँ तक की उसका मूड और बिगड़ गया.

करा : थिस गेम इस वॉर्टलेस. थे गन है सम फाल्ट फॉर सूरे. ओपन तहत उप. There's ा फाल्ट इन it's मैकेनिज्म. थे गाए इस कनिंग उस...

'फुसक्कक्कक्ककककककक!'

वीर : M-Mein... करता हु... यू वेट! भैया! एक राउंड मेरा...

जब वीर को उसने वापस से गन लोड कर के दी...

तोह वीर ने निशाना लगाया पर अगले hi पल उसके दिमाग में एक घंटी की आवाज़ गुंजी और...

*डिंग*

[Hawkeye]

अगले hi पल... उससे एक नीला छोटा सा डॉट बन के सामने बैलून पर दिखने लगा. और जैसे hi उसने ट्रिगर दबाया...

*बंग*

*पॉप*

वो गन से निकला हुआ छर्रा सीधा जाके उसी जगह लगा जहा वीर को वो डॉट दिख रहा था कुछ देरर पहले और एक hi झटके में... वो बैलून फूट उठा.

और फिर तोह...

*बंग* *बंग* *बंग* *बंग*

*पॉप* *पॉप* *पॉप* *पॉप*

'फुसक्कककककक! थिस स्किल इस इंसाने....'

पाछो के पाछो बैलून्स उसने फोड़ डाले. इनाम के तौर पर वीर को एक छोटा सॉफ्ट तोय उस काउंटर वाले ने दिया, जो बड़ा hi वाहियात सा मुँह बनाये हुए था वीर को प्राइज देते वक़्त. उसका नुक्सान जो हुआ था.

करा : यू...!? हाउ दीद यू!?

बिना कुछ कहे... वीर ने वो सॉफ्ट तोय करा को थमा दिया.

जो आश्चर्य भाव से अपने हाथो में उस सॉफ्टटौय को देख रही थी.

उससे अजीब सी फीलिंग्स ने अपने चक्रव्यूह में घेर लिया था और अब वो समझ नहीं पा रही थी की ये सब किसी फीलिंग्स है.

वो बस ावक्वार्डली सॉफ्ट तोय को लिए उससे hi देख रही थी. और वीर उससे... वीर को जैसे अब सब कुछ धीरे धीरे समझ आ रहा था. और उसने अपना पहला लेसन शुरू किया.

वीर : ये हमारा प्राइज है.

करा : ??

वीर : वे वोन! यू एंड में... टुगेदर.

करा : आईटी वास् यू बूत...

वीर : नहीं! मेने कहा न... वे वोन थिस टुगेदर. It's योर्स नाउ. फ्रॉम माय साइड...

करा : I-I don't क्नोव...

वीर : गिफ्ट्स शुड बे एक्सेप्टेड राइट!?

करा : ....

वीर : क्या... आपको पसंद नहीं!? मेरा गिफ्ट!?

करा : It's...

उसने एक बार फिर उस सॉफ्ट तोय को देखा और फिर धीरे से बोली...

करा : It's गुड ी गेस!?

वीर (स्माइल्स) : तोह फिर रखिये!

वो मुस्कुराया. पर जैसे उससे इस बात का ध्यान आते hi की वो सोनिआ को अकेला चोरर के आया है उसकी साड़ी मुस्कराहट एक पल में गायब हो गयी.

'फुसक्कक्ककककककककक!!!'

[Isliye kabhi ek saath do naav me perr nahi rakhne chahiye.]

'शट ुप्प्प!!!'

[Haha~]

वीर : ी... ी हैवे तो जो... मिस सोनिआ को में वह अकेला चोरर के आया हु.

और इतना बोल वीर वह से निकल गया.

करा ने कुछ कहना चाहा पर उसने अपने शब्द रोक लिए. जैसे उससे पता था... की वीर फिरसे दुबारा आएगा...

इधर वीर जैसे hi सोनिआ के पास आया तोह सोनिआ उसके ऊपर चढ़ पड़ी,

सोनिआ : कहा रह गए थे बाबा तुम? 10 से 15 मिनट हो चुके है. इतनी लम्बी बात!? ी वास् वेटिंग फॉर सो लॉन्ग...

वीर : यह! वो घर से कॉल था... यू क्नोव भाभी... को ब्रीफ देना पड़ता है. उन्हें मेरी बोहत चिंता लगी रहती है.

सोनिआ : O-Okay! ी अंडरस्टैंड!

पर वीर की किस्मत न जाने किसने लिखी थी.

अगले hi पल उसका फ़ोन बज उठा और कॉलर थी...

~रागिनी!

'फुकककककक माय किसमत्तत्तत्त!!!!!'

[Haha~]

'Don't यू डरे लाफ पारी! फुकककककक!'

सोनिआ : अब किसका कॉल??

वीर : उम्... भाभी का hi है...

सोनिआ (शिघ्स) : सीरियसली!?

वीर ने कॉल उठाया और जल्दबाज़ी में बस यही कहा,

वीर : भाभी! बिजी हु! बाद में बात करता हु आपसे.

और इतना बोल उसने कॉल कट कर दिया.

बेचारी रागिनी इधर मुंबई में अजीब निगाहो से अपने फ़ोन को देख रही थी. दिन भर के काम ख़तम होने के बाद अभी उसने आज वीर को कॉल लगा कर उसका हाल चाल पूछना चाहा और बदले में उससे वीर से ऐसा जवाब मिला.

'ऐसा क्या काम है वीर को!? किस काम में बिजी होगा भला?'

पर बेचारी रागिनी को क्या पता था की हमारा वीर इधर गलती से एक प्रकार की डबल डेट में फस्स चूका था.

वीर : दोने! आइये... चलते है...

कुछ कदम आगे बढ़ते hi सोनिआ की नज़र एक बैनर पर गयी.

सोनिआ : फ्यूचर बताने वाला!? चले!?

वीर : वैसे... में इन् सब में ज़्यादा...

सोनिआ : Let's गोऊ~

वीर : वोअहहहहह!!!

और सोनिआ इसके पहले की वीर अपनी बात रख पाटा उसका हाथ पकड़ खींच के उससे ले गयी.

एक बड़ा सा टेंट मौजूद था. जिसके अंदर एक आदमी अजीब से कपडे पहन, सर्र पर कपडा बांधे बैठा हुआ था. उसकी शकल hi बता रही थी की ये साला ठगेगा...

आदमी : आ जाओ बच्चा... आ जाओ... उपरवाले ने एकदम सही जगह भेजा है मुन्ना... बैठो इधर... बोलो क्या देखना चाहते हो मेरे बच्चे...!? निकालेगा पत्ता मेरा ये तोता... बता देगा की सिक्का सही है या खोता...!!!

'व्हाट थे फ़क!?'

उस आदमी को देख वीर को बस यही लगा की साला इस से ज़्यादा एक्ससिटेड पूरी दुनिया में इस वक़्त कोई भी बाँदा न होगा.

आदमी : बैठो मेरा बच्चा...!

सोनिआ : अहह! Y-Yes!!

वीर जहा एकदम ुनींतेरेस्टेड था, वही सोनिआ जैसे कुछ सच में jaan'ne के लिए बेक़रार थी.

वीर और सोनिआ सामने बैठे. उनके सामने एक लकड़ी की छोटी टेबल थी, जिसपर न जाने क्या क्या सामान बिखरा पड़ा था. यहाँ तक की नकली खोपड़ी भी राखी हुई थी.

'भविष्य बता रहा है की क्या बता रहा बस!? नकली खोपड़ी? Wtf? करना क्या चाहता है ये?'

आदमी : हम्म! तोह क्या बनाऊ!?

वीर : कितनो को बना लिया है अभी तक?

आदमी : क्या बोलै बच्चा!?

वीर : एहम! कितनो का भिवष्य देख चुके हो अब तक?

आदमी : ये बाबा बोहत बिजी रहता है बच्चा... तुम्हारे आने से पहले... यहाँ मेने कई लोगो के भविष्य देखे है.

कहते हुए उसने अपनी पैसे लेने की ट्रे पीछे खींच ली... जो एकदम खाली पड़ी हुई थी.

'ये आदमी जोकर क्यों नहीं है!?'

[Haha~]

आदमी : तोह बताओ बच्चा! क्या बताऊ?

सोनिआ : उम्... मेरा... मेरा भविष्य!? क्या आप बता सकते हो?

आदमी : बिलकुल बच्चा!

उसने कहते हुए पिंजरे में से तोता निकाला और तोता आगे बढ़ कुछ नीचे रखे पत्तो में से कार्ड्स निकाल के उस आदमी के पास लाके रख दिया.

वीर एकदम बोर होते हुए सब कुछ देख रहा था तोह वही दूसरी ऑर्डर सोनिआ अपनी आँखों में चमक लिए ये सब देख रही थी.

'गर्ल्स... विल ऑलवेज बे गर्ल्स...'

उस आदमी ने फिर वो पत्ते उठाये और सोनिआ को देखा.

सोनिआ एकदम अन्सियस होते हुए अपने आंसर का वेट कर रही थी.

आदमी अपनी दाढ़ी को सहलाते हुए कुछ सोचा और फिर बोलै,

आदमी : अध्भुत!! अविश्वश्नीय... कमाल! तुम्हारा भविष्य एकदम उज्जवल है लड़की. थोड़ी बोहत कठनाईया है जीवन में. पर उनका हमे दत्त कर सामने करना है. है न?

सोनिआ : हम्म्म!

आदमी : रही बात तुम्हारे प्रेम जीवन की... तोह जल्द hi... तुम्हे वो इंसान मिलेगा... जिसकी तुम्हे तलाश है. बोहत जल्द...

सोनिआ : अहह! रियली!?

आदमी : बिलकुल बच्चा!

सोनिआ : O-Okay!!!! फुफु~

आदमी : और बताओ बच्चा? क्या इन् जनाब का भी देखना है भविष्य!?

वीर : नहीं इसकी कोई...

सोनिआ : हां बिलकुल अंकल...

आदमी : अभी लो बच्चा! निकल मेरे तोते... एहम! निकाल के दे पत्ते... ज़रा में भी देखु... क्या लिखा है इस शक्श की किस्मत में!?

'कहा से रटते इसने ये डायलॉग्स!?'

वीर एकदम नॉन इंटरेस्टेड होते हुए वही सामने राखी बोतल उठा के पानी पीने लगा जब...

आदमी : हम्म! जो दीखते हो वो हो नहीं हाँ!? शकल कुछ और बया करती है पर कर्म कुछ और... प्रेम जीवन में... एक के साथ मस्तिया कर, दूसरी के संग रंग रेलिया!? देख लीजिये मेम साहब... इनकी दशा तोह यही कह रही है पत्तो में... बल्कि में तोह ये कहूंगा की ये अभी hi दो तरफी चाल चल रहे है...

*Phuuuuuuuuuu*

जो पानी वीर ने मुँह में भरा था वो अगले hi पल आदमी की बात सुन्न एक झटके में उसके मुँह से बाहर निकला और पूरा नीचे बच्चे कालीन पर गिर गया.

'Wtf????'

आदमी : अरे भाई!? ये कालीन नया है... कल hi बिछवाया है.

वीर बिना कुछ बुले उठा और सोनिआ का हाथ थाम उसने टेबल पर एक 100 का नोट रखा और उससे लेते हुए बाहर निकल आया.

आदमी : ू... जनाब!?? ज़रा सुनते तोह जाते भविष्य... कमाल है...!

सोनिआ : K-Kya हुआ!?

वीर : K-Kuch नहीं! कही और चलते है?

सोनिआ : बूत... वो तुम्हारा भविष्य बता रहा था?

वीर : हम्फ! तहत गाए वास् जस्ट कनिंग उस... घंटा कुछ आता है उस से देखते. हे जस्ट सेक्स रैंडम थिंग्स.

[Haha~ He wasn't lying though.]

'शट उप!!!'

सोनिआ : ी मैं... हे साइड सम नीस थिंग्स अबाउट में. ी don't हैवे अन्य कम्प्लेंट्स.

'अहह थी गर्ल्स! इतनी इंटेलीजेंट होने के बाद भी ये सभी इन् सब चीज़ो में कैसे विश्वाश कर लेती है!?'

[That's why we are girls.]

'ाररघ्ठ!!'

वीर और सोनिआ आगे बढ़ जैसे hi आये तोह इस बार उनकी नज़र फोटो शूट वाले काउंटर पर गयी.

सोनिआ : लुक!!! Let's जो! हमे भी कुछ क्लिक करवानी चाहिए. फॉर मेमोरीज...

वीर : ी... ी don't वांट तो... आप जाइये न...

सोनिआ : बूत क्यों!?

वीर : कुछ लम्हे... केवल दिल में क़ैद करने चाहिए...

उसका वाक्य जैसे सोनिआ को कुछ समझ में नहीं आया. उसने वीर को घर के देखा पर उसके चेहरे पर बस एक स्माइल थी, जो सोनिआ कुछ समझ नहीं पायी.

सोनिआ : कभी कभी... मेमोरीज के लिए... फोटोज क्लिक करवानी चाहिए... वीर!

वीर : प्लीज! ी रियली don't वांट तो... आप जाइये... में आपकी अपने फ़ोन से भी एक्स्ट्रा निकाल देता हु.

सोनिआ : Okay! ी won't फाॅर्स यू!

और वो चली गयी, जहा एक कैमरा मन सभी की फोटोज पोलरॉइड कैमरा से निकाल के तुरंत hi उन्हें दे रहा था.

वीर सोनिआ का हस्ता चेहरा देख खुश था. पर उसका अंतर मैं कही न कही एकदम मायूस था, जिससे पारी ने महसूस कर लिया था.

[I will never forgive them. I will never. It's because of them that you don't like to take pictures right master!? Shuru se hi... Aapko harr photo me unn logo ne peeche khada kiya ya photo me hi nahi liya, jo lii wo bhi dhang ki nahi lii kabhi. Family photo me jaha sabhi logo ke hasste chehre dikhte hai, waha ya toh aapka chehra hi nahi tha ya aisa tha ki dikhaayi hi na de. They never paid attention to you at all. I hate them so much.... ]

'लीव आईटी पारी!'

शायद पारी समझ गयी थी...

वीर ने जो बोल सोनिआ को कहे थे उनका मतलब...

कुछ लम्हे केवल दिल में क़ैद करने चाहिए. वीर का मतलब था.... अपनी उन् डार्क मेमोरीज से. फोटो देख कर तोह आदमी बता देता की फोटो में वो अच्छे थे या नहीं पर... दिल में उन् लम्हो को क़ैद रखने से... किसी को ये नहीं पता लगने वाला था की वो लम्हे उस आदमी के लिए अच्छे थे या बुरे.

वो लम्हे... केवल उसके दिल में hi दबे रहने वाले जो थे.

जैसे यहाँ सोनिआ को नहीं पता चला. वीर के उन् लम्हो के बारे में...

और आज ऐसे hi...

उन् दोनों का ये दिन कुछ इस प्रकार समाप्त हुआ.

डिनर कर वो होटल लौट चुके थे. सुहाना भी लेट नाईट आ चुकी थी और यहाँ आज दिल्ली में ये उनकी लास्ट नाईट थी स्टे की.

अगली सुबह की फ्लाइट से उन्हें मुंबई निकलना था.

दिल्ली में वीर ने जैसा सोचा था उस से कई गुना बेहतर समय गुज़रा. उससे कोई भी मिशन नहीं मिला. जो की अच्छी बात भी थी और बुरी भी.

अच्छी इसलिए की वो अपने शहर में नहीं था. और दिल्ली में उससे परेशानी होती. तोह मिशन न मिलना एक अच्छी बात थी. पर न मिलने से... पारी को लेवल उप करना और लेट होने वाला था.

वीर की ये दिल्ली ट्रिप में उसने कई साड़ी चीज़ो को मोड़ दे दिया था. अब मुंबई में आके... उन् नयी चीज़ो की शुरुआत कैसे होनी थी ये देखने लायक था.

पर...

क्या वो वाक़ई अभी अपनी शान्ति भरे पालो का मज़ा ले सकता था!? या कोई नया तूफ़ान उसका मुंबई में वेट कर रहा था!? ये उससे जल्द hi पता लगने वाला था.

.

.

.

.

.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

ये एक नई चेंज था जो मेने किया बिकॉज़ ी थॉट थिस वास् फन. और एक्शन के स्टार्ट होने से पहले थोड़ा लाइट माहौल वास् नीडेड. सो थिस इस आईटी.

बाकी लिखे करने का... 😁


धन्यवाद!
 
अपडेट - 46 ~ क्रासिंग पथ्स

अब तक...

वीर की ये दिल्ली ट्रिप में उसने कई साड़ी चीज़ो को मोड़ दे दिया था. अब मुंबई में आके... उन् नयी चीज़ो की शुरुआत कैसे होनी थी ये देखने लायक था.

पर...

क्या वो वाक़ई अभी अपनी शान्ति भरे पालो का मज़ा ले सकता था!? या कोई नया तूफ़ान उसका मुंबई में वेट कर रहा था!? ये उससे जल्द hi पता लगने वाला था.


अब आगे...

मुंबई...

वीर सुहाना और सोनिआ के साथ दिल्ली ट्रिप में जाने के बाद वह से अपने घर लौट चूका था. काफी सारे इन्सिडेंट्स हुए वह पर. जो कुछ उसके फवौर में थे और कुछ उसकी पहुँच के बाहर थे.

पर इतना ज़रूर था की वीर को अपना पथ समझ आ गया था. उससे किस दिशा में बढ़ना है और किन लोगो को लेके बढ़ना है ये उसके दिमाग में पूरी तरह से क्लियर हो चूका था.

और क्यों न होता? आखिर उसने अपना इंटेलिजेंस जो बढ़ा लिया था.

दिल्ली ट्रिप में जाने से पहले उसके स्टैट्स कुछ इस प्रकार से थे.

[ स्टैट्स :

स्ट्रेंथ - 50/100

इंटेलिजेंस - 50/100

अगिलिटी - 50/100

ेंदुराने - 50/100

अपीयरेंस - 40/100]

और 52 पॉइंट्स रमैनिंग थे. पारी ने बताया था की अब 50 पॉइंट्स के ऊपर जाने के लिए, 2 पॉइंट्स 1 पॉइंट के बराबर होएंगे.

मतलब सिंपल सी बात. यदि वीर अब अपनी स्ट्रेंथ 50 से 60 करना चाहेगा तोह उससे 10 नहीं बल्कि उसके दुगने पॉइंट्स यानी की टोटल 20 पॉइंट्स उससे इन्वेस्ट करने होंगे. ये अपने आप में और भी ज़्यादा कॉम्प्लिकेटेड होता जा रहा था.

पर पारी का कहना साफ़ था. यदि पावर चाहिए तोह पापड तोह बेलने पड़ेंगे. स्टैट्स को जल्दी बढ़ाना है तोह ज़्यादा से ज़्यादा पॉइंट्स चाहिए होंगे. ज़्यादा पॉइंट्स चाहिए तोह ज़्यादा से ज़्यादा मिशंस करने होंगे और उनकी डिफीकल्टी का लेवल भी बढ़ता जाएगा.

मोरे यू प्रोसीड, मोरे डेंजरस आईटी गेट्स.

और इसी के चलते, दिल्ली से लौटने से पहले उसने उस रात अपने इंटेलिजेंस को बढ़ाना ठीक समझा. उसने सीधा 40 पॉइंट्स इन्वेस्ट कर, अपना इंटेलिजेंस 20 पॉइंट्स से बढ़ा लिया था. बचे हुए 12 पॉइंट्स उसने अपनी स्ट्रेंथ में दाल दिए.

शायद वीर स्ट्रेंथ और इंटेलिजेंस का कॉम्बो बना के आगे बढ़ने की सोच रहा था. जो की वाक़ई एक कमाल को टैक्टिक थी, पारी भी उसके इस फैसले से इम्प्रेस्सेड थी.

अब उसके स्टैट्स कुछ इस प्रकार से थे.

[ स्टैट्स :

स्ट्रेंथ - 56/100

इंटेलिजेंस - 70/100

अगिलिटी - 50/100

ेंदुराने - 50/100

अपीयरेंस - 40/100]

पॉइंट्स भले hi न बचे हो पर वीर जानता था की पॉइंट्स उससे बखूबी मिशन कम्पलीट करने पर मिलते रहेंगे.

पर अभी सवाल था की आखिर जवाब क्या दे!?

उसके सामने रागिनी एक नेवसपपेर लिए कड़ी हुई थी. और नेवसपपेर में उसकी और करा की फोटो आपस में बैठे साफ़ साफ़ नज़र आ रही थी.

और खबर भी बोल्ड लेटर्स में थी...

'मिस करा ऑफ़ क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स स्पॉटेड इन ा लविश पार्टी इन ान एक्सक्वीसीते ब्लैक ड्रेस. बूत who's थे यंग लड़ बेसीडे हेर?'

रागिनी प्रश्नभरी निगाहो से उससे घर रही थी. यहाँ तक की सुमन, आभा और सोनाली भी वही मौजूद थी.

वीर (शिघ्स) : भाभी...

रागिनी : बोलो वीर! मेने कहा था न!? मुझे सब कुछ jaan'na है. बताओ अब!

वीर जानता था की बिना सच सुने उसकी रागिनी भाभी maan'ne वालो में से नहीं है. उसने एक लम्बी सास ली और सब कुछ बताना शुरू कर दिया.

रागिनी को अँधेरे में रखना उससे कुछ सही नहीं लगा इसलिए उसने ये सब बताया की कैसे वो सोनिआ और सुहाना के कांटेक्ट में आया और कैसे उनकी दोस्ती बढ़ी और कैसे वो इत्तेफ़ाक़ से वह दिल्ली होक आया.

ऑफ़ कोर्स, उसने सुहाना से डील वाली कोई बातें नहीं बतायी और न hi आतिश का कोई ज़िक्र किया. उसने उतना hi बताया जितना ज़रूरी था.

रागिनी : तुम्हे पता है!? में कितनी चिंता में थी वीर? कल में अपने सारे काम ख़तम कर तुम्हारे मुँह से बस इतना सुन्न ने के लिए कॉल लगाई थी की तुम सही सलामत हो... और... और तुमने मेरा कॉल उठाते hi क्या कहा था!? भाभी! में बिजी हु, बाद में बात करता हु...

कहते हुए वो वीर को मुँह फुला के देखने लगी. गलती तोह की थी वीर ने. और उससे वाक़ई अब बुरा भी लग रहा था. रागिनी उसकी चिंता कर उसका हाल चाल पूछने के लिए फ़ोन की थी और यहाँ उसने ऐसा व्यवहार किया उसके साथ.

वो आगे बढ़ा और रागिनी को अपनी बाहो में भर उससे अपने सीने से चिपका लिया.

वीर : I'm सॉरी भाभी! मेरा कोई भी इरादा ऐसा करने का नहीं था. में उस वक़्त... सोनिआ जी के बगल से था. और कुछ ज़रूरी बातें hi चल रही थी. इसलिए...

रागिनी बेचारी... उसका जो भी गुस्सा था वो जैसे एक झटके में hi कही गायब हो गया. और उसका चेहरा गुस्से की जगह किसी और चीज़ के चलते लाल पड़ने लगा.

रागिनी (ब्लशेस) : O-Okay!

वीर (स्माइल्स) : नेक्स्ट टाइम से ऐसा नहीं होगा. ी प्रॉमिस.

रागिनी (ब्लशेस) : H-Hmmm!

और वो जल्द से जल्द वीर की बाहो से चूत अपनी तेज़्ज़ धड़कन लिए अंदर किचन में भाग गयी.

इधर वीर केवल उससे जाता हुआ मुस्कुराते हुए देख रहा था. और अगले hi पल उसने मैं में hi कहा,

'फवौरीबिलिटी चेक'

*डिंग*

[Ragini's Favourability : 59]

उसने अगले hi पल सुमन को इशारा किया और ऊपर मिलने को कहा.

सुमन हां में सर्र हिलायी और कुछ देरर के लिए किचन में चली गयी.

***

कुछ देरर बाद वीर अपने बाथरूम में मौजूद था पर वो अकेला नहीं था.

बाथटब में जहा वो गरम पानी में टिक के अपने परर लम्बे किये बैठा हुआ था तोह वही उसके साथ hi बाथटब में सुमन भी मौजूद थी.

पूरी नग्न हालत में वो अपने मालिक से चिपकी हुई थी. और वीर के सीने में झाग को उठा के वो उसके सीने में मॉल रही थी.

उसकी नंगी दूध की थैलिया भी वीर की छथि में hi धसी हुई थी.

और उसके गालो में इस वक़्त थोड़ी शर्म थी. शर्म क्यों!? आज वाडे के अनुसार उसके मालिक कुछ करने वाले जो थे.

दोनों के बीच काम hi बातें हो रही थी. वीर बस रिलैक्स करना चाह रहा था. वो बीच बीच में सुमन को खींचता और उसके रसीले होंठो को अपने मुँह में भर बेरहमी से चुस्त तोह कभी वो उन् बड़े बड़े थानों को अपने हाथो से जकड़ता और उन्हें जी भर के मसलता. और इधर सुमन अपने मालिक के हर्र एक अंग को सेहला रही थी.

वो इस वक़्त वीर के ऊपर hi सर्र रख लेती हुई थी.

वीर : यदि इस वक़्त... कोई ऊपर आ जाए तोह क्या होएगा सुमन!?

सुमन (स्माइल्स) : उन्हें शक होगा. या हो भी सकता है पता चल जाए.

वीर : तोह हमे ये नहीं करना था राइट!?

सुमन : क्यों नहीं!? जिससे पता चल जाए, तोह चल जाए.

वीर : तोह तुम्हे कोई डर नहीं!??

सुमन : बिलकुल भी नहीं!

वीर : तुम्हे पता है!? मेरे ख्याल से तुम्हारी बेटी... सोनाली को हम पे शक है.

सुमन (स्माइल्स) : उससे शक नहीं है मालिक. बल्कि उससे सब कुछ पता है.

वीर : हँ!? तोह!? सच पता होने के बाद भी... उसने... केवल गुस्सैल आँखों से मुझे क्यों देखा? कुछ कहा क्यों नहीं??

सुमन : कैसे कहेगी? टाँगे न तोड़ दूंगी में उसकी. अभी बच्ची है न, नादान है. समझती नहीं है. समझा के भी रखा हुआ है की...

वीर : की...!?

सुमन : माफ़ करना मालिक. इसके आगे नहीं कह सकती. वचन बढ़ हु.

वीर (शिघ्स) : तुम और तुम्हारे वचन. न जाने कब इन् बातो पर से पर्दा हटेगा!?

सुमन : बातो से पर्दा हेट या न हेट पर... कोई और पर्दा ज़रूर हट सकता है.

कहते हुए उसने वीर का लुंड अपने हाथो में भर लिया और वो आगे सरक के ठीक उसके कानो के समीप आयी.

सुमन : में जानती हु क्या sunn'na चाहते हो आप. मालिक!!!! आपकी... आपकी ये रांड यहाँ हाज़िर है... आपकी रखेल... एक वो औरत जो सिर्फ अपने मालिक को सुख देने के लिए hi पैदा हुई है... जो अपने मालिक के लिए कुछ भी कर सकती है.

उसके अश्लीलता से भरे शब्द वीर के कानो में पड़ते hi उससे उकसाये जा रहे थे. सुमन जैसे जानती थी की अपने मालिक को कैसे उकसाना है. क्युकी उसके हर्र बोल पर... वीर का लुंड झटका जो मार रहा था उसके हाथो में.

और अगले hi पल वीर ने एक hi झटके में उससे दबोचा, पानी में hi छाप छाप कर उसने सुमन को अपने नीचे लिया और उसकी गर्दन को चूसने लगा.

"आअह्हह्ह्ह्ह! मालिक...."

वो सिसकी तोह वीर ने एक हाथ उसके उन् थानों को मसलने में लगा दिए और दूसरा हाथ ले जाके उसने उसकी मुनिया को टटोलना शुरू कर दिया जो अंदर से पहले hi रस छोड़े जा रही थी.

कुछ देरर की होंठो से चुसाई के बाद, अपना हथियार पकड़ वीर ने सुमन की छूट पर लगाया और करारा शॉट में आधा लुंड अंदर पेल दिया.

"स्स्स्सस्स्स्स.... आअह्ह्ह!!!"

और अगले एक और ज़ोरदार शॉट के बाद वीर पूरा का पूरा सुमन के अंदर समां चूका था. सुमन जोरर से अपने मालिक के सर्र के बालो को पीछे से जकड़ी हुई थी और अपनी दोनों टांगो को वो वीर की कमर पर कस्सी हुई थी.

आवाज़ आ रही थी तोह बस पानी के छलकने की जो वीर के हर्र धक्को पर बाथटब में हलचल पैदा कर रहे थे.

*छाप* *छाप*

*ठप्प* *ठप्प*

की कुछ मिली जुली आवाज़ें hi बाथरूम में गूँज रही थी. आज इतने समय के बाद वीर अपना माल निकाल रहा था. जितना भी फ़्रस्ट्रेशन भरा था उसके अंदर आज वो सब कुछ खाली करने वाला था.

आज वो अपना पूरा माल, सुमन के छेड़ो में उड़ेलने वाला था. सुमन इधर अंदर hi अंदर बेहद खुश थी की आज तोह वो पक्का गर्भवती होक रहेगी. पर बेचारी उसको क्या पता था की इधर वीर ने सेक्स प्रोटेक्शन स्किल ों करके राखी हुई थी. जब तक वो नहीं चाहेगा, सुमन तोह क्या कोई भी औरत गर्भवती नहीं हो पाएगी उसके ज़रिये.

"आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह! मालिक... ऐसे hi... मालिक... मारिये अपनी इस रांड की बुर... और मारिये मालिक..."

वो जानती थी की वीर को कैसे उसके फुल पोटेंशियल में लाना है. कैसे उत्तेजित करना है. वीर और तेज़्ज़ धक्के मारता और उसकी नंगी चूतड़ों पर अपने हाथो से छाते लगाता जिसके चलते सुमन की नंगी गोरी गांड थिरकते हुए हिलती और लाल पड़ने लगी. बेचारी सुमन सिहर के रह जाती हर्र एक छाते पर. परन्तु आखिर यही तोह वह चाहती थी.

एक मैसोचिस्ट जो थी वह. जितना दर्द उसके मालिक उससे देते उतना hi पानी उसकी छूट चोररटी...

"आअह्ह्ह! सुमन... फुककककक! फीलस सो गुड.... तुम मेरी हो न!? ये ले... मेरी रांड..."

*स्लैप*

"आआह्ह्ह्हह्ह! स्स्सस्स्स्स.... मालिक..."

*ठप्प* *ठप्प* *ठप्प*

और काफी देरर की इस चुदाई के बाद वीर ने अपना तीसरा लोड, सुमन की छूट में उड़ेल दिया.

सुमन खुद बेचारी चार बार जहर चुकी थी. दोनों को hi करीब एक घंटा तोह हो hi गया होगा बाथरूम में घुसे. पर उसके बावजूद दोनों को कोई परवाह नहीं थी.

सुमन... कुटिया बने अपने मालिक के लुंड को मुँह में भर उससे साफ़ कर रही थी. उन् दोनों का कामरस जो वीर के लुंड में लगा हुआ था वो ख़ुशी ख़ुशी उससे मुँह में भर पी रही थी. और वीर इधर शावर ों किये अपने मुँह पर पानी की बूंदो को एन्जॉय कर रहा था. बीच बीच में वो सुमन के सर्र पर हाथ फरता, जैसे मानो वो उसकी कोई पालतू जानवर हो और सुमन भी किसी जानवर की तरह सिहरते हुए मुँह में लुंड लिए घर गहराने लगती...

जब दोनों का hi ये जिस्मानी खेल ख़तम हुआ तोह वीर ने वही एक वाशरूम के स्टूल पर सुमन को बैठाया और फिर अपने हाथो में एक औज़ार लिए वो सुमन के सामने नीचे hi बैठ गया.

बेचारी सुमन के गाल इस वक़्त शर्म के मारे पूरे टमाटर की तरह लाल थे. और क्यों न होते!?

वीर : टाँगे फेलाओ सुमन...

वीर के कहने पर सुमन शर्माते हुए अपनी दोनों टांगो को खोल के बैठ गयी और उसकी गीली बालो से भरी मुनिया वीर के सामने थी.

वीर ने अपने हाथ में शेविंग क्रीम ली और सुमन की छूट पर मॉल उसने धेरर सारा झाग बनाया.

फिर रेजर को हाथ में लिए वो आगे बढ़ा,

"बिलकुल भी हिलना मत सुमन... वर्ण कट लग जाएगा."

सुमन (ब्लशेस) : J-Jii मालिक!

फिर जो समय गुज़रा वो इतना शान्ति का समय था. वीर तोह सुमन के गुप्तांग से बालो को हटाने में व्यस्त था पर बेचारी सुमन के लिए ये समय काटे नहीं काट रहा था. सबसे ज़्यादा शर्म तोह उससे hi आ रही थी.

सेक्स करना अलग बात थी. पर ऐसे अपने गुप्तांग को अपने मालिक के सामने खोले हुए बैठना और अपनी मुनिया के पूरे दर्शन देना, अपने आप में एक शर्म की बात थी.

[Ohhhhhh..... ]

पर अचानक hi पारी के मुँह से बोल सुनते hi वीर का हाथ लड़खड़ाया और बेचारी सुमन को चोट पहुचाते पहुचाते बचा वीर.

'Wtf!?? P-Pari!??'

[Hmm?]

'वेट!! Y-You वेरे इन स्लीप मोड राइट?'

[Huh? Kab? Aapne daala kya mujhe sleep mode me?]

'हँ!? No वेट! तुम तोह... तुम तोह हमेशा अपने आप चली जाती थी न? जब भी में सेक्स करता हु!?'

[Hmm? O-Ohhhh! I mean... Ahem...]

'There's समथिंग डेफिनिटेली रॉंग विथ पारी.'

[E-Ehh!? No No No... Master! Nothing's wrong. Why are you thinking like that? Mein aapki hi toh Pari hu na... Right!?]

***

पारी के अजीब बेहेवियर को फिलहाल के लिए होल्ड पर रख वीर शाम के वक़्त आ चूका था श्रेया के घर.

दिल्ली जाने से पहले उसने बोल के जो रखा हुआ था की दिल्ली से लौटने के बाद वो आएगा ज़रूर उनसे मिलने.

पर...

श्रेया तोह खुश थी उसके यहाँ आने पर. जूही भी बेहद खुश थी. मामू मामू की ृत्त लगाए वो वीर पे hi चढ़ी हुई थी और उससे चोरर hi नहीं रही थी.

पर...

उसकी निधि ma'am... न hi उस से नज़रे मिला रही थी सही से. न hi ज़्यादा बात कर रही थी. काम का बहाना कर वो बार बार कही किचन में चली जाती तोह कही अंदर बैडरूम में. पर हॉल में जहा वीर बैठा हुआ था उधर आने से hi कटरा रही थी निधि.

उन् दोनों की आखिरी मुलाक़ात भी तोह आखिर ऐसी hi थी. वीर आखिरी बार निधि से उसकी हेयर क्लिप लौटाने जब आया था तब मिला था.

और... उस मुलाक़ात में क्या हुआ था, ये बात दोनों hi जानते थे.

क्या शायद उसी के चलते निधि वीर के सामने आने से कटरा रही थी या बात कुछ और hi थी?

उन् दोनों के hi ये खामोशी जैसे श्रेया ने भांप ली थी.

आज वैसे... वो भी बोहत hi प्यारी लग रही थी. या यु कहे की आकर्षक लग रही थी. सफ़ेद टॉप और जीन्स पहने वो इस सिंपल से ऑउटफिट में भी बड़ी hi कमाल की जांच रही थी.






श्रेया : ारी... ी... न... वेट! मैंने तुम्हारे लिए कुछ खरीदा है.

वीर : मेरे लिए!?

श्रेया : Mmm-hmmm

और वो उठी और अंदर से कुछ लेके आयी.

श्रेया : थिस इस फॉर यू...

वीर ने देखा तोह पाया की एक केयरिंग थी. एक प्यारी सी केयरिंग. एक डॉलफिन थी केयरिंग के रूप में.

श्रेया : उम्... छोटा सा गिफ्ट है. वेल! अब तुमने तोह अपनी बाइक की पार्टी न दी तोह मेने सोचा काम से काम में यही दे दू...

वीर : O-Ohhh! वो बाइक... भाभी ने मुझे अस ा बर्थडे गिफ्ट दी थी.

श्रेया : हां तोह? पार्टी तोह बनती है न? बर्थडे पार्टी किधर गयी और!? हाँ!?

वीर : उम्... वेल! Okay! आप कहिये! किधर चलना है? हम वही चलेंगे.

श्रेया (स्माइल्स) : ये हुई न बात! बच्चू... अच्छा खर्चा करवाउंगी. हम्म... Let's सी... एक नई रेस्टोरेंट खुला है. उधर चलते है लंच करने? हाउ अबाउट तहत? बूत इतना hi नहीं... मूवी भी चलेंगे उसके पहले...

वीर : पूरी जेब खाली करवाने की प्लानिंग है हाँ!?

श्रेया : ः~ समथिंग लिखे तहत. क्यों डर गए?

वीर : न न... कल तोह फिर... दोने!

श्रेया : ये हुई न बात...

जूही : मामू... मुझे भी चलना है. में भी चलूंगी!

श्रेया : नहीं जूही! तुम नहीं...

जूही : मुउउउउउउ~

श्रेया : ये तुम्हारी प्यारी प्यारी आँखें इस बार मेरा डिसिशन नहीं बदल पाएंगी. तुम्हारे वीर मामू कल के लिए बूकेड है. अब तुम अपने वीर मामू से डिसकस करो.

जूही : माहामुउउउउउ~

वीर ने न जाने ऐसा क्या कहा जूही के कान में की वो अगले पल hi शांत हो गयी और हम्म हम्म करते हुए वो वीर की केयरिंग लिए खेलने लगी.

श्रेया : ऐसा क्या कहा भला तुमने उससे!?

वीर (स्माइल्स) : ये हमारे बीच का सीक्रेट है.

श्रेया : हम्म... वेल! रेडी रहना... यू एंड में टुमारो...

श्रेया तोह फुल मूड में थी वीर से पार्टी लेने के लिए पर... पर क्या वो वाक़ई पार्टी थी? या कही...!? कुछ और hi चल रहा था श्रेया के मैं में!?

जो भी था, निधि को अंदर किचन में सब कुछ सुनाई दे रहा था. उसके हाथ जो सब्ज़िया काटने में व्यस्त थे वो अचानक hi रुक जो चुके थे.

न जाने अभी कितना प्रयास किया उसने, की बाहर जाके वीर से सीधे मुँह बातें कर पाए. पर जैसे hi वो वीर को देखती... उससे पुराने पल याद आने लगते.

खासकर... वो पिछली मुलाक़ात. जब वीर अपने हाथो से उसके बालो में वो क्लिप लगा रहा था. उसके गरम सासें जो उसकी गर्दन पर पद रही थी और कैसे उस मोमेंट को बगल की औरत ने देख लिया था. वो तोह अच्छा हुआ की मकान मालकिन से निधि के रिलेशन्स अच्छे थे. वर्ण... शायद अब तक निधि को फ्लैट खाली करना पद जाता.

श्रेया : उम्... तुम बैठो में आती हु वाशरूम से...

वीर : हम्म!

श्रेया उठ के वाशरूम में चली गयी. और इधर वीर अब अकेला हॉल में था. कहने को तोह जूही भी थी पर वो टीवी में अपने फवौरीते कार्टून को देखने में लगी हुई थी.

और यही ओप्पोर्तुनिटी देख वीर उठा और किचन में गया.

निधि... किचन में कड़ी सब्ज़ी काट रही थी. जब से वो आया था, तब से एक भी बार निधि ने ढंग से कुछ शब्द न कहे वीर से. बस 'आओ वीर', 'बैठो', 'क्या खाओगे?'....

इन् शब्द के अलावा निधि ने कोई बात नहीं की थी उस से. वो गुलाबी साड़ी, और उस गहरे नीले रंग के ब्लाउज में वो अलग hi क़यामत लग रही थी.

उसका ये रूप जैसे वीर को उसके समीप बुलाने पर मजबूर कर रहा था.

और न चाहते हुए भी वीर ठीक पीछे आके उसके खड़े हो चूका था.

वो आधे से ज़्यादा नग्न पीठ वीर भली भाति देख पा रहा था. वैसे तोह निधि ऐसा ब्लाउज नहीं पहनती थी घर में. पर शायद... अब वीर उसके घर में मौजूद नहीं रहता था. शायद इसलिए आज वो ये पहनी हुई थी.


निधि~





और इत्तेफ़ाक़ से... आज hi वीर को आना था.

जैसे hi निधि को अपने पीछे किसी के आने की आहात महसूस हुई, उसकी चाक़ू जो सब्ज़ी पर चल रही थी वो वही रुक गयी.

और अगले hi पल...

वीर की गरम सासें और उसके मुँह से निकले बोल एक बार फिर उसके कानो में पड़े...

"क्यों!? इतना भी मत रूठो ma'am... की में मौन हो जाऊ. कुछ कहने लायक hi न बच्चू. आपकी ये नाराज़गी... आपको पता है!? मुझे कितना दुःख देती है?"

उन् शब्दों को सुनते hi निधि की सासें अगले hi शान तेज़्ज़ हो गयी. वो पीछे नहीं मुड़ी. पर वीर निधि की तेज़्ज़ धड़कनो को भांप चूका था. उसकी खुद की धड़कने उसके काबू में नहीं थी.

निचला होंठ दबाये, निधि अपने thar-tharaate हुए होंठो को काबू में करने का प्रयत्न करने लगी.

वीर को पता नहीं क्या सूझा की अगले hi पल वो आगे बढ़ा और उसने एक हाथ निधि के नग्न पेट पे फिराया...

निधि : *गैप्स* !!!!!????????

उसने अपना चेहरा उसके कंधो के समीप ला के उधर टिकाया और फिरसे कहा,

"ये बात आप भी जानती हो ma'am. की आपकी बेरुखी... मुझसे बर्दाश्त नहीं होती है. आप hi तोह मेरा मोरले बढ़ाती हो मेरे टफ टाइम्स में. यू अरे माय सपोर्ट. आप उस पिलर की तरह हो जो बिल्डिंग को खड़े रखने में मदद करता है. जब... वो पिलर hi बिल्डिंग से हट जाएगा... तोह भला बिल्डिंग का क्या होगा ma'am!? वो तोह धस्स hi जाएगी न!?"

अपने हाथ को निधि के नग्न पेट पर कस उसने निधि को पीछे से hi अपने सीने से लगा लिया. कस के... जोरर से...

पर अगले hi पल...

*चाताआआअआककककक*

एक ज़ोरदार छाता वीर को अपने गाल पर महसूस हुआ.

'!????'

[.....]

वो खुला मुँह लिए निधि को प्रश्न जनक आँखों से देखा पर जैसे अगले hi पल वीर को अपनी गलती का एहसास हुआ...

जब उसने निधि की आँखों में बन्न रहे वो आसुओ की बूंदे देखि... उसके कापते हुए होंठ देखे जिन्हे वो दातो में दबा दबा के थार थाने से रोक रही थी. रोक रही थी कुछ फिरसे गलत कहने से...

एक बार उन् होंठो से निकले गए शब्दों का परिणाम निधि देख चुकी थी. क्या हुआ था जब गलती से उसने कुछ बातें कह दी थी. इस बार... वो खुद को रोक रही थी. पर इसका ये मतलब नहीं था की वो अन्य हरकतों को आमंत्रण दे रही थी.

वीर को अगले पल hi रीलीज़ हुआ की उसने कितनी घिनौनी हरकत की. और वो अपना सर्र झुकाये वही खड़ा हो गया.

"राइट! ी... ी डेसेर्वेद आईटी. ी shouldn't हैवे बीन हेरे. ी... I'm सॉरी. M-Mein... मेरा यहाँ रहना ठीक नहीं..."

और धीरे से बोल वो अगले hi शान तेज़्ज़ कदमो के साथ किसी हवा के झोके की तरह बाहर निकल गया.

निधि... केवल अपनी साड़ी के चोरर को भींचे वही कड़ी उससे जाता देखती रही. पर इस बार न hi उसकी कुछ बोलने की हिम्मत हुई और न hi वीर को रोकने की.

***

[What the hell? Why were you so pushy with her today? Master!?]

'ी क्नोव... No! ी जस्ट don't क्नोव... पता नहीं... अपने आप hi सब कुछ हो गया. यू क्नोव राइट? मेरे कोई भी गलत इंटेंशन्स नहीं थे. ी... ी जस्ट वांटेड तो होल्ड हेर.'

[Holding a married woman alone in her house who's already trying to divorce her husband. Sure! Sounds good!]

'शट उप!!!'

क्यों आखिर!? आखिर ऐसा हर्र बार क्या और क्यों हो जाता था की जैसे hi वीर और निधि करीब आते, कुछ न कुछ गतिविधिया ऐसी बनती की दोनों के बीच अजीब सी एक अदृश्य दिवार आके कड़ी हो जाती थी.

[Well anyways...]

इसके पहले की पारी कुछ कह पाती, वीर की पॉकेट में रखा फ़ोन बज उठा.

वीर : Hello?

सुहाना : मीट में टुनाइट इन क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स होटल. It's अर्जेंट.

वीर : हँ!?

सुहाना : गोत सम डिटेल्स रिगार्डिंग योर माँ!

वीर : गोत आईटी!

***

वीर : I'm रियली ग्लैड ात लीस्ट इस बार... आपने डिफरेंट होटल चूसे की ..

सुहाना : ः~ हर्र बार अपनी बहिन की होटल में जा कर पाक गए हो क्या? यू don't लिखे आईटी!?

वीर : आप मैरिड होने के बावजूद सोनिआ जी के साथ उनके घर में क्यों रहती हो? व्हाई नॉट विथ योर हस्बैंड? यू don't लिखे आईटी!?

उसके इतना कहते hi सुहाना अगले hi पल आगे बढ़ी और उसकी कल्लोर अपने हाथो में पकड़ ली...

सुहाना : यू...

वीर (स्माइल्स) : वेल... Didn't यू मेक फन ऑफ़ में? एअरलिएर!? पासपोर्ट!?

सुहाना : हम्फ! फाइन! I'll इग्नोर आईटी.

वीर : सो? What's थे न्यूज़!?

सुहाना (सीरियसली) : वेल... लुक! सो, मेने कुछ डिटेल्स पता लगायी है.

वीर : !??

सुहाना : योर माँ... भावना... वेल! She's इन ेगीपत!

वीर (सुरप्रीसेड) : E-Egypt!??

सुहाना : हाँ! आफ्टर आल, she's ान अर्चेओलॉजिस्ट. और वो भी रेपुटेड ओने. तोह फ़िलहाल अभी वो ेगीपत में है. इन्क्लूडिंग योर सिस्टर. यू हैवे ा सिस्टर अस वेल.

वीर : I-I क्नोव तहत.

सुहाना : हँ!??? वेट! व्हाट? यू क्नोव!?

वीर : येह! ी मैं... इतना मुझे पता है. बूत ी don't क्नोव की... इस शी माय सिबलिंग और... स्टेप सिस्टर.

सुहाना : वेल... इतना मुझे भी नहीं पता. पर इतना ज़रूर है की... जल्द hi वो ेगीपत से वापस आएंगी और उन्हें इंडिया में hi किसी ेष्कावतिओं साइट पर जाना है फिर. वो डिटेल्स समय आने पर मिल जाएंगी तुम्हे.

वीर : थैंक्स!

उसके सुहाना को धन्यवाद दिया और पल भर के लिए hi... वीर की नज़र साइड में गयी जहा लिफ्ट्स थी.

उसने देखा की लिफ्ट में एक आदमी था. उसने एक फ्लोरल शर्ट पहनी हुई थी. और ऊपर एक ब्लेजर. साथ hi साथ और भी आदमी थे उसके साथ.

और लिफ्ट हलके हलके बंद हो रही थी.

पर बंद होने से पहले दोनों की hi नज़रे आपस में टकराई.

और...

*डिंग*

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


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