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अभ अग्गे...
काल , रवि और बाकि सब को लेकर अपनी हवेली में पहुँच गया , वोह बेहद चिंता में था , जिस बात का उसे दर था , अभ वही हो रहा था ,
वोह चाहता तोह तभी रवि को रोक देता , जब पहली बार वोह सीमा से मिला था , पर वोह ऐसा कर न सका , आखिर वोह इक वैम्पायर था , तब कैसे वोह रवि के सामने जाता , और न hi वोह कभी सीमा की सचाई रवि को बता पाया ,
सब दर्द से कराह रहे थे , पर रवि अभ भी बेबी का सार अपनी गॉड में लिए बैठा हुआ था , उसकी आँखें नाम थी , वोह उसकी जिंदगी थी , उसका प्यार , आखिर थी तोह वोह जूही hi , जिसने उसे इक नयी जिंदगी दी थी , और अज्ज वख्त ा चूका था , जूही को नयी जिंदगी देने का , लेकिन कैसे ,
क्या उसे वैम्पायर बना दिया जाता , नै , रवि उसे ें अंधेरो की जिंदगी नै देना चाहता था , वोह कोई और रास्ता सोच रहा था ,
"पिता जी , बेबी को जिन्दा करने का कोई रास्ता तोह होगा..." रवि ने बेबी के माथे को चुम कर बोलै ,
काल कुछ देर रवि के मन की हालत को महसूस करता रहा , फिर वोह बेहद शांत आवाज़ में बोलै ,
"जानते हो रवि , यह जुंग हमारी नै , न hi बेबी की , न तुम्हारी किसी बहिन की , यह जुंग तुम्हारी है , जो प्यार तुम पिछले जनम में न मिल सका , तुमने अपनी जान देदी , तुम्हारी प्रेमिका ने भी , और तुम्हारी दुश्मन कैद हो गई , अभ तुम लड़ना है , सुहाना से , जोकर से , सबसे , अगर तुम अपनी कोमल को पाना चाहते हो , तोह तुम आखरी साँस तक लड़ना होगा..." काल ने रवि के करीब एते हुए बोलै ,
"पिता जी , इसका अंजाम क्या होगा , कितने परिणाम निकले है इस लड़ाई में , कितनी बार जीत सकता हु में..." रवि ने घम्बिर होकर बोलै ,
"परिणाम तोह लाखो निकलते हैं , पर जीत इक बार होगी , मने कहा था तुमसे , अभ रिंग hi तय करेगी के तुम कोमल का प्यार मिलेगा या नै..." काल ने पिछली बात रवि को यद् दिलाते हुए बोलै ,
"क्या में रूही का भाई था , पिछले जनम में..." रवि ने बेबी के बाल सहलाते हुए बोलै , जो उसकी गॉड में सार रखे मरी पढ़ी थी ,
"में कुछ नै जनता , और अगर जनता भी होता , तोह तुम बता न पता , हाँ , इतना बता सकता हु , जिंदगी में कभी कभी , किसी लड़ाई का कोई परिणाम नै निकलता , कई बार अंत कुछ ऐसा होता है , जो हमने कभी सोचा न हो..." काल ने इक पहेली से बुझाते हुए बोलै ,
"ओह्ह , पिता जी , मुझे मेरी जूही वापिस चाहये , में इसके बिना जी नै पाउगा , यह मेरी जिंदगी का हम हिस्सा है , कोई तोह रास्ता होगा..." रवि ने थोड़ा दर्द में बोलै ,
"रवि , तुम आँखें बंद करो , कोमल को यद् करो , वही तुम कोई रास्ता दिखा सकती hai..."kaal इतना बोल खामोश हो गया ,
रवि ने आँखें बंद की , उसे कुछ न दिखा , बार बार कोससिह करने पर भी , उसका दयँ इक जगह केंद्रित नै हो रहा था , बेबी की हालत उसे कमज़ोर कर रही थी ,
"नै हो रहा , मेरा ध्यान बातक रहा है , क्या करू..." रवि ने मन hi मन खुद को खोलते हुए बोलै ,
रवि ने फिर से कोससिह की , पर बेबी का मासूम चेहरा , उसकी मुस्कान , और फिर िका इक , जूही का चेहरा , उसकी आँखों के सामने ा गया , वोह कितनी प्यारी लग रही थी , मुस्कराते हुए , और फिर निशा , जो उसे उलटी सीधी बतिअन सिखाती थी , तेन की वोह जूही को परेशान कर सके ,
निशा इक दोस्त नै थी , वोह दोस्ती से काफी ऊपर उठ चुकी थी , अपना सब कुछ जूही को सौंप दिया , अपनी डोलत , अपनी जिंदगी , उफ़ , ऐसा दोस्त शयद hi किसी को मिला हो कभी ,
"में जूही को वापिस लयुगा , जरूर लयुगा..." रवि ने गुस्से में मन hi मन बोलै , और फिर से आँखें बंद कर ली , इस बार उसका मन विश्वास से भरा हुआ था , और जब मन में विश्वास भरा हो , तब दुनिआ का कोई काम कठिन नै लगता ,
"कोमलललल , कहा हूँ , प्लस बैठत कारु मुज़सेई..." रवि ने आँखें बंद किये मन hi मन बोलै , उसके प्यार में इक ताकत थी , उसकी आवाज़ में इक दर्द था , और कोमल अपने भाई को दर्द में कैसे देख लेती ,
उसने पल भर में यह महसूस कर लिया , वैसे भी वोह सब जान चुकी थी , सुहाना वापिस ा चुकी थी , उसने सब देख और सुन लिया था , इक इक बात वोह सुन चुकी थी ,
"कोमळळ , प्लस बैठत कारु मुज़से.." रवि ने थोड़ा दर्द भरी आवाज़ और नाम आँखों से बोलै , तोह कोमल की आत्मा भी तड़फ उठी ,
"भइआएए .." कोमल ने अपनी पूरी शक्ति को एकजुट कर , अपने भाई से मन hi मन बात करते हुए बोलै ,
"कोमळळ , मेरी जान , कोमल , वोह रिंग सुहाना हैई , और रेखा डीडीई ..." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,
"भइआए , मने सब देख लिया ही , रेखा देदी के साथ बहुत बुरा हुआ ही , यह आपको पता लगाना हैई , और वोह रिंग मेरी बहिन सुहाना हैई ..." कोमल ने भी दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,
"कोमल , तुम सब पता हैई , तुम बता दू , रेखा देदी के साथ क्या हुआ है..." रवि ने फिर से दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,
"नई भइआ , यह सब आपके कारन हुआ ही , अपने घर छोड़ा था , रेखा देदी आपसे प्यार करती थिई , अपने उनके साथ सेक्स किया था , आपको इक बात शयद पता नै..." कोमल अभी बता hi रही थी के रवि ने बेच में पूछ लिया ,
"क्या पता नयी..."
कोमल पर अग्ग अभ अपना पूरा प्रभाव दाल रही थी , उसके बदन के हर हिस्से को जला कर उसे दर्द दे रही थी ,
"आआअह्ह्ह , भइआए , रेखा देदी , आपसे बेइंतहा प्यार करती थी , उनकी जिंदगी में क्या हुआ , यह आपको hi जानना ही , और भइआए , सीमा , अहहहसष्ठ , उनका भी पता लागू..." कोमल बेहद दर्द में सिसकते हुए बोली ,
"में पता लगाऊगा सीमा कहा ही , कोमल , मुझे बेबी को जिन्दा करना हैई.."
"नई भइआ , जो हुआ उसे भूल जाओ..."
"कोमल , कैसी बतिअन कर रही हो , बेबी को भूल जाओ , जिसने मुझे नयी जिंदगी दी , हर कदम पर मेरे साथ चली , नै , में इतना खुदगरज नै हु , में , में , उसे जिन्दा करुगा , काट , हाँ , उसका क्या होगा , मर जाएगी वोह , प्लस , कोई रास्ता है , तोह बताओ , प्लस , में बेबी के बिना नै जी सकता , प्लस..." रवि ने बेहद नाम आँखों से घम्बिर होकर बोलै ,
"भइआए , प्लस रोना बंद कारु , ाचा , में बताती हु , अप्प लॉकेट की शक्ति से बेबी को जिन्दा कर सकते हो , पर फिर लॉकेट की पूरी ताकत ख़तम हो जाएगी , अप्प बस इक आम वैम्पायर बनकर रह जोगी , अप्प अपने दुश्मनो से लड़ नै पाओगे..." कोमल ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,
"मंज़ूर है मुझे , अपनी मौत से दर कर , में बेबी को मरने दू , नै , नै , अगर मेरी तकदीर में उनके हाथो मरना लिखा है , तोह कोई मुझे बचा नै सकता , और अगर जीतना लिखा है , तोह कोई मर नै सकता , में बेबी को जिन्दा करुगा , मेरी ताकत इनसब के प्यार में है ..." रवि ने मन hi मन कोमल से बोलै और फिर िका इक उसका ध्यान बातक गया , अभ कोमल की आवाज़ उसे सुनाई नै दे रही थी ,
फिर रवि ने अपने गले से लॉकेट उतरा और बेबी को जमीन पर सीधा लेता , लॉकेट उसके सीने पर रख दिया ,
फिर रवि ने आँखें बंद की और लॉकेट की पूरी ताकत जागृत करने लगा , धीरे धीरे उसके बदन से लाल रौशनी निकलने लगी , वोह रौशनी लॉकेट में सामने लगी , जब पूरी शक्ति लॉकेट में समां गई , तब रवि ने आँखें खोल ली ,
"काशः के मेरी बेबी फिर से जिन्दा हो जाती , किसी भी कीमत पर..." रवि ने लॉकेट पर अपना हाथ रखते हुए बोलै ,
तभी लॉकेट से तेज़ रौशनी निकलने लगी , फिर इक जोरदार धमका हुआ , पूरी हवेली में सफेद रौशनी फैल गई , चारो तरफ बस रौशनी hi रौशनी थी ,
कुछ भी दिखाई नै दे रहा था , काल , काया , माया और शया , उस तेज़ रौशनी में उड़द कर हवेली की देवरो से जा टकराये , रवि भी आँखों पर हाथ रखे , पीछे को गिर गया ,
कुछ देर बाद , वोह रौशनी बेबी के जिस्म में समां गई , रवि धीरे धीरे आँखें मसलता हुआ उठ कर बेथ गया , उसने बेबी का सार वापिस अपनी गॉड में रख लिया , और उसके बालो को सहलाने लगा ,
"रवीए , यह तुमने क्या कर दिया , लॉकेट की ताकत बेबी को देदी , उसे जिन्दा करना इतना जरुरी नै था , हम उसे वैम्पायर बना देते..." काल ने बेहद गुस्से में बोलै ,
"अह्ह्ह , यही इक रास्ता था , उफ्फ्फ , शठ , में बेबी को वैम्पायर नै बनाना चाहता , वोह इंसान hi रहेगी..." रवि ने दर्द से कहरहते हुए बोलै ,
"लेकिन यह भगवन के बनाये निज़मो के खिलाफ है , तुमने हमारी आखरी उम्मीद उस लॉकेट को भी तबाह कर दिया ..." काल ने थोड़ा निराश होकर बोलै ,
"पारर , पिता जी , कोमल ने hi यह रास्ता मुझे दिखाया था..."
"पर रवीए , इस लॉकेट के बिना तुम सुहाना और जोकर का मुकाबला नै कर पाओगे , और इस लॉकेट के बिना कोमल भी वापिस नै ा पायेगी..." माया ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,
"पर माया , कोमल , ओह्ह्ह , मतलब कोमल नै चाहती , के में उसे वापिस लेकर आयु , पर क्यों , आखिर इक न इक दिन , कोमल को सुहाना का सामना करना hi होगा..." रवि ने थोड़ा चिंता में बोलै ,
"रावी , अभी वख्त नै आया , जब वख्त आएगा , तुम खुद बा खुद पता चल जायेगा , यह लड़ाई बेहद ब्यांक होगी , यह लड़ाई , बुराई और सचाई की नै , नफरत और प्यार की है , सुहाना को मारा नै जा सकता , उसे कैसे रोका जा सकता है , यह तुम पता करना है , ऐसी लिए कोमल ने तुम्हारे हाथो उस लॉकेट को नष्ट करवा दिया..." काल ने रवि को समझा दिया ,
"इसका मतलब , मुझे मेरा पिछले जनम यद् करना होगा , लेकिन कैसे , पिता जी , कोई रास्ता तोह होगा..." रवि ने कुछ न समाज पते हुए बोलै ,
"है इक रास्ता , कोमल की वोह किताब , जानते हो , हर वोह रहस्मयी चीज़ , जिसका कोमल इस्तेमाल करती थी , वोह हर चीज़ रूही की है , अभ तुम यह पता करना है , उस आखरी लड़ाई में , तुमने और रूही ने कैसे , सुहाना को पराजित करके , उस रिंग में कैद किया था..." काल ने इक उम्मीद की किरण सबके मन में जागते हुए बोलै ,
"इस बार में अपना प्यार मरने नै दूंगा , पिछली बार , सुहाना हर कर भी हमसे जीत गई , लेकिन इस बार , में और मेरी कोमल , हम दोनों मिलकर , सुहाना को ख़तम कर देंगे..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,
"रावी , तुम जल्दबाज़ी नै करनी है , पहले सीमा को डंडो , वोह कहा है , उसके बाद hi तुम सुहाना के बारे में सोचो , तुम्हारे कई सवालों के जवाब , सीमा तक पहुँचने पर तुम मिल जायेगे..." काल अभी बोल hi रहा था के बेबी के बदन में थोड़ी हलचल हुई ,
रवि भी बेबी के खूबसूरत मासूम चेहरे को निहारने लगा , पहले बेबी के नरम हाथ की पतली उंगलियाँ कम्पनी लगी , फिर धीरे धीरे उसकी सांसे चलने लगी ,
"बब्यीय , मेरी जांणण..." रवि ने झुक कर बेबी के माथे को चूमते हुए बोलै ,
"अह्ह्ह्ह , सससससीईई ..." बेबी ने धीरे धीरे दर्द भरी सिस्कियाँ लेते अपनी आँखें खोली , सबसे पहले उसे रवि का चेहरा hi दिखाई दिया ,
"r...rr...raviiiii..." बेबी बेहद धीमे से हकलाते हुए बोली ,
"हाँ , मेरी जान , उम्मा , शुक्र है , तुम ठीक हो , में बेहद दर गया था..." रवि ने बेबी के गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै ,
फिर बेबी धीरे धीरे उठ कर बेथ गई , उठते hi उसने काल और बाकि सबको देखा , तोह उसने डरकर अपना चेहरा रवि के सीने में छुपा लिया ,
"डरो मत जणू , यह मेरा परिवार है , मेरे अपने , और तुम्हारे भी..." रवि प्यार से बेबी के बालो को सेहला कर बोलै ,
बेबी ने रवि के सीने में चेहरा छुपाये hi थोड़ी सी आँख खोल सबको देखा , वोह बेहद मासूम और प्यारी लग रही थी ,
"रवीए , इसका ख्याल रखना , लॉकेट ने ऐसे जिन्दा तोह कर दिया , पर इसका असर बेबी पर क्या होगा , कुछ कह नै सकता , तुम बेबी को अपनी नज़रिओं के सामने रखना होगा..." काल ने वैसे hi भरी आवाज़ में बोलै , जिसे सुन बेबी ने रवि को और भी कास कर जकड लिया ,
"जीई पिता जी , में बेबी से बहुत प्यार करता हु , इसकी हिफ़ज़त करुगा , हर पल , लॉकेट ऐसे हमेशा खुश रखेगा , यह मेरा वादा है आपसे..." रवि ने बेबी के बालो को सहलाते हुए बोलै , जब की बेबी अपना चेहरा उसके सीने में छुपाये हुए बैठी थी ,
"रावी बेटा , तुम यद् है , जेल से बहार ऐनी के बाद तुम इक छोटे से कसबे में रहते थे , वह इक शिव मंदिर था , यहाँ तुम रोज़ सुबह , शाम जाते थे , वह उस मंदिर में इक पुजारी था , बस , उस पुजारी से इक बार मिल लेना ..." ." काल ने तब की बात बताई , जब रवि घर छोड़ कर चला गया था , और जूही मुंडेर केस में जेल काटने के बाद , वापिस इक छोटे से कसबे में रहता था , तब वोह मंदिर में उस पुजारी बाबा से मिला था ,
"हाँ , यद् है , जेल काटने के बाद में टूट चूका था , तब पुजारी मेरी जिंदगी में आया , उसने मुझे विश्वास दिलवाया , के मेरे अपने मुझे मिल जायेगे , तभी अपने शहर एते hi मुझे सीमा मिल गई , धीरे धीरे मेरा पूरा परिवार मुझे मिल गया , उनको में कैसे भूल सकता हु..." रवि ने पुजारी बाबा को यद् करते आँखें नाम कर बोलै ,
"हम्म , तुमने सही कहा , अभ तुम उसी के पास जाना है , वोह भी जल्द से जल्द , वोह तुम यद् कर रहे हैं , अभ जाओ बीटा..." काल ने इतना बोलै तोह रवि और बेबी वह से गयाब होकर बेबी के घर पहुँच गए , इस बात से अनजान के उसके घर में क्या हो रहा है , उसकी बहने कैसी हैं....
वही दूसरी तरफ...
रेखा अभ रमा के बेहद करीब ा चुकी थी , दोनों में बेहद काम फैसला था , रमा के पास hi सोफे पर बाकि तीनो बेहोश पढ़ी हुई थी ,
रमा दर से थार थार कम्पटी हुई सोफे पर बैठी रही , िका इक रेखा उसके और करीब हो गई , अभ रेखा की वहशी सांसे , रमा के मोह पर पढ़ रही थी ,
रेखा के मोह से निकलते संसू की महक , बिलकुल वैसी थी , जैसे कोई गाला सदा मुर्दा जीव कही पढ़ा हो ,
रमा की सांसे जैसे रुकने सी लगी , क्यों की रेखा के वेशी चेहरा उसके बेहद करीब ा चूका था , रमा का पूरा बदन सुन पढ़ चूका था ,
अभी रेखा रमा को चुने hi जा रही थी के घर का मैं दूर इक डैम से खुल गया , और सीमा घर के अंदर ा गई ,
रेखा ने जैसे hi सीमा को देखा , वोह उसकी तरफ बढ़ने लगी , रमा दर से थार थार कंपते रोने लगी , क्यों की उसकी माँ की जान खतरे में ा चुकी थी....
तो बे कुनिटेड...


