Incest Deewanapan... - Page 13 - SexBaba
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Incest Deewanapan...



अपडेट-45

अभ अग्गे...

काल , रवि और बाकि सब को लेकर अपनी हवेली में पहुँच गया , वोह बेहद चिंता में था , जिस बात का उसे दर था , अभ वही हो रहा था ,

वोह चाहता तोह तभी रवि को रोक देता , जब पहली बार वोह सीमा से मिला था , पर वोह ऐसा कर न सका , आखिर वोह इक वैम्पायर था , तब कैसे वोह रवि के सामने जाता , और न hi वोह कभी सीमा की सचाई रवि को बता पाया ,

सब दर्द से कराह रहे थे , पर रवि अभ भी बेबी का सार अपनी गॉड में लिए बैठा हुआ था , उसकी आँखें नाम थी , वोह उसकी जिंदगी थी , उसका प्यार , आखिर थी तोह वोह जूही hi , जिसने उसे इक नयी जिंदगी दी थी , और अज्ज वख्त ा चूका था , जूही को नयी जिंदगी देने का , लेकिन कैसे ,

क्या उसे वैम्पायर बना दिया जाता , नै , रवि उसे ें अंधेरो की जिंदगी नै देना चाहता था , वोह कोई और रास्ता सोच रहा था ,

"पिता जी , बेबी को जिन्दा करने का कोई रास्ता तोह होगा..." रवि ने बेबी के माथे को चुम कर बोलै ,

काल कुछ देर रवि के मन की हालत को महसूस करता रहा , फिर वोह बेहद शांत आवाज़ में बोलै ,

"जानते हो रवि , यह जुंग हमारी नै , न hi बेबी की , न तुम्हारी किसी बहिन की , यह जुंग तुम्हारी है , जो प्यार तुम पिछले जनम में न मिल सका , तुमने अपनी जान देदी , तुम्हारी प्रेमिका ने भी , और तुम्हारी दुश्मन कैद हो गई , अभ तुम लड़ना है , सुहाना से , जोकर से , सबसे , अगर तुम अपनी कोमल को पाना चाहते हो , तोह तुम आखरी साँस तक लड़ना होगा..." काल ने रवि के करीब एते हुए बोलै ,

"पिता जी , इसका अंजाम क्या होगा , कितने परिणाम निकले है इस लड़ाई में , कितनी बार जीत सकता हु में..." रवि ने घम्बिर होकर बोलै ,

"परिणाम तोह लाखो निकलते हैं , पर जीत इक बार होगी , मने कहा था तुमसे , अभ रिंग hi तय करेगी के तुम कोमल का प्यार मिलेगा या नै..." काल ने पिछली बात रवि को यद् दिलाते हुए बोलै ,

"क्या में रूही का भाई था , पिछले जनम में..." रवि ने बेबी के बाल सहलाते हुए बोलै , जो उसकी गॉड में सार रखे मरी पढ़ी थी ,

"में कुछ नै जनता , और अगर जनता भी होता , तोह तुम बता न पता , हाँ , इतना बता सकता हु , जिंदगी में कभी कभी , किसी लड़ाई का कोई परिणाम नै निकलता , कई बार अंत कुछ ऐसा होता है , जो हमने कभी सोचा न हो..." काल ने इक पहेली से बुझाते हुए बोलै ,

"ओह्ह , पिता जी , मुझे मेरी जूही वापिस चाहये , में इसके बिना जी नै पाउगा , यह मेरी जिंदगी का हम हिस्सा है , कोई तोह रास्ता होगा..." रवि ने थोड़ा दर्द में बोलै ,

"रवि , तुम आँखें बंद करो , कोमल को यद् करो , वही तुम कोई रास्ता दिखा सकती hai..."kaal इतना बोल खामोश हो गया ,

रवि ने आँखें बंद की , उसे कुछ न दिखा , बार बार कोससिह करने पर भी , उसका दयँ इक जगह केंद्रित नै हो रहा था , बेबी की हालत उसे कमज़ोर कर रही थी ,

"नै हो रहा , मेरा ध्यान बातक रहा है , क्या करू..." रवि ने मन hi मन खुद को खोलते हुए बोलै ,

रवि ने फिर से कोससिह की , पर बेबी का मासूम चेहरा , उसकी मुस्कान , और फिर िका इक , जूही का चेहरा , उसकी आँखों के सामने ा गया , वोह कितनी प्यारी लग रही थी , मुस्कराते हुए , और फिर निशा , जो उसे उलटी सीधी बतिअन सिखाती थी , तेन की वोह जूही को परेशान कर सके ,

निशा इक दोस्त नै थी , वोह दोस्ती से काफी ऊपर उठ चुकी थी , अपना सब कुछ जूही को सौंप दिया , अपनी डोलत , अपनी जिंदगी , उफ़ , ऐसा दोस्त शयद hi किसी को मिला हो कभी ,

"में जूही को वापिस लयुगा , जरूर लयुगा..." रवि ने गुस्से में मन hi मन बोलै , और फिर से आँखें बंद कर ली , इस बार उसका मन विश्वास से भरा हुआ था , और जब मन में विश्वास भरा हो , तब दुनिआ का कोई काम कठिन नै लगता ,

"कोमलललल , कहा हूँ , प्लस बैठत कारु मुज़सेई..." रवि ने आँखें बंद किये मन hi मन बोलै , उसके प्यार में इक ताकत थी , उसकी आवाज़ में इक दर्द था , और कोमल अपने भाई को दर्द में कैसे देख लेती ,

उसने पल भर में यह महसूस कर लिया , वैसे भी वोह सब जान चुकी थी , सुहाना वापिस ा चुकी थी , उसने सब देख और सुन लिया था , इक इक बात वोह सुन चुकी थी ,

"कोमळळ , प्लस बैठत कारु मुज़से.." रवि ने थोड़ा दर्द भरी आवाज़ और नाम आँखों से बोलै , तोह कोमल की आत्मा भी तड़फ उठी ,

"भइआएए .." कोमल ने अपनी पूरी शक्ति को एकजुट कर , अपने भाई से मन hi मन बात करते हुए बोलै ,

"कोमळळ , मेरी जान , कोमल , वोह रिंग सुहाना हैई , और रेखा डीडीई ..." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"भइआए , मने सब देख लिया ही , रेखा देदी के साथ बहुत बुरा हुआ ही , यह आपको पता लगाना हैई , और वोह रिंग मेरी बहिन सुहाना हैई ..." कोमल ने भी दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"कोमल , तुम सब पता हैई , तुम बता दू , रेखा देदी के साथ क्या हुआ है..." रवि ने फिर से दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"नई भइआ , यह सब आपके कारन हुआ ही , अपने घर छोड़ा था , रेखा देदी आपसे प्यार करती थिई , अपने उनके साथ सेक्स किया था , आपको इक बात शयद पता नै..." कोमल अभी बता hi रही थी के रवि ने बेच में पूछ लिया ,

"क्या पता नयी..."

कोमल पर अग्ग अभ अपना पूरा प्रभाव दाल रही थी , उसके बदन के हर हिस्से को जला कर उसे दर्द दे रही थी ,

"आआअह्ह्ह , भइआए , रेखा देदी , आपसे बेइंतहा प्यार करती थी , उनकी जिंदगी में क्या हुआ , यह आपको hi जानना ही , और भइआए , सीमा , अहहहसष्ठ , उनका भी पता लागू..." कोमल बेहद दर्द में सिसकते हुए बोली ,

"में पता लगाऊगा सीमा कहा ही , कोमल , मुझे बेबी को जिन्दा करना हैई.."

"नई भइआ , जो हुआ उसे भूल जाओ..."

"कोमल , कैसी बतिअन कर रही हो , बेबी को भूल जाओ , जिसने मुझे नयी जिंदगी दी , हर कदम पर मेरे साथ चली , नै , में इतना खुदगरज नै हु , में , में , उसे जिन्दा करुगा , काट , हाँ , उसका क्या होगा , मर जाएगी वोह , प्लस , कोई रास्ता है , तोह बताओ , प्लस , में बेबी के बिना नै जी सकता , प्लस..." रवि ने बेहद नाम आँखों से घम्बिर होकर बोलै ,

"भइआए , प्लस रोना बंद कारु , ाचा , में बताती हु , अप्प लॉकेट की शक्ति से बेबी को जिन्दा कर सकते हो , पर फिर लॉकेट की पूरी ताकत ख़तम हो जाएगी , अप्प बस इक आम वैम्पायर बनकर रह जोगी , अप्प अपने दुश्मनो से लड़ नै पाओगे..." कोमल ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"मंज़ूर है मुझे , अपनी मौत से दर कर , में बेबी को मरने दू , नै , नै , अगर मेरी तकदीर में उनके हाथो मरना लिखा है , तोह कोई मुझे बचा नै सकता , और अगर जीतना लिखा है , तोह कोई मर नै सकता , में बेबी को जिन्दा करुगा , मेरी ताकत इनसब के प्यार में है ..." रवि ने मन hi मन कोमल से बोलै और फिर िका इक उसका ध्यान बातक गया , अभ कोमल की आवाज़ उसे सुनाई नै दे रही थी ,

फिर रवि ने अपने गले से लॉकेट उतरा और बेबी को जमीन पर सीधा लेता , लॉकेट उसके सीने पर रख दिया ,

फिर रवि ने आँखें बंद की और लॉकेट की पूरी ताकत जागृत करने लगा , धीरे धीरे उसके बदन से लाल रौशनी निकलने लगी , वोह रौशनी लॉकेट में सामने लगी , जब पूरी शक्ति लॉकेट में समां गई , तब रवि ने आँखें खोल ली ,

"काशः के मेरी बेबी फिर से जिन्दा हो जाती , किसी भी कीमत पर..." रवि ने लॉकेट पर अपना हाथ रखते हुए बोलै ,

तभी लॉकेट से तेज़ रौशनी निकलने लगी , फिर इक जोरदार धमका हुआ , पूरी हवेली में सफेद रौशनी फैल गई , चारो तरफ बस रौशनी hi रौशनी थी ,

कुछ भी दिखाई नै दे रहा था , काल , काया , माया और शया , उस तेज़ रौशनी में उड़द कर हवेली की देवरो से जा टकराये , रवि भी आँखों पर हाथ रखे , पीछे को गिर गया ,

कुछ देर बाद , वोह रौशनी बेबी के जिस्म में समां गई , रवि धीरे धीरे आँखें मसलता हुआ उठ कर बेथ गया , उसने बेबी का सार वापिस अपनी गॉड में रख लिया , और उसके बालो को सहलाने लगा ,

"रवीए , यह तुमने क्या कर दिया , लॉकेट की ताकत बेबी को देदी , उसे जिन्दा करना इतना जरुरी नै था , हम उसे वैम्पायर बना देते..." काल ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"अह्ह्ह , यही इक रास्ता था , उफ्फ्फ , शठ , में बेबी को वैम्पायर नै बनाना चाहता , वोह इंसान hi रहेगी..." रवि ने दर्द से कहरहते हुए बोलै ,

"लेकिन यह भगवन के बनाये निज़मो के खिलाफ है , तुमने हमारी आखरी उम्मीद उस लॉकेट को भी तबाह कर दिया ..." काल ने थोड़ा निराश होकर बोलै ,

"पारर , पिता जी , कोमल ने hi यह रास्ता मुझे दिखाया था..."

"पर रवीए , इस लॉकेट के बिना तुम सुहाना और जोकर का मुकाबला नै कर पाओगे , और इस लॉकेट के बिना कोमल भी वापिस नै ा पायेगी..." माया ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"पर माया , कोमल , ओह्ह्ह , मतलब कोमल नै चाहती , के में उसे वापिस लेकर आयु , पर क्यों , आखिर इक न इक दिन , कोमल को सुहाना का सामना करना hi होगा..." रवि ने थोड़ा चिंता में बोलै ,

"रावी , अभी वख्त नै आया , जब वख्त आएगा , तुम खुद बा खुद पता चल जायेगा , यह लड़ाई बेहद ब्यांक होगी , यह लड़ाई , बुराई और सचाई की नै , नफरत और प्यार की है , सुहाना को मारा नै जा सकता , उसे कैसे रोका जा सकता है , यह तुम पता करना है , ऐसी लिए कोमल ने तुम्हारे हाथो उस लॉकेट को नष्ट करवा दिया..." काल ने रवि को समझा दिया ,

"इसका मतलब , मुझे मेरा पिछले जनम यद् करना होगा , लेकिन कैसे , पिता जी , कोई रास्ता तोह होगा..." रवि ने कुछ न समाज पते हुए बोलै ,

"है इक रास्ता , कोमल की वोह किताब , जानते हो , हर वोह रहस्मयी चीज़ , जिसका कोमल इस्तेमाल करती थी , वोह हर चीज़ रूही की है , अभ तुम यह पता करना है , उस आखरी लड़ाई में , तुमने और रूही ने कैसे , सुहाना को पराजित करके , उस रिंग में कैद किया था..." काल ने इक उम्मीद की किरण सबके मन में जागते हुए बोलै ,

"इस बार में अपना प्यार मरने नै दूंगा , पिछली बार , सुहाना हर कर भी हमसे जीत गई , लेकिन इस बार , में और मेरी कोमल , हम दोनों मिलकर , सुहाना को ख़तम कर देंगे..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"रावी , तुम जल्दबाज़ी नै करनी है , पहले सीमा को डंडो , वोह कहा है , उसके बाद hi तुम सुहाना के बारे में सोचो , तुम्हारे कई सवालों के जवाब , सीमा तक पहुँचने पर तुम मिल जायेगे..." काल अभी बोल hi रहा था के बेबी के बदन में थोड़ी हलचल हुई ,

रवि भी बेबी के खूबसूरत मासूम चेहरे को निहारने लगा , पहले बेबी के नरम हाथ की पतली उंगलियाँ कम्पनी लगी , फिर धीरे धीरे उसकी सांसे चलने लगी ,

"बब्यीय , मेरी जांणण..." रवि ने झुक कर बेबी के माथे को चूमते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्ह , सससससीईई ..." बेबी ने धीरे धीरे दर्द भरी सिस्कियाँ लेते अपनी आँखें खोली , सबसे पहले उसे रवि का चेहरा hi दिखाई दिया ,

"r...rr...raviiiii..." बेबी बेहद धीमे से हकलाते हुए बोली ,

"हाँ , मेरी जान , उम्मा , शुक्र है , तुम ठीक हो , में बेहद दर गया था..." रवि ने बेबी के गुलाबी होंठो को चूमते हुए बोलै ,

फिर बेबी धीरे धीरे उठ कर बेथ गई , उठते hi उसने काल और बाकि सबको देखा , तोह उसने डरकर अपना चेहरा रवि के सीने में छुपा लिया ,

"डरो मत जणू , यह मेरा परिवार है , मेरे अपने , और तुम्हारे भी..." रवि प्यार से बेबी के बालो को सेहला कर बोलै ,

बेबी ने रवि के सीने में चेहरा छुपाये hi थोड़ी सी आँख खोल सबको देखा , वोह बेहद मासूम और प्यारी लग रही थी ,

"रवीए , इसका ख्याल रखना , लॉकेट ने ऐसे जिन्दा तोह कर दिया , पर इसका असर बेबी पर क्या होगा , कुछ कह नै सकता , तुम बेबी को अपनी नज़रिओं के सामने रखना होगा..." काल ने वैसे hi भरी आवाज़ में बोलै , जिसे सुन बेबी ने रवि को और भी कास कर जकड लिया ,

"जीई पिता जी , में बेबी से बहुत प्यार करता हु , इसकी हिफ़ज़त करुगा , हर पल , लॉकेट ऐसे हमेशा खुश रखेगा , यह मेरा वादा है आपसे..." रवि ने बेबी के बालो को सहलाते हुए बोलै , जब की बेबी अपना चेहरा उसके सीने में छुपाये हुए बैठी थी ,

"रावी बेटा , तुम यद् है , जेल से बहार ऐनी के बाद तुम इक छोटे से कसबे में रहते थे , वह इक शिव मंदिर था , यहाँ तुम रोज़ सुबह , शाम जाते थे , वह उस मंदिर में इक पुजारी था , बस , उस पुजारी से इक बार मिल लेना ..." ." काल ने तब की बात बताई , जब रवि घर छोड़ कर चला गया था , और जूही मुंडेर केस में जेल काटने के बाद , वापिस इक छोटे से कसबे में रहता था , तब वोह मंदिर में उस पुजारी बाबा से मिला था ,

"हाँ , यद् है , जेल काटने के बाद में टूट चूका था , तब पुजारी मेरी जिंदगी में आया , उसने मुझे विश्वास दिलवाया , के मेरे अपने मुझे मिल जायेगे , तभी अपने शहर एते hi मुझे सीमा मिल गई , धीरे धीरे मेरा पूरा परिवार मुझे मिल गया , उनको में कैसे भूल सकता हु..." रवि ने पुजारी बाबा को यद् करते आँखें नाम कर बोलै ,

"हम्म , तुमने सही कहा , अभ तुम उसी के पास जाना है , वोह भी जल्द से जल्द , वोह तुम यद् कर रहे हैं , अभ जाओ बीटा..." काल ने इतना बोलै तोह रवि और बेबी वह से गयाब होकर बेबी के घर पहुँच गए , इस बात से अनजान के उसके घर में क्या हो रहा है , उसकी बहने कैसी हैं....

वही दूसरी तरफ...

रेखा अभ रमा के बेहद करीब ा चुकी थी , दोनों में बेहद काम फैसला था , रमा के पास hi सोफे पर बाकि तीनो बेहोश पढ़ी हुई थी ,

रमा दर से थार थार कम्पटी हुई सोफे पर बैठी रही , िका इक रेखा उसके और करीब हो गई , अभ रेखा की वहशी सांसे , रमा के मोह पर पढ़ रही थी ,

रेखा के मोह से निकलते संसू की महक , बिलकुल वैसी थी , जैसे कोई गाला सदा मुर्दा जीव कही पढ़ा हो ,

रमा की सांसे जैसे रुकने सी लगी , क्यों की रेखा के वेशी चेहरा उसके बेहद करीब ा चूका था , रमा का पूरा बदन सुन पढ़ चूका था ,

अभी रेखा रमा को चुने hi जा रही थी के घर का मैं दूर इक डैम से खुल गया , और सीमा घर के अंदर ा गई ,

रेखा ने जैसे hi सीमा को देखा , वोह उसकी तरफ बढ़ने लगी , रमा दर से थार थार कंपते रोने लगी , क्यों की उसकी माँ की जान खतरे में ा चुकी थी....

तो बे कुनिटेड...
 


अपडेट-46

अभ अग्गे...

रेखा हर बेटे पल के साथ सीमा की और बढ़ रही थी , सीमा भी रेखा की आँखों में देख रही थी , उसके चेहरे को देख यह साफ लग रहा था , वोह बेहद दरी हुई थी , पसीना उसके खूबसूरत चेहरे से टपक रहा था ,

धीरे धीरे वोह पल भी आया जब रेखा इक डैम सीमा के सामने कड़ी थी , वोह ख़ामोशी से सीमा को घर कर देख रही थी ,

"मायआ भगगगग जावूओ...." रमा ने रट हुए चीला कर बोलै , रमा अभ और भी दर और सेहम गई थी , उसे अपनी माँ की बेहद चिंता हो रही थी ,

"ैय्यूननननननन..." रेखा बेहद वेशीपन में पीछे पलट रमा की तरफ देख कर चिलायी , रमा उसकी खौफनाक चीख सुन और भी कम्प गई ,

फिर रेखा ने वापिस सीमा की तरफ देखा , वोह सुन सी पढ़ चुकी थी , रेखा की खौफनाक चीख सुन कर ,

"माआ , रेखा dediiii...mm...maa...kk...ko..cc...ch...chod..dd...do..." रमा ने सोफे से उठ कर खड़े होते हुए बोलै , उसकी टंगे कम्प रही थी , पूरा बदन जैसे विबरते पर लगा हुआ था ,

सीमा की आँखों से असनु बह निकले थे , तभी रेखा ने वोह किया , जिसे देख रमा और भी कम्प गई ,

"nn...naiii ...pp...plsss..." सीमा ने दर से हकलाते हुए बोलै , उस से बोलै भी नै जा रहा था ,

"yieeaaannnnnnnnnnnnn..." रेखा फिर से अपने पोरे जबड़े खोल चिलायी , उसके होंठ फैल कर उसके कनु तक खुल गए , उसके पोरे वेशी नोकीले , खून से साणे दन्त , सीमा की सेहमी हुई आँखों के सामने ा गए ,

फिर रेखा ने अपने इक हाथ से सीमा को गर्दन से पकड़ ऊपर उठा दिया , सीमा उसके हाथ पर अपने हाथ मरने लगी , उसकी सांसे रूकती जा रही थी , पेअर हवा में फड़फड़ा रहे थे ,

"माआआ..." रमा अपनी माँ की यह हालत देख रेखा की तरफ तेज़ी से भागी ,

अभी रमा , रेखा के पास पहुंची hi थी , के रेखा ने अपना चेहरा घुमा लिया , ऐसा लग रहा था , जैसे रेखा की गर्दन थी hi नै , अभ उसका चेहरा , उसके पचा ा चूका था , रमा के पेअर वही थम सा गए ,

"मा , प्लस छोड़ दू , मेरीए मा को , प्लस , डेडीईई ..." रमा ने रट हुए बोलै , पर जब उसने सीमा की हालत देखि , वोह रेखा पर जपत पढ़ी ,

"ैय्यूननननन..." रेखा इक बार और जोर से चखी , और सीमा को निचे फेंक दिया , फिर रेखा ने रमा को अपने से अलग कर दोनों हाथो से जोरदार ढाका दिया , रमा उड़ती हुई देवर से जा टकराई और फिर जमीन पर गिर गई ,

रमा का सार देवर से लगते hi फैट गया था , पूरा चेहरा खून से लथपथ हो चूका था , रमा जमीन पर पेट के बल पढ़ी हुई थी , रेखा को देख रही थी , वोह अपना हाथ हिलती हुई रेखा को मन कर रही थी ,

तभी रेखा ने सीमा की तरफ घर कर देखा , तोह सीमा अपने अप्प hi जमीन से उड़ने लगी , और फिर रेखा ने सीमा को पीछे से अपनी बहु में जकड लिया ,

उसकी पकड़ इतनी टाइट थी , के सीमा के गुलाबी होंठो से खून की पतली धार बह निकली ,

रमा ने जब अपनी माँ की यह हालत देखि तोह वोह गुस्से से पागल हो गई , उसकी सांसे बेहद तेज़ चलने लगी , िका इक वोह जमीन से उठ कड़ी हुई ,

धीरे धीरे रमा का गुस्सा बढ़ता गया , अपनी माँ , सीमा के साथ बिताये पल , उसकी आँखों के सामने घूमने लगे , उसका प्यार , उसका रोना , रमा गुस्से में पागल हो गई ,



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तभी रमा के शरीर में बदलाव ऐनी लगा , उसके सार से जो खून बह कर निचे फर्श पर गिर उसे लाल कर रहा था , उस खून का रंग अभ कला हो चूका था ,



रमा की आँखों का रंग भी धीरे धीरे कला होने लगा , फिर इक वख्त आया , जब उसकी आँखें काली हो चुकी थी , धीरे धीरे हाथो का रंग भी कला होता गया , इक वख्त आया , जब रमा का पूरा बदन कला हो चूका था , गुस्से में उसका रूप बेहद खौफनाक लग रहा था ,



इक बात अजीब थी , रमा के बाल पोरे लाल हो चुके थे , और लम्बे इतने के उसके पैरो को चुने लगे थे ,

"अय्यूननननन..." रेखा इक बार और जोर से चिलायी , और सीमा को इक तरफ फेंक दिया , वोह रमा की तरफ बढ़ने लगी , रमा भी गुस्से में पागल उसकी तरफ बढ़ रही थी ,

अपनी माँ को खून से लथपथ बेसुध पढ़े देख , रमा और भी पागल हो गई , और गुस्से में चिलाती हुई , रेखा की तरफ तेज़ी से बढ़ने लगी ,

दोनों बहने लड़ने को त्यार थी , गाओं में दोनों में बेइंतहा प्यार था , लेकिन अज्ज किस्मत और वख्त ने दोनों को इक ऐसे मोड़ पर लेकर खड़ा कर दिया था , यहाँ इक hi जिन्दा बच सकती थी ,

अभ रेखा और रमा इक दूसरे के सामने कड़ी थी , इक दूसरे की आँखों में घूरते हुए देख रही थी ,

"ायूंनंन्न...." रेखा अपना पूरा मोह खोल जोर से चखी तोह , रमा भी गुस्से में चिलायी , रमा जैसे hi छिलने लगी , उसके मोह से अग्ग की लपटे निकलने लगी ,

रेखा उस अग्ग को बर्दाश्त नै कर प् रही थी , वोह गयाब हो गई , रमा को कुछ समाज न आया , तभी रेखा इक डैम से उसके पीछे वापिस ा गई ,

रमा कुछ समाज पति , तब तक रेखा ने उसकी कमर पर हाथ दाल उसे कास कर जकड लिया , रेखा की पकड़ इतनी मज़बूत थी के रमा के बदन की हड्डीयाँ कड़क कड़क की आवाज़ करने लगी , उसके मोह से खून बहने लगा जो काळा रंग का था ,

"aaaannhhhhhhhhhh..." रमा दर्द और गुस्से से चिलायी और रेखा को साथ लेकर वह से गयाब हो गई , दोनों किसी जंगल में पहुँच गई ,

जंगल भी काम ब्यांक नै था , वह के ुचे लम्बे पेड़ , बिलकुल सूखे हुए थे , और अँधेरे से नहाये हुए भी , यहाँ तक के मिटटी भी काळा रंग की थी ,

यह वही जगह थी , यहाँ रमा पहले कैद हुई थी , वही डरावना , ब्यांक जंगल था , रेखा अभ रमा के सामने कड़ी थी ,

"aaaieeeeeeeeeeeiiiiiiiiiiii उफ्फफ्फ्फ़..." रेखा ने रमा की गर्दन को दोनों हाथो से जकड लिया , रमा थोड़ा दर्द से कसमसाई ,

रेखा , रमा को गर्दन से जकड़े कड़ी थी , फिर रमा के लाल चमकते बाल और भी लम्बे होने लगे , धीरे धीरे रमा के लम्बे बालो ने रेखा की गर्दन को किसी सांप की तरह कास कर जकड लिया ,

इक तरफ रेखा , रमा की गर्दन दबा रही थी , तोह दूसरी तरफ रमा अपने जादुई बालो से रेखा की गर्दन हर बढ़ते पल के साथ कस्ती जा रही थी ,

अचानक से रेखा ने रमा की गर्दन को छोड़ , उसके बालो को अपने लम्बे नाखुनो वाले हाथ से काट दिया ,

रमा ने जोर से चीखते हुए रेखा को ढाका जड़ दिया , रेखा उड़ती हुई , इक सूखे बड़े पेड़ से टकराई , वोह इतनी जोर से टकराई थी के , "काकड़दायककककक.." की आवाज़ करता पेड़ बेच से टूट कर गिर पढ़ा ,

रमा के कटे बाल जो जमीन पर गिरे पढ़े थे , वोह अपने अप्प hi उड़द कर , रमा के बालो से जुड़ गए , रेखा कड़ी हुई , और रमा की तरफ देखने लगी ,

"aayunnnnnnnnnn.." रेखा जोर से चीखती हुई , रमा की तरफ बड़ी , वोह उड़ती हुई रमा की तरफ बढ़ रही थी , पर तभी जैसे hi रेखा , रमा पर जप्ती , रमा वह से गयाब हो गई और वापिस घर पहुँच गई , अभ रेखा उस जंगल में कैद थी , पर कब तक...

रमा घर वापिस आयी और अपनी माँ के पास बेथ गई , फिर रमा ने अपनी माँ के माथे पर हाथ फिरा दिया , सीमा के जखम अपने अप्प भरने लगे , कुछ देर बाद उसे होश ा गया ,

तब तक रमा भी अपने इंसानी रूप में ा चुकी थी , अभ उसे अपनी ताकत का एहसास हो चूका था , अभ इक मटर रवि hi था , जिसे अपनी पिछले जनम की ताकत नै मिली थी ,

सीमा ने आँखें खोल अपनी बेटी को देखा और फिर मुस्कराने लगी , उसके गालो पर हाथ फिरा कर बोली ,

"मेरी बेटी , तू ठीक है ना..."

"मा , में बहुत दर गई थी , अगर आपको कुछ हो जाता , ओह्ह्ह , मा .." रमा उसके पोरे चेहरे को चूमती हुई बोली , फिर रमा ने सीमा को अपने हाथो का सहारा देकर खड़ा कर लिया , और सोफे पर बिठा लिया ,

"माँ , अप्प पहले मेरे साथ ऐसे क्यों कर रही थी..." रमा ने सीमा की गॉड में सार रख लेटते हुए नाम आँखों से बोलै ,

"मेरी बची , वोह में नै थी , ऐसी शेतीअन लड़की ने मुझे वश में कर लिया था , वार्ना , में अपनी बेटी को कभी चोट पहुंचा सकती हु , तू तोह मेरी जान है..." सीमा ने प्यार से रमा के बाल सहलाते उसका माथा चुम कर बोलै ,

"ओह्ह , माँ , मने कितना गलत समझा आपको , सॉरी माँ , माँ वोह लड़की कोई और नै , रेखा देदी थी..." रमा ने रट हुए बोलै ,

"क्या , रेखा डीडीई , पर इस हालत में ,और इतनी ब्यांक , कैसे..." सीमा ने चौंकने का नाटक करते हुए बोलै ,

"नै जानती माँ , पर माँ , अगर किसी ने आपको छुआ भी तोह , में उसे मर डूंगीए..." रमा ने नाम आँखों से बेहद गुस्से में बोलै , सीमा उसके बालो को सहलाते मुस्कराने लगी , लेकिन उसकी मुस्कान में इक खौफनाक बुराई छिपी हुई थी ,

"हम्म , अभ रमा की शक्ति भी मेरे साथ है , ऐसे में अपनी ढल बना कर रखूगी , हमेशा , रमा , तुम मेरी गुलाम बन कर रहुगीय , मेरी हर ीचा पूरी करुँगी , तुम्हारी ताकत से में रवि और कोमल को मत डूंगीए , और फिर परीइ लोग पर राज़ करुगीय , हहै , मेरी गुलाम , मेरी बेटीइ..." सीमा ने मन hi मन सोचते हुए मुस्करा कर बोलै , फिर उसने रमा के माथे को चुम लिया , जो उसकी गॉड में सो चुकी थीई ....

वही दूसरी तरफ...

अभी रत के 8 बज रहे थे , अज्ज का दिन , बहुत ब्यांक बीता था , रवि की पूरी जिंदगी बदल चुकी थी , अपनी ताकत वोह खो चूका था , लेकिन बेबी को जिन्दा करना भी जरुरी था , आखिर वोह उसका प्यार था , वोह कोई आम लड़की नै थी , वोह प्यार की मूरत थी ,

वोह आम लड़कयों जैसी नै थी , जो अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन्ना चाहती हैं , वोह बस रवि का प्यार चाहती थी , उसकी बहु में रहना चाहती थी , उसके साथ अपनी पूरी जिंदगी गुजरना चाहती थी ,

उसने अपना सब कुछ खो दिया था , अपने माँ , बाप , अपनी प्यारी निशा , अभ उसके पास अगर कुछ था , तोह वोह , बस रवि और काट hi थे , लेकिन रवि भी उसे खोना नै चाहता था ,

रवि ने बेबी को गॉड में उठा रखा था , अभी अभी वोह बेबी के घर पहुंचे थे , बेबी ने अभी भी अपना चेहरा रवि के सीने में छुपा रखा था , रवि उसे बैडरूम में ले आया और उसे बीएड पर लिटा दिया , वोह जाने लगा , तेन की बेबी कुछ देर आराम कर सके ,

पर उसके पलटते hi बेबी ने उसका हाथ पकड़ लिया , रवि , बेबी के मन की हालत समाज गया , वोह खामोश थी , उसकी आँखें दरी और सेहमी सेहमी सी थी , गुलाबी नरम होंठ थोड़ा थोड़ा कम्प रहे थे , उसके ब्राउन बाल उसके चेहरे पर फैले हुए थे , उफ़ उसका सफेद चेहरा कयामत ध रहा था ,

रवि बीएड पर उसके साथ लेट गया , बेबी भी कास कर उसके सीने से लग गई , इक तोह वोह दरी हुई थी और , दूसरा लॉकेट की ताकत उससे सेहन नै हो रही थी ,

लॉकेट उसके मन से जुड़ने की कोससिह कर रहा था , क्यों की अभ वोह लॉकेट नै रहा था , अभ उसे इक जिस्म मिल गया था , और वोह बेबी के दिमाग में छुपी उसकी पिछली यादिओं को देख रहा था , ऐसी लिए बेबी का मन बेचैन था , क्यों की उसकी आँखों के अग्गे उसकी पिछली यदिअण किसी सपने की तरह उसे दिखाई दे रही थी ,

"क्या हुआ मेरी जान , उम्मा , तुम मेरी बहु में सकूं मिलता है न , सो जाओ , मेरी प्यारी जुहीय , में तुम्हारे पास हु ..." रवि ने बेबी के होंठो को चुम कर बोलै , बेबी ने रवि के सीने में अपना चेहरा छुपा , अपनी आँखें बंद कर ली , उसे पता भी न चला , के वोह कब सो गई ,

उसकी पिछली पूरी जिंदगी उसकी आँखों के सामने गुजर रही थी , अभ वोह पल आया जब वोह अपने शहर में नयी नयी अपने मम्मी -पापा के साथ शिफ्ट हुई थी , तब वोह 12 साल की थी ,

बेबी सो रही थी , पर उसके होंठो पर इक मुस्कान थी , क्यों की वोह अपनी जिंदगी के खुशनुमा पलु को महसूस कर रही थी ,

फिर उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा ख़ुशी का पल आया , जब वोह अपनी प्यारी दोस्त निशा से मिली थी , निशा और जूही , इक hi स्कूल में पढ़ती थी , वोह पहला दिन था , जब जूही ने नया नया एडमिशन लिया था निशा के स्कूल में ,

रिसेस होने पर जूही स्कूल में बने छोटे से पार्क में गई , तब उसने देखा , पार्क की नरम नरम घास पर इक लड़की अकेली बैठी हुई थी , वोह पहले तोह उसे बुलाने उसके करीब हुई , पर फिर उसने पास कड़ी दो लड़कयों की बतिअन सुनी , जो निशा के बारे में बोल रही थी ,

"यह बड़े बाप की बेटी है , सुना है , इसके पास बेइंतहा डोलत है , लेकिन पता नै , यह इस मामूली से स्कूल में क्यों पढ़ती है.."

जूही उन दोनों की बात सुन रुक गई , उसने सोचा वोह बहुत अमीर है , पर में गरीब , मेरी उससे बात करने की उखाड़ नै , जूही पलट कर जाने लगी , तभी किसी ने पीछे से उसका हाथ पकड़ लिया , जूही दर गई , उसने डरते हुए पीछे देखा , उसके पीछे निशा कड़ी थी ,

"वोह , वोह , सॉरी..." जूही ने डरते हुए बोलै , वोह निशा से नज़रियन भी नै मिला प् रही थी ,

"किस बात के लिए सॉरी , तुमने क्या गलती की , तुम नयी आयी हो , है न , मेरा नाम निशा है और तुम्हारा..." निशा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"jj...jj..juhii..." जूही ने हकलाते हुए बोलै ,

"जुहीय , मेरी दोस्त बानगी , में अकेली हु..." निशा ने जूही के करीब होकर बोलै , उसकी आँखें नाम थी ,

जूही ने उसे बहु में भर लिया और बोली.. " हाँ , में तुम्हारी दोस्त बानगी , पर में बहुत गरीब हु , तुम मेरे साथ..." जूही अभी बोल hi रही थी के निशा ने पीछे होकर उसकी आँखों में देख बोलै ,

"जूही , मुझे कोई अपना चाहये, जिसके साथ में प्यार कर सकू , अपने दुःख दर्द बाँट सकू , में अकेली हु , मुज़से वादा करो , कभी मेरा साथ नै छोड़ोगी , वादा कारु..." निशा ने रट हुए बोलै , जूही फिर से उसके गले लग गई , उसे बहु में भरते हुए बोली... "कभी नयी..."

बेबी की आँखों से असनु बह रहे थे , हलाकि वोह सो रही थी , पर आँखों से असनु तोह रुकने का नाम नै ले रहे थे , निशा उसकी जिंदगी थी ,

फिर उस दिन के बाद निशा , जूही की जिंदगी में आयी , दोनों हमेशा साथ रही , यहाँ जूही बहुत भोली और मासूम लड़की थी , वही निशा चुलबुली , शरारती और बिंदास लड़की थी ,

दोनों हमेशा साथ रहती , साथ घूमती , इक दूसरे के बेहद करीब अति गई , निशा अभ अपना महलो जैसा घर छोड़ , जूही के साथ रहने लगी ,

दोनों में बहुत प्यार था , पर निशा इक बात पर जूही से लड़ती रहती , क्यों की जूही उससे कुछ लेती नै थी , न कोई महंगा गिफ्ट न कपडे , कुछ भी नै , और निशा बार बार यही कहती , जूही इक दिन , तेरे पास इतनी डोलत छोड़ कर जोगी , के गिनते गिनते तेरी उम्र गुजर जाएगी ...

उफ़ यह सब देख बेबी की आँखों से असनु और तेज़ बहने लगे , क्यों निशा ने अपना चैलेंज पूरा कर दिया था , वोह सच में , उसके पास इतनी डोलत छोड़ गई थी के वोह कभी गईं hi न पायी ..

निशा के मरने के बाद , उसे अपने चेहरे से नफरत हो गई थी , क्यों की निशा उसके ऐसी चेहरे को पसंद करती थी , आखिर जूही ने मज़बूर होकर प्लास्टिक सर्जरी करवा ली , तेन की वोह निशा को भूल सके...

आखिर लॉकेट बेबी की पिछली पूरी जिंदगी को देखता और उसे दिखता रहा , करीब 2 घंटे बाद बेबी की आँख खुली , निशा की यदिअण , उसकी जिंदगी में फिर से भर गई थी , इस लिए वोह रोटी जा रही थी , उसकी चखे अभ तेज़ हो गई थी , वोह निशा को यद् कर बेइंतहा रट जा रही थी ,

यहाँ तक के घर के हॉल में बैठे रवि और काट भी उसकी चखे सुन भाग कर उसके पास ा गए , काट ने उसे अपनी बहु में भर बहुत मुश्किल से चुप करवाया और उसे फिर से लिटा दिया ,

"रवि क्या हुआ था बेबी को..." काट ने रट हुए पूछा ,

"काट , सॉरी में नै बता सकता , पर बेबी ठीक है , प्लस , तुम इसके पास hi रहना , कोई प्रॉब्लम ए तोह मुझे कॉल कर देना , ok , में चलता हु.." रवि इतना बोल जल्दी से बहार निकल गया , क्यों की काट उससे पूछ hi लेती , जो अज्ज के दिन गुजरा था...

अभ लॉकेट की पूरी शक्ति , बस इक hi चीज़ को महसूस कर रही थी , वोह थी निशा , पर क्यों , पर इससे बेबी की हालत भिगाडती जा रही थी , क्यों की निशा की यदिअण उसे बेचैन करती जा रही थी....

रवि जल्दी से अपना घर पहुंचा, क्यों की उसे चिंता थी , अपनी बहनो की , क्यों की सीमा , सुहाना है , यह बात , उसकी कोई बहिन नै जानती थी ,

रवि घर पहुंचा तोह उसने घर के अंदर घुस कर देखा , सभी लड़कियाँ डाइनिंग टेबल पर बैठी हुई थी , और सीमा उनको खाना खिला रही थी ,

"रवि तुम ा गए , ायो तुम भी खाना खा लो.." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

अभ रवि को यह समाज नै ा रहा था , यह सीमा है या सुहाना , क्यों की अभ उसके पास लॉकेट जो नै था...

तो बे कुनिटेड...
 
फ्रेंड्स मेरा इक दोस्त लव1994 बन हो गया है... और मने यह डिसिशन लिया है... के में अग्गे अपडेट नै दूंगा...

लव ने बोलै के वोह 1 मंथ के लिए बन हुआ है... तोह में भी 1 मंथ बाद अपडेट दूंगा... जब उसका बन हैट जायेगा...

तब तक अप्प यहाँ के लीजेंडरी वरिटेरस की स्टोरीज रीड करो... में अपने दोस्त के साथ खड़ा हु.. तब तक अप्प मुझे भी बन hi समझो... bye.. तक फ्रेंड्स... क्या पता दुबारा मुलाकात हो या न हो...

और इक बात में जनता हु अप्प गळ्यां डोज... बहुत कुछ कहोगे... बूत.. जिसके कहने पर यह स्टोरी रीस्टार्ट की.. अगर वही नै होगा.. तोह में लिख नै पाउगा.. सॉरी... bye
 
फ्रिएंड्स अहॉ िलपफते नया कटिगा ..ककल दिहंस शुकीहा
 


अपडेट-47

अभ अग्गे...

रवि अग्गे बढ़ा और सबके साथ बेथ गया , वोह बार बार सीमा की तरफ देख रहा था , उसे लग रहा था , वोह सीमा नै सुहाना है ,

"रवि तुम खाना दू..." सीमा ने मुस्कराते हुए पूछा , वोह अज्ज बेहद खुश लग रही थी ,

"नै , मुझे भूक नै है..." रवि ने सबकी तरफ देख कर बोलै ,

"क्यों..." सीमा उसकी आँखों में आँखें दाल बोली ,

रवि के पास अभ न तोह रिंग थी और न hi लॉकेट , अभ वोह इक वैम्पायर था , और सीमा इस बात को जानती थी , घर पर उसकी बहाने इस बात को नै जानती थी , सीमा उसे परेशान कर रही थी ,

"भइआ खा लो न , थोड़ा सा , माँ कितने प्यार से बोल रही है..." रमा ने मुस्करा कर बोलै , अज्ज वोह भी बेहद खुश थी , आखिर उसने अपनी माँ की जान जो बचाई थी ,

"रमा , मुझे भूक नै है , बाद में खा लूंगा..." रवि ने इक बार और अपने अप्प को बचते हुए बोलै ,

"ओह्ह रवि , अगर तुम खाना नै खाओगे , तोह में भी नै खाऊगी..." सीमा ने रवि को आँख मर कर बोलै , वोह उसे गुस्सा दिला रही थी ,

"यह क्या देदी , भइआ खा लो न थोड़ा सा , वार्ना देदी भी कुछ नै खायेगी..." शूरति ने थोड़ा सीरियस होकर बोलै ,

"मने इक बार कहा न , मुझे भूक नै है..." रवि इतना बोल उठ कर अपने रूम की तरफ चला गया ,

सीमा के होंठो पर इक मुस्कान दौड गई , पर उसने अपने चेहरे के भाव किसी को दिखने नै दिए , सीमा भी अपने रूम में चली गई ,

"यह भइआ भी न , माँ को रुला दिया , अगर थोड़ा सा खा लेट तोह क्या हो जाता..." रमा ने बेहद गुस्से में बोलै , और खाना बेच में छोड़ अपनी माँ के पीछे भाग गई ,

"इसमें भइआ की क्या गलती , वैसे भी वोह मुझे परेशान से लग रहे थे..." रिमी ने उदास मन से बोलै ,

"तुम सही बोल रही हो , देदी और रमा को समज़ना चाहये , कभी कभी किसी का मन नै करता .." शूरति भी उदास आवाज़ में बोली ,

फिर तीनो भी उठ कर अपने अपने रूम में जाने लगी , तभी शूरति वापिस ा गई , और डाइनिंग टेबल को साफ करने लगी , उसने किचन का सारा काम सम्बल लिया ,

वही दूसरी और रमा , सीमा के पास बीएड पर बैठी हुई थी , वोह अभ भी गुस्से में थी , क्यों की सीमा रो रही थी , पता नै वोह सीमा थी या सुहाना ,

"माँ , क्यों रो रही हो , प्लस , चुप हो जाओ , प्लस.." रमा भी आँखें नाम किये हुए बोली ,

"देखा नै तुमने , रवि ने खाना भी नै खाया और न hi मुज़से कहा के तुम खा लो , वोह अभ मुज़से प्यार नै करता..." सीमा ने और भी रट हुए बोलै ,

"माँ , में हु न , में सब ठीक कर दूंगी , में आपसे प्यार करती हु , और सबसे जायदा..." रमा ने सीमा को अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

"ओह्ह , मेरी बची , बस अभ तुम्हारा hi सहारा है मुझे , वार्ना में अकेली पढ़ जोगी..." सीमा ने रमा के चेहरे को चूमते हुए बोलै ,

"माँ , मेरे लिए खाना खा लो , थोड़ा सा , प्लस.." रमा ने अपने असनु साफ करते हुए बोलै ,

"ठीक है , मेरी बची तोह यही बेथ , में खाना लती हु..." सीमा थोड़ा मुस्करा कर उठी और रूम से बहार जाने लगी ,

उसके होंठो पर इक मुस्कान थी , अभी सीमा बहार जा hi रही थी , के उसका पेअर फिसल गया , वोह अग्गे की तरफ गिरने लगी , गिरते हुए उसका सार देवर से टकरा गया , सीमा का माथा इक तरफ से फैट गया और खून बहने लगा ,

"माआआ , यह क्या हो गया , भय्याहा , डीडीई , जल्दीए आयु..." रमा जोर जोर से चिलाती रट हुए बोली ,

उसने भाग कर सीमा का सार अपनी गॉड में रख लिया , और उसके गालो को थपथपते हुए उसे होश में लेन लगी , पर सीमा का पूरा चेहरा खून से लथपथ हो चूका था , खून से उसका चेहरा , उसकी गर्दन , और उसके कपडे तक लाल हो चुके थे ,

तभी शूरति , रिमी और सीमा , भाग कर रमा के पास पहुँच गई , फिर जैसे hi उन तीनो ने सीमा को देखा , वोह रोने लगी ,

"रमा , क्या हुआ देदी को..." सीमा रट हुए रमा के पास बैठते हुए बोली ,

"मा , फिसल कर गिर गयी , भइआ कहा ही... " रमा ने जोर से छीलते हुए बोलै , वोह सीमा को हॉस्पिटल लेकर जाना चाहती थी ,

"में लती हूँ..." रिमी इतना बोल गहबरि सी , रवि को बुलाने भाग गई ,

"उफ्फ्फ , कितना खून बह रहा है ..." शूरति बेइंतहा रट हुए बोली , और फिर अपनी सफेद चुनरी को फाड् , उसे सीमा के माथे पर बंद दिया , पर खून उस पतली सी चुनरी से निकल कर बहने लगा ,

"खून तोह रुक hi नै रहा , माआ , होश में आयु..." रमा , सीमा की ऐसी हालत देख और भी रट हुए बोली ,

कुछ वख्त बाद hi रवि और रिमी भी वह पहुँच गए , रवि ने जैसे hi सीमा की ऐसी हालत देखि , वोह भाग कर उसके पास बेथ गया ,

"सीमा , उठो ना , क्या हो गया तुम..." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै , फिर वोह सीमा के चेहरे को हाथो से सेहलने लगा ,

"भइआ , माँ को हॉस्पिटल लेकर चलते हैं , जल्दी कारु ..." रमा और भी रट हुए अपने भाई की तरफ देख कर बोली ,

रवि ने निचे होकर सीमा को जैसे hi उठाना चाहा , खून की महक उसकी नक् में घुस गई , गरम खून की ताप्ती महक ने रवि को मदहोश सा कर दिया ,

रवि भूल चूका था , अभ न उसके पास रिंग है और न hi लॉकेट , सीमा के खून से उठी महक ने , उसके अंदर की प्यास को बड़ा दिया ,

उसके बदन में इक ऊर्जा सी दोड़ने लगी , हाथ पेअर ठन्डे होने लगे , वोह बार बार अपने सूखे होंठो को जीभ फिरा गीला करने लगा , रवि बेहद ललचाती नज़रिओं से , सीमा के खून से साणे चेहरे को निहार रहा था , उसकी आँखों का रंग अभ गहरा नीला हो चूका था , और दन्त भी नोकीले होने लगे थे , जैसे अभी वोह सीमा की नरम गर्दन को काट कर , उसका सारा खून चूस जायेगा ,

"भैई , क्या देख रहे हूँ , जल्दी उठाओ माँ को , हॉस्पिटल जाना ही , मा.." रमा रट हुए थोड़ा गुस्से में बोली , उसे सीमा की बेहद चिंता थी ,

"अह्ह्ह , में क्या करूण , अगर , अगर कुछ देर और , यहाँ रहा , तोह में अपने असली रूप में ा जाउगा , सशह्ह्ह , मुझे जाना होगा , अभी..." रवि ने मन में सोचते हुए बोलै , उससे अभ बर्दाश्त नै हो रहा था , उसका दरिन्दापन उसे मज़बूर कर रहा था , खून की महक ने उसे मदहोश सा कर दिया था ,

"भइआएए चालू..." इस बार शूरति जोर से चिलायी ,

पर रवि ने सीमा को इक डैम से छोड़ दिया , और उठ कर अपने रूम की तरफ भाग गया , सब की सब हरिजन होती हुई उसे जाते देखती रही ,

रवि अपने रूम में पहुँच गया , और जल्दी से दरवाजा बंद कर , वाशरूम में घुस गया , रवि खुद को वाशरूम में लगे बड़े से मिरर में देखने लगा ,

उसका बदन अभ असली रूप में ा चूका था , वोह अभ खून पीना चाहता था , सीमा के बहते ताज़ा खून ने , उसकी प्यास इस कदर बड़ा दी थी , के रवि से अभ सेहन नै हो रहा था ,

वही दूसरी तरफ अपने भाई के इस तरह जाने से सब की सब गुस्से से पागल हो चुकी थी , रमा तोह बेहद गुस्से में थी , उसकी आँखों का रंग कला हो चूका था , उसका अपनी शक्ति पर कोई कण्ट्रोल नै था , जब जब उसे अभ गुस्सा अत , तब तब वोह अपने असली रूप में ा जाती ,

"यह भइआ को क्या हुआ..." रिमी ने रट हुए बोलै ,

"हाँ जेजु को इस तरह नै जाना चाहये था , आखरी सीमा उनकी वाइफ है ..." सीमा ने भी गुस्से में बोलै ,

"रमा , अभ हम hi लेकर चलती है देदी को हॉस्पिटल , रिमी गाड़ी निकालो , हम अति है देदी को लेकर..." शूरति ने अपने असनु साफ करते हुए बोलै ,

"जी देदी..." रिमी इतना बोल बहार भाग गई , उसे गेराज से गाड़ी निकालनी थी , क्यों की अभ रत के 9 बज रहे थे ,

पर रमा तोह पत्थर की बन चुकी थी , अभ उसकी आँखों से असनु नै बह रहे थे , अभ उन आँखों में गुस्सा था , बेहद गुस्सा , और यह गुस्सा उसे अपने भाई पर था ,

जिस भाई के साथ जिंदगी की शुरुआत की थी , अज्ज उसी भाई से नफरत करने लगी थी , उसे अकेला छोड़ रही थी , इस बेमतलब दुनिआ में , इक माँ की ममता ने , अज्ज इनके अनोखे प्रेम का अंत कर दिया था , लेकिन सुहाना , सीमा की ममता का नाजायज फिदा उठा कर , रमा की मासूम जिंदगी से खेल रही थी ,

सीमा धीरे धीरे सबकी जिंदगी में जहर घोल रही थी , सबको रवि से दूर कर रही थी , इसके पीछे उसका क्या मकसद हो सकता था , यह तोह अभ सीमा hi बता सकती थी , या शायद सुहाना ,

"रएमाआ , उठू जल्दीए..." शूरति ने जब चीला कर बोलै , तब रमा थोड़ा होश में आयी , उसकी आँखों का रंग पहले जैसा हो गया ,

"हम्म , चालू..." रमा बेहद उदास आवाज़ में बोली , और सीमा को उठाने लगी ,

"उफ्फ्फ , सीमा देदी तोह बेहोश हो चुकी है , अभ कैसे लेकर जायेगे , भइआ होते तोह , गॉड में उठा कर ले जाते..." शूरति ने थोड़ा चिंता में बोलै ,

"में बोलती हु जेजु को , वोह मेरी बात जरूर मानेगे..." सीमा ने आँखों से बहते असनु साफ कर बोलै , अभी वोह जाने hi लगी थी के रमा बेच में बोल पढ़ी ,

"कोई जरुरत नई , मुझे किसी की मिन्टन नै करनी , में खुद अपनी माँ को उठा सकती हु .." रमा ने बेइंतहा गुस्से में बोलै , अभ उसकी आँखें काली होने लगी थी ,

रमा ने फिर सीमा को अपनी गॉड में उठा लिया , सीमा उसे अभ फूलु से भी हलकी लग रही थी , रमा तेज़ी से गुस्से में , घर के बहार ा गई , अगर वोह चाहती तोह सीमा को पल भर में ठीक कर देती , पर इससे सबको शक हो जाता , और वैसे भी अभ वोह , यह देखना चाहती थी , के उसका भाई कितना प्यार करता है उसकी माँ को ,

रमा ने सीमा को गाड़ी में बिठा लिया , फिर रिमी , शूरति , और सीमा भी गाड़ी में बेथ गई , कुछ देर रिमी ने घर की तरफ देख , अपने भाई का इंतज़ार किया , जब वोह न चली तोह रमा ने उसे गुस्से में चीला कर बोलै ,

"रिमी , गाड़ी क्यों नै चला रही , वोह नै आएंगे , अज्ज के बाद , मेरा कोई भाई नै , जब वोह मेरी माँ के नै हुए , तोह मेरे कहा से होंगे , में अपनी माँ की कसम कहती हु , जिंदगी भर उनसे कभी प्यार नै करुँगी , बस नफरत करुँगी..." रमा ने रट हुए चीला कर बोलै , उसकी दर्द भरी आवाज़ सुन सभी रोने लगी , फिर रिमी ने रट रट गाड़ी हॉस्पिटल की तरफ डोडा दी ,

वही दूसरी तरफ रवि वाशरूम में घुटनो के बल बैठा हुआ था , उसके हाथ में उसकी बेल्ट थी , और ऊपर से उसका सीना नंगा था , वोह बार बार , खुद को बेल्ट से मर रहा था , तेन की उसकी प्यास यही थम जाये ,

उसका पूरा बदन जख्मी हो चूका था , आखिर वोह खुद को मरता मरता थक गया , रवि वही पेट के बल वाशरूम के फर्श पर गिर गया ,

उसकी पथ पर हर तरफ बेल्ट के निशान छपे हुए थे , कही कही से खून निकल रहा था ,

रवि ने आँखें बंद की हुई थी , तभी उसने खुद को देखा , अजीब सा था वोह , पूरा बदन लाल था ,

उसके कंडे के पीछे से दो बड़े पंख निकले हुए थे , लम्बे लम्बे बाल थे , आँखें भी गहरी लाल थी , पूरा बदन लाल था ,

रवि खुद के ऐसे रूप को देख थोड़ा भेबीअत होकर उठ बैठा , उसकी सांसे तेज़ चल रही थी , उसके कनु में इक hi नाम गूंज रहा था सोनिक , जिसे प्यार से सब सोना कहते थे ,

रवि ने जल्दी से अपनी संसू को कण्ट्रोल किया और कपडे पहन कर बहार बीएड पर आकर बेथ गया , उसकी आँखों के सामने , उसका खुद का खौफनाक रूप घूम रहा था , जिसके कदमो में अजीब से दिखने वाले प्राणी बैठे हुए थे ,

लेकिन रवि को अभ सीमा की बेहद चिंता हो रही थी , वोह उसे मिलना चाहता था , उसे खुद पर गुस्सा भी ा रहा था , लेकिन उसकी मज़बूरी थी ,

लेकिन बार बार उसकी आँखों के सामने उसका लाल जिस्म ा रहा था , उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी , लेकिन इसका इक hi इलाज था , रवि को जल्द से जल्द , उस पुजारी बाबा के पास पहुंचना था , क्यों की वही बता सकते थे , यह सोनिक कोण है ,

फिर रवि बीएड पर लेट गया , वोह सीमा के करीब नै जा सकता था , इस लिए उसने सुबह जल्दी जल्दी निकलने का सोचा , क्यों की अभ बाबा से मिलना बेहद जरुरी था ,

सुबह के 6 बज रहे थे , रमा , शूरति जग रही थी , पर सीमा और रिमी उनके पास hi बेंच पर सो रही थी , शूरति तोह इक बार सो कर उठ चुकी थी , पर रमा इक बार भी नै सोई थी ,

दूसरी तरफ डॉक्टर्स भी परेशान थे , क्यों की सीमा की चोट इतनी गहरी नै थी , पर उसे होश नै ा रहा था , ऐसा केस उनहोनु पहले कभी नै देखा था , बेहद मुश्किल से सीमा का बेहटा खून बंद किया था , डॉक्टर्स बेहद परेशान थे ,

रमा के दिल में अपने भाई के लिए नफरत और भी बाद चुकी थी , क्यों की इक बार भी रवि यहाँ नै आया था ,

वही दूसरी तरफ रवि सुबह जल्दी उठ गया था , उसने अपने कुछ कपडे पैक कर लिए थे , क्यों की पुजारी बाबा के पास , शयद उसे कुछ दिन रुकना पढ़े ,

रवि ने अपने कपडे इक बैग में डेल और घर से बहार ा गया , रवि गाड़ी में बेथ घर से निकला , तभी उसे काट घर के बहार कड़ी दिख गई , सुबह के 6 बज रहे थे ,

रवि ने गाड़ी रोकी और उतर कर काट के पास चला गया , रवि ने काट की तरफ देखा , जो कुछ उदास थी ,

"क्या हुआ काट.." रवि ने काट के पास पहुँच कर बोलै ,

"चट्टाअक्कक्क..." इक थपड रवि के गाल पर ा पढ़ा , काट गुस्से में चीखती हुई बोली ,

"क्या किया मेरी बेबी के साथ , वोह रत से रोटी जा रही है , और में कुछ नै कर प् रही हु , यह सब तुम्हारी गलती है , जब में और अनु , उसे अनु के घर छोड़ कर गई थी , तब तुम क्या जरुरत थी उसे अपने साथ लेकर जाने की ..." काट ने बेहद गुस्से में रट हुए बोलै ,

"पर काट..." रवि कुछ नै जनता था , बेबी वह कैसे पहुँच गई , यह सब इक हादसा था ,

"शह्ह्ह्ह , चुप हो जाओ , और मेरी बात सुनो , तुम मुझे पाना चाहते हो न , फ़क में , फ़क में , बूत , प्लस लीव में अलोन माय बेबी , प्लस , रवि तुम मुज़से प्यार करना है , कर लो , पर बेबी को बकश दो , में मर जोगी अगर उसे कुछ हो गया तोह , प्लस रवि , चाहे मेरे जिस्म का कटरा कटरा नोच डालो , पर बेबी को छोड़ दो..." काट ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

रवि कुछ नै बोल प् रहा था , अज्ज वोह खुद को अकेला महसूस कर रहा था , उसे कोई समाज hi नै प् रहा था ,

उसकी कोमल उसके पास नै थी , उसकी सीमा उसके पास नै थी , उसकी बहाने उसे नफरत करती थी , काट उसे बेबी के पास नै जाने दे रही थी , कोण था , कोण था , जो उसे समाज पता , हाँ इक था , जो उसके दिल के दर्द को समाज पता , ख़ुशी...

रवि , काट के करीब हुआ , काट ने भेजी आँखों से उसकी तरफ देखा , उसकी सांसे तेज़ हो चली थी , रवि ने काट के कण के पास अपने होंठ कर बोलै ,

"अपना ख्याल रखना काट , और जूही का भी , में अभ कभी तुम दोनों की जिंदगी में नै ायुगा , मुझे माफ़ कर देना , में तुम सबसे बहुत दूर जा रहा हु , बेबी को इतना प्यार देना , के वोह मुझे भूल जाये , अलविदा.. " रवि ने दिल की गहराई से रट हुए बोलै और काट के कंपते गुलाबी होंठो को चुम लिया ,

रवि और कुछ नै बोलै और वह से पलट कर तेज़ी से अपनी गाड़ी में बेथ गया , और गाड़ी डोडा दी उस तरफ , यहाँ उसे जूही मिली थी , हाँ वोह जूही के शहर जा रहा था ,

रवि ने अपना मोबाइल निकला और ख़ुशी को कॉल कर दिया , अभी कल hi सुबह उसने ख़ुशी से बात की थी , लेकिन अभ दिल की हालत बदल गई थी , अभ दिल में दर्द था , जब के कल ख़ुशी थी ,

कुछ hi रिंग्स गई होंगी के ख़ुशी ने फ़ोन पिक कर लिया ,

"हलो जणू , सुबह सुबह कैसे यद् किया..." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"खुशु , में अकेला पढ़ गया हु , मुझे जरुरत है तुम्हारी , प्लस , ा जाओ , मेरे दिल में इक दर्द सा बढ़ रहा है..." रवि ने दिल के दर्द को सेहन न कर पते हुए बोलै ,

"रविइइइ , में ा रही हु , तुम बताओ कहा आयु में..." ख़ुशी ने नाम आँखों से बोलै , ख़ुशी , रवि के दिल की हर धड़कन को महसूस कर रही थी ,

"में तुम्हारे घर ा रहा हु , कुछ दूर रुक कर तुम्हारा इंतज़ार करुगा , कुछ कपडे भी लेते आना..." रवि ने आँखों में ए असनु साफ कर बोलै ,

"ठीक है , में अति हु , मुझे कॉल कर देना जब तुम ा जाओ , पर उदास मत होना , में तुम्हारे बिना जी नै पाउगीय , प्लस..." ख़ुशी ने रट हुए बोलै और फ़ोन कट कर दिया , ख़ुशी ने अपनी माँ को सब बता दिया , और जल्दी से अपने कपडे बैग में दाल त्यार हो गई ,

सबकी नज़रिओं से बचते हुए उसकी माँ ने उसे हवेली के बहार पहुंचा दिया , यहाँ रवि उसका इंतज़ार कर रहा था , अभ उसे जाना था , पुजारी बाबा के पास....

ख़ुशी ने अपना बैग गाड़ी की दिग्गी में रखा और रवि के साथ बेथ गई , उसने देखा , रवि सच में परेशान था , पर ख़ुशी नै जानती थी , इस सफर में उसकी जिंदगी भी बदलने वाली हु ,

"रावी , क्या बात है..." ख़ुशी ने नाम आँखों से रवि के कंडे पर हाथ रख बोलै ,

"वोह..." रवि अभी बोलने hi जा रहा था के उसका फ़ोन बज उठा , रवि ने नंबर देखा तोह रिमी का था , रवि ने फ़ोन उठा लिया ,

"भइआ कहा हो , देदी को होश ा गया है , वोह आपसे मिलना चाहती है , प्लस जल्दी ा जाओ..." रिमी ने रट हुए बोलै ,

"कहा हो , में अभी ा रहा हु..." रवि ने गाड़ी शहर की भीतर लेजाते हुए बोलै ,

"भइआ इक प्राइवेट हॉस्पिटल है , एड्रेस नोट करो..." फिर रिमी ने रवि को जल्दी से एड्रेस बता दिया ,

"क्या बात है रवि , कोण है हॉस्पिटल में.." ख़ुशी ने नाम आँखों से बोलै ,

"सीमा एडमिट है , उसका प्यार फिसल गया था , सार पर चोट आयी है..." रवि ने बेहद उदास आवाज़ में बोलै ,

"ओह्ह्ह , जल्दी चलो .." ख़ुशी ने रट हुए बोलै ,

"नै , तुम गाड़ी में hi रुकोगी , प्लस.." रवि ने ख़ुशी का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोलै ,

"पर क्यों.."

"अभी नै बता सकता.."

"डरते हो अपनी बहनो से..."

"अभी कुछ नै बता सकता , और न तुम समाज पाउगी , प्लस.."

"ठीक है..." ख़ुशी ने थोड़ा मुस्करा कर बोलै , फिर दोनों उस हॉस्पिटल में पहुँच गए , यहाँ सीमा या फिर सुहाना एडमिट थी ,

रवि गाड़ी से उतरा और हॉस्पिटल के अंदर घुस गया , फिर रवि उस रूम के सामने पहुँच गया , यहाँ उसकी बहने बैठी हुई थी ,

शूरति और सीमा ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया , रमा वह से उठकर कही और चली गई , लेकिन रिमी रट हुए उसके गले लग गई , उसके सीने पर मुक्के जड़ते रट हुए बोली ,

"क्यों किया भाई अपने , क्यों नै ए देदी को हॉस्पिटल लेकर ..."

"रिमी , अभी नै बता सकता , बस इतना समाज लो मज़बूर हु , जैसे कभी कोमल थी , ाचा वोह सब छोड़ , सीमा कैसी है अभ..." रवि ने बात को घूमते हुए बोलै ,

फिर रिमी ने ख़ामोशी से रवि को सीमा के पास बेहज दिया और खुद रूम के बहार बेथ गई ,

रवि और सुहाना अभ इक दूसरे के सामने थे , क्या सुहाना फिर से कुछ बताने वाली थी , या उसकी कोई नयी चल थी , रवि को उसकी बहनो से दूर करने की , यह सब छुपा था ऐनी वाले वख्त में....

"ायो रवि , में तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी , हम्म , एप्पल खाओगे , बेहद टेस्टी है , उम् , तुम इंसानो की कुछ चीज़े खाने में लाजवाब होती हैं , उम् , मज़ा ा गया..." सीमा ने हस्ते हुए बोलै ,

"तुम सुहाना हो , यह सब नाटक क्यों , क्योऊ , अगर लड़ना है तोह सीधी तरह लड़ो , मेरी मासूम बहनो को बेच क्यों ला रही हो..." रवि ने गुस्से में बोलै ,

"दर्द देना है तुम , तुम झुकना है मुझे , भेख मंगवानी है तुमसे , तुम रो रो कर , मेरे पैरो में गिरकर , मुज़से भेख मांगोगे , के में सीमा को छोड़ दू , तुम्हारी मासूम बहनो को बकश दू , हहै ..." सीमा ने बीएड से उठ कर रवि के करीब एते हुए बोलै ,

"पर क्यों , मुझे तोह कुछ यद् भी नै , मने तुम्हारे साथ क्या किया था..." रवि ने सुहाना की आँखों में देखते हुए बोलै ,

"यद् , यद् आएगा तुम , अगर इस जनम में तुम इतनी लड़कयों से प्रेम कर सकते हो , तोह पिछले जनम में तुमने रूही को क्यों चुना , आखिर क्यों , मेरे प्यार को ठुकरा दिया , इस जनम में मुझे अपना लिया , हहै , तुम , तुम में इतना रुलाओगी , इतना तड़फोगी , तुम पागल कर दूंगी में , कोई तुम्हारा अपना नै होगा , कोई नै , तुम अकेले रह जाओगे , जिन बहनो के प्यार पर तुम इतना घमंड है , इनके प्यार को तिनके की तरह उड़ा दूंगी , यही तुम्हारी बहाने , तुम्हारे चेहरे से बेइंतहा नफरत करेगी , हहै , जितना में रोई थी , तुम्हारे लिए , उतना तुम भी रोना होगा , अभ दर्द का हिसाब दर्द से लुंगी , असनुईओं का हिसाब असनुईओं से , जैसे मने अपनी जिंदगी गुजारी थी , प्यार के बिना , वैसे तुम भी गुजरोगे..." सुहाना ने बेइंतहा गुस्से में बोलै ,

"क्या मिलेगा तुम , कुछ भी नै , इससे ाचा तोह तुम मुझे मर दो , मेरी जान लेलो , तुम्हारे दिल को सकूं मिल जायेगा..."

"नै , नै , सोना , तुम मरना नै है , तुम मरना है , किसी और को..." सुहाना ने अपनी लाल चमकती आँखों में वेशीपन दिखते हुए बोलै ,

"किसे मरना होगा..."

"अपनी कोमल को... " सुहाना ने अभी इतना hi बोलै था के रवि ने उसे गर्दन से पकड़ लिया और चिलता हुआ बोलै ,

"मेरी कोमल को कोई नै मर सकता , कोई नै..."

"बस्स्स , ऐसी प्यार से जलती हु में , तब भी जलती थी और अज्ज भी , ऐसी लिए , में तुम्हारी जिंदगी को नाराज बना दूंगी , और कोमल को तुम मरोगे , वार्ना में सीमा को मर दूंगी , तुम अभ इक को चुनना होगा , सीमा या कोमल , जैसे तब तुमने रूही को चुनकर मुझे अपनी जिंदगी से निकल फेंका था , अभ तुम सीमा या कोमल , किसी इक को अपनी जिंदगी से हे नै , इस दुनिआ से निकल फेकना है..." सुहाना अभी बोल hi रही थी के रवि ने उसके चेहरे पर इक थपड जड़ दिया ,

"मेरी सीमा को कुछ हुआ तोह..." रवि अभी बोल hi रहा था के सुहाना ने अपना माथे पर लगी पट्टी को उतर फेंका और भाग कर अपना सार देवर के साथ जड़ दिया , उसी चोट पर खून फिर से बहने लगा ,

"बचावू , रेमाआ , रिमी , बचावू , रवीए मुझे मर देगा , बचावू..." सुहाना नाटक करते हुए रोने चखने लगी ,

"सुहाना तुम यह..." रवि अभी इतना hi बोलै था के रूम का दरवाजा खुल गया , सामने गुस्से में पागल रमा कड़ी थी और उसके पीछे बाकि तीनो भी , रमा का गुस्सा इस कदर बाद चूका था , के उसकी आँखें , उसके हाथ , अपने असली रूप में ा चुके थे....

तो बे counited....friends इक hi अपडेट दे रहा हु.. दूसरे की लैंग्वेज आपको समाज नै आएगी .. :लोटपोट:

 


अपडेट-48

अभ अग्गे...

"माँ , यह क्या हुआ तुम्ही , मा..." रमा गुस्से में पागल अपनी माँ से लिपट टी हुई बोली ,

सीमा का चेहरा फिर से खून से भेज चूका था , रवि ने जैसे hi सीमा का बेहटा हुआ खून देखा , वोह फिर से अपना कण्ट्रोल खोने लगा ,

उसकी प्यास फिर से जग उठी , उसकी नज़रियन बस सीमा के बहते गरम खून पर जैम सी गई थी , वोह फिर से मदहोश हो गया ,

"भइआ , यह क्या किया अपने , भाभी को क्यों मारा , उनकी गलती तोह बताओ..." शूरति भी सीमा की नाज़ुक हालत देख चीखते हुए बोली ,

"भइआ यह अप्प ठीक नै कर रहे , क्यों हमारा दिल ढुका रहे हो..." रिमी ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

सभी रवि को दोष दे रहे थे , क्यों की सुहाना ने हालत ऐसे कर दिए थे , जो जहर घोलने का काम , वोह पिछले जनम में नै कर पायी थी , वोह अभ कर रही थी ,

पर रवि तोह सीमा के खून को देख रहा था , जिसकी ताज़ा महक ने उसे पागल सा कर दिया था , उसकी प्यास इस कदर बढ़ चुकी थी , के अभ इक पल भी उससे रुका नै जा रहा था ,

"भइआए , दफा हो जाओ यहाँ से , इससे पहले के में गुस्से में पागल हो जाऊ , निकल जाओ , दुबारा अपनी शकल मत दिखाना..." रमा ने बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै , सीमा ने जो माँ का प्यार उसे दिया था , वोह अज्ज सुहाना के काम ा रहा था ,

"अह्ह्ह , मुझे जाना होगा , सुहाना मुझे मज़बूर कर रही है , शहहह , मेरा असली रूप बहार ा रहा है , मुझे जाना होगा..." रवि मन hi मन सोचते हुए वह से जाने लगा , तभी सुहाना ने कुछ ऐसा किया , जिसकी रवि ने कभी कल्पना भी नै की थी ,

रवि पलट कर जाने लगा , तभी सुहाना ने उसे पीछे से अपनी बहु में जकड लिया , उसका बहते खून से रवि की पीठ पूरी तरह से भेज गई ,

"मैट जाओ , प्लसस , मेरी गलती तोह बता दू , में नै जी सकती तुम्हारे बिना , प्लस , रवीए मैट जाओ ..." सीमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै , उसकी हर चल काम कर रही थी ,

सीमा के इतना पास ऐनी से रवि का बदन ठंडा पढ़ गया , वोह पागल हो गया , उसकी आँखें नली हो गई , उसका दरिन्दापन बहार ऐनी लगा , उसकी सांसे तेज़ चलने लगी ,

"हाँ जेजु बताओ न , क्या गलती की है मेरी मासूम बहिन ने..." सीमा भी रट हुए बोली ,

लेकिन हालत ऐसे बन चुके थे , अभ रवि कुछ नै कर सकता था , अगर वोह सुहाना की सचाई उनको बता देता , तब सुहाना उनको चोट पहुंचा देती ,

अभ इक अंतिम रास्ता बचा था , उसे जाना था , सबसे दूर , सबको छोड़ कर , उसे तलाश करनी थी खुद की ,

जब दुश्मन हद से जायदा ताकतवर हो जाये , तब खुद को पहचानो , अज्ज दुश्मन बेहद ताकतवर था , अभ वख्त था , खुद को उनके जैसा बनाने का ,

लेकिन यह इतना आसान भी नै था , इस दुनिआ में खुद को पाना , बेहद मुश्किल होता है , जलना पढता है , कई परीक्षाओ से गुजरना पढता है , तब कही जाकर , इंसान खुद को समाज सकता है ,

रवि कुछ बोल hi नै प् रहा था , उसे तोह बस ताज़ा बहते खून की , ताज़ा महक ने मदहोश कर दिया था , अभ उसकी सांसे और तेज़ चलने लगी थी , उसका रूप बदलने की कगार पर पहुँच चूका था ,

"उफ्फ्फ , कितना प्यार करती है मा , और भइआ , कुछ बोल भी नै रहे..." रमा ने मन hi मन गुस्सा में दहकते हुए बोलै ,

"प्लसस , कुछ तोह बोलू..." सीमा ने और भी कास कर रवि को जकड़ते हुए बोलै , इंसानी बदन की गर्मी को इतना करीब महसूस कर , रवि अपने होश खो बैठा , और उसका असली रूप बहार ा गया ,

रवि दोनों हाथो की मुठियाँ कस्ते , जोर से चखा , उसके दन्त नुकीले हो गए , आँखें नली हो गई , बदन सफेद पढ़ गया ,

"aaaaaaaaaaaaeeeeeee...." रिमी जोर से चीखती हुई , शूरति से चिपक गई , सीमा भी शूरति से लिपट रही थी , और शूरति खुद कड़ी कम्प रही थी ,

रमा भी अपने भाई के इस खौफनाक रूप को देख , थोड़ा दर गई , पर जल्द hi उसे अपनी माँ का ख्याल आया ,

"माआ , हतोऊ वहा सीए..." रमा चिलाती हुई रवि की तरफ बढ़ी , पर रवि ने उसे सीमा तक पहुँचने hi नै दिया , रवि ने बेच रस्ते में hi उसे गर्दन से पकड़ लिया , और पीछे की तरफ फेंक दिया ,

रमा निचे फर्श पर गिर गई , उसने उठ कर अपने भाई की तरफ देखा , जो अभ उसकी माँ की तरफ पलट चूका था ,

रवि अभ धीरे धीरे सीमा के खून को सुंग रहा था , उसकी आँखों में इक प्यास थी , अभ सीमा उसे अपना शिकार नज़र ा रही थी , वही सीमा कम्पटी हुई रवि को घर रही थी , जब के रवि उसके बहते खून को जीभ से चाट रहा था ,

उफ़ गरम खून की मीठे नमकीन स्वाद ने रवि को और भी मदहोश कर दिया , तभी इक डैम से रवि ने जोर से चीखते हुए अपने होंठ खोल , सीमा की गर्दन पर वॉर करना चाहा ,

तभी उसे इक जोरदार ढाका पढ़ा , रवि उड़ता हुआ देवर के साथ टकरा गया , यह और कोई नै रमा थी , उसका रूप अभ बदल चूका था , बाल लम्बे हो चुके थे , वोह भी बेहद लाल , पूरा बदन कला , अँधेरे जैसा हो चूका था , इक बात और अजीब थी , शूरति , रिमी और सीमा पत्थर जैसी हो चुकी थी , उनका बदन तोह दूर की बात , वोह अपनी पालक तक नै जपका प् रही थी ,

रवि इक डैम से उठा और हवा से भी तेज़ सीमा की तरफ बढ़ा , सीमा का खून से लथपथ चेहरा उसे अपना स्वादिष्ट पकवान नज़र ा रहा था ,

लेकिन वोह सीमा के पास पहुँच पता , तभी रमा भी हवा से तेज़ सीमा के अग्गे कड़ी हो गई , उसकी ताकत की कोई समय नै थी , बेइंतहा ताकतवर थी रमा , लेकिन रवि अभी उतना ताकतवर नै था , कोमल , रमा , ें सबको अपने पिछले जनम की पावर्स मिल चुकी थी , पर रवि को अभी कोई पावर नै मिली थी , वोह बस इक वैम्पायर था ,

रवि वैसे hi भागता हुआ रमा के बदन से टकरा गया , रमा के लाल लम्बे बालो ने रवि को किसी पेड़ की बाल की तरह पूरा जकड लिया ,

अभ रवि का जिस्म रमा के लाल रौशनी में चमकते उसके जादुई लाल बालो में जकड़ा हुआ था , रवि छूटने की कोससिह कर रहा था , पर रमा के बालो से अग्ग जैसी तेज़ तपश निकल रही थी , जिस कारन रवि कमज़ोर होता जा रहा था ,

"रमा , बुसस कारु..." सुहाना को दर था कही रमा सच में रवि को मर न दे , क्यों की कोमल को बस रवि hi ला सकता था , और कोमल की बलि दिए बिना , उसका मकसद पूरा नै हो सकता था ,

"नईईई , ममअअअअ , इस्स्त्री , आपपक्कू , द्दाररद्द ददिया हैआईई..." रमा गुस्से में पागल हुई , चीख कर बोली , उसकी आवाज़ इतनी ब्यांक थी , के कोई आम इंसान सुन लेता , तोह वही डैम तोड़ देता ,

"आअह्ह्ह्ह , rr...rr..remaaahh.." रवि ने दर्द से कहरहते हुए बोलै ,

हर बढ़ते पल के साथ रमा के जादुई लाल बालो की पकड़ और बढ़ती जा रही थी , अभ रवि बेहोश सा होने लगा था , क्यों की रमा के बाल अभ जवालामुखी के लावा जैसे गरम हो चुके थे ,

रवि का बदन जलने लगा था , उसके बदन से धुआँ उठने लगा था ,

रमा ने अपना चेहरा रवि के करीब किया , उसकी घोर , अंधकार में डूबी आँखें सफेद रौशनी में चमक उठी , रवि ने जैसे hi रमा की आँखों में ज़का , उसके दिमाग में , उसके ख्यालो में कुछ पुराणी यदिअण , उसे दिखाई देने लगी , उसे कुछ अवाजिअं भी सुनाई दे रही थी ,

"रूही जी , हमसे ताकतवर इस पारी लोग में कोई नै , पर हम आपके गुलाम है , जो अप्प कहुगी , वही हम करेंगे..." इक बेहद खूबसूरत लड़का , जिसका बदन इतना सफेद था , के आँखें भी चूंडिया जाये , और उसके ब्राउन लम्बे लम्बे हलके बाल , उसकी गहरी लाल आँखें , और उसके मज़बूत चोदे कण्डु के पीछे , उसके दो काळा खूबसूरत पंख , उस लड़के की खूबसूरती , चाँद शबदो में बयान नै हो सकती थी ,

"उम् , भाई , अप्प हमें सतना बंद करो , अप्प हमारे गुलाम नै , अप्प हमारे प्यारे भाई हो..." रूही ने मुस्कराते हुए बोलै , उसके मासूम सफेद चेहरे पर , उसकी मुस्कराहट , बेहद दिलकश और हसन लग रही थी , उसके नरम पतले गुलाबी होंठ , जिन में दुनिआ भर की मीठी चीज़ो की मिठास थी , यह मलिका रूही थी ,

रवि के बदन में इक हलचल सी हो रही थी , आँखों से असनु बहने लगे थे , उसकी यादिओं ने उसे मदहोश सा कर दिया , रूही की खूबसूरती ने उसे मोहित सा कर दिया , उसे कुछ पता नै था , के रूही उसकी बहिन है , उसे रूही बस अपनी प्रेमिका नज़र ा रही थी , पारी लोग की सबसे खूबसूरत प्यारी मलिका ,

फिर रवि को कुछ और दिखाई दिया , उसकी रूही , उसके हाथो में डैम तोड़ रही थी , उसका जिस्म रौशनी में भिकर्ता जा रहा था , और वोह कुछ नै कर प् रहा था ,

"bb...bhaii...hh...hhme...mm...maff...kk...kar...dd...dena , aa...aagar...mm..mane...kk...kabhi ..aa..apse....sacha...pp...pyar...kk...kiya..hh..ho..tt..toh...aa...app...hii..mm..mere...bb...bhai ..bb...banna...aa...agle...jj...janam..mmeehhh.." रूही ने अपना डैम तोड़ दिया , वोह चीख उठा , उसकी चीख से पूरा पारी लोग कम्प उठा , रवि यह सब सेहन न कर पाया , और चीला उठा ,

"rr...rr...ruhiiiiiiiiiiii....." रवि इतनी ताकत से चिलाय के उसने अपने हाथो को जोर से खोलते हुए रमा के जादुई बालो को फाड् दिया , रमा के बाल टूट कर पोरे रूम में भीकर गए , रमा हरिजन सी होती हुई थोड़ा पीछे हैट गई ,

रवि का बदन पहले से काफी मज़बूत हो गया था , उसका पूरा बदन लाल रौशनी में चमक रहा था , उसके कण्डु के पीछे उसके पंख निकल चुके थे , उसकी लाल चमकती आँखों से अग्ग जैसी रौशनी निकल रही थी ,

"सोनिककक..." सुहाना जो सीमा के रूप में थी , वोह रवि के इस रूप को देख चहक उठी ,

रवि इक डैम से सीमा की तरफ देखने लगा , तब तक रमा के बाल फिर से जुड़ गए , अभ रमा का गुस्सा और भी बढ़ चूका था , वोह रवि को मरने पर उतारू हो चुकी थी ,

रमा आँखें बंद कर अपनी पूरी ताकत इक hi जगह पर एकत्रित करने लगी , धीरे धीरे रमा के सीने में इक , ब्लैक होल बनने लगा , जो गोल गोल घूम रहा था , यह नाराज का दरवाजा था , यहाँ जाने के बाद कोई वापिस न ा पता ,

रवि का पूरा दयँ सीमा की तरफ था , सीमा अभ सुहाना के रूप में ा चुकी थी , और रवि , सुहाना को देख अचंबित सा हो गया था , आखिर क्या रिश्ता था दोनों का ,

"सुहानआठ देद्दीिहहह..." रवि ने गुस्से में बोलै , उसे सब यद् ा चूका था , इक इक पल , इक इक पुराणी यद् , आखिर क्या हुआ था , उस आखरी खुनी युद्ध में , कोण जीता था , कोण हरा था ,

"हांण , मई , मलिका सुहानाअहहह , मेरी आशिक़ , मेरे भईईई , मेरी सोनाआ , जोऊ रुहीईई की पसससस..." सुहाना ने बेइंतहा मुस्कराते हुए बोलै ,

तभी रवि ने रमा की तरफ देखा , जो उसकी इक तरफ कड़ी , अपने सीने में इक बहुत बड़ा कला अंधकार से भरा , ब्लैक होल बना रही थी , पूरा ब्रह्माण्ड , रमा के सीने में छुपा हुआ था , क्या था , रमा की बेइंतहा ताकत का रहस्य , कोण थी रमा ,

रवि अभी कुछ बोलने hi जा रहा था , तभी किसी लड़की की चीख उसे सुनाई दी , यह और कोई नै ख़ुशी थी , जो रवि का इंतज़ार करते करते , उससे मिलने ा गई थी ,

पर अंदर का नज़ारा देख , ख़ुशी चखने लगी , उसे गहरा सदमा लगा था , पर जैसे hi उसने रवि का चेहरा देखा , वोह भाग कर उसे गले लग गई , वोह इतने सदमे में थी , के उसे रवि के रूप का एहसास hi नै हुआ था ,

धीरे धीरे रमा के अंदर का ब्लैक होल रवि को खींचने लगा , रवि खुद को रोकना चाहता , तोह रोक लेता , पर उसे रूही से मिलना था , वोह तड़फ रहा था , इतनी सदियों से , उसे रूही को बहु में भरना था , उसे प्यार करना था , रूही से मिलने की चाहत ने उसे इस कदर मदहोश कर दिया , के वोह भूल गया के उसके साथ ख़ुशी भी जा रही है , उस ब्यांक खौफनाक दुनिआ में ,

रवि के सीने से ख़ुशी लगी हुई थी , उसकी आँखें बंद थी , रवि के लम्बे हलके बाल , हलकी हलकी हवा में उड़द रहे थे , रवि के पंख धीरे धीरे फड़फड़ा रहे थे , आँखों में इक गहरी कससिह थी ,

धीरे धीरे रवि और ख़ुशी का बदन उस काळा अंधकार से दुबे , ब्लैक होल में समां गया , कुछ देर बाद रमा नार्मल हो गई , उसका वोह खौफनाक रूप , अभ इक आम इंसानी जिस्म में बदल चूका था ,

लेकिन ऐसा क्या राज़ था , क्या रहस्य था , के रमा की आँखों में देखते hi , रवि अपनी ताकत को हासिल कर पाया था , क्या था रमा की गहरी काली आँखों में , जो रवि को उसकी शक्ति दिला चुकी थी ,

रमा नार्मल हुई तोह उसने as-pas देखा , अपनी माँ को देखते hi वोह उसके गले लग गई , और रोने लगी , सीमा मुस्कराते हुए रमा के बालो को सहलाने लगी ,

आखिर उसकी इक चल कामयाब हो गई थी , रमा के जरिये hi रवि , कोमल के पास जा सकता था , क्यों की सुहाना को रमा की बेइंतहा ताकत का ज्ञान था , अभ रवि और कोमल को वापिस एना hi पढता , क्यों की , इक इंसानी जिस्म भी उनके साथ था , और उसे यहाँ वापिस लाना hi था , वार्ना वोह मर जाती , और रवि , ख़ुशी को मरने नै देता ,

लेकिन क्या पता ऐनी वाले वख्त में , सुहाना की यह चल उलटी पढ़ जाती , क्यों की रवि अभ वोह नै रहा था , जो वोह सोच रही थी , यह बात सुहाना भी जानती थी , के रवि ने अकेले hi पोरे पारी लोग का विनाश कर दिया था ,

"मा , yy...yehh...mm..mane...kk..kya ..कर diya...bhyia..ko marrr...diyaaaa..." रमा ने बेहद रट हुए बोलै ,

"रमा , तुमने सही किया , तुम्हारा भाई इक दरिंदा था , अगर तुम उसे न रोकती , तोह वोह मुझे और तुम सबको मर देता , मेरी बेटी , तुमने कुछ गलत नै किया..." सीमा ने रमा को पीछे कर उसकी आँखों में देखते हुए बोलै ,

तब तक शूरति , रिमी और सीमा भी ठीक हो चुकी थी , रवि को वह न देख , वोह थोड़ा परेशान हो गई थी , पर जल्द hi यह परेशानी , गुस्से में बदल गई , वोह गुस्सा भी नफरत में बदल चूका था ,

फिर वोह दोनों भी सीमा और रमा के गले लग रोने लगी , पर कोई था जो मुस्करा रहा था , यह और कोई नै सुहाना थी ...

वही दूसरी तरफ काट ने जब रवि को थपड मर , उसे बेबी से दूर जाने का बोलै था , तब से वोह घर के हॉल में , परेशान घूम रही थी ,

फिर काट उसी परेशानी को साथ लिए बेबी के पास चली गई , बेबी गुमसुम सी बीएड पर बैठी हुई थी , उसकी आँखें अभ भी नाम थी , और चेहरा रो रो कर लाल हुआ पढ़ा था , बाल भीकरें हुए थे ,

काट रट हुए बेबी के पास गई और बीएड पर लेट , बेबी के पैरो में चेहरा छुपा रोने लगी , बेबी ने भेजी आँखों से उसे देखा , बेबी कुछ पल काट को देखती रही ,

"निशाआअ , तुम क्यों रो रही होऊ..." बेबी ने आँखों से असनु बहते हुए बोलै ,

काट ने थोड़ा शॉकेड होकर चेहरा उठा बेबी को देखा , बेबी की भेजी आँखों को देख , काट और बर्दाश्त न कर पायी और उसके गले से लग गई , काट उसके पोरे चेहरे को चूमने लगी , बेबी ने उसे ढाका देते हुए बोलै ,

"निशा की बची , मने कितनी बार तुमसे बोलै है , में लेसबु नै हु , तुम भी न..." बेबी खिलखिला कर हस्ते हुए बोली तोह काट और भी परेशान होकर उसे देखने लगी ,

"mm...me...kk..kat..huu.." काट ने हकलाते हुए बोलै ,

"हम्म , तुम काट नै , मेरी निशा हो , और निशा , मुझे मेरे बाबू से मिलना है , कहा है वोह..." बेबी ने as-pas रूम में देखते हुए बोलै ,

"kk...kon..bb...babu..." काट ने हकलाते हुए पूछा , पर फिर उसे लगा , बेबी शयद रवि का पूछ रही है ,

"ओह्ह्ह , इक hi तोह मेरा प्यारा बाबू है , निशा में क्या तुम aisi-vaisi लड़की लगती हु , मुझे मेरा बाबू लेकर दो , वार्ना में , में खाना नै कहुगी , प्लस ..." बेबी ने जोर से छीलते हुए बोलै ,

"लती हु..." काट ने अपनी आँखों से बहते असनु साफ किये और उठ कर बैडरूम से बहार ा गई , और बीएड पर बेथ कुछ सोचने लगी ,

अभी लॉकेट बेबी को रवि जब उसके साथ रहता था , तब की यदिअण दिखा रहा था , लेकिन वोह वख्त भी नज़दीक था , जब वोह बेबी मडोना बानी थी , शयद जल्द hi लॉकेट , बेबी की हर यद् को जान लेता , उसे महसूस कर लेता , पर उसके बाद क्या...

तो बे कुनिटेड...
 
बस.. पिछले 5 मिंट से खोल रहस था थर्ड को.. अब्ग इसके खिला.. फ़्रिएंस हली .. अजग उपदर्व दूंगा.. तय को 10 बजे ...
 
अपडेट-49

अभ अग्गे...

"अह्ह्ह्ह , शहहह , मेरा सार , ओह्ह्ह नू , यह में कहा ा गया..." यह और कोई नै , बल्कि रवि था , जो इक वेरियन और खौफनाक जगह पर , जमीन पर गिरा हुआ था , उसके as-pas बस अँधेरा था , घोर अंधकार था ,

इस बेहद काळा घोर अँधेरे में , रवि खुद को मुश्किल से देख प् रहा था , इस वेरियन ब्यांक , दिल ढेला , देने वाली जगह , की मिटटी भी काली थी , और जब रवि ने ऊपर नज़र डाली , तोह वोह हरिजन हो गया , ऊपर जैसे आसमान तोह था hi नै , घोर अंधकार था , अँधेरा hi अँधेरा , यहाँ तक रवि की नज़र जाती , अँधेरे का विशाल सागर लहरा रहा था ,

रवि ने उठना चाहा तोह उसे महसूस हुआ , के उसके ऊपर कोई लेता हुआ है , रवि ने हाथ लगा महसूस किया , तोह कोई लड़की थी , रवि ने उसे जमीन पर लिटा दिया , और उसके चेहरे को देखने लगा , उसे समाज नै ा रहा था , यह लड़की कोण है ,

"कोण है यह लड़की , और हम यह कहा ा गए , यह कोनसी अजीब सी जगह है..." रवि ने उठ कर खड़े होते हुए बोलै ,

रवि as-pas देखने लगा , अभी वोह खुद को प्रिंस सोनिक hi समाज रहा था , और उसके लिए अभी पारी लोग था , रूही भी थी , उसका माँ , बाप भी थे , लेकिन इसके पीछे क्या कारन था ,

यह इक शरत थी , इस दुनिआ में किसी के ऐनी का रास्ता था , पर जाने का नै , यह अंधकार लोग था , पोरे ब्रह्माण्ड के अंत पर इक छोटी से अँधेरी दुनिआ , यहाँ कोई अत तोह अपनी ीचा से था , पर उसका वापिस जा पाना नामुमकिन थी ,

रमा के सीने में जो ब्लैक होल बना था , वोह यही आकर ख़तम होता था , अभ रवि को इस अंधकार को पर कर , नाराज लोग के बड़े से दरवाजे तक पहुंचना था ,

यहाँ उसकी कोमल कैद थी , कोमल ने जब दयना को अपने अंदर कैद किया था , तब सीधा नाराज का दरवाजा hi खुला था , और कोमल वह कैद हो गई थी , उसे वह से निकल पाना बेहद कठिन था ,

लेकिन उस दुनिआ तक पहुँचने में रवि को कई परीक्षाओ से गुजरना था , वोह अपने सोनिक वाले रूप में , यहाँ कैद हुआ था , इसलिए रवि कोण था , क्या था , उसे कुछ पता नै था , वोह अभ प्रिंस सोनिक hi था ,

यही तोह खईसत थी , इस दुनिआ की , यहाँ जो जिस रूप में अत था , उसी रूप की यद् शक्ति उसे यद् रहती थी , वोह सब भूल चूका था ,

यह उसके प्यार की अग्नि परीक्षा थी , उसे खुद को भूल कर भी , कोमल को बचाना था , क्यों की इस दुनिआ में बिताये उसके कुछ घंटे , पृथ्वी पर उसकी दुनिआ के कई दिन बन जाने थे ,

मतलब यहाँ के वख्त और उसकी अपनी दुनिआ के वख्त में बेइंतहा अंतर था , अभ उसे जल्द से जल्द , इस दुनिआ को पर कर , कोमल को बचा कर लेजाना था , क्यों की उसकी दुनिआ पर वख्त बहुत तेज़ी से बीत रहा था , उसके यहाँ बिताये 3 दिन , पृथ्वी पर 6 महीनो के सामान बराबर थे ,

"हम , प्रिंस सोनिक , यहाँ कैसे पहुँच गए , कही हमारे दुश्मन जेनिथ की कोई चल तोह नै , वोह तोह है hi शेतीअन , हमारी रूही के पीछे पढ़ा रहता है , लेकिन हमारी रूही , सिर्फ हमारी है..." रवि खुद से hi बतिअन करता हुआ चल रहा था ,

"ाआआआंणणह्ह्हह्ह्ह्ह..." इक बेहद तेज़ चीख उस वेरियन जगह पर गूंज गई , प्रिंस सोनिक के कदम वही थम गए ,

उसने पलट कर देखा , तोह वोह लड़की चीखती हुई रो रही थी , प्रिंस सोनिक उसके पास जल्दी से पहुँच गया , और बोलै ,

"अप्प कोण है कन्या , अप्प हमें , हमारी दुनिआ की नै लगती , ब्रह्माण्ड के किस कोने से अप्प आयी हो..." रवि , अपने प्रिंस वाले अंदाज़ में बोलै , उसे यद् नै था वोह रवि है , और ख़ुशी तोह अपने असली रूप में उसके साथ पहुंची थी , ख़ुशी को सब कुछ यद् था ,

"rr...ravii...yy...yeh...kk..kon..si..jj..jagah ...hh..haiii..." ख़ुशी ने दर से कंपते रट हुए बोली ,

"कन्या , यह अंधकार लोग है , यहाँ चारो और अँधेरा है , घोर अँधेरा , न कोई दिन , न कोई रत , न सूरज , न चाँद ..." रवि ने ख़ुशी की भेजी आँखों में देखते हुए बोलै ,

"rr..ravi , तुम क्या बतिअन कर रहे हो , तुम हुआ क्या है..." ख़ुशी ने खड़े होते हुए रवि के करीब होकर बोलै ,

पर जैसे hi वोह रवि के करीब हुई , उसका लाल जिस्म और काळा बड़े बड़े पंख देख दर कर पीछे हैट गई ,

"तुम रवि नै हो , नै हो , kk..kon हो तुम..." ख़ुशी ने दर से कंपते हुए रट हुए बोलै ,

"हम प्रिंस सोनिक हैं , पारी लोग के राजा ाबून और मलिका सोना के बाटे , और हम कोई रवि नै हैं , तुम शयद अपनी स्मृति खो चुकी हो ..." रवि ने अपने रूप को थोड़ा बदलते हुए बोलै , उसका जिस्म अभ बेहद सफेद हो गया था , पर उसके पंख अभी भी काळा थे ,

ख़ुशी तोह रवि की नली खूबसूरत आँखों में hi खो गई , वोह बस मंतर मुगड हुई , रवि की आँखों में देखती , उसे महसूस करती रही ,

"हे कन्या , कहा खो गई अप्प , कन्या अप्प कहा से आयी हो , कुछ यद् है आपको.." रवि ने ख़ुशी के और करीब होकर बोलै ,

"मेरा नाम कन्या नै , ख़ुशी है , में हु ठाकुर ख़ुशी , और तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो रवि , हम दोनों यहाँ पता नै कैसे पहुँच गए , हम पृथ्वी के रहने वाले हैं , पर तुम्हारे यह पंख कैसे निकल ए , तुम पंछी कैसे बन गए..." ख़ुशी ने अपने निचले होंठ पर ऊँगली रख सोचते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , हम पंछी नै , हम पारी के लड़के हैं , तोह हमारे भी पंख होते हैं , और हम पारी लोग में रहते हैं , न के किसी पृथ्वी पर..." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"हे भगवन , इक तोह इस ब्यांक जगह कैद हु और , रवि को कुछ यद् नै , पता नै कहा का प्रिंस बना पड़ा है , यह काफी ताकतवर है , ऐसे कहती हु , मुझे मेरे घर पहुंचा दे..." ख़ुशी ने मन hi मन सोचते हुए मुस्करा कर बोलै ,

"ख़ुशी कन्या क्या सोच रही हो अप्प..."

"ख़ुशी कन्या नै , बस ख़ुशी hi बोलो , और मुझे घर जाना है , जहा से में आयी हु..." ख़ुशी ने रवि का हाथ अपने हाथिओं में लेते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , हमें चुना मत , हम रहना से प्रेम करते हैं , हमने वचन दिया है , हम किसी और को प्रेम नै करेंगे .." रवि ने ख़ुशी से दूर होते हुए बोलै ,

"अरे पर तुमने मुझे छुआ था , मेरे साथ सब कुछ किया था , उसका क्या..." ख़ुशी ने नाम आँखों से बोलै ,

"हमने क्या किया , हम तोह तुम देख hi पहली बार रहे हैं.." रवि ने ख़ुशी की आँखों में देखते हुए बोलै ,

"ओरल सेक्स .." ख़ुशी ने शरमाते हुए बोलै ,

"हैं , यह कोनसा कला जादू है , ख़ुशी कन्या तुम झूठ बोल रही हो , तुम प्रिंस की साफ छवि को डेग लगा रही हो , इसका दंड तुम मिलेगा..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"यह कला जादू नै , तुमने हमसे कपडे उतर कर प्यार किया था , वोह है ओरल सेक्स..." ख़ुशी ने बेहद शरमाते हुए बोलै ,

"झूठ , तुम प्रिंस सोनिक पर इल्ज़ाम लगा रही हो , हमने रूही के बिना किसी को नग्न नै देखा , तुम इसका दंड मिलेगा , हम तुम पारी लोग लेकर जायेगे , अगर तुम झूठी हुई तोह तुम , पटल लोग , में फेंक दिया जायेगा..." रवि ने बेहद गुस्से में बोल , उतर दिशा की तरफ चलते हुए बोलै , ख़ुशी भी उसे चलता देख , भाग कर उसके साथ चलने लगी ,

"यह पटल लोग क्या होता है..."

"हमें क्या पता , हम कोनसा वह गए हैं..." रवि ने जैसे hi यह बोलै , ख़ुशी हसने लगी ,

"तुम हस्स क्यों रही हो , तुम हमारी बेइज्जती कर रही हो..." रवि ने उस अंधकार अँधेरे भरे रस्ते पर अग्गे बढ़ते हुए बोलै ,

फिर ख़ुशी कुछ न बोली , वोह रवि के साथ चलती हुई , ऐनी वाले वख्त के बारे में सोचने लगी , उसे इतना तोह कन्फर्म हो गया था , के रवि शयद अपने किसी पिछले जनम के रूप में फास गया था ,

"उफ्फ्फ , ाचा हुआ , रवि इक पारी है , चलो , कोई खतरा हुआ , तोह मुझे बचा लेगा..." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

दोनों चलते जा रहे थे , अँधेरे भरी घोर काली जमीन पर , रवि चाहता तोह उड़द कर ख़ुशी को अपने साथ ले जाता , पर अँधेरा इतना था , के वोह किसी पहाड़ से टकरा जाता , क्यों की यहाँ के पहाड़ भी अँधेरे में दिखाई नै देते थे ,

"उफ्फ्फ , कितनी दूर जाना है , प्रिंस जी , में थक गई हु , मेरे नाज़ुक पेअर दर्द करने लगे हैं..." ख़ुशी ने रूठी हुई आवाज़ में बोलै , वोह अपने लम्बे काळा बालो से खेल रही थी , ख़ुशी ने इक ब्लैक टॉप और शार्ट रूफ ब्लू जीन पहनी हुई थी ,

"ख़ुशी कन्या , हम तक़रीबन आधे दिन के बाद इस अंधकार भरी दुनिआ से निकल जायेगे , तुम बस हमारे साथ चलती रहो , ख़ुशी कन्या इक बात पूछे आपसे..." रवि ने ख़ुशी के खूबसूरत चेहरे को घूरते हुए बोलै ,

"हम्म , पूछो प्रिंस जी..." ख़ुशी हस्ते हुए बोली ,

"हम पूछना छह रहे थे , अपने किस तरह के विस्तार धारण किये हैं , इनके अंदर क्या शक्ति है..." रवि ने ख़ुशी के मोडरें कपडे देख बोलै ,

"अभ क्या बताऊ प्रिंस जी , मेरे ें कपड़ो के पीछे गजब की शक्ति है , अप्प देखना चाहते हो , उतारू कपडे..." ख़ुशी ने रवि को परेशान करते हुए बोलै ,

"नै , नै , अप्प इक कन्या हो , हम गैर कन्या को कैसे नग्न देख सकते हैं , हमारी रूही बुरा मन जाएगी..." रवि ने थोड़ा घबरा कर बोलै ,

"लो जी , कर लो बात , पृथ्वी पर लोग मरे जा रहे हैं , मुझे नग्न देखने के लिए , और तुम हो की , तुम मर्द तोह हो न , मतलब कही तुम सच में पंछी तोह नै..." ख़ुशी ने रवि के पंखो को हाथ से सहलाते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , हम मर्द नै , हम पारी लोग के प्रिंस हैं , हमारे अंदर हर तरह की कला मज़द है , हमें हर तरह की विद्या अति है , क्यों की हम प्रिंस हैं..." रवि ने ख़ुशी को गुस्से में बोलै ,

"हम्म , ठीक है , में समाज गई , पर प्रिंस जी , कब होगा आपका आधा दिन , में थक गई हु.." ख़ुशी ने थोड़ा दर्द में बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , आधा दिन , तोह अभी बहुत देर बाद होगा , अभी तोह कुछ पल बीते हैं , फिर लम्हा बनेगा , फिर ऐसे 10 लमहु के बाद , आधा दिन होगा..." रवि ने ख़ुशी को समज़ते हुए बोलै ,

"ओह्ह भैई , यह क्या पल , लम्हा , दिन , बता रहे हो , कुछ मिंटो , घंटो की बात करो..." ख़ुशी ने अपना माथा पत्ते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , पारी लोग में पल , लम्हे hi होते हैं , अप्प क्या अजीब अजीब शबदो का उच्चारण कर रही हो , हमें इनके अर्थ नै पता..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

"ओह्ह्हुउउ , ाचा तोह कितने पलु बाद , तुम्हारा वोह लम्हा अत है..." ख़ुशी ने अभ चिढ़ते हुए बोलै ,

"करीब तीन हज़ार पल..."

"अभी कितने पल गुजर चुके हैं..."

"हमें क्या पता ..."

"अरे , तुमने अभी बोलै के तुम पता है.." ख़ुशी ने और भी चिढ़ते हुए बोलै ,

"हमने अंदाज़ा लगाया था , हमारा समय यन्त्र पारी लोग में होगा , हमारे पास अभ नै है..." रवि ने सच बताते हुए बोलै ,

"हे भगवन , कहा फसा दिया तुमने , मुझे घर जाना है..." ख़ुशी ने नाम आँखों से बोलै ,

अभी दोनों चल hi रहे थे के ख़ुशी इक बड़े से गोल गद्दे में गिर गई , और रवि ने यह देख भी लिया , रवि ने भी उस गहरे गोल गद्दे में छलांग लगा दी , वोह इतना गहरा था के करीब 3 मिंट बाद रवि , ख़ुशी को देख पाया ,

ख़ुशी गिर रही थी , पर रवि उड़ता हुआ निचे जा रहा था , वोह अभ ख़ुशी के करीब पहुँच चूका था ,

"बचावू रविइइइइ ..." ख़ुशी दर से चीखते हुए बोली , वोह पता नै कहा गिर रही थी , उसे दर था अभ जमीन आयी , अभ जमीन आयी , उसने डरते हुए रवि की तरफ देखा जो उड़द रहा था , उसके करीब ,

"रविइइइ , मतलब प्रिंस जीई , बचाओ म्युज़िए..." ख़ुशी ने चीखते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , अपने विस्तार उतर दो , तुम्हारे अंदर शक्ति है , तुम बच जोगीइ..." रवि ने निचे की तरफ उड़ते हुए बोलै , दोनों निचे गिर रहे थे ,

"पागलल , बेवकूफ , मुज़मे कोई शक्ति नई , में मर जोगीइ , मुझे बचा लू , प्लसे , बचा लू.. " ख़ुशी ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"अरे ख़ुशी कन्या , अपने विस्तार उतरो , तुम में शक्ति ा जाएगी , तुमने hi बोलै था..."

"बचावूओ , मेरे वस्तारो के निचे कुछ नै हैई , बचावू म्युज़िए..." ख़ुशी ने गाला फाड् चीखते हुए बोलै ,

"ओह्ह , तोह झूठ क्यों बोलै अपने हमसे..." रवि ने इतना बोल उड़ते हुए ख़ुशी को बहु में भर लिया और फिर से वापिस उड़द कर बहार ा गया ,

अभ रवि और ख़ुशी उस गहरे गद्दे से बहार आकर खड़े हुए थे , ख़ुशी तोह बेहद हाफ रही थी , वोह रवि को खा जाने वाली नज़रिओं से घर रही थी ,

तभी तेज़ हवा सी चलने लगी , अँधेरे का तूफान उठने लगा , रवि ने जल्दी से ख़ुशी को अपनी गॉड में उठा लिया , और तेज़ तेज़ उड़ते हुए अग्गे बढ़ने लगा , वोह पता नै कितनी देर उड़ता रहा , ख़ुशी तोह उसकी गॉड में hi सो गई , उसकी जब आँख खुली तब भी वोह रवि की बहु में उड़द रही थी , उसके पंखो की आवाज़ उसे साफ सुनाई दे रही थी ,

"प्रिंस और कितना दूर है..." ख़ुशी ने सुस्ती सी आवाज़ में पूछा ,

"ख़ुशी कन्या कुछ देर और , बहुत काम पल बचे हैं , हम पहुँचने hi वाले हैं.." रवि ने उड़ते हुए बोलै ,

फिर बेहद वख्त बीतने के बाद , रवि और ख़ुशी इस अंधकार दुनिआ को पर कर , इक रौशनी वाली दुनिआ में पहुँच गए , रवि जब जमीन पर उतरा तब ख़ुशी उछलने लगी , जैसे वोह बेहद खुश थी , इस जगह को देख कर....

तो बे कुनिटेड...
 
माय हस्बैंड कुड नॉट अपडेट इन थिस कंडीशन

थे ड्रिंक ा लोट

दीद नॉट व्रिठे अन्य उपदटेस

हाफ रिटेन, विल कम्पलीट टुमारो एंड पोस्ट… सॉरी रीडर्स ..
 


अपडेट-50

अभ अग्गे....

रवि और ख़ुशी , अंधकार की दुनिआ को पर कर चुके थे , अभ उनके सामने इक विशाल हरा भरा जंगल था , hare-bhare बड़े बड़े पेड़ थे , खूबसूरती बेमिसाल थी इस पोरे जंगल की , और ख़ुशी इस जंगल की खूबसूरती में खो चुकी थी ,

"वाओ , व्हाट ा रोमांटिक प्लेस , उफ्फ्फ , कितना खूबसूरत नज़ारा है , प्रिंस जी .." ख़ुशी ने बोलते हुए जैसे रवि को देखा , वोह मदहोश हो गई ,

रवि उस फूलु से भरे जंगल में घूम रहा था , वोह जंगल की खूबसूरती में खो सा चूका था , रवि के सफेद चोदे सहरीर को देख , ख़ुशी मदहोश सी हुई उसकी तरफ बढ़ने लगी , वोह इक डैम रवि के करीब पहुँच रुक गई ,

"ख़ुशी कन्या , यह जादुई जंगल है , देखो यहाँ के फूल कितने चमक रहे हैं , अभी तोह कुछ नै , कई बार तोह ें फूलु से रंगु से भरी रौशनी भी निकलती है..." रवि ने फूलु को प्यार से देखते हुए बोलै ,

"प्रिंस क्या में इक फूल तोड़ लू..." ख़ुशी ने इक रेड फूल को बड़े प्यार से देखते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , क्यों नै , तोड़ लो..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

ख़ुशी ने ख़ुशी में चहकते हुए इक फूल को तोड़ने के लिए अपना हाथ अग्गे बढ़ाया , ख़ुशी ने अभी फूल को छुआ hi था , के फूल की कोमल पत्तयों ने अपने अप्प को मुरझा दिया , ख़ुशी यह देख मायूस हो गई और प्रिंस सोनिक की तरफ देखने लगी ,

"प्रिंस यह क्या हो गया..."

"ख़ुशी कन्या , खूबसूरत चीज़ को देखा जाता है , जब उसे चोट पहुँचने का सोचे , तभी वोह चीज़ अपनी खूबसूरती खो देती है , हम भी खूबसूरत चीज़ो को बस दूर से देखते हैं ..." रवि ने और भी फूलु को प्यार से देखते हुए बोलै ,

"ओह्ह हो , अगर तुम मुझे चुना चाहो तोह , तोह छू सकते हो , मुझे चोट नै पहुंचगी..." ख़ुशी ने बड़ी अड्डा से अपने बाल लहराते हुए बोलै ,

"हम्म , ख़ुशी कन्या , आपसे किसने कहा के अप्प खूबसूरत हो ..."

"हुऊ , पृथ्वी पर तुम पागल थे मेरे लिए , मेरे साथ दारू पेट थे , मुज़से प्यार करते थे , मुझे चूमते थे , और अभ बोल रहे हो , में खूबसूरत नै हु..." ख़ुशी ने चिढ़ते हुए गुस्से में पेअर पटक कर बोलै ,

"ः , ख़ुशी कन्या , हम कभी पृथ्वी पर गए hi नै , हम पारी लोग में रहते हैं , अभ चलो हमें चलना है..." रवि ने इतना बोल अग्गे बढ़ते हुए बोलै ,

"क्यों , इतनी भी क्या जल्दी है , उम् , इतनी खूबसूरत जगह का आनंद तोह लेने दो ..." ख़ुशी ने फूलु के साथ खेलते हस्ते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , जो दीखता है वोह होता नै , यह जंगल दिखने में जितना खूबसूरत है , उतना hi ब्यांक और कहकर है , अभ चलो जल्दी से..." रवि ने चलते हुए बोलै ,

"हम्म , खोडस कही का..." ख़ुशी गुस्से में बड़बड़ाते हुए भाग कर रवि के साथ मिल गई , फिर दोनों साथ साथ चलने लगे ,

धीरे धीरे दोनों जंगल में अग्गे बढ़ते गए , अभ जंगल काफी घाना और विशाल हो गया था , हर तरफ पेड़ hi पेड़ थे , और पेड़ू के साथ छोटी छोटी जाड्यां थी , जो रवि और ख़ुशी को अग्गे बढ़ने से रोक रही थी ,

"ओह्ह शठ , और कितना चलना है , में तोह थक गई हु , और कितना चालू यार..." ख़ुशी ने अग्गे बढ़ते हुए जड्यों को हाथो से हटते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , अभी आधा दिन बीत चूका है , अभ आधा दिन और , फिर हम इस दुनिआ को भी पर कर जायेगे..." रवि ने मुस्करा कर बोलै ,

रवि खुद को प्रिंस समाज रहा था , उसे यह नै पता था , अंधकार लोग में उसका बीता आधा दिन , उसके अपने घर पर 1 महीने के सामान था , मतलब पृथ्वी पर 1 महीना बीत चूका था , रवि को घर से गयाब हुए ,

इस 1 महीने में क्या हुआ होगा , उसके घर का , उसकी बहनो का , उसके शहर का , सुहाना ने क्या क्या अतयाचार किये होंगे , मासूम लोग पर , अभ तोह जोकर भी उसके साथ था ,

"प्रिंस और कितना चलना है , उफ़ बस यार , में तोह थक गई..." ख़ुशी ने रुक कर हफ्ते हुए बोलै ,

अभी रवि कुछ बोलने hi जा रहा था , के इक बड़े से शेर ने उन पर हमला कर दिया , वोह कोई आम शेर (लायन) नै था , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक रही थी , वोह बेहद ब्यांक था ,

प्रिंस सोनिक मतलब रवि की बात सच थी , यह जंगल जितना खूबसूरत था , उतना hi खतरनाक था , बेहद खतरनाक , इस जंगल में अजीब अजीब जानवर थे ,

उस ब्यांक से शेर ने धहद लगाई , तोह ख़ुशी दर कर , रवि के सीने से लग गई ,

रवि उस शेर को देख रहा था , उसे अभ रक्षा करनी थी , ख़ुशी की , क्यों की ख़ुशी ने अपने विस्तार अभी भी धारण किये हुए थे , उसे शक्ति नै मिल रही थी ,

"ख़ुशी कन्या , हम तुम कुछ नै होने देंगे , अगर हमें कुछ हो जाये , तोह अप्प अपने विस्तार उतर देना , तेन की आपकी शक्ति जग जाये..." रवि ने उस शेर की खौफनाक आँखों में देखते हुए बोलै ,

"हे भगवन , तुम मेरे कपड़ु के पीछे क्यों पढ़े हो , कुछ नै है निचे , में इक आम लड़की हु , ाचा , में तुम उतर कर दिखा दूंगी..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में बोलै ,

पर अभी प्रिंस कुछ बोलने hi जा रहा था , के शेर ने इक तेज़ धहद लगते हुए , दोनों पर छलांग लगा दी , प्रिंस सोनिक ने ख़ुशी को इक तरफ ढाका दे दिया ,

ख़ुशी इक तरफ को जमीन पर गिर गई , पर प्रिंस सोनिक ने शेर से लड़ना सुरु कर दिया , वोह कोई आम शेर नै था , वोह शेर था भी बहुत बड़ा , उसकी चमड़ी लाल रंग की थी , आँखें भी लाल रौशनी में चमक रही थी ,

उस शेर ने रवि पर छलांग लगा उसे निचे गिरा दिया , उसने अपने मोह खोले तेज़ धहद लगाई , उसके दन्त बेहद बड़े और नोकीले थे , दांतो से hi उसकी वैशियत साफ झलक रही थी ,

जैसे hi उस शेर ने रवि के चेहरे को नोचना चाहा , उसी वख्त रवि ने उसके जबड़ो के ऊपर निचे से दोनों हाथो में कास कर पकड़ लिया ,

वोह शेर अभी अपनी पूरी ताकत लगा रहा था , उसके तेज़ पंजू ने रवि के कण्डु और डोलू को चीयर कर रख दिया , उसके तेज़ पंजू के निशान रवि के कण्डु पर और उसके हाथो पर पढ़ चुके थे , अभ धीरे धीरे खून भी रिसने लगा था ,

यह इक जादुई शेर था , यह किसी को भी चोट पहुंचा सकता था ,

"eehhhhhhhhhhh...." रवि ने जोर से छीलते हुए पूरी जान लगा , उस शेर को अपने ऊपर से दूर फेंक दिया , शेर दूर गिरते हुए , तेज़ आवाज़ में दहाड़ा , और अपने कण जड़ता हुआ , फिर से रवि की तरफ बढ़ने लगा ,

रवि हफ्ते हुए खड़ा हुआ , अभी की बार जैसे hi उस बड़े से शेर ने रवि पर छलांग लगाई , रवि के पंख काटो की तरह नोकीले हो गए , रवि ने उस शेर के चेहरे को चीयर कर रख दिया ,

वोह शेर दर्द से कहरहाता दूर गिर गया , वोह अभी खड़ा होने की कोससिह कर रहा था और गुस्से में तेज़ तेज़ दहाड़ भी रहा था ,

रवि यानि के प्रिंस सोनिक को इक बात यद् ा गई के घ्याल शेर का गुस्सा बेहद ब्यांक होता है , यह सोचते hi रवि ने उड़ते हुए ख़ुशी को अपनी गॉड में उठाया और तेज़ी से उस जंगल में कही खो गया , तेन की इस जादुई शेर से बच सके , जिसे मारा नै जा सकता था ,

"ख़ुशी कन्या , अप्प ठीक तोह हो..." रवि ने उड़ते हुए बोलै ,

"हाँ , पर हम कब पारी लोग पहुंचेगे , कितना वख्त बीत चूका है , पृथ्वी पर तोह इक महीना बीत चूका होगा , उफ़ , मुझे तोह यह सोच कर hi अजीब महसूस हो रहा है..." ख़ुशी ने थोड़ा उदास आवाज़ में बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , यह दुनिआ पर करते hi हम , जेनिथ के साम्राज्य में पहुँच जायेगे ..." रवि ने वैसे hi उड़ते हुए बोलै , निचे देखने पर जंगल बेहद खूबसूरत लग रहा था , लेकिन इस जंगल की सचाई कुछ और hi थी ,

"जेनिथ , यह कोण है..."

"जेनिथ मेरा सौतेला भाई है , ख़ुशी कन्या , हमें माफ़ करना , हमने तुमसे इक बात छुपा कर राखी..." रवि ने थोड़ा उदास होकर बोलै ,

"वोह क्या है , और जेनिथ से डरने की क्या जरुरत , आखिर वोह तुम्हारा भाई है..."

"ख़ुशी कन्या , तुम्हारा चेहरा हमारी अंगरक्षक तामस से मिलता है , तुम बिलकुल उस जैसी हो , यह बात हमने तुम नै बताई , क्यों की हम तुम परेशान नै करना चाहते थे , और रही बात जेनिथ की , वोह बेहद बुरा है , वोह हमारी रूही को पाना चाहता था , हमने उसे युद्ध में पराजित कर , पारी लोग से निकल दिया , अभ वोह हमसे बदला लेना चाहता है..." रवि ने बेहद शांत आवाज़ में बोलै ,

"तामस , हहै , यह कैसा अजीब सा नाम है..." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"तामस , वोह बेहद कहकर और गुस्से वाली है , वोह सोने के विस्तार धारण करती है , उसके वस्तारु में , बेहद शक्ति है , मेरे पिता जी कहते हैं , तामस को तब तक कोई नै मर सकता , जब तक उसके सुनहरी विस्तार उसके बदन से चिपके रेह्गे..." रवि ने जंगल के अंत पर पहुँच निचे उतारते हुए बोलै ,

अभ सामने इक अँधेरे की पतली देवर थी , रवि और ख़ुशी सामने देख रहे थे ,

"तोह क्या तामस , मेरा मतलब , में तुम तामस की तरह दिखती हु , में तुम्हारी अंगरक्षक हु , सो फनी यार..." ख़ुशी हस्ते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , हम झूठ नै बोलते , तुम hi तामस हो , और तुम पता है , तुम पता है , हम 4 भाई बहिन हैं , इक रूही , इक सुहाना , इक हम , और इक का नाम यद् नै मुझे..." रवि ने सोचते हुए बोलै ,

"ओह्ह , वैसे तुम यद् क्यों नै.."

"ख़ुशी कन्या , हमारी इक बहिन , हमसे बिछड़ गई थी , वोह बेहद ताकतवर , और चालक थी , मेरे पिता जी कहते हैं , उसे कोई जादूगरनी उठा कर ले गई थी , हमने उसे कभी नै देखा , और उसका नाम , फिर कभी राज महल में नै लिया गया , चलो अग्गे की दुनिआ में , जेनिथ से बच कर , वोह दरिंदा है , अगर तुम नुकसान पहुँचने की कोससिह करे , तोह अपने विस्तार उतर देना..." रवि ने ख़ुशी के साथ उस अँधेरे की देवर को पर करते हुए बोलै ,

"हम्म , विस्तार तोह उतर दूंगी , पर फिर वोह मुझे छोड़ेगा नै , आखिर मेरे वस्तारु के निचे बेहद कीमती और जादुई चीज़ है , जिसे पृथ्वी पर सब लोग देखने के लिए मरे जा रहे हैं..." ख़ुशी ने रवि को आँख मरते हुए बोलै ,

"हमने देखा है , तुमने कई बार हमारे सामने अपने विस्तार उतरे हैं , तुम बेहद ताकतवर हो , ख़ुशी कन्या अपना ख्याल रखना..." रवि ने इस नए लोग में अग्गे बढ़ते हुए बोलै ,

" क्या तुम भी , हम अपने विस्तार कैसे उतर सकती है , हमें शर्म आएगी , और हम अपना ख्याल क्यों रखे..." ख़ुशी ने शरमाते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , तुम हमारी तामस भी नै हो , वोह तोह लाल आँखों वाली , कहकर लड़की है , अप्प की आँखें तोह काली है , अप्प तामस नै हो..."

"तामस , तामस , में तंग ा गई हु , में ख़ुशी हु , ख़ुशी ठाकुर , इक नंबर की बेवडी , अभी मेरा माथा सरक रहा , अभी अपुन का दिमाग खिसका न , तोह तेरी यह तामस में यही निकल दूंगी ..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"वह , अभ अप्प हमारी तामस लग रही हो , वोह भी हमेशा मदिरा (दारू) में तुन रहती है , वोह भी ऐसे hi बोलती है , वह , अभ तोह हमें विश्वास है , अप्प जेनिथ का सामना कर लोगी..." रवि ने अपने प्रिंस वाले रूप में मुस्करा कर बोलै ,

"हूउउ , यह जेनिथ क्या है , अप्प बार बार उसकी hi क्यों बात कर रहे हो..." ख़ुशी ने चिढ़ते हुए बोलै ,

"जेनिथ इस लोग का देवता है ..." रवि ने अभी इतना hi बोलै था , के सेकड़ो , छोटे छोटे दानव जैसे लोग ने उसे घेर लिया , उनका कद 4 फ़ीट था , पर वोह नंगे जीव बेहद ब्यांक और कहकर लग रहे थे , ख़ुशी दर कर रवि से चिपक गई , इक सुनसान , वेरियन , मदिआं पर दोनों गिर चुके थे ,

"yeh...yeh..kon है..." ख़ुशी ने दर से कंपते हुए बोलै ,

"यह मेरे भाई जेनिथ की , आदमखोर , दानव सेना है..." रवि ने उन सब चीखते छीलते दानवो की तरफ देख कर बोलै....

बैक तो पृथ्वी...

इक मंथ बाद...

इक महीना बीत चूका था , यह मिथली शहर अभ पहले जैसा नै रहा था , बुराई अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी , बुरे लोग बेहद ताकतवर हो गए थे , सचाई अभ बेबस सी हो गई थी ,

मिथली शहर बुराई का दिल बन चूका था , अभ धीरे धीरे ऐसी शहर से बुराई , पूरी दुनिआ में फैलने लगी थी ,

ें सब के पीछे , दो hi बुरी ताकतीअं थी , इक सुहाना और दूसरा जोकर , सुहाना ने इतनी बुराई फिआला दी थी के , शहर में हर तरफ हाहाकार मची हुई थी ,

लोग को सरेआम मारा जा रहा था , हर तरह का जुर्म , अपना सार उठाये , सचाई का मज़ाक उड़ा रहा था ,

सुहाना की शैतानी सेना ने पोरे शहर पर कब्ज़ा जमा लिया था , उसकी वहशी सेना ने लोग पर जुर्म और अतय्चारो की बरसात कर दी थी ,

लेकिन यह सब शहर के लोग के लिए थे , घर पर सुहाना , सीमा थी , रमा की माँ थी , और बाकि सब की बहिन ,

रवि के घर में बहुत कुछ बदल चूका था , सुहाना ने रमा के कनु में इतना जहर भर दिया था , के रमा अभ रवि से इस कदर नफरत करती थी के कुछ बयान नै किया जा सकता ,

शूरति और रिमी , सुहाना के वश में होकर रवि से नफरत तोह करती थी , पर उसे भूल नै प् रही थी , रवि का बेइंतहा प्यार , उन दोनों को दर्द देता , रुलाता , उसकी बेहद यद् दिलाता , पर उनको भूलने नै दे रहा था ,

अनु और राजेश ने बहुत कोससिह की , रवि को ढूंढ़ने की , पर आखिर थक हर कर दोनों रुक गए , तलाश ख़तम हुई , तोह अनु फिर से टूट गई , उसने जॉब छोड़ दी ,

वोह रोटी रहती , खुद को कोसती रहती , आखिर जब रवि मिल गया था , तोह क्यों उसे सच न बताया के वोह hi अनु है , यही बात , अनु को दर्द देती ,

बेबी अभ नार्मल हो चुकी थी , काट ने उसे बहुत प्यार दिया था , पर बेबी जो प्यार रवि से चाहती थी , वोह उसे मिल नै प् रहा था , यह कोई जिस्मानी प्यार नै , आत्मिक प्यार था ,

वोह रोटी रहती , काट से बस रवि की बतिअन करती रहती , शहर के बुरे हालातो से लड़ती रहती , बेबी तोह पागल हो चुकी थी , रवि की बेवफाई से उसे दरिंदा बना दिया था , पर सचाई का रास्ता उसने नै छोड़ा था , बस अपनी जान उसे अभ कीमती नै लगती थी ,

वोह सीधा जोकर और सुहाना से लड़ रही थी , वोह कई बार उनको मत देती , पर आखिर वोह जीत जाते , सुहाना की ताकत बेबी से हज़ार गुना जायदा दी , क्यों की सुहाना इक रिंग थी , और जो जिस्म उसे मिला था , वोह पवितर था ,

बेबी कई बार घ्याल हुई , पर उसके सर इक जनून सवार था , प्यार में मिले धोके ने उसे अंदर से तोड़ दिया था , यह बिलकुल ऐसा था , जैसे जूही , बेबी बानी थी , और अभ बेबी , कविया .....

"माँ , माँ , कहा हो अप्प..." रमा मुस्कराते हुए सीमा के पास किचन में आकर बोली ,

"हम्म , मेरा बचा , क्या बात है.." सीमा ने बेहद प्यार में बोलै ,

"माँ , में अपनी फ्रेंड्स के साथ मूवी देखने जा रही हु , सोचा आपको बता दू.." रमा ने मुस्करा कर बोलै ,

"बीटा , अभ शादी कर लो , कब तक ऐसे अकेली रहूगी..." सीमा ने रमा के चेहरे पर हाथ फिरा कर बोलै ,

"माँ , नै , मुझे प्यार से नफरत है , मेरा दिल तोह उनके पास था , वोह मरते मरते , अपने साथ hi ले गए , इससे ाचा वोह कही चले जाते , मर क्यों गए , माँ , मुज़से ऐसी बतिअन मत किया करो , में उनको भूलना चाहती हु..." रमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै और किचन से बहार भाग गई ,

"नै मेरा बचा , भूलने नै दूंगी , क्यों की वोह जल्द आएगा , कोमल को लेकर , तब तुम गुस्से में उन दोनों को जला डौगी , क्यों की , में तुम्हारे मन में इतना जहर भर दूंगी , तुम अपनी शक्ति से उन दोनों को मर डौगी , आखिर हम दोनों का पिछले जनम का रिश्ता है... " सुहाना ने बेहद मुस्कराते हुए मन hi मन बोलै...

तो बे कुनिटेड....

 
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