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- Dec 5, 2013
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Part -34
सुबह, अनु दीदी और दिव्या के कॉलेज या काम के लिए जाने के बाद, पारी ने रसोई संभाली. उसने दोनों के लिए नाश्ता तैयार किया और अपने भाई माणिक को हॉल में बुलाया.
दोनों डाइनिंग टेबल पर शान्ति से नाश्ता कर रहे थे, लेकिन पिछली शाम की नज़दीकी और आगामी हिल स्टेशन की यात्रा की योजना अभी भी उनके दिमाग में थी.
पारी: (नाश्ता करते हुए, शरारती अंदाज़ में) भाई, देखो... आस्था को मनाना तोह हो गया. पर यह मत भूलना की यह सिर्फ एक शुरुआत है. तुम्हे वहाँ सीमाओं का ध्यान भी रखना है और रोमांस भी करना है.
माणिक: (कॉफ़ी पीते हुए) हाँ, हाँ. मुझे पता है. जेंटलमैन बन कर रहना है.
पारी: (मुस्कुराते हुए) सिर्फ जेंटलमैन नहीं! तुम्हे थोड़ा... सशक्त भी दिखना है. सीमा पार न करो, लेकिन अपनी मजबूती दिखाओ. तुम्हे पता है न... बॉर्डर पर लड़ने के लिए हथियार मजबूत होने चाहिए!
पारी ने जानबूझकर "हथियार" शब्द पर ज़ोर दिया.
माणिक, जो पहले से hi पारी के खुले मज़ाक से उत्तेजित था, उसने जोश और अनजाने में उत्तेजना के मिश्रण में जवाब दिया.
माणिक: (थोड़ा सीना फुलाते हुए) कहो तोह! हथियारों का ट्रायल दिखा दूँ? तुम्हे?
यह सुन कर पारी ने अपना हाथ रोका और प्यार से माणिक के कंधे पर मारते हुए हंस पड़ी.
पारी: (आँखों में हंसी) यार! अपनी hi बहिन पर हथियार तरय करोगे? शर्म नहीं आती? ट्रायल दिखाना है तोह आस्था को दिखाना!
माणिक को अपनी बात पर थोड़ी शर्म आयी, लेकिन साथ hi मज़ा भी आया. अब दोनों बेजहीझाँक दोस्तों की तरह अंतरंग मज़ाक कर रहे थे.
माणिक: (आवाज़ धीमी करके, नज़दीक झुकते हुए) मैं बस... तुम्हे बताना चाहता था की तुम्हारे गुरु की तैयारी पूरी है.
Baaton-baaton में, माणिक की आँखें, जो अब वर्जित चीज़ों पर आसानी से चली जाती थी, पारी के खुले गले के पास तिकी. उसने अचानक, बिना soche-samjhe, एक ऐसी बात कह दी जो सीमा पार कर गयी.
माणिक: (फुसफुसाते हुए, अचानक एक असहज तुलना करते हुए) वैसे, मुझे एक बात समझ नहीं आती... तुम्हारे बूब्स आस्था से भी बड़े और ज़्यादा... (वह शब्द नहीं ढूंढ पाया) ...खूबसूरत लगते हैं.
जैसे hi माणिक ने यह बात कही, उसने तुरंत महसूस किया की उसकी पंत में अंदर उसका 'हथियार' तन गया है. पारी के शरीर की वर्जित तुलना और उसकी नज़दीकी ने उसे तुरंत उत्तेजित कर दिया था.
पारी यह सुन कर शर्मा गयी. उसका चेहरा लाल हो गया. यह मज़ाक अब मज़ाक नहीं रहा था. उसके भाई ने उसके अंगों की तुलना किसी और लड़की से की थी, और उसने साफ़ देखा की उसके भाई का 'हथियार' यह देख कर खड़ा हो गया है.
पारी ने बिना कुछ कहे, तुरंत अपनी कुर्सी पीछे की तरफ धकेली.
पारी: (धीमी, काम्पटी आवाज़ में) बस... बस, भाई.
उसने तुरंत अपने और माणिक के ख़तम हुए बर्तन उठाये और तेज़ी से किचन में भाग गयी, जैसे की उसे उस माहौल से भागना हो.
किचन में पहुँच कर, पारी ने बर्तन सिंक में रखे. वह बर्तन साफ़ करने लगी, लेकिन उसकी आँखें दूर दीवार पर थी. उसके गाल अभी भी गरम थे. वह माणिक की baatein—uske शरीर की तुलना, 'हथियार' का ट्रायल, और उसका उत्तेजित hona—soch कर मुस्कुराने लगी.
वह जानती थी की यह सब गलत था, पर उसके भाई की यह कच्ची, बेकाबू उत्तेजना उसे अंदर hi अंदर एक अजीब सी गुदगुदी और रोमांच दे रही थी. वह मन hi मन सोच रही थी, "यह भाई भी न... अब इसे कौन सुधारेगा!"
*********************************************
पारी के किचन में भाग जाने के कुछ hi पल बाद, माणिक को अपनी गलती का एहसास हुआ. वह समझ गया था की इस बार उसने मज़ाक की सीमा लांघ दी थी. वह तुरंत उसके पीछे किचन में चला गया.
पारी सिंक के सामने कड़ी थी, zor-zor से झूठे बर्तन धो रही थी, जबकि वहाँ धोने के लिए सिर्फ do-teen hi कप प्लेट्स थे. वह जानबूझकर माणिक की तरफ नहीं देख रही थी.
माणिक ने धीरे से पीछे से दरवाज़ा बंद किया और उसके पास आया.
माणिक: (आवाज़ में शर्मिंदगी और पछतावा) पारी... सुनो.
पारी ने बर्तन धोना जारी रखा.
माणिक: (थोड़ा नज़दीक आकर) मेरी बात सुनो. बुरा तोह नहीं लगा? मैं बस... मज़ाक कर रहा था. मुझे पता है की मुझे वह सब नहीं कहना चाहिए था.
पारी ने नल बंद किया, एक गहरी सांस ली, और धीरे से माणिक की तरफ मुढ़ी. उसके चेहरे पर अभी भी पिछली शर्मिंदगी की लाली थी, लेकिन उसकी आँखों में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक अजीब सी शरारत और संकोच था.
पारी: (शर्माते हुए, धीमी आवाज़ में) बुरा तोह नहीं लगा, भाई... पर आप कुछ भी बोलते हो! तुम्हे पता है, मेरा दिल कितनी ज़ोर से धड़क रहा था जब तुमने... जब तुमने वह सब कहा?
माणिक की नज़रें फिर से झुक गयीं.
माणिक: मुझे पता है. मैंने ख़ुशी के जोश में कह दिया. मैं माफ़ी चाहता हूँ. मैं उस नज़दीकी को कण्ट्रोल नहीं कर पाया.
पारी: (अब थोड़ी दृढ़ता से) कण्ट्रोल करना पड़ेगा, भाई! आप मुझसे अपना हथियार तरय करने की बात करते हो, और... और मेरे बूब्स की तुलना अपनी गर्लफ्रेंड के बूब्स से करते हो! यह सब... यह सही नहीं है.
पारी ने एक गहरी सांस ली.
पारी: क्या यार! बहुत आगे बढ़ रहे हो तुम! हमारा रिश्ता अब एक दोस्ती जैसा हो गया है, जहां हम खुल कर बात करते हैं, पर कुछ चीज़ों की सीमा होती है. तुम्हे आस्था के साथ नज़दीक होना है, न की मेरे साथ.
माणिक ने पारी के हाथ पकडे, जो अभी भी गीले थे.
माणिक: तुम सही कह रही हो. मैं जानता हूँ की मैं भटक रहा हूँ. पर यह सब तब तक hi था जब तक आस्था ज़िन्दगी में नहीं आयी थी. अब मैं पूरी तरह से उस पर फोकस करूँगा. तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो, पारी, और मैं तुम्हे कभी असहज नहीं करूँगा.
पारी, माणिक की ईमानदारी से थोड़ी नरम पड़ी.
पारी: (थोड़ा मुस्कुराते हुए) ठीक है. मैं तुम पर भरोसा कर रही हूँ. अब जाओ और अगली मुलाक़ात की तैयारी करो. और हाँ, अगली बार जब तुम आस्था से मिलो, तोह तुम्हे अपनी 'सीमा' थोड़ी काम करनी पड़ेगी, ताकि मुझे तुम्हारी 'फिजिक्स' पर भरोसा हो जाए.
माणिक ने हँसते हुए सर हिलाया. उसने प्यार से पारी के गाल पर हाथ फेरा और किचन से निकल गया, अपनी बहिन की बातों को गाठ बाँध कर.
सुबह, अनु दीदी और दिव्या के कॉलेज या काम के लिए जाने के बाद, पारी ने रसोई संभाली. उसने दोनों के लिए नाश्ता तैयार किया और अपने भाई माणिक को हॉल में बुलाया.
दोनों डाइनिंग टेबल पर शान्ति से नाश्ता कर रहे थे, लेकिन पिछली शाम की नज़दीकी और आगामी हिल स्टेशन की यात्रा की योजना अभी भी उनके दिमाग में थी.
पारी: (नाश्ता करते हुए, शरारती अंदाज़ में) भाई, देखो... आस्था को मनाना तोह हो गया. पर यह मत भूलना की यह सिर्फ एक शुरुआत है. तुम्हे वहाँ सीमाओं का ध्यान भी रखना है और रोमांस भी करना है.
माणिक: (कॉफ़ी पीते हुए) हाँ, हाँ. मुझे पता है. जेंटलमैन बन कर रहना है.
पारी: (मुस्कुराते हुए) सिर्फ जेंटलमैन नहीं! तुम्हे थोड़ा... सशक्त भी दिखना है. सीमा पार न करो, लेकिन अपनी मजबूती दिखाओ. तुम्हे पता है न... बॉर्डर पर लड़ने के लिए हथियार मजबूत होने चाहिए!
पारी ने जानबूझकर "हथियार" शब्द पर ज़ोर दिया.
माणिक, जो पहले से hi पारी के खुले मज़ाक से उत्तेजित था, उसने जोश और अनजाने में उत्तेजना के मिश्रण में जवाब दिया.
माणिक: (थोड़ा सीना फुलाते हुए) कहो तोह! हथियारों का ट्रायल दिखा दूँ? तुम्हे?
यह सुन कर पारी ने अपना हाथ रोका और प्यार से माणिक के कंधे पर मारते हुए हंस पड़ी.
पारी: (आँखों में हंसी) यार! अपनी hi बहिन पर हथियार तरय करोगे? शर्म नहीं आती? ट्रायल दिखाना है तोह आस्था को दिखाना!
माणिक को अपनी बात पर थोड़ी शर्म आयी, लेकिन साथ hi मज़ा भी आया. अब दोनों बेजहीझाँक दोस्तों की तरह अंतरंग मज़ाक कर रहे थे.
माणिक: (आवाज़ धीमी करके, नज़दीक झुकते हुए) मैं बस... तुम्हे बताना चाहता था की तुम्हारे गुरु की तैयारी पूरी है.
Baaton-baaton में, माणिक की आँखें, जो अब वर्जित चीज़ों पर आसानी से चली जाती थी, पारी के खुले गले के पास तिकी. उसने अचानक, बिना soche-samjhe, एक ऐसी बात कह दी जो सीमा पार कर गयी.
माणिक: (फुसफुसाते हुए, अचानक एक असहज तुलना करते हुए) वैसे, मुझे एक बात समझ नहीं आती... तुम्हारे बूब्स आस्था से भी बड़े और ज़्यादा... (वह शब्द नहीं ढूंढ पाया) ...खूबसूरत लगते हैं.
जैसे hi माणिक ने यह बात कही, उसने तुरंत महसूस किया की उसकी पंत में अंदर उसका 'हथियार' तन गया है. पारी के शरीर की वर्जित तुलना और उसकी नज़दीकी ने उसे तुरंत उत्तेजित कर दिया था.
पारी यह सुन कर शर्मा गयी. उसका चेहरा लाल हो गया. यह मज़ाक अब मज़ाक नहीं रहा था. उसके भाई ने उसके अंगों की तुलना किसी और लड़की से की थी, और उसने साफ़ देखा की उसके भाई का 'हथियार' यह देख कर खड़ा हो गया है.
पारी ने बिना कुछ कहे, तुरंत अपनी कुर्सी पीछे की तरफ धकेली.
पारी: (धीमी, काम्पटी आवाज़ में) बस... बस, भाई.
उसने तुरंत अपने और माणिक के ख़तम हुए बर्तन उठाये और तेज़ी से किचन में भाग गयी, जैसे की उसे उस माहौल से भागना हो.
किचन में पहुँच कर, पारी ने बर्तन सिंक में रखे. वह बर्तन साफ़ करने लगी, लेकिन उसकी आँखें दूर दीवार पर थी. उसके गाल अभी भी गरम थे. वह माणिक की baatein—uske शरीर की तुलना, 'हथियार' का ट्रायल, और उसका उत्तेजित hona—soch कर मुस्कुराने लगी.
वह जानती थी की यह सब गलत था, पर उसके भाई की यह कच्ची, बेकाबू उत्तेजना उसे अंदर hi अंदर एक अजीब सी गुदगुदी और रोमांच दे रही थी. वह मन hi मन सोच रही थी, "यह भाई भी न... अब इसे कौन सुधारेगा!"
*********************************************
पारी के किचन में भाग जाने के कुछ hi पल बाद, माणिक को अपनी गलती का एहसास हुआ. वह समझ गया था की इस बार उसने मज़ाक की सीमा लांघ दी थी. वह तुरंत उसके पीछे किचन में चला गया.
पारी सिंक के सामने कड़ी थी, zor-zor से झूठे बर्तन धो रही थी, जबकि वहाँ धोने के लिए सिर्फ do-teen hi कप प्लेट्स थे. वह जानबूझकर माणिक की तरफ नहीं देख रही थी.
माणिक ने धीरे से पीछे से दरवाज़ा बंद किया और उसके पास आया.
माणिक: (आवाज़ में शर्मिंदगी और पछतावा) पारी... सुनो.
पारी ने बर्तन धोना जारी रखा.
माणिक: (थोड़ा नज़दीक आकर) मेरी बात सुनो. बुरा तोह नहीं लगा? मैं बस... मज़ाक कर रहा था. मुझे पता है की मुझे वह सब नहीं कहना चाहिए था.
पारी ने नल बंद किया, एक गहरी सांस ली, और धीरे से माणिक की तरफ मुढ़ी. उसके चेहरे पर अभी भी पिछली शर्मिंदगी की लाली थी, लेकिन उसकी आँखों में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक अजीब सी शरारत और संकोच था.
पारी: (शर्माते हुए, धीमी आवाज़ में) बुरा तोह नहीं लगा, भाई... पर आप कुछ भी बोलते हो! तुम्हे पता है, मेरा दिल कितनी ज़ोर से धड़क रहा था जब तुमने... जब तुमने वह सब कहा?
माणिक की नज़रें फिर से झुक गयीं.
माणिक: मुझे पता है. मैंने ख़ुशी के जोश में कह दिया. मैं माफ़ी चाहता हूँ. मैं उस नज़दीकी को कण्ट्रोल नहीं कर पाया.
पारी: (अब थोड़ी दृढ़ता से) कण्ट्रोल करना पड़ेगा, भाई! आप मुझसे अपना हथियार तरय करने की बात करते हो, और... और मेरे बूब्स की तुलना अपनी गर्लफ्रेंड के बूब्स से करते हो! यह सब... यह सही नहीं है.
पारी ने एक गहरी सांस ली.
पारी: क्या यार! बहुत आगे बढ़ रहे हो तुम! हमारा रिश्ता अब एक दोस्ती जैसा हो गया है, जहां हम खुल कर बात करते हैं, पर कुछ चीज़ों की सीमा होती है. तुम्हे आस्था के साथ नज़दीक होना है, न की मेरे साथ.
माणिक ने पारी के हाथ पकडे, जो अभी भी गीले थे.
माणिक: तुम सही कह रही हो. मैं जानता हूँ की मैं भटक रहा हूँ. पर यह सब तब तक hi था जब तक आस्था ज़िन्दगी में नहीं आयी थी. अब मैं पूरी तरह से उस पर फोकस करूँगा. तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो, पारी, और मैं तुम्हे कभी असहज नहीं करूँगा.
पारी, माणिक की ईमानदारी से थोड़ी नरम पड़ी.
पारी: (थोड़ा मुस्कुराते हुए) ठीक है. मैं तुम पर भरोसा कर रही हूँ. अब जाओ और अगली मुलाक़ात की तैयारी करो. और हाँ, अगली बार जब तुम आस्था से मिलो, तोह तुम्हे अपनी 'सीमा' थोड़ी काम करनी पड़ेगी, ताकि मुझे तुम्हारी 'फिजिक्स' पर भरोसा हो जाए.
माणिक ने हँसते हुए सर हिलाया. उसने प्यार से पारी के गाल पर हाथ फेरा और किचन से निकल गया, अपनी बहिन की बातों को गाठ बाँध कर.