Incest JANNAT TERI BAHON (TANGO) MEIN - Page 8 - SexBaba
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Incest JANNAT TERI BAHON (TANGO) MEIN

भाग 43: ईर्ष्या की आग और फॅमिली का पूरा ड्रामा



दिव्या गुस्से से किचन में घुस आयी थी. चेहरा लाल, आँखें तमतमा रही थी. गैस जलाकर पानी चढ़ाया, केतली राखी और चाय की पट्टी डालते हुए खुद से बड़बड़ाने लगी. मन अभी भी उसी सन पर अटका हुआ था – माणिक और पारी को उस ावक्वार्ड हालत में देखना, और फिर वह झूठा बहाना “बुखार आ गया”! उसे यकीन नहीं हो रहा था की यह दोनों मिलकर उसका मज़ाक उदा रहे हैं. हाथ काँप रहे थे, चमच से चाय हिलाते हुए भी दिमाग कहीं और था.

तभी पारी धीरे से किचन में दाखिल हुई. अब वह पूरी तरह नार्मल बनने की कोशिश कर रही थी – मुस्कान लगायी, बाल ठीक किये, जैसे कुछ हुआ hi नहीं. लेकिन आँखों में वह दर छुपा था, जो दिव्या से छुप नहीं प् रहा था.

पारी: (प्यार से, दी के पास आकर) दीदी? तुम इतनी नाराज़ क्यों हो गयी हो यार?

दिव्या ने बिना मुड़े जवाब दिया, चाय छंटे हुए.

दिव्या: मैं नाराज़ नहीं हूँ पारी. बस… बोहोत परेशान हूँ. दिल में कुछ अजीब सा लग रहा है.

पारी ने माहौल हल्का करने की कोशिश की. मुस्कुरायी और दिव्या के कंधे पर हाथ रख दिया.

पारी: अरे अच्छा! तो ठीक है न. तुम हमारे लिए भी चाय बना दो न प्लीज? माणिक भाई भी बहार इंतज़ार कर रहा है. दोनों के लिए ek-ek कप. प्लीज दीदी…

दिव्या ने बिना कुछ बोले दो और कप निकले. चाय डाली, थोड़ी चीनी मिलायी और गैस बंद कर दी. गुस्सा अब थोड़ा काम हो चूका था, लेकिन आँखों में चिंता साफ़ दिख रही थी – गहरी वाली, जो दिल को कुरेद रही थी. वह पारी की तरफ मुड़ी, उसका हाथ पकड़ा और सीधे आँखों में देखकर बोली.

दिव्या: (गंभीर होकर) देख पारी… तू अभी छोटी है यार. मैं जानती हूँ की तू और माणिक भाई अब बोहोत अचे दोस्त बन गए हो. Ek-doosre से सब कुछ खुलकर बात करते हो, हँसते हो, मज़ाक करते हो. मैं इस दोस्ती का पूरा सम्मान करती हूँ, सच में. लेकिन…

पारी को लगा अब दांत शुरू होगी, लेकिन दिव्या की बात कहीं और मुद गयी.

दिव्या: …लेकिन एक बात हमेशा याद रखना. तुम दोनों bhai-behen हो. इस रिश्ते की कुछ लिमिट्स होती हैं यार. तू कॉलेज जा रही है, माणिक भी बड़ा हो रहा है. तुम लोगों की हरकतें देखकर मुझे दर लगता है… कहीं गलत रस्ते पर मत चल पड़ना. समझ रही है न?

इशारा इतना साफ़ था की पारी के दिल में बिजली सी कौंध गयी. तुरंत साड़ी वह क्लोज मोमेंट्स याद आ गए – वह रातें जब माणिक के साथ बोहोत पास बैठी थी, हाथ पकडे थे, वह बातें जो bhai-behen के बीच नहीं होनी चाहिए. चेहरा लाल हो गया, आँखें नीचे झुक गयी. उसे एहसास हुआ – दी कितनी भोली हैं, और वह और माणिक कितनी खतरनाक आग से खेल रहे हैं.

पारी: (गंभीर होकर सर हिलाते हुए) नहीं दीदी… तुम टेंशन मत लो. हम… हम बस bhai-behen हैं यार. तेरी बात समझ गए. पक्का.

दिव्या ने रहत की सांस ली. पारी के लिए चाय का कप थमाया.

दिव्या: बस यही चाहती हूँ. तुम दोनों हमेशा हँसते रहो, लेकिन पढाई पर ध्यान दो. और हाँ… माणिक को भी बोल देना की वह भी समझे.

पारी ने कप लिया, मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन अंदर अब नयी टेंशन जाग चुकी थी. अब उन्हें और ज़्यादा सावधान रहना पड़ेगा. दी की नज़र अब उन पर तिकी हुई थी.

************************************

रात का डिनर था. डाइनिंग टेबल पर पूरा फॅमिली बैठा हुआ था – आनंद पापा, अनु दीदी, दिव्या, पारी और माणिक. आज माहौल थोड़ा पार्टी जैसा था, क्यूंकि माणिक ने का अन्तर की एग्जाम नहीं सिर्फ पास की थी, बल्कि अच्छी रैंक भी लायी थी. टेबल पर सबकी फेवरेट चीज़ें लगी थी – बटर चिकन गरमागरम, नान, दाल मखनी, सलाद, और डिजर्ट में गुलाब जामुन.

आनंद ने ख़ुशी से माणिक की पीठ थपथपाई.

आनंद: शाबाश मेरे शेर! तूने मेरा सर गर्व से ऊंचा कर दिया यार. जैसा मैंने वादा किया था, मैं तुझे तेरी मनपसंद बुलेट मोटरसाइकिल दिलवा दूंगा!

माणिक का चेहरा ख़ुशी से चमक उठा. बुलेट – दो लाख के करीब की बाइक. उसके सपनों वाली. सबने तालियां बजायी.

माणिक: थैंक यू पापा! मैं आपको कभी निराश नहीं करूँगा.

आनंद ने फिर दिव्या की तरफ देखा, मुस्कुराते हुए.

आनंद: और हाँ दिव्या बेटी… मुझे पता है इस सेमेस्टर में तेरे नंबर्स उतने अच्छे नहीं आये जितने आने चाहिए थे. लेकिन मैं जानता हूँ तू म्हणत करती है. तुझे भी कॉलेज aane-jaane में आसानी हो, इसलिए मैं तुझे भी एक स्कूटी दिलवाने का वादा करता हूँ.

दिव्या जो पहले से hi रोहन की वजह से खीझि हुई थी, अब यह सुन कर उसका खून खौल उठा. भाई को दो लाख की बुलेट, और उसे सिर्फ अस्सी हज़ार की स्कूटी? यह साफ़ भेदभाव लग रहा था.

दिव्या: (गुस्से में) यह क्या बात हुई पापा? आप हमेशा भेदभाव करते हो! माणिक को दो लाख की बुलेट और मुझे सिर्फ अस्सी हज़ार की स्कूटी? क्या मैं आपकी बेटी नहीं हूँ?

आनंद ने आराम से समझाया.

आनंद: अरे मेरी बेटी! ऐसा मत सोच. माणिक को कॉलेज दूर जाना पड़ता है, और यह उसकी म्हणत का इनाम है. तू मब्ब्स कर रही है, तुझे स्पीड से ज़्यादा सुविधा चाहिए. मेरे लिए तुम सब बच्चे बराबर हो यार.

पर दिव्या सुनने को तैयार नहीं थी. अंदर साड़ी फ़्रस्ट्रेशन निकलने लगी.

दिव्या: (झल्ला कर) नहीं! आप झूठ बोल रहे हो! आप हमेशा माणिक को hi सपोर्ट करते हो! मैं यह नाटक नहीं देख सकती!

उसने कुर्सी पीछे धकेली और उठने लगी.

तभी अनु दीदी ने सख्त आवाज़ में रोका.

अनु: दिव्या! बैठ जा! मैंने कहा बैठ और अपना खाना ख़तम कर. पापा ने जो कहा वह बिलकुल सही है. माणिक ने टॉप किया है, स्कूटी तेरे लिए काफी है. बिना खाये कहीं नहीं जाएगी!

अनु दी की आवाज़ में इतनी पावर थी की दिव्या को झुकना पड़ा. वह जबरदस्ती कुर्सी पर बैठ गयी, लेकिन गुस्सा अभी भी ठंडा नहीं हुआ था.

उसने जलती हुई नज़रों से माणिक को देखा. आँखों में नफरत और जलन साफ़ दिख रही थी. यह सिर्फ बुलेट की वजह से नहीं थी – अंदर साड़ी पुराणी शिकायतें निकल रही थी. माणिक को हमेशा ज़्यादा प्यार, ज़्यादा ध्यान, ज़्यादा सब कुछ. और अब यह बाइक भी.

माणिक ने उसकी नज़र पकड़ी. वह जानता था दी कितनी जल रही है. उसने jaan-bujh कर मुस्कुराते हुए, धीरे से कहा.

माणिक: थैंक यू दी!

यह “थैंक यू” बिलकुल छेड़ने वाला था. दिव्या ने मुँह कास कर बंद कर लिया. प्लेट में खाने पर ध्यान देने की कोशिश की, लेकिन अंदर आग लगी हुई थी.

आनंद ने माहौल सँभालने की कोशिश की.

आनंद: बस बच्चो… खाना खा लो. आज ख़ुशी का दिन है. माणिक ने म्हणत की है, उसका रिवॉर्ड मिला. दिव्या, तू भी अगली बार अच्छे नंबर्स लाएगी, फिर तेरी भी बड़ी बाइक दिलवा देंगे.

दिव्या ने सिर्फ “हम्म” कहा. Jaldi-jaldi खाना खा लिया और उठ गयी.

दिव्या: मैं रूम में जा रही हूँ. गुड नाईट.

वह चली गयी. टेबल पर सन्नाटा छ गया.

अनु ने माणिक को देखा.

अनु: तू भी थोड़ा संभल कर. दिव्या को छेड़ना अच्छा नहीं लगता.

माणिक ने सर हिलाया, लेकिन अंदर थोड़ा गिलटी फील कर रहा था. पर वह भी जानता था – दी की जलन अब रुकने वाली नहीं.

पारी ने चुपचाप सब देखा. मन में सोचा – यह फॅमिली कितनी कॉम्प्लिकेटेड है यार. दी को इतना गुस्सा, माणिक भाई को इतनी ख़ुशी… और मैं बीच में फँसी हुई. अब हमे और ज़्यादा छुपाना पड़ेगा.

खाना ख़तम हुआ. सब अपने कमरे में चले गए.

दिव्या रूम में लेट गयी. आँखें बंद की, लेकिन नींद कहाँ आ रही थी. सोचा – पापा हमेशा माणिक को ज़्यादा पसंद करते हैं. मुझे कुछ नहीं मिलता. और वह माणिक और पारी… उनका रिश्ता भी सही नहीं लग रहा. मैं सब देख रही हूँ. अब मुझे कुछ करना पड़ेगा. यह सब बंद होना चाहिए.

तकिये को ज़ोर से पकड़ा. ईर्ष्या की आग अब पूरी तरह भड़क चुकी थी. और यह आग शायद जल्दी बुझने वाली नहीं थी.



रात गहरी हो गयी. घर में सन्नाटा था, लेकिन andar-andar तूफ़ान चल रहा था – जलन का, प्यार का, और गलत रिश्तों का.
 
Part -44डिनर के बाद माणिक सीधे अपने कमरे में चला गया. उसके चेहरे पर अभी भी दिव्या का वह गुस्सा दिखाई दे रहा था. वह बीएड पर बैठ गया, हाथ से सर पकड़ लिया. थोड़ी देर बाद पारी भी अंदर आयी, दरवाज़ा धीरे से बंद किया और माणिक के पास बैठ गयी.

माणिक: (गुस्से से) यार, यह दिव्या मुझसे कुछ ज़्यादा hi नहीं जलती? साला, मैंने सोचा था आज तोह काम से काम खुश होगी, पर स्कूटी न मिली तोह सारा गुस्सा मुझ पर निकाल रही थी. जैसे मैंने उसका हक़ मार लिया हो!

पारी: (शांत करने की कोशिश करते हुए, उसके कंधे पर हाथ रखकर) छोड़ न भाई. वह थोड़ी मूडी है. यह उसका स्वाभाव है. तुम उसकी बातों पर इतना ध्यान मत दो. तुम्हे बुलेट मिल रही है, उस पर खुश रहो.

माणिक: (गुस्से में पेअर पटकते हुए) स्वाभाव है? मैंने साली का बिगाड़ा क्या है? वह बचपन से hi मुझसे नफरत करती है! हर chhoti-badi बात पर मुझे टोकना, मुझे छेड़ना! बुलेट की बात पर तोह जिस तरह मुझे घूर रही थी, जैसे मैं उसका सबसे बड़ा दुश्मन हूँ!

माणिक का गुस्सा अब कण्ट्रोल से बहार हो रहा था. उसने गुस्से में साड़ी सीमाएं तोड़ दी.

माणिक: (ज़ोर से, गंदे शब्दों में) मेरा तोह दिल करता है की साली की छूट फाड़ दूँ! तब पता चलेगा उसे की जलने का क्या नतीजा होता है!

पारी यह सुन कर चौंक गयी. माणिक के मुँह से अपनी बड़ी बेहेन के लिए ऐसे गंदे शब्द सुन कर उसे अजीब लगा. वह खुद भी kabhi-kabhi उत्तेजित बातें करती थी, पर यह सीधा योनिक हिंसा से जुड़ा था.

पारी: (आश्चर्य से माणिक के कंधे पर मरते हुए) क्या भाई! तुम भी न! यह क्या बोल रहे हो? अपनी बेहेन के लिए कैसे शब्द इस्तेमाल कर रहे हो? तुम्हे शर्म नहीं आती?

माणिक: (आक्रामक होकर) और वह जो मुझसे बिना मतलब की नफरत करती है? वह बचपन से hi मेरे हर काम में टांग ादती है! तुम नहीं जानती, मैं बस अब बर्दाश्त नहीं कर सकता! उसका गुस्सा हमेशा मुझ पर hi निकालता है!

पारी ने महसूस किया की माणिक का गुस्सा सिर्फ बुलेट तक सीमित नहीं था. यह बरसों पुराणी नफरत थी जो अब योनिक शब्दों के रूप में बहार निकल रही थी. पारी चुप हो गयी. उसने धीरे से माणिक को गले लगा लिया ताकि वह थोड़ा शांत हो जाये.

पारी: (फुस्फुसाते हुए) ठीक है भाई. शांत हो जाओ. वह नाराज़ है, पर वह तुम्हारी बेहेन है. छोड़ दो.

माणिक ने गहरी सांस ली, पर उसका दिमाग अब बचपन के दिनों में चला गया था. वह यादें अभी भी ताज़ा थी – जब माँ ज़िंदा थी, जब घर में सब कुछ नार्मल था, लेकिन दिव्या की जलन तब से hi शुरू हो चुकी थी.

माणिक ने धीरे से बोलै, आवाज़ में अब गुस्सा नहीं, बल्कि थकन थी.

माणिक: यार पारी… यह जलन तोह बचपन से चल रही है. जब माँ ज़िंदा थी, तब भी दिव्या मुझसे का यही हाल था. याद है न, जब मैं 8 साल का था और दिव्या 10 की… पापा ने मुझे बर्थडे पर नया साइकिल दिलवाया था. रेड वाला हीरो साइकिल, जो मैंने बोहोत टाइम से माँगा था. पापा ने कहा था – “बीटा, तूने स्कूल में अच्छे मार्क्स लाये हैं, यह तेरा रिवॉर्ड है.”

पारी ने सर हिलाया, वह भी याद कर रही थी.

पारी: हाँ यार… मैं तब छोटी थी, पर याद है. दिव्या दी को उस दिन बोहोत बुरा लगा था.

माणिक: बिलकुल. दिव्या ने पापा से कहा – “पापा, मैंने भी तोह अच्छे मार्क्स लाये थे लास्ट एग्जाम में. मुझे क्यों नहीं साइकिल?” पापा ने समझाया की “बीटा, तू लड़की है, साइकिल से ज़्यादा बुक्स चाहिए. और माणिक को स्कूल दूर जाना पड़ता है.” पर दिव्या मान hi नहीं रही थी. उसने रात को चुपके से मेरी साइकिल के टायर में नेल थोक दिया. सुबह जब मैं स्कूल जाने लगा तोह टायर पंक्चर था. मैं रोटा हुआ पापा के पास गया. पापा ने समझा की एक्सीडेंट हुआ है, पर मुझे पता था दिव्या ने किया था. उसने मुझे चुपके से देखा और मुस्कुरा दिया – जैसे कह रही हो “देख लिया न?”

पारी: और तुमने क्या किया?

माणिक: मैंने कुछ नहीं किया. बस माँ से शिकायत की. माँ ने दिव्या को डांटा, पर दिव्या ने मन कर दिया. उसने कहा – “मैं नहीं करती, माणिक झूठ बोल रहा है.” माँ ने मुझे समझाया की “Bhai-behen में ऐसे होता है.” पर उस दिन से मुझे एहसास हो गया की दिव्या मुझसे जलती है. क्यूंकि मैं लड़का हूँ, मुझे थोड़ा ज़्यादा ध्यान मिलता था.

पारी ने हाथ से माणिक के बाल सहलाये.

पारी: हाँ यार… पापा और माँ दोनों तुम्हे थोड़ा ज़्यादा प्यार करते थे. लड़का होने की वजह से. दिव्या दी को लगता था की तुम्हे सब कुछ आसानी से मिल जाता है.

माणिक: और यह सिर्फ एक बार नहीं था. याद है जब मैं 12 साल का था? माँ ने मुझे क्रिकेट का नया बात दिलवाया था – मर्फ वाला, जो बोहोत कॉस्टली था. मैंने कहा था “माँ, मैं इससे खेलूंगा और टीम में टॉप करूँगा.” दिव्या तब 14 की थी, उसने कहा – “मुझे भी कुछ नया चाहिए.” माँ ने कहा “बीटा, तू लड़की है, तुझे फैंसी ड्रेस के लिए कुछ दिलवा देंगे.” दिव्या को यह बात बुरी लगी. उसने रात को मेरा बात छुपाया. सुबह जब मैं प्रैक्टिस के लिए ढूँढा तोह नहीं मिला. मैंने सबको बताया, पर दिव्या ने कहा “मुझे पता नहीं.” बाद में माँ ने दिव्या के अलमारी में बात मिला. दिव्या ने रोने लगी – “मैं जेलस नहीं हूँ, बस मुझे भी कुछ चाहिए था.” पर मैं जानता था – वह जल रही थी.

पारी: और माँ ने क्या किया?

माणिक: माँ ने दिव्या को समझाया, पर पापा ने मुझे नया बात दिलवा दिया. उस दिन दिव्या ने मुझसे बात नहीं की. वह गुस्से में अपने रूम में बंद हो गयी. तब से मुझे लगता था की दिव्या मुझसे सच में नफरत करती है. क्यूंकि मैं लड़का हूँ, मुझे हर चीज़ पहले मिलती थी – साइकिल, बात, पॉकेट मनी, सब कुछ.

पारी: और एक और बात याद है न? जब तू 15 का था और दिव्या 17 की. स्कूल में तू टॉप किया था क्लास में, पापा ने तुझे मोबाइल फ़ोन दिलवाया – पहला नोकिआ वाला फैंसी. दिव्या को भी फ़ोन चाहिए था, पर पापा ने कहा “बीटा, तू अभी पढाई पर फोकस कर, फ़ोन बाद में.” दिव्या ने रात को मेरा फ़ोन छुपाया. मैंने सुबह ढूँढा तोह नहीं मिला. दिव्या ने कहा “शायद तू ने hi खो दिया.” मैं रोने लगा. माँ ने दिव्या से पुछा, तोह दिव्या ने रोने लगी – “मैं जेलस नहीं हूँ, बस मुझे भी लगता है की माणिक को सब मिल जाता है.” फिर माँ ने मुझे समझाया की “Bhai-behen में थोड़ी सी जलन होती है, पर प्यार भी बोहोत है.” पर मुझे पता था – दिव्या की जलन कभी काम नहीं होगी.

माणिक ने गहरी सांस ली.

माणिक: और अब यह बुलेट. पापा ने बोलै “माणिक ने म्हणत की है, रिवॉर्ड है.” दिव्या को लगा की फिर से मुझे ज़्यादा मिल रहा है. उसने टेबल पर घूरा, जैसे मैंने उसका हक़ चीन लिया हो. पर यार… मैंने तोह कुछ गलत नहीं किया. बस म्हणत की. क्यों जलती है यह इतनी?

पारी ने माणिक को और ज़ोर से गले लगाया.

पारी: भाई… शायद इसलिए जलती है क्यूंकि वह भी म्हणत करती है, पर उसे लगता है की तुम्हे ज़्यादा मिलता है. लड़का होने की वजह से. पापा और माँ दोनों तुम्हे थोड़ा स्पेशल ट्रीट करते थे. दिव्या दी को लगता था की वह हमेशा सेकंड नंबर पर है. पर अब… अब हम दोनों को और ज़्यादा संभालना पड़ेगा. दी की नज़र अब हम पर भी है.

माणिक ने पारी के बाल सहलाये.

माणिक: हाँ यार… अब हमे बोहोत केयरफुल रहना पड़ेगा. दिव्या की जलन अब रुकने वाली नहीं. पर मैं भी अब बर्दाश्त नहीं करूँगा. अगर वह ज़्यादा करेगी तोह…

पारी ने उसके मुँह पर हाथ रख दिया.

पारी: शठ… ऐसे मत बोल. हम दोनों को अपना रिश्ता संभालना है. अभी के लिए शांत हो जाओ. कल सुबह सब ठीक लगेगा.

माणिक ने आँखें बंद की. पर उसके दिमाग में बचपन की वह साड़ी इन्सिडेंट्स घूम रहे थे – साइकिल पंक्चर, बात छुपाना, फ़ोन गायब, और अब बुलेट पर गुस्सा. सब में एक hi चीज़ थी – दिव्या की जलन.

पारी भी सो रही थी – *यह पुराणी जलन अब नहीं रुकेगी. दी को कुछ करना पड़ेगा. पर हम भी नहीं रुकेंगे. हमारा रिश्ता अब हमारे हाथ में है.*

रात गहरी हो गयी. कमरे में सन्नाटा था, पर andar-andar पुराणी और नयी जलन की लड़ाई चल रही थी.



****************************
 
Part -45

माणिक का गुस्सा अभी भी ठंडा नहीं हुआ था. वह बीएड पर बैठा था, हाथ मुँह पर रखे, आँखें बंद, पर दिमाग में सिर्फ दिव्या की वह घूरने वाली नज़र घूम रही थी. पारी उसके पास बैठी थी, उसके कंधे पर हाथ रखे, dheere-dheere पीठ सेहला रही थी, जैसे छोटी बच्ची को शांत कर रही हो. पर माणिक का दिल अभी भी तेज़ धड़क रहा था – गुस्सा, नफरत, और कुछ और भी जो उसने पहले कभी इतने ज़ोर से महसूस नहीं किया था.

माणिक: (आवाज़ में सख्ती और एक अजीब सी वासना मिलकर) नहीं पारी… मैं इसे ऐसे hi नहीं छोड़ सकता. छूट तो इसकी मारूंगा एक दिन! वह भी पूरा प्लान बनाकर! बस साली की कोई कमज़ोरी पता लग जाये… फिर देखना मैं क्या करता हूँ!

पारी का दिल ज़ोर से धड़क उठा. यह सिर्फ गुस्सा नहीं था – यह एक भयानक योनिक इरादा था. उसने माणिक के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ा, आँखों में देखा. उसकी आँखें बड़ी हो गयी थी, चेहरा सफ़ेद पद गया था.

पारी: (गहरी चिंता से) भाई… प्लीज शांत हो जाओ. इतना गुस्सा मत करो. वह तुम्हारी बेहेन है यार. तुम इस बारे में सोचना भी मत.

पर माणिक का दिमाग अब कण्ट्रोल से बहार था. वह पारी के हाथों को साइड करके बोलै.

माणिक: (फिर से गुस्से में) तुम्हे पता नहीं पारी… वह मुझे कितना…

वह फिर वही शब्द बोलने वाला था – “साली की छूट…”

माणिक: (आक्रामक होकर) साली की छू—

इससे पहले की वह पूरा शब्द बोल पता, पारी ने बिना एक पल सोचे अपने होंठों को माणिक के होंठों पर रख दिया. यह एक अचानक किया गया काम था – बस उसको रोकने के लिए, उसके मुँह से वह गन्दा शब्द निकलने से पहले. पर जैसे hi उनके होंठ मिले, कुछ बदल गया.

माणिक, जो गुस्से और बेकाबू वासना में था, उसने तुरंत पारी को अपनी तरफ खींच लिया. यह किश शुरू में सिर्फ रोकने के लिए था, पर पल भर में यह एक तेज़, भूखा, गहरा किश बन गया. माणिक ने पारी के बालों में उँगलियाँ डाली, उसके सर को पकड़ा और और ज़ोर से किश करने लगा. उनकी जीभें एक दुसरे से टकराई, दोनों के मुँह से हलकी सी आह निकल गयी.

पारी ने पहले तोह सिर्फ रोकने के लिए किश किया था, पर अब वह भी बहक गयी. उसने माणिक के गर्दन पर हाथ रखे, उसको और पास खींच लिया. दोनों के शरीर एक दुसरे से चिपक गए. माणिक का हाथ पारी की पीठ पर फिर रहा था, नीचे की तरफ स्लाइड कर रहा था. पारी ने भी उसके शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए – एक, दो, तीन.

माणिक: (किश के बीच में, सांस फूलते हुए) पारी… तू… तू मेरी हो… सिर्फ मेरी…

पारी: (फुस्फुसाते हुए, आँखें बंद) हाँ भाई… शांत हो जाओ… मैं हूँ न तेरे पास… सब भूल जा…

उनका किश और गहरा हो गया. माणिक ने पारी को बीएड पर धकेल दिया, उसके ऊपर चढ़ गया. पारी ने उसके शर्ट को पूरा खोल दिया, उसके सीने पर हाथ फेरा. माणिक का हाथ पारी की कुर्ती के अंदर दाल दिया – उसकी ब्रा के ऊपर से छाती दबायी. पारी की सांस तेज़ हो गयी, वह मोअन करने लगी.

माणिक ने पारी को बीएड पर धकेल दिया था, पर अभी तक कोई कपडा उतरा नहीं था. दोनों के शरीर एक दुसरे से बिलकुल चिपके हुए थे – सिर्फ कपड़ों की पतली सी परछाई के बीच. माणिक उसके ऊपर था, उसकी टांगें पारी की टांगों के बीच में फँसी हुई थी. उनका सांस एक साथ चल रहा था – तेज़, गरम, और बेकाबू. किश अभी भी चल रहा था, गहरा, भूखा, जैसे दोनों एक दुसरे को खा जाना चाहते हों.

माणिक का हाथ पारी की पीठ पर था – dheere-dheere upar-neeche कर रहा था, कुर्ती के अंदर से उसकी नंगी पीठ को सेहला रहा था. पारी ने अपने हाथों से माणिक के कन्धों को पकड़ा, उँगलियाँ उसके मसल्स में गदा दी – जैसे कह रही हो “और पास आ, और ज़ोर से चिपक”. दोनों के सीने एक दुसरे से डाब रहे थे, पारी की छाती माणिक के सीने से रगड़ रही थी – कपड़ों के बीच से भी गरमी महसूस हो रही थी.

माणिक: (सांस फूलते हुए, किश के बीच में) पारी… तू कितनी गरम है यार… तेरा बदन… मेरा बदन जला रहा है…

पारी: (आँखें बंद, उसके कान में फुस्फुसाते हुए) हाँ भाई… जलने दो… तुम्हारा गुस्सा… मेरी तरफ मोड़ दो… मैं ले लुंगी सब कुछ…

माणिक ने अपने हाथों से पारी की कमर पकड़ी, उसको और ज़ोर से अपनी तरफ खींच लिया. अब दोनों के शरीर बिलकुल एक दुसरे में घुल गए थे – जैसे दो मिटटी के बर्तन एक साथ चिपक गए हों. माणिक ने अपने हिप्स को धीरे से हिलाया – बस हल्का सा मूवमेंट, पर उससे पारी की छूट पर प्रेशर पद रहा था, जीन्स के ऊपर से hi. पारी की सांस रुक गयी, वह मोअन करने लगी – हलकी सी, पर गहरी.

पारी: (मोअन करते हुए) ाः… भाई… ऐसे मत करो… जीन्स के ऊपर से hi… इतना प्रेशर… मैं पागल हो जाउंगी…

माणिक: (मुस्कुराते हुए, उसके गले पर किश करते हुए) पागल हो जा… मैं भी पागल हो रहा हूँ… तेरा यह बदन… मेरी साड़ी नफरत को खा रहा है…

वह दोनों अब एक रदम में हिल रहे थे – dheere-dheere, जैसे डांस कर रहे हों. माणिक का लुंड जीन्स के अंदर सख्त था, पारी की छूट के बिलकुल ऊपर रगड़ रहा था – कपड़ों के बीच से hi गरमी और गीलापन महसूस हो रहा था. पारी ने अपने हाथों से माणिक की पीठ को खुरच लिया – नाख़ून उसके शर्ट के ऊपर से hi उसकी पीठ पर निशाँ बना रहे थे.

पारी: (तेज़ सांस लेते हुए) भाई… तुम्हारे हाथ… मेरी कमर पर… कितना ज़ोर से पकडे हो… मुझे लग रहा है तुम मुझे तोड़ डोज…

माणिक: (उसके कान में) तोडना नहीं… बस अपना बनाना है… तू मेरी हो… सिर्फ मेरी… दिव्या का गुस्सा… अब तुझ में निकाल रहा हूँ…

माणिक ने अपने हिप्स को और ज़ोर से दबाया. पारी की टांगें उसकी कमर पर लपेट गयी – वह उसको और पास खींच रही थी. दोनों के शरीर अब पसीने से भीगे हुए थे – कपडे चिपक रहे थे, पर उतरने की ज़रुरत नहीं महसूस हो रही थी. यह सिर्फ क्लोसनेस्स थी, सिर्फ रगड़, सिर्फ गरमी.

पारी: (आँखें बंद, मोअन करते हुए) ाः… भाई… यह… यह क्या कर रहे हो… जीन्स के ऊपर से hi… इतना मज़ा… मैं… मैं झाड़ जाउंगी…

माणिक ने उसके गले पर किश किया, फिर कान में कहा.

माणिक: झाड़ जा… मेरी जान… झाड़ जा मेरे ऊपर… मैं भी तेरे साथ आ जाऊंगा… बस ऐसे hi चिपके रहने दे…

पारी ने अपने हिप्स को भी हिलना शुरू कर दिया – वह माणिक के लुंड पर अपनी छूट रगड़ रही थी, जीन्स के ऊपर से. दोनों के मूवमेंट्स एक साथ थे – तेज़, धीमे, फिर तेज़. कमरे में सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़ थी और हलकी सी कपड़ों की खिसकने की आवाज़.

पारी: (तेज़ मोअन) भाई… तुम्हारा… तुम्हारा यह सख्त… मुझे महसूस हो रहा है… जीन्स के अंदर से… कितना बड़ा… कितना गरम…

माणिक: (सांस फूलते हुए) और तू… तेरी छूट… इतनी गीली… कपडे भीगे हुए हैं… मैं महसूस कर रहा हूँ… तू कितनी तड़प रही है…

दोनों अब एक दुसरे को और ज़ोर से दबाने लगे. माणिक ने पारी के निप्पल्स को कपड़ों के ऊपर से hi दबाया – ब्रा और कुर्ती के बीच से. पारी की पीठ उठ गयी, वह ज़ोर से मोअन करने लगी.

पारी: ाः… हाँ… दबाओ… और ज़ोर से… मेरी छाती को… तुम्हारी बेहेन की छाती को…

माणिक ने उसके निप्पल्स को पिंच किया – हल्का सा, पर इतना की पारी का बदन काँप उठा. वह दोनों अब बिलकुल घुल गए थे – शरीर एक दुसरे में समां गए थे. किश अब गले, कान, गर्दन पर शिफ्ट हो गया था. माणिक ने पारी के गले पर बाईट किया – हल्का सा, पर निशाँ छोड़ने वाला.

पारी: (आह भरते हुए) बाईट करो… और करो… मुझे अपना बना लो… आज रात मुझे अपना बना लो…

माणिक: (तेज़ आवाज़ में) तू मेरी है पारी… सिर्फ मेरी… कल से दिव्या का गुस्सा भूल जाऊंगा… बस तू रहना मेरे पास…

दोनों के मूवमेंट्स और तेज़ हो गए. जीन्स के ऊपर से hi रगड़ इतनी थी की दोनों क्लाइमेक्स के करीब पहुँच गए. पारी ने माणिक की पीठ को और ज़ोर से खुरचा, उसके नाम लेते हुए मोअन करने लगी.

पारी: भाई… mera….aahhh….nikalne वाला है… ाः… झाड़ रही हूँ… तेरे ऊपर…

माणिक ने भी अपने हिप्स को ज़ोर से दबाया – एक आखरी रगड़. वह भी झाड़ गया – जीन्स के अंदर hi, गरम, पसीने के साथ.

दोनों एक साथ थक कर लेट गए. सांसें अभी भी तेज़ थी. कपडे अभी भी पहने हुए थे – बस पसीने से भीगे, चिपके हुए. माणिक ने पारी को अपनी बाहों में भर लिया, उसके माथे पर किश किया.

माणिक: (सांस सँभालते हुए) पारी… तू… तू ने मेरा गुस्सा ले लिया… अब दिल हल्का हो गया…

पारी: (मुस्कुराते हुए, उसके सीने पर सर रखते हुए) हाँ भाई… मैं हूँ न तेरे पास. अब शांत हो जाओ. हम दोनों मिलकर सब संभल लेंगे. दिव्या दी को भूल जा… सिर्फ हम हैं अब.

माणिक ने उसके बाल सहलाये. दोनों एक दुसरे में घुल गए थे – बिना कपडे उतरे, सिर्फ क्लोसनेस्स से, सिर्फ रगड़ से, सिर्फ प्यार और वासना के मिलान से. यह पल उनके रिश्ते को और गहरा कर चूका था – जहां गुस्सा अब प्यार में बदल चूका था.

कमरे में सन्नाटा छ गया. बहार घर सो रहा था, पर अंदर यह दोनों अपनी दुनिया में खोये हुए थे. रात और गहरी हो गयी. यह बहका हुआ पल उनके लिए एक नयी शुरुआत था – जहां नफरत की आग अब सिर्फ एक दुसरे के प्यार में जल रही थी.



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Part -46दोनों की सांसें अभी भी तेज़ चल रही थी. होंठ सूजे हुए, लाल, गरम. पारी का चेहरा पसीने से भीगा हुआ था, आँखें चमक रही थी – दर और लालसा का मिला जुला रंग. वह धीरे से उठी, कुर्ती को ठीक किया, जीन्स का बटन बांध किया. उसके हाथ अभी भी काँप रहे थे.

पारी: (आवाज़ कांपते हुए, गहरी चिंता से) भाई… बस! अब… अब मुझे जाना चाहिए. कहीं कोई अनहोनी न हो जाये!

वह दरवाज़े की तरफ मुद गयी, पर पलट कर एक आखरी बार माणिक को देखा. माणिक अभी भी बीएड पर बैठा था, शर्ट खुली हुई, जीन्स का ज़िप खुला, लुंड अभी भी सख्त, जीन्स के बहार उभरा हुआ. उसके चेहरे पर वासना अभी भी थी, आँखें लाल, सांसें भरी हुई.

माणिक: (आवाज़ भरी, गहरी) हाँ… हाँ, तुम सही कह रही हो.

पारी ने एक शरारती, मुस्कुराती हुई नज़र उस पर डाली – वह नज़र जो कह रही थी “अभी भी तुम्हारे अंदर आग है”. उसने धीरे से माणिक के लुंड की तरफ इशारा किया.

पारी: (फुस्फुसाते हुए, शरारती अंदाज़ में) चिंता मत करो भाई… तुम… तुम बाथरूम में जाकर मुठ मार लो. उससे तुम्हारा गुस्सा और यह… (लुंड की तरफ इशारा) …यह सब शांत हो जायेगा.

पारी ने यह कहकर एक तेज़ सांस ली, जैसे खुद को रोक रही हो. फिर बिना रुकावट के दरवाज़ा खोला और बहार निकल गयी. दरवाज़ा धीरे से बंद हो गया. कमरे में सन्नाटा छ गया – सिर्फ माणिक की तेज़ सांसें और उसका दिल की धड़कन.

माणिक वही बैठा रहा कुछ पल. उसका लुंड अभी भी सख्त था, जीन्स के अंदर तड़प रहा था. पारी की बात उसके कानों में गूँज रही थी – “मुठ मार लो”. वह उठा, धीरे से बाथरूम की तरफ चला. मिरर के सामने खड़ा हुआ. अपना चेहरा देखा – लाल, पसीना भरा, आँखें लाल. उसने शर्ट उतरी, जीन्स नीचे की. लुंड बहार आया – सख्त, टोपी गीली, वेइन्स उभरी हुई.

वह शावर के नीचे खड़ा हो गया, पानी नहीं खोला. बस हाथ से लुंड पकड़ा. दिमाग में दिव्या का चेहरा आ गया – वह घूरने वाली नज़र, टेबल पर उसका गुस्सा, वह “थैंक यू दी” के बाद उसकी जलती आँखें. माणिक के दिल में गुस्सा फिर से भड़क उठा.

माणिक: (खुद से बड़बड़ाते हुए) साली… तू मुझसे इतनी जलती है? बुलेट मिली तोह जल रही है? बचपन से जलती है… साइकिल छुपाई, बात छुपाया, फ़ोन छुपाया… अब यह गुस्सा? अब मैं तुझे दिखाऊंगा…

उसने लुंड को ज़ोर से पकड़ा, हिलना शुरू किया – धीरे से, फिर तेज़. दिमाग में एक ख्याल आया – दिव्या बेबस है. वह सोचने लगा की दिव्या उसके सामने बेबस है, हाथ बंधे हुए, आँखें बंद, और वह उसको छोड़ रहा है – गुस्से में, ज़ोर से, उसकी साड़ी जलन को उसके शरीर पर निकालते हुए.

माणिक: (तेज़ सांस लेते हुए) हाँ साली… अब तू मेरी है… तेरी छूट में दाल रहा हूँ… ज़ोर से… तू चिल्लायेगी… रोएगी… पर रुकूंगा नहीं…

उसने स्पीड बधाई. हाथ तेज़ चल रहा था – ऊपर नीचे, टोपी पर ऊँगली घूमते हुए. दिमाग में दिव्या की चीख सोच रहा था – “भाई… मत करो… दर्द हो रहा है…” पर वह रुक नहीं रहा था. गुस्सा और वासना मिला हुआ था – दिव्या को पुनीश करने का ख्याल उसको और उत्तेजित कर रहा था.

माणिक: (मोअन करते हुए) ाः… साली… तेरी छूट कितनी टाइट है… मैं पूरा अंदर दाल रहा हूँ… तू जलेगी… अब जलेगी मेरे लुंड से…

उसने आँखें बंद की, दिव्या का चेहरा सामने सोचा – उसकी लाल आँखें, उसका गुस्सा, पर अब वह बेबस है. माणिक ने ज़ोर से हिलाया – हाथ तेज़, लुंड टोपी से गीला हो रहा था. आखिर में वह झाड़ गया – बेहिसाब माल निकला, शावर के फर्श पर गिरता हुआ. उसने ज़ोर से मोअन किया – “ाः… साली… ले… मेरा सब कुछ ले…”

वह थक कर शावर के नीचे बैठ गया. पानी खोला, गरम पानी उस पर गिरा. उसने सांस ली – अब दिल हल्का था. गुस्सा अब ठंडा हो चूका था. पर अंदर एक अजीब सी ख़ुशी थी – जैसे उसने दिव्या को मेंटली पुनीश कर दिया हो.

उधर पारी अपने कमरे में पहुँच गयी थी. दरवाज़ा बंद किया, बीएड पर लेट गयी. उसकी सांसें अभी भी तेज़ थी. कपडे अभी भी पसीने से भीगे हुए थे. उसने अपनी जीन्स का बटन खोला, पंतय नीचे की. ऊँगली छूट पर राखी – वह गीली थी, तड़प रही थी.

पारी: (फुस्फुसाते हुए) भाई… तुमने मुझे इतना उत्तेजित कर दिया… अब मैं कैसे सो पाऊँगी…

उसने ऊँगली अंदर डाली – धीरे से, फिर तेज़. दिमाग में माणिक का चेहरा आ गया – उसका गुस्सा, उसका लुंड जीन्स के अंदर उभरा हुआ, उसकी आवाज़ “तू मेरी है”. पारी ने आँखें बंद की, ऊँगली को andar-bahar करने लगी.

पारी: (मोअन करते हुए) भाई… तुम्हारे हाथ… तुम्हारी आवाज़… ाः… मुझे छोड़ रहे हो… ज़ोर से…

वह तेज़ हो गयी. दूसरी ऊँगली भी दाल दी. छूट गीली, आवाज़ निकल रही थी – chup-chup. उसने पिलो मुँह पर रखा ताकि आवाज़ बहार न जाये.

पारी: (तेज़ मोअन) हाँ भाई… अंदर… पूरा अंदर… मुझे झड़ने दो… तुम्हारे नाम से… ाः…

उसने स्पीड बधाई. दिमाग में माणिक का गुस्सा, उसका लुंड, उसकी आवाज़ – सब घूम रहा था. आखिर में वह झाड़ गयी – ज़ोर से, बदन काँप उठा, माल बहार निकला, बीएड शीट गीली हो गयी. वह थक कर लेट गयी, सांसें तेज़.

पारी: (सांस सँभालते हुए) भाई… तुमने मेरा गुस्सा भी ले लिया… अब हम दोनों एक हैं…

दोनों alag-alag कमरों में थे, पर एक hi ख्याल में – एक दुसरे के. गुस्सा अब वासना में बदल चूका था. रात अभी बाकी थी, पर उनके दिल में एक नयी आग जल रही थी – प्यार की, वासना की, और थोड़ी सी गुस्से की.

सुबह होने वाली थी, पर यह रात उनके रिश्ते को और गहरा कर चुकी थी. अब वह दोनों जानते थे – उनका रिश्ता सिर्फ bhai-behen का नहीं रहा. यह कुछ और था – गहरा, खतरनाक, पर बेइंतेहा मज़ेदार.



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Part -47



आनंद, सविता के साथ अनीता के घर पहुंचा. घर का माहौल खुशनुमा था. अनीता और उसका पति विनोद दोनों hi वहां थे. अनीता ने आते hi आनंद को देखकर मुस्कुराया, और फिर एक गहरी सांस लेकर, खुशखबरी सुनाई — वह गर्भवती थी.

विनोद: (ख़ुशी से आनंद को गले लगते हुए) आनंद! यार, थैंक यू सो मच! देखो, अनीता ने हमारी बात मान ली! आज हमारी इतनी बड़ी ख़ुशी का दिन है!

चाहे बच्चा आनंद का था, जो उनकी पिछली मुलाक़ातों का नतीजा था, पर नाम तो विनोद का hi लग्न था. इस सच्चाई को अनीता और आनंद के अलावा कोई नहीं जानता था.

सविता ने भी आगे बढ़कर अनीता को गले लगाया. हालाँकि, वह आनंद की यौन सफलताओं से ईर्ष्या करती थी, पर अनीता की गर्भावस्था की बात सुनकर उससे कोई ख़ास फरक नहीं पड़ा, क्यूंकि वह जानती थी की यह आनंद की उपलब्ध ी है.

जश्न मानाने के लिए विनोद ने शैम्पेन खोली. कुछ देर तक बातें चलती रही, लेकिन सविता और विनोद को एक शरारती विचार आया.

सविता: (विनोद की तरफ देखकर, आँखों में शैतानी) विनोद! यह खुशखबरी आनंद सर की वजह से आयी है. मुझे लगता है, उन्हें और अनीता को इस पल को प्राइवेट में सेलिब्रेट करना चाहिए. क्या बोलते हो?

विनोद: (हँसते हुए) शानदार आईडिया! आनंद, अनीता को थोड़ा प्राइवेट टाइम दो. तुम दोनों जाओ, और हाँ... हमारे बैडरूम में hi जाना! वहां कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा!

विनोद का यह निमंत्रण, अनजाने में hi, आनंद और अनीता के लिए एक गुप्त निमंत्रण था.

आनंद और अनीता ek-dusre को देखते हैं, उनके चेहरे पर एक हलकी, उत्तेजक मुश्क ाँ थी. वे दोनों बिना किसी संकोच के, विनोद और अनीता के बैडरूम की तरफ बढ़ गए.

बैडरूम का दरवाज़ा बंद होते hi, दोनों की ख़ुशी और बेताबी का बाँध टूट गया.

अनीता: (आनंद की बाहों में कसकर चिपकते हुए) तुम्हे पता है, आनंद! मुझे दर था की यह सब कभी नहीं होगा! और अब...

आनंद: (उसके होठों को चूसते हुए) अब जश्न मानते हैं, मेरी जान! तुमने मुझे एक और ख़ुशी दी है!

उन्होंने तुरंत ek-dusre के कपडे उतार दिए. अनीता का हल्का फूला हुआ पेट आनंद के लिए एक और रोमांचक आकर्षण था.

आनंद ने अनीता को बिस्तर पर लिटाया और उसकी जांघों को अपने कन्धों पर कसकर रखा. वह सीधे यौन क्रिया पर आया, क्यूंकि उनकी वासना चरम पर थी.

आनंद: (आवाज़ भरी) आज कोई धीमा खेल नहीं! आज सिर्फ तुम्हारी इस जीत का जश्न!

आनंद ने अपना लुंड अनीता की योनि में ज़ोर दार तरीके से डाला. अनीता ने एक ज़ोर दार चीख भरी.

अनीता: (आनंद की पीठ पर नाख़ून गड़ाते हुए) हाँ, आनंद! मैं यही चाहती हूँ! मुझे तुम्हारी यह उग्रता पसंद है!

आनंद ने अपनी चौड़ाई की गति को तेज़ और लगातार रखा.

आनंद ने अपनी गति को बनाये रखते हुए, अपना मुँह अनीता के वक्षस्थल (बूब्स) पर रखा और उन्हें zor-zor से चूसना शुरू कर दिया. उसकी जीभ और होठ अनीता के संवेदनशील निप्पल्स पर काम कर रहे थे, और अनीता ख़ुशी और दर्द के मिश्रण से बेकाबू हो रही थी.

अनीता अपने मुँह से उत्तेजक बातें और गन्दी गालियां निकाल रही थी, जो आनंद के जोश को और बढ़ा रही थी.

आनंद: (अनीता के बालों को कसकर पकड़ते हुए) तुम्हे बहुत मज़ा आ रहा है, है न? मेरे बच्चे की माँ!

अनीता: (आनंद की कमर पर टांगें कस्ते हुए) हाँ! बहुत! तुम... तुम सबसे अच्छे हो! मुझे और... और ज़ोर से!

दोनों की यह वासनापूर्ण क्रिया बहुत देर तक चली. आनंद ने अनीता के शरीर को पूरी तरह से निचोड़ दिया. जब आनंद ने महसूस किया की अनीता चरम सुख पर पहुँच चुकी है, तो उसने अंतिम, सबसे ज़ोरदार धक्के लगाए, और अपनी साड़ी ऊर्जा अनीता की गहराई में उतार दी.

अनीता, ख़ुशी, दर्द और सम्पूर्ण समर्पण से भरी हुई, बिस्तर पर निढाल पद गयी. आनंद उसे कसकर पकडे रहा.

यह जश्न, जो बैडरूम में हुआ, उनके गुप्त और जटिल रिश्ते का सबसे उग्र और संतुष्टिदायक पल था.

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मल्लिका अनुज की बाहों में थी और इतनी उत्तेजित हो गयी थी के उसने अपनी पंत निचे सरककर अनुज का लुंड निकाल लिया और चूसने लगी. वह जोश में इतनी खोई हुई थी की उसे यह भी नहीं पता था के इन दोनों को कोई खिड़की की दरार से देख रहा था.

अनुज ने मल्लिका के बाल पकड़ कर उसका मुँह अपने लुंड पर और गहराई से धकेला. मल्लिका zor-zor से चूस रही थी, उसकी जीभ लुंड के सुपारी पर घूम रही थी और kabhi-kabhi पूरा लुंड मुँह में ले लेती थी. अनुज की सांसें तेज़ हो रही थी.

अनुज: (आवाज़ में गरम जोश के साथ) हाँ मल्लिका... ऐसे hi... बहुत अच्छा चूस रही हो... ज़ोर से!

मल्लिका सिर्फ “ममम... ममम” की आवाज़ें निकाल रही थी, उसका मुँह अनुज के लुंड से भरा हुआ था. उसने एक हाथ से अनुज के बॉल्स को हलके से मसलना शुरू कर दिया, जो अनुज को और उत्तेजित कर रहा था.

वह दोनों इतने मदहोश थे की उन्हें बिलकुल भी एहसास नहीं था की बैडरूम की खिड़की के छोटे से दरार से कोई उनकी हर हरकत को देख रहा था.

बहुत देर तक मल्लिका अनुज का लुंड चूसती रही, कभी तेज़ कभी धीरे, कभी सिर्फ सुपारा चुस्ती तो कभी पूरा लुंड गले तक ले लेती. अनुज की टांगें दर्द से कम्प रही थी इतना मज़ा आ रहा था.

अनुज ने आखिर में मल्लिका को ऊपर खींच कर उसके होठों को चूमा और बोलै:

अनुज: “अब बस मुँह से नहीं... अब मैं तुम्हे छोड़ना चाहता हूँ.”

मल्लिका ने मुस्कुराते हुए अपनी स्कर्ट ऊपर की और पंतय साइड में सरकते हुए अनुज के लुंड पर बैठने की कोशिश की. अनुज ने उसकी कमर पकड़ी और एक hi ज़ोर दार धक्के से अपना लुंड मल्लिका की गीली छूट में घुसा दिया.

मल्लिका: “आआह्ह्ह... अनुज... बहुत मोटा है... धीरे... ाः!”

लेकिन अनुज ने धीरे नहीं किया. वह zor-zor से धक्के लगाने लगा. मल्लिका उसके ऊपर upar-down हो रही थी और अपने बूब्स को अनुज के मुँह पर दबा रही थी.

दोनों की चुदाई बहुत वाइल्ड और तेज़ थी. कमरे में सिर्फ उनकी साँसों की तेज़ आवाज़ें और चुदाई की chap-chap की आवाज़ गूँज रही थी.

जो उन्हें देख रहा था, वह सिलेंटली सब कुछ एन्जॉय कर रहा था और अपना लुंड हाथ में पकड़ कर हिलने लगा था खिड़की के बहार से.

इस तरह मल्लिका और अनुज की सीक्रेट चुदाई का यह नया part शुरू हुआ, जिसमें उनकी हर हरकत किसी अनजान आँख के सामने हो रही थी.



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Part - 48

रात काफी हो चुकी थी. अनीता के घर से निकलते वक़्त, आनंद और सविता के मैं में अभी भी उस बैडरूम सेशन की गरम हवास का झोंका महसूस हो रहा था. आनंद तोह पूरी तरह से थक कर भी तृप्त था, लेकिन सविता का शरीर और मैं दोनों एक अलग hi लेवल पर उत्तेजित हो चुके थे. वह सोच रही थी की आनंद ने abhi-abhi उसकी राइवल अनीता के साथ कितनी ज़बरदस्त, कितनी वाइल्ड चुदाई की थी. हर धक्के की आवाज़, हर मोअन, हर “हाँ आनंद… और ज़ोर से!” वाली चीख उसके कान में गूँज रही थी.

सविता अब कण्ट्रोल नहीं कर पा रही थी. जैसे hi वह दोनों आनंद की कार की तरफ बढे, उसने अपनी बेचैनी छुपाये बिना सीधा आनंद से बोल दिया.

सविता: (आवाज़ में बेहताबीपन और ुर्गेनस्य के साथ) “आनंद! मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती. तुम्हे पता है न… मुझे बहुत ज़ोर की चुदाई की तालाब लग गयी है. बहुत तेज़, बहुत गहरी… बिलकुल ऐसी hi जैसे तुमने अनीता को दी!”

आनंद ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोलै, “क्यों? मेरी और अनीता की सक्सेस स्टोरी सुन कर जलने लगी हो क्या?”

सविता: (ज़ोर देते हुए, थोड़ी सी गर्मी के साथ) “जलन नहीं आनंद… यह चैलेंज है! मुझे साबित करना है की मैं उससे कहीं ज़्यादा मज़ेदार, ज़्यादा टाइट और ज़्यादा वाइल्ड हूँ. जो कुछ भी तुमने उसको दिया… मुझे उससे डबल चाहिए! आज रात मैं तुम्हारी हूँ… पूरी तरह से!”

सविता ने तुरंत आनंद का फ़ोन उसके हाथ में थमा दिया और बोली, “अभी फ़ोन करो मेरे पति को. बोल दो की मीटिंग बहुत इम्पोर्टेन्ट है और लम्बी चलेगी. सविता कल सुबह घर आएगी. आज रात वह यहीं रुकेगी.”

आनंद को पता था की सविता का पति विकास उसपर कितना भरोसा करता है. वह आनंद को अपना सीनियर और बहुत इज़्ज़त वाला इंसान मानता था. इसलिए आनंद ने बिना किसी हेसिताशन के फ़ोन उठाया और विकास को कॉल कर दिया.

आनंद: “Hello विकास… हाँ मैं आनंद बोल रहा हूँ. सुनो, आज की मीटिंग बहुत क्रुशल है. डिसकशंस अभी भी चल रही हैं और लगता है रात भर चलने वाली है. सविता को मैं यहीं रोक रहा हूँ. कल सुबह वह डायरेक्टली ऑफिस से घर चली जाएगी. कोई प्रॉब्लम तोह नहीं है न?”

विकास: (बिलकुल बेखबर और भरोसे भरी आवाज़ में) “अरे कोई बात नहीं सर. आप जो ठीक समझें. सविता काम ख़तम करके आराम से आएगी. मैं वेट कर लूंगा. आप दोनों को कोई परेशानी न हो.”

फ़ोन कट करते hi सविता ने विजयी मुस्कान के साथ आनंद की तरफ देखा. उसकी आँखों में एक अलग hi चमक थी – चमक जो लस्ट, जेएलओसी और विक्ट्री का मिक्सचर थी.

सविता: (आनंद की तरफ सेडक्टिव नज़रों से देखते हुए, धीरे से उसके गले में हाथ डालते हुए) “देखा? अब बताओ… अब कहाँ चलें? मैं और इंतज़ार नहीं कर सकती. मेरे अंदर आग लग रही है.”

आनंद ने देर नहीं की. उसने तुरंत कार स्टार्ट की और सिटी के एक बेस्ट 5-स्टार होटल की तरफ कार मोड़ दी. रस्ते भर सविता उसके थिगह पर हाथ फेर रही थी, कभी उसकी चेस्ट को छू रही थी और कभी उसके कान में गर्मी भरी बातें फूसा रही थी – “आज मुझे इतना ठोकना की मैं सुबह तक चल न सकू… समझे?”

कुछ hi देर में दोनों एक लुक्सुरिओउस होटल के सुईठे रूम में पहुँच गए. दूर बंद होते hi सविता ने अपने सारे कपडे एकदम से उतार दिए. उसका सुन्दर, गोरा शरीर बिलकुल नंगा हो गया. उसके टाइट बूब्स, पतली कमर, और gol-gol गांड अब बिलकुल बेखबर थे. आनंद ने भी अपने कपडे उतारे और सविता को देख कर उसका लुंड एक बार फिर से खड़ा हो गया.

जैसे hi दरवाज़ा पूरी तरह बंद हुआ, आनंद ने सविता को दीवार से सताया. उसने उसकी दोनों टांगें अपनी कमर पर कास ली और हाथों से उसकी गांड को तिघ्टलय पकड़ लिया. बिना किसी फोरप्ले के, सीधा अपना मोटा और खड़ा लुंड सविता की गीली छूट में घुसा दिया.

सविता: (दीवार से सर टिकते हुए, ज़ोर से चीखते हुए) “आआह्ह्ह आनंद! हाँ… बस ऐसे hi! आज अपनी साड़ी ताकत लगा दो! मुझे कोई शिकायत नहीं चाहिए! ज़ोर से… और ज़ोर से छोड़ो मुझे!”

आनंद ने पूरी शक्ति से धक्के लगाने शुरू कर दिए. हर धक्का इतना पावरफुल था की सविता का पूरा शरीर upar-neeche हो रहा था. उसकी टांगें आनंद की कमर पर kas-kas कर टाइट हो रही थी. रूम में सिर्फ उनकी साँसों की तेज़ आवाज़ें और स्किन की thap-thap की आवाज़ गूँज रही थी.

आनंद: “ले… ले सविता… यह लो! अनीता को भी ऐसे hi मारा था… अब तू भी ले!”

सविता: (आहें भरते हुए) “हाँ… मारो! बताओ… मेरी छूट उसकी छूट से टाइट है न? ज़्यादा मज़ा आ रहा है न?”

आनंद ने उसको और ज़ोर से छोड़ते हुए जवाब दिया, “बहुत टाइट है तेरी… बहुत ज़बरदस्त!”

थोड़ी देर बाद आनंद ने सविता को बीएड पर ले जाकर उसको घुटनो के बल झुका दिया – क्लासिक डोगग्य स्टाइल पोजीशन. सविता ने अपनी कमर को अच्छे से ुचा किया और गांड पीछे की तरफ निकाल दी. आनंद ने पीछे से उसकी कमर पकड़ी और एक hi धक्के में पूरा लुंड अंदर दाल दिया.

इस पोजीशन में पेनेट्रेशन बहुत गहरा और एग्रेसिव था. हर धक्के के साथ सविता के बूब्स नीचे लटक रहे थे और zor-zor से हिल रहे थे. आनंद ने दोनों हाथों से उसके बूब्स को पीछे से पकड़ कर मसलने शुरू कर दिए. साथ hi उसके कान में dheere-dheere अनीता की बातें फूसा रहा था ताकि सविता की जेएलओसी और एक्ससिटेमेंट दोनों बढे.

आनंद: (धक्के लगते हुए) “अनीता भी ऐसे hi चीख रही थी… ‘आनंद और ज़ोर से… पहाड़ दो मेरी छूट!’ … तू भी चीख न सविता!”

सविता: (zor-zor से मोअन करते हुए) “आआह्ह्ह… हाँ! उससे ज़्यादा… उससे ज़्यादा मज़ा आ रहा है या नहीं? बोल न! मैं उससे बेटर हूँ न?”

आनंद: (तेज़ गति बढ़ाते हुए) “हाँ बेबी… बहुत ज़्यादा! तेरी तिघटनेस… तेरी गांड… सब कुछ कमल है! तू उससे कहीं बेटर है आज!”

सविता की जलन अब पुरे लस्ट में बदल चुकी थी. वह और ज़ोर से पीछे धक्का लगा रही थी ताकि आनंद का लुंड सबसे गहराई तक पहुंचे.

थकने के बाद भी सविता ने कण्ट्रोल लिया. उसने आनंद को बीएड पर लिटाया और खुद उसके ऊपर चढ़ गयी – वुमन ों टॉप पोजीशन. अब वह खुद hi upar-neeche हो रही थी. उसकी गांड zor-zor से ऊपर उठ रही थी और नीचे गिर रही थी. उसके बूब्स भी तेज़- तेज़ उछाल रहे थे. दोनों एक दूसरे की आँखों में सीधा देख रहे थे.

सविता: (तेज़ सांस लेते हुए, अपने बूब्स को और ज़ोर से उछलते हुए) “देखो आनंद… देखो कैसे मैं तुम्हे छोड़ रही हूँ! आज मैं जीत रही हूँ! मेरी जीत का जश्न मन रहे हैं हम दोनों!”

आनंद ने नीचे से उसकी कमर पकड़ कर धक्के दिए और बोलै, “हाँ मेरी जान… छोड़ मुझे… पूरी रात छोड़ मुझे!”

रात भर दोनों ने alag-alag पोसिशन्स में सेक्स किया – मिशनरी, काउगर्ल, रिवर्स काउगर्ल, स्पूनिंग, स्टैंडिंग, अगेंस्ट थे वाल, बाथरूम में शावर के नीचे भी. हर बार सविता अपनी जेएलओसी को निकाल रही थी और हर बार आनंद उसको यह एहसास दिलवा रहा था की वह भी अनीता जितनी hi मज़ेदार और वाइल्ड है, बल्कि आज तोह उससे भी ज़्यादा.

सविता कभी चिल्लाती, कभी रोटी, कभी हस्ती और कभी आनंद के गले से लिपट कर उसको किश करती. उसकी हर इच्छा, हर छोटी सी डिमांड आनंद ने पूरी की. कभी वह उसके बूब्स को चूसना चाहती, कभी उसकी गांड पे थप्पड़ मांगती, कभी दीप्तरोात करना चाहती – सब कुछ.

सुबह होने तक सविता बिलकुल थक चुकी थी लेकिन पूरी तरह से सटिस्फीएड थी. उसका शरीर लाल हो चूका था, छूट में हल्का दर्द भी था, लेकिन चेहरे पर एक अनोखी ख़ुशी थी. उसने महसूस किया की आनंद सच में सेक्सुअल प्लेअसुरे का शिखर है. और अब उसकी अनीता के लिए वाली जेएलओसी पूरी तरह ख़तम हो चुकी थी. अब वह जानती थी की आनंद दोनों को alag-alag तरीके से, alag-alag इंटेंसिटी से सटिस्फी कर सकता है.

सविता ने आनंद के सीने पर सर रख कर धीरे से बोलै, “थैंक यू आनंद… आज तूने मेरी साड़ी आग बुझा दी. अब मैं बिलकुल शांत हूँ. पर हाँ… यह रात मैं कभी नहीं भूलूंगी.”

आनंद ने उसके बाल सहलाते हुए मुस्कुराते हुए कहा, “मैं भी नहीं भूलूंगा. तू भी बहुत वाइल्ड थी आज.”

दोनों थोड़ी देर और ऐसे hi लेते रहे. बहार सुबह की पहली किरण धुप में बदल रही थी, लेकिन रूम के अंदर अभी भी उनकी रात की वाइल्ड चुदाई की खुशबू फैली हुई थी.
 
Part - 49



उसी वक़्त जब पिता आनंद एक hi रात में, जेएलओसी से भरी सविता और ख़ुशी से भरी अनीता — dono-dono औरतों को सटिस्फी कर रहे थे, बिलकुल उसी टाइम बीटा माणिक भी अपने रूम में एक बेकाबू आवेग से जूझ रहा था.

माणिक, अपनी बेहेन पारी के होठों की अच्छी तरह से चूसै करने के बाद, बीएड पर अकेला था. उसने अभी तक पारी की सलाह पर अमल नहीं किया था. वह इस वक़्त सिर्फ अंडरवियर में था और उसका लुंड पूरी तरह से तन कर खड़ा हो चूका था. पारी की नज़दीकी और दिव्या की नफरत — दोनों ने मिलकर उसे एक तूफानी सिचुएशन में ला दिया था.

उसे अभी भी दिव्या पर बहुत गुस्सा आ रहा था. वह नफरत जो बुलेट से शुरू हुई थी, अब सेक्सुअल रिवेंज में बदल रही थी. माणिक ने दिव्या को सबक सीखने का फाइनल डिसिशन ले लिया था.

वह उसी तरह सिर्फ अंडरवियर में — अपने तन चुके लुंड को क्लेअर्ल्य दिखते हुए — jaan-bujhkar बीएड से उठा. उसने अपने गुस्से और सेक्सुअल एक्ससिटेमेंट को फ्यूल बनाया और दिव्या के रूम की तरफ चल दिया.

माणिक ने दिव्या के रूम का दरवाज़ा khat-khataya, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. उसने थोड़ा धक्का दिया तो देखा की रूम खुला hi था.

माणिक ने बिना किसी झिझक के एकदम से दरवाज़ा खोल दिया.

दिव्या, जो दिन भर कॉलेज की थकान और रोहन से निराशा के बाद आराम से अपने बीएड पर लेती हुई थी, इस अचानक एंट्री से चौंक गयी.

दिव्या ने खुद को शांत करने और अपनी निराशा दूर करने के लिए, शायद कुछ देर पहले hi, अपने फ़ोन पर पोर्न देखना शुरू कर दिया था. वह अभी भी अपने एअरफोन्स में किसी इंटेंस सन की आवाज़ सुन रही थी.

जैसे hi माणिक रूम में घुसा, दिव्या ने अपने भाई को सिर्फ अंडरवियर में, अपना तन चूका लुंड दिखते हुए देखा और वह एकदम से चौंक गयी! उसका दिल ज़ोर से धड़का और उसके हाथ से फ़ोन छूट गया.

माणिक भी उस वक़्त ठहर गया, क्यूंकि उसने अपनी बेहेन को उस हालत में पकड़ लिया था जहां वह खुद सेक्सुअल कंटेंट देख रही थी. दोनों bhai-behen ek-dusre के प्राइवेट, वर्जित सच को देखकर एक असहज और टेंशन भरी सिचुएशन में जैम गए.

माणिक रूम के दरवाज़े पर खड़ा था, सिर्फ अंडरवियर में, उसका तन चूका लुंड साफ़ दिखाई दे रहा था. दिव्या अपने बीएड पर बैठी, एअरफोन्स हाथ से छूटा हुआ, पूरी तरह से स्तनद थी. उसके फ़ोन की स्क्रीन पर अभी भी सेक्सुअल सन चल रहा था, जिससे रूम का टेंशन असहनीय हो गया.

माणिक को अपनी बेहेन के रूम में घुसने का असली वजह याद hi नहीं रहा. उसका सारा गुस्सा अब इस सन पर सेण्टर हो गया.

माणिक: (आवाज़ में गुस्सा और अविश्वास) तुम... तुम यह क्या देख रही हो? पोर्न?

दिव्या तुरंत घबराहट से अपने फ़ोन को चादर से छुपाने की कोशिश की, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी.

दिव्या: (गुस्से और घबराहट से) तुम... तुम मेरे रूम में क्या कर रहे हो? और... और किस हाल में आये हो? तुम्हे शर्म नहीं आती!

माणिक: (आक्रामक रूप से आगे बढ़ते हुए) मुझे शर्म आणि चाहिए? और तुम्हे नहीं आ रही है? जो इतनी badi-badi बातें करती हो, हमेशा मुझे ज्ञान देती हो — तुम अकेली में यह सब देखती हो? तुम कितनी बड़ी ढोंगी हो!

माणिक की इस बात पर दिव्या का गुस्सा फिर भड़क उठा, लेकिन इस बार वह अपनी दबी हुई वासना और पकडे जाने की शर्म के कारन और भी ज़्यादा आक्रामक हो गयी.

दिव्या: (चिल्लाते हुए) हाँ, देखती हूँ! और तुम क्या समझते हो? तुम बड़े दूध के धुले हो? तुम क्या कर रहे हो? सिर्फ अंडरवियर में मेरे रूम में अपना खड़ा हुआ लुंड दिखने आये हो? क्या तुम अपनी बेहेन को छेद रहे हो?

दिव्या ने jaan-bujhkar “खड़ा हुआ लुंड” शब्द का इस्तेमाल किया था, ताकि माणिक को पता चले की वह भी उसके इरादे भांप चुकी है.

माणिक: (उसे चिढ़ाने के लिए, jaan-bujhkar अपना लुंड दिखते हुए) तो क्या हुआ? तुम्हे तो यह सब देखना पसंद है न? तभी तो अपने रूम में बैठ कर यह सब देखती हो!

दिव्या: (तेज़्ज़ी से बीएड से उठते हुए, अपनी मर्यादा भूलकर) तुम्हारी क्या प्रॉब्लम है? तुम मुझसे इतना जलते क्यों हो? हमेशा मुझ पर इलज़ाम लगते हो! तुम्हारे पास तुम्हारी बुलेट है, तुम्हारी गर्लफ्रेंड होगी — लेकिन तुम मुझसे हमेशा नफरत क्यों करते हो?

माणिक: (गुस्से से दहाड़ते हुए) मैं तुमसे नफरत करता हूँ क्यूंकि तुम हमेशा मुझे नीचे दिखती हो! और तुम पूछती हो की मेरी प्रॉब्लम क्या है? तुम्हारी छूट में आग लगी हुई है! इसीलिए तुम अकेली में यह सब देखती हो!

माणिक ने jaan-bujhkar सबसे गंदे और उत्तेजक शब्दों का इस्तेमाल किया.

दिव्या, इस घिनौनी बात को सुनकर एक पल के लिए काँप गयी, पर उसने हिम्मत नहीं हारी.

दिव्या: (आंसू आँखों में भर कर, पर दृढ़ता से) हाँ! लगी है! और तुम्हारी भी तो लगी हुई है! इसीलिए तुम अपनी बेहेन के पास, इस हाल में आये हो! तुम्हे लगता है तुम अपनी हर इच्छा पूरी कर लोगे और मैं चुप रहूंगी? मैं तुम्हारी तरह गन्दी नहीं हूँ!

दोनों bhai-behen ek-dusre के सामने, नग्न वासना और उग्र नफरत के बीच खड़े थे. दिव्या ने तुरंत दरवाज़े की तरफ इशारा किया.

दिव्या: निकल जाओ मेरे रूम से! अभी! और अगर अगली बार मेरे रूम में इस हाल में आये, तो मैं पापा को बता दूंगी की तुम अपनी बेहेन को...

दिव्या ने अपनी बात पूरी नहीं की, लेकिन उसका इशारा बिलकुल क्लियर था. माणिक की उत्तेजना, दर और शर्म के मिश्रण में शांत होने लगी. वह जानता था की उसने हद पार कर दी है. वह बिना कुछ कहे, गुस्से से अपनी मुट्ठियां भींचता हुआ दरवाज़े से बहार निकल गया, दिव्या को अकेला और गुस्से में छोड़कर.

********************************

दरवाज़ा बंद होते hi, दिव्या तेज़्ज़ी से बीएड पर बैठ गयी. उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था. उसने तुरंत फ़ोन को छुपाया और खुद को कास कर पकड़ लिया.

दिव्या का विचार:

उसके दिमाग में तुरंत खतरा बज उठा. “हे भगवन! मेरे भाई ने मुझे पोर्न देखते पकड़ लिया! अगर उसने किसी को, खासकर अनु दीदी या पापा को बता दिया तो क्या होगा? मेरी साड़ी इज़्ज़त ख़तम हो जाएगी! सब सोचेंगे की मैं कितनी घटिया हूँ!”

उसे एहसास हुआ की माणिक ने उसे एक बहुत hi प्राइवेट और शर्मनाक सिचुएशन में पकड़ा था. यह उसे एक बहुत बड़ी कमज़ोरी दे गया था.

साथ hi, वह खुद भी सोचने लगी की उसने माणिक के मामले में over-react कर दिया. “ठीक है, वह अंडरवियर में आया था, पर मेरा चिल्लाना और उस तरह अपशब्दों का इस्तेमाल करना शायद ज़्यादा था. वह तो बस गुस्से में था.” दिव्या जानती थी की माणिक को उस अपमान का बदला ज़रूर चाहिए होगा.

माणिक का विचार:

माणिक अपने रूम में लौट आया था और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया. वह अभी भी उत्तेजित था, लेकिन अब उसकी उत्तेजना पर दर हावी हो चूका था.

“मैं ने यह क्या कर दिया? मैंने गुस्से में आकर उसे ‘छूट’ कह दिया और अंडरवियर में, खड़ा हुआ लुंड लेकर उसके रूम में चला गया! अगर दिव्या ने यह बात कहीं किसी को बता दी — खासकर अनु दीदी या पापा को — तो क्या होगा? वह मेरी बुलेट, मेरी पूरी आज़ादी, सब चीन लेंगे!”

माणिक को एहसास हुआ की इस टकराव में दिव्या ने भी उसे एक बड़ी कमज़ोरी दे दी थी — वह जानती थी की माणिक की वासना और गुस्सा किस हद तक जा सकता है.

अघोषित समझौता:

दोनों bhai-behen apne-apne रूम्स में बैठे थे, दर और शर्म से भरे हुए.

• माणिक का दर: दिव्या कहीं “अंडरवियर” और “खड़े लुंड” वाली बात न बता दे.

• दिव्या का दर: माणिक कहीं “पोर्न” देखने वाली बात न बता दे.



दोनों ने अनजाने में hi एक अघोषित समझौता कर लिया था: “तुम मेरा राज़ रखो, मैं तुम्हारा राज़ रखूँगा.” वे दोनों जानते थे की अब वे ek-dusre के खतरनाक राज़दार बन चुके थे.
 
दोस्तों जैसा के आप लोगों को पता है हिंदी कहानियों का कांटेस्ट चल रहा है तो मैंने भी बाप बेटी पर एक इन्सेस्ट स्टोरी लिखी HAI...PLEASE आप उसे पढ़कर रिव्यु थ्रेड में रिव्यु दे देना ताकि आपके फेवरेट लेखक की कहानी को कोई अच्छा स्थान मिल SAKE...LINK निचे दिया है....

https://xforum.live/threads/★☆★-xfo...st-2026-entry-thread-★☆★.217468/post-12201509

रिव्यु का लिंक चाहिए होगा तो बता DENA...KAISE करना है मैं बता DUNGA....PLEASE मुझे वहां काम से काम 200 लाइक्स और 100 कमैंट्स CHAHIYE...BAS मेरी रिक्वेस्ट मान लीजिये फिर आप लोगों को एक तड़कती भड़कती नयी कहानी दूंगा....
 
Part - 50

अनु, उस दिन विक्रम से मिली असहजता के बाद, थोड़ी परेशां थी. मल्लिका की बातों ने उसे कुछ देर के लिए शांत किया था, लेकिन अनु को कुछ ज़रूरी कागज़ात के बारे में मल्लिका से तुरंत बात करनी थी. उसने सोचा की मल्लिका के पास जाकर सीधे बात करना ज़्यादा आसान होगा, और उसने मल्लिका को फ़ोन करके बताना ज़रूरी नहीं समझा. यह एक बड़ी गलती थी.

अनु मल्लिका के अपार्टमेंट पहुंची. उसने देखा की दरवाज़ा थोड़ा सा खुला hi मिला. अनु को लगा की शायद मल्लिका बालकनी में होगी.

अनु: (हलकी आवाज़ में दरवाज़े के पास से) मल्लिका? क्या तुम अंदर हो?

कोई जवाब नहीं आया. अनु को लगा की शायद मल्लिका हेडफोन्स में होगी. वह धीरे से अंदर चली गयी.

जैसे hi अनु उसके बैडरूम के दरवाज़े के पास पहुंची, तोह वह दृश्य देखकर पूरी तरह से स्तब्ध रह गयी.

मल्लिका, एक नए, अनजान लड़के के ऊपर बैठी थी और पूरी उग्रता के साथ उससे चौड़ाई करवा रही थी. मल्लिका पूरी तरह से नंगी थी, और वह लड़के की कमर को कास कर पकडे हुई थी. दोनों का शरीर पसीने से भीगा था और उनके चेहरे पर तीव्र वासना का भाव था.

मल्लिका ने आवाज़ सुनकर दरवाज़े की तरफ देखा. उसे अनु को अचानक वहां देखकर एक पल का भी संकोच नहीं हुआ, बल्कि उसके चेहरे पर एक चमकीली, शरारती मुस्कान आ गयी, जैसे की उसने कोई मज़ाकिया बात सुनी हो.

मल्लिका ने अपनी गति जारी राखी, और बिना किसी शर्म के, उसने अनु को खुलेआम आमंत्रीत किया.

मल्लिका: (हँसते हुए, गहरी सांस लेते हुए) अरे! आओ, आओ, अनु! तुम बिना बताये आ गयी! बैठो! कुछ लोगी क्या? कॉफ़ी? या... शैम्पेन?

मल्लिका ने अपनी बात कहते हुए, लड़के के ऊपर एक ज़ोर दार उछाल मारी.

अनु को खुद पर गुस्सा आ गया की वह इस तरह से क्यों आयी. वह इतनी असहज हो गयी की उसे समझ नहीं आया की वह क्या करे. वह मल्लिका के खुलेपन से भौचक्की थी.

अनु ने तुरंत अपनी आँखें बंद की, जल्दी से मुद्दि, और दरवाज़ा बंद कर दिया. वह तुरंत लिविंग एरिया में पड़े सोफे (काउच) पर जाकर बैठ गयी. उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, और उसके गाल शर्म से गरम हो रहे थे. उसके कानों में अभी भी मल्लिका की आवाज़ और उन दोनों की चौड़ाई की आवाज़ें गूँज रही थी.

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अनु को सोफे पर बैठे लगभग पंद्रह मिनट हो चुके थे. उसके मैं में अभी भी उस दृश्य का विचार घूम रहा था. उसकी बेचैनी थोड़ी काम हुई hi थी की बैडरूम का दरवाज़ा खुला.

मल्लिका बहार आयी. वह अब एक बाथरोब में थी, और उसके साथ वह नया लड़का भी था. लड़का भी एक T-shirt और लोअर में था.

मल्लिका ने अनु को देखकर एक बार फिर शरारती मुस्कान दी और लड़के के कंधे पर हाथ रखा.

मल्लिका: (पूरे आत्मविश्वास और हल्केपन से) अनु, मिलो मेरे बॉयफ्रेंड आर्यन से. आर्यन, यह है अनु, जिस के बारे में मैं तुम्हे बता रही थी.

आर्यन ने आगे बढ़कर हाथ मिलाया. वह भी मुस्कुरा रहा था, जैसे की उसे कोई शर्म या पछतावा न हो की अनु ने उन्हें abhi-abhi किस हालत में देख लिया था. मल्लिका और आर्यन दोनों hi पूरी तरह से नार्मल थे.

अनु ने किसी तरह खुद को संभाला. उसका मैं मल्लिका के इस खुलेपन पर नाराज़ हो रहा था.

अनु: (थोड़ा मुँह बनाकर और नाराज़गी से) नीस तो मीट यू, आर्यन. मल्लिका... यह कौनसे नंबर का बॉयफ्रेंड है? मुझे याद नहीं है की मैंने तुमसे आखरी बार कब बात की थी.

मल्लिका इस सवाल पर ज़ोर से हंसी. आर्यन भी मल्लिका के कंधे पर हाथ रखकर हंसने लगा.

मल्लिका: (हँसते हुए, लापरवाह अंदाज़ में) शायद 7तह या 8तह होगा! मुझे भी ठीक से याद नहीं है. पर क्या फरक पड़ता है! है है है.

मल्लिका और आर्यन दोनों hi zor-zor से हंसने लगे. अनु उनकी इस बेफिक्र, खुले व्यवहार से परेशां सी हो गयी. अनु के लिए यह सब अनैतिक और गलत था, जबकि मल्लिका और आर्यन के लिए यह एक मज़ेदार मज़ाक था. अनु के मैं में एक बार फिर अपने घर की, अपनी मर्यादाओं की तुलना मल्लिका की आज़ाद ज़िन्दगी से हुई, और वह बस सोफे पर बैठी असहज महसूस करती रही.

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मल्लिका और आर्यन की हंसी पूरे लिविंग एरिया में गूँज उठी. अनु को यह सब बहुत hi अजीब और अटपटा लग रहा था. मल्लिका ने हंसना बंद किया और सोफे के पास आकर बैठ गयी, जहाँ अनु बैठी थी. आर्यन पास hi खड़ा था, अभी भी मुस्कुरा रहा था.

मल्लिका: (अनु के कंधे पर हाथ रखते हुए) अच्छा, अब बताओ. तुम इतनी घबराई हुई क्यों लग रही हो? क्या हुआ? तुम बिना बताये, बिना कॉल किये क्यों आ गयी?

अनु: (थोड़ा सख्ती से) तुम्हे पता है, मल्लिका. मैं तुम्हे फ़ोन करने वाली थी, लेकिन मुझे कुछ ज़रूरी फाइल्स चाहिए थी जो मैंने पिछली बार यहाँ छोड़ी थी. और हाँ... तुम्हे दरवाज़ा खुला नहीं छोड़ना चाहिए था!

मल्लिका: (आर्यन की तरफ देखते हुए, आँख मारते हुए) हाँ, हमे पता है. पर हम थोड़ा बिजी थे. वैसे, मुझे तोह लगता है की यह अच्छा हुआ की तुमने देख लिया. काम से काम तुम्हे पता तोह चला की मैं यहाँ क्या कर रही हूँ. अब तुम झूठे दिखावा वाली चीज़ों को लेकर इतनी परेशां नहीं होगी.

आर्यन: (हँसते हुए) हाँ, अनु. मल्लिका बहुत ओपन माइंडेड है. यह किसी चीज़ को छिपाती नहीं है.

अनु: (आर्यन की बात पर चिढ़ते हुए) ओपन माइंडेड? मल्लिका, क्या तुम कभी नहीं सोचती की इन सब का क्या नतीजा होगा? तुम हर हफ्ते बॉयफ्रेंड बदलती हो!

मल्लिका: (शांत होकर, लेकिन आत्मविश्वास से) नतीजा? अनु, मैं अपनी ज़िन्दगी जी रही हूँ, जो मुझे ख़ुशी देती है. मैं अपने बॉस से नहीं डर्टी, मैं अपनी सोसाइटी से नहीं डर्टी. मुझे किसी पुरुष की ज़रुरत नहीं है जो मुझे बताये की मुझे क्या करना है. और हाँ, मैंने कोई गलती नहीं की है.

मल्लिका ने जानबूझकर यह सब कहा, क्यूंकि वह जानती थी की अनु हमेशा अपने परिवार की इज़्ज़त और मर्यादा की परवाह करती है.

मल्लिका: (शरारती अंदाज़ में) अच्छा, तुम बैठो. मैं तुम्हारे लिए कुछ कॉफ़ी लाती हूँ. और हाँ, आर्यन, तुम अनु को वह गाने दिखाओ जो हमने अभी डाउनलोड किये हैं.

मल्लिका किचन की तरफ बढ़ गयी. अनु को लगा की वह मल्लिका को बदलने नहीं आयी थी, बल्कि खुद मल्लिका की दुनिया को देखकर और ज़्यादा परेशां हो गयी थी. अनु, सोफे पर बैठी, आर्यन के पास रखे उस सोफे को घूरने लगी, जहाँ कुछ मिनट पहले मल्लिका और आर्यन अंतरंग थे.



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