Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 14 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-125

रात भर मल्टी के सपनो में रवि hi था जो उसे लगातार चोदे जा रहा था

उसकी बरसो की प्यास को बुझाने का रास्ता उसे रवि कल रात दिखा गया था

सुबह हो चुकी थी सब जान अपने काम में व्यस्त थे वही मल्टी भी आज काफी खुश थी क्योंकि रात के बाद से उसे अब पता था की जल्द hi उसे उसका मनपसंद लुंड मिलने वाल है

इधर रवि और रेखा अब भी एक दूसरे से चिपके सो रहे थी

मेघा दीदी की नजर उठते hi रवि और रेखा पारर पड़ती है

रेखा जोकि रात को hi अपना ब्लाउज उतार चुकी थी

रेखा की चूचिया बिलकुल नंगी थी और रवि का हाथ रेखा की एक चुकी के ऊपर था

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रवि के हाथ को देख कर ऐसा लग रहा था मनो उसने खुद से hi रेखा दीदी की चुकी को जबरदस्त तरिके से पकड़ रखा हो

मेघा दीदी को भी आज पहली बार यह अहसास हुआ था

मेघा( हे भगवान् इनदोनो को कोई इस हालत में देखेगा तो कोण बोलेगा की ये दोनों भाई बेहेन है ये रेखा तो है hi बेशरम अब रवि को भी बिगाड़ रही है अपने नंगे शरीर से चिपका कररर)

कहि न कहि मेघा दीदी के अंदर एक जलन थी की क्यों रवि रेखा से चिपका हुआ है न की उनसे

खैर थोड़ी hi देर में रेखा भी उठ जाती है और अब तक मेघा दीदी भी कमरे के बहार जा चुकी थी

रेखा - अरे ूठः न कितना सोयेगा तू रवि

रवि- दीदी सोने दोना

रेखा - इधरर तेरी दीदी की छूट में खुजली हो रही है और तुझे नींद आ रही है कैसा भाई है रे चू देख तो कितना पनिया गयी है तेरी दीदी की छुटत

रेखा अपना पेटीकोट उठती हुई सीधा रवि की छाती पारर चढ़ जाती है

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रवि अपनी आँखे खोल कर देखता है और रेखा दीदी की छूट को आगे बढ़ता हुआ चुम्म लेता है

रवि- दीदी रात को तो सू गयी थी तुम जल्दी और अब तुम्हारी छूट पानी छोड़ रही है

रेखा- तो रात को जगाया क्यों नहीं

रवि- मैंने सोचा आपकी तबियत खराब होगी

रेखा- अच्छा मेरी तबियत खराब होगी तो मैं क्या अपने छोटे भाई के लुंड को तड़पता हुआ छोड़ दूंगी

रेखा अपना हाथ आगे बढ़ा कर रवि के लुंड को धोती के ऊपर से hi पकड़ लेती है

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रेखा- भले hi मेरी कितनी भी तबियत खराब रहे मेरे छेद तेरे इस मुसल के लिए हेमशा hi खुले रहेंगे समझा

चल अब उठ जा जल्दी सी

रवि- दीदी आपने तो सुबह सुबह hi इतनी मस्त चीज़ज़ दिखा दी की अब जब्ब तक्क तुमको रगड़ कर छोडूंगा नहीं तब्ब तक्क ये लुंड ऐसे hi फनफनाता रहेगा

रेखा - सब्र करले मेरे भाई थोड़ा वैसे भी सब्र का फल बहुत मीठा होता है अभी उठ जा दोपहर में मैं खेतो पर आउंगी तब जितना कहे उतना रगड़ लेना अपनी दीदी को

रवि- दीदी दोपहर को क्यों

रेखा- तो क्या अभी चलु तेरे साथ खेतो पारर

रवि- हां चलो ना

रेखा- अच्छा ताकि तू दिन भर छोड़ छोड़ कर मेरी गांड का छेद फैला दी

रवि - दीदी आपकी गांड hi ऐसी है की उसे देखने के बाद बिना चोदे रहा hi नहीं जाता

रेखा - बड़ा कमीना है तू दिन रत अपनी दीदी की गण्ड मरने की फिराक में hi लगा रहता है

चल उठ जा जल्दी आउंगी में खेतो में तब जो करना हो कर लेना मेरे सठह

रेखा अपना ब्लाउज पहनने लगती है और रवि उठ कर अपने लुंड कक धोती में छुपता हुआ जैसे hi बहार निकलता है उसे सामने hi मल्टी बैठी नजर आ जाती है

मल्टी जोकि रवि और रेखा की साडी हरकतों को देख देख कर काफी गरम हो चुकी थी जैसे hi उसकी नजर रवि की धोती पारर पड़ती है उसके नथुने फूलने लगते है

ये वही लुंड था जिसके मुखछोडन की वजह से अभी टककक मल्टी का गला दररड कर रहा था

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रवि और मल्टी की नजरे हैसे hi मिलती है दोनों एक दूसरे को एक नजर देखते हुए दुबारा से एक दूसरे के मादक अंगो को देखने लगते है

कुछ देर बाद रवि अपना लुंड मसलता हुआ बहार निकल जाता है

और मल्टी वही बैठी बैठी उस लुंड से छोड़ने की कल्पना में खो जाती है

रवि नाश्ता करके खेतो की और निकलने लगा था तभी उसे मल्टी दिखाई पड़ती है जो घर के पिछवारे की और जा रही थी

रवि भी मल्टी के पीछे जाता है और जैसे hi वो घर के पीछे पहुँचता है उसे मल्टी बैठी हुई दिखाई देती है

मल्टी की गांड रवि की तरफ थी जिसे देख कर रवि अपना लुंड मसलने पारर मजबूरर हो चुका था

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मल्टी भी किसी अप्सरा से कम् नहीं थी

इधर मल्टी की छूट से एक मादक आवाज़ज के साथ पिशाब बहार आने लगता है जिसे देख कर रवि अपने आप पर काबू नहीं रख पता और अपना हाथ अपनी धोती पर ले जाता हुआ साइड से लुंड बहार निकल कर मसलने लगता है

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मल्टी जैसे hi पलटती है उसे सामने hi उसका देवरर दिखाई पड़ता है जो उसे देख कर अपना लुंड मसल रहा था

एक बार को तो मल्टी को वो लुंड देख कर डर लगता है जिसने रात को उसका मुह्ह छोड़ा था

पर अगले hi पल मल्टी अपनी गांड मटकती हुई रवि के नजदीक पहुँचती है और बड़े hi मादक अंदाज में अपने हाथ पर थूकती हुई सीधा रवि का लुंड पकड़ लेती है

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मल्टी- अह्ह्ह्ह कितना बड़ा है देवरर जी अआप्का मुसल

रवि- क्यों भाभी पहले कभी इतना बड़ा नहीं देखा क्या

मल्टी- अगर देखा होता तो आज तक्क प्यासी न रहती

मल्टी अब तक्क अपने दूसरे हाथ को भी काम पर लगा चुकी थी अब वो अपने दोनों हाथो से रवि के लुंड को मसल मसल कर मुठिया रही थी

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रवि- भाभी आपकी तो शादी हो गयी है फिर भी आप प्यासी हो केशव भैय्या के पास नहीं है क्या ऐसा मुसल

रवि की बात सुनकर मल्टी को हसी hi जाती है

मल्टी- हहहहह

मुसल तुम्हरे भाई की तो लुल्ली है और इतना जान लो देवर जी मेरी बास शादी हुई है सील अभी टककक नहीं टूटी

अभी रवि कुछ बोलता उससे पहले hi मेघा दीदी की आवाज आ जाती है

हड़बड़ी में मल्टी तो घर की और भगति है और रवि अपने विशाल लुंड को धोती से ढकता हुआ खेतो की तरफ चल देता है

रवि को आज दूर वाले खेतो में काम था वो जल्दी hi उस तरफ चला जाता है ताकि जल्दी काम ख़तम करके दिन भर रेखा दीदी को थोक सखे

इधर करीब 10 बजे रेखा रवि का खाना लेकर निकलने को होती है

तभी मल्टी भी उसे साथ चलने को बोलती है पर रेखा मुह्ह बनती हुई साफ़ साफ़ मना कर देती है की वो अपने साथ किसी को भी नहीं ले जाएगी

मेघा दीदी भी कुछ नहीं बोलती और बज्चारी मल्टी वही कमरे में जाकर अपनी कामवासना पर काबू करने की कोशिश करती है

इधर हरिया और नीलम दोनों अपने खेतो में खत पर बैठे थी

उधर से रेखा अपनी भरी भरकम गांड मटकती हुई चली आ रही थी

हरिया- देख तो कैसे रंडी की तरह चल रही है कुटिया

नीलम- बापू इसके मुह्ह लग्ग कर फायदा नहीं है इसका भाई और ये दोनों hi बहुत कमीने है

रेखा भी हरिया और नीलम को देखती है

रेखा- क्या बात है नीलम आज काका को यही खेतो में खुश करेगी क्या

रेखा एक टोंट मरती हुई आगे को निकल जाती है

हरिया - इस कुटिया को तो सबक सीखना पड़ेगा आज

नीलम- बापू इस रंडी पारर कोई रेहम मत्तट करना

हरिया- तेरी कसम बेटी आज ये तेरे सामने गिड़गिड़ा कर भीख मांगेगी और जब तू बोलेगी तभी छोडूंगा मैं इसे

नीलम- कोई भी छेद मैट छोड़ना बापू इस कुटिया का सबको अपने माल से बाहर देना

हरिया नीलम का हाथ पकड़ता हुआ उसे अपने साथ लेकर रवि के खेतो की और चल देता है....
 
अपडेट-126

रेखा अपनी झोपडी के अंदर जाकर आराम से अपनी टंगे फैलाये अपना पसीना सूखा रही थी

इधर हरिया नीलम को लिए उसी झोपडी की और बढ़ा चला जा रहा था

हरिया झोपडी के पास पहुँचता हुआ अंदर झक कर देखता है की कहि रवि तो नहीं ह यहां

उसे सिर्फ और सिर्फ रेखा दिखाई देती है जोकि अपनी टंगे इस तरह फैला कर बैठी थी की उसकी मांसल जंघे हरिया को साफ़ नजर आ रही थी जिन्हे देखते hi उसके मुह्ह में पानी आ गया था

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हरिया- बेटी अकेली है तेरी शैली

नीलम को आज अपने बापू की आँखों में एक अजीब सी चमक दिख रही थी मनो उसने वो पा लिया हो जिसके लिए वो तरस रहा था

नीलम- तब तो आज तुम्हारे सरे अरमान पुरे हो जायेंगे बापू

पर कसम है मेरी उस कमीनी पारर बिलकुल रेहम मैट करना

हरिया एक झटके के साथ अंदर घुस जाता है और उसके पीछे पीछे उसकी बेटी भी

रेखा अच्चानक से दोनों बाप बेटी को देख कर डर सी जाती है

नीलम- क्यों रे कमीनी बड़ी आराम से टंगे फिआला कर बैठी है अपने छोड़ू भाई का इन्तजार कर रही थी क्या

रेखा- क्यों रे बुड्ढे अब इसे लेकर क्यों आया है आज राजी हो गयी क्या ये दुबारा से मेरे छोड़ू भाई का लुंड अपनी टैंगो के बिच लेने के लिए

नीलम को रेखा की इस बात पारर गुस्सा आ जाता है

नीलम- चुप साली रंडी आज तो तेरी खैर नहीं मेरा बापू आज तेरी छूट और गांड दोनों फाड़ेगा

नीलम आगे बढ़ती हुई सीधा रेखा के बाल पकड़ लेती है

रेखा- बड़ी आयी तू और तेरा ये चक्का बाप

रेखा अपने हाथ से नीलम की गर्दन पकड़ती हुई एक उलटे हाथ का जोरदार छठा मरती है

एक hi पल ने नीलम के कान सुन्न ोाद चुके थे रेखा उसे धक्का देती हुई गिरा देती है

तभी हरिया को भी गुस्सा आता है और वो अपना हाथ उठाने hi वाला था की तभी उसे पीछे से एक जोरदार लात पड़ती है

हरिया संभाल कर पीछे देखता hi है की एक जोरदार मुक्का सीधा उसके चेहरे पारर पड़ता है

मुक्का इतना जोरदार था की हरिया एक मुक्के में hi बेहोश हो गया था

रेखा- आया था मेरी छूट और गांड की धजिया उड़ने अब बाप बेटी दोनों पड़े धूल चाट रहे है

हहहहह

रवि- अच्छा तो इन हरामियों की इतनी हिम्मत की मेरे hi खेत में आकर मेरी hi दीदी को छोड़ने के सपने देख रहे थे

नीलम को कुछ कुछ सुनाई देना चालू हो गया था

रवि गुस्से में हरिया की तरफ बढ़ता है जो अबतकक बेसुध पड़ा हुआ था

रवि- दीदी आप बोलो तो इस हरामी बुड्ढे को मार कर यही खेत में hi दफना दू

रवि की बाटे सुनकर नीलम बुरी तरह डर गयी थी क्योंकि वो एक बार उस जानवर को देख चुकी थी जो रवि के अंदर छुपा हुआ था

रेखा - अरे नहीं नहीं भाई तू इस बुड्ढे को मार देगा तो इस रंडी को चुड़ते हुए कोण देखेगा आखिर इसका बाप भी तो देख ले की रेखा और रवि से पन्गा लेने का क्या अंजाम हो सकता है

रेखा की बात सुनते hi नीलम चौकटी हुई उसकी और देखती है

रेखा- ऐसे चौक मैट मेरी शैली आज फिर से तेरी गांड का बजा बजने वाला है

हहहहहह

नीलम को अंदाजा हो चुका था की अब उसके साथ क्या होने वाला है

उसे अब दुबारा से अपने बाप के चूतियापे पर गुस्सा आ रहा था

पर आखिरी वक्त्त में भी नीलम एक आखिरी कोशिश कर है भागने की पर जैसे hi वो दरवाजे की और बढ़ती उससे पहले hi रवि उसे भी एक जोर्डरर तमाचा जड़ देता है जिससे वो भी बेसुध गिरर्र जाती है

रवि- अब खा भागोजी नीलम दीदी आज तो तुमको मेरा लुंड बैठने के बाद hi यहां से निकलने का मौका मिलेगा

हाहाहाहा

हहहहहहहहहह......
 
भाई तू मेरे ऊपर एक अहसान कर और ये कहानी पढ़ना छोड़ दे

क्यों की अपडेट तो तभी आएगा जब मेरे पास टाइम होगा

किसी. Hi समय अपडेट लिखना मुमकिन नहीं होता

आराम से बैठ कर सोचना पड़ता है सीन क्रिएट करना पड़ता है

यह मामला कॉपी पेस्ट वाला नहीं है

बीआरओ आप न कॉपी पेस्ट वाली स्टोरी पढ़ो करो वही आपको रेगुलर अपडेट मिलेंगे

मुझे तो जॉब भी करनी है और जॉब सबसे जरूरी है जब टाइम मिलेगा तो मैं खुद hi अपडेट दूंगा

धन्यवाद्......
 
अपडेट-127

आज सुबह से hi मल्टी रवि की रात वाली हरकत के बारे में सोच रही थी

पता नहीं क्यों रह रह कर उसका मैं रवि के पास जाने का कर रहा था

वो रात को hi समझ चुकी थी की रवि के मासूम चेहरे के पीछे एक भूखा भेड़िया छुपा है जो उसके गदराये जिस्म को पूरी तरह छत्त करने की फिराक में है वो भी हड्डी समेत

पारर ये सब जानते हुए भी अब मल्टी अपना मादक जिस्म रवि के हवाले कर देना कहती थी कहे उसका देवर उसके साथ जो भी करे उसे सबब मंजूरर था

आलम ये था की कल रात से अब तक्क मल्टी की छूट रॉस टपकाये जा रही थी जिसे रोकना अब सिर्फ और सिर्फ मल्टी के भोले देवरर के हाथ में था

आखिर में मल्टी का मैं विचलित हो उठता है और वो एक नजर कम्मो और मेघा पर डालती है जोकि आराम कर रही थी

मल्टी बिना किसी से कुछ बोले hi खेतो की और निकल जाती है

खेतो पारर...

हरिया की जबब्ब आँख खुलती है तो वो अपने आपको बंधा हुआ पता है

रवि ने उसे झोपडी में लगे कहते से अच्छी तरह बांध दिया था ताकि आज हरिया अपनी बेटी को छुड़ता हुआ आराम से देख सखे

रवि के एक कहते से hi हरिया की हालत खराब हो चुकी थी उसके अंदर इतनी जान भी नहीं थी की आगे बढ़ कर अपनी बेटी को छोड़ने से बचा सखे

रेखा बड़े मजी से ब्लाउज और पेटीकोट में खत पारर लेती हुई हरिया को hi देख रही थी

और रवि हरिया के ठीक सामने नीलम को अपनी गॉड में बैठाये हुए था और अपनी दोनों हाथो से बड़े hi प्यार से नीलम की रसीली चूचियों को मसले जा रहा था

मनो कमरे में सब के सब लोग हरिया के होश में आने का hi इन्तजार कर रहे हो

हरिया की नजर जैसे hi अपनी बेटी पारर पड़ती है वो उसके आंसुओ को देख कर समझ चुका था की उसने जोश जोश में यह आकर भट्ट बड़ी गलती कर दी है जिसका भुगतान अब उसकी बेटी को करना पड़ेगा

हरिया के अंदर इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो अपनी बेटी से नजरे भी मिला सखे

इधर नीलम भले hi सुबुक सुबुक के रू रही थी पार आज रवि जिस तरह से उसे छू रहा था उसमे एक प्यार भरा अहसास था जिसकी वजह से नीलम भी ान अंदर hi अंदर गर्माने लगी थी

रेखा- क्यों रे बुड्ढे हरिया क्या सोच कर आया था तू यहां की आज मुझे छोड़ेगा रेखा को छोड़ेगा हाहाहाःहाहा

हरिया - रेखा बेटी मैं माफ़ी मांगता हु मुजसे बहुत बड़ी गलती हो गयी जो मैं यह चला आया बहुत बड़ी भूल हो गयी मुझसे बेटी माफ़ करदे मुझे

रेखा- अब क्या माफ़ी मांग रहा है कमीने अगर रवि नबी आता तब तो तू आज मुझे छोड़ hi देता पर अब जो तूने गलती कर hi दी है तो जुरमाना भी भरना पड़ेगा हहहहह

हरिया समझ चूका था की रेखा किश जुर्माने की बात कर रही है

हरिया- बेटी हाथ जोड़ता हु मैं छोड़ दे मेरी बेटी को आखिर वो तेरी भी तो बचपन की शैली है रेहम कर उसपरर बेटी

रेखा- अच्छा मैं रेहम कृ और वो भी तेरी इस रद्द बेटी पारर ये भी तो कुछ सोच कर hi आयी थी यहां अब काम बिगड़ गया तो शैली बन गयी वह जी वहहह

रवि अपने हाथ को निचे ले जाता हुआ सीधा नीलम के पेटीकोट में गुसा देता है

जैसे hi रवि का हाथ नीलम की पनियाई बुर्र पारर पड़ता है

नीलम की एक अह्ह्ह्ह निकल जाती है

रवि बड़े hi प्यार से नीलम के कानो को चूमता हुआ बोलता है

रवि- क्या बात है दीदी तुम तो लगातार रस टपकाये जाए रही हो लगता है की तुम भी मेरे लौड़े की दीवानी बन गयी हो उस दिन छुड़वाने के बाद

इसके तुरंत बाद hi रवि नीलम के उस कान को मूठ में भर्र लेता है

आज रवि की हरकते नीलम को अंडरर तक्क हिला रही थी

नीलम भी इनसब हरकतों से कहि न कहि छोड़ने के लिए उतावली हुई जा रही थी

हरिया- छोड़ दे बीटा रवि मेरी फूल सी बची को छोड़ दे

रेखा- अरे काका अभी देखना तुम्हारी ये फूल सी बची कैसे मेरे भाई का लुंड कहती है वो भी अपने सरे छेड़ो से हहहहह

रेखा- अच्छा काका ये बताओ की तुमको अभी भी मुझसे छोड़ना है क्या

रेखा की बात सुनते hi हरिया तुरंत ना कर देता है क्यों की वो जनता था की ये भी रेखा की एक चल hi होगी

हरिया- नहीं नेति नहीं मैं तो अब तेरी तरफ नजर उठा कर भी नहीं देखूंगा कभी जिंदगी भर्र

रेखा - अच्छा मतलब छोड़ने आये थे पारर अब नहीं छोड़ना गांड फट गयी काका आपकी तू हहहहहह

रेखा अपने ब्लाउज के दो हुक खोल देती है

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रेखा - अब भी नहीं छोड़ना क्या काका

हरिया एक नजर रेखा की चूचियों पर डालता है और अपना थूक गटकते हुए तुरंत hi मना कर देता है

अगले hi पल रेखा सरे हक्क खोलती हुई ब्लाउज को बगल में रख देती है

हरिया की नजर जैसे hi रेखा की रसीली चिचियो पारर पड़ती है उसका सोया हुआ लुंड एक झटके में खड़ा हो जाता है

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रेखा- अब भी नहीं छोड़ना चाहते काका मुझे देख लो आखिरी बार ऑफर दे रही हु

हरिया की हालत अब ये थी की वो एक पल के लिए अब अपनी बेटी को भूल चूका था और सिर्फ रेखा के जिस्म को hi देखे जा रहा था

रेखा - बोलो काका जल्दी कहि मेरा मदद न बदल जाये

हरिया न हो हां कर रहा था और ना hi मना कर रहा था

पर रेखा उसके धोती में उठते हुए उभर को देख चुकी थी

रेखा - लगता है की अब काका में दम्म नहीं रहा जो रेखा को छोड़ सखे

हरिया - बेटी माफ़ करदे हम दोनों को और जाने दे

रेखा- काका अआप इतना बोल रहे हो मेरा बास चलता तो मैं आपको जाने देती पर वो देखो मेरा छोटा भाई कैसे अपनी बेटी के अंगो को मसल रहा है उससे पूछ लो अगर वो मेरी शैली को छोड़ दे तो आप लोग चले जाओ

रवि अब तक्क नीलम का ब्लाउज खोल चूका था और उसकी दोनों चूचियों के रस को बरी बरी पीए रहा था

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हरिया- छोड़ दे बीटा रवि अपनी नीलम दीदी को छोड़ दे

रवि - चुप चाप वही बैठा रेहह बुड्ढे अगर दुबारा कुछ बोलै तो तेरी बेटी को छोड़ कर पहले तेरी गांड मरूंगा

रवि की बात सुनकर हरिया का मुँह उसके लुंड के जैसे hi लटक जाता है

और वो लटका हुआ मुह्ह लेकर रेखा की और देखता है

रेखा - काका अब मुझे ऐसे मैट देखो मैं कुछ नहीं कर सकती अब तो बास चुप चाप नीलम को छुड़ता हुआ देखो और एन्जॉय करो

हहहहह

रेखा वही खत पर लेत जाती है और अब उसका ध्यान सिर्फ और सिर्फ रवि की और hi था

हरिया भी समझ चुका था की अब गिड़गिड़ाने का कोई फायदा नहीं है वो मायूस होता हुआ अपनी गर्दन निचे लटका लेता है

रेखा - अरे काका इतनी अच्छी फिल्म चल रही है और आप मुह्ह लटकाये बैठे हो ऐसे तो काम नहीं चलेगा देखो तो जरा हीरोइन भी तुम्हारी बेटी hi है हहहह

इधर मल्टी भी झोपडी के पास पहुंच चुकी थी वो अंदर घुसने hi वाली थी की तभी उसे याद आता है की रेखा भी खेत पर hi आयी हुई है

मल्टी तुरंत hi झोपडी के पीछे की और चली जाती है और जैसे hi वो अंदर का नजारा डेक्टि है सन्न रेहह जाती है......
 
दोस्तों एक बार फिरर से माफ़ी मांगता हु आधे अधूरे अपडेट के लिए

टाइम hi नहीं मिल पा रहा है

पर वडा है जितना जल्दी हो सखे उतना जल्दी अपडेट पूरा करने की कोशिश करूंगा

अब आप लोग तो जानते है की मैं सीन को पूरी डिटेल में लिखता हु

इसलिए अपडेट थोड़ा बड़ा hi रहता है

उम्मीद है आप लोग मेरी प्रॉब्लम समझ सखे

धन्यवाद्....
 
अपडेट-128

झोपडी के अंदर का नजारा देख कर मल्टी की सांसे ऊपर निचे होने लगी थी क्योंकि न तो वो नीलम को जानती थी और न hi हरिया को और जिस तरह से हरिया के मुह्ह से खून निकल रहा था और उसे बंधा हुआ देख कर वो सन्न रह गयी थी

और सामने hi उसकी नन्द लगभग नंगी लेती थी और उसका देवर किसी और को दबोचे बैठा हुआ था

इधर रवि लगातार नीलम की रसीली चूचियों का रस निचोड़ने में लगा हुआ था

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नीलम- अह्ह्ह्ह रवि आराम से दर्द्द हो रहा है

रवि- दीदी ड़ड़ड़ड़ड़ में hi तो असली मजा है और आप चिंता मैट करो आज मैं आपको ऐसा दर्द दूंगा की तुम खुद hi मेरे पास आओगी उस ड़ड़ड़ड़ड़ को पाने के लिये

इतना बोलते हुए रवि खड़ा हो जाता है और एक झटके के साथ नीलम को भी खड़ा कर देता है

नीलम का ब्लाउज तो रवि पहले hi उतर चूका था अब वो सिर्फ एक पेटीकोट में थी जो रवि को बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा था

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अपनी बेटी मो किसी और के हाथो मसलता हुआ देख कहि न कहि हरिया का भी लुंड खड़ा हो चुका था जिसे रेखा भी देख चुकी थी

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रेखा- हहहह अरे वह बुड्ढे सेल तेरी ठरक भी बड़ी खतरनाक है

तेरी बेटी को मेरा भाई मसल रहा है फिर भी तेरा लुंड खड़ा है

रेखा आगे बढ़ती हुई सीधा अपने एक पेअर से हरिया की धोती पारर लाट मरती हुई उसकी धोती को हटा देती है

हरिया- अह्ह्ह्हह रेखा बेटी मत कररर

रेखा- कर तो तेरी रंडी ब्वती रही है बुड्ढे देख तो जरा कैसे मेरा छोटा भाई तेरी गदराई बेटी को मसल रहा है है मेरा भाई और ये रंडी भी पुरे मजी ले रही है पक्का इसकी छूट से नदिया बेहनी शुरू हो गयी होगी

रेखा- अरे रवि जरा इसके बाप को भी तो दिखा कैसे इसकी बेटी तेरा मुसल लेने के लिए तड़प रही है

रेखा दीदी की बात सुनते hi रवि सीधा नीलम के पेटीकोट का नाडा पकड़ता हुआ एक झटके में खोल देता है

एक झटके में hi हरिया की बेटी उसके सामने नंगी खड़ी थी पर किसी और के हाथो की कठपुतली बनी हुई

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पेटीकोट खुलते hi नीलम शर्म के मरे निचे बैठ जाती है जिसकी वजह से उसकी छूट और गांड खुल कर हरिया और रवि के सामने आ जाती है

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रवि सीधा नीलम की छूट पारर हाथ रखता हुआ एक ऊँगली ुंदरर घुसा देता है जिससे नीलम की हालत पंचर हो जाती है

नीलम -अह्ह्ह्ह बापू

रवि- दीदी बापू नहीं मैं हु

सच खा दीदी आपने नीलम दीदी की छूट तो पूरी गीली पड़ी है

रेखा- छोड़ दे साली को बहुत तड़प रही है तेरा लुंड खाने के लियी

बहार खड़ी मल्टी भी अंदर का नजारा देख कर पूरी गरमा गयी थी ऊपर से दोपहर की गर्मी

मल्टी अपने आप पर काबू नहीं रख पायी और अपनी सदी को उठती हुई सीधा अपनी छूट को रगड़ने लगती है

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मल्टी- हे बहगवां ये रेखा तो बहुत बड़ी राबड़ी निकली एक तो अपने छोटे भाई के लुंड की सवारी कर रही है ऊपर से अपनी hi शैली को उसके बापू के सामने hi अपने चीते भाई से छुड़वा रही है

मल्टी को देखना था की रवि अपनी hi दीदी के सामने उसकी शैली को किस तरह से छोड़ता है क्योंकि पिछली रात को मल्टी भी ये जान चुकी थी की रवि के अंदर एक जानवर छुपा है

मल्टी की बेचैनी बढ़ती hi जा रही थी वो कभी अपनी छूट के अंदर 2 उंगलिया पेल देती तो कभी अपने मोठे मोठे निप्पल्स को पकड़ कर खुद hi मड़ोरने लगती है

इधर अंदर रवि नीलम को चित्त लिटाता हुआ उसकी दोनों टैंगो को पकड़ कर खोल देता है

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रवि- दीदी तुम्हारी छूट तो दिन बी दिन फूलती hi जा रही है

नीलम चटपटा तो रही थी पर रवि की मजबूत पकड़ के सामने उसकी एक ना चल रही थी और इधर उसकी छूट लगातार पनियाई जा रही थी

रेखा भी दोनों को देख कर पूरा मजा ले रही थी

रेखा- क्यों रे नीलम इतना पसंद है क्या तुझे मेरे छोटे भाई का लुंड जो लगरर अपनी छूट से पानी फेक रही है

देख ले बुड्ढे मुझे तो लग रहा है की अब तेरी बची कुछ बेटी भी तेरे हाथ से निकल जाएगी और हिलाते हुए hi मरेगा तू कमीने

रेखा की बाटे कहि न कहि हरिया को सच में डरा रही थी क्योंकि उसकी बेटी नीलम आज बिलकुल ना के बराबर विरोध कर रही थी जिसे देख कर वो भी विचलित था

हरिया- बेटी आग तो तू पहले hi लगा चुकी है अब मेरे घर को पूरा मैट उजाड़ हाथ जोड़ता हु बेटी तेरे

रेखा- अब ये तो रवि का लुंड hi तैय करेगा की तेरी बेटी तेरी बेटी रहेगी या मेरे छोटे भाई की रखैल हाहाहाहा

इधर रवि नीलम की छूट पर हमला बोल चुका था और लगातार नीलम की छूट को कहते जा रहा था .

नीलम- अह्ह्ह्हह रवि अह्ह्ह्हह कट्ट्ट्ट मटर हहहहहहह अह्ह्ह्हह हा ीासी हीई हहहहहहहहहहहहहह

रवि भी लगातार नीलम की छूट को चूसे जा रहा था जिसके वजह से नीलम भी अपना आप खो चुकी थी और आज नीलम को रवि का रवैय्या कुछ बदला बदला सा लग्ग रहा था

रेखा अपने पेअर से हरिया के नंगे लुंड पारर जोरदार लात मरती है

हरिया- अह्ह्ह्हह्ह

रेखा - देख ले बुड्ढे मुझे तो लग रहा है की अब तेरी उलटी गिनती शुरू हो चुकी है हाहाः

करीब 10 मिनट तक्क रवि लगातार नीलम की छूट को चाट चाट कर लाल कर देता है

और जॉब रवि अपनी धोती को अलग करता है तो उसका लुंड देख कर रेखा के अलावा सबकी हालत खराब हो जाती है

हरिया- हे भगवन मेरी बेटी को बचना इस जंवरर से

नीलम जानती थी की ये लुंड थोड़ी hi देर में उसके छेड़ो में घुसने वाला है पर आह उसे भी एक लालसा थी रवि के लुंड से छोड़ने की क्योंकि नीलम के तीनो छेद तो रवि काफी पहले hi खोल चूका था

इधर मल्टी की आँखे भी फ़टी की फ़टी रह गयी थी रवि का लुंड देखने के बाद

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मल्टी को यकीन नहीं हो रहा था की एहि लुंड रात को उसके गले तक्क फसा हुआ था

मल्टी- हे भगवान् ये इस बच्चे का लुंड है या किसी गधे का

मल्टी अपनी छूट को अब और भी तेजी से रगड़ रही थी

इधर रवि नीलम का एक हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर टिका देता है

नीलम एक बार तो अपना हाथ हटा लेती है पर जब रवि दुबारा से उसका हाथ लुंड पर रखता है तो वो भी उस लुंड की दीवानी सी हो जाती है

नीलम( आज तो मेरी खैर नहीं ये कमीना आज मुझे चोदे बिना नहीं जाने देगा अच्छा होगा की मैं भी इसका साथ दू जिससे मुझे भी तकलीफ कम् होगी)

नीलम जानती थी की उसका फैसला सही है पर वो ये नहीं जानती थी की आज उसका फैसला उसे उसके बापू से दुर्र कर देगा हमेशा हमेशा के लिये

नीलम खुद hi आगे बढ़ती हुई रवि के लुंड को अपने चेहरे पर चिपका लेती है

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नीलम न कहते हुए भी रवि के इशारो पर hi चल रही थी जिसका अनुमान अब तक्क उसके बाप को भी हो चुका था

रेखा- अरे वह तेरी बेटी तो दीवानी हो गयी इसकी देख तो जरा कैसे रवि का लुंड अपने मुह्ह में घुसने को उतावली हो रही है

घुसा दे रवि मैट तड़पा बेचारी को देख तो जरा कैसे इसके मुह्ह से पानी टपक रहा है

रवि एक बार नीलम के चेरे को पकड़ता हुआ ऊपर की और उठता है

उसे नीलम की आँखों से साफ़ पता चल रहा था की मनो नीलम आँखों hi आँखों में उसे कह रही हो की मेरा मुखछोडन करो

अगले hi पल रवि अपने लुंड को सीधा करता हुआ सीधा नीलम के होठो पर रख देता है ..........

अगला अपडेट जल्द hi आएगा
 
अपडेट-129

रवि अपने विशाल लुंड को नीलम के गुलाबी होठो पर रख चुका था

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इधर हरिया को अपनी बेटी पारर दया भी आ रही थी और उसके साथ जो हो रहा था उसे देख कर उसका लुंड लगातार झटके खा रहा था

हरिया की हालत रेखा भप्प चुकी थी

इधर बहार खड़ी मल्टी का तो मनो मुह्ह hi सुख रहा था वो बार बार अपनी जीभ से अपने होठो को गिला करती

वो छाती थी की नीलम की जगह रवि का लुंड उसके रसीले होठो पारर हो

इधर रवि एक नजर नीलम की और देखता है और अगले hi पल नीलम अपने रसीले मुह्ह का रास्ता रवि के लिए खोल देती है

रवि का लुंड अब नीलम के गरम और गीले मुँह के अंदर घुसने को उतावला था

रवि अपने लुंड को अंदर सरकता चला गया और कुछ hi पीएलओ ने नीलम पूरा का पूरा लुंड निगल गयी

नीलम का गला पूरी तरह से फूल चूका था उसकी आँखे बहार को आ गयी थी

इधर मल्टी अपनी बुर्र को रगड़ रगड़ कर अपना पूरा पेटीकोट गिला कर चुकी थी पारर उसकी छूट की गर्मी काम होने का नाम hi नहीं ले रही थिई

रवि नीलम के मुह्ह को पकड़ता हुआ एक बार अपने लुंड को टोपे तक बहार निकलता है और एक नजर हरिया को देखता हुआ अपना पूरा का पूरा लुंड नीलम के मुहहह में ठुस्स देता है एक झटके के सठह

नीलम- गूगगगुणु

हरिया- छोड़ दे बीटा मर्डर जाएगी मेरी बेटी

रेखा- अरे वो नहीं मरेगी बुड्ढे देख तो जरा पूरा का पूरा लुंड मुँह में ठुसे बैठी है और तू सेल उसको मार रहा था

रुक हरामी

रेखा उठती हुई एक झटके के साथ अपना पेटीकोट उतर देती है और और खत को खींचती हुई हरिया के सामने अपनी टैंगो को फैला कर लेत जाती है

अब तो हरिया की नजर सिर्फ और सिर्फ रेखा की रसीली छूट और फ़टे हुए गांड के छेद पारर थी

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रेखा- क्यों क्या हुआ बुड्ढे बोलती बंद हो गयी

हरिया की तो मनो सच में बोलती बंद हो गयी थी

हरिया एक नजर अपने बेटी की और देखता है जिसके मुह्ह को पकड़े हुए रवि लगातार झटके मरे जा रहा था और जब्ब नीलम की नज़ारे अपने बापू से मिलती है तो नीलम के चेरे पर एक मुस्कान आ जाती है मनो वो अपने बापू को बताना कह रही हो की वो कुश है

खैर उधर बेटी की ताबड़तोड़ मुहचुड़ै हो रही थी इधर बाप को प्यासा देख रेखा को ाचा नहीं लगा और अगले hi पल वो अपनी छूट को फैलाती हुई सीधा हरिया के मुह्ह पारर मूतने लगती है

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इधर हरिया को तो मनो अमृत मिल गया था

वो तो कबसे रेखा के अंग अंग का दीवाना था

हरिया तुरंत hi मुँह खोल देता है और रेखा के गरम पेशाब को पिने लगता है

हरिया की हालत देख कर नीलम को अजीब सा hi एक नशा साध रहा था और वो अब और जोर जोर से अपना सर रवि के लुंड पर मरने लगी थी

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मनो अब नीलम रवि के लुंड को और निचे तक्क उतरना कहती थी और रवि को वो रास्ता मालूम था

अगले hi पल रवि नीलम को खड़ा करता हुआ पीछे घुमा देता है

नीलम जानती थी की अब उसकी माँ छोड़ने वाली है वो आगे की और झुकती है पारर रवि उसकी गर्जन को पकड़ता हुआ सीधा करता हुआ

नीलम को दिवार से चिपका देता है

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रवि खड़े खड़े hi नीलम की गांड मरने के जुगाड़ में था पर इसमें नीलम को तकलीफ ज्यादा होने वाली थी

इधर नीलम अपनी गांड को ढीला छोड़ देती है और रवि एक झटके के साथ अपना आधा लुंड नीलम की गांड में ठुस्स देता है

नीलम- अह्ह्ह्हह मा मर्डर गयीईइ रवि आराम से दाल भाई

रवि - दीदी आराम से डालना तो आता hi नहीं आपको तो पता hi है

रेखा- हहहहहहहह

अभी नीलम कुछ बोलती उससे पहले hi रवि अपना अगला झटका मरता है और अपना पूरा का पूरा लुंड नीलम की गांड में थुश देता है

नीलम को वो लुंड अपने पेट में महसूस हो रहा था

रवि अपने लुंड को पूरा बहार खींच लेता है

नीलम एक रहत की साँस लेती है

रवि नीलम की गांड को दोनों हाथो से फैला कर देखता है

और जब हरिया की नजर अपनी बेटी के उस छेद पर पड़ती है तो उसे अंदाजा हो जाता है की नीलम को छोड़ छोड़ कर रवि उसके दोनों छेड़ो को बर्बाद कर देगा

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रवि एक जोरदार झटके के साथ दुबारा से अपना लुंड नीलम की गांड में पेल देता है और बिना किसी रेहम के ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर देता है

नीलम के दर्द की तो मनो कोई सिमा hi नहीं थी पर अब इतने बड़े लुंड से छुड़वाना भी तो शोभाग्य को बात थी वो भी दूसरी बार

जिसे सपने में देख कर भी वो पसीने पसीने हो जाती थी आज दुबारा से वो उस मुसल की सवारी कर रही थी

हरिया कभी अपनी बेटी की और द्केहता तो कभी रेखा की और कुल मिलकर उसे भी अब मजा आ रहा था जिसे रेखा भी भाप चुकी थी

रेखा दुबारा से उठती हुई उसके सामने आकर खड़ी होती और घूमती हुई घोड़ी बन जाती है

अब हरिया के सामने वो छूट और गांड थी जिसे चाटने के कभी वो सपने देखा करता था

रेखा- तेरी बेटी के दोनों छेड़ो के बदले तुझे इतना तो दे hi सकती हु मैं

रवि को भी अपनी दीदी का फैसला कुछ हद्द तक्क ठीक लगता है

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हरिया अपने होतो को सीधा रेखा की गांड पारर लगा देता है और खूब जोर जोर से रेखा की गांड को चूसने लग जाता है

मनो वो अंदर से खुश खुश कर बहार निकलना कहता था

रेखा को भी आज किसी और मर्द का मुह्ह अपनी गांड पर महसूस करके एक अलग hi मजा आ रहा था

इधर नीलम भी अपने बाप को रेखा की गांड चुस्त देख खुस थी

जिससे उसका सारा दर्द्द गायब हो गया था

रवि अब भी ताबड़तोड़ झटको के साथ नीलम की गांड को फाड़ने पर तुला हुआ था

बहार खड़ी मल्टी की उंगलिया अब उसकी गांड के छेद को छोड़ रही थी वो भी चुदाई की शौखिन थी और गांड मरवाना उसका एक सपना था पारर उसका पीटीआई तो ठीक से उसकी छूट नहीं छोड़ पता था तो गांड की उम्मीद कर तो बेवकूफी hi थी

पर अब मल्टी को वो लुंड मिल चूका था जिसके शेयर वो अपने सरे शौक़ पुरे कर सकती थी

इधर अंदर ठप्पों ठप्पों की आवाजों से पूरा कमरा गूंज चुका था

रवि जब अपने लुंड को बहार खींचता तो सफेद पानी से बने बुलबुलो के साथ नीलम की गांड से पड़द पाडडडड करके पाद निकलता जिसे देख कर रवि और जोशी आजाता और डरा से अपना मुसला नीलम की गांड में ठुस्स देता

रवि- आह्हः साली रंडी आज तो बड़े मजी से छुड़वा रही है लगता है तुझे भी अपने छेद चिउड़े करवाने का शौक़ साध गया है

नीलम- अहा कमीने इतना मोटा लुंड लटकाये घूमता है तेरा बास चले तो औरत को छोड़ छोड़ कर hi मार डालेगा

रवि- औरो का तो पता नहीं पर आज तुझे जरूर छोडूंगा रगड़ रगड़ कर बड़े दिन बाद हाथ आयी है कुटिया

रेखा- अरे इस बुड्ढे को भी तो दिखा इसकी बेटी की चुदाई कब्ब से कमीना मेरी गांड चूसे जा रहा है अभी हग्ग दूंगी इसके मुह्ह पारर

काफी देर बाद हरिया अपना मुँह रेखा की गांड से हटाता है

हरिया- हग्ग दे बेटी तेरी तो संडास भी सोने समान है हग्ग दे मेरे मुह्ह पर hi हग्ग दे

रेखा एक जोरदार हसी के साथ एक जोरदार पड़द मरती है जिसकी खुसबू से हरिया और भी ज्यादा मस्त हो जाता है और अपना मुँह दुबारा से रेखा की गांड में घुसा देता है

रवि नीलम को पकड़ कर हरिया के करीब लता है और हरिया के समें लता हुआ जमीन पर घोड़ी बना देता है

अब हरिया की तरफ उसकी बेटी का रसीला मुँह और रेखा के मादक छेद थे इससे ज्यादा उस बुड्ढे को क्या चाहिए था

नीलम और हरिया कक नजरे एक दफा मिलती है और अगले hi पल नीलम लपक कर अपने बापू का लुंड मुँह में भर लेती है

हरिया का लुंड बड़े आराम से नीलम के मुह्ह में पूरा अंदर तक्क जा रहा था

ये सब रवि के लुंड का hi किया धरा था

पर अब हरिया को काफी कुछ मिल चूका था जिसके सामने वो अपनी बेटी को भी भूल चूका था

इधर नीलम जोर जोर से हरिया का लुंड चूस रही थी और उसका बापू रेखा की छूट और गांड को चूसने में लगा हुआ था

रवि रेखा के चेहरे के पास आता है और अपनी दीदी का चेहरा पकड़ता हुआ उसके रसीले होठो को चूसने लगता गई

रेखा- खुश है न मेरे भाई तू

रवि- भट्ट खुस्स दीदी भट्ट खूसस

रवि सीधा होता हुआ नीलम के कर्रीब आता है और अपने लुंड को सेट करता हुआ एक hi झटके में पूरा लुंड नीलम की छूट में उतर देता है

नीलम को तो मनो सोने ोे सुहागा मिल गया हो काफी देर बाद रवि को नीलम की छूट की याद आयी थी

हर झटके के साथ नीलम अपने बापू के लुंड को और अंदर तक्क लेती

पीछे से आया झटका हरिया के लुंड पर आकर ृक्क रहा था

अंडरर चल रही सामूहिक चुदाई देख कर मल्टी की आँखों में खूंन उतर आया था

पीछे एक घंटे से लगातार अपनी छूट को रगड़ रगड़ कर वो काफी पानी निकल चुकी थी पर उसकी छूट तो मनो अब बस रवि के लुंड से छोड़ने के बाद hi शांत होने वाली थी

इधरर अंदर कुछ hi देर बाद हरिया अपनी बेटी के मुह्ह में जहद्द चूका था पर हरिया अब भी लगातार रेखा के छेड़ो का स्वाद लिए जा रहा था

करीब 10 मं तक्क छूट मरने के बाद

रवि नीलम को छूट में hi जहडडड जाता है

मल्टी को भी अब ज्यादा देर रुकना ठीक नहीं लगता शाम होने को थी

करीब 10 मिंट की शांति के बाद रवि नीलम के ऊपर से उतर चूका था

नीलम की छूट वीर्य की उलटी कार रही थी

इधर नीलम उठ कर अपने कपडे पइहें लेती है और अपने बापू के हाथो को भी खोल देती है

रवि अब भी नंगा hi पड़ा था रेखा की चिचियो पर सर रखे हुए

रवि- अब कब्ब आएगी मेरी रांदड़

नीलम- आना क्या है जब तेरा मैं करे घर्र आकर hi छोड़ लेनाआ

रेखा- अरे वहहह देखो तो मेरी शैली को ये तो दीवानी हो गयी मेरे भाई के लुंड की अब

हरिया जनता था की अगर उसे रेखा की छूट मारनी है तो इनदोनो भाई बेहेन का गुलाम बन ओर रहना hi ठीक है

हरिया- ः बेटे जब तेरा लुंड खड़ा होकर घर आकर hi छोड़ना मेरी इस चुड़क्कड़ बेटी बल्कि हम दोनों छोड़ेंगे इसे

रेखा- अरे वह बुड्ढे तेरी जो जबान hi बदल गयी मेरी गांड का स्वाद साख कर

वैसे मेरा भी मैं करता है दो लुंड लेने का एक बार में

हरिया - तेरा जब मन करे मुझे बुला लेना रेखा बेटी

रेखा- भाग भोजदीके 😁😁

रेखा एक बार फिर हरिया की बेज्जती कर चुकी थी

नीलम का हाथ पकड़ता हुआ हरिया उसे लेकर बहार निकल जाता है

नीलम की चल बिलकुल बदल चुकी थी जिसे देख कर रेखा अबदार hi अंदर अपने भाई के लुंड पर गर्वव महसूस कर रही थी

रवि- दीदी मजा आ गया तुम्हारी शैली को छोड़ कर

रेखा - अरे शैली के चक्कर में अब अपनी दीदी को मत भूल जाना

रवि - दीदी कैसी बात कर रही हो

रवि रेखा की टैंगो को खोलता हुआ अपना लुंड उसकी छूट में उतर देता है

रेखा- अह्ह्ह्ह बस ऐसे hi तू हमेशा अपनी दीदी की सवारी करते रेहनाआ........
 
अपडेट-130

नीलम आज रवि से छुड़वा कर धन्या हो चुकी थी

वो अपने बाप के साथ घर की और निकल चुकी थी

हां नीलम की चल जरूर बदल गयी थी पर अपनी बेटी की बदली हुई चल देख कर हरिया को गुस्सा नहीं बल्कि और भी कयदा मजा आ रहा था

आज पहली बार हरिया ने रेखा जैसी मादक और गदराई औरत के छेड़ो से रस पीया था

अब उसे आगे का राष्ट ज्यादा कठिन नहीं लग रहा था

हरिया का सोचना अब भी यही था की वो अपनी बेटी के शेयर hi सही पर एक न एक दिन जरूर रेखा की सवारी करेगा

और अपने सपने को हक़ीक़त में बदल देगा

इधर सबके जाने के बाद रवि काफी देर तक्क रेखा को छोड़ता है कभी मुह्ह कभी छूट तो कभी गांड वो अपनी दीदी को भी भरपूर मजी देता है जैसे नीलम को दिए थी

आज दिन भर की चुदाई में समय का पता hi नहीं चला और सूरज कब का ढल चुका था पर रवि अब भी रेखा की गांड मरने में लगा हुआ था

आख़िरकार रवि का लुंड हार मैं लेता है और अपनी दीदी की गांड को पूरी तरह अपने कॉमर्स से भर देता है

कुछ वीर्य रेखा की गांड से बाजार गिर जाता है और बाकि का बचा हुआ वीर्य अपनी गांड में hi लिए रेखा रवि के साथ घर की और चल देती है

इधर जबसे मल्टी घर पहुंची थी तभी से वो बैचैन थी

उसकी छूट लगातार पानी चोदे जा रही थी

मनो उसे ऐसा लग रहा हो की उसके पुरे बदन पर एक साथ हजारो चीटिया रेंग रही हो

दोपहर को हुई जबरदस्त चुदाई के बाद तो मल्टी इतनी गरमा गयी थी की उसे इस वक़्त सिर्फ और सिर्फ एक लुंड चाहिए था और अगर वो उसके बाप का लुंड भी होता तो वो उसकी सवारी करने से नहीं हिचकिचाती

खैर रवि और रेखा अपने घर की और पहुंच जाते है

बहार hi मल्टी और कम्मो बैठी थी मेघा दीदी शायद अंदर थी

कम्मो रवि को देख कर घर में चली जाती है रोटी बनाने और रेखा भी उसके साथ साथ अंदर चली जाती है

इधर रवि एक बार मल्टी की और देखते हुआ लुंड मसलता है और जोर से चिल्लाता हुआ सबको बता देता है की वो घर के पिछवाड़े जा रहा है संडास करने

मल्टी की आँखों में हवस साफ़ नजर आ रही थी उसकी आँखों में अंगारे उतर चुके थे जिन्हे सिर्फ रवि hi शांत कर सकता था

रवि जैसे hi पीछे की और जाता है मल्टी भी तुरंत उसके पीछे पीछे चल देती है

अभी मल्टी पिछवाड़े पहुंची hi थी पारर उसे रवि कहि दिखाई नहीं देता और जैसे hi वो घर के पीछे की दिवार पार करती है कोई उसका हाथ पकड़ कर जोरसे अपनी और खींचता है

ये और कोई नहीं बल्कि उसका चुड़क्कड़ देवरर था जो पहले hi अपनी धोती को खोल कर अलग कार्र चूका था

मल्टी अभी संभाल पति उससे पहले hi उसका हाथ उस विशालकाय लुंड से टच होता है जिसे अपनी छूट में लेने के लिए वो तड़प रही थी

मल्टी एक दम से लुंड को पकड़ लेती है और अगले hi पल डर के मरे अपना हाथ हटा लेती है

मल्टी भी समझ चुकी थी की रवि का लुंड जितना बड़ा दीखता है असल में उससे काफी बड़ा और मोटा है

रवि मल्टी के चेहरे को उठता हुआ ऊपर करता है और अपने होठो को अपनी भाभी के गरम और रसीले होठो पारर रख देता है

मल्टी तो पहले से hi तैयार थी वो खुद को पूरी तरह से रवि के हवाले कर देना छाती थी

रबी जिस तरह मल्टी के होठो को चूस रहा था वो अहसास मल्टी को पागल किये जा रहा था

असल में मल्टी के अंदर एक चुड़क्कड़ किस्म की औरत थी जिसे हमेशा hi छोड़ना था पर पति नामर्द मिल गया और इज्जत के डारर से वो उस औरत को अपने अंदर छुपाये चलती गयी

पर आज उसका hi देवर उसे मजबूर कर रहा था उस औरत को बहार निकलने के लिए

मल्टी आज साडी ही पारर कर देना छाती थी

करीब 10 मिनट तक रवि मल्टी के पुरे मुह्ह को चुस्त रहा और इस मुह्चुसै से मल्टी के नथुने फूलने लगे थे

अबतक मल्टी की पकड़ भी रवि के लुंड पर बड़ी मजबूत हो चुकी थी मनो वो उसे छोड़ना hi न छाती हो

रवि मल्टी से अलग होता है पर मल्टी अब भी रवि के लुंड को पकडे हुए थी

रवि- क्या हुआ भाभी तुम तो हाफ रही हो

मल्टी की जवान लड़खड़ा रही थी उसके होंठ कांप रहे थे

जिसका रवि पूरी तरह से फायदा उठा रहा था

अगले hi पल रवि आगे बढ़ता हुआ अपने लुंड को पेटीकोट के ऊपर से hi भाभी की फूली हुई छूट में ढसा देता है

मल्टी- अह्हह्ह्ह्ह siiiiiiiiiiiiii

रवि- क्या हुआ भाभी किसी कीड़े ने काट लिए क्या

मल्टी के सब्र्र का बांध अब टूट चूका था वो तुरंत hi बोल पड़ती है

मल्टी- देवर जी मुझे छोड़ड़ड़ दो

मल्टी अपने दीसरे हाथ से रवि का एक हाथ पकड़ती हुई सीधा अपने पेटीकोट के अंदर घुसा देती है

अभी रवि का हाथ भाभी की जांघ पर hi था पर उसे महसूस होता है की उसकी भाबी की दोनों जंघे पूरी तरह चिपचिपे पानी से सनी हुई है

रवि को समझते देर नहीं लगती की ये पहनी किश जगह से आया है

रवि- भाभी तुम्हारी छूट तो पानी पानी हुई पड़ी है जाओ न केशव भैया से छुड़वा लो

मल्टी- तेरे भाई ने तो मुझे आज तक ठीक से चुवा तक नहीं वो नामर्द क्या छोड़ेगा मुझे मेरी जैसी रंडी को तो तेरा ये घोड़े जैसा लुंड hi शांत कर सकता है

रवि- अच्छा मतलब तुम मेरी रंडी बनने के लिए तैयार हो सोच लो भाभी जिसे आपने अभी हाथ में पकड़ा है न ये बड़ा हरामी है और इसे दया बिलकुल नहीं आती मेरी तरह कहे सामने वाली औरत कोई भी हो

मल्टी- मैं कहती भी नहीं की तू मुझे पारर दया करे तेरा मैं करी तो मुझे पूरी की पूरी तोड़ दे बॉस इस्सस कहते से एक बार मेरी चुदाई करदे उसके बाद तेरा जैसा मन करे वो करना अपनी इस भाभी के साथ

रवि का हाथ अब टककक मल्टी की छूट पर पहुंच चूका था जिसे वो लगातार कुरेदे जा रहा था

मल्टी- ahhhhhhhhhh हहहहहहहह रविइइइ हहहाहा बस्स्स अह्ह्ह्हह

मल्टी न जाने कितनी hi बार जहद चुकी थी

रवि का हाथ पूरी तरह गिला hi चुका था जिसे वो बाजार निकल कर चाटने लगता है एयर मल्टी को भी चटटा है

रवि- भाभी वैसे आज तुम्हारी छूट इतना पानी क्यों छोड़ रही है

मल्टी- तेरे लुंड की चुदाई देख कर

मल्टी की बात सुनकर रवि के कान खड़े हो जाते है

रवि- मतलब मतलब भाभी क्यया अपने कब देखि चुदाई

मल्टी- तभी देखि जब तू अपनी दीदी और उसकी शैली को उसके बाप के सामने छोड़ रहा था

मल्टी की बात सुन कर रवि को थोड़ा डर सा लगता है

मल्टी- अरे देवरर जी तुम ड्रॉ मैट

मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगी बस मैं तो इतना छाती हु की तुम अपनी रंडियो में मुझे भी शामिल करलो

और तबियत से दिनरात मेरी चुदाई कारु

उस छक्के से तो कुछ होता नहीं

रवि- तो देर किस बात की भाभी और तुम्हारा मुँह मीठा करता हु

रवि मल्टी के सर को पकड़ता हुआ निचे की और दबाता है मल्टी होनी पोजीशन जानती थी वो तुरंत hi घंटो के बल बैठ जाती है और रवि के सुपडे पर एक जोरदास किश करती हुई उसके लिए अपना मुह्ह खोल देती है

अभी रवि कुछ करता उससे पहले hi मेघा दीदी की आवाज आ जाती है

रवि जब दिवार से आगे देखता है तो मेघा दीदी वही खड़ी थी और उसे hi बुला रही थी

रवि- हहआ आया दीदी बस एक मिनट

रवि एक जोरदार झटके के साथ पूरा का पूरा लुंड मल्टी के मुह्ह में ठुस्स देता है

झटका इतना जोरदार था की मल्टी की हालत खराब हो जाती है पर पीछे दिवार थी तो बचने का कोई चांस hi नहीं था

खैर मल्टी ने रवि को खुद hi दावत दी थी तो अब पीछे हटने का कोई चांस hi नहीं था

रवि एक के बाद एक कई सरे झटके मरता हुआ मल्टी का मुँह छोड़ने लगता है

करीब एक मिंट में hi रवि की धुँवाधाद मुहचुड़ै से मल्टी के मुह्ह से सिर्फ थूक hi थूक गिर्र रहता

और जब्ब रवि अपने लुंड को मुँह से बहार निकलता है तो मल्टी खास्ती हुई तुरंत hi उसके लुंड को पकड़ लेती है और खुद hi अपने सर को आगे दबती हुई दुबारा से लुंड को गले तक्क उतारर लेती है

मल्टी की इस हरकत से रवि इतना तो जान चूका था की उसकी भाभी भी एक नंबर की रंडी है और अपनी भाभी को भोगने में भी काफी मजा आने वाला है

रवि अपने लुंड को बहार खींचता हुआ धोती को लपेटता है

और जब वो मल्टी की और देखता है तो उसे हसी आ जाती है

मल्टी का मुँह लटक गया था ऐसा लग रहा था मनो वो अभी रू देगी

रवि- अरे मेरी प्यारी भाभी ऐसा मुह्ह मत बनाओ रात को आऊंगा में तुम्हारे पास और जम्म कर ठोकूंगा तुम्हे

मल्टी रवि की बात सुनकर खुस हो जाती है

रवि के जाने के थोड़ी देर बाद वो भी बहार आ जाती है

थूक गिरने की वजह से उसका पूरा ब्लाउज आगे से भीग चूका था जिसे छुपाने की वो कोई भी कोशिश नहीं करती और सबके साथ जाकर बैठ जाती है ...
 
अपडेट-131

करीब आधी रत हो चुकी थी घर का लगभग हर्र सदस्य सो चूका था

सिवाय रवि के

रवि की आँखों से नींद कोशो दूर थी

अच्चानक से रवि उठ जाता है और अपनी दोनों दीदियो पर एक नजर डालता हुआ सीधा कमरे से बहार निकल जाता है और कमरे को बहार से बंद कर देता है

रवि की नजर अब सामने लेती मल्टी और कम्मो पर थी

लुंड तो पहले से hi खड़ा था

आगे बढ़ता हुआ रवि अपनी धोती की गत खोल देता है

और धोती सरकती हुई जमीन पर गिर जाती है

रवि पूरा का पूरा नंगा उन दोनों की और hi बढ़ रहा था

उसका विकराल कला लुंड हवा में ऊपर निचे झूल रहा था

मनो शिकारी अपना शिकार धुंध रहा हो

मल्टी के करीब पहुंचते हुए रवि अपनी एक हाथ से मल्टी की कासी हुई चूचियों को सहलाने लगता है और अपने दूसरे हाथ से लगातार अपने लुंड को मसलने लगता है

मल्टी का बदन काफी गरम था जिसकी गर्मी रवि पर साधना शुरू हो चुकी थी

जैसे जैसे रवि अपनी भाभी के मादक अंगो को सेहला रहा था उसका लुंड और भी ज्यादा फूलता जा रहा था

रवि से अब और बर्दास्त नहीं हो रहा था वो अपने सुपडे की चमड़ी को पीछे खींचता हुआ अपना सूपड़ा सीधा मल्टी के गरम होठो पर रख देता है

इन सब चीज़ो से अनजान मल्टी बेसुध सी सोई हुई थी और इधर उसका छोटा देवर उसके जिस्म से खेल रहा था

रवि अपने लुंड को होठो पर रगड़ता रगड़ता अंदर घुसाने की कोशिश कर रहा था पर जब कुछ बात नहीं बनती तो वो अपनी 2 उंगलियों को मल्टी के मुँह में थुश देता है और जब मुँह थोड़ा सा खुल जाता है तो वो एक जोरदार झटके के साथ अपने लुंड को करीब आधे से ज्यादा मल्टी के मुँह में थुश देता है

अच्चानक हुए इस हमले से मनो मल्टी की हालत पंचर हो जाती है एकाएक उसकी आँख खुल जाती है

बेचारी मल्टी समझ पति की उसके साथ क्या हो रहा है इससे पहले रवि एक और जोरदार झटका मरता हुआ पूरा का पूरा लुंड मल्टी के गले तक उतर देता है और अपने दूसरे हाथ से मल्टी के ब्लाउज को इस तरह खींचता है की एक एक करके उसके सरे हक्क टूट जाते है

मल्टी की आँखे बहार को आ गयी थी उसका पूरा मुँह रवि के लुंड से भरा हुआ था

इधर रवि बड़े आराम से अपने लुंड को मल्टी के गले में फसाये उसकी गदराई चूचियों को मसलता हुआ मल्टी के मुँह के अंदर की गर्मी को अपने लुंड पर महसूस कर रहा था

मनो उसके मुँह की गर्मी रवि के लुंड को पिघला देना कहती थी

करीब 5 मिंट तक रवि ऐसे hi मल्टी की दोनों चूचियों को मसलता रहा और अचानक से अपने लुंड को पूरा बहार खींच लेता है

मल्टी के मुँह से सिर्फ और सिर्फ थुक्क hi गिर रहा था वो बेचारी ठीक से साँस लेने की कोशिश hi कर रही थी की एक और जबरदस्त झटके के साथ रवि अपना लुंड दुबारा से उसके मुँह में पेल देता है पूरा का पूरा

अब तक्क हवस का नशा रवि पर हावी हो चूका था

वो बिना सोचे समझे एक के बाद एक जोरदार झटको के साथ अपनी भाभी का मुखछोडन शुरू कर चूका था

मनो उसे कोई परवाह hi नहीं थी की बगल में hi उसकी बड़ी बेहेन भी सोई है

कमरे में गुग्गगूऊगू की आवाजे गूंज रही थी

रवि अपने एक हाथ से मल्टी के मुँह को निचे बिस्तर की और दबाये हुए था और दूसरे हाथ से मल्टी के मोठे मोठे निप्पल मरोड़ने में लगा हुआ था

मल्टी को अब जाकर समझ आया था की रवि से कदवन कितना दर्द भरा होने वाला है पर अब वो भी इस दर्द के लिए अपने आपको पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी

मल्टी अपना पूरा का पूरा मुँह खोले अपने देवर का लुंड अंदर बहार कर रही थी उसकी आँखों से भले hi लगातार पानी गुर रहा था पर उसकी आँखों में एक खुसी थी जिसे वो कह कर बुइ छुपा नहीं सकती थी

करीब 10 मिंट तक्क मुखछोडन करने के बाद रवि एक झटके में अपना लुंड बहार निकल लेता है और जबरदस्त तरिके से मल्टी को पलट कर उसकी गांड अपनी और कर लेता है

रवि का जोश देखकर मल्टी को अंदर hi अंदर डर भी लग रहा था की कहि उसकी छोटी नन्द न उठ जाये

खैर रवि अपने काम को अंजाम दिए बिना पीछे हटने वालो में से नहीं था

वो पीछे से मल्टी का पेटीकोट उसकी कमर तक्क उठा देता है

और मल्टी की मदमस्त गांड एक पल में hi उसकी नजरो के सामने आ जाती है

रवि एक जोरदार छठा मल्टी की गद्देदार गांड पर जड़ देता है

चट्ट्ट्ट......

छठा इतना जोरदार था की उसकी अव्वज पुरे कमरे में गूंज उठती है और कम्मो इस आवाज को सुनकर थोड़ा बहुत हिलती है

मल्टी की तो ये देखकर हालत hi बिगड़ने लगती है

पर रवि एक के बाद एक कई सरे थप्पड़ अपनी भाभी की गांड पर मरे जा रहा था

और फिर वो मल्टी की दोनों गांड को फैलता हुआ एक दम से अपने होठ मल्टी के उस छोटे छेद पर लगा देता है जिसे बड़ा करने के इरादे से वो यह आया था

कभी वो मल्टी की गांड को अपने होठो से चूसने लगता तो कभी उसकी छूट को

कभी वो मल्टी की गांड में जीभ डालता तो कभी छूट में

मल्टी को इतना मजा पहली बार आया था आज पहली बार था जब कोई मर्द उसकी छूट और गांड को किसी भूखे भेड़िये की तरह चाट रहा था

वो इतनी गरम हो चुकी थी की अपने आप पर काबू नहीं रलह पति और 2 मिंट के अंदर hi अपनी साडी की साडी मलाई रवि के मुह्ह में छोड़ देती है

रवि भी पूरा मॉल चाट जाता है

अब वक़्त था भाभी के छेड़ो को अपना बनाने का

रवि अपने लुंड पर थूक मसलता हुआ अपने लुंड को सीधा मल्टी की गांड के छेद पर रख देता है

मल्टी समझ जाती है की अब क्या होने वाला है पर वो अभी सिर्फ और सिर्फ अपनी छूट की प्यास बुझवाना कहती थी

मल्टी अपने हाथ को पीछे ले जाती हुई रवि को रोकने की कोशिश करती है

पर ये कोशिश बेकार थी रवि अपना जोर लगता हुआ लुंड को भाभी की गांड के अंदर दबाने लगता है

मल्टी अपने मुँह को तकिये में दबती हुई पीछे हाथ लेजाकर रवि के हाथो को दबाते हुए उसे रुकने का इशारा कर रही थी पर कोशिश बेकार गयी और एक झटके के साथ रवि अपने सुपडे को मल्टी की गांड में फसा देता है

मल्टी की तो मनो दुनिआ hi पलट जाती है

रवि का सूपड़ा किसी कटे हुए आलू की तरह काफी मोटा था जिसे बर्दास्त कर पाना सबके बस की बात नहीं थी

पर जो इसे बर्दास्त कर गया उसके जिंदगी भर के मजे हो जाते थे

अगले hi पल रवि एक और जोरदार झटका मरता है और इस बार उसका आधा लुंड मल्टी की गांड में घुस जाता है

मल्टी की हालत तो ऐसी थी की न तो वो अपना दर्द बया कर सकती थी और न hi वो पीछे मुद कर अपने देवर से रुकने के लिए बोल सकती थी

अभी मल्टी दर्द से कराहः hi रही थी की रवि अपने लुंड को थोड़ा बहार खींचता हुआ एक करारा झटका मरता है और पूरा का पूरा लुंड अपनी भाभी की गांड में थुश देता है

अच्चानक हुए इस हमले से मल्टी अपने आपको संभाल नहीं पति और अनजाने में hi सही पर वो अपने हाथ को आगे बढ़ती हुई सीधा कम्मो की एक चुकी पकड़ लेती है और जोरसे दबा देती है

कम्मो की अचानक से नींद खुल जाती है और जब वो पीछे पलट कर देखती है

उसके होश उड़द जाते है उसका छोटा भाई अपने लुंड को उसकी नयी नवेली भाभी के किसी छेद में फसाये हुए था

कम्मो की सांसे ऊपर निचे होने लगती है

मल्टी को लगा था की अब कम्मो की वजह से रवि उसे छोड़ देगा और उसकी गांड को कुछ रहत मिलेगी

पर बेचारी मल्टी खा जानती थी की असली खेल तो अब शुरू होने वाला है

कम्मो की नजर जैसे hi रवि से मिलती है उसे पिछली बाटे याद आने लगती है

कैसे पिछली बार रवि ने इसी जगह कम्मो के सामने hi रेखा दीदी को रगड़ रगड़ कर छोड़ा था

रवि भी खा जाने वाली नजरो से कम्मो को देखता हुआ अपने लुंड को पूरा बहार निकल लेता है और अपनी कुवारी दीदी को दिखता हुआ अपने लुंड को दुबारा से मल्टी की गांड में पेल देता है

मल्टी अब तक्क कम्मो के एक हाथ को पकडे हुई थी

उसका दर्द चरम पर था पर रवि को इससे कोई फरक नहीं पड़ने वाला था वो लगातार अपने लुंड को आगे पीछे करता हुआ भाभी की गांड छोड़ने में लगा हुआ था

वही दूसरी तरफ कम्मो ये नजारा देख कर काफी गरम हुई जा रही थी उसका हाथ खुद बा खुद hi अपनी चूचियों को मसलने लगा था जिसे रवि भी देख रहा था

पर अब इस घर में शर्म के लिए कोई जगह नहीं बची थी

कम्मो की आँखे सुर्ख लाल हो चुकी थी वो अब बस अपने छोटे भाई की होना कहती थी बहुत तदपि थी वो उसे पाने के लिए

इधर नाल्टी की आह पुरे कमरे में गूंज एही थी पर दोनों भाई बहनो को मनो भाभी की कोई परवाह hi नहीं थी

अच्चानक से रवि अपना लुंड मल्टी की गांड से निकल लेता है और मल्टी को अपनी और खींचता हुआ पलंग से निचे गिरा देता है

मल्टी समझ hi नहीं पति की आखिर हुआ क्या और जब वो उठ कर पीछे देखती है तो उसके होश hi उड़द जाते है

वो जिस फल को अपने भाई हरी के लिए बचाना कह रही थी वो फल आज खुद hi काटने को तिअययर था

रवि कम्मो के बिलकुल करीब था

दोनों भाई बेहेन की गरम सांसे एक दूसरे को और भी गरम कर रही थी

और अनंततत में रवि अपने होठो को कम्मो के गरम और कंपते हुए होठो पर रख देता है

अच्चानक हुए इस हमले से कम्मो सिहर उठती है और अपना मुँह दूसरी और घुमा लेती है

पर अगले hi पल रवि अपने हाथ से अपनी दीदी का मुह्ह अपनी और घूमता हुआ उस पर ऐसे टूट पड़ता है मनो वो अपनी दीदी के होठो को खा hi जायेगा

इस बार तो कम्मो की भी हिम्मत नहीं होती की वो अपने छोटे भाई से मुह्ह फेर सखे

बस फिर क्या था रवि अपने एक हाथ को कम्मो की गुदाज और भरी हुई चुकी पर रख देता है

और जैसे hi वो उसे मसलता है कम्मो भी जोश में आ जाती है और एक झटके में अपने छोटे भाई का लुंड पकड़ लेती है

रवि का लुंड पहले से hi काफी चिपचिपा था

कम्मो का हाथ लगातार लुंड को आगे पीछे किये जा रहा था

रवि को आज इतना मजा आ रहा था की वो अपने आप पर काबू नहीं रख पाया

और अगले hi पल उसका ज्वालामुखी फुट जाता है

उसका सारा का सारा वीर्य कम्मो के हाथ और लहंगे पर लगा हुआ था

मल्टी ये नजारा देख कर नादर hi अंदर खुद को कोष रही थी

अच्छा होता अगर वो रवि को रात को न बुला कर खेत पर hi छुड़वा लेती

क्योंकि अब वो जानती थी की शादी के बाद उसके प्यारे भाई हरी को छूट नहीं भोसड़ा मिलने वाला है

इधर रवि करीब 5 मिंट तक्क अपने लुंड से वीर्य उगलता रहता है

और कम्मो भी पुरे मजे लेकर अपने छोटे भाई के लुंड को पूरा निचोड़े जा रही थी

पर रवि अंदर hi अंदर मायूस था आज पहली बार थाजो उसके लुंड ने किसी के हाथ लगते hi पानी छोड़ दिया था

कम्मो भी ये बात जानती थी की उसका छोटा भाई लम्बी रेस का घोडा है

और रवि भी समझ चूका था की उसकी सबसे छोटी दीदी में कुछ तो खास है जिसने उसे इतनी जल्दी झड़ने पर मजबूर कर दिया

रवि अपनी गर्दन निचे करता हुआ सीधा कमरे में घुस जाता है

उसकी धोती अब भी जमीन पर hi पड़ी हुई थी

वो नंगा hi कमरे में चला जाता है और लमऱे को अंदर से बंद कर लेता है

इधर मल्टी अब भी वही खड़ी थी

रवि के जाते hi कम्मो दूसरी और गम जाती है और अपने वीर्य से साणे हुए हाथ को सूंघती हुई एक ऊँगली मेह में दाल लेती है

मल्टी कम्मो की ये हरकत देखकर सेहम जाती है क्योंकि अब रवि का नशा कम्मो पर भी हावी होने लगा था

कम्मो एक एक करके अपनी साडी उंगलियों पर लगा वीर्य छत्त जाती है

उसके चेरे की मुस्कान साफ़ बता रही थी की वो कितनी खुस है

इधर रवि कमरे में आ गया था

उसके होठो पर अब तक उसकी दीदी के होठो की मिठास थी

जिसपर जीभ फेरते hi उसका लुंड एक झटका खता हुआ अपना सर दुबारा से उठाने लगता है

हवस का नशा रवि पर फिरसे चढ़ने लगा था

उसका मैं तो था की वो दुबारा से बहार जाये और अपनी दीदी के मादक अंगो का स्वाद चखे

पर इस वक़्त उसे ये करना थी नहीं लगता और वो तेल की सीसी से तेल लेकर अपने लुंड को मसलने लगता है

देखते hi देखते उसका लुंड फिरसे अपनी पूरी औक़ात में आ चूका था

जिसे शांत करने के लिए रवि को एक छेद चाहिए था

रेखा की तरफ देखता हुआ रवि उसके करीब जाता है पर अच्चानक से वो पलट कर मेघा दीदी के पीछे जाकर लेत जाता है और धीरे धीरे उनका पेटीकोट उठता हुआ कमर तक्क चढ़ा देता है

अब मेघा दीदी भी कमर के निचे पूरी नंगी थी

रवि ने पहले hi काफी सारा तेल अपने लुंड पर लगाया हुआ था

वो अपने लुंड को पकड़ कर मेघा दीदी की जुडी हुई टैंगो के बिच रखता है और लुंड को अंदर दबाने लगता है

मेघा दीदी की फटी हुई छूट धीरे धीरे करके रवि का पूरा लुंड निगल जाती है

मेघा दीदी की छूट काफी गरम थी बिलकुल किसी भट्टी की तरह

रवि अच्चानक से जोश में आ जाता है और अपना एक हाथ आगे बढ़ता हुआ मेघा दीदी की चुकी को जोरसे पकड़ता हुआ लुंड को बहार खींच कर एक जोरदार झटका मरता है

झटका इतना जोरदार था की एक अहह ले साथ मेघा दीदी की आँख भी खुल जाती है

मेघा को ऐसा लग रहा था मनो उसकी छूट में किसीने क्कोई मोटा कहता थोक दिया हो और जैसे hi मेघा पीछे पलट कर देखती है मेघा के तो होश hi उड़द जाते है........
 
अपडेट-132

कम्मो को आज आखिर वो मिल hi गया था जिसके लिए वो न जाने कबसे तड़प रही थी

आज पहली बार उसने अपने छोटे भाई के लुंड को अपने हाथो में थमा था और पहली hi बार उसने आज उसके अंदर से निकली मलाई का स्वाद कहा था जिसकी वो दीवानी सी हो गयी थी

मल्टी बेचारी रात भर अपनी छूट को समझने

की कोशिश कर रही थी की आखिर उसका नंबर क्यों नहीं आया

इधरर सुबह जब रेखा की आँख खुलती है

अपनी आँखों को मसलती हुई जैसे hi उजर नजर मेघा दीदी पर पड़ती है तो उसकी सूजी हुई आँखे फटी की फटी रेहह जाती है

मेघा दीदी का पेटीकोट गायब था और ब्लाउज आगे से खुला

और साथ hi उनके पीछे उनका सांड़ भाई सोया हुआ था वो भी पूरा का पूरा नंगा

और उसके गधे जैसे लुंड का कोई आता पता नहीं था

रेखा को एक अजीब सा झटका लगता है जिसका असर सीधा उसकी छुटत पर होता है

आखिर सामने उसकी बड़ी दीदी अपने hi भाई का लुंड अपनी छूट में घुसाए सोइ हुई थी

रेखा की छूट रह रह कर पानी छोड़ रही थी

वो आगे बढ़ती हुई मेघा दीदी की एक चुकी को पकड़ कर जोर से मसल देती है

मेघा की अच्चानक आँख खुल जाती है और जब उसे अपनी स्तिथि का पता चलता है तो उसके होश उड़ जाते है और एक पल के लिए वो सब सब उसे याद आता है जो रात को उसके छोटे भाई ने उसके साथ किया और उसने किस तरह उसे किसी चीज़ की तरह ीस्त्वमाल किया मनो वो उसकी दीदी नहीं उसका कोई खिलौना हो

खैर ये सब सोचने समझने के लिए मेघा के पास बहुत टाइम था पर सामने रेखा थी जो उसे हक घर रही थी

मेघा के अंदर हिम्मत नहीं हुई की वो अपनी छोटी बेहेन से आँखे मिला सखे

मेघा जैसेकि उठती है रवि का लुंड पककककक से उसकी छूट से बहार आ जाता है

रवि का लुंड फ़िलहाल आधा hi खड़ा था पर उसकी चमक अब भी बरक़रार थी

रात भर का जमा काम रास रवि के लुंड पर सना हुआ था

मेघा एक बार फिरसे उलझन भरी निगाहो से अपने छोटे भाई के लुंड को देख रही थी

रेखा समझ चुकी थी की रात को क्या हुआ है और अब वो समय आ चूका है जब उसे अपने छोटे भाई का लुंड अपनी बड़ी दीदी के साथ बाटना पड़ेगा

पर वो इसके लिए तैयार थी

रेखा आगे बढ़ती हुई सीधा रवि का लुंड चेतना शुरू कर देती है और जब वो ऊपर नजरे उठाते हुए मेघा दीदी को देखती है तो वो उसे hi नजरे फाडे देख रही थी

मेघा को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था

उसकी नजरो के सामने रेखा रवि का लुंड चाट रही थी

और वो देखते hi देखते पूरा लुंड मह में उतर कर चूसने लगती है

मेघा तुरंत hi दरवाजा खोलती हुई बहार चली जाती है

सबेरा हो चूका था कोई भी आ सख्त था तो रेखा भी एक चादर को रवि के ऊपर डालते हुए बहार की और निकल जाती है

पुरे दिन मेघा दीदी उलझन में hi रहती है और रेखा भी रात का प्लान बनाने में बिजी थी

इधर रवि सुबह hi अपने खेतो की और निकल जाता है

घर से कुछ दूर जाते हु उसे सामने से मल्टी का बाप रामलाल आता हुआ दीखता है

रामलाल को देखते hi रवि के खुरापाती दिमाग में कुछ अनोखे विचार आते है

अपने चेहरे पर मुस्कान लिए वो रामलाल की और तेजी से बढ़ने लगता है

रवि- काका नमस्कार

बड़े hi अदब के साथ रवि रामलाल के पेअर छूटा हुआ बोलता है

रामलाल- जीते रो बीटा

(कितना समझदार बालक है रवि )

रवि - काका अभी सदी में तो थोड़े दिन है न

रामलाल- अरे है बीटा पर मन कर रहा था मल्टी से मिलने का तो चला आया

बस मिलकर चला जाऊंगा

रवि- अरे काका आये हो तो शाम तक्क रुको आओ आज आपको अपना गाओं घूमता हु

रामलाल- अरे बीटा क्यों कास्ट उठाते हो मेरे कारन

रवि- अरे कैसी कास्ट काका आखिर आपकी बेटी हमारी प्यारी भाबी है

आइये साथ में घर चलेंगे थोड़ी देर में

रामलाल भी रवि के साथ चलने लगता है

इधर

घूमते घूमते रवि नीलम के घर के करीब पहुँचता है

दरवाजा खुल था पर कोई दिख नहीं रहा था

रवि- देखो काका ये गोअन में अपने सबसे खास लोगो का घर है नीलम दीदी और हरिया काका का

और मेरे दोस्त राजू का भी

आओ आपको इनसे मिलवाता हु

रवि रामलाल को लेकर सीधा अंदर घुस जाता है

नीलम अंदर hi बर्तन धो रही थी अचानक से रवि को देख कर वो उठ जाती है

रवि- दीदी इनसे मिलो ये मल्टी भाभी के पिता है

नीलम और रामलाल की नमस्कार होती है नीलम भी एक संस्कारी लड़की की तरह रामलाल को चाय पानी पिलाती है

कुछ hi देर में हरिया भी घर आ जाता है

अंदर रवि को देख कर उसकी आँखे बड़ी हो जाती है और साथ hi रामलाल भी था

Hriya-are बीटा तुम कब आये

रवि- बस काका अभी आया इन्हे दीदी और आपसे मिलवाने के लिए ये मल्टी भाभी के ससुर है

दोनों बुड्ढे एक दूसरे से गले मिलते है पर हरिया के मन में अब भी शंका थी की रवि आखिर आया किस मकसद से है

हरिया अंदर आ hi रहा था की रवि बोल पड़ता है

रवि- काका दरवाजा बंद कार्डो

रवि की बात सुनते hi हरिया का शक यकीन में बदल जाता है और वो समझ जाता है की आज उसकी बेटी के साथ क्या होने वाला है

पर अब हरिया को भी इस खेल में मजा आने लगा था उसे अब अपनी बेटी किसी रंडी से ज्यादा और कुछ नहीं लगती थी

जिसे किसी रंडी कक तरह छूट देख हरिया को अब मजा आने लगा था

हरिया भी आगे बढ़ता हाउ दरवाजा अंदर से बंद कर देता है

रामलाल बिचारा किसी चूतिये की तरह सोचने में लगा हुआ था की आखिर चल क्या रहा है

इधर रवि और नीलम एक दूसरे को hi देख रहे थे

रवि नीलम और हरिया की तरफ देखते हुए अपनी गर्दन हिलाकर रामलाल की और देखता है फिर हरिया की और इशारा करता है

हरिया भी तुरंत hi अपनी बेटी की और देखता है जो अपनी गर्दन हिलती हुई है करती है

हरिया के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान थी

इधर रामलाल अब भी चुटिया बनकर बैठा था

नीलम खड़ी होती हुई सीधा रवि के आगे आकर खड़ी हो जाती है

रवि और रामलाल अब भी खत पर hi बैठे थे

हरिया इस खेल में अपना भी एक रोले धुंध रहा थस जो अब उसे मिल चूका था

हरिया आगे बढ़ता हुआ नीलम के एकदम पीछे बिलकुल चिपक कर खड़ा हो जाता है

किसी अजनबी के सामने उसका बाप उसकी गांड में अपना लुंड लेलना कहता था

नीलम ये सोच सोच कर hi पानी पानी हुई जा रही थी

इधर हरिया की हरकते अब रामलाल को अजीब लगने लगी थी

वो कुछ समझ पता है इससे पहले hi हरिया अपने हाथो से अपने बेटी की छाती पर उभरी विशाल चूचियों को मसलता हुआ सीधा जचे ले जाता है और एक पल में hi अपनी बेटी को अधनंगा करके रामलाल और रवि के सामने परोस देता है

रामलाल की आँखे ये देख कर फ़टी की फ़टी रह जाती है

कैसे एक बाप अपनी hi बेटी को छुड़वाने के लिए किसी अजनबी के सामने नंगा कर रहा है और खुद भी अपना लुंड उसकी गद्देदार गांड में गड़ाए खड़ा है

अच्चानक से एक पल के लिए रामलाल जे जेहन में उसकी बेटी मल्टी की तस्वीर उभर का आती है और उसका लुंड ये सोच कर hi झटका खा जाता है जब उसकी बेटी भी ऐसे hi साथ चिपके गई तो कितना मजा आएगा

रामलाल अपने आप पर काबू करता है और आँखे झपकते हुआ रवि की और देखता है

जिसे वो बच्चा समझ रहा था यह तो वो अपने से दुगनी उम्र की औरते छोड़ रहा था.....
 
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