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अपडेट-125
रात भर मल्टी के सपनो में रवि hi था जो उसे लगातार चोदे जा रहा था
उसकी बरसो की प्यास को बुझाने का रास्ता उसे रवि कल रात दिखा गया था
सुबह हो चुकी थी सब जान अपने काम में व्यस्त थे वही मल्टी भी आज काफी खुश थी क्योंकि रात के बाद से उसे अब पता था की जल्द hi उसे उसका मनपसंद लुंड मिलने वाल है
इधर रवि और रेखा अब भी एक दूसरे से चिपके सो रहे थी
मेघा दीदी की नजर उठते hi रवि और रेखा पारर पड़ती है
रेखा जोकि रात को hi अपना ब्लाउज उतार चुकी थी
रेखा की चूचिया बिलकुल नंगी थी और रवि का हाथ रेखा की एक चुकी के ऊपर था
रवि के हाथ को देख कर ऐसा लग रहा था मनो उसने खुद से hi रेखा दीदी की चुकी को जबरदस्त तरिके से पकड़ रखा हो
मेघा दीदी को भी आज पहली बार यह अहसास हुआ था
मेघा( हे भगवान् इनदोनो को कोई इस हालत में देखेगा तो कोण बोलेगा की ये दोनों भाई बेहेन है ये रेखा तो है hi बेशरम अब रवि को भी बिगाड़ रही है अपने नंगे शरीर से चिपका कररर)
कहि न कहि मेघा दीदी के अंदर एक जलन थी की क्यों रवि रेखा से चिपका हुआ है न की उनसे
खैर थोड़ी hi देर में रेखा भी उठ जाती है और अब तक मेघा दीदी भी कमरे के बहार जा चुकी थी
रेखा - अरे ूठः न कितना सोयेगा तू रवि
रवि- दीदी सोने दोना
रेखा - इधरर तेरी दीदी की छूट में खुजली हो रही है और तुझे नींद आ रही है कैसा भाई है रे चू देख तो कितना पनिया गयी है तेरी दीदी की छुटत
रेखा अपना पेटीकोट उठती हुई सीधा रवि की छाती पारर चढ़ जाती है
रवि अपनी आँखे खोल कर देखता है और रेखा दीदी की छूट को आगे बढ़ता हुआ चुम्म लेता है
रवि- दीदी रात को तो सू गयी थी तुम जल्दी और अब तुम्हारी छूट पानी छोड़ रही है
रेखा- तो रात को जगाया क्यों नहीं
रवि- मैंने सोचा आपकी तबियत खराब होगी
रेखा- अच्छा मेरी तबियत खराब होगी तो मैं क्या अपने छोटे भाई के लुंड को तड़पता हुआ छोड़ दूंगी
रेखा अपना हाथ आगे बढ़ा कर रवि के लुंड को धोती के ऊपर से hi पकड़ लेती है
रेखा- भले hi मेरी कितनी भी तबियत खराब रहे मेरे छेद तेरे इस मुसल के लिए हेमशा hi खुले रहेंगे समझा
चल अब उठ जा जल्दी सी
रवि- दीदी आपने तो सुबह सुबह hi इतनी मस्त चीज़ज़ दिखा दी की अब जब्ब तक्क तुमको रगड़ कर छोडूंगा नहीं तब्ब तक्क ये लुंड ऐसे hi फनफनाता रहेगा
रेखा - सब्र करले मेरे भाई थोड़ा वैसे भी सब्र का फल बहुत मीठा होता है अभी उठ जा दोपहर में मैं खेतो पर आउंगी तब जितना कहे उतना रगड़ लेना अपनी दीदी को
रवि- दीदी दोपहर को क्यों
रेखा- तो क्या अभी चलु तेरे साथ खेतो पारर
रवि- हां चलो ना
रेखा- अच्छा ताकि तू दिन भर छोड़ छोड़ कर मेरी गांड का छेद फैला दी
रवि - दीदी आपकी गांड hi ऐसी है की उसे देखने के बाद बिना चोदे रहा hi नहीं जाता
रेखा - बड़ा कमीना है तू दिन रत अपनी दीदी की गण्ड मरने की फिराक में hi लगा रहता है
चल उठ जा जल्दी आउंगी में खेतो में तब जो करना हो कर लेना मेरे सठह
रेखा अपना ब्लाउज पहनने लगती है और रवि उठ कर अपने लुंड कक धोती में छुपता हुआ जैसे hi बहार निकलता है उसे सामने hi मल्टी बैठी नजर आ जाती है
मल्टी जोकि रवि और रेखा की साडी हरकतों को देख देख कर काफी गरम हो चुकी थी जैसे hi उसकी नजर रवि की धोती पारर पड़ती है उसके नथुने फूलने लगते है
ये वही लुंड था जिसके मुखछोडन की वजह से अभी टककक मल्टी का गला दररड कर रहा था
रवि और मल्टी की नजरे हैसे hi मिलती है दोनों एक दूसरे को एक नजर देखते हुए दुबारा से एक दूसरे के मादक अंगो को देखने लगते है
कुछ देर बाद रवि अपना लुंड मसलता हुआ बहार निकल जाता है
और मल्टी वही बैठी बैठी उस लुंड से छोड़ने की कल्पना में खो जाती है
रवि नाश्ता करके खेतो की और निकलने लगा था तभी उसे मल्टी दिखाई पड़ती है जो घर के पिछवारे की और जा रही थी
रवि भी मल्टी के पीछे जाता है और जैसे hi वो घर के पीछे पहुँचता है उसे मल्टी बैठी हुई दिखाई देती है
मल्टी की गांड रवि की तरफ थी जिसे देख कर रवि अपना लुंड मसलने पारर मजबूरर हो चुका था
मल्टी भी किसी अप्सरा से कम् नहीं थी
इधर मल्टी की छूट से एक मादक आवाज़ज के साथ पिशाब बहार आने लगता है जिसे देख कर रवि अपने आप पर काबू नहीं रख पता और अपना हाथ अपनी धोती पर ले जाता हुआ साइड से लुंड बहार निकल कर मसलने लगता है
मल्टी जैसे hi पलटती है उसे सामने hi उसका देवरर दिखाई पड़ता है जो उसे देख कर अपना लुंड मसल रहा था
एक बार को तो मल्टी को वो लुंड देख कर डर लगता है जिसने रात को उसका मुह्ह छोड़ा था
पर अगले hi पल मल्टी अपनी गांड मटकती हुई रवि के नजदीक पहुँचती है और बड़े hi मादक अंदाज में अपने हाथ पर थूकती हुई सीधा रवि का लुंड पकड़ लेती है
मल्टी- अह्ह्ह्ह कितना बड़ा है देवरर जी अआप्का मुसल
रवि- क्यों भाभी पहले कभी इतना बड़ा नहीं देखा क्या
मल्टी- अगर देखा होता तो आज तक्क प्यासी न रहती
मल्टी अब तक्क अपने दूसरे हाथ को भी काम पर लगा चुकी थी अब वो अपने दोनों हाथो से रवि के लुंड को मसल मसल कर मुठिया रही थी
रवि- भाभी आपकी तो शादी हो गयी है फिर भी आप प्यासी हो केशव भैय्या के पास नहीं है क्या ऐसा मुसल
रवि की बात सुनकर मल्टी को हसी hi जाती है
मल्टी- हहहहह
मुसल तुम्हरे भाई की तो लुल्ली है और इतना जान लो देवर जी मेरी बास शादी हुई है सील अभी टककक नहीं टूटी
अभी रवि कुछ बोलता उससे पहले hi मेघा दीदी की आवाज आ जाती है
हड़बड़ी में मल्टी तो घर की और भगति है और रवि अपने विशाल लुंड को धोती से ढकता हुआ खेतो की तरफ चल देता है
रवि को आज दूर वाले खेतो में काम था वो जल्दी hi उस तरफ चला जाता है ताकि जल्दी काम ख़तम करके दिन भर रेखा दीदी को थोक सखे
इधर करीब 10 बजे रेखा रवि का खाना लेकर निकलने को होती है
तभी मल्टी भी उसे साथ चलने को बोलती है पर रेखा मुह्ह बनती हुई साफ़ साफ़ मना कर देती है की वो अपने साथ किसी को भी नहीं ले जाएगी
मेघा दीदी भी कुछ नहीं बोलती और बज्चारी मल्टी वही कमरे में जाकर अपनी कामवासना पर काबू करने की कोशिश करती है
इधर हरिया और नीलम दोनों अपने खेतो में खत पर बैठे थी
उधर से रेखा अपनी भरी भरकम गांड मटकती हुई चली आ रही थी
हरिया- देख तो कैसे रंडी की तरह चल रही है कुटिया
नीलम- बापू इसके मुह्ह लग्ग कर फायदा नहीं है इसका भाई और ये दोनों hi बहुत कमीने है
रेखा भी हरिया और नीलम को देखती है
रेखा- क्या बात है नीलम आज काका को यही खेतो में खुश करेगी क्या
रेखा एक टोंट मरती हुई आगे को निकल जाती है
हरिया - इस कुटिया को तो सबक सीखना पड़ेगा आज
नीलम- बापू इस रंडी पारर कोई रेहम मत्तट करना
हरिया- तेरी कसम बेटी आज ये तेरे सामने गिड़गिड़ा कर भीख मांगेगी और जब तू बोलेगी तभी छोडूंगा मैं इसे
नीलम- कोई भी छेद मैट छोड़ना बापू इस कुटिया का सबको अपने माल से बाहर देना
हरिया नीलम का हाथ पकड़ता हुआ उसे अपने साथ लेकर रवि के खेतो की और चल देता है....
रात भर मल्टी के सपनो में रवि hi था जो उसे लगातार चोदे जा रहा था
उसकी बरसो की प्यास को बुझाने का रास्ता उसे रवि कल रात दिखा गया था
सुबह हो चुकी थी सब जान अपने काम में व्यस्त थे वही मल्टी भी आज काफी खुश थी क्योंकि रात के बाद से उसे अब पता था की जल्द hi उसे उसका मनपसंद लुंड मिलने वाल है
इधर रवि और रेखा अब भी एक दूसरे से चिपके सो रहे थी
मेघा दीदी की नजर उठते hi रवि और रेखा पारर पड़ती है
रेखा जोकि रात को hi अपना ब्लाउज उतार चुकी थी
रेखा की चूचिया बिलकुल नंगी थी और रवि का हाथ रेखा की एक चुकी के ऊपर था
रवि के हाथ को देख कर ऐसा लग रहा था मनो उसने खुद से hi रेखा दीदी की चुकी को जबरदस्त तरिके से पकड़ रखा हो
मेघा दीदी को भी आज पहली बार यह अहसास हुआ था
मेघा( हे भगवान् इनदोनो को कोई इस हालत में देखेगा तो कोण बोलेगा की ये दोनों भाई बेहेन है ये रेखा तो है hi बेशरम अब रवि को भी बिगाड़ रही है अपने नंगे शरीर से चिपका कररर)
कहि न कहि मेघा दीदी के अंदर एक जलन थी की क्यों रवि रेखा से चिपका हुआ है न की उनसे
खैर थोड़ी hi देर में रेखा भी उठ जाती है और अब तक मेघा दीदी भी कमरे के बहार जा चुकी थी
रेखा - अरे ूठः न कितना सोयेगा तू रवि
रवि- दीदी सोने दोना
रेखा - इधरर तेरी दीदी की छूट में खुजली हो रही है और तुझे नींद आ रही है कैसा भाई है रे चू देख तो कितना पनिया गयी है तेरी दीदी की छुटत
रेखा अपना पेटीकोट उठती हुई सीधा रवि की छाती पारर चढ़ जाती है
रवि अपनी आँखे खोल कर देखता है और रेखा दीदी की छूट को आगे बढ़ता हुआ चुम्म लेता है
रवि- दीदी रात को तो सू गयी थी तुम जल्दी और अब तुम्हारी छूट पानी छोड़ रही है
रेखा- तो रात को जगाया क्यों नहीं
रवि- मैंने सोचा आपकी तबियत खराब होगी
रेखा- अच्छा मेरी तबियत खराब होगी तो मैं क्या अपने छोटे भाई के लुंड को तड़पता हुआ छोड़ दूंगी
रेखा अपना हाथ आगे बढ़ा कर रवि के लुंड को धोती के ऊपर से hi पकड़ लेती है
रेखा- भले hi मेरी कितनी भी तबियत खराब रहे मेरे छेद तेरे इस मुसल के लिए हेमशा hi खुले रहेंगे समझा
चल अब उठ जा जल्दी सी
रवि- दीदी आपने तो सुबह सुबह hi इतनी मस्त चीज़ज़ दिखा दी की अब जब्ब तक्क तुमको रगड़ कर छोडूंगा नहीं तब्ब तक्क ये लुंड ऐसे hi फनफनाता रहेगा
रेखा - सब्र करले मेरे भाई थोड़ा वैसे भी सब्र का फल बहुत मीठा होता है अभी उठ जा दोपहर में मैं खेतो पर आउंगी तब जितना कहे उतना रगड़ लेना अपनी दीदी को
रवि- दीदी दोपहर को क्यों
रेखा- तो क्या अभी चलु तेरे साथ खेतो पारर
रवि- हां चलो ना
रेखा- अच्छा ताकि तू दिन भर छोड़ छोड़ कर मेरी गांड का छेद फैला दी
रवि - दीदी आपकी गांड hi ऐसी है की उसे देखने के बाद बिना चोदे रहा hi नहीं जाता
रेखा - बड़ा कमीना है तू दिन रत अपनी दीदी की गण्ड मरने की फिराक में hi लगा रहता है
चल उठ जा जल्दी आउंगी में खेतो में तब जो करना हो कर लेना मेरे सठह
रेखा अपना ब्लाउज पहनने लगती है और रवि उठ कर अपने लुंड कक धोती में छुपता हुआ जैसे hi बहार निकलता है उसे सामने hi मल्टी बैठी नजर आ जाती है
मल्टी जोकि रवि और रेखा की साडी हरकतों को देख देख कर काफी गरम हो चुकी थी जैसे hi उसकी नजर रवि की धोती पारर पड़ती है उसके नथुने फूलने लगते है
ये वही लुंड था जिसके मुखछोडन की वजह से अभी टककक मल्टी का गला दररड कर रहा था
रवि और मल्टी की नजरे हैसे hi मिलती है दोनों एक दूसरे को एक नजर देखते हुए दुबारा से एक दूसरे के मादक अंगो को देखने लगते है
कुछ देर बाद रवि अपना लुंड मसलता हुआ बहार निकल जाता है
और मल्टी वही बैठी बैठी उस लुंड से छोड़ने की कल्पना में खो जाती है
रवि नाश्ता करके खेतो की और निकलने लगा था तभी उसे मल्टी दिखाई पड़ती है जो घर के पिछवारे की और जा रही थी
रवि भी मल्टी के पीछे जाता है और जैसे hi वो घर के पीछे पहुँचता है उसे मल्टी बैठी हुई दिखाई देती है
मल्टी की गांड रवि की तरफ थी जिसे देख कर रवि अपना लुंड मसलने पारर मजबूरर हो चुका था
मल्टी भी किसी अप्सरा से कम् नहीं थी
इधर मल्टी की छूट से एक मादक आवाज़ज के साथ पिशाब बहार आने लगता है जिसे देख कर रवि अपने आप पर काबू नहीं रख पता और अपना हाथ अपनी धोती पर ले जाता हुआ साइड से लुंड बहार निकल कर मसलने लगता है
मल्टी जैसे hi पलटती है उसे सामने hi उसका देवरर दिखाई पड़ता है जो उसे देख कर अपना लुंड मसल रहा था
एक बार को तो मल्टी को वो लुंड देख कर डर लगता है जिसने रात को उसका मुह्ह छोड़ा था
पर अगले hi पल मल्टी अपनी गांड मटकती हुई रवि के नजदीक पहुँचती है और बड़े hi मादक अंदाज में अपने हाथ पर थूकती हुई सीधा रवि का लुंड पकड़ लेती है
मल्टी- अह्ह्ह्ह कितना बड़ा है देवरर जी अआप्का मुसल
रवि- क्यों भाभी पहले कभी इतना बड़ा नहीं देखा क्या
मल्टी- अगर देखा होता तो आज तक्क प्यासी न रहती
मल्टी अब तक्क अपने दूसरे हाथ को भी काम पर लगा चुकी थी अब वो अपने दोनों हाथो से रवि के लुंड को मसल मसल कर मुठिया रही थी
रवि- भाभी आपकी तो शादी हो गयी है फिर भी आप प्यासी हो केशव भैय्या के पास नहीं है क्या ऐसा मुसल
रवि की बात सुनकर मल्टी को हसी hi जाती है
मल्टी- हहहहह
मुसल तुम्हरे भाई की तो लुल्ली है और इतना जान लो देवर जी मेरी बास शादी हुई है सील अभी टककक नहीं टूटी
अभी रवि कुछ बोलता उससे पहले hi मेघा दीदी की आवाज आ जाती है
हड़बड़ी में मल्टी तो घर की और भगति है और रवि अपने विशाल लुंड को धोती से ढकता हुआ खेतो की तरफ चल देता है
रवि को आज दूर वाले खेतो में काम था वो जल्दी hi उस तरफ चला जाता है ताकि जल्दी काम ख़तम करके दिन भर रेखा दीदी को थोक सखे
इधर करीब 10 बजे रेखा रवि का खाना लेकर निकलने को होती है
तभी मल्टी भी उसे साथ चलने को बोलती है पर रेखा मुह्ह बनती हुई साफ़ साफ़ मना कर देती है की वो अपने साथ किसी को भी नहीं ले जाएगी
मेघा दीदी भी कुछ नहीं बोलती और बज्चारी मल्टी वही कमरे में जाकर अपनी कामवासना पर काबू करने की कोशिश करती है
इधर हरिया और नीलम दोनों अपने खेतो में खत पर बैठे थी
उधर से रेखा अपनी भरी भरकम गांड मटकती हुई चली आ रही थी
हरिया- देख तो कैसे रंडी की तरह चल रही है कुटिया
नीलम- बापू इसके मुह्ह लग्ग कर फायदा नहीं है इसका भाई और ये दोनों hi बहुत कमीने है
रेखा भी हरिया और नीलम को देखती है
रेखा- क्या बात है नीलम आज काका को यही खेतो में खुश करेगी क्या
रेखा एक टोंट मरती हुई आगे को निकल जाती है
हरिया - इस कुटिया को तो सबक सीखना पड़ेगा आज
नीलम- बापू इस रंडी पारर कोई रेहम मत्तट करना
हरिया- तेरी कसम बेटी आज ये तेरे सामने गिड़गिड़ा कर भीख मांगेगी और जब तू बोलेगी तभी छोडूंगा मैं इसे
नीलम- कोई भी छेद मैट छोड़ना बापू इस कुटिया का सबको अपने माल से बाहर देना
हरिया नीलम का हाथ पकड़ता हुआ उसे अपने साथ लेकर रवि के खेतो की और चल देता है....