Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 23 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -207

मल्टी के मन में यही उधेड़ बन चल रही थी की आखिर कम्मो क्यों लगदा रही है

इस बिच सब खाना खा चुके थे

केशव - एक काम करो तुम सब घर में सो जाओ और मैं और मल्टी यह आंगन में सो जायेंगे

रेखा - ठीक है भैया जैसा आप ठीक समझे

सब लोगो का बिश्तर लग चूका था केशव और मल्टी बहार पड़ी चारपाई पर सो रहे थे

पहले हरी फिर रवि फिर रेखा और लास्ट में कम्मो

करीब आधी रात को रवि को अचानक से लगता है की कोई उसकी धोती में कुछ टटोल रहा है

रवि आँखे खोल कर देखता है तो कोई और नहीं बल्कि उसकी कम्मो दीदी थी जो उसकी आँखों में देखती हुई गप्प्प गप्प्प लुंड चूसना शुरू कर चुकी थी

कम्मो की आग को रवि ने hi भड़काया था और अब जसे hi इस आग को शांत भी करना था

कम्मो रवि की आँखों में देखती हुई उठ कर अपना पेटीकोट ऊपर चढ़ती हुई अपने दातो से पकड़ लेती है और बिना किसी शर्म के सीधा अपने छोटे भाई के लुंड को सीधा करते हुए उस पर अपनी छूट टिका कर एक hi झटके में अपने शरीर को ढीला छोड़ देती है जिसकी वजह से एक झटके के साथ hi रवि का लुंड उसकी छूट की गहराईयों में समा जाता है

कम्मो- अह्ह्ह्ह शहहहहह

रवि की गांड फट रही थी क्योंकि बगल में hi हरी सोया हुआ था जो की कब्भी भी उठ सकता था

इधर कम्मो का बदन इतना तप रहा था मनो उसके अंदर कोई हीटर जल रहा हो

अपनी दीदी की छूट की गर्मी को अपने लुंड पर महसूस करके रवि पागल हो जाता है और निचे से हलके हलके कमर उठता हुआ अपनी दीदी को छोड़ने लगता है

थाओ थप थप थापलप्प की आवाज कमरे में गूंज रही थी हलकी hi सही

जो किसी को जगाने के लिए काफी थी

और हुआ भी ठीक यही रेखा तो नहीं जगी पर बगल में सोया हुआ हरी जाग गया और भाई बेहेन की इस कामलीला को देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी

जिसके साथ उसकी सदी होने वाली थी वो पागलो की तरह अपने छोटे भाई के लुंड पर कूद कूद कर छुड़वा रही थी मनो वो भाई बेहेन न होकर पति पत्नी हो

हरी बस ऐसे hi लेता लेता देख रहा था उसका छोटा सा लुंड भी अब खड़ा होना शुरू हो गया था

इधर कम्मो की खुमारी बढ़ती hi जा रही थी उसकी छूट इतना पानी छोड़ रही थी की रवि की कमर पूरी तरह चिपचिपे पानी से भीग चुकी थी

छप्प्प्पपकाहप.

छप्प्प्पपकाहप

करीब 10 मिंट तक ऐसे hi कम्मो रवि के लुंड पर उछलती रहती है और अंतत में अपने छोटे भाई का सारा वीर्य अपनी छूट में गिरवा कर उसके लुंड से उतरती हुई उसे चाट कर साफ़ करती हसि और एक चुम्मा रवि के लुंड पर देती हुई अपनी जगह पर चली जाती है

रवि (ये तो रेखा दीदी से भी ज्यादा गरम है कम्मो दीदी को मस्त करके पेलने में और मजा आएगा )

रवि जैसे hi पलट कर सोने लगता है उसकी नजर अचानक से हरी पर पड़ती है जो अपनी आँखे खोले रवि को hi देख रहा था

रवि तुरंत hi दूसरी और मुँह घुमा लेता है

रवि-( चुद गयी माँ ये बेहेन का लौड़ा खा से उठ गया इसने सब देख लिया है भगवान् अब क्या होगा ये अपनी उस रैंड दीदी को सब बता देगा तो नहीं नहीं इससे बात करनी पड़ेगी )

जैसे तैसे रवि आँखे बंद करके सो जाता है की कल वो हरी को देख लेगा

इधर हरी सोच में ोडा हुआ था की अपनी hi दीदी को छोड़ने में कैसा मजा आता होगा ...
 
अपडेट -208

सुबह की पहली किरण पड़ते hi कम्मो उठ जाती है

बहार केशव और मल्टी पहले hi उठ चुके थे और मल्टी ने अब तक घर की कम्मं भी अपने हाथो में लेलथि

कम्मो भी हसी खुसी अपनी भाभी का हाथ बता रही थी

थोड़ी देर बाद हरी की भी नींद खुल जाती है

जैसे hi वो अपनी आँखों को मसलता हुआ खोलता है उसकी आँखों के सामने रेखा दिखती है

एक दम मांसल औरत जिसके कायदे पूरी तरह अस्त वयस्त थे

हरी अपने आपको उसे अप्सरा को देखने से रोक नहीं पता

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हरी-( ये साली तो दीदी से भी मस्त है एक बार अगर इसकी मिल जाये तो माँ कसम मजा hi आ जायेगा )

यह एक बात जानना जरूरी है की जैसे रामलाल को रंडिया छोड़ने का शोख था ठीक उसी तरह उसके बेटे को भी रोज रोज रंडिया पेलने की आदत लग गयी थी

हरी रेखा की बेकाबू जवानी को देख कर अपना लुंड मसल hi रहा था तभी रवि की आँख खुल जाती है

रवि हरी की हरकत देख लेता है

गुस्सा तो उसे बहुत सा रहा था पर रिश्ता hi ऐसा था की उसे अपने आप पर काबू रखना पड़ा

रवि( भोस्डिका मादरचोद मेरी दीदी को देख कर लुंड मसल रहा है तेरे सामने hi अगर तेरी दीदी को रांड की तरह ना छोड़ा तो मेरा नाम भी रवि नहीं )

रवि भी तुरंत उठ कर बैठ जाता है

रवि को देखते hi हरी दूसरी तरफ द्केहता हुआ नाटक करने लगता है

रवि- अरे हरी भैया बड़ी जल्दी जाग गए आप

हरी- है वो नई जगह है न तो इसी लिए

रवि- चलो ठीक है चलो चाय पिटे है

दोनों की आवाज सुनकर रेखा भी जाग जाती है

रेखा - अरे रवि क्या समय हुआ है

रवि- दीदी 8 बज गए है

रेखा - हे भगवान् इतनी देर तक कैसे सो गयी मैं

रेखा हरी और रवि के सामने hi अपने कामुक बदन को तोड़ते हुए अंगड़ाई लेती है

जिसे देख कर दोनों की आंको में एक चमक आ जाती है

रेखा- बड़ी जोर की हगवास लगी है रे भाई

इतना बोलते हुए रेखा बहार भाग जाती है

हगवास का नाम सुनते hi हरी के बदन में एक करंट सा दौड़ उठता है

हरी( कैसा होगा जब ये साली अपनी बड़ी सी गांड से हगने बैठेगी तो हे भगवान् ऐसी औरत तो मेरे मुँह में भी हैगगग दे तो कोई हर्ज्ज़ नहीं

रवि- क्या हुआ हरी भैया खा खो गए

हरी- अरे कहि नहीं चलो चलो

दोनों बहार निकल कर चाय नाश्ता करते है

केशव - अरे रवि आज तुम्हे खेतो में कुछ काम है क्या

रवि- कोई खास काम तो नहीं है भैया आप बताइये

केशव - अरे बताना क्या है हमारे सेल साहब को गाओं घूमने का बड़ा शौख है बस इन्हे गाओं घुमा दो

रवि- ठीक है भैया

रवि हरी को लेकर अपने साथ निकल जाता है

सुभे की बात सोच सोच कर रवि को गुसा तो इतना आ रहा था की उसका मन कर रहा था की अभी सेल हरी को गिरा कर यही पेल दे पर रवि को अभी उससे भी जरूरी एक काम करना था बदला तो वो हरी की बेहेन से भी ले सकता था

खून का घूंट पी कर रवि हरी को साथ लेकर हरिया के घर की और निकल जाता है ....
 
अपडेट -209

दूसरी तरफ रामलाल का घर

हरिया और नीलम एक दम पसीने से लटपट थे

हरिया को जब से ये पता चला था की अब जल्दी hi उसकी बेटी की शादी हो जाएगी तब से hi वो उसे दिन रात छोड़ रहा था और हर बार अपना वीर्य अपनी बेटी के किसी न किसी छेद में छोड़ देता

नीलम तो वैसे भी हर वक़्त छुड़वाने के लिए तैयार रहती थी उसे इन सब से कोई फरक नहीं पद रहा था बल्कि उसे तो और मजा आ रहा था दिन भर उसके बाप का लुंड उसकी छूट या गांड में फसा रहता था

बस बेचारी को चिंता एक hi बसत की थी की अगर कहि गलती से उसकी शादी न हुई और बच्चा हो गया तो वो दुनिया को क्या बताएगी की कैसे उसका बाप दिन भर उसे छोड़ा करता था और उसी की दें है ये बच्चा

नीलम हर पल बस रवि की बात को hi याद करके थोड़ी खिस होती थी की वो जरूर कुक ह न कुछ करेगा

और उसी की बात को याद करके नीलम हर वक़्त तैयारी में रहती थी क्योंकि रवि कभी भी होने वाले दूल्हे को ला सकता है

नीलम इस बात से बेखबर अपने बाप से अपनी छूट छुड़वा रही थी की आज hi वो दिन है जब उसका होने वाला दूल्हा पहली बार उससे मिलेगा

हरिया अपनी बेटी का मुँह चुस्त हुआ उसकी छूट में ढका धक् लुंड पेल रहा था

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी टूउउ तो अपनी माँ से बी गरम है

नीलम- तभी तो छोड़ छोड़ कर गाभिन कर दिया बापू तुमने मुझे

हरिया- तेरी जैसी बेटी हो तो एक बार तो क्या कोई भी बाप अपनी बेटी को कई बार गाभिन कर दे

अह्ह्ह्ह तेरी छूट की ये चिकनाहट बेटीई

नीलम - अच्छा गाओं में तो कोई और ऐसा बाप नहीं है जो अपनी hi बेटी को छोड़ कर गाभिन कर रहा हो

हरिया- अरे मेरी रानी तेरी बात hi अलग है तू नीलम है नीलम मेरी बेटी नीलम अह्हह्ह्ह्ह

इतना बोलता हुआ हरिया अपना विरया अपनी बेटी की छूट में छोड़ने लगता है

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी पी जा इसे अपनी छूट से बी जैसे मुहहह से पीती है वैसे hi अपनी छूट से भी पी जा बेटी अपने बाप का विरया

अह्ह्ह

हरिया अपनी बेटी की पूरी छूट को अपने विरया से भर देता है नीलम की छूट भी सारा का सारा माल छत्त कर जाती है

तभी दरवाजे पर दस्तक होती है

दोनों बाप बेटी एक दम शांत हो जाये है

हरिया- इस वक़्त कौन आ गया बेटी

नीलम - बापू लगता है राजू आ गया सेहर से

हरिया का लुंड अब भी उसकी बेटी की छूट में था जिसे वो निकलना तो नहीं छठा था ोहिर भी निकाल लेता है

लुंड पाछह की आवाज के साथ नीलम की कट से बहार आ जाता है

दोनों बाप बेटी जल्दी जल्दी कायदे पेहेनते है

नीलम अपना दुपट्टा उठा कर बाप बेटी की कामलीला के सबूत्त मिटा देती है और घर में हर तरफ गिरे हुए थे ( वीर्य)

हरिया एक शरीफ इंसान बेम कर खत पर बैठ जाता है मनो कितना सच्चा बाप हो

नीलम वैसे hi पेटीकोट और ब्लाउज में गेट खोलती है

गेट पर खड़े साक्ष को देखते hi नीलम की आँखों मर चमक आ जाती है

वो समझ गयी थी की आखिर वो दिन आ hi गया ...
 
दोस्तों छोटे अपडेट देने के लिए माफ़ी चाहूंगा

असल में बात ये है की बड़े अपडेट लिखने के लिए टाइम निकलना बहुत मुश्किल है और आप लोगो को ज्यादा इन्तजार करबा पड़ता है

तो आगे से मेरी कोशिश यही रहेगी की रेगुलर उपदटेस आये छोटे hi सही पर कहानी का फ्लो बना रहे

बाकि अगर कभी अपडेट न आये तो समझ लेना की आपका भाई बिजी है

धन्यवाद्...
 
अपडेट -210

रवि के साथ हरी को देख कर नीलम की आँखों में एक अलग hi तरह की चमक आ गयी थी

आखिर उसे वो मिल hi गया था जो उसके बूढ़े बाप की गलती को छुपाने में उसकी मदद कर सकता था

हरिया भी अपनी खत से उठ कर दरवाजे पर आ जाता है

हरिया - अरे बीटा रवि आओ आओ कैसे आना हुआ

रवि- कुछ नहीं काका ये हमारी भाभी के भाई है इन्हे गाओं घुमा रहा था तो सोचा आपसे और नीलम दीदी से भी मिलवा दू

हरी एक नजर नीलम को ऊपर से निचे की और देखता है

जो सच में एक काम की देवी लग रही थी ये सब उसके बाप के कर्मो का hi फल था की नीलम का जिस्म अब और भी ज्यादा खूबसूरत हो चूका था

हरी भी नीलम दीदी की जवानी को अब आँखो से पी रहा था

हलाकि वो अब तक नहीं जनता था की रवि का रिश्ता नीलम के साथ में सच में भाई बेहेन वाला है या बेहेन को बजाने वाला है

नीलम - अरे तू आया है तो बहार क्यों खड़ा है अंदर आना

आप भी आइये अंदर

नीलम अपनी कामुकता भरी आंको से हरी को बोलती है

हरी और रवि दोनों अंदर चले जाते है

कुछ देर बैठने के बाद चाय पानी होता है और इधर उधर की बकते होती है

रवि- काका आपका पानी वाला इंजन बिगड़ गया है न चलिए उसको देख लेते है

हरिया को पहले तो बात कुछ समझ नहीं आती

असल में उस बुड्ढे का प्लान तो आज यही था की दिन भर अपनी बेटी को पलेगा पर रवि के आने से उसका प्लान चौपट हो गया था

रवि अपनी आँखे दिखता हुआ दुबारा से कहता है

हरिया - हाहा बीटा चलो चलो

रवि और हरिया के साथ साथ हरी भी उठने लगता है

रवि- अरे हरी भैया आप यही बैठिये नील दीदी से बात चित कीजिये मैं बस अभी आता हु थोड़ी देर में फिर घूमेंगे गाओं

हरिया- है है बीटा अपना hi घर समझो

इसे

हरिया और रवि घर से निकल जाते है

हरिया - तो क्या बीटा तू इसी की बात कर रहा था

रवि- है काका यही है वो जो तुम्हारी गलती पर पर्दा डालेगा

हरिया- वह बीटा वहहह क्या दिमाग लगाया है

रवि- काका दिमाग तो लगाया है बस अब तुम्हारी छिनाल बेटी अपना जादू उस सेल पर चला दे तो समझो बात पक्की

हरिया - अरे बीटा तू चिंता मत कर मैं अपनी नीलम को एक दम मांझी हुई खिलादन बना दिया है हहहह

रवि- खिलादन नहीं बनाया बुड्ढे तूने अपनी बेटी को बल्कि तूने तो उसे रंडी बना दिया है सेल हरामी हेहेहे

हरिया - अरे बीटा अब जो भी हो खाना तो हमे hi है न मिल बात कर

वैसे मैं सोच रहा हु की नीलम की शादी से पहले एक बार तू रेखा को ले आना मिल कर मजा करेंगे

रवि- अब्बे सेल हरामी तू नहीं सुधरेगा

अभी बार चालू तो होने दे

हरिया - मैं तो बस ऐसे hi कह रहा था बेटा

रवि- अच्छा काका ये बताओ अगर इस चमन चूतिये से नीलम दीदी की शादी हो भी गयी तो पहले दीदी के साथ सुहागरात कौन मानिएगा

हरिया - अरे बीटा ये भी पूछने की बात है नीलम मेरी बेटी और तेरी दीदी है मिल कर पेलेंगे उसे रात भर

सुहाग की रात उसे जिंदगी भर याद रहेगी जब उसके एक छेद में बाप का लुंड और एक छेद में भाई ला लुंड होगा तो

रवि- तो जब हम नीलम दीदी के दोनों छेद छोड़ रहे होंगे तो उसका पति क्या करेगा काका

हरिया - वो साला क्या करेगा ज्यादा से ज्यादा उसका मुब छोड़ लेगा और हम दोनों का लुंड पकड़ कर उसके छेड़ो में डालेगा हहहहहह

रवि- सच में बड़े हरामी हो काका तुम

हरिया - हरामी का तो पता नहीं बीटा पर बेटिचोड़ पक्का वाला हु हेहेहे
 
अपडेट -211

हरिया के जाते hi उसकी रैंड बिटिया अपने काम में लग गयी

उसे कैसे ब्बि करके हरी को अपने हुसैन और गदराये जिस्म के जाल में फ़साना था

नीलम जानती थी की अगर ये मौका हाथ से गया तो वो और उसका बूढ़ा बाप गाओं में किसीको मुँह दिखने लायक नहीं बचेंगे

नीलम पानी लेने जाती है और जान बुझ कर अपने ब्लाउज के ऊपर का 1 हक्क और निचे का 1 हक्क खोल देती है और दुबारा से अपना दुपट्टा ओढ़ते हुए अपनी भरी भरकम छतियो को धक् लेती है

नीलम - लो पानी पियो आप

नीलम हरी की और गिलास बढ़ती हुई और भी ज्यादा झुक जाती है ताकि हरी को उसकी घाटियों का नजारा साफ साफ दिखाई दे सखे

हरी पानी लेते हुए नीलम की चूचिया hi देख रहा था

नीलम मन hi मन बहुत खुश थी आखिर वो अपने प्लान में कामयाब जो हो रही थी

नीलम- आप बैठो मैं अभी चाय बना कर लती हु

हरी- अरे नहीं नहीं दीदी इसकी कोई जरुरत नहीं है मैं तो बस अभी अभी पी कर आया हु

नीलम- अरे दीदी बोलते हो और बोलते हो जरूरत नहीं है हर बेहेन का फ़र्ज़ होता है अपने भाई को तन मन से सेवा करना

हरी इस बात को ज्यादा नहीं सोचते हुए नीलम की है में हां मिला देता है

नीलम जैसे hi पलट कर जाने को होती है वो जान बुझ कर फिसलने का नाटक करती हुई सीधा हरी की गॉड में अस गिरती है

नीलम- अह्हह्ह्ह्ह

हरी अपनी कमजोर बहो से नीलम जैसी गदराई घोड़ी को संभाले हुए था

हरी- क्या हुआ दीदी

नीलम- अह्हह्ह्ह्ह भाई मुझे चक्कर आ गया

मौके का फायदा उठती हुई नीलम अपनी छाती पर पड़ा दुपट्टा सरका देती है और अच्चानक से हरी की आँखों के सामने उसकी चूचिया आ जाती है जो आधे से ज्यादा नंगी थी

हरी अब घर घर कर नीलम की चूचिया hi देख रहा था

हरी के नथुने फूलते देख नीलम मन hi मन ख़ुशी मना रही थी

नीलम- अगर तुम ना होते तो न जाने आज मुझे खा खा चोट लगती भाई

हरी कुछ नहीं बोलता बल्कि अपने दोनों हाथो की पकड़ नीलम की कमर पर और भी ज्यादा मजबूत कर देता है

नीलम- अह्ह्ह्ह माआआआ

हरी - क्या हुआ दीदी

नीलम- लगता है गिरने की वजह से चोट आयी है

हरी- खा लगी है दीदी आपको

हरी की आँखे अब भी नीलम के जोबन पर hi थी

नीलम अब असली खेल शुरू करना कहती थी आर या पार जो होगा देखा जायेगा यही सोच कर उसने हरी का हाथ पकड़ कर सीधा अपनी एक चुकी पर ब्लाउज के ऊपर रख दिया

नीलम- यहां लगी है भाई

हरी का बदन अब थार थार काँप था था क्योंकि उसने आज तक किसी को दीदी बोल कर नहीं छोड़ा था और खैर नीलम तो उसकी दीदी से भी बढ़ कर होने वाली थी

नीलम- क्या हुआ भाई अपनी दीदी की मदद नहीं करोगे

हरी- हाहहाआ करूंगा दीदी पर यह कैसे ठीक होगा आपका दर्द

नीलम अपने एक हाथ को हरी के हाथ पर रखती हुई दबा देती है

नीलम- कुछ मत करो बस अपनी दीदी की चूचिया निचोड़ दो अह्हह्ह्ह्ह

हरी नीलम की यह हरकत देख कर पागल सा हो जाता है

हरी- पररर दीदी

नीलम- अरे मुझे यह दर्द से तकलीफ हो रही है और तुम्हारे पर मगर ख़तम नहीं हो रहे

भाई हो न तो बेहेन की तकलीफ नहीं समझते तुम

हरी अब नीलम की बातो में पूरी तरह फस्स चूका ..
 
अपडेट -212

बस दबाता जा अपनी दीदी की चूचिया समझा भाई

अगर इतनी शर्म आ रही है तो मुझे अपनी मल्टी दीदी समझ कर मेरी मदद करदे भाई अह्ह्ह्ह ये दररर अब बर्दास्त नहीं होता

हरी बड़े hi आराम आराम से नीलम की एक चुकी मसल रहा था

जिसका असारर अब नीलम की छूट पर भी होने लगा था

नीलम अपने दोनों पैरो को रगड़ती हुई हरी का दूसरा हाथ अपनी दूसरी चीची पर रख देती है

हरी तो मनो बोखला सा गया था इतनी जल्दी सब कुछ हुआ की उसे सम्भलने का समय hi नहीं मिला

नीलम- आह्हः कितना अच्छा भाई है तू अह्ह्ह्ह कितना ख्याल रखता है तू अपनी दीदी का काश की तेरे hi जैसा मेरा भी भाई होता अह्ह्ह और जोर से दबा भाई

अब हरी को भी इस खेल में मजा आने लगा था

आखिर नीलम जैसी मांसल गदराई औरत को चुना किसे अच्छा नहीं लगेगा

हरी- हहहआ दीदी मुझे भी आपका भाई बन्ना है दीदी काश आपकी hi तरह मेरी भी दीदी मुझसे ऐसे hi अपनी सेवा करवाती

नीलम- अरे तू है न मेरा भाई तू चिंता क्यों करता है तेरी दीदी न सही पर तेरी यह दीदी तुझसे अपनी पूरी सेवा करवाएगी अह्ह्ह्ह और जोरसे मसल भाई अपनी दीदी की चूचिया अह्ह्ह्ह निचोड़ ढाल इन्ही

हरी अब पूरी तरह बहक गया था वो जोश में आता हुआ अब नीलम के ब्लाउज को पूरा खोल देता है और उस्ले मोठे मोठे निप्पल पकड़ कर ैठने लगता है

नीलम- अह्ह्ह तू तो सच में जादूगर निकला भाई मेरी तकलीफ एक पल में hi गायब हो गयी अह्हह्ह्ह्ह और जोर से मसल मेरी घुंडियो को अह्ह्ह्ह मर गयी भईई तेरी दीदी अह्ह्ह्हह्हह

नीलम हरी का मुँह पकड़ कर अपनी चुकी पर रख देती है और हरी भी बिना किसी सवाल के सीधा अपना मुँह खोल कर नीलम की चूचिया पीना और चूसना चालू कर देता है

नीलम की पीठ में अब हरी का लुंड गड़ना चालू हो चूका था जो जयादा बड़ा तो नहीं था फिर भी नीलम को महसूस जरूर हो रहा था

नीलम हरी का एक हाथ पकड़ कर निचे खींचती हुई उसे अपनी छूट पर लगा देती है

हरी तो मनो यही साहहह रहा था

हरी भी नीलम की छूट को दबोच लेता है

नीलम - अह्ह्ह भईई तेरा हाथ तेरी दीदी की छूट को दबाए रहा है

हरी- दीदी तेरी छूट है hi मेरे लिए अह्ह्ह आज तू सारा का सारा रस पी जाऊंगा तेरा दीदी अह्हह्ह्ह्ह

अच्चानक से नीलम खिड़की की और देखती है झा से उसका बाप और रवि अंदर का सारा नजारा देख रहे थे

रवि इशारे में नीलम को जल्दी करने के लिए कहता है

नीलम अपने होठो पर मुस्कान लती हुई खड़ी हो जाती है और एक hi झटके में अपने पेटीकोट की गांठ को खोलती हुई पूरी नंगी हो जाती है

नीलम- ले अब निचोड़ ले भाई अपनी दीदी को

हरी किसी भूखे भेड़िये की तरह नीलम पर जहापत पड़ता है

सबसे पहले वो नीलम के होठो को चुस्त है फिर उसकी चूचिया और फिर अंतत में नीलम को पलंग पर लिटाते हुए उसकी दोनों टैंगो को खोल कर अपना मुँह सीधा नीलम की फटी हुई छूट पर रख देता है

सुबह हुई चुदाई के बाद से नीलम की बुर्र वैसे भी पनियाई हुई थी

जिसकी वजह से अब उसकी महक और भी बढ़ चुकी थी

कहते है न खेली खायी औरत को पेलने का मजा hi कुछ और है

बस वही मजा अब हरी को भी आ रहा था

हरी ताबड़तोड़ नीलम की छूट में अपनी जीभ घुसा घुसा कर उसका पानी चूस रहा था

अपनी नीलम भी खा काम थी वो भी किसी जंगली बिल्ली की तरह पलटी मरती हुई 69 की पोजीशन में आ जाती है और हरी का लुंड पेंट से निकल कर सीधा अपने हलक तक उतर कर चूसने लगती है

हरी को अब दोहरा मजा मिल रहा थाआ

हरी- अह्ह्ह्ह दीदी क्या छूट है तेरी

हरी- तेरा लुंड भी कमाल है भैई गपपपप गपपपपपप

नीलम- चल अब और देर मत कर छोड़ दे अपनी दीदी को

हरी अपनी पोजीशन ठीक करता हुआ अपने लौड़े को नीलम की छूट पर टिका देता है

नीलम- अरे यह क्या. कर रहा है तू

हरी- क्या हुआ दीदी

नीलम- दीदी की पहली चुदाई यादगार होनी चाहिए समझा तभी तो बार बार छोड़ने का मन करेगा दीदी का

हरी - तो क्या कृ दीदी मैं

नीलम- तू कुछ मत कर ये ले मेरा दुपट्टा और मेरे दोनों हाथ बांध दे और इससे मेरा मुँह बांध दे

हरी- पर दीदी ये सब

नीलम- अरे भाई डर मत तू बस ये सोच कर मुझे छोड़ की तू अपनी सगी दीदी को जबरदस्ती छोड़ रहा है बस

हरी बिचारा नीलम की साडी बाटे मंटा हुआ इसके हाथ और मुँह बांध देता है और अपना लुंड उसकी छूट ओर रखता हुआ एक झटका मरता है

एक hi झटके में पूरा का पूरा लुंड नीलम की छूट में घुस जाता है पर उसे घंटा फरक नहीं पड़ता

हरी अब तेज धक्को के साथ नीलम को छोड़ रहा था करीब करीब 5 -7 मिंट की चुदाई के बाद हरी का पानी नीलम की छूट में hi निकल जाता है और वो वही नीलम के ऊपर गिर जाता है

रवि- चलो चलो काका यही सही समय है

हरिया एक जोरदार लात मरता हुआ दरवाजा खोलता है

हरिया को यु देख कर हरी की गांड फट जाती है

हरिया के पीछे पीछे रवि भी आ जाता है

रवि- क्या हुआ काका

Hriya-tu मुझसे पूछ रहा है वो देख तेरी भाभी के भाई ने क्या हाल किया मेरा बेटी का हे भगवान् मैं तो अब कहि मुँह दिखने लायक नहीं रहूंगा

रवि- यह क्या किया हरी भैय्या अपने नीलम दीदी के साथ

हरी की तो मनो गांड hi फैट गयी थी उसके मुँह में सब्द hi नहीं बचे थे

हरी- रवीए मेंनननरररर कुछःह नहीं किया

हरिया- चुप कर मादरचोद तेरी इस गलती की वजह से अब मेरी बेटी गाभिन हो जाएगी और बिन ब्याही गाभिन लड़की का बोख मैं कैसे धोऊंगा हैट जा रवि मैं अपनी जान देने जा रहा हु

नीलम भाग कर नंगी hi अपने बाप के पैरों में गुर जाती है

नीलम- माफ़ कार्डो बापू बहुत बड़ी गलती हो गयी

मुझसे जो मैं यह सब कर बैठी .

हरिया- अब तो लगता है हम दोनों बाप बेटी को नदी में कूद कर जान देनी hi पड़ेगी

हरी- आपकी कोई गलती नहीं है दीदी मैं hi अपने आप पर काबू नहीं रख पाया मैं hi अपनी जान देदेता हु

कमरे में फुल तो इमोशनल ड्रामा चल रहा था जिसे देख कर अब रवि को अंदर hi अंदर हसी भी आ रही थी

रवि- कोई जान नहीं देगा काका अगर गलती हुई है तो सुधरी भी जा सकती है

हरिया - कैसे सुधरेगा तू गलती रवि देख इसने मेरी बेटी के अंदर अपना बिज्ज गिरा दिया है अब तो गाभिन होना तैय्य है रवि तैय है

हरी- मुझे माफ़ कार्डो काका प्लसस

रवि- मेरे पास एक उपाए है अगर सब राजी हो तो

सब रवि की और देखने लगते है

कमरे में सन्नाटा फ़ैल जाता है

रवि- अगर नीलम दीदी के अंदर हरी भाई का बिज्ज गिरा है तो बच्चा तो जरूर होगा और अगर ये बच्चा बिना बाप के हुआ तो सबकी बदनामी होगी तो इससे अच्छा यही है की हरी भाई नीलम दीदी से शादी कर ले

रवि की बात सुनकर बाप बेटी तो खुश हो जाते है पर हरी के चेहरे का रंग उड़द जाता है

हरी- शादी पर मैं कैसे रवि

हरिया - देखा बीटा रवि यह तो कहता hi है की हम बाप बेटी नदी में कूद कर जान देदे

चल बेटी चल

हरिया नीलम को नंगी hi पकड़ कर घर के बहार जाने को होता है

रवि दौड़ कर दरवाजा बंद कर देता है

रवि- सोच लो हरी भाई आपकी एक छोटी सी गलती की वजह से 2-2 जिन्दगिया बर्बाद हो जाएँगी तो क्या आप जी पाओगे जिंदगी भर सुकून से

हरी - ठीक है मैं टीएयर हु पर घर वालो से बात कौन करेगा

हरिया - मेरी बेटी पर क्या घर वालो से पूछ कर चढ़ा था तू बीटा

हरी मुँह लटका लेता है

हरिया - मेरी जान पहचान का एक पंडित है मैं उसे अभी लेकर आता हु

हरी- मतलब अभी शादी पर कैसे

हरिया हां अभी होगी शादी अभी की अभी समझा बीटा नहीं तो हम ठाणे में जाकर सब बता देंगे और तेरी माँ छुड़वा देंगे

हरी अब हालातो के सामने लचर सा महसूस कर रहा था

आगे कुवा पीछे खायी

यही हालत थी बेचारे की

हरी- ठीक है जैसा आपको ठीक लगे

हरिया जाकर पंडित को बुला लता है और थोड़ी hi देर में दोनों की शादी भी हो जाती है घर में hi

रवि- अब दीदी को विदा करके खा ले जाओगे हरी भाई

हरी- यही तो सोच रहा हु रवि क्या कृ कैसे कृ

रवि- एक काम करो इन्हे सीधा सेहर वाले घर ले जाओ और हां सबसे यही बोलना की आपने नीलम दीदी को भगा कर शादी की है

हरी- और यह क्या बोलेगा तू जीजा जी और दीदी को

रवि- वो मुझ पर छोड़ दो अभी आपलोग जकड़ी निकलो बस का समय हो गया है

नीलम रोने का नाटक करती हुई हरिया के गले लगती है

हरिया - रोऊ मत बेटी तेरा बाप जल्दी hi तुझे वापस घर लाएगा और तेरे पति के hi सामने तुझे तबियत से ठोकेगा

नीलम रवि के गले लगती है

नीलम- भाई सच में आज तूने एक भाई होने का फ़र्ज़ निभा दिया मुझे इस मुसीबत से निकल लिया

रवि- दीदी भाई का तो फ़र्ज़ hi होता है दीदी को बचना तुम आराम से जाओ और मजे करो और हां वो साला तुम्हारा ससुर है न वो भी एक नंबर का ठरकी है उसे बस फसा लो फिर तो दोनों घरो में तुम्हारा hi राज होगा बास उसके बाद मिल बात कर छोड़ेंगे ये बाप बेटे तुम्हे हेहेहे

हरी नीलम को लेकर निकल जाता है

रवि- क्यों काका हो गया न मेरा वडा पूरा

हरिया - बीटा वडा तो पूरा हो गया पर अब मैं कैसे रहूंगा बिना मेरी बेटी के

रवि- अरे थोड़े दिन मुठ मारो और उसके बाद सेहर चले जाना अपनी बेटी की ससुराल उसके बाद उसके ससुर के साथ मिलकर उसे खूब रगड़ रगड़ कर छोड़ना काका

वैसे भी तुम्हारी बेटी एक बार अपने ससुर का लुंड साख चुकी है हेहेहे

रवि इतना बोलकर घर निकल जाता है और घर पहुंच कर सबको बता देता है की हरी भाई नीलम दीदी को लेकर भाग गए

मल्टी को तो मनो विस्वास hi नहीं होता वो वही बैठ कर रोना शुरू कर देती है ....
 
अपडेट -213

नीलम के घर से जाने के बाद हरिया का घर सुना सूना हो गया था

जैसे तैसे हरिया मुट्ठिया मरता हुआ अपनी जिंदगी काटने पर मजबूर था

इधर राजू को भी घर आये हुए काफी समय हो चला था

उस बिचारे को तो ये तक मालुम नहीं था की उसकी दीदी की शादी हो गयी है

खैर ऐसे hi 2-3 दिन बीत गए

रवि को इस बिच न तो अपनी दीदियो को छोड़ने का मौका मिला और न hi अपनी भाभी को

इधर रवि भी नीलम को लेकर हरिद्वार के किसी आश्रम में ोडा हुआ था

चुदाई तो वो नीलम की रोज कर रहा था

ओर फ़टे ढोल पर कितना भी हाथ मारो आवाज तो फटी हुई hi आएगी न

है ये बात अलग थी की नीलम अपने फटी हुए छेड़ो से भी किसी मर्द को सवर्ग की सैर करवा सकती थी

पर बिचारे हरी की किस्मत उतनी अच्छी खा थी उसका हथियार hi उसका साथ नहीं देता डालने के 2-3 मज्जन्त के अंदर hi वो झाड़ जाता

नीलम को अपने पति देव पर गुस्सा तो काफी आता था पर क्या करे

अपने इस पाप को छुपाने के लिए वो गुस्से का घूंट पी कर रह जाती

इधर मल्टी भी अब संभाल चुकी थी

भले hi शादी किसी से भी हुई हो पर अब उसके भाई का घर बस गया था

वो यह नहीं जानती थी की नीलम दुल्हन तो उसके भाई की है पर सुहाग रात किस किस के साथ मना चुकी है

केशव - अरे मल्टी मेरा टोलिया देना तो जरा

मल्टी- अभी लायी जी

रेखा और कम्मो किसी काम से गाओं में गए थे

रवि आंगन में खत पर पड़ा पड़ा सोच रहा था की काश उसका भाई न आया होता तो दिन रात अपनी दोनों दीदियो को नंगा करके एक के ऊपर एक लुटा कर खूब पेलता

कभी लुंड कम्मो दीदी की बुर्र में डालता तो कभी रेखा दीदी की गांड में

यह सोच कर hi उसका लुंड खड़ा हो जाता था

इधर मल्टी भी अब रवि से उखड़ी उखड़ी सी रहने लगी थी

कहि न कहि मल्टी को शकक हो चला था की यह सब किया धरा रवि का hi है जिसने उसके भाई को अपने से बड़ी उम्र की लड़की से शादी करने पर मजबूर किया

अब आगी

मल्टी - अभी लायी जी

मल्टी उठ कर टोलिया लेने के लिए अंदर जाती है

रवि ( बहुत हो गया बेहेन छोड़ अब तो इस लुंड को सुलाना hi पड़ेगा दीदी नहीं तो भाभी hi सही )

मल्टी अभी कमरे में गयी hi थी की रवि भी उसके पीछे पीछे अंदर चला जाता है

मल्टी जैसे hi टोलिया लेकर पलटती है उसकी नजर रवि पर पड़ती जो अपनी धोती खोले अपने विकराल लुंड को मसल रहा था

मल्टी थूक गटकती हुई

मल्टी- हटिये देबर जी आपके भइया घर पर hi है

रवि- तो क्या हुआ भाभीजी भैया को भी बुला लो दोनों भाई एक साथ पेलेंगे तुम्हे

मल्टी- चीई शर्म नहीं आती

अपने देवता समान भाई के बारे में ऐसे बात करते हुए

रवि- देवता समान भाई के बारे में बोलते हुए क्यों सहराम आएगी

जब मेरी देवी समान भाभी रंडियो की तरह मुझसे छुड़वा चुकी है

मल्टी- हटो मुझे बहुत काम है और मेरे करीब भी मत आना कह देती हु

रवि- साली रांड इतना नाटक करेगी तो मेरा लुंड कैसे सहेगी

रवि आगे बढ़ते हुए अपनी भाभी के बालो को पकड़ कर उसके रसीले होठ चूसने लगता है

गरम तो मल्टी भी थी पर इस वक़्त उसे रवि पर सर्फ और सिर्फ गुस्सा hi आ रहा था

केशव - अरे खा है भाई मेरा टोलिया ओहो ये मल्टी भी ना

रवि मल्टी के एक हाथ को पकड़ कर अपने लुंड पर रख देता है

पहले तो मल्टी हाथ झटक देती है पर रवि के बार बार इस तरह करने के बाद वो भी घुटने तक देती है और अपने हाथो से अपने देबर का मुसल मुठियाती हुई अपने होठो को चुसवाने लगती है

रवि- बड़ा नाटक कर रही थी न साली अभी तेरी माँ छोड़ता हु भोसड़ी

रवि मल्टी के बालो को पकड़ता हुआ सीधा निचे बैठा देता है और उसके होठो पर अपने लुंड को रगड़ता हुआ सीधा एक hi झटके में उसके मुँह में पेल देता है

केशव - ओहो ये मल्टी भी न

अच्छानक से केशव कमरे में आ जाता है और अंदर का नजारा देख कर उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

उसके छोटे भाई का लुंड आधे से ज्यादा उसकी बीवी के मुँह में फसा हुआ था

और उसके मुँह से थुक्क गिर्र रहा था

केशव - यह क्या कर रहे हो तुम दोनों ....
 
अपडेट -214

उस हादसे को करीब करीब 1 महीना बीत चूका था जब केशव ने अपनी बीवी मल्टी को अपने hi छोटे भाई का लुंड चूसते हुए देखा था

अब केशव न तो मल्टी से जयादा बात करता था और न hi रवि से

अब भी केशव को लगता था की साडी गलती मल्टी की hi थी और वही रवि की नासमझी का फायदा उठा कर अपनी प्यास बुझाना कहती थिई

रवि से गलती तो हो गयी थी इसका अहसास उसे भी था

रवि अब अपने भाई से बहुत संभाल कर रहने लगा था

क्योंकि अगर उसने उसे अपनी hi बहनो के साथ ये सब करते देख लिया तो मना जाने क्या होगा

इधर मल्टी अब मन hi मन रवि से नफरत करने लगी थी

पहले तो उसने उसके भाई को फसाया और अब उसकी hi वजह से उसका खुद का पति उससे सीधे मुँह बात नहीं कर रहा था

इधर कामो अब दिन बा दिन और भी ज्यादा छुडासी होती जा रही थी

उसकी छूट की गर्मी दिन बा दिन बढ़ती हो जा रही थी

एशिया नहीं था की इस बिच रवि अपनी दीदियो को छोड़ नहीं रहा था

बस दिन रात नहीं बल्कि कभी कभी जब मौका अच्छा रहता बस तब चुदाई होती

इसी बिच केशव को एक डाक मिला जो किसी और का नहीं उसकी बुवा का था

बुवा की लिखावट -----

कैसे हो मेरे बच्चो

मैं तुम्हारी बुवा जानकी

जान कर बड़ी खुसी हुई की मेघा का घर वापस से बस गया

मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती है

अब क्या बताऊ बीटा जिंदगी बड़े कास्ट के साथ काट रही है

पहले कलुवा और उसला परिवार था तो खाने पिने की समस्या नहीं होती थी पर जब से वो सेहर गए है हर एक चीज़ में दिक्कत होती है

मैं बस यही कहती हु की अपने आखिरी पल में अपनों के साथ बिताऊ

मुझे यह से आकर ले चल बीटा

मैंने यह पटररर लिखने से पहले अपनी साडी जमीन बेच दी है जिसके अच्छे खासे पैसे भी मिलने वाले है वो पैसे लगा कर हम तुम्हारे घर को दुबारा से बना सकते है अब तुम hi तो मेरे अपने हो बास आकर ले जा बीटा केशव मुझे यह से नहीं तो मैं ऐसे hi मर जाउंगी

केशव को जानकी बुवा का खत पढ़ कर एक उपाय सूझता है अगर वो घर को अच्छे से बनवा देगा तो अपनी बीवी को अपने छोटे भाई से दुर्र रख पायेगा

केशव बिना किसी को बताये अपनी बुवा के घर निकल जाता है

अब बुवा का परिचय:-

जानकी नाम की hi तरह एक दम साधारण औरत

एक दम गदराई हुई और मांसल मनो हर जगह उसे भगवान् ने कामवासना के समुन्दर में डूबा कर बनाया हूँ

बस एक hi लाचारी थी बेचारी की आँखों से आंधी और खुद की गाड़ धोने के अलावा उसे हर एक काम में किसी न किसी की जरूरत पड़ती रही ....
 
अपडेट -215

इधर लगभग 1 महीना बाधारी हिम्मत जूता कर अपनी नयी नवेली बीवी को लेकर अपने घर पहुँचता है

अभी तक तो रामलाल को यही मालूम था की उसका बीटा अपनी होने वाली ससुराल में मजे लूट रहा है

जैसे hi हरी दरवाजा खटखटा है थोड़ी hi देर में रामलाल दरवाजा खोलता है

सामने का नजारा देख उसके पैरो तले जमीन खिसक जाती है

रामलाल- बेताआए कोँणन हैई

हरी- पिताजी ये मेरी पत्नी है

नीलम ने सर पर दुपट्टा दाल रखा था

नीलम तुरंत आगे की और झुकती हुई अपने ससुर के पैरों को छू कर आशीर्वाद लेती है

रामलाल- सदा सुहागन रो बेटी

रामलाल को क्या पता था की जिस भू को वो आशीर्वाद दे रहा है वो एक बार अपने बाप और रवि के सामने hi उसका लुंड चूस चुकी है

रामलाल हरी और नीलम को अंदर बुलाता है और दरवाजा बंद कर देता है

रामलाल- भू तुम अंदर वाले कमरे में जाओ

और आराम करो मुझे कुछ बात करनी है हरी के साथ

नीलम चुप चाप घूँघट ओढ़े हुए कमरे में चली जाती है

नीलम तो मन hi मन कुसस थी की अब तो उसके ससुराल में भी मजे होंगे भले hi बेटे का लुंड न उठता हो पर बाप के अंदर मर्दानगी अब भी बाकि है

नीलम के अंदर जाते hi रामलाल एक जोरदार छठा हरी को मरता है

रामलाल - क्यों रे हरामी तुझे वह भेजा था घूमने के लिए या शादी करने के लिए

मादरचोद बेहेन के लोडे

हरी- पिताजी मुझे माफ़ कार्डो हालत hi कुछ ौसे बन गए की मैं कुछ नहीं कर पाया

नीलम अंदर से सारा नजारा देख रही थी

नीलम ( है है और मार सेल हरामी को लुंड तो उठता नहीं मादरचोद का और मेरे जैसी माल से शादी कर लाया भोस्डिका हहहह)

हरी अपने आपको संभालता हुआ उठ खड़ा होता है और तुरंत hi अपने बाप के पैरों में गिर कर माफ़ी मांगने लगता है

हरी- माफ़ कार्डो बापू मुझे बापू जो भी है जैसी भी नीलम hi मेरी पत्नी है पिताजी

नीलम का नाम सुनते hi रामलाल के दिमाग में वही नीलम आती है पर वो इतना ध्यान नहीं देता और हरी को झटक देता है अपने पैरो से

हरी- पिताजी मुझे माफ़ कर देना अगर हो सखे तो

रामलाल- है है जा माफ़ किया अब और ये बुद्धा कर भी क्या सकता है

नीलम ( करना क्या है ससुर जी अब तो दिन रात अपनी बहु को छोड़ना है आपको )

Ramlal-jaa बाजार से कुछ लेकर आजा मैंने कुछ नहीं बनाया है बहु भी थकी हरी होगी

हरी खुश हो जाता है की चलो अब काम से काम उसका बाप तो मन गया

हरी के जाते hi नीलम सीधा आकर रामलाल के पैरो में गुर कर उससे माफ़ी मांगने लगती है

नीलम- ससुरजी उनकी कोई गलती नहीं है आपको जो सजा देनी है मुझे दीजिये आप जो कहेंगे वो करुँगी आप जैसे कहोगे वैसे करुँगी बस उन्हें कुछ मत बोलिये उनकी कोई गलती नहीं है

नीलम झूठा नाटक करती है और रोने लगती है

रामलाल अपने हाथ बढ़ा कर अपनी बहु को उठता है

रामलाल- बहु अब तू चिंता मत कर अब तू hi इस घर की इजाज़त है

नीलम ( हां ससुरजी और आपको hi इस इज्जत को रोज रोज लूटना है)

रामलाल- अब मैं किसी के गुस्सा नहीं हु बस तू आ गयी है न अब तो और क्या चाहिए मुझे

बात करते करते अचानक से नीलम का पल्लू निचे गुर जाता है और जैसे hi रामलाल उसकी शकल देखता है उसे एक और झटका लगता है

नीलम- क्या हुआ ससुर जी

रामलाल- नीलम तू यः कैसे

नीलम- आपके बेटे से प्यार हो गया मुझे इसी लिए मैं यह चली आयी आपके पसस

नीलम एक कातिल अदा के साथ कहती हुई कमरे में जाने लगती है

रामलाल जो अब तक गुस्से से आग बबूला था अब वो गुस्सा गर्मी बन कर उसके लुंड की नशो में बहने लगा था

रामलाल( वह रे ऊपर वाले गजब खेल है तेरे बेटी को भोगा वो चीनी तो उससे भी जबरदस्त माल देदी वो भी बहु के रूप में)

नीलम अपनी गांड मटकती हुई अंदर जा hi रही थी की वो दरवाजे पर रुक जाती है

रामलाल- बही तू सजा की बात कर रही थी ना

नीलम- हां ससुरजी

रामलाल- ससुरजी नहीं बहु अब तो तू मुझे पिताजी hi बोल

नीलम- ठीक है पिताजी

तो क्या अब आप मुझे सच में सजा देंगे

रामलाल- मन तो कर रहा है बहु

नीलम- तो अभी देंगे या रात में

रामलाल- रात में बहु जब तेरा पति सो जायेगा

नीलम- हाय राम पिताजी ऐसी कौन सी सजा है जो आप उनके सोने के बाद देंगे मुझे

और अबसे आप भी मुझे बहु नहीं बेटी बोलै कीजिये मुझे आपसे अपने बापू वाला प्यार चाहिए

आपको तो पता है न मेरे पिताजी मुझे कैसे प्यार करते है

रामलाल- उससे भी अच्छे से करूँगा बेटी मैं तुझे

नीलम- क्या करेंगे पिताजी

रामलाल- प्यार बेटी प्यार तो धयान से रात को आजाना अपने पिता का प्यार पाने के लिए......
 
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