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अपडेट -207
मल्टी के मन में यही उधेड़ बन चल रही थी की आखिर कम्मो क्यों लगदा रही है
इस बिच सब खाना खा चुके थे
केशव - एक काम करो तुम सब घर में सो जाओ और मैं और मल्टी यह आंगन में सो जायेंगे
रेखा - ठीक है भैया जैसा आप ठीक समझे
सब लोगो का बिश्तर लग चूका था केशव और मल्टी बहार पड़ी चारपाई पर सो रहे थे
पहले हरी फिर रवि फिर रेखा और लास्ट में कम्मो
करीब आधी रात को रवि को अचानक से लगता है की कोई उसकी धोती में कुछ टटोल रहा है
रवि आँखे खोल कर देखता है तो कोई और नहीं बल्कि उसकी कम्मो दीदी थी जो उसकी आँखों में देखती हुई गप्प्प गप्प्प लुंड चूसना शुरू कर चुकी थी
कम्मो की आग को रवि ने hi भड़काया था और अब जसे hi इस आग को शांत भी करना था
कम्मो रवि की आँखों में देखती हुई उठ कर अपना पेटीकोट ऊपर चढ़ती हुई अपने दातो से पकड़ लेती है और बिना किसी शर्म के सीधा अपने छोटे भाई के लुंड को सीधा करते हुए उस पर अपनी छूट टिका कर एक hi झटके में अपने शरीर को ढीला छोड़ देती है जिसकी वजह से एक झटके के साथ hi रवि का लुंड उसकी छूट की गहराईयों में समा जाता है
कम्मो- अह्ह्ह्ह शहहहहह
रवि की गांड फट रही थी क्योंकि बगल में hi हरी सोया हुआ था जो की कब्भी भी उठ सकता था
इधर कम्मो का बदन इतना तप रहा था मनो उसके अंदर कोई हीटर जल रहा हो
अपनी दीदी की छूट की गर्मी को अपने लुंड पर महसूस करके रवि पागल हो जाता है और निचे से हलके हलके कमर उठता हुआ अपनी दीदी को छोड़ने लगता है
थाओ थप थप थापलप्प की आवाज कमरे में गूंज रही थी हलकी hi सही
जो किसी को जगाने के लिए काफी थी
और हुआ भी ठीक यही रेखा तो नहीं जगी पर बगल में सोया हुआ हरी जाग गया और भाई बेहेन की इस कामलीला को देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी
जिसके साथ उसकी सदी होने वाली थी वो पागलो की तरह अपने छोटे भाई के लुंड पर कूद कूद कर छुड़वा रही थी मनो वो भाई बेहेन न होकर पति पत्नी हो
हरी बस ऐसे hi लेता लेता देख रहा था उसका छोटा सा लुंड भी अब खड़ा होना शुरू हो गया था
इधर कम्मो की खुमारी बढ़ती hi जा रही थी उसकी छूट इतना पानी छोड़ रही थी की रवि की कमर पूरी तरह चिपचिपे पानी से भीग चुकी थी
छप्प्प्पपकाहप.
छप्प्प्पपकाहप
करीब 10 मिंट तक ऐसे hi कम्मो रवि के लुंड पर उछलती रहती है और अंतत में अपने छोटे भाई का सारा वीर्य अपनी छूट में गिरवा कर उसके लुंड से उतरती हुई उसे चाट कर साफ़ करती हसि और एक चुम्मा रवि के लुंड पर देती हुई अपनी जगह पर चली जाती है
रवि (ये तो रेखा दीदी से भी ज्यादा गरम है कम्मो दीदी को मस्त करके पेलने में और मजा आएगा )
रवि जैसे hi पलट कर सोने लगता है उसकी नजर अचानक से हरी पर पड़ती है जो अपनी आँखे खोले रवि को hi देख रहा था
रवि तुरंत hi दूसरी और मुँह घुमा लेता है
रवि-( चुद गयी माँ ये बेहेन का लौड़ा खा से उठ गया इसने सब देख लिया है भगवान् अब क्या होगा ये अपनी उस रैंड दीदी को सब बता देगा तो नहीं नहीं इससे बात करनी पड़ेगी )
जैसे तैसे रवि आँखे बंद करके सो जाता है की कल वो हरी को देख लेगा
इधर हरी सोच में ोडा हुआ था की अपनी hi दीदी को छोड़ने में कैसा मजा आता होगा ...
मल्टी के मन में यही उधेड़ बन चल रही थी की आखिर कम्मो क्यों लगदा रही है
इस बिच सब खाना खा चुके थे
केशव - एक काम करो तुम सब घर में सो जाओ और मैं और मल्टी यह आंगन में सो जायेंगे
रेखा - ठीक है भैया जैसा आप ठीक समझे
सब लोगो का बिश्तर लग चूका था केशव और मल्टी बहार पड़ी चारपाई पर सो रहे थे
पहले हरी फिर रवि फिर रेखा और लास्ट में कम्मो
करीब आधी रात को रवि को अचानक से लगता है की कोई उसकी धोती में कुछ टटोल रहा है
रवि आँखे खोल कर देखता है तो कोई और नहीं बल्कि उसकी कम्मो दीदी थी जो उसकी आँखों में देखती हुई गप्प्प गप्प्प लुंड चूसना शुरू कर चुकी थी
कम्मो की आग को रवि ने hi भड़काया था और अब जसे hi इस आग को शांत भी करना था
कम्मो रवि की आँखों में देखती हुई उठ कर अपना पेटीकोट ऊपर चढ़ती हुई अपने दातो से पकड़ लेती है और बिना किसी शर्म के सीधा अपने छोटे भाई के लुंड को सीधा करते हुए उस पर अपनी छूट टिका कर एक hi झटके में अपने शरीर को ढीला छोड़ देती है जिसकी वजह से एक झटके के साथ hi रवि का लुंड उसकी छूट की गहराईयों में समा जाता है
कम्मो- अह्ह्ह्ह शहहहहह
रवि की गांड फट रही थी क्योंकि बगल में hi हरी सोया हुआ था जो की कब्भी भी उठ सकता था
इधर कम्मो का बदन इतना तप रहा था मनो उसके अंदर कोई हीटर जल रहा हो
अपनी दीदी की छूट की गर्मी को अपने लुंड पर महसूस करके रवि पागल हो जाता है और निचे से हलके हलके कमर उठता हुआ अपनी दीदी को छोड़ने लगता है
थाओ थप थप थापलप्प की आवाज कमरे में गूंज रही थी हलकी hi सही
जो किसी को जगाने के लिए काफी थी
और हुआ भी ठीक यही रेखा तो नहीं जगी पर बगल में सोया हुआ हरी जाग गया और भाई बेहेन की इस कामलीला को देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी
जिसके साथ उसकी सदी होने वाली थी वो पागलो की तरह अपने छोटे भाई के लुंड पर कूद कूद कर छुड़वा रही थी मनो वो भाई बेहेन न होकर पति पत्नी हो
हरी बस ऐसे hi लेता लेता देख रहा था उसका छोटा सा लुंड भी अब खड़ा होना शुरू हो गया था
इधर कम्मो की खुमारी बढ़ती hi जा रही थी उसकी छूट इतना पानी छोड़ रही थी की रवि की कमर पूरी तरह चिपचिपे पानी से भीग चुकी थी
छप्प्प्पपकाहप.
छप्प्प्पपकाहप
करीब 10 मिंट तक ऐसे hi कम्मो रवि के लुंड पर उछलती रहती है और अंतत में अपने छोटे भाई का सारा वीर्य अपनी छूट में गिरवा कर उसके लुंड से उतरती हुई उसे चाट कर साफ़ करती हसि और एक चुम्मा रवि के लुंड पर देती हुई अपनी जगह पर चली जाती है
रवि (ये तो रेखा दीदी से भी ज्यादा गरम है कम्मो दीदी को मस्त करके पेलने में और मजा आएगा )
रवि जैसे hi पलट कर सोने लगता है उसकी नजर अचानक से हरी पर पड़ती है जो अपनी आँखे खोले रवि को hi देख रहा था
रवि तुरंत hi दूसरी और मुँह घुमा लेता है
रवि-( चुद गयी माँ ये बेहेन का लौड़ा खा से उठ गया इसने सब देख लिया है भगवान् अब क्या होगा ये अपनी उस रैंड दीदी को सब बता देगा तो नहीं नहीं इससे बात करनी पड़ेगी )
जैसे तैसे रवि आँखे बंद करके सो जाता है की कल वो हरी को देख लेगा
इधर हरी सोच में ोडा हुआ था की अपनी hi दीदी को छोड़ने में कैसा मजा आता होगा ...