Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 9 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

मर्द का बच्चा. अपडेट 40.

अभी छितिज पर सूर्य की लाली फ़ैल hi रही थी. सूर्य देव अभी उदय नहीं हुए थे. चारो और अँधेरे का परत अब हट गया था और उजाला अपना पंख फैलाना सुरु क्र दिया था.

त्रम्ब्केश्वर नाशिक…..

गोदावरी नदी किनारे एक इक्कंत स्थान, जहा परिंदे और नदी क अविरल धरा क अलावा और वह कोई नहीं था.

सो सॉरी….

वह कोई और भी था…

ओह्ह्हू आज ये हो क्या रहा है.

वह कोई और भी था… नहीं बल्कि थी…

एक कमशीन, अल्हड़, जवानी से लबरेज काळा वस्त्र पहले लड़की.

गोदावरी नदी मई एक नव क उप्पेर अकेली योग मुद्रा मई काफी देर से एक hi ाशन मई स्थिर थी.

वो नटराज मुद्रा मई पूर्व की और अपना चेहरा क्र क बाये पेअर पर कड़ी हो क्र दाहिने पेअर को पीछे सर की सिद्ध मई मोर क्र दोनों हाथ को सर क उप्पेर से पीछे ले जा क्र दाहिने पेअर क उंगलियों को पकडे हुए थी.

सूर्य की बहुत हलकी किरणे उसके सलोने मुखड़े पर पर रहा था.

बड़ा hi मनमोहक दृश्य था ये.

सूर्य की तीक्षण किरणे जब उसके पुरे बदन मई सामने लगा तब जा कर कही वो अपने इस नटराज मुद्रा से बहार आई.

वह से नव खेती हुई वो लड़की गोदावरी नदी किनारे पहुंची और फिर नव को एक किनारे लगा क्र उस मई से उतर गई.

एक बार नदी को प्रणाम क्र वापस चल पड़ी.

थोड़ी देर बाद वो त्रम्ब्केश्वर क योग विद्या पीठ आश्रम मई पहुंची.

वह जा क्र वो एक कमरे मई चली गई. जो सायद उसका hi था.

वह फ्रेश होने क बाद वो बहार निकल क्र आई.

तभी उस आश्रम क आचार्य दिखे जो वह क बचो को शिक्षा दे रहे थे.

इसारे से उन्होंने उस लड़की को अपने पास बुलाये.

आचार्य- कहा गई थी तुम पुत्री.

लड़की- बाबा मई तो गोदावरी नदी किनारे योग क्र रही थी.

आचार्य- बीटा गायत्री. काम से काम किसी को बता क्र तो जाया करो.

वो लड़की जिसका नाम गायत्री था.

गायत्री- क्षमा करे बाबा. आगे से बता क्र जाउंगी.

फिर आचार्य बच्चो को पढ़ने लगे और गायत्री वह आश्रम क पशु पक्षियों को उनका खाने क लिए दाना और चारा देने लगी.

वह आश्रम मई एक और कुछ मोर कोयल कबूतर इधर उधर घूम क्र गायत्री द्वारा छींटे गए डेन को चोग रहे थे तो एक और बंधी हुई गाय घास खा रही थी.

गायत्री उन्हें खता देख क्र बहुत खुश हो रही थी.

लल्लू बीएड पर लेता सदी ब्याह क कनु से काम रह गए है उसके बारे मई सोच रहा था.

अभी वो कल पुरे दिन यहाँ नहीं था और अभी दोपहर क बाद आया है.

उसे पता भी नहीं था की क्या काम शेष है और क्या हो गया है.

उसे काका से पूछना पड़ेगा की क्या सब काम सेष रह गया है ताकि जल्दी से उन कामो को निपटाया जा सके.

इधर माँ और ऋतू काकी का ब्यबहार भी कुछ ठीक नहीं लग रहा.

लगता है अभी भी नाराज है.

समझ नहीं आ रहा था की क्या करे. कैसे मनाये उन्हें. क्या कहे माँ को.

लगता है माँ ऋतू काकी क बारे मई जान गई है. अब कैसे उन्हें समझौ.

उधर वो ऋतू काकी है की वो अलग मुँह फुलाए बैठी है.

अब इतनी बड़ी गांड बना क्र मटकती हुई घूमेगी तो फिर इस मई मेरा क्या कसूर है.

अब मुझ से नहीं रहा गया तो मई क्या करू.

क्यू इन सब क बारे मई सोचता हु मई.

मुझे अपने जान क बारे मई सोचना चाहिए.

जब से आया हु ठीक ढंग से बात भी नहीं हुई है.

वैसे आज वो कितनी खूबसूरत लग रही थी ग्रीन सूट मई.

माँ कशम कहर ध रही थी.

मेरा बस चले तो अभी मई उन्हें भाग क्र कही दूर देश के जाऊ. जहा मई और मेरी जान हो और हम अक्षर प्यार भरी बाटे करता rahu.:D

लल्लू यु hi उटपटांग बाटे सोचता हुआ सो गया.

" लल्लू बीटा कितना सोता है. रात को क्या करेगा. अब उठ जा नहीं तो रात मई नींद नहीं आएगी.

आवाज सुन क्र लल्लू की आँख खुल गई.

देखा तो छोटी बुआ झुक क्र उसे उठा रही थी

झुकने क कारन छोटी बुआ की सूट क गले से बुआ की गोरी बड़ी बड़ी दो पहर काली ब्रा मई कैसे हुए आधा से बहार निकल झक रहा था.

लल्लू का तो मन किया की अभी इन दूध से भरे टंकी को निचोड़ निचोड़ क्र पि जय.

छोटी बुआ जब लल्लू को यु अपनी और घूरती देखि तो समझ hi नहीं पाई की ये ऐसे क्यू घर रहा है बड़ी बड़ी आँखे क्र के.

फिर जब वो लल्लू क आँखों का पीछा की यह जानने क लिए तब उन्हें एहसास हुआ की ये लल्लू उल्लू की तरह क्यू तक रहा है.

वो झट से सीधी हो क्र अपने सूट को सही करती लल्लू को एक बार गौर से देख कमरे से बहार निकल गई.

लल्लू सर पिट लिया अपना.

ये क्या क्र दिया. क्या सोचेंगी मेरे बारे मई.

लल्लू सर्मिन्दा सर्मिन्दा सा उठा और फ्रेश हो क्र आँगन मई आ गया.

आज आँगन मई जमघट लगा था.

वैसे भी उसके घर मई hi काफी मेम्बर है लेकिन दोनों बुआ उनके दो बच्चे और अब दो ममी.

बहुत अच्छा लग रहा था.

सब बहुत खुश थे.

लल्लू खटिये पर बैठा सब क चेहरे को निहार रहा था.

जब वो नजर घूमता सोनम की और देखा तो वो भी लल्लू को hi देख रही थी.

सोनम आँखों क इसारे से लल्लू से पूछो की क्या हुआ क्या देख रहा है वो.

लल्लू भी इसारे मई hi बता दिया की कोई बात नहीं है बस यु hi वो सब को तर रहा था की इन सब क चेहरे पर खुशिया कैसे चमक रही है.

लल्लू- दीदियो कोई चाय पिलायेगा क्या.

बड़ी ममी- बाबू क्या तू डेली ऐसे hi सोया रहता है इतनी देर.

ऋतू- तो और क्या. करने को कुछ होता नहीं है. तो सोया hi रहेगा.

बड़ी ममी- ललिता ये मई क्या सुन रही हु.

लल्लू मुसकुडने लगा. फिर उठ क्र ममी क पास गया और उनको पकड़ क्र बैठ गया. उनके पास

लल्लू- आप को क्या लगता है.

छोटी ममी- दीदी, बाबू थक गया होगा. जब हम कार मई बैठे बैठे थक गए थे तो ये तो इतनी देर ड्राइव क्र क आया है.

सभी काकी एक साथ- क्या…. लल्लू ड्राइव क्र क आया है…

इसने कैसे कार चला लिया.

बड़ी ममी- क्या मतलब…. कैसे कार चला लिया. जैसे चलाया जाता है वैसे hi तो चलाएगा न.

काजल- नहीं. नहीं. हमारा मतलब था की इसने कब सिख लिया कार चलना. इसे तो बुलेट चलना भी नहीं आता.

दोनों ममी- क्या…..

फिर दोनों ममी लल्लू को देखने लगी.

लल्लू- लल्लू नाम है मेरा.

बड़ी ममी- कौन कहता है तुम्हे लल्लू. अगर आज क बाद किसी क मुँह से ये लल्लू बल्लू सुन्नन लिया तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.

सब अचानक चुप्प..

लल्लू- संत ममी संत… वो सब प्यार से बोलते है. ऐसा कुछ नहीं है.

बड़ी ममी- नहीं मुझे ये पसंद नहीं कोई तुम्हे लल्लू कहे. अरे इतना अच्छा नाम है ललित. सब ये कहने क बदले लल्लू उल्लू ऐसे भी कोई अपने बेटे को भाई को कहता है क्या.

लल्लू छोटी ममी को इसरा किया.

तब छोटी ममी आगे बढ़ क्र बड़ी ममी को संत किये.

बड़ी ममी उठ क्र कमरे मई चली गई.

पीछे छोटी ममी भी चली गई.

लल्लू उठ क्र मम्मी क कमरे की और उन्हें मानाने चला गया.

बड़ी बुआ- वैसे भाबी, बात तो सही है. अब इतने मेहमान होंगे घर मई वह उसे सब लल्लू लल्लू क्र क पुकरबगें क्या ये अच्छा लगेगा आप लोगो को.

रागिनी- नहीं.

छोटी बुआ- फिर आप लोग ये सब बाते पहले क्यू नहीं सोचे.

रागिनी- अब तो आदत हो गया है लल्लू बोलने का.

छोटी बुआ- वैसे आप सब उसे लल्लू क्यू कहते है.

काजल- क्या बताये दीदी. ये जब पढाई क्र रहा था सायद तब 8 मई था स्कूल मई सीधी से लुढ़कता हुआ निचे आ गया जिस कारन इसके सर मई चोट लग गया था. चोट तो सही हो गया लेकिन कभी कभी ये उस चोट क कारन पागल जैसा हो जाता है. इसकी हरकते बच्चो वाली हो जाती है.

इसी लिए सब इसे लल्लू कहने लगे. ककी इसे सही गलत सच झूठ कुछ भी पता नहीं होता है.

बड़ी बुआ- अभी देख क्र तो ये घर मई सब से समझदार लग रहा है. बिलकुल पिताजी की तरह.

छोटी बुआ- सही कहा दीदी. जब से हम लोग आये है तब से तो सच मई ये घर का सब से समझदार लगता है. और सुनील भैया से बाटे करता देख क्र तो यही लग रहा था जैसे आप लोग hi लल्लू हो या वो जान बुझ क्र आप सब को लल्लू बना रहा है.

सोनम- वैसे आप ने सही कहा बुआ. भाई कही से भी वैसा नहीं लगता है. वैसे भी हम तो उसे हमेसा भाई hi कह क्र बुलाये है.

बड़ी बुआ- तुम लोगो की माये hi सब की है. यही उसे लल्लू लल्लू करती रहती होंगी.

छोटी बुआ- वैसे बड़ी भाबी जी आप की भाबी क्यू इतना गुस्सा हो गई.

ऋतू- वो दरअशल बात ये है की वो लल्लू को…..

सोनम- maa….abhi अभी इतना बोलै है सब ने फिर भी आप बाज नहीं आ रही.

सोनम गुस्से मई ऋतू को बोली.

ऋतू समाज नहीं पाई.

ऋतू- क्या हुआ. मैंने क्या क्र दिया अब.

कोमल- काकी. आप अब भी भाई को लल्लू कह रही है.

ऋतू- ओह्ह. ये आदत हो गया है. बातो बातो मई मुँह से निकल जाता है. धीरे धीरे hi ये छूटेगा.

है तो मई क्या कह रही थी.

छोटी बुआ- आप अपनी भाबी और ललित क बारे मई बता रही थी.

ऋतू- है. मेरी भाभी Lallu...lalit को अपने बेटे की तरह मानती है. जब लाल्ल्लित को चोट लग गया था तो मेरे भैया को भी पता चला तो वो देखने आये थे.

फिर वो लाल्ल्लित को अपने साथ ले क्र चले गए थे. ललित वह कई साल रहा है.

छोटी बुआ- अच्छा तो ये बात है. इसी लिए वो ललित को इतना चाहती है.

सब यु hi बाटे क्र रहे थे यहाँ.

उप्पेर लल्लू बड़ी ममी क कमरे मई गया तो बड़ी ममी रो रही थी और छोटी ममी उन्हें चुप करा रही थी.

लल्लू कमरे मई जा क्र बड़ी ममी क सामने बैठ गया अपना कान पकड़ क्र.

लल्लू- प्लस ममी आप चुप हो जाइये. ये सब मेरी hi गलती है. प्लस आप मत रोइये. नहीं तो मई भी रोने लगूंगा.

बड़ी ममी अपने आँखों से बहते आँखों को हाथो से साफ क्र लल्लू को उठा क्र गले से लगा लिया.

बड़ी ममी- फिर मुझे ऐसे रुलाया तो मई तुझ से कभी बात नहीं करुँगी

लल्लू ममी क गले लगे हुए गर्दन हिला दिया.

फिर तीनो वही बैठे बाटे करने लगे.

थोड़ी देर मई सोनम इन सब को निचे चलने को बुलाने आयी.

बड़ी ममी- बीटा एक काम क्र. हम जो शॉपिंग किये है न उस मई से चार पैकेट निचे करवा दे.

छोटी ममी वो चार पैकेट लल्लू को दिखा दी जो निचे लाना था.

लल्लू एक एक क्र चारो पैकेट ले जा क्र निचे जहा सब आँगन मई बैठे थे वह रख दिया.

तब तक चाय बन गई थी.

सब चाय पिने लगे.

छोटी ममी एक एक पैकेट खोल क्र उस मई से सब को उनका कपडा बाँट दिए.

ऋतू- भाभी ये क्या है. इतना सब क्यू किया आप. आप लोग यहाँ आये हमारे लिए यही बहुत है.

बड़ी ममी- आती कैसे नहीं. हमारा बीटा जो गया था बुलाने.

और ये सब छोटा सा उपहार मेरे बेटे की तरफ से.

सोनम- ममी हम सब को तो दे दिए लेकिन आप का लाडला बीटा hi रह गया. उसे कुछ मिला hi नहीं.

लल्लू- मुझे भी मिला है दी.

सोनम और कोमल - क्या मिला दिखाओ.

लल्लू- दालान क बहार खड़ा है न लाल रंग का.

लल्लू मुसकुडता हुआ बोलै.

रोमा- बहार लाल रंग का तो कार है जो भैया को उपहार मई उनके ससुर ने दिया है.

लल्लू- मेरी प्यारी बहन वह रेड कलर का एक नहीं दो कार है.

मीनू- भाई, जिस से ममी आई है.

लल्लू- है, वो मेरा hi है. जो मई वही मां क पास छोड़ दिया था पिछली बार.

गौरी- वाओ भाई. वो तो ऑडी है. बहुत सुन्दर है.

लल्लू गौरी को पकड़ क्र अपने पास बैठता हुआ.

लल्लू- वो मेरे साथ साथ मेरी सभी बहनो का भी है.

रानी- थैंक ु भाई.

लल्लू- भाई को थैंक ु नहीं कहते. ये बड़े बुजुर्गो ने कहा है.

सभी हुस्ने लगे.

फिर लल्लू सब को वह छोड़ दालान पर आ गया पूछने की कोई काम तो नहीं बचा है.

फिर लल्लू वही सब क साथ बैठा रहा जब तक खाना न तैयार हो गया रात का.

सुनील काका हलवाई को बुला लिए थे तो अब से हलवाई hi खाना बना रहा था.

घर की सभी महिलाये अब फ्री थी.

परसो सगुन का रस्म था.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 41.

हलवाई खाना बना दिया था.

सब लोग आँगन आ क्र खाना पीना से निपट गए.

फिर अपने अपने कमरे मई जा क्र सो गए.

लल्लू दिन मई काफी देर तक सोया था तो अभी उसे नींद नहीं आ रहा था.

लल्लू उठ क्र चाट पर चला गया.

वह छोटी बुआ पहले से hi मोबाइल पर बात क्र रही थी.

लल्लू उनको बात करता देखा तो थोड़ा दूर hi रुक गया. छोटी बुआ अभी फूफा जी से बात क्र रही थी तो उसे अभी बुआ क पास जाना अच्छा नहीं लगा.

थोड़ी देर मई बुआ बात क्र क जब फ्री हो गई तो लल्लू क पास आ क्र कड़ी हो गई.

बुआ- क्यू बच्चे नींद नहीं आ रहा है क्या.

लल्लू- है बुआ अभी नींद नहीं आ रहा था.

बुआ- सही बात है. दिन मई hi इतनी देर सो गए थे.

लल्लू- आप क्यू जग रही है बुआ. मुझे तो नींद नहीं आ रहा लेकिन आप तो नहीं सोई थी फिर….

बुआ- मुझे भी अभी नींद नहीं आ रहा था. अभी ये नया जगह है न.

लल्लू- क्या लाइफ होती है लड़कियों की. पिता का घर जहा वो पैदा होती है. छोटे से बच्चे से जवान होती है. फिर सदी क्र एक पराये घर चली जाती है जिस घर क बारे मई उसे कुछ भी पता नहीं होता. घर नया, वह क लोग नए, माहौल नया. और देखो अब, वापस पिता क घर आने क बाद यहाँ सुकून नहीं.

बुआ- वाओ, ललित. बीटा तू तो बहुत बड़ी बड़ी बातें करने लगा है. कहा से सीखा है ये सब.

लल्लू- वक्त. बुआ वक्त से बड़ा टीचर कौन हो सकता है. वक्त सब सीखा देता है.

बुआ- इम्प्रेससिवे. तुम ने तो दिल जीत लिया मेरा. अच्छा अब ये सब छोड़ और ये बता की कभी हमारे यहाँ क्यू नहीं आया.

लल्लू- बुआ कल पहली बार मुझे अकेला कही जाने दिया गया है. नहीं तो मई एक हरह से एक लक्ष्मण रेखा मई कैद था. मेरा सरहद लक्ष्मण रेखा का ये गौण की हड्डी थी. मई इस गौण से बहार नहीं जा सकता था. सब क लिए तो मई आज भी उनका बच्चा hi हु. इसी लिए आप क पास क्या किसी क पास नहीं जा सका.

लेकिन अब वडा है आप से. अब मई आप क पास महीने मई एक बार जरूर आया करूँगा.

बुआ- थैंक्स बीटा.

लल्लू- क्या बुआ, बीटा भी कहती हो और थैंक्स भी. बेटे को कोई माँ थैंक्स कहा कहता है.

बुआ- ोूहः मेरा बच्चा.

बुआ लल्लू को पकड़ क्र अपने साइन से लगा ली.

लल्लू भी बुआ क गले लगा हुआ उनका प्यार फील क्र रहा था.

साथ hi बड़े बड़े चुके भी.

बुआ को अचानक लल्लू का वो सोते हुए से उठ क्र अपने दूध को घूरना याद आ गया.

अभी लल्लू को वो अपने उसी दूध पर दबाये हुए है. ऐसा दिमाग मई बात घूमते hi उन्हें कुछ होने लगा.

आज तक छोटी बुआ कभी ऐसा फील नहीं की थी. उन्हें गिलटी फील हो रहा था तो वो लल्लू से अलग हो क्र हैट क्र कड़ी हो गई.

लल्लू चांदनी रात मई उप्पेर आसमान मई निकले चाँद को देखता बुआ से बोलै.

लल्लू- बुआ, आप कभी क्यू नहीं आई यहाँ. अभी सदी था और पापा गए तब आये आप और बड़ी बुआ भी.

बुआ- बीटा कभी घर परिवार से फुर्शत hi नहीं मिला.

लल्लू- बुआ ये भी आप का hi परिवार है.

बुआ- है बीटा. ये भी मेरा hi परिवार है. लेकिन अपनी जिंदगी मई इतना उलझी होती हु की फिर यहाँ आने का मौका नहीं मिला.

लल्लू- बुआ काफी रात हो गया है तो अब जा के आप सो जाइये.

बुआ- तो भी जा सो जा अब.

फिर लल्लू और बुआ दोनों निचे आ गए.

लल्लू- बुआ आप कहा सोयेंगे.

बुआ- तेरे माँ क पास, क्यू.

लल्लू- नहीं ऐसे hi पूछा था.

फिर लल्लू अपने कमरे मई चला गया.

वह जा क्र बीएड पर लेट गया लल्लू.

नींद नहीं आ रहा था. लेकिन क्र भी क्या सकते है. उठ क्र आँगन मई आ गया लल्लू और खटिया पर लेट गया.

रात कितनी बीती थी पता नहीं.

किसी क कराहने से लल्लू की नींद खुल गया.

पहले सोचा की ये उसका वहां है लेकिन चाँद सेकंड बाद फिर से कराहने की आवाज आई.

लल्लू तेजी से खटिया से उठा. आवाज नलका की तरफ से आ रहा था.

लल्लू दौड़ क्र नलका पर गया. देखा कोई औरत वह गिरी है. लगता है अँधेरे मई पेअर स्लीप हो गया है.

लल्लू जल्दी से उस औरत को उठा क्र अपने कमरे मई ले गया. वह जब लाइट जला क्र देखा तो छोटी बुआ थी.

बुआ दर्द से कराह रही थी.

लल्लू- बुआ मई माँ को बुआ क्र लता हु.

बुआ- नहीं नहीं. प्लस किसी को मत बुलाओ.

लल्लू- बुआ आप को चोट लगा है. कहा लगा है. माँ को तो बुलाने दो. और किसी को नहीं उठाऊंगा.

बुआ चुप रह गई.

सही बात था. बुआ को पीछे कमर से निचे चोट लगा था तो वो लल्लू को क्या कहती.

लल्लू जल्दी से काजल क कमरे मई पंहुचा.

लल्लू काजल को हिला क्र नींद से जगाया.

काजल- क्या है. तू तू यहाँ क्या क्र रहा है.

काजल गुस्से से बोली.

लल्लू- माँ, छोटी बुआ अभी अभी नलका पर फिलहाल गई है. इन्हे पता नहीं कहा कितना चोट आया है. आप प्लस जरा चल क्र देखो.

काजल- तुरंत उठ गई. कहा है दीदी.

लल्लू- मेरे कमरे मई.

बस फिर क्या था. मेरे कमरे मई सुनते hi काजल का हाथ उठा और सीधा लल्लू क गाल पर अपने पांचो ऊँगली को चिपका दिया.

काजल- तुम्हे जरा भी सरम नहीं आई. अपने बुआ क साथ ये करते हुए.

कैसा हैवान हो गया है तू. पहले मई फिर बड़ी दीदी और अब अपने बुआ को भी नहीं छोड़ा.

लल्लू- आप जो सोच रही है ऐसा कुछ नहीं है. वो बहुत ज्यादा पदेशन है. अगर आप को नहीं जाना तो आप लेती रहो मई किसी और को उठता हु.

काजल फिर एक थप्पड़ लगा दी.

काजल- अब क्या सरे घर को जनवायेगा नालायक. इस सदी तक तू यहाँ रहेगा उसके बाद तू अब इस घर मई नहीं रहेगा. यहाँ इतनी लड़किया है. तेरे जैसे हैवान का भरोषा नहीं कुछ भी क्र सकता है तू.

लल्लू अवाक् सा काजल का चेहरा देखे जा रहा था.

लल्लू-( मुसकुडता हुआ) तुम अभी जा क्र बुआ को देखो क्या हुआ है. बांकी मई सदी तक का अब इंतजार नहीं क्र सकता. मई अभी ये घर छोड़ क्र जा रहा हु.

लल्लू वह से निकल क्र अपने कमरे मई आ गया. वह बुआ अभी भी पदेशन थी.

लल्लू तुरंत एक बैग मई अपना एक सेट कपडा डाला और अपना वॉलेट और गारी की चाभी ले क्र घर से बहार आ गया.

गारी का गेट खोल उस मई बैग फेक दिया एक और.

गारी स्टार्ट क्र वो गारी को सरक पर ला क्र गौण से बहार क रस्ते पर चल दिया.

अब उसे समझ नहीं आ रहा था की कहा जय. वह माँ को तो कह दिया की अभी चला जाएगा.

गारी अँधेरे रात मई सुनसान सड़क पे दौरा चला जा रहा था.

पता नहीं कब तक गारी चलता रहा. कहा जा रहा है ये भी उसे कुछ पता नहीं. बस गारी आगे दौड़ती जा रही थी.

तभी अचानक कोई लल्लू क गाड़ी क आगे आ गया.

लल्लू का तो ऐसे hi दिमाग घुमा हुआ था. मरे टेंशन क उसका सर फटा जा रहा था उप्पेर से ये अचानक किसी का यु बिच रोड पर गारी क आगे आ जाना.

लल्लू क झट का बाल ब्राउन हो गया.

लल्लू ब्रेक लगा क्र जैसे तैसे रोका गारी. फिर भी रुकते रुकते भी वो उसे हल्का टक्कर मर hi दिया.

लल्लू का तो वैसे hi अभी भेजा फ्राई हुआ पड़ा था. झट से गारी क दरवाजा खोल क्र निकला बहार और जिसे धक्का लगा था उसे उठा क्र एक काश के चिपका दिया.

लेकिन थप्पड़ मरते मरते उसे लगा जैसे ये कोई महिला है.

लल्लू झट से उसे पलट क्र देखा तो सही मई वो तो एक महिला नहीं बल्कि लड़की थी.

लल्लू- हेय भगवन. क्या क्र रहा है ये. फैला कोई मरने भी आया गारी क आगे तो एक लड़की.

उसे उठा क्र गारी मई डाला और फिर गारी को आस पास नजर दौरता हुआ किसी हॉस्पिटल क्लिनिक को ढूंढने लगा.

तभी उसे बहार एक प्याऊ नजर आया.

लल्लू गाड़ी रोक क्र वह प्याऊ से चुल्लू मई पानी ला क्र उस लड़की क चेहरे पर दो बार डाला.

तब जा क्र वो लड़की थोड़ी कुनमुनाई..

लल्लू आशा भरी नजर से उस लड़की को देखने लगा.

लल्लू- भगवन जी. बचा लेना इसे ज्यादा चोट न लगी हो.

लल्लू गाड़ी मई आ के बैठ गया.

लल्लू उस लड़की की और देखा.

लल्लू- कौन है आप. मरने का इतना hi शौक था तो ट्रैन क निचे जाना था. या किसी और क गारी क निचे जाती. मेरे से क्या दुश्मनी है जो मेरे गारी से टकराने आ गई.

लड़की-......

लल्लू- कुछ बोलोगी. या गूंगी हो. कही बहरी न हो ये. मेरी बात hi न सुनी हो.

लड़की-......

लल्लू- अरे कुछ बोल भी दो अब. कौन हो. क्यू आ गई अचानक गारी क आगे.

लड़की- वोऊ….. वोऊ..

लल्लू- ये क्या है. ो मोहतरमा मुझे ऐसा कोई भासा बोलना और समझना नहीं आता. प्लस देखो मई खुद बहुत पदेशन हु. अब और पदेशन न करो.

लड़की- me..ra naa..m L..aks..hmi है. मेरे cha..cha ने मेरे माँ... bap..u को मर्डरर क्र हमारे सरे जमीं ja.ydadddd हड़प लिया है ऑर्डर अब उसका ब्ब्ब्बेता मेरे साथ गगगनदा काआम kar..na cha..hta है.

वो लड़की लक्ष्मी रोटी हुई लल्लू को अपनी आप बीती बताई.

लल्लू- कब की बात है ये.

लक्ष्मी- आज सुबह की.

लल्लू- कहा रहती हो आप.

लक्ष्मी- उज्जैन. सूरज नगर.

लल्लू- यहाँ से कितना दूर है. यहाँ तक कैसे आये.

लक्ष्मी- एक ट्रक मई चुप क्र.

लल्लू- अब ये भी बता दो की मेरे गारी क आगे क्यू आ गए अचानक.

लक्ष्मी- क्या करू फिर कहा जाऊ. हर और तो जिस्म क भूखे भेड़िये घूम रहे है.

लल्लू- अब क्या चाहती हो आप.

लक्ष्मी - मेरे चाहने से क्या होता है.

लल्लू- फिर भी कुछ तो मन मई होगा.

लक्ष्मी- मई तो चाहती हु की जैसे मेरे चाचा ने मेरे माँ और बापू को मारा है वैसे hi उसे भी भगवन महाकाल सजा दे. लेकिन मेरे चाहने से क्या होता है.

लल्लू- सही बात है. वैसे आप गारी से टकराई थी. आप को ज्यादा चोट तो नहीं आया है.

लक्ष्मी- नहीं इसी बात का तो रोना है. बच गई मई. मरी hi नहीं.

लल्लू- कैसी बाटे करती है आप. मरे आप का दुश्मन. चलिए देखे आप क चाचा को. क्या सुरमा है वो.

लल्लू गारी चलता हुआ उज्जैन क सूरज नगर को चल दिया.

अब सूरज निकलने वाला था. चारो और उजाला फ़ैल गया था.

लल्लू की ऑडी तेजी से उज्जैन क सूरज नगर की और बढ़ रहा था.

इधर घर मई.

काजल गुस्से से बड़बड़ाती हुई बैठी थी कमरे मई.

उसे अभी भी यही लग रहा था की लल्लू ने जैसे ऋतू क साथ किया है वैसे hi अपने बुआ क साथ भी किया है.

थोड़ी देर मई सोच क्र वो उस कमरे की और चल दी. ताकि किसी और को पता चलने से पहले hi वो अपने इस ननद को जहा तक हो सके उपचार क्र दे जिस से सुबह किसी और को पता न चले.

कमरे मई आई तो काजल देखती है की दीक्षा अपने गांड उठाये कराह रही है.

काजल- क्या हुआ. कैसे हुए ये.

मन मई तो यही कह रही थी की लल्लू ने इसका भी गांड फाड् दिया है जैसे ऋतू का फार दिया था.

दीक्षा- पेशाब करने नलका पर गई थी. वही पेअर फिलहाल गया और उस के चौबूत्रे पर गिर गई. वही किनारी पीछे लग गया है जो बहुत दर्द क्र रहा है.

काजल- लाओ दिखाओ जरा. कहा लगा है. कही मांश तो नहीं फटा है.

मन मई तो कुछ और hi चल रहा था.

( कितनी झूठ बोल रही है. फरवा ली है मेरे बेटे क मुशल से अपना ये मटका और अब बहाने बना रही है की गिर गई थी. रुक अभी देखती हु कितना चौड़ा किया है उस कलमुहे ने इसके पहले से चौड़ी गांड को.)

काजल दीक्षा क गांड से साडी पेटीकोट उठा क्र देखा. एक पतली सी पेंटी पहने हुए थी दीक्षा.

जब काजल को दीक्षा क गांड पर लल्लू क कारनामो का कोई सुराग नहीं मिला तो काजल फिर सोचने लगी की कही सही मई तो नहीं गिर गई थी.

फिर काजल नजर उठा के दीक्षा क गांड का मुआइना करने लगी.

तब काजल को एहसास हुआ की सही मई ये गिर गई है ककी गिरने से जो चोट लगा था वह कला हो गया था और फुल भी गया था.

काजल- आहा फुल गया है और कला भी हो गया है. मई तेल गर्म कर क लती हु.

फिर काजल जा क्र ऋतू को भी उठा क्र उसे साडी बात बता दी और उसे दीक्षा क पास भेज क्र खुद तेल गर्म करने चली गई.

सुबह तक ये लोग दीक्षा क साथ hi लगी रही.

अब दीक्षा का दर्द काम था और सूजन भी काम हो गया था.

सुबह उठाने क बाद सब अपने प्रतिदिन क कामो मई मसरूफ हो गए.

लल्लू का किसी को कोई ख्याल नहीं था.

खाने क समय दोपहर को खाना खता हुआ सुनील लल्लू का खोज किया.

सुनील- अरे भाई अपने नवाब साहब कहा है. आज तो उनका चेहरा भी नहीं देखा है.

राघव- सही कहा चाचा. सुबह से मैंने भी नहीं देखा है. मई तो समझ रहा था की आप कही भेजे होंगे.

सुनील- मैंने नहीं भेजा है कही.

दादू- फिर कहा जाएगा. बिना बताये तो कही जाता भी नहीं.

पापा- तो क्या उसे किसी ने भी नहीं देखा है सुबह से. न hi किसी ने काम से बहार भेजा है.

सब मन क्र दिए.

काजल को अभी भी एहसास नहीं था की क्या नतीजा निकला है रात की घटना का.

सुनील- सब से लास्ट मई किस ने देखा है उसे.

सब चुप. कोई कुछ नहीं बोल रहे थे.

B.mami- ऐसे चुप मत रहो सब. बताओ रात मई सब से लास्ट मई किस ने देखा है.

छोटी बुआ- मैंने. हम दोनों चाट पर काफी देर तक बात क्र रहे थे. दोनों को hi नींद नहीं आ रहा था तो. फिर दोनों निचे आ गए. यहाँ ललित बीटा अपने कमरे मई चला गया और मई छोटी भाभी क कमरे मई सोने चली गई.

सुनील- उसके बाद किसी ने देखा है.

अब सभी खाना छोड़ दिए थे. टेंशन से सब का हाथ रुक गया था.

छोटी बुआ- आधी रात को मई पानी पिने नलका पर गई थी तो वह स्लिप क्र गई थी जिस क कारन मई गिर गई.

मेरे गिरने की आवाज सुन क्र ललित बीटा आया था. वही उठा क्र फिर अपने कमरे मई ले गया मुझे. फिर उसने बड़ी भाभी और छोटी भाभी को उठाया था. उसके बाद मई नहीं मिली हु.

पापा- क्या तुम गिर गई थी रात मई. अब अभी बता रही हो.

तुम लोग क्या करती रहती हो. ये पानी पिने अकेले कैसे चली गई थी. साथ क्यू नहीं गए कोई.

बड़ी ममी वह से उठ क्र बहार को चल दी.

सुनील- आप कहा जा रहे ho.aap यही रहो मई देखता हु.

फिर बांकी क काका भी उठ गए. सब बहार तक आये बात करते हुए.

राघव- यहाँ कार भी नहीं है. जिस से लल्लू दोनों ममी को ले क्र आया था.

अब सभी और भी ज्यादा पदेशन हो गए.

क्या हुआ है. कहा गया कार ले क्र. कही कोई एक्सीडेंट तो नहीं हो गया.

सब तरह तरह क अनुमान लगा रहे थे.

पापा- उसे गारी चलना भी नहीं आता था. अभी अभी तो वो बुलेट चलना सीखा था. उस पर सब उसे कार चलने को दे दिए.

सब उसे सर पर चढ़ा रहे है. आज उसी का नतीजा है ये की वो बिगड़ गया है. किसी की सुनता नहीं है.

बड़ी ममी का तो अब बप बढ़ने लगा था.

अब काजल को रात की वाकिया याद आता है.

जो काजल ने किया और कहा था और उसके जवाब मई जो कुछ लल्लू ने कहा था.

काजल क हाथ पेअर सुन्न हो गए.

वो कहे तो किसे कहे.

इधर लल्लू उज्जैन पहुंच क्र एक सस्ते होटल मई रूम ले क्र मजे से खाना पीना खा क्र सो रहा था. लक्ष्मी साथ मई बैठी हुई थी.
 
मास्स bhai:lotpot:

मैंने स्टोरी को ले क्र सिर्फ फर्स्ट अपडेट hi सोचा था. उसके बाद का कुछ भी नहीं सोचा है.

जब लिखने लगता हु या कहे टाइप करने लगता हु तो फिर जो दिल और दिमाग कहता जाता है ऊँगली वही टाइप करता जाता है.

अपडेट टाइप करने क बाद मई फिर पढता भी नहीं.

ककी कई भाई क स्टोरी को पढ़ा है मैंने कभी कभी वो भाई लोग बोलते है की अपडेट 4 बार टाइप क्र क डिलीट क्र दिया क्यू की मुझे खुद पसंद नहीं आई.

मई इस झमेले मई नहीं पड़ता.

ककी मई अगर एक बार भी टाइप करने क बाद अपडेट पढ़ लिया फिर मन 100 थॉट्स आने लगता है. इस लिए मई पढता hi नहीं.

न हो पहले सोचता हु.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 42.

क्या हुआ मिला मेरा बीटा.

बड़ी ममी बेहाल हो क्र दालान पर बैठी थी.

अभी अभी अनिल काका आये थे आस पास गौण मई धुंध क्र जिस से बड़ी ममी पूछ रही थी.

अनिल काका अपना सर इंकार मई हिला दिए.

बीएड पर बैठे दादू भी बहुत गमगीन लग रहे थे.

बहनो का तो क्या हाल था ये पूछो hi मत.

सभी एक तरफ से रोये जा रही थी. कभी कोमल सोनम क गले लग क्र रोटी तो कभी सोनम रोमा क गले लग क्र. तो ाकभी गौरी रानी क गले लग क्र रोटी

ऐसे hi सब पदेशन थे.

काजल तो अपने आप को कमरे मई कैद क्र ली थी.

उसे किसी क सामने जाने मई दर लग रहा था. कही किसी को पता न चल जय की क्यू लल्लू घर से चला गया.

ऋतू अब अलग पदेशन थी.

ऋतू- मुआए कहा चला गया. गांड मेरी फर्जी दर्द मई झेली हु और गुस्सा किया तो घर से भाग गया.

लेकिन अगर मेरे गुस्से से भाग क्र जाता तो पहले hi जाता. अब तो मई गुस्सा भी नहीं हु उस पर. अब कहा चला गया. घर मई सदी है दो दिन मई और अब ये गायब है.

हे प्रभु, रक्षा करना उस बुद्दू का. मन मई कोई मेल नहीं है उसके. जो भी कहता करता है सब साफ दिल से hi करता है.

कैसे होगा ये सदी अब. हे भगवन लाज रखना हमारी.

देर रात तक सब ढूंढते रहे लेकिन लल्लू का कोई पता नहीं चला.

दोनों मां भी रात मई आ गए थे.

जब आस पास नहीं मिला लल्लू तो छोटी ममी को बोल क्र बड़ी ममी ने दोनों मां को बुलवा लिया यही.

अभी सभी लोग आँगन मई बैठे हुए थे.

गज्जू मां- ललित आस पास क गौ बाजार कही नहीं मिला है.

अब आप लोग बताइये. किसी पर कोई सूचक. या किसी को पता हो की वो कहा जा सकता है. किसी से कोई बहस हुआ हो या किसी को बातो बातो मई ललित ऐसा कुछ बताया हो की वो कही जाने वाला है.

सब चुप. किसी को कुछ पता नहीं था और जिस को पता था वो दर से बोल नहीं रही थी.

ककी वो जानती थी. जैसे hi वो बताएगी रात क्या हुआ था तो सब से पहले उसे सुनील काट देगा गर्दन. उस से बच गई तो फिर गज्जू मां उसके. वो काट देंगे.

इसी लिए काजल चुप hi रह गई.

पुलिस मई भी कंप्लेंट लिखवा दिया था गुमसुदगी का.

पुलिस गज्जू मां क कारन पुरे जोर सोर से धुंध रहा था ललित उर्फ़ लल्लू को.

बड़ी ममी सोनम और कोमल इन तीनो का बहुत बुरा हाल था.

इधर लल्लू आधी रात को उठा सो क्र.

लक्ष्मी बीएड पर सो रही थी उस समय. लल्लू निचे चादर बिछा क्र सोया था.

उठ क्र बाथरूम से फ्रेश हो क्र आया. भूख लगी थी तो खाने को पूछा. अभी आधी रात को कुछ नहीं था. सिर्फ चाय और बिस्किट्स मिले. उसी को खा पि क्र काम चला लिया.

फिर बालकनी मई आ क्र थोड़ी देर टहल क्र लल्लू कमरे मई आया और सोचने लगा की अब क्या करे.

नींद तो अब आएगा नहीं और रात अभी आधी hi बीती है

लल्लू सोचा क्यू न ध्यान hi लगा लिया जय.

सब मंगल है.

लल्लू ध्यान मई बैठ गया.

आधी रात का वक्त. सारा जहा सो रहा था. लल्लू को सो रही लक्ष्मी क ससो की आवाज सुनाई दे रही थी.

महा कालेश्वर क प्रांगण मई या कही किसी सधी की जयघोष उसे सुनाई दे रहा था.

पूरा वातावरण संत था. लल्लू अपने मन को सब से पहले संत किया फिर ढूंढने लगा मार्ग साधना का.

धीरे धीरे वो साधना मई डूबता चला गया.

पहले लल्लू अपने आप को भूल गया. वो क्या है. कहा है. कुछ है भी वो.

ये साडी चीजे उसके दिमाग से निकल गया.

अपने आप को वो हवा मई तैरता हुआ महसूस क्र रहा था. जैसे वायुमंडल मई घुल मिटटी क बहुत छोटे कण ुरते तैरते रहते है हवा मई. वैसे hi लल्लू खुद को अनुभब क्र रहा था.

लल्लू अभी भी साधना मई लीं था. उसे ये एहसास तो था की वो हल्का हो क्र हवा मई तैर रहा है लेकिन वो अपने ध्यान को भांग नहीं होने दिए

लल्लू ुरता हुआ हवा मई एक द्वार क पास पंहुचा.

लाल रंग का था ये द्वार.

लल्लू थोड़ी देर वही हवा मई तैरता रहा फिर उस दरवाजे की और चला गया.

वह पहुंच क्र हलके से धक्का दिया उस दरवाजे को.

खुलता चला गया वो गेट. अंडर लाल रंग का प्रकाश चारो और फैला हुआ था.

लल्लू ुरता हुआ उस लाल प्रकाश मई कही खो गया.

कभी इधर तो कभी उधर ुरता तैरता रहा.

फिर लल्लू अपने आप को एक जगह स्थिर क्र उप्पेर उठता चला गया.

काफी उप्पेर आने पर उसे फिर एक दरवाजा दिखा. ये ऑरेंज कलर का था.

लल्लू उस दरवाजे को भी पर क्र लिया.

यहाँ चारो और ऑरेंज लाइट्स फैले हुए थे.

लल्लू चारो और देख क्र अपने मन को स्थिर करने लगा. फिर वह से उप्पेर उठता चला गया.

आगे उसे येल्लो गेट दिख रहा था.

लल्लू इस और चल दिया. अभी लल्लू उस दरवाजे को टच करने वाला hi था की उसका ध्यान भांग हो गया.

आँख खोल क्र देखा तो लक्ष्मी बीएड पर बैठी लल्लू को घर रही थी.

लल्लू आँखों क इसारे से पूछा की क्या हुआ तो लक्ष्मी इंकार मई गर्दन हिला दी.

लल्लू अपने बीएड से उठ क्र खड़ा हो गया.

लल्लू- सो जाइये. अभी बहुत रात बांकी है.

लक्ष्मी- अच्छा. ये किस ने कहा आप से.

लल्लू चौक क्र लक्ष्मी की और देखा तो उसे खिड़की से आती सुबह क सूर्य की किरणों का आभास हुआ.

लल्लू खिड़की खोल क्र देखा तो सही मई अभी सूर्य देव निकले hi थे अपने रथ पर.

लल्लू- वाओ सुबह हो गया. मई फिर तो काफी देर से ध्यान मई बैठा रह गया था और मुझे पता भी नहीं चला.

ओफ़्फ़्फ़ सब मंगल है.

लल्लू- ाचा लक्ष्मी जी ये बताइये की यहाँ उज्जैन मई आप रहती है तो यहाँ जो कुम्भ लगता है वो भी पता होगा आप को. यहाँ आप कई बार आई होंगी.

लक्ष्मी- है यहाँ मेरा घर है. तो यहाँ तो आती hi रही थी मई अपने माँ बापू क साथ.

लल्लू- मई यहाँ महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करना चाहता हु क्या चलेंगी मेरे साथ.

लक्ष्मी- ये भी कोई मन करने वाली बात है.

लल्लू- फिर चलिए. चलते है. वही शिप्रा नदी मई स्नान कर क पूजा करेंगे.

झट पैट दोनों तैयार हो क्र चल दिए वह से महाकाल की पूजा क लिए अपनी कार से.

थोड़ी देर मई hi ये लोग शिप्रा नदी किनारे पहुंच गए थे.

दोनों नदी मई जा क्र स्नान किये फिर कपडे पहन क्र चल दिए पूजा करने क लिए.

दोनों वह सब से पहले महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा किये.

फिर उस से उप्पेर क फ्लोर पर hi ओम्कारेश्वर महादेव है तो दोनों उनकी पूजा किये. उस से उप्पेर क फ्लोर पर चंद्र कारेश्वर है वह गए पूजा करने.

उसी प्रांगण मई बड़े गणेश जी बिराजमान है तो दोनों फिर वह गए उनका पूजा किये उनके पीछे पंचमुखी हनुमान जी है. उनका दर्शन क्र वो दोनों आगे हरसिद्धि देवी क मंदिर चले गए.

वह पूजा करते वक्त लल्लू से एक गलती हो गई.

लक्ष्मी अपने साथ देवी पूजा क लिए सभी सामग्री लायी थी जिस मई सिंदूर भी था. गलती से वो सिंदूर गिर गया लल्लू से वो भी लक्ष्मी मई सर मई.

लल्लू क हाथ मई पूजा का सामान था. वो सामान पकडे खड़ा था और लक्ष्मी बैठ क्र पूजा क्र रही थी. लक्ष्मी पूजा क्र क जैसे hi कड़ी होने लगी. लक्ष्मी का सर लल्लू क हाथ मई लग गया और बांकी कुछ नहीं गिरा बस सिंदूर hi गिर क्र लक्ष्मी पर फ़ैल गया. वह जो पांडा खड़े थे वो जयघोष करने लगे ये देख क्र. फिर जबरन दोनों को फिर से जोड़े मई पूजा करवा क्र दुबारा लल्लू से लक्ष्मी का मांग उन लोगो ने हरसिद्धि देवी पर चढ़े सिंदूर से करवा दी.

लक्ष्मी और लल्लू दोनों हतप्रभ से रह गए.

किसी क कुछ समझ नहीं आया और ये कांड हो गया.

फिर दोनों वह से मुँह लटकाये उस मंदिर मई स्थापित और देवी जैसे माँ कलिका, लक्ष्मी सरस्वती इन सब की पूजा क्र वापस अपने होटल आ गए. बांकी जगह गए hi नहीं पूजा करने.

होटल आ क्र लक्ष्मी फुट फुट क्र रोने लगी.

लल्लू कुछ क्र भी नहीं सकता था.

लल्लू उठ क्र लक्ष्मी क सामने कान पकड़ क्र खड़ा हो गया.

लल्लू- मुझे माफ़ क्र दो. ये सब मेरे गलती का नतीजा है. न मई तुम्हे वह चलने को कहता न ये सब होता.

मई तुम्हारा गुनहगार हु. तुम जो भी सजा मुझे देना चाहो दे सकती हो. मई उफ़ तक नहीं कहूंगा.

लक्ष्मी- मई अपने पति को क्या सजा दूंगी. अब ये सब तो माता रानी क आशीर्वाद से hi हुआ है. अब तो आप hi मेरे पति है. अब आप जो भी कहनेगे, जैसे भी मुझे रखेंगे. मई रहने को तैयार हु.

लल्लू- लल्लू तो ये सब सुन्ना तो उसके कान से धुआँ निकलने लगा.

क्या सोचा था और क्या हो गया.

लल्लू चुप चाप जा क्र अपने बीएड पर बैठ गया

फिर लल्लू उठ क्र पहले खाने का आर्डर क्र दिया.

खाना पीना करने क बाद लल्लू लक्ष्मी को ले क्र बाजार गया.

वह लल्लू ने लक्ष्मी और अपने लिए कपडे ख़रीदे.

फिर वही त्रिले रूम मई जा क्र दोनों नए कपडे पहन लिए.

लल्लू- लक्ष्मी जी अब आप मुझे अपने घर की और ले चलिए.

हम दूर से hi आज आपके घर को देखेंगे. अगर आप का चाचा और चाचा का लड़का दिखे तो उसे भी मुझे सीखा दीजिये.

फिर लक्ष्मी डर्टी हुई लल्लू को ले क्र अपने घर को चल दी.

वह पहुंच क्र लक्ष्मी दूर से hi अपना घर दिखा दिया लल्लू को.

बहुत आलिशान माकन था ये. घर क बहार अभी कोई नहीं था.

थोड़ी देर वह आस पास का कार से hi चक्कर लगा क्र लल्लू गाड़ी वापस ले लिया. तभी लक्ष्मी किसी को देख क्र छिपने लगी.

लल्लू- क्या हुआ लक्ष्मी जी. किस को देख क्र छिप रही है आप.

लक्ष्मी- ये सामने की दुकान पर जो दो लोग खड़े है ये मेरे चाचा और उनका लड़का है.

लल्लू दोनों को अच्छी तरह देख क्र गाड़ी वापस होटल की और घुमा लिया.

होटल पहुंच क्र दोनों अपने कमरे मई पहुंच गए.

लक्ष्मी को अपना घर देखने से वो थोड़ी देर क लिए जो अपने माँ बापू को भूल गई थी.

वो फिर से याद करती हुई रोने लगी.

लल्लू- लक्ष्मी जी ये क्या आप फिर से रोने लगी. मैंने कहा न. अगर आप को मुझे सजा देना है तो आप को जो ठीक लगे वो सजा दे लीजिये मुझे.

लक्ष्मी- nahi...mai तो माँ बापू को याद क्र क रो रही हु. अभी घर देख क्र उनलोगो की याद आ गई.

लल्लू- अपने आप को रो क्र क्यू दुखी क्र रही हो. जिस ने भी तुम्हारा ये हाल किया है उसका भी वही हाल होगा.

अभी खाना मंगवा रहा हु पहले फ्रेश हो जाओ जा क्र.

फिर लल्लू लक्ष्मी को समझा बुझा क्र चुप करवाया और उसे फ्रेश होने भेज दिया.

थोड़ी देर मई खाना आ गया.

दोनों मिल क्र खाना खाये.

लल्लू फिर से निचे चादर बिछा क्र लेट गया.

लक्ष्मी उठ क्र लल्लू क पैरो मई बैठ गई.

लल्लू- ये क्या क्र रही है आप. यहाँ क्यू बैठ गई.

लक्ष्मी- आप भी तो यहाँ निचे लेट गए है.

लल्लू- है, आप उप्पेर बीएड पर लेट जाइये.

लक्ष्मी- माँ कहती थी, पति क चरणों मई पत्नी का स्थान होता है. पत्नी पति का दासी होती है. बस ये दादी भी वही क्र रही है.

लल्लू- ये क्या कह रही हो आप. ये दासी, चरणों मई स्थान. ये सब क्या है.

लक्ष्मी- क्या गलत कहा है मैंने. अब आप hi तो मेरे पति है. मेरे लिए आप क चरणों मई hi मेरा चारो धाम है.

लल्लू- बाप रे ऐसी बाटे. प्लस आप सब से पहले यहाँ से उठ जाइये.

लक्ष्मी- मई उठ जाउंगी लेकिन आप उप्पेर देब पर आ जाइये.

लल्लू- नहीं नहीं. वो आप का स्थान है. आप वह जा क्र आराम कीजिये.

लक्ष्मी- मई उप्पेर जा क्र सो जाऊ और आप यहाँ निचे सिर्फ एक चादर पर सोयेंगे. मुझे पाप नहीं लगेगा. क्या मुझे उप्पेर बीएड पर नींद आ जाएगी. मेरे लिए तो वो बीएड काँटों का बीएड लगेगा. जहा मई सोऊ उप्पेर और मेरा पति सोये निचे.

लल्लू- क्या… आप आप इस सदी को स्वीकार क्र लिए. वो एक गलती था. वैसे भी मई मई आप क कहा लायक हु. मई तो पागल हु. मुझे पागलपन क दौरे पार्टी है. आप को तो मुझे कई गुणा अच्छा पति मिलेगा.

लक्ष्मी- नहीं. अब मेरी सदी हो गई है वो भी माता रानी क आशीर्वाद से. उनके मंदिर मई. इस से अच्छा पति तो मेरे माँ बापू भी मेरे लिए धुंध नहीं पते.

अब आप उप्पेर चल रहे है या मई भी यही निचे नंगे फर्श पर लेट जाऊ.

लल्लू हड़बड़ा क्र उठ गया.

लल्लू- लक्ष्मी जी आप बात नहीं समझ रही है. मई खुद भी घर छोड़ क्र आ गया हु. मेरा कोई ठिकाना है है. क्या करना है कहा जाना है कुछ पता नहीं. ऐसे इन्शान को अपना पति मानना समझदारी नहीं जिसका खुद कोई ठिकाना नहीं.

लक्ष्मी- आप मुझ से पीछा छुड़ाना चाहते है तो ठीक है. अब मई आत्मा हत्या नहीं करुँगी क्यू की मुझे अब आप से प्यार हो गया hai.(sarma क्र मुँह झुका क्र लज्जते हुए बोली)

लेकिन मई आप पर बोझ भी नहीं बनूँगी. मई वही माता रानी क मंदिर चली जाउंगी. वही रह क्र उन क मंदिर प्रांगण की साफ़ सफाई क्र लिया करुँगी और वही किसी कोने मई पड़ी रहूंगी.

लल्लू आगे आ क्र लक्ष्मी को गले से लगा लिया.

लल्लू- तुम तो मेरे से बड़ी पागल निकली. बहुत बढ़िया है. एक पागल को पत्नी भी एक पगली hi मिली.

लल्लू लक्ष्मी को काश क्र गले से लगा लिया.

लक्ष्मी लल्लू क आगोश मई सरमाती सकुचाती उसके बहो से लगी थी

लल्लू लक्ष्मी को गॉड मई उठा क्र बीएड पर लेता दिया फिर खुद भी जा क्र लक्ष्मी क साथ लेट गया.

लक्ष्मी लल्लू की और करवट लिए उसे देख रही थी.

जैसे hi लल्लू क नजरो से उसकी नजर मिली वो शर्मा क्र लल्लू क साइन मई अपना मुँह छुपा ली.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र उसे पीछे से पकड़ क्र अपने से काश क्र चिपका लिया.

लक्ष्मी लल्लू क बहो मई उस से चिपकी हुई लक्ष्मी का रोम रोम थिरक रहा था.

लक्ष्मी लल्लू क एक हाथ को अपना तकिया बनाये लल्लू क कंधे पर लेती हुई थी.

लल्लू दूसरे हाथ से लक्ष्मी क बालो को सहला रहा था.

थोड़ी देर मई लक्ष्मी लल्लू क बहो मई hi सो गई.

आधी रात का समय होगा लल्लू ऐतिहात से एक तकिये पर आहिस्ता से लक्ष्मी क सर रख दिया.

फिर आराम से बीएड से उतर क्र गेट खोल क्र दुबारा गेट लगा दिया.

बहार आ क्र लल्लू होटल से बहार आ गया.

कार मई बैठ क्र वो एक दिशा को चल दिया.

थोड़ी देर मई hi लल्लू अपने मंजिल पर था.

वह लल्लू थोड़ी दूर पहले कार एक साइड रोक क्र उतर गया और एक तरफ चल दिया.

लक्ष्मी क घर क चारदीवारी क पास पहुंच क्र लल्लू कूद क्र उस चारदीवारी को पर क्र लिया.

वह एक बल्ब जल रहा था. बहार कोई नहीं था.

लल्लू झट से दौर क्र घर क दिवार से जा क्र चिपक गया.

घूम क्र घर का निरिक्षण करने क बाद भी कही से घर क अंडर जाने का रास्ता नहीं दिख था.

लल्लू वाटर पाइप क पकड़ क्र उसकी मजबूती आंक उसी को पकड़ क्र लटक गया और चढ़ने लगा.

माकन तीन फ्लोर का था.

उप्पेर फर्स्ट फ्लोर पर एक खिड़की खुली थी तो लल्लू उस खिड़की क सहारे कमरे क अंदर चला गया.

वो एक खली कमरा था.

फिर लल्लू वह से निकल क्र सभी कमरों को छुपते हुए देखने लगा.

फर्स्ट फ्लोर क एक कमरे मई एक लड़का सो रहा था. ये लक्ष्मी का भाई था.

लक्ष्मी क चाचा का लड़का.

बांकी सरे कमरे उस फ्लोर पर खली hi थे.

लल्लू फिर सेकंड फ्लोर पर चला गया वह सरे कमरे खली hi था.

लल्लू वह से निचे ग्राउंड फ्लोर पर आ गया.

ग्राउंड फ्लोर पर लल्लू एक एक क्र सभी कमरों को नाचने लगा.

निचे क एक कंडे का दरवाजा अंडर से बंद था.

लल्लू उस कमरे क चारो और देखा तो पीछे एक खिड़की का थोड़ा सा शीशा टुटा हुआ था.

उस से लल्लू देखा तो अंदर एक मर्द और एक औरत नंगे एक दूसरे से चिपके सो रहे थे.

सब से पहले लल्लू उप्पेर जा क्र उस लड़के को सोते हुए hi हाथ पेअर बांध दिया.

फिर एक चमत काश क्र लगाया.

जैसे hi वो जगा लल्लू उस के पेट मई एक ग़ुस्सा लगा दिया.

उस लड़के क मुँह से आह निकल गया.

उस लड़के ने जैसे hi मुँह खोला लल्लू कपडे का टुकड़ा को गोला बना रखा था वो उसके मुँह मई थुश दिया.

फिर लल्लू वह से निचे आ क्र उसी टूटे हुए खिड़की क पास चला गया. उस टूटे कांच को लल्लू बहुत आराम से और तोड़ दिया फिर उस खिड़की से अंडर चला गया.

लल्लू अपना मोबाइल निकल क्र उसे चालू किया और रिकॉर्डिंग चालू क्र एक ऐसे जगह लगा दिया जहा से सारा कुछ रिकॉर्ड हो जय.

लल्लू अपने मुँह को कपडे से धक् क्र बीएड क पास गया और लक्ष्मी क चाचा क काली गांड पर एक लात मारा.

लक्ष्य का चाचा लुढ़क क्र निचे गिर गया बीएड से.

ल. चाचा हड़बड़ा क्र उठ खड़ा हुआ.

देखा तो सामने एक आदमी मुँह ढके खड़ा है.

L.chacha- कौन हो तुम. ये क्या हरकत है. यहाँ कैसे आये तुम.

लल्लू- मई तुम्हारा काल हु बीटा. दूसरे का दौलत हड़पने का बहुत सौक है न तुम्हे आज बताता हु तुम्हे मई.

L.chacha- तुम बच क्र नहीं जा सकते. यहाँ से तेरी लाश hi जाएगी.

लल्लू- जैसे अपने भाई और भाभी को मारा था.

L.chach- क्या बक रहे हो तुम. मई क्यू मरूंगा उन्हें. उन्हें तो किसी चोर ने मारा था. जो चोरी करने आया था.

लल्लू- और वो चोर अपना भाई hi निकला. जो बहुत दिन से अपने भाई का सब कुछ छोड़ी करना चाहता था.

L.chacha- कौन है तू. तेरी तो मई…

वो लल्लू पर झपटा की लल्लू एक लात दिया उसके मुँह पर.

L.chacha ुरता हुआ बीएड से टकरा क्र निचे लुढ़क गया.

नंगी औरत उठ क्र दहसत से लल्लू को देखती हुई अपने नंगे जिस्म को चादर से धक् ली.

लल्लू- कौन है ये.

L.chacha कुछ नहीं बोलै.

लल्लू- कौन हो तुम.

उस औरत से लल्लू बोलै.

औरत- ma..mai कुछ nahi...k..ya है. ये सब is..isi ने क्या है. मैंने मन किया था किसी का हत्या न करे लेकिन ये दौलत का अँधा. अपने hi भाई और भाभी की हत्या क्र दी.

लल्लू- मैंने तुम से पूछा है की तुम कौन हो.

औरत- ma..mai इनकी p..pa.patni.

लल्लू L.chacha की और देखा.

वो बीएड को पकड़ क्र खड़ा था.

लल्लू L.chacha की और देख क्र.

लल्लू- सच सच बता क्या किया है तू ने अपने भाई भाभी क साथ.

L.chacha- तू जनता नहीं कौन हु मई. यहाँ की पोलिश नेता सब मुझे सलाम करते है.

लल्लू- अच्छा वो भी देख लेंगे.

फ़िलहाल तुम्हे बता दू की तेरा बीटा जो उप्पेर सो रहा था कमरे मई. उसे मैंने जहर का इंजेक्शन लगा दिया है. उसे आधे घंटे मई डॉक्टर क पास नहीं ले जाया गया तो वो गया काम से.

L.chacha- kya..nahi..nahi. तुम ऐसा नहीं क्र सकते. तुम्हारी मुझ से क्या दुश्मनी है. मैंने तुम्हारा क्या बिगड़ा है.

लल्लू- तुम्हारे भाई ने तुम्हारा क्या बिगड़ा था. क्यू मर दिया उसे. तुम्हारी भाभी ने तुम्हारा क्या बिहारी थी जो मर दिया उसे.

L.chacha- तुम कौन हो. तुम्हे क्या मतलब इस सब से. तुम्हे पैसे चाहिए तो बोलो. मई तुम्हे मालामाल क्र दूंगा.

लल्लू- चुप बेटी छोड़. तू खुद भिखारी. बहनचोद मुझे मालामाल करने चला है. अभी तो अपने बेटे क बारे मई सोच.

औरत- क्या सोच रहे हो जी. हमारा एकलौता बीटा है वो. ये सब उसके लिए hi तो किये थे तुम. अगर वही नहीं रहेगा तो क्या करोगे धन दौलत ले क्र.

L.chacha- क्या जानना चाहता है तू.

लल्लू- क्यू और कैसे मारा अपने भाई और भाभी को.

L.chacha- मैंने दो नंबर का काम सुरु किया था. काम मई लोस्स हो गया तो कर्ज उधर ले क्र फिर सुरु किया लेकिन काम फिर भी नहीं चला.

इस चक्क्र मई मेरा घर बार सब बेचना पड़ा.

मई पैसे पैसे क लिए मोहताज हो गया.

एक दिन मई अपने भाई क पास आ क्र उस से कुछ पैसे उधर मांगे ताकि एक बार फिर से अपना धंधा सुरु क्र सकू.

लेकिन भाई ने पैसे देने से मन क्र दिया. बहुत बेज्जती महसूस हुई मुझे. बस मैंने फैसला क्र लिया की अब मई सब से पहले इस से बदला लूंगा.

एक सुबह सुबह आ क्र मैंने उसके बेटी क सर पर बन्दुक रख क्र सब कुछ अपने नाम करवा लिया. फिर दोनों को गोली मर दिया.

पुलिस मई जा क्र कुछ पैसे खिला दिए.

पुलिस ने ये एक चोरी क उद्देश्य से मर्डर दिखा क्र केस क्लोज क्र दिया.

लल्लू- वह क्या बात है. कौन सा पुलिस वाला था जिसे तुम ने पैसे खिलाये थे.

L.chacha- यहाँ क ठाणे का दरोगा.

लल्लू- वो कागजात कहा है जिस पर लिखवाया था अपने भाई से सब कुछ अपने नाम पर.

ल. चाचा- बताने मई हिचकिचाया…

लल्लू लक्ष्मी क चची की और देखा तो वो आलमारी से निकल क्र सरे कागज लल्लू को दे दी.

लल्लू सभी पेपर्स को देखने लगा.

लल्लू- और कही है कोई पेपर्स.

L.chcha- नहीं यही है सरे.

लल्लू- तुम्हारे भाई की बेटी थी. वो कहा है.

L.chacha- वो हमे पता नहीं. वो यहाँ से भाग गई थी.

लल्लू- क्यू भाग गई.

L.chcha- मेरा बीटा उस क साथ कुछ गलत हरकत क्र दिया था. उस से दर क्र वो भाग गई.

लल्लू- मतलब तेरा बीटा तेरा hi कार्बन कॉपी है.

l.chacha- नहीं नहीं. उसे कुछ मत कहना. प्लस मैंने सब कुछ तुम्हे बता दिया है अब मेरे बेटे को डॉक्टर क पास ले जाने दो.

लल्लू- अभी कहा ससुर जी. अभी पहले लिख क्र दो तुम जैसे अपने भाई से लिखवाया है.

L.chacha जल्दी से एक स्टाम्प पेपर ले क्र उस मई सिग्न क्र दिया.

L.chacha- लो अब मैंने वो सब क्र दिया जो तुम ने करने को कहा. अब तो मेरे बेटे को डॉक्टर क पास ले जाने दो.

लल्लू- ठीक है जा ले जा.

फिर वो मिया बीबी जल्दी से भाग क्र अपने बेटे क कमरे मई पहुंचे. उन्हें अपने नंगे पैन का भी याद नहीं रहा.

उन दोनों क जाते hi लल्लू अपना मोबाइल उठा क्र झट से वह से बहार निकल आया.

फिर चलता हुआ अपने कार तक आ क्र लल्लू अपना कार ले क्र होटल को चल दिया.

अब सुबह होने वाला था.

यहाँ काफी समय लग गया.

लल्लू को अब दर आता रहा था की कही लक्ष्मी न उठ गई हो.

अगर उसे वह नहीं पाया तो लक्ष्मी कितनी पदेशन होगी. कही वो ये न समझ ले की मई उसे सोया छोड़ क्र भाग गया हु.

ये सब ख्याल आते hi. लल्लू का पेअर एक्सक्लेटर पर दबाव बढ़ता चला गया.

जल्दी से लल्लू होटल मई गाड़ी कड़ी क्र भगा अपने कमरे की और. वह जा क्र देखा तो लक्ष्मी अभी भी सो रही थी.

लल्लू सर पर आये पसीने को साफ़ करता लक्ष्मी क माशूम चेहरे को देखने लगा.

फिर बीएड पर आ क्र सोये हुए लक्ष्मी क गलो पर आते एक लत को हटा क्र वह एक प्यारी चुम्मी ले लिया.

लक्ष्मी कसमसा क्र फिर से सो गई.

लल्लू भी लक्ष्मी क साथ आ क्र लेट गया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 43.

सोनम तो जब से पता चला है की लल्लू खो गया है. गायब हो गया है तब से कमरे से बहार hi नहीं निकली है. बस रोये जा रही है और बार बार मोबाइल पर कॉल करती जा रही थी.

आधी रात मई जब लल्लू लक्ष्मी क चाचा क यहाँ रिकॉर्ड करने को मोबाइल चालू किया था तब सोनम मोबाइल चार्ज मई लगा क्र बीएड पर बैठी रोये जा रही थी और खिड़की से बहार अँधेरे मई देखे जा रही थी.

गौण मई सुबह की पहली किरण क साथ सब उठ गए. वैसे भी नींद किसे आना था.

आज राघव का सगुन ले क्र लड़की वाले आने वाले थे.

सभी घर वाले सर से सर जोड़े बिचार क्र रहे थे की अब आगे क्या करना चाहिए.

ये सदी अगर अभी रोक दे तो इन लोगो से ज्यादा लड़की वालो को मान सम्मान पर ऊँगली उठेगा साथ hi धन की भी हानि होगी.

इधर लल्लू क ऐसे गायब हो जाने से किसी का अब इस ब्याह मई रूचि भी नहीं रह गया था.

सब से पहले सभी वह क पुलिस स्टेशन गए जहा लल्लू की गुमसुदगी का रिपोर्ट लिखवाये थे ये.

वह जा क्र पता चला की अभी केस मई कोई प्रोग्रेस नहीं हुआ है. लल्लू का और कार का दोनों मई से किसी का कोई अत पता नहीं चला.

सब ठगा सा मुँह ले क्र वापस आ गए.

सोनम जब सुबह मोबाइल चार्जर से निकल क्र लायी फिर से लल्लू को कॉल करने को तो उस मई नोटिफिकेशन आया था.

सोनम ये देख क्र खुश हो गई और भाग क्र बहार दालान पर पहुंच क्र सब को ये बात बताई.

सब अपना अपना मोबाइल निकल क्र लल्लू को कॉल लगाना सुरु क्र दिए. लेकिन अभी सुबह मई तो लल्लू रिकॉर्ड करने क बाद फिर से मोबाइल बंद क्र दिया था.

कॉल नहीं लगा.

फिर एक बार सब मायुश हो गए.

गज्जू मां S.P को कॉल क्र इस बारे मई बात किये.

S.P उन्हें दिलाशा दिया की जैसे hi अब ये मोबाइल चालू होगा. पुलिस को पता चल जाएगा की ललित कहा है.

गज्जू मां को फिर थोड़ी तस्सली हुई की हो सकता है लल्लू का मोबाइल फिर से चालू होगा.

सब इंतजार करने लगे. कब लल्लू मोबाइल चालू करता है.

इधर सुबह लक्ष्य जैसे hi उठी अपने आप को लल्लू क बहो मई पाई.

लल्लू क बहो मई देख क्र लक्ष्मी को बड़ा लाज आया. सरम से गाल लाल हो गए उसके.

लल्लू तो लक्ष्मी क सुन्दर चेहरे को निहारते निहारते hi कब सो गया पता नहीं चला.

लक्ष्य लल्लू को यु सोया देख क्र उसे लल्लू पर बड़ा प्यार आया.

लक्ष्य अब लल्लू को hi अपना सब कुछ मानाने लगी थी. और कोई तो था hi नहीं उसका.

वो झुक क्र लल्लू क माथे को चुम ली.

फिर खुद hi शर्मा क्र अपने हाथो से अपना चेहरा धक् ली.

लल्लू अभी भी सोया hi था.

कुछ छान बाद लक्ष्मी अपनी उंगलियों क बिच गैप बना क्र देखि तो लल्लू को अभी भी सोया देख क्र अपना हाथ चेहरे से हटा क्र एक बार फिर चूमने क लिए होठो को गोल क्र लल्लू क उप्पेर झुकने लगी.

लल्लू क होठो से लक्ष्मी क होठो क बिच एक से डेढ़ इंच का फैसला था की लल्लू की आँखे खुल गई.

दोनों की नजरे चार होते hi लक्ष्मी तो अचानक से चौक क्र पीछे हो गई और बीएड से कूद क्र वाशरूम भाग गई.

लल्लू लक्ष्मी की हरकत देख क्र उसे लक्ष्मी पर बड़ा प्यार आया.

लल्लू मुसकुडता हुआ बीएड पर लेता रहा.

थोड़ी देर बाद लक्ष्मी वाशरूम से बहार आ गई. अभी भी सरम से उसकी पलके झुकी हुई थी और गाल लाल थे.

लल्लू चाय क लिए बोल दिया था तो चाय आ गया था तब तक.

दोनों चुप चाप चाय पि लिए.

फिर लल्लू मोबाइल निकल क्र चार्ज मई लगाया. और फिर सरे पेपर निकल क्र लक्ष्मी को दिखाया.

लक्ष्मी पेपर्स देख क्र बहुत खुश हुई.

वो कूद क्र लल्लू को गले से लगा ली.

लल्लू उसे गले से लगाए उसके सर को सहलाता रहा.

लल्लू- अगर इजाजत हो तो नास्ता भी मंगवा ले. फिर हम दोनों को पुलिस स्टेशन भी जाना है.

लक्ष्मी- पुलिस स्टेशन क्यू.

लल्लू- आप क चाचा क खिलाफ कंप्लेंट करने.

लक्ष्मी खुश हो क्र सर है मई हिला दी.

फिर लल्लू नास्ते का आर्डर क्र दिया.

थोड़ी देर मई नास्ता आ गया.

फिर दोनों साथ मई नास्ता किये.

दोनों फिर तैयार हो क्र पुलिस स्टेशन को चल दिए.

लल्लू पुलिस स्टेशन आ क्र पता किया यहाँ ैप कहा बैठता है. फिर लल्लू लक्ष्मी क साथ वह चला गया ककी यहाँ का दरोगा तो वैसे भी लक्ष्मी क चाचा का hi आदमी है. दूसरा दरोगा खुद इस केस मई मुजरिम है तो उसे hi कंप्लेंट लिखवा क्र लल्लू उसके नजरो मई नहीं आना चाहता था.

लल्लू ैप ऑफिस जा क्र वह क एक हवलदार को बताया की वो ैप से मिलना चाहता है.

हवलदार लल्लू को वह क दरोगा क पास भेज दिया.

लल्लू लल्लू सोचा की ये ऐसे सीधा ैप क पास जाने नहीं देगा तो उस से अच्छा है की पहले इस दरोगा से मिल लिया जय फिर वही बोलेगा की ैप से मिला दे.

लल्लू लक्ष्मी क साथ चला गया दरोगा क केबिन मई.

वह एक लड़की बैठी थी दरोगा क कुर्सी पर.

नाम प्लेट पर उसका नाम किरण लिखा था.

किरण- कहिये क्या बात है.

लल्लू- मम, हमे एक मर्डर क बारे मई बात करनी है.

किरण- बैठ जाइये आप लोग. वैसे किस का मर्डर हुआ है.

लल्लू लक्ष्मी की और इशारा क्र क इनके पेरेंट्स का. लल्लू और लक्ष्मी कुर्सी पर बैठ गए.

किरण- कहा हुआ है.

लक्ष्मी- हमारे घर मई. सूरज नगर मई.

किरण- वह क पुलिस स्टेशन जाइये और वह रिपोर्ट लिखवाये.

लल्लू- उस पुलिस स्टेशन का इंचार्ज भी इस केस मई इन्वोल्वेद है.

किरण- क्या बक रहे है आप.

लल्लू- मुझे ैप सर से मिला दे प्लस.

किरण- वो ऐसे किसी से नहीं मिलते.

लल्लू- तो कैसे मिलते है यही बता दीजिये.

किरण- आप क पास कोई प्रोफ्फ है की उस पुलिस स्टेशन का इंचार्ज इन्वॉल्व है इस केस मई.

लल्लू- बिलकुल है. मई बिना प्रूफ क क्यू बोलूंगा.

किरण- दिखाइए वो प्रूफ.

लल्लू अपना मोबाइल से रिकॉर्डिंग चालू क्र किरण को सारा दिखा दिया.

किरण- काफी है ये प्रूफ.

फिर किरण एक हवलदार को बुला क्र फिर तैयार करने को कहता है.

लल्लू - क्या एक बार आप ैप सर से मिला देंगे प्लस.

किरण- उन से क्यू मिलना चाहते है आप.

लल्लू- क्यू की दूध का जल्ला छाछ भी फूक फूक क्र पिता है. आप खुद देखि है कैसे इस रिकॉर्डिंग मई कहा है की इस ने दरोगा को भी अपने तरह मिला लिया है. तो इसी लिए हम दोनों यहाँ ैप ऑफिस मई आये है.

किरण- आप का सक करना जायज है लेकिन यकीं मानिये. अभी मई कातिल को बाद मई पकड़ूँगी उस से पहले इस हरामजादे को पकड़ूँगी जो गिडार क खाल मई सेर बना फिर रहा है.

हमे इसके खिलाफ और भी कंप्लेंट आये थे लेकिन तब हमारे पास कोई साबुत नहीं था इसके खिलाफ. अब ये नहीं बच सकता है.

लक्ष्मी तब तक फिर लिखवा दी.

फिर दोनों वह से निकल आये.

लल्लू लक्ष्मी को ले क्र उसके घर आ गया.

लल्लू गारी ले जा क्र लक्ष्मी क घर क बहार कड़ी क्र दी.

लक्ष्मी- हम यहाँ क्यू आये है.

लल्लू- अब यहाँ hi रहना है न.

लक्ष्मी- नहीं नहीं. मुझे यहाँ नहीं रहना. अगर फिर चाचा इस बार आप क साथ कुछ kiya...he भगवन मई तो जीते जी मर जाउंगी.

लल्लू- अरे बाबा ऐसा कुछ नहीं होगा. आप का वो सो कॉल्ड चाचा अभी जेल मई होगा. आप इतना क्यू घबराती है.

लक्ष्मी लल्लू को पकड़ क्र कैसे न घबराऊ आप क शिव मेरा है hi कौन.

लल्लू- हैयय मेरी प्यारी बीबी जी.

लल्लू लक्ष्मी को पकड़ क्र अपने बहो मई भर लिया.

फिर ले क्र घर क अंडर आ गया.

वह अभी कोई नहीं था. पूरा घर खली था.

लल्लू- लक्ष्मी यहाँ कोई काम करने वाला नहीं रहता है क्या.

लक्ष्मी- माँ बापू क बाद उन लोगो को भी चाचा ने भगा दिया.

लल्लू- पता है वो लोग कहा रहते है. उन्हें फिर से बुला क्र लाये.

लक्ष्मी- है पता है मुझे. अभी बुला क्र लती हु.

लक्ष्मी जाने लगी उन लोगो को बुलाने को.

लल्लू- अरे अरे मेरी गुलाबो. अकेले कहा जा रही है. अपने दीवाने को भी तो साथ ले क्र चलिए.

लक्ष्मी शर्मा गई लल्लू की बात सुन क्र.

फिर दोनों गारी से उन लोगो क घर चले गए.

वह जा क्र लक्ष्मी गारी से उतर क्र लल्लू क साथ उनके घर पर पहुंच गए.

लक्ष्मी दरवाजा खटकाया.

एक औरत बहार निकली.

औरत- अरे लक्ष्मी बिटिया. तुम कहा चली गई थी. हम सब कहा कहा नहीं ढूंढा तुम्हे.

लक्ष्मी - काकी वक्त ख़राब होता है इन्शान का तो फिर कोई ठिकाना नहीं रह जाता. वो तो उप्पेर वाले ने मुझे इन से मिला दिया. नहीं तो आप की ये अभागन बेटी पता नहीं जिन्दा भी होती या नहीं.

औरत- नहीं मेरी बेटी. ऐसा नहीं बोलते. उप्पेर वाला तुम्हे लम्बी उम्र दे.

लक्ष्मी- काकी अब सब ठीक है. मई ये बताने आई थी की आप सब आज से hi आ जाना घर. आप लोग होंगे तो मुझे भी अच्छा लगेगा.

औरत- ठीक है बीटा. मई बोल देती हु सब को.

फिर लल्लू और लक्ष्मी वह से वापस घर आ गए.

घर आ क्र लल्लू अपना मोबाइल चालू क्र लिया. ये उसकी मज़बूरी थी. ककी यही नंबर वो अभी ैप ऑफिस मई दे क्र आया है ins.kiran को.

अभी मोबाइल चालू कर क दोनों बैठे hi थे की फ़ोन बज उठा.

लल्लू मोबाइल निकल क्र देखा तो सुनील काका का कॉल था.

लल्लू अब सोच मई पद गया. क्या करे कुछ समझ नहीं आ रहा था.

लक्ष्मी- किस का कॉल है. उठा क्यू नहीं रहे.

लल्लू- यार ये मेरे घर से मेरे काका का कॉल है. कैसे उठाऊ.

लक्ष्मी- क्यू क्या हुआ. क्यू नहीं उठा सकते.

लल्लू- यार मई घर से गुस्से मई भाग क्र आया था.

लक्ष्मी- क्या. आप घर से भाग क्र आये थे. सब कितना पदेशन होंगे.

आप जल्दी से फ़ोन उठाइये.

लल्लू- नहीं यार. मई कॉल नहीं उठा सकता. क्या कहूंगा.

लक्ष्मी तब तक लल्लू क हाथ से फ़ोन झपट क्र उठा ली.

लक्ष्मी- Hello…

सुनील- hello कौन बोल रहे है.

लक्ष्मी- आप को किन से बात करना है. कौन है आप.

लल्लू अपना सर पिट लिया.

इधर सुनील क पास घर क सभी आ क्र जमा हो गए.

सुनील- आप कौन बोल रही है. ये मेरे बेटे का मोबाइल नंबर है. ये आप क पास कहा से आ गया. मेरा बीटा कहा है.

लक्ष्मी- ओह्ह्ह, नमस्ते. Ma..mai aap…mai...aap.

सुनील- क्या बोल रही है. मई आप मई आप. कुछ समझ hi नहीं आ रहा है. साफ साफ बोलिये न.

लक्ष्मी- wo..wo..mai...mai..

सुनील अब कुछ बोलता तब तक बड़ी ममी सुनील काका क हाथ से मोबाइल छीन के रट हुए बोली.

B.mami- कौन बोल रही हो तुम. बोलती क्यू नहीं. मेरा बीटा कहा है. मेरा ललित कहा है. प्लस मुझे मेरे बेटे से बात करवा दो. मई जिंदगी भर तुम्हारी दासी बन क्र रहूंगी.

लक्ष्मी- माँ जी. वो यही है. लीजिये बात कीजिये.

लक्ष्मी बड़ी ममी का रोटा हुआ आवाज सुन क्र उसे अपनी माँ की याद आ गई. वो रोटी हुई मोबाइल लल्लू को पकड़ा दी.

लल्लू-( कम्पटी आवाज से.) B..a..di ma..m..i.

ममी- कहा है तू. बिना बताये कहा चला गया था. क्या तेरे इस माँ से कोई गलती हो गई. किस बात का सजा दे रहा है अपने माँ को.

लल्लू- माँ मई आप सब क प्यार क काबिल नहीं हु. इसी लिए मुँह छुपा क्र भाग आया.

बड़ी ममी- ऐसा क्या हो गया जो तुम ऐसे बोल रहा है. अगर तुम्हारे दिल मई अपने इस माँ क लिए जरा सा भी प्यार है तो साम तक यहाँ आ जा नहीं तो मई अपनी जान दे दूंगी.

लल्लू- माँ. प्लस ऐसा मत कहो. M..ma..mai वह नहीं आ सकता. Mai...mai आप क यहाँ आ जाता हु.

बड़ी ममी- ठीक है तू वही आ. हम भी अभी यहाँ से निकल रहे है.

लल्लू मोबाइल रख क्र सर पर हाथ रख क्र बैठ गया.

लक्ष्मी- अब ऐसे क्यू बैठे है. सुना नहीं माँ ने क्या कहा आप साम तक नहीं गए तो क्या होगा.

लल्लू- कुछ समझ नहीं आ रहा क्या करू. यहाँ भी अभी रहना जरुरी था. आईएनएस. किरण कभी भी पुलिस स्टेशन बुला सकती है. और वह अगर नहीं गया अब तो बड़ी ममी पदेशन होगी.

लक्ष्मी- मई क्या कहती हु. आप चले जाइये और मई यहाँ रहती हु.

लल्लू- पागलो वाली बात करती है. अब तुम्हे मई यहाँ तो किसी भी कीमत मई अकेला नहीं छोड़ सकता. तुम मेरे साथ चलोगी.

तभी वह पर जो लोग पहले यहाँ लक्ष्मी क घर काम करते थे वो सभी आ गए.

वो सभी कुल 5 लोग थे.

लक्ष्मी- आ गए आप लोग. हम आप का hi इत्तजर क्र रहे थे.

उन मई एक गेट कीपर, एक ड्राइव, एक लक्ष्मी क पापा क साथ उनका खेती बड़ी का काम देखता था और दो लेडीज घर क कामो मई लक्ष्मी क माँ का हेल्प करती थी.

लल्लू- देखिये अब लक्ष्मी जी का आप सब hi परिवार है. मुझे अभी अभी कही जरुरी काम से जाना पड़ेगा. मई साथ मई लक्ष्मी जी को भी ले जा रहा हु. इन्हे अब यहाँ नहीं छोड़ सकता मई. वैसे भी इनके चाचा और उसका लड़का सायद अभी तक पकड़ा जा चूका होगा.

आप सब से मेरा एक hi गुजारिश है.

आप सब जब तक हम न आये. यही रहिएगा. किसी से डरने की जरुरत नहीं है.

जैसे पहले आप सब यहाँ काम करते थे वैसे hi कीजियेगा. कोई आप सब को पदेशन करे तो तुरंत मुझे बता दीजियेगा. मई जहा भी रहूँगा आ जाऊंगा यहाँ.

अब आप सब बताइये. कुछ कहना है आप सब को.

एक आदमी- बाबू हम आप को पहचाने नहीं. आप कौन है.

लल्लू- लक्ष्मी की और देख क्र. ये तो अब लक्ष्मी जी hi बता सकती है की मई कौन हु.

लक्ष्मी- काका, माँ बापू क बाद चाचा मुझे भी मरना चाहते थे. मई यहाँ से भागने लगी की मुझे चाचा का वो अवदा लड़का पकड़ लिया था. बड़ी मुश्किल से उस से पीछा छुड़ा पाई. लेकिन वो मेरे पीछे hi लगा रहा. वो मेरे साथ कुछ गलत करना चाहता था तो मई एक ट्रक मई बैठ क्र यहाँ से दूसरे सहर पहुंच गई चुप क्र.

वह जब ट्रक से उतरा क्र रोड पर भटकने लगी तो वह भी लोगो की गिद्ध जैसी भूखी नजर मेरे जिस्म पर पद रहे थे.

मुझे कोई रास्ता नजर नहीं आया तो आत्महत्या करने की सोच क्र रोड पर एक गारी क आगे कूद गई.

भगवन तो मुझे बचाना चाहते थे तो उस गारी मई ये बैठे थे.

तब से मई इनके साथ hi हु.

कल hi हम महाकालेश्वर मंदिर पूजा करने गए थे.

वही गलती से हमारी सदी हो गई.

अब मैंने इन्हे hi अपना पति मान लिया है.

तो काका अब से ये आप सब क दामाद है.

काकी- बेतु तुम ने कितना कुछ सहा है. मेरा बचा.

काकी भी रो पड़ी लक्ष्मी की आपबीती सुन क्र.

लल्लू जेब से एक 500 क नोटों का गद्दी निकल क्र उनकी और बढ़ता हुआ बोलै.

लल्लू- इस पैसे से आप सब एक बार फिर से जैसे ये घर और इसका काम धंधा चलता था वैसे hi चलिए.

और पैसे लगे तो मुझे बता दे. मई और पैसे दे दूंगा.

दूसरा बाँदा जो लक्ष्मी क पिता क साथ था.

बीटा पैसे की कोई जरुरत नहीं है. हमारे बाबू जी क पास पैसे की कोई कमी नहीं थी. बस उस राक्षश ने उनकी बात को न समझ क्र कुछ और समझ लिया और ये जघन्य अपराध क्र दिया. ये पैसा आप रख लीजिये. हमारे पास अभी पैसे है. बांकी जब हमे पैसे की जरुरत होगा हम मांग लेंगे.

लल्लू- ठीक है काका. अब हमे आज्ञा दीजिये. मेरा मोबाइल नंबर ले लीजिये. मुझ से बात करते रहिएगा. अभी मुझे उस होटल जा क्र अपना सामान लेना है और फिर पुलिस स्टेशन जा क्र आईएनएस. किरण को भी बताना है की हम कुछ समय क लिए बहार जा रहे है.

फिर दोनों वह से निकल क्र होटल गए और वह से चेकआउट क्र किरण से मिलने पुलिस स्टेशन गए.

वह किरण को साडी बाटे बता क्र दोनों फिर अपने मां क यहाँ क लिए निकल गए.

इधर जैसे hi सब को लल्लू का पता चला एक खुसी की लहार दौर गई सब मई.

बड़े मां क साथ दोनों ममी तो तभी निकलने को तैयार हो गए. लेकिन लल्लू की साडी बहने भी तैयार थी जाने को. तीनो काकी का भी यही हाल था. लेकिन यहाँ आज मेहमान भी आने वाले थे.

फिर फैसला हुआ की ऋतू और रागिनी क साथ रोमा मीनू गौरी दोनों बुआ और उनके बचे यहाँ रहेंगे.

वह काजल, शालिनी, सोनम, कोमल ,रानी ये सब जाएंगे साथ मई मर्दो मई लल्लू क पापा जा रहे थे लेकिन सुनील राम क बदले खुद जाने का बोलै.

फिर सब दो गारी मई वह क लिए निकल लिए.

बड़ी ममी रस्ते मई फिर उसे कॉल की.

ममी- कहा पंहुचा. याद है न तुम्हे साम तक यहाँ आना है.

लल्लू- माँ मई आ रहा hu..mai अभी उज्जैन मई हु. थोड़ा वक्त दो मई वह से निकल चूका हु. बस आ रहा हु.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 44.

ममी- बीटा मई अब तेरे मुखड़े को देखे भीना नहीं रह सकती.

कब तक आएगा मेरा लाल.

लल्लू- आप का लाल पीला नीला सब आ रहा है. रस्ते मई है. बस थोड़ा सा इंतजार कीजिये. आ रहा हु मई.

बड़ी ममी- बीटा वो लड़की कौन थी जो पहले मोबाइल पर बात क्र रही थी.

लल्लू- आप खुद क्यू नहीं पूछ लेती उस से. मई उसे ले क्र भी आ रहा हु.

ममी- बहुत अच्छा. लेता आ. बीटा आराम से आना. हम सब भी रस्ते मई hi है.

आजा बीटा. अब रखती हु मई फ़ोन.

फिर लल्लू गारी चलता हुआ लक्ष्मी को देख क्र.

लल्लू- लक्ष्मी जी वह जा क्र क्या कही सब से.

लक्ष्मी- सब से पहले आप ये लक्ष्मी जी लक्ष्मी जी करना बंद कीजिये.

लल्लू- फिर क्या करू.

लक्ष्मी- कुछ नहीं.

लक्ष्मी मुँह फुला क्र बोली.

ऐसे hi दोनों मई नोक झोक हो रहा था. लल्लू एक जगह गारी रोक क्र खाना खाये दोनों फिर कार का टंकी फुल करवा क्र लल्लू फिर चल पड़ा.

साम से रात होने को आई लेकिन लल्लू नहीं आया.

दर क्र बड़ी ममी ने फिर कॉल लगाया.

ममी- बीटा अब तो रात हो गई. अभी तक तू नहीं आया है.

लल्लू- ममी बस पहुंचे वाला हु. थोड़ी देर मई पहुंच जाऊंगा.

रात 10 बजे लल्लू की कार मां क यहाँ पंहुचा.

गाड़ी की आवाज सुन क्र सब बहार को दौरे.

लल्लू डरता डरता गारी से बहार आ गया.

देखा तो बहार तो पूरा जमघट लगा हुआ था.

वह इतने लोगो को देख क्र लल्लू की हालत पतली हो गई.

लल्लू कहा सोचा था की यहाँ सिर्फ मां ममी hi होंगे लेकिन यहाँ तो काका काकी माँ और बहने सभी आये है.

लल्लू डरता हुआ गरिसे बहार आ क्र उनकी और बढ़ा.

तभी सोनम रोटी हुई दौड़ क्र आई और लल्लू को काश क्र एक थप्पड़ लगा दी.

लल्लू आह क्र क रह गया

सोनम फिर उसके गले लग क्र रोने लगी.

लल्लू सोनम को बहो मई लिए खड़ा उसे देख रहा था.

फिर बड़ी ममी भी आ गई.

वो भी लल्लू को पकड़ क्र बहो मई भर ली.

ममी- क्यू किया तुम ने ऐसा क्या तुम्हे ऐसा करते हुए हमारी थोड़ी भी फिक्र नहीं था.

हम कैसे जिए तुम्हारे बिना.

लल्लू बरी बरी सोनम और ममी को चुप करता आशु पोछता उन्हें बहला रहा था.

लेकिन लल्लू को सब से ज्यादा दर सुनील काका से लग रहा था.

उनको क्या कहेगा वो.

वो बिना जाने छोड़ेंगे नहीं उसे. काजल क साथ जो बात हुआ था वो लल्लू बता नहीं सकता था नहीं तो फिर काजल पर समेत आ जाती.

आखिर वो लल्लू की माँ थी. कोई बीटा अपने माँ को कैसे किसी क सामने सर्मिन्दा होने देता.

दोनों को गले लगाए लल्लू सुनील काका को hi देख रहा था और उधर सुनील काका आँखों मई आँशु लिए लल्लू को देख रहे थे.

फिर लल्लू आगे बढ़ क्र सुनील काका क पास जा क्र सर झुका क्र खड़ा हो गया.

सुनील काका मुँह घुमा क्र खड़े हो गए.

लल्लू फिर निचे बैठ क्र उनका पेअर पकड़ लिया

सुनील काका तरप क्र लल्लू को उठा क्र गले से लगा लिए.

सुनील- क्यू बीटा. क्यू किया तुम ने ऐसा. ऐसा क्या कशुर क्र दिया मैंने की तुम्हे ये सब करना पड़ा.

बिना बताये घर छोड़ क्र क्यू गया.

लल्लू- काका माफ़ क्र दीजिये. आगे से ऐसी गलती नहीं करूँगा.

सुनील- पहले मुझे जानना है की तू ये किया क्यू.

लल्लू- काका आप सब को मेरा कसम है. ये आप सब फिर कभी मेरे से मत पूछियेगा. मई नहीं बता पाउँगा. बस मई वडा करता हु की आगे से कभी भी आप सब क साथ ऐसा नहीं करूँगा.

बड़े मां- ऐसा क्या बात है बीटा. जो तू बताना नहीं चाहता है.

लल्लू- मां कुछ चीजे जान क्र दिल को बहुत चोट पहुँचता है. तो इस लिए ऐसे चीज न जानना hi बेहतर रहता है. नहीं तो आदमी साडी जिंदगी उस चोट क दर्द को झेलता रहता है.

मां- चल ठीक है नहीं बताना तो मत bta.lekin वडा क्र आगे से कभी ऐसा काम नहीं करेगा.

लल्लू- प्रॉमिस. सब से वडा करता हु. आगे से ऐसा नहीं करूँगा.

छोटी ममी- आ अंदर आ.

फिर सब अंदर आ गए. तभी लल्लू को लक्ष्मी की याद आई.

वो उठ क्र बहार आने लगा…

ममी- कहा जा रहा है अब.

लल्लू- ममी इधर आये सब. आप को किसी से मिलवाना है.

फिर लल्लू सब क साथ बहार आया.

बहार लक्ष्मी कार क पास hi अभी भी कड़ी रो रही थी….

लल्लू- sorry..in लोगो क साथ बात करता हुआ मई अंदर चला गया. मई समझा आप भी आ रही है पीछे.

बड़ी ममी- बीटा ये बच्ची कौन है.

लल्लू- कहानी लम्बी है ममी. जो बाद मई बताऊंगा अभी तो बस इतना समझ लीजिये की ये आप की बहु है.

सब एक साथ- क्या….

लल्लू- है. परसो रात मेरे पर बहुत भरी था. उस एक रात ने बहुत कुछ बदल दिया. और मेरे जिंदगी मई अचानक से इनको भी भेज दिया. कैसे ये बाद मई. अभी आप सब इनके बारे मई क्या फैसला सुनते है ये बता दीजिये.

सुनील- बीटा तू तो बड़ा तेज निकला. तेरे बड़े भाई की सदी का आज सगुन था और उस से भी पहले तू ने हमारे लिए बहु ले आया. वह क्या बात है.

मां बड़ी ममी से- मुँह क्या देख रही हो जल्दी से आरती की थाली ले क्र आओ.

बड़ी ममी छोटी ममी क साथ अंडर को दौरि.

इधर लक्ष्मी सर झुकाये कड़ी थी.

शालिनी और काजल लक्ष्मी क पास जा क्र उसे प्यार की.

लक्ष्मी झुक क्र उन सभी का आसीर्बाद लिया.

तब तक बड़ी ममी आरती की थल ले आई.

फिर लक्ष्मी का आरती उतर क्र अंदर ले गए सब.

फिर सब अंडर ड्राइंग रूम मई जा क्र बैठ गए

सुनील- अब बता सुरु से अब तक का सारा कुछ.

फिर लल्लू काजल का मामला गोल क्र बांकी सब कुछ इन लोगो को बता दिया.

लक्ष्मी क बारे मई सुन क्र सब को बड़ा दुःख हुआ.

बड़े मां- बेटी आज से मई तुम्हारा पिता हु. तुम मुझे अभी से पिता जी कहना सुरु क्र दे.

b.mami- और बीटा, मई तुम्हारी माँ हु. जैसे इस पगले का हु. वैसे hi. इनको पिता जी कहना और मुझे माँ.

छोटी ममी- और मई तुम्हारी छोटी माँ हु.

छोटे मां- अरे सब मुझे मत भूल जाओ. बीटा मई तुम्हारा छोटे पिता जी.

लक्ष्मी तो ख़ुशी से रोने hi लगी.

फिर दोनों ममी आगे आ क्र उसे गले से लगा क्र चुप कराया.

सुनील- लो बीटा तुम्हारे एक माँ पापा बिचार गए और दो माँ पापा मिल गए.

मई तो फिर तुम्हारा ससुर hi ठीक हु. ये दो तुम्हारी सैश है बांकी तुम्हारे तीन और ससुर और दो सैश गौण मई है.

ये सब तुम्हारी ननद है.

सब अपना अपना नाम बताओ. अपना परिचय दो लक्ष्मी बीटा को.

फिर क्या था सब बहने लग गई चपर चपर करने मई एक साथ.

B.Mama- अरे एक एक क्र क बताओ. इक्कठा सब बोलोगे तो मेरे बेटी को कुछ समझ hi नहीं आएगा.

b.mama- अरे अब कोई खाना खिला दो. तीन दिन से सही से किसी ने खाना भी नहीं खाया है.

फिर सब जल्दी से खाना लगा दिया.

दिंनिंग टेबल पर बैठ क्र पहले गेट्स लोग खाये खाना और फिर लेडीज.

खाना हो जाने क बाद सब फिर थके हुए थे. इन तीन दिनों से तो कोई ढंग से सोया भी नहीं था तो सब ने फैसला किया की अब सो जाते है आज बांकी बाटे कल सुबह होगी.

लक्ष्मी की बड़ी ममी अपने साथ सोने ले गई.

लल्लू उल्लू की तरह मुँह देखता रह गया.

थोड़ी देर बहार टहल क्र लल्लू अपने कमरे मई आया तो वह काजल बीएड पर बैठी हुई थी.

लल्लू काजल को देख क्र गेट पर hi रुक गया.

फिर लल्लू गेट लगा क्र आया और अपना रात को पहन क्र सोने का कपडा ले क्र बाथरूम चला गया.

वह से आ क्र लल्लू बीएड पर बैठ गया.

लल्लू- क्या बात है कुछ कहना है आप को माँ.

बस लल्लू क इतना बोलते hi काजल फुट फुट क्र रोने लगी.

लल्लू काजल को बहो मई ले क्र चुप करने लगा.

काजल चुप hi नहीं हो रही थी.

लल्लू काफी देर तक उसे समझाया की उसके दिल मई कोई बात नहीं है. उस रात गुस्सा आ गया था तो चला गया. अब गुस्सा ख़त्म हो गया तो आ गया.

लेकिन काजल चुप hi नहीं हो रही थी.

लल्लू क साइन क पास कुरता को पकड़ क्र उसके साइन से लगी हुई रो रही थी.

लल्लू जब चुप करते करते थक गया और काजल चुप नहीं हुई तो लल्लू आराम से काजल को अपने साथ बीएड पर सुला लिया और उसके आँखों से बहते आंशुओ को चाट क्र पि गया. दो चार बार करने से काजल का रोना काम हो गया लेकिन अभी भी वो सिसक क्र रो रही थी.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 45.

काजल का रोना जब बंद नहीं हुआ तो लल्लू आहिस्ता से काजल क उप्पेर झुकता चला गया.

वो काजल क होठो को अपने होठों से दबा क्र उसे चूसने लगा.

थोड़ी देर काजल क होठो को चूसने क बाद लल्लू अपना सर उठा लिया.

तभी माँ ने लल्लू क सर को पीछे से पकड़ क्र उसके होठो पर अपने होठ रख दिए.

अब काजल लल्लू क होठो को मुँह मई ले क्र चूसने लगी. वो लल्लू क बालो मई ऊँगली चलती हुई बड़े प्यार से लल्लू क होठो को निचोड़ रही थी.

लल्लू काजल का पूरा साथ देता हुआ आहिस्ता से अपना एक हाथ काजल क मोठे मोठे गुब्बारे पर ले गया और ब्लाउज क उप्पेर से hi उसे पकड़ क्र सहलाने लगा.

फिर काजल आहिस्ता से अपने हाथ को लल्लू क सर को हटा क्र अपने हाथ से ब्लाउज खोल दी फिर उठ क्र ब्रा का हुक खोल क्र उसे भी अपने बदन से अलग क्र दी.

अब काजल क बड़े बड़े चुके हवा मई खुल रहे थे.

काजल अपने हाथ से लल्लू क सर को पकड़ क्र दूसरे हाथ से अपने एक चुके को लल्लू क होठो से लगा दी.

लल्लू बड़े प्यार से काजल क दूध को चूसने लगा. लल्लू क मुँह मई मीठा मीठा दूध घुलता चला गया.

एक को खली क्र लल्लू फिर दूसरे को अपने मुँह मई ले लिया.

बरी बरी दोनों चुके खली करने क बाद लल्लू एक बार फिर से काजल क होठो पर टूट पड़ा.

काजल अपने दोनों पैरो को रगड़ती लल्लू क साइन को अपने हाथ से सहलाती उसका भरपूर जवाब दे रही थी.

फिर काजल आहिस्ता से अपना हाथ निचे ले जा क्र लल्लू क पजामा क उप्पेर से hi लल्लू क सर उठा चुके लौड़े को अपने मुठी मई पकड़ क्र उसे मुठियाने लगी.

लल्लू को बहुत मजा आ रहा था. वो पिछली साडी बाटे भूल गया.

लल्लू कभी काजल क गलो को काट रहा था तो कभी काजल क गोल गोल दूध को मसल रहा था.

अब काजल से रुकना मुश्किल हो रहा था वो उठ क्र बीएड से उतर गई.

लल्लू उसे प्रश्नवाचक दृस्टि से देखने लगा.

काजल लल्लू क आँखों मई देखती हुई मुस्कदाति अपने साडी और पेटीकोट खोल क्र अलग रख दी.

अब काजल उप्पेर से निचे तक पूरी नंगी थी.

काजल क छूट पर अभी हलके हलके बाल था.

काजल आ क्र बीएड पर लेट गई.

लल्लू आगे बढ़ क्र अपना कुरता पजामा जल्दी से खोल क्र चड्डी भी निकल दिया और कूद क्र काजल क छूट को अपने मुँह मई भर क्र चूसने लगा.

काजल तड़पती हुई आहे भरने लगी.

काजल- बाबू, ऐसे hi बाबू. बहुत अच्छा. ऐसे करता रह. आह माँ. बहुत ाचा बीटा. मेरे लाल. अपने इस माँ को माफ़ क्र दे. ऐसे hi..aahh काट मत न. दर्द करता है.

लल्लू अपना जीभ निकल क्र काजल क गद्दे दर छूट क उप्पेर से निचे तक सस्सररप्प सस्सररप्प क्र क चाटने लगा.

काजल मजे से हवा मई उरने लगी.

लल्लू अपने जीभ को नोकीला बना क्र काजल क छूट मई घुसा दिया.

काजल मजे से अपने कमर को हवा मई उठा ली फिर धरम से बीएड पर गिरती हुई झरने लगी.

लल्लू काजल क छूट से मुँह लगाए उसका सारा रास चाट क्र गया.

काजल आँखे बंद किये अपने इस सुख को महसूस क्र रही थी.

लल्लू एक बार फिर से काजल क बूबड़ी को अपने हटो से पकड़ क्र निचोर्ने लगा. काजल क होठो को अपने होठो से आहिस्ता से छूटा फिर हटा लेता. फिर छूटा और हटा लेता.

और दोनों हाथो से बड़े बड़े फुल्ले हुए चुके को मिष्टा मसलता भी जा रहा था. काजल क दोनों बूब्स लाल हो गए थे. इसके चुचुक दोनों जैसे लग रहा था की लाल रंग से रंग दिया हो.

काजल भी अब सम्भल गई थी और एक बार फिर से आहे भर रही थी.

फिर काजल लल्लू को पलट क्र उसके उप्पेर आ गई और उसके टैंगो क तरफ आ क्र लौड़े को मुट्ठी मई पकड़ क्र उसे मसलते हुए टोपे पर चुम्मी ले ली.

काजल कभी लल्लू क लौड़े को जीभ निकल के उसके टोपे पर जीभ फिर देती तो कभी उसे चुम्मी ले लेती. निचे जार से उसे मुट्ठी मई पकडे हिलती भी जा रही थी.

लल्लू आँखे बंद किये आनंद और मजे से हवा मई उड़द रहा था.

फिर काजल पूरा मुँह खोल क्र लल्लू क लौड़े को अपने मुँह मई भर क्र चुप्पा लगाने लगी.

लल्लू भी अभी काफी दिन से इस सुख को पता नहीं था.

लल्लू काजल क सर को पकड़ क्र उसे अपने लौड़े पर दबाता निचे से कमर उछाले जा रहा था.

फिर लल्लू काजल क कमर को पकड़ क्र उसे अपने मुँह पर बैठा लिया और निचे से अपना जीभ निकल क्र उसके तपते रसभरी छूट मई जीभ घुसा दिया.

काजल चिहुँक उठी लल्लू क लपलपाते जीभ को अपने छूट मई महसूस क्र क.

काजल लल्लू क मुँह पर अपना छूट रगड़ती हुई लल्लू क लौड़े को अपने कंठ तक गहराई मई उतर क्र फिर उसके टोपे को चुभलाने लगती.

लल्लू हवा मई ुर्र रहा था. इतना मजा उसे कभी नहीं आया था. वैसे भी उसे काजल क साथ एक अलग मजा आता था.

लल्लू काजल क इस रसभरी क होठो को दांतो से हलके से पकड़ क्र उसे हौले हौले काटने लगता कभी तो कभी उसे पकड़ क्र खींच लेता.

तो इसके जबाब मई काजल लल्लू क लौड़े को अपने दन्त से पकड़ कर उसे हलके से काट लेती.

दोनों एक दूसरे को हर तरह से मजा, असीम आनंद देने की कोसिस कर रहे थे.

फिर लल्लू काजल क गांड क छोटे से दंड छेद को अपने जीभ से कुरेदने लगा.

काजल को बहुत मजा आ रहा था. काजल अब जोर जोर से चुप्पे लगाने लगी और अपने हाथ से हिलती भी का रही थी.

लल्लू अब अपने चरम सुख क करीब hi था.

वो काजल क गांड से मुँह निकल क्र गुर्राते हुए उसके छूट को मुँह मई भर क्र काटता हुआ काजल क मुँह मई hi अपना पिचकारी मरने लगा.

इधर काजल भी लल्लू क मुँह पर अपना गांड घिसती हुई उसके पुरे चेहरे को अपने कामराश से भिंगो दी.

दोनों एक दूसरे को अपने बहो में भरे हुए लुढ़क गए.

थोड़ी देर ससे दुरुस्त करने क बाद लल्लू काजल क निचे से निकला और उसके पैरो क पास आ क्र काजल क छूट को फिर से चाटने लगा.

जब एक बार फिर लल्लू का डंडा तैयार हो गया तो लल्लू उसे काजल क बुर रानी क मुँह पर लगा क्र वह घिसने लगा.

काजल अपने होठो को दन्त से कटती लल्लू क हरकतों का आनंद ले रही थी.

लल्लू घिसते घिसते अपने डंडे को बुर क मुँह पर लगा क्र जोर का धक्का लगा दिया.

लल्लू का लौड़ा फिसलता हुआ काजल क गर्म गुफा मई जार तक जा घुसा.

दोनों क मुँह से एक आह निकल गया.

फिर लल्लू काजल क हिलते चुके को दोनों हाथो मई थम क्र हचा हाच काजल की गर्म गुफा मई अपना डंडा पेलता गया.

कुछ देर बाद लल्लू काजल को पलट क्र घोड़ी बना दिया और उसके छूट मई अपना मुँह घुसा क्र उसे चाटने लगा थोड़ी देर चाटने क बाद लल्लू अपना लौड़ा को पकड़ क्र डंडे की तरह काजल की छूट पर पटकने लगा.

काजल इस मीठे दर्द का मजा लेते हुए आंख बंद किये दोनों हाथो से चादर को को पकडे हुए थी.

थोड़ी देर ऐसे hi खेलने क बाद लल्लू पीछे से काजल क कोमल माखन गांड को पकड़ क्र पेल दिया लौड़ा.

लल्लू काजल क गांड को काश काश क्र मसलता हुआ जोर जोर से पेले जा रहा था. काजल आहे भरे हुए जहर गई.

काजल क झरने से उसके छूट से मधुर आवाज निकल रही थी. Fuch...fuch... ghach...ghach..

लल्लू non-stop काजल को हुमच हुमच क्र चोदे जा रहा था जिस से काजल बार बार आगे तकिये पर गिरने लगती.

लल्लू तो आसमान मई सैर क्र रहा था.

लल्लू को लग रहा था जैसे लल्लू ऐसे hi काजल पर जिंदगी भर चढ़ा पेलता रहे.

लल्लू काजल की गोरी चौड़ी गांड को देख देख क्र और उत्तेजित हो रहा था.

लल्लू एक ऊँगली को गिला क्र काजल क गांड क भूरे छेद मई लगा क्र कुरेदने लगा.

काजल को बहुत मजा आ रहा था. मजे से वो कराहने लगी.

लल्लू फिर से ऊँगली गिला क्या और काजल क गांड क छेद मई घुसा दिया.

काजल दर्द से चिहुँक उठी.

काजल की कमर तन गया.

लल्लू धक्के लगते हुए उस ऊँगली को अंडर बहार करने लगा.

अब काजल को बहुत मजा आ रहा था वो अपना गांड पीछे धकेल धकेल क्र लल्लू का पूरा साथ दे रही थी.

लल्लू को काजल क गांड का थिरकना बहुत मजा दे रहा था.

अब दोनों अपने मंजिल क काफी करीब लग रहे थे.

दोनों अपनी और से पूरा जोर लगा रहे थे की ये खेल कभी ख़त्म न हो लेकिन ये प्रक्रि का नियम है की जो सुरु हुआ है उसका कोई एन्ड भी होता है.

दोनों पसीने से भींगे हुए पूरी दुनिया से बेखबर थे.

लल्लू क मुँह से अब उत्तेजना से अजीब अजीब आवाजे निकल रहा था.

वो काजल क गांड को दबोचे उसके अंदर खली हो गया.

काजल अपने अंडर लल्लू क लावे को फील क्र वो भी अपना लावा उगल दी.

लल्लू काजल क उप्पेर hi ढेर हो गया. काजल भी वैसे hi लेट गई.

सुबह किसी क दरवाजा खटकने से दोनों का नींद खुला.

लल्लू देखा तो अभी भी उसका डंडा काजल क बुर मई घुसा हुआ खड़ा है.

काजल जैसे hi आगे को हुई उठाने को की पुक्क की मधुर आवाज आया.

काजल जल्दी से कड़ी हो क्र अपने कपडे को समेत क्र वाशरूम भाग गई.

लल्लू भी खड़ा हुआ और अपना कपडा पहन क्र दरवाजा खोलने चला गया.

दरवाजे पर छोटी ममी कड़ी थी.

C.mami- क्या बात है सुहागरात मन रहा था क्या.

लल्लू सरमाता हुआ- आप की बेटी तो अपने बड़ी माँ क पास सो गई थी.

C.mami- है वो मुझे पता है लेकिन मई समझा दोनों माँ बेटे अभी तक सो रहे है तो हो सकता है की साडी रात कब्बडी खेली हो बीएड पर.

लल्लू- मामीई… आप ये क्यू नहीं कहती की मां क साथ आज आप कब्बडी खेली हो.

काजल- कौन कब्बडी खेला है.

पीछे से फ्रेश हो क्र आती काजल दोनों को देख क्र बोली.

लल्लू- ममी बोल रही है की वो खत कब्बडी खेलने मई चैंपियन है.

लल्लू क मुँह से खत कब्बडी नाम सुन क्र काजल और ममी दोनों शर्मा गई.

ममी- बहुत बदमाश हो गया है तू. चल जल्दी से फ्रेश हो क्र निचे आ जा.

फिर ममी काजल क साथ निचे चली गई.

लल्लू रूम मई आ क्र वाशरूम चला गया.

वह से फ्रेश हो क्र निचे ड्राइंग रूम मई पंहुचा.

वह पर घर क सभी बैठे हुए थे.

लक्ष्मी बड़ी ममी क साथ बैठी थी.

लल्लू को देख क्र वो किचन मई चली गई.

लल्लू आ क्र एक सोफे पर बैठ गया.

सुनील- बीटा कल राघव का सगुन था. हम सब तो यहाँ आ गए. खैर जैसे तैसे वो तो निपट गया. अब आगे क्या करने का सोचा है तुम ने.

लल्लू- है काका राघव भैया भी मेरे बारे मई पता नहीं क्या क्या सोच रहे होंगे.

मेरे कुछ समझ नहीं आ रहा. आप सब यहाँ है और कल hi सदी है. मई तो कहता हु की जल्दी से नास्ता क्र क सब गौण hi चलते है. वह मुझे सब से माफ़ी भी मांगनी है.

उस से पहले मई यहाँ जितने भी लोग है.

मेरे माता पिता सामान दोनों ममी और मां. मेरी माँ काकी और काका.

मेरी सभी प्यारी बहन, मई आप सब का गुनहगार हु.

जैसे आप सब पहले मुझे बचा नादाँ पागल समझ क्र माफ़ क्र देते थे अभी भी माफ़ क्र दीजिये.

मई आगे से फिर कभी भी ऐसा काम नहीं करूँगा.

सुनील- पगलू हम सब ने तुम्हे पहले hi माफ़ क्र दिया है. अब वो साडी बाटे छोड़.

छोटे मां- है सही बात है. बीती बातो पर मिटटी बालो और अब आगे क्या सोचा है ये बताओ.

लल्लू- मां आप एक बार लक्ष्मी क गौण जा क्र उसका कोई ब्यापार है क्या है देख लीजियेगा. मुझे तो इतना समय hi नहीं मिला वो सब देखने का. और ैप क ऑफिस जा क्र वह किरण नाम की इंस्पेक्टर है उस से लक्ष्मी क चाचा और उसके बेटे क बारे मई भी पता क्र लीजियेगा. वो पकडे गए या नहीं.

शालिनी काकी- वह बीटा. अभी से इतनी चिंता अपने बीबी और उसके घर परिवार की.

तभी लक्ष्मी लल्लू क लिए चाय ले क्र आ गई और लल्लू क आगे बढ़ा दी.

तभी मीनू आगे बढ़ क्र वो चाय उठा ली.

मीनू- ये तो गलत बात है. बीबी अपने मिया क लिए चाय बना क्र लती है. यहाँ इतने लोग बैठे है सब क लिए लाना था. या फिर किसी क लिए नहीं लती.

कोमल- सही बात है. यहाँ मां ममी है माँ काका काकी और हम बहने है. हम लोगो को एक गिलास पानी भी नहीं और अपने पति को आते hi चाय.

लक्ष्मी कड़ी कड़ी रोने लगी.

लक्ष्मी को रोटा देख क्र माँ और बड़ी ममी सब को डट क्र चुप कराइ.

ममी- कोई मेरे बेटी को कुछ नहीं कहेगा. तुम सब तो अभी अभी चाय ख़त्म की हो पि क्र. मेरा बीटा अभी यहाँ आया hi है और उसे मेरेबेटी ने चाय ला क्र दे दी तो क्या हो गया.

अब मेरी बेटी को तुम लोग तंग करना बंद करो.

ममी- जा बीटा सब क लिए एक बार और म्हणत क्र ले. नहीं तो ये सब तंग करना बंद नहीं करेंगे. और है इन सब क बातो का बुरा नहीं मानते. ये सब तुम्हारी ननद और दोस्त दोनों है.

लक्ष्मी किचन जा क्र फिर से चाय बना क्र ले आई.

तब तक मीनू वो चाय लल्लू को पकड़ा दी.

सुनील- तो कब चलना है.

बड़े मां- यहाँ से नास्ता क्र क निकलते है.

सब बैठे बात क्र रहे थे तब तक लल्लू चाय पि लिया और वह से बाग़ मई आ गया.

इधर लक्ष्मी सब को फिर से चाय बना क्र दे दी.

लल्लू क जाने क बाद सोनम भी चुपके से वह से निकल क्र लल्लू को ढूंढते हुए बाग़ आ गई.

लल्लू बाग़ मई एक जगह घास पर बैठ क्र ध्यान लगा रखा था.

उसके चारो और अभी येल्लो लाइट्स फैले हुए थे.

अभी लल्लू येल्लो दरवाजे को खोलने की कोसिस क्र रहा था.

सोनम को ध्यान मई बैठा देख क्र उसके सामने आ क्र बैठ गई. वो बैठ क्र लल्लू क धयान से बहार आने का इंतजार करने लगी.

लल्लू क चारो और तो येल्लो प्रकाश था और सोनम जैसे जैसे लल्लू क चेहरे को देख रही थी प्यार से वैसे वैसे वो येल्लो प्रकाश सोनम को भी अपने घेरे मई ले रहा था.

लल्लू येल्लो दरवाजे को खोल क्र उस मई प्रवेश क्र गया. और लल्लू क साथ सोनम भी.

सोनम भी खुद को लल्लू क साथ hi उस येल्लो कलर क बदलो मई तैरती पाई.

लल्लू दरवाजे को जैसे hi खोला दोनों खींचे उस मई चले गए.

अंदर पूरा वातावरण येल्लो येल्लो हो रखा था.

लल्लू अभी तक सोनम को नहीं देखा था.

लल्लू वह चारो और घूमता हुआ जैसे hi पीछे घुमा तो वह सोनम को देख क्र चौक गया.

लल्लू- दी आप यहाँ.

सोनम- है क्यू, यहाँ भी मेरा आना मन है.

लल्लू- क्या मतलब यहाँ भी.

सोनम- तुम ने ऐसा क्यू किया.

लल्लू- दी वो एक एक्सीडेंट था.

सोनम- अच्छा ऐसा एक्सीडेंट तो तू चाहेगा की डेली हो. है न.

लल्लू- ऐसा कुछ नहीं है दी.

सोनम- मुँह तोर दूंगी अगर अब एक बार भी मुझे अब दी कहा तो.

लल्लू- तो फिर क्या कहु.

सोनम- मुझे क्या पता. जाओ जा क्र अपने लक्ष्मी जी को बोलो जो बोलना है.

लल्लू- ओह्ह मेरी प्यारी सोनू दी…

सोनम- फिर दी… अब एक बार भी दी बोलै तो तेरा सर फॉर दूंगी.

लल्लू- अच्छा अब मई आप को सोनू कहूंगा. लेकिन घर वालो क सामने तो दी hi कहना पड़ेगा न.

सोनम- मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी.

लल्लू- सोनू आप मेरे से रूत जाओगे तो फिर मेरी जिंदगी का कोई किनारा hi नहीं होगा. Mai...mai..kaise जियूँगा आप क बिना.

( क्या कहु. कैसे मनौ सोनम दी को फैला कुछ समझ hi नहीं आ रहा. काफी गुस्से मई लगती है.)

सोनम- क्यू जा अपने लक्ष्मी जी क पास. वो है न उसके साथ मजे क्र.

लल्लू आगे बढ़ क्र सोनम को गले से लगा लिया

दोनों गले लगे उस येल्लो वातावरण मई घूमते हुए ग्रीन कलर क द्वार पर पहुंच गए.

वह अब सब कुछ येल्लो से ग्रीन हो रहा था.

लल्लू और सोनम दोनों क रूह एक दूसरे मई समाये हुए hi ग्रीन गेट से टकराये.

टकराने से वो द्वार खुल गया और दोनों ऐसे hi एक दूसरे क प्यार को महसूस करते ग्रीन वातावरण मई तैरने लगे.

यहाँ बाग़ मई सोनम बैठी हुई आँखे बंद किये लल्लू को अपने बहो मई महसूस क्र बहुत खुस थी. सोनम क दिल को बहुत सुकून मिल रहा था.

अभी दोनों क बॉडी क चारो और ग्रीन आभा फुट रहा था.

तभी मीनू दोनों को ढूंढती हुई वह आ गई.

वो काफी देर से दोनों को धुंध रही थी.

रानी आवाज लगाती हुई जैसे hi बाग़ क पास आई दोनों का ध्यान टूट गया और दोनों एक दूसरे को देख क्र मुसकुडने लगे.

तब तक मीनू भी वह आ गई.

मीनू- आप दोनों यहाँ हो. मई कब से आप दोनों को धुंध रही हु. बता क्र तो आना चाहिए. थका दिया आप लोगो ने. अब चलो जल्दी सब इंतजार क्र रहे है.

दोनों तो बस एक दूसरे को देख क्र मुसकुडते hi जा रहे थे.

फिर तीनो वह से घर आ गए.

सब वही ड्राइंग रूम मई hi बैठे थे. सब तैयार थे. बस इनदोनो का hi इंतजार हो रहा था.

लल्लू और सोनम अपने कमरे मई जा क्र फ्रेश हो गए और फिर आ क्र सब क साथ दिंनिंग टेबल पर बैठ गए.

सब एक साथ नास्ता करने लगे.

सामान तो कोई ले क्र आया नहीं था. सब जल्दी से गौण से आये थे.

सब जैसे आये थे वैसे hi गरियो मई चल दिए.

बस लक्ष्मी अभी ममी क साथ थी और सोनम कोमल और रानी तीनो लल्लू क साथ.

सब रुकते हुए साम तक घर पहुंच गए.

लल्लू क आने का सुन क्र सब बहार आ क्र घेर क्र खड़े हो गए सब.

सुनील सब को लक्ष्मी क बारे मई पहले hi बता दिया था.

ऋतू आरती की थाल ले क्र लक्ष्मी की आरती उतरी और फिर घर क भगवन क आगे पूजा करवा क्र उसे लल्लू क कमरे मई ले जा क्र बैठा दी.

आज लल्लू क कमरे को अच्छी तरह से फुल्लो से सजा दिया गया था.

लक्ष्मी कमरे को देख क्र चौक गई.

इस दिन का hi इंतजार तो लक्ष्मी क्र रही थी. वो वैसे तो लल्लू की पत्नी बन गई. लल्लू भी उसे स्वीकार लिया था लेकिन ये छान इस पल का इंतजार तो सभी लड़की करती है.

आज उसके माँ बापू जिन्दा होते तो कितना खुश होते.

लक्ष्मी की आँखे नाम हो गई.

फिर वो अपने आँख को साफ क्र बैठ गई.

तभी वह रोमा गौरी रानी आ गई.

रोमा- देखो देखो अपना भाई इनके लिए hi भगा था. हमे पहले बता देता की भैया से पहले मुझे सदी करनी है तो हम चाचा से बात क्र उसकी सदी hi पहले करवा देते.

रानी- वैसे रोमा भाभी तो बहुत सुन्दर है.

गौरी- भाभी सुन्दर है तभी तो भाई लट्टू हो गए.

ऐसा क्या जादू चलाया भाभी मेरे भोले भाई पर.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 46.

तभी वह सोनम कोमल मीनू भी आ गई.

लक्ष्मी- मन mai..ye सब क्या काम थी जो और तीन आ गई.

सोनम- क्या हो रहा है यहाँ.

गौरी- हम सब भाभी से पूछ रहे है की आप इतनी सुन्दर कैसे है. कौन सा पाउडर लगाती है.

लक्ष्मी- मन मई… ये तो सैतान की नानी है. देखो कैसे बाटे बना रही है.

कोमल- तुम सब भाभी को तंग मत करो. चलो सब यहाँ से बहार चलो.

रोमा- देख भाई की चमची आ गई. अब हम सब भाभी क पास नहीं रह सकते.

रानी- वैसे हमे जानना था की भाभी और भाई की मुलाकात कैसे हुई.

सोनम- कल ये सब भाभी से पूछ लेना. अभी सब बहार चलो.

गौरी- कल कहा टाइम मिलेगा. कल तो भैया की सदी है. सब उस मई बिजी रहेंगे.

रागिनी- तुम सब यहाँ हो. बहार कब से हम तुम सब को धुंध रहे है. चलो सब यहाँ से. बहार बहुत काम पड़ा है.

ऋतू- ऋतू कमरे मई आती हुई.

यहाँ क्या चल रहा है. बहु को सब तंग कर रही होगी न. अरे बहार इतना काम पड़ा है और तुम सब यहाँ मीटिंग क्र रहे हो. बहु को भी बहार hi ले चलो.

रागिनी- लेकिन दीदी अभी बहार क भी बहुत लोग आये है. वह अभी नयी बहु को ले जाना सही रहेगा.

ऋतू- अरे है ये बात भी है. लेकिन क्या कृ देख न इन चुड़ैलों को इतना काम पड़ा है और सब यहाँ मीटिंग क्र रहे है.

ऋतू और रागिनी सभी बहनो को ले क्र वह से बहार चली गई.

लक्ष्मी चैन की सैश ली.

इधर राघव लल्लू को पकडे हुए था.

राघव- क्या बात है. मेरे से पहले तुम्हे सदी करना था तो मुझे बता देता. इसके लिए इतना ड्रामा करने की क्या जरुरत था.

लल्लू- भाई आप क्या बोल रहे हो. लक्ष्मी से सदी एक हादसे की तरह हुआ था. मई तो उसे इस से पहले कभी मिला भी नहीं था. मिलता भी कैसे. मई घर से निकला hi पहली बार था.

राघव- क्या बात है. पहली बार घर से निकला तो एक दुल्हन ले क्र आया है. तू भाई बहार मत निकलना. पता नहीं आगे क्या करे.

लल्लू हुस्ने लगा.

यु hi सब जगह हसी मजाक चल रहा था.

इधर राघव क सदी की तयारी भी चल रहा था.

खाना पीना हो जाने क बाद सब अपने कमरे मई सोने चले गए.

लल्लू अपने कमरे मई आया तो वह कमरे को देख क्र हैरान रह गया.

सब तरफ फूलो से सजाया गया था. बीएड क बिच मई फूल क पत्तियों से एक दिल बना हुआ था.

वही लक्ष्मी बिलकुल रेड कलर क दुल्हन वाली लिबाश मई एक हाथ का घूँघट किये बैठी थी.

देख क्र hi लल्लू की धरकने बढ़ गई.

लल्लू गेट बंद क्र दिया.

धीरे से चलता हुआ बीएड क पास आया.

लल्लू की धड़कन बढ़ गया था लक्ष्मी को इस तरह सजा हुआ दुल्हन क रूप मई सुहाग सेज पर बैठा देख क्र.

लल्लू एक गहरी सास ले क्र आगे बढ़ बीएड पर जा क्र लक्ष्मी क सामने बैठ गया.

लल्लू को समझ नहीं आ रहा था की वो अब आगे क्या करे.

कोई दोस्त नहीं था लल्लू का. कभी इन सब विषय मई किसी से बात भी नहीं किया था.

न कोई भाभी थी न कोई ऐसा रिलेशन्स जो उसे बताता की ऐसे समय क्या होता है.

फिर लल्लू कुछ सोच क्र अपने कपट हाथो से लक्ष्मी क घूँघट को पकड़ लिया और उसे उठा क्र लक्ष्मी क सर क उप्पेर रख दिया.

लक्ष्मी लाज से सिकुड़ी हुई अपना गर्दन झुका क्र बैठी रही.

लक्ष्मी का बदन हलके हलके मरे रोमांच से कम्प रहा था. उसके सरीर क सरे रोये खड़े हो गए थे.

धड़कन तो मनो सौ गुनी रफ़्तार से चल रहा था.

लल्लू को समझ नहीं आ रहा था की वो आगे क्या करे.

इधर लक्ष्मी इंतजार क्र रही थी लल्लू क अगले कदम का.

लल्लू तो लक्ष्मी क इस मोहिनी रूप क जादू मई मदहोश हुआ पड़ा था.

वो फिर एक बार कंपते हाथो को लक्ष्मी क चेहरे की और बढ़ाया.

चेहरे क पास ला क्र लक्ष्मी क चढ़ी को पकड़ क्र उसके चेहरे को उप्पेर उठा दिया.

लक्ष्मी का मोहक रूप उसका ये चेहरा देख क्र लल्लू पलके झपकना भूल गया.

लल्लू मन मई सोचने लगा की क्या कोई इतना भी खूबसूरत हो सकता है. उसने तो कभी गौर hi नहीं किया था की लक्ष्मी इतनी सुन्दर है.

ये तो सुंदरता की पराकाष्ठा है.

पता नहीं सब ने मिल क्र क्या किया था. कैसे और कब तैयार क्र दिया. लल्लू को पता भी नहीं चला.

तभी ममी लल्लू को लक्ष्मी से गौण आते वक्त मिलने भी नहीं दी थी.

अब कुछ कुछ समझ आ रहा था लल्लू को.

घर आ क्र भी लल्लू को पहले वह से हटा दिया गया था. फिर लक्ष्मी गारी से निकली थी.

लल्लू तो अपलक लक्ष्मी को hi देखे जा रहा था.

अब देखते hi रहोगे या कुछ डायलॉग भी मरोगे.

तभी पीछे से आवाज आया.

लल्लू चौक क्र पीछे देखा था साडी बहने अपने कमरे क बिच वाले गेट पर कड़ी पेट पकड़ क्र हुस्स रही थी.

लल्लू तो हड़बड़ा क्र बीएड से निचे उतर गया.

सरम से जमीं मई गदा जा रहा था लल्लू.

वही हाल अभी लक्ष्मी का भी था.

वो भी हड़बड़ा क्र अपना घूँघट निचे क्र ली और दोनों हाथो से अपने चेहरे को धक् ली.

सभी बहने ये सब देख क्र जोर जोर से हस्ते हुए कई तो वही गेट पर hi लुढ़क गई.

कोमल और रोमा तो पेट पकडे झुकी हुई हिस्से hi जा रही थी.

गौरी और रानी तो हस्ते हस्ते निचे लुढ़क गई थी.

सोनम और मीनू सब से पीछे कड़ी मुसकुदा रही थी.

लल्लू बिच कमरे मई सर झुकाये खड़ा था.

उसे समझ नहीं आ रहा था की वो इन्हे क्या कहे और अभी क्या करे.

भला हो सोनम का जो इन नटखट लड़कियों को पकड़ के अंदर ले गई और दरवाजा बंद क्र दी.

लल्लू रहत का सास लिया.

वो सोनम को मैं hi मन थैंक्स कहता आगे बढ़ क्र अंडर से दरवाजा बंद क्र दिया.

दरवाजे क इधर से लल्लू द्वारा बंद किये जाने की आवाज सुन्न क्र एक बार फिर से सभी लड़किया तथा क्र हुस्स पड़ी.

लल्लू मुसकुडता हुआ वापस बीएड की और आ गया.

बीएड पर आ के जब देखा तो लक्ष्मी फिर से घूँघट काढ़े बैठी थी.

लल्लू सर पिट लिया. कितना हिम्मत क्र क तो वो घूँघट उठाया था अब एक बार फिर से उसे घूँघट उठाना पड़ेगा.

लल्लू एक बार फिर से जैसे तैसे हिम्मत जूता क्र लक्ष्मी क घूँघट को पकड़ क्र उठा दिया.

लक्ष्मी आंखे बंद किये हुए बैठी थी.

लक्ष्मी क होठ थड़थड़ा रही थी.

लल्लू का मन तो कर रहा था की इस लाल लाल रास भरे होठो को काश क्र मुँह मई भर क्र उसका सारा राश निचोड़ ले.

लक्ष्मी इस समय क्या खूब लग रही थी.

दमकता चेहरा माथे पर मांग मई सोने का टिका जो लाल सिंदूर क साथ मिल क्र लक्ष्मी क रूप को दोगुनी बड़ा रहा था.

माथे पर लाल रंग की बिंदी. आँखों मई काजल, होठो मई लाल लिपस्टिक जिसे ग्लॉसी से ऐसा किया था जैसे लग रहा था अभी इन माध भरे होठो से राश टपक पड़ेगा. लल्लू को तो इन मदभरे होठो ने सब से ज्यादा उत्तेजित किया था.

गाल पर सरम की लाली.

नाक मई नाथ और कानो मई चन्द्रमा क आकर का बलि.

गले मई एक भरी सा हर जिस मई लहंगे क कलर का स्टोन लगा था.

बाजु मई बाजूबंद, हाथ मई भरी हुई चुरिया और उस मई चमकता कंगन.

ऊँगली मई अंगूठी, और कमर मई कमरबंद.

पैरो मई पाजेब जिस मई छोटे छोटे झुमको लगा हुआ था और उस झुमको मई लाल रंग का स्टोन चमक रहा था. अन्घुता और बिछिया.

ये सब मिला क्र लक्ष्मी स्वर्ग से उत्तरी अप्सरा लग रही थी जो आज लल्लू का तपस्या भांग करने आई थी.

लल्लू को यु चुप देख क्र लक्ष्मी समझी पता नहीं क्या हुआ इतनी देर से संत कैसे है तो वो आहिस्ता से अपने पलकों को जिस पर भी कोई कारीगरी की गई थी उसे उठा क्र लल्लू को एक नजर देख भर ली.

लल्लू तो खुद लक्ष्मी क इस अद्भुत सौंदर्य को देख क्र बेसुध था.

दोनों की नजरे चार हुई और लल्लू अपने साइन पर हाथ रखता हैय्यायी क्र क रह गया.

लक्ष्मी लल्लू का ये पागल दीवाना सा अड्डा देख क्र शर्मा क्र फिर अपनी पलके झुका ली.

लल्लू क होठो से स्वतः एक गजल फुट पड़ा.

तुम को देखा, तो ये ख्याल आया.

जिंदगी धुप, तुम घाना छाया.

तुम को देखा, तो ये ख्याल आया

जिंदगी धुप, तुम घाना छाया.

आज फिर दिल ने एक तम्मना की.

आज फिर दिल को हमने समझाया.

जिंदगी धुप तुम घाना छाया.

तुम को देखा तो ये ख्याल आया.

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे.

तुम चले जाओ गए तो सोचेंगे.

हमने क्या खोया क्या पाया.

जिंदगी धुप तुम घाना छाया.

तुम को देखा तो ये ख्याल आया.

लक्ष्मी शर्मा क्र और झुक गई.

अब लल्लू क लिए मुश्किल हो रहा था तो वो थोड़ा आगे जा क्र लक्ष्मी क दोनों मेहदी लगी हाथो को पकड़ क्र अपने होठो से लगा लिया.

लक्ष्मी एक बार को कैंप गई.

लल्लू आगे बढ़ क्र लक्ष्मी को अपने बहो मई भर क्र अपने बदन से चिपका लिया.

लल्लू- अब मेरे साबरा का इम्तिहान न लो.

लक्ष्मी चुप वही पास टेबल पर रखे एक गिलास उठा क्र लल्लू को पकड़ा दी.

लल्लू उस गिलास को ले क्र देखा तो वो दूध से भरा हुआ था.

लल्लू उस गिलास को लक्ष्मी क होठो की और बढ़ा दिया.

लक्ष्मी पकड़ क्र उसे वापस लल्लू क होठो से लगा दी.

लल्लू हौले से एक घुट ले क्र उसे लक्ष्मी क होठो से लगा दिया.

लक्ष्मी कंपते होठो को हल्का सा खोल क्र एक छोटा घुट ले ली.

फिर गिलास लल्लू की और क्र दी सरमाती हुई.

लल्लू उस गिलास को पकड़ एक सैश मई खली क्र दिया और एक और रखता बोलै.

लल्लू- ये हमारे बिच मई बढ़ा दाल रहा था.

लक्ष्मी सुन क्र शर्मा गई.

लल्लू लक्ष्मी क दोनों लाल गाल अपने हथेलियों मई पकड़ क्र उसे उठा क्र लक्ष्य क आँखों मई अपलक देखने लगा.

लल्लू- तुम्हरी इस झील सी गहरी आँखों मई दुब जाने को जी चाहता है.

लल्लू आहिस्ता से अब लक्ष्मी पर झुकने लगा था.

लक्ष्मी क होठ थोड़ा सा थड़थड़ा हुआ खुल गया.

लल्लू लक्ष्मी क दोनों गलो को अपने हथेलियों मई पकडे उसकी कोमलता महसूस करता लक्ष्मी क होठो को अपने होठो से छू लिया.

लक्ष्मी का पूरा सरीर एक बार को कम्प गया. जिसे लल्लू ने भी महसूस किया.

लक्ष्मी क होठो का एहसास प् क्र लल्लू क सरीर का रोया रोया लक्ष्मी मई समां जाने को चीख चीख क्र कहने लगा.

लल्लू फिर आगे बढ़ लक्ष्मी क तपते होठो को अपने होठो मई दबा क्र चूसने लगा.

बहुत आहिस्ता से जैसे लल्लू दर रहा हो की कही लक्ष्मी को तकलीफ न हो.

लल्लू किसी और दुनिया मई पहुंच गया था.

लक्ष्मी को भी अपना सरीर हल्का हो क्र हवा मई तैरता हुआ महसूस हो रहा था.

लक्ष्मी को अपने निचे जैसे लग रहा था पंतय गीली हो गई है. उसे बड़ा सरम आ रहा था.

लल्लू हाथ को लक्ष्मी क गाल से हटा क्र उसके सर को पकड़ लिया और एक हाथ पीछे पीठ पर सहलाने लगा.

लल्लू हौले हौले लक्ष्मी क होठो को अपने होठो मई दबाये बीएड पर लेट गया.

थोड़ी देर मई लल्लू होठो को छोड़ क्र लक्ष्मी क मांग टिका को उठा क्र वह छोटा सा चुम्मी ले लिया फिर उस गहने को निकल क्र एक और रख दिया.

फिर लल्लू उस से निचे नक् पर हल्का सा चुम लिया और नाथ को खोल दिया.

उसके बाद कान क लौ को चुम लिया और वह से भी गहने को खोल क्र निकल दिया.

लक्ष्मी तो लल्लू द्वारा कान क लॉ क छूटे hi अपनी पंतय गीली क्र दी.

आज जिंदगी मई पहली बार उसे ये अद्भुत आनंद महसूस हो रहा था.

वो कास क्र लल्लू क कुर्ते को पकडे हुए थी साइन क पास से और गहरी गहरी सास ले रही थी.

लल्लू वह से थोड़ा निचे आया और लक्ष्मी क गले को चुम लिया.

फिर वह क हार को खोल क्र हटा दिया.

लक्ष्मी का गोरा सुराही की तरह कर्व लिए हुए गाला लल्लू को आमंत्रित क्र रहा था की आओ निचे क अमृत कलश को चख क्र देखो.

लल्लू लक्ष्मी क बाजु को हम लिया और बाजूबंद खोल लिया.

फिर लल्लू निचे खिसक क्र लक्ष्मी क पेट क निचे नाभि पर अपने होठ लगा दिए.

लक्ष्मी आह क्र क उछाल गई.

लल्लू मुसकुडता हुआ कमरबंद भी खोल दिया.

लल्लू उठ क्र बैठ गया फिर और निचे आ गया.

लक्ष्मी अपने दोनों हाथो से चादर को काश क पकडे हुए थी. ये सब उसे बर्दास्त से बहार होता जा रहा था. आज तक किसी पुरुष ने उसे कभी नहीं छुआ था.

तभी लक्ष्मी का रोया रोया खड़ा हो गया और लक्ष्मी भी उठ बैठी.

लल्लू लक्ष्मी क पेअर पर पाजेब क पास अपना होठ लगा दिया था.

लक्ष्मी लल्लू क चेहरे को पकड़ क्र लाज सरम को टाक पर रख अपने उप्पेर खींच ली और उसके होठो पर टूट पड़ी.

लल्लू ख़ुशी से बबला हो गया लक्ष्मी का ये रूप देख क्र.

लल्लू लक्ष्मी का भरपूर साथ दे रहा था.

लक्ष्मी बहुत उत्तेजित हो क्र लल्लू क होठो को काट काट क्र कुश क्र जैसे भी उसकी उत्तेजना लक्ष्मी से करवा रहा था वो करती जा रही थी.

जब सैश फूलने लगा तो लक्ष्मी मुँह हटा क्र गहरी गहरी सास लेने लगी.

लल्लू एक बार फिर निचे आ गया.

लक्ष्मी आँखे बंद किये अपने उखरि हुई ससो को दुरुस्त करने मई लगी थी तभी लल्लू एक बार फिर लक्ष्मी क पेअर को चुम लिया.

लक्ष्मी फिर से तरप क्र उठ बैठी.

लक्ष्मी गर्दन हिला क्र मन करने लगी और अपना प्यार मोर क्र हटाने लगी.

लल्लू झट से लक्ष्मी क एक पेअर क अंगूठे को मुँह मई ले लिया.

लक्ष्मी सिसक क्र लल्लू क बालो को नोचती हुई फिर से झाररर गई.

वो भम्म से बीएड पर गिर गई.

लल्लू पहले पाजेब खोला फिर बिछिया.

लल्लू उठ क्र लक्ष्मी क सपाट पेट को चुम लिया.

पेट का पूरा हिस्सा कम्प गया. लक्ष्मी पेट चिपका ली.

लल्लू आगे बढ़ क्र लक्ष्मी क अमृत कलश क स्टार्ट पर उसके खाई मई जीभ निकल क्र चाट लिया.

लक्ष्मी लल्लू क सर को वही पकड़ क्र दबा ली.
 
भाई लोग किसी बात का बहस करने की कोई जरुरत नहीं है आप सब को. रहा अपडेट की बात. तो सुबह नहीं आया तो 12 बजे तक आ जाएगा फिर एक रात मई कभी भी आ जाएगा. ये दो टाइम अपडेट आते रहेंगे.

एक सुबह 12 तक दूसरा रात तक कभी भी.

प्लस आप सब बहस न करना.

दूसरा लास्ट बनचर भाई ने जो कहा.

स्टोरी सही मई अभी स्टार्ट hi हुआ है.

मैंने इस मई कुछ सोच क्र नहीं लिखता. जब लिखने लगता हु तो जो मन आता है लिखता जाता हु. इसी लिए कभी कभी लगा होगा की कही कही बहुत कुछ मिसिंग है.

क्या कृ सोचने बैठ जाऊंगा तो और नहीं लिख पाउँगा. दूसरा कभी सोच क्र लिखने बैठता भी हु तो घर वाले आ क्र टोक देते है बस भूल जाता हु सारा कुछ.

अभी तो लल्लू खेल hi रहा है अभी बड़ा कहा हुआ है.

इसे अभी पहले बड़ा होने देते है.

:love::hug:dost:
 
मर्द का बच्चा. अपडेट47.

लल्लू लक्ष्मी क कठोर पर्वत का एहसास करता हुआ लक्ष्मी क वक्ष पर अपना सर दबाये उसे होठो से चुम रहा था.

लक्ष्मी को ऐसा एहसास कभी नहीं मिला था. बहुत अच्छा लग रहा था उसे.

लक्ष्मी लल्लू क सर क बालो को सहलाती सिसकती जा रही थी.

लल्लू सर उठा क्र लक्ष्मी क होठो पर लगा दिया.

लक्ष्मी क गलो को सहलाता हुआ बड़े प्यार से उसके होठो से टपकने को आतुर प्रेम राश को लल्लू निचोड़ता जा रहा था.

जब दोनों को सास लेना मुश्किल हो गया तो मुँह उठा क्र गहरी सास लेने लगे.

लक्ष्मी सिमट क्र लल्लू क साइन पर सर रख ली.

लल्लू लक्ष्मी को अपने आगोश मई लिए उसके पीठ पर हाथ चलता जा रहा था.

जैसे hi लल्लू का हाथ लक्ष्मी क नंगी पीठ क हिस्से पर जाता दोनों क सरीर मई कम्पन छूट जाती.

लल्लू आहिस्ता से लक्ष्मी क चोली क डोर को पकड़ क्र खींच दिया.

चोली ढीली हो गई.

लल्लू चोली को लक्ष्मी क कंधे पर से निचे खींच दिया.

लक्ष्मी अपनी आँखे बंद किये लल्लू क हाथो मई अपने आप को समर्पित क्र दी.

लक्ष्मी मरे सरम क लल्लू क साइन मई मुँह छुपाये हुए थी.

लल्लू एक हाथ को चोली से निकल दिया.

अंदर लक्ष्मी क लाल ब्रा उजागर हो गया. जिस मई लक्ष्मी क अमृत कलश छुपे हुए बहार आने को तरप रहे थे.

लक्ष्मी को दूसरी और क्र लल्लू दूसरे हाथ से भी चोली को निकल क्र लक्ष्मी क सरीर से अलग क्र एक और रख दिया.

लक्ष्मी लज्जया से अपना पीठ लल्लू की और किये अपने दोनों हाथो से अपना चेहरा धक् ली.

लल्लू लक्ष्मी क बेदाग चिकनी पीठ और उस पर ब्रा की लाल पति देख क्र रोमांचित हो रहा था.

लल्लू झुक क्र लक्ष्मी क पीठ पर चुम्मियो की झरि लगा दी.

लक्ष्मी सिसकती हुई चादर को अपने दोनों हाथो से पकड़ क्र औंधे मुँह हो गई.

लल्लू ब्रा क पट्टी को हुक क पास उसे मुँह मई ले क्र हुक को खोलने की कोसिस करने लगा अपने मुँह से.

लल्लू की गर्म सास और उसके होठो का स्पर्श लक्ष्मी को एक नया अनुभब करा रहा था.

लक्ष्मी वैसे hi मजे से आँखे बंद किये लल्लू क उटपटांग हरकतों का मजा ले रही थी.

ब्रा का हुक्म खुल गया. लल्लू उसे दांतो मई दबाये दोनों और क्र दिया.

कंधे पर चिपके ब्रा क स्ट्रैप्स को कंधे को चूमता लल्लू उसे भी खिशका दिया.

लल्लू लक्ष्मी क कंधे को पकड़ क्र पीठ क बल घुमा दिया.

लक्ष्मी क गोर ामी पर ब्रा का कप्स टेंगा हुआ था बांकी हिस्सा लाइट की रौशनी मई संगमरमर की तरह चमक रहा था.

लल्लू को लक्ष्मी क उन्नत उभारो क गहरी घाटी अपनी और खींच रहा था.

लल्लू आगे बढ़ लक्ष्मी क वक्ष पर टंगे कप्स को होठो मई दबा क्र अलग क्र दिया.

लक्ष्मी आह भर्ती अपने दोनों हाथो से अपने उस दोनों पहाड़ियों को धक् लिया.

लल्लू को एक झलक मात्रा मिल पाया.

लल्लू उस कोमल पहाड़ी और उस पर की पिंक छोटी को देख क्र एक आह भर क्र रह गया.

अब लल्लू क साबरा की इंतहा हो गई थी.

लल्लू झपट क्र लक्ष्मी क पुरे चेहरे को चूमने लगा.

चेहरे को चूमता हुआ लल्लू निचे सरकता जा रहा था. लल्लू लक्ष्मी सुराही जैसी चिकनी गर्दन पर जा पंहुचा.

लक्ष्मी अपने गले मई लल्लू क ससो को महसूस क्र गले को उठा क्र लम्बी क्र ली और लल्लू को अपने बहो मई भर उसके पीठ पर हाथ से सहलाने लगी.

लल्लू लक्ष्मी क गले को चूमता हुआ निचे आने लगा.

लक्ष्मी क छोटे पिंक निप्पल्स लल्लू क बदन से रगड़ क्र खड़े हो गए थे.

थोड़ा सा भी अगर लल्लू क सरीर से चिपकता तो लक्ष्मी क मुँह से मस्ती की लहार से एक आह निकल जाता

लल्लू निचे आता लक्ष्मी क एक निप्पल को मुँह मई भर लिया.

लक्ष्मी मजे से हवा मई उरने लगी.

लल्लू क बालो को नोचती लक्ष्मी लल्लू क सर को अपने चुके पर दबती जा रही थी.

लल्लू थोड़ी देर एक निप्पल को चूसने क बाद उसे छोड़ दूसरे को पकड़ लिया और पहले वक्ष को अपने हथेली मई ले क्र हलके हाथो से सहलाने लगा.

लक्ष्मी आनंद की साडी सीमा तोर बदलो की सैर क्र रही थी. वो अपने होठो को अपने दन्त से कटती नाक से लम्बी लम्बी ससे छोड़ रही थी.

लल्लू चूस चूस क्र दोनों चुके को लाल क्र दिया.

फिर लल्लू वह से निचे आ गया.

लक्ष्मी क पेट पर लल्लू क सास को महसूस क्र लक्ष्मी क पेट मई गुदगुदी हो रही थी.

लल्लू लक्ष्मी क चिकनी पेट को चूमता उसके गहरी नाभि पर आ गया और अपना जीभ निकल क्र उसे चाट लिया.

लक्ष्मी कमर ुहता क्र पटकने लगी बीएड पर.

लल्लू अपनी लपलपाते जीभ से लक्ष्मी क नाभि मई घुसा क्र उसे चाटने लगा.

लक्ष्मी की पेंटी तो पूरा भींग गई थी. जैसे पंतय मई hi पेशाब क्र दिया हो.

नाभि से खेलने क बाद लल्लू वह से निचे खिशक क्र लक्ष्मी क लहंगा जो कमर पर बंधी थी.

लल्लू कमर को चूमता लहंगा क डोर को दांतो से पकड़ क्र खींच दिया.

लहंगा का डोर खुलते hi लल्लू उसे मुँह मई दबा क्र निचे खिश्काने लगा.

लहंगा लक्ष्मी क कमर क निचे बड़ा हुआ था और लक्ष्मी उसे हाथो से पकड़ भी ली.

लक्ष्मी को बड़ा सरम आ रहा था लल्लू क हाथो यु नंगी होने मई.

लल्लू एक बार लक्ष्मी को देखा वो नजरे झुकाये शर्मा क्र मुँह घुमा ली.

लल्लू अपना कुरता और बनियान खोल लिया. अब लल्लू उप्पेर से नंगा था.

फिर उस ने अपना पजामा भी खोल दिया

अब लल्लू सिर्फ कच्चे मई था सिर्फ.

अब लल्लू लक्ष्मी क बदन को निचे से उप्पेर सहलाता आगे बढ़ने लगा.

लल्लू उप्पेर आ क्र एक चुके को होठो मई दबा लिया और दूसरे को हाथ से मसलने लगा.

लक्ष्मी आहे भर्ती हुई लल्लू क पीठ को सहला रही थी. लल्लू क नंगे बदन को अपने बदन से चिपकाये लक्ष्मी बिन पानी क मछली की तरह बीएड पर मचल रही थी.

लल्लू लक्ष्मी क चुके को दोनों हाथो मई पकडे मशाल रहा था.

लल्लू फिर एक बार निचे आ ने लगा और दोनों हाथो से लांघा क साथ साथ लक्ष्मी क पंतय को पकड़ क्र खींच दिया.

लक्ष्मी चौक क्र उठ बैठी. लेकिन तब तक लल्लू भी उठ चूका था और लहंगा जो आधे पेअर तक आ गया था उसे पूरा खींच क्र लक्ष्मी क पैरो से निकल दिया.

लक्ष्मी अपने हाथो से अपने सरंगः को हक क्र पीछे पलट गई. अब लक्ष्मी का पीठ लल्लू की और था.

लल्लू लक्ष्मी क गोल गांड को देख क्र बबला हो गया.

वो अपना चड्डी भी खोल क्र फेक दिया और पीछे अपने हाथ से हलके हलके लक्ष्मी क पीठ को सहलाने लगा. लक्ष्मी सिहर गई. वो मचलने लगी.

लल्लू पीठ से खेलता हुआ लक्ष्मी से पीछे से चिपक गया जा क्र.

लल्लू का पूरा सरीर लक्ष्मी से चिपका हुआ था.

लक्ष्मी सिसकती हुई घूम क्र लल्लू को अपने गले से लगा क्र उसके होठो से चूसने लगी.

लल्लू लक्ष्मी क पीठ पर हाथ चलता अपने हाथ को निचे ले जा क्र लक्ष्मी क फुल्ले हुए गांड को मुट्ठी मई भर लिया.

लक्ष्मी आह भर्ती हुई लल्लू क होठो को काट ली.

लल्लू अब इस प्रेम को पूर्ण क्र लक्ष्मी को हर तरह से अपना बनाना चाहता है.

लल्लू- लक्ष्मी क्या तुम तैयार हो हमेशा मेरी बन क्र रहने को. मुझे माफ़ करना ये सवाल मई अब कर रहा हु जो बहुत पहले करना चाहिए था.

लक्ष्मी- क्या इतना सब होने क बाद भी आप को अब इस सवाल का जबाब चाहिए.

लल्लू- मई एक बार तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हु.

लक्ष्मी आगे बढ़ क्र उसके होठो को चुम ली और शर्मा क्र साइन मई मुँह छुपा ली.

लक्ष्मी- मिल गया जबाब.

लक्ष्मी लजाती हुई बोली.

लल्लू लक्ष्मी क पुरे सरीर पर अपना हाथ चला रहा था. इतना कोमल बदन था की लल्लू का हाथ एक जगह रुक hi नहीं रहा था.

लल्लू उठ क्र उसके पेअर क पास आ गया और फिर वह से लक्ष्मी को चूमना स्टार्ट क्र दिया और उप्पेर बढ़ने लगा.

उप्पेर बढ़ता लल्लू लक्ष्मी क जांघ को काटने लगा लक्ष्मी बीएड पर मचलने लगी.

लल्लू लक्ष्मी क दोनों पेअर को हाथ से पकड़ क्र फैला दिया.

लक्ष्मी झट से अपने हाथो से अपने छूट को धक् ली.

लल्लू लक्ष्मी क होठो क चारो और अपने जीभ से चाटने लगा.

लल्लू जीभ चलता हुआ एक हाथ से उसके गोल गोल चुके को मसलने लगा.

लक्ष्मी दर्द और मजे से कराह रही थी.

धीरे धीरे लक्ष्मी का हाथ वह से हैट रहा था.

लल्लू एक हाथ से उसके दोनों हाथ को वह से हटा क्र लक्ष्मी क छोटी सी छूट पर अपना जीभ से चाट लिया.

लक्ष्मी लल्लू क सर को वह से धकेल क्र हटाने लगी.

लक्ष्मी- प्लस.. वह नहीं. वो गन्दा है. प्लस मन जाइये.

लल्लू कहा मानाने वाला था वो मुँह खोल क्र पुरे छूट को मुँह मई भर क्र उसे काटने और जीभ चलने लगा.

लक्ष्मी तड़पती हुई लल्लू क मुँह मई जहर गई.

लल्लू उठ क्र बैठ गया और लक्ष्मी क छूट क मुँह पर अपना डंडा लगा क्र वह मसलने लगा.

लक्ष्मी लल्लू क गर्म लौड़े को अपने छूट पर महसूस क्र सिहर उठी.

उसका गाला सुख गया था. होठ फड़फड़ा रहा था.

लल्लू थोड़ी देर लौड़े को छूट पर मसल क्र उसे अच्छी तरह छूट रास से गिला क्र दिया फिर लक्ष्मी क छूट क छोटे से छेद पर अपना डंडा लगा क्र लक्ष्मी क कमर को पकड़ लिया.

लक्ष्मी अपने दांतो से अपने होठ को दबा राखी थी.

लल्लू एक हल्का धक्का लगा दिया लेकिन इतना छोटा छेद था की लल्लू का लोला फिलहाल क्र लक्ष्मी क पेट से जा लगा.

लल्लू इधर उधर देखा तो टेबल पर एक क्रीम का डब्बा रखा था.

लल्लू झट से उसे उठा क्र लाया और पहले अच्छी तरह से लक्ष्मी क गुलाबी छूट क छेद मई ऊँगली दाल क्र अंदर तक लगा दिया फिर अपने डंडे को उस लुब्रीकेंट क्रीम से पूरा चॉपर दिया.

फिर लल्लू आ क्र लक्ष्मी क टैंगो क बिच आ क्र बैठ गया और लक्ष्मी को देख क्र अपने डंडे को एक हाथ से पकड़ क्र छूट क छेड़ पर लगा दिया फिर लल्लू लक्ष्मी क दोनों बूब्स को पकड़ क्र एक जोर का धक्का लगा दिया.

लक्ष्मी एक जोर की चीख मर दी लेकिन लल्लू जल्दी से अपना हाथ आगे क्र लक्ष्मी क मुँह को बंद क्र दिया.

लल्लू का डंडा लक्ष्मी क छूट को फार क्र आधा अंडर जा घुसा.

छूट पूरा फ़ैल गया था. उस खून को एक पतली लकीर निकल आई.

खून देख क्र लल्लू का दर से बुरा हाल हो गया.

लल्लू नजर उठा क्र लक्ष्मी को देखा तो लक्ष्मी की आँखों से आंसू की धरा उसके चेहरे पर पूरा फैला हुआ था.

लल्लू को ये देख क्र बहुत जायदा बुरा लगा. वो लक्ष्मी क उप्पेर झुक क्र उसके चेहरे पर फैले आंशुओ को चाट क्र साफ क्र दिया.

लल्लू फिर लक्ष्मी क एक पिंकी निप्पल को मुँह मई भर क्र चुभलाने लगा.

थोड़ी देर मई जब लक्ष्मी को थोड़ा आराम मिला दर्द से तो वो लल्लू क सर क बालो को सहलाने लगी.

लल्लू समझ गया की अब लक्ष्मी का दर्द काम हो गया है तो वो अब हल्का हल्का अपना कमर हिलने लगा.

लक्ष्मी को अभी भी दर्द हो रहा था.

वो हर धक्के पर कराह उठती. जब तक लक्ष्मी क छूट की मांसपेशिया अंदर से लल्लू क लौड़े क लायक जगह नहीं बना ली.

थोड़ी देर बाद लक्ष्मी क मुँह से दर्द क साथ साथ मजे की आहे भी निकलने लगी.

लल्लू अब थोड़ा गहरा धक्का लगाने लगा था.

लक्ष्मी की दोनों चूचिया लल्लू क मर्दन से लाल हो गया था और उसके निप्पल्स भी. निप्पल्स पर तो कही कही लल्लू क काटने से ब्लड भी आ गए थे

अभी अब लल्लू लक्ष्मी क कमर को पकड़ क्र उसके दोनों पैरो क बिच बैठा लम्बे लम्बे स्ट्रांग स्ट्रोक लगा रहा था जिस से लक्ष्मी की चूचिया एक ले मई आगे पीछे हिल रही थी.

लक्ष्मी अपने हाथो से चादर पकडे लल्लू क धक्को को सहती हुई उसका पूरा साथ दे रही थीं

लक्ष्मी को तो याद भी नहीं था की इस पहली रात मई hi वो कितनी बार अपना काम राश बहा चुकी है.

लल्लू आज लक्ष्मी को पूरा निचोड़ लेने क मुद मई था.

कहा ये गौण का गबरू जवान देसी छोरा और लक्ष्मी कहा एक धार्मिक स्थल की नाजुक सी लड़की. बड़ी मुश्किल से लल्लू क लोले को झेल रही थी.

अभी लल्लू अपना पूरा लौड़ा निकल क्र एक बार मई hi लक्ष्मी क अंदर जार तक थोक रहा था.

लक्ष्मी तो हर धक्के क बाद लग रहा था जैसे उसके बच्चेदानी मई लल्लू का लौड़ा घुस रहा है.

वो आसमन की सैर क्र रही थी.

लल्लू अपने घुटने पर बैठा लक्ष्मी क गांड क निचे हाथ से पकड़ क्र उसे उठाये धक्का धक् अपना रेल गारी चलाये जा रहा था.

लल्लू को तो जैसे स्वर्णिम आनंद का अनुभब हो रहा था.

लल्लू अब अपने चरम सुख क नजदीक hi था तो उसका स्पीड बहुत बढ़ गया था.

लक्ष्मी भी कभी अपने होठो पर जीभ गिरती तो कभी लल्लू लल्लू को पकड़ क्र चुम लेती.

वो भी अब करीब hi थी. उसका पूरा सरीर कंपता हुआ सारा खून उसके चेहरे पर आ गया था.

लल्लू लक्ष्मी क दोनों गोल दूध को निचोड़ता हुआ एक कराह भरता अपना लावा लक्ष्मी क गर्म भट्ठी मई उगलने लगा.

लल्लू क लावे को अपने अंदर फील क्र क लक्ष्मी भी झरती चली गई.

दोनों एक दूसरे को अपने बहो मई समाये ऐसे hi लेते ससो को दुरुस्त करने लगे.

थोड़ी देर बाद लल्लू आहिस्ता से लक्ष्मी क उप्पेर से उठा क्र बैठ गया.

लक्ष्मी क छूट से जैसे hi लौड़ा निकला लल्लू ने एक मधुर ध्वनि सुनाई दिया पक्क.

लल्लू जब लक्ष्मी क छूट को देखा तो उसका बहुत बुरा हाल था.

छूट क होठ सूज क्र फुल गए थे और काफी लाल भी हो गया था.

अभी थोड़ी देर पहले जहा छूट क दोनों होठ बिलकुल चिपके हुए थे अभी तो लल्लू क मोठे डंडे से मर खा क्र फ़ैल गया था. जिस मई से दोनों का मिला हुआ प्रेम राश साथ मई लक्ष्मी क छूट से निकलता खून तीनो मिल क्र अभी उस छेद से निकल रहा था.

लल्लू टॉवल लपेट क्र वाशरूम चला गया और वह से फ्रेश हो क्र आया तो उसके हाथ मई एक भिनगा हुआ कपडा था जिस से लल्लू लक्ष्मी क छूट को पहले अच्छे से साफ़ क्र दिया.

लक्ष्मी तो जैसे बेहोश हो हो गई थी.

अपने छूट पर गर्म पानी का एहसास प् क्र आँख खोल क्र देखि तो लल्लू को साफ करता देख वो शर्मा गई.

लल्लू उसे साफ क्र फिर एक बार वाशरूम गया और

दुबारा वह से वो कपडा भिनगा क्र ले आया और उस से थोड़ी देर लक्ष्मी क छूट की सके क्र दी.

फिर लल्लू उठ क्र एक किसी उस छूट पर ले क्र कपडे को एक और रख दिया और बीएड पर आ क्र लक्ष्मी को बहो मई भर उसके होठो पर चुम लिया.

लक्ष्मी लजा क्र लल्लू से चिपक गयी.

लक्ष्मी की छूट मई अभी भी दर्द था.

लक्ष्मी को घूमने से छूट मई दर्द करने लगा जिस से उसके मुँह से एक कराह निकल गई.

लल्लू उठ क्र कपडा पहन लक्ष्मी क उप्पेर चादर दाल क्र धक् दिया और रसोई मई चला गया.

वह फ्रीजर से आइस निकल क्र लाया और फिर उस से लक्ष्मी क छूट की थोड़ी सके क्र दी..

आइस लगने से लक्ष्मी को बहुत गुदगुदी हो रही थी.

लेकिन लल्लू का प्यार देख क्र उसे बहुत ख़ुशी हो रहा था.

लल्लू मोबाइल निकल क्र देखा तो अभी 3 बज रहे थे.

थोड़ी देर सके क बाद लल्लू फिर से आ क्र लक्ष्मी को पकड़ क्र सो गया.

लल्लू का मन तो नहीं भरा था लेकिन वो देख रहा था की अभी लक्ष्मी की हालत बहुत ज्यादा ख़राब है. इस लिए अपने मन की भाबना को दबा क्र सोने की कोसिस करने लगा.

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लक्ष्मी भी बहुत थक गई थी.

उसे नहीं पता था की उसे रानी माँ ने किस संध से सदी क्र दी है. जो एक hi बार मई लक्ष्मी का कचूमर निकल दिया है.

लक्ष्मी लल्लू क माशूम चेहरे को देखते हुए वो भी नींद की हसीं वादियों मई खो गई.
 
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