Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 11 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

मर्द का बच्चा. अपडेट 58.

सुबह क 4 बजे लल्लू की नींद खुली. आँख मीचता बीएड से उठ क्र बैठ गया. रात बहुत अच्छी नींद आई थी एक मई. उसने सोच लिया था की वो सब कमरे मई अब एक लगवा देगा.

खिरकी से बहुत हलकी उजाला आ रहा था. वो उठ क्र लाइट जला दिया और फिर वाशरूम मई जा क्र फ्रेश हो गया.

वह से आ क्र एक नजर बीएड की और डाला तो बुआ बहुत गहरी नींद मई सो रही थी. सोते हुए सैश लेने से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया उप्पेर निचे हो रहा था.

लाइट मई निघ्त्य सोई हुई वो बहुत खूबसूरत दिख रही थी. सरे बल इधर उधर फ़ैल क्र कुछ तकिये पर तो कुछ उनके चेहरे पर आ गया था.

लल्लू आहिस्ता से चलता हुआ गया और उनके चेहरे पर आये हुए बालो को अपने हाथ की उंगलियों से बहुत hi आहिस्ता से हटा दिया. इस क्रिया मई लल्लू की उंगलिया बुआ क गाल से छू गया.

नींद मई hi बुआ क चेहरे पर एक मुस्कान आ गई.

बुआ क कंधे पर निघ्त्य का पतला स्ट्रेप और उस से झांकता वो साइन से उप्पेर का गोरा गदराया हिस्सा लल्लू को दीवाना बना रहा था.

बुआ क़यामत की जीती जगती मिसाल थी.

निघ्त्य क गले से झक्ति आधी से ज्यादा गोरी पोस्ट उभर लल्लू क बदन क रक्त संचार को बड़ा रहा था. लल्लू सैश रोके बुआ क जानलेवा रूप का आँखों से राश पैन क्र रहा था.

निचे गोलाई लिए हुए कमर का निचे क हिस्सा और निघ्त्य जो नींद मई बुआ क घुटने से हल्का उप्पेर तक आ गया था उस से झक्ति बुआ की चिकनी पिण्डलिया…

लल्लू का मन क्र रहा था की जीभ निकल क्र इस चिकने बदन को चाट चाट क्र खा जय लेकिन ये पॉसिबल नहीं था. लल्लू ये सोच hi सकता था. वास्तव मई ये होना मुश्किल hi था.

फिर भी लल्लू से रहा नहीं गया और वो झुक क्र बुआ क माथे पर एक किश क्र दिया और लाइट बंद क्र गेट खोल क्र वह से बहार भाग आया

वह खड़ा रहना उसके लिए एक टफ एग्जाम था.

लल्लू घर से निकल क्र पैदल hi नदी की और निकल गया.

थोड़ी देर मई hi लल्लू नादिंकिनारे ध्यान मई बैठा हुआ था.

अभी लल्लू क ध्यान मई कल गोली चलने वाला और उस गारी क बारे मई hi घूम रहा था. किस ने किया ये.

थोड़ी देर ध्यान मई बैठने क बाद ध्यान टूट जाता उसका. कल हुए इस कांड से उसका मन बहुत बिचलित था. घर मई भी सब क साथ रहते हुए भी उसके मन मई यही सब घूम रहा था.

उसे अपने मरने का दर नहीं था. उसे दर था तो अपने पापा और काका का जो उसी बाजार मई नया काम सुरु क्र रहे थे. कही वो लोग उस गोली चलने वालो क नजर मई आ गए तो क्या होगा.

आज उसे एहसास हो रहा था की एक पिता क होने से बच्चे कितने अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है. आज जब वो सोच रहा था और एक संभावना अपने पिता पर होने वाले हमले का सोचा तो उसकी रूह कम्प गई.

ऐसा कभी नहीं हुआ था उसके साथ. वो अपने सुनील काका क ज्यादा करीब रहा है. जितना लगाव उसे अपने सुनील काका से था उतना और किसी से नहीं था या फिर सोनम और कोमल से.

कोमल से बात बहुत काम होता था लेकिन कोमल लल्लू क आँखों मई देख क्र भी उसके मन को जान जाती थी. मुँह से कुछ कहने की जरुरत hi नहीं होता था.

अपने पिता से तो वो बात hi नहीं करता था.

उसे आज भी याद है वो दिन जब वो स्कूल मई सीढ़ियों से लुढ़कता हुआ उप्पेर से निचे आ गया था और उसके पापा को पता चला था तो वो स्कूल मई क्या हंगामा किये थे. लल्लू को ऐसे हालत मई भी दो थप्पड़ लगाए थे. टीचर्स को तो रेल बना दिए थे.

और फिर हॉस्पिटल मई रात को सब से चुप क्र मुझे देख देख क्र रट रहते थे.

क्या अजीब प्यार था उनका.

घर मई भी उनके गुस्से से सब डरते है. थोड़ा जल्दी hi गुस्सा आ जाता है उन्हें.

" ोुये यहाँ क्या क्र रहा है तू."

किसी क आवाज देने से लल्लू का ध्यान टुटा.

गर्दन घुमा क्र देखा " टूउउ…."

लल्लू- तुम यहाँ क्या क्र रही है.

लड़की- क्यू क्या ये तेरे बाप का है जो मई नहीं आ सकती.

लल्लू- बहुत दिन हो गया लगता है. क्या किसी से ठुकवै नहीं है जो निचे का गर्मी उप्पेर से निकल रही है.

लड़की- सुरु हो गया तेरा. कितनी गंदगी भरी रहती है तेरे दिमाग मई. चल आज सारा निकल ले.

लल्लू- बहनचोद जब निकलवाने को तैयार hi है मेरे लौड़े से निकलवा दे. ले ले मेरा भी सब का bhala.to क्र hi रही है तू. कुछ मेरा भी भला क्र दे.

लड़की अपना सारा कपडा जल्दी जल्दी खोलते हुए..

लड़की- आ.. आज देखु तेरे मई कितनी गर्मी है. ले निकल ले आ.

लल्लू उठ खड़ा हुआ और उसके पास जा क्र उसके एक चुकी पर जोर से थप्पड़ लगता हुआ झुक क्र कपडे सरे उठा लिए उसके.

लल्लू- ले पहन ले. मई रंडियो को नहीं छोड़ता हु.

फिर लल्लू वह से घर की और निकल गया.

लड़की- रंडी का बच्चा.. अगर इस छूट मई एक दिन तुझे घुसा नहीं लिया तो मेरा नाम भी रधिया nahi.:D

लल्लू का मूड ख़राब हो गया था तो वो वह से घर आ गया सीधा.

घर आ क्र थोड़ी देर दालान पर अपने दादू क पास बैठ क्र उन से सुनील जहाँ की बाटे करता रहा.

तभी वह बुआ आ गई चाय ले क्र.

बुआ- तेरी चाय मई नहीं लाया हु. मुझे नहीं पता था की तू भी आ गया है.

दादू- ले आ बीटा. इसका भी एक लाडे चाय.

बुआ- है अभी लती हु पापा.

फिर बुआ आँगन चली गई लल्लू क लिए चाय लेने.

थोड़ी देर मई hi वो दो कप चाय ले आई.

लल्लू- बुआ इस बार दो कप ले आई आप. मई तो एक hi पियूँगा.

बुआ- बड़ा आया दो कप वाला. एक कप मई अपने लिए लायी हु.

बुआ भी वही बैठती हुई बोली.

दादू बुआ से- सुना है ललित बीटा मेरी गुड़िया क लिए एक लाया था कल.

बुआ- है पापा. बहुत प्यार करता है ये मुझ से.

दादू- ये सब से hi प्यार करता है बीटा. ये है hi ऐसा.

बुआ- है पापा. ये बात तो है. वैसे मैंने वो एक इसके कमरे मई hi लगवा दी है. मई तो कुछ दिन रहूंगी फिर वो कमरा ऐसे hi रहता तो इस लिए अभी मई ललित बेटे क कमरे मई hi सॉफ्ट हो जाउंगी आज.

दादू- ये बढ़िया है.

लल्लू- दादू वैसे मई कुछ और एक लेन का सोच रहा हु. एक भाभी क कमरे मई एक दीदी लोगो क और फिर चार काकी और माँ क कमरे क लिए भी

दादू- इतना सारा क्यू लाएगा बीटा.

लल्लू- दादू आज रात मई सोया था एक मई बहुत अच्छी नींद आती है.

दादू- नहीं नहीं. बस दो ले आ. एक राघव क कमरे मई लगवा देना और एक अपने बहनो क कमरे मई बस. मेरे बहुवो को आदत नहीं है इस सब का. तू एक लगवा देगा तो वो लेट सो क्र उठेगी किसी दिन तुम्हे hi समय से खाना नहीं मिलेगा फिर सोच लेना.

दादू हस्ते हुए बोले.

लल्लू- आप मुझे पिटाई खिलने का अच्छा बंदोबस्त क्र रहे है.

उनके कमरे मई नहीं लगूंगा तो मुझे कल से hi खाना नहीं मिलेगा.

दादू- हस्ते हुए, ठीक है जैसा तू ठीक समजे क्र ले.

फिर बुआ इन सब का खली किया कप ले क्र चली गई.

दादू- आज कई दिनों बाद दीक्षा क चेहरे पर वो चमक देखि है जो इसके सदी से पहले हुआ करता था.

लल्लू- है दादू, आज तो मुझे भी बुआ कुछ अलग लगी है.

दादू- वो तेरे प्यार से खुश है लगता है. उसे और करीब से समझ बीटा. देख इसे क्या पड़ेशानी है जो ऐसे दुखी रहती है.

लल्लू- जी दादू. मई कोसिस करूँगा.

दादू- कोसिस नहीं बीटा. मुझे मेरी वही पुराणी वाली बेटी hi मुझे चाहिए. इसके लिए तुझे जो करना पड़े वो क्र. लेकिन मुझे वो ला क्र दे.

लल्लू- जी ठीक है दादू.

फिर लल्लू वह से उठ क्र आँगन मई आ गया.

आँगन मई सभी बैठे चाय पि रहे थे.

लल्लू- मई सोच रहा हु दो एक और लगवा दू दो कमरे मई.

शालिनी- मेरे कमरे मई जरूर लगवा देना नहीं तो तेरा खाना बंद समझो.

गौरी- भाई एक हमारे कमरे मई भी. हम तो तुम्हरी प्यारी बहन है न.

रागिनी- नहीं नहीं. सब से पहले मेरे कमरे मई लगवाना. नहीं तो अभी से नास्ता बंद क्र दूंगी.

काजल और ऋतू तो बस मुस्काये जा रही थी.

लल्लू- आप दोनों को कुछ नहीं कहना है क्या.

काजल- पिटाई कहानी होगी तो ऐसा काम करेगा तू.

लल्लू- क्या मतलब.

ऋतू- मतलब ये की सिर्फ दो लाएगा तो पिटाई खायेगा. इस लिए लाना तो सब क लिए लाना या फिर किसी क लिए नहीं आएगा.

लल्लू- बुआ देख लिए. अभी दादू मुझे मर खिलने वाला hi आईडिया दे रहे थे न.

काजल- क्या मतलब.

लल्लू- मतलब ये की दो एक का आईडिया दादू का hi था.

ऋतू- नहीं नहीं. पापा ऐसा बोल hi नहीं सकते है.

लल्लू- क्यू. क्यू नहीं बोल सकते है.

काजल- सही बात है. पापा ऐसा नहीं बोल सकते.

लल्लू- बुआ से पूछ लो. मई झूठ बोल रहा हु तो.

बुआ- है बोल तो रहे थे पापा लेकिन मजाक hi किये थे ललित से.

बुआ हस्ती हुई बोली.

लल्लू- जो जो मुझे घुश देगा उसके कमरे मई आज लगवा दूंगा एक.

" क्या घुश चाहिए आप को मैनेजर साहब." शालिनी और गौरी एक साथ बोली

लल्लू- बुआ देख रही हो. दोनों माँ बेटी एक जैसी hi है.

गौरी- अब मेरी माँ है तो मेरी जैसी hi होगी न.

बुआ- तुम्हारी माँ है इस लिए वो तेरे जैसी है या तू भाभी क जैसी है.

गौरी- मेरा कहने का वही मतलब था.

रागिनी- तो बताया नहीं बीटा क्या घुश चाहिए तुम्हे

अभी लल्लू कुछ बोलता तभी काजल बोल पड़ी.

काजल- पिटाई चाहिए इसे अभी. बहुत बदमाश होता जा रहा है ये. अपने माँ सब से घुश लेगा ये.

लल्लू मुँह बनता उठ गया.

बुआ हाथ पकड़ क्र लल्लू को खींच क्र अपने साथ बैठा ली.

बुआ- कहा भगा जा रहा है.

लल्लू जो बुआ क सरीर से चिपका बैठा था.

लल्लू- जाने दो बुआ. यहाँ आसार अच्छे नहीं लग रहे. कही थप्पड़ पड़ने सुरु हो गया तो मई गिनती भी नहीं क्र पाउँगा.

बुआ- मेरे होते हुए कौन हाथ लगाएगा तुम्हे. किस मई इतनी हिम्मत है.

ऋतू- क्या बात है. ये तो दीवानी होती जा रही है मेरे बेटे की.

बुआ- तो आप को क्या लगा था. आप hi एक है.

काजल- धीरे से. लो एक और गई लगती है.

बुआ- क्या कहा आप ने भाभी.

काजल- मैंने कहा की अब मई आप को ननद रानी कहु या बहु रानी.

बुआ- जो दिल करे कह लेना. फिर मई सौतन रानी भी कहूँगी आप को

रागिनी- वह वह क्या बात है.

ऋतू उठ क्र बुआ को गले से लगा ली.

ऋतू- कहा थी तुम इतने दिन से छोटी. हम सब यही तो धुंध रहे थे की हमारी छोटी कही खो सी गई थी.

लल्लू देखा की अब सब सेंटी हो रहे है.

लल्लू- ू हेल्लो मेरे घुश का क्या हुआ.

ऋतू- मिल जाएगा. बोल क्या चाहिए

लल्लू- ये तो आप सब को सोचना है. जिस का सब से अच्छा होगा उसे एक मिल जाएगा.

काजल- फिर तो अपने दोनों काकी से ले लो. क्यू की अब वही बची है. क्यू दीदी.

काजल ऋतू को देखती बोली.

ऋतू शर्मा क्र नजरे झुकाये है मई सर हिला दी.

रागिनी- मई क्या दू बीटा. मेरा सब कुछ तो तुम्हारा hi है.

शालिनी- मेरा भी तो वही हाल है.

बुआ- छोड़ दे बीटा. सब क लिए ला दे. ये सभी तेरी माँ है और तुम से बहुत प्यार करती है.

लल्लू- अब आप कह रही हो तो ठीक है.

रागिनी- क्या… मतलब. तेरी बुआ कहेगी तो तू ला देगा. हम सब क्या गैर है तेरे.

लल्लू आगे बढ़ क्र रागिनी काकी क गाल को दांतो से काट लिया.

लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी माओ. मई आप सब से मजाक क्र रहा था. आज जाऊंगा मई बाजार तो ले आऊंगा आप सब क लिए एक. और कुछ चाहिए तो बता दीजिये वो भी ला दूंगा.

बुआ- मई भी चालू क्या. थोड़ा घूम लुंगी.

ऋतू- ये भी कोई पूछने वाली बात है. ले जा बीटा अपने बुआ को भी ले जा. आज अच्छे से खातिरदारी करना बुआ का.

काजल- है बीटा, ये मौका बार बार नहीं मिलता. हमारी छोटी पहली बार घूमने जाने को बोली है.

फिर काकी लोग रसोई मई चली गई खाने की तयारी को.

वह बुआ और लल्लू hi रह गए थे.

लल्लू- बुआ लगता है आज आप सुबह hi नाहा लिए हो.

बुआ- है नाहा लिया आज सुबह hi. वैसे तुम्हे कैसे पता चला.

लल्लू- आज आप खिली खिली सी लग रही हो. ऐसे hi रहना आप हमेसा.

बुआ- अच्छा तुम्हे बड़ा पता है. ऐसा क्या दिख गया तुम्हे.

लल्लू- आज और दिन से बिलकुल अलग लग रही हो आप. आज आप से खुशिया जैसे फुट क्र निकल रहा हो. आप को ऐसे खुस देख क्र घर मई सब बहुत खुश है. काकी, माँ, दादू सभी.

बुआ- क्या पापा कुछ कह रहे थे.

लल्लू- दादू भी आज आप को देख क्र खुश थे. कह रहे थे की मेरी बुर सदी से पहले ऐसे hi हुआ करती थी.

बुआ- पता नहीं बीटा. अब तो मई भूल भी गई हु.

अच्छा बुआ मई भी नाहा क्र तैयार हो जाऊ. तब तक नास्ता भी बन जाएगा. फिर हम लोग चलेंगे.

बुआ- ठीक है.

हरिद्वार…… इसाबेल्ला.

शाम मई गंगा आरती मई गई थी. वह से आते हुए लेट हो गया था. रात मई बीएड पर लेटते hi नींद आ गया था ककी पुरे दिन काफी घूमी थी. तो थक गई थी.

सुबह सुबह जैसे वही कल वाले साधु बाबा इसाबेल्ला को उसके रूम मई आ क्र उठा रहे थे.

इसाबेल्ला झट से उठ बैठी. इधर उधर देखि तो अभी तो वो अपने कमरे मई अकेली hi सो रही थी.

इसाबेल्ला उठा क्र फ्रेश हुई और गंगा स्नान क लिए चल दी.

उसे आज साधु बाबा से मिलने जाना था.

वो बाइसिकल रिक्शा से हर की पौड़ी पर पहुंच गई. वह वो स्नान क्र क फिर से इलेक्ट्रिक रिक्शा से माँ चंडी देवी मंदिर को चल दी.

इसाबेल्ला क मन मई इस समय कई सवाल उठ रहे थे.

" कौन हैं वो साधु बाबा. उसे hi क्यू बोले. क्या कारन है उसे आज यहाँ चंडी माँ क मंदिर बुलाने का. कही कोई ठग तो नहीं होगा. वैसे भी इंडिया मई ढोंगी साधुओं की कोई कमी नहीं. लेकिन वो साधु बाबा ऐसे दिख तो नहीं रहे थे. उन मई एक अलग hi आभा झलक रहा था. चेहरे पर एक तेज था जो उन्हें बाँकियो से उस बाबा को अलग कर रहा था.

इसाबेल्ला पुरे रस्ते इन्ही सब बातो क बारे मई सोचती जा रही थी.

मंदिर क नजदीक उतर क्र इसाबेल्ला मंदिर क प्रांगण की और चल दी.

आज बहुत भीड़ था वह पर. इसाबेल्ला आगे बढ़ती हुई क़तर मई जा क्र कड़ी हो गई.

इधर उधर देखती हुई वो वह साधु बाबा को ढूंढती आगे बढ़ रही थी

थोड़ी देर मई hi इसाबेल्ला वह माता की पूजा करने पहुंच गई.

वही वो साधु बाबा भी मौजूद थे.

वो इसाबेल्ला को अपने पीछे आने का इसरा क्र मंदिर क प्रांगण से निकल क्र वही निल पर्वत पर दूसरी दिशा मई बढ़ गए.

पहाड़ी पर पेरो क बिच होते हुए मंदिर से दूर निकल क्र वो साधु बाबा एक चट्टान क पास रुक गए.

पीछे इसाबेल्ला कौतुहल बस साधु बाबा क सभी हरकतों को देखती हुई साथ मई आ रही थी.

चट्टान क पास रुक क्र वो साधु बाबा अपने कंधे पर लटके झोले से अपना चिंता की तरह का एक औजार निकल क्र उस चट्टान पर हलके से मर दिए.

वो चट्टान एक और खिशाक्त हुआ चला गया.

साधु- आओ बीटा.

साधु बाबा आगे बढ़ गए उस गुफा मई.

बल्ला- हम कहा जा रहे है बाबा.

इसाबेल्ला आगे गुफा की और देखती बोली.

साधु- डरो नहीं. ये माँ का स्थान है. यहाँ दर नाम का कोई चीज नहीं होता. वैसे भी तुम खुद दर का दूसरा रूप हो. आ जाओ अंडर.

इसाबेल्ला खुद भी बहुत अच्छी फाइटर थी. वो कई देशो का भर्मण क्र चुकी थी और ऐसी चीजे उसे जहा भी दिख जाती कुछ सिखने वाली तो वो वह से सिख लिया करती थी.

जैसे चीन से शाओलिन सीखी thi,Japan से ैकीदो तो कोरिया से टैक्नोडो.

उसे इस तरह की चीजे सिखने का बचपन का सौक था.

चार शाल से वो घूम घूम क्र यही सब सिख रही है. इन सभी मई वो पूरी पारंगत नहीं थी लेकिन उसे काफी कुछ आता था इसका.

इसाबेल्ला माता चंडी को याद क्र उस गुफा मई साधु बाबा क पीछे पीछे घुस गई.

गुफा मई अंडर सुरु मई तो उजाला था लेकिन आगे जाने पर अँधेरा होने लगा

साधु बाबा बिच बिच मई अंदर गुफा मई दिवार क पथरी पर चिंता मर क्र उजाला करते जा रहे थे.

थोड़ा और आगे जा क्र एक जगह बाबा रुक क्र दिवार मई कुछ ढूंढने लगे.

वो दिवार पर हाथ से टटोल क्र कुछ धुंध रहे थे.

कुछ hi समय मई उन्हें वो मिल गया. उसे अपने हाथ से पकड़ क्र खींच दिए.

तभी उस गुफा मई जगह जगह मसल की लाइट जल उठा.

वो एक संकरी सी गली जैसा था चौड़ाई कोई दो मीटर्स का होगा.
 
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गूगल डॉक् और ये स्फोरम दोनों पदेशन क्र रखा है.

मोबाइल मई डॉक् हैंग हो जाता है और यहाँ पर बार बार रिफ्रेश हो जाता है जब भी कॉपी पेस्ट करने लगता हु अपडेट.

फैला दो रात से पदेशन क्र रखा है. इसी चक्क्र मई कल अपडेट नहीं दे पाया था.

एक तो नींद लगा था उप्पेर से कभी गूगल डॉक् हैंग क्र जय तो कभी यहाँ से पेस्ट करते वक्त गायब हो जय.
 
थैंक्स जॉन bhai.:love:

जो स्टार्ट हो चूका है उसे अब मई कुछ नहीं क्र सकता हु. आप क्या चाहते है की मई एक साथ सभी बहनो और बांकी जितने फीमेल करैक्टर है उन सभी को गायब क्र दू.

लक्ष्मी आ चुकी है. गायत्री आने वाली है. इसाबेल्ला भी इन क्र गई है स्टोरी मई. सोनम पहले से है. अब मई इनको अचानक से ख़त्म कैसे क्र दू. इस लिए आप से हम्बल रिक्वेस्ट है की जो जैसा चल रहा है चलने दे.

अगर कोई ज्यादा दिक्कत दे रहा है तो आप मुझे पर्सनल मस्सगे क्र सकते है

थैंक्स जोंनि भाई. :love::hug:

थैंक्स फॉर योर केयर भाई. कोई खास नहीं. बस लाइफ मई छोटी मोती प्रोबलुए आती रहती hai.:love:
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 59.

अब वह गुफा मई उजाला हो गया था. इसाबेल्ला साधु बाबा क पीछे पीछे चल रही थी

थोड़ा आगे जा क्र वो रास्ता थोड़ा चौरा होता चला गया था और लास्ट मई एक मैदान मई जा क्र निकल गया.

इसाबेल्ला- ये हम कहा आ गए बाबा.

साधु- यही तो रहस्य है बीटा.

चारो और हरा भरा मैदान. जिस मई कई तरह क फूल और फल क पौधे लगे हुए थे. जिन क आस पास खरगोश हिरन इधर उधर मंडरा रहे थे तो वही कई कबूतर मोर अपना पंख फैलाये नाच रहे थे

इसाबेल्ला का हाथ अनायाश अपने सीएएम को ढूंढने लगा. बाद मई उसे एहसास हुआ की सीएएम तो है hi नहीं उसके पास. वो तो मंदिर पूजा करने आई थी और वही से साधु बाबा क साथ यहाँ आ गई.

बहुत बहुत खूबसूरत दृश्य था यहाँ का जिस का वर्णन करना मुश्किल था.

इसाबेल्ला- वाओ it's can't बेलिएवेअबले. इतना खूबसूरत जगह अभी तक मैंने कही नहीं देखि थी.

बाबा- आ जाओ यहाँ बैठो.

साधु बाबा वही एक बड़े से पत्थर की और इसरा करते बोले.

इसाबेल्ला वह आ क्र बैठ गई.

साधु बाबा वही एक दूसरे पत्थर क पास चले गए और उस पर बैठ गए.

साधु- बीटा अब मई जो कुछ भी तुम्हे बताने वाला हु उसे ध्यान से सुनना.

लल्लू तैयार हो क्र बहार आ गया.

लल्लू- बुआ आप अभी तक तैयार नहीं हुई. क्या हुआ, जाइये जल्दी तैयार हो क्र आइये.

फिर बुआ भी वह से उठ क्र अपने कमरे मई तैयार होने चली गई.

लल्लू वह से फिर रसोई मई गया तो वह चारो महिलाये खाना बनाने मई लगी हुई थी.

काजल- क्या हुआ. भूख लगी है क्या.

लल्लू गर्दन हिला दिया.

काजल- अभी तो थोड़ा समय लगेगा.

रागिनी- दूध पीला दे तब तक.

ऋतू- तुम्हारा भी तो बीटा है. तू hi पीला दे.

काजल- है दीदी. आज आप hi पीला दो. जा बीटा पि ले मझली काकी का आज.

लल्लू- कोई बात नहीं. कोई भी दे दो. लेकिन बुआ को क्या देंगे फिर आप लोग.

शालिनी- तब तक तो बन जाएगा.

लल्लू- ठीक है फिर मुझे दूध hi दे दो.

ऋतू- दे दो रागिनी.

रागिनी- Mai...mai कहा से दू. मुझे अब थोड़े न आता है.

लल्लू- अच्छा तो आप सब मिल क्र मेरा पोपट बना रही है. काकी देना है तो दे दो इतना नखरा क्यू. ये रखा तो है बर्तन मई.

लल्लू पीछे से रागिनी क गले लगता बोलै.

रागिनी का तो रोये खड़े हो गए लल्लू क पीछे से चिपकने से.

फिर रागिनी काकी गिलास मई दूध निकल क्र लल्लू को दे दी.

शालिनी- बताओ यहाँ तजा दूध मिलने वाला था और ये बसी दूध पिने जा रहा है.

लल्लू- तजा hi तो है ये. अभी दे गया होगा न.

शालिनी- दूध वाले रात का दूध मिला देते है सुबह क दूध मई.

लल्लू- फिर तजा कहा से लेट अभी आप.

शालिनी- मई नहीं लती. छोटी दीदी लती तेरे लिए तजा दूध.

लल्लू- अच्छा. मेरे लिए इतना पदेशन होने की कोई जरुरत नहीं है. मई यही पि लूंगा.

फिर लल्लू दूध पिता हुआ वह से बहार आँगन मई आ गया.

तभी बुआ भी तैयार हो क्र आ गई.

क्या लग रही थी इस वक्त बुआ. लल्लू तो बुआ को देखता hi रह गया. दूध का गिलास मुँह मई लगाने क बदले कही और चला गया और सारा दूध निचे गिर गया.

बुआ सब देख क्र मुसकुडती हुई आँखों से इसरा किया की क्या हुआ.

लल्लू भी हाथ की उंगलियों को दिखा क्र hi बता दिया की बहुत सुन्दर लग रही हो आप.

बुआ सरमाती हुई रसोई की और चली गई.

लल्लू बुआ को जाता हुआ पीछे से घर रहा था.

पीछे से उनके कमर क निचे कैसा हुआ वो साडी और उस मई से बुआ का वो पिछवाड़े का उभर कहर ध रहा था.

लल्लू तो अपना होश खो चूका था.

थोड़ी देर मई नास्ता क्र क दोनों बाजार को चल दिए

लल्लू- बुआ आज आप क़यामत लग रही हो. क्या प्लान है बाजार मई दंगे करवाना है क्या.

बुआ सरमाती हुई नजरे झुका क्र लल्लू क कंधे पर प्यार से एक मुक्का लगा दी.

लल्लू- बताओ न बुआ. आप इतनी सुन्दर कैसे हो.

बुआ- क्या कुछ भी बोलता है. मई कोई सुन्दर नहीं हु. मई तो अब बूढी हो गई हु.

लल्लू- कौन कहता है आप बूढी हो गई हो. अभी भी आप लड़कियों को पीछे छोड़ सकती हो. कोई भी अभी देखे आप को तो सोनम दीदी की छोटी बहन hi समझेगा आप को.

बुआ- ऐसा कुछ नहीं है. तू मुझे चने क जहर पर मत चढ़ा. मुझे पता है मई अब बूढी हो गई हु.

लल्लू- ठीक है तो अभी हम बाजार जा hi रहे है तो आज देख hi लेते है. अगर मई जीता तो जो मई बोलू आप वो करेंगी. और अगर मई हर गया तो जो आप बोलोगी वो मई करूँगा.

बुआ- ठीक है.

फिर लल्लू बाजार आ क्र सब से पहले अंकल क शॉप पर गया.

लल्लू- नमस्ते अंकल जी.

अंकल- आओ आओ. बताओ क्या सेबा करू.

लल्लू- अंकल कल पेमेंट नहीं लिए थे वो लोग. और मुझे कुछ और भी एक चाहिए था. तो इसीलिए आ गया आप क पास. उसका पेमेंट कितना करना है.

अंकल- बीटा वो एक वाला शॉप राहुल क शॉप क पास है मई एड्रेस बता देता हु तुम वही चले जाओ. उसे मेरा नाम बता देना. वही पेमेंट भी क्र देना और बांकी एक का भी आर्डर दे देना.

लल्लू- बहुत बढ़िया अंकल. कल मई आप को तकलीफ दे दिया था उसके लिए माफ़ कर दीजिये गए.

अंकल- ऐसा कुछ नहीं है बीटा. मई राहुल और तुम मई कोई फर्क नहीं समझता. तुम्हारा परिवार भी हमारा hi है. इस लिए ये सब बाटे करने का कोई मतलब नहीं है.

लल्लू- अच्छा अंकल अब इजाजत दीजिये.

अंकल- अरे ऐसे कैसे आये हो तो जरा बैठो. कुछ नास्ता या जूस पि क्र जाना.

लल्लू- नहीं नहीं अंकल. अभी घर से नास्ता क्र क आया हु. ये सब फिर कभी.

फिर लल्लू वह से राहुल क शॉप पर आ गया.

अभी वो शॉप खुला hi था.

लल्लू गाड़ी साइड मई कड़ी क्र बुआ क साथ अंडर चला गया.

लल्लू- भैया कैसे हो आप.

राहुल- ओह्ह भाई आया है आज यहाँ. बहुत बढ़िया. तुम ने दिल खुश क्र दिया.

लल्लू- वो तो आना hi था. अभी अंकल क पास से आ रहा हु. मुझे कुछ और एक चाहिए.

राहुल- चलो फिर ले आते है. वैसे ये कौन है.

लल्लू- ye...ye मेरी वाइफ है.

राहुल- वाओ… बहुत खूबसूरत है भाभी जी. तो ये है जिन को तुम घर से गए थे तो सदी क्र क लाये. सुना था सुनील चाचा से की काफी खूबसूरत है. आज देख भी लिया. सुच मई यार तुम बड़े किस्मत वाले हो.

बुआ की और देख क्र.

नमस्ते भाभी जी. आप की कोई बहन नहीं है क्या. अगर हो तो प्लस मेरा भी उद्धार करवा दो.

बुआ तो कड़ी कड़ी ब्लश करती जा रही थी.

राहुल लल्लू से.

" यार तुम भाभी को यहाँ लाये हो और अब बता रहे हो. आइये भाभी जी आप लोग यहाँ बैठिये."

राहुल सोफे की और इसरा करता हुआ बोलै.

लल्लू- भैया उस एक वाले शॉप पर भी तो जाना है न.

राहुल- अभी नहीं खुला है वो. पहले मुझे मेरे भाभी का सेबा करने दे. तुम ने आज दिल खुश क्र दिया इनको ला क्र.

फिर राहुल एक लड़के को बुला क्र उसे सब क लिए नास्ता लेन को बोल दिया.

लल्लू- अरे भैया क्या क्र रहे हो. हम सब अभी घर से नास्ता क्र क hi आये है.

राहुल- तू चुप रह. आज पहली बार तो आई है यहाँ भाभी और ऐसे hi चला जाने दू. पापा को पता चला तो वो मुझे घर से निकल देंगे.

लल्लू- ऐसा कुछ नहीं है भैया. आप खामखा इतना पदेशन हो रहे हो.

राहुल- मई कुछ नहीं सुनूंगा. भाभी आप कहिये इसको चुप रहे

बुआ तो राहुल को यु बार बार भाभी भाभी करता देख क्र सरम से वो गाड़ी जा रही थी.

बुआ का पूरा चेहरा सरम से लाल हो गया था.

लल्लू बुआ को ले क्र सोफे पर आ गया. दोनों वह बैठ गए.

अब एक दो क्र क कस्टमर आने लगे थे. जिसे राहुल अपने लड़को को बोल दिया अटेंड करने को. एक लड़के को काउंटर पर खड़ा क्र दिया और खुद लल्लू और बुआ क पास आ क्र बैठ गया.

तभी वो लड़का जो नास्ता लेने गया था वो भी तीन प्लेट नास्ता ले आया.

फिर तीनो मिल क्र नास्ता किये.

लल्लू- अब तो आप खुश हो न.

राहुल- न अभी कहा. अभी बांकी है.

लल्लू- अब क्या रह गया है.

तभी एक लड़का तीन गिलास जूस ले क्र आ गया

राहुल- ये रह गया था.

लल्लू- भैया क्या क्र रहे हो. कहा रखूँगा इतना. पहले hi घर से नास्ता क्र क आये थे

राहुल- तुम चुप रहो. ये भाभी क लिए है.

लल्लू- फिर ठीक है.

बुआ- क्या मई क्या इतनी पेटू लगती हु.

बुआ सरमाती हुई बोली.

राहुल- अच्छा ऐसा करते है एक एक गिलास सब ले लेते है.

लल्लू- आप नहीं मानोगे न.

राहुल- nahi:D

फिर लल्लू एक गिलास ले लिया और जैसे तैसे पि गया.

एक गिलास राहुल उठा क्र बुआ को पकड़ा दिया.

बुआ भी न न करती रह गई लेकिन राहुल क जिद्द क आगे हारना पड़ा.

फिर दूसरा गिलास राहुल खुद खली क्र दिया.

बुआ पूरा नहीं पि पाई.

लल्लू- अच्छा अब क्या वो एक वाला आ गया होगा.

राहुल- है बस भाभी का गिलास खली होते hi हम चलते है वह.

बुआ- ओने थर्ड पि क्र, अब मेरे से नहीं पिया जाएगा.

लल्लू- छोड़ दीजिये.

राहुल- क्या हुआ अच्छा नहीं था क्या.

लल्लू- भैया, सब बहुत अच्छा था लेकिन मई बता रहा हु न. हम लोग अभी घर से नास्ता क्र क आये थे फिर आप यहाँ इतना सारा नास्ता मंगवा लिए फिर ये जूस. इतना जगह भी तो हो पेट मई.

राहुल- ठीक है फिर चलिए एक वाले क पास चले.

वो तीनो वह से एक क शॉप पर जा क्र और एक का आर्डर क्र दिए और सारा पेमेंट करने क बाद वापस राहुल क साथ आ गए.

लल्लू- अच्छा ये एक काम तो हो गया. अब मुझे मैडम क लिए कुछ कपडे दिखा दो भैया.

राहुल- क्या बात है. क्या बात है. आ जाओ मई दिखता हु.

फिर राहुल बुआ और लल्लू को कुछ अच्छे कपडे दिखाए जिन मई से लल्लू ने एक हैंड एम्ब्रायडरी किया हुआ साडी लिए और एक सूट्स लिया जो फिटिंग करनी थी.

बुआ लल्लू क कपडे की चॉइस देख क्र बहुत खुश हुई. उसे भी ये दोनों कपडा बहुत पसंद आये थे.

लल्लू- भैया अब कुछ स्पेशल है तो एक दो वो भी दिखा दो.

राहुल मुसकुडता हुआ गर्दन है मई हिला क्र वह से उठ क्र दूसरे रैक क पास आया और उन मई से दो बंडल ले क्र इन लोगो क पास आ गया.

राहुल- ले भाई ये कुछ स्पेशल है. जो तुम्हे पसंद आएगा.

राहुल उस मई से एक बंडल को खोलता हुआ बोलै.

वह लल्लू ने बुआ क लिए एक यूरोपियन व् नाक वाली बहुत खूबसूरत ड्रेस लिया फिर एक ब्लैक कलर मई धनुष कलर वाली ड्रेस लिया और एक रात को पहने क लिए फीते और नेट वाली ड्रेस ख़रीदा.

बुआ इन ड्रेस को देख क्र उन्हें लल्लू पर बड़ा प्यार आया.

काउंटर पर आ क्र लल्लू पैसे देने लगा तो राहुल तैयार hi नहीं हुआ पैसे लेने से.

राहुल- ये क्या क्र रहा है. ये मई अपनी भाभी क लिए दे रहा हु.

लल्लू- भाई ये गलत बात है. ये आप का घर नहीं शॉप है. यहाँ कुछ भी मुफ्त देना अच्छी बात नहीं है. आप भले प्रॉफिट न लो लेकिन डैम का डैम तो ले hi लो.

राहुल- नहीं. बिलकुल नहीं.

लल्लू- फिर तो इसका मतलब आप चाहते हो की आगे से मई यहाँ औ hi नहीं

राहुल- पागल हो गया है क्या. भाभी आप समझाओ इसे. मई अगली बार से पक्का पैसे लिया करंगा. लेकिन इस बार नहीं लूंगा.

लल्लू- फिर तो ये कपडा आप रख लो. मई फिर अंकल क पास hi जा क्र ले लूंगा

बुआ- अरे आप लोग लड़िये मत. ये सही बोल रहे है. आप प्रॉफिट मत लीजिये लेकिन आप का जो पैसा लगा है इस मई वो ले लीजिये. बांकी हम ने यहाँ आ क्र नास्ता किया जूस पिया. फिर आएंगे तो फिर आप क यहाँ मेहमान नवाजी का लिफ्ट उठाएंगे.

फिर बुआ लल्लू क हाथ से पैसे ले क्र काउंटर पर दे दी

राहुल अभी भी पैसा नहीं ले रहा था लेकिन बुआ क जबरदस्ती करने पर ले लिया

फिर ये दोनों वह से बहार आ क्र गाड़ी मई बैठ गए.

लल्लू गाड़ी आगे बढ़ा दिया.

लल्लू- अब कहा चले.

बुआ- मुझे क्या पता.

लल्लू गाड़ी ले क्र सहर से बहार आ गया.

मां क यहाँ जाते वक्त लल्लू इधर एक खूबसूरत पार्क देखा था.

लल्लू उसी पार्क को ढूंढता हुआ आगे बढ़ रहा था.

अभी सहर से थोड़ा hi आगे बढ़ा था की तभी दो कार आगे आ क्र लल्लू क गाड़ी का रास्ता रोक लिया.

लल्लू जल्दी से ब्रेक लगा क्र कार रोक दिया.

बुआ- ये लोग कौन है. हमारा रास्ता क्यू रोक दिया है.

लल्लू- आप सीट क निचे झुक क्र चुप जाइये मई देखता हु इन्हे.

बुआ- नहीं नहीं. तुम बहार मत निकलो. गारी पीछे ले लो. ये लोग बहुत खतरनाक लग रहे है

तभी आगे वाले दोनों गाड़ी का दरवाजा खोल चार लोग निकले. सब क हाथ मई कोई न कोई हथियार था.

लल्लू- आप यही बैठी रहना. लल्लू गाड़ी को लॉक क्र दिया निकल क्र.

लल्लू- क्यू भाई लोग. रास्ता क्यू रोक लिया मेरा.

एक बाँदा- आज तेरे से हिसाब चुकता करना है अपना.

लल्लू देखा की ये बोलने वाला एक गारी मई दरवाजा खोले लल्लू की और अपनी लाल लाल आँखों से घर रहा था.

लल्लू- आँखे बंद क्र ले रे. मेरे जैसे बच्चे को दर लग रहा है.

तब तक उसके चार बन्दे लल्लू को चारो और से घेर चुके थे.

" इसे बता की हम से जो दुश्मनी मोल लेता है भगवन भी उस से रूत जाते है."

वही जो गारी मई बैठा था. वो अपने बन्दों से बोलै.

लल्लू को जो चार घेरे हुए थे उन मई से एक चाकू ले क्र झपटा लल्लू पर.

लल्लू सतर्क था.

वो झुके दे क्र अपने आप को बचा लिया. वो चाकू वाला अपने झोक मई आगे बढ़ने लगा तो लल्लू भी उसके पिछवाड़े पर एक भरपूर लात लगा दिया.

वो चाकू वाला ुरता हुआ रोड क देविडोर से जा टकराया. उसका सर सीधा जा क्र देविडोर क पत्थर से जा लगा. जिस से तरभुज की तरह फ़ैल गया उसका सर.

उस बन्दे का हालत देख क्र बांकी क तीनो दर गए.

लल्लू- भाग जा अभी भी मौका है.

तभी गोली चलने की आवाज आई और लल्लू एक तरफ को खड़े खड़े झुकता चला गया.

गोली लल्लू क कपडे को छूटा हुआ वही दूसरी और खड़े एक गुंडे क गले मई जा घुसा.

उस बन्दे क गले से खून की एक पतली सी पिचकारी निकल गई.

सभी खड़े भौचक्का रह गए.

गोली लगनी थी लल्लू को और लग गई उस क अपने आदमी को hi.

लल्लू को ये मौका सही लगा और वही पास मई खड़े एक को सर पकड़ क्र जोर से घुमा दिया.

वो बाँदा खड़ा था पूरब को मुँह क्र क. अब वैसे hi उसके गले से उप्पेर का हिस्सा पश्चिम मई घूम गया.

अब सिर्फ एक बसहा था जिस क हाथ मई लोहे का पाइप था.

वो पाइप घुमा क्र लल्लू क सर का निशाना बनाया और जोर से हाथ चला दिया.

लल्लू उसके पाइप को अपने एक हाथ से रोक क्र दूसरे हाथ से उसके गले मई दो ऊँगली से सीधी तीर की तरह मर दिया.

वो सर आगे को झुकाये hi बैठता चला गया.

लल्लू घूम क्र उस गोली चलने वाले को देखा तो वो गारी से निकल क्र सामने बन्दुक तने खड़ा था.

उसके साथ चार और भी लोग थे. जिन क हाथो मई भी गैन था.

लल्लू- क्यू मरने पर तुला हुआ है. जा न भाग जा यहाँ से.

बॉस- अभी पता चल जाएगा किस की मौत आई है.

लल्लू मरे हुए उसके साथियो को दिखा क्र.

लल्लू- इन लोगो से भी सबक नहीं मिला तुम्हे.

तभी उन मई से दो लोग एक साथ गोली चला दिया.

लल्लू बचते बचे एक गोली क चपेट मई आ hi गया.

उसके कंधे क मांश को उधेरती हुई गोली निकल गई.

लल्लू अपना कन्धा पकडे एक और को झुक गया.

उसके कंधे से खून निकलने लगा जो उसके एक हाथ को पूरा भीगा दिया था.

लल्लू आँखे बंद किये हुए अपने दर्द को बर्दास्त क्र रहा था.

तभी उसके सर पर हवा क दवाब का एहसास हुआ

लल्लू सेकंड क सौवे हिस्से मई hi वही और झुक गया.

आँख खोल क्र देखा. तो एक हॉकी स्टिक उसके सर क उप्पेर से जा रहा था.

लल्लू अब अपने बैश मई नहीं था. उसकी आँखों मई अब कलर बदलना चालू हो गया था.

टैटू ग्रीन कलर मई बन रहा था जो उसके कंधे पर खून को भी लाल से ग्रीन बना रहा था.

धीरे धीरे लल्लू का कंधे का जख्म भरने लगा और फिर वो पूरा सही हो गया.

अभी लल्लू की आँखों मई एक पूरा रेनबो बना हुआ था.

आसमान जो की बिलकुल साफ़ था अचानक से घने काळा बदल छ गए. बिजलिया कड़कने लगी. चारो और अँधेरा छ गया. बदलो मई छितिज पर कई रेनबो बन गया था.

अद्भुत दृश्य था ये.

लल्लू हाथ की दोनों मुट्ठिया भींच रखा था गुस्से से. उसकी आँखे चमक रही थी इस समय.

लल्लू आगे बढ़ता हुआ उन गुंडों क पास पंहुचा.

लल्लू- बहुत बड़ी गलती क्र दी तूने. मेरे से पन्गा. अपने बाप को छोड़ना सीखा रहा था.

गुंडे तो लल्लू का ये रूप देख क्र दर से कम्प गए. अपने सूखे होठो पर जीभ फिर क्र उसे गिला क्र रहे थे वो लोग.

इधर गाड़ी मई बुआ को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे. दर और घबराहट से बुआ का बुरा हाल था. हाथ पेअर कम्प रहे थे उनके.

तभी बुआ गोली चलने को आवाज सुनी. बुआ घबरा क्र गिलास निचे क्र सर निकल क्र देखि तो लल्लू को कन्धा पकडे दर्द से बेहाल दिखी.

बुआ की आँखों से आँशु बहने लगा. वो कंपते हाथो से कार का दूर खोलने की कोसिस करने लगी लेकिन अभी उनके हाथ कम्प रहे थे. जैसे कोई जान hi नहीं हो उस मई. दूर खुल hi नहीं रहा था उन से.

बुआ रोटी हुई अपना सर पकड़ क्र वही सीट पर बैठी रोने लगी.

उन्हें बहुत रोना आ रहा था की लल्लू क पास नहीं जा प् रही है वो. कोई मदद नहीं कर प् रही है. क्या होगा उसका. इतने गुंडे है वह और वो अकेला. पता नहीं वो लोग क्या चाहते है उस से.

लल्लू एक गुंडे का गिरेबान पकड़ क्र अपने पास खींच लिया और उस के आँखों मई अपनी आँखे गदा दी.

लल्लू की आँखों से एक स्पार्क निकला और उस गुंडे क दोनों आँखों मई समां गया.

वो चिल्लाता हुआ अपनी आँख पकड़ क्र तड़पते हुए लाश मई बदल गया

इन लोगो का बॉस जो अभी क इस दृश्य को देख क्र सुन्न पद गया था वो अचानक अपने बन्दे की चीख सुन क्र प्रेजेंट मई आ गया. वो गन उठा क्र लल्लू को निशाना लगा दिया.

लल्लू जब उसकी और देखा तो अपने तरफ गन घुमा देख क्र लल्लू घर क्र उस गन को देखा और वो गन पिघल गया जैसे माँ का बना हो.

वो बॉस कभी अपने गन को देखे तो कभी लल्लू को.

वो झपट क्र अपने साथी क हाथ से गन लिया और झटके से लल्लू की और क्र उस पर साडी गोलिया खली क्र दी.

बॉस गोलिया खली क्र जब गौर किया तो लल्लू अभी भी खड़ा हो था. बॉस को लगने लगा जैसे किसी भूत से पला पड़ा है.

अब उसे दर लगने लगा था. गोली का जिस को असर नहीं है वो कोई इन्शान तो हो नहीं सकता.

लल्लू हाथ आगे क्र सभी गोली उसकी और उछाल दिया.

सभी गुंडे दर क्र पीछे हो गए. पीछे होने क चक्कर मई दो गुंडे तो लुढ़क hi गए.

लल्लू झटके से आगे बढ़ा और पालक झपकने से पहले बॉस क बिलकुल सामने था.

लल्लू- क्या नाम है तेरा.

बॉस- होठो पर जीभ फिर क्र रह गया. हलक से कुछ निकला hi नहीं.

लल्लू- मैंने पुझा क्या नाम है तेरा.

लल्लू की गुर्राती आवाज सुन क्र उस बॉस को अपने रीढ़ की हड्डियों मई सिहरन महसूस हो रहा था.

लल्लू झटके से उसका गाला पकड़ लिया.

लल्लू- आखरी बार पूछ रहा हु. क्या नाम है तेरा.

बॉस- Ch..ch..Champak.

लल्लू उसका गर्दन पकडे hi पीछे को मोर दिया सीधा.

बॉस का रीढ़ टूट गया. वो पीछे को झुकता जमीं से लग गया उसका सर.

लल्लू बांकी क उसके साथियो की और देखा तो सब दर से कम्प रहे थे हाथ जोड़े हुए.

लल्लू- अगर फिर कभी दिख गए तो वो दिन आखरी होगा तुम लोगो का. भाग जा यहाँ से सब बॉडीज को ले क्र.

वो सभी गुंडे गिरते पड़ते सभी को गारी मई ठूसने लगे जल्दी जल्दी.

अब लल्लू का गुस्सा संत हो गया था.

एक बार फिर से मौषम भी साफ़ हो गया और चारो और धुप फ़ैल गया.

लल्लू भी अपना कपडा साफ़ करता हुआ अपने गाड़ी की और चल दिया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 60.

लल्लू गाड़ी को अनलॉक करता हुआ उस का दरवाजा खोल क्र बैठ गया.

बुआ अभी भी अपने सर पर हाथ रखे सर झुकाये रोये जा रही थी.

लल्लू- बुआ मई ठीक हु. रो क्यू रही हो आप.

बुआ क सर पर हाथ रख क्र लल्लू बोलै.

बुआ जल्दी से सर उठा क्र लल्लू की और देखि.

लल्लू को अपने सामने प् क्र बुआ उसे पकड़ क्र फुट फुट क्र रोने लगी.

लल्लू बुआ को अपने बहो मई ले क्र उन्हें चुप करने लगा.

बुआ- m..m..mujhe la...laga जैसे mai...mai तुम्हे भी खो दूंगी.

लल्लू- मुझे कुछ नहीं हुआ है. वो लोग डरपोक थे. दर क्र भाग गए.

बुआ लल्लू क पुरे सरीर को टटोल क्र देखने लगी की कही चोट तो नहीं लगा है.

लल्लू अपने हाथो से बुआ क चकहरे पर फैले आंशुओ को साफ़ क्र दिया

बुआ बदस्तूर रोये जा रही थी.

लल्लू- अब चुप हो जाइये प्लस. मई आ गया हु न बुआ. चलिए अब पार्क चलते है.

बुआ- नहीं नहीं. अब तू सीधा घर ले चल. अब और कही नहीं जाएंगे.

लल्लू- ऐसे कैसे. हम लोग पार्क जाने को निकले है. तो पार्क hi जाएंगे. बस यही है.

लल्लू बुआ क माथे पर चुम क्र गाड़ी स्टार्ट क्र आगे बढ़ा दिया गाड़ी पार्क की और

पार्क पहुंच क्र लल्लू गाड़ी एक साइड मई लगा क्र बुआ क साथ उतर गया और फिर उनका हाथ पकड़ क्र पार्क क अंडर आ गया.

इस समय पार्क मई ज्यादा लोग नहीं थे.

अभी दोपहर का समय था. लल्लू बुआ को ले क्र एक पैर क निचे लकड़ी क बेंच पर आ क्र बैठ गया.

लल्लू- बुआ मैंने आज आप को रुला दिया. सॉरी.

लल्लू कान पकड़ता बोलै.

बुआ- नहीं नहीं. इस मई तुम्हारी क्या गलती है. वो तो वो गुंडे अचानक से आ गए थे. तुम क्यू सॉरी बोलते हो.

लल्लू- वैसे बुआ मेरी बात सुच हुई न.

बुआ- कौन सी बात.

लल्लू- यही की आप अभी भी एक लड़की की तरह hi लगती हो. जो भी देखेगा यही कहेगा की आप 20-22 शाल से ज्यादा की नहीं हो.

बुआ लल्लू की बात सुन क्र उसे शॉप मई हुई घटना याद आ गई. वो शर्मा क्र मुँह झुका क्र मुसकुडने लगी.

बुआ- tum...tum न मर खाओगे मेरे हाथ से.

लल्लू- सॉरी, ऐसा जुल्म न कीजियेगा. ककी आप को चोट लग जाएगा.

बुआ- ऐसा किस ने कहा की मरने वाले को चोट लगता है. मर कहने वाले को नहीं.

लल्लू- अब फूलो से भी किसी को चोट लगा है क्या. आप अपने हाथ देखिये कितने मुलायम है फूल जैसे. और मेरा बदन ठोस पत्थर जैसा. तो आप को hi तो चोट लग जाएगा

बुआ- इतने भी नाजुक नहीं है मेरे हाथ. किसी दिन लग गया न तो रोटा रहेगा.

लल्लू- घर मई hi मारिएगा, बहार नहीं.

बुआ- क्यू बहार क्यू नहीं.

लल्लू- ककी बहार लोग कहेंगे की देखो अपने बीबी से मर खा रहा है.

बुआ- चुप नालायक. बड़ा आया बीबी बनाने वाला. वो तो वही दुकान मई मरती लेकिन छोड़ दी की खली पिली सब के सामने तुम्हारा इज्जत का फालूदा हो जाता.

बुआ सरमाती हुई हुस क्र बोली.

लल्लू- काश आप की सदी न हुई होती.

बुआ- क्यू ऐसा क्यू चाहता है तू

लल्लू- मई सदी क्र लेता न.

बुआ शर्मा क्र एक थप्पड़ लगाई लल्लू क कंडे पर.

लाल झट से बुआ का हाथ पकड़ क्र उसे चूमते हुए.

लल्लू- बोलै था न आप को चोट लग जाएगा. मेरा सरीर इतना सख्त है और आप का कोमल. ज्यादा जोर से तो नहीं लगा.

बुआ लल्लू को बहो मई भर क्र इस के मात को चूमती हुई बोली.

बुआ- अब ज्यादा नौटंकी करने की जरुरत नहीं है. चलो अब घर चले.

लल्लू- बुआ आप खुश तो है न.

बुआ- है मई बहुत बहुत खुस हु.

लल्लू- अच्छी बात है.

फिर दोनों वह से उठ खड़े हुए और पार्क मई घूमते हुए बहार की और चल दिए.

तभी एक झरि क पीछे से कराहने की आवाज आई.

बुआ- लगता है पीछे झरि मई कोई घायल हो गया है. चलो चल क्र देखते है.

लल्लू का हाथ पकड़ क्र बुआ खींचती हुई झाड़ियों क उस तरफ आने लगी

अभी थोड़ा hi आगे आई थी की फिर से वैसा hi आवाज आया.

बुआ लम्बे डेग भर्ती लल्लू को खींचती जा रही थी.

वह जा क्र देखती है तो बुआ सरमसर हो क्र नजरे फेर दूसरी और घूम जाती है.

वह एक जोड़ा अपने प्रेम मई मगन था.

लल्लू मंद मंद मुस्काने लगा बुआ को देख क्र

बुआ लल्लू को छोड़ क्र वह से भाग आई.

लल्लू- क्या हुआ बिना बचाये आ गई वह से.

बुआ- तुम्हे पता था तो पहले क्यू नहीं बताया. तुम कब से ऐसे गंदे जगह आने लगे हो.

लल्लू- मई आज पहली बार hi आया हु. मां क यहाँ जाते वक्त इस पार्क को देखा था रोड से. आज सोचा आप को घुमा लौ.

बुआ- अब चल यहाँ से. कितने गंदे लोग है यहाँ पर. किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा.

लल्लू- यही सोचेगा की ललित अपनी पत्नी क साथ पार्क मई घूमने आया था.

बुआ- बड़ा आया पत्नी वाला. इस पत्नी क नखरे बहुत है. तुम से नै उठाया जाएगा इसके नखरे.

लल्लू- ऐसी बीबी क तो मई लाखो नखरे उठा लू.

बुआ- ये सब सिर्फ बाटे है.

लल्लू बुआ का हाथ पकड़ क्र रोक लिया और उनके आँखों मई देखते हुए बोलै.

लल्लू- अगर यकीं नहीं तो आजमा क्र देख लो आप. आप क लिए मई अपनी जान तो दे नहीं सकता ककी वो तो आप hi हो बांकी आप जो भी बोलो.

बुआ लल्लू क आँखों मई hi खो गई.

दोनों एक दूसरे क आँखों मई देखते हुए खोये खड़े थे.

कब दोनों मदहोश हो क्र अपने अपने होठ एक दूसरे से चिपका दिए उन्हें पता भी नहीं चला.

बुआ आँखे बंद किये लल्लू क सर को पीछे से पकड़ क्र बहुत प्यार से उसके होठो को चूस रही थी.

लल्लू बुआ क चेहरे को दोनों हाथो मई पकड़ क्र उनका भरपूर साथ दे रहा था.

दोनों की जब ससे उखाड़ने लगी तो दोनों एक दूसरे से अलग हुए.

बुआ नजरे झुकाये लम्बी लम्बी ससे लेती शर्मा क्र गाड़ी की और भाग गई दौर क्र.

लल्लू पीछे से खुसी से मुसकुडता हुआ लम्बे डेग भरता गाड़ी क पास आ गया.

बुआ लल्लू की और अपनी पीठ किये कड़ी थी.

लल्लू गाड़ी अनलॉक क्र दिया तो बुआ झट से गाड़ी मई बैठ गई.

लल्लू हस्ता हुआ बुआ को देखता ड्राइविंग सीट पर बैठ गया.

हरी स्टार्ट क्र दोनों एक बार फिर से बाजार की और वापस चल दिए.

लल्लू- बाजार से कुछ और लेना है.

बुआ- नहीं अब कुछ नहीं लेना है. अब चलो एक वाला भी अब तक पहुंच न गया हो.

लल्लू- उसका फिक्र आप मत कीजिये वो चार बजे तक जाएगा घर.

बुआ- बस एक ड्रेस ले लो अपने लिए. ये कपडा फैट गया है तुम्हारा.

बुआ अभी तक अपना लल्लू से नजरे मिलाने से बच रही थी.

लल्लू एक रेडीमेड क दुकान पर गाड़ी रोक दिया.

फिर वह से बुआ एक जींस पेण्ट और एक t-shirt खरीद क्र लल्लू को दे दी अपनी पसंद से.

लल्लू वो ले क्र वही चेंजिंग रूम मई जा क्र पहन लिया.

लल्लू- कुछ पेट पूजा कर ले यहाँ पर.

बुआ- नहीं नहीं. राहुल hi इतना खिला दिया है की रात तक कुछ भी नहीं खाना.

लल्लू- एक जूस hi पि लीजिये न प्लस..

बुआ- ऐसे क्यू बोल रहे हो. ठीक है जूस पि लेंगे दोनों आदमी.

लल्लू- गुड.

फिर एक जूस क शॉप से लल्लू दोनों क लिए जूस ले आया. बुआ गाड़ी मई hi बैठी थी.

दोनों जूस पि क्र वह से घर को चल दिए.

घर आ क्र दोनों अपने कमरे मई आ गए.

लल्लू बुआ क सरे कपड़ो का पैकेट ले आया था गाड़ी से.

दोनों फ्रेश हो क्र बहार आ गए.

लल्लू दालान पर दादू क पास चला गया. वही दादू क पास बैठा उन से बाटे क्र रहा था की एक वाला अपने गाड़ी मई सारा सामान ले क्र आ गया.

फिर उस क साथ लग क्र लल्लू सभी कमरों मई एक लगवा दिया.

सब फिटिंग करते करते रात क 10 बज गए.

फिर खा पि क्र सभी एक मई सोने क उत्साह मई अपने अपने कमरों मई चले गए.

बुआ लल्लू क पास hi आई थी सोने को.

ड्रेस बदल क्र दोनों अपना अपना रात मई पहनने क कपडे पहन क्र बीएड पर आ गए.

लल्लू- बुआ ये तो अच्छी बात नहीं है.

बुआ- क्या अच्छी बात नहीं है.

लल्लू- मैंने कितने प्यार से आप क लिए ड्रेस ख़रीदा था और आप ने वो पहना hi नहीं. यही पुराण वाला पहन लिया.

बुआ- ये भी नया hi है. यहाँ आने से पहले ख़रीदा था.

लल्लू- लेकिन आज जो ख़रीदा था वो क्या रखने क लिए ख़रीदा था.

बुआ- ये मुझे कैसे पता होगा. तुम ने ख़रीदा था तो ये बात तुम्हे hi पता होगा न.

लल्लू मुँह फुला क्र दूसरी और घूम क्र सो गया.

बुआ थोड़ी देर लेती रही फिर उठ क्र वो ड्रेस बदल क्र आज जो खरीदारी की थी उस मई से निघटजोन निकल क्र पहन ली.

बुआ लल्लू क पास आ क्र बीएड पर बैठ गई.

बुआ- लो देखो मैंने पहन लिया तुम्हारा वाला.

लल्लू आँखे बंद किये सोया था.

बुआ लल्लू को हिला क्र उसे जगती फिर से बोली.

"अब देख भी लो. मैंने पहन लिया है."

लल्लू अभी भी सोया रहा.

बुआ थोड़ी देर देखती रही फिर लल्लू क उप्पेर झुक क्र उसके गाल को काट ली

लल्लू- ाःह, ये कैसे उठा रही है आप.

ाःह अभी भी दर्द क्र रहा है. जंगली बिल्ली…

बुआ- अब चल यहाँ से. कितने गंदे लोग है यहाँ पर. किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा.

लल्लू- यही सोचेगा की ललित अपनी पत्नी क साथ पार्क मई घूमने आया था.

बुआ- बड़ा आया पत्नी वाला. इस पत्नी क नखरे बहुत है. तुम से नै उठाया जाएगा इसके नखरे.

लल्लू- ऐसी बीबी क तो मई लाखो नखरे उठा लू.

बुआ- ये सब सिर्फ बाटे है.

लल्लू बुआ का हाथ पकड़ क्र रोक लिया और उनके आँखों मई देखते हुए बोलै.

लल्लू- अगर यकीं नहीं तो आजमा क्र देख लो आप. आप क लिए मई अपनी जान तो दे नहीं सकता ककी वो तो आप hi हो बांकी आप जो भी बोलो.

बुआ लल्लू क आँखों मई hi खो गई.

दोनों एक दूसरे क आँखों मई देखते हुए खोये खड़े थे.

कब दोनों मदहोश हो क्र अपने अपने होठ एक दूसरे से चिपका दिए उन्हें पता भी नहीं चला.

बुआ आँखे बंद किये लल्लू क सर को पीछे से पकड़ क्र बहुत प्यार से उसके होठो को चूस रही थी.

लल्लू बुआ क चेहरे को दोनों हाथो मई पकड़ क्र उनका भरपूर साथ दे रहा था.

दोनों की जब ससे उखाड़ने लगी तो दोनों एक दूसरे से अलग हुए.

बुआ नजरे झुकाये लम्बी लम्बी ससे लेती शर्मा क्र गाड़ी की और भाग गई दौर क्र.

लल्लू पीछे से खुसी से मुसकुडता हुआ लम्बे डेग भरता गाड़ी क पास आ गया.

बुआ लल्लू की और अपनी पीठ किये कड़ी थी.

लल्लू गाड़ी अनलॉक क्र दिया तो बुआ झट से गाड़ी मई बैठ गई.

लल्लू हस्ता हुआ बुआ को देखता ड्राइविंग सीट पर बैठ गया.

हरी स्टार्ट क्र दोनों एक बार फिर से बाजार की और वापस चल दिए.

लल्लू- बाजार से कुछ और लेना है.

बुआ- नहीं अब कुछ नहीं लेना है. अब चलो एक वाला भी अब तक पहुंच न गया हो.

लल्लू- उसका फिक्र आप मत कीजिये वो चार बजे तक जाएगा घर.

बुआ- बस एक ड्रेस ले लो अपने लिए. ये कपडा फैट गया है तुम्हारा.

बुआ अभी तक अपना लल्लू से नजरे मिलाने से बच रही थी.

लल्लू एक रेडीमेड क दुकान पर गाड़ी रोक दिया.

फिर वह से बुआ एक जींस पेण्ट और एक t-shirt खरीद क्र लल्लू को दे दी अपनी पसंद से.

लल्लू वो ले क्र वही चेंजिंग रूम मई जा क्र पहन लिया.

लल्लू- कुछ पेट पूजा कर ले यहाँ पर.

बुआ- नहीं नहीं. राहुल hi इतना खिला दिया है की रात तक कुछ भी नहीं खाना.

लल्लू- एक जूस hi पि लीजिये न प्लस..

बुआ- ऐसे क्यू बोल रहे हो. ठीक है जूस पि लेंगे दोनों आदमी.

लल्लू- गुड.

फिर एक जूस क शॉप से लल्लू दोनों क लिए जूस ले आया. बुआ गाड़ी मई hi बैठी थी.

दोनों जूस पि क्र वह से घर को चल दिए.

घर आ क्र दोनों अपने कमरे मई आ गए.

लल्लू बुआ क सरे कपड़ो का पैकेट ले आया था गाड़ी से.

दोनों फ्रेश हो क्र बहार आ गए.

लल्लू दालान पर दादू क पास चला गया. वही दादू क पास बैठा उन से बाटे क्र रहा था की एक वाला अपने गाड़ी मई सारा सामान ले क्र आ गया.

फिर उस क साथ लग क्र लल्लू सभी कमरों मई एक लगवा दिया.

सब फिटिंग करते करते रात क 10 बज गए.

फिर खा पि क्र सभी एक मई सोने क उत्साह मई अपने अपने कमरों मई चले गए.

बुआ लल्लू क पास hi आई थी सोने को.

ड्रेस बदल क्र दोनों अपना अपना रात मई पहनने क कपडे पहन क्र बीएड पर आ गए.

लल्लू- बुआ ये तो अच्छी बात नहीं है.

बुआ- क्या अच्छी बात नहीं है.

लल्लू- मैंने कितने प्यार से आप क लिए ड्रेस ख़रीदा था और आप ने वो पहना hi नहीं. यही पुराण वाला पहन लिया.

बुआ- ये भी नया hi है. यहाँ आने से पहले ख़रीदा था.

लल्लू- लेकिन आज जो ख़रीदा था वो क्या रखने क लिए ख़रीदा था.

बुआ- ये मुझे कैसे पता होगा. तुम ने ख़रीदा था तो ये बात तुम्हे hi पता होगा न.

लल्लू मुँह फुला क्र दूसरी और घूम क्र सो गया.

बुआ थोड़ी देर लेती रही फिर उठ क्र वो ड्रेस बदल क्र आज जो खरीदारी की थी उस मई से निघटजोन निकल क्र पहन ली.

बुआ लल्लू क पास आ क्र बीएड पर बैठ गई.

बुआ- लो देखो मैंने पहन लिया तुम्हारा वाला.

लल्लू आँखे बंद किये सोया था.

बुआ लल्लू को हिला क्र उसे जगती फिर से बोली.

"अब देख भी लो. मैंने पहन लिया है."

लल्लू अभी भी सोया रहा.

बुआ थोड़ी देर देखती रही फिर लल्लू क उप्पेर झुक क्र उसके गाल को काट ली

लल्लू- ाःह, ये कैसे उठा रही है आप.

ाःह अभी भी दर्द क्र रहा है. जंगली बिल्ली…

बुआ- अब चल यहाँ से. कितने गंदे लोग है यहाँ पर. किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा.

लल्लू- यही सोचेगा की ललित अपनी पत्नी क साथ पार्क मई घूमने आया था.

बुआ- बड़ा आया पत्नी वाला. इस पत्नी क नखरे बहुत है. तुम से नै उठाया जाएगा इसके नखरे.

लल्लू- ऐसी बीबी क तो मई लाखो नखरे उठा लू.

बुआ- ये सब सिर्फ बाटे है.

लल्लू बुआ का हाथ पकड़ क्र रोक लिया और उनके आँखों मई देखते हुए बोलै.

लल्लू- अगर यकीं नहीं तो आजमा क्र देख लो आप. आप क लिए मई अपनी जान तो दे नहीं सकता ककी वो तो आप hi हो बांकी आप जो भी बोलो.

बुआ लल्लू क आँखों मई hi खो गई.

दोनों एक दूसरे क आँखों मई देखते हुए खोये खड़े थे.

कब दोनों मदहोश हो क्र अपने अपने होठ एक दूसरे से चिपका दिए उन्हें पता भी नहीं चला.

बुआ आँखे बंद किये लल्लू क सर को पीछे से पकड़ क्र बहुत प्यार से उसके होठो को चूस रही थी.

लल्लू बुआ क चेहरे को दोनों हाथो मई पकड़ क्र उनका भरपूर साथ दे रहा था.

दोनों की जब ससे उखाड़ने लगी तो दोनों एक दूसरे से अलग हुए.

बुआ नजरे झुकाये लम्बी लम्बी ससे लेती शर्मा क्र गाड़ी की और भाग गई दौर क्र.

लल्लू पीछे से खुसी से मुसकुडता हुआ लम्बे डेग भरता गाड़ी क पास आ गया.

बुआ लल्लू की और अपनी पीठ किये कड़ी थी.

लल्लू गाड़ी अनलॉक क्र दिया तो बुआ झट से गाड़ी मई बैठ गई.

लल्लू हस्ता हुआ बुआ को देखता ड्राइविंग सीट पर बैठ गया.

हरी स्टार्ट क्र दोनों एक बार फिर से बाजार की और वापस चल दिए.

लल्लू- बाजार से कुछ और लेना है.

बुआ- नहीं अब कुछ नहीं लेना है. अब चलो एक वाला भी अब तक पहुंच न गया हो.

लल्लू- उसका फिक्र आप मत कीजिये वो चार बजे तक जाएगा घर.

बुआ- बस एक ड्रेस ले लो अपने लिए. ये कपडा फैट गया है तुम्हारा.

बुआ अभी तक अपना लल्लू से नजरे मिलाने से बच रही थी.

लल्लू एक रेडीमेड क दुकान पर गाड़ी रोक दिया.

फिर वह से बुआ एक जींस पेण्ट और एक t-shirt खरीद क्र लल्लू को दे दी अपनी पसंद से.

लल्लू वो ले क्र वही चेंजिंग रूम मई जा क्र पहन लिया.

लल्लू- कुछ पेट पूजा कर ले यहाँ पर.

बुआ- नहीं नहीं. राहुल hi इतना खिला दिया है की रात तक कुछ भी नहीं खाना.

लल्लू- एक जूस hi पि लीजिये न प्लस..

बुआ- ऐसे क्यू बोल रहे हो. ठीक है जूस पि लेंगे दोनों आदमी.

लल्लू- गुड.

फिर एक जूस क शॉप से लल्लू दोनों क लिए जूस ले आया. बुआ गाड़ी मई hi बैठी थी.

दोनों जूस पि क्र वह से घर को चल दिए.

घर आ क्र दोनों अपने कमरे मई आ गए.

लल्लू बुआ क सरे कपड़ो का पैकेट ले आया था गाड़ी से.

दोनों फ्रेश हो क्र बहार आ गए.

लल्लू दालान पर दादू क पास चला गया. वही दादू क पास बैठा उन से बाटे क्र रहा था की एक वाला अपने गाड़ी मई सारा सामान ले क्र आ गया.

फिर उस क साथ लग क्र लल्लू सभी कमरों मई एक लगवा दिया.

सब फिटिंग करते करते रात क 10 बज गए.

फिर खा पि क्र सभी एक मई सोने क उत्साह मई अपने अपने कमरों मई चले गए.

बुआ लल्लू क पास hi आई थी सोने को.

ड्रेस बदल क्र दोनों अपना अपना रात मई पहनने क कपडे पहन क्र बीएड पर आ गए.

लल्लू- बुआ ये तो अच्छी बात नहीं है.

बुआ- क्या अच्छी बात नहीं है.

लल्लू- मैंने कितने प्यार से आप क लिए ड्रेस ख़रीदा था और आप ने वो पहना hi नहीं. यही पुराण वाला पहन लिया.

बुआ- ये भी नया hi है. यहाँ आने से पहले ख़रीदा था.

लल्लू- लेकिन आज जो ख़रीदा था वो क्या रखने क लिए ख़रीदा था.

बुआ- ये मुझे कैसे पता होगा. तुम ने ख़रीदा था तो ये बात तुम्हे hi पता होगा न.

लल्लू मुँह फुला क्र दूसरी और घूम क्र सो गया.

बुआ थोड़ी देर लेती रही फिर उठ क्र वो ड्रेस बदल क्र आज जो खरीदारी की थी उस मई से निघटजोन निकल क्र पहन ली.

बुआ लल्लू क पास आ क्र बीएड पर बैठ गई.

बुआ- लो देखो मैंने पहन लिया तुम्हारा वाला.

लल्लू आँखे बंद किये सोया था.

बुआ लल्लू को हिला क्र उसे जगती फिर से बोली.

"अब देख भी लो. मैंने पहन लिया है."

लल्लू अभी भी सोया रहा.

बुआ थोड़ी देर देखती रही फिर लल्लू क उप्पेर झुक क्र उसके गाल को काट ली

लल्लू- ाःह, ये कैसे उठा रही है आप.

ाःह अभी भी दर्द क्र रहा है. जंगली बिल्ली…

बुआ- अब चल यहाँ से. कितने गंदे लोग है यहाँ पर. किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा.

लल्लू- यही सोचेगा की ललित अपनी पत्नी क साथ पार्क मई घूमने आया था.

बुआ- बड़ा आया पत्नी वाला. इस पत्नी क नखरे बहुत है. तुम से नै उठाया जाएगा इसके नखरे.

लल्लू- ऐसी बीबी क तो मई लाखो नखरे उठा लू.

बुआ- ये सब सिर्फ बाटे है.

लल्लू बुआ का हाथ पकड़ क्र रोक लिया और उनके आँखों मई देखते हुए बोलै.

लल्लू- अगर यकीं नहीं तो आजमा क्र देख लो आप. आप क लिए मई अपनी जान तो दे नहीं सकता ककी वो तो आप hi हो बांकी आप जो भी बोलो.

बुआ लल्लू क आँखों मई hi खो गई.

दोनों एक दूसरे क आँखों मई देखते हुए खोये खड़े थे.

कब दोनों मदहोश हो क्र अपने अपने होठ एक दूसरे से चिपका दिए उन्हें पता भी नहीं चला.

बुआ आँखे बंद किये लल्लू क सर को पीछे से पकड़ क्र बहुत प्यार से उसके होठो को चूस रही थी.

लल्लू बुआ क चेहरे को दोनों हाथो मई पकड़ क्र उनका भरपूर साथ दे रहा था.

दोनों की जब ससे उखाड़ने लगी तो दोनों एक दूसरे से अलग हुए.

बुआ नजरे झुकाये लम्बी लम्बी ससे लेती शर्मा क्र गाड़ी की और भाग गई दौर क्र.

लल्लू पीछे से खुसी से मुसकुडता हुआ लम्बे डेग भरता गाड़ी क पास आ गया.

बुआ लल्लू की और अपनी पीठ किये कड़ी थी.

लल्लू गाड़ी अनलॉक क्र दिया तो बुआ झट से गाड़ी मई बैठ गई.

लल्लू हस्ता हुआ बुआ को देखता ड्राइविंग सीट पर बैठ गया.

हरी स्टार्ट क्र दोनों एक बार फिर से बाजार की और वापस चल दिए.

लल्लू- बाजार से कुछ और लेना है.

बुआ- नहीं अब कुछ नहीं लेना है. अब चलो एक वाला भी अब तक पहुंच न गया हो.

लल्लू- उसका फिक्र आप मत कीजिये वो चार बजे तक जाएगा घर.

बुआ- बस एक ड्रेस ले लो अपने लिए. ये कपडा फैट गया है तुम्हारा.

बुआ अभी तक अपना लल्लू से नजरे मिलाने से बच रही थी.

लल्लू एक रेडीमेड क दुकान पर गाड़ी रोक दिया.

फिर वह से बुआ एक जींस पेण्ट और एक t-shirt खरीद क्र लल्लू को दे दी अपनी पसंद से.

लल्लू वो ले क्र वही चेंजिंग रूम मई जा क्र पहन लिया.

लल्लू- कुछ पेट पूजा कर ले यहाँ पर.

बुआ- नहीं नहीं. राहुल hi इतना खिला दिया है की रात तक कुछ भी नहीं खाना.

लल्लू- एक जूस hi पि लीजिये न प्लस..

बुआ- ऐसे क्यू बोल रहे हो. ठीक है जूस पि लेंगे दोनों आदमी.

लल्लू- गुड.

फिर एक जूस क शॉप से लल्लू दोनों क लिए जूस ले आया. बुआ गाड़ी मई hi बैठी थी.

दोनों जूस पि क्र वह से घर को चल दिए.

घर आ क्र दोनों अपने कमरे मई आ गए.

लल्लू बुआ क सरे कपड़ो का पैकेट ले आया था गाड़ी से.

दोनों फ्रेश हो क्र बहार आ गए.

लल्लू दालान पर दादू क पास चला गया. वही दादू क पास बैठा उन से बाटे क्र रहा था की एक वाला अपने गाड़ी मई सारा सामान ले क्र आ गया.

फिर उस क साथ लग क्र लल्लू सभी कमरों मई एक लगवा दिया.

सब फिटिंग करते करते रात क 10 बज गए.

फिर खा पि क्र सभी एक मई सोने क उत्साह मई अपने अपने कमरों मई चले गए.

बुआ लल्लू क पास hi आई थी सोने को.

ड्रेस बदल क्र दोनों अपना अपना रात मई पहनने क कपडे पहन क्र बीएड पर आ गए.

लल्लू- बुआ ये तो अच्छी बात नहीं है.

बुआ- क्या अच्छी बात नहीं है.

लल्लू- मैंने कितने प्यार से आप क लिए ड्रेस ख़रीदा था और आप ने वो पहना hi नहीं. यही पुराण वाला पहन लिया.

बुआ- ये भी नया hi है. यहाँ आने से पहले ख़रीदा था.

लल्लू- लेकिन आज जो ख़रीदा था वो क्या रखने क लिए ख़रीदा था.

बुआ- ये मुझे कैसे पता होगा. तुम ने ख़रीदा था तो ये बात तुम्हे hi पता होगा न.

लल्लू मुँह फुला क्र दूसरी और घूम क्र सो गया.

बुआ थोड़ी देर लेती रही फिर उठ क्र वो ड्रेस बदल क्र आज जो खरीदारी की थी उस मई से निघटजोन निकल क्र पहन ली.

बुआ लल्लू क पास आ क्र बीएड पर बैठ गई.

बुआ- लो देखो मैंने पहन लिया तुम्हारा वाला.

लल्लू आँखे बंद किये सोया था.

बुआ लल्लू को हिला क्र उसे जगती फिर से बोली.

"अब देख भी लो. मैंने पहन लिया है."

लल्लू अभी भी सोया रहा.

बुआ थोड़ी देर देखती रही फिर लल्लू क उप्पेर झुक क्र उसके गाल को काट ली

लल्लू- ाःह, ये कैसे उठा रही है आप.

ाःह अभी भी दर्द क्र रहा है. जंगली बिल्ली…

बुआ- तो किस ने कहा था सोने का नाटक करने को. चलो देखो मैंने पहन लिया. कैसा लग रहा है.

लल्लू बुआ को देखा तो देखता hi रह गया.

क्या क़यामत लग रही थी.

बुआ- बस बस अब घूरना बंद करो. मुझे नींद आ रही है लाइट बंद क्र क सो जाओ. मई समझ गई तुम्हे ये ड्रेस अच्छा लगा.

लल्लू- सिर्फ ड्रेस नहीं ड्रेस पहनने वाली भी. वैसे आप कुछ भी पहन लो, क़यामत hi लगती हो.

बुआ- चुप बदमाश. अब लाइट बंद क्र प्लस.

लल्लू लाइट बंद क्र नाईट बल्ब जला दिया.

बुआ- अब ये क्यू जला दिया.

लल्लू- रात मई आप उठोगी तो सही रहेगा. इसीलिए ये काम प्रकाश वाला जला दिया है.

बुआ- नहीं इसे भी बंद क्र.

लल्लू- रहने दो न. थोड़ा सा तो देखने दो मुझे.

बुआ- (सरमाती हुई) प्लस बंद क्र दे न. मुझे सरम आ रही है.

लल्लू- हेय क्या ऐडा है आप क बुआ. मई मर जावा…

बुआ- चुप.. फ़्लर्ट करना बंद कर. बात बात और फ़्लर्ट करता रहता है. अब जल्दी से लाइट बंद क्र और सो जा.

लल्लू मुँह लटका क्र वो लाइट भी बंद क्र दिया.

दोनों सोने की कोसिस करने लगे.

लल्लू का मन बड़ा बेचैन था उसे नींद नहीं आ रहा था आज.

वही बुआ आज बहुत खुश थी. इस लिए उन्हें भी नींद नहीं आ रही थी. वो समझ नहीं प् रही थी की वो लल्लू की तरफ क्यू खींची चली जा रही है.

मन उनका अपना सदी सुदा लाइफ सही नहीं चल रहा है लेकिन इस तरह लल्लू क लिए उनके दिल मई उठता फीलिंग उन्हें कही न कही गलत लग रहा था.

वो खुद को बहुत रोकने की कोसिस क्र रही थी लेकिन लल्लू क मजीद आ क्र पिघलने लगती थी. खुद पर से उनका काबू खो जाता था.

समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे.

अगर लल्लू अभी कल रात की तरह कुछ हरकत क्र दिया तो वो रोक भी नहीं पायेगी. वो लल्लू क पास आ क्र खुद को बहुत कमजोर महसूस क्र रही थी.

लल्लू का प्यार उसका केयर करना. बात बात और उन्हें फ़्लर्ट करना सब बुआ को बड़ा प्यारा लगता था.

अभी कई साल से वो इस प्यार केयर अपने पैन को कही वो मिस क्र रही थी.

अब उनका पति वो पहले वाला नहीं रहा जो सदी क कुछ साल पहले तक था. सब कुछ बदल सा गया tha..yaha आ क्र लल्लू से मिल क्र वो खुद को अभी जिन्दा समझ रही थी नहीं तो वो तो एक लाश की तरह अपने सरीर को धो रही थी.

तभी लल्लू का पेअर बुआ क पेअर से टच क्र गया निचे से.

बुआ क सरीर क पुरे रोये खड़े हो गए. उनका पूरा बदन कम्प गया.

थोड़ी देर बुआ दम साढ़े ऐसे hi लेती रही और लल्लू क अगले हरकत का इंतजार करती रही लेकिन लल्लू नींद मई पेअर हिलाया था जो बुआ से टच क्र गया था.

लल्लू क तरफ से दुबारा कोई हरकत नहीं होने पर बुआ को काफी निरसा हुई.

जैसे वो इंतजार क्र रही थी लल्लू का.

बुआ को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या चाहती है.

वो उठ क्र बैठ गई. फिर टेबल पर रखे जग से जा क्र पानी पिने लगी.

वह से आ क्र बुआ एक बार फिर से बीएड पर लेट गई.

लल्लू को नींद आ गया था लेकिन अभी वो कच्ची नींद मई था. बीएड क हिलने से उसका नींद खुल गया.

वो झट से नाईट बल्ब जला दिया.

घूम क्र देखा तो बुआ अधलेटी अवस्था मई कुछ सोच रही थी.

लल्लू उठ क्र बैठ गया.

लल्लू- क्या बात है. नींद नहीं आ रहा है क्या.

बुआ लल्लू की आवाज से उसकी और घूम क्र देखि. उन्हें पता भी नहीं चला कब नाईट बल्ब जला और कब लल्लू उठ क्र बैठ गया.

बुआ इंकार मई गर्दन हिला दी.

लल्लू आगे बढ़ क्र बुआ को पकड़ क्र उसके सर को अपने गॉड मई रख लिया और उसे प्यार से सहलाने लगा.

बुआ क आँखों मई आँशु आ गया.

एक उनका पति था जो आते hi खाना खा क्र ऑफिस का काम ले क्र स्टडी रूम मई बैठ जाता और फिर कब आ क्र सोता था बुआ को पता भी नहीं चलता था या कभी कभी आता भी नहीं था.

एक लल्लू है जो उसका कितनी फिक्र रखा था. कितना केयर करता है.

बुआ क आँखों से बहता आँशु जब लल्लू क धोती को भिगो दिया तब उसे एहसास हुआ की बुआ रो रही है.

लल्लू बुआ क आँखों क निचे हाथ लगा क्र देखा तो उसका हाथ भींग गया.

बुआ झट से अपनी आँखे पॉच डाली.

लल्लू बुआ क चेहरे को पकड़ क्र उन्हें उठा लिया.

लल्लू- बुआ आप मेरे से नाराज है तो मुझे जो सजा देना चाहे दे लीजिये लेकिन प्लस आप मत रोइये. वो शॉप पर तो मई ऐसे hi मजाक क्र रहा था ये दिखने क लिए की आप अपने आप को किसी से काम मत समझिये आप बहुत प्यारी है बहुत सुन्दर है. अभी भी आप जवान है.

और वो पार्क मई पता नहीं क्या हो गया मुझे. आप की आँखों मई इतना कैसे डूब गया मई की मुझे खुद का होश नहीं रहा.

बुआ प्लस आप मुझे मार लीजिये. चाहे तो आप सब को बता दीजिये सब मुझे बहुत मरेंगे और घर से भी भगा देंगे. आप क्यू रो रही है

मई hi पता नहीं क्या हो जाता है आप को देख क्र. मई कैसे अपने आप को भूलने लगता हु. आप क पास आते hi कमजोर हो जाता हु. बुआ सब मेरी गलती है. आप मुझे मारिये न प्लस. अपना गुस्सा ठंढा क्र लीजिये मुझे मर क्र.

लल्लू को दिमाग काम नहीं कर रहा था जो उसके मुँह मई आता था बोलता जा रहा था.

बुआ लल्लू की बाटे सुन क्र जब वो चुप नहीं हो रहा है तो बुआ आगे बढ़ क्र लल्लू क होठो को अपने होठो से बंद क्र दी.

लल्लू को तो कुछ समझ hi नहीं आया. ये क्या हो गया.

लल्लू- प्लस बुआ माफ़ क्र दो न. मुझे से गलती हो गई.

लल्लू बुआ से छुड़ा क्र फिर से बोलै.

बुआ लल्लू क चेहरे को सहलाती एक बार फिर से उसके होठो को मुँह मई ले क्र उसे चूसने लगी.

लल्लू को अब अपने उप्पेर कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया था.

वो भी फिर धीरे धीरे बुआ का साथ देने लगा.

बुआ लल्लू क उप्पेर क होठ चूस रही थी तो लल्लू बुआ क निचे क होठो को.

लल्लू अब बदस्तूर बुआ क होठो को चुस्त हुआ अपने हाथो से उनके पीठ को सहलाता जा रहा था.

बुआ लल्लू क उप्पेर अपना भर डालती हुई उस पर झुकती चली गई.

लल्लू बुआ को पीठ से दोनों हाथो से पकड़ क्र अपने आगोश मई लिए लेट गया.

दोनों क होठ अभी भी एक दूसरे का रास निचोर्ने मई लगे हुए थे.

लल्लू निचे लेता हुआ था और उप्पेर बुआ थी.

उनकी बड़ी बड़ी चूचिया लल्लू क साइन मई धसा हुआ था.

अभी लल्लू को जो आनंद मिल रहा था उसका वर्णन मुश्किल था.

लल्लू बुआ क नंगी कंधे को हाथ सेसहलाता हुआ उनके मुँह मई अपना जीभ घुसा दिया

बुआ झट से उसके जीभ को अपने होठो मई दबा क्र उसे अपने जीभ से लड़ने लगी.

दोनों क जीभ एक दूसरे क मुँह मई खेलने लगा.

कभी लल्लू का जीभ बुआ क पुरे मुँह मई घूम आता तो कभी बुआ का जीभ लल्लू क मुँह का सैर क्र आता.

बुआ लल्लू क बलिस्त छाती पर अपना छाती की दो उन्नत पहाड़ी को रगड़ती हुई लल्लू क उप्पेर जंघा पर दोनों पेअर दोनों और कर क बैठ गई.

लल्लू को अपने दोनों हाथो से कंडे से पकड़ क्र बुआ उसे अपने मई समां लेना चाहती थी.

अब वो साडी दिवार गिरा देना चाहती थी आज. अब उन्होंने सोच लिया था की अब उन्हें पीछे मुर क्र नहीं देखना है.

बुआ सीधी हो क्र बैठ गई लल्लू क कमर पर और अपने निघटजोन का फीता खोल क्र उसे आजाद क्र दी अपने सरीर से. अब बुआ उप्पेर से पूरी नंगी थी.

वो निचे झुक क्र लल्लू क बनियान को पकड़ क्र लल्लू क बदन से खोल क्र निकल दी.

लल्लू अपना बनियान निकलने मई बुआ का मदद क्र दिया..

अब उप्पेर से दोनों बिलकुल नंगे थे.

बुआ एक बार फिर से झुक क्र लल्लू क चेहरे को जगह जगह चूमती अपना दूध उसके साइन से लगा क्र लल्लू को भरपूर प्यार देने लगी.

लल्लू बुआ का ये रूप देख क्र निहाल हो गया.

वो बुआ क नंगे पीठ पर अपना हाथ फिरता हुआ बुआ को ेन्सॉरगे करने लगा.

जब लल्लू से बर्दास्त मुश्किल हो गया तो वो पलट क्र उप्पेर आ गया और बुआ क दोनों चुकी को हाथ मई थम क्र उसे मसलते हुए उनके होठो को चूसने लगा.

बुआ उठ उठ करती हुई लल्लू क पीठ को सहलाती उसका भरपूर साथ दे रही थी.

फिर लल्लू बुआ क होठो को छोड़ क्र उनके दोनों दूध पर भूखे बच्चे की तरह टूट पड़ा.

बरी बरी से दोनों नारियल को चूस चूस क्र लाल क्र दिया था लल्लू ने.

अपने एक हाथ निचे ले जा क्र लल्लू बुआ क गाउन को उनके पैरो से निकल क्र बहार क्र दिया.

बुआ अपना कमर उठा क्र पूरा साथ दी लल्लू का.

फिर लल्लू अपना धोती खोल क्र उसे भी निकल क्र फेक दिया.

लल्लू बुआ क पारी क पास मुँह ले जा क्र उस पर एक छोटा चुम्मी दे दिया

बुआ आआह्ह्ह क्र क रह गई.

बुआ- वह मत क्र वो गन्दा है.

लल्लू- ये तो अमृत कलश है. देखो कितना अमृत निचे बहा दिया आप ने.

बुआ- चुप क्र. ऐसी बाते भी कोई करता है क्या.

लल्लू- मई तो करता हु. बहुत तड़पाया है आप ने आज तक. अब हिसाब बराबर होगा.

बुआ- मैंने कब तर्पया है. मई खुद तरप रही हु तुम्हारे प्यार मई

लल्लू बुआ क छूट रानी मई मुँह घुसा क्र एक बार उप्पेर से निचे तक फिर दिया

बुआ- हहहयय ये कैसा मजा है. मत कर वह न. छी छी गन्दी जगह है वो.

लल्लू- मजा आ रह है न.

बुआ- बहुत… बहुत मजा है.

लल्लू- तो फिर गन्दी गन्दी क्यू क्र रही हो तुम. क्या ख्याल है मेरे बच्चे की माँ बनोगी.

बुआ- अब तो बीबी बना hi लिया है तो माँ क्यू नहीं बना देता. बना दे अब जो रह गया है वो सब. अपने बच्चे की माँ बना या अपनी रंडी...

लल्लू- ऐसा दुबारा न बोलना. आप मेरे दिल मई रहोगी हमेसा. आप क लिए मई ये गंदे वर्ड सुनाने से पहले अपना कान दीद लूंगा.

बुआ- माफ़ क्र दो मुझे. आगे से अब कभी ऐसा नहीं कहूँगी.

लल्लू- आप मेरी रानी बन क्र रहोगी. सिर्फ मेरी रानी.

बुआ- मंजूर है. अब मुझे वो सारा प्यार दे दो जिस कारन मई अभी तक तड़प रही हु.

लल्लू बुआ क छूट पर एक बार फिर से झुक गया और उस मई से बहते नदी क मुहाने पर मुँह लगा क्र सारा पानी पिने लगा.

बुआ लल्लू क बालो को अपने उंगलियों मई फसा क्र उसे नोचती हुई अपना नलका खोल दी.

बुआ झरने क बाद लम्बी लम्बी ससे लेने लगी. आज जा क्र उनके अंदर का ये लावा निकला है जो कई सालो से दबा सुलग रहा था. लेकिन अभी ऐसे कई लावे का भंडार वह दफ़न था जिसे लल्लू का फायर ब्रिगेड hi बजा सकता था.

लल्लू एक बार फिर से अपना हाथ बढ़ा क्र बुआ क दोनों चूचियों को मसलता अपना मुँह झुका दिया बुआ क मुनिया पर.

जब बुआ फिर से गर्म हो गई तो लल्लू तैयार हो गया अपना हथोड़ा मरने क लिए

लल्लू ढेर सारा थूक निकल क्र अपने लौड़े पर चुपड़ क्र उसे बुआ क मुनिया क मुहाने पर लगा दिया

बुआ लल्लू क लौड़े का गर्म सूपड़ा अपने छूट क मुँह पर फील क्र आँखे बंद क्र उसे महसूस करने लगी अपनी दिल क गहराइयों से.

बहुत सुकून दे रहा था ये गर्मी उन्हें.

लल्लू बुआ क छूट क फक मई अपना टोपा घुसा क्र बुआ क कमर को पकड़ लिया कास क्र और एक जोर का धक्का धीरे से लगा दिया.

बुआ जानती थी अभी दर्द होगा इस लिए वो तकिये को अपने दांतो से दबा ली. दोनों हाथ से लल्लू क कंधे को पकड़ क्र.

लल्लू का लौड़ा बुआ क छूट क दीवारों को रगड़ता एक चौथाई अंडर चला गया.

लल्लू- कितनी गर्म हो तुम.

बुआ- ठंढा क्र दीजिये न मुझे. बहुत दिन से ये गर्मी जमा है आप क लिए.

पूरा अंडर तक जा क्र मुझे ठंढा क्र दीजिये.

लल्लू- दर्द होगा. बर्दास्त करना.

बुआ- मई कर लुंगी. अब आप पूरा अंदर जा क्र hi रुकना.

लल्लू एक बार फिर से बुआ क कमर को जोर से पकड़ क्र हुमच क्र धक्का लगा दिया.

लौड़ा बुर को चीरता हुआ आधा अंडर चला गया.

लल्लू का लुल्ला अब रुकने को तैयार नहीं था.

लल्लू वैसे hi पकडे हुए दनादन हुमच हुम्मच क्र दो और जोर का झटका लगा दिया. लल्लू का पूरा डंडा बुआ क छूट को फार क्र उसके बच्चेदानी मई जा क्र ठोकर मरने लगा.

जैसे घर क दरवाजे पर जा क्र दुर्बल बजाते है. वैसे hi लल्लू का लौड़ा बुआ क छूट मई घुस क्र बच्चेदानी पर ठोकर मरता दुर्बल बजा रहा था.

लल्लू बुआ क एक चुके को मुँह मई भर क्र उसे हौले हौले चुभलाने लगा और दूसरे को अपने हाथ मई ले क्र मसलने लगा.

थोड़ी देर मई बुआ तैयार थी खत कब्बडी क लिए.

लल्लू बुआ क दोनों पैरो को उठा क्र उसे बुआ क चुके से लगा दिया और झुक क्र बुआ क दो दो तरभुज जैसे गांड को पकड़ क्र छोड़ने लगा.

बुआ है हैयय करती लल्लू क धक्को को पुरे मजे से खेल रही थी.

कभी दर्द तो कभी मजा बुआ इस खेल को खेलती एक बार और पानी बहा दी.

अब रूम मई बुआ की आठो क साथ साथ छूट मई लौड़े क घुसने की फुछ फुछ की आवाजे भी आ रही थी.

लल्लू- ये क्या आवाज आ रहा है.

बुआ- आह्हः हहहयय कहा से. कौन सी आअह्ह्ह ावजज.

लल्लू- ये सुनो न. फुछ फुछ करके छोड़ते हुए आवाज सुना के.

सुनाई दिया क्या.

बुआ- मुझे नहीं पता. बाटे मत करो न.

लल्लू- फिर क्या करू.

बुआ- जो क्र रहे हो. जोर जोर से करिये न.

लल्लू- क्या कर रहा हु. पहले बताओ ये आवाज कैसा है फुछ फुछ का.

बुआ- आप का क्र रहा है ये आवाज.

लल्लू- मेरा क्या आवाज करेगा.

बुआ- मुझे नहीं पता. आप करते रहो.

लल्लू- क्या करता राहु. ये तो बता दो.

बुआ- जो क्र रहे हो. जोर से करिये न.

लल्लू- क्या जोर से करू.

बुआ- मुझे माँ बना दीजिये. अपने बच्चे की.

लल्लू झुक क्र बुआ क होठो को चुम लिया.

लल्लू- बहुत चालक हो आप.

बुआ- बीबी किस की हु.

लल्लू- लल्लू की.

बुआ- nahi….aahh इस्सस

लल्लू- मेरी नहीं हो.

बुआ- है हु न. इससे आह्हः हहहयय. धीरे धीरे कीजिये न. कमर दर्द करने लगा है.

लल्लू- चलो घोड़ी बन जाओ फिर. कमर भी दबा दूंगा.

लल्लू अपना लौड़ा निकलता बोलै बुआ से.

बुआ पलट क्र घोड़ी बन गई.

लल्लू अपना लौड़ा जो बुआ क छूट रस से भींग गया था उसे बुआ क गांड पर मसलता हुआ छूट क मुहाने से लगा क्र अंडर जोर से तेल दिया.

बुआ हहहयय करके रह गई.

लल्लू बुआ क बड़ी की गोदी गांड को पकड़ कर मसलता बुआ क छूट की धज्जिया उड़ने लगा.

लल्लू को बड़ी बड़ी मटकी जैसी गांड बहुत पसंद थी.

वो बुआ की गांड देख क्र बबला सा हो गया था.

वो पगलाया हुआ दनादन बुआ क छूट मई लौड़ा पेलने लगा.

बुआ इस हमले से बार बार आगे को गिर जाती जिसे लल्लू उसके कंडे से पकड़ क्र फिर से सही से पकड़ लेता.

फिर गांड क फको को मसलता छूट की कुटाई करने लगता.

बुआ कितनी बार झरि थी ये तक भूल गई.

लल्लू भी अब नजदीक hi था.

वो बुआ को पलट क्र उस क उप्पेर आ गया और फिर से छूट मई लैंड दाल क्र ताबरतोड़ ठुकाई करने लगा.

अंत मई वो बुआ क चुके से अपना मुँह रगड़ता बुआ क बच्चेदानी मई अपना लावा उगलने लगा.

लल्लू पास्ट हो क्र बुआ क उप्पेर hi ढेर हो गया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 61.

रात क किसी पहर बुआ को वाशरूम क लिए नींद खुला तो वो उठी. लल्लू बुआ क उप्पेर hi उनकी छतियो मई मुँह गड़ाए सो रहा था.

बुआ लल्लू क बालो को सहला क्र उसे आराम से एक और लेता दी फिर उठ क्र नंगी hi वाशरूम चली गई

वाशरूम मई जा क्र जैसे hi पेशाब क लिए बुआ बैठे.

धार निकलते hi उनके मुँह से एक आह निकल गया.

बुआ क छूट मई अंडर बहुत जलन दे रहा था जैसे चील गया हो छूट क अंदर का हिस्सा.

बुआ वह से निकल क्र वापस कमरे मई आ गई.

पूरा बदन दर्द क्र रहा था. दोनों जांघो क बिच मई भी बहुत दर्द था. आराम आराम से चलती बीएड तक आई और लल्लू क साइन पर सर रख क्र सो गई उसे पकड़ क्र.

सबेरे क समय लल्लू का नींद खुला तो बुआ लल्लू क कमर पर एक पेअर चढ़ाये उस से लिपट क्र सो रही थी.

अभी बुआ क चेहरे पर बहुत सुकून था उनके बालो का कुछ हिस्सा बिखर क्र बुआ क चेहरे पर आ गया था जो उन्हें और भी हसीं बना रहा था.

लल्लू बुआ क चेहरे को देखता हुआ उस पर झुक गया और उनके होठो को चुम लिया.

बुआ एक बार कसमसा क्र फिर से सो गई.

लल्लू बुआ क पोस्ट सख्त चुचो को पकड़ क्र धीरे धीरे सहलाने लगा. बिच बिच मई कभी कभी लल्लू उनके बूब्स क निप्पल को भी पिंच कर देता था.

बुआ नींद मई hi और काश क्र लल्लू को बहो मई भर क्र उस से चिपक गई.

लल्लू करवट ले क्र बुआ की और घूम गया और उनके एक बूब्स को मुँह मई ले क्र चूसने लगा और दूसरे को आहिस्ता से दबाता मसलता रहा.

बुआ का भी अपने चुके क मर्दन से नींद खुल गया था लेकिन वो आँखों को बंद किये लेती हुई थी.

बुआ क मुँह से हलकी हलकी सिसकी निकल जाती कभी कभी.

लल्लू बुआ क दोनों दूध को बरी बरी से चूस क्र लाल क्र दिया.

लल्लू अपना एक हाथ निचे ले जा क्र अपने फनफनाते लैंड को वैसे hi लेते हुई बुआ क छूट क मुँह पर रगड़ने लगा

बुआ अपने होठो को सकती से भींचे मुँह से निकलने वाले मादक आवाजों को रोकने की भरपूर कोसिस क्र रही थी लेकिन बिच बिच मई उनके मुँह से आवाज निकल hi जाता था.

लल्लू अपना लैंड रगड़ता हुआ हलके से कमर को बुआ की और पुश क्र दिया.

बुआ की छूट पूरी गीली हो क्र रास बहा रही थी.

लल्लू का हथियार फिसलता हुआ ओने थर्ड बुआ क छूट मई समां गया.

बुआ मजे की आठ भर क्र रह गई. वो कास क्र लल्लू से चिपकती लल्लू को अपने मई और अंदर समां लेने की कोसिस क्र रही थी.

लल्लू बुआ क दूध को पकड़ क्र उसे भिचने लगा

बुआ लल्लू क होठो को अपने होठो मई ले क्र उसे बेदर्दी से कुचलने लगी. अब बुआ मजे क सिखर पर पहुंच गई थी.

लल्लू बुआ को पकड़ क्र अपने उप्पेर खींच लिए उनके छूट मई लैंड डेल हुए hi.

लल्लू का डंडा बुआ क छूट को फैलता हुआ आधे से ज्यादा बुआ क छूट मई घुश गया.

बुआ एक सिसकी लेती लल्लू क सोने पर गई गई.

बहुत बार्ड हो रहा था बुआ को. वो अपना कमर उठाने लगी की लल्लू उनके कमर को पकड़ क्र उठने से रोक लिया.

बुआ सम्भल न सकीय और लल्लू क कमर पर बैठ गई जिस से लल्लू का बचा हुआ लौड़ा भी बुआ क छूट मई समां गया.

बुआ बिलबिला गई दर्द से

बुआ- आअह्ह्ह मा.. मर्डर दलललाहा… इससीई.. ऊऊफफफ. धीरे करो न.

बुआ लल्लू पर लुढ़की हुई कराह रही थी.

लल्लू बुआ क पीठ को सहलाता उनके कंधे को गाल को चुम और चाट रहा था.

थोड़ी देर मई बुआ संभल गई.

लल्लू बुआ क गांड क दोनों फको को पकड़ क्र उन्हें अपने कमर पर आगे पीछे करने लगा.

धीरे धीरे बुआ भी अपना कमर हिलने लगी. लल्लू निचे से अपना कमर उठा उठा क्र बुआ क छूट मई भरपूर प्रहार करने लगा.

लल्लू हाथ उठा क्र बुआ क साथ साथ उनके उछलते दो बॉल्स को पकड़ क्र मसलने लगा.

बुआ लल्लू क पेट पर दोनों हाथ रख क्र लल्लू क डंडे पर सीधी हो क्र बैठ गई थी.

अब बुआ लल्लू क डंडे पर उठक बैठक लगा रही थी.

उनके दोनों फुले हुए चुके उछलता हुआ बड़ा मजेदार लग रहा था.

लल्लू बिच बिच मई उनके बूब्स का निप्पल्स पकड़ क्र उमेठ देता था.

बुआ सिसक क्र और तेज उछलने लगती. बुआ अब करीब hi थी अपने मंजिल क. लल्लू जोर जोर से अपना कमर उठता हुआ बुआ क छूट की धज्जिया उड़ाए जा रहा था. अंत मई बुआ अपना पानी बहती लल्लू क उप्पेर ढह गई.

लल्लू भी करीब hi था. जैसे hi बुआ लुढ़की लल्लू क उप्पेर वो बुआ को पकड़ क्र पलट गया और उन्हें निचे ले क्र फिर एक बार दनादन शॉट लगाना सुरु क्र दिया.

लल्लू बुआ क होठो को चुस्त उनके दूध को सहला रहा था.

थोड़ी देर मई बुआ फिर से गरम होने लगी.

वो अपना दोनों पेअर उठा क्र लल्लू क कमर को लॉक क्र ली.

बुआ निचे से अपना गांड उठा उठा क्र लल्लू का भरपूर साथ दे रही थी.

लल्लू बुआ क कान को मुँह मई ले क्र उसे अपने दन्त से हलके हलके काटने लगा. बुआ का पूरा सरीर कमान की तरह तन गया.

लल्लू बुआ क मखमली जिस्म क हर एक अंग को मसलता हुआ बुआ क छूट मई अपना पानी छोड़ दिया.

लल्लू बुआ क होठो को चुम क्र उनके बगल मई लेट गया.

बुआ निढाल हो क्र आँखे बंद किये हुए गहरी गहरी सास ले रही थी.

बुआ- जान निकल दी पूरा तुम ने.

लल्लू- तो अच्छा नहीं लगा आप को.

बुआ- बहुत अच्छा लगा. मेरा मॉर्निंग वैरी गुड हो गया.

बुआ लल्लू क माथे को चुम क्र बोली.

जबाब मई लल्लू भी बुआ क होठो को चुम लिया.

दोनों उठ क्र बैठ गए.

बुआ- मुँह उधर करो.

लल्लू- क्यू क्या हुआ.

बुआ- मुझे कपडा पहनने है.

लल्लू- तो मई क्या आप का कपडा ले रखा हु. आप पहन लो न.

बुआ- मुझे सरम आ रही है. तुम अपना चेहरा उधर करो न.

लल्लू- मई तो नहीं करता. आप मुझे ऐसी hi ज्यादा अच्छी लग रही हो.

बुआ- बात समझा करो. सुबह हो गया है. सब उठ रहे होंगे. तुम भी पहन लो कपडा

लल्लू हाथ बढ़ा क्र बुआ क एक चुकी पकड़ लिया.

लल्लू- कितनी खूबसूरत हो आप अंडर से भी और बहार से भी. लव ु..

बुआ शर्मा क्र नजरे झुका ली.

बुआ- तंग न करो. प्लस मन जाओ. उधर घूम जाओ.

लल्लू घूम क्र बुआ की और पीठ क्र लिया.

बुआ सारा कपडा समेत क्र वाशरूम भाग गई. फिर वह से नाहा क्र hi बहार आई.

बुआ एक टॉवल लपेट क्र बहार आई थी.

लल्लू अपना धोती लपेट क्र बुआ क बहार आने का इंतजार क्र रहा था.

बुआ जैसे hi बहार आई टॉवल मई लल्लू उनके नंगी चिकनी पिंडलियों को देख क्र बेकाबू हो गया और उठ क्र बुआ क पास चला गया.

लल्लू पीछे से जा क्र बुआ से चिपक गया और उनके नंगे कंधे को चुम लिया

बुआ अपने कंधे पर लल्लू क होठो का छुवन महसूस क्र रोम रोम बुआ का खड़ा हो गया.

बुआ- ीिसस्स, अभी जाने दो. तुम भी फ्रेश हो जाओ.

सब जग गए होंगे प्लस. मन जाओ न.

लल्लू बुआ क कंडे पर गर्दन पर चूमता हुआ उनके टॉवल का गांठ खोल दिया.

टॉवल सरकता हुआ बुआ क पैरो मई जा गिरा

बुआ आँखे बंद किये हुए अपने निचे होठ को दन्त से दबा ली.

लल्लू थोड़ा पीछे हो क्र बुआ क पीछे से भरपूर नजर से देखने लगा.

इस वक्त वो अपने बालो को समेत क्र सर क उप्पेर बांध राखी थी. सरीर पर कही कोई कपडा नहीं था. बदन पर कोई दाग नहीं. पूरा गोरी चिकनी चमेली लग रही थी बुआ. पीछे को उभरा हुआ उनका दो तरभुज. जान मरू था. लल्लू पीछे से जा क्र बुआ से चिपक गया.

लल्लू- मेरा बस चले तो मई आप को इस कमरे से निकलने hi न दू कभी.

लल्लू बुआ क कान को काटता हुआ धीरे से कहा.

बुआ एक ाःह भर क्र रह गई. बुआ को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की इस से अभी कैसे पीछा छुड़ाए. अब सब उठ गए थे और ये दोनों अभी तक इस बंद कमरे मई है. सब क्या कहेंगे.

लल्लू हाथ आगे ले जा क्र पीछे से उनके गाल को जीभ से चाटता हुआ उनके उभर को सहला दिया.

बुआ की ससे भरी होने लगी. छूट फिर से गीली हो गई थी.

बुआ झट से घूम गई लल्लू की और.

उसके आँखों मई देख क्र होठो को हलके से चुम ली और फिर पीछे हो क्र अपना टॉवल उठा लिया

टॉवल फिर से लपेट क्र बुआ अलमारी से अपने कपडे निकल क्र पहले एक जाली वाली पेंटी उठाई.

लल्लू उसे देख क्र फिर से बुआ की और बढ़ा.

बुआ लल्लू को अपनी और आता देख क्र कपडे छोड़ लल्लू की और बढ़ गई और उसे पकड़ क्र वाशरूम मई धकेल दी. फिर बहार से दरवाजा बंद क्र दी वाशरूम का.

बुआ जल्दी जल्दी साडी कपडे पहन क्र तैयार हो गई और फिर वाशरूम का दरवाजा खोल क्र छोड़ दी.

बुआ अपने आप को एक बार और आइना मई देख क्र बहार वाला गेट खोल बहार आ गई.

ऋतू- क्या बात है. बड़ी खिली खिली सी लग रही है.

बुआ शर्मा क्र नजरे झुका ली.

रागिनी- अब बता भी दो इस खूबसूरती का राज क्या है.

शालिनी- हमे नहीं बताएगी ये. कल बाजार मई कोई मिल तो नहीं गया था.

काजल- क्या कह रही हो दीदी. बाजार मई तो अपना बीटा भी साथ था न. यही कोई मिल गया…

जैसे आज hi काली से फूल बानी है. ऐसे खिली खिली सी लग रही है हमारी छोटी रानी.

बुआ- अब आप सब का हो गया हो तो चाय पानी हो जय.

ऋतू- क्या चाय भी पिणि है आप को. मई तो समझी थी आप सीधा पाइप से गधा गधा दूध पि क्र आ रही हो.

बुआ- भाभी प्लस. चाय दे दो न. फिर बाद बाद करते रहना.

रागिनी- हेय मतलब हम फालतू की बात करते हैं. और अभी दीदी उठाने गई थी तो आप की आवाज क्यू आ रही थी.

बुआ तो रागिनी की बात सुन क्र घबरा गई.

पता नहीं क्या सुन लिया इन लोगो ने. अब क्या होगा. सब क्या सोचेंगे मेरे बारे मई.

ये लल्लू कहा फशा दिया.

तब तक लल्लू भी तैयार हो क्र बहार आ गया.

लल्लू- कोई चाय नसत दे दो. मुझे खेत पर बहुत काम है आज.

ऋतू उठ क्र किचन मई चली गई. लल्लू देखा की सब यही बैठे है तो वो भी किचन की और बढ़ गया.

ऋतू- ला रही थी चाय. यहाँ क्यू आ गया.

लल्लू- रात नींद कैसी आई.

लल्ली पीछे से ऋतू से चिपकती हुआ बोलै.

ऋतू- कोई आ जाएगा यहाँ. चल बहार जा क्र बैठ.

लल्लू- कोई नहीं आ रहा अभी. आप बता दो कैसा लगा रात मई एक मई सो क्र.

ऋतू- बहुत अच्छी नींद आई.

लल्लू आगे हाथ बढ़ा क्र उनके दबी बड़ी चुकी जो आधी ब्लाउज से झक रही थी उसे पकड़ क्र दबाने लगा.

ऋतू- क्या क्र रहा है. छोड़ दे अभी. तुम तो चले जाओगे आग लगा क्र. यहाँ मई जलती रहूंगी.

लल्लू- कोई बात नहीं आज बुझा दूंगा आप का आग. तैयार रहना रात को.

ऋतू- कैसे करेगा. दीक्षा भी तो रहती है वह.

लल्लू- वो सो जाएगी फिर मई आऊंगा.

ऋतू- ठीक है अब जा यहाँ से. मई लती हु चाय नास्ता.

ऋतू अपनी गांड पीछे लल्लू क लैंड पर धकेलती हुई बोली.

लल्लू एक बार जोर से ऋतू की दोनों चूचियों को मसल क्र बहार आ गया.

बहार आ क्र लल्लू सब क साथ बैठ गया.

लल्लू- तो काकी कैसी नींद आई रात को.

रागिनी- मई तो रात मई सोई थी तो अभी सुबह hi उठी हु. बहुत बढ़िया नींद आई थी. पूरा कमरा ठंढा था सुबह तक.

शालिनी- सही कहा दीदी. रात तो मजा आ गया सोने मई. पहले तो कुकर भी चिपचिपा सा हवा देता था. पूरा सरीर अजीब सा हो जाता था. सही से नींद hi नहीं आती थी.

लल्लू- आप सब खुश हो न अब.

रागिनी, शालिनी- बहुत खुस.

दोनों लल्लू क दोनों गलो को दोनों तरफ से चुम लिया.

लल्लू- अब आप भी बता दीजिये माता जी. आप को कैसी नींद आई.

काजल- मुझे नींद नहीं आई. मई तो एक को बंद क्र क सोई थी.

लल्लू- क्यू आप को नींद क्यू नहीं आई.

काजल- मुझे ठंढ लग रहा था. पता नहीं कौन सा बटन डाब गया था जिस से वो काम ज्यादा हो hi नहीं रहा था. अंत मई मैंने उसे बंद hi क्र दिया.

लल्लू- ठीक है. अभी तो थोड़ा जल्दी मई हु. साम मई आप बताना. मई देख लूंगा उसे.

ऋतू तब तक चाय और पराठा बना क्र ले आई.

लल्लू जल्दी से नास्ता किया और बुलेट ले क्र खेत को चला गया.

खेत मई रवि काका पहले से लगे हुए थे मजदूरों को काम बताने मई.

लल्लू गाड़ी खलिहान मई खड़ा क्र दिया. फिर वह से काका क पास आ गया.

लल्लू- काका लैब वाले का कॉल आया था वो बासमती चावल का बीज तो अभी दे देगा लेकिन बादाम की अच्छी क्वालिटी क खोज मई थोड़ा समय लग रहा है तो क्या प्लान है आप का.

रवि- तुम बताओ बीटा क्या प्लान किया है तुम ने.

लल्लू- काका मई सोच रहा था की धन का तो अभी कर लेते है रहा बादाम तो जब बीज आ जाएगा तो उसकी भी तयारी सुरु क्र देंगे.

बांकी पुराने फसल की क्या पोजीशन है.

काका- सब बढ़िया है. तो तुम धन का बीज ले आओ. मई खेत तैयार करवा देता हु.

लल्लू- ठीक है काका. फिर मई पहले बीज ले आता हु.

फिर लल्लू वह से घर आ जाता है और फिर अपनी कार ले क्र किशन लैब चला जाता है जहा से बीज ले क्र आ जाता.

इन्ही सब कामो मई शाम हो जाता है.

साम को लल्लू दालान पर बैठा दादू और छोटे काका क साथ बाटे क्र रहा था. बुआ भी वही बैठी हुई थी. उन्हें धन का बीज निकल क्र दिखता है.

सभी बहुत खुश होते है. तब तक दोनों बड़े काका और पापा भी आ जाते है.

लल्लू आँगन जा क्र उन सब क लिए चाय और नास्ता ले क्र आ जाता है.

राम- कैसा चल रहा है तुम्हारा काम बीटा.

लल्लू- आज मैं धन का बीज ले आया हु. अब कल से इस काम मई लग जाऊंगा. उम्मीद है एक वीक तक बादाम का भी बीज मिल जाएगा.

राम- बहुत बढ़िया बीटा. मन लगा क्र काम करना. अब तुम्हे hi खेती का काम देखना है. मई छोटे भैया को भी कभी कभी अपने साथ ले जाऊंगा.

लल्लू- अच्छा ऐसी बात है. ठीक है पापा. मई मैनेज क्र लूंगा.

सुनील- वैसे कभी मेरी छोटी गुड़िया को भी खेत दिखा देना.

बुआ- है बीटा. मई भी सोच रही थी. एक दिन खेत चलने को.

लल्लू- ठीक है बुआ. आप को भी ले चलूँगा

सब वही बैठे बात क्र रहे थे फिर लल्लू उठ क्र वह से अपने बहनो क रूम मई आ गया.

लल्लू- मेरी बहने क्या क्र रही हो आप लोग.

गौरी- आ गई हमारी याद. हम बात नहीं करेंगे.

लल्लू- ये क्या बात हुआ. मई भुला hi कब था जो अब याद आएगा.

रानी- दो दिन बाद तुम आये हो यहाँ हम सब क पास.

लल्लू- थोड़ा बिजी था न दीदी. अब आप भी रूठना सिख गई हो.

लल्लू रानी क दोनों हाथो को पकड़ क्र बोलै.

रोअम और मीनू सोनम क साथ बैठ क्र पढाई क्र रही थी.

कोमल- भाई कभी कभी पढाई भी क्र लिया करो.

लल्लू- डीडू मुझे क्या जरुरत है पढ़ने को. आप सब तो पढ़ hi रही हो न.

रोमा- चल यहाँ बैठ भाई. तुम भी थोड़ी देर पढाई क्र लो.

लल्लू वह से भागता बोलै.

लल्लू- मुझ से अब ये सब नहीं होता.

सब बहने हुस्ने लगी

लल्लू वह से निकल क्र अपने कमरे मई आ क्र लक्ष्मी से बात करने लगा.

उसे अभी एक वीक और लग्न था वह.

शालिनी काकी खाने को बुलाने आई तब लल्लू फ्रेश हो क्र चला गया खाना खाने.

खाना पीना करने क बाद सब अपने कमरे मई सोने चले गए.

लल्लू कपडा बदल क्र धोती पहन लिया. बुआ अभी खा क्र नहीं आई थी.

वो लोग आँगन मई बैठे खाना खा रहे थे.

थोड़ी देर मई बुआ खाना खा क्र आ गई.

फिर बुआ कपडे बदल क्र आई और लल्लू क बगल मई बैठ गई.

लल्लू- कितना देर क्र दी बुआ आप ने.

बुआ- तुम्हारे ख्याल से मुझे बिना खाये hi आ जाना चाहिए थे महाराज की सेबा मई.

लल्लू- नहीं नहीं. मेरा कहना था की थोड़ा जल्दी खाना खा क्र आती.

कितना इंतजार किया है आप का.

बुआ- क्यू मेरा क्यू इंतजार किया है आप ने.

बुआ लल्लू की मजे लेती बोली.

लल्लू- आप को प्यार जो करना था.

बुआ- आज मुझे माफ़ कर दो. मेरा पूरा बदन दर्द क्र रहा है और वह भी. आज आराम करुँगी तो ठीक हो जाएगा.

लल्लू मुँह लटका लिया.

लल्लू- आइये यहाँ लेट जाइये. मई आप का बदन दबा देता हु.

बुआ- नहीं नहीं. मई आज आराम करुँगी तो ठीक हो जायेगा.

लल्लू बुआ का हाथ पकड़ क्र बीएड पर लेता दिया अपने पास और उनके बदन को दबाने लगा.

बुआ- छोड़ दे आराम करुँगी तो ठीक हो जाएगा.

लेकिन लल्लू लगा रहा.

तभी दरवाजे पर नॉक हुआ.

बुआ अपना कपडा सही क्र लेट गई.

लल्लू जा क्र दरवाजा खोला.

बहार काजल कड़ी थी.

लल्लू- माँ क्या बात है. सब ठीक है न.

काजल- है सब ठीक है. गुड़िया सो गई क्या.

लल्लू है माँ बुआ सो गई है.

काजल- ठीक है. आ जरा मेरा एक देख ले. मई भूल गई थी. वो बहुत ठंढा क्र रहा है.

लल्लू बुआ की और देखा तो वो आँखे बंद किये लेती हुई थी.

लल्लू लाइट बंद क्र दरवाजा लगा दिया और काजल क साथ उसके रूम मई आ गया.

लल्लू- सॉरी माँ, मुझे भी याद नहीं रहा. लाइए देखु क्या हुआ इसे

लल्लू रिमोट ले क्र देखा तो वो लॉक हो गया था.

लल्लू उसे अनलॉक क्र क टेम्परेचर सेट क्र दिया.

लल्लू- माँ ये हो गया. गलती से लॉक हो गया था ये.

अब सो जाइये आप.

काजल- अब कहा जाएगा. यही सो जा. छोटी भी सो गई है तो अब कही जाएगा तो वो उठ न जय.

लल्लू आ क्र काजल क बगल मई सो गया.

काजल- लक्ष्मी कब आएगी.

लल्लू- अभी एक वीक और लग जाएगा उसे. माँ भैया और भाभी कब आएंगे.

काजल- वो कल आ जाइए. तुम्हे खेत क कामो मई पड़ेशानी तो नहीं हो रहा न. अगर कोई पड़ेशानी हो तो मुझे कहना. मई बात क्र लुंगी.

लल्लू- नहीं माँ पड़ेशानी कैसा. काका को hi पड़ेशानी हो रहा होगा. ककी मई तो ज्यादा जाता भी नहीं हु.

काजल- नहीं ऐसा मत करना. वो अकेले पदेशन हो जाइए.

लल्लू- है माँ. मई ध्यान रखूँगा.

काजल लल्लू क हाथ का तकिया बना क्र उस पर सर रख क्र लेट गई.

कमरे मई लाइट जल रहा था. काजल एक क्रीम कलर की निघ्त्य पहन राखी थी. जिस मई उसके पॉक करता निप्पल दिख रहे थे.

लल्लू हलके से ऊँगली से उसे टच क्र दिया.

काजल हलके से लल्लू क उस हाथ पर थप्पड़ मर दी.

काजल- चुप चाप सो जा. बदमासी करेगा तो पिटाई लगा दूंगी.

लल्लू मुसकुदा क्र आँखे बंद क्र लिया और एक हाथ तो काजल क सर क निचे था लेकिन दूसरा हाथ आजाद था तो लल्लू दूसरे हाथ से काजल क गाल को सहलाने लगा.

काजल लल्लू क हरकतों का मजा लेती आँख बंद क्र सोने लगी.

काजल- तो जनाब बुआ को भी अपना दीवाना बना hi लिया.

लल्लू का चलता हुआ हाथ अचानक से माँ की बात सुन रुक गया.

लल्लू- क्या माँ, मई समझा नहीं.

काजल- तेरी बुआ दो दिन से बहुत खुश है. उसे एक सहारे की सख्त जरुरत थी. उसका साथ मत छोड़ना कभी.

लल्लू माँ क चेहरे को देखता रहा.

काजल आँखे बंद किये बोल रही थी.

लल्लू काजल की बात सुन हैंग हो गया.

लल्लू मन मई सोचने लगा की लगता है माँ को बुआ क बारे मई भी पता चल गया अब.

माँ कही मेरी जासूसी तो नहीं क्र रही. पहले काकी क बारे मई जान गई अब लगता है बुआ क बारे मई भी जान गई है.

यु hi सोचते हुए उसे कब नींद आ गया पता hi नहीं चला.

इधर उज्जैन…. मई एक कांड हो गया था.

नेक्स्ट अपडेट...
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 62.

उज्जैन…..

रात क 3 बजे लक्ष्मी अपने कमरे मई सो रही थी तभी उसका मोबाइल रिंग करने लगा

लक्ष्मी गहरी नींद मई थी तो उसने कॉल नहीं उठाया.

जब मोबाइल लगातार बजने लगा तो नींद मई hi बोझिल पलकों से मोबाइल धुंध क्र लक्ष्मी फ़ोन उठा क्र कान से लगा लिया.

" मई क्राइम ब्रांच से आईएनएस किरण बोल रही हु. आप क चाचा अपने बेटे का मर्डर क्र क जेल से भाग गए है."

लक्ष्मी क कान मई मोबाइल से निकली बाते सुन क्र उसका पूरा सरीर पसीने से हींग गया.

दर क मरे उसके मुँह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी.

" Hello….Helloo. आप हमारी बात सुन रहे है. घबराने की कोई जरुरत नहीं है. मैंने पुलिस क कुछ लोग आप क घर और भेज दिया है. जब तक वो न आये आप अपने घर क खिड़की बरवाजे बंद hi रखे. और थोड़ा सतर्क रहे."

लक्ष्मी है हु कुछ बोल hi नहीं प् रही थी. जैसे उसके होठ सील गए थे.

वो जल्दी से मोबाइल बीएड पर फेक क्र बहार को भागी.

वो भाग क्र लल्लू क गज्जू मां जिसे अब लक्ष्मी पापा कहती थी उनके कमरे क गेट पर जा पहुंची

दरवाजा बंद था. वो जोर जोर से गेट पीटने लगी.

अंडर गज्जू मां सो रहे थे. इतनी तेज गेट पीटने से उनका नींद टूट गया

जल्दी से लाइट जला दी उन्होंने.

गज्जू मां- कौन है. कौन इतना तेज गेट पिट रहा है.

लक्ष्मी- " ….."

लक्ष्मी क मुँह से तो दर से कुछ आवाज hi नहीं निकल रहा था.

गज्जू मां- कौन है भाई. कुछ बोलेगा. या दरवाजा तोडना है.

लक्ष्मी- पापा मई हु. जल्दी से दरवाजा खोलिये.

लक्ष्मी बड़ी मुश्किल से ये बोल पाई.

गज्जू मां लक्ष्मी की आवाज सुन्न क्र जल्दी से जा क्र दरवाजा खोल दिए

लक्ष्मी गज्जू मां को देखते hi जा क्र उनका हाथ पकड़ क्र कम्पटी हुई रोने लगी.

गज्जू- क्या हुआ बीटा. कोई बुरा सपना देखा क्या.

लक्ष्मी- पापा वो आ रहा है. वो हम सब को मर देगा जैसे माँ बापू को मारा था.

लक्ष्मी रोटी हुई गज्जू मां से बोली.

गज्जू- कौन मर देगा. यहाँ कोई नहीं है बीटा. तुम घबराओ नहीं. मई हु न तुम्हारे पास. मेरे होते मेरी बेटी की तरफ कोई देख भी नहीं सकता है.

गज्जू मां लक्ष्मी को ले क्र बीएड पर आ गए और उसे वह बैठा क्र टेबल से जग मई से एक गिलास मई पानी दाल क्र लळष्मी को दे दिए

गज्जू- ये लो बीटा. पहले पानी पियो. फिर मुझे बताओ क्या हुआ.

लक्ष्मी पानी पि क्र खली गिलास गज्जू मां को पकड़ा दी.

गज्जू मां लक्ष्मी क पास आ क्र बैठ गए.

गज्जू- अब बताओ बीटा क्या हुआ. ऐसी क्या बात है की आप इतना घबरा गई.

लक्ष्मी गज्जू मां क चेहरे को देखने लगी.

गज्जू- बताओ बीटा क्या बात है. क्यू आप इतनी पदेशन हो.

लक्ष्मी- पापा वो जेल से भाग गया है. वो हम सब को भी मर देगा.

लक्ष्मी सिसक सिसक क्र रोये हुए बोली.

गज्जू- कौन भाग गया है जेल से आप क चाचा?

किस ने कहा आप से. क्या आप कोई सपना देखे हो.

लक्ष्मी- नहीं पापा. अभी अभी आईएनएस. किरण का कॉल आया था की वो अपने बेटे का मर्डर क्र क जेल से भाग गया है.

गज्जू थोड़ी देर सोचने लगे.

गज्जू- आओ मेरे साथ.

फिर गज्जू लक्ष्मी को ले क्र निचे आ गए.

वह से वो दोनों सर्वेंट क्वार्टर मई आ क्र सभी को जगा दिए.

गेट कीपर (सोहन)- क्या बात है मालिक सब ठीक तो है न.

गज्जू- लक्ष्मी क चाचा जेल से भाग गया है.

सोहन- ये तो बहुत बुरा हुआ. वो यहाँ भी आ सकता है. एक मिनट मई जरा अपना बन्दुक ले लू.

सोहन अपने कमरे मई जा क्र एक दो नाली उठा लाया.

सोहन- अब डरने की कोई जरुरत नहीं है बिटिया. अब वो यहाँ आया तो मेरे हाथ से मरेगा.

तभी वह ड्राइवर भैया राकेश भी आ गया.

राकेश- क्या हुआ. सब ख़ैरिट तो है. सब इतने रात को यहाँ.

सोहन- वो हत्यारा जेल से भाग गया है.

लेकिन आप सब को कैसे पता चला मालिक.

लक्ष्मी- मुझे कॉल आया था आईएनएस. किरण का. वो बता रही थी की जेल मई अपने बेटे को मर क्र भाग गया है. वैसे पुलिस क कुछ लोग यहाँ आ रहे है हमारी सुरक्षा क लिए. आईएनएस. किरण भेज दी है उन लोगो को.

राकेश- ये अच्छा हुआ. मई युसूफ को कॉल क्र क बता देता हु.

लक्ष्मी- है भैया आप जल्दी से उन्हें बता दीजिये. उस हैवान का कुछ पता नहीं.

राकेश मोबाइल निकल क्र युसूफ को कॉल लगा दिया

रात का समय था. उस मई भी 3 बजे क समय तो सब गहरी नींद मई होते है. एक कॉल मई तो कोई नहीं उठता है.

तीन बार लगातार कॉल लगाने क बाद युसूफ कॉल उठाया.

फिर राकेश उसे साडी बात बता दिया.

युसूफ उसी वक्त यहाँ आने को बोलने लगा लेकिन सब क मन करने पर वो मान गया.

सभी ने उसे सतर्क रहने को कहा.

लक्ष्मी अभी भी गज्जू का हाथ पकड़ राखी थी.

तभी काकी सब क लिए चाय बना क्र ले आई.

सब वही बहार सर्वेंट क्वार्टर क सामने गार्डन मई पत्थर क चबूतरे पर बैठ क्र चाय पिने लगे.

काकी- लक्ष्मी बीटा, तुम्हे घबराने की कोई जरुरत नहीं है. यहाँ इतने लोग है वो यहाँ नहीं आएगा.

लक्ष्मी- काकी वो पागल है. जेल मई जो अपने बेटे को मर सकता है वो कुछ भी कर सकता है.

काकी आ क्र लक्ष्मी को अपने से लगा ली और उसके मात पर हाथ से सहलाने लगी.

काकी- हम सब है न. आप को चुने से पहले उसे हम सब को मर क्र जाना पड़ेगा.

गज्जू- लक्ष्मी बीटा तुम मेरी बेटी हो अब. ऐसे चोर उचक्के मेरे आगे पीछे घूमते रहते है. तुम्हे यकीं न हो तो अपने पति से पूछ लेना. वो बता देगा तुम्हे मेरे बारे मई.

लक्ष्मी को लल्लू की याद आ गई.

लक्ष्मी- काकी मेरा मोबाइल ला देंगी कमरे से. मुझे दर लगता है मई नहीं जाउंगी.

लक्ष्मी धीरे से काकी से बोली.

काकी सर हिला क्र अंदर बंगले मई चली गई. उप्पेर फर्स्ट फ्लोर पर लक्ष्मी का कमरा था वह से मोबाइल ला क्र काकी लक्ष्मी को दे दी.

गज्जू मोबाइल देख क्र लक्ष्मी को कही बुइ कॉल करने से अभी मन क्र दिया

गज्जू- अभी मत कर बीटा कॉल किसी को. सब पदेशन हो जाएंगे. सुबह हो जाने दे. मन करे तो बुला लेना उसे यही.

लक्ष्मी गज्जू की बात सुन क्र शर्मा गई.

थोड़ी देर मई मैं गेट पर एक जीप आ क्र रुकी.

उसने हॉर्न बजे.

लक्ष्मी जीप की आवाज सुन क्र दर गई

लक्ष्मी- लगता है वो आ गया. पापा देखो मई कहती थी न वो पागल है. कुछ भी क्र सकता है वो.

गज्जू- बीटा तुम संत हो जाओ. ये जीप पुलिस की है. तुम ने hi तो कहा था की आईएनएस. किरण कुछ पुलिस वाले भेजे है हमारे सुरक्षा क लिए

तब जा क्र लक्ष्मी संत हुई. लेकिन अभी भी दरी हुई थी.

सोहन गेट क पास जा क्र देखा तो वो पुलिस वाले hi थे.

सोहन गेट खोल क्र उन लोगो को अंदर क्र लिया और गेट फिर से लगा दिया.

गज्जू- इन सब क लिए भी चाय बना दीजिये. आओ हम सब भी उधर ड्राइंग रूम मई चलते है.

फिर सब वह से ड्राइंग रूम मई आ गए.

सभी पुलिस वाले पुरे बंगलो को एक चक्कर लगा क्र देख लिया सब सही था तो वो भी जगह जगह फ़ैल क्र खड़े हो गए.

आईएनएस. किरण उन्हें स्पेशल बोल क्र भेजी थी की खाश ख्याल रखे वो लक्ष्मी को भी निशाना बना सकता है.

ड्राइंग रूम मई बैठे बाटे करते हुए hi सब ने सुबह क्र दी.

सुबह 5 बजे hi युसूफ भी अपने फॅमिली क साथ वही आ गया.

लक्ष्मी को इस बिच एक मिनट क लिए भी चैन नहीं मिला.

वो सुबह 5 बजे hi लल्लू को कॉल लगा दी.

लल्लू रात को सो गया था माँ को बहो मई ले क्र उसके बदन से आती मादक महक मई मदहोश हो क्र

सुबह 4 बजे उसका नींद खुल गया. उठा तो काजल की निघ्त्य उसके जांघ तक उठा हुआ था.

लल्लू काजल की मोती मांशल जांघ देख क्र पगला गया और वो निघ्त्य को कमर तक उठा दिया.

निचे काजल पंतय भी नहीं पहनी थी.

उसके छूट पर छोटे छोटे बाल थे इस समय.

लल्लू काजल क छूट पर झुक क्र उस मई नाक दाल क्र सूंघने लगा

काजल की छूट बहुत प्यारी थी. उसके दोनों होठ फुले हुए बहुत सुन्दर गद्देदार लग रहे थे.

लल्लू जीभ निकल क्र काजल क छूट को चाटने लगा.

काजल को अपने छूट पर लल्लू क जीभ का एहसास होते hi वो कुनमुना क्र और अपनी जांघ फैला दी दोनों और क्र क.

लल्लू काजल क दोनों जांघ क बिच बैठ क्र छूट का रास चूसने मई मगन हो गया.

थोड़ी देर छूट चूसै करने क बाद अपना धोती खोल क्र निकल दिया और अपने लौड़े को पकड़ क्र उसे काजल क छूट क सुराख़ पर मलने लगा.

जब लल्लू का लैंड काजल क छूट रास से चिकना हो गया तो लल्लू जोर से एक धक्का लगा दिया.

लल्लू का पूरा लैंड एक बार मई hi काजल क छूट क दीवारों को भेदती हुई जड़ तक घुस गया.

काजल आह क्र क रह गई. वो झटके से आँखे खोल क्र लल्लू को देखने लगी.

काजल- धीरे क्र न बाबू. इतना जोर लगाएगा तो मई चिल्ला दूंगी.

लल्लू काजल क चुके को निघ्त्य से निकल क्र उसे मुँह मई भर लिया और अपने कमर को हिलने लगा.

थोड़ी देर मई hi काजल जहर गई एक बार

काजल की छूट क अंडर पानी भर जाने से जब लल्लू का लैंड छूट क अंडर जाता तो अजीब सा आवाज निकलता.

लल्लू काजल क दोनों चूचियों को बरी बरी पिता उसके छूट मई अपना गधा गधा माल छोड़ दिया.

दोनों हफ्ते हुए अपने ससो को सँभालने लगे.

थोड़ी देर बाद लल्लू अपना धोती लपेट क्र काजल क होठो को चुम क्र बहार आ गया फिर अपने कमरे मई फ्रेश हो क्र कपडे बदलने चल दिया

अभी वो काजल क कमरे का दरवाजा खोला hi था की बहार बुआ लल्लू का मोबाइल लिए कड़ी थी.

लल्लू बुआ को यहाँ देख क्र घबरा गया.

वो दरवाजा लगा क्र बुआ को देखने लगा.

बुआ- ले लक्ष्मी कॉल क्र रही है देख कोई काम होगा.

लल्लू लक्ष्मी का कॉल देख क्र सोच मई पद गया. अभी इतनी सुबह तो वो कभी कॉल नहीं करती थी.

बुआ- क्या सोचने लगा. तीन बार कॉल क्र चुकी है. इतना क्या सोच रहा है. कॉल उठा जल्दी से.

लल्लू घबराता हुआ कॉल उठा लिया

लल्लू- Hello, लक्ष्मी जी कैसी है आप.

लक्ष्मी- M..ma..mai..thik..h.hu A...ap कैसे है.

लल्लू- क्या बात है लक्ष्मी जी. सुच सुच बताइये क्या बात है.

फिर लक्ष्मी लल्लू को सब कुछ बता दी.

थोड़ी देर लिए लल्लू भी घबरा गया.

लल्लू- वो जेल से कैसे भाग गया

लक्ष्मी- पता नहीं. किरण बता रही थी की अपने बेटे को मर क्र वो भाग गया है. अब कैसे क्या हुआ ये मुझे नहीं पता. आप यहाँ आ जाओ न. मुझे बहुत दर लग रहा है.

लल्लू- मई अभी निकल रहा हु. आप घबराइए नहीं. मई किरण से बात करता हु. और आप घर से बहार नहीं जाना जब तक मई न आ जाऊ.

फिर लल्लू कॉल कट क्र दिया.

तब तक काजल भी कपडे पहन क्र बहार आ गई थी.

बुआ- क्या हुआ है वह. सब ठीक तो है न.

काजल- किस का कॉल था. किसे क्या हुआ है.

लल्लू- लक्ष्मी जी का कॉल था. उसका चाचा अपने बेटे को मर क्र जेल से भाग गया है.

काजल, बुआ- ये तो बहुत बुरा हुआ.

काजल- कब हुआ है ये.

लल्लू- अभी रात मई.

बुआ- पुलिस क्या क्र रही थी. जेल से कैसे भाग गया.

लल्लू- पता नहीं बुआ. अब ये तो वह जा क्र hi पता चलेगा.

काजल- तू वह जाएगा.

लल्लू- है माँ जाना पड़ेगा. लक्ष्मी जी कुछ ज्यादा hi दर रही है. वैसे उस पागल का कोई भरोसा भी नहीं. जो अपने भाई भाभी और बेटे को मर सकता है वो कुछ भी क्र सकता है.

बुआ- कब जाएगा.

लल्लू- अभी जाऊंगा बुआ.

बुआ- m..ma.mai भी चालू.

लल्लू बुआ का मुँह देखने लगा.

काजल- ले जा बीटा. छोटी भी घूम लेगी थोड़ा.

लल्लू- लेकिन माँ अभी वह का माहौल ठीक नहीं होगा

बुआ- तभी तो जाउंगी. लक्ष्मी को मेरे जाने से थोड़ा सहारा मिल जाएगा.

लल्लू- ठीक है बुआ. चलो जल्दी से एक दो कपडे दाल लो और तैयार हो जाओ.

मई दालान पर बता क्र आता हु.

तभी ऋतू और शालिनी भी अपने कमरे से बहार आ गई.

शालिनी- अरे वह दोनों छोटी ननद और भाभी आज सब से पहले कैसे उठ गए. साथ hi सोये थे क्या.

फिर काजल ने सब को उज्जैन की साडी बात बता दी.

इधर लल्लू दालान पर गया तो सभी उठ गए थे वह भी. काका लोग फ्रेश हो गए थे.

दादू अभी नहाने गए थे

लल्लू वह जा क्र एक कुर्सी पर बैठ गया.

राम- क्या बात है. अब तुम कुछ समय से नदी क तरफ नहीं जाते.

लल्लू- अभी जाने वाला था लेकिन..

राम- क्या हुआ.

लल्लू- वो उज्जैन से अभी कॉल आया था.

सुनील- क्या बात है गज्जू भाई कॉल किये थे. इतनी सुबह…

राम- सब कुशल है न वह.

लल्लू- वो लक्ष्मी जिअ का चाचा जेल मई बेटे को मर दिया और पता नहीं कैसे वह से भाग गया है.

राम- ओह्ह्ह no. ये तो बहुत बुरा हुआ. लक्ष्मी बेटी ठीक है.

लल्लू- है सब ठीक है. बस दर गई है.

दादू- क्या हुआ. क्या बात है. मुँह क्यू लटकाये हुए है मेरा सेर पटर.

राम- छोटी बहु का कॉल आया था उज्जैन से. उसके चाचा अपने बेटे का मर्डर क्र क जेल से भाग गया है.

दादू- ओह्ह ये तो बहुत गलत हुआ. बीटा कब हुआ ये.

लल्लू- अभी अभी कॉल आया था दादू. रात मई हुआ है ये.

दादू- फिर तो वह खतरा है. किसी को जाना चाहिए वह. गज्जू अकेला कैसे संभालेगा.

अनिल- फिर वह छोटे को भेज देते है.

सुनील- नहीं नहीं. अभी बहु को लल्लू की ज्यादा जरुरत होगा.

दादू- है ये बात तो है लेकिन वह खतरा भी तो होगा.

लल्लू- वो दादू बुआ भी जाना चाहती है वह.

रवि- नहीं नहीं. उस खतरे मई गुड़िया कहा जाएगी.

लल्लू- बुआ कहती है की वह वो लक्ष्मी को संभल सकती है. एक लेडीज का वह होना जरुरी है.

अनिल- तो कोई और चला जाएगा वो क्यू जाना चाहती है.

दादू- ठीक है लल्लू बीटा. कब निकल रहे हो तुम दोनों.

लल्लू- वो हम तो तैयार है बस आप सब की इजाजत चाहिए.

राम- तो अभी तुम यहाँ सब से इजाजत लेने आये हो. वह मेरा बीटा सुच मई अब बड़ा हो गया है. पापा आज मई अपने आप को प्राउड फील क्र रहा हु. पहले कभी ऐसा फील hi नहीं हुआ था. जब भी इसे देखता था तो दिल मई एक अजीब दर्द हो उठता था.

अब जा क्र इस दिल को चैन आया है.

सुनील- ठीक है बीटा. हमारी तरफ से इजाजत है लेकिन एक वडा क्र मेरी गुड़िया और बहु दोनों का ख्याल रखेगा तू सही से.

फिर लल्लू वह से उठ क्र आँगन आ गया.

दीक्षा पहले से hi अपने और लल्लू क दो जोड़े कपडे एक बैग मई रख चुकी थी.

लल्लू जा क्र झट पैट फ्रेश हो क्र तैयार हुआ और बैग ले क्र बहार आ गया.

दीक्षा बुआ पहले hi तैयार हो गई थी.

काकी और माँ लोग इन दोनों क लिए नास्ता बना दिए थे.

दोनों जल्दी से नास्ता क्र क बैग ले क्र गाड़ी मई बैठ क्र चल दिए सब से बीड़ा ले क्र.

लल्लू- बुआ आप क्यू जाने को तैयार हो गई. वह खतरा भी हो सकता है.

बुआ- तुम्हारे लिए भी तो खतरा हो सकता है.

लल्लू- सब के लिए हो सकता है लेकिन मई तो मर्द हु. थोड़ा बहुत झेल सकता हु इन सब को.

बुआ- मई भी तो तुम्हारी अब औरत हु. तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हु. तो मई अपने बचे क पापा को अकेला कैसे जाने दे सकती थी.

लल्लू- तो मेरे बचे की माँ इस लिए मेरे साथ चलने को तैयार थी.

बुआ- मई वह गौण मई अकेला क्या करती. तुम होते नहीं तो मई वह बोर होती रहती. बच्चिया का अभी एग्जाम आने वाला है तो वो लोग पढाई मई hi लगी रहती है. भाभी लोगो को घर का काम hi इतना होता है की उन्हें टाइम hi नहीं मिलता.

लल्लू- कोई बात नहीं. मेरे पास पूरा टाइम है आप क लिए.

तभी लल्लू का मोबाइल बज उठा.

लक्ष्मी- आप आ रहे है न.

दीक्षा- बिलकुल आ रहे है. आप घबराइए नहीं. हम रस्ते मई hi है. बहुत जल्द आप क पास होंगे.

लक्ष्मी- बुआ आप भी आ रही है. ये बहुत बढ़िया किया आप ने. मुझे भी अच्छा लगेगा आप क आने से. मई यहाँ सभी जगह घुमा दूंगी आप को.

लल्लू- कही कही मुझे भी घुमा देना आप. ऐसा न हो की इनके चक्कर मई मुझे hi भूल जाना.

लक्ष्मी- आप आइये तो सही. बहुत पदेशन किये है आप. सब गईं गईं क्र बदला लुंगी.

बुआ- ले भाई अब तैयार हो जाओ. हमारी राज कुमारी नाराज है तुम से. सब का बदला लिया जाएगा.

अच्छा बीटा हम आ रहे है तुम घबराना नहीं. अब कॉल रखती हु.

फिर बुआ मोबाइल बंद क्र दी.

दोनों बाते करते हुए आगे बढे जा राजे थे.

रस्ते मई एक जगह रुक क्र लल्लू गाड़ी मई तेल डलवा लिया फिर हल्का नास्ता क्र क वह से फिर आगे चल दिया.

आज ये रास्ता काफी दूर लग रहा था.

बुआ- थक जाओ तो बताना. कुछ देर मई ड्राइव क्र लुंगी.

लल्लू- फिर देर किस बात की है. आ जाइये.

बुआ- ठीक है रोको गाड़ी.

लल्लू रोड क साइड मई गाड़ी रोक दिया.

बुआ दूसरी और आ क्र कड़ी हो गई

बुआ- चलो जाओ उधर उस सीट पर.

लल्लू- देखिये हमारे बच्चे की होने वाली मां. आप को गाड़ी चलना है तो फिर मेरे गॉड मई बैठ क्र चलना पड़ेगा नहीं तो फिर दूसरी और बैठ जाइये .

बुआ- पहले नहीं बता सकते थे क्या. गॉड मई बैठ क्र कोई गाड़ी चलता है क्या. लोग क्या कहेंगे.

लल्लू- कौन लोग. कौन देखने आ रहा है आप को की आप क्या क्र रहे हो.

वैसे भी ये कितना सुनसान रास्ता है. जहा देखो खेत hi खेत दिख रहा है. उप्पेर से ब्लैक गिलास लगा है गाड़ी मई.

बुआ- नहीं नहीं फिर भी ये सही नहीं है.

लल्लू- फिर मत चलाइये.

बुआ आ क्र अपने पहले वाली जगह पर बैठ गई.

लल्लू फिर से गाड़ी आगे बढ़ा दिया.

बुआ- यहाँ आये है तो सब ठीक हो जाने क बाद सही जगह घूमने चलेंगे. बहुत अच्छी अच्छी जगह है यहाँ घूमने को.

लल्लू- जरूर चलेंगे. वैसे मई तो सब से पहले खुजराहो ले चलाऊंगा आप दोनों को.

बुआ- दोनों कौन.

लल्लू- अरे मई अपनी दोनों बीबियो की बात क्र रहा हु.

बुआ- खुजारो नहीं जाना मुझे.

लल्लू- क्यू वह गई है कभी क्या.

बुआ- नहीं मैंने सुन रखा है उस क बारे मई.

लल्लू- क्या सुन रखा है जरा मुझे भी बता दीजिये

बुआ- कोई जरुरत नहीं है.

लल्लू- अभी गाड़ी चलने क बदले कैसे भाग गई थी. इस लिए मई कह रहा हु की आप को खुजराहो जाना चाहिए. वह कई तरीके दिखाए है अपने पति को खुश करने क.

बुआ- मेरा पति पहले से hi बहुत खुस है.

लल्लू- क्या नाइंसाफी है. जबरदस्ती खुस रहने को कहा जाता है यहाँ तो.

आओ न थोड़ी देर चला लो न. कोई नहीं है यहाँ आगे पीछे.

बुआ- नहीं नहीं. अभी दिन है. कोई देखेगा तो क्या कहेगा.

लल्लू गाड़ी रोक दिया और बुआ को मानाने लगा.

अंत मई थक हर क्र बुआ अपने सीट से उठ क्र लल्लू की और चली गई.

लल्लू अपने सीट को खींच क्र थोड़ा पीछे क्र दिया और अपना बेल्ट खोल क्र पेण्ट को लूसे क्र दिया

दीक्षा आ क्र सकुचाती हुई लल्लू क गॉड मई बैठ गई.

लल्लू उन्हें बैठा लिया अपने गॉड मई आराम से.

लल्लू- चलो मेरे बच्चे की मां. अब गाड़ी आगे बढ़ाओ.

दीक्षा गाड़ी धीरे से आगे बढ़ा दी.

थोड़ी देर लल्लू संत रहा फिर अपना दोनों हाथ बढ़ा क्र बुआ क दोनों चूचियों का पकड़ लिया हाथ मई.

बुआ- ये क्या कर रहे है. एक्सीडेंट हो जाएगा.

वो गाड़ी बिलकुल स्लो क्र दी.

लल्लू दीक्षा क गर्दन पर पीछे से किश करता हुआ उसके दोनों पपीते को मसल रहा था.

बुआ गाड़ी को एक तरफ रोक दिया

बुआ- इसी लिए बुलाये थे न मुझे यहाँ बैठने को.

लल्लू- आप को जिस काम से बुलाया है वो अभी क्या कहा है मैंने.

बुआ- अब क्या करना है आप को जनाब

लल्लू- अभी आप को मैंने अपने घोड़े पर बैठाया hi नहीं है. आप मेरे घोड़े पर बैठ क्र इस गाड़ी को चलाओगी.

बुआ- चुप बदमाश. मुझे से नहीं होगा.

लल्लू- होगा कैसे नहीं. बिलकुल होगा.

लल्लू जोर जोर से दीक्षा क निप्पल को मरोड़ता हुआ बोलै.

बुआ- ऊह्ह्ह, मत करो न. दर्द कर रहा है. खुला सरक है ये. कोई देखेगा तो क्या कहेगा.

लल्लू- हमे देखने क लिए इस गर्मी मई कौन आ रहा है. खुले मई इस तरह गाड़ी मई प्यार करने का आप का मन नहीं करता है क्या.

बुआ- नहीं मेरा मन नहीं क्र रहा है. अब मुझे गाड़ी चलने दो न. नहीं तो हम लेट हो जाइए.

लल्लू बुआ क गर्दन पर चूमते हुए उसके कान मई जीभ घुसा क्र घूमने लगा.

बुआ का पुरे सरीर का रोया रोया खड़ा हो गया.

लल्लू- कैसा लग रहा है.

बुआ- ऊह्ह्ह, बायसस करररर ना. आअह्ह्ह मुझसे से इस्सस गाड़ी नहीं चलयाआ जा रहा..

ीिययय ओह्ह्ह.

लल्लू बुआ को थोड़ा आगे क्र अपना पेण्ट निचे क्र लिया. उसका डंडा पूरा अपने सबब पर था. फिर वो बुआ क साडी को निचे से उठा लिया.

बुआ मन करती रही लेकिन लल्लू अपने काम मई लगा रहा.

पीछे से उसकी हरकते जारी थी जो बुआ क बदन मई आग लगाना नहीं रोका था.

बुआ क साडी पेटीकोट कमर तक क्र दिया था पीछे से लल्लू ने.

बुआ निचे पेंटी भी पहने हुए थी

लल्लू बुआ की पेंटी पकड़ क्र फार दिया

बुआ- ाःह ये क्या क्र रहे हो

लल्लू- आज क बाद आप ये नहीं पहनोगे कभी. मुझे जहा जब मन करेगा तभी अपना मुन्ना आप की मुनिया से मिला दूंगा.

समझ गई आप.

लल्लू बुआ क छूट को पंजे मई दबोच क्र उसे भिचने हुए बोलै.

बुआ की छूट क पानी से लल्लू का पूरा हाथ भींग गया था.

बुआ- ाःह मत करो. अब मुझ से कटी नहीं होगा.

लल्लू- आप को कौन कहता है कण्ट्रोल करने को.

देखो तो कितना पानी निकल रहा है आप क छूट से.

ये आप क छूट मई तो लगता है जैसे बढ़ आ गया है.

बुआ- कितना गन्दा बोल रहे हो. छी…

लल्लू बुआ को पकड़ क्र अपने लैंड पर बैठा लिया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 63.

लल्लू बुआ को पकड़ क्र अपने लौड़े पर बैठा लिया.

सूखा लैंड बुआ की बुर को भेदता हुआ जार तक जा घुसा.

बुआ- आह मर दिया. ओह्ह्ह फैट गया मेरी बुर्र. गिला तो क्र लेते पहले.

लल्लू- आप तो गीली हो हो. उस मई जा क्र ये भी गिला हो जाएगा.

लल्लू बुआ क कमर पकड़ क्र उसे उप्पेर निचे करने लगा. साथ hi अपना कमर भी हिलने लगा.

तभी एक गाड़ी आगे से आ रही थी.

बुआ- देख गाड़ी आ रही है. देखेगा तो क्या कहेगा.

लल्लू- क्या कहेगा. यही की मिया बीबी दोनों गाड़ी मई प्यार क्र रहे है.

बुआ- ाः प्लस मन जाओ न.

तभी वो गाड़ी इन लोगो क गाड़ी को क्रॉस क्र गया.

लल्लू- क्या कहा उसने.

बुआ- किस ने.

लल्लू- गाड़ी वाले ने.

बुआ- मुझे क्या पता.

लल्लू- तो इतनी चिंता किस बात की थी.

बुआ- करो जो करना है. जल्दी ख़त्म करो.

लल्लू- जब तक हम उज्जैन नहीं पहुंच जाते तुम मेरे घोड़े पर hi बेटी रहोगी. समझी मेरी घोड़ी.

लल्लू बुआ की चुकी मसलता बोलै.

बुआ- हैयय कितना मजा आ रहा है.. इस्सस ऐसी ही कर्त्ता रहहह..

थोड़ा जोररररसे.

बुआ अब जोर जोर से अपनी गांड घिसने लगी लल्लू क गॉड मई बैठी हुई.

लल्लू पीछे से कभी बुआ क चुकी मसल देता तो कभी उनके कान क लॉ को होठो मई दबा क्र चूस लेता.

लल्लू की ये सब हरकते बुआ क आग को और भड़का दे रहा था.

बुआ साइड मई गाड़ी कड़ी क्र जल्दी से उठ क्र घूम गई और लल्लू क लैंड को पकड़ क्र उस पर बैठती चली गई.

बुआ की आँखे बंद हो गई थी. वो अपने होठो को दातो से दबाये हुए लल्लू क लौड़े को अपने बच्चेदानी मई थोकड मरती महसूस कर रही थी.

जैसे hi लल्लू का बुआ लैंड जड़ तक बुआ क छूट मई घुसा दोनों क मुँह से एक आनंद की आह्हः निकल गया.

फिर बुआ लल्लू क कंधे को पकड़ क्र जोर जोर से लल्लू क लैंड पर पानी छूट को पटकने लगी.

दोनों अब नजदीक थे अपने मंजिल से.

दोनों मई hi बोर लगा था अपने साथी को ज्यादा से ज्यादा प्लेअसुरे देने की.

बुआ लल्लू क होठो को चुस्ती हुई उसके बालो को नोचती झरने लगी.

लल्लू अपने लैंड पर बुआ क पानी को फील क्र वो भी बुआ क दोनों चूचियों को मरोड़ता हुआ उसके छूट मई hi पानी बहा दिया.

बुआ थक क्र लल्लू क गॉड मई गिर गई.

अपने सर को लल्लू क साइन से लगाए आँखे बंद किये बुआ गहरी गहरी सास ले रही थी.

लल्लू बुआ क गलो को चूमता उसके बालो को सहला रहा था.

थोड़ी देर दोनों यु hi एक दूसरे मई खोये बैठे रहे. तभी किसी गाड़ी क हॉर्न देने से उनकी खुमारी टूटी.

बुआ सर उठा क्र लल्लू को देखि.

लल्लू बुआ की आँखों मई देखता हुआ अपनी एक आँख दबा दी.

बुआ शर्मा क्र नजरे झुका ली. लल्लू झुक क्र बुआ क होठो को चुम लिया.

लल्लू- कैसा लगा.

बुआ- बहुत अच्छा. बहुत मजा आया.

लल्लू- फिर एक बार और हो जय.

बुआ- हुत्त पागल, अब नहीं. जल्दी चलो. लक्ष्मी अपने पति से मिलने को बेक़रार होगी

लल्लू- फिर आप कपडे सही क्र लीजिये. अब हम लक्ष्मी जी क पास जा क्र hi रुकेंगे.

बुआ वह से उठ क्र कपडे सही करती बगल वाली सीट पर बैठ गई.

लल्लू अपना पेण्ट पहन क्र उसे बंद क्र लिया. उसका लौड़े क चारो और बुआ और उसके पानी से भींग गया था. जिसे रुमाल निकल क्र साफ़ क्र दिया था पहले.

लल्लू गाड़ी आगे बढ़ा दिया.

फिर दोनों मस्ती मजा करते हुए सीधा जा क्र लक्ष्मी क बंगले क आगे hi गाड़ी रुकी.

लल्लू मैं गेट क आगे गाड़ी रोक क्र हॉर्न दिया

बुआ- ये लक्ष्मी का घर है.

लल्लू- है बुआ. यही है उनका घर.

बुआ- बहुत सुन्दर है.

तब तक गेट कीपर आ क्र छोटी से खिड़की से देखा की कौन आया है.

लल्लू को देख क्र उसने जल्दी से गेट खोल दिया

लल्लू- कैसे हो काका. सब कैसे है.

सोहन- Ram-Ram बाबूजी. सब बढ़िया है बाबूजी. आप आ गए तो अब बिटिया को भी अच्छा लगेगा.

सोहन लल्लू को सलाम करता बोलै.

लल्लू गाड़ी आगे बढ़ा क्र पोर्च मई गाड़ी कड़ी क्र दी.

गाड़ी की आवाज सुन क्र सब बहार आ गए.

बुआ को देख क्र लक्ष्मी बहुत खुश हुई. वो दौड़ क्र बुआ को गले से लगा ली.

लक्ष्मी इस वक्त एक ग्रे कलर का ड्रेस पहने हुई थी जिस मई वो कमल की लग रही थी.

लल्लू तो लक्ष्मी को hi देखता रह गया.

बुआ और लक्ष्मी दोनों बाटे करती हुई घर क अंडर चली गई.

लल्लू वह थका सा खड़ा रह गया.

गज्जू मां- अब मुँह फारे क्या खड़ा है. बीबी मिल गई तो मुझे भी भूल गया.

लल्लू मां की आवाज सुन हड़बड़ा क्र वर्तमान मई आया और जा क्र मां क पेअर छू क्र प्रणाम किया.

गज्जू मां लल्लू को उठा क्र गले से लगा लिए.

गज्जू- कैसा है मेरा बीटा.

लल्लू- आप क सामने hi हु. देख लीजिये बिलकुल फिट हु.

गज्जू मां लल्लू को ले क्र अंदर आ गए.

गज्जू मां- जा बीटा उप्पेर लक्ष्मी बीटा का कमरा है. फ्रेश हो क्र आजा.

लल्लू फर्स्ट फ्लोर पर लक्ष्मी क कमरे मई चला गया जहा दोनों परिया बीएड पर बैठी हुई बाते क्र रही थी.

लल्लू भी थोड़ा सताने क लिए लक्ष्मी जी को इग्नोर करना सही समझा.

वो बैग से अपना कपडा निकल क्र वाशरूम चला गया. वह से फ्रेश हो क्र आ गया फिर निचे गज्जू मां क पास चला गया.

लल्लू- मां अब बताइये क्या हुआ है.

फिर गज्जू मां लल्लू को साडी बात बता दिए.

तब तक काकी सब क लिए नास्ता लगा दी.

बुआ और लक्ष्मी भी निचे आ गए थे. फिर सब ने साथ मई नास्ता किया.

लल्लू- मां, युसूफ भाई कहा है. सब से ज्यादा खतरा उन्हें hi होगा मेरे ख्याल से लक्ष्मी क बाद.

मां- वो बेचारा सुबह 5 बजे hi आ गया था. अभी अभी गया है यहाँ से.

लल्लू- उन्हें कॉल क्र यही बुला लीजिये. बोलियेगा अपनी फॅमिली को ले क्र hi आये.

मां कॉल क्र युसूफ को साडी बात बता दिए.

वो थोड़ी देर मई आने का बोल दिया.

लल्लू- मां आईएनएस. किरण से फिर बात हुई थी क्या.

मां- है एक बार फिर हुआ था.

लल्लू- क्या कहा है उस ने.

मां- कहना क्या है. वही जो पुलिस वालो का तकिया कलम है. हम कोसिस क्र रहे है. बहुत जल्द पकड़ लेंगे.

लल्लू सर हिला क्र रह गया.

मां- उसने कुछ पुलिस वाले भेजे है हमारी सुरक्षा के लिए.

लल्लू- आप का काम कहा तक पंहुचा था मां जी.

गज्जू- मेरा काम तो हो गया है यहाँ. लक्ष्मी क पापा का सारा बिज़नेस मैंने लक्ष्मी क नाम ट्रांसफर करवा दिया है. सुच पूछो तो लक्ष्मी क पापा इतने भले आदमी थे की मुझे कही कुछ करना hi नहीं पड़ा. सब उनका नाम सुन क्र hi काम कर देते थे.

लल्लू- फिर आप अगर गौण जाना चाहे तो चले जाइये. यहाँ मई देख लूंगा

मां- नहीं बीटा. अब मई जाऊंगा तो तुम सब को ले क्र hi जाऊंगा.

लल्लू- मुझे अब यहाँ समय लग सकता है मां. अब मई उस हत्यारे को किसी नतीजे पर पंहुचा क्र hi घर वापस जाऊंगा. नहीं तो हो सकता है वो पीछे पीछे हमारे घर तक पहुंच जय.

सब नास्ता कर चुके थे फिर वह से उठ क्र ड्राइंग रूम मई आ गए.

लक्ष्मी और बुआ एक बार फिर से अपने कमरे मई चले गए.

लल्लू मां क साथ ड्राइंग रूम मई hi बैठा था.

दोनों लक्ष्मी क पापा क बिज़नेस और उसके चाचा से रिलेटेड बातो मई मसगुल थे.

थोड़ी देर मई यूसीउफ भी अपने फॅमिली क साथ आ गया.

उसके फॅमिली मई.

युसूफ.- 50 एरस ओल्ड.

सकीना- 45 इयर्स.

इन दोनों की तीन बेतिया है.

सिबा- बड़ी बेटी- 26 एरस ओल्ड. ये फैशन डिज़ाइनर है.

कोमल- दूसरी बेट. 22 इयर्स ओल्ड. ये प्राइवेट स्कूल मई टीचर है.

जोया- तीसरी बेटी. 19 इयर्स ओल्ड. ये अभी पढाई क्र रही है.

लल्लू और गज्जू मां आगे बढ़ क्र उन दोनों का वेलकम किया फिर लल्लू काकी को बी क्र लक्ष्मी को बुला ली.

सकीना और उसकी तीनो बेतिया अभी फुल बुरका पहने हुए थी.

जिस मई से सिर्फ उन लोगो की आँखे hi दिख रही थी.

लल्लू- लक्ष्मी जी आंटी और बहनो को अंदर ले जाओ. ये अब अभी कुछ दिन यही रहेंगे. इनका कमरा दिखा दो.

लक्ष्मी सब को ले क्र अंडर चली गई.

लल्लू- काकी इन लोगो क लिए भी नास्ता का प्रभंश क्र दीजिये.

युसूफ- नहीं नहीं. हम अभी घर से कर क आये है. ये भी मेरा hi घर है. तक्क्लुफ़ की कोई जरुरत नहीं है.

फिर तीनो वही ड्राइंग रूम मई बैठ क्र बाटे करने लगे.

थोड़ी देर मई लल्लू कॉल क्र सब को घर पर बता दिया की वो लोग लक्ष्मी क घर पहुंच गए है.

सब ने उसे गुस्सा भी किया की कॉल समय से क्यू नहीं किया. सब को फिक्र हो रहा था.

थोड़ी देर सब से बात करने क बाद लल्लू मां और युसूफ क साथ ैप ऑफिस चले गए.

लल्लू- कैसी है मम. आप क यहाँ से मुजरिम भाग गया वो भी एक और मर्डर क्र क. कैसे हुए ये

किरण- सॉरी तो से बूत यही सुच है. उसने अपने कुरता फार क्र उस से अपने बेटे क गले मई लपेट क्र मर दिया.

लल्लू- लेकिन वो भगा कैसे यहाँ से.

वही तो समझ नहीं आ रहा है. उसके साथ उस बाररक मई कैद दो और कैदी भी भाग गए है.

गज्जू- कहा था वो कैद. कौन से जेल मई था.

किरण- यही क सेंट्रल जेल मई था वो.

लल्लू- क्या हम वह जा क्र देख सकते है.

किरण- आप कल सुबह आइये. फिर वह ले चलूंगी मई आप को.

फिर लल्लू और बाकि सभी वह से घर आ गए.

अभी रात हो गया था. ये तीनो आ क्र अपने कमरे मई चले गए फ्रेश होने को.

लल्लू जब कमरे मई गया तो वह मजमा लगा हुआ था.

लक्ष्मी क साथ बुआ और युसूफ की तीनो बेतिया बैठी हुई थी.

सभी बातो मई लगे हुए थे.

लल्लू हलके से दरवाजा नॉक क अंदर आ गया.

युसूफ की तीनो बेतिया लल्लू को देख क्र कड़ी हो गई.

वो सभी अभी सलवार कमीज मई थी.

लल्लू एक नजर सब को देखता हुआ वाशरूम चला गया.

जोया- दीदी आप क हुब्बी तो बड़े चार्मिंग है. अदि किस्मत वाली हो आप.

लक्ष्मी- अगर तुम्हे ज्यादा hi पसंद हैं वो तो बता दो मई तुम्हारी भी सदी उन्ही से करवा दूंगी.

सभी लोग लक्ष्मी की बाते सुन क्र हुस्ने लगी.

सिबा- इसे मत कहो लक्ष्मी दी. नहीं तो ये सुच मई कही सदी क्र hi न ले.

जोया- आप क्यू पदेशन हो रही हो. आप से पहले नहीं करुँगी. पहले आप की डोली उठेगी फिर छोटी बजी की मेरा नंबर तो सब से लास्ट मई है.

तब तक लल्लू फ्रेश हो क्र बहार आ गया था जिसे देख क्र सब चुप हो गए.

लल्लू कमरे से बहार आ गया.

बुआ- लगता है बेचारा शर्मा रहा है. इतने तितलियों को देख क्र.

सब फिर से हुस्स दिए.

सिबा- मैंने आज तक ऐसा लड़का नहीं देखा है.

अभी कमरे मई आये है तो हम सब को देखते hi आँखे नीची क्र ली उन्होंने और अभी जाते वक्त भी एक बार भी अपनी नजर नहीं उठाई. लक्ष्मी दी आप सुच मई बहुत खुसनसीब वाली हो.

ऐसा सौहार मिला है आप को.

लक्ष्मी- सिबा दी आप बार बार मुझे दीदी न कहे. मई आप से बहुत छोटी हु. मई तो जोया की उम्र की हु. वो तो एक्सिडेंटली हमारी सदी हो गई. आज अगर मेरे माँ बापू जिन्दा होते तो अभी थोड़ी न मेरी सदी होती

कोमल- लेकिन एक बात कहु लक्ष्मी दी. अगर अंकल आंटी भी होते न तो ऐसा लड़का मुझे नहीं लगता धुंध पते आप क लिए.

लक्ष्मी सरमने लगी कोमल की बात सुन क्र.

लक्ष्मी- कोमल दी एक राज की बात बताऊ.

कोमल और बांकी सभी- kya…(utsukta से)

लक्ष्मी- इनकी एक जुड़वाँ बहन है इन से बड़ी. उनका नाम भी कोमल है. ये उस से बहुत प्यार करते है.

कोमल- क्या जुड़वाँ है दोनों. वाओ नाम भी मेरे से मिलता है.

बुआ- खूबसूरत भी तुम्हारी तरह hi है वो भी बीटा.

कोमल तो सुन क्र hi खुस्स हो गई.

तभी सकीना सब को खाने को बुलाने क लिए आई.

फिर ये लोग भी अपने कमरे मई फ्रेश होने चले गए.

सब आ क्र एक साथ दिंनिंग टेबल पर बैठ गए खाने को.

काकी, मोहिनी दीदी और सकीना आंटी सब को खाना परोसने लगी.

लल्लू- आंटी आप भी आ जाइये काकी और दीदी सब को खिला देंगी.

सकीना- नहीं बीटा. मई घर मई भी आप क अंकल क खाने क बाद hi कहती थी. आप सब खाओ मई बाद मई खा लुंगी.

फिर सभी खाना खाने लगे. खाना बहुत बढ़िया बना था.

लल्लू- वह, मजा आ गया. खाना बहुत बढ़िया बना है.

काकी- ये सब आज सकीना बजी ने बनाया है.

गज्जू- वाकई मई आज का खाना बहुत सुन्दर था. पेट तो भर गया लेकिन मन नहीं भरा.

लल्लू- सही कहे आप ने मां. ठंकु आंटी इतने अच्छे खाना बनाने क लिए.

आंटी- बीटा तुम ठंकु कह क्र मुझे पराया क्र रहे हो. मई भी इसी घर की हु. ये सब मेरे परिवार है. इस लिए no थैंक्स.

लल्लू- ठीक है आंटी आप मेरा ठंकु मुझे वापस क्र दीजिये.

लल्लू की बात सुन क्र सभी हुस्ने लगे.

फिर सब का खाना हो जाने क बाद ये तीनो मर्द लोग वह से बहार गार्डन मई आ गए और लेडीज अपने कमरे मई चली गई आराम करने.

बहार गार्डन मई कुछ देर टहलने क बाद सब आ गए वापस

गज्जू- बीटा अब जा क्र सो जाओ. थक गए होंगे तुम भी. लम्बा सफर क्र क आये हो. फिर कल उधर जेल भी जाओगे सुबह मई.

फिर लल्लू वह से अपने कमरे मई आ गया. वह अभी सिर्फ लक्ष्मी hi थी.

लल्लू- बुआ कहा है.

लक्ष्मी- वो बगल वाले कमरे मई है.

लल्लू- मई मिल क्र आता हु.

फिर लल्लू बुआ क कमरे मई चला गया.

लल्लू- बुआ आप यहाँ सोने की तयारी क्र रहे हो.

बुआ- तो और कहा सोना है.

लल्लू- हमारे साथ.

बुआ- चुप क्र. बहु को पता चल गया तो अनर्थ हो जाएगा.

लल्लू- ऐसे कैसे. क्या आप इस लिए आये हो. आप यहाँ अकेले रहोगी. नींद आ जाएगा आप को.

बुआ- नींद तो नहीं आएगा लेकिन ये लक्ष्मी क साथ अन्याय होगा.

लल्लू- कैसा अन्याय.

बुआ- आज कई दिनों बाद उसका पति आया है और मई वह चली जाउंगी तो वो तुम से बात करने मई झिझकेगी. वो खुल क्र तुम से बात नहीं क्र पायेगी. उसे अभी तुम्हारी जरुरत है. मेरा क्या है. मई भी यही हु और तुम भी यही हो. हम फिर कभी मिलेंगे. अभी ये टाइम लक्ष्मी का है.

लल्लू आगे बढ़ क्र बुआ को अपने आगोश मई ले लिया और उनका होठ चूसने लगा.

थोड़ी देर होठो का रास निचोर्ने क बाद लल्लू को बुआ वह से लक्ष्मी क कमरे मई भेज दी.

लल्लू कमरे मई आ क्र बैग से पजामा निकल क्र पहन लिया.

लक्ष्मी एक निघ्त्य पहने हुए थी. जो उसके जांघ से थोड़ा निचे था.

लल्लू बीएड पर आ क्र बैठ गया.

लक्ष्मी पहले से hi बीएड पर अधलेटी अवस्था मई थी.

दोनों मई से कोई कुछ नहीं बोल रहा था.

लक्ष्मी चोर नजरो से लल्लू को देख रही थी.

लल्लू- कैसी हो आप.

लल्लू समाज गया की लक्ष्मी को अभी सरम आ रहा है बात करने मई या लल्लू क नजरो को फेस करने मई.

बात भी सही hi थी ये. अभी लक्ष्मी यही सोच रही थी की वो कैसे बात सुरु करे.

लक्ष्मी- मई ठीक हु. घर मई सब कैसे है. माँ काकी दीदी लोग दादू और काका.

लल्लू- सब मजे मई है. आप को सब याद क्र रहे थे.

लक्ष्मी- मुझे भी सब की बहुत याद आती है.

लल्लू- यहाँ कोई दिक्कत तो नहीं था न आप को.

लक्ष्मी- नहीं दिक्कत कोई नहीं थी. बस ये जो हादसा हो गया है उस से थोड़ा दर लग रहा है.

लल्लू- अब मई आ गया हु न. उसे फिर से पकड़ क्र इस बार पुलिस को नहीं दूंगा. इस बार कुछ और hi करना पड़ेगा.

लक्ष्मी- वो हैवान बन गया है. हमे ऐसा कुछ नहीं करना है. एक दो दिन मई हम सब यहाँ से अपने गौण चले जाएंगे.

लल्लू- ठीक है जैसा आप कहे.

लक्ष्मी खुस हो क्र लल्लू क बाह को पकड़ क्र उसे तकिये पर अपने जैसे लेता दी और अपना सर उसके साइन पर रख ली.

लल्लू- लक्ष्मी मुझे कुछ कहना है तुम से. कुछ मेरी लाइफ की बाटे है जो तुम्हे नहीं पता है. सब कुछ इतना जल्दी जल्दी हो रहा है की समय hi नहीं मिला तुम्हे बताने को.

लक्ष्मी सर उठा क्र लल्लू को देखने लगी.

लल्लू- पता नहीं मुझे ये बात तुम्हे कहना चाहिए या नहीं लेकिन मई तुम से कुछ छुपाना भी नहीं चाहता हु. लेकिन ये भी सुच है की हमारी सदी जैसे भी हुई है अब हम पति पत्नी है. और मई आप से बहुत बहुत प्यार करता हु.

लक्ष्मी- मई भी आप से बहुत प्यार करती हु. मुझे आगे और कुछ भी नहीं जानना है. मेरे लिए बस इतना जानना hi काफी है की मेरा पति मुझे बहुत प्यार करते है.

लल्लू- कल को किसी और से पता चल गया तो.

लक्ष्मी- मैंने कहा न. मुझे और किसी चीज से कोई मतलब नहीं है.

लल्लू लक्ष्मी क सर क बालो को सहलाता उसके सर को पकड़ क्र उठा लिया और हलके से उसके होठ पर चुम लिया.

लल्लू- अब आप ये बताइये की आप मुझ से नाराज है क्या. मई कब से आया हुआ हु और एक बार भी आप मुझ से भी कुछ पूछ लेती. बुआ को ले क्र चली गई और मई मुँह देखता रह गया.

लक्ष्मी- बाबू ये सब तो मई भी कह सकती हु. इतने देर से आप आये है और अब जा क्र आप को फुर्सत मिला है. दूसरी बात ये है की वह पापा और बांकी लोग भी थे तो मुझे सरम आ रही थी इस लिए मई बुआ को ले क्र भाग आई. वैसे आप को तड़पते देखने का एक अलग मजा है. सही कह रही थी सोनम दी.

लल्लू- ओह्ह्ह, अब समझा तो ये सब सोनम दी का किया धरा है.

लक्ष्मी- प्लस दी को मेरा नाम मत बताइयेगा. वर्ण वो मेरे से नाराज हो जाएगी.

लल्लू लक्ष्मी को पलट क्र उसके उप्पेर आ गया.

लल्लू- आप और आप क सोनम दी क आगे मेरा कहा कुछ चलता है.

लक्ष्मी मुसकुडने लगी.

लल्लू अपना गर्दन निचे क्र क लक्ष्मी क सर को चुम लिया. फिर उसके दोनों आँखों को, इस से निचे लळष्मी क नाक को फिर कश्मीर क सेब की तरह लाल लाल फुले हुए दोनों गलो को और वह से सरकता हुआ लल्लू का होठ आ क्र लक्ष्मी क तपते होठो पर लगा दिया.

लक्ष्मी हल्का सा खोल क्र लल्लू क होठो का अनतरण स्वीकार क्र उसे अपने होठो मई समां लिया.

दोनों क होठ एक दूसरे से उलझ क्र एक दूसरे का रसपान करने लगे.

लल्लू दोनों हाथ से लक्ष्मी क उन्नत वक्ष को निघ्त्य क उप्पेर से hi पकड़ क्र सहलाने लगा.

लक्ष्मी अंडर ब्रा नहीं पहले हुए थी.

लल्लू क हाथो का स्पर्श पते हुए उसके दोनों उभर क अग्रभाग पर जो निप्पल थे वो और कड़ी हो गई

बिच बिच मई लल्लू उन निप्पल्स को अपने दो उंगलियों मई पकड़ क्र हलके से मसल देता

लक्ष्मी सिस्किई ले क्र रह जाती

लल्लू लक्ष्मी पर से उठ क्र साइड हो गया और उसके निघ्त्य क गांठ को खोल दिया.

निघ्त्य दो भागो मई बात क्र लक्ष्मी क सरीर से अलग हो गया.

अभी लक्ष्मी पूर्ण नग्न अवस्था मई आँखे बंद किये बीएड पर लेती हुई थी.

सैश लेने से उसके उभर एक ले मई उप्पेर निचे हो रहे थे.

गोर उभारो क सब से आगरा भाग मई थोड़ा सा हलके भूरे रंग का हिस्सा और उस बिच मई पिंक पिंक दोनों उभारो की वो छोटी जो अपना सर उठाये हुए थी.

अभी लल्लू क हाथ क मर्दन से हल्का लाली लिए हुए था.

बहुत मनमोहक था ये.

बल्ब क रौशनी मई चमकता हुआ ये लक्ष्मी का बदन लल्लू क उत्तेजना को और चरम पर ला रहा था.

लल्लू आँखे गड़ाए इस हुस्ना की मल्लिका क हुस्ना का दीदार क्र रहा था.

चिकना सपाट पेट जो सास लेते हुए उप्पेर निचे हो रहा था उसके निचे एक गहरी खाई थी.

बहुत अद्भुत नजारा था ये.

कमर से फिशलता हुआ लल्लू की नजर लक्ष्मी की क्लीन सेव्ड छूट जिस क बिच एक पतली सी लकीर बनाये हुए थी. उस छोटी सी लकीर मई एक बून्द मोती चमक रहा था जो इस बात का गवाही दे रहा था की लक्ष्मी लल्लू क मिलान को बहुत आतुर है.

लल्लू उस चमकते मोती को अपने एक ऊँगली को बड़ा क्र हलके से उस पर उठा लिया और उसे अपने जीभ से चाट लिया. लल्लू आँख बंद किये लक्ष्मी क इस अमृत बून्द को महसूस क्र रहा था.

. लल्लू का वो ऊँगली बहुत हल्का सा लक्ष्मी क लकीर क पास एक छोटी सी निकली हुई टॉप पर छू गया.

लक्ष्मी इस छुअन से चिहुँक गई. उसका पूरा बदन थरथरा गया.

लल्लू गर्दन झुका क्र लक्ष्मी क इस अमृत द्वार को हौले से चुम लिया.

लक्ष्मी उछाल क्र लल्लू क सर को पकड़ ली. उसके बालो को सहलाने लगी

अभी लक्ष्मी की ससे बहुत तेज तेज चलने लगा था. उसके होठ बार बार सुख जा रहे थे जिसे लक्ष्मी अपना जीभ निकल क्र फिर से गिला क्र लेती थी.

लल्लू का अगला कदम क्या होगा ये सोच सोच क्र लक्ष्मी क सरीर मई चीटिया रेंग रही थी. मरे उत्तेजना क उसका पूरा सरीर तप रहा था. लक्ष्मी की आँखे बिलकुल लाल हो गई थी. जैसे उस से अभी खुल निकल आएगा.

लल्लू से अब सबर करना मुश्किल हो रहा था लेकिन वो इतनी जल्दी भी इस खेल को ख़त्म नहीं करना चाहता था.

वो और निचे आ क्र लक्ष्मी क पेअर क पास आ क्र बैठ गया बीएड पर.

वो लक्ष्मी क चिकनी पेअर और उस क गोर उंगलियों को हलके से एक ऊँगली से सहला दिया.

लक्ष्मी झटके से उस पेअर को खींच ली

लल्लू ड्सरे पर क अंघूठे को अपना जीभ निकल क्र चाट लिया

लक्ष्मी उसे भी खींचने लगी की लल्लू उसे पकड़ लिया.

लक्ष्मी आँखे खोल क्र उठ बैठी और लल्लू क हाथो को पकड़ क्र उसे अपने पास खींचने लगी.

लल्लू उठ क्र लक्ष्मी क पास आ गया.

लक्ष्मी लल्लू क t-shirt को पकड़ क्र उसे अपने पास खींच ली. दोनों की ससे अब एक दूसरे क चेहरे पर आ रहा था. लक्ष्मी लल्लू क आँखों मई अपनी माध भरी आँखों से देखते हुए अपने तपते होठ लगा दिए.

दोनों पैशनएटली किश करने लगे.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र लक्ष्मी क नंगे उन्नत अमृत कलश को पकड़ लिया और उसे सप्रेस करने लगा.

लक्ष्मी अपने हाथो को लल्लू क t-shirt क अंडर दाल क्र उसके पीठ को सहलाती अपने उप्पेर लेने लगी

लल्लू किश तोर क्र अपना t-shirt खोल क्र अलग रख दिया.

फिर अपना पजामा भी खोल दिया.

लल्लू का मोटा डंडा हवा मई झूल रहा था.

लल्लू लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र उसके हाथ मई अपना लौड़ा पकड़ा दिया.

लक्ष्मी अपने हाथ मई लल्लू क सख्त गर्म डंडे को अनुभब क्र क सिहर उठी.

निचे से लक्ष्मी की छूट आँशु बहाने लगी.

लल्लू लक्ष्मी पर झुक क्र उसके एक चुकी को अपने मुँह मई भर लिया और उसे चूसने लगा और दूसरे चुकी को पकड़ क्र दबाने लगा.

लक्ष्मी सिसकती हुई लल्लू क लौड़े को हाथ से पकडे उसे जोर से मरोर दी मजे मई.

लल्लू दोनों चूचियों को पिने क बाद उठ क्र लक्ष्मी क पेअर क बिच आ गया और लक्ष्मी पैरो को फैला क्र उस क छूट को जीभ निकल क्र चाटने लगा.

लक्ष्मी लल्लू क बालो को नोचती अपने होठो को खुद क दांतो से काटने लगी.

लक्ष्मी मजे की वादियों मई सैर क्र रही थी. बहुत मजा आ रहा था उसे.

लक्ष्मी अपने मुहसे अजीब अजीब आवाजे निकल रही थी

थोड़ी देर छूट चूसने क बाद लल्लू उठ क्र लक्ष्मी सर क पास आ गया और अपना लौड़ा पकड़ क्र उसके मुँह की और क्र दिया लेकिन लक्ष्मी अपना गर्दन दूसरी और घुमा ली

लक्ष्मी को अभी बहुत सरम आ रही थी.

वो समझ गई लल्लू क्या करना चाहता है लेकिन सरम क कारन वो नहीं क्र प् रही थी.

लल्लू ज्यादा जोर नहीं दिया उसे पता था. ये सब चीजे सब नहीं कर सकता है.

लल्लू एक बार फिर से लक्ष्मी पेअर क बिच आ गया और अपने ऊँगली से लक्ष्मी क छूट को कुरेदने लगा.

लक्ष्मी सर इधर उदाहर पटकती हुई तरप रही थी मजे से.

ये मजा ऐसा था जिस का वर्णन नहीं कर सकती थी लक्ष्मी. एक बार वो जहर चुकी थी और लग रहा था जैसे वो अब दूसरी बार भी ऐसे hi जहर जाएगी.

वो आँखे खोल क्र लल्लू को देखने लगी.

लल्लू लक्ष्मी क आँखों मई देखता अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकल क्र अपने लैंड पर लगाने लगा. अच्छे से थूक से गिला करने क बाद लल्लू उसे लक्ष्मी क छूट पर लगा दिया.

लल्लू झुक क्र लक्ष्मी क दोनों दूध को पकड़ क्र एक करारा धक्का लगा दिया

लक्ष्मी जोर से चिल्लाने वाली थी की लल्लू हाथ बढ़ा क्र उसके मुँह को बड़ा दिया.

लल्लू का पूरा लैंड एक बार मई hi लक्ष्मी क छूट मई जार तक थोक दिया

लल्लू लक्ष्मी का मुँह दबाये हुए hi चार पांच बार और पूरा लैंड निकल निकल क्र एक बार मई hi लक्ष्मी क छूट को भर देता.

जब छूट अंदर से हलकी ढीली हो गई तो फिर लल्लू अपना हाथ हटा लिया.

तब तक लक्ष्मी लल्लू क हाथो और साइन पर अपने दोनों हाथो से चार पांच मुक्का लगा चुकी थी.

लक्ष्मी- आअह्ह्ह मर देंगे क्या मुझे. ऐसे भी कोई करता है क्या. एक बार मई hi फार दिया आप ने मेरा.

लल्लू- मई क्या करू. आप हो hi इतनी हॉट माल की मुझ से सबर hi नहीं हुआ. आप को गिला करने दिया था न की दर्द काम हो तो अपना मुँह उधर घुमा ली आप ने.

लक्ष्मी- आह्हः मर्डर गई.. फट गया है मेरा. हैयय मा इस्सस..

यु hi बारबरा तो लक्ष्मी अपने दर्द को कण्ट्रोल क्र रही थी.

लल्लू उसके चूचियों को जोर जोर से पकड़ क्र मसल दिया.

लक्ष्मी- क्या हो गया है. आज आप को. अब इसे क्या ुखरना है आप को. किस बात का बदला ले रहे है.

लल्लू- इसे बड़ा क्र रहा हु जान

लक्ष्मी- पहले hi बड़ा हो गया है. सरे कपडे अब यहाँ से टाइट हो गया है. एक भी ब्रा नहीं आता है पहले वाली.

लल्लू- ये तो खुसी की बात है. मई इसे और बारे करना चाहता हु. तभी तो सुन्दर लगेगा और दूध भी ज्यादा आएगा इस मई.

लक्ष्मी- ऐसा कुछ नहीं है. मुझे नहीं करना ज्यादा दूध अभी. ये सब सोचियेगा भी नहीं.

लल्लू अब हलके हलके अपना कमर हिलने लगा.

कभी गर्दन कभी पेट तो कभी लक्ष्मी की चूचियों को सहलाता हुआ लल्लू अब अपने पुरे उफान पर था.

एक बार लक्ष्मी झरर गई थी और दूसरी बार झरने वाली थी.

लल्लू लक्ष्मी क उप्पेर लेटता हुआ उसके होठो को चुस्त धक्के का स्पीड और बढ़ा दिया.

दोनों एक दूसरे मई समां जाना चाहते थे.

अंत मई इस खेल का लास्ट हो hi गया.

लल्लू लक्ष्मी क छूट की गहराइयों मई अपना लैंड घुसा क्र उसके छूट को अपने वीर्य से भर दिया.

लल्लू अपना लैंड निकल लिया लक्ष्मी क छूट से.

अभी लल्लू का लैंड छूट रास से पूरा भिनगा चमक रहा था.

लल्लू- जान..

लक्ष्मी- हुऊ. (आँखे बंद किये हुए)

लल्लू- इसे साफ़ क्र दो न.

लक्ष्मी आँख कह क्र देखि लल्लू की आँखों मई.

लल्लू अपने आँखों से लैंड की और इसरा क्र दिया.

लक्ष्मी नजर घुमा क्र देखि तो बहुत भयानक लग रहा था अभी छूट रास से भिनगा हुआ लैंड.

लक्ष्मी मुसकुडती हुई अपना गर्दन घुमा ली

लल्लू- अरे साफ़ क्र दो न.

लक्ष्मी- मुझे इस लायक आप चोदे है कहा. अभी तो हिला भी नहीं जाएगा मुझ से.

जो करना है खुद क्र लीजिये. ज्यादा चालक मत बनिए.

लल्लू वैसे hi नंगा वाशरूम चला गया.

वह से आ क्र देखा तो लक्ष्मी नंगी hi सो गई थी.

उसके गोर बदन पर कई जगह लल्लू क दन्त क निशान आ गए थे जिस से लग रहा था जैसे खून निकल जाएगा.

लल्लू लक्ष्मी पर चादर दाल क्र एक किसी उसके मात पर कर दिया.

लल्लू उसके और बुआ क दिवार क बिच का दरवाजा खोल दिया और नंगा hi बुआ क कमरे मई चला गया.

बुआ गहरी नींद मई सो रही थी.

लल्लू बुआ की साडी उठा दी कमर तक. बुआ निचे पेंटी नहीं पहने हुए थी.

लल्लू बुआ क बुर मई अपना मुँह घुसा क्र उसे चूसने लगा.

बुआ हार्बर क्र उठ बैठी. वो चीखने वाली थी की लल्लू अपना सर उठा क्र देखा बुआ को.

बुआ जल्दी से अपने मुँह और अपना हाथ रख ली

बुआ- ये क्या क्र रहा है. लक्ष्मी को पता चल गया तो.

लल्लू- मई समझ लूंगा. तुम मजे लो.

बुआ- नहीं नहीं. अभी जा क्र सो जाओ तुम.

लल्लू उठ क्र बुआ क दोनों पेअर उठा क्र उसके छूट मई अपना झंडा गड दिया.

लल्लू फिर दनादन बुआ को छोड़ने लगा.

बुआ- ाःह मा कैसा वहसीई सी पाला पड़ गया ही. मा यी तू जब्ब मर्जी तब्ब खड़ा किये रहता है.

लल्लू- मई खुस हुआ. तुम हमेसा ऐसे hi बिना पेंटी क रहोगी. जब मेरा मन करेगा मई अपने बच्चे क माँ को छोड़ सकता हु.

बुआ- मा बचाया लो..

बुआ बीएड का चादर दोनों हाथ से पकडे सर को तकिये और इधर उधर पटक रही थी.

लल्लू का लौड़ा पिस्टन की तरह बुआ की छूट की धज्जिया उड़ने मई लगा था.

थोड़ी देर मई hi लल्लू बुआ क छूट मई अपना लावा उड़ेल दिया. साथ hi बुआ भी झरर क्र निढाल हो क्र बीएड पर लुढ़क गई.

लल्लू उनके छूट से अपना लैंड निकल लिया और आ क्र बुआ क गलो पर रगड़ दिया

बुआ मुँह घुमा के लल्लू को देखि तो लल्लू दोनों क राश से भींगे लौड़े को गाल पर रगड़ते देखि तो उसे एक थप्पड़ लगा दी उसके लौड़े पर.

बुआ- भाग जा यहाँ से नहीं तो बहुत मरूंगी. पता नहीं क्या सब गन्दी गन्दी बाटे इसके दिमाग मई आता है. हैयय राममम. कितना गंदा करर दिया ये.

लल्लू बुआ क होठो को चुम क्र वापस उसी दरवाजे से अपने कमरे मई आ गया और गेट बंद क्र दिया.
 
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