Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 8 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

मर्द का बच्चा. अपडेट 34.

सब को बैठा क्र वो D.wala एक लड़के को बुलाया और उसे काउंटर पर बैठने को बोलै.

D.wala- यहाँ भीड़ बहुत रहेगा तो आप लोग मेरे साथ पीछे गोडाउन चलिए.

वह मई आप सब को सभी तरह क कपडे तसल्ली से दिखा पाउँगा.

फिर सभी उस दुकान वाले क साथ पीछे गोडाउन चले गए. वह लगभग 2 घंटे तक खरीदारी करने क बाद सभी वह से उठे.

डी. वाला- ये सारा मई पैक कड़वा क्र गारी मई रखवा देता हु.

आप सब तब तक आइये चल क्र शोरूम मई बैठिये.

सोनम- माँ यहाँ कपडे का सिलाई भी होता है. अगर आप सब को सिलाई करवाना है तो अंकल वो भी करवा देंगे.

डी. वाला- है है क्यू नहीं. जिन को भी अपने कपडे सिलवाने हैं. वो नाप दे क्र सिलने को दे दीजिये. दो दिन मई सील क्र तैयार करवा दूंगा.

सभी काकी वही ब्लाउज सिलने को दे दिए.

दीदी लोग भी अपने अपने लहंगा की फिटिंग करे तो कोई शॉट्स की सिलाई को भी दे दिए.

फिर सब वह से शोरूम मई आ गए.

फिर वह सब क लिए वो दुकान वाला जूस मंगवाया.

सब जब तक जूस पि रहे थे तब तक सारा सामान पैक क्र उनके गारी मई रखवा दिया गया.

लल्लू जा क्र बिल बनवा लिया.

पैसे ऋतू जा क्र पाय क्र दी.

लल्लू सोनम और रिद्धि वाला सूट्स भी ले लिया.

लल्लू- (ऋतू से) अभी और लेना है क्या काकी. तो दूसरे दुकान का भी पता कर ले.

काजल- तुम्हे समझदार बनाने की जरुरत नहीं है. हम सब को भी पता है यहाँ काफी सरे शोरूम है.

लल्लू माँ की बात सुन क्र पीछे हो गया.

फिर सब गारी मई बैठ गए. लल्लू भी जा क्र बाइक स्टार्ट क्र गारी क पीछे चल दिया.

फिर गारी एक शोरूम पर रुका. लल्लू भी अपना बाइक पीछे रोक लिया.

सब गारी से उतर क्र अंडर दुकान मई चले गए. लल्लू बहार hi खड़ा रहा. उसे अंडर जाने का मन नहीं क्र रहा था. लल्लू बाइक पर बैठा इधर उधर दुकाने देख रहा था.

तभी लल्लू देखता है की एक 2.5- 3 शाल का बच्चा रोड पर अकेला रोड क्रॉस कर रहा है और उधर से एक कार बड़ी तेज दौरि चली आ रही है.

लल्लू बाइक को स्टैंड पर खड़ा क्र उस पर एक पेअर मोर क्र अपने जांघ पर रखे बैठा हुआ था.

लल्लू जब ये देखा तो उसकी ससे अटक गई.

ओह्ह मय्यै गोड़.. ये बच्चा…

लल्लू जल्दी से कूद क्र बाइक से उतरा.

अब वो कार उस बच्चे से मुश्किल से चार कदम दूर था.

लल्लू तो कम्प गया देख क्र. उसे अब जल्दी hi कुछ करना था.

वो उप्पेर वाले को याद क्र दौड़ क्र लौंग जम्प लगाया तब तक कार भी बस बच्चे से टकराने hi वाला था.

लल्लू गुलाटी खता हुआ रोड पर बच्चे को गॉड मई लिए रोड क दूसरे साइड घिसटते हुए गिरा लेकिन कार फिर भी टक्कर मर hi दी थी.

लेकिन अच्छी बात ये थी की वो बच्चे क बदले लल्लू को लगा था.

बच्चा लल्लू क गॉड मई दर से चिपका हुआ था.

लल्लू उस बच्चे को अपने साइन मई छिपाये रोड पर गिरा था.

आस पास क दुकान पर जो लोग थे वो दौड़ क्र आये.

राघव लल्लू को दुकान मई नहीं देखा तो वो लल्लू को ढूंढते हुए बहार देखने आया था.

बहार सरक पर भीड़ और सोर होता देख क्र राघव वह देखने चला आया.

तब तक वह पर जमा भीड़ लल्लू को पकड़ क्र उठाया.

लल्लू क कार से टक्कर होने से और फिर सरक पर घिसटने से उसका एक तरफ का कन्धा और कमर चील गया था. सर भी फुट गया था जहा से खून निकल रहा था.

कपडे तो कई जगह से फट गया था.

सभी लोग लल्लू को पकड़ क्र वही एक दुकान पर ले जा क्र बैठता. फिर उसे पानी पिलाया.

सभी तुरंत एक डॉक्टर को बुलाने को बोलने लगे एक दूसरे को.

तभी वह एक मर्द और औरत आये. जिन का वो बच्चा था.

औरत तो बदस्तूर रोये जा रही थी.

वो दौड़ क्र उस बच्चे को उठा क्र अपने साइन से लगाए उसका सरीर सहलाती उसके छोटे मासूम चेहरे को चुम्मी से भर दी.

औरत- मेरा बच्चा. मेरे लाल. तुम्हे कही चोट तो नहीं लगा. मेरा sona..wagairah.. वगैरह…

मर्द भी अपने बचे को पकड़ क्र उसे दुलार रहा था. उसका गाल छू क्र सहला रहा था. कभी उस बचे को पीठ सहलाता कभी सर सहलाता.

अरे कोई पहले इसे डॉक्टर को दिखाओ. इसी क कारन ये बच्चा सकुसल है.

उस भीड़ मई से किसी एक ने कहा.

एक मिनट एक मिनट मई खुद एक डॉक्टर हु. वो औरत जिस का ये बच्चा था. उस ने बच्चे को अपने पति क गॉड मई दे क्र लल्लू की और आती बोली.

लल्लू तो लोगो से घिरा हुआ था.

तब तक राघव भी भीड़ मई आ क्र देखा तो लल्लू….

राघव- ओह्ह्ह… go...d….

Bhai...ye किऐसे.. हुआ.

लल्लू- वो….

तब तक वो औरत भी लल्लू क पास आ गई.

औरत- तुममम….

लल्लू सर उठा क्र देखा… आप…

औरत- थैंक ु सोऊ सोऊ मुछ्ह. अगर आअज…

अरे इसे थैंक्स.. बाद मई दे लेना पहले इसका इलाज तो करो. या किसी डॉक्टर क पास hi ले जाओ. कोई. उस भीड़ मई से फिर किसी ने बोलै.

वो लेडी डॉक्टर अपने पति से - आप अपना कार ले आओ न इन्हे अपने क्लिनिक hi ले चलते है.

उसका पति दौर क्र कार लेन चला गया.

दो मिनट्स मई कार ले क्र आ गया.

लल्लू को उस मई बैठा क्र वो डॉक्टर अपने क्लिनिक ले क्र चली गई. साथ मई राघव भी चला गया.

वो कार वाला तो टक्कर मर क्र भाग गया था जब तक लोग लल्लू और बच्चे को सँभालने मई लगे थे.

लल्लू- सॉरी भैया. आप यहाँ क्यू आ गए. आप उन लोगो क पास जाओ नहीं तो वो सब हम दोनों को गायब देख क्र बहुत चिंतित होंगे.

राघव- तुम्हे इस हालत मई छोड़ क्र मई कैसे जा सकता हु भाई.

लल्लू- भैया मुझे कुछ नहीं हुआ है. बस थोड़ा सा खरोच लगा है बस. आप बस काकी और बहनो क पास जाइये.

उन लोगो को मेरे बारे मई मत बताइयेगा. आप सब जिस काम से आये है वो काम कीजिये बिना मेरे चिनत करे. मई बिलकुल ठीक हु.

डॉक्टर- अरे बाबा कितना बोलते हो तुम. अभी बिलकुल चुप रहो और इस बीएड पर लेट जाओ. मुझे देखने दो कहा कहा चोट लगा है.

और है आप इनका कोई फिक्र मत कीजिये. आप अपना काम क्र क आइये तब तक मई इनको जरा देख लेती हु.

राघव पदेशन सा वह से उस शॉप पर आ गया जहा उसके घर की सभी महिलाये शॉपिंग क्र रही थी.

ऋतू- कहा गया था तू. कब से धुंध रही हु. यहाँ हम तुम्हारे सदी की शॉपिंग मई आये है और तुम इधर हम सब को छोड़ क्र बहार घूम रहा है.

राघव क्या कहे अभी लल्लू क बारे मई बता क्र सब को पदेशन नहीं करना चाहता था. वो चुप चाप ऋतू क साथ चल दिया.

सब का शॉपिंग लगभग निपट hi गया था. और जो थोड़ा बहुत रह गया था वो अब अगले दिन आ क्र दो चार लोग कर लेते.

वैसे समय भी काफी हो गया था.

अभी अब शाम हो गया था और चारो और अँधेरा फैलने लगा था.

सोनम रह रह क्र चारो और कुछ धुंध रही थी.

कोमल सोनम को इतना बेचैन देखा तो उस से रहा नहीं गया.

कोमल- क्या बात है दी. आप कुछ पदेशन लग रही हो.

सोनम- नहीं कोमल. कोई बात नहीं है. आज तो बड़ा मजा आया शॉपिंग मई.

कोमल- दी, अगर नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं. यु बात तो मत बदलो.

सोनम- यार मई काफी देर से भाई को नहीं देखि हु. पता नहीं कहा है. आज सब उसके पीछे hi लग गए है. सब किसी न किसी बात पर उसे दन्त देते है.

कोमल- है दी. मई भी देख रही हु. भाई आज बहुत उदाश था. सायद बहार होगा वो.

फिर सब सामान पैक करवा क्र गारी मई रखवा दिया.

ऋतू काउंटर पर जा क्र बिल पाय क्र दी.

फिर सब बहार आ गए.

अब राघव भी पदेशन था की क्या करे. कैसे इन लोगो को बताये.

लल्लू को देखना भी जरुरी था.

सोनम अलग पदेशन थी जब देखि की बुलेट तो वह कड़ी है लेकिन लल्लू नहीं है वह.

तभी पास क दुकान वाला आ क्र रहब से लल्लू क लिए पूछा.

D.wala - भाई साहब अब आप क भाई कैसे है.

उस दुकान वाले की बात सुन्न क्र सब चौक गए.

सोनम तो रोने hi लगी.

सोनम- भैया क्या हुआ भाई को.

D.wala- क्या आप लोगो को पता नहीं है. वहहह क्या काम किया है उन्होंने. बेचारे को थोड़ी चोट भी लग गई लेकिन ऐसा जज्बा ऐसा कठिन काम सब नहीं क्र सकता. इसके लिए कोई जिगर वाला hi चाहिए.

ी प्राउड हिम. कैसे है अब वो भाई साहब.

कोमल, सोनम- एक साथ… क्या…..

कोमल को तो सुन्न क्र hi हालत ख़राब होने लगा.. और वही हाल सोनम का भी था.

ऋतू काजल रागिनी शालिनी सब अब परेशां हो गए.

राघव- अब वो ठीक है. अभी हम वही जा रहे है.

फिर जल्दी से सब जैसे तैसे गारी मई बैठ क्र क्लिनिक की और चल पड़े.

इधर वो डॉक्टर लल्लू क सरे कपडे निकल क्र उसे एक्सामिने कर रही थी.

लल्लू को एक साइड बगल मई पेअर मई जंघा मई कमर मई हाथ पर और सर मई चोट आया था. सभी जगह छील गया था जहा से थोड़ा थोड़ा खून बहा था जो अब सुख गया था.

डॉक्टर डेटोल से उस सभी हो को साफ क्र उस पर दबाई लगा दी.

सर मई जहा लगा था वह साफ़ क्र दबाई लगा क्र पट्टी क्र दी.

डॉक्- और कहा लगा है चोट.

लल्लू- अभी तो पता hi नहीं चल रहा है.

डॉक्टर दो तीन सुई भी लगा दी.

डॉक्- दर्द थोड़ी देर मई ख़त्म हो जाएगा. मैंने नींद का भी इंजेक्शन लगा दिया है अभी थोड़ी देर सोने क बाद जब उठोगे तो दर्द ख़त्म हो जाएगा आप का.

फिर बाटे करते करते hi लल्लू सो गया.

डॉक्टर अपने पति से- आज हमारा तो पूरा संसार ुज़रने से इस लड़के ने बचा लिया.

D.pati- सही कह रही हो. आज हम लोगो क गलती का खामयाजा ये बेचारा भुगत रहा है. खास मई इस लड़के का कुछ दर्द बाँट पता. आज अगर ये लड़का नहीं होता तो हम जीते जी मर जाते.

डॉक्टर- कितना भयाबह था वो मंजर. ये लड़का तो हमारे लिए भगवन बन क्र hi आया था. पता नहीं कैसे हम इसका कर्ज उतरेंगे.

d.pati- सही कह रही हो. बस तुम इसे जल्द से जल्द पहले जैसा स्वस्थ क्र दो.

तब तक लल्लू क फॅमिली भी वह क्लिनिक मई आ गए.

राघव गारी से निकलता तब तक कोमल और सोनम निकल क्र क्लिनिक मई घुस गई भाई भाई करती हुई.

D.pati सोर सुन क्र बहार आया.

D.pati- जी कहिये. क्यू सोर क्र रही है.

सोनम- यहाँ मेरा भाई एडमिट है. हम उसे देखने आये है.

D.pati- लेकिन आज क्लिनिक तो बंद है और यहाँ कोई पेसेंट नहीं है.

तभी पीछे से राघव क साथ बांकी लोग भी आ गए.

राघव को देख क्र डॉक्टर का पति समझ गया की ये लोग लल्लू क डे मेम्बर हैं.

फिर वो सब को वही सोफे और चेयर्स पर बैठाया.

राघव- कैसा है अब मेरा भाई.

d.pati- अब ठीक है. अभी सो रहा है वो.

फिर हाथ जोर क्र सब को देखते हुए.

D.pati-. आज ये नहीं होते तो हम अपने एकलौते बेटे को खो देते. ये बीटा हमे सदी क पुरे 10 शाल क बाद हुआ है. हमारा पूरा संसार आज आप क बेटे ने ुज़रने से बचा लिया.

कोमल- सर.. क्या हम अपने भाई को देख सकते है.

D.pati- मई अभी आता हु.

फिर डॉक्टर का पति वह से उठ क्र अंडर आया.

अंडर डॉक्टर अपने चेयर बर बच्चे को ले क्र बैठी हुई थी.

डॉक् का पति - इसके फॅमिली वाले आये है. वो इसे देखना चाहते है.

डॉक्- है तो बुला लो न. देखने दो उन लोगो को. पहले जरा एक चादर दाल दो इस पर.

डॉक् का पति एक चादर ले क्र लल्लू क उप्पेर दाल दिया.

चादर डालते hi लल्लू क बदन मई पीछे जो टैटू बना था वो सुनहरे रंग मई चमकने लगा.

वो टैटू कहा जहा चोट लगा था सर को छोड़ क्र उन सभी जगह बनाने लगा.

सभी जगह वैसे hi सुनहरे रंग मई चमक रहा था. थोड़ी देर मई hi सरे घाव भर गए.

जैसे लग रहा था की कही चोट hi नहीं लगा है.

यहाँ तक की सर मई जो पट्टी क निचे घाव था वो भी सही हो गया.

तब तक लल्लू क सभी घर वाले उसे देखने आये.

लल्लू तो अभी सो रहा था.

डॉक्- ये अभी सो रहे है. थोड़ी देर मई नींद खुल जाएगी. फिर इन्हे काफी आराम मिलेगा.

सोनम- कैसा है मेरा भाई.

डॉक्- कुछ मामूली चोट लगी थी जिसे साफ़ क्र मैंने ड्रेसिंग क्र दी है. दो तीन दिन मई सब ठीक हो जाएगा. आप क इस बहादुर भाई ने आज मेरा कोख ुज़रने से बचा लिया.

आज अगर ये नहीं होते तो हम दोनों तो जीते जी मर जाते. मेरे लिए तो आप का भाई किसी भगवन से काम नहीं है.

आप सब बैठिये. मई चाय का बोल क्र आती हु.

कोमल- नहीं नहीं आप रहने दीजिये. लास्ट करने की कोई जरुरत नहीं है.

डॉक्- कास्ट कैसा. आज मेरे लिए भगवन ये इन खुदाई मददगार को भेजा है. काम से काम मई उनके फॅमिली को चाय तो पीला hi सकती हु. आप लोग बहार चल क्र बैठिये

सब एक बार फिर से बहार आ क्र बैठ गए.

डॉक्- वही उप्पेर क मेल पर रहती थी.

वो अपने सर्वेंट को चाय का बोल क्र आ गई.

थोड़ी देर मई डॉक्टर का सर्वेंट चाय बिस्किट्स ले क्र आ गया.

सब को चाय बिस्किट्स दिया.

सब चाय बिस्किट्स कहते हुए बात क्र रहे थे.

ऋतू राघव क सदी का इन्हे न्योता भी दे दिए.

थोड़ी देर बाद लल्लू जग गया. अब कही भी बदन मई उसे दर्द नहीं था.

उसे तो लग hi नहीं रहा था की उसे अभी थोड़ी देर पहले कही चोट भी लगा है.
 
थैंक्स भाई आप कभी कुछ बाटे बताये है जिसे बताना जरुरी बनता है.

स्टोरी की हीरोइन- तो भाई स्टोरी मई एक से अधिक हेरोइन है. ये एक लॉन्ग स्टोरी की तरफ जा रहा है. पहली तो घर मई hi है. कौन ये नहीं बताऊंगा.

दूसरी अभी अभी एक झलक दिया है. कहा ये भी नहीं bataunga.:D और अभी और भी आने वाली है. कैसे ये तो आगे bataunga.:lol:

दूसरा सवाल है टैटूज- तो ये मैंने जान बुझ क्र ऐड किया है लल्लू गौण मई सिर्फ चुदाई hi करता रहे ये कैसा स्टोरी होगा. स्टोरी को आगे ले जाने क लिए कुछ तो मसाला चाहिए भाई. तो ये टैटू स्टोरी को आगे ले जाएगा.

तीसरा सवाल है विलीन तो थोड़ा सा समय दे वो भी आएगा उसके बिना तो स्टोरी hi नहीं चलेगा.
 
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मर्द का बच्चा. अपडेट 35.

लल्लू जैसे hi जगा तो अपने ऊपर क चादर को हटा क्र बीएड से उतर क्र खड़ा हो गया.

उसके सरीर क दर्द अब छू मंत्र हो गए थे.

तभी वह डॉक्टर आ गयी.

डॉक्- अरे अभी लेते रहो. खड़े क्यू हो गए.

लल्लू- डॉक्टर मम मई बिलकुल ठीक हु. अब घबराने की कोई बात नहीं है.

लल्लू की आवाज सुन क्र उसकी साडी बहने वह अंडर आ गई.

सोनम- लल्लू को काश क्र गले लगते हुए. कैसा है भाई. क्यू करता रहता है ऐसा. तुम्हे हमारी जरा भी फिक्र नहीं है क्या.

लल्लू- दी. दी.. बस करो. मुझे कुछ नहीं हुआ है. मई तो बिलकुल भला चंगा आप सब क सामने खड़ा हु. आप सब ये बताओ की शॉपिंग किया काम क्र या नहीं.

कुछ रह गया हो तो अभी चलो चलते है.

कोमल- सब हो गया शॉपिंग हमारा. तुम ये बताओ की अब कैसे हो तुम. ज्यादा दर्द तो नहीं है. दर्द ज्यादा हो तो डॉक्टर मम यही है वो अभी दबाई दे देंगी.

लल्लू- दीदी आप सब बहुत अच्छी है. मेरे लिए बहुत पदेशन रहती है आप सब. लेकिन मेरा यकीं मानिये. मई अब बिलकुल ठीक हु.

डॉक्- हाथ जोर क्र लल्लू से.- आप मेरे लिए भगवन बन क्र आये है. अगर आप नहीं होते तो पता नहीं हमारा क्या होता. हम तो जीते जी मर जाते.

लल्लू- अरे अरे क्या क्र रही है आप. क्यू मुझे पाप चढ़ा रही है. पता है आप को घर मई सब मुझे गधा कहते है. मई तो गधे से इन्शान बनाने की कोसिस क्र रहा हु और एक आप है की मुझे भगवन बनाये जा रही है.

लल्लू की बात सुन क्र सब हुस्स पड़े.

डॉक्टर- सुच मई आप बहुत अच्छे है. आज आप क कारन मेरे बेटे की जान बच गई है. मई तो आप का पेअर धो क्र भी…..

लल्लू- प्लस… डॉक्. ऐसे मत करिये. मई तो बस अपना फर्ज निभाया है. अच्छा देखिये आप भी मरिको का इलाज करते हैं न तो बस वैसे hi मैंने भी इस मासूम प्यारे बच्चे को बचाया है.

डॉक्- मई मरीजों को देखने उनका इलाज करने क बदले उन से पैसा लेती हु. कोई फ्री मई नहीं करती और मुझे उस काम मई कोई चोट नहीं लगता. कही से खून नहीं बहता.

लल्लू- मई भी फ्री मई कहा बचाया है आप क बच्चे को. मई भी तो आप से लिया है न.

डॉक्- क्या..

लल्लू- आप का प्यार. आप का सम्मान. आप की नजरो मई इज्जत.

डॉक् आगे बढ़ क्र लल्लू को गले लगाती हुई.

डॉक्- आप सुच मई बहुत अच्छे है और आप की बाटे भी.

लल्लू- इस वीक हमारे भैया की सदी है तो आप लोग उस सदी मैं जरूर आएगा. मई आ क्र आप को कार्ड दे जाऊंगा.

अब हम लोगो को इजाजत दे. बस जरा मेरा कपडा दे दीजिये नहीं तो बहार मुझे इस तरह देख क्र कुत्ते भौकने लगेंगे.

सब हुस्ने लगे.

तभी डॉक् का पति भी आ गया.

डॉक्टर अपने पति से - इनके लिए जो कपडा लाये थे वो कहा है.

डॉक्टर का पति वही टेबल पर रखे एक पैकेट को उठा क्र लल्लू को दे दिए.

लल्लू- ये क्या है.

डॉक्- आप का कपडा ख़राब हो गया था तो ये आप क कपडे क नाप से दूसरा ला दिए है ये.

लल्लू- तो नया लेन को क्या जरुरत था मई वही पहन लेता.

डॉक् का पति- वही पहन क्र आप कैसे जाते घर. इसी लिए मई ले आया था.

फिर लल्लू जल्दी से वो कपडा पहन लिया और अपने फाटे कपड़ो से पर्स के मोबाइल सब निकल क्र नया कपडा जो पहना था उस मई रख लिया. रुमाल तो पहले ख़राब हो गया था सर क खून को रोकने क चक्कर मई.

फिर डॉक्टर का पति आगे बढ़ क्र लल्लू क पास आया.

डी. पति - ही माय सेल्फ अमित कुमार. मेजर हु आर्मी मई.

लल्लू- अमित से हाथ मिलता हुआ. अमित जी मई ललित कुमार और ये सभी मेरी दीदी है. मेरे भैया राघव वो भी आर्मी मई है. उनका सदी है नेक्स्ट वीक. आप सब जरूर आएगा.

अमित- जरूर जरूर. मई आप का भैया से मिला लेकिन उस बारे मई बात hi नहीं हुई. मई अभी आया उन से मिल क्र.

फिर अमित राघव क पास उस से अपना आर्मी की बाते करने चला गया.

लल्लू- तो डॉक् अब इजाजत है.

डॉक्- मेरा नाम रैना है. तुम मुझे रैना कह क्र hi बुलाना.

लल्लू- नहीं नहीं. आप मेरे से उम्र मई बरी है. नाम ले क्र कैसे बुला सकता हु.

रैना- क्यू की मई कह रही हु.

लल्लू- ोकक रैना. अब हम सब को इजाजत दे.

फिर सभी बहनो क साथ लल्लू बहार आ गया.

बहार सभी काकी और माँ राघव क साथ बैठे थे. वही अमित भी रहब से बात कर रहा था.

लल्लू को देख क्र सब खड़े हो गए.

ऋतू- कैसा है तू. क्यू उटपटांग हरकते करता रहता है. अभी सदी का टाइम है. घर मई कितने काम पड़े है और तुम हाथ पेअर तुड़वाने मई लगे हो.

काजल- क्या जरुरत थी हीरोगिरी दिखने की. और दिखाया भी तो काम से काम अपना भी तो ख्याल रखो.

लल्लू- भैया चले क्या अब. रात बहोत हो गई है और दादू अकेले है घर पर.

राघव- है भाई चल.

सब उठ खड़ा हुए.

राघव और लल्लू, अमित से बीड़ा ले क्र गारी क पास आगये.

राघव- भाई तुम्हारी बाइक तो वही कड़ी है.

लल्लू- कोई बात नहीं भैया. आप लोग चलिए. मैं बाइक ले क्र आता हु.

तभी अमित बोलै की मई छोड़ देता हु वह तक ललित को.

फिर अमित और ललित वह चले गए जहा बाइक कड़ी थी साथ मई सोनम भी आ गई.

राघव सब को ले क्र घर की और चला गया.

बाइक क पास आ क्र लल्लू और सोनम अमित से हाथ मिला क्र बीड़ा लिया फिर अपने बाइक पर बैठ चल दिए घर.

दोनों गारी साथ hi घर पहुंचे.

सभी मिल क्र गारी से सामान निकल क्र घर मई रखने लगे.

सोनम- भाई तुम आँगन मई जा क्र आराम करो. तुम्हे कुछ करने की जरुरत नहीं है.

लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी सोना दी. आप का भाई इतना भी कमजोर नहीं hai.jitna आप सब मुझे समझ रखे हो.

सोनम- क्या कहा अभी…..

लल्लू- मैंने कहा की आप का भाई अभ..

सोनम- इस से पहले क्या कहा.

लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी दी.

सोनम- नहीं नहीं.. तुम ने कुछ और कहा है.

लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी सोना दी..

सोनम दौर क्र लल्लू को काश क्र गले लगा ली.

रागिनी- अब तुम भाई बहनो का भारत मिलाप हो गया हो तो जरा इन सामने को घर मई पहुचाओ.

फिर सब मिल क्र सामान उठा क्र आँगन मई ले जा क्र रख दिए फर्स्ट फ्लोर क एक खली रूम मई.

ऋतू- चलो अब सभी जल्दी से फ्रेश हो जाओ और खाने की तयारी करो.

सभी लोग फ्रेश होने चले गए.

लल्लू लड़कियों क बगल वाले रूम मई अब रहने का सोचा था तो वो वही जा क्र अपना सारा कपडा खोल क्र सिर्फ चड्डी मई खड़ा था की सोनम अंडर का दरवाजा खोल दी…

लल्लू जल्दी से अपने पेण्ट से अपने आप को ढकने की कोसिस करने लगा. लेकिन तब तक सोनम तो लल्लू क सजीले गठीले बदन और उस पर से अब टैटू जो पहले सिर्फ पीठ पर था. वो अब बढ़ क्र कमर और हाथ पर भी फ़ैल गया था.

सोनम- सो.. सॉरी भाई. वो मई देखने आई थी की तुम रेस्ट क्र रहे हो या नहीं.

लल्लू- है दी. अभी कपडे बदल क्र रेस्ट hi तो करूँगा.

सोनम- है ठीक है. ये दरवाजा खुला है. किसी चीज की जरुरत हो तो आवाज दे देना. मई आ जाउंगी.

फिर सोनम वह का पर्दा गिरा क्र चली जाती है अंदर.

लल्लू अब दर्पण क आगे खड़ा हो क्र अपने बदन और उस पर बने टैटू को देख रहा था. उसे समझ नहीं आ रहा था की आखिर ये टैटू है क्या बाला. अभी तक जहा सिर्फ पीठ पर था वो फ़ैल क्र इतना कैसे हुआ.

और उसके सरे जखम कहा गए.

लल्लू सब क सामने तो नार्मल था लेकिन ये उसे पदेशन क्र रहा था.

फिर वो धोती और उप्पेर एक टीशर्ट पहन क्र बीएड पर लेट गया.

लेट क्र कुछ देर टैटू hi लल्लू क दिमाग मई घूम रहा था फिर कब उसकी आँख लग गई उसे पता hi नहीं चला.

लल्लू गहरी नींद मई था तभी ऐसा लगा जैसे कोई उस से कह रहा है. " सब मंगल है. सब मंगल है. ध्यान लगा. योग क्र. सब मंगल है."

लल्लू का नींद खुल गया.

थोड़ी देर ऐसे hi लेता रहा फिर उठ क्र नदी किनारे चला गया.

रह रह क्र उसे वही याद आ रहा था. सब मंगल है. ध्यान लगा. योग क्र.

लल्लू समझ नहीं प् रहा था की आखिर क्या है ये. ये कैसे सुना. आवाज तो पहचानता भी नहीं था वो. कोई अनजान आवाज था.

लल्लू नदी किनारे बैठा यही सब सोच रहा था तभी उसे ख्याल आया की आवाज आया था ध्यान लगा योग क्र.

तो लल्लू वही ध्यान लगाने को बैठ गया योग मुद्रा मई.

काफी देर बैठा रहा लेकिन कुछ समझ नहीं आया.

मन मई कई तरह की बाटे आ क्र उसे ध्यान से भटका रहा था.

फिर लल्लू वह से घर को चल दिया.

दालान पर आ क्र नलका पर हाथ पेअर धो क्र दालान पर आ क्र बैठ गया.

दालान पर दादू और छोटे काका बैठे थे.

लल्लू वही इन लोगो क साथ बैठ सदी क विषय पर बात करता हुआ चाय पि रहा था.

गुड़िया बिच मई इनको चाय दे गई थी.

थोड़ी देर वह बैठ क्र लल्लू आँगन मई आ गया.

वह राघव बैठा हुआ था. लल्लू भी जा क्र राघव क साथ बैठ गया.

राघव- कैसा है भाई. सब ठीक है न.

लल्लू - बिलकुल भैया. सब चकाचक है.

राघव- फिर आज का क्या प्रोग्राम है.

लल्लू- फ़िलहाल तो कोई नहीं है. आगे का पता नहीं. वैसे एक बार बाजार जाना है.

राघव- कुछ लेना है.

लल्लू- है भाई. एक सिम लेना है. मोबाइल तो आप ले आये. सिम नहीं था तो कल सोचा था वो लेने का लेकिन कल मौका hi नहीं मिला.

तभी वह सोनम दो जगह प्लेट मई नास्ता ले क्र आ गई.

सोनम- पहले नास्ता क्र लो. रात भी ऐसे hi सो गए थे. कुछ खाये भी नहीं.

लल्लू- ऐसे hi कैसे सो गया. आप सब क प्यार से hi मेरा पेट भर गया.

लल्लू वही पास मई बैठी ऋतू और काजल को देख क्र बोलै.

सोनम- बाटे बनाना भी सिख गया है अब तो भाई.

राघव और लल्लू फिर नास्ता करने लगे.

नास्ता करने क बाद लल्लू फिर दालान पर आ गया.

लल्लू- छोटे काका खेत मई मेरे लिए कोई काम हो तो बता देना.

काका- नहीं बीटा. ज्यादा कुछ नहीं है वह करने को. बांकी मजदुर तो कर hi रहे है.

फिर लल्लू वह से आँगन मई आ क्र अपने कमरे मई जा क्र बीएड पर लेट गया.

भाई खाना खाने आ जाओ. दरवाजे से आवाज आई.

लल्लू मुँह घुमा क्र देखा तो मीनू दी कड़ी थी.

लल्लू- अभी आया दी.

फिर लल्लू उठ क्र फ्रेश हुआ और आँगन मई आ गया.

वह दोनों काका भी आज आ गए थे.

लल्लू भी सब क साथ खाना खाने बैठ गया.

सुनील- लल्लू बीटा कहा थे सुबह से. दिखे नहीं.

लल्लू- कमरे मई hi बोर हो रहा था काका.

सुनील- कल क्या किया है.

लल्लू- क्यू उस ने नहीं बताया क्या जिस ने ये बताया की कल मई कुछ किया हु.

सब सर उठा क्र लल्लू को देखने लगे.

आज से पहले लल्लू सुनील से ऐसे कभी बात नहीं किया था.

काजल- नालायक. अपने से बड़े से कैसे बात किया जाता है भूल गया क्या.

लल्लू तो सर झुकाये खाने मई लगा हुआ था.

सुनील- लल्लू बीटा मई तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हु.

लल्लू- खाना खा लीजिये फिर बताता हु दालान पर.

ऋतू- दालान पर क्यू यही अभी कह दे. हमे भी पता चले की आखिर कल क्या हुआ था.

लल्लू चुप चाप खाना खता रहा.

फिर सब खाना खाने लगे. खाना हो जाने क बाद सब मर्द उठ क्र दालान पर आ गए.

लल्लू भी सब क पीछे दालान पर चला गया.

साथ मई राघव भी.

दादू- है तो बीटा अब बताओ क्या हुआ था.

लल्लू- वह शोरूम मई सब चले गए…

सुनील- na..na.. बीटा. यहाँ से बताओ. सुरु से..

लल्लू मुसकुदा उठा.

कल सब तैयार हो रहे थे तो मुझे तैयार होने मई लेट हो गया किसी कारन से.

फिर मई पीछे से सोनम दीदी क साथ गया तब ये सभी एक शोरूम मई पहले से hi पार्किंग मई खड़े थे.

फिर मई भी जा क्र बाइक पार्क की फिर सब वह खरीदारी करने चले गए.

वह कुछ पसंद नहीं आया तो फिर सोनम दी दूसरे दिन वाले शोरूम मई चलने को बोले फिर हम वह गए. वह से सब सामान ले क्र दूसरे शो रूम आये यहाँ मई बहार बाइक पर खड़ा था…… फिर सारा लल्लू ने बता दिया जो कहानी हुई.

दादू- तुम्हे कहा कहा चोट आई थी.

लल्लू- कही नहीं बस सर मई थोड़ा सा फुट गया था.

सुनील- काम तो बहुत अच्छा किया बीटा लेकिन मुझे लगता है की तुम ने कीच काट चाट क्र बाटे बताई है. खैर आगे से ध्यान रखना की दूसरे क जान क साथ अपना भी जान सलामत रहे.

लल्लू- जी काका.

फिर लल्लू वह से उठ क्र जाने लगा की…

अनिल- अभी कहा जा रहा है. अभी बात पूरी नहीं हुई है.

लल्लू एक बार फिर बैठ गया वही.

अनिल- कल सुबह तुम्हे राघव क ननिहाल जाना है. फिर निमंत्रण दे क्र कल hi वापस आ जाना. कई बार बोल चुके है की ललित को भेज देना.

लल्लू- कल hi जा क्र कल hi वापस आना. आप को लगता है वो कल hi आने देंगे मुझे.

सुनील- सही बात है. कल hi नहीं आने देंगे वो लोग. ऐसा करना कल रात रुक जाना और सुबह सुबह वह से चल देना.

लल्लू- ठीक है काका.

फिर लल्लू वह से आ क्र अपने कमरे मई बीएड पर लेट गया.

तभी वह सभी बहने आ गई.

मीनू- भाई क्या बात हुआ है दालान पर.

आप को किसी ने डांटा या गुस्सा तो नहीं हुए.

लल्लू- नहीं बहनो. मैंने ऐसा कौन सा गुनाह क्र दिया था जो कोई मुझे से गुस्सा होते या मुझे डाटते.

रोमा- भाई फिर वह क्या बात हुई.

लल्लू- वही कल क्या हुआ ये पूछे थे फिर कल सुअभ मुझे एक दिन क लिए कही जाना है. ये बता रहे थे.

सोनम- कहा जा रहे हो तुम भाई.

लल्लू मुसकुडता हुआ सोनम क पास आ क्र.

लल्लू- कल मई गज्जू मां क यहाँ जा रहा हु.

सोनम- फिर आओगे कब.

लल्लू- कल वही रुकूंगा फिर परसो सुबह वह से चलूँगा तो दोपहर तक आ जाऊंगा.

सोनम- (थोड़ा उदाश हो क्र.) ठीक है भाई.

फिर सब बैठे बैठे बाटे करते रहे साम तक.

लल्लू- दीदी कल सुबह सुबह मई निकलूंगा गज्जू मां क पास. क्या आप सुबह मुझे एक कप चाय दे देंगी बना क्र.

सोनम- भाई. तुम कहे तो जान दे दू. ये चाय क्या चीज है. कितने बजे चाय चाहिए तुम्हे बस ये बता दो.

लल्लू- जान क्यू मांगूंगा. वो तो पहले से hi मेरा है. और जो मेरा है वो फिर मांगना कैसा. रही समय की बात तो 5 बजे सुबह आप चाय दे देना मुझे.

सुन क्र तो सोनम दीदी खुसी से मन मई नाचना चालू क्र दी लेकिन हकीकत मई कैसे नाचने लगती. सब पूछने लगेंगे तो क्या बताएगी.

सोनम- बस.. मिल जाएगी.

दीदी माँ बुला रही है. गौरी आ क्र बोली तो सोनम उठ क्र चली गई.

लल्लू यु hi बीएड पर लेता था. करने को कुछ था hi नहीं. बीएड पर लेते लेते बोर हो रहा था.

रात सब खाना खा रहे थे साथ मई आँगन मई.

लल्लू- काका कल सुबह मुझे 5 बजे निकलना है तो क्या मई बाइक ले जाऊ.

सुनील- अब वो बाइक तेरी hi है. एक कार तो है hi अपने पास फिर एक राघव क ससुर भी दे रहे है तो यहाँ ाललरेअद्य दो कार हो जाएगा.

फिर सब खाना खाने लगे.

लल्लू- काका वह कुछ ले क्र तो नहीं जाना. और आज बुआ लोग आने वाले थे पापा क साथ वो भी नहीं आये.

अनिल- सोनम बीटा कुछ भेजना है मां क यहाँ तो दे देना लल्लू बीटा को.

लल्लू- वो भी अभी

ककी मई सुबह अँधेरे निकलूंगा.

दादू- तेरे बुआ लोग कल सुबह आएंगे. तेरे पापा का फ़ोन आया था.

फिर सब खाना खा क्र चले गए.

लल्लू भी अपने कमरे मई चला गया.

साडी लेडीज खाना खाने क बाद सब काम निपटा क्र वो सभी भी अपने कमरे मई सोने चले गए.

सब क सोने क बाद सोनम लल्लू क कमरे मई आ गई

लल्लू खिड़की खोल क्र वही सामने बीएड पर बैठा बहार चाँद को देख रहा था.

सोनम- भाई अभी तक सोया नहीं.

लल्लू- नहीं. चाँद क चांदनी का इंतजार क्र रहा था.

सोनम- क्या मतलब.

लल्लू- देखो न बहार आसमान मई चाँद अपने चकोर का इंतजार क्र रहा है.

सोनम- अभी तुम कुछ और कह रहे थे.

लल्लू- मेरी प्यारी सोना दी. आज कल आप कुछ ज्यादा नहीं सुनाने लगी है.

सोनम- क्या करे मेरा प्यारा भाई भी तो कुछ ज्यादा hi बोलने लगा है.

लल्लू- आप को पसंद नहीं तो फिर नहीं बोलता. बस..

सोनम- मुझे पसंद नहीं है.... बहुत पसंद है.

लल्लू- आइये फिर बैठ जाइये.

सोनम- तुम सो जाते न. कल तुम्हे सुबह जाना है.

लल्लू- सो जाऊंगा. वैसे भी पूरा दिन तो सोता hi रहा हु. इतनी जल्दी नींद भी तो नहीं आती.

अरे है एक चीज तो मई भूल hi गया था.

सोनम- क्या.. क्या भूल गए थे.

लल्लू- दी आप ने वो सौत पहन क्र देखा था क्या.

सोनम- नहीं क्यू.

लल्लू- प्लस प्लस पहन क्र दिखा दो न.

सोनम- अभी..

लल्लू- है दी. फिर मई सुबह चला जाऊंगा और कल तो आऊंगा नहीं फिर परसो hi आ पाउँगा. प्लस दिखा दो न.

सोनम- लेकिन भाई ऐसा क्या है उस मई.

लल्लू- ऐसा तो कुछ नहीं है. बस मई देखना चाहता था. लेकिन आप को पसंद नहीं तो रहने दीजिये.

सोनम उठ क्र अंडर चली गई.

लल्लू को लगा की सोनम सायद बुरा मान गई है.

लेकिन थोड़ी देर मई hi सोनम वो सौत पहन क्र लल्लू क सामने आ कड़ी हुई.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 36.

लल्लू जब सोनम को देखा तो उसके तो होश hi ुर्र गए.

सोनम इस समय एक अनारकली ड्रेस मई क़यामत लग रही थी.

सोनम अपने सुनहरे बालो का ज़ुरा बनाये हुए थी माथे पर सुनहरी बिंदी

गले मई सोने का हार.

उस पर वो कजरी कलर का अनारकली ड्रेस जिस मई सुनहरे रंग का एम्ब्रायडरी किया हुआ था.

किसी राषिक कवी की कविता थी वो.

लल्लू तो मुँह खोले सोनम को घूरे जा रहा था.

सोनम हस्ते हुए बोली- भाई मुँह बंद क्र लो नहीं तो मक्खी चली जाएगी मुँह मई.

लल्लू हड़बड़ा क्र मुँह तो बंद क्र लिया लेकिन पलके झपकना भूल गया.

लल्लू बीएड से उतर क्र सोनम क कदमो मई बैठ गया और अपने दोनों हाथ फैला दिया जैसे हमारे शाहरुख खान साहब अपने हीरोइन क आगे फैलते है.

वैसे hi हमारा लल्लू अपने हीरोइन क आगे हाथ फैला दिया.

तुमको देखा तोह यह ख्याल आया

ज़िन्दगी धुप तुम घाना साया

तुमको देखा तोह यह ख्याल आया--2

ज़िन्दगी धुप तुम घाना साया.

तुमको देखा तोह यह ख्याल आया.

आज फिर दिलने इक तमन्ना की--2

आज फिर दिलको हमने समझाया--2

ज़िन्दगी धुप तुम घाना साया

तुमको देखा तो यह ख्याल आया.

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे--2

हमने क्या खोया हमने क्या पाया--2

ज़िन्दगी धुप तुम घाना साया

तुमको देखा तो यह ख्याल आया.

हम जिससे गुनगुना नहीं सकते--2

वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गया--2

ज़िन्दगी दूप तुम घाना साया

तुमको देखा तो यह ख्याल आया--2

लल्लू सोनम को देखते गए रहा था और सोनम कभी मुसकुडती तो कभी सरमाती, कभी नजरे झुका क्र अपने दांतो से होठ काटने लगती तो कभी हुस्स देती.

लल्लू का यु सोनम क लिए गण गण सोनम बहुत खुस थी.

सोनम आगे बढ़ कर लल्लू को हाथ से पकड़ क्र उसे खड़ा की और उसे प्यार से देखने लगी.

सोनम- ये क्या था.

लल्लू- क्या..

सोनम- ये जो अभी अभी किये हो

लल्लू- मैंने क्या किया है.

सोनम- अच्छा ये बताओ की ये गण किस के लिए गए रहे थे.

लल्लू- w..o...wo...wo तो बस ऐसे hi…

सोनम- भाई सुच बता प्लस ये गण किस क लिए था.

लल्लू- ये कैसा सवाल है दी. यहाँ हम दो लोग hi तो है. अब मई गण गए रहा था तो फिर यहाँ और कौन रह गया आप. तो फिर आप क लिए hi तो गाऊंगा न..

सोनम कास क्र लल्लू को अपने बहो मई भर ली.

सोनम- भाई ी म सोऊ.. हैप्पी…

ी लव ु भाई. ी लव ु सो मच.. फिर उसके होठो पर एक छोटी चुम्मी चिपका दी.

लल्लू तो हवा मई ुर्र रहा था.

उसकी ड्रीम गर्ल उसका बचपन का क्रश आज उसे अपने प्यार का इजहार क्र दिया था.

लल्लू को तो समझ hi नहीं आ रहा था की वो क्या करे.

लल्लू सोनम क दोनों गलो को अपने हाथो मई थम क्र सोनम क आँखों मई प्यार से निहारते हुए अपने होठो को बाधान्य लगा…

सोनम ये देख क्र अपनी आँखे बंद क्र ली..

लल्लू अपने बढे हुए होठो को सोनम क माथे पर चिपका दिया.

सोनम को अपने माथे पर लल्लू क होठो का एहसास होते hi पुरे सरीर मई कम्पन हो गई और रोये खड़े हो गए.

लल्लू सोनम को अपने आगोश मई लिए उसे अपने साइन से लगाए अपने पहले प्यार को फील क्र रहा था.

लल्लू- ी लव ु तू दी. मई भी आप को बहुत बहुत चाहता हु.

सोनम लल्लू क बहो मई सिमटी उसके प्यार को महसूस क्र रही थी.

दोनों दिन दुनिया से बेखबर एक दूसरे मई खोये हुए थे.

सोनम लल्लू क चौड़े साइन पर सर टिकाये उसके कंधे को पकड़ क्र उसके धड़कनो को सुन रही थी जहा सिर्फ एक hi नाम बार बार धड़क रहा था. सोनम सोनम.

दोनों यु hi काफी देर तक खड़े रहे.

लल्लू सोनम को बहो मई लिए कभी उसके पीठ को सहलाता तो कभी सर को.

लल्लू को यकीं hi नहीं हो रहा था की अभी जो पल वो जो रहा है वो हकीकत है.

लल्लू- दी…

सोनम- कुछ मत कह अभी.

लल्लू- क्या ये सच है या मई कोई ख्वाब देख रहा हु.

सोनम- तो क्या ऐसा ख्वाब भी देखते थे.

लल्लू- ये भी कोई पूछने की बात है. कौन अपने प्यार का ख्वाब नहीं देखता है. मुझे तो ये पूछो की क्या कभी ऐसा हुआ की अपने प्यार का ख्वाब न देखा हो.

सोनम- शर्मा क्र… कब से मुझ से ये प्यार करता है तू.

लल्लू- जब मुझे प्यार क्या होता है ये भी नहीं पता था. मुझे तो, प्यार क्या है, क्यू है और प्यार भी कुछ होता है, ये सब आप को दुख क्र hi पता चला.

सोनम- ऐसा क्या है मुझ मई.

लल्लू-

तू hi तो जन्नत मेरी

तू hi मेरा जूनून

तू hi तो मन्नत मेरी

तू hi रूह का सुकून..

तू hi अँखियों की ठंडक

तू hi दिल की है दस्तक

और कुछ न जानूं

मैं बस इतना hi जानूं..

तुझे में रब दीखता है

यारा मैं क्या करून

तुझे में रब दीखता है..

यारा मैं क्या करून

सजदे सर झुकता है

यारा मैं क्या करून

तुझे में रब दीखता है

यारा मैं क्या करून..

सोनम लल्लू क पुरे चेहरे को चुम का गिला क्र दी.

लल्लू सोनम को गॉड मई उठा क्र बीएड पर ले आया.

फिर खिड़की क पास दोनों चाँद की चांदनी मई एक दूसरे क बहो मई ले क्र बैठ गए.

सोनम लल्लू क एक हाथ को अपने हाथ से पकडे उसके गाल को प्यार से सहला रही थी.

तो लल्लू सोनम क प्यार मई डूबा हुआ उसके हाथ मई हाथ डेल उसके बालो को सहला रहा था.

दोनों एक दूसरे क प्यार को महसूस करते हुए एक दित मई खोये हुए थे.

रात यु hi सरकती जा रही थी.

दो प्रेमी प्रेम मई दुब क्र वैसे hi एक दूसरे को बहो मई लिए सो गए.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 37.

सुबह 4 बजे लल्लू की नींद खुली. आँख खोला तो उसे दीदार ै इश्क़ हुआ.

सोनम लल्लू क बहो मई ऐसे hi सो गई थी. अभी भी सोनम एक हाथ मई लल्लू का हाथ पकड़ राखी थी और दूसरे हाथ से लल्लू क छाती क उप्पेर उसके t-shirt को पकड़ राखी थी.

लल्लू सोनम क सलोने मुखड़े को निहारता बिना पलके झपकाए देखे जा रहा था.

फिर झुक क्र उसके होठो पर एक चुम्मी ले लिया.

सोनम सोई हुई मुसकुडती रही.

लल्लू को अभी गज्जू मां क यहाँ भी जाना था तो वो सोनम को गाल सहलाता उस के पुरे चेहरे पर हलके हलके चूमने लगा.

कभी माथे पर तो कभी आँखों पर कभी गलो पर.

सोनम सोने का नाटक करती हुई लेती हुई थी.

लल्लू- मेरी प्यारी जणू दी. अब उठ जाओ. मुझे मां क यहाँ जाना भी है.

सोनम लल्लू को बहो मई ले क्र उसके जोर से पकड़ दूसरे करवट ले क्र सो गई.

लल्लू सोनम की ये सभी प्यारी हरकते हस्ता हुआ देख रहा था.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र सोनम क बगल मई ले गए और हलके से सहला दिया.

सोनम क बदन क सरे रोये खड़े हो गए.

सोनम कम्प क्र रह गई.

लल्लू फिर से सोनम क बगल मई हाथ रख दिया की सोनम लल्लू क हाथ को पकड़ क्र उसे खींच क्र अपने गले मई चिपका क्र पकडे हुए लेती रही.

लल्लू झुक क्र सोनम क गले मई चुम लिया.

सोनम होठो को दबाये अपने आप को रोकने की कोसिस क्र रही थी फिर भी उसे होठो से एक आह निकल गई.

लल्लू फिर एक बार झुकता चला गया सोनम क गले पर तभी सोनम पलट क्र सीधी हो गई और लल्लू क होठ सोनम क होठो से जा मिला.

लल्लू सोनम क चेहरे को सहलाता सोनम क सहद से मीठे होठो को चूस लिया.

लल्लू- दी अब उठ जाइये. मुझे फर्श होने जाना है. आप भी फ्रेश हो क्र जरा चाय बना दीजिये.

सोनम लल्लू को पकड़ क्र अपने उप्पेर खींच ली.

लल्लू सोनम पर गिर गया.

लल्लू को अपने साइन पर सोनम क गोल कठोर उभर का एहसास रोमांचित क्र रहा था.

लल्लू चेहरा झुका क्र सोनम क गले मई रगड़ते हुए उसके बदन क महक को अपने मई समां रहा था.

सोनम आँख बंद किये हुए दांतो से होठ दबाये लल्लू क सर क बालो को सहलाती हुई उसे अपने साइन पर दबा रही थी.

लल्लू सोनम क गले से निचे जहा सूट का सुरुवात था वह चुम लिया.

सोनम लल्लू क बालो को नोचती हुई अपने पहले चरम सुख को अनुभव क्र रही थी.

लल्लू को इसका एहसास होते hi वो सोनम पर से उठ क्र बैठ गया.

सोनम लम्बी लम्बी ससे ले रही थी जिस से उसके पोस्ट उन्नत उभर उप्पेर निचे हो रहा था जो लल्लू को और उत्तेजित क्र रहा था.

फिर लल्लू सब इग्नोर क्र बीएड से उठ क्र फ्रेश होने चला गया.

वह से आया तो सोनम कमरे मई नहीं थी.

लल्लू अपने बैग से कपडे निकल क्र पहनने लगा.

तैयार हो क्र वो बहार आ गया आँगन मई

आँगन मई काजल झाड़ू लगा रही थी.

लल्लू रसोई मई देखा तो सोनम चाय कप मई दाल रही थी.

लल्लू फिर बहार आ क्र आँगन मई खटिये पर बैठ गया.

सोनम चाय क साथ पराठा ला क्र लल्लू क आगे रख दी.

लल्लू- दी, ये क्या आप ने पराठा क्यू बना लिया. आप मेरे लिए इतना लास्ट की. इतनी सुबह कौन खता है.

सोनम- चुप चाप खा ले.

लल्लू फिर चाय क साथ पराठा खा क्र उठ गया.

लल्लू- दी कुछ ले भी जाना है क्या.

सोनम- भाई माँ ने तो रात कुछ बताया hi नहीं था. रुक अभी पूछती हु.

लल्लू- रहने दो दी. अब इतना समय नहीं है. मई चलता हु. कोसिस करूँगा की मां आज hi आ जाने दे वैसे लगता तो है नहीं की वो मानेंगे.

सोनम- ठीक है भाई. आराम से जाना.

फिर लल्लू वह से दालान पर आ गया.

दालान पर सब उठ गए थे.

लल्लू सब से मिल क्र वह से बुलेट ले निकल गया गज्जू मां क गौण की और.

मां क फॅमिली का छोटा सा परिचय.

नाना और नानी अब नहीं रहे.

गजेंद्र सिंह. - (गज्जू) सब से बड़े मां. ये आस पास क 52 गौण क सरपंच है.

बड़ा नाम है इनका. बहुत अच्छे इन्शान है. लल्लू मई तो इनका जान बस्ता है.

सुमिता सिंह- ममी. ये भी मां की तरह लल्लू को बहुत चाहती है.

इनको कोई संतान नहीं है.

बलदेव सिंह- छोटे मां. इनका अपना बिज़नेस है. गौण मई रह क्र hi ये बिज़नेस सँभालते है.

करुणा सिंह- ममी.

इनको एक लड़की है.

सुसीला- इनकी सदी हो गयी है. ये अब अपने ससुराल मई है.

लल्लू रस्ते मई एक जगह रुक क्र पेट्रोल पंप पर पहले बाइक का टैंक फुल करवाया फिर वह एक चाय पि क्र एक मोबाइल शॉप मई से एक सिम लिया फिर आगे बढ़ गया.

लल्लू का गौण दूसरे डिस्ट्रिक्ट मई है और इनका दूसरे डिस्ट्रिक्ट मई.

लल्लू 12 बजे क करीब मां क यहाँ पंहुचा.

बाइक ले जा क्र गेट पर रोका फिर हॉर्न बजाय.

बहार चारदीवारी क साथ एक लोहे का बड़ा सा गेट लगा है.

बड़े गेट मई एक छोटा गेट भी बना था जिस को खोल क्र एक दरबान देखा की कौन आया है.

लल्लू हेलमेट खोल क्र अपना चेहरा दिखा दिया.

दरबान चेहरा देख क्र दौरते हुए जा क्र गेट खोल दिया.

लल्लू बाइक अंदर ला क्र दरबान क पास बाइक रोक दिया.

लल्लू- कैसे हो काका सब बढ़िया.

दरबान- सब बढ़िया है बचुवा. कितने दिन बाद इधर आये हो. हम सब को तो तोहे भूल hi गए.

लल्लू- नहीं काका किसी को नहीं भुला है मैंने. बस फुर्शत नहीं मिल रहा था.

अच्छा मिलता हु काका.

दरबान- ठीक है बचुवा. जाओ पहले मालिक और मालकिन से मिल लो. वो बहुत खुस होंगे

लल्लू- ठीक है काका.

फिर लल्लू वह से आगे बढ़ गया.

आगे गज्जू मां का बैठक था जो उनके बंगले से अलग वही एक बड़ा सा खुले मई बना था.

काफी साडी गरिया अभी वह कड़ी थी.

जैसे कोई मीटिंग चल रहा हो.

लल्लू उधर न जा क्र सीधा घर की और hi गारी मोर लिया.

आगे 200 ंटर्स पर मां का बड़ा सा भव्य बांग्ला बना हुआ था जो तीन मंजिल का था.

लल्लू गाड़ी पार्क क्र गेट पर जा क्र बेल्ल दबा दिया

थोड़ी देर मई एक घर मई काम करने वाली महिला गेट खोली.

महिला- जी किस से मिलाना है.

लल्लू- मेरा नाम ललित है. ये मेरे मां जी का घर है. कृपया आप मुझे अंदर आने देंगी.

महिला साइड हो क्र लल्लू को अंडर आने दी.

लल्लू एक छोटा कैर्री बैग लिए अंदर ड्राइंग रूम मई आ क्र सोफे पर बैठ गया.

लल्लू इधर उधर देखा तो कोई और दिख hi नहीं रहा था.

महिला तब तक पानी ला क्र लल्लू को दी.

लल्लू- कोई दिख नहीं रहा. बड़ी और छोटी ममी कहा है.

महिला- बड़ी मालकिन मंदिर गई है और छोटी मालकिन उप्पेर कमरे मई है.

लल्लू- अच्छी बात है. मई मिल आता हु.

फिर लल्लू उठ क्र छोटी ममी क कमरे की और फर्स्ट फ्लोर पर चल दिया.

कमरे क सामने पहुंच क्र लल्लू दरवाजा धकेल क्र देखा हलके से तो दरवाजा थोड़ा सा खुल गया.

ममी बीएड पर बैठी कपडे को यह लगा रही थी.

दरवाजे की तरफ उनका पीठ था.

लल्लू चुपके से आगे बड़ा और छोटी ममी क आँखों को अपने दोनों हाथो से बंद क्र दिया

ममी चौक गई.

वो सीधी हो क्र बैठ गई.

अपने हाथ से लल्लू क हाथ को टटोल क्र छू क्र देखने गई.

ममी- बलदेव आप आ गए. जणू आप तो साम मई आने का बोले थे न.

लल्लू- ….. खड़ा हस्ता रहा. ममी का आज एक सीक्रेट पता चल गया. ममी छोटे मां को जणू भी कहती है.

ममी- अब छोड़ भी दो न.

लल्लू- …..

ममी- अच्छा एक किसी दूंगी.

लल्लू से अब रहा नहीं गया.

लल्लू- तो पहले किसी दो. फिर छोडूंगा.

ममी- k..k..kaun हो तुम. ममी घबराता हुई बोली.

लल्लू- पहले किसी चाचिये. हैयय कितना मीठा होगा.

ममी- मई कहती हु छोड़ दो मुझे. नहीं तो बहुत पछताओगे बाद मई.

लल्लू- कोई बात नहीं. काम से काम एक मिट्ठी किसी तो मिल जाएगी.

है है मई तो सोच क्र hi रोमांचित हो रहा हु.

तभी पीछे से बड़ी ममी आ क्र लल्लू का कान पकड़ ली.

बड़ी ममी- क्यू रे नालायक. अपने ममी को छेद रहा है.

लल्लू- क्या ममी कितनी ख़राब वक्त पर एंट्री ली हो आप. अभी थोड़ी देर बाद आती तो मुझे एक किसी मिल गई थी.

लल्लू छोटी ममी क आँखों से हाथ हटाता बोलै.

फिर झुक क्र पहले बड़ी ममी का पेअर छू क्र छोटी ममी क पैरो मई झुक गया.

छोटी ममी भी कान से पकड़ क्र उठाई.

छोटी ममी- एक तो इतने दिन बाद आया है और आते hi सररत सुरु. अपने ममी से फिरकी ले रहा था.

लल्लू- दे दो न जानू. बस एक किसी.

बोल क्र लल्लू हस्ता हुआ भाग क्र बड़ी ममी क पीछे चिप गया.

छोटी ममी- रुक नालायक. मुझ से मजाक करता है.

ऐसे hi सब हसी मजाक करते हुए निचे आ गए.

बड़ी ममी आगे बढ़ क्र लल्लू को गले से लगा क्र रोने लगी.

B.Mami- क्यू रे अपने इस माँ की याद नहीं आती थी क्या.

लल्लू बड़ी ममी के आँखों से बहते आंशुओ को साफ क्र क उनके गाल को चुम लिया.

लल्लू- मेरी प्यारी माँ. आप मेरे लिए मेरी यसोदा माँ हो. आप को कैसे भूल सकता हु.

अपने नन्द बाबा से भी मिल ले मेरे लाल.

लल्लू क पीछे से आवाज आई.

लल्लू सर घुमा के देखा तो पीछे गेट पर गज्जू मां बहे फैलाये खड़े थे.

लल्लू भाग क्र अपने मां को जा क्र गले लगा लिया.

मां- कैसा है मेरा सेर.

लल्लू- आप क सामने hi हु. देख लीजिये.

मां- ये तेरे सर पर क्या हुआ. कैसे चोट लगी.

फिर लल्लू कल क्या हुआ था सब मां और ममी को बता दिया.

मां- मुझे गर्व है मेरे लाल. आज मेरा सीना चौड़ा क्र दिया तूने. सबस…

ममी आगे बढ़ क्र लल्लू क चेहरे को पकड़ क्र उसे चुम ली मात पर.

ममी- सबस बीटा. आज तू इस माँ को खुस क्र दिया. एक माँ को उस क बच्चे से मिला क्र बहुत अच्छा काम किया. भगवन तुम्हे साडी खुशियां दे.

C.mami भी आ क्र मुझे गले लगा ली एक और से.

C.mami- मई तुम से बहुत नाराज थी. लेकिन तुम ने कल जो किया है इस से खुस हो क्र तुम्हे माफ़ करती हु.

लल्लू c.mami क कान मई.

लल्लू- जणू एक किसी….

C.mami- बहुत मर खायेगा. अब अगर छेड़ेगा तो.

मां- इसे खाना खिलाया.

लल्लू- कहा मां. अभी तक किसी ने पानी क लिए भी नहीं पूछा है.

मां गुस्से से.

सुम्मी.. ये क्या तरीका है. बीटा सुबह सुबह चला होगा वह से. अभी तक कुछ खाया भी नहीं है और तुम इसे अभी तक पानी का भी नहीं puchhi….aise कैसे क्र सकती हो तुम.

लल्लू- mama.mama..pls..mere माँ को कुछ मत कहिये. मई अभी अभी तो आया hi हु. और पानी पि लिया है मैंने. फिर pahle.aap सब से मिल लेने दीजिये.

खाना कहा भगा जा रहा है.

B.mami- नहीं बीटा तेरे मां सही कह रहे है. मई अपने खुसी मई ये भूल hi गई की मेरा बीटा सुबह hi चला होगा. मई अभी खाना लगाती हु तब तक तू फ्रेश हो ले अपने कमरे मई.

लल्लू वह से अपने कमरे मई चला गया.

लल्लू- आह. कितना अच्छा लग रहा है आ क्र इस कमरे मई. ये आज भी ऐसे hi है जैसे 4 साल पहले छोड़ क्र गया था.

सब सामान वैसे hi रखा है.

लल्लू बीएड पर जा क्र लेट गया पेअर को निचे लटकाये हुए.

थोड़ी देर वह लेते रहने क बाद बाथरूम जा क्र फ्रेश हुआ.

फिर निचे आ गया.

निचे दिंनिंग टेबल पर बैठ गया.

तब तक दोनों ममी कई तरह क डिशेस बना क्र लल्लू क आगे रखने लगी.

लल्लू- मां आप नहीं खाएंगे.

मां- बीटा कुछ लोग आये थे आज. तो उनके साथ मैंने कई चाय और थोड़ा नास्ता भी क्र लिया है अभी तो अब जगह नहीं बचा.

लल्लू- मेरा पेट फैट जाएगा इतना खा खा क्र. थोड़ा सा हेल्प क्र दीजिये न.

मां- न भाई, बहुत दिन का बांकी था तो ये तेरे लिए है. मुझे तो उस मई से छूने को भी नहीं देगी. खाने की तो बात hi छोड़.

C.Mami- सही कहा भाई जी आप ने. ये सब तो मेरे लाल क लिए hi है. इस मई से और किसी को नहीं मिलने वाला.

मां- देख लिया बीटा. कहा था न मैंने

लल्लू- मुसकुडता हुआ हाथ बढ़ाया hi था खाने को की बड़ी ममी आ क्र हाथ पकड़ ली.

B.mami- न न. आज अपने बेटे को मई अपने हाथ से hi खिलाऊंगी.

लल्लू- मन मई,. मर गया. बी. ममी तो थुश थुश क्र खिलाएगी.

C.mami किचन से बना बना क्र लती गई और B.mami लल्लू को कभी प्यार से तो कभी दन्त क्र खिलाती गई.

फिर लल्लू को बचने का एक तरकीब दिमाग मई आया.

लल्लू- ओह्ह तेरी ये पहले क्यू नहीं सोचा मई ने.

बस फिर लल्लू अपने हाथ मई भी खाना उठा लिया.

B.mami- क्या हुआ बीटा. तू क्यू हाथ मई खाना उठाया. क्या तुम्हे मेरे हाथ से नहीं खाना. तुम्हे अच्छा नहीं लगा मेरे हाथ का.

लल्लू- बहुत अच्छा लग रहा है और मई आप क हाथ से hi खाऊंगा. ये तो मई आप को खिलने को उठाया है.

फिर लल्लू अपना हाथ b.mami क मुँह की और बढ़ाया.

B.mami की आँखों मई आँशु आ गया.

लल्लू- आप फिर से रोने लगी. क्या है ममी कितना पानी है आप क आँखों मई. जब देखो तब नलका खोल लेती हो.

लल्लू दूसरे हाथ से ममी क आँखों क आँशु को पॉच क्र साफ क्र दिया.

तभी c.mami किचन से पकौड़ी ले क्र आई.

लल्लू उनको भी हाथ पकड़ क्र बैठा लिया.

फिर क्या था.

लल्लू दो no ममी को एक एक क्र खिलता गया और दोनों ममी लल्लू.

लल्लू- बस ममी अब आज क लिए हो गया मेरा कोटा पूरा. अब मेरा पेट फैट जाएगा.

बड़े मां वही पास बैठे हुए देखते हस्ते रहे.

लल्लू बड़ी मुश्किल से उठ खड़ा हुआ वह से और कराहता चलता हुआ मां क पास आ क्र बैठ गया.

मां- और बात बीटा घर मई सब कैसे है. दादू, तुम्हारे काका पापा और काकी सब बहने कैसे है.

लल्लू- सब बहुत अच्छे है मां. भैया की सदी है संडे को.

मां- क्या राघव की सदी है. आया है वो. बहुत साल हो गए उसे भी देखे हुए.

लल्लू- है मां आये है भैया.

मां- अब ये बता की तू यहाँ से गया तो हम सब को भूल कैसे गया.

लल्लू- आप सब तो मेरे दिल मई हमेसा रहते हो मां. आप लोगो को कैसे भूल सकता हु. अपने भगवन को भक्त कैसे भूल सकता है. आप सब मेरे लिए भगवन से काम थोड़े हो.

मां- बस बस. वह जा क्र और कुछ सीखा या नहीं लेकिन बाटे अच्छी करने लगा है.

लल्लू- मई सुच hi तो कह रहा हु मां. आप सब मेरे लिए मेरे आगे माँ बाप से बढ़ क्र हो. आप सब क प्यार क आगे उनका प्यार कुछ भी नहीं है.

मां- चल झूठा. और बता कैसे आया है. आने कैसे दिए वो लोग तुम्हे बाइक से.

लल्लू- अब क्या कहु मां. सुनील काका को मैंने थोड़ा बहुत बता दिया है यहाँ क बारे मई तब जा क्र वो कुछ मुझ पर मेहरबान रहते है नहीं तो बांकी लोग तो मुझे सच मई लल्लू hi समझते है.

मां तथा क्र हुस्ने लगे.

साथ मई ममी लोग भी.

लल्लू- ाचा मां ये बताइये की आप लोग किस दिन आएंगे वह.

मां- बीटा संडे को सदी है लेकिन मुझे संडे को तो बहार जाना था एक जरुरी काम से. अब बड़ा भांजा है तो जाना भी जरुरी है. तो मई सैटरडे को hi अपना काम ख़तम क्र क उधर से उधर hi आ जाऊंगा.

लल्लू- और मेरी दोनों ममी. उनका क्या.

मां- ये तुम और तुम्हारी ममी समझे.

लल्लू ममी की और देखने लगा.

B.mami- बीटा आज तेरे छोटे मां भी आ जाइए. वो भी बहार गए है. फिर उन से बात कर क बताती हु. वैसे भी अब सदी मई दिन hi 5 बचे है.

लल्लू- ठीक है ममी. आने दो छोटे मां को भी.

मां- अच्छा बीटा मई अभी थोड़ी देर मई आता हु.

लल्लू- ठीक है मां. मई भी जरा सब से मिल लेता हु.

ममी की और देख क्र बोलै.

ममी मुसकुदा क्र इजाजत दे दी.

लल्लू वह से बहार आ गया और बैठक की और चल दिया.

बैठक मई इस समय ज्यादा लोग नहीं थे.

बहार क जितने भी लोग थे सब जा चुके थे.

एक 40-45 साल का बलिस्त सरीर वाला आदमी खड़ा किसी से बात क्र रहा था.

लल्लू अंडर आ क्र अपने होठो पर ऊँगली रख लिया. और वह जितने भी लोग थे सब को चुप रहने का इसरा क्र दिया.

लल्लू पीछे से जा क्र उस आदमी को कमर से काश क्र अपने बहो से पकड़ क्र उठा लिया.

और चार बार उठा उठा क्र जमीं पर झटके से खड़ा क्र देता.

वो बाँदा बौखला गया.

अब वो भी अपने आप को छुड़ाने का कोसिस करने लगा. वो बाँदा अपने दोनों हाथो से लल्लू क बन्दे हाथो को खोलने का जी तोर कोसिस करने लगा.

आस पास खड़े सभी हुस्स रहे थे. इंजॉय क्र रहे थे.

अंत मई थक क्र वो बाँदा अपना हाथ खड़े क्र लिया फिर लल्लू उसे छोड़ दिया.

लल्लू- बूढ़े हो गए अब तो आप मां.

आवाज सुन क्र वो झट से पलट गया और लल्लू को मुसकुडता खड़ा देख क्र उसे गले से लगा लिया.

वो बाँदा- कैसा है मेरा सेर. कब आये तुम.

लल्लू- बहुत बढ़िया हु कल्लू मां. देख लीजिये आप क सामने hi खड़ा हु.

फिर लल्लू वह क सभी लोगो से मिला
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 38.

लल्लू वह सोफे पर बैठ गया.

वह क सभी लोग आ क्र लल्लू क आस पास hi बैठ गए.

कल्लू मां- ललित बीटा तुम तो अब और भी मजबूत हो गए हो. आज तक मैंने अपनी पूरी लाइफ मई ऐसा बच्चा कोई दूसरा नहीं देखा है.

लल्लू- मां ये सब आप सब क म्हणत और आसीर्बाद का hi तो नतीजा है.

क्या आप भूल गए 4 शाल पहले तक आप मेरे पीछे तो हाथ धो क्र पड़े रहते थे

4बजे सुबह से जो मेरा परेड करना चालू करते थे वो 8 बजे तक चलती रहती थी और फिर साम मई 4 बजे से सुरु हो जाते थे मेरे पीछे लग जाते थे वो साम 7 बजे तक लगे रहते थे.

आप तो तेल निकल देते थे मेरा.

कल्लू मां- वो अब दिख भी तो रहा है बीटा. देखो अभी तुम मुझे जो पीछे से पकड़ लिए थे तो मई तो समझो मुझे पसीना आ गया था. क्या मजबूत पकड़ थी. दिल खुस क्र दिया तुम ने. बीटा तुम गौण मई प्रैक्टिस करते थे न.

लल्लू- है बिलकुल मां सुबह 4 बजे hi उठ क्र मई प्रैक्टिस करने चला जाता हु.

मां- शाबाश बीटा.

यु hi बाते करते हुए अपने पुराने समय को याद क्र रहे थे.

फिर लल्लू उठ क्र वह से घर आ गया.

घर मई आ क्र देखा तो निचे कोई नहीं था.

लल्लू बड़ी ममी क कमरे की और बढ़ गया.

लल्लू कमरे क गेट पर जा क्र गेट नॉक किया.

B.mami- आ जाओ खुला है.

लल्लू गेट खोल क्र अंडर चला गया.

बड़ी ममी बीएड पर लेती हुई थी.

लल्लू को देख क्र बड़ी ममी उठ क्र बैठ गई.

B.mami- मिल आये सब से.

लल्लू- है ममी. मिल लिया. अब अपने माँ क पास सोने आया हु.

B.mami- आ जा मेरा बचा.

बड़ी ममी बहे फैला क्र लल्लू को अपने पास बुलाई.

लल्लू जा क्र अपने ममी क गॉड मई सर रख क्र लेट गया.

बड़ी ममी लल्लू क सर क बालो को सहलाती उसे प्यार से निहार रही थी.

B.mami- बाबू, क्या यहाँ अपने इस माँ क पास आने का मन नहीं करता था तुम्हारा.

लल्लू- बहुत मन करता था माँ लेकिन वह गौण मई सब अभी मुझे बच्चा hi समझते थे. इस लिए कोई अकेले आने नहीं दिए. और किसी को इधर आने का मौका hi नहीं लग रहा था इसी लिए नहीं आ पाया.

B.mami- कोई बात नहीं लेकिन अब आते रहेगा न. अब तो कोई नहीं रोकेंगे तुम्हे.

लल्लू- अब मई किसी क रोके रुकूंगा भी नहीं माँ.

हर महीने मई अब एक बार आप क पास जरूर आया करूँगा.

B.mami- सबस बीटा.

फिर बड़ी ममी भी वही पास मई लेट गई.

लल्लू बाइक चला क्र आया था तो थक गया था.

ममी क गॉड मई लेटने और फिर ममी क द्वारा बल सहलाने से उसकी पहलके नींद से बोझिल हो गई और वो ममी क साथ मई नींद क वादियों मई खो गया.

पता नहीं कितनी देर सोया रहा.

जब नींद खुली तो वो बीएड पर अकेले लेता हुआ था.

बहार आ क्र देखा तो साम हो गया था.

बहार आ क्र ड्राइंग रूम मई सोफे पर बैठ गया.

लल्लू- ममी चाय..

वही महिला आ क्र थोड़ी देर मई चाय दे गई.

लल्लू- आप का नाम क्या है.

महिला- मंजू.

लल्लू- मंजू दी, दीदी तो कह सकता हु न आप को.

मंजू- आप तो हमारे मालिक है. आप कुछ भी कह सकते है.

लल्लू- ये क्या बात हुआ. कुछ भी कह सकता हु. ऐसा थोड़ी न होता है. खैर ये बताइये की ममी लोग कहा है.

मंजू- दोनों मालकिन गार्डन मई मई. बोले है आप को भी वही भेज दू.

लल्लू उठ क्र घर क पीछे क गार्डन मई चला गया.

घर क पीछे अच्छे खासे जगह मई बागवानी हुआ था. जिस मई छोटे बड़े कई तरह क फल फूल क पैर पैधे लगे थे. वह बैठे क लिए कुछ सीमेंट क बने चबूतरे थे और वह झूला भी लगा हुआ था.

वैसे अच्छी घास भी था वह और उसकी देख भल भी सही तरीके से होता था तो ज्यादातर ये लोग निचे घास पर hi बैठते थे.

वह जा क्र देखा तो दोनों ममी निचे घास पर बैठे बाते क्र रहे थे

लल्लू जा क्र बड़ी ममी और छोटी ममी क बिच बैठ गया.

लल्लू- एक किसी उधर है मेरा आप पर. कब डोज.

लल्लू धीरे से छोटी ममी क कान मई बोलै.

C.mami- पहले अपनी बड़ी माँ से ले हिम्मत है तो फिर मई दूंगी.

लल्लू- लेकिन देने का वडा तो आप ने किया था. बड़ी ममी ने नहीं.

C.mami- तो क्या हुआ. जैसे वो है तेरे लिए वैसे मई भी हु. तो पहले इन से ले.

लल्लू बड़ी ममी की और देखने लगा.

b.mami- क्या किशोर फुसुर क्र रहा है तुम दोनों.

लल्लू- कुछ नहीं ममी. C.mami पूछ रही थी की वो किसी इनका उधर रह गया है वो कब लूंगा मई.

C.mami- मैंने ये कब कहा. वो तो तू hi पूछ रहा था.

ममी आँखे बड़ी क्र क बोली.

लल्लू- ममी आप घबराइए मत न. अब वडा क्र दिया है आप ने तो कोई बात नहीं मई ले लूंगा. वैसे भी मैं भी तो आप का बीटा hi हु. क्या हुआ मां नहीं मई hi सही.

B.mami और c.mami दोनों आँखे बड़ी क्र क लल्लू को देखने लगी.

B.mami- ललित बीटा मई तो तुम्हे छोटा बच्चा समझ रही थी लेकिन तू तो अब बड़ा हो गया. अब तुम्हारी भी सदी करनी पड़ेगी.

लल्लू ममी को बात सुन क्र शर्मा इ लाहा.

C.mami- दीदी देखो अपना बीटा तो सरमाता भी है.

लल्लू- ममी आप लोग मेरा तंग खींचना बंद करिये अब.

तभी वह मंजू आ गई.

मालकिन छोटे मालिक को मिलने कल्लू भैया आये है.

फिर मई वह से उठ क्र कल्लू मां क पास आ गया.

कल्लू मां- क्यू भांजे कहा थे.

लल्लू- बहुत दिन बाद आया हु न मां तो अपनी दोनों माँ क पास उनका इतने दिन का बचा रखा प्यार लूट रहा था.

लल्लू बोल क्र हुस्ने लगा तो कल्लू मां भी हुस्ने लगे साथ मई.

कल्लू मां- भांजे जी हम चाहते है की तुम जरा मुझे ये दिखा दो की कही अपने गौण जा क्र यहाँ मेरा सिखाया हुआ भूल तो नहीं गए.

लल्लू- ओह्हू तो इस लिए मां जी धुंध रहे थे अपने भांजे को.

कल्लू मां- है बीटा. नहीं तो मई तुम्हे अपने माँ से कैसे दूर कर सकता था.

लल्लू- ठीक है मां जी. चलिए फिर चलते है अपने अड्डे पर.

दोनों बैठक से बहार आ क्र पोर्च मई आ गए.

वह तीन गरिया कड़ी थी और लल्लू का बुलेट भी.

लल्लू बुलेट की और बढ़ गए.

बाइक स्टार्ट क्र मां को बैठा क्र लल्लू चल पड़ा वह जहा आज से 4-5 साल पहले लल्लू का गहरा नाता था.

यहाँ चारो और 2 कम मई बाग़ था. जिस मई आधा तो गज्जू मां का था और आधे मई यहाँ क गौण वालो का था.

यही बाग़ मई एक माकन बना हुआ था उस माकन मई बहार एक आखाड़ा बना हुआ था.

लल्लू गाड़ी ले क्र बाग़ आ गया.

आखाड़े क सामने बाइक लेजा क्र लल्लू ने रोक दिया.

मां- चल बचे आजा देखे क्या सब याद है.

लल्लू माकन मई आ क्र अपना कपडा खोल क्र आलमारी मई रख दिया. अब लल्लू म बदन पर सिर्फ एक चड्डी रह गया था.

चड्डी पहने आ क्र आखरी क मिटटी को अपने माथे से लगा क्र लल्लू उस मई प्रवेश क्र गया.

पीछे से कल्लू मां भी अपना कपडा खोल क्र लंगोट पहले आ क्र मिटटी मात से लगा क्र खड़े हो गए लल्लू क सामने.

कल्लू मां- भांजे ये क्या बना रखा है पुरे पीठ और एक हाथ मई कला कला.

लल्लू- मां ये कुम्भ गया था अभी तो वही ये टैटू बनवाया था.

मां- अच्छा लग रहा है ये तो.

लल्लू हुस्ने लगा.

फिर दोनों तैयार हो गए.

दोनों ने हाथ मिलाया.

फिर एक दूसरे क आँखों मई देखते हुए दोनों क दोनों हाथ एक दूसरे से उलझ गए.

लल्लू मां को पीछे धकेलने को जोर लगा रहा था और शामे ऐसे hi मां लल्लू पर जोर आजमा रहे थे.

तभी लल्लू मां को दो कदम पीछे धकेला फिर मां भी जैसे hi लल्लू को धकेलने को जोर लगाए की लल्लू झटके से घूम क्र मां को अपने पीठ पर उठा पटक दिया निचे.

ये सब इतना जल्दी मई हुआ की मां लेते लेते आँख फाड् क्र देखने लगे लल्लू को.

लल्लू खड़ा मुसकुदा रहा था.

कल्लू मां- ये क्या था.

लल्लू- देव था मां. मई दिन मई बोलै था न की अब आप बूढ़े हो गए हो.

मां कुछ सोच क्र मुसकुडते हुए खड़े हो गए.

फिर दोनों ऐसे hi उलझ गए.

अबकी मां जी यही देव लल्लू पर आजमाया.

लल्लू क एक हाथ को दबा क्र अपने पीठ पर ले क्र झुक गए..

तभी लल्लू मां को कमर से पकड़ वही लुढ़क क्र चित्त क्र दिया.

मां- नहीं नहीं.. ये तू क्या क्र रहा है.

लल्लू- क्या मां जी.

मां- कहा सीखा ये सब.

लल्लू हस्ता हुआ..

मां जी आप जो भी करने को सोच रहे होते है न वो मुझे पहले पता होता है. इस लिए मई पहले से तैयार रहता हु.

मां- नहीं नहीं. तू झूठ बोल रहा है.

ऐसे थोड़े न होता है. वैसे भी ये सब तो मैंने तुम्हे सिखाया hi नहीं है.

लल्लू- मां जी आप मेरा टेस्ट लेने आये है. अब मई क्या देव आजमा रहा हु ये देखने थोड़े आये है आप.

मां- चल ठीक है.

मां भांजे एक बार फिर आमने सामने थे.

दोनों एक दूसरे को देखते हुए झुके थे और दोनों क हाथ एक दूसरे क हाथ को बचने की कोसिस मई लगी हुई थी.

अचानक दोनों अपने अपने सर एक दूसरे क सर से चिपका क्र धकेलने की कोसिस करने लगे.

कल्लू मां लल्लू क गर्दन क पीछे से पकड़ क्र अपने आगे झुका क्र गिरना चाहते थे और लल्लू उन से बच रहा था अपने गर्दन को तीते क्र क.

फिर लल्लू भी अपने दोनों हाथ मां क सर क पीछे ले जा क्र अपनी और दबाया और मां आगे झुकने लगे की मां थोड़े खड़े हो गए.

तभी झट से लल्लू मां क पेअर क बिच से निकल उन्हें पकड़ क्र दे पटकनिया.

मां तो आज गदगद हो गए.

उनका प्रिये सिस्य आज उन्हें साबित क्र दिया की उनकी म्हणत बेकार नहीं गया.

फिर मां उठ क्र लल्लू को गले से लगा क्र उसे पीठ थपथपा क्र सबसि दी.

फिर दोनों वह से निकल क्र माकन मई जा क्र स्नानं क्र धूल मिटटी से छुटकारा पाए और अपने अपने कपडे पहन क्र घर को चल दिए.

अब बहार हल्का अँधेरा हो गया था घर पहुंच क्र लल्लू बाइक कड़ी क्र अंडर आ गया.

अंदर सब ड्राइंग रूम मई hi बैठे हुए थे.

छोटे मां भी आ गए थे बहार से.

लल्लू जा क्र मां क पेअर छू प्रणाम किया.

छोटे मां- कहा गए थे बीटा. मई तो कब से तुम्हे धुंध रहा हु.

लल्लू- क्या बताऊ मां जी. कल्लू मां को तो मुझ माशूम बच्चे से जैसे कोई बैर है. देखा नहीं की पकड़ क्र ले गए परेड करने.

अभी वही से आ रहा हु. मैंने भी आज सारा बदला ले लिया. उठा उठा क्र पटका है.

सब लल्लू की बाते सुन क्र हुस्ने लगे.

लल्लू भी वही बैठ गया सोफे पर.

छोटी ममी उठ क्र की किचन मई गई और वह से जूस बना क्र लल्लू को पकड़ा दी.

लल्लू मुँह बिचकाती हुआ जूस पि लिया.

B.Mama- तेरा जूस से नफरत अभी तक ख़त्म नहीं हुआ.

सब हुस्स दिए.

लल्लू- अच्छा अब मां भी आ गए है. यहाँ अभी सभी है तो अब आप लोग बताइये की वह सदी मई जाने का क्या प्रोग्राम है.

सब एक दूसरे का मुँह देखने लगे.

लल्लू- ोू hello.. किसी क चेहरे पर लिखा है क्या. सब एक दूसरे का चेहरा देख रहे है.

C.mama- तुम्हारे आने से पहले हम इसी बारे मई बात क्र रहे थे.

लल्लू- तो क्या नतीजा निकला.

सब चुप्प..

लल्लू- मई आता हु फ्रेश हो क्र तब तक आप लोग फैसला क्र लीजिये अगर नहीं किये है तो.

लल्लू उठ क्र अपने कमरे मई चला गया.

B.mama- अब क्या करना है. अभी मन करेंगे तो ललित को भी बुरा लग सकता है.

B.mami- फिर….. आप सदी वाले दिन आएंगे और छोटे बाबू आएंगे hi नहीं. फिर अब क्या करे.

छोटे मां- मेरे ख्याल से आप कल बाबू क साथ चले जाइये. भैया संडे को पहुंच जाएंगे. मुझे टाइम मिला तो मई करुणा क साथ आ जाऊंगा. नहीं तो करुणा कल्लू भैया क साथ आ जाएगी संडे.

तब तक लल्लू भी कमरे से फ्रेश हो क्र निचे आ गया.

लल्लू-. तो बताइये क्या प्लान बना आप सब का.

फिर बड़े मां अभी जो कुछ फैसला हुआ था लल्लू को बता दिए.

लल्लू- आप दोनों संडे को आएंगे वो भी पक्का नहीं. छोटी ममी को क्यू फसा रहे है आप छोटे मां.

मई कल सुबह दोनों ममी को ले जाऊंगा आप लोग संडे को आएगा या फिर मंडे को.

C.mami- सुबह तो जा hi नहीं पाएंगे.

लल्लू- क्यू ममी.

C.mami- शॉपिंग भी तो करनी है.

लल्लू- शॉपिंग रस्ते मई कर लीजियेगा या वह क बाजार मैं क्र लीजियेगा.

B.mama- यहाँ से कल 10 बजे खाना खा क्र निकल जाना और रस्ते मई शॉपिंग कर लेना. अगर मौका न मिले तो फिर वही क्र लेना एक दिन जा के.

b.mami- ठीक है. फिर छोटी चल पैकिंग क्र ले अभी hi.

छोटी ममी- ठीक है दीदी.

फिर दोनों ममी वह से अपने कमरे मई पैकिंग करने चली गई.

लल्लू और दोनों मां वही बैठे बाटे करते रहे.

B.mama- बाबू तुम तो बुलेट से आये थे तो अब उसे यही छोड़ जाना. उसे मई किसी क हाथ से भेजवा दूंगा. तुम कल अपना कार hi ले क्र चले जाओ.

लल्लू- है मां बुलेट पर तो वैसे भी तीन लोग और फिर सामान नहीं हो पायेगा.

B.mama- फिर ठीक है मई कल बोल दूंगा कोई उस कार को सुबह hi साफ़ क्र देगा गररगो से निकल क्र.

लल्लू- मां आप लोग प्लस जरूर आइयेगा नहीं तो सब समझेंगे की मई hi सही से नहीं बोलै होऊंगा.

C.mama- ऐसा बिलकुल नहीं सोचना बीटा तुम. हम हर हाल मई संडे को वह होंगे.

लल्लू- ठीक है मां.

फिर मंजू आ क्र डिनर रेडी होने की बात बताई.

छोटे मां भी बहार से आये थे तो खाना नहीं खाये थे.

सब फ्रेश होने चले गए.

थोड़ी देर मई सब दिंनिंग टेबल पर बैठ गए.

खाना खाने क बाद सब उठ क्र थोड़ी देर वाक क लिए बहार आ गए.

वह वाक क्र फिर सब सोने चले गए.

लल्लू अपने कमरे मई आ गया.

कपडा खोल क्र टॉवल लपेट लल्लू बीएड पर लेट गया.

थोड़ी देर सोनम को और उसके प्यार को याद करता खुद से hi बाटे करता कब नींद क गॉड मई पहुंच गया पता hi नहीं चला.

सुबह तो लल्लू की नींद जल्दी hi खुल जाती है.

आज भी वो जल्दी hi उठ गया. बीएड से उठ क्र फ्रेश हो क्र लल्लू बहार आ गया.

बहार आ क्र वो बाग़ मई जा क्र ध्यान लगाने को बैठ गया.

आज थोड़ी देर बाद लल्लू को ध्यान लगाने मई सफलता मिल गया.

तभी बाग़ मई कही कुछ आवाज आया और लल्लू का ध्यान टूट गया.

आँख खोल क्र देखा तो मंजू फूल तोड़ने क लिए बगीचे मई आई थी.

सूर्य उदय हो गया था. लल्लू वह से उठ कर घर आ गया और स्नान क्र ड्राइंग रूम मई आ गया.

बड़े मां वह पेपर पढ़ रहे थे.

लल्लू भी जा क्र वही बैठ गया.

C.mami लल्लू क लिए एक गिलास जूस बना क्र ला दी.

लल्लू जूस पिता हुआ c.mami से बाटे क्र रहा था.
 
प्रेम भाई, लल्लू का पास्ट मई आगे दिखा दूंगा कभी भी.

दूसरी बात है भाई की स्टोरी मई सिर्फ चुदाई चुदाई और चुदाई hi होगा तो एक समय बाद वो भी अच्छा नहीं लगेगा.

अभी अब मुझे स्टोरी को आगे बढ़ाना है जिस को ले क्र दिमाग मई दो चार बाते घूमती रहती है पुरे दिन.

अपडेट थोड़ा स्लो भी इसी कारन हुआ है दूसरा कारन ये है की फॅमिली भी साथ रहता है मेरे.

अब हमेसा मुझे मोबाइल मई hi उलझा देखता है सब तो वो भी पूछने लगते है की इतना मोबाइल मई क्या करता रहता हु.

ये एक एडल्ट साइट है सब क सामने खोल भी नहीं सकता. न hi सब क साथ बैठ क्र अपडेट टाइप क्र सकता हु.

अपडेट क लिए थोड़ा इक्कंत और संत जगह चाहिए होता है.

इसी सब कारन से स्पीड थोड़ा काम हुआ है.

माफ़ करना भाई क्या करे सब देखना पड़ता hai.:D
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 39.

खाना तैयार हो गया था. खाना खाने क बाद दोनों ममी और लल्लू तैयार होने चले गए.

थोड़ी देर मई तैयार हो क्र लल्लू बहार आ गया.

दोनों मां भी अंडर कमरे मई चले गए.

थोड़ी देर मई सब अपने बैग ले क्र निचे आ गए.

लल्लू दोनों ममी का बैग ले क्र पोर्च मई चला गया कार मई रखने.

पोर्च मई आ क्र लल्लू अपने कार को देख क्र खुश हो गया.

जब लल्लू यहाँ कार चलना सीखा था कल्लू मां से तो मां ने बाद मई लल्लू को ये कार खरीद दी थी.

लल्लू डिक्की खोल क्र उस मई सारा सामान रख दिया.

दोनों ममी मां क साथ वह आ गए.

बड़े मां आज सुबह hi कार को साफ़ करवा दिए थे.

अभी ये रेड कलर का ऑडी ा3 चमक रहा था.

जब लल्लू यहाँ से गौण गया था तो मां ने इसे अंदर कव्य से धक् क्र रखवा दिया था.

तभी वह कल्लू मां और गज्जू मां क साथ काम करने वाले सरे स्टाफ आ गए.

लल्लू एक एक क्र सभी से गले मिला.

कल्लू मां को भी सदी मई आने का निमंत्रण दे क्र हाथ जोर क्र प्रणाम किया लल्लू ने फिर दोनों मां को एक बार फिर प्रणाम क्र गारी मई बैठने लगा.

बड़े मां आ क्र लल्लू को गले से लगा लिए. उनकी आँखे नाम हो गई थी.

लल्लू भी अंदर से मायुश था.

बड़े मां फिर अलग हो क्र लल्लू को एक पैकेट दिए.

लल्लू- ये क्या है.

B.mama- ये घर जा क्र देखना.

फिर छोटे मां आ क्र गल्ली को साइन से लगा क्र उसे प्यार किये.

लल्लू झूठी मुस्कान बिखेरता हुआ कार मई बैठ गया.

फिर हाथ हिला क्र सब को अभिवाय करता हुआ कार को वह से निकल क्र रोड पर ले आया.

बड़ी ममी आगे बैठी थी.

लल्लू वह से गौण को चल दिया.

अपने गौण क पास क बाजार आ गया था.

लल्लू दोनों ममी को रस्ते मई सब दिखता आ रहा था.

B.mami- बाबू हमे कुछ शॉपिंग करना है.

लल्लू कार ले क्र उसी शोरूम मई आ गया जहा पहली बार सोनम क साथ आया था.

कार पार्किन मई लगा क्र लल्लू दोनों ममी क साथ अंडर शॉप मई आ गया.

आज शॉप मई वो अंकल नहीं थे. एक लड़की बैठी हुई थी.

लल्लू - नमस्ते मम. यहाँ अंकल होते थे. कही गए है क्या.

लड़की- वो मेरे पापा है. अभी वो गोडाउन मई नए माल को देख रहे है. जो रात मई आया है.

जी कहिये मई आप की क्या मदद क्र सकती हु.

लल्लू- जी ये मेरी दोनों ममी hai..hume कुछ शॉपिंग करना है.

फिर वो लड़की एक महिला को बुला क्र उन्हें दोनों ममी को अटेंड करने को कहा.

दोनों ममी उस के साथ चली गई.

थोड़ी देर मई c.mami आई.

बीटा किसी और शॉप मई चलते है. यहाँ कुछ समझ नहीं आ रहा.

लल्लू काउंटर पर चला गया.

लल्लू- मम क्या आप जरा मेरी बात करवा देंगे अंकल से.

लड़की- जी क्या हुआ. अभी तो वो बिजी है.

लल्लू- अगर पॉसिबल हो तो मुझे सिर्फ उन से बात करवा दे.

लड़की- क्या बात है आप मुझे बताये.

लल्लू- मेरे ममी को कुछ पसंद नहीं आया यहाँ.

लड़की c.mami को ले क्र खुद आगे आ गई और कपडे दिखने लगी.

दरअशल दोनों ममी सिंपल रहना पसंद करती है.

इस लिए वो सिंपल कपडे hi पहले हुए थी.

वो महिला उनके सिंपल कपड़ो मई देख क्र लौ रेंज क कपडे देखा रही थी.

अब ये शॉप ओनर की लड़की आ क्र दोनों ममी को एक से एक कलर और क्वालिटी क कपडे निकल क्र दिखने लगी.

दोनों ममी खुश हो गई देख क्र.

फिर दोनों ममी काफी सरे कपडे खरीदी.

पहले तो लल्लू की फॅमिली क सभी मेम्बर क लिए कपडे ली फिर अपने लिए.

वह से निकलते वक्त उनके पास पांच बड़े बड़े पैकेट्स हो गए.

बिल बनवा क्र लल्लू पसे देने गया लेकिन बड़ी ममी ने लल्लू को पैसे नहीं देने दी.

B.mami- ये क्या क्र रहा है बाबू.

लल्लू- बिल पाय कर रहा हु ममी.

B.mami- हमारे रहते तू क्यू पाय कर रहा है.

लल्लू- (हुस्स क्र) ममी मेरे पास जो पैसे है वो भी तो आप क hi है.

C.mami- तो उसे तुम अपने काम मई लगाना. जहा हम लोग न हो.

अभी हम है साथ मई तो तुम रहने दो बाबू. दीदी दे रही है.

फिर c.mami लल्लू को पकड़ क्र सोफे पर बैठा दी.

तभी गोडाउन से शॉप वाले अंकल भी आ गए.

उन्हें देख क्र लल्लू खड़ा हो क्र अंकल को हाथ जोर प्रणाम किया.

अंकल लल्लू को देख क्र वह आ गए.

अंकल- बीटा आप यहाँ आये हो. मुझे बुलवा लेते.

लल्लू- कोई बात नहीं अंकल. पता चला आप गोडाउन मई बिजी मई तो आप को डिस्टर्ब करना सही नहीं समझा. वैसे भी मम खुद hi सरे कपडे निकल क्र दिए है.

अंकल- अच्छी बात है बीटा. और ये कोई मम नहीं है लंदन से आई हुई. ये तुम्हारी बहन है सीतल.

फिर अंकल काउंटर पर आ क्र उनका बिल देखा.

अंकल अपने बेटी सीतल से- बीटा मई जब यहाँ न राहु और ये लोग आये तो इन्हे स्पेशल ट्रीट देना. ये तुम्हे राम चाचा का लाडला है.

फिर अंकल बिल मई और सपकल डिस्काउंट क्र क लल्लू को पैसे वापस क्र दिए.

सीतल- सॉरी भाई मुझे पता नहीं था की आप मेरे भाई हो. और आप ने बताया भी नहीं की आप राम चाचा क लड़के हो.

लल्लू- कोई बात नहीं दी. वैसे भी मई यहाँ शॉप मई एक ग्राहक बन क्र आया था. है घर आया होता आप क तब मई परिचय करता.

सीतल- भाई सदी क बाद फ्री हो क्र घर जरूर आना.

लल्लू- ठीक है दी. मई जरूर ायूँगा. आप लोग सदी मई तो आओगे न.

सीतल- भाई मुझे तो शॉप पर रहना पड़ेगा. है पापा जरूर जाएंगे.

वो लोग बात करते हुए बहार तक आ गए.

लल्लू की रेड ऑडी देख क्र- वाओ भाई रेड ऑडी.

अवेसमे..

लल्लू- थैंक्स दी. ये मेरी दोनों माँ ने दिया है.

लल्लू अपने ममी की और इसरा करता बोलै.

फिर लल्लू उन लोगो से बीड़ा ले क्र अपने घर की और चल दिया दोनों ममी क साथ.

वह से चलने क पहले अंकल और सीतल ने बहुत जोर दिया जूस क लिए लेकिन लल्लू प्यार से उनके आग्रह को ठुकरा दिया.

लल्लू घर आ क्र दालान क सामने अपनी ऑडी ला क्र कड़ी क्र दी.

वह अभी तीन गरिया और भी कड़ी थी.

लल्लू अंदर आ क्र आँगन मई चला गया.

लल्लू- काकी…. काकी… जरा जल्दी आओ. दोनों ममी आई है. बहार कार मई है.

लल्लू की आवाज सुन क्र जो जहा था वह से निकल क्र जल्दी से दालान क बहार आ गए.

बहार कार से दोनों ममी बहार आ गई थी.

सब दोनों से मिलने लगी.

सभी बहने जा क्र दोनों ममी को प्रणाम किये.

सभी घर की महिला दोनों से गले मिली फिर ले क्र उन्हें आँगन आ गए.

लल्लू कार से सारा सामान निकलने लगा.

साथ मई राघव भी था.

दोनों मिल क्र सारा बैग्स पैकेट्स ले क्र आँगन आ गया.

लल्लू- काकी इनको किस रूम मई राखु.

लल्लू रागिनी काकी क पास जा क्र पूछा जो दोनों ममी से बात क्र रही थी.

रागिनी काकी फर्स्ट फ्लोर का रूम मई रखने को बोली तो लल्लू सारा सामान ले जा क्र उस रूम मई रख दिया.

फिर लल्लू अपनी दोनों बुआ को ढूंढने लगा.

लल्लू- भैया बुआ कहा है. क्या वो नहीं आई.

राघव- आ गई है भाई. वो फर्स्ट फ्लोर पर hi हैं. अभी आराम क्र रही है. वो लोग भी आज hi आई है.

लल्लू फिर अपने कमरे मई जा क्र फ्रेश हुआ.

फ्रेश हो क्र बहार आया.

लल्लू- अरे पहले इन्हे फ्रेश होने दो. कुछ खाने को दो. फिर बाते करते रहना.

लल्लू सब से बोलै जो दोनों मामियो को घेरे बाटे क्र रहे थे.

फिर शालिनी काकी जा क्र दोनों ममी को उनका कमरा दिखा दी.

दोनों ममी फ्रेश होने लगी.

ऋतू काकी लल्लू क पास आ क्र.

ऋतू- बीटा चल तू भी कुछ खा ले. थक गया होगा.

लल्लू कुछ नहीं बोलै. आँगन मई खटिये पर जा क्र बैठ गया.

तभी वह सोनम क साथ एक प्यारी मासूम डॉल आ क्र कड़ी हो गई.

सोनम- इसे पहचानता है कौन है.

लल्लू उस लड़की को देख रहा था और वो जापानी गुड़िया लल्लू को.

फिर लल्लू अपने होठो पर एक ऊँगली रख क्र गौण की महिलाओ की तरह सोचतने का नाटक करने लगा.

लल्लू- है याद आया ये तो….. फिर चुप हो गया.

सोनम- क्या, ये तो…

लल्लू- ये तो मेरी प्यारी प्यारी सब से छोटी डॉल है और इनका naam...nammm, फिर से एक बार लल्लू सर खूझाता हुआ सोचने का नाटक करने लगा.

वो लड़की जो अभी बची hi थी, apna.muh फुल्ल ली.

लल्लू आगे बढ़ क्र उसके सामने बैठ गया कान पकड़ क्र बोलै

लल्लू- ये मेरी प्यारी गुड़िया है "रूही".

लल्लू अपनी बहे फैला दिया.

रूही जो मुँह फुलाए हुई थी अपना नाम सुन क्र खुश हो गई लेकिन उसने लल्लू की और देख क्र जीभ निकल उसे ठेंगा दिखा दी अन्घुता निकल क्र हिलाते हुए.

सोनम का तो हस्स हस्स क्र बुरा हॉल था.

वो ठहाके लगा क्र हस्स रही थी.

लल्लू बुरा सा मुँह बना क्र खड़ा हो गया.

पीछे दोनों बुआ कड़ी थी साथ मई काजल लल्लू का नास्ता ले क्र.

सब हस्स रहे थे.

फिर रूही आ क्र लल्लू क गले लग गई.

लल्लू गले लगाए उसके बालो को सहला रहा था.

लल्लू- तो मेरी गुड़िया मुझ से फिरकी ले रही है. मुझे मामू बना रही है.

लल्लू रूही को पकड़ क्र गुदगुदी करने लगा.

रूही हस्ते हुए लल्लू क बहो मई मचलने लगी.

फिर लल्लू रूही क माथे को चुम लिया.

लल्लू- कैसी है मेरी गुड़िया. और अपना राजू कहा है.

रूही- भाई वो तो अभी माँ क साथ सो रहा था.

क्यू रे मेरी बेटी को तंग क्र रहा है.

पीछे से किसी ने लल्लू क कानो को पकड़ क्र उस से बोली.

लल्लू गर्दन घुमा क्र देखा तो दोनों बुआ कड़ी मुसकुदा रही थी.

लल्लू झुक क्र उन्हें प्यार छू क्र प्रणाम किया.

बड़ी बुआ लल्लू को उठा क्र अपने गले से लगा ली. फिर उसके ललाट को चुम क्र अपने बहन से बोली.

बड़ी बुआ- छोटी, देख कितना बड़ा हो गया है. अब तो हम से भी लम्बा हो गया है. जब देखि थी तब कितना छोटा था.

छोटी बुआ लल्लू को गले लगाती हुआ.

छोटी बुआ- सही कहा दीदी. पहले जब देखा था तब हमारा बीटा नंगा घुमा करता था आँगन मई. आज देखो इसे. लगता है अब राघव क साथ hi इसकी भी सदी करनी पड़ेगी.

लल्लू छोटी बुआ की बात सुन क्र शर्मा गया.

छोटी बुआ- दीदी ये तो लड़कियों की तरह शर्मा रहा है. देखो कैसे गाल लाल हो गए है.

लल्लू- बुआ आप लोग मेरा मजाक बनाना बंद करो और ये बताओ की आज क्यू आई. आप लोग परसो आने वाले थे फिर कल का प्रोग्राम बना और अब आज आई.

बड़ी बुआ- ये तुम अपनी छोटी बुआ से पूछ.

लल्लू छोटी बुआ को देखने लगा.

छोटी बुआ- वो बीटा मई तेरे फूफा क साथ उनके रिस्तेदारी मई चली गई थी. वह भी सदी था.

इसी लिए आज आ पाई हु.

फिर सब वही आँगन मई बैठ गई खटिये पर.

लल्लू एक और खटिया उठा क्र ले आया.

अब सब वही बैठे बात क्र रहे थे.

काजल- खाना नहीं खाना तो मंगवाया क्यू तूने. कितने देर से ले क्र कड़ी हु.

लल्लू- मई तो समझा था किसी गे या भैसा क लिए खाना ले क्र आये हो आप. ऐसे तो वही कहते है. एक hi बर्तन मई उन्हें सब मिला क्र दे डिजा जाता है.

काजल- सरे बर्तन अभी गंदे थे. इसी लिए एक मई hi लगा दी है. लेकिन अलग अलग है. अभी खा ले. आगे से ऐसे नहीं दूंगी.

लल्लू- क्या बात है. सरे बर्तन गंदे थे. नलका मई पानी नहीं आ रहा. या आ रहा है तो सब ने हाथो मई मेहदी लगा रखा है. तुम लोग तो नाक कटवा डोज. क्या इसी घर मई सदी है.

लल्लू उठ क्र दालान पर चला गया.

दालान पर अभी सिर्फ दादू hi थे.

लल्लू वापस आँगन आ गया.

लल्लू- दी मझले काका का मोबाइल नंबर दो

सोनम- भाई गुस्सा नहीं करते. हो गया न. मई लती हु न तुम्हारे लिए खाना.

लल्लू- दी मुझे काका से दूसरी बात करनी है. और मई नाराज नहीं हु. अपने माँ बाप से क्या नाराज होना. आप काका का नंबर दो न प्लस.

सोनम- क्या बात करनी है मुझे बताओ.

लल्लू- दी आप को मुझ पर भरोसा नहीं है. मई सुच मई गुस्सा नहीं हु. ये मुझे खाना नहीं देती मई तब भी गुस्सा नहीं होता.

कोई बुआ- बाबू तुम यहाँ आ क्र बैठ. मेरा बीटा आज मई तुम्हे अपने हाथ से खिलाऊंगी.

लल्लू सोनम को देखता हुआ खटिया पर बैठ गया.

छोटी बुआ माँ क हाथ से थाली ले क्र खाना खिलने लगी लल्लू को.

लल्लू दो चार बार खाना खाया बुआ क हाथ से फिर अपने हाथ से खाना खा लिया.

तभी सुनील काका आँगन मई आये.

सुनील- ूहू तो आ गया मेरा बीटा.

लल्लू- है काका. आप कहा से आ रहे है.

सुनील- मई तो बीटा बाजार गया था. कुछ सामान लेन रह गए थे.

लल्लू- हलवाई कब से रहेगा काका.

सुनील- हलवाई बीटा परसो सुबह आ जाएंगे.

लल्लू- क्यू परसो क्यू. अभी से क्यू नहीं.

काका- तुम्हारी काकी लोगो ने मन किया था. बोल रही थी की हम लोग इतने आदमी है सब मिल क्र खाना बना लिया करेंगे.

लल्लू- नहीं काका. सदी का घर है. जितने लोग होते है किसी काम को करने मई इतनी hi ज्यादा पड़ेशानी होती है काम पूरा होने मई. आप हलवाई आज hi बुलाते. वैसे भी यहाँ सदी का भी विधि सुरु होने वाला होगा आज से hi. कुछ पत्तल वाली थाली प्लेट्स भी मंगवा दीजिये. इतने बर्तन कौन बार बार धोएगा.

और सब से लास्ट अपना सेल नंबर दे दीजिये.

फिर दोनों अपना नंबर एक्सचेंज किये.

काका हलवाई को बोल दिए आज से आने को और गिलास प्लेट का भी आर्डर क्र दिए. वो गौण का hi था तो रात को घर आते वक्त वो लेते आएगा.

काका वह से फिर दालान पर चले गए.

दोनों बुआ और सोनम दी भी लल्लू से मोबाइल नंबर एक्सचेंज किये.

फिर लल्लू सब से इजाजत ले क्र अपने कमरे मई थोड़ी देर आराम करने आ गया.
 
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