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- Dec 5, 2013
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मर्द का बच्चा. अपडेट 34.
सब को बैठा क्र वो D.wala एक लड़के को बुलाया और उसे काउंटर पर बैठने को बोलै.
D.wala- यहाँ भीड़ बहुत रहेगा तो आप लोग मेरे साथ पीछे गोडाउन चलिए.
वह मई आप सब को सभी तरह क कपडे तसल्ली से दिखा पाउँगा.
फिर सभी उस दुकान वाले क साथ पीछे गोडाउन चले गए. वह लगभग 2 घंटे तक खरीदारी करने क बाद सभी वह से उठे.
डी. वाला- ये सारा मई पैक कड़वा क्र गारी मई रखवा देता हु.
आप सब तब तक आइये चल क्र शोरूम मई बैठिये.
सोनम- माँ यहाँ कपडे का सिलाई भी होता है. अगर आप सब को सिलाई करवाना है तो अंकल वो भी करवा देंगे.
डी. वाला- है है क्यू नहीं. जिन को भी अपने कपडे सिलवाने हैं. वो नाप दे क्र सिलने को दे दीजिये. दो दिन मई सील क्र तैयार करवा दूंगा.
सभी काकी वही ब्लाउज सिलने को दे दिए.
दीदी लोग भी अपने अपने लहंगा की फिटिंग करे तो कोई शॉट्स की सिलाई को भी दे दिए.
फिर सब वह से शोरूम मई आ गए.
फिर वह सब क लिए वो दुकान वाला जूस मंगवाया.
सब जब तक जूस पि रहे थे तब तक सारा सामान पैक क्र उनके गारी मई रखवा दिया गया.
लल्लू जा क्र बिल बनवा लिया.
पैसे ऋतू जा क्र पाय क्र दी.
लल्लू सोनम और रिद्धि वाला सूट्स भी ले लिया.
लल्लू- (ऋतू से) अभी और लेना है क्या काकी. तो दूसरे दुकान का भी पता कर ले.
काजल- तुम्हे समझदार बनाने की जरुरत नहीं है. हम सब को भी पता है यहाँ काफी सरे शोरूम है.
लल्लू माँ की बात सुन क्र पीछे हो गया.
फिर सब गारी मई बैठ गए. लल्लू भी जा क्र बाइक स्टार्ट क्र गारी क पीछे चल दिया.
फिर गारी एक शोरूम पर रुका. लल्लू भी अपना बाइक पीछे रोक लिया.
सब गारी से उतर क्र अंडर दुकान मई चले गए. लल्लू बहार hi खड़ा रहा. उसे अंडर जाने का मन नहीं क्र रहा था. लल्लू बाइक पर बैठा इधर उधर दुकाने देख रहा था.
तभी लल्लू देखता है की एक 2.5- 3 शाल का बच्चा रोड पर अकेला रोड क्रॉस कर रहा है और उधर से एक कार बड़ी तेज दौरि चली आ रही है.
लल्लू बाइक को स्टैंड पर खड़ा क्र उस पर एक पेअर मोर क्र अपने जांघ पर रखे बैठा हुआ था.
लल्लू जब ये देखा तो उसकी ससे अटक गई.
ओह्ह मय्यै गोड़.. ये बच्चा…
लल्लू जल्दी से कूद क्र बाइक से उतरा.
अब वो कार उस बच्चे से मुश्किल से चार कदम दूर था.
लल्लू तो कम्प गया देख क्र. उसे अब जल्दी hi कुछ करना था.
वो उप्पेर वाले को याद क्र दौड़ क्र लौंग जम्प लगाया तब तक कार भी बस बच्चे से टकराने hi वाला था.
लल्लू गुलाटी खता हुआ रोड पर बच्चे को गॉड मई लिए रोड क दूसरे साइड घिसटते हुए गिरा लेकिन कार फिर भी टक्कर मर hi दी थी.
लेकिन अच्छी बात ये थी की वो बच्चे क बदले लल्लू को लगा था.
बच्चा लल्लू क गॉड मई दर से चिपका हुआ था.
लल्लू उस बच्चे को अपने साइन मई छिपाये रोड पर गिरा था.
आस पास क दुकान पर जो लोग थे वो दौड़ क्र आये.
राघव लल्लू को दुकान मई नहीं देखा तो वो लल्लू को ढूंढते हुए बहार देखने आया था.
बहार सरक पर भीड़ और सोर होता देख क्र राघव वह देखने चला आया.
तब तक वह पर जमा भीड़ लल्लू को पकड़ क्र उठाया.
लल्लू क कार से टक्कर होने से और फिर सरक पर घिसटने से उसका एक तरफ का कन्धा और कमर चील गया था. सर भी फुट गया था जहा से खून निकल रहा था.
कपडे तो कई जगह से फट गया था.
सभी लोग लल्लू को पकड़ क्र वही एक दुकान पर ले जा क्र बैठता. फिर उसे पानी पिलाया.
सभी तुरंत एक डॉक्टर को बुलाने को बोलने लगे एक दूसरे को.
तभी वह एक मर्द और औरत आये. जिन का वो बच्चा था.
औरत तो बदस्तूर रोये जा रही थी.
वो दौड़ क्र उस बच्चे को उठा क्र अपने साइन से लगाए उसका सरीर सहलाती उसके छोटे मासूम चेहरे को चुम्मी से भर दी.
औरत- मेरा बच्चा. मेरे लाल. तुम्हे कही चोट तो नहीं लगा. मेरा sona..wagairah.. वगैरह…
मर्द भी अपने बचे को पकड़ क्र उसे दुलार रहा था. उसका गाल छू क्र सहला रहा था. कभी उस बचे को पीठ सहलाता कभी सर सहलाता.
अरे कोई पहले इसे डॉक्टर को दिखाओ. इसी क कारन ये बच्चा सकुसल है.
उस भीड़ मई से किसी एक ने कहा.
एक मिनट एक मिनट मई खुद एक डॉक्टर हु. वो औरत जिस का ये बच्चा था. उस ने बच्चे को अपने पति क गॉड मई दे क्र लल्लू की और आती बोली.
लल्लू तो लोगो से घिरा हुआ था.
तब तक राघव भी भीड़ मई आ क्र देखा तो लल्लू….
राघव- ओह्ह्ह… go...d….
Bhai...ye किऐसे.. हुआ.
लल्लू- वो….
तब तक वो औरत भी लल्लू क पास आ गई.
औरत- तुममम….
लल्लू सर उठा क्र देखा… आप…
औरत- थैंक ु सोऊ सोऊ मुछ्ह. अगर आअज…
अरे इसे थैंक्स.. बाद मई दे लेना पहले इसका इलाज तो करो. या किसी डॉक्टर क पास hi ले जाओ. कोई. उस भीड़ मई से फिर किसी ने बोलै.
वो लेडी डॉक्टर अपने पति से - आप अपना कार ले आओ न इन्हे अपने क्लिनिक hi ले चलते है.
उसका पति दौर क्र कार लेन चला गया.
दो मिनट्स मई कार ले क्र आ गया.
लल्लू को उस मई बैठा क्र वो डॉक्टर अपने क्लिनिक ले क्र चली गई. साथ मई राघव भी चला गया.
वो कार वाला तो टक्कर मर क्र भाग गया था जब तक लोग लल्लू और बच्चे को सँभालने मई लगे थे.
लल्लू- सॉरी भैया. आप यहाँ क्यू आ गए. आप उन लोगो क पास जाओ नहीं तो वो सब हम दोनों को गायब देख क्र बहुत चिंतित होंगे.
राघव- तुम्हे इस हालत मई छोड़ क्र मई कैसे जा सकता हु भाई.
लल्लू- भैया मुझे कुछ नहीं हुआ है. बस थोड़ा सा खरोच लगा है बस. आप बस काकी और बहनो क पास जाइये.
उन लोगो को मेरे बारे मई मत बताइयेगा. आप सब जिस काम से आये है वो काम कीजिये बिना मेरे चिनत करे. मई बिलकुल ठीक हु.
डॉक्टर- अरे बाबा कितना बोलते हो तुम. अभी बिलकुल चुप रहो और इस बीएड पर लेट जाओ. मुझे देखने दो कहा कहा चोट लगा है.
और है आप इनका कोई फिक्र मत कीजिये. आप अपना काम क्र क आइये तब तक मई इनको जरा देख लेती हु.
राघव पदेशन सा वह से उस शॉप पर आ गया जहा उसके घर की सभी महिलाये शॉपिंग क्र रही थी.
ऋतू- कहा गया था तू. कब से धुंध रही हु. यहाँ हम तुम्हारे सदी की शॉपिंग मई आये है और तुम इधर हम सब को छोड़ क्र बहार घूम रहा है.
राघव क्या कहे अभी लल्लू क बारे मई बता क्र सब को पदेशन नहीं करना चाहता था. वो चुप चाप ऋतू क साथ चल दिया.
सब का शॉपिंग लगभग निपट hi गया था. और जो थोड़ा बहुत रह गया था वो अब अगले दिन आ क्र दो चार लोग कर लेते.
वैसे समय भी काफी हो गया था.
अभी अब शाम हो गया था और चारो और अँधेरा फैलने लगा था.
सोनम रह रह क्र चारो और कुछ धुंध रही थी.
कोमल सोनम को इतना बेचैन देखा तो उस से रहा नहीं गया.
कोमल- क्या बात है दी. आप कुछ पदेशन लग रही हो.
सोनम- नहीं कोमल. कोई बात नहीं है. आज तो बड़ा मजा आया शॉपिंग मई.
कोमल- दी, अगर नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं. यु बात तो मत बदलो.
सोनम- यार मई काफी देर से भाई को नहीं देखि हु. पता नहीं कहा है. आज सब उसके पीछे hi लग गए है. सब किसी न किसी बात पर उसे दन्त देते है.
कोमल- है दी. मई भी देख रही हु. भाई आज बहुत उदाश था. सायद बहार होगा वो.
फिर सब सामान पैक करवा क्र गारी मई रखवा दिया.
ऋतू काउंटर पर जा क्र बिल पाय क्र दी.
फिर सब बहार आ गए.
अब राघव भी पदेशन था की क्या करे. कैसे इन लोगो को बताये.
लल्लू को देखना भी जरुरी था.
सोनम अलग पदेशन थी जब देखि की बुलेट तो वह कड़ी है लेकिन लल्लू नहीं है वह.
तभी पास क दुकान वाला आ क्र रहब से लल्लू क लिए पूछा.
D.wala - भाई साहब अब आप क भाई कैसे है.
उस दुकान वाले की बात सुन्न क्र सब चौक गए.
सोनम तो रोने hi लगी.
सोनम- भैया क्या हुआ भाई को.
D.wala- क्या आप लोगो को पता नहीं है. वहहह क्या काम किया है उन्होंने. बेचारे को थोड़ी चोट भी लग गई लेकिन ऐसा जज्बा ऐसा कठिन काम सब नहीं क्र सकता. इसके लिए कोई जिगर वाला hi चाहिए.
ी प्राउड हिम. कैसे है अब वो भाई साहब.
कोमल, सोनम- एक साथ… क्या…..
कोमल को तो सुन्न क्र hi हालत ख़राब होने लगा.. और वही हाल सोनम का भी था.
ऋतू काजल रागिनी शालिनी सब अब परेशां हो गए.
राघव- अब वो ठीक है. अभी हम वही जा रहे है.
फिर जल्दी से सब जैसे तैसे गारी मई बैठ क्र क्लिनिक की और चल पड़े.
इधर वो डॉक्टर लल्लू क सरे कपडे निकल क्र उसे एक्सामिने कर रही थी.
लल्लू को एक साइड बगल मई पेअर मई जंघा मई कमर मई हाथ पर और सर मई चोट आया था. सभी जगह छील गया था जहा से थोड़ा थोड़ा खून बहा था जो अब सुख गया था.
डॉक्टर डेटोल से उस सभी हो को साफ क्र उस पर दबाई लगा दी.
सर मई जहा लगा था वह साफ़ क्र दबाई लगा क्र पट्टी क्र दी.
डॉक्- और कहा लगा है चोट.
लल्लू- अभी तो पता hi नहीं चल रहा है.
डॉक्टर दो तीन सुई भी लगा दी.
डॉक्- दर्द थोड़ी देर मई ख़त्म हो जाएगा. मैंने नींद का भी इंजेक्शन लगा दिया है अभी थोड़ी देर सोने क बाद जब उठोगे तो दर्द ख़त्म हो जाएगा आप का.
फिर बाटे करते करते hi लल्लू सो गया.
डॉक्टर अपने पति से- आज हमारा तो पूरा संसार ुज़रने से इस लड़के ने बचा लिया.
D.pati- सही कह रही हो. आज हम लोगो क गलती का खामयाजा ये बेचारा भुगत रहा है. खास मई इस लड़के का कुछ दर्द बाँट पता. आज अगर ये लड़का नहीं होता तो हम जीते जी मर जाते.
डॉक्टर- कितना भयाबह था वो मंजर. ये लड़का तो हमारे लिए भगवन बन क्र hi आया था. पता नहीं कैसे हम इसका कर्ज उतरेंगे.
d.pati- सही कह रही हो. बस तुम इसे जल्द से जल्द पहले जैसा स्वस्थ क्र दो.
तब तक लल्लू क फॅमिली भी वह क्लिनिक मई आ गए.
राघव गारी से निकलता तब तक कोमल और सोनम निकल क्र क्लिनिक मई घुस गई भाई भाई करती हुई.
D.pati सोर सुन क्र बहार आया.
D.pati- जी कहिये. क्यू सोर क्र रही है.
सोनम- यहाँ मेरा भाई एडमिट है. हम उसे देखने आये है.
D.pati- लेकिन आज क्लिनिक तो बंद है और यहाँ कोई पेसेंट नहीं है.
तभी पीछे से राघव क साथ बांकी लोग भी आ गए.
राघव को देख क्र डॉक्टर का पति समझ गया की ये लोग लल्लू क डे मेम्बर हैं.
फिर वो सब को वही सोफे और चेयर्स पर बैठाया.
राघव- कैसा है अब मेरा भाई.
d.pati- अब ठीक है. अभी सो रहा है वो.
फिर हाथ जोर क्र सब को देखते हुए.
D.pati-. आज ये नहीं होते तो हम अपने एकलौते बेटे को खो देते. ये बीटा हमे सदी क पुरे 10 शाल क बाद हुआ है. हमारा पूरा संसार आज आप क बेटे ने ुज़रने से बचा लिया.
कोमल- सर.. क्या हम अपने भाई को देख सकते है.
D.pati- मई अभी आता हु.
फिर डॉक्टर का पति वह से उठ क्र अंडर आया.
अंडर डॉक्टर अपने चेयर बर बच्चे को ले क्र बैठी हुई थी.
डॉक् का पति - इसके फॅमिली वाले आये है. वो इसे देखना चाहते है.
डॉक्- है तो बुला लो न. देखने दो उन लोगो को. पहले जरा एक चादर दाल दो इस पर.
डॉक् का पति एक चादर ले क्र लल्लू क उप्पेर दाल दिया.
चादर डालते hi लल्लू क बदन मई पीछे जो टैटू बना था वो सुनहरे रंग मई चमकने लगा.
वो टैटू कहा जहा चोट लगा था सर को छोड़ क्र उन सभी जगह बनाने लगा.
सभी जगह वैसे hi सुनहरे रंग मई चमक रहा था. थोड़ी देर मई hi सरे घाव भर गए.
जैसे लग रहा था की कही चोट hi नहीं लगा है.
यहाँ तक की सर मई जो पट्टी क निचे घाव था वो भी सही हो गया.
तब तक लल्लू क सभी घर वाले उसे देखने आये.
लल्लू तो अभी सो रहा था.
डॉक्- ये अभी सो रहे है. थोड़ी देर मई नींद खुल जाएगी. फिर इन्हे काफी आराम मिलेगा.
सोनम- कैसा है मेरा भाई.
डॉक्- कुछ मामूली चोट लगी थी जिसे साफ़ क्र मैंने ड्रेसिंग क्र दी है. दो तीन दिन मई सब ठीक हो जाएगा. आप क इस बहादुर भाई ने आज मेरा कोख ुज़रने से बचा लिया.
आज अगर ये नहीं होते तो हम दोनों तो जीते जी मर जाते. मेरे लिए तो आप का भाई किसी भगवन से काम नहीं है.
आप सब बैठिये. मई चाय का बोल क्र आती हु.
कोमल- नहीं नहीं आप रहने दीजिये. लास्ट करने की कोई जरुरत नहीं है.
डॉक्- कास्ट कैसा. आज मेरे लिए भगवन ये इन खुदाई मददगार को भेजा है. काम से काम मई उनके फॅमिली को चाय तो पीला hi सकती हु. आप लोग बहार चल क्र बैठिये
सब एक बार फिर से बहार आ क्र बैठ गए.
डॉक्- वही उप्पेर क मेल पर रहती थी.
वो अपने सर्वेंट को चाय का बोल क्र आ गई.
थोड़ी देर मई डॉक्टर का सर्वेंट चाय बिस्किट्स ले क्र आ गया.
सब को चाय बिस्किट्स दिया.
सब चाय बिस्किट्स कहते हुए बात क्र रहे थे.
ऋतू राघव क सदी का इन्हे न्योता भी दे दिए.
थोड़ी देर बाद लल्लू जग गया. अब कही भी बदन मई उसे दर्द नहीं था.
उसे तो लग hi नहीं रहा था की उसे अभी थोड़ी देर पहले कही चोट भी लगा है.
सब को बैठा क्र वो D.wala एक लड़के को बुलाया और उसे काउंटर पर बैठने को बोलै.
D.wala- यहाँ भीड़ बहुत रहेगा तो आप लोग मेरे साथ पीछे गोडाउन चलिए.
वह मई आप सब को सभी तरह क कपडे तसल्ली से दिखा पाउँगा.
फिर सभी उस दुकान वाले क साथ पीछे गोडाउन चले गए. वह लगभग 2 घंटे तक खरीदारी करने क बाद सभी वह से उठे.
डी. वाला- ये सारा मई पैक कड़वा क्र गारी मई रखवा देता हु.
आप सब तब तक आइये चल क्र शोरूम मई बैठिये.
सोनम- माँ यहाँ कपडे का सिलाई भी होता है. अगर आप सब को सिलाई करवाना है तो अंकल वो भी करवा देंगे.
डी. वाला- है है क्यू नहीं. जिन को भी अपने कपडे सिलवाने हैं. वो नाप दे क्र सिलने को दे दीजिये. दो दिन मई सील क्र तैयार करवा दूंगा.
सभी काकी वही ब्लाउज सिलने को दे दिए.
दीदी लोग भी अपने अपने लहंगा की फिटिंग करे तो कोई शॉट्स की सिलाई को भी दे दिए.
फिर सब वह से शोरूम मई आ गए.
फिर वह सब क लिए वो दुकान वाला जूस मंगवाया.
सब जब तक जूस पि रहे थे तब तक सारा सामान पैक क्र उनके गारी मई रखवा दिया गया.
लल्लू जा क्र बिल बनवा लिया.
पैसे ऋतू जा क्र पाय क्र दी.
लल्लू सोनम और रिद्धि वाला सूट्स भी ले लिया.
लल्लू- (ऋतू से) अभी और लेना है क्या काकी. तो दूसरे दुकान का भी पता कर ले.
काजल- तुम्हे समझदार बनाने की जरुरत नहीं है. हम सब को भी पता है यहाँ काफी सरे शोरूम है.
लल्लू माँ की बात सुन क्र पीछे हो गया.
फिर सब गारी मई बैठ गए. लल्लू भी जा क्र बाइक स्टार्ट क्र गारी क पीछे चल दिया.
फिर गारी एक शोरूम पर रुका. लल्लू भी अपना बाइक पीछे रोक लिया.
सब गारी से उतर क्र अंडर दुकान मई चले गए. लल्लू बहार hi खड़ा रहा. उसे अंडर जाने का मन नहीं क्र रहा था. लल्लू बाइक पर बैठा इधर उधर दुकाने देख रहा था.
तभी लल्लू देखता है की एक 2.5- 3 शाल का बच्चा रोड पर अकेला रोड क्रॉस कर रहा है और उधर से एक कार बड़ी तेज दौरि चली आ रही है.
लल्लू बाइक को स्टैंड पर खड़ा क्र उस पर एक पेअर मोर क्र अपने जांघ पर रखे बैठा हुआ था.
लल्लू जब ये देखा तो उसकी ससे अटक गई.
ओह्ह मय्यै गोड़.. ये बच्चा…
लल्लू जल्दी से कूद क्र बाइक से उतरा.
अब वो कार उस बच्चे से मुश्किल से चार कदम दूर था.
लल्लू तो कम्प गया देख क्र. उसे अब जल्दी hi कुछ करना था.
वो उप्पेर वाले को याद क्र दौड़ क्र लौंग जम्प लगाया तब तक कार भी बस बच्चे से टकराने hi वाला था.
लल्लू गुलाटी खता हुआ रोड पर बच्चे को गॉड मई लिए रोड क दूसरे साइड घिसटते हुए गिरा लेकिन कार फिर भी टक्कर मर hi दी थी.
लेकिन अच्छी बात ये थी की वो बच्चे क बदले लल्लू को लगा था.
बच्चा लल्लू क गॉड मई दर से चिपका हुआ था.
लल्लू उस बच्चे को अपने साइन मई छिपाये रोड पर गिरा था.
आस पास क दुकान पर जो लोग थे वो दौड़ क्र आये.
राघव लल्लू को दुकान मई नहीं देखा तो वो लल्लू को ढूंढते हुए बहार देखने आया था.
बहार सरक पर भीड़ और सोर होता देख क्र राघव वह देखने चला आया.
तब तक वह पर जमा भीड़ लल्लू को पकड़ क्र उठाया.
लल्लू क कार से टक्कर होने से और फिर सरक पर घिसटने से उसका एक तरफ का कन्धा और कमर चील गया था. सर भी फुट गया था जहा से खून निकल रहा था.
कपडे तो कई जगह से फट गया था.
सभी लोग लल्लू को पकड़ क्र वही एक दुकान पर ले जा क्र बैठता. फिर उसे पानी पिलाया.
सभी तुरंत एक डॉक्टर को बुलाने को बोलने लगे एक दूसरे को.
तभी वह एक मर्द और औरत आये. जिन का वो बच्चा था.
औरत तो बदस्तूर रोये जा रही थी.
वो दौड़ क्र उस बच्चे को उठा क्र अपने साइन से लगाए उसका सरीर सहलाती उसके छोटे मासूम चेहरे को चुम्मी से भर दी.
औरत- मेरा बच्चा. मेरे लाल. तुम्हे कही चोट तो नहीं लगा. मेरा sona..wagairah.. वगैरह…
मर्द भी अपने बचे को पकड़ क्र उसे दुलार रहा था. उसका गाल छू क्र सहला रहा था. कभी उस बचे को पीठ सहलाता कभी सर सहलाता.
अरे कोई पहले इसे डॉक्टर को दिखाओ. इसी क कारन ये बच्चा सकुसल है.
उस भीड़ मई से किसी एक ने कहा.
एक मिनट एक मिनट मई खुद एक डॉक्टर हु. वो औरत जिस का ये बच्चा था. उस ने बच्चे को अपने पति क गॉड मई दे क्र लल्लू की और आती बोली.
लल्लू तो लोगो से घिरा हुआ था.
तब तक राघव भी भीड़ मई आ क्र देखा तो लल्लू….
राघव- ओह्ह्ह… go...d….
Bhai...ye किऐसे.. हुआ.
लल्लू- वो….
तब तक वो औरत भी लल्लू क पास आ गई.
औरत- तुममम….
लल्लू सर उठा क्र देखा… आप…
औरत- थैंक ु सोऊ सोऊ मुछ्ह. अगर आअज…
अरे इसे थैंक्स.. बाद मई दे लेना पहले इसका इलाज तो करो. या किसी डॉक्टर क पास hi ले जाओ. कोई. उस भीड़ मई से फिर किसी ने बोलै.
वो लेडी डॉक्टर अपने पति से - आप अपना कार ले आओ न इन्हे अपने क्लिनिक hi ले चलते है.
उसका पति दौर क्र कार लेन चला गया.
दो मिनट्स मई कार ले क्र आ गया.
लल्लू को उस मई बैठा क्र वो डॉक्टर अपने क्लिनिक ले क्र चली गई. साथ मई राघव भी चला गया.
वो कार वाला तो टक्कर मर क्र भाग गया था जब तक लोग लल्लू और बच्चे को सँभालने मई लगे थे.
लल्लू- सॉरी भैया. आप यहाँ क्यू आ गए. आप उन लोगो क पास जाओ नहीं तो वो सब हम दोनों को गायब देख क्र बहुत चिंतित होंगे.
राघव- तुम्हे इस हालत मई छोड़ क्र मई कैसे जा सकता हु भाई.
लल्लू- भैया मुझे कुछ नहीं हुआ है. बस थोड़ा सा खरोच लगा है बस. आप बस काकी और बहनो क पास जाइये.
उन लोगो को मेरे बारे मई मत बताइयेगा. आप सब जिस काम से आये है वो काम कीजिये बिना मेरे चिनत करे. मई बिलकुल ठीक हु.
डॉक्टर- अरे बाबा कितना बोलते हो तुम. अभी बिलकुल चुप रहो और इस बीएड पर लेट जाओ. मुझे देखने दो कहा कहा चोट लगा है.
और है आप इनका कोई फिक्र मत कीजिये. आप अपना काम क्र क आइये तब तक मई इनको जरा देख लेती हु.
राघव पदेशन सा वह से उस शॉप पर आ गया जहा उसके घर की सभी महिलाये शॉपिंग क्र रही थी.
ऋतू- कहा गया था तू. कब से धुंध रही हु. यहाँ हम तुम्हारे सदी की शॉपिंग मई आये है और तुम इधर हम सब को छोड़ क्र बहार घूम रहा है.
राघव क्या कहे अभी लल्लू क बारे मई बता क्र सब को पदेशन नहीं करना चाहता था. वो चुप चाप ऋतू क साथ चल दिया.
सब का शॉपिंग लगभग निपट hi गया था. और जो थोड़ा बहुत रह गया था वो अब अगले दिन आ क्र दो चार लोग कर लेते.
वैसे समय भी काफी हो गया था.
अभी अब शाम हो गया था और चारो और अँधेरा फैलने लगा था.
सोनम रह रह क्र चारो और कुछ धुंध रही थी.
कोमल सोनम को इतना बेचैन देखा तो उस से रहा नहीं गया.
कोमल- क्या बात है दी. आप कुछ पदेशन लग रही हो.
सोनम- नहीं कोमल. कोई बात नहीं है. आज तो बड़ा मजा आया शॉपिंग मई.
कोमल- दी, अगर नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं. यु बात तो मत बदलो.
सोनम- यार मई काफी देर से भाई को नहीं देखि हु. पता नहीं कहा है. आज सब उसके पीछे hi लग गए है. सब किसी न किसी बात पर उसे दन्त देते है.
कोमल- है दी. मई भी देख रही हु. भाई आज बहुत उदाश था. सायद बहार होगा वो.
फिर सब सामान पैक करवा क्र गारी मई रखवा दिया.
ऋतू काउंटर पर जा क्र बिल पाय क्र दी.
फिर सब बहार आ गए.
अब राघव भी पदेशन था की क्या करे. कैसे इन लोगो को बताये.
लल्लू को देखना भी जरुरी था.
सोनम अलग पदेशन थी जब देखि की बुलेट तो वह कड़ी है लेकिन लल्लू नहीं है वह.
तभी पास क दुकान वाला आ क्र रहब से लल्लू क लिए पूछा.
D.wala - भाई साहब अब आप क भाई कैसे है.
उस दुकान वाले की बात सुन्न क्र सब चौक गए.
सोनम तो रोने hi लगी.
सोनम- भैया क्या हुआ भाई को.
D.wala- क्या आप लोगो को पता नहीं है. वहहह क्या काम किया है उन्होंने. बेचारे को थोड़ी चोट भी लग गई लेकिन ऐसा जज्बा ऐसा कठिन काम सब नहीं क्र सकता. इसके लिए कोई जिगर वाला hi चाहिए.
ी प्राउड हिम. कैसे है अब वो भाई साहब.
कोमल, सोनम- एक साथ… क्या…..
कोमल को तो सुन्न क्र hi हालत ख़राब होने लगा.. और वही हाल सोनम का भी था.
ऋतू काजल रागिनी शालिनी सब अब परेशां हो गए.
राघव- अब वो ठीक है. अभी हम वही जा रहे है.
फिर जल्दी से सब जैसे तैसे गारी मई बैठ क्र क्लिनिक की और चल पड़े.
इधर वो डॉक्टर लल्लू क सरे कपडे निकल क्र उसे एक्सामिने कर रही थी.
लल्लू को एक साइड बगल मई पेअर मई जंघा मई कमर मई हाथ पर और सर मई चोट आया था. सभी जगह छील गया था जहा से थोड़ा थोड़ा खून बहा था जो अब सुख गया था.
डॉक्टर डेटोल से उस सभी हो को साफ क्र उस पर दबाई लगा दी.
सर मई जहा लगा था वह साफ़ क्र दबाई लगा क्र पट्टी क्र दी.
डॉक्- और कहा लगा है चोट.
लल्लू- अभी तो पता hi नहीं चल रहा है.
डॉक्टर दो तीन सुई भी लगा दी.
डॉक्- दर्द थोड़ी देर मई ख़त्म हो जाएगा. मैंने नींद का भी इंजेक्शन लगा दिया है अभी थोड़ी देर सोने क बाद जब उठोगे तो दर्द ख़त्म हो जाएगा आप का.
फिर बाटे करते करते hi लल्लू सो गया.
डॉक्टर अपने पति से- आज हमारा तो पूरा संसार ुज़रने से इस लड़के ने बचा लिया.
D.pati- सही कह रही हो. आज हम लोगो क गलती का खामयाजा ये बेचारा भुगत रहा है. खास मई इस लड़के का कुछ दर्द बाँट पता. आज अगर ये लड़का नहीं होता तो हम जीते जी मर जाते.
डॉक्टर- कितना भयाबह था वो मंजर. ये लड़का तो हमारे लिए भगवन बन क्र hi आया था. पता नहीं कैसे हम इसका कर्ज उतरेंगे.
d.pati- सही कह रही हो. बस तुम इसे जल्द से जल्द पहले जैसा स्वस्थ क्र दो.
तब तक लल्लू क फॅमिली भी वह क्लिनिक मई आ गए.
राघव गारी से निकलता तब तक कोमल और सोनम निकल क्र क्लिनिक मई घुस गई भाई भाई करती हुई.
D.pati सोर सुन क्र बहार आया.
D.pati- जी कहिये. क्यू सोर क्र रही है.
सोनम- यहाँ मेरा भाई एडमिट है. हम उसे देखने आये है.
D.pati- लेकिन आज क्लिनिक तो बंद है और यहाँ कोई पेसेंट नहीं है.
तभी पीछे से राघव क साथ बांकी लोग भी आ गए.
राघव को देख क्र डॉक्टर का पति समझ गया की ये लोग लल्लू क डे मेम्बर हैं.
फिर वो सब को वही सोफे और चेयर्स पर बैठाया.
राघव- कैसा है अब मेरा भाई.
d.pati- अब ठीक है. अभी सो रहा है वो.
फिर हाथ जोर क्र सब को देखते हुए.
D.pati-. आज ये नहीं होते तो हम अपने एकलौते बेटे को खो देते. ये बीटा हमे सदी क पुरे 10 शाल क बाद हुआ है. हमारा पूरा संसार आज आप क बेटे ने ुज़रने से बचा लिया.
कोमल- सर.. क्या हम अपने भाई को देख सकते है.
D.pati- मई अभी आता हु.
फिर डॉक्टर का पति वह से उठ क्र अंडर आया.
अंडर डॉक्टर अपने चेयर बर बच्चे को ले क्र बैठी हुई थी.
डॉक् का पति - इसके फॅमिली वाले आये है. वो इसे देखना चाहते है.
डॉक्- है तो बुला लो न. देखने दो उन लोगो को. पहले जरा एक चादर दाल दो इस पर.
डॉक् का पति एक चादर ले क्र लल्लू क उप्पेर दाल दिया.
चादर डालते hi लल्लू क बदन मई पीछे जो टैटू बना था वो सुनहरे रंग मई चमकने लगा.
वो टैटू कहा जहा चोट लगा था सर को छोड़ क्र उन सभी जगह बनाने लगा.
सभी जगह वैसे hi सुनहरे रंग मई चमक रहा था. थोड़ी देर मई hi सरे घाव भर गए.
जैसे लग रहा था की कही चोट hi नहीं लगा है.
यहाँ तक की सर मई जो पट्टी क निचे घाव था वो भी सही हो गया.
तब तक लल्लू क सभी घर वाले उसे देखने आये.
लल्लू तो अभी सो रहा था.
डॉक्- ये अभी सो रहे है. थोड़ी देर मई नींद खुल जाएगी. फिर इन्हे काफी आराम मिलेगा.
सोनम- कैसा है मेरा भाई.
डॉक्- कुछ मामूली चोट लगी थी जिसे साफ़ क्र मैंने ड्रेसिंग क्र दी है. दो तीन दिन मई सब ठीक हो जाएगा. आप क इस बहादुर भाई ने आज मेरा कोख ुज़रने से बचा लिया.
आज अगर ये नहीं होते तो हम दोनों तो जीते जी मर जाते. मेरे लिए तो आप का भाई किसी भगवन से काम नहीं है.
आप सब बैठिये. मई चाय का बोल क्र आती हु.
कोमल- नहीं नहीं आप रहने दीजिये. लास्ट करने की कोई जरुरत नहीं है.
डॉक्- कास्ट कैसा. आज मेरे लिए भगवन ये इन खुदाई मददगार को भेजा है. काम से काम मई उनके फॅमिली को चाय तो पीला hi सकती हु. आप लोग बहार चल क्र बैठिये
सब एक बार फिर से बहार आ क्र बैठ गए.
डॉक्- वही उप्पेर क मेल पर रहती थी.
वो अपने सर्वेंट को चाय का बोल क्र आ गई.
थोड़ी देर मई डॉक्टर का सर्वेंट चाय बिस्किट्स ले क्र आ गया.
सब को चाय बिस्किट्स दिया.
सब चाय बिस्किट्स कहते हुए बात क्र रहे थे.
ऋतू राघव क सदी का इन्हे न्योता भी दे दिए.
थोड़ी देर बाद लल्लू जग गया. अब कही भी बदन मई उसे दर्द नहीं था.
उसे तो लग hi नहीं रहा था की उसे अभी थोड़ी देर पहले कही चोट भी लगा है.