Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 7 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

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मर्द का बच्चा. अपडेट 30.

सुबह क करीब 5 बज रहे थे.

हरिद्वार क ' हर की पौड़ी' मई सरदूलो क स्नान का ताँता लगा हुआ था. उसी मई एक गोरी चिट्टी अँगरेगें लड़की.

लम्बे घने भूरे बाल, चौड़ी ललाट उस पर छोटी सी लाल बिंदी, घने धनुष क तरह तीखे भौहे. उस क निचे झील सी नीली आँखे. जिस मई कोई देख ले तो दुब जाने को जी चाहे.

लम्बे सुत्वा नाक, पतले रास से भरे कोमल होठ और फुले हुए कश्मीरी सेब की तरह गोर गाल. उस गाल पर एक तिल जो उस हुस्ना की मल्लिक्का क हुस्ना को चार चाँद लगा दे रखा था.

वो हुस्ना की मल्लिका एक गेंडुआ वस्त्र पहने हर की पौड़ी' पर श्रद्धालुओ क भीड़ मई स्नान क्र बहार आई hi थी कपडे पहन क्र की एक लुच्चा उसका हैंड बैग झपट क्र भागने की कोसिस की उस बैग का एक हिस्सा उस चोर क हाथ मई और दूसरा अँगरेगें लड़की क.

वो लड़की अपने बैग को पकड़ क्र खींची तो चोर उस बैग क साथ ुरता हुआ खींच क्र सीता गंगा जी मई गिरा.

आस पास क सभी लोग देख क्र ताली बजाते हुए उस लड़की को सबसि दे रहे थे.

वो लड़की वह से निकल क्र चंडी देवी मंदिर जो गंगा नदी क पूर्व मई निल पर्वत पर स्थित है वह पहुंची.

वह माँ चंडी की पूजा क्र वह से फिर वो लड़की माया देवी मंदिर मई पूजा अर्चन करने गई.

वह से निकल क्र माँ वैष्णो देवी मंदिर चल दी जो हर की पौड़ी से करीब एक कम दूर था वह कृतिम तरीके से जम्मू मई स्थित माँ वैष्णो की मंदिर की तरह hi बनाया गया है.

वैसा hi गुफा बनाने की कोसिस की गई है. मार्ग को भी दुर्गम बनाने की कोसिस की गई है यहाँ.

यहाँ पूजा क्र वो लड़की भारत माता मंदिर जा क्र वह की भव्य सुंदरता का आनंद लेती वह देवी माँ की पूजा की फिर ऑटो पकड़ क्र वह से सप्तऋषि आश्रम जा पहुंची.

वह माँ गंगा की सात धरा बाटी हुई है जो आगे और कई धाराओं मई बिभाजित हो गई है.

वह क शिव मंदिर मई प्रभु शिव संकर की पूजा अर्चा क्र वो लड़की वही क एक आश्रम मई जा क्र थोड़ी देर वह आश्रम की साफ़ सफाई की फिर वह से आ गई.

वह से ऑटो पकड़ क्र वो कनखल पहुंच गई.

जहा वो दक्षेश्वर मंदिर फिर हरिहर मंदिर मई जा क्र पूजा की.

कनखल मई hi एक होटल मई वो लड़की एक कमरा ले क्र रह रही थी.

वो लड़की वह से पूजा अर्चना क्र अपने होटल चली गई.

कमरे मई आ क्र खाना का आर्डर क्र दिया और वाशरूम मई जा क्र फ्रेश होने लगी.

जब तक फ्रेश हो क्र आई तब तक खाना भी आ गया.

खाना ले क्र वो लड़की रूम बंद क्र दी और अपने सरे कपडे खोल क्र नंगी हो गई.

जब सरीर ढाका हुआ था तब वो चलती फिरती क़यामत लग रही थी लेकिन कपडे उतरने क बाद वो तो स्वर से उत्तरी अप्सरा लग रही थी जो यहाँ हरिद्वार मई गलती से आ गई.

सब से आकर्षक उसके पीछे कमर पर वो टैटू था जो उसके पीछे क उभर से जस्ट उप्पेर बना हुआ था.

वो लड़की झट से एक जींस पेण्ट और टी शर्ट निकल क्र पहन ली. फिर खाना खा क्र बीएड पर लेट गई.

लल्लू सूर्य उदय तक वही नदी किनारे बैठा नदी क जीवो से बात करता रहा फिर फ्रेश हो क्र घर को चल दिया.

दालान पर आ क्र हाथ पेअर धो क्र अंडर आ गया.

दालान पर सब बैठे थे.

लल्लू भी वही बैठ गया.

सुनील- कहा से आ रही है सबरी.

लल्लू- सुबह सुबह थोड़ा बहार टहलने गया था.

सब काका लोग भैया क सदी की hi बात क्र रहे थे की एक महीने की छुट्टी मई आया है तो अच्छा है की सदी क्र क hi अब भैया को यहाँ से भेजा जय.

लल्लू फिर वह से उठ क्र आँगन आ गया.

लल्लू- कोई चाय दे दो मुझे भी.

काजल- जा रसोई मई जा क्र काकी से ले लो.

लल्लू चलता हुआ रसोई मई पहुंच गया.

वह रागिनी काकी खाना बना रही थी.

लल्लू- काकी चाय दे दो थोड़ी सी.

रागिनी- देती हु तू बैठ बहार.

लल्लू फिर बहार खटिया पर जाने लगा लेकिन वो अपने कदम ऋतू काकी क कमरे की और बढ़ा दिया.

ऋतू कमरे मई लेती हुई थी साथ मई वह रोमा भी थी.

लल्लू- रोमा दीदी क्या बात है आप भी यही है.

रोमा- है भाई. माँ को बुखार हो गया है. उसे hi दवाई देने आई थी.

लल्लू ऋतू क माथे को छू क्र देखा.

सुच मई बुखर था ऋतू को.

लल्लू को बहुत बुरा लग रहा था.

उसे समझ नहीं आ रहा था की अभी वो अब क्या करे.

तभी बहार रागिनी लल्लू को आवाज दी तो लल्लू बहार आ गया.

रागिनी चाय ले क्र कड़ी थी.

लल्लू आगे बढ़ क्र चाय का कप ले क्र खटिया पर बैठ गया और सोचने लगा की क्या करे की ऋतू को कुछ आराम मिले.

अभी गारी ले क्र कही जा भी नहीं सकता था सब को जवाब देना मुश्किल था.

सुनील काका को पता था की मई गारी चला लेता हु लेकिन बांकी को क्या जबाब देगा.

लल्लू चाय पिता यही सोचता रहा.

फिर उठ क्र बहार आ गया.

दालान पर अभी भी सब बैठे थे.

लल्लू सुनील काका क पास जा क्र बैठ गया.

लल्लू- काका थोड़ा बाइक की चाभी दीजिये न. बहुत जरुरी काम है.

लल्लू सुनील क कान मई फुसफुसा क्र बोलै.

सुनील लल्लू को देखता हुआ जेब से चाभी निकल क्र दे दिया

लल्लू वह से उठ क्र बुलेट ले क्र लुढ़कता हुआ बहार आया रोड पर फिर वह स्टार्ट क्र तेजी से सहर की और चल दिया.

सहर मई एक लेडी डॉक्टर का क्लिनिक ढूंढने लगा.

फिर उसे एक क्लिनिक मिल गया.

लल्लू बुलेट कड़ी क्र उस क्लिनिक मई घुस गया.

लल्लू- डॉक्टर से मिलना है. (बहार बैठी एक लड़की से लल्लू बोलै)

लड़की- नाम बताओ.

लल्लू- लल्लू.

लड़की- लल्लू को देखती हुए. उम्र..

लल्लू- 18

लड़की- 500 रूपीस जमा करो.

लल्लू जेब से 500 का नोट निकल क्र दे दिया.

लड़की पर्ची बना क्र देती डॉक्टर क केबिन मई भेज दी.

लल्लू अंडर गया तो एक 30-35 साल की महिला डॉक्टर अपने चेयर पर बैठी थी.

डॉक्- आओ यहाँ बैठो. वो महिला डॉक्टर लल्लू को अपने आगे क चेयर पर बैठने को बोली.

लल्लू जा क्र वह बैठ गया.

डॉक्- बताओ क्या पड़ेशानी है.

लल्लू- जल्दी जल्दी मई तो आ गया यहाँ लेकिन अब उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या कहे.

लल्लू को चुप देख क्र वो डॉक्टर फिर बोली.

डॉक्- बताओ क्या हुआ है तुम्हे.

लल्लू- डॉक्टर दरसल बात ये है की मुझे कुछ नहीं हुआ है.

डॉक्- तो.. किसे क्या हुआ है. मरीज को लाना था न. या वो आने क लायक नहीं है तो क्या हुआ है ये तो बताओ.

लल्लू- वो डॉक्टर… कैसे कहु…

डॉक्- बताओगे नहीं तो मुझे पता कैसे चलेगा. मई इलाज कैसे करुँगी.

लल्लू- डॉक्टर बात ये है की रात एक लड़की क साथ. नहीं लड़की नहीं औरत क sath..wo क्या है…..

लल्लू को बड़ा सरम आ रहा था बताने मई.

डॉक्- देखो तुम बिना झिझक क बताओ क्या बात है. डॉक्टर से कैसा सरम. तुम खुल क्र बताओ..

लल्लू- डॉक्टर मई कल रात एक औरत क साथ सोया था तो उसे अब काफी प्रोबी हो रहा है पीछे. उसका कोई दबाई दे दीजिये प्लस और उसे बुखार भी है.

डॉक्- मई कुछ समझी hi नहीं. तुम सोये थे एक औरत क साथ तो क्या हुआ उसमे. इस से क्या हो गया की दवाई चाहिए.

लल्लू- आप डॉक्टर hi हो न. एक मर्द और औरत सो रहा था और क्या आप समझ जाओ प्लस..

उस औरत को पीछे बहुत पैन hai.or बुखर भी है.

डॉक्- क्या तुम दोनों सेक्स किया था.

लल्लू- है वही वही…

डॉक्- क्या ये उसका पहली बार था

लल्लू- है ये उसका पहली बार hi था.

डॉक्- तो आगे से किया था न तुमने..

लल्लू- नहीं नहीं डॉक्. पीछे पीछे किया था.

डॉक्- तो तुम ने उस औरत क साथ अनिल सेक्स किया था राइट..

लल्लू- है जो भी है….. आप जल्दी से दवा देदो और उसे बुखार भी है.

फिर डॉक्टर ने लल्लू को कुछ तुबे जिसे कैसे लगाना है और कुछ दवाई लिख क्र दी और उसे मेडिकल से ले लेने को बोली.

लल्लू- वह से उठ क्र मेडिकल से वो दवाई से क्र तुरंत घर को चल दिया.

बहार रोड पर hi गारी बंद क्र अंदर लुढ़कता हुआ ला क्र खड़ा क्र दिया.

दवाई ले क्र लल्लू ऋतू क कमरे मई चला गया.

ऋतू गांड उप्पेर किये बीएड पर लेती हुई थी.

लल्लू जा क्र दरवाजा बंद क्र दिया.

लल्लू- काकी ये दवाई लाया हु मई.

ऋतू उसे देख क्र अपने पास बुलाई..

लल्लू दवाई ले क्र ऋतू क पास बीएड पर जा पंहुचा.

ऋतू खींच क्र एक चमत लल्लू को लगा दी.

ऋतू- सेल कमीने ये क्या क्र दिया है. तुम्हे पता भी है सब को जबाब देना कितना मुश्किल हो रहा है.

लल्लू सर झुकाये खड़ा रहा.

ऋतू- किसी को पता चला न तो हम दोनों को मार क्र यही खेत मई गाड़ देंगे किसी को पता भी नहीं चलेगा.

लल्लू- ये दबाई लाया हु. ये तुबे उस मई जहा तक हो सके अंडर लगाना है और ये गोली खाने की.

लल्लू ऋतू को वो दवाई पकड़ा क्र वह से बहार आ गया.

बहार राघव बैठा हुआ था खटिया पर.

राघव- कहा था भाई सुबह से. मई कब से तुम्हे धुंध रहा हु.

लल्लू- भैया वो मई सुबह खेत की और चला गया था तो वही से आने मई लेट हो गया.

राघव- वह क्या बात है. तुम काका लोगो क साथ खेती मई मदद भी करते हो. गुड ये तो बहुत अच्छी बात है.

दोनों वही बैठे हुए बाटे करने लगे.

गौरी- भैया आप बोले थे सुबह हमारे लिए लाये हुए गिफ्ट डोज तो दो न.

सभी बहने गौरी को पकड़ क्र लायी थी.

राघव - हस्ता हुआ. अरे मई तो मजाक किया था. मई आज यही बाजार से ला दूंगा.

सभी बहने एक साथ- क्या.. आप हमारे लिए कुछ नहीं लाये.

राघव- साद फेस बनता हुआ मुंडी न मई हिला दिया.

सभी बहने साद हो गई. सब का मुँह लटक गया.

राघव तथा क्र हस्ता हुआ बोलै.

राघव- अरे मई मजाक क्र रहा हु. सब खुस हो जाओ. मई तुम सब क लिए लाया हु.

फिर राघव उठ क्र घर से अपना बैग ले क्र आया और उसे खोल क्र सब को उसका गिफ्ट्स देने लगा.

सभी बहने बहुत खुस थी.

राघव सब क लिए नए देसी क जींस और टॉप लाया था

सब ले ले क्र अपने को पहन क्र देखने क लिए होर लगा लिए.

आँगन मई सब इन लड़कियों को देख क्र हुस्स रहे थे.

रागिनी- सब घोड़ी जैसे हो गई है लेकिन अक्ल एक ढेले का नहीं है किसी मई.
 
ाःह रुलाएगा क्या पगले. ऐसा रिव्यु पढ़ क्र तो मई रो दूंगा.

थैंक्स भाई ऐसे hi मुझे प्रोत्साहन करते रहे. मई ये सब नहीं देखता कितना व्यू आये है और कितने कमैंट्स.

अभी लोखड़ौन है घर पर खली बैठा था तो मंद मई ये फैला कोरोना hi ग़ुस्सा रहता था.

इसी लिए ये स्टोरी स्टार्ट क्र दिया.

दूसरा ेंगिमा भाई ने भी स्टोरी बंद क्र दिल तोर क्र चकनाचूर क्र दिया था.

समय था अभी तो स्टोरी सुरु क्र दिया. आप सब को अच्छा लगा ये देख क्र मुझे भी बहुत अच्छा लगा और बस फिर लिखता चला गया.

मेरे लिए आप सब का प्यार ज्यादा मायने रखता है.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 31.

लल्लू- भैया मेरे लिए क्या लाये हो

राघव- भाई सब क लिए लाया हु. तू तो मेरा प्यारा छोटा भाई है तेरे लिए तो मई स्पेशल लाया हु.

लल्लू- तो दिखा दो न भैया मेरे लिए क्या लाये हो.

राघव एक जींस पेण्ट और एक टी शर्ट निकल क्र लल्लू को बिया. फिर एक प्लास्टी क पैकेट निकल क्र दिया.

लल्लू वो पैकेट खोल क्र देखा तो उस मई एक सनग्लास था.

वाओ मस्ट है भैया.

राघव- कुछ और भी है तुम्हारे लिए.

लल्लू- भैया एक एक क्र मत निकालो. इतनी खुसी समां नहीं रहा है. जो भी है एक बार मई hi देदो न.

फिर राघव एक और पैकेट निकला.

लल्लू झपट क्र उसे खोलने लगा.

रागिनी- अरे आराम से खोल बीटा. किस बात की इतनी जल्दी है.

लल्लू जल्दी से उसका कवर हटा दिया फिर खोला तो एक स्मार्ट फ़ोन था.

लल्लू राघव को गले से लगा लिया.

भैया ये मोबाइल जो लाये हो न ये सब से बढ़िया काम किये हो.

मई आज कल मई hi खरीदने वाला था.

राघव- तुम्हे पसंद आया.

लल्लू- आप पसंद की बात कर रहे हो. बहुत पसंद आया.

काजल- चल बढ़िया है अब तुम्हे नया खरीदना नहीं पड़ेगा.

लल्लू- भैया पहले hi समझ गए थे की उनके भाई क पास मोबाइल नहीं है तो इसी लिए ले आये.

रोमा- भैया मई कैसी लग रही हु.

सब उधर देखने लगे.

रोमा भैया का लाया कपडा पहन क्र आई थी.

लल्लू- तुम तो bo...bahut खूबसूरत लग रही हो रोमा. मुझे पता hi नहीं था चुदाई के भी खूबसूरत होती है.

( बच गया फैला बम निकल रहा था मुँह से. सब मर मर क्र मेरा गुब्बारा बना देते)

रोमा- क्या… क्या कहा तुम ने बन्दर. मई चुड़ैल लगती हु.. ठहर अभी ये चुड़ैल बताती है की वो क्या करती है बंदरो क साथ.

रोमा गुस्से मई लल्लू की और दौरि.

लल्लू आँगन से भाग क्र दालान पर आ गया.

लल्लू- आह बच गया आज तो. नहीं तो ये चुड़ैल सच मई आज खा जाती.

दालान पर दादू और पापा क साथ साथ तीनो काका भी आज बैठे हुए थे.

राम- बीटा जा आँगन मई बोल एक बार और चाय बना दे.

लल्लू जा क्र शालिनी काकी को बता दिया चाय क लिए.

लल्लू वह से लड़कियों क कमरे मई चल दिया.

दरवाजे पर पहुंच क्र वो दरवाजा खटकाया.

दरवाजा गौरी ने खोला.

गौरी- भाई तुम्हारे लिए भैया क्या लाये है.

लल्लू- दी मेरे लिए तो भैया ने बहुत कुछ लाये है.

कोमल- क्या सब भाई.

लल्लू- दी मेरे लिए एक जींस पेण्ट एक t-shirt एक सनग्लास और एक मोबाइल भी लाये है.

लल्लू वही सोफे पर बैठता हुआ बोलै.

रानी- क्या ये तो चीटिंग है. तुम्हारे लिए मोबाइल भी और मेरे लिए सिर्फ कपडे. Bhaiya...bhaiya…

रानी कमरे से hi चिल्लाती हुई बहार चली गई.

रोमा पीछे से आ क्र लल्लू का गाला पकड़ ली.

रोमा- अब बता अब कहा भाग क्र जाएगा बन्दर. अब तो तू गया काम से.

लल्लू- मेरी प्यारी दी. मई आप से भाग क्र कहा जाऊंगा. मई तो खुद आप क पास माफ़ी मांगने आया था. मुझे माफ क्र दो. मई वैसे hi मजाक किया था.

रोमा- अच्छा बन्दर मजाक भी करता hai.ai आज तुम्हे छोडूंगी नहीं.

लल्लू- दी िसासूम भाई का गाला दबा कर क्या होगा. वैसे भी भैया एक महीने बाद चले जाएंगे तो यही बन्दर भाई यहाँ आप सब क साथ रहेगा.

ये क्या क्र रही है रोमा. पीछे से सोनम दीदी आ क्र रोमा को डाटती बोली.

रोमा- दी इस बन्दर ने मुझे चुड़ैल बोलै है.

सोनम- ठीक hi बोलै है. काम तो वही क्र रही है तुम. वैसे भी तुम कई बार उसे बन्दर कह क्र चिड़ा लिया है तो अब बदला पूरा हो गया. चल छोड़ भाई को.

रोमा मुँह बनती लल्लू को छोड़ क्र अलग हैट गई.

सोनम- भाई तुम्हे क्या सब मिला है भैया से.

फिर लल्लू सोनम को बता दी की उसे क्या सब मिला है.

सोनम- वाओ भाई तुम्हारे पास भी अब मोबाइल हो गया. चालू किया क्या उसे.

लल्लू- नहीं दी अभी सिम नहीं है मेरे पास. अब कभी बाजार जाऊंगा तो ले लूंगा.

सोनम- भाई जाना तो मुझे भी बताना. मई भी चलूंगी.

लल्लू- दी मई तो बुलेट से जाऊंगा.

सोनम- है तो मई भी उस पर चली जाउंगी. क्यू तू किसी और क साथ जाएगा क्या.

लल्लू- नहीं मई तो इस लिए कह रहा था की कल आप दर रही थी न.

सोनम- भाई मुझे नहीं पता था न की तू पहले से जनता था चलना. वैसे भाई ये बता की तू ये सब सीखा कब.

लल्लू- दी ये तो टॉप सीक्रेट है. अभी नहीं बता सकता. लेकिन प्रॉमिस मई सब से पहले आप को hi बताऊंगा.

वैसे दी आप अपना ड्रेस पहन क्र देखि क्या.

सोनम- नहीं भाई अभी नहीं पहनी हु.

लल्लू- तो पहन क्र दिखाओ न.

सोनम- प्यार से सरमाती हुई. तुम्हे मुझे उस कपडे मई देखना है.

लल्लू- है दी. मई देखना चाहता हु की मेरी प्यारी दी कैसी लग रही है उस ड्रेस मई.

सोनम- ठीक है तुम दो मिनट्स यहाँ बैठो मई अभी पहन क्र आई.

लल्लू वही बैठा रहा तब तक साडी लड़किया भैया क पास शिकायत क्र रही थी की उनके लिए मोबाइल क्यू नहीं लाये और लल्लू क लिए लाये.

थोड़ी देर मई सोनम जींस और टॉप पहन क्र आ गई.

सोनम- भाई कैसी लग रही हु बता.

लल्लू गर्दन घुमा क्र सोनम की और देखा.

सोनम इस समय किसी क़यामत से काम नहीं लग रही थी.

जींस बिलकुल उसके बदन से चिपका हुआ था.

सोनम घूम घूम क्र लल्लू को दिखा रही थी.

सोनम जैसे hi पीछे घूम क्र दिखाई.

लल्लू की ससे उसके गले मई hi अटक गया.

लल्लू- वाओ दी ु आअह्ह्ह क़यामत. कस आप मेरी बहन न होती.

सोनम चौक क्र घूम गई.

सोनम- क्या मतलब मई तुम्हारी बहन नहीं होती तो…

लल्लू- दी अगर आप मेरी बहन नहीं होती तो मई आप से सदी क्र लेता.

सोनम सरम से लाल हो है. अपनी नजरे झुकाये.

सोनम - क्या मई तुम्हे इतनी सुन्दर लगती हु.

लल्लू- सुन्दर.. आप तो सुंदरता की पराकाष्ठा हो. सुंदरता भी आप को देख क्र शर्मा जय.

सोनम- हेय राममम… भाई प्लस ऐसे मत बोल. मुझे बहुत सरम आ रहा है.

लल्लू- मई सुच कह रहा हु दीदी. आप से सुन्दर मई इस दुनिया मई किसी को नहीं देखा और मुझे यकीं है चाँद भी आप को देख क्र रस्क करता होगा.

सोनम- ओह्ह्ह मीय गॉडडडड. क्या मई तुम्हे इतनी पसंद हु.

लल्लू- पसंद… आप तो मेरी ससो की डोर हो दीदी. आप मेरे रोम रोम मई बसी हो.

सोनम आ क्र लल्लू को गले से लगा ली.

सोनम- प्लस. अब और कुछ मत बोल. मुझे कुछ कुछ होने लगता है.

लल्लू सोनम को अपने बहो मई लिए उसके पीठ को सहलाता खड़ा था.

लल्लू क हाथ मई सोनम क ब्रा का स्ट्रेप बार बार छू रहा था.

लल्लू और सोनम दोनों क बदन मई चिंगारी उठ चुकी थी जिसे बस सोला बनाना था.

तभी लड़कियों क आने का सर हुआ तो सोनम लल्लू क बहो से निकल क्र दूसरे कमरे मई भाग गई.

लल्लू अपने हाथो को चुम क्र मुस्काता वह खड़ा रहा.

लल्लू- कहा गई थी मेरे बहनो की टोली.

कोमल- हम भाई क पास गए थे.

लल्लू- किस लिए कोई काम था.

रानी- भाई हमे सिर्फ कपडा और तुम्हे कपडे क साथ सनग्लास और मोबाइल भी दिए इस लिए गए थे की हमे भी चाहिए.

लल्लू- फिर क्या हुआ दिए क्या भैया आप लोगो को मोबाइल.

गौरी- नहीं. लेकिन बोले है कल तक ला देंगे.

लल्लू- वाओ. ये तो बहुत अच्छी बात है.

चलो मई तो चला आप लोग बाटे करो.

लल्लू वह से निकल के ऋतू क कमरे मई चला गया.

वह पहले से hi काजल थी तो लल्लू वह से जल्दी से भाग आया.

राघव- भाई चल कही घूम क्र आते है.

लल्लू- कहा चलना है भैया.

राघव- कही भी ये गौण hi घूम लेते है.

लल्लू- ठीक है फिर चलो.

लल्लू और राघव आँगन से निकल क्र दालान पर आ गए.

दालान से बहार निकल क्र दोनों आगे बढ़ने लगे की लल्लू बोलै

भैया कहो तो बुलेट ले लू या पैदल hi चलना है.

राघव- नहीं अभी पैदल hi चल. बुलेट से फिर कभी चल देंगे.

दोनों वह से निकल क्र गौण क चाक की और चल दिए.

रस्ते मई जो भी मिलता लल्लू को राम राम जरूर करता चाहे वो लल्लू से बड़ा हो या छोटा.

राघव- क्या बात है भाई. गौण मई इतना रेस्पेक्ट तो काका लोगो का भी नहीं है जितना तुम्हारा है.

लल्लू- ऐसा कुछ नहीं है भैया. ये सब मुझ से दर क्र राम राम क्र रहे है. मन मई तो गली hi दे रहे होंगे.

राघव- ऐसा क्यू.

लल्लू- ककी मुझे अगर कही गलत होता दीखता है तो फिर चाहे वो कोई भी हो मई अपने आप को नहीं रोक पता हु. उसकी माँ बहन एक क्र देता हु. बस एक hi रह गया है जिसका मुझे मौका hi नहीं लग रहा है.

राघव- ऐसा क्या रह रहा है. जिस का तुम्हे मौका नहीं मिल रहा.

लल्लू- यहाँ अपने स्टेट मई सरब बन्न है. लेकिन सुनाने मई आया है की गौण क पूर्व मई नदी किनारे कोई दारू बेच रहा है. मई जा रहा था उसी दिन लेकिन उस दिन रात ज्यादा हो गया था तो मुझे वापस घर जाना पड़ा फिर मौका hi नहीं मिला अभी उधर जाने का.

राघव- तो अभी उधर hi जाना था न. इधर क्यू आ गया. चल उसी और चलते है. देखे तो सही कौन है वो जो यहाँ सब गौण वालो मई जहर घोल रहा है.

लल्लू- इसी लिए तो पूछा था की बुलेट ले लू तो आप मन क्र दिए. अब नेक्स्ट टाइम बुलेट से उधर hi चलेंगे.

राघव- चल ठीक है.

फिर दोनों भाई गौण घूमते हुए चाक तक गए.

चाक पर दोनों थोड़ी देर हुशि मजाक करते हुए गौण वालो क साथ बैठ क्र चाय पि और फिर वापस घर को आ गए.

काजल- कहा गया था भैया को ले क्र.

लल्लू- वो भैया घर पर बैठे बैठे बोर हो रहे थे तो थोड़ा बहार घूमने गए थे.

काजल- चल बैठ नास्ता भी नहीं किया दोनों. आ जा खाना खा ले.

फिर दोनों बैठ क्र खाना खाने लगे.

खाना खा क्र लल्लू जा क्र ऋतू को देखा तो वो सो रही थी.

अब ऋतू को बुखार नहीं था.

लल्लू वह से आ क्र आँगन मई बैठ गया.

तभी सोनम कमरे से बहार निकली.

दोनों की नाज़े टकराई. सोनम शर्मा क्र नजरे झुका ली.

लल्लू आँगन से उठ क्र मलन पर आ गया.

दादू- बीटा तेरे पापा बोले है जरा खेत चला जा. वो सभी बहार है आज.

लल्लू- दादू तो पहले बताना था न. मई तो कब से खली hi था. चला जाता हु मई.

लल्लू बहार आ क्र खेत की और चल दिया.

खेत मई फसल की कटाई हो रहा था.

काफी सरे मजदूर लगे थे कटाई मई.

लल्लू वही एक पैर क निचे जा क्र बैठ गया.

वह से साम मई सारा फसल बंडवा क्र सही से खेत से खलिहान मई पहुंचवाया.

इस सब मई अँधेरा हो गया.

लल्लू क घर आते आते रात हो गया.

आँगन आ क्र लल्लू नलका पर हाथ पेअर धो क्र खाना खाया.

खाना खा क्र लल्लू खटिया पर बैठा हुआ था.

फिर सब लेडीज खाना खाने आ गई.

ऋतू का खाना उसके कमरे मई hi पंहुचा दिया. वो वही खाना खा ली.

सोनम बार बार लल्लू को hi देख रही थी

लल्लू से नजर मिलती तो वो फिर शर्मा क्र पलके झुका लेती.

सब का खाना हो गया तो सब लड़किया बर्तन समेत क्र धोने ले गई और काकी और माँ रसोई समेत क्र उसे सही से व्यवस्थित करने लगी.

सब फ्री हो क्र अपने करे मई चले गए.

आज लल्लू देखता hi रह गया उसे किसी ने पूछा hi नहीं.

लल्लू उदाश हो क्र खटिया पर hi लेट गया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 32.

सुबह लल्लू की नींद खुली.

उठ क्र अपने नियम क अनुशार नदी किनारे जा क्र बैठ गया.

फिर सूर्य उदय क बाद लल्लू उधर से फ्रेश हो क्र खेत की और चला गया जहा कल का फसल कटाई क बाद रखा गया था.

वह कुछ देर काम देख क्र वापस घर आ गया.

सुनील- क्या बात है बीटा. आज काफी देर लगा दी आने मई.

लल्लू- वो काका आज जरा खेत चला गया था. कल वो फसल कटाई हुई थी वो खलिहान मई रखवा दिया था तो उसी को देखने गया था.

पापा- वह तुम ये सब काम भी करते हो. वैरी गुड. मुझे तो पता hi नहीं था मेरा बीटा अब बड़ा हो गया है.

दादू- लल्लू बीटा. आज कुछ मेहमान आने वाले है तो देख आँगन मई कैसी तयारी है. और अब कही जाना नहीं.

लल्लू- ठीक है दादू. वैसे कौन आ रहे है.

सुनील- तुम्हारे भैया को देखने लड़की वाले आ रहे हैं.

लल्लू- वाओ ये बात तो पहले बताना था न. लल्लू भागता हुआ आँगन चला गया.

सब हुस्ने लगे.

आँगन मई लड़किया राघव को बिच मई बैठाये उसे छेड़ने मई लगी हुई थी.

लल्लू- अरे मेरे भैया को तुम लोग क्यू तंग क्र रहे हो.

रोमा- आ गया भैया का चमचा.

लल्लू- मई उनका सिर्फ प्यारा भाई हु. आप लोगो को तो आज खुश होना चाहिए की आज भैया की सदी तैय हो गया तो कितना मजा आने वाला है.

ऋतू- सदी तय है बस वो डेट पक्की करने आ रहे हैं.

लल्लू ऋतू की आवाज सुन पीछे घूम क्र देखा.

लल्लू- काकी अब कैसी तबियत है आप की.

लल्लू ऋतू क पास आता बोलै.

ऋतू- ठीक है अब. ( ऋतू बुरा सा मुँह बनती बोली.)

लल्लू का मुँह लटक गया.

काजल दूर से ये सब देख रही थी.

थोड़ी देर मई मेहमान आ गए.

फिर क्या था सब लग गए उनके आव भगत मई.

लल्लू तो सिर्फ आँगन से दालान पर चाय पानी नास्ता यही सब पहुंचने मई लगा हुआ था.

ऋतू जैसा पहले hi बताई थी की सदी पहले से तय था ये लोग सिर्फ डेट फिक्स करने आये थे.

पंडित को बुला क्र डेट फिक्स किया गया.

डेट भी एक वीक बाद का निकला. आगे सुबह मुहूर्त नहीं था.

समय काम था और काम ज्यादा.

मेहमान सब साम तक रुके फिर अपने घर चले गए.

यहाँ सब बहुत खुस थे. एक वीक बाद hi सदी थी. घर मई खुसियो का माहौल था. सब क चेहरे पर खुशिया देखते hi बनती थी.

साम मई सभी खुसी से इसी बारे मई बाटे करते हुए खाना पीना क्र सोने को चल दिए.

लल्लू अपने खटिया पर hi लेता हुआ था.

सब अपने कमरे मई चले गए सोने.

थोड़ी देर मई रागिनी बहार निकल क्र नलका पर गई.

तभी लाइट चली गई.

रागिनी को अँधेरे मई बहुत दर लगता था.

वो वह से वापस आ क्र लल्लू क पास पहुंची.

रागिनी- लल्लू बीटा सो गए क्या.

लल्लू- नहीं काकी क्या हुआ बताओ. कोई काम था.

रागिनी- लल्लू बीटा ये लाइट चली गई. मुझे अँधेरे से दर लगता है तुम्हे तो पता है. क्या तुम थोड़ा नलका पर चलोगे. मुझे बाथरूम जाना है.

लल्लू- ठीक है काकी चलो.

लल्लू आगे और उसके पीछे रागिनी नलका तक आ गए.

लल्लू- लो काकी हो आओ बाथरूम से.

रागिनी- बीटा तू जाना नहीं. यही रहना.

लल्लू- काकी मई यही हु. आप हो क्र आओ.

फिर रिगिनी अपना साडी उठा क्र कच्ची निचे खींच मूतने को बैठ गई.

अँधेरे मई भी रागिनी की गोरी बड़ी सी गांड चमक रही थी.

लल्लू को तो देख क्र hi बाबूराव सलामी देने लगा.

लल्लू का मन कर रहा था की पीछे से जय और काकी की इस बड़ी सी गांड को खा जय मुँह लगा क्र.

रागिनी जब मुट्ठ रही थी तो बड़ी मधुर आवाज फिज्जा मई घुल रही थी.

लल्लू का बाबूराव जिसके मुँह अब खून लग चूका था वो तो पागल हुआ पारा था. बार बार ठुमक ठुमक क्र अपनी मनोदशा लल्लू को बता रहा था.

रागिनी मूत क्र कड़ी हो गई. अपने मखमली गांड को फिर से साडी से धक् ली.

लल्लू झट से पीछे घूम गया.

रागिनी हाथ पेअर धो क्र वह से आँगन मई आ गई.

रागिनी- लल्लू बीटा अब नाईट तो पता नहीं कब आएगा. क्या तुम मेरे साथ आज सो जाओगे.

लल्लू- ये भी कोई कहने की बात है. आप जब भी कहेंगे मई आप क साथ सो जाऊंगा.

फिर दोनों रागिनी क कमरे मई आ गए.

फिर दोनों बीएड पर लेट गए.

लल्लू को तो नींद hi नहीं आ रहा था. एक तो नया बीएड उप्पेर से अभी जो रागिनी अपना मटका दिखा दी थी.

रागिनी थोड़ी देर मई खाट लेते हुए सो गई.

लल्लू वैसे hi लेता हुआ आँखे बंद किये सोने की कोसिस क्र रहा था.

पता नहीं कब तक वो यु hi जगा रहा.

आधी रात को अचानक लल्लू की नींद खुली.

लाइट आ गया था.

रागिनी की साडी उसके जांघो तक उप्पेर आ गया था और वो एक हाथ और एक पेअर लल्लू क उप्पेर रखे लल्लू को बहो मई भर क्र मजे से चिपकी सो रही थी.

लल्लू को ये देख क्र नींद hi ुर्र गई.

लल्लू का डंडा बिलकुल सीधा खड़ा हो क्र रागिनी क जांघो क निचे दबा हुआ था.

लल्लू बहुत बेचैन हो रहा था.

जब लल्लू से नहीं रहा गया तो वो रागिनी क जांघो को पकड़ क्र अपने उप्पेर से हटा दिया और फिर उसके हाथ को हटाने लगा तो रागिनी और काश क्र लल्लू से चिपक गई.

लल्लू क छाती मई रागिनी की बड़ी बड़ी चूचिया डाब क्र पिश रहा था.

लल्लू घूम क्र रागिनी को अपने बहो मई ले लिया और उसे अपने से चिपका लिया.

लल्लू से अब बर्दास्त नहीं हुआ तो वो रागिनी क चेहरे को देखता हुआ उसके माथे पर अपने तपते होठ रख दिया.

रागिनी सोते हुए hi मुसकुदा उठी.

लल्लू को बड़ा प्यार आया.

वो रागिनी क बालो को सहलाता उसे अपने बहो मई लिए आँख बंद क्र सोने की कोसिस करने लगा.

सुबह जब रागिनी की नींद खुली तो वो लल्लू की बहो मई थी.

दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे.

रागिनी को बाहत सरम आया.

वो लल्लू क हाथो को हटा क्र उठाने लगी तो देखती है की उसकी साडी उसके कमर से थोड़ा hi निचे तक था और पीछे से तो बिलकुल उठा हुआ था.

रागिनी एक नजर लल्लू पर डालती अपनी साडी सही कर ली.

जब वो साडी सही क्र क लल्लू क पास से थोड़ा हैट क्र दूर हुई तो जो देखती है वो देख क्र तो एक पल क लिए उसे लगा की उसकी सास hi रुक जाएगी.

लल्लू का धोती उसके कमर से खुल गया था और अभी सुबह सुबह उसका डंडा अपने पुरे जौबन पर खड़ा था.

रागिनी की ससे तेज हो गई लल्लू क लौड़े को देख क्र.

रागिनी को निचे अपने कच्ची मई गीलापन का एहसास हुआ तो वो और शर्मा गई.

रागिनी- हेय रम्म ये जिस पर चढ़ जाएगा वो तो मर hi जाएगी. कैसे झेलेगी इसकी वाइफ इसे.

रागिनी बहुत आहिस्ता से उठ के लल्लू क उप्पेर उसका धोती दाल दी.

फिर बीएड से उतर कर अपने कमरे से बहार आ गई.

बहार काजल और ऋतू पहले से उठी हुई थी.

फिर रागिनी फ्रेश होने चली गई.

सुबह लल्लू थोड़ा देर से उठा.

बहार य क्र आँगन मई खटिये पर बैठ गया.

लल्लू- माँ… चाय.

काजल- कहा था तू. अभी सो क्र उठा है क्या.

लल्लू- है माँ. मझली काकी क रूम मई सोया था. रात लाइट चली गई तो उहने दर लग रहा था.

काकी बोली साथ सोने को तो वही सो गया था जा क्र.

ऋतू चाय ले क्र लल्लू को दे दी.

सदी का एक वीक था तो अब सब क जुबान पर सिर्फ सदी की hi बाटे थी.

माँ और काकी तो सदी की बातो मई लगी थी.

शालिनी काकी और रागिनी काकी रसोई मई थी.

भैया बहार घूमने गए थे.

मई भी चाय पि क्र फ्रेश होने चला गया.

फ्रेश हो क्र आया तो दादू सभी काका और पापा सभी लोग आँगन मई बैठे चाय पि रहे थे.

दादू- लल्लू बीटा क्या बात है आज सुबह नहीं उठा था क्या.

लल्लू दादू क साथ बैठता हुआ.

लल्लू- कहा दादू. रात लेट से सोया था तो अभी अभी नींद खुली.

पापा- घर मई अब काम है तो तुम्हे नींद आ रहा है.

सुनील- बीटा आज सब को ले क्र बाजार जाना है.

समय काम है तो लेडीज पार्टी को ले क्र दोनों भाई बाजार से मार्केटिंग क्र लो. वैसे भी एक बार मई तो हो नहीं पायेगा.

क्या कहते हो.

लल्लू- जैसा आप कहे काका.

लल्लू- काका कब जाना है बाजार.

अनिल- बीटा खाना पीना हो जय जल्दी से फिर चले जाना.

लल्लू- ठीक है काका. वैसे काका क्या सब लेना है और कहा से लेना है.

सुनील- कपडे का तो दो दुकान तुम देख hi रखे हो.

लल्लू- दो कहा काका. एक hi दुकान तो गए थे उस दिन वो भी छोटा रेडीमेड का दुकान था.

सुनील- हाहाहा, मई पहले दिन मेरे साथ गए थे उसका बात नहीं क्र रहा. सोनम बीटा क साथ दूसरे दिन गए थे उसका बता रहा हु.

वो शोरूम तो बड़ा है न.

लल्लू- ओह्ह तो वो अंकल आप को बता दिए.

सुनील- बताता कैसे नहीं. वो तो वो उसका बाप भी बताता.

लल्लू- अच्छा और दूसरा.

सुनील- दूसरा दुकान उसके भाई का है उस से कहना तो वो दिखा देगा.

बांकी तुम लोगो का जहा दिल करे और कपडे अच्छा लगे वाला लेना.

लल्लू- ठीक है काका.

फिर ऐसे hi बाटे होने लगी.

दादू- राम अपने बहनो क यहाँ तुम hi चले जाओ. उन दोनों को साथ hi ले क्र आना. अब समय नहीं रहा.

पापा- पापा मैंने कॉल क्र दिया है दोनों को की तयारी क्र क रहे. मई आज hi चला जाऊंगा और कल आ जाऊंगा.

फिर सब दालान पर चले गए.

समय काम और काम ज्यादा था. सभी रिश्तेदारों क यहाँ ये सुबह समाचार देना था. विवाह का मार्केटिंग करना था और खेती भी देखना था.

अनिल काका, सुनील काका और पापा को बहार का काम मिला और छोटे काका को खेती का.

पापा को तो दो दिन बुआ को लेन मई hi लग्न था. वो अपना तयारी मई लग गए.

लल्लू आँगन आ क्र सब को खाने की तयारी जल्दी करने को बता दिया ककी मार्किट जाना था.

लल्लू अपने बहनो को भी जा क्र बता दिया.

सभी बहने भी माँ और काकी लोगो क साथ लग गई जल्दी से खाना तैयार करने मई.

खाना हो जाने क बाद पापा तो चले गए दोनों बुआ को लेन. और दोनों बड़े चाचा भी रिश्तेदारों मई न्योता देने चले गए.

लल्लू- काकी यहाँ घर पर कौन रहेगा. क्या सब का जाना सही है.

ऋतू- अभी दिन है तो हम सभी जा hi सकते है बीटा. है अगर रात होता तो फिर यहाँ किसी को रहना पड़ता.

लल्लू- फिर सब तैयार हो जाइये.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 33.

बाजार जाने क नाम पर तो सभी लड़कियों मई जैसे पंख लग गए थे. दौर दौर क्र सही काम जल्दी जल्दी निपटा क्र घुस गए तैयार होने मई सभी.

लल्लू और राघव बहार बैठे हुए थे.

राघव- यार भाई क्या तुम लड़की को देखे हो.

लल्लू- नहीं भैया. क्यू क्या हुआ.

राघव- नहीं हुआ कुछ नहीं. मई ऐसे hi पूछ रहा हु.

लल्लू- मुझे तो कुछ पता hi नहीं था. कल मुझे पता चला है.

राघव- चल हम लोग भी तैयार हो जाते है.

लल्लू- अभी तो दो घंटा लगेगा इन लोगो को भैया. हमे तैयार हमे मई 5 मिनट्स लगेगा.

राघव हुस्ने लगा.

लल्लू- भैया आप खुस तो हो न इस सदी से.

राघव- है भाई. अब उम्र तो हो hi गया था. अब तुम्हारे जैसे सब से छोटा तो हु नहीं. घर मई सब से बड़ा बीटा हु तो अगर मई अभी सदी करने से मन भी करूँगा तो कोई नहीं मानेगे.

लल्लू- है ये बात तो है भैया. सब से खुस तो मुझे दादू दिख रहे थे कल.

राघव- सही कह रहे हो. वैसे तो सब hi बहुत खुस है लेकिन दादू क चेहरे की खुसी तो देखते hi बन रही थी कल.

लल्लू हुस्ने लगा.

ऋतू- तुम दोनों को नहीं जाना है क्या बाजार.

ऋतू जो बहार निकली थी वो दोनों को हस्ते देख क्र बोली.

राघव- जा रहा हु माँ. लल्लू कह रहा है की आप सब को 2 घंटा से पहले होगा नहीं तो इसी लिए हम यहाँ बैठे है.

लल्लू- b..bh..bhaiya. m.m.maine कब बोलै. ये to..aap hi कह रहे थे.

ऋतू गुस्से से लल्लू को देख रही थी.

लल्लू घबराता हुआ गर्दन झुका लिया.

ऋतू फिर कमरे मई चली गई.

लल्लू- भैया आप क्यू मर खिलाना चाहते हो. मैंने क्या बिगड़ा है आप का. मुँह छोटे से मासूम बच्चे पर आप को थोड़ा सा भी तरस नहीं आता.

राघव- बहुत प्यार आता है भाई. अब चल जल्दी से हम भी तैयार हो जाते है. नहीं तो अभी अब किसी ने देख लिया ऐसे बैठे तो पक्का मार पड़ेगी.

फिर दोनों वह से उठ क्र कमरे मई चले गए.

लल्लू का सामान तो काजल क कमरे मई था और राघव का उप्पेर फर्स्ट फ्लोर पर था अपना सपरत कमरा.

राघव उप्पेर चला गया अपने कमरे मई तैयार होने.

लल्लू काजल वाले रूम मई चला गया.

जैसे hi रूम का दरवाजा खोला लल्लू वही जैम गया.

काजल अभी सिर्फ एक कच्ची मई कड़ी थी.

काजल दरवाजा खुलते hi घबरा गई और बीएड पर रखे साडी से खुद को ढकने लगी.

लल्लू को देख क्र उसे थोड़ा चैन मिला.

काजल- मुआ ऐसे कोई करता है क्या. डरा hi दिया था अभी.

लल्लू- मैंने क्या किया है. सब मेरे पर hi गुस्सा रहते है.

लल्लू पेअर पटकता हुआ कमरे से बहार आ क्र फिर से खटिये पर बैठ गया.

पुरे 2 घंटे बाद सब बहार निकल निकी क्र आने लगे.

कोमल- भाई तुम क्या ऐसे hi जाओगे.

लल्लू- गुस्से मई; माँ तैयार हो रही है. मेरा कपडा उसी रूम मई है.

पीछे से आती रोमा- तो जा न जल्दी तैयार हो जा. चची का अब हो गया होगा.

लल्लू- दीदी आप जरा मेरा दो बैग होंगे वो ला दो न.

रोमा- मई क्यू लौ. जाना है तो जा नहीं जाना तो मत जा.

लल्लू वही बैठा था तब तक राघव भी आ गया.

राघव- अरे तू अभी तक यही बैठा है.

लल्लू- क्या मेरा जाना जरुरी है भैया. यहाँ घर मई भी तो कोई रहना चाहिए. आप सब को कार से ले क्र चले जाओ न. मई यहाँ घर पर रहता हु. वैसे भी दादू भी यहाँ अकेले hi है.

राघव- क्या बात है. क्या हुआ. अभी तो तू बहुत खुस था. फिर तेरा चेहरा क्यू लटक गया है.

लल्लू- कौन कहता है मई खुस नहीं हु. मई बहुत खुस हु.

कोमल- है तुम कितने खुस हो वो तो तुम्हरे चेहरे से hi पता चल रहा है. पुरे बारह बजे है.

सोनम पीछे से आती हुआ.

सोनम- क्या हुआ. किस क चेहरे पर बारह बजे है. भैया क क्या.

राघव- नहीं मेरे भाई क.

सोनम नजर घुमा क्र लल्लू को देखि.

लल्लू गर्दन घुमा लिया उधर से.

अब लल्लू क लिए यहाँ बैठना मुश्किल हो रहा था.

क्या करे समझ नहीं आ रहा था. फिर कमरे मई जाये तो कही फिर दन्त न पर जय और अगर नहीं जाएगा तो तैयार कैसे होगा.

सोनम- क्या हुआ भाई.

सोनम लल्लू क पास आ क्र उसके सर क बालो को हाथ से बिगड़ती बोली.

लल्लू- दी माँ क कमरे मई कपडे है मेरे. माँ तैयार हो रही होगी. कैसे जाऊ.

सोनम- अरे तू उनका बीटा है. तू चला जाएगा तो क्या हुआ. तुम ये सब कब से सोचने लगा.

किसी ने कुछ कहा है क्या तुम्हे फिर से.

लल्लू- नहीं दीदी. किसी ने कुछ नहीं कहा. मेरे कपडे का बैग ला दो न कमरे से.

सोनम उठ क्र कड़ी होती हुई.

सोनम- ठीक है मई लती हु.

लल्लू- दीदी दो बैग है. दोनों ले आना.

तब तक सभी तैयार हो क्र बहार आ गई.

लग रहा था जैसे इंद्रा की सभा से साडी अप्सराये यहाँ इस आँगन मई उतर आयी है.

सब एक से बढ़ क्र एक लग रही थी.

लल्लू तो मुँह खोले सोच रहा था की किस को देखे और किस को नहीं.

सोनम तब तक बैग्स लेन चली गई.

रागिनी- बीटा मुँह बंद क्र ले. कोई माखी चली जाएगी.

आँगन मई कड़ी सभी लेडीज हुस्ने लगी.

सोनम दोनों बैग ला क्र लल्लू को दे दी.

सोनम- ये लो भाई. अब जल्दी से तैयार हो जाओ.

लल्लू दोनों बैग ले क्र लड़कियों क कमरे क बगल मई उसके लिए जो कमरा तैयार था उस मई चला गया.

वाशरूम से फ्रेश हो क्र लल्लू आया तो कमरे मई सोनम कड़ी थी.

सोनम- कहा चले गए थे. कितना समय लगा रहा है. सब गुस्सा क्र रहे है.

लल्लू- कौनकौन गुस्सा क्र रहा है. लल्लू टॉवल से मुँह हाथ साफ करता बोलै.

सोनम- एक हो तो नाम बताऊ न. सब hi खड़े है आँगन मई.

लल्लू- आप सब कमरा बंद करो और चलो. मई आ रहा हु.

सोनम- ये बोलूंगा तो सब और गुस्सा करेंगे और सब चले जाएंगे तो तुम कैसे जाएगा. मई तेरे बगैर नहीं जाउंगी.

लल्लू t-shirt जो पहना था वो खोल क्र निकल रहा था की सोनम की बात सुन क्र रुक गया.

लल्लू- क्यू आप मेरे बगैर क्यू नहीं जाओगे.

सोनम- क्यू जब मेरा प्यारा भाई नहीं जाएगा तो मई कैसे जा सकती हु.

ऋतू- क्या क्र रहे हो टी दोनों भाई बहन. जल्दी तैयार नहीं हुआ जा रहा तुम्हे. इतना से तो हम सब को भी नहीं लगता.

लल्लू- आप लोग चलो. मई आता हु पीछे से.

ऋतू- तू यही बैठा रह. कोई जरुरत नहीं है जाने को.

ऋतू हाथ पकडे सोनम की कमरे से बहार निकल आयी.

लल्लू अपना कपडा पहन क्र पर्स ले क्र जेब मई रखा फिर रुमाल निकल क्र रखा.

बहार आया तो सब चले गए थे.

लल्लू काजल क रूम की और गया तो वह लॉक लगा था.

अब जूता तो उसी घर मई बंद रह गया.

लल्लू पुराण स्लीपर hi पहन लिया.

कमरे को बंद क्र लल्लू दालान पर आया तो वह सोनम बैठी हुई थी दादू क पास.

लल्लू- आप गई नहीं दी.

सोनम- नहीं मई तेरे साथ hi जाउंगी.

लल्लू- घर का के है क्या.

सोनम- क्यू क्या हुआ.

लल्लू- वो जूता माँ क कमरे मई रह गया है.

सोनम दादू क पास से के ले क्र आँगन मई आई.

फिर कमरा खोल क्र लल्लू वह से अपना जूता निकला.

लल्लू जब तक जूता पहना तब तक सोनम फिर से कमरे मई लॉक लगा क्र के दादू को पकड़ा दी.

लल्लू जूता पहन क्र दालान पर आया. वह से बुलेट की के ले क्र बहार आ गया.

दोनों बुलेट पर बैठ क्र घर से चल दिए.

लल्लू- दीदी आप अभी भी गुस्सा हो क्या.

सोनम- तुम से किस ने कहा की मई गुस्सा हु.

सोनम लल्लू क कंधे को पकड़ क्र बोली.

लल्लू- नहीं मुझे लगा सब गुस्सा है तो आप भी होंगे.

सोनम- और तुम्हे ऐसा क्यू लगा.

लल्लू- लेट हो गया न आप को भी मेरे कारन से इस लिए मुझे लगा……

सोनम- इतना मत सोचा क्र तू.

लल्लू बुलेट की स्पीड बढ़ाता हुआ बोलै.

लल्लू- दीदी वो लोग कहा मिलेंगे हमे.

सोनम- मैंने कोमल और रोमा को समझा दिया है. बाजार सुरु होने से पहले छोटी पुलिया है वही ये लोग रुकेंगे.

स्पीड बढ़ने से सोनम दर क्र लल्लू से चिपक क्र बैठ गई.

लल्लू को सोनम की कठोर उभर अपने पीठ पर रगड़ता हुआ बहुत अच्छा लग रहा था.

लल्लू- दीदी आज आप बहुत सुन्दर लग रही हो.

लल्लू सोनम को बाइक क साइड मिरर इन देखता बोलै.

सोनम उस मई देखि तो दोनों की नजरे मिल गई.

सोनम शर्मा क्र मुसकुडती हुई लल्लू से और काश क्र चिपकते हुए उसके कंधे पर पीछे अपना मुँह छुपा ली.

थोड़ी देर मई सोनम अपना चेहरा निकल क्र मिरर मई फिर से देखि तो लल्लू वही देख रहा था.

लल्लू की तो आनंद की कोई सिमा नहीं थी.

सोनम मिरर मई देखि तो लल्लू उसे hi देखता पाया.

सोनम का चेहरा सरम से लाल हो गया टमाटर की तरह.

लल्लू सोनम को देख क्र मुसकुदा पारा.

सोनम अब उधर देखि hi नहीं वो दूसरी साइड देखि तो लल्लू को उस तरफ क मिरर मई खुद को देखता पाई.

सोनम एक मुक्का प्यार से लल्लू को मर दी पीठ पर और फिर उसके पीठ मई चेहरा छुपा क्र दोनों हाथो से उसके साइन पर बांध ली.

लल्लू को असीम आनंद का एहसास हो रहा था.

दोनों यु hi लुका छुपी का खेल खेलते हुए वह पुलिया क पास आ गए.

वह पर ये लोग थे hi नहीं.

लल्लू वह रुक गया.

लल्लू- दी ये लोग तो है नहीं यहाँ. अब क्या आगे देखे.

सोनम- है भाई आगे hi देखेंगे न ककी पीछे होने का तो कोई चांस नहीं है उन लोगो का.

लल्लू फिर बाइक आगे बढ़ा दिया.

बाजार क अंडर आ क्र दोनों उन लोगो को देखने लगे.

लल्लू- दीदी आप इस और देखना मई उस और देखता हु.

बाजार रोड क दोनों साइड था.

दोनों उन लोगो को ढूंढते हुए आगे बढ़ रहे थे.

तभी एक शोरूम क सामने इनका स्कार्पियो कड़ी दिखी.

दोनों शोरूम क सामने बाइक ले क्र खड़ा क्र दिए.

सभी लोग वही खड़े थे.

ऋतू- आ गए तुम. हो गया तुझे नाटक किये हुए. और सोनम तू भी इसके साथ रह क्र इसके जैसा hi बनती जा रही है.

अब चल जल्दी se..late हो रहा है.

लल्लू-( मन मई.) बहनचोद ये हो क्या रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे मई सब का पालतू कुत्ता बन गया हु. जब मन किया सब आ क्र प्यार करते है फिर जब मन किया दुत्कार देते है.

लल्लू सब क पीछे पीछे शोरूम मई चला गया.

सब अपनी खरीदारी मई लग गए.

वह कुछ ज्यादा उन लोगो को पसंद नहीं आया तो सब वह से बहार आ गए.

सोनम- माँ मई फॉर्म सब्मिट करें आई थी न तो हम एक शोरूम मई गए थे वह सब कपडे बहुत अच्छे है. वही चलते है.

ऋतू- तो इतनी देर से बताई क्यू नहीं. उप्पेर से उस नाटकबाज क चक्कर मई पड़ी थी. तुम्हे पता था तो हमारे साथ आना था न.

लल्लू सब से पीछे खड़ा सब सुनता हुआ मुसकुदा रहा था.

सोनम लल्लू क पास आ क्र उसका हाथ पकड़ बहार आ गई.

सोनम- भाई हमे उस दुकान ले चलो न. यहाँ कुछ खाश कपडे थे hi नहीं.

लल्लू चुप चाप बाइक स्टार्ट क्र उस शोरूम की और चल पड़ा.

पीछे सभी कार से आ रहे थे.

उस शोरूम मई पहुंच क्र लल्लू बाइक साइड मई लगा अंडर चला गया सोनम क साथ.

लल्लू- नमस्ते अंकल.

d.wala- अरे बीटा आप आ गए. आप का कपडा सिला हुआ रखा है.

लल्लू- अंकल मेरे साथ मेरा पूरा परिवार आया है. मेरे भैया की सदी तय हुआ है तो उसकी शॉपिंग क लिए.

d.wala- अरे वहहह. अनिल भाई क लड़के की सदी तय हुआ है क्या.

लल्लू- जी अंकल.

D.wala बहार जा क्र सभी का हाथ जोर क्र नमस्कार करता हुआ दुकान मई अंदर लाया.

सब को दुकान मई बैठने को कहा.
 
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