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- Dec 5, 2013
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अपडेट- 51
पुरे दिन भर में सीमा ने अपने लिए थोड़ी भोत शॉपिंग कर ली थी और वही दूसरी तरफ मानव, रागिनी और श्वेता भी आज के अपने ऑफिस के काम से फ्री हो चुके थे और जैसा की सीमा ने कहा था ठीक वैसे hi रागिनी उसे फ़ोन करके ये खबर दे देती है की उनका काम निपट गया है..
बुआ से ये जानकर की उन लोगो का काम भी ख़तम हो चूका है, सीमा बुआ से होटल में hi मिलने का बोल देती है क्युकी वो खुद भी दिन भर की शॉपिंग करने के बाद थकन के कारन और कही नहीं जाना छह रही थी लेकिन उसकी बात के जवाब में रागिनी उसे ये कहती है की उसे एक कोई खास जरुरी काम है तो वो अभी होटल नहीं आ सकती है इसलिए मानव और श्वेता होटल लौट रहे है और उसे लौटने में देरी होगी..
रागिनी बुआ की बात सुन सीमा का मन तो इस बात के लिए कटाई राज़ी नहीं था की चाहे थोड़े hi समय के लिए भी क्यों नहीं, लेकिन पापा स्वेता के साथ अकेले नहीं होने चाहिए.. परन्तु अब इसके अलावा और कोई चारा भी नहीं था इसलिए बुआ की बात पर हामी भरते हुए वो ठीक है बोल फ़ोन कट कर देती है और खुद भी बाजार से सीधा होटल के लिए रवाना हो जाती है.
यहाँ मानव को ये बात जान कर तसल्ली होती है की चलो कुछ समय के लिए hi सही उसे श्वेता के साथ अकेले वेट बिताने का मौका तो मिल रहा है और आज सुबह से hi वो ये बात गौर कर रहा था की श्वेता उससे आज इतनी बात चित नहीं कर रही है, कुछ उखड़ी उखड़ी सी लग रही है...
इसीलिए रागिनी से अलग होने के बाद दोनों मानव और श्वेता कंपनी की गाड़ी जो उन्हें होटल चोर्ने के लिए मौजूद थी उसमे पीछे की सीट पर बैठ जाते है और होटल की तरफ रवाना हो जाते है..
कार में बैठने के बस कुछ hi देर में मानव अपना हाथ श्वेता की जांघो पर रख कर उसे देखते हुए मुस्कुरा देता है मनो ये जाता रहा हो की वो उसे मानाने की कोशिश कर रहा हो.. श्वेता जो की इस वक्त एक कैसा हुआ सलवार सूट पहनी हुई थी जिसका कपडा उसकी त्वचा से एक दम सत्ता हुआ था मनो की बस थोड़ा जोर लगाओ तो चूचिया तो कुर्ते से झट बहार उछाल के निकल आएँगी...
अपने बॉस मानव के हाथो को जांघो पर महसूस करते hi तुरंत वो अपने हाथो से मानव का हाथ झटक देती है और आँखों से इशारे कर ये जाता रही होती है मनो की वो उससे भोत रूठी हुई और गुस्से में है...
मानव, श्वेता का ये रवैया देख वापस अपने हाथो को उसके कुर्ते के अंदर सरकते हुए टैंगो के बिच बिच रख छूट को मुट्ठी में भीचते हुए धीरे स्वर में जिससे की कार ड्राइवर को कुछ सुनाई न दे: क्या हुआ मेरी रंडी, इतनी क्यों गुस्सा हो रही है आज हम्म्म..
श्वेता, जो इतने लम्बे आरसे से खुद मानव के हाथो अपनी छूट मसलवाने को तरस रही थी, इस तरह चलती कार में अपनी छूट के बाबोचे जाने से पिघल सी जाती है और उसके जिस्म में मनो कम्पन सा उत्पन्न हो जाता है और उसकी दोनों टंगे आपस में सिकुड़ सी जाती है और मानव का हाथ बिच में hi फसा रह जाता है लेकिन फिर बी नाराज़गी जात्ते हुए वो मानव के हाथ को अपने हाथो से बहार खींचने का दिखावा करते हुए: उम्म्म्म गुस्सा न हो तो क्या करू भला में, आपको मेरी फ़िक्र hi कहा है कुछ...
मानव, ये जानते हुए की श्वेता का ये गुस्सा कुछ वकत का है, मुट्ठी में दबोची छूट को ढीला चोर अपनी हथेली को छूट के उप्पेर दबाव बनाते हुए घिसते हुए: ाचा क्यों तुझे ऐसा क्यों लगता है की तुझे मेरी फ़िक्र नहीं...
श्वेता, अब मानव के हाथ को ढीला चोर मस्त होती हुई: आगे इतनी hi फ़िक्र होती तो मुझे मेरे घर से दूर ला कर ऐसे अकेले तड़पती नहीं चोरते. जाओ अपनी बेटी के आगे पीछे घूमो बस और कुछ नहीं होना है आपसे अब..
मानव, एक हाथ को तो श्वेता की टैंगो के बिच घिसते हुए और दूसरे हाथ को उसकी कमर के पीछे से दूसरी तरफ ले जा कर उसे अपने पास खींचता है और दुपट्टे के अंदर से एक चुकी को कास के दबा देता है और सहलाना शुरू करते हुए: ऐसी बात नहीं है श्वेता रानी, तुम्हे बी पता है की हालत क्या है वार्ना में खुद यही सोच कर तुम्हे यहाँ लाया था की एक हफ्ते तक तुझे दिन रत नंगी रख कर तेरी पूरी जवानी लूटूँगा...
श्वेता, छूट और चुकी पर मानव द्वारा किये जा रहे दोहरे प्रहार से अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वासना से जलती हुआ जिस्म और चुदाई के लिए उसकी तड़प और लाचारी अब उसकी आँखों में भी साफ दिखाई दे रही थी और उन्ही तरसती आँखों को मानव की तरफ उठाते हुए: तो फिर लूट क्यों नहीं लेते आप मेरी जवानी सर, मई तो खुद मेरा जिस्म और जवानी लुटवाने आयी हु आपके साथ अपने पति का साथ चोर कर, और अगर आप चाहो तो इन हालातो में भी भोत कुछ हो सकता है.
मानव, चुकी के उप्पर जो हाथ अभी दुपट्टे के निचे था अब उसे हौले से उसके कुर्ते के गले से होते हुए अंदर दाल श्वेता की एक मुलायम गदराई चुकी को पकड़ के दबाते हुए और निप्पल को उंगलिओ के भींच फसा मरोड़ते हुए: हाँ तो मेरी रंडी, बस वही मौका ढूंढे में तो लगा हुआ हु न मैं, जितनी तड़प तुझे है उतनी hi मुझे बी है एक जवान शादी शुदा औरत के जिस्म को लूटने की, मुझसे बी नहीं रहा जा रहा है अब तो...
श्वेता, अपनी चुकी को इस तरह भीचते हुए महसूस कर एक धीमी सिसकी निकलते हुए: ससस अह्ह्ह्ह सर तो और कितना इंतज़ार करवाओगे आप, अब तो वाकई में नहीं रहा जा रहा आपकी इस रंडी से ममममम...
और इससे पहले की सीमा और मानव अपनी इस मस्ती को और आगे बढ़ाते हुए मजे लेते की मानव को दिखाई पड़ता है की कार होटल के गेट के अंदर पहुंच चुकी है और सामने मैं गेट पर hi सीमा कड़ी हुई है और अपनी बेटी सीमा को सामने खड़े देख वो झट से अपने दोनों hi हाथ श्वेता की टैंगो के बिच से और उसके कुर्ते से बहार निकल लेता है..
इस तरह अचानक से अपने जिस्म से मानव के हाथ हटाने से मदमस्त हुई श्वेता नहीं चौक सी जाती है और सवालिया नजरो से मनो ये पूछ रही होती है की हाथ क्यों हटा दिया, और यही सवाल को समझते हुए मानव भी श्वेता को इशारा करते हुए सामने कड़ी सीमा की मौजूदगी दिखता है.
एक बार फिर बिच मजधार में अकेले चोरे जाने के कारन सीमा को देखते hi श्वेता को गुस्सा आजाता है और मानव की तरफ देखते हुए अपने गुस्से को आँखों hi आँखों से जाहिर करने लगती है, लेकिन चूँकि कार सीमा के बिलकुल नजदीक पहुंच जाती है इस वजह से मानव श्वेता से दुरी बना कर बैठ चूका था..
कार रुकते hi मानव झट से दरवाजा खोल बहार निकलते हुए: अरे सीमा बेटी तुम यहाँ बहार क्यों कड़ी हो...
सीमा: हाँ बस आपका hi वेट कर रही थी में पापा...
मानव: क्यों हमारा वेट क्यों कर रही थी वो भी यहाँ गेट पर..
सीमा: वो बस में भी अभी जस्ट यहाँ पहुंची हु तो सोचा थोड़ा नाश्ता पानी करके hi कमरे में जाउंगी, इसलिए आपका वेट क्र रही थी अब अकेले खाने की मुझे आदत नहीं न..
मानव, मन को तसल्ली देते हुए की लगता है अब सीमा की मेरे प्रति नाराज़गी शायद काम होने लगी है : हाँ क्यों नहीं मुझे भी बड़ी भूख लगी है आओ चलो चलते है.
सीमा, कार से उतर कर पास hi कड़ी श्वेता से : आओ श्वेता तुम भी चलो हमारे साथ..
श्वेता, जो वैसे hi अधूरी प्यासी चोरे जाने के कारन गुस्से में थी और निचे उसकी टैंगो के बिच गीली पड़ी छूट भी घिसे जाने को तड़प रही थी इस कारन: नहीं ma'am आप लोग जाइये मुझे भूख नहीं है, मैं अपने कमरे में जाती हु... और ये बोल मानव की तरफ गुस्से और शिकायत भरी नजरो से देखते हुए और मन hi मन ये सोचते हुए की, "यहाँ जिस्म की भूख तो मिटने दे नहीं रही है ये औरत और पेट की भूख मिटने का न्योता दे रही है कामिनी ", वह से चली जाती है..
उसके जाने के बाद दोनों बाप बेटी अंदर जा कर टेबल पर बैठ जाते है और नास्ता पानी करते हुए मानव एक तरफ अपनी ऑफिस की बाटे करते हुए और सीमा से उसकी शोपोइन्ग के बारे में पूछते हुए उन दोनों के रिश्ते के बिच आई कड़वाहट को दूर करने का एक कदम बढ़ाता है..
यहाँ वो ये भी देखता है की पिछले दिनों से जहा सीमा का उसके प्रति व्यवहार थोड़ा रुखा सा था आज उसमे थोड़ा भोत बदलाव आया है, और वो ये बिलकुल नहीं चाहता था की अब वो सीमा के आगे कोई भी गलती करे.
दूसरी तरफ ऑफिस से मीटिंग ख़तम करने के बाद रागिनी जो किसी जरुरी काम का बहाना कर के निकली थी वो सीधा एक कैफ़े में पहुंच जाती है और वह जा कर एक टेबल पर जहा पहले से hi एक शख्स जिसका नाम राजीव था, वो बैठा हुआ था और रागिनी उसके सामने राखी खली कुर्सी पर जा कर बैठ जाती है...
यहाँ में राजीव का एक छोटा सा परिचय दे देता हु,
राजीव जो की एक जवान 28 साल के करीब का लड़का शहर की एक मणि हुई होटल में कार्यरत होता है. दरअसल राजीव की मुलाकात रागिनी से कुछ सालो पहले तब होती है जब वो ऑफिस के hi किसी काम से इस शहर में आई थी और उसी होटल में रुकी थी जहा राजीव कार्यरत था. बस वही से इन दोनों की जानपहचान हुई और दोस्ती की शुरुआत होती है...
रागिनी, कुर्सी पर बैठे हुए: आईएम सॉरी राजीव, मुझे आने में थोड़ी देर हो गई, तुम्हे ज्यादा इंतज़ार तो नहीं करवाया न मेने..
राजीव: इंतज़ार तो तुमने भोत करवाया रागिनी लेकिन एक खूसूरत औरत के लिए इंतज़ार करना भी ाचा लगता है मुझे ः..
रागिनी: ः तुम भी न, कभी नहीं सुधरोगे है न..
राजीव, आँख मरते हुए: ाचा वैसे ये बताओ की दर्द तो नहीं है न अब तुम्हे बदन में..
रागिनी, मुस्कुरा कर: हहै दर्द तो था हल्का हल्का आज सुबह तक भी पर अब ठीक है और वैसे भी ऐसे दर्द तो में कितनी बार hi झेलने को तैयार हु..
राजीव: हाय वाकई मन्ना पड़ेगा तुम्हारी इस बात को तो की इन मामलो में तो औरतो को तुमसे सीखना चाहिए की अपने यार को कैसे खुश किया जाता है..
रागिनी : हाहाहा ाचा ये बताओ वैसे तुमने मेरे ऑफर के बारे में क्या सोचा, डोज न मेरा साथ या नहीं...
राजीव : इसमें सोचना क्या है रागिनी, तुम्हारे लिए तो सब कुछ कुर्बान हाहाहा... जरूर दूंगा में तुम्हर साथ और आज क्या हमेशा देता रहूँगा..
रागिनी, खुश होते हुए: अरे वाह ये हुई न बात, ठीक है फिर अभी मेरे भैया और भतीजी भिनिसि शहर में मौजूद है, तो जाने से पहले में तुमहु उनसे एक बार मिलका दूंगी फिर बताती हु की आगे क्या और केसव करना है..
राजीव: हाँ जैसा तुम्हे ठीक लगे पर हाँ जो कुछ भी करो संभल कर करना, कही हम फास न जाये..
रागिनी: तुम फ़िक्र न करो ऐसा कुछ नहीं होगा वैसे भी अब कल इतना दर्द फसने के लिए तो नहीं सहा मेने हहह, अब तो जो थान लिया वो क्र के hi रहूंगी...
राजीव: हहह बात तो ये भी सही है तुम्हारी...
रागिनी : जी हाँ, ाचा तो फिर अब मैं चलती हु, भैया से कब, कहा और किस दिन मुलाकात करनी है ये में तुम्हे फ़ोन करके बता दूंगी..
राजीव: हाँ ठीक है दोने, तब तक के लिए bye..
और इस तरह रागिनी राजीव से विदा ले कर वापस होटल में आजाती है और दिमाग में आगे होने वाली चीजों को सोचते हुए मन hi मन ख़ुशी के मरे उत्साहित हो रही थी...
दोस्तों अब देखना ये है की ऐसा की सोचा है रागिनी ने और क्या होने वाला है रागिनी और राजीव के बिच.
इन सब सवालो क्व उत्तर जानने के लिए बने रहिये कहानी के संग
अगले अपडेट के इंतज़ार के साथ...
तो बे कॉन्टिनोएड..
पुरे दिन भर में सीमा ने अपने लिए थोड़ी भोत शॉपिंग कर ली थी और वही दूसरी तरफ मानव, रागिनी और श्वेता भी आज के अपने ऑफिस के काम से फ्री हो चुके थे और जैसा की सीमा ने कहा था ठीक वैसे hi रागिनी उसे फ़ोन करके ये खबर दे देती है की उनका काम निपट गया है..
बुआ से ये जानकर की उन लोगो का काम भी ख़तम हो चूका है, सीमा बुआ से होटल में hi मिलने का बोल देती है क्युकी वो खुद भी दिन भर की शॉपिंग करने के बाद थकन के कारन और कही नहीं जाना छह रही थी लेकिन उसकी बात के जवाब में रागिनी उसे ये कहती है की उसे एक कोई खास जरुरी काम है तो वो अभी होटल नहीं आ सकती है इसलिए मानव और श्वेता होटल लौट रहे है और उसे लौटने में देरी होगी..
रागिनी बुआ की बात सुन सीमा का मन तो इस बात के लिए कटाई राज़ी नहीं था की चाहे थोड़े hi समय के लिए भी क्यों नहीं, लेकिन पापा स्वेता के साथ अकेले नहीं होने चाहिए.. परन्तु अब इसके अलावा और कोई चारा भी नहीं था इसलिए बुआ की बात पर हामी भरते हुए वो ठीक है बोल फ़ोन कट कर देती है और खुद भी बाजार से सीधा होटल के लिए रवाना हो जाती है.
यहाँ मानव को ये बात जान कर तसल्ली होती है की चलो कुछ समय के लिए hi सही उसे श्वेता के साथ अकेले वेट बिताने का मौका तो मिल रहा है और आज सुबह से hi वो ये बात गौर कर रहा था की श्वेता उससे आज इतनी बात चित नहीं कर रही है, कुछ उखड़ी उखड़ी सी लग रही है...
इसीलिए रागिनी से अलग होने के बाद दोनों मानव और श्वेता कंपनी की गाड़ी जो उन्हें होटल चोर्ने के लिए मौजूद थी उसमे पीछे की सीट पर बैठ जाते है और होटल की तरफ रवाना हो जाते है..
कार में बैठने के बस कुछ hi देर में मानव अपना हाथ श्वेता की जांघो पर रख कर उसे देखते हुए मुस्कुरा देता है मनो ये जाता रहा हो की वो उसे मानाने की कोशिश कर रहा हो.. श्वेता जो की इस वक्त एक कैसा हुआ सलवार सूट पहनी हुई थी जिसका कपडा उसकी त्वचा से एक दम सत्ता हुआ था मनो की बस थोड़ा जोर लगाओ तो चूचिया तो कुर्ते से झट बहार उछाल के निकल आएँगी...
अपने बॉस मानव के हाथो को जांघो पर महसूस करते hi तुरंत वो अपने हाथो से मानव का हाथ झटक देती है और आँखों से इशारे कर ये जाता रही होती है मनो की वो उससे भोत रूठी हुई और गुस्से में है...
मानव, श्वेता का ये रवैया देख वापस अपने हाथो को उसके कुर्ते के अंदर सरकते हुए टैंगो के बिच बिच रख छूट को मुट्ठी में भीचते हुए धीरे स्वर में जिससे की कार ड्राइवर को कुछ सुनाई न दे: क्या हुआ मेरी रंडी, इतनी क्यों गुस्सा हो रही है आज हम्म्म..
श्वेता, जो इतने लम्बे आरसे से खुद मानव के हाथो अपनी छूट मसलवाने को तरस रही थी, इस तरह चलती कार में अपनी छूट के बाबोचे जाने से पिघल सी जाती है और उसके जिस्म में मनो कम्पन सा उत्पन्न हो जाता है और उसकी दोनों टंगे आपस में सिकुड़ सी जाती है और मानव का हाथ बिच में hi फसा रह जाता है लेकिन फिर बी नाराज़गी जात्ते हुए वो मानव के हाथ को अपने हाथो से बहार खींचने का दिखावा करते हुए: उम्म्म्म गुस्सा न हो तो क्या करू भला में, आपको मेरी फ़िक्र hi कहा है कुछ...
मानव, ये जानते हुए की श्वेता का ये गुस्सा कुछ वकत का है, मुट्ठी में दबोची छूट को ढीला चोर अपनी हथेली को छूट के उप्पेर दबाव बनाते हुए घिसते हुए: ाचा क्यों तुझे ऐसा क्यों लगता है की तुझे मेरी फ़िक्र नहीं...
श्वेता, अब मानव के हाथ को ढीला चोर मस्त होती हुई: आगे इतनी hi फ़िक्र होती तो मुझे मेरे घर से दूर ला कर ऐसे अकेले तड़पती नहीं चोरते. जाओ अपनी बेटी के आगे पीछे घूमो बस और कुछ नहीं होना है आपसे अब..
मानव, एक हाथ को तो श्वेता की टैंगो के बिच घिसते हुए और दूसरे हाथ को उसकी कमर के पीछे से दूसरी तरफ ले जा कर उसे अपने पास खींचता है और दुपट्टे के अंदर से एक चुकी को कास के दबा देता है और सहलाना शुरू करते हुए: ऐसी बात नहीं है श्वेता रानी, तुम्हे बी पता है की हालत क्या है वार्ना में खुद यही सोच कर तुम्हे यहाँ लाया था की एक हफ्ते तक तुझे दिन रत नंगी रख कर तेरी पूरी जवानी लूटूँगा...
श्वेता, छूट और चुकी पर मानव द्वारा किये जा रहे दोहरे प्रहार से अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वासना से जलती हुआ जिस्म और चुदाई के लिए उसकी तड़प और लाचारी अब उसकी आँखों में भी साफ दिखाई दे रही थी और उन्ही तरसती आँखों को मानव की तरफ उठाते हुए: तो फिर लूट क्यों नहीं लेते आप मेरी जवानी सर, मई तो खुद मेरा जिस्म और जवानी लुटवाने आयी हु आपके साथ अपने पति का साथ चोर कर, और अगर आप चाहो तो इन हालातो में भी भोत कुछ हो सकता है.
मानव, चुकी के उप्पर जो हाथ अभी दुपट्टे के निचे था अब उसे हौले से उसके कुर्ते के गले से होते हुए अंदर दाल श्वेता की एक मुलायम गदराई चुकी को पकड़ के दबाते हुए और निप्पल को उंगलिओ के भींच फसा मरोड़ते हुए: हाँ तो मेरी रंडी, बस वही मौका ढूंढे में तो लगा हुआ हु न मैं, जितनी तड़प तुझे है उतनी hi मुझे बी है एक जवान शादी शुदा औरत के जिस्म को लूटने की, मुझसे बी नहीं रहा जा रहा है अब तो...
श्वेता, अपनी चुकी को इस तरह भीचते हुए महसूस कर एक धीमी सिसकी निकलते हुए: ससस अह्ह्ह्ह सर तो और कितना इंतज़ार करवाओगे आप, अब तो वाकई में नहीं रहा जा रहा आपकी इस रंडी से ममममम...
और इससे पहले की सीमा और मानव अपनी इस मस्ती को और आगे बढ़ाते हुए मजे लेते की मानव को दिखाई पड़ता है की कार होटल के गेट के अंदर पहुंच चुकी है और सामने मैं गेट पर hi सीमा कड़ी हुई है और अपनी बेटी सीमा को सामने खड़े देख वो झट से अपने दोनों hi हाथ श्वेता की टैंगो के बिच से और उसके कुर्ते से बहार निकल लेता है..
इस तरह अचानक से अपने जिस्म से मानव के हाथ हटाने से मदमस्त हुई श्वेता नहीं चौक सी जाती है और सवालिया नजरो से मनो ये पूछ रही होती है की हाथ क्यों हटा दिया, और यही सवाल को समझते हुए मानव भी श्वेता को इशारा करते हुए सामने कड़ी सीमा की मौजूदगी दिखता है.
एक बार फिर बिच मजधार में अकेले चोरे जाने के कारन सीमा को देखते hi श्वेता को गुस्सा आजाता है और मानव की तरफ देखते हुए अपने गुस्से को आँखों hi आँखों से जाहिर करने लगती है, लेकिन चूँकि कार सीमा के बिलकुल नजदीक पहुंच जाती है इस वजह से मानव श्वेता से दुरी बना कर बैठ चूका था..
कार रुकते hi मानव झट से दरवाजा खोल बहार निकलते हुए: अरे सीमा बेटी तुम यहाँ बहार क्यों कड़ी हो...
सीमा: हाँ बस आपका hi वेट कर रही थी में पापा...
मानव: क्यों हमारा वेट क्यों कर रही थी वो भी यहाँ गेट पर..
सीमा: वो बस में भी अभी जस्ट यहाँ पहुंची हु तो सोचा थोड़ा नाश्ता पानी करके hi कमरे में जाउंगी, इसलिए आपका वेट क्र रही थी अब अकेले खाने की मुझे आदत नहीं न..
मानव, मन को तसल्ली देते हुए की लगता है अब सीमा की मेरे प्रति नाराज़गी शायद काम होने लगी है : हाँ क्यों नहीं मुझे भी बड़ी भूख लगी है आओ चलो चलते है.
सीमा, कार से उतर कर पास hi कड़ी श्वेता से : आओ श्वेता तुम भी चलो हमारे साथ..
श्वेता, जो वैसे hi अधूरी प्यासी चोरे जाने के कारन गुस्से में थी और निचे उसकी टैंगो के बिच गीली पड़ी छूट भी घिसे जाने को तड़प रही थी इस कारन: नहीं ma'am आप लोग जाइये मुझे भूख नहीं है, मैं अपने कमरे में जाती हु... और ये बोल मानव की तरफ गुस्से और शिकायत भरी नजरो से देखते हुए और मन hi मन ये सोचते हुए की, "यहाँ जिस्म की भूख तो मिटने दे नहीं रही है ये औरत और पेट की भूख मिटने का न्योता दे रही है कामिनी ", वह से चली जाती है..
उसके जाने के बाद दोनों बाप बेटी अंदर जा कर टेबल पर बैठ जाते है और नास्ता पानी करते हुए मानव एक तरफ अपनी ऑफिस की बाटे करते हुए और सीमा से उसकी शोपोइन्ग के बारे में पूछते हुए उन दोनों के रिश्ते के बिच आई कड़वाहट को दूर करने का एक कदम बढ़ाता है..
यहाँ वो ये भी देखता है की पिछले दिनों से जहा सीमा का उसके प्रति व्यवहार थोड़ा रुखा सा था आज उसमे थोड़ा भोत बदलाव आया है, और वो ये बिलकुल नहीं चाहता था की अब वो सीमा के आगे कोई भी गलती करे.
दूसरी तरफ ऑफिस से मीटिंग ख़तम करने के बाद रागिनी जो किसी जरुरी काम का बहाना कर के निकली थी वो सीधा एक कैफ़े में पहुंच जाती है और वह जा कर एक टेबल पर जहा पहले से hi एक शख्स जिसका नाम राजीव था, वो बैठा हुआ था और रागिनी उसके सामने राखी खली कुर्सी पर जा कर बैठ जाती है...
यहाँ में राजीव का एक छोटा सा परिचय दे देता हु,
राजीव जो की एक जवान 28 साल के करीब का लड़का शहर की एक मणि हुई होटल में कार्यरत होता है. दरअसल राजीव की मुलाकात रागिनी से कुछ सालो पहले तब होती है जब वो ऑफिस के hi किसी काम से इस शहर में आई थी और उसी होटल में रुकी थी जहा राजीव कार्यरत था. बस वही से इन दोनों की जानपहचान हुई और दोस्ती की शुरुआत होती है...
रागिनी, कुर्सी पर बैठे हुए: आईएम सॉरी राजीव, मुझे आने में थोड़ी देर हो गई, तुम्हे ज्यादा इंतज़ार तो नहीं करवाया न मेने..
राजीव: इंतज़ार तो तुमने भोत करवाया रागिनी लेकिन एक खूसूरत औरत के लिए इंतज़ार करना भी ाचा लगता है मुझे ः..
रागिनी: ः तुम भी न, कभी नहीं सुधरोगे है न..
राजीव, आँख मरते हुए: ाचा वैसे ये बताओ की दर्द तो नहीं है न अब तुम्हे बदन में..
रागिनी, मुस्कुरा कर: हहै दर्द तो था हल्का हल्का आज सुबह तक भी पर अब ठीक है और वैसे भी ऐसे दर्द तो में कितनी बार hi झेलने को तैयार हु..
राजीव: हाय वाकई मन्ना पड़ेगा तुम्हारी इस बात को तो की इन मामलो में तो औरतो को तुमसे सीखना चाहिए की अपने यार को कैसे खुश किया जाता है..
रागिनी : हाहाहा ाचा ये बताओ वैसे तुमने मेरे ऑफर के बारे में क्या सोचा, डोज न मेरा साथ या नहीं...
राजीव : इसमें सोचना क्या है रागिनी, तुम्हारे लिए तो सब कुछ कुर्बान हाहाहा... जरूर दूंगा में तुम्हर साथ और आज क्या हमेशा देता रहूँगा..
रागिनी, खुश होते हुए: अरे वाह ये हुई न बात, ठीक है फिर अभी मेरे भैया और भतीजी भिनिसि शहर में मौजूद है, तो जाने से पहले में तुमहु उनसे एक बार मिलका दूंगी फिर बताती हु की आगे क्या और केसव करना है..
राजीव: हाँ जैसा तुम्हे ठीक लगे पर हाँ जो कुछ भी करो संभल कर करना, कही हम फास न जाये..
रागिनी: तुम फ़िक्र न करो ऐसा कुछ नहीं होगा वैसे भी अब कल इतना दर्द फसने के लिए तो नहीं सहा मेने हहह, अब तो जो थान लिया वो क्र के hi रहूंगी...
राजीव: हहह बात तो ये भी सही है तुम्हारी...
रागिनी : जी हाँ, ाचा तो फिर अब मैं चलती हु, भैया से कब, कहा और किस दिन मुलाकात करनी है ये में तुम्हे फ़ोन करके बता दूंगी..
राजीव: हाँ ठीक है दोने, तब तक के लिए bye..
और इस तरह रागिनी राजीव से विदा ले कर वापस होटल में आजाती है और दिमाग में आगे होने वाली चीजों को सोचते हुए मन hi मन ख़ुशी के मरे उत्साहित हो रही थी...
दोस्तों अब देखना ये है की ऐसा की सोचा है रागिनी ने और क्या होने वाला है रागिनी और राजीव के बिच.
इन सब सवालो क्व उत्तर जानने के लिए बने रहिये कहानी के संग
तो बे कॉन्टिनोएड..