Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh - Page 7 - SexBaba
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Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh

अपडेट- 51


पुरे दिन भर में सीमा ने अपने लिए थोड़ी भोत शॉपिंग कर ली थी और वही दूसरी तरफ मानव, रागिनी और श्वेता भी आज के अपने ऑफिस के काम से फ्री हो चुके थे और जैसा की सीमा ने कहा था ठीक वैसे hi रागिनी उसे फ़ोन करके ये खबर दे देती है की उनका काम निपट गया है..

बुआ से ये जानकर की उन लोगो का काम भी ख़तम हो चूका है, सीमा बुआ से होटल में hi मिलने का बोल देती है क्युकी वो खुद भी दिन भर की शॉपिंग करने के बाद थकन के कारन और कही नहीं जाना छह रही थी लेकिन उसकी बात के जवाब में रागिनी उसे ये कहती है की उसे एक कोई खास जरुरी काम है तो वो अभी होटल नहीं आ सकती है इसलिए मानव और श्वेता होटल लौट रहे है और उसे लौटने में देरी होगी..

रागिनी बुआ की बात सुन सीमा का मन तो इस बात के लिए कटाई राज़ी नहीं था की चाहे थोड़े hi समय के लिए भी क्यों नहीं, लेकिन पापा स्वेता के साथ अकेले नहीं होने चाहिए.. परन्तु अब इसके अलावा और कोई चारा भी नहीं था इसलिए बुआ की बात पर हामी भरते हुए वो ठीक है बोल फ़ोन कट कर देती है और खुद भी बाजार से सीधा होटल के लिए रवाना हो जाती है.

यहाँ मानव को ये बात जान कर तसल्ली होती है की चलो कुछ समय के लिए hi सही उसे श्वेता के साथ अकेले वेट बिताने का मौका तो मिल रहा है और आज सुबह से hi वो ये बात गौर कर रहा था की श्वेता उससे आज इतनी बात चित नहीं कर रही है, कुछ उखड़ी उखड़ी सी लग रही है...

इसीलिए रागिनी से अलग होने के बाद दोनों मानव और श्वेता कंपनी की गाड़ी जो उन्हें होटल चोर्ने के लिए मौजूद थी उसमे पीछे की सीट पर बैठ जाते है और होटल की तरफ रवाना हो जाते है..

कार में बैठने के बस कुछ hi देर में मानव अपना हाथ श्वेता की जांघो पर रख कर उसे देखते हुए मुस्कुरा देता है मनो ये जाता रहा हो की वो उसे मानाने की कोशिश कर रहा हो.. श्वेता जो की इस वक्त एक कैसा हुआ सलवार सूट पहनी हुई थी जिसका कपडा उसकी त्वचा से एक दम सत्ता हुआ था मनो की बस थोड़ा जोर लगाओ तो चूचिया तो कुर्ते से झट बहार उछाल के निकल आएँगी...

अपने बॉस मानव के हाथो को जांघो पर महसूस करते hi तुरंत वो अपने हाथो से मानव का हाथ झटक देती है और आँखों से इशारे कर ये जाता रही होती है मनो की वो उससे भोत रूठी हुई और गुस्से में है...

मानव, श्वेता का ये रवैया देख वापस अपने हाथो को उसके कुर्ते के अंदर सरकते हुए टैंगो के बिच बिच रख छूट को मुट्ठी में भीचते हुए धीरे स्वर में जिससे की कार ड्राइवर को कुछ सुनाई न दे: क्या हुआ मेरी रंडी, इतनी क्यों गुस्सा हो रही है आज हम्म्म..

श्वेता, जो इतने लम्बे आरसे से खुद मानव के हाथो अपनी छूट मसलवाने को तरस रही थी, इस तरह चलती कार में अपनी छूट के बाबोचे जाने से पिघल सी जाती है और उसके जिस्म में मनो कम्पन सा उत्पन्न हो जाता है और उसकी दोनों टंगे आपस में सिकुड़ सी जाती है और मानव का हाथ बिच में hi फसा रह जाता है लेकिन फिर बी नाराज़गी जात्ते हुए वो मानव के हाथ को अपने हाथो से बहार खींचने का दिखावा करते हुए: उम्म्म्म गुस्सा न हो तो क्या करू भला में, आपको मेरी फ़िक्र hi कहा है कुछ...

मानव, ये जानते हुए की श्वेता का ये गुस्सा कुछ वकत का है, मुट्ठी में दबोची छूट को ढीला चोर अपनी हथेली को छूट के उप्पेर दबाव बनाते हुए घिसते हुए: ाचा क्यों तुझे ऐसा क्यों लगता है की तुझे मेरी फ़िक्र नहीं...

श्वेता, अब मानव के हाथ को ढीला चोर मस्त होती हुई: आगे इतनी hi फ़िक्र होती तो मुझे मेरे घर से दूर ला कर ऐसे अकेले तड़पती नहीं चोरते. जाओ अपनी बेटी के आगे पीछे घूमो बस और कुछ नहीं होना है आपसे अब..

मानव, एक हाथ को तो श्वेता की टैंगो के बिच घिसते हुए और दूसरे हाथ को उसकी कमर के पीछे से दूसरी तरफ ले जा कर उसे अपने पास खींचता है और दुपट्टे के अंदर से एक चुकी को कास के दबा देता है और सहलाना शुरू करते हुए: ऐसी बात नहीं है श्वेता रानी, तुम्हे बी पता है की हालत क्या है वार्ना में खुद यही सोच कर तुम्हे यहाँ लाया था की एक हफ्ते तक तुझे दिन रत नंगी रख कर तेरी पूरी जवानी लूटूँगा...

श्वेता, छूट और चुकी पर मानव द्वारा किये जा रहे दोहरे प्रहार से अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वासना से जलती हुआ जिस्म और चुदाई के लिए उसकी तड़प और लाचारी अब उसकी आँखों में भी साफ दिखाई दे रही थी और उन्ही तरसती आँखों को मानव की तरफ उठाते हुए: तो फिर लूट क्यों नहीं लेते आप मेरी जवानी सर, मई तो खुद मेरा जिस्म और जवानी लुटवाने आयी हु आपके साथ अपने पति का साथ चोर कर, और अगर आप चाहो तो इन हालातो में भी भोत कुछ हो सकता है.

मानव, चुकी के उप्पर जो हाथ अभी दुपट्टे के निचे था अब उसे हौले से उसके कुर्ते के गले से होते हुए अंदर दाल श्वेता की एक मुलायम गदराई चुकी को पकड़ के दबाते हुए और निप्पल को उंगलिओ के भींच फसा मरोड़ते हुए: हाँ तो मेरी रंडी, बस वही मौका ढूंढे में तो लगा हुआ हु न मैं, जितनी तड़प तुझे है उतनी hi मुझे बी है एक जवान शादी शुदा औरत के जिस्म को लूटने की, मुझसे बी नहीं रहा जा रहा है अब तो...

श्वेता, अपनी चुकी को इस तरह भीचते हुए महसूस कर एक धीमी सिसकी निकलते हुए: ससस अह्ह्ह्ह सर तो और कितना इंतज़ार करवाओगे आप, अब तो वाकई में नहीं रहा जा रहा आपकी इस रंडी से ममममम...

और इससे पहले की सीमा और मानव अपनी इस मस्ती को और आगे बढ़ाते हुए मजे लेते की मानव को दिखाई पड़ता है की कार होटल के गेट के अंदर पहुंच चुकी है और सामने मैं गेट पर hi सीमा कड़ी हुई है और अपनी बेटी सीमा को सामने खड़े देख वो झट से अपने दोनों hi हाथ श्वेता की टैंगो के बिच से और उसके कुर्ते से बहार निकल लेता है..

इस तरह अचानक से अपने जिस्म से मानव के हाथ हटाने से मदमस्त हुई श्वेता नहीं चौक सी जाती है और सवालिया नजरो से मनो ये पूछ रही होती है की हाथ क्यों हटा दिया, और यही सवाल को समझते हुए मानव भी श्वेता को इशारा करते हुए सामने कड़ी सीमा की मौजूदगी दिखता है.

एक बार फिर बिच मजधार में अकेले चोरे जाने के कारन सीमा को देखते hi श्वेता को गुस्सा आजाता है और मानव की तरफ देखते हुए अपने गुस्से को आँखों hi आँखों से जाहिर करने लगती है, लेकिन चूँकि कार सीमा के बिलकुल नजदीक पहुंच जाती है इस वजह से मानव श्वेता से दुरी बना कर बैठ चूका था..

कार रुकते hi मानव झट से दरवाजा खोल बहार निकलते हुए: अरे सीमा बेटी तुम यहाँ बहार क्यों कड़ी हो...

सीमा: हाँ बस आपका hi वेट कर रही थी में पापा...

मानव: क्यों हमारा वेट क्यों कर रही थी वो भी यहाँ गेट पर..

सीमा: वो बस में भी अभी जस्ट यहाँ पहुंची हु तो सोचा थोड़ा नाश्ता पानी करके hi कमरे में जाउंगी, इसलिए आपका वेट क्र रही थी अब अकेले खाने की मुझे आदत नहीं न..

मानव, मन को तसल्ली देते हुए की लगता है अब सीमा की मेरे प्रति नाराज़गी शायद काम होने लगी है : हाँ क्यों नहीं मुझे भी बड़ी भूख लगी है आओ चलो चलते है.

सीमा, कार से उतर कर पास hi कड़ी श्वेता से : आओ श्वेता तुम भी चलो हमारे साथ..

श्वेता, जो वैसे hi अधूरी प्यासी चोरे जाने के कारन गुस्से में थी और निचे उसकी टैंगो के बिच गीली पड़ी छूट भी घिसे जाने को तड़प रही थी इस कारन: नहीं ma'am आप लोग जाइये मुझे भूख नहीं है, मैं अपने कमरे में जाती हु... और ये बोल मानव की तरफ गुस्से और शिकायत भरी नजरो से देखते हुए और मन hi मन ये सोचते हुए की, "यहाँ जिस्म की भूख तो मिटने दे नहीं रही है ये औरत और पेट की भूख मिटने का न्योता दे रही है कामिनी ", वह से चली जाती है..

उसके जाने के बाद दोनों बाप बेटी अंदर जा कर टेबल पर बैठ जाते है और नास्ता पानी करते हुए मानव एक तरफ अपनी ऑफिस की बाटे करते हुए और सीमा से उसकी शोपोइन्ग के बारे में पूछते हुए उन दोनों के रिश्ते के बिच आई कड़वाहट को दूर करने का एक कदम बढ़ाता है..

यहाँ वो ये भी देखता है की पिछले दिनों से जहा सीमा का उसके प्रति व्यवहार थोड़ा रुखा सा था आज उसमे थोड़ा भोत बदलाव आया है, और वो ये बिलकुल नहीं चाहता था की अब वो सीमा के आगे कोई भी गलती करे.

दूसरी तरफ ऑफिस से मीटिंग ख़तम करने के बाद रागिनी जो किसी जरुरी काम का बहाना कर के निकली थी वो सीधा एक कैफ़े में पहुंच जाती है और वह जा कर एक टेबल पर जहा पहले से hi एक शख्स जिसका नाम राजीव था, वो बैठा हुआ था और रागिनी उसके सामने राखी खली कुर्सी पर जा कर बैठ जाती है...

यहाँ में राजीव का एक छोटा सा परिचय दे देता हु,

राजीव जो की एक जवान 28 साल के करीब का लड़का शहर की एक मणि हुई होटल में कार्यरत होता है. दरअसल राजीव की मुलाकात रागिनी से कुछ सालो पहले तब होती है जब वो ऑफिस के hi किसी काम से इस शहर में आई थी और उसी होटल में रुकी थी जहा राजीव कार्यरत था. बस वही से इन दोनों की जानपहचान हुई और दोस्ती की शुरुआत होती है...

रागिनी, कुर्सी पर बैठे हुए: आईएम सॉरी राजीव, मुझे आने में थोड़ी देर हो गई, तुम्हे ज्यादा इंतज़ार तो नहीं करवाया न मेने..

राजीव: इंतज़ार तो तुमने भोत करवाया रागिनी लेकिन एक खूसूरत औरत के लिए इंतज़ार करना भी ाचा लगता है मुझे ः..

रागिनी: ः तुम भी न, कभी नहीं सुधरोगे है न..

राजीव, आँख मरते हुए: ाचा वैसे ये बताओ की दर्द तो नहीं है न अब तुम्हे बदन में..

रागिनी, मुस्कुरा कर: हहै दर्द तो था हल्का हल्का आज सुबह तक भी पर अब ठीक है और वैसे भी ऐसे दर्द तो में कितनी बार hi झेलने को तैयार हु..

राजीव: हाय वाकई मन्ना पड़ेगा तुम्हारी इस बात को तो की इन मामलो में तो औरतो को तुमसे सीखना चाहिए की अपने यार को कैसे खुश किया जाता है..

रागिनी : हाहाहा ाचा ये बताओ वैसे तुमने मेरे ऑफर के बारे में क्या सोचा, डोज न मेरा साथ या नहीं...

राजीव : इसमें सोचना क्या है रागिनी, तुम्हारे लिए तो सब कुछ कुर्बान हाहाहा... जरूर दूंगा में तुम्हर साथ और आज क्या हमेशा देता रहूँगा..

रागिनी, खुश होते हुए: अरे वाह ये हुई न बात, ठीक है फिर अभी मेरे भैया और भतीजी भिनिसि शहर में मौजूद है, तो जाने से पहले में तुमहु उनसे एक बार मिलका दूंगी फिर बताती हु की आगे क्या और केसव करना है..

राजीव: हाँ जैसा तुम्हे ठीक लगे पर हाँ जो कुछ भी करो संभल कर करना, कही हम फास न जाये..

रागिनी: तुम फ़िक्र न करो ऐसा कुछ नहीं होगा वैसे भी अब कल इतना दर्द फसने के लिए तो नहीं सहा मेने हहह, अब तो जो थान लिया वो क्र के hi रहूंगी...

राजीव: हहह बात तो ये भी सही है तुम्हारी...

रागिनी : जी हाँ, ाचा तो फिर अब मैं चलती हु, भैया से कब, कहा और किस दिन मुलाकात करनी है ये में तुम्हे फ़ोन करके बता दूंगी..

राजीव: हाँ ठीक है दोने, तब तक के लिए bye..

और इस तरह रागिनी राजीव से विदा ले कर वापस होटल में आजाती है और दिमाग में आगे होने वाली चीजों को सोचते हुए मन hi मन ख़ुशी के मरे उत्साहित हो रही थी...

दोस्तों अब देखना ये है की ऐसा की सोचा है रागिनी ने और क्या होने वाला है रागिनी और राजीव के बिच.

इन सब सवालो क्व उत्तर जानने के लिए बने रहिये कहानी के संग😛 अगले अपडेट के इंतज़ार के साथ...


तो बे कॉन्टिनोएड..

 
अपडेट - 52

अब आते है वापस घर पर प्रीति, मम्मी और बाकि के सदस्यों की तरफ और देखते है वह क्या चल रहा है :-

सुबह सुबह जब मैं तैयार हो कर कॉलेज से निकलने hi वाला था की पीछे से एक आवाज मुझे रोक देती है और जो आवाज थी प्रीति की, उसकी आवाज सुन में ुयी तरह मुड़ता हु और मुड़ते hi जब मेरी नज़र प्रीति पर पड़ती है तो जैसे उसकी सुंदरता और कल मेरी पसंद के ख़रीदे हुए उस कुर्ते में वो एक दम कामुक और हसीं पारी सी लग रही थी..

आज वो कुरता उस पर ट्रायल रूम की तुलना से भी ज्यादा जांच रहा था और कुर्ते की पारदर्शिता से उसकी ब्रा का लाल रंग भी कुछ हद तक दिखाई दे रहा था जिससे मेरे मन में ये बात भी आई की प्रीति ने शायद ब्रा भी नयी वाली फेनी हुई है, और सच में आज उसकी चूचिया उस कैसे हुए कुर्ते में एक दम कड़क उभरी हुई और बिलकुल भी किसी प्रकार की लटक के बिना सख्त सीधी सामने की और उभरी हुई दिख रही थी जिन्हे देख मनो कोई भी मर्द बस उन्हें सीधा अपने मुँह में लेना चाहेगा...

और कुर्ते के निचे पहनी हुई त्वचा से चिपकी हुई वो लेग्गिंग जिसमे से उसकी मांसल जांघो का अकार बिलकुल hi साफ़ दिखाई पद रहा था और कमर के ठीक पास से कुर्ते की साइड में लगे कट्स से उसके कैसे चूतड़ों का अकार भी अच्छे से नजर आ रहा था, अपनी प्यारी सी बेहेन के इस कामुक रूप को डोह एक बार तो मेरा मन हुआ की उसे अपनी बहो में भींच उसके इन मुलायम गद्दीदार चूतड़ों को हाथो जोर से मसल कर रख दू...

इसी सब सोच के बिच मुझे दोबारा प्रीति की आवाज सुनाई देती है, जो खुद भी मेरे उसे इस तरह देखने से मन hi मन खुश हो रही थी की शायद उसने जो सोचा था या वो जो चाहती थी वही हो रहा है क्युकी अब पिछले दिनों से वो भी यही चाहने लगी थी की उसका भाई सनी ज्यादा से ज्यादा वक्त उसे देखता रहे, किसी न किसी प्रकार से वो अपने भाई का ध्यान अपनी तरफ खींचती रहे...

मैं, प्रीति की आवाज सुन वापस उसे देखते हुए: हाँ जल्दी बोल क्या हुआ क्यों रोका मुझे..

प्रीति: भाई वो क्या तुम मुझे मेरी कॉलेज चोर कर अपनी कॉलेज जा सकते हो क्या वो दरअसल आज मुझे गाड़ी चलने का मन नहीं. कर रहा..

मैं, उसके इस अजीब से बहाने की वजह न समझते हुए: ये कैसा बहाना है अब तेरा, गड़े चलने का मन नहीं, रोज तो जाती है न तू फिर आज क्या दिक्कत है..

प्रीति, मुँह बना कर: यार भाई प्लस न चोर दो अब आज नहीं है मन तो नहीं, और मेरा कॉलेज भी रस्ते में. पड़ता है तो चोर्ने में दिक्कत क्या है तुम्हे..

मैं, सुबह सुबह फालतू की बेहेस करना ठीक न समझ कर: ाचा चल ठीक है अब चल जल्दी मुझे भी देर हो रही है..

मेरी हाँ सुन प्रीति खुश होते हुए झट से तैयार हो जाती है और मेरे साथ कार में मेरी पास वाली hi सीट पर बैठ जाती है और हम दोनों चल पड़ते है..

मैं, कार चलते हुए उसकी तरफ नज़र दाल: वैसे ये कुरता काफी जांच रहा है तुझ पर प्रीति, देखा मेरी पसंद इतनी भी बुरी नहीं है..

प्रीति, मेरे मुँह से अपनी तारीफ सुन मुस्कुराते हुए: हाँ भाई सच्ची ये तो है, तमहरि पसनद भोत अछि है, मुझे भी ये कुरता भोत ाचा लगा और इसकी फिटिंग भी बिलकुल सटीक है एक दम..

मैं, मन hi मन ये सोच की हाँ फिटिंग तो दिख hi रही है कुर्ते की, कैसे बेचारी उन चुचिओ को एक दम कास के जकड़े हुए है ः..

मैं: वैसे बाकि के कपडे भी तरय किये की नहीं घर आकर तूने, उनकी फिटिंग किसी है.

प्रीति: हाँ भाई सब तरय किये और सब बिलकुल परफेक्ट बैठ रहे है मेरी बॉडी पर...

मैं, थोड़ा मजाकिया अंदाज में: और मेरी गफ के लिए ख़रीदे गए उन्देर्गर्मेन्ट्स... उनकी फिटिंग किसी है और क्या वो उसे अचे लगे क्युकी ऐसे नए डेगीसँ खरीदने से वो मन कर रही थी न..

प्रीति, मेरे मुँह से ये सवाल सुन एक दम शर्मा सी जाती है लेकिन उसके अंदर hi अंदर जिस्म में एक अलग सी सिहरन उत्पन्न होने लगती है मनो उसके रोंगटे से खड़े हो रहे हो: क्या भाई तुम भी, ऐसे कोई अपनी बेहेन से बाटे करता है क्या..

मैं: अरे वाह अब बेहेन हो गई, कल तो तू खुद तुझे मेरी गफ बता रही थी न ये सब खरीदते हुए अब जब में पूछ रहा तो इतने नाटक वाह..

प्रीति, अब तुझे कैसे बताऊ सनी, में किस पशोपेश में पड़ी हुई हु इन दिनों, दिल कुछ कहता है और दिमाग कुछ.. चाहती तो में भी हु की तेरे सामने बिलकुल खुल जाऊ लेकिन पता नहीं क्यों ऐसा करने की अब तक हिम्मत नहीं हो रही है: हेहेहे तुम भी न भाई, वो तो मेने बस ऐसे hi कहा था

मैं: ऐसे या वैसे मुझे नहीं ोाता, मेने तो अपनी गफ के नाते तुझे वो सब पसंद करने में मदद की अब तुझे बताना तो पड़ेगा की उनकी फिटिंग किसी आई तेरे शरीर पर..

प्रीति, नज़रे झुका मुस्कुराते हुए: हम्म्म उनकी फिटिंग भी भोत सटीक है और लग भी अछि रही हैं ये लेटेस्ट दसिग्नस हहै..

मैं, उसकी बात सुनते hi मेरे लुंड को एक झटका लगता है, उफ़ काश मुझे सच में ये मेरी आँखों से देखने को मिल जाता: वाह ये तो बड़ी अछि बात है मेने कहा था न तुझसे की ये तुझे भोत सूट करेगी और अछि लगेगी...

प्रीति, अब बी शरमाते हुए और मन hi मन शरीर में अलग सी hi उत्तेजना को महसूस करते हुए: हम्म्म भाई..

मैं, अब मेरा मन इस बारे में और जानने को उत्सुक होते हुए: वैसे आज भी तूने कल खरीदी हुई ब्रा में से hi एक पहनी है न प्रीति..

प्रीति, इस सवाल को सुनते hi झट से अपनी आंखे उप्पेर कर सवालिया नज़रो से : क्यों तुझे क्या करना है अब ये जान कर सनी,

मैं, हस्ते हुए: क्युकी अब मुझे पता होना चाहिए न मेरी गफ मेरे द्वारा दी हुई चीजों का अचे से इस्तेमाल तो कर रही है न..

प्रीति, मेरे हाथो पर मुक्का मरते हुए, हस्ते हुए: चुप कर जा तू अब कुछ भी मत बोल समझा, ोरब में तेरी कोई गफ नहीं हु..

मैं: ः तू मत मन लेकिन में तो यही मानूंगा क्युकी तूने खुद कहा था न... वैसे तू एक दोस्त के नाते hi बता दे फिलहाल की तूने उनमे से hi एक हरा पहनी है न आज..

प्रीति, अपने भाई द्वारा इस तरह सीधे जवळ पूछे जाने से मन hi मन पिघलते हुए: हाँ भाई हाँ पहनी है मेने उनमे से hi एक रेड वाली ब्रा, हहै

मैं: ाचा रेड वाली कौनसी, उसमे तो अलग अलग पैटर्न की थी न, तूने कौनसी वाली पहनी है अभी...

प्रीति, इतने डिटेल में सवाल सुनने के बाद अब वो खुद भी कही न कही इन बातो काजा लेते हुए: अब तुझे उससे क्या मतलब है, क्यों बताऊ तुझे और ऐसी बाटे कौनसा भाई अपनी बेहेन से करता है बेशरम..

मैं, आँख मरते हुए: ः वही भाई जिसकी बेहेन खुद उसे अपने लिए कपडे और ब्रा चुनने साथ में ले जाती हो.

प्रीति, मेरी इस बात से फिर से मुस्कुराते हुए: तू सच में भोत ख़राब है सनी मुझे hi फसा दिया, मुझे ऐसा कुछ कहना hi नहीं चाहिए था तुझसे कल..

मैं: अब जो हो गया सो हो गया, वैसे भी में बस पूछ रहा हु कौनसा ये कहा की मुझे कुरता निकल कर दिखा हाहाहा...

प्रीति, कुरता निकलने की बात शायद उसके जिस्म में एक करंट फ़ैलाने का काम कर जाती है और इसी कारन उसकी चट्टिया भरी सांस के साथ उप्पेर निचे होने लग जाती है: सनी कुछ भी मत बोलै कर तू समझा, और तू ऐसा बोल कर तो देख थप्पड़ न खायेगा फिर.

मैं: देख तो फिर अब बता जल्दी से और क्या...

अभी हमारी बात ख़तम होती hi इससे पहले मुझे दिखाई पड़ता है की बातो बातो में प्रीति का कॉलेज आ चूका है और इसी बात का फायदा उठा..

प्रीति: हहै नहीं अभी मेरा कॉलेज आ गया अब फिर कभी फुर्सत में बता दूंगी ठीक है..

मैं: ओह इस कॉलेज को भी इतनी जल्दी आना था सहित, खैर कोई बात नहीं आज तू बच गयी लेकिन अब में अपने इस बात का जवाब तो ले कर रहूँगा..

प्रीति: हाहाहा देखते है देखते है भाई..

मैं: ाचा चल ठीक है वो तो वक्त बताएगा अब जा तू और हाँ तेरी उस सहेली को.. क्या नाम था उसका.. हाँ मोनाल, उसको मेरा होई कहना..

प्रीति, मोनाल का नाम सुनते hi दोबारा जलन महसूस करते हुए: क्यों उसको hi क्यों बोलना है अब तुझे..

मैं: क्यों क्या, बड़ी प्यारी लड़की है वो भी और खूबसूरत भी, कल तो तूने उससे ज्यादा परिचय भी नहीं करवाया न बात करने दी, बस इसलिए उसको कहना की मेने ही बोलै है... वक्त मिला तो किसी दिन फिर मिल लेंगे क्यों क्या कहती है..

प्रीति: कोई जरुरत नहीं किसी से मिलने की और वैसे भी वो तेरे जैसे फ्री नहीं की बस भटकती रहे समझा, चल अब जा अब देर नहीं हो रही तुझे कॉलेज के लिए..

और ये बोल प्रीति कारसे उत्तर जाती है और यहाँ में भी प्रीति को छेड़ने के बाद उसको इस तरह चिढ़ता हुआ देख है कर वह से निकल जाता हु और यहाँ कॉलेज गेट से अंदर पैदा जाते हुए प्रीति अपने होठो पर मुस्कराहट के साथ ये सोचते हुए घुसती है की, " कैसी बाटे करता है ये सनी भी न हहै, अब उसे कैसे बताती की मेने आज सब कुछ उसकी पसंद का पहना है, भर कुर्ते लेग्गिंग से ले कर अंदर ब्रा पंतय भी, और उसके पूछने पर में उसे ये बात बता क्यों नहीं पाई ाकाहिर, पता नहीं वो ये सब मजाक में पूछ रहा था मेरी तंग खींचने या सच में जानना चाहता था... और अगर जैसे वो मेरा कुरता निकलवा कर मुझे सिर्फ ब्रा में देखने की बात बोल रहा था उफ्फ्फ्फ़ क्या कभी सच में मैं उसके सामने ऐसे जा पाऊँगी भी या नहीं, नहीं पता तब मेरा क्या हाल होगा अगर में उसके सामने ऐसे उसकी पसंद की ब्रा और पंतय पहन कर कड़ी हो गई तो.. उसका तो पता नहीं पर में तो सच में पानी पानी हो जाउंगी हहै"...

अभी ये सब सोचते हुए प्रीति अपनी क्लास में पहुँचती hi है की उसे सामने बैठी मोनाल दिखाई दे जाती है और वो सीधा उसके पास जा कर बैठ जाती है और क्लास अटेंड करने के बाद रोज की hi तरह दोनों कैंटीन में अपने ठिकाने पर जा कर बैठ जाती है..

कैंटीन में पहुंच मोनाल अब प्रीति से कल मालमे उसके जाने केनद हुए सरे वाकिये की जानकारी लेती है और इस बार प्रीति भी बिना कोई मनगढ़त कहानी बनाये बिना कोई बात छिपायेसब कुछ सचसच बता देतीहै मनो वो खुद अब मोनाल कोई जाताना छह रही है की उसके और सनी के बिच वाकई कुछ चल रहा है और मोनाल भी इस बात को ले कर प्रीति को चिढ़ाने लगती है और प्रीति की झिझक कोदूर करए हुए दोबारा यही समझती है की, " तू मने या न मने, कितना भी इंकार कर ले लेकिन तेरे दिल में सनी केलिए प्यार उत्पन्न हो चूका है और यही कारन है की तू उसकी पसंद को मायने देते हुए उसके मुताबिक रहने लगी है, और इसलिए अब अपने पैर को समझ और सनी से इस बात का इज़हार कर. "

अब यहाँ मोनाल को ये कहा पता है की प्रीति जिससे प्यार कर बैठी है वो उसका अपना सागा भाई है और इसलिए ये प्यार का इज़हार करना इतना आसान नहीं होने वाला है इसलिए फिलहाल तो वो बस इन कुछ पालो की हसीं मस्ती भरी बातो और अपने भाई के साथ बिट रहे वक्त को एन्जॉय करना चाहती है और सही वक्त और मौका आने पर जो होना होगा जैसे होना होगा वो हो क्र रहेगा, फिलहाल तो वो खुद को इस बात के लिए पूरी तैयार नहीं कर प् रही है..

वह जब मैं अपनी कॉलेज पहुँचता हु तो देखता हु की कामिनी भाभी कॉरिडोर में अकेली कड़ी हुई है और इस वक्त उन्होंने एक मस्त सी साड़ी पहनी हुई थी जिसमे वो एक दम कड़क पटाखा माल लग रही होती है और उनके अकेला पा कर उनके पास जा कर..

मैं: क्या भाभी, यहाँ अकेले खड़े किसका इंतज़ार कर रही हो आप..

कामिनी: अरे सनी तुम यहाँ, बस किसी का नहीं वो प्राची मां की रह देख रही थी..

मैं: ओह ऐसी बात है, वैसे आज कमल लग रही हो आज तो... एक दम हॉट और छोड़ने लायक माल..

कामिनी, इधर उधर देख: क्या सनी कही भी कुछ बी बोलते हो, ये घर नहीं कॉलेज है कोई सुन लेगा न..

मैं: कोई नहीं सुनने वाला और गलती से कोई सुन भी लेगा तो गलत क्या है अब में मेरी चुड़क्कड़ रैंड को छोड़ने की hi बात क्र रहा हु न कोई और बात तो नहीं...

कामिनी: िषजः हाय देवर जी लेकिन यहाँ आपका मेरा कोई रिश्ता नहीं है आपने hi कहा था यद् है न, तुम्हारे लिए ये कामिनी एक चुदक्क्ड़ रंडी भाभी कॉलेज के बहार है कॉलेज में नहीं...

मैं: हाँ पता है मेरी जान, इसलिए तो अब तक रुका हुआ हु वार्ना कबका तुम्हे यहाँ से उठा क्र किसी कोने में ले जा चूका होता और तुम्हारी गांड मार रहा होता मेरी रनडीई...

कामिनी: िष्ठ अब ऐसी बाटे करके मेरी छूट गीली मत करवाओ सनी पूरा दिन निकलना मुश्किल हो जायेगा मेरा हहै..

अभी हमरी बात चल hi रही होती है की दूर से हमें प्राची मां आती हुई दिखाई देती है इसलिए वापस नार्मल होते हुए एक दूसरे से बात करने लगते है और जैसे hi प्राची करीब आती है में भाभी को "ठीक है ma'am में पूरी कोशिश करूँगा आपकी हेल्प कैसे करू इस बारे में सोचने की बस बदले में आप मुझे भी जो चाहिए वो देते रहना."

जनरल बातो में भी इस तरह की दोहरे मतलब की बात सुन भाभी तो सब समझ जाती है और अंत के वाक्यों का कुछ टुकड़ा प्राची मां के कानो में भी जा कर सुनाई पड़ता है जिसे सुन हमारे पास आ कर..

प्राची : किस तरह की हेल्प करने की बाटे हो राहु और तुम्हे क्या चाहिए कामिनी मां से सनी..

मैं: अरे मां अब आप तो दे नहीं रही हो तो मेने सोचा कामिनी मां से hi मांग लिए जाये..

मेरी इस बात से एक तरह कामिनी मां के चेहरे पर मुस्कान सी आजाती है वही प्राची मां झेंप सी जाती है और ये देख बात को सँभालते हुए..

कामिनी: अरे प्राची मां कुछ नहीं बीएस वो सनी के पापा कॉलेज के बोर्ड मेंबर्स में से एक है न तो कुछ मैनेजमेंट के सिलसिले में बात कर रही थी और बदले में ये स्टडीज में मदद कर उसका फायदा दिलाने की बात क्र रहा था हैं न सनी..

मैं: हाँ मां बस और नहीं तो क्या अब इसके अलावा में आपसे या प्राची मां आपसे (उनको देख मुस्कुरा कर) क्या फायदा ले सकता हु भला ः... ाचा मेरी क्लास का टाइम हो रहा अब में चलता हु.. और ये बोल में वह उन दोनों औरतो को अकेला चोर निकल जाता हु..

कामिनी, मुझे जाता हुआ देख: कितना बिंदास लड़का है न ये, हर वक्त बस मजे में रेहत हाउ न किसी बात की परवाह न कुछ..

प्राची: अब बड़े घर का बीटा है यार कामिनी ये, इसे क्या पड़ी होगी सब तैयार जो मिल रहा..

कामिनी: नहीं इसमें वैसे गन नहीं और न hi अमीर होने का कोई गुरुर, मुझे तो इसमें ऐसा कुछ भी नहीं दीखता है और जरुरी नहीं की हर बड़े घर का लड़का वैसा hi निकले..

प्राची, मनो कोई सीरियस सी बात कह रही हो: में तो तुमसे यही कहूँगी की ऐसे बड़े घर के लड़को से जितना दूर रह सको रह लो, सब बस अपने फायदे का सोचते है, और अपने फायदे के लिए ये किसी और का नुकसान करने से पहले भी नहीं सोचते..

कामिनी, आज दूसरी बार ये महसूस करते हुए की ये सनी को ले कर हमेशा इस तरह की बात क्यों करती है, पहले भी मेने इंदिरेक्ट्ली इसके मुँह से ऐसा hi कुछ सुना था: क्या मतलब में कुछ समझी नहीं, तुम ऐसा क्यों कह रही हो..

प्राची, बात को संभल कर दिशा से भटकते हुए: नहीं बस में तो ज़माने को देख कर अपना अनुभव बता रही हु तुम्हे और क्या, बाकि तो तुम भी समझदार हो हहै.. खैर चलो अब क्लास का समय हो रहा है, में चलती हु.. और ये बोल वो भी वह से चली जाती है.

यहाँ कामिनी खड़े खड़े यही सोचती है की हो न हो कोई न कोई बात तो जरूर है जो प्राची मुझे बताना भी छह रही है और छिपाना भी.. और मुझे ऐसा भी लग रहा है की ये बात कही न कही सनी से जुडी हुई है, और इस बात का मुझे ोाता लग्न hi पड़ेगा, सनी से बात करके देखूंगी शायद कुछ पता लग जाये...
 
दोस्त

थैंक्स भाई...

रही बात कहानी के इन्सेस्ट रहने की तो दोस्त अब तक की कहानी में घर की औरत किसी बहार वाले से नहीं चूड़ी है, तो मुझे नहीं लगता की इन्सेस्ट प्लाट से हैट कर मेने कहानी आगे बड़ाई हो... बाकि रही बात सीमा की तो, दोस्त जैसे कहानी आगे बढ़ेगी उसके प्रति भी चीजे साफ़ नज़र उसने लगेगी, जैसा की मेने पहले भी कहा की कहानी लम्बी और मजेदार बनानी है तो दरी बाटे एक hi अपडेट में क्लियर नहीं की जा सकती..

में बस आपसे उम्मीद और विनती कर सकता हु की कहानी का साथ देते रहिये चीजे अपने आप साफ होती चली जाएँगी.. अब तक साथ बनाये रखने के लिए थैंक्स वन्स अगेन.. एंड थैंक्स फॉर थे सुग्गेस्टियन्स तू.. आशा करता हु ऐसे आगे भी साथ मिलता रहेगा मुझे..
 
अपडेट - 53


घर पर अकेली महिमा अपने घर के कामो में व्यस्त hi थी की तभी उसका मोबाइल की घंटी बजना शुरू हो जाती है और अपने गंदे हाथो को धो कर वो मोबाइल हाथ में ले स्क्रीन पाए फ़्लैश होता हुआ नाम देखती है जो की उसी अनजान कॉलर का था..

चूँकि बाईट हुए कल उस कॉलर का फ़ोन नहीं आया था तो शायद आज महिमा ने ये उम्मीद चोर सी दी थी की आज भी उसका कॉल आएगा लेकिन उसकी उम्मीद क्व विपरीत जब उसे उसका नंबर अभी स्क्रीन पर फ़्लैश होता दिखाई देता है तो मन के किसी कोने में उसे थोड़ी सी ख़ुशी तो जरूर होती है, मनो उसे भी कही न कही इंतज़ार हो इस कॉल के आने का..

महिमा, फ़ोन रिसीव करते हुए: hello...

कॉलर: hello महिमा जी, कैसी हो आप.

महिमा: में एक दम ठीक मुझे क्या होगा.

कॉलर: हाँ आपको तो हम कुछ होने दे भी नहीं सकते.. वैसे कही व्यस्त तो नहीं हो आप वार्ना हम बाद में भी बात क्र सकते है..

महिमा, बाद में बात करने का सुन टपक से : अरे नहीं नहीं कही व्यस्त नहीं हु मैं तो..

कॉलर, झट से महिमा का ये उत्तर सुन समझते हुए की उसे भी अब बात करनी है मुझसे: ः ाचा ाचा नहीं रख रहा में फ़ोन, इतनी उतावली क्यों हो रही हो आप मुझसे बात करने को..

महिमा, ये समझते हुए की उसने शायद जवाब देने में जल्दबाजी कर दी और इसी बट को सँभालते हुए: ओह अब इतने भी हवा में न ऊधो समझे, मुझे भला कैसा ुतवालपन होगा तुमसे बात करने में, वैसे भी में अब तक तुमको जानती भी नहीं की कौन हो..

कॉलर: मुझे नहीं जानती पर कही न कही ये तो जानती हो न आप की मैं hi वो शख्स हु जो अभी अकेलेपन में आपकी मनोस्तिथि को समझने के काबिल हु...

महिमा, बात तो सही है इसकी, और यही सोचते हुए किचन से निकल कर हॉल में सोफे पर ा कर बैठते हुए: वैसे मुझे लगा था की अब तुम्हारे फ़ोन से मुझे रहत मिल जाएगी, चूँकि कल तुमने कोई कॉल नहीं किया ये जानते हुए की अभी कुछ दिन में इस वक्त अकेली रहूंगी फिर बी...

कॉलर: ः तो इसका मतलब कल आपको मेरे फ़ोन का इंतज़ार तो था, चलो ाचा लगा ये जान कर की अब आपको भी मुझसे बात करने का इंतज़ार रहने लगा है..

महिमा, मुस्कुराते हुए, सफ़ेद झूट बोलते हुए: ऐसा कुछ बी नहीं है सक्झए उल्टा में तो खुश थी की अब तुमसे पीछा छूटा मेरा.

कॉलर: हाहाहा महिमा जी पता नहीं अब आप कब मेरी बात मान क्र सच स्वीकारना शुरू करोगी..

महिमा: जब तुम सच बोलने लगोगे तब से मैंने लगूंगी और क्या..

कॉलर: वैसे माफ़ी चाहता हु की कल कुछ कारणवश आपसे बात नहीं कर पाया...

महिमा: अरे जब मुझे इससस्व फरक hi पद रहा की तुम बात करे या नहीं, तो माफ़ी मैंने का फायदा hi क्या...

कॉलर: ाचा चलो ठीक है आपने मुझे मिस न किया हो लेकिन मेने तो सच में आपको भोत यद् किया कल, आपकी आवाज को मिस किया..

महिमा: क्यों, तुम तो काम में थे न तो वह मेरी यद् कहा आ गई होगी..

कॉलर: हैए चाहे कितना भी जरुरी काम क्यों न हो महिमा जी, आपका व्यक्तित्व hi ऐसा है की कोई छह क्र भी आपको भूल न पाए..

महिमा: ाचा ऐसी क्या बाटे यद् आ गयी तुम्हे मेरी जो, जरा में भी तो सुनु..

कॉलर: बस ये समझ लो की सब कुछ जो में आपसे जानना पूछना चाहता था कल फ़ोन पर, वो न पूछने का अफ़सोस..

महिमा: ऐसा क्या पूछना था तुम्हे की इतना अफ़सोस जाता रहे..

कॉलर: वही एक सबसे महत्वपूर्ण सवाल की, " उस पति, जो वैसे तो अब आपसे प्यार पाने के लायक नहीं है, की गैरमौजदगी में आपने अपने इस गदराये हुए हसीं खूबसूरत जिस्म को कैसे खुश किया, खुश किया भी या आअज भी आपका ये जिस्म रोज की hi तरह कामाग्नि में जल रहा है और मचल रहा है किसी अपने का प्यार पाने के लिए...

महिमा, हकीकत से रूबरू होते हुए की, अब तो शायद ऐसे hi जलता रहेगा मेरा ये जिस्म, न जाने मानव कभी इसे वो संतुष्टि दे भी पाएंगे या नहीं: ओह्होऊ वाह फ़िक्र हुई भी तो किसकी, मेरे जिस्म की, न की मेरी वाह.. वैसे में तुम्हे ये बता दू की तुम्हे ये सब बताना में जरुरी नहीं समझती हु.

कॉलर: अरे महिमा जी ये आपकी hi फ़िक्र है जिस्म की नहीं, क्युकी आपकी ख़ुशी जिस्म की ख़ुशी में छिपी हुई है और क्युकी आप मेरी अपनी होतो मुझव ये फ़िक्र हमेशा लगी rahegi...Aap जरुरी समझो या न समझो पर में तो ये जरुरत समझता हु की आपसे आपकी ख़ुशी के बारे में पूछता राहु..

महिमा: हाँ वैसे जान कर तुम कर भी क्या लोगे, में खुश न भी राहु तो क्या होगा, एक अनजान शख्स को इस बात से भला क्या लेना देना है न..

कॉलर: ये तो आपने दिल दुखने वाली बात कर दी महिमा जी, आप बस एक बार बोल कर तो देखिये सब कुछ कर जाऊंगा आपको ख़ुशी देने के लिए..

महिमा: ाचा क्या कर सकते हो बताना जरा...

कॉलर: ये समझ लो की आपके उस तड़पते हुए जिस्म की तड़प मिटने के लिए में रिश्तो की हर मर्यादा तोड़ जाऊ, आप एक बार मौका दे कर तो देखो, कैसे आपके जिस्म को अपने निचे दबोच क्र रगड़ रगड़ के मसल कर रख देता हु, आप भी कह जाओगी की वाकई में आज मेरे जिस्म की साडी आग तुजे बुझा दी और मुझे अंतर्मन तक वो ख़ुशी दी है जो मेरे पति से मुझे कभी नहीं मिलती...

महिमा, अनजान शख्स से चूड़े जाने की बात सुन क्र hi गर्माती हुई लेकिन फिर भी अपनी आवाज कठोर करते हुए: बस बस अब इतना भी जयदा बोलने की जरूरत नहीं है समझे, में थोड़ा कोमल क्या हो रही बात करने में तुम तो बस हवा में छाडे जा रहे हो..

कॉलर: अरे महिमा जी में कही नहीं उड़ रहा जो सच है वही बता रहा हु आपको, और हाँ मेरी चोरो चलो आपको अपने बच्चो की कसम, आप hi बताओ क्या आपको ये सुन कर जरा भी ाचा नहीं लगा, सच बताना की क्या अभी आपके मन में ये विचार नहीं आ रहे की काश सच में मुझे कोई ेस्व hi बेरहमी से छोड़ने वाला मिल जाये जो मेरा जिस्म बुरी तरह नोच क्र रख दे..

महिमा, बच्चो की कसम की बात सुन और मन hi मन ये मानते हुए की पहले भी तो इसके साथ ये सब बट कर चुकी हु तो अब क्या फरक पड़ना: हम्म्म्म

कॉलर: क्या हम्म्म साफ साफ कहिये न महिमा जी...

महिमा, जो इस वक्त सलवार सूट पहनी हुई थी अपनी दोनों टंगे आपस में भींचते हुए: ओफ्फोऊ हैं चाहती हु में भी वैसे hi बुरी तरह से छोड़ना लेकिन मेरे चाहने से क्या होना, जब मेरा पति hi मेरे साथ नहीं तो मुझे इस आग में जलते hi रहना है bas...kyuki अगर तुम ये सोच रहे की मई तुम्हे कोई मौका देने वाली तो ये तो कभी होने वाला है नहीं, बीएस एक अनजान शख्स के नाते तुमसे ये सब बाटे बोल रही हु..

कॉलर: में जनता हु और इस बात को समझता हु की आप अपनी जरूरतों और भावनाओ से उप्पेर परिवार को रकहतीहो और आपकी इस बात की पूर्ण रन से इज्जत करता हु लेकिन काम से काम में ये उम्मीद तो कर सकता हु आपसे की फ़ोन पर आप मुझसे अब बिक्लुल खुल कर बिना किसी शर्म के बात करे...

महिमा, उफ्फ्फ में इसकी बातो में तो आ गयी लेकिन पता नहीं ये कोण रिश्तेदार है मेरा और कभी सामने बी आ गे तो में इसे पहचान भी नहीं पाऊँगी की ये वही है जिससे में ये साडी बाटे करती आ रही हु: हम्म्म ठीक है कोशिश करुँगी, वैसे भी तुम सब कुछ तो जान चुके हो अब बताने को बचा hi क्या है...

कॉलर: भोत कुछ बचा है अभी तो जानने को महिमा जी..

महिमा: ाचा अब और क्या जानना चाहते हो भला..

कॉलर: सबसे पहले तो में आपके मुँह से पूरा सच जानना चाहता की हकीकत में आपकी सेक्स लाइफ कैसी है.

महिमा: हम्म्म ठीक है सच सुन्ना है तो सुनो, मेरी सेक्स लाइफ अब उतनी अछि नहीं रही, मानव यहाँ होते है तब भी हमारे बिच अब नाम मात्रा का सेक्स होता है वो भी कभी कभी, महीने में मुश्किल से दो या तीन बार और हाँ ये भी सच है की मुझे इससे ज्याद जरुरत है सेक्स की और इसी वजह से में आज भी असंतुष्टि महसूस करती हु..

कॉलर: हम्म्म और अपकाये असंतुस्ट जिस्म संतुष्ट कैसे होगा महिमा जी..

महिमा, अब गरम होते हुए अपने कंपत्व हुए होठो के साथ: उफ्फ्फ्फ़ मुझे संतुष्टि तब मिलेगी जब जैसा की तुमने थोड़ी देर पहले कहा की कोई मेरे इस जिस्म को बुरीतरह रगड़ रगड़ के मसल कर नोच डेल...

कॉलर: आप ये कहना चाहती हैं महिमा जी की आपका जिस्म एक बेरहम दुमदार, छूट में करारे धक्के देने वाले लुंड की मार वाली चुदाई के लिए तड़प रहा है...

महिमा, ये बात सुन कुर्ते के उप्पेर से hi अपनी एक चुकी मसलते हुए: अह्ह्ह्हह हैं सही कहा तुमने, मुझे मेरी छूट में ऐसे hi किसी कड़क दुमदार लुंड की मार लेनी है, एक लम्बे आरसे से मेरी छूट को ऐसे करारे धक्के मरने वाले लुंड की कमी महसूस हो रही है उफ्फफ्फ्फ़...

कॉलर: तो फिर आप कैसे रह रही हो इस आग के साथ, क्या करती हो जब आपका जिस्म आपके काबू में नहीं रहता है तब महिमा जी.

महिमा: हम्म्म एक प्यासी औरत ऐसे समय और कर भी क्या सकती है सिवई अपनी उंगलिओ से छूट रगड़ने के यार..

कॉलर: ओह महिमा जी सच कह रहा हु आप जैसी हसीं औरत इस तरह अकेली तड़प रही, अपने हक़ की ख़ुशी पाने के लिए मचल रही है, ये देख कर मुझे भोत दुःख हो रहा है...

महिमा: हम्म्म पर अब मुझे इस तरह रहने की आदत हो गयी है, मेने इस तरफ ध्यान देना hi नंदकर दिया था, सारा समय परिवार और काम में लगा देती हु, ये तो तुमने इस बात को छेद कर आज सब कुछ यद् दिला दिया...

कॉलर: अरे महिमा जी, ध्यान दूसरी तरफ लगा देना इस चीज का कोई हल नहीं है, हल तो इसका बस यही है की आपको बिस्तर में नंगी करके पटक पटक कर इतना छोड़ा जाये की आपके इस कामुक जिस्म की साडी गर्मी निकल जाये...

महिमा, छोड़ने की बात से बुरी तरह गरम होते हुए सलवार के बिच अपने हाथ को ले जा छूट दबोचते हुए: अह्ह्ह्हह ये हल उस औरत के लिए है जिसका पति उसका साथ दे, और मुझे मेरे पति से इस तरह की दुमदार चुदाई मिलने की अब कोई आस hi नहीं रही है...

कॉलर: ओह्ह महिमा, तुम एक बार अगर पति का राग अलापना चोर दो और घर के बहार तो निकलो, मेरे जैसे hi न जाने कितने लुंड वाले होंगे जो तुम्हरे जिस्म को लूटने के लिए मचल रहे होंगे ः..

महिमा: उम्म्म्म जानती हु में सब कुछ अचे से, लेकिन मुझे अपने परिवार और पति को धोखा देना वो भी मेरी जिस्मानी ख़ुशी के लिए, ये बता गवारा नहीं...

कॉलर: अरे तो अनजान से न सही में तो तुम्हारा अपना हु, तुम्हारा hi कोई करीबी, मुझे hi मयकदे दो तुम्हारी उस तड़पती छूट पर मेरी जीभ लगा क्र चाटने का उम्म्म...

महिमा, जो अब छूट चटवाने की बात से पूरी तरह गरम हो चुकी होती है, अपने हाथ को जोरो से छूट पर घिसते हुए: अह्ह्ह्ह उम्म्म्म ाचा तुम छूट चूसना चाहते हो मेरी मतलब,

कॉलर, ये जान के की अब महिमा पूरी तरह गर्म चुकी है: हैं तुम्हारी टंगे फैला कर छूट की फको को उंगलिओ से फैलते हुए अपनी जीभ से तुम्हारे उस छूट के रसीले डेन को चूसना चाहता हु और.... (इतना कह चुप होते हुए)

महिमा, जिसकी भरी साँसों की आवाज अब फ़ोन पर अचे से सुनाई देने लगी थी: उम्म्म्म और क्या...

कॉलर: और और फिर तुम्हरी चार बचो को जनम देने वाली रसीली छूट में अपना कड़क मुसल लौड़ा दाल कर हुमच हुमच कर धक्के लगते हुए तुम्हे मेरी घोड़ी बना कर तुम्हारी सवारी करना चाहता हु...

महिमा, इतने आरसे से प्यासी तड़पती हुई छूट पर कॉलर की गरमा गरम बातो का और साथ hi उंगलिओ की रगड़ क ये असर होता है की वो अपना काम रास बहाना शुरू कर देती है : अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह इतनी पसंद हु क्या मई तुम्हे, और सच में इतनी बुरी तरह तड़प रहे मेरी छूट मरने के लिए तुम िष्ठ्हह उम्म्म्म, जवान लुंड बोल कर तड़पा तो ऐसे रहे हो जैसे तुम्हे अचे से पता है की मेरी छूट इस वक्त एक जवान दुमदार लुंड के लिए कितना तड़प रही है िष्ठ्हहह...

कॉलर: ाचा इतना तड़प रही हो तो फिर रोका क्यों है खुद को, आजाओ मेरे पास, मेरे निचे लिटा कर इतना मस्त क्र दूंगा की छूट की साडी गर्मी दूर हो जाएगी, वैसे भी तुम्हारे जैसी मोती सुडोल गांड वाली औरत को तो में अपनी कुटिया बना कर छोड़ना चाहूंगा महिमा अहह..

महिमा, चूँकि भोत आरसे बाद महिमा आज इतनी ग्राम हुई थी वो भी किसी अनजान शख्स से बाटे करतव हुए हुए इसी लिए अब वो लगभग अपनी छूट से धरा बहाने को तैयार hi थी और तभी कॉलर के मुँह से ये कुटिया बन छोड़ने की बात सुन उसके जिस्म में एक कम्पन सा उत्पन्न्ना हो जाता है और इसी कम्पन के साथ उसकी छूट अपना रास बहाना शुरू कर देती है और हर एक धार के साथ महिमा की कमर भी झटके देते हुए उछलने लग पड़ती है... अभी छूट रास बहाव के दौरान लग रहे झटको में आखरी झटका महसूस किया hi था की तभी घर के दरवाजे की घंटी बज जाती है...

हवस और वासना की दुनिया में खोई महिमा जिसे कुछ वक्त के लिए तो घंटी की आवाज भी नहीं सुनाई दे रही थी अचानक से उसके कानो में वो आवाज पड़ती है और वापस अपनी दुनिया में लौट ते हुए वो अपना हाल देख कर मनो चौक सी जाती है...

कुरता एक तरफ सरका हुआ, टंगे पूरी तरह छोड़ी कर फैलाये हुए और अपने एक हाथ को छूट के उप्पेर इस तरह सहलाता देख और साथ hi चूचिया मसलने से कुर्ते पर पड़ी सिलवटों को देख मनो महिमा को एक झटका सा लगता है की ये मैं क्या कर रही हु, क्या हो गया है मुझे जो आज एक अनजान शख्स की बातो में आकर अपनी छूट घिसने लग बैठी उफ्फ्फ हे भगवानंन्न मुझे क्या हो गया था ये कैसा पाप कर बैठी मैं...

और इसी सोच के साथ महिमा बिना कुछ कहे hi फ़ोन कट कर देती है और खुद को सँभालते हुए दरवाजा खोलती है, जहा सामने दरवाजे पर प्रीति कड़ी हुई थी...

प्रीति, दरवाजा खुलते hi: मम्मी कितनी देर से घंटी बजा रही हु मैं, कहा थी आप...

महिमा, बात सँभालते हुए: अरे बेटी वो में कमरे में थी मेरी आँख लग गई थी इसलिए मुझे घंटी की आवाज hi नहीं सुनाई दी, सॉरी...

प्रीति: ओह ठीक है मम्मी कोई बात नहीं...

और ये बोल प्रीति सीधा अपने कमरे में चली जाती है और यहाँ महिमा अब खुद से सवाल करने लगती है की, " इन दिनों आखिर मुझे हो क्या रहा है क्यों में वासना की इस कामाग्नि में इतना जल रही हु, क्यों मुझे उम्र के इस पड़ाव में ये महसूस हो रहा है की अब मुझे पहले से ज्यादा चुदाई की जरुरत हो रही है... और इस वासना की आग में आज तो मेने हद hi कर दी, हे भगवन, एक अनजान शख्स के सामने वो साडी बाटे इतनी बेशर्मी से कर डाली जो शायद में किसी अजनबी से करने की सपने में सोच भी नहीं सकती थी और बाटे तो की जो की उन बातो के दौरान मेरे जिस्म में इतनी गर्मी पैदा हो गई की मेरे हाथ अपने आप hi मेरी छूट पर पहुंच गए और छूट को स्खलन तक का सफर करवा दिया उफ्फ्फ्फ़. " न जाने कौन है ये अनजान कॉलर और क्यों में हर वक्त उसकी बातो में आ कर वो सब क्र बैठती हु जो नहीं करना चाहती हु.. खैर अब जो होना था सो तो हो गया लेकिन अब आगे से मुझे अपने आप पर काबू रखना हॉग और वैसे भी टीम चार दिनों की बात है फिर मानव और सीमा वापस आजायेंगे तो में दिन में अकेली भी नहीं रहूंगी, और फिर शायद इस शख्स के फ़ोन आने बंद हो जाये....
 
अपडेट - 54


घर पर शाम के समय मैं रोज की तरह आज भी टेरेस पर पहुंच जाता हु और वह पहुंचते hi मुझे ये दिखाई पड़ता है की प्रीति वह पर पहले से hi मौजूद थी और खास बात तो ये थी की उसने इस वक्त भी वही कुरता पहना हुआ था जो सुबह कॉलेज जाते वक्त उसके जिस्म पर था, इसका मतलब ये की कॉलेज से आने के बाद भी उसने कपडे बदले नहीं है.

प्रीति जो की ये जानती थी की उसका भाई यानि की मैं रोज शाम के समय टेरेस पर टहलने के लिए आता है और यही वजह थी की आज वो जान बुझ कर उससे पहले टेरेस पर आ कर कड़ी हो गयी थी और रोज जहा कॉलेज से आने के बाद वो अपने कपडे बदल लेती थी लेकिन चूँकि आज सुबह कार में सनी के साथ कपड़ो को ले क्र हुई बात चित और छेद चढ़ के बाद वो खुद भी सनी को इस बात को और आगे बढ़ाने का बहाना देना चाहती थी, इसी वजह से आज अब तक उसने सुबह वाले कपडे पहने हुए थे.

मैं, प्रीति के पास पहुंच कर: क्या बात है प्रीति, लगता है अब तुझे भी मेरे जैसे आदत लग गई है शाम को टेररसपर आने की.

प्रीति: ओह सनी भाई तुम, नहीं आदत तो नहीं पर बस निचे बोर सी हो रही थी इसलिए उप्पेर चली आई मैं..

मैं, उसके कपड़ो पर नज़र डालते हुए: हम्म्म वैसे लगता है तुझे ये कुरता कुछ ज्यादा hi पसंद आ गया है जो आज कॉलेज से आने के बाद भी यही पहन कर घूम रही है ः...

प्रीति, ये जान क्र खुश होती है की इसका मतलब कही न कही मेरा भाई मुझे रोज नोटिस तो करता है: हाँ कह सकते हो भाई, मुझे भोत पसंद आया ये कुरता, वैसे तुम क्यों बदलवाना चाहते हो ये कुरता मुझे, ाचा नहीं लग रहा है क्या..

मैं: अब ख़रीदा hi तो मेने है मुझे क्यों ाचा नहीं लगेगा भला, खैर वैसे हमारी बात सुबह कार में अधूरी रह गई थी (मुस्कुराते हुए )

प्रीति, ये समझते हुए की में किस बात के बारे में बोल रहा हु, मुस्कुरा आँखे बड़ी करते हुए: कौनसी बात भाई, मुझे तो कोई बात यद् नहीं है ऐसी जो अधूरी चुटी हो...

मैं, उसकी तरफ देख : चल चल अब ये बहाने कही और जा कर बनाना समझी, तू अचे से जानती है की में किस बात के बारे में बोल रहा हु

प्रीति, सब कुछ जानते हुए भी अपने भाई को चिढ़ाने का मजा लेते हुए, एक भोली सी शकल बना कर: सच्ची भाई मुझे नहीं पता, ाचा यद् तो दिला दो किस बारे में बात क्र रहे हो...

मैं, अब ये समझ कर की प्रीति मजे ले रही है, उसके कान के पास अपना मुँह ले जा क्र धीरे से: अरे वही वाली बात प्रीति, बता न आज जो लाल रंग की ब्रा तूने पहनी है वो मेरे द्वारा खरीदी गई कौनसे डिज़ाइन वाली hai...(or ये बोल में वापस दूर हो जाता हु और उसके चेहरे की तरफ मुस्कुराते हुए देखता हु)

प्रीति, जिसकी साँसे अपने भाई को इतना करीब महसूस करने से वैसे hi भरी होने लगी थी, अब भाई के मुँह से वापस ब्रा के बारे में बात सुन क्र सिहर सी जाती है और भाई के वापस दूर होते hi उसके सामने देखते हुए शर्मा सी जाती है और इस वजह से उसके गाल एक दम लाल सेहो जाते है: उफ्फ्फ भाई क्या तुम भी, वापस वही बात ले क्र बैठ गए, मेने कहा न ये सब बाटे एक बेहेन अपने भाई को नहीं बताती है और न hi भाई का ये सब पूछना उचित है समझे...

मैं: ाचा जी तो क्या ये उचित है की बेहेन खुद भाई से कहे की मुझे मेरी ब्रा खरीदने में मदद क्र दे, तब कहा थी तेरी ये उचित अनुचित की गणित..

प्रीति, मन hi मन इस नोक झोक का मजा लेते हुए: हाँ वो तो मैंने बस ऐसे hi मदद ली थी तुमसे, तुम चाहते तो मन भी तो कर सकते थे न...

मैं: अरे वाह देखो तो भोली लड़की को, जब मन किया था तब, गफ समझ के मदद कर दो, यही बोलै था न तूने, तो अब तो मुझे बस जानना hi है चाहे मेरी बेहेन बताये या गफ ः..

प्रीति, जो की खुद भी मन hi मन तो अपने भाई को बताना चाहती थी लेकिन अब तक संकोच के मरे बोल नहीं प् रही थी लेकिन अब हिम्मत करते हुए: ाचा बाबा सच में जानना है न तुझे तो ठीक है बता रही हु, मैंने न... वो... मैंने रेड कलर की ब्रा पहनी है अभी...

मैं: ये तो मुझे भी पता है, मुझे ये जानना है की तूने कौनसी डिज़ाइन वाली पहनी है रेड कलर वाली ब्रा..

प्रीति, शरमाते हुए : उम्म्म वही वाली पहनी है जिसके हुक्स आगे से है और हाफ कप्स वाली थी.

मैं, ब्रा की डिटेल सुन प्रीति को अपनी कल्पनाओ में देखते हुए की इस डिज़ाइन वाली ब्रा में उसका खूबसूरत गोरा जिस्म कैसा दिखाई देगा, और इसी कल्पना मात्रा ने hi मेरे लुंड को एक अंगड़ाई लेने पर मजबूर कर दिया, तभी उसके करीब जा कर: वाह बड़ी खूबसूरत लग रही होगी न वो ब्रा तो तुझ पर..

प्रीति, सर झुका कर: ह्म्म्मम्म वो तो है भाई.

मैं: वैसे क्या खूबसूरत लग रहा होगा, ब्रा खूबसूरत लग रही होगी तेरे शरीर पर या वो ब्रा पहनने के बाद तेरा शरीर ज्यादा खूबसूरत लग रहा होगा प्रीति...

प्रीति, इतने करीब आ कर भाई द्वारा पूछे गए इतने गहरे सवाल को सुन शर्म के मरे सर झुका कर: बास अब और कुछ नहीं बता रही हु मैं हुए तुम कुछ पूछोगे भी नहीं समझे...

मैं, उसके हाथ को पकड़ एक झटके से अपनी तरफ खींच कर: ये मेरे सवाल का जवाब नहीं है प्रीति...

प्रीति, इस तरह खींचे जाने पर सीधा मेरे साइन के एक दम करीब आ जाती है, और इस वजह से अब भरी सासो के साथ अब उसकी मुलायम कासी चुचिओ का उस कैसे हुए कुर्ते में उप्पेर निचे होना साफ तौर पर दिखाई दे रहा था: उफ्फ्फ मुझे नहीं पता भाई और चोरो मुझे..

मैं: तुझे नहीं पता होगा तो किसे पता होगा प्रीति, शरीर तेरा है ब्रा तेरी है और तू hi वो एक तू hi वो इंसान है जिसने इस ब्रा को पहनने के बाद अपने आप को आईने में देखा होगा, तो बस वही पूछ रहा की कैसे लग रही थी मेरी बेहेन रूपी गफ मेरी पसंद की हुई ब्रा में...

प्रीति, लगातार हो रहे इस सवालो की बरसात से अब प्रीति के जिस्म में भी उत्तेजना की दौर सी उत्पन्न हो चुकी थी और वैसे भी पहले से hi अपने भाई के लिए उसके दिल दिमाग में एक अलग hi जगह बन चुकी थी और इसी कारन अब अपना चेहरा उप्पेर करके अपने भाई की नजरो में नजरे दाल मुस्कुराते हुए: ब्रा पहनने के बाद मेरा जिस्म भी और मेरे जिस्म पर ये bra,dono hi भोत खूबसूरत दिख रहे थे भाई, किसी एक को चुनना मुश्किल होगा...

मैं: ाचा, वैसे मेने तो तुझे वैसे देखा नहीं है अब तक तो लेकिन मुझसे कोई पूछता तो में ये कहता की खूबसूरती तो तुझमे है प्रीति, अगर ब्रा अछि लग भी रही है तो वो इसलिए क्युकी उसे तुझ जैसी खूसूरत जवान लड़की ने पहना है...

प्रीति, अपने भाई के मुँह से इतनी अछि तारीफ सुन एक बार को उसका मन हुआ की उसके चेहरे से कुछ hi दुरी पर दिख रहे भाई के चेहरे को पकड़ कर उसके होठो पर अपने होठ रख दू लेकिन फिलहाल बस एक बार फिर शरमाते हुए चेहरा निचे करके: हहै भाई कुछ भी मतलब हाँ...

मैं: नाह प्रीति मेने जो कहा सच कहा तू मने या न मने, इतनी हॉट सेक्सी के साथ साथ सुंदरता का कॉम्बिनेशन भोत काम लड़कियों में मिलता है..

प्रीति, खुश होते हुए की उसके भाई को वो सेक्सी और हॉट लगती है: ः तारीफ के लिए शुक्रिया भाई, तुम कहते हो तो चलो मन लेती हु...

मैं, अपना चेहरा उसके गलो के एक दम करीब ले जा कर कानो के पास होठ लगते हुए: वैसे सिर्फ ब्रा में hi तेरी खूबसूरती अछि लगती है या ब्रा और पंतय दोनों साथ में पहनने पर ज्यादा अछि लगती है...

प्रीति, अब इस सवाल ने तो मनो उसके जिस्म में एक जोरदार सा करंट फैला दिया हो, उसे ऐसा महसूस हुआ की किसी ने बिना छुए hi उसकी छूट को सहला दिया हो, सिहरन भरी आवाज में, अपने भाई को हलके सेपीछे धक्का देते हुए: सनी अब बस भोत हो गया कैसी बाटे पूछ रहे हो शर्म बी करो थोड़ी...

मैं, धक्का देने का प्रयास करते उसके हाथ को पकड़ उसे अपनी तरफ खींच अपने हाथ उसकी कमर में दाल इतना करीब खींच लेता हु की उसके होठ और मेरे होठो में बस थोड़ा सा फैसला रह जाता है: नहीं है शर्म मुझमे, गफ से बात करने में कैसी शर्म भला, बता न पंतय भी वैसी hi लाल रंग की पहनी है क्या तूने, और अगर हाँ तो ये बता न की तेरे शरीर पर दोनों की फिटिंग किसी आ रही है...

प्रीति, जो इस वक्त भाई की पकड़ में होने के कारन उत्तेजित होते हुए हुए साथ hi पंतय के बारे में शूम कर अपनी टैंगो के बिच गीलापन महसूस करने लगती है : ओह्ह्ह सनी क्या कर रहा है चोर मुझे, और मुझे नहीं पता ये सब अब, प्लस चोर न...

मैं, अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए : जब तक तू नहीं बताएगी की " मेरी गफ का जिस्म उस लाल रंग की ब्रा और पंतय में कैसा लग रहा था, उसका गोरा खूबसूरत जिस्म कितना कामुक दिखाई दे रहा था, और क्या उसे मेरे द्वारा पसंद की गयी पंतय भी उतनी hi पसंद आयी जितने बाकि के कपडे आये," तब तक में तुझे नहीं चोर्ने वाला हु.

प्रीति, मन hi मन में, अब तुझे कैसे बताऊ मेरे भाई की अब से तेरी पसंद hi मेरी पसंद बन चुकी है और आज इन ब्रा पंतय में मैं वैसी लग रही जैसी आज से पहले कभी नहीं लगी हु और इस वक्त मेरे बस में होता तो शायद तुम्हारे सामने hi कड़ी होजाती ये कुरता निकल कर उम्म्म्म लेकिन पता नहीं अब भी एक अजीब सा डर है या संकोच है जो मुझे रोक रहा ,...

और अभी वो कुछ जवाब देती इससे पहले hi निचे से मम्मी की आवाज हमारे कानो में पड़ती है जो प्रीति को आवाज दे कर निचे आने को बोल रही थी और इसी मौके का फयदा उठा कर प्रीति झट से मेरी पकड़ से आज़ाद हो जाती है और मुझे जीभ दिखा चिढ़ाते हु हसने लगती है की अब ढूंढता रह तेरे सवालो क जवाब बच्चू, ः... और ये बोल वो भागते हुए निचे उतरने लगती है और में खड़े खड़े उसे जाते हुए देख बस मुस्कुरा रहा होता हु... "क्या यार मम्मी को भी इसी वक्त बुलाना था थोड़ा रुक नहीं सकती थी कितनी अछि बात चल रही थी हमारे बिच ः, खैर चलो अब मुझे भी निचे जाना चाहिए." और यही सोच में भी निचे अपने कमरे की तरफ आने लगता हु. "

सीढ़ियों से उतारते हुए में कमरे तक पहुंच hi रहा होता हु की मेरी नज़र कामिनी भाभी के कमरे की तरफ पड़ती है, चूँकि राहुल भैया अब तक ऑफिस से आये नहीं थे तो में भाभी के कमरे की तरफ चला जाता हु.

दरवाजे ओर पहुंचते hi ये मालूम पड़ता है की दरवाजा खुला हुआ है और इसी कारन हलके से दरवाजा खोल अंदर दाखिल होते hi मेरी नज़र अपनी कपड़ो की अलमारी खोले उसके सामने सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में कड़ी भाभी पर पड़ती है..

डोरी वाले ब्लाउज में नंगी पीठ और पेटीकोट में उभरी हुई गांड का नज़ारा देख मेरा लुंड जो प्रीति से मस्ती भरी बाटे करतेहुए वैसे hi अंगड़ाइयां लेने लगा था अब वापस झटके खाने लग गया था और इसी कारन अब दबे पाँव में भाभी की तरफ बढ़ता हु और चुपके से उनके पास पहुंच कर अपना एक हाथ पीछे खड़े खड़े hi आगे ले जा उनके मुँह पर रख देता हु और दूसरे हाथ से ब्लाउज की वो डोरी जोर से खींच कर खोल देता हु...

अचानक से मेरे इस तरह धावा बोलने से जैसा मैंने सोचा था भाभी की चींख निकल जाती है लेकिन मेरा हाथ होने की वजह से वो चीख वही डाब जाती है और अब मुँह पर हाथ रखे hi भाभी को ये बताते हुए की " चिल्लाओ मत रंडी भाभी मेरी, मैं हु आपका प्यारा देवर सनी" उन्हें मेरी तरफ घुमा देता हु...

भाभी मेरी तरफ घूम कर अपनी सांस सँभालते हुए: ओह्ह्ह्ह सनी ऐसे भी कोई करता है क्या, पता है कितना दर गयी थी मैं, बताना तो चाहिए न...

मैं, डोरी खुलने के बाद ढीले पड़े ब्लाउज को उप्पेर उठा ब्रा के कप्स से चूचिया आज़ाद कर मुँह में भरते हुए: उम्मम्मम्म भाभी, अपनी रंडी के जिस्म को लूटने से पहले में कुछ भी बताना जरुरी नहीं समझता हु और ये बोल में निप्पल को मुँह में भर जोर से खींच लेता हु...

भाभी, मेरे सर को चुचिओ पर दबा कर: अह्ह्ह्ह देवर जी मुझे पता है और वैसे भी आपको जरुरत भी नहीं कुछ बताने या पूछने की, आपकी ये रैंड हमेशा तैयार है आपके लिए तो अह्ह्ह्ह उम्मम्मम ओह्ह्ह्ज सनी...

मैं, ये जानते हुए की शाम का समय ह घर में सब मौजूद है, ज्यादा वक्त लगाना ठीक नहीं और तभी भाभी को वही अलमारी के सहारे आगे झुका पीछे से उनका पेटीकोट उठा कर छूट पर लुंड सत्ता देता हु और एक गहरे दुमदार धक्के के साथ लुंड छूट में पेल देता हु...

अगले कुछ वक्त की दुमदार चुदाई के बाद अपना माल भाभी की छूट के अंदर hi भर के मैं मेरे माल और भाभी के छूट रास से भरे मेरे लुंड को बहार खींच लेता हु और पीछे जाते हुए बिस्तर पर बैठ जाता हु, भाभी जो अब तक आगे झुकी हुई कड़ी थी, जैसे hi मैंने अपना लुंड बहार निकला वो भी सीधी होते हुए अपनी छूट को हथेली से दबा कर सहलाते हुए मेरी तरफ पलट जाती है...

भाभी, पलटने के बाद मेरे गीले लुंड को देखते hi पास आ कर ब्रा से बहार लटकती हुई चुचिओ के साथ अपने घुटनो के बल निचे बैठते हुए मेरे लुंड को हाथ में पकड़ : उफ्फ्फ्फ़ देवर जी सच भोत मजा देता है आपका ये लुंड मेरी छूट को, जब से इस लुंड का स्वाद चखा है भोत खुश रहने लगी है मेरी छूट...

मैं, भाभी के बाल पकड़ उनका चेहरा मेरे लुंड के पास लेट हुए: ः मेरी रैंड चल अब बाटे बाद में करना जल्दी से इस लुंड को चाट कर अचे से साफ कर दे देख कितना रास लग ाहुआ है इस पर...

मेरी बात सुनते hi बिना किसी देर के भाभी झट से पूरा लुंड मुँह में ले अचे से जीभ से चाट चाट कर साफ कर देती है...

मैं, लुंड साफ़ करवाते hi: वैसे तेरे जैसी रैंड को खुश करना hi तो शौक है मेरे इस लौड़े का भाभी, मन तो तुम्हे आज कॉलेज में hi पेलने का हो गया था लेकिन खुद को रोक लिया ः... वैसे चल अब कपडे पहन ले इससे पहले की कोई देख ले...

भाभी, पास में hi जमीं पर पड़ी अपनी पंतय उठा कर कड़ी हो जाती है और मेरे सामने hi टंगे फैला उस पंतय से छूट के गीलेपन को साफ़ करने लगती है और फिर वही पंतय में अपनी टंगे घुसा कर पहन लेती है...

मैं, ये सब देख: हैए यही सब अदाए तो तेरी मुझे और मजबूर करती है तुझे कुटिया बनाने को ः...

भाभी, मेरी इस बात पास है देती है और फिर अपनी ब्रा को वापस निचे कर सेट करते हुए ब्लाउज को ठीक करते हुए, ये सोचते हुए की यहु सही वक्त है सनी से प्राची के बारे में बात करने का: वैसे सनी एक बात सच सच बताओगे मुझे...

मैं: हाँ पूछो..

भाभी: क्या तुम्हारे और प्राची के बिच कुछ चल रहा है, मेरा मतलब है कभी कुछ हुआ है क्या..

मैं, फिलहाल भाभी को कुछ बताना सही नहीं और झूट बोलते हुए: नहीं तो मेरे और मां के बिच में कुछ भी नहीं, क्यों आपको ऐसा क्यों लगा..

भाभी, अपना पेटीकोट दाल नाडा बांधते हुए: सच कह रहे हो न की कुछ भी नहीं तुम दोनों के बिच..

मैं: भाभी मेने कहा न कुछ भी नहीं है और वैसे अगर कुछ होता भी तो क्या.. आपको जलन हो रही क्या हाहाहा...

भाभी, पेटीकोट पहन कर बिस्तर पर मेरी तरफ पीठ करके बैठते हुए, ताकि में उनके ब्लाउज की डोरी बांध सकू: मुझे भला क्यों जलन होगी, मेरे नसीब में तो मेरे देवर के इस दुमदार लुंड का प्यार आलरेडी लिखा हुआ है हहै.. और चाहे ये लुंड कितनी hi छूट को सुख प्रदान करे लेकिन मुझे ये पता है की अपने hi घर में रहने वाली अपनी रंडी बना कर राखी भाभी को कभी प्यासा नहीं छोड़ेगा...

मैं, ब्लाउज की डोरी को कस के बन्ध्त्व हुए जिससे की आगे चूचिया बहार निकल आये: ः बस जब ये पता है मेरी रंडी भाभी को तो ये सब क्यों पूछ रही हो...

भाभी, डोरी बंधवाने के बाद मेरी तरफ पलट कर, थोड़ा सीरियस होते हुए: वो इसलिए क्युकी आज जब तुम्हारे जाने केबाद में प्राची से बात क्र रही थी तो उसने कुछ ऐसा कहा जो मुझे अजीब सा लगा..

मैं, अब ऐसा क्या बोल दी प्राची , कही सब उगल तो नहीं दिया: क्यों ऐसा क्या बोलै उन्होंने भाभी... क्या मुझे ले कर कोई खास बात कही क्या..

भाभी: नहीं उसने स्पष्ट रूप से तो तुम्हरा नाम नहीं लिया पर वो मुझसे कह रही थी की कभी बड़े घर के लड़को की बातो में मत आना, ये सिर्फ फायदा उठाना जानते है और कुछ नहीं... और ये उसने तब कहा जब तुम मुझसे बात करने के बाद वह से चले गए थे तो मुझे लगा की शायद वो तुम्हारे बारे में hi बोल रही हो...

मैं, मैंने ऐसा क्या फायदा उठाया उसका, पता नहीं अब क्या हुआ होगा उसे जो बोली, पर फिलहाल बात ढकना hi ठीक है, पहले प्राची से बात करनी होगी: नहीं भाभी हमारे बिच कभी कुछ हुआ hi नहीं बस एक टीचर और स्टूडेंट वाली hi बात रही है.. हो सकता है वो किसी और के लिए बोल रही हो..

भाभी, कड़ी हो अपनी साड़ी पहनते हुए: हाँ हो सकता है ऐसा hi हो..

मैं: वैसे भाभी आजकल आप दोनों में भी कुछ ज्यादा hi बनने लगी है, अक्सर साथ में घूमते देखता हु में और उसको ड्राप करने जाना लेने जाना ये सब कुछ ज्यादा नई होने लगा है ः..

भाभी, प्राची के घर हुए वो किश वाले वाकिये को यद् कर: सच कहु तो मुझे भी नहीं पता था की हममे इतनी गहरी दोस्ती हो जाएगी पर वो बिलकुल मेरे जैसी नेचर की है, बातूनी और खुशमिजाज़ तो बस हो गयी दोस्ती... वैसे तुम्हे पता है सनी, में तो उसे बस अपनी अछि सहेली समझती हु ओर वो मुझे कुछ ज्यादा hi मन रही है हहै..

मैं: क्या मतलब में समझा नहीं भाभी..

भाभी, मेरी बात का जवाब देने की जगह पास आकर मेरे होठो पर अपने होठ रख एक मस्त सा चुम्बन दे देती है: अब कुछ समझे मेरे देवर जी...

मैं: नहीं... साफ साफ बताओ न भाभी...

भाभी: अरे मेरा मतलब की वो मर्दो के साथ साथ औरतो को भी पसंद करती है, ी मैं वो एक लेस्बियन भी है... उस दिन जब में उसके साथ उसके घर गयी थी न तो उसने मुझ पर भी ये आजमाने की कोशिश की हहै...

मैं, ये सुन हैरत भरी निगाहो से देखते हुए और मन hi मन में और जानने को उत्साहित होते हुए: क्या बोल रही हो भाभी, साफ साफ बताओ न क्या हुआ तुम दोनों के बिच ः..

भाभी: अरे उसके घर जाने के बाद कुछ देर बाटे करने के बाद उसने सीधा अपने होठ मेरे होठो पर रख दिए... बाद में जब मेने उसे रोका ये बोल क्र की मुझे ये सब नहीं पसंद तो कहने लगी की उसे मैं भोत पसंद हु और मुझे प्यार करना चाहती है, मेरे साथ शारीरिक सम्बन्ध स्टफिट करना चाहती है...

मैं, भाभी की बात सुन उन्हें खींच कर अपनी जांघो पर बिठा कर : ोये होये क्या बात है भाभी, मर्द तो मर्द अब औरते भी आपको पाना छह रही है ः, वैसे कैसा लगा एक औरत के होठो को चुम कर..

भाभी: हहै देखो वैसे तो मेरे लिए ये पहला अनुभव था पर ये अनुभव इतना भी बुरा नहीं था, अगर मन हुआ तो में इस रिश्ते को आगे बढ़ाने का इरादा बना लू तो इसमें बुराई भी नहीं होगी हहै..

मैं, ब्लाउज के उप्पेर से चुकी पकड़ दबा कर मसलते हुए: हाहाहा पक्की रैंड औरत है तू सच, वैसे अगर इरादा बना ले तो मेरे लिए फायदा है, भाभी के जरिये उसकी छूट भी मिल जाएगी, अब मेरी रैंड मेरे लिए इतना तो करेगी hi न ः...

भाभी: हहै मुझे पता hi था की तुम ऐसा hi कुछ कहोगे, लेकिन हाँ अगर में ऐसा इरादा बनाऊ और हमारे बिच कुछ होता है तो में से तुम्हारे निचे लेन की भी हर मुक्किन कोशिश करुँगी वैसे बी अकेली ह वो उसे भी मर्द की जरुरत तो है hi...

मैं, उसे में पहले hi अपने निचे लेता चूका हु भाभी अब तुम क्या लाओगी ः: हाहाहा ये हुई न मेरी पक्की रखेल वाली बात उम्म्माह, वैसे मई क्या कहता हु की अभी इतनी जल्दबाजी में क़रीबिया मत बढ़ाना तुम उसके साथ... बस सही वक्त आने पर चौका मरना है तुम्हे ः..

भाभी: हाँ हाँ अभी तो में खुद भी एक औरत के साथ संबंध बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हु, मुझे खुद वक्त लगेगा हहै..

मैं, हाँ तब तक में भी प्राची से बात करता हु की उसने मेरे बारे में ऐसा कुछ क्यों कहा होगा, और कुछ डाउट जैसी बात होगी तो बाद में भाही के जरिये अब चीजे पता करना भोत आसान हो जायेगा: हम्म्म वैसे भी उसे तड़पने तो तुम्हारे लिए, तुम्हरो तड़प मिटने के लिए तो मेरा ये लौड़ा है hi ः...

भाभी, मेरी बात सुन दोबारा अपने होठ मुझसे छिपाते हुए: उम्मम्माह हाँ मेरे देवर जी, आपके लुंड के होते हुए वैसे भी मुझे किसी की जरुरत नहीं, प्राची के साथ भी जो कुछ करुँगी सब आपको बता कर hi करुँगी हहै... वैसे चलो चोरो मुझे अब, निचे जाना है डिनर भी बनाना है अब वार्ना मम्मी जी गुस्सा करेगी.. और इसी बात पर एक बार और चुम्बन के साथ हमारी बाटे ख़तम कर दोनों hi उस कमरे से निकल जाते है.

 
दोस्तों, काफी दिनों से देख रहा हु सीमा को लड़ काट भोत स्सरे कमैंट्स आ रहे है, आप सब के सुझावों के लिए धन्यवाद् लेकिन मुझे सिर्फ ये जानना है की सिर्फ एक पत्र को ले कर में कहानी आगे कैसे बढ़ा सकता hu...har अपडेट में सिर्फ वही ज़िक्र तो हो नहीं सकता है न... मेने कहानी में हर चीज के लिए कुछ सोवह रखा है, और हमेशा कहता आया हु की धीरे ढिर्र सरे पत्ते खुलेंगे... सो प्लस थोड़ा संयम रखे इतना hi कहना चाहूंगा..
 
अपडेट - 55




वह दूसरे शहर में सुबह से तो कुछ खास नहीं हुआ होता है, वही पिछले दिन की तरह मानव, श्वेता और रागिनी ऑफिस के काम में व्यस्त रहते है और सीमा अपने पापा पर निगरानी रखने का काम कर रही होती है.. दिन पूरा इसी तरह निकल जाता है और अभी शाम को आज भी रागिनी बहाना बना कर मानव और श्वेता से अलग हो जाती है और वो दोनों वही कार के सफर के दौरान थोड़ी भोत मस्ती के बाद होटल पहुंच जाते है..

लगभग एक घंटे बाद रागिनी अपना "जरुरी काम" निपटा कर होटल के कमरे में पहुँचती है और तभी, यहाँ घर से भाभी को छोड़ अपने कमरे में ोाहुचने के बाद मेरे द्वारा बुआ को फ़ोन लगाए जाने के कारन उनके फ़ोन की घंटी बज जाती है..

फ़ोन पर अपने भतीजे का नंबर देख कर रागिनी के चेहरे पर एक खूबसूरत सी मुस्कान आजाती है और झट से फ़ोन रिसीव करते हुए..

रागिनी,: ओह्ह्ह तो आखिर अब यद् आ hi गयी तुम्हे मेरी क्यों..

मैं: ाचा जी उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, तीन दिन हो गए तुम्हे यह से गए हुए तुमने यद् किया क्या मुझे..

रागिनी: ऐसा एक पल नहीं था जब मेने अपने इस पति को यद् न किया हो समझे...

मैं: अगर इतना hi यद् किया तो फ़ोन किया होता, वो तो एक बार नहीं किया तुमने..

रागिनी, इधर उधर देख की कही कमरे में श्वेता तो नहीं, और किसी को न पा कर: फ़ोन इसलिए नहीं किया मेरे राजा क्युकी अगर में तुम्हे फ़ोन करती तो तुम्हारी आवाज और बाटे सुन मेरा जिस्म गर्माने लगता, और तुमने hi तो मुझे कसम दी है न की में अपने जिस्म के किसी भी आतंरिक अंग को हाथ नहीं लगा सकती जब तक वापस न लौट जाऊ, तो है इसलिए मेने फ़ोन नहीं किया सनी..

मैं: ाचा सच्ची इतनी गरम होती हो बुआ तुम अपने भतीजे की बातो से..

रागिनी: जिस वक्त से तुम्हारा लुंड इस छूट के अंदर गया है सनी उस वक्त के बाद में कभी ठंडी हो hi नहीं पायी उल्टा तुमने मेरे शरीर की गर्मी और बढ़ा दी है और ये गर्मी सिर्फ तुम्हारे लुंड से hi बुझने वाली है जो अगले कुछ दिन और मुझे नहीं मिलने वाला है...

मैं: ोये होये सच में इतना तड़प रही हो तुम अपने भतीजे से छोड़ने के लिए बुआ...

रागिनी: उफ्फ्फ पूछो मत सनी, भोत मुश्किल से रह रही हु में, न जाने कब खतम होगा ये हफ्ता... भोत तड़प रही हु, वह आते hi सबसे पहला काम यही होगा मेरा की तुम्हारे लुंड से मेरी छूट की जैम कर कुटाई करवौ.. और हाँ प्लस अभी के लिए मुझे छूट सहलाने की आज्ञा दे दोना सनी..

मैं, कुछ सच कुछ झूट का मिश्रण करते हुए: नहीं बिलकुल भी नहीं बुआ, यहाँ मई भी तो रह hi रहा हु न आपकी छूट के बगैर बिना कुछ किये, तो क्या आप मेरे लिए नहीं रह सकती... मेरा भी वही हाल है भोत मिस कर रहा है मेरा लुंड पत्नी बानी मेरी बुआ की छूट ठोकने के लिए...

रागिनी, ये सुन की उसका भतीजे भी उसकी छूट का प्यासा है, उत्तेजना में आहे भरते हुए: ओह्ह्ह्हह्ह सुननयीयीय काश तुम भी यहाँ होते उम्म्म उछाल उछाल के लेती मैं तुम्हारा मुसल लुंड...

मैं: यहाँ आजाओ वापस लौट कर फिर साडी तड़प दूर करूँगा आपकी बुआ, बस याद रहे की मेरे लिए कुछ ऐसा खास गिफ्ट ले कर आना जो मुझे जिंदगी भर यद् रहे...

रागिनी, ये सुन कर मन hi मन मुस्कुराते हुए: अरे उसकी फ़िक्र मत करो, ऐसा गिफ्ट लेन वाली हु की तुम हैरान रह जाओगे देख लेना हहै...

तभी मुझे मम्मी की आवाज सुनाई देती है जो डिनर के लिए बुला रही थी..

मैं: ः ाचा चलो वो भी पता लग जायेगा कुछ दिनों में, चलो अब में फ़ोन रखता हु मम्मी बुला रही है.. Bye अपना ख्याल रखना.. और ये बोल में फ़ोन कट कर निचे डिनर करने चला जाता हु.

डिनर के बाद मैं बहार हॉल में कुछ देर टीवी देखने के बाद पिछले दो दिनों की hi तरह आज भी सीधा मम्मी के कमरे में उनके साथ एक hi बिस्तर पर सोने चला जाता हु.. कमरे में पहुंचकर देखता हु की मम्मी आज उसी सलवार कमीज़ में लेती हुई थी जो दिन भर से पहना हुआ था, जिसका मतलब की उन्होंने आज कपडे न बदल कर उन्ही कपड़ो में रहना तय किया था..

मैं, मम्मी के बगल में जा कर बैठते हुए: मम्मी क्या बात है लगता है आज आपको जल्दी नींद आ रही है..

मम्मी, लेते हुए मेरी तरफ करवट ले कर: नहीं बीटा नींद तो नहीं आ रही बस थोड़ी थकन सी लग रही है आज...

मैं: तो मम्मी आप इतना काम करती hi क्यों हो, घर में भाभी है, प्रीति है ये ससब भी है न उनसे करवा लिया करो काम आप...

मम्मी: अरे अब वो सब तो अपने अपने जॉब और पढाई में इतना व्यस्त ररह्ते है और शाम को थक हर के घर आते है अब भला उनसे क्या hi काम करवौ बीटा..

मैं: तो आप आपकी मदद के लिए किसी माइड को क्यों नहीं रख लेती हो..

मम्मी: नहीं मुझे नहीं समझ आता ये माइड वैद रखना बीटा.. इसलिए तो कह रही हु तुझसे की अब तेरे लिए कोई अछि सी लड़की ढूंढ लेते है ताकि मेरा घर में हाथ बता सके..

मैं: ः क्या मम्मी आप भी न, और वैसे भी भाभी की तरह वो भी जॉब करने लगी तो बात वही के वही रह गयी न..

मम्मी, मजाक के अंदाज में: नहीं तेरे लिए ऐसी लड़की ढूंढूंगी जो हाउसवाइफ hi बनना चाहती हो ताकि मुझे काम काम करना पड़े हेहेहे.

मैं: ः पर फिर वो अगर हाउसवाइफ होगी तो उसे बिलकुल आप जैसा होना पड़ेगा तभी में उसे पसंद करूँगा..

मम्मी: मेरे जैसा का क्या मतलब है तेरा..

मैं, मम्मी के बगल में लेट ते हुए अपनी टंगे उनकी टैंगो से सहलाना शुरू करते हुए: मतलब की मुझे बिलकुल आपके जैसी बीवी चाहिए, जो आप जैसी सुन्दर और मस्त हो.. हर काम में आपकी टक्कर दे सस्के और बिलकुल आपकी hi तरह मेरा ख्याल रख सके...

मम्मी: हहै अच्छा बच्चू, मेरी तो अब उम्र हो गयी अब मुझमे ये सब बाटे कहा.. कुछ भी बकवास करता है तू..

मैं: अरे मम्मी आपमें जो बात है वो किसी में नहीं, सच कह रहा हु अगर आप मम्मी न होती मेरी और मुझे मौका मिलता तो आपसे hi शादी कर लेता में तो ः...

मम्मी, मन hi मन जवान लड़के के मुँह से अपने बारे में अछि अछि बाटे सुन खुश होते हुए: ाचा ऐसा क्या है मुझमे जो तू मुझ जैसी इतनी उम्र वाली औरत से शादी करने को राज़ी हो गया..

मैं, अब कैसे बताऊ मम्मी को की वो शराब की वो पुराणी बोतल है जिसे पिने का नशा नयी शराब में कभी नहीं मिलने वाला: मम्मी प्लस एक तो ये उम्र वाली औरत कहना बंद करो बार बार आप... क्युकी चाहे कुछ भी हो मेरे लिए तो सच यही है की आप आज भी एक जवान लड़की से ज्यादा खूबसूरत दिखाई पड़ती हो और उसे बराबरी की टक्कर देती हो हर तरह से..

मम्मी: ाचा जरा मुझे भी तो बता न ताकि पता चले की आखिर की अपने बेटे की नज़र से कैसे में एक जवान लड़की के बराबरी की हु...

मैं, मम्मी की आँखों में देखते हुए: अब क्या क्या बताऊ आपको मम्मी, आपके चेहरे की खूबसूरती, उम्र के साथ साथ आपके शरीर में परिपक्वता और बनावट जो शायद एक जवान लड़की में कभी नहीं दिखाई लड़ ससक्ति और...

मम्मी, जो बेटे की बाटे सुन अब उत्साहित होते हुए मन में और सुनने की लालसा जागते हुए: और क्या सनी... बोल न...

मैं, करवट लिए हुए लेती हुई मम्मी की वजन के मरे एक तरफ कमीज़ में hi लटकती हुई चुचिओ को देखते हुए: और कुछ नहीं मम्मी...

मम्मी, मेरी नज़रो का पीछा करते हुए शायद समझते हुए की मेने अपनी बात अधूरी क्यों चोर दी लेकिन वो अब पूरी बात सुनने के मूड में आते हुए: देख सनी अब बिच में बात रोकना गलत बात है न, इसका मतलब या तो तू बस मुझे खुश करने के लिए ये सब बोल रहा था.. मुझमे ऐसा कुछ है hi नहीं जैसा तू बोल रहा था..

मैं: नहीं मम्मी ऐसी बात नहीं है और में कुछ झूट नहीं बोल रहा, लेकिन अब इससे आगे जो मुझे बोलना है वो शायद एक बेटे के लिए अपनी hi मम्मी के लिए बोलना गलत होगा...

मम्मी: देख अब जब तूने बात शुरू की है तो उसे ख़तम कर, वार्ना मुझे अब नींद नहीं आएगी.. और बात चाहे किसी भी हो, जितनी भी गस्लात हो एक बार तो बोल दे ताकि मुझे भी पता तो लगे की क्या तू जो बोल रहा वो सच है या बस ऐसे hi मुझे मस्का लगाने ले लिए कह रहा था...

मैं, मम्मी के करीब जाते हुए उनके हाथो पर अपनी हथेली फेरते हुए: सच कहु तो मम्मी अगर में कुछ देर के लिए ये भूल जाऊ की हमारे बिच माँ बेटे का रिश्ता है और आपको सिर्फ एक औरत की नज़र से देखु न तो आपसे सुन्दर, हसीं और कामुक औरत मेने आज तक नहीं देखि.. जिस तरह आपने अपने शरीर की बनावट को मेन्टेन किया हुआ है कोई भी मेरे जैसा जवान लड़का आपको पाने की हसरत रखेगा....

मम्मी, मन hi मन, हे भगवन आखिर क्या सच में आज भी मैं ऐसी दिखती हु की पहले वो अनजान कॉलर के रूप में मेरा hi कोई रिश्तेदार और अब मेरा hi अपना बीटा मेरे बारे में ऐसी बाटे कर रहा है, क्या बेटे के मुँह से ये सब सुन्ना ठीक बात होगी, खैर सुनने में क्या बुराई है, अब सनी के साथ इतनी खुली हु तो ये बाटे तो पूरी सुन ली जाये: सनी ये तू क्या बोल रहा है बीटा, में मम्मी हु तेरी और मेरे बारे में hi ऐसी सब बाटे कर रहा, शर्म नहीं आती तुझे क्या...

मैं: मम्मी इसलिए hi तो मेने बोलने से पहले hi आपको कह दिया की आप अब एक बेटे का नजरिया नहीं सुन कर एक जवान लड़के का नजरिया सुनने वाली हो...

मम्मी, मुस्कुराते हुए : तू वाकई अब भोत बेशरम हो गया है बीटा, में कुछ कहती नहीं इसलिए बस इस बात का फायदा उठा रहा है...

मैं: ः ठीक है ऐसी बात है तो में नहीं बोलता कुछ, रहने देते है इस बात को यही पर...

मम्मी, मन hi मन इस बात को और आगे सुनने के लिए लालायित होते हुए: अब जब तूने बात शुरू की है तो पूरी ख़तम कर hi दे न बीटा..

मैं: हम्म्म तो मई ये कह रहा था की आपके शशरीर का एक एक अंग एक दम सही और सटीक तरीके से बना हुआ है और आपने उनकी बनावट बनाये रखने में भी कोई कसार नहीं चोरी है.. उप्पेर से ले कर निचे तक और aage(chuchi पर नज़र डालते हुए) से ले कर पीछे तक का एक एक अंग इतना सटीक और हसीं लगता है की मन करता है बस आपके इस कामुक खूबसूरत रूप को देखता hi राहु और सच कहता हु अगर कभी में अपनी होने वाली बीवी के बारे में कल्पना भी करता हु तो यही सोचता हु की वो एक दम बिलकुल आप जैसी hi हो...

मम्मी, जो मेरे बिना स्पष्ट रूप से बोलने के बाद भी आगे और पीछे के अंगो का मतलब समझ कर ये जानते हुए की उनके अपने बेटे की भी नज़रो पर उनके चूचियों और गांड ने अपना जादू चला hi दिया है, अंदर hi अंदर उत्साहित होते हुए और साथ hi ये सुन कर की बीवी के रूप में भी बीटा मेरे जैसी औरत की छह रखता है मन hi मन खुश होती है लेकिन इस बात का दिखावा न करते हुए : बास भोत हो गया सनी अब इससे ज्यादा कुछ बोलने की जरुरत नहीं है तुम्हे.. भोत ज्यादा आगे बढ़ रहे हो तुम, मेने इतना भी कुछ बोलने को नहीं कहा था समझे... और ये मत भूलो की फिलहाल में तुम्हारी मम्मी hi हु बीवी नहीं हहै...

मैं: ः मम्मी यही बात का तो मलाल है की आप मम्मी हो इसलिए आपको बेटे के हक़ का hi प्यार जार सकता हु एक बीवी के हक़ का नहीं...

मम्मी मेरी बात सुन हलके से मेरे कान खींचते हुए : नालायक कुछ सोच विचार तो कर लिया कर बोलने से पहले... सच आजकल के बच्चे भोत ज्यादा तेज़ हो गए है...

मैं: अरे मम्मी मैंने ऐसा क्या कह दिया, आपने hi तो कहा था जो भी है सच सुन्ना है मुझे तो मेने सुना दिया, अब इसमें भी मेरी गलती है क्या भला..

मम्मी: हाँ तो मुझे थोड़े hi पता था की तू इतनी बेशर्मी से मेरे बारे में ऐसी बाटे करेगा पागल लड़का...

मैं: हाहाहा अब मेने तो सच कहा, सॉरी अगर आपको बुरा लगा हो तो, पर वाकई मुझे ख़ुशी है मुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत के साथ एक hi बिस्तर पर सोने का मौका मिल रहा है..

मम्मी, मेरी दोहरे मतलब की बात को समझते हुए: तू अब मार खायेगा सनी मुझसे, और ज्याद बोलै न तो वापस भगा दूंगी तुझे टेरर कमरे में फिर न कहना की में तुझे वक्त नहीं देती या तुझे वैसे पैर नहीं देती जैसे बचपन में देती थी...

मैं: ः ाचा ाचा सॉरी, वैसे अभी आपने मेरी दो शर्ते hi पूरी की है एक शर्त बाकि है आपको याद हो तो...

मम्मी: हाँ यद् है पर तूने अब तक तीसरी शर्त बताई भी तो नहीं है न..

मैं: आज नहीं, लेकिन जल्दी hi में आपके सामने अपनी तीसरी शर्त भी रखूँगा मेरी प्यारी मम्मी.. और ये बोल में लेते लेते hi मम्मी के गले लग जाता हु... और उनके गाल चुम लेता हु...

मम्मी, मुझे दूर करते हुए: ाचा चल अब बस, भोत देर हो गयी है, तू भी सो जा और मुझे भी सोने दे..

और ये बोल कर मम्मी मुझे अपने से दूर कर मेरी दिशा से विपरीत मुँह कर करवट बदलते हुए सो जाती है.. हालाँकि सोने का तो एक बहाना सा था शायद, क्युकी अपने बेटे के मुँह से अपने जिस्म की बनावट और खूबसूरती के बारे में सोच कर अब उनकी नींद कुछ वक्त के लिए भाग सी गयी थी, क्युकी अब उनके ज़हन में बस यही चल रहा था की, "कैसे सनी मेरी चुचिओ को घर रहा था और कैसे वो मेरी चुचिओ और गांड के बारे में अस्पष्ट रूप से hi सही सब कुछ बो गया.. उसने मुझे एक कामुक औरत कहा, हे भवन मेरा hi बीटा मेरे बारे में ऐसा सोच रहा है मुझे समझ नहीं आ रहा कैसे रियेक्ट करू, और आखिर मुझे हो क्या रहा है दिन में उस अनजान कॉलर की बातो ने मेरी छूट को गिला कर दिया और अब बेटे की बाटे मुझे अछि सी लग रही है.. बजे इसके की में सनी को दांतु या चिल्लाओ में उसे कुछ नहीं कह प् रही थी आखिर क्यों..."

दूसरी तरफ सनी यानि मेरे दिमाग में अब भी मम्मी की कुछ देर पहले मेरी नज़र पड़ी उन कमीज़ में लटकती हुई चूचियों का नज़ारा घूम रहा था और साथ hi बाईट दिनों मम्मी का खुद के शरीर के साथ पूर्ण रूप से नग्न होते हुए खेलने का वो हसीं दृश्य मेरे लुंड को अब अपनी औकाद पर आने के लिए मजबूर कररहा था और अभी ुंए ससभी दृश्य मेरी आँखों के सस्मने चल hi रहे थे की मेरी नज़र उलटी दिशा में करवट लिए सोइ हुई मम्मी की गांड जो की मेरी तरफ थी उस पर पड़ती है, करवट लेने की वजह से मम्मी का कुरता गांड से साइड में हैट चूका था जिस कारन उनकी गांड उस पाजामे में hi साफ तरफ से दिखाई दे रही थी और मम्मी की वो भरी भरकम मांसल गांड देख मेरा हाथ अपने आप उस तरफ बढ़ जाता है...

ये जानते हुए की मम्मी सो रही है, हौले से मेरा हाथ उनके चूतड़ों पर राखत देता हु और हाथ लगते hi मम्मी के गदराये मुलायम चूतड़ों का वो एहसास हईये, उस एहसास मात्रा से hi लुंड में गर्मी सी च जाती है और में धीमे से आगे की तरफ सरक कर मम्मी से एक दम चिपक सा जाता हु.. कुछ देर बिना किसी हलचल के वैसे hi चिपके रहने के बाद जब ये संतुष्टि हो जाती है की मम्मी किसी प्रकार का कोई रिएक्शन नहीं दे रही, ये मानते हुए की वो सो चुकी है में अपने लुंड को उनकी मुलायम गांड की दरार में फस्स्ते हुए धीरे धीरे घिसने लग जाता हु...

अह्ह्ह्हह्हह मम्मी की गांड के बिच में लुंड घिसने का एहसास मात्रा hi मेरे अंदर का रोम रोम. प्रफुल्लित कर देता है, भले hi ये घर्षण कपड़ो के उप्पर से hi क्यों न हो... निचे से हलकी हलकी एक दम हौले हौले गति से लुंड को गांड पर घिसते हुए अब मेने अपने होठ कसमीज़ में दिकग रही नंगी पीठ पर लगा दिए थे और वह एक हल्का सा चुम्बन दे अपना एक हाथ आगे ले जा मम्मी की मुलायक चुचिओ को एक बार महसूस करने का का प्रयास करने लगा...

जहा में ये सब ये जान कर कर रहा था की मम्मी अब सो चुकी है लेकिन वो तो अपने hi ख्यालो में बेटे की बातो और दिन में उस अनजान शख्स के साथ मस्ती भरी बातो को यद् करए हुए अब भी अर्ध निंद्रा अवस्था में थी और जैसे hi उसे अपनी गांड में बेटे के कड़क लौड़े का एहसास हुआ था उसके शशरीर में करंट सा दौड़ने लगा था, वह उसे भी पहले तो यही लगा की शायद सनी नींद में ऐसा कुछ कर रहा हो लेकिन जब उसे अपनी पीठ पर बेटे के होठो का स्पर्श और बेटे के हाथो से चुकी दबाये जाने का एहसास हुआ तो उसे भी यकीं हो गया की उसका बीटा भी जग रहा है...

एक दूसरे के जगे होने की बात से अनजान यहाँ सनी अब अपनी मम्मी के जिस्म को सहलाते हुए असीम मजा लेने में व्यस्त था वही महिमा जो की अब बुरी तरह से गरमा चुकी थी ये जानते हुए की वो अपने hi बेटे के हाथो ये सब होने दे रही है, फिर भी उसको रोकने की बजे वो इस पल उत्तेजना में अपनी कामुकता के हार कर बेटे के घर्षण का मजा लेने लगती है.. और ऐसे hi एक दूजे की जानकारी के बिना hi दोनों माँ बेटे अपने अपने कपड़ो के अंदर hi अपना अपना रास चोट देते है और सनी ऐसे hi पीछे से चिपक कर महिमा को बहो में भर के सो जाता है...



महिमा, जो अपनी छूट का रास बेटे के घर्षण से बहाने के बाद वापस अपनी हवस भुला जब सच्चाई से वाकिफ होती है तो एक बार पुनबलः उसे ग्लानि होती है की ये मैं क्या कर रही हु, अपने hi बेटे के लुंड को अपनी गांड में महसूस कर उसके घर्षण से गरम हो गयी और मेने उसे रोकने की बजे इस चीज का मजा लेते हुए उसे सब करने दिया उफ्फफ्फ्फ़, नहीं महिमा नहीं ये सब गलत हो रहा है तुझे खुद पर भी काबू पाना होगा सुर इससे पहले की सनी कुछ आगे करने की सोचे तुझे उसे भी स्ट्रिक्ट होते हुए पाबंद करना होगा और उसके सामने इतना खुलने की बजे माँ बेटे के रिश्ते की दोर्र को थामना होगा... और यही सोचते हुए अब महिमा भी सो जाती है...
 
अपडेट - 56


वह दूसरे शहर में सुबह सुबह मानव जो की बिस्तर पर सोया हुआ था, उसकी आँख खुलती है और जैसे hi उसकी आँख खुलती है तो उसके सामने एक खूबसूरत सा नज़ारा होता है, ऐसा नज़ारा जो शायद किसी भी मर्द के डरा देखे जाने के बाद खुद से यही कहेगा की, "वाह क्या शुरुआत हुई है दिन की." दरअसल नज़ारा ये था की सीमा अभी कुछ hi देर पहले बाथरूम से नाहा कर लौटी थी और इस वक्त वो सिर्फ घुटनो तक की लम्बाई वाला एक कुरता पहनी हुई थी और अपनी अलमारी से शायद निचे पहनने का कुरता hi ढूंढ रही थी...

एक कैसे हुए घुटनो तक की लम्बाई वाले कुर्ते में बेटी की जवानी को इस तरह देख और साथ hi उसकी नंगी गोरी चिकनी टैंगो को देखने मात्रा से hi अब मानव का मन डोलने लग गया था, भले hi वो अपनी बेटी के सामने कितनी hi सुधरने की कोशिश क्र ले लेकिन एक जवान औरत की जवानी इस तरह उसके सामने जलवा बिखेर रही थी तो उससे अब कहा काबू होने वाला था और अपने आप hi उसका हाथ कम्बल के अंदर अपने पाजामे के उप्पेर से लुंड पर फिरा देता है...

सीमा जो शायद ये सोच कर सिर्फ कुर्ते में बहार आ गयी थी की रोज उसके पापा यानि मानव की नींद देरी से खुलती है और तब तक तो वो कुर्ते के निचे पेहेन्ने के लिए लेग्गिंग ढूंढ कर वापस बाथरूम में आजायेगी लेकिन उसे भी लेग्गिंग मिल नहीं रही थी इसलिए इतनी देर से वो वही अलमारी में उसे ढूंढने में लगो हुई थी और उसे ये पता hi नहीं है की उसपे पापा की नींद खुल चुकी है और इस वक्त वो उसकी नंगी चिकनी गोरी टैंगो को घूरने में व्यस्त हो चुके है...

मानव यहाँ मन hi मन बेटी की नंगी टंगे और घुटनो से कुछ इंच तक की लम्बाई वालेकुरते की दोनों तरफ के उन कट्स से दिख रही उसकी मांसल भरी हुई गोरी चिकनी जांघो को देख, साथ hi कुरता इतना कैसा हुआ था की कुर्ते में से नज़र आता ब्रा के आकर को देख कर खुद दे यही बाटे कर रहा था की, " वाह मुझे नहीं पता था की सीमा अंदर से इतनी हसीं निकलेगी, कहा मैं बहार की औरतो की जवानी लूटने में व्यस्त था और यहाँ मेरे अपने hi घर में इतना हसीं गुलाब खिला हुआ है, एक दम यौवन से भरा हुआ" और इसी सोच के साथ लुंड को कस के मुट्ठी में दबोच लेता है...

चूँकि मानव जो वैसे hi बेटी की वजह से hi इतने वक्त से किसी छूट का मज़ा नहीं ले पाया था, उसे आज अपनी बेटी की जवानी को इस तरह देख कर उत्तेजित होने में जरा भी शर्मिंदगी महसूस नहीं हो रही थी और दबी आँखों से वो एक तक बेटी की जवानी को निहार रहा होता है और तभी सीमा भी लेग्गिंग ढूंढ़ते हुए निचे झुक जाती है ताकि अलमारी के निचे वाले हिस्से में भी अचे से ढूंढ ले.. और जैसे hi सीमा ऐसे निचे झुकती है उसकी गांड का उभर मानव की आँखों के सस्मने आ जाता है और ये देख अभी मानव के लुंड को एक झटका लगा hi था की कमरे में चल रहे पंखे की वजह से सीमा का कुरता हवा में उड़ता हुआ उप्पेर उठ जाता है और इसी वजह से अब बेटी की उन गोरी मांसल चिकनी जांघो पर फांसी उसके मोठे गदराये मुलायम चूतड़ों को कुछ हद तक धक् रही लाल रंग की पंतय में कैद गांड, मानव की आँखों से सामने आजाती है... और ये नज़ारा देख तो मनो मानव का अपने आप पर से काबू hi खो सा गया हो वो मौका देख तुरंत अपना हाथ पाजामे के अंदर दाल कर लुंड दबोच क हिला देता है..

अभी मानव अपने लुंड को दबोचे हुए मसल hi रहा होता है की वह सीमा को अपनी लेग्गिंग मिल जाती है और उसे अलमारी से निकल लेती है और पलट कर बिस्तर पर लेते हुए अपने पापा की तरफ देखती है... मानव जो की इतना शातिर इंसान था बेटी को पलट ता हुआ देख वो पहले hi संभल चूका था और अपनी आँखे वापस बंद कर चूका था जिससे की सीमा को ये यकीं हो गया की उसके पापा अब भी नींद में hi है..

पापा को नींद में पाने के बाद वो कुछ देर सोचने के बाद लेग्गिंग को एक हाथ से खोल कर पकड़ लेती है और दूसरे हाथ से अपने पहने हुए उस कुर्ते को उप्पेर उठा लेती है और कुर्ते का निचला हिस्सा अपने मुँह में दांतो के बिच दबा देती है...

यहाँ मानव जो की दबी आँखों से ये सब देख रहा था, अब उसकी आँखों के सामने बेटी के जिस्म का अगला हिस्सा था, मतलब की जिस तरह सीमा कुरता उप्पेर उठा कर मुँह में फसाये हुए कड़ी थी, तो उसका पेट बिलकुल नंगा साफ दिखाई दे रहा था और साथ hi वो लाल रंग की पंतय में ढकी हुई उसकी छूट का आकर भी अब एक दम उसकी आँखों के सामने था... एक जवान लड़की, निहायती खूबसूरत और उसकी जवानी का दीदार इस ततः किसी मर्द को करने का मौका नसीब हो जाये तो उसके लिए तो ये जन्नत से काम नहीं ठौर अभी बिस्तर पर लेता मानव भी वैसा hi कुछ महसूस कर रहा था..

अपनी hi बेटी के जवान जिस्म का निचे का हिस्सा मतलब की कमर से ले कर निचे एडीओ तक का पूरा हिस्सा ततः नंगा जहा बस बिच में उसके जिस्म के सबसे कीमती खजाने यानि उसकी छूट को ढंकती हुई एक लाल रंग की पंतय के सिवई और कुछ भी नहीं था, ये नज़ारा देख मनो मानव का लुंड तो ोाजमे के अंदर की पिचकारी मरने को मजबूर सा हो गया था, और लुंड को ऐसे hi कास के पकडे हुए वो आगे का नज़ारा देखने लगता है जहा..

सीमा अब आगे की तरफ झुकते हुए अपनी एक तंग उठा उस लेग्गिंग में डालने लगती है और ठीक वैसे hi अपनों दूसरी तंग भी लेग्गिंग के अंदर दाल कर उस लेग्गिंग को उप्पेर की और खींचने लगती है, और ठीक छूट के निचले भाग तक पहुंचने के बाद अपनी गांड को थोड़ा आगे पीछे कर लेग्गिंग के इलास्टिक को एडजस्ट करते हुए वो उसे उप्पेर की तरफ धकेलती है और अपना कुरता वापस निचे सरका देती है...

सीमा के लिए भले ये सिर्फ लेग्गिंग पहना होगा लेकिन यहाँ बिस्तर पर लेते मानव के लिए तो आज की सुबह किसी जन्नत से काम नहीं थी, जिस बेटी के बारे में उसने सपने में भी नहीं सोचा था, जो उसके सामने इतनी सख्त पड़ती है आज उसी बेटी के जिस्म का दीदार वो भी इतने अचे तरीके से करने का मौका मिलना मनो एक सपना सा hi था... अब भी मानव का हाथ तो आयने के सामने कड़ी अपने बालो को सवारती हुई बेटी सीमा को देख कर लुंड मसलने में hi व्यस्त था की तभी बाल सवार कर सीमा को उसकी तरफ आते हुए देख वो दोबारा संभल जाता है..

सीमा, बिस्तर के करीब आते हुए: पापा, पापा उठो भी अब कितना सोना है और, ऑफिस के लिए लेट हो जाओगे आप..

मानव, बेटी की आवाज सुन नींद से जागने का नाटक कर आँख खोल अंगड़ाई लेते हुए: ओह्ह सीमा, गुड मॉर्निंग बेटी...

सीमा, वापस आईने की तरफ जाते हुए: गुड मॉर्निंग पापा...

मानव, बेटी की जवानी को उप्पेर से निचे तक वापस घूरते हुए और लेग्गिंग में छिपे उभरते चूतड़ देख: क्या बात है सीमा, तुमने तो नाहा भी लिया इतनी जल्दी...

सीमा: हाँ अब मुझे जल्दी जागने और नहाने की आदत जो है., खैर अब आप भी नाहा लो जाओ, फिर ब्रेकफास्ट करने चलना है बुआ वेट क्र रही होगी हमारा...

मानव, बिस्तर से उठते हुए बाथरूम की तरफ जाते हुए: हाँ बेटी बस दस मिनट दो मुझे अभी रेडी हो जाता हु..

और ये बोल मानव सीधा बाथरूम में घुस जाता है और झट से अपना पायजामा निचे उतर कल की तरह hi सामने तंगी सीमा की ब्रा पंतय में से पंतय को हाथ में ले अपनी नाक से सूंघते हुए लुंड को मुठियाना शुरू कर देता है.. बंद आँखों में बेटी की नंगी जंघे, लाल रंग की पंतय में कासी छूट और गांड को यद् क्र उसकी छूट की महक को सूंघते हुए, मन hi मन बड़बड़ाते हुए, "अह्ह्ह्ह क्या मस्त जवानी है सीमा की िष्ठ, इसके आगे तो श्वेता भी कुछ नहीं, वो गोरी मांसल जंघे हईये उफ्फ्फ और वो गोर चूतड़ उम्म्म मन तो कर रहा था की कास के दबोच लू अह्ह्ह और पता नहीं उस लाल रंग की छोटी सी पंतय में छिपी उसकी छूट किसी होगी, कितनी हसीं होगी अह्ह्ह क्या उसकी छूट पर बल है या चिकनी छूट है मेरी सीमा की अह्ह्ह्ह, जो भी हो जैसी भी हो पर होगी तो भोत hi खूबसूरत और रसभरी उम्म्म्म, ahhhh,"aur इसी सोच के साथ कुछ hi देर में मानव का लुंड पिचकारी चोर देता है और वापस बेटी की ब्रा को ठिकाने पर रख नहाने लगता है...

नाश्ता करने के बाद मानव, रागिनी और श्वेता तो वापस अपने काम पर निकल जाते है और सीमा वापस कमरे में पहुंच जाती है, कमरे में पहुंचे कुछ hi देर हुई होती है की उसके मोबाइल पर घंटी बज उठती है और मोबाइल की स्क्रीन पर नाम फ़्लैश हो रहा था "अशोक", यानि की उसके पति का...

एक आरसे बाद आज पहली बार अशोक ने सामने से खुद सीमा को फ़ोन किया था, सीमा फ़ोन रिसीव करते हुए, मीठी सी आवाज में: ही अशोक कैसे हो...

अशोक, रौदे से स्वर में : में ठीक हु, कहा हो तुम अभी, क्या हम मिल सकते है..

सीमा, अशोक की तरफ से इस तरह का रवैया सुनकर: मिल सकते है मतलब? आप वापस कब आये फॉरेन से, और मुझे इस बात की कोई खबर क्यों नहीं दी..

अशोक: खबर दे कर क्या होता, वैसे भी अब बता रहा हु न मैं की में लौट आया हु, तुम बताओ तुम तुम्हारे पापा के यहाँ hi हो न, में उसी शहर में हु अभी मुझे मिलना था तुमसे..

सीमा: नहीं में पापा के यहाँ नहीं अभी, में पापा और बुआ के साथ दूसरे शहर आयी हुई हु.. दो दिन बाद वापस लौटूंगी...

अशोक: ओह, चलो ठीक है फिर में दो दिन बाद वापस आता हु, तब मिलते है..

सीमा: वैसे कोई खास बात है क्या अशोक, भोत सीरियस साउंड कर रहे हो आप..

अशोक: हाँ ऐसा hi समझ लो कुछ, लेकिन ये बाटे फ़ोन पर नहीं की जा सकती, मिल कर hi बताऊंगा फिलहाल चलो bye अब... और ये बोल अशोक ने झट से फ़ोन कट कर दिया..

सीमा, जिसे पहले से hi मालूम तो था hi की अब उसका वैवाहिक जीवन और पति के साथ रिश्ता कुछ ज्यादा ाचा नहीं रह गया है लेकिन फिर भी वो इस रिश्ते को ठीक करने की हर मुमकिन कोशिश करना चाहती थी, लेकिन अपने पति के इस तरह के रवैये से वो आज एक बार फिर कमजोर सी पद जाती है और उसकी आँखे भर आती है और मन में सवाल उठने लगते है की, " आखिर अब क्या बात होगी जो अशोक इतना जरुरी बता रहे और क्या वो बात इतनी बड़ी है की बीवी का हल चल पूछने तक का मौका नहीं दे पायी, और वो वापस आ रहे है ये बात भी उन्होंने मुझे नहीं बताई, न कोई फ़ोन न मश्ग आखिर उनके दिमाग में चल क्या रहा है.. मुझे अशोक की हरकते, उनका मेरे प्रति रवैया कुछ समझ hi नहीं आता है, पिछले कुछ महीनो में पता नहीं हमारे इस रिश्ते को क्या हो गया है जो इतनी कड़वाहट सी आ गयी है, उनका बत्ताव एक दम hi बदल सा गया hai,Pata नहीं अब इस रिश्ते में और क्या क्या होना बाकि रह गया है. "

और अब सीमा खुद को सँभालते हुए, "खैर जो कुछ भी हो दो दिन बाद पता चल जायेगा, मुझे अभी अपना मूड ख़राब नहीं करना है न hi यहाँ किसी को इस बारे में कुछ पता चलने देना है, घर से बहार निकली हु थोड़ा मूड माहौल बदलने के लिए तो ये दो दिन मुझे वही करना है और कुछ नहीं सोचना है."

दूसरी तरफ यहाँ घर पर सनी यानि की मैं भी कॉलेज के लिए तैयार हो कर नाश्ता करके घर से निकलता हु और अभी बाइक ले कर घर निकला hi था की कुछ hi दुरी पर बने चची के घर के बहार मुझे चाचा दिखाई देते है जो की ऑफिस के लिए बस रवाना hi हो रहे होते है और एक तरफ उनका घर से निकलना और उनकी गाड़ी के रवाना होते hi मैं चची के घर के बहार अपनी बाइक रोक देता हु और सीधा घर के अंदर चला चला जाता हु..

कुछ देर दूर बेल्ल बजने के बाद चची दरवाजा खोलती है और मुझे दरवाजे पर देख मुस्कुरा देती है...

अंजलि चची: ोहू सनी तुम यहाँ इस वक्त, क्या बात है..

मैं, अंदर जाते हुए: क्यों नहीं आ सकता क्या में यहाँ, क्या मेरा घर नहीं ये, वैसे इतनी देर क्यों लगाई दरवाजा खोलने में..

चची: आ सकते हो बिलकुल, अब तो तुम्हारा hi है ये घर, वैसे भी तुम्हारा वंशज है इस घर में अब तो हहै... बस बेबी को दूध पीला रही थी इसलिए वक्त लग गया आने में..

मैं, चची की चूचिया भींचकर: थोड़ा दूध मुझे भी पीला दिया करो कभी कभी चची..

चची: अह्ह्ह्ह उम्म्म ओह्ह सनी, कभी कभी क्यों में तो रोज पिलाने को तैयार हु, अजय करो जब मन करे पिने और क्या हहै.. वैसे भी इनमे दूध आया भी तो तुम्हारी वजह से hi है न..

मैं, उनकी साड़ी का पल्लू गिरते हुए: ठीक है तो शुभ काम में देरी कैसी भला.. और ये बोल उन्हें उठा कर वही सोफे पर लिटा देता हु और चची की दोनों चूचिया खली करने के बाद हमारे बिच चुदाई का एक घमासान दौर चालू हो जाता है और इस दौर के अंत में चची के मुँह में अपना वीर्य भर कर में उनके घर से निकल कॉलेज की तरफ चला जाता हु.

में तो कॉलेज जाते जाते चची के घर उन्हें अकेला प् कर उनका दूध पिने और छूट की ठुकाई करने पहुंच गया लेकिन वही चाचा जो की ऑफिस के लिए निकले थे उन्होंने अपनी गाड़ी के मिरर से मुझे अपने घर के आगे गाड़ी कड़ी करते हुए देख लिया था और मुझे घर के अंदर जाते हुए देख कर hi उन्हें ये समझ आ गया था की हो न हो सनी मेरी बीवी अंजलि की छूट मरने hi रुका है..

और यही बात दिमाग में आते तुरंत मन hi मन उग्र होते हुए, " कर ले बीटा सनी बस एक दो दिन और मस्ती कर ले फिर देख में कैसे ठीक करता हु तुझे, मेरी बीवी को छोड़ कर तू जो मस्ती और मजे ले रहा है न बस्स्स अब भोत हो गयी ये मस्ती, अब मेरी बीवी के साथ ऐसे सम्बन्ध बनाने और उसे माँ बनाने का जो घिनोना काम किया है न उसका जवाब देगी तेरी मम्मी और मेरी प्यारी भाभी महिमा, अब हद hi हो रही है लगता है मुझे इस काम को अंजाम देना hi होगा... " और इसी सोच के साथ वो गाड़ी के एक्सेलरेटर को दबा कर अपने ऑफिस की और चला जाता है..

 
अपडेट - 57




दोपहर के समय रोज की तरह hi आज भी महिमा अकेली hi होती है और तभी महिमा का फ़ोन फिर बज उठता है, और जैसे hi उसकी नज़र मोबाइल की स्क्रीन पर पड़ती तो जिसका नंबर उसे दिखाई देता hi वो था उसी "अनजान कॉलर" का...

महिमा, फ़ोन रिसीव करते हुए: hello...

कॉलर: हैए कितनी नशीली आवाज है आपकी महिमा जी, सच सिर्फ hello इतना hi सुना और नशा सा चढ़ा दिया अपने तो..

महिमा: बस बस अब ये चिकनी चुपड़ी बाटे बंद करो samjhe...aur ये बताओ की फ़ोन क्यों किया है.

कॉलर: अब भला आपको कॉल करने के लिए कोई कारन होना जरूरी है क्या, आप जैसे जानती hi नहीं की आपसे बात करने का तो मौका ढूंढ़ता है आपका ये चाहने वाला...

महिमा: हाँ सब अचे से पता है मुझे, वैसे भी बस आज और कल का दिन है फिर ये बात करना सब बंद हो जायेगा, मेरे पति और बेटी ससब वापस आजायेंगे तो...

कॉलर: हईये इसी बात का तो गम है मुझे महिमा जी, मुझे नहीं लगता की अब आपसे बात किये बिना एक दिन भी में रह पाउँगा..

महिमा: ओह्ह जनाब ऐसा कुछ सोचना भी मत समझे, ठीक है इन दिनों मेने तुमसे अपनी लुक चढ़े पार करके खुल कर बात कर ली लेकिन ये सब आगे नहीं चलने वाला है...

कॉलर: वो तो आगे आने वाला वक्त बताएगा महिमा जी, फिलहाल वर्त्तमान की बात करे तो बेहतर है, वैसे अब आपने पिछले दिनों की बातें और मस्ती का ज़िक्र किया hi है तो आपसे पूछना चाहूंगा की आखरी बार जब हमारी बात चल रही थी तो कौन आ गया तह घर में की झट से फ़ोन रखना पड़ा आपको...

महिमा: वो मेरी बेटी कॉलेज से लौट आयी थी इसलिए..

कॉलर: ओह्ह्ह भोत गलत हुआ न ये तो..

महिमा: इसमें गलत क्या हुआ, बेटी अपने घर नहीं आएगी तो कहा जाएगी भला..

कॉलर: अरे नहीं वो बात गलत नहीं, में तो गलत उस बात को कह रहा की बेटी के घर आने की वजह से आपका अपनी गीली तड़पती छूट को सहलाना बिच में hi रोकना पद गया होगा न...

महिमा, उस वक्त छाडे वासना के नशे को यद् कर मुस्कुरा देती है : ऐसा कुछ नहीं है समझे, वैसे भी मुझे पता है मेरे शरीर पर कैसे काबू पाना है...

कॉलर: ाचा तो आपका ये मतलब है की आप उस वक्त अपनी छूट नहीं सहला रही थी, उसमे अपनी लम्बी लम्बी उंगलिया दाल कर छूट का छोडन नहीं कर रही थी...

महिमा: हाँ सही कहा तुमने, में ऐसा कुछ भी नहीं कर रही थी...

कॉलर: क्यों झूट बोल रही हो आप, मुझे आपकी भरी आवाज की सिसकिया और गहरी सास लेते हुए आपके जिस्म की कामुकता भोत अचे से समझ आ रही थी समझी आप...

महिमा: ाचा जब ये सब समझ आ hi गया था तो पूछ क्यों रहे हो फिर...

कॉलर: क्युकी मुझे ये सब आपके मुँह से सुन्ना है इसलिए...

महिमा: उफ्फ्फ तुम वाकई बेशरम हो यार,... हाँ सच कहा तुमने, मैं उस वक्त कुछ ज्यादा hi गरमा गयी थी और मेरी छूट को सहलाने लग गई थी...

कॉलर: हम्म्म फिर तो बेटी का इस तरह गलत वक्त पर लौटना भोत ख़राब लगा होगा न आपको, भोत चीड़ मची होगी उस पर ः..

महिमा: हहै जी नहीं जनाब ऐसा कुछ नहीं था क्युकी वह उसका दरवाजा खटखटाना और यहाँ मेरी छूट के रास का बहना दोनों एक साथ hi हो रहा था तो एक तरह से अगर वो नहीं भी आती तब भी शायद में उसके आगे तुमसे इस बारे में बात नहीं करती...

कॉलर: ओह तो आपका मतलब ये है की आपने मुझे बस अपनी हवस और कामाग्नो तृप्त करने तक hi बात करने का सोच रखा था क्या...

महिमा: हाँ तो और नहीं तो क्या हहै, एक अनजान शख्स से इससे आगे क्या बात करू और वैसे भी में भोत वक्त से असंतुष्ट तो महसूस कर hi रही थी तो उस दिन सोचा तुम्हारी मदद से hi काम चला लू...

कॉलर: वाह मुझे नहीं पता था की आप इतनी तेज निकलोगी महिमा जी..

महिमा: कोई बात नहीं तुम्हे पता करके करना भी क्या है अब, वैसे भी उस दिन जो हुआ वो पहली और आखरी बार था, और तुम्हे यही कहना चाहूंगी की दो दिन बाद मेरे पति वापस लौट रहे है तो मुझे कांटेक्ट करने की कोशिश भी मत करना.. मैंने इतने दिन तुमसे बात करके तुम्हारी बात रख ली अब और कुछ भी उम्मीद न करना...

कॉलर, यहाँ अपना आखरी डाव खेलने का सोचते हुए: ठीक है महिमा जी, में आपकी हर एक बात मानूंगा लेकिन आपको मेरी बस एक आखरी बात माननी पड़ेगी..

महिमा: कौनसी बात बची है अब और?

कॉलर: पहले ये वडा करो की आप मन नहीं करोगी..

महिमा: में ऐसा कोई वडा नहीं कर सकती बिना बात जाने.. तुम्हे बतानी है तो बताओ वार्ना तुम्हारी मर्जी...

कॉलर: ः यार भोत जिद्दी हो आप, ठीक है, जैसा की आपने कहा की आने वाले दो दिनों के बाद आप मुझसे किसी भी तरह का संपर्क नहीं रखना चाहती है तो में चाहता हु की कल का दिन आप मेरे लिए एक यादगार दिन बना दो, यकीं कीजिये इसके बाद में आपकी हर बात मानूंगा और आपको कभी तंग नहीं करूँगा...

महिमा: यादगार बना दू, मतलब क्या करना होगा ऐसा मुझे जो तुम्हारे लिए कल का दिन यादगार बन जाये...

कॉलर: " मैं आपसे सिर्फ एक बार मिलना चाहता हु.. अगर कल आप मुझसे मुलाकात कर लेती है तो मुझे ऐसा लगेगा की मेरा एक अधूरा सपना सच हो गे है"..

महिमा, चौकते हुए की : ये क्या कह रहे हो तुम, ऐसा बिलकुल भी नहीं हो सकता है, में कभी नहीं मिल सकती tumse...aur वो भी तब जब मेने तुमसे इतनी खुल कर साडी बाटे की हो और तुम पहले से hi मेरे कोई रिश्तेदार हो.. नहीं बिलकुल नहीं, अगर अब तुमसे मिल ली तो शायद ज़िन्दगी भर में खुद से नज़रे न मिला पाऊँगी...

कॉलर: महिमा जी एक बार मेरी पूरी बात तो सुन लीजिये, पहले hi इतना कुछ कह रही हो आप ः...

महिमा: तुमने बात hi ऐसी की है, अब इसमें और सुनने जैसा बचा hi क्या है...

कॉलर: अरे में सिर्फ एक मुलाकात के लिए कह रहा हु, और यकीं मानिये ये मुलाकात बिलकुल hi नार्मल रहेगी, में आपको अपना स्पर्श तक महसूस नहीं होने दूंगा अगर आप नहीं चाहती हो तो, ये समझ लो की मुझे बस इस खूबसूरत हसीं औरत के साथ कुछ वक्त अकेले में बिताना है जहा बस में और आप हो...

महिमा: नहीं चाहे तुम कुछ भी कहो ये मुमकिन नहीं है...

कॉलर: क्यों नहीं है लेकिन, आपको इस बात का दर है न की आपने मुझसे इतनी खुल कर साडी बाटे की, चुदाई से लेकर पति से आपके सम्बन्धो के बारे में मुझे बताया और अब मुझे आपकी कमज़ोरी इच्छाएं ये सब पता है और आपको इसी बात का दर है की अगर आप मुझसे मिलने आती है तो मैं इन सब चीजों का आपके खिलाफ गलत फायदा उठाऊंगा हैं न?

महिमा: पता नहीं मुझे इस सब के बारे में पर अब इतना सब होने के बाद में नहीं मिल सकती तुमसे बस,, हो सकता है जो तुमने कहा शायद ये सभी प्रकार का दर भी हो मेरे मन में इस वक्त... और साथ hi इस बात का गिला हो की अपने hi किसी रिश्तेदार का सामना कैसे करू जिससे मेने बेशर्मो जैसे इतनी बाटे कर डाली...

कॉलर: देखिये महिमा जी, में आपको यकीं दिलाता हु, जैसा की मेने कहा आपकी मर्जी के बिना तो में आपको स्पर्श भी नहीं करूँगा तो कुछ करना तो दूर की बात है, रही बात हमारे बिच पिछले दिनों हुई इतनी तरह तरह की बातो की तो वो बातें कभी हमारे रिश्ते के बिच नहीं आएगी, हाँ इसमें कोई दोराहे नहीं की में आपको पाने के लिए कुछ भी कर जाऊ लेकिन अगर उसमे आपकी इच्छा नहीं है तो में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाऊंगा...

कॉलर: कल अगर आप मुझसे मिलने तो राज़ी होती है तो ये सिर्फ एक साधारण सी मुलाकात होगी, ये समझ लीजिये की आपका कोई चाहने वाला है जो बस आपके साथ कुछ यादगार पल बिताना चाहता है और कुछ भी नहीं...

महिमा, कुछ देर सोचने के बाद: नहीं फिर भी मुझे मेरा मन इस बात को गवारा नहीं की में ऐसे किसी से मिलु... न में तुम्हे अब एक दम अनजान समझ के मिल पाऊँगी और एक रिश्तेदार से मिलने लायक तो अब हमारे बिच कुछ बचा hi नहीं है, कितना अजीब लगेगा यार...

कॉलर: ओफ़्फ़्फ़ो महिमा जी, आप बेवजह hi इतना सोच रही हो, मुझसे रिश्तेदार ना समझो बस कोई अनजान शख्स hi समझ कइल लेना और क्या, बस मेरी एक विनती, इच्छा कुछ भी समझ के पूरी कर दीजिये इसे...

महिमा, सोचते हुए ki,vaise मिलने में बुराई नहीं, उल्टा आखिर मुझे भी पता तो चलेगा की आखिर ये है कौन वार्ना मानव के आने के बाद में इसका नंबर वैसे hi ब्लॉक करने वाली हु तो हमेशा इसके अनजान होने का राज़ राज़ बन कर hi रह जायेगा.. : हम्म्म ठीक है पर तुम्हे वडा करना की ये मुलाकात एक साधारण सी hi मुलाकात होगी और तुम ऐसा वैसा कुछ भी नहीं करोगे...

कॉलर, खुश होते हुए: अरे महिमा जी मैंने कहा न की कुछ भी गलत नहीं होगा आपकी इच्छा के विरूद्ध... तो क्या में ये पक्का समझू की आप मुझसे मिलेंगी...

महिमा : हैं ठीक है कल इसी वक्त मिल पाऊँगी तुम्हे लेकिन मैं...

कॉलर: अरे समय की कोई दिक्कत नहीं, मेरे लिए इतना hi भोत है की आप मिलने को राज़ी हो गयी है.. सच मैं, भोत भोत भोत शुक्रिया आपका मेरी बात क़ुबूल करने के लिए.. में बता नहीं सकता आज में कितना खुश हु, जिस औरत के लिए में आज तक सपने देखता आया हु, जिसे चिप चिप कर फंक्शन्स में देखा करता था कल उस औरत के साथ अकेले में कुछ वक्त बिताने को मिलने वाला है.. सच ये भोत हसीं पल होगा मेरी जिंदगी का...

महिमा: ः बस बस अब इतना भी हवा में ना ऊधो... वैसे मिलेंगे कहा हम?

कॉलर: उसकी आप चिंता मत करो, जगह बेहद hi खूबसूरत होगी बिलकुल आप जैसी hi, आप तो बस एक सुन्दर सी सारी में लपेटे हुए अपने इस हसीं जिस्म को लिए वह पहुंच जायेगा...

महिमा: ः वो सब तो ठीक है पर जगह बताओगे तब पहुँचूँगी न मैं वह पर...

कॉलर: वो आपको कल hi पता चल जाएगी, फ़िक्र न करिये, कोई ऐसी वैसी जगह नहीं होगी और न hi आपके साथ कुछ गलत होने वाला है.. आखिर हो तो आप मेरे hi परिवार क हिस्सा न तो आपको थोड़े किसी गलत जगह ले जाऊंगा या कोई गलत काम करूँगा...

महिमा: हम्म्म ठीक है फिर अभी में फ़ोन रखती हु बेटी के आने का भी समय हो रहा है..

कॉलर: ठीक है महिमा जी, एक बार और भोत भोत शुक्रिया आपका, कल मिलते है.. ब्बये...

और ये बोल फ़ोन रखते हुए यहाँ कॉलर अब मन hi मन ख़ुशी से उछलते हुए की आखिर वो दिन आ hi गया जब ये हसीं कामुक जिस्म की औरत महिमा मेरे साथ होगी, और कल जो होगा वो तो वाकई मजेदार होगा है... मुझसे तो अब रहा नहीं जा रहा की कब कल का दिन आये और महिमा का जिस्म मेरी गिरफ्त में उफ्फ्फ्फ़...

यहाँ कॉलेज सनी अभी मैं कैंटीन की तरफ जा hi रहा था की उसकी नज़र कॉरिडोर से गुज़रती हुई प्राची मां पर पड़ती है और उन्हें देखते hi सनी के दिमाग में कामिनी भाभी द्वारा कही हुई बाटे यद् आजाती है की कैसे प्राची ने कामिनी से सनी के बारे में कुछ बाटे कही थी जो ये दिखा रही थी मनो प्राची को सनी से किसी तरह का शिकवा है और उसी बात को जानने के लिए सनी वही से प्राची को फ़ोन मिला देता है..

प्राची, कॉल रिसीव करते हुए: हाँ सनी बोलो क्या हुआ...

सनी: मां आपसे कुछ जरुरी काम था क्या आप अभी पार्किंग एरिया में आ सकती हैं क्या..

प्राची, पार्किंग एरिया का नाम सुन कर ये समझते हुए की कही सनी उसके साथ किसी तरह की मस्ती करने की बात तो नहीं क्र रहा: सनी देखो ये कोई समय नहीं है मस्ती करने का समझे, अगर तुम उस सब के लिए मुझे बुला रहे हो तो में बिलकुल नहीं आ रही हु...

सनी: ः अरे ma'am क्या आप भी, सच में कुछ जरुरी काम है प्लस आप आओ तो सही..

प्राची: ठीक है आती हु थोड़ी देर मैं...

पार्किंग एरिया में सनी पहले से hi पहुंच चूका था और कुछ hi देर में प्राची भी वह ोाहीच जाती है और सनी को एक कोने में कार के पीछे खड़े देख उसके मन में दोबारा शंका होती है की आखरी उसने यहाँ क्यों बुलाया है लेकिन अब आ hi गयी है तो सोचने का क्या फयदा, और सीधा सनी की तरफ बढ़ जति है..

प्राची, सनी के पास जा क्र: हाँ बोलो सनी, ऐसी क्या बात थी जो मुझे यहाँ बुलाया..

सनी, कैसे हुए सलवार कमीज़ में अपने जिस्म की बनावट और उभारो का दीदार करते हुए सामने कड़ी प्राची को देख: जल्दी भी क्या है ma'am, जरा मुझे आपकी सुंदरता को अचे से निहार तो लेने दीजिये, कितने दिनों बाद तो ऐसा मौका मिला है ः...

प्राची, मुस्कुराते हुए: बकवास बंद करो समझे सनी, यहाँ इसलिए बुलाया है क्या मुझे...

सनी: बुलाया तो किसी और वजह से है पर आपको इस रूप में देख मेरा इरादा अब कुछ और करना का बन रहा है ः...

प्राची, थोड़ा घबराते हुए इधर उधर देख कर: पागल हो गए हो क्या सनी, यहाँ तो कुछ करने की सोचना भी मत, कोई बी कभी बी आ सकता है यहाँ...

सनी, प्राची के हाथो को अपने हाथ में ले उसे करीब खींचते हुए: ाचा ठीक है नहीं करता परुजहे आपसे कुछ बातो के जवाब जानने है वो तो दे सकती हो न आप..

प्राची, वैसे hi करीब खड़े खड़े: कैसे सवाल और क्या जवाब चाहिए तुम्हे मुझसे...

सनी: न जाने क्यों लेकिन पिछले दिनों से में नोटिस कर रहा हु की आपका बर्ताव मेरे लिए थोड़ा बदल सा गया है, जान सकता हु की ऐसा क्यों...

प्राची: नहीं तो सनी ऐसा तो कुछ भी नहीं है...

सनी: देखो प्राची, चाहे में तुम्हारे साथ नहीं रहता पर मुझे एक औरत के बर्ताव में मेरे प्रति बदलाव भोत अचे से पता चलता है, ऐसा लगता है मनो तुम मुझसे दूर जाना छह रही हो क्या ये सच है...

प्राची, : कुछ भी मतलब सनी, अगर दूर जाना होता तो अभी क्या इस तरह तुम्हारे इतने करीब कड़ी होती क्या मैं, बोलो तुम hi...

सनी: वो तो इसलिए कड़ी हो क्युकी मेने बुलाया आपको यहाँ अभी, मुझे बस आपसे सच सच जानना है की आखिर आपके डिंग में चल क्या रहा है क्या सोच रही हो आप मेरे बारे में अब...

प्राची, थोड़ा सीरियस होते हुए: देखो सनी हमारे बिच पहले hi भोत कुछ हो चूका है, इनफैक्ट ये कहूँगी की सब कुछ hi हो चूका है, में अपना सब कुछ तुम्हे सौप चुकी हु एक बार के लिए तो, लेकिन....

सनी: हाँ लेकिन क्या?

प्राची: देखो सनी मैं तुम्हारे जैसे बड़े घर से नहीं आती, भोत सुलझे हुए घर से हु और उसी तर्ज से रहती हु, मेरी इच्छाएं भी उतनी hi है ज्यादा बिलकुल नहीं... पर उस दिन मेरे घर जो हमारे बिच हुआ, जहा मैंने अपना सब कुछ तुम्हारे नाम कर दिया, उसके बाद मुझे खुद पर ग्लानि सी महसूस होने लगी क्युकी में किसी की पत्नी किसी की प्रेमिका हु और इसके साथ hi कही न कही मुझे ये भी पता है की तुम इतने नमी हो की तुम्हे शायद इस बात का फरक भी नहीं पड़ेगा और सब कुछ आसानी से भुला डोज लेकिन मेरे लिए ये सब इतना आसान नहीं होने वाला है, और बस इसलिए में नहीं चाहती थी की हमारे इस रिश्ते को और आगे की हवा मिले बाकि मुझे तुमसे किसी ततः की कोई शिकायत नहीं है सनी...

सनी: शिकायत नहीं है? वाह! इतनी बड़ी शिकायत, शिकायत क्या आपने तो इल्जाम सा hi लगा दिया एक झटके में मुझ पर और कह रही हो की शिकायत नहीं hai...kya लगा आपको की में भी बाकि के उन ऐयाश रईस बदमाशों जैसा हु की जिस पर नज़र पड़ी जो पसंद आयी उसको भोग लिया और अपने रस्ते चल दिया.. हाँ?

सनी: मुझे सिर्फ एक बात बताओ प्राची, क्या मेने तुमसे जो रिश्ता बनाया वो जबरदस्ती का था? या उस दिन जो तुम्हारे घर तुम्हरे बिस्तर में तुम्हरे इस शरीर को भोगा वो तुम्हारी मर्जी के खिलाफ किया गया कार्य था.. बताओ प्राची?

प्राची: सिर्फ ना में सर हिला देती है..

सनी: तो फिर तुमने ये कैसे कह दिया की में भी बाकि उन लड़को जैसा हु जो बस तुम्हारे जिस्म का उपयोग करके तुम्हे कही साइड में फेक दूंगा.. अगर मुझे यही करना होता तो चाँद मिनट लगते मुझे समझी तुम.. और हाँ अगर सच में अब तुम्हारी मेरे. प्रति यही सोच बन गयी है तो मुझे नहीं लगता की अब तुमसे बात करना भी मेरे लिए ठीक होगा.. और ये बोल सनी प्राची का हाथ चोर उसे पीछे की और सरका देता है...

प्राची, सनी की बाते सुन रुआँसी सी होते हुए अपनी गलती का एहसास करते हुए: नहीं सनी मेरा वो मतलब नहीं था, में बस घबरा गयी थी, कंफ्यूज हो गई थी की कही ये सब मेरी शादी शुदा ज़िन्दगी को एफेक्ट न कर जाये, ऐसा न हो की सब इतना बिखर जाये की में संभल न पाव...

सनी: ये बात थी तो तुम मुझसे डिसकस कर सकती थी न प्राची की आखिर तुम्हारे मन में क्या चल रहा है, वो तो ठीक है आज मेने पूछ लिया वार्ना तो तुम कभी बताती hi नहीं.. खैर जो भी है अब आगे से तुम्हे ऐसी किसी प्रकार की भी ग्लानि महसूस नहीं होगी क्युकी अब में तुम्हे कभी किसी भी प्रकार से तंग नहीं करूँगा, न hi तुम्हारे सामने आऊंगा, ये तो ठीक है न...

प्राची, करीब आते हुए बिना किसी दर एक झट से अपने होठ सनी के होठो पर रखते हुए एक गहरा चुम्बन जड़ देती है: नहीं सनी ऐसा मत कहो, मुझे माफ़ कर दो मेरा तुम्हारा दिल दुखने का कोई इरादा नहीं है, आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा... मई बस दर गयी थी इसलिए ये सब बोल बैठी...

सनी, प्राची के गलो को हाथो में पकड़: प्राची में भी समझता हु की तुम्हारी अपनी जिंदगी है अपना परिवार है और मैं ये कभी नहीं चाहूंगा की वह तुम्हे किसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़े तो प्लस ऐसा कभी मत सोचना और हाँ मुझे अपनाना न अपनाना, मुझसे सम्बन्ध रखना न रखना ये भी अब बिलकुल तुम्हारी मर्जी है, मेरी तरफ से कोई जोर जबरदस्ती नहीं है.. हाँ में तो बीएस यही कहूंगा की चाहे तुम शादी शुदा हो, किसी की पत्नी हो लेकिन मैं तुम्हे हमेशा पाना चाहूंगा हमेशा प्यार करना चाहूंगा.... तुम्हारे इस खूसूरत जिस्म को, उसके हर एक अंग अंग को प्यार करते हुए भोगना चाहूंगा ः...

प्राची, मुस्कुराते हुए: हहै बस बस अब इतना भी ज्यादा न बोलो समझे, घर नहीं ह ये मेरा, कॉलेज में है हम... और हाँ अब मुझे कोई शिकायत नहीं है तुमसे और में खुद हमारे इस गोपनीय रिश्ते को इसी तरह कायम रखना चाहूंगी...

सनी: अच्छा इसी तरह मतलब किस तरह से कायम रखना है प्राची.. और अगर अभी घर पर होती कॉलेज की जगह तो क्या करती...

प्राची, कान के पास अपने होठ ला कर धीरे से बोलते हुए: अगर घर पर होती तो तुम्हारे कड़क दुमदार हथियार को मेरी इस नाजुक सी ओखली के अंदर ले कर अचे से कुटाई करवाते हुए अपने इस गोपनीय रिश्ते को ऐसे hi कायम रखती हहै..

सनी, उसकी बात सुन प्राची के कमर में हाथ दाल एक दम से जकड़ते हुए: ाचा इतना पसंद आया है तुम्हारी ओखली को मेरे हथियार की कुटाई...

प्राची: हाँ भोत ज्यादा, उस दिन के बाद तो न जाने कितनो बात मन हुआ दोबारा तुम्हारे इस लुंड से छोड़ने का सनी लेकिन बस इसी दर ने मुझे रोका हुआ था, पर अब मुझे किसी तरह का दर नहीं, जब भी मौका मिलेगा घर आजाना मुझे अपने इस दुमदार लुंड का स्वाद चखने के लिए उम्म्माह...

सनी, कुर्ते के उप्पेर से चूचिया मसलते हुए: ः कोई बात नहीं इतने दिनों की कसार निकल दी जाएगी जल्दी hi... कहो तो अभी थोड़ी भोत मदद कर दू ः...

प्राची: अह्ह्ह नहीं सनी प्लस अभी नहीं, मौका बना कर घर आजाना अचे से मदद क्र देना हहै.. चलो अब मेरी क्लास भी है मुझे जाना होगा.. और ये बोल एक बार और होठो को होठो से मिला चुम्बन का मजा ले दोनों एक दूसरे से अलग हो जाते है..

 
ा स्माल रिकैप ऑफ़ थे स्टोरी :-





Hello दोस्तों, जैसा की मेने कहा था की भोत जल्दी hi में आपके सामने इस कहानी के आगे के उपदटेस पेश करूँगा, मुझे मालूम है की आप लोगो में कही जा कही कहानी के रुकने से निराशा उत्पन्न हुई है, जिस कारन में आप सभी से माफ़ी मांगता हु और इसके साथ hi आप सब का धन्यवाद् भी करता हु अब तक साथ बनाये रखा है और उम्मीद करता हु आगे भी इसी तरह साथ बना कर रखोगे

कहानी का अगला अपडेट पेश करने से पहले एक छोड़ा सा रिकैप कर रहा हु...

तो जैसा की अब तक हमने इस कहानी में देखा की :-

1) सनी अपनी भाभी कामिनी को अपने बिस्तर पर निचे लिटा कर भोत अचे से रगड़ रगड़ कर छोड़ चूका है और अपने देवर की चुदाई से खुश हो कर कामिनी भी अब ख़ुशी ख़ुशी उसकी रंडी बन कर अपना जिस्म लुटवा रही है और उसके हर काम में उसका साथ दे रही है

2) सनी ने अपनी चची अंजलि को अचे से छोड़ छोड़ कर अपने दोस्त की माँ डॉ कुसुम की मदद से उन्हें माँ बनने का सुख दिलाया और जिस कारन अब अंजलि पूरी तरह से सनी की हो चुकी है और साथ hi अंजलि के पति और सनी के चाचा अजित को इस बात का पता लग चूका है की उसके घर में उसकी बीवी ने जिस बेटे को जन्म दिया है वो उसका न हो कर उसके भतीजे सनी के बीज का फल है, और इसी बात को जान कर अजित अब बदला लेने की फ़िराक में बैठा हुआ है

3) सनी अपनी मम्मी महिमा की सहेली माधवी को भी दुमदार चुदाई से संतुष्ट कर चूका होता है.

4) अपने कॉलेज की एक प्रोफेसर प्राची Ma'am को भी सनी अपने निचे सुला कर अपने प्यार में पड़ने के लिए मजबूर कर दिया होता है लेकिन कामिनी भाभी के जरिये सनी को पता लगता है की कही न कही प्राची के मन में कुछ चीजे होती है जो अब तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई होती है.

5) सनी अपनी बड़ी बेहेन सीमा से सबसे ज्यादा प्यार करता है और वो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी और ताकत दोनों होती है.

6) सनी के पापा, मानव जो की शादी शुदा औरतो की छूट मरने का शौक़ीन है और अपने ऑफिस की सेक्रेटरी श्वेता को अपनी पर्सनल रंडी बना चूका है, जिसको अब अपनी महिमा के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं बची होती है, अपनी बड़ी बेटी सीमा की सहेली रश्मि, जो की बदला लेने की भावना से उसके ऑफिस में काम करती है, उसके ट्रैप में फास जाता है और सीमा को मानव की साडी करतुते पता चल जाती है जिससे बाप बेटी के रिश्ते में फीकापन आ चूका होता है.

7) सनी के लिए अपनी छोटी बेहेन प्रीति का भी नजरिया अब धीरे धीरे बदल रहा होता है और कही न कही अपने भाई की वजह से या उसको सोच कर वो अपने शरीर में और भावनाओ में हो रहे बदलाव को समझने की उलझन में फांसी हुई होती है, और इस सब का कारन होता है सनी का उसके लोए कॉलेज में स्टैंड लेना और अपनी सहेली मोनाल द्वारा उसके भाई के प्रति आकर्षण व्यक्त करना.

8) घर की सबसे स्ट्रिक्ट सदस्य और अपनी बुआ रागिनी को भी सनी अपने हमबिस्तर कर चूका है और बुआ ने भी सनी से कमरे की चार दीवारी में शादी करके उसे अपना पति बना लिया होयता है और अब वो सनी को खुश करने और उसे सरप्राइज देने के लिए कुछ और हसीं कदम उठाने वाली है.

9) एक और बात यहाँ की सनी का भाई, कामिनी का पति राहुल जो अपनी बुआ पर नजरे गड़े बैठा था, उसने अपनी बुआ पर हाथ डालने की कोशिश की थी जिस पर बुआ ने उसे कस के थप्पड़ रसीदे थे और उसके बाद इन दोनों के रिश्ते में कड़वाहट आ चुकी होती है और अपने पति की इस करतूत के बारे में कामिनी को भी पता होता है.

10) सनी और उसकी मम्मी महिमा, जिसके अपने पति के साथ शारीरिक सम्बन्ध बिलकुल न के बराबर रह गए है, के बिच भी कररबिया बढ़ रही होती है और इनदिनों पापा मानव के बहार होने की वजह से वो अपनी मम्मी के साथ hi उसके रूम में राते बिता रहा है, दोनों के मन में भोत कुछ है लेकिन अभी तक उन दोनों के बिच कुछ नहीं हुआ होता है.

11) एक अनजान कॉलर जो रोज महिमा को कॉल करके परेशां कर रहा होता है और उसे पाने चाहने का दवा कर रहा है, जो खुद कप घर का hi सदस्य भी बता रहा है और थक हार कर महिमा भी एक बार उसे एक जनरल मीटिंग करने के लिए राज़ी हो जाती है.



ये कुछ महत्वपूर्ण किस्से है जो इस कहानी में अब तक हो चुके है, बाकि और भी भोत कुछ हुआ है जो अपने कहानी में अब तक पढ़ा है और जिसे पूरा यहाँ लिखना संभव नहीं है, जिस के लिए जिन्होंने अब तक ये कहानी नहीं पढ़ी उनसे अनुरोध करूँगा की कहानी को शुरू से एक बार जरूर पढ़े और मेरा साथ समर्थन सुझाव देते हुए कहानी आगे बढ़ने में मदद करे, और जो लोग शुरू से मेरा साथ बनाये हुए है उनका में भोत शुक्रगुजार हु और आगे भी ऐसे hi साथ की आशा और भरोसा करता हु... धन्यवाद् दोस्तों... अगला अपडेट भोत जल्द आपके सनमे पेश करूँगा!!!!
 
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