Romance भंवर (पूर्ण) - Page 7 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:-45

"कोई एक तो खुश रहे मेरे भाई… मेरा क्या है, बिना अाशरा तब भी थे आगे भी जीते रहेंगे। एक ही दर्द से 2 लोग क्यों पिस्ते रहे।"…

संडे की सुबह.. दिन भी आज तो जैसे पूरा फुर्सत में था। देर से सो कर उठने के बाद लावणी अंगड़ाई लेती रात कि बात पर सोचने लगी। कुछ ही देर में वो साची के पास जाकर बैठ गई। साची अपने स्टडी चेयर पर बैठी किसी ख्यालों में गुम थी। लावणी उसके कानों में तेज चिल्लाई और साची चौंक कर उसके ओर देखने लगी…. "कब आयी"

लावणी:- कोई फर्क पड़ता है क्या इस बात से।

साची:- तू भी ताने मार रही है।

लावणी:- इसे ताने मारना नहीं कहते है अपना हाल-ए-दिल बताना बोलते है।

"किस से हाल-ए-दिल बताने कि बात कर रही हो। अभी उसके पागलपन का तीसरा फेस चल रहा है। अभी वो हर बात का रिएक्शन बस लटके मुंह से देगी।".. कुंजल कमरे में आती हुई बोलने लगी…

साची:- तुम दोनों प्लीज मुझे अकेला छोड़ दो।

कुंजल:- देख लावणी अब ज्यादा जिद करेंगे तो चिल्लाकर कहने लगेगी मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

लावणी:- कितने दिनों से तो छोड़ा ही था इन्हे, लेकिन कोई सुधार ही नहीं है। मै क्या सोच रही हूं कि दी से आज पूरी कहानी सुन ही ले, की उस दिन आखिर हुआ क्या था?

कुंजल:- ये तो तुमने मेरे दिल की बात कह दी।

साची थोड़ा गुस्सा दिखाती हुई… जाकर अपने भाई से पूछना था ना, क्या हुआ था उस दिन।

कुंजल:- ये लो अब इनकी भी सुनो। हम दर्द बाटने आए है और ये मुझ को ही ताने दे रही है।

लावणी:- दी अभी गुस्से में है कुंजल हो सकता है ये भी कह दे की… "हो तो किसी धोखेबाज की ही बहन।"

कुंजल:- हो !!!! … क्या सच में ऐसा किया उसने … धोका दिया साची को।

साची, हार मानती हुई….. "प्लीज मत तंग करो। क्या चाहती हो मुझ से।"…

लावणी और कुंजल दोनों एक साथ….. "तुम्हारे दर्द कि वजह हम जानना चाहते हैं।"

"क्या बताऊं मै, ये बता दूं कि वो किसी के साथ पहले से रिलेशन में है और उसके बाद भी मुझसे प्यार करता है।"… साची गुस्से में अपने दिल की बात कह गई।

कुंजल:- क्या बात कर रही हो.. ये तो दोनों के साथ दगाबाजी हुई ना।

लावणी:- हां ये तो सही है। चलो उसकी खबर ली जाए।

कुंजल:- आज से वो मेरा भाई नहीं रहा… धोखेबाज कहीं का ....

साची:- ऊफ ओ !!! धोखेबाज नहीं है वो।

लावणी:- कैसा कन्फ्यूजन है ये। दूसरे के साथ रिलेशन में होकर भी वो तुम्हारे साथ प्यार करना चाह रहा था, फिर भी वो धोखेबाज नहीं। दी आप ठीक तो है ना।

कुंजल:- ऐसी बात ना है रे लावणी, ये अपस्यु को देवता समझती थी, इसलिए सदमे में कह रही है कि को धोखेबाज नहीं। इसके दिमाग ने धोखेबाज मान लिया है बस दिल नहीं मान रहा।

साची:- चुप हो जाओ तुम दोनों। बिना पूरी बात जाने कुछ भी नहीं बोलो। वो धोखेबाज नहीं।

कुंजल और लावणी कुछ देर तक खामोश रहे और साची के बोलने का इंतजार करने लगे… कुछ समय बीतने के बाद साची खुद से कहने लगी….

"पता नहीं क्या कहूं। मैं बिल्कुल ब्लैंक हो गई हूं। किसी के पास एक्स गर्लफ्रेंड हो तो समझ में आता है वर्कआउट नहीं हुआ होगा। कोई लड़का किसी लड़की को घुरे तो समझ में आता है नजर फिसल गई, रहेगा मेरा ही। किसी से दोस्ती है तो भी फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इनकी ये कैजुअल रिलेशन, मेरे ही सामने एक दूसरे को मुंह से मुंह लगा कर किस्स करते है, एक दूसरे को छोड़ भी नहीं सकते और चाहते है कि, मै उनके इस बेहूदे से मज़ाक के साथ उससे प्यार करूं।

साची की बात सुनकर लावणी का मुंह खुला का खुला रह गया। लावणी आश्चर्य से पूछने लगी…. "ऐसा भी होता है क्या? ये कैसा रिलेशन हुआ। इसे तो पागलपन कहते है। हां तो ठीक ही तो की, जो उसके साथ रिलेशन खत्म कर दी।

कुंजल:- एक मिनट रुको, क्या अपस्यु ने कहा था कि तुम उन दोनों का रिश्ता एक्सेप्ट करो।

साची:- कुंजल तुम्हे क्या लगता है तुम्हारा भाई मेरी तरह बेवकूफ है। उसने बिना किसी प्रस्ताव के ही, मुझे ऐसा फसाया की कुछ ना बोलते हुए भी उसने वो सब कुछ मुझ से उम्मीद की, जो वो मुझे समझना चाहता था।

कुंजल:- हां मै तुम्हारी ये बात मान सकती हूं। वो इस मामले में चतुर तो है। हां लेकिन जब उसने धोका नहीं दिया और अपनी सारी बात कहकर उसने फैसला तुम पर छोड़ दिया, तो तुमने भी तो बिल्कुल फैसला लेते उसे दरकिनार कर दिया। फिर ये उदासी और मायूसी क्यों। क्या तुम्हारी अंधी चाहत ये तो नहीं सोच रही की किसी दिन अपस्यु अाकर तुमसे ये कहे कि मैंने वो रिश्ता तोड़ दिया अब तुम मेरे प्यार को कबूल कर लो।

साची:- उसे अपना ये फालतू रिश्ता तोड़ना ही होता तो मुझे पहले ही कह चुका था हमारे बीच ये कहानी चल रही थी, जो तुम्हारे आने के बाद मैंने खत्म कर दिया। जानती हो सबसे ज्यादा क्या दुखता है, उसे भी मुझसे बेहद प्यार था। जब मैंने उसे धोका दिया था पहली ही मुलाकात मे, उसे ये बातें पहले से पता थी, तब भी उसने मेरे लिए वो किया जो मेरे पिता समान चाचा नहीं कर पाए।

"पूरा दिन बालकनी पर सिर्फ मुझे देखने के लिए खड़ा रहता था। मै ही एकतरफा सोचती रही कि, मैंने कई बार उसकी बे इज्जती मैंने की है, लेकिन इसे वो मेरी नादानियां मानता रहा.. इससे ज्यादा और क्या प्रमाण चाहिए की वो मुझे कितना चाहता था। लेकिन कोई इतना चाहने वाला क्यों.. आखिर क्यों नहीं वो उसको छोड़ पाया, जिसके साथ वो जब जी में आए मस्ती कर सके। जब मै उसका प्यार थी, तो वो लड़की अपस्यु लिए मुझ से बढ़कर कैसे हो गई? मै बर्दास्त नहीं कर पा रही हूं इस बात को।

कुंजल:- एक तुम हो की उसके लिए रोए जा रही हो और एक वो है, उसे किसी बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ा। वो तो अपनी मस्ती में है। शायद अब तो तुम्हे याद भी नहीं करता।

साची:- याद तो जरूर करता होगा वो भी। तभी तो मेरा सामना नहीं कर सके इसलिए कॉलेज नहीं आता।

कुंजल:- बावली कहीं की। वो कोई युग पुरुष नहीं बल्कि इंसान है ऊपर से एक लड़का।

साची:- मतलब…

कुंजल:- मतलब की कल रात भी मैंने उसे देखा व्हाट्स ऐप पर किसी के साथ देर रात तक लगा था। मुझे लगा कि तुम्हारे साथ पैचअप हो रहा होगा लेकिन ये तो अपने ब्रेकअप के बाद किसी और को ढूंढ़ चुका है।

साची:- तुम इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकती हो की कोई दूसरी लड़की थी, वो भी तो हो सकती है जिसके साथ उसका कैजुअल रिलेशन है।

कुंजल:- इसें कहते है जले दिल की उम्मीद… एक बात बताओ क्या कभी उसने एक बार भी इस बात को जानने की कोशिश की, की तुम किस बात पर राजी होगी। क्या एक छोटी सी पहल भी किया हो की साची मुझे माफ़ कर दो मै अब मुड़कर उसे नहीं देखूंगा। तु मेरी और मै तेरा।

साची, मायूसी से… नहीं उसने कोई कोशिश नहीं की।

कुंजल:- क्या जब तुम ऐक्सिडेंट में उससे मिलने आया करती थी तो वो व्हाट्स ऐप पर किसी के साथ लगा रहता था?

साची:- मै जबतक उसके साथ होती तो उसके फोन का मैसेज भी नहीं बजता।

कुंजल:- उसके बताने से पहले क्या तुम्हे भनक भी लगी कि इसका कोई ऐसा रिलेशन भी होगा।

साची:- कभी नहीं।

कुंजल:- तो इसे तुम्हारी जले दिल की उम्मीद ही कहूं ना। वो तो पहले दिन ही मान लिया कि यहां वर्कआउट नहीं हुआ कहीं और कोशिश की जाए। ऐसे तो अपने कॉलेज के बाहर ही कई ऐसे लड़के मिल जाएंगे जो लड़कियों के लिए, सब काम छोड़कर दिन रात फील्डिंग लगाए रहते है। और तो और भिड़ा दो उनमें से किसी को किसी के खिलाफ भी, मज़ाल है पीछे हट जाएंगे…. तो क्या उनमें से सबका प्यार सच्चा हो जाता है।

लावणी:- इसका क्या मतलब समझा जाए…

कुंजल:- बात सिंपल है… देखे पसंद आयी। उसे पाने के लिए दिन-रात एक कर दिए.. नहीं मिली तो आगे बढ़ो, कोई दूसरी मिल जाएगी। कौन दिमाग लगाए अब पिछले पर।

लावणी:- दी बहुत भोली है, इनको दुनियादारी की इतनी समझ कहां।

कुंजल:- और यदि मै प्रूफ कर दूं तो।

साची:- फिर वो मेरे लिए कोई अनजान हो जाएगा, जैसे राह चलता कोई लड़का।

कुंजल:- तो फिर चलो झटपट तैयार हो जाओ अभी प्रूफ कर दूंगी।

लावणी:- मैगी बना रहे हैं क्या, बस 2 मिनट में…

कुंजल:- हां कुछ ऐसा ही समझो.. वो अपनी लंबोर्गिनी से निकला है कुछ देर पहले, जरूर वो या तो फील्डिंग लगाने गया होगा या फिर सेट हो गई होगी तो मिलने गया होगा।

साची:- लेकिन अपस्यु गया कहां होगा हमे क्या पता?

कुंजल:- आसान है। उसके गाड़ी में जीपीएस लगा है और उसका ऐप है मेरे पास।

तीनों अपस्यु की जासूसी करने के लिए तैयार होकर नीकल चुके थे। कुछ ही देर में वो तीनो एक शॉपिंग मॉल में थे जिसके पार्किंग में कार की लोकेशन शो हो रहा था।

उसके तो ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी परी। आखों के सामने जो नजारा था वो साची के आखों में चिंगारी भर रही थी। ग्राउंड फ्लोर पर तीनों खड़ी थी और फर्स्ट फ्लोर पर अपस्यु दिख रहा था। किनारे के फेंसिंग के पास किसी लड़की के साथ आइसक्रीम खाते हुए…..

"मुझे पक्का यकीन हो गया इसे बस टाइमपास वाली लड़की चाहिए। इसे किसी से सच्चा प्यार हो ही नहीं सकता।… साची अपनी दिल की भड़ास निकलती हुई बोली।

लावणी:- लेकिन कोई पुरानी जान पहचान या फिर कोई कॉमन फ्रैंड भी तो हो सकती है।

साची:- जैसा कि मैंने कहा था अभी से वो मेरे लिए ठीक वैसे ही लड़के के बराबर है जैसे इस मॉल में अन्य लड़के घूम रहे। बाकी किसी को अपने डाउट्स क्लियर करने हो तो वो कर सकती है।

कुंजल:- दोनों का ब्रेकअप पहले से है अब वो आगे बढ़ना चाह रही है। इसमें और ज्यादा डाउटस क्लियर करना जैसा क्या है? हां, लेकिन अब इतनी दूर अा ही गए है तो चलकर कुछ शॉपिंग ही कर ली जाए, यदि साची को कुछ विशेष प्रॉबलम ना हो तो।

"अब कोई परेशानी नहीं है कुंजल।" … साची मुस्कुराते हुए जवाब दी और वहीं से तीनों शॉपिंग करने चल दिए। शॉपिंग के दौरान 2 ऐसे मौके आए जब साची अपस्यु के कुछ करीब से गुजरी लेकिन साची ने ना तो कोई प्रतिक्रिया दी और ना ही उसने अपस्यु के ओर ध्यान दिया। एक बार तो दोनों आमने-सामने थे, लेकिन अपस्यु भी साची पर बिना ध्यान दिए कुंजल और लावणी से बात करके निकल गया। वहीं साची भी बिना किसी आपत्ति के वहीं खड़ी रही।

हालांकि अपस्यु जब आगे बढ़ गया तो उसे देखकर एक बार लावणी ने कहा भी… "अपस्यु के चेहरे के हाव-भाव तक नहीं बदले। इतनी भी घबराहट नहीं हुई की साची सामने है अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर चुपके से निकल जाए।"… इसपर साची बस इतना कहती आगे बढ़ गई… "सब की अपनी अपनी लाइफ है लावणी। दुनिया में एकलौती मै ही लड़की नहीं और ना ही वो इकलौता लड़का है। वो अपने में खुश, हम अपने में खुश।"

उसी रात जब तीनों भाई बहन हॉल में में बातें कर रहे थे और कुंजल बस ये सुनिश्चित करने में लगी थी कि नंदनी सोई की नहीं। जैसे ही वो सुनिश्चित हो गई कुंजल अपस्यु से पूछने लगी…. "क्या मिल गया ये फिल्मी ड्रामा करके।"

अपस्यु:- उसके दर्द शायद कम ना हो पर जिंदगी में आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा।

कुंजल:- सुनो भाई मै ना कुछ दिनों के ड्रामे से पक गई हूं, मुझे थोड़ा माहौल बदलना है।

आरव:- मुझे भी ब्रेक चाहिए…

अपस्यु:- मतलब दोनों पहले से कुछ ना कुछ सोच कर आए हो। इस बंदर का तो पता है, इसे यूएस जाना होगा। तू कहां जाएगी?

कुंजल:- तुम्हे कैसे पता ये यूएस जाएगा?

आरव:- इसे साची ने बताया होगा कि कॉलेज के छुट्टियों में वो यूएस जा रही है। और जहां तक मुझे लगता है कि इसने तेरा पासपोर्ट भी रेन्यू करवा दिया होगा, और ये भी पता है कि ये हमारे साथ नहीं आएगा, चाहे कुछ भी कर लो।

अपस्यु:- कमीना जुड़वा कहीं का.. फिर से मेरे दिमाग में झांका…

आरव:- थू !! ये तेरा गोबर वाला दिमाग… कौन झकेगा?

कुंजल:- मुझ गरीब को भूल गए, कुछ निंजा तकनीक मुझे भी सीखा देते।

दोनों भाई अपने बाहें फैला कर…. "तुम तो हमारी पूरी दुनिया हो।"…

कुंजल:- भाई एक बात पूछूं … तुम तो पहले प्यार में डूबे रहे, बाद में दर्द में डूबे। फिर इतनी छोटी-छोटी बात भी तुम्हारे दिमाग से कैसे नहीं उतरी? …

आरव:- गम तुझसे है, दर्द तूने दिए, फिर मुरझाए सबके चेहरे क्यों?

अपस्यु:- जे बात…. तुझे याद थी ये…

आरव:- तुमने प्रैक्टिस जो करवाई थी, याद कैसे ना होता…

कुंजल:- जा रही हूं मै सोने… खेलते रहो तुम दोनों पजल।

अपस्यु:- पागल बिल्कुल सीधी तो बात है ये … दो लोगों के बीच के दर्द के किस्से में अन्य किसी के खुशी का ख्याल नहीं रखना ये तो बेईमानी है ना।

कुंजल:- वह बाबा रंछोड़ दास छांचर…

आरव:- तीनों लग भी तो रहे है थ्री इडियट्स की तरह…

देर रात तक तीनों की बातें चलती रही… बात करते-करते कब सो गए किसी को पता भी नहीं चला…..
 
Update:-46

देर रात तक तीनों की बातें चलती रही… बात करते-करते कब सो गए किसी को पता भी नहीं चला…

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दिसंबर 2001…..

"ए लड़के रुक किधर भाग रहा है अभी बताती हूं तुम्हे"……. "तुम यहां आकर बताओ स्वीटहार्ट क्या बताना है, सुबह-सुबह तुम होश उड़ा रही हो पल्लवी"………. "जेके मै फ्रस्ट्रेट हो रही हूं। लाइफ से एक्शन चली गई यार।"……….. "अरे इधर अा जाओ, मेरे 12 इंच का हथियार, आज की सुबह तुम्हे पूरा एक्शन दिखाएगा"…..…….. "वो ओओओ !!!! तो मिस्टर हसबैंड खुद को तैयार करने के लिए कोई फुहर सी कहानी कि लाइन मुझे सुना रहे। है मूंगफली जितना और बता 12 इंच का रहे हो। जेके अंत में कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हे घंटो अपने मिडिल फिंगर से मेहनत करनी पड़े। फिर तुम, तुम्हारी उंगलिं और तुम्हारा लन्ड तीनों थककर झूलने लगे…………. ऐसा है तो तुम आजमा के ही देख लो पल्लवी………... क्यों नहीं, बड़े ही शौक से डार्लिंग। मै तो मेरी जा रही हूं स्वीटहार्ट" ….

"छनाक"….. खिड़की के कांच पर एक पत्थर लगा और खिड़की के टूटने की आवाज़। … "चूतिये ने मूड की मा बहन कर दी। जेके अगर तुमने उस लड़के को अभी नहीं पकड़ा तो तुम समझ लेना"…. पल्लवी, जेके को आखें दिखाती कहने लगी।

जेके अपने ऊपर शर्ट डालकर बाहर निकला। उसे लगा पत्थर फेकने वाला लड़का भाग रहा होगा और उसे मेहनत करनी पड़ेगी.. लेकिन वो भागा नहीं था, बल्कि अभी भी पत्थर मारकर पेड़ से खुबानी फल (Apricot) तोड़ने में लगा हुआ था।

जेके:- ओए लड़के…

अपस्यु:- ओए लड़के नहीं भैय्या, मेरा नाम अपस्यु है… और आपका

जेके:- ओ तेरी ये तो छोटा पैकेट में बड़ा धमाका लगता है। सुन भाई मेरा नाम जुगल किशोर है।

अपस्यु:- सुप्रभात जुगल किशोर भैय्या।

जेके:- अरे भाई फल तोड़ना बंद करो और इधर देखकर बात करो।

अपस्यु, पत्थर मारना बंद करते हुए, जेके के ओर ध्यान दिया…. "जी भैय्या"

जेके:- यार सुबह-सुबह क्यों तंग कर रहे हो हमे। इतना सरा बगीचा है, कहीं और से फल तोड़ लो।

अपस्यु:- भय्या कल मेरा मित्र गलती से यहां आया था तब किसी स्त्री ने उसपर अभद्र टिप्पणी करके, उसे डांट कर भगा दिया था। कुछ देर पहले जब मै बगीचे के उस हिस्से में था, तब भी वो चिल्ला रही थी। मुझे पसंद नहीं आया। जबतक वो अपने अभद्र बातों के लिए हमसे माफी नहीं मांगती, मै इसी बगीचे से फल, फूल इत्यादि तोड़ कर ले जाता रहूंगा।

जेके:- ओ भाई, तू तो बहुत खतरनाक है। तुझे डर नहीं लगता क्या?

अपस्यु:- एप्लाइड साइंस समझते हो आप। डर, भय, खुशी और दुख ये सब मानवीय स्वभाव है जो हार्मोन के अति स्त्राव (hyper secretion) से मेहसूस होता है। सब इस दिमाग कि उपज होती है जो शरीर में किसी माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

जेके:- गुरुदेव लगता है आप से बहुत कुछ सीखने के लिए मिलेगा।

अपस्यु:- क्यों नहीं भय्या, हम एक दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते है।

जेके:- एक बात बताओ फिर, ये पेड़ तो इतना छोटा है, इसपर चढ़ कर क्यों नहीं फल तोड़ रहे।

अपस्यु:- अभी मेरा खाली समय है तो मै सही निशाना साधने की कोशिश कर रहा हूं। फलों की जड़ में मार कर नीचे गिरा रहा हूं।

जेके:- मेरे साथ प्रतियोगिता करोगे। सही निशाना पर 1 स्कोर।

दोनों फिर पत्थर मार-मार कर फल गिराने लगे। अपस्यु 8 के स्कोर पर था और जेके का खाता भी नहीं खुल पाया था। इसी बीच पल्लवी बाहर आते ही चिल्लाने लगी…. "जेके ये क्या करने लगे, तुम्हे मै पकड़ने बोली और तुम इसके साथ खेल रहे हो।"

अपस्यु, पल्लवी को घूरते हुए, जेके से पूछने लगा…. "इस बदतमीज स्त्री को आप जानते हो भैय्या?"

पल्लवी:- ये क्या बोल रहा है जेके?

जेके:- तुम्हे बदतमीज स्त्री बोल रहा है।

पल्लवी:- बित्ते भर का है और ऐसी जुबान।

Apasyu:- खंभे जैसी आप है, और आप को बोलने की तमीज है क्या? आप अपने कल के प्रकरण के लिए माफी मांग लीजिए, मै यहां से चला जाऊंगा।

पल्लवी:- जेके ये क्या बोल रहा है? किस बारे में बात कर रहा है।

अपस्यु:- I said you have to apologize for your last day sins. भारत में रहकर इन्हे ठीक से हिंदी नहीं आती। शर्म आनी चाहिए।

पल्लवी, गुस्से में आखें दिखाती हुई कहने लगी….. "भागता है कि नहीं यहां से वरना पिटेगा आज मेरे हाथ से।"

अपस्यु:- भय्या ये स्त्री काफी आक्रोशित दिख रही है। आपका और इनका रिश्ता क्या है।

जेके:- ये मेरी डियर वाइफ है।

अपस्यु:- इनको कहिए गुस्सा करना अच्छी बात नहीं।

पल्लवी गुस्से में अपना हाथ ऊपर उठाती आगे बढ़ी…. "भागता है कि नहीं यहां से।"..

"मारो इसे।" अपस्यु से नजरे मिलाकर जैसे जेके कह रहा हो परख रहा हूं तुम्हे और अपस्यु भी इस बात को भांपते जैसे अपने नजरों की स्वीकृति दे रहा हो।.. पल्लवी अपना हाथ नीचे करती… "नहीं यार बहुत क्यूट है ये तो। गुस्सा अपनी जगह लेकिन पागल हूं क्या जो मारूंगी।"..

तीनों के बीच फिर एक छोटी सी चर्चा हुई, पल्लवी अपना हाथ उठाने के लिए नहीं राजी हुई, किंतु जेके ने अपना उठाया। एक स्पेशल ट्रेंड एजेंट जो अपने से बहुत छोटे लड़के को पूरी ताकत से मारा। असर तो अपस्यु पर भी हुआ। उसके सौम्या से गाल पर पंजे के बहुत गहरे छाप आए थे। उसका सिर थोड़ी देर के लिए घुमा लेकिन चेहरे पर सिकन नहीं आयी। अपस्यु थप्पड के बारे में अपनी दर्द भरी भावना जाहिर तो किया, लेकिन चेहरे कि प्रतिक्रिया बिल्कुल नहीं बदली।

तकरीबन घंटे भर वो जेके और पल्लवी के पास रहा। दोनों मियां-बीवी पूरे जिज्ञासा से अपस्यु को जानने की कोशिश करने लगे। ये एक छोटी सी मुलाकात, बहुत प्रभावित करने वाली थी। अपस्यु को जैसे ही पता चला की, जेके और पल्लवी उसे बहुत सी चीजों को सिखाने वाले है, फिर तो वो खुशी-खुशी राजी होकर, अपना पूरा खाली वक़्त उन्हीं दोनों के पास बिताने लगा। इसे किस्मत कहें या संयोग, दो कुशल प्रशिक्षित लेकिन निष्क्रिय एजेंट्स, अपस्यु को अपना हुनर सीखा रहे थे।

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सुबह से ही घर में कातुहल का माहौल था। नंदनी उन दोनों को छुट्टियों में अकेले विदेश नहीं भेजना चाह रही थी और ना ही खुद भी इनके साथ जा रही थी। वो एक ही जिद पकड़े बैठी थी, यदि अपस्यु साथ जाएगा तो ही दोनों जाएंगे, खासकर कुंजल। क्योंकि नंदनी को कुंजल पर यकीन नहीं था, उसे फ़िक्र थी कि कहीं फिर से वो नशे के ओर अपना रुख ना कर ले। …

बहुत देर तक बहस होते ही चली गई… कितना समझाने और मनाने के बाद, तब कहीं जाकर नंदनी मानी। मान तो गई किंतु कुछ शर्तों के तले दोनों को लाद भी दी…. "कोई फिजूल खर्ची नहीं, रोज वीडियो कॉल और यदि कहीं नशे करते हुए देखे गए तो उसी वक़्त छुट्टी कैंसल। रात में नो आउटिंग और दोनों भाई बहन साथ रहेंगे।…

अपस्यु सभी शर्तों पर राजी हो गया, लेकिन आरव और कुंजल का चेहरा लटक गया। कुंजल तो बहस ही करना शुरू कर दी परन्तु उसके चिढ़ पर नंदनी ने अपने आखरी फैसले का मुहर लगा दिया… "तुम लोगो को मेरी शर्त मंज़ूर नहीं तो मेरा भी तुम लोगों का जाना मंजूर नहीं। बस इसके आगे एक शब्द नहीं।"..

नंदनी अपनी बात कहकर निकल गई और कुंजल हॉल में बैठकर नकियाने लगी…. "हिटलर कहीं की, ऐसी शर्त है तो मुझे नहीं जाना।"…

आरव:- क्यों रो रही है। तुम क्या चाहती हो, वो बताओ।

कुंजल:- मुझे वहां नहीं रहना जहां साची होगी। वो अपना लटका सा मुंह दिखा-दिखा कर मेरी छुट्टियां बिगाड़ देगी। जिस ड्रामे से तंग आकर कहीं माइंड फ्रेश करने जा रही हूं, वही बात पीछे-पीछे चली आए, ये तो टर्चर है।

अपस्यु:- ठीक है, मै मां को यहां संभाल लूंगा। अच्छा तू बता तू कहां घूमना चाहती है।

कुंजल:- मै तो पूरा यूएस घुमुंगी। कुछ दिन यहां कुछ दिन वहां। पूरा भटकना है मुझे।

अपस्यु:- ठीक है तू न्यूयॉर्क से सीधा मियामी निकल जाना। वहां तुम्हारे लिए पूरी व्यवस्था पहले से मिलेगी। अब खुश।

कुंजल खुशी से उछालती हुई… "थैंक यू, थैंक यू, थैंक यू… लेकिन भाई"…

अपस्यु:- और क्या?

कुंजल कुछ सोचती हुई…. "नहीं जाने दो।"

आरव:- पागल कहीं की, इतना संकोच क्यों कर रही है। बता ना।

कुंजल:- भाई वो अकेले मै बोर हो जाऊंगी ट्रिप पर…

दोनों भाई एक साथ आखें दिखाते हुए….. "अब वो मत कह देना, जिसका डाउट्स हमे हो रहा है।"…

कुंजल, हंसती हुई…. "हां हां… खुद गर्लफ्रेंड के साथ घूमो तो जायज है और अभी मेरी बात पूरी भी नहीं हुई और दोनों के रिएक्शन तो देखो।"…

दोनों एक साथ…. "हम भाई है… तुम्हारे लॉजिक का मैजिक नहीं चलेगा।"…… फिर आरव बात आगे बढ़ते हुए कहने लगा…. "और हम से ऐसे पूछना ….. अगली बार थप्पड खाएगी।"

कुंजल के आंसू निकल आए .. वो रोती हुई कहने लगी… "धत, मुझे कहीं जाना ही नहीं है, कहीं नहीं जा रही मै।"

आरव:- देख अपस्यु ये वैसा ही रोना है ना जैसे मां ने इसे हॉस्पिटल में सिखाया था। वो मिना कुमारी स्टाइल.. एक बार आशु निकले नहीं की सारे काम बन जाए।

अपस्यु:- नॉट बैड कुंजल। ये तो शानदार अभिनय है…

कुंजल रोती रोती हुआ हंस दी… दोनों उसे फिर मानते हुए कहने लगे… "चल पूरी बात बताओ, क्या सोची और फिर क्या सुझा जो हमसे बता नहीं पाई।"

कुंजल:- मै अकेले वहां जाकर बोर नहीं हो जाऊंगी। बस मेरे प्यारे भाई, विन्नी का भी कुछ जुगाड लगा दो।

अपस्यु:- पागल इतनी सी बात के लिए तू सोच रही थी। ठीक है इस बात पर भी राजी हो गया। और कोई समस्या है।

कुंजल:- हां एक छोटी सी समस्या और भी है।

आरव:- उसके बॉयफ्रेंड क्रिश का भी खर्च उठाने मत बोल देना।

कुंजल:- नहीं वो बात नहीं है।

अपस्यु:- हां बेटा फिर क्या समस्या है?

कुंजल:- भाई ..

अपस्यु:- हां बोल ना.. मै सुन रहा हूं।

कुंजल:- आप नहीं उसका भाई..

अपस्यु:- अब ये मत कहना कि उसका भाई भी उसके साथ जाएगा। ऐसे तो हम कहीं जाने के लायक नहीं बचेंगे।

कुंजल:- नहीं वो बात नहीं है। उसका भाई पहले तो राजी नहीं होगा कि कोई उसके बहन को जाने के लिए पैसे दे और ऊपर से वो अपनी बहन को इतनी दूर कभी अकेले नहीं भेजेंगे।

अपस्यु:- हां भाई है वो भी, और उसकी चिंता भी जायज है। इसमें हम कुछ थोड़े ना कर सकते है। ये उनका पारिवारिक मामला है।

कुंजल:- हां आप कर सकते हो भाई।

आरव:- ये कुछ ज्यादा ही उम्मीद नहीं लगाए बैठी है।

अपस्यु:- मुझे भी ऐसा ही फील हो रहा है।

कुंजल:- मै कह रही हूं ना आप कर सकते है, मुझे यकीन है।

आरव:- ये बावली हो गई है। हम किसी अनजान के पास जाकर कहा देंगे की मेरी बहन के साथ अपनी बहन को भेज दो और वो राजी हो जाएगा। एक जिम्मेदार आदमी कभी नहीं मानेगा।

कुंजल:- मै कुछ नहीं जानती आप को ये करना ही होगा। समझ लो इतने सारी रखी का जो गिफ्ट आप पर उधार है उसके बदले मैंने ये मांग लिया। वैसे भी उसके भाई आपको जानते है और आप उसको।

आरव:- ये कौन सा भाई है जिसे हम जानते है और वो हमे जानता है और हमे पता भी नहीं।

कुंजल:- वो और कोई नहीं बल्कि वही थानेदार है, जिसकी मदद से आप हम तक पहुंचे थे।

अपस्यु:- तुम जब कंपलेंट कर रही थी तब तो देखकर ऐसा नहीं लगा कि तुम दोनों जानते हो एक दूसरे को।

कुंजल:- हर बात डाउनलोड करते हो क्या दिमाग में। पुलिसवाले आरेस्ट कर रहे थे, दोनों भाई घुटनों पर बैठे थे फिर भी हर बात ऑब्जर्व कर रहे थे… तुम्हे ना कोई सिक्रेट एजेंट होना चाहिए। वो मेरा काम कुछ ऐसा था कि मै पुलिसवालों से दूरियां बनाकर चलती थी। और भी कुछ सुनना है।

अपस्यु:- सॉरी… लेकिन तू नहीं जानती हमारे बीच क्या चल रहा है।

कुंजल:- मुझे सुनना भी नहीं की तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है। मैंने अपना गिफ्ट मांग लिया और वो पूरा होना चाहिए बस। अब दोनों भाई बैठ कर आराम से सोचो की क्या करना है, मै चली विन्नी के साथ शॉपिंग करने।…

कुंजल के जाते ही…. "भाई….. " ….. "हां बोल आरव"….. "ये लड़कियां कितनी शॉपिंग करती है, अभी कल ही तो उसने शॉपिंग कि थी ना"……. "पता ना रे आरव.. मै तो कुछ और ही सोच में पड़ गया हूं।"….. "हां जानता हूं, दिमाग में अजिंक्य सिंह घूम रहा है ना।"…….. "सही कहा… अब ऐसी बात बोल कर गई है कि करना ही पड़ेगा।"……… "इन्हे अच्छे से इमोशनल अत्याचार करने आता है।"….. "हां सही कहा… ठीक है तू जाकर लावणी का इमोशनल अत्याचार झेल, मै कुछ सोचता हूं सर जी के विषय में।"
 
Update:-47

कुंजल के जाते ही…. "भाई….. " ….. "हां बोल आरव"….. "ये लड़कियां कितनी शॉपिंग करती है, अभी कल ही तो उसने शॉपिंग कि थी ना"……. "पता ना रे आरव.. मै तो कुछ और ही सोच में पड़ गया हूं।"….. "हां जानता हूं, दिमाग में अजिंक्य सिंह घूम रहा है ना।"…….. "सही कहा… अब ऐसी बात बोल कर गई है कि करना ही पड़ेगा।"……… "इन्हे अच्छे से इमोशनल अत्याचार करने आता है।"….. "हां सही कहा… ठीक है तू जाकर लावणी का इमोशनल अत्याचार झेल, मै कुछ सोचता हूं सर जी के विषय में।"

रात के 9 बजे… अजिंक्य सिंह का घर….

अपस्यु, थोड़े हिचक के साथ अजिंक्य के घर का दरवाजा खटखटाया। सामने खुद थानेदार दरवाजा खोलते… "रे कौन है… तू"

अपस्यु:- अरे सर प्लीज़ 2 मिनट आप अपना दे दीजिए। आप से कुछ बातें करनी है।

अजिंक्य:- चल आजा अंदर, आराम से बैठ कर बातें करते है।

अपस्यु:- बाहर चल कर बातें करे सर।

अजिंक्य:- अरे तू अंदर अा.. अंदर नहीं आया तो मुझे लगेगा तू मेरी उस दिन की बात को दिल से लगाए है।

अपस्यु के अंदर आते ही अजिंक्य ने सबसे पहले तो उससे माफी मांगी, फिर कहने लगा…। वह बहुत दिन से सोच तो रहा था मिलने के लिए लेकिन झिझक के कारण नहीं अा पा रहा था। बातों के दौरान पता चला कि अपस्यु ने जिस राठी ब्रदर्स को पीटा था, उसके लिए वो सुक्रगुजार है। कई केस दोनों के नाम पर दर्ज थे। लड़कियों को ड्रग्स की लत लगाना और फिर उनकी अश्लील ताबीरें और वीडियो बनना इनका शौक था।

अपने शौक के लिए ये लड़कियों का पूरा इस्तमाल करते थे और ड्रग जैसी महंगी लत के कारण कई लड़कियों को या तो देह व्यापार करना पड़ता था या ड्रग्स ना मिलने के कारण सुसाइड कर लिया करती। अब तक 6 लड़कियों ने इनकी वजह से सुसाइड किया था, जिनमें से उसके साथ काम कर चुके एक हेड कांस्टेबल कि भी बेटी थी।

अजिंक्य की कहानी सुनने के बाद अपस्यु को थोड़ी राहत मिली, की थानेदार साहब उससे नाराज नहीं है, उल्टा उसके काम को सराहा। फिर अपस्यु भी बिना बात घुमाए सीधा मुद्दे पर अा गया और वो विन्नी को कुंजल के साथ भेजने के लिए आग्रह करने लगा। समझाना थोड़ा मुश्किल था, और अजिंक्य ठहरा एक ईमानदार आदमी उसे किसी और से पैसे लेने मंजूर भी नहीं थे… अंत में अपस्यु ने भरोसा दिलाया कि जैसे कुंजल उसकी बहन है, ठीक वैसे ही विन्नी भी उसके लिए हुई। इसलिए एक भाई खर्च नहीं उठा पा रहा तो क्या हुआ दूसरा भाई उठा रहा है।

थोड़ी झिझक अब भी बची थी जिस कारण से अजिंक्य कहता रह गया "नहीं वो नहीं जाएगी।" किसी तरह मनाकर और उसकी पूरी जिम्मेदारी लेने के बाद तब कहीं जाकर अजिंक्य माना।

इधर लावणी कई रातों तक जाग कर आरव का इंतजार कर रही थी। उसे लगता कि आज रात आरव आएगा लेकिन उसकी दिल की आश दिल में ही रह जाती। 8 दिन बाद लावणी अपने परिवार के साथ यूएस निकालने वाली थी और आरव 5 दिन बाद। उसने अभी तक लावणी को इस बारे में भनक भी लगने नहीं दिया था। वो तो बस इस ख्याल से रोमांचित हो रहा था कि यहां इंतजार करवाकर जब आरव, लावणी से यूएस में मिलेगा तो उसका रिएक्शन कैसा होगा।

5 दिन बाद आरव, कुंजल और विन्नी तीनों यूएस जाने के लिए तैयार, वेटिंग लॉबी में इंतजार कर रहे थे। विन्नी को छोड़ने उसके भय्या और भाभी दोनों पहुंचे थे, लेकिन ड्यूटी पर होने के कारण अजिंक्य अपनी मिसेज को लेकर वहां से जल्दी निकल गया। इधर नंदनी भी दोनों को छोड़ने नहीं अा सकी क्योंकि 304 के फ्लैट में किसी की डेथ हो गई थी, वो वहीं गई हुई थी।

सभी आपस में बात कर रहे थे, तभी अपस्यु की नजर क्रिश पर भी पड़ गई… अपस्यु वेटिंग लाउंज में ही चिल्लाकर उसे आवाज़ लगाने लगा… इधर कुंजल, विन्नी से कहने लगी…. "होशियार कहीं की, क्या कह रही थी क्रिश को कोई पहचान ही नहीं सकता। मैंने क्या कहा था कुछ भी कर ले अपस्यु की नजरों में एक्सरे लगा हुआ है। देख कर लिया ना स्कैन।"

विन्नी:- यार बहुत ही खतरनाक प्राणी है ये।

इतने में ही क्रिश अपना सामान उठाए उनके पास पहुंचा और ऐसा दिखाने लगा जैसे उसे कुछ पता ही नहीं। इसपर विन्नी ही उसे कहने लगी… "इतना नाटक ना ही करो तो अच्छा है।"… फिर शुरू हो गई दोनों भाई की जुगलबंदी जिसमे बेचारे क्रिश पीस कर रह गया। वापस लौटते वक़्त अपस्यु, क्रिश को खास हिदायत देते हुए लौटा…. "विन्नी मेरी जिम्मेदारी पर जा रही है। जितनी खुश वो अभी है, इतनी ही खुश वो लौटने पर भी होनी चाहिए। वरना तुम्हारी जिंदगी से खुशियां गायब हो जाएगी।"…

खैर सबको बिदा करने के बाद अपस्यु सीधा अपने घर निकला। शव यात्रा निकलने के कारण अपार्टमेंट के दरवाजे पर थोड़ी भीड़ जमा हो गई थी। अपस्यु अपनी गाड़ी साइड में लगाकर, भीड़ छंटने का इंतजार करने लगा। तभी सामने, साची अपने गेट से निकलकर, उसने भी स्कूटी साइड कर ली। दोनों गाड़ियों के बीच 1 फिट का फासला और दोनों आमने-सामने थे।

सामने साची को देखकर अपस्यु अपनी नजरे बार-बार उसपर ही डाल रहा था। दिल को जैसे सुकून मिल रहा हो उसे। तभी साची अपने चेहरे पर काला चस्मा चढ़ाई और अपनी गर्दन दूसरी ओर करके देखने लगी। …. "यहां गाड़ी लगा कर खड़ा है, संस्कार खत्म हो गए है क्या? जाकर अर्थी को कंधा दे।"… नंदनी दोनों गाड़ियों के बीच खड़ी होकर अपस्यु से कहने लगी।

अपस्यु ने अपना जूता वहीं कार में ही खोल दिया और अर्थी को कंधा देने पहुंच गया। लावणी भी साची के पीछे ही बैठी थी। नंगे पाऊं जब उसने अपस्यु को सड़क पर चलते देखी, तब वो भी अपना एक पाऊं का सैंडल उतारकर नीचे रखी। नीचे मिट्टी तो थी नहीं जो पाऊं को राहत देती। साची बस कुछ छन के लिए अपनी पाऊं दी और तुरंत फिर से सैंडल पहन ली।

"यार ये कितने दिल से नियम का पालन करता है। देख नंगे पाऊं कैसे कंधा देने पहुंच गया।"… लावणी हैरान होती हुई कहने लगी….

साची:- आज बेचारे के पाऊं में छाले पड़ जाएंगे। एक काम करना कोई एंटीसेप्टिक खरीद कर दे देना। राहत मिलेगी।

इतना कहकर साची ने स्कूटी को पीछे मोड़ा और चली गई। वहीं अर्थी के साथ चलते हुए कुछ लड़के-लड़कियां गर्मी से तर बतर थी। खुद तो गर्मी से परेशान थे, लेकिन नंगे पाऊं चल रहे अपस्यु के ऊपर हंस रहे थे। उसका नंगा पाऊं चलना मात्र एक पागलपन लग रहा था जी 21वी सदी में नहीं जचता। खैर अपस्यु अर्थी के साथ ही शमशान घाट तक आया और क्रियाक्रम की प्रक्रिया को देखने लगा….

"लगभग लोग चले गए है, आप अभी तक रुके हुए है।".. सफेद लिबास में एक लड़की अपस्यु के ओर पानी बढ़ाती हुई पूछने लगी।

अपस्यु, पानी की 2 घूंट पीते हुए……. "अपनी-अपनी मान्यता है, मै थोड़ा ज्यादा नियम मानता हूं।"

"हां मैंने भी देखा ये। बाय दी वे, आई एम् श्रेया"… श्रेया अपने हाथ अपस्यु के ओर बढ़ाती हुई कहने लगी… "मै अपस्यु हूं।"…. अपस्यु भी उससे हाथ मिलाते हुए बोलने लगा।

श्रेया:- मेरी नानी आपसे मिलकर काफी खुश होती। वो भी आप की तरह ही सात्विक थी।

अपस्यु:- ये मेरा दुर्भाग्य है जो मै उनसे नहीं मिल पाया।

श्रेया:- इट्स ओके, नानी नहीं हुई तो क्या हुआ, उनकी परछाई मेरी मॉम है ना… आप उनसे मिल लीजिएगा। एक मिनट मै अभी अाई… अा गए नरेश अंकल.. लाइए वो सामान मुझे दीजिए।

श्रेया अपने ड्राइवर के हाथ से सामान लेकर अपस्यु के पास पहुंची… "आप जरा ऊपर बैठेंगे।" .. कुछ सीढ़ियां थी उसी के ऊपर श्रेया उसे बैठने के लिए कहने लगी।

अपस्यु, श्रेया की बात को समझ नहीं पाया और वो जाकर सबसे ऊपर की सीढ़ी पर बैठ गया। जैसे ही वो सीढ़ी पर बैठा, श्रेया उसके पाऊं को हाथ लगाने लगी। अपस्यु अपने पाऊ पीछे करते हुए…. "आप ये क्या कर रही हैं।"

श्रेया:- सेवा कर रही हूं। ठीक उसी प्रकार, जिस प्रकार आप ने मेरी नानी के लिए किया।

अपस्यु खामोश होकर बस उसे करते हुए देख रहा था। श्रेया, अपस्यु के तलवों को पहले कॉटन से साफ की फिर उसपर एंटीसेप्टिक लगाकर पट्टी चढ़ाई और फिर बैग से सैंडल निकालकर उसे अपने हाथो से पहनाई।

अपस्यु:- थैंक्स, वैसे आप डॉक्टर है या नर्स।

श्रेया, अपने हाथ को साफ करती…. "जी मै एमबीबीएस 4th ईयर में हूं। लेकिन आप ने कैसे पहचाना।"

अपस्यु:- इतनी सफाई से आप ने पाऊं में पट्टियां लगाई, की मुझे शक सा हो गया।

श्रेया:- काफी मजाकिया लगते है आप। वैसे आप को देखकर लगता है कि…

अपस्यु:- देखकर कुछ भी अंदाज़ा लगा दीजिए। आप का विषय मनोविज्ञान नहीं बल्कि मेडिकल साइंस हैं। कष्ट ना कीजिए, मै अभी अपने ग्रेजुएशन के फर्स्ट ईयर में हूं। साहित्य लेकर पढ़ रहा हूं।

श्रेया उसे गौर से देखती हुई…. बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी क्या आपने?

अपस्यु:- कभी चाय पर इसकी चर्चा करेंगे। आज इतना ही रहने दीजिए।

श्रेया:- आप अप्रत्यक्ष (indirectly) रूप से मुझे चाय के लिए आमन्त्रित कर रहे है क्या?

अपस्यु, ऐमी को कार लगाते देख चुका था। वो वहां से निकलते हुए कहने लगा…. "मैंने आपको आमन्त्रित नहीं किया है। बल्कि मुझे लगा, अपनी जब कभी भी दूसरी मुलाकात होगी, वो चाय पर होगी, इसलिए आपसे कहा। फिलहाल मेरी दोस्त अा गई है मै चलता हूं।"

श्रेया, अपस्यु के इस विश्वासपूर्ण बातों को सुनकर मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी।… इधर अपस्यु ऐमी के साथ बैठकर वहां से निकल गया।… "काफी खूबसूरत थी वो"..

अपस्यु:- कम ऑन ऐमी, अभी नहीं। अभी तुम मुझे बताओ कि आज के शाम का क्या प्रोग्राम है।

ऐमी:- हद है सर, पहले बताना था ना आज शाम मेरे साथ हो।

अपस्यु:- कोई नहीं। कल शाम का प्रोग्राम रखते है। कोई दिक्कत…

ऐमी:- ना ना कोई दिक्कत नहीं। तो प्रोग्राम कुछ ऐसा है कि आज शाम तुम मेरा गाना सुनने चल रहे हो। म्यूज़िक स्टूडियो में आधे घंटे का प्रोग्राम है। उसके बाद हम तेज ड्राइविंग का लुफ्त उताएंगे। और कल तुम अपने हिसाब से करना।

अपस्यु:- बदमाश, इसे चीटिंग कहते है। जब आज फ्री थी, फिर मुझे ठगी क्यों?

ऐमी:- मेरा हक बनता है.. कोई सवाल..

अपस्यु:- कोई सवाल नही मिस।

ऐमी:- बात क्या है अपस्यु?

अपस्यु:- कुछ भी नहीं।

ऐमी:- कोई गहरी बात अंदर चल रही है, बाहर से उसे ना जताने की कोशिश कर रहे हो। कह भी दो….

अपस्यु:- और तुम्हे ऐसा क्यों लगा रहा?

ऐमी:- इतनी भी बेवकूफ नहीं की तुम्हारे बॉडी एक्सप्रेशन बता दू। तुम जैसा फास्ट लरनर को देर ना लगेगी अपनी आदत बदलने में। अब ये साइड टॉपिक छोड़ो और बात क्या है वो बताओ।

"वैसे भी मैंने तुम्हे बुलाया ही इसी वजह से था। कुछ अतीत के पन्ने खुलने को तैयार है। जेके और पल्लवी सहर में अा चुके है।.. आज रात मिलना है। बस दिमाग पजल बना परा है।"… अपस्यु ने अपनी बात रखी।

"कुछ ज्यादा परेशान दिख रहे हो। क्या क्लू मिला है।"… ऐमी जिज्ञासावश पूछने लगी…..

"पुनानिर्धरीत (reshudule) करने का क्लू दिया है दोनों ने। साथ में ये भी की एक और इंतजार की जरूरत है।"…. अपस्यु चिंता जाहिर करते हुए कहने लगा।

"हम इतने स्ट्रोंग पोजिशन में अाकर फिर से पुनानिर्धरीत करें। ये क्या हो गया। हट यार, अब और कितना लंबा इंतजार। 7 साल से तो धैर्य बनाए ही हुए है, और कितना वक़्त लगेगा।"… ऐमी हतास होती हुई कहने लगी।

"वो अपने वक़्त में हमे आजमाकर भूल चुके है, माना कि उन्हें आजमाने के लिए अभी थोड़ा और वक़्त लगना है, लेकिन जिस दिन हम उन्हें आजमाना शुरू करेंगे वो हताश होकर ना तो जमीन को तकेंगे और ना आसमान। अपने मौके के लिए सही वक़्त का इंतजार करो, हताश होने से बेहतर है खुद को तैयार करो"……
 
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"वो अपने वक़्त में हमे आजमाकर भूल चुके है, माना कि उन्हें आजमाने के लिए अभी थोड़ा और वक़्त लगना है, लेकिन जिस दिन हम उन्हें आजमाना शुरू करेंगे वो हताश होकर ना तो जमीन को तकेंगे और ना आसमान। अपने मौके के लिए सही वक़्त का इंतजार करो, हताश होने से बेहतर है खुद को तैयार करो"……

ऐमी मुस्कुराती हुई अपस्यु के गले लगी और फिर वहां से दोनों पहले पहुंचे सिन्हा जी के घर। अपस्यु दरवाजे के बाहर ही खड़ा रहा और वहीं उसने पहले स्नान किया और कपड़े पहन कर अंदर आया।

आते ही सबसे पहले वो वैभव से मिला और उसे अपने सीने से लगाकर पूछने लगा…. तो मिस्टर वैभव कैसा लग रहा है यहां आकर।

वैभव:- अभी एक दिन ही हुए है भैय्या, अभी थोड़ा मुश्किल है कह पाना। कुछ दिन यहां रहकर मै आकलन करूंगा, फिर अपना सही विचार बता पाऊंगा।

अपस्यु:- क्या बात है। इतने छोटे से दिमाग में इतनी ज्यादा सोच। किसने सिखाई ये बातें।

वैभव:- ऐमी दीदी ने सिखाया।

अपस्यु:- शाबाश, चलो जाओ अब तुम खेलने मै आता रहूंगा तुम्हे देखने।

ऐमी:- और मुझे कौन देखेगा…

अपस्यु ने जैसे ही नजर उठाकर देखा….. "देखी लख-लख परदेशी गर्ल, नो बॉडी लाइक माय देशी गर्ल। तुम आज किसी को पागल बनाने निकली हो क्या?

ऐमी:- नाः… आज स्टूडियो में एथेनिक पहन कर आने का आदेश मिला है।

अपस्यु:- सॉरी, लेकिन क्या तुम कोई सिंपल सलवार-कुर्ता पहन सकती हो क्या?

ऐमी:- क्यों ? तुम पागल तो ना हुए जा रहे?

अपस्यु:- हाहाहाहा… हां शायद हो भी रहा हूं। किंतु बात वह नहीं है। अभी हम घर चलेंगे ना, और हमारे ही फ्लोर पर एक डेथ हुई है…

ऐमी:- ओह !! इट्स ओके, मै अभी अाई चेंज करके।

ऐसा लग रहा था आज किस्मत भी मज़ाक के मूड से थी। अपार्टमेंट के सामने ही एक बार फिर भीड़ लगी थी। इस बार मामला ये था कि दो गाड़ी सामने से टकराई थी और दोनों गाड़ी के लोग आरोप-प्रत्यारोप करने में लगे हुए थे।

फिर से एक बार दोनों की गाड़ी किनारे लगी हुई थी और दोनों आमने-सामने। लेकिन फर्क सिर्फ इतना था कि इसबार अपस्यु की गाड़ी साची के दरवाजे पर थी और साची की स्कूटी ठीक उसके सामने।

अपस्यु का ध्यान उनके झगड़े पर था, उसका ध्यान साची पर नहीं गया था।… "हेल्लो मिस्टर, कैजुअली आप ने अपनी गाड़ी मेरे रास्ते में खड़ी कर चुके है, हटाइए।" … बोल्ड एंड सेक्सी लुक, ऊपर से आखों पर चस्मा लगाए। अपस्यु तो साची को एक बार ऊपर से नीचे तक देखता ही रह गया, और साची अपनी बात कहकर वापस अपने स्कूटी के ओर चल दी।

ऐमी जब साची को सुनी, वो जोड़-जोड़ से हंसती हुई कहने लगी…. "काजुआली गाड़ी क्यों खड़ी कर दिए".…. ऐमी की बात सुनकर अपस्यु भी हंसने लगा।…. "ऐमी, ब्रेकअप के बाद इसमें बहुत बदलाव अा गया है। पहले से ज्यादा हॉट और सेक्सी दिख रही। इसमें तो घायल करने वाला एटिट्यूड अा गया है।"…… "होता है अपस्यु, ब्रेकअप के बाद गर्लफ्रेंड कुछ ज्यादा ही अट्रैक्टिव लगने लगती है। लेकिन .. लेकिन.. लेकिन…"…. "हां आगे भी तो बोलो ऐमी"….. "लेकिन ये तुम्हारी कैजुअली पार्किंग"… फिर से दोनों जोड़-जोड़ से हसने लगे….

साची को लगा दोनों उसपर ही हंस रहे है। साची थोड़ी चिढ़ गई, और चिढ़ते हुए उसने दोनों को सुनाते हुए, उन झगर रहे लोगों पर चिल्लाती हुई कहने लगी…. "ओए… यहां जमा कैजुअली लोग, जल्दी से अपना लफड़ा खत्म करो और भागो यहां से। ब्लडी काजुअल्स"…. झगर रहे लोगों में से तो किसी कानो तक उसका चिल्लाना नहीं पहुंचा, लेकिन ऐमी और अपस्यु, साफ-साफ उसकी आवाज़ सुन चुके थे।

साची की बात सुनकर ऐमी कार का दरवाजा जोड़ से खोलती हुई बड़े ही एटिट्यूड के साथ साची के पास पहुंची और उसे घूरती हुई कहने लगी….. "ग्रो उप किड्ढो" और चल दी झगड़े के बीच में। जो ही उसने दोनों गाड़ियों वालों पर तांडव मचाई, बस 2 मिनट में ट्रैफिक क्लियर और दोनों अपार्टमेंट में।

साची भी अपनी स्कूटी लेकर अंदर घर पहुंची…. "दीदी वो कौन थी जो बड़े ही एटिट्यूड के साथ आप को सुना कर गई और आप कुछ बोल नहीं पाई।"

साची:- ये वही कैजुअल रिलेशन वाली कमिनी थी।

लावणी:- एटिट्यूड तो सॉलिड था दीदी, तुम्हारी छोड़ो उसने तो उन दोनों गाड़ियों वाले की भी बोलती बंद कर दी।

साची:- तू बड़ी मुखियान क्यों बन रही है। चल, चलकर पैकिंग करते है।

शाम के 7 बजे….

ऐमी, अपस्यु के साथ म्यूजिक स्टूडियो पहुंचा। ऐमी अपने बैंड के साथ बैठी और थोड़ी देर बाद अपनी सुरीली आवाज़ में गाना शुरू किया….

कहते हैं खुदा ने इस जहां में सभी के लिए

किसी ना किसी को है बनाया हर किसी के लिए

तेरा मिलना है उस रब का इशारा

मानो मुझको बनाया तेरे जैसे ही किसी के लिए

कुछ तो है तुझसे राबता, कुछ तो है तुझसे राबता


कैसे हम जानें, हमें क्या पता, कुछ तो है तुझसे राबता

इतनी मीठी आवाज़ थी कि अपस्यु खोता चला गया। संगीत आगे बढ़ता जा रहा था और वो धीमे-धीमे सुकून मेहसूस करता जा रहा था। प्यारी सी मुस्कान उसके चेहरे पर अा गई थी।

"चले, या यहीं बैठना है।"…. अपस्यु एक गहरी नींद से जाग रहा हो जैसे। ऐमी को पास देखकर, अपनी नज़रों को उसके चेहरे पर ठहरने दिया और मुस्कुराते हुए कहने लगा… "ऐमी कल शाम भी तो साथ रहेंगे, आज मुझे तुम्हे सुनना है। मेरे लिए कुछ और भी गाने गा सकती हो क्या?

ऐमी मुस्कुराई और वापस अपने क्रु के पास पहुंच गई।… दूसरा गाना उसने शुरू किया… गाने से पहले उसके आखों में थोड़े आंसू और चेहरे पर मुस्कान थी.. गाने से पहले वो कहने लगी…. "इस गाने का हर शब्द मुझे खींचता है। ऐसा लगा जैसे ये मुझे जोड़ रहा हो"… और फिर वो गाना शुरू की….

जिसे ज़िन्दगी ढूंढ रही है, क्या ये वो मक़ाम मेरा है

यहां चैन से बस रुक जाऊं, क्यों दिल ये मुझे कहता है

जज़्बात नए मिले हैं, जाने क्या असर ये हुआ है

इक आस मिली फिर मुझको, जो क़बूल किसी ने किया है

हां… किसी शायर की ग़ज़ल, जो दे रूह को सुकून के पल

कोई मुझको यूँ मिला है, जैसे बंजारे को घर

मैं मौसम की सेहर या सर्द में दोपहर

कोई मुझको यूँ मिला है, जैसे बंजारे को घर

जैसे कोई किनारा, देता हो सहारा, मुझे वो मिला किसी मोड़ पर

कोई रात का तार, करता हो उजाला, वैसे ही रौशन करे, वो शहर

दर्द मेरे वो भुला ही गया, कुछ ऐसा असर हुआ

जीना मुझे फिर से वो सिख रहा

हम्म जैसे बारिश कर दे तर, या मरहम दर्द पर

कोई मुझको यूँ मिला है, जैसे बंजारे को घर

मैं मौसम की सेहर, या सर्द में दोपहर

कोई मुझको यूँ मिला है, जैसे बंजारे को घर

मुस्काता ये चेहरा, देता है जो पहरा

जाने छुपाता क्या दिल का समंदर

औरों को तो हरदम साया देता है

वो धुप में है खड़ा ख़ुद मगर

चोट लगी है उसे फिर क्यों

महसूस मुझे हो रहा

दिल तू बता दे क्या है इरादा तेरा

हम्म परिंदा बेसबर, था उड़ा जो दरबदर

कोई मुझको यूँ मिला है, जैसे बंजारे को घर

मैं मौसम की सेहर, या सर्द में दोपहर

कोई मुझको यूँ मिला है, जैसे बंजारे को घर

जैसे बंजारे को घर, जैसे बंजारे को घर


जैसे बंजारे को घर..

वाकई ऐमी ने जब इसे गाना शुरू की और इस सिद्दत से उसने अपनी आवाज़ दी कि वो अपने जज़्बात सबको मेहसूस करवा गई। अपस्यु, सुनकर बस मुस्कुराए जा रहा था। 4 गाने वो लगातार गाने के बाद अपस्यु के पास आकर बैठ गई और पानी पीती हुई वो अपस्यु को देखने लगी। अपस्यु अब भी उसके संगीत में जैसे खोया ही हुआ था।

"जगिए मोहन प्यारे, भोर भई"…. ऐमी धीमे से हिलाती हुई उस कहने लगी… "शानदार शाम थी ये ऐमी, मज़ा ही अा गया… और ये बंजारा सोंग पर क्या कह गई तुम"..

ऐमी:- दर्द मेरे वो भुला ही गया, कुछ ऐसा असर हुआ, जीना मुझे फिर से वो सिख रहा।

अपस्यु:- तुम भी ना .. पागल कहीं की। तैयार हो भूतों से मिलने के लिए।

ऐमी:- ना जाने कब से बेकरार हूं मै अपस्यु। उनसे पिछला हिसाब भी तो बराबर करना है।

अपस्यु:- तुम हिसाब बराबर करने का सोच रही हो और मुझे लग रहा है एक और हिसाब तुम पर ना चढ़ जाए।

ऐमी:- इसपर बहस क्यों करना, चलकर आजमा ही लेते है फिर।

दोनों निकल पड़े एक दोस्ताना आजमाइश पर। यूं तो मिलने का वक़्त 9 बजे था, लेकिन दोनों तय जगह पर पौने नौ बजे ही पहुंच चुके थे। दोनों बिल्कुल तैयार, उस सुनसान अंधेरे खंडहर के ओर चल दिए। कुछ दूर आगे चलकर दोनों अलग हुए और आगे का रास्ता तय करने लगे…

माहौल बिल्कुल अंधेरा और खामोश, तभी हवा कि ध्वनि में एक छोटा सा परिवर्तन और अपस्यु बड़ी तेजी से किनारे हुआ। कोई बुलेट थी जो सीधे जमीन में घुसी। … "क्या भइया, ट्रांकुलाइजर पर ही अटके हो, कितनी बार बताया है कि स्नाइपर ट्रंकुलाइजर ध्वनि उत्पन करती है। ये बेकार कोशिश थी। कुछ और ट्राय करो।"…

इधर ऐमी जैसे ही आगे बढ़ी, कुछ तेज से उसकी ओर आता हुआ। ऐमी खुद को किनारे करती उसे अपने नाक के पास से गुजरते हुए मेहसूस कर रही थी। उसने अपने तेज हाथों का इस्तमाल करती अपने हाथ से पकड़ ली। एक धारदार चाकू जो उसकी ओर फेका गया था। दिशा का ज्ञान करती हुई, उसने अपने तेज हाथ से पकड़ते हुए कहने लगी…. "नीचे अा जाओ भाभी, आप के हुस्न का चाकू ही धारदार है, ये बेकार सी कोशिश है।"..

अपस्यु और ऐमी दोनों उनके पोजिशन समझ चुके थे। जेके और पल्लवी दोनों ऊपर कहीं पर बैठे थे और वहीं से हमला कर रहे थे। दोनों ने कुछ और कोशिश की लेकिन अपस्यु और ऐमी अपने प्रतिभा में और ज्यादा निखार का प्रदर्शन करते हुए, उनके सभी हमलों को बेकार किए जा रहे थे।

जेके:- नॉट बैड हां !! पल्लवी वन टू वन क्या कहती हो, अंधेरे का खेल बहुत हुआ।

अपस्यु:- डर लग रहा तो अंधेरे का ही सहारा लिए रहो। थोड़ी और कोशिश कर लो।

ऐमी:- भाभी जल्दी डिसीजन लो, क्योंकि इस बार यदि वन टू वन हुआ ना तो नाक टूटनी है।

तभी वहां के अंधेरे को चीरती हुई रौशनी हुई। 4 फोकस लाइट और उन उनके मध्य में मिस्टर एंड मिसेज खत्री अपने चिर परिचित अंदाज़ में दिखने लगे।

जेके:- सभी रिलैक्स.. आज के लिए इतना ही।

फाइट कॉल ऑफ का संकेत और ऐमी उनके ओर चल दी। वो जैसे ही वहां पहुंची, एक जोरदार पंच उसके नाक पर और नाक से खून निकलने लगा। ऐमी का दिमाग झन्ना गया। वो अपने हाथ से नाक को पोछति, अपना खून देखने लगी और जंप करती हुई अपने हाथ को पूरे फोर्स से पीछे लेे जाकर… ऐमी अपने वार के लिए तैयार।

पल्लवी अपने दोनो पाऊं फैला कर, 180 डिग्री का तेज फ्लिप ली और ऐमी का वार खाली गया। वो ठीक पल्लवी के आगे लैंड हुई और पल्लवी ने उसके दोनों पाऊं पकड़ कर तेजी से खींच दी। अचानक इस हमले से बचने के लिए ऐमी ने हवा में 360 डिग्री का फ्लिप ली और सीधी खड़ी हो गई जमीन पर।

जेके और अपस्यु दोनों वहीं नीचे बैठ कर फाइट का लुफ्त उठाने लगे। ऐमी के इस मूव पर दोनों अपने बियर की बोतल हवा में लहराकर हूटिंग करने लगे। दोनों में जंग छिड़ चुकी थी। दोनों हवा और जमीन पर कलाबाजियां दिखा रही थी। इसी दौरान ऐमी के हाथ एक डंडा लगा।

उसने पूरे तेजी के साथ वो डंडा सामने से चला दिया। मात्र छन भर का समय मिला पल्लवी को और उसने अपने दोनो हाथ आगे करके अपने उपर बॉडी को कवर कर लिया। लेकिन ऐमी के प्लान में उतने ही तेजी के साथ बदलाव आया। उसने दाएं से बाएं हाथ में डंडा पास किया और हौक कर तेज डंडा उसके पीछे चिपका दी।

पल्लवी बिल्कुल सरप्राइज होती हुई छटपटा गई और अपने हाथ के कवर को खोल चुकी थी। एक छोटा सा मौका और ऐमी नहीं चुकी। पल्लवी अपने सरप्राइज से उबरी भी नहीं थी कि अगले ही पल उसके नाक पर ऐमी का जोरदार प्रहार और उसका नाक भी गया।

पल्लवी अपने नाक पर हाथ देती हसने लगी और ऐमी को रुकने का इशारा किया। वो भी हंसती हुई अाकर अपस्यु के पास बैठ गई। अपस्यु अपना रुमाल निकालकर उसके नाक को साफ करने लगा। इधर पलालवी भी रिलैक्स हुई और अपना खून साफ करने लगी।

पल्लवी:- ऐमी तूने सरप्राइज मूव देकर तो मेरा पिछ्वाड़ा लाल कर दिया।..

ऐमी:- हीहीहीही… भाभी आज पेबैक के इरादे से अाई ही थी मैदान में… चीयर्स…

ऐमी भी एक बियर उठा कर टोस्ट करती हुई पीन लगी। कुछ देर तक चारो की आपस में बातें होती रहीं। उसी दौरान अपस्यु ने जगदीश राय (जगदीश राय वही क्रिमिनल, जिसके अंडरग्राऊंड फाइट वाली जगह में घुसकर अपस्यु और आरव ने उसके सेफ से फाइल उड़ाई थी) के पास से मिली डायरी की तस्वीरें जेके को सौंप दिया। जेके चूंकि इन्हीं क्रिमिनल्स के कब्र खोदने में लगने वाला था इसलिए उसने अपस्यु को दिल से धन्यवाद किया।

15 मिनट बाद चारों एक टेबल पर इकट्ठा हुए और जेके कुछ पुराने फाइल्स उस टेबल पर रखते हुए कहने लगा…. "जून 2007 में हुई आचार्य निशी और उनके चेलों की भीषण हत्याकांड का एक मुख्य कड़ी जो अब तक हमारे नजरों से ओझल रहा था वो एक छोटे से सुराग से अब सामने आ चुका है।"
 
Update:-49

15 मिनट बाद चारों एक टेबल पर इकट्ठा हुए और जेके कुछ पुराने फाइल्स उस टेबल पर रखते हुए कहने लगा…. "जून 2007 में हुई आचार्य निशी और उनके चेलों की भीषण हत्याकांड का एक मुख्य कड़ी जो अब तक हमारे नजरों से ओझल रहा था, वो एक छोटे से सुराग से अब सामने अा चुका है।"

जेके अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहने लगा….

तुम लोग को देखकर यही एक बात दिमाग में अा रही है… ख्वाहिश एक बदल की थी हाथ पूरा आसमान लग गया। नंदनी रघुवंशी, डॉटर ऑफ कुंवर सिंह राठौड़, इस वक़्त 2000 करोड़ के संपति की मालकिन है, और यदि उसने अपने कजिन विक्रम सिंह राठौड़ को रास्ते से हटा दे, तो वो 20000 करोड़ के एम्पायर की अकेली मालकिन हो जाएगी।

जिन हवाला सिंडिकेट के पीछे तुमलोग पड़े हो उसका बरगद है… मायलो ग्रुप। बेशक मुखिया बदला नहीं है, इसे भी वही ऑपरेट कर रहा है, लेकिन जिस नीव के साथ वो आगे बढ़ा है, तुम्हारे दिमाग की नशें हिल जाएगी उसे बर्बाद करने में।

चन्द्रभान की प्लैनिंग ने भूषण रघुवंशी और मानस रघुवंशी की जान ली थी। दोनों भाइयों के बीच कभी संपत्ति को लेकर लड़ाई हुई ही नहीं। बहस तो बस इतना था कि भूषण को गैर-कानूनी पैसे कभी नहीं चाहिए थे। चन्द्रभान रघुवंशी जो भी पैसों के इधर-उधर करता, वो कंपनी के प्रॉफिट में शो करता और वो उसमे से भूषण को भी हिस्से भेजता था और बदले में चाहता था कि वो भी यही काम करे।

लेकिन भूषण ने कभी भी चन्द्रभान के प्रॉफिट का शेयर एक्सेप्ट नहीं किया और उसे अब किसी भी कीमत पर बिजनेस के 2 हिस्से चाहिए थे क्योंकि ऐसे माहौल में वो अपने भाई के साथ पार्टनरशिप पर काम नहीं कर सकता था, और यहीं से भूषण रघुवंशी पर काल मंडराने लगा।

सी.ए.बी लिमिटेड शक के दायरे में आना शुरू हो चुका था, क्योंकि वेस्ट मैनेजमेंट के जो रिसाइकिल डिवाइस सी.ए.बी इंस्टॉल्ड किया करती थी, वो गुणवत्ता के आधार पर रिजेक्ट किया जा रहा था। इनका एक प्रोडक्ट कहीं इंस्टॉल नहीं हो रहा था, फिर भी इसका प्रॉफिट में होना एक बहुत बड़ा सवाल था।

साल 2006 से प्लान बनना शुरू हुआ। ब्लैक से व्हाइट के धंधे में इन्हे मजबूत आधार चाहिए थे, इसके लिए 2 आधार को तैयार किया गया। एक आचार्य निशी के ट्रस्ट का नाम और दूसरा एक मजबूत बिजनेस एम्पायर, जिसके लिए चुना गया कुंवर सिंह राठौड़ की एम्पायर, क्योंकि चन्द्रभान मायलो ग्रुप के बारे में पूरा रिसर्च कर चुका था। चन्द्रभान ने पहले तो रिश्तेदार होने के नाते, सामने से ऑफर दिया और जब वो नही माने तब एक खेल रचा गया।

एक खूनी खेल जिसमे नंदनी के कजिन विक्रम सिंह ने उसके पूरे परिवार का केवल इकलौता वारिश छोड़ा, नंदनी रघुवंशी। अब उसके परिवार का कोई जिंदा नहीं। लगभग 80 करोड़ के बॉन्ड्स और कुछ शेयर चन्द्रभान ने अपने भाई के नाम छोड़े, ताकि भूषण के मौत के बाद, नंदनी को यह यकीन दिलाया जा सके कि उसने पूरा बटवारा पहले ही कर दिया था।

कुछ दिन नंदनी को वही फ्रांस में रखा जाना था, फिर उसके परिवार की मौत की खबर दी जाती और उसे मायलो ग्रुप का चार्ज लेने इंडिया वापस बुलाया जाता, ताकि उनके काले धंधे को एक व्हाइट फेस मिल सके। पीछे क्या चल रहा है नंदनी को कुछ पता नहीं लगने दिया जाता और पूरा गैर-कानूनी बिल उसके नाम से फाड़े जाने थे।

मास्टर माइंड चन्द्रभान की ये दोहरी नीति … एक कंपनी जो लगातार प्रॉफिट में थी और एक बहुत पुराना ट्रस्ट जिसपर सबको अटूट विश्वास था… दो मुख्य बेस जिसमे आचार्य निशी के ट्रस्ट में 100 करोड़ और 500 करोड़ का मायलो ग्रुप… कुल 600 करोड़ के बेसिक स्टार्ट के साथ हवाला का धंधा। क्या दिमाग पाया था।

भूषण के मौत का समय और तारीख सब पहले से तय हो चुका था, किंतु चन्द्रभान से एक ही चूक हुई और वो मारा गया।… इसी चक्कर में उन लोगों को कभी नंदनी मिली ही नहीं। और उस रात…

अपस्यु:- बस अब उस रात की कोई बात नहीं… ऐमी तुम ठीक हो।

ऐमी:- येस सर..

पल्लवी:- अभी तक येस सर। हिहिहिही … उस दिन फूल तोड़ते हुए अपस्यु गिरा और दिमाग पर ऐमी के चोट लगी।

ऐमी:- कैसे भाभी…

पल्लवी:- उस दिन जो हमने उपाधि वाली कहानी सुनाई थी .. अंग्रेज अपने महान लोगों को सर कहकर संबोधित करते थे…

ऐमी:- हीहीहीही.. सर निकोलस, सर न्यूटन, सर अपस्यु..

पल्लवी:- अब तो छोड़ दो, उस वक़्त तो केवल हमने तुम्हारे साथ बस एक प्रेंक किया था।

ऐमी:- अच्छा अच्छा.. वो प्रैंक था। अब रहने भी दो आप.. मेरा मुंह दबाकर मुझे उठाकर लाए थे। प्राण हलख में अटक गए थे। किडनैपिंग कहिए उसको…

अपस्यु:- एक और आस्तीन का सांप। कोई नहीं जेके भैय्या ये एहसान रहा।

जेके:- नो फ़्री सर्विस बेटा। तुम हम में से एक हो, एक अनाधिकारिक एजेंट। एक केस में मै तुम्हारी मदद कर रहा हूं, बदले में तुम भी मदद कर दिया करते हो। इसलिए फॉर्मेलिटी नहीं।

"लेकिन एक बात जो मुझे जरूरी लग रहा है बताना…. अभी उनकी जड़ें बहुत ही मजबूत है। तुम्हे अंदाज़ा भी नहीं की ये लोग कितने व्हाइट कॉलर लोगों के ब्लैक पैसे को व्हाइट करते है। इनपर कमजोर हाथ डालोगे तो समझ लो कि तुमने भारत के टॉप पॉलिटीशियन, बिजनेसमैन, ऑर्गनाइजेशन, क्रिमिनल्स और ना जाने कितने ब्यूरेक्रेट्स पर हाथ डाल दिए। एक बार मे तुम और तुमसे जुड़े सभी लोग गायब हो जाओगे, किसीको कनोकान भनक तक नहीं लगेगी। जैसे 2007 में हुआ था पूरा एक आश्रम जल गया, 160 बच्चे मर गए, एक पूरी रॉयल फ़ैमिली खत्म हो गई और किसी अखबार के छोटे कोने में भी नहीं छापा।"

"इसलिए जब भी इनको आजमाना उस वक़्त एक साथ हमले होने चाहिए। पता ना चले इन्हे की क्या हो रहा है। बौखलाकर एक दूसरे को नोचने लगे… पागलों की तरह अपना सर पीटने लगे… किसी को भी मारना मत, जिंदगी सजा लगे वो हाल करना। पूरे धैर्य के साथ आगे बढ़ना, अनुकूल समय दिखे तो इनके नेटवर्क को तोड़ते रहना और सही वक़्त पर अपने हर साथी का उस निर्मम हत्या का पूरा हिसाब लेना। और सबसे जरूरी बात"..…

अपस्यु:- जबतक हम जिंदा है तभी तक हमारा न्याय जिंदा है। हम गए तो साथ हमारा न्याय भी चला जाएगा…

जेके:- आय शाबाश… इसे कहते है सच्चा खिलाड़ी…. चलो आज की मीटिंग यहीं खत्म होती है।…

पल्लवी:- जेके तुम जाओ आज रात का प्रोग्राम मैंने अपस्यु के साथ सेट किया है। क्यों छोड़े तैयार है।

अपस्यु:- अरे यार संभालो अपनी बीवी को वो फिर पागल हो गई है।

जेके:- पागल क्यों ना हो, कल ही उसने एक कहानी पढ़ी थी.. कौन सी थी वो पल्लवी…

पल्लवी…. भाभी के साथ सुहागरात मनाई भाय्या के बगल में।

ऐमी:- मै जा रही हूं, इसे और सुनूंगी तो आत्महत्या कर लूंगी…

अपस्यु:- रुकी ऐमी… मै भी आया…

दोनों तेज नहीं चले बिल्कुल वहां से दुम दबाकर भाग गए। उसको ऐसे भागते देख पल्लवी और जेके दोनों हसने लगे। …. "तुम्हारी आखें इतनी जली-बुझी सी क्यों थी मिस्टर जुगल किशोर"… पल्लवी उसे एक हाथ मारती हुई पूछने लगी।

जेके:- यार उसे ऑफर पर ऑफर दिए जा रही थी और मैं बेचारा 4 दिन का प्यासा। पत्नी होने के बावजूद हाथों से काम चलाना पड़ रहा है।

पल्लवी:- ओह ऐसा है क्या.. कोई नहीं आज तुम्हे पूरा मौका मिलेगा मिस्टर हसबैंड। जो बैंड ऐमी ने मेरे पिछवाड़े की बजाई है, अब तो उसे तुम्हारे हाथ के मालिश की ही जरूरत होगी।

जेके:- यार क्या शानदार मूव था वो। मै तो दंग ही रह गया। लगभग वो हमला कर चुकी थी। लेकिन आखरी वक़्त का उसका वो बदलाव.. ध्यान, एकाग्रता, और पूरा बैलेंस.. कमाल की अचीवमेंट की हैं।

पल्लवी:- आज वायग्रा लेे लेना.. पूरा फ्री है तो अभी से ही तुम मेहनत करना ताकि सुबह तक तुम्हारे लिए भी कहा जा सके.. कमाल का अचीवमेंट।

अपस्यु और ऐमी दोनों भागते हुए कार में आए और वहां से जल्दी में निकल गए…. "यार ये पल्लवी भाभी कभी नहीं सुधर सकती। लास्ट ईयर नागपुर का किस्सा भूल तो नहीं।"..

अपस्यु:- मत याद दिलाओ वरना मै गाड़ी से कूद जाऊंगा।

ऐमी उसका कंधा पकड़ कर खींचती हुई उसके चेहरे को अपने चेहरे के करीब लाई और कहने लगी….. "भाभी के शिकार होने से बचने के लिए एक युवक ने कुएं में छलांग लगा दिया… हिहिहिहिही….".

अपस्यु:- बेकार सा जोक था हंसी नहीं आयी।

ऐमी:- हंसी नहीं आती हो तो मोड़ लो गाड़ी, भाभी अभी तक वहीं होंगी।

अपस्यु:- बस रे बाबा बस आज के लिए मेरी इतनी छिलाई काफी है।

ऐमी:- 11 बज रहे है, डिस्को चले क्या?

अपस्यु:- मेरे पाऊं में पहले से छाले पड़े हुए थे, ऊपर से जेके भैय्या ने अपनी स्नाइपर के ताल पर मुझे नचाया, तुम खुद डिसाइड कर लो अब।

ऐमी:- कोई बात नही.. तुम आराम करो लेकिन कल पक्का हम डिस्को चल रहे है और इसपर कोई बहस नहीं।

अपस्यु:- ठीक है पक्का.. अच्छा सुनो तुम पार्थ, आरव और स्वस्तिका को फॉल बैंक का संदेश देकर, 29 जून को बार्सिलोना में एक मीटिंग का कॉल दो।

ऐमी:- जी सर अपस्यु…

अपार्टमेंट के गेट पर अपस्यु उतर गया और ऐमी वहां से चली गई। अपस्यु मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था और वो शाम के संगीत को याद करके खुश हुआ जा रहा था।

अपस्यु अपने धुन में घुसा, सामने नंदनी खड़ी थी। ये अंदर की भावना… अभी वो संगीत में डूबा था और नंदनी का चेहरा देख कर दर्द में अा गया। वो नंदनी को गले लगाकर कहने लगा…. "आप ने बहुत दर्द झेले है। सिर्फ एक सनकी की वजह से आपको ये सब झेलना पड़ा है।"

नंदनी उसे खुद से अलग करती हुई उसका मुंह सूंघने लगी…. "तुम पी कर तो नहीं आए।"

अपस्यु, नंदनी के दोनों गाल पकड़ के खींचते हुए…. "क्या आप भी ना मां, बहुत तेज भूख लगी है कुछ खाने को दो।… तभी उसकी नजर हॉल के दूसरे हिस्से पर पड़ती है…. "मां ये सब"….

नंदनी:- वो उनके यहां नियम है कि 4-5 दिनों तक खाना नहीं बनता है, अब कहां वो लोग बार-बार रेस्टुरेंट से ऑर्डर देकर इतने लोगो का खाना मंगवाते, इसलिए उस हॉल का किचेन उन लोगों को इस्तमाल करने के लिए दे दिया।

अपस्यु:- और घर में कुछ चोरी वग्रह हुई तो, या रात को किसी ने आपके गले पर चाकू रखकर सब कुछ लूट लिया तो।

नंदनी:- अपना सबकुछ तो बैंक में है, यहां लुटकर क्या करेंगे? जो भी लूटने आएंगे उन्हें मै बोल दूंगी… सुनिए आप मेरी नींद खराब मत कीजिए, जो भी ले जाना है बड़े आराम से लीजिएगा।

अपस्यु:- हाहाहाहाहा.…. मां मेरा एक काम करोगी?

नंदनी:- क्या?

अपस्यु:- मेरे रूम में जाकर वो जड़ी बूटियों वाला बैग लेे आओ ना। मै जबतक हमारे लिए खाना गर्म करके लगाता हूं।

नंदनी:- क्या हो गया, तुम्हारा चेहरा फिर जला क्या? लेकिन देखने से तो नहीं लगता की किसी ने कॉफी फेकी हो…

अपस्यु:- हा … हा … हा … मस्त जोक था। मां ला दो ना प्लीज़।

नंदनी:- अच्छा ठीक है ला देती हूं, लेकिन तुम खाना रहने दो, जाकर हाथ मुंह धोकर आराम से बैठो।

"ठीक है मां, जैसा आप कहो।"… और अपस्यु हाथ मुंह धो कर सोफे पर लेट गया। नंदनी जब बैग लेकर अाई तब उसकी नजर पहली बार उसके तलवों पर गई, जिसपर से अपस्यु ने पट्टी हटा दिया था।

बहुत ही बुरी स्थिति में उसके लाऊं की हालत थी, नंदनी से देखा नहीं गया। सर छू कर देखी तो बदन भी गरम था… अपस्यु, नंदनी को चिंता में देखकर कहने लगा…. "बस थोड़े से छाले पड़े है मां, वो लेप लगा लूंगा तो रात भर में आराम मिल जाएगा।"

नंदनी:- तुम्हे डॉक्टर से परहेज़ है क्या? ये तो बहुत बुरे कंडीशन में है बेटा।

अपस्यु:- आप चिंता ना करे मां, वो बैग ला दीजिए मै सामग्री निकाल देता हूं। आप बस गुलाब जल में इसका लेप बनाकर लगा दीजिए, सुबह तक ठीक हो जाएगा।

थोड़ी ही देर में नंदनी बैग लेकर पहुंच गई।अपस्यु ने नंदनी को सारा समान निकाल कर दे दिया, वो जल्दी में गई और ग्राइंडर में पीसकर उसका लेप तैयार करने लगी। इतने में वहां साची और लावणी भी पहुंच गई। "क्या आंटी आप दरवाजा तो बंद कर लिया करो कम से कम"… साची दरवाजे से ही तेज चिल्लाती हुई कहने लगी, शायद अपस्यु को सुना रही थी, और लावणी तो अंदर आते ही चारो ओर ताक-झांक शुरू कर दी।

नंदनी किचेन से लेप लाती हुई सीधा अपस्यु के पास ही अाई….. "वहां क्यों खड़ी हो अा जाओ।"….

साची और लावणी दोनों वहां पहुंची, नंदनी जबतक अपस्यु के बाएं तलवे में लेप लगा रही थी। दाएं पाऊं का हाल देख कर दोनों बहने सिहर गई। …. इधर नंदनी लेप लगाने के चक्कर में थोड़ी देर के लिए भूल ही गई की वहां साची और लावणी भी है। फिर उसे जब ये ख्याल आया तब वो दाएं पाऊं में लेप लगाती हुई पूछने लगी…. "किसी काम से आए थे क्या तुम दोनों।"…. नंदनी ने दोबारा पूछा, लेकिन फिर भी कोई जवाब नहीं और जब वो पीछे मुड़कर देखी तो दोनों में से कोई नहीं थी, बल्कि वहां श्रेया खड़ी थी, जो बड़े ध्यान से नंदनी को लेप लगाते हुए देख रही थी।
 
Update:-50

फ्लाइट में .. रात के 8 बजे….

तीनों बिजनेस क्लास से जा रहे थे और क्रिश इकॉनमी क्लास में था। इस चक्कर में क्रिश बार-बार उठकर विन्नी से मिलने बिजनेस क्लास में आ जाता, जिस वजह से वहां बैठे पैसेंजर काफी गुस्से में आते हुए उसकी शिकायत फ्लाइट क्रु से करने लगे।

मजबूरन माहौल को संभालने के लिए आरव ने क्रिश के पास वाली सीट पर बैठे एक सज्जन को बिजनेस क्लास में जाने का आग्रह किया और स्वयं उसकी जगह बैठ गया…. "अबे ओ घोंचू, पूरा 1 महीना छुट्टी पर है, फ्लाइट में ऐसी तुच्ची हरकत करते शर्म नहीं आती।"

क्रिश:- यार कॉलेज से दुकान और दुकान से घर, मेरे पप्पा ने कभी मुझे वक़्त ही नहीं दिया, जो मै अपनी विन्नी को घुमा भी सकु। आज पहली बार कहीं इतनी दूर जा रहा हूं, मेरी भी तो फीलिंग्स है यार। लेकिन यहां भी बिजनेस क्लास और इकॉनमी क्लास कि दीवार।

आरव:- किस चीज कि दुकान है तुम्हारी।

क्रिश:- दिल्ली में 4 रेस्टुरेंट की दुकान है।

आरव:- अबे रेस्टुरेंट को दुकान बोल रहा है…

क्रिश:- पप्पा कहते है, चाहे शॉपिंग मॉल हो या ऑनलाइन बाज़ार सब दुकान है और दुकान अपना इमान है।

आरव:- नाम क्या है तेरे पप्पा का।

क्रिश:- श्याम सुन्दर पटेल…

आरव:- तू गुजराती मानस है।

क्रिश:- हां

आरव:- अबे तेरे टोन से कभी पता ही नहीं चलता।

क्रिश:- इसी कारण से तो घर में रोज गालियां खाता हूं। मेरे पप्पा कहते है हॉस्पिटल में मेरा बेटा ही किसी ने बदल दिया।

आरव जोड़ जोड़ से हंसते हुए कहने लगा…. "शायद तेरे पप्पा का अनुमान सच हो।"

क्रिश:- क्या यार मज़ाक उड़ा रहे हो मेरा। ऐसा कुछ नहीं है, अब पैदा होने से लेकर आज तक मै दिल्ली में रहा। ऊपर से अपने धंधे के चक्कर में उन्होंने मेरी पूरी स्कूलिंग बोर्डिंग से करवाया। घंटा मै कुछ सीख पता। अब इनको कौन समझाए।

आरव:- अबे तू तो इमोशनल हो गया। अच्छा ये बता जब तू 4 रुपए के लागत का माल 400 में बेचता है फिर अपनी गर्लफ्रेंड का खर्चा क्यों नहीं उठाया। साले कंजूस….

क्रिश:- मै तो तैयार ही था लेकिन उसके भाई को देख कर मेरी फट जाती है। एक बार मैं और विन्नी कॉलेज में एक दूसरे का हाथ पकड़कर घूम रहे थे। विन्नी के भैय्या ने हमे देख लिया। बस इतनी सी बात के लिए मुझे कोपचे में लेे जाकर 2 थप्पड लगा दिए और जाते-जाते वार्निंग भी देते गए मुझे, हमेशा दूरी बना कर रखो।

आरव:- अच्छा सुन अब तो हमने तेरा काम कर दिया ना… तो तू 14 लाख दे देना, विन्नी के आने जाने का भाड़ा।

क्रिश:- क्या 14 लाख !!!.. मेरा तो आना-जाना सब 2 लाख 2 हजार का है।

आरव:- साले कंजर, जून का महीना, 5 दिन पहले बिजनेस क्लास की टिकट.. छुट्टियों के सीजन में 5 गुना तक कीमत वसूल कर लेते है ये एयरलाइंस वाले। वैसे एक बात बता, दोनों कितने साल से रिलेशन में हो..

क्रिश:- 4 साल से..

आरव:- हां तो तू राउंड फिगर 15 लाख दे देना।

क्रिश:- मेरा 4 साल का रिलेशन जान कर सीधा 1 लाख बढ़ा दिए…

आरव:- साले कंजर, अपने पप्पा के दुकान में बैठ कर तो तू उसे कॉफी पिलाता नहीं रोज, तो 200 रुपया रोज के कॉफी का पकड़ ले, फिर हफ्ते में एक दिन सिनेमा जाता उसका हफ्ते का 2000 पकड़ कर रख। फिर महीने में एक महंगी ट्रिप बनता, उसका 10000 पकड़। इसके अलावा ड्रेस और गिफ्ट का खर्च 10000 रुपया महीना मान ले। चल अब जोड़ कर बता कितना खर्चा आया 1 महीने का और इस हिसाब से महंगाई में 20% हर साल इजाफे के साथ 4 साल का खर्च कैलकुलेट कर।

क्रिश, आरव के ओर मुड़कर देखते हुए…. "आरव, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?"

आरव:- अब तू मेरे गर्लफ्रेंड की इंक्वायरी क्यों कर रहा है।

क्रिश:- तुम्हारे घर मै पप्पा को भेजता हूं ना, जैसा दामाद वो ढूंढ़ रहे है तुम में वो सारे गुण है। मेरे परिवार के ओर से ये रिश्ता मै आज ही पक्का कर देता हूं।

आरव:- हट, तू दूर हट… साला उल्टी खोपड़ी…

साची का घर

"क्या हुआ दीदी आप के लिए तो वो मात्र एक आम लड़का था, तो फिर उसके लिए इतना सोच में डूबना क्यों?"… लावणी साची को अपने ख्यालों से बाहर निकालती हुई पूछने लगी।

साची:- उसकी जगह कोई भी होता तो उसके लिए भी मै इतना ही सोचती, कितनी बुरी तरह जला हुए था उसका पाऊं।

लावणी:- हां लेकिन किसी भी लड़के का पाऊं जला होगा इस व्याकुलता से तुम उसके घर नहीं जाती उसे देखने, वो भी रात में साढ़े ग्यारह बजे। उस वक़्त मै भी आप के पीछे ही बैठी थी, और मैंने सब देखा। कैसे आपने अपने नंगे पाऊं सड़क पर डाल कर चेक किया था।

साची:- मुझे इस बारे ने बात नहीं करनी।

लावणी:- मै भी आप से इस विषय पर बात नहीं करना चाहती। मै बस इतना कहना चाहती हूं कि नफरत आप को जलाती रहेगी। अगर किसी को चाहा है तो चाहते रहिए, ये चाहत और नफरत के साथ जिंदगी बेकार होते चली जाएगी।

साची:- तू एग्जैक्टली कहना क्या चाहती है?

लावणी:- दोनों भाई पैसे वाले है। पर्सनैलिटी तो किसी भी लड़की को आकर्षित कर ले, फिर भी कभी दोनों भाई को देखी हो कभी भी किसी लड़की को अपने खाली घर में लाया हो। ये दिल्ली है दीदी, उसकी जगह कोई और होता ना तो आप को वहां हर दूसरे या तीसरे दिन पर कोई नई लड़की दिख जाति।

साची:- तू उनकी अच्छाई गिना कर मुझे पिघलाने की कोशिश कर रही है। ये संभव नहीं।

लावणी:- आप ना तो इस पार हो ना उस पार। ना तो भूलकर आगे बढ़ना चाहती हो, और ना ही परिस्थिति को स्वीकार कर कोई विचार बना पा रही हो। तुम भी तो यहां बॉयफ्रेंड बनाने अाई थी। थोड़ा खुलकर जीने अाई थी, तो क्या जिसे बॉयफ्रेंड बनती उसके साथ लाइफलोग रिलेशन चलता। थोड़ा अपनी सोच का भी दायरा बढ़ाओ। जानती हो मुझे क्या लगता है, आप जितना ब्रेकअप से नहीं हताश है उससे कहीं ज्यादा आप को इस बात की इर्ष्या है कि वो किसी और लड़की के साथ वो क्यों है? भला लड़का था जो उसने सब पहले बताना सही समझा क्योंकि वो अपने रिलेशन उस लड़की से खत्म नहीं कर सकता था और ना ही आप को अंधेरे में रखना चाहता था। वरना यहां तो लड़के हो या लड़कियां सब कई रिलेशन एक साथ मेंटेन करते है, फीलिंग की किसे परवाह।

साची:- भुटकि, तू समर्टली खेल गई हां..

लावणी:- क्या हुआ दी, आप ऐसे शक्की नजरों से मुझे क्यों घूर रही है…

साची:- एक सोची समझी चाल, एक भाई से दूसरे बहन का रिश्ता खराब तो दूसरे भाई के साथ तेरे रिलेशन में कहीं कोई दरार ना अा जाए…

लावणी:- नहीं नहीं मेरा वो मकसद तो बिल्कुल भी नहीं था.. सॉरी दी लेकिन प्लीज मेरी बात को मेरे रिलेशन से मत जोड़ों…

साची:- हिहिहिहीही… डरपोक कहीं की.. वो गाना नहीं सुनी क्या, जब प्यार किया तो डरना क्या। और हां थैंक्स.. बातों बातों में तुमने बहुत कुछ सीखा दिया। अभी छुट्टियों को एन्जॉय करते है और मै एक गैप लेती हूं। वापस लौटकर निपटेंगे हमसे टकराए, इस केजुअल रिलेशन वाले अपस्यु से…

लावणी:- ये हुई ना बात.. डॉट्स माह सट्रोंग दीदी।

साची… और तू प्यारी सी मेरी भूटकि। वैसे एक बात तो है, तू बिल्कुल हैंडपंप है। ऊपर से तो 4 फिट की नजर आती है लेकिन अंदर की गहराई का पता नहीं चलता।

लावणी:- अरे अरे अरे… मैं 5 फिट 5 इंच की हूं। बस आप लोगों से थोड़ी कम हाइट है, इसका मतलब ये नहीं कि 4 फिट का ही बोल दो…

जैसे पुरानी साची वापसी करने को तैयार थी। 15-20 दिन के ठहराव के बाद आज पहली बार वो खुल कर मुस्कुरा रही थी और लावणी के साथ नोक झोंक चल रहा था….

अपस्यु का घर….

दाएं पाऊं पर लेप लगाते हुए जब नंदनी ने 2 बार उन्हें पूछ लिया लेकिन फिर भी कोई जवाब ना आया, नंदनी पलटी और पीछे श्रेया खड़ी थी…

नंदनी:- तुम हो श्रेया, वो दोनों कहां गई…

श्रेया:- मै जब इधर अा रही थी तभी वो गई।

नंदनी:- कुछ बताई भी नहीं क्यों अाई थी, रुकी भी नहीं। जाने दो उनको, सभी गेस्ट खाना खा लिए।

श्रेया:- हां आंटी सबने खा लिया। क्या मै आप के गले लग सकती हूं।

नंदनी:- एक शर्त पर, यदि गले लग कर रोना नहीं है तब इजाज़त है वरना नहीं।

श्रेया, नंदनी के गले लगती कहने लगी… "आप बहुत स्वीट हो, आपने बहुत मदद की वरना आज मै भागते दौड़ते परेशान हो जाती"

नंदनी:- इतने सारे तो लोग है, और तुम्हारे दोनों भाई भी तो है.. सब मिलकर कर लेते।

श्रेया:- हां वो तो कर ही लेते सब मिलकर लेकिन मै क्या घर में बैठी रहती मुझे भी तो उनके साथ भाग दौड़ करनी परती ना।

नंदनी:- हाहाहाहा… हां सो तो मैंने भी देखा, यहां भी तुमने कम भागदौड़ नहीं की। चलो अब बैठकर तुम मेरे साथ खाना खा लो।

श्रेया नंदनी को कुर्सी बार बिठाते…. "आप यहीं बैठिए, मै निकलती हूं खाना।"…. श्रेया अपास्यु को खाने के लिए कहने गई….. "आंटी अपस्यु तो सो गया है, इसे जगा दूं।"

नंदनी:- आराम करने दो उसे श्रेया, रात को उठकर खा लेगा…

श्रेया, प्लेट लगाती…. "पक्का उठ कर खा लेगा क्या?"

नंदनी:- हां इस मामले में मेरा बेटा बहुत जागरूक है। अपने हेल्थ पर पूरा ध्यान देता है। वो उधर उस हिस्से में बड़ा सा पार्टीशन जो देख रही हो, वहां रोज ये अपने भाई बहन के साथ एक्सरसाइज करता है।

श्रेया:- ये तो अच्छी बात है आंटी। एक बात समझ में नहीं आयी, जब इतना हेल्थ कॉन्शस है फिर पाऊं में क्या लगाया है। मैंने दिन में ऑइंटमेंट और मेडिसिन दी तो थी।

नंदनी:- मत कहो बेटा। पता नहीं इसे तो जैसे डॉक्टर से ही नफरत है। अपने बैग में जड़ीबूटियां भरे रहता है और खुद ही अपना इलाज कर लेता है।

श्रेया:- अम्म .. आंटी ये असर भी करती है क्या?

नंदनी:- मुझे भी इसी बात का शक था लेकिन असर करता है। तुम सुबह खुद ही देख लेना।

श्रेया:- आंटी अगर आपके बेटे जैसे सब हो गए तब तो मेरा क्लीनिक खुलने से पहले ही बंद हो जाएगा।

हल्की फुल्की बातों का लुफ्त उठाते दोनों खा रहे थे। थोड़ी देर बाद दोनों कि सभा समाप्त हुई और श्रेया, नंदनी को सुभ रात्रि कहकर निकल गई। सुबह सुबह का वक़्त था। श्रेया ट्रे में चाय लिए अपने सभी गेस्ट को चाय दे रही थी। चाय देते हुए वो नंदनी के पास पहुंची… "आंटी चाय"..… "थैंक्स बेटा"…. "आंटी अपस्यु कहीं दिख नहीं रहा"….. "वो एक्सरसाइज कर रहा है।"..

श्रया, बाहर से ही नॉक करती… "क्या अंदर अा सकती हूं।"… "एक मिनट"… अपस्यु अपने ऊपर शर्ट डालते हुए दरवाजा खोला…. "आप है, आइए"…

श्रेया एक कप चाय अपस्यु को देती हुई, अपना अपने चाय के प्याले के साथ वहीं बैठ गई…. "सो इट्स डेस्टिनी हां।"..

अपस्यु:- हां कह सकते है।

श्रेया:- आप को ज्योत्षी होना चाहिए था।

अपस्यु:- ये तारों और ग्रहों की दिशा समझने के लिए पूरा एक जीवन भी कम पड़ जाएगा, मुझ से तो ना होगा।

श्रेया:- आप तो ऐसे बोल रहे है जैसे आपने कोशिश की थी।

अपस्यु:- जी कोशिश तो कभी नहीं किया, लेकिन एक महान ज्योत्षी से मुलाकात हुई थी। उनके अध्यन और विषय कि गहराई समझने के बाद बता रहा हूं।

श्रेया:- बहुत रोचक है आप। वैसे जरा अपना पाऊं दिखा सकते है क्या?

अपस्यु, अपना पाऊं ऊपर किया और श्रेया उसे देखने लगी…. "क्या बात है इसमें तो पहले से काफी सुधार है। इनफैक्ट ये तो कमाल हो गया, मेडिसिन से एक रात में इतना रिकवर होना थोड़ा मुश्किल था।

अपस्यु:- आप ने जो मेडिसिन दी थी उसमें से एंटीबायोटिक लिया था मैंने, बस ऑइंटमेंट की जगह अपना स्वदेशी उपचार किया।

श्रेया:- आप ने आयुर्वेद पढ़ा है क्या?

अपस्यु:- पढ़ा थोड़ा काम ही है पर कई तरह के जड़ी-बूटी का ज्ञान मुझे गुरुजी ने जबरदस्ती दे दिया था।

श्रेया:- कूल हां, मतलब आप गुरुकुल के छात्र रहे है।

अपस्यु:- जी कह सकते है।

श्रेया:- अच्छा लगा आप से मिलकर, चलती हूं बहुत सारे काम पड़े है।

श्रेया वहां से चल दी और अपस्यु अपने व्यायाम में लगा रहा। सुबह से 7.30 बज रहे होंगे जब कई सारे ड्राइवर्स की भीड़ अपस्यु के दरवाजे के बाहर थी, और नंदनी एक एक करके सबका इंटरव्यू ले रही थी।…. "मां अब ये सब क्या है।"…

नंदनी:- तू तो कल अपनी उस बेकाबू कार को वहीं सड़क पर खड़ी करके चला गया था, मैंने सोचा खुद से अंदर कर देती हूं लेकिन..

अपस्यु:- हाहाहा.. लेकिन आप ने ठोक दी… वैसे कहीं से टूटी-फूटी तो नहीं दिख रही आप।

नंदनी:- वाह बेटा, मतलब अपनी मां को टूटा-फूटा देखना चाहता है। मै तो नहीं टूटी लेकिन वो सरला जी की कार बुरी तरह डैमेज हो गई।

अपस्यु:- अब ये सरला कौन है…

नंदनी:- सरला मेरे लिए तेरे लिए आंटी.. 304 फ्लैट उन्हीं का है ना…

अपस्यु:- ओह !!! कोई ना, उनकी कार गारेज गई की नहीं।

नंदनी:- मैंने इतना ध्यान ही नहीं दिया, टक्कर हुई तो मैं इतना घबरा गई थी कि इन सब बातों पर ध्यान ही नहीं गया… तू जाकर उधर देख लेगा क्या? मै जबतक अपने लिए एक ड्राइवर रख लूं।

अपस्यु:- आप रहने दो मां, मै आप के लिए ड्राइवर देख लेता हूं, आप जाकर उधर पता लगा आओ।

नंदनी:- अब तुम मुझे आदेश दोगे। जैसा मै कहूंगी वहीं होगा।

अपस्यु:- ठीक है मां… जैसा आप चाहो.. मै ही जाता हूं..

नंदनी:- नहीं ! तुम ड्राइवर सिलेक्ट करो मै उधर जा रही हूं…

दोनों हसने लगे। नंदनी उधर चली गई और अपस्यु ड्राइवर को परखने लगा.. 20 लोगों में से उसने 2 को अलग किया… एक का नाम गुफरान था और दूसरे का प्रदीप… बाकी सबको कुछ पैसे देकर अपस्यु ने सबको वहां से विदा किया।
 
Update:-51

USA Trip…

सुबह सुबह न्यूयॉर्क में फ्लाइट लैंड कर चुकी थी, चारों वहां से बाहर निकले और इन्हे रिसीव करने वीरभद्र पहले से एयरपोर्ट पहुंचा हुआ था। जैसे ही वीरभद्र की नजर में आरव आया, वो दौर कर उसके पास पहुंचा और उसके गले लग गया।

"अबे छोड़ दे वीरे, वरना यहां के लोग कुछ और ही समझ लेंगे।"… आरव ने वीरभद्र के कानो में कहकर उससे अलग हुआ। प्रतीक्षालय में चारो बैठ गए, आरव ने सबको वीरभद्र से मिलवाया और उसके बाद वीरभद्र को अलग ले जाकर कहने लगा….

"सुन वीरे, यूं समझ ले आज तुम्हे मै पहला काम दे रहा हूं।"… आरव ने धीमे आवाज़ में कहा।

वीरभद्र:- हुकुम करो .. अभी किसी को सुला दू क्या?

आरव:- गावर कहीं के आराम से बात करो और कितनी बार कहा है पूरी बात समझ कर रिएक्शन दिया करो।

वीरभद्र, अपने भावनाओ पर काबू रखे… "क्षमा करना गुरुदेव भूल गया था। तुम समझाओ पूरी बात।"

आरव:- ध्यान से सुनो, मै यहां से शिकागो निकल रहा हूं। तीनों की जिम्मेदारी तुमपर सौंप कर जा रहा हूं।

वीरभद्र:- ठीक है आरव। मुझे क्या करना होगा।

आरव:- हर जगह इनके पीछे साए कि तरह रहोगे। जहां जाएंगे घूमने साथ जाओगे और सबसे जरूरी बात दोनों मेरी बहने है, विन्नी और कुंजल।

वीरभद्र:- भाई सा, वो छोड़ा बहन को छू रहा है, अभी मुंह तोड़कर आया मैं…

आरव, अपना सर पीटते…. अबे रुक बावले, वो छुई-मुई नहीं है जो छूने से मुरझा जाएगी। यार तू महीने दिन के ऊपर से यहां है, फिर भी गांव तेरे दिमाग से निकला नहीं। हर बात में मार-पिट और खून-खराबा। तू रहने दे तुझसे ना हो पाएगा।

वीरभद्र:- अरे गुस्सा क्यों कर रहे हो। अब कुछ आदत है जाते जाते जाएगी। तुम सारी बात समझाओ मुझे और निश्चिंत हो जाओ।

तकरीबन आधा घंटे के माथा-पच्ची के बाद आरव को लगा कि ये पूरा समझ चुका है। थोड़ी ही देर में आरव की वहीं से कूनेक्टिंग फ्लाइट थी, आरव वहां से शिकागो निकल गया और बाकी सब सन-डिएगो निकले।

सबके कमरे पहले से तैयार थे, आते ही दोनों लड़कियां अपने कमरे में चली गई और वीरभद्र क्रिश को लेकर उसके कमरे में चला आया।…

विन्नी बाथरूम के दरवाजे पर खड़ी होकर…. "कुंजी की बच्ची जल्दी निकलियो घंटो मत लगाना।"

कुंजल:- दरवाजा खुला है, तू भी आ सकती है।

विन्नी:- तेरे साथ अंदर जाने के लिए आयी हूं क्या, वो है ना मेरा क्रिश उसके साथ बाथरूम शेयर करूंगी।

कुंजल:- अरमान काबू में रख बेटा, कहीं तू गरम तवा की तरह भट्टी में ना जलती रह जाए। मेरे एक भाई ने क्रिश को वहां एयरपोर्ट पर वार्निंग दिया था और दूसरे ने तो एक चिपकू तुम दोनों के बीच में छोड़ रखा है।…

विन्नी:- अरे तू उसकी चिंता क्यों कर रही है… उसे तो मै यूं मैनेज कर लूंगी। वो कोई बड़ी बात नहीं है।

कुंजल:- मै भी यहीं हूं, देख लूंगी तेरी होशियारी भी। वैसे एक बात बता, तुम दोनों के बीच कुछ हुआ भी है या मामला ऊपर-ऊपर ही चल रहा है।

विन्नी:- हुंह ! ये हम दोनों की बीच की बात है, कोई ये सब भी शेयर करता है क्या?

कुंजल, बाथरूम से बाहर निकलती हुई….. "ओह हो तो बेबी अपना सिक्रेट रीलेशन मेनटेन कर रही है। मत बता"....

विन्नी, बाथरूम में घुसती…. हीहीहीहीही… ऐसी बातें कोई पूछता हैं क्या? वैसे अब तक कुछ ना हुआ है। अच्छा सुनना, यहां के हिसाब से कुछ कपड़े खरीदने चलें क्या? छोटी सी शॉपिंग।

कुंजल:- आज रात चलते है ना… शॉपिंग के साथ-साथ यहां के डिस्को का भी मजा लेंगे…

विन्नी:- वु हू….. अब तो बस मस्ती ही मस्ती…. अपनी तो पाठशाला, मस्ती की पाठशाला… वू हू…

इधर आरव शिकागो अपने होटल पहुंचकर, ऐमी के "फॉल बैंक" के मैसेज का रिस्पॉन्ड करते हुए वापस संदेश भेजा और आते ही बिस्तर पर चित लेट गया…. थोड़ा सा मायूस होते खुद से ही कहने लगा… "वक़्त, वक़्त की बात है.. शायद अभी वो वक़्त नहीं आया"….

दिल्ली, अपस्यु के घर सुबह 7.30 बजे के करीब….

नंदनी जबतक सरला (श्रेया की मां) के घर जाकर उसके कार के बारे में पता कर रही थी तबतक अपस्यु ड्राइवर को परखने लगा.. 20 लोगों में से उसने 2 को अलग किया… एक का नाम गुफरान था और दूसरे का प्रदीप… बाकी सबको कुछ पैसे देकर वहां से रवाना किया…

थोड़ी ही देर में नंदनी वापस लौट आयी और उसके पीछे-पीछे श्रेया भी थी। अपस्यु ने एक एक नजर देखा और फिर दोबारा नजर उठा कर देखने पर विवश हो गया…. कुछ छन देखने के बाद अपस्यु अपनी नजरे उसपर से हटा कर नंदनी से बात करते हुए कहने लगा… "मां ये 2 ड्राइवर को मैंने सिलेक्ट किया है, आप इनकी सैलरी वगैरह की बात करके रख लो। मैं आज इंजीनियर को बुलवाकर उस पर्टेशन के आगे वाले हिस्से से 2 कमरे उस हॉल में बनवा देता हूं।"

नंदनी:- एक ही ड्राइवर की जरूरत है, 2 क्यों?

श्रेया:- आंटी मै चलती हूं।

नंदनी:- ओह मैं भी ना…. एक मिनट बेटा.. अपस्यु इसे कॉलेज तक छोड़ दे, मै इनसे बात कर लेती हूं।

अपस्यु:- मां 2 की जरूरत है किसी को निकालना मत, बस सैलरी तय कर लो। चले मैम…

"आप दोनों मां-बेटे कि जोड़ी कमाल की है।"… दोनों चलते-चलते बातें करने लगे…

अपस्यु:- और आप को ऐसा क्यों लगा?

श्रेया:- एक आप की मां हैं, जहां इतनी बड़े अपार्टमेंट में पड़ोसियों कि मुलाकात मात्र लिफ्ट में होती है। कोई पड़ोसी बेल बजा दे, तो गेट के छोटे से छेद से पहले देखते है फिर 20 लॉक खोलने के बाद थोड़ा दरवाजा खोलकर, उसकी आड़ में रहकर पूछते है, क्या काम है.. और आप की मां है, पूरा घर का दरवाजा खोल दिया। ऐसी ही कुछ कहानी आपकी भी है। आप अपनी मां से बहुत प्यार करते है ना।

अपस्यु:- अपनी मां से तो सभी प्यार करते है। केवल मै उनकी बात मान लेता हूं इस वजह से कह देना की बहुत प्यार करता हूं सही है, लेकिन हर बच्चा अपनी मां से उतना ही प्यार करता है, बस हर किसी के जताने का तरीका अलग होता है।

श्रेया:- आप ये उल्टा रास्ता जा रहे है अपस्यु।

अपस्यु:- ओह, आप ने बताया नहीं जाना कहां है?

श्रेया:- लेडी हार्डिंग कॉलेज, कनॉट प्लेस…

अपस्यु ने गाड़ी घुमाई और चल दिया, कुछ देर दोनों के बीच खामोशी रही फिर श्रेया अपस्यु से पूछने लगी… "आज सुबह चोर नजर से क्या ऑब्जर्व कर रहे थे आप।".. श्रेया सवालिया नजरों से देखती हुई पूछने लगी…

अपस्यु:- आप ने पकड़ लिया क्या?

श्रेया:- हां मैंने देखा था।

अपस्यु:- वो आप बहुत खूबसूरत दिख रही थी। पहले एक झलक देखा, दिल ने कहा और देखो, सो दिल के हाथों मजबुर देखने लगा।

श्रेया:- वाह, क्या बात को घुमाया है आपने, जिस नजर की बात आप कर रहे वो आलग होती है, आपके देखने का नजरिया कुछ और ही था।

अपस्यु:- नजरों की इतनी परख, वैसे आप की पारखी नजर क्या विश्लेषण कर रही है मेरे इस प्रकार से देखने को…

श्रेया:- मुझे शक है कि आप मेरे पहनावे को लेकर कुछ सोच रहे थे…

अपस्यु:- हां आप का सोचना सही है। पूरी दिल्ली में आप के उम्र कि बहुत कम लड़कियां होंगी जो एथेनिक पहनती है, वरना तो यहां सबको मैंने शोर्ट्स, जीन्स और वेस्टर्न पोशाक में ही देखता हूं।

श्रेया:- लड़कियों को लेकर आप की सोच बहुत संकीर्ण हैं। पहनावे के साथ नजरों में भटकाव नहीं होना चाहिए। खैर मै एक मेडिकल की छात्रा हूं इसलिए मुझे ऐसे ड्रेस पहनने पड़ते है वरना मै भी अपनी इक्छा अनुसार कपड़े पहनती हूं। माफ़ कीजियेगा गाड़ी यहीं रोक दीजिए, मै यहां से चली जाऊंगी।

अपस्यु ने गाड़ी किनारे खड़ी की और वहां से श्रेया ने ऑटो ले लिया।… "सब लड़कियों को आजकल मेरे कैरेक्टर जज करने में ज्यादा इंट्रेस्ट है… मैं कहां किसी को लड़की को जज किया.. आखिर ये हो क्या रहा है मेरे साथ…."

अपस्यु वहीं से ऐमी को कॉल लगाया…. "क्या कर रही हो?"

ऐमी:- वैभव के साथ खेल रही थी।

अपस्यु:- सिन्हा सर से ऑफिशियल मीटिंग फिक्स करो, पूछो उनसे कब फ्री है?

ऐमी:- ठीक है मै कॉन्फ्रेंस में ही लेती हूं…

सिन्हा जी:- अरे मेरा बेटा इस वक़्त अपने डैड को कैसे याद की।

ऐमी:- डैड एक ऑफिशयल मीटिंग फिक्स करनी है, आप के पास वक़्त है क्या?

सिन्हा जी:- 4 बजे दोनों आ जाओ।

अपस्यु:- ठीक है सर, मुलाकात होती है फिर 4 बजे…..

ऐमी:- मुझे पिक करते हुए चलना…

अपस्यु:- ठीक है।….

घर लौटकर अपस्यु सीधा अपने कमरे में गया और सरा सामान बैग में पैक करने लगा, जिसमे कुछ कपड़े, एक लैपटॉप, कुछ छोटे बड़े डिवाइस और 4 फिट के 2 रॉड डालकर, बैग पैक कर ही रहा था कि पीछे से नंदनी चलीं आयी।

"तुम भी कहीं जा रहे हो क्या?"… बिस्तर पर बैठती हुई नंदनी पूछने लगी।

अपस्यु, अपने बैग को पैक करते…. "नहीं मै कहीं जा नहीं रहा बस खाली बैठे पागल हो रहा हूं, तो सोच काम शुरू कर दूं।"

नंदनी:- अभी पढ़ाई पूरी करेगा या काम करेगा। काम करने के लिए तो पूरी उम्र बची है अपस्यु, पहले पढ़ाई।

अपस्यु, अपने मां के गाल को चूमते… मेरी स्वीट मम्मा... आप बेवजह परेशान हो रही है। मै कौन सा पढ़ाई छोड़ रहा हूं बस पार्ट टाइम जॉब है। मुझे दूर रह कर कुछ लोगों की जासूसी करनी है और उनकी रिपोर्ट सिन्हा सर को देनी है। बस इतना ही।

नंदनी:- अच्छा ! और ये अचानक से ख्याल कैसे आया तेरे मन में?

अपस्यु:- आज सुबह की घटना से…

नंदनी:- और मेरे स्वीट बेटू के साथ घटना क्या हुई?

अपस्यु:- वो है ना सरला आंटी की बेटी श्रेया, जिसे आपने मेरे साथ कॉलेज भेजा था…

नंदनी:- वो तो बड़ी प्यारी बच्ची है.. उसने क्या कर दिया..

अपस्यु:- मुझे कुछ भी बताना ही नहीं है। आप फिर बीच में कूद जाओगी…

"मां जी वो लंबोर्गिनी को शो रूम ले जाऊं या फिर बाहर किसी के पास बनवाना है।"…. नया ड्राइवर गुफरान कमरे के बाहर से पूछा…

अपस्यु अपने मुंह पर हाथ रख कर नंदनी को देखने लगा… नंदनी उसका रिएक्शन देखती हुई हसने लगे।… "गूफी, बेटा उसे का शो रूम ले जा, और वो प्रदीप गया उनकी कार को गराज लेकर।"… गुफरान वहां से "हां मां जी" कहता हुए निकला।

अपस्यु:- मुझे गए आधे घंटे ना हुआ होगा और ये कमरे में ऐसे चला आया जैसे वर्षों से काम कर रहा हो। इसपर कुछ प्रकाश डालेंगी।

नंदनी:- अरे बेचारा गूफी, उसकी बीवी छोड़ कर भाग गई। बहुत बुरा हुआ बेचारे के साथ।

अपस्यु आराम से पल्थी लगाते, वहीं जमीन पर बैठ गया और हथेली को फैलाकर अपने मुंह पर रखते हुए बड़े ध्यान से सुनने की मुद्रा में आते हुए पूछने लगा… "मां इस बेचारे के साथ क्या हुआ आज आप पूरी डिटेल बता ही दो।"

नंदनी, अपस्यु की इस हरकत पर जोड़ से हंसती हुई…. "अच्छा सॉरी, तुम बताओ क्या हुआ तुम्हारे और श्रेया के बीच। ऐसा क्या कह दी उसने जो तुम अब काम करने पर जोर डालने लगे।"

अपस्यु:- कुछ नहीं, जब वो आप के साथ आ रही थी तब मैंने उसे चोर नजरों से देखा और उसने ये पकड़ लिया। मुझ से पूछने लगी कि मै चोर नज़रों से क्या ऑब्जर्व कर रहा था।

नंदनी, अब वो ध्यान से सुनने की मुद्रा में आयी... "हां तो तुमने क्या कहा?"

अपस्यु:- मैंने उसे पहले झूट बोलकर उसकी तारीफ करी, लेकिन उसने मेरे झूट को पकड़ लिया। तब मैंने उसे सच बता दिया…

नंदनी:- मुझे भी वो सच सुनना है…

अपस्यु:- सच क्या मां, मैंने कहा आप की उम्र की बहुत कम लड़कियां होंगी जो एथेनिक पहनती है वरना सबको मैंने वेस्ट्रन ड्रेस में ही देखता हूं।

नंदनी:- हाहाहाहा… पक्का वो भी वेस्टर्न पहनती होगी इसलिए सुना दी होगी तुम्हे कुछ।

अपस्यु:- कुछ गलत बोल दिया क्या मां?

नंदनी:- तुम इकलौते बेटे होगे, जो अपनी मां से ये सब साझा कर रहा होगा। नहीं तुमने कुछ गलत नहीं बोला, बस उसने अपने ऊपर ले लिया, इसलिए उसे बुरा लग गया। अब तुम ज्यादा मत सोचो।

शाम के लगभग 4 बजे…

अपस्यु ऐमी को लेते हुए सिन्हा जी के ऑफिस के ओर निकल रहा था। अपस्यु कुछ खामोश सोच रहा था। ऐमी उसकी खामोशी को भांपते हुए पूछने लगी… "बात क्या है, मुख्य काम को छोड़कर अन्य काम को हाथ डालने का फैसला अचानक से कैसे कर लिए"…

अपस्यु:- बस लगा की एक ही विषय पर सोच-सोच कर कहीं मै अपने सोच को किसी दायरे के अंदर तो नहीं कैद कर रहा, जिसमे मुझे केवल जीत ही नजर आ रहा है…

ऐमी:- हम्मम !! मतलब कुछ केस हाथ में लेकर हम खुद आजमाएंगे…

अपस्यु:- नहीं आज सुबह एक घटना हुई, जिसमें मैंने कुछ गलत नहीं किया लेकिन मुझे उसका सरप्राइज रिएक्शन देखने मिला। मुझे लगा जैसे ये मेरे योजना कि सच्चाई बयां हो गई हो। एकतरफा प्लैनिंग ही बस मैंने किया है लेकिन किस वक़्त कौन सरप्राइज कर जाए किसे पता।

ऐमी:- मतलब ये भी एक तरह से अपनी तैयारियों की मजबूती देना हुआ। कुछ केस के जरिए ये आकने की कोशिश की हम जो प्लैनिंग करते है उसमे और जब वास्तव ने जो परिस्थितियां होती है उनमें कितने फर्क आते है. और लोग हमे कैसे चौंका सकते है।

"बिल्कुल सही आकलन… बस जो अंतर है, वो केवल इतना है कि, यहां हमें दोबारा मौका मिलेगा। एक बार नजरों में किसी के आ गए, तो छिपना आसान होगा। लेकिन वहां किसी की नजरों में आए तो फिर आर या पार वाली कहानी होगी। इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि, अब एकतरफा अपनी योजना नहीं बल्कि उनके हिसाब से भी सोचकर देखना चाहिए, कि वो कितने सुनियोजित है और हम कहां-कहां चुक कर सकते है। इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि कुछ क्रिमिनल्स को पहले परख कर देख लें कि उनकी क्या सोच रहती है किसी ऐसे दुश्मन से बचाव के लिए जिन्हे वो जानते ही नहीं।"
 
Update:-52

USA trip ..

सफर की थकान मिटा देने वाली नींद के बाद विन्नी शाम को 6 बजे जागी। जब वो उठी तब सब सो रहे थे। वो उठकर हॉल में आ गई और वहीं सोफे पर बैठकर बाहर का नजारा लेने लगी। उसके चंद मिनट बाद ही क्रिश भी हॉल में पहुंचा। विन्नी को अकेले बैठे देखकर उसे ये अच्छा अवसर लगा और वो विन्नी को अपने बाहों में जकड़ कर, माथे पर आए बाल को हटाते हुए कहने लगा…. "ना जाने कब से मै इस पल का इंतजार कर रहा था"….. "और मै भी"…

दोनों की नजरें एक दूसरे पर, कुछ पल के लिए ठहर गई और फिर बोझिल नजरें बंद होती चली गई। प्यासे होंठ आगे बढ़ते हुए चूमने को बेकरार हो गए। एक लहर सी दोनों के दिल में उठने लगी और एक दूसरे को शिद्दत से चूमने लगे…

दोनों की आखें तो बंद थी लेकिन इनके इस प्यारे से चुम्बन के बीच में, खाचिक-खचिक की आवाज के साथ लगातार फ़्लैश लाइट जल रही थी। दोनों ने आंख खोलकर नजर घुमाई और झटके के साथ दोनों अलग हुए…

फिर वहां उस हॉल में तो शोर गुल का माहौल शुरू हो गया। शोर सुनकर कुंजल भी आधी सोई आधी जागी हॉल में पहुंच गई…. "क्या हुआ किस बात पर शोर मचा रहे हो तुम लोग।" कुंजल जम्हाई लेती हुई पूछने लगी…

विन्नी:- कुंजी देख ना यार इसने हमारी फोटो निकली।

वीरभद्र:- कुंजी.. ताला हो तुम जो उसे कुंजी बुला रही, नाम शॉर्ट करने के चक्कर में तुमलोग कुछ भी बोल दोगे क्या?

विन्नी:- तेरे यहां सब मेंटल है क्या.. जिसे देखो मुंह खोलता है तो पहले शॉर्ट नेम पर ही लैक्चर देता है।

कुंजल:- ओह हो पगलाओ मत, अभी हल्ला क्यों कर रहे थे वो बताओ। तुम दोनों नहीं, वीरे आप बताइए…

वीरभद्र:- कुंजल जी ये दोनों एक दूसरे को चुम्मा ले रहे थे तब मैंने इनकी राश-लीला की तस्वीर निकल ली।

कुंजल:- वीरे

वीरभद्र:- जी कुंजल जी…

कुंजल:- आप ये सब क्या कर रहे है, किसी ने आप को बताया नहीं की ऐसे किसी की तस्वीर नहीं लेनी चाहिए।

वीरभद्र:- कुंजल जी, बस ये तस्वीरे इसलिए लिया हूं ताकि फिर से दोबारा यदि ऐसे करते पाए गए तो इनकी ताबीरें मै सीधा इनके भैया को भेज दूं।

कुंजल:- नहीं ये गलत है आप इनकी तस्वीर अभी डिलीट कीजिए…

वीरभद्र:- ना ये अभी डिलीट ना होगी। जब दोनों इंडिया पहुंच जाएंगे और आरव का सिग्नल मिलेगा तब डिलीट होगा… अभी घूमने आए है तो घूमिए बाकी ये सब हरकत मेरे रहते नहीं चलेगी । इन दोनों को भी समझा दीजिए दोबारा पकड़े गए तो ये तस्वीर इनके भाई तक पहुंच जाएगी।

इतना कहकर वीरभद्र वहां से चला गया और कुंजल बिन्नी को देखते हुए कहने लगी…. "उसे तो मै यूं मैनेज कर लूंगी तू देखती रहना … अब करती रह मैनेज। बिना आरव या अपस्यु के तो ना सुनने वाला ये।"

विन्नी:- अरे यार ये कहां फस गई मै, और तुम तबसे चुपचाप मूर्ति क्यों बने हो।

क्रिश:- मै कुछ सोच रहा हूं?

विन्नी:- और क्या सोच रहे हो?

क्रिश:- जब वो तस्वीर ले ही रहा था तब मुझे पूरे किस्स के बाद ही अलग होना था।

विन्नी:- हुंह ! मै परेशान हूं और तुम्हे मज़ाक सूझ रहा। कुंजी बहना प्लीज उससे बोल ना तस्वीर डिलीट कर दे।

कुंजल:- मै क्या जैपनीज में बोल रही थी। तेरे सामने ही उसे डिलीट करने बोली थी ना।

विन्नी:- तो तू आरव से बात करके देख ना।

कुंजल:- क्या कहूं मै अपने भाई से… मेरी दोस्त को चुम्मा लेने में और देने मै काफी दिक्कत हो रही है, वीरे को बोल दो उनके चुम्मी के बीच ना आए। पागल कहीं की। इतना है तो तू ही अपने भाई से क्यों ना बात कर लेती। वैसे भी तू उसे मैनेज करने वाली थी, जाकर मैनेज कर। मै चली तैयार होने आज शॉपिंग और फिर डिस्को… वूं हू … अपनी तो पाठशाला मस्ती कि पाठशाला…

विन्नी:- भाग यहां से, कमीनी ताने मर रही…

कुंजल के जाते ही विन्नी भी चली वीरभद्र को मैनेज करने। पहले विन्नी ने मिन्नतें की, फिर गुस्सा और फिर लड़ाई, लेकिन वीरभद्र को कोई डरा सकता था क्या… आलम ये रहा, शॉपिंग के वक़्त विन्नी कुंजल के साथ और क्रिश, वीरभद्र के साथ। डिस्को में तो हद ही कर दिया वीरभद्र ने। क्रिश और विन्नी को आधे फिट की दूरी बनाकर रखते हुए डांस करने के लिए कहा और खुद वहीं बैठकर सब देख रहा था।

शाम के 4 बजे.. सिन्हा जी के ऑफिस..

कॉन्फ्रेंस हाल में अपस्यु और ऐमी दोनों एक साथ बैठे और सामने सिन्हा जी थे…

सिन्हा जी:- आज की ऑफिशयल मीटिंग का मुद्दा।

अपस्यु:- हम काम करने के लिए तैयार है।

सिन्हा जी अपने जगह से खड़े होते हुए….. "काम तो है लेकिन ये भरोसा दिलाना होगा कि एक बार काम हाथ में लोगे तो उसे बीच में नहीं छोड़ोगे और ना ही किसी को पता चलना चाहिए कि ये काम किसके लिए कर रहे हो।

अपस्यु:- काम शुरू करने से पहले मुझे काम की पूरी डिटेल चाहिए। अगर अनैतिक काम नहीं हुआ तो ही मैं काम करूंगा। और जिसके लिए भी काम करूंगा मै खुद उससे आमने-सामने बात करना चाहूंगा। वही पहली और आखरी मुलाकात भी होगी उस काम के संबंधित।

सिन्हा जी:- हां ये मै जनता हूं … ठीक है दोनों यहीं बैठो…

तकरीबन 5 मिनट बाद सिन्हा जी होम मिनिस्टर के साथ वापस लौटे। उन्हें आते देख अपस्यु और ऐमी ने खड़े होकर इज्जत दी और फिर सब बैठ गए…

सिन्हा जी…. मंत्री जी के पास तुम लोगों के लिए एक काम है, बाकी डिटेल वही देंगे…

मंत्री जी:- मै जानता हूं तुम्हारा मन में कई सारे सवाल होंगे, लेकिन उन सभी सवालों को जवाब में इतना ही कहूंगा, हर काम कानूनन नहीं किया जा सकता इसलिए हमे प्रोफेशनल हायर करने पड़ता है। तो क्या मै तुम्हे प्रोफेशनल समझ सकता हूं।

अपस्यु:- जी सर आप समझ सकते है। कोई भी काम बताने से पहले सिन्हा सर ने तो मेरे काम करने का तरीका बता ही दिया होगा।

मंत्री जी:- हां पता है, तुम अनैतिक काम अपने हाथ में नहीं लेते, बताया था सिन्हा ने। काम बताऊं उससे पहले मै एक बात साफ कर दूं असफल होने कि स्तिथि में पूरा मामला तुम्हे खुद संभालना होगा।

अपस्यु:- हां ये मै अच्छे से जानता हूं…

मंत्री जी:- आर.डी. केमिकल्स, हेड ऑफिस बंगलौर। इसके बसेमनेट के नीचे एक पूरा हॉल बना है, जिसके अंदर एक सेफ है। उसके अंदर एक रिसर्च के पेपर है। उसे तुम्हे निकलना है।

अपस्यु:- ये तो किसी की मेहनत को चुराना हुआ…

सिन्हा जी:- ऐसा तुम्हारा मानना है। लेकिन हमारा मानना है विज्ञान पर सबका अधिकार है। उस रिसर्च में कैंसर के एक मेडिसिन की डिटेल है। उस मेडिसन का पटेट आर.डी. केमिकल्स के पास थी। पेटेंट खत्म होने के बाद जब दूसरी फर्मा कंपनी ने उस दवा को बनाया तो कीमत जहां पहले 1 टैबलेट की 800 रुपए थी वो सीधा 60 रुपए के आस पास आ गई। मामला यहां फसा है की जो दूसरी कंपनी बनाते है उन टैबलेट्स में वो असर नहीं रहता जो आर.डी. केमिकल्स के दवा में है। हमे शक है कि उसने कोई एक छोटी जानकारी गायब की है।

अपस्यु:- हम्मम !!! ठीक है मै ये काम करूंगा, कीमत क्या होगी…

मंत्री जी:- 2 करोड़ अगर तुम सफलतापूर्वक वो रिसर्च कॉपी को लाने में कामयाब हुए तो।

अपस्यु:- ठीक है सर मुझे ये काम पसंद आया। आप आरडी की पूरी डिटेल हमे दे दीजिए….

पूरी डिटेल लेने के बाद दोनों वहां से निकल गए और वहां से दोनों अपस्यु अपने तीसरे फ्लैट पहुंचा। जहां पर दोनों पूरी फाइल पर रिसर्च करने लगे… तकरीबन 3 घंटे की माथा-पच्ची के बाद दोनों थोड़े रिलैक्स हुए।

ऐमी:- यहां से बैठकर कोई प्लैनिंग नहीं की जा सकती, हमे उनके नेटवर्क को हैक करना होगा।

अपस्यु:- तुम कर पाओगी।

ऐमी:- उसके लिए तो पहले हमे बंगलौर जाना होगा.. रिमोट एसेस हैकिंग तो पॉसिबल नहीं है।

अपस्यु:- ठीक है तुम शेड्यूल करो पूरा। मुझे 3 दिन लगेंगे मैक्रो डिवाइस तैयार करने में।

ऐमी:- ठीक है मै आज रात पूरा शेड्यूल करती हूं। कॉल ऑफ करे अब।

अपस्यु:- हां कॉल ऑफ करते हैं।

ऐमी दोनों के लिए कॉफी बनाकर ले आयी... "बहुत दिनों के बाद एक्शन होने वाला है, मै एक्साइटेड हूं।"

अपस्यु मुस्कुराते हुए…. "पागल कहीं की, एक्शन की दीवानी। अब छोड़ो उसे और आज शाम का तुम्हारा प्रोग्राम क्या है वो बताओ।"

ऐमी:- तुम्हे 3 दिन लगेंगे मैक्रो डिवाइस बनाने में, मुझे अपने सॉफ्टवेर पर काम करना है। पुराना सिस्टम आउटडेटेड हो गया होगा, मुझे शुरू से काम करना पड़ेगा।

अपस्यु:- अच्छा जी ! मतलब मुझे ऐसा क्यों लगा रहा है कि तुम आज का डिस्को का प्रोग्राम कैंसल करने वाली हो।

ऐमी, अपस्यु के गाल खींचती… "यू आर टू गुड, वैसे भी मिसन की सफलता का जश्न तो होगा ही।"..

अपस्यु:- ये भी सही है, ठीक है फिर मिलते है 3 दिन बाद..

ऐमी:- हां ये सही है…

दोनों वहां से जैसे ही निकलने को हुए, ऐमी किस्स करती हुई कहने लगी…. कोई स्लीपलेस नाइट नहीं, और ना ही एक्स्ट्रा लोड, मै सॉफ्टवेर के साथ माइक्रो डिवाइस भी डेवलप कर लूंगी। समझे…

अपस्यु:- येस मिस… नो सलीपलेस नाइट और जितना होगा उतना ही डिवाइस बनाऊंगा।

ऐमी दोबारा उसे किस्स करती… दैट्स माह गुड बॉय.. अब चलें…

अपस्यु घर लौट कर सीधा अपने वर्किंग सेक्शन में गया। ये बालकनी से लगा कमरा था जो केवल काम के वक़्त ही खुलता था। वरना बंद ही रहा करता था। शाम के 8.30 बजे वो अंदर गया, 3 मैक्रो डिवाइस वो अबतक बना चुका था लेकिन एक भी मनचाहा परिणाम नहीं दे रहा था।

अंत में उसने ऐमी को कॉल लगाया और उससे कुछ मदद मांगी। ऐमी उसे वीडियो के जरिए एसिस्ट करती रही और डिवाइस में बुनियादी बदलाव के सुझाव दिए। उसके बाद अपस्यु फिर से कोशिश किया… अभी वो डिवाइस बनाने के बिल्कुल मध्य में था, तभी उसके दरवाजे पर नॉक हुई…. "मां बस थोड़ी देर और"…

"मै हूं श्रेया, 12.00 बज गए है, आंटी आपका नीचे इंतजार कर रही है।"…. "आप बढ़िए मै आ रहा हूं।"..

अपस्यु काम बीच में ही रोककर वहां से निकला, और फ्रेश होकर जल्दी से खाने के टेबल पर पहुंचा…. श्रेया उसके लिए थाली लगा रही थी… "मां कहां गई।"..

श्रेया:- आंटी थकी थी, तो वो खाकर आराम करने चली गई।

अपस्यु:- अरे आप रहने दीजिए मै ले लूंगा। आप भी जाइए, आप को भी आराम करना होगा।

श्रेया:- कोई बात नहीं है मै निकाल रही हूं, आप खाना खाइए।

अपस्यु उसके बाद कुछ नहीं कहा बस अपने खाने पर ध्यान देने लगा। … "स्ट्रेंज हां।"…… "क्या?"

श्रेया:- मुझे लगा आप सुबह के बात को लेकर कुछ बोलेंगे, लेकिन आपका पूरा ध्यान तो खाने पर है।

अपस्यु:- नहीं मै पूछने ही वाला था, वो सुबह आप अचानक से ऐसे गुस्सा क्यों हो गई थी?

श्रेया, खुलकर हसने लगी, और अपस्यु उसे हंसते हुए देखने लगा…. "क्या हुआ मैंने कोई कॉमेडी कि क्या?"

श्रेया, अपनी हंसी रोकती हुई….. सॉरी, वो आप के रिएक्शन ऐसे थे ना, नहीं मै पूछने ही वाला था.. हालांकि ये हम दोनों को पता है कि आप कभी इस बात की चर्चा भी नहीं करने वाले थे..

अपस्यु:- तो आप भी चर्चा छोड़ दीजिए क्यों बात को पकड़े बैठी है।

श्रेया:- मै दिल से आप से माफी मांगती हूं। प्लीज मुझे माफ़ कीजियेगा। और यहां पर एक छोटा सा स्पष्टीकरण (clarification)

अपस्यु:- इसकी जरूरत है क्या?

श्रेया:- है तो नहीं, लेकिन जब तक अपनी फीलिंग बता ना दूं चैन नहीं आएगा। तो आप है अपस्यु, जो सहर के माहौल और यहां के दोहरी नेचर से बिल्कुल दूर रहे है। आप की बात पर अब से ठीक इसी छवि के साथ प्रतिक्रिया भी होगी।

अपस्यु:- सुबह की तरह क्या?

श्रेया:- ताने हां !! अच्छा अब इस स्पष्टीकरण के बाद अपनी भूल के लिए 1 छोटी सी भरपाई…

अपस्यु:- अब इसकी भी जरूरत है क्या?

"जरूरत तो नहीं लेकिन जबतक भरपाई ना हो जाए, मुझे सुकून नहीं मिलेगा… ये लीजिए मेरी ओर से छोटा सी भरपाई"…. श्रेया, भगवान शिव की बहुत ही प्यारी सी प्रतिमा उसे भेंट स्वरूप दी, जिसे वो हॉल में बने रैक पर रखती हुई कहने लगी…. "आप दोनों में विशेष समानताएं है। जैसे महा शिव रूपवान, गुणवान, रौद्र और भोले है आप में भी उन्हीं के गुण हैं।"

अपस्यु:- तो मिसेज नंदनी रघुवंशी ने आज आप की क्लास ली है, इसलिए आप मेरी क्लासिफिकेशन यहां बता रही…

श्रेया:- मै फिर हसुंगी आप फिर कहिएगा मैंने कोई कॉमेडी कि क्या? वैसे आप ने जिस प्रकार से अपनी बात आंटी से कही ना वो ईपिक था। मतलब बिल्कुल ही हटकर। सच ने बहुत ही भोले है। और आंटी ने जितनी बातें आप के बारे में बताई, वो बिल्कुल सही थी।

थोड़े समय तक दोनों के बीच इसी प्रकार बातें होती रही, फिर दोनों एक दूसरे को शुभ रात्रि कहते हुए विदा लिया।
 
Update:- 53

USA Trip….

सन-डिएगो में 6 दिन हो चुके थे और वीरभद्र, विन्नी और क्रिश के बीच सनी कि तरह कुंडली मारे बैठ गया था। वो अपने साथ क्रिश को ऐसे बांधे रखता था कि किस्स तो दूर की बात है, दोनों हाथ में हाथ डालकर साथ चल भी नहीं सकते थे। सभी लोग आज रात सन-डिएगो से कुछ दिन के टूर पर न्यूयॉर्क निकल रहे थे।

विन्नी अपनी किस्मत पर रोती हुई कुंजल से गुस्से में कहने लगी…. "कुंजी, तू बहुत मज़े ले रही है ना मेरी इस हालत पड़। ये तू अच्छा ना कर रही है।"

कुंजल, हंसती हुई कहने लगी…. "किसे कॉन्फिडेंस था, जरा बताएगी।"

विन्नी:- एक ही बात के लिए कितने ताने मारेगी, ले दोनों कान पकड़ कर माफी मांगती हूं। जरा मेरे हालत पर भी तरस खा ले।

कुंजल:- हम्मम ! तेरी हालत तो वाकई पिंजरे में कैद बुलबुल जैसी है… कोई ना सोचती हूं कुछ…

विन्नी, खुश होते…. "पक्का"…

कुंजल:- हां बाबा पक्का, अब ऐसे ही हंसती रहना। और तैयार हो जा… all the way to New York…

विन्नी:- woooooooo hooooooooo….

शिकागो में 6 दिन काटने के बाद आज आरव की मुस्कान भी वापस लौट आयी थी। सुबह ही मिश्रा फैमिली उसी होटल में चेक इन कर चुकी थी जहां अराव पिछले 6 दिनों से था। ये कोई इत्तेफ़ाक नहीं था बल्कि आरव, उन लोगों के ट्रैवल एजेंट से सब पता कर चुका था। केवल दोनों के फ्लोर अलग थे, आरव 8th फ्लोर पर था और मिश्रा परिवार 7th फ्लोर पर।

मनीष मिश्रा भी अपने परिवार को ज्वाइन करने, कुछ दिनों की छुट्टियों पर था, साथ में मनीष और राजीव के बड़े बेटे, नीरज और कबीर भी वहां पहुंचे थे। होटल भी काफी आलीशान था। 7th फ्लोर के हर कमरे में के अंदर 2 सेपरेट कमरे, छोटा सा हॉल और बहुत सारी सुविधाओं से लैस थी।

अभी दोनों बहनों को कमरे में आए 10 मिनट भी नहीं हुए होंगे.. साची बाथरूम में फ्रेश होने गई थी और लावणी कमरे के अपने हिस्से में अपना सामान जमा रही थीं। तभी पीछे से आरव उसके गले लगते, उसके कानों के नीचे, गले पर किस्स किया।

लावणी चौंक कर पीछे मुड़ी और आखों के सामने आरव को देखकर उसकी आखें और भी ज्यादा फैल गई। उसके हैरानी का सबब ऐसा रहा की वो बस बुत (idole) बनी भौचक्की (shocked) होकर, बिना पलकें झपकाए ताकने लगी।..

आरव उसके आखों के सामने चुटकी बजाते….. "क्या हुआ मिस, आप कुछ ज्यादा ही हैरान दिख रही हैं।"

लावणी, अब भी हैरानी से ही देखती हुई…. "क्या ये तुम हो आरव।"

आरव अपना सिर हिलाते…. "हां रे मै ही हूं।"..

लावणी, हैरानी की हालत में ही, आखें फैलाए और बिना पलकें झपकाए…. "किस्स करो फिर"..

आरव उसके होटों को छू कर पीछे हुआ। किस्स होते ही लावणी ने अपनी पलकें झपकाई और खुशी से उछालती हुई…. "ओह माय गॉड .. ओह माय गॉड … ओह माय गॉड.. ओह माय गॉड"… बिल्कुल चहकती हुई वो "ओह माय गॉड" करती आरव को जोड़ से अपने बाहों में जकड़ ली….

"क्या हो गया क्यों इतना शोर मचा रही है।"… साची बाथरूम से आवाज़ लगाई…. "कुछ नहीं दीदी, यूएस पहली बार आयी हूं, ये उसी की एक्साइटमेंट है।"… और कहते हुए आरव के होठों से होंठ को लगा कर उसे चूमने लगी।

कुछ पल डूब कर किस्स करने के बाद आरव लावणी से अलग हुआ और उसकी आखों में देखते हुए कहने लगा… "अब तुम आराम करो, मै बाद में मिलता हूं।"..

आरव, वापस खिड़की से जाने लगा.. लावणी उसे रोकती हुई… "अभी तो मिले है, अभी छोड़कर जा रहे हो।"..

आरव:- तुम्हारे लिए ही तो यहां परा हूं। अब जब हम इतने दिनों बाद मिल रहे है तो फ़िक्र मत करो… अब बस मै और तुम ही होंगे…

लावणी:- रूको.. वहां से कहां जा रहे हो..

आरव:- यहीं से तो अभी अंदर आया हूं… तुम्हारा नीचे कमरा और इसके ठीक ऊपर मेरा कमरा…

लावणी, अपनी आखें दिखाती…. "कोई फिल्म की शूटिंग नहीं चल रही जो तुम बार-बार खिड़की से आओ और जाओ। चुप-चाप दरवाजे से जाओ, कोई हीरो बनने की जरूरत नहीं है… और वापस खिड़की से तुम्हे यहां आने की जरूरत नहीं है।

आरव, थोड़ा मायूस होकर…. "पर यहां तो मै सिर्फ तुम्हारे लिए हूं।"

लावणी, उसके गले लग कर उसके गाल को चूमती कहने लगी…. "तुम्हे आने कि जरूरत नहीं है, मौका देख कर मै ही मिलने आऊंगी। अब सीधे-सीधे दरवाजे से जाओ और आना भी हो तो दरवाजे से आना।

आरव जाते-जाते एक बार फिर लावणी को चूमते हुए दरवाजे तक आया, दरवाजे की आड़ में दाएं-बाएं देखा और तेजी से उस फ्लोर के लॉबी से गायब हो गया।…

"कौन आया था यहां।"… साची बाहर निकलते ही पूछने लगी…

लावणी:- कौन होगा… यहां तो बस मै और मेरी एक्साइटमेंट थी।

साची:- क्या बात है, जितना तू पूरे रास्ते नहीं चहक रही थी, यहां कमरे में आते ही पूरे तेवर बदल गए। किसी गोरे को तो नहीं पसंद कर ली?

लावणी, अपनी आंख मारती…. "तो आप भी एक पसंद कर लो, मैंने थोड़े ना रोका है।"

साची:- ओह हो तो हमारी भुटकी अब बड़ी हो रही है।..

लावणी, साची का हाथ पकड़ कर उसे गोल-गोल घुमाती कहने लगी…. "हां कुछ ऐसा ही समझ लो।"…

साची:- अरे हाथ छोड़, टॉवेल खुल जाएगा… पागल कहीं की बिल्कुल दीवानी हुई जा रही है।….

16 जून 2014… दिल्ली…

अपस्यु और ऐमी दोनों बंगलौर के लिए अपने घर से निकल चुके थे। अपने तैयारियों को देखने के लिए दोनों अपस्यु के तीसरे फ्लैट, कनॉट प्लेस के पास वाले मुक्ता अपार्टमेंट में मिल रहे थे।

ऐमी अपस्यु की पूरी रीडिंग लेती हुई… स्पीड परफेक्ट है 38km/hr.. शॉर्ट रेंज पॉवर पंच 280 पाउंड, ओवरऑल पंच पॉवर 880 पाउंड… हाई और लोग जंप भी परफेक्ट, 360 डिग्री फ्लिप भी परफेक्ट है… फिजिकली कंप्लीट परफेक्शन।

अपस्यु:- तो फिर चले, मेंटली देख ले हम कितने प्रेफेक्ट है।…

दोनों वहां से फ्लाइट बोर्ड करने निकले। दोनों बंगलौर पहुंच चुके थे। दो अलग-अलग होटल में दोनों ने अपना-अपना कमरा लिया। एक होटल आरडी केमिकल के हेड ऑफिस के ठीक सामने था, जहां से उनके ऑफिस का सामने का हिस्सा पूरा दिख रहा था। वहीं ऐमी का होटल उसके ऑफिस के पीछे का पूरा व्यू दे रहा था।

उस दिन दोनों ने कोई काम नहीं किया। बंगलौर पहुंच कर घूमे, सिनेमा देखा, क्लब गए और रात के 10.30 बजे तक अपने अपने होटल पहुंच चुके थे। सुबह के 8 बजे अपस्यु ने ऐमी को कॉल लगाया और फिर दोनों सोने चले गए। 3 बजे के करीब अपस्यु की नींद खुली। आखें खुलते ही उसने ऐमी से कॉन्टैक्ट किया, वो भी कुछ देर पहले ही जागी थी।

6 बजे के आसपास फिर से दोनों बंगलौर घूमने निकले, और रात के 10.30 तक वापस लौटे। आज रात दोनों आते ही सो गए और सुबह के तकरीबन 7.30 बजे उठे। 7.30 बजे सुबह से लेकर रात के 10.30 बजे तक दोनों कहीं निकलें नहीं। रात के 10.45 पर अपस्यु कार लेकर ऐमी के होटल के नीचे उसके आने का इंतजार करने लगा।

ऐमी जब कार के ओर बढ़ रही थी, अपस्यु देख पा रहा था वहां मौजूद लड़कों को, जो पीछे से ऐमी को जाते हुए लगातार घुरे जा रहे थे। और हो भी क्यों ना ऐसा। अपने कमाल के चेहरे पर, वो आज पूरा मेकअप लगाकर क़यामत ढा रही थी। आंखों की हल्की काजल, ऐसे प्रतीत हो रही थी जैसे उसकी आंखे सबकी नजरें अपनी ओर आकर्षित कर रही हो।

उसपर से उसके लहराते खुले बाल, जिसकी कुछ कर्ली लटें चलने के साथ ऐसे बलखाती थी, देखकर रोम-रोम खुश हो जाए। अपस्यु भी उसके रूप को पूरा निहार रहा था। अपस्यु को अपने ओर ऐसे देखते हुए, ऐमी मुस्कुराए बिना नहीं रह पाई।

ऐमी कार में बैठती…. "मुंह तो बंद करो सर"…

अपस्यु:- माहौल बनना है, मैंने ऐसा कहा था, तुम तो बिजलि गिराने के लिए निकली आयी….

ऐमी, अपस्यु को आंख मारती…. "तो चलकर बिजली ही गिराते है।"

शायद अभी अपस्यु ने मात्र ट्रेलर ही देखा था, क्योंकि ऐमी ने अपने ऊपर लंबी सी लैदर जैकेट डाली हुई थी। लेकिन डिस्को में जाने से पहले जब उसने वो जैकेट उतारी…. उफ्फ, उस एसी कार में अपस्यु को पसीने आने लगे।….

लाल रंग की वो छोटी सी पोशाक जिसके आगे से, उसके बड़े गले का अाकर, उसके योबान को पूरा उभार रहा था, और पीछे "वी" अाकर का शेप, जो कमर से ऊपर तक फैलते-फैलते पीछे बैकलेस करता जा रहा था। ऊपर से ऐसा लग रहा था कि पूरे पाऊं और बदन के हर खुले हिस्से में वो मेकअप पोत कर आयी हो। पूरा बदन गोरा और चमकदार नजर आ रहा था। देखने वाले देखकर कंफ्यूज हो जाए, कि बदन के किस हिस्से पर नजर जमानी है और किस हिस्से को छोड़ दे।

दोनों डिस्को के अंदर पहुंचे। यूं तो वहां और भी सेक्सी बालाएं थी, लेकिन जो जादू ऐमी बिखेर रही थी, उसके दीवाने सब की नजरें हुई जा रही थी। दोनों जैसे ही बार काउंटर पर बैठे, दाएं बाएं कई लड़कों की भीड़ लग गई जो अपनी अदा से ऐमी को लुभाने की कोशिश कर रहे थे।

वो कहते है ना जैसा रूप वैसा स्वभाव, और ऐसे रूप पर थोड़ा गुरूर जचता भी था। ऐमी सभी को अपना गुरूर दिखाती वहीं पर तीन टकीला शॉट ली, अपस्यु भी उसका साथ निभाते 3 टकीला शॉट खिंचा।

ऐमी, अपस्यु का हाथ पकड़ते डांस फ्लोर तक ले गई और संगीत की थिरकन पर जो उसने अपना पहला मूव दिया.. देखने वाले हूटिंग करने लगे। वहीं अपस्यु भी रंग जमाते, उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने दाएं-बाएं ऐसे उठा कर नाचने लगा जैसे उसके हाथ में कोई खिलौना हो। दोनों अपने पूरे पैशन में एक दूसरे से चिपक कर ऐसे नाच रहे थे, देखने वाले बस आखें फाड़कर, उन्हें ही देखने में लगे थे।

उन दोनों के डांस फ्लोर पर आते ही लगभग वो डांस फ्लोर खाली सा हो गया था। दोनों के हर स्टेप पर सब हूटिंग कर रहे थे। और अंत में जो ही अपस्यु ने उसके कमर से पकड़कर खिंचा और किस्स किया… सब की आखों में वो समा जैसे कैद हो गया हो।

दोनों वहां से हंसते हुए बाहर के ओर आने लगे.. रास्ते में छोटा अंधेरा पैसेज था। वहां अपस्यु ने ऐमी को दीवाल से बिकुल लगाकर, उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर उसे ऊपर दीवार से पूरा चिपका दिया। खुद वो उसके ऊपर आकर उसके गर्दन से लेकर सीने पर किस्स करने लगा और कुछ देर के किसिंग के बाद दोनों फिर हंसते हुए वहां से बाहर निकले और कार में बैठ कर अपस्यु ने पूरा पिकअप लिया।

ऐमी अपने ऊपर जैकेट डाल कर सीट बेल्ट बांध ली। कार लगभग 90 के रफ्तार पर थी और उससे भी ज्यादा रफ्तार से पीछे से 2 कार चली आ रही थी। पहली कार उनको क्रॉस की। वो कार राईट से क्रॉस करके उसके लेफ्ट में गई और दूसरी कार क्रॉस करके राईट पर ही चल रही थी। उन दोनों कार के पीछे अपस्यु की कार बिल्कुल मध्य से चल रही थी।

अचानक ही दोनों कार ने अपनी गति को धीमा किया। अपस्यु सब कुछ समझकर, कार को गलत साइड ले गया और वहां से अपनी गति को बढ़ा कर उन दोनों को क्रॉस करते अपनी साइड आ गया। दोनों कार वाले ताकते रह गए और अपस्यु उनसे आगे निकल कर गति को 100 के पार ले गया।

लोकल सड़क पर इतनी गति वो भी एक आम कार के लिए… बहुत ही ज्यादा थी वो गति। उन दोनों पीछा करने वालों को भी ये बात पता थी कि अपस्यु इस गति को और ज्यादा देर तक जारी नहीं रख सकता था।

उन दोनों ने भी एक बार फिर अपनी गति बढ़ाई। अपस्यु को क्रॉस करने के लिए उनको अपनी गति 120 पर लेकर जनी पड़ी। दोनों कार लेकिन इसी गति से चेस करते, एक बार फिर उनके आगे थे। सड़कों पर सायं-सायं के आवाज़ के साथ, धूल उड़ाते तीनों कार चूहे-बिल्ली के खेल में लगे हुए थे।

एक बार फिर उन दोनों कार ने अपस्यु का रास्ता रोकते हुए, उसे गति पर लगाम लगाने के लिए मजबुर कर दिया। कार कि गति धीमी होते बीते 60 पर पहुंच चुकी थी। अपस्यु ने एक बार फिर कार को जैसे ही राईट में मोड़ा, उसके राईट साइड वाली कार पूरा एक्सीलरेटर लेते हुए पूरा राईट गया।

वो तो राईट चला गया लेकिन अपस्यु तुरंत ही अपनी कार सीधी करते एक्सेलेरेटर पर पाऊं दिया और मिडिल फिंगर निकाल कर उन्हें दिखाने लगा… उसका ड्राइवर जबतक उस मिडिल फिंगर को देख रहा था.. जोड़ से टकराने की आवाज़ आयी और कार जाकर सीधा एक सिक्योरिटी वैन को सामने से टक्कर दे मारी। इनके साथ चल रही दूसरी कार ने वहीं ब्रेक लगाया और 4 लड़के दौर कर सड़क के दूसरे ओर चले गए।

इधर अपस्यु और ऐमी ने अपनी कार होटल में पार्क कि और दोनों रूम में जाकर बाहर का नजारा देखने लगे। हर मिनट कैलकुलेट हो रहा था और हर बारीक चीज पर अपस्यु अपनी नजर बनाए हुए था।
 
Update:-54 (A)

इधर अपस्यु और ऐमी ने अपनी कार होटल में पार्क कि और दोनों रूम में जाकर बाहर का नजारा देखने लगे। हर मिनट कैलकुलेट हो रहा था और हर बारीक चीज पर अपस्यु अपनी नजर बनाए हुए था।

ऐक्सिडेंट के ठीक 5 मिनट बाद पुलिस वाहन वहां पहुंच चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा कांड हुआ हो। कुल 22 पुलिसकर्मी वहां पहुंचे थे। जिनमे ज्यादातर 1 या 2 सितारा वाले पुलिस थे। कुछ पुलिसकर्मी ऊपर बिल्डिंग के पास गए। 2-3 उसके चारो ओर चक्कर लगाकर देखने लगे। 5-6 पुलिस वाले वहां के ट्रैफिक को देख रहे थे, हालांकि रात के इस प्रहर में ज्यादा ट्रैफिक तो नहीं थी, लेकिन फिर भी पुलिस पूरी मुस्तैदी से वहां के ट्रैफिक को मेनटेन कर रहे थे।

लगभग आधे घंटे में वहां का पूरा तमाशा खत्म हो चुका था। पुलिस वालों के जाते ही एक सिक्योरिटी गार्ड बाहर आकर खड़ा हुआ। वहीं उसके दाएं ओर सबसे आखरी में बिल्डिंग के पिलर पर एक बॉक्स लगा था। उस बॉक्स के ऊपर लगे दोनों स्विच को बंद करके वहीं कोने में बैठ गया।

"कुछ भी बदलाव नहीं है, अब फिर से वही सब कुछ यहां होगा"… ऐमी भी बाहर के ओर देखती हुई कहने लगा। अपस्यु उसके पीछे अाकर, अपने चेहरे को उसके कंधे पर रख कर, अपने चेहरे को उसके चेहरे से बिल्कुल जोड़ते …. "बस एक बदलाव है, यहां इस कमरे में"….

अपनी बात कहकर अपस्यु उसके जैकेट के बटन को खोलता चला गया। जैकेट के दोनों साइड को पकड़ कर वो धीरे-धीरे पीछे आने लगा… ऐमी अपने दोनो हाथ पीछे की ओर उठा कर अपने पूरे बदन को आगे की ओर झुका ली, और जैकेट हाथों से फिसलते हुए, धीरे-धीरे उसके बदन से अलग हो गया।

अपस्यु तेजी से उसके पीछे पहुंचा और उसके खुले पीठ पर अपने हाथ फेरते हुए, उसके कानों के नीचे गले पर चूमने लगा। पीछे से चूमते हुए, उसने कंधे से स्ट्रिप को खिसकना शुरू किया और धीरे-धीरे ऐमी हाथों से सरकाते हुए उसे बाहर निकाल दिया।

स्ट्रिप के हाथों से निकाल ही ऐमी की छोटी सी पोशाक भी उसके पाऊं में थी और अपस्यु उसके दोनों कंधो के बीच पीठ पर चूमते हुए, उसके स्तनों पर पर अपने हाथ डालते उसे मसलते हुए, उसे पीछे से गर्दन से लेकर पीठ तक चूमने लगा। ऐमी की कसमसाहट, और मस्ती में अपने होटों को दातों तले दबाकर वो तेज-तेज श्वास लेने लगी।

अपस्यु उसके स्तनों को अपने हाथों के बीच पूरा मसलते मज़े ले रहा था। उसके पीठ को चूमते हुए अपस्यु नीचे बैठ गया। अपने हाथों से उसके पैंटी को नीचे खिसकाते, धीरे-धीरे नीचे लाते उसे भी बाहर निकाल फेका। ऐमी आगे के ओर झुकी खिड़की पर लगे पाइप को अपने मुट्ठी में पकड़ी, तेज-तेज चलती श्वासो के साथ, धीमी-धीमी सिसकियां भी ले रही थी।

अपस्यु नीचे बैठ कर पैन्टी को उसके पाऊं से बाहर निकाल कर फेंक दिया। आखों के सामने ऐमी को पीछे पूर्ण नग्न देखने का मादक एहसास। बिल्कुल सफेद शरीर और उभरा वो नितम्ब। अपस्यु उसके जांघ को चूमते हुए ऊपर बढ़ा और अपना चेहरा उसके नितम्बों के बीच पूरा डालकर खेलना शुरू कर दिया..

ऐमी पागल होती अपने होंठ दबाकर तेज सिसकारियां लेने लगी। उसके शरीर में कंपन फैल गया। उसका रोम-रोम सिहर उठा। अपस्यु उसके पीछे अपना पूरा चेहरा लगाकर, अपने हाथ को आगे ले गया और उसके योनि के ऊपर डालकर, योनि को कभी धीमे तो कभी जोर से मसलते जा रहा था। ऐमी की मादक सिसकारियां जोड़ पकड़ने लगी थी। उसके पाऊं मस्ती से हिलने लगे और अब खुद को संभालना भी मुश्किल हो रहा था…

ऐमी तेजी में पलटी, अपस्यु को खड़ा करती उसके होटों को चूमना और काटना शुरू कार दी। फिर खुद नीचे बैठकर अपस्यु के पैंट को पूरे तेजी के साथ खोली। उसके अंडरवीयर को नीचे सरकाती, उसके लिंक को अपने मुट्ठी में जकड़कर, उसे कुछ देर तक आगे पीछे हिलाने के बाद, बॉल को चूमते हुए उसके लिंग पर अपनी जीभ चलाई और अपना मुंह खोल कर अंदर ले ली।

पूरे मस्ती में वो उसके लिंग को चूसती हुई उसके बॉल को अपने हाथों में लेकर उसके साथ खेनलने लगी.. अपस्यु बिल्कुल बेकाबू अपने सिर को ऊपर किए तेज तेज सांस लिए जा रहा था और ऐमी लगातार उसके लिंग को मुंह में लेकर आगे पीछे करती हुई चूस रही थी।

अपस्यु से भी अब बर्दास्त कर पाना मुश्किल हो गया। वो ऐमी को कंधे से पकड़ कर ऊपर उठाया। उसके दोनों स्तनों को अपने दोनो हथेलियों के बीच दबाकर, उसे पूरा अपने हाथों में कैद करके मसले हुए ऐमी के होंठों को चूसने लगा।

ऐमी भी पागल होती उसके होटों को काटती उसके जीभ को चूसने लगी। अपस्यु ने उसके अपने गोद में उठाया और बिस्तर पर पटक कर उसके दोनों पाऊं को फैला दिया। योनि के बीच अपने लिंग को डालते, एक ही झटके में अपने लिंग को पूरा अंदर तक तेज झटका मारा। ऐमी के स्तनों को दोनों हाथों में दबोज कर, उसपर पूरे अपने नाखूनों को धसा दिया। ऐमी तेज तेज "आहहहहहहहहहहहहहहहहह" करती अपने दोनो मुट्ठी में चादर को दबोचकर अपनी छाती ऊपर करने लगी। ऐमी भी लिंग को योनि के पूरा अन्दर मेहसूस करने लिए तेज-तेज ऊपर नीचे कमर को झटकने लगी।

हर झटका पूरे थिरकन के साथ अंदर तक मेहसूस हो रहा था। वासना अपने पूरे चरम पर थी और फिर तेज-तेज झटकों के बीच ऐमी का बदन अकड़ने लगा। इसी के साथ अपस्यु ने भी अपने झटकों कि रफ्तार पूरा बढ़ाते, उसका पूरा साथ साथ देने लगा। और फिर दोनों ही अपने चरम पर पहुंचकर उस सुख को भोगते हुए शांत हो गए।

अपस्यु वहीं उसके पास में लेट कर अपनी श्वास सामान्य करने लगा।… एक मीठी रात दोनों के जहन में कैद हो गई और दोनों निढल पड़े सो गए। सुबह जब ऐमी की नींद खुली तो अपस्यु के नंगे बदन को देखकर उसके अंदर गुदगुदी सी हो गई। वो अपस्यु के होंठ को चूमती हुई बाथरूम में घुसी और जल्दी से फ्रेश होकर बाहर निकल गई।

जबतक वो बाहर आयी अपस्यु भी जाग चुका था… ऐमी के बाहर निकलते ही, वो भी अंदर घुसा। जबतक वो बाहर आया ऐमी खाने का आर्डर कर चुकी थी… दोनों खा पीकर जब निश्चिंत हो चुके थे।

दोनों लैपटॉप खोलकर बैठ गए और कल रात के मैक्रो डिवाइस की सभी फुटेज को देखने लगे। लगभग 2 घंटे तक हर बात को नोट करने के बाद…

अपस्यु:- ऐमी तुम्हे क्या लगता है यहां की सुरक्षा को देखकर…

ऐमी:- ये लोग बहुत ही निश्चिंत है अपने सिक्योरिटी सिस्टम के कारण। ग्राउंड फ्लोर के नीचे बने बेसमेंट में जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है, और वहां पर भी इन्होंने लेजर बिम्ब लगा रखा है।

अपस्यु:- 4 ट्रेंड गार्ड जो ग्राउंड फ्लोर पर हमेशा रहते है और एक गार्ड बाहर लगातार चारों ओर चक्कर लगाता है। 15 गार्ड की टीम जो 8 घंटे के हिसाब से 5 की टुकड़ियों में अपनी ड्यूटी निभाते हैं।

ऐमी:- अंदर के चारों गार्ड कभी बाहर नहीं निकलते और बाहर का माहौल जरा भी गड़बड़ हो तो, बाहर वाला गार्ड दोनों स्विच ऑन करके उन्हें खतरे का सिग्नल देता है।

अपस्यु:- खतरे की स्तिथि में 5 मिनट में पुलिस कि टीम भी पहुंच जाती है। पुलिस की टीम को देखकर तो यही लगता है कि ये एक्स्ट्रा सिक्योरिटी है आरडी वालों की, जो खतरे कि स्तिथि में अलर्ट हो जाती है।

ऐमी:- 3 पॉवर बैकअप है और पॉवर जाने की स्थिति में ग्राउंड फ्लोर 4 फिट मोटी स्टील के अंदर कवर, जिसे मिसाईल से भी तोड़ने में परेशानी हो जाए।

अपस्यु:- अब इतनी जानकारी हासिल करने के बाद एक ही सवाल उठता है, ये चोरी कैसे संभव होगी।

ऐमी:- यह असाइनमेंट नहीं है, ये एक ट्रैप है।

अपस्यु:- तो कल की रात फंसते है इस ट्रैप में।

ऐमी:- कैसे….

"जब रात के अंधेरे में घना कोहरा छाएगा… हम शान से, सामने से जाएंगे.. सूट उप एंड गेट रेडी फॉर एक्शन"

18 जून 2014 USA Trip

सब न्यूयॉर्क भी पहुंच गए थे और वहां पहुंचकर मस्ती कि सारी प्लैनिंग भी हो चुकी थी। रात का वक़्त और चारो कैसिनो में जाकर मज़े कर रहे थे। इसी बीच वीरभद्र के पास कुछ प्रायोजित (sponsored) लड़कियां पहुंची। जो वीरभद्र के साथ बहुत ही अभद्र हरकतें शुरू कर चुकी थी। कोई बालों मै हाथ फेर रही थी तो कोई गालों को हाथ लगा रही थी। एक ने तो पैंट के ऊपर हाथ रखकर उसके लिंग को ऊपर-ऊपर से सहलाने लगी।

कोई और मौका होता तो शायद वो पूरा मज़ा भी लेता, लेकिन नजरों के सामने कुंजल थी जो राउंड टेबल पर बैठकर, चकरी घूमने वाले जुए के टेबल पर थोड़ा-थोड़ा पैसा लुटा रही थी। वहीं पास वाली सेक्शन में विन्नी बैठकर, पासे (dice) की संख्या पर पैसे लगा रही थी, और उसके कुछ दूरी पर क्रिश बैठा हुआ अपनी गर्लफ्रेंड को तार रहा था बेचारा।

वीरभद्र उन लोगों को सामने देखकर थोड़ा असहज मेहसूस करने लगा। तभी कुंजल ने वीरभद्र को देखा और चौंकने की झुटी प्रतिक्रिया देती उसने अपना मुंह खोल ली।

कुंजल की ऐसी प्रतिक्रिया देखकर वीरभद्र उन लड़कियों को किनारे करने कि कोशिश में जुट गया। सिर को ना में हिलाकर जताने कि कोशिश करने लगा कि वो कुछ नहीं कर रहा, बल्कि यही लड़कियां पीछे पड़ी है। तभी कुंजल उसके कंफ्यूज से चेहरे को देखकर जोड़ से हसी और बड़ी अदा से चलती हुई उसके पास पहुंची और अाकर सीधा उसके गोद में बैठ गई।

ये तो वीरभद्र के लिए और भी ज्यादा चौंकाने वाला छन था और उसका हैरानी से भड़ा चेहरा देखने लायक था।…. "कुंजल जी"…. "हां वीरे जी"..

वीरभद्र:- कुंजल जी आप ये क्या कर रही है, मेरे प्राण हलख में आ गए है। आप प्लीज ऐसा मत कीजिए। मै पहले ही इन गोरी कन्याओं सें परेशान हूं।

कुंजल:- वीरे जी, ये लड़कियां आप जैसे गबरू देशी नौजवान पर फिदा हो गई है। आप 2 मिनट मुझे दीजिए, इन सबको अभी भागती हूं।

कुंजल ने कुछ देर अंग्रेजी में खिटिर-पिटिर करके समझाने कि कोशिश करने लगी कि वो लोग उसके बॉयफ्रेंड को छेड़ रही है। वीरभद्र बिल्कुल शांत बस वहां चल रहे माहौल को सुनने में लगा हुआ था और बस यही प्रार्थना करने में लगा था कि कुंजल जल्दी यहां से उठ कर जाए…

बात होते-होते अंत में ऐसा हुआ कि, वीरभद्र को कुंजल ने उसके गाल को चूमने के लिए कहने लगी। वीरे अब पूरा फसा। कुंजल ना तो उसके गोद से उठने का नाम ले रही थी और ना ही वहां से वो लड़कियां जाने का नाम ले रही थी। लेकिन वीरभद्र की अभी प्राथमिक समस्या तो कुंजल को वहां से उठाना था और इसी क्रम में वीरभद्र उसके गाल को अपने होंठ से छू कर जल्दी से सीधा हो गया…

कुंजल:- वीरे जी..

वीरभद्र:- जी कुंजल जी…

कुंजल:- किसी बच्चे को चूम रहे है क्या, गर्लफ्रेंड को चूम रहे है। थोड़ा अच्छे से चुमिए वरना ये लड़कियां आप को नहीं छोड़ने वाली।

बेचारा वीरभद्र क्या करता, सांप छूछुंदर जैसी हालत थी। उसने एक बार फिर कुंजल के गाल को चूमा। ये चुम्बन थोड़ा लम्बा चला और वीरभद्र कुंजल को चूमने के बाद फिर से सीधा बैठ गया। उसके इस किस्स के बाद वहां की सारी लड़कियां गायब हो गई और कुंजल भी उठकर बैठ गई।

कुंजल के हटते ही वीरभद्र वहां से कुछ देर के लिए गायब हो गया और इधर कुंजल, विन्नी और क्रिश हंस रहे थे। थोड़ी देर बाद वो वापस आया। कुंजल उससे मज़ाक करती हुई कहने लगी… "बहुत थके हुए लग रहे है, कहां गए थे।"

वीरभद्र, थोड़ा घबराते हुए कहने लगा…. "वो बाथरूम… मै बाथरूम गया हुआ था।"

कुंजल उसे देखकर जोड़ से हंसती हुई कहने लगी…. "हां इतनी सरी लड़कियां जब इधर-उधर हाथ लगाएगी तब तो बाथरूम जाना लाजमी ही है।"

वीरभद्र अपना मुंह छिपाए हुए इधर-उधर देखने लगा…. "वो दोनों कहां गए, मै उसे ढूंढ़ कर लाता हूं।"

कुंजल उसका हाथ पकड़कर रोकती हुई…. "अरे आप कहां जा रहे है। दोनों प्रेम के पंछी उड़ चले, उसे कहां आप ढूंढ़ने जाएंगे।"..

वीरभद्र:- उनकी तो अभी बैंड बज जानी है… अभी आरव को सब बताता हूं मै।

कुंजल:- वैसे क्रिश जाते जाते बोलता गया है.. "यदि वीरभद्र मेरे किस्स वाली फोटो भेजेगा तो वो भी हमारी किस्स वाली तस्वीर आरव को भेज दूंगा।"

वीरभद्र:- आप लोगों ने मिलकर मेरा ही चुटिया काट दिया। ये अच्छा ना किया आप लोगों ने। ये मेरा पहला काम था और मै अपने पहले काम में असफल हो गया।

कुंजल:- वीरे जी..

वीरभद्र:- जी कहिए …

कुंजल:- ऐसे अपसेट नहीं होते। वैसे भी प्रेमियों को मिलने से जब उसके घर के लोग नहीं रोक पाते तो फिर हम कौन है। आप बिल्कुल भी असफल नहीं हुए है। अब मूड ऑफ नहीं कीजिए और चलिए चलकर थोड़ा माल कमाया जाए। मैं 1000 डॉलर हार चुकी हूं।

वीरभद्र, बेचारा मायूस कुंजल के पीछे चल दिया। उसकी जीत पर फीकी मुस्कान देता और और उसके हार पर फिका सा अफसोस….
 
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