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18 June 2014 USA Trip…
शाम का वक्त था। आरव होटल के कैसिनो में बैठकर, वहां पर ड्रिंक के मज़े ले रहा था। वो वहां के बार काउंटर पर बैठकर लोगों के हारने और जितने कि प्रतिक्रिया को देखकर अपना मन बहला रहा था।
कैसिनो के अंदर का वो प्यारा सा संगीत उस माहोल में चार चांद लगा रहा था। तभी सामने से, मनीष मिश्रा, साची के पिताजी, का बड़ा बेटा कबीर जो लगभग 26 साल का था कैसिनो के अंदर आया। उसके साथ उसका चचेरा भाई नीरज, जो राजीव मिश्रा, लावणी के पिताजी, का बड़ा बेटा, लगभग 24 साल का था, वो भी आ रहा था।
दोनों अाकर वहीं बार काउंटर पर आरव के पास बैठ गए। कोई एक दूसरे को जानता नहीं था और सब अपने अपने हिसाब से वहां मज़े कर रहे थे। आरव का फोन बजा… "हे स्वीटी, तुमने व्हाट्स एप से मुझे अनब्लॉक कर दिया क्या?"
लावणी:- वेरी फनी.. क्या चाहते हो मै फिर से ब्लॉक कर दूं।
आरव:- बिल्कुल नहीं बेबी, तुम तो गुस्सा हो गई.. आई लव यू..
लावणी:- लव यू टू। अब जल्दी से बताओ कहां हो। तुम्हे देखने के लिए तरप गई हूं।
आरव:- कहां हो मै आता हूं ना, बताओ…
लावणी:- ना मै आती हूं, तुम बताओ कहां हो?
आरव:- अपने कमरे में, आ जाओ..
लावणी:- नाइस जोक.. लेकिन शाम के 7 बजें तुम्हारा भाई ये बात कहता तो मान भी लेती। लेकिन तुम इस वक़्त अपने रूम में हो मान ही नहीं सकती। जरूर किसी गोरी के पाऊं या उसके क्लीवेज ताड़ रहे होगे।
आरव:- क्या मेरा इतना रेपो गिरा हुआ है…
लावणी:- ओ मेरा बेबी मायूस हो गए.. आती हूं उदासी दूर करने… अब बताओ भी…
आरव:- ओके बाबा कैसिनो में आ जाओ, यहीं बैठा हूं…
लावणी चहकती हुई कैसिनो के अंदर पहुंची और वहां पहुंच कर वो आरव को ढूंढ़ने लगी। और जब आरव मिला तब उसकी आखें बड़ी हो गई। वो जैसे ही आयी वैसे ही वहां से भागने लगी, लेकिन इस बीच आरव उसे देख चुका था और वो दूर से ही उसे हाथ दिखाने लगा..
लावणी क्यों कोई प्रतिक्रिया दे या फिर मुड़ कर ही देखे। वो तो सीधे-सीधे वहां से रवाना हुई। उसके पीछे-पीछे आरव भी गया, लेकिन कैसिनो से बाहर निकलते ही उसने अपना रास्ता बदला और बाहर के ओर चल दिया, क्योंकि रिसेप्शन लॉबी में लावणी, अनुपमा और सुलेखा के साथ बातें कर रही थी।
माहौल को समझते हुए आरव भी वहां से दबे पाऊं बिना किसी के नजर में आए निकलने लगा। वो होटल के बाहर जा ही रहा था कि तभी उस होटल में मानो कोई बहुत बड़ी हस्ती ने अभी-अभी कदम रखा हो। बॉडीगार्ड रास्ता क्लियर करते हुए आरव को किनारे किए और बीच से एक इंडियन फैमिली चली आ रही थी।
उस फैमिली को रिसीव करने खुद मनीष और राजीव भी नीचे पहुंच चुके थे, और पूरी मिश्रा परिवार देखते ही देखते वहां जमा हो चुका था। आरव वहीं किनारे खड़े होकर, दूर चल रहे मिश्रा परिवार का ये भारत मिलाप के सीन को समझने कि कोशिश कर ही रहा था तभी साची की नजर आरव पर पड़ी। साची अपने परिवार को छोड़कर चुपके से जाकर आरव के पास खड़ी हो गई…
"लावणी आज काफी प्यारी दिख रही है ना।"…. "वो तो मेरी जान … वो वो वो.... साची तुम, व्हाट्स अ प्लीजेट सरप्राइज।"..
साची:- अच्छा बच्चू, नाटक हो रहा है.. हां..
आरव:- तुमसे झूट नहीं कहूंगा साची, तुम जो सोच रही हो वही बात हैं।
साची:- कमाल है ना आरव, ये तो कमाल ही हो गया।
आरव:- क्या हुआ साची, क्या कमाल कर दिया मैंने?
साची:- तुमने नहीं बल्कि तुम दोनों भाई ने। दोनों ने कभी मुझसे झूठ बोला ही नहीं। काश बोला होता।
आरव साची का हाथ पकड़कर कहने लगा…. कभी-कभी अच्छे लोग ज्यादा दर्द दे जाते है। और अपस्यु उन्हीं में से एक है। कभी वक़्त मिले तो उसकी कहानी मुझसे सुन लेना क्योंकि वो तो ठीक से अपनी कहानी भी बता नहीं सकता।
साची:- हमारा रिश्ता शायद किस्मत को ही मंजूर नहीं थी, लेकिन फिर भी ये दिल है कि मानता नहीं।
आरव:- साची तुम्हे मायूस देखता हूं तो मेरे दिल में दर्द होने लगता है।
साची:- छोड़ो वो सब, अब बीते वक़्त पर रोने से अच्छा है कि उसे स्वीकार करके आगे बढ़ना चाहिए। मै भी कहां अपनी कहानी लेकर बैठ गई। अभी तो तुम्हारी टांगें तोड़नी है। तो आज सुबह वो तुम थे जिसे देख कर लावणी चहकने लगी.. हां..
आरव:- मै तो यहां से 5 दिनों से हूं, लावणी से मिला भी नहीं अब तक।
साची:- ओय.. साची को उल्लू बनाने चले हो मिस्टर… सोच लो पहरा लगा दूंगी मै फिर। सब सच-सच निकालना चाहिए…
आरव ने फिर शुरू से यूएस आने की कहानी उसे बता दिया…. "ओह हो तो कुंजल भी आयी है, पक्का वो कहीं और घूम रही होगी।"
आरव:- अरे ऐसी कोई बात नहीं है। वो उसके साथ, उसके कुछ और दोस्त थे तो वो उन्हीं के साथ न्यूयॉर्क निकल गई।
साची:- कोई नहीं तुमसे मै कल बात करती हूं, अपना रूम नंबर बताओ..
आरव:- 806
साची:- ठीक है आराम से सुबह मिलती हूं अभी जरा उन सब के बीच जाऊं वरना पूरा खानदान मुझे ढूंढ़ते तुम्हारे पास पहुंच जाएगा। अभी चलती हूं लेकिन कल सुबह मै तुम्हारी खबर लेती हूं।
आरव:- साची सुनो तो.. ये बड़े-बड़े लोग कौन है..
साची:- पता नहीं मुझे भी यार.. सोची थी यूएस घूमने का प्रोग्राम होगा लेकिन पापा ने अपने किसी दोस्त को बुला लिए, फैमिली मीटिंग करने।
आरव:- बाप रे, ये तो कोई बिलियनेयर लगता है वो भी डॉलर में कमाने वाला..
साची:- हीहीहीही.. मुझे भी पता नहीं, सुबह पूरी डीटेल मिल जाएगी। अब जाने दो और ज्यादा मस्ती नहीं हां..
आरव अपने दोनो कान पकड़ कर सिर को झुका दिया और उसे देखकर साची हंसती हुई अपने परिवार के पास पहुंची।
19 June 2014.. Banglore…
रात के 9 बज रहे थे। अपस्यु और ऐमी अपनी तैयारियों पर एक बार पुनः नजर डालते हुए हर बारीकियों पर अपनी नजर बनाए थे, साथ ही साथ हर संभावनाओं पर अपनी चर्चा कर रहे थे।
अपस्यु:- सो, तैयार हो…
ऐमी:- शुरू से तैयार हूं…
ऐमी फिर वही अपना जैकेट पहनी। अपस्यु भी कोट और टाय के साथ बिल्कुल जेंटलमैन कि तरह तैयार हुआ। एक होटल बॉय को बुलवाकर अपना बड़ा बैग उठवाया। वो बैग कार में रखा और दोनों चल दिए।
वहां से तकरीबन 2 किलोमीटर दूर जाकर कार किसी कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स के पार्किंग में रुकी। आज यहां पर संगीत का कोई क्रयक्रम आयोजित था जहां ऐमी भी गाने वाली थी। दोनों ने अपनी एंट्री दर्ज करवाई और उनके परफॉर्मेंस के वक़्त आने तक दोनों को एक कमरा दे दिया गया ठहरने के लिए।
दोनों जैसे ही उस कमरे में पहुंचे, ऐमी लैपटॉप ऑन करती एक धीमा संगीत शुरू की और उसी के साथ-साथ उसने वहां का सर्विलेंस को हैक कर लिया। हैक होने के बाद दोनों ने जल्दी से अपने ऊपर के कपड़े उतारे, जिसके नीचे दोनों ने काले रंग का बुलेट प्रूफ कपड़ा डाल रखा था।
अपने काम का सरा सामान अपस्यु ने एक छोटे से बैग में पैक किया और अपने कंधे में टांग कर खिड़की से बाहर निकला। छज्जे के ऊपर पाइप से और पाइप के सहारे फिर से छज्जा और ऐसे करते हुए वो उस बिल्डिंग के टॉप पर था।
16 माले की बिल्डिंग के सबसे टॉप पर अपस्यु… फिर अपस्यु ने दौड़ लगाई। 38 की रफ्तार से दौड़ते हुए वो बिल्डिंग से छलांग लगाते उसने तकरीबन 8 फिट की लंबी छलांग लगाई और दूसरी बिल्डिंग के 14th फ्लोर के एक छोटे से छज्जे को अपने हाथ से मजबूती के साथ पकड़ा…
ऐमी अपने लैपटॉप से उसे पूरा एसिस्ट कर रही थी। उस बिल्डिंग के 14th फ्लोर से वो फिरसे ऊपर चढ़ना शुरू किया और चढ़ते चढ़ते वो 20th फ्लोर के ऊपर जाकर एक बार फिर टॉप पर था।
अपस्यु ने वापस से दौर लगाया और एक बिल्डिंग के टॉप से कूद कर दूसरी बिल्डिंग के 2-3 फ्लोर नीचे लैंड करता वो आगे बढ़ता जा रहा था। फाइनली वो आरडी के हेड ऑफिस के ठीक पास वाले बिल्डिंग के टॉप पर खड़ा था… "तुम्हारी बारी अब.. कांउटडाउन शुरू करो"… अपस्यु ने ऐमी को अनुदेश दिया। और दोनों ने 3 की गिनती पर 10 मिनट का कांउटडाउन शुरू किया।
ऐमी भी खिड़की से निकली और हॉल के पीछे अंधेर में गुम होती उसने सड़क पर दौड़ लगा दी। 25 की रफ्तार से वो दौड़ती तकरीबन 200 मीटर की दूरी पर जब थी, अपने बैग को हाथ में ली और हर कदम बढ़ती वो स्मोक बॉम्ब गिराती, वहां कोहरा बनाने लगी.. घड़ी की उल्टी गिनती छटवे मिनट पर और अपस्यु उस बिल्डिंग के टॉप से नीचे आना शुरु कर चुका था।
आरडी हेड ऑफिस के बाहर का गार्ड दूर उठते धुएं को देखकर कंफ्यूज हो गया.. लेकिन इस से पहले की वो स्विच ऑन करता अपस्यु पहले ही नीचे पहुंच चुका था। उसने वहां 6 स्मोक बॉम्ब एक साथ चारो ओर गिराते हुए, अपने कमर में टंगा दोनों रोड निकाल कर तेजी से दौड़ते हुए उस गार्ड के पास पहुंचा।
इससे पहले की वो कोई प्रतिक्रिया देता सिर के नीचे एक रोड और वो वहीं धराशाही हो गया। अपस्यु को पता था ऐमी धुएं के अंदर एक कदम नहीं चल सकती इसलिए वो तय समय के हिसाब से 5 सेकंड रुका और तय जगह पर बिना किसी परेशानी के पहुंच कर उसने ऐमी का हाथ थामा और फिर ऐमी अपस्यु के कदम से कदम मिला कर बस दौड़ने लगी।
उल्टी गिनती बिल्कुल 5 मिनट पर थी। ऐमी अपना लैपटॉप ऑन कर चुकी थी और अपस्यु सभी माइक्रो डिवाइस फैला चुका था। दोनों सामने से ग्राउंड फ्लोर के दरवाजे से अंदर घुसे। 4 हथियारबंद ट्रेंड गार्ड के नजरों के सामने कई सारे लोग नजर आने लगे। चोरों की पूरी टोली जो काले लिबास में सिर से पाऊं तक खुद को ढके हुए थे। एक गार्ड ने तुरंत सिक्योरिटी अलर्ट किया, दूसरे ने पूरे ग्राउंड फ्लोर को सील कर दिया .. बचे दो गार्ड तबतक अपनी गन निकाल कर फायरिंग शुरू करने ही वाले थे…
इधर अंदर आते ही ये दोनों भी अपने काम पर लग चुके थे.. ऐमी तेजी के साथ स्मोक बॉम्ब निकाल कर बिखेरने लगी और अपस्यु अपने आंख पर पट्टी बांध रहा था। … जबतक पहली गोली फायर हुई… इधर ग्राउंड फ्लोर स्टील के दीवार के पीछे सील हो रहा था… और सिक्यूरिटी अलर्ट का सिग्नल भेजा जा रहा था… इतने वक़्त में ऐमी 4 स्मोक बॉम्ब डाल चुकी थी और पहली फायरिंग से पहले अपस्यु अपने आखों पर पट्टियां लगाकर, ऐमी का हाथ पकड़कर उसे खींचते हुए विस्थापित (displacement) कर तय जगह पर छोड़ चुका था।
ग्राउंड फ्लोर पूरा कोहरे में था। कहीं कुछ दिख नहीं रहा था, बस जलती हुई लाइट के कारण वो जगह उजले धुएं से घिरा हुआ नजर आ रहा था। ऐमी बिना कोई हरकत के अपनी जगह पर लेटकर माइक्रो डिवाइस को कमांड कर रही थी। और इधर अपस्यु हर आहट पर अपना जवाब देते हुए अपने रोड से वार करता जा रहा था।
चारो कुशल प्रशिक्षित गार्ड खुद को उस धुएं के कोहरे में असहाय महसूस कर रहे थे। गोलियां एक दूसरे को लग ना जाए इस वजह से अपने डंडे और चाकू का प्रयोग कर रहे थे और अपस्यु हवा के ध्वनि में आए बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए हमला करता जा रहा था।
किसी गार्ड को कुछ दिख तो नहीं रहा था, लेकिन उस लोकेशन के चप्पे चप्पे और हर इंच को अपस्यु अपने दिमाग में डाउनलोड कर चुका था। वो अपने हर कदम एक निश्चित दिशा में रखता और वापस अपने जगह पर अाकर फिर से दूसरी दिशा में आगे बढ़ता। अपस्यु के रोड जब उन गार्ड को पड़ते तो बस वहां चिख ही निकाल रही थी।
उल्टी गिनती का वक़्त नीचे आता 210 सेकंड का और वक़्त बचा। "बस 90 सेकंड है तुम्हारे पास, शुरू करो"… अपस्यु ऐमी के बनाए एक डिवाइस को सिक्योरिटी अलर्ट स्विच के पीछे पीन करते हुए कहा।
ऐमी अपने लैपटॉप पर हाथ चलना शुरू की। सभी सिक्योरिटी को भेदकर ऐमी नीचे का रास्ता खोल चुकी था और उन रास्तों से सभी माइक्रो डिवाइस चींटी की कतार में तेजी से नीचे जाने लगे।
उल्टी गिनती 150 सेकंड पर… माइक्रो डिवाइस नीचे जा चुकी थी। और इधर जबतक अपस्यु अपना कुछ बचाव करता, मोटी पीन जैसी छोटी बुलेट, अपस्यु के बुलेट प्रूफ जैकेट को भेदकर उसके सीने में घुस चुकी थी। लगभग 10 फिट की दूरी से चली थी ये बुलेट जो रफ्तार के साथ बुलेट प्रूफ़ जैकेट को भेदने में सफल हो चुकी थी। एक प्रतिबंधित वैपन जिसका स्कोप बॉडी के थर्मल हीट को डिटेक्ट करता है। 20 फिट मोटी दीवार के पीछे का भी जो डिटेक्ट करने की क्षमता रखता हो। स्पेशल ऑपरेशन में इस्तमल किया जाने वाले गन से शूट किया जा रहा था।
अच्छी बात ये थी कि अपस्यु ने खुद को इतनी तेजी से हटाया, की गोली दिल के सही निशाने पर ना लग कर थोड़ी बाएं जाकर घुसी… अपस्यु बचाव के लिए जबतक बेहोश पड़े गार्ड के पास लेटता, उससे पहले ही उसके शरीर को 2 गोली और भेद चुकी थी। दर्द ने उसके गति को धीमा तो किया लेकिन वो दो गार्ड के बीच लेटकर अपने लिए थोड़ा वक़्त लिया। उल्टी गिनती के अब 90 सेकंड ही बचे थे।
18 June 2014 USA Trip…
शाम का वक्त था। आरव होटल के कैसिनो में बैठकर, वहां पर ड्रिंक के मज़े ले रहा था। वो वहां के बार काउंटर पर बैठकर लोगों के हारने और जितने कि प्रतिक्रिया को देखकर अपना मन बहला रहा था।
कैसिनो के अंदर का वो प्यारा सा संगीत उस माहोल में चार चांद लगा रहा था। तभी सामने से, मनीष मिश्रा, साची के पिताजी, का बड़ा बेटा कबीर जो लगभग 26 साल का था कैसिनो के अंदर आया। उसके साथ उसका चचेरा भाई नीरज, जो राजीव मिश्रा, लावणी के पिताजी, का बड़ा बेटा, लगभग 24 साल का था, वो भी आ रहा था।
दोनों अाकर वहीं बार काउंटर पर आरव के पास बैठ गए। कोई एक दूसरे को जानता नहीं था और सब अपने अपने हिसाब से वहां मज़े कर रहे थे। आरव का फोन बजा… "हे स्वीटी, तुमने व्हाट्स एप से मुझे अनब्लॉक कर दिया क्या?"
लावणी:- वेरी फनी.. क्या चाहते हो मै फिर से ब्लॉक कर दूं।
आरव:- बिल्कुल नहीं बेबी, तुम तो गुस्सा हो गई.. आई लव यू..
लावणी:- लव यू टू। अब जल्दी से बताओ कहां हो। तुम्हे देखने के लिए तरप गई हूं।
आरव:- कहां हो मै आता हूं ना, बताओ…
लावणी:- ना मै आती हूं, तुम बताओ कहां हो?
आरव:- अपने कमरे में, आ जाओ..
लावणी:- नाइस जोक.. लेकिन शाम के 7 बजें तुम्हारा भाई ये बात कहता तो मान भी लेती। लेकिन तुम इस वक़्त अपने रूम में हो मान ही नहीं सकती। जरूर किसी गोरी के पाऊं या उसके क्लीवेज ताड़ रहे होगे।
आरव:- क्या मेरा इतना रेपो गिरा हुआ है…
लावणी:- ओ मेरा बेबी मायूस हो गए.. आती हूं उदासी दूर करने… अब बताओ भी…
आरव:- ओके बाबा कैसिनो में आ जाओ, यहीं बैठा हूं…
लावणी चहकती हुई कैसिनो के अंदर पहुंची और वहां पहुंच कर वो आरव को ढूंढ़ने लगी। और जब आरव मिला तब उसकी आखें बड़ी हो गई। वो जैसे ही आयी वैसे ही वहां से भागने लगी, लेकिन इस बीच आरव उसे देख चुका था और वो दूर से ही उसे हाथ दिखाने लगा..
लावणी क्यों कोई प्रतिक्रिया दे या फिर मुड़ कर ही देखे। वो तो सीधे-सीधे वहां से रवाना हुई। उसके पीछे-पीछे आरव भी गया, लेकिन कैसिनो से बाहर निकलते ही उसने अपना रास्ता बदला और बाहर के ओर चल दिया, क्योंकि रिसेप्शन लॉबी में लावणी, अनुपमा और सुलेखा के साथ बातें कर रही थी।
माहौल को समझते हुए आरव भी वहां से दबे पाऊं बिना किसी के नजर में आए निकलने लगा। वो होटल के बाहर जा ही रहा था कि तभी उस होटल में मानो कोई बहुत बड़ी हस्ती ने अभी-अभी कदम रखा हो। बॉडीगार्ड रास्ता क्लियर करते हुए आरव को किनारे किए और बीच से एक इंडियन फैमिली चली आ रही थी।
उस फैमिली को रिसीव करने खुद मनीष और राजीव भी नीचे पहुंच चुके थे, और पूरी मिश्रा परिवार देखते ही देखते वहां जमा हो चुका था। आरव वहीं किनारे खड़े होकर, दूर चल रहे मिश्रा परिवार का ये भारत मिलाप के सीन को समझने कि कोशिश कर ही रहा था तभी साची की नजर आरव पर पड़ी। साची अपने परिवार को छोड़कर चुपके से जाकर आरव के पास खड़ी हो गई…
"लावणी आज काफी प्यारी दिख रही है ना।"…. "वो तो मेरी जान … वो वो वो.... साची तुम, व्हाट्स अ प्लीजेट सरप्राइज।"..
साची:- अच्छा बच्चू, नाटक हो रहा है.. हां..
आरव:- तुमसे झूट नहीं कहूंगा साची, तुम जो सोच रही हो वही बात हैं।
साची:- कमाल है ना आरव, ये तो कमाल ही हो गया।
आरव:- क्या हुआ साची, क्या कमाल कर दिया मैंने?
साची:- तुमने नहीं बल्कि तुम दोनों भाई ने। दोनों ने कभी मुझसे झूठ बोला ही नहीं। काश बोला होता।
आरव साची का हाथ पकड़कर कहने लगा…. कभी-कभी अच्छे लोग ज्यादा दर्द दे जाते है। और अपस्यु उन्हीं में से एक है। कभी वक़्त मिले तो उसकी कहानी मुझसे सुन लेना क्योंकि वो तो ठीक से अपनी कहानी भी बता नहीं सकता।
साची:- हमारा रिश्ता शायद किस्मत को ही मंजूर नहीं थी, लेकिन फिर भी ये दिल है कि मानता नहीं।
आरव:- साची तुम्हे मायूस देखता हूं तो मेरे दिल में दर्द होने लगता है।
साची:- छोड़ो वो सब, अब बीते वक़्त पर रोने से अच्छा है कि उसे स्वीकार करके आगे बढ़ना चाहिए। मै भी कहां अपनी कहानी लेकर बैठ गई। अभी तो तुम्हारी टांगें तोड़नी है। तो आज सुबह वो तुम थे जिसे देख कर लावणी चहकने लगी.. हां..
आरव:- मै तो यहां से 5 दिनों से हूं, लावणी से मिला भी नहीं अब तक।
साची:- ओय.. साची को उल्लू बनाने चले हो मिस्टर… सोच लो पहरा लगा दूंगी मै फिर। सब सच-सच निकालना चाहिए…
आरव ने फिर शुरू से यूएस आने की कहानी उसे बता दिया…. "ओह हो तो कुंजल भी आयी है, पक्का वो कहीं और घूम रही होगी।"
आरव:- अरे ऐसी कोई बात नहीं है। वो उसके साथ, उसके कुछ और दोस्त थे तो वो उन्हीं के साथ न्यूयॉर्क निकल गई।
साची:- कोई नहीं तुमसे मै कल बात करती हूं, अपना रूम नंबर बताओ..
आरव:- 806
साची:- ठीक है आराम से सुबह मिलती हूं अभी जरा उन सब के बीच जाऊं वरना पूरा खानदान मुझे ढूंढ़ते तुम्हारे पास पहुंच जाएगा। अभी चलती हूं लेकिन कल सुबह मै तुम्हारी खबर लेती हूं।
आरव:- साची सुनो तो.. ये बड़े-बड़े लोग कौन है..
साची:- पता नहीं मुझे भी यार.. सोची थी यूएस घूमने का प्रोग्राम होगा लेकिन पापा ने अपने किसी दोस्त को बुला लिए, फैमिली मीटिंग करने।
आरव:- बाप रे, ये तो कोई बिलियनेयर लगता है वो भी डॉलर में कमाने वाला..
साची:- हीहीहीही.. मुझे भी पता नहीं, सुबह पूरी डीटेल मिल जाएगी। अब जाने दो और ज्यादा मस्ती नहीं हां..
आरव अपने दोनो कान पकड़ कर सिर को झुका दिया और उसे देखकर साची हंसती हुई अपने परिवार के पास पहुंची।
19 June 2014.. Banglore…
रात के 9 बज रहे थे। अपस्यु और ऐमी अपनी तैयारियों पर एक बार पुनः नजर डालते हुए हर बारीकियों पर अपनी नजर बनाए थे, साथ ही साथ हर संभावनाओं पर अपनी चर्चा कर रहे थे।
अपस्यु:- सो, तैयार हो…
ऐमी:- शुरू से तैयार हूं…
ऐमी फिर वही अपना जैकेट पहनी। अपस्यु भी कोट और टाय के साथ बिल्कुल जेंटलमैन कि तरह तैयार हुआ। एक होटल बॉय को बुलवाकर अपना बड़ा बैग उठवाया। वो बैग कार में रखा और दोनों चल दिए।
वहां से तकरीबन 2 किलोमीटर दूर जाकर कार किसी कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स के पार्किंग में रुकी। आज यहां पर संगीत का कोई क्रयक्रम आयोजित था जहां ऐमी भी गाने वाली थी। दोनों ने अपनी एंट्री दर्ज करवाई और उनके परफॉर्मेंस के वक़्त आने तक दोनों को एक कमरा दे दिया गया ठहरने के लिए।
दोनों जैसे ही उस कमरे में पहुंचे, ऐमी लैपटॉप ऑन करती एक धीमा संगीत शुरू की और उसी के साथ-साथ उसने वहां का सर्विलेंस को हैक कर लिया। हैक होने के बाद दोनों ने जल्दी से अपने ऊपर के कपड़े उतारे, जिसके नीचे दोनों ने काले रंग का बुलेट प्रूफ कपड़ा डाल रखा था।
अपने काम का सरा सामान अपस्यु ने एक छोटे से बैग में पैक किया और अपने कंधे में टांग कर खिड़की से बाहर निकला। छज्जे के ऊपर पाइप से और पाइप के सहारे फिर से छज्जा और ऐसे करते हुए वो उस बिल्डिंग के टॉप पर था।
16 माले की बिल्डिंग के सबसे टॉप पर अपस्यु… फिर अपस्यु ने दौड़ लगाई। 38 की रफ्तार से दौड़ते हुए वो बिल्डिंग से छलांग लगाते उसने तकरीबन 8 फिट की लंबी छलांग लगाई और दूसरी बिल्डिंग के 14th फ्लोर के एक छोटे से छज्जे को अपने हाथ से मजबूती के साथ पकड़ा…
ऐमी अपने लैपटॉप से उसे पूरा एसिस्ट कर रही थी। उस बिल्डिंग के 14th फ्लोर से वो फिरसे ऊपर चढ़ना शुरू किया और चढ़ते चढ़ते वो 20th फ्लोर के ऊपर जाकर एक बार फिर टॉप पर था।
अपस्यु ने वापस से दौर लगाया और एक बिल्डिंग के टॉप से कूद कर दूसरी बिल्डिंग के 2-3 फ्लोर नीचे लैंड करता वो आगे बढ़ता जा रहा था। फाइनली वो आरडी के हेड ऑफिस के ठीक पास वाले बिल्डिंग के टॉप पर खड़ा था… "तुम्हारी बारी अब.. कांउटडाउन शुरू करो"… अपस्यु ने ऐमी को अनुदेश दिया। और दोनों ने 3 की गिनती पर 10 मिनट का कांउटडाउन शुरू किया।
ऐमी भी खिड़की से निकली और हॉल के पीछे अंधेर में गुम होती उसने सड़क पर दौड़ लगा दी। 25 की रफ्तार से वो दौड़ती तकरीबन 200 मीटर की दूरी पर जब थी, अपने बैग को हाथ में ली और हर कदम बढ़ती वो स्मोक बॉम्ब गिराती, वहां कोहरा बनाने लगी.. घड़ी की उल्टी गिनती छटवे मिनट पर और अपस्यु उस बिल्डिंग के टॉप से नीचे आना शुरु कर चुका था।
आरडी हेड ऑफिस के बाहर का गार्ड दूर उठते धुएं को देखकर कंफ्यूज हो गया.. लेकिन इस से पहले की वो स्विच ऑन करता अपस्यु पहले ही नीचे पहुंच चुका था। उसने वहां 6 स्मोक बॉम्ब एक साथ चारो ओर गिराते हुए, अपने कमर में टंगा दोनों रोड निकाल कर तेजी से दौड़ते हुए उस गार्ड के पास पहुंचा।
इससे पहले की वो कोई प्रतिक्रिया देता सिर के नीचे एक रोड और वो वहीं धराशाही हो गया। अपस्यु को पता था ऐमी धुएं के अंदर एक कदम नहीं चल सकती इसलिए वो तय समय के हिसाब से 5 सेकंड रुका और तय जगह पर बिना किसी परेशानी के पहुंच कर उसने ऐमी का हाथ थामा और फिर ऐमी अपस्यु के कदम से कदम मिला कर बस दौड़ने लगी।
उल्टी गिनती बिल्कुल 5 मिनट पर थी। ऐमी अपना लैपटॉप ऑन कर चुकी थी और अपस्यु सभी माइक्रो डिवाइस फैला चुका था। दोनों सामने से ग्राउंड फ्लोर के दरवाजे से अंदर घुसे। 4 हथियारबंद ट्रेंड गार्ड के नजरों के सामने कई सारे लोग नजर आने लगे। चोरों की पूरी टोली जो काले लिबास में सिर से पाऊं तक खुद को ढके हुए थे। एक गार्ड ने तुरंत सिक्योरिटी अलर्ट किया, दूसरे ने पूरे ग्राउंड फ्लोर को सील कर दिया .. बचे दो गार्ड तबतक अपनी गन निकाल कर फायरिंग शुरू करने ही वाले थे…
इधर अंदर आते ही ये दोनों भी अपने काम पर लग चुके थे.. ऐमी तेजी के साथ स्मोक बॉम्ब निकाल कर बिखेरने लगी और अपस्यु अपने आंख पर पट्टी बांध रहा था। … जबतक पहली गोली फायर हुई… इधर ग्राउंड फ्लोर स्टील के दीवार के पीछे सील हो रहा था… और सिक्यूरिटी अलर्ट का सिग्नल भेजा जा रहा था… इतने वक़्त में ऐमी 4 स्मोक बॉम्ब डाल चुकी थी और पहली फायरिंग से पहले अपस्यु अपने आखों पर पट्टियां लगाकर, ऐमी का हाथ पकड़कर उसे खींचते हुए विस्थापित (displacement) कर तय जगह पर छोड़ चुका था।
ग्राउंड फ्लोर पूरा कोहरे में था। कहीं कुछ दिख नहीं रहा था, बस जलती हुई लाइट के कारण वो जगह उजले धुएं से घिरा हुआ नजर आ रहा था। ऐमी बिना कोई हरकत के अपनी जगह पर लेटकर माइक्रो डिवाइस को कमांड कर रही थी। और इधर अपस्यु हर आहट पर अपना जवाब देते हुए अपने रोड से वार करता जा रहा था।
चारो कुशल प्रशिक्षित गार्ड खुद को उस धुएं के कोहरे में असहाय महसूस कर रहे थे। गोलियां एक दूसरे को लग ना जाए इस वजह से अपने डंडे और चाकू का प्रयोग कर रहे थे और अपस्यु हवा के ध्वनि में आए बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए हमला करता जा रहा था।
किसी गार्ड को कुछ दिख तो नहीं रहा था, लेकिन उस लोकेशन के चप्पे चप्पे और हर इंच को अपस्यु अपने दिमाग में डाउनलोड कर चुका था। वो अपने हर कदम एक निश्चित दिशा में रखता और वापस अपने जगह पर अाकर फिर से दूसरी दिशा में आगे बढ़ता। अपस्यु के रोड जब उन गार्ड को पड़ते तो बस वहां चिख ही निकाल रही थी।
उल्टी गिनती का वक़्त नीचे आता 210 सेकंड का और वक़्त बचा। "बस 90 सेकंड है तुम्हारे पास, शुरू करो"… अपस्यु ऐमी के बनाए एक डिवाइस को सिक्योरिटी अलर्ट स्विच के पीछे पीन करते हुए कहा।
ऐमी अपने लैपटॉप पर हाथ चलना शुरू की। सभी सिक्योरिटी को भेदकर ऐमी नीचे का रास्ता खोल चुकी था और उन रास्तों से सभी माइक्रो डिवाइस चींटी की कतार में तेजी से नीचे जाने लगे।
उल्टी गिनती 150 सेकंड पर… माइक्रो डिवाइस नीचे जा चुकी थी। और इधर जबतक अपस्यु अपना कुछ बचाव करता, मोटी पीन जैसी छोटी बुलेट, अपस्यु के बुलेट प्रूफ जैकेट को भेदकर उसके सीने में घुस चुकी थी। लगभग 10 फिट की दूरी से चली थी ये बुलेट जो रफ्तार के साथ बुलेट प्रूफ़ जैकेट को भेदने में सफल हो चुकी थी। एक प्रतिबंधित वैपन जिसका स्कोप बॉडी के थर्मल हीट को डिटेक्ट करता है। 20 फिट मोटी दीवार के पीछे का भी जो डिटेक्ट करने की क्षमता रखता हो। स्पेशल ऑपरेशन में इस्तमल किया जाने वाले गन से शूट किया जा रहा था।
अच्छी बात ये थी कि अपस्यु ने खुद को इतनी तेजी से हटाया, की गोली दिल के सही निशाने पर ना लग कर थोड़ी बाएं जाकर घुसी… अपस्यु बचाव के लिए जबतक बेहोश पड़े गार्ड के पास लेटता, उससे पहले ही उसके शरीर को 2 गोली और भेद चुकी थी। दर्द ने उसके गति को धीमा तो किया लेकिन वो दो गार्ड के बीच लेटकर अपने लिए थोड़ा वक़्त लिया। उल्टी गिनती के अब 90 सेकंड ही बचे थे।