Romance भंवर (पूर्ण) - Page 8 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:-54 (B)

18 June 2014 USA Trip…

शाम का वक्त था। आरव होटल के कैसिनो में बैठकर, वहां पर ड्रिंक के मज़े ले रहा था। वो वहां के बार काउंटर पर बैठकर लोगों के हारने और जितने कि प्रतिक्रिया को देखकर अपना मन बहला रहा था।

कैसिनो के अंदर का वो प्यारा सा संगीत उस माहोल में चार चांद लगा रहा था। तभी सामने से, मनीष मिश्रा, साची के पिताजी, का बड़ा बेटा कबीर जो लगभग 26 साल का था कैसिनो के अंदर आया। उसके साथ उसका चचेरा भाई नीरज, जो राजीव मिश्रा, लावणी के पिताजी, का बड़ा बेटा, लगभग 24 साल का था, वो भी आ रहा था।

दोनों अाकर वहीं बार काउंटर पर आरव के पास बैठ गए। कोई एक दूसरे को जानता नहीं था और सब अपने अपने हिसाब से वहां मज़े कर रहे थे। आरव का फोन बजा… "हे स्वीटी, तुमने व्हाट्स एप से मुझे अनब्लॉक कर दिया क्या?"

लावणी:- वेरी फनी.. क्या चाहते हो मै फिर से ब्लॉक कर दूं।

आरव:- बिल्कुल नहीं बेबी, तुम तो गुस्सा हो गई.. आई लव यू..

लावणी:- लव यू टू। अब जल्दी से बताओ कहां हो। तुम्हे देखने के लिए तरप गई हूं।

आरव:- कहां हो मै आता हूं ना, बताओ…

लावणी:- ना मै आती हूं, तुम बताओ कहां हो?

आरव:- अपने कमरे में, आ जाओ..

लावणी:- नाइस जोक.. लेकिन शाम के 7 बजें तुम्हारा भाई ये बात कहता तो मान भी लेती। लेकिन तुम इस वक़्त अपने रूम में हो मान ही नहीं सकती। जरूर किसी गोरी के पाऊं या उसके क्लीवेज ताड़ रहे होगे।

आरव:- क्या मेरा इतना रेपो गिरा हुआ है…

लावणी:- ओ मेरा बेबी मायूस हो गए.. आती हूं उदासी दूर करने… अब बताओ भी…

आरव:- ओके बाबा कैसिनो में आ जाओ, यहीं बैठा हूं…

लावणी चहकती हुई कैसिनो के अंदर पहुंची और वहां पहुंच कर वो आरव को ढूंढ़ने लगी। और जब आरव मिला तब उसकी आखें बड़ी हो गई। वो जैसे ही आयी वैसे ही वहां से भागने लगी, लेकिन इस बीच आरव उसे देख चुका था और वो दूर से ही उसे हाथ दिखाने लगा..

लावणी क्यों कोई प्रतिक्रिया दे या फिर मुड़ कर ही देखे। वो तो सीधे-सीधे वहां से रवाना हुई। उसके पीछे-पीछे आरव भी गया, लेकिन कैसिनो से बाहर निकलते ही उसने अपना रास्ता बदला और बाहर के ओर चल दिया, क्योंकि रिसेप्शन लॉबी में लावणी, अनुपमा और सुलेखा के साथ बातें कर रही थी।

माहौल को समझते हुए आरव भी वहां से दबे पाऊं बिना किसी के नजर में आए निकलने लगा। वो होटल के बाहर जा ही रहा था कि तभी उस होटल में मानो कोई बहुत बड़ी हस्ती ने अभी-अभी कदम रखा हो। बॉडीगार्ड रास्ता क्लियर करते हुए आरव को किनारे किए और बीच से एक इंडियन फैमिली चली आ रही थी।

उस फैमिली को रिसीव करने खुद मनीष और राजीव भी नीचे पहुंच चुके थे, और पूरी मिश्रा परिवार देखते ही देखते वहां जमा हो चुका था। आरव वहीं किनारे खड़े होकर, दूर चल रहे मिश्रा परिवार का ये भारत मिलाप के सीन को समझने कि कोशिश कर ही रहा था तभी साची की नजर आरव पर पड़ी। साची अपने परिवार को छोड़कर चुपके से जाकर आरव के पास खड़ी हो गई…

"लावणी आज काफी प्यारी दिख रही है ना।"…. "वो तो मेरी जान … वो वो वो.... साची तुम, व्हाट्स अ प्लीजेट सरप्राइज।"..

साची:- अच्छा बच्चू, नाटक हो रहा है.. हां..

आरव:- तुमसे झूट नहीं कहूंगा साची, तुम जो सोच रही हो वही बात हैं।

साची:- कमाल है ना आरव, ये तो कमाल ही हो गया।

आरव:- क्या हुआ साची, क्या कमाल कर दिया मैंने?

साची:- तुमने नहीं बल्कि तुम दोनों भाई ने। दोनों ने कभी मुझसे झूठ बोला ही नहीं। काश बोला होता।

आरव साची का हाथ पकड़कर कहने लगा…. कभी-कभी अच्छे लोग ज्यादा दर्द दे जाते है। और अपस्यु उन्हीं में से एक है। कभी वक़्त मिले तो उसकी कहानी मुझसे सुन लेना क्योंकि वो तो ठीक से अपनी कहानी भी बता नहीं सकता।

साची:- हमारा रिश्ता शायद किस्मत को ही मंजूर नहीं थी, लेकिन फिर भी ये दिल है कि मानता नहीं।

आरव:- साची तुम्हे मायूस देखता हूं तो मेरे दिल में दर्द होने लगता है।

साची:- छोड़ो वो सब, अब बीते वक़्त पर रोने से अच्छा है कि उसे स्वीकार करके आगे बढ़ना चाहिए। मै भी कहां अपनी कहानी लेकर बैठ गई। अभी तो तुम्हारी टांगें तोड़नी है। तो आज सुबह वो तुम थे जिसे देख कर लावणी चहकने लगी.. हां..

आरव:- मै तो यहां से 5 दिनों से हूं, लावणी से मिला भी नहीं अब तक।

साची:- ओय.. साची को उल्लू बनाने चले हो मिस्टर… सोच लो पहरा लगा दूंगी मै फिर। सब सच-सच निकालना चाहिए…

आरव ने फिर शुरू से यूएस आने की कहानी उसे बता दिया…. "ओह हो तो कुंजल भी आयी है, पक्का वो कहीं और घूम रही होगी।"

आरव:- अरे ऐसी कोई बात नहीं है। वो उसके साथ, उसके कुछ और दोस्त थे तो वो उन्हीं के साथ न्यूयॉर्क निकल गई।

साची:- कोई नहीं तुमसे मै कल बात करती हूं, अपना रूम नंबर बताओ..

आरव:- 806

साची:- ठीक है आराम से सुबह मिलती हूं अभी जरा उन सब के बीच जाऊं वरना पूरा खानदान मुझे ढूंढ़ते तुम्हारे पास पहुंच जाएगा। अभी चलती हूं लेकिन कल सुबह मै तुम्हारी खबर लेती हूं।

आरव:- साची सुनो तो.. ये बड़े-बड़े लोग कौन है..

साची:- पता नहीं मुझे भी यार.. सोची थी यूएस घूमने का प्रोग्राम होगा लेकिन पापा ने अपने किसी दोस्त को बुला लिए, फैमिली मीटिंग करने।

आरव:- बाप रे, ये तो कोई बिलियनेयर लगता है वो भी डॉलर में कमाने वाला..

साची:- हीहीहीही.. मुझे भी पता नहीं, सुबह पूरी डीटेल मिल जाएगी। अब जाने दो और ज्यादा मस्ती नहीं हां..

आरव अपने दोनो कान पकड़ कर सिर को झुका दिया और उसे देखकर साची हंसती हुई अपने परिवार के पास पहुंची।

19 June 2014.. Banglore…

रात के 9 बज रहे थे। अपस्यु और ऐमी अपनी तैयारियों पर एक बार पुनः नजर डालते हुए हर बारीकियों पर अपनी नजर बनाए थे, साथ ही साथ हर संभावनाओं पर अपनी चर्चा कर रहे थे।

अपस्यु:- सो, तैयार हो…

ऐमी:- शुरू से तैयार हूं…

ऐमी फिर वही अपना जैकेट पहनी। अपस्यु भी कोट और टाय के साथ बिल्कुल जेंटलमैन कि तरह तैयार हुआ। एक होटल बॉय को बुलवाकर अपना बड़ा बैग उठवाया। वो बैग कार में रखा और दोनों चल दिए।

वहां से तकरीबन 2 किलोमीटर दूर जाकर कार किसी कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स के पार्किंग में रुकी। आज यहां पर संगीत का कोई क्रयक्रम आयोजित था जहां ऐमी भी गाने वाली थी। दोनों ने अपनी एंट्री दर्ज करवाई और उनके परफॉर्मेंस के वक़्त आने तक दोनों को एक कमरा दे दिया गया ठहरने के लिए।

दोनों जैसे ही उस कमरे में पहुंचे, ऐमी लैपटॉप ऑन करती एक धीमा संगीत शुरू की और उसी के साथ-साथ उसने वहां का सर्विलेंस को हैक कर लिया। हैक होने के बाद दोनों ने जल्दी से अपने ऊपर के कपड़े उतारे, जिसके नीचे दोनों ने काले रंग का बुलेट प्रूफ कपड़ा डाल रखा था।

अपने काम का सरा सामान अपस्यु ने एक छोटे से बैग में पैक किया और अपने कंधे में टांग कर खिड़की से बाहर निकला। छज्जे के ऊपर पाइप से और पाइप के सहारे फिर से छज्जा और ऐसे करते हुए वो उस बिल्डिंग के टॉप पर था।

16 माले की बिल्डिंग के सबसे टॉप पर अपस्यु… फिर अपस्यु ने दौड़ लगाई। 38 की रफ्तार से दौड़ते हुए वो बिल्डिंग से छलांग लगाते उसने तकरीबन 8 फिट की लंबी छलांग लगाई और दूसरी बिल्डिंग के 14th फ्लोर के एक छोटे से छज्जे को अपने हाथ से मजबूती के साथ पकड़ा…

ऐमी अपने लैपटॉप से उसे पूरा एसिस्ट कर रही थी। उस बिल्डिंग के 14th फ्लोर से वो फिरसे ऊपर चढ़ना शुरू किया और चढ़ते चढ़ते वो 20th फ्लोर के ऊपर जाकर एक बार फिर टॉप पर था।

अपस्यु ने वापस से दौर लगाया और एक बिल्डिंग के टॉप से कूद कर दूसरी बिल्डिंग के 2-3 फ्लोर नीचे लैंड करता वो आगे बढ़ता जा रहा था। फाइनली वो आरडी के हेड ऑफिस के ठीक पास वाले बिल्डिंग के टॉप पर खड़ा था… "तुम्हारी बारी अब.. कांउटडाउन शुरू करो"… अपस्यु ने ऐमी को अनुदेश दिया। और दोनों ने 3 की गिनती पर 10 मिनट का कांउटडाउन शुरू किया।

ऐमी भी खिड़की से निकली और हॉल के पीछे अंधेर में गुम होती उसने सड़क पर दौड़ लगा दी। 25 की रफ्तार से वो दौड़ती तकरीबन 200 मीटर की दूरी पर जब थी, अपने बैग को हाथ में ली और हर कदम बढ़ती वो स्मोक बॉम्ब गिराती, वहां कोहरा बनाने लगी.. घड़ी की उल्टी गिनती छटवे मिनट पर और अपस्यु उस बिल्डिंग के टॉप से नीचे आना शुरु कर चुका था।

आरडी हेड ऑफिस के बाहर का गार्ड दूर उठते धुएं को देखकर कंफ्यूज हो गया.. लेकिन इस से पहले की वो स्विच ऑन करता अपस्यु पहले ही नीचे पहुंच चुका था। उसने वहां 6 स्मोक बॉम्ब एक साथ चारो ओर गिराते हुए, अपने कमर में टंगा दोनों रोड निकाल कर तेजी से दौड़ते हुए उस गार्ड के पास पहुंचा।

इससे पहले की वो कोई प्रतिक्रिया देता सिर के नीचे एक रोड और वो वहीं धराशाही हो गया। अपस्यु को पता था ऐमी धुएं के अंदर एक कदम नहीं चल सकती इसलिए वो तय समय के हिसाब से 5 सेकंड रुका और तय जगह पर बिना किसी परेशानी के पहुंच कर उसने ऐमी का हाथ थामा और फिर ऐमी अपस्यु के कदम से कदम मिला कर बस दौड़ने लगी।

उल्टी गिनती बिल्कुल 5 मिनट पर थी। ऐमी अपना लैपटॉप ऑन कर चुकी थी और अपस्यु सभी माइक्रो डिवाइस फैला चुका था। दोनों सामने से ग्राउंड फ्लोर के दरवाजे से अंदर घुसे। 4 हथियारबंद ट्रेंड गार्ड के नजरों के सामने कई सारे लोग नजर आने लगे। चोरों की पूरी टोली जो काले लिबास में सिर से पाऊं तक खुद को ढके हुए थे। एक गार्ड ने तुरंत सिक्योरिटी अलर्ट किया, दूसरे ने पूरे ग्राउंड फ्लोर को सील कर दिया .. बचे दो गार्ड तबतक अपनी गन निकाल कर फायरिंग शुरू करने ही वाले थे…

इधर अंदर आते ही ये दोनों भी अपने काम पर लग चुके थे.. ऐमी तेजी के साथ स्मोक बॉम्ब निकाल कर बिखेरने लगी और अपस्यु अपने आंख पर पट्टी बांध रहा था। … जबतक पहली गोली फायर हुई… इधर ग्राउंड फ्लोर स्टील के दीवार के पीछे सील हो रहा था… और सिक्यूरिटी अलर्ट का सिग्नल भेजा जा रहा था… इतने वक़्त में ऐमी 4 स्मोक बॉम्ब डाल चुकी थी और पहली फायरिंग से पहले अपस्यु अपने आखों पर पट्टियां लगाकर, ऐमी का हाथ पकड़कर उसे खींचते हुए विस्थापित (displacement) कर तय जगह पर छोड़ चुका था।

ग्राउंड फ्लोर पूरा कोहरे में था। कहीं कुछ दिख नहीं रहा था, बस जलती हुई लाइट के कारण वो जगह उजले धुएं से घिरा हुआ नजर आ रहा था। ऐमी बिना कोई हरकत के अपनी जगह पर लेटकर माइक्रो डिवाइस को कमांड कर रही थी। और इधर अपस्यु हर आहट पर अपना जवाब देते हुए अपने रोड से वार करता जा रहा था।

चारो कुशल प्रशिक्षित गार्ड खुद को उस धुएं के कोहरे में असहाय महसूस कर रहे थे। गोलियां एक दूसरे को लग ना जाए इस वजह से अपने डंडे और चाकू का प्रयोग कर रहे थे और अपस्यु हवा के ध्वनि में आए बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए हमला करता जा रहा था।

किसी गार्ड को कुछ दिख तो नहीं रहा था, लेकिन उस लोकेशन के चप्पे चप्पे और हर इंच को अपस्यु अपने दिमाग में डाउनलोड कर चुका था। वो अपने हर कदम एक निश्चित दिशा में रखता और वापस अपने जगह पर अाकर फिर से दूसरी दिशा में आगे बढ़ता। अपस्यु के रोड जब उन गार्ड को पड़ते तो बस वहां चिख ही निकाल रही थी।

उल्टी गिनती का वक़्त नीचे आता 210 सेकंड का और वक़्त बचा। "बस 90 सेकंड है तुम्हारे पास, शुरू करो"… अपस्यु ऐमी के बनाए एक डिवाइस को सिक्योरिटी अलर्ट स्विच के पीछे पीन करते हुए कहा।

ऐमी अपने लैपटॉप पर हाथ चलना शुरू की। सभी सिक्योरिटी को भेदकर ऐमी नीचे का रास्ता खोल चुकी था और उन रास्तों से सभी माइक्रो डिवाइस चींटी की कतार में तेजी से नीचे जाने लगे।

उल्टी गिनती 150 सेकंड पर… माइक्रो डिवाइस नीचे जा चुकी थी। और इधर जबतक अपस्यु अपना कुछ बचाव करता, मोटी पीन जैसी छोटी बुलेट, अपस्यु के बुलेट प्रूफ जैकेट को भेदकर उसके सीने में घुस चुकी थी। लगभग 10 फिट की दूरी से चली थी ये बुलेट जो रफ्तार के साथ बुलेट प्रूफ़ जैकेट को भेदने में सफल हो चुकी थी। एक प्रतिबंधित वैपन जिसका स्कोप बॉडी के थर्मल हीट को डिटेक्ट करता है। 20 फिट मोटी दीवार के पीछे का भी जो डिटेक्ट करने की क्षमता रखता हो। स्पेशल ऑपरेशन में इस्तमल किया जाने वाले गन से शूट किया जा रहा था।

अच्छी बात ये थी कि अपस्यु ने खुद को इतनी तेजी से हटाया, की गोली दिल के सही निशाने पर ना लग कर थोड़ी बाएं जाकर घुसी… अपस्यु बचाव के लिए जबतक बेहोश पड़े गार्ड के पास लेटता, उससे पहले ही उसके शरीर को 2 गोली और भेद चुकी थी। दर्द ने उसके गति को धीमा तो किया लेकिन वो दो गार्ड के बीच लेटकर अपने लिए थोड़ा वक़्त लिया। उल्टी गिनती के अब 90 सेकंड ही बचे थे।
 
Update:-55

अपस्यु बचाव के लिए जबतक बेहोश पड़े गार्ड के पास लेटता, उससे पहले ही उसके शरीर को 2 गोली और भेद चुकी थी। दर्द ने उसके गति को धीमा तो किया लेकिन वो दो गार्ड के बीच लेटकर अपने लिए थोड़ा वक़्त निकला। उल्टी गिनती के अब 90 सेकंड ही बचे थे।

सभी माइक्रो डिवाइस नीचे खुले रास्ते में जरिए नीचे पहुंच चुके थे। एक बड़ा सा वाल्ट था, जिसके ऊपर एक रेटीना स्कैनेर लगा हुआ था। सारे माइक्रो डिवाइस, उस स्कैनर के ऊपर आकर उसे पूरा कवर कर चुके थे। उसके कोने से वो जगह बनाते धीरे-धीरे अन्दर घुसते चले गए। स्कैनर में लगे वायर के रास्ते वो सारे डिवाइस वाल्ट के अंदर तक पहुंच चुके थे। वहां जितनी भी फाइल रखी थी लगभग सभी फाइल्स में घुसकर अंदर हर पन्ने को पूरा स्कैन होने लगा।

ऐमी वक़्त पर काम ख़त्म करके सभी डिवाइस को वापस आने का कमांड दे चुकी थी और इस बीच अपस्यु भी बेहोश गार्ड के बीच आकर लेट चुका था। अपस्यु को इस बात का इल्म था कि जो भी फायरिंग कर रहा है वो लेटे हुए पर इसलिए गोली नहीं चला सकता क्योंकि वो उसी के साथी होंगे।

अपस्यु जैसे ही लेटा, उसकी तेज चलती सासों के साथ आ रही दर्द कि हल्की आवाज ऐमी साफ सुन पा रही थी। "वहां क्या हो रहा है.. तुम सुरक्षित तो हो अल्फा (अपस्यु)"…. "लेटे रहना बीटा (ऐमी).. क्या तुम 6 फिट ऊंचा आग जला सकते हो बीटा"…. "कितने सेकंड का विंडो चाहिए"… "3 सेकंड का विंडो चाहिए…. 30⁰ पुरव 1 मीटर के रेडियस में आग चाहिए।"

10 सेकंड का वक़्त लेती हुई ऐमी ने जवाब दिया… "मै तैयार हूं अल्फा"…. "मेरे 3 की गिनती पर तैयार हो जाना एक बार फिर कदम मिला कर भागने के लिए बीटा"… "मै तैयार हूं।"…

3 की गिनती के साथ ही ऐमी कमांड देकर दौड़ने के लिए तैयार थी। ऐमी के कमांड देते ही सभी माइक्रो डिवाइस 1 मीटर के रेडियस का सर्किल बनाते हुए, वहां 10 फिट ऊंचा धमाका हुआ। अचानक से तेज लपटें उठीं, और अपस्यु ऐमी का हाथ पकड़ कर तुरंत ग्राउंड फ्लोर के बाहर आया।

इधर आग जलने के कारण थर्मल डिवाइस बॉडी स्कैन तो नहीं कर पा रही थी लेकिन हवा में लगातार गोलियां फायर हो रही थी। बाहर निकलते ही ऐमी ने सिक्योरिटी अलर्ट के पास लगी डिवाइस में एक छोटा सा धमाका की और देखते ही देखते फिर से वो ग्राउंड फ्लोर स्टील के मजबूत दीवारों से ढक चुकी थी।

उल्टी गिनती के 30 सेकंड बचे थे। बाहर घुएं का कोहरा छटने लगा था, पुलिस के सायरन की आवाज़ दोनों को सुनाई भी देने लगी। अपस्यु ने फिर से बाहर स्मोक का कोहरा बना दिया और ऐमी ने लैपटॉप बैग में डाला। दोनों वापसी के लिए तैयार थे।

दौड़ते हुए दोनों ने तकरीबन 100 मीटर की दूरी तक पूरा कोहरा की चादर बिछाते हुए आगे बढ़े और अपने तय समय से 1 मिनट की देर से 10.21 मिनट पर वापस कमरे के पीछे पहुंच चुके थे।

ऐमी खिड़की से अंदर गई और पीछे से अपस्यु पहुंचा… दोनों बिना कोई देर किए अपने बुलेट प्रूफ जैकेट को निकालाना शुरू कर चुके थे। ऐमी जबकि अपने ऊपर कपड़े डाल रही थी और अपस्यु अपने चोट खाई जगह को कॉटन से दबा कर खून को नीचे गिरने से रोक रहा था।

"ऐमी, क्या तुम जल्दी से इनपर पट्टियां बांध कर मास्क करोगी।" ऐमी पीछे पलटकर, जब अपस्यु के खुले बदन पर बहते खून को कॉटन से साफ करती देखी, तो वो हताश हो गई…. "अपस्यु तुम्हे ट्रीटमेंट की जरूरत है। अभी हॉस्पिटल चलो।"

अपस्यु:- हां मै जानता हूं मुझे ट्रीटमेंट की जरूरत है लेकिन अभी नहीं। पट्टियां लगाओ और उपर बॉडी को मास्क करो। भूल गई पुलिस पहले अपने पास ही आएगी पूछताछ के लिए।

ऐमी:- लेकिन तुम्हे बुलेट लगी है, आम जख्म नहीं है।

अपस्यु:- जानता हूं। मै वो सेल रिकवर थेरेपी लेता हूं, कुछ वक़्त का सपोर्ट मिल जाएगा जबतक तुम स्वस्तिका से बात करके देखो यदि वो बंगलौर आ सके तो।

ऐमी की घबराहट और बेचैनी दोनों अपने सबब पर थी। वो टाइट पट्टी लगा कर अपस्यु के बदन के उपरी हिस्से में स्किन की बनी एक सूट डाली जों देखने में बिल्कुल असली और उसको ऊपर से काटने पर खून भी निकलता था।

ऐमी उसके उपर की बॉडी मास्क करके, वहां के फ्लोर पर टपके खून पर किसी तरह का केमिकल डालकर, तेजी के साथ साफ की। दोनों के बुलेट प्रूफ जैकेट और अन्य संदेह जनक सामान को लेकर एक बार फिर से खिड़की से बाहर गई और छिपाने के तय स्थान पर उनको छिपा कर वापस आयी।

अपस्यु लेटा हुआ था, ऐमी ने वापस अाकर सबसे पहले बचा काम खत्म की। अपने लैपटॉप से सारे स्कैन फाइल को एक साथ डिलीट मारी और सारे हैकिंग सॉफ्टवेर को वो अपने लैपटॉप से गायब कर दी। काम खत्म करने के बाद वो अपस्यु के सिरहाने बैठी और उसके बालों मै हाथ फेरती उसे देखने लगी…. "11.10 में मुंबई से स्वस्तिका की फ्लाइट है। लगभग 1 बजे तक वो हमारे साथ होगी।"….

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है। वैसे तुम इतनी मायूस होकर मुझे क्यों देख रही हो?

ऐमी के आंसू टपक कर अपस्यु के चेहरे के ऊपर गिरी। ऐमी अपने आशु पोंछती कहने लगी… "पहली बार तुम्हारे चेहरे पर मै दर्द को देख रही हूं। तुमसे ये दर्द नहीं छिप रहा अपस्यु।

अपस्यु:- हां जानता हूं, मुझे शवंस लेने ने भी बहुत तकलीफ़ हो रही है। क्या तुम कहीं से कोकीन ला सकती हो क्या?

ऐमी हड़बड़ी में वहां से निकली और कार स्टार्ट करके पास में ही किसी डिस्को का पता लगाकर वहां पहुंची। नजरे अब बस उसकी ढूंढ़ने लगीं… ज्यादा वक़्त नहीं लगा, उसे एक ड्रग बेचने वाला मिल गया।

ऐमी जल्दी से उसके पास पहुंची और हड़बड़ी में पैसे निकालकर उससे कोकीन मांगने लगी। उस ड्रग डीलर ने पहले उसे ऊपर से नीचे तक देखा और देखकर मना कर दिया। ऐमी उससे मिन्नतें करने लगी… "प्लीज दे दो।" लेकिन वो ड्रग डीलर ऐमी को सुनने के लिए तैयार ही नहीं हो रहा था।

ऐमी परेशान होने लगी लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा। ऐमी अपने बैग से 1लाख की पूरी गद्दी टेबल पर पटककर कहने लगी….. "या तो अभी मेरी चीज दे दो। और कहीं तुम्हे ऐसा लगता हो की मै कोई खबरी हूं तो तुम इस वक़्त तो गलत हो, लेकिन मेरे पास इतना पैसा है कि मै देखूंगी तुम कभी जेल से बाहर ना आने पाओ।"..

उसके ड्रग डीलर के साथ एक और डीलर था, वो पैसे उठाकर कहने लगा…. "इतने से नहीं होगा और पैसे चाहिए, और हां तेरे पास कितने भी पैसे हो, हमारे बैकग्राउंड के आगे सब मूत देंगे।"

ऐमी ने अपना बैग देखा उसने पैसे नहीं थे, फिर वो अपनी डायमंड इयर रिंग उतार कर देती हुई कहने लगी…. "12 लाख की कीमत का है… अब दोगे या मै कहीं और जाऊं।"

दोनों ड्रग डीलर जोड़-जोड़ से हंसते हुए, ऐमी को कोकीन कि एक छोटी सी पुड़िया थामा कर, उसके पीछे हाथ फेरते हुए कहने लगा…. "हम तुझे यहीं मिल जाएंगे, दोबारा जब जरूरत हो तो फिर आना।"

ऐमी वो पुड़िया उठकर वहां से जाते-जाते बोली…. "फ़िक्र मत करो मै वापस जरूर आऊंगी, ये वादा रहा।"…

ऐमी जबतक वापस पहुंची 11.30 बजने ही वाला था। वो जैसे ही कमरे के पास पहुंची, 2 स्टाफ वहां पहले से खड़े थे…. "मैडम आप कहां चली गई थी, आप का इंतजार हो रहा है बैंक स्टेज पर, 11.30 बजे से आप का शो है।

ऐमी:- प्लीज मुझे माफ़ कीजियेगा। आप लोग बढ़िये मै आयी...

स्टाफ:- मैम इट्स ओके, हम यहां इंतजार कर रहे है।

ऐमी झटपट में अंदर गई और अपस्यु को एक नजर देखने लगी। उसका बदन पूरा जल रहा था, उसकी आखें बिल्कुल लाल हो चुकी थी, लेकिन इतना होने के बाद भी वो अपनी आखें खोले हुए था।…. "ऐमी वो दो और जाओ, मैं भी आया तुम्हारे पीछे।"

उसकी हालत देखकर वो अपने आंसू छिपाती, वहां से निकल गई। अपस्यु किसी तरह उठकर टेबल पर ड्रग फैलाया और अपने नाक से उसे खींचने लगा। ऐमी के द्वारा लाए हुए कोकीन को वो पूरा इस्तमाल करने के बाद कुछ देर के लिए बैठा और फिर लड़खड़ाते किसी तरह खड़ा हुआ।

खड़ा होकर सिर को वो 2 बार झटका। बैग के अंदर से 2 सीरप की बॉटल निकला। इनमे सेल रिकवर और डेवलपमेंट वाली वहीं द्रव्य था जो आईवी सेट के जरिए अपस्यु ने अपने एक्सिडेंट के वक़्त इस्तमाल किया था। दोनों सीरप को पीने के बाद वो कुछ देर और वहीं बैठा.. फिर खुद को सामान्य की स्तिथि में दिखाते हुए वो प्रोग्राम हॉल में पहुंचा।

बिल्कुल खामोश, बिल्कुल शांत जैसे सब अपनी धड़कने रोके ऐमी के दर्द को सुन रहे थे… फिर उस खामोशी में दर्द के साथ वो आवाज़ आयी... "सुन रहा है ना तू, रो रही हूँ मैं सुन रहा है ना तू, क्यूँ रो रही हूँ मैं… सुन रहा है ना तू, क्यूँ रो रही हूँ मैं.. यारा"…

ऐमी का गाना जैसे ही समाप्त हुआ, लोग खड़े होकर तालियां बजाने लगे। अपस्यु को ऐमी का हाल-ए-दिल पता था, इसलिए वह बैंक स्टेज पर पहुंचा। जब वो पहुंचा तब ऐमी उसे देख कर दौड़कर उसके पास पहुंची और उसके गले लगकर खुद को शांत करने लगी।

अपस्यु उसे खुद से अलग करता हुआ, उसके चेहरे को साफ किया… "आय मिस अवनी, रोते नहीं है।"

ऐमी:- मै कहां रो रही हूं, बस तुम्हारी हीरोगिरी रुला रही है।

अपस्यु:- शांत बच्चा शांत। चलो यहां से चलते है।

दोनों बैंक स्टेज से निकलकर वापस आ ही रहे होते है कि पुलिस की एक टुकड़ी उन्हें ढूंढते हुए वहां पहुंचती हैं। प्रोग्राम ऑर्गनाइजर उन्हें ऐमी और अपस्यु के पास लेकर पहुंच ही रहे होते और सभी रास्ते में ही टकराते है…

ऑर्गनाइजर:- यहीं है दोनों, जिन्हे आप ढूंढ़ रहे है।

पुलिस:- आप मिस्टर अपस्यु और मिस ऐमी है।

अपस्यु:- क्या हुआ सर, कोई बात हुई है क्या?

पुलिस:- हमे प्लीज कोऑपरेट कीजिए। जितना पूछा जाए उतना ही जवाब दीजिए।

अपस्यु:- सॉरी सर.. हां मै अपस्यु हूं और ये ऐमी।

पुलिस:- आप दोनों अपनी-अपनी आईडी दिखाइए।

दोनों अपनी आईडी पुलिस वाले को दिखाने लगे। आईडी देखने के बाद पुलिसवाला पूछने लगा…. "आप दोनों 10.00 बजे कहां थे।

ऐमी:- मेरा प्रोग्राम था इसलिए हम दोनों यहीं थे।

क्रॉस चेक करने के लिए पुलिस वालों ने पूरा सीसी टीवी फुटेज देखा उनके कमरे की तलाशी ली। बैग लैपटॉप सरा सामान उन लोगों ने चेक कर लिया… जब वो चेक करके अपस्यु से कुछ पूछने लगे तभी ऐमी बीच में ही पूछने लगी…

"सर आधे घंटे से आप हमसे पूछताछ कर रहे है, अब बताइएगा हुआ क्या है।"… ऐमी थोड़ा तेवर दिखाती हुई पूछने लगी..

"मिस कहा ना आप हमे कोऑपरेट कीजिए.. आप बिल्कुल शांत खड़े रहीए।".. पुलिसवाला उसे घूरते हुए कहने लगा… ऐमी ने भी बिना देर लिए सिन्हा जी को फोन लगा दी… "पापा देखो ना यहां पुलिस वाला अाधे घंटे से हमे परेशान कर रहा है और कुछ बता भी नहीं रहा कि क्यों हमसे पूछताछ कर रहा है।"…

ऐमी अपनी बात समाप्त करके फोन स्पीकर पर डाली…. "हेल्लो तुम किस केस में मेरी बच्ची से इंक्वायरी कर रहे हो।"…

पुलिस:- देखिए यहां एक रॉबरी हुई है उसी के सिलसिले में पूछताछ चल रही है। आप प्लीज हमे हमारा काम करने दीजिए।

सिन्हा जी:- ऐमी बेटा, वो उनकी छोटी सी इंक्वायरी चल रही है, और कोई परेशानी नहीं है। हां अगर ऐसा लगे कि जानबुझ कर परेशान किया जा रहा है फिर फोन करना।

सिन्हा जी ने कॉल डिस्कनेक्ट किया और पुलिस वाला ऐमी से पूछने लगा… "आप के पापा क्या करते हैं।"

ऐमी:- सुप्रीम कोर्ट में वकील है, एडवोकेट अनिरुद्ध सिन्हा..

पुलिस:- क्या !! आप वो मशहूर वकील एडवोकेट सिन्हा की बेटी है।

ऐमी:- जी हां सर। वैसे आप को तसल्ली हो गई या और कुछ पूछना है। मुझे तो समझ में नहीं आ रहा कि कोई रॉबरी हुई है तो आप क्रिमिनल को पकड़ने के बदले यहां पूछताछ करने क्यों आ गए?

पुलिस:- हमारा काम है हर संभावना को देखना। कल रात ओवर स्पीड ड्राइविंग तुम लोग ही कर रहे थे ना, और किसी कार का एक्सिडेंट भी हुआ था तुमसे रेस करने के चक्कर में।

ऐमी:- वो ! अच्छा हुआ ऐक्सिडेंट हो गया उनका सर। आप जानते भी है कल क्या हुआ था हमारे साथ।

पुलिस:- हां मै सब जानता हूं। खैर मै चलता हूं, थैंक्स फॉर कोऑपरेशन। और हां अपने दोस्त को बोलो थोड़ा नशा कम करे।

ऐमी हंसती हुई उसके बात का अभिवादन की और उसके जाते ही वो अपस्यु को देखने लगी। ऐमी अपने साथ ऑर्गनाइजर के एक स्टाफ को लेकर वहां का सरा सामान पैक करवाई और अपस्यु को लेकर पार्किंग तक पहुंची।

रास्ते में ऐमी, अपस्यु से बात करती रही लेकिन अपस्यु हिम्मत अब टूट चुकी थी। वो बेहोश सा होने लगा था, फिर भी वो किसी तरह खुद को खींचते हुए पार्किंग तक पहुंचा। लेकिन ज्यों ही वो कार में बैठा, उसके मुंह से खून की उल्टियां होने लगी और वो बेहोश होकर वहीं सीट पर गिर गया।
 
Update:-56

रास्ते में ऐमी, अपस्यु से बात करती रही लेकिन अपस्यु हिम्मत अब टूट चुकी थी। वो बेहोश सा होने लगा था, फिर भी वो किसी तरह खुद को खींचते हुए पार्किंग तक पहुंचा। लेकिन ज्यों ही वो कार में बैठा, उसके मुंह से खून की उल्टियां होने लगी और वो बेहोश होकर वहीं सीट पर गिर गया।

आखें बंद हो चुकी थी, श्वांस बिल्कुल मध्यम, ना के बराबर। अपस्यु को इस हाल में देखकर ऐमी की भी श्वास अटकने लगी थी और आखें भिंग चुकी थी। अपस्यु का हाथ पकड़कर ऐमी अपनी आखें मूंद ली, तेज श्वास अंदर खींचती कुछ पल को याद याद करने में बाद अपनी आखें खोली।

अपने आंसू पोंछ कर वो इधर-उधर देखने लगी। पास में ही एक बियर की बॉटल पड़ी थी। ऐमी उस बॉटल को तोड़कर अपस्यु के पेट के मास्क स्किन को चिर दी। घड़ी में समय देखी और ड्राइविंग करती हुई स्वस्तिका को कॉल लगाई…

"कामिनी कहीं की.. तू यदि मुझे मिल गई ना तो देखना मै तुम्हारा क्या हाल करती हूं।"… ड्राइविंग करती वो पूरे गुस्सा उतारती हुई कहने लगी…

स्वस्तिका:- हेय क्यूटी, कितनी बार सॉरी कहूं… बस मै बंगलौर एयरपोर्ट से बाहर निकल ही रही हूं मेरी जान।

ऐमी:- जहां से आयी है वहीं वापस लौट जा। मेरा प्रोग्राम कब का खत्म हो गया और तू क्या मेरे जले पर नमक छिड़कने आयी है। वैसे भी इस अपस्यु ने मेरा जीना हराम कर दिया आज। इतने नशे में था कि बियर की बॉटल पर गिर गया। एक तो मै अकेली हूं ऊपर से इसकी ऐसी हरकतें। मै ही पागल हो जाऊंगी…

स्वस्तिका:- अरे यार, इसका कुछ नहीं हो सकता। तुम उसे एडमिट करवाओ, मै भी वहां पहुंच रही हूं…

ऐमी:- मै अकेली सब कर लूंगी.. तू दिखियो भी नहीं होस्पिटल में।

ऐमी गुस्से में फोन रखी और एयरपोर्ट के रास्ते में पड़ने वाले हॉस्पिटल में पहुंची। आते ही उसने सारी कहानी बता कर अपस्यु को उस हॉस्पिटल में एडमिट करवाई। नजर बस अब प्रवेश द्वार पर ही था, और प्राण हलख में। तभी जैसे सामने प्रवेश द्वार से उसकी हसी वापस आ रही हो। स्वस्तिका एयरपोर्ट से सीधे हॉस्पिटल आयी और भागती हुई ऐमी के पास पहुंची।

जैसी ही वो ऐमी के पास पहुंची, एक तमाचा उसके गाल पर पड़ा और ऐमी उससे झगड़ा करती हुई ऑपरेशन थियेटर कि ओर चल दी। .. ऑपरेशन फ्लोर पर आते ही वो वाशरूम में घुसी और वहां के सर्विलेंस को हैक करती हुई स्वस्तिका को ऑपरेशन थियेटर में जाने का इशारा कर दी।

3 सेकंड का पॉवर ऑफ हुआ और स्वस्तिका ऑपरेशन थियेटर के अंदर थी। खुद के चेहरे को एंटी गैस मास्क से कवर करके, उस ऑपरेशन थियेटर में उसने एक बेहोशी की गैस छोड़ दी.. बस 5 सेकंड में ही अंदर के डॉक्टर और सभी स्टाफ वहां बेहोश परे थे।…

स्वस्तिका दरवाजा नॉक करती हुई ऐमी को अंदर ली और तेजी के साथ अपस्यु के उप्पर बॉडी मास्क को सावधानी से निकली।…. "ऐमी.. प्लस चेक करो.. ऐमी".. स्वस्तिका को उसे जगाने के लिए थोड़ा चिल्लाना परा…

"हां… कुछ नहीं होगा तुम्हे .. अपस्यु"… बावरी सी बनी ऐमी कुछ भी बोल जा रही थी। स्वस्तिका अपस्यु को इंजेक्शन लगाते हुए ऐमी से कहने लगी…. "जब ये 300 फिट के पर्वत से गिर कर नहीं मारा तो क्या ये बुलेट से मरेगा।.. अब या तो तुम मेरी मदद करो या फिर बाहर जाकर रो लो।"…

ऐमी, दोनों हाथों से अपनी आखें पोंछती… "सॉरी बताओ क्या करना है।"…

2 घंटे के ऑपरेशन और 3 घंटे के मेडिकल सपोर्ट के साथ अपस्यु की स्थिति सामान्य थी। सुबह के लगभग 7 बज चुके थे। अंदर बेहोश डॉक्टर को छोड़कर दोनों बाहर आ गई। ऐमी वापस से वाशरूम जाकर सर्विलेंस पर से अपना कमांड हटाई और चेहरा धोकर वापस आ गई। तबतक स्वस्तिका रिसेप्शन पर पहुंच कर हंगामा मचा रही थी।

वहां के सभी स्टाफ को हड़कती वो कहने लगी… "मै भी मेडिकल प्रोफेशनल हूं, आखिर एक मामूली कट के लिए तुमलोग कितने देर तक मेरे दोस्त को ऑपरेशन थियेटर में रखोगे। कहीं तुम लोगों का किडनी निकाल कर बेचने का इरादा तो नहीं।"

इतने में पीछे से ऐमी भी पहुंच गई और आते ही वो भी उन सब पर बरसने लगी। उसने तुरंत 100 नंबर डायल करके पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई। पुलिस का नाम सुनकर ही हॉस्पिटल प्रबंधन सकते में आ गया। कुछ सीनियर डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर में घुसे, और इधर बेहोश हुए डॉक्टर और स्टाफ, उठकर समझने की कोशिश में जुटे थे कि यहां हुआ क्या था।

सीनियर डॉक्टर्स अंदर घुसते ही पेशेंट् की कंडीशन और उसके कट के ऊपर लगे स्टिच को देखकर कहने लगे…. "मामूली 5 स्टिच करने में आप लोगों को 6 घंटे कैसे लग गए? पेशेंट के साथ आए लोग पुलिस कंपलेंट कर चुके हैं।"…

फिर क्यों किसी को ख्याल आए की रात क्या हुआ था। अब तो मेडिकल और हॉस्पिटल लाइसेंस बचाने कि नौबत आ चुकी थी। तुरंत ड्रामा सेट किया गया, कुछ फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाई गई और हालत को अत्यधिक ही नाजुक दिखाया गया। बियर बॉटल की कांच किडनी में घुसा, कुछ कांच के टुकड़े अंदर टूट गए .. छोटे-छोटे कांच के टुकड़े किडनी के अंदर फसे थे, जिस कारण स्तिथि नाजुक हो गई थी और इन्हीं कांच के टुकड़ों को निकालने में समय लग गया था। पेशेंट अब स्टेबल है लेकिन 4 दिन आईसीयू में रखकर निगरानी देनी होगी। ..

ड्रामा तैयार था.. इधर तबतक ऐमी की शिकायत पर पुलिस भी पहुंच चुकी थी। वहां के सभी डॉक्टर पूरी कहानी के साथ अपस्यु की रिपोर्ट पुलिस को सौंपते हुए अपनी सफाई पेश करने में जुट गए। पेशेंट की हालत जाने बिना शिकायत दर्ज करवाने के लिए पुलिस ने ऐमी को खूब सुनाया। जाने से पहले ऐक्सिडेंट की रिपोर्ट उन्होंने दर्ज की और होश में आते ही उसका सबसे पहले बयान दर्ज किया जाना है ऐसा हॉस्पिटल प्रबंधन को कहते हुए सभी पुलिस वाले वहां से निकल गए।

अब इतना बड़ा ऑपरेशन था तो जाहिर सी बात है माल भी उतना ही लगना था। हॉस्पिटल प्रबंधन ने पुलिस बुलाने कि गलती के लिए ऐमी से ऑपरेशन कि भरी कीमत वसूल लिए। ऐमी खुशी-खुशी अपना कार्ड स्वैप करवाकर वहां से स्वस्तिका के साथ कैफेटेरिया चली आयी।

स्वस्तिका:- अब सब ठीक है, इतने ख्यालों में डूबी रहोगी तो काम कैसे चलेगा।

ऐमी:- नहीं मै अपस्यु के बारे में नहीं बल्कि हमारी पहली मुलाकात को याद कर रही थी।

स्वस्तिका:- अतीत दर्द है उसे छोड़ दो, वर्तमान में जियो और खूब मस्ती करो। चलो अब स्माइल करो..

ऐमी, मुस्कुराती हुई… शुक्रिया स्वस्तिका, तुम नहीं होती तो पता नहीं क्या होता।

स्वस्तिका:- मै नहीं होती तो कोई और होता। अब फिर से वहीं इमोशनल बातें। अच्छा वो छोरो और ये बताओ कि तुम्हारे ये फिगर इतना सेक्सी क्यों होता जा रहा है। कहां तुम्हे समतल मै बुलाया करती थी और आज तो 34 के दिख रहे है।

ऐमी:- मेहनती करती हूं फिगर पर ऐसे ही थोड़े ना बनता है ऐसे फिगर।

स्वस्तिका, आंख मारती हुई कहने लगी….. किसकी मेहनत तुम्हारी या किसी और कि..

दोनों हसने लगे.. फिर गर्ल्स चिट-चाट शुरू हो चुकी थी… एक बार जो बातें शुरू हुई, फिर होती ही चली गई। बातों के दौरान ही स्वस्तिका को कोकीन लाने की कहानी भी पता चली और दोनों ने तय किया कि कल रात उस डिस्को में जाना कुछ ज्यादा ही जरूरी है।

इधर जब तक ऐमी और स्वस्तिका कैफेटेरिया में अपनी चिट-चैट में व्यस्त थी कल रात वाला वो पुलिस दोबारा आया था। इस बार वर्दी में था… सिटी एसपी.. वो आते ही अपस्यु का पूरी केस फाइल देखा फिर वहां के सर्विलेंस को पूरा चेक करने के बाद आईसीयू में जाकर अपस्यु के जख्म देखे और वापस आ गया।

वापस आते ही उसने आरडी के मालिक वेंकट रेड्डी को कॉल लगाया…. "सर कल रात से पूरा नजर बनाए हुए था, पर ये दोनों कोई आम से लड़का लड़की लग रहे है। इनकी फोन कॉल कल से चेक कर रहा हूं। जितने लोगों से इनकी बात हुई है सब दिल्ली में ही है। हां इनका एक कॉमन फ्रेंड वो कल रात इनसे मिलने पहुंची थी।"

रेड्डी:- तुम्हारा मन क्या कहता है.. क्या ये लोग इन्वॉल्व हो सकते हैं?

एसपी:- देखिए सर, दोनों जब से बंगलौर आए हैं बस दोनों साथ में घूम ही रहे थे। मैंने हर जगह के सर्विलेंस को देखा है। दोनों शायद गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड है। पहले दिन ये लोग बंगलौर घूमे। मूवी देखे और वापस अपने होटल। दूसरे दिन भी ये लोग डिस्को में थे.. तीसरे दिन संगीत में हिस्सा लिया था लड़की ने.. और क्या गीत गायी वो.. कोई बनावटी नहीं बल्कि ओरिजनल कला थी वो। अब यदि इनपर फोकस करते रहेंगे, तो हम उन प्रोफेशनल तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे।

रेड्डी:- मै तो इनकी प्रोफ़ाइल देखकर शुरू से कह रहा था ये दोनों नहीं हो सकते तुम्हे ही शक था।

एसपी:- उस दिन के कार चेस को देखकर कुछ शक सा हुआ था। ऊपर से इन दोनों के होटल भी ऐसे लोकेशन पर है जहां से सब कुछ कवर किया जा सकता है।

रेड्डी:- अरे केवल चेस यहीं थोड़े कर रहे थे, वो 8 लोकल लड़के और भी तो थे। वैसे उस लड़की ने ऐसी आग लगाई थी वहां डिस्को में कि कोई भी पीछे पर जाए। अब इस उम्र में अपनी गर्लफ्रेंड के साथ, गाड़ी में स्पीड अपने आप आ ही जाती है। तुम उन बच्चों को छोड़ो और असली चोर को ढूंढो। आखरी वो कौन सा चोरों का ग्रुप है जो मेरे वाल्ट तक घुसने कि हिम्मत कर सकता है।

USA Trip… 18 June 2014…

मिश्रा फैमिली अपने फैमिली फ्रेंड्स के साथ पुनर्मिलन कर रही थी। सभी लोग मेल मिलाप करते हुए बैंक्वेट हॉल में आए जो पहले से इनके लिए आरक्षित रखा गया था। यूएस के रुलिंग पार्टी के सेनेटर और मशहूर उद्योगपति प्रकाश जिंदल अपने परिवार के साथ अपने पुराने मित्र से मिलने के लिए पहुंचे हुए थे।

लेकिन इनके मिलने की विशेष वजह ये भी थी कि जिंदल के छोटे सुपुत्र ध्रुव जिंदल की मुलाकात साची से करवाई जाए। ये दोनों कुछ दिन साथ रहकर एक दूसरे को जान सके और पसंद कर सके, ताकि इनके रिश्ते की बात आगे बढ़ाई जा सके।

इसी नेक ख्याल के साथ दोनों परिवार आपस में मिल रहे थे। इधर साची भीड़-भाड़ से अलग बैठकर लावणी के साथ बातों में लगी हुई थी…. "हेल्लो, आई एम् ध्रुव जिंदल, सन ऑफ मिस्टर प्रकाश जिंदल।"..

साढ़े 6 फिट का, इंडो-यूएस हाइब्रिड, एक दिलकश नौजवान साची के ओर अपना हाथ बढ़ाते हुए अपना परिचय दिया… साची भी उससे हाथ मिलती हुई कहने लगी…. "हाई, आई एम् साची।"

ध्रुव:- आप…. बहुत.... खूबसूरत... लग रही हो।

साची, उसकी बात सुनकर हंसती हुई… "जी शुक्रिया।"

ध्रुव थोड़ा कंफ्यूज होते हुए पूछने लगा…. "क्या… हुआ, ….. आप ऐसे… हंस… क्यों… रही हो।"

इस बार लावणी और साची दोनों हसने लगी…. "सॉरी, वो आप की हिंदी इतनी प्यारी है कि हमे हंसी आ गई।"… साची अपनी हंसी रोकती हुई कहने लगी…

ध्रुव:- वो.. अभी.. मै थोड़ा थोड़ा…. ही सीख.. पाया… हूं… इसलिए.. मै.. तोड़ तोड़.. कर… बोल रहा… हूं। मेरे… कुछ… मित्र… भी… मेरी.. हिंदी.. पर.. ऐसे.. ही.. प्रति…क्रिया ….. देते है।

उसकी बातें सुनकर तो साची और लावणी अपनी हंसी रोक ही नहीं पा रही थी और ध्रुव साची की खिली हंसी में खोया जा रहा था।… "जब… आप.. हंसती है… तो… बाहर… आ.. जाती है…

साची:- व्हाट्… आप ने अभी अभी बाहर कहा…

ध्रुव:- no, sleep of tongue.. it's blossom..

साची:- ओह ! इसे बाहर नहीं बहार कहते है…

ध्रुव:- ब हा र… बहार…

साची:- राईट…

लावणी वहां से उठकर जाने लगी, तभी उसे बिठाते हुए साची पूछने लगी… "तू किधर चली।"..

लावणी:- देख नहीं रही क्या दीदी… बड़ी मां मुझे बुला रही है।

साची:- ठीक है जा…

लावणी, साची को छोड़कर भीड़ का हिस्सा बनने चल दी और इधर साची ध्रुव की हर बात पर हंसती हुई उसके साथ बातें करने लगी। लावणी जब सबके बीच पहुंची तो उसे ऐसा लगा, जैसे वो किसी कन्फ्यूजन के शिकार हुए किसी फिल्मी परिवार से मिल रही है।

साची और ध्रुव को ऐसे हंसकर बातें करते हुए देख सभी लोगों के ख्यालों में ऐसा गलतफहमी का बीज उगा की दोनों की कुंडलियां बदलते हुए कहने लगे… "लगता है दोनों ने एक दूसरे को पसंद करना शुरू कर दिया है… हम भी कुंडलियां मिला ही लेते है।"…
 
Uska भी दे दिया था .... मैंने कहा भी तो था कि आप की आशंका बिल्कुल सही है ... और आप कई सारे विकल्प क्यों दे रहे ... क्योंकि उसके साची लावणी के अलावा उसके भाई का नाम भी था...

तभी तो लिख भी दिया था कि आप की आशंका बिल्कुल सही है और इतने विकल्प की तो जरूरत भी नहीं
 
Update:-59

इधर स्वस्तिका किसी लड़की की आवाज सुनकर फोन स्पीकर पर डालकर अपस्यु से पूछने लगी कि ये कौन है। अपस्यु ने भी इशारों में समझा दिया कि ये आरव की गर्लफ्रेंड है। "आरव की गर्लफ्रेंड" ये बात सुनते ही स्वस्तिका ने कुटिल मुस्कान हंसी, और उसकी इस मुस्कान को देखकर ऐमी और अपस्यु भी समझ गए कि अब तो बजने वाली है आरव की।

स्वस्तिका:- तुम कौन हो जो मेरे डार्लिंग का कॉल रिसीव कर रही। मै क्या ही बताऊं, ये कभी नहीं सुधर सकता।

लावणी, अपनी आवाज़ थोड़ी धीमे रखते…. "सुनिए आपने किसी गलत नंबर पर कॉल लगाया है।"

स्वस्तिका:- ये आरव का ही नंबर है और नॉटी के नाम से मेरा निक नेम सेव होगा। सुन छिपकली बहुत चिपक ली मेरे बॉयफ्रेंड के साथ, अभी के अभी उसे फोन दे और तू कल्टी हो वहां से।

लावणी:- अच्छा मज़ाक कर लेती है आप। जरूर आप आरव की कोई खास दोस्त होगी जो उसे छेड़ने के लिए मुझ से नाटक कर रही है। खैर आप कोई भी हो आरव इस वक़्त कॉल नहीं ले सकता क्योंकि वो गहरी नींद में सोया है।

स्वस्तिका:- ये लड़का मुझ से पिटेगा अब, आने दो इसे वापस। सुनो तुम एक काम करना अभी कॉल डिस्कनेक्ट करके कॉल लॉग में देखो वो मुझ से कितनी बार कॉन्टैक्ट किया है। इसके बाद ऐसा झटका दूंगी की तुम्हे भी यकीन होगा की मै कौन हूं उसकी…

लावणी कॉल डिस्कनेक्ट करती हुई नॉटी का कॉल लोग चेक करने लगी और इधर जबतक स्वस्तिका हंसती हुई कहने लगी… "यार बड़ी प्यारी लड़की है। मुझे मिलना इससे।"..

ऐमी:- हां ये बात तो सच कही। मै भी मिल चुकी हूं।

अपस्यु:- अरे स्वस्तिका रहने दो, कुछ दिन पहले मैंने भी झटका दिया था तब से दोनों में जो बात बंद हुई वो यूएस जाकर शुरू हुई है। अब बात बंद होगी तो ना जाने कब शुरू हो।

"फ़िक्र क्यों करते हो, मै कल उससे खुद बात करके सब समझा दूंगी।"…. स्वस्तिका बोल ही रही थी कि लावणी का कॉल उधर से आ गया।..

स्वस्तिका:- जी लावणी जी देख लिया…

लावणी:- हां देख ली, मै झटके के लिए तैयार हूं…

स्वस्तिका:- हम्मम ! ठीक है फोन स्पीकर पर डालकर तुम उसके कान के पास रखो, मै यहां से धीमे बोलूंगी और वो फटाफट उठकर कोने में चला आएगा बात करने।

लावणी ने ठीक वैसा ही किया जैसा स्वस्तिका ने बताया था… वो फोन स्पीकर पर डाल कर आरव के कान के पास रख दी…. इधर से स्वस्तिका ने बस अपनी श्वांस चलने जितनी आवाज़ में कही होगी…. "अपस्यु जाग गया है।"… आरव अचानक से उठा और आस-पास के माहौल को देखते हुए वो सीधा कोने में चला गया बात करने।

स्वस्तिका ने भी अपस्यु को फोन दिया…. "ज्यादा परेशान हुआ था क्या"…. "हां कह सकते हो, लेकिन अब सब ठीक है। तू बार बार डराया मत कर अपस्यु, तुझे कुछ होता है तो अजीब सी हालत हो जाती है मेरी। तू इतना प्रेशर ना ले.. फील्ड का काम तू मेरे जिम्मे रहने दे बस।"…. "कोई नहीं इसपर आराम से बैठ कर बात कर लेंगे.. अभी वहां पूरी छुट्टी का मज़ा ले।" चंद अल्फाज दोनों भाइयों ने एक दूसरे से कहा और आरव सुकून की श्वांस लेते हुए कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।

कॉल डिस्कनेक्ट करके जब आरव वापस लौटा, लावणी गुस्से से फुफकार मारती वहां से चली गई। आरव अपना सर खुजाता वहां चल रहे माहौल को देख रहा था। कुंजल और साची पागलों की तरह हंस-हंस कर, एक दूसरे के कंधों को धकेल-धकेल, बात करने में लगे थे। उनके लिए तो मानो यहां कोई था भी नहीं और इस ओर लावणी गुस्से में फुफकारकर चली गई....

आरव अपने ख्यालों में.….. "कहीं कल पीने के बाद इसे कुछ कह तो नहीं दिया या फिर इसके बाप को .. सॉरी ससुर जी.. या फिर इसके पापा के साथ, फिर कोई जंग हो गई… अरे यार अभी तो हमारा पैचअप हुआ था और ये क्या नया नाटक शुरू हो गया। कम से कम बता तो देती की किस बात पर मुंह लाल करके गई, सस्पेंस में डाल दी। अब मै कितने बातों के बारे में सोचकर उसे सफाई दूं। साला ये पीना मुझे ले डूबेगा किसी दिन।

आरव फटाफट निकला अपनी लावणी को मानने और ये तक ध्यान नहीं दिया कि सोते वक़्त उसके कपड़े बदले जा चुके थे। वो अंडरवीयर और बनियान में ही बाहर उसके पीछे-पीछे भागा चला जा रहा था, और उसे देखकर वहां के होटल के लोग उसे घूर रहे थे। तभी वहां का एक स्टाफ ने आरव को रोकते हुए समझाया की सर ऐसे कपड़ों में आप बाहर नहीं घूम सकते।

आरव ने अपना हुलिया देखा और अपनी जगह खड़ा होकर मायूसी से लावणी लावणी पुकारने लगा और लावणी बिना पल्टे बस चलती रही और वहां से चली गई।

21 जून … बंगलौर रात के 8 बजे…

अपस्यु को आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था और दोनों लड़कियां होटल पहुंचकर आज रात के तय प्लान के बारे में चर्चा करने लगी… और चर्चा का विषय था आत्मसम्मान। इक्छा के विरूद्ध इन लड़कों की हिम्मत कैसे होती है यहां-वहां हाथ लगाने की… ऐसा सबक की फिर दोबारा किसी लड़की को बिना उसकी मर्जी के बिना छूना तो दूर उनसे बात करने में भी घबराए...

ऐमी:- मै तो कहती हूं केट मूव दिखाते है उन कमीनो को.. तुम क्या कहती हो स्वस्तिका…

स्वस्तिका:- केट मूव नहीं ऐमी। मुझे तंग कड़पे पहनने का मन नहीं है। क्यों ना गर्ल्स ट्रैप करे।

ऐमी:- मुझे आज बदन दिखने का मूड नहीं है।

स्वस्तिका:- कुछ नया करे क्या?

ऐमी:- नए में क्या करना चाहती हो?

स्वस्तिका:- बीडीएसएम (bdsm)

ऐमी:- नाह.. ये नया नहीं है। इन चूजों के हिसाब से ये कुछ ज्यादा बड़ा मूव हो जाएगा। वैसे भी ये मूव पब्लिक प्लेस में नहीं होगा तो क्या फायदा घर के अंदर कितना भी मारो, इनको बेज्जती थोड़े ना मेहसूस होगी। इन्हे तो पब्लिक में बेईज्जत करना है।

स्वस्तिका:- अम्म्म ! फिर देशी राउडी गर्ल ट्राय करें क्या?

ऐमी:- साउंड इंट्रेस्टिंग… इसे फाइनल करते हैं।

स्वस्तिका:- तो फिर चलते है, राउडी गर्ल की शॉपिंग करने।

दोनों निकल चुकी थी देसी राउडी गर्ल बनने। पूरा शॉपिंग करने के बाद दोनों होटल लौटी और फटाफट तैयार हुई। दोनों एक दूसरे को देखते ही हसने लगी। दोनों ने भारतीय नारी वाली साड़ी पहन रखी थी वो भी बिल्कुल सामान्य तरीके से , जैसे आम गृहणी पहना करती है। हाथो में दोनों के हथियारों से भड़ा बैग और रास्ते से दो लड़के को उठाई जिसे कुछ पैसे देकर केवल इतना कम दिया गया था कि वो शूटिंग करे।

पहली झरप डिस्को के मुख्य द्वार पर ही हुई, जहां उनके परिधान के कारण उन्हें अंदर जाने से रोका गया। ऐमी इशारों में रिकॉर्डिंग कर रहे लड़कों के ओर इशारा करती हुई उस रोकने वालों को अच्छे से समझा दी….. कि यदि पारंपरिक पोशाक में उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया तो ये बात कहां-कहां तक फैल जाएगी। साथ में स्वस्तिका ने ये भी समझा दिया कि ये केवल रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि लाइव रिकॉर्डिंग चल रही है इसलिए कोई भी गैर कानूनी हरकत हुई तो इस वीडियो की फाइल केवल फोन मोमरी नहीं, बल्कि 8-10 जगहों पर सेव हो रही है।

मजाल है फिर किसी ने ना-नुकुर भी किया हो। उल्टा नमस्ते करके उन्हें अंदर भेजा गया। अब दोनों पहले बार काउंटर पर आयी... टकीला अपने हाथों में उठकर चीयर्स किया और 4 टकीला के शॉट जल्दी-जल्दी लगा लिए।

इतने में उन ड्रग डीलर की नजर भी दोनों पर गई। अब दोनों ने कपड़े ही ऐसे पहने थे कि हर कोई उन्हें ही घूर रहा था। दोनों ने ऐमी को पहचान कर आपस में बात करते हुए उसके ओर बढ़ चले….

ऐमी और स्वस्तिका टकीला शॉट खत्म करके जब नजर घुमाई तभी ऐमी को भी वो दोनों उनके ओर आते हुए दिख गए…. "स्वस्तिका आ गए अपने शिकार, तू बैग खोलकर तैयार रह।"

स्वस्तिका अपने साथ लाए बैग को पूरा खोल कर रख दी, ताकि जरूरत के वक़्त तेजी से उनमें से हथियार निकलकर राउडीगीरी दिखाई जा सके। ऐमी और स्वस्तिका बार काउंटर के राउंड टेबल पर बैठी थी, और दोनों आते ही साड़ी के ऊपर से, उनके कमर के नीचे हाथ फेरते हुए कहने लगे… "क्या जानेमन आज धंधा करने आयी है क्या यहां।"..

दोनों अपना गर्दन घुमा कर प्यारी सी स्माइल देती हुई कहने लगी… "नो माय लव… हम दोनों यहां राउडीगिरी दिखाने आए है।"… इतना कहकर ऐमी और स्वस्तिका ने तेजी के साथ अपना लात उठाकर उसके सीने पर लात जमा दी। दोनों धक्का खाकर कुछ दूर पीछे गिरे।

उधर दोनों ड्रग डीलर धक्के खाकर फ्लोर पर गिरे और इधर ऐमी और स्वस्तिका ने तेजी के साथ बैग से अपना पहला हथियार निकाली… दोनों के हाथ में बेलन थी, और मारने कि काला में तो दोनों ने महारत हासिल किया ही हुआ था।

अब माहौल कुछ ऐसा था, ये जगह उन दोनों ड्रग डीलर की। एक तरह से घर मान लीजिए। दो सामान्य सी तैयार होकर आयी भारतीय लड़की.. और उसने सब लोगों के बीच वहां के सबसे जाने माने चेहरे को लात जमा कर सबके बीच मारा..… अकेले में भी उन दोनों ड्रग डीलर के साथ ऐसा होता, तो दोनों को बेज्जती मेहसूस होती, फिर तो उनके साथ ये कांड भरी सभा में हो गई। ऊपर से ऐमी और स्वस्तिका के पहनावे के कारण वहां मौजूद सभी लोग उन्हें ही देख रहे थे। लात जमा कर धक्का जैसे ही दिया, सब जोर-जोर से हसने लगे।

अपनी बेज्जती का बदला लेने के लिए, दोनों ड्रग डीलर तेजी से उनपर झपटे और उनका हाथ आंचल के ओर बढ़ रहा था। ऐमी और स्वस्तिका ने अपना बेलन को चाकू की तरह पकड़ी और पहले तो नीचे पूरे जोड़ के साथ घुसेड़ी। अंडकोष में वो बेलन ऐसा घुसा की दोनों बाप-बाप चिल्लाने लगे। आंचल के ओर बढ़ता हाथ जब नीचे जाने लगा, अपने अंडकोष को पकड़ कर सहारा देने के लिए तभी ऐमी और स्वस्तिका ने पूरे ताकत से दोनों की कलाइयों पर ऐसा बेलन चलाया की कलाई की हड्डी टूट गई।

"औरतों की इज्जत करना सीख, ये आंचल मां का होता है जो तुझ जैसी कमीनो को भी दूध पीला कर पालती है और तू साला इसी आंचल को हाथ लगाने के लिए अपना हाथ बढ़ा रहा था। रेस्पेक्ट द वुमन".... स्वस्तिका दहारी..

स्वस्तिका की बात पूरी ही हुई थी कि तबतक वहां बाउंसर पहुंच गए और दोनों को पकड़ने की कोशिश करने लगे… तभी ऐमी उन बाउंसर्स को नसीहत देती हुई कहने लगी…… "कोई मेल बाउंसर ने हाथ लगाया तो सीधा जेल जाएगा। जिसे जेल जाने का शौक हो और विश्वास हो कि उसका मालिक लाखों खर्च करके उसे बाहर निकाल लेगा, वहीं बस हाथ लगाए।.. क्योंकि वीडियो लाइव रिकॉर्ड हो रहा है… हमे किसी मर्द ने हाथ लगाया तो तुम्हरे साथ-साथ इस क्लब पर भी तला लगा होगा।"..

जो बाउंसर जहां थे वहीं रुक गए… दोनों ड्रग डीलर वहीं नीचे जमीन पर कर्राहते हुए अब भी मुंह से अपशब्द निकाल रहा था। और इधर पुरुष बाउंसर तो आगे नहीं बढ़े लेकिन 4 महिला बाउंसर वहां पहुंच गई।

दोनों इसके लिए भी पहले से तैयार थी। "सॉरी बहना".. कहती हुई दोनों ने तेजी के साथ बैग से रस्सी निकली और उन्हें पकड़ने के लिए बढ़े हाथ पर बड़ी तेजी से वो रस्सियां बांधती, सबको बांध कर वहीं बिठा दी…

स्वस्तिका बैग से झाडू निकालकर एक झाड़ू ऐमी के ओर उछाल दी। ऐमी उसे पकड़ती हुई…. "स्वस्तिका, अभी तक दिमाग कि गंदगी नहीं मिटी इनकी, जरा चेहरे की अच्छी से सफाई तो करी।"….. "बड़े ही शौक से ऐमी"… और फिर वो प्लास्टिक के सिक वाली झाड़ू से, 10 झाड़ू उनके चेहरे पर मार-मार कर तोड़ डाली…

सभी झाड़ू जब उनके चेहरे पर मार-मार कर दोनों ने तोड़ डाला, तब दोनों …. "ये हम लड़कियों का तुझ जैसे कमीनो के लिए देशी उपचार। किसी वक़्त भी इस उपचार की जरूरत हो बता दियो… हथियार 24 घंटे उपलब्ध रहता है।"..

चेहरे से खून तो नहीं निकला उनके, पर ऐसा लग रहा था कि पूरे चेहरे पर दोनों ने टैटू गोद दिया हो। … "ओ ऐमी, अभी इन दोनों ने हमारे बैंक को भी हाथ लगाया था ना।"…. "हां.… इनको हमारे बैंक पर हाथ डालना बहुत अच्छा लगता है स्वस्तिका, इसने तो उस दिन भी मेरे बैंक पर हाथ फेरा था।"….. "तो चल जरा पेबैक करे और समझा दे की जब ये हमारे बैंक पर हाथ डालते है तो हमें कैसा फील होता है।"

बैग के अंदर का पूरा बेलन अब फ्लोर पर फैला था। दोनों को लात मार कर उल्टा किया गया और जो ही उनके पिछवाड़े पर दोनों ने बेलन तोड़ा। पुलिस जबतक मामला संभालने आयी, तबतक तो वहां के फ्लोर पर पूरा टूटा हुआ बेलन, बिखरा पड़ा था, और पास खड़ी लड़कियां जो इनका शो देख रही थी, अपने अंदर अच्छा मेहसूस करती, दोनों का उत्साह बढ़ाती हुई पूरा हूटिंग कर रही थी।

2 लेडी कॉन्स्टेबल जब उन्हें पकड़ने पहुंची तब वहां के लड़कियों ने घेर लिया उन्हें और ले जाने के विरूद्ध अपना मोर्चा खोल दी… ऐमी सबको पीछे हटने का इशारा करती हुई कहने लगी….. "बहनों इन कमिने लोगों को बाहर से हथियार खरीदने की जरूरत पड़ती होगी… हम है राउडी गर्ल्स और हमारे हथियार 24 घनेट हमारे घर में होते है… जो हमारी दादी से लेकर हम सब लड़कियां रोज इस्तमाल करती है। कोई तुम्हे छेड़े और जबरदस्ती छुए तो बन जाओ राउडी गर्ल.."

स्वस्तिका ऐमी को देखकर हंसती हुई कहने लगी…. "तू क्या अब इनकी लीडर बनेगी। लंबा लंबा भाषण… अब चल यहां से"… दोनों लड़कियां यहां से अरेस्ट होकर थाने जा रही थी और इधर इनका करनामा पूरे देश में वायरल हो रहा था। थाने पहुंचने तक तो इनकी न्यूज ब्रेकिंग न्यूज बनकर राष्ट्रीय न्यूज चैनल में दिखाया जा रहा था और जो भी इस न्यूज को देखता बस "वाह-वाह जियो शेरनियों"… ऐसा ही कहता।

इतने बड़े कांड को सिन्हा जी, नंदनी, यहां तक कि विदेश में बैठा मिश्रा परिवार, साची लावणी कुंजल आरव सब ने देखा। और जो नहीं देख पा रहे थे लोग उन्हें कॉल करके देखने बोल रहे थे।
 
Update:-60

इतने बड़े कांड को सिन्हा जी, नंदनी, यहां तक कि विदेश में बैठा मिश्रा परिवार, साची, लावणी, कुंजल, आरव सब ने देखा। और जो नहीं देख पा रहे थे लोग उन्हें कॉल करके देखने बोल रहे थे।

माहौल कुछ ऐसा हुआ कि डिस्को की लड़कियों ने अपने सारे मित्रों को संदेश भेजना शुरू कर दिया। हर संदेश के पहले वीडियो और उसके नीचे लिखा होता "ये सम्मान की लड़ाई है। पुलिस को इन्हे छोड़ना ही होगा।"… फिर क्या था। रात के 12 बजने वाले होंगे। ऐमी और स्वस्तिका को थाने लाकर उन्हें अभी बिठाए 2 मिनट भी नहीं हुए थे कि पूरा पुलिस स्टेशन को कई सारे लड़के लड़कियों ने घेर लिया। और पुलिस स्टेशन का घेराव करके दोनों को रिहा करने की मांग करने लगे।

इधर न्यूज में जब सिन्हा जी ने अपनी बेटी को एक्शन करते देखा, फिर तो उन्होंने सबसे पहले अपना बॉटल निकाला, दूसरे चैनल से वीडियो को रिपीट देखा और हर एक्शन पर जाम को हवा में लहराते हुए पीने लगे। 3 पेग पिने के बाद उन्होंने सीधा बंगलौर के सबसे नामी वकील को फोन लगाया और साथ में वहां के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को कॉन्फ्रेंस में लेते हुए सीधा बोल दिए, 5 मिनट के अंदर उसकी बेटी और उसके दोस्त को बेल मिल जानी चाहिए, बाकी मै कोई फ़्री सर्विस नहीं लेता।

सिन्हा जी के कॉल पर वो मजिस्ट्रेट और वकील दोनों अपने घर से उसी वक़्त निकले पुलिस स्टेशन। निकलने से पहले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने मौके पर कमिशनर और सिटी एसपी को भी आने के लिए कह दिया।

हंगामे के बीच उस पुलिस स्टेशन में एक-एक करके सभी आला अधिकारियों की गाड़ी पहुंची। इधर सब अधिकारी अंदर घुसे और उधर दोनों को छोड़ दिया गया। फिर तो जैसे भीड़ में खुशी की लहर दौड़ गई थी। पूरी भीड़ दोनों को पूरा रेस्पेक्ट देते हुए उन्हें होटल तक छोड़ कर आयी।

USA.. 21 June….

दिन के लगभग 12 बज रहे होंगे। मिश्रा परिवार के सभी सभी सदस्य के बीच कुंजल अाकर बैठ चुकी थी। राजीव मिश्रा छोटे मुंह परिचय देते हुए जब मनीष से बताया कि ये उसी लड़के की बहन है जो एयरपोर्ट पर आया था, तब मनीष का चेहरा देखने लायक था।

उसे कुछ समझ में नहीं आया कि वो अपने भाई को क्या कहे, क्योंकि आरव के पीछे गुंडे भेजने में मनीष का भी तो हाथ था। मनीष इससे पहले कोई प्रतिक्रिया देता सुलेखा ही बोलने लगी….

"जो भी हो हमने उस लड़के को समझने में थोड़ी सी गलती कर दी, दोनों भाई अच्छे है।"… सिर झुकाकर ही सही, बेमन से ही सही, लेकिन सुलेखा ने ये बात मान ली और उसकी बात का समर्थन ना चाहते हुए भी राजीव को करना पर गया।

दोनों दंपति के सच कबूलते ही जैसे मनीष मिश्रा भी पिघल गए हो और उन्होंने कुंजल का ऑफिशयल स्वागत किया। साथ में आरव को भी बुलवाया गया, एयरपोर्ट के हरकतों पर माफी मांगने के लिए। सब मिलकर आज साथ लंच का प्लान किए और फिर बातचीत का दौर चलता रहा।

वैसे मिश्रा परिवार में 2 लड़के भी थे और दोनों को कुंजल कुछ ज्यादा ही भा रही थी। दोनों किसी ना किसी विधि उसे अपने साथ बातचीत में लगाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे। लेकिन कुंजल को साची छोड़े तब ना वो किसी और से भी बात करे। दोनों अलग ही अपनी दुनिया बनाए खुश थे।

बच गया आरव, जो बेचारा लावणी का गुस्से से भड़ा चेहरा देखकर मायूस हो जाता और इशारों में मिन्नतें करता की प्लीज एक बार बात तो सुन लो। किंतु लावणी सब कुछ समझ कर भी ना समझने का अभिनय कर रही थी। ये सब आपस में लगे ही हुए थे कि तभी वहां के हिंदी न्यूज चैनल पर भी ऐमी और स्वस्तिका की वीडियो चलने लगी।

उसे सबसे पहले साची ने ही देखा। साची ऐमी को देखते ही कुंजल को टीवी दिखाने लगी.. और दोनों पूरा न्यूज देखने टीवी के बिल्कुल करीब पहुंच गई। यहां तो उसके हर एक्शन पर कुंजल और साची हैरान होकर एक दूसरे का मुंह ही देख रहे थे। …. "कुंजल इसे तू जानती है।"…. "हां रे जानती हूं।"…. "कुंजल ये तो बॉम्ब है यार… कुछ दिन पहले लावणी ने कही थी ये बात, पर मुझे उसके बात पर यकीन से ज्यादा तो उससे नफरत थी। लेकिन आज इसे देखकर यार गर्व टाइप फील हो रहा है।……. "मुझे तो हूटिंग करने की इच्छा हो रही है साची।"…. "मेरी भी।"..

फिर दोनों एक साथ हूटिंग करती हुई तालियां बजाने लगी। दोनों को ऐसा करते देख सब का ध्यान उधर गया… अनुपमा साची की हरकत पर गुस्सा होती उसके ऐसे व्यव्हार के लिए पूछने लगी"..

साची उसे अपने पास बुलाते न्यूज देखने बोली। अनुपमा ने जब साड़ी में एक्शन होते देखा और बीच में बोले गए वो मां के आंचल वाले डायलॉग और वो बैंक कि कहानी… फिर तो अपने बच्चों के साथ वो भी हूटिंग करने लगी।

इधर भीड़ कि नजर जैसे ही टीवी पर केन्द्रित हुई, आरव फाटक से लावणी के गाल को चूमकर सीधा खड़ा हो गया…. "तुम्हे बहुत मस्ती चढ़ रही है.. जैसा वो ऐमी ने उसके साथ किया, वहीं हाल तुम्हारा भी करूंगी… दूर रहो मुझसे।"

आरव:- मै चिल्लाने लगूंगा, यदि तुमने नहीं बताया कि गुस्से में लालाम लाल क्यों हो?

लावणी:- हुंह ! जाकर अपनी उस नॉटी गर्लफ्रेंड से पूछो। मुझ से तो तुम बात भी मत करना।

आरव:- मेरी तो एक ही नॉटी गर्लफ्रेंड है और वो तुम हो। इसलिए तुम्ही से तो पूछ रहा हूं।

लावणी:- चल झूठे, मै किसी गोरे पर यकीन कर लूं, लेकिन तुम पर नही। कम से कम उनके इतनी तो कट्सी होती है कि एक वक़्त पर एक गर्लफ्रेंड रखते है। तुम जैसा झूठा तो नहीं होते जो 3-4 गर्लफ्रेंड मेनटेन किए होते है।

आरव:- बेबी कोई तो कन्फ्यूजन है, मै तुम्हारी कसम खाता हूं कि मेरी सिर्फ 1 ही गर्लफ्रेंड है। इनफैक्ट तुम तो गर्लफ्रेंड नहीं बल्कि मेरी सफर की हमसफ़र हो।

आरव:- और वो नॉटी कौन है..

नॉटी का नाम सुनकर आरव बोलते बोलते रुका… फिर कुछ सोचा और फिर सोचकर बोलने लगा… "वहां टीवी पर देख रही हो, उसमे से तुम किसे पहचानती हो?

लावणी:- वो जो मस्त डायलॉग बोल रही है ऐमी, उसे जानती हूं।

आरव:- और उसके साथ जो है वो है नॉटी… नाम की तरह पूरी नॉटी। नॉटी, परिवार का एक प्यारा हिस्सा है.. हम दोनों भाइयों कि पहली बहन… अब तो तुम समझ गई ना या अब भी कोई क्लैरीफिकेशन बाकी है।

लावणी:- अच्छा ऐसी बात है तो प्रूफ करो..

आरव:- मानना है तो मानो ना मानना है तो मत मानो। मुझ से ये सबूत दिखाओ और बेगुनाही प्रूफ करो ये सब नहीं होता।

लावणी:- अच्छा और ये 5 मिनट से क्या चल रहा है… कौन क्लैरीफिकेशन दे रहा था और मुझे समझाने की कोशिश कर रहा था।

आरव:- नकचढ़ी कहीं की। जा रहा हूं … गुस्सा होकर..

लावणी कुछ पल बाद… गए नहीं, यहीं खड़े हो।

आरव:- हां जा ही रहा हूं.. रोकोगी भी तो नहीं रुकने वाला…

लावणी लंबी जम्हाई लेती हुई कहने लगी….. "अब एक ही बात को बोल-बोल कर सुला ही दोगे क्या?"

आरव, लावणी को आंख चढ़ा कर देखते हुए वहां से जाने लगा.. तभी लावणी उसे पीछे से रोकती हुई कहने लगी…. "अच्छा सुनो"…

आरव खुश होते उसके करीब अाकर…. "थैंक्यू.. मुझे लगा तुम्हे मेरे होने ना होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ता, अच्छा हुआ जो रोक ली।"

लावणी:- ना ना.. तुम गलत समझ रहे हो.. मैंने तो इसलिए रोका था कि यदि तुम जा रहे हो तो एक प्लेट खाना कैंसल करवा देते है। फालतू का मेरे पप्पा का बिल बढ़ेगा….

आरव नाक, आंख, कान, सब सिकोड़ते वहां से निकल गया और अाकर वीरे के पास बैठकर उससे बात करने लगा। इधर जब लावणी और आरव अपनी बातें कर रहे थे, उनको लगा वो इतने धीमे बोल रहे हैं कि कोई उन्हें नहीं सुन सकता। लेकिन उनकी पूरी बात सुलेखा ने सुन चुकी थी।

22 जून बंगलौर......

बीती रात के हंगामे को लेकर ऐमी और स्वस्तिका सुर्खियों में थी। जहां से गुजरती जो पहचान जाते बस उन्हें रोककर यही कहते की कल कमाल कर दिया… होटल से लेकर हॉस्पिटल तक हर जगह लोग घेर लेते। इन दोनों के कारनामे से अपस्यु की हसी भी नहीं रुक रही थी, साथ में अन्य लोगों की तरह उसे भी ऐमी और स्वस्तिका पर गर्व महसूस हो रहा था।

अगले दिन तीनों हॉस्पिटल में बैठे थे, साथ में बीती रात की घटना को लेकर तीनों हंसी मज़ाक कर रहे थे। तभी अपस्यु, स्वस्तिका से लावणी के बारे में पूछने लगा… "क्या उसने कॉल करके सब बता दिया।"..

स्वस्तिका अपस्यु से नंबर लेकर उसे कॉल लगाई। लावणी कॉल पिक करती… "दीदी प्रणाम"… स्वस्तिका आश्चर्य से सबके ओर देखती और सब इशारों में पूछने लगे क्या हुआ… स्वस्तिका ने स्पीकर पर फोन डाला… "क्या बोली"..

लावणी:- फोन स्पीकर पर डालकर पूरे ग्रुप को सुना रही हैं क्या दीदी.. ऐमी दीदी को भी प्रणाम कहिएगा… आपके कारनामे यूएस में भी हिट हैं।

लावणी की बात सुनकर तीनों जोड़-जोड़ से हंसने लगे… अपस्यु, कहने लगा… "लावणी कैसी हो।"

लावणी:- अच्छी हूं। वैसे आप नहीं आए बाकी सब तो यहां पहुंचे हैं।

अपस्यु:- मुझे यहां थोड़ा काम था इसलिए नहीं आ पाया। तुमलोग मज़े करो वहां।

स्वस्तिका:- सुनो लावणी तुम्हे आरव ने सब बता दिया।

लावणी:- वो नहीं भी बताता तो भी मै कल ही जान गई थी कि आप मज़ाक कर रही है।

स्वस्तिका:- नाय नाय .. झूट बोल रही ..

लावणी:- अच्छा आप मुझे एक बात बताओ, जब मैंने अपना नाम बताया ही नहीं तो आपको क्या मेरा नाम का सपना आया था।

स्वस्तिका:- शिट ! मतलब तुमने उससे झगड़ा नहीं की।

लावणी:- ऐसा भी हो सकता है क्या? मौका मिले और झगड़ा ना करूं। जब वो मुझे मानता है ना, तब मुझे बहुत अच्छा लगता है। और वो क्यूट सा चेहरा… जब मायूसी भरे चेहरे पर वो उम्मीद के साथ मेरी ओर इशारा करता है… हाय क्या बताऊं… मै आगे अपनी फीलिंग नहीं बता सकती..

तीनों एक साथ…. उफ्फ ये मोहब्बत..

लावणी:- मै अब रखती हूं बस एक संदेश के साथ.. हो सके तो आप आ जाओ, साची दीदी बिल्कुल भी खुश नहीं है और यहां उनके लिए लड़का भी फाइनल हो रहा है। अब मै रखती हूं।

लावणी ने फोन रख दिया और अपस्यु बात को अलग दिशा मोड़ते हुए कुछ अलग ही टॉपिक पर बात करना शुरू कर दिया…

सेल रिकवरी सब्सटेंस के थेरेपी के साथ अपस्यु जल्द ही ठीक हो रहा था। स्वस्तिका सबसे बचाकर हर दिन, मास्क बॉडी निकालकर उसके घाव का निरक्षण करती। 26 तारीख तक अपस्यु, ऐमी और स्वस्तिका के साथ वापस दिल्ली लौट गया। एयरपोर्ट से ऐमी अपने घर चली गई और स्वस्तिका को साथ लेकर अपस्यु सीधा अपने घर पहुंचा।

लेकिन जब वो घर पहुंचा तब उसे झटका ही मिला। घर पहुंचकर पता चला कि मां तो वहां है ही नहीं, वो 2 दिन पहले यानी कि 24 तारीख को ही यूएस के लिए निकल गई। अपस्यु आश्चर्य में पड़ गया, वो फोन निकालकर एक तरफ से सबको फोन लगाया लेकिन किसी ने भी उसके कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। वो लगातार कॉल लगता रहा लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं।

अपस्यु अपना सर पकड़ कर बैठ गया। स्वस्तिका उससे पूछने लगी कि क्या हुआ.... लेकिन अपस्यु अपने सोच में इस कदर डूबा रहा की वो स्वस्तिका के बातों पर ध्यान ही नहीं दे सका। स्वस्तिका एक बार फिर उसे टोकी और उसे अपने सोच से बाहर लाते हुए कुछ पूछना चाहती थी, लेकिन उससे पहले ही अपस्यु बोलने लगा… पार्थ को फोन लगाकर कहो 28 तक शिकागो पहुंच जाए।

इधर अपस्यु ऐमी को फोन लगाते हुए कहने लगा… डिलीट फाइल का बैकअप लेकर फाइल को प्रिंट करो, हम ये काम ख़त्म करके आज रात यूसए निकल रहे है।
 
Update:-61

USA Trip....

सुलेखा के कानो में जब से अपनी बेटी और आरव की बातें गई थी वो गुस्से में नागिन कि तरह फुफकार मार रही थी। अब तो बस वो सही मौके की तलाश में थी। थोड़ी ही देर में पूरी मिश्रा फैमिली खाने पर थी, और उन्हें ज्वाइन करने यूएस सेनेटर और उद्योगपति प्रकाश जिंदल का बेटा ध्रुव भी पहुंचा हुआ था।

जब साची ध्रुव के साथ बैठी तब कबीर के लिए अच्छा मौका था कुंजल से कुछ बातें करने की। वो कुंजल के पास आकर बैठ गया। एक ओर से कबीर और दूसरे ओर से नीरज, और दोनों ने एक साथ उसे "हाई" कहा… लेकिन कबीर "हाई" कहते हुए, पीछे से उसके पीठ पर हाथ रख दिया। जब कुंजल उसकी इस हरकत पर प्रतिक्रिया देती हुई उसकी ओर मुड़ी, तब कबीर अपनी एटिट्यूड वाली मुस्कान उसे दिखाने लगा।

कुंजल:- इंडिया में तो समझ में आता है कि एक लड़की के पीछे लड़के पड़े है। तुम तो यहां अाकर भी ऐसा कर रहे। इतनी खराब रेपो है कि तुम्हे यूएस में भी कोई गर्लफ्रेंड या टाइमपास नहीं मिल रही।

थे तो मिश्रा परिवार के ही, कुछ तो पिताजी वाला गुण तो रहेगा। बेज्जती ऐसी हुई की कबीर बिलबिलाता हुआ कुंजल के कानों के पास धीरे से कहने लगा…. "हमने सोचा तुम जैसे गवार को हम जैसा इंटरनेशनल हंक मिल जाएगा… वरना यहां तो रोज रात को बिस्तर में नई-नई लड़कियों कि कमी नहीं रहती।"

कुंजल उसकी बातों पर मुस्कुराती हुई धीरे से उसे कहने लगी…. "तुम्हे देखकर ही पता चलता है… उन लड़कियों को रात में कोई मिला नहीं होगा तो अपने मज़े के लिए तुझ जैसे लल्लू को पकड़ ली होगी या फिर तुमने बाज़ार से किसी को उठा लिया होगा… ख्याली पुलाव में डूबे रहो डार्लिंग।"

सामने पूरा परिवार बैठा हुआ था, कबीर अपना गुस्सा भरा चेहरा अनचाही हसी में छिपाए, वहां से उठकर दूसरी जगह चला गया… उसके जाते ही नीरज कुंजल से कहने लगा… "ऐसा क्या बोल दिया उसे, जो वो उठकर भाग गया।"

कुंजल:- उसी से पूछ लेना, फिलहाल मै खाना खा लूं, खाकर बात करते है।

नीरज:- ये भी सही है। वैसे एक बात जो मै कहे बिना नहीं रह पाऊंगा…

कुंजल:- ओह कम ऑन.. अब तुम्हे मै इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की तो नहीं लगने लगी।

नीरज:- हाहाहा… सॉरी मै ऐसे फ्लर्टिंग नहीं करता, और खाते वक़्त तो बिल्कुल भी नहीं। बस थैंक्स कहना था। मेरी बहने कोई दोस्त को लेकर नहीं आयी थी और मेरे पागल घरवाले किसी भी सोसायटी में चले जाएं, उनसे गांव नहीं छूट पता। तुम हो तो कम से कम तुम्हारे साथ वो कहीं घूम तो सकती है। वरना मेरी मजबूरी तो ऐसी है कि, मै जानता भी रहूं की वो लोग गलत है फिर भी उनका विरोध नहीं कर पाता।

कुंजल, नीरज के ओर देखती हुई…. "तुम अपनी बहनों को बहुत प्यार करते हो।"

नीरज:- पता नहीं, शायद मुझे अपनी बहनों से वह लगाव नहीं है जैसा वो दोनों अपने भाइयों से रखती हैं। जब मै उनके ऊपर मेरे घरवालों की पहरेदारी देखता हूं, तो मेरा दिमाग खराब हो जाता है। अभी साची की उम्र ही क्या होगी… आज कल तो भारत में 20-21 में किसी लड़की की शादी नहीं होती, लेकिन इन्हे देखो, यदि लड़का पसंद आ गया तो यहां सब प्लैनिंग हो चुकी है।

कुंजल:- अब इसमें मै क्या कर सकती हूं। ये तुम लोगों का आंतरिक मामला है।

इधर दूसरी ओर पूरा मिश्रा परिवार ध्रुव को खिलाने में जुटा हुआ था। बेचारा सोच कर आया था कि आज साची से आज शाम के बारे में पूछेगा, लेकिन पूरा परिवार था कि घेरे बैठा हुआ था उसे। लावणी के लिए यह अच्छा अवसर था और वो चुपके से वहां से निकल गई।

वेटर को 806 में खाना सर्व करने बोलकर, वो मीठी सी मुस्कान अपने चेहरे पर लिए, चहकती हुई चल दी आरव के पास। सुलेखा की नजर तो पहले से लावणी पर थी, लेकिन जैसे ही वो माहौल से निकलने की कोशिश करने लगी, अनुपमा ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया।

बेल बजी, और आरव जोर से चिल्लाते हुए कहने लगा "दरवाजा खुला है।".. लावणी अंदर आयी, आरव कुर्सी पर अपना सिर टिकाए आखें मूंदे हुआ था। लावणी अाकर उसके गोद में बैठ गई और अपने दोनों पाऊं ऊपर करती उसके कंधे में अपने बाहों का फंदा डाल दी।

आरव उसके कमर में अपनी बाहों को लपेटकर, अपने होंठ उसके गालों पर फिराते हुए कहने लगा… "मुझे लगा आज भी मै भूखा ही रहूंगा।"…… "ऐसे कैसे भूखा रहते, कल तो भैय्या के लिए परेशान थे, इसलिए मैंने छोड़ दिया। लेकिन अब चिंता की कोई बात नहीं है।"…

आरव अपने चेहरे को पीछे करके उसे देखने लगा…. "तुम कल रात आयी थी यहां।"

लावणी, आरव के कान के नीचे धीमे से काटती हुई कहने लगी… "हां कुछ नॉटी खयालात के साथ आयी थी, लेकिन तुम्हे बेबस देखकर मुझे लगा।"…

आरव:- क्या लगा लावणी..

लावणी:- बस यही की किसी दिन मै भी भैय्या की तरह तुम्हारे दिल में इतनी जगह बना पाऊं की तुम भी उनके जितना मुझे प्यार करो।

आरव उसे जकड़ते हुए कहने लगा…. "उसके लिए बेबस हुआ था तुम्हारे लिए सब को बेबस कर दूंगा। और कभी सोचना भी मत की तुम्हारे बिना मेरी हालात बहुत अच्छी होती है।"

लावणी:- छोड़ो भी ये बातें। वैसे नॉटी से मेरी बात हुई थी। भैय्या को क्या हुआ था आरव।

आरव:- ये तुम अपस्यु को भैया क्यों कह रही हो, बड़ा ही अजीब लग रहा है।

लावणी:- बोलने में मुझे भी अजीब लग रहा है, लेकिन हमारी शादी के बाद वो मेरे जेठ हुए, तो अभी से भैय्या कहने की प्रैक्टिस कर रही हूं।

आरव:- मछली अभी पानी में ही है, और तुम मसाला पीस कर तैयार रहो फ्राई करने के लिए।

लावणी:- पानी में मछली है, तो कभी ना कभी घर भी आ ही जायेगी पकने, सारी तैयारियां पहले से होनी चाहिए।

लावणी की शरारती नजरों को देखते हुए आरव मुस्कुराने लगा। अपने होंठ को उसके होंठ के पास ले जाते हुए, दोनों अपने कब से सूखे अरमान का इजहार करते उसी में डूब गए। लंबा चला ये किस्स दोनों की श्वांस को सीने में कैद किए बस चलती ही जा रही थी।

तभी वहां के रूम कि बेल बजी, दोनों अपने प्यारे से अनुभव को मुस्कुराहट के साथ तोड़ते हुए, लावणी दरवाजा खोलने चली गई। वेटर दरवाजे पर खाना लिए खड़ा था। लावणी खाना लेकर अंदर आयी और वापस आरव के गोद में बैठकर एक निवाला उसे खिलाती और दूसरा निवाला खुद खाती।

दोनों का खाना अभी मध्य में ही था की साची और कुंजल बिना नॉक किए उस कमरे में आ धमकी। सामने का नजारा देखकर कुंजल बोलने लगी… "ओय कुछ शर्म आती है कि नहीं।"..

आरव, अपना बायां हाथ दिखाते…. "कृपया आप दोनों हमे बिना परेशान किए, आप हमे खाते हुए देख सकते है, और यदि देखा नहीं जा रहा है तो कृपया दूसरे कमरे में चले जाएं।"

"बस 2 मिनट रुक जाओ पीछे से सुलेखा मिश्रा भी आ रही है यहीं"… साची अभी आधा ही बोली थी, कि लावणी हड़बड़ा कर नीचे उतर आयी और भागी उस कमरे से…

आरव:- दोनों ने मिलकर भागा दिया ना उसे, अच्छा नहीं किया..

कुंजल:- पागल हम सच कह रहे है। वो वाकई में तुम्हारा रूम नंबर पूछ रही थी।

आरव:- बेड़ा गर्क हो इसका। क्या वाकई में इधर आ रही हैं वो।

कुंजल:- हां भाई सच कह रही हूं, …

आरव:- भागने दो फिर मुझे भी यहां से। तुम दोनों बोल देना मै यहां हूं ही नहीं कहीं घूमने निकल गया हूं।

आरव अपनी बात कहकर वीरभद्र के कमरे में पहुंच गया और दरवाजा लगाकर उससे बातें करने लगा… इधर साची, कुंजल से आंख मारती हुई पूछने लगी… क्या बातें हो रही थी मेरे भैय्या से..

कुंजल:- वहीं फर्स्ट टाइम बॉय एंड गर्ल टॉक…

साची:- हीहिहिही… तो तूने क्या कहा..

कुंजल:- मैंने कहा पनीर पकोड़ा मस्त बना है, जो भी ऐसा पनीर पकोड़ा बनाकर मुझे खिलाएगा, मै उसकी गर्लफ्रेंड।

साची:- ओह हो मतलब अपने लिए सर्टिफाइड बावर्ची ढूंढ़ रही है।

कुंजल:- हीहीहीही… मेरी छोड़ अपनी बताओ। तुम आज अपने रजिस्टर्ड होने वाले के साथ कहां जाने वाली हो घूमने…

साची:- पता ना अब वो जहां ले जाए…

कुंजल:- क्या हुआ किस शंका में डूबी हो…

साची:- नहीं शंका नहीं है, बस कुछ सोच रही हूं…

कुंजल:- क्या ?

साची, मुस्कुराती हुई… वो मै अभी नहीं, जब उस लल्लू के साथ घूमकर वापस आऊंगी तब बताऊंगी….

कुंजल उसे आंख मारती…. "ओह हो दिल पिघल रहा है क्या?"…

साची:- दिल तो अभी पिघलने से रहा, बस मन बना रही हूं… मन को भा गया तो दिल पिघलने में वक़्त ही कितना लगेगा…

कुंजल:- बेस्ट ऑफ लक डार्लिंग। चल तू इतना मेहनत कर रही है तो मै भी तेरे लिए आज दुआ मांगने जाऊंगी…

साची:- अब तू शिकागो में कहां मंदिर ढूंढ़ने जाएगी…

कुंजल:- किसने कहा मै दुआ मांगने मंदिर जाऊंगी। मै तो स्ट्रिप क्लब जाकर तेरे लिए दुआ करूंगी।

साची का खुला मुंह…… हो... तू सच कह रही है क्या…

कुंजल उसे आंख मारती हुई कहने लगी…. "यहां तक आयी हूं तो, कुछ मस्ती तो बनती है ना यार। सिक्स पैक में लड़के एक-एक कपड़े उतरते हुए।"…

साची:- कुंजल…. सुन ना..

कुंजल:- अब तू नकियाना बंद करके कुछ कहेगी भी…

साची:- सुन ना मै भी चलूंगी साथ में.. तू सब प्लान करके रख लेना..

कुंजल:- आज शाम तो तू ध्रुव के साथ जा रही है ना…

साची:- हां तो कौन सा मै उसके साथ पूरी रात रुकने वाली हूं। 6 बजे लेकर जाएगा, मैक्सिमम 9 बजे तक लौट आऊंगी…

कुंजल, फिर से आंख मारती हुई कहने लगी…. "तो फिर तैयार रहना… why should boys have all the fun."…

शाम के 5.30 बज रहे होंगे, साची बाहर जाने के लिए तैयार थी। बिल्कुल गजब का लुक और अजब सी रौनक उसके चेहरे पर थी। ध्रुव ने जब उसे देखा, तब देखते ही यह गया…

दोनों वहां से निकले, ध्रुव रह-रह कर बस बार-बार साची को ही देख रहा था…. "तुम… बहुत … खूबसूरत … लग… रही… हो…। मेरा … दिल.. पहले.. कभी.. ऐसे... नहीं.. धड़का..

साची:- ध्रुव प्लीज, तुम वो भाषा बोलो जिसमे तुम कंफर्टेबल हो। ये बनावटी भाषा में कोई फीलिंग नहीं आती।

ध्रुव:- ओके स्वीटहार्ट, जैसा तुम कहो…. (रूपांतरित भाषा)

साची:- ये हुई ना बात.. वैसे हम कहां जा रहे है।

ध्रुव:- जहां तुम चाहो…

साची:- मेरा एक अच्छा दोस्त है क्रेज़ी बॉय, उससे कल ही बात हुई थी। उसने कहा यदि किसी को परखना हो तो उसके दोस्तों से मिलो.. सो मै तुम्हारे दोस्तों से मिलना पसंद करूंगी, यदि तुम्हे कोई ऐतराज ना हो तो।

ध्रुव गाड़ी की स्पीड बढ़ाते हुए… "क्यों नहीं जरूर"…

दोनों के बीच आज अच्छी बातें चल रही थी। घूमने और बातों में कब वक़्त बीता पता ही नहीं चला। साची लगभग पौने नौ (8.45) के करीब लौट आयी। आज वो थोड़ा खुश नजर आ रही थी। आते ही वो सीधा कुंजल के पास गयी, जहां लावणी पहले से तैयार होकर उसके पास बैठी थी।

लावणी को देखते ही साची आश्चर्य से पूछने लगी… "ये भी साथ चल रही है क्या?"

कुंजल:- तुम्हे कोई ऐतराज हो तो अभी बता दो, मै इसे नहीं ले जाती।

साची:- ना ना .. इसे भी लेकर चल… कब तक ये भुटकी छोटी बनी रहेगी…

कुंजल… ये हुई ना बात... तो चलो फिर हम चलते हैं…

तीनों होटल से निकली। कुंजल ने स्ट्रिप क्लब जाने के लिए लिमो बुक करवाया था, तीनों उसी में सवार होकर निकल लिए… अंदर का इंतजाम देख कर पहले तो दोनों बहन थोड़ा ना नुकुर करने लगी, लेकिन कुंजल के जोड़ के आगे फिर किसका चले…. सैंपैन की बॉटल खुली, 3 ग्लास में उड़ेला गया.. तीनों ने चीयर्स किया और चुस्कियों में तीनों पीने लगी…

लावणी:- इसका टेस्ट तो दारू जैसा नहीं है, ये तो कोई ऐपल जूस लग रहा है।

साची और कुंजल दोनों एक साथ उसकी ओर घूरते…. "भुटकी दारू का टेस्ट तुझे अच्छे से पता है.. माजरा क्या है।".. फिर जो बेचारी लावणी को दोनों ने घेरा.. उसे कुछ बोलने भी नहीं दी।

तीनों पहुंचे स्ट्रिप क्लब और अंदर जैसे ही एंट्री मेरी… तीनों के अंदर अजीब सी हलचल होने लगी…. "ये कहां आ गए हम।" लावणी वहां के वेटर को चड्डी में टाय पहने सर्व करते हुए देखी और चौंककर पूछने लगी।

कुंजल:- इसे कहते है हमारा आज का फन…

तीनों सोफे पर जाकर बैठ गई। हाथों में फिर से तीनों के एक जाम और सामने देखने लगी। तभी वहां पर पूरा अंधेरा हो गया, और स्टेज के फोकस लाइट पर एक नया ताजा लड़का रंग ज़माने पहुंच गया।

उसके स्टेज पर आते ही वहां मौजूद लड़कियों कि हूटिंग शुरू हो गई। जैसे ही पोल डांस शुरू हुआ, तीनों की जोरदार हंसी भी शुरू हो गई.. फिर जैसे जैसे कपड़े उतार रहे थे.. कुंजल वैसे-वैसे हूटिंग कर रही थी। अब वो लड़का केवल चड्डी में था और तीनों की धड़कने तेज। बड़ी ही अदा से वो पीछे मुड़ा और अपनी चड्डी नीचे सरकाने लगा। साची जो अभी जाम का घूंट पी रही थी वो पीते-पीते सरक गई, और तेज-तेज खांसने लगी.. वहीं इन दोनों से भी आगे देखा नहीं गया और दोनों अपना मुंह फेर कर जोर-जोर से हसने लगी।

जितनी मस्ती करनी थी तीनों ने यहीं तक की, फिर वहां से बाहर निकलकर शिकागो के नाइट लाइफ का लुफ्त उठाने लगी। आज तीनों लड़कियां एक साथ एक ही कमरे में सोयी और रात भर हंसी मज़ाक के साथ छेड़-छाड़ चलती रही। लावणी सो चुकी थी और उसके नींद में कोई खलल ना हो इसलिए साची और कुंजल धीमे-धीमे बात करने लगे।
 
Update:-62

जितनी मस्ती करनी थी तीनों ने यहीं तक की, फिर वहां से बाहर निकलकर शिकागो के नाइट लाइफ का लुफ्त उठाने लगी। आज तीनों लड़कियां एक साथ एक ही कमरे में सोयी और रात भर हंसी मज़ाक के साथ छेड़-छाड़ चलती रही। लावणी सो चुकी थी और उसके नींद में कोई खलल ना हो इसलिए साची और कुंजल धीमे-धीमे बात करने लगे।

अचानक से साची थोड़ी गंभीर होती हुई कुंजल से कहने लगी…. "थैंक्स यार, आज बहुत दिन के बाद लग रहा है जी रही हूं।"..

कुंजल:- चलो सुनकर मुझे सुकून मिला। वैसे आज ध्रुव के साथ गई थी, वहां क्या हुआ।

साची:- अच्छा है यार वो भी। मै सोच रही हूं कि कुछ दिन उसके साथ देखते है वक़्त कैसा बीतता हैं।

कुंजल:- मतलब तू हां कहने वाली है…

साची:- येस.. जैसे वो मुझसे बातें करता है, और मेरे लिए उसके फीलिंग है। मुझे लगता है वो एक मौका तो डिजर्व करता है। और हां तुम्हे अब मेरे साथ जबरदस्ती बात करना नहीं पड़ेगा।

कुंजल:- चढ़ गई है क्या तुम्हे… ये क्या बकवास कर रही हो।

साची:- सच ही कह रही हूं कुंजल। एक बार मैंने भी यही गलती कि थी, मेरे एक करीबी के साथ। तब उसके साथ मेरे इतने अच्छे रिलेशन नहीं थे और मै अचानक उसके साथ बैठकर मीठी-मीठी बातें करने लगी। वो समझ गया मुझे उससे कुछ काम निकलवाना है।

कुंजल:- हां तो फिर उसने किया की नहीं तुम्हारा काम।

साची:- उल्लू, ये मैंने उदहारण मारा था बस.. और तू है कि वहीं पहुंच गई।

कुंजल:- अच्छा सॉरी, हां तो आगे बता..

साची:- हुंह ! सब जान कर भी बात घुमा रही है। तुम अचानक क्यों मुझपर इतना मेहरबान हो गई उसका कारण अपस्यु है ना।

कुंजल:- येप । मुझे लगा मेरे भाई के वजह से तुमने हंसना छोड़ दिया, जीना छोड़ दिया। इसलिए एक छोटी सी भरपाई कह लो या तुम्हारी हंसी वापस लौटने की कोशिश।

साची:- ओय अब वो मेरा बॉयफ्रेंड नहीं रहा, इसलिए अब इस सोच के साथ मुझसे मत बात करना… और हां अगर वो मेरा दोस्त बनाना चाहे तो मुझे कोई ऐतराज नहीं।

कुंजल:- ठीक है मै उसको बोल दूंगी..

साची:- ना तू मत कहना, मै खुद उसे मिलकर बोल दूंगी।

बस इतने से गंभीर माहौल के बाद दोनों फिर से अपने बातों में रम गए और बात करते-करते सो गए… सुबह तीनों की देर से नींद खुली। इधर आरव सुबह से उस कमरे के कई चक्कर लगा चुका था, लेकिन लावणी अब तक सोकर नहीं उठी थी।

आरव के लिए ये पूरा दिन लगभग ऐसे ही गया। मिश्रा परिवार में खुशियों का माहौल चल रहा था क्योंकि आज साची ने हां कह दी था और आगे कि सारी बात तय करने शाम को प्रकाश जिंदल खुद आ रहे थे।

5 बजे की बात है जब ये कांड हो रहा था। लावणी बैंक्वेट के ओर जा रही थी तभी उसका हाथ पकड़कर आरव ने किनारे खींच लिया और उसके कमर में हाथ डालकर उसकी नज़रों से नजरें मिलाकर देख रहा था, तभी उसे सुलेखा और राजीव ने पकड़ लिया।

दोनों को वहां देख लावणी घबराहट से बिल्कुल सहम गई। आरव उसका हाथ थामा, मानो कह रहा हो की डरो मत कोई गलती नहीं की है। लावणी की आखों में देखकर वो उसे जाने के लिए बोल दिया। इधर राजीव पूरे आवेश में था, किन्तु सुलेखा भी उसे रोकते हुए कहने लगी "अभी नहीं, लोग आने वाले हैं"….

आरव उनकी ओर कुछ बोलने के लिए बढ़ा लेकिन कुछ बोलने से पहले ही राजीव मिश्रा बोलने लगे… "तुझे मै बाद में देखता हूं… एक बार इन लोगों को चले जाने दे"।

आरव समझ गया अब तो पक्का एक्शन होने वाला हैं। वो अपने कमरे में आया, वीरभद्र और कुंजल बैठ कर बातें कर रहे थे और आरव दोनों के बीच बैठकर कहने लगा… "तैयार हो जाओ, अब यहां एक्शन होने वाला है।"

वीरभद्र:- अरे इसके लिए तो कितने दिनों से इंतजार कर रहा था। कब और कहां होना है एक्शन।

आरव अपने दोनो हाथ जोड़ते:- बस वीरे बस… हर वक़्त मारपीट के लिए तैयार रहता है। समझ भी लिया कर बात को कभी।

कुंजल:- ठीक से समझाओगे तब ना समझे, क्यों वीरे जी..

आरव:- वेरी फनी… हमे सुलेखा और राजीव मिश्रा ने पकड़ लिया…

कुंजल बिस्तर पर खड़े होकर नाचने लगी… उस नाचते देख वीरभद्र पूछने लगा… "कुंजल जी, आप ये नाच क्यों रही है।"….. "आओ वीरे जी, अब तो हमारे घर में शहनाई बजने वाली है, अपने आरव की शादी तय होने वाली है।"… फिर क्या था वीरभद्र भी कुंजल के साथ एक दो ठुमके लगाते हुए कहने लगा…. "कुंजल जी शादी के लिए अभी ये बच्चा नहीं लग रहा।"

लगातार आरव के साथ दोनों छेड़-छाड़ कर रहे थे, इतने में नीरज वहां पहुंचा और दोनों भाई-बहन को अपने साथ चलने के लिए कहा। दोनों जब वहां पहुंचे पूरा मिश्रा परिवार आरव को ऐसे घूर रहा था मानो अभी खा जाएंगे। वहीं लावणी साची के पास बैठी रो रही थी।

आरव के लिए ये पहला अवसर था, जब वो लावणी को रोते हुए देख रहा था। आरव, लावणी के करीब तो जाना चाहता था लेकिन कुंजल उसका हाथ थामे उसे रोक रही थी…

तभी आरव के ओर कबीर तेजी से बढ़ा और उसके पेट ओर एक लात मारते हुए कुंजल को देखा और कहने लगा… "साला 2 कौड़ी के इंसान, सड़कछाप, हमारे घर की लड़की पर बुरी नजर डालता है।"….

कबीर का ऐसा करना था और इधर लावणी "नहीं" करती दौड़ गई अपने चचेरे भाई को रोकने। इसपर नीरज अपनी बहन को खींचकर वहां से हटाते हुए उसे थप्पड मारा और लाकर साची के पास बिठा दिया। आरव ये मंजर देखकर गुस्से में फुफकारने लगा.. उसकी नजरें कुंजल से मिली जो बिल्कुल सुलेखा के पास खड़ी थी। कुंजल हाथ जोड़ती उसे कुछ ना करने का इशारा करने लगी…

कबीर जैसे कुंजल का खुन्नस आरव से निकाल रहा हो। कहां मार रहा था, कैसे मार रहा था वो देख तक नहीं रहा था। आरव लगातार मार खाए जा रहा था लेकिन कोई प्रतिउत्तर नहीं दे रहा था।

उसे इस तरह मार खाते देख कुंजल के भी आंसू निकलने लगे। साची से भी बर्दास्त कर पाना मुश्किल था। अंत में जब सब बर्दास्त के बाहर हो गया तब साची बोलने लगी…. "बस भी करो आप सब, क्यों पागलों कि तरह उसे मारे जा रहे हो। वो अगर उठकर मारने लगे ना, फिर कोई बर्दास्त भी नहीं कर पाएगा।"..

"चुप एकदम, ज्यादा जुबान मत चलाओ।" कबीर चिल्लाते हुए बोला और गुस्से में वहां परे एक फ्लॉवर पोट उठकर उसे मारने के लिए बढ़ा… आरव अपना कपड़ा झारते हुए उठा और कबीर का हाथ पकड़कर, उसे मरोड़ते हुए कहने लगा…. "अबे घोंचू, मै मार खा रहा इसका मतलब मुझे जान से ही मार देगा क्या? साला गधा, इतना भी नहीं देख पा रहा, इतनी खूबसूरत लड़कियां रो रही है और तू रुकने के बदले और हथियार उठा रहा।".. इतना कहकर आरव उसके गाल पर थप्पड लगाते अपने उंगलियों के छाप उसके गाल पर छोड़ दिया।

मनीष मिश्रा, अपने बेटे को मार खाते देख जोड़ से चिल्लाया…. "मार नीरज इसे, तेरे भाई को मार रहा है।"

"अच्छा तू आएगा मुझे मारने, साले तुझे समझ में नहीं आता कि उस लल्लू से मै अब तक मालिश करवा रहा था… ओ ससुर जी.. हां हां आप से ही बोल रहा हूं राजीव मिश्रा… जब बात खुल गई है तो मै सीधा कहता हूं … तुम्हारी बेटी से मुझे बेइंतहा प्यार है, और उससे शादी भी करूंगा… आगे फैसला तुम्हारा है। हंस के विदा करोगे अपनी बेटी को या गुस्से में"…. इतने में नीरज सामने से चिल्लाता हुआ आया। आरव ने कबीर को छोड़ा, वो अपना हाथ पकड़ कर बैठ गया। नीरज का भी वहीं स्वागत किया आरव ने, उसका भी हाथ मरोड़ा और 2 थप्पड देकर छोड़ दिया और अाकर बैठ गया राजीव और मनीष के बीच….

"देखो सर ना तो मै 2 कौड़ी का इंसान हूं और नाही मै लावणी के साथ कोई टाइम पास कर रहा। अब आप फैमिली ड्रामा करोगे, क्योंकि सिर्फ इस बात के लिए की पहले आप को पता चला कि मै आप की बेटी से प्यार कर रहा हूं। किंतु इसके ठीक विपरीत यदि मेरी मां आती बात करने और आप को हमारे बारे में पता चलता तो मुझे यकीन है कि आप जरूर हां कह देते।"…

मनीष:- लेकिन तुम्हारी मां तो नहीं बात कर रही है ना, यहां बुलाओ फिर उन्हें…

आरव, इससे पहले कि अपना फोन निकालता कुंजल तबतक नंदनी को फोन लगा भी चुकी थी। जब कुंजल ने आरव की शादी तय करनी है ऐसी बात कही नंदनी हल्की-बक्कि रह गई। उसके हिसाब से अभी तो उसका बच्चा 22 साल का ही है और 22 साल में शादी। नंदनी कुंजल को तुरंत फोन रखने बोली और अपना बैग पैक करना शुरू की।

नंदनी के पास केवल एक समस्या थी, वो थी यूएस की टिकिट आज के आज किसी तरह लेना, जो की मिलना थोड़ा मुश्किल हो रहा था और वो अपस्यु को ये सब बताना नहीं चाहती थी। इसी क्रम में उसने पूरा मामला सिन्हा जी को बता दी। अब उसके भी बेटे की शादी तय हो रही थी, भला सिन्हा जी कैसे शरीक ना होते.. उन्होंने भी 3 टिकिट बुक करवाई और उसी दिन उड़ चले यूएस।

23 जून को दोनों पहुंच चुके थे। कमरे में, कुंजल आरव के पास बैठकर बातें कर रही थी, और उसके चोट पर गरम पोटली डालकर सिकाई भी कर रही थी। वीरभद्र वहीं थोड़ी दूरी पर बैठकर टीवी देख रहा था, विन्नी और क्रिश एक दूसरे को अपने हाथ से अंगूर खिला रहे थे। नंदनी ने बेल बजाई और वीरभद्र दरवाजा खोलते हुए नंदनी से पूछने लगा…. "मां जी आप कौन है.. और क्या काम है।"..

नंदनी वीरभद्र को किनारे करती सीधा अंदर घुसी और वहां का माहौल देखी.... "तुम लोग क्या क्लब में हो। अनजान लड़का दरवाजा खोल रहा है। वहां वो दोनों लैला मजनू की तरह अंगूर खिला रहे और ये लड़का पता नहीं पीकर कौन से नाले में गिरा होगा, हर जगह चोट के निशान है। यहां चल क्या रहा है कोई बताएगा।

अब तक जो सब आपस में लगे हुए थे, नंदनी की धमाकेदार एंट्री के बाद सब के सब बिल्कुल ध्यान लगाए नंदनी को ही देख रहे थे। इतने में कुंजल अपने भाई की तरफदारी करती अपने मां के पास पहुंची… और एक थप्पड खाकर वापस अपनी जगह पर पहुंच गई।

आखें गुर्राती हुई नंदनी ने आरव को अपने पास बुलाया। आरव अपने दोनों गाल पर हाथ रखते हुए पहुंचा… "हाथ हटा गाल से और नीचे झुक"… आरव ने ठीक वैसे ही किया जैसे नंदनी ने कहा… 2 थप्पड नंदनी उसे रशीद करती… "पहले ये बताओ कि ये जो दोनों लड़के-लड़की एक दूसरे को अंगूर खिला रहे है, वो कौन है।"

"बहन ही समझो उस लड़की को, विनीता नाम है उसका।"…. "क्या कहा फिर से बोल जरा।"… "वो बहन जैसी है।"… नंदनी चार जोरदार थप्पड गाल पर मारती हुई… "बहन मानता है और कोई लड़का उसे तुम्हारे सामने अंगूर खिला रहा है और तू देख रहा है। मतलब इसके घरवालों ने इसे तुम्हारी जिम्मेदारी पर भेजा था और अच्छी जिम्मेदारी यहां निभाई जा रही है।"…. "सॉरी मां..."… "जोर से बोलो, क्या बोल रहे हो।"

"एक साथ 30-40 थप्पड मार ही लो ना, ये क्या अब हर प्वाइंट पर गिन-गिन कर थप्पड मार रही।".. आरव थोड़ा चिढ़कर बोलने लगा…

"नंदनी जी अब जाने भी दीजिए बच्चे ही तो है, और देखिए आरव ने यदि उसे बहन माना है और उन दोनों के रिश्ते में इसे कोई बुराई नहीं लग रही, मतलब लड़का तो अच्छा ही होगा ना।"…

नंदनी:- अनिरुद्ध जी .. आप अपने ये ओपन खयालात ना ही दे तो अच्छा होगा। प्यार जताने और बेशर्मी दिखाने में फर्क होता है। अब इस से ज्यादा मै नहीं बोल सकती बच्चे है यहां पर। और तू मुंह छिपाए क्यों खड़ा है…

कुंजल:- बस भी करो ना मां अब गुस्सा थूक भी दो।

नंदनी:- नालायक कहीं का, और क्या गुल खिलाया जो ये मिश्रा परिवार से मुझे रिश्ता जोड़ने आना पड़ा है। अभी 22 का है और शादी करने चला है। मुंह तो देखो इसका जरा.. बच्चा ही लगता है अभी तो। 3-4 साल तक रुका नहीं गया तुमसे…

आरव अपनी मां के गले लगकर उसके गालों को चूमते हुए कहने लगा…. "इतना गुस्सा करोगी तो ब्लड प्रेशर हाई हो जाएगा। आप अभी आराम करो। बहुत दूर से आयी है, थक गई होंगी।"

थोड़ा मस्का, थोड़ा मनाना और नंदनी अपना गुस्सा समेट कर चली गई सफर का थकान मिटाने। नंदनी के जाते ही वैभव दौड़ कर आरव के गोद में कूदकर चढ़ गया और उसके गालों पर अपना हाथ फेरने लगा। बाकी के लोग नंदनी के जाते ही, अलग-अलग रूम में दुबक लिए।
 
Update:-63

थोड़ा मस्का, थोड़ा मनाना और नंदनी अपना गुस्सा समेट कर चली गई सफर का थकान मिटाने। नंदनी के जाते ही वैभव दौड़ कर आरव के गोद में कूदकर चढ़ गया और उसके गालों पर अपना हाथ फेरने लगा। बाकी के लोग नंदनी के जाते ही, अलग-अलग रूम में दुबक लिए।

शाम का वक्त था नंदनी, कुंजल और आरव को बिठा कर सब पूछ रही थी। पूरी बात वो बड़े ध्यान से सुन रही थी इसी बीच जब उसे पता चला कि आरव को कल सबके सामने पीटा गया और अपशब्द काहे गए, तब तो नंदनी का पारा अंदर ही अंदर चढ़ता रहा। वो अभी अपने घर पर हुई पिछली बेज्जती भुली नहीं थी और अब ये।

नंदनी ने वीरभद्र को मिश्रा फैमिली के पास भेजकर मुलाकात का वक़्त पूछकर आने के लिए बोली… वीरभद्र वापस लौटकर कल शाम का वक्त बोला। उसी शाम नंदनी अपने पूरे परिवार के साथ निकली शॉपिंग करने।…

24 की शाम पूरा मिश्रा परिवार एक ओर बैठ था और दूसरी ओर रघुवंशी परिवार अपने सभी प्रियजनों के साथ। नंदनी ने इशारा किया और वीरभद्र ने लोगों को बुलाना शुरू किया। 12 करोड़ की शॉपिंग नंदनी ने अपनी होने वाली बहू के लिए किया था वहीं सिन्हा जी ने उसमे चार चांद लगाते 20 करोड़ और जोड़ दिए। ऐसा लग रहा था उनके सामने के टेबल पर कोई ज्वेलरी शॉप खुल गई हो… 32 करोड़ सिर्फ गहने और कपड़ों का खर्च था।

सब शांत होकर बस आ रहे सामान को देख रहे थे। तभी उस शांत माहोल में नंदनी की आवाज़ गूंजी…. "वो कौन था जिसने कल मेरे बेटे को 2 कौड़ी का कहा था वो खड़ा हो जाए।"..

अनुपमा:- छोड़िए ना बहन जी कल माहौल ही ऐसा था…

नंदनी:- आप अपनी जगह बैठ जाएं अनुपमा जी। ये कोई अनाथ नहीं जो आप का परिवार बार-बार मेरे बेटे की इज्जत भरी महफ़िल में उछलता रहे। किस तरह के संस्कार है आप के परिवार के..

मनीष मिश्रा:- हम कुछ बोल नहीं रहे इसका ये मतलब नहीं कि..

नंदनी:- कुछ बोल नहीं रहे है से क्या मतलब है आप का.. मेरा बेटा को "दो कौड़ी का" और "सड़कछाप" जब बोला जा रहा था, तब बोला नहीं गया। किसी की औकात जज करने वालों को वैसे भी नहीं बोलना चाहिए क्योंकि हर किसी की औकात एक ही जैसी होती है फिर चाहे वो यहां का वेटर ही क्यों ना हो.. अपनी मेहनत का खाता है।

खैर मुझे इस बहस में नहीं पड़ना। मुझे आप की बेटी पसंद है, आप की बड़ी बेटी के साथ छोटी बेटी का भी इंगेमेंट फाइनल हो गया।.. बात ख़त्म।

राजीव:- बिना मेरी मर्जी के आप मेरी बेटी का रिश्ता एकतरफा कैसे तय कर सकती है।

नंदनी:- आप की रजामंदी जरूरी नहीं, दोनों बच्चे राजी है बस इतना ही काफी है। और हां लावणी आज से मेरी बहू है… कुंजल सगुण की थाली दे बहू को… याद रहे आज से उसकी गार्जियन मै हूं। वो कोई भी गलती करेगी आप हमसे शिकायत करेंगे… किसी को कुछ कहना है।

मनीष जो शांत बैठा हुआ था, वो गुस्से में आते हुए कहने लगा…. "कहीं की डॉन हो क्या, जो बोलोगी वो होगा… आप ने हमे समझ क्या रखा है। यदि हम इनकार कर दे तो?

नंदनी:- तरीके से करते इनकार, फिर मेरा बेटा बीच में आता तो उसका सर काट कर थाली में पेश कर देती। इस उम्र में किसी से प्यार करना गलत नहीं होता, हां प्यार में धोका देना गलत होता है, जो मेरे बच्चे ने नहीं किया। आपने क्या किया.. पसंद नहीं था तो उस माना कर देते "मत मिलो"। मुझ से कहते अपने बेटे को दूर रखो मेरी बेटी से। लेकिन आप लोगों ने क्या किया… भारी महफ़िल में बुलाकर उससे अपशब्द काहे, उसे बेइज्जत किया।

अब ये शादी मेरे लिए इज्जत की बात है। और बात जब इज्जत की आए तो हम से बड़ा डॉन फिर कोई नहीं। विश्वास ना हो तो राजपुताना इतिहास उलट कर देख लेना। हमे आजमाने की कोशिश ना ही करे तो बेहतर होगा, क्योंकि जिस दिन हम आजमाना शुरू करेंगे, फिर किसी की प्रोफाइल कैसी भी हो, घुटनों पर ले ही आते है।

सुलेखा:- मुझे ये रिश्ता मंजूर है।..

सभी लोग सुलेखा को घूरने लगे.. तभी सुलेखा अपनी बात पर आगे कहने लगी… "अच्छा परिवार है। मजबूत गार्जियन, हमारी बेटी को ये पसंद भी करती है, लड़का-लड़की भी एक दूसरे को पसंद करते है। आपस में बात बढ़ाने से कोई फायदा नहीं।"

सुलेखा की बात पर राजीव और मनीष आपस में कुछ चर्चा करने के बाद कहने लगे…. "अब हंस भी दीजिए बहन जी, रिश्ता जुड़ने जा रहा है तो ऐसे टेंशन का माहौल बनाना अच्छा है क्या?..

नंदनी:- सुनिए समधी जी, मै बात दिल से नहीं लगाती किंतु भरी सभा की बेज्जती तो घर में काम करने वाले कर्मचारी भी नहीं सहते। इसलिए मेरी सलाह है कि आप लोग जितनी जल्दी अपनी ये आदत बदलेंगे हमरा रिश्ता उतना ही मजबूत होगा। जिस दिन साची की इंगेजमेंट होगी उसी दिन लावणी की भी होगी। अब हम चलते है।

वहां मौजूद सभी लोग जैसे किसी शेरनी कि दहाड़ सुन रहे हो। सभी जंगली जानवर उसके सामने बस घिघ्या ही रहे थे। नंदनी ने जिस अंदाज़ में बात शुरू की बिल्कुल उसी अंदाज़ में खत्म करके अपने कमरे में वापस लौट आयी और अपने लोगों के बीच बैठकर छुट्टियों का आनंद उठाने लगी।

24 तारीख की सुबह जब अपस्यु दिल्ली अपने घर पहुंचा और सबको कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रहा था, उस वक़्त पूरा परिवार वहां नंदनी की दहाड़ सुन रहा था और जब वो लोग वापस लौटे तब नंदनी ने सबको अपस्यु को कुछ भी बताने से मना कर दी, क्योंकि वो उसे सरप्राइज देना चाहती थी।

अपस्यु वहां के माहौल को देखते हुए तुरंत ऐमी को फोन लगाते हुए कहने लगा… "डिलीट फाइल का बैकअप लेकर फाइल को प्रिंट करो, हम यह काम ख़त्म करके आज यूसए निकल रहे है।"

कुछ ही देर में अपस्यु फाइल लेकर मंत्री जी के आवास पर था। मंत्री जी उसके हाथों से फाइल लेकर शाबाशी देते हुए कहने लगे…. "मुझे यकीन था कि तुम इस काम को कर लोगे।"…

अपस्यु:- क्या सर, बता देते मेरा टेस्ट चल रहा है, मै कुछ और अच्छे से प्लान कर लेता। फालतू में गोली खिला दिए, डमी बुलेट कहते इस्तमाल करने। कहीं मुझे ठोकने का इरादा तो नहीं था।

मंत्री जी:- काफी तेज और चालाक हो। तुम्हे कब पता चला यह एक टेस्ट है।

अपस्यु:- जब मुझे एक ऐसे गन से शूट किया गया, जिस गन को केवल स्पेशल ऑपरेशन में हाई प्रोफाइल सरकारी प्रोफेशनल इस्तमाल करते हैं। किसी प्राइवेट कंपनी के मालिक या किसी ऑर्गनाइजेशन के बस का नहीं वो गन रखना।

मंत्री जी:- हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होती, बस यही परख रहा था। तुम खड़े उतरे। आगे से काम मिलता रहेगा। तुम पैसा कैश लोगे या सीधा अकाउंट में।

अपस्यु:- इसके पैसे नहीं ले सकता मै सर। जब कोई काम ही नहीं किया तो उसके पैसे क्या लेना। बस छोटी सी मदद कर दीजिए वही बहुत है।

मंत्री जी:- याद रहे मै भी कोई अनैतिक मदद नहीं करूंगा।

अपस्यु:- आप बहुत आदरणीय है सर मेरे लिए। ना मै अनैतिक करता हूं और ना ही कोई अनैतिक मांग रखूंगा। बस आज यूएस जाने की 3 टिकट अरेंज करवा दीजिए।

मंत्री जी, अपने पीए को अंदर बुलाते हुए…. शुक्ला जी अपस्यु से डिटेल ले लीजिए और 3 यूएस जाने की आज की टिकिट अरेंज कीजिए। और सुनिए आज से ये लड़का कभी भी यहां आ सकता है बिना किसी अपॉइंटमेंट के। सबको बोल दीजिएगा।

अपस्यु, हैरानी से देखते हुए….. "सर आप ये इतना विश्वास, मतलब मै समझ नहीं पा रहा"…

मंत्री जी:- ना ही समझो तो बेहतर है। तुम मेरी वो फैंटेसी हो जिसके सपने मै अपने बचपन से जवानी तक देखता रहा।

अपस्यु वहां से निकला आया। वो जबतक लौटा तब तक तीनों की टिकिट भी पहुंच चुकी थी। दिन के 2 बजे के फ्लाइट से तीनों निकल गए। यूएस के टाइम के हिसाब से तीनों 25 के लगभग रात के 8 बजे शिकागो पहुंचे।

विदेश की हवा में तो जैसे अपस्यु और ऐमी की बिल्कुल रंगत ही बदली सी लग रही थी। एयरपोर्ट के वाशरूम से जब दोनों बाहर आए तो ऐसा लग रहा था हॉलीवुड के मोस्ट हैंडसम एंड मोस्ट ब्यूटीफुल और सेक्सी कलाकार चले आ रहे हो। उनके कपड़े, चेहरे की रंगत और उस चेहरे के ऊपर स्टाइलिश ग्लास और एटिट्यूड के साथ जब दोनों चल रहे थे, अमेरिकन को भी पलट कर देखने पर मजबुर कर रहे थे।

स्वस्तिका तो दोनों को देखकर हंसती हुई कहने लगे…. "द डेविल कपल इज़ बैंक"… ऐमी उसकी बात पर अपना चस्मा आखों के नीचे की और स्वस्तिका को आंख मारती हंसने लगी। तीनों होटल के ओर चल दिए। होटल के दरवाजे पर जैसे ही दोनों की दस्तक हुई, उनके एटिट्यूड को देखकर होटल मैनेजमैंट खुद उनके स्वागत के लिए दरवाजे तक गए…

अपस्यु और ऐमी दोनों मुख्य द्वार से अंदर आ रहे थे और उसी वक़्त होटल कि लॉबी से ध्रुव और साची बाहर जा रहे थे। दोनों को देखकर ध्रुव बिना कहे रह नहीं सका…. "वाउ, दोनों साथ में कमाल के लग रहे। कोई एक्टर और एक्ट्रेस हैं क्या?"

साची:- वो दोनों मेरे दोस्त है, इनफैक्ट वो लड़का मेरा क्रश था।

ध्रुव हंसते हुए… कोई आश्चर्य की बात नहीं, केवल वो लड़का ही नहीं बल्कि वो लड़की भी.. किसी के भी क्रश हो सकते हैं।

"रूको मिलवाती हूं।"… कहती हुई साची ने अपस्यु को आवाज़ लगाई… "ओय हीरो, देखकर भी अनदेखा करने वाले… इधर"… अपस्यु और ऐमी साची के ओर मुड़े, साची इशारे से उसे अपने पास बुलाने लगी। अपस्यु अपना चस्मा अपने सीने पर लगाते, अपने चिर परिचित मुस्कान के साथ साची के ओर बढ़ गया।

"हे ध्रुव इससे मिलो, मेरा क्रश जो ब्वॉयफ्रैंड बनते बनते रह गया अपस्यु।"… "अपस्यु ये हैं मेरे होने वाले मंगेतर ध्रुव जिंदल"…

दोनों अपना अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए एक दूसरे से हाथ मिला रहे थे। ऐसा लग रहा था वहां के हवाओं में इंटेंस म्यूज़िक बजना शुरू हो गया हो। अपस्यु ध्रुव से हाथ मिलाते ही कहने लगा… "तुम लकी हो जो तुम्हे साची मिली। नाइस चॉयस।"

ध्रुव:- दोस्त तुम्हारी चॉयस तो मुझ से भी ज्यादा खतरनाक है।

ऐमी:- हेय हैंडसम तुम मुझ पर ट्राय कर सकते हो। मै सिंगल हूं।

ध्रुव:- क्या सच में…

साची:- हां सच में, ये दोनों बस क्लोज वन है।

ध्रुव:- हाहाहाहा.. तुम दोनों को देखकर कोई भी कंफ्यूज कर जाए। और किसी को यदि पता चले कि तुम दोनों सिंगल हो तो यहां लड़के-लड़कियों की भीड़ लग जाए। अब मै सिंगल नहीं वरना कई लड़कों में मै भी होता। वैसे हमलोग घूमने जा रहे, तुम हमें क्यों नहीं ज्वाइन करते।

स्वस्तिका, थोड़े दूर से ही… "मै जा रही हूं कमरे में, तुम दोनों आओ"…

ध्रुव जब स्वस्तिका को देखा तो कुछ देर गौर से देखने के बाद उसे हाथ हिलाता कहने लगा… "हेल्लो मिस राउडी गर्ल, .. हे ये वही है ना डिस्को में जिसने उन लोगों की पिटाई कि थी।"

साची:- ध्रुव गौर नहीं किया तुमने, उसके साथ जो दूसरी लड़की थी वो यही तुम्हारे सामने खड़ी है।

ध्रुव ने जब दोनों राउडी गर्ल को एक साथ देखा फिर तो वो दोनों से बिना ऑटोग्राफ लिए वहां से हिला नहीं। ध्रुव, अपस्यु और ऐमी को अपने साथ चलने का आग्रह किया, लेकिन अपस्यु "फिर किसी दिन" कहता दोनों के पास से हटा।

ऐमी:- अपस्यु ये तुम्हारी एक्स को क्या हो गया, इतना परिवर्तित रूप।

अपस्यु:- इसपर बाद में बात करें, अभी मै पहले काम खत्म करना चाहता हूं। स्वस्तिका ढूंढो उसे और मौका अच्छा हो तो दबोच लेना।

स्वस्तिका लग गई काम पर। तकरीबन आधे घंटे का वक़्त लगा लेकिन वो मिल ही गई। स्वस्तिका दूर से ही मौका देखने लगी तकरीबन 15 मिनट बाद उसे मौका मिल गया। वो अपस्यु और ऐमी को तुरंत कमरा नंबर 703 के पास बुला ली।

स्वस्तिका पहले से दरवाजे पर खड़ी थी… अपस्यु और ऐमी के आते ही उसने दरवाजे पर "डू नोट डिस्ट्रब" का साइन लगाई और चोरों कि तरह लॉक खोलकर तीनों अंदर दाखिल हुए… कमरे में सुलेखा अकेली थी और तीनों को देखते एक साथ अंदर देख वो पूरी हैरान हो गई।

अपस्यु वहीं कुर्सी पर बैठते हुए कहने लगा…. "आप की बेवकूफियां हमे डुबो देगी… समझी आप।"
 
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अपस्यु वहीं कुर्सी पर बैठते हुए कहने लगा…. "आप की बेवकूफियां हमे डुबो देगी… समझी आप।"

सितंबर 2013… डेविल ग्रुप मीटिंग, तन्हा लोट, बाली, इंडोनेशिया…

त्रिवेणी शंकर के बेटे को योजनाबद्ध तरीके से मारा जा चुका था। भूषण और जमील के हवाला के पैसों को उड़ा लिया गया था और सुलेखा के सूचना के आधार पर यह मीटिंग रखी गई थी।

डेविल ग्रुप के सभी सदस्य… अपस्यु, आरव, ऐमी, स्वस्तिका और पार्थ सभी अलग-अलग रास्तों से इंडोनेशिया पहुंच चुके थे। सभी एक छत के नीचे बैठे हुए थे और अपस्यु मीटिंग की शुरवात करते हुए…

"सुलेखा आंटी पूरी जानकारी दे चुकी हैं। हमारे दिए गए 800 करोड़ के झटके के बाद, मनीष मिश्रा को नीदरलैंड भेजा जा रहा है। मनीष मिश्रा कुछ महीनों बाद, रॉटरडम (यूरोप का सबसे बड़ा समुद्री पोर्ट, जहां एक दिन में कई हजार कंटेनर लोड और अनलोड किए जाते है।) पर अपनी निगरानी देगा और आगे इस जगह से कोई घाटा ना हो उसकी जिम्मेदारी लेगा।"

"योजना का पहला चरण लगभग कामयाब हुआ है। दूसरी एक और कमाल कि खबर निकलकर आयी है। प्रकाश जिंदल और मनीष अपने काले कारनामे को रिश्ता में बदल रहे है, अगले साल जून तक मनीष मिश्रा की बेटी साची मिश्रा और प्रकाश जिंदल के बेटे ध्रुव जिंदल के बीच ये रिश्ता तय हो जाना है।

"इस सूचना के दम पर हम प्रकाश जिंदल को घेर सकते है क्या? इनके छोटे-छोटे काम करने वाले सहायकों के जाने से, हवाला सिंडिकेट को कोई फर्क नहीं पड़ने, लेकिन यदि प्रकाश जिंदल को लपेट लिया, फिर समझो की हमने इनकी कमर तोड़ दी। एक-एक करके तुम सब बोल सकते हो।"

पार्थ:- प्रकाश जिंदल पर हम कम से कम 3 साल तक हाथ नहीं डाल सकते। एक यूएस सेनेटर पर हाथ डालने का मतलब हुआ की हम पहले तो वर्ल्ड पॉलिटिक्स में हाथ डाल देंगे। ऊपर से यूएस की सारी एजेन्सी हमारे पीछे होगी। मुझे नहीं लगता कि हम उनके इन्वेस्टिगेशन को 2 दिन से ज्यादा चकमा दे सकते है। इसलिए उसपर अभी सोचने का अर्थ होगा, हम केवल जिंदल को लपेटकर ही मरने वाले है, बाकी उनका हवाला सिंडिकेट चलता रहेगा।

सभी सदस्यों के बीच काफी देर तक खामोशी रही, सब गहन चिंतन से कुछ निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे…

स्वस्तिका:- प्रकाश जिंदल को लपेटा जा सकता है… बस पूरे धैर्य और समझदारी से आगे बढ़ना होगा। दिल्ली में तुम दोनों भाई कब स्टेबल होने वाले हो।

ऐमी:- वहां की तैयारियां पूरी हो गई है। जनवरी से हम गढ़ में होंगे…

स्वस्तिका:- ठीक है, सुलेखा आंटी को बोलना किसी तरह चक्कर चला कर साची को दिल्ली ले आए।

आरव:- नॉटी तू बहुत नॉटी प्लान कर रही है, मुझे ऐसा क्यों लगा रहा है?

स्वस्तिका:- अगर ये प्लान काम कर गया तो समझो प्रकाश जिंदल अपनी झोली में।

अपस्यु:- पूरी बात बताओ स्वस्तिका…

स्वस्तिका:- साची और ध्रुव रिश्ते में बंधने जा रहे है। अगर इन दोनों के बीच हम किसी तीसरे को प्लॉट कर देते है, और साची के दिमाग से यदि खेलने में कामयाब हुए तो समझो ध्रुव जिंदल को हम भारत आने पर मजबुर कर सकते है। एक बार वो भारत आ गया, फिर समझ लो ध्रुव जिंदल अपने जाल में। यदि ध्रुव जिंदल हमारे चंगुल ने फंस गया, फिर वो प्रकाश जिंदल, यूएस, का कितने दिनों तक सेनेटर बना रहेगा। ऐसा मजबुर करो की प्रकाश जिंदल खुद बेबस होकर रिजाइन कर दे। एक बार उसका पॉलिटिकल कैरियर बर्बाद हुआ फिर तो पॉलिटिकल गेम ही उसे बर्बाद कर देगी। हम तो बस उसके विपक्ष के हाथ में एक के बाद एक सबूत देते चले जाएंगे।

आरव:- मै सहमत हूं…

पार्थ:- में भी..

ऐमी:- मै भी..

अपस्यु:- मै भी..

अपस्यु:- तो ठीक है यही तय होता है। अब हम अपने आखरी चरण में है। दिल्ली में बसने का समय अब आ चुका है। हर किसी की पहचान हो चुकी है। डेविल की तरह सारे काम होंगे, सबके सामने होकर भी छिपे रहेंगे। उनके बीच रहकर अब उनको उखाड़ने का वक़्त आ गया है। उम्मीद करते है 2015 के शुरवात तक हम उन्हें वो सब लौटा सके, जो उन्होंने हमे दिया है। मिशन साची की इंशियल प्लान बनाओ, आगे सिचुएशन के हिसाब से सब काम करेंगे….

तकरीबन, 10 मिनट बाद, पार्थ….

"सबसे पहले हमे साची की पूरी जानकारी चाहिए। किसी एक को ऑन स्क्रीन पहले उससे जुड़ना होगा, ताकि उसके दिल में छिपी भावना को निकाल सके। ऐसी बातें जो वो अपने परिवार से भी शेयर नहीं कर सकती। एक ऑनलाइन दोस्त जो उसकी फैंटेसी जान सके"..…

"दूसरा उसे कंफ्यूज करने के लिए किसी ऐसे की जरूरत होगी जिसे साची पढ़ ना सके। जिसकी भावना को जान पाना उसके लिए असंभव हो, तभी वो कंफ्यूज होगी। इसके लिए अपस्यु से बेहतर कोई नहीं होगा।"

ऐमी:- सहमत हूं

आरव:- मै भी सहमत

स्वस्तिका:- मै भी सहमत..

अपस्यु:- ठीक है फिर ये तय हो गया.. ऐमी हैक करो उसे और अंदर तक झांको, पूरी ऑनलाइन एक्टिविटी चेक करो। जानकारियां निकालो और जुड़ो उससे। उसे ऐसा दिखाना होगा कि तुम साची को कम से कम 3-4 साल से जुड़ी हो। ढूंढो उसके प्रोफाइल में किसी फेक डेड आईडी को, जिससे उसकी 2-4 बार भी कभी बात हुई हो।

आरव:- इसका फायदा…

ऐमी:- फायदा ये होगा की वो प्राइवेट चाट का रिस्पॉन्स जल्दी करेगी। पूरी जानकारी के बाद एक बार जब बातें शुरू होगी फिर समझो वो अपने जाल में।

अपस्यु:- राईट.. आरव तुम 5 दिन का सर्विलेंस लोगे साची का.. वो अपने घर में क्या करती है, कैसी आदतें हैं, कैसे जीती है। क्या उसका कोई बॉयफ्रेंड है, कितने फ्रेंड है।.. और इसी के साथ हमारी आज की मीटिंग समाप्त होती है।

कुछ दिन बाद दिल्ली के एक शॉपिंग मॉल, जहां के सीसीटीवी को ऐमी पूरी तरह से अपने कब्जे में लेने के बाद अपस्यु को सूचना दी। सूचना मिलते ही अपस्यु सुलेखा के सामने पहुंचा। अपस्यु को देखकर सुलेखा उसे अपने गले लगाती हुई कहने लगी… "कब तक ऐसे चोरों कि तरह मिलता रहेगा। मै चाहती हूं कि तू मेरे पास रहे।"

अपस्यु:- आप के पास ही तो हूं आंटी, दूर कब हुआ था। बस इस वक़्त माहौल ऐसा नहीं कि खुद को जाहिर कर सकूं, लेकिन चिंता मत करो बहुत जल्द आपके परिवार में एंट्री होगी हम दोनों भाई की।

"तेरी आखें बिल्कुल तेरी मां के जैसी है।" सुलेखा अपस्यु की बात को अनसुनी कर उसे ध्यान से देखती हुई कहने लगी…

अपस्यु:- आप बेकार में इमोशनल हो रही है, अभी जो मै बात बताने आया हूं वो बता दूं।

सुलेखा:- ठीक है बताओ…

अपस्यु मीटिंग में लिए गए फैसलों को बताते हुए पूछने लगा…. "क्या आप का दिल मानेगा की मै आप की बेटी का इस्तमाल करूं।"

सुलेखा थोड़ी मायूस होती…. "मेरी दोनों बच्चियां बहुत मासूम है, बस उनके बाप की वजह से कभी मै ये प्यार जाता नहीं सकी। मेरे बेटे को भी शायद ये लोग अपने काम में ना शामिल कर ले। बड़ा वाला तो पूरा ही बिगड़ा हुआ है, लेकिन अभी तक शामिल नहीं हुआ है। डर सा लगा रहता है, कहीं दोनों बेटे भी इसके नक्शे कदम पर चले तब तो मै जीते जी मर जाऊंगी।"

अपस्यु:- चिंता नहीं कीजिए यह साल जाते-जाते आपका डर भी चला जाएगा। आप ने अब तक मेरे सवालों का जवाब नहीं दिया।

सुलेखा:- पिता के बुरे कर्मों का भुगतान उसके बच्चे को करना ही होता है। आप के कर्म कितने भी अच्छे हो लेकिन आप के जनक के कर्म कहीं ना कहीं उसपर हावी होता ही है। क्या तुम अपने पिता के कर्मों की सजा नहीं भुगत रहे? मां का दिल रो रहा है, पर नीति अपना काम करेगी और तुम्हे अपने कर्म के पथ पर बढ़ते रहना है।

अपस्यु:- आप की बात से मुझमें विश्वास पैदा हुआ है। आप के लिए भी काम दिए जा रहा हूं। साची को आप दिल्ली लेकर अाइए.. और जब हम आप की फ़ैमिली में एंट्री करेंगे… आप मार और संभाल दोनों कहानी रचेंगी।

सुलेखा:- तुम पहले ही नरक के आग में जल रहे हो और मुझसे कह रहे… पहले तुम्हे मै बदनाम करूं और तुम अच्छे हो यह बात भी घुमा फिरा कर मै उनके दिमाग ने डालूं… मुझसे यह कैसे होगा? तुम दोनों भाई को देखती हूं, तो तुम दोनों में मुझे सुनंदा दिखती है और तुम चाहते हो मै अपनी सुनंदा को बेइज्जत करूं, वो भी सबके सामने। मुझसे ये सब कर पाना मुश्किल हो जाएगा…

अपस्यु:- आप क्या चाहती है, हम दोनों भाई हमेशा के लिए आप से दूर हो जाएं।

सुलेखा:- नहीं, बिल्कुल नहीं। मै तैयार हू। बेटा सुन ना..

अपस्यु:- हां आंटी बोलिए ना..

सुलेखा:- क्या तू सबकुछ भूलकर नई शुरवात नहीं कर सकता क्या? इतना जोखिम क्यों उठा रहे हो। जाने वाले चले गए और जब वो तुम्हे देखते होंगे तो

जरूर आज भी रोते होंगे कि उनकी वजह से तुम बंजारों की ज़िंदगी जी रहे। अंधेरे में कहीं गुम… बदले की आग में झुलशते।

अपस्यु:- यदि भगवान श्री राम बदले कि आग में झुलशते तो एक ही बार में रावण का अंत कर देते। वो तो स्वयं भगवान थे फिर भी एक अहंकारी से जितने के लिए इतनी प्रतीक्षा क्यों? क्यों अपने प्रियजनों पर शस्त्र ना उठा पाने पर भगवान श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था… क्यों 3 पग जमीन के लिए स्वयं भगवान विष्णु को आना परा.. यह केवल बदला नहीं अपितु न्याय की भावना थी। किसी को मारना बदला होता है लेकिन उसके किए की सजा देना न्याय। यहीं नीति है और यही धर्म भी.. मै न्याय के मार्ग पर हूं और मै पीछे नहीं हट सकता।

राजीव और मनीष इस हवाला सिंडिकेट के वो माध्यम थे, जो सिंडीकेट के लिए सभी व्हाइट कॉलर लोगों के संपर्क में रहते थे। इनकी तरह ही जमील, त्रिवेणी, भूषण और अन्य लोग भी काम कर रहे थे, लेकिन सबसे ज्यादा संपर्क राजीव और मनीष के पास ही थे। राजीव और मनीष शुरवात से ही इनसे जुड़े थे और इनके सिंडिकेट को पाऊं पसारने में अपना पूरा योगदान दिया था।

तत्काल समय.. 25 जून 2014, रात के लगभग 9 बजे…

अपस्यु ऐमी और स्वस्तिका के साथ सुलेखा के कमरे में प्रवेश किया और वहीं कुर्सी पर बैठते हुए कहने लगा…. "आप की बेवकूफियां हमे डुबो देगी… समझी आप।"

सुलेखा:- अपनी आंटी से पहली बार ऐसे बात कर रहे हो। थोड़ा बुरा लगा मुझे। शायद थोड़ा नहीं, बहुत ज्यादा बुरा लगा। नजरों के सामने थे, फिर भी मुझे तुमसे चिढ़े हुए रहना परता था। मेरी बेटी को एक लड़के से प्यार हुआ और लड़का मुझे बेहद पसंद था, मैंने सब तय कर दिया।

मै फैसला लेने में देर करती, तो मेरा पति भी कोई ऐसा दामाद ढूंढ लेता जो उनके गैर-कानूनी विरासत का हिस्सा होता, फिर मै क्या करती। दोनों साथ में बहुत प्यारे लगते है। दोनों हर बात समझकर भी, जब नासमझों की तरह एक दूसरे से नोक-झोंक करते है, तब उनके रिश्ते के बीच का विश्वास दिखता है। जहां मैंने इतना नाटक किया, क्या मै उनके शादी के लिए इतना नहीं कर सकती थी। जो मुझे बेहतर लगा मैंने वहीं किया और यही मेरा आखरी फैसला है।

स्वस्तिका:- मैं सहमत हूं।

ऐमी:- मै भी..

अपस्यु थोड़ा चिढ़ते हुए… "क्या है यार !! सब बिना सोचे कुछ भी फैसले लिए जा रहे हो। कोई समझने के लिए भी तैयार है क्यों नहीं, आरव के एंगेजमेंट में कभी भी कोई भी हमारे बाप का नाम जान सकता है। उनको पता चला हम दोनों चन्द्रभान रघुवंशी के बेटे है और नंदनी रघुवंशी उसके छोटे भाई की पत्नी तो क्या होगा?

सुलेखा:- लेकिन उन्हें बताएगा कौन…

अपस्यु:- नंदनी रघुवंशी या कुंजल रघुवंशी। क्या यहां किसी को पता भी है कि अब हमारा मुख्य टारगेट प्रकाश जिंदल के साथ एक और भी है, और दोनों को हमे एक ही वक़्त में निपटाना होगा। ऊपर से मुझे एक बहुत बड़ी सच्चाई अपनी मां और बहन को भी बताना है, जिसे ना जाने मै कितने दिनों से छिपाए हूं।

सुलेखा:- मुझे क्या करना है वो बताओ। अब जो हो चुका है उसे बदला नहीं जा सकता और ना ही मुझे तुम इसके बारे में कुछ बोल सकते हो।

अपस्यु गहरी श्वांस लेते अपनी जगह से उठकर सुलेखा के पास पहुंचा, और उसके हाथों को थामकर कहने लगा… मुझे माफ़ कीजिए आंटी, पता नहीं क्या हुआ जो मै आपसे बुरा व्यव्हार कर बैठा। मुझे अफसोस हो रहा है अभी।

सुलेखा:- हट पागल, तू तो मेरे बेटे जैसा है, ऐसे मायूस चेहरा तुझोर अच्छा नहीं लगता। किसी ने तुझे बताया है क्या, तुझ पर वो प्यारी मुस्कान काफी प्यारी लगती है। और रही बात तेरी परेशानी की तो अब मै समझ चुकी हूं कि तुम्हे अपनी नंदनी और कुंजल को लेकर चिंता हो रही है। क्या पूरे डेविल यहां पहुंच चुके है?

अपस्यु:- हां लगभग, पार्थ भी पहुंच चुका होगा लेकिन उसकी अबतक कोई खबर नहीं।

सुलेखा:- फिर ठीक है, मै सिन्हा जी के साथ मिलकर नंदनी को किसी भी तरह का परिचय देने से रोकती हूं। तुम कुंजल पर ध्यान देना। हम मिलकर सब संभल लेंगे…..

"नहीं इतनी मेहनत किसी को करने की जरूरत नहीं होगी। मै मां और कुंजल को सब बता कर पूरी तरह सुनिश्चित हो जाऊंगा। बहुत दिनों बाद हमारे घर में खुशियां आ रही है। हमारा पूरा परिवार इस खुशी को यहां सेलीब्रेट करके जाएगा… इस बीच ना तो काम नहीं होगा, और ना ही बीते वक़्त की कोई चर्चा।

सभी एक साथ… हम सब सहमत…
 
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